फंतासी ऐटिटूड.....( मैजिक + रोमांस )(कम्प्लेटेड) - Page 11 - SexBaba
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फंतासी ऐटिटूड.....( मैजिक + रोमांस )(कम्प्लेटेड)

अब तक आपने पढ़ा की भुविका और बिल्जेबब के स्पिरिट्स आपस में जुड़ जाते हैं वहीँ विक्रम और अवंतिका के बीच की दूरी भी ख़त्म हो जाती है...

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट- 83

PLANET-EARTH

प्लेस- मीनाक्षी मेन्शन

गुड इवनिंग AUNTY...GOOD इवनिंग अंकल....

V/MOM-aao आओ बचो बैठो......

विक्रम की माँ और डैड ने अवंतिका शनाया और उनके साथ आये उनके दोनों भाइयों के जेस्चर का जवाब देने के बाद कहा....

शाम का वक़्त hai.....VIKRAM ने अपने माँ डैड को बता दिया था की अवंतिका शनाया भी हमारे साथ आने वाले हैं और उनके साथ उनके दो भाई भी होंगे....

और मेरे दोनों दोस्त तोह थे hi....

विक्रम & पार्टी स्विट्ज़रलैंड के लिए कल निकलने वाले हैं....

मेरी माँ ने जाने से पहले मुझसे एक बार अवंतिका के दोनों भाईओं को घर लाने को कहा ताकि वो दोनों भी सब से मिल लें और हॉलिडे में जाने से पहले hi सबसे कम्फर्टबले हो जाएँ....

और इसीलिए मैंने रियांश और देवांश को घर बुला लिया....

रियांश और देवांश दोनों hi जानते थे की मेरे डैड इंडिया के लीडिंग इंडस्ट्रियलिस्ट में से एक हैं इसीलिए दोनों थोड़ा नर्वस थे..

और ये बात मैंने डैड को धीरे से बता दी...

डैड- so,we हैवे तवो फेसेस इन आवर हाउस टुडे हाँ......

रियांश- hello sir..i'am रियांश & हे इस माय बरोथेर देवांश.....

देवांश- hello सर....

रियांश- sir,i मस्ट say,it's ा हूजे ऑनर तो सीट इन्फ्रोन्ट ऑफ़ ु....

ये बात रियांश ने सिर्फ किसी औपचारिकता की वजह से नहीं कही thi...he मैंट व्हाट हे साइड.....

और ये उसकी आँखों में देखा जा सकता tha...waise तोह मेरी खुद की हक़ीक़त बोहोत बड़ी है....

ग्लूटो में मेरी पहचान की एक छोटो सी झलक देख कर सबने कैसे रियेक्ट किया tha,ye तोह आप सबको पता hi है पर जब कोई मेरे डैड की तारीफ़ करता है या उनके आगे रेस्पेक्ट से झुकता hai,toh जो फीलिंग मेरे दिल में आती है उससे मई शब्दों में बयां नहीं कर सकता....

और वो ईसीए क्यूंकि मेरी पहचान मेरे जन्म से पहले hi सुनिश्चित हो चुकी थी पर मेरे डैड ने अपनी पहचान खुद बनायीं है..

एक ऐसी पहचान जिसके आगे हर कोई झुकता है, मई भी....

डैड- दो ु वर्क फॉर में????

डैड ने ये बात थोड़ी कड़क आवाज़ में बोली थी जिससे सुनकर रियांश और देवांश जो पहले से hi डैड को अपने सामने देख कर थोड़े नर्वस the,wo और नर्वस हो गए....

डैड- मैंने पूछा की क्या तुम दोनों मेरे लिए काम करते हो????

RIYANSH/DEVANSH- no सर.....

डैड- तोह ये सर सर क्या लगा रखा है yaar...mere बच्चों के फ्रंज ho,toh मेरे लिए भी मेरे बचे की hi तरह हुए ना...

अंकल बुलाओ एंड जस्ट relax....isse अपना hi घर समझो...

डैड की बात सुनकर रियांश और देवांश थोड़ा रिलैक्स हो गए....

अरे waah,aaj सारे बच्चे घर par..kis बात की मीटिंग चल रही है भाई.....???

अभी हममे से कोई कुछ कहता उससे पहले hi ये आवाज़ हमारे पीछे से आयी जो की मेरे नानू की थी....

नानू को आता देख हम सब खड़े हो gaye.....afterall हेड ऑफ़ थे फॅमिली जो थे....

RIYANSH,DEVANSH,SHANAYA,AVANTIKA ने नानू के पेअर chue..naanu ने चारों के सर पर हाथ रख उन्हें ब्लेस्सिंग्स दी...

नानाजी- इन दोनों बच्चियों को तोह मई जानता हूँ पर ये दो नौजवानो को पहली बार देख रहा हूँ...

अवंतिका- naanu,ye हमारे भाई हैं....

नानाजी- ाचा ाचा....

अवंतिका के मुँह से नानू सुन कर मुझे बोहोत ाचा laga.aur फीलिंग सिर्फ मेरे मन में hi नहीं जाएगी thi,AVANTIKA को भी ऐसा बोलते वक़्त एक अलग hi एहसास ने छुआ था....

नानाजी- वैसे अभी शाम के वक़्त सभी बचे घर par....kahin घूमने नहीं गए तुम लोग!!!!

मई- नानू वो कल हम सब हॉलिडे पर जा रहे हैं naa,RIYANSH और देवांश भी हमारे साथ जा रहे hai....toh माँ ने कहा था की एक बार इनको घर ले आऊं....

नानाजी- ाचा किया beta.....beta हमे भी अपने घरवाले hi samjhnaa...koi भी बात बोलने में बिलकुल भी नहीं हिचकना....

रियांश- जी नानाजी.....

डैड- papa,aapki पैकिंग हो गयी...

नानाजी- हाँ वो तुम्हारी मम्मी कर रही हैं..

रोनित- naanu,aap एक्ससिटेड तोह हैं ना इस हॉलिडे के लिए.....

नानाजी- ारे मई तोह तुम सब से ज़्यादा एक्ससिटेड hun....ek तोह पहली बार विदेश जा रहा हूँ और उसके ऊपर मेरे दोनों बच्चों की शादी की सालगिरा है....

dekhna,sabse ज़्यादा तोह मई hi नाचूंगा...

नानाजी की बात सुनकर हम सब है दिए वहीँ माँ और डैड ने नानू को साइड से हुग कर लिया....

भैया..........

हम सब है hi रहे तह की इतने में हमारे कानो में ये आवाज़ आयी..

ये और कोई नहीं ाशी थी जो कोमल के साथ बाहर खेल रही थी और अभी अभी अंदर आयी थी...

जिस दिन से मैंने ाशी को समझाया tha,us दिन एक बाद से वो कभी नहीं रोई और अब वो हमेशा खुश hi रहती है...

और जैसे बचे ज़िद करते hain,thik वैसी hi ज़िद अब मेरी ाशी भी करती थी....

इनफैक्ट उसके और कोमल के बीच ज़िद के नाम पे हमेशा कम्पटीशन लगी रहती thi....par उनकी हर ज़िद उन्हें और भी प्यारा बना देती थी....

khair,mera नाम लेते हुए ाशी दौड़ कर आयी और मेरी गोद में कूद gayi..maine भी उससे पकड़ लिया....

वहीँ उसके साथ आ रही कोमल ने जब ये देखा तोह वो भी दौड़ते हु आयी और उसने भी ाशी की hi तरह मेरे ऊपर छलांग लगा दी...

मैंने उससे भी गोद में उठा लिया.....

मई दोनों के साथ मस्ती करने में लग गया वहीँ मेरे घर वालों की मेरे दोस्तों के साथ कुछ देर तक बात होती रही......

रोनित- चलो yaaron,kahin घूम कर आते हैं....

मई- यार ये दोनों मुझे नहीं छोड़ेंगी.....

अंजलि- ारे पास के hi कफ हाउस में चलते हैं naa...bacchon को भी साथ ले चलते hain,ye वहां आइसक्रीम खा लेंगी...

अंजलि की आइसक्रीम की बात सुनके कोमल और ाशी ने आइसक्रीम की रत लगनी शुरू कर दी....

माँ ने भी हमे उसी कफ शॉप में जाने को कहा....

मेरे सारे फ्रंज naanu,mom और डैड से बारी बारी mile...dad ने सबको सुबह 10 बजे तक यहीं घर पर आने के लिए कह दिया....

हम सब कफ हाउस के लिए निकले जहाँ दोनों बच्चियां आइस क्रीम खाने में बिजी हो gayin..hum लड़के मिलकर िपद में हमारे स्विट्ज़रलैंड में रुकने वाले होटल और अर्रंगेमेन्ट्स की बात में लग गए वहीँ तीनो गर्ल्स अपने गॉसिप में मशगूल हो गए...

कुछ देर बाद हम सब एक दूसरे को कल मिलने का कह अपने अपने घर निकल गए....

फिर कुछ ख़ास नहीं hua...next डे प्लान के मुताबिक अवंतिका & पार्टी सुबह 10 बजे से पहले hi मेरे घर पहुँच गए...

हम सब तोह रेडिठे hi....AVANTIKA & पार्टी रोनित और अनजालि के पेरेंट्स से मिले और उनके साथ भी काफी जल्दी कम्फर्टेबले हो गए...

हम सब अलग अलग कार्स से एयरपोर्ट के लिए निकल gaye...SHANAYA हमारे प्लेन को देखने और उसमे सफर करने क लिए कुछ ज़्यादा hi एक्ससिटेड थी...

उनमे से किसी ने भी आज तक किसी चार्टर्ड प्लेन में सैर नहीं की थी...

और जब एयरफील्ड में कड़ी हुई हमारी प्लेन पर उन सब की नज़र गयी तोह वो सब और ज़्यादा एक्ससिटेड और खुश हो गए.....

हम सब हसी ख़ुशी मस्ती करते हुए प्लेन में बैठ गए और हमारे बैठते hi हमारी प्लेन ने टेक ऑफ कर लिया.......

अब बस 10 घंटे का सफर बाकी रह गया था हमे स्विट्ज़रलैंड के शहर जुरिक में लैंड करने के लिए....

चलिए जब तक हमारे हीरो & पार्टी जुरिक pahunche,hum कहीं और से घूम आते हैं...

प्लेनेट- एलोप्टुस

प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट

YELUPTUS........ek.banzar PLANET.....naa hawa,aur नाही paani....har तरफ रथ hi रथ और उसी रथ का एक अज्ञात गैस के ज़रिये उठता हुआ बवंडर..

सूरज की धीमी सी रौशनी जो की किसी और गृह के उजाले के लिए thi,us ग्रह से होता हुआ उस सूर्य का एक बारीक सा प्रकाश एलोप्टुस गृह पर पढ़ रहा था....

जिससे यहाँ के भयावह माहौल को देखा जा सकता tha...par ऐसे वीरान गृह में जहाँ किसी कीड़े तक का वास नहीं hai,wahan हम कर क्या रहे हैं...?????

अरे ये kya???????is बवंडर भरे रेगिस्तान में ये दो साये कौन hain.....chaliye, पास से देखते हैं.....

अरे ये दोनों तोह........

भुविका और बिल्जेबब हैं....

पर ये यहाँ कर क्या रहे हैं????

अच्छाआ याद aaya.....ASMODEUS ने बिल्जेबब से भुविका को किसी शांत जगह ले जाने को कहा tha,aur बिल्जेबब ने ये जगह चुनी hai....par ये जगह hi kyun????aayiye बिल्जेबब की ज़ुबानी hi सुन लेते हैं....

बिल्जेबब- एलोप्टुस में तुम्हारा स्वागत है भुविका.......

भुविका ने कुछ कहा नहीं बस इधर उधर देखती rahi...uske मन भी यही ख्याल आ रहा था बिल्जेबब उससे यहीं क्यों लाया है....

बिल्जेबब- यही सोच रही हो ना की मई तुम्हे यहाँ क्यों लाया हूँ????

बिल्जेबब की बात सुनकर भुविका चौंक गयी....

भुविका- तुम्हे कैसे पता की मई क्या सोच रही हूँ???

बिल्जेबब- तुम भूल रही हो की हम दोनों के स्पिरिट्स अब जुड़ गए हैं... इसीलिए मई तुम्हारी सोच पढ़ सकता हूँ..

भुविका- पर मई तोह तुम्हारी सोच नहीं पढ़ पा रही हूँ???

बिल्जेबब- क्यूंकि अभी तुम्हारी शक्तियों पर तुम्हारा नियंत्रण नहीं आया है....

और इसीलिए hi हम यहाँ आये hain...isse अछि जगह तुम्हे अपनी शक्तिओं को नियंत्रित करने के लिए नहीं मिलेगी...

और ना hi परीक्षा देने के लिए इससे बेहतर कोई स्थान है...

भुविका- pariksha!!!!Kaisi परीक्षा????

बिल्जेबब- अपनी शकितयों की हदों को पेहचानने और उससे और निखारने की pariksha....haan,ye सत्य है की इस वक़्त तुम्हारे अंदर दो शक्तिशाली डेविल्स की ऊर्जा है और उसके साथ मेरी शक्तियां और ज़िन्दगी भर मेरे सीखे गए विद्याएं भी तुम्हारे मस्तिष्क के किसी कोने में दफ़न है...

किन्तु एक सत्य ये भी है की तुम्हारा जन्म मनुष्य योनि में हुआ hai...aur इसिलए मेरी शक्तियों को अपनी शक्ति बनाना तुम्हारे लिए या ये कहूं तुम्हारे शहर के लिए आसान नहीं है....

पर ये नामुमकिन भी नहीं bai..aur ये जगह इस मुश्किल काम को तुम्हरे लिए आसान करने के लिए रास्ता भी बनाएगी और साथ साथ कुछ रोड भी अटकाएगी जिससे तुम्हे पार करना है....

भुविका- जब ये जगह मेरी मदद करने वाली है तोह फिर रोड क्यों अटकाएगी??? और वैसे ये जगह है kya????tumne मुझे अब तक ये भी नहीं बताया की ये जगह hi तुमने क्यों चुनी!!!!?????

बिल्जेबब- तुमने अक्सर सुना होगा की बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न ho,ant में आचायी की hi जीत होती hai....par ये जगह उस बुराई का प्रतीक है जिसके सामने आचायी ने अपने घुटने तक दिए थे......

भुविका- मतलब!!!!!!

बिल्जेबब- जिस बंज़र गृह में हम खड़े hain,kisi ज़माने में ये एक हरा भरा जीवन से भरा हुआ गृह था...

पर यहाँ की आबादी ज़्यादा नहीं thi...kul 200 लोग इस गृह में रहते थे...

भुविका- बस 200....!!!!

BEELZEBUB-yahan के गृह वासी कोई साधारण मनुष्य नहीं the...wo बोहोत अलग the...aur सबसे मज़ेदार बात ये थी की उन 200 लोगों के नाम नहीं the,bas पहचान थी और उसी पहचान से पूरा ब्रम्हांड ना सिर्फ उन्हें जानता tha,balki उनके सम्मान में झुकता भी था...

भुविका- अजीब बात hai...bina नाम के manushya...waise उनमे ऐसी क्या विशेषता थी जिसके आगे पूरा ब्रम्हांड झुकता था...

BEELZEBUB-unki पहचान hi उनकी विशेषता thi...un 200 लोगों के समूह को समय संचालक के नाम से जाना जाता tha....aur यही नाम उनकी पहचान भी थी...

भुविका- समय संचालक!!!!! क्या वो समय की गति को आगे पीछे कर सकते थे?????

बिल्जेबब- शायद!!!!

भुविका- शायद मतलब!!! तुम्हे नहीं पता!!???

बिल्जेबब- nahi...mujhe kya,kisi को भी नहीं pata...ye सब मेरे जन्म से हज़ारों साल पहले की बात है....

मुझे बस इतना पता है की वो समय संचालक अच्छाई के प्रतिक the.....aur बेहद शक्तिशाली भी...

भुविका- फिर उन्हें किसने मारा.....?????

बिल्जेबब ने कुछ कहा नहीं बस भुविका की तरफ देख कर muskuraya...aur बिल्जेबब के मुस्कान से भुविका को उसके सवाल का जवाब भी मिल गया...

भुविका- तुम्हारे फादर ने!!!!!!

बिल्जेबब- haan....par फादर ने उन्हें मारा nahi,balki उनकी आत्माओं को कैद कर लिया...

BHUVIKA-aatmaon को कैद कर लिया matlab????fir उन समय संचालकों के शरीर कहाँ गए.....

बिल्जेबब- तुम उनके ऊपर कड़ी हो?????

बिल्जेबब की बात सुन भुविका को एक तेज़ झटका लगा....

भुविका- मई तोह रथ पर कड़ी hun???kya उन सब के शरीर रथ में बदल गए???

बिल्जेबब- nahi...is ज़मीं के नीचे इस गृह की नीव में उन सभी के शरीर दफ़न hain....aur इसी वजह से hi आज भी ये गृह बचा हुआ है वर्ण कबका फैट चूका होता....

और उन शरीरों में अब भी वाइट और ब्लैक ऊर्जा काफी मात्रा में भरी हुई hai.aur जब तुम यहाँ ध्यान लगाने के लिए baithogi,tab एक तरफ वही ब्लैक ऊर्जा तुम्हे मेरी शक्तियों और सिद्धियों को तुम्हारे मस्तिष्क के भीतर ढूंढ़ने में मदद करेंगी वहीँ वाइट ऊर्जा तुम्हे अपनी मंज़िल तक पहुँचने से रोकेंगी.....

भुविका- adbhudh.....par मुझे एक बात batao,tumari बातों से पता चलता है की यहाँ जो लोग रहते the,unke अंदर जो भी शक्ति thi,wo उन्हें वाइट एनर्जी से मिली थी पर तुम कह रहे हो की उनके अंदर ब्लैक एनर्जी भी hai...toh वो उनके अंदर कहाँ से आयी.....

बिल्जेबब- मुझे पूरा सच तोह नहीं पता पर जितना पता है उतना बता देता हूँ....

फादर को उन समय संचालको से कुछ चाहिए था जो उन लोगों ने फादर को देने से मन कर दिया...

फादर ने बल पूर्वक उस चीज़ को उन समय संचालको से छीनने की भी कोशिश की पर नाकामियाब रहे...

ये जानकार की ास्मोडियस को कुछ चाहिए था पर वो उससे हासिल करने में नाकामियाब raha,ye जानकार भुविका को शॉक लगा...

अपनी बेहेन और मैडोक्स की शक्तियों को पाने के बाद भुविका को ास्मोडियस की शक्तियों के बारे me,jitna निष्कलिका और मैडोक्स जानते the,utna पता चल गया था..

और उसी आधार पर बिल्जेबब की बात उससे हज़म नहीं हो पा रही थी....

भुविका- समय संचालक तुम्हारे फादर से भी ज़्यादा शक्तिशाली थे..

बिल्जेबब- मेरे फादर से शक्तिशाली कोई भी नहीं hai...agar ऐसा कुछ होता तोह मेरे फादर उन समय संचालको को कैद नहीं कर पाते....

भुविका- समय संचालकों को तुम्हारे फादर ने कैद क्यों kiya,unhe तोह उन सब को मार देना चाहिए था...

बिल्जेबब- यही बात मैंने भी अपने पितः से पूछी thi,tab उन्होंने मुझे बस यही बताया था की जो चीज़ उन्हें समय संचालकों से हासिल की hai,agar वो उन सब को मार देंगे तोह वो चीज़ भी नष्ट हो जाएगी....

भुविका- oh.....par तुम्हारे फादर ने उन सब की आत्माओं को कैद कैसे किया???

बिल्जेबब- फादर ये जानते थे की बल पूर्वक वो समय संचालकों को मार नहीं पाएंगे...

इसीलिए उन्होंने छल का इस्तेमाल kiya..SAMAY संचालक हमेशा ध्यान की मुद्रा ने बैठे रहते थे..

एक दिन समय संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल के बाहर कुछ धमाके सुनाई दिए....

और ये धमाके कुछ कुछ देर के बाद लगातार हो रहे थे...

इन धमाकों से इस गृह को कुछ नुक्सान तोह नहीं हो रहा tha,par धमाकों के आवाज़ से उनका ध्यान भांग होने लगा.....

उन धमाकों का कारण जानने के लिए उन में से कुछ संचालकों ने वायु मंडल से बहार जाने की बात कही...

पर क्यूंकि उनमे से किसीको भी गॉड से ऐसा करने की इजाज़त नहीं thi,isiliye बाकियों ने मन कर दिया...

और वो सब पुनः अपना मन एकाग्रित कर ध्यान में बैठ गए...

पर उन धमाकों की आवाज़ों की वजह से वो ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे थे.....

और गृह के अंदर से वो ना hi इस परेशानी की वजह जान पा रहे the,naa hi उससे ठीक कर पा रहे थे....

अन्तः उनमे से कुछ संचालकों को अपने गृह के वायु मंडल से बाहर जाना hi पड़ा.....

गॉड को छोड़कर बस मेरे फादर hi ऐसे थे जो ये जानते थे की एलोप्टुस के बाहर समय संचालकों को मारा जा सकता है.....

पर वो ये भी जानते थे की समय संचालकों के मरते hi जिस चीज़ को वो हासिल करना चाहते hain,wo नष्ट हो जाएगा....

इसीलिए उन्होंने एक दूसरी युक्ति सोच कर राखी थी...

समय संचालक अपने गृह के सीमा को पार कर बाहर आये और उन्होंने देखा की अंतरिक्ष क बीच hi लगातार रूक रूक कर लगातार कारण भेदी धमाके होते जा रहे हैं...

धमाकों की आवाज़ से तंग आकर उन्होंने उससे रोकने के लिए स्पेल बोलै और यहीं वो धोका खा गए.....

उन्हें पहले धमाकों के होने का कारण जान लेना चाहिए tha,par आवाज़ की तीव्रता की वजह से उन्होंने बिना कारण जाने स्पेल बोल दिया था...

