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मेधावी की मौत देखकर शुक्राचार्य को बेहद गुस्सा आने लगा था. और उन्होंने उसी गुस्से से जल निकला और उसपर मात्रा जाप करके छोड़ दिया. और ऐसा करते hi जो जल बहा जमीन पैर गिरा वो अचानक से एक रूप लेने लग गया. किसी विशाल जीव का रूप. जो पहले तो समाज में नहीं आया लेकिन जब बन कर रेडी हो गया तब समाज में आया. ये एक ड्रैगन था. बहुत hi विशाल और उड़ने वाला ड्रैगन और मुँह से ज्वाला निकलने वाला भी. उसकी चमड़ी इतनी सख्त थी की मेरी तलवार को टूट जाएगी लेकिन इस खरोच तक नहीं aayegi.ise शक्तियों से hi हराना पड़ेगा. इसलिए मेरी तलवार को मैंने दिव्यास्त्र में बदला और बहा से उड़द गया.
शुक्राचार्य- जाओ और सर्वनाश कर दो उसका.
ये सुनते hi ड्रैगन ने एक बहुत hi भयंकर दहाड़ मरी और होने मुँह से इतनी भयंकर ज्वाला निकली जिसमे प्रेशर से में और दूर को उड़द गया. मैंने पीछे पलट कर देखा तो वो भी उड़ कर मेरे पीछे आने लगा था. इसलिए मैंने अपनी गति बड़ाई. तो उसकी रफ़्तार भी तेज़ hi गयी. और होगी भी क्यों नहीं. मयाबी हो तेहरा. वो बार बार मुझपर आग उगल रहा था. और दिव्यस्त्र मुझे उस आग से ठीक समय पैर बचा ले रहा था.
मैंने पीछे देखा तो वो मेरे बहुत करीब आज्ञा था और अपना मुँह पूरा खोल कर मुझे निगलने को कोसिस कर रहा था. तभी मैंने दिव्यास्त्र का मुख उसकी तरफ किया और शक्ति का प्रयोग किया जो सीधे उसके खुले मुख से उसके डिल में जेक लगी. और ऐसा होते hi उसका डिल का धड़कना कुछ देर के लिए रुक गया. और वो झटपटता हुए नीचे गिरने लगा. और इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने रुका और दिव्यास्त्र को एक ऐसी तलवार में बदलने को कहा जो आसानी से इसकी चमड़ी को चीयर सके.
मेरा ऐसा कहते hi दिव्यास्त्र बैसि hi तलवार में बदल गया. और में उसे लेके नीचे की तरफ तेज़ी से जाने लगा. हम काफी ऊंचाई पैर थे इसलिए नीचे जाने में हमें वक़्त लग रहा था. ड्रैगन अभी भी झटपटा रहा था. इसी मौके का फायदा उठा कर में तेज़ी से उसके बगल में गया. और टॉवल उसके पेट में घुसा दी. और बही पैर रुक गया. मेरे रुकने से तलवार भी रुक गयी. लेकिन ड्रैगन तेज़ी से नीचे hi जा रहा था. और ऐसे hi मेरी तलवार उसे नीचे से ऊपर चीरती हुई निकल गयी. और ड्रैगन का काम तमाम होगया. और में इस बात की कृषि मन hi रहा था की पीछे से मेरे ऊपर हमला हुआ और में तेज़ी से उड़ता हुआ थोड़ा दूर जा पहुंचा और पर कटे पक्षी की तरह नीचे गिर गया. जो एक खली मैदान था. मेरे गिरते hi. बहा पैर चारो तरफ गहरा गद्दा बन गया.
में थोड़ी देर के लिए एक दम सुन्न हो गया. मुझे कुछ समाज में नहीं आया की क्या हुआ और कैसे हुआ.
