फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 13 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट -103

मैं निचे चला आया tha.......Dark वर्ल्ड वालो से मिलने ko.......wo सब के सब गुस्से में the......ho भी क्यों naa.......Maine उनके एक साथी को उठा लिया tha.......par एक बात thi......kisi ने गुस्से में कुछ किया nahi.......ek बार bhi.......naa तब जब रूपल दीदी ने उनको होटल में आने बोलै था हॉल में इन् सब के लिए और ना hi तब जब मैं गया वह pe.......kaaran तो बस एक hi नज़र आ रहा tha......unki वो ग़लतफ़हमी.......

सायद उनको ऐसा लग रहा होगा की अगर उन्होंने हमारे साथ कुछ भी kiya.....to डार्क पावर वाली Chachi.....unka साथ कभी नहीं देगी.......

वो सब शांति से बैठे हुए the.....Main उनके बिच में गया........

मैं - मुझे आप सभी से बात करनी thi.......bas इसी वजह से ये सब करना पड़ा........

वो सब तब भी चुप the......wo कहते है ना मुसीबत में गधे को भी बाप बनाना पड़ता hai......ye सायद मुझे वही गधा समझ रहे थे :सिघ:

मैंने उनका ज्यादा वक़्त नहीं लेने का socha......waise भी मुझे वापस ऊपर जाना था और उस लड़की को संभालना tha.........Main ये सोच रहा था कही वो मधु के पास ना चली jaaye.......kya पता कब क्या कर दे वो........

मैं - मैं आप सब का ज्यादा वक़्त नहीं lunga......mujhe पता है आप सब की samasya......maine आपके साथी से सब सुन्ना hai.......aapko इसके बारे में अब चिंता करने की जरुरत नहीं hai.......Mujhe कुछ वक़्त दे मैं खुद वह आऊंगा और जो भी परेशानी है उसको ख़तम कर दूंगा........

"तुमसे कुछ नहीं hoga........humme वो चाहिए......"

वो सायद चची की बात कर रहे थे........

मैंने भी अब खुद को इनसब के सामने साबित करने के बारे में ना सोचते हुए बस इतना सा कह दिया.......

मैं - अब आपकी परेशानी एक सुई से हल हो रही है आप तलवार निकल के उसको और बड़ा क्यों करना चाहते hai..........Main जानता हु मैं ये कर सकता hu.....aur अगर ना हुआ तो मैं पक्का आपकी तलवार को वह पे लेके आऊंगा........

मेरी बात सुन्न के वो सब के सब एक दूसरे को देखने लग gaye........aur आपस में खुसफुसाने लग गए........

दीदी - ये सब क्या बोल रहा hai.......Mummy वह जायेगी.......

मैं - अरे दीदी मैं कर दूंगा इनकी समस्या को सोल्वे वो तो बस इनको ऐसे hi बोल रहा हु.......

तभी वह पे कोई खड़ा हुआ.......

"पर इसमें खतरा hoga.......agar तुम खतरा उठाने को तैयार हो तो ठीक hai......humme कोई परेशानी नहीं है......"

मैं - हां मुझे पता hai........to ठीक है अब मुझे नहीं लगता आपको मेरी चची का पीछा करने की जरुरत hai........Main वह आऊंगा कुछ वक़्त में और सब सेट कर दूंगा.......

वो सब भी इस बात से खुश the........haa मेरे वह जाने से hi.......ab मैं जाऊँगा और मुझे कुछ भी hua......to चची को तो आना hi होगा naa........aur उसके बाद तो जो बुरे लोग है वह उनको चची यूँ hi संभल legi......aisa hi कुछ सोच रहे होंगे वो सब.......

"ठीक hai......par तुम कब आने वाले हो waha......kya हम सब यही पे रुक्के तुम्हे साथ ले जाने के लिए......."

मैं - रुकना ना रुकना ये सब आप सभी पे hai........Mujhe आने में कुछ वक़्त तो lagega......abhi यहाँ पे बहुत कुछ चल रहा hai........par इतना कह सकता हु आपकी परेशानियां ज्यादा लम्बी नहीं चलने dunga........baaki जैसा मैंने कहा रुकना ना रुकना सब आप सभी पे है.......

मैंने उनसे ये बात कही और फिर दीदी को वह का सँभालने को बोल के मैं ऊपर अपने रूम में चला गया जहा दोनों भाई बहन को छोड़ा था मैंने........

वह पंहुचा तो कोई था hi नहीं........

मुझे लगने लगा ये दोनों निकल गए होंगे मधु के पास जाने ko......Main वह से निकलने को हुआ तो वो दोनों वह पे आ गए.........

रिआन - हमने देखा निच्चे tumhe....tum....

"ये नाटक कर रहा था हममे दिखने के liye..........warna ये क्यों मदद करने लग गया उन् लोगो ki.......iske जैसे लोग खुद के सिवई किसी के बारे में नहीं सोचते......."

रिआन - तुमने देखा ना अभी निच्चे क्या ये झूट बोल रहा tha.......natak कर रहा था लगा तुम्हे कही ऐसा.......

वो चुप रही पर मुझे घूरती रही........

रिआन - अच्छा ये chodo.......Prateek इसको उन् मछलियों वाली बात batao.......batao इसको की यहाँ पे इम्मोर्टल्स के कुछ तरीके है जो लोग आज़मा रहे है.......

मैं - तो क्या उसको लेके अभी तक कोई जांच शुरू hi नहीं हुई hai........Maine ऐसा सोचा tha......par मुझे लगा था ये तो समझेगी तुम्हारी बातों को.......

रिआन - इसमें इसकी गलती nahi.......Maine hi बात को छोड़ di......Mujhe लगा अगर इम्मोर्टल्स का ध्यान यहाँ आया तो उनकी नज़र में तुम और मधु भी आ jaaoge.....aur फिर और ज्यादा परेशानी होगी तुम्हे.......

"रिआन इससे बोलो मुझे उस जगह के बारे में bataye.......tum तो वह नहीं गए थे naa......isse बोलो मुझे वह लेके chale.......Main देखना चाहती हु उस जगह को......"

रिआन - Nahi........iski जरुरत नहीं hai.......jo जैसा है वैसा रहने देते है जैसा मैंने कहा अगर यहाँ पे ज्यादा इम्मोर्टल्स आने जाने lage......to चीजजें बिगड़ने लग जायेगी.......

"मैं मान लुंगी तुम्हारी baat......par इससे kaho.....main यहाँ आती rahungi........ispe नज़र rakhne.......aur एक baar.......ek बार भी मुझे laga.......Madhu के साथ फिर से कुछ हो रहा hai......Main उसी वक़्त इसको ख़तम कर dungi......ab तो इम्मोर्टल की बॉडी भी नहीं है इसके pas......aur ना hi मधु को पता चलेगा कुछ......"

रिआन - तुम हमेसा ऐसी बातें hi क्यों करती हो.......

मैं - ठीक hai.......mujhe मंजूर है........

रिआन - पर इसकी जरुरत नहीं है.......

"उसने कह दिया उसको मंजूर है अब इस्पे बात करके कुछ नहीं मिलने wala......Chalo मुझे मधु से मिलवाओ....."

रिआन - Kya......abhi तो कहा tha.....usse नहीं मिल सकते........

मैं भी यही कहने वाला था की उससे मिलने जाओगे तो सायद वो ना pahchane......yaa फिर कुछ और hi हो जाए......

"मैं बस देखने के लिए बोल रही hu.......puccho इससे कहा है वो अभी......"

मैंने उसको उसके सिचुएशन के बारे में बताया वो यहाँ अपने माता पिता को एक करने आयी है वगेरा वगेरा.......

"सायद यही वजह hai.........yahi वजह है की वो एकलौती ऐसी इम्मोर्टल है जिसके माता पिता hai.......ek परिवार hai......kyunki वो उसके काबिल hai.......tumhare जैसे nahi......pata नहीं क्या पसंद है उसको तुम......"

वो आगे कुछ बोलती उससे पहले रिआन ने उसका हाथ pakda.....aur दोनों के दोनों गायब......

इसकी मुझसे बननी hi नहीं kabhi.......mere हिसाब से इसकी सोच उस मूर्ति में कैद बन्दे से डिट्टो मितली thi......haa पर ये भी मधु को पाने के लिए नहीं दौड़ रही थी बस यही बात अलग thi.....ye मधु के साथ hi रहा करती thi.......acche dost......isko मैं बिलकुल पसंद नहीं tha......Mujhe छोड़ के सायद hi कोई दूसरी चीज़ज़ बननी ho......jisko लेके दोनों के विचार अलग अलग थे.....

इसको यही छोड़ते है और उन दोनों के पीछे चलते है.........

रिआन उसको लेके सीधा उधर hi चला गया जहा मधु को वो देख सकते the.......waise देखने का तो वो कही से भी देख लेते पर आम इंसानो की तरह देख सकते वह पे.......

मधु सोल्लगे से वापस आ चुक्की thi......apne पिता से तो मिल aayi....ab आगे के बारे में सोच रही thi........Daksh मां तो वह से चले गए the.......aakhir और भी काम होते hai....par पंकज नहीं गया tha....wo वही पे tha.......aur मधु को बता रहा था धीरे धीरे आगे बढ़ने के बारे में......

क्यूंकि मधु इस वक़्त बहुत आगे का सोच रही thi.......wo अपने माँ पिता के साथ उस घर में हो ऐसा........

पंकज - देखो अभी पहला hi पड़ाव था ये और तुमने ठीक ठाक kiya.......ye जो इतना सोचती हो तुम उसी वजह से सायद वह जाके घबरा रही थी......

मधु - पता nahi.....accha मुझे वापस उनको देखना है......

पंकज - किसको.....

मधु - किसको kya......apne पापा ko........Main उनसे ना जाने कितने सालों बाद मिल्ली hu.....aur......aur हममे वैसी कोई बात भी नहीं हुई......

पंकज - जैसी तुम्हारी कहानी है naa.......usme ये नार्मल hai.......aur अभी ये सोचो कल वह इंसानो के बिच कैसे रहोगी akeli.......koi गड़बड़ नहीं करनी है tumhe......aur jaadu.....bhul के भी नहीं.......

मधु - haa.....yaad है मुझे......

पंकज - ये सब पापा ने कहने को बोलै tha......ab मेरी sunno......maine कुछ मूवीज में देख रखा है ये रैगिंग लेते hai......aur नए लोगो को परेशां करते है कलागेस mein..........agar ऐसा कुछ ho.......to थोड़ी बहुत चालाकी चलेगी.......

मधु - उसकी जरुरत नहीं padegi.......Main वह पे इस बात का ध्यान रखूंगी की किसी मुसीबत में ना padu.......haa पर अगर ऐसी कोई बात हुई तब की तब देखेंगे......

पंकज - हम्म तैयार रहना chahiye......bas देखते देखते वो लोग तुम्हे ना देख le.....jo भी करना आराम se.....tumhari ताकतें उनसे बहुत ज्यादा hai....yaad रहे......

ये दोनों यहाँ बातें कर रहे the.......Rian अपनी बहन को पंकज के बारे में बता रहा tha.........sukar है उसको वो सब पता नहीं tha......ki कैसे प्रतीक ने उसको भगा दिया था वगेरा wagera........warna उसको तो बस एक छोटी सी बात चाहिए thi.....wo निकल पड़ती मधु को बचने के liye.........chahe मधु को इस बात का पत्ता हो या नहीं.......

रिआन - अब चले यहाँ se........yaa यही रहना है.......

"मैं इसको देखना चाहती हु......"

रिआन - देख तो रही ho.......aur कैसे देखना है.......

"मैं उससे मिलना चाहती हु........"

रिआन - Nahi......hum इस बात पे सहमत हुए the.......yaad है naa......to हम नहीं जाने wale.......isse उसको भी परेशानी हो सकती hai.......humme अब वापस चलना चाहिए........

थोड़ा बहुत समझने पे वो समझ गयी और दोनों के दोनों hi वापस चले गए.......

ये सब चल रहा था yaha.......wahi आश्रम में दब अपनी तैयारी किये जा रहा tha........usko पता था वह जाना और वह से वापस आ जाना ये दोनों hi आसान काम नहीं hai......wo जिससे सामना करने जा रहा tha......wo उसके सरीर से सायद लाख या फिर उससे भी ज्यादा गुणा बड़ा tha........par उसको ये करना था......

लीडर को अपने साथ लेकर चल रहा था wo.......Leader के लिए सबसे पहले तो वो चीज़ज़ बनवानी thi.....jisse लीडर को कोई शारीरिक दर्द ना दे सक्के Fumos.......iske लिए वो पुजारी जी के पास भी गया tha.....innn सब के होने में काम से काम 2 दिन का वक़्त तो लग्न hi था.........

नेक्स्ट डे.....

सुबह सुबह मधु तैयार होक्के निकल गयी सोल्लगे जाने के liye........saaman सारे उसके लिए ख़रीदे जा चुक्के थे......

वो सोल्लगे पैदल hi निकली thi.....phir एक ऑटो लेके उससे सोल्लगे तक pahuchi.......waha गेट के पास ऑटो वाले ने रोका और वो भी पैसे देके निच्चे उतर गयी.......

आज भीड़ थी वह pe......matlab लोग the......kaafi सारे लोग the......tarah तरह के......

मधु को इन् सब से घंटा hi कोई मतलब tha.....wo यहाँ आयी थी बस अपने पापा के liye.......par क्या kare......ab जो होना है वो होना है और वो तो होना hi है.....

मधु धीरे धीरे अंदर जा रही thi.....ki तभी उसके सामने कुछ लड़के आ गए........

"नई एडमिशन"

मधु ने उनकी तरफ dekha......haa में अपनी मुंडी हिलायी और साइड से जाने lagi......par वो लोग वापस से उसका रास्ता रोक लिए......

"नाम कौन बताएगा......"

मधु - मधु

नाम बताने के बाद वह से निकलने lagi.......phir से रोक लिया.......

" ऐसे देते है इंट्रो......"

मधु - मुझे इंट्रो देना नहीं आता........

"accha.....theek hai.......chalo हमारे साथ एक्स्ट्रा क्लास लेते है tumhari......intro कैसे देते है ये सिखाते है आज......"

मधु - मैं खुद सिख लुंगी.....

इतना बोलने के बाद मधु वापस से आगे जाने lagi......par इस बार उन् लड़को की हिम्मत सायद ज्यादा बढ़ गयी थी की उनमे से एक ने मधु के कंधे पे हाथ रख diya......aaspass कुछ लोग the......jo ये सब देख रहे the.......wo बस देख hi रहे थे कुछ कर नहीं रहे थे........

मैं भी मधु के पीछे पीछे सोल्लगे तक पहुंच गया tha......aur देख रहा था ये sab.......uss वक़्त तक तो मैंने खुद को रोकके हुए tha.......par इन् लोगो ने उसको हाथ lagaya......wahi पीछे खड़े मैंने अपनी उँगलियों से डार्क पावर का एक छोटा सा अंश बहार निकला hi tha......ki वो खुद से अंदर चला गया......

मुझे याद है ये कब होता tha........Dark पावर जब भी गोल्डन पावर के पास hota.....aur उसको पता होता की गोल्डन पावर को उसकी कोई जरुरत नहीं वो आइए करता tha.......yaani की छह के भी मैं पहले भी मधु की तब तक मदद नहीं कर पाटा tha.....jab तक वो अपने गोल्डन पावर को स्टाबलिजे ना कर लेती thi.......uska उसके पावर पे जो कण्ट्रोल tha.....wo मेरा कभ नहीं हुआ......

मैं सोचने लगा क्या गोल्डन पावर बहार आने वाला hai......agar ऐसा hua......to ये सारे ladke......pata नहीं इनका क्या होगा.......

"क्या हो रहा है यहाँ......."

आगे कुछ होता उससे पहले किसी की आवाज वह पे gunji.......wo आवाज किसी और की नहीं thi......Madhu के पिता की thi.....uss एक आवाज ने गोल्डन पावर को ऐसे दबाया उसके अंदर की वो बहार नहीं आ paaya........uss आवाज से ध्यान जो भटक गया था उसका......

मधु पीछे देखने लग गयी जहा से उसके पिता बोल रहे the......jo इस सोल्लगे के डीन भी थे......

वो लड़के जो अभी मधु के सामने थे वो ऐसे गायब हुए जैसे गधे के सर से शिंग......

उनके एते hi सभी अपने अपने क्लासेज में जाने लग gaye.......ye कुछ सख्त किसम के इंसान लगे mujhe........Main क्लास में नहीं पेड़ के पास tha.....waha से मधु को देख रहा tha......aur वो अपने पापा को........

डीन साहब उसके पास pahuche......aur उसको क्लास में जाने का बोल के आगे बढ़ गए.......

यहाँ डीन सर उस जगह से निकले और सारे लोग जो यहाँ वह हो गए थे वो वापस से आ गए उस jagah......Madhu वही कड़ी rahti....agar उन् लड़कियों के ग्रुप ने उनको वह से हटाया ना होता तो.........

ग1 - ुये तू क्या पागल hai........tu बचने के बाद भी वह पे क्यों कड़ी थी.......

ग2 - हां वो लड़के सही लड़के नहीं hai.......ameer बाप के बिगड़े औलाद है वो saare......unse दूर रहा करियो......

मधु उनकी बातें सुन्न के बस उनका चेहरा देखे जा रही थी........

ग1 - अरे हम भी तेरे सीनियर्स hi hai......haa पर ठीक ठाक wale......acche वाले नहीं बोल सकते हममे भी......

ग2 - हाँ जी अच्छे वाले हममे भी मत samajhna.......ragging तो हम भी लेंगे......

ग1 - और नहीं तो kya......haa पर छोटा sa......aur इजी sa........koi बड़ा सा नहीं.......

ग2 - पर आज नहीं फिर कभी ले lenge.....hai naa.......aaj तू बच गयी इसी बात पे चाय शै हो जाए......

ग1 - nahi.....Chai nahi......pichli बार भी चाय का hi हुआ tha......iss बार faluda......faluda पिलाना होगा......

मधु - पर मैं......

ग1 - अब इसमें भी नाटक karegi......aaj छोड़ रहे तेरे ko.......pareshan हो गयी hogi....kal ना छोड़ेंगे अब चल......

मधु - अरे पर.....

मधु बोलती रही पर उन् दोनों ने उसको पकड़ा और लेके चले गए वही के कैंटीन mein......aur एक टेबल पे जाके चुप चाप बैठ gaye.......Mujhe याक्किन नहीं हो रहा था अभी तब जो लड़कियां चपर चपर करि जा रही थी वो एकदम से शांत कैसे हो gayi.......yahi बात वह मधु भी सोच रही hogi.....tabhi दोनों के चेहरों को देख रही थी.......

उनमे से एक ने मेनू कार्ड उसके हाथ में पकड़ा दिया और चेहरा ढकने को बोल diya.......bol क्या diya.....apne हाथ से धक्का हुआ था.......

मैं ये सब देख रहा tha........Main भी कैंटीन में चला गया और उनके पीछे के टेबल पे बैठ गया...........

मैंने देखा दरअसल उन्ही लड़को में से 2 लड़के यहाँ पे आये हुए थे जिन्होंने मधु का रास्ता रोका tha.......sayad उससे बचने को वो लड़कियां मधु का चेहरा धक्के जा रही थी.......

मधु ने उनसे पूछा क्या बात hui.....aise क्यों कर रहे ho.....par वो जवाब नहीं दे रही thi....bas चुप रहने को कह रही थी........

इन् सब से चिढ़ के उसने अपने चेहरे के सामने से वो मेनू हटा diya......aur कड़ी हो gayi........jisse उन् दो लड़को ने उसको देख लिया......

पता नहीं ये लड़के यहाँ करने क्या आये the......kisi भी तरह से ये तो नहीं लग रहा था वो यहाँ मधु को धुंध रहे hai.......par जब उन्होंने मधु को dekha.....to पहले वाले ने किसी को फ़ोन kiya.....aur फिर गेट के पास चला गया.......

उन् दोनों लड़कियों ने तो पहले मधु को निच्चे बिठाया और उन्होंने भी देखा जो कुछ hua.......phir गहरी साँस लेने के बाद दोनों ने मधु का हाथ पकड़ा और उसको अपने साथ लेके जाने lagi.....par गेट पे तो वो खड़े the.......phir भी वो दोनों मधु को लेके गयी........

"रूक्को अभी कोई बहार नहीं जा सकता......"

ग1 - तुझे पता है ना मैं कौन hu......chal साइड हैट.......

"प्रोफेसर की बेटी तू होगी घर mein.......yaha पे हमारा राज चलता है samjhi.....jo बोलै वो सुन्न और जाके बैठ waha......ooye कैंटीन वाले इनको खिलाओ बे जो खाना है inko......aur पैसे ना ले लेना......"

ग2 - तमीज़ से बात करो......

"tamiz.......tu ज्यादा बोल mat......samjhi.....warna इस नयी लड़की के साथ तुम दोनों का भी......"

मैंने फिर से कोशिश करि डार्क पावर को बहार निकलने ki.......inki बातें सुनने के बाद मुझे इनको इतना दर्द देना tha.....ki इनकी जिंदगी में बस वही एक अहसास बच्चे और कुछ भी nahi.......par ये डार्क power.....bahar आके अंदर चला जा रहा tha.........iss बार भी मधु की वजह से.......

मुझे ये समझ नहीं आ रहा था मैं यहाँ पे क्या ये सब बस देखने आया hu......iss बार मैं आगे जाने को उठा की और लोग आ गए उसी ग्रुप के......

ध्रुव - मैंने आपकी पावर्स काम कर दी hai.....par फिर भी देख के मारिएगा......

मैं पूरा तैयार tha......par कुछ होना भी तो चाहिए tha.......waha से वो सब आये...

मधु - तुम सब वापस आ गए.........

"क्या kare........ab तुमने इंट्रो दिया hi नहीं सही se......to हम लेने आ gaye.....intro....."

एक चूतिये ने ये लाइन boli.....aur उसके साथ उस ग्रुप के सारे लोग हसने lage.......ye बन्दे जैसे अपनी hi दुनिया में खुश the......wo होते है ना तो बे कूल दुदेस वाले log.......wahi थे ये सारे......

ग1 - साइड हो jaao.......abhi भी मौका है.......

"ये दोनों भी है yaha......inse भी बदला लेना है....."

मधु ने सोचा था यहाँ पे वो बस एक hi चीज़ज़ पे फोकस karegi......par nahi......ye तो होने से raha........wo पहले से hi चिद्धि हुई thi......ek तो उस लड़ने ने शुरू में उसको टच kiya......aur उसके बाद वो दो ladkiyan......haa उन्होंने कुछ किया नहीं par.....unki हरकतों से वो थोड़ा और चिढ़ गयी thi........ab ये वापस आ गए थे......

मधु ने जो सबसे पास में खड़ा tha......usko एक जोर का थपड दिया......

पहले कुछ बातें चल रही थी वह कैंटीन mein.......par उस आवाज के baad........uske बाद तो एकदम से सन्नाटा hi चा gaya......aur जिसको लगी th......wo निच्चे पड़ा हुआ था और उसके पास में 2 दांत भी गिर्री हुए थे.......

दोनों लड़कियां जो अभी मधु को सायद बचने की कोशिश कर रही thi......wo दोनों बस मधु को देखे जा रहे थे.......

वो दोनों क्या सब के sab.......Main खुद देखे जा रहा था.......

उस वक़्त जो मैंने देखा वो थोड़ा और अलग tha......uski बॉडी चमकनी शुरू हो गयी thi......golden पावर बहार आने लग गयी thi.......isko देख मैं इस चिंता में चला गया कही पूरी तरह बहार ना आ jaaye.......warna हो गया बेडा पार.....

"आईईईई ladki.........tujhe पता भी है किसको मारा tunne.......MLA का भतीजा है ये......."

जो बोल रहा था उसको भी एक padi.....wo भी निच्चे गिर्रा हुआ था.......

मैं अपनी डार्क पावर को बहार निकलने की कोशिश कर रहा tha......taaki अगर ये गोल्डन पावर निकले भी तो मैं उसको धक् sakku......par वो हो hi नहीं रहा था.......

वह पे अब लड़को ने भी अपना हाथ चलने का सोच लिया tha.....par उनको कहा पता tha......ye कौन hai.......iss बार भी इसको ट्रेनिंग मिली हुई hai.....uss चोर se.......aur उसके बाद पुजारी ji......aur इन् सब से बढ़ के मैंने खुद सिखाया था उसको जब हम इम्मोर्टल थे......

मैं उसके गोल्डन पावर को ढकने की कोशिश कर रहा tha.....aur वो वह पिटाई किये जा रही थी.......

मैं - ध्रुव डार्क पावर बहार क्यों नहीं आ raha.......Main उससे मधु की उन् सब को पीटने में मदद थोड़ी करने वाला हु......

ध्रुव - वो मैंने hi ताक़त कमज़ोर कर दी है naa.......abhi नार्मल करता हु......

उसने सब नार्मल kiya......aur मैंने तुरंत डार्क पावर को बहार निकला और उससे पुरे कांटें को धक् diya......jisse गोल्डन पावर छह के भी वह से बहार नहीं जा पायेगा.......

ये सब करके जब मैंने सामने की ओर dekha......to वह पे बस वो लड़के निच्चे पड़े हुए dikhe.......aur मधु आगे जा रही thi.....aur उसके पीछे वो दो ladkiyan......daudti हुई जा रही थी.......

गोल्डन पावर वापस से उसके सरीर में चला गया tha......Maine बहार जो उसके अंश बच्चे हुए थे उनको अपने पास डार्क पावर के जरिये पा liya......aur आगे बढ़ा.......

मधु ने अच्छी धुलाई करि थी inki.......par थोड़ा तो मेरा भी बनता था ना.........

मैं पास की चेयर पे बैठ gaya......aur डार्क पावर के एक छोटे से टुकड़े को बहार nikala........wo उन् सब के अंदर jaata.....aur बहार aata......pahle की बात होती तो सच में इनकी यादों से इनकी साड़ी खुशियां छिन्न leta.....par अभी की इनकी हालत देख ke......maine ज्यादा कुछ ना करने का सोचा.......

बस 10 सेकंड के लिए डार्क पावर को खुल्ला छोड़ diya....usne इन् सब के हड्डियों को अंदर से जाने तोड़ diya......dard से ये सब के सब बेहोश हो gaye.......wahi बाकी के सब तो इन् सब का वीडियो बनाने में लगे हुए थे......

वीडियो बहुत गलत चीज़ज़ होती hai......log इसको साबुत मान लेते hai.......ab इंसानो का क्या है वो चुप रह जाते है पर ये वीडियोस ये तो बस बोलते रहते है naa.......Main वह पे हर एक मोबाइल और कैमरा में से वो वीडियो हटा diya......thoda जादू थोड़ा technology......isse काम हो गया था......

उसके बाद मैं भी वह से निकल गया........

नेक्स्ट अपडेट में dekhenge.......MLA को वापस se.......aur दब का फोमोस जाना और डेमोस वालो से लड़ना......

:सिघ: तबियत कुछ ठीक नहीं hai......iss वजह से लेट हो गया......
 
अपडेट - 104

हम तो निकल गए वह se.......par उसके बाद वह पे पूरा सोल्लगे hi आ गया tha......aakhir पड़े हुए लोग भी बड़े बाप के बेटे the......ek तो उस मला का भतीजा tha.......aur बाकी के उसके चमचे या दोस्त जो भी the......wo सब भी बड़े लोगो के घर से the.....yaa फिर बड़े गुंडों के बच्चे या रिस्तेदार थे........

