फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 11 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

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कल से पहले के चान्सेस नहीं है
 
अपडेट - 85

घर से बहार......

मधु - तुम क्या कोई चोरी कर रहे the...jo इस तरह से उस चीज़ज़ को चुप्पा लिया....

पंकज - हां चोरी hi कह lo....ab मैंने पापा से पूछा नहीं था ना उसको उसे करने से पहले.....

मधु - पर जो तुम्हारे पापा का है वो तो तुम्हारा भी है naa.....phir ऐसा क्यों.....

पंकज - नहीं ऐसा नहीं hota......haa उनका सब कुछ मेरा है hi hai....par फिर भी उनसे बिना पूछे लेना गलत है.....

मधु - accha....haa ये बात भी सही है.....

मधु वो किताब अपने साथ उठा ले आयी thi.....jisme ये दोनों भानपुर देख रहे the......ab जब उसको समझ आ गया की ये पंकज मदद नहीं करने वाला तो उसने उस किताब को छुपाये रखना hi सही samjha.....wo बाद में उसको वही रख देगी जहा से उसने लिया था.....

पंकज - वैसे इंसानो के बिच क्यों जाना चाहती हो tum.....matlab ऐसा तो होता नहीं है normally.....ki कोई स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये वो भी किसी रॉयल फॅमिली से और यहाँ पे इंसानो के पास रहना चाहे.....

मधु - ऐसा होता है kya......ye मुझे बताया hi nahi....mujhe इसके बारे में भी ध्यान रखना चाहिए....

पंकज - क्या बोले जा रही हो.....

मधु - कुछ nahi.....wo पार्क आया या नहीं.....

पंकज - हम पार्क में hi है :रेडफास: वो आस पास जो लोग है वो इंसान hi है.....

मधु - accha......wo मैं थोड़ी भटक गयी थी.....

पंकज - तुम इंसानो के पास पहली बार आयी ho......tumko कुछ खिलता hu.....hmm तुम जाओ वह बेंच पे बैठो मैं आता हु.....

मधु - कहा waha......theek है..... :सिघ: मैं भी क्या क्या सोच रही थी यहाँ आउंगी और उसके बाद अपने घर जाउंगी माँ पापा को एक करना का काम शुरू karungi.....aur यहाँ तो अभी तक कुछ पता hi नहीं चला है.....

"देख देख नयी लड़की आयी है आज यहाँ पे......"

"हम्म अकेली भी लग रही hai......yaar देखो तो एकदम बम लग रही है ये तो...."

"तो आओ चलो थोड़ी मस्ती कर लेते hai....bahut दिन हो गया लाइन मारे....."

मधु बेंच पे बैठी खुद में hi बड़बड़ा रही थी की कैसे उसको अभी तक अपने घर के बारे में पता लगा लेना चाहिए tha.....par अभी कुछ भी नहीं हुआ hai.....ki तभी एक बॉल उसके सर के ठीक पास से जाता है......

अब कोई आम लड़की होती तो एकबार को घबरा jaati.....par ये बॉल जहा गयी उस तरफ देखने lagi.....tabhi वह पे कुछ लड़के आ गए.....

"अब्बे बंटू देख के नहीं मार sakta......abhi इनको लग जाता to......aap ठीक हो ना......"

"वैसे नाम क्या है तुम्हारा....."

"नयी आयी हो यहाँ pe......hum तुमको ये जगह घुम्मा दे क्या...."

मधु उन् सब को देख के अजीब सा मुँह बनती hai......ye चूतिये पता नहीं क्या समझते hai......unme से एक बाँदा अपना हाथ आगे करता है और बिलकुल मधु के चेहरे के पास लेके जाता है और बगल से आगे करते हुए बॉल की तरफ इशारा कर के कहता है......

"देखो वो रही ball.....aapne नाम नहीं bataaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh........arrreeeeeeeeeeeeee choddddddddddddoooooooo........"

मधु को उसका वैसा करना पसंद नहीं aaya,......usne बस उसका हाथ pakda.....aur थोड़ा सा मरोड़ diya.......ab मधु के लिए जो थोड़ा सा tha....usse उस बन्दे की जो चीख nikli.....pura पार्क उसी जगह देखने लग gaya.....wo पंकज जो आइस क्रीम लेने गया हुआ tha......wo भी अब वह देख रहा tha.....usne देखा मधु उस लड़के का हाथ पकडे हुए thi.....wo आइस क्रीम लेके उसकी ओर आने laga.....par तब tak.....dard में दडबे हुए लड़के से एक और गलती हो gayi.....usne अपने पेअर से एक लात मधु को maara.....Madhu हिल्ली भी nahi.......par उसको आ गया gussa......usne थोड़ी और ताकत लगा दी हाथ मरोड़ने में......

पंकज - अरे छोड़ो इसको Madhu.....dekho इसको दर्द हो रहा hai.....haath टूट जाएगा......

मधु - तुमको पता है ये ऐसे ऐसे कर रहा था.....

मधु ने अपना हाथ ठीक वैसे hi बाकी के लड़को के चेहरे के सामने से nikala......par जब वो हाथ वैसे निकल रही थी तब कर्रम में जैसे स्ट्राइकर को मारते है वैसे hi उनके मुँह पे मार दी थी.......

किसी का दांत तो किसी का नाक तो किसी का jabda......aise ीासे करके उसने उन् सब की ऐसी ऐसी कर दी.......

पंकज - ये क्या कर रही ho....inn सब को शक हो जाएगा.....

मधु - अरे हां ये मैंने सोचा hi nahi.....main हर बार इसके बारे में भूल रही hu.....tum संभल लोगे ना.....

मधु वह से चली और जाके बॉल के पास rukki.......usne बॉल uthaya.....aur उसको भी दे मारा उन्ही लड़को में से एक ko......wo बॉल उसके पीठ पे lagi......wo लड़का अपनी पीठ पकडे बैठा रहा......

पंकज - चलो यहाँ से.......

उसका हाथ पकड़ा और खींचते हुए उसको वह से लेके जाने laga.....par इसका मैं बारे तब naa........paas में थोड़ा सा पानी पड़ा हुआ tha.....nal के pass......usko उन् सब पे थोड़ा थोड़ा पंहुचा diya.....ab इससे क्या करने वाली है ये पता नहीं.....

दोनों वापस से घर पे पहुंच जाते hai.....pahle तो पंकज ये देखता है दक्ष कहा है जब वो नहीं दीखता तो उसको अपने कमरे में लेके जाता है और.....

पंकज - पागल हो kya......wo जान जाएंगे हम उनके जैसे नहीं है.....

मधु - जान jaaye......wo मुझे परेशां कर रहे the.....maine थोड़ा सा उनको कर दिया

पंकज - तुम्हारे इस थोड़े से में ना यहाँ पे बवाल हो jaayega.....jyada चोट ना लगी हो unnnnnnn.......ye kkitab.....ye यहाँ तुम्हारे पास कैसे......

पंकज उसको बता रहा था की तभी उसकी नज़र उस किताब पे padi....jo मधु ने ड्रेस में चुप्पा राखी थी.....

मधु - wo....wo मैं बस देखना चाहती थी तो leli.....main रखने hi वाली थी वापस......

पंकज - Tum....tumko पता है अगर पापा को पता चला तो वो.....

मधु - अब तुम हो ना संभल लेना ना इसको भी.....

पंकज - मैं kyun......aur ये क्या है हर बात पे तुम संभल लेना तुम संभल lena,.....main कोई बड़ा भाई नहीं हु तुम्हारा.....

मधु - वैसे ये भी सही hai.....tum.....ohh नहीं आप बन जाओ मेरे भाई.....

दक्ष - स्टडी रूम से एक किताब गायब hai......Pankaj....

पंकज - wo.....haa पापा ये इसको भानपुर का पता करना था ना तो मैं लेके आ gaya......aap दिखे नहीं मुझे तो मैं bas.....aage से ऐसा नहीं करूँगा....

दक्ष - हम्म ध्यान रखना इसका......

दक्ष बहार से इन् दोनों की बातें सुन्न रहे the......inn सब में उनको वैसा hi लग रहा था जब नीलम उनसे ऐसे hi खुद को बचने को बोलै करती thi....aur वो भी बच्चा लेते the.....aaj पंकज ने भी वही kiya......inn सब को देख वापस से एक आशा की किरण दिखाई दी दक्ष को.....

इनके यहाँ और ज्यादा कुछ नहीं hua.....haa उन् लड़को के साथ जो हुआ उसका पता दक्ष को बहार से laga.....par उनको ये सब जान के ख़ुशी hui....unhone खुद वो सब सेटल कर diya......par एक दिक्कत थी यहाँ pe.....settle उन्होंने किया tha.....Madhu ने उन् सब लड़को पे जो पानी की कुछ बुँदे डाली थी उसका कारनामा अभी बाकी था.....

नेक्स्ट डे.....

हम सब घर पे बैठे the......Dada दादी हमको बतलाब रहे थे की क्यों हमको इन् सब से दुर्र रखा गया tha.....kyun नहीं बताया गया था इन् सब के बारे में....

वो नहीं चाहते थे की हम वैसी किसी सिचुएशन में फस्स jaye......jis तरह का फिछले tha......humko पता था ये तो बस मौका वैसा था इस वजह से बोल रहे है ye.....khair......

दादा - ये सबसे कमज़ोर सैतान था हमारे अनुसार और इसकी ताकत तुम देख hi चुक्के ho.....iske बाद जो शैतान है वो इससे भी ताकतवर है....

दादी - और उसके लिए तुम सब को आराम chahiye......wo हम अगले वीक में karenge....tum सब इस वीक इन् सब से दूर रहने वाले हो अब.....

अब उनको कहा पता की हमको ज्वाला के पास जाना था.....

कल रात में निकिता ने हम सब को वह के हालात के बारे में bataya......wo बट्स पोलर बेयर के कबीले से आगे निकल आये the.....aur वो आस पास से जो भी गुजरे उनपे हुम्ला कर रहे थे......

मैंने रूपल दीदी से इस बारे में बात kiya.....unhone कहा वो तैयार hai......iss बार वक़्त नहीं tha......chance लेना hi tha......par वो अकेले नहीं जाने वाली thi....Main भी जाने वाला tha......aur मैं का मतलब hi यहाँ पे गया बाकी के सभी bhi.....kyun की सभी बैठे सुन्न रहे थे निकिता की बातें.....

तय ये हुआ था की जिस दिन स्कूल जाना है उसी दिन हम वह जाएंगे स्कूल बंक कर ke......School को K.Bua और बुआ सँभालने वाली थी.....

इन् सब को हम परसो करने वाले थे......

वही रात का वक़्त था......

दक्ष खुश था की पंकज को कोई मिल गया है जो उसके साथ रहता hai......aur वैसे भी मधु तो राजकुअंरि hai.....uske हिसाब से तो वो सायद उसको सुधर hi de,....aisa सोच रहे थे wo......par यहाँ मधु का अलग hi चल रहा था......

पिछले दिन भी उसने कहा था उसको भानपुर के बारे में जानना है उसको वह जानना है पर पंकज ने मन्ना कर diya.....usne कहा की जो कुछ भी उसने किया है उसके बाद वो गलती से भी ये नहीं करने wala....wahi दक्ष को वो ये बात बोलने गयी तो उसने भी कह diya.....ki अभी वह जाने को तुम तैयार नहीं हो.....

इन् सब से वो गुस्सा हो गयी thi...par उसको यहाँ पे अच्छा लग रहा tha....to वो यहाँ से जाना भी नहीं छाती थी......

पर अब गुस्सा है तो उसको काम करने का कोई ना कोई उपाय भी तो करना होगा ना......

वो आँखें बंद करके बैठ जाती है रात में अपने रूम में......

मधु - हम्म ये wala.....nahi इसके तो पीठ पे चोट लगी हुई thi,,,,,,ye तो मोटा hai.....ye भी nahi.....haa ये सही hai......wo वाला भी सही hai.....mote को भी ले लेती hu.....bura मान गया तो.....

ये जैसे शॉपिंग करने को आयी थी यहाँ pe......aakhen बंद इस लिए थी क्यूंकि ये पता लगा रही थी आखिर वो लड़के थे कौन और उस वक़्त कहा मिलने वाले the.....wo पानी की एक boond......usse इसने उनका पता लगा लिया.....

वही फोमोस पे आज hi स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए 3 लोग ख़तम हो चुक्के थे और उनमे से 2 को तो खुद स्लेयर ने मारा था.....

लूसिफ़ेर को अभी तक स्लेयर के बारे में कुछ भी पता नहीं चला था.......

आज के लिए इतना hi......chota अपडेट hai......next बड़ा hoga....waha देखेंगे मधु उन् लड़को का क्या करने वाली है साथ hi ज्वाला के यहाँ chalenge.....aur पंकज और मधु स्कूल भी आएंगे.....

घर पे रहो सेफ रहो......

:गूडनिघत:
 
अपडेट -86

मैं, निकिता और रूपल didi.......tinno hi ज्वाला के कबीले में पहुंचे हुए the.....Bua भी आना चाहती thi.....par K.Bua को दब के पास जाना padda.....kyunki उसको कुछ बहुत hi सीरियस इशू हो गया tha......wahi Bua......Bua को आज स्पेशल क्लास दे दी गयी thi......unko गुस्सा बहुत आ रहा था पर एक बार वो दांत सुन्न चुक्की thi......iss वजह से हमने hi उनको मन्ना कर दिया आने se.....ab बच्चे हम तीन तो हम वह पे आ चुक्के थे.....

निकिता - मैंने कहा था ना dekho....ye और भी पास आते जा रहे है......

J.Mom - सायद इनको पता चल गया है इनकी रानी अब नहीं rahi......ye उसी के तलाश में है......

मैं - sayad........Rupal दीदी आप कर लोगी ना.......

रूपल दीदी - हां पर इस बार तुममे से कोई भी वह पे नहीं aayega.....maine पिछले बार कुछ महसूस किया tha.....mujhe देखना है वो क्या था......

मैं - नहीं ये नहीं chalega.....hum आपके साथ honge....aur जैसे hi हमको lagega.....hum वह पे उनको रोकने आए जाएंगे....

रूपल दीदी ने एक दो बार समझने की कोशिश करि पर मैं नहीं samjha......to उन्होंने कहा की जब तक वो खुद आने ना कहे कोई नहीं जाएगा उनके पास......

वो आगे gayi....aur जैसा तय हुआ था हम सब पीछे rahe,.....Jwala के कबीले के पास.......

दीदी आगे गयी.....

(रूपल के रेस्पेक्ट में )

पिछली बार भी जब इन् सब के पास आयी थी कुछ तो हुआ tha......juch ajeeb,.......par उस वक़्त कुछ होता उससे पहले वो दोनों वह पे आ गए थे......

मैं ऐसे hi खुद से बातें करती आगे जा रही thi....aur पहुंच गयी उस जगह पे जहा तक वो सब आ चुक्के the......sayad किसी ने गौर नहीं किया था पर ये सब किसी सर्किल के तरह the.....bas इनकी रेडियस बढ़ती जा रही thi......aur मैं वापस से इनके सरकमफेरेंस पे पहुंची हुई थी......

जैसे hi वह पे पेअर rakhe......aaj भी वही चिलम chilli........Mujhe याद है उस दिन भी ऐसा hi हुआ था kuch.....Main वह पे पहुंची thi......aur ये चिल्लाने लग गए थे......

आज भी इनके चिल्लाने की आवाज से सर्र फटता जा रहा था mera......maine अपने हाथ लिए और अपने का........

"ये मैं क्या कर रही hu.......Nikita.....tum ठीक तो हो......."

निकिता - प्रतीक ye...ye ठीक हो gayi......aapne तो हमको आज मार hi देना था.....

मैं - क्या baat.......Chotu.....tujhe क्या hua.....ye chott......ye kaise......aur ये जगह......

पोलर बेयर किंग - ज्वाला इस जगह का ये हिस्सा तो बिलकुल मेरे कबीले जैसा हो चला hai.....ab इसको भी मरमत लगेगी.....

ज्वाला - पहले खुद की मरमत करा lu.....uske बाद इस जगह को देख लेंगे.....

ज्वाला ने पोलर बेयर किंग को कुछ तो इशारा और किया tha.....jiske बाद वह पे दोनों के hi और लोग आ पहुंचे the...aur वो मेरे आस पास आ गए the.....jaise मुझे पकड़ने वाले ho......Main छोटू को उठा रही थी जो जमीं पे लेता हुआ लम्बी लम्बी साँसे ले रहा था......

प्रतीक - आप ठीक हो ना......

मैं - हां मुझे क्या hoga......par यहाँ पे ये sab.....aur मैं यहाँ कैसे आ......

निकिता - अभी बताने लायक कुछ नहीं हुआ है Di.....aap chalo......Jwala......K.Bua को यहाँ लेके aao......aur हम तिण्णो को वैद्यों के पास लेके चलो.....

ज्वाला ने ठीक वैसा hi किया जैसा निकिता ने उससे कहा था.......

हम तिण्णो पहुंच गए वह pe.....aur थोड़ी देर में वह पे K.Bua भी आ gayi......aatein hi अपने काम में लग गयी wo......par पता नहीं kyun.....chottein प्रतीक और निकिता को लगी थी वो चेक मुझे कर रही थी.....

मैं - आप मुझे क्या देख रहे ho....dekho इन् दोनों को चोट लगी hai.....pata नहीं क्या हुआ वह पे......

मेरी ये ात सुनके उन्होंने सबकी तरफ dekha.....aur फिर से मुझे चेक करने lagi......wahi दूसरे वैद्य निकिता और प्रतीक को देख रहे the......aur उतने में वह पे बुआ भी आ gayi.....Old ोल्व को बुला के....

उनको भी पता चल गया था आखिर यहाँ पे हुआ क्या था......

बैक तो हीरो

उन्होंने हम तिण्णो को hi पहले अच्छे से dekha.....thoda डांटा उसके बाद हमको लेके वापस एअर्थ पे आ gayi......Main और निकिता तो स्कूल के मेडिकल डिपार्टमेंट में hi जाने वाले the.....par बुआ ने रूपल दीदी को भी वही रहने को बोलै......

रूपल दीदी को थोड़ी सी थकावट तो हो रही thi.....to उन्होंने भी ज्यादा न नुकुर नहीं kiya.....K.bua वह पे नींद की दवाई लेके आयी और उसको दीदी को दे दिया......

बुआ जैसे वेट कर रही थी कब ये हो और वो सो jaaye......jaise hi वो सोई

बुआ - अब बताई तुम दोनों ये जो मैंने सुन्ना वो सच hai....kya रूपल ने.....

मैं - नहीं ये वो नहीं थी Bua.....darasal जब दीदी उन् सब के पास गयी.....

रूपल बट्स के पास पहुंची hi थी और उन् सब ने चिल्लाना शुरू कर दिया tha......Rupal ने अपने कान बंद kiye....par उसके baad......uske बाद पता नहीं क्या hua.....uski आखें खुद से बदल gayi......ekdum से काली और badi......usne अपना हाथ अपने कानो से हटाया और आज भी उसी तरह से ताली bajayi......aur वो सारे के सारे बट्स एकदम से शांत हो गए या कहे थम से gaye.....jo जैसे था वैसे hi raha.....Hum सब hi इस चीज़ को देख रहे the.....Polar बेयर किंग ने कहा की ये उसी दिनन के जैसा हो रहा hai......Mujhe लगा अब मुझे वह जाना चाहिए और उनको वापस लेके आना chahiye......par तभी उन्होंने अपने हाथ के इशारे से रुकने को कहा......

मैं - मैं जा रहा हु उनके pass.....mujhe वो ठीक नहीं लग.......

निकिता - देखो वो रुकने कह रही है ना रूक्को थोड़ा......

मैं - उनकी आँखें तो देखो.....

निकिता - ये सायद उन् सब को कण्ट्रोल करने के लिए ऐसा कर रही होगी तुमने देखा ना कैसे ताली बजने से hi सब शांत हो गए.....

मुझे भी निकिता की बात थोड़ी सही lagi.....Main ृक्क गया पर अगले hi पल जिस हाथ से वो हमको रुकने कह रही थी उसी हाथ को झटक के उन्होंने हमारी तरफ इशारा कर दिया......

पोलर बेयर किंग - ये इस तरफ इशारा क्यों कर रही है......

उसका सवाल ख़तम हुआ और हमको जवाब मिल gaya........wo हमारे तरफ उन् बट्स को भेज रही थी........

ज्वाला - ये सब तो हमारी तरफ आ रहे hai......hume तैयार रहना चाहिए.....

निकिता - अरे उन्होंने उन् सब को कण्ट्रोल कर लिया है ये दिखने को वो यहाँ पे आ रही है उनके साथ......

काश निकिता की बात सही hoti......par वो सब तो उस जगह पे हमला करने आ रहे the.......aur पहला वार मुझपे hi हुआ tha......unn बट्स में से एक ने मुझपे हमला करने की कोशिश की पर मैंने अपने हाथ से उसको खुद से दूर कर diya......lekin उसके बाद और आने लग गए.........

मैं - ये सब हमपे हमला कर रहे hai.....Didi का खुद पे कण्ट्रोल नहीं hai......inn सब को संभालना hoga....par दीदी को कुछ नहीं होना चाहिए.....

वो सब भी लग गए अपने काम mein.....par हमको ज्वाला के कबीले को भी बच्चन tha.....ek बार वो बट्स वह चले जाते तो बहुत दिक्कत होने वाली थी......

मैंने अलबूस और कूपर को बस इसीलिए बहार बुलाया की वो उन् सब को अंदर ना जाने de....Jwala और पोलर बेयर किंग ने भी अपने लोगो को इसी काम में लगाया हुआ था......

निकिता बस दीदी के पास जाने की कोशिश कर रही thi......par वो bats......wo ऐसा होने hi नहीं दे रहे the......unhone दीदी के आस पास जैसे कोई बड़ा सा सुरक्षा कवच बना रखा था जैसे hi कोई उसके पास जाने की कोशिश करता वो सब उसपे हमला कर देते.......

मैं अपनी तलवार हाथ में लिए बस चलाये जा रहा tha......unn बट्स को मारे जा रहा tha.....par ये ख़तम नहीं हो रहे the.....ek को मारो 10 आ जाते उनकी जगह लेने ko.....inki तद्दत बहुत ज्यादा thi.....yaha पे मैं उस शैतान के साथ जैसा किया था वो भी नहीं कर सकता tha.....wo सब जमीं पे थे ये सारे हव्वा mein......maan लो हवा में भी एक थंडर वेव बना देता मैं पर इससे सिर्फ बट्स hi नहीं दीदी को और बाकी सब को भी चोट लग सकती thi......main बस ऐसे hi तलवार चला रहा tha.....iss कोशिश में की मैं दीदी के पास पहुंच सक्कु पर ये हो hi नहीं रहा था.......

कोशिश निकिता भी कर hi रही थी पर बात वही thi......Jwala और पोलर बेयर किंग भी लगे हुए the....par कोई खास आसार नहीं हो रहा था.....

एक तो ज्वाला और पोलर बेयर किंग के बहुत सारे लोग लगे हुए थे उन् सब के saath......bats को कबीले के अंदर जाने se.......upar से ये सब खुल के हमला नहीं कर पा रहे थे क्यूंकि दीदी को चोट लग सकती थी इससे......

हम सब ृक्क से गए the.....uss वक़्त ओल्ड आउल के लोग वह पे आ gaye.....unn सब ने बट्स को रोकने में बहुत मदद ki.......wo सायद जानते थे एक तरीका उनको रोकने ka......wo सब आये और चिल्लाने लग gaye.....jisse बट्स यहाँ वह बिखरने lage......par ये भी ज्यादा देर नहीं chala.......Bats वापस से चिल्लाने लग gaye......aur हम सब अपने अपने कान हाथ से बंद करके आगे की ओर बढ़ रहे the......Nikita ने देखा की अभी बट्स दीदी के पास बहुत काम hai......wo ुस्सन ओर बढ़ी और मैं भी उसी तरफ badha.....Jwala और पोलर बेयर हम दोनों के लिए रास्ता साफ़ कर रहे the.....par

दीदी के पास पहुंच के भी कुछ नहीं hua......wo खुद के काबू में थी hi nahi......Pahle मैं hi पंहुचा था उनके पास.......

मैं - Didi.....Didi......Rupal दीदी आप ठीक हो.....

मैं चिल्लाता रहा पर वो सुन्न hi नहीं रही thi......unhone मेरी तरफ देखा और मेरा गाला पकड़ के एक हाथ से हवा में लटका diya......ye देख के ज्वाला ने उनपे फायर से हमला kiya......par निकिता ने उसको रोक liya....aur वो वार खुद पे ले liya.....aur इसी वजह से वो हम दोनों के ऊपर आके girri......Jisse मैं दीदी से अलग हो गया......

मैं अपनी जगह से खुद को संभालता हुआ उठा और निकिता की तरफ badha......usko चोट लगी होगी ये सोच ke.....Bahut गुस्सा आ रहा था इस वक़्त ज्वाला pe.......jab निकिता के पास पंहुचा तो उसको कुछ नहीं हाउ tha......uske स्पिरिट एनिमल ने उसको बच्चा लिया tha.....wo horse.....jispe फ्लेम the......upar से डार्क पावर का भी चक्कर.....

पर उसको झटका तो लगा tha....aur उसकी वजह से चोट लगी हुई थी.......

मैंने उसको uthaya.....aur फिर दीदी को देखने lage......wo कुछ बट्स के बिस्तर पे पड़ी हुई thi......unn बट्स ने उनको गिरने नहीं दिया था.....

मैं और निकिता उनकी तरफ hi देख रहे थे की वो बट्स की बानी हुई बीएड सीधी हो गयी और रूपल दीदी कड़ी हो गयी.....

निकिता - ये तो अपने काबू में hi नहीं है......

मैं - ये बात अब समझ आ रही hai.....ye सोचो कैसे वो ठीक होंगी......

ध्रुव - अभी कोई चांस नहीं hai.....haa अगर कुछ देर के लिए वो खुद को कण्ट्रोल कर पाए तो चान्सेस बन jaayegi......warna ये सायद बहुत वक़्त तक ऐसे hi रहने वाली है.....

मैं - क्या बकते जा रहे हो.....

ध्रुव कुछ कहे उससे पहले बट्स हमपे वापस हमला करने लग गए the......Main अपने तलवार से उनसे लड़ने में लगा हुआ tha.....aur धीरे धीरे निकिता के पास जा रहा ठावो भी उसी में लगी हुई थी.....

मैं - हमे हमला करना होगा उनपे.....

निकिता - क्या बककक रहे ho......tum उनपे हमला करोगे......

मैं - उनको सायद झटका chahiye.....sayad इससे वो कण्ट्रोल में आ जाए......

निकिता - कुछ भी मत bolo.....main ऐसा नहीं करने दूंगी तुमको.....

मैं - ज्वाला वार करो दीदी pe......par नुक्सान काम से काम होना चाहिए......

निकिता - ज्वाला तुम ये नहीं करोगे.....

मैं - अभी वार करो.....

ज्वाला समझ नहीं पा रहा था वो किसकी बात manne......dark पावर के कारण उसकी हालत ऐसी थी की मेरे ऑर्डर्स को मैंने के लिए अगर निकिता मन्ना कर दे तो वो नहीं कर सकता waisa......par पोलर बेयर king.....wo ना मेरे अंडर था ना निकिता ke......usne हमारी बहेश sunni....aur उसने भी कुछ socha......aur फिर वार कर दिया दीदी के taraf.....aur बस करता hi गया.......