और अचानक से में हिला. जैसे में एकदम नींद से जाग गया हु. और जागने के बाद मैंने आजु बाजु देखा तो में एक गद्दे में पड़ा था. हालत ख़राब हो गयी थी. मैंने कार्बेट बदली और हाथो का प्रयोग करके अपने घुटनो पैर आया और बाजु में पड़े दिव्यस्त्र को उठा लिया. तभी मेरे कानो में कुछ आवाज पड़ी. जो कदमो की थी बहुत सरे कदमो की. पूरी जमीन हिल रही थी. उनके कदमो से. भयंकर कम्पन्न उत्पन्न हो रहा था. और ये आवाजे मेरे राइट साइड से आरही थी. इसलिए मैंने उस तरफ मुंडी को घुमा कर देखा. तो में हैरान रह गया. मेरे सामने करीब 1 लाख से भी ज्यादा असुर चले आरहे थे. कुछ बहुत hi भद्दे थे. और कुछ बहुत hi बेकार. देखकर मुझे तो उलटी होने लगी थी. और उन सबके आगे चल रहा था मेधावी. जिसे मैंने अभी कुछ देर पहले hi मार दिया था. एक पल को तो मुझे यकीन hi नहीं हुआ की ये जिन्दा कैसे हो गया. फिर मुझे याद आया की मृत संजीवनी विद्या.
शुक्राचार्य के पास ये विद्या थी और वो किसी को भी जीवित कर सकते थे. जिसका सरीर सही सलामत बचा है.
ये याद आते hi मैंने अपना माथा पीट लिया. और सोचा इसका अंत कभी होगा भी या नहीं. में सोच रहा था और वो मेरे करीब आते जा रहे थे. तभी मैंने सोचा की ये सब छोडो और खड़े हो. इनका मुकाबला करो. इनका अंत अब अलग तरीके से करना पड़ेगा. जैसे अभी तक करते आया हु.
ये सोचकर में फिर से खड़ा हुआ और गद्दे से बहार निकला.
में अकेला और मेरे सामने लाखो की भीड़. सोच hi सकते हो इसका क्या परिणाम होने वाला था.
तभी मेरे पीछे से आवाज आई.
मदद चाहिए.
ये आवाज सुनके मेरे चेहरे पैर हसी आगयी. क्युकी ये आवाज रेनू की थी. और में सूरे था की उसके साथी बाकि सभी भी यहाँ आई होंगी. इसलिए में पीछे मुदा जहा वो चारो अपने असली अवतार में कड़ी हुई थी हाथो में हथियार लिए.
प्राची- तुम्हारी हालत तो बकै में ख़राब हो गयी है.
मैं- है मामला थोड़ा हाथ से निकल गया था. वर्ण मैंने सब संभल लिया था.
आलिआ- वो तो दिख hi रहा है. अब ये बताओ की हमें बिना साथ लिए तुम यहाँ अकेले क्यों आये.
मैं- फिलहाल ये मटर छोड़ दे तो कैसा रहेगा. क्युकी सामने बहुत hi बड़ी समस्या है.
सुरभि- इसको बाद में देख लेंगे. आलिआ. Don't वोर्री पूरा हिसाब लेंगे हम.
तभी मुझे सामने से मेधावी की आवाज आई.
मेधावी- अभी भी मौका है हार मानलो और हमें वो अस्त्र दे दो.
मैं- ये सवाल तब पूछना था जब मैंने तुझे दो हिस्सों में बात दिया था अभी कुछ देर पहले.
मेधावी- धोके से.
प्राची- क्या इसे मार दिया था तुमने. फिर ये जिन्दा कैसे हुआ.
मैं- संजीवनी विद्या से कर दिया होगा शुक्राचार्य ne.or समाज को किसी का भी सरीर सलामत मत छोड़ना.
रेनू- ok कप्तान.
मैं- बकवास बंद करो.
वो चारो मेरे बगल में आगयी.
मैं- मेधावी में तुम्हे एक आखिरी मौका देता हु. चले जाओ अपनी सेना को लेके. वर्ण इसके बाद जो अंजाम होगा उसके जिम्मेदार तुम खुद होंगे.
मेधावी- में तैयार हु अंजाम भुगतने को. क्या तुम हो.
मैं- हमेशा से.
ये कहके मेधावी ने अपनी सेना को हमला करने का आदेश दे दिया और वो सभी जानवर चिल्लाते हुए हमारी तरफ बढ़ने लगी. और यहाँ हमने भी उनकी तरफ दौड़ लगा दी.
