अपडेट 3
रात गुज़री और सूर्य उदय के साथ एक नए सुबह का आगमन hua.waise तोह फ़िलहाल गर्मी के दिन थे पर आज का मौसम hi कुछ अलग tha.hawa में बिलकुल भी गर्माहट नहीं thi.sheetal हवा मन और तन दोनों को बोहत रहत पहुंचा रही thi.lag hi नहीं रहा था की गर्मी का मौसम चल रहा है.
अब चलते है अपने हीरो के घर की तरफ...
अरे वाह यहाँ तोह त्यौहार सा आलम tha.pure घर को फूलों से सजाया गया tha.ghar के बहार अलग अलग रंगोली बानी हुई थी मानो दीपावली का त्यौहार ho.par आज का दिन तोह मीनू और जयराज के लिए किसी भी त्यौहार से ऊपर tha.aaj उनके घर के चिराग का नाम जो रखा जाने वाला tha.subah के 10.30 बज रहे the.minu अपने कमरे में आईने के सामने कड़ी हो साड़ी पेहेन रही thi.ye एक हरी कांजीवरम की साड़ी थी जो मीनू की ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा रही thi.jairaj बहार हॉल में the.decorations में नज़र रख रहे the.kaam सारे लगभग हो hi गए the.jairaj को भी हलकी थकावट हो रही thi.wo सुबह से hi घर सजाने में लगे हुए the.waise तोह एक सिविल इंजीनियर के घर में नौकरों की भीड़ रहती है पर जयराज एक सेल्फ मेड मन the.jo स्ट्रगल उन्होंने अपनी लाइफ में करि थी उसने उन्हें इतने बड़े ओहदे में पहुँचने के बाद भी काफी डाउन तो एअर्थ रखा tha.unhe ज़्यादार काम खुद hi करना पसंद था और आज तोह उनके nazar-e-noor उनके बचे का नाम कारन tha.wo तोह दोगुने जोश से सारे सजावट में हाथ बता रहे the.ek और कारन ये भी था की उनकी वाइफ अभी अभी डिलीवरी के बाद हॉस्पिटल से वापस आयी thi.unka जिस्म फ़िलहाल कमज़ोर tha.jairaj उन्हें बिलकुल भी मेहनत नहीं करने देना चाहते the.pyar जो बेशुमार करते थे अपनी पत्नी se.khair,kaam सारे लगभग पुरे हो गए थे तोह जयराज भी तैयार होने अपने रूम पहुँच गए.
पर रूम में घुसते hi जो नज़ारा उनके आँखों के सामने आया उससे वो वहीँ ठिठक कर रूक gaye.unki आँखें भी पलके झपकना भूल gayi.minu अपना श्रृंगार लगभग पूरा कर hi चुकी thi.bacha पैदा करने के बाद, थकन के बावजूद मीनू का जो रंग सामने निखार कर आया था वो जयराज को घायल करने के लिए काफी tha.aur अभी तक तोह जयराज ने आईने में hi सिर्फ मीनू के अक्स को hi देखा था और ये हाल हो गया अभी तोह असली हमला बाकि tha.aur वो भी हो hi gaya.final तोचुप के बाद मीनू जब पलटी तोह सामने जयराज को खड़े paya.minu के पलटते hi उसकी ख़ूबसूरती जयराज के सामने thi..jairaj को ऐसा लगा जैसे कोई अप्सरा आसमान से उतर उसके सामने कड़ी hai.khudko ऐसा घूरते देख मीनू को कुछ समझ नहीं aaya.usne आंखों से इशारा किया की क्या hua?par जवाब कुछ अलग hi अंदाज़ में मिला मीनू ko.jairaj ने यूँही बेखुदी में कहा की
"तेरी उम्र तोह वही रूक gayi,hum बड़े हो गए,
ये यह नाइंसाफी है.
हमे मारने के लिए किसी हैठियार की ज़रुरत नहीं,
तेरा ये रूप hi काफी है...."
अपने लिए तारीफ़ सुन मीनू के गोर गाल लाल हो gaye.shadi को उनके 1 साल होचुका था पर जानते वो एक दूसरे को 4 सालों से the.jairaj का प्यार उसकी दीवानगी इतने सालों में ज़रा भी काम नहीं हुई thi.the तोह वो हस्बैंड वाइफ बूत रहते लवर्स की तरह hi थे.