ऐसा इस लिए क्यूंकि सारे बट्स वापस से दीदी को बच्चन में लग गए थे जैसे hi उनपे हमला hua......Polar बेयर के लगातार वार करने से एक बार दीदी को चोट्ट aayi.....par ये झटका काम नहीं kiya.....wo ऊपर से गुस्सा हो गयी और इस बार तो bas.......wo सारे बट्स उनके हाटों के इशारे पे काम करने lage....jaha उनका हाथ जाता उस ओर सारे के सारे बट्स पहुंच जाते और सब tabah........taadat तो ज्यादा थी hi unki....aur अब एक स्पेसिफिक जगह पे एक साथ हमला karna.....ye उनको और खतरनाक बना रहा था......

निकिता और मैं दोनों ये सब देख रहे the......hum दोनों hi उनकी ओर daude.....iss बार हमारे पास और कोई रास्ता था nahi....siway उनसे खुल के लड़ने ki.....aur नहीं तो वह पे बहुत से लोग मरने वाले थे.....

मैंने और निकिता ने वॉर करना शुरू kiya......to उन् बट्स ने हम तिण्णो को घेर liya......ek गोले mein........bahar से ओल्ड आउल , ज्वाला और पोलर बेयर किंग उस गोले पे हमला करते जा रहे थे उसको ख़तम करने ko.....par कोई सफलता nahi......hum तिण्णो अंदर the.....jaise hi मैं दीदी पे वार करने को आगे badhta.....kahi ना कही से बट्स मुझपे हमला कर देते वही निकिता के साथ भी था.....

जब ये ज्यादा होने लगा तो मैंने कूपर और अलबूस को अंदर बुलाना चाहा पर वो भी नहीं आ paaye......koi जगह hi नहीं थी की वो अंदर आ पाते......

हम दोनों दीदी पे वार करने की कोशिश कर रहे the......par काम नहीं बन्न रहा था तो हमने तय kiya.....main उनपे वॉर करूँगा और वो बट्स से निपटेंगी......

मैं आगे badha.....mujhpe वार करने बट्स आ रहे थे की निकिता ने उनको मार giraya......ab वो मर्रे या नहीं ये तो पता नहीं पर उस वक़्त मैं आगे बढ़ gaya.....aur बस यही चलता रहा जब तक हम दीदी के करीब ना pahuche.....Maine ेलेमेंटल पावर से उनपे हमला करने की sochi.....thunder एलिमेंट se.....par काम नहीं banna.....wo बट्स बिच में आने lage....par इस दौरान एक चीज़ज़ मैंने dekhi.....ek ओर बट्स की तादात काम होने लगी thi......Dhruv ने मुझे मन्ना किया हुआ था ये करने से पर अब तो बस ये hi एक तरीका समझ आ रहा था mujhe.....Maine निकिता से कहा की जैसे hi मैंने उस तरफ थंडर ब्लास्ट karunga.....wo दीदी को लेके बहार की ओर कुद्द jaayegi......wo हिस्सा दीदी के थीप पीछे hi tha.....Nikita ने भी बात मैं li.....aur हमने वही kiya.....Pahle वो बहार को कुड्डी दीदी को लेके और फिर मैं bhi.....par मैंने अपने दूसरे एलिमेंट का उसे kiya......jisse मैं अपना साइज या फिर अपने आस पास के चीज़ज़ों का साइज बड़ा छोटा कर सकता tha.....sayad मुझे उन् बट्स के साइज को hi छोटा करना चाहिए tha.......par मैंने खुद को बड़ा kiya.....wo भी एक्सट्रीम लेवल tak......aur वो बट्स जो अभी भी वो गोला बनाये बैठे हुए the.....unke ऊपर हाथ रखा और अपना थंडर एलिमेंट भी उसे कर दिया.......2 एलिमेंट एक sath.....upar से एक्सट्रीम लेवल्स tak.....wo बट्स का क्या हुआ पता nahi.......par main.....Main वही पे पड़ा रह gaya......Bhala हो उस ध्रुव का जिसने मेरा साइज नार्मल करने में मदद kiya......wahi बाकी सब मुझे ऐसे देख के हैरान हो रहे the.....par Didi...wo तो अभी भी लगी हुई थी निकिता को मारने mein....aur Nikita....wo मुझे देख रही thi......ki तभी एक मुक्का.....

उसके बाद रूपल दीदी उसको मारती रही और वो बस जितना हो सकता था उतना बचती rahi.....phir एक मुक्का उसने भी maara......jiske बाद दीदी ने वापस उसको मारा और वो निच्चे जमीं पे गिर gayi......aur उसके ऊपर रूपल दीदी बैठ गयी और मारने को की तभी वो अपने कण्ट्रोल में वापस आ गयी...

बुआ सब सुन्न रही thi.....Dhruv की बातें nahi....unhone मेरी साड़ी बातें सुन्नी और फिर दीदी के पास जाके उनके सार पे हाथ फेरने लगी.....

बुआ - तप अब उन् बट्स का kya.....iss बारे में भी कुछ पता चला yaa.......nahi.....

मैं - पता नहीं Bua.....sayad थंडर के वजह से वो सारे जल के ख़तम हो गए ho.....par मैं इस बारे में साफ़ साफ़ नहीं बता सकता.......

K.Bua - तो तुम्हारे पास एक और एलिमेंट भी है.....

मैं - हम्म एक और एलिमेंट hai....par मैंने इसके बारे में आप सबको नहीं बताया था......

बुआ - कोई बात nahi.....ab जैसे इस बात को चुप्पा रखा था वैसे hi जो कुछ भी वह हुआ वो सब चुप्पाना hai.....Rupal को वो बातें नहीं बतानी hai.....naa hi किसी और ko......pata नहीं ऐसा क्यों लग रहा है वो ये बातें सुनने के बाद वापस से अपने कण्ट्रोल में नहीं रहेगी.....

हम दोनों ने इस बात को मान liya......Waise तो हम दोनों की मरहम पट्टी हो चुक्की thi....par फिर भी K.Bua ने एक बार सब वापस से सही kiya.......aur उसके बाद वो भी रूपल दीदी को चेक करने में लग gayi......unhone देखा की उनकी एनर्जी लेवल में हलचल हो रही है पर फिर वो नार्मल भी हो गयी thi......Jab शाम में रूपल दीदी जाएगी तो उनको बुआ ने समझा के घर वापस भेज diya....aur इस बारे में किसी से ना कहने को कहा.....

रूपल दीदी - मैं भला इस बारे में क्यों बताउंगी किसी ko....aap भी ना......

वही पिछले 2 दिन दक्ष मां के घर पे जो कुछ हुआ उससे वो हैरान हो गए the....unhone ये नहीं सोचा था की इन् दोनों में बस इतने से वक़्त में इतना अच्छा बॉन्डिंग हो jaayega......aisa लग रहा था जैसे पंकज और मधु बचपन से एक दूसरे को जानते हो.....

अब परसो रात की बात hi लेलो.....

इस लड़की ने तो घर के बहार जाने के liye......unn लड़को को अपने पास बुल्ला लिया tha......isko किसी भी तरह से भानपुर जाना hi tha......to उसने सोचा वो लड़के इसको पंहुचा hi denge......to उसने पानी के जादू की मदद से उन् लड़को को अपने पास लेके आ gayi......wo तिण्णो तो बेचकर नींद में hi the......upar से चोट लगी थी तो पट्टी भी लगी हुई थी उनमे......

मधु ने उन् तिण्णो को अपने पास बुल्ला के उनको पानी के चेयर्स पे बिठा दिया और पानी से hi उनको बाँध भी दिया था.....

मधु - ooye.....utho saare......kab तक सोते रहोगे......

"nahi.,,,,nahi मत maaro......main....main आज के बाद कभी ऐसा नहीं का....."

वो मोटा नींद में hi पिट रहा था किसी से सायद तभी बड़बड़ा रहा था.....

मधु ने थोड़ा सा और पानी liya...aur उन् सब के चेहरे पे दे maara.....jisse वो तिण्णो hi छटपटाते हुए उठ गए......

मोठे लड़के ने जब मधु को सामने देखा वो तो चिल्लाने hi laga.....wo तो सही वक़्त पे मढ़ी ने तिण्णो के मुँह पानी से भर diye....par आवाज तो हो चुक्की thi....Pankaj पता नहीं क्या करने को निच्चे आ रहा था की उसने ये sunna.....aur ये सुनके वो कमरे के पास पहुंच gaya......Ab मधु ने तो बंद किया नहीं था कमरा तो वो वह से देखने लगा क्या हो रहा hai.....pahle उसको मधु dikhi......phir paani.....phir वो मोटा ladka.....aur उसके बाद बाकी के do.....Pankaj जल्दी से रूम में गया और वह पे तिण्णो को बेहोश कर दिया......

मधु - हीं ये क्या hai......ye लोग मेरा काम करने वाले थे.....

पंकज - पागल लड़की पहले तो धीरे bolo......aur ये इनके मुँह से पानी nikalo....ye सांस नहीं ले पाएंगे ऐसे और मर्डर जाएंगे....

मधु ने पानी हटा दिया......

पंकज - तुम क्या पागल ho......itni रात को इनको अपने कमरे में लेके आ gayi....inko कुछ हो जाता to.....aur अब तो इन्होने देख लिया है तुमको....

मधु - पर मुझे इनसे पूछना था भानु.....

पंकज - ये तुम और तुम्हारा Bhanupur.....aise जाओगी waha.....waha भी लोगो को ऐसे मारने को.....

मधु ने ये बात sunni....usko बुरा laga......usko पुजारी जी की बात याद aayi.....usko भी लगा ये तरीका सही नहीं hai.......waise तो वह पे उसको पुजारी जी ने बताया था कैसे इंसानो के साथ रहना है पर तब भी यहाँ आने के बाद एक भी बात नहीं फॉलो की थी isne.....itni उत्तवाली हुई पड़ी थी ये......

पंकज ने देखा मधु उद्दस हो गयी hai.....aur जाके अपने बीएड पे बैठ गयी है....

पंकज - अच्छा ये बताओ क्या है वह भानपुर में क्यों पता कर रही हो उस जगह के बारे में.....

मधु - कुछ नहीं hai.....tum जाओ यहाँ से.....

पंकज - अरे मैं मदद karunga.....aur तुम्हारी बस बताओ to.....aur इंसानो के बिछ कैसे रहते है ये भी बताऊंगा....

मधु - मुझे नहीं जानना कुछ भी जाओ यहाँ से......

पंकज - ठीक hai....par इन् तिण्णो का kya....inko इनके घर कौन pahucayega.....akele कर पाओगी.....

मधु - जैसे आये थे वैसे hi चले जाएंगे......

पंकज - इनके घर कौन कौन से थे याद भी hai......jaise आये थे चले jaayenge...aur बेहोश पड़े है ये tinno.....agar पापा को इस बारे में पता चला तो वो स्कूल में बताएँगे फिर इंसानो के पास जाना भूल hi जाओ तुम....

मधु - भानपुर में कोई मेरा अपना है ऐसा मुझे लगता है पूरी बात नहीं बता सकती......

पंकज - हम्म चलो इतना काफी hai.....theek है मैं चलता हु.....

मधु - Aeee......inka kya...inko कौन लेके jaayega.....aur इन्होने मुझे देख लिया है अब तो तुम्हारे पापा को पता चल hi जाएगा ना......

पंकज - तुम करने वाली थी ना कुछ अब karo....main चला तुम खुद समझो....

मधु उसकी बात सुनके उसको घूरने lagi.....to पंकज ने उन् सब के घर का पता उसको बता diya......Madhu उनको लेके तो आ गयी thi.......par अब ये थोड़ी पता था उसको की वो किस गली के किस मुहल्ले में रहते है और वह पे जाय कैसे jaaye......usne पानी की मदद से उन् तिण्णो का पता लगाया tha.....lekin अब वो भी यही थे और पानी bhi.....to उनके घर का पता लगाना मुश्किल tha.....Pankaj ने ना सिर्फ एड्रेस बताया बल्कि मदद भी की उनको वह पहुंचने mein.....Madhu के बार बार पूछने पे की उन् सब ने उसका चेहरा देखा हुआ hai......Pankaj ने कहा की जब वो घर पे होंगे तो उनको ये बस एक सपना lagega.....aur अगर बात बढ़ी तो वो संभल लेगा.....

इन् दोनों की जोड़ी सही बन रही थी.....

बैक तो प्रेजेंट.....

दोनों हो आज स्कूल पहुंचे the....par ना तो निकिता वह पे थी और ना hi Prateek.....ye सब तो अलग hi चल रहे the.......haa बुआ को इसी को पढ़ने का काम दिया गया था एक्स्ट्रा क्लास mein......padhana नहीं बस टेस्ट लेना कहा जाए तो सही hoga.....wo इसकी खूबियां समझ रही thi.....Principle सर के कहने पे

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है मधु और निकिता का milna.....aur साथ hi डेमोस का चक्कर लगा आएंगे एक बार......
 
अपडेट - 87

नेक्स्ट डे.......

सुबह hui.....Main अपने रूम में utha......raat को हम अपने अपने रूम्स में चले गए the......jo कुछ भी हुआ था kal.....uske बाद ज्वाला उसके लोग और वह के बाकी sab....sabhi को आराम की जरुरत thi.....Polar बेयर किंग की जगह वापस मिल गयी thi.....par अभी उनकी हालत ख़राब हो चुक्की थी कल के वजह से तो उन् सब ने थोड़ा आराम करने के बाद अपने यहाँ काम शुरू करने के बारे में सोचा tha.....aur जब तक काम होता वो सब वही ज्वाला के कबीले में रहने वाले the,,,,....pahle की तरह....

मैं उठा और उसके बाद जैसा तय होता है मैं चला गया ध्यान लगाने ko.....waha पंहुचा तो निकिता और बाकी के सब भी आ गए थोड़ी देर में....

हम सब ने अपना रोज का काम kiya....uske बाद वह से अपने अपने रूम में चले gaye......fir वह से ब्रेकफास्ट के लिए गए......

निकिता - तुमने बोलै था कुछ बताओगे......

मैं - क्या बताना tha.....mujhe याद नहीं है.....

निकिता - तुमने कहा था पंकज ठीक हो जाएगा तो तुम मुझे बता doge.....par वो कल hi आ गया था यहाँ पे.....

मैं - वो ठीक हो गया इतनी jaldi......aisa होना तो नहीं चाहिए tha......sayad दक्ष मां ने कुछ किया hoga....haa....

निकिता - अगर कल वो सब ना हुआ होता ना तो abhi.....abhi...

मैं - अरे शांत हो jaao....ab आ गया ना वो जो करना है karo.....maar दो उसको मुझे कोई मतलब न.....

मैं कुछ और बोलता उससे पहले hi मेरी नज़र सामने एक लड़की पे padi....chahra नहीं दिख रहा था par.....kya कहु....

निकिता - देखो ज्यादा तो बोलो mat.....main क्यों उसको कुछ करने जाउंगी मैंने तो बस थैंक्स और सॉरी बोलना है उसको अब वह क्या देख रहे ho.....tumse baat.....Pankaj...

निकिता ने मुझे देखा और मेरी नज़रों का पीछा करते हुए वो भी वही देखने लगी पर उसको लड़की दिखे उससे पहले पंकज दिख gaya......Ab वो समझ नहीं पा रही थी कैसे उससे बात kare.....usne तो कुछ और hi प्लान कर रखा था par.....ye तो पहले hi पहुंच gaya...Usne जब आस पसस देखा तो वो एक लड़की के साथ बैठा हुआ था जिसके बाल और पीठ hi देखे जा रहे थे यहाँ से तो...

मैं - तुम जानती हो उसको.....

निकिता - मैं भी यही पूछने वाली थी....

मैं - मैं क्यों जानूंगा usko........lekin सोचने पे लग तो थोड़ी बहुत जानी पहचानी hi....bas चहेरा दिख जाए तो....

निकिता आगे कुछ बोलती उससे पहले hi क्लास का टाइम हो गया और सभी वह से जाने लग gaye......humko भी जाना pada.....humdekh नहीं पाए उस लड़की का चेहरा.....

क्लास में पहुंचे तो पता नहीं ये निकिता को क्या हो gaya.....wo चिढ़ने लग गयी mujhse....upar से वो यहाँ वह देख रही थी की वो नयी स्टूडेंट वो लड़की उसको दिख जाए और वो उससे बात kare....par वैसा कोई है hi नहीं वह पे.........

मैं क्लास में ध्यान देने लग गया क्यूंकि ये एक अजीब से हथियार के बारे में tha.....Lambe हैंडल वाले सोर्ड के बारे mein....khair इसको तो बाद में सुनेंगे कभी.....

अभी को मधु के पास चलते है......

मधु को आये ज्यादा टाइम नहीं हुआ था यहाँ pe.....par वो यहाँ के पढ़ाई में बहुत पीछे thi.....Principle चाहते थे उसको थोड़ा ज्यादा केयर mille.....to उन्होंने सबसे पहले तो कुछ प्रोफ्स को बोलै की उसको padhaye.....aur अच्छे से padhaye.....taaki वो मैच कर सक्के अपना लेवल बाकी सब के saath.....par बात इतनी सी तो थी nahi.....Madhu ने इन् सब में पंकज को भी खींच लिया.....

पंकज जोकि सीनियर tha...uske कारण उसको अपने साड़ी पुराणी पढ़ाई वापस करने का मौका मिल गया.....

ये मौका नहीं सज़्ज़ा होती hai......par पंकज को इसको मन्ना करने का मौका नहीं milla.......Daksh मां वही पर थे जब मधु ने ये बात बताई प्रिंसिपल को की वोआकेले में क्लासेज नहीं लेना chahti....usko कोई तो और चाहिए hi.....

इस्पे प्रिंसिपल ने भी सोचा इसके साथ किसी एवरेज ग्रेड या भी ख़राब ग्रेड वाले को बिठा दिया जायेगा उससे उसका भी भला हो jaayega......unhone उसको इस बात से परेशां नहीं होने को kaha......wo खुद धुंध लेंगे किसी ko.....par मधु ने तो सोच रखा था......

मधु - मैं पंकज के साथ पड़ूँगी आपको किसी को ढूंढने की जरुरत नहीं.......

प्रिंसिपल - Pankaj.....(haste हुए) अरे उसने तो बड़ी मुस.....

वो आगे कुछ बोलते उससे पहले उनको याद आया की पंकज के पिता वही पे खड़े है जो सब सुन्न रहे the.....Par दक्ष मां को तो सब पता hi tha.....Pankaj के गरदेस और उसके तरीके जिससे वो पास होता आया tha....to उन्होंने प्रिंसिपल सर को अपनी बात पूरी करने को कहा....

परिनिस्प्ले - मधु बीटा पंकज के गरदेस सही नहीं hai....aur ऊपर से वो सीनियर hai...tumse....usko तुम्हारे साथ padhana....ye सही नहीं होगा ना.....

मधु - आपने कहा गरदेस सही नहीं hai....ab वो मेरे साथ पढ़ेंगे तो उनके गरदेस सही हो जाएंगे naa....aur मुझे भी एक साथी मिल jaayega....waise भी यहाँ और किसी को कहा जानती हु main.....bas वही तो है एक....

परनिसिपले - इस बारे में मैं कुछ नहीं kahunga.....Daksh आप bataiye.......aapko क्या लगता है......

दक्ष - मैं इसके बात से सहमत hu.....aap चिंता मत करिये मैं उसको इसमें आने को बोल dunga.....dusra मौका बड़े किस्मत वालो को मिलता hai....aur लगता है पंकज की किस्मत अब आ गयी है यहाँ पे....

किस्मत वाली बात उन्होंने मधु को देखते हुआ कहा था....

पंकज जो आराम से अपने रूम में तैयार हो रहा था क्लास में जाने को उसके रूम के दरवाजे पे नॉक करता है koi.....wo दरवाजा खोलता है तो वह पे कोई स्टाफ का बाँदा tha......uske हाथ में एक लेटर tha....usne वो लेटर उसको दिया और हस्ता हुआ वह से चला गया.....

पंकज पहले तो उसको देख रहा tha......aur सोच रहा था ये उसको देख के है क्यों रहा था उसने एक बार खुद को देखा kahi...kuch गड़बड़ तो नहीं thi......par ऐसा कुछ नहीं tha....wo एकदम से ठीक tha.....kapde बाल सब सही थे.....

पंकज - ये है जे क्यों gaya....saare पागल हो गए है लगता है इतने hi वक़्त mein.....ye लीडर भी पता नहीं बिन्ना बताये कहा निकल liye....sayad वो खुद को मेरी हालत का कारण समझ रहे honge.....Unko धुंधके उनसे बात करनी होगी.....

पंकज ये सब बड़बड़ाते हुए उस लेटर को खोलता hai......usme लिखा हुआ पढ़ के उसको बहुत गुस्सा आ रहा tha......khud pe.....Daksh मां pe.....aur सबसे ज्यादा प्रिंसिपल pe.......usne तो लेटर को hi फाड़ diya.......par फिर उसने उसको वापस से ठीक कर दिया और लेके चल दिया प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ.......

वह पे पहले से hi दक्ष तैयार थे......

पंकज ने दरवाजा नॉक किया......

प्रिंसिपल - हम्म्म के इन.......

पंकज वो लेटर हाथ में लिए आगे बढ़ा की उसको उसके पापा दिख gaye.....ek पल को रुक्का वो पर उसने जो पढ़ा था उस हिसाब से तो उसके पापा ने भी हां कहा था इस बारे में......

पंकज - सर ये लेटर......

प्रिंसिपल - देखो बीटा Pankaj......daraasal हम एक एक्सपेरिमेंट करने वाले है स्टूडेंट्स के sath.....to हमको एक सब्जेक्ट तो चाहिए hi tha......Daksh जी से बात करने के बाद हमने तुमको चुनना है......

पंकज - आपके एक्सपेरिमेंट की वजह से मुझे परेशानी होने वाली hai.......Main इसमें भाग नहीं लेना चाहता आप किसी और को ये देदो......

दक्ष - सब हो चुक्का hai.....ab कोई भी बदलाव नहीं होने वाला.....

पंकज - पर Papa....Prof. मैं hi क्यों आप जानते है मेरे एग्जाम होने वाले hai......main इन् सब में रहा तो वह कैसे परफॉर्म कर सकूंगा.....

पंकज के इस बात को सुन्न के प्रिंसिपल को हस्सी आने लग गयी......

दक्ष - तुम्हारे गरदेस के बारे में सब जानते hai.....aur तुमको बस उन्हें सुधरने के लिए hi इस प्रोग्राम में लिया गया hai......tum और मधु दोनों को स्पेशल क्लासेज करनी होगी......

मधु का नाम जब इसमें aaya......to पंकज को थोड़ा सा तो पता चल hi गया की ये सब कहा से शुरू हुआ होगा......

पंकज ने थोड़ी कोशिश और ki.....par कुछ फायदा नहीं हुआ उसके बाद उसने हार मान li.....aur सोच लिया इस मधु को सबक सीखने के बारे में.....

पंकज वह से चला gaya.....kaha जाता अपने रूम mein......uska नया टाईमटेबल उसको मिल गया tha......to थोड़ी देर में hi उसको बुआ के पास जाना था उनसे मैजिक की क्लासेज लेने को......

पंकज को बहुत बुरा लग रहा tha.....upar से अजीब इतना की पूछो मत.....

पंकज ने एक बार तो सोचा वो वह जाए hi nahi....par क्लास 2 hi लोगो की thi....usko धुंध hi लेंगे वो सब...

पंकज अपना मैजिक क्लास का सारा सामान उठता है और चल देता है.......

जब वो बुआ के पास पंहुचा तो वह पे पहले से hi मधु thi......Madhu उसको देख के स्माइल कर रही thi.....Pankaj भी कर रहा था पर उसके स्माइल के पीछे उसके भिच्चे हुए दांत नहीं दिख रहे थे जो उसके गुस्से को दिखा देते....

बुआ वही पर thi.....aur मधु को कल के बारे में बता रही thi.....ki उनकी नज़र भी पंकज पे पड़ती hai..........Pankaj जाता है चुप चाप बैठ जाता है वह पे......

बुआ पढ़ना शुरू करती hai.......Madhu ko......Pankaj बस देख रहा tha.....kyun की उसको ये सब थोड़ा थोड़ा पता था.....

बुआ ने मधु को जो भी बताया उसको एक बार वापस से देखने को कहा और वो पंकज की ओर देखने लगी....

बुआ - तो मर. Pankaj.....tum भी आये ho.....par आके भी हो नहीं यहाँ पे.....

पंकज - मुझे इन् सब के बारे में पता hai,,,,,aur कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं आया हु यहाँ pe......(madhu को देखते हुए) किसी ने बहुत म्हणत की है मुझे यहाँ लाने में....

बुआ ने जब ये देखा तो उनको हस्सी आ गयी.....

बुआ - हम्म ठीक hai....agar तुमको ये सब आता है तो बस एक रेविसिओं की तरह लेलो isko......Principle सर ने बताया था की तुम्हारा ये बस रेविसिओं hai......Daksh चाहते है तुम और बेहतर बन्नो.....

पंकज सब सुन्न रहा था और ऐसे hi अजीब से फेसिअल एक्सप्रेशन दे रहा था जैसे बोर हो रहा हो वो.....

बुआ - वैसे तुमने पनिशमेंट के बारे में नहीं bataya....uska क्या हुआ है.....

Bua(mann में ) - ये क्या पूछ लिया poonam......aaj तो ये सही लग रहा hai......ab वापस से वो सब पूछ liya....ye पक्का वापस से डिप्रेस हो jaayega.....ye क्या कर दिया.....

पंकज - वो काम चल रहा hai....waise अभी तक तो हो भी जाना tha.....par कुछ करने की वजह से नहीं हो paaya.....par पिछले दिन हम गए थे हेडोफ़्फ़िस mein.....aur उनसे बात की thi.....unhone कहा है वक़्त लगेगा इसमें पर कितना ये नहीं पता है......

बुआ -(मैं में) हस्सस ये सही hai....isko इससे कोई परेशानी नहीं hui.....ab बेहतर लग रहा है ye......sayad इस लड़की की वजह से......

बुआ - हम्म तो तुम वह गए the.....Daksh जी के साथ गए थे kya.....unke जाने से काम जल्दी हो जाता.....

मधु - मैं गयी thi.....inke साथ mein.......ye lijiye.....maine देख लिया इसको.....

बुआ - हम्म दो......

बुआ ने फिर उस टॉपिक से कुछ क़ुएस्तिओन्स pucche....Pankaj से भी पूछे जिसमे पंकज ने 5 में से बस 2 के जवाब दिए.....

उसके बाद इन् दोनों की अगली क्लास थी.....

वही क्लास ख़तम होने के बाद निकिता यहाँ वह देख रही थी की पंकज कहा hai,,,,,,usne सोचा था की उसको सॉरी बोल देगी और थैंक्स के लिए उसको कोई ट्रीट दे degi.....par वो दिख भी नहीं रहा tha......upar से वो ladki.....Nikita को पता नहीं चल रहा था आखिर उसको बुरा क्यों लग रहा है....

मैं उसके पास आया......

मैं - क्या hua.....yaha ऐसे क्यों कड़ी हो......

निकिता - कुछ नहीं तुम जाओ मैं आती हु थोड़ी देर में.....

मैं - ठीक hai.....pata नहीं इसको अब क्या हुआ hai.....accha मैं बुआ के पास जा रहा hu......aane हो तो आ जाना......

निकिता ने थोड़ी देर में आने को कहा और मैं वह से चला आया......