और जैसे hi समय संचालक के बोले गए स्पेल की वजह से रे निकल कर उन धमाकों पर padi,un धमाकों से भी एक रे निकली और उस रे ने समय संचालकों के रे को जकड लिया....

और ऐसा होते hi उस रे का श्रोत जो की समय संचालक the,wo भी धमाकों से उज्वलित हुए रे में बांध गए...

उन्होंने बोहोत कोशिश की पर वो छूट नहीं पाए...

पर इसके साथ एक चीज़ और भी हुई thi...darasal सारे समय संचालक एक दूसरे से जुड़े हुए थे....

और जैसे hi अंतरिख में आये हुए समय संचालक उन धमाकों से निकलिए रेज़ में fasen,neeche गृह के बाकी के सारे संचालकों के शरीर भी हवा में उठकर ऊपर की तरफ जाने लगे..

उन सब ने बोहोत कोशिश की की वो और ऊपर ना जाएँ पर वो सब कुछ कर ना पाए..

और वो सब ये भी जान गए थे की अंतरिक्ष में गए उनके साथियों के साथ कुछ गलत हुआ है और उसी वजह से उनके साथ भी ये अब हो रहा है..

कुछ hi देर में सारे समय संचालक अंतरिक्ष में the...antariksh में आते hi सभी संचालकों के शरीर भी रेज़ से बांध गए...

वो सब अपने बंधन से निजात पाने की बोहोत कोशिश कर रहे थे पर वो कामियाब नहीं हुए....

तभी......

उनके सामने एक तेज़ रौशनी हुई और उस रौशनी के बीच मेरे फादर प्रकट हुए....

मेरे फादर को देखते hi सारे संचालक समझ गए की ये सब उनका hi किया धरा है.....

समय संचालक मेरे फादर को उकसाने के लिए उन्हें भला बुरा कहने lage..wo चाहते थे की मेरे फादर क्रोध में आकर उन्हें मार दें क्यूंकि ऐसा करते hi जिस चीज़ की चाह मेरे फादर को thi,wo भी नष्ट हो जाती....

पर मेरे फादर उन सब के मंजूबो से अवगत the..par इसके बावजूद उनके सामने एक और परेशानी थी....

और वो ये की एलोप्टुस की नीव hi उन समय संचालकों के शक्तियों से राखी गयी है....

इसीलिए वो उन सब को अपने साथ बंदी बनाकर भी नहीं ले जा सकते थे...

पर वो समय संचालकों को वापस एलोप्टुस में भी नहीं छोड़ सकते थे...

क्यूंकि एलोप्टुस में जाते hi समय संचालकों की शक्ति फिर से बढ़ जाती और मेरे फादर ने जिस चीज़ के लिए इतना कुछ खेल रचा tha,wo उससे वापस अपने पास बुला लेते...

और वो चीज़ तोह थी hi समय संचालकों की amanat..unke बुलाते hi वो वापस आ जाती....

भुविका- और इसीलिए उन्होंने एक युक्ति sochi....aur वो ये की समय संचालकों के शरीर को उनकी शक्ति सहित एलोप्टुस के नीव में दफना दिया जाए..

और उन सब की स्पिरिट्स को अपने साथ ले जाय jaaye...kyunki आत्मा बिना शरीर के रह सकती है पर शरीर बिना आत्मा के नहीं रह sakta....HAINA !!!!

भुविका ने बिल्जेबब की आगे की बात पूरी की....

बिल्जेबब- haan...par उससे पहले फादर एलोप्टुस गए और उस चीज़ को जिससे हासिल करने के लिए उन्होंने इतना कुछ किया tha,usse लिया और वापस समय संचालकों के सामने आ गए...

उसके बाद फादर ने समय संचालकों के शरीर से उनकी आत्मा को अलग कर diya...aatma के अलग होते hi शरीर का कोई मोल नहीं raha...sabhi संचालकों के शरीर अंतरिक्ष में तैरने लगे...

फिर फादर ने उन आत्माओ से उनकी साड़ी शक्ति उनके शरीरों में स्थानांतरण कर दी....

पर साथ साथ उन सब के शरीर में कुछ काली शक्तियां भी भेज दी जिससे संचालकों के स्पिरिट्स अगर चाहें तोह भी अपने शरीर का पता नहीं लगा पाते....

फिर फादर ने सभी संचालकों के शरीर इस गृह के नीव में दफना दिए...

पर जैसे शरीर को शरीर उसकी आत्मा बनती hai,thik उसी तरह एक गृह को भी गृह हवा और पानी बनाते हैं...

इस तर्क पर जैसे hi बिना आत्मा के सारे संचालकों के शरीर दफ़न hue,thik उसी वक़्त इस गृह की आत्मा ने भी इससे छोड़ दिया...

और ये गृह ऐसा बन gaya...BANZAR.......

भुविका- इतना खतरनाक dimag,itni दूरदर्शिता के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता....

वाकई तुम्हारे फादर जैसा कोई नहीं.....

वैसे तुमने एक बात अभी भी नहीं batayi...un समय संचालकों के स्पिरिट्स का क्या hua???tumhare फादर उन्हें कहा ले गए...

बिल्जेबब- फादर ने उन सब को रखने के लिए एक अलग गृह का निर्माण किया....

भुविका- एक अलग गृह kaa!!!!abhudh.....koi नाम है उस गृह का????

बिल्जेबब- शैडो वर्ल्ड.....

आज के लिए इतना HI.....

आपका अपना V...J.....
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम & पार्टी स्विट्ज़रलैंड के लिए निकल जाते हैं वहीँ दूसरी तरफ बिल्जेबब भुविका को लेकर एलोप्टुस पहुँचता है और उससे वहां का राज़ बताता है...

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट- 84

प्लेनेट- एलोप्टुस

प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट

ये बार बार हो क्या रहा hai????jab भी मई ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रही hun,mere दिमाग को झटका सा लग रहा है.....

बिल्जेबब- ये तोह बस शुरुआत hai...abhi तोह तुम्हे कठिनाईओं के पहाड़ को पार करना बाकी है....

बिल्जेबब ने भुविका को जितना उससे पता tha,utna बताने के बाद वो उससे जिस मकसद से यहाँ लाया tha,usse शुरू करने के लिए कहा...

भुविका वहीँ रथ के बीच पालथी मारकर बैठ गयी और अपनी आँखें बंद कर अपने अंदर झाकने की कोशिश करने लग गयी....

पर इस काम की शुरुआत hi बोहोत मुश्किल थी और इसकी वजह थी रथ में लगातार उठता बवंडर जो भुविका और बिल्जेबब के शरीर को लगातार छू रहा था...

क्यूंकि बिल्जेबब और अब भुविका भी डेविल्स the,isiliye इस बवंडर से उन्हें कोई नुक्सान तोह नहीं पहुँच रहा था पर कंसंट्रेशन बिगड़ने के लिए काफी था....

पर भुविका ने हार नहीं मानी और अपने शरीर के भार को रथ में दबाते हुए कंसन्ट्रेट करने की कोशिश करने लगी... और कुछ hi देर में वो कंसन्ट्रेट करने में कामियाब हो hi गयी थी....

उससे अपने अंदर काली और सफ़ेद रौशनी की ऊर्जा दिखने hi लगी थी की अचानक.......

भुविका के मस्तिष्क को एक झटका सा लगा और वो ध्यान से बाहर आ गयी....

पर भुविका ने हार नहीं मानी और दोबारा अपनी आँखें बंद कर कंसन्ट्रेट करने की कोशिश करने लगी....

पर फिर वही hua..white और ब्लैक ऊर्जा के दीखते hi भुविका के दिमाग को एक बार फिरसे झटका लगा और वो वापस ध्यान से बाहर आ गयी....

फिर यही घटना क्रम भुविका के साथ लगातार हुआ जिससे चिढ़कर उसने अपनी बात बिल्जेबब के सामने राखी जिसका जवाब बिल्जेबब ने दिया....

भुविका- कठिनाईओं का पहाड़ मतलब!!!!

बिल्जेबब- जिस जगह पहुंचकर तुम्हारे मस्तिष्क को झटका लग रहा hai,wo तुम्हारी शक्तियों के साम्राज्य की सरहद है...

और वहां पर तुम्हारे अंदर मौजूद वाइट और ब्लैक ऊर्जा के कण मौजूद हैं जो तुम्हे आगे बढ़ने से रोक रहे हैं..

भुविका- पर वो शक्तियां तोह मेरी hi हैं naa,fir मुझे क्यों रोक रहे हैं...

बिल्जेबब- अभी तक तुम्हारी शक्तियां तुम्हारे आधीन नहीं हुईं हैं...

उन्हें अपना गुलाम बनाने के लिए तुम्हे उन्हें आज़ाद करना होगा..

और वो तभी होगा जब तुम उन्हें dekhogi....unka स्पर्श करोगी..

अपनी साड़ी शक्तियों को स्पर्श करते hi तुम्हारी साड़ी शक्तियां तुम्हे अपना लेंगी....

और जिस झटके से तुम इतनी विचलित हो रही ho,wo तोह तुम्हरे परेशानियां की बस शुरुआत है...

उस सरहद को पार करते hi तुम्हारी असली परेशानी शुरू होगी....

भुविका बिल्जेबब की बात सुनकर शॉकेड हो गयी....

भुविका- असली परेशानी मतलब????

बिल्जेबब- इतनी जल्दी भूल gayi...is गृह के नीव में पड़े समय संचालकों के शरीर में मौजूद वाइट एनर्जी.....

जो तुम्हारे रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती hain....aur जैसे hi तुमने उस चुनौती को पार kiya,tumhe तुम्हारी शक्तियां मिल जाएंगी....

भुविका- पर मुझे मेरी hi शक्तियां पाने के लिए इतना संघर्ष करने की आवशयकता hi क्यों है????

बिल्जेबब- आसानी से मिली चीज़ की कदर नहीं होती BHUVIKA...jitna कठिन sangharsh,utna hi मीठा फल मिलता है...

पर मई समझ सकता हूँ की तुम संघर्ष के बिना hi सब कुछ क्यों पाना चाहती हो...

आज तक तुम्हे तुम्हारी बेहेन की वजह से सब कुछ आसानी से जो मिला hai..tumhe कभी म्हणत करने की ज़रुरत hi नहीं पड़ी....

पर ये मत भूलो की अब तुम्हारी दीदी मर चुकी hai..ab तुम्हे सब कुछ अपने दम पर hi हासिल करना होगा....

बिल्जेबब के मुँह से अपनी बेहेन के मरने की बात सुनकर भुविका को क्रोध आ गया और वो बिल्जेबब को मारने के लिए अपने ध्यान आसान से उठ गयी और अगले hi पल....

धामममममम.....

वो पुनः वापस अपनी जगह पर बैठ गयी या ये कहूं बैठा दी गयी...

हुआ ये की जैसे hi भुविका uthi,BEELZEBUB ने अपना हाथ आगे kiya..uske हाथों से एक प्रेशर एयर रे निकली और भुविका को लगी जिससे भुविका वापस अपनी जगह पर बैठ गयी......

बिल्जेबब- अपना ghussa,apni ऊर्जा अपने प्रतिशोध के लिए बचा कर रखो BHUVIKA.......aur वैसे भी ये मत भूलो की अब हमारी आत्माये जुड़ चुकी हैं..

अगर मुझे कोई नुक्सान हुआ तोह तकलीफ तुम्हे भी होगी....

भुविका कुछ देर तक बिल्जेबब को घूरती रही पर फिर उसने अपनी आखें बंद कर्ली....

बिल्जेबब- अपने मन से सारे भाव बहार निकल दो भुविका... ना prem,naa moh,naa krodh,naa jigyasa..bas उस किरण पर अपने चित को एकाग्रित करो जो तुम्हारे मस्तिष्क के बीच उज्वलित होगी...

और उस किरण की डोर को पकड़ आगे बढ़ती jaao.....tumhe तुम्हारी मंज़िल मिल जायेगी....

बिल्जेबब ने ये सब बोल तोह दिया था पर वो जनता था की ये सब बोलना जितना आसान hai,karna उतना hi मुश्किल....

वैसे तोह उसने भुविका की ढृढ़ता का नमूना देख लिया था पर वो ये भी जानता था की अपनी बेहेन को खोने की वजह से भुविका का मन बोहोत विचलित है और विचलित मन से वो कभी भी अपनी शक्तियों तक पहुँच नहीं पाएगी....

पर उम्मीद और इंतज़ार करने के सिवा वो कुछ कर भी तोह नहीं सकता था....

वहीँ भुविका ध्यान अवशता में वापस वहीँ पहुँच चुकी थी जहाँ उससे झटका लगता था....

और जैसे hi भुविका वाइट और ब्लैक ऊर्जा से बने सरहद पर pahunchi,white और ब्लैक ऊर्जा ने उससे छू लिया जिससे उससे वापस एक झटका लगा और वो ध्यान से बाहर आ गयी....

और जब उसमे सामने देखा तोह पाया की बिल्जेबब उससे देखकर मुस्कुरा रहा है...

भुविका- यहाँ मई बार बार असफल हो रही हूँ और तुम है रहे हो...

बिल्जेबब- तुम्हारी असफलता पे नहीं, मई तुम्हारे दर पे है रहा हूँ...

इस बार जब तुम अपनी शक्ति की सरहद पर pahunchi,toh तुम झटका लगने से दर रही थी.....

इसीलिए हसी आ गयी.....

भुविका- तोह इसमें हसने वाली कौन सी बात है???

बिल्जेबब- जिस शक्ति को पाने के लिए तुम ध्यान में बैठी ho,ussi के स्पर्श से दर रही ho,aise में हसी तोह आएगी....

एक बात batao,kabhi तुमने खाना बनाया hai?????ya फिर किसी को खाना बनाते वक़्त देखा है...!!!!!

भुविका- बनाया तोह नहीं है पर haan,dekha है...

बिल्जेबब- खाना जब बनता hai,toh क्या तुम तुरंत खा लेती हो???

भुविका- नहीं.....

बिल्जेबब- क्यों????

भुविका- क्यूंकि वो बोहोत गर्म होता hai..jab उसकी गर्माहट थोड़ी काम होती hai,tabhi उससे खाया जा सकता है...

BEELZEBUB-HMM.ab एक बात batao,jab तुम अपनी शक्ति की सरहद पर पहुँचती ho,tab होता क्या है....????

भुविका- मई जैसे hi आगे बढ़ने की कोशिश करती hun,shaktiyon के स्पर्श से मुझे झटका लगता है और मई ध्यान से बाहर आ जाती हूँ...

बिल्जेबब- तुम मेरे सवाल को समझी nahi...mai यह पूछ रहा हूँ की जब तुम वहां पहुँचती हो तोह तुम्हे क्या दीखता है???

भुविका- मेरे वहां पहुँचते hi वाइट और ब्लैक ऊर्जा दो अलग अलग तरफ से एक दूसरे की तरफ बढ़ने लगते हैं और........

बिल्जेबब- और जैसे hi वो मिलते हैं ठीक उसी वक़्त तुम उन्हें पार करने की कोशिश करती हो....

बिल्जेबब ने भुविका की बाकी की बात पूरी कर दी....

भुविका- हाँ तोह..........

पर आगे भुविका कुछ कह नहीं पायी क्यूंकि उससे बिल्जेबब के तर्क का मतलब समझ में आ गया था???

और वो ये की जिस तरह खाने को पकते साथ नहीं खाया जाता क्यूंकि वो बोहोत गरम होता हैं ठीक वैसे hi जिस वक़्त वाइट और ब्लैक ऊर्जा जब आपस में टकराते हैं उस वक़्त उनकी एनर्जी मल्टीप्लय हो जाती है जिससे नार्मल होने के लिए कुछ वक़्त चाहिए पर ऐसा होने से पहले hi भुविका उन्हें क्रॉस करने की कोशिश करती है जिस वजह से उससे झटके लगते हैं.....

बिल्जेबब- chalo,tumhe समझ तोह आया.....

भुविका ने कुछ नहीं कहा बस फिरसे अपनी आखें बंद कर लीन.....

और धीरे धीरे उसका ध्यान बिंदु उस जगह पहुँचने लगा जहाँ उससे jhatka.lagta था...

पर इस बार जैसे hi भुविका अपनी शक्तियों की सरहद पर pahunvhi,wo रूक गयी..

उसके सामने दोनों तरफ से उसकी दोनों शक्तियां एक दूसरे की तरफ बढ़ने लगीं और कुछ hi पलों में दोनों एक दूसरे में समां चुकी थी....

दोनों ऊर्जा के एक दूसरे से मिलते hi ऊर्जा का कलर हल्का स्वेत हल्का काला हो गया....

और वो ऊर्जा से भरी रे अपनी जगह में उछलने लगी मानो उबाल रही हो....

ये सब भुविका का चित देख रहा tha.....aur अपनी दोनों ऊर्जा को उछलते देख वो ये भी समझ गयी की वो इसीलिए hi आगे नहीं जा पा रही थी क्यूंकि उसकी ऊर्जा उस वक़्त काफी असंतुलित थी जो खुद को ठीक करने की कोशिश कर रही थी...

और कुछ hi देर में वो असंतुलित ऊर्जा का उछलना धीरे धीरे काम होने लगा और फिर वो ऊर्जा स्थिर हो गयी...

अपनी ऊर्जा को स्थिर होता देख भुविका का चित आगे बढ़ा और अगले hi पल ध्यान अवशता में होने के बावजूद भुविका के चेहरे पर हलकी सी एक मुस्कान नाच गयी...

जिससे सामने खड़े बिल्जेबब ने देख लिया.....

बिल्जेबब मन में- chalo,ek बाधा तोह ख़त्म हुई...

बिल्जेबब ने राहत की सांस छोड़ी hi थी की अचानक उसके दिमाग में एक दूसरा ख्याल दौड़ गया और उस ख्याल के दौड़ते hi बिल्जेबब के चेहरे पर चिंता के भाव उत्पन्न हो गए.....

अभी वो कुछ और सोचता की इतने में................

ऐसा कुछ नहीं होगा................

बिल्जेबब के कानो में ये आवाज़ गूंज गयी जिससे बिल्जेबब तुरंत पहचान गया......

बिल्जेबब- किन्तु फादर, इस ब्रम्हांड में वाइट एनर्जी का हर श्रोत विक्रम के आधीन हैं...

भुविका के वाइट एनर्जी को पाते hi उन्हें सब पता चल जाएगा और इसका अंजाम ाचा नहीं होगा....

अपनी बातों में जैसे hi बिल्जेबब के मुँह से विक्रम के लिए उससे नहीं उन्हें nikla,apne महल में बैठे ास्मोडियस के चेहरे पर एक हलकी सी स्माइल आ गयी...

बिल्जेबब को याद था जो उसके फादर ने उससे उसके भाई को किस तरह से सम्भोदित करने को कहा था....

ास्मोडियस- मैंने कहा ना ऐसा कुछ नहीं होगा......

बिल्जेबब को अपने फादर की बात का मतलब तोह समझ नहीं आया पर वो जानता था की अगर ास्मोडियस ने कुछ कहा है तोह वो होगा ज़रूर......

इसलिए वो निश्चिंत हो गया और वापस भुविका के चित से जुड़ गया......

ास्मोडियस- VIKRAM.......WHITE एनर्जी का एक लौटा वारिस.........

पर कब तक...........

प्लेनेट- एअर्थ

प्लेस- स्विट्ज़रलैंड

स्विट्ज़रलैंड..... एअर्थ का सबसे ख़ूबसूरत country....aur कपल्स के लिए तोह शायद इससे परफेक्ट जगह कोई है hi नहीं...

सिलसिला से लेकर डलज तक हर मूवी ने इस जगह की ख़ूबसूरती को कैद करने की कोशिश की पर कोई भी ऐसा करने में पूरी तरह से कामियाब नहीं हो पाया..

सफ़ेद चादर की बर्फ से खुद को ओढ़े हुए pahad...unhi पहाड़ों के किनारों को चूमते हुए झील.....

प्राकृतिक सौन्दर्यता के साथ साथ वैज्ञानक उपलब्धियों से सुसज्जित अनेक खेल क्रीड़ा जिसने यहाँ आये पर्यटकों के दिलों को खुदमे बाँध सा लिया है......

Khair,agar स्विट्ज़रलैंड की खूबसूरती के बारे में लिखने बैठूं तोह शायद कमसेकम 20 उपदटेस तोह निकल hi जायेंगे तोह इसीलिए यहाँ की मनमोहकता से खुदको कुछ देर तक अलग करते हुए चलिए, कहानी में वापस चलते हैं...

ममममममममहहहह..........

व्हाट फ्रेश एयर मन.......

स्विट्ज़रलैंड के फाइनेंसियल कैपिटल जुरिक के एयरपोर्ट से बाहर निकलते हुए यहाँ के हलके ठन्डे वातावरण को महसूस करते हुए यहाँ के फ्रेश एयर को अपनी साँसों से खींचते हुए सभी ने इस बात को अपने मन में कहा.....

हम सब स्विट्ज़रलैंड के टाइम के हिसाब से सुबह 8 बजे यहाँ लैंड हुए the..security मेझस को क्रॉस करते करते 1 घंटा और लग गया....

प्लेन में सफर के दौरान ाशी और कोमल ने खूब मस्ती की थी इसीलिए फ़िलहाल दोनों सोये हुए थे....

ाशी को मैंने गोद में उठाया हुआ था और कोमल को अवंतिका ने....

ाशी को हस्ता खेलता देख मुझे बोहोत ख़ुशी हुई थी...

पर मस्ती सिर्फ उन दोनों ने hi नहीं हम सब ने की थी......

थोड़ी बोहोत झिझक जो रियांश और देवांश के मन में बची thi,wo भी अब ख़त्म हो चुकी थी....

और ये सब हुआ मेरी माँ की वजह se..mom ने उन्हें अपने सेज बच्चे की तरह ट्रीट किया...