सोच के hi हस्सी आती है अगर वो वीडियो जिसमे मधु इन् सब को कुत्त रही थी वायरल हो जाती तो उन् सब का क्या मुँह रह jaata....Khair वीडियोस तो डिलीट हो चुक्की thi......ab उसका कुछ हो नहीं सकता......

प्रिंसिपल सर और बाकी सारे लोग वह पे आ चुक्के थे........

प्रिंसिपल - ये सब क्या hai......kya हुआ था यहाँ पे........

कैंटीन में जो लोग थे उन् सब से पूछा जा रहा था ये सवाल पर वह पे किसी को समझ hi नहीं आ रहा था एक तो उनकी वीडियोस गायब हो चूकककी thi......upar से वो क्या कहे ये समझ नहीं पा रहे the.......khair अब कांतीनवले को तो बोलना hi tha......usne सब कुछ बताया जो भी हुआ जैसे भी hua......sab कुछ बारी बारी से बताया......

प्रिंसिपल सर ने एम्बुलेंस को तो पहले hi फ़ोन करके बुल्ला लिया tha.......aur उसके बाद ये सब सुनने के बाद उन्होंने पुलिस को भी बुल्ला लिया.........

अब ये लौंडे थे बड़े घरों ke.......police तक बात pahuchi......aur साथ hi उनके घरों में भी की उनके लौंडे पीट के बच्चे पड़े है कैंटीन में.........

वो सब भी निकल गए वह se........apne अपने लाल को देखने के लिए........

यहाँ प्रिंसिपल सर अपने ऑफिस में आ चुक्के the........unko उस लड़की का नाम तो नहीं मिला था जिसने मार पीट kari.......par उन् दोनों का तो मिल गया था जो उसके साथ thi.......aur वो दोनों नाम सुन्न के वो कुछ परेशां भी the......aur नाराज़ भी......

उन्होंने सबसे पहले तो उन् दोनों लड़कियों को bualaya......aur साथ में एक प्रोफेसर को भी.......

वो प्रोफेसर कोई और नहीं tha......ye वही है जिसको कुछ दिन पहले प्रतीक ने बचाया tha........aur ये बाँदा उन् दोनों लड़कियों का पिता और प्रिंसिपल सर के छोटे भाई है......

प्रिंसिपल सर के कहने पे hi इन्होने अपने और उनके रिश्ते के बारे में सोल्लगे में किसी से कुछ भी नहीं कहा hai........naa hi इनकी बेटियों ne.........Principal सर तो इस बात से भी गुस्सा थे की उनकी भतीजियों ने अपने पिता के बारे में सोल्लगे के लोगो को क्यों बताया है........

अजीब hai......par जो है यही है.......

खैर इन् तिण्णो को hi वह पे बुलाया गया.......

वो दोनों लड़कियां मधु के पीछे पड़ी हुई thi.......par जब उनको बुलाया गया तो उन्होंने मधु को वही छोड़ दिया और वह से चली गयी.......

उन् दोनों को थोड़ा बहुत समझ आ गया था की किश वजह से उनको बुलाया जा रहा hai.......aur बात पक्की तब हुई जब उन्होंने अपने पिता को प्रिंसिपल ऑफिस में जाते हुए देखा......

"आज तो बड़े पापा हमारी क्लास ले hi लेंगे......"

"देख तू उन्हें सब बता dena.......galti साड़ी उन् लड़को की thi......aur वो भी बताना जो उन् लड़को ने पापा के बारे में कहा था......."

"Nahi......Main kyun.......tu bata......mujhe क्यों फसा रही है....."

वो दोनों ऐसे hi बातें करते हुए अंदर चली जाती है........

प्रिंसिपल - aao......dono बैठो......

दोनों चुप चाप जाके बैठ जाते है वह pe......apna चेहरा निच्चे karke........jaise कोई गलती कर के आये हो.....

प्रिंसिपल - अब बैठे रहोगे या बोलना शुरू karogi.......maine कितनी बार कहा hai........aise मामलों से दुर्र रहा karo......kya मैं ये सब अपने लिए कहता हु......

"नहीं भैया आप ये सब इनकी hi भलाई के लिए कहते है........"

प्रिंसिपल - कितनी बार कहा hai.......ye भैया यहाँ नहीं घर pe.......yaha मैं डीन हु और तुम professor.........bas.......

"यस सर......"

"सर हमारी कोई गलती नहीं hai.......wo उन् लड़को ने hi उस नयी लड़की को परेशां करना शुरू किया tha.......hum तो bas.......usko बच्चा रहे थे उनसे......"

"हां पर हममे कहा पता tha.......humme बचाना उन् लड़को को चाहिए tha.......kya मारा उस लड़की ne......aapko पता भी hai.......wo जो पंच उसने मारा tha.........daant उखड गए थे उस लड़के के......"

प्रिंसिपल - चुप raho.........aur tum......ye बताओ कौन थी वो ladki......naam क्या है uska......mujhe उसके पेरेंट्स को बुलाना hoga.......Main नहीं चाहता इन् सब में सोल्लगे का नाम ख़राब ho.......Main उनसे उसका एडमिशन कही और करने को बोल दूंगा......

"Par......isme उसकी क्या गलती hai......aapko तो उन् लड़को को निकलना chahiye.......aapko पता भी hai.....unn सब ने हममे क्या क्या कहा....."

प्रिंसिपल - मैं ये उस लड़की के लिए कर रहा hu.......tum भी जानती ho......iss सोल्लगे में मैं रहूँगा उसको देखने के liye.....par bahar......bahar का kya.......ye लोग उससे नहीं छोड़ेंगे......

"आपने देखा नहीं कैसे उस लड़की ने उन् सबकी चैतन्य बनाई thi.....agar आप देख लेते to.....abhi आप ये सब उन् लड़को के बारे में बोलते......."

अभी बातें चल hi रही थी की किसी ने दरवाजे पे नॉक किया.......

दरवाजा खुला और वह पे कुछ पुलिस वाले the......saath में और भी कुछ लोग थे......

प1- प्रिंसिपल sir.....aap hi है ना यहाँ के.......

प्रिंसिपल - जी haa.......Maine hi आपको बुलाया tha.......par ये लोग......

प2 - Ye......ye सब उन् बच्चो के घरवाले hai.......puchne आये है इनके बच्चो की ऐसी हालत किसने कर di.......aap बस नाम बता dijiye.....ye चले जाएंगे......

प्रिंसिपल - Ji.......iss बारे में मैं क्या kahu.......darasal मुझे जब पता चला सब कुछ शांत हो चुक्का tha.......Maine वह पे लगे कैमरा के फोटोज मंगवाए hai......wo आ जाए तो बस मैं आपको नाम बता दूंगा.......

प2- हां बस जल्दी से हो जाए वो मला साहेब का काम है naa.......aaj कल कुछ परेशां से रहते है wo......ab और परेशां hue......to बाकी सबको परेशां कर देंगे ना.......

प्रिंसिपल को सब समझ आ रहा tha.......ye पुलिस वाला साफ़ साफ़ धमकी दे रहा था unko......par अभी कुछ करने का वक़्त नहीं tha........wo जानते थे इस वक़्त सबसे पहले तो उस लड़की को वह से बहार निकलना जरुरी hai......wo बहार चली गयी तो ये सब यहाँ क्या hi कर लेंगे......

उन्होंने अपने भाई और भतीजियों को उस लड़की को ढूंढने को kaha.....aur वह से निकलने को kaha.......wo भी इस तरह से की पुलिस वालो को और ना hi उन् बाकी के लोगो को कुछ समझ आये.......

वो तिण्णो लग गए अपने काम में.......

मैं इस वक़्त ऐसे hi यहाँ वह घूम रहा tha.......darasal मधु के hi पीछे लगा हुआ tha......par वो hi किसी पतंग की तरह कभी यहाँ लहराती hui.....to कभी वह लहराती हुई जा रही thi.....pata नहीं सायद कुछ धुंध रही thi......Maine सोचा जाके पूछ लू एक बार फिर लगा ये यहाँ पे मुझे देख के पता नहीं कैसे रियेक्ट karegi........to मैं बस उसके पीछे hi लगा रहा.......

मैंने देखा था की सोल्लगे में बहुत सी गाड़ियां आयी thi......kuch तो वो एम्बुलेंस की थी कुछ पुलिस की पर उन् सब से ज्यादा दूसरी गाड़ियां आयी thi.....kuch बाइक्स the....aur कुछ 4-व्हीलर्स

कुछ कुछ तो लग रहा था मुझे क्या होने वाला hai......main खुद इंसानो के साथ इतने वक़्त से रहता आया tha........mujhe पता है जब भी कोई लड़ाई होती है उसके बाद क्या होता hai.....School में ऐसी चीजजें बहुत बार हो चुक्की थी.....

यहाँ पे मुझे कुछ और करना hoga.....kyunki पता नहीं कब वो सब के सब मधु के पीछे पद jaayenge.....aur मधु का कोई पता nahi.....kab उसकी वो गोल्डन पावर जाग जाए.......

मैं सोच hi रहा था की मैंने dekha........wo बाँदा जिसको मैंने बचाया tha.....aur उसके साथ वो दो लड़कियां जो मधु को बचने की कोशिश में thi......wo तिण्णो मधु के तरफ जा रहे थे.......

मैंने पहले तो उनकी तरफ जाने का सोचा पर फिर वह ना जाके बहार गेट की तरफ जाने लग गया.......

मैंने अपना फ़ोन निकला और सबसे पहले तो चाचा जी को कॉल kiya.......Mujhe पता था उनके कॉन्टेक्ट्स होंगे जरूर यहाँ pe.......waise भी हमारी फॅमिली होटल्स के बिज़नेस में thi....aur वो भी देश विदेश में......

खैर मैंने चाचा को कॉल kiya.....aur उनको यहाँ पे जो कुछ भी हुआ वो सब bataya.......pahle तो वो थोड़ा परेशां हो गए......

चाचा - तुमने या मधु ने किसी मैजिक का उसे तो नहीं किया naa........kisi को पता तो नहीं चला की तुम दोनों......

मैं - Nahi......Maine ऐसा कुछ नहीं kiya.....aur मधु ने भी nahi....haa सायद उसने उन् सब को मारते वक़्त ज्यादा hi ताक़त लगा दी थी.....

चाचा - हम्म यहाँ तक ठीक है फिकर की कोई बात nahi......par पावर्स उसे ना hi करो तो अच्छा है.....

मैं - वो मैंने सारे फ़ोन्स से उस वक़्त का वीडियो हटा दिया था......

चाचा - Kya....ye क्या kiya......isse मधु उन् सब के सामने अजीब बन jaayegi....aage से इन् बातों पे गौर karna.......Main भेज रहा हु किसी ko.....wo सब संभल लेंगे......

मैं - हम्म ठीक है......

कॉल रखा hi था मैंने की मैंने dekha......saamne से मधु गुस्से में वह से प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ जा रही thi....aur उसके पीछे वो तिण्णो भी.......

मैं भी पीछे पीछे हो गया.......

जब वह पंहुचा तो मैंने जो देखा उससे गुस्सा तो आया tha.......par उससे भी ज्यादा उस बन्दे पे तरस आ रहा था mujhe......jisne अभी प्रिंसिपल का कालर पकड़ा हुआ था.......

पोलिसवाले जो दोनों थे वह पे वो दोनों के दोनों hi हाथ में अखबार लेके बैठे हुए the......Principal सर उनसे बोल रहे थे की उनको chudwaye.......par वो तो ऐसे बैठे थे जैसे वह कुछ हो hi नहीं रहा था.......

मधु पता नहीं यहाँ पे किश बात पे गुस्सा होक्के आयी thi.....par इसको देख ke.....wo बात उसके दिम्माग से निकल गयी और गुस्सा हद्द से ज्यादा बढ़ गया......

दब - अरे यार तुम्हे कब से धुंध रहे है hum.....pata भी hai.......kaha कहा गए तुम्हारी तलाश में हम दोनों.....

मैं वह मधु को देख रहा था की मेरे सामने दब और वो लीडर आ गए.......

मैंने उनको साइड किया और खुद मधु के पीछे जाने लग gaya....par देर तो हो चुक्की thi......yaa ये kahu.....Madhu कुछ ज्यादा hi जल्दी में thi.......agar मैं नार्मल इंसान hota.....to अभी मैंने अपनी पलकें भी नहीं जपकाइ होती और उतने में वो बाँदा जिसने प्रिंसिपल सर का कालर पकड़ा हुआ tha......wo निच्चे जमीं पे पड़ा हुआ tha......aur उसके खून से व्वहा का मार्बल लाल हो चुक्का था......

सब के सब हक्के बक्के रह gaye.......waha सब कुछ hi बदल गया tha......Principal सर अपने कुर्सी पे बैठे हुए the.....unke ठीक पीछे मधु कड़ी हुई thi......niche जमीं पे वो बाँदा पड़ा tha....aur उसके खून से मार्बल लाल हो रहा था.....

दोनों पुलिस वालो ने अपने सामने से वो पेपर हटाया और देखा प्रिंसिपल अपने कुर्शी पे है......

प2 - एई ladki......kaun है tu.....kisse पूछ के यहाँ aayi.....ye सब क्या hai.....kaise हुआ ये.....

दब - लगता है अंदर कुछ जरुरी चल रहा hai.....Mujhe भी वह जाना चाहिए.......

मैं खुद आगे से अंदर जा रहा tha.....waha पे बैठे सभी लोग पहले से hi हक्के बक्के थे की दरवाजा फिर से खुल्ला और इस बार मैं और दब थे वह पे.......

प1 - क्या हो रहा है ye......ye कोई सिनेमा हॉल है की कोई भी आ जा रहा hai......Principal भगाओ इनको यहाँ se.....aur जल्दी से उस लड़की को यहाँ bulao....warna....

वो आगे कुछ बोलता उससे पहले दब उसके पास पहुंच gaya....aur उसके गार्डन के निच्चे एक बार मारा जिससे उसकी आवाज आणि hi बंद हो गयी thi......itne में दूसरे पुलिस वाले ने अपनी बन्दूक निकल ली......

मैंने डार्क पावर उनके अंदर भेज di.......wo वही पे निच्चे गिर gaya.......aur चिल्लाने लग गया......

इतने में वह पे वापस से दरवाजा khula......iss बार वह पे लीडर था.......

लीडर - कोई आ रहा hai......humme निकलना hoga......DB

दब ने उसकी तरफ dekha.....aur फिर मुझसे kaha.......Main तुमसे बाद में बात karunga......abhi मुझे जाना होगा......

और वो वह से गायब हो गया लीडर के saath........ye सब कुछ वो इंसान भी देख रहे the........ab मुझे ये समझ नहीं आ रहा था ये सब कैसे कवर उप karu.......inn सब को मार dena......ye कुछ नहीं बहुत ज्यादा हो jaata......agar डार्क पावर का उसे करके इनके दिम्माग से वो चीजजें hi निकल दू तो बात अलग thi......par प्रिंसिपल और उन् तिण्णो का kya........Principal सर को दर्द हुआ तो मधु मुझे मार देगी.......

इतने में वापस से दरवाजा khula.....saamne K.bua thi.....aur उनके साथ कुछ और लोग......

K.Bua - बहार niklo......Bhaiya ने कहा था ना कुछ मत karna.......ye कुछ नहीं है क्या.......

मैं - Bua...wo...

K.Bua - बहार niklo....Madhu तुम भी.....

मधु - नहीं.....

K.bua - ये बच्चे भी naa.........tum सब क्या देख रहे ho......kaam शुरू करो......

उन्होंने दरवाजा बंद कर diya....aur कुछ तो कर रही थी वो sab.....par मुझे पता नहीं था ये सब क्या हो रहा है........

कभी किसी के सर पे हाथ रखती तो कभी किसी के......

जब प्रिंसिपल के सर पे हाथ रखा तो मधु ने उनको रोकना चाहा पर K.bua ने अपना काम कर दिया tha.......kuch hi देर में वो सब के सब बेहोश पड़े हुए थे.......

K.bua - अब बहार jaaoge.....tum दोनों को यहाँ देख के ये सब कंफ्यूज हो jaayenge.....aur इनको खतरा भी हो सकता है.......

मधु - आपने क्या किया इनके saath.......ye ऐसे बेहोश.....

K.bua - कुछ नहीं बस कुछ देर की यादास्त को मिटाया hai......aur कुछ नकली यादें इनके दिम्माग में प्लांट करि hai......Ab बहार jaao......humme इनको होश में भी लाना hai.......ek minute....jo जहा था उसको वह का बताओ मुझे.....

हमने उन् सब के पोसिशन्स के बारे में उनको bataya......wo दो लड़कियां और प्रोफेसर को हमने गेट के बहार खड़ा किया......

K.bua - हम्म सब ठीक है ना ab......arre इसके सर से खून निकल रहा hai......iska कुछ करना होगा......

उनके किसी साथ ने उसके घाव को काम चलौ रूप से ठीक कर diya....aur वो सब वह से बहार आ gayi.....aur उसके बाद hi सभी को होश आ गया......

यादों के साथ खेलना ये बहुत बड़ी बात होती hai.......logo को बहुत परेशानी होती है इन् सब को समझने mein......wo वक़्त को समझ नहीं पाते hai.......aur तो और दिम्माग के साथ कुछ होने पे दिम्माग का लिक्विड काम हो जाता है जिससे लोगो के सोचने की क्षमता काम हो जाती है कुछ वक़्त के लिए......

इन् सब को होश आया और ये सब एक दूसरे को टाक रहे थे bas........Principal सर ने वह पड़े हुए पानी का गिलास उठाया और पूरा एक बार में hi पि gaye......par उनकी प्यास नहीं बुझी......

बहार जो तिण्णो थे उनका भी यही हाल tha....khair उन्होंने पानी पिया और उसके बाद वो अपने काम पे लग gaye......matlab वो मधु को ढूंढने को निकल गए.......

मधु जो अभी हमारे साथ थी......

मधु - आप सब यहाँ पे क्या कर रहे hai.......aur तुम यहाँ क्यों हो.....

K.Bua - तुम्हे बताया गया होगा इंसानो के सामने जादू नहीं करना hai........aage से इस बात का ध्यान rakhna......agar मार पीट होती hai......(unhone एक बार अपने आस पास के लोगो को dekha......wo सब हेड ऑफिस के लोग the.....unke सामने ऐसी बात वो नहीं बता सकती thi.....)......Main बाद में कभी बता dungi.......par इन् सब से दुर्र raho....aur जादू नहीं करना है......

मधु - Wo.....unhone पापा का......

K.bua - अच्छा वो है तुम्हारे papa.....mujhe थोड़ा शक हुआ tha.....par....khair कोई बात नहीं वो ठीक है abhi.....Maine अभी की घटना को मुइत्ता दिया hai......apna फ़ोन निकालो और जाके वीडियो रिकॉर्ड karo.......gusse से कुछ नहीं होने wala....dimmag lagao.....log आते hi honge.....bas कुछ देर संभल लो.....

K.bua अपने साथियों के साथ वह से चली गयी.......

मधु मुझे देख रही thi....aur मैं usko......phir उसने अपना फ़ोन निकला और वह चली गयी ऑफिस के दरवाजे के पास........

अभी सब के सब लगभग से संभल चुक्के थे......

प1 - प्रिंसिपल साहब wo......video ा गयी क्या.....

प्रिंसिपल - video.....kaun si.....arre नहीं nahi....abhi वो आता hi होगा......

प2- वक़्त बहुत लग रहा hai.....kahi लड़की निकल गयी to......tum सब यहाँ क्या मुँह देखने आये ho.....Principal साहेब को कुछ बोलते क्यों नहीं.....

पुलिस वाले के कहने के बाद पीछे खड़े लोगो में से कुछ आगे gaye....aur उनमे से एक जिसका अभी सर फटता हुआ tha....wo गया प्रिंसिपल सर के पास और उसका कालर पकड़ा........

मधु को वापस से गुस्सा आ रहा था पर वो चुप rahi....aur बस वीडियो लेती रही......

वही अंदर प्रिंसिपल सर ने उस बन्दे से खुद को छुड़ाने के लिए थोड़ा पीछे धक्का hi दिया tha....ki उसका सर फट gaya....aur बहुत सारा खून निकलने लग gaya......waha खड़े लोग तो एकदम से चऊक gaye.....wo समझ नहीं पा रहे थे......

समझ तो खुद प्रिंसिपल सर भी नहीं पा रहे the.....achanak से इतनी ताकत कहा से आ gayi....ek डेरे का धक्का और सामने वाले का सर्र hi फैट गया.....

पुलिस वालो को भी समझ नहीं आ रहा था kuch.....par उनको एक मौका मिल गया प्रिंसिपल को डरने का और काम जल्दी करवाने के.....

प2 - पुलिस के सामने मर ppeet......charges तो बनते है.....

प्रिंसिपल - आपने देखा उसने शुरुवात करि thi.....Main बस बचाव कर रहा था खुद का......

प1 - किस किस ने देखा hai......tum सब ने देखा hai.....Maine तो नहीं देखा......

"मैंने देखा hai.......aur इस कैमरा ने bhi......Pramod माथुर यू अरे suspended........aur आप सी ji......sunna है मला साहब का हाथ है आपके upar.....ab वो भी आपके ऊपर आ जाए तब भी आपका सस्पेंशन कोई नहीं रोक sakta.......you अरे आल्सो suspended......baaki सभी को भी उठाओ यहाँ से......"

मधु अभी वीडियो ले hi रही थी की वह पे बहुत से लोग आ gaye.....ek तो पुलिस कमिश्नर tha......aur कुछ मीडिया वाले थे वह पे.......

जब पुलिस वालो ने अपनी बात कही तो वो सब मधु के साथ साथ उन् लोगो ने भी रिकॉर्ड कर लिया था......

दरअसल रैगिंग का मामला tha......aur ये बाते जब हायर ऑफिशल्स को पता चला तो वो सब वह आ gaye.....aur मीडिया का तो पता hi hai.....makhi की तरह होते hai.......to वो भी आ गए.......

P.C - रैगिंग का मामला है ye.....unn लड़को को हॉस्पिटल के बाद सीधा जेल में hi आना hoga......Principal sir......unn सब के पेरेंट्स को खबर करा dijiyega......ab वो कुछ साल बाद hi दिखेंगे घर mein.....Ladki....uss वीडियो को सभी जगह वायरल कर do......inn सब को भी सज़्ज़ा मिलनी chahiye......Police की इमेज ख़राब करने वाले इन् ऑफिसर्स को भी पब्लिक सज़्ज़ा degi.....canteen वाले से और बाकी सब से बयां लेने के बाद उन् सब को सज़्ज़ा जरूर मिलेगी.....

यहाँ ये सब चल रहा था वही दब जो ाभ्ही अभी यहाँ से गया tha......wo सीधा जा पंहुचा था फोमोस के pass......Leader के साथ.....

लीडर - वह जाने के baad.....main सायद तुम्हारी मदद नहीं कर पाऊंगा.......

दब - नहीं आपको करना भी नहीं hai......bas जाइये और उनसे boliye.......log नज़र रखे हुए है फोमोस के ऊपर......

दब ने ये कहा और लीडर को अपने हाथों से इशारा करके दिखाया की कितने सारे जगहों पे डेमोस के लोग है वह pe......wo सब के सब फोमोस पे नज़र बनाये हुए थे.....

लीडर फोमोस पे चला गया........

फोमोस अभी भी इसी सोच में लगा हुआ tha.....kya उसको अभी hi भरोषा कर लेना चाहिए स्लेयर पे या फिर उसको और टॉड देना चाहिए........

तोड़ने का तरीका भी टी वो समझ नहीं पा रहा tha.......Leader के वक़्त में उसने लीडर के परिवार का उसे किया tha....par ye......Slayer का कोई अपना जिन्दा hi नहीं tha......wo बस अकेला hai.....sayad ये भी वजह है की वो hi सबसे अच्छा ऑप्शन है फोमोस के लिए......

लीडर के फंसो पे आते hi उसको पता चल गया tha.......par फोमोस से बिन्ना बात करे hi लीडर ने फोमोस के क्रीचर्स को सीधा डेमोस के लोगो पे हमला करने को बोल दिया.......

फोमोस को इस बारे में बिलकुल भी पता नहीं tha.......aur ऐसे अच्चानक हुई हलचल से वो कुछ चौवक गया था.....

फोमोस ने उन् सब को जाने diya.....par साथ hi लीडर से बात करने की भी thaani......aur.....

फोमोस - तुम जल्दी आ gaye.....iss बार भी.....

लीडर - मुझे खबर मिली thi....yaha पे चीजजें ठीक नहीं है......

फोमोस - ठीक नहीं hai......Maine यहाँ हर एक चीज़ज़ अपने काबू में रखा हुआ tha......tum ये कैसे कह सकते हो.....

लीडर - सायद यही वजह है की तुम्हे मैं चाहिए होता hu......upar से नज़र रखे हुए है डेमोस के log.......Sayad लूसिफ़ेर की कोई साज़िश है......

फोमोस - Lucifer......wo भला क्यों अपने पैरों पे कुल्हाड़ी maarega.......usse पता नहीं kya....ki Main......ooh.......Main समझ गया.....

फोमोस ने एकदम से अपनी बात को बदल diya.....aur साथ hi लीडर को उन् लोगो को वह से हटाने को कहा.....

लीडर भी वह से चला gaya.....aur डेमोस के उन् लोगो पे हमला करने लग gaya.......usne देखा दब भी उसकी मदद कर रहा tha.....wo भी उन् सब को मार रहा tha.......Demos के ये लोग लड़ने में उतने सक्षम नहीं the......ye दरअसल बस नज़र रखने के लिए the.......Lucifeer ने उनको उतनी hi दुरी पे रखा था जहा से फोमोस को या फिर लीडर को उन् सब का पता ना chale......par दब ने जब टेलिपोर्ट किया तो वो भी उतनी hi दुरी पे हुआ था जिससे इनको पता चल गया था.......

वो सब लगे हुए the.......apne काम mein.......aur तभी अच्चानक से हमला शुरू हो gaya......pahle तो बस एक तरफ se.....par उसके बाद बाकी जगहों से bhi......Wo सब घिरर चुक्के थे......

ये सब कुछ देर chala......Fumos के क्रीचर्स ने उन् सब को मारा nahi......balki उनको बंधी बना के अपने यहाँ लेके आ gaye.......isse वह पे लोग भी आ जाएंगे और उसके साथ hi लूसिफ़ेर से सवाल कर सकते थे वो......

फोमोस को पता था किस वजह से लूसिफ़ेर ने इन् सब को वह भेजा tha.........wo जरूर अपने बेटे के सोल के लिए आया hoga.......par वो स्लेयर के बारे में नहीं सोच रहा था.......

जब ये सब ख़तम hua........to फोमोस के एक क्रेअटुरे ने दब को भी पकड़ने की कोशिश kari......ye समझ के की वो भी उनका hi बाँदा hoga........par लीडर ने दब को उनके हाथ नहीं लगने दिया.......

लीडर ने दब को खुद का गेस्ट बताया और उसको फोमोस पे ले जाने को कहा........

फोमोस को जब पता चला की लीडर अकेला नहीं आया है अपने साथ एक मेहमान लेके आया hai......to उसको थोड़ा अजीब लगा........