Minu-dhat.aap कहीं भी शुरू हो जाते ho.abtoh शर्म karo,ek बचे के बाप बन गए ho.minu की बात पर जयराज ज़ोर से है pade.phir बोले
Jairaj-darling,agar शर्म करते तोह बाप कैसे bante.bhai हम तोह आपके आशिक़ hain,apki तारीफ़ करना हमरा हक़ है.
Minu-bade आये तारीफ़ करने waale,chaliye jaiye,babaji के आने का वक़्त हो गया hai.unhe इंतज़ार करना ठीक नहीं.
जयराज ने भी ये ठीक samjha,aur तुरंत बाथरूम में घुस gaye.minu अपने बचे के पास जाकर बैठ gayi.ab tak.usne भी गौर किया की ना तोह उसका बचा एक बार भी रोया है ना उससे भूक लगी hai.par जब भी दूध खुद से पिलाओ पिता hi चला जाता hai.thoda अजीब तोह था ये सब पर मातृ प्रेम ने इस सोचको गहराने न diya.minu ने कुछ देर तक बचे को दूध पिलाया फिर उससे पलने में रख उससे निहारती rahi.bacha भी शांत मुद्रा में बिन पलके झपकाएं अपनी माँ को देखता raha.idhar कमला विषाक्त ऋणी बाबाजी को लेकर घर की तरफ निकल चुकी thi.unka घर पास hi tha.waise भी ये टाउन छोटा सा tha.saari जगह आस पास hi thi.kuch दस मिनट के अंदर hi बाबाजी और कमला घर के द्वार तक पहुँच gaye.babaji का मुख एक दम शांत था जैसे उन्होंने ज़िन्दगी नमक पहेली की गुथी सुलझा ली ho.baba ने जैसे hi बहार के गेट के अंदर पाँव रखा वैसे hi उनके दिल की धड़कन बढ़ gayi.ek अजीब सी व्याकुलता से उनका मन भर gaya.unhe लगा जैसे उनकी बरसो की प्रतीक्षा ख़त्म होने वाली hai.wo वहीँ रुक गए और आँखें बंद कर li.baba विषाक्त के आने की खबर आस पास के घरों में भी फैले चुकी thi.sab उनके दर्शन हेतु जयराज के घर के पास पहुँच गए the.kuch जो जान पहचान के थे वो गेट के अंदर hi डेरा डाले खड़े the.babaji को यूँ अचानक रूक आँख बंद कर ध्यान करने जैसा देख कर सबको अजीब laga.kamla जो बाबा के आगे आगे चल रही थी उसने अचानक पीछे मुड़के देखा तोह बाबा को आँख बंद कर खड़े paya.wo भी उनकी और वापस चल di.idhar बाबाजी आँख बंद कर किसी और hi दुनिया में पहुँच गए the.wo खुद वहां नहीं पहुंचे थे बल्कि किसी अज्ञात शक्ति ने उन्हें वहां अपने पास बुलाया tha.har तरफ कोहरा tha.babaji को कुछ नज़र नहीं आ रहा tha.fir धीरे धीरे वो धुंध हटा और जो सामने आये उससे देख बाबाजी को अपनी आँखों पे विश्वास नहीं hua.wo अपने घुटनो पे गिर gaye.kyunki उनके सामने स्वयं परम पिता परमेश्वर the,jo बाबाजी को देख मुस्कुरा रहे थे.
Babaji-hey परम कृपालु, परम पूज्य पिता parmeshwar,hey भगवन आपने मुझे पुनः दर्शन diye.(jee हाँ punah,pehle भी ये भगवन से मिल चुके hain,kaise?bas अभी पता चल jayega.)hey prabhu,kya मेरे गुनाह माफ़ हो gaye.kya अब मुझे मोक्ष मिल जायेगा!!!
(दोस्तों चलिए कहानी थोड़ा पीछे ले चलते हैं...)
बात अबसे कुछ हज़ारों साल पुराणी hai,kalyug ने दुनिया में पाऊँ पसरा नहीं tha.us वक़्त बाबा विषाक्त ऋणी तपस्या में लीं the.sadiya बीत चुकी thi,najaane कितने hi मौसम बदले पर विषाक्त बाबा पर इसका कोई असर नहीं hua.samay बीतता gaya,tapasya और कठिन होती गयी पर बाबाजी तस से मास नहीं hue.phir वो दिन भी आया जिसके लिए बाबा इतने कठिन तप कर रहे the.param पिता परमेश्वर को उनकी ये ढृढ़ता अछि लगी और वो बाबा के आगे प्रगट हुए.