और जैसे hi हम करीब पहुंचे हम सभी एक साथ उछाल गए. और धड़ाम से उनकी सेना के बीच गिरे और हमारी शक्तियों का बेग इतना ज्यादा था की आस पास के असुर तो उसी बेग से उड़द गए. तभी प्राची ने बायु का बवंडर बनाया बहुत hi तेज़. और रेनू तो अपनी तलवार जिसको भी लगा रही थी वो उसी समय रख में बदलता जा रहा था. बही आलिआ भी अपनी छड़ी की शक्तियों का बखूबी इस्तेमाल कर रही थी. और सुरभि अपनी तलवार से बर्फ निकाल कर जमा रही थी सभी को. और आलिआ उन जमे हुए लोगो के टुकड़े कर रही थी. प्राची का बवंडर असुरो को अपनी चपेट में लेने लगा था. तभी मैंने दिव्यास्त्र का इस्तेमाल करके उस बवंडर में भयंकर बिजली उत्पन्न कर दी. और अब वो बवंडर सभी को भस्म करता जा रहा था.
बही में अपनी शक्तियों का काम और अपने हाथो का इस्तेमाल ज्यादा कर रहा था. दिव्यास्त्र को तलवार में बदल कर.
तभी मेधावी में कुछ किया जिससे वो बवंडर तुरंत hi बंद हो गया लेकिन उसमे से केवल रख hi nikli.uski सेना की.
और इसी गुस्से से वो मेरी तरफ बड़ा और में उसकी तरफ.
और वो उछाल गया और में भी और हमारी शक्तिया हवा में टकरा गयी. और ऐसा होते hi हवा में भयंकर बेग उत्पन्न हो गया.
मेधावी- तेरा अंत में करके hi रहूँगा.
मैं- लेकिन आज नहीं.
ये कहके मैंने अपने हाथो से आग निकलना सुरु किया और मैंने जहा उसका हाथ पकड़ा हुआ था बहा उसे जलन होने लगी.
मेधावी- ये चल अच्छी है लेकिन काम की नहीं है.
मैं- तो फिर ये कैसे है.
ये कहके मैंने हाथ को ठंडा कर दिया और जहा उसे पकड़ा हुआ था. बहा से उसे में बर्फ में ज़माने लगा. बर्फ काफी तेज़ी से उसके सरीर पैर चढ़ गयी और वो बही जैम गया. और उसके जमते hi मैंने उसे नीचे छोड़ दिया. और वो तेज़ी से नीचे गिरने लगा. मुझे लगा गिरते hi ये टूट जायेगा. लेकिन साला गिरने से एक सेक्. पहले hi पता नहीं कैसे उसके सरीर पैर जमी बर्फ पिघल गयी. और वि सही सलामत नीचे गिरा. ये देखकर में तेज़ी से नीचे गया. अपनी तलवार को सीधा करके. जो सीधे उसके सीने में धसने वाली थी. लेकिन साला फिर बच गया. बाजु हैट गया. लेकिन ये दोतरफा हमला था. जमीन पैर तलवार लगते hi. ताकवर से भयंकर बिजली निकली लिखे बहुत hi भयंकर. और चारो तरफ फ़ैल गयी. मेधावी ने खुद को कैसे बचाया पता नहीं. लेकिन बाकि जितने भी असुर उसकी चपेट में आये वो नहीं बचा पाए खुद को और जल कर रख हो गए.
ये देखकर मेधावी का गुस्सा बाद गया. और उसने अपना आकार बड़ा कर लिया. इतना की मुझे आसानी से कुचल सके. ये देखकर हम सबकी आँखे फटी की फटी रह गयी.
आलिआ- ये क्या करने को सोच रहा है.
मैं- सायद हमें कुचलने ki.baise ये हमारे किये मौका है.
रेनू- में समाज गयी.
ये कहके रेनू स्पीड से उसकी तरफ बड़ी और जोर से तलवार उसके पेअर में घुसा दी. तभी मैं और प्राची उड़ते हुए गए और एक एक पंच उसके थोबड़े पैर जड़ दिया. जिससे वो नीचे गिरने लगा. वो भी उसी की सेना पैर.
मैं- होशियार है पैर है तो बचा hi.
सुरभि- सही कहा. लेकिन यहाँ इसी सेना बचे नहीं है. ये ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रहे है.
रेनू- देव कुछ बड़ा तरय करना चाहिए. ताकि ये सब जल्दी ख़त्म हो सके. क्युकी हम ऐसे hi महीनो तक लगे रहेंगे तब भी ये ऐसे hi लड़ते रहेंगे.
मैं- बैसे में भी कुछ ऐसा hi सोच रहा था. एक काम करो तुम सभी मेरे पीछे आजाओ. जरा इनको अपनी असली ताकत का नमूना दिखते है.
