दिव्यास्त्र.[The power of five elements] - Page 10 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

दिव्यास्त्र.[The power of five elements]

है भाई मुलाकात हो तो गयी यही बहुत बड़ी बात है. बाकि रही बात रुद्राक्ष की तो सायद आपका अंदाजा सही निकले की ये एक शील्ड की तरह hi काम करे. ये फिर किसी और मकसद से दिया हो महादेव ने. क्या पता. बाकि जो भी है जल्द hi सामने आजायेगा. अब देखते है असुर क्या नै योजना बनाते है और प्राची और आलिआ का मटर क्या रंग लता है सब जानने के लिए साथ बने रहे....

कीप सपोर्टिंग..............
 
अपडेट 75



मैं प्राची से बात करने की सोची इस बारे में. इसलिए में सीधा चला गया कैंटीन. बहा पहुंचकर देखा की वो तीनो. मतलब को चिराग प्राची और लकी तीनो hi बैठे हुए है. प्राची एकदम shan't बैठी थी और बाकि दोनों अपनी पातर पातर लगाए हुए थे. मैंने प्राची के पास गया.

चिराग- में तुझे कॉल लगाने hi वाला था की प्राची यही पैर है.

मैं- कोई न. प्राची मुझे कुछ बात करनी है जरा साइड में आओ तो.

प्राची- फिलहाल हम लेट है क्लास के लिए. बाद में कर लेना.

ये कहके वो क्लास की तरफ चली गयी और हम तीनो बस देखते hi रह गए.

लकी- क्या हुआ बीआरओ. कुछ सीरियस मटर है क्या.

मैं- नहीं यार बस कासुअल. तुम लोग चिंता न karo.chalo क्लास में चलते है.

उसके बाद हम तीनो भी क्लास में गए. एंड उस दिन भर प्राची ने मेरी तरफ ठीक से देखा भी नहीं. और ये सब देखकर में हैरान परेशान सब था. मुझे समाज में नहीं आरहा था की अब मैंने क्या कर दिया इसे जो ये मुँह फुलाए बैठी hai.na उसने लंच में मुझसे बात की न hi छूती के दौरान और क्लास की तो बात न hi करे तो बेहतर है. और ये बात उन दोनों ने भी नोटिस की की प्राची मुझे इग्नोर कर रही है. और वो मेरी जान खा रहे थे की मैंने क्या कह दिया उसे. जबकि सच तो ये था की उसे किसी ने कुछ नहीं कहा. और बाकि की सच्चाई उन्हें बता नहीं सकता था में. खैर शाम को जब में घर पंहुचा सलग से तो घर का दरवाजा खोला रेनू ने. और एक बार को तो मुझे यकीन hi नहीं हुआ की ये लोग आज hi आगये.

मैं- क्या इस थिस रियल.

रेनू- 100% कैसा लगा सरप्राइज.

मैं- बहुत जोर का. बैसे कब आये तुम सभी.

रेनू- दोपहर में hi आगये थे. आओ अंदर आओ इसे अपना hi घर समझो. बिलकुल मत शर्माओ.

ये कहके वो हसने लगी

मैं- वैरी फनी.

रेनू- ी क्नोव.

मैं- चलो हटो आने तो दो अंदर.

उसने रास्ता छोड़ा में अंदर गया. तो पूरी फॅमिली बहा जमी हुई थी और गप्पे लगी हुई थी. ममी ने जैसे hi मुझे देखा दौड़ कर मेरे पास आगयी और मुझे गले से लगा लिया.

ममी- कैसा है मेरा बचा.

मैं- ठीक हु. आप बताइये कैसी हो. कोई तकलीफ.

ममी- बिलकुल नै.

उसके बाद मां और सुरभि से भी मिला. फिर में सबको बोलके अपने कमरे में चला गया फ्रेश होने. अपने बेग को पटका और बाथरूम में घुस गया. बढ़िया से शावर लिया उसके बाद लोअर टी शर्ट पहना और नीचे aagya.mom ने मुझे कॉफ़ी दी. और में उसकी चुस्किया लेते हुए सबकी बाटे सुनने लगा.

दादू- पुत्र तुम्हारे लिए एक और सुप्रिसे है.

मैं- और वो क्या है.

ममी- दरअशल हम्मे फैसला किया है की अब हम यही शिफ्ट हो जाते है. बैसे भी दिल्ली बहुत दूर पड़ती है. और हमारा मिलना तो बिलकुल न के बराबर hi होता है. इसलिए अब हम यही rahenge.or रेनू और सुरभि का अड्मिशन भी यही के सलग में करवा देंगे.

ये सुनके में सॉलिड चौका.

मैं- क्या आप सीरियस है.

मां- बिलकुल. तुम्हे इससे कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न.

मैं- प्रॉब्लम और मुझे. क्या मां आपको ये सवाल hi नहीं करना चाहिए थे. आपलोग यहाँ रहेंगे उससे बढ़कर कृषि की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है. बल्कि मैंने तो बहुत पहले रेनू से इसके बारे में कहा था की यही आजाओ सभी. लेकिन इसने आपके बिज़नेस का नाम लेकर मुझे चुप करवा दिया. बैसे आपके बिज़नेस का क्या होगा.

मां- हम एक ऑफिस यही खोल रहे है और यही से दिल्ली के ऑफिस को संभालेंगे.

मैं- ये तो और भी अच्छी बात है. It's ा बेस्ट सरप्राइज एवर. थैंक्स.

ममी- हैट पहला हमें थैंक्स कहता है. तुझे और बाकिओ बचो को खुश रखना hi तो हमारा काम है.

उसके बाद हमारी ऐसी hi बाटे चलती रही. एंड रात में हम्मे साथ में डिनर किया और फिर अपने अपने कमरों में चले गए. और मेरे पीछे रेनू और सुरभि भी मेरे hi कमरे में आगयी.

रेनू- तो बीआरओ क्या हाल.

मैं- बैसे तो ठीक हु.

सुरभि- और ऐसे कैसे हो.

मैं- बहुत परेशान.

रेनू- क्यों क्या हुआ.

मैं- वो प्राची के दिमाग में पता नहीं क्या चल रहा है. आलिआ और वो दोनों साथ hi उसके हॉस्टल में रह रही थी. आज सुबह मुझे पता चला की आलिआ बहा से का चुकी है. मैंने प्राची से बात करने की कोसिस की तो उसने मुझे टोटल इग्नोर कर दिया आज उसने मुझसे बात तक नहीं की किसी भी बारे. और इसलिए मुझे लग रहा है की सायद प्राची ने आलिआ से झगड़ा किया है. और आलिआ इसीलिए बहा से चली गयी है. और प्राची अब ये सब छुपाने के लिए मुझे बात नहीं कर रही है. बाकि ये मेरा पहलु है. जो सच भी हो सकता है और झूट भी.

ये सब सुनके उन दोनों के मुँह खुले के खुले रह गए. उन्हें भी ये सब बहुत अजीब सा लगा. प्राची काफी समझदार लड़की है वो ऐसा कैसे कर सकती है. यही इस वक़्त दोनों के दिमाग में चल रहा था.

रेनू- ी can't बिलीव की प्राची ने आलिआ से झगड़ा किया होगा. बाकि बात कुछ और hi है ी गेस.

सुरभि- बैसे एक पॉइंट ये भी है की प्राची उससे झगड़ा कर सकती है. उसका पहले का नेचर तो तुम्हे पता hi है. देव की कार को फोड़ दिया था उसने सिर्फ देव की बात का उसे बुरा लगा था isiliye.or इस बार तो बात उसके प्यार की है. और ऐसा अगर हम समझे तो सोचो की वो क्या क्या करेगी.

रेनू- बैसे मेरे न चाहते हुए भी तुम्हारी बात में दम तो है. और इसका सच केवल अब आलिआ hi बता सकती है. देव तुम्हे उससे बात करनी चाहिए.

मैं- नहीं. सबसे पहले में प्राची से hi बात करूँगा उसका क्या कहना है इस बारे में पहले मुझे वो जानना है. बाकि आलिआ से उसके बाद बात करूँगा में.

सुरभि- ये भी सही है. तुम उसके हॉस्टल में hi जाओ और बही आमने सामने बात करना उससे.

मैं- मुझे भी यही लगता है. ठीक है में जेक आता हु. जरा देखि तो अभी वो क्या कर रही है.

उसके बाद में बहा से तुरंत गायब हो गया और अदृश्य हालत में प्राची के कमरे में पंहुचा. बहा मैंने देखा की प्राची कुछ सोच में डूबी हुई है. उसे किसी बात की सायद कोई सुध नहीं है. तभी मैंने उसे आवाज दी. और में उसके सामने आया.

प्राची- तुम यहाँ कब आये

मैं- जस्ट अभी. क्या सोच रही हो.

प्राची- कुछ खास नहीं. आओ बैठो.

में बहा बैठा.

प्राची- सॉरी वो आज तुमसे बात hi नहीं कर पाई में.

मैं- तो अब करलो और बताओ की आखिर बात है क्या. तुम दोनों में झगड़ा हुआ क्या. या फिर कुछ और बात है.

प्राची- यही बात में समाज नहीं प् रही हु. की बात आखिर है kya.me उसे एक्सेप्ट नहीं कर प् रही हु. और वो ये बात अच्छे से जानती है. मैंने उसे जाने को नहीं कहा. वो खुद hi अपने मन से चली gyi.or सबसे बुरी बात तो ये की मैंने उसे रोकने की कोसिस भी नहीं की. सायद में भी यही चाहती थी की वो चली जाये.

ये सुनकर मुझे ज्यादा हैरानी नहीं हुई.

मैं- वो कहा गयी तुम्हे कुछ पता है.

प्राची- नहीं. वो बिना एक शब्द कहे बहा से चली गयी. कहा जा रही है कब लौटेगी कोई आईडिया नहीं मुझे. और में दिनभर से यही सोच रही हु की वो चली गयी है इस बात के लिए में कुश हो या दुखी. क्युकी उसकी हमें जरुरत है. लेकिन में उसे तुम्हारे साथ नहीं देख सकती. फिर चाहे ये संसार मुझे खुदगर्ज़ hi क्यों न कहे.

मैं- मैंने तुमसे कहा था की इसको समय पैर छोड़ दो. और इसके नारे में सोचना बंद कर दो. लेकिन तुमने न तो मेरी बात मणि न hi गुरुदेव की. तुम केवल अपने स्वार्थ के लिए ऐसा नहीं कर सकती हो प्राची. में नहीं कहता की तुम उसे स्वीकार करो अपनी सौतन के रूप में. बल्कि खुद को और उसे थोड़ा समय दो. जब शादी का वक़्त आएगा तब स्वयं महादेव हमें कोई न कोई हल बताएँगे. और इतनी से बात तुम्हारे दिमाग में नहीं घुस रही है.

मेरी बाते प्राची को सीधा असर कर रही थी.

प्राची- में कोसिस तो कर रही हु. लेकिन मुझसे नहीं हो रहा है. में क्या करू.

मैं- तुम एक आम लड़की की तरह बाटे और बेहवे कर रही हो प्राची. जबकि तुम आम नहीं हो. तुम खास हो. याद है न गुरुदेव ने हमें क्या क्या बताया और सिखाया है वो सब ऐसे hi टाइम पास के लिए नहीं बताया है उन्होंने. वो परमज्ञानी है. उनके हर एक शब्द के पीछे कई मतलब छिपे होते है. जो हम समाज भी नहीं सकते है. अगर हम्मे आपस में hi फुट पद गयी तो जरा सोचो की इसका क्या परिणाम होगा. असुरो की तो चंडी हो जाएगी. और तुम देखलेने वो जल्द hi इस बात का फायदा उठाने लगेंगे. जरा सोचो की अगर उन्होंने तुम्हारा या आलिआ का. दोनों में से किसी एक को भी अपनी साइड कर लिया कोई झूठा प्रलोभन देकर तो क्या में तुम्हारे विरुद्ध हथियार उठा पाउँगा या आलिआ के खिलाफ. नहीं. में खुद की जान लेना सही समझूंगा तुम दोनों से लड़ने की जगह.

मेरी ये बाटे सुनकर आलिआ का नजरिया बदल रहा था. और में जांभोज कर अभी शादी बगेरा की बाटे नहीं कर रहा था. में बस चाहता था की दोनों के बीच को दुरी मिट जाये बाकि बाद में देखेंगे.

प्राची- बैसे तुम्हारी बात में पॉइंट तो है. अगर ऐसा हुआ तो में भी आलिआ के खिलाफ नहीं जा पाऊँगी. और अगर मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ तो आलिआ भी मेरे लिए यही करेगी इतना तो भरोसा मुझे है उसपर. लेकिन वो शादी बलि बात का क्या.

मैं- तुम घूम फिर कर उसी पॉइंट को क्यों पकड़ रही हो. देखो मैंने कहा न सब भूल जाओ. हमारी शादी जब होगी सो होगी. लेकिन उसके चक्कर में हम अपना आज क्यों बिगाड़ रहे है. अब आलिआ को यहाँ बापिस बुलाओ भले तुम उसके साथ मत रहना में उसे कही और शिफ्ट करवा दूंगा.

प्राची- क्या में तुमपर भरोसा कर सकती हु.

मैं- है पूरा भरोसा.

प्राची- ठीक है में कोसिस करती हु.

उसके बाद प्राची ने अपनी आँखों को बंद किया और आलिआ को याद किया उससे संपर्क बनाने की कोसिस ki.lekin नहीं बन पाया. उसने फिर से कोसिस की लेकिन फिर से नाकाम

प्राची- वो जवाब नहीं दे रही है. सायद नाराज़ है वो मुझसे.

मैं- तो उसे मनाओ.

प्राची- लेकिन कैसे.

मैं- जहा तक मुझे यकीन है वो अपने घर गयी होगी परीलोक. तो तुम बहा जाओ कुछ दिन बहा की सेर करो उसे मनाओ और अपने साथ लेके आओ यहाँ.

प्राची- लेकिन में कैसे.

मैं- तुम कर सकती हो. मेरा हाथ पकड़ो.

प्राची ने मेरा हाथ पकड़ा और मैंने उसे सीधे परीलोक भेज diya.bina देर लगाए.

मैं- पहुंच गयी.

प्राची- बिलकुल कितना खूबसूरत है ये.

मैं- वो तो होगा hi आखिर परीलोक है वो. अब महल में जाओ आलिआ के बारे में पूछो वो बहा की राजकुमारी है उसे सब जानते है. और कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे बता देना.

प्राची- ok मिलते है बाद में.

ये कहके हमारा संपर्क टूट गया. और में बहा से सीधा पंहुचा अपने कमरे me.jaha वो दोनों मेरा वेट कर रही थी.

रेनू- क्या हुआ

सुरभि- है क्या कहा उसने

मैं- बही पुराणी बात की वो उसे एक्सेप्ट नहीं कर रही बगेरा बगेरा लेकिन अच्छी बात ये है की उसने उसे जाने को नहीं कहा है.

रेनू- फिर वो कहा गयी और क्यों.

मैं- पता नहीं. ी गेस की उसके घर गयी होगी. मैंने प्राची को बही भेजा है परीलोक उसे बापिस लेन के लिए अब देखते है क्या होता है इनके बीच.

सुरभि- क्या वो परीलोक गयी hai.wow it's अमेजिंग.

रेनू- है यार काश हम भी बहा जा पते

मैं- सभी चलेंगे किसी दिन पहले ये प्रॉब्लम सोल्वे हो जाये.

रेनू- पक्का.

मैं- है एक दम पक्का. चलो अब जाओ और सो जाओ.

सुरभि- ok गुड़ नाईट. बीआरओ.

रेनू- है गुड़ नाईट. और है कल सलग में हमारा अड्मिशन करवा देना. हम सरे डाक्यूमेंट्स साथ ले चलेंगे.

मैं- दोने.

उसके बाद वो दोनों चली गयी और में सो गया अपनी टंगे फैला कर.

रात में अचानक मेरी नींद खुल गयी. मेरा पूरा चेहरा पसीने से तर tha.or डिल जोरो से धड़क कर शोर मचा रहा था. और इसके पीछे का कारण में जनता था. वो सपना जो मुझे अभी आया था. जिसमे में चारो तरफ से असुरो में घिरा हुआ हु. और वो मुझपर हमला कर रहे है. और मेरी मदद कोई नहीं कर प् रहा था खुद में भी नहीं. मेरी शक्तिया उन्हें नुकसान नहीं पंहुचा प् रही थी. उल्टा वो सभी बस भयानक हसी है रहे थे. उसके अलावा भी कुछ दिखा था मुझे. कुछ चमकीली चीज़ किसी साये के हाथो में. मई बे वो ाँस hi थे. बहा उसके हाथ में तीन रोहनिया जगमगा रही थी. मतलब की तीन ाँस. और वो भी असुरो के हाथ में. ये सोचकर तो मेरा माथा hi ठनक गया. मैंने सोचा ये कैसे संभव हो सकता है. मुझे लगा की शायद ये कोई संकेत है. जो मुझे आगाह कर रहा है की ऐसा भी हो सकता है. और अब मुझे सोचना था की में ऐसा होने से कैसे रोक सकता हु.

मुझे कुछ तगड़ा सोचना पड़ेगा. और तभी मुझे गुरुदेव की कही गयी बात याद आई की अब अधीरा की जगह उसका बीटा नया सम्राट है. जो काफी चालाक है. वो शायद कुछ धांसू प्लान बना रहा होगा उनको हासिल करने के लिए. लेकिन क्या हो सकता है उसका प्लान. वो ऐसा क्या कर सकता है जिससे मेरे हाथ वो ाँस न लग सके. इस बार तीनो ाँस एक साथ आने वाले है. मतलब उनका पूरा पूरा चांस है उनको हथियाने ka.or अब प्राची और आलिआ भी नहीं है. मतलब की मेरी टीम कमजोर है. रेनू और सुरभि पता नहीं कितना मुकाबला कर सकती है उनका. वैसे गुरुदेव ने उन्हें हर संभव परिस्थिति से निपटने का रास्ता बताया है. बाकि रही बात असुरो की तो वो क्या कर सकते है इस बार. किस प्रकार का हमला वो karenge.bas इक बार इसका अंदाजा लग जाये तो में अपना काउंटर प्लान बना सकता हु. वर्ण इस बार सब चौपट हो जायेगा. मेरे कवच ने इस दौरान किसी भी असुरो के यहाँ आने का संकेत भी नहीं दिया hai.matlab की वो यहाँ अभी तक आये नहीं है.

नहीं दूसरी तरफ सौरमंडल में जुंग छिड़ चुकी थी. हर जगह तबाही मची हुई थी. जितने भी छोटे मोठे राज्य थे. फिर चाहे वो किसी के भी हो सभी पैर बराबर हमला हो रहा tha.or मुझे बताने की जरुरत नहीं की ये कोण कर रहा था. नहीं आकाश वाले असुर. ऊपर के सरे लोको पैर देवताओ और असुरो की लड़ाई सुरु हो गयी थी. देवता हरसंभव प्रयास कर रहे थे उन्हें पीछे धकेलने की लेकिन उन तीनो की शक्तिया देवताओ से अधिक थी. जिस बजह से वो देवताओ को बराबर टक्कर दे रहे थे. और उनकी कुछ टुकडिया परीलोक की तरफ भी बढ़ने लगी थी. बाकि देखते है बहा पहुंचने के बाद क्या धमाका होता है…

तो बे कॉन्टिनुए………………….