लीडर ने अपनी पत्नी के अलावा कभी किसी को वह नहीं बुलाया tha......aur कुछ वक़्त बाद तो उसको भी वह नहीं बुलाने लगा था वो......

फोमोस इस बारे में लीडर से बात करने वाला tha.......par उससे पहले उसको डेमोस पे खबर पहुचानी थी........

फोमोस ने लीडर को आदेश दिया की वो अभी अभी पकडे गए लोगो में से किन्ही दो लोगो को पूरी तरह घायल karke.....bas इस काबिल चोदे की वो वह से टेलिपोर्ट हो सक्के डेमोस में.......

फोमोस की बात लीडर को माननी hi thi.....bas उसने वही किया......

पर लीडर के नज़रों से बचते hue.......DB ने कुछ और hi कर दिया था उन् दो लोगो के saath......ek संदेसा था......

दब जानता tha......Fumos को हराना उसपे काबू पाना वैसा hi है जैसा किसी जंगली घोड़े पे काबू पाना और उसकी सवारी करना........

दब को ना तो सिर्फ अंदर से बल्कि बहार से भी इस बारे में कुछ करना था.........

दब को पता नहीं कहा se......magar ये बातें पता thi......Lucifer क्यों यहाँ पे नज़र रखे हुए hai.....DB सब जानता था......

तो उसको इस बात पे भी पूरा याक्किन tha......Fumos को हारने में वो उसकी मदद करेगा hi.......Par वो ये बात भी जानता tha.......ki वो सीधा लूसिफ़ेर से नहीं मिल सकता था......

लूसिफ़ेर से सीधा मिलना मतलब खुद को बदनाम कर देना हो jaata........chahe वो कितनी भी कोशिश कर leta.....par लोगो को पता चल hi जाता उसके मुलाकात के बारे में जैसे उसको पता चला था जस्टिन के बारे में......

खैर लूसिफ़ेर के पास उन् बॉडीज को भेज दिया गया.......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है लूसिफ़ेर का क्या जवाब होता hai.....aur कैसे दब इस फोमोस पे काबू पाटा है.......
 
अपडेट - 105

कुछ खास अच्छा वक़्त नहीं चल रहा था लूसिफ़ेर ka.......bete को खू diya.......uske बाद उसके सोल को भी एक ऐसे जगह फसा पाया जाहा से वो छह के भी उसको तुरंत नहीं निकल सकता था.......

डार्क पावर को ढूंढने के लिए इतने लोग भेजे पर फ़ालतू के जवाबों के अलावा और कोई जवाब मिला hi नहीं......

परेशानियां उसके लिए बस बढ़ती hi जा रही thi.......iss वक़्त वो बैठा अपने कमरे में शराब पी रहा tha........bas वही उसकी परेशानिओं को कुछ देर के लिए उससे दूर कर देती थी.......

नशा चढ़ना शुरू hi हुआ था की उसके कमरे के दरवाजे पे दस्तक हुई......

"कौन है......"

"महाराज दरबार mein......waha वो......"

लूसिफ़ेर - साफ़ साफ़ bolo......Kya बात है.....

"महाराज वह दरबार में हमारे गुप्तचर आये हुए hai.....jakhmi हालत में...."

लूसिफ़ेर - Guptchar.......kaun से wale........Unhe जल्दी से इलाज़ के लिए भेजो मैं आ रहा हु वह.......

लूसिफ़ेर अपने रूम से निकला और जाके दरबार में अपने गद्दी पे बैठ गया.......

थोड़ी देर बाद वह पे उन् दोनों को लाया gaya........par अभी भी कोई मरहम पट्टी नहीं की गयी थी........

लूसिफ़ेर - इनका इलाज़ शुरू क्यों नहीं किया gaya.......kya है ये सब.......

तभी वह पे वह का वैद आ gaya.......aur उसने कुछ ऐसा कहा जिसको सुन्न के लूसिफ़ेर की आँखें बड़ी हो गयी........

वही फोमोस पे......

दब महल में tha........wahi महल जिसमे लीडर रहा करता था......

फोमोस की नज़रें उसके ऊपर hi थी.......

दब पूरी तैयारी के साथ आया tha.........wo इस वक़्त बिलकुल शांत tha......bas अपना गेम शुरू होने का इंतज़ार कर रहा था wo.........Fumos को कभी ये बात पता नहीं चलेगी की बस कुछ वक़्त baad......wo......wo नहीं बचेगा जो वो है.........

इन् सब से दुर्र एअर्थ पे......

मधु - तुम यहाँ क्या कर रहे हो.......

मैं - मैं भी यहाँ पढ़ने आया hu.......Tum भी यहाँ हो.......

मधु - पुजारी जी ने भेजा है tumhe.......unko क्या कोई और नहीं mila.......tumse अच्छा पंकज hai....pata नहीं पुजारी जी को क्या हो गया.......

मैंने उसको नहीं बताया की मैं hi हु वो जो यहाँ पे उसकी रक्षा के लिए आया hai......par उसने पहले hi गेस कर liya......aur ऊपर से मुझे पंकज से भी बत्तर बता रही है......

मैं आगे कुछ बोलता उससे पहले........

मधु - देखो मैं यहाँ बहुत जरुरी काम कर रही hu.....agar तुमने कुछ भी गड़बड़ की तो मैं hi तुम्हे मार दूंगी.......

मैं - अरे मैं यहाँ हेल्प करने आया हु......

मधु - मुझे नहीं चाहिए कोई हेल्प अगर तुम मेरे काम में बिच में आये तो समझ लेना.......

प्रिंसिपल सर - Madhu.....Tum मेरे साथ ऑफिस में aao......mujhe तुमसे कुछ बात करनी hai.....Tum यहाँ क्या कर रहे हो........

मैं - Wo.....Main बस ऐसे hi......

प्रिंसिपल - सोल्लगे ख़तम हो जाएगा और तुम यही जवाब देते रह जाओगे जाओ पढाई करो......

ऐसे कौन बात करता hai.......dono hi बाप बेटी एक जैसे है.......

मैं वह से जाने लग gaya.....tabhi थोड़ी दुर्री पे वो तिण्णो मिल gaye.....wo दो लड़कियां और उनके पिता जिसको मैंने बचाया था.......

वो - Arre.......tum......tum तो.....

मैंने उसकी ओर नहीं देखा और बस आगे बढ़ गया.......

"पापा बड़े पापा हममे बुला रहे hai.....usko क्या देख रहे हो चलो ना....."

"तुम दोनों वह jaao.......Mujhe इस लड़के से बात करनी hai.......bhaiya को तुम दोनों से काम है वैसे भी......."

इतना बोल वो वह से निकल गए मेरे पीछे वही वो दोनों लड़कियां अंदर चली गयी ऑफिस के.........

वह पे मधु कड़ी हुई thi.....aur वो दोनों भी अंदर चले गए और खड़े हो गए.......

प्रिंसिपल - मधु ये सब जो भी hua.......wo अच्छा नहीं hua......Agar तुम चाहो तो मैं तुम्हारी साड़ी फीस रिफंड करा सकता hu.......jisse तुम किसी और सोल्लगे में जा सकती हो.......

मधु - Nahi......Mujhe नहीं chahiye.....aur मैं क्यों जाउंगी यहाँ से.......

प्रिंसिपल - बीटा मैं तुम्हे दर्रा नहीं raha......par ये log.....wo सही नहीं hai.......Mujhe पता है वो तुम्हारे पीछे आएंगे hi.......Main नहीं चाहता की तुम्हे कुछ हो......

मधु - आपने मेरे लिए इना सोचा उसका बहुत बहुत sukriya.....par......Main नहीं जाना चाहती kahi......Main यही ठीक हु....

"हां बड़े पापा ये सही hai.......isne जैसे उन् सब को मारा था naa......uss हिसाब से इसको वो सब छू भी नहीं सकते...."

बोल तो diya.....par उसके बाद प्रिंसिपल सर उसको घूरने लग gaye.......abhi कुछ देर पहले hi मन्ना किया था रिलेशन्स को घर में रखना है यहाँ नहीं बताना hai......par

खैर अब बोल तो दिया था.......

मधु ने भी ये बात sunni......par वो समझ नहीं paayi.......Ye बड़े पापा क्यों कहा उस लड़की ने उसके पिता को......

प्रिंसिपल ने आगे उन् दोनों से कुछ नहीं kaha......bas मधु की तरफ देखा.......

प्रिंसिपल - ठीक hai......par मैं एक बार तुम्हारे पापा से बात करना chahunga......phir तो तुम्हारी मर्जी hai.......Main उनसे बात कर lunga......tum जाओ......

मधु वह से निकली hi थी की अंदर बाकी दोनों लड़कियों की क्लास लग gayi......unko डांटा प्रिंसिपल ne.......aur ये भी कहा की ये बात बहार किसी और को पता नहीं चलनी चाहिए.......

यहाँ मैं आगे बढ़ गया था अभी कैंटीन तक पंहुचा hi था की वही प्रोफेसर आ गया मेरे pass.......jisko मैंने बचाया था उस दिन.....

"बीटा आप इसी सोल्लगे में हो....."

मैंने उसको पहचान तो लिया tha........par मेरा मैं नहीं था अभी किसी से बात करने ka.......Maine उसको देखा और ऐसे बेहवे किया जैसे मैं उसको जानता hi nahi.......mujhe लगा वो चला jaayega......par मैं तो हमेशा की तरह hi गलत था......

वो बैठ गया वही मेरे सामने कुर्सी लेके......

"अरे याद नहीं उस din.......tumne मुझे बचाया tha........tum क्या लाडे थे उन् सब से........"

मैं - मैंने आपको नहीं बचाया था उन् सब ने मेरे पेरेंट्स को गाली दो थी उसका बदला लिया tha......main ऐसे hi हर किसी की मदद करता नहीं फिरता.......

मेरी बात सायद उसको बुरी lagi.....par मुझे kya.....main तो बस चाहता था ये चला जाए यहाँ से और मैं थोड़ी देर अकेला rahu......par नहीं......

इतना ज़िद्दी इंसान क्या hi बताऊँ......

"अरे ये बात भी सही hai.....ab हर किसी की मदद क्यों करते रहोगे tum.......tum क्या कोई भगवान् ho........waise एक बात और भी सही hai.......Tumne उनसे बदला hi लिया tha......par उसके चक्कर में मैं भी तो बच गया naa.......Main इसी सोल्लगे में पढ़ता hu.....aur वो saare......wo सब भी यही के स्टूडेंट्स the........abhi भी hai......par जबसे तुमने उनको पिता hai......wo यहाँ आये hi nahi......yaha क्या घर नहीं गए अभी तक वो saare........itni जोर से मारा था तुमने उनको....."

मैं - देखो सर मुझे अभी अकेला रहने do.....main थोड़ा परेशां hu....aur आप हो ki....bas गले लगे जा रहे हो......

"Oooh.......accha ठीक hai.....Main जाता hu......Par मेरी एक बात सुन lo.......wo अगर तुम मेरी थोड़ी और मदद कर दो तो....."

मैं- मैंने कहा मैं ऐसे hi किसी की भी मदद नहीं करता......

"अब तो मैं तुम्हारा प्रोफेसर हु naa......ab तो मदद कर hi सकते ho......dekho मन्ना मत करना मैं इस बारे में बहुत वक़्त से सोच रहा था पर मुझे कोई मिला hi नहीं जिसको मैं इस काम के लिए bolu.......Tum hi कर सकते हो बस ye.......manna मत करना......"

मैं - क्या yaar.......accha बताइये क्या काम hai......dekho मैं पक्का नहीं कह सकता की ये करूँगा hi......

"वो दरअसल बात ये है की मेरी दो बेटियां hai......wo इसी सोल्लगे में hai.......par ये Collage.....ye यहाँ का सबसे अच्छा सोल्लगे है...."

मैं - तो इसमें क्या परेशानी hai.....apki बेटियां सबसे अच्छे सोल्लगे में hai.....aapko इस बात से परेशानी है......

"अरे तुम पूरी बात तो sunno........Ye सबसे अच्छा सोल्लगे है पर यहाँ के स्टूडेंट्स वो सारे अच्छे नहीं है naa........kuch को तो तुम जानते hi ho.......wo सब जिनको तुमने पिता tha.....unn जैसे बच्चे भी तो है yaha......Mujhe कुछ हो जाए इस बात की चिंता नहीं है mujhe......par मेरी bacchiyan......wo dono......aaj hi कुछ लड़के उनके saath......Main बस इतना चाहता hu.....tum उनको मुसीबतों से बच्चा के rakho.....dekho मैं पैसे दे सकता हु इसके लिए....."

मैं - कैसे बाप हो aap......aap खुद अपनी बेटियों को इन् सब से नहीं बच्चा सकते......

मैंने इस बार ज्यादा बोल दिया tha.......Mujhe ये नहीं बोलना चाहिए था......

" हां मुझे पता है मैं अच्छा पिता नहीं hu.....nahi बच्चा सकता हर बार उन् सब se......Issi वजह से तो तुम्हे बोल रहा hu.....agar तुमने हां कर diya.....to मैं काम परेशां rahunga.....aur अपने काम पे ध्यान दे सकूंगा......"

मैं - ठीक hai.....aur सॉरी मैंने थोड़ा ज्यादा बोल diya......Par आपको मुझपे पूरा याक्किन है की मैं उनके साथ कुछ उल्टा सीधा नहीं करूँगा.....

"बीटा तुम्हारी उम्र के बच्चो को पढ़ता हु main.........ye आँखें तुरंत पहचान लेती है की कौन कैसा hai........Mujhe पूरा याक्किन है तुम उस तरह के तो नहीं ho........dekho तुमने हां कर दिया hai.....Main तुम्हारी पढाई में भी मदद करवा dunga.....aur तो और कभी भी जरुरत हो मुझे कह दिया करो मैं सब देख लूंगा......"

मैं - हम्म ठीक hai......par आपकी वो बेटियां कहा है अब जब तक मैं उनको देखूंगा नहीं तब तक कैसे उनको प्रोटेक्ट कर सकूंगा......

"वो अभी प्रिंसिपल ऑफिस में hai......tum वही चलो मैं उनको तुमसे इंट्रोडस करवा देता हु......"

मैं - चलिए......

मैं चल दिया उनके साथ अभी ऑफिस के पास पंहुचा hi था की मधु वापस से िखै di.....wo अपना सर्र खूज्जा रही थी कुछ सोच रही थी sayad......confuse थी बेचारी.....

उसने भी मुझे dekha....aur देखते hi मेरी तरफ आने lagi.....par फिर ृक्क gayi.....aur यहाँ वह देखने lagi.....Main उसके पास पंहुचा तो वो वो फिर पास आने लगी पर फिरर पीछे चली गयी......

"बीटा वो दोनों ऑफिस में hi hai.....tum यही रूक्को मैं उनको लेके आता हु....."

इतना बोल वो प्रोफेसर अंदर मुझे वही छोड़ आगे चले gaye.......Main वही नहीं रुक्का मधु के पास चला गया......

मैं - क्या hua......koi परेशानी है......

मधु - Nahi......tum वापस से आ गए यहाँ.......

मैं - तुमने देखा ना वो प्रोफेसर मुझे लेके आया था......

मधु - Haa......ye तो hai.....Maine dekha....accha तुम क्या मुझे कुछ बता सकते हो......

मैं - हां हां जरूर पूछो न क्या पूछना है.....

मधु - ये पापा का मतलब होता है पिता ठीक है naa.....ye मैं जानती hu......par ये बड़े पापा ये क्या होता hai......bade पिता ऐसा भी कुछ होता है क्या.....

मैं - बड़े Papa.....iska मतलब हुआ पापा के बड़े bhai......wo कुछ लोग चाचा ना कहके बड़े पापा भी कहते hai......ye यहाँ आम बात hai......sabki बोली एक दूसरे से अलग hi होती है......

मधु - मतलब मेरे पापा उन् दोनों के बड़े पापा hai....to वो उन् दोनों के बड़े चाचा hue......to उन् दोनों के पापा मेरे चाचा हुए.....

मैं - क्या बोल रही हो......

मधु - तुमसे matlab.....jaao यहाँ se....Main अपना काम खुद कर लुंगी.....

मैंने उसको dekha....aur जाके वही ऑफिस के पास खड़ा हो gaya.......phir देखा तो वो भी वही आ रही thi......Mujhe लगा फिर से कुछ पूछना hoga....par इस बार मैंने खुद से कुछ नहीं kaha.....ab क्या हर वक़्त बेइज्जती करवाता फिरऋण......

5 मिनट चुप रहा Main......wo वही ऑफिस के पास मेरे साथ कड़ी थी......

मैं - अब क्या hua.....kyun आई हो यहाँ.....

उसने मेरी ओर dekha.....nahi ghoora.....isko घूरना hi कहते है......

मैं - अर्र्रे मेरा मतलब कुछ और पूछना है तो पूछो.....

उसने कुछ नहीं कहा बस थोड़ा आगे चली गयी......

मैं भी उसके पास चला gaya....par कुछ बोलता उससे पहले.......

मधु - तुम ये जो मेरा पीछा कर रहे हो naa......dekho मैं बता रही hu......Pujari जी को बोल के भगा दूंगी यहाँ se.....aur उसके बाद तुम्हारे घर वालो को बताउंगी तुम क्या कर रहे हो.......

मैं - अरे पर मैंने किया की.......

आगे बोलता उससे पहले दरवाजा khulla.......wo दो लड़कियां और उसके साथ वो प्रोफेसर बहार aaye.......Maine देखा दरवाजे से hi प्रिंसिपल सर अंदर अपने चेयर पे बैठे the......aur घूर रहे थे उन् तिण्णो को गुस्से में.......

दरवाजा बंद hua....aur

"यही लड़की है ना wo......accha हुआ यही मिल gayi.....Beta आपसे कुछ बात करनी थी......"

"पापा यहाँ pe....canteen में चलते है या आपके ऑफिस में......"

"कैंटीन सही नहीं है मेरे ऑफिस में चलो......."

हम सब जाने लग gaye......wahi......unke picche.......Ab मधु ने देखा मैं भी पीछे पीछे आ रहा hu......to वो घुम्मी और वापस से शुरू हो गयी......

मधु - मैंने कहा न पीछा मत karo.....phir क्यों आ रहे हो पीछे.....

"बीटा उसको मैंने बुलाया hai......koi परेशानी है क्या....."

प्रोफेसर बिच में hi बोल pada.......hassh वर्ण पता नहीं ये क्या क्या सुनती मुझे.......

प्रोफेसर की बात सुनके मधु एकदम से चुप हो गयी......

हम वापस से चल diye.....aur पहुंच गए उनके ऑफिस mein.......waha आते hi हम सब अंदर गए और उन्होंने दरवाजा बंद करा पहले.......

"(मधु से) बीटा तुम्हे तो पता चल hi गया hai........Main प्रिंसिपल सर का भाई hu.....aur ये दोनों मेरी बच्चियां उनकी भतीजियां hai.......par ये बात किसी को बताना mat......wo भैया को ये बात पसंद नहीं hai......kaam के जगह पे रिश्ते wagera......aur ऊपर से अगर सभी को पता चला की ये दोनों प्रिंसिपल की भतीजियां है तो इन् दोनों को स्टूडेंट्स टारगेट karenge......Main नहीं चाहता ऐसा ho......tum इस बात को किसी को मत बताना......."

मधु एकदम से शॉकेड रह गयी thi.......matlab उसको पता तो ये बात थोड़ी देर पहले hi चल गयी थी पर अब एकदम से कन्फर्म हुआ ना तो वो थोड़ा ज्यादा hi शॉकेड थी......

उसने बस अपनी मुंडी हां में हिलाई और बस कड़ी rahi......tinno को बारी बारी देखती रही......

"हां तुम दोनों इससे millo.....Maine बताया था ना उस रात के बारे mein.......kisi ने बचाया था mujhe.......wo लड़का यही tha........aur अब ये तुम दोनों का ड़याँ रखेगा....."

"क्या पापा हम दोनों खुद को संभल सकते है और ये तो छोटा है हमसे......"

"हां आपको सच में याद है यही tha.......yaa किसी और ने आपको बचाया था......"

"तुम दोनों मज़ाक करना बंद karogi.......iss बार मैं सीरियस hu......aaj भी जो hua.......Main उससे बहुत परेशां हो गया tha......tumhe पता है मैं हार्ट का पेशेंट हु......"

"Papa.....aap बार बार ये sab......theek है हममे कोई परेशानी नहीं है....."

"होनी भी नहीं chahiye......arre मैं इसका नाम भी नहीं jaanta.....Beta तुमने नाम क्या बताया अपना....."

मैं - प्रतीक ......आप भी अजीब हो बिन्ना नाम जाने मुझे अपनी बेटियों का बॉडीगार्ड बना रहे हो......

"पापा आपको सच में इसका नाम भी नहीं पता था......"

"अब पता है naa.......chalo ठीक hai......ab जाओ तुम सब और (मधु से) बीटा आप प्लीज इस बात को बहार मत बताना....."

मधु इस वक़्त बहुत बड़े शॉक में thi......pahle इस बात को लेके की वो अपने परिवार वालो से मिल रही thi.......saamne उसके चाचा और दो बहने खड़े the......dusri बात ये की मैंने उसके चाचा को बचाया tha......tisri की उसके चाचा पे हमला हुआ tha......matlab उसका परिवार सुरक्षित नहीं hai......aaj भी उसकी बहनो के साथ वो लोग पता नहीं क्या करते अगर वो वह नहीं होती तो......"

मधु को तो जैसे होश hi नहीं था वो कहा पे hai........aur क्या कर रही hai......wo बस अपने hi विचारों में खोटी जा रही थी.......

मैंने अगर उसको सही वक़्त पे हिलाया ना होता तो वो अपनी गोल्डन पावर को बहार निकलने वाली थी.......

मधु - Haa.....haa क्या हुआ......

"बीटा आप ठीक हो ना......."

मधु - हां हां मैं ठीक hu......bilkul ठीक hu......Main किसी से कुछ नहीं kahungi.......Prateek तुम बहार आओगे मेरे साथ मुझे बात करनी है......

मैंने प्रोफेसर की तरफ देखा और फिर बहार चला aaya.....wo भी मेरे साथ बहार आ गयी.......

मधु - T.....Tu...tumne उन्हें बचाया था.....

मैं - हां.....

मधु - वो मेरे चाचा hai.....tumne मेरे चाचा को बचाया था......

मैं - Haa.....aur अब मैं तुम्हारी बहनो का भी प्रोटेक्टर हु तुम्हारी तरह :कूल:

मधु कुछ बोलती उससे पहले hi ऑफिस से उसकी दोनों बहने भी बहार निकल आयी.......

वो दोनों मुझे hi देखे जा रहे थे.......

" पापा ने कहा तुम बहुत अच्छा लड़ते ho......hamara एक काम है उसको कर सकते हो क्या....."

यहाँ का यही छोड़ देते है.......

लूसिफ़ेर के लोग जो एअर्थ पे the.....unme से किसी को एक खबर मिली thi......wo सभी से चुप के उसी पे काम कर रहा tha..........usne डार्क वर्ल्ड के एक बन्दे को पकड़ liya......aur उसको टॉर्चर करके उससे डार्क वर्ल्ड वालो को जो बात भी पता चली थी वो सब puccha.....par उसने ज्यादा कुछ नहीं bataya........ab वो बाँदा उस डार्क वर्ल्ड वाले बने को डेमोस लेके जा रहा था.......

डेमोस पे अलग hi सन चल रहा tha........Lucifer अपने उन् दो गुप्तचरों के सरीर को अच्छे से देख रहा tha.........usko यकीं नहीं हो रहा था.......

जिस वैद्य को उन् दोनों की मरहम पट्टी करनी थी वो बाँदा उन् दोनों को वैसे hi वापस से लेके आ गया था लूसिफ़ेर के दरबार mein......aur लूसिफ़ेर को बता रहा था की उनके सरीर पे कुछ hai.........uss मैसेज को वो तो नहीं समझ paaya......par लूसिफ़ेर जो की बहुत साडी भाषाओं को जानता tha.......wo समझ पा रहा था.......

पर विशवास नहीं कर पा रहा था वो........

उसको सामने से मदद मिल रही thi......apne बेटे के सोल को वापस अपने पास लाने ka........agar वो सोल उसके हाथ लग गयी तो उसको डार्क पावर का पता भी जल्द hi मिल jaayega......kyunki जस्टिन की सोल ने उसको देखा था........

लेकिन बात वही थी याक्किन कैसे kare.........wo भी उसस्पी जिसका नाम उसने पहली बार सुन्ना था.......

दब ने अपना नाम नहीं लिखा था उस मैसेज pe.......usne हर तरह से ये सुनिश्चित किया था की कोई भी इस बात को ना जान पाए की वो लूसिफ़ेर से मिला hai.......aur उसकी मदद कर रहा है.......

लूसिफ़ेर थोड़ी देर सोचने के बाद अपनी तलवार को अपने हाथ में लेता hai.....aur महल के चाट पे चला जाता hai......aur जोरर से चिल्लाता hai......jisse उसके तलवार से एक बहुत hi तेज़्ज़ रोशनी निकलती hai.......laal रंग ki......jo दुर्र से भी दिख जाए......

दब ने यही इशारा देने को कहा tha.....agar लूसिफ़ेर को ये बात मंजूर है तो.......

प्लान कुछ दिन बाद का tha.......tab तक दब यहाँ पे फोमोस को कमज़ोर करने वाला tha........ander से......

वही लूसिफ़ेर को इस वक़्त में अपनी सीना को तैयार करना tha......Lucifer फोमोस के सारे क्रीचर्स को सँभालने वाला tha......aur दब लीडर को और फोमोस को.......

नेक्स्ट अपडेट में देखते hai.........Dark वर्ल्ड का वो बाँदा जब लूसिफ़ेर के सामने पहुँचता है तो वो क्या बताता hai.......saath hi क्या दब कामियाब हो पायेगा फोमोस को काबू में लाने mein......aur ये मधु की बहने प्रतीक से अब क्या चाहती है.......
 
अपडेट -106

यहाँ मैं उन् दोनों की बातें सुनने में लगा हुआ tha......wahi दूसरी तरफ.......

डेमोस की तरफ निकल चुक्का था वो लूसिफ़ेर का guptchar......apne साथ एक बंधी को leke...........haa उसको इन् बातों को अपने साथियों को बताने का मौका नहीं मिला था.......

मौका तब मिलेगा ना जब कोई उसकी तलाश kare......yaa खुद banaye......par ये जनाब तो चले थे हीरो हीरा लाल बनने ke........isne किसी को भी कुछ नहीं बताया था दो कारण the.....ek तो वो खबर लीक ना हो jaaye......dusri ये की कही इसके म्हणत कोई कोई और अपने नाम ना कर le.....kahi वो जाके ये ना कह दे की उसने पकड़ा है isko........inn सब से बचने के लिए......

वैसे उसके एअर्थ से निकलने तक ये बात वह पे फैल तो गयी hi थी पहले hi......

खैर.......

ये वह से डेमोस पे चला गया........

पर वह पे सब अलग hi tha......kaha इसने सोचा था की महाराज ने जब ये बात सुन्नी होगी ये उनके लिए कोई अच्छी खबर लेके आ रहा है तो वो इसको ले जाने के लिए कुछ लोगो को वह bhejenge....par यहाँ तो सब hi अजीब hai......koi एक बाँदा नहीं था वह.......