प्राची- बढ़िया है.
ये कहके सभी मेरे पीछे आगयी. और मैंने अपनी आँखों को बंद किय अपने हाथो को जोड़ा और मन में अपने मंत्र का जाप किया. और ऐसा करते hi तिरदये खुल गयी. और अब समय था इनको बताने का की मेरी ताकत ये दिव्यास्त्र से नहीं है.
मैंने तिरदये से सभी को देखा लगभग 50000 असुरो को जो इस वक़्त बहा लड़ाई करने हमारी तरफ hi बाद रहे थे.
ऐसा समझिये की में एक साथ सभी को निशाना बना रहा था. एक hi बार में साडी सेना को ख़त्म करने का प्लान. और जैसे hi सभी पैर निशान लग गए. मैंने अपनी आँख से भयंकर ज्वाला निकली. और ज्वाला निकलते hi. उसे मात्रा कुछ सेक्. लगे होंगे और हमारे सामने मौजूद सरे असुर पल भर में रख में बदल gye.vo भी एक साथ.
सुरभि- अगली बार इसी से शुरुवात करना. खामखा इतनी एनर्जी वास्ते करवा दी.
मैं- है क्यों नहीं.
और इसी के साथ मेधावी की साडी सेना का अंत हो गया. और ये सीन देखकर मेधावी की तो हालत hi ख़राब हो गयी उसे समाज में नहीं आया की आखिर ये कोनसी शक्ति है. क्युकी ये तिरदये हर किसी को नहीं दिखती है. मेधावी को जरा भी अंदाजा नहीं था की अभी यहाँ पैर क्या हुआ. उसे तो बस इतना पता था की मेरी शक्तियों ने एक hi बार में उसकी सेना का अंत कर दिया. पर कैसे किया इसका पता केवल शुक्राचार्य को लगा होगा बाकि किसी को नहीं.
ऐसा करने के बाद मैंने अपनी आँखों को बापिस से खोल लिया. और सामने का नजारा बकै काफी डरने वाला था. दुसरो को.
और फिर में मेधावी के पास गया.
मैं- अब भी लड़ना चाहते हो.
मेधावी- ये कैसे किया तुमने.
मैं- बहुत कुछ है जो तुम अभी नहीं जानते हो. और जानने की जरुरत भी नहीं है. तुम एक अच्छे इंसान बन सकते हो. अगर बनना चाहते हो तो. तुम्हारे पास अभी समय है.
मेधावी- में ये अच्छे से जनता हु. लेकिन में ऐसा नहीं कर सकता. इस जन्म में तो बिलकुल नहीं.
ये कहके उसने तलवार मेरे पेअर में घुसा दी. जिससे मुझे बकै में दर्द हुआ.
और ये सब देखकर ुम चारो को गुस्सा आज्ञा. और वो चारो एक साथ मेधावी पैर टूट पड़ी. वो पहले से थोड़ा घायल था. उसके पेअर में चोट लगी थी. मेरे कई प्रहार उसने सेहन करे थे. लेकिन वो इतना कमजोर नहीं था की इतनी जल्दी हार मान जाये. पर
मेरे सामने जो हो रहा था उसे भी झुटलाया नहीं जा सकता था. क्युकी वो किसी भी हमले को रोक नहीं रहा था. बस अपने ऊपर होने दे रहा था. और इसी बीचे प्राची ने उसकी गार्डन को उदा दिया रेनू ने उसी समय उसके सरीर में आग लगा दी और बस उसका काम हो गया.
अबकी बार सचमे हो गया इसका काम तमाम.
अब केवल शुक्राचार्य बचे हुए थे. बाकि कोई नहीं काम से काम मुझे तो यही लग रहा है. शक्तिया कमजोर होने के बावजूद किसी ने मुझे अभी तक मरने का प्रयास नहीं किया था. मतलब की ऐसी शक्ति का प्रयोग जिससे बकै मेरी मौत हो सके. ये बात मुझे कुछ अजीब से लग रही थी. ये सेना लेके आना युद्ध करना. ये सब अलग बात है लेकिन प्राण घातक हमला अभी तक नहीं हुआ था मुझपर. इसलिए मुझे कुछ डाउट सा हो रहा था की ये सब आखिर क्यों हो रहा है………….
तो बे कॉन्टिनुए………………….