 
अपडेट 76



ये सपना देखने के बाद में काफी देर तक सोचता रहा की आखिर क्या प्लान हो सकता है असुरो का कैसे वो तीनो ाँस हासिल करेंगे. लेकिन इतना सोचने के बाद भी कोई सॉलिड प्लान मेरे दिमाग में नहीं आरहा था. बस इतना अंदाजा मुझे लग रहा था की हो न हो ये मुझे उलझने की कोसिस जरूर करेंगे ताकि में उन्ही में उलझा राहु और इस दौरान ये अपना काम कर sake.ab सवाल ये था की ये मुझे उलझायेंगे कैसे.

यही सब सोचते सोचते कब 5 बज गए पता hi नहीं चला. तो इसलिए में बिस्तर से उठा और फ्रेश होने और नहाने बाथरूम चला गया. बढ़िया से नहाया और छत पैर चला गया. बहा जेक मैंने बैठा ध्यान में. और अपने मंत्र का जाप करने laga.sansaar की पॉजिटिव एनर्जी को महसूस करने लगा और अपनी एनर्जी को फ़ैलाने लगा. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पॉजिटिव सोच वाले हो sake.aise hi टाइम निकल गया और फिर मैंने उगते हुए सूर्य को देखा. बकै में लाजवाब दृश्य था ये. खासकर देहरादून की वादियों में ये नजारा और भी खुल कर सामने आरहा था. क्युकी यहाँ मौसम में अधिकतर बदल hi छाये रहते है कभी कभी hi सूर्य दीखता है खासकर उदय होते हुए तो काम hi दीखता है. इस नज़ारे का आनंद लेने के बाद मैं नीचे गया सलग आज था नहीं संडे की बजह से और ये बात रेनू और सुरभि को भी पता नहीं थी सायद उनके दिमाग से निकल गयी होगी. जभी तो कह रही थी की आज उनका अड्मिशन करवा दू में सलग में. जो की संभव hi नहीं है. खैर संडे था सुन के दर्शन हो गए. इसके आल्वा कोई और काम तो था hi नहीं मुझे. में फ्री था दिन भर. और यही चीज़ मुझे सबसे ज्यादा बेकार लगती है. में खुद को बिजी रखना चाहता हु. फ्री बैठना बहुत सिरदर्द का काम hai.lekin करू भी क्या समाज में नहीं आरहा tha.bas सोच रहा था की क्या किया जाये. तभी माँ कॉफ़ी लेके आगयी. मैंने उनसे कॉफ़ी ली और वो भी नहीं बैठ गयी.

माँ- क्या सोच रहे हो.

मैं- बस यही की आज का दिन कैसे निकलू. क्या करू.

माँ- फ्री हो आराम करो पड़े करो. और चाहो तो कही घूमने चले जाओ. और रेनू और सुरभि को भी ले जाओ. और क्या कर सकते हो.

मैं- ये सब तो करते hi रहते है. और मेरा आज घूमने का कोई मूड नहीं बन रहा है.

माँ- तो फिर क्या करोगे.

मैं- आराम और एक्सरसाइज. अभी जेक सुरु होता hu.music को फुल वॉल्यूम पैर लगा कर.

माँ- जैसा तुम चाहो. बैसे में तो बहुत बिजी हु. अभी नास्ता बनाना है फिर लंच और डिनर. और इस बीच ऑफिस का कुछ पेंडिंग काम भी निपटना है.

मैं- लकी हो जो इतना काम है आपके पास.

माँ- सबकी अपनी अपनी पसंद होती है. तुझे काम करना पसंद है और किसी को फ्री बैठना पसंद होता है.

मैं- ये भी hai.khair छोडो में जाता हु. जब नास्ता बन जाये तो कॉल कर देना.

माँ- ok.

उसके बाद में बहा से गया अपनी गयम में. बढ़िया अपनी टी शर्ट को उतरा और अपनी बॉडी को आईने में देखा. तो यार काफी जगह से फैट बढ़ने लगा था मेरा थोड़ा थोड़ा. और ये केवल इसलिए क्युकी काफी दिनों से एक्सरसाइज जो नहीं की थी. बाइसेप्स भी छोटे से हो गए थे. इनपर अभी तक मैंने ध्यान hi नहीं दिया था.

ये सब देखने के बाद मैंने सोच लिया की अब रोज 4 बजे उठना पड़ेगा. 1 घंटा एक्सरसाइज. उसके बाद महल ध्यान में baithunga.isse दोनों काम इकसठ हो जायेंगे. और बस उसके बाद बढ़िया से इंस्पिरेशनल सांग लगाए जिससे जोश बड़े और शुरू होगया वार्मअप से.

बही दूसरी तरफ सुबह hi परीलोक पैर हमला हो गया. उन असुरो की फौज ने उन्हें चारो तरफ से घेर लिया. लेकिन उन्हें प्रॉब्लम ये थी की वो अंदर नहीं जा प् रहे थे. देव के कवच की बजह se.vo बार बार हमला कर रहे थे. लेकिन कोई भी नुकसान नहीं हो रहा था कवच को. जिस बजह से उन असुरो ने सभी को पीछे धकेल दिया और कोई युक्ति सोचने लगा की कैसे अंदर घुसा जाये क्या किया जाये. बही प्राची आलिआ से मिल चुकी थी. दोनों की बात भी हो चुकी थी. कुछ कन्फूसिओं अभी भी था लेकिन अब दोनों नार्मल बेहवे करने लगी थी. और ऊपर से ये नै मुसीबत उनके दरवाजे पैर आगयी. जिस बजह से बहा पैर सभी परेशान थे. प्राची ने थोड़ा ध्यान लगा कर उनके बारे में जानने की कोसिस की तो उसे पता चल गया की कोण बहार खड़ा हुआ है और वो क्या कर सकते है. और ये जानकार बाकि सभी और डरने लगे की इन असुरो को फिलहाल हराया नहीं जा सकता है. लेकिन सभी के लिए अच्छी बात ये थी की वो अंदर नहीं आसक्ति थे कवच की बजह से.

बही अधीरा भी अपने पातळ लोक के साथियो के साथ एक गुप्त रस्ते से पृथ्वी के अंदर दाखिल हो गया था. और हैरानी की बात ये थी की इस रस्ते के बारे में किसी को भी पता नहीं tha.or देव के कवच को भी नहीं. ये एक अलग तरह का पोर्टल जैसा कुछ था. जो असुरो ने hi बनाया था लेकिन उसकी जानकारी केवल गिने चुने लोगो को hi थी. और ाधिरा सम्राट था इसलिए उसे भी इस पोर्टल की जानकारी थी. और उसने अभी तक इसके बारे में इसलिए किसी को नहीं बताया क्युकी उसे पता था की अगर देव को इसके बारे में पता चल गया तो वो उसे नस्ट कर देगा और फिर एक hi रास्ता बचेगा यहाँ आने का जिसके दरवाजे पैर खुद देव खड़ा मिलेगा सभी को. और ये अभियान काफी गुप्त था इसलिए अधीरा ने इस पोर्टल का उपयोग किया वर्ण वो उसी रस्ते से अंदर आता जहा देव का कवच बना हुआ है. लेकिन उनका सोचना था की देव को ये भनक भी न लगे की कोई यहाँ आज्ञा है और ये चुपचाप अपना काम कर सके. उसके बाद अधीरा के साथ आये हुए इक को अधीरा ने एक छोटे जीव में बदलने को कहा तो वो तुरंत hi एक चूहा बन गया बहुत मामूली चूहा और बहुत छोटा भी. ताकि आसानी से किसी की नजर में न आये वो. और ऐसा करके वो देव के घर के अंदर घुस गया. और यहाँ भी हैरानी की बात ये हुई की घर के बहार बने कवच ने इस चूहे को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया. ये कवच खास था जिसके अंदर आसुरी शक्ति है फिर चाहे वो एक छोटा सा मच्छर hi क्यों न हो. ये कवच उसे बहार hi जला कर रख कर देता था. लेकिन इस बार ये अंदर चला गया. और उसको कोई नुकसान भी नहीं हुआ. अब पता नहीं ये कैसे असुर है. जिन्हे ये कवच भी नहीं पकड़ पाया. अंदर की साडी खबरों के लिए अब यही चूहा hi अधीरा की मदद करेगा. और ये असुर कोई भी रूप ले सकता था. फिर चाहे वो किसी इंसान का लेना हो या फिर किसी जानवर का. और उसके अंदर जाते जी अधीरा और उसके साथी बहा से गायब हो गए.

स्पेस में हर तरफ तबाही मची हुई थी. सिर्फ परीलोक को छोड़ कर. लेकिन बहा कभी भी सुरु हो सकती थी. क्युकी जब घर के कवच में कोई घुस सकता है तो परीलोक के कवच में bhi.or इसीकोसिस में बाकि सभी लगे हुए थे. लेकिन उनकी किस्मत ख़राब की बहा वो पातळ लोक वाले असुर नहीं थे. इसलिए उन्होंने शुक्राचार्य से संपर्क किया और उन्हें यहाँ की समस्या बताई. जिसे सुनने के बाद उन्होंने बहा जाने को मन कर diya.or उसके आसपास के छोटे राज्यों पैर हमला करने को कहा. ताकि ये बहा मदद के लिए आये और पकडे जाये. जो आईडिया उन्हें भी अच्छा लगा. बही उन तीनो मेसे एक दिमाग में एक खुराफात घूमी जिसके वेयर में उसने शुक्राचार्य से पूछा तो उन्हें भी वो पसंद आई. और उन्होंने उसे करने को कह दिया. तो हुआ ये की ुन्तीणो में से एक के पास एक अलग प्रकार की शक्ति थी. और ये शक्ति के वेयर में आप पहले से hi जानते है. वो है लावा…

है दरअशल उनमे से एक असुर उसी लावा की पैदाइस था. और वो खुद को एक विशाल लावा में बदल सकता था. और ऐसा करके वो क्या कर सकता है ये बताने की भी जरुरत नहीं है. तो उसने ये किये की सूर्य और बाकि ग्रहो के बीच एक दीवार बनकर खड़ा होगया. और ऐसा होते hi एक भयंकर सूर्यग्रहण लग गया एक साथ सभी ग्रहो पैर. और सूर्य की साडी रौशनी उस लावा में रोक ली. और ऐसा होते hi चारो तरफ अन्धकार छ गया. पेड़ पौधे मुरझाने लगे. फूल सूखने लगे. और ऐसा इसलिए क्युकी इस लावा का प्रभाव सिर्फ सूर्य पैर hi नहीं बल्कि सभी ग्रहो पैर पड़ने लगा था. उस लावा की नेगेटिव एनर्जी चारो तरफ फैलने लगी थी. उसने एक hi बार में पोरे स्पेस को जीत लिया ऐसा लग रहा था. और ये कुछ ज्यादा hi पावरफुल लग रहा था. क्युकी सूरज की रौशनी भी उसको भेद नहीं प् रही थी न hi इसका कुछ बिगाड़ प् रही thi.isko देखकर ऐसा लग रहा था जैसे सूरज पीला नहीं कला हो. उसने इतनी सफाई से सूरज को ढाका हुआ था.

बही ये नजारा देखकर सरे देवताओ के होश उड़द गए थे. उन्हें इस असुर की इस काबिलियत का बिलकुल अंदाजा नहीं tha.or सूरज पैर ग्रहण लगने से देवताओ की शक्तिया कमजोर होने लगती है ये बात तो सभी जानते hi है. तो उसकी शुरुवात भी हो hi गयी. स्पेस में जितनी भी काली शक्तिया निबाश करती है. उनकी शक्तिया बढ़ने लगी थी. ग्रहो की चाल बदलने लगी थी. सभी जगह प्रलय के संकेत होने लगे थे. और जब काली शक्तिया बढ़ने लगी और देवीए शक्तिया काम होने लगी तो देव के द्वारा बनाया गया कवच भी एकदम से कमजोर पड़ने लगा. परीलोक का और पृथ्वी का. और ऐसा होते hi बाकि सेना अवसर देखकर तुरंत hi परीलोक में घुस गयी. नहीं प्राची आलिआ और रानीपारी और ुसलंके साथ सारा परीलोक हैरान रह गया ये देखकर. लेकिन अब समय बदल चूका था. अब समय था युद्ध लड़ने का. और यही अपना कर्त्तव्य जानकारी उन सभी में डटकर मुकाबला करने का फैसला किया. और असुरो की सेना पैर तीन तरफ़ा हमला कर दिया. पहला रानीपारी. दूसरा आलिआ और तीसरा प्राची. असुरो की सेना चारो तरफ से घिर गयी और इसका परिणाम ये हुआ की पहले hi हमले में असुरो की आधी से ज्यादा सेना ख़त्म हो गयी. और ऐसा इसलिए हुआ क्युकी उन्होंने इन्हे हलके में ले लिया. हलाकि बाकि के दोनों असुर ये देख रहे थे. उन्हें ऐसी उम्म्मीद तो बिलकुल नहीं थी. इसलिए उन्होंने बाकि की सेना को पीछे करवाया और फिर शुरू हुआ शक्तियों का खेल. असुर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते तो परिया apni.pariyo की शक्तिया भी कमजोर पद गयी थी इसलिए शक्तियों के युद्ध में असुर उनपर हावी होने लगे थे.

बही पृथ्वी पैर देव तो घर के अंदर था अपनी एक्सरसाइज कर रहा था. तभी रेनू भगति हुई बहा आई.

रेनू- जरा खिड़की के बहार देखो.

मैं- क्या हुआ

रेनू- देखो तो सही. कुछ गड़बड़ हुई है

मैं फ़ौरन खिड़की के पास गया और जैसे hi बहार देखा मेरे होश उड़द गए. क्युकी बहार ऐसा अँधेरा लगा हुआ था जैसे रात के 12 बज रहे हो. और आज अमावस को रात हो. कुछ भी नहीं दिख रहा था ठीक से.

रेनू- ये अचानक से क्या हुआ.

मैं- इतना भयानक ग्रहण कैसे लग गया. अभी तो इसका समय भी नहीं है.

रेनू- बही तो. अभी कुछ समय पहले hi तो ग्रहण लगा था. इतनी जल्दी दूसरा ग्रहण कैसे लग गया.

मैंने आसमान की तरफ अपनी नजर को किया और देखने लगा. लेकिन कुछ नहीं दिख रहा था. इसलिए मैंने अपनी आँखों को बंद किया और फिर अपनी तिरदये से देखने की कोसिस करने लगा. तो मुझे कुछ दिखा. कुछ हिलता हुआ लावा जैसा. और ये देखकर hi में समाज गया की माजरा क्या है.

रेनू- पता चला क्या है ये.

मैं- है. और ये भी की अगर इसे जल्दी hi नहीं रोका तो ये सूरज को पूरा निगल जायेगा.

रेनू- लेकिन ये कैसे पॉसिबल है.

मैं- पता नहीं. ये चीज़ बहुत hi घातक और खतरनाक है.

रेनू- तुम इसे रोक सकते हो.

मैं- पता नहीं. मुझे गुरुदेव से बात करनी होगी. एक काम करो नीचे जाओ सबको बोलो की घर के अंदर hi रहे. और सभी जगह नजर बनाये रखना. की कोण अंदर आ रहा है कोण नहीं. फिर चाहे वो कोई चीरती hi क्यों न हो. सुरभि को भी बता देना.

रेनू- ठीक है.

ये कहके वो नीचे चली गयी और में बही बैठ गया ध्यान में और गुरुदेव से संपर्क बनाने लगा.

थोड़े hi समय में उनकी आवाज आने लगी.

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- कल्याण मस्तु. वत्स.

मैं- ये क्या हो रहा है गुरुदेव

गुरुदेव- तुमने देख तो लिया hi होगा. ये उन आकाश वाले असुरो में से एक का काम है. उसने सूरज को घेर लिया है. और अब उसका अंत केवल दिव्यास्त्र से hi हो सकता है इसलिए वो और ज्यादा शक्तिशाली हो गया है. वो सूरज को निगल lega.or अगर ऐसा हो गया तो चारो तरफ प्रलय मच जायेगा सारा जीवन समाप्त हो जायेगा.

मैं- इसे कैसे रोकू गुरुदेव.

गुरुदेव- वत्स रोकने का एक hi तरीका है इसे क़ैद करना होगा. जो की आसान नहीं होने वाला.

और इसी के साथियो ने सरे अंतरिक्ष में हाहाकार मचा दिया है. सरे ग्रहो पैर हमला भी कर दिया है. जिसमे परीलोक भी शामिल है.

ये सुनते hi मेरा मंद पूरा ब्लेंक हो गया एक पल के लिए. लेकिन अगले hi पल फिर से चलने लगा गुरुदेव की आवाज सुनकर.

गुरुदेव- शांत रहो वत्स. तुम्हे इसे दिमाग से हटाना होगा. ऐसे काम नहीं चलेगा. परीलोक में साडी पार्टिया और प्राची उन्हें अच्छे से संभल रही है. लेकिन सबसे बड़ी चूनौती यही है की सूरज के ग्रहण का अंत कैसे किया जाये. और इसके लिए तुम्हे hi कुछ करना पड़ेगा.

मैं- ठीक है गुरुदेव अपना आशीर्वाद दीजिये की में इस मुसीबत का सामना कर सकू और उसे आगे बढ़ने से रोक सकू.

गुरुदेव- विजयी भाव वत्स.

ये कहके वो चले गए और मैंने अपनी आँखों को खोल लिया. और अब मुझे सारा खेल एक दम साफ़ समझमे आने लगा था इस असुरो का. और अब में बना रहा था अपना काउंटर प्लान.

बाकि अब देखना ये था की इसमें में किस हद तक कामयाब हो पता हु….



तो बे कॉन्टिनोएड……………...
 
थैंक्स भाई लोग अपना साथ बनाये रखने के लिए.....

आज के उपदटेस पोस्ट कर दिए है. उम्मीद है पसंद आएंगे सभी को. आज देखिये की देव क्या करेगा कैसे मनाएगा प्राची को. और वो महंती भी है या नहीं. और इसी बीच असुर अपनी योजनाओ को कैसे आगे बढ़ाएंगे ये भी देखने लायक होगा. आगे जानने के लिए साथ बने रहे.....

कीप सपोर्टिंग.............
 
