फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 15 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 122

वह एल्फ नेशन में इतना कुछ हो रहा tha....wahi दूसरी taraf.....Fumos पे लूसिफ़ेर की मुलाकात उसके बेटे से हो गयी थी......

उस इम्मोर्टल ने पहले तो कुछ वक़्त तक कोशिश kari......ki लूसिफ़ेर को पावर्स की लालच देके उसको रोकक के रखा jaaye......par अच्चानक पता नहीं उसके दिम्माग में क्या aaya......usne खुद से एक पोर्टल खोल दिया लूसिफ़ेर के saamne......aur लूसिफ़ेर के ऊपर से अपने सारे जादू वापस ले liye......haa पर लूसिफ़ेर के ऊपर फोमोस पे जो उसके जादू करे गए थे वो सब के सब काम कर hi रहे the....usme कोई अंतर नहीं आया था......

मतलब उसके पास अभी भी फोमोस पे आने पे जो ताक़त मिली थी वो सब तो थी hi उसके पास......

अब जब पोर्टल खुला तो लूसिफ़ेर को समझ कुछ आ नहीं रहा tha......ye एकदम अच्चानक से हो गया tha.......abhi कुछ वक़्त तक वो क्या कर रहा tha.....usko ये सब याद आते hi वो सन्न रह गया tha.......wo उस पोर्टल को देख रहा tha.....saath hi अस्स पास की चीज़ज़ों को.....

एक बात उसको अच्छे से समझ आ चुक्की thi.....ye jagah......ye बहुत बदल चुक्की hai......wo यहाँ पे पहले भी आ चुक्का thaa......par उसने कभी कुछ ऐसा महसूस नहीं किया tha.....aur इस baar....iss बार ये जगह एकदम se.....ekdum से बदल गयी थी उसके हिसाब से....

ऊपर से वो इम्मोर्टल देख रहा था लूसिफ़ेर को ध्यान se......aur हर एक पहलु पे गौर कर रहा था वो.....

अब पोर्टल भी तो एक दरवाजे के तरह hi होता hai.....darwaja जिसके दोनों तरफ से hi आया जाय जा सकता hai......aur ठीक यही हुआ भी.....

लूसिफ़ेर उस तरफ जा नहीं रहा था क्यूंकि उसको इस जगह पे अब सब कुछ hi अजीब लग रहा tha.....aur वो ये नहीं चाहता था की जो वो यहाँ पे आने के बाद इतने वक़्त से कर रहा था वापस से कुछ वैसा hi kare.......Par दूसरी तरफ जो tha......usko उस जगह से बहार निकलना tha.....aur अभी उसके सामने एक पोर्टल आ गया tha.....wo कैसे इस मौके को छोड़ देता......

वो उस पोर्टल से बहार आ gaya.......aur जब आया तो उसने अपने सामने लूसिफ़ेर को पाया.......

ये कोई और नहीं tha.......Slayer के बॉडी में जस्टिन tha......iss वक़्त ध्रुव का पूरी तरह से काबू नहीं था उस बॉडी पे.....

अब जस्टिन तो जानता था अपने पिता ko.....to वो एकदम से खुश हो गया ये देख के की उसके पिता वह पे hai......par इससे पहले की वो कुछ कह पता.......

लूसिफ़ेर ने उसपे हमला कर दिया.......

लूसिफ़ेर कोई आम बाँदा था nahi......wo डेमोस का राजा tha......usne ना जाने कितनी लड़ाइयां लड़ी हुई thi.......wo जानता tha......ki पहली नज़र में किसी को भी दोस्त तो नहीं कहा जा sakta......aur जो दोस्त नहीं hai.....usse अगर आप किसी अनजान सी और अजीब सी जगह पे मिलो to.....hamla करना और उसके ऊपर काबू पाना hi सबसे सही तरीका है.....

ये हर तरह के जीवों में होता है......

तो लूसिफ़ेर ने कर दिया hamla.....aur जस्टिन इस बात को समझ नहीं पाया.......

अब जस्टिन ठीक है राजकुमार है डेमोस ka......par ये बाँदा पैदा होने के बाद से hi बीमार रहा hai.......Lucifer ने इसको ट्रेनिंग दिलवाई thi.....khud से भी दी thi.....par एक लिमिट में दी thi.......Justin कभी bhi.....ek कड़ी ट्रेनिंग के लिए तैयार hi नहीं tha......uska सरीर इतना कमज़ोर था की अगर उसको ट्रेनिंग दी जाती अच्छे से तो वो मर जाता....

हां पर दिम्माग तेज़ था इस जस्टिन ka......ye बाँदा प्लान्स बनाया करता tha.....aur प्लान्स अच्छे भी होते थे......

पर यहाँ pe....yaha पे कुछ अलग hi था.....

लूसिफ़ेर ने उसपे हमला कर diya......aur वो संभल नहीं पाया......

वैसे ज्यादा कुछ हुआ नहीं tha......Slayer की बॉडी में था wo.....bahar क्या hi होना tha.......haa बस 2-4 कदम पीछे को चला गया था वो.....

लेकिन वो अकेला तो था नहीं उस बॉडी में जो उस बॉडी को कण्ट्रोल कर paaye.....bahar कुछ नहीं hua......par बॉडी के अंदर एक अलग सी हलचल होने लग gayi.......Dhruv अब स्लेयर की बॉडी पे वापस से कण्ट्रोल लेने की कोशिश करने लग गया aur......aur वो धीरे धीरे कामियाब भी हो रहा था.....

यहाँ बहार लूसिफ़ेर ने देखा की उसके वार का ज्यादा कोई असर हुआ नहीं है उसके सामने वाले pe.....to उसने वापस से वार करने का सोचा......

जस्टिन - Dad......ye main...hu.....Justin....

उसने बोलने की कोशिश तो kari.....par वो कुछ बोल पाटा उससे pahle......uske मुँह के आधे हिस्से पे ध्रुव का कण्ट्रोल आ गया tha.....jis वजह से वो बोल नहीं paaya.....aur बस एक अजीब सी गुर्राहट निकली मुँह से.....

अब हालत ऐसे थे की बॉडी के कुछ पार्ट्स पे जस्टिन का तो कुछ पार्ट्स पे ध्रुव का कण्ट्रोल tha......Justin बॉडी को रोकने की कोशिश कर रहा था क्यूंकि सामने उसका अपना बाप खड़ा tha.....Dhruv लूसिफ़ेर को मारने की कोशिश कर रहा था क्यूंकि सामने wala......matlab लूसिफ़ेर उसपे हमला कर रहा था.....

लूसिफ़ेर इस बार वार कर पता उससे पहले hi....Dhruv ने उसको एक हाथ से पकड़ liya......aur वह से दुर्र फेंक diya.......aur Justin.....wo उस हाथ को कण्ट्रोल hi नहीं कर पा रहा था.....

लूसिफ़ेर ने जो वार किया था वो वाला भले hi ना लगा हो inko.....par ये जो फेंका था ध्रुव ने लूसिफ़ेर ko.......wo दूर तक गया tha....aur अकेला नहीं आस पास के कुछ पेड़ भी लेके गया था wo.....aur ध्रुव इसके बाद रुकने वाला नहीं tha.....wo आगे gaya.....aur उसने उसके बाद वापस से लूसिफ़ेर को उठाया और उसको मारने के लिए अपने दूसरे हाथ का उसे करने की कोशिश करने लग gaya......par....wo उसे नहीं कर पा रहा था....

जस्टिन का बॉडी पे जितना भी कण्ट्रोल इस वक़्त तक बच्चा हुआ tha.....wo उससे पूरी कोशिश कर रहा था की वो अपने पिता को बच्चा sakke.....par उसकी बारी ख़तम हो रही थी.....

ध्रुव से जब दूसरा हाथ उसे नहीं हो पा रहा tha....to लूसिफ़ेर को मौका मिल gaya.....aur उसने वापस से वार कर diya.....waar ठीक ठाक tha.....jiski वजह से ध्रुव के हाथ से वो छूट gaya.....aur छूटने के बाद किसी तरह दूर हट के खड़ा होने की कोशिश करने लग gaya.....par उससे नहीं हुआ जा रहा था.....

स्लेयर की बॉडी में हद्द से ज्यादा ताकत आ गयी थी इस वक़्त को..... यही तो कारन थी की वो ध्रुव जैसे को भी अपने सरीर के अंदर रख पा रही thi....aur Justin...jisko इतनी पावर दे दी गयी उसको भी अपने अंदर रख पा रही थी.

वही दूसरी taraf....Pankaj और मधु दोनों hi अभी तक नींद में the...aur ये अच्छा था उन् सब के liye...Prateek और बाकी सब वापस तो आ गए थे पर इनको समझ नहीं आ रहा था जब दोनों जागेंगे तो क्या होगा..

क्या उन् दोनों को वो सब याद होगा या फिर nahi...iske पीछे की भी वजह thi...Madhu जब उस महल में पहुंची तो वो एक तरफ पंकज को बचा रही थी अपने एक हाथ से उसको एक सुरक्षा घेरे में रख kar...bas यही वाली बात प्रतीक को समझ नहीं आ रही थी और परेशां किये जा रही थी.

उसके हिसाब से अभी भी मधु को कुछ भी याद नहीं hai...to जब भी वो गोल्डन पावर के कण्ट्रोल में होती है तो वो पूरी तरह से अपने अस्स पास के चीज़ज़ों को भूल के बस वही करती है जो इतने हज़ारों सालो में गोल्डन पावर ने उससे सीखा tha...apno की सुरक्षा करना और जो उनके लिए खतरा साबित हो रहे हो उनको ख़तम karna...aur उसके अपने कौन है ये बात भी उसको गोल्डन पावर को hi पता होती थी.

इस बार ये अलग था... प्रतीक के हिसाब से अगर मधु उसको बचने आती है जब वो मुसीबत में हो तो ये बात समझ आती भी hai....dono का रिश्ता बहुत पुराण है और उस समय से है जब मधु गोल्डन पावर को अच्छे से कण्ट्रोल कर लिया करती thi....lekin Pankaj...ye तो बस कुछ वक़्त पहले का मिला हुआ है....

इसके कारन hi उसके मैं में वो सवाल बार बार आ रहा था वापस se....kahi मधु को सब याद तो नहीं है.... और अगर ऐसा है तो इन् सब का क्या hi मतलब बनता hai.,...ye सब जो है.... वो यहाँ है अपने माता पिता को ढूंढने के लिए उनके साथ रहने के लिए अपने परिवार वालो की तलाश में...... ये सब बस ऐसे hi है....

और जैसा की पहले भी हुआ था..... इस पॉइंट पे आने के बाद प्रतीक को लगता है की वो hi गलत सोच रहा है...

रूपल - प्रतीक.... प्रतीक क्या हुआ... तू बोल क्यों नहीं रहा....

प्रतीक - कहा.... क्या हुआ... आप कुछ बोल रही थी.

K.Bua - अरे हम बात कर रहे थे की पंकज को तो किसी तरह से संभल hi लेंगे पर ये मधु का क्या....

प्रतीक - हमे उन् दोनों के उठने का इंतज़ार करना होगा उससे पहले हममे नहीं पता है की उनको क्या कुछ याद होगा और क्या नहीं.

रूपल - अरे घडी dekho...kuch hi देर में मम्मी वापस आ जाएंगी और जब वो उन् दोनों को यहाँ देखेंगी सोते hue....to फिर उनको बताना होगा...

चची - क्या बताना hoga.....tum सब के सब यहाँ pe....Nikita तुम्हे तो स्कूल में होना चाहिए था ना और तुम दोनों को भी...

P.Bua - वो भाभी वो क्लासेज ख़तम हो hi गए the....to हमने सोचा की यही पे आ जाए...

चची - मन्ना तुम सब को स्कूल से बहार निकलने का ख़ुफ़िया रास्ता पता है.... परए अच्छी बात नहीं है की रोज के रोज वह से निकल hi जाओ... और तुम दोनों तो वह पे पद्धति हो... ऐसे पढ़ने वाले होंगे तो पता नहीं पढ़ने वाले बच्चे कैसे होंगे.... कभी किसी नियम को मानेगे भी या नहीं...

चची ने आते hi लेक्चर देना शुरू कर दिया था पर अभी उनकी नज़र प्रतीक पे नहीं पड़ी थी... अभीतक तो नहीं

चची - तुम भी यहाँ आ गए... तुमको तो इस वक़्त वो मधु के पास होना चाहिए था... मधु से याद आया.... वो पंकज आया था यहाँ पे काम था सायद उसको कुछ...

कोई कुछ और बोलता उससे पहले hi रूम में से सामान गिरने की आवाज आयी....

नेक्स्ट अपडेट में देखते है पंकज और मधु के जागने पे क्या होता है साथ hi निकिता का लीडर से मिलना और लूसिफ़ेर की हालत..
 
अपडेट 123

चची घर पे आ चुक्की थी और वो आगे कुछ बोलती उससे पहले hi रूम के अंदर किसी चीज़ के गिरने की आवाज आयी....

अब आगे

चची ने एक बार हममे dekha......aur हम घबराये हुए the.......Humme पता tha.....unse ये बात कभी नहीं चुप सकती की हम किसी को घर पे लाये hai.....yaa कोई घर पे आया है....

एक तो वो उनका और दादी का जादुई कवच और dusra.....unko पता चल hi jaata.....kisi ना किसी तरह से.....

और अब जब उनको पता चला.....

चची - घर पे कोई आया है क्या.....

पता नहीं kyun......sayad वो जान बुझ के हमसे ये पूछ रही थी......

P.Bua - हां Bhabhi.....wo....

अभी बुआ कुछ बोलती उससे पहले फिर से कोई सामान गिरा और फिर उस रूम का दरवाजा खुल गया......

सामने पंकज tha......uska हाथ उसके सर पे tha.....aur देखने में उसकी हालत ख़राब लग रही थी......

P.Bua - Wo....Pankaj यहाँ आया था.....

चची ने जब पंकज को वैसे देखा तो वो तुरंत उसके पास गयी और उसको पकड़ के पास के सोफे पे बिठाया......

चची अक्सर ये सारे काम जादू से नहीं किया करती thi.....par उन्होंने अपने जादू का इस्तेम्मल पंकज के लिए पानी लाने को किया......

चची - Pankaj.....tum ठीक हो ना....

पंकज बस अपने सर पे हाथ लिए सोफे पे बैठा यहाँ वह देखे जा रहा था......

चची ने वापस से उससे पूछा की वो ठीक है की nahi.......par पंकज जवाब ने जवाब नहीं diya.....wo bas.....usss पानी के गिलास को देख रहा था जो अभी वह पे कही से आ गया था......

चची ने उसको वही पे बैठे रहने दिया और......

बाकी सब को वह से थोड़ा दूर लेके gayi......Nikita को उसके पास छोड़ के......

चची - Poonam.....kya हुआ है पंकज ko.....wo ऐसे हमारे घर पे क्यों है......

रूपल दीदी - मम्मी, क्या मलतब है aapka....kya वो ऐसे हमारे घर पे नहीं आ सकता.....

चची ने घूर के रूपल दीदी को dekha.....aur बस रूपल दीदी चुप हो गयी......

P.bua - वो Bhabhi.....darasal......

चची - अब बोलो bhi....Main क्या जवाब दूंगी दक्ष को.....

अभी यहाँ पे ये सब चल रहा था वही दूसरी तरफ फोमोस पे......

लूसिफ़ेर एक पत्थर के सहारे बैठा हुआ था क्यूंकि उससे उठा नहीं जा रहा था......

ध्रुव या जस्टिन जिसका भी इस वक़्त पे स्लेयर के बॉडी पे कण्ट्रोल था वो वह से थोड़ी दुरी पे खड़ा हुआ tha......sayad दोनों का hi कण्ट्रोल था उस वक़्त uspe......yaa ये कहा जाए की किसी का भी कण्ट्रोल नहीं था.....

यूँ तो सोफ़िया ने स्लेयर के बॉडी को ऐसा बनाया hi था की वो ढेर साड़ी शक्तियां अपने अंदर सम्मा sakke.....lekin हर एक चीज़ज़ की एक क्षमता होती hai.....aur सायद आज स्लेयर के बॉडी की क्षमता ख़तम होने वाली थी.....

लूसिफ़ेर अपनी जगह से देख रहा tha.....kaise उसके सामने जो बाँदा खड़ा था वो अचानक से विबरते होने लग गया tha......aur वो भी बुरी तरह से.......

लूसिफ़ेर देख hi रहा था की अच्चानक se......waha पे बहुत तेज़्ज़ रौशनी हो गयी.......

लूसिफ़ेर को अपनी आँखें बंद करनी पद गयी......

ये जो रौशनी thi....wo रौशनी कोई आम रौशनी नहीं thi.......wo रौशनी उस इम्मोर्टल के उस जगह पे आने की वजह से हुई थी......

लूसिफ़ेर को इस बात का पता नहीं चलने वाला था की अब कुछ देर तक जो भी hoga......wo ना तो उसको देख पायेगा ना hi महसूस कर पायेगा.....

वो इम्मोर्टल वह पे निच्चे आया और वो सीधा स्लेयर के बॉडी के पास गया जो अभी बहुत बुरी तरह से हिल रहा था......