मेधावी की मौत देखकर शुक्राचार्य को बेहद गुस्सा आने लगा था. और उन्होंने उसी गुस्से से जल निकला और उसपर मात्रा जाप करके छोड़ दिया. और ऐसा करते hi जो जल बहा जमीन पैर गिरा वो अचानक से एक रूप लेने लग गया. किसी विशाल जीव का रूप. जो पहले तो समाज में नहीं आया लेकिन जब बन कर रेडी हो गया तब समाज में आया. ये एक ड्रैगन था. बहुत hi विशाल और उड़ने वाला ड्रैगन और मुँह से ज्वाला निकलने वाला भी. उसकी चमड़ी इतनी सख्त थी की मेरी तलवार को टूट जाएगी लेकिन इस खरोच तक नहीं aayegi.ise शक्तियों से hi हराना पड़ेगा. इसलिए मेरी तलवार को मैंने दिव्यास्त्र में बदला और बहा से उड़द गया.
शुक्राचार्य- जाओ और सर्वनाश कर दो उसका.
ये सुनते hi ड्रैगन ने एक बहुत hi भयंकर दहाड़ मरी और होने मुँह से इतनी भयंकर ज्वाला निकली जिसमे प्रेशर से में और दूर को उड़द गया. मैंने पीछे पलट कर देखा तो वो भी उड़ कर मेरे पीछे आने लगा था. इसलिए मैंने अपनी गति बड़ाई. तो उसकी रफ़्तार भी तेज़ hi गयी. और होगी भी क्यों नहीं. मयाबी हो तेहरा. वो बार बार मुझपर आग उगल रहा था. और दिव्यस्त्र मुझे उस आग से ठीक समय पैर बचा ले रहा था.
मैंने पीछे देखा तो वो मेरे बहुत करीब आज्ञा था और अपना मुँह पूरा खोल कर मुझे निगलने को कोसिस कर रहा था. तभी मैंने दिव्यास्त्र का मुख उसकी तरफ किया और शक्ति का प्रयोग किया जो सीधे उसके खुले मुख से उसके डिल में जेक लगी. और ऐसा होते hi उसका डिल का धड़कना कुछ देर के लिए रुक गया. और वो झटपटता हुए नीचे गिरने लगा. और इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने रुका और दिव्यास्त्र को एक ऐसी तलवार में बदलने को कहा जो आसानी से इसकी चमड़ी को चीयर सके.
मेरा ऐसा कहते hi दिव्यास्त्र बैसि hi तलवार में बदल गया. और में उसे लेके नीचे की तरफ तेज़ी से जाने लगा. हम काफी ऊंचाई पैर थे इसलिए नीचे जाने में हमें वक़्त लग रहा था. ड्रैगन अभी भी झटपटा रहा था. इसी मौके का फायदा उठा कर में तेज़ी से उसके बगल में गया. और टॉवल उसके पेट में घुसा दी. और बही पैर रुक गया. मेरे रुकने से तलवार भी रुक गयी. लेकिन ड्रैगन तेज़ी से नीचे hi जा रहा था. और ऐसे hi मेरी तलवार उसे नीचे से ऊपर चीरती हुई निकल गयी. और ड्रैगन का काम तमाम होगया. और में इस बात की कृषि मन hi रहा था की पीछे से मेरे ऊपर हमला हुआ और में तेज़ी से उड़ता हुआ थोड़ा दूर जा पहुंचा और पर कटे पक्षी की तरह नीचे गिर गया. जो एक खली मैदान था. मेरे गिरते hi. बहा पैर चारो तरफ गहरा गद्दा बन गया.
में थोड़ी देर के लिए एक दम सुन्न हो गया. मुझे कुछ समाज में नहीं आया की क्या हुआ और कैसे हुआ.