अपडेट 77



मैं प्लेन बना रहा था और सोच रहा था की कैसे दोनों काम एक साथ हो सके. मुझे अंदाजा था की ाक्ष के साथ पृथ्वी पैर भी हमला वो जरूर karenge.or रेनू और सुरभि लड़ने में माहिर है लेकिन वो जल्द से जल्द कही नहीं पहुंच सकती है. और जब तक वो हमले की जगह पैर पहुचेंगी तब तक सारा खेल बिगड़ जायेगा. इस समय मुझे प्राची या आलिआ की जरुरत थी. जो यहाँ सब संभल सके. लेकिन चुकी अब वो यहाँ नहीं है तो अब मेरे पास कोई चारा नहीं बचा खुद बहा जाने के. और में अपना क्लोन नहीं बनाना छह रहा था क्युकी पिछली बार कुछ ज्यादा hi बड़ा नुकसान कर दिया था इन असुरो ne.jo इस बार भी हो सकता था. इसलिए मैंने सोचा अब जो होगा सो देखा जायेगा. यही सोचकर में अपनी गयम से सीधा आदमन की तरफ उड़द gya.full स्पीड में. थोड़ी hi देर में मैं पहुंच गया स्पेस में. बहा पहुंचकर देखा तो चारो तरफ घोर अन्धकार चाय हुआ था. स्पेस में बैसे hi अन्धकार छाया रहता है लेकिन सूरज की थोड़ी बहुत रौशनी तो रहती hi है. लेकिन इस बार सामने का भी कुछ नहीं दिख रहा tha.prithvi पैर लाइट्स चमक रही थी. हलाकि मुझे सब क्लियर दिख रहा था. इसलिए में उड़द गया सूरज की तरफ. अब बहा पहुंचने में समय तो लगेगा hi.

बही दूसरी तरफ अधीरा को उसके साथी जो चूहा बना हुआ देव के घर में था उसने खबर दे दी की देव ऊपर की तरफ निकल गया hai.jaise hi अधीरा को ये खबर मिली उसने अपने साथियो को हमला करने का आर्डर दे दिया. और उन असुरो ने तबाही मचाना शुरू कर दिया. कई बड़ी बिल्डिंग्स को चुटकी में गिरा दिया जिनमे देव कर कई लोग मर गए. बही अधीरा ने अपनी शक्ति से एक काली ऊर्जा को बहार निकला जो सीधे लोगो के दिमाग पैर असर कर रही है. और उन्हें हिंसक बना रही थी. और ऐसा होते hi लोग आपस में hi लड़ने लगे. पुलिस वाले लोगो को शूट करने लगे. लोग आपस में एक दूसरे की जान लेने लगे. असुर सभी अदृश्य हालत में थे. उन्हें कोई नहीं देख प् रहा था. बस उन्हें महसूस किया जा सकता tha.bhut प्रेत पिसाच सभी हर जगह हमला कर रहे थे. बही घर में चूहे के वेश में जो असुर था वो भी अपने असली रूप में आज्ञा और अचानक से उसने घर वालो पैर हमला करना सुरु कर दिया. लेकिन रेनू ने उसके हमले को रोक दिया. और ये देखकर सरे घरवाले हैरान थे की ये कोण है इतना भयानक क्यों है. बही सुरभि और रेनू दोनों ने hi उस पैर हमला सुरु कर दिया. जिसे देखकर वो असुर भी हैरान था. उसे समाज में नहीं आरहा था की ये दोनों उसे कैसे देख प् रही है. बल्कि सच तो ये था की वो अदृश्य था लेकिन घर के बहार कवच के कारण उसकी शक्तिया यहाँ थोड़ी काम काम कर रही थी जिस बजह से सभी उसे देख ला रहे थे. और यही कारण था की रेनू और सुरभि उस पैर भरी पड़ने लगी थी. वो अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करना छह रहा था लेकिन नहीं कर प् रहा था. और इसी का फायदा रेनू और सुरभि उठा रही थी. रेनू ने उछाल कर उसके सीने पैर एक किक mari.or वो उड़द कर घर की दीवार से जा टकराया. और वो संभालता उससे पहले hi सुरभि दौड़ कर उसके करीब गयी और स्पीड में अपने घुटने को उसके सीने में घुसेड़ दिया. और इस प्रहार के कारण उसका सीना बही पैर फैट गया. और सुरभि का घुटना उसने सीने में घुस गया. और ऐसा होते hi वो बजा से रख बन कर गायब हो गया. और ये देखकर तो सभी घर वाले एक दम से हैरान रह गए. उन्हें अपनी आँखों पैर यकीन hi नहीं हो रहा था की ये कैसे संभव हुआ.

मां- ये क्या था. और ये कहा चला गया.

रेनू- मां अभी समझने का समय नहीं है. आप सभी को लेके एक कमरे में चले जाइये और कमरे को लॉक कर leejiye.or बहार मत निकालिएगा.

ममी- हम कही नहीं जाने वाले तुम दोनों को छोड़ कर. पहले बताओ की ये सब क्या हो रहा है.

सुरभि- माँ प्लस मानिये. आप सभी के सरे सवालो के जवाब हम जरूर देंगे. लेकिन इस वक़्त नहीं.

रेनू- है दादू आप प्लस ले जाइये सभी को. हैंपर विस्वास रखिये.

दादू- ठीक है बीटा. लेकिन इसके बाद हमें जवाब चाहिए.

रेनू- पक्का.

माँ- देव कहा है. वो नीचे नहीं आया अभी तक.

सुरभि- वो ठीक है बुआ ऊपर hi है. और बही पैर गयम में बंद है. उसी ने कहा है सभी कमरों में चले जाये. उसकी बात मानिये.

दादू- ठीक है हम जाते है.

उसके बाद दादू सभी को एक कमरे में ले गए और दरवाजे को अंदर से बंद कर दिया. और उसमे बाद रेनू और सुरभि घर के बहार निकली. और अपने हाथो को जोड़ कर गुरुदेव का स्मरण किया और उनके द्वारा दिए गए मंत्रो का जाप किया. और ऐसा करते hi उन दोनों के हाथो में एक एक चम् सहमति तलवार आगयी. जो काफी पावरफुल हथियार था. ये सिर्फ काटने के काम का hi नहीं थी बल्कि बहुत काम का थी.

रेनू- हमें कुछ करना होगा.

सुरभि- लेकिन यहाँ रहना भी जरुरी hai.baise देव कहा है.

रेनू- पता नहीं. सायद ऊपर गया हो. एक काम करते है में बहार जाती हु. तुम यही रहो और घरवालों की रक्षा करो.

सुरभि- नहीं तुम यहाँ रहो में जाऊँगी बहार.

रेनू- मैंने एक बार कह दिया न. बही करो.

ये कहके रेनू ने अपनी तलवार को ऊपर आसमान की तरफ kiya.or वो आसमान की तरफ तेज़ी से उड़द गयी. और सुरभि बस देखती रह गयी.

बही रेनू ऊपर पहुंचकर चारो तरफ देखने लगी. और उसे बहुत दूर दूर तक दिख रहा था. तो वो एक जगह के लिए चली गयी जहा एक बिल्डिंग नीचे गिर रही थी और उसमे काफी लोग फसे हुए थे. रेनू तेज़ी से उड़ते हुए जा रही थी. और दूर से देखने से रेनू नहीं बल्कि अग्नि का गोला hi दिखाई दे रही थी. जो उड़ता हुआ जा रहा है. खैर इस वक़्त इसपर ध्यान देने वाला कोई नहीं था. असुर और इंसान अपने में hi मस्त थे. रेनू- जल्दी से बिल्डिंग के कांच को तोड़कर एक फ्लोर में घुस गयी. हलाकि बिल्डिंग को गिरने से रोका नहीं जा सकता था. क्युकी उसके पिलर्स hi टूट गए थे. और काफी लोग मर भी चुके थे. अब बस ऊपर के फ्लोर पैर कुछ hi लोग बचे हुए थे. जो चिल्ला रहे थे. रेनू- अपनी स्पीड का इस्तेमाल करते हुए आगे बड़ी और एक hi झटके में उसने चार लोगो को अपने दोनों हाथो में पकड़ा और उड़ती हुई उन्हें नीचे एक सेफ जगह पैर छोड़ दिया. ये सब इतनी जल्दी हुआ की उन लोगो को कुछ पता hi नहीं चला की कब वो यहाँ आगये. किसी ने भी नहीं देखा की उन्हें कोण यहाँ छोड़ गया. ऐसे hi करके रेनू करीब 20 लोगो को नीचे छोड़ा. और स्पीड में दूसरी तरफ चली गयी जहा और लोगो को मदद की जरुरत थी.

और सबसे जरुरी बात ये की देव को दोनों की इन शक्तियों की बिलकुल जानकारी नहीं thi.isiliye वो थोड़ा कंफ्यूज भी था की ये सब कैसे किया जाये.

खैर. रेनू ने एक एक करके काफी लोगो की मौत को ताल दिया. और ये देखकर अधीरा काफी हैरान था की ये कोण बचा रहा है लोगो को. जबकि देव तो यहाँ है नहीं. लेकिन अधीरा जनता था की भले hi वो अभी बच गए हो. लेकिन उसकी काली शक्ति के प्रभाव से नहीं बचेंगे. वो खुद hi मार डालेंगे एक दूसरे को. और सच कहु तो इसका हल तो रेनू के पास भी नहीं था. वो खुद हैरान थी की ये लोग आपस में क्यों लड़ रहे है. और उसके जवाब के लिए रेने तेज़ी से जमीन पैर गिरी और अपनी तलवार को जमीन पैर घुसेड़ दिया. और ऐसा करते hi चारो तरफ हवा का भयंकर बेग उत्पन्न हुआ और तलवार से अग्नि की एक लहार निकली और चारो तरफ फ़ैल गयी. और जैसे hi अग्नि ऊपर की तरफ जाने लगी तभी थोड़ी ऊपर जाते hi अग्नि भुज गयी. अग्नि पूरी ऊपर नहीं जा सकीय. और ये संकेत थे काली शक्तियों के. और रेनू को समाज में आज्ञा की ऐसा क्यों हो रहा है. और उसे कोण रोक सकता है. उसने अपनी आँखों को बंद किया और प्राची को याद किया.

जहा प्राची आलिआ के साथ मिलकर असुरो का बंद बजा रही थी. लेकिन उनकी गिनती है की ख़त्म होने का नाम hi नहीं ले रही थी. तब उसे गुरुदेव द्वारा दिया गया एक मंत्र याद आया. और उसने बही अपनी आँखों को बंद किया और उस मंत्र का जाप करने लगी. और मंत्र का पहला शब्द बोलते hi. परीलोक में एक बहुत hi भयानक हवा का बवंडर बनने लगा. ये इतना भयानक था की लोगो को तो तिनके की तरह उदा कर फेंक रहा था. और जैसे जैसे मंत्र आगे बढ़ रहे थे बवंडर और भी गहरा बनता जा रहा था. जैसे hi मंत्र पूरा हुआ प्राची ने अपनी आँखों को खोल लिया और बवंडर को इशारे से समझा दिया की क्या करना है. और ये इशारा मिलते hi बवंडर असुरो की सेना पैर अपना केहर गिराने लगा. केवल असुरो की सेना पैर. और सरे असुरो को एक एक करके अपने अंदर लेने लगा असुरो की सेना इसे देखकर hi पीछे की तरफ भागने लगी लेकिन बवंडर से कोण भाग सकता है. थोड़ी hi देर में असुरो के सरे सैनिक इस बवंडर में उड़ते हुए नजर आने लगे the.ab उस बवंडर में धूल मिटटी की जगह केवल असुर hi असुर दिखाई दे रहे थे. और अक्काश वाले असुर ये देखकर काफी हैरान थे की इस शक्ति का प्रयोग यहाँ आखिर किसने किया और कैसे. और बवंडर तेज़ी से उनकी तरफ भी बाद रहा था. इसलिए वो अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उसपर करने लगे. लेकिन उनकी साडी शक्तिया बिफल होने लगी. और बवंडर उनके एक दम करीब पहुँच गया तो उनके पास अब भागने के शिव कोई भी रास्ता नहीं बचा. तो वो बहा से फ़ौरन hi गायब हो गए और बवंडर उस जगह से आगे बढ़ गया. अब सवाल ये था की इन असुरो का अंत कैसे होगा. इस बवंडर से. उसने उन्हें रोक कर अपने अंदर तो ले लिए लेकिन इनका अंत कैसे करेगा. तो यहाँ रानी पारी ने अपना दिमाग चलाया और अग्नि की भयंकर ज्वाला अपनी छड़ी से निकाल दी बवंडर की तरफ. और यहाँ प्राची उनके वॉर को समाज गयी. और जैसे hi अग्नि उस बवंडर तक पहुंचा प्राची ने बवंडर को नहीं समाप्त कर दिया. और उसके बाद अग्नि में बहा अपना कब्ज़ा जमा लिया. और उन सभी असुरो को वो अग्नि जलने lagi.or इस तरह सेना की एक टुकड़ी का अंत होगया वो भी एक साथ.

और इसके जस्ट बाद प्राची को रेनू की आवाज आगयी.

प्राची- क्या हुआ दीदी.

रेनू- यहाँ तुम्हारी मदद चाहिए. कुछ असुरो ने यहाँ कालीशक्ति फैला दी है. जिसके प्रभाव में लोग आपस में hi मारकाट कर रहे है. और देव यहाँ है नहीं तुम अपनी मंद शक्ति से इसका अंत कर सकती हो.

प्राची- ठीक है दीदी हम आते है.

उसके बाद प्राची ने ॉलीअ को अपने साथ लिया और आलिआ अपनी शक्ति से प्राची को पृथ्वी की तरफ उड़द ले गयी.

बही मैं भी अब सूरज के समीप पहुंच गया था. और मेरे सामने थी एक बहुत बड़ी दीवार उस लावा की. तो मैंने सबसे पहले तो अपनी तिरदये को खोलकर उसकी भीषण ज्वाला को उसपर छोड़ दिया. और ऐसा होते hi उसका आकार घटने लगा. अब में जनता था की इसका अंत फिलहाल मुमकिन नहीं है. इसलिए ज्वाला के साथ मैंने अपने हाथो को जोड़ा और बैसे hi एक कवच का निर्माण करने लगा जैसा मैंने पहले किया था. ताकि इस लावा को उसी में क़ैद कर सकू. फिलहाल इसका आकर काफी बड़ा था. और इसको काम करते करते काफी टाइम जाने वाला था इसलिए मैंने दोनों कामो को एक साथ करना सुरु किया ताकि जल्दी से जल्दी उसका काम लग जाये. वर्ण ये युद्ध महीनो तक भी चल सकता है. ये काफी मोटा और बड़ा था. मेरी ज्वाला सीधे उसके कोर पैर हमला कर रही थी. जिस बजह से इसका आकर घटने लगा था. लेकिन ये कभी भी बपीसी कर सकता था. अब मेरे कवच का आकार भी बढ़ने लगा. लेकिन इसी बीच उस लावा ने मुझाएर हमला कर दिया. लावा की एक लहर मेरी तरफ आने लगी. ताकि मुझमे समां सके. लेकिन में साइड हो गया. तो इस बार उसने करीब 100 लेहरो को एक साथ मेरी तरफ भेज दिया. ताकि में किसी न किसी में तो फसूंगा. लेकिन मेरी ज्वाला उसकी लेहरो को काटने लगी. काफी लेहरो को काट दिया लेकिन पता नहीं कहा से एक लहर ने अचानक मुझे कमर से बांध लिया. और में हैरान रह गया की ये कब आगयी मेरे पास. और में आगे कुछ सोचता उससे पहले hi वो लहर मुझे उसके अंदर की तरफ खींचने लगी और ऐसा होते hi मेरा कंसंट्रेशन टूट गया और वो कवच बही नस्ट हो गया. अब इसे फिर से बनाना पड़ेगा. लेकिन उसके प्रभाव के कारण में कंसन्ट्रेट नहीं कर प् रहा था. मेरी शक्तिया कमजोर पड़ने लगी थी. और वो मेरे ऊपर भी चढ़ने लगा था. और उसे रोकने का एक hi तरीका था मैंने अपनी हाथो को जोड़ा और ध्यान करने लगा. जैसे hi फिर से तिरदये खुली मेरे पुरे सरीर में से तेज़ ज्वाला बहार निकलने लगी. और इसकी तपन से वो लावा ने मुझे एक hi झटके में छोड़ दिया. और मैंने फिर उसी अवस्था में फिर से उस कवच का निर्माण सुरु किया और थोड़ा तेज़ गति से. और लावा मुझपर हमला करता रहा लेकिन मेरे आसपास भी नहीं पहुंच प् रहा था. तो उसने ये किये की मुझे चारो तरफ से घेर लिया मेरे ऊपर नीचे दये बाये चारो तरफ वो एक बंद कमरे की तरह बन गया जिसके अंदर में हाथ जोड़े खड़ा और कवच का निर्माण कर रहा था. और इस कमरे को हटाने के लिए मैंने अपने सरीर की लपटों को और तेज़ किया और लम्बा भी लेकिन इससे काम बन नहीं रहा था. लावा भी अपना आकर बढ़ाता जा रहा था. इसलिए मैंने ऊपर की तरफ जाना सुरु किया वो भी बहुत hi तेज़ स्पीड में. इतना तेज़ की लावा को पता hi नहीं चला की में कब उसमे छेड़ करके दूसरी तरफ आज्ञा. और इसी मौके का फायदा उठा कर मैंने अपने कवच को उसी लावा पैर छोड़ दिया. और ऐसा करते hi बाकि का काम कवच खुद करने लगा. कवच खुद hi अपना आकर बढ़ाने लगा और कवच को घेरने लगा बही लावा अपना आकर बसने लगा. लेकिन कवच की रफ़्तार कुछ ज्यादा hi थी. कुछ hi सेक्. में कवच ने लावा की पूरी तरफ अपने अंदर ले लिया. जो लावा दुसरो को निगलता था उसे मेरे कवच ने खुद निगल लिया. और निगलने के बाद कवच ने अपना अक्सर छोटा करना सुरु किया और कवच के साथ लावा का अक्सर भी छोटा होता चला गया. और जैसे hi लावा छोटा हुआ सूरज अपनी रौशनी फिर से बिखेरने लगे. सभी ग्रहों पैर सूर्य की रौशनी पहुंचने लगी सेक् के हिसाब se.or देखते hi देखते कवच का आकर बिलकुल नार्मल हो गया. और कवच के अंदर लावा तडफने लगा अपने अकार को फ़ैलाने के लिए लेकिन नाकाम रहा. और ऐसे hi कोसिस के बाद जब उसका कुछ नहीं हुआ तो वो अपने इंसानी रूप में आज्ञा. और ये देखकर में मुस्कुराया और उसे भी अपने उसी मायाजाल में भेज दिया कहा बाकि के असुर क़ैद थे. और में फिर बहा से बापिस हो लिया पृथ्वी के लिए. क्युकी बहा पैर खतरा काफी बाद गया था.