बुआ के केबिन में पंहुचा तो वो फ़ोन पे बात कर रही thi......sayad रूपल दीदी से कर रही thi........Main जाके बैठ गया ऐसे hi.......

उन्होंने मुझे देखा पर वो बात करती rahi......thodi देर बाद जब बात ख़तम हुई तो वो मेरे पास आयी.....

मैं - क्या हुआ दीदी ठीक है ना......

बुआ - वही पूछने को कॉल किया tha.....sab सही है या nahi.......abhi वो ऑफिस में है वो दसिग्नस वगेरा वो sab.....thek hi लगी मुझे बात करने पे तो......

मैं - हम्म ये ठीक है.....

बुआ - हम्म तुम बताओ यहाँ क्या करने आये हो......

मैं - वो तो बस ऐसे hi.....waise मुझे ना किसी के बारे में पता करना था....

बुआ - अभी nahi.......abhi मैं वैसे भी एक्स्ट्रा वर्कलोड से परेशां hu.....abhi कुछ नहीं करने वाली मैं.....

मैं - सुन्न तो lo.....aap भी कम्मल करती हो......

बुआ - मुझे सुन्ना hi नहीं hai.......pahle तुम बताओगे फिर मुझे उसका पता लगाने को bologe.....main पढ़ना hi नहीं चाहती इसमें वैसे भी ये एक्स्ट्रा क्लास्से.......

वो आग कुछ बोलती उससे पहले निकिता बड़बड़ाते हुए अंदर aayi.......chahre से साफ़ पता चल रहा था ये जिससे में hai......waise सायद ये हमेशा hi गुस्से में रहती है......

बुआ - तुझे क्या हुआ......

निकिता - ये सारे लड़के hi अजीब होते है.....

मैं - क्या hua.....maine कहा कुछ किया इस बार.....

निकिता - इसको hi देख lo......aur तुम तो बोलो मत......

बुआ - अरे हुआ क्या ये तो बताओ......

निकिता - वो मुझे इग्नोर करके चला गया मैं उससे माफ़ी मांग रही थी और उसने सुन्ना तक nahi......aur वो ladki......usko तो main......wo उसको वह से लेके चली गयी....

मैं - किसकी बात कर रही हो तुम......

निकिता - तुम्हारे भाई ki........sahi कहती थी main.......ye लड़के सही होते hi nahi......koi माफ़ी मांग रहा हो उसको सुन्नते भी नहीं.....

बुआ - aree......Pankaj की बात कर रही ho......meri मानो तो अभी कुछ वक़्त उसको वैसे hi छोड़ do.....wo पहले hi परेशां hao......darasal उसको अब साड़ी पढ़ाई वापस से करनी पद रही है......

निकिता - अच्छा hi है ye......usko तो निकल भी देना चाहिए यहाँ से.....

मैं - एक minute....padhayi वापस से क्यों करनी पद रही है.....

बुआ ने मुझे बताया की प्रिंसिपल सर ने कोई एक्सपेरिमेंट के बारे में बताया है जहा उसको अस ा सब्जेक्ट ट्रीट किया जाने वाला hai.....jiske बाद से उसको स्पेशल क्लासेज में बी......

बुआ की बात पूरी होती उससे पहले hi K.Bua आ गयी और उन्होंने बताया की उनको प्रिंसिपल सर बुल्ला रहे hai......K.Bua बस यही बताने आयी thi....unko आज भी दब के पास hi जाना था......

दब का कुछ अलग hi चल रहा tha.....mujhe इसके बारे में पूछना चाहिए tha.....par मैंने नहीं puccha....pata नहीं क्यों....

क बुआ वहज से चली gayi.....thodi देर में मैं और निकिता भी चल दिए......

मैं उसको बता रहा था की वो छोड़ दे पंकज ko....usne माफ़ी मांग ली बस बात khatam.....par वो सुनने को तैयार hi नहीं थी......

यहाँ का छोड़ हम डेमोस पे चलते hai.......aaj जाके बस एक बात पता चली थी स्लेयर के बारे में.....

स्लेयर ने शाम के वक़्त जब लड़ाई ख़तम हुई तो सोफ़िया का नाम लिया tha......wo इस वक़्त अपनी माँ को याद कर रहा tha......Bas ये नाम hi पता चल पाया था लूसिफ़ेर ko......aur लूसिफ़ेर ने लोगो को लगा दिया इस नाम के बारे में पता करने ko.....bahut सी सोफ़िया थी वैसे तो पर वो ये नहीं जानता था ये किसका बीटा hai.......usne अपने लोगो को इस काम में लगा दिया.....

बस इस नाम का पता चला था usko....aur उसके बदले करीब 13 लोग मारे गए the......ab तो जो लोग स्ट्रेंज वर्ल्ड से वह गए हुए थे वो ये सोच रहे थे की कैसे खुद को बच्चा के रखे कुछ समझ गए थे की लूसिफ़ेर के आने से पहले उनकी मौत hi आने वाली है.....

वही इन् सब से दूर लीडर ने पता लगा लिया था की कितने सैतान है एअर्थ pe.....par वो कहा कहा पे है वो उसको पता नहीं चल पा रहा था वो कोशिश कर रहा था पर सफल नहीं हो रहा tha......saath hi उसने शेतां को ट्रैन करना शुरू कर दिया था जिसको वो पंकज को देना चाहता था.....

पंकज से याद आया......

क्लासेज जब ख़तम हुई तो पंकज पुर्रा चिढ़ा हुआ tha......Madhu को गुस्से से देख रहा tha.....par उसको कुछ बोल नहीं रहा था वो.....

मधु - अरे बोलो bhi....kya ऐसे घूर रहे ho......tum भी.....

पंकज - तुम्हारी वजह से मुझे ये सब करना पद रहा hai.....kaha मैं एकदम सही से अपनी लिफ़.......

वो इस बात को बोल hi रहा था की वह पे निकिता आ जाती hai......usko देख के वो चुप हो जाता है और जब वो छुओ होता है तो मधु देखने लगती है कारण क्या है इस चीज़ ka......to उसकी नज़र निकिता पे जाती है......

निकिता - पंकज मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.....

पंकज ने कुछ नहीं कहा वो बस वैसे hi बैठा raha......wahi मधु भी बस देखती रही और समझने की कोशिश करती रही अब ऐसे hi किसी के मामले में बोल देना सही तो नहीं hai.....wo भी बिन्ना कुछ जाने

निकिता - सॉरी मैंने तुम्हारे साथ वैसा बेहवे किया......

पंकज ने एक बार मधु की तरफ dekha.....aur जिस बेंच पे बैठा था वह से उठा और वह से जाने लग गया......

मधु भी उसके पीछे जाने lagi.....wo पीछे मुद के देख रही थी निकिता ko......aur निकिता गुस्से में thi.....koi ऐसे इग्नोर करे वो भी तब जब आप उससे माफ़ी मांगने जाओ तो ऐसा होता है.....

वो आगे बढ़ी और वापस से पंकज के सामने गयी और उसको सॉरी bola.......khud के गुस्से को कण्ट्रोल करते hue.......iss बार मधु ने पंकज का हाथ पकड़ा और वह से लेके चली गयी......

निकिता का गुस्सा बस बढ़ता hi जा रहा tha......isse पहले वो कुछ और करती वो दोनों hi जा चुके थे.....

वो भी अपने पेअर पटकते हुए वह से चली गयी.......

पंकज और मधु दोनों अपने नेक्स्ट क्लास में जाके बैठ gaye......Madhu उससे कुछ पूछ नहीं रही thi....sayad वो जानती थी की पंकज बताएगा उसको की क्या मटर था.....

पंकज ने वैसा hi किया जब ये क्लास ख़तम हुई तब उसने मधु से कहा की वो बहार जा रहा है अगर वो आना चाहे तो आ सकती है......

मधु को तो जाना hi tha.....wo भी निकल ली उसी पेड़ के पास se......aur दोनों चल दिए बस se......Pankaj ने आज भी वही जगह चुन्नी thi.....jaha वो पहली बार प्रतीक के साथ बहार गया tha.....wo फैजटिंग वाली जगह :lol:

मधु - हम्म तो यहाँ भी इललीगल फाइटिंग होती hai.......ye सही जगह लेके आये तो तुम.....

पंकज - तुमको पता है इस बारे mein.....tab तो नियम भी पता होगा naa......bolna नहीं होता यहाँ पे.....

मधु - बोलेंगे नहीं तो मज़्ज़ा कैसे aayega......arre स्ट्रेंज वर्ल्ड में तो......

वो फ्लो फ्लो में थोड़ा ज्यादा बोल जाती पर ृक्क गयी खुद को संभल लिया उसने

पंकज - तुम्हे वह इन् सब का पता tha.....ajeeb राजकुमारी हो तुम to......accha पर यहाँ पे कच मत bolna.....bas मैच देखना है.....

मधु - बस देखने में कैसा मज़्ज़ा

पंकज - आज बस देख lo.....aaj मैं कोई और परेशानी नहीं देखना चाहता......

मधु ने उसकी बात मान ली पंकज और वो दोनों अंदर गए और बैठ गए मैच देखने को.....

पंकज आराम से बैठा देख रहा था लड़ाई ko......ki तभ मधु छिलने lagi......aur मारो लेफ्ट se....punch karo......elements ऐसे कौन उसे करता है....

वो बस चिल्लाने लग गयी......

उसका 1 बार हो गया था......

पंकज जो अभी वह थोड़ा आराम से बैठा था वो उसको घूरने laga.....aur चुप रहने को कहा......

थोड़ी देर वापस से वो चुप rahi......par उसके बाद फिर se......ek बार चिल्लाने लगी वो......

पंकज उसको चुप करने में बोलने लग gaya.......aur इसके वजह से उसका भी एक पॉइंट हो गया था......

पंकज ने जब ये देखा वो वह से मधु को लेके निकल gaya......aur बहार आके उसको कुछ बोलता उससे पहले वो हसने लग गयी.....

Madhu(haste हुए) - तुम इतना डरते क्यों ho.......darne का नहीं मैं है इधर....

पंकज - तुमको पता है अगर तुमको चोट लागु तो मुझे क्या क्या बोलै jaayega......aur डरता नहीं मैं किसी से.....

मधु - ारी तुम्हारे पापा.......

मधु ने ऐसा कहा तो वो पंकज एकदम से दर गया पीछे देखा कोई नहीं था वह पे आगे बस पेट पकड़ के मधु है रही thi.......pahle तो पंकज को गुस्सा आया पर फिर उसको खुद हस्सी आने लग गयी.....

पंकज - कुछ खाने चले......

मधु - हां chalo.....main भी देखती हु कहा लेका जाते हो तुम एक लड़की को.....

पंकज उसको बस के पास लेके गया और फिर इंसानो के अरे में उतर gaya.......waha पे उसने एक होटल dekha.....chota सा था wo......uss ओर चल दिया.....

पंकज - ये देख रही ho.....yaha पे हम सब आया करते थे pahle....jab मैं छोटा था......

मधु - ooh.....tab तो अच्छा खाना मिलता होगा यहाँ pe......chalo ये ठीक है....

पंकज वह गया और कुछ आर्डर kiya....aur जाके दोनों एक टेबल पे बैठ गए......

पंकज ने उसको बताना शुरू kiya....kaise वो निकिता से और बाकी सब से milla.....aur उसने सब कुछ hi बता diya.....matlab एल्फ किंग को मारने की कोशिश ये सब भी बता दिया था usne......kuch भी नहीं छुपाया tha......pata नहीं क्यों उसको ऐसा लग रहा था सायद ये सब जब बाद में मधु को पता चलेगा तो वो उसके पास नहीं aayegi.....to उसने सोचा अभी hi बता देना सही होगा......

मधु बस हैरानी से सुनती रही सब kuch.......kahi कही पे पंकज गलत tha....par और जगह पे तो उसको मौका hi नहीं मिला किसी चीज़ के बारे mein.....usko गुस्सा आ रहा था इन् सब mein.....ki कैसे कोई ऐसा कर सकता है किसी के साथ.....

मधु - तुमको फ़िक्र करने की जरुरत नहीं hai...aur अब तो अकेले भी नहीं हो tum.....main हु तुम्हारे saath......aur जैसे आज इग्नोर किया naa...waise hi इनको करना hai......inko तो मैं सबक सिखाऊंगी.....

पंकज - खाना खाओ चुप चाप सबक sikhaungi.....kuch नहीं करोगी tum......wo सब पास्ट tha....usko रहने do....ab मुझे भी उनसे कोई मतलब नहीं hai......jo करना है उनको करने दो.....

मधु - हम्म ठीक hai.....koshish कर सकती हु.....

इन् दोनों ने अपना खाना ख़तम किया और फिर वह से चल दिए वापस स्कूल को.....

आज के लिए इतना hi......

अभी अपन बिजी है एक एग्जाम के चक्कर में तो उपदटेस थोड़े छोटे हो जा रहे hai.......ye बड़े हो jaayenge....kuch वक़्त में.....

नेक्स्ट अपडेट रूपल दीदी और दब के प्रॉब्लम पर hogi....saath में हीरो हीरोइन को मिलवा भी देंगे.....
 
अपडेट - 88

रात से शुरू करते है दीदी आराम से सो रही thi.......ki तभी उनके रूम के खिड़की पे कोई चीज़ज़ आके lagi.....par आवाज नहीं हुई थी uski....waise वो लगी खिड़की पे नहीं thi.....balki उस सुरक्षा कवच पे लगी थी जिसको दादी और चची ने बनाया tha........aur जब वैसा हुआ तो दोनों को hi पता चल गया की कोई उनके घर में आने की कोशिश कर रहा है......

चची अपने रूम से बहार आयी तो उन्होंने दादी को भी वही पे पाया.......

चची - माँ आपने भी वो महसूस किया क्या.....

दादी - hmm.......ye कल भी हुआ था ना......

चची - हां Maa......hum बहार चलके देखते है कौन है......

दादी - तुम यही रूक्को मैं देखती हु........

दादी आगे गयी उन्होंने दरवाजा khola.....aur बहार nikli.....Chachi से रहहा नहीं गया वो भी बहार चली गयी.....

दादी - तुम एक बात नहीं सुनोगी ना meri......chalo अब दूसरे तरफ देखो पर घेरे से बहार नहीं jaana.....iss वक़्त ये कौन सा जीव होगा इसका कोई पता नहीं है.....

दरअसल जिस दिन से वो सैतान घर में आया था उस दिन से सभी ज्यादा hi सतर्क हो गए थे.......

दादी के कहे अनुसार दोनों hi चलने लग गए यहाँ वह......

अँधेरी रात mein,,,,,,,agar कोई साया आसमान में हो तो उसको देख पाना मुश्किल होता hai....par यहाँ पे ये कोई इंसान थे nahi.....chachi ने जब वो बड़ा सा साया देखा वो तुरंत घेरे के और अंदर आ गयी और उसको देखने लगी.......

वही दादी भी घूम कर वह पे पहुंच gayi......unko वो साया दूसरे तरफ से दिखा था पर चची को देखते हुए वो वह पे आ gayi........dono ने देखा की वो साया ऊपर के कमरों के आस पास घूम रहा है......

चची - माँ ये क्या hai......kahi उन् सैतानो में से तो....

दादी - पता nahi......kya है ye.....accha हुआ हमने कवच को मजबूत कर दिया....

चची - पर माँ ये dekho.....ye तो फिर भी आने की कोशिश कर रहा है......

दादी - चलो अंदर chalo.....ye अंदर नहीं आ paayega.....hum इसके बारे में बात करेंगे सभी se......Rupal ऊपर अकेली है naa.....uske पास चले जाना आज.....

चची - हम्म्म मैं वही jaaungi......par माँ ये है kya.....aur जानते गए भी की इस कवच के अंदर नहीं आ सकता wo.....wo क्यों अपने आप को चोट पंहुचा रहा है.....

दादी - तुम अंदर chalo......iske बारे में वही बात करेंगे....

दोनों hi अंदर गए दरवाजा बंद किया और फिर से वही सवाल चची ने किया......

दादी - मुझे लगता है ये जो भी है बहुत गुस्से में hai......warna क्यों कोई खुद छूट खता रहता अब tak.....tum ऊपर jaao......main यही rahungi.....agar कुछ गड़बड़ लगे तो निच्चे आ जाना रूपल को लेके......

चची ऊपर कमरे में चली gayi.......jab वो वह पहुंची तो उन्होंने देखा खिड़की से की वो saya...ussi तरफ बढ़ रहा था थोड़ा ृक्क ृक्क ke......par हर बार कवच से टकरा जा रहा था.....

चची ने रूपल दीदी को देखा जो सो रही thi.....unke पास गयी wo.....aur उनके सर पे अपना हाथ rakha.....body कुछ गरम सी गली unko.......ye सही नहीं tha.....sayad उनको बुखार आ गया tha......unhone गिला कपडा लाया और लग गयी दीदी के साथ.....

वो सुबह तक वही rahi......haa इन् सब में नींद आ गयी थी उनको.....

इनको यही छोड़ हम किसी और के पास चलते hai......yaha पे एक अलग hi कुछ चल रहा tha......DB को पावर्स के साथ साथ अपने उन् पूर्वजों की यादें भी मिलती जा रही थी जिनके पास ये नेचर एलिमेंट था.....

कभी acchi.....to कभी buri.......wo समझने की कोशिश कर रहा tha.....par समझ नहीं पा रहा था आखिर वो करे तो करे kya.....iss वजह से उसको अब परेशानी होने लग गयी thi......K.bua की दोस्त ने उनको बताया ककी दब कुछ दिंनो से अजीब बेहवे कर रहा hai....upar से कुछ खता पीटा भी नहीं hai....hum कुछ पूछते है वो बातें बदल देता है.....

K.Bua इसी वजह से उसके पास जा रही thi......ek दिन तो वो उसको बस समझने को गयी थी उसको देखने पर कोई फायदा नहीं hua.....Shuru में K.Bua को लगा उसको अपने घर की याद आ रही होगी या फिर स्कूल दोस्त ये sab.....par ये बात नहीं thi......wo इस बात को यहाँ किसी को बता नहीं पा रहा था.....

K.bua जब कल इसके पास गयी थी तो वो इसको लेके वापस से आशाराम में चली गयी thi.....taaki गुरूजी उसको समझा sakke......par आशाराम में आने के बाद दब ने ऐसा कुछ किया की गुरूजी खुद समझ नहीं पाए.....

गुरूजी इससे कुछ सवाल पूछ रहे the....jaise की वो रोज ध्यान लगता है या नहीं और बाकी के काम करता है या nahi......isse वो थोड़ा चिढ़ सा गया tha.....aur उसने गुरु जी से कुछ ऐसा कहा की गुरु जी अपनी आँखें बड़ी करके बस दब को देखते रह गए......

दरअसल वो बात गुरूजी के पास्ट से थी जो की दब के किसी पूर्वज को पता thi......aur वो मेमोरी दब ने देख ली thi......to अब दब ने वो बात उनसे कह दी......

गुरूजी को शुरू में समझ नहीं आया आखिर ये कैसे हो gaya......unhone दब को उसी वक़्त वह से K.Bua के साथ वापस चले जाने को kaha.....kaha था अब वो खुद आएंगे उससे मिलने को.......

दब चला गया पर गुरूजी उस बात को सोचते rahe.....kaise इसको इन् सब के बारे में पता चला........

नेक्स्ट मॉर्निंग......

सुबह हुई मैं अपने रूम से निकला और ध्यान लगाने चला gaya......waha पंहुचा तो निकिता और बुआ पहले से थी वह pe......K.Bua भी आयी थी बाद में.....

ध्यान लगाने के बाद K.Bua ने हमसे कहा की उनको हमसे बात करनी है दब के बारे में.....

बुआ ने भी पूछ लिया की क्या हुआ hai.....unhone पूछा नहीं था इस बारे में unse......ispe K.Bua ने कहा की तैयार होने के बाद उनके केबिन में जाते है जहा वो इस बारे में बात करेंगे......

वही दूसरे ओर मधु और पङकज भी सुबह ध्यान लगाने गए हुए थे बाकी सब से alag......wo जगह prof.s के लिए thi....par मधु तो मधु thi....usko वह जाने को मिल गया था और वो पंकज को भी लेके gayi.....yaha एक बात ध्यान देले लायक thi.......DB भी तो राजकुमार था पर उसको ये सब कुछ भी नहीं मिला tha......aur इस मधु को :सिघ:

खैर वो दोनों भी वह से निकले और ब्रेकफास्ट के लिए दिंनिंग हॉल की तरफ hi जा रहे थे की एक स्टाफ वाले ने कहा की उनको दक्ष बुला रहे hai......to दोनों वह चल diye.....waha पहुंचे तो वह पे प्रिंसिपल पहले से the....aur वह पे टेबल पे खाना भी रखा हुआ था......

मधु को इससे कुछ मतलब नहीं tha....par पंकज को ये बड़ा अजीब लगा अब क्या उसको खाना भी सबसे अलग होक खाना था.....

प्रिंसिपल - ये बस आज के लिए है कुछ बातें है जो तुम दोनों को जाननी है.....

दोनों उनकी ओर देखने लग गए......

दक्ष वही पे साइड में बैठे हुए the......upar छत्त की तरफ देख रहे थे वो......

प्रिंसिपल - तुम दोनों कल बहार गए the......haa या ना में जवाब दो....

पंकज कुछ बोलता उससे पहले मधु ने हां बोल diya.....wo भी बिना किसी डर के.....

प्रिंसिपल - पंकज तुम इसको लेके गए the.....haa या ना.....

वो कुछ बोलता उससे पहले फिर से मधु ने बोलै.....

मधु - नहीं....

परिनिस्प्ले - क्या मतलब nahi....kya तुम इसको लेके गयी थी.....

मधु - हां मैं लेके गयी thi......Mujhe कही बहार जाना था......

प्रिंसिपल - पर ये स्कूल के नियमों के खिलाफ है....

मधु - तभी तो इसको मैं बेहोश करके लेके गयी थी स्कूल से बहार.....

इस बात को सुन्न के दक्ष को हस्सी आने लग गयीवहि पंकज कभी उसको देखता कभी प्रिंसिपल को तो कभी अपने पापा को......

Pankaj(mann में) - ये झूट तो ऐसे बोलती है की क्या bolu......kuch मिल भी नहीं रहा जिससे तुलना कर सक्कु....

प्रिंसिपल - तुम जानती हो मैं तुम्हे इसके बदले क्या सज़्ज़ा दे सकता हु.....

मधु - मैं जब स्ट्रेंज वर्ल्ड चूड के आयी थी तो मुझे कहा गया था मैं यहाँ इंसानो के साथ रह सकती hu.....aur आज यहाँ पे हु.....

दक्ष - प्रिंसिपल सर आप देख सकते है ये लड़की खुद को hi नहीं पंकज को भी संभल legi.....to चिंता की बात नहीं है......

प्रिंसिपल - हम्म मैंने सोचा नहीं था ये इतनी बोल्ड hogi......par....chaliye अब इनको बता dijiye.......Main बहार hi hu......aur तुम Madhu.....jhoot काम बोलै karo....aur पंकज कुछ तो बोलै करो.....

प्रिंसिपल सर वह से ये बोलते हुए बहार चले gaye.......Pankaj समझ नहीं पा रहा था क्या hua......Madhu को मतलब hi नहीं था क्या hua.....wo चिल्लेद थी एकदम से.....

दक्ष - मुझे कुछ काम से 2 दिन के लिए स्ट्रेंज वर्ल्ड भेजा जा रहा hai.......Principle सर भी जा रहे hai.....wo किसी और को मधु की जिम्मेदारी देना चाहते the....par अब वो समझ गए है ये जिसके साथ चाहती है उसी के साथ rahegi.....to पंकज एक दूसरे का ख्याल रखना मैं अब 2 दिन बाद aaunga....aaj hi जा रहा हु main....hmm और हां अगर कोई प्रॉब्लम हो तो tum.....ye lo.....iss नंबर पे कॉल कर देना और बता देना क्या बात hai......wo वह पे आ जाएंगे और उसको सोल्वे कर देंगे.....

पंकज - ठीक है पर आपको अचानक से जाना पद रहा है....

दक्ष - मेरे प्रमोशन की बात चल रही है इसी सिलसिले में वह जाना hai.....tum बस यहाँ का ध्यान रखना aur.....Madhu इसका ध्यान रखना.....

मधु - आप चिंता ना करो मैं हु यहाँ इसके साथ.....

दक्ष - चलो ठीक है ये खाना तुम दोनों के लिए hi है यही करलो नास्ता फिर क्लासेज hai.....tab तक मैं निकलता hu.....ab आने के बाद मिलेंगे.....

दक्ष भी वह से अपना छोटा सा सूटकेस लेके निकल gaye......Madhu आराम से जाके वह पे खाना खाने लग gayi.....wahi पंकज उसको देख रहा था और गुस्से में tha......thoda परेशां भी क्यों की ये ूनप्रेडिक्टिबले थी ladki.....kab क्या करे पता नहीं......

पंकज - तुमने ये सब क्यों कहा.....

मधु - तुमको दांत पड़ने वाली thi....maine बचाया bas....aao खाना खाओ वो मैडम आ जायेगी warna....kya नाम tha....Poonam ना....

पंकज - नहीं रूक्को pahle.....tum ये वड्डा करो ऐसे hi झूट मुझे नहीं बोलोगी तुम....

मधु - मैं तुमको बच्चा रही thi.....aur तुम ऐसा कह रहे ho....theek है नहीं बोलूंगी झूट tumse.....ab जल्दी आओ खाना खाओ...

थोड़ी बहुत बातें करते हुए उसने खाना ख़तम किया और वो बहार जाने lage......tabhi उन्होंने देखा आगे के केबिन से प्रतीक निकिता और K.Bua ,बुआ निकल रहे थे.....

मधु - अरे देखो तुम्हारे पहले का group.....milna है क्या....

पंकज - मुझे नहीं जाना वह पे.....

तभी मधु को प्रतीक दिखाई देता hai......matlab उसका चहेरा...... :शॉकिंग:

मधु - y.....ye ladka......ye है तुम्हारा भाई....

पंकज - हां और तुमको क्या हो gaya....abhi तो मिलना था और अब ऐसे.....

मधु खुद को सँभालते hue.....ab तो मिलना hi hai.....isko समझाना है कुछ......

पंकज कुछ बोलता उससे पहले वो आगे निकल गयी......

मधु प्रतीक और सभी के पीछे जाके....

मधु - Hei.....tum.......tumne मेरे पीछे जासूस लगाए हुए थे.......

पंकज अपने जगह पे खड़ा ये सुन्न रहा tha.....wahi मधु की बात सुन्न के सब पीछे को मुद्दे......

प्रतीक - tum.......tum यहाँ ho....main कब से तुमको धुंध रहा था.....

मधु - इस बार तुम्हारा उल्लू काम नहीं आया जो खुद आ रहे थे.....

निकिता - ये तुमको कैसे जानती है....

प्रतीक - तुम्हारी वजह से उसको छूट लग सकती थी.....

मधु - Main......meri वजह se......ab कोई किसी पे चुपके नज़र रखे तो चोट लगने का डर तो होगा hi.....par चोट उसको नहीं तुमको लगनी चाहिए थी....

K.Bua - ये प्रतीक राजकुमारी को कैसे जानता है और ये ऐसे क्या बातें कर रहे है.....

प्रतीक - वो तो मैं बस ये देखना चाहता था की तुम इन्......

