नहीं भाई आपके कमेंट के कारन नहीं बंद किया हु , असल में अब लिखने को कुछ बचा भी नहीं था , कहानी को बढ़ाना बस फिजूल में खींचने जैसा hi हो जाता उससे अच्छा था की बंद hi कर दो :अप्प्रोवे:
ऐसे भी मेरी स्टोरीज 60 से 80 उपदटेस के बिच की hi रहती है , सुसपनेसे जंहा ख़त्म हुआ स्टोरी को समेत कर एन्ड कर देता हु
भाई कुछ करैक्टर को पब्लिक डिमांड में भी स्टोरी में लाना पड़ता है
और काजल ,पूर्वी और विकाश का इस रूप में इंट्रोडक्शन आने वाली स्टोरी की एक झलक थी , इनकी पूरी अलग से एक स्टोरी लिखने वाला हु तो उसका इंट्रोडक्शन यंहा कर रहा हु ..
ऐसा मैं करते रहता हु जो रेगुलर रीडर्स है मेरी स्टोरीज के वो जयदा अच्छा ड़ालते कर पते है इन चीजों से , जो बस पर्टिकुलर एक स्टोरी पर hi फोसोउस कर रहे है वो इन्हे स्टोरी का एक चैरेक्टर मान कर hi चले तो ठीक है जो बस स्टोरी को आगे बढ़ने में मदद करते है
मैं कॉलेज लाइफ को और अच्छे से दिखने के फ़िराक में था लेकिन स्टोरी आलराय बहुत डिले चल रही थी , दो बार टाइम की कमी के कारण बंद भी कर दिया था इसलिए इस स्टोरी का उतना बज्ज नहीं बना जितना मेरी स्टोरीज में अधिकतर रहता है .. मेरे खुद का इंट्रेस्ट भी थोड़ा काम होने लगा था इसलिए कॉलेज लाइफ को ज्यादा डिटेल्ड वे में नहीं दिखाया , आशा है की अक्की और स्नेहा वाले चैरेक्टर की लव स्टोरी मेरी दूसरी स्टोरी में देखने मिले
भाई नार्मल लोगो के जीवन में भी एक बीवी एक प्रेमिका और एक रैंड होती है :डी
वो तो बड़ा आदमी था ,
और स्टोरी के हिसाब से भी कोमल तो भुवन के साथ निकल ली , उसके बाद तिवारी और जीवा अलग हुए उसके बहुत बाद महिमा तिवारी के जीवन में आयी , यंहा स्टोरी के टाइम पीरियड के देखे तो नेहा और सस की उम्र एक है , मतलब उस समय तक तिवारी 2 बच्चो का बाप भी बन चूका था , 2 बच्चे के बाद इंसान अधिकतर बीवी से तो बोर हो hi जाता है , तो अगर तिवारी ने कोई प्रेमिका पाल ली तो मुझे नहीं लगता की इसमें कोई हैरत की बात होनी चाहिए :डेड:
पॉसिबल तो कुछ भी होइ सकता है लेकिन स्टोरी के हिसाब से देखो तो ये पॉसिबल नहीं था ,क्योकि तिवारी को महिमा की नजरो में अच्छा बनने से कोई भी फायदा नहीं होने वाला था , और पूरी स्टोरी में पता नहीं लोगे ने ये बात नोटिस की या नहीं की तिवारी कमीना जरूर था लेकिन सेंसेटिव भी था , जबकि करीम महामदेर्चोद टाइप tha,bian सेंस्टीवेनेस्स के और जीवा महा कमीना था जिसमे ..
अब कमीना होना और सेंसेटिव न होना दोनों अलग चीज है , कमीना आदमी भी अगर सेंसेटिव है तो वो अपने कमीनेपर भी कण्ट्रोल करके चलेगा जिसके कारण hi तिवारी सक्सेजफुल आदमी और नामी आदमी बन पाया
वही सेन्सेशनलेस लोग जानवरो जैसे हो जाते है , वो खतरनाक जरूर हो जाते है लेकिन बहुत कामियाब नहीं हो पते ...