और अचानक से में हिला. जैसे में एकदम नींद से जाग गया हु. और जागने के बाद मैंने आजु बाजु देखा तो में एक गद्दे में पड़ा था. हालत ख़राब हो गयी थी. मैंने कार्बेट बदली और हाथो का प्रयोग करके अपने घुटनो पैर आया और बाजु में पड़े दिव्यस्त्र को उठा लिया. तभी मेरे कानो में कुछ आवाज पड़ी. जो कदमो की थी बहुत सरे कदमो की. पूरी जमीन हिल रही थी. उनके कदमो से. भयंकर कम्पन्न उत्पन्न हो रहा था. और ये आवाजे मेरे राइट साइड से आरही थी. इसलिए मैंने उस तरफ मुंडी को घुमा कर देखा. तो में हैरान रह गया. मेरे सामने करीब 1 लाख से भी ज्यादा असुर चले आरहे थे. कुछ बहुत hi भद्दे थे. और कुछ बहुत hi बेकार. देखकर मुझे तो उलटी होने लगी थी. और उन सबके आगे चल रहा था मेधावी. जिसे मैंने अभी कुछ देर पहले hi मार दिया था. एक पल को तो मुझे यकीन hi नहीं हुआ की ये जिन्दा कैसे हो गया. फिर मुझे याद आया की मृत संजीवनी विद्या.
शुक्राचार्य के पास ये विद्या थी और वो किसी को भी जीवित कर सकते थे. जिसका सरीर सही सलामत बचा है.
ये याद आते hi मैंने अपना माथा पीट लिया. और सोचा इसका अंत कभी होगा भी या नहीं. में सोच रहा था और वो मेरे करीब आते जा रहे थे. तभी मैंने सोचा की ये सब छोडो और खड़े हो. इनका मुकाबला करो. इनका अंत अब अलग तरीके से करना पड़ेगा. जैसे अभी तक करते आया हु.
ये सोचकर में फिर से खड़ा हुआ और गद्दे से बहार निकला.
में अकेला और मेरे सामने लाखो की भीड़. सोच hi सकते हो इसका क्या परिणाम होने वाला था.
तभी मेरे पीछे से आवाज आई.
मदद चाहिए.
ये आवाज सुनके मेरे चेहरे पैर हसी आगयी. क्युकी ये आवाज रेनू की थी. और में सूरे था की उसके साथी बाकि सभी भी यहाँ आई होंगी. इसलिए में पीछे मुदा जहा वो चारो अपने असली अवतार में कड़ी हुई थी हाथो में हथियार लिए.
प्राची- तुम्हारी हालत तो बकै में ख़राब हो गयी है.
मैं- है मामला थोड़ा हाथ से निकल गया था. वर्ण मैंने सब संभल लिया था.
आलिआ- वो तो दिख hi रहा है. अब ये बताओ की हमें बिना साथ लिए तुम यहाँ अकेले क्यों आये.
मैं- फिलहाल ये मटर छोड़ दे तो कैसा रहेगा. क्युकी सामने बहुत hi बड़ी समस्या है.
सुरभि- इसको बाद में देख लेंगे. आलिआ. Don't वोर्री पूरा हिसाब लेंगे हम.
तभी मुझे सामने से मेधावी की आवाज आई.
मेधावी- अभी भी मौका है हार मानलो और हमें वो अस्त्र दे दो.
मैं- ये सवाल तब पूछना था जब मैंने तुझे दो हिस्सों में बात दिया था अभी कुछ देर पहले.
मेधावी- धोके से.
प्राची- क्या इसे मार दिया था तुमने. फिर ये जिन्दा कैसे हुआ.
मैं- संजीवनी विद्या से कर दिया होगा शुक्राचार्य ne.or समाज को किसी का भी सरीर सलामत मत छोड़ना.
रेनू- ok कप्तान.
मैं- बकवास बंद करो.
वो चारो मेरे बगल में आगयी.
मैं- मेधावी में तुम्हे एक आखिरी मौका देता हु. चले जाओ अपनी सेना को लेके. वर्ण इसके बाद जो अंजाम होगा उसके जिम्मेदार तुम खुद होंगे.
मेधावी- में तैयार हु अंजाम भुगतने को. क्या तुम हो.
मैं- हमेशा से.
ये कहके मेधावी ने अपनी सेना को हमला करने का आदेश दे दिया और वो सभी जानवर चिल्लाते हुए हमारी तरफ बढ़ने लगी. और यहाँ हमने भी उनकी तरफ दौड़ लगा दी.