अब वो दोनों भी खुदको हमारी फॅमिली का hi हिस्सा समझने लगे थे....

khair,hum सब साड़ी सिक्योरिटी मेझस क्रॉस करके बहार आ गए और बाहर आते hi यहाँ के मौसम की ठंडी हवाओं ने हमारा स्वागत किया...

नानाजी- कितना सुन्दर नज़ारा है यहाँ ka???kya यहाँ हमेशा hi ठण्ड रहती है....???

डैड- जी papa.par फ़िलहाल काम hai....baakji के सेअसोंस में ज़्यादा ठण्ड रहती है...

रियांश- यार V.J अपने होटल का नाम क्या था????

रियांश ने अपने राइट साइड में देखने के बाद मुझसे पूछा....

मई- फ्लोर वाल्ट.....

रियांश- वो dekho,wahan एक बाँदा बैनर पकडे खड़ा है जिसपे फ्लोर वाल्ट लिखा हुआ है......

हम सब ने रियांश की बताई जगह पर देखा जहाँ 1 बाँदा हमारे होटल का बैनर ऊपर उठाये खड़ा थे....

रोनित- लगता है ये हमारे होटल का गाइड है....

हम सब उसकी तरफ चल pade..wo भी हमे अपनी तरफ आता देखकर समझ गया की हम hi उसके गेस्ट्स हैं....

GUIDE-bonjour, जे सुइस वोटर......

गाइड ने हल्का सा झुक कर अपने नेटिव लगगे फ्रेंच में हमें जेस्चर दिया और जैसे hi उसने अपनी बात को इंग्लिश में ट्रांसलेट करने के लीयते मुँह खोला.....

MAI-salut c'est सिम्पा दे ते रेकटरेर...

hello,nice तो मीट ु......

मैंने उसके ट्रांसलेट करने से पहले hi उससे उसकी hi लैंग्वेज में जेस्चर दिया जिससे सुनकर पहले तोह शॉकेड हुआ पर फिर खुश हो गया...

वहीँ मेरे दोस्त और माँ डैड को छोड़ कर बाकी सब मेरे यूँ फ्रेंच बोलने पर शॉकेड हो गए.....

गाइड- oh,tu सैस ले फ्रान्सिअस.....

oh,aap फ्रेंच जानते हैं...

मई- उन पेउ

किते ा बिट....

एलोर्स कबियन दे टेम्प्स पौर अर्रिवेर अल होटल.....

waise,hotel पहुँचने में कितना वक़्त लगेगा....

गाइड- सस्त soixante-quinze मिनट्स ें वोईतुरे....

it's ा सेवेंटी फाइव मिनट्स ड्राइव...

MAI-que नॉस attendons,allons

फिर हमे किसका इंतज़ार hai,chalen!!!.....

गाइड ने एक तरफ इशारा किया और चलने लगा...

हम सब भी उसके पीछे पीछे चल दिए....

थोड़ी दूर पर hi होटल की लक्ज़री बस कड़ी thi..hum सब एक एक कर बस में चढ़ गए..

क्यूंकि मैंने और अवंतिका ने बच्चों को पकड़ा हुआ था इसीलिए हम दोनों लास्ट सीट पर जो की ज़्यादा चौड़ी thi,wahan जाकर बैठ गए..

बच्चों को हमने सीधे लेता दिया और उनके सर हमने अपनी गोद पर रख लिए थे....

हमारे बैठते hi बस चल पड़ी.....

कुछ देर तक हमारा गाइड हम सब को बताता रहा की आगे का प्रोग्राम क्या क्या hai...saari चीज़ें सुनने के बाद हम सब बहार का नज़ारे देखने में खो गए..

तभी........

शनाया- hello एवरीबॉडी.....

आवाज़ सुनकर हम सब ने सामने देखा जहाँ शनाया मैडम हाथ में गाइड की मिछ पकड़ कर कड़ी थी....

रियांश- अब तुझे क्या हो gaya...speech देनी है क्या???

शनाया- haha,very funny...jaisa की आप सब जानते हैं की हमे होटल पहुँचने में 1 घंटे से ज़्यादा वक़्त lagega..toh क्यों naa,kuch गेम खेला जाए....

रोनित- तुझमे शैफाली की आत्मा घुस गयी है क्या???

शनाया- तूने और रियांश भैया ने एक hi गोली खा ली है kya,bakwas P.JS मारने की....

अरे यार एक घंटा क्या सिर्फ नज़ारे देखकर बिताना hai...nazaren तोह हम देखेंगे hi,par फ़िलहाल कुछ गेम हो जाए तोह कैसा रहेगा..

डैड- bhai,mai तोह khelunga...aur वैसे भी अंजू बता रही थी की तुम सबने सेक्रिला टूर पर खूब गेम्स खेले थे...

तोह वैसा hi आज एक गेम हम भी खेल लेंगे....

नानाजी- bilkul..maza आएगा...

नानीजी- आप भी naa.bachon के साथ, बच्चे बन जाते हैं...

नानाजी- लो bhai.khelne की भी भला कोई उम्र होती है kya!!hum तोह ज़रूर खेलेंगे..

मामाजी-- अब पापा ने कह दिया है तोह फिर खेलना hi पड़ेगा...

माँ- पर पहले बताओ तोह की आखिर गेम है क्या???

शनाया- उससे भी पहले एक बात क्लियर कर देती hun....games में या किसी भी चीज़ में इस V.J को हराना बोहोत मुश्किल hai...toh इसीलिए गेम को और टफ करने के लिए ये एक तरफ रहेगा और बाकी सब एक तरफ....

मई- अरे काम से काम कोई एक पार्टनर तोह मुझे दे दो....

माँ- मई बन जाती हूँ तेरी पार्टनर..

डैड- oye,kahan की partner..aap हर गेम में हमारी hi पार्टनर रहेंगी..

डैड की बात सुनकर सब है दिए....

डैड- एक काम kar..AVNI और तू एक टीम हो jao.waise भी दोनों साथ hi बैठे हो....

शनाया- अरे uncle,ye क्या कर रहे hain???wo भी काम होशियार नहीं हैं????

डैड- तोह क्या hua??hum भी तोह इतने लोग हैं....

नानाजी- तोह फिर तय raha...VICKY और अवनि एक टीम में और हम सब दूसरी टीम में...

शनाया- ठीक hai..par फिर भी मुझे मालुम है की ये दोनों भी सब पर भारी pedenge..isiliye इनके हिस्से में दूसरी टीम से ज़्यादा हार्ड टास्क रहेगा...

देवांश- अरे पहले ये तोह बता की गेम क्या है??

शनाया- गेम असल में एक क्विज hai..jisme मई आप सब की टीम से एक सवाल पूछूँगी और V.J और अवनि की टीम से ek..ye सिलसिला होटल पहुँचने तक chalega.hotel पहुँचने तक जिस टीम ने ज़्यादा सवालों के सही जवाब दिए वो जीत गया...

SAB-theek है...

शनाया- तोह मेरा पहला सवाल आपकी टीम से नानू....

कुछ महीनो में 31 डेज होते हैं और कुछ महीनो में 30 days..toh ये बताइये की ऐसे कितने महीने होते हैं जीमनमे 28 डेज होते हैं...

सभी सोचने लगे...

डैड- हैंग on..ye एक ट्रिक क्वेश्चन है.28 डेज हर महीने में होते hain.....matlab साल भर....

शनाया- अब्सोलुतेल्य राइट अंकल......

अब V.J,AVNI,tumhara क्वेश्चन??

अगर आप किसी ज़िले के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं और आपको ये इन्फो मिलती है की दो ट्रेंस आपस में टकरा गए हैं तोह आप सबसे पहले क्या करेंगे और आपका रिएक्शन क्या होगा???

मैंने एक बार अवनि की तरफ dekha,usne कुछ कहा नहीं बस है दिया...

हाय रे इस लड़की की muskurahat......game का तोह पता नहीं पर साली ये ज़िन्दगी कहीं मई हार ना जायूँ .

मई- सब से पहले ये पता लगाऊंगा की वो कर्रिएर ट्रैन थी ( माल गाडी ) या फिर पैसेंजर train..uske बाद hi एक्शन लूंगा...

शनाया- वाओ yaar,absolutely राइट.....

ok नाउ सेकंड क्वेश्चन नौ की टीम के लिए....

अगर मई हर आधे घंटे में एप्पल खाई हूँ तोह 1-30 घंटे बम कितने एप्पल खाउंगी...

सब फिर सोचने लगे...

माँ- 2..अगर हर आधे घंटे में खाना है तोह आधे घंटे का गैप भी तोह हुआ ना....

शनाया- क्या बात है aunty......bilkul सहीं..

अब V.J और अवनि तुम्हारा सवाल और ये भी एप्पल पर hi बेस्ड है.....

आधे एप्पल की तरह क्या दीखता है...???

इस बार अवनि ने मेरी तरफ dekha,aur उसी की तरह मई भी है दिया.....

मेरी हसी देख उसके होंठों पर भी मुस्कान नाच गयी और उसने कहा..

बाकी का आधा एप्पल....

शनाया- बंग ों अवनि.......

देखा uncle,maine कहा था ना की ये भी बोहोत इंटेलीजेंट है.....

इसके बाद शनाया ने हमसे लगातार कई सवाल किये पर लउकीली ना हमसे कोई जवाब मिस हुआ और ना नानू की टीम से....

गाइड- 5 मिनट्स तो होटल......

शनाया- ok now....ab हमारे पास ज़्यादा वक़्त नहीं बचा इसीलिए 1 फाइनल question..dono टीम में से जिसने भी पहले जवाब diya,wo टीम जीत जाएगी...

सो थे क्वेश्चन तहत एक्चुअली इस ा रिडले गोज लिखे थिस.....

है लेकिन दीखता नहीं,

खरीदें कैसे जब

ये बिकता नहीं...

वैसे तोह ये हर कहीं है....

पर इसकी कोई फिक्स्ड जगह नहीं है...

जो हासिल करना चाहेगा

वो खो देगा....

जो सिर्फ मेहुस करना चाहेगा,

उससे ये भिगो देगा....

दिमाग lagaoge,nahi पता

लगा पाओगे....

खुद के अंदर jhaanko,jawab

समझ जाओगे....

तोह बताइये क्या है ये...?????

नानू & टीम सोच में पढ़ गयी और एक दूसरे से इशारे में जवाब पूछने लगी पर हर कोई क्लोएलेस्स था....

वहीँ जब मैंने अवंतिका की तरफ देखा तोह उससे आँख बंद किये सोचते पाया या ये कहूं कुछ महसूस करते पाया....

जो वो महसूस कर रही thi,wo तोह मैंने नजाने कबसे महसूस कर लिया था....

और जैसा की शनाया ने कहा tha,mehsoos करोगे तोह भीग jaaoge,AVANTIKA के साथ वैसा hi हुआ...

उसके अंदर शनाया के जवाब की बारिश होने लगी...

शनाया- लगता है नानू & टीम अरे clueless..V.J,AVNI तुम्हे आंसर पता है....???!!!!

अवंतिका की आँखें खुल गयी...

उसने एक बार मेरी तरफ देखा तोह मुझे अपनी तरफ hi देखता पाया...

हम दोनों की आँखें mili,dil machle,aur दोनों के लैब एक साथ हिले जिनसे शनाया के सवाल का जवाब निकला....

हम दोनों- मोहोब्बत...........

हम जीत गए.......

आज के लिए इतना HI......

आपका अपना V..J.....
 
थैंक्स 4 थे रिव्यु BROTHER...BROTHER,ASMODEUS को छोड़कर ऐसा कोई भू नहीं है जो विक्रम से भीड़ कर जीत सकता HAI...KYUNKI जितनी भी पावर्स इस ब्रम्हांड में HAIN,WO इन दोनों की HI संपत्ति HAIN..AUR ये बात तोह खुद ास्मोडियस ने भुविका से कही थी की वो विक्रम का सीधे तौर पर कुछ बिगड़ नहीं SAKTI..MAAMLA और सोच कुछ और है जो बोहोत जल्द आपके सामने HOGA....SAATH बने रहिये........
 
अब तक आपने पढ़ा की भुविका अपने शक्तियों के सरहद को पार करने में कामियाब हो जाती है वहीँ हमारे हीरो और हेरोइन की टीम नानू की टीम से जीत जाती है....

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट- 85

प्लेनेट- एलोप्टुस

प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट

मज़ा आया.......

हाहाहाहा........

भुविका बिल्जेबब की बात सुनकर उससे घर घर कर देख रही थी......

बिल्जेबब- मुझे घूरने से कुछ नहीं होगा BHUVIKA.....is बढ़ा के बारे में तोह मई तुम्हे पहले hi बता चूका था पर तुम अपनी hi धुन में निश्चिन्त होकर आगे बढ़ रही थी....

भुविका कुछ देर तक बिल्जेबब को घूरती रही फिर उसके लैब हिले...

भुविका- एक बात batao.....tum तोह कह रहे थे की हम दोनों के स्पिरिट्स जुड़े होने की वजह से अगर मई तुमपे वार करुँगी तोह तकलीफ मुझे भी होगी....

तोह फिर अभी जब मुझे इतनी तकलीफ hui,fir तुम कैसे भले चुंगे खड़े हो.....

बिल्जेबब- सिर्फ इसीलिए की मई ठीक ठाक खड़ा hun,iska ये अर्थ तोह नहीं की मुझे तकलीफ नहीं हुई है....

भुविका- पर तुम्हारे चेहरे पर तोह ज़रा सा भी दर्द का भाव नहीं दिख रहा है....

बिल्जेबब- तुम्हे क्या लगता है की बस तुम hi दर्द सेह सकती ho....BEELZEBUB को दर्द से नहीं बल्कि दर्द को बिल्जेबब से दर लगता है....

और मई तुम्हारी तरह लापरवाह नहीं hun...tum तोह बेसुध सी मेरी साड़ी बातों को भूलकर आगे बढ़ रही थी पर मुझे ज्ञात था की आगे क्या होने वाला है...

इसीलिए मैंने अपने आप को आने वाले दर्द के लिए तैयार कर लिया था....

भुविका- क्या हर बार मुझे इतना hi दर्द होगा????

बिल्जेबब- तुम अपने आप को खुशकिस्मत समझो की समय संचालको की ऊर्जा झेलने के बाद भी तुम ज़िंदा हो...

और धन्यवाद् दो फादर का जिनकी वजह से ऐसा संभव हो पाया hai..SAMAY संचालकों के शरीर में बसी वाइट एनर्जी को उनकी ब्लैक एनर्जी अपने में लपेटे हुए है और उसी के प्रभाव से hi तुम ध्यान से बाहर आ पायी हो....

पर तुम्हारा दयँ से सकुशल वापस आना इस बात को भी दर्शाता है की अब तुम्हारा शरीर वाइट और ब्लैक ऊर्जा के समावेश के लिए पूरी तरह तैयार है....

अब बस ज़रुरत है ध्यान केंद्रित कर बिना डरे अपने लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ने की....

अपने मन से दर को निकल अपने चित्त को शांत कर आगे बढ़ो BHUVIKA..tum अपने गंतव्य अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुँचोगी......

भुविका ने एक लम्बी सांस खींच कर छोड़ी और फिर उसने अपनी आखें बंद कर ली.....

चलिए जब तक भुविका अपने नेक्स्ट स्टॉप पर पहुँचती hai,mai आपको बताता हूँ की ये दोनों किस बारे में बात कर रहे थे......

जैसे की आपको पता है की भुविका अपनी पहली बाधा अपनी शक्तियों की सरहद को क्रॉस करने में कामियाब हो गयी....

और जैसे hi ये हुआ, वाइट और ब्लैक ऊर्जा का धुआं जो सरहद में घूम रहा था, वो भुविका में समां गया...

भुविका के चित्त के रास्ते वो साड़ी ऊर्जा उसके पुरे शरीर में फैले गयी....

भुविका को अपने अंदर काफी शक्ति महसूस हुई और इसी ख़ुशी में उसका कंसंट्रेशन टूट गया....

थी तोह अब भी वो अपनी शक्तियों के मार्ग से जुडी हुई hi,par उसका चित्त आगे आने वाली परेशानियां को भूल गया था....

भुविका का चित्त आगे बढ़ता गया और कुछ देर तक आगे चलने के बाद भुविका को अपने से कुछ दूर सामने कुछ दिखा जिससे देखकर वो चौंक गयी...

दरअसल भुविका से कुछ दूर आगे बादल hi बादल the.....par चौंके की बात सिर्फ यही नहीं thi...chownke की बात ये थी की कुछ बादल वाइट कलर के थे और कुछ बादल ब्लैक कलर के....

और देखते hi देखते वो सारे वाइट और ब्लैक बादल के दूसरे में सामने लगे और उनका कलर भी वैसा हो गया जैसा सरहद पर बिछी दोनों ेनेर्गीएस के मिलने पर हो गया था....

और ऐसा होते देख भुविका खुश हो gayi...kyunki वो जान गयी थी की ये बादल असल में उसकी शक्तियां थी जिसका ये मतलब था की वी अपनी मंज़िल के पास पहुँच गयी है....

और ये बात जानते hi वो और लापरवाह होकर ख़ुशी ख़ुशी आगे बढ़ने लगी की तभी......

Aahhhhh......aaaahhhhh...aahhhhhhhhhhh........

बादलों की सरहद से पहले ज़मीं thi...aur जैसे hi भुविका उस ज़मीं के पास pahunchi,us ज़मीं के अंदर से एक वाइट एनर्जी की रे रस्सी के रूप में बाहर निकली और उस रस्सी ने भुविका को लपेट लिया....

और अगले hi पल उस रस्सी ने भुविका को इधर से उधर पटकना शुरू कर diya...teen चार बार ऐसा करने के बाद अचानक......

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह........

एक बार फिरसे भुविका के मुँह से चीख निकल gayi...aur ये चीख इसीलिए निकली थी क्यूंकि उस रस्सी ने खुदमे बिजली उत्पन्न कर दी थी जिससे उसके गिरफ्त में फांसी भुविका को भी झटके लगे....

क्यूंकि भुविका का दिमाग इस जगह से जुड़ा हुआ था इसीलिए उसके दिमाग से होते हुए ये सारे झटके और दर्द भुविका के असल शरीर को भी लग रहे थे...

और जैसे hi बिजली का झटका दूसरी बार भुविका के चित्त को laga,BHUVIKA के मुँह से फिरसे चीख निकली और इस बार उसकी आखें भी खुल गयी और ऐसा होते hi उसके चित्त में फांसी भुविका भी उस रस्सी के बीच से गायब हो गयी.....

भुविका से जुड़े होने की वजह से ये साड़ी चीज़े बिल्जेबब ने भी देखि और महसूस की थी और इसिलए उसने भुविका से वो साड़ी बातें कहीं और उससे आगे क्या करना hai,uski सुग्गेस्टियन्स दिए.......

तोह चलिए वापस चलकर देखते हैं की इस बार भुविका का क्या हाल होता है...?????

अरे waah..madam अपना काला साम्राज्य षटपिट करने के करीब hi हैं....

भुविका वापस बादल रुपी अपने शक्तियों में सामने कड़ी thi....wo ध्यान से सामने ज़मीं की तरफ देख रही थी जहाँ से वाइट एनर्जी की रोप बाहर आयी थी....

पर वो जगह समतल थी और वहां पर किसी भी तरह की कोई भी हलचल नहीं हो रही थी.....

कुछ देर तक भुविका यूँही उस जगह पर कड़ी रहकर कुछ गुना भाग करती रही पर फिर.........

AAHHHHHHH....AHHHHHHH......UMMMMMMM.AAHH.UMMMMMM......

HAAAAAAAAAAA....................HAAAAAAAAAAAAAAAA

हुआ ये की भुविका एक निष्कर्ष पर पहुंची की जगह से वाइट एनर्जी ने उससे लपेटा tha,wo उस जगह पर पाऊँ hi नहीं रखेगी और उससे पहली hi छलांग लगा देगी और इसी इरादे के साथ भुविका ने दौड़ लगा दी और ज़मीं की सरहद पर पहुँचने से पहले hi उसने छलांग लगा दी

पर इससे पहले की भुविका अपनी शक्तियों का स्पर्श कर paati,zamin से एनर्जी रोप तीव्र गति से बाहर आयी और उसने भुविका को उसकी शक्ति रुपी बादल को चुने से पहले hi पकड़ अपने में लपेट लिया और फिर पिछले बार जैसा hi घटनाक्रम रिपीट हुआ पर इस बार भुविका के चित्त को कहीं न कहीं इस बात का अंदेशा था....

भुविका के चित्त से होते हुए उस एनर्जी रोप से मिलता दर्द भुविका के मस्तिष्क में सामने लगा जिससे भुविका का दिमाग सेहेन करने की कोशिश करता रहा पर आखिर में उसने हार मान ली और भुविका की आँखें खुल गयी....

भुविका मुँह खोले लम्बी साँसें लेने लगी वहीँ बिल्जेबब उसके नार्मल होने का वेट करने लगा और जैसे hi भुविका की साँसें नार्मल hui,usne कुछ कहने के लिए अपना मुँह खोला hi था की इतने में वो चौंक गया पर अगले hi पल मुस्कुराने लगा...

दरअसल हुआ ये की अपनी साँसों को दुरुस्त होने के अगले hi पल भुविका की आँखें पुनः बंद हो चुकी thi..jiska मतलब था की वो फिरसे ध्यान में जा चुकी थी...

भुविका की इतनी प्रबल इच्छा और दृढ़ता को देखकर hi बिल्जेबब के चेहरे पर मुस्कान आ गयी...

बिल्जेबब मन में- मई ये तोह नहीं जानता की फादर तुमसे क्या करवाना चाहते हैं पर इतना ज़रूर पता है जो भी काम तुम्हे सौंपा jaayega,tum उसमे ज़रूर कामियाब होगी....