ये सब देख के खुद को ये दिलाशा देता रहा सायद दरबार में सब इंतज़ार कर रहे honge......waha pe.....waha पे कुछ हो जाए.....

ये बाँदा कुछ ज्यादा hi सोचता tha......matlab एक चिट्टी को मार के खुद को सीरियल किलर कह दे ये वो है......

हां तो ये दरबार के बहार gaya.......aur अंदर जाने laga.....par इसको रोकक लिया gaya.....iss बात से बहुत गुस्सा आया isko.....isne वह पे दरबानो को बहुत कुछ सुनाया......

जब ये सब हो रहा था तब लूसिफ़ेर अपनी सीना की तैयारी देख रहा tha.......arre वो तो खुद hi चला जाना चाहता tha......par वो समझता था उसका जाना सही नहीं hai....naa उसके प्लेनेट के लिए ना hi उसके liye.......to इन् सब को सोचने के बाद उसने ये तय किया की वो अपनी सीना को खुद dekhega....unki तैयारिओं को खुद परखेगा.....

वो इन्ही सब कामो में तो लगा हुआ था तभी एक दरबान इसके पास आता है और बताता है की वो गुप्तचर जो एअर्थ से आ रहा था वो आ चुक्का है......

लूसिफ़ेर ने उसको आराम करने को बोलने का kaha.....aur कहा वो थोड़ी देर में उससे मिलेगा......

अब दरबान वापस गया उसके पास और बोल दिया....

"तू अपने घर जा महाराज जब आएंगे तो तुझे खबर दे दी जायेगी....."

तू तड़क करके बात नहीं करता वो दरबान अगर ये गुप्तचर सही से बातें करता उससे पर नहीं गुप्तचर तो जब से आया है बस लगा हुआ hai.....aur ये जो बात दरबान ने इस तरह से कही......

क्या hi bataun.....uska चेहरा ऐसा हुआ की जैसे अभी दरबान को मार dega....aur उसके बाद खुद जाके लूसिफ़ेर से पूछेगा इस हरकत के बारे में.....

पर उसने ऐसा कुछ किया nahi......haa पर वो भी नहीं किया जो उसको कहा गया tha......wo बैठ गया वही pe......darbaan के सामने दरवाजे के बच्चो बिछ......

"ये क्या कर रहे ho.......Kaha ना महाराज आएंगे तो बुल्ला लेंगे tumhe.....jaao यहाँ से....."

"मैं महाराज से मिले वगैर नहीं जाऊँगा....."

यहाँ ये लोग बहेश करने लग गए.......

फोमोस पे चलते है......

फोमोस पे दोपहर की लड़ाई का वक़्त होने hi वाला tha.....issi को लेके तो लीडर कुछ परेशां था......

पहले तो उसने कभी दब को लड़ते नहीं देखा tha.....haa बस बातें hi तो करता रहता था wo......wo भी अजीब अजीब सी......

और ये जगह यहाँ पे लड़ना tha......aur इसमें लीडर उसकी कोई मदद नहीं कर सकता था......

फोमोस से उसने इस बारे में पहले hi सुन्न लिया था नियमों में कोई भी बदलाव नहीं आने wale......wo यहाँ है तो उसको भी लड़ना hi होगा......

लीडर दब के पास जाता है उससे बात करता hai......par....DB ने उसकी बातें नहीं सुन्नी बल्कि हर बार की तरह hi बक्कर की बातें करता रहा.......

दब - यहाँ पे हरियाली सच में बहुत काम hai........Main सोच रहा था कुछ किया जाए इस बारे में......

लीडर - तुम समझ नहीं rahe......Main कह रहा हु यहाँ पे तुम्हे लड़ना hoga.....aur इस बारे में मैं कुछ नहीं कर सकता......

दब - अच्छा तुम तो बड़े आरसे से इस जगह पे हो naa......ye बताओ यहाँ पे भी कोई मीठा फल होता है क्या......

लीडर - अरे तुम समझ क्यों नहीं रहे हो......

दब - समझ तुम नहीं rahe.....Main कब से पूछ रहा हु मीठा फल कहा hoga.....aur तुम हो ki......accha chodo.....main खुद hi धुंध लूंगा......

और इतना बोल के वो निकल जाता है........

उसका निकलना था और लड़ाई का वक़्त भी हो चला tha.......aur वो दब उसी तरफ बढ़ रहा था जिस तरफ वो स्लेयर होता था........

स्लेयर ने अपना एक इलाका hi बना रखा tha......aur दब उसी की ओर बढ़ता जा रहा tha......Leader ने उसको बताने की कोशिश करि उस तरफ ना जाए पर ये हो ना सक्का......

लीडर अपने कमरे में पहुंच गया जहा उसको होना चाहिए इस वक़्त......

फोमोस - हम्म्म बहुत जरुरी सा लगता है ये तुम्हारे लिए.......

लीडर ने कोई जवाब नहीं दिया........

Fumos(haste हुए) - खामोशियाँ बहुत कुछ बता देती hai......par मुझे ये उम्मीद ना थी तुमसे.......

लीडर कुछ नहीं बोल रहा tha......wo बस बैठा था......

फोमोस - जब इतना ही जरुरी है तो उसको लेके hi क्यों aana......ek ऐसी जगह पे जहा पे मौत और तक़दीर की लड़ाई में तक़दीर का जीतना ताकत पे निर्भर करता hai.......kya इतना याक्किन है उसके ताकत पे तुम्हे......

ये यहाँ बातें कर रहे थे वही धीरे धीरे आराम से दब आगे बढ़ता जा रहा tha.......Leader को इस बात का पता नहीं tha.....aur ना hi ये बात फोमोस को पता चली की उन् दोनों की ताक़तों को लेके ये दब आराम से वह से निकल रहा था......

आश्रम में दब ने खून लिया था लीडर ka.......wo खून आज काम आने वाली थी......

यूँ तो वो खून लिमि के लिए hi tha......par दब ने नहीं सोचा था की उस वक़्त वह पे गॉडलें पावर आ jayega......agar वो ना भी आती तो भी दब के पास उस वक़्त भी लेडीर का खून था जिसमे ना सिर्फ उस लीडर की बल्कि फोमोस की भी शक्तियां थी......

पर जब उसकी जरुरत वह पे नहीं padi......to उसने उस खून का कही और उसे kiya......wo शैतान जो पेड़ की तरह दीखता था जो लीडर के पास tha.....jisko वो देना चाहता tha.......Pankaj को पहले पर फिर कंफ्यूज हो गया उसको hi दे या अपनी बेटी koo.......waise तब तक उसको अपनी बेटी के बारे में पता नहीं था......

दब ने लीडर के खून में कुछ किया था और उस खून को उस शैतान को पिल्ला दिया tha.....jisse वो बड़ा hua.......aur लीडर तो उसको ट्रैन कर hi रहा था......

उस शैतानी पेड़ से उसके बाद एक फल निकला tha......jiska पता लीडर को नहीं चला और दब ने उसको अपने पास रख लिया tha......abhi जो वो लीडर से मीठे फल की बातें कर रहा था वो इसको लेके hi tha......jab वो लीडर से दुर्र जाने लगा तब hi उसने वो फल निकला और उसको अच्छे से dekha.....aur फिर उसके बीज अच्छे से निकल के बाकी का हिस्सा खा गया wo.....ab उसकी वजह से वो इस वक़्त फोमोस का हिस्सा सा बना हुआ था पर फोमोस को इस बारे में पता नहीं tha.....ye कैंसर की तरह था.......

पर असली का कैंसर आना बाकी है अभी.......

वो बढ़ता गया......

उसको आज hi स्लेयर से भी मिलना tha......usse मिलके hi वो अपने प्लान को आगे बढ़ा सकता tha.....wo ये पक्के तौर से नहीं जानता था की लीडर से शक्तियां निकलने के बाद क्या फोमोस उसको वो शक्तियां तुरंत दे देगा......

अगर dega.....to क्या वो खतरा बन जायेगा या फिर दोस्त बन के रह सकता है कुछ वक़्त को.......

कुछ वक़्त hi काफी hai.....kyunki उसके बाद तो वैसे भी वह पे प्रतीक को आ जाना है और आगे जो होगा उसमे वो कुछ कर नहीं पायेगा......

बस इसी छोटी सी डाउट को क्लियर करने को वो उस ओर चला जा रहा tha.....aur वो धीरे धीरे जा रहा tha.....waqt गुज़रता जा रहा था......

ये अच्छा tha......wo उस फल के बीजों को जहा जहा जा रहा tha......wahi पे गिरता जा रहा था.......

उसने ये बात लीडर को नहीं बताई thi.....kyunki वो चांस ले hi नहीं सकता tha.....agar कही गलती हो जाती तो ये सब बेकार हो जाता......

वो टहलता टहलता उस जगह पे पहुंच गया जहा पैर से उसको स्लेयर दिख रहा tha......usne एक नज़र आस पास भी डाली और मुस्कुराने laga......phir वो उन् बच्ची हुई बीजों को आस पास और छिड़कने लगा.......

वह बैठ वो वेट करने लगा सही वक़्त ka......aur थोड़ी देर में hi लड़ाई का वक़्त बस ख़तम होने hi वाला था की वो utha.....aur चल पड़ा स्लेयर के पास.......

स्लेयर अभी एक और बन्दे को मार रहा tha.......aur उसको मारते मारते hi उसकी नज़र दब पे gayi.......dekhte hi उसने सोच लिया की इसको भी मार के आज खाना बनाया jaaye......aur वो दूसरे वाले बन्दे को मार के फिर अपना मुक्का तैयार करके दौड़ पड़ा......

दब ने देखा उसको आते hue....par वो बस गईं के 6 कदम पीछे जाके खड़ा हो गया.......

जब स्लेयर ने देखा वो पीछे जा रहा है तो उसको बहुत ख़ुशी hui.......apne शिकार क्क डर देख के जो ख़ुशी शिकारी को मिलती है वो अलग hi होती hai.....aur इस वक़्त स्लेयर वो ख़ुशी देख रहा था.......

पर वो ये समझता की वो ृक्क क्यों गया उससे पहले hi वो दुर्र जाके गिर्रा पड़ा था.......

शुरू शुरू में जो स्लेयर के साथ हुआ था आज भी वही हुआ hai........waqt ख़तम होने के बाद कोई किसी का शिकार नहीं hota......sab आम बन जाते है......

स्लेयर ने वक़्त को नहीं dekha.....jyada खाना पाने के चक्कर mein.....aur इसी वजह se.....khud के वार से वो खुद hi जख्मी हो बैठा था.......

ये जब हुआ तो ये फोमोस को भी पता chala......aur इससे उसको बहुत चिढ हुई......

अभी तक उसने इतना कुछ सोच रखा था स्लेयर के liye.....par ये तो बेसिक्स में अटका पड़ा हुआ tha........waqt को कैसे भूल सकता है ये.....

ये बात लीडर को भी पता चली पर उसको इससे ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ा वो बस इस बात को लेके खुश था की दब को कुछ नहीं हुआ था वो सही था.......

लीडर वह से निकलने वाला था दब के पास जाने के liye.....par फोमोस ने उसको रोकक लिया.....

फोमोस - कोई खबर आई क्या डेमोस se......Lucifer ने कोई संदेसा भेजा या नहीं......

लीडर - नहीं अभी तक कोई जवाब नहीं आया.......

फोमोस - 2 और लोगो को अधमरा करके वह भेज दो......

लीडर - हम्म ठीक है.....

वही स्लेयर के सामने अपना हाथ badhaye......DB खड़ा था......

ये यहाँ पे आम बात हो गयी thi......matlab लड़ाई के वक़्त जो दुस्मन था आपका लड़ाई के बाद तक अगर आप दोनों जिन्दा बच्चे रहते हो तो दोनों उसके बाद दोस्तों की तरह बैठ जाते hai.......waise ये सब दिखवा है......

वो तो सुन्ना hi होगा बकरे को हलाल करने से पहले कुछ खिल्ला पिल्ला दिया jaaye.....ye वैसा hi है......

आज आपका दुसमन बच गया और अभी आप कुछ कर नहीं sakte.....to उसको अच्छे से खिलो pilao....aur मोटा karo.....phir कल उसको मार दो....

ये होता है यहाँ.......

दब ने अपना हाथ आगे बढ़ा रखा tha......usko पकड़ के स्लेयर खड़ा हुआ......

स्लेयर - बच गए तुम आज.......

दब - हां बच गए हम dono.....warna.....

स्लेयर - दोनों......

दब - हां दोनों hi बच्चे naa.....ab मुझे कुछ हो जाता तो यहाँ से तुम्हे कौन hi निकलता.......

स्लेयर ने जब ये सुन्ना तो उसने एक नज़र दब की और dekha......nahi इसको घोरणा कहते hai....ghora....aur फिर वह से आगे जाने लग गया......

दब - अरे सुनने to.....main निकल सकता हु तुम्हे यहाँ se......par मुझे भी मदद चाहिए......

स्लेयर ने उसकी ओर dekha.....aur मुस्कुराया और वापस से बिन्ना कुछ बोले आगे जाने लग गया......

दब - अच्छा फल खाओगे क्या......

स्लेयर - इस पथरीले प्लेनेट पे फल फूल जैसी चीजजें नहीं होती.....

दब - accha......par वो क्या है.......

दब ने एक तरफ इशारा kiya.....aur अपना हाथ ऊपर किया......

नेचर एलिमेंट था दब के pass.......aur उसकी मदद से उसने उन् बीजों को पेड़ों में बदलना शुरू कर दिया जो उसने यहाँ वह फेंके the.....aur वो bhi......bade बड़े पेड़ों में......

स्लेयर ने जब देखा तो वो चौक gaya.....usne यही पे बिलकुल भी हरियाली नहीं देखि thi....par तभी वह सब हिलने laga......lekin पेड़ उगते रहे......

स्लेयर बस देखता hi रह gaya......matlab दब जिस ओर हाथ करता उस ओर पेड़ आ jaata.....aur वो भी बड़ा सा pedd......jisme फल लगे the.....phool भी थे......

दब को पता था अभी जो उसने किया है उसके बाद वो जाने वाला है सीधा कैद mein......to उसने बस इतना hi कहा स्लेयर से.......

दब - अगर बहार जाना hai......to मुझे बहार निकलना......

स्लेयर ये बात समझ पाटा उससे पहले वह pe......waha पे फोमोस के बहुत से जीव आ gaye.....aur उन्होंने दब को पकड़ा और उसको वह से लेके चल दिए........

स्लेयर ने जैसे hi ये dekha....thoda सा खाना लेके वो दौड़ पड़ा उन् सब की ओर........

स्लेयर के लिए ये बहुत जरुरी tha.....wo यहाँ पे रह रह के परेशां हो गया tha.....wo बस किसी तरह वह से निकलना चाहता था......

वही दूसरी तरफ......

जब दब वो पेड़ ुग्गा रहा tha......tab फोमोस लीडर को कुछ बता रहा tha......par.....tabhi वो आच्चंक से चीखने लगा.......

साथ hi वह ोे भूकंप भी आयी थी वो भी इसी के वजह se.......Leader को समझ नहीं आया की क्या चल रहा है.......

पर कुछ देर में उसको भी वो सब महसूस hua.....aakhir वो जुड़ा हुआ था फोमोस से......

वो जानता tha....agar फोमोस को मौका दिया तो वो दब को मरवा dega.......usne खुद फोमोस के क्रीचर्स को बुलाया और उनको दब को कैद कर लेने को कहा.......

ये पेड़ जो अभी ुग्गे थे ये सारे बनने वाले थे असल के कैंसर.......

कैंसर में भी ऐसा hi होता है बॉडी का कोई एक सेल डैमेज होता है और वो hi खुद के जैसे और बनता रहता hai.....aur बस फैलता जाता है.......

ये पेड़ जो अभी उगे वो थे वो दमगढ़ सेल और जब ये फैलने लगेंगे तो बस अन्दर से फोमोस ख़तम होने लग जाएगा......

दब ने इतना डैमेज शुरू में hi कर दिया की फोमोस इस हालत में hi नहीं रहे की वो अपने क्रीचर्स को उन् पेड़ों को ख़तम करने के लिए बोले.......

और उनको ये बात समझ में खुद से आने वाली थी नहीं क्यों की उन् पेड़ों में भी फोमोस की hi शक्तियां थी.......

ये नार्मल ह्यूमन बॉडी की तरह tha......ab बायोलॉजी की क्लास नहीं लगनी यहाँ पे तो हम चलते है वापस से डेमोस पे......

डेमोस पे.....

यहाँ भी अजीब सा हाल था......

दरबान कह रहा था उस गुप्तचर को चला जा चला jaa.....par वो नाइयो नाइयो किये जा रहा tha.....matlab मन्ना कर रहा था......

लूसिफ़ेर अपनी सीना को देख के आया और दूसरे तरफ से अपने दरबार में gaya......aur वह पे उसने दरबान को उस गुप्तचर को बुलाने के लिए बोलै.......

पर दरबान से कोई जवाब आता उससे पहले गुप्तचर hi आ गया वह पे......

ये देख के लूसिफ़ेर को बड़ा आश्चर्य हुआ......

"Maharaj.......Maharaj...."

लूसिफ़ेर - Hmm......batao क्या खबर लाये हो......

उसने कहा सुन्ना था ये sab......wo तो पहले अपना दुखड़ा रोने लग gaya........wo भी कैसे शुरू किया ये सुनने......

"Maharaj.......Main.....main आपका गुप्तचर hu.....aapka.....aapke लिए काम करता hu......apni जान जोखिम में दाल के में खबर लाता हु आपके liye.......aap कहते है और मैं अपने परिवार को छोड़ ke......apne घर को छोड़ ke......yaha तक अपने प्लेनेट को छोड़ के निकल जाता hu......aap जगा भेजते है वह चला जाता hu......aur mujhe.....aapke इतने बड़े सेवक ko.......inn दरबारों ने क्या कहा आपको पता hai......inhone मेरी बेइज़्ज़ती करि है Maharaj.......aapki तौहीन करि है इन् लोगो ne......Mujhe आपसे मिलने नहीं diya......mujhse अच्छे से बात नहीं kari.......Mujhse आपके इतने बड़े सेवक se......aur जब मैंने कहा मैं यही बैठ के आपका इंतज़ार karunga.....to.....to इन्होने वापस से मुझसे बतमीज़ी की maharaj.......aap इन् लोगो को......"

वो इससे आगे कुछ बोलता उससे पहले hi उसके कान के बगल se......theek बगल से एक काली रोशनी gujri.....wo रौशनी लूसिफ़ेर के कारण गयी थी......

वो एक दम से चुप हो गया......

लूसिफ़ेर - अब batao.....khabar क्या है.....

उसको सुनाई hi नहीं दिया लुसिफर ने क्या कहा........

वो तो लूसिफ़ेर ने पास खड़े दरबान को इशारा kiya......tab उसने आके उस गुप्तचर को हिलाया.......

लूसिफ़ेर - अब batao....kya hua.....kya खबर है......

वो कांपता हुआ बोलै......

"डार्क वर्ल्ड वालो को कुछ पता चला है उस शक्ति के बारे में मैंने उनमे से एक को उठा लिया hai.....par wo....wo कुछ नहीं batata......maine कोशिश कर li.....phir लगा यहाँ लेके आता hu....sayad यहाँ पे ज्यादा बातें पता चल सक्के.....:

लूसिफ़ेर - Hmm.....ye बताओ क्या तुमने उसको बोलने का मौका दिया था.......

"माफ़ कैरए महाराज मैं मतलब नहीं समझा...."

लूसिफ़ेर - matlab......jab से यहाँ आये हो बातें hi कर रहे the......mujhe नहीं लगता तुमने इसको बोलने का मौका दिया hoga......Darbaan इसको लेके jaao.....aur पूछो इससे अच्छे se.......aur Guptchar......tumhari जुबान बहुत चलती है हमने देखा है ye.....aaj.......Ab हममे ये देखना hai.......haatein कितनी तेज़्ज़ हतियार चला ले है tumhari......Tum जुंग में जा रहे ho......jaao तैयारी करो......

कहा बाँदा सोच के आया था की खबर सुंनने पे महाराज मोतियों की माला denge......koi नयी ताकत denge.....audaa बढ़ा देंगे mera......ye तो सब उल्टा हो गया......

अब जाना पद रहा है जुंग पे......

इसको यहाँ रहने देते hai.......aur चलते है एअर्थ पे.......

एअर्थ पे......

मुझे उन् दोनों ने बताया की मुझे किसी से मिलना hai.......aur उनको कन्विंस करना है किसी काम के लिए.......

मैंने शुरू में हां नहीं बोलै होता तो मैं साफ साफ़ मन्ना कर deta.....Main क्यों जाऊं किसी और को समझने......

पर अब बोल दिया था तो जाना hi tha.....Waise मधु भी आ रही थी साथ में तो मुझे कोई दिक्कत hi नहीं था फिर मुझे तो बस मौका मिल गया था.......

अब तो ये मौके और मिलते रहने वाले थे sayad......kyunki.....

मुझे उसके चाचा ने उसकी बहनो का बॉडीगार्ड बना दिया tha......ab उनको अगर सही से हैंडल किया तो ये तो सेट हो hi जानी है......

हम कार से जा रहे the......Madhu उन् दोनों से उनके घर walo......matlab अपने घरवालों के बारे में पूछना छह रही थी पर उसको समझ नहीं आ रहा था........

नहीं पहले वो इंसानो के बिच में कुछ भी कर लेती थी कुछ भी उल्टा पलटा बोल देती thi.....par अभी.....

अभी एकदम से shant.......wo नहीं छाती थी के ये दोनों उसको अजीब samjhe....aur phir...isse दूर रहने lage......arre ये दोनों hi तो उसको सभी के पास लेके जाने वाले the.....to रिस्क लेना hi नहीं था उसको......

बस इसी वजह से वो चुप thi.....haa यहाँ वह देख रही thi......wo कुछ पूछते तो वो बता deti.....Par मैं बस उसको देख रहा था देखता hi जा रहा tha.....matlab इतने पास जो बैठे थे हम......

ऊपर से उसको भी पता था मुझे लेके जा रही है वो दोनों और वो एक्स्ट्रा में है तो मेरा होना वह जरुरी tha.....waise इन् सब में ना.......

सायद मैं उसके और भी पास आ hi सकता tha.....aur वो देवर जो उसके गोल्डन पावर से बन जाती थी उसके मेरा उसके पास ना जाने की बात को leke.....wo ख़तम हो रहा tha......warna कहा हम दोनों एक कार में बैठ पाते.....

जब मैं ये सोचने लगा तो दिम्माग में ये बात भी aayi........jab मैं उसके पीछे लगा हुआ tha....tab भी तो वो दीवार नहीं आयी thi.......aur कैंटीन में तो उसके पास hi था Main.....tab भी नहीं.......

मैं इस बारे में सोचते हुए हैरानी से उसको देख रहा था की तभी गाडी rukki.....aur उसकी नज़र मेरे पे aay....aur उसने पाया मैं उसको देखे जा रहा tha.......usne गुस्से से मुझे dekha.....aur फिर कार से निकल गयी......

मैं अपने hi सवालों में खोया हुआ था......

"ुये हीरो बहार भी aao......ander hi रहना है क्या...."

जब ये आवाज आयी तब जाके होश में आया था मैं.......

मैं कार से बहार nikla......humare सामने एक घर tha.....ass पास देखा तो वह पे एक हवेली दिखी thi.....malab उसका थोड़ा सा हिस्सा.......

मधु - तुम दोनों क्या यहाँ रहती हो........

वो ये पूछने में भी बहुत घबरा रही thi......yaha वो खुद को अजीब ना दिखने की कोशिश कर रही thi....aur यही बात उसको अजीब बनाये जा रही थी......

"Nahi.....nahi यहाँ हम नहीं rahte.......wo सामने देख रही ho.....wo haweli.....hum वह रहते hai......yaha पे हमारी एक दोस्त है....."

"ुये Hero......ye दिम्माग का टेस्ट है tera......samjha naa.....agar वो मान गयी तो ठीक hai....aur अगर nahi.....to....."

उससे आगे उसने कुछ कहा hi nahi......Main रुक्का हुआ रहा की वो कहे kuch.....par वो तो आगे बढ़ गयी.....

उन् दोनों ने दुर्बल बजे......

थोड़ी देर में दरवाजा खुल्ला......

मुझे समझ नहीं आ रहा था ये चेहरा यहाँ kaise......matlab......

"beta......aap..."

ये वही है मैनेजर की Maa.......hotel में मिले थे जब मैनेजर की बेटी को किडनैप किया गया था......

मैं - Aap.....yaha.....

मुझे भी कहा समझ आ रहा था......

"Dadi.....aap जानती हो इसको...."

" बीटा इसी ने तो बचाया था humme.....ye सब नहीं hote.....to sayad.....aaj......"

मैं - अरे आप रोइये मत.......

मैं क्या करने आया था और ये पता nahi......kya.....

"अरे यहाँ मत raho.....ander.....ander aao.....bahu.....dekho कौन आया hai.......beta......"

वो जोर जोर से बोलते हुए अंदर लेके गयी mujhe.....baaki तिण्णो भी पीछे पीछे आ गए......

मैंने सुन्ना था वो मधु की दोनों बहने जो बातें कर रही थी.....

"ये क्या hai.......jaha लेके जाओ सब जानते है isko.....kahi कोई जासूस तो नहीं उस फिल्म की तरह"

मुझे नहीं पता क्या बोल रहे थे पर बोलने के बाद हसने lage.....ajeeb.....

थोड़ी hi देर में मैनेजर की बेटी और उनकी पत्नी भी वह पे आ चुक्के the......unhone बताया मैनेजर अब यहाँ पे काम करने लगा hai.....wo मधु के घर वालो के लिए काम करते hai......ab किस लिए ये पूछा नहीं मैंने.....

उन् तिण्णो ने hi मेरी और मेरे घरवालों की बहुत तारीफ़ kari.....wo बताने लगे कैसे हमारी वजह से वो सब सेफ थे......

इन् सब में मधु अब मुझे देख रही thi.....sayad थोड़ी इम्प्रेस हो गयी thi....par मुझे ये समझ नहीं आ रहा था ठीक वैसे hi उसकी बहने क्यों मुझे देख रही thi......Wo भी इम्प्रेस हो गयी थी सायद......

खैर फिर हम मुद्दे की बात पे aaye......wo दोनों मुझे यहाँ इस वजह से लेके आये थे की मैं मैनेजर के परिवार को मैनेजर की बेटी को सोल्लगे वापस भेजने के लिए मन सक्कु.......

मैंने इस बारे में बात kari.....par शुरू में उन् लोगो ने मन्ना कर diya.....unke चेहरे पे डर साफ़ साफ़ दिख रहा tha....ab इतना कुछ हो जाए तो डर तो वाजिब था.......

पर फिर उनको बताया गया की मैं मधु की बहनो के साथ रहने वाला हु ab......as bodyguard......naukar बना दिया.....

Khair.....jab ये क्लियर hua......to उन् दोनों ने मैनेजर के घर वालो को वापस से मानना शुरू kiya....par वो तब भी पूरी तरह नहीं माने the......matlab मैं एकदम से साये की तरह थोड़ी रह सकता tha.....aisa उनको laga.....waise मैं रह सकता था साये की तरह......

तो फिर उन्होंने मधु के बारे में bataya.....aur आज जो कुछ भी हुआ उसके बारे में भी.......