तो महिमा को बचाना और उसे सहारा देना इसी बात का घोतक है की तिवारी सेंसेटिव भी था ,ये हिंट मैंने स्टोरी में कई बार दिया भी है लेकिन लोग इतनी छोटी डिटेल्स को अधिकतर मिस कर जाते है :अप्प्रोवे:
करीम को मरवाना तो उसकी मज़बूरी बन गयी थी , उसने महिमा पर हाथ दाल दिया जिसे वो पेर्सनली सपोर्ट कर रहा था , मतलब करीम ने इंदिरेक्ट्ली तिवारी के ईगो को चलेंगे कर दिया ..दूसरी बात ये धयान देने वाली है की तिवारी ने खुद उसे नहीं मारा बल्कि जीवा से मरवाया .. क्योकि जीवा करीम के टक्कर का आदमी था ..
अब जीवा को किस्से मरवाता , लेकिन जीवा को बर्बाद जरूर करने में कामियाब हो पाया
अब ये समझना बहुत hi सिंपल सी चीज है की महिमा पार्टी में क्यों थी , क्योकि उसे तिवारी ने बुलाया था यार तिवारी के सपोर्ट में थी वो तो ये कमें सेंस वाली बात हो गयी न .. :अप्प्रोवे:
दूसरा तिवारी ने उसे उस टाइम सपोर्ट किया जब उसे इसकी सबसे जदया जरुरत थी , और इंसान कही न कही टूट hi जाता है और प्रेम में भी पद जाता है, दूसरा तिवारी ने उसके पति को मारा नहीं था वो इन्वॉल्व था अब दोनों चीजों में बहुत फर्क हो जाता है , अगर क्रीम के कारण महिमा के सामने नफरत करने के लिए दूसरे लोग जयदा थे
इसका जवाब स्टोरी में hi मिल जायेगा और साथ hi एक कमेंट में भी इसका जवाब दिया की जीवा करीम को मरने के बाद और कमजोर हो गया , कारण तिवारी था तिवारी ने उसके पीछे पुलिस छोड़ दिया था करीम की मौत के कारण , ये पॉइंट स्टोरी में hi बताया गया है ..
दूसरा आरती के जीवा को मरने की बात है तो वो भी स्टोरी पढ़ कर समझ गए होंगे की जब आरती के अंदर वो ताकत जगती है तो उसके सामना कर पाना किसी के बस की बात नहीं थी , और जीवा तो एक बुढ्डा आदमी hi था आरती के सामने ..
दूसरा गैंग के लोगो के होते हुए कैसे मारा तो स्टोरी से ये भी क्लियर है की पहले hi कुछ लोगो को आरती ने मारा था जीवा गैंग के उसके बाद फिर सम्पत और जीवा को मरने गयी , और साथ hi साथ जीवा गैंग के लोगो के अंदर सकती को लेकर खौफ पहले से hi था क्योकि उनसे सकती के किस्से पहले से hi मालूम थे , दूसरा शिवा को वो डरते भी थे और इज्जत भी करते थे ये भी स्टोरी से पता चलता है जब पहली मौत होती है तो गैंग के लोग शिवा के नाम के नारे लगा रहे होते है , इन सबका भी तो साइकोलॉजिकल प्रबह्व गैंग के ऊपर पड़ेगा जब उन्हें पता चलेगा की कैसे अब शिवा उनके गैंग के hi खिलाफ हो गयी है या गया है ...या फिर ये पता चले की शिव कोई और नहीं बल्कि सकती है ..तब तो और भी फटेगी उनकी ..