बही शुक्राचार्य को जब ये पता चला की एक और असुर क़ैद होगया तो उन्हें बहुत क्रोध आने लगा उनके क्रोध की सीमा अब पार होने लगी थी. लेकिन ये अच्छा हुआ की मेधावी उनके पास hi था. और वो इस क्रोध को अच्छे से जनता था. ीये उसने तुरंत hi उनके पैरो को पकड़ लिया और उन्हें shan't रहने को कहना लगा काफी देर विनती करने के बाद उन्होंने अपना गुस्सा शांत कर लिया. लेकिन ये गुस्सा पूरी तरह से शांत नहीं हुआ था. ये ज्वाला अंदर hi अंदर धड़क रही थी. और ये तय था की किसी दिन ये जरूर फूटेगी.

एक hi झटके में देव एंड उसके साथियो ने पृथ्वी और ाक्ष दोनों को सुरक्षित कर लिया था. लेकिन फिलहाल खतरा सिर्फ टाला था. ख़त्म नहीं हुआ था. क्युकी अधीरा और उसके साथी छिप गए थे. और बाकि के दोनों असुर भी. बही प्राची और आलिआ रेनू के पास पहुंच चुकी थी और बहा आलिआ और प्राची दोनों ने अपनी शक्तियों को मिला कर फैलाना सुरु कर दिया. प्राची के मंद से निकलने वाली रौशनी आलिआ की छड़ी से निकली रौशनी से मिलकर सभी इंसानो के ऊपर से काली शक्ति के प्रभाव को हटाने लगी. और उसमे आलिआ की शक्तिया इसी लिए मिले गयी. क्युकी परिया खुशियाली का प्रतीक होती है. और इसवक्त सभी को ऐसे hi पॉजिटिव करने की जरुरत थी. सबके मन में हर्ष और उल्लाश भरने की जरुरत थी. और ऐसा hi हुआ. इस शक्तियों के प्रभाव का असर जल्दी hi दिखा और ाधिरा के द्वारा फाइअलि गयी शक्ति को जड़ से ख़त्म कर दिया गया. आज के इस युद्ध में काफी लोगो ने अपनी जान भी गाबा दी. लेकिन खतरा अभी भी ख़त्म नहीं हुआ था. एक तरह से ये एक ऐसा हमला था. जिसमे मेधावी देखना चाहता था की ऐसा होने लेर देव क्या करेगा. और उसे इसका जवाब अच्छे से मिल गया था. और अब अगली चाल वो उसी हिसाब से चलने की तैयारी करने लगा था.

बही देव जब यहाँ आया तो उसने यहाँ सब ठीक देखा और रेनू आलिआ और प्राची को एक साथ देखा तो उसे बहुत खुसी हुई की चलो इस बजह से ये दोनों एक साथ तो आई.

बही सुरभि घर के बहार घूमती रही लेकिन बहा कोई नहीं आया था अभी तक. और अब सूरज का ग्रहण भी हैट गया था. जिस बजह से सब सही हो गया था. लेकिन अभी तक कोई बापिस नहीं आया था इसलिए उसे चिंता भी हो रही थी.

तो बे कॉन्टिनुए……………….

 
अपडेट 78



खैर हम सभी बहा से सीधे घर के लिए निकल गए. और प्राची और आलिआ हॉस्टल के लिए. मैंने उनसे बाद में मिलने को कहा दोनों से एक साथ मिलने को. मुझे उनसे एक साथ बात करनी थी आमने सामने इसलिए. वो बहा से हॉस्टल चली गयी. और में और रेनू घर आगये. जहा सुरभि बहार hi कड़ी हुई थी हाथ में तलवार liye.or ऐसे hi तलवार रेनू के हाथ में भी थी. जिसे देखकर में हैरान हुआ.

मैं- ये कोनसी तलवार है.

रेनू- ये गुरुदेव ने हमें दी थी. खास मौके पैर इस्तेमाल के लिए.

मैं- क्या बकै.

सुरभि- है और इसका जलवा तो देख hi चुके होंगे

मैं- पूरा नहीं. लेकिन में देखना चाहूंगा. लेकिन अभी नहीं. बाद में. फिलहाल ये बताओ सब बढ़िया है न घर पैर कोई दिक्कत तो नहीं हुई.

ये सुनके रेनू और सुरभि एक दूसरे की शॉल देखने लगी. और मुझे उनके चेहरे से साफ़ पता चल गया को कोई गड़बड़ हुई है.

मैं- क्या हुआ.

रेनू- एक्चुअली थोड़ी सी गड़बड़ हो गयी है.

मैं- है आगे बोलो.

सुरभि- वो एक असुर घर में घुस आया था और हमला कर दिया था. और हम दोनों ने मिलकर उसे मार डाला सबके सामने. और तबसे सभी हमारी राह देख रहे है जवाब के लिए.

ये सुनके मैंने अपना सर पीट लिया.

मैं- सबके सामने.

रेनू- है.

मैं- लेकिन वो घर में घुसा कैसे. कवच था न घर पैर तो.

सुरभि- यही तो हमारी समाज में नहीं आरहा है. वो काफी शक्तिशाली था. सायद कवच का तोड़ जनता हो. कुछ कह नहीं सकते.

रेनू- इसको बाद में डिसकस कर सकते है लेकिन घर वालो का क्या करे.

मैं- बही में सोच रहा हु. उनकी याद मिटा देता हु.

सुरभि- मेरे ख्याल से उन्हें सच बता देते है. उन्हें जानने का पूरा हक़ है. और उनकी याद्सत मिटाना उन्हें धोका देने जैसा होगा.

रेनू- बैसे में सहमत hu.is बात से.

मैं- में ब्बि उन्हें सच बताना चाहता हु. लेकिन जरा सोचो वो कैसे रियेक्ट करेंगे. और हो सकता है हमें आगे से वो ऐसा करने से मन कर दे. तो हम क्या करेंगे.

.

रेनू- इस बात में भी पॉइंट है.

सुरभि- तुम चुप रहो डबल ढोलकी. हमें उन्हें विस्वास दिलाना होगा की हम सही कर रहे है. और मुझे आवर यकीन है की वो हमारा साथ जरूर देंगे.

रेनू- बैसे मेरे पास एक रास्ता है. जिससे साप भी मर जायेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी.

सुरभि- और वो क्या है भला.

रेनू- पहले हम उन्हें सब सच बता देते है. अगर वो मान जाते है तो ठीक है. वर्ण फिर उनकी याददस्त मिटा देंगे. क्या कहते हो देव.

मुझे ये सही लगा.

मैं- में सहमत हु.

सुरभि- बैसे में भी.

रेनू- ग्रेट तो चलो अंदर सब इन्तजार कर रहे होंगे.

हम तीनो अंदर गए और मैंने दादू के कमरे का दरवाजा खटखटाया. और उन्हें आवाज लगाई. और मेरी आवाज सुनकर उन्होंने दरवाजा खोल दिया. और माँ और ममी तुरंत hi भाग कर हमारे पास आई और हमें गले लगा लिया.

माँ- तुम सभी ठीक तो हो न.

मैं- है माँ हम एक दम ठीक है. आप सभी ठीक है न.

मां- हमें क्या होगा.

दादू- है भाई. लेकिन अब मुझसे और सब्र नहीं हो रहा है. इसलिए तुम सब बताओ हमें की ये क्या हो रहा था.

मैं- तीखे में बताया hi सभी को. आइये बैठ जाइये सभी और एकदम ध्यान से सुन्ना

दादू- ठीक है.

उसके बाद बहा मौजूद सभी लोग बैठ गए और मैंने सबके सामने.

मैं- तो दादू बात शुरूहोती है सलग के पहले दिन से.

उसके बाद मैंने सभी को उस दिन से लेकर आज तक की साडी बाते विस्तार से बताना शुरू कर दिया. और सबका रिएक्शन एक दम हैरान करने वाला था. खासकर माँ और ममी का. दोनों की आँखे जैसे बहार आने को हो गयी थी. उन्हें समाज में नहीं आरहा था की वो क्या कहे और क्या नहीं. सभी मुझे घर रहे थे. और एक दूसरे को देखकर आँखों hi आँखों में ये पूछ रहे थे को क्या ये सच हो सकता है.

और में फिर साडी कहानी सुना कर शांत बैठ गया और सबके चेहरे पड़ने लगा.

सभी हैरान थे परेशान थे.

इसीबीच दादू बोले.

दादू- इसमें कितनी सचाई है. देव. तुम हमें कही झूट तो नहीं बोल रहे हो न.

मैं- दादू मेरा कहा गया एक एक शब्द सच है. और उसमे रत्ती भर भी झूट नहीं है. अगर आपलोग चाहे तो में ये साबित भी कर सकता हु.

माँ- उसकी जरुरत नहीं है. में जानती हु मेरा बीटा कभी झूट नहीं बोल सकता खासकर हमसे तो बिलकुल नहीं.

ममी- में सहमत हु दीदी से.

मां- में भी.

दादू- और मुझे तो कोई शक hi नहीं है. लेकिन मुझे बस दुःख इस बात का है की तुमने हमें ये पहले क्यों नहीं बताया.

मैं- दादू में नहीं जनता था की ये सब जानने के बाद आप सभी कैसे रियेक्ट करेंगे. कही आप इसे मेरा बहम बगेरा मान कर मुझे ोागल न कहने लगे. इसी लिए मैंने जसे सभी से छिपा कर रखा है. बस बही करता हु जैसा गुरुदेव कहते है मुझसे.

मां- तो मतलब की असुर आज भी जीवित है और भरी मात्रा में है. और आज जो कुछ भी हुआ उसमे उन्ही सब का हाथ था.

मैं- ये सच है. बैसे भी दो असुर तो अमर hi है पहले से. राहु और केतु. बाकि सबको शुक्राचार्य ने अपनी संजीवनी विद्या से जीवित कर रखा है. और कुछ अपने वरदानो की बजह से जीवित है. और अब सबका शिकार केवल में हु. क्युकी मेरे पास वो दो ाँस है. और बाकि के किसी भी दिन जागृत हो सकते है. और तब भयंकर युद्ध होने के आसार है.

ममी- तो अब तुम क्या करोगे बीटा.

मैं- उन्हें वो ाँस हासिल करने से रोकूंगा. बाकि इसके लिए चाहे जो करना पड़े.

माँ- बीटा उसमे बहुत खतरा हो सकता है.

मैं- जनता हु माँ. लेकिन यही मेरा कर्त्तव्य है. और इसी लिए मेरा जन्म हुआ है. और मुझे अपने लक्ष्य को प् कर अपने जीवन के उद्देश्य को पाना है. और अपने गुरु का सर फक्र से ऊँचा करना hai.jo अभी तक रहा है.

दादू- बीटा हम तुम्हारे साथ है. मुझे नहीं पता इसका क्या परिणाम होगा. लेकिन एक बात याद रखना की तुम्हे हमारे लिए इस संसार के लिए जीवित रहना है. अगर तुम्हे कुछ हो गया तो हम सभी जीते जी मर जायेंगे. इसलिए मुझसे वादा करो की तुम खुद को जिन्दा रखोगे चाहे उसके लिए तुम्हे कुछ भी करना पड़े.

मैं- में वादा नहीं कर सकता दादू. लेकिन में उसकी कोसिस जरूर कर सकता हु. भविस्य में क्या होगा ये मुझे नहीं पता है. लेकिन में हमेशा आप लोगो के साथ रहूँगा.

माँ- हमारे लिए यही बहुत hai.beta. जीते रहो. और अपने गुरु और हमारा नाम रोशन करो.

मैं- थैंक्स माँ.

उसके बाद मैंने सभी के गले लगा और सभी में मुझे जी भर कर आसीर्बाद दिए. और साथ में रेनू और सुरभि को भी. क्युकी वो भी अब सुपर हीरोइन बन गयी थी.

उसके बाद हमने साथ मिलकर खाना खाया. और ढेर साडी बाटे की. हमारे कामो के बारे me.jise सुनकर सभी बहुत hi प्राउड फील कर रहे थे. और मैं बात बताना तो में भूल hi गया. वो ये की माँ एंड बाकि सभी को मैंने ये नहीं बताया था की मेरी शादी आलिआ और प्राची दोनों से होने की बात गुरुदेव ने कही है. मुझमे हिम्मत hi नहीं हुई उन्हें ये बताने की. है लेकिन उन्हें इतना पता जरूर चल गया था की आलिआ एक पारी है. और में ये सोच रहा था तभी रेनू ने अपना मुँह खोल दिया.

रेनू- आप सभी को एक बात तो देव में बताई hi नहीं.

मैंने ये सुनके रेनू की तरफ देखा तो उसने मुझे आँख मार दी.

माँ- कोनसी बात.

रेनू- गुरुदेव ने एक भविस्यवाणी की है देव के लिए.

दादू- अरे वह. जरा बताओ क्या कहा है उन्होंने.

में रेनू को आँखे दिखाए जा रहा था लेकिन इसका उसपर कोई फर्क नहीं पद रहा था और उसने आगे बोलना जारी रखा

रेनू- वो ये की देव की दो शादियां होंगी. उसकी दो बीविया होने वाली है

ये सुनके माँ और ममी को एक साथ ठसका लग गया. और मां जो की पानी पे रहे थे उनके मुँह से सारा पानी टेबल पैर निकल गया एक दम से. और दादू तो जैसे स्टेचू बन गए थे.

हॉल में दो पल की शांति छ गयी. एंड उसके बाद अचानक से सभी जोर जोर से हसने लगे. लिखे बहुत जोर से. मां तो हसी में टेबल पीटने लगे थे और माँ तो पेट पकड़ कर हसने लगी. और ममी ने अपना मुँह छिपा कर. और दादू भी शामे मां की तरह. और में सभी की नजरो से बचके अपनक गार्डन को नीचे किये हुए बैठा हुआ था.

माँ- क्या ये सच है रेनू.

रेनू- बिलकुल और उन्होंने तो लड़कियों के नाम तक बताये है.

ममी- कही वो प्राची और आलिआ तो नहीं.

सुरभि- आपने सही गेस किया माँ.

ये सुनके सबहि और हसने लगे.

मां- मेरा बेचारा भांजा. तरस आता है तुझ पैर. कैसे संभालेगा 2-2 को.

दादू- में सहमत हु. इसकी तो अच्छे से लग गयी. बेचारा.

माँ- सच कहु तो में उन्हें पहली नजर में hi समाज गयी थी की इन तीनो का कोई चक्कर चल रहा है. और इसीलिए मैंने उसे कहा था की दोनों में से जो भी पसंद हो बतादेना. मुझे तो दोनों पसंद है.

ये सब बाटे सुनकर में शर्म में गदा जा रहा था. और बाकि सभी मेरा मजाक बनाते hi जा रहे थे.

मैं- अब बस कीजिये आप लोग. वर्ण में चला जाऊंगा यहाँ से.

ममी- कहा जायेगा उन दोनों के पास.

मां- और कहा जा सकता है वो.

मैं- प्लस ममी मां. बस कीजिये अब. और माँ आप भी. और दादू आप तो बिलकुल shan't हो जाइये वर्ण आपके बहुत से राज है मेरे पास. सबको सुना दूंगा में. और रेनू तुझे में बाद में देखता हु.

ये सुनकर रेनू ने मुझे जीव दिखा दी. और मुझे चिढ़ाने लगी. लेकिन बाकि सभी अब shan't पड़ने लगे थे.

सुरभि- बैसे ये हसने की नहीं टेंशन की बात है. क्युकी प्राची ने साफ़ केहड़िया है की वो देव को किसी के साथ नहीं बात सकती. और इस चक्कर में बेचारा देव पीस रहा है. और आलिआ का कहना है की जब तक प्राची और देव दोनों है नहीं कहेंगे तब तक वो भी इस बारे में कुछ नहीं सोचेगी. और इस चक्कर में सब काम लटकने लगे है. जबकि सबकी भलाई इसी में है की इन तीनो की शादी हो जाये. तभी इनकी शक्तिया अच्छे से काम करेगी. अभी सब फैली हुई है. लेकिन शादी के बाद सब एक जुट हो जाएँगी.

.ये सुनके सब सीरियस हो गए.

ममी- बैसे प्राची अपनी जगह सही है. लेकिन एक सच ये भी है की उसे ये कुर्वानी देनी hi होगी.

माँ- मुझे भी यही लगता है. बाकि एक काम कर तू दोनों को यहाँ बुला ले. हमें सभी मिलकर उन्हें समझायेंगे. मुझे विस्वास है वो जरूर मान जाएँगी.

मैं- ी थिंक थिस इस ा ब्रिलियंट आईडिया. आपने मेरी मुश्किल हल कर दी. में अभी बुलाता हु उन्हें.

ये कहके मैंने प्राची को आलिआ के साथ घर आना का मश्ग भेज दिया.

माँ- यही तो हमारा काम है बीटा जी.

उसके बाद हमने खाना फिनिश किया और बैठ कर उनका वेट करने लगे

मां- बैसे दादू के कोनसे राज की बात कर रहे थे तुम देव. हमें भी बताओ

ये सुनके दादू सकपका गए.

दादू- मेरे कोई राह नहीं है. मेरा जीवन एक खुली किताब की तरह है. ये तो ऐसे hi बकवास कर रहा था.

मैं- बैसे उन्होंने सही कहा. में बस इनके मजे ले रहा था इन्हे फसा रहा था. बाकि इनके क्या राज हो सकते है. जैसे छिपकर मिठाई खाना. और संडे को दोस्तों के साथ ड्रिंक करने जाना. वो भी इस आगे में.

ये सुनके माँ और ममी तो एकदम हैरान रह गयी और दादू ने अपना माथा पीट लिया. बही मां के चेहरे पैर हसी आगयी.

मां- आप छिपकर मिठाई कहते है.

माँ- जबकि आपको डायबिटीज है फिर भी.

ममी- और ड्रिंक भी करते हो. क्या बात है

दादू- सेल मरवा दिया न.

मैं- अब हसो. दो अब जवाब.

दादू- वो बीटा कभी कभार कर लेता हु. जब थोड़ा स्ट्रेस ज्यादा होता है. बाकि मेरी हब्बित नहीं बानी है ये. बिलीव में.

माँ- एक महीने तक आपको अब बिना नमक वाला फीका खाना दिया जायेगा और आपका बहार जाना भी बंद अबसे. आपकी यही सजा है .

दादू- क्या इतनी बड़ी सजा तो मत दो. में आगे से नहीं करूँगा प्रॉमिस.

मां- आपकी तो अच्छे से बंद बज गयी दादू. कोंग्रटुलतिओन्स.

दादू- ये सब इसकी बजह से. मुँह बंद रखा कर न.

मैं- बैसे मैंने ये जांभोज कर किया है. डॉक्टर की रिपोर्ट मैंने देखि है. आपकी हालत बकै में ख़राब होने लगी है. जितना फायदा आपको मेडिसिन से होना चाहिए था वो आपकी इन आदतों की बजह से नहीं हुआ उल्टा नुकसान ज्यादा हो रहा है. इसलिए अब आपको माँ की सजा काबुल करनी होगी.

ये सुनकर दादू ने थोड़ा सोचा और फिर है बोल दिया. और हम सब कुश हो गए. अब बस हमें प्राची और आलिआ का इन्तजार था.

देखते है इन्हे कैसे समझती है माँ और ममी…..