अब मधु की बारी thi.....to उसने भी बोल diya.....ki वो तो साथ में रहेगी thi.....agar कोई दिक्कत होती है वो सब संभल लेगी......

हमने बहुत samjhaya.....to उन्होंने कहा की वो मैनेजर से बात करके इसके बारे में सोचेंगे......

हम वह से वापस आ गए......

यही तक रखते hai.....next अपडेट में फोमोस की तबाही के बारे में dekhenge.....aur साथ hi प्रतीक और स्लेयर का मिलना......

सॉरी बहुत लेट हो गया अपडेट आने में पर अभी कुछ काम hi ऐसे आ रहे hai.....aur जैसा की सभी कहते है प्राइवेट लाइफ को पहले dekho.....story तो चलती rahegi.....to मैंने बस वही करा......

अब वो सॉर्ट हो रहा है तो स्टोरी पे आ जाते hai......next अपडेट संडे को
 
:सिघ: बहुत टाइम hi गया पर स्पीड आ hi नहीं पा रही

सायद एक ब्रेक से काम चल jaaye.....waise देखा जाए तो ये ब्रेक hi चल रहा है......

संडे का bola....aur अपडेट आता hai....aata hi नहीं hai......Tuesday हो गया :सिघ:

खैर जब ऐसा hi है तो इस ब्रेक को ऑफिसियल ब्रेक कह देते है.....

कुछ वक़्त बाद वापस से शुरू करेंगे सायद तब स्पीड आ जाए 🥺
 
अपडेट - 107

2 दिन बाद

फोमोस की परेशानिया बस बढ़ती hi जा रही thi.......wo पेड़ जो वह पे थे वो कोई आम पेड़ थे नहीं एक तरह से उनमे भी फोमोस की शक्तियां thi........aur वो शक्तियां अपने बनाने वाले से मिलने को तरस सी रही थी........

सायद यही वजह भी थी की उन् पेड़ों की जड़ें तेज़्ज़ी से फंसो के अंदर तक जा रही thi......waha जहा पे फोमोस की साड़ी शक्तियां बस्ती थी.......

इससे बचने को फोमोस भूकंप ला रहा था या और भी चीज़ीं कर रहा था पर वो ped.......wo जैसे के तैसे hi the.......nahi उल्टा और बढ़ रहे थे.......

लीडर ये सब देख रहा tha........usko बस इतना पता था की कुछ तो हो रहा hai.....par क्या ये सच में वो भी नहीं समझ पा रहा tha........aur वो समझना भी नहीं चाहता tha.......aakhir उसको उस जगह से निकलना भी tha......aur अपनी बेटी के पास जाना था.....

पर उसको दब की फ़िक्र हो रही thi.....wo नहीं चाहता था की इस वक़्त कुछ हो jaaye........wo बस इस बारे में सोच रहा था की कब दब प्रतीक को वह बुलाएगा.......

इसी के लिए तो उसने बाकी के फोमोस के जीवों को भी काम पे लगा दिया tha.....taaki उनको इसके बारे में पता ना chale......par ऐसा कुछ नहीं हुआ......

दब ने प्रतीक को नहीं बुलाया tha......abhi तक तो नहीं......

वही स्लेयर जिसको खुद इस जगह से बहार जाना tha......aur अब उसको कोई मिल गया था जो सायद उसको वह से निकल de.......to वो उसको कैसे छोड़ता.....

स्लेयर ने पीछा किया था फोमोस के उन् जीवों का जिन्होंने दब को उठाया था.......

वो ये मौका कैसे छोड़ सकता tha.....itne वक़्त से इस जगह से निकलने के लिए वो तड़प रहा tha.......usne क्या कुछ तरय नहीं kiya.....par आखिर में उसको कुछ भी नहीं मिल पा रहा था और अब उसको कोई और मिला......

वो ठीक उसी जगह के सामने खड़ा था जहा पे दब को लेके गए the.......ye बहार से तो पहाड़ की तरह दीखता था पर अंदर से खोखला tha.......haa लेकिन इसमें कोई दरवाजा नहीं tha......nicche पठेरों की इतनी मोती परत थी की कोई भी उसको टॉड के बहार नहीं जा सकता tha.....aur बहार वाला क्यों hi एक पहाड़ को तोड़ने की कोशिश करेगा......

दब के पास कुछ बीज और the......par वो उन्हें यहाँ खर्च नहीं करना चाहता tha.....wo किसी और hi चीज़ज़ के लिए थे......

खैर स्लेयर ने ये देख hi लिया tha.....aur उसने तय कर लिया वो उस पहाड़ को टॉड के hi रहेगा.......

बस फिर क्या tha.....wo लग गया अपने काम mein........Iss वक़्त फोमोस खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था वो आखिर किस तरह से स्लेयर की शक्तियों को काम जयादा कर पाटा........

स्लेयर ने शुरू में तो ऐसे hi मारा उन् पठेरों को पर जैसे hi उनको इस बात का अंदाजा हुआ की उसकी शक्तियां वापस आ गयी hai.......usme और जोश भर गया और वो bas......maarta रहा उन् पठेरों को और वो पाथेर टूटने लग gaye.....kuch अंदर भी जा रहे थे......

दब - ज्यादा खुश हो गया ये सायद........

उसके बाद वो ओल्ड आउल चिल्लाया........

ओल्ड आउल जो इस वक़्त ठीक स्लेयर के पास बैठा हुआ tha,......usko देख रहा tha.......binna उसको खबर hue......yahi काम तो था उसका......

ऊपर से रिआन ने उसको इस काम में और ज्यादा काबिल बना दिया tha......ek बार को तो उसको भी याक्किन नहीं हुआ की दब उसको hi बुल्ला रहा था......

वो बस वह पे बैठा ये देख रहा था की आगे क्या होता है......

लेकिन अब नाम आ गया uska.....to वो अपनी जगह से उड़ा और सीधा जा पंहुचा दब के पास.......

ओल्ड आउल - तुम मुझे देख सकते the......kaise.....

दब - इन् सब के बारे में बाद में बात कर lenge......abhi मुझे यहाँ से nikalo......Ye स्लेयर तो मुझे इन् पठेरों के बिच में hi मरवा देगा.......

ओल्ड आउल - पर ये सब हो क्या रहा है......

दब - ये sab......ye सब बस ऐसे hi hai......hmmm चलो अब बहार चलते hai......Mujhe उस स्लेयर से दुर्र utarna.....wo ये पहाड़ तोड़े ये जरुरी है....

ओल्ड आउल दब को लेके वह से बहार आ gaya.......kuch इस तरह से की स्लेयर की नज़र नहीं पड़ी......

ओल्ड आउल - मुझे प्रतीक ने यहाँ पे इस्पे नज़र रखने के लिए भेजा hai......tum यहाँ क्या कर रहे ho......aur तुम्हे मेरे बारे......

दब - बस karo......Mujhe लगता है वक़्त हो चला है......

ओल्ड आउल - किस चीज़ज़ का waqt......yaha पे हो क्या रहा है और ये भूकंप......

दब - बताता hu......par.....

अभी वो कुछ बोलता उससे पहले hi आसमान से कोई आ गिरा वही पे......

दब - हम्म सही कहा tha.......Waqt हो गया hai.....Old आउल तुम यहाँ पे बहुत वक़्त से ho......kya कोई ऐसी जगह देखि है तुमने जोउसके आसपास के इलाके से मैच नहीं करती......

ओल्ड आउल - क्या मतलब ....

दब - एक ऐसी जगह जो उस जगह पे है जहा पे उसको नहीं होना चाहिए tha......aisa कुछ.....

ओल्ड आउल - मैं यहाँ बस स्लेयर पे नज़र रखने को आया हुआ hu.......aisi चीज़ मैंने नहीं देखि.....

दब - हम्म तब तुम्हे थोड़ी म्हणत करनी hogi......par संभल kar.......upar लड़ाई होने वाली है......

ओल्ड आउल - क्या मतलब hai....au.....

वापस से थोड़ी दुर्री पे कुछ गिर्रा.....

दब - तुम आसमान से देखो कोई ऐसी jagah......ek ऐसी जगह जिसके आस पास का इलाका उससे मैच नहीं करता हो......

वैसे तो ओल्ड आउल ये नहीं करना चाहता tha.....par फिर भी वो चला गया वो जानता था दब और प्रतीक दोस्त है......

वही दब उसी जगह पे खड़ा raha......sayad स्लेयर का इस बात पे ध्यान नहीं गया की आसमान से कुछ चीजजें गिर रही hai.....wo तो बस लगा हुआ था खुद में hi उस पहाड़ को तोड़ने में,....

लीडर जो इस वक़्त बस बैठा tha.....usko पता चल चुक्का था क्या हुआ hai......aur वो इसमें छह के भी नहीं ृक्क सकता tha.....usko फोमोस पे हुए हमले का जवाब देने जाना hi tha......chahe उसकी मर्ज़ी हो या ना हो......

और उसने वही किया वो वह से उठा और चला गया बहार......

दब इस वक़्त उस स्लेयर को देख रहा tha.....aur खुद से बातें कर रहा था.....

दब - सायद अब सही वक़्त आ गया hai......wo वह पे बिजी hai.....agar इस वक़्त प्रतीक को यहाँ बुलाया जाए तो ये अच्छा hoga.....par अभी ये स्लेयर ताकतवर hi है......

दब नहीं चाहता था की लड़ाई हो प्रतीक और स्लेयर mein.....ab ऐसा क्यों था ये वही जाने.....

यहाँ से वो टेलिपोर्ट नहीं हो सकता tha.......usko खबर वह पहुचनी thi.....aur इसका ऊपर भी उसने धुंध रखा tha....par अभी वो उपाय वह पे था nahi.....wo तो किसी और चीज़ज़ में लगा हुआ tha.......to ये देखते हुए दब ने कुछ देर रुकने का socha.....waise भी अभी स्लेयर को वक़्त लगने वाला था.....

ये सब वह फोमोस पे जमीन पे चल रहा था पर उसके आसमान में कुछ और hi चल रहा tha......thodi वक़्त में पीछे चल के देखते है......

डेमोस पे वो सब तैयारी हो चुक्की thi......waise तो ये दो दिन लूसिफ़ेर के लिए सायद सबसे ज्यादा मुश्किल the.....wo इंतेज़्ज़ार नहीं कर पा रहा था पर वो ये भी जानता था अगर थोड़ी भी गली hui....to चीजजें बस ख़राब hi होनी hai.....bas इसी को देखते हुए वो खुद को तसली देता रहा......

की उसका बीटा इन् सब के बाद वापस aayega....aur उसके बाद वो उसके साथ वापस से उस शक्ति को ढूंढेगा और उसको सबसे ताकतवर बनाएगा......

खैर किसी तरह से ये दो दिन बिताने के बाद वो आज जल्दी से अपने सैनिकों को हमले के लिए बोल देता hai......aur वो सब भी वह से निकल पड़ते है.......

इन् दो दिंनो में फोमोस की हालत ख़राब hi thi......aasman में जो उसके जीव उसकी सुरक्षा के लिए थे वो सब भी कमज़ोर हुए बैठे थे.......

इससे अच्छा मौका भी हो सकता है क्या......

डेमोस से लोग आये और उन्होंने हमला कर diya.....ye एकतरफा लड़ाई सी हो चुक्की thi......Raja खुद अंदर से कमज़ोर होता जा रहा tha.....aur उसके सैनिकों की हालत भी वैसी hi थी तो इससे अच्छा कोई समय hi नहीं हमला के लिए.....

वही एअर्थ पे.....

यूँ तो हलचल यहाँ भी हो रही thi......par अभी सभी की नज़रें फोमोस की तरफ चली गयी thi......sabhi ki....Chahe वो ओरियन वाले हो या टाइटन wale.....sab के सब उसी पे नज़र रखे हुए the.....kyun की पहले कभी भी कुछ ऐसा नहीं हुआ था फोमोस के saath....waha पे भूकंप आते रहते the.....par इतने बड़े बड़े झटके नहीं और ना hi इतने लम्बे......

खैर उनकी बात ना करते हुए प्रतीक को देखते है.....

इन् दो दिंनो में मैं मधु के साथ hi रहा.......

अब मैं उसकी बहनो का बॉडीगार्ड बना फिर रहा tha.....aur मधु को उनके साथ टाइम स्पेंड करना tha.....to वो चाहे या ना चाहे मैं वह पे रहने hi वाला था.....

हां इस दौरान 2-3 बार उसकी मेरे से लड़ाई भी hui......wo दरअसल हर बार मुझे उसकी तरफ देखते हुए पकड़ लेती thi.....aur उसको चिढ़ होने लग गयी इस बात से.....

सच कहु तो वो सच में मुझे बहुत हलके में ले रही thi.....Main इससे गुस्सा नहीं था पर खुश भी नहीं था.....

तो मैंने एक प्लान बनाया.....

मुझे उससे ज्यादा hi इंसानो की जिंदगी के बारे में पता tha.....to मैंने सबसे पहले उसी बात का फायदा उठाया...

पहले मैंने जाके मूवीज की 3 टिकट्स li.....aur सोल्लगे के बहार गेट के पास बैठा था अपनी गाडी में......

उसकी वो बहने ड्राइवर के साथ आती thi....aur उसमे एक बाँदा भी होता था.....

मेरा प्लान था मधु के वह आने से पहले hi मैं उन् दोनों को सोल्लगे बंक करने को बोलके उनको मूवी दिखने के लिए ले jaaunga.....aur उसके बाद वो सब करूँगा जिससे मधु आज किसी तरह भी उनसे मिल hi ना पाए......

बस प्लान के हिसाब से जैसे hi वो दोनों कार से निच्चे aai....aur सोल्लगे के गेट की तरफ बढ़ी मैं भी अपनी कार से निच्चे उतर गया......

"देख आ गया अपना बॉडीगार्ड :lol: "

"ुये हीरो यहाँ क्या कर रहा है....."

मैं - आज क्लास नहीं करना मुझे......

"देखो तो 2 दिन हुए सोल्लगे आये और मैं भर गया इसका...."

"अच्छा hi hai....Papa इसको नौकरी पे रख hi लेंगे...."

मैं - तुम्हे भी नहीं करना....

"क्या matlab.....hum क्यों नहीं करेंगे क्लास....."

"हां बताओ जर्रा हम क्यों ना करे....."

मैं - मेरे पास मूवी की टिकट है....3 है waise....to socha...aaj तुम्हे ट्रीट दे दू.....

"हममे कोई ट्री....."

"हां हां चलो challo.....kya बोल रही hai....yaar देख ये सोल्लगे के बाद ज्यादा घूमने मिलता नहीं hummme....tujhe भी पता hai.....ab एक दिन कर ली मस्ती तो क्या hoga.....aur ऊपर से इसके साथ hi जा रहे है ना....."

"ठीक है अब तू बोल रही है तो...."

वो दोनों मान gayi......Maine आस पास dekha.....abhi मधु के आने का वक़्त नहीं हुआ था कुछ देर बाकी tha.....to मैंने उन् दोनों को कार में बैठने बोलै और वो दोनों भी आ गयी....

"एक मिनट यार मधु भी आती होगी उसको भी ले चलते है naa....wo क्या करेगी....."

मैं - वो पढ़ने वाली लड़की है पड़ेगी और क्या करेगी.....

इतना बोल मैंने कार शुरू कर दी.....

प्रतीक वह से निकल gaya.....wahi थोड़ी hi देर में वह पे मधु आ gayi.....wo स्कूटी से आयी thi.....pichle दिन से hi उसने ये शुरू किया था.....

आते hi यहाँ वह dekha.....jab हममे से कोई नहीं दिखा तो वो अंदर चली गयी स्कूटी पार्क karne......aur उसके बाद सोल्लगे में....

वह पे भी तिण्णो को ढूंढा पर कोई नहीं मिला.....

इतने में क्लास शुरू हो gayi.....uska मैं तो नहीं था क्लास ka....par उसको जाना पड़ा वह पे.....

अभी क्लास चल hi रही thi.....ki वो अपनी जगह से कड़ी हुई और वह से निकल gayi....darasal उसको बहुत अजीब सा लग रहा था 3 hi दिन हुए the.....par फिर भी उसकी बॉन्डिंग अच्छी बन गयी थी अपनी बहनो से....

वो क्लास से बहार आयी और सबसे पहले अपने चाचा को ढूंढने lagi....usko लगा सायद घर में कुछ हुआ hoga.....agar ऐसा है तो वो वह जाना चाहेगी.....

उसको उसके चाचा मिल गए पर वो क्लास ले रहे the.....usne कुछ देर socha....agar घर में कुछ भी हुआ होता तो ये यहाँ पे नहीं hote......yaa फिर उसके पापा जो अभी अपने केबिन में बैठे हुए the.......Ghar में नहीं तो कही बहार कुछ ना हुआ ho....aur किसी को इस बारे में पता भी नहीं है.....

मधु वह से भी बहार निकल gayi....aur अपनी स्कूटी के पास चली gayi....waha देखा तो वो ड्राइवर अभी भी वही the....jiske साथ उसकी बहने आयी थी....

मधु उसके पास gayi.....aur पूछा उससे....

ड्राइवर - वो दोनों तो सोल्लगे में hi गए the....kya बात है.....

मधु (खुद से)- मतलब वो सोल्लगे भी आयी thi.....kahi सोल्लगे mein.....par अगर ऐसा होता तो पता तो चल जाता naa.....ye प्रतीक भी नहीं दिख रहा hai.....kya कुछ और hi चल रहा है यहाँ पे......

मधु खुद से hi बातें कर रही थी.....

उसने फ़ोन करने की कोशिश करि थी और फ़ोन की रिंग भी बज रही thi.....par कोई एक्सेप्ट नहीं कर रहा था.....

यहाँ तक की उसने प्रतीक को भी कॉल किया......

पर वह मूवी देखते वक़्त जान बुझ के उसने hi दोनों बहनो का फ़ोन साइलेंट मोड पे कर दिया था.....

फोमोस पे लगभग से काम ख़तम हो चुक्का था उन् सब ka.....matlab पहाड़ टूटने hi वाला था स्लेयर se.......Old आउल ने एक जगह धुंध ली थी बिलकुल वैसी hi जैसा उसको कहा गया tha.....aur वह पे दब को लेके भी पहुंच गया था वो.....

ये एक पथरीले जगह के बच्चो बिछ रेट से भरी हुई जगह thi.....aisa बहुत काम होता hai.....DB को इसी की तलाश thi.......ye वजागह थी जहा से फोमोस की एनर्जी सबसे नजदीक और सिद्धि पड़ती thi....usne अपने पास पड़े हुए बिज्जों को वह पे दे diya.....aur अपना काम शुरू कर diya.....par उससे पहले उसने ओल्ड आउल से प्रतीक को एक सन्देश भेजने को कहा......

मैं यहाँ पे मधु को मज़्ज़ा चखने के बारे में सोच रहा tha....par मुझे पता नहीं था मुझे अचानक से कही जाना पद jaayega.....Movie ख़तम hi होने वाली थी की मुझे ओल्ड आउल की आवाज सुनाई di......wo वही पे था एक होटल के खिड़की पे

पहले तो उसको देख मैं चौंक गया पर फिर मुझे लगा सायद दब का काम हो गया है.......

लेकिन अब मैं इन् दोनों को ऐसे छोड़ के नहीं जा सकता tha......Mujhe कोई चाहिए था जो उन् दोनों के पास aaye....aur उनको देखे.....

वही मधु इस वक़्त मैनेजर के घर पे जा पहुंची thi.....usko लगा सायद वो दोनों मेरे साथ वह गए हुए honge....par वह पे भी कुछ पता नहीं chala......ulta वो मैनेजर की लड़की भी परेशां हो gayi.....aur वो भी बहार चली आयी अपने घर से.....

दोनों hi मधु के स्कूटी पे बैठ के निकल pade.......Madhu स्कूटी चला रही थी और वो कॉल कर रही thi.....phone उनके हैंडबैग में था इस वजह से पता नहीं चल रहा था.....

मैं यहाँ होटल के पास खड़ा tha......mera ये सो कॉल्ड प्लान ख़राब हो गया था.....

मैंने अपना फ़ोन निकला और उससे मधु को कॉल kiya.....par शुरू में बिजी आ रहा tha......lekin उसके ुरन्त बाद उसने कॉल किया.....

मधु - कहा हो tum....aur वो दोनों.....

मैं इस वक़्त इसको कुछ समझाना नहीं चाहता tha.....Maine उसको एड्रेस bataya....aur वही पे खड़ा raha.......Madhu की बहने अभी होटल में बैठी हुई थी और खाने के लिए आर्डर देने वाली थी.....

मैंने सामने से उन् दोनों को आते हुए देखा.......

मधु गुस्से में thi....par मैंने मौका नहीं दिया.....

मई - वो दोनों अंदर है मुझे अभी जाना hoga.....main बाद में मिलता हु.......

मधु - आईये सुनने.....

मैंने नहीं सुन्ना वह एक संत जगह पे गया जहा पे कोई मुझे देख ना सके.......

ओल्ड आउल मेरे पीछे पीछे आ रहा था.......

उसने पोर्टल खोला और हम दोनों उसके अंदर होते हुए चल दिए दूसरी तरफ फोमोस पे.......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है स्लेयर के शरीर के साथ क्या होता hai....saath में लूसिफ़ेर को जस्टिन की सोल मिलती है या नहीं
 
अपडेट - 108

मैं फोमोस के लिए निकल गया tha.....par यहाँ पे बस मैं अकेला hi नहीं था......

यूँ तो एअर्थ , डेमोस . या इस जैसे प्लैनेट्स इम्मोर्टल्स के स्पेस में घूमने वाली फालतू के प्लैनेट्स में से the......par फोमोस का एक अलग महत्वा tha......Titan का भी अलग महत्वा था पर फोमोस वो टाइटन से भी ज्यादा महत्वा रखता था इम्मोर्टल्स के liye....Jaahir सी बात है फोमोस एक अलग hi तरह का प्लेनेट tha,.....wo जिन्दा tha......sayad hi पुरे स्पेस में ऐसा कोई प्लेनेट होगा जो जिन्दा होगा.....

मैं जब यहाँ पे पंहुचा तो सीधा दब के पास आया tha......wo वही पे जमीन पे बैठा tha......apni हथेलियों को जमीन पे रखे हुए.....

मैं वह आया तो मुझे थोड़ा अजीब सा laga.......par मैं यहाँ पे किसी मकसद से आया था और उसको पूरा करना मेरी पहली प्राथमिकता thi.......Maine बाकी चीज़ज़ों को इग्नोर कर दिया......

यहाँ आया तो सबसे पहले मैंने आस पास का जायज़ा liya......aur उसके बाद ओल्ड आउल की तरफ देखने laga......wo भी मेरी बात समझ गया tha.....wo तुरंत hi उड़द के उचाई पे गया और वह एक चक्कर लगा के वापस मेरे पास आया......

ओल्ड आउल - वो अभी यहाँ से दुर्र hai.......usko यहाँ आने में थोड़ा वक़्त लगेगा......

मैं - ये दब क्या कर रहा है......

ओल्ड आउल - उसने यहाँ पे हर जगह पेड़ ुग्गा दिए है अब यहाँ भी वही कर रहा है sayad......inn पेड़ों की वजह से ये प्लेनेट अजीब तरह से बर्ताव कर रहा है......

मैं - मतलब yaha......yahi निच्चे इस प्लेनेट की साड़ी एनर्जी hai.....ek सुरक्षा घेरा बनाओ यहाँ pe......koi भी इसके आस पास नहीं आना chahiye......Isko अभी वक़्त लगने वाला है.....

ओल्ड आउल को मेरे बोलने की देरी thi.....aur वो लग गया उस काम में......

मैं - Dhruv......waqt आ रहा hai.....tum अपनी तरफ से तैयार raho......Main भी तैयारी करता हु......

ध्रुव - आपको पता है ना इसका नतीजा क्या होगा वो अभी भी अनजान है.....

मैं - हमने इस बारे में पहले भी बात कर राखी hai......tumhe बस उस शरीर में जाना है और उसके बाद जितनी भी आत्माएं उस सरीर से जुड़ी हुई है उन् सब को बहार कर देना है तुमने......

ध्रुव - हां पर फिर भी इसमें उन् साड़ी आत्माओं की भी इच्छा होनी जरुरी hai.....agar वो नहीं चाहते बहार जाना तो मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा.....

मैं - वो सरीर उन् आत्माओं के लिए किसी जेल से काम नहीं hoga......unko जैसे hi मौका मिलेगा वो खुद से बहार निकल jaayenge.....ek बार वो साड़ी आत्माएं निकल गयी तो स्लेयर खुद से hi ख़तम हो jaayega....aur वो सरीर तुम्हारा हो जाएगा......

ध्रुव - Haa......agar ऐसा हुआ तो अच्छा hoga.....sayad आप सही कह रहे hai......aisa hi hoga.....aakhir कौन सी आत्मा होगी जो उस सरीर से बहार नहीं निकलना chahegi.....Kya आप उन् दोनों के लिए तैयार है.....

मैं - अभी तो मुझे भी पता नहीं hai......Maine इस बारे में ज्यादा सोचा hi nahi.....par अगर हमारा अंदाज़जा सही hai.....to वो दोनों भी वही होने चाहिए......

ध्रुव - हां और उनके साथ साथ वो भी वही पे hogi......aapko लगता है वो उस जगह को छोड़ के बहार आ जायेगी.....

मैं - ध्रुव हम घूम के उसी बात के शुरुवात पे आ गए hai......inn सब पे हमने बहुत बातें करि हुई hai......sayad जब तक हम इसको कर ना ले हममे जवाब नहीं मिलेगा.....

ध्रुव - अगर कुछ गड़बड़ हुई तो उसके बाद हममे आगे क्या करना है उसका भी पता नहीं hoga......par फिर भी मैं आपका साथ dunga.....mujhe आपके ऊपर याक्किन है.....

मैं - मुझे पता hai.....aur मैं वड्डा करता hu.......ab किसी का याक्किन नहीं टूटने दूंगा खुद के ऊपर se......Tum अपनी तरफ से तैयारियां शुरू करो.....

मैंने ये कहा और वो अपना काम करने लग gaya.......iss वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था कोई चीज़ज़ मुझे काट रही hai.....unn सब के बाद मैं और ध्रुव एक दूसरे से जुड़े हुए the.....aur अब वो अलग हो रहा था सायद इसी वजह से......

ओल्ड आउल ने दब के चारो तरफ वो सुरक्षा घिरा बना दिया tha.....Main उस घिरे से बहार tha.....aur वो खुद भी मेरे पास आ चुक्का था अब......

ओल्ड आउल - tum.....tum ठीक हो naa.....mujhe तुम्हारी अंदर कुछ हलचल महसूस हो रही है......

मैं - Haa......Main ठीक hu.....Tum जाके देखो वो कितनी दुर्र है यहाँ से.....

जब मैं बोल रहा था तो मेरे मुँह से गहरे लाल रंग का कुछ निकल रहा था और वो हवा में जाके गायब हो रहा tha......usne उसको देख liya......aur मुझे घूरने लगा.....

मैं - जाओ और देखो वो कहा है.....

वो मुझे देखता रहा और उसके बाद वह से उड़द के ऊपर चला गया......