BHAGWAN-putra vishakht.utho putra.ankhen kholo.mai तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न hua.ankhen खोलो और मानगो क्या चाहते हो.
विशाखत बाबा ने आँखें खोली और जब भगवन को सामने देखा तोह ख़ुशी से झूम uthe.apneaap को भगवन के चरणों में झुका पहले सास्टांग प्रणाम kiya.phir उठ कर bole.prabhu,mai धन्य hogaya.kya मई आपसे कुछ भी मांग सकता हूँ.
BHAGWAN-nisankoch होकर मानगो putra.par ध्यान रहे जो भी तुम मानगो उसमे जगत कल्याण हो न हो किसीका नुक्सान नहीं होना चाहिए.
VISHAKHT-avashya prabhu.par क्या मई दो वरदान मांग सकता हूँ!!!
BHAGWAN-thik है putra,mango.
VISHAKHT-PRABHU मई इस संसार का सबसे ज़्यादा ज्ञानी मनुष्य बनाना चाहता hun.aisa कुछ न हो जो मुझे ना पता ho.na कोई मंत्र न कोई रोग और उसका upchaar.aur दूसरा वरदान ये की मई जब भी चहुँ आपसे ध्यान में जाकर बात कर सकूँ.
BHAGWAN-TATHASTU...
ये कह भगवन अदृश्य हो गए.
विशाखत बाबा भी इसके बाद वहां से अंतर्ध्यान हो अपने नगर सोरमपुर (काल्पनिक)
चले gaye.jaane कितनो युगों से बाबा विषाक्त अपनी तप में लीं the.wo तोह अपने तब के बल पर अब भी जवान hi the.par उनके घर वाले अपना जीवन चक्र पूरा कर नजाने कब का ये संसार छोड़ चुके the.baba विशाखत जब घर पहुंचे तब उन्हें इस कड़वे सच का बोध hua.unhe इस बात का बोहोत दुःख हुआ और वो वहां से अंतर्ध्यान हो gaye.aur वो पहुंचे भारत के उत्तरी भाग में पहाड़ों के बीच बेस एक गाओं में जिसका नाम था SILHARPUR.ye एक बोहोत hi सुन्दर गाओं tha.sabhi सुख सुविधाओं से bharpoor.yahan एक तरफ झरने the,Dusri तरफ लहलहाते khet.yahan की ज़मीन बोहोत उपजाऊ थी जिसके चलते खेती बोहोत अच्छी होती thi.aur यहाँ का कमाई का महत्वपूर्ण श्रोत भी यही tha.baba विशाखत अंतर्ध्यान हो सीधा यहीं pahunche.unke हृदय में जो परिवार वियोग के कारन दर्द था यहाँ आकर कुछ काम hua.yahan उनके मन को एक अलग hi शांति mili.unhone वहीँ आगे का जीवन बिताने का निर्णय liya.iska एक कारण और भी tha.SILHARPUR में जड़ीबूटी प्रचुर मात्रा में thi.ause पौधे और पेड़ थे जिनसे नजाने कितने रोगो का उपचार हो सकता tha.par इसकी जानकारी किसीको न थी.
पर बाबा विशाखत की बात कुछ और thi.bhagwan से वरदान पाकर अब वो सर्वज्ञानी हो चुके the.jagah देखते hi उनकी दिव्यदृष्टि से कुछ न चुप saka.unhone वहीँ गाओं से कुछ hi दूर एक कुटिया बना रहने लगे.
जहाँ वो रहते थे वहीँ एक नदी बहती thi.ek दिन जब बाबा विशाखत वहां स्नान कर रहे थे तोह उन्हें नदी के पास पत्थर के पीछे कुछ कपडा सा dikha.jab बाबा पास गए तोह उन्होंने देखा की वहां एक लड़की थी जो मूर्छित हो गयी thi.par फिर भी कांप रही thi.baba उससे उठा अपनी कुटिया में ले आये और पास hi के कुछ पत्तों को तोड़ औषधि बना उसका लेप लड़की के मष्तिष्क में लगा मंत्र ुचरणां करने लगे
"दृणना उपचर्या नमः"....