और जैसे hi हम करीब पहुंचे हम सभी एक साथ उछाल गए. और धड़ाम से उनकी सेना के बीच गिरे और हमारी शक्तियों का बेग इतना ज्यादा था की आस पास के असुर तो उसी बेग से उड़द गए. तभी प्राची ने बायु का बवंडर बनाया बहुत hi तेज़. और रेनू तो अपनी तलवार जिसको भी लगा रही थी वो उसी समय रख में बदलता जा रहा था. बही आलिआ भी अपनी छड़ी की शक्तियों का बखूबी इस्तेमाल कर रही थी. और सुरभि अपनी तलवार से बर्फ निकाल कर जमा रही थी सभी को. और आलिआ उन जमे हुए लोगो के टुकड़े कर रही थी. प्राची का बवंडर असुरो को अपनी चपेट में लेने लगा था. तभी मैंने दिव्यास्त्र का इस्तेमाल करके उस बवंडर में भयंकर बिजली उत्पन्न कर दी. और अब वो बवंडर सभी को भस्म करता जा रहा था.
बही में अपनी शक्तियों का काम और अपने हाथो का इस्तेमाल ज्यादा कर रहा था. दिव्यास्त्र को तलवार में बदल कर.
तभी मेधावी में कुछ किया जिससे वो बवंडर तुरंत hi बंद हो गया लेकिन उसमे से केवल रख hi nikli.uski सेना की.
और इसी गुस्से से वो मेरी तरफ बड़ा और में उसकी तरफ.
और वो उछाल गया और में भी और हमारी शक्तिया हवा में टकरा गयी. और ऐसा होते hi हवा में भयंकर बेग उत्पन्न हो गया.
मेधावी- तेरा अंत में करके hi रहूँगा.
मैं- लेकिन आज नहीं.
ये कहके मैंने अपने हाथो से आग निकलना सुरु किया और मैंने जहा उसका हाथ पकड़ा हुआ था बहा उसे जलन होने लगी.
मेधावी- ये चल अच्छी है लेकिन काम की नहीं है.
मैं- तो फिर ये कैसे है.
ये कहके मैंने हाथ को ठंडा कर दिया और जहा उसे पकड़ा हुआ था. बहा से उसे में बर्फ में ज़माने लगा. बर्फ काफी तेज़ी से उसके सरीर पैर चढ़ गयी और वो बही जैम गया. और उसके जमते hi मैंने उसे नीचे छोड़ दिया. और वो तेज़ी से नीचे गिरने लगा. मुझे लगा गिरते hi ये टूट जायेगा. लेकिन साला गिरने से एक सेक्. पहले hi पता नहीं कैसे उसके सरीर पैर जमी बर्फ पिघल गयी. और वि सही सलामत नीचे गिरा. ये देखकर में तेज़ी से नीचे गया. अपनी तलवार को सीधा करके. जो सीधे उसके सीने में धसने वाली थी. लेकिन साला फिर बच गया. बाजु हैट गया. लेकिन ये दोतरफा हमला था. जमीन पैर तलवार लगते hi. ताकवर से भयंकर बिजली निकली लिखे बहुत hi भयंकर. और चारो तरफ फ़ैल गयी. मेधावी ने खुद को कैसे बचाया पता नहीं. लेकिन बाकि जितने भी असुर उसकी चपेट में आये वो नहीं बचा पाए खुद को और जल कर रख हो गए.
ये देखकर मेधावी का गुस्सा बाद गया. और उसने अपना आकार बड़ा कर लिया. इतना की मुझे आसानी से कुचल सके. ये देखकर हम सबकी आँखे फटी की फटी रह गयी.
आलिआ- ये क्या करने को सोच रहा है.
मैं- सायद हमें कुचलने ki.baise ये हमारे किये मौका है.
रेनू- में समाज गयी.
ये कहके रेनू स्पीड से उसकी तरफ बड़ी और जोर से तलवार उसके पेअर में घुसा दी. तभी मैं और प्राची उड़ते हुए गए और एक एक पंच उसके थोबड़े पैर जड़ दिया. जिससे वो नीचे गिरने लगा. वो भी उसी की सेना पैर.
मैं- होशियार है पैर है तो बचा hi.
सुरभि- सही कहा. लेकिन यहाँ इसी सेना बचे नहीं है. ये ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रहे है.
रेनू- देव कुछ बड़ा तरय करना चाहिए. ताकि ये सब जल्दी ख़त्म हो सके. क्युकी हम ऐसे hi महीनो तक लगे रहेंगे तब भी ये ऐसे hi लड़ते रहेंगे.
मैं- बैसे में भी कुछ ऐसा hi सोच रहा था. एक काम करो तुम सभी मेरे पीछे आजाओ. जरा इनको अपनी असली ताकत का नमूना दिखते है.