दब ने उससे प्रतीक के पास जाने से पहले hi कहा था वो नहीं चाहता की प्रतीक और स्लेयर के बिच लड़ाई ho.....par अभी उसने जो देखा उसके बाद ओल्ड आउल थोड़ा और परेशां हो गया tha......DB के अनुसार स्लेयर अभी भी ताकतवर hoga......aur प्रतीक की हालत और ख़राब हो रही थी.....

ओल्ड आउल ने सोचा सायद वो प्रतीक को कुछ वक़्त दे paayega.....wo ऊपर गया और उसने स्लेयर को dekha......wo अब प्रतीक और दब के तरफ hi आ रहा tha....Old आउल वह से तुरंत प्रतीक के पास gaya.....aur वह जाने के बाद......

ओल्ड आउल - वो आ रहा hai......tum भी इस घेरे में क्यों नहीं चले jaate......Main उसको संभल लूंगा......

मैंने उसकी बात सुन्नी तो मुझे हस्सी आ gayi....par साथ में दर्द भी बढ़ने लगा था.....

मैं - इसकी कोई जरुरत नहीं hai.....Tum एक काम karo.....wo लीडर यही पे है naa.....uski मदद karo.....usko कुछ ना हो इस बात का ध्यान रखना....

ओल्ड आउल - Nahi......wo खुद का ध्यान खुद hi रख lega....Mujhe तुम सही नहीं लग रहे तो मैं यही तुम्हारे पास रुकूंगा....

मैं - ऐसा कुछ भी नहीं hoga.....tum मेरे पास नहीं रह sakte......tumhe....yaha se.....ahhhh......yaha से जाना होगा.....

ओल्ड आउल - ये क्या हो रहा है tumhe.....tumhare मुँह से ये क्या निकल रहा है......

मैं - इसके बारे में अभी तुम्हे नहीं समझा paaunga......tum.....tumhe अभी यहाँ से जाना hoga.....Main नहीं चाहता तुम्हे कुछ हो.....

ओल्ड आउल - पर तुम theek.......nahi मैं नहीं जा रहा कही भी.....

मैं - मैंने कहा यहाँ से जाओ मतलब jaao.....jaao लीडर के पास जब दब अपना काम पूरा कर लेगा तो उसकी शक्तियां भी जा सकती hai.....uss वक़्त वो कमज़ोर hoga......Tum उसके पास जाओ......

वो जाना नहीं छह रहा था पर आखिर में मैं उसका मालिक tha.....to वो चला gaya.....par वो दोस्त भी था mera.....jaate जाते उसने मेरे अस्स पास भी एक कवच बना diya......Ab मुझे इस कवच को भी तोडना tha......kaam बढ़ा के चला गया ये..... :सिघ:

मैं अंदर था और अंदर से कवच को तोडना आसान होता hai.....ye अच्छा tha......waise उसने मजबूत कवच बनाना सीख लिया था.....

मैंने उसको तोडा और वह से बहार आ गया......

दब की तरफ मदद के देखा तो वो अभी भी लगा हुआ था अपने काम mein......sayad उसको अभी और वक़्त लगने वाला था इन् सब में......

मैंने भी अपनी आखें बंद kari.....aur डार्क पावर की मदद से खुद को ध्रुव से अलग करने लग gaya......isse मुझे और दर्द हो रहा tha......Dhruv ने अपनी तरफ से काम पूरा कर hi लिया था bas......thoda सा और हिस्सा बाकी था.....

"अजीब है......"

मैं अपना काम कर hi रहा tha.....ki मेरे कानो में ये आवाज aayi......Mujhe लगा ये ध्रुव hai.....sayad उसको कुछ अजीब सा लग रहा था......

मैं - तुम अब एक अलग बॉडी में जाने वाले हो सायद इस वजह से अजीब लग रहा होगा......

ध्रुव - हां अजीब लग रहा hai.....par आपको ये कैसे पता चला......

मैं - अब तुम बताओगे तो कैसे पता नहीं चलेगा......

ध्रुव - पर मैंने तो नहीं बताया.......

मैं - हम अभी भी जुड़े हुए है ना इस वजह से सायद.....

मैं ये बोल के वापस से अपने काम में लगा raha.....aur अपने हिस्से का काम करता raha.......inn सब में मुझे ये पता नहीं चला की डार्क पावर ने कब मेरे सरीर के आस पास एक बहुत hi मज़बूत दीवार बना राखी thi.....waise इस बात का अंदाज़ा मुझे पहले से tha.......Dark पावर हर मुमकिन कोशिश करेगा मुझे नुक्सान ना पहुंचे इस बात ki.....aur वो वही कर रहा tha.....par मैं ये खुद कर रहा था और वो भी अंदर se......issi वजह से तो मैंने ओल्ड आउल से दब के लिए वो घिरे wanwaya....aur साथ में उसको भी वह से जाने को bola....agar वो यहाँ उस घेरे के बहार होता तो मेरे और ध्रुव के अलग होने के बाद जो होता उसमे उसको बहुत चोटें आ सकती थी.....

उस कवच की वजह से अब मुझे बहार की कोई भी बातें पता hi नहीं चल रही thi.....aankhen पहले से बंद थी और आवाज अब उसके अंदर कोई आ नहीं रही थी......

मुझे पता नहीं चला कब वह पे स्लेयर आ चुक्का tha.....aur वो दब के पास जा रहा tha......par बिच में वो घेरा होने के वजह से वो ुस्तक पहुंच नहीं पाया tha.....aur उसको तोड़ने की कोशिश में लगा हुआ था......

वो अपना काम कर पाटा उससे पहले hi मैंने अपना काम पूरा कर लिया tha......aur उसके बाद वो डार्क पावर का घेरा जो मेरे चारो तरफ tha.....wo टूट gaya.....aur उसके टूटने से वह चारो तरफ डार्क एनर्जी फैलने lagi.......DB घेरे में था तो उसको कुछ नहीं hua.....par Slayer.......wo अपनी जगह से बहु दुर्र जाके गिर्रा था.......

मैं और ध्रुव अलग हुए hi थे की हममे ये dikha.....Dark पावर ने अपना काम बखूबी किया tha......Slayer जैसे बेहोश hi हो गया tha.....ye सबसे सही वक़्त था ध्रुव के लिए उसके सरीर में जाने ka.....aur उसने ये मौका गवाना सही नहीं samjha....aur वो उसके सरीर में चला gaya......par

जैसे hi वो उसके सरीर में गया स्लेयर उठ gaya......Mujhe लगा था वो उसके अंदर चला gaya....aur अपना काम करने लगा hoga....par अभी जो देख रहा था उससे समझ नहीं पा रहा tha.....agar स्लेयर अभी पूरी तरह से होश में था to......to ध्रुव भी उसका खाना बन गया होगा.....

मैं एकदम से डर गया tha.......Slayer से nahi.......Dhruv के liye......hum ना जाने कब से एक साथ the.......aur आज सायद वो मेरी वजह से.....

स्लेयर जो अभी उठ चुक्का tha.....wo वापस से दब के पास जाने laga.......wo घिरा अभी भी वह tha........usne उसकी तरफ dekha.....aur उस घिरे में दरार सी आने लग gayi......ye देख के मुझे याक्किन हो गया ki.....ki ध्रुव अब नहीं raha........wo इस स्लेयर का खाना बन चुक्का था.....

पर अभी मेरे पास इतना भी वक़्त नहीं था की मैं ध्रुव के जाने का शोक मन्ना सक्कु क्यूंकि अगर मैंने वैसा किया तो sayad.....sayad कुछ देर के बाद दब के लिए भी mujhe......Main ये नहीं होने दे सकता tha.....Mujhe नहीं पता वो दब के पीछे क्यों पड़ा hai.....par मैं उसको उसे नुक्सान पहुंचने नहीं देने वाला था.....

मैंने अपना हाथ आगे किया और उससे डार्क एनर्जी बहुत ज्यादा मात्रा में स्लेयर के ऊपर चला gaya.......aur वो वह से दुर्र जाके गिरा.....

इस इंसानी सरीर में ये पहली बार था की मैंने इतनी ज्यादा मात्रा में डार्क पावर को एक बार में उसे किया ho......par इससे मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा tha.....aur सायद ना hi इस इंसानी सरीर को.....

मैं आगे बढ़ा स्लेयर की taraf......wo जहा पे गिर्रा था वह पे अभी बस धूल hi उड़द रही thi.....kuch साफ़ साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था.....

मैं देखने की कोशिश कर रहा tha.....par कुछ दिख नहीं रहा tha.....lekin कुछ hi देर में मुझे 2 आखें दिखाई di.....chamakti हुई aankhen.......aur अगले hi pal.....Main निच्चे जमीं पे गिर्रा हुआ था.....

कुछ समझने का वक़्त hi नहीं मिला बस वो चमकीली आँखें दिखाई दी और उसके बाद उनमे से कुछ आया मेरे पास और मैं निच्चे जमीं पे था.....

मैं किसी तरह वह से utha.....aur वही निच्चे एक पत्थर का सहारा लेके बैठ gaya.....ye जो भी tha.......bahut ताकतवर tha......mera ये सरीर उसके सामने मुश्किल से कुछ वक़्त टिकने वाला था बस......

ध्रुव की शक्तियों से ये स्लेयर बहुत ज्यादा ताकतवर हो चुक्का tha......kisi इम्मोर्टल को वो टक्कर दे सकता tha.....aur सायद जीत भी सकता था.....

अभी इन्ही सब के बारे में सोच रहा था की अचानक से मुझे ऐसा लगा जैसे कोई चीज़ज़ थी जो मुझसे जुड़ रही thi......meri ये इंसानी sarir.....ekdum से मजबूत सी लगने लग gayi.....Main जो अभी निच्चे बैठा हुआ tha......wapas से खड़े होने की कोशिश करने लग gaya.....aur देखते hi देखते मैं खड़ा हो भी गया.......

ये ज्वाला tha......wo यहाँ पे आया हुआ tha......par उसका यहाँ आना ये अजीब tha.......Old आउल यहाँ पे आ सकता tha......kyunki उसको रियान ने तैयार किया था इसके liye.....par ज्वाला nahi.......haa उसके पास डार्क पावर है पर वो ऐसे यहाँ पे नहीं आ सकता.......

मुझे लगा सायद दब अपने काम में कामियाब हो चुक्का hai......sayad वो फोमोस के अंदर जहा उसकी साड़ी ेनेर्गीएस है वह पे पहुंच चूका hai.......par अगर ऐसा हुआ भी tha.....to इसका मतलब ये था की अभी कुछ hi देर में पूरा प्लेनेट उथल पुथल होने वाला tha.......Maine ऊपर dekha......waha पे अभी भी फोमोस के क्रीचर्स the......matlab अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ था.......

अभी कुछ और ोचता उससे पहले मेरी नज़र वापस से उस स्लेयर पे पड़ी जो वापस से दब के अस्स पास लगे उस घिरे को तोड़ने में लगा हुआ था.......

मैंने अपना हाथ आगे किया और उसके अंदर से काली आग बाहर aayi......Dark पावर और ज्वाला के आग का मिला हुआ रूप......

वो किसी गोले की तरह tha.....aur वो सीधा जाके उस स्लेयर को laga......jisse वो वह से कुछ दुर्र चला गया पर वो अभी भी खड़ा hi tha.....girra नहीं tha.....uss आग के गोले ने जैसे बस उसको धक्का दिया ho......par डार्क पावर का काम बाकी था......

डार्क पावर ने उस आग को उसके पुरे सरीर पे फैला diya......aur वो वही खड़े खड़े जल रहा tha......par तब भी वो बस खड़ा hi था.......

अगर कोई जल रहा हो तो वो यहाँ वह bhagega......par ये तो बस खड़ा tha....aur उसकी aankhen.....wo वापस से चमकने hi वाली थी की मेरी पीठ से पंख निकले और मैं अपनी जगह से उड़द के वह से साइड चला गया......

ज्वाला और मैं पहले भी एक दो बार सायद ऐसे एक साथ आये the.....par ये उन् सब से अलग tha......iss बार हमारा कनेक्शन कुछ ज्यादा hi मजबूत लग रहा था.....

मैंने अभी एक बात और नोटिस kari.....ye जब आखें चमकी थी इस स्लेयर की तो उसके चेहरे से मतलब उसके मुँह से और नाक से कुछ धुवां जैसा बहार आया tha......pata नहीं ये क्या tha......lekin ये उसको अंदर से कमजोर कर रहा था......

इस बार उसने ये चीज़ कुछ देर तक करि थी क्यूंकि उसका निशाना सही लगा hi नहीं tha......Main अपनी जगह से उड़द के यहाँ वह हो रहा tha.....aur उसका निशाना इसी में नहीं लग पा रहा था.....

और फिर वो एकदम से ृक्क गया था और मैंने वो धुवां वगेरा dekha......aur वो वह हांफ रहा tha......issi को लेके मैंने कहा की वो सायद कमज़ोर हो रहा था.....

मेरे सामने एक परेशानी थी और अब सायद मुझे उसका हल दिख रहा tha.....isko हारने के लिए मुझे बस इसको उसी पावर को उसे करने के लिए उकसाना tha......par यहाँ पे मेरे लिए भी दिक्कत thi......main ज्यादा उच्चा नहीं जा सकता tha.....waha जाऊँगा तो वह पे जो लोग लड़ रहे है उनमे से किसी न किसी का निशाना बन jaaunga.....aur अभी उनको और इसको दोनों को संभालना वो भी एक साथ वो थोड़ा मुश्किल तो tha.....aur मैं जान बुझ के मुश्किलें नहीं कड़ी करना चाहता था.....

मैंने वापस से अपनी ब्लैक फायर बॉल banai......aur उसके ऊपर फेंकने के जगह उसके आस पास के जगहं पे फेंका और फिर उनसे उसके ाएस पास में hi आग की एक ऊँची सी दिव्वार बना di.....aise में उसको डबल म्हणत करनी padegi......pahle तो आग के इस दीवार से बहार आना और उसके बाद निशाना लगाना.......

अंदर से निशाना लगाना और मुश्किल होगा उसके liye.....aag है तो वह की हवा भी गरम hogi....aur गरम हवा के कारन बहुत बार चीजजें जहा होती है उस जगह पे नहीं दिखाई देती hai......to अगर आपको निशाना लगाना ही तो उस जगह से निकलना hi होगा.....

अब बहार वो आग से hi aayega.....isse भी उसकी कुछ न कुछ शक्तियां तो काम होनी hi थी......

जैसा मैंने सोचा था वैसा hi हुआ bhi.....wo वह से निकलने के लिए आगे चला और वापस से उसके पुरे शरीर पे आग hi आग thi......lekin इस बार भी उसको उस आग से कुछ हो नहीं रहा था sayad......wo आराम से hi बहार आया और फिर से मुझे देखते हुए उसने आखें chamkai........Sukar हो इन् पंखों ka.....ye सच में बहुत तेज़्ज़ thi.....Main तुरंत hi एक जगह से दूसरे जगह पहुंच गया था.....

मैंने वापस से वही kiya....uske अस्स पास आगे की दीवार और इस बार भी वो वह से बहार आ gaya......par वो कमज़ोर होता जा रहा tha.....aur इस बार कुछ और भी दिखा mujhe......iss बार धुवें की मात्रा और ज्यादा थी......

क्या ये साब जो निकल रहा था वो उसके अंदर फांसी हुई आत्माएं thi.....Mujhe पक्का पता नहीं था ye.....par.....wo जो भी उसके मुँह से या नाक से निकल रही thi.....wo थोड़ी ऊपर जाके कुछ बन रही thi.....jaise कोई चेहरा ho......aur उसके बाद गायब हो जा रही थी.....

सायद अभी भी अंदर में ध्रुव लड़ रहा था.....

देखते है नेक्स्ट अपडेट में
 
अपडेट - 109

सायद अभी bhi.....Dhruv उसके अंदर से मेरी मदद कर रहा था.......

वैसे भी कुछ हो हो उसका सरीर चाहे कितने hi इंसानो के सरीर के टुकड़ो से मिलके बनाया हुआ ho......par ध्रुव की असल क्षमता को खुद में कैद कर पाना वो भी तब जब पहले से hi अंदर ना जाने कितनी hi आत्माएं है आसान नहीं होने वाला था......

पर ये सब जो कुछ भी tha......wo सब बस मेरे ख्याल hi तो the.....abhi तक मैं कन्फर्म नहीं हुआ tha......sayad ये जो भी उसके चेहरे से निकल रहा था वो कुछ और hi हो....

वो इस वक़्त वही जमीं पे बैठा हुआ था और हांफ रहा tha.....Main बस उसको देखे जा रहा tha.....Main ये भी नहीं चाहता था की उसके शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाया jaaye......wo अपने तरह का इस जगह पे एकलौता tha......usko काम से काम नुकसान पहुंचना ये मेरी सोच thi.....haa पर तभी तक जब तक वो मुझे या किसी और को चोट ना पहुचाये....

मैं इन् बातों पे गौर कर रहा था की तभी मुझे कुछ महसूस hua.....Mujhe ऐसा लगा जैसे कोई मुझे कह रहा ho.....bas एक बार और......

मैंने आस पास dekha.....par कोई भी नहीं था वह pe.....Main यहाँ पे जब से आया हु तब से मुझे अजीब सा लग रहा था par....iss फीलिंग से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट चीज़ज़ मेरे सामने थी तो इस्पे ध्यान ना के बराबर दे रहा था Main.....isse पहले भी एक बार मुझे एक आवाज सुनाई दी thi.....aur अभी ये जो हुआ वो.....

जब मैंने कुछ नहीं kiya.....to मुझे मेरे कानो में आवाज आयी वही आवाज जो इसके पहले आयी थी.....

" मैंने कहा ना बस एक बार और....."

इस आवाज के बाद जैसे मुझपे मेरा कोई कण्ट्रोल hi नहीं raha......aur Maine....Apna हाथ आगे किया और sidha.....ek बड़ा सा ब्लैक फायर बॉल बनाया और इस बार उसके आस पास नहीं ठीक उसके ऊपर दे मारा......

स्लेयर जो बैठा हुआ था जमीं पे अभी वो इस बार छटपटाने लग gaya......wo आग और डार्क पावर इस baar....iss बार वो उसपे असर कर रही thi.....aisa नहीं था पहले नहीं कर रही thi.....lekin इस बार उसका असर मुझे दिखाई दे रहा था.....

वो आग बस बढ़ती hi जा रही थी शुरू में तो उसने हिलने की कोशिश करि थी और वो हिल्ला भी tha.....par उसके कुछ देर baad.....wo बस चिल्ला hi रहा था और अपने जगह पे थोड़ा बहुत हिल रहा था ऐसा लग रहा था जैसे वो बंधा हुआ हो किसी चीज़ज़ se......aur तभी अचानक से.....

"बंद कार्डो अब...."

वापस से मुझे ये आवाज सुनाई di....aur मैंने बस अपना हाथ आगे किया और इस बार बस डार्क पावर hi tha.....usne उस आग को ख़तम कर दिया.....

यहाँ उस आग की लपटें ख़तम हुई hi थी की अचानक से स्लेयर का सरीर अकड़ने सा laga.....uska चेहरा एकदम से ऊपर की तरफ हो गया और हाथ सरीर से बिलकुल दुर्र जैसे किसी ने रस्सी से बांध रखे हो और अब उनको खिंच रहा tha.....par बात यही पे ख़तम नहीं हुई.....

ऊपर की ओर देखते हुए hi उसकी आँखों से और मुँह से ढेर साड़ी रोशनी निकलने लग gayi......roshani की मात्रा बहुत hi अधिक थी....

वो रोशनी नहीं thi......wo सारे वही आत्माएं थी जो उसके अंदर फंसे हुए the.....wo इतनी रफ़्तार से बहार आ रहे थे इस वजह से उनको देखना मुश्किल था......

मैं उन्ही सब को देख रहा tha...alag अलग chahre.....kuch इंसानी तो कुछ दूसरे jeev....wo बस बहार आते जा रहे the.....maine देखा उनमे से कुछ वो उस तरह के भी दिख रहे थे जैसे डार्क वर्ल्ड से आये लोग दिख रहे थे.....

वो सब बस उसके अंदर से बहार आते और ऊपर की तरफ जा रहे the.....upar जितने भी लोग इस वक़्त लड़ रहे the.....wo सब इसको देख के शांत हो चुक्के the......Khud लूसिफ़ेर तो यहाँ पे नहीं आया था पर अगर होता तो इस वक़्त वो भी बस रुक्का हुआ hi होता.....

मैंने इस दौरान कुछ और भी dekha.....unn आत्माओं के ऊपर जाने के कारन जो रोशनी चहरो तरफ फैली हुई थी उसके कारण hi मुझे एक परछाई दिखाई दी thi.....par सायद उसने भी मुझे देख लिया था और इसी वजह से वो तुरंत hi वह से गायब हो गयी....

मैंने यहाँ वह dekha.....uss परछाई को ढूंढने की कोशिश kari.....par मुझे वो कही भी नहीं दिखे...

जब मेरी नज़र वापस से स्लेयर की तरफ गयी तो अब उसके हाथ उसके चेहरे पे थे और वो कोशिश कर रहा था अपने हाथों से अपने मुँह को और आँखों को ढकने की पर उससे नहीं हो पा रहा था.....

वो ाटमैंन बस निकलती hi जा रही थी ठीक उसी तरफ से जैसे सौदे के बोतल का दक्कन खोलने पे उसके अंदर का गैन बहार आने लग जाता है.....

ये बस होता hi चला gaya......Main उसको देखता रहा उसकी चीखें सुन्न रहा था.....

ज्वाला जो अभी भी मेरे अंदर tha......wo भी मुझसे अलग हो gaya......aur अभी बस वो एक छोटे से चील के रूप में tha......mere कंधे पे बैठा hua.....Hum दोनों बस उसको देख रहे थे.....

मैं - ज्वाला तुम यहाँ पे कैसे.....

ज्वाला ने मेरी तरफ dekha.....aur बस फिर वह से उड़द गया वो....

मैं कुछ समझ नहीं paaya.....ye ऐसे कैसे चला गया.....

मैं उसको बुलाता रहा पर वो वापस आया hi नहीं बस उस जगह से उड़द कर गायब हो गया jaise......aur मुझे वही छोड़ गया दब के साथ जो अभी भी अपने काम में लगा हुआ था और स्लेयर के साथ जिसका काम सयद ख़तम होने वाला था......

मेरी आवाज से ज्वाला तो नहीं आया पर हां ओल्ड आउल वह पे जरूर आ गया था.....

उसने भी देखा था सब कुछ एकदम से ृक्क गया है कोई भी अभी लड़ नहीं रहा था बस सारे के सारे लोग उस स्लेयर को hi देख रहे the....haa वो दब को छोड़ ke.....to वो मेरे पास आ गया.....

ओल्ड आउल - क्या हुआ प्रतीक वह क्या देख रहे ho.....ye इसके साथ ऐसा तुमने किया क्या....

मैं - Hmm....sayad....Old आउल ये बताओ क्या ज्वाला यहाँ पे आ सकता है अभी.....

ओल्ड आउल - हां क्यों नहीं मैं उसको अभी यहाँ पे ले आता हु.....

उसने बोलै और पोर्टल खोलने लग gaya......ki मैंने उसको रोक्का....

मैं - वो खुद से नहीं आ सकता क्या....

मेरी इस बात पे वो मुझे अपनी गर्दन टेढ़ी करके देखने लगा.....

ओल्ड आउल - कैसी बात कर रहे ho.....iss जगह पे तुम भी खुद से नहीं आ सकते the.....Main लेके आया हु tumhe.....Jwala खुद से कैसे आएगा यहाँ पे.....

मैं - पर ye....kya तुमने मुझे स्लेयर से लड़ते हुए देखा था....

ओल्ड आउल - नहीं मैं तुम्हारी hi सुनके यहाँ से वह गया tha....aur वैसे भी यहाँ जमीं पे बहुत धुल उड़द रही थी ऊपर ज्यादा कुछ नहीं दिखाई दे रहा था वो तो अब सब साफ़ साफ़ दिख रहा है.....

मैं - तुम्हे पक्का याक्किन है ना ज्वाला यहाँ नहीं आ सकता.....

ओल्ड आउल - तुम्हे याक्किन नहीं तो तुम उसको यहाँ बुल्ला के dekho.....wo नहीं आ पायेगा यहाँ pe.....ye जगह hi कुछ ऐसी है....

मुझे अभी भी याक्किन नहीं हुआ इस वजह से मैंने पुकारा उसको और कोई जवाब नहीं आया.....

मैं - ओल्ड आउल वो यहाँ tha.....hum दोनों एक साथ मिलके लाडे स्लेयर se....aur उसके बाद वो छोटे से चील में बदल के mere.....yaha इसी कंधे पे बैठा हुआ tha.....phir वो उड़द के चला gaya.....Main उसको पुकारता raha.....par उसने कोई जवाब नहीं diya.....bas चला गया....

ओल्ड आउल - ऐसा कैसे हो sakta....ye क्या है.....

वो अभी कुछ और hi बोल रहा था पर उसको कुछ दिखा और उसने अपनी बात को बदल diya.....Maine उस जगह देखा जहा पे वो इशारा कर रहा tha.....waha पे 2 रोशनी के गोले the.....ek थोड़ा पिंकिश था और दूसरे वाला bluish....dono hi यहाँ वह हिल रहे थे.....

मैंने स्लेयर की तरफ देखा तो अब उसके अंदर से रोशनी के साथ साथ कुछ गोले भी बहार आ रहे थे जैसे मेरे पास थे उसी के तरह ke.....aur वो बहार आके उसके ऊपर एक चक्कर लगते और phir....phir वह से चले जा रहे ठेबहुत तेज़्ज़ स्पीड mein......par एक गोला था जो उसके अंदर से बहार तो आ गया था लेकिन वापस अंदर जाना छह रहा था हलके काळा रंग का था वो gola......par बहुत कोशिश करने के बाद भी वो अंदर नहीं जा पा रहा था क्यूंकि अंदर से बस गोले बहार hi आते जा रहे थे और सायद उसमे उतनी ताकत नहीं थी की वो रोकक पाए उन् सब को और अंदर चली jaaye.....Maine देखा जो दो गोले मेरे पास थे वो दोनों उस काले गोले के पास gaye....aur एक पल को तो ऐसा लगा जैसे वो तिण्णो hi एक हो gaye.....aur फिर उनमे से चिंगारी निकली और थोड़ा सा धुवां nikla...aur फिर वो अलग हो gaye.....Uss काले रंग के गोले का कालापन पहले से और काम हो गया था वही बाकी के दोनों गोलों का रंग कुछ कुछ गधा सा हो चुक्का tha.....aur फिर वो मेरे पास आ gaye....aur वो काले रंग का गोला उसने 3-4 और चक्कर लगाए स्लेयर के उसके बाद वो भी आसमान की तरफ चला gaya......aur वही पे कही गम हो गया बाकी सभी के जैसे.....

मैं जानता था ये दो गोले क्या hai....yaa ये कहु की कौन hai.....Mujhe इनसे मिलना tha....aur ना सिर्फ मिलना था बल्कि कुछ लोगो को इनसे मिलवाना भी था.......

मैं - ओल्ड आउल बुआ के पास jaao.....aur उनसे कहो की वो सभी घरवालों को इक्कठा kare.....Daksh मां और पंकज को भी....

ओल्ड आउल - मैं तुम्हे यहाँ पे अकेला छोड़ के.....