और साइकोलॉजी से hi वो हार जायेंगे .. ये सब स्टोरी में एक्सपालिन नहीं क्या हु , स्टोरी के हिसाब से देखो तो बस आरती की ताकत वाला फैक्टर hi काफी है और फिर दर भी गैंग के लोगो को भागने या हारने के लिए काफी था
भाई ये जंग तो तीर कमान से भी सिर्फ युद्ध कौसल के भरोशे भी जीती जाती है लेकिन लोग गन का प्रयोग करते है न :डेड:
पावर जीतनी मिल जाये उतना काम होता है , यंहा कोमल जीवा के लिए एक हथियार था जो 50 लोगो का काम अकेले कर देती थी तो उसका उपयोग वो क्यों न करता ,
कोमल के बिना भी उसने डैम दिखा कर कॉलेज में करीम के आदमी को मारा था और फिर करीम को भी मारा , लेकिन जब आपके पास पूरा टैंकर हो तो आप एक पिस्तौल पकड़ कर लड़ाई क्यों लड़ोगे , ये स्वाभाविक सी बात है यार :डोह:
और मुझे लगता है की आपने सकती के ताकत के जागरण को और उसके ताकत को समझा hi नहीं इसलिए आप ऐसा बोल रहे हो की एक नयी सीखी लड़की ..
तब वो आरती में पहली बार जगा तो उसने रेलवे ट्रेक पर कई लोगो को ऐसे hi काट डाला था :डेड:
सुबकसिओस की ताकत क्या होती है इसे जानने के लिए आप होल्ल्य्वूद की लूसी मूवी देखिये उसमे बहुत अच्छे से इस चीज को एक्सपालिन किया है की क्या क्या पावर्स आती है और कटने प्रेसेंट ब्रेन एक्टिव होने पर क्या होता है
अरे भाई ये क्या बोल रहे हो तिवारी से रिलेशन और गैंग के लिए मार काट को निकाल दोगो तो पूरी स्टोरी hi चंग हो जाएगी, तिवारी से रिलेशन के कारण hi तो ये स्टोरी बानी है , अगर उससे कोमल का रिलेशन नहीं होता तो उसके अंदर भुवन के प्यार की समझ hi कैसे आती और फिर वो दर्द नहीं मिलता और न hi वो ताकत ..
इसमें मैंने दो कांसेप्ट दे दिए है ताकत को लेकर
एक बुक में लिखी स्टोरी जो की जादुई है ,
दूसरी जो की डॉ चुटिया ने एक्सप्लेन की वो वैज्ञानिक एक्सप्लनेशन है ताकत की
अब दोनों में से दोनों hi सच हो सकते है , ये मैंने रीडर्स के ऊपर छोड़ दिया है की आप किस चीज को सच मन्ना पसंद करेंगे :अप्प्रोवे:
चंचल कोई छोड़ा नहीं गया चंचल को जेल पहुंचे गया :डोह:
और कैसे साबित हो जाता की खून उसने नहीं किया है :?:
तब तक किसे पता था की आरती में वो ताकत आएगी :डेड: या ये भी किसे पता था की असली शिवा कौन है ...
मेरे स्टोरी के अधिकतर हीरो वैसे hi होते है :डी
असल में वो मेरे लिए बस एक चेरेक्टर है जो स्टोरी बोल रहा है , रीडर्स उसे हीरो मान लेते है या किसी को हेरोइन मान लेते है तो उसमे मेरी गलती नहीं है भाई :अप्प्रोवे:
रीडर्स की डॉट होती है क्योकि वो ऐसी स्टोरी hi यंहा पर पढ़ते है की एक हीरो है वो साला कुछ भी कर रहा है 10 लड़कियों के साथ से कर रहा है फिर भी अच्छा है और लड़की एक से दो से सेक्स की तो रंडी हो गयी ,, तो ये सब पढ़कर भी लोगो के दिमाग में ये ख्याल आ जाता है की स्टोरी है तो कोई न कोई तो हीरो होगा .. लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता , जैसे म्यूजिशियन के लिए सब कुछ सुर होता है चाहे वो गायक हो या फिर गिटारिस्ट या फिर बांसुरी वाला .. वैसे hi राइटर के लिए सब कुछ चेरेक्टर होना चाहिए ..
है कुछ का रोले जयदा तो कुछ का काम जरूर हो सकता है :अप्प्रोवे:
:lol1: तब तो मुझे भी देखनी पड़ेगी सहो :डी
:थैंक्स: धन्यवाद विक्रम भाई इतनी म्हणत करके ऐसे कमैंट्स करने के लिए
आने वाली स्टोरी भी पदियेगा , जब लिखना शुर करूँगा तो मश्ग करूँगा आपको