मधु ने जब देखा वो उसको इंसान बताने वाला है उसकी आँखें एकदम से बड़ी हो gayi.....wo कुछ समझ नहीं पायी उसने देखा पास में पानी है उस्सको प्रतीक के चेहरे पे दे डाला......

वह पे सब के सब हक्के बक्के रह gaye.....Nikita कुछ करती या बोलती उससे पहले पीछे से पंकज दौड़ता हुआ आया उसने मधु को पकड़ा और उन् सब को सॉरी बोलते हुए उसको लेके वह से चला गया......

निकिता - इस्सकी तो Main.......rukko अभी बताती हु इसको.....

K.Bua - अरे रूक्को pahle......(rummal देते हुए) इससे भी पूछो वो बोल क्या रही thi.....aur ये क्या बोल रहे थे.....

बुआ - तुम उसको कैसे जानते ho.....tum निक्स कबीले में भी गए हुए हो क्या....

मैं अपना मुँह साफ़ कर रहा tha.....pata नहीं ऐसे पानी क्यों दाल diya......ajeeb लड़की है मैं उसको उसके बारे में बताने वाला tha......aur वो थी ki......ab तो बताना hi नहीं कुछ चाहे खुद पूछने आ jaaye.....kya सोचा था और ये.... :सिघ:

निकिता - bologe.....kya उल्लू उल्लू कर रही थी वो तुमने उसके पीछे ओल्ड आउल को लगाया था क्या.....

मैं - नहीं ऐसा कुछ नहीं वो स्ट्रेंज वर्ल्ड में एक इन्......

इंसान बोलने hi वाला था वापस से मुँह पे पानी आ gaya.....aur पीछे से वो चिल्ला रही thi......Pankaj उसको पकडे हुए था.....

बुआ - तुम दोनों जाओ यहाँ se.....Pankaj मधु को यहाँ आने do......Bachu तुम भी यहाँ aao....dono मेरे केबिन में अभी.....

K,bua - इनका बाद में सुनूंगी अभी मुझे जाना hoga......waha एक और है नमूना....

पंकज मधु को लेके वह आता hai.....K.Bua वह से चली जाती hai.....Bua मुझे और मधु को रूम में बुलाती है......

मैं अभी भी अपना चहेरा hi साफ़ कर रहा था......

बुआ - चलो अब batao......kya hua....aur तुम ऐसा क्यों कर रही हो इसके साथ.....

मधु - क्या आप ये बात बहार सभी को बताने वाली है.....

बुआ - मैं ये सब बहार क्यों बताने वाली hu.....ye तो बस तुम दोनों का मटर समझने के लिए है.....

मधु - इसने मुझपे नज़र रखने के लिए किसी को भेजा था.....

बुआ उसको बात सुन के चौक गयी थी......

बुआ - प्रतीक ये क्या है....

मैं - अरे बुआ वो तो ये inn....aaaahhh....

Madhu(dhere से) - किसी को बताया मैं इंसान हु तो सोच लेना पानी हर जगह है.....

नहीं मैं क्या बोलू ispe.....waise इस बात से ये समझ आ गया ये क्यों ऐसा कर रही thi.....sayad ये नहीं चाहती की इसके इंसान होने की बात यह सबको पता चले वैसे भी यहाँ तो राजकुमारी बांके आयी है ये.....

बुआ - क्या हुआ.....

मैं - वो कुछ nahi.....wo मैं बस एक गलती हो गयी थी इस वजह से ये सब ग़लतफ़हमी हुई है.....

बुआ - तुम सच बोल रहे हो ना.....

मैं - हां बुआ सच में ये बस.....

मधु - और नहीं तो kya.....ye मुझपे नज़र रख रहा tha....aap बताओ एक लड़की पे इस तरह se.....kaisa लगता है....

बुआ - बच्चू ये उम्मीद नहीं थी mujhe...sorry बोलो इसको और दोनों हाथ मिलाओ.....

मैं (मैं में )- हद्द है एक तो बचाया मैंने और ये और झूट बोल रही hai......mujhe उल्टा फसा रही है......

मैं उसको घूर रहा tha....to उसने कहा......

मधु - नहीं माफ़ी की जरुरत नहीं है वैसे भी मैंने इसको सज़्ज़ा दे दी hai.....bas आगे से ध्यान रखना.....

यहाँ ये सब चल रहा था वही बहार पंकज खड़ा हुआ था गेट के पास और निकिता उसके pass......waise तो निकिता बोलना नहीं चाहती थी कुछ पर जिस तरह से पंकज ने उसको इग्नोर किया था और उसके बाद मधु का उसको वह से लेके jaana.....usse रहा नहीं गया....

निकिता - मैंने सॉरी कहा था तुमने जवाब नहीं दिया कुछ......

इस बार भी पंकज ने कुछ भी नहीं कहा हां एक बार उसके तरफ देखा और फिर से दरवाजे के तरफ देखने लग गया.....

निकिता - हम्म नयी दोस्त मिल गयी तो पुराने को भूल गए.....

पंकज कुछ बोलता उससे पहले वह पे मधु और मैं बहार आ रहे थे बुआ के साथ......

मधु ने उसकी बात सुन ली थी.....

मधु - पंकज चलो नए दोस्त के साथ चलो पुराने वाले तुम्हारे काबिल नहीं है......

अब मैं क्या bolu......ye तो मतलब जैसे यहाँ पे लड़ने को hi आयी है......

निकिता कुछ बोलती उससे पहले बुआ ने सबको अपने अपने जगह जाने को बोल diya.....unhone भी मधु को कुछ नहीं कहा.....

हां बहार जाके मधु से पंकज ने कहा ये ऐसे ताने ना दिया करे किसी ko.....wo सब यही सोचेंगे की मैं तुमको ये सब करने को बोल रहा हु.....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट कल रात को आएगी.....

लीडर वापस एअर्थ पे आने वाला है और साथ hi दब का अलग chapter शुरू hoga.....aur रही बात प्रतीक की तो वो डार्क पावर का एक बार उसे करने वाला hai.....uske बाद क्या होगा पता नहीं
 
जैसे जो को ये स्टोरी हजम नहीं हो रही :रोफ्लोल:

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डॉ. स्ट्रेंज चीचा :डोरे: , जो ने तो पुरे 14,000,605 फ्यूचर देख लिए :बाउ:

बूत उसमे 1 बार अवेंजर्स भी जीता है :फ़क1:

ना तो ऐसा सोचा था और ना hi होगा.....

Haven't यू हर्ड ऑफ़ डिसेप्शन :कूल:

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:अप्प्रोवे: ताकि तुम्हारे जैसे चोमू का पंकज फवरत बन जाये , और फिर तुम्हारे फवरत करैक्टर को मस्त पलेगा अपुन :रोफ्लोल:

अब प्लाट को एकदम से तो नहीं पलट सकते ना

की लोवीनघेअर्त जी आये hai.....sab बदल देते है ताकि वो क्विट ना करे....

थैंक्स फॉर रिव्यु :डी

और हां

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:केओ:
 
अपडेट - 89

यहाँ जब मधु और प्रतीक के बिछ ये सब हो रहा था और जब मधु ने प्रतीक को टच किया था उसको मारने के लिए ताकि वो बुआ को वो सब ना बता सक्के जैसे की वो एक इंसान hai......uss वक़्त यहाँ से दूर स्ट्रेंज वर्ल्ड में कुछ हुआ था......

निक्स कबीले के पुजारी जी को जैसे hi इसका आभाष हुआ वो फलफूल लेके अपने देवता के मूर्ति के पास पहुंच gaye......aaj भी उन्होंने सबको आदेश दे दिया की मंदिर बंद रहने वाला है......

ये कोई आम बात नहीं थी निक्स कबीले के liye......ye सायद दूसरी बार रहा हो जब इतनी जल्दी मंदिर बंद किया गया hi वापस se........unn सब को भी ये सब जानने की इच्छा हो रही thi......par वो कभी भी इस चीज़ज़ को नहीं भूल सकते थे की पुजारी जी ने मंदिर बंद करने को बोलै है......

मंदिर के अंदर पुजारी जी जाके बैठे हुए थे मूर्ति के पास आज वापस से उस मूर्ति के आँखों से आँशु निकल रहे थे......

पुजारी - मैं जानता हु आप ये वापस से होते हुए नहीं देख सकते पर यही नियति hai.....aur आप भी इसको बदल नहीं सकते.......

पुजारी जी ये बोल तो रहे थे पर उनके हाथ काँप रहे थे ये बोलते वक़्त वो जानते थे अगर ये गुस्सा हुए तो इनकी जान अभी के अभी चली जायेगी.....

कांपते हुए हाथों से hi उन्होंने अपने साथ लाये हुए फलफूलों में से एक फलफूल उठाया और उसको मूर्ति के पास ले gaye.......uss फूल में एक लिक्विड होता था जिसके वजह से उसको फलफूल बोलते hai.......uss लिक्विड का रंग बदल के काला हो gaya......sirf उसका hi नहीं बल्कि इसके साथ साथ वह पे जितने भी फलफूल थे सभी के साथ ऐसा hi हुआ.......

पुजारी जी ने सोच लिया था अब उनकी मौत तय hai......to आँखें बंद करके वो बस बैठ गए वही पे.......

इस वक़्त एअर्थ पे मधु को बुआ पढ़ा रही थी पंकज के साथ.......

पता नहीं अच्चानक से मधु को क्या hua.......wo अपने जगह से कड़ी hui......aur वह से बहार जाने lagi.......uss वक़्त बुआ पंकज को कुछ बता रही थी की उन्होंने देखा मधु अपने जगह से उठ गयी है और वह से जा रही है......

बुआ - Madhu......koi परेशानी hai.......tum कहा जा रही हो.......

मधु ने जवाब नहीं diya.....saamne दरवाजा था जो अभी बंद tha........Madhu ने अपनी ऊगली के इशारे से उस दरवाजे को को एकदम से उखाड़ diya......waha पे उस वक़्त पंकज और बुआ थे उन् दोनों ने जब ये देखा दोनों hi चौक गए the......aur इससे जो आव्वज hui.....usse आधा स्कूल चौक गया tha.......jab तक वह कोई आता मधु आगे बढ़ गयी thi......Bua तो उस वक़्त शॉकेड hi thi.....par पंकज ने जब देखा मधु आगे जा रही है वो उसके पीछे bhaaga.....Madhu तालाब की तरफ गयी thi.....jaha से वो इस जगह पे आयी थी वही pe......usne कुछ किया और वह पे एक गुफा का द्वार दिखने laga.....Madhu उड़ते हुए उसके अंदर चली gayi.......Pankaj ने ये देखा और वो खुद भी एक पेड़ पे चढ़ के उस गुफा के अंदर चला gaya.......ek और सेकंड की देरी होती तो वो गुफा गायब hi हो जाता......

बुआ भी अब तक इन् सब से बहार आ चुक्की थी और वो भी वह से भगति हुई बहार आयी थी पर जब तक आयी उन्होंने देखा पंकज हवा में कही गायब हो गया tha......Guffa दिखी नहीं उनको......

दरवाजे के आवाज से बहुत से स्कूल का स्टाफ वह पे आ चुक्का tha.....wo सब यहाँ वह देख रहे the.......ye कोई हल्का दरवाजा नहीं था की कोई भी आये और तोड़ jaaye......isko इस तरह से तोड़ dena.....aisa कोई बहुत शक्तिशाली hi कर सकता tha......Sab स्टाफ वाले बुआ के पास थे और पूछ रहे थे आखिर क्या हुआ......

बुआ उनको बता hi रही थी की पीरियड ख़तम होने का वक़्त भी हो गया और सभी के सभी अपने अपने क्लासेज से बहार आ गए.......

प्रतीक और निकिता तालाब के पास hi जा रहे the.....Nikita का मूड ख़राब था और उसको तालाब के पास रहना अच्छा लगता था इस वजह से वो वह जा रही थी और प्रतीक बस उसके साथ जा रहा था......

वह पे पहुंचे उससे पहले hi भीड़ दिखी वह pe.......Bua कुछ बता रही थी sabko.....to वो दोनों भी उस तरफ जाने lage......par बिछ में hi स्टाफ के एक बन्दे ने उन् दोनों को रोक diya.....bas वही दोनों नहीं किसी भी स्टूडेंट को वह पे जाने नहीं दिया जा रहा था.....

ये उनकी सुरक्षा के लिए भी था और इस लिए भी की ताकि वह पे जो भी जादू हुआ है उसके अवशेष कही ख़राब ना हो जाए......

(हीरो के रेस्पेक्ट में)

अजीब था ye......humme से किसी को उस जगह पे जाने नहीं दिया जा रहा था......

मैं - निकिता यहाँ कुछ तो हुआ है......

निकिता - मैंने अभी सुन्ना यहाँ पे कोई बोल रहा था किसी ने एक क्लासरूम का दरवाजा उखाड़ दिया hai.....rukko......

मैंने इंतेज़्ज़र kiya.......wo अपने तेज़ सुनने की काबिलियत का इस्तेमाल कर रही thi.....jisse वो समझ पाए की हुआ क्या है......

निकिता - जिसने दरवाजा तोडा वो लड़की thi.....aur अब वो कही चली गयी hai.....aur उसके साथ एक लड़का भी गया है......

बुआ ये सब स्टाफ वालो को बता रही थी और फिर वो सब आपस में ये बातें कर रहे थे की ऐसा कैसे हो सकता hai......ussi में निकिता ने ये सब सुन्न लिया......

स्ट्रेंज वर्ल्ड में.......

पुजारी जी बैठे हुए थे अपने जगह pe......bas याद कर रहे थे वो की उन्होंने इस जनम में क्या क्या किया है और उन् सब का नतीजा क्या मिलने वाला है unko......ki तभी मंदिर का दरवाजा खुलता hai.....khoolna नहीं टूटना कहेंगे इसको......

ये दरवाजा मंदिर के पीछे के तालाब के तरफ से था.......

यहाँ वो दरवाजा खुल्ला मूर्ति की आँखों से एक काली रोशनी nikli......wo रौशनी आस पास पानी थी उन् सब से होते हुए उस दरवाजे के तरफ जा रहा tha.......jab वो रोशनी पानी से टकराई तो वो पानी भाफ्फ बन गया और वह का माहौल ऐसा हो गया जैसे सभी के सभी आसमान में हो.......

"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ऐसा सोचने की bhi.......tumhe पहले hi कैद किया गया hai.....agar अभी इस पुजारी को कुछ हो जाता तो तुम्हे तुम्हारी आत्मा को इसी कैदखाने में हमेशा के लिए बंद कर देती मैं......"

ये आवाज बहुत hi साफ़ और तेज़्ज़ thi......iss आवाज को सुनते hi वो मूर्ति या जो भी वो tha......ekdum से शांत हो गया उसके आँखों से जो रोशनी निकल रही थी वो जैसे गायब हो गया ho......par अभी भी आस पास वो भाफ तो थी hi......wo कही नहीं गयी थी अभी भी......

मधु उसी भाफ्फ में से बहार आ रही thi......uske पीछे उस दरवाजा से जिसको अभी तोडा था उससे रोशनी आ रही thi.......jaisa मूवीज में होता है धुवें के पीछे से हीरो आता है कुछ उसी तरह से मधु अंदर आ रही थी......

पुजारी जी उसकी आवाज नहीं पहचान पाए पर जब उसको वो सुनहरी चमकती हुई आँखें दिखाई di......wo समझ गए ये कौन hai.......par अब वो ये नहीं समझ पा रहे थे क्या kare.......unhone देखा एक और परछाई आ रही थी वह पैर se.......Wo अपनी जगह पैर से उठे और उस दूसरे परछाई की तरफ badhe......unko पता नहीं था वो कौन है क्या hai....unhone बस उसका हाथ पकड़ा और उसको खींचते हुए बाहर लेके चले gaye......darwaaje के पास......

पुजारी जी - इस दरवाजे को लगाने में मेरी मदद karo......jaldi.....

पंकज ने उनकी नहीं सुन्नी वो बस अंदर मधु के पास जाना चाहता tha......Jab पुजारी जी को ये अहसास हुआ की पंकज अंदर जाना चाहता hai.......unhone उसकी और बाकी सभी की जाएं बचने के लिए वह पे तालाब से पानी ला के पानी का दरवाजा लगा diya......par ये काफी नहीं tha.....unhone उस पानी को जम्मा भी diya.....par वो जानते थे ये भी काफी नहीं hai.....ab जो अंदर hoga.....uske बाद जो ेनेर्गीएस निकलने वाली है उससे बहुत hi ज्यादा नुक्सान होने वाला hai.......ye दरवाजा उन् सब को सोख सकता था और इस मंदिर के बनावट के वजह से वो साड़ी ेनेर्गीएस जमीं के अंदर चली jaati......par अभी ऐसा कुछ नहीं होने वाला.....

पंकज अभी भी लगा हुआ था उस बर्फ के दरवाजे के उस पार जाने के liye....par वो नहीं जा सकता था.....

पुजारी जी - बीटा मदद karo.....agar ये दरवाजा नहीं लगा तो बहुत कुछ ख़तम हो jaayega.......tumhe मदद करनी होगी.....

पंकज इस वक़्त समझ नहीं पा रहा tha....aur समझे भी kya.....kuch देर पहले बाँदा आराम से क्लास में बैठा था और उसके बाद तो :डोह: पहले दरवाजा टूट गया उसके बाद बाँदा हवा में बनने हुए एक गुफा में ये यहाँ आ pahucha.....aur अब एक बाँदा उसको बोल रहा है दरवाजा लगा दो वर्ण बहुत बुर्रा होगा.....

ऊपर से आज hi उसको जिम्मेदारी दी गयी थी मधु ka......dhyaan रखना hai......aur यहाँ पे वो अंदर चली गयी thi.....wo तो ये भी नहीं जान रहा था आखिर वो आ कहा गया है.......

निक्स कबीले में वैसे भी बहार के ज्यादा लोगो को आने की अनुमति नहीं hoti.....aur ये तो मंदिर के पास जा पंहुचा था......

पंकज ने पुजारी जी की बात नहीं सुन्नी और बस सामने वो बर्फ के बनने हुए दरवाजे को पार करने का सोच रहा tha.......fire एलिमेंट था उसके पास भी पर उतना इफेक्टिव नहीं था जिससे वो उस दरवाजे को पिघला सक्के......

पुजारी जी ने जब देखा वो दरवाजा पिघलने की कोशिश कर रहा hai.......Pankaj के ऊपर उन्होंने पानी से वार कर diya....jisse वो बस वह से साइड हो gaya......Pujari जी ने अपनी पूरी ताकत का उसे किया और वो 2 बड़े बड़े दरवाजे उनको किसी तरह पानी के सहारे ऊपर उठाया और उसको अपनी जगह पे लगाने lage.......itni शक्ति एक बार में उसे करने के कारण उनके नाक से खून निकलने लग गया tha......Pankaj जो अभी गिरा हुआ था थोड़ा पानी उसके चेहरे पे पड़ा और वो होश में aaya.....usne देखा की ये सब हो रहा है तो उसने पंकज उनके पास पंहुचा और उनका हाथ निच्चे कर diya....jissse वो दरवाजे जो थोड़ा सा ऊपर उठा हुआ था वो निच्चे गिर gaya.....aur उसके साथ साथ वो बर्फ से बना हुआ दरवाजा भी टूट गया पूरी tarah.......Pankaj और पुजारी जी जो अंदर देख रहे थे वो उनको नहीं देखना चाहिए tha.......wo दैविक चीजजें thi.....jo इन् दोनों की आँखें सह नहीं पाती पर भला हो उस भाफ का जो वह पे मौजूद tha......usse इन् दोनों को बस परचाहियाँ hi दिखी......

मूर्ति के अंदर से किसी को निकला गया tha......aur उसके बाद वो जो भी था उसको यातनाएं दी जा रही thi......wo चीख रहा tha.....uski चीखें बहार तक आ रही thi......Pankaj को पहले लगा वो मधु है पर जब उसने ध्यान से सुन्ना वो किसी लड़के की आवाज है तो वो वही ृक्क gaya......Pujari जी को समझ नहीं आ रहा था वो इस वक़्त अपने देवता को बचने जाए या क्या करे........

ये सब ऐसे hi चल रहा था की तभी एक पोर्टल और खुल्ला वह pe.......usme से प्रतीक बहार aaya.......bas वही था अभी to.....par आँखें एकदम से kaali........aur वो भी मंदिर के अंदर चला gaya........par जाने से पहले उसने वो दरवाजा वापस से ठीक से बंद कर दिया जो अभी टूटा हुआ था.....

पंकज ने जब ये देखा वो दरवाजे के पास जाके उसको पीटने laga.......Pujari जी ने भी जब वह पे प्रतीक को देखा तो वो भी दरवाजे पे जा पहुंचे.......

अंदर पता नहीं क्या चल रहा था.......5 मिनट भी नहीं हुआ होगा की स्ट्रेंज वर्ल्ड के उस कोने में ज्वाला , ओल्ड आउल आ गए the......aur उनके साथ hi निकिता और पूनम बुआ भी आ पहुंची thi.......waha पे पंकज को देख बुआ को थोड़ी तसली हुई की एक तो ठीक ठाक milla.......par अभी वो जिस वजह से यहाँ आयी थी वो जानना था उनको.......

थोड़ी देर पहले एअर्थ पे.......

बुआ ने सब कुछ वह पे बता दिया tha......uss वक़्त ना तो प्रिंसिपल और ना hi मैडम थी वह पे और तो और वर्किंग प्रिंसिपल जो थे वो कही बहार गए हुए the........unko जल्दी से वह पे बुलाया गया और इन् सब की जानकारी दी gayi.....jiske बाद उन्होंने वह पे हेडोफ़्फ़िस से कुछ लोग बुलाये और ये सब कुछ बताया unko.....ussi वक़्त बुआ उन सब से दूर आ गयी थी......

प्रतीक और निकिता ने जब देखा की बुआ वह से आ रही है तो वो उनके पास चले गए.......

बुआ अपने केबिन में जा रही thi.....wo इन् सब के बारे में थोड़ा सोचना चाहती thi.......jab वो वह पहुंची तभी वह वो दोनों भी पहुंच गए......

मैं - क्या हुआ बुआ कौन था वो जो गायब हो गया......

बुआ - तुम dono........wo दोनों पंकज और मधु थे.......

बुआ ने फिर पूरी बात दोनों को बताई......

मैं ये सुन्न के हैरान था आखिर मधु कैसे ये सब कर सकती thi......Main आगे कुछ बोलता या सोचता उससे पहले निकिता ने मुझसे कहा......

निकिता - हमको पंकज के बारे में पता करना hoga......tum ओल्ड आउल की मदद लो......

मैं - हम्म

मैंने ओल्ड आउल को बुलाने को आवाज लगायी पर आवाज नहीं आयी wapas.......ulta मेरी आवाज hi गूंजती हुए मुझे सुनाई दे रही thi.......Jab आँखें खुली तो मैं पता नहीं कहा पे एक मूर्ति के पास पड़ा हुआ tha.......puri बॉडी hi दर्द कर रही thi........kya बताऊँ कैसा लग रहा tha.........upar से वो भद्दी सी murti.......kissi तरह मैं उठ के बैठा तो देखा मधु भी वही पे पढ़ी हुई thi......uske नाक से खून निकल रहा tha.....Main उसके पास जाने लगा की तभी जैसे कोई अदृश्य दीवार हो उसने मुझे रोक liya.....Main उसको पार करने की कोशिश करने लगा तो मुझे झटका लगा और मैं पीछे की तरफ आ गिरा.....

मधु वैसे hi निच्चे पड़ी हुई थी......

मुझे किसी की आवाज आयी.....

"हाहाहाहा क्या लगा वो तुझे आसानी से मिल jaayegi........sapna मत dekh........wo तुझे नहीं milegi.....tu उसके काबिल नहीं hai.....tu उसको छू भी नहीं सकता......."

ये aawaj.....jaise hi वो मेरे कानो में गयी क्या बताऊँ क्या hua......mere आँखों के सामने पहले तो अँधेरा चा गया और फिर इतनी तेज़ रोशनी की कुछ बता hi नहीं सकता मैं......

"nahi......ye......ye kaise.......ye मुमकिन नहीं hai.......tum mere......nahi .....तुम इसको तोड़ नहीं sakte......koi भी इसको तोड़ नहीं सकता......."

वो चिल्लाता रहा पर जो होना था जैसा होना था वो हो चुक्का tha.......Maine एक बार मधु के तरफ dekha.......aaj भी वैसी hi दिखती थी wo.......Main ऊपरी सुंदरता की बात नहीं karta......main उसके अंदर के सुंदरता को निहार रहा tha......ussi तरह सुद्ध थी वो जिस तरह उस वक़्त थी जब वो पहली बार मुझसे अपने घर पे मिली thi......haa तब मैं उसके पास जा सकता tha.....par आगे जो कुछ भी मैंने किया wo.......uske लिए मैं खुद को जिम्मेदार मानता हु और जो सज़्ज़ा मुझे मिली है मैं उसको भी manunga......issi में मेरी उसकी और सभी की भलाई थी.......

पर मैं इस वक़्त यहाँ पे क्यों tha......Aur मधु भी थी यहाँ pe......kya ये कोई दूसरा मौका मिला है मुझे.....

मैंने ये सोचा और उत्सुकता से एक कदम आगे बढ़ाया मधु की taraf.......par तभी मुझे उसकी कही हुई वो बातें याद aayi......Maine अपने कदम पीछे ले liye.......ek बार पीछे मदद के उस भद्दे से मूर्ति को dekha........issi में कैद था वो जिसके कारण हम अलग हुए the.....issi मूर्ति में रहने की सज़्ज़ा मिली थी usko......aur खुद की गलतियों को जान्ने की सज़्ज़ा......

मैं - कैसे हो तुम........

"Tuuuuuuuuuuuuummmmmmmmm...........tum ये मत सोचना तुम्हे सब याद आ गया है तो तुम कुछ भी कर सकते ho......main तुम्हे कभी ऐसा करने नहीं दूंगा...."

मैं - मैं नहीं जानता इस बार किस चीज़ के बारे में बात कर रहे हो tum.......Rahi बात मधु ki......Main उसके करीब तभी जाऊंगा जब वो chahegi.......uski इज़्ज़ज़त के बिना उसके पास नहीं जा सकता मैं......

मैंने उससे ये कहा और वह से बहार आने का रास्ता देखने laga.....taaki किसी को बोल सक्कु अंदर मेरी मधु है उसका ध्यान रखे......

मैंने कुछ आवैं सुन्नी एक दरवाजे के तरफ se.......main उस तरफ गया और पहले तो अपना आकर काम kiya.......Main अपने असली आकर में ऐसे hi किसी के सामने नहीं जा सकता tha.....isse वो सब दर के भाग jaate......Main मधु के जितने आकर का हुआ और उस दरवाजे के पास pahucha......uss दरवाजे को खोला तो बहार कुछ लोग the.......aur कुछ जीव bhi......pata नहीं कौन थे ये sab.......wo मुझे देख रहे the.....par उनमे से दो लोग ऐसे भी थे जो अंदर को झाँक रहे थे......

मैं - मेरी मधु अंदर hai.....Main उसके पास नहीं जा सकता उसका ध्यान rakhna.......aur उसके बताना मैं आया था......

मैं इतना बोल वह से अपना पोर्टल खोल के निकल gaya.......binna उन् सब को देखे......

वही पीछे......

जब प्रतीक वह से गया और ऐसे पागलों जैसी बातें कर के गया बुआ और बाकी सब को कुछ समझ hi नहीं आ रहा था आखिर ये है क्या......