मैं - इस बारे में हम पहले बात कर चुक्के है और तुम्हे पता है की तुम्हे मेरी बात माननी hi होगी तो जाओ और बुआ से कहो जो मैंने कहा hai.....agar सवाल पूछे तो बस वही बात वापस से कह dena...aur उसके बाद मेरे पास वापस आ जाना....

ओल्ड आउल जाने के लिए तैयार था पर उससे पहले वो पीछे मुद्दा और इससे पहले वो वापस से मेरे चारो तरफ वो घेरा banata.....Maine उसको रोकक diya.....aur जल्दी से जाने को कहा......

मैं - क्या वो सोफ़िया थी......

मेरे इतना कहने से वो दोनों गोले मेरे चारो तरफ घूमने लग gaye....Matlab वो सोफ़िया hi थी......

मैं - क्या स्लेयर के अंदर अभी भी ध्रुव ठीक है.....

वो दोनों गोले अभी भी मेरे चारो तरफ घूमते rahe......matlab वो ठीक था ander.....ye अच्छी बात थी....

मैं - मैं आप दोनों को बाकी सब से मिलवाना चाहता hu.....sayad आप भी यही चाहते है.....

वो दोनों वैसे hi घूमते rahe.....gol गोल मेरे चारो तरफ....

स्लेयर अभी भी उसी तरह बैठा अपने चेहरे को ढकने की कोशिश कर रहा था पर अब उसका सरीर जैसे कमज़जूर होता जा रहा tha.....uski हड्डियां दिखने लग गयी thi......sareer सुख चुक्का tha....aur देखते hi dekhte.....wo निच्चे की तरफ गिर gaya......par वो रोशनियाँ अभी bhi....waise hi निकल रही thi.....kuch डियर के बाद वो बंद हो gayi....aur स्लेयर अभी बस एक हड्डियों का ढांचा जैसा दिखाई दे रहा था सामने......

थोड़ी देर तक जब उसका सरीर वैसे hi वह रहा उसके बाद वापस से उसका सरीर पहले जैसा होने लग gaya.....jo अभी हड्डियों का ढांचा दिखाई दे रहा था वो वापस से अपने पहले जैसे रूप में आने लग गया tha.....haa पशर आँखों का रंग बदल गया tha......Slayer को बनाने के लिए सोफ़िया ने दोनों तरह के जादू का उसे किया tha....par ab.......ab उसके अंदर ध्रुव था तो डार्क मैजिक ना के बराबर होने लग गयी thi....kahte है आँखों में सरीर का हाल दिखाई देता है बस वही बात thi.....wo उसके नादेर मौजूद साड़ी ेनेर्गीएस को दिखा रहा tha.....par अभी उसने कोई एक कलर चूसे नहीं किया tha....wo बस बदलता जा रहा था.....

मैं अपने आँखों के सामने देख रहा था उसके सरीर को बनते हुए....

अभी यहाँ पे ये हो hi रहा था की दब अपने जगह से खड़ा hua.....matlab उसका काम पूरा हो चुक्का था उसने फोमोस के एनर्जी सोर्स को काबू में कर लिया tha.....aur शांत भी कर दिया tha....yaa ये कहा जाए उसने उसको सुल्ला दिया....

अगर ऐसा नहीं होता तो सायद अभी मैं और वो खुद और बाकी के सब जो यहाँ फोमोस पे the....wo सब के सब यहाँ वह अंतरिक्ष में तैरती हुई पठेरों पे hote......naa की इस पुरे प्लेनेट पे.....

उसके ऐसा करने के बाद वह आस पास जो भी पथरीली जमीन थी उनके पास भी छोटे छोटे पौधे दिखाई देने लग गए थे......

ऊपर जो आसमान में फोमोस के लोग the.....wo सब के सब बारिश की बूंदों की तरह जमीन पे गिरने लग गए the....Maine जब वो देखा तो मेरी नज़रें लीडर को ढूंढने लग gayi.....agar बाकी सभी की पावर्स जा रही थी तो उसकी भी जाने वाली thi....aur वो भी ऊपर आसमान से गिरने वाला tha.....par मैंने देखा पास का hi पेड़ अचानक से बड़ा होने लग गया और ऊँचा होता जा रहा tha...upar देखा तो वह पे लीडर tha....aur इससे पहले वो निच्चे गिरता उसने उस पेड़ को पकड़ लिया था.....

ये दब कर रहा था उस पेड़ के saath......aur जब लीडर ने पेड़ को पकड़ लिया तो दब ने उसको निच्चे उत्तर diya....wo निच्चे आया पर साथ में डेमोस वाले भी आ रहे थे उसपे हमला करने को आखिर वो अभी तक उनके हिसाब से इस जगह का लीडर था और जुंग में जब तक आप या तो मर नहीं जाते या हार क़ब्ल नहीं करते तब तक आप नहीं हारते ho.....to वो तो यहाँ पे इसको मारने आ रहे थे....

मैं कुछ करता इससे पहले वह पे लगे पेड़ों ने वापस से अपना कमल dikhaya.....wo झूम रहे the.....unki पत्तियां उनके तन्ने किसी हथियार की तरह काम कर रही thi......kabhi कोई पेड़ किसी डेमोस वाले को अपने पत्तियों में सम्मा लेता तो कभी किसी को अपने तन्ने से मार के दूसरे तरफ पंहुचा देता.....

डेमोस की आधी सेना इन्ही सब के चाप्पेट में आ चुक्की thi.....aur क्यूंकि उन्होंने ऐसा कुछ पहले देखा नहीं tha....iss वजह से उन्होंने वह से भाग जाने में hi अपनी सलामती समझी और bas.....saare के सारे हो गए 9....2....11...

इस बात से बेखबर की जब लूसिफ़ेर उनको बिन्ना जीत हासिल किये हुए paayega....to वो उनका क्या हाल करेगा.....

दब अभी भी उस सुरक्षा धीरे के अंदर hi tha.....aur वही से ये सब कर रहा tha.....usne वो घेरा toda.....aur उसमे से बहार aaya.....usne एक नज़र स्लेयर पे डाली फिर मुझे देखा.....

दब - तुम दोनों कही लड़ तो नहीं रहे थे ना.....

मैं - नहीं ऐसी कोई बात नहीं hai.....usne भी मेरे पास उन् दो गोलों को dekha....aur बस देखता raha....phir अपनी गर्दन हिलाते हुए आगे बढ़ा.....

दब - मैंने इसके बारे में नहीं सोचा था.....

मुझे नहीं पता ये क्या सोच रहा था पर कुछ बातें सिर्फ और सिर्फ इम्मोर्टल्स को hi पता होती hai.....aur ये बात भी उन्ही में से एक thi.....mujhe याद नहीं किसी भी इम्मोर्टल ने इस बारे में किसी दूसरे को कोई बात बताई थी.....

लीडर - DB.....Kya अब सब ठीक hai.....kya मैं आज़ाद hu....aur फोमोस का क्या हुआ....

दब - आप bataiye.....kaisa महसूस हो रहा है आपको......

लीडर - Main.....main ठीक hu.....haa थोड़ी कमज़ोरी सी लग रही है मुझे.....

दब - वो इस वजह से क्यूंकि अब आपको फोमोस की तरफ से मिलने वाली पावर्स नहीं मिल रही hai......ab वो साड़ी पावर्स उस पेड़ को मिल रही hai....aur वो ped.....unn सभी पावर्स को आस पास बिखेर दे रहा है....

लीडर - तो क्या फोमोस अभी भी......

दब - वो गहरी नींद में सो रहा hai....aur अभी उसको बहुत वक़्त लगने वाला है......

अभी हम बातें कर रहे थे की स्लेयर का सरीर वापस से हिलने लग गया और वो खड़ा हो गया......

लीडर ने भी देखा उसको.....

लीडर - तो अब इसका क्या....

मैं - इसकी चिंता मत करिये ये हमारे साथ hi है....

Dhruv(Slayer) - है मैं आपके साथ hi हु....

यहाँ का काम मेरे हिसाब से पूरा हो चुक्का tha.....Main बस उस ओल्ड आउल का वेट कर रहा tha.....pata नहीं उसको क्या hua......ek काम दिया था उसको और उसमे भी वो इतना वक़्त लगा रहा था.....

वही यहाँ से दुर्र.....

बहार से जितने भी लोग फोमोस पे नज़रें गड़ाएं हुए the......unko अब कुछ समझ नहीं आ रहा tha.....Fumos बिलकुल से बदल गया tha.......har जगह पे पेड़ hi पेड़ थे ab.....pura प्लेनेट hi जंगल जैसा दिखाई दे रहा था बहार se.....ander क्या चल रहा था और क्या नहीं ये सब कुछ समझ नहीं आ रहा था किसी को....

कुछ को लगने लगा सायद लूसिफ़ेर ने जीत लिया इस प्लेनेट को वही कुछ लोगो को लग रहा था की फोमोस ने अपना रूप बदल लिया उन् सब को हारने के बाद......

तो ऊपर तो बहुत हलचल thi.....har कोई जानना छह रहा था पर किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था......

लेकिन एक बाँदा tha.....asal में दो the.....ek तो लूसिफ़ेर और दूसरा कोई और.......

लूसिफ़ेर तो गुस्से से पागल हो गया था और अपने लोगो को मार रहा tha.....wahi दूसरा अभी जो हुआ वो देख के पागल हुआ जा रहा था......

उसके हिसाब से वक़्त आ गया था इस जगह को तबाह कर देने ka.....nahi तो फोमोस बाकी प्लैनेट्स पे कब्ज़ा कर leta.....lekin उसने देखा फोमोस शांत हो गया tha.....so गया tha.....aur ये बात उसको समझ नहीं आ रही थी.......

पर वो वापस से वह आना नहीं चाहता tha......usko इस बात की फिकर थी की कही उसको देख ना लिया जाए......

नेक्स्ट अपडेट में एक बार डेमोस का नज़ारा देखने चलेंगे और फोमोस पे कुछ काम बच्चे है वो भी देख lenge.....saath में क्या प्रतीक अपने माँ बाप के खुनी के सरीर को अपने घर पे ले जा पायेगा.....
 
अपडेट - 110

डेमोस पे

लूसिफ़ेर की नज़रें फोमोस पे hi टिक्की हुई thi.....usne अपने हिसाब से चुनन चुनन के उन् लोगो को भेजा था जो इस लड़ाई में उसको जीत दिला सकते the......par वो भी काम नहीं आये.....

ऐसा नहीं था बिलकुल hi नहीं aaye......shuru में जब लूसिफ़ेर की सेना फोमोस पे गयी थी तो उनका मनोबल hi कुछ अलग tha.....wo बहुत अच्छे से लड़ रहे the......khud लूसिफ़ेर डेमोस पे बैठा किसी यन्त्र से ये सब देख रहा था और बड़ा खुश हो रहा था.....

हां उसको सब साफ़ साफ़ नहीं दिखाई दे रहा था खास कर जमीन पे क्या चल रहा था वो तो बिलकुल hi nahi.....par चुक्की उसकी सेना आसमान में hi लड़ाई कर रही थी तो उसकी जरुरत उसको पड़ी भी नहीं.......

लेकिन जैसा की hua......ek पल के लिए जब स्लेयर से वो आत्माएं निकलने लगी थी तो सब के सब एकदम से ृक्क गए the......wo लूसिफ़ेर ने भी देखा पर आधा अधूरा......

उसने बस यही देखा था की फोमोस के सारे लोग किसी चीज़ज़ को देख के ृक्क gaye.....aur इस बात का फायदा उठाने के के बदले उसके लोग भी बस रुक्के हुए रहे.....

ये देख उसका खून खौलने लग गया tha.....wo एकदम से गुस्से में आ गया tha....par फिर भी वो अपने दांत पिस्ता हुआ वो सब देखता रहा.......

वो रोशनी आती रही कुछ देर तक और वो बस ये सोच रहा था की अब उसके लोग हमला करेंगे अब करेंगे par......uske लोग तस से मास नहीं हो रहे the.....jaise पुतले हो सारे के सारे.....

फिर अच्चानक से वो रोशनी बंद hui.....aur उसके baad.....uske बाद जैसे आसमान में पटाखे फूटने लग गए the.....Fumos के जितने भी जीव थे वो सारे के सारे अपनी जगह पे फटने लग गए the...Ye देख के उसको लगा सायद उसकी सेना के किसी ने अपनी दिम्माग का इस्तेमाल किया है और उसको जीत दिलाई hai.....wo काफी खुश हुआ tha....aur तो और उसने अपने पास खड़े एक सैनिक से भी कहा की उसका फोमोस जाने का प्रबंध किया जाए....

यहाँ वो सैनिक थोड़ी दुर्र hi गया था और लूसिफ़ेर की नज़र वापस से उस यन्त्र पे पड़ी थी की उसको दिखाई दिया.......

फोमोस पे और भी ज्यादा पेड़ उगने लग गए hai.....wo भी इतनी रफ़्तार में की कुछ hi देर पे पूरा फोमोस hi हरा भरा जंगल बन गया था.....

पहले धूल के कारन जमीन नहीं दिख रही थी और अब पेड़ों के कारन.....

वो इस घटना को देख hi रहा था की उसको एक पेड़ ऐसा दिखाई दिया जिसने अपनी जटाओं से उसके किसी सैनिक पे हमला किया tha......ye अजीब tha.....par ये बस शुरुवात थी.....

उसने देखा की उसके लोग उन् पेड़ों की तरफ बढ़ रहे the.....par साथ hi साथ वो पेड़ भी उसके लोगो की तरफ बढ़ रहे the....aur ये कोई एक पेड़ नहीं tha....balki अब सारे के सारे पेड़ उसी तरह से उसके लोगो पे हमला किये जा रहे है.....

देखते hi देखे उसकी सेना आधी हो गयी थी....

लूसिफ़ेर को कुछ भी समझ नहीं आ रहा tha....aisa नहीं था उसने चलने वाले पेड़ों की प्रजाति नहीं देखि thi.....par ये वो नहीं थे इस बात पे उसको जर्रा भी शक नहीं था....

लूसिफ़ेर अभी उनको पहचानने की कोशिश hi कर रहा था की उसको उसकी सेना वह से भगति हुई दिखाई दी......

ये देख के लूसिफ़ेर को बहुत गुस्सा आया की उसकी खुद से चुन्नी हुई ये सेना इस तरह से भाग रही थी......

बाँदा पहले से गुस्से में था की तभी वही सैनिक उसके पास आया और उससे कहा की आपके वह जाने का प्रबंध कर दिया गया है.....

ये सुनते hi लूसिफ़ेर ने गुस्से से उसकी तरफ देखा और अपने पास पड़े उस यन्त्र को उठाया और उसको उस सैनिक के ऊपर फ़ेंक दिया........

वही दूसरी तरफ एअर्थ पे......

एअर्थ पे अलग hi कुछ चल रहा tha......Prateek ने मधु को जब उसकी बहनो के साथ छोड़ दिया था और खुद वह से फोमोस को निकल गया tha.....to मधु ने अपनी बहनो से बात kari......yun तो उसको पहले से hi कुछ अंदाज़ा हो चुक्का था की प्रतीक उसके साथ क्या कर रहा tha......usko परेशां करने के liye.....aur बात करने के बाद उसको साड़ी बातें और अच्छे से समझ आ गयी थी.....

पहले वो कुछ देर उन्ही दोनों के साथ बैठी रही वह पे और उसके बाद कुछ सोचने के बाद वो वह से उन् दोनों के साथ hi निकल gayi....waise तो वो चाहती थी की उन् दोनों के साथ उनके घर जाए वो par.....abhi उसको कुछ और hi करना था....

अपनी स्कूटी से वो अपने किराये के घर पे गयी जो उसको दक्ष ने दिलाई thi....aur उसके बाद वो बहार आयी और कुछ देर तक एक खली जगह पे रुक्की रही......

फिर वह पे बस आयी और वो उसपे चली gayi.....usne तुरंत hi आश्रम जाने के लिए टिकट ली....

बस से आश्रम आने के बाद उसने पहले पुजारी जी को ढूँढना शुरू kiya.....waha उसको पता चला की पुजारी जी किसी काम को लेके स्कूल गए हुए hai......to वो वापस से बहार आयी और फिर बस से स्कूल की तरफ चल दी.....

स्कूल पहुंचने पे उसने वह भी पुजारी जी का पता lagaya.....par ज्यादा कुछ पता hi नहीं चल रहा tha.....phir उसको किसी से पता चल वो पूनम बुआ से मिलने आये hai....to वो चली गयी पूनम बुआ के केबिन की तरफ......

पर बस यही नहीं थी जो इस वक़्त वह पे पहुंची थी.....

पूनम बुआ ने अपने केबिन का दरवाजा बंद नहीं किया था जाने से पहले आखिर बात hi कुछ ऐसी thi......School में मधु को पुजारी जी के बारे में कुछ सही सही पता नहीं लग रहा था इसकी भी वही वजह थी...

अच्चानक से एक प्लेनेट में बहुत से बदलाव आने लग गए थे जिसको देखने के लिए सब दूसरी जगह जा रहे the......issi में दरवाजा बंद करना रह गया था....

अब यहाँ पे मधु ने दरवाजा खोला और वह पे एक पोर्टल खुला कमरे के ander.....aur उसमे से ओल्ड आउल बहार आया था.....

मधु की नज़र उस पोर्टल के मुह्ह पे चली gayi......uska रंग अलग tha.....aur बुआ के ऑफिस में पोर्टल से आ जाना ये आसान नहीं tha....to उसने कुछ सोचा नहीं बस पास में रखे जग के पानी को अपने हाथों से एक बुलबुले में बदला और उसको उस पोर्टल के मुँह के पास कर दिया.....

यहाँ ओल्ड आउल बहार आया और खुद को उस बुलबुले में कैद पाया usne.....wo पीछे मुद्दा अपने पोर्टल से बहार जाने के लिए पर देर हो चुक्की thi.....Madhu ने बुलबुले को बर्फ का बना दिया tha.....aur उसने उसको पोर्टल से दुर्र कर दिया.....

ओल्ड आउल वह से जा नहीं paaya.....usne देखा ये किसने किया तो सामने मधु को पाया उसने......

अब ओल्ड आउल को जब रियान ट्रैन कर रहा था तो कुछ बातें भी बताई थी usne.......aur बातें थी वो मधु के बारे में......

मधु खास है उतनी hi जितना की प्रतीक है और प्रतीक के लिए तो वो और भी ज्यादा खास है तो मधु को कभी भी किसी भी कीमत पे चाहहए प्रतीक ने hi क्यों ना कहा हो वो कुछ भी नहीं करेगा......

ऐसी ऐसी बातें उसको समझा दी गयी thi......Old आउल जब वह से आया तब से उसको मधु से मिलने का मौका hi नहीं मिला tha....waha से आने के बाद तो वो सीधा फोमोस hi चला गया था......

अब मधु सामने थी uske.....wo कुछ कर भी नहीं सकता था.....

मधु ने अब देखा की कौन है ander......usne पहले भी ओल्ड आउल को देखा हुआ था.....

मधु - वहहह तो अब अपनी hi बुआ पे नज़र रखने के लिए तुम्हे भेजा है usne.......pata नहीं क्या चलता रहता है इसके दिम्माग में.....

ओल्ड आउल - Aap....galat समझ रही hai.....Main तो बुलाने आया था उनको....

मधु - मैं गलत नहीं समझ rahi.....tumne क्या मुझे अपनी तरह समझा है उल्लू....

ओल्ड आउल - आप गलत समझ रही hai......main यहाँ पे सच में उनको बुलाने के लिए आया हु.....

मधु - कहा बुलाने के लिए और वो प्रतीक कहा hai.....aaj उसने मेरे साथ जो किया है उसके लिए मैं उसको कभी भी माफ़ नहीं करने वाली......

ओल्ड आउल - वो यहाँ नहीं hai.....wo फोमोस पे hai.....aur उसने कहा था के उसकी बुआ से कहु उसके घरवालों को इकठा करे.....

मधु - वो फोमोस पे hai......ye तो वही प्लेनेट है ना जहा pe....jail है....

ओल्ड आउल - हां उसको सब जेल की तरह इस्तेमाल करते है....

मधु - तो अब क्या वो अपने परिवार को वह ले जाना चाहता है.....

ओल्ड आउल - नहीं उसने बस कहा की बुआ से कहो सबको एक जगह पे इकठा करे......

मधु - जब तक मुझे ये नहीं पता चलता की kyun.....main ये नहीं होने दूंगी.....

ओल्ड आउल - देखिये वो मेरा इंतज़ार कर रहा hoga....aap मुझे जाने दीजिये.....

मधु - करने दो उसको इंतज़ार आज जो उसने मेरे साथ किया है naa.....uske लिए ये सही hai....bilkul सही है....

मधु कुछ भी सुनने को तैयार hi नहीं थी वो तो बस अपनी बात पे hi अड्डी हुई थी की जब तक पूरी बात नहीं पता चलेगी वो उसको नहीं जाने देगी......

अब बेचारा ओल्ड आउल बताये भी तो kya....bataye usko.....jo उसके समझ में आ jaaye......pahli बात अगर ओल्ड आउल सब बताता उसको तो वो याक्किन नहीं करती इस्पे और जब याक्किन नहीं करती तो जाने नहीं देती

यहाँ ये चल रहा था इस वजह से ओल्ड आउल वापस आ नहीं पा रहा था फोमोस पे.....

अब फोमोस पे चलते है.....

यहाँ पे एक सवाल किया था दब ने प्रतीक se......jiska जवाब प्रतीक को समझ hi नहीं आ रहा tha.....darasal बात ये हुई की....

जब ओल्ड आउल नहीं आ रहा था वह पे तो दब ने प्रतीक से पूछा आगे क्या करेगा wo....Slayer के सरीर के साथ.....

मैं - मैं क्या karunga.....ab ये सरीर ध्रुव का hai.....aur वो जो चाहे वो कर सकता है iska......Mujhe याक्किन है ये कोई बुर्रा काम तो नहीं करने वाला.....

दब - अब नहीं करेगा ये पर इसने इससे पहले बहुत से बुर्रे काम कर दिए hai.....tumhe क्या लगता है जब ये एअर्थ पे हमारे साथ जाएगा तो क्या होगा.....

मैं - क्या होगा से क्या मतलब है तुम्हारा.....

दब - मन्ना एअर्थ पे जो भी इसको जानता था वो सब के सब मारे गए थे इसके द्वारा पर उसके बाद जो इसने दूसरे प्लैनेट्स पे किया उसका kya......aur वो खबरें और इसके बारे में सब कुछ सभी को पता चल गया था उसका क्या....

मैं - मैं समझा नहीं......

दब - इसने डार्क वर्ल्ड में जो kiya....uske बाद ुम्हे लगता है कोई भी प्लेनेट इस चेहरे वाले सरीर को अपने गृह पे रहने की इज़्ज़ज़त देगी....

मैं - par.....kya उन्होंने इसका चेहरा देखा होगा....

दब - डार्क वर्ल्ड में तो जरूर देखा hoga.....uske बाद ये बातें दूसरे जगहों पे भी फैली thi.....Strange वर्ल्ड में भी इसके जैसे एक बन्दे के बारे में बातें चल रही थी एक वक़्त ko......kya पता किसी ने इसको पहचान लिया तो.....

मैं - तो क्या मैं इसको यहाँ से चले जाने को कह du.....ye नहीं हो सकता......

दब - पता hai....jaise तुम्हारे पास ये दो रौशनी के गोले आएं हुए है ना उसी तरह बहुत से लोगो के पास भी गए honge....aur मुझे नहीं लगता वो ये नहीं बताएँगे की उनकी मौत कैसे हुई और किसने kari.....tum समझ रहे ho....ye बात अभी और बढ़ने वाली है.....

मैं समझ रहा tha....par मैं इस तरह से ध्रुव को अकेला कैसे छोड़ सकता tha......usko अभी इम्मोर्टल्स स्वीकार भी नहीं करने वाले the.....uske सरीर के वजह se......aur अगर मैंने भी छोड़ दिया तो वो अकेला हो jaayega...par दब की बात भी सही thi......Mujhe भी लग रहा था अगर अभी मैं अपने परिवार वालो को माँ पापा से मिलाऊँगा और उनको पता चलेगा की माँ पापा को मारने वाला उनके पास hi खड़ा हुआ है तो वो पता नहीं क्या karenge.....Meri समझ में नहीं आ रहा था ऐसे कहा अकेले छोड़ दू इसको.....

मैं - पर मैं इसको ऐसे hi नहीं छोड़ सकता....

Slayer(Dhruv) - प्रतीक ये सही कह रहे hai....aur आप भी जानते है मैं इस शरीर में किसी भी जगह पे नहीं रह पाउँगा.....

मैं अब उसको उस सरीर से अलग भी नहीं कर सकता tha....aur वापस से खुद में मिला leta.....Maine इस बारे में सच में नहीं सोचा tha......kaash में ये सोच leta....kaash मैंने वो वड्डा ना किया होता इससे सरीर देने का.....

मैं - तो तुम क्या चाहते हो......

Slayer(Dhruv) - ये जगह भी ठीक लग रही hai.....Main इस जगह पे रह सकता hu....yaha की सुरक्षा के लिए.....

मैं - पर इस जगह पे अकेले...

Slayer(Dhruv) - अकेले कहा यहाँ पे ये पेड़ पौधे तो है naa.....aur वो कैदी भी तो होंगे.....

दब - ये कुछ सही लग रहा है Mujhe....agar तुम यहाँ रहोगे तो कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.....

मैं - Dhruv.....Main ये नहीं चाहता tha.....maine नहीं सोचा था की कुछ ऐसा हो jaayega.....mujhe इस बारे में सोचना चाहिए था.....

Slayer(Dhruv) - ये बस आपका फैसला नहीं था मैंने भी आपका साथ दिया tha....aur आगे भी दूंगा....

लीडर - मैं ये समझ नहीं पा रहा तुम सब किस बारे में बात कर रहे ho.....aur ये स्लेयर अब इतना बदला बदला सा क्यों लग रहा है.....

दब - जैसी ये प्लेनेट बदल गया वैसे hi स्लेयर भी बदल गया hai.....aap इसको छोड़िये और मेरी थोड़ी मदद करिये.....

लीडर - कैसी मदद.....

दब - मैं यहाँ पे एक माननी के लिए आया tha......harre रंग का manni.....Usse मेरे लोगो की मुसीबतें ख़तम हो सकती hai.....wo बस इसी प्लेनेट पे मिलती hai....kya आप उस जगह को जानते है....

लीडर - haa....main जानता तो hu.....par....wo यहाँ से बहुत दुर्र hai.....aur मुझे नहीं लगता हम यहाँ पे पोर्टल खोल पाएंगे.....

दब - पोर्टल की जरुरत नहीं hai.....ye पेड़ है ना ये लेके चलेंगे हममे.....

लीडर - ये ped......paaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa............................yeeeeeeeeeeeeee क्या haiiiiiiiiiiii....

लीडर अपनी बात पूरी करता उससे पहले hi उसके पैरों के निच्चे से एक जड़ निकली और उसने उसके पैरों को जकड liya.....aur फिर तेज़्ज़ी से वो जड़ें और बड़ी होने लग gayi....aur वो अब एक पेड़ के ऊपर था......

पेड़ उसको उसी तरह से आगे की तरफ उछाल रहे थे जैसे hi लूसिफ़ेर के सेना के लोगो को भगाया था वह से पर हां धीरे धीरे जिससे उसको छूट ना lage......aur देखते hi देखते एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक वो दोनों hi बहुत आगे पहुंच गए......