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 79



थोड़ी देर बाद प्राची और आलिआ दोनों hi aagyi.sabhi उनसे मिले उन्होंने सभी को नमस्ते किया. उसके बाद माँ एंड ममी उन दोनों को अपने कमरे में ले गयी. सायद अकेले में बात करना था उन्हें. बाकि में बहा से अपने कमरे में आज्ञा. और सोचने लगा की ये सब को हुआ है आज. ये कैसे हुआ. सबसे पहले तो पृथ्वी पैर असुर आगये मुझे पता नहीं चला. और दूसरी बात मेरे घर में घुस गए तो भी मुझे पता नहीं लगा. ये कैसे संभव हो सकता है. मेरे कवच को भेद कैसे पाए वो. बाकि आकाश वालो का तो समझ में आता है. लेकिन यहाँ ये सब कैसे संभव हुआ. मुझे पता लगाना होगा.

ये सोचकर में ध्यान में बैठ गया. और जैसे hi तिरदये खुली में सरे सवालो के जवाब ढूंढ़ने लगा की आज ये सब कैसे संभव किया असुरो ने. क्युकी अगर वो आज कर सकते है तो कभी भी कर सकते है. इसलिए मेरा ये जानना बहुत जरुरी था.

में ध्यान में बैठ कर देखने की कोसिस करने लगा की ये सब कैसे हुआ. तो मुझे एक दैत्य दिखा. जो सायद अधीरा था. बाकि कोई नहीं दिख रहा था. में जनता था वो अकेला नहीं था. क्युकी मुझे उसके साथ काळा साये दिख रहे थे. लेकिन उनकी पहचान नहीं हो प् रही थी. की आखिर ये साये है कोण. और इनके पास कैसे शक्तिया है. काफी देर तक कोसिस की मैंने लेकिन उनके बारे में जानकारी नहीं मिली. लेकिन एक अच्छा काम हो गया. मुझे वो रास्ता दिख गया जहा से ये अंदर आये थे पृथ्वी पैर. और जिस बजह से मुझे इनके आने के बारे में पता नहीं चल पाया था. और बाकि सवालो के जवाब के लिए मुझे गुरुदेव से संपर्क करना होगा. ये निश्चय करके मैंने गुरुदेव का ाबहन किया तो थोड़ी hi देर में उनकी आवाज आने लगी

मैं- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स. आज तुम सबने बकै एक बड़े खतरे को ताल दिया. वर्ण छतो तरफ तबाही मच जाती.

मैं- ये सब आपके आसीर्बाद से hi संभव हुआ है. आपने हम सभी को इस काबिल बनाया है गुरुदेव. वर्ण हम तो ऐसा करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे.

गुरुदेव- कुछ मेरी म्हणत और बाकि तुम्हारा कुशलता. उसी का ये फल है.

मैं- गुरुदेव आज कुछ नहीं शक्तिया पृथ्वी पैर आई है किसी गुप्त रस्ते से. मैंने वो रास्ता तो ढूंढ लिया लेकिन उन शक्तियों की जानकारी मुझे नहीं मिल प् रही है. वो मेरे कवच के बाबजूद घर में घुस गए. क्या आप इनके बारे में कुछ बता सकते है.

गुरुदेव- इनके बारे में मुझे भी ज्यादा जानकारी नहीं है वत्स. बस इतना hi कहूंगा की सावधान रहो. ये तुम्हारे आसपास भी रहेंगे तब भी तुम्हे इनका आभास तक नहीं होगा. और ये पाताललोक के असुर है. कई तांत्रिकी सिद्धिया उन्हें प्राप्त है. जिसकी बजह से ये भूतो की तरह है. कब आएंगे और कब जायेंगे कुछ नहीं कह सकते. बस इतना करो की जब भी सामने आये तो पूरा जोर लगा कर उनका अंत कर दो. जैसे आज सुरभि और रेनू ने किया.

मैं- परन्तु गुरुदेव मेरे पीछे अगर इन्होने घर पैर हमला कर दिया तो. ये तो कवच को भी भेद सकते है. और अब मुझे लग रहा है की ये उन बाकि के असुरो को आज़ाद भी करा सकते है मेरे जाल से.

गुरुदेव- बिलकुल करा सकते है. परन्तु जब तक उन्हें तुम्हारे जाल में जाने का मौका नहीं मिलेगा तब तक वो कुछ नहीं कर सकते है. इसलिए इन्हे क़ैद करने की कोसिस बिलकुल मत करना. बस इनका अंत hi एक मात्रा उपाय है. और रही बात तुम्हारे पीछे घर में घुसने की तो है वो ऐसा दीवार जरूर करेंगे. और इसके लिए तुम्हे hi कोई उपाय सोचना होगा. किसी एक को घर में hi रहना होगा. बैसे तुम सभी पाठशाला जाते हो. लेकिन आलिआ नहीं जाती है तो उससे कहो की वो यही रहे तुम्हारे साथ. इस प्रकार वो सबकी रक्षा भी कर पायेगी. उन असुरो से.

मैं- आपका सुझाव अच्छा है गुरुदेव. में आलिआ से इस बारे में बात करूँगा. अगर वो मान गयी तो ठीक. वर्ण कोई और रास्ता ढूंढूगा इनसे निपटने का.

गुरुदेव- विजय भाव वत्स….

उसके बाद वो चले गए उनकी आवाज आना बंद हो गयी. और मैंने भी अपनी आँखे खोल ली. और सोचने लगा की अब क्या किया जाये.

तभी रेनू रूम में आगयी

रेनू- माँ बुला रही है नीचे.

मैं- ठीक है.

में उठा और उसके साथ नीचे चला गया. जहा सभी मौजूद थे.

मैं- है तो बात हो गयी.

माँ- है हो गयी है. इन्हे बस थोड़ा सा समय चाहिए है. और प्राची भी रेडी है.

मैं- आप सीरियस है.

माँ- क्यों कोई शक है क्या.

मैं- आपने तो कमाल hi कर दिया माँ. बैसे क्या बोलै आपने उन्हें

माँ- जो बोलना था बोल दिया. अब तुम सभी को जानने की जरुरत नहीं है.

ममी- है और न hi इनसे पूछने की जरुरत है. बैसे भी ये दोनों नहीं बताने वाली

मैं- ऐसा क्या बोलै है जो हम भी नहीं जान सकते.

माँ- बीटा लेडीज टॉक है. तुम लोगो को जानने की जरुरत नहीं है. और देखो मैंने दोनों शगुन भी दे दिया है.

मैं- इसको अभी देने की क्या जरुरत थी. बैसे भी मेरा या इन दोनों का फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है. ये सब बाद की बाटे है.

ममी- बीटा जी ये बाद की hi प्लानिंग है. ये समाज लो की रिश्ता पक्का हो गया. अब बस शादी की देर है जो तुम लोग जब कहोगे तब कर देंगे.

दादू- चलो मेरी एक टेंशन तो काम हुई. वर्ण मुझे लगता था की मुझे hi इसके लिए लड़की ढूंढ़नी पड़ेगी. लेकिन इसने अपना कमाल दिखा दिया. वैरी प्राउड ऑफ़ यू

मैं- है है उदा लो मजाक. वो तो में आपका लिहाज करके ये सब में नहीं पड़ता था. वर्ण पुछलो प्राची से. की कितनी लड़किया मुझे देखकर आँखे भर्ती है. और प्राची रोक सलग में किस किस का मुँह तोड़ती है.

ये सुनकर सभी प्राची को देखने लगे और प्राची ने अपना मुँह अपने हाथो में छिपा लिया.

मां- शाब्बास बेटी. इसपर ऐसे hi लगाम लगाए रखना. वर्ण पता चला अभी दो है. कही ये गिनती बाद न जाये.

ये सुनकर प्राची के साथ सबकी हसी निकल गयी. और हस्ते हुए प्राची बोल पड़ी.

प्राची- जैसा आप कहे मां जी. बैसे मुझे कृषि हुई ये जानकार की अबसे आप सब यही रहने वाले है. देव हमेशा आप सभी को याद करता रहता था. और कहता था की काश हम सब साथ रहते. और देखो आज उसकी कही गयी बात सच हो गयी.

ये सुनकर ममी ने प्राची को गले लगा लिया.

ममी- इसीलिए तो हम यहाँ रहने आये है. क्युकी हमें भी सभी की याद आती थी. और हमारा भी मन था की सबके साथ रहे हम. और देव के साथ रह सकू. और देखो आज मेरा सपना भी सच हो गया. अब हम सब साथ साथ है.

सुरभि- नीस मूवी थी ये.

रेनू- है मैंने भी देखि है.

मैं- बैसे मेरा एक सुझाव है अगर आप सभी को पसंद आये तो.

माँ- कैसा सुझाव.

मैं- यही की प्राची और आलिआ को अब यही रोक ले तो. मतलब की हम सब यही रहे एक साथ. इसमें एक फायदा ये है की आलिआ हमेशा घर पैर रहेगी. और आज के हालत देखते हुए में आप सभी को अकेले नहीं छोड़ सकता. और आलिआ आप सभी के साथ रहेगी तो में भी टेंशन फ्री रहूँगा. क्या कहते हो सभी.

ये सुनके प्राची और आलिआ दोनों hi माँ और ममी को देखने लगी. जैसे उन्हें पता था की इसका फैसला ये दोनों hi लेने वाली है. और दोनों का hi मन है यहाँ रुकने का.

ममी- बक्से मुझे कोई ऐतराज नहीं है. लेकिन मुझे एक वादा चाहिए तुम सभी से.

मैं- जैसा वादा

माँ- यही की दूरियां बनाये रखोगे. वर्ण एक hi छत के नीचे हो ये सोचकर कोई गलती मत मर बैठना

माँ और ममी का इशारा हम सभी अच्छे से समाज गए थे. और मुझे तो इससे कोई ऐतराज नहीं था. इसलिए मैंने है कह दिया.

और मेरे बोलते hi बाकि दोनों ने भी है कह दिया.

माँ- याद रखना अगर इस वादे को तोडा तो इसकी भरी कीमत चुकानी पड़ेगी तुम तीनो को. मैं तुम सबकी शादी का सपना खा जाउंगी.

मैं- बैसे मैंने इस बारे में पहले hi प्राची को समझा दिया था. और इसी लिए उसे मैंने हॉस्टल में रखा था. ताकि वो सेफ भी रहे और हमारी बीच की दुरी भी बरक़रार रहे. इसलिए में अच्छे से समाज गया आपकी बात. बाकि आप लेडीज अपनी जानो.

ये सुनकर सभी के चेहरे पैर एक मीठी मुस्कान आगयी.

मां- वह भाई. मजा आज्ञा. देखा ये है मेरा बीटा. सबसे समझदार. इसकी गुरेन्टी में लेता हु.

दादू- में भी.

ये सुनकर बाकि लेडीज ने अपनी टीम बना ली. और सब साथ में बोल पड़ी.

तो हम भी इन दोनों को गुरेन्टी लेते है. हमारी बेतिया भी किसी मामले में काम नहीं है. वो जानती की कब क्या करना है.

ममी- सही कहा न

आलिआ- बिलकुल ममी जी. में सहमत हु.

प्राची- में भी.

रेनू- याद रखना हमारी टीम कमजोर न पड़े इनके आगे.

ये सुनके हम सभी ने रेनू को घुरा की ये क्या कह रही है.

रेनू- अरे मेरा मतलव है की अब घर में दो टीम तो हो hi गयी है. और मेजोरिटी हमारे पास है. इसलिए हमें अधिक फायदा है. लेकिन तुम दोनों कमजोर न पड़ना बस. बाकि हम संभल लेंगे.

प्राची- ऐसा कभी नहीं होगा दीदी. हमारी टीम को हम हारने नहीं देंगे.

सुरभि- गुड.

मां- लो भाई यहाँ तो टीम बन गयी. लेकिन यार ये चीटिंग है. हम तो केवल 3 hi है. और तुम लोग 6. मतलब हमसे दोगुनी.

ममी- क्यों दर लग रहा है क्या.

मैं- हम डरने वालो में से नहीं है ममी. एंड मां don't वोर्री. इन 6 लेडीज के लिए हम 3 hi काफी है.

दादू- आईये शाब्बास. मेरे शेर के दहाड़ने से सब अपने अपने बिलो में घुसते नजर आते है. फिर ये तो मात्रा 6 लेडीज है.

मां- ठीक कहा अपने.

ऐसे hi हमारी बैटल चलती रही. और इसी कड़ी में हमारी अंतक्षीरी शुरू हो गयी. और कभी हम जीत रहे होते तो कभी वो. बात कहा से शुरू हुई और अंतक्षीरी पैर जेक ख़त्म हुई.

शाम को माँ ने प्राची के डैड से बात की. और उन्हें भी मन लिया प्राची को घर पैर रहने देने के लिए. बैसे उन्हें भी हैंपर भरोसा tha.isliye उन्होंने कोई ऑब्जेक्शन नहीं लिया.

और फिर हम गए हॉस्टल और इन दोनों का सारा सामान घर लेके आगये. इसमें राजू ने काफी मदद की. और माँ ने दोनों के लिए दो अलग अलग कमरे में रेडी करवा दिए. और दोनों ने अपना सामान उसी में सजा लिया.

और काफी थक जाने के कारण हम सभी डिनर करके अपने अपने कमरों में जेक सो गए. एंड मुझे बिलकुल याद नहीं रहा की इस ख़ुफ़िया रस्ते को बंद भी करना था. इन सभी में वो रह गया.

बही दूसरी तरफ मेधावी और शुक्राचार्य के यहाँ सरे असुर फिर से एक जुट हो गए. आगे की योजनाओ पैर काम करने के लिए.

अधीरा- आज के युद्ध में उनकी साडी शक्तिया खुलकर सामने आगयी है. अब हम आगे की योजना बना सकते है.

मेधावी- जहा तक मुझे याद है आप सभी ने कहा था की वो अकेले काम करता है. लेकिन उसकी तो 4 और मददगार है. ये कहा से आगयी.

अधीरा- मुझे 2 के बारे में जानकारी पहले से थी. जो मैंने बताई भी थी. एक तो वो पारी. और दूसरी उसकी premika.jiske अंदर इसी की शक्तिया एक हादसे के जरिये आगयी है. लेकिन बाकि दोनों की जानकारी मुझे भी नहीं थी. और आज उन्ही मेसे एक ने मेरी योजनाओ को बर्बाद कर दिया था. गुरुदेव आपको इसके बारे में ककी जानकारी है.

शुक्राचार्य- है मुझे ध्यान से पता चला की बाकि दोनों उसकी बहने है. जिन्हे स्वयं परसुराम ने तैयार किया है. और अपनी कुछ दिव्या शक्तिया प्रदान की है. ताकि वो देव की मदद कर sake.aise हालातो में.

मेधावी- एक बात और गौर करने वाली है.

ा1- वो क्या है सम्राट.

मेधावी- वो ये की उनकी गिनती पांच है. और दिव्यस्त्र के ांसो की संख्या भी पांच है. गुरुदेव कही इसका कोई मतलब तो नहीं बनता है न..

शुक्राचार्य- बैसे तुम्हारा शक जायज है. मुझे भी ऐसा hi आभास हो रहा है. की ये पांच की संख्या कोई संयोग नहीं हो सकता है. जरूर परसुराम जी के दिमाग में कुछ चल रहा है. जिसे में जान नहीं प् रहा हु.

अधीरा- कही ऐसा तो नहीं की वो दिव्यस्त्र के पांचो ांसो को इन पांचो में बिभाजित करने वाले हो.

मेधावी- अगर ऐसा रहा तो इन्हे हराना आसान होगा. उसमे हमारा hi फायदा होगा. अगर वो शक्तिया एकजुट रहे तो हमारे लिए मुश्किल है. लेकिन अगर वो अलग अलग इंसानो में रहेंगी तो हम उनको आसानी से हरा पाएंगे.

शुक्राचार्य- मेधावी सही कह रहा है. वो जरूर कुछ और सोच रहे है. जो हम समाज नहीं प् रहे है. लेकिन जल्दी hi में जान जाऊंगा की उनके दिमाग में क्या चल रहा है. तब तक हमें अपनी आगे की योजनाओ को आगे बढ़ाना होगा. हम ऐसे बैठे नहीं रह सकते.

मेधावी- सही कहा गुरुदेव ने. पिताजी. आप बापिस जाइये पृथ्वी पैर. और इस बार उन असुरो के साथ अपने कुछ खास लोगो को भी ले जाइये. और अब हमला केवल पातळ लोक वाले असुर hi करेंवे. आप छिपे रहेंगे. जब तक वो ाँस जागृत नहीं होते है. तब आपको उन ांसो को प्राप्त करने जाना होगा. बाकि का काम कैसे करना है वो पातळ लोक वाले अच्छे से जानते है.

अधीरा- समाज गया.

शुक्राचार्य- और है संभल कर जाना. अभी तक उसे तुम्हारे उस गुप्त रस्ते के बारे में ज्ञात हो गया होगा. इसलिए उसकी नजरो में आये बिना जाने का ये आखिरी मौका होगा तुम्हरे पास.

अधीरा- में इस बात का ख्याल रखूँगा गुरुदेव. बाकि इन दोनों को क्या करना है अब. इनका एक साथी तो पकड़ा गया.

शुक्राचार्य- इनकी शक्तिया ाक्ष तक hi सीमित है. और इसका इस्तेमाल हम समय पैर करेंगे.

अधीरा- जैसा आप ठीक समझे.

उसके बाद अधीरा अपने साथ कुछ खास असुरो को बहा से फ़ौरन hi पृथ्वी के लिए लेके निकल गया. उसी गुप्त रस्ते से. एंड बाकि के असुर बही रहे और इस बीच मेधावी सबको अपनी योजना बताता रहा और सभी गौर से सुनते रहे. और फिर बहा से अपने अपने रस्ते चले गए. असुरो की सेना अब काफी काम हो गयी थी. आज के युद्ध में काफी असुरो की जान चली गयी थी. लेकिन इससे इन्हे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था.



तो बे कॉन्टिनुए……………...
 
अपडेट 80



नेक्स्ट डे मैं अपने रूटीन से उठा सबसे पहले एक्सरसाइज की उसके बाद नहाया और फिर ध्यान किया. और मेरे धायण करने से पहले रेनू और सुरभि भी एक्सरसाइज करने आगयी. हलाकि इनको भी ध्यान करना चाहिए लेकिन जल्दी नहीं उठा जाता होगा इनसे. अब इसमें कोई और क्या कर सकता है.

खैर वो अपनी एक्सरसाइज करती रही और में अपने ध्यान में बैठा raha.maine फिर से उनके बारे में जानने की कोसिस की लेकिन नाकाम रहा. और ध्यान करते वक़्त hi मुझे उस ख़ुफ़िया रस्ते का ख्याल आज्ञा. और ये भी की मैंने उसे बंद नहीं किया था कल.

इसलिए मैंने ध्यान के जरिये उसको देखने जारी किया. और ये भी को बहा से कोई आया है या नहीं.