"Hmm......Maine सोचा नहीं tha....par ये sarir......ye काफी सही हालत में है इस वक़्त भी......"

ध्रुव ने जब ये आवाज सुन्नी तो वो समझ गया की वह पे कोई इम्मोर्टल आया हुआ hai........par वो उसको जानता नहीं था......

जस्टिन - तुम कौन ho.....aur ये सब क्या हो रहा hai......Mere पिता कहा है.....

"उह घबराने की बात नहीं hai......wo उसी हालत में है जिस हालत में तुम दोनों ने उससे छोड़ा hai......Main अब बस एक hi सवाल पूछना चाहता हु तुम दोनों से......"

ध्रुव - तुम्हे पता है मैं कौन hu.....kya हु......

"Sayad.....haa......yaa......sayad......naa पर पता hai.....ye जो तुम दोनों की जोड़ी hai......ye कमल की hai.....Main....main बहुत वक़्त se...yaha वह भटकता आ रहा hu.....chizzon को देखता उनको समझता आ रहा hu....par आज tak.....ye जो तुम दोनों का नहीं नहीं तुम तिण्णो का सम्भन्ध hai.....wo समझ नहीं पा रा hu....aur तुम्हे तो पता होगा जब हम बहुत वक़्त कहते है तो वो कितना वक़्त होता है......"

ध्रुव - तो क्या तुम्हे पता tha.....ki मैं कौन hu......aur फिर bhi....phir भी तुम मेरे पास नहीं aaye.....mujhe इससे बहार निकलने को....

"सायद तुमने सुन्ना nahi.....Main ये कह रहा था की तुम तिण्णो का ये सम्बन्ध बहुत hi अजीब है और कम्मल का भी hai.....Main तुम्हे ट्रैन करना चाहता hu.....taaki तुम एक साथ काम कर सक्को..."

ध्रुव - क्या बकवास कर रहे हो तुम......

जस्टिन जो अभी तक बस सुन रहा था और समझने की कोशिश किये जा रहा था उसको थोड़ी थोड़ी बातें समझ में aayi.....jaise की.....

उसके सामने ये जो कोई भी खड़ा था वो चाहता है की वो और ध्रुव उसकी बात मान le......par ध्रुव उसकी बात नहीं मैंने वाला....

जस्टिन ने जब देखा की ये मौका सही है लूसिफ़ेर को उस जगह से बहार निकलने की मांग करने के लिए तो उसने तुरंत हां बोल दिया......

ये कोई ऐसे hi लिया गया फैसला नहीं था उसके अनुसार उस वक़्त के लिए.....

जस्टिन ने इसके बारे में सोच लिया वो जानता tha......uske पास अभी अपने पिता को बचने का और कोई रास्ता नहीं hai.....wo खुद उस सरीर पे पूरी तरह से कण्ट्रोल कर नहीं पा रहा tha.....aur उसने कोशिश कर राखी थी उस प्लेनेट से बहार जाने की पर वो बक्कर थी.....

इसी वजह से....

जस्टिन - मैं तैयार hu.....par मेरी एक शर्त है.....

"बहुत khub......chalo ठीक है मैं इस जनाब को वापस से इसके जगह पे भेज देता hu.....yahi थी ना तुम्हारी इच्छा...."

जस्टिन एक बार को चौक गया पर ज्यादा देर के लिए नहीं उसको समझ आ गया था ये जो भी उसके सामने खड़ा है वो कोई पंहुचा हुआ बाँदा है.....

ध्रुव - Nahi.....mujhe मंज़ूर nahi....aur तुम जानते हो अगर मैंने इस बात को उस जगह पे उठाया तो क्या होगा.....

"पहली बात क्या तुम अब भी सोच रहे हो की तुम उस जगह पे जा सकते हो ?? सपने देखना बंद kardo.....aur dursi....rahne दो ये कभी और कर lenge......ab या तो तुम मुझे हां में जवाब do.....yaa मैं तुम्हे इस सरीर में कैदी बना के ये पूरा सरीर hi इस जस्टिन के हवाले कर दूंगा....."

ध्रुव - तुम ये कभी नहीं कर सकते.....

"Accha.....phir ये बताओ आखिर kaar.....Justin जैसे कमज़ोर बुरा मत मन्ना जस्टिन पर तुम कमज़ोर तो ho.....kaise तुम्हारे सामने टिक्का हुआ है इस शारीर में...."

ध्रुव - Nahi.....nahi...tumne....ye सब तुमने किया hai....hai naa....Main तुम्हे छोडूंगा नहीं......

"मेरे पास वक़्त नहीं है ज्यादा अब बस जल्दी से हां बोलो और मैं अपना काम शुरू कर दूंगा..."

ध्रुव ने कुछ देर socha.....aur उसके बाद हां कर दिया....

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है फोमोस पे क्या चल रहा है साथ hi पंकज को क्या हुआ है और निकिता का लीडर से मिलना
 
अपडेट - 124

पंकज चची के किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहा tha.....aur इस वजह से चची अब बाकियों से सवाल करने लग गयी thi......wahi दूसरी तरफ पहली बार उस इम्मोर्टल ने खुद को ध्रुव और जस्टिन के सामने पेश किया tha.....par वो ऐसे hi नहीं था साथ में कुछ चाहता था वो उन् दोनों से.....

अब आगे

जब चची सभी से सवाल पूछ रही थी तभी रूम के अंदर से रोशनी आने लग gayi.....aur प्रतीक को पता tha......ye क्या हो रहा है.....

पर उसने सोचा नहीं था कुछ ऐसा होगा.....

जैसे hi वो रोशनी बहार आयी और पंकज ने उसको dekha......Pankaj जो अभी निकिता के साथ बैठा था वो वापस से बेहोश हो गया......

बाकी किसी पे कोई और असर नहीं हुआ......

जब सबने देखा की पंकज वापस से बेहोश हो गया है सब उसके पास चले gaye.......par चची रूम का दरवाजा खोलने गयी thi....kyunki वो परेशां थी......

जहा तक उनको पता था घर पे बस उतने hi लोग थे जो अभी हॉल में the....room में कोई भी नहीं tha....phir ये रौशनी कहा से आयी....

जब दरवाजा खुल्ला अंदर कोई नहीं tha.....room खली tha....aur बाकी सब ये देख के हैरान थे....

पर कोई कुछ और सोचता या फिर karta....usse पहले पंकज चिल्लाता हुआ utha.....usko होश आ गया था....

निकिता और K.Bua उसको संभल रहे थे....

चची - ये क्या हुआ था abhi.....ye रौशनी कहा से आयी थी......

चची के इस सवाल का जवाब देने से पहले बाकि सब के दिमाग में ये सवाल था की आखिर मधु गयी कहा.....

कमरे से गोल्डन पावर के अंश यहाँ वह ना हो जाए इस चीज़ज़ से बचने के लिए सबसे पहले प्रतीक hi रूम के अंदर गया और वो पता लगाने की कोशिश करने लग गया की आखिर मधु कहा गयी थी.....

वही दूसरी तरफ फोमोस पे......

ध्रुव और जस्टिन ने उस इम्मोर्टल के साथ काम करने के लिए हामी भर दी थी.....

जैसा जस्टिन ने कहा tha......uske पिता यानी लूसिफ़ेर को उसी वक़्त उस इम्मोर्टल ने वापस भेज diya.....Demos पे क्यों की उसको लूसिफ़ेर की जरुरत नहीं थी इस वक़्त तो बिलकुल nahi......par लूसिफ़ेर के डेमोस पे ना होने पे वह पे चीजजें बदलने लग गयी थी....

रही ध्रुव की बात तो ध्रुव ने भी हां कह दिया tha.....ab पता नहीं उसके दिम्माग में क्या चल रहा था.....

"तुम्हे पता hai......iss जगह पे मैंने छोटे छोटे बदलाव किये hai.....jo की तुम दोनों की ट्रेनिंग में काम आने वाली है...."

ध्रुव - Kya.....tum हममे यही पे ट्रेनिंग देने वाले ho.....par यहाँ पे कैसे....

"Ohh...tumhe क्या laga.....main तुम दोनों को यहाँ से बहार निकलने का sochunga......ye अच्छी जगह hai.....tum जानते हो इस बात को Dhruv.....aur मेरा यकीं karo......jab तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू hogi....tum दोनों को इस जगह की सबसे ज्यादा जरुरत पड़ने वाली है....."

जस्टिन - मुझे क्या करना hai.....batao..

"हम्म मुझे और हममे इन् दोनों में क्या फर्क होता hai.....ye पता करना hai....tum दोनों ko.....ab जब तुम दोनों साथ में काम करने वाले हो तो ये जरुरी होने वाला है...."

उसने अपनी बात ख़तम kari.....aur वो वह से चला गया.....

जस्टिन और ध्रुव को स्लेयर के बॉडी में छोड़ ke.....dono hi कंफ्यूज the.....par ये कन्फूसिओं उस वक़्त ख़तम हो गयी जैसे hi.....unke सामने जो पेड़ लगे हुए the.....wo खुद से हिलने लग gaye.....aur उनकी जड़े मिटटी से बहार आने लग गयी....

इनको ट्रेनिंग करने देते है......

लीडर जो काफी वक़्त से अपनी बेटी निकिता से मिलना छह रहा था वो बहुत देर तक इंतज़ार करता raha.....ki वो aayegi......kyunki उसने कहा tha.....par वो नहीं आयी....

लीडर वह से जाने को उठा hi था की उसके ठीक पीछे रौशनी hui.....aur उसके बाद एक पोर्टल खुला जिससे वो देख नहीं sakka.....aur जब पोर्टल बंद हुआ तो उसकी जगह पे वह पे मधु कड़ी थी.....

लीडर को अभी भी रोशनी की वजह से कुछ सही से नहीं दिख रहा tha.....par जब सब ख़तम हुआ तो उसने देखा वह पे मधु कड़ी थी....

लीडर - मधु तुम यहाँ क्या कर रही ho......kya निकिता ने तुम्हे यहाँ भेजा है.....

मधु को खुद याद नहीं था वो उस जगह पे क्या कर रही thi.....usko तो वह पे होना भी नहीं चाहिए tha.....aakhiri चीज़ज़ जो उसको याद thi.....wo पंकज के साथ thi....par अब वो अपने आस पास देख रही थी और पंकज वह पे नहीं था.....

मधु - मैं यहाँ कैसे aayi.......Pankaj कहा है.....

लीडर - क्या बात है Madhu....sab ठीक है ना....

मधु - Main...main यहाँ नहीं thi.....Main तो पंकज के साथ thi.....par मैं यहाँ कैसे आ गयी.....

लीडर ने मधु के बैठने के लिए वह पे मिटटी का एक बेंच banaya....aur उसको उसपे bithaya.....aur उससे बात करने की कोशिश करने लग गया.....

वही दूसरी तरफ......

रूम में क्या हुआ इस बात का चची पता लगा रही thi.....par उनको कुछ समझ नहीं आ रहा tha.....upar से पंकज की बातें सुन के उनको और भी अजीब लग रहा था......

पंकज का कहना था वो मधु के साथ था पर यहाँ नहीं कही और pe....aur उसके बाद कुछ hua.....phir जो भी चीजजें हुई वो बस टुकड़ो में उससे याद tha...aur वो आखिरी चीज़ज़ जो उसको अच्छे से याद है वो यहाँ पे नहीं था.....

चची उसको समझा रही थी की वो शांत rahe.....par जो यादें उसके दिम्माग में thi.....adhuri yaadein.....wo....usko परेशां कर रहे the.....aur इसी वजह से वो जल्द से जल्द मधु को ढूँढना छह रहा था....

पंकज - मुझे जाना hoga.....sayad मधु मुसीबत में hai...Mujhe जाना होगा....

प्रतीक को ये सही लगा वह से निकलने के liye....kyunki वो भी अभी वह से निकलना चाहता tha....aur देखना चाहता था की मधु आखिर गयी कहा.....

पर इससे पहले वो वह से nikalta......darwaje पे दस्तक हुई......

रूपल दीदी दरवाजे के पास थी और जब उन्होंने दरवाजा खोला तो सामने मधु thi.....jo इस वक़्त परेशां दिखाई दे रही थी.....

मधु - क्या पंकज यहाँ पे है......

रूपल - तुम ठीक हो न Madhu.....haa वो यही hai....aa जाओ अंदर आ जाओ...

मधु जो रूम के अंदर होनी चाहिए थी उसको घर के दरवाजे पे देख के सब थोड़ा चौके the.....par ज्यादा nahi.....Madhu अंदर आयी और वो पंकज को वह पे देख के राहत की सांस लेने lagi.....yahi शामे पंकज के साथ भी था.....

रूपल दीदी जो इस वक़्त भी दरवाजे पे hi thi.....unhone कुछ और भी देखा बहार.....

बहार लीडर खड़ा tha.....par वो अंदर नहीं आ रहा था....

सायद इससे पहले जो चीजजें हुई थी उसके वजह se.....yaa वो वक़्त देना चाहता था निकिता ko.....par वो अंदर नहीं आ रहा था.....

रूपल दीदी को पता था की निकिता उनसे मिलना का मैं बना चुक्की thi.....aur मधु दीदी इस बात के खिलाफ thi.....par लीडर को उस तरह से देख ke.....pata नहीं उनको क्या हुआ.....

रूपल - Nikita....bahar कोई तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है......

निकिता ने लीडर को dekha.....aur लीडर ने भी निकिता को dekha.....par उसके बाद वो वह से जाने लग गया.......

निकिता को ये बात समझ नहीं aayi.....Leader खुद उससे मिलना चाहता tha....aur अब उसको देखने के बाद ऐसे hi जा रहा है......

लीडर के दिम्माग में ऐसा कुछ नहीं tha.....wo तो bas.....wo स्पेस दे रहा था निकिता को.....

नेक्स्ट अपडेट में देखते hai....Strange वर्ल्ड पे हो रही कुछ चीज़ज़ों को.....
 
अपडेट -125

मधु लीडर के साथ वापस से पंकज के पास आ गयी thi.....par उसको कुछ भी याद नहीं tha......Leader जो आज सुबह से बस अपनी बेटी से मिलके उसको अपनी बातें बताना चाहता tha......wo अब उसको कुछ स्पेस देने के बारे में सोच रहा tha.....sayad उसको भी समझ में आ रहा था की वो कुछ ज्यादा hi एक्सपेक्ट कर रहा है उससे......

अब आगे

इन् सब को 2 दिन हो गए the.....inn दो दिंनो वैसे भी मधु के कॉलेज में छुट्टियां thi......aur वो कुछ परेशां सी थी इस वजह से उसने ये दो दिन पंकज और दक्ष मां के साथ रहने का सोचा tha....aur उसने ऐसा hi किया भी.....

वही प्रतीक इस वक़्त कंफ्यूज tha......wo ये समझ नहीं पाया था अभी तक की आखिर मधु की गोल्डन पावर कैसे काम करती hai......ye सवाल पहली बार नहीं था उसके सामने पहले भी वो इसके बारे में सोच रहा tha.....par हर बार चीजजें चेंज हो जाती thi....aur वो खुद को एक झूठ बोल दिया करता tha....par इस बार उसने इस बारे में थोड़ा अच्छे से सोचने का मैं बना लिया था.....

वही यहाँ से दूर स्ट्रेंज वर्ल्ड में.....

वह पे चीजजें सही नहीं thi......aur अभी यहाँ पे बात एल्फ नेशन की नहीं हो रही hai.....yaha पे बात पुरे स्ट्रेंज वर्ल्ड की हो रही थी.....

स्ट्रेंज वर्ल्ड में चीजजें बहुत बदल चुक्की thi.....Lucifer ने जब अपने सभी खबरियों को जस्टिन के बारे में पता लगाने के लिए बोलै tha......uske बाद से यहाँ स्ट्रेंज वर्ल्ड में कुछ बड़े बड़े लोगो का नाम सामने आया tha.....aur इन् नामो ने स्ट्रेंज वर्ल्ड को एक तरह से हिल्ला के रख दिया था.....

स्ट्रेंज वर्ल्ड पे अलग अलग देश बने हुए the.....aur उन् देशों में अलग अलग तरह की सरकारें thi....par पुरे स्ट्रेंज वर्ल्ड के सिक्योरिटी को और उसको रिप्रेजेंट करने के लिए उन् सब कन्ट्रीज के सहमति से एक कंबाइंड सरकार भी थी.....

जिस कोर्ट ने दब को वह पे ना जाने का फैसला सुनाया था वो भी उसी कंबाइंड सर्कार का hi एक हिस्सा था.....

अब आते है मुख्य बिंदु पे.....

तो यहाँ स्ट्रेंज वर्ल्ड में बहुत से ऐसे लोग थे जो लूसिफ़ेर के कहने पे उसके लिए काम करने लग गए the.....aur जब इस बात का सबको पता चला तो वह पे बहुत गरमा गर्मी हो गयी थी.....

सभी की मीटिंग चल रही thi.....issi बात को लेके.....

और इस मीटिंग में फिर पता नहीं कहा se.....ek और बात आ gayi......Nix समुदाय का स्ट्रेंज वर्ल्ड से चले जाने का.....