पंकज और पुजारी जी तो अंदर मधु के पास चले गए the.......Pankaj उसके पास जा रहा था की तभी पुजारी जी ने देखा मधु के कपडे ठीक नहीं है उन्होंने पंकज को rokka.....aur पंकज ने भी देखा की कपडे सही नहीं hai.....wo दोनों hi मदद गए और बहार खड़े बुआ और निकिता को आवाज लगायी........

बुआ और निकिता बस वह देखे जा रहे थे जाहा पे वो पोर्टल खुल्ला था और बंद हुआ tha......ki तभी उनको अंदर से आवाज आयी......

बुआ और निकिता अंदर चले gaye.....jab बुआ ने देखा मधु के कपडे ठीक नहीं hai....unhone पंकज और पुजारी जी को वजा से जाने को kaha.......Pujari जी वह से जाने लगे पर जाते जाते hi उन्होंने पानी से उस मूर्ति के तरफ एक दीवार बना दी.......

बहार आके......

पुजारी जी - तुम कौन हो bacche......aur तुम हमारी राजकुमारी के साथ कैसे हो......

पंकज - Wo.....wo main......wo मेरे साथ hi रहती है वह pe......Main पंकज hu.....uska दोस्त

पुजारी जी ने पंकज की तरफ dekha......unhone ध्यान दिया था कैसे वो मधु को बच्चन के लिए उस बर्फ के दरवाजे को तोड़ने में लगा हुआ tha....usko अच्छा लगा की मधु को ऐसे अच्छे दोस्त मिले है.....

पुजारी जी - हम्म हमारी राजकुमारी का ध्यान रखना......

पंकज - वो बहुत जिद्दी hai......aap सब को धययन देना चाहिए था उसपे.....

पुजारी जी उसके इस बात पे उसको अपनी ऑंखें दिखने lage......ki तभी पंकज की नज़र वह पे मौजूद ओल्ड आउल पे और ज्वाला पे गयी......

पंकज उनको देख सकता tha......Pujari जी की बात और thi.....par पंकज से छुपने की काबिलियत उन् दोनों में थी......

पंकज उन् दोनों की ओर देख रहा tha.....aur बस देखते hi जा रहा था......

ओल्ड आउल - ज्वाला आपको क्या लगता है ये बच्चा हममे देख पा रहा है.....

ज्वाला ने भी पंकज की ओर dekha......wo सच में उनकी hi तरफ देख रहा था......

ज्वाला - ये तो हममे देख सकता hai.......par ऐसा होना नहीं चाहिए tha.....haalaki ये प्रतीक का रिस्तेदार है पर फिर भी उन् दोनों के खून में बहुत अन्तर है.....

ओल्ड आउल - पर ये हमे देख सकता hai......yaha से निकलना सही होगा क्या अभी.....

ज्वाला - मेरे मैं में बहुत से सवाल hai.....abhi मैं नहीं जा रहा kahi.....aur ये प्रतीक पता नहीं क्या बोल के यहाँ से गया है......

तभी अंदर से आवाज आयी.....

निकिता - यहाँ कोई कमरा है जहा ये आराम कर सकती hai.....isse जमीं पे नहीं छोड़ सकते......

पुजारी जी अंदर गए उन्होंने मंदिर के सामने का दरवाजा खोला और उसके बाद थोड़ा आगे जाके एक कमरे के तरफ सबको आने को kaha.....jab सब वह पहुंचे तो वह पे एक बीएड दिखा sabko.......ussi पे मधु को आराम करने के लिए सुल्ला दिया गया......

उस कमरे से निकलने के बाद......

बुआ - ये प्रतीक क्या बड़बड़ा के गया था यहाँ पर se.......aur वो गया kaha.....waha से भी बिन्ना बताये यहाँ आ गया और अब यहाँ से भी चला गया......

निकिता -(धीरे से) मैं उन् दोनों को पता लगाने को बोलती हु......

निकिता बहार की तरफ जाने lagi.....Pankaj ने सोचा उससे पूछे क्या वो भी वह पे उन् जीवों को देख सकती है या nahi......aur इसी वजह से वो भी वह पे gaya......par जब पंहुचा तब निकिता तो उनसे बात कर रही thi.......aur वो दोनों सुन्न भी रहे थे......

निकिता - पता करो कहा गया है वो......

वो दोनों निकिता की बात सुन्न्के वह से चले gaye.....Nikita जब पीछे मुद्दि तो उसने देखा पंकज उसको घूर रहा tha.......usko नहीं लगा था पंकज या कोई भी उन् दोनों को देख सकता hai......Pujari जी ने देखा था पर इग्नोर maara......unn दोनों से बड़ा मुद्दा सामने था unke......Par Pankaj.....uska क्या बोले....

निकिता - क्या hua.....tum ऐसे क्या देख रहे हो.....

पंकज - wo....wo जो abhi.....abhi.....tum क्या कर रही थी......

निकिता - कुछ नहीं मैं बस ऐसे hi आयी thi.....aur अब बात कर रहे हो मुझसे.......

यहाँ ये सब चल रहा था वह फोमोस से वापस निकल चुक्के थे लीडर यहाँ एअर्थ की taraf.....aur एअर्थ पे आये तो उसने कुछ महसूस kiya.......iss चीज़ को और भी लोगो ने महसूस किया tha.......naa सिर्फ डार्क पावर के होने का अहसास हो रहा था बल्कि मधु के गोल्डन पावर का bhi......usne भी काबू खोया था......

प्रतीक इस वक़्त टाइटन प्लेनेट की ओर बढ़ता जा रहा tha.......kyunki वही से उसके घर जाने का रास्ता tha......wo एक बार अपने घर जाना चाहता tha......par अभी वो एक मोर्टल जीव के शरीर में tha.......aur इस हालत में वो टाइटन पे भी नहीं जा सकता था उसको आने hi नहीं देते वो सब......

अभी वो स्ट्रेंज वर्ल्ड से थोड़ा दूर ओरियन तक पंहुचा hi था की ध्रुव उसको आवाज लगाने लगा.....

प्रतीक को पहले तो लगा ये कोई वहां hai....par जब ये आवाजें आती hi रही तो वो खुद को रोक कर उस आवाज की तरफ ध्यान दिया......

ध्रुव - Master........master आप ऐसे नहीं जा sakte......aapka यहाँ से जाना ठीक नहीं है......

प्रतीक को ये आवाज पहचानने में ज्यादा वक़्त नहीं laga.......ye उसी का एक शिष्य tha.......sayad सबसे भरोसेमंद shishya......Dhruv.....

प्रतीक - ध्रुव ये तुम्हारी आवाज hai.......kaha हो तुम.......

ध्रुव - मास्टर मैं आपके अंदर hu......pichli बार जो कुछ भी हुआ उसमे मैंने अपना शरीर खू diya.....par आपने मेरी आत्मा को बच्चा लिया था.....

प्रतीक - हम्म्म मुझे याद hai.......Mujhe माफ़ करना Dhruv.......meri वजह से तुम आज इस हाल में ho......Main वडा करता हु तुम्हे एक शरीर जरूर दूंगा.....

ध्रुव - मास्टर आप बुरा ना माने तो मेरी एक बात सुनेगे...

प्रतीक - हम घर चलते है वही पे बात करेंगे.....

ध्रुव - मास्टर आपका ghar.......wo नहीं raha.......sab तबाह हो गया tha.....aapka कोई घर नहीं अब.....

प्रतीक ने जब ये सुन्ना उसको बहुत गुस्सा aaya........ye वो घर था जिसको उसने और मधु ने मिलके रहने को बनाया tha.......sabhi इम्मोर्टल्स से dur.....taaki वो शांति से रह sakke......aur आज ना तो उसके पास मधु है और ना hi अब वो घर.......

प्रतीक - kisne......kisne किया ye........kiski हिम्मत हुई इतनी जो मेरे घर को छू लिया.....

ध्रुव - मास्टर इस बारे में अभी मुझे नहीं पता hai.......main इस बारे में पता लगाने की कोशिश करता hu........par तब तक आपको वापस से एअर्थ पे चलना होगा......

प्रतीक - Earth.......ye कौन सी जगह है....

ध्रुव - मास्टर ये वही जगह है जहा अभी तक आप रह रहे the......kya आपको एअर्थ और वह के लोगो के बारे में कुछ भी याद नहीं है......

प्रतीक -(थोड़ा सोचने के बाद) नहीं मैं नहीं जानता इस जगह के बारे mein......Main तो बस यहाँ पे उस जेल को जानता हु जहा पे उसको उस मूर्ति में कैद किया हुआ है......

ध्रुव - मास्टर आपकी पुराणी यादास्त आ गयी है वापस पर आपकी इस वक़्त की यादास्त चली गयी hai......aapko वो सब याद करना होगा.....

प्रतीक - मुझे पहले ये बताओ यहाँ पे चल क्या रहा hai......Main यहाँ पे कैसे आया मैं तो ये भी समझ नहीं पा रहा hu.....aur ये शरीर ये भी कमज़ोर सा लग रहा है मुझे......

ध्रुव - मास्टर ये लम्बी कहानी hai......aur इतनी पुराणी की मुझे वक़्त लग जाएगा इसको बताने mein......aapko उससे पहले ना सिर्फ अपनी यादें वापस लानी है बल्कि अपने डार्क पावर को कण्ट्रोल में रखना hoga......maine सोचा नहीं था ये सब इतना जल्दी हो jaayega......aapko बहुत सी बातें बतानी है और वक़्त बहुत काम है.....

प्रतीक - चलो ठीक है बताओ किस जगह पे मुझे जाना chahiye.......kaha पे जाके मैं अपनी यादें वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करू जहा पे कोई भी ना आ पाए.......

ध्रुव ने एक जगह बताई जहा पे प्रतीक चला gaya......wahi ओल्ड आउल और ज्वाला उसी के तलाश में यहाँ वह भटक रहे the......par कुछ पता hi नहीं चल रहा tha......Jwala ने डार्क पावर को भी ट्रेस करने की कोशिश की पर फायदा नहीं हुआ कुछ.....

यहाँ स्ट्रेंज वर्ल्ड में बुआ पुजारी जी से बात कर रही thi.....yaa ये कहा जाए पुजारी जी बुआ से बात कर रहे थे और प्रतीक के बारे में पूछ रहे the.....wo कैसा hai....kya क्या खूबियां है उसमे उसकी स्ट्रेंग्थ्स वगेरा wagera......Bua को ये बड़ा अजीब लग रहा था......

पुजारी जी - मेरी बात ध्यान से suniyega.......agar मैं सही हु तो अब प्रतीक के अंदर कुछ चंगेस aayenge......ye सायद वक़्त से पहले हो गया hai......uska गुस्सा बढ़ जाएगा.....

अभी वो बोल hi रहे थे की उन्होंने एक बार वापस से बुआ और निकिता की ओर देखा......

पुजारी जी (बुआ से) - तुम्हारे घर में बहुत कुछ होने वाला है अभी तक मैं बस प्रतीक के बारे में सोच रहा tha.....par चीजजें और भी बड़ी hai.......(Nikita से) तुम तैयार raho......kuch चीजजें milengi......par जो उनमे ना सिर्फ सुख होगा बल्कि दुःख भी hoga......khud पे काबू रखना.....

बुआ और निकिता समझ hi नहीं पाए ये बाँदा अभी तक जो बस बातें पूछ रहा था वो अच्चानक से ये सब क्या कहने लग गया........

पर पुजारी जी ने भी उतना कहा और उसके बाद वो बेहोश हो gaye........ye समझ से पर्रे tha.......aur इससे भी अजीब था उनका निच्चे गिरना और उसी वक़्त मधु को होश aana.......Madhu होश में आ गयी thi.......wo उस कमरे से बहार aayi.....aur वह पे पुजारी जो को गिरा हुआ पाया.......

वो दौड़ के उनके पास gayi......aur सबसे पहले तो बुआ और निकिता को वह से हटाया.......

उसने देखा पुजारी जी के नाक से खून निकल रहा था और अब वो सूखा हुआ hai........Madhu ने यहाँ वह देखा पास में पानी था उसने अपने ऊँगली के इशारे से उस पानी को अपने पास बुलाया और आँखें बंद करके कुछ बड़बड़ाने लग gayi.....jiske बाद वो पानी पुजारी जी के चेहरे पे एक परत की तरह बिछ गया और थोड़ी देर में गायब हो गया चमकने के baad......jiske बाद वो जाग गए.....

पुजारी जी - क्या हुआ tha......Madhu......tum yaha.....tum ठीक हो ना अब......

मधु - हम्म पर आपको क्या hua.....aur मैं यहाँ पे कैसे.......

पुजारी जी - मैंने बुलाया thaa......yaad नहीं hai.....tum अपने दोस्तों को लेके आयी हो यहाँ देखो.....

मधु को ये बात पच्छ भी जाती पर दोस्तों का बोलै और वह पे निकिता और बुआ the.....wo दोस्त नहीं the......par अभी उसने कुछ पूछा नहीं......

पुजारी जी - अब तुम्हे वापस चले जाना chahiye......waha पे लोग इंतज़ार कर रहे होंगे ना......

मधु - पर आप इस हालत mein....main ऐसे कैसे जाऊं......

पुजारी जी ने इस बात पे एक बार उस कमरे की तरफ देखा जहा पे वो मूर्ति thi.....aur फिर एक लम्बी सांस लेके कहा......

पुजारी जी - हम सब भी वही आ रहे hai........ye जगह ये देवता अब ना तो रहने लायक है और ना पुज्जे जाने laayak........bahut से मौके मिले पर ये नहीं समझ paaye......Pujari जी ने पंकज की ओर dekha......aur कहा तुम बहार जाओ और सभी से कहो की निक्स कबीला एअर्थ पे जाने वाला है आज hi........

पंकज - Main.....main kaise......(wo बोल रहा था की तभी मधु ने उसको आँखें दिखाई और वो वह से जाने लग gaya......uske पीछे निकिता भी चली गयी)

जब यहाँ ये सब हो रहा था एअर्थ पे भी एक घटना हो रही thi.......DB इस वक़्त अपने गुरु जी के सामने बैठा हुआ tha......Guruji समझ नहीं पा रहे थे की वो क्या कहे क्या ना kahe......aisa कभी सोचा hi नहीं था उन्होंने की दब कुछ कहेगा......

दब ने कहा की वो अब वापस से वह सिर्फ एक hi बार jaayega.......bas उस बीमारी को ख़तम karne.....usko बाद वो वापस से एअर्थ पे आ जाएगा और यही rahega........Elf नेशन को उसके जैसा राजा नहीं chahiye.....aur ना वो खुद को वह का राज ाबनने के काबिल समझता hai.......aur ये ना सिर्फ उसका मन्ना था बल्कि उसके उन् पूर्वजों के मैं में भी ये बात आयी thi.....par उस वक़्त कोई भी ऐसा नहीं था वह पे जो उस जगह को संभल सक्के पर ये मौका दब को मिला tha.......Leemi एक अच्छी केयरटेकर बन सकती thi.....aur उसके बाद उसकी beti......wo उसी को वो राज्य सौपने के बारे में सोच रहा tha.....aur ये बात उसने अपने गुरु जी को भी बताई.....

इसी बात को लेके वो और ज्यादा शॉकेड थे.......

प्रतीक इस वक़्त उसी जंगल में tha......jaha पे पंकज ने उस सैतान से निकिता को बच्चया था.....

प्रतीक वह पे आके एक जगह पे बैठ गया और अपनी बातें याद करने लग गया,........

जब वो खुद के साथ हुई बातें याद कर रहा था तो उसके एक्सप्रेशंस बहुत अजीब होते जा रहे the.......ye थोड़ा लम्बा जाने वाला था........

इसी वक़्त ओल्ड आउल और ज्वाला को इसका पता मिल गया और वो दोनों वह पे आ gaye......unko आने में थोड़ा वक़्त तो लगा hi था.......

जब वो वह पे आये तो देखा प्रतीक ध्यान लगा रहा tha......wo दोनों उसके पास नहीं गए बस वही पे रुक्के rahe.......Jwala जो अभी वही पे था उसको थोड़ा अजीब सा लगने लगा ऐसा लगने लगा जैसे कोई उसके अंदर से कुछ खिन्छ रहा है.......

पहले तो उसको लगा वो थक्का हुआ hai.....par ये थकावट नहीं tha.........Wahi निकिता जो इस वक़्त स्ट्रेंज वर्ल्ड में थी उसको भी ऐसा hi लगने लगा जैसे कोई उससे कुछ चीन रहा ho.......wi खुद में hi बहुत ज्यादा थका हुआ महसूस कर रही थी......

इस बार भी अगर ध्रुव बिच में नहीं आया होता तो उन् दोनों के शरीर से ना सिर्फ डार्क पावर का हिस्सा बहार आ जाता बल्कि उसके निकले जाने के बाद जो दर्द होता उससे दोनों के दोनों वही पे डैम टॉड देते......

ध्रुव ने बहुत मुश्किल से अपने मास्टर को ऐसा करने से rokka.....aur उसके रोकने की वजह से प्रतीक का ध्यान टूट gaya.......par यादें वापस आ गयी थी......

प्रतीक ने अपनी आखें खोली सामने उसके दो बन्दे थे एक ओल्ड आउल जो जासूस tha.....aur दूसरा ज्वाला जिसको उसका सिपाही कहा जा सकता tha......usne देखा की उसकी शक्तियां काम कर दी है इस मोर्टल जीव के शरीर ने पर तब पर उसके बदले उसको ऐसे बन्दे मिले है जो उसकी भरपाई कर सकते थे........

उसने अपने अंदर से अलबूस और कूपर को भी बहार बुलाया......

वो चारो वह पे the......aur प्रतीक को देख रहे थे.......

प्रतीक - तुम सब से मिलके बहुत अच्छा laga........ab िन्न्न सब में थोड़ा बदलाव लाया jaayega......main जब भी जैसा भी कहूंगा वैसा hi करना होगा tumko.......Old आउल, ज्वाला दोनों अभी के अभी अपने जगह पे जाओ तुम्हारे log......wo इस वक़्त खुश नहीं है tumse......ek सच्चा राजा वही होता है जो अपने प्रजा को खुश rakhe.......aaj से तुम दोनों का पहला काम यही होगा अपने लोगो को खुश rakhna.........Main जब जरुरत पड़े तब hi bulaunga........Albus......Cooper...... तुम dono......tumhe मैं अब अपने अंदर नहीं रख sakta.........ye तुमपे है टीम आज़ाद होना कहते हो या मेरे साथ रहना चाहते हो......

वक़्त आ गया था जब प्रतीक इन् दोनों से इनकी वफादारी के बारे में समझ sakke.......ye उसी के लिए tha......agr वो वह से जाने के बारे में सोचते जो की लगभग से नामुमकिन था तो प्रतीक उनको अपनी शक्तियों से बाँध deta.......par जैसा उसने सोचा था वैसा hi हुआ वो दोनों वह से नहीं गए.......

प्रतीक - अगर तुम यही रहना चाहते हो मेरे saath......to तुम जानते हो क्या करना होगा.......

प्रतीक ने अपनी तलवार निकली और दोनों के दोनों hi उसी के अंदर चले gaye......indirectly वो दोनों प्रतीक के अंदर hi रहने वाले थे......

प्रतीक ने जैसा ओल्ड आउल और ज्वाला को कहा उन् दोनों ने भी वही करने का socha......waise भी वो कहा दूर थे जब भी बुलाता वो आ hi जाते.....

नेक्स्ट अपडेट में एअर्थ पे सारा निक्स कबीला होगा लगभग से और उसके बाद कुछ बातें हम खुनी घुड़सवारों की रानी यानी रूपल दीदी की भी karenge......kyun उनको hi उन् बट्स ने चुना इस बारे mein.......Prateek वापस से स्कूल जाएगा पर सब बदला हुआ hoga.....usko वो सब सहना hi होगा जो इससे पहले उसने सहा था बस इस बार लोग नए आये हुए है उसके सामने......
 
अपडेट -90

निकिता और पंकज ने बहार जाके सभी को पुजारी जी की बात बताई की वो चाहते थे की सब वह से निकल जाए और एअर्थ पे जाने के लिए तैयार हो जाए.......

कुछ ने उनकी बात माननी और कुछ नहीं nahi......yaha पे मामला विश्वास का tha.......ab कौन ऐसा होगा जो अपने उस देवता को छोड़ के चला जाएगा जिसकी पूजा वो क्या उसके बड़े बुजुर्ग भी कर रहे हो......

जो कुछ लोग उनकी बात को मान गए वो सब अपने अपने घर चले गए और अपना अपना सम्मान इक्कठा करने लग गए......

यहाँ पे माहौल ख़राब होने वाला था.......

निकिता और पंकज वापस से अंदर आ गए......

पुजारी जी - तुमने उनसे कह दिया......

पंकज - हम्म....

पुजारी जी - अब हमे तैयारी करनी होगी.....

मधु - एक बात बताओ मैं यहाँ आयी kaise......ye बात मुझे याद क्यों नहीं आ rahi.....au.....

पंकज - तुम ज्यादा सोचो मत मधु देखो तुम्हारे लोगो को जरुरत है तुम्हारी......

मधु को पता था वो लोग कुछ नहीं सुनने वाले वैसे भी वो कहा कोई उनकी राजकुमारी थी ये तो बस कहने की बात thi......to वो थोड़ी देर चुप रही.......

पुजारी जी -तुम सब मेरे पीछे aaoge......iss मंदिर में बहुत से ऐसे चीज़ीं है जो हमको लेके जानी hai.......wo ामन्त है कुछ लोगो ki......unko मिलनी hi chahiye........Madhu तुम उन् दरवाजो को खोल देना जिनकी तरफ मैं इशारा करू.....

पंकज - दरवाजे अच्छे से खोलने आते है इसको......

मधु - क्या मतलब......

पुजारी जी - चलो मेरे पीछे aao.....waqt काम है हमारे पास.......

कुछ कमरों के तरफ पुजारी जी ने इशारा किया और वो सारे कमरे मधु ने खोल diye......aur उनके अंदर पुजारी जी अकेले गए और उनको जो करना था कर के बहार आ गए और सब बंद कर diya......par उन् कमरों में से एक कमरा खली मिला उनको......

वो कमरा भी इम्पोर्टेन्ट tha......jab उन्होंने ध्यान से देखा तो कमरे में पहले hi कोई आया था ऐसा निशान मिला unko........unhone अपना सर पीट liya......par अभी रुकना सही नहीं tha......wo वह से बहार nikale......jin जिन दरवाजो को बंद करना था वो सारे बंद कर दिए gaye......aur वो चल दिए वह मंदिर के मुख द्वार के पास.......

बहुत सारे लोग नहीं आये हुए थे वह pe........thoda रुकने के बारे में सोचा उन् सब ने.......

तभी ओल्ड आउल और ज्वाला वह पे आ gaye......Prateek का पता उनको चल गया था और उनको उसने आदेश भी दे दिया था की वो अब वह अपने लोगो का ध्यान रखे जब तक प्रतीक खुद उनको ना बुलाता.......

ये दोनों यहाँ पे बस ये बताने को आये थे की वो मिल गया है और कहा पर है वो.......

प्रतीक की खबर दी इन् दोनों ने की वो एअर्थ पे hi है पर थोड़ा अज्जेब लगा उसको देख के इस baar.......Ispe पुजारी जी ने कहा.....

पुजारी जी - ये अब ऐसा hi rahega.......kuch चीजजें बदल गयी hai......ab तुम सबको भी थोड़ा बदलना hoga.....Madhu तुम क्या उस दरवाजे को बंद कर आओगी.....

मधु ने एक बार तो अजीब सा मुँह बनाते हुए उनको dekha......abhi ऐसा लग रहा था जैसे कितनी इम्पोर्टेन्ट बात कर रहे the......aur अब :सिघ: वो वह से चली गयी दरवाजा बंद करने को.....

पुजारी जी - तुम सब से बस एक hi बात kahunga......inn दोनों की इस कहानी में इनके बिच दीवार मत बन जाना......

किसी को ये बात साफ़ साफ़ समझ में hi नहीं aayi......sabhi के आँखें बड़े हो गए the.......Pujari जी ने ऐसा बम hi फोड़ा tha.....unhone सीधा कह दिया की प्रतीक और मधु की कहानी में वो बिच में ना jaaye.....kahne को बहुत से मतलब हो सकते है iske......par वह सभी के दिम्माग में बस एक hi मतलब aaya.....aur वो सरे के सारे चौक गए थे.....

निकिता - पर वो तो पंकज के सा......

पंकज जो बस आँखें बड़ी करके देख रहा था पुजारी जी को की कैसे उन्होंने कह दिया मधु और प्रतीक की kahani......aur जब निकिता के मुँह से अपना नाम सुन्ना तो और उसका मतलब समझा तो आँखें और बड़ी हो gayi.....thodi और बड़ी कर लेता तो आँखें निच्चे आ जाती.......

पंकज - आई पागल हो kya.......Madhu और मैं बस दोस्त है और कुछ nahi......dimmag है या नहीं तुममे वैम्पायर.....

निकिता को भी बोलते वक़्त लगा था वो ज्यादा बोल रही है पर उसके अंदर कुछ और hi चल रहा था वो बस कन्फर्म होना चाहती thi.......par उसने ये नहीं सोचा होगा ये इतना भड़क जाएगा......

निकिता - मैं तो बस wo......ye वैम्पायर क्या hai........naam है mera......Nikita......wapas से ऐसा बोलै to....to....

बुआ - चुप रहो dono.......Pujari ji.....aap क्या वही कह रहे है जो मैं सोच रही हु.......

पुजारी जी - hmm.....ye सब बहुत पुराणी बातें है बस कुछ लोगो को hi इसका पता hai.......Main सब बताऊंगा tumko.....par ना ये जगह सही है और ना hi waqt.....bas इतना ध्यान रखना उन् दोनों के बिछ में मत आ jaana....agar आये तो क्या होगा ये मैं भी नहीं बता सकता......

बुआ इसको लेके सोच में पद गयी आखिर ऐसा क्या है......

थोड़ी देर में जिनको भी जाना था एअर्थ पे वो सब मंदिर के पास आ गए और जो नहीं जाना चाहते थे वो वही पे रह गए.......

पुजारी जी ने उन्ही गुफाओं का उसे kiya......waha से एअर्थ पे जाने के liye.......wahi ओल्ड आउल और ज्वाला भी मदद कर रहे थे उसकी.....

उनको पता नहीं था वो जा कहा रहे hai......bas गुफा में पुजारी जी के पीछे पीछे जा रहे थे वो sab......aur ऐसा करते करते वो सीधा लिमि के पास पहुंच गए......

लिमि को उसके गुरूजी ने एक जगह पे रुकने को कहा tha.........bas रुकने को hi कहा था वो भी जाके उस जगह पे बस खडुई thi.....saamne एक तालाब था उसी को देख रही थी की अचानक से तालाब का थोड़ा पानी ऊपर जाने लगा......

लिमि ने जब ये देखा वो पीछे हो gayi......aur उसके बाद जो हुआ वो तो और भी चौकाने वाला था उसके liye........upar आसमान में एक गुफा का दरवाजा खुल गया और वह से कुछ लोग निच्चे आने लगे.......

लिमि बस वही देखे जा रही thi....samajh नहीं आ रहा था कैसे ये लोग यहाँ आ gaye....aur वो आ कहा से रहे है......

पुजारी जी और बाकी सब के बाद बुआ , निकिता और पंकज आये ओल्ड आउल और ज्वाला अपने जगह पे चले गए थे........