कुछ hi देर में एक रौशनी का गोला बाबा के हाथ से निकल लड़की के मस्तिष्क से होते हुए उसके अंदर चला gaya.kuch hi वक़्त में उससे होश आ gaya.thik तोह वो औषधि से hi हो गयी थी पर मन्त्रों से उसकी शारीरिक शक्ति तुरंत लौट aayi.wo बाबा को धन्यवाद् कर घर चली gayi.ghar पहुंची तोह उससे उसके परिवारवाले बैठे मिले जो काफी उदास दिख रहे the.ladki को देख वो खुश hogaye.mel मिलाप के बाद लड़की की माता ने उससे पूछा वो सुबह से कहाँ thi.ladki ने बताया की वो नदी की तरफ यूँही घूमने निकल गयी thi.pani में खेलते खेलते उसका पेअर फिसला और उसका सर एक पत्थर से takraya.wo मूर्छित हो gayi.fir बाबा के बारे में भी बता diya.wo उस गाओं के एक धनि घर की बेटी thi.phir क्या था ये बात हर जगह फ़ैल gayi.uske घर वाले बाबा का शुक्रिया करने उनके कुटिया में gaye.us धनि व्यक्ति के घर में लड़की के दादा को कोढ़ हो गया tha.bohot जगह कोशिश की पर कोई उन्हें ठीक ना कर saka.us धनि व्यक्ति ने बाबा से पूछा की क्या वो अपने पिता को एक बार देखेंगे तोह बाबा ने हाँ कहा और उससे भी चाँद पलों में hi ठीक कर diya.fir क्या था बाबा की ख्याति चरों दिशाओं में गूंजने lagi.dur दूर से लोग अपने रोग मुक्त करने बाबा के पास आने लगे यहाँ तक की राजघरानो से भी और हर कोई ठीक होकर hi jata.Baba विशाखत की लोग भगवन से तुलना करने lage.aur यहीं से शुरू हुई बाबा की दुर्दशा की shuruwat.baba विशाखत को खुद के ऊपर गुमान होने laga.vinamrata आदर सब कुछ धीरे धीरे बाबा विशाखत के व्यवहार से विलुप्त होने laga.ab बाबा हर किसीका इलाज नहीं करते थे .केवल राजघरों से आये लोगों का या धनि व्यक्तियों का hi वो उपचार करने lage.kutiya की जगह एक भव्य आश्रम ने ले li.baba के सेवा में इतने सेवक रहने लगे जितना किसी राजा के पास भी न थे.
अपडेट 4...
ऐसे hi दिन बीतने lage.ek दिन बैकुंठ रीती राज्य से ऋषि विशिष्ट अपनी पुत्री आरती के साथ बाबा विशाखत के आश्रम padhare.par उन्हें काफी इंतज़ार करना पड़ा क्यूंकि बाबा विशिष्ट के ये आराम करने का वक़्त tha.rishi विशिष्ट को क्रोध तोह आया पर अपने पुत्री की वजह से वो चुप rahe.aarti को जड़ी बूटी औषद्या में बोहोत रूचि thi.unhone बाबा विशाखत का बोहोत नाम सुना tha.toh अपने पिता से ज़िद कर उन्हें ले बाबा विशाखत से मिलने चली aayi.kafi देर बाद बाबा विशाखत aaye.unki नज़र आरती पर जैम gayi.ye बाबा अब पहले वाले बाबा तोह थे nahi.jahan पहले कोमल हृदय था अब उसमे मक्कारी आ गयी thi.jin आँखों में श्रद्धा थी अब उसमे आरती के लिए हवस दिख रही thi.par उन्होंने अपनी मानदशा चेहरे पे दिखने नहीं दी.
उन्होंने बड़े आदर से ऋषि विशिस्टा को baithaya.rishi विशिस्टा का करोरध बाबा विशाखत के व्यवहार से शांत हो गया. ऋषि विशिस्टा ने अपने आने का कारन बाबा को बताया की उनकी पुत्री यहाँ उनकी शिष्य बन कर रहना चाहती hai.baba विशाखत खुश हो gaye.wo भी तोह यही चाहते the.ek गहरी नज़र आरती के बदन को देखकर ऋषि विशिष्ट को बाबा ने अपनी सहमति दे di.rishi विशिष्ट अपनी पुत्री सौंप वापस चले gaye.baba ने आरती को उसका कमरा दिखा दिया.