ये बोलकर बिल्जेबब ने भी अपनी आखें बंद कर ली और भुविका के चित्त के साथ जुड़ गया......

वहीँ भुविका वापस अपनी मंज़िल के करीब पहुँच चुकी thi.....zamin को ध्यान से देखते हुए वो कुछ सोच hi रही थी की इतने में उससे एक आवाज़ सुनाई दी....

ये आवाज़ बिल्जेबब की थी....

बिल्जेबब- झटके लगेंगे पर मरोगे नहीं....

सचाई दिखेगी अगर अपने साये

से डरोगे नहीं......

बिल्जेबब की आवाज़ को या यूँ कहूं बिल्जेबब की पहेली को सुनकर भुविका शॉकेड हो gayi..wo बिल्जेबब की पहेली का मतलब समझने की कोशिश करने लगी...

कुछ देर तक ध्यान में बैठी भुविका के सर पर सोच की सिलवटें तैरती rahi,par फिर अचानक जैसे भुविका के दिमाग में बिजली सी कौंधी और अगले hi पल भुविका के मस्तिष्क से बिल्जेबब की पहेली का जवाब निकला जिससे भुविका के चित्त ने सुन लिया...

भुविका के चित्त ने किसी चीज़ का आवाहन किया और अगले hi पल भुविका के चित्त को किसी ने घेर लिया...

ये और कोई नहीं वही वाइट एनर्जी थी जो सरहद पर भुविका के अंदर समायी थी....

भुविका ने इन्ही वाइट एनर्जी का आवाहन किया था....

और यही वाइट एनर्जी hi बिल्जेबब की पहेली का जवाब भी था....

भुविका को समयसंचालकों के वाइट एनर्जी से बानी रोप नुक्सान पहुंचा रही थी....

और वो इसीलिए ऐसा कर रही थी क्यूंकि भुविका के अंदर ब्लैक एनर्जी थी....

पर भुविका रोप नुमा वाइट एनर्जी से दर रही thi,par वो ये भूल गयी थी की उसके अंदर भी वाइट एनर्जी है..

इसका मतलब वो अपनी hi परछाई से दर रही थी जैसा की बिल्जेबब ने कहा tha....isiliye भुविका ने वाइट एनर्जी का आवाहन किया जिसने भुविका को अपने दायरे में लपेटते hi उसके अंदर मौजूद ब्लैक एनर्जी के लक्षण को छुपा दिया....

भुविका ने एक लम्बी सांस ली और आगे बढ़ gayi.....aur जैसे hi वो ज़मीं के सरहद पर pahunchi,ek बार फिरसे वाइट एनर्जी की रोप निकली...

पर इस बार वो भुविका को लपेट नहीं पायी क्यूंकि पहले से hi भुविका वाइट एनर्जी के दायरे के बीच थी.....

समय संचालकों के वाइट एनर्जी की रोप ने एक बार भुविका को घेरे हुए वाइट एनर्जी को छुआ..

ऐसा होते hi भुविका को एक झटका लगा पर फिर वो नार्मल हो gayi....wahin वो वाइट एनर्जी की रोप ने एक दो बार और उसके सामने मौजूद वाइट एनर्जी के धुंए को छुआ और फिर गायब हो गयी....

रोप को गायब होता देख जहाँ भुविका के अंदर ख़ुशी की लेहेर दौड़ गयी वहीँ अपने मस्तिष्क को भुविका के चित्त से जोड़े हुए बिल्जेबब के चेहरे पर भी एक मुस्कान नाच गयी.....

भुविका का चित्त हौले हौले अपने शक्तियों को स्पर्श करने हेतु आगे बढ़ गया पर इससे पहले की भुविका अपनी शक्तियों को छू पाती.............

भुविका को एक और बार ज़ोर का झटका लगा और उससे जुड़े होने की वजह से बिल्जेबब में भी इस झटके को महसूस किया और नतीजा......

दोनों की आँखें खुल gayi...par आँख खुलते hi जो नज़ारा उनके सामने था उससे देखकर दोनों शॉकेड हो गए....

भुविका और बिल्जेबब इस वक़्त एलोप्टुस में नहीं मांसलिकेल में the..ASMODEUS के महल में ास्मोडियस के सामने....

भुविका तोह सब कुछ समझने की कोशिश कर रही थी पर बिल्जेबब तुरंत अपने घुटनो पर बैठ गया और उसने भुविका को भी मन hi मन बैठने को कहा...

बिल्जेबब की बात जैसे hi भुविका के दिमाग में gunji,usse होश आया की वो ास्मोडियस के सामने कड़ी hai..agle hi पल वो भी अपने घुटनो पर थी.....

पर वो जानना चाहती थी की ास्मोडियस ने उससे अपनी शक्तियों को क्यों हासिल नहीं करने दिया जबकि वो अपने शक्ति पाने के कगार पर hi कड़ी थी....

और ये सवाल तोह बिल्जेबब के मन में भी चल रहा था इसीलिए उसने hi सवाल पूछने के लिए अपना मुँह खोला पर इससे पहले की वो कुछ कहता........

ास्मोडियस- अभी सही वक़्त नहीं आया......

प्लेनेट- एअर्थ

PLACE-HOTEL फ्लोर वाल्ट

हे bro.....yaar अंजू को देखा है kya?????uske मिस कॉल्स थे और अभी मई लगा रहा हूँ तोह उठा नहीं रही....

मई- वाह रे मजनू के bhatije....tujhe सिर्फ अंजू के मिस कॉल्स दिखे, और किसी के नहीं.....

रोनित- नहीं toh...aur किसीने भी कॉल किया था क्या???

रोनित ने ये बात टिपिकल इडियट चेहरे के साथ कही थी...

मई- कहाँ था यार tu????mai तुझे नजाने कबसे मिस कर रहा था..

ये बोलकर मैंने रोनित के गाल खींच लिए.....

रोनित- ज़्यादा चलने की वजह से तेरा दिमाग फ्यूज हो गया है क्या???? क्या बोल रहा है???

मई- saale,jab दिमाग बिलकुल नहीं लगाने से तू कोमा में नहीं गया तोह ज़्यादा लगाने से मेरा कैसे फ्यूज हो जाएगा....

आज कितने टाइम बाद तू वही पुराने इडियट रोनित की तरह बात कर रहा है जिससे किसी चीज़ का आईडिया नहीं होता था????

रोनित- मतलब???

मई- मतलब सिर्फ अंजू ने nahi,RIYANSH,DEVANSH और शनाया ने भी तुझे कॉल किया था पर मजनू को बस अपनी लैला का नंबर hi याद रहा....

रोनित- अरे वो भाई जेट लग की वजह से नींद hi नहीं khuli.....waise तेरे रहते सब मुझे क्यों कॉल कर रहे the.....saari प्रोब्लेम्स का सलूशन तोह तेरे पास होता है...

मई- अब्बे वो अंजू को तुझसे कुछ काम था पर तूने उठाया नहीं तोह वो नाराज़ हो गयी और यही बताने के लिए बाकी सब तुझे बार बार कॉल कर रहे थे....

रोनित अभी जस्ट उठा tha,aur अभी भी कुछ नींद में था पर मेरी बात सुनकर उसकी नींद उड़ गयी.....

रोनित- व्हाट!!!!! अंजू मुझसे नाराज़ हो gayi.....saale,waise तोह हर टाइम दिमाग में घुस कर कुछ न कुछ बकवास करते रहता है पर जब सच में ज़रुरत पड़ती है तोह कोई सिग्न नहीं देता....

तू मुझे उठा नहीं सकता था...

मई- भाई मई दिमाग में घुसता हूँ पर तेरा मामला तोह दिल का hai....aur जब बात दिल के मामलो की हो तोह मई दिमाग में नहीं घुसा जाता.....

रोनित- तू और तेरी baatein...kam से काम इतना तोह बता की अभी अंजू कहाँ है और भाई आंसर सीधे सीधे dena..koi पजल न दाल दियो....

मई- neeche,hall में.....

रोनित- चल मई चला.....

ये बोलकर जैसे hi रोनित भागने को hua,maine उससे पकड़ लिया...

मई- अब्बे मई भी वहीँ जा रहा hun..chal साथ कहते हैं.....

रोनित- हाँ भाई चल और sun..zyada ग़ुस्सा हुई तोह तू संभल liyo..wo तेरी बात ज़रूर सुनेगी....

मई- उसकी टेंशन ना le.tu बस इतना करियो की जाते साथ सॉरी की रत लगा देना....

रोनित- abbe,wo तोह मई करूँगा hi.....chal अब जल्दी चल..

हम दोनों नीचे ग्राउंड फ्लोर पर हॉल की तरफ चल दिए....

Chaliye,jab तक ये हॉल पहुँचते hain,mai आपको बता देता हूँ की अब तक हमने क्या क्या किया है....

कल सुबह होटल में चेक इन करने के एक घंटे बाद हम सब ब्रेकफास्ट करके बाहर रिसेप्शन में इकठ्ठा हुए जहाँ पहले से hi हमारा गाइड खड़ा हुआ था....

उसके बाद हम सब सबसे पहले स्विस नेशनल म्यूजियम गए जहाँ वर्ल्ड के बेस्ट आर्किटेक्चर रखे गए hain..purane भी और नए भी.....

वहां पर करीब 2 घंटे रूकने के बाद हम सब यहाँ के फेमस लेक जुरिच गए जहाँ हमने कुछ 1 घंटे तक बोटिंग की.....

क्यूंकि ये पेअर बोटिंग थी मतलब जिसमे एक साथ दो लोग hi बैठ सकते हैं इसीलिए हम सब पेअर में गए....

वैसे तोह कायदे से रियांश और देवांश को अपनी दोनों सिस्टर्स के साथ बैठना था पर क्यूंकि अवंतिका कोमल को और मई ाशी को पकडे हुए थे इसीलिए हम दोनों यहाँ भी साथ hi बैठे.....

इस दौरान........

अवंतिका- कितना ख़ूबसूरत नज़ारा है ना....

मई- haan,par फ़िलहाल थोड़ा फीका लग रहा है....

अवंतिका- fika?????kaise....????

मैंने कुछ जवाब नहीं दिया बस अवंतिका की आँखों में देखने लगा....

अगले hi पल अवंतिका के होंठो पर मुस्कान तैर गयी और वो इसीलिए क्यूंकि उससे उसके सवाल का जवाब मिल गया था....

पर ये मुस्कान सिर्फ ख़ुशी की hi नहीं शर्म की भी थी इसीलिए अवनि ने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया और हौले हौले शरमाते हुए मुस्कुराने लगी.......

मई- देख कर हमको तू

यूँ ना छुप जाय कर....

हम तोह अपने हैं,

गैरों से शरमाया कर....

मेरी बात सुनकर अवनि की शर्म और बढ़ गयी पर उसने जल्दी से खुद को नार्मल किया और सामने देखने lagi...ab वो मुझसे कुछ कह नहीं रही thi,bas बीच बीच में तिरछी निगाहों से मेरी तरफ देख रही थी.....

ये बात मई जानता था पर मैंने उससे इस बात का एहसास नहीं होने diya.....boating करते करते हम दोनों लेक के बीच में आ गए the..saamne से 2,2 बन्दों का 4 ग्रुप हमारी तरफ आ रहा था...

लड़के अचे घर से लग रहे थे पर जैसे hi उनकी नज़र अवनि पर padi,wahin ठहर गयी....

अब इसमें उनका भी क्या dosh..upar वाले ने अवनि को बनाया भी फुर्सत से है और आखिर क्यों ना banate..apne बेटे के लिए इतना तोह करेंगे hi.....

Khair,wo सब अवनि को एक तक देखने लगे जिससे अवनि ने भी नोटिस कर लिया और थोड़ी उनकंफर्टबले हो गयी...

और जैसे hi उसने मेरी तरफ देखा तोह पाया की मई भी उन बन्दों की तरफ hi देख रहा हूँ पर फिर मैंने अपनी नज़रें घुमा ली....

ये देखकर की मुझे उन बन्दों के उससे घूरने से कोई प्रॉब्लम नहीं हुई, अवनि का चेहरा मुरझा गया....

मई- what's up????chehra क्यों उतर गया तुम्हारा.....

अवंतिका- नहीं toh,i'm फाइन....

मई- ु सूरे.....!!!

अवंतिका- हम्म.....

इसके बाद कुछ देर तक हम दोनों के बीच कोई बात चीत नहीं हुई.....

मई नज़ारे देखने में बिजी था और अवंतिका कुछ सोच रही थी....

अवंतिका- V.J एक बात पूछूं???

मेरा चेहरा दूसरी तरफ था जब अवंतिका ने मुझे pukara...uske पुकारते hi मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी पर फिर मैंने खुदको नॉर्मक किया और उसकी तरफ पलटा...

मई- haan,pucho???

अवंतिका- मान लो की तुम किसी को चाहने लगे हो और जिससे तुम चाहते हो उससे कोई और प्रोपोज़ कर दे तोह तुम्हे कैसा लगेगा???

अवंतिका के सवाल पर मई कुछ देर उसकी आँखों में देखता रहा वहीँ वो तोह मेरे आँखों में hi जवाब तलाशने की कोशिश कर रही थी.....

मई- कुछ नहीं लगेगा...???

मेरा जवाब सुनकर अवंतिका शॉकेड हो गयी...

अवंतिका- ऐसा क्यों???

मई- अरे yaar,mere किसीको पसंद करते hi क्या वो मेरी पर्सनल प्रॉपर्टी बन जायेगी...???

उसकी लाइफ तोह उसीकी रहेगी naa...aur वैसे bhi,mujhe किसीका प्रोपोज़ करना क्यों बुरा लगेगा....

लड़कियों को तोह लड़के प्रोपोज़ करते hi हैं ना???

अवंतिका- और अगर उसने हाँ कह दी तोह...???

मई- तोह kya,asta labista...bye bye....alvida..

वो अपने रास्ते और मई अपने....

अवंतिका- इतनी आसानी se..tum उससे रोकोगे nahi..confront नहीं करोगे की उसने तुम्हारे साथ ऐसा क्यों किया????

मैंने एक लम्बी सांस छोड़ी और फिर एक तक अवंतिका की आँखों में देखने लगा..

वहीँ अवंतिका की आँखों में मेरे जवाब को सुनाने की एक तड़प आ गयी थी....

मई- जो मेरा HAI,WO मुझे कभी छोड़ कर नहीं जाएगा और जो चला GAYA,WO मेरा कभी था HI नहीं....

और जो अपना ना हो उसके जाने का कैसा अफ़सोस.....????

(इससे कहते हैं ऐटिटूड गुइज़)

जवाब देकर मई मुस्कुराया और फिर सामने देखने लगा वहीँ अवंतिका मेरे जवाब के बारे में कुछ देर सोचती रही और तभी....

सही तोह है.......

ये आवाज़ अवंतिका के दिल से आयी thi...aur इस आवाज़ के आते hi अवंतिका के चेहरे की चमक वापस लौट आयी और वो मुस्कुरा उठी....

इसके बाद कुछ ख़ास नहीं hua...hum सब ने बोटिंग ख़त्म ki.sabhi के ऊपर जेट लग सवार हो गया था जिस वजह से सभी थक गए थे इसीलिए हम सब ने पहले लंच किया उसके बाद वापस होटल आ गए..

इस बीच मेरी और अवंतिका की नज़रें कई बार mili..jab भी हमारी नज़रें milti,uske चेहरे पर कई एक्सप्रेशंस आ आ कर निकल जाते.....

वैसे तोह मई जानता था की वो मुझसे क्या कहना चाहती है पर मई ये भी जानता था की अभी सही वक़्त नहीं आया है.....

khair,hotel पहुँचने के बाद सभी अपने अपने रूम में जाकर लुढ़क गए....

अंजलि और रोनित बाकियों के मुकलबले बिलकुल नहीं थके थे इसीलिए हम तीनो शाम को घूमने बाहर निकल गए जहाँ हमने बोहोत से एडवेंचर स्पोर्ट्स खेले..

वैसे तोह इसके बाद भी वो दोनों नहीं थकते पर क्यूंकि दोनों ने मेरे साथ खेला था इसीलिए दोनों के ऊपर थकावट भरी हो गयी और जब तक हम वापस पहुंचे तब तक दोनों भी बाकियों की hi तरह सुस्त पढ़ गए थे...

और इसी तरह कल का दिन निकल गया...

और आज का हमारा सचेडूले कुछ अलग hai..hum सब यंग लोग hi होटल में hain..senior सिटीजन्स जुरिक दर्शन पे गए हुए हैं..

दरअसल आज वही दिन है जिसकी वजह से हम सब यहाँ पर आये हुए hai...mere माँ डैड की मरिएगे एनिवर्सरी....

सुबह उठते hi मैंने दोनों को विश किया और आज के प्रोग्राम के बारे में उन दोनों को बता दिया..

आज हम सब युथ ब्रिगेड को होटल में रहकर हॉल को सजाना था इसीलिए सीनियर पार्टी वेरे नॉट अल्लोवेद तो स्टे...

ब्रेकफास्ट के बाद सभी सीनियर्स बहार चले गए थे

वहीँ जेट लग की वजह से रोनित भाई साहब की नींद आज थोड़ी लेट से खुली और उसके बाद क्या हुआ वो तोह आप जानते hi हैं....

khair,hum दोनों जल्दी से हॉल की तरफ पहुंचे या ये कहूं रोनित मुझे खींचता हुआ ले आया....

और जैसे hi हम हॉल में एंटर हुए तोह हमने देखा की साड़ी बन्दियाँ होटल स्टाफ को इंस्ट्रक्शंस दे रहे थे और रियांश और देवांश भी होटल स्टाफ के साथ मिलकर सब कुछ सेट कर रहे थे...

रोनित- ANJU....i'm सो सॉरी yaar..wo दरअसल जेटलैग की वजह से आँख hi नहीं khuli...please यार मान जा na....tu तोह जानती है ना की मई तेरा फ़ोन कभी अवॉयड नहीं करता पर नींद में था तोह कर भी क्या सकता था....

रोनित अंजलि के पास पहुंचा और उसके दिल में जो आया वो बकता गया बिना ये देखे की अंजलि उसको शॉकिंग लुक्स देकर देख रही है..

और इससे पहले की अंजलि अपना मुँह खोलती....

थोड़ी सी एक्टिंग करले........

ये आवाज़ अंजलि के कानो में गूंज गयी जो की मेरी थी....

अंजलि ने मेरी तरफ देखा तोह मैंने उससे आँख मार di...pehle तोह अंजलि ने मन में ना कहा पर जब मैंने उससे आँख दिखाई तोह वो मान गयी....

रोनित- यार कुछ तोह बोल....

अंजलि- nahi....tum मेरी बिलकुल केयर नहीं karte...neend नहीं khuli..pata है ना की आज अंकल आंटी की मैरिज एनिवर्सरी hai..kya तुमने उन्हें वश किया.....

nahi....tumhe किसीकी परवाह नहीं है....

RONIT-aisa मत बोल yaar....kasam से yaar.meri नींद hi नहीं खुली वर्ण ऐसा कुछ नहीं होता.....

अंजलि- जस्ट डोंट टॉक तो में.....

ये बोलकर अंजलि ने अपना चेहरा घुमा लिया...

वहीँ बाकी सब हैरान परेशां कभी रोनित को देखते तोह कभी अंजलि की तरफ....

और तभी अवंतिका की नज़र मुझपे गयी और वो सब समझ गयी.....

मैंने भी उसकी तरफ dekha.usne मुझे आँखों से hi ग़ुस्सा दिखाया और साला मई फिर बाज़ी हार गया....

मई मन में- बोहोत hua..dekh रोनित की शकल रोने जैसी हो गयी है....

मेरी आवाज़ सुनकर अंजलि तुरंत पलटी और जब उसने रोनित का मुरझाया चेहरा देखा तोह उससे उसपर बोहोत प्यार आया...

अंजलि झट से रोनित के गले लग गयी....

अंजलि - सॉरी baby..mai तुमसे कोई नाराज़ नहीं hun...ye तोह मुझे V.J ने ऐसा करने के लिए कहा था...

अंजलि की बात सुनकर रोनित शॉकेड हो गया पर फ़िलहाल वो अंजलि के गले hi लगा रहा..

अब भला कोई अपने मेहबूब के बाहों से भी जुड़ा होना चाहेगा भला....

पर कहते हैं naa,all गुड थिंग्स आल्सो हैवे तो एन्ड....

और जैसे hi दोनों प्यार के पंछियों का गले मिलने का टाइम ऑफ हुआ.....

रोनित- kamine...mai तुझे नहीं छोडूंगा........

ये बोलकर रोनित मेरे पीछे भगा....

पर कुछ hi देर में वहां खड़े सभी शॉकेड हो गए.....

और वो इसीलिए क्यूंकि मई बस 10 या 20 मीटर के रेंज में hi इधर उधर दौड़ रहा था इसके बावजूद रोनित मुझे पकड़ नहीं पा रहा था.....

पर फिर मई एक जगह रूक गया और मेरे रूकते hi रोनित ने मेरे ऊपर छलांग लगा दी पर जैसे hi ये hua,mai हल्का जा हैट गया और अगले hi पल मई रोनित को पीछे से जकड़ा हुआ था...

रोनित छूटने की बोहोत कोशिश कर रहा था पर ऐसा हुआ nahi......aur आखिर थक हार कर...

रोनित- ठीक है ठीक hai..kuch नहीं karunga..chhod मुझे....

साला भूल गया था की किस्से झूठ बोल रहा hai..mujhe पता था की मेरे उससे छोड़ते hi तुरंत मुझपर झपटेगा..

इसीलिए मैंने उससे सामने हल्का सा झटका दिया पर साली गड़बड़ हो गयी पर उस गड़बड़ का अंत बोहोत खूबसूरत तरीके से हुआ.....

हुआ ये की जैसे hi मैंने रोनित को झटका diya,jhatke का प्रेशर ज़्यादा होने की वजह से रोनित डिस्बैलेंस हो गया और डगमगाते हुए सामने की तरफ बढ़ा..