तो मुझे इतना पता चला की कोई आया है. लेकिन उसकी शक्ल साफ़ नहीं दिखी. लेकिन हाव भाव से में समाज गया की ये अधीरा hi है. और इस बार उसके साथ और लोग भी थे. जिन्हे में देख सकता था. उनके बारे में जान सकता था. इसलिए में समाज गया की ये पाताललोक वाले असुर नहीं है.

अब सवाल ये उठता है की ये अधीरा यहाँ क्या करने का प्लान बना रहा है. जो एक के बाद एक लोग यहाँ लाये hi जा रहा है. जरूर कुछ अलग खिचड़ी पाक रही है.

अगर जल्दी hi मैंने पता नहीं लगाया तो बंद बजना तय है. इसलिए मैंने पृथ्वी पैर अधीरा को ढूंढ़ना सुरु किया. वो कहा है अगर ये पता चल गया तो मुझे बाकि की जानकारी मिल सकती है.

लेकिन मैं हैरान तब हुआ जब साडी पृथ्वी को छान लिया लेकिन मुझे अधीर नहीं दिखा. न कोई ऐसा इंसान जिसका रूप अधीरा ने ले लिया हो यहाँ आके. वो एक दम से गायब हो गया है. जो काफी अजीब बात थी. इतना में जनता था की वो सभी असुर यही पृथ्वी पैर हो मौजूद है. लेकिन मुझसे छिपे हुए है. लेकिन कहा और कैसे.

पृथ्वी के उन अदृश्य िस्थानो पैर भी कोई नहीं था. फिर ये कैसे गायब हो सकते है और कहा. क्युकी ये यहाँ आके कैसे भी माया कर ले. लेकिन मेरी तिरदये से बच नहीं सकते ये. लेकिन ये बच गए. जो मेरे लिए काफी हैरानी की बात थी. मुझे जब ज्यादा कुछ समाज में नहीं आया तो मुझे लगा की सायद इनके गायब होने में भी उन्ही पाताललोक वाले असुरो की कोई विद्या का हाथ हो. सायद.

बाकि फिलहाल मुझे उस रस्ते को बंद करना था. ताकि अब और कोई इस रस्ते से यहाँ न आपये. और मुझे ये भी पता करना था की ऐसे और दूसरे रस्ते तो नहीं है. इसलिए मैंने ऐसे रस्ते ढूंढ़ने सुरु किये. तो मुझे बैसा कोई और रास्ता नहीं दिखा. लेकिन मुझे विस्वास तो था की ऐसा और भी रस्ते हो सकते है. सायद किसी मायाजाल की बजह से वो इस वक़्त दिख नहीं रहे है. बाकि मैंने सोचा जब कोई असुर उन रास्तो से आएगा या जायेगा तब उसकी जानकारी मुझे पता चल hi जाएगी.

फिलहाल इस रातसे का कुछ करना था. इसलिए में बहा से सीधा गायब हो गया उसी अवस्था me.or जब मैंने आँखे खोली तो में उसी जगह पैर उसी रस्ते के ठीक सामने खड़ा था.

मेरे सामने इस वक़्त एक मोटा वरगद का पेड़ था. जिसका तना बकै में काफी मोटा था. मतलब की करीब 20 ft.or ये पेड़ काफी घाना भी था और बहुत जगह घेर राखी थी इसने. काफी पुराण होगा ये. इतने घने पेड़ आजकल देखने को hi नहीं मिलते है. खैर मुझे इस रस्ते को बंद नहीं करना था बस इसका कोई और इंतजाम करना था. क्युकी मुझे यकीन था की हो न हो ये रास्ता भविस्य में मेरे काम आ सकता है.

इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा और मेरी ऊर्जा का एक मजबूत घेरा इतना मजबूत की कोई भी शक्ति इसे न तोड़ पाए. उस पेड़ के चारो तरफ बना दिया. और मैंने उस पूरी जगह पैर आसपास अपनी माया का जाल विचार दिया. ये क़ैद करने वाली नहीं बल्कि मुझे खबर देने वाली माया थी. यहाँ अगर कोई आता है खासकर असुर तो मुझे उनकी जानकारी मिल सके. में क़ैद करने वाली माया का जाल बिछा कर उन असुरो को कोई मौका नहीं देना चाहता tha.ki बाकि असुरो को वो आज़ाद कर सके.

लेकिन इस घेरे में अभी भी समस्या थी. मुझे बैसे तो पूरा यकीन था की इसे कोई नहीं तोड़ पायेगा. लेकिन एक शंका भी थी की कही वो पाताललोक वाले असुर इसे तोड़ कर उस पार न चले जाये. उनका कुछ कह नहीं सकते है फिलहाल जब तक उनकी साडी जानकारी मुझे नहीं मिल जाती है. इसलिए इसके साथ मुझे कोई और रास्ता भी सोचना होगा.

तभी मैंने सोचा की इसे अगर गायब कर दिया जाये तो कैसा रहेगा. मुझे ये सही लगा इसलिए मैंने अपने पृथ्वी तत्त्व का इस्तेमाल किया और इस वरगद के पेड़ को गायब कर दिया और उसकी जगह पैर एक छोटा नीम का पेड़ लगा दिया. ये सब केवल मेरे सोचने मात्रा से hi हो गया. और अब अगर असुर ये सोचेंगे की इस नीम के पेड़ से वो उस रस्ते में जा सकते है तो गलत सोचेंगे वो. क्युकी अब वो वरगद का पेड़ तभी सामने आएगा जब में चाहूंगा. तब तक सरे असुर उसे कितना hi क्यों न ढूंढे उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला.

ये करके में बहा से बापिस घर आज्ञा और अपना ध्यान समाप्त करने के बाद में सलग के लिए रेडी हो गया. और मेरे साथ प्राची और रेनू और सुरभि भी. दोनों ने अपने सरे डॉक्यूमेंट भी साथ ले लिए थे. अब बस उन्हें प्रिंसिपल को दिखाना था ताकि वो आगे की प्रोसेस कर सके.

अब में नीचे आया हमने साथ में नास्ता किया सबका आशीर्वाद लिया और उसके बाद आई जाने की बरी तो रेनू और सुरभि उनकी मिनिकोपेर में बैठ गयी और उनके साथ प्राची भी. और में अकेला hi रह गया.

लेकिन ज्यादा देर तक नहीं. मैं अपनी कार में बैठा और मैंने कार को आगे बड़ा दिया और उन्होंने कार को मेरे पीछे लगा लिया. रस्ते में मैंने चिराग के घर कार को मोड़ दिया. तो उन्होंने भी मोड़ लिया. हम उसके घर पहुंचे मैंने हॉर्न मारा वो देख रही थी की में कहा रुका हु. और इसके पीछे की बजह ये थी की काफी समय से ये यहाँ नहीं थी इसलिए अधिकतर जगह ये भूल गयी थी. हलाकि रेनू को थोड़ा याद था की ये किसका घर है.

और जब चिराग घर से बहार आया तो सबको पता चल गया. प्राची को भी मालूम था की ये चिराग का घर है बस सुरभि को नहीं पता था जो आज पता चल गया. चिराग बहार आया और जब उसने मेरे पीछे रेनू को देखा तो भाग कर बहा चला गया.

चिराग- अरे दी आप लोग. कब आई.

रेनू- हम तो परसो hi आगये थे.

चिराग- लो और मुझे पता hi नहीं. लगता है मेरे से रिश्ता टूट ता जा रहा है आप सभी का. खासकर ये देव अब मुझे कुछ बताया hi नहीं है. न मुझे कॉल करता है.

मैं- अबे ये सब बाद में देखेंगे फिलहाल बैठ हम लेट हो रहे है. रस्ते में तुझे सब समझाता हु.

चिराग- मुझे नहीं आना तेरे साथ. जा तू अकेला hi. में दी के साथ आ रहा हु.

ये कहके वो भी उसी कार में बैठ गया. और इसके पीछे की बजह में जनता tha.lekin कुछ कह नहीं सकता था उसे.

.

मैं- पक्का न.

चिराग- एकदम पक्का.

उसने ये कहा और मैंने कार को आगे. बड़ा दिया और रेनू ने मेरे पीछे पीछे अपनी कार को. में अब अकेला था इसलिए लाउड vol. में गाने सुनते हुए जाने लगा बाकि पीछे उनकी बाटे चलती रही होंगी सायद. हम आराम से टाइम लेर सलग पहुंच गए. मैंने कार को पार्किंग में लगाया. और रेनू ने भी. उसके बाद हम सभी बहार निकले और बहार रुक गए.

रेनू- यहाँ क्यों रुके हो. किसका इन्तजार है.

मैं- लकी का. आता hi होगा. एक काम करिये आप दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस चलिए में आता हु.

सुरभि- ठीक है वहां टाइम पैर.

ये कहके वो दोनों चली गयी और प्राची उनके साथ उन्हें रास्ता दिखने के लिए. और में और चिराग बही रुके रहे.

मैं- क्यों बे बड़ी होशियारी झाड़ रहा था. ठीक है अब उन्ही के साथ आना में नहीं आने वाला अब तुझे लेने के लिए.

चिराग- सेल उल्टा चोर कोतवाल को दांते. तू ये बता सलग के बहार हम कब कब मिले है. तू अब मुझे भूल गया है. और ऐसा होना भी था. क्युकी तुझे तेरी गफ जो मिल गयी है. लेकिन मेरी सोच जब मेरी गफ होती थी तब ऐसा कभी हुआ है जब मैंने तेरे लिए टाइम न निकला हो

मैं- तू तो सेंटी हो रहा है.

चिराग- मेरा ऐसा होना जायज़ है. सेल तूने मुझे बताया भी नहीं की दी लोग आई है और ये भी नहीं की अब वो यही रहेंगी.

इस सवाल का जवाब बकै में मेरे पास नहीं था. इन असुरो से लड़ाई में मैं बकै में अपने दोस्तों को भूल सा गया था. खासकर चिराग और लकी दोनों को. उन्हें सलग के बहार बिलकुल भी वक़्त नहीं दे परः था में. और सबसे बेकार बात ये थी की में इन्हे सच भी नहीं बता सकता था.

मैं- सॉरी यार बस थोड़ा पड़े और ये लोग आई थी तो बातो में टाइम का पता hi चलता था. इसी में तुझसे रह गया tha.aage से पक्का ध्यान रखूँगा.

चिराग- चल हैट सेल हमेशा ऐसा hi बोलता है और फिर भूल जाता है.

मैं- अबे सॉरी तो बोल रहा हु न. अब मान भी जा नेक्स्ट टाइम अगर ऐसा कुछ हो तो सीधे मेरे को एक पंच मार लेना जहा तेरा मन चाहे और जितनी जोर से चाहे.

चिराग- ठीक है अब रोने मत लग्न. चल इस बार और तुझे छोड़ दिया. लेकिन नेक्स्ट टाइम के लिए रेडी रहना पंच खाने को.

मैं- ये मौका तुझे मिलेगा तब बात करियो. और दूसरी बात की मैंने कहा की तू मार सकता है. लेकिन मैंने ये नहीं कहा की में उसे रोकूंगा नहीं. इसलिए भूल जा.

ये सुनते hi चिराग का माथा फिर गया और मुझे पकड़ने लगा और में भागने लगा बहा से. तभी में थोड़ा स्लो हुआ तो उसने पकड़ लिया मुझे ोरमेरी गार्डन को अपनी बाजु में फसा लिया.

चिराग- अब बोल बीटा क्या कह रहा था.

मैं- छोड़ दे में तो मजाक कर रहा था.

ये सुनके उसने मुझे छोड़ दिया.

मैं- ये लकी अभी तक नहीं आया. कहा रह गया.

चिराग- एक काम कर तू जा उनका अड्मिशन करवा में उसे कॉल करता हु.

मैं- ठीक है.

उसके बाद मैंने दौड़ लगाई प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ और चिराग बही रह गया और लकी को कॉल करने लगा. में भागते हुए ऑफिस पहुंच गया. तो बहा पैर रेनू और सुरभि दोनों hi बैठी हुई थी.

मैं- मई ी के इन सर.

प्रिन्सी- यस के इन.

में अंदर आया

मैं- hello सर.

प्रिन्सी- है देव मैंने डॉक्यूमेंट सबमिट कर लिए है और बाकि का प्रोसीजर भी कम्पलीट कर दिया है. अब अगर ये चाहे तो आज से hi क्लास ज्वाइन कर सकती है.

मैं- थैंक यू सर.

रेनू- थैंक यू वैरी मच सर.

प्रिन्सी- अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है. चलो अब जाओ आज क्लास अटेंड कर लो. कुछ दोस्त बगेरा बना लो और उनसे नोट्स भी ले लो. ताकि सिलेबस जल्दी से कवर हो जाये जो भी बच गया है.

रेनू- ok सर. गुड डे.

प्रिन्सी- शामे हेरे फॉर एवरीवन.

उसके बाद हम उनको bye बोलके बहार आगये.

मैं- तो अब क्या ख्याल है.

सुरभि- इसमें सोचना क्या आज क्लास अटेंड करेंगे.

मैं- बढ़िया है चलो तो फिलहाल कैंटीन में चलते है. अभी 20 मं. है क्लास को.

उसके बाद हम कैंटीन में चले गए जहा चिराग और प्राची दोनों hi बैठे हुए थे लकी नहीं आया था. हम भी उनके पास बैठ गए.

मैं- क्या हुआ किया उसे कॉल.

चिराग- है लगाया था. उसने कहा की वो आज नहीं आपयेगा. उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही है.

मैं- क्या हुआ.

चिराग- कह रहा था फीवर हो गया है. मेडिसिन बगेरा ले ली है अब आराम कर रहा है.

मैं- बढ़िया उसे करने दो. शाम को चलेंगे उससे मिलने.

उसके बाद हमने थोड़ी बहुत गप्पे मरी और उन दोनों को सलग घुमाया. उसके बाद हम गए क्लास में. शाम तक ऐसे hi टाइम काट गया. एंड शाम को हम सभी सलग से hi निकल गए लकी के घर की तरफ. जल्दी hi बहा पहुंच गए हम सभी. हमने कार को पार्क किया और बहार निकल कर घर की दूर बेल्ल बजे. तो थोड़ी देर में आंटी ने दरवाजा खोला.

मैं- कैसी हो आंटी.

मैंने उनके पेअर छुए.

आंटी- अरे बीटा तुम तो उस दिन के बाफ गायब hi हो गए. दिखे hi नहीं.

मैं- सॉरी आंटी थोड़ा बिजी हो गया था इसलिए किसी से मिलने हु नहीं आपया. बैसे लकी कैसा है मैंने सुना उसकी तबियत बिगड़ गयी.

आंटी- अब क्या बताऊ. कल पता नहीं क्या खा लिया बहार सुबह से hi उल्टिया किये जा रहा है. खैर डॉक्. ने मेडिसिन दे दी है अब ठीक है. अरे में तो अंदर hi नहीं आने दे रही तुम सभी को.

उसके बाद वो दरवाजे से साइड हुई एंड हम सब अंदर आये. और मैंने रेनू और सुरभि का इंट्रो आंटी से कराया. बाकि उन दोनों को तो वो जानती hi थी. उसके बाद आंटी किचन में चली गयी एंड में चला गया लकी के कमरे में. जहा लकी बीएड पैर लेता हुआ मोबाइल चला रहा था.

मैं- अबे आराम क्यों नहीं कर रहा है.

मेरी आवाज और मुझे देखकर उसके चेहरे पैर एक बहुत hi मनमोहक मुस्कान आगयी जिसकी कोई कीमत नहीं लगा सकता था.

लकी- तुम कब आये.

मैं- बस अभी. तू बता क्या खा लिया बहार जो तबियत बिगड़ गयी.

लकी- अरे कुछ नहीं यार कल कुछ गोलगप्पे खा लिए थे. पता नहीं कैसे बनाये उसने सुबह से hi तबियत डाउन हो गयी.

मैं- सेल भुक्कड़ दिन भर तो कुछ न कुछ खता रहता है. और दोष बिचारे गोल गप्पे वाले को दे रहा है.

लकी- चल हैट नजर मत लगा. ये बता अकेले आया या सभी आये है.

मैं- सभी आये है. नीचे है.

लकी- बहा क्या कर रहे है.

मैं- कॉफ़ी का इन्तजार.

लकी- चल में भी चलता हु. और बैसे भी दिन भर से लेता हुआ हु. बहुत बोर हो गया था. अच्छा हुआ तू आज्ञा.

.उसके बाद लकी बीएड से उठा तो उसका दिमाग थोड़ी देर के लिए घूम गया. जिस बजह से वो अपनी hi जगह पैर थोड़ा सा हिल गया जैसे चक्कर आरहे हो. लेकिन जल्दी hi नार्मल हो गया. सायद मेडिसिन का असर अभी भी था. खैर मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे नीचे ले आया जहा उसने दो अनजान साक्ष को देखा तो मेरी तरफ देखने लगा की ये दोनों कोण है.

मैं- है तू तो मिला hi नहीं है उनसे. ये है रेनू दी और ये है सुरभि दी. तुझे बताया होगा कभी मैंने.

लकी- है बताया था. Hello डीडीओ कैसी हो. बैसे हम पहली बार hi मिल रहे है.

रेनू- है लकी लेकिन तुम्हारी बाटे हमेशा सुनती रहती हु में देव से. तुम सभी की. काफी टाइम पास हो जाता है हमारा.

लकी- ये तो हमारी खुशकिस्मती है की किसी काम तो आया आप सभी के. क्यों बे जिंघुर.

चिराग- है ने मेढक जैसी आँख वाले. अब कैसा है. मैंने सुना उलटी बगेरा कर रहा है. बैसे कोनसा मंथ है. तूने बताया भी नहीं हमें.

ये सुनकर बहा मौजूद सभी की एक देवी हसी निकल गयी. और मेरी भी. और लकी की भी.

लकी- है बीटा तेरा hi कुकर्म है ये. में आता हु कल घर और आंटी से कहूंगा इसके बारे में. तब देखता हु कहा कहा भागेगा तू.

ये सुनके चिराग का पोपट हो गया एक hi झटके में और हमारी हसी थोड़ी लाउड हो गयी.

मैं- बस करो दोनों मेरा लेट दुखने लगा इतने में hi.

सुरभि- तू गुड. गजब केमिस्ट्री है दोनों की.

मैं- तो फिर. मेर दिन कब निकल जाता है पता भी नहीं चलता है.