आरती एक 18 वर्षीया चर्चरी बदन वाली सुन्दर लड़की thi.uska यौवन अपने ज़ोर पे tha.par जितनी वो खूबसूरत थी उतनी hi शांत और कोमल bhi.uske पिता ने उससे बोहोत hi अचे संस्कार दिए the.kuch दिनों में hi इस बात को बाबा विशाखत भांप भी gaye.unhone बोहोत कोशिश की आरती को इम्प्रेस करने ki.alag अलग मंत्र पढ़ते चमत्कार dikhate.aushadhiyon के बारे में नयी नयी बातें सिर्फ आरती को बताते ताकि उसके करीब जा सकें पर आरती बस काम से काम rakhti.aur चमत्कारों का भी उसपे कुछ ख़ास असर नहीं hota.baba विशाखत ये नहीं जानते थे की ऋषि विशिष्ट एक सिद्ध पुरुष है और ऐसे चमत्कार आरती बचपन से hi देखते आ रही है.
एक बात और भी थी की आरती बोहोत तेज़ thi.rijhaane के चक्कर में बाबा विशाखत ये नहीं देख पाए की उनकी साड़ी विद्या आरती एक बार में hi सिख लेती thi.mantron का उपयोग उससे नहीं आया था पर औषधियों का पूरा ज्ञान उसने प्राप्त कर लिया था.1 वर्ष बीत gaya.baba अपनी कोशिशें आरती के ऊपर करते रहते थे पर आरती बस अपने काम से काम रखती थी.
एक दिन बाबा विशाखत अपने कमरे में विश्राम कर रहे थे तभी एक सेवक आया
Sevak-baba vishakt,aapse मिलने तालिन्दा देश के महाराज आये है.
बाबा vishakht-unse कहो इंतज़ार करें हम आ रहे है.
सेवक चला गया और बहार महाराज को ये खबर दे दी
(दोस्तों जिन चरक्टेर्स को रोले नहीं मई उनका नाम नहीं लिख रहा हूँ)
कुछ समय पश्चात बाबा विशाखत बहार आये और महाराज से मिले और आने का कारन पूछा.
Maharaj-guruwar,kripya कर मेरी सहायता kijiye.mere कुल के सभी बचो को ऋक्ष रोग हो गया hai(is रोग में जो भी खाओ उलटी हो जाती ह और बदन भी सुख जाता है)
मई बड़ी आस लेके आपके पास आया हूँ.
बाबा vishakt-rajan चिंता की कोई आवश्यकता नहीं hai.hamare पास सभी रोगों का उपचार है पर आप बताइये इससे हमे क्या लाभ होगा!
Raja-prabhu आप बताइये आपको क्या चाहिए.
मई अपने वंश के लिए कोई भी कीमत दे सकता हूँ.
बाबा vishakht-apko हमें अपने राज्य का हिस्सा देना होगा.
कहिये क्या आपको मंज़ूर है.
राजा थोड़ा चौंक गए क्यूंकि उन्होंने ये नहीं सोचा था पर कर भी क्या सकते the.unhone हाँ कह दिया.
बाबा vishakht-maharaj इस रोग की औषधि हिमालय की एक घाटी में hai.wahan पोहोचना आसान nahi.hum अंतर्ध्यान होक भी बस उस जगह की सीमा तक hi जा सकते हैं उसके आगे पिता परमेश्वर के आशीर्वाद से बने रुवदू पेड़ों का जंगल hai.wahan से हमे चल कर आगे जाना hoga.isme कुछ वक़्त lagega.(RUVADU एक पेड़ है जिसमे जीवन देने की शक्ति है और भी अलौकिक शक्तियां है जिसके बारे में विस्तार में आगे पता चलेगा)
आप निश्चिंत होकर अपने राज्य प्रस्थान करें हम औषधि लेकर आपके पास पोहोचते हैं.
Raja-thik ह gurudev.jaise आपकी aangya.aur महाराज चले गए.
इसके बाद बाबा विशाखत ने आरती को रिझाने का एक और प्रयत्न kiya.usne सिल्हारपुर की पूरी ज़िम्मेदारी आरती को देदी और खुद चले गए औषधि lene.aur यहीं से उनकी पतन की शुरुवात हुई.
(दोस्तों ये उपचार वाला part शार्ट में निपटा dunga.iska आगे कुछ काम नहीं है)
बाबा विशाखत के जाने के बाद आरती ने सारा काम अचे से संभल liya.jin लोगों को बाबा विशाखत अब नहीं देखते थे उनका भी उपचार आरती ने निस्वार्थ भावना से kiya.jo गुणगान कभी बाबा विशाखत का होता था वही अब आरती के लिए होने laga.par इसका आरती पर ज़रा भी दुष्प्रभाव नहीं pada.woh उसी निर्मल और साफ़ मन से लोगों की सेवा करती रही.