दब - मज़्ज़ा आ रहा है ना.....

लीडर - nahiiiiiiiiiii......

दब - क्या kaha......sunai नहीं diya.......wo जगह किस तरफ है बताना जर्रा.....

लीडर ने किसी तरह अपने हाथ से इशारा किया और उसके बाद पेड़ों ने उनको उस तरफ फेंकना शुरू कर diya.....aur कुछ hi देर में दोनों ने दोनों वह पहुंच चुक्के थे.....

लीडर की हालत ख़राब हो चुक्की थी.....

वही एअर्थ पे.....

फोमोस पे क्या हुआ ये बहुत लोगो ने dekha...par अब धीर्रे धीर्रे लोग अपने अपने कामों पे जा रहे थे हां पर बातें उसके बारे में hi कर रहे थे....

पूनम बुआ भी पुजारी जी के साथ और K.Bua के साथ अपने केबिन की तरफ आ रही थी......

जैसे hi वो तिण्णो अंदर आये वो चौक गए......

हवा में एक बर्फ का बुलबुला tha.....jisme ओल्ड आउल tha.....aur वो यहाँ वह घूम रहा tha.....uske अलावा और कोई नहीं था रूम में......

P.bua - ये yaha......iss हाल में कैसे......

उनकी बात पूरी hi हुई थी की केबिन के वाशरूम का दरवाजा खुला और अंदर से मधु आयी.....

मधु - माफ़ करियेगा मैंने पूछा नहीं आने से पहले.....

पुजारी जी - मधु तुम yaha....aur ये सब क्या है.....

मधु - ye.....isko उसने अपनी बुआ पे नज़र रखने के लिए भेजा था....

P.bua - Kya.....Prateek ने इसको मुझपे नज़र रखने के लिए भेजा tha.....ye नहीं हो सकता.....

ओल्ड आउल - हां मैं यहाँ बस आपको कुछ बताने आया हु.....

मधु - अरे रूक्को मैं बताती hu.....Apka प्रतीक आप सभी को फोमोस पे भेजना चाहता hai....aur इसको भेजा है आपके पास ताकि आप सभी को इक्कठा कर सक्को....

फोमोस का नाम आते hi वह पे सब के सब चौक गए the....unhone अभी देखा वह पे क्या हुआ hai.....aur अब ये ऐसी बात बोल रही hai.....jisse सभी को लगा की सायद प्रतीक वह पे है.....

P.Bua - Kya.....Prateek फोमोस पे है.....

मधु - हां वो वही hai....aur आप सब को वह ले जाने वाला है wo....mujhe तो लगता है वही छोड़ देगा वो आप सब को.....

P.Bua - चुप karo.....kuch भी मत bolo.....aur इसको बहार निकालो जल्दी se......Old आउल मुझे प्रतीक के पास ले चलो.....

मधु ने अजीब सा मुँह बना के P.Bua की तरफ dekha....par फिर ओल्ड आउल को बहार निकल दिया.....

ओल्ड आउल - मैं आपको वह नहीं ले जा sakta.....aap सभी को एक जगह पे इक्कठा करिये प्रतीक आपको किसी से मिलवाना चाहता hai.....aap सभी को......

P.bua - Kya....nahi.....Mujhe उसके पास जाना hai....tum जल्दी से......

ओल्ड आउल को एक बात समझ आ चुकी थी वो यहाँ रहा तो उसको इन् सब को वह लेके जाना hi hoga.....par इस वक़्त वो खुद नहीं जानता था की वो जगह कितनी सुरक्षित है तो वो ये नहीं करना चाहता था.....

उसने हवा में पोर्टल खोला और अपनी बात दोहराई और वह से निकल गया.....

P.Bua,K.bua और बाकी सब भी देखते hi रह गए.....

मधु - इसको छोड़ना hi नहीं चाहिए tha....ab क्या करोगे......

P.Bua - वो वह किसी मुशीबत में हुआ to.....Mujhe वह जाना होगा.....

K.Bua - मैं भी चलूंगी.....

पुजारी जी - उस जगह पे ऐसे कोई नहीं जा sakta.....Mujhe लगता है तुम वही करो जो उसने कहा है.....

पुजारी जी को पता था प्रतीक को ज्यादा कुछ नहीं हो sakta....agar हुआ होता तो मधु अभी ऐसे तो कड़ी नहीं hoti.....uske अंदर की गोल्डन पावर अब तक कुछ ऐसा कर रही होती जिसकी कल्पना कर पाना मुश्किल है....

नेक्स्ट अपडेट में देखते है मुलाकात और साथ में डार्क वर्ल्ड वाली प्रॉब्लम का सलूशन......
 
अपडेट - 111

पुजारी जी की बात सुनने के बाद वह पे बाकी तिण्णो hi उनको घूरने लग गयी.......

K.Bua और P.Bua यहाँ का गुस्सा वह निकलने के चक्कर में और Madhu.....uska भी कुछ ऐसा hi था....

मधु ने अभी तक जितना भी सुन्ना था प्रतीक के बारे में या खुद से देखा था उस हिसाब से वो अपने परिवार के साथ कुछ भी कर सकता tha......ye एक बात थी जिसकी वजह से मधु को कभी भी प्रतीक अच्छा नहीं लग रहा था.....

हां कभी कभी उसके दिम्माग में कुछ अच्छी बातें आती थी उसके बारे में पर उसके तुरंत बाद कुछ ऐसी बातें आ जाती जिसके बाद वो उससे और ज्यादा चिढ़ जाती थी.....

मधु यहाँ पे अपने परिवार के लिए आयी हुई thi......wahi दूसरी तरफ ये प्रतीक था जिसका परिवार उसके पास था पर वो उनको कोई अहमियत नहीं देता tha......ye सब मधु का सोचना था.....

अभी भी वो इसी वजह से गुस्से में thi......akhir वो ऐसा कैसे कर सकता hai......waise उसको ये पता नहीं था की प्रतीक करने क्या वाला है वो बस गुस्सा थी.....

K.Bua और P.Bua इस वजह से गुस्सा थी की पुजारी जी ने कितने आराम से कह दिया के वो अच्छा hi hoga....aur तो और उन्होंने उनको फोमोस जाने का कोई तरीका बताने की जगह सभी लोगो को इकठा करने को कहा.......

ये दोनों इस वक़्त प्रतीक se.....Madhu se.....aur उस ओल्ड आउल से गुस्सा the.....par शुरू में चुक्की पुजारी जी ने कहा तो गुस्सा उनपे निकला जाना hi बनता था....

P.Bua - ये क्या कह रहे है aap.....wo वह पे पता नहीं क्या कर रहा होगा ठीक भी होगा या नहीं और aap.....aap हममे यहाँ पे बैठ जाने को कह रहे है.....

K.Bua - आपको तो इस वक़्त हममे वह जाने का कोई रास्ता बताना चाहिए tha......Poonam मुझे लगता है हममे िप मैडम के पास जाना chahiye.....unse बात करनी chahiye....wo सायद हममे.....

मधु को अब ये समझ नहीं आ रहा था वो कहा और किसपे निकले अपना gussa......wo पुजारी जी के बात से सहमत नहीं thi.....par अभी जो K.Bua और P.Bua ने कहा उससे तो वो और भी ज्यादा सहमत नहीं थी......

पुजारी जी - अरे आप दोनों गलत समझ रहे ho.....(Madhu की ओर देखते हुए) मुझे पता है वो जरूर ठीक hoga.....aur रही बात फोमोस पे जाने की तो अभी कोई भी मदद नहीं करने वाला आप लोगो ki.....behtar यही है की आप दोनों वही करे जो उसने करने को कहा है.....

मधु - मैं तो अभी भी कहती हु उस उल्लू को छोड़ना hi नहीं चाहिए था......

यहाँ अभी भी tu-tu मैं मैं चल रही थी.....

वही दूसरी तरफ.......

डेमोस पे अब डेमोस के वो सिपाही पहुंच गए थे जो फोमोस से बचके भागे the.....pata नहीं इनकी किस्मत किश चीज़ज़ से लिखी गयी थी.....

यहाँ पे लूसिफ़ेर जो एकदम से पागल hi हो चुक्का था गुस्से की वजह se......wo अपने हाथों में अपनी तलवार लिए खड़ा था तलवार में से आग की लपटें निकल रही थी.....

दूसरी तरफ से जो ठक्की हारी सेना वापस आ रही थी उनको वो दिखा तो जरूर पर देर हो चुक्की thi......Lucifer ने आव देखा ना ताव बस अपनी तलवार को घूमने लग gaya......yaha वह......

कुछ भी kaho....uske तलवार चलने की स्पीड को देख के कोई भी कह सकता था की उसने कितनी प्रैक्टिस करि hogi....uske साथ साथ उसकी वो टेक्निक्स इतने गुस्से में होने के बाद भी तलवार से कट मारने का एंगल एक डिग्री भी यहाँ वह नहीं हो रहा था.....

गुस्से में बस अपना तलवार चलते और अपने hi लोगो को काटता जा रहा था वो....

इसमें वो एक जासूस भी tha.....jo डार्क वर्ल्ड वाली खबर लेके आया था यहाँ pe.......uski किस्मत अच्छी थी sayad......yaa buri.....pata नहीं....

लूसिफ़ेर जब अपने hi किसी सैनिक को मार रहा था तो वो उसके ठीक पीछे tha....aur वो बाँदा निच्चे गिर गया और जासूस उसके सरीर के निच्चे डाब gaya...wo उठ सकता tha.....par यहाँ पे उठ के बस मौत मिलनी thi.....to वो वैसे hi raha......ekdum वैसे hi हिल्ला भी नहीं.....

लूसिफ़ेर ने उन् सब बच्चे हुए लोगो को मारने के बाद अपनी तलवार उन्ही लाशों के ढेर में किसी एक लाश के ऊपर जोर से मारा और वो तलवार उसके अंदर चली gayi.....aur वैसे hi कड़ी रही......

लूसिफ़ेर उसके बाद अपने घुटनो के बल बैठ gaya...aur अपना सर ऊपर करके जोर जोर से दहाड़ने लग गया.....

लूसिफ़ेर के इन् हरकतों को कोई था जो ऊपर से देख रहा tha.....aur वो कुछ सोच रहा था

फोमोस पे......

लीडर और दब इस वक़्त उन् मणियों के पास पहुंच चुक्के the.....Leader की हालत ख़राब हो गयी thi.......hoga वो बहादुर पर ये उसके लिए एकदम से नया था और डरावना भी था.....

दब - हम्म वो रहे saare......waise आपको पता है ये यहाँ पे इतने ज्यादा क्यों है.....

लीडर - Nahi.....Main नहीं jaanta.......aur क्या अब हम चल के वापस जा सकते है......

दब - चल ke.....isme बहुत वक़्त लग जाएगा......

लीडर - मुझे चलेगा वो......

दब - ठीक hai.....jaisa आप kahe....waise मैंने पूछा क्या आपको पता है ये यहाँ पे इतने सारे क्यों है.....'

लीडर - मैंने बताया ना मुझे नहीं pata......iss जगह पे मैं बस तब आया था जब मेरी ट्रेनिंग चल रही thi......uske बाद इस जगह पे नहीं आया मैं कभी....

दब - जहा तक मुझे पता है ये माननी फोमोस के सरीर के खून से बनने हुए है......

लीडर - खून se......par....

दब - हम्म आपको इस बारे में पता नहीं hoga......kabhi फुर्सत में bataunga......chaliye हम इनमे से एक टुकड़ा ले लेते है और यहाँ से निकलते है....

लीडर - एक hi क्यों ये तो बहुत है यहाँ pe.....hum जितना चाहे उतना ले सकते है.....

दब - ले के कोई फायदा नहीं होने wala......mujhe बस एक टुकड़े का काम hai.....iss चीज़ज़ को यही पे रहने देना सही hai.....yaha से बहार जाके ये बस तबाही मचने के काम में आ सकती है और कुछ nahi......aap बस यही खड़े rahiye.....main अपना काम करता हु.....

लीडर ने इस बारे में कुछ socha....par वो साँझ नहीं पा रहा था उसको ऐसा करना चाहिए या नहीं.....

वही दूसरी तरफ ओल्ड आउल वापस आ गया था वह पे.....

मैं - इतना वक़्त कैसे लग गया ओल्ड Owl.....Tumhe तो काफी देर पहले hi यहाँ पे आ जाना चाहिए था......

ओल्ड आउल - मैं फंस गया tha.....issi वजह से मुझे देर हो गयी.....

मैंने उसको ध्यान से dekha....jaha तक मुझे पता था रियान ने उसके साथ जो कुछ किया उसके बाद वो सायद hi कही फंस सकता tha.....yaha तो बिलकुल भी नहीं......

मैं - तुम्हे जो बोलै था वो काम हो गया ना......

ओल्ड आउल - हां वो काम हो gaya.....bas थोड़ी सी परेशानी हो गयी है......

मैं - कैसी pareshani.....kya उसी के वजह से देर हुई है तुमको....

ओल्ड आउल - वो दरअसल मुझे पकड़ लिया tha.....aur मुझे बताना पड़ा तुम यहाँ पे ho.....aur अब वह सभी को ये पता है.....

मैंने ये सुन्ना और मेरा सर घूम gaya......isne बता दिया मैं फोमोस पे tha......agar मैं खुद से बताता तो उस वक़्त बात अलग होती लेकिन अभी मैं वह पे पंहुचा भी नहीं हु और वह पता चल चुक्का था सभी को मतलब वो सब परेशां होंगे गुस्सा होंगे.....

मैं - ध्रुव लगता है हममे जल्दी से निकलना होगा यहाँ से....

ध्रुव - मैं सोच रहा था की क्यों न आपका एक काम मैं पूरा कर du....uske बाद यहाँ पे वापस आ जाऊँगा.....

मैं - कौन सा kaam.....kiss बारे में बात कर रहे हो तुम.....

ध्रुव - आपको याद नहीं डार्क वर्ल्ड वाले लोग आये थे एअर्थ pe.....Main इस वक़्त स्लेयर के सरीर में hu.....isse वह पे सभी डरते hai.....agar मैं उन् सब को दर्रा देता हु जिन्होंने वह पे लोगो को परेशां कर रखा है तो......

मैं - पर वह पे ऐसे नहीं जा sakte......Maine उनकी पूरी कहानी सुन्नी thi.....wo घेरा उसका kya.....kya तुम इस सरीर के साथ उसको पारर कर पाओगे.....

ओल्ड आउल - इसमें मैं मदद कर सकता hu.....main इसको वह टेलिपोर्ट कर सकता हु.....

मैं - अगर ऐसा है तो मैं भी वह chalunga.....akhir उन् सब से कहा था मैं वह आऊंगा......

ओल्ड आउल - पर वह जाके बस वक़्त की बर्बादी होगी.....

मैं - अभी एअर्थ पे बुआ को सभी को साथ लाने में थोड़ा वक़्त तो लगेगा hi....par एक दिक्कत hai......Main माँ पापा का क्या karu.....ye वह नहीं जा सकते अगर वह गए तो इनका घरवालों से मिलना बाकी hi रह jaayega....aur यहाँ पे छोड़ नहीं सकता मैं इनको......

ध्रुव - क्या main......Main इनको वापस से अपने अंदर ले सकता हु कुछ वक़्त के लिए जब वह से हम वापस आएंगे तो उनको बहार निकल दूंगा.....

मैं - ये मुमकिन है क्या.....

ध्रुव - है अगर मैं इस सरीर पे अपना प्रभाव थोड़ा काम कर दूँ to.....aur मैं ऐसा कर सकता हु.....

मैंने सोचा ध्रुव hi तो hai....ispe भरोषा करने में कोई नुकसान नहीं hai....aur मैंने हां बोल दिया....

दब और लीडर भी वापस नहीं आ रहे the.....aur ध्रुव को वापस से यहाँ लेकर आना hi tha....to ओल्ड आउल से जल्दी डार्क वर्ल्ड के लिए पोर्टल खोलने को कहा और हम वह चले गए.......

इस जगह पे हमने जो देखा वो बहुत hi खास tha......Slayer ने सायद अपना सबसे ज्यादा वक़्त इस जगह पे hi बिताया tha....aur उसके वजह से सबसे ज्यादा आत्माएं इसी प्लेनेट की थी उसके ander......jo आत्माएं ताकतवर th....wo सब माँ पापा के तरह hi एनर्जी बॉल में बदल के आखिरी बार अपनों से मुलाकात करने निकल पड़ी थी.....

वो सब हममे इसी जगह पे मिल रहे थे.....

जहा कही भी हम नज़र डालते वह पे एनर्जी बॉल होती और वो अपनी कहानी सुन्ना रही होती अपने लोगो ko....apne परिवार वालो को....

हम ये देख hi रहे थे की किसी ने स्लेयर के सरीर पे हमला कर दिया......

जब हमने पीछे मुद के dekha....to वो वह के कुछ लोग थे.....

मैं - ृक्क jaao.....ye क्या कर रहे हो.....

"इसकी वजह से हमारे log.....hamare बच्चे हमसे अलग हो गए...."

"इसको नहीं छोड़ेंगे हम...."

ये सब बाकी के लोग बोल रहे the....ki तभी मेरी नज़र उनमे से एक पे padi.....wo उन् लोगो में से था जो एअर्थ पे आया tha.....usne भी मुझे पहचान लिया.....

उसके आँखों से पहले से hi आँशु निकल रहे the....pata नहीं क्या बात थी......

उसने सभी को रुकने के लिए kaha...aur सभी ृक्क gaye.....aisa नहीं की वो वह का कोई राजा वगेरा tha.....bas सब ृक्क गए थे....

वो - तुम यहाँ आ gaye.....tumne अपना वडा पुर्रा किया....

मैं - नहीं अभी नहीं अभी आपकी परेशानी को ख़तम करना है हममे.....

वो - तुमने हमारे लिए ये सब socha......accha लगा par....ab तो ये बह यहाँ आ चुक्का hai....ab सब वापस से.....

मैं - अरे आप समझ नहीं रहे इसको मैं लेके आया hu.....ye आपकी मदद करने वाला hai.....aap मुझे बस उन् सब के बारे में बताइये जो सभी को परेशां करते है.....

पहले तो किसी को याक्किन नहीं hua......kuch ने तो मन्ना भी kiya......par कुछ लोगो ने हममे उन् सब के बारे में बताया भी......

कुछ गॉब्लिन्स the.....aur कुछ डार्क वर्ल्ड के ेल्फ्स और कुछ vampires.....jo यहाँ पे अपनी चलने में लगे हुए थे....

हममे उन् सब के बारे में पता चलने के बाद स्लेयर के सरीर के साथ ध्रुव सबसे पहले वह से निकल गया......

उसने पता नहीं क्यों ये सोचा की इन् सब को सज़्ज़ा ठीक उसी तरह से मिलेगी जैसे स्लेयर बाकी सब के साथ अपनी भूख मिटने के लिए किया करता tha......wo उनकी आत्माओं को अपने अंदर लेने के बारे में मैं बना चुक्का था.....

मुझे इस बात के बारे में पता नहीं था.....

वो हर उस बन्दे के पास गया जिनका नाम लिया गया tha.....aur चुक्की वो सरीर स्लेयर का tha....to जिसके सामने वो जाता उसकी हवा टाइट हो जाती thi......wo एकदम से कांपने लग जाता......

ध्रुव को ज्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ती thi.....bas जाता वह पे और उनके अंदर से उनकी आत्माओं को चूस के बहार निकल leta....aur फिर अपने अंदर दाल लेता.....

मैंने उससे बस यही कहा था उन् सब को सबक sikhao......aur वो पता नहीं क्या क्या कर आया......

खैर कुछ hi देर में वो मेरे पास वापस आ गया था.....

मैं - इतनी जल्दी.....

ध्रुव - उन् सब को सज़्ज़ा देना tha....aur इस नेक काम में देरी सही नहीं लगी मुझे तो मैंने जल्दी से काम निपटा liya....waise भी आपको घर भी जाना है......

मैंने डार्क वर्ल्ड के लोगो के लिए एक और मैसेज छोड़ा......

"अगर आज के बाद वापस से मुझे पता चला यहाँ पे कोई और है जो बाकियों को निच्च समझ के उनको खुचालने का काम कर रहा hai....to मैं उसको ऐसी सज़्ज़ा दूंगा की वो सोच भी नहीं सकता......." ऐसा कहने के बाद मैंने ओल्ड आउल की तरफ dekha.....aur उसने भी तुरंत hi पोर्टल खोल दिया.

पोर्टल खुलते hi हम वापस चले आये.....

मैंने देखा ध्रुव थोड़ा अलग सा लग रहा tha.....par मुझे अभी जल्दी थी घर जाने की तो मैंने कुछ ज्यादा नहीं socha......bas उसको माँ पापा को वापस लाने के लिए bola......iss बात पे ुस्कने मुझे अजीब तरह से dekha....jaise मैंने उससे क्या hi मांग लिया हो.....

खैर उसने बाद में मुस्कुराते हुए उनको वापस kiya.....tab तक मैंने देखा दब और लीडर भी पास आ चुक्के थे......

मैं - जल्दी करो हममे जल्दी जाना होगा.....

लीडर - haa.....rukko बस आ रहे है.....

ये बहुत दुर्र से पैदल आ रहे थे.....

मैंने वापस से ओल्ड आउल की तरफ देखा उसने भी पोर्टल खोल दिया और हम तिण्णो और साथ में माँ पापा वह से निकल के एअर्थ पे आ गए......

इस ओल्ड आउल ने घर के पास hi हममे टेलिपोर्ट कराया tha.....isse ज्यादा यहाँ वह जाने की जरुरत नहीं पड़ी humko......par एक बात ये भी thi.....kuch सोचने का मौका भी नहीं मिला mujhe.....jisse मैं बच पाटा....

खैर हम दरवाजे के तरफ बढे hi थे की अंदर से hi किसी ने दरवाजा khola.....aur तेज़्ज़ी से हमारे तरफ आ रही थी.....

P.Bua थी वो......

आते के साथ सबसे पहले तो मेरे सामने रुक्की और मुझे देखने लग gayi......puri अच्छी तरह से जैसे स्कैन कर रही ho......aur main....main वैसे hi खड़ा था......

ये जो मेरे साथ आये the.....wo पहले hi आगे बढ़ गए घर की oor.....rukke hi नहीं मेरे लिए.....

बुआ ने जब देख लिया सब ठीक है की नहीं तो उन्होंने खिंच के एक थप्पड़ मारा मेरे गाल में.....

अभी वो एनर्जी बॉल जो मेरे कपड़ो के अंदर the.....wo बहार आ gaye.....aur बुआ के चारो तरफ घूमने लग गए.....

बुआ - ये क्या hai.....inko रोक्को abhi......warna तुम्हे....

मैं - ye....wo.....

बुआ -मैंने कहा रोक्को समझ नहीं आता.....

वैसे तो मैं जानता था उनको कैसे रोक्का जाए या फिर उनसे कोई काम करना हो तो कैसे कराया jaaye....par इससे उनको बहुत तकलीफ hoti....aur मैं अब इनको तकलीफ नहीं देना चाहता था.....

बुआ को गुस्से में देख के उन् दो एनर्जी बॉल्स में से एक सीधा घर की तरफ चला gaya....aur अंदर जाके सभी को अपनी तरफ आकर्षित kara...aur फिर बहार ले आया.....

सायद बुआ ने किसी और को ये नहीं बताया था मैं कहा पे tha.....agar बताती तो एकदम से उनका चेहरा बदल नहीं जाता.....

सबको बहार आते देख उन्होंने बस मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अंदर लेके जाने लग gayi....wo एनर्जी बॉल्स भी हमारे साथ जा रही थी.....

मैं जब अंदर गया तो वह पे पुजारी जी भी the.....aur साथ में मधु bhi.....Pankaj और दक्ष मां भी थे वह पे......

वही दूसरी तरफ......

यहाँ हम फोमोस से बहार निकले hi थे की वह पे कोई और चला गया tha.....wahi इम्मोर्टल जो उस जगह को तबाह करने आया tha......par अब उसको अलग hi कुछ हो गया tha......wo एक्सपेरिमेंट्स के बारे में सोच रहा tha....wo भी पता नहीं कैसे कैसे......

हुआ यूँ की उसने अपने इतने saal....itne हज़ारों साल के एक्सपीरियंस के मदद से ये नतीजा निकला था की अगर आस पास के प्लैनेट्स और वह के जीवों को बचाना hai......to उसको फोमोस को पूरी तरह से ख़तम hi करना hoga.....par यहाँ आने के बाद उसने कुछ अलग और नया देख लिया.......

कुछ ऐसा जिसने उसके हज़ारों साल की एक्सपेरनिएन्स से निकले नतीजे को भी झूठला दिया tha.....aur एक नया hi नतीजा उसके सामने tha.....jisme फोमोस को ख़तम करने की जरुरत hi नहीं पड़ी और बाकी सब भी ठीक ठाक था.....

प्रतीक के बारे में देखा था हमने उसने कैसे कुछ गिनने चुनने जीवों की जिंदगी में दखल डाला और उनको पूरी तरह बदल दिया tha......Khooni घुड़सवारों की रानी रूपल दीदी को या और भी लोग थे unko......Waise hi रियान का भी कुछ ऐसा hi tha.....wo अजीब से जीव बनता और उनको यहाँ वह छोड़ देता और देखता वो कहा तक जा सकते hai.....kya क्या कर सकते है....

ये आदत लगभग हर एक इम्मोर्टल में थी.....

नियम बनने हुए थे उन् सब के लिए की कोई भी किसी दूसरे जीव के जीवन के साथ कोई ched-chad नहीं karega....par इस बात को हर इम्मोर्टल कभी ना कभी भूल hi जाता था......

वैसा hi कुछ अब होने वाला tha.....yaha पे

इन् इम्मोर्टल को एक्सपेरिमेंट करने की चुल्ल मच gayi......aur इन्होने आस पास के चीज़ज़ों के साथ ऐसा करना शुरू भी कर दिया.......

स्लेयर के बॉडी पे उसको एक्सपेरिमेंट करना tha....usko देखना था की एक सरीर में दो ताकतवर आत्माएं कब तक साथ में रह सकती hai.....usne उसके सरीर में dekha....Justin के अलावा और कोई नहीं मिला उसको जो ध्रुव को टक्कर दे sakke.....to उसने जस्टिन को और ताकतवर बना दिया.....

पर इस इम्मोर्टल ने एक और काम kiya.....usne वह पे लगे पेड़ों को भी और शक्तियां दे di....saath में प्लेनेट पे एक घिरा बना diya....usse लोग अंदर आ सकते the....bahar भी जा सकते the.....bas स्लेयर का सरीर बहार नहीं जा सकता था वह se......wo वही पे बढ़ गया था....

एक और खास बात तह उस घेरे ki......jab कोई उस घेरे के अंदर यानी के इस प्लेनेट पे आता तो उसके अंदर बेशुमार ताकतें आ जाती thi.....aur जैसे hi वो घेरे से बहार जाता वो साड़ी ताकतें ऐसे गायब हो जाती जैसे की वो थी hi नहीं.....

इतना सब करने के बाद वो इम्मोर्टल वह से चला गया अपने जगह pe.....aur फोमोस पे साथ साथ स्लेयर के सरीर पे नज़र रखने का काम शुरू कर दिया.....
 
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