और ठीक उसी वक़्त अवंतिका भी मेरे पास आने के लिए आगे बढ़ी थी....

रोनित को यूँ अपनी तरफ ुंबलानेद तरीके से आते देख वो भी दर गयी और उसने अपनी आँखें बंद कर लीन...

वहीँ अंजलि राइट साइड से आगे बढ़ रही थी....

जैसे hi मैंने देखा की रोनित अवंतिका से टकराने वाला hai,mai तेज़ी से आगे बढ़ा और अगले hi पल मेरे लेफ्ट हाथ ने रोनित के लेफ्ट शोल्डर को हल्का साइड से झटक दिया जिससे रोनित की दिशा चेंज हो गयी और वो अपने राइट की तरफ पलट गया जहाँ से ांजलिआ रही थी...

पर अंजलि जैसे तैयार सी thi..RONIT के उसके पास आते hi उसने उससे थाम लिया..

वहीँ रोनित को झटका देने के बाद मेरा शरीर थोड़ा आगे बढ़ गया और अगले hi पल.......

अवंतिका मेरे बाहों में thi....aur पता नहीं कैसे मेरे उससे छूटे hi अवंतिका ने मेरे स्पर्श को पहचान लिया और उसके मन से आवाज़ आयी...

V.J.......

आवाज़ के आते hi उसने आखें खोल दी और मेरे आँखों में देखने लगी...

वहीँ मैंने जैसे hi अवंतिका को बाहों में लिया हम दोनों के बॉडी नीचे गिरने लगे....

मई चाहता तोह हम दोनों को गिरने से रोक सकता था और मई रोकने भी वाला था की तभी मेरी नज़रें अवंतिका की नज़रों से टकराई जो इस वक़्त मेरी आँखिन में hi खुद के अक्स को तलाश रही थी.....

और मई भी अवंतिका की आँखों की गहरायी में डूब सा gaya....aur जब हम hi डूब गए तोह गिरने से बच के क्या फायदा...

हम दोनों के शरीर एक दूसरे से जुड़े हुए थे और इसी तरह हम दोनों तेज़ी से नीचे गिर रहे थे पर मेरे और अवंतिका के लिए तोह जैसे वक़्त थम सा गया था...

हमे ऐसा लग रहा था मानो वक़्त ने अपनी रफ़्तार धीमी कर दी है और हम दोनों धीरे धीरे निचे फ्लोर की तरफ जा रहे थे..

मैंने हवा में hi खुदको पलटा लिया ताकि अवंतिका की बॉडी फ्लोर से ना टकराये और अगले hi पल हम दोनों फ्लोर पर थे....

क्यूंकि अवंतिका की बॉडी मेरे ऊपर थी इसीलिए उससे कुछ महसूस hi नहीं हुआ....

वो अब भी एक तक मेरे आँखों में देख रही थी और तभी उसके लैब हिले....

अवनि- मेरी तन्हाई में भी है,

मेरी महफ़िल में भी है.

जो बात तेरी आखों में है,

क्या वो तेरे दिल में भी है...

मई- जो तेरा hai,tujhe मिल hi जाएगा

बस ऐतबार रखना

इकरारे वफ़ा का वक़्त नज़दीक

hai,labon को तैयार रखना...

ठीक उसी वक़्त मांसलिकेल में:-

ास्मोडियस- जितना हसना है है ले,

ये वक़्त लौट कर नहीं आएगा.....

इंसानियत से हैवानियत

जब टकराएगी.....

तेरा कमाया सब कुछ ख़त्म

हो जाएगा.......

आज के लिए इतना HI...

आपका अपना V..J....
 
थैंक्स बरोथेर 4 सुच लवली वर्ड्स एंड REVIEW....WRITNING मेरा शौक है पैशन NAHI..AGAR पैशन होता तोह ज़रूर परसुए KARTA...AB आते हैं आपके सवाल PAR...KAHANI का नाम HI आपके सवाल का जवाब HAI...THE वे ु ठीक रेफ्लेक्टस योर इमेज एंड डेफनेस ुर CHARACTER...AGAR आप अपने चारो तरफ गौर से देखें तोह आपको ास्मोडियस की नफरत सही लगने LAGEGI....LOGON की सोच HI ऐसी हो गयी HAI...KHAIR,HAR सोच का एक अंजाम होता है और मई इस कहानी के हर किरदार की सोच को उसके अंजाम तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा HUN..SAATH बने रहिये
 
अब तक आपने पढ़ा की भुविका अपनी शक्तियों को पाने HI वाली होती है की इतने में ास्मोडियस उससे और बिल्जेबब को अपने पास बुला लेता है वहीँ विक्रम और अवंतिका धीरे धीरे और करीब आने लगे हैं....

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट-86

प्लेनेट- एअर्थ

PLACE-HOTEL फ्लोर वाल्ट

लेडीज & जेंटल MAN......PLZ पूत ुर हैंड्स टुगेदर 4 थे बेस्ट कपल एवर....

जयराज अंकल & मीनू आंटी.......

अंजलि के माँ डैड के नाम अन्नोउंस करते hi पार्टी हॉल की पूरी लाइटिंग पहले 10 सेकंड के लिए ऑफ हो गयी..

10 सेकण्ड्स बाद पार्टी हॉल की एंट्रेंस पर एक फ़्लैश लाइट पड़ी जिसके बीच इस वक़्त मेरे माँ खड़े थे...

डैड वास् वेअरिंग ा ब्रिवि थ्री पीेछे सियत जिसमे वो एकदम दप्पर लग रहे थे वहीँ माँ ऋतू कुमार (डिज़ाइनर) की डिज़ाइन की हुई रेड साड़ी में किसी रियासत की महारानी से काम नहीं लग रही थी....

इस सेक्शन के इंट्रो part से hi आप सब समझ गए होंगे की जिस रीज़न जिस वजह से हम सब स्विट्ज़रलैंड आये the,wo दिन और अगर एक्सएक्ट वर्ड्स उसे karun,toh वो शाम आ गयी है....

सुबह की हमारी शुरुआत किस तरह से hui,wo तोह आप सब जानते hi hain...khair,uske बाद मस्ती वगैरह तोह दिन भर चली पर नार्मल वे में....

इस दौरान अवंतिका और मेरी नज़रें काफी बार mili..honton से तोह सभी मुस्कुराते hain,par आखों से मुस्कुराना कितना हसीं दीखता hai,ye मैंने अवंतिका के आँखों में झांक कर जाना...

खैर इसी तरह एक दूसरे से मस्ती करते कब सारा काम ख़त्म हुआ पता hi नहीं चला....

सीनियर्स करीब शाम के 5 बजे वापस लौटे पर उनमे से किसीको भी हॉल में घुसने की परमिशन नहीं थी इसीलिए सभी अपने अपने कमरे की तरफ चल दिए....

और शार्प 7 पं को सभी रेडी होकर हॉल में आ चुके the..guests के तौर पर डैड ने यहाँ के कुछ इंडियन बिजनेसमैन को बुलाया था..

और वो सब भी ों टाइम आ चुके the...mom डैड की एंट्री हमने सबसे आखिर में राखी thi..after आल ये उन दोनों की शाम थी....

साड़ी तैयारियां को रेचक कर मैंने अंजलि से माँ डैड को बुलाने को कहा जिससे सुनकर वो खुश हो गयी....

और उसके आगे क्या hua,ye मई आलरेडी लिख चूका हूँ....

फ़्लैश लाइट के यूँ सडनली अपने ऊपर पड़ने पर माँ कुछ नर्वस सी हो गयी पर अगले hi पल उनकी नर्वस्नेस ख़त्म भी हो गयी...

और वो इसीलिए क्यूंकि माँ के नर्वस होते hi डैड ने माँ का हाथ थाम लिया था...

डैड के हाथ थामते hi माँ ने डैड की तरफ देखा तोह उन्हें अपनी तरफ देख मुस्कुराता हुआ पाया....

देखने वालों के लिए ये बस एक मुस्कराहट थी पर माँ डैड के मुस्कान के पीछे ख़ामोशी से कही गयी साड़ी बातें पहचान गयी थी.....

डैड ने मुस्कुराते हुए बिना कहे hi माँ को भरोसा दिला दिया था की उनके रहते माँ को नर्वस होने की ज़रुरत नहीं है....

और डैड का माँ के हाथो को मज़बूती से थामना उनका बिन कहे किया गया माँ से वादा था की ये हाथ अब ज़िन्दगी के साथ hi chhutega,usse पहले नहीं....

और ये भरोसा आज का नहीं tha...ye भरोसा तबसे था जबसे डैड ने माँ का हाथ पहली बार थामा था...

डैड के हाथ थामने और अपनी तरफ देखकर मुस्कुराने से माँ के चेहरे पर दिख रही नर्वस्नेस गायब हो गयी और उसकी जगह कॉन्फिडेंस ने ले ली....

और उसी कॉन्फिडेंस को कैर्री करते हुए माँ और डैड आगे बढे पर अगले hi पल दोनों चौंक गए.......

और वो इसीलिए क्यूंकि उनके आगे बढ़ते hi उनके ऊपर गुलाब की पंखीअड़ियन गिरने लगी थी...

मई- कॉमन डैड कॉमन ों mom..come उप....

माँ डैड अपने ऊपर बरसते फूल को महसूस कर hi रहे थे की मैंने दोनों को आवाज़ di..awaaz सुन दोनों hi आगे बढ़ने लगे और कुछ hi देर में दोनों स्टेज पर थे जहाँ हमारी पूरी फॅमिली विथ फ्रेंड्स पहले से hi खड़े थे...

अंजलि- सो लव birds....sabse पहले तोह हम सब की तरफ से वन्स अगेन ा वैरी हैप्पी मैरिज एनिवर्सरी......

अंजलि ने चिल्लाते हुए ये बात कही...

अंजलि- और इससे पहले की आपको यहाँ आये सारे गेस्ट्स बधाई den,aap दोनों के लिए एक टास्क है...

माँ/ डैड- टास्क?????

अंजलि- घबराइए mat....bohot इजी hai...toh टास्क ये है की आप दोनों ने अकेले में तोह कई दफा एक दूसरे को प्रोपोज़ किया होगा पर आज आप दोनों को यहाँ स्टेज पर सबके सामने एक दूसरे को ी लव ु कहना है...

जहाँ अंजलि की बात सुनकर हम सब यस यस की चांट करने लगे वहीँ माँ की हालत ख़राब हो गयी...

माँ- मई ये सब नहीं कर सकती....

अंजलि- oh,common aunty,be ा sport...aur वैसे भी आपको किसी और से नहीं अपने हस्बैंड को hi तोह कहना है...

माँ ने कुछ नहीं कहा बस नानू और नानी की तरफ हमे इशारा करने lagi...jisse हमारे साथ साथ नानू ने भी देख लिया...

नानाजी- अरे गुड़िया हमसे शर्माने की कोई ज़रुरत नहीं है...

रोनित- और नहीं तोह kya???common आंटी जस्ट जो 4 आईटी....

रोनित के बाद सभी माँ को चेअर उप करने लगे पर माँ अब भी नर्वस थी....

मई- dad,aap तोह पहले बोलो...

मैंने धीरे से डैड के कान में बोलै...

डैड- अरे यार मई तोह बोल दूंगा पर अगर तेरी माँ नहीं बोली तोह बेकार में सबके सामने मेरा कचरा हो जाएगा....

डैड की बात सुनकर मुझे हसी आ गयी...

मई- dad,mom का माँ को डीडे करने do..aa पहल तोह करो, देखना माँ की नर्वस्नेस भी ख़त्म हो जायेगी....

डैड ने एक लम्बी सांस छोड़ी और अपनी बात राखी...

डैड- MINU,jin 7 फेरों की कसम को आज तक हम दोनों निभाते आ रहे hain,ussi कसम की कसम खाकार सबके सामने मई कहता हूँ ki....I लव ु.....

डैड ने अपनी बाहें फैला कर अपनी बात kahi....unhe लगा माँ उनकी बाहों में समां जायेगी पर माँ ने तोह शर्म से अपना सर नीचे कर लिया...

मई- MOM....PLZZZ.......

मेरे प्ल्ज़ कहते hi माँ ने झट से एक बार मेरी तरफ देखा और मुझे देखने के बाद ुनबोने डैड से....

माँ- ी लव ु तू...

माँ ने ये धीरे से कहा पर हम सब ने सुन लिया tha...mom इज़हारे इश्क़ करते hi डैड की बाहों में छुप गयी वहीँ हम सब एक बार फिरसे हूटिंग करने लगे....

डैड- आज बेटे ने बचा liya,warna सच में सबके सामने मेरा कचरा हो जाना था...

डैड ने धीरे से अपनी बात कही जिससे माँ और मैंने सुन liya..jahan मई ये सब सुनके है दिया वहीँ माँ ने डैड के चेस्ट पर एक हल्का मुक्का मारा...

खैर इसके बाद सभी गेस्ट्स एक के बाद एक स्टेज पर आये और माँ डैड को विश किया....

बुफे सिस्टम था इसीलिए सारे गेस्ट्स खुद hi खुद को सर्वे करने लगे...

सारे गेस्ट्स खाना खा रहे थे पर हमारी फॅमिली अभी भी स्टेज पर hi थी...

डैड- papa,chaliye खाना खा लेते हैं...

नानाजी- हाँ ठीक hai..chalo.....

डैड- bacchon,aap सब भी डिनर कर लीजिये....

मई- ok डैड.....

अभी हम सब स्टेज से उतर hi रहे थे की इतने में आकाश अंकल जो की किसी से फ़ोन पर बात कर रहे the,call ख़त्म करके हमारे पास आये और डैड को साइड में लेजाकर उनसे कुछ कहा...

डैड और अंकल को वहीँ छोड़ हम सब स्टेज से निचे आ गए और टेबल्स पर बैठ गए...

सीनियर्स अलग टेबल्स पर बैठे और हम सब फ्रेंड्स अलग टेबल par...waise तोह बुफे सिस्टम के हिसाब से हम सब को फ़ूड काउंटर पर जाकर खाना लेना चाहिए था पर हमारी फॅमिली के लिए अलग से अर्रंगेमेन्ट्स की गयी थी....

वेटर्स आकर हमारा खाना सर्वे करने lage....hum सब बात कर hi रहे थे की इतने में डैड ने मुझे आवाज़ दी...

मई- या dad..whats उप???

डैड- beta,next वीक सिंगापुर से एक पार्टी आने वाली थी मीटिंग के लिए पर अब वो परसो hi आ रही है...

तोह मुझे और तेरे दोनों उंक्लेस को जाना padega...toh कैसे करना hai??tum लोग भी साथ चलोगे या फिर कुछ दिन और यहाँ रुकोगे..

मई- dad,hum यहाँ आपके और माँ के मैरिज एनिवर्सरी के लिए आये थे जो हमने सेलिब्रेट कर li...ab रूक करक्या फायदा...

एक्साम्स के बाद हम सब फिर कहीं हॉलिडे पर चले जाएंगे...

डैड- ठीक है fir..apne सारे फ्रंज को बतादे क्यूंकि हमे कल अर्ली मॉर्निंग निकलना है...

मई- ok डैड...

ये बोलकर मई वापस अपने टेबल की तरफ चल पड़ा और वहां पहुँच मैंने सबको बता दिया की हम कल hi निकल रहे हैं...

वापस जाने के नाम से सब थोड़ा साद तोह थे hi पर ज़्यादा nahi..haan,par मेरे दोनों फ्रंज कुछ ज़्यादा hi साद थे और वजह भी वैलिड थी..

यहाँ से जाने के बाद मई इस्ला जो जाने वाला था और वो भी उनके बिना...

पर ये बात तोह मैंने पहले hi क्लियर कर दी थी इसीलिए मैंने दोबारा उनसे इस बारे में बात करना सही नहीं समझा...

अवंतिका- कहाँ चली तू???

अंजलि को अपने चेयर से उठते देख अवंतिका ने कहा...

अंजलि- हैंड वाश करके आती हूँ...

अवंतिका- चल मई भी चलती हूँ....

अंजलि- चल...

दोनों गर्ल्स वाश रूम की तरफ चल दिए....

अवंतिका- क्या हुआ babe,tu साद लग रही है...

क्यूंकि अवंतिका को अब मेरी सच्चाई पता थी इसीलिए अंजलि ने उससे सच कह दिया...

अंजलि- कुछ नहीं yaar..wo V.J इस्ला जाने वाला है ना इसीलिए थोड़ा मूड ऑफ है...

अवंतिका- इस्ला!!!!

अंजलि- अरे तू ग्लूटो में अलेसेन्द्र नाम की लड़की से बात नहीं कर रही thi,ussi के प्लेनेट में...

अवंतिका- ohh,haan याद aaya..toh इसमें साद होने का क्या hai???tum दोनों भी तोह उसके साथ जाओगे ना???

अंजलि- वही toh...akela जा रहा है इस baar.aur जब रीज़न पूछा तोह कहता है की बाद में बताऊंगा....

इसके बाद अवंतिका ने कुछ नहीं कहा पर नजाने क्यों उससे एक घबराहट सी होने लगी.....

और जब दोनों वापस आयी तोह अवंतिका की नज़र लगातार मुझपर hi थी..

वैसे तोह मुझे उसकी nazar,aur नज़र के पीछे का sawal,ghabrahat सब कुछ पता था पर मैंने उससे कुछ नहीं pucha..jab भी वो मेरी तरफ dekhti,mai भी उससे देख हल्का सा मुस्कुरा सडता..

इसी तरह हम सबका डिनर ख़त्म hua...dad ने एक बार फिरसे वहां आये सभी गेस्ट्स को थैंक्स कहा फिर सबको हॉल के एंट्रेंस पर सी ऑफ करने के बाद हम अब अपने अपने रूम्स में चले गए....

और इसी तरह हमारा स्विट्ज़रलैंड ट्रिप का अनएक्सपेक्टेड लास्ट डे ख़त्म हुआ...

khair,next डे हम सब अर्ली मॉर्निंग hi उठ गए और रेडी होकर एयरपोर्ट पहुँच अपनी प्लेन में बैठ होम स्वीट होम की तरफ उड़ चले....

होम स्वीट home.....jahan पहुँचने के बाद मुझे फिर कहीं निकलना था.

पर मुझे नहीं मालुम था की ये सफर मेरी ज़िन्दगी के साथ साथ और भी बोहोत कुछ बदलने वाला है....

प्लेनेट- थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स

प्लेस- ट्रेनिंग ग्राउंड.....

जब तक राखत और पसीना एक धार और एक गति से ना बहाने LAGE,SAMAJH जाना की तुम तैयार नहीं हुए हो.....

शरीर थके तोह THAKE,PAR अपने लक्ष्य को प्राप्त करने से पहले तुम्हारी आत्मा नहीं थकनी चाहिए...

क्यूंकि आत्मिक बल से HI शारीरिक थकावट को हावी होने से रोका जा सकता है....

सुबह का वक़्त hai....jab से अक्षांत और मोकलसर को वारियर्स वर्ल्ड के सैनिकों के युद्ध कौशल को निखारने का दायित्व दिया गया hai,tabhi से ये दोनों मिलकर वारियर्स वर्ल्ड और उनके साथ hi कुछ इस्ला के प्रमुख सैनिकों को कठिन प्रशिक्षण दे रहे हैं.....

इस्ला के जो प्रमुख सैनिक यहाँ मोकलसर और अक्षांत से प्रशिक्षण ले रहे हैं, वो सैनिक हर दिन प्रशिक्षण के बाद वर्ल्ड दूर से वापस इस्ला जाकर अपने सैनकों को वही प्रशिक्षण देते हैं....

मोकलसर- क्या आप सब लार्ड ऑफ़ एंगेल्स से मिलना चाहते हैं....

मोकलसर की बात सुनकर सभी सैनिक बोहोत खुश हो गए....

और सभी ने एक साथ हाँ की हुंकार लगा दी....

मोकलसर- बोहोत जल्द वो यहाँ आने वाले hain..aur हम दोनों चाहते हैं की उनके आने से पहले आप सब तैयार हो जाएँ और अपने गृह को वापस उसकी पुराणी गरिमा लौटाएं....

हम दोनों नहीं हम तीनो.......

ये आवाज़ मोकलसर और अक्षांत के पीछे से आयी थी जिससे सुनकर दोनों पीछे पालते और अपने पीछे खड़े शक्श को देखकर दोनों के चेहरे खिल उठे....

दोनों- शैला.........

दोनों ये कहकर आगे बढे और दोनों ने बारी बारी शैला को हुग kiya...sabse पहले मोकलसर ने किया और जब अक्षांत की बारी आयी तोह उसने शैला को अपनी बाहों में छुपा सा लिया...

अक्षांत और शैला दोनों की hi आखें बंद हो gayi..dono एक दूसरे को अंदर तक महसूस करने में मशरूफ हो गए...

दोनों में से किसीको इस बात का भी ख्याल नहीं रहा की शैला के साथ लार्ड क्रूसेडर भी खड़े हैं....

मोकलसर- बस करो yaar.ab एक दूसरे में समां कर hi दम लोगे kya??kamse काम महाराज का तोह ख्याल करो....

मोकलसर की पहली लाइन को तोह अक्षांत ने एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकल दिया था पर दूसरी लाइन में जैसे hi मोकलसर ने लार्ड क्रूसेडर का ज़िक्र किया तोह अक्षांत झट से शैला से अलग हो गया जब उसने अपनी राइट तरफ देखा तोह पाया की लार्ड क्रूसेडर उन दोनों को hi देखकर मुस्कुरा रहे थे....

अक्षांत- शमा करें लार्ड CRUSEDAR..mai आपको देख नहीं पाया...

लार्ड क्रूसेडर- कोई बात नहीं putra...mujhe तोह तुम दोनों के आलिंगन के बीच छुपे प्रेम को देखकर बोहोत ख़ुशी हुई....