उधर बाबा विशाखत को उन जंगलों को पार कर औषधियओं को प्राप्त करने में काफी मेहनत lagi.par उसने वो हासिल कर hi li.wahan से वो तालिन्दा देश चले gaye.sabhi बचो का उपचार कर उन्होंने उन्हें ठीक कर दिया.
महाराज ने बाबा विशाखत को कुछ दिन रुकने का निमंत्रण दिया ताकि आधा राज्य उनके नाम पर कर सके लिखित में.
बाबा को भी कोई आपत्ति नहीं थी क्यूंकि एक तोह राज विलास को कौन ठुकराए और अब उन्हें किसी के दर्द से, रोग से कोई हमदर्दी भी नहीं thi.jab से लोगों ने उन्हें भगवन का दर्जा दिया था तबसे उन्होंने ध्यान लगा भगवन से बात करना भी छोड़ दिया tha.unhe लगने लगा की जब वो स्वयं भगवन से काम नहीं तोह फिर क्यों बात करें.
कुछ 3 महीने पश्चात बाबा विशाखत वापस अपने आश्रम pahunche.par वापस आकर उंहोने जो देखा उससे वो बोहोत क्रोध में आ gaye.jahan पहले उनकी जयजयकार होती थी अब वहीँ सभी आरती के गुण गए रहे the.unhe ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था पर वो कर भी क्या सकते the.wo चुप रहे पर अंदर hi अंदर उन्होंने आरती से बदला लेने का मन बना लिया.
कुछ दिन यूँही बीत gaye.ab भी कुछ ऐसे रोग थे और उनकी औषधियां थी जो सिर्फ बाबा विशाखत जानते the.inhi रोगों में एक रोग था मरिदनुक्ती ROG.iske लक्षण शुरू में पीलिए जैसे लगता the.par असल में इस रोग में शरीर के सारे छिद्र से पूस निकलने लगता tha.jaise जैसे छिद्र बड़े होने लगते थे दर्द असहनीय होता जाता था और फिर शरीर के फटने से मौत हो जाती thi.par दर्द के लक्षण बाद में पता चलता tha.iska उपचार सिर्फ बाबा विशाखत के पास hi tha.ek बार एक महिला अपना इलाज करवाने आश्रम में aayi.aarti ने उसका इलाज कर दिया पर उसके जाते वक़्त बाबा ने अपने मन्त्रों के शक्ति से जानबूझ कर ये रोग उस महिला में दाल diya.kuch दिन बाद वो महिला वापस aayi.aarti ने उससे dekha.usse ये पीलिए hi laga.usne उसके उपचार हेतु कुछ दवाई di.par दवा कहते hi उस महिला के शरीर के छिद्र खुलने lage.asahaniya पीड़ा उठी और देखते hi देखते उस औरत का शरीर फैट गया.
उसका पति साथ में hi tha.apni पत्नी की ऐसी मौत देखकर वो पागल सा hogaya.idhar आरती को कुछ समझ नहीं आ रहा था की ये क्या हो gaya.kuch देर रोने के बाद वो आदमी क्रोध से जल utha.aashram में बोहोत से लोग the.sabhi का यही हाल tha.sab आरती को hi दोषी कह रहे the.aarti भी क्या कहती वो तोह खुद सदमे में thi.usse होश दर्द से aaya.hua ये की उस मरी हुई औरत के पति ने कहीं से एक पत्थर उठाकर आरती के सर पर mara.aarti का सर पहात gaya.uske बाद सभी यही करने लग gaye.koi पत्थर मार रहा था कोई लकड़ी से मार रहा tha.baba विशाखत चुप चाप खड़े मुस्कुरा रहे the.unhe उनका बदला पूरा होता नज़र आ रहा tha.kuch देर युहीं चलता रहा फिर जब लोग हेट तोह वहां एक और शव tha.aarti का शव.
वही दूर कहीं ऋषि विशिष्ट ध्यान में बैठे थे.
अचानक उन्हें अपनी पुत्री के साथ कुछ अनर्थ घटने की आशंका hui.wo तुरंत अंतर्ध्यान हो आश्रम पहुंच गए.