निक्स समुदाय की आबादी लगभग से 60 प्रतिसत स्ट्रेंज वर्ल्ड से जा चुक्की thi.....sath में उन् सब का लीडर भी जो की पुजारी जी थी.....

उस मीटिंग में ये तय हुआ की पहले तो स्ट्रेंज वर्ल्ड की सुरक्षा को बढ़ाया jaaye......aur इसमें सभी मदद करेंगे.....

साथ में ये भी तय हुआ की वो सब पुजारी जी से एक बार बात करेंगे और साथ में ये भी पता करेंगे की अब निक्स समुदाय का लीडर कौन है.....

एल्फ नेशन....

यहाँ पे जो हुआ था उसका पता बहार के लोगो को नहीं tha......ye बातें तो उन् सबको भी पता नहीं thi....jo खुद अपने देश के राजा और उनके परिवार वालो के दुस्मनन बन गए the....aur उन् सब को ख़तम करना छह रहे थे...

इस वक़्त दब के पिता दब की कही हुई बात के बारे में सोच रहे......

उसने कहा tha.....ki अब वक़्त आ गया hai.....ki वो इस गद्दी को किसी और को सौंप de.......par वो कोई और राज परिवार से नहीं होना चाहिए......

ये कोई तुरंत ले लेने वाला फैसला नहीं tha.....iss वजह से इसके बारे में उन्हें सोचना hi था....

अभी वो सोच hi रहे थे की तभी एल्फ नेशन की तरफ से जो बाँदा उस मीटिंग में गया था वो वह आ गया.....

वो- महाराज....

महाराज - Haa.....aa गए aap.....bataiye क्या फैसला हुआ है वह पे.....

वो - Maharaj.....Strange वर्ल्ड पे जो कुछ भी hua.....usko लेके सभी परेशां the.....aur सभी ने ये तय किया है की हममे एक बार और एक साथ खड़े रहने की जरुरत hai.....jaisa हमने पहले भी किया hai....unka कहना है की सुरक्षा को और मज़बूत करने की जरुरत hai.....aur इसके लिए सभी को अपने यहाँ से कुछ लोगो को वह भेजना hai.....aise लोग जो सुरक्षा के प्रबंधों के बारे में अच्छी तरह से जानते है.....

महाराज - Hmm....hum समझ रहे hai.....ye कुछ दिन हम सभी के लिए सही नहीं the.....kisi ने नहीं सोचा होगा की हम सब के बिच mein....aise लोग भी honge....aap एक काम kariye.....hamare तरफ से जो सबसे काबिल है इसके लिए उसको वह पे भेज dijiye....aur उसको इस बात की भी इज़्ज़ज़त होगी की वो अपने साथ किन्न लोगो को लेके जा सकता है.....

वो - सुक्रिया Maharaj.....waise महाराज वह पे एक और बात hui......Kya आपने निक्स समुदाय के पलायन के बारे में सुन्ना है....

महाराज - निक्स समुदाय का palayan.....nahi....kya बात है....

वो- Maharaj.....hua कुछ ऐसा की जब मीटिंग चल रही थी तो ये बात सबके सामने आयी की निक्स समुदाय के 60 प्रतिसत से भी ज्यादा लोग पलायन कर चुक्के है स्ट्रेंज वर्ल्ड se.....aur उनके साथ साथ उनके लीडर ने भी.....

महाराज - ये सोचने की बात hai.....Nix Samuday......Strange वर्ल्ड की सबसे पुराणी सब्यताओं में से hai.....unka यहाँ से ऐसे jaana.....aur पुजारी जी के बारे में मैंने सुन्ना hai....Mujhe नहीं लगता वो बिन्ना किसी बड़े वजह के इस जगह से जाने की सोचेंगे भी.....

वो - महाराज आपने सही kaha.....aur सायद यही वजह है की ये बात आज उस मीटिंग में आयी hai.....Meeting में ये भी तैय किया गया है की पुजारी जी के साथ इस बारे में एक बार बात करि jaayegi.....aur साथ में अब निक्स समुदाय का लीडर कौन है इन् सब के बारे में भी पता लगाया जाएगा.....

महाराज - एक काम karo.....pata लगाओ की अभी पुजारी जी कहा पे hai......aur ये निक्स समुदाय के लोग आखिर जा कहा रहे है.....

वो - Maharaj.....maine इस बारे में थोड़ा बहुत पता किया hai......bahut से लोग तो एअर्थ पे चले गए hai....kuch लोग डार्क वर्ल्ड में भी गए hai.....aur kuch.....pata nahi.....unn सब का कुछ पता नहीं है....

महाराज - Earth.....waha पे क्यों....

वो - महाराज तो अब वो खुद hi बता सकते hai......par अगर कोई स्ट्रेंज वर्ल्ड को छोड़ के एअर्थ पे जाना chahe.....to ये तो मेरे समझ से बहार hai......Maine सुन्ना है एअर्थ पे हमारे लिए कैसे कैसे कानून hai.....hum खुल्ले में जादू नहीं कर sakte.....hume वह के लोगो के साथ रहना होता है......

महाराज - hmm.....theek hai....tumhe और कुछ कहना है.....

वो - नहीं Maharaj.....Main चलता हु.....

वो वह से चला gaya.....wahi महाराज वापस से अपनी सोच में दुब gaye......Earth पे आखिर ऐसा है क्या की ये सब वह जा रहे hai......aur दब ने आखिर ये सब छोड़ के एअर्थ पे रहने का क्यों सोच liya.....Earth hi क्यों.....

वही दूसरी तरफ.......

फोमोस पे........

यहाँ पे अब क्या hi bataye.......pichle 2 दिन ......जस्टिन और धुर्व के लिए काफी मुश्किल the.......aur ये तो बस सुरुवात थी......

उस इम्मोर्टल ने पता नहीं क्या किया था इस जगह pe.......ab तो जैसे हर एक चीज़ज़ hi उन् दोनों की दुसमन बननी बैठी थी......

कल की hi बात ले lo......uss इम्मोर्टल ने इनसे कहा था की इन्हे एक दूसरे का साथ देना hai......ab दोनों ने इस बात को मैंने में hi भलाई समझी par......dono ने hi बस दिखने के लिए ये किया था.....

फिर क्या tha......shuru में दोनों बस साथ में यहाँ वह जंगल में घूम रहे the......ki तभी अच्चानक से वह जंगल में पेड़ उनके ऊपर पाथेर फेंकने लग gaye....aur यही पे दोनों ने अपने अपने हिसाब से एक्शन लेना शुरू कर दिया.....

जिसके वजह से हुआ ये की वो वही पे गिर gaye.....aur उसके बाद उनके ऊपर पठेरों की बारिश hi होने लग गयी.....

और वो तब तक होती रही जब तक दोनों ने कुछ वक़्त के लिए hi सही पर साथ में काम करना चुनना.....

हां ये बात अलग है की उस वक़्त दोनों इस बात पे एक साथ आये थे की उन् दोनों को वह से भागना था......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है पुजारी जी क्या बताते है स्ट्रेंज वर्ल्ड वालो ko....aur साथ में निक्स समुदाय के लोग क्या करने वाले hai......sath में देखेंगे मधु के साथ क्या होता है कॉलेज में वापस जो वो प्रतीक से मदद मांगने चली जाती है....

सॉरी फॉर लेट अपडेट
 
अपडेट - 126

मधु थोड़ी परेशां सी thi.....usko समझ नहीं आ रहा था जो भी उसने देखा वो सपना hi tha.....yaa फिर वो सच था.....

वो बार बार कोशिश कर रही thi.....khud को ये समझने की के वो सब सपना hi hoga......wo ऐसा कुछ कर hi नहीं sakti.....par उसको अंदर hi अंदर लग रहा था की वो सब सिर्फ कोई सपना नहीं हो sakta.......to उसने पिछले दिन hi इस बारे में पता करने के लिए पहले तो वो साड़ी बातें उसने कही पे लिख ली जो उसको याद थी....

उसके बाद उसने वह पे जो कुछ भी होते हुए उसने देखा tha....wo सब भी याद करके लिख liya....jo उसने खुद किया था वो सब भी....

इतना सब करने के बाद उसनेस्ट्रांगे वर्ल्ड में पिछले 3-4 दिंनो में जो कुछ भी हुआ था उन् सब के बारे में पता lagaya......wo सब पता लगाने के बाद उसने फिर एल्फ नेशन के बारे में पता लगाना शुरू किया.....

उसने वह पे घाटी हर एक घटना के बारे में पता किया और उसके बाद वो ये देखने लग गयी की क्या कही पर भी उसने जो लिखा tha....unse मिलता जुलता आख्या हुआ है या नहीं....

पर ऐसा कुछ नहीं मिला उसको जिससे वो ये कह सक्के की उसने जो देखा वो सब सिर्फ कोई सपना नहीं था......

एल्फ नेशन में जो कुछ भी हुआ tha.....wo साड़ी बातें बस कुछ लोगो को पता thi.....Royal फॅमिली वाले या फिर वो सब जो वह पे उनको बचने में लगे हुए the.....baaki सब तो अपने होश में थे hi nahi....to ये बातें कही बहार गयी hi नहीं थी....

पर इन् सब में लोग घायल हुए the......kuch मारे भी गए the....aur ये बात ऐसे hi जा नहीं सकती थी.....

लीमो ने वैद्यों को बुला लिया था प्रतीक के कहने पे महल mein....aur वह पे जितने भी लोग घायल थे उनका इलाज भी चल रहा tha.....par इन् सब में कुछ लोगो की मौत भी हो गयी thi......aur जिनका इलाज चल रहा था उन् सब को ये पता नहीं था आखिर उनको चोट लगी कैसे......

लीमो खुद इस बात से अनजान था.....

एल्फ नेशन में खबरें आयी thi.....ki कुछ सैनिक घायल है और कुछ की मृत्यु हो गयी hai.....par कारण किसी को पता नहीं tha......aur इसी वजह से वह पे तरह तरह की मंनघडंत कहानियां बनती चली जा रही thi......aur इन्ही कहानियों का पता चला था मधु ko.....to वो थोड़ी कंफ्यूज हो गयी thi.....par जैसा उसने देखा था वैसा कुछ नहीं था वह पे इस वजह से वो खुश थी....

लेकिन इन् सब के बाद जब वो ये याद करने की कोशिश करने लग गयी की वो आखिर लीडर के पास कैसे पहुंची तो उसको ये बात कही पे फिट होती समझ नहीं आ रही thi.....aur ना hi ये बात की पंकज तो उसके साथ tha.....wo वह से प्रतीक के यहाँ कैसे पहुंच गया.....

उसने इसका पता लगाने के liye.....Chachi से अकेले में मिलने का सोचा tha.....aur वो वही करने यहाँ आयी हुई थी.....

इस टाइम घर पे चची के अलावा कोई और था nahi......to वो घर पे आयी और उसने उनसे पूछा की पंकज वह पे कब आया था....

चची ने उसको बताया की वो वह पे कब आया था ये तो उनको मालुम नहीं है पर हां वो थोड़ा बीमार सा लग रहा tha.....Chachi ने उससे पंकज अब कैसा है ये सब भी पूछा....

मधु जो सपने देख रही thi.....unme उसके देखा था पंकज को कुछ हो गया था.....

दरअसल उसके दिम्माग में वो यादें घूम रही थी जो उसने गोल्डन पावर के काबू में आने के बाद किया था एल्फ नेशन mein.....aur वो इस बात से दरी हुई थी की कही उसकी वजह से पंकज को तो कुछ नहीं हुआ था ना....

हलाकि अभी पंकज एकदम से सही tha.....par मधु को अंदर hi अंदर ये बात सताए जा रही थी कही उसने पंकज को कोई नुक्सान तो नहीं पहुंचाया था ना....

पंकज और दक्ष मां उसके लिए बहुत ज्यादा खास बन गए थे.....

पंकज तो कुछ ज्यादा hi......Pankaj के साथ उसका जो रिस्ता था वो एकदम से अलग सा tha....aur वो इसी वजह से डर रही थी.....

वो इस वजह से भी डर रही थी क्यूंकि जब पुजारी जी ने उसको उसके माता पिता की कहानी सुनाई thi....usme भी उसी के कारन वो दोनों अलग हुए.....

ये बात जैसे उसको अंदर से खाये जा रही थी.....

कल कॉलेज जाना था उसको wapas.....par वो वापस जाने से डर रही thi....ye सोच के की कही उसकी वजह से वापस से उसके किसी अपने को कोई नुकसान ना पहुंचे.....

नेक्स्ट डे.....

पिछले दिन स्ट्रेंज वर्ल्ड से कुछ लोग एअर्थ पे आये the......Pujari जी से मिलने के लिए......

उन् सब ने पुजारी को वह मीटिंग में क्या हुआ ये सब bataya....aur ये भी बताया की निक्स समुदाय स्ट्रेंज वर्ल्ड के बहुत पुराणी सब्यताओं में से एक hai......aur उसका यूँ अचानक से पलायन कर जाना सभी को चुभ रहा है.....

सब इस पलायन का कारण जानना छह रहे थे.....

पुजारी जी ने उन् सब को वही एअर्थ पे उस आश्रम में एक दिन रुकने के लिए bola.....aur उसके बाद वो अपना जवाब उन्हें देंगे ऐसा बोल दिया था.....

तो आज सुबह वो सब वापस से पहुंच गए पुजारी जी के पास....

पुजारी जी - आप सब को यहाँ रहके कैसा लग रहा है.....

उन् सब ने उनको जैसा लगा वैसा बताया उनको.....

पुजारी जी - मैं और मेरे बहुत सारे लोग स्ट्रेंज वर्ल्ड को छोड़ के यहाँ आये है उसके पीछे कुछ वजहें hai.....humara ghar....ab वह पे वो पवित्रता नहीं रही जो पहले हुई करती thi.....kaali शक्तियों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था हमारे घरों mein.....aur हम उसके लिए तैयार नहीं the....iss वजह से हममे वह से यहाँ आना पड़ा....

"तो क्या आप सब वह से डर के यहाँ आ गए है..."

"हमने सुन्ना था निक्स समुदाय बहुत बहादुर होती hai....wo किसी से डर के अपना घर छोड़ de.....ye बात हम नहीं मान सकते...."

जो लोग आये the...unhone तरह तरह की बातें kari...par उनमें से एक ने कुछ ऐसा बोलै की पुजारी जी का पूरा ध्यान उसी के ऊपर चला गया.....

"क्या आपसब यहाँ इस वजह से नहीं आये हो क्यूंकि आपके किताब ने ये कहा...."

ये निक्स समुदाय के पास के कबीले में रहने वाले लोगो में से एक tha....Nix समुदाय और इस कबीले के लोगो में बहुत बनती thi.....ye व्यापार किया करते the....par फिर एकदिन सब बदल गया.....

उस कबीले के सरदार के मैं में जमीं की लालच आ गयी और वो अपने कबीले को बढ़ने के लिए निक्स समुदाय के लोगो पे हमला करने का विचार करने लग गया tha.....lekin कुछ hi दिंनो बाद उसको पता चला की निक्स समुदाय के लोगो ने उनके साथ अब व्यापार करना बंद कर दिया hai.....sath hi में अब उस कबीले के लोगो का आना जाना भी बहुत हद्द तक काम कर दिया है....

जब उन् लोगो ने इस बात का कारन पता किये तो उनको समझ नहीं आया ऐसा कैसे हो सकता है.....

निक्स लोगो में से किसी ने उनसे कहा था की उनके किताब ने बताया की तुम्हारे कबीले वाले निक्स समुदाय पे हमला करने वाले hai.....iss वजह से ऐसा किया गया है....

उस बन्दे को ये बात अच्छी तरह से पता थी की इतनी बड़ी बात हुई hai....isme उस किताब का हाथ ना हो ये हो hi नहीं सकता.....

पुजारी जी ने उसको dekha....aur उसकी बात को झुटला के उन् सब को वह से जाने को बोल diya....sath में एक साफ़ साफ़ जवाब भी दे दिया....

की निक्स समुदाय को वह पे किसी महामारी के आने की शंका thi...iss वजह से वो सब वह से निकल गए.....

सब चले gaye...par वो कबीले वाला बाँदा रुक्का रहा.....

वही दूसरी तरफ.....

प्रतीक कॉलेज पहुंच चुक्का tha...aur वेट कर रहा था की कब मधु वह aayegi....par वो आ hi नहीं रही थी....

मधु नहीं आयी पर उसकी वो बहने आ गयी थी वह pe.....jinka बॉडीगार्ड बनने का ज़िम्मा मिला था प्रतीक को.....

उन् दोनों के साथ वो मैनेजर की बेटी भी थी.....

प्रतीक को लगा सायद इनसब को पता हो मधु के बारे में तो उसने इनसे पूछ लिया....

उन् सब को इसके बारे में कुछ नहीं पता tha.....upar से मधु की बहन ने तो उसको कल कॉल भी किया था.....

पर मधु ने कॉल hi नहीं उठाया tha...aur ना उसके बाद कुछ रिप्लाई किया tha....to इस बात से वो थोड़ी चिद्धि हुई थी मधु से....

क्लासेज शुरू हो गए तो वो सब के सब चल दिए क्लासेज करने के लिए.....

प्रतीक थोड़ी देर रुक्का पर फिर उसको लगा सायद मधु क्लास में hi ho....to वो वह चला गया पर वो वह नहीं थी....

जब क्लासेज शुरू hui....uske थोड़ी देर बाद मधु कॉलेज के अंदर आयी thi....aur आतें hi वो सीधा क्लास में चली gayi....par लेट होने की वजह से उसको क्लास में आने नहीं दिया....

मधु वह से निकल कर कैंटीन में जाके बैठी थी....

तभी वह पे कुछ सीनियर्स आ gaye.....Madhu नयी थी कॉलेज mein.....usko अभी ज्यादा कोई जनता था नहीं....

वो सीनियर्स पहुंच गए मधु के पास

सीनियर्स - नई एडमिशन ??

मधु खुद परेशां thi.....usne पहले ध्यान hi नहीं diya...wo खुद के ख्यालों में खोयी हुई थी.....

सीनियर्स ने 2-3 बार पूछा और जब कोई रिएक्शन ना मिला तो उनको गुस्सा आया और उनमे से एक लड़के ने पास रखे हुए जग का पूरा पानी मधु के ऊपर दाल दिया.....

किस्मत ख़राब होती है तो उन्नत पे बैठे नाते आदमी को भी कुत्ता काट लेता है....

मधु एकदम से घबरा गयी अचानक से पानी आने se.....par वो तो अच्छा हुआ की उसने अभी इन् सब के सामने कोई जादू नहीं kiya....agar ऐसा होता तो बात बहुत बढ़ जाती....

सीनियर - अब सुनाई dega.....naam क्या है तेरा....

मधु उसको देखने लग gayi.....gusse में....

पीछे से किसी ने bola.....lagta है गूंगी बहरी hai.....abhi भी सुनाई नहीं दे रहा है.....

मधु बोलने hi वाली थी की एक और ने कुछ ऐसा बोलै जो मधु के hi नहीं बल्कि उसके पुरे परिवार के बारे में tha....aur फिर मधु की आँखें चमक गयी....

बाकी सब को छोड़ के मधु सिद्ध उस बन्दे के पास पहुंच गयी और एक हाथ से उसका गल्ला पकड़ के उसको ऊपर उठा दिया.....

सब लोग देखते रह gaye......unko याक्किन नहीं हो रहा tha....ye आम सी दिखने वाली दुबली पतली ladki....itni ताकत कहा से आयी इसमें....

यहाँ ये चल रहा था इस बात का पता डीन को यानी की मधु के पिता को चली और वो पहुंच गए वह पे.....

उन्होंने जो देखा वो भौचक्के रह gaye.....Madhu उस बन्दे को एक हाथ से हवा में uthaye.....dusre हाथ से उसके गालों को लाल किये जा रही thi....uss बन्दे का तो एक दांत भी निकल आया था.....

डीन ने जब देखा की वो लड़का कौन hai....to उसने मधु को रोकने का सोचा....

डीन - Madhu....chod दो usse......and के तो माय ऑफिस....

मधु ने जैसे सुन्ना hi नहीं tha.....aur इसके वजह से डीन को उसके पास जाना पड़ा....

डीन जैसे hi उसके पास pahucha....kuch तो हुआ जिसकी वजह से वो पीछे धक्का खा के गिर gaya.....ab ये क्या था किसी को समझ नहीं आया......

प्रतीक जो अभी क्लास में बैठा tha....usko अचानक से गोल्डन पावर का अहसास hua.....wo बिन्ना टीचर के पता लगे hi रूम से जल्दी में निकला और मधु को ढूंढने लग गया.....

जब वो गोल्डन पावर के करीब पंहुचा तो उसने देखा....

मधु एक कमरे में बैठी रो रही थी.....

वो उसके पास गया.....

प्रतीक - Madhu.....tum...tum ठीक हो ना....

प्रतीक को वह पे देख के मधु का रोना और बढ़ gaya,....aur आज वापस se....wapas से मधु ने प्रतीक को चुवा और बस चुवा hi नहीं बल्कि उसके पास आके रोने लग गयी....

प्रतीक को समझ नहीं आ रहा था की क्या हुआ hai.....itne में मधु की एक बहन वह पे aayi.....aur उसने मधु को और प्रतीक को वह देखा....

वो - Madhu....tum ठीक हो ना.....

मधु ने जब उसको dekha....to वो पीछे जाने लग gayi......usko इस बात का डर था कही वो इसके साथ bhi....kuch ऐसा ना कर दे की उसको चोट लग जाए....

प्रतीक को ये बात समझ नहीं आयी....

वो - मधु डरो mat.....kuch नहीं हुआ है.....

प्रतीक - क्या हुआ hai.....ye ऐसे क्यों रो रही hai...aur....

वो - तुम्हे पता नहीं.....

इतना बोल के उसने अपना फ़ोन प्रतीक को दे diya...jisme एक वीडियो चल रहा tha....aur वीडियो में मधु कुछ लोगो को कैंटीन में मारे जा रही thi....aur सायद गलती से उसने डीन को भी मार दिया था.....

प्रतीक ने ये देखा तो वो थोड़ा थोड़ा बात को समझ गया.....

प्रतीक - मधु मैं तुम्हे घर छोड़ आता हु....

मधु की बहन - मधु तुम्हे घबराने की जरुरत नहीं hai.....ye गलती से हुआ था....

मधु ने कोई भी जवाब नहीं diya...wo बस बहार आयी और प्रतीक के साथ गाडी में बैठ गयी.....

कार में भी मधु शांत सी hi thi.....wo तो प्रतीक का फ़ोन बज्जा तो उसने कार रोकी बात करने के लिए.....

प्रतीक - Hmm....theek है.....

वह से.......

प्रतीक - नहीं थोड़ी परेशां hai.....par ठीक हो जायेगी...

वह से......

प्रतीक - नहीं मैं आज वापस नहीं आ paunga...mujhe कुछ काम है....

कॉल कट

प्रतीक - डीन सर ठीक hai....bas कुछ खरोच आयी hai....aur तुमपे कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है....

मधु पहले तो चुप rahi....Prateek भी उसकी हालत समझ कर कार वापस से चलने लग गया.....

मधु - मुझे यहाँ आना hi नहीं चाहिए tha.....meri वजह से सबको नुकसान होता है....

प्रतीक - क्या बात कर रही हो Madhu......aisa कुछ भी नहीं hai....ye सब बस तुम्हारे दिमाग में चल रहा है....

मधु - Nahi....waha पे जो कुछ भी hua....usme से मिझे बस ये याद है की मैंने एक लड़के को मारा tha.....par तुमने वो वीडियो देखि naa....meri वजह से मेरे पापा....

प्रतीक - उनको कुछ नहीं हुआ hai.....wo बिलकुल ठीक है....

मधु - पर क्या मैं ठीक hu......mujhe याद क्यों नहीं की मैंने वह पे क्या किया था.....

प्रतीक को समझ आ रहा था ये गोल्डन पावर की वजह से है पर वो ये बात सीधे सीधे मधु को नहीं बता सकता था....

आज के लिए इतना hi......
 
अपडेट - 127

अगर कोई बीमार hai.....aur उसको बीमारी का पता ना ho....to वो कभी खुद को बीमार नहीं samjhega.....aur ना hi कभी किसी को खुद को बीमार बोलने dega.....par अगर उसको कुछ सिम्पटम्स दिखने लग जाए बीमारी के तो वो सोचता जरूर hai.....ki उसके साथ कुछ तो गलत है......

ठीक यही चीज़ मधु के साथ हो रही thi......Madhu को गोल्डन पावर के बारे में ना के बराबर पता tha.....kyunki हर बार जब भी गोल्डन पावर एक्टिव होती thi.....Madhu मधु नहीं रहा करती thi....wo बदल जाती thi.....aur ऐसे में उसने क्या kiya....kyun किया इन् सब के बारे में उसको कुछ पता नहीं होता tha.....par चीजजें बदलने लग गयी thi.....sayad पहले से hi बदल रही thi....par उसको इन् सब का अहसास कुछ वक़्त पहले हुआ....

स्ट्रेंज वर्ल्ड में जो hua....uske बाद से उसको समझ नहीं आ रहा tha.....ki वो सपना hai....yaa सच में उसने वो सब किया और देखा tha......lekin लीमो ने चीजजें संभल ली थी इस वजह से मधु को कुछ खास पता नहीं चल पाया और वो उन् चीज़ज़ों को बस एक सपना साबित करने में कामियाब रही.....

पर उस चीज़ज़ ने उसके दिम्माग के कोने में एक सवाल तो खड़ा कर hi दिया tha......aur उसके बाद जो कल कॉलेज में hua......wo तो उस सवाल को दिम्माग के किसी कोने से उठा के उसको सेंटर में लेके आ गया tha.....ab मधु के से बस उसी के बारे में सोचे जा रही थी......

बार बार उस वीडियो को देखे जा रही थी जिसमे उसने ना सिर्फ उन् सीनियर्स को मारा tha.....sath में अपने पिता यानी डीन को भी धक्का दिया और उन्हें छूट आ गयी थी......

उसने सिर्फ एक वीडियो नहीं बल्कि वह पे जिन जिन लोगो ने वीडियो ली thi.....unn सब को देखा.....

पर उसको ये बात याद नहीं आ रही थी की आखिर ये हुआ kab......aur यही बात तो उसको डराए जा रही थी......

प्रतीक ने उसको कल कॉलेज से आने के बाद बहुत samjhaya.......par ये कुछ ऐसा tha.....jisko समझने के liye....Madhu को टाइम चाहिए tha.....aur इस चीज़ज़ को समझते हुए प्रतीक ने उसको अकेला छोड़ना hi बेहतर samjha.....par वो ज्यादा दूर नहीं गया tha.....wo मधु के घर के पास hi गाडी में बैठा tha....aur नज़र रखे था......

रात भर वो वही रहा......

वही दूसरी तरफ.....

पुजारी जी ने स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये सभी को उनकी और बाकी के निक्स जो उनके साथ स्ट्रेंज वर्ल्ड छोड़ के आ गए the.....unn सब के तरफ से जवाब दे दिया tha......haa सारे के सारे उस जवाब से संतुस्ट नहीं the......par पुजारी जी इस बात को अच्छी तरह से जानते थे.....

और उन्होंने इस बात की पूरी तरह से तयारी भी कर ली thi......unhone अपने लोगो से ये बोल दिया tha......ki उन् सब से अगर कोई कुछ पूछे तो वो बस सच hi bataye.....kisi को भी बेमतलब की कहानिया बनाने की जरुरत नहीं hai.......jaisa सवाल पूछा जाए उन् सब का पूरी सचाई और ईमानदारी से जवाब देना है.....

सो जब स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए लोग उन् सब से सवाल पूछने गए तो उन् सब ने उन्हें सच bataya......ki कैसे अब वो जगह उनके लिए सही नहीं रही थी.......

वो निक्स hai.....aur उनके लिए सबसे ज्यादा जरुरी पानी hai......aur वह का पानी अब सही नहीं रहा.....

और भी बहुत सी baatein.....jo सच thi.....par ये भी tha....unn सब में से किसी ने भी किताब के बारे में कुछ भी नहीं kaha......kyunki ये नियम है उनका......

वो नहीं बता सकते अपने पवित्र किताब के बारे mein......haa पर कुछ निक्स होते hai.....jo इन् नियमों को ना मानते hue.....apne मैं की करने लग जाते hai....par एअर्थ पे जितने भी निक्स the.....unn सब में से वैसा कोई भी नहीं tha......kyunki नियम ना मैंने वाले सारे के सारे स्ट्रेंज वर्ल्ड में hi रह गए थे......

क्यूंकि उस वक़्त पुजारी जी वह से जा रहे the....to अब वह पे कोई होगा नहीं जो उन्हें नियमों का पालन karo......ye karo.....wo मत karo.....ye साड़ी बातें समझाए....

इस तरह से भी जब स्ट्रेंज वर्ल्ड से आये हुए लोगो को वैसे वाले जवाब नहीं मिले जिनकी उम्मीद लेके वो वह पे आये the.....to वो सब वह से जाने के लिए तैयार the......par....

उन् सब में से एक बाँदा tha......wahi निक्स समुदाय के पड़ोस के कबीले wala.......usne किसी और से बात करने के बारे में ना तो सोचा tha.....aur कोशिश करना तो दुर्र की बात हो गयी.....

वो वापस से पुजारी जी से बात करने की कोशिश में लगा हुआ tha.....par पुजारी जी पता नहीं क्यों उससे मिलना नहीं छह रहे the.....par आखिर mein.....usne पुजारी जी को खुद से बात करने के लिए मन्ना hi लिया.....

हुआ कुछ ऐसा की जब पुजारी जी अकेले the.....tab वो उनके पास gaya....aur उनसे कुछ ऐसी बातें कहने लग gaya......jisse सुन के पुजारी जी थोड़े उदास हो गए और परेशां भी.....

मन्ना पुजारी जी ने स्ट्रेंज वर्ल्ड छोड़ दिया tha.....par वो अपने लोगो के प्रति अपनी उस लगाओ को नहीं छोड़ पाए थे.....

जब उनके सुनने में आया की आज कल वह के निक्स समुदाय के लोग बीमार रहते hai.....waha पे जैसे कोई महामारी सी चल रही hai.......ajeeb अजीब सी चीजजें हो रही है वह पे.....

पुजारी जी - मैं जानता tha....ki ऐसा hi कुछ hoga.....issi वजह से मैंने उन् सब को वह से यहाँ आने के बारे में बोलै tha......par वो नहीं maane.....kuch ऐसे the....jinko हमारे देवता की फिकर हूँ रही thi......aur कुछ ऐसे the....jo बस मेरे वह से चले जाने से कुश थे.....

वो - आप जानते the.....to फिर आप वह से यहाँ क्यों आ gaye.....aapne वह पे रहके उनको समझने की कोशिश क्यों नहीं की सायद वो समझ जाते......

पुजारी जी - अगर मैं ये करने को वह रुकता तो आज साड़ी की साड़ी निक्स सभ्यता वही पे उस विनाश का हिस्सा बन jaati......mujhe जितना हो सक्के उतने लोगो को वह से यहाँ लाना thaa.......taaki उन् सब को बच्चा सक्कु......

वो - पर अब जब वो सब यहाँ आ चुक्के hai.....to आपको वापस वह जाने में क्या परेशानी हो रही hai......kya आप वह नहीं जाना चाहते अपने लोगो को बचने के लिए.....

पुजारी जी - तुम इस बात को नहीं समझ paaoge.......ab वो सब निक्स नहीं रहे.....

वो - निक्स नहीं rahe.....isse क्या मतलब है आपका......

पुजारी जी - कुछ बातें ऐसी hai......jo मैं किसी बाहर वाले को नहीं बता सकता.....

वो - आपको बताना hi hoga.....aap नहीं jaante.....jab से आप वह से यहाँ आये hai......hamare कबीले पे छोटे छोटे हमले होने शुरू हो गए है....

पुजारी जी - इसका मुझसे क्या लेना देना hai......tumhare कबीले पे हमले हो रहे hai....to तुम्हे उन्हें सबक सीखने के बारे में सोचना चाहिए....

वो - हमारे कबीले पे हमला करने वाले कोई और nahi......aapke निक्स है जिन्हे आप वह छोड़ आये ho.......aur मैंने जो आपको उनके बारे में बताया ये इस वहज से हो सक्का क्यूंकि हमारे जसस गए थे वह pe.....aur उन्होंने देखा ये सब......

पुजारी जी - Kya.....baat यहाँ तक पहुंच चुक्की है.....

वो - Haa.....aur मुझे लगता है अब आपको वह पे वापस जाके उनको समझाना चाहिए की वो ऐसा ना kare......nahi तो हममे भी.....

पुजारी जी (कुछ सोचते हुए) - जहा तक मुझे याद hai......pichli बार तुम्हारे कबीले ने हमपे हुम्ला करने का मैं बना लिया tha....aur कर भी देते अगर सही वक़्त पे हम सही कदम ना uthate.....to इस बार ऐसा क्या हो गया की तुम लोग पीछे हैट रहे ho.....aur मुझे ये सब बताने आये हो.....

वो - मैं इस बात को अच्छी तरह से जानता hu....ki हमारे सम्बन्धो को आज के हालत तक पहुंचने में सबसे बड़ा हाथ हमारी hi रहा hai.....par मैं आगे का सोच रहा hu.....aur इसी वजह से आपके पास आया hu.....agar आप मेरी बात मैं लेते ho....aur उन् सब को समझने में कामियाब हो जाते ho....to सायद हम पहले की तरह दोस्त बन सकते है.....

पुजारी जी - मेरी बात sunno.....Jaisa मैंने kaha....ab वो सब निक्स नहीं rahe......wo मेरी बात नहीं सुनने wale.....wo मुझे मारना चाहते hai.....aur इसके लिए वो सब यहाँ पे भी आये the.....par मैं बच्च gaya.....aur रही बात tumhari....to ये बातें जो मैं बताने जा रहा hu.....isko ठीक वैसे hi karna.....jab भी हमला करना ho.....aag का सहारा lena......agar खुद का बचाव करना हो तो भी आग का सहारा lena......iss वक़्त बीएस आग hi है जो उन्हें रोक सकता hai...aur उन्हें हरा सकता है.....

वो - क्या आप मुझे अपने hi लोगो को मारने का तरीका बता रहे है......

पुजारी जी - मैंने तुमसे पहले भी kaha.....ki वो सब अब निक्स नहीं rahe.....agar थोड़ी सी भी उम्मीद बाकी होती तो मैं इस वक़्त वह पे hota....unke साथ.....

वो - मैं उनपे हमला नहीं करने wala......haa अपने बचाव के लिए आपने जो बताया उसका उपयोग जरूर karunga....par हमला nahi......aur एक baat.....kabhi भी किसी चीज़ज़ के लिए उम्मीद ख़तम नहीं होती.....

यहाँ ये सब हो रहा tha.....wahi दूसरी तरफ कुछ log......Madhu के घर के पास इकठा होते जा रहे थे......

मधु इस बात से पूरी बेखबर thi......par गोल्डन पावर नहीं......

मधु जिसने सोच लिया था की वो पता लगा के hi रहेगी आखिर उसके साथ क्या गलत hai......aakhir क्यों उसको याद नहीं की कब उसने उन् सब को बुरी तरह पीट दिया......

मधु ने ये पता लगाने के लिए सबसे पहले ये सोचा की अगर वो ये बात पता कर सकती है की ऐसा कब कब होता hai.....to सायद वो ऐसा होने से रोकने में खुद की मदद कर paayegi.....aur इसके लिए उसको कामर्स की जरुरत थी.....

ये कैमरा वाला आईडिया उसके दिम्माग में इस वजह से आया क्यूंकि इन्ही कामर्स की वजह से उसको पता चला था की वो खुद से काबू खू देती hai.....to उसने आज सुबह में कुछ कामर्स मंगवा लिए the...aur उन् सब को घर पे hi लगा लिया tha....aur वो इन् सब में इतनी बिजी हो गयी थी......

की उसने कॉलेज के बारे में सोचा hi nahi.....waise ये सब बस बहाना tha.....wo अभी नहीं जाना चाहती थी कॉलेज क्यूंकि वो नहीं चाहती थी की उसके वजह से किसी को बेमतलब की छूट lage.....khaskar किसी ऐसे को जो उसका अपना हो....

उसने कामर्स लगा liye.....aur अब बस बैठी हुई hi thi.....ki तभी उसका फ़ोन बजा

फ़ोन उसकी बहन का tha.......wo उसको बार बार फ़ोन किये जा रही thi.....par मधु थी की फ़ोन नहीं उठा रही थी.....

मधु ने इस बार भी नहीं uthaya.....to वह से उसने कुछ मैसेज किया....

अब मधु इससे पहले की वो मैसेज padhti....kisi ने उसके घर का दरवाजा नॉक किया....

प्रतीक कल पूरी रात मधु के घर के बाहर hi tha......aur जब उसने देखा की वो आज सुबह भी कॉलेज के लिए नहीं nikli....to वो थोड़ी देर के लिए वह से निकल गया और होटल में चला गया था.....

अब मधु ने जैसे hi घर का दरवाजा khola.....saamne से किसी ने उसके चेहरे पे कोई चीज़ स्प्रे कर di......jisse मधु बेहोश हो गयी......

वो बेहोश hui....uske कुछ hi देर बाद उसके घर में एक एक करके बहुत से लोग अंदर आने लग gaye......pahle उन् सब ने पुरे घर को dekha.....koi और तो नहीं रहता वह पे उस बात का जायज़ा liya.....jab वो संतुस्ट हो gaye.....to फिर सभी एक जगह पे वापस aaye.....tab तक उनमे से एक ने मधु को उठा के उसके बैडरूम में पंहुचा दिया tha.....par वो वापस नहीं आया अंदर से....

"साला अभी से शुरू हो गया वो...."

"यार एक बात तो batao.....isko पता था kya....ki हम आने वाले hai....jo इसने इतने सारे कामर्स लगा के रखे है...."

"Cameras.......kya बात कर रहे ho......bsdk....saaree कामर्स बंद karo.....aur अभी तक जो भी रिकॉर्ड हुआ hai.....sab डिलीट karo....bsdk पहले नहीं बोलै गया तुझसे..."

"मुझे लगा हम उसकी फिल्म भी बनाएंगे ना...."

"बसड्क टुन्ने मास्क पेहेन रखा है kya......yaa यहाँ से जाते hi प्लास्टिक सर्जरी करने का इरादा है tera.....jail नहीं जाना मुझे..."

वो सारे लग गए सारे कामर्स बंद करने mein.....bahar के सारे तो बंद कर दिए थे उन्होंने par.....bedroom में कोई नहीं गया था अभी tak......jab उसमे से किसी एक ने बैडरूम का दरवाजा नॉक kiya....camera के बारे में बताने के liye....to...darwaja खुला हुआ hi tha....par अंदर जो था उसको देख वो भाग गया.....

"अरे bhoot.....hai.....bhoot है ye....bhago..."

"क्या hua.....kya बोले जा रहा है...."

"wo.....wo.....wo हवा mein.....hawa में बैठी हुई है....."

"Kya....tu क्या नशा करके आया है क...."

वो पूरी बात बोलता उससे पहले hi बैडरूम में से मधु बहार aayi.....wo हवा में तैर रही thi.....par उसकी आँखें बंद thi......aisa लग रहा था जैसे बेहोश हो वो....

उसको देखने के बाद सारे डर gaye....aur जो गेट के पास tha....wo तुरंत वह से भागने का सोचने लग gaya....ki तभी....

तभी उसके सामने वो बाँदा आके गिरा जो मधु को उठा कर लेके गया था....

उसको वैसे गिरते देख वो सब दर gaye.....bahut ज्यादा दर गए.....

यहाँ ये सब चल रहा tha.....Madhu की बहन उसको फ़ोन करते करते हार गयी thi.....phir उसको याद आया की प्रतीक को पता होगा उसका एड्रेस तो उसके प्रतीक को कॉल किया.....

प्रतीक इस वक़्त होटल में tha...aur अभी अभी नाहा के बहार आया था.....

उसने देखा की फ़ोन किसका है....

प्रतीक - मैं आज नहीं आ पाऊंगा college.....tum दोनों खुद का ध्यान रख lena....aur किसी मुसीबत में मत पद जाना....

"प्रतीक वो सब मधु के घर पे गए hai......hum वही जा रहे hai.....tum भी आ जाओ..."

प्रतीक - कौन गया है उसके ghar....kya बात कर रही हो अच्छे से बताओ....

फिर वो बताती है की कल जिसको मधु ने मारा था वो वह के किसी स्टूडेंट लीडर का भाई tha....to अब वो सब उससे बदला लेने जा रहे है....

प्रतीक ने जैसे hi ये सुन्ना उसने तुरंत कॉल कट कर diya....aur तुरंत अपने रूम में hi एक पोर्टल खोला और मधु के घर पे पहुंच गया.....

सायद देर हो चुकी थी....

मधु वह पे हवा में उड़द रही thi....behosh hi thi....aur अस्स पास माचिस के तिल्लियों की तरह लोग बिखरे पड़े हुए थे.....

प्रतीक ने सबसे पहले तो आस पास फिकले हुए गोल्डन पावर को एक जगह इकठा करना शुरू kiya...taaki वो बहार ना जाए और उसका पता किसी और को ना लगे....

उसके बाद उसके मधु को chuwa....aur चुनने के बाद hi मधु के ऊपर जो गोल्डन पावर का असर था वो काम हो gaya....aur वो धीरे धीरे निच्चे आने लग gayi.....wo गिर जाती अगर प्रतीक उसको पकड़ता नहीं......

प्रतीक ने उसको पकड़ा aur.....phir ओल्ड आउल को वह पे बुलाया....

ओल्ड आउल वह पे तुरंत आ गया था.....

ओल्ड आउल - Hmmm....kya हुआ....

प्रतीक - ये जो लोग पड़े हुए hai.....inn सब को इनके घर पंहुचा दो इनको ठीक कर कर ke.....aur सुनने हो सक्के तो इनकी यादास्त भी देख लेना thoda.....sayad इन्होने मधु को ऐसे हवा मेंउड़ते हुए देख लिया है.....

ओल्ड आउल - Par....ye सब....

प्र्रतीक - अच्छा एक और बात पता है जब यादास्त के साथ तुम छेद चढ़ करने hi वाले हो तो इन् सब के दिम्माग में कुछ चीजजें डालनी भी hai.....tum काम शुरू karo....details मैं तुम्हे आके बताता hu.....ye सच में भरी हो गयी है पहले से....

प्रतीक ये सब बोलते हुए मधु को उसके कमरे में लेके gaya.....aur उसपे मैजिक से उस बेहोश करने वाले दवा का असर बहुत कम् कर diya....ab हालात ऐसे थे की वो बस नींद में थी....

प्रतीक बहार आ hi रहा था की उसको कैमरा दिखा वह pe....usne कैमरा dekha....aur उसमे वो सब देखा की कैसे उसको रूम में लाया गया tha....aur उसके बाद कैसे गोल्डन पावर ने अपना काम किया....

प्रतीक ने वो सब डिलीट कर diya...aur खुद वह से निकल गया.....

बहार ओल्ड आउल के लोग वह पे आये हुए the....aur वो सब उन् लोगो को संभल रहे थे....

प्रतीक - ओल्ड Owl.....sunno इन् सब की यादें मिटने के baad.....inke दिमाग में ये भर दो की इन् सब ने कुछ लोगो का खून किया hai....aur पुलिस इन् सब के पीछे पड़ी हुई hai......wo भी बहुत बुरी तरह se......ye इतने डरने चाहिए की ये दिन के उजाले में कभी बहार आने से दर्रे.....

ओल्ड आउल ने वैसा hi कर दिया.....

उसके बाद ओल्ड आउल ने उन् सब को अलग अलग जगहों पे ऐसे छोड़ दिया जैसे की वो सब वह पे छुपने के लिए hi गए थे.......

अब ये सब हो hi रहा था की तभी वापस से घर का दरवाजा नॉक hua.....Prateek ने तुरंत से पोर्टल खोला और घर के बहार चला gaya....usko पता था कौन आने वाला है वह pe.....wo बहार गया और उसके बाद वो भी वह पे आ गया कुछ सेकण्ड्स mein.....darwaje के पास खड़ा हो गया.....

प्रतीक - सब ठीक तो है ना......

मधु सीस1 - पता nahi.....ye दरवाजा नहीं खोल रही hai.....kya हम पुलिस को फ़ोन करे.....

मधु सीस2 - हां मुझे भी यही लगता है.....

प्रतीक - दरवाजा नहीं खोल रही इस वजह से पुलिस को कॉल किया तो वो हममे पकड़ lenge....tum ृकक्को....

प्रतीक को पता था मधु बस सो रही thi....to उसने 3-4 बार और नॉक किया ज़ोर ज़ोर se....aur जैसा उसने सोचा tha....Madhu की आँख खुल गयी और वो निच्चे आ गयी दरवाजे के पास.....

पर तभी उसको याद aaya....ki वो तो पहले भी यहाँ पे आयी थी कुछ देर pahle...aur फिर वो ये समझने की कोशिस करने लगी की आखिर वो सोने कब गयी थी....

इतने में वापस से दरवाजा नॉक hua....aur फिर मधु ने दरवाजा खोला.....

दरवाजा खुलते hi....tinno घर के अंदर आ गए.....

उन् दोनों ने तो मधु को पकड़ hi liya.....tum ठीक हो naa.....sab ठीक है ना यहाँ पे....

मधु जो पहले से hi कंफ्यूज thi....usko अब बिलकुल भी समझ नहीं आ रहा था आखिर हुआ क्या hai.....aur हो रहा है....

आज के लिए इतना hi.....
 
अपडेट - 128

मधु इन् सब से परेशां हो गयी thi.....usko अब यकीं हो गया था की उसके साथ कुछ ना कुछ तो गड़बड़ hai....aur इसी वजह से उसने ये तय कर लिया की वो अभी लोगो से दुरी बनाये rakhegi......unn लोगो से जो उसकी फ़िक्र करते थे......

मदु के साथ ये सब हप रहा था वही निकिता का भी कुछ ऐसा hi हाल था.......

उसने शुरू में खुद को अपने पिता से मिलने के लिए कर उनकी बातें सुनने के लिए तो मन्ना लिया tha......par सायद वो सच में तैयार नहीं थी इसके लिए.....

अब जब उसको और वक़्त मिला इस बारे में सोचने के liye.....aur उसने इस मुद्दे पे बात भी करि लोगो se.....to उसको लगा की वो उनसे मिलने के लिए तो तैयार thi.....par उनकी बातों को सुनने के लिए नहीं......

वो अपने पिता के पास बस कुछ सवाल लेके जाना चाहती thi.....aur जवाब में बस वही सुन्ना चाहती थी जो उसको सुन्ना था......

जैसे की जो कुछ भी हुआ उसके साथ उन् सब में पूरी गलती उसके पिता की hi hogi.......par अब वैसा नहीं था.....

जिस दिन उसको लीडर से मिलना tha.....uss दिन लीडर उसके सामने से बिन्ना कुछ कहे चला गया तो वो सोचने लगी इन् सब के बारे mein.....aur उसने तय किया की अब वो सब कुछ सुनेगी और उसके बाद सोचेगी की उसको क्या करना चाहिए....

आज सुबह hi निकिता ने पंकज को कॉल किया और उसको लीडर के पास चलने को बोलै....

पंकज इन् सब में फसना नहीं चाहता tha.....wo जानता था की यहाँ पे जो hoga.....wo उसके बिच में फास जाएगा और फिर आगे भी इन् सब के चक्कर में पिस्ता चला jaayega......ye सब उन् दोनों के परिवार की बात thi......Pankaj को इसमें नहीं आना था.....

पर जब पंकज ने ध्यान से socha.....to ये उसके लिए एक इनविटेशन tha.....Nikita के तरफ से.......

उसने सोचा की निकिता को अगर किसी को ले जाना hi था तो वो प्रतीक को ले जा सकती थी, रूपल दीदी भी थी या बाकी सब क्यों nahi.....usne पंकज से hi क्यों बोलै.......

तो पंकज ये सब सोच कर एकदम से खुश हो गया tha.....aur उसने लीडर से बात कर ली थी......

लीडर की जब पंकज से बात हुई और उसको पता चला की निकिता उससे मिलने आना चाहती hai.....to वो खुश हो gaya......wo इस वक़्त का इंतेज़्ज़र कर रहा था......

लीडर अब एअर्थ पे hi रहता था तो उसने यहाँ पे गुरूजी की और दक्ष मां की मदद से खुद को सेटल करना शुरू कर दिया था......

लीडर लड़ाई के मामले में बहुत अच्छा tha......binna पावर्स उसे करे हुए भी वो बहुत अच्छे से हथियारों का उसे कर लेता tha.....bas इसी के बदौलत उसने एक सिक्योरिटी एजेंसी में ट्रेनर की नौकरी पा ली थी...

आज उसने निकिता से मिलने के लिए हाफ डे ले लिया tha......aur इस बार किसी जंगल में मिलने न बुला कर उसने निकिता और पंकज को अपने ऑफिस के पास के एक होटल में बुलाया था...

लीडर चाहता था की उसकी बेटी को पता चले वो अब उसके साथ रहने के लिए hi आया hai.....aur साथ में उसकी और अपनी जरूरतों को पूरा करने का भी बंदोबस्त कर रहा है.....

दोपहर का वक़्त था और निकिता और पंकज उस होटल में पहुंच gaye......chuki दोपहर थी तो ज्यादा भीड़ नहीं थी वह pe......Lunch ऑवर अभी कुछ देर पहले hi ख़तम हुआ था तो अस्स पास के ऑफिस के लोग भी जा चुक्के थे अपने काम पे....

निकिता पंकज के साथ उस होटल में pahuchi.....usne देखा की लीडर कोने के एक टेबल पे बैठा हुआ है......

दोनों वह उसके पास गए......

जब लीडर ने निकिता को देखा तो वो कुछ बोल नहीं पाया और निकिता कुछ बोलना नहीं छह रही thi.....to एकदम से चुप्पी छ गयी वह pe.....iss वजह से पंकज ने चुप्पी थोड़ी.....

पंकज - कैसे है आप.......

लीडर - haa.....Main ठीक hu......tum कैसे हो......

पंकज - हम भी ठीक hai.....waise आज आपने इस जगह पे ??

लीडर - ये जगह अच्छी hai......main पिछले कुछ दिनों से यहाँ आ रहा hu....to मैंने सोचा की निकिता से यही पे मिलना सही होगा....

पंकज कुछ बोलने वाला था की निकिता बिच में बोली.....

निकिता - तुम्हे पता hai.....ki हम यहाँ पे क्यों आये hai.....ab मुझे अपनी बात batao....kya बताना चाहते थे तुम मुझे.....

पंकज - निकिता ये तुम्हारे....

पंकज अपनी बात पूरी करता उससे पहले hi निकिता ने उसको चुप करा दिया....

लीडर - Hmm...theek hai.....par rukko.....pahle कुछ आर्डर कर लेते hai....nahi तो वेटर यहाँ आता रहेगा और हमारी बात बिच में रुक जाती रहेगी....

निकिता ने वेटर की तरफ dekha....to वो वही आ रहा था उसके टेबल के pass.....to उसने भी सोचा ये सही होगा......

निकिता - ठीक है....

पर उसने आर्डर नहीं किया कुछ मेनू पंकज की तरफ बढ़ा दिया और उसको आर्डर करने को बोल दिया......

पंकज ने निकिता की तरफ dekha....aur फिर लीडर की taraf.....phir वो समझ gaya.....ye उसको hi करना hoga.....to उसने ज्यादा ना सोचते hue.....kuch चीजजें आर्डर कर दी....

वेटर चला gaya......aur एक बार फिर से शांति चा gayi.....iss बार इस वजह से क्यूंकि दोनों पंकज को देखे जा रहे थे......

पंकज ने जब ये देखा तो उसको बड़ा अजीब laga....aur उसने मेनू को दोनों के बिच में रख के पूछा....

पंकज - आप दोनों को कुछ और भी चाहिए तो बता दो.....

निकिता - :सिघ: इतना खाना हम तिण्णो नहीं खा पाएंगे.....

लीडर - मुझे इसके बाद ऑफिस भी जाना है....

निकिता - tum....aur ऑफिस...

लीडर कुछ बोलना चाहता tha......par उसने कुछ सोच के चुप रहना hi सही समझा.....

पंकज - ठीक hai.....ab आप लोग अपनी बातें शुरू करो.....

लीडर ने अपनी पूरी कहानी निकिता को बताना शुरू kiya......Kaise लीडर को लगा की उसको और भी ताकत chahiye.....aur फोमोस ने उसको क्या ऑफर दिया tha......aur उसके बाद कैसे फोमोस ने अपनी वो शर्तें राखी जिसके कारण उसको निकिता की माँ से दूर होना पड़ा था.....

साथ में वो सब भी की कैसे वो अपनी बेटी की तलाश किये जा रहा था इतने वक़्त tak.....par वो कामियाब नहीं हो सक्का......

लीडर की ये कहानी पंकज को पहले से मालुम thi.....par निकिता को साड़ी बातें पता नहीं थी.....

उसने ये सब सुन्ना तो उसको बुरा laga......jaisa उसने सोचा था की उसके साथ जो कुछ भी हुआ hai.....unn सब में बस लीडर की गलती नहीं thi......haa गलती थी कही कही par.....lekin लीडर मजबूर भी था.....

पंकज ने ज्यादा कुछ नहीं सोचा और उसने लीडर से बोलै.....

पंकज - ये सब जो कुछ भी hua......main ऐसा नहीं कहूंगा की इसमें आपकी गलती नहीं thi....par फिर आपने कोशिश kari.....aapne निकिता को ढूंढने की कोशिश kari....ye अच्छी बात थी.....

निकिता को पंकज की बात सही नहीं lagi.....aur ना hi लीडर को......

निकिता - कोशिश kari.....to इसमें क्या अच्छा काम किया isne.....mujhe ढूंढना इनकी जिम्मेदारी thi......ye कोई अच्छा काम नहीं था....

लीडर - Haa....main खुद को हर रोज़ज कोष्टा tha.....ki मेरी वजह से मेरी bacchi......pata नहीं किन्न हालातों में होगी.....

पंकज चुप हो gaya.....usko लग रहा था की सायद उसके ये बोलने से उन् दोनों को अच्छा lagega.....par यहाँ पे तो बात hi अलग हो गयी.....

निकिता - आप खुद को कोश्ते थे या nahi...isse मैंने जो सब सहा है वो वापस तो नहीं हो jaayega......naa hi माँ वापस आ जायेगी.....

लीडर के पास इसका कोई जवाब नहीं था......

निकिता - अब आप यहाँ आये ho......kis वजह se.....kya चाहते हो आप....

लीडर ने भी सायद ध्यान नहीं दिया था की निकिता ने उसको तुम से आप कहना शुरू कर दिया था.....

लीडर - Main....main बस तुम्हारे साथ रहना चाहता hu......kya....kya तुम मेरे साथ रहना पसंद करोगी.....

निकिता ने इस बात का कोई जवाब नहीं diya......unnn सब का खाना हो चुक्का tha.....aadha खाना पंकज ने खाया था......

जब लीडर ने देखा की निकिता कोई जवाब नहीं दे रही hai....to उसने कहा.....

लीडर - तुम्हे अगर और वक़्त चाहिए to....koi बात नहीं hai.....tumhe जितना वक़्त लेना है lo.....Maine अब यही पे रहने का सोच लिया hai....Yaha रहूँगा तो तुम सब से मिल भी सकूंगा.....

निकिता ने उसकी बात सुन्नी और फिर वह से उठ के चली gayi.......Pankaj अभी वही पे बैठा था.....

पंकज - ठीक hai....main भी चलता hu.....agar किसी चीज़ की जरुरत हो तो बता देना.....

लीडर - अपने पिता को मेरी तरफ से धन्यवाद् kahna......agar उन्होंने पेपर्स में मदद नहीं करि होती तो सायद मेरी यहाँ पे नयी पहचान नहीं बन paati....aur मुझे अभी भी चुप के रहना पड़ता....

पंकज - हम्म पापा ने बताया tha....waise आपको ट्रेनर की जॉब करने की जरुरत नहीं hai.....aap कुछ और भी....

लीडर - nahi.....abhi के लिए ये सही hai.....aage अगर कुछ होता है तो देखा jaayega.....tum jaao......aur उसका ध्यान रखना.....

पंकज - हम्म ठीक है....

पंकज वह से बहार आया तो निकिता वही गेट पे कड़ी उसका वेट कर रही थी.....

निकिता - क्या बात कर रहे थे वह pe......tumhe मेरे साथ hi बहार आ जाना चाहिए था....

पंकज - Wo...kyun.....Main तुम्हारे साथ आया tha.....par तुम्हारे साथ जॉन ये जरुरी तो नहीं ना.....

निकिता - Haa.....theek hai....phir रहो यही पे.....

इतना बोल वो वह से जाने लगी....

पंकज भी उसके पीछे हो liya.....wo कुछ सोच रहा था.....

पंकज - Nikita.....nikita....sunno to.....Mujhe तुमसे कुछ पूछना है.....

निकिता - अब मेरे पीछे क्यों आ रहे ho....tumhe तो यही रहना था ना.....

पंकज - अभी तो बोलै मुझे तुमसे कुछ पूछना है......

निकिता - हां बोलो....

पंकज - Nahi....main बस सोच रहा tha...ki तुम मुझे अपने पापा से मिलवाने लेके आयी thi....kya मैं उन्हें पसंद आया होऊंगा.....

निकिता को शुरू में पंकज की ये टेढ़ी बात समझ में नहीं aayi.....to उसने बिना कुछ सोचे बोल दिया.....

निकिता - Pasand......tum hi थे naa.....jisko उन्होंने सब कुछ बताया tha......aur तुमने मदद भी करि थी तो पसंद तो करेंगे hi......

पंकज - हम्म मतलब एक तरफ से सब क्लियर है.....

निकिता - क्या क्लियर hai....kya बोले जा रहे हो....

पंकज - कुछ nahi.....chalo चलते है वैसे भी मुझे मधु के पास जाना hai.....wo बता रही थी की उसकी तबियत ख़राब है.....

निकिता को समाज में नहीं आया कुछ और वो चली गयी वह se......par वो पंकज के बातों के बारे में भी सोच रही थी......

वही यहाँ से दूर मधु आज भी अपने घर में अकेली बैठी thi......jaisa की उसने सोचा था की वो अभी बस खुद के साथ क्या हो रहा है उसका hi पता लगाएगी.......

पर उसने जो कैमरा वाला तरीका अपनाया था वो तो शुरू होने से पहले hi बिगड़ गया tha.....to उसने वापस से कैमरा का सोचा hi नहीं......

उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था तभी उसकी बहन का कॉल आया......

वो - तुम आज भी कॉलेज नहीं आयी.......

मधु - Wo.....meri तबियत ठीक नहीं है.....

वो - क्या हुआ है तुम्हे अच्छे से batao.....ek तो तुम इतना दूर रहती ho......pata नहीं खाना वन कहती भी हो या nahi......aaj चाचा जी तुम्हारे बारे में पूछ रहे थे......

मधु - Papa.....mera मतलब hai...Dean सर मेरे बारे में क्या पूछ रहे the.....wo अब ठीक है ना.....

वो - वो ठीक है तुम्हे उसी दिन बताया tha......wo हमसे पूछ रहे थे की तुम ठीक तो ho.....uss दिन तुमने जीन लड़को को मारा था ना उनमे से एक सूडेन्ट लीडर का भाई tha.....aur तुम अभी कॉलेज आ नहीं रही तो वो थोड़े चिंतित थे......

मधु - दरअसल मुझे कुछ हो गया hai......par मुझे समझ नहीं आ रहा की क्या हुआ है.....

वो - Kya....kya.....kya.....

मधु - मुझे लगता है की मुझे कुछ तो हुआ hai.....par क्या हुआ है ये समझ नहीं आ रहा.....

वो - तुम डॉक्टर तो हो नहीं की तुम्हे सब समझ आ jaayega....tumhe किसी डॉक्टर के पास जाना chahiye.....wo बताएँगे ना तुम्हे की तुम्हे क्या हुआ hai......main जानती हु एक डॉक्टर को तुम कहो तो....

मधु - Hmm.....doctor के pass....tumne सही kaha......mujhe वही जाना chahiye.......theek है मैं रखती हु....

बिन्ना कोई जवाब सुनने उसने कॉल रख दिया और वो चल पड़ी.....

अभी कविता बुआ स्कूल में thi.....wahi अपने हॉस्पिटल में किसी चीज़ के बारे में पता लगा रही थी की वह पे मधु पहुंच गयी......

मधु - क्या आप फ्री ho.....mujhe आपसे बात करनी है......

K.Bua - अरे Madhu.....tum....tum यहाँ कैसे.....

मधु ने K.Bua को सब कुछ बता diya....jo भी उसके साथ हो रहा था......

K.bua को कुछ कुछ बातें तो पता थी की वो सब सही hai.....par वो मधु को ये बता नहीं सकती की वो सब सपना नहीं था हकीकत में हुआ tha....aur ना hi वो मधु को कोई दवा दे सकती थी जिससे उसकी पावर्स काम हो जाए.....

क्यूंकि उनको पता hi नहीं था की उसपे दवा का कैसा असर hoga......jab से K.Bua ने उसको एल्फ नेशन में वैसे देखा tha.....wo चौक गयी thi....waise उन्होंने पहले भी ये सब देख रखा था पर उस वक़्त बात कुछ अलग hi थी.....

K.bua - मधु मुझे तुम्हारी परेशानी मानसिक लग रही hai......ye शारीरिक नहीं lagti....tumhe सपनो और हकीकत में फर्क करने में परेशानी हो रही hai.....mujhe लगता hai......tumhe किसी मनोचिकित्सक के पास जाना चाहिए.....

मधु - Manochikitsak.....wo क्या करेंगे.....

K.bua - वो तुम्हे समझने की कोशिश करेंगे और उसके बाद तुम्हे तुम्हारी बीमारी और उसका इलाज बताएँगे.....

मधु - हम्म क्या आप जानते हो किसी ऐसे को.....

K.Bua - Haa....par वो इंसान hai.....agar तुम कहो तो.....

मधु - Par....wo इंसान क्या मेरी बातों को समझ पाएंगे.....

K.Bua - अरे तुम्हे नहीं पता वो मनोचिकित्सक कैसे होते hai......wo तुम्हारी इन् समस्याओं को एक कहानी की तरह समझेंगे और फिर उसी कहानी के हिसाब से तुम्हे इलाज भी बता देंगे.....

K.Bua को समझ में आ रहा था की ये सब उसके साथ क्यों हो रहा hai.....aur वो उसको इसी वजह से मनोचिकित्सक के पास भेजना छह रही थी.....

मधु ने इस बारे में socha....aur उसने K.bua को हां kardi......phir वो वह से आश्रम की तरफ निकल ली......

मधु के वह से जाने के बाद K.bua ने तुरंत प्रतीक को कॉल किया....

प्रतीक - हां बुआ....

K.bua - कहा हो तुम.....

प्रतीक - वो कुछ चीजजें सेट कर रहा hu.....kya बात है.....

K.bua - तुझे मधु का ध्यान रखने के लिए बोलै था ना पुरजी जी ne......wo अभी मेरे पास आयी thi.....usko लग रहा है उसको कुछ हो गया है.....

प्रतीक - अच्छा वो आज आपके पास आयी thi......kya कहा आपने उसको.....

K.bua - उसको किसी मनोचिकित्सक के पास जाने को बोलै hai......tumhe उसका ध्यान रखना चाहिए....

प्रतीक - बुआ आप मानोगी nahi......Iss वक़्त भी उसी के लिए काम कर रहा हु main......apko पता चला कुछ दिन पहले उसने स्टूडेंट लीडर के भाई को मारा tha.....ab वो बौखलाया चल रहा hai......usne तो कुछ लोगो को भी भेजा था मधु के pass......unko मैंने संभल liya.....ab इस स्टूडेंट लीडर से बात करने आया हु....

K.bua - मेरी बात ध्यान से sunn......tu जितना काम जादू का उसे वह उनके सामने करेगा उतनी जल्दी निकलेगा....

प्रतीक - हम्म समझ आ रहा है Bua......uske लोगो के साथ मैंने और ओल्ड आउल ने कुछ किया था इस वजह से वो और बौखलाया हुआ hai......usko लगता है इन् सब में बस मधु की गलती hai....issi लिए उसको समझने जा रहा hu.....aur इस बार आपके तरीके से काम करूँगा.....

K.Bua - हम्म ठीक hai...agar कोई हेल्प चाहिए तो बताना....

प्रतीक - ठीक है बुआ.....

प्रतीक इस वक़्त हॉस्पिटल में tha....uss लड़के को देखने आया था जिसको मधु ने मारा tha......usko देखने नहीं बल्कि उसको देखने आये हुए उसके भाई से बात करने आया हुआ था......

प्रतीक उसके पास जाता hai.....aur उसको बहार आने के लिए बोलता है.....

वो बाँदा पहले तो प्रतीक को देखता hai.....uske बाद प्रतीक के हाथ में जो फ़ोन था उसको देखता hai.....aur उसमे जो फोटो थी उसको bhi.....aur वो फोटो देख के उसके पसीने निकल जाते है.....

वो तुरंत वह से प्रतीक को बहार लेके जाता है.....

"ये तस्वीर तुझे कहा से milli.....kaun है तू...."

प्रतीक - sunno...main कौन hu.....kya hu.....main ये बताने नहीं आया हु यहाँ pe.....to अब जब तक तुम सही सवाल नहीं puchoge.....mujhe नहीं लगता मुझे कुछ बोलने की जरुरत है.....

"क्या चाहते हो इस फोटो के बदले.."

प्रतीक - हम्म समझदार ho......jis लड़की ने तुम्हारे भाई को मारा tha.....uski तरफ देखना भी mat....jis दिन मुझे पता चला तुमने उसके खिलाफ कुछ िया hai....uss दिन ये तस्वीर वायरल हो जायेगी.....

"ठीक hai.....main तुम्हारी बात मैंने को तैयार hu.....par...."

प्रतीक - अभी ये पर वॉर करने के हालत नहीं है tumhare.....theek hai.....to इस पर को अपने जगह पे रहने do....aur अपने लोगो से कहो उस लड़की से दुर्र रहने को....

"हम्म"

प्रतीक ने ये मामला संभल लिया tha.....uske हिसाब से तो वो आराम से वह से जाने लग गया.....

उस बन्दे ने प्रतीक को अच्छे से dekha.....usko उम्मीद नहीं थी की कुछ ऐसा होगा....

उसने अपना फ़ोन निकला aur.....apne लोगो को पीछे हैट जाने को कहा.....

वही मधु इस वक़्त आश्रम पहुंची हुई thi.....waha पे उसने सबसे pahle...Pujari जी से बात करने का सोचा.....

वो पुजारी जी के पास gayi.....aur उनको उसके साथ जो हो रहा था वो सब बताया......

पुजारी जी पहले से hi थोड़े परेशां the......baaki के निक्स को lekar......unhone बोल तो दिया था की अब उनका उन् सब से कोई लेना देना नहीं tha......par वैसा नहीं tha.....Pujari जी को आज भी उनकी चिंता thi...lekin अभी के हालत ऐसे हो गए थे ki......wo अभी कुछ नहीं कर सकते the.....bas इंतज़ार कर सकते the....uss आने वाले वक़्त ka....jab सब कुछ ठीक हो जाएगा.....

पुजारी जी - हम्म तो तुम्हे किसी मनोचिकित्सक से मिलना hai.......mujhe लगता है मैं भी किसी को जानता hu.....aur तुम उनसे मिलकर अच्छा महसूस करोगी....

मधु - पर मैंने कविता मिस को बोल दिया hai....ki मैं उनके बताये हुए मंनोचिकित्सक के पास जाउंगी.....

पुजारी जी - अच्छा ठीक hai....main उससे बात करूँगा.....
 
अपडेट - 129

अब तक

मधु को खुद से लगने लग गया था की उसके साथ कुछ तो गलत hai.....par इस बात से उसको उतना मतलब नहीं था जितना की इस बात से की वो अब अपने परिवार वालो के लिए एक खतरा बन सकती hai.......uske दिम्माग में हर वक़्त बस वही सन चलता रहता है जब वो गुस्से में थी और उसने अपने पिता को धक्का दे दिया tha......chahe ये गलती से hi हुआ हो पर हुआ तो था......

अब आगे

मधु के जाने के बाद पुजारी जी ने थोड़ी देर तक ध्यान lagaya......wo कुछ उलझनों में the......unko उनके पिता ने कुछ कार्य सौंपे the......jinn कार्यों को पूरा करने के लिए उन्हें चाहे जो भी करना हो वो वैसा करेंगे ऐसा वचन भी लिया गया था उनसे....

पर उनके अंसार कुछ कर्त्तव्य और भी थे उनके अपने निक्स समुदाय के liye.......aur अभी वो बस इसी दुविधा में the.....ki आखिर उन्हें करना क्या chahiye......kya उन्हें इन् दोनों में से सच में किसी एक को चुनना पड़ेगा......

अगर उन्हें ऐसा करना पड़ा तो ये ऐसा होगा जैसे वो अपने सरीर को दो भागो में बाँट रहे हो......

चीजजें उनकी समझ में नहीं आ रही thi.....issi के बारे में सोचने के लिए उन्होंने ध्यान लगाने का सोचा.....

ध्यान से उठने के बाद उनके चेहरे पे एक अलग hi रौनक सी thi....unhone सबसे पहले तो आश्रम पे गुरूजी से मिलने का socha.....par वो जानते थे की उनके अकेले जाने का ज्यादा फायदा है नहीं......

वही दूसरी तरफ.....

K.Bua लगी हुई थी अपने हॉस्पिटल में.....

मैजिक स्कूल में बहुत से लोग the....jinhe अब मैजिकल मेडिसिन्स में रुच्ची thi....ye सब देखते hue.....K.bua को अब हॉस्पिटल में hi उनको गाइड करने का काम दिया गया tha.....taaki उनसे बाकी सब कुछ सीख सक्के...

अभी K.Bua वही कर रही thi......ki उनका फ़ोन बज्जा

K.Bua - Hello...

................

K.Bua - पर ये सब kaise......tum ठीक हो ना....

..............

K.Bua - देखो आप पास के लोगो को भी इससे खतरा हो सकता hai......meri मानो तो अभी के अभी सब बांध करना होगा waha.....main जितनी जल्दी हो सक्के वह आने की कोशिश करती हु...

..............

K.Bua - हां मुझे पता hai.....par अभी तुम उसके लिए तैयार नहीं ho....main किसी और को लेके आती हु.....

K.bua ने तुरंत कॉल rakha.....aur वो अपने अस्स पास खड़े सारे स्टूडेंट्स को देखने लग gayi.....Unke दिमाग में कुछ चल रहा था पर इसके लिए उन्हें परमिशन लेनी थी.....

K.Bua ने वापस से अपना फ़ोन उठाया और हेडमास्टर को कॉल किया.....

उन्होंने वह के हालत उनको bataye.....sath में उनको उस हालत से निकलने के बारे में अपना सुझाव भी दिया.....

हेड मास्टर को उनकी बात सही भी लगी पर उन्हें इस बात की भी चिंता थी की इन् सब के बाद उनपे ऊपर से दबाव आ सकता hai.....naa सिर्फ स्कूल की मैनेजमेंट बल्कि साथ में स्ट्रेंज वर्ल्ड से भी उनपे दबाव आ सकता है......

लेकिन उन्होंने इस्पे रिस्क लेने का सोचा क्यों की बात बढ़ चुक्की थी......

दरअसल कुछ चीजजें होने लग गयी थी एअर्थ pe........Yaha के स्कूल के hi एक पुराने टीचर हुआ करते the.......jinko एअर्थ के जीवों पे मैजिकल एक्सपेरिमेंट्स करने के लिए निकल दिया गया tha.......unko यहाँ से स्ट्रेंज वर्ल्ड भेजा जाने वाला था पर पता नहीं कैसे वो बचके भाग गया........

इस बन्दे ने उसके बाद जो कुहराम मचाया वो सोफ़िया से काम तो tha......par फिर भी लोगो के नज़र में आ जाए ऐसा था......

K.bua का और उस टीचर का कुछ पुराण chapter भी था.......

एक बार हेड मास्टर ने जैसे hi K.Bua को आगे बढ़ने के लिए परमिशन दे diya......K.bua ने तुरंत hi अपना दिम्माग चलना शुरू कर दिया......

सबसे पहले तो उन्हें उस पुरे जगह को बाकी के जगहों से काटना tha......matlab ना तो कोई वह पे जा सक्के और ना कोई वह से आ सक्के.....

और इस स्टेप के लिए उनको लोगो की जरुरत thi.....aise लोग जो वह जो भी हो उसका समन्ना कर सक्के......

साथ में उन्हें ऐसे लोग भी चाहिए थे जो की उनके साथ उस जगह के अंदर जाए और वह पे जो लोगो के साथ हो रहा था उन् सब को काबू में कर सक्के और रोकक सक्के......

ये साड़ी बातें उनके दीमंगा में चल रही thi.....aur वो उन् लोगो के बारे में भी सोच रही थी जिनको वो लेके जा सकती थी वह pe.......par दिक्कत ये हो रही thi......ki पहले स्टेप को पूरा करने के liye.....yaani के उस जगह को उसके अस्स पास के इलाकों से अलग करने के लिए उन्हें ज्यादा लोगो की जरुरत पड़ने वाली थी......

K.bua - Students......mujhe लगता है आप सब ने कुछ कुछ चीजजें तो सीख ली है यहाँ pe.......kya मैं सही हु ??

K.Bua ने ऐसा पूछा वह पे बैठे स्टूडेंट्स se........ab स्टूडेंट्स ने ज्यादा चीजजें तो नहीं पर कुछ कुछ चीजजें सीख राखी thi.....to उन्होंने भी हां में जवाब दिया.....

K.Bua - हम्म्म मुझे लगा hi tha.......Samples एकता karna......ye काम तो तुम सब को आता hai.....to आज तुम सब के सब अभी से अपनी कीटस तैयार rakhoge.....aur अपने सुइट्स में rahoge.....kyunki आज तुम सब को एक मौका मिलने वाला hai......kuch प्रैक्टिकल करने ka......Kya main.....iske लिए तुम सब पे याक्किन कर सकती हु.....

स्टूडेंट्स को इस सब्जेक्ट में रुच्ची तो thi.....aur इसी वजह से जब K.Bua ने ये सब कहा तो वो सारे एक्ससिटेड हो gaye.....aur तैयारी में लग गए......

K.bua ने जाने से पहले एक बार और सबको अच्छे से बताया की उनके सुइट्स जो उनकी प्रोटेक्शन के लिए hai......wo किसी भी हाल में ख़राब नहीं होने chahiye.......unn सबको अपने सुइट्स अच्छे से पहन के आने थे......

ये सब बोलने के बाद K.Bua वह से निकल पड़ी......

वही दूसरी taraf......Prateek जो की अभी थोड़ी देर पहले उस बन्दे को धमकी देके आया था जिसके भाई को मधु ने मारा था......

मैं आराम से कार चलते हुए वापस आ रहा था की K.Bua का फ़ोन आया......

मुझे लगा सायद वो ये पूछने के लिए कॉल कर रही होगी की मैंने उस लड़के के सामने कोई जादू वगेरा तो उसे नहीं किया.....

मैं - Hello बुआ.....

K.Bua - कहा हो tum.....jaldi से घर आ जाओ....

मैं - क्या hua.....sab ठीक है ना.....

K.bua - तू जल्दी से घर आ ना....

मैं - ठीक है बुआ......

मैंने भी कार की स्पीड बधाई और एक सुनसान से रस्ते के तरफ gaya.....waha जाने के बाद एक पोर्टल खोला और उसके अंदर कार जम्प करा दी......

ये काम पहले ek-do बार और कर चुक्का था main....par इस बार कुछ अलग hua.....yaa सायद मैंने इन् चीज़ज़ों पे पहले कभी ध्यान hi नहीं दिया था.....

यूँ तो पोर्टल के अंदर ज्यादा कुछ नहीं दिखाई देता hai.....par इस बार उसके अंदर जाते hi मुझे कार के मिर्रोर्स में चीजजें दिखाई दी......

एक जगह thi....jaha पे जानवरों के कंकाल पड़े हुए the.....ek दो nahi......bahut saare.....dhyaan से देखने पे उधर इंसानो के भी कंकाल दिखाई दिए.....

इसके आगे कुछ और देख पाटा उससे पहले hi मैं पोर्टल के दूसरे तरफ पहुंच चुक्का था......

मैंने जल्दी से ब्रेक lagaya.....aur वापस से कार के मिर्रोर्स में देखने लग gaya.....aur इन् सब के बारे में सोच hi रहा था की निकिता ने दरवाजा नॉक किया......

निकिता - क्या कर रहे ho.....sab अंदर बुल्ला रहे है तुम्हे.....

मैं जल्दी से गाड़ी से निकला और सबके पास अंदर गया......

K.Bua - आप लोगो में से कुछ लोगो को सायद ये बातें पता hongi.....par कुछ ऐसे भी है जिनको इन् सबके बारे में भनक भी नहीं है......

मैंने देखा वह पे पुजारी ji....Guruji.....P.bua, रूपल दीदी सब मौजूद the.....yaha तक की लीडर भी वह पे था......

K.Bua ने हमारे सामने एक नक्सा rakha.....naksa किसी बड़े से गाओं का tha......unhone फिर हममे प्लान बताना शुरू कर दिया......

K.bua - सबसे पहले तो हममे इस गाओं को बाकी के गाओं से अलग करना hoga......ye आस पास देख रहे ho....yaha पे जंगल hai.....sath में एक नदी भी hai......humme इस तरह से काम करना होगा की कोई एक पंछी तक इस गाओं से बहार ना जा paaye.....chahe फिर वो इस जंगल से hi क्यों ना jaaye.....Prateek इस काम के लिए हममे ओल्ड आउल की भी जरुरत पड़ेगी.....

प्रतीक - हम्म आप चिंता ना kariye....Main इसके लिए सबको बुला देता hu......par हम ये क्यों करने वाले है.....

K.Bua - लम्बी कहानी है प्रतीक इस कहानी को अगर बताने बैठु तो सायद हममे और ज्यादा देर हो जायेगी....

K.Bua की बात सुनके मैंने आगे फिर कुछ नहीं kaha.....aur सीधा ओल्ड आउल, पोलर बेयर किंग और साथ में ज्वाला को भी वह पे बुला लिया......

K.Bua ने उन् सब को उस गाओं के चारो तरफ फैल जाने को kaha....aur साथ में उन् सब को ये भी कहा की किसी भी हाल में उस गाओं से कोई भी बहार नहीं जाना चाहिए.....

इसके बाद K.Bua ने उन् तिण्णो को आगे का कुछ नहीं bataya.....bas उन्हें अपने काम में लग जाने को kaha.....aur वो तीनो भी चले गए......

उनके जाने के बाद......

K.Bua - अब बारी है हम सब ki.....Pujari Ji.....Guru ji.....aap दोनों को गाओं के अंदर चलना होगा हमारे sath......aap दोनों के अंदर इतना एक्सपीरियंस है आप हममे उन् लोगो को समझने में मदद karoge.....rahi बात बाकी sabki....to हमे इस गाओं में इन् इन् जगहों पे जाना hoga......aur हम ये 3 पेयर्स में करने वाले hai.....iss गाओं को हमने 3 पार्ट्स में बाँट दिया hai.....aur उन् 3 पार्ट्स के सेंटर्स में हमारे ये 3 पेयर्स रहने वाले hai.....Mujhe इस बात का पता नहीं है की वह पे हालत कितने परसेंट ख़राब हो चुक्की hai....par मैं ये जानती हु की जितनी होनी चाहिए थी उससे काफी ज्यादा ख़राब हो चुक्की है.....

K.bua ने उसके बाद पेयर्स बनाने शुरू कर diye......pairs में.....

मैं और लीडर the......Nikita और रूपल दीदी the......aur आखिरी का पेअर K.bua और P.Bua खुद थे.....

सब कुछ रेडी था......

मैंने खुद देखा की पंकज वह पे नहीं tha......to मैंने इस बारे में वह पे पूछ लिया.....

K.Bua - उसको मैंने एक अलग काम दिया hai......aur उम्मीद करती हु वो उस काम को सही से कर रहा hoga......warna हालत और ख़राब हो जाएंगे.....

ये सब हुआ उसके तुरंत बाद हम सबको बताये हुए जगहों पे पहुंचना था......

बाकी सब का तो ठीक tha.....waha पे कोई ना कोई ऐसा था जो दूसरे को बता सकता था आखिर हम यहाँ पे करने क्या आये hai.......par मेरा क्या.....

मैं लीडर के साथ tha......Leader जो यहाँ पे बस और बस अपनी बेटी के लिए आया हुआ tha......mujhe पता नहीं इसको यहाँ पे क्या हुआ है क्या हो रहा hai......innn सब से कोई मतलब भी है या नहीं.......

मेरे कहने का मतलब ये था की ना तो इसको पता है यहाँ पे क्या हो रहा hai.....aur ना hi मुझे पता है इस बारे mein.....hum दोनों hi अनजान थे यहाँ पे क्या हो रहा है इससे......

अब हम दोनों तो आ गए थे अपने तय किये हुए जगह पे......

लीडर - हममे प्लान के अनुसार अंदर की ओर चलना चाहिए......

मैं - लीडर एक बात batana.......kya तुम्हे पता है यहाँ पे क्या हो रहा है.....

लीडर - Nahi....mujhe इस बारे में तो नहीं pata.....par इतना जरूर पता है ये सब जो हो रहा hai......usko रोकना जरुरी hai.....agar ऐसा नहीं hota.....to मुझे नहीं लगता की हम दोनों यहाँ पे इस तरह से होते.....

मैं - हम्म बात तो तुम्हारी सही.....

अभी मैं उससे बात कर hi रहा था की मुझे कुछ अजीब सा dikha.......pata नहीं kaise......par ये जगह बिलकुल से उसी जगह की तरह दिखाई दे रही thi.....jo जगह मैंने थोड़ी देर पहले देखि thi......Portal में कार के मिर्रोर्स के अंदर.....

अब ये बात मेरी समझ में hi नहीं आ रही thi....aakhir कैसे......

लीडर ने मुझे थोड़ा कंफ्यूज dekha....par वो आगे बढ़ gaya.....kyunki उसको भी कुछ दिखा tha.....aur उसने मुझे भी वही देखने के लिए बुलाया था.....

यहाँ ये सब चल रहा tha.....wahi दुरसी तरफ फोमोस पे......

ध्रुव और जस्टिन की अलग hi क्लास चल रही थी.....

उस इम्मोर्टल ने तो जैसे इन् दोनों को परेशां hi कर रखा tha.......inn दोनों ने हार मान ली thi.....ye दोनों अब एक दूसरे से लड़ते लड़ते थक गए थे......

अब हालत कुछ ऐसे थे की ये दोनों खुद में ना लड़ कर आपस में काम कर लिया करते थे.....

इम्मोर्टल को अपना ये काम बहुत अच्छा laga.....usne आखिर कार इन् दोनों को एक कर hi दिया tha.....par फिर भी कुछ बातें बाकी hi थी.....

इम्मोर्टल अभी भी उनपे काम कर रहा tha......par वो अभी एअर्थ पे जो होने वाला tha.....uss चीज़ज़ से अनजान था......

दरअसल इस वाले इम्मोर्टल के pass......ek ऐसी पावर thi....jisse ye.....hone वाली चीज़ज़ों के बारे में पहले से hi जान लेता tha......aur यही वजह थी इसके यहाँ पे आने की.....

अगर ये फोमोस को ख़तम करने यहाँ नहीं आया hota.....to फोमोस के चक्कर में यूनिवर्स का 1/5तह हिस्सा ख़तम हो जाने वाला tha.....aur उसको रोकने का काम इसका tha......par जो तरीका इसको पता tha.....uss तरीके से ना सिर्फ फोमोस तबाह hota.....sath में आस पास के कुछ प्लैनेट्स और भी हो jaate....jinme से एअर्थ भी एक प्लेनेट था......

अब एअर्थ तबाह तो नहीं hua.....par एक अजीब सी बात हो गयी इस इम्मोर्टल के sath.......Ab एअर्थ पे या अस्स पास के उन् प्लैनेट्स पे जो की फोमोस के साथ तबाह होने वाले the.....waha जो कुछ भी हो रहा tha.....unn सब का अंदाज़जा इसको नहीं लग पा रहा था......

और इस बात से इस इम्मोर्टल को कोई खास फर्क भी नहीं पद रहा था अभी तक तो......

लेकिन अब कुछ होने वाला था जिससे इसको hi नहीं बाकी के इम्मोर्टल्स को भी फर्क पढ़ने वाला था एअर्थ से.....
 
अपडेट - 130

"ये कैसे निशान hai.....aur ये क्या है कला कला......"

मैं - ये खून hai....aur ये सद्द चुक्का hai.....par इतना सारा खून इस जगह पे...

लीडर - अगर ये खून hai.....to इसकी हालत बहुत ख़राब हो चुक्की hai....lekin....jis तरह का ये hai.....abhi तक तो इसको सुख जाना चाहिए tha.......ye यहाँ के मिटटी पे ऐसे कैसे है....

मैंने लीडर की बात सुन्नी और उस खून को देखने के लिए आगे झुका hi था की खून के अंदर से बुलबुले निकलने lage......aur उसके ठीक बाद उसके अंदर से 2 आँखें बहार aayi......wo आँखें तैर रही थी उस खून के अंदर......

मैंने चीजजें देखि हुई hai.....tarah तरह की पर ये सच मच घिनौना tha......bahut ज्यादा.....

लीडर ने भी वो सब dekha.....aur पता नहीं उसके दिम्माग में क्या aaya.....usne पास पड़े हुए एक लकड़ी के टुकड़े को खून के अंदर डाला.....

जब वो टुकड़ा वापस से बहार आया तो उसमे दिम्माग लगा हुआ tha......brain का कुछ हिस्सा था उसके अंदर.....

मैं - ये क्या hai......kya ये सच में दिम्माग है....

लीडर - Hmm......aur मुझे लगता है अब हममे अपने हथियार बहार निकल लेने chahiye.....kya तुम आस पास की लकड़ियां इकठा कर सकते हो......

मैं - हम्म्म पर तुमने ऐसा क्यों कहा की हममे अपने हथियार निकल लेने चाहिए.....

लीडर - फोमोस pe......ek जगह thi.....jaha पे इस तरह की चीजजें पायी जाती thi......aur याक्किन maano......tum कभी उस जगह पे जाने के बार्रे में सोचना भी नहीं chahoge.....Uss जगह पे ऐसी ऐसी चीज़ें देखने को मिलती है की पूछो मत....

मैं - अगर वो जगह ऐसी hai......to हममे बाकी सब को इसके बारे में बताना चाहिए......

लीडर - तुम लकड़ियां इकठा karo.....main कोशिश करता हु.....

उसके बाद मैं लकड़ियां इकठा करने लग गया और वही लीडर बात करने की कोशिश करने लग गया.......

वही दूसरी तरफ........

निकिता और रूपल दीदी साथ में the......wo गाँव के जिस इलाके में गए हुए the.....waha पे उन्हें लोग mille......aur वो सब नार्मल hi थे......

वह पे सब नार्मल tha.....par दोनों ने फिर भी सतर्कता से hi काम liya......wo दोनों बस वह का जायजा लेती रही.......

वही तीसरी तरफ.....

वो जगह जहा pe.....K.bua और P.bua गए हुए थे.....

P.Bua - कविता यहाँ पे इतना सन्नाटा सा क्यों है......

K.Bua - हम वही देखने को आये है यहाँ pe........jaise hi मुझे पता चला इस गाँव के बारे में और यहाँ हो रही गड़बड़ियों के बारे mein.....main तुरंत hi यहाँ आ गयी तुम सब के साथ......

P.Bua - क्या तुम उसपे तब से नज़र रख रही थी......

K.bua - (मुस्कुराते हुए) अगर मुझे वो कहा पे है इस बात का पता hota.....tumhe लगता है हम आज यहाँ पे होते.......

वो दोनों बातें कर hi रहे थे की दूर एक घर में लाइट ों ऑफ ों होते हुए P.bua ने देखा.......

शुरू में उनको लगा जैसे कोई बल्ब ख़राब हो गया hoga.....yaa वैसा hi kuch.....par nahi......ye एक सीक्वेंस में हो रहा था......

P.Bua - Kavita......waha pe.....uss घर में dekho......lights कैसे सीक्वेंस में बंद चालू हो रहे है......

K.bua - हम्म हममे वह चलना चाहिए......

और उसके बाद वो दोनों उस घर के तरफ बढ़ gaye......abhi कुछ दुर्र गए hi थे की अच्चानक से उसको जानवर के चिल्लाने की आवाजें आने लग गयी......

वो तो वक़्त रहते hi उन् दोनों ने अपने हथियार निकल liye........warna उस झुण्ड ने उन् दोनों पे हमला कर hi दिया था......

P.bua - क्या ye......sach mein......inki ऐसी हालत कैसे हो गयी.....

K.Bua - Hmm......ye लग तो इंसान hi rahe.....hainnnn.....Pankaj.......Abhi.....

यहाँ K.Bua ने पंकज का नाम liya.....aur वह पे एक पोर्टल खुला......

पोर्टल के दूसरे तरफ दब और पंकज थे......

दब - ये कौन सा जानवर है.....

K.Bua - बातें काम karo.....aur इनमे से एक को बेहोश करके अपने साथ लेके jaao.....jaldi.....

पंकज ने दूसरी तरफ से उन् इंसानो में से एक पे बेहोशी का जादू kiya.....par वो बेकार हो गया......

अब माहौल ऐसा था की वो सारा झुण्ड ना सिर्फ दोनों बुआ पे लगा हुआ tha.....balki अब दब और पंकज भी उस झुण्ड का सीकर बनने वाले the.....aur तो aur......ass पास से वैसे और 3-4 झुंड वह आ रहे थे.......

पंकज - ये नहीं हो raha.......inpe जादू का असर नहीं हो रहा है.....

K.Bua - बन्दूक लेके aao.....aur नशे की दवाई से शूट करो इनको.....

दब ने पास में रखा बन्दूक उठाया और उससे निशाना लगाया.....

एक goli......do goli.....par फिर भी कुछ नहीं हुआ unko........teesri गोली लगने के बाद उनमे से एक ने अपने होश खोये the.....aur दब और पंकज ने उसको पकड़ा और अपने साथ पोर्टल के दूसरे तरफ ले गए......

दब - आप लोगो को मदद चाहिए.....

K.Bua - जितना बोलै गया है उतना hi karo......ab बारी बारी से बाकी की टीम्स के पास jaao.......tumhe पता है ना इसको कहा पे लेके जाना है.....

K.Bua की बात सुनने के बाद उन् दोनों ने पोर्टल बंद कर diya.....unka जाना था उसके बाद...

P.Bua - मुझे नहीं लगता अब ये इंसान बच सकते hai.....hume इनकी जान लेनी hi पड़ेगी.....

K.Bua - हम्म अगर बाकी सभी को बचाना है तो इन् सब को मारना hi होगा....

उसके बाद दोनों बुआ लग गयी उन् सब को काटने mein......aur कुछ hi देर के बाद वो पूरा का पूरा jagah......kaale खून से भर गया था......

जब उन् दोनों ने कुछ को मार diya.....aur बाकियों का इंतेज़्ज़र करने लग gaye.....tabhi P.Bua ने देखा की लाइट्स और जल्दी जल्दी बंद चालू हो रहे है.....

P.Bua - मुझे लगता है अभी के लिए ये काफी hai.....baakiyon को बाद में देखा jaayega....uss घर में सायद कोई हममे बुल्ला रहा है....

K.Bua - ठीक hai....chalo...

यहाँ वो दोनों उस घर में जा रहे थे वही दूसरी तरफ....

पुजारी जी और गुरूजी जो इस वक़्त दब और पंकज से खबर का इंतज़ार कर रहे थे......

वो दोनों भी गाँव के अंदर hi the......par जैसा की K.Bua ने उनको कहा tha......wo दोनों बस चीज़ज़ों को समझ रहे the.......unn दोनों के पास ज्ञान का भण्डार tha.....aur K.bua जानना चाहती थी की वह जो भी हो रहा है उसके बारे में सायद उनको कोई अंदाजा हो.....

दब और पंकज कुछ देर में वह पहुंच चुक्के the......aur उन् दोनों ने जो भी देखा वो सब बताने लग गए......

गुरूजी ने जब सब कुछ सुन्ना तो उनके चेहरे पे तनाव की लकीरें आ गयी.....

पुजारी जी को सायद ाभ्ही जो हो रहा था उसके बारे में उतना अंदाजा नहीं tha.....par गुरूजी को देख के कोई भी ये बात सकता था की वो कुछ ना कुछ जानते hai.....aur ये बुरा है....

गुरूजी - एल्फ Prince....agar आप दोनों की बताई हुई बातें एकदम से सही hai.....to सायद कुछ बहुत hi बुरा शुरू हो चुक्का है इस एअर्थ pe......Aap दोनों jaao.....aur हममे हर एक जगह से खबर do.....kass मैं जैसा सोच रहा hu,......waisa कुछ ना हो रहा हो यहाँ पे....

दब और पंकज दोनों hi वह से जल्दी निकल gaye.....unko समझ आ गया था ये चीज़ज़ बहुत सीरियस होने वाला है.....

पुजारी जी - Guruji.....kya हो रहा है यहाँ पे......

गुरूजी - Tabahi.....tabahi आने वाली है यहाँ pe.....agar इन् बच्चों ने जो बताया वो सच hai.....to इस जगह को एअर्थ को बचने के लिए इस पुरे गाँव को ख़तम करना hoga......ek भी जीव यहाँ से बहार नहीं जाना चाहिए.....

दब और पंकज इसके बाद हमारे पास आये.....

मैंने तब तक लकड़ियां इकठा कर ली thi.....aur लीडर की बात नहीं हो पायी थी किसी se.....pata नहीं kyun....mujhe लग रहा था वो बात कर hi नहीं रहा है.....

दब - ये क्या कर रहे हो.....

लीडर - Tum.....accha तुम भी आये ho.....dhyaan से sunno......Mujhe आग की नीली लपटें chahiye.....sirf नीली लपटों से हो अब कुछ हो सकता है.....

दब - क्या हो रहा है यहाँ पे......

लीडर - दिखाओ इन्हे.....

मैं उन् दोनों को उस खून से भरे हुए गड्ढे के पास लेके gaya.....aur उनको सब कुछ बताया.....

पंकज - दब हममे इसको भी लेके जाना होगा.....

लीडर - क्या बकवास कर रहे ho.....usko चुनना भी mat.....tumhe पता नहीं उससे चुनने से क्या क्या हो सकता है.....

पंकज - कविता मैडम ने बोलै है इसको लेके जाना है और मेरे पास......

लीडर - तुम्हारा जादू काम नहीं करने वाला इस्पे.....

दब - जादू कर कौन रहा है.....

उसके बाद दब एक ने पोर्टल के अंदर से किसी को bulaya......wo बाँदा पूरी तरह से सूट में बंद tha.....wo बाहर nikala....aur उसने उस गड्ढे में से सैम्पल्स लिए और अंगूठा दिखा के सक्सेसफुल हो गया ऐसा बताया.....

लीडर बस देखता रहा उस चीज़ज़ को.....

दब - लीडर क्या तुम्हे पता है यहाँ पे क्या चल रहा hai.....aisa लगता है तुमने ये सब पहले देख रखा है......

लीडर - Hmm.....aisi एक jagah.....Fumos पे हुआ करती thi.....aur वो सच में बहुत खतरनाक जगह thi.....Mujhe आग की नीली लपटें चाहिए.....

दब - ठीक hai....accha तुम्हे कुछ और पता है इसके बारे में....

लीडर - मैंने सुन्ना था फोमोस se.......usne कहा tha.....ki ये उसकी सुरुवात इसी तरह से हुई थी.....

पंकज - किसकी सुरुवात.....

लीडर - फोमोस की सुरुवात.....

पंकज ने उसको आग की नीली लपटें di....aur उसके बाद वो दोनों वह से जाने लग गए.....

लीडर - सबसे कह do......yaha की कोई चीज़ ना khaaye.....naa hi piyee......ye sab....ye सब ऐसे hi फैलता है.....

पंकज - हम्म ठीक है.....

उसके बाद पंकज और दब वह से निकल के वापस से गुरूजी के पास gaye......aur वह पे पहुंच के उनको जो भी पता चला था वो सब वापस से बताया.....

गुरूजी - जिस बात की चिंता thi.....wahi हो रहा hai.....jaao और सबको boldo.....ki तैयार rahe......waqt बहुत काम है हमारे पास.....

पंकज और दब वापस से वह से निकल gaye.....aur इस बाद तो गुरूजी भी पुजारी जी को लेके कही चले गए......

दब और पंकज इस बार रूपल दीदी और निकिता के पास पहुंचे.......

वक़्त सही था unka.....wo दोनों तब hi वह पे पहुंचे जब निकिता वह पे पानी पिने वाली थी.....

पंकज ने जैसे hi ये dekha....usne पोर्टल के दूसरे तरफ से hi उसके हाथ से पानी निच्चे गिरा दिया.....

रूपल दीदी - ये क्या hai......Pankaj....tum....

निकिता - ये क्या था.....

पंकज - तुम्हारे पापा ने कहा है इस गाँव में ना तो कुछ खाना है और ना hi पीना है....

निकिता - क्या मतलब.....

अभी पंकज कोई जवाब देता उससे पहले......

दब - doston......ye...ye लोग हमारी तरफ ऐसे क्यों आ रहे है......

दब की बात सुनने के बाद जब सब ने आस पास देखा तो होश hi उड़द गए सभी के......

लोगो की भीड़ उनके तरफ आ रही thi.....aur वो भी अजीब तरीके se......wo सब आपस में टकराये जा रहे the.....girte जा रहे the....par बार बार उठ उठ के वो उन् सब के पास आ रहे थे.....

पंकज - हममे यहाँ से चलना चाहिए.....

रूपल दीदी - पर ये हो क्या रहा है......

उसके आगे वो कुछ और बोलती उससे पहले hi पंकज ने पोर्टल को अपने तरफ खींच liya.....aur साथ में जो पानी निकिता पिने वाली थी उसको भी उठा लिया और ले गए......

वो चारो इस वक़्त वह से जा चुक्के थे......

रूपल दीदी - ये क्या tha.....K.bua ने हममे वह पे रहने को बोलै tha.....aur तुमने....

पंकज - अपने देखा nahi.....wo सब कैसे हमारे तरफ आ रहे थे.....

पंकज ने वो पानी उस लैब में खड़े एक बन्दे को diya....aur उसको भी टेस्ट करने को कहा.....

निकिता - ये कौन सी जगह है.....

पंकज - ye.....ye K.bua का ठिकाना hai.....unhone अपने इंसानी दोस्तों के साथ बनाया हुआ है......

रूपल दीदी - क्या हममे उन्हें यहाँ नहीं बुलाना चाहिए....

दब - वो खुद आ jaayenge.....humme बस प्रतीक और लीडर को लेने जाना hai.....aur उसके लिए अभी वक़्त है......

रूपल दीदी - तो हममे क्यों बुलाया गया यहाँ पे.....

पंकज - आप शांत हो jaao....apko यहाँ इस वजह से लाये है ताकि हम ये कन्फर्म कर सक्के की अपने कोई चीज़ खाई पे तो नहीं hai....Inn दोनों का भी टेस्ट करो.....

वो दोनों कुछ और बोलती उससे पहले उन् दोनों को वह से लेके चले गए......

दब - ये क्या था.....

पंकज - :सिघ: ये सवाल बहुत करती hai......ab थोड़ी देर शांति rahegi.....chalo तब तक गुरूजी के पास हो लेते है.....

उसके बाद दोनों वापस से गुरूजी के पास चले gaye......par इस बार दोनों आश्रम जा पहुंचे थे......

पंकज - ये गुरूजी यहाँ आ गए क्या.....

गुरूजी - अऊ तुम दोनों का hi इंतेज़्ज़र tha.....maine आश्रम में सभी से बोल दिया hai.....ki वो सब तुम्हारा साथ देंगे....

पंकज - किस चीज़ज़ में....

गुरूजी - उस नरसंघार में जिसको अब तुम सब देखने वाले हो.....

दब - हम कुछ समझे नहीं.....

गुरूजी - ये एअर्थ अब फोमोस की तरह बनने वाली hai.......pata नहीं kaise.....par ये बनने वाली है.....

दब - हम्म लीडर भी कुछ ऐसा बोल रहा tha.....par हम ऐसा नहीं होने देंगे.....

गुरूजी - तुम इसमें कुछ नहीं कर sakte.....sab तैयारी हो चुक्की hai.....aur दुःख इस बात का है की मुझे इसके बारे में कुछ पता क्यों नहीं chala.....agar वक़्त रहते पता होता तो सायद कुछ हो सकता था.....

पुजारी जी - गुरूजी सायद अभी भी थोड़ी आशा हो......

गुरूजी - ाषा अब ना के बराबर hai.....par ठीक hai......main अपने लोगो को तब तक कोई आदेश नहीं दूंगा जब तक उस गाँव से लोग बहार ना आने लग jaaye.....jaise hi लोग बहार आने lagenge.....mere लोग उनको ख़तम करने वह पहुंच जाएंगे.....

दब - क्या आपको पता है उस गाँव में कितने लोग है.....

गुरूजी - मुठी भर लोगो को मार के अगर पूरा प्लेनेट बच्चा सकते hai....to ये कबूल है मुझे....

दब और पंकज ये सब सुनने के बाद वह से निकल गए.....

पंकज - हममे ये सबको बताना होगा.....

आगे देखते है क्या होता hai.....kya एअर्थ भी फोमोस बन्न जाएगा......
 
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