मुझे कल hi शैला ने इस बात से अवगत कराया की तुम दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हो......

और ये जानकार मुझे बोहोत प्रसन्नता हुई.....

वैसे आज का प्रशिक्षण समाप्त हुआ या नहीं...

अक्षांत- अभी कुछ देर और बाकी है...

लार्ड क्रूसेडर- आज के लिए रहने do..mujhe एक महत्वपूर्ण घोषणा करनी है और तुम तीनो का भी उस वक़्त मेरे साथ रहना अनिवार्य है....

अक्षांत- जैसा आप कहें लार्ड.......

और फिर अक्षांत ने सभी सैनकों को आज के लिए चुटहि दे दी जिससे सुनकर सैनिकों की भी जान में जान आयी क्यूंकि अक्षांत और मोकलसर ने उन सभी के सारे अंजार पंजर ढीले कर दिए थे...

सब को आज के लिए अवकाश देकर अक्षांत शैला और मोकलसर लार्ड क्रूसेडर के साथ महल की तरफ चल दिए...

इन पैलेस

लार्ड क्रूसेडर- आज हम आप सब के समक्ष एक ज़रूरी घोषणा करने वाले हैं.....

सभा में आने से पहले hi उन्होंने अपने मंत्री से सभी सभा सादों को सभा भवन में एकत्रित होने के लिए कह दिया था...

सभा में पहुंचकर लार्ड क्रूसेडर ने अपनी राज गद्दी के सामने खड़े खड़े ये बात कही...

MOKALSAR,AKSHAANT और शैला उनके बाजू में hi खड़े थे या फिर ये कहूं लार्ड क्रूसेडर ने तीनो को अपने पास खड़े होने के लिए कहा था...

तीनो की भी उत्सुकता अब बढ़ने लगी ये जानने के लिए की ऐसी कौन सी बात है जो लार्ड क्रूसेडर उनकी मौजूदगी में hi कहना चाहते हैं....

लार्ड क्रूसेडर- पर घोषणा करने से पहले मई आप सब को शैला से मिलाना चाहूंगा जोकि ग्लूटो की नयी रानी हैं और जिन्हे मैंने अपनी पुत्री माना है.....

ये कहकर लार्ड क्रूसेडर ने अपना हाथ शैला की तरफ बढ़ा दिया जो अक्षांत के बाजू में कड़ी थी....

लार्ड क्रूसेडर की बात सुनकर शैला की आँखें भी भर आयी....

अकेले में किसीको अपना पुत्र या पुत्री कहना कोई बड़ी बात नहीं है पर सभी के बीच जब लार्ड क्रूसेडर ने शैला को अपनी पुत्री कहकर सम्भोदित किया तोह शैला का मन ख़ुशी से झूम उठा....

जिस लड़की ने साड़ी ज़िन्दगी एक अनाथ बनकर गुज़री ho,uske लिए यूँ अचानक एक पितः मिल जाना बोहोत बड़ी बात थी...

शैला अपने नयनो को भिगोये हुए लार्ड क्रूसेडर का हाथ थाम उनके पास कड़ी हो गयी....

अक्षांत और मोकलसर भी लार्ड क्रूसेडर की बात सुनकर बोहोत खुश हो गए थे.....

वहीँ लार्ड क्रूसेडर के शैला को अपनी बेटी कहकर सम्भोदित करते hi सभा में मौजूद सभी शैला के नाम की जयजयकार करने लगे....

लार्ड क्रूसेडर ने अपना हाथ ऊपर कर सबको शांत होने को कहा जिसपे सभी शांत हो गए...

लार्ड क्रूसेडर- मैंने ये सभा आप सभी को अपने उत्तरधिकारी से मिलाने के लिए राखी है...

लार्ड क्रूसेडर की बात सुन पहले तोह सभी चौंके पर फिर खुश भी हो गए....

लार्ड CRUSEDAR-aur एक baat,uttaradhikari एक नहीं बल्कि दो हैं और वो दोनों और कोई नहीं अक्षांत और मोकलसर हैं.....

जहाँ अपना नाम सुनकर अक्षांत और मोकलसर शॉकेड हो गए वहीँ सारे सभा साद बोहोत खुश थे और सभी अपने दोनों नए युवराजों की जय जयकार करने लगे...

अक्षांत- लार्ड CRUSEDAR.....ye सब???

लार्ड क्रूसेडर- लार्ड नहीं पिताजी कहो putra....maine तुम दोनों को अपना पुत्र मान कर ये फैसला लिया hai.ab तुम दोनों भी मेरे दो पुत्रों के रूप में हमारे गृह के युवराज का पद स्वीकार करो....

M0KALSAR- आपने हमे इस लायक samjha,yahi हमारे लिए किसी ऊंच पद से काम नहीं है पिताजी....

मोकलसर के मुँह से पिताजी सुनकर लार्ड क्रूसेडर बोहोत भावुक हो गए....

मोकलसर के बाद अक्षांत ने भी उन्हें पितः कहकर सम्भोदित किया जिससे उनका सीना और फूल गया...

लार्ड क्रूसेडर- हमारे परिवार की हत्या के बाद हमने तोह सोचा था की हमारा जीवन अब नीरस हो गया है पर dekho,aaj हमे हमारा एक नया परिवार मिल गया है...

और ये सब लार्ड ऑफ़ एंगेल्स की वजह से hi संभव हो पाया hai....unhe एक बार सामने से भेट कर उन्हें धन्यवाद् करने को मन विचलित सा हो उठा है.....

अभी MOKALSAR,SHAILA,aur अक्षांत में से कोई कुछ कहता की तभी.....

2 दिवस AUR....MAI आ रहा हूँ.......

ये आवाज़ मेरे तीनो दोस्तों के कानो में गूंज उठी जिससे सुनकर उनके चेहरे खिल गए और जब ये बात उन्होंने लार्ड क्रूसेडर को बताई तोह उनके भी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा....

लार्ड क्रूसेडर- 2 diwas..humare पास ज़्यादा वक़्त नहीं hai...hume आज और अभी से उनके स्वागत की तयारी करनी होगी.....

फॉर फिर सभी मेरे स्वागत की तैयारियों में लग गए....

PLANET-ISLA

PLACE-GRAH सेतु.....

ये देखिये maharaj......yahi है हमारे गृह सेतु का प्रवेश द्वार...

पर जिस रास्ते को डिफेंडर गृह सेतु का रास्ता बता रहे the,usse देखकर किंग सोलोमन शॉकेड हो गए..

सुबह का वक़्त hai...GRAH सेतु के निर्माण का काम ख़त्म हो चूका hai....aur जैसे hi ये बात किंग सोलोमन को पता chali,unhone डिफेंडर से एक बार गृह सेतु को देखने का निवेदन किया...

और इस वक़्त डिफेंडर और किंग सोलोमन जैसा की डिफेंडर ने bataya,GRAH सेतु के प्रवेश द्वार के सामने खड़े थे..

पर किंग सोलोमन के चौंके की वजह ये थी की उनके सामने द्वार जैसा कुछ भी नहीं था...

इस वक़्त डिफेंडर और किंग सोलोमन जंगल के बीच में थे और किंग सोलोमन के सामने एक बड़ा सा पेड़ था....

किंग सोलोमन- किन्तु DEFENDER,yahan तोह कुछ भी नहीं है....

डिफेंडर- आपके सामने आपको जो पेड़ दिख रहा है उसके सीध में खड़े हो जाईये...

और जैसे hi किंग सोलोमन पेड़ की सीध में खड़े hue,us पेड़ के बीचो बीच रौशनी उभरी और देखते hi देखते उस पेड़ के बीच में से एक रास्ता नज़र आने लगा....

गृह सेतु का प्रवेश द्वार इतना बड़ा था की एक साथ 100 लोग भी उसके अंदर घुस सकते थे....

किंग सोलोमन- अद्भुद....

डिफेंडर- ये पेड़ hi हमारे गृह सेतु का प्रवेश द्वार hai..theek ऐसा hi द्वार इस्ला में भी है....

इस गृह सेतु की एक ख़ास बात यह भी है पर वो क्या है ये मई नहीं आपको लार्ड ऑफ़ एंगेल्स बताएँगे....

किंग सोलोमन- अब तोह काफी वक़्त गुज़र चूका hai..grah सेतु भी बन कर तैयार hai....LORD ऑफ़ एंगेल्स कब आएंगे.....???

तभी......

दो दिवस AUR......MAI आ रहा हूँ......

ये आवाज़ डिफेंडर के कानो में गूंज uthi......jisse सुनकर डिफेंडर के चेहरे पर एक चमक आ गयी...

और जैसे hi मेरे आने की बात डिफेंडर ने किंग सोलोमन को batayi,unke चेहरे पर भी चमक आ गयी...

किंग सोलोमन- दो diwas..bohot काम वक़्त है हमारे पास लार्ड ऑफ़ एंगेल्स के स्वागत की तयारी करने का.....

डिफेंडर अगर आपकी इजाज़त हो तोह क्या हम जा सकते हैं..????

डिफेंडर ने हाँ में सर hilaya.KING सोलोमन ने अपना सर पुनः एक बार डिफेंडर के आगे झुकाया पर जैसे hi उनका सर ऊपर hua,DEFENDER जा चुके थे...

किंग सोलोमन भी अपने महल की तरफ निकल गए....

ठीक उसी वक़्त......

प्लेनेट- मांसलिकेल....

प्लेस- पैलेस

ास्मोडियस- मंगल के दिन

शनि सवार होगी......

ऐसा पहली बार होगा जब....

मंज़िल पर पहुँचने के बाद,

हार होगी.....

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V...J......
 
अब तक आपने पढ़ा की मोकलसर और अक्षांत को लार्ड क्रूसेडर अपना युवराज घोषित करते हैं वहीँ विक्रम & पार्टी अपने घर के लिए निकल जाते हैं....

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

मेगा अपडेट-87

प्लेनेट- एअर्थ

प्लेस- कॉफ़ी हाउस

वाओ YAAR..TUM तीनो तोह ACTUALLY,WHATS तहत WORD,HAAN,LANGOUTIYA फ्रंज हो......

ये वर्ड्स रियांश के मुँह से निकले थे जिससे सुनकर सभी मुस्कुरा दिए पर ये मुस्कराहट दो अलग अलग ग्रुप्स में अलग अलग फीलिंग्स के साथ डिवाइडेड थी...

एक ग्रुप में थे AVANTIKA,DEVANSH और शनाया जिनकी मुस्कराहट सच्ची थी और दूसरे ग्रुप में थे मेरे दोनों फ्रंज अंजलि और रोनित जिनके चेहरे पर फेक मुस्कान थी....

और ये फेक स्माइल अवंतिका से नहीं छुप पायी...

शाम का वक़्त hai.....fog की वजह से हमारा प्लेन थोड़ा लेट से टेक ऑफ हुआ था जिस वजह से हम सब कल लेट नाईट वापस मुंबई लैंड हुए थे....

एक बार फिर से जेट लग ने सबको अपना शिकार बना लिया था इसीलिए दिन भर सब सोते रहे और शाम को शनाया ने कॉफ़ी हाउस में मिलने का प्लान बनाया जिससे सबने ok कहा और कुछ hi देर पहले मेरे सारे फर्न्स यहाँ कफ हाउस में इकठ्ठा हुए...

पर ह्मर्रे ग्रुप में एक बाँदा मिसिंग था और वो मई था और इसकी वजह थी ISLA....mai आज रात hi इस्ला के लिए निकलने वाला था इसीलिए उससे पहले मई अपना बाकी का टाइम फॅमिली के साथ स्पेंड करना चाहता था..

वैसे तोह अंजलि और रोनित को भी इस वक़्त मेरे साथ रहना चाहिए था पर क्यूंकि मेरे अकेले जाने से दोनों कुछ ज़्यादा hi अपसेट थे इसीलिए नहीं आये....

पर यहाँ आते hi रियांश ने उन दोनों से हम तीनो की फ्रेंडशिप के बारे में hi सवाल पूछ लिया जिसका जवाब देने के बाद से hi दोनों बस ऊपरी तौर पर है रहे थे पर अंदर से साद थे....

और इसी सडनेस को अवंतिका भांप गयी पर वो अंजलि और रोनित की तरह मंद तो मंद बात तोह कर नहीं सकती थी इसीलिए उसने अपना फ़ोन निकला अंजलि को संस किया...

अंजलि ने अपना सेल हाथ में hi पकड़ा हुआ था इसीलिए मोबाइल विबरते करते hi उसने मश्ग ओपन करके देखा जो अवंतिका का hi था...

अवंतिका इन संस- व्हाट happened???udaas क्यों है....????

अंजलि ने अवंतिका का संस तोह पढ़ा पर संस से जवाब देने के बजाये उसने अवंतिका के मंद में अपनी बात कही...

अंजलि- V.J आज जा रहा है????

ढक्क्क्क..........

ऐसी hi कुछ आवाज़ अवंतिका को अपने दिल में सुनाई di..uska दिल ज़ोरो से धड़का पर वजह उससे समझ नहीं आयी....

अवंतिका अब V.J की सच्चाई से वाकिफ थी उससे ये भी पता था की V.J का ऐसे सफर में जाना बोहोत नार्मल सी बात है पर इन सब के बावजूद अवंतिका का मन बेचैन हो उठा...

और ये बेचैनी ख़त्म होने की जगह बढ़ती hi चली जा रही thi...AVANTIKA को समझ में नहीं आ रहा था की उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है और जब उसने खुद से hi जवाब माँगा तोह.....

अवंतिका के अंदर मेरी तस्वीर उभर आयी जिससे देखते hi उसकी बेचैनी कुछ काम हो गयी...

पर उसकी बेचैनी पूरी ख़त्म नहीं हुई थी...

अवंतिका मन में- मुझे V.J के जाने से पहले एक बार उससे मिलना है......

क्यों???? ये सवाल भी अवंतिका के दिमाग में कौंधा पर इस बिना जस्बातों वाले दिमाग को कौन समझाए के दिल के मसलो में सवाल नहीं किये जाते बस फैसलों पर विश्वास कर उनमे अमल किया जाता है...

पर अवंतिका तुरंत उठ कर तोह जा नहीं सकती थी इसलिए उसने कुछ देर इंतज़ार करना hi बेहतर समझा...

मेरे सारे फ्रंज कुछ 1 घंटे तक वहीँ बैठे रहे और जब सब कल मिलने का बोल कफ हाउस से बाहर आये तोह....

अवंतिका- bhaiya,mujhe कुछ काम hai...aap सब jaaiye,mai आती हूँ...

शनाया- अभी रात को क्या काम hai???chal मई भी चलती हूँ???

अवंतिका- अरे नहीं yaar....mai आ जाती hun..tu भी भैया के साथ घर निकल....

शनाया- कूल babes.jaldi आना....

अवंतिका को अकेले घूमना बोहोत ाचा लगता था इसीलिए शनाया ने भी ज़्यादा गौर नहीं किया और अपने दोनों भाईयों के साथ निकल गयी....

रोनित और अनजालि के निकलते hi अवंतिका भी V.J के घर की तरफ निकल गयी....

PLACE-MINAKSHI मेन्शन

नमस्ते आंटी.......

V/MOM- अरे अवनि beta...aao aao.....aaj रात को यूँ achanak....every थिंग ाललरिघ्त ना....

AVANTIKA-ya या aunty.every थिंग इस fine..wo एक्चुअली मई शाम को hi आने वाली थी पर कुछ काम की वजह से थोड़ी लेट हो gayi...waise V.J कहाँ है आंटी??

मुझे सामने ना देखकर अवंतिका की बेचैनी फिर से बढ़ने लगी thi..usse लग रहा था की मई चला गया....

V/MOM- अपने रूम में hai..abhi जस्ट डिनर करके गया hai....dinner से याद aaya,aao तुम भी डिनर कर लो...

अवंतिका- no no aunty..actually घर में सब डिनर पर मेरा वेट कर रहे हैं toh.....next टाइम पक्का......

V/MOM- चलो ठीक hai...jao,tum V.J से मिल लो......

माँ को थैंक्स बोल अवंतिका मेरे रूम की तरफ nikli...uski बेचैनी अभी भी ख़त्म नहीं हुई थी क्यूंकि वो जानती थी की अगर मई चला भी जाऊं तोह भी मेरा डमी यहाँ घर पर मौजूद होगा....

नॉक नॉक नॉक......

मई- के इन.......

मेरे बुलाने पर ावनतिका अंदर आयी.....

मई- हे AVANTIKA,whats उप???

पर अवंतिका ने मुझसे कुछ कहा नहीं बस मुझे घर घर बकर देखती रही....

मई- अरे मई विक्रम hi hun,mera डमी नहीं....

मेरे कन्फर्मेशन के बाद अवंतिका थोड़ी सी रिलैक्स्ड हुई....

मई- अब कुछ बोलोगी bhi,tum यहाँ इस वक़्त कैसे???

अवंतिका- वो अंजू ने मुझे बताया की तुम अभी hi इस्ला के लिए जा रहे हो...

मई- haan...yahi बोलना था????

अवंतिका- नहीं वो एक्चुअली......

मन में- अब इससे कैसे कहूं की मई भी साथ आना चाहती हूँ.....

मई- ठीक है fir..mai चलता हूँ.....

अवंतिका- क्या मई भी साथ चल सकती हूँ.....

मैंने जैसे hi अपनी लाइन बोली अवंतिका ने झट से अपने दिल की बात कह दी....

मई- चलो.....

मेरा जवाब सुन कर अवंतिका को एक झटका laga...aur ऐसा तोह होना hi था क्यूंकि मैंने रोनित और अंजलि तक को मन कर दिया था अपने साथ आने के लिए पर अवंतिका को एक बार में hi हाँ कह दिया था...

पर मेरे जवाब को सुनकर अवंतिका इतनी खुश हो गयी थी की उसने अपने सारे थॉट्स को साइड कर दिया....

अवंतिका- सच ???

मई- अपना एक बाल दो......

अवंतिका पहले तोह मेरी बात का मतलब नहीं समझी पर फिर अचानक उससे सब समझ आ गया....

अवंतिका ने झट से अपने सर का एक बाल तोड़कर मुझे दे दिया तब तक मैंने भी अपने सर का एक बाल तोड़ लिया था...

दोनों बालों को मैंने एक साथ अपनी मुट्ठी में मसला और ज़मीं पर फेक दिया...

कुछ hi पलों में हम दोनों के सामने हमारे क्लोन्स थे..

फिर मेरा क्लोन अवंतिका के क्लोन को छोड़ने बाहर चला गया....

मई- जाने से पहले मई तुम्हे कुछ बताना चाहता हूँ AVNI...par उससे पहले मेरा एक सवाल है.....???

AVANTIKA-V.J का sawaal...tab तोह पक्का बोहोत टफ hoga...but i''ll तरय तो आंसर. पूछो????

पर जब मैंने अवंतिका के सामने अपना सवाल rakha,toh उसने ना में अपना सर हिला diya....AVANTIKA को मेरे सवाल का जवाब नहीं पता था..

उससे hi kya,is ब्रम्हांड में गॉड और मुझे छोड़कर शायद किसी को भी मेरे पूछे गए सवाल का जवाब नहीं मालुम था....

पर जैसे hi मैंने अवंतिका को अपने पूछे गए सवाल का जवाब diya,uski आँखें हैरत से फैले गयी...

अवंतिका- एक बात बताओगे???

मई- सब कुछ अपने आप तुम्हे पता चल jaayega....bas जब सही वक़्त aaye,toh तुम्हार दिमाग नहीं दिल जो भी kahe,tumhe जो भी dikhaye,usse समझने की कोशिश करना...

अवंतिका को मेरी बात का मतलब तोह समझ नहीं aaya,par वो ये जानती थी की जब वक़्त aayega,toh साड़ी चीज़ें क्लियर हो जाएंगी....

मैंने अपना हाथ आगे किया जिससे अवंतिका ने थाम liya...agle hi पल हम दोनों गायब हो गए.........

प्लेनेट- वारियर्स वर्ल्ड

प्लेस- पैलेस एंट्रेंस

आज लार्ड ऑफ़ एंगेल्स के पावन कदम हमारे गृह पर पुनः PADENGE,HUM बता नहीं सकते की हमे कितनी ख़ुशी हो रही है.....

शैला- ये ख़ुशी सिर्फ आपका मन hi नहीं पिताजी

,बल्कि हम सबका मन महसूस कर रहा है.....

2 दिन पहले जबसे मैंने सुचना दी है की मई आने वाला hun,ISLA और वारियर्स वर्ल्ड में ज़ोरों शोरों से मेरे स्वागत की तैयारियां चल रही हैं....

सारे रास्तों के ऊपर फूल बिछा दिए गए hain....mahal से लेकर गृह सेतु के प्रवेश द्वार तक के रास्ते को अलग अलग तरीके से सजा दिया गया है....

ऐसा लग रहा है जैसे इस्ला और वारियर्स वर्ल्ड की शादी हो रही है....

इस वक़्त लार्ड क्रूसेडर ,SHAILA,MOKALSAR और अक्षांत अपने महल के सामने hi खड़े थे.....

महल के चारो तरफ बम्बू के बड़े बड़े बार्रिकडेस लगाए गए थे जिनके दूसरी तरफ वारियर्स वर्ल्ड के सभी लोग खड़े होकर मेरा नाम चिल्ला रहे थे....

लार्ड क्रूसेडर- bacchon,tum सब तोह उनके मित्र ho..tumhe तोह पता hi होगा की उन्हें क्या क्या पसंद है...

अगर कुछ कमी रह गयी है तोह शिग्रह batao,taaki अविलम्ब उस कमी को पूरा किया जाए....

लार्ड क्रूसेडर की बात सुनकर तीनो बस मुस्कुरा दिए...

शैला- दिल में प्रेम और आँखों में sacchayi,VIKRAM को इन दो गहनों के आगे और कुछ भी नहीं चाहिए....