लिमि ने जब देखा की वह पे बुआ और निकिता है तो उनके पास चली gayi......wo उनसे बात करने hi वाली थी की पुजारी जी ने उसको देखा और कहा......

पुजारी जी - हममे अपने आश्रम पे ले चलो.....

लिमि - आपको कैसे पता आश्रम है हमारा......

पुजारी जी - मुझे बस उसके बारे में hi नहीं बल्कि तुम्हारे बारे में भी बहुत कुछ पता है.......

वो कुछ बोलता उससे पहले वह ोे खुद गुरु जी आ गए और उसके साथ hi K.Bua और दब भी आ गए वह पे.......

K.Bua ने जब बुआ और निकिता को देखा तो वो थोड़ा चौक गयी वो यहाँ क्या कर रही थी फिर मधु और पंकज भी थे waha......upar से ये तो सारे निक्स the.....wo भी सामन के साथ.......

K.Bua कुछ बोलती उससे पहले गुरूजी बोले.....

गुरूजी - dost.....tum यहाँ आये ये देख के बहुत खुसी हुई......

पुजारी जी - वक़्त आ गया था उस जगह से पलायन करने ka.....par दुःख इस बात का हैउ सभी को नहीं बच्चा पाया main......kuch लोग वही रह गए.....

दब - वो उनकी किस्मत hai......aur जो यहाँ आ गए है उनकी किस्मत अलग है......

पुजारी जी ने जब दब की बात सुन्नी तो उसको गौर से देखने लग गए......

गुरूजी - ये एल्फ राजकुमार है.........

दब - मैं tha......par मुझे मेरे पिता जी ने वह से निकल दिया......

K.Bua - दब तुम हर बार ऐसे क्यों बोलते ho.....Rajkumar तुम hi ho.....aur आगे जाके तुमको hi वह सब देखना है तो ये सब सोचना बंद कर दो.....

पुजारी जी - हम्म तो ये है वो Rajkumar......milke अच्छा लगा aapse......Dost मैंने कहा था मेरे लोगो के रहने के लिए एक जगह......

गुरूजी - एक जगह hai.....waha पे एक छोटा सा तालाब भी है जिससे तुम सब को कोई परेशानी नहीं hogi......par...

पुजारी जी - पर kya.....waha पे कोई दिक्कत है क्या......

मधु - (पंकज से) ये राजकुमार hai......lagta तो नहीं.....

गुरूजी - वो जगह हमारे hi आश्रम में hai......aur यहाँ पे सिर्फ जादुई जीव hi नहीं बल्कि इंसान भी होते hai.....tumhare लोग क्या ये......

पुजारी जी - इसकी चिंता मत karo.....hum सब देख lenge....aur मैनेज भी कर lenge.....chalo अब दिखाओ कहा है वो जगह.....

दब - गुरु जी मैं चलता हु मुझे कुछ और काम hai....aap करो ये सब.....

गुरूजी एक बार उसको अकेले में पुजारी जी से मिलवाना चाहते the.....taaki वो कन्फर्म कर सक्के आखिर माजरा क्या hai...par ये जा रहा tha......Pahle गुरु जी ने सोचा रोक ले पर फिर लगा अभी तो ये सब ए है अभी ये सब करना सही नहीं होगा तो उन्होंने भी जाने को कह दिया......

पुजारी जी ने भी बाकी सब को वह से जाने को कह diya......Madhu रुकना चाहती थी पर उसको भी जाने को कह diya.....iss दौरान K.Bua क एक पेड़ के पास एक परछाई दिखी thi.....K.Bua उसकी ओर देख रही thi......aisa लग रहा था वो वह पे छिपने आया था.....

K.Bua ने बुआ को भी बताया और बुआ ने भी उसको dekha....par कुछ सोच के K.Bua को शांत रहने को कहा......

मधु और बाकी सब जब स्कूल जा रहे थे उस वक़्त भी बस पे वो tha.....piccha कर रहा था सभी ka......K.Bua ने जब ये देखा तो उनसे रहा नहीं गया.....

K.Bua - प्रतीक ये चुप चुप के क्या देख रहे ho......yaha नहीं आ सकते क्या.....

प्रतीक बस पे tha....wo बस मधु को देख रहा tha....baaki किसी से कोई खास मतलब था नहीं usko.....haa वो ये जान गया था की ये सब उसके दोस्त है रिलेटिव्स है पर अभी उनसे कोई काम नहीं है उसको.....

K.Bua के उसका नाम बुलाने से वो वह से उनके पास चला gaya.....aakhir इससे वो मधु को और पास से जो देख सकता था......

K.Bua - ये क्या चोरो की तरह पीछा कर रहे ho.....kuch बोलना है......

बुआ - Kavita.....chup raho......Prateek तुम यहाँ कैसे.....

मधु ने भी उसको dekha.....par वो पुजारी जी के द्वारा वह से भेज दिए जाने से थोड़ी चिद्दि हुई थी पहले से hi और जब उसने देखा की प्रतीक बस उसको hi देख रहा है तो गुस्से में बड़बड़ाते हुए वो दूसरी तरफ देखने लग गयी...

(हीरो के रेस्पेक्ट में)

सब याद आ गया था mujhko.....Main तो वह से स्कूल में जाना चाहता था देखने को की आखिर इस दुनिया में क्या क्या पढ़ते hai....kya यहाँ भी वही सब पढ़ाया जाता है जो मैं अपने शिष्यों को पढ़ाया करता था या कुछ aur.....par तभी मुझे लगा की मधु मेरे पास आ गयी hai.....isko क्या kahu....Madhu और मेरा जो कनेक्शन था बड़ा hi अजीब tha.......Jab भी हम दोनों एक दूसरे से दूर होते हममे पता होता था और जब भी किसी तरह पास आए जाते तो हमको पता चल जाता tha......iss बार भी वही था सायद वो इस जगह पे आ गयी thi.....Maine अपनी आखें बंद करि और उस जगह को देखने लगा जहा पे वो थी abhi.....aur वो मुझ मिल गयी कुछ लोगो की भीड़ के पास.......

मैं वही से चुप के उसको देखने laga......mann कर रहा था उसके पास जाऊं par......kaise jaata.....to बस देखता रहा usko......uske बाद वो सब वह से nikle....aaj भी जब उद्दस होती है ये तो इसके गाल एकदम गोल जैसे हो जाते hai.....kaun कहेगा ये गोल्डन पावर वाली है.....

उस वक़्त ध्रुव से एक सवाल किया मैंने......

मैं - मुझे सब याद आ गया है क्या इसको भी सब याद hai.....agar ऐसा हुआ तब तो.......

ध्रुव - Nahi......mujhe तो ऐसा नहीं लगता अगर ऐसा होता तो क्या वो वह पे होती abhi......wo आपको धुंध रही होती आपको मारने के लिए....

ध्रुव जो बात सही thi......agar उसको पता होता तो अभी मैं इस शरीर में तो नहीं hota.....par मैं फिर भी कन्फर्म करना चाहता था इसी वजह से जब वो सब बस में गए तो मैं भी चला gaya.......saath hi उसको बस देखते रहना चाहता था......

मैं तो वही कर भी रहा था पर पता नहीं ye.......haa.....ye तो K.Bua thi.....inhone मुझे देखा और मुझे बुला लिया अपने pass.......ab वह जा रहा था मैं और थोड़ी घबराहट भी हो रही थी कही उसको सब याद हुआ तो वो कैसे रियेक्ट karegi.....par जब मैं उसको देखते हुए आगे जा रहा था तो उसने अपनी आँखें छोटी करके मुझे देखा और ऐसे देखा जैसे अभी के अभी खा jaayegi.....par उसके बाद आगे देखने lagi....matlab ये साफ़ है उसको कुछ याद नहीं hai.....par फिर भी मैं उसके एकदम से पास नहीं जा sakta......Main उससे उतना दूर था जितना मुझे होना चाहिए था और वही से K.Bua को dekha.....aur कहा....

मैं - वो मैं भी जा रहा था यहाँ से तो आप सब मिल गए......

बुआ - कविता उसको वही रहने do.....tum ये बताओ दब का क्या हुआ....

K.Bua - क्या hua......ye सारे नमूने hai......usne पता नहीं गुरूजी से क्या बोल दिया है वो परेशां हो गए hai.....Main सोच रही थी उसक अपने दोस्त के यहाँ से निकल के कही और करा दू.....

बुआ - पर हुआ क्या.....

K.Bua - पहले खाना नहीं खा रहा था बातें नहीं कर रहा tha.....ab पता नहीं क्या हुआ है usko......wo दिन भर बड़बड़ करते रहता है वह पे.....

मेरे कानो में उनको आवाजें तो आ रही थी पर कोई ख़ास असर नहीं हो रहा था uska.....main तो बस मधु को देख रहा tha.....tabhi बस rukkki......aur बस में एक अजीब सा बाँदा आ gaya.....isko भी देखा था मैंने pahle.....ye तो वही था जो पंकज के साथ रहता था.....

वो बस पे पंकज को hi ढूंढते हुए आया tha....aur यहाँ वह देख रहा tha......tabhi उसकी नज़र पंकज पे padi.....aur वो उसके तरफ जाने लगा.....

पर वो मेरा ध्यान खिंच रहा था अपनी tarf......wo बाकियों की तरह आम सा तो नहीं लग रहा था......

लीडर - पंकज तुम यहाँ घूम रहे ho.....main तुम्हारे घर पे गया था वह तल्ला लगा हुआ था तुम्हारी पडोसी ने बताया तुम ठीक हो गए hi......

मधु जो पंकज के बगल में बैठी हुई thi....wo उसको देखने lagi.....Nikita पंकज के पीछे वाली सीट पे थी.....

पंकज - अरे aap......aap वापस आ gaye....aapse मुझे बात करनी थी.....

लीडर ने आस पास dekha....wo थोड़ा सा चौक गया की पिछले बार बाँदा एक दम से अकेला था और इस बार टोली में वापस आ गया.....

वो मधु की तरफ भी देख रहा tha.....thoda गौर se.....jaise पहचानने की कोशिश कर रहा हो......

पंकज - ये ये मेरी दोस्त है निक्स राजकुमारी Madhu......aur ये है leader......fum......

पंकज बस बोल hi देता अगर उस वक़्त लीडर ने बात ना बदली होती.....

लीडर - Nix......to आप निक्स राजकुमारी है.....

इतना बोलने के बाद पंकज को देखने लगे wo.....jisse पंकज को अपनी गलती समझ आ गयी.....

अभी बस जा hi रही थी के कुछ आवाजें मेरे कानो में aayi.....ye कोई आम आवाज नहीं thi.......ye एक खास किसम का कीड़ा hai.....jo हमारे यहाँ hi मिलता था bas.....inn इंसानो के दुनिया में ये kida.....ye कैसे मुमकिन hai....yaha पे तो इसने तबाही मचा राखी होगी......

मैं उस कीड़े के बारे में सोचने laga......wo बहुत खतरनाक था इस जगह के liye....yaha ये सब आपस में जान पहचान बना रहे थे......

रात के वक़्त.....

हम सब स्कूल में the.....Leader को पंकज से बात करनी थी पर पंकज ने कहा की वो कल hi हो पाएगी लीडर ने भी आस पास के लोगो को देखा और इसी में भलाई समझी और वो चला gaya.....par कल आएगा ये भी कह गया......

रात में घर के पास आज भी वही साया मंडरा रहा tha.....wo bats.......aaj भी दीदी के रूम के पास चल रहे थे wo......Chachi और दादी इनसे परेशां the......unhone इस बारे में चाचा और दादा जी को भी बताया पर उनकी समझ में भी कुछ नहीं aaya.....upar से जब तक सुरक्षा कवच थी तब तक तो वो आ नहीं सकते थे ander....to उन्होंने इसको अभी बस ऐसे hi रहने देने को कहा......

लेकिन आज रात सब वैसा hi नहीं रहने वाला था......

बहुत वक़्त पहले की बात hai......ek लूटेरा हुआ करता tha.....uski बस एक बेटी hi thi.......usne उसको अपने सारे पैतरे सिखाये थे ताकि उसके बाद वो सब संभल सके......

उस लूटेरे को किसी ने बहुत बेरहमी से मार दिया tha......aur उसके बाद उसकी बेटी को भी छोड़ दिया tha......ye वो था जिससे उसकी बेटी एक वक़्त प्यार किया करती thi.....bahut ज्यादा pyaar....itna की पूछो mat.....par मिला क्या dhokha.......par यहाँ पे बहुत सी और भी चीज़ें हुई thi....iss कहानी को विस्तार से जानना होगा ......

कहानी खुनी घुड़सवारों की रानी की.......

ये कहानी इस जगह की नहीं th....yaha से बहुत दूर एक प्लेनेट हुआ करता था वो प्रमुख प्लैनेट्स में तो नहीं आया करता था पर उसका बहुत असर था इन् प्रमुख प्लैनेट्स pe......ussi प्लेनेट पे एक लड़की thi......kuch दिन पहले hi उसके पिता को मार दिया गया था जो की एक लूटेरा था......

लड़की को अब पता लगाना था की किसने उसके पिता को मारा है और उससे बदला भी लेना tha....aur उसके लिए वो अपने प्यार की मदद लेती hai........par उसको कहा पता था जिससे वो प्यार करती है वही था वो कमीना जिसने उसके पिता को मारा था.....

और वो ये भी नहीं जानती थी की वो उसको भी मार देगा........

वो बाँदा जानता था अगर ऐसे hi उसने उस लड़की को मार दिया तो पूरा समूह बिखर jaayega.....aur फिर कभी एक नहीं हो paayega.....upar से उसको मार देंगे वो alag......par अगर उसने उससे शादी कर ली और फिर उसको मार के इसको किसी दुर्घटना का नाम दे दिया तो सब उसके साथ हो जाएंगे......

उसने वही किया........1 साल का इन्तेज़र किया और उससे शादी कर li.....shadi करने के बाद जब खुनी घुड़सवारों की रानी प्रेग्नेंट हो gayi.....to उसने अपने बचे के लिए लूट पात का काम थोड़ा काम कर diya....usne अपनी कुल्हाड़ी को कही रख दिया tha.....ye सब देख के उसके पति ने उसको मार diya....aur बहुत बेरहमी से maara.....aur उसको एक खायी में फेन दिया......

पर उन् दिनों उस प्लेनेट पे ओरियन का एक जादूगर भी मौजूद tha......wo लड़की उसी के पास आके गिर्री thi......thodi hi तो जान बच्ची हुई थी उसमे.....

लड़की ने बस एक मदद मांगी usse.....ki उसको बदला लेना है......

जादूगर ने लड़की को dekha...aur उसकी मदद करने का वड्डा किया पर साथ में कुछ मांग भी liya.....usne उसका गर्भ मांग liya.....jisme उसका बच्चा पल रहा था.......

लड़की ने का कर diya....aur जादूगर ने उसके खुनी को बड़ी बेरहमी से मार diya....par वापस आके उसका गर्भ भी उससे निकल liya.....aur जाते जाते कह gaya........ye अपनी माँ को खुद धुंध hi लेंगे......

एक बहुत पुराण तरीका hai......kisi चीज़ को सद्दा दो और उसमे कीड़े ugao.....haa कीड़े ugao.....jab वो चीज़ सद्द जाएगा तो उससे कीड़े निकलने लग jaayenge.....aur वो कीड़े बड़े हो जाएंगे....

उस जादूगर ने वही तरीका अपनाया tha.....usne उस गर्भ को एक बर्तन में रखा और सड़ने के लिए छोड़ diya.....ussi से बहुत से कीड़े निकले और वो कीड़े बड़े होक बट्स बन gaye.......uss जादूगर ने खुद की साडी शक्तियां उन् बट्स में से एक को दे दी thi.....pata नहीं कौन था ये जादूगर और क्या चाहता था पर इसी से वो बट्स की रानी का जनम हुआ tha....aur फिर वो उन् सब को उस जंगल में लेके गयी थी जहा पे ज्वाला रहता था......

वो बात तो मर gayi......par उसने वो पावर्स रूपल को दे दिए the.....Rupal जो की उसकी माँ थी.....

आज रात को जब रूपल दीदी सो रही थी तो उनको अच्चानक से प्यास लगने lagi....wo अपने रूम से बहार गयी क्यूंकि रूम में पानी नहीं tha......aur वो किचन के पास gayi.....kitchen में एक खिड़की थी जहा से उनको बाहर का नज़ारा dikha......ek साया tha....wo उसी खिड़की के बहार tha......Didi को इस बारे में कुछ नहीं बताया गया tha....wo उसको देख के बहार की ओर चली gayi.....darwaja खोला और bahar.....aur तो और उस सुरक्षा कवच से भी बहार चली gayi....jab ये हुआ तो वो सारे bats......wo सब के सब दीदी को घेर liye.........Yaha ज्वाला जो अभी अपने जगह पे था उसको पता चल गया की वो मुसीबत में hai.....usne तुरंत मुझे बताया और साथ hi वो भी निकल गया वह से जाने को.......

मैं जाना नहीं चाहता था पर इस वक़्त वो मेरी दीदी थी और मुझे देखना तो होगा hi.....to मैंने आँखें बंद करि और सीधा पहुंच गया उसी जगह पे.....

सामने का नज़ारा बहुत अजीब tha.......ek ladki....uske चारो तरफ bats......wo सब के सब अपने मुँह खोल के चिल्ला रहे the.......Isse पहले मैं कुछ karta.....wo bats......wo धुल बन gaye....aur दीदी के सरीर पे जेक लग गए.....

मैं - क्या ये वही है जो मैं सोच रहा hu......yaha पे भी ये सब होता है......

ये 2 शक्तियों के मिलने का सबसे आसान तरीका tha.....ek खुद को इतना कमज़ोर बनना लेता है की दूसरा उसको अपने अंदर lele.....aur फिर वो दोनों एक हो जाते है और दोनों की पावर्स बहुत बढ़ जाती है......

मैं ये देख hi रहा था की वो वह से गायब हो गयी......

मैं यहाँ वह देखने लगा की वो कहा गयी hai........par थोड़ी hi देर में वो वही पर thi.....apne हाथों में 2 पुराने से कुल्हाड़ी लिए हुए......

ये आम कुल्हाड़ी नहीं थे.......

ध्रुव - ये खुनी घुड़सवारों की रानी hai.......aapne hi इनको ये कुल्हाड़ी भेजी थी....

मैं यही सोच रहा tha,,,,,,,,hum इम्मोर्टल्स को ये सब करने की अनुमति नहीं thi......par मैं इन् नियमों को नहीं मंटा tha......mujhe जो अच्छा लगता मैं वही karta......uss वक़्त मैंने बहुत से हतियार बहुत से लोगो को भेजे the......kuch ओरियन pe.....kuch टाइटन pe.....aur कुछ ऐसे ह्रः जहा पे मुझे नज़र रखने में मज़्ज़ज़ा आता tha.......ye उन्ही में से एक था......

वो मेरे सामने वो कुल्हाड़ी लिए कड़ी थी.....

मैं - हम्म मैंने hi दिया था isko......par उसके बाद से इस्क्के साथ सब गलत hi हुआ tha.......tumhe याद है इसके पिता के saath.......niyam सही the....hum इम्मोर्टल्स को कभी भी तुम जैसे लोगो की जिंदगी में नहीं आना चाहिए tha......Maine नियम तोड़े मैं तो गया hi तुम सब भी देखो खुद ko......tumhare पास शरीर नहीं hai.....isne अपना सब कुछ खो दिया था......

ध्रुव कुछ नहीं बोलै वो बस शांत रहा.....

मैं उन् पुराने दिंनो के बारे में सोच रहा था......

रूपल दीदी हाथों में कुल्हाड़ी लिए बस उनको देख रही थी.......

मैं - इसको अभी तक सिद्धि नहीं मिली है Dhruv.......Mainn इसकी मदद कर देता hu.....isse ये अपनी पावर्स को अचे से समझ पाएगी.....

मैंने अपना हाथ ऊपर kiya.....aur उसके सर पे रखने hi वाला था की वह पे दरवाजा खुला और अंदर से सब बहार आ gaye......inn सब में आवाज होने लग गया था और उसके वजह से सब जाग गए थे और जैसे hi उन्होंने देखा हम बहार है वो बहार आ gaye......iss वक़्त उन्होंने वो नहीं देखा था जो मैंने देखा tha......wo साया दीदी के अंदर चला गया था उसको नहीं देखा उन्होंने......

नेक्स्ट update......ek शैतान और मारा jaayega....par निक्स कबीले के वो लोग जो ाभ्ही भी स्ट्रेंज वर्ल्ड में the......wo विललाइंस बांके आने वाले है....... :सिघ: एक और बात वो स्लेयर को विलन मत समझो :साद: सब उसके पीछे पड़ेंगे

नेक्स्ट अपडेट कल शाम तक पोस्ट करता हु अगर ये बारिश रुक जाते तो :रेडफास:
 
अपडेट - 91

"रूपल प्रतीक ठीक हो ना तुम दोनों......."

"माँ वो saya......wo नहीं है यहाँ abhi.........Dono जल्दी से aao.......ander"

मैं उनकी ओर देखने लगा वही दीदी तो अभी भी खुद को देखे जा रही thi.......Chachi ने हम दोनों को खिंचा अंदर और तुरंत घर में लेके gaye.....aur दरवाजा बंद कर दिया अलग से......

चची - माँ इन् दोनों को कही कुछ.......

दादी - चिंता मत karo.......main देखती hu..........tum जाओ थोड़ा पानी लेके aao.......Satya एक पिन लेके आओ मेरे सम्मान से......

चची और चाचा को जैसा कहा दादी ने वो वैसा hi करने लग gaye......Didi अभी भी बस खुद के हाथों को देख रही thi......aur वो कुल्हाड़ी.....

दादी - रूपल बीटा इसको निच्चे रख do.....tumhare hi है ये रक् दो अभी......

चची इतने में पानी लेके आ गयी और चाचा वो pin.....laal रह की थी पिन ye......uske ऊपर में एक हरे रंग का छोटा सा मोती लगा हुआ था.......

चची ने भी देखा दीदी अभी भी वो कुल्हाड़ी लेके बैठी हुई hai......Chachi ने अपना हाथ आगे किया की वो उनको लेके उनसे दूर karde......par बिच में hi दादी ने उनको रोक दिया......

मैं - अगर मैं होता तो इसको ऐसे तो ना chutta........bahut खतरनाक हो जाता ये फिर......

मैंने ये बोलै वो सब मुझे देखने लग गए सिवाए दीदी के.....

दादी ने चची से वो पिन liya.......aur मेरी ओर आयी.....

दादी - प्रतीक अपना हाथ आगे karo.....aur इस गिलास के ऊपर रखना......

मैंने जब ये देखा मुझे हस्सी आ gayi.....Matlab ये हमारे यहाँ बच्चे खेलते थे इन् सब se......ye खून को पानी में मिलाना फिर वो मंत्र पढ़ना अगर आपको श्राप दिया गया है तो वो ब्लू हो जाएगा अगर आपके ऊपर कोई साया है तो वो कला हो jaayega.....aur भी बहुत से कलर combinations......par ये बहुत कमज़ोर था मेरे लिए भी और दीदी के लिए भी.......

मैं - ध्रुव ये कैसे जगह पे आ गए है हम.......

ध्रुव - अब आप ये मुझसे तो ना puchiye......Madhu जी ने इस जगह को चुनना tha.....Main इस बारे में कुछ बोलने के बारे में सोच भी नहीं sakta.......kahi भविष्य में उनको मेरे इस काम का पता चला तो अभी शरीर नहीं hai.....aage मैं नहीं rahunga.....mujhe इसमें मत घसीटिये आप

मैं - तुम डरते बहुत हो......

दादी - प्रतीक हाथ आगे karo......Dekhne दो दादी को कोई परेशानी तो नहीं है......

मैं (मुश्कुराते हुए) - ये लो दादी पर पिन को सीधा hi चुभना है......

दादी ने मेरी बात सुन्नी और बड़ी बड़ी आँखें करके मुझे देखने lagi......Phir उन्होंने मेरा हाथ बिना चुवे हुए hi उसपे पिन चुभाई और मेरा खून उसी गिलास में गिरा जिसमे चची पानी लेके आयी थी.....

दादी - एक और गिलास लेके aao......Rupal बीटा निच्चे रख दो इसको......

मैं - ये ऐसे नहीं rakhegi......rukiye......

मैं अपने जगह से उठा और उनके पास gaya......unke कान के पास जाके मैंने उनको बस इतना कहा.......

मैं - खुनी घुड़सवारों की रानी

वो जो अभी तक अपनी कुल्हाड़ी को देख रही thi.......unki गर्दन ऊपर की ओर uthi.....unhone मुझे dekha......phir अपनी कुल्हाड़ी dekhi.....phir अपने पेट को dekha......aur इतने में उनके हाथ से वो कुल्हाड़ी निच्चे गिर gayi.....aur वो अपने हाथ को अपने पेट पे रख के रोने लग गयी.......

ये आशु बहुत पहले के the.......ab तक बहे नहीं the......Utne में चची वह आ gayi......Unhone रूपल दीदी को ऐसे रट हुए देखा उनको समझ नहीं आया क्या हुआ hai.......wo पानी निच्चे रख के उनके पास जाने लगी तो दादी ने वापस से उनको rokka......par मैंने दादी को इशारे से रुकने को kaha.....aur चची को जाने देने को kaha......unhone चची को छोड़ दिया......

चची दीदी के पास गयी उनको गले से लगा liya.....Didi भी जैसे इस वक़्त थोड़ी सी इमोशनल सपोर्ट के लिए hi रुक्की thi.....aur ऐसे में माँ सबसे अच्छी होती hai......Unhone भी उनको गले से लगा लिया और रोने lagi......Chacha को भी समझ नहीं आ रहा था आखिर हुआ क्या hai.....wo मुझे देख रहे थे दादा जी और दादी की तरह क्यों की मैंने hi उनको कुछ कहा जो वो वैसे रोने लग गयी......

चाचा - निधि रूपल को लेके अंदर jaao......Mujhe इससे बात करनी है कुछ यहाँ.......

चची ने एक बार चाचा की ओर देखा और फिर mere......unko समझ नहीं आया अब ये क्या शुरू हो गया hai......Chachi मुझे देख रही थी मैंने भी इशारे से उनको जाने को kaha.....aur वो रूपल दीदी को शहर देते हुए उनको रूम में लेके गयी.....

चाचा - तुमने क्या किया उसके साथ वो अच्चानक से रोने क्यों लगी.....

मैं - जो पीछे का कुछ बाकी रह गया था उसको बहार निकलना जरुरी tha.....bas वही किया hai....aap चिंता मत करो वो एकदम ठीक है....

दादी - सत्य थोड़ा रूक्को पहले मैं ये देख लू ये ठीक है naa......iski बातें मुझे अजीब लग रही है....

उन्होंने वो गिलास लिया और वो मंत्र पढ़ने lagi......Main जाके सोफे पे बैठ gaya.....mujhe पता था कुछ नहीं निकलने वाला.....

और कुछ नहीं हुआ......

दादी फिर मेरे पास आयी.....

दादी - तुमको कैसे पता इन् सब के बारे में.......

मैं - Kitabein.....main अभी जो किताब पढ़ रहा हु उसमे इसी के बारे में बताया है......

चाचा - तुमने रूपल को क्या बोलै वो रोने क्यों लग गयी......

मैं - चाचू वो दरअसल जब में बहार आया था ना तभी कोई साया था जो उनको घेरे हुए tha.....sayad उसी से दर के शॉक में चली गयी होगी और अब......

मेरी बात सुनके दादी तुरंत कड़ी हुई और गिलास और पिन लेके रूम में जाने लगी....