इस तरह ऋषि विशिस्टा को अपने सामे देख एक बार तोह बाबा विशाखत भी घबरा gaye.unhe नहीं पता था की ऋषि
विशिस्टा इतने पहुंचे हुए है पर अपने ताकत के घमंड में चूर उन्होंने ज़्यादा ध्यान नहीं diya.rishi विशिष्ट अपनी पुत्री की मृत शरीर देख स्तब्ध रह gaye.ek सिद्ध पुरुष के आँखों से भी आंसू निकल aaye.kuch देर यूँही खड़े रहे फिर उन्होंने पूछा की ये सब कैसे hua.bhid में से किसीने नमक मुर्छ लगाकर सब बता diya.par आखिर में एक भूल कर दी usne.usne आरती को बढचलान कह diya.ussi वाट उसकी राख ज़मीं पर पड़ी thi.hua ये की अपनी पुत्री के बारे में गलत सुन ऋषि विशिष्ट की आँखों में आग उतर आया .उन्होंने घूर कर उस आदमी की तरफ dekha.rishi विशिष्ट की आँखों से आग निकल कर उस आदमी को लगा और वो वहीँ राख हो gaya.sab ये देखकर भाग खड़े हुए पर ऋषि विशिष्ट ने अपना हाथ ऊपर kiya,ek मंत्र पढ़ा और सबके पेअर वहीँ जैम gaye.koi हिल नहीं पा रहा tha.baba विशाखत भी ये देख दर गए पर अब कर भी क्या सकते the.rishi विशिष्ट भरी कदमो से अपनी पुत्री के शव के पास गए और उसके सर पर हाथ रख कुछ मंत्र padha.achanak ऋषि विशिष्ट के माथे में एक जयते दिखने lagi.ye उनकी दिव्या दृष्टि थी जिससे वो जो चाहे देख सकते the.rishi विशिष्ट को सब कुछ दिखने laga.baba विशाखत की धोकेबाज़ी bhi.achanak उनकी आँखें खुल gai.khrod से उनका मुख लाल हो gaya.wo आगे बढे और बाबा विशाखत के आगे खड़े हो gaye.rishi विशिष्ट का ये रूप देख बाबा विशाखत के पेअर थार थार कांप रहे थे.
ऋषि VISHISHT-guru vishakht.apne वरदान के गुरूर में तुम सब कुछ भूल gaye.tumne ये भी याद ना रहा की भगवन ने तुम्हे क्या कहा tha.ki कभी किसी को तुम्हारे ज्ञान से हानि नहीं होनी चाहिए थी पर तुम अपने घमंड में ये महा अपराध कर gaye.lalach ने सत्ता ने तुम्हे अँधा कर diya.par अब नहीं.
मई तुम्हे श्राप देता hun.mai तुमसे तुम्हारी शकितियाँ चिन्ता hun.chahun तोह तुम्हे अभी मार सकता हूँ पर नहीं तुम्हे एक ऐसी ज़िन्दगी दूंगा जो मौत से भी बत्तर hogi.tumhe ज्ञान चाहिए था naa.wo तुम्हारे पास hi rahega.tumne जिस तरीके से इस औरत के औषधि में बीमारी मिले जो दर्द इस औरत ने सहा वही दर्द अब तुम्हे सहना hoga.hamesha सहना hoga.aur इस दर्द का उपचार है तुम्हारा ज्ञान और उसका upyog.jab भी तुम किसी रोगी को निस्वार्थ भाव से ठीक करोगे तुम्हारा दर्द चला जाएगा पर सिर्फ एक पेहेर के liye.dard से बचने के लिए तुम्हे लगातार लोगों की सेवा करनी hogi.par ये दंड भी काफी nahi.tumhe मई दीर्घायु का अविषाप देता hun.haan ठीक सुना, ये तुम्हारे लिए अविषाप hi है क्यूंकि अब से तुम्हे भूक तोह लगेगी पर तुम कुछ ग्रहण नहीं कर paoge.jo भी खाओगे खून के साथ बहार आ jayega.par तुम मरोगे भी nahi.sirf तड़पोगे.
बाबा विषाक्त स्तब्ध रह gye.shraap का असर शुरू भी हो चूका tha.unhe दर्द महसूस होना शुरू हो गया था.
ऋषि VISHISHT-aur तुम सब लोग कितने स्वार्थी ho.itne दिन मेरी बेटी ने तुम लोगों की सेवा की सब भूल gaye.sach hi तोह कहा है kisine,jitna भी ाचा karlo,koi एक गलती भी हो गयी तोह साड़ी अच्छाइयां दिखनी बंद हो जाती hai.tum सब को जीने का कोई अधिकार nahi.rishi विशिष्ट ने अपनी आँखें बंद ki,kuch मंत्र बुदबुदाए और हाथ ऊपर kiya.achakan बिजलियाँ कड़की और जितने भी लोग खड़े थे सब जलकर रख बन gaye.baba विशाखत ने ऋषि विशिष्ट से बोहोत विनिटी की पर वो नहीं माने अपनी पुत्री के शव को उठा अंतर ध्यान जो गए.