और ये दोनों गहने आपके पास हैं पिताश्री इसीलिए निश्चिन्त होकर अपनी बाहें फैलाये उनका स्वागत कीजियेगा....

उन्हें बोहोत अच्छा लगेगा....

अभी लार्ड क्रूसेडर कुछ कहते उससे पहले hi उनसे थोड़ी दूर उनके सामने एक तेज़ प्रकाश फैले गया जिसकी वजह से वहां मौजूद सभी की आँखें बंद हो गयीं....

जब वो प्रकाश काम हुआ और सबने अपनी आखें खोलकर अपने सामने देखा तोह सभी के ख़ुशी का ठिकाना न रहा...

मई और अवंतिका सामने खड़े होकर अपने चरों तरफ खड़े लोगों को देख रहे थे वहीँ मुझे अपने सामने देख वहां मौजूद भीड़ की आवाज़ और बुलंद हो गयी....

मैंने हल्का ऊपर हवा में उठ गया ताकि भीड़ के आखिर के लोग भी मुझे देख saken...hawa में उठ मैंने अपना हाथ ऊपर किया और सबको मेरा नाम पुकारने से रोका...

सभी चुप हो गए.....

मई थोड़ी देर तक यूँही हवा में खड़ा रहा उसके बाद धीरे धीरे निचे आ गया....

पर अब नीचे सिर्फ अवंतिका नहीं thi,balki उसके पास मेरे तीनो दोस्त और लार्ड क्रूसेडर भी खड़े थे....

और तीनो ने लार्ड क्रूसेडर को अवंतिका से परिचय भी करा दिया था...

मेरे नीचे आते hi लार्ड क्रूसेडर ने मुझे फूलों की माला पेहेनना चाहा पर मैंने उन्हें रोक दिया और झुककर उनके पैरों को छू लिया....

जैसे hi मैंने उनके पैरों को chhua,LORD क्रूसेडर के आँखों के सामने उनकी पत्नी और उनके बच्चों के चेहरे आ गए जो स्वर्ग में बैठ अपने पितः को देख मुस्कुरा रहे थे...

इतनी सदियों के बाद अपने बच्चों और पत्नी को वापस देख लार्ड क्रूसेडर बोहोत खुश भी हो गए और साथ hi भावुक भी....

मई- आप एक महँ योद्धा है लार्ड CRUSEDAR...aur आप जैसे योद्धा के आँखों में आंसू अच्छे नहीं लगते...

आपके मन में एक बार अपने बच्चों और पत्नी को देखने की तीव्र इच्छा जागृत हुई थी इसीलिए hi आप उन्हें देख सके..

पर जो जीवन चक्र से आज़ाद हो चूका है उससे याद कर आंसू बहाने से ाचा है आपके नए parivar,aapki पुत्री और आपके दोनों पुत्र के साथ आप हसी ख़ुशी जियें...

लार्ड क्रूसेडर- ऐसा hi होगा विक्रम.....

अभी कोई और कुछ कहता उससे पहले hi एक बार और हमारे सामने तेज़ प्रकाश हुआ और उसी प्रकाश के बीच से डिफेंडर प्रकट हुए...

डिफेंडर को अपने सामने देख वहां मौजूद सभी झुक गए वहीँ डिफेंडर ने मेरे आगे अपना सर झुकाया...

मई- चलें....

डिफेंडर- जी...

मैंने अवंतिका का हाथ पकड़ा और आगे की तरफ बढ़ गया....

और हमारे पीछे पीछे hi लार्ड क्रूसेडर, मेरे तीनो DOST,SAARE सभा साद और वारियर्स वर्ल्ड के सभी लोग चलने लगे....

अवंतिका एक तक मेरी तरफ देख रही थी...

मेरे आँखों में कुछ था जिससे वो समझने की कोशिश कर रही thi...aur जब वो नहीं समझ पायी तोह....

अवंतिका- कोई बात है क्या V.J...???tum कुछ डिस्टर्बेद से लग रहे हो...

मई- मैंने कहा था naa,sab पता चल jaayega....aur मेरी कही हुई बात भूलना मत....

जब भी सही वक़्त AAYE,TUMHARE दिल में जो भी DIKHE,USSE समझने की कोशिश करना.....

अभी वो कुछ कहती की......

डिफेंडर- हम पहुँच गए....

ठीक इस्ला की hi तरह वारियर्स वर्ल्ड में भी एक बड़े और मोठे से पेड़ के बीच से गृह सेतु के प्रवेश द्वार को बनाया गया था..

और अभी हम उसी पेड़ के सामने थे...

मैंने अवंतिका का हाथ अभी भी थामा हुआ tha..mai उससे लेकर उस पेड़ के सीध में खड़ा हो गया....

मेरे ऐसा करते hi उस पेड़ के बीच का हिस्सा खुल गया और वहां से एक तेज़ प्रकाश निकलने लगा...

मेरे पीछे पीछे hi बाकी सभी एक लाइन में खड़े हो गए.....

जैसा की मैंने बताया था की उस रास्ते से एक साथ 100 लोग आराम से जा सकते हैं इसीलिए सभी ने 100 100 के ग्रुप्स बना लिए थे...

mai,AVANTIKA,LORD CRUSEDAR,DEFENDER और मेरे तीनो फ्रंज सबसे पहले आगे बढे और जैसे hi हम सब उस पेड़ के बीच बने रास्ते से निकलती रौशनी के दायरे में pahunche,us रौशनी ने हमारे शरीर को खुद की तरफ खींच लिया....

यही हमारे पीछे आ रहे सभी ग्रुप्स के साथ hua....aur कुछ hi पलों में हम सब गृह सेतु के दूसरे छोर के बाहर खड़े थे...

दूसरा CHHOR......mere सफर का अगला और सबसे महत्व पूर्ण पड़ाव.......... इस्ला..............

प्लेनेट- इस्ला

प्लेस- गृह सेतु पॉइंट.....

मई- ख़ूबसूरत है ना???

मैंने ये बात अवंतिका से कही थी जो की आँखें फाड़े इस्ला की वादियों को देखे जा रही थी....

अवंतिका- khubsoorat....aise प्राकृतिक सौन्दर्यता की कल्पना भी मैंने कभी नहीं की थी...

सच hi तोह कह रही थी AVANTIKA.....ISLA ब्रम्हांड का सबसे ख़ूबसूरत गृह है...

हवा में तैरते छोटे और बड़े पहाड़...

बिना किसी श्रोत के गिरते हुए waterfall.har तरफ हरियाली ने अपनी एक ऐसी चादर फैला राखी थी मानो पुरे गृह में अपने अधिकार की पुष्टि कर रही हो.....

हमारे सामने किंग SOLOMON,unki पत्नी और अलेसेन्द्र खड़े थे......

मुझे अपने सामने देख उनकी ख़ुशी का ठिकाना न raha....teeno hi मुझसे मिलने के लिए आगे बढे hi थे की इतने में.......

इस्ला की ज़मीन में कम्पन होने लगी जिसकी वजह से वहां मौजूद सभी के पाँव लड़खड़ाने लगे पर इससे पहले की कोई girta,maine अपना हाथ सभी तरफ घुमा दिया..

सभी के पाँव एक जगह जैम gaye..par अभी भी कम्पन बराबर हो रही थी जिसकी वजह से सभी एक शरीर बुरी तरह हिल रहे थे...

अलेसेन्द्र- ये अचानक क्या हो रहा है विक्रम......????

डिफेंडर- मई पता लगता हूँ....

ये बोलकर डिफेंडर ने अपनी आखें बंद कर कुछ स्पेल बुदबुदाया पर इससे कोई फायदा नहीं हुआ...

वहीँ मई बस मुस्कुरा रहा था जिससे जैसे hi अवंतिका और अलेसेन्द्र ने dekha,dono पहले तोह शॉकेड हो गए फिर ये सोचकर की मेरे रहते कुछ भी गलत नहीं हो sakta,dono शांत भी हो गए....

मई- आप इस कम्पन के राज़ का पता नहीं लगा पाएंगे डिफेंडर......

मेरी बात सुनकर डिफेंडर और वहां मौजूद सभी चौंक गए....

मई- शांत हो JAAIYE,MAI आ रहा हूँ....

मेरे ऐसा कहते hi कम्पन रूक गयी पर ऐसा होने पर सभी और ज़्यादा आश्चर्यचकित हो गए.....

डिफेंडर- ये कैसी माया है लार्ड.....???

मई- फाउंटेन ऑफ़ LIGHT......sadiyon से वो मेरा इंतज़ार कर रही hai,apne आप को छुपकर अपने अस्तित्व को बचा रही है..

और आज मुझे खुद के इतना समीप महसूस कर फाउंटेन ऑफ़ लाइट उत्तेजित हो गयी है...

अगर आप बुरा ना माने किंग सोलोमन तोह क्या मई पहले फाउंटेन ऑफ़ लाइट की जगह से हो आऊं..

उसके पश्चात् आपकी प्रजा से मिल लूंगा....

किंग सोलोमन- आप बस हमे आदेश दें लार्ड ऑफ़ ANGELS...nivedan कर हमे पाप का भागिदार न बनाये....

मई- मई आपकी पुत्री अलेसेन्द्र को भी अपने साथ लेजाना चाहता हूँ....

किंग सोलोमन- ये उसका सौभाग्य होगा LORD..par क्या हम सभी नहीं जा sakte...FOUNTAIN ऑफ़ लाइट को दोबारा देखने के liye...humari भी आखें तरस गयी हैं...

मई- वो तोह आपकी hi धरोहर hai....aur उससे वापस आप सब के बीच लाने लिए hi तोह मई जा रहा हूँ...

पर अभी आप सब मेरे साथ नहीं जा सकते क्यूंकि फाउंटेन ऑफ़ लाइट के पुनः प्रकट होते hi उसकी एनर्जी बोहोत ज़्यादा होगी जो आपमें से कोई भी बर्दाश्त नहीं कर पायेगा.....

उसके बाद मैंने डिफेंडर से अकेले में कुछ बातें की और फिर वापस अवंतिका के पास आ गया...

मई- ALESENDRA,mere पास आइये...

मेरे कहते hi अलेसेन्द्र मेरे पास आ गयी...

मैंने अलेसेन्द्र और अवंतिका का हाथ पकड़ा और अगले hi पल हम तीनो गायब हो चुके थे.....

क्लाइमेक्स सन

फाउंटेन ऑफ़ लाइट

उद्भेदा ज्वलका प्रकटम

फाउंटेन ऑफ़ लाइट मैनिफेस्ट

फाउंटेन ऑफ़ लाइट के सामने खड़े होकर मैंने स्पेल bola.....mere आजु बाजू में अलेसेन्द्र और अवंतिका फूलों एक्ससिटेड होकर कड़ी थी....

दोनों hi फाउंटेन ऑफ़ लाइट को देखने के लिए लालायित थी...

पर अगले hi पल जहाँ उन दोनों के चेहरे उतर गए वहीँ मई शॉकेड हो गया....

और इसका कारण ये था की मेरे स्पेल बोलने के बाद भी कुछ नहीं हुआ tha...FOUNTAIN अब भी नदारद थी...

यहाँ पहुँचते hi मुझे लगा था की मुझे देखते hi फाउंटेन अपने आप प्रकट हो जायेगी पर यहाँ तोह मेरे स्पेल बोलने के बाद भी कुछ नहीं हुआ....

अलेसेन्द्र- ऐसा कैसे हो सकता hai???FOUNTAIN को तोह आपको अपने समक्ष देखते hi प्रकट हो जाना चाहिए था....

मई- समझ तोह मुझे भी नहीं आ रहा है???

अभी हममे से कोई कुछ और कहता की तभी....

क्यूंकि उससे पता है की मई यहाँ मौजूद HUN....AUR दो भाइयों के पहले मिलान के बीच वो बाधक कैसे बन सकती है?????

ये awaaz........pure कहानी का saaransh....do अलग अलग आटीटुडे के स्वामियों का सबसे बड़ा हथियार....

जहाँ इस आवाज़ को पुनः सुन अलेसेन्द्र के मन में एक दर ने घर बना लिया वहीँ मुझे भी अपनी रीढ़ की हड्डियों में एक ठंडक सी दौड़ती महसूस हुई.....

हम तीनो धीरे धीरे घूम gaye....aur अगले hi पल.......

वो घडी जो इस कहानी की रचना की सबसे एहम कड़ी thi,wo आ चुकी thi...do अलग अलग दिशा से दो दो आँखें एक दूसरे की आँखों के हर भाव को टोल रही थी....

जहाँ एक भाई के होंठों पर मुस्कराहट थी वहीँ दूसरे का चेहरा भाव शुन्य....

इस वक़्त ब्रम्हांड के दो सबसे शक्तिशाली व्यक्तित्व के स्वामी एक दूसरे के सामने खड़े थे....

गॉड के दो पुत्र जिनमे में से एक लार्ड ऑफ़ एंगेल्स था तोह दूसरा लार्ड ऑफ़ डेविल्स....

विक्रम और ास्मोडियस.......

पर हम दोनों से अलग अलेसेन्द्र के चेहरे पर शॉक के भाव थे और ये भाव ास्मोडियस को देखकर नहीं बल्कि उसके साइड में खड़े इस्ला के राज गुरु को देखकर आये थे....

ये वही राज गुरु है दोस्तों जिन्होंने बिल्जेबब को इस्ला के लिए खतरा बताया था और उससे यहाँ से दूर भेजने की सलाह दी थी....

अलेसेन्द्र- राज गुरु AAP???WO भी ास्मोडियस के साथ????

अभी राज गुरु कुछ कहते उससे पहले hi...

मई- ये तुम्हारे राज गुरु नहीं हैं ALESENDRA...ye बिल्जेबब hai.tumhari संतान जिसने कई वर्ष पूर्व तुम्हारे राज गुरु की हत्या कर दी थी और फिर उन्ही का रूप लेकर यहाँ रहने लगा...

और फाउंटेन ऑफ़ लाइट से जुड़ी साड़ी जानकारी यही अपने पितः को देता रहा है....

जहाँ मेरे मुँह से बिल्जेबब का सच जानकार अलेसेन्द्र का दिल फिरसे तड़प उठा वहीँ अवंतिका भी मेरी बातें सुनकर काफी शॉकेड हो गयी थी....

बिल्जेबब- कैसी हो माँ.....????

ये बात बिल्जेबब ने अपने असली रूप में आकर कही थी पर उसके माँ शब्द में प्यार नहीं अलेसेन्द्र के लिए नफरत थी...

अलेसेन्द्र- मई किसी पप्पी की माँ नहीं hun...apni गन्दी ज़ुबान से मुझे माँ मत बुला....

अलेसेन्द्र की बात सुनकर बिल्जेबब के हाथों में एक अनेर्ग्य बॉल चमक उठा जिससे देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट नाच गयी....

मई- माँ कितना भी बुरा bole,par किसी बेटे की इतनी हिम्मत नहीं होनी चाहिए की वो अपनी माता को जवाब de....par तेरे हाथों में इस ऊर्जा गंध को लाकर तूने अलेसेन्द्र की बात को सच साबित कर दिया....

मेरी बात सुनकर बिल्जेबब ने उस एनर्जी बॉल को मेरी तरफ फेख दिया पर मई अपनी जगह बिना हाथ पेअर हिलाये खड़ा रहा..

वो बॉल मेरे पास आकर नष्ट हो गया...

ऐसा होते देख अवंतिका और अलेसेन्द्र के चेहरे पर एक मुस्कान नाच गयी की तभी............

अह्हह्ह्ह्ह.............

ये आवाज़ मेरे मुँह से निकली थी और चीखते साथ hi मई कुछ दूर जा गिरा...

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसीने मेरे सीने के ऊपर एक वजनी पत्थर रख दिया है..

मुझे कुछ वक़्त लगा पर मई खड़ा हो गया...

मेरे दूर गिरने पर जहाँ अवंतिका और अलेसेन्द्र के चेहरे की मुस्कराहट गायब हो गयी थी और उसकी जगह दर्द और डर ने ले ली थी वहीँ मेरे सामने खड़े ास्मोडियस के चेहरे पर मुस्कराहट कायम थी...

ये वार उसने hi मुझपर किया था....

ास्मोडियस- तुम्हे दिखा nahi,haina भाई....

मैंने कुछ कहा नहीं बस अगले hi पल मेरे शरीर के हर हिस्से से लगातार कई साड़ी एनर्जी रेज़ निकली और तेज़ी से ास्मोडियस की तरफ चल पड़ी....

पर ास्मोडियस की तेज़ी काबिले तारीफ़ thi...uska शरीर सेकंड के 1000वे हिस्से से भी काम समय में इधर से उधर हिलने लगा और मेरे सारे रेज़ उससे टच भी नहीं कर पाए पर बिल्जेबब ऐसा नहीं कर पाया...

उससे मेरा छोड़ा एक एनर्जी रे टकराया और वो छिटक कर दूर जा गिरा...

क्यूंकि ये सारे रेज़ मेरी ऊर्जा से बन कर बाहर निकले थे इसीलिए बिल्जेबब इस ऊर्जा को बर्दाश्त नहीं कर पाया और बेहोश हो गया...

वहीँ ास्मोडियस ने मेरे सारे रेज़ को डॉज कर hi दिया था की......

अधिकतमं करोति......

मक्सिमिज़े.....

आह्ह्ह्हह...........

मेरे स्पेल बोलते hi मेरे सीने के बीच से एक एनर्जी बॉल निकली जिसकी रफ़्तार पहले से 1000 गुना ज़्यादा तेज़ थी और इस बार ास्मोडियस मेरे प्रहार से बच नहीं पाया..

एनर्जी बॉल ठीक उसके सीने के बीच लगी और ठीक मेरी hi तरह उसके मुँह से भी एक हलकी सी चीख निकल गयी और उसका शरीर भी पीछे जा गिरा....

पर ास्मोडियस तुरंत खड़ा हो गया...

मई- तुम्हे भी दिखा nahi,haina भाई.....

ास्मोडियस ने कुछ कहा नहीं बस खड़ा हो गया....

उठते hi ासमोईउस के लैब हिले और उसने जो कहा और kiya,wo मैंने नहीं एक्सपेक्ट नहीं किया था..

ास्मोडियस- ALESENDRA,AVANTIKA...tum दोनों को सुरक्षा कवच में रहना चाहिए...

वर्ण तुम दोनों को चोट लग सकती है.....

ये कहकर ास्मोडियस ने अपना हाथ आगे kiya,jisse एक अदृश्य रे निकली और उस रे ने अवंतिका और अलेसेन्द्र के चारों तरफ एक शील्ड बना दिया....

एक ऐसा hi शील्ड ास्मोडियस ने हम जिस जगह खड़े the,uske चारों तरफ भी फैला दिया...

अलेक्सांद्र- तुमने वचन दिया था ास्मोडियस की तुम वापस नहीं आओगे...

ास्मोडियस- वचन याद है शर्त nahi.maine कहा था की जब तक फाउंटेन ऑफ़ लाइट इस गृह से नदारद hai,tab तक मई यहाँ नहीं आऊंगा पर इसके यहां आने का मतलब है फाउंटेन का यहाँ उपस्थित होना.....

अगर मई तुम्हे मार dun,toh बुरा मत मानना भाई.....

मई- नहीं maanunga....bas एक शर्त है.....

मार HI DENA.....KYUNKI अगर मई बच गया तोह तुम निपट जाओगे.....

मेरी बात सुनकर ास्मोडियस के चेहरे पर एक मुस्कान नाच गयी....

और अगले hi पल......

DHOOMMMM..DHOOMMMMM.......DHOOOMMM.....SAAYEN,SAAYENNNN साईनंनं........

ऐसी hi लगातार कई आवाज़ें aayin.....mai जिस जगह खड़ा tha,theek उसके ऊपर आसमान में एक जगह खुल गयी और उस जगह से बारिश होने लगी....

पर ये बारिश पानी की नहीं आग की थी...

मई अपनी जगह से हाथ गया और जिस जगह पर वो अग्नि वर्षा giri,wahan धमाके होने लगे ठीक उसी वक़्त ास्मोडियस के आजु बाजू से कई शाश्त्र मेरी तरफ बढे पर मैंने हाथ आगे कर उन्हें रोक दिया और उन्हें वापस ास्मोडियस की तरफ hi मोड़ दिया...

पर ास्मोडियस तक पहुँचने से पहले hi वो सारे

शाश्त्र बेकार हो गए....

तभी........

आह्ह्ह्हह........

ये मेरी चीख थी और इसी चीख के साथ में आगे की तरफ उड़ता हुआ गिरा....

हुआ ये की ास्मोडियस के दो लगातार वारों से जैसे hi मई bacha,thik उसी वक़्त पीछे से एक मायावी हाथ मेरे पीठ से टकराया जिसकी वजह से मई आगे उड़ता हुआ गिरा...

ास्मोडियस- BHAI,BHAI,BHAI......yudh के वक़्त चारों तरफ नज़र होनी चाहिए वर्ण ऐसा हाल होना अनिवार्य है....

AHHHHH....DHOOBBHHHHHH...........

ये आवाज़ ास्मोडियस के मुँह और शरीर से निकली थी.....

हुआ ये की जब ास्मोडियस मुझसे बात कर रहा था तब मेरा चेहरा नीचे ज़मीं की तरफ था और तभी.......

ास्मोडियस जहाँ खड़ा tha,ussi ज़मीं के अंदर से एक मायावी हाथ निकला और ास्मोडियस के पैरों के नीचे से उससे ऊपर हवा में उठा दिया और अगले hi पल ास्मोडियस के हवा में तैरते शरीर को पकड़ कर नीचे पटक दिया......

अस्मोड़ेदुस कुछ पल तक ऊपर आसमान को घूरता रहा फिर मुस्कुराते हुए खड़ा हो गया...

साला besharam.....maar खाकर भी हस्ता hai...par था तोह मेरा hi BHAI,kuch तोह साइड इफ़ेक्ट होगा hi.....