मैं - उनको कुछ नहीं हुआ है दादी मैं जानता हु आप चिंता मत karo.....thodi देर में वो ठीक हो jaayegi......Chalo मैं चलता हु यहाँ से......

मैंने पोर्टल खोला वो भी घर के अंदर और वह से सीधा अपने रूम में......

सभी ने जब ये देखा उनका मुँह खुला का खुला रह गया tha.......Dadi ने और चची ने बहुत शक्तिशाली कवच बनाया था ये मुमकिन hi नहीं था की कोई पोर्टल घर के अंदर से बनने या खुल्ले....

वो कुछ करते इस बारे में उससे पहले अंदर से चची ने आवाज दी.......

चची - अरे देखो ना ये क्या बोल रही hai.....aur चुप hi नहीं हो रही ये.......

सब अंदर गए तो चची ने सबसे पहले दादा और चाचा को बहार जाने को kaha.....aur दरवाजा बंद कर दिया......

दादी - क्या hua.....kya बोल रही है.....

चची - माँ मुझे कुछ सही नहीं लग रहा है ये बोल रही है.......

दादी - हां क्या बोल रही हाईल.....

चची - बोल रही है इसका बच्चा मार गया......

दादी - क्या.....

चची - माँ कही उस साये की वजह से to......ye ठीक हो जायेगी ना.....

दादी - इसको पहले तो बीएड पे लेताओ......

चची ने वैसा hi kiya......Dadi तब तक वह निच्चे एक पेपर पे अपने खून से कुछ बना रही thi......uss पिन की मदद से......

मैं अपने रूम में आ तो गया था पर पता था वह पे सब सही नहीं hoga......Didi को बहुत वक़्त चाहिए इन् सब से निकलने में और ऐसे में सब उनको गलत hi samjhenge.....unko कुछ तो चाहिए की वो ध्यान भटका सक्के apna.....Maine वापस से एक छोटा सा पोर्टल khola....aur वो भी उस रूम में जहा पे अभी उनको रखा गया tha......Dadi के कहने पे चची दीदी के कपडे निकल रही थी.....

मैं - ये पता नहीं क्या क्या कर रहे है इसके साथ.......

मैंने अपना हाथ आगे kiya......ek कोने में एक पेंटिंग लगी हुई थी उसको पहले गिरा diya.....jiske बाद उन् दोनों का hi ध्यान उस ओर चला gaya.....a.ur फिर पोर्टल को सीधा दीदी के सर के पास khola.....apna हाथ उनके सर पर rakha.....aur मुझे जो करना था मैंने कर diya.....ek गहरी नींद जिसमे उनको वो सब याद आने वाला tha....jo भी उनके साथ हुआ tha.....uske बाद फिर इस लाइफ में भी अब तक जो हुआ था वो bhi....aur आज जो हुआ wo....aur उसके बाद धीरे धीरे वो पीछे की याद धुंधली हो जाती बस लुक बातें याद रहने वाली थी जैसे में वो बट्स से उनका कुछ तो रिलेशन है वो और वो कुल्हाड़ी को कण्ट्रोल करना......

ये सब ज्यादा वक़्त नहीं लगा मुझे करते hue.....yaha उनकी आखें बंद हुई मैंने पोर्टल बंद कर दिया और आराम से बैठ गया अपने रूम mein.....par ये आराम कहा रहने वाला था.....

मेरी मधु पास में hai....aur मैं बैठा हुआ था यहाँ...

देखने तो जा hi सकता था ना उसको......

मैंने अपनी आखें बंद करि और उसको ढूंढने laga.....par वो मिलती उससे पहले कुछ और मिल गया mujhe.......ek taikhana.......aur वह पे कुछ तो था जो अजीब था.......

मैं - ध्रुव ये तैखना कहा है इस स्कूल में......

ध्रुव - तालाब के पास था sayad.....acche से याद नहीं mujhe......haa पर वह पे जाने से मन्ना करते थे sabko......aap क्यों पूछ रहे हो......

मैं - उस जगह पे कुछ है Dhruv......Mujhe उस जगह जाना होगा.......

मैंने उस जगह का पता लगाया और वह के लिए पोर्टल खोला और वह पहुंच gaya.......wo कोई आम जगह नहीं tha......dreams के थ्रू बातें करि जा सकती थी उस जगह se.......par ये चीज़ यहाँ होनी hi नहीं चाहिए थी......

मैंने उसको chuwa......aur तभी मुझे सब पता चला उसके बारे mein.......iske थ्रू कुछ लोगो को ट्रेनिंग दी जा रही thi.......jab अच्छे से देखा तो उन् लोगो में मेरे इस वक़्त के माँ पापा भी थे......

इम्मोर्टल्स की दुनिया में ऐसा नहीं tha.....waha हमारे माता पिता नहीं होते the.....humko बनाया जाता tha.......yaa हम बन जाते the......sirf एक hi थी उस waqt.......jiske माँ पापा थे......

Madhu....Madhu hi बस ऐसी इम्मोर्टल थी जो पैदा हुई thi.......aur गोल्डन पावर उसके पास है इसकी वजह इसी को मन्ना जाता था......

मैंने वह पे जो जो चीज़ थी सभी को अच्छे से dekha......waha पे जमीं से करीब 200 फ़ीट निच्चे चुप्पय हुआ था वो चीज़ जो इन् सब के पीछे tha......upar में बस एक यन्त्र लगा था जो उस चीज़ज़ के इफ़ेक्ट को बनाये रखती थी.......

मैं पहले तो अपने असल के साइज मतलब इम्मोर्टल्स के साइज में आया और अपना हाथ सीधा जम्मीं के अंदर दे marra......aur बस निचे जाता raha......par मेरा हाथ वह तक थोड़ी ना पहुंच सकता था......

मैं भी कितना बुद्धू हो गया था इस इंसानी सरीर में aake......wo चीज़ खुद मेरे पास आ सकती थी और मैं उसके लिए म्हणत कर रहा था.......

मुझे उस चीज़ के बारे में पता tha.....aur ये भी वो कहा पर hai......maine इन् सब को अपने दिम्माग में रखा और आँखें बंद करके उसको अपने पास आने का वेट करने लगा.....

ये अब भी काम करती hai.......bas हमको सब पता होना चाहिए की वो कहा है और कैसा है.....

मेरे हाथ में एक पाथेर था हरे रंग ka.........uske ऊपर कुछ आकृतियां बननी हुई थी......

मैंने उसको अच्छे से dekha......uske ऊपर डार्क वर्ल्ड लिखा हुआ tha.........aur ये भासा ओरियन की thi.....jadugaron की भासा......

मैं - ध्रुव इसका सोर्स डार्क वर्ल्ड में hai......uss जगह के बारे में भी जानते हो क्या कुछ.......

ध्रुव - वो जगह यहाँ से थोड़ी hi दुरी पे hai......aap वह जा सकते है.....

मैंने पाथेर को अपने जेब में रखा और कुछ सोचते हुए वह ना जाने का मैं बना liya.....aur अपने रूम में वापस चला गया......

नेक्स्ट मॉर्निंग

मैं आराम से utha.......karib 5 बजे हुए थे......

ध्रुव - आपको ध्यान लगाना बंद नहीं करना chahiye....aapka सरीर कमज़ोर......

मैं - तुम तो मुझे मत hi batao....shareer भी नहीं है tumhara......waise शरीर से याद aaya......Maine तुमसे वड्डा किया है ना सायद एक शरीर दूंगा तुमको.....

ध्रुव - हां पर इसकी कोई जरुरत नहीं hai......aap....

मैं - मैं तुम्हारा मास्टर hu......maine वडा किया है तो दूंगा bhi......abhi चलो कुछ लोगो से मिल आते hai......Tumko पता है ये मधु कहा पे hogi.....subah उसको देख के शुरू करूँगा तो दिन अच्छा जाएगा......

ध्रुव - वो कहा है ये मुझे नहीं पता है.....

मैं - किसी काम के नहीं हो तुम......

मैंने अपनी आखें बंद kari.....aur आस पास के ेनेर्गीएस को ऑब्सेर्वे करने laga......the कुछ जो बहुत ब्राइट the,,,,,,par अधिकतर बक्कर से hi the.....yahi कोई अच्छा जादू गर बन जाए तो बहुत hai.......phir मुझे मेरी वाली की एनर्जी dikhi.....aur साथ में एक झटका भी लगा.......

गोल्डन पावर साला मेरा दुसमन बनना बैठा हुआ tha.....agar ये मधु में नहीं होती तो आज कोई परेशानी hi नहीं थी......

पर ये भी सच है ये नहीं होती तो मैं पता नहीं कहा होता......

खैर ये पीछे जाना सही नहीं hai......Main अपने रूम से निकला और उस जगह चला गया जहा से मैं उसको देख सकता था.....

पेड़ के पीछे चुप्प के मैं उसको दीख रहा था ये भी पता नहीं था चुप्पा किस लिए हु main......aur मैं बस देखता hi रहा usko......wo तो सायद थोड़ी देर बाद वह पे wo....Nikita आ गयी और मुझे पीछे से छुआ तब मेरा ध्यान उसपे से हत्ता......

निकिता - तुम आज आये नाह waha.......dhyaan लगाने को......

मैं - Wo.....arre जाव ना मैं आ जाऊँगा थोड़ी देर में.....

अब पता नहीं कैसे पर सायद उसके ध्यान से उठने का वक़्त हो गया था तो उसने मुझे देख liya.......par अभी सायद ध्यान से उठी थी इस वजह से कोई गुस्सा नहीं दिखा उसके चेहरे pe......wo बस uthi......aur वह पे बैठे पंकज ko.....jo सायद सो गया tha......usko jagaya......aur उसका haath......haath पकड़ के लेके गयी wo..........iske हाथ काट दूंगा मैं.......

इतना गुस्सा उस वक़्त आया था जब वो सब हुआ tha.........aur आज भी कुछ कुछ वैसा hi hai.....koi वापस से हमारे बिच में आ रहा tha........uss वक़्त मैंने इसको सीरियस नहीं लिया tha.....iss बार nahi......iss पंकज ko.....isko समझाना होगा......

निकिता मुझे देख रही थी......

निकिता - तुम ठीक हो naa.....ye चेहरा ऐसा क्यों हुआ जा रहा है तुम्हारा.......

मैं - मैं ठीक hu........par ये नहीं bacchega......isko,,,,,chodunga नहीं मैं......

(निकिता के रेस्पेक्ट में)

ये प्रतीक पता नहीं कहा चला gaya.....aur मुझे इसको ढूंढने को भेज दिया :सिघ:

यहाँ वह देखने पे ये मुझे एक पेड़ के पास मिला जहा से ये वो मधु को देख रहा tha.......mujhe पुजारी जी की बात याद आ गयी.....

मतलब इन् दोनों का सच में कुछ तो है......

मैंने सोचा इसको थोड़ा परेशां karu.....par फिर वही पुजारी जी की बात इनके बिछ नहीं जाना hai.....aur सुबह तो ख़राब करनी नहीं थी मुझे......

मैं इसके पीछे gayi.....aur उसको बोलै आये क्यों नहीं.....

पर इतने में मधु उठ गयी वह pe.....waha पे वैसे वो पंकज भी tha......main भी सोच रही थी अब यही पे आके ध्यान लगाया karu.....accha होगा ye......aur सायद उसके बाद ये नमूना प्रतीक को भी मौका मिल jaaye......Matlab मैं तो मदद कर दूंगी इनकी.....

पर ye......ye एक नंबर का गड्ढा है.....

ये पंकज के बारे में पता नहीं क्या सोचने लग गया hai......usko मारने की बात कर रहा है......

हां मन्ना मैंने भी सोचा tha......par पंकज वैसा थोड़ी hai.......wo तो अच्छा hai......mujhe इसको रोकना hi होगा.....

मैं - प्रतीक वो बस दोस्त है......

प्रतीक - पहले वो भी दोस्त hi tha......aur फिर......

मैं - किसकी बात कर रहे हो तुम......

प्रतीक - किसी की nahi.....iss बार ऐसा नहीं होने दूंगा मैं.......

मैं - अरे पूछ तो लो मधु se......wo दोस्त है क्या है.......

अपनी बात मनवाने के लिए एक और कार्ड खेल दिया मैंने.......

मैं - उस वक़्त भी पूछा था क्या तुमने.......

प्रतीक मेरे इस बात पे पहले तो बहुत गुस्सा हो गया पर फिर सोचने laga.......Mujhe समझ आ गया मैं एक दम सही लाइन पे हु........

मैं - अगर उस वक़्त तुमने पूछा होता तो sayad.....wo सब नहीं हुआ होता.....

प्रतीक - हम्म तुम सही कह रही ho......aeee तुम ये सब कैसे जानती ho.......mere साथ ब्लफ कर रही हो तुम......

मैं - अरे नहीं मैं तो बस उस मासूम को तुमसे बच्चा रही hu.....tum उसको कुछ कर डोज और बात बिगड़ गयी तो.......

प्रतीक थोड़ी देर सायद कुछ सोचने laga.......aur उसके बाद उसने जो kaha......Main खुश हो गयी........

प्रतीक - तुम एक काम karo....pahle तो उस लड़के से पूछो की उसके मैं में क्या है मधु को leke.......aur मुझे batao......uske बाद अगर कुछ गलत लगा मुझे तब मैं मधु से बात करूँगा......

मुझे लगा था ये मधु से बात कर लेगा और पंकज को कुछ नहीं hoga....par यहाँ तो बोनस था......

मैं - हां मैं ये जरूर karungi......aaj खाने के बाद इस्पे काम शुरू करुँगी.....

इसको यही तक रखते hai......next अपडेट में पंकज और लीडर पे हमला hoga......aur उसमे मधु उनको बचने आएगी......
 
अपडेट - 92

अभी अभी रूपल दीदी को घर में सब चेक कर रहे the........matlab K.Bua को बुला लिया था इस वक़्त में hi पर उनको भी बताया नहीं गया था की बात क्या hai........bahar किसी को नहीं पता था जो भी कल रात में दीदी बड़बड़ा रही thi......aur बता के फायदा भी क्या tha.......sab कुछ तो नार्मल hi था जब दादी ने चेक किया tha.......wo तो अब एक एक्सपर्ट एडवाइस के लिए K.Bua को सुबह यहाँ बुला लिया गया था......

क. बुआ ने उनको अच्छे से चेक kiya......ek दम अच्छे से कोई दिक्कत नहीं thi.....balki उनके ेनेरगु लेवल्स और स्टॅब्लिज़ेड the.....matlab वो एकदम से शांत थी.....

K.Bua - क्या बात है Rupal......aaj कल ध्यान ज्यादा लगा रही हो kya......tumne अपने एनर्जी लेवल्स को बहुत अच्छे से मैनेज कर रखा hai.....agar मैं गलत नहीं हु तो सायद तुम और भी कोई एलिमेंट हासिल कर सकीय हो अभी....

दादी - इसके पास पहले से hi 2 एलिमेंट्स hai.......aur ये उनको सही से संभल नहीं paati.....aur तुम हो की एक और बोल रही हो.........3 एलिमेंट वालो को बहुत ज्यादा ध्यान से रहना होता है......

K.bua - अरे मैं सच कह रही hu......baaki इस्पे है ये कंट्रोल्स सही करती है या नया एलिमेंट......

रूपल दीदी - मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा एक तो मुझे ये चेक क्यों hi किया जा रहा है मैं कोई बीमार hu.......Mummy ये सब क्या है......

चची - क्या क्या hai.......ye बस एक रेगुलर चेक उप है और कुछ nahi......(thoda सीरियस होक) कविता इसका दिम्माग भी चेक कर लेना एक बार वह भी गड़बड़ हो सकती है.......

रूपल दीदी - मममममममय......

K.Bua - भाभी वह तो बहुत पहले से दिक्कत hai.....maine आपसे पहले भी कहा हुआ है.......

रूपल दीदी - आपको पता है मैं आपके साथ क्या करने व.......

K.bua - एक minute.....ye क्या है.....

चची - क्या hai......kuch है क्या......

चची को लगा जैसे कुछ मिला है K.Bua ko........usse उनको पता चल जाता की रात में ये ऐसी बातें कर क्यों रही thi.......matlab चची यहाँ पे सीरियस हो गयी थी.......

रूपल दीदी - क्या hai......main एकदम से ठीक हु......

K.Bua - भाभी कुछ तो गलत है.......

दादी - क्या गलत है......

K.Bua - इसका dimmag.......haa बस इसका दिम्माग थोड़ा सा ख़राब है बाकी ये पूरी फिट hai......aur ये अच्छा है आपने इसका रेगुलर चेक उप करने के बारे में सोचा मैं तो कहती हु सभी को ये करना chahiye......isse सभी ठीक रहेंगे......

चची और दादी जाहा अभी थोड़े घबरा गए थे जब उनको समझ आया ये बस मज़ाक था तो वो दोनों शांत तो hue.....par फिर भी उनके मैं में वो सवाल तो था hi......aakhir रात को हुआ क्या था......

दादी - कविता तुम मेरे साथ आओ निधि तुम भी chalo......Rupal जाके खाना खाओ.....

रूपल दीदी को वही छोड़ के वो दोनों K.Bua को लेके गए अपने साथ.......

दादी - कविता सब सच में ठीक है ना उसके साथ......

K.Bua - हां सब ठीक है मैंने अच्छे से चेक किया hai.......par आप dono.....kuch हुआ है क्या.....

चची - किसी को बताना मत ye......wo दरअसल कल रात को अजीब अजीब बातें करने लगी थी ye.......aur रो रही thi.....phir सो गयी और अब सब ठीक है.....

K.Bua - ऐसा पहले भी हुआ है kya.....matlab इससे पहले.....

चची - nahi.....kabhi नहीं......

K.Bua - भाभी कभी कभी होता है aisa......accha वो जाएगी थी kya.....inn सब से pahle.....matlab कब हुआ था ये सब.....

चची ने सब बताया की कैसे रात को वो उठी थी और उसके बाद ये सब हुआ......

K.Bua - समझ gayi.....ye दरअसल नींद में इसको कुछ सपना आया hoga.....aur वो उस सपने में भटक गयी hogi.......aisa नार्मल तो नहीं hai.....par इससे कोई दिक्कत नहीं है अगर एक बार हुआ hai.......agar बार बार होने लग जाए तब दिक्कत हो सकती hai.....to आप चिंता मत करो......

दादी और चची से थोड़ी देर और बात करि उन्होंने और वह से फिर खाना खाने के बाद वो स्कूल के लिए निकल gayi......Par रूपल दीदी भी उनके साथ आ गयी.........

वैसे भी आज सभी को तो वापस आना hi था......

मैं अभी निकिता पे नज़र रखे हुए tha......mujhe बस देखना था वो पंकज क्या बोलता hai.......Main सुन्ना चाहता था ye.....aur इसी वजह से आज निकिता पर hi नज़र थी की वो जायेगी पूछेगी और मैं शांत हो paaunga......ek फैसला ले पाऊंगा.....

पर ये जा hi नहीं रही थी उसके pass......pahle तो क्लास का बोल के निकल li.......uske बाद जब वापस से वो मिला तो वह से बस उसको देख के स्माइल किया और वह पे बस कड़ी rahi.......Pata नहीं क्या था इसका.......

मैं - ये क्या hai......maine कहा तुमसे उससे पूछ के आओ उसकी फीलिंग्स मधु के बारे में और तुम हो की......

निकिता ने मुझे dekha......aur मुँह फूलती हुई चली गयी वह se......pata नहीं ये लड़कियों का क्या होता है......

मैंने सोचा अब मैं खुद जाके पूछूंगा उससे वो भी अपने तरीके se......par जाऊं kaise.....aur kab......ye मधु उसके साथ hi होती hai......ek सेकंड के लिए उससे दूर नहीं हुई है अभी tak......kaha से जाऊं उसके pass......puchne उससे.....

मेरा तो बस खून जल्ला जा रहा था ये सब देख के........

अभी अगली क्लास होने hi वाली थी की वह पे एक आवाज जानी पहचानी आवाज सुनाई di........khooni घुड़सवारों की rani.......arre......Rupal didi.....haa वही आयी हुई थी.......

मैंने पीछे मदद के देखा तो वह पे रूपल दीदी से निकिता बातें कर रही थी मेरी ओर इशारा कर कर ke.......pata नहीं क्या कहा की वो बाद मेरी तरह आने लग गयी गुस्से में.......

दूर से hi......meri तरफ ऊँगली करके......

रूपल दीदी - टुन्ने इसको परेशां kiya......dimmag नहीं है क्या तेरे pass.......inn सब मामलों में जल्दी नहीं करते ये पता नहीं है क्या......

ध्रुव - आपको शांत रहना hoga.......gussa नहीं करना है ये सब अपने है......

मैं - तुम मुझे ज्ञान मत do......samajhne दो आखिर ये बात क्या hai......aur गुस्सा नहीं होता हु मैं तुम भी जानते हो.....

Dhruv(mann में) - ये सब जो हुआ है वो गुस्से की वजह से तो हुआ है

मैं - आप यहाँ क्या कर रही ho.....aur किस बारे में बात कर रही हो......

वो कुछ बोलती उससे पहले निकिता आयी और उनके कान में कुछ kaha.........aur उसके बाद दीदी को पता नहीं क्या हुआ........

वो एक दम se...khush हो gayi......phir वापस से नार्मल हुई उसके बाद थोड़ा सीरियस हो gayi.......itne से वक़्त में एक्सप्रेशंस बदल बदल के वो मुझे देख रही थी.........

फिर सीरियस होक.....

रूपल - ये मधु कौन है.......

मैं - Madhu.......Madhu तो mer............(thoda ृक्क के) मैं उससे दोस्ती करना चाहता हु.......

रूपल - सिर्फ दोस्ती......

अब ऐसे चिढ़ाता कौन hai.......bahut अजीब सा लग रहा था जब वो वैसे पूछ रही थी........

मैं वह से जाने लग गया.......

रूपल - ुये छोटू ृक्क to......bhag कहा रहा है......

मैं - मैं कही भाग नहीं रहा hu.......mujhe जाना है एक जगह बस........

रूपल - कहा मधु के पास जा रहे हो......

यार अब मुझे गुस्सा आ गया पता नहीं है इसको पर फिर भी मेरी तो दुखती राग है ना wo......main छह के भी उसके पास नहीं जा सकता......

मैं - मैं नहीं जा रहा उसके pass.......aur आपको क्या है isse.....aap जाओ और मुझे भी जाने दो......

रूपल दीदी मुझे hi देखती रह गयी.......

वह निकिता को लगा सायद पुजारी जी ने जो बदलाव कहे थे ये उन्ही में से एक है इतना जल्दी गुस्सा हो jaana........Wo रूपल दीदी के पास चली गयी......

रूपल दीदी - ये देखा isko.....kaise बात करता है.......

निकिता - आप उसको वैसे चिढ़ाओगी तो क्या hi करेगा वो.......

रूपल दीदी - hmm.......chal ठीक है तुझे चिढ़ाती hu........ye बता उसके साथ पहले के चैप्टर्स क्लियर हुए या नहीं.......

निकिता - कह तो दिया है पर गंगा हो गया है वो कुछ बोलता hi नहीं hai......bolti है बस वो Madhu.......kuch कहने जाओ वो बिच में आ जाती है.....

रूपल - आई मधु के बारे में ऐसे नहीं बोलते (जोर से) छोटू को बुरा लगेगा.......

मैं थोड़ी hi दूर आया था इसी वजह से ये बात मुझे सुनाई दे दी.......

मैं पीछे मुद्दा वो दोनों है रही थी........

मैं फिर से आगे मदद के चलने लगा.......

ध्रुव - आपको अपना गुस्सा निकलना chahiye,,,,,,wo कीड़ें जिनके बारे में आप बात कर रहे थे वो सही होंगे इसके लिए........

मैं - हम्म ये भी ठीक hai......par पहले हममे कोई अच्छी सी शांत जगह ढूंढनी है......

मैंने एक शांत जगह dhundha.......aur वह जाने के बाद कुछ सोच कर ke......Old आउल को बुलाया.......

ओल्ड आउल मेरे पास आया.......

मैं - तुम्हारी शक्तियां कैसी है......

ओल्ड आउल - क्या बात कर रहे ho......tumhe नहीं पता क्या......

मैं - मुझे तो पता है पर तुम्हे कितना पता है ये जानने के लिए पूछा तुमसे.......

ओल्ड आउल ने अपने शक्तियों के बारे में बताया कैसे वो बिन्ना नज़र आये हुए किसी का पीछा कर सकता hai......wo किसी के बारे में पता कर सकता है और तरह तरह की खूबियां अपनी गिनवाने लग गया वो......

मैं सब सुन्न रहा था पर इसकी शक्तियां बहुत कमज़ोर थी मेरा खबरि बनने के liye.......Maine आज तक खबरि रखा नहीं था वैसे तो मेरी कोई एक्सपेक्टेशंस नहीं थी की मेरे खबरि में ये हो वो ho.......lekin ये तो बहुत hi दयनीय स्थिति में था.......

मैं - तुम्हे कुछ पावर्स दी जा रही hai......unka उसे अच्छे के लिए करना.......

ध्रुव - आप क्या कर रहे ho......isse आप फर्श सकते हो......

मैं - मुझे पता है मैं क्या कर रहा hu......aur जिसको बुल्ला रहा hu......usse ज्यादा भरोषा किसी पे नहीं hai.....yaha तक की मधु पे भी नहीं tha........mujhe करना चाहिए था ना ye......sayad ये वजह भी है हमारे अलग होने ki.......RIIIIIAAAN क्या तुम यहाँ आ सकते हो........

मैंने ऐसा कहा और थोड़ा वेट kiya......kuch भी नहीं hua......Main ऊपर देख रहा था कब वो aaye......par वो आ hi नहीं रहा tha.......aur ओल्ड आउल वो भी ऊपर देख रहा tha......pata नहीं क्या देख रहा tha.......kabhi मुझे देखता कभी ऊपर देखता......

जब उससे रहा नहीं गया तब.......

ओल्ड आउल - ये ऊपर क्या देख रहे हो......

मैं - ये कभी नहीं सुधरेगा........

मैंने ये बोलै hi था की मेरे पीछे एक बड़ा सा पोर्टल खुल gaya.......aur उसके अंदर से एक बड़ा सा जीव बहार आया.......

मैं बिन्ना उसके तरफ देखते......

मैं - इस जगह पे हमारे इतने साइज वाले को देखना बहुत बड़ी बात hai......mere साइज में आ जाओ रिआन......

वो मेरे साइज में आ गया.......

रिआन भी एक इम्मोर्टल hi hai.......mere hi इतना बड़ा होगा वो bhi.......Main जैसे लोगो को हथियार दे दिया करता tha......iski खूबियां ये थी की ये अजीब अजीब तरह के जीव बनाया करता tha.....aur उनमे अलग अलग शक्तियां दे दिया करता tha......phir उनको छोड़ देता बड़ा होने के liye......par वो स्पिरिट एनिमल्स नहीं होते the......Spirit एनिमल्स इसकी मुँह बोली बहन वैसे तो वह पे भाई बहन ये सब होता नहीं hai.....par लोग है बना लेते है riste.....to इसने भी बना लिए the....haa तो स्पिरिट एनिमल्स इसकी मुँह बोली बहन बनाया करती thi.....usse मेरी ज्यादा बनती नहीं thi....par इससे बहुत बनती थी meri.......Ye जीवों को बना देता और साथ में उनका एक शारदार भी बनता tha......ab आगे ये उस सरदार पे होता था वो कैसे उन् जीवों के समूह को आगे लेके jaaye......Jwala का जो कबीला था उन्होंने चुन लिया था की वो किसी को अपना मालिक बना lenge......wo मैं बन gaya.......Old आउल का कबीला ऐसा नहीं tha......wo ज्वाला के कबीले के लोगो का कहा मानता tha......wahi पोलर बेअर्स का kabila.....wo तो और अलग था वो सब अलग रहा करते the.....kisi से मतलब नहीं था unko......agar आप लड़ोगे वो भी ladenge.....aise और भी जीव the......Slayer के हाथ पे जो नीसाण थे वो सब जीव भी.....