तभी आंटी सभी के लिए चाय और कॉफ़ी लेके आगयी. और सभी ने अपने अपने मुँह लिए और आंटी भी नहीं बैठ गयी और फिर हमारी गप्पे चलने lagi.kafi देर तक बहा रहने के बाद हमने आंटी और लकी को bye बोलै और अपने घरो की तरफ निकल गए. रस्ते में चिराग को छोड़ा और हम अपने घर आगये. रात को डिनर किया एंड अपने अपने कमरों में चले गए. अब थोड़ी शांति थी तो में सोच रहा था की ये असुर क्या करने की सोच रहे है. बही घिसा पिता सवाल

जिससे में भी बोर हो गया था. लेकिन क्या करे ये अगर नहीं सोचूंगा तो बंद बज जाएगी. इसलिए सोचना जारी रखा तब मुझे थोड़ा समाज में आया की जरूर ये सभी उस दिन की प्लानिंग कर रहे है जब तीनो ाँस एक साथ जागेंगे. ताकि मुझे था फसा कर खुद बहा जा सके. लेकिन ये मुझे फसाएँगे कैसे बस यही समाज में नहीं आरहा था. ऑप्शन बहुत सरे थे. लेकिन उनमें से कोनसा अपनाएंगे ये कन्फूसिओं हो रहा था. और मुझे उसके साथ इक और टेंशन थी की ये तीनो ाँस काहिरा किस जगह पैर प्रगट होंगे. अग्नि वाला जहा होगा बहा पहले से hi बहुत साडी अग्नि होगी. और बायु वाला तो कही भी हो सकता है. इसको ढूंढ़ना सबसे मुश्किल काम है. एंड सबसे लास्ट जल वाला. सात समुद्र है. इनमे से कहा मिलेगा ये सोचकर hi हालत पतली हो जाती है. पानी में तो करोड़ राज दफ़न है जिनमे से ये ाँस भी एक है. तभी मेरे मोबाइल पैर मुझे एक फोटो दिखी. और उसे देखकर मुझे कुछ समाज में आया की पहला ाँस कहा जाग सकता है. ीये मैंने इंटरनेट खोला और उसके रेलेटेड सर्च करने लगा. और मुझे कुछ चौकाने वाले रिजल्ट मिले. जिससे मेरा डाउट पक्का सा हो गया की एक ाँस तो डेफिनेटली यही कही मिलेगा. बाकि दो का पता नहीं.



तो बे कॉन्टिनुए………………...
 
अपडेट 81



मुझे डाउट हुआ तो मैंने सोचा की इसे एक बार कन्फर्म करके देख लू. इसलिए मैंने धयान लगाना सुरु किया और उन जगहों को देखने लगा जहा मुझे डाउट हुआ था. करीब ऐसी 10 जगह थी.

मैंने एक एक करके सरे जगहों को देखा. मुझे पता था की ाँस ऐसे नहीं दिखेगा लेकिन उसके होने का एहसास जरूर होगा मुझे. सायद मामूली सा एहसास hi काफी होगा. एक एक करके साडी जगह देख ली लेकिन हल्का सा भी एहसास नहीं हुआ. लेकिन जैसे hi आखिरी वाले पैर पंहुचा तो शुरुवात में hi मुझे हल्का सा एहसास हो गया मुझे अपने अंदर बहुत hi ज्यादा गर्मी महसूस हुई और इसी से में समाज गया की ी गोत यू. इसलिए मैंने इसका फैसला कल करने के लिए छोड़ दिया. सोचा पहले गुरुदेव से बात कर लू फिर यहाँ जाऊंगा.

इसके बाद मैंने सोचा की दूसरे ाँस की भी तलाश की जाये सायद कोई सुराग मिल जाये. इसलिए मैंने फिर से ध्यान में बैठे बैठे hi उसकी भी तलाश जारी कर दी. हलाकि एरिया काफी बड़ा था एक एक जगह को देखने में पता नहीं कितना समय लगेगा इसलिए मैंने शुरुवात एक बदनाम पॉइंट से की. मैंने सोचा सायद यहाँ कुछ मिल जाये. और हुआ भी बैसा hi इस बार भी मुझे एक अजीब सा एहसास हो गया. जिसका मतलब था की मैंने 2 ांसो का पता लगा लिया था.

अब बस एक hi बचा हुआ था. लेकिन वो एक भी मुसीबत का न्योता hi था. इसलिए उसका पता लगाना भी जरुरी था लेकिन अफ़सोस की मेरे पास शुरुवात करने के लिए कोई जगह hi नहीं थी. इसलिए इसको मैंने कल पैर छोड़ दिया. सोचा सायद कोई रास्ता मिल जाये. और में सो गया.

आधी रात को अचानक से मेरी नींद खुल गयी. कारण था सपना फिर से डरावना सपना. और इस सपने का मतलब में जनता था अच्छे से, यानि की बहुत अच्छे से.

ये संकेत था तीनो ांसो के जागने का. और सायद इसी लिए में उन्हें महसूस कर पाया क्युकी वो जस्ट जागने hi वाले थे. वर्ण वो कभी अपने बहा होने का सुराग नहीं देते.

लेकिन अब समस्या ये थी की बाकि दोनों जगह तो कन्फर्म थी लेकिन आखिरी वाली यानि की बायु ाँस की जगह कन्फर्म नहीं थी न hi मुझे कोई ऐसी खास जगह दिखी सपने में जिससे में समाज सकू की वो बहा हो सकती है.

अब टेंशन बढ़ने वाली थी. दोनों ाँस तक अब जल्दी hi पहुंचना पड़ेगा क्युकी जहा तक है सुबह तक ट्रैफिक बाद जायेगा इन असभ्य जगहों पैर. लेकिन सायद न भी बड़े. कुछ कह नहीं सकते थे. बही असुरो की नजर है मुझपर. वो मेरा पीछा करते हुए जरूर बहा पहुंच जायेंगे. अगर बैसे नहीं पहुंचे तो.

तो सवाल अब ये था की में क्या करू और कैसे. मुझे गुरुदेव से बात करनी थी. उनसे हल जानना छह रहा था में. जो सुबह hi मिल सकता है. अभी उनके विश्राम में बढ़ा डालना ठीक नहीं होगा.

लेकिन में सुबह तक वेट नहीं कर सकता था. इसलिए अब एक hi रास्ता था की काम से काम एक ाँस को अभी हासिल कर लो. बाकि दोनों का सुबह देखेंगे.

यही सोचकर में विस्तार से उठा और खुद को पूरा गायब कर लिया. और अपने पहले निशाने की तरफ बाद गया.

जो था. अंडमान निकोबार पैर मौजूद थे बारेन आइलैंड वोल्केनो. भारत का इकलौता एक्टिव ज्वालामुखी. और यही मिलने वाला था अग्नि ाँस. मुझे यही पैर उसका आभाष हुआ था. लेकिन ये छोटा ज्वालामुखी नहीं था. इसमें ाँस को ढूंढ़ना बहुत मुश्किल होने वाला था.

लेकिन इस बात को मेरे hi एक काम ने काट दिया. मेरा डिल खुद से hi बोलै की." बीटा जब तुमने विशाल अंतरिक्ष में से आकाश ाँस को ढूंढ लिया तो उसके मुकाबले तो ये बहुत छोटी जगह है. लिखे बहुत hi छोटी. हठी के सामने एक चींटी जो हठी को दिखती भी नहीं है." लेकिन इस बात में एक और तर्क भी था की बही न दिखने वाली चींटी उसी विशाल हठी की जान भी ले लेती है.

लेकिन ये तो बाद की बात है. ाँस को प्राप्त करने का सबसे पहला नियम यही है की हार नहीं मन्ना चाहिए. चुकी मुझे आग से कोई प्रॉब्लम नहीं है. लेकिन इस आग में ाँस है. और जब ये मुझे महसूस हुआ था तब मुझे अपने सरीर में गर्मी का एहसास हुआ. जबकि में अपने घर पैर था इससे कोसो दूर. और अब तो में इसके अंदर घुसने वाला था. तो जस्ट चेक कर रहा था की कही में भून कर तो बहार नहीं निकलूंगा न. लिखे तंदूरी चिकन की तरह. की की. काम से काम एक्साम्प्ले तो सही दिया करो. शाकाहारी इंसान होक ऐसा एक्साम्प्ले. शर्म आणि चाहिए. तो और क्या कहु में. कोई एक्साम्प्ले सूझ hi नहीं रहा है.

यही सब बकवास करते हुए में वोल्केनो के करीब पहुँच गया. और ये बकवास में खुद से hi किये जा रहा था. पता नहीं शायद मेरा दिमाग फिर गया है या कुछ और भगवन जाने.

बहा पहुंचकर मैंने देखा की पहले के मुकाबले कुछ ज्यादा hi आग भड़क रही है इसके अंदर. पहले सिर्फ धुआँ निकलता था लेकिन अब तो सीढ़ी लपटे निकल रही है वो भी भयानक वाली.

जहा में खड़ा था बहा की जमीन तक गर्म होने लगी थी. जबकि में मैं वोल्केनो से 5 कम दूर खड़ा था जमीन per.bahut hi बड़ा था ये. कितना इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. और गहरा कितना है ये बातपना तो और भी मुश्किल है.

लेकिन ये मुझे करना तो था hi. इसलिए में उड़ता हुआ उसके मुँह के एकदम पास पहुंच गया. और नीचे देखने लगा जिसमे मुझे आग के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था.

इसलिए मैंने अपने हाथो को जोड़ा. और महादेव और अग्नि देव को प्रणाम किया और उनसे विनती करि की मुझे सफल बनाये इस कार्य में. और बस उसके अगले hi पल में ज्वालामुखी के मुँह में तेज़ी से घुस गया. और जैसे hi मैंने अपनी आँखों को खोला अंदर जाकर. तो में एक दम हैरान रह गया. सामने का नजारा देख कर.

मैंने जब अपनी आँखे खोली तो में किसी अलग hi जगह पैर पहुंच गया था. ऐसा लगा जैसे ये वोल्केनो सिर्फ एक रास्ता है. बाकि में कहा था ये तो पता नहीं लेकिन ये जगह थी बड़ी खतरनाक.

बहा में एक ज्वालामुखी से दर रहा था और इस जगह पैर तो हर तरफ आग hi आग थी. हर जगह छोटे छोटे ज्वालामुखी फैट रहे थे. गर्म लावा बह रहा था. बल्कि ये कहना गलत नहीं होगा की उसी गर्म लावा की नदी बह रही थी. जो हर चीज़ को पिघला रही थी.

और में झूट नहीं बोलूंगा मुझे गर्मी लग रही थी. आग मुझे महसूस हो रही थी. जो को बकै में चिंता का विषय था मेरे लिए. और अब में अदृश्य भी नहीं रहा था.

ऐसा लग रहा था जैसे इस जगह पैर आते hi मेरी शक्तिया गायब हो गयी है. और अब मुझे ये ऐसे hi करना होगा. जो की करना इम्पॉसिबल था. ये लावा मुझे पल भर में पिघला देगा. ये बात में अच्छे से जनता था.

लेकिन उस ाँस को हासिल करना है तो ये तो सहना hi पड़ेगा. फिर चाहे कुछ भी क्यों न हो जाये. मैंने अपनी आँखों को बंद किया और महादेव का स्मरण किया और गुरुदेव का भी और उसके बाद कुछ लुम्बी लुम्बी ससे छोड़ी और फिर आँखों को खोल लिया और ये संकेत था की में अब रेडी हु आगे बढ़ने के लिए.

अब मैंने चारो तरफ ध्यान से देखना सुरु किया. आखिर कहा हो सकता है ाँस तो मेरी नजर लावा की नदी में एक जगह पैर रुकी. बिलकुल बीचो बीच एक बेहद hi चमकदार चीज़ तैर रही थी. और ये देखकर में समाज गया की यही है वो ाँस. लेकिन मुश्किल तो अब सुरु होने वाली थी क्युकी वो एक दम बीच में था. और बहा तक पहुंचने का कोई भी रास्ता नहीं दिख रहा था मुझे. सिवाय एक के की में तैर का बहा तक जाऊ. जो संभव नहीं था. बहा तक पहुंचने से पहले hi में पिघल जाऊंगा किसी सेक्रेम की तरह.

लेकिन आगे तो बढ़ना hi था. इसलिए मैंने अपने कदमो को आगे बढ़ाया. में अपने पैरो को संभल कर केवल सॉलिड जगह पैर hi रख रहा tha.jo की कही कही बहार निकली हुई थी कुछ दुरी तक. कुछ पास में थी तो कुछ बेहद दूर जिनपर जम्प मारकर hi पंहुचा जा सकता tha.or जम्प में जरा भी गड़बड़ हुई तो में सीधा नदी में गिरूंगा.

जिन जगहों पैर में पेअर रख रहा था वो भी किसी भट्टी से काम नहीं थी. मेरे जुटे पूरी तरफ से जल गए थे केवल 4-5 कदमो में hi. और अब जलन मेरे तलवो में सीढ़ी महसूस हो रही थी. जो बर्दास्त के बहार जा रही थी.

इसलिए मैंने कुछ तरय करने की सोची. और मैंने अपने हाथो को जोड़ा और बहा खड़े खड़े hi ध्यान लगाना सुरु किया. मंत्र का जाप करने लगा मैं. मुझे उम्मीद थी की कुछ न कुछ तो जरूर होगा. और हुआ भी बैसा hi मेरी थर्ड ऑय खुल गयी. और अब मैंने रास्ता निकला सबसे पहले की क्यों न यहाँ बारिस करवाई जाये. ये लावा उससे ठंडा पद जायेगा और में आराम से आगे बाद पाउँगा. और में बैसा करने hi जा रहा था की अचानक से मेरे कानो में आवाज आई.

गुरुदेव- तेहरो वत्स ये क्या करने जा रहे हो तुम.

मैं- प्रणाम गुरुदेव. में बारिस करने की कोसिस कर रहा हु.

गुरुदेव- इसीलिए मुझे इस समय तुम्हे सचेत करने जागना पड़ा मुझे यही लग रहा था की तुम ऐसा hi कुछ करोगे.

मैं- तो में क्या करू गुरुदेव ये अग्नि मुझे भस्म कर देगी. में एंड तक कभी पहुंच hi नहीं पाउँगा.

गुरुदेव- ये सब इसलिए क्युकी तुम जरुरत से ज्यादा दर रहे हो. और ये अग्नि दर को महसूस कर लेती है. और उसी दर को सच बना देती है. इसीलिए तुम्हे वो महसूस हो रही है. तुम्हे अपने मन से दर को निकलना होगा. वर्ण सच में तुम बही भस्म हो जाओगे.

मैं- में पूरी कोसिस कर रहा हु गुरुदेव परन्तु पता नहीं क्यों ये दर मुझे और जकड रहा है.

गुरुदेव- ध्यान लगाओ वत्स और फिर कोई तरकीब सोचो बारिस करवाने वाली नहीं ाँस को हासिल करने वाली. तुम्हे जरूर कोई न कोई रास्ता मिलेगा. कोसिस करो.

मैं- ठीक है गुरुदेव में कोसिस करता हु. और शमा करे मुझे जो मेरी इस भूल की बजह से आपके विश्राम में बढ़ा आगयी.

गुरुदेव- तुम उसकी परवाह मत करो. और ाँस पैर ध्यान दो.

ये कहके वो बापिस चले गए और मैंने अपने मन को शांत करने के लिए अपनी आँखों को बंद hi रखा. और मंत्र का जाप सुरु किया. में सब कुछ भूलने की कोसिस करने लगा. बस मंत्र में hi खोने लगा. और इसका असर ये हुआ की मुझे अब जलन महसूस नहीं हो रही थी कही भी. करीब एक घंटे तक में एक hi जगह पैर खड़ा रहा और मंत्र का जाप करता रहा मैंने बिलकुल ध्यान नहीं दिया की में कहा हु और कहा जा रहा हु. बस मंत्र का hi जाप करता रहा.

मैं ाँस को तो जैसे भूल hi गया था की मुझे उसे हासिल करना है. और ये भी की में इस वक़्त एक लावा को नदी में खड़ा हु. एक ऐसे पत्थर पैर जो कभी भी पिघल सकता है.

तभी मेरे कानो में आवाज सुनाई दी. काफी जोर से जिससे मेरा ध्यान टुटा और मैंने अपनी आँखों को खोला. तो में हैरान था. क्युकी इस वक़्त में ाँस के बिलकुल पास में खड़ा था. इतना पास की में हाथ बड़ा कर उसे ले सकता था.

लेकिन वो आवाज किसकी थी मुझे ये नहीं पता चला.

मैं- कोण है यहाँ कृपा कर सामने आये.

तभी फिर से आवाज आई. मैंने ध्यान से आवाज की तरफ देखा तो पाया की ये आवाज ाँस से आरही थी सीधे.

ाँस- देव में प्रसन्न हुआ तुमसे. तुमने जो धैर्य और समर्पण दिखाया वो बकै में अविश्वसनीय है.

मैं- प्रणाम अग्नि ाँस. में धन्य हुआ आपकी आवाज सुनकर. मेरा प्रणाम स्वीकार करे.

ाँस- स्वीकार है वत्स. पहले मुझे लगा था की सायद कोई गलत ब्यक्ति यहाँ पहुंच गया है. जब तुमने बारिस करने का फैसला किया था. लेकिन उसके बाद जो तुमने महादेव का स्मरण किया और उसमे पूरी तरह खो गए उसने मुझे तुम्हारे पास आने के लिए मजबूर कर दिया. और देखो अब में स्वयं hi तुम्हारे पास आज्ञा. और अब तुम मुझे प्राप्त कर सकते हो.

मैं- ये मेरा सौभाग्य hai.or मेरे गुरुदेव का आशीर्वाद, जिन्होंने मुझे अपने मार्ग से भटकने नहीं दिया.

ाँस- धन्य है तुम्हारे गुरु जिन्होंने तुम्हे शिक्षा दी और इस काबिल बनाया में प्रणाम करता हु उन्हें.

उसके बाद वो ाँस खुद बा खुद भयंकर चमक बिखेरने लगे और मैं नीचे झुका और उस ाँस के नीचे अपना हाथ लगाया ऐसा करते hi वो ाँस मेरे हाथ में आगये और उसके बाद उन्होंने बही किया जो बाकि के ाँस ने किया था. मेरे सरीर में समां गए. और ऐसा होते hi मेरे सरीर का तापमान काफी बाद गया.

मेरे सरीर से भयंकर रौशनी निकलने लगी. और वो इतनी तेज़ थी की अगर कोई आम इंसान होता तो इसी रौशनी में जल कर भस्म होजाता. जब तक ाँस ने सरे सरीर में अपने आप को ठीक से फैला नहीं लिया तब तक वो रौशनी ऐसे hi बानी रही और में इस तपन को सेहन करने के लिए अपने हाथो को जोड़ कर खड़ा हुआ था और अपने मंत्र का जाप कर रहा था.

काफी देर तक ऐसा hi चलता रहा. और आखिर कार वो साडी तपन मेरे अंदर बापिस से समां gyi.or मेरे अंदर अब तीन ाँस आ चुके थे और बाकि के दो ाँस अब भी बाकि थे. जो मुझे जल्द hi हासिल करने थे. लेकिन फिलहाल नहीं. इसलिए अब मुझे बहा से बापिस घर जाना था. इसलिए मैंने अपने आँखों को फिर से बंद किया और अपने कमरे को याद किया और अगले hi पल में अपने कमरे में पहुंच गया.