यहाँ हम लड़ रहे the,wahan पुरे ब्रम्हांड में हल्का हल्का अँधेरा छाने लगा tha...hawayen तेज़ बहने लगी थी....

एंगेल्स और डेविल्स टकटकी लगाए हम दोनों के बीचे छिड़े महा संग्राम को देख रहे थे....

अलेसेन्द्र और अवंतिका के चेहरे पर भी फ़िक्र और दर के मिले जुले भाव तैर रहे थे...

khair,ASMODEUS के साथ साथ मई भी खड़ा हो चूका tha...hum दोनों hi एक दूसरे की शक्ति को आँखों hi आखों में तौल रहे थे की तभी.......

mmmmmm..............mmmmmm............

ये आवाज़ मेरी थी और ये इसीलिए मेरे गले से निकल रही थी क्यूंकि मई अपने दोनों हाथों को फैलने से रोक रहा था....

हुआ ये की ास्मोडियस ने अपने हाथों को साथ कर माला और मेरी तरफ एकटक देखते हुए अपने दोनों हाथों को फ़ैलाने लगा...

ये एक घातक मैजिक tha....isme ास्मोडियस जितना अपने हाथों को फैलता उतने hi मेरे हाथ भी फैलते जाते...

और इस कंडीशन में ास्मोडियस मेरी बॉडी को निशाना बनाकर कोई भी स्पेल बोल सकता था और क्यूंकि मुझे उसने जकड़ा हुआ था इसीलिए मई कुछ भी नहीं कर पाटा....

मई भी अपनी पूरी शक्ति अपने दोनों भुजाओं में लगाकर अपने हाथों को फैलने से रोकने लगा....

पर ये रोकना बोहोत मुश्किल था क्यूंकि इस मैजिक की शुरुआत ास्मोडियस ने कर दी थी...

और इस मैजिक को बेकार करने के लिए सबसे पहले मुझे ास्मोडियस का कंसंट्रेशन ब्रेक करना ज़रूरी था...

मैंने अपने हाथों को फैलने से रोकने की कोशिश करते हुए ास्मोडियस के पैरों के पास एक तक देखना शुरू किया और ऐसा करते hi उसके पैरों के पास से एक मिटटी का भवर उठा और उसकी आखों की तरफ बढ़ने लगा...

पर तभी......

आह्ह्ह्ह................

आह्ह्ह्हह...............

ये आवाज़ मेरे और मेरे बाद ास्मोडियस के मुँह से निकली थी....

हुआ ये की ास्मोडियस के कंसंट्रेशन को तोड़ने के चक्कर में मेरी बल शक्ति को मुझे हल्का काम करना पड़ा जिसकी वजह से ास्मोडियस मेरे दोनों हाथों को फ़ैलाने में कामियाब रहा और जैसे hi ऐसा hua,ASMODEUS की आँखों से एक के बाद एक 3 रेड रेज़ निकले.....

ये रेड रेज़ बोहोत घातक the...mere सिवा कोई भी इन रेज़ को एक बार भी झेल नहीं सकता था.....

पर इसका मतलब ये नहीं था की मुझे इन रेज़ से कोई खतरा नहीं tha...rays के मुझपर पड़ते hi मेरा शरीर कई जगह से काट गया जिसकी वजह से मुझे असीम दर्द महसूस हुआ....

वहीँ मेरे द्वारा बनाये गए भवर ने ास्मोडियस को ना सिर्फ हर तरफ से घेर लिया tha,balki उसकी आँखों में भी कुछ मात्रा में मिटटी के कण घुस गयी...

पर ये कोई बड़ा प्रहार नहीं tha.....girne से पहले ास्मोडियस की hi तरह मेरी आँखों से भी एक के बाद एक तीन ग्रीन रेज़ nikle..ye रेज़ लार्ड ऑफ़ एंगेल्स के शक्ति के प्रतिक थे..

वो रेज़ ास्मोडियस के शरीर से ना टकराकर उसके शरीर के अंदर चले गए और ास्मोडियस के अंदर मौजूद असीम ब्लैक एनर्जी के साथ टकराने लगे जिसकी वजह से ास्मोडियस को भी काफी ज़्यादा दर्द हुआ और वो गिर गया....

मेरे शरीर पर किसी भी तरह की ब्लैक एनर्जी का प्रभाव ज़्यादा देर तक नहीं hota..thik उसी तरह ास्मोडियस के शरीर पर भी किसी वाइट एनर्जी का प्रभाव बोहोत जल्द ख़त्म हो जाता है....

इसीलिए कुछ hi देर में ास्मोडियस ठीक हो गया...

हम इस बार भी साथ hi खड़े हुए....

ास्मोडियस- बस बोहोत हुआ.......

ास्मोडियस ने अपनी आखें बंद की और अगले hi पल......

विजवते शक्तियम विनाशय भवति

मल्टीप्लय आल पावर्स तो डिस्ट्रॉय......

मंत्र के उच्चारित होते hi ास्मोडियस के शरीर के सारे अंग एक दूसरे से अलग हो gaye....aur हर अंग से तेज़ एनर्जी बीम निकली और मेरी तरफ बढ़ी.....

मई- अद्भुधहहह.........

ये शब्द मेरे मुँह से अपने आप निकल गया......

मई अपनी जगह पर हाथ जोड़े सीधा खड़ा हो गया ुर अगले hi पल.....

मेरे बॉडी से ठीक वैसे hi रेज़ निकले जैसे ास्मोडियस की बॉडी से निकल रहे the..mere रेज़ ने ास्मोडियस के रेज़ को आगे बढ़ने से रोक रखा था....

की तभी......

AAHHHHH............SHIT.....AHHHHHH......MMMMMMMM.....

हुआ ये की बिल्जेबब जो मेरे वार से बेहोश हो गया tha,usse होश आ गया tha...aur मुझे अपने फादर के इतने घातक वार को भी रोकते देखकर वो गायब होकर मेरे राइट तरफ आ गया...

मेरा सारा ध्यान ास्मोडियस की तरफ था...

तभी बिल्जेबब ने अपनी ब्लैक एनर्जी से मुझपर वार कर दिया.....

बिल्जेबब की छोड़ी गयी ब्लैक रे मेरे राइट कंधे पर लगी जिससे मुझे हल्का दर्द हुआ...

पर ये दर्द मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं थी पर इस वार की वजह से मेरा ध्यान 1 सेकंड के लिए बिल्जेबब की तरफ चला गया जिसकी वजह से ास्मोडियस के रेज़ मुझपर पड़े जिससे मुझे असहनीय दर्द हुआ.....

मेरा शरीर कई जगह से काट गया था पर मैंने अपने दर्द को ज़ब्त करते हुए...

विभाजति.....

डिवाइड......

मेरे स्पेल बोलते hi मेरे द्वारा छोड़ी गयी रेज़ ने खुदको विभाजित कर लिया.....

और ऐसा होने से मेरी रेज़ हर तरफ फैले गयीं.....

एक बीम ास्मोडियस की तरफ सीधी जाने lagi,dusri बीम बिल्जेबब की तरफ जाने लगी जिससे बिल्जेबब ने रोकने की कोशिश तोह की पर पूरी तरह कामियाब नहीं हो पाया...

कुछ रेज़ को उसने अपने पावर से रोक लिया पर कुछ रेज़ उसके पावर्स को काटते हुए उसके शरीर में जाने लगी जिससे उससे बोहोत ज़्यादा दर्द होने लगा....

पर बिल्जेबब ने अपने दर्द की परवाह ना करते हुए अपने दूसरे हाथ से मेरे ऊपर एक और ब्लैक बीम छोड़ी जो मेरे शरीर से टकराने लगी....

ठीक उसी वक़्त.....

ास्मोडियस ये समझ गया था की बिल्जेबब के छोड़े गए रेज़ से मुझे ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा इसीलिए उसने अपने रेज़ की शक्ति और स्पीड डबल कर दी....

अब ास्मोडियस के छोड़े गए रेज़ के कुछ हिस्से मेरे शरीर से टकराने लगे जिससे मुझे बोहोत दर्द होने लगा....

मई जान गया था की मई जीत तोह पाऊंगा नहीं पर हार मई सकता नहीं था इसीलिए.....

अननुगच्छेति ब्लास्ट.....

ऑब्सेर्वे विस्फोटम......

ईश्वर का नाम लेकर मैंने स्पेल उच्चरित किया और अगले hi पल.....

बूम.........

एक तेज़ धमाके के साथ सब कुछ शांत हो गया....

मेरे द्वारा छोड़े गए रेज़ से ास्मोडियस और बिल्जेबब मुश्किल से खुदको बचा पा रहे the,par मेरे बोले गए दूसरे स्पेल से वो खुदको बचा नहीं पाए...

मेरा बोले गए स्पेल से मेरे पुरे शरीर की ऊर्जा बहार निकली और ास्मोडियस और बिल्जेबब की तरफ लपकी...

इस स्पेल की ख़ास बात ये थी की मेरी ऊर्जा ने पहले मेरे दोनों दुश्मनो की वैकपॉइंटस को ऑब्सेर्वे किया...

मेरे हाथों से वाइट एनर्जी निकलकर ास्मोडियस की तरफ जाने से वैसे तोह उसकी अलग हो चुकी ज़्यादातर बॉडीपार्ट्स को कुछ ख़ास फर्क नहीं पद रहा था पर उसके पेट से लेकर सीने तक का भाग उसके अन्य भागों के मुकाबले कमज़ोर था जिससे मेरी ऊर्जा ने डिटेक्ट कर लिया...

वहीँ बिल्जेबब का मामला काफी आसान tha...wo तोह वैसे भी मेरी रेज़ के इफेक्ट्स से काफी कमज़ोर हो चूका था इसीलिए मेरी ऊर्जा तीव्र गति से आगे बढ़ी और फिर एक कारण भेदी dhamaka.uske बाद सब शांत...

पर इस धमाके से मेरा कमज़ोर हो चूका शरीर भी नहीं बच paaya....ek दर्द भरी आह के साथ mera,ASMODEUS और बिल्जेबब की बॉडीज नीचे गिरने लगी....

मेरा पूरा शरीर लहूलुहान हो चूका tha.yahi हाल ास्मोडियस और बिल्जेबब का भी था...

V...J....VIKRAM..........

मुझे गिरते देख अवंतिका और अलेसेन्द्र के मुँह से चीख निकल गयी...

क्यूंकि उनके चारो तरफ शैलद ास्मोडियस ने डाली thi,aur ास्मोडियस अब बेहोश हो चूका tha,isiliye उसकी बनायीं शील्ड भी गायब हो गयी थी....

दोनों भागते हुए मेरे पास aaye..AVANTIKA ने मेरे सर को गोद में उठा liya....mera सारा शरीर लगभग ख़त्म हो hi चूका था पर मेरे चेहरे की मुस्कान अब तक कायम थी.....

अवंतिका कुछ कह नहीं रही thji,bas चुप चाप रोये जा रही थी....

आंसू तोह अलेसेन्द्र के आंसू में भी पर वो थोड़े दूर में कड़ी मुझे देख रही थी......

तभी.............

हमारे सामने एक तेज़ रौशनी हुई और उसी रौशनी के बीच एक आकृति उभरी और धीरे धीरे उस आकृति ने रूप लेना शुरू किया और जैसे hi उसका रूप पूरा hua,hum सब की हैरत की कोई सीमा नहीं थी.....

मेरी आँखें बोझिल हो चुकी थी उसके बावजूद मई आँख फाड़े सामने उस शक्श की तरफ देख रहा था....

अलेसेन्द्र- ास्मोडियस tum.....!!!!!ye नहीं हो sakta,agar तुम ास्मोडियस हो तोह ये कौन है.....

जी हाँ doston,mere,ALESENDRA और अवंतिका के सामने इस वक़्त ास्मोडियस खड़ा था...

पर वहीँ एक ास्मोडियस हमारे सामने ज़मीं पर बेहोश भी पड़ा tha.....ajeeb गुथी.....

ास्मोडियस- ज़्यादा मत सोचो ALESENDRA,ASMODEUS की चालों को समझना तुम्हारे बस की बात नहीं थी....

कैसे हो मेरे BHAI......pehli बार मिल रहे ho,aur वो भी अपनी आखरी साँसें गिनते हुए......

मई तोह टोटल ब्लेंक मोड में जाकर ास्मोडियस की बातें सुन रहा था....

चलिए जब तक हमारा हीरो अपने शॉक से बाहर आता hai,mai आपको बताता हूँ की आखिर माज़रा क्या है???

केतक SHAKTI......ye तोह याद hi होगा aapko.....ep-54 में इसके बारे में बताया गया है....

केतक शक्ति के अंतर्गत तीन स्पेल्स आते हैं....

1ST-SAMVEGA MAAYA....jisme छोटे से छोटे स्पेल्स की शक्ति को लाख गुना तक बढ़ाया जा सकता है...

2ंद- ग्रैहम MAAYA..jisme एक बंज़र गृह के अंदर एक जीवन दायी गृह को छुपाया जाता है....

पर इन दोनों के बारे में बताया जा चूका hai...par आखरी के नहीं जिसकी वजह से ये सब हुआ है...

3रद- भ्रम MAAYA.....ek अद्भुद maaya....ek ऐसा स्पेल जिससे खुदके एक ऐसे क्लोन को बनाया जाता है जिससे खुद भी नहीं पता होता की वो एक क्लोन है...

उस क्लोन के अंदर अपने असली रूप के सारे talent,saari yaadein,in शार्ट सब कुछ होता है.....

बस वो वक़्त उससे याद नहीं रहता जब उससे बनाया गया tha.....aur ये स्पेल को अब तक ब्रम्हांड में ास्मोडियस को छोड़कर और कोई नहीं बोल सकता....

आपको याद होगा की बिल्जेबब मिरर वर्ल्ड में अग्रसेन को कैद करने के बाद जैसे hi वापस जाने को हुआ तोह उससे कहीं खींच लिया गया था...

उससे असली ास्मोडियस ने क्रॉस वर्ल्ड में अपने पास बुलाया था और अपनी सच्चाई और माया के बारे में बताया था.....

ास्मोडियस- अब तोह चौंकना छोडो BHAI...tumse मुझे ज़्यादा उम्मीदें thi....waise मई तोह तुमसे ढेर साड़ी बातें करना चाहता था पर तुमने अपने भतीजे की इतनी बुरी हालत कर दी है की अगर मैंने इससे जल्दी से ठीक नहीं किया तोह ये मर जाएगा...

ये बोलकर ास्मोडियस ने अपना हाथ बिल्जेबब के ऊपर ghumaya,BEELZEBUB गायब हो गया...

ास्मोडियस- जाने से पहले एक अधूरे काम निपटा लूँ.....

और तभी..........

AAHHHH...AHHHHH....AHHHHHH.......

एक साथ दो चीज़ें हुई....

ास्मोडियस ने एक हाथ से अवंतिका को मुझसे दूर किया और फिर अगले hi पल उसने मेरे ऊपर लगातार 5 ब्लैक रेज़ छोड़े.....

उन रेज़ का इम्पैक्ट इतना ज़्यादा था की दर्द की ाद्यादिकता के चलते मई चिल्ला भी नहीं पाया और अगले hi पल मेरी आँखें बंद हो गयीं....

V.J.................

मेरा नाम चिल्लाते हुए अवंतिका मुझसे चिपक गयी.....

अलेसेन्द्र- तुम...

ास्मोडियस- shhhhh............jitna बोलना tha,tum बोल चुकी ho..ab और नहीं.....

ASMODEUS-ISHWAR में विश्वास रखती हो अवंतिका???????

(प्रकाप लाइन्स )

अवंतिका जिससे अभी तक एक खरोच तक नहीं आयी thi,par उसके बाद भी उसकी ऐसी हालत ऐसी हो गयी थी जैसे अभी उसके प्राण निकल jaayenge,wo ास्मोडियस की आवाज़ सुनकर जैसे कोई सपने से जाएगी......

उसकी आँखों में अभी भी ास्मोडियस के रूप और ताकत का दर देखा जा सकता tha....logon के शरीर कांपते hain,par ास्मोडियस की तरफ देखते हुए अलेक्सांद्र की आँखें तक कांप रही थी.......

ास्मोडियस- मैंने पूछा क्या तुम ईश्वर में विश्वास राखी हो??????

अलेक्सांद्र- H...A.......A.......A........N........

एक shabd,bas एक शब्द को मुँह से बहार निकलने के लिए अवंतिका को अपने पुरे sharir,yahan तक की अपनी आत्मा तक की शक्ति का इस्तेमाल करना पद गया........

वहीँ अवंतिका के जवाब को सुनकर ास्मोडियस के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी..........

ास्मोडियस- hmm.......toh फिर ठीक hai........mai तुम्हे तब तक नहीं मार सकता जब तक ये ज़िंदा है.........

वैसे तोह इसकी बस चाँद सासें hi बची है पर मुझे अछि तरह पता है की तुम इसकी जान बचने की कोशिश ज़रूर करोगी........

पर लार्ड ऑफ़ एंगेल्स की जान बचने के काम में कोई रोड़ा न ho,toh मज़ा नहीं आएगा.........

इसीलिए...................................

AAAHHHHHHHHHH.........................

AAAHHHHHHHHHH.........................

ये चीखें अवंतिका के मुँह से निकल रही थी........

अवंतिका को अपने पुरे शरीर में ऐसा दर्द महसूस हो रहा था जैसे उससे एक साथ कई बिच्छुओं ने डांक मार दिया हो......

और अरे................ ये क्या????????!!!!!!!!!!

जैसे जैसे अवंतिका के मुँह से चीख निकल रही thi,uske शरीर का रंग भी बदलकर पीला पड़ते जा रहा था.......

ास्मोडियस- तुम्हारे शरीर में मैंने सकरुण विष छोड़ा है AVANTIKA.........ek ऐसा विष जो बोहोत धीरे धीरे असर करता है......

पर ये विष शरीर में प्रवेश करते hi शरीर में एक ऐसा दर्द पैदा करती hai,jisse मनुष्य सहने से ाचा मरना पसंद करता है.......

अब तुम्हे विक्रम को बचने के लिए इसी दर्द को सहते हुए कोई युक्ति सोचनी पड़ेगी........

और haan,is विष को तुम्हारे शरीर को परलयज़े करने में 1 पहर (12 हॉर्स ) का समय lagega....itna hi वक़्त है तुम्हारे पास इससे बचने के लिए........

अपने ईश्वर को याद करो अवंतिका, सुना है इससे दर्द सेहेन करने की शक्ति मिलती hai........hahahahahha....

ये बोलकर ास्मोडियस गायब हो गया और पीछे रह गए 3 लोग.....

एक पथराई आखों से ये अनर्थ होते हुए देख रही thi.dusra ऐसे पड़ा हुआ था जैसे अभी मर जाएगा और तीसरी ऐसे तड़प रही थी जैसे इस तड़प से बचने के लिए अभी के अभी मरना चाहती हो.....

अलेसेन्द्र दौड़ कर अवंतिका के पास पहुंची......

अलेसेन्द्र- हिम्मत रखो AVANTIKA....naahi तुम्हे कुछ होगा और नाही विक्रम ko..upar वाले पर भरोसा रखो..

वो अपने बेटे को और उसकी शक्ति को इस हाल में कभी नहीं छोड़ेगा....

नहीं नहीं nahi....AVANTIKA...ankhen kholo...behosh मत hona...agar तुम बेहोश हुई तोह फिर कभी नहीं उठ पाओगी.....

हुआ ये की अवंतिका कजे उपार्जेहेर का नशा हावी होने लगा था जिसकी वजह से वो बेहोश होने लगी थी....

अलेसेन्द्र ने बोहोत कोशिश की पर अवंतिका बेहोश हो hi गयी.....

अलेसेन्द्र- हे parmeshwar...kya आज अच्छाई पर बुराई की जीत हो jaayegi...agar तेरा खुद का बच्चा भी हार जाएगा तोह फिर कौन उस दुष्ट पापी को हराएगा.....

हे prabhu..meri गुहार सुन और अपने बच्चे और उसकी शक्ति की हिफाज़त कर....

अभी अलेसेन्द्र और भी बोहोत कुछ कहती पर तभी.........

अलेसेन्द्र के पीछे एक तेज़ रौशनी चमकी और जब अलेसेन्द्र ने पीछे पलट कर देखा तोह इस दुःख भरे पल में भी उसके अंदर ख़ुशी की लहार दौड़ गयी.....

क्यूंकि उसके पीछे जो रौशनी हुई थी वो और किसी की नहीं बल्कि फाउंटेन ऑफ़ लाइट की थी.....

और अगले hi पल...........

फाउंटेन से तीन रे लाइन्स निकली और उन लाइन्स ने मुझे अलेसेन्द्र और अवंतिका को अपने अंदर खींच लिया.....

जैसे hi हम तीनो फाउंटेन के अंदर pahunche,fountain के अंदर की रौशनी ने खुद को कुछ काम कर लिया ताकि वो रौशनी आखों में चुभे ना....

और बाहरी तौर पर फाउंटेन एक बार फिरसे गायब हो गयी....

अभी अलेसेन्द्र कुछ सोचती की तभी....

ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह................

इसी आवाज़ के साथ अवंतिका को होश आ गया....

खुदको एक नयी जगह में देखकर उससे भी शॉक लगा पर तभी....

AAHHHH....AHHHHHH....

अवंतिका को होश ज़रूर आ गया था पर विष का प्रभाव तोह उसके अंदर अभी भी पहले जैसा hi tha..wo दर्द से तड़प उठी..

उससे इतना दर्द हो रहा था की वो कुछ सोच hi नहीं पा रही थी....

अलेसेन्द्र भी इस बात को बखूबी जानती थी इसीलिए वो भी बेबस निगाहों से अवंतिका और मेरे तरफ देखे जा रही थी की तभी.....

HUKKKKK....HUK...............MMMMMMMMM.........HUKKKKK.........

V.JJJJ...........

पहली आवाज़ मेरे मुँह