रिआन - प्रतीक तो तुम्हे एक शरीर mil.......ye जीव यहाँ क्या कर रहा hai......isko तो.....

मैं - हां मुझे सरीर मिल गया hai.......aur ये तुमने hi बनाया है isko......Mujhe इसकी कुछ खूबियां बहार निकलवानी hai......socha जिसने इनको बनाया है अगर वो मदद करे तो इससे अच्छा क्या hi होगा.......

रिआन - तुमने नहीं लगता मैं इस बारे में सबको बता दूंगा की तुम्हे एक बॉडी मिल चुक्की है......

मैं - मैं नहीं समझता इससे कोई परेशानी होनी chahiye......aakhir मुझे निकला गया था उस जगह से अब चाहे मेरे साथ कुछ भी हो इसमें उन् सब का क्या......

रिआन - तो kya......Madhu को भी शरीर मिला है......

मैं - हां......

रिआन - तो क्या ab......ab तुम.....

मैं - Nahi.....abhi nahi......Main उसके पास अब भी नहीं जा पा रहा हु......

रिआन - ठीक है तो बताओ कौन सी खूबियां चाहिए तुम्हे इसमें.......

मैं - मैं इसको किसी के बारे में पता लगाने के लिए उसे करना चाहता hu......wo और वो जो कोई भी ho.....chahe ज कोई भी इसका पता ना लगा पाए bas.......chaahe ये उसके ऊपर hi क्यों ना बैठा हो......

रिआन - मैं इसको छोटा बना सकता hu.....matlab छोटा और बड़ा होने की shakti......par सिर्फ उससे काम नहीं chalega......tum चिंता मत करो मैं इसको सही कर दूंगा......

मैं - ठीक hai......to ओल्ड आउल तुम अभी इसके साथ जा रहे ho.......Rian.....mujhe ये जल्द hi यहाँ चाहिए......

रिआन - चिंता मत करो दोस्त मैं ये कर dunga.......wapas से जरुरत पड़े तो बता देना......

उसने ओल्ड आउल को कुछ किया और वो वही पे बेहोश हो गया और रिआन उसको उठा के लेके चला गया......

मैं - ध्रुव तेरा काम तो हो गया अब बाकी है उस कीड़े से मिलना.......

ध्रुव - मेरा काम :शॉकिंग: मैंने क्या कहा था करने को....

मैंने इसको जवाब देना जरुरी नहीं samjha.....aur एक पोर्टल khola.....aur उस जगह चला गया जहा पे मैंने उन् कीड़ों की आवाज सुन्नी थी.......

मैं इस जगह पे आया और यहाँ वह देखने laga....dhyaan से सुनने लगा उन् कीड़ों की aawaj.....ye बहुत अजीब आवाज करते है जैसे मेंढकों का एक बहुत बड़ा सा झुण्ड......

वैसे ये दीखते भी वैसे hi है बस इनके पंख होते है अलग se.....aur तेज़ाब की थूक हां बस यही है और कुछ नहीं......

मैं उनकी आवाज सुन्न के उस जगह पे चला gaya........waha पे जब पंहुचा तो गंध भी आणि शुरू हो गयी thi......thoda और अंदर जाने पे गल्ले हुए हड्डियों के टुकड़े मिलने lage......tezab से सायद गल्ल गए हिन्ज ये......

ध्रुव - आपको नहीं लगता आपको ऐसे hi यह नहीं आना चाहिए.....

मैं - अब तुम बताओगे mujhe.......arre......ye तो वही कीड़ें है naa......jinhone.....

ध्रुव - आप भी कब की बात लेके आ gaye.....dhyaan से चलिए ये शरीर इम्मोर्टल्स का नहीं है......

मैंने भी उसकी बात पे गौर kiya.....Immortals का शरीर होता तो वो कीड़ें मुझे कुछ भी नहीं कर paate.......kaat भी लेते तो कुछ भी नहीं होता......

पर जब मैं इस सर्रेर में hu......tab तो दिक्कत की बात thi......agar इस वक़्त उसने गलती से भी काटा तो मेरा तो काम वही पे ख़तम हो जाएगा.......

पता नहीं ये कीड़ा यहाँ आया कैसे है.......

मैं उसकी आवाज सुन्न रहा था और आगे भी जा रहा था पर साथ में आस पास का भी ध्यान रख रहा था.......

थोड़ा आगे पंहुचा तो मुझे कुछ अंडे दिखाई diye.......meri किस्मत ख़राब thi.....yaa पता नहीं इस जगह ki......naa जाने कैसे ये जीव यहाँ पे इतने समय तक टिक्क gaya.......matlab ye.......ye जीव बहुत वक़्त लगते है प्रजनन में और अगर इन् जीवों ने यहाँ अंडे दिए hai......to ये काफी वक़्त से थे यहाँ पे......

मैंने अपनी तलवार बहार nikali......Albus और कूपर दोनों उसी में थे......

मैंने तलवार पे जो मोती लगा हुआ था उसको चुवा और मेरे कपडे बदल gaye......ye उन्ही दोनों का दिया हुआ था.......

मैं अपने नए कपड़ों में आ gaya......inn कपड़ों से मैं उन् कीड़ों के तेज़ाब से तो बच hi jaaunga......haa.....usse तो बच hi जाऊँगा.....

तलवार हाथ में लिए थोड़ा आगे बढ़ा main......ye अंडे अभी फूटतें नहीं the......chalo ये सही hua.....haa फुट गए होते तो ये जगह बचने वाली नहीं थी......

मैं - अलबूस कूपर बहार आओ........

वो दोनों मेरे एक बार कहने से hi तलवार से बहार आ गए.......

मैं - इन् अण्डों के अंदर जाके इनके अंदर जो भी है उसको तबाह करना है......

ध्रुव - इनमे तेज़ाब है आप ये क्या कर रहे है......

मैं - ये ड्रैगन्स है Dhruv.......inko कुछ नहीं hoga......balki ये और ताकतवर honge......Albus कूपर एक और kaam.......unn अण्डों के अंदर अगर वो जीव थोड़े भी बड़े हो गए हो तो उनको बस एक जगह पे इकठा कर lo......main उन् सब की पावर्स इस तलवार में daalunga.......phir कोई भी तेज़ाब इसको पिघला नहीं paayegi......chahe कोई भी हो......

उन् दोनों ने मेरी बात को सुन्ना और लग गए काम pe.......Maine ये नहीं बताया कैसे क्या करना hai.......inn दोनों ने सारे अण्डों को पकाना शुरू कर दिया अपने आग के लपटों se.......ye बहुत अजीब था पर अच्छा भी tha......wo जीव जो इनके अंदर होंगे वो मर जाएंगे पर उनका शरीर बचा हुआ रह jaayega......Ab जब यही काम इनको करना था मैंने ज्वाला को भी बुलाना chaha.......aur वो आ गया वह pe.....aur लग गया काम पे......

मैं उन् सब को वह छोड़ आस पास देखने लगा की वो कीड़ें कहा है जिनका ये घोसला था......

एक पेड़ के पास पंहुचा hi था की मर्रे ऊपर तेज़ाब की लार giri......maine ऊपर dekha......ek कीड़ा वही पे बैठा हुआ tha.....par सो रहा tha......sayad अभी खाना खाया था उसने.......

मैं धीरे से उस पेड़ से थोड़ा पीछे gaya......taaki कुद्द के उस जीव पे हमला कर sakku.......par.....

पर जब मैं पीछे gaya.....aur उसके बाद जो मुझे दिखा..... :रेडफास:

किस्मत ऐसी hi होनी chahiye......mere दुश्मनो की.......

मैं एक ऐसे जगह पे था जहा आस पास चन्दन के पेड़ the......aur उन्ही के ऊपर वो कीड़ें बैठे हुए the.......bahut saare........kuch सो रहे थे कुछ आस पास अपनी आंतें जैसीं आखों से देख रहे the.....waide इनकी आखें किसी काम की होती नहीं hai.....ye अपने कान और नाक से पता लगते है आस पास की चीज़ज़ों ka.....par दिक्कत ये होती hai......agar इन्होने अभी अभी कुछ खाया हो तो इनका कान और नाक दोनों hi काम नहीं करता ठीक se......aur सायद ये वही वक़्त tha......inn सब ने अभी hi खाना खाया tha......Maine गिनना शुरू किया तो यहाँ पे 6 कीड़ें the.....matlab इन्होने किसी बड़े जीव को मारा होगा या फिर चोटें जीवों के एक समूह को तभी इनका पेट भरा हुआ होगा.....

मैं - इनको एक hi शॉट में ख़तम करना hoga.......Dhruv अगर मैं चुक्का तो कुछ भी हो सकता है......

ध्रुव - आप ये मुझे क्यों बता रहे hai.......aap मुझे ऐसे डरा नहीं sakte.....main जानता हु आप कर hi लोगे......

मैं - (खुद को ठीक करते हुए) हां सही कहा.......

मैंने अपनी तलवार को अच्छे से पकड़ा और पोजीशन में आ gaya.......Dark पावर का उसे किया जा सकता था यहाँ pe.....par क्या ये सही hota......ye सोचने की बात thi......lekin इसके अलावा और बचा hi क्या tha......kya मैं थंडर एलिमेंट का उसे करता.......

मैंने इन् दोनों को मिला के उसे करने का socha......isse मेरे बॉडी की एनर्जी स्टाबलिज़्ड रह जाती......

मैंने अपनी तलवार को ऊपर kiya....jisse आसमान से उसमे बिजली आ gayi......aur उसके बाद मैंने अपने अंदर से डार्क पावर को तलवार में diya.........jo थंडर अभी तलवार में नीली दिख रही थी वो पहले तो थोड़ी लाल जैसी हुई और उसके बाद काली हो गयी......

मैंने तलवार को जमीं में दे maara......jiske बाद मेरे अस्स पास एक गोला बन gaya.....aur उसी गोले के अंदर वो पेड़ और वो कीड़ें भी आ gaye......Maine हैंडल को थोड़ा सा ghumaya.....aur चारो तरफ काळा रंग की बिजली फैलने lagi........kabhi यहाँ कभी waha......jab ये हुआ तो वो सरे कीड़ें जो सो रहे थे वो जाग गए और जो जाग रहे थे उन् सब का ध्यान मेरी तरफ आ gaya......Maine दोनों हाथों से तलवार के हैंडल को pakda.......aur जो बिजलियाँ यहाँ वह हर तरफ जा रही थी उन् सब को एक कर diya.......wo कीड़ें अब मेरी तरफ आने lage.....ab सायद उनका पेट भरा हुआ था इस वजह से वो चलते हुए आ रहे the.....ye गेनेराल्ल्य तब उड़ते है जब इनको खतरा दिखाई देता hai......par मज़्ज़े की बात ये थी इनकी आँखें किसी काम की nahi.....to इनको समझ नहीं आता ये कब उद्दे कब नहीं udde......khane की तलाश में उड़द लेते थे ये कभी कभी......

अब जब ये सारे रेंगते हुए आ रहे थे तो मैंने पानी तलवार का हैंडल एक कीड़ें hi ओर kari.....aur उस काली बिजली को एक दिशा दे di......uss कीड़ें की taraf............jab वो बिजली उस कीड़े के ऊपर gayi......to वो एकदम से रख हो gaya.......bas रख बच्ची वह पे और थोड़ा सा धुवां utha.....aur हां बदबू आने लग गयी bahut........maine दूसरे वाले के साथ यही kiya......3rd 4तह और ऐसे hi सभी ko......wo सारे ख़तम हुए और मैंने अपनी तलवार को निकला और सब नार्मल kiya.....par मैं एक बात भूल गया tha........maine ध्यान नहीं दिया पर ये सारे के सारे तो एक समूह में थे यहाँ pe.....Matlab ये सब के सब मेल कीड़े the......female वाली अभी यहाँ नहीं the......female और खतरनाक होते है......

मैंने ध्यान दिया नहीं और आराम से वह से चला गया अण्डों के pass.....waha भी तो काम था......

वही इसी waqt.......Madhu से थोड़ा bachke.......Pankaj बहार आया tha......aur लीडर से मिलने का सोच रहा tha......wo स्कूल से बहार gaya.....aur लीडर के पास पंहुचा......

लीडर - तुम ठीक हो गए हो Pankaj.....ye अच्छी बात है......

पंकज - हम्म अच्छा तो hai.....par मेरे पास आपके लिए अच्छी खबर नहीं है......

लीडर - मुझे पता है मेरी बेटी के बारे में इतनी जल्दी नहीं पता चलने वाला hai......isko लेके मैंने भी सोचा है kuch.......Main बस तुमको देखने आया था और कुछ बातें karne.....aur हां एक और मदद चाहिए था mujhe.....hmmm तुम क्या मुझे हेड ऑफिस के किसी बड़े अफसर से अकेले में मिलने में मदद कर डोज.....

पंकज - अकेले mein.....aap करने क्या वाले हो......

लीडर - इस प्लेनेट पे बहुत से अनचाहे जीव hai.....unka सिखर और उनकी खबर दूंगा unko....aur उसके बदले वो मेरी बेटी को ढूंढने में मेरी मदद करेंगे......

पंकज - पर इसमें तो बहुत खतरा hai.....aap कैसे......

लीडर - खतरा हर चीज़ में होता है Pankaj.....tum अभी यहाँ हो मेरे साथ इसमें भी तो खतरा है......

पंकज - ये बात और hai......aap पता नहीं कैसे जीवों के बारे में बात कर रहे hai.....mannna आप लीडर है पर फिर भी खतरा तो hai......main आपके साथ चलूँगा......

लीडर - पागल मत बन्नो bacche....main तुम्हारी जान जान बुझ के खतरे में नहीं डालने वाला......

पंकज - ये मेरा फैसला hai.....main आ रहा hu....aur इससे मुझे नयी चीज़ें सिखने को मिलेगी साथ में आपककी madad.....kya आप मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकते.......

लीडर - बच्चे मैं सच में तुम्हे नहीं दाल सकता खतरे mein.......aur रही बात नयी चीज़ सीखने की तो वो मैं तुम्हे बाद में सीखा दूंगा.....

पंकज - मैं बस दुर्र खड़ा rahunga.....agar आपको मदद की जरुरत हुई तब hi आऊंगा.......

लीडर ने सोचा ये तो ऐसे मानेगा नहीं तो इसको किसी शांत जीव के पास लेके चले जाते है जहा ये दर जाए जब उससे लड़ाई ho.....aur ये वापस से यहाँ आने के बारे में सोचे भी नहीं......

लीडर - तुम ऐसे नहीं maanoge......thek है चलो......

अब किस्मत hi कहेंगे ना की इस लीडर ने भी वही कीड़ें चुनने जिनको मैं मारने आ गया tha.......males सारे मैंने मार दिए the.....aur females......wo अभी सायद जंगल में hi खाना धुंध रही thi......par मुझे इस बात का थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं था.......

वही जब लीडर और पंकज आगे गए तो उनके पीछे कोई और भी आया था....

लीडर और पंकज एक जगह पे जाके रुक्के......

लीडर - तुम यही rahoge......maine पता किया है ये जीव बहुत खतरनाम है ये लोगो को मार देते है देखते hi......

लीडर ने इतना कहा और आगे जाने hi वाला था की ुन्नन दोनों के ठीक आगे तेज़ाब की थूक आके giri.......waha पे जो घास थी वो पूरी जल गयी thi.......saath में जम्मीं पे भी थोड़ा गधा हो गया था......

उसको देख के लीडर पंकज के आगे आके खड़ा हो gaya......apne हाथ फैला ke.......jaise अपने हाथ से रोकता वो तेज़ाब ko......wapas से तेज़ाब की थूक aayi.....usne खुद को और साथ hi पंकज को भी वह से पीछे dhakela.......par इसमें वो दोनों निचे गिर gaye......Ab आगे पीछे hi हो सकते थे और वो भी वक़्त लगने वाला था.......

वापस से एक और तेज़ाब की धार आयी पर वो उन् दोनों के ऊपर आता उससे पहले hi वो एक पानी के गोले के अंदर चला gaya.......aur वो पानी का गोला वापस से उस कीड़े के पास जिसने उसको फेंका था.......

यहाँ पे भी 6 कीड़े थे......

ये मधु थी जिसने ये किया था......

मधु - किसी ने कहा था वो स्टाफ रूम में जा रहा hai......ye है स्टाफ रूम अपने स्कूल ka.....ye है क्या वो स्टाफ wale.....bade गंदे है ये......

पंकज ने पीछे देखा पीछे मधु thi......uske दोनों हाथ ऊपर हवा में the......aur उसके पीछे पानी हवा में तैर रहा tha......bahut सारा पानी.......

उन् कीड़ों में से 2 ने वापस से thooka.....aur इस बार मधु ने पानी से ना सिर्फ वो तेज़ाब वह गिरने से रोक्का बल्कि वो कीड़ें जो अभी उड़द रहे the......unke ऊपर बच्चा हुआ पानी भी दे daala......jisse उनके पंख गिल्ले हो gaye.....aur वो निच्चे गिर गए.....

भींगे हुए पंख से कोई उड़द नहीं सकता.......

थोड़ा पानी बच्चा हुआ था उसको उसने लीडर और पंकज पे दे डाला.......

वो दोनों अपने जगह से खड़े hue.......Leader खुद को साफ़ कर hi रहा था की मधु उसके पास gayi.......usko ghora......aur पंकज को एक थपड मारा.......

मधु - जब ये कह रहे थे यहाँ खतरा है तो आने की जरुरत थी kya.....baat नहीं मान सकते inki......aur aap......aapko जरुरी था इसको यहाँ लेके aana.....isse आप कही और लेके चले जाते और बहला फुसला के भगा देते.....

पंकज जो अभी तक अपना हाथ गाल पे रखे हुए tha.....manna उसके पापा उसको दांत देते the.....par ऐसे हाथ उठाना सायद hi कभी हुआ tha.......aur यहाँ pe........par उससे कुछ बोलै भी नहीं गया......

मधु hi बोल रही thi......itne में वो कीड़े आगे आने लग gaye.......Pankaj ने ये देखा......

पंकज - वो wapas......wo आ रहे hai....humme चलना चाहिए.....

मधु - मेरी बात ख़तम नहीं हुई hai......usne अपना हाथ बिन्ना देखे hi पीछे किया.....6 कीड़े 6 बुलबुलो में कैद हो गए थे और ऊपर हवा में उड़द रहे थे.......

लीडर ये देख के दांग tha.......Pankaj भी......

लीडर - ये तो कम्मल है......

मधु - आप आगे से कभी इसको लेके नहीं जाएंगे अकेले.....

पंकज - और तुम कौन हो मेरी Maa......Main jaaunga......ab तो और jaaunga......tumne मुझे मारा kaise.....main तुम्हारी मदद करता हु और tum.....tum मुझे परेशां करती थी अब तक पर अब तो मारा भी......

मधु - ज्यादा चपर चपर करि तो यही एक और dungi......jo बोलै सुनाई नहीं diya.....aage से अकेले नहीं जाना है इसके saath......(leader की तरफ मदद के) इसको लेके जाना है तो मैं भी चलूंगी......

पंकज को समझ नहीं आया ये क्या कह रही hai.......Leader भी पहले समझ नहीं sakka.....par जब उसने देखा की इसकी पावर्स इतनी कण्ट्रोल में है और ये अभी भी स्कूल में है वो bhi......Wo समझ गया इसको क्या चाहिए.......

लीडर - ठीक है तोआगे से तुम भी चल सकती ho......mujhe इससे कोई दिकत नहीं है......

पंकज - ये क्या है मैंने आने को कहा मुझे मन्ना किया और इसको.....

लीडर - तुमको मेरी सुरक्षा लगने वाली थी जैसे अभी लगी thi.....aur ye.....ye हमको बच्चा सकती है जैसे अभी बचाया है dekho....Bacchi मैं तुम्हे बहुत कुछ सीखा सकता हु......

पंकज - आप मुझे क्या सिडकीक समझ रहे हो इसका.....

लीडर - नहीं ऐसा नहीं है.......

ये सब यहाँ बातें कर रहे थे वही उन् कीड़ों ने उन् बबल्स को तेज़ाब से भरना शुरू कर दिया tha....jisse हुए ये वो बबल्स अब फुट गए.....

मैं यहाँ अण्डों के पास tha.....aur हमारा काम पूरा हो hi गया tha.....matlab अब वो जितने भी अंधे थे वो बर्बाद हो गए थे उनमे जो जीव थे उनका धीर अलबूस और कूपर ने एक जगह लगा दिया tha.....aur मैं वो तलवार लेके वह पे पहुंच गया था.......

ज्वाला थोड़ा ऊपर गया ताकि वो ऊपर से एक नज़र मार sakee......par उसने जो देखा......

ज्वाला - प्रतीक वो kidde.....Pankaj वह है......

मैं - Pankaj......wo यहाँ क्या कर रहा hai....marr जाने दो उसको मुझे उससे क्या.....

ज्वाला - उसके साथ मधु भी है......

मैं - Albus.....Cooper उन् कीड़ों को उनन्साब से दूर करो......

मैंने ये इस वजह से किया क्यों की मधु के होते वह जा नहीं सकता था मैं.......

अलबूस और कूपर उन् दोनों के पास जाने lage.....wahi ज्वाला को कुछ और soojha....usne उन् जीवों पे आग से हमला करना शुरू कर diya.....maine वैसे भी अपना काम कर लिया था तलवार इतनी शक्ति शैली बन hi गयी थी की वो अब किसी भी तेज़ाब सी नहीं गलने वाली थी......

ज्वाला ने ऐसा इस वजह से किया ताकि उनकी जलने की बदबू हर जगह फैल jaaye......usko लगा सायद वो जीव इसको महसूस करने के बाद वह आ jaaye.....to उसने पहले तो जलना शुरू किया और उसकी बदबू उसी तरफ कर दी अपने पंखों से जिस तरफ वो जीव थे.....

मुझे पता नहीं था ये ज्वाला इतना समझदार hai.....wo जीव सच में हमारी ओर आने लग गए......

अब अलबूस और कूपर जो वह गए थे जब उन्होंने देखा वो कीड़ें खुद जा रहे है तो वो भी पीछे पीछे आने लग gaye.....par इस वक़्त मधु और उसका गैंग भी पीछे पीछे आने लग गया.......

वो जीव अपने अण्डों के पास आ गए......

मैं - ये सारे माद्दा कीड़ें hai.....maine इनके बारे में क्यों नहीं सोचा......

मैं आगे badha......aur अपनी तलवार वापस से जमीं में गाड़ di......ye तरीका मुझे तलवार बाज़ी से सही लगता है जब बात ऐसे कीड़ों की ho......bas फिर क्या था वही गोल घेरा आ gaya......aur उसके अंदर ये सारे kidde.......upar से ये वाले तो चल भी मुश्किल से पा रहे the.....tabhi तो इनके आने तक हमारा काम हो गया tha......Maine अपनी तलवार को एक के तरफ झुकाया और बिजली उसके ऊपर जाके गिर्री और वो राख हो गया......

वैसे hi दूसरा और तीसरा भी......

मुझे पता भी नहीं लगा कब वो तिण्णो वह पे आ भी गए the......Main तो बस तलवार लिए हुए tha.....aur मार रहा था......

अब मास्क तो था नहीं चेहरे पे की ये पहचान ना paaye......tinno में से 2 का तो मुँह खुल्ला रह gaya.....par मधु का nahi.....Leader तक ka.....usne भी काली बिजली नहीं देखि थी और ये तकनीक ये तो और भी खास थी.....

मैंने उन् सब को मार diya......aur अपना तलवार जमीं से ऊपर uthaya......aur अण्डों की ओर देखने laga......Mujhe नहीं पता था की मधु मेरे पास आ रही hai......pata तब लगा जब दिल एकदम से तेज़्ज़ धड़कने लग gaya.....aur पीछे se......picche से उसने मुझसे मेरी तलवार maangi........Wo मेरे बिलकुल पीछे thi......matlab.....ek से दो फ़ीट bas......usse ज्यादा nahi.....bas यही दुरी थी हमारे bicch.......par ये kaise.......main उसके पास नहीं जा सकता tha.....kabhi भी नहीं फिर आज आज कैसे ye......main समझ नहीं पा रहा tha.....mujhe एक दम से कुछ भी समझ नहीं आ रहा था ये हुआ कैसे.......

मैं तो ये भी समझ नहीं पा रहा था ये सच है या झूट hai.......aur बस इसी को देखले के लिए मैंने अपना हाथ थोड़ा hi तो आगे kiya.....aur अच्चानक से मैं एक पेड़ के पास पड़ा हुआ था......

मधु भी ये देख के दांग thi.....aur बाकी के सभी bhi.....aur मुझे भी समझ आ गया था वो सच tha.....matlab वो मेरे उतने पास थी.....

पर ये समझ नहीं आ रहा था की मैं इससे खुश हो जाऊं या फिर dukhi.....matlab अभी वो मेरे पास thi....aur मैं उसको छु भी नहीं पाया.....

जब मैं निच्चे गिर्रा हुआ था तब मधु वापस से मेरे पास aayi...aur आती gayi......aur बस आती hi gaye......wapas से वो बस 1 फ़ीट दूर होगी उसने मुझे अपना हाथ diya.....ki मैं खड़ा हो sakku......maine......Maine अपना हाथ आगे किया थोड़ा sa.....sayad उसको लगा मैं आगे नहीं कर पाऊंगा तो उसने hi मेरा हाथ पकड़ के मुझे उठा दिया.....

इतने सालों baad........naa जाने कितने सालों बाद मैंने मधु को चुवा tha.....main उसको छू paaya.....isse अच्छा kya....kabhi भी कुछ हो सकता था मेरे लिए.....

मधु ने मुझे खड़ा kiya.....aur मेरे कंडे पे लगी हुई धुल को साफ़ किया....

मधु - तुम वह से यहाँ कैसे आ गए.......

इतने में लीडर ने कहा......

लीडर - यहाँ पे लोग आ रहे है उन्हें लग रहा होगा यहाँ आग लगी हुई hai.....humko निकलना होगा......

मधु - हम जा रहे है तुम भी चले जाओ......

इतना बोल वो सब चले गए......

मैं बस खड़ा रहा.......

ध्रुव - हमे यहाँ पे आग दिखानी hogi.....ye अंडे के टुकड़े देख के ये लोग घबरा जाएंगे......

मैं - ज्वाला आग लगाओ yaha.....aur उसके बाद चले जाना wapas......Albus कूपर वापस आओ......

मैंने ऐसा kaha.....ek पोर्टल खोला और सीधा स्कूल के अपने कमरे mein......Main वह जाके टेबल पे बैठ के सोचने लग गया अभी जो भी हुआ था.....

नेक्स्ट update......ghar पे जाने के बाद एक और सैतान के बारे में पता करना hai.....aur वह पे रूपल दीदी के साथ मिलके लड़ना hai.....after तहत दक्ष मां भी आने वाले hai.......waha भी कुछ होगा....
 
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