प्राची- बढ़िया है.
ये कहके सभी मेरे पीछे आगयी. और मैंने अपनी आँखों को बंद किय अपने हाथो को जोड़ा और मन में अपने मंत्र का जाप किया. और ऐसा करते hi तिरदये खुल गयी. और अब समय था इनको बताने का की मेरी ताकत ये दिव्यास्त्र से नहीं है.
मैंने तिरदये से सभी को देखा लगभग 50000 असुरो को जो इस वक़्त बहा लड़ाई करने हमारी तरफ hi बाद रहे थे.
ऐसा समझिये की में एक साथ सभी को निशाना बना रहा था. एक hi बार में साडी सेना को ख़त्म करने का प्लान. और जैसे hi सभी पैर निशान लग गए. मैंने अपनी आँख से भयंकर ज्वाला निकली. और ज्वाला निकलते hi. उसे मात्रा कुछ सेक्. लगे होंगे और हमारे सामने मौजूद सरे असुर पल भर में रख में बदल gye.vo भी एक साथ.
सुरभि- अगली बार इसी से शुरुवात करना. खामखा इतनी एनर्जी वास्ते करवा दी.
मैं- है क्यों नहीं.
और इसी के साथ मेधावी की साडी सेना का अंत हो गया. और ये सीन देखकर मेधावी की तो हालत hi ख़राब हो गयी उसे समाज में नहीं आया की आखिर ये कोनसी शक्ति है. क्युकी ये तिरदये हर किसी को नहीं दिखती है. मेधावी को जरा भी अंदाजा नहीं था की अभी यहाँ पैर क्या हुआ. उसे तो बस इतना पता था की मेरी शक्तियों ने एक hi बार में उसकी सेना का अंत कर दिया. पर कैसे किया इसका पता केवल शुक्राचार्य को लगा होगा बाकि किसी को नहीं.
ऐसा करने के बाद मैंने अपनी आँखों को बापिस से खोल लिया. और सामने का नजारा बकै काफी डरने वाला था. दुसरो को.
और फिर में मेधावी के पास गया.
मैं- अब भी लड़ना चाहते हो.
मेधावी- ये कैसे किया तुमने.
मैं- बहुत कुछ है जो तुम अभी नहीं जानते हो. और जानने की जरुरत भी नहीं है. तुम एक अच्छे इंसान बन सकते हो. अगर बनना चाहते हो तो. तुम्हारे पास अभी समय है.
मेधावी- में ये अच्छे से जनता हु. लेकिन में ऐसा नहीं कर सकता. इस जन्म में तो बिलकुल नहीं.
ये कहके उसने तलवार मेरे पेअर में घुसा दी. जिससे मुझे बकै में दर्द हुआ.
और ये सब देखकर ुम चारो को गुस्सा आज्ञा. और वो चारो एक साथ मेधावी पैर टूट पड़ी. वो पहले से थोड़ा घायल था. उसके पेअर में चोट लगी थी. मेरे कई प्रहार उसने सेहन करे थे. लेकिन वो इतना कमजोर नहीं था की इतनी जल्दी हार मान जाये. पर
मेरे सामने जो हो रहा था उसे भी झुटलाया नहीं जा सकता था. क्युकी वो किसी भी हमले को रोक नहीं रहा था. बस अपने ऊपर होने दे रहा था. और इसी बीचे प्राची ने उसकी गार्डन को उदा दिया रेनू ने उसी समय उसके सरीर में आग लगा दी और बस उसका काम हो गया.
अबकी बार सचमे हो गया इसका काम तमाम.
अब केवल शुक्राचार्य बचे हुए थे. बाकि कोई नहीं काम से काम मुझे तो यही लग रहा है. शक्तिया कमजोर होने के बावजूद किसी ने मुझे अभी तक मरने का प्रयास नहीं किया था. मतलब की ऐसी शक्ति का प्रयोग जिससे बकै मेरी मौत हो सके. ये बात मुझे कुछ अजीब से लग रही थी. ये सेना लेके आना युद्ध करना. ये सब अलग बात है लेकिन प्राण घातक हमला अभी तक नहीं हुआ था मुझपर. इसलिए मुझे कुछ डाउट सा हो रहा था की ये सब आखिर क्यों हो रहा है………….
तो बे कॉन्टिनुए………………….