बहा पहुंचकर मैंने टाइम देखा तो सुबह के 3 बज गए थे. और मुझे बहुत तेज़ नींद आरही थी. इसलिए मैंने विस्तार पैर लेट गया और गिरते hi मेरी नींद लग गयी. उसके बाद पता नहीं में कब तक सोता रहा. और जब मेरी आँख खुली तो सुबह के 9 बज गए थे. मतलब की आज का सलग मिस हो गया था. लेकिन में हैरान था की मुझे इतनी नींद कैसे आगयी. जबकि कई बार में पूरी रात जगा हु. और अपने समय पैर बापिस से उठ भी गया हु सोने के बाद. लेकिन आज क्या हुआ. खैर अब जो होना था सो होगया.

में उठा फ्रेश हुआ नहाया और अपने कमरे में hi ध्यान करने बैठ गया. थोड़ी देर ध्यान किया और फिर गुरुदेव से संपर्क साधा.

मैं- प्रणाम गुरुदेव

गुरुदेव- आयुष्मान भाव वत्स. में बहुत कुश हु की तुमने तीसरे ाँस को भी प्राप्त कर लिया. और इससे भी ज्यादा कृषि मुझे तब मिली जब तुमने ांसो के जागने से पहले hi उनकी जगहों का पता लगाया.

मैं- ये सब तो आपने आसीर्बाद का hi कमाल है गुरुदेव. परन्तु अभी भी मुझे बायु ाँस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है. क्या आप इसमें मेरी मदद कर सकते है.

गुरुदेव- वत्स ाँस कहा मिलेंगे ये कहना बहुत hi मुश्किल है. परन्तु इतना जरूर कहूंगा की बायु ाँस बही मिलेगा जहा पैर बायु देव से जुड़ा कोई बकया हुआ होगा. अब तुम्हे hi उसके बारे में पता लगाना होगा.

मैं- गुरुदेव बायु देव तो हर जगह मौजूद है और उनके वाकये भी बहुत हुए होंगे. में किस जगह से शुरुवात करू.

गुरुदेव- वत्स सबसे पहले तो तुम जल ाँस को प्राप्त करो उसके बाद बायु तत्त्व के बारे में सोचना. असुरो को भी ज्ञात होगा है उसके बारे में. और उन्होंने भी हर संभव जगहों का निरिक्षण सुरु कर दिया है. तीनो ांसो की जगहों का एक साथ. पहला तो मिल गया तुम्हे. अब दूसरे ाँस पैर ध्यान दो. असुरो से पहले उसे हासिल करना होगा तुम्हे. और एक बात जो में तुम्हे बताना चाहता हु.

मैं- कोनसी बात गुरुदेव.

गुरुदेव- वत्स अगर एक भी ाँस असुरो के हाथ लग गया. तो फिर असुर तुमसे इन ांसो को छीने का प्यारस बंद कर देंगे. और तुम्हे मरने का प्रयास सुरु कर देंगे. क्युकी अगर एक भी ाँस उनके पास हुआ तो फिर तुम्हारे अंत के बाद सरे ाँस खुद बा खुद hi उस के पास चले जायेंगे जिसके पास वो एक ाँस मौजूद होगा. और इस तरह तुम्हारी अब तक की गहि साडी म्हणत पैर पानी फिर जायेगा. इसलिए तुम्हे एक भी एंड उनके उनके हाथ नहीं लगने देना है.

ये सुनके में हैरान रह गया पूरी तरह से. क्युकी जहा तक मुझे पता था. वो ये की अगर असुरो में ांसो को मुझसे छीने का प्यारस किया या मुझे मारने का प्रयास किया तो ये ाँस फिर से अनंत काल के लिए लुप्त हो जायेंगे.

लेकिन अब गुरुदेव कह रहे है की अगर एक भी ाँस उनके हाथ लगा तो ऐसा कुछ नहीं होगा. मतलब की असुर इसी की प्लानिंग कर रहे है उनका सारा ध्यान इसी पैर है की वो किसी भी एक ाँस को हासिल कर ले ताकि उसके बाद वो तसल्ली से मेरा खत्म कर सके. और बाकि के ांसो को मुझसे हासिल कर सके.

गुरुदेव- किस सोच में दुब गए वत्स.

मैं- बस यही की आपने मुझे पहले इसके बारे में क्यों नहीं बताया.

गुरुदेव- क्युकी इसकी जानकारी किसी को नहीं थी. लेकिन अब असुरो को इस बात का पता चल गया है. और अब तुम्हारा भी ये बात जानना बहुत hi जरुरी है इसलिए मैंने तुम्हे ये बात अब बताई. और अब इस बात को ध्यान में रखो और अपने कार्य को आगे बढ़ाओ. मुझे विस्वास है सफलता तुम्हे hi मिलेगी.

मैं- जैसा आप कहे गुरुवार.

गुरुदेव- विजय भाव वत्स.

ये कहके वो चले गए और में अपनी आँखे खोल कर सोच में बैठ गया की अब में क्या करू……………..



तो बे कॉन्टिनुए………………..
 
अपडेट 82



में बैठा सोचता रहा लेकिन कुछ खास आईडिया नहीं मिला इसलिए में नीचे चला गया नास्ता करने क्युकी मुझे भूक लगने लगी थी. जब नीचे पंहुचा तो देखा की बहा पैर कोई नहीं है. मैंने आवाज लगाई तो माँ किचन से बहार निकली और मुझे देखकर बोली

माँ- क्या हुआ आज लेट हो गया. तबियत ठीक है न.

मैं- है माँ ठीक है. पता नहीं आज नींद hi नहीं खुली. आप नास्ता दे दीजिये.

माँ- ठीक है बैठो में लती हु.

माँ चली गयी किचन में और में बही बैठ कर टीवी देखने लगा. क्या आ रहा है. थोड़ी hi देर में माँ नास्ता ले आई और में उसे करने लगा साथ में कॉफ़ी भी. और माँ ये देकर बापिस अंदर चली गयी. बही दादू और मां सायद अपने ऑफिस गए होंगे और बाकि सभी सलग. लेकिन आलिआ दिखाई नहीं दे रही थी. वो कहा है.

मैं- माँ आलिआ कहा गयी.

माँ- अपने कमरे में होगी सायद.

मैं- ठीक है.

मैंने अपना नास्ता फिनिश किया और उसके बाद में गया आलिआ के रूम में. जहा वो बैठी कोई बुक पद रही थी. मैंने दरवाजे पैर नॉक किया. जिसे उसने सुना और फिर मेरी तरफ देखा तो उसके चेहरे पैर एक प्यारी सी मुस्कान आगयी.

आलिआ- बहा क्यों खड़े हो अंदर आओ न. इसे अपना hi घर समझो.

मैं- बैसे ये जोके बहुत पुराण हो गया है कुछ नया बोलो.

ये कहते हुए में अंदर आज्ञा.

आलिआ- अब नया मुझे कुछ याद hi नहीं आरहा था तो यही बोल दिया. बैसे आज गए नहीं सलग.

मैं- है आज नींद नहीं खुली और रात में काफी लेट भी सोया था.

आलिआ- ऐसा क्या कर रहे थे रात भर जो इतना देर से सोये.

मैं- में अग्नि ाँस को लेने गया था. और वो मुझे मिल गया.

ये सुनते hi आलिआ एक दम से चौक गयी. जैसे उसे लगा की में मजाक कर रहा हु उससे.

आलिआ- तुम मजाक नहीं कर रहे हो न.

मैं- बिलकुल nahi.kal रात को hi मैंने अग्नि ाँस को प्राप्त कर लिया है. और उसी के साथ बाकि के दोनों ाँस भी जाग गए है और अब सरे असुर उनके पीछे लग गए है.

आलिआ- तो तुम यहाँ क्या कर रहे हो जाओ और उन्हें भी ढूंढ लो.

मैं- जल वाला तो मुझे पता है बस बायु वाला मुझे नहीं मिल प् रहा है. इसलिए में चाहता हु की तुम प्राची के साथ उस ाँस का पता लगाओ. सिर्फ पता लगाना बहा जाना नहीं है. वर्ण असुर तुम्हारा पीछा करते हुए बहा पहुंच जायेंगे और फिर क्या होगा ये तुम अच्छे से जानती हो.

आलिआ- मेरे ख्याल से उसका पता लगाना फ़िलहाल जरुरी नहीं है. क्युकी अगर तुम्हे उसके बारे में नहीं पता चल रहा है इसका मतलब असुरो को भी नहीं पता चला होगा. इसलिए वो अपनी तलाश जारी रखेंगे. बाकि रही बात जल ाँस की तो तुम्हे उसे जल्दी hi हासिल करना होगा. और बल्कि मेरा सुझाव तो ये था की तुम्हे रात में hi उसे हासिल कर लेना चाहिए था. ये मौका असुर कबसे ढूंडरहे थे और उन्हें मिल गया. देख लेना वो उस जगह पैर अभी तक पहुंच भी गए होंगे.

इसीलिए तुम्हे अपने साथ लेजाने के लिए आया हु. हमें जल्दी hi निकलना होगा.

आलिआ- अभी तो कह रहे थे की में उस तीसरे ाँस की तलाश में जाऊ. और अब साथ ले जा रहे हो.

मैं- तुम्ही ने कहा न की उसकी खबर उनको भी नहीं होगी तो फिर उन्हें रास्ता देके क्या फायदा. हमें अपना पूरा जोर बही लगाना होगा और में जनता हु ये हम दोनों से सायद नहीं हो ोायेगा. हमें सबकी जरुरत पड़ेगी खासकर सुरभि की. वो जल ाँस की प्रतीक है.

आलिआ- सही कहा. एक काम करो उनको भुला लो. फिर हम तीनो hi चलेंगे और बाकि दोनों यही रहेंगी क्युकी घर पैर भी किसी का होना जरुरी है.

मैं- लेकिन वो शाम तक आएँगी यही मैं प्रॉब्लम है. और इसी बजह से में परेशान हु.

आलिआ- एक बार कोसिस करके तो देखो सायद बात बन जाये. वर्ण कही ऐसा न हो की हम यही बात करते रहे और बहा वो ाँस उनके हाथ लग जाये.

मैं- बैसे ये हो सकता है. ाँस जो ब्बि उसके करीब जाते है उनकी परीक्षा लेते है. अब अगर असुरो ने थोड़ा धीरज से काम लिया तो प्राप्त कर लेंगे वर्ण बही दफ़न हो जायेंगे.

आलिआ- ये बात में जानती हु. अब जल्दी करो.

ये सुनने के बाद मैंने अपनी आँखों को बंद किया और रेनू सुरभि और प्राची तीनो से एक साथ कांटेक्ट किया. मेरी आवाज एक साथ तीनो सुन सकती थी.

मैं- आप तीनो को अभी घर आना होगा. ाँस जागृत हो गए है और हमें उन्हें लेने जाना है अभी. अगर ज्यादा देर हुई तो असुर उन्हें हासिल कर लेंगे.

ये बात सुनते hi उन तीनो के हावभाव बदल गए और उन्होंने तुरंत hi घर आने को है कह दिया. लेकिन अब बो आएँगी कैसे. तो उनकी किस्मत अच्छी थी की अभी पहला पीरियड ख़त्म हुआ था क्लास में कोई नहीं था. और यही मौका देखकर वो तीनो अपनी जगहों से उठी और सीधे बहार निकल gyi.vo भी जल्दी जल्दी ताकि कोई उन्हें देख न पाए. और देख भी ले तो क्या कर लेगा इनका.

बहार निकल कर पार्किंग में पहुंची अपनी कार में बैठी और तेज़ी से बहार निकल गयी.

बही क्लास में बैठे चिराग और लकी हैरान थे की ये प्राची अचानक कहा चली गयी और क्यों. ईसीए चिराग ने तुरंत hi प्राची को कॉल किया. तो प्राची कॉल उठा कर उसे तबियत का बहाना बना दिया. अभी उन दोनों को ये नहीं पता था की रेनू और सुरभि भी क्लास से गायब हो गयी है. और क्लास में अभी तक कोई नहीं आया था इसलिए चिराग भी बहार निकल गया उन दोनों को देखने ताकि प्राची को घर पहुंचाया जा सके.

चिराग को लगा की सायद प्राची ऑटो से गयी होगी और उसकी तबियत कही ज्यादा न बिगड़ी हो. उसे चिंता हो रही थी. लेकिन जब वो उनकी क्लास में पंहुचा तो बहा उसने उन दोनों को नहीं देखा. और बहा पूछने पैर उसे पता चला की दोनों अचनाक से उठ कर चली गयी बहार.

तब चिराग को लगा की सायद प्राची ने hi उन्हें बुलाया होगा. और वो उन्ही के साथ गयी होगी. लेकिन दोनों के साथ. ये बात उसे समाज में नहीं आरही थी. उसके बाद उसने फिर रेनू को कॉल किया लेकिन उसका फ़ोन बंद आरहा था. तो उसने तीनो के no. डायल किये तो तीनो ने hi होने फ़ोन बंद कर लिए थे ताकि किसी के कॉल न आये खास कर चिराग और लकी के.

ये सब बाटे चिरग को परेशान कर रही थी. तब उसने मुझे कॉल किया तो मैंने उठा लिया. और उसने उठाते hi साडी राम कहानी कह डाली. जिसे सुनके मैंने अपना माथा पकड़ लिया. तब मैंने उसे कह दिया की वो घर hi आरही है शाम को यही अजाना और उन्ही से पूछ लेना. और उसे भी ये ठीक लगा.

लेकिन वो अभी आने का कह रहा था तो मैंने उसे समझाया और कहा की अब आज बंक क्यों मार रहे हो. थोड़ी बहुत पड़े को बाटे उसे बताई तो वो मान गया और शाम को आने के उसने कह दिया. और फ़ोन रख दिया.

बही मेरे फ़ोन रखते hi घर की बेल्ल बज गयी तो मैंने दरवाजा खोला तो सामने तीनो कड़ी हुई थी.

प्राची- पता चला जगहों के बारे में

मैं- है एक का चल गया है बाकि दूर का फिलहाल पता नहीं. और बाकि बचे को मैंने हासिल भी कर लिया है.

रेनू- क्या कब कैसे.

मैं- वो में बाद में बताऊंगा. फिलहाल मेरी बात सुनो. प्राची और रेनू तुम दोनों यही रहोगी और घर की देखभाल करोगी. प्राची तो ऑफिस में मां और दादू पैर नजर जमाये रखना और रेनू घर पैर नजर जमाये रखेगी. बाकि बचे हम तीनो जायेंगे जल ाँस को लेने. बहा पहले से hi काफी असुर पहुंच चुके होंगे तो उनसे निपटने के लिए मुझे इनकी जरुरत पड़ेगी. सब समाज गयी.

प्राची- ठीक है. बैसे अगर में चली साथ तो.

मैं- चल सकती हो. लेकिन तुम्हे यह रोकने के पीछे भी खास बजह है. तुम्हारे अंदर मेरे जैसी hi शक्तिया है. और तुम खतरे को भाव सकती हो और उसका हल भी जल्दी hi ढूंढ सकती हो. और में सूरे हु की हमारे जाने के बाद यहाँ भयंकर हमला होगा. इसलिए तुम्हे यहाँ रहने को कह रहा हु. बाकि सुरभि जल ाँस की प्रतीक है इसलिए उसे साथ ले जा रहा हु. और आलिआ को सुरभि की मददगार के रूप में. अब कोई और सवाल तो नहीं है न.

रेनू- नहीं ये और हम सभी समाज गए है. तुम तीनो जल्दी से निकलो पता नहीं बहा क्या हो रहा होगा.

मैं- सही कहा.

उसके बाद मैंने उन दोनों का हाथ पकड़ा और हम बहा से गायब हो गए. और एक hi पल में पहुंचे सीधे बरमूडा ट्रायंगल. जो समुद्र की सबसे बदनाम जगहों मेसे एक है. और यही मुझे एहसास हुआ था जल तत्त्व का.

सुरभि- ये कोनसी जगह है.

मैं- बही बरमूडा ट्रायंगल.

ये सुनके वो थोड़ी चौकी.

सुरभि- क्या यही है समुद्र की सबसे बदनाम जगह.

आलिआ- ये क्या नाम बतया बेरमु

सुरभि- बरमूडा ट्रायंगल.

आलिआ- है ये किस लिए बदनाम है.

सुरभि- यहाँ पैर बहुत hi अद्भुत घटनाये घाट टी रहती है. बहुत सालो पहले यहाँ से एक पूरा हवाईजगह गायब हो गया था. उसका पता आज तक नहीं चला. जबकि वो इस जगह से कई कम दूर ऊपर आसमान में उड़द रहा था. और इस जगह से कई समुद्री जगह भी गायब होते रहते है. इसलिए इस जगह आने पैर रोक लगा दी गयी है.

अब न तो हवाई जहाज और न hi समुद्री जगह कोई भी उसके आसपास भी नहीं आते है. बहुत प्रयास किये गए इसके राज को जानने के लेकिन सब नाकाम रहे. और यही एक ऐसी जगह है जहा सबसे पहले उस ाँस के होने की सम्भावन बन सकती है. इसीलिए सभी इसी तरफ बड़े सबसे पहले.

आलिआ- ओह्ह तो ये बात है. बैसे मुझे क्यों ऐसा लग रहा hi की यहाँ कुछ नहीं मिलने वाला.

मैं- और तुम्हे ऐसा क्यों लग रहा है.

आलिआ- जरा तुम hi सोचो. ये जगह जब इतनी बदनाम है तो असुरो की इस जगह पैर कबसे नजर होगी. उन्हें भी इस बात का अंदाजा होगा की जल तत्त्व यही हो सकता है. तो मेरे ख्याल से उन्होंने उसे पहले hi हासिल कर लिया होगा अगर वो यहाँ बकै में है तो.

सुरभि- बैसे आलिआ की बात में दम है. और दूसरी बात ये की मुझे लगता है यहाँ ाँस सायद है hi नहीं. ाँस अपनी रक्षा कर सकते है उन्हें छिपे रहना ज्यादा पसंद है. तो फिर वो यहाँ ऐसी घटनाएं क्यों करेंगे जिससे सभी का ध्यान इस तरफ जाये.

ये बाटे सुनकर मेरा माथा पूरी तरह से घूम gya.mujhe समाज नहीं आया की में क्या जवाब दू इन दोनों ko.jabki दोनों की बातो में सचाई थी.

मैं- अगर ऐसा होता तो फिर मुझे इस जगह पैर ाँस का एहसास कैसे हुआ. ये भी बता दो.

आलिआ- सायद ाँस पहले यहाँ हो. लेकिन बाद में यह से कही चला गया हो. इस बजह से तुम्हे उसका एहसास यहाँ हुआ होगा. सायद?

अब में पूरी तरह से कंफ्यूज था की क्या किया जाये. अंदर जाया जाये या नहीं. कही ऐसा न हो की अंदर कोई नै चूनौती हमारे सामने आजाये और ाँस यहाँ बकै में न हो. ये सभी सवाल मेरे दिमाग में घूमने लगे the.me फैसला नहीं कर प् रहा था. जबकि इस वक़्त मुझे तुरंत फैसला लेना था….

बाकि अब देखते है देव क्या फैसला करता है…..

तो बे कॉन्टिनुए………………..

 
Back
Top