कुछ महीने बीत gaye.baba विशाखत की हालत बाद से बदतर हो gayi.jab भी किसीका उपचार करते एक पहारतक की शांति मिलती पर फिर वही dard.aur ऊपर से bhook.kuch खा भी नहीं सकते the.ab तक उन्हें भी अपनी भूल का एहसास हो गया tha.ek रात वो दर्द से तड़पते पेड़ के निचे बैठे हुए the.apni गलतियों के बारे में सोच रहे की उन्हें कुछ कराहने की आवाज़ सुनाई di.dard में भी वो उस और badhe.dekha एक वृद्ध आदमी चट्टान के निचे बैठ कांप रहा tha.baba विशाखत उसके पास gaye.usse छुआ तोह पता चला की उससे तेज़ बुखार है. बाबा विशाखत की हालत कुछ ठीक नहीं thi.fir भी वो उठे और कुछ पौधों को ढूंढ़ने lage.zyada इंतज़ार नहीं करना pada.poudha पास hi tha.patte तोड़ रास निकल उस वृद्ध के पास जाकर उन्हें वो रास पिलाने lage.dheere धीरे उस आदमी का कापना बंद हो gaya.par ये क्या बाबा विशाखत का भी दर्द चला gaya.achanak उस वृद्ध का रूप बदल गया और जो सामे आया उससे देख बाबा विशाखत घुटनो पर आ gaye.saamne और कोई नहीं स्वयंपराम पिता परमेश्वर थे और मुस्कुरा रहे the.baba विशाखत घुटनो के बल बैठ फुट फुट कर रोने लगे.
भगवन ने उन्हें उठाया
BHAGWAN-tum इतने कष्ट में थे तोह तुमने मेरा ध्यान क्यों नहीं किया.
बाबा VISHAKHT-kis मुँह से याद करता bhagwan.mai इस काबिल नहीं.
BHAGWAAN-tumhe पश्चाताप है ये अछि बात hai.mai खुश hua.mai ऋषि विशिष्ट के श्राप को तोडूंगा नहीं पर इसका एक हल है मेरे pass.sunoge!
बाबा VISHAKHT-krupa करे प्रभु.
BHAGWAN-toh suno.tumhara दर्द तोह rahega.par अब जब भी तुम किसीकी मदद करोगे तोह उस पुरे दिन तुम्हे कुछ नहीं hoga.roz मदद करोगे तोह हमेशा ठीक rahoge.Aur हाँ जब जब मदद करोगे उस दिन भोजन भी खा सकोगे.
बाबा VISHAKHT-prabhu क्या इसका कोई सम्पूर्ण हल nahi.krupa मुझे दीर्घ आयु से भी मुक्त karen.ye शापित जीवन मई नहीं जीना chahta.mai आपकी शरण में रहना चाहता हूँ.
BHAGWAN-iska वक़्त अभी नहीं aaya.par आने वाला hai.bohot शीघ्र कल युग आने वाला hai.us युग में पाप अपने चरम पर hoga.shaitan अति शक्तिशाली hoga.tab मेरा अंश इस संसार में aayega.jab भी उसका जन्म hoga,uska नाम तुम hi rakhoge.uske पेअर को अपने माथे पे लगते hi तुम अविषाप मुक्त हो जाओगे.
बाबा VISHAKHT-toh क्या तब मुझे मोक्षा मिल jayega.mai आपके शरण में आ जाऊंगा.
BHAGWAAN-iska जवाब भी मई तुम्हे तब hi dunga.tab तक लोगों की दिल से सेवा करो.
बाबा VISHAKHT-JO आज्ञा प्रभु
BHAGWAAN-MANGAL हो.
(दोस्तों ये रहा 3रद और 4तह UPDATE.BABA विशाखत का पास्ट लिखना ज़रूरी THA.UNKA भी एहम किरदार है आगे ISILIYE.PADHIYE और बताइये कैसा LAGA.LATE इसीलिए हुआ क्यूंकि मई बाबा का पूरा पास्ट एक साथ दिखाना चाहता THA.READ & एन्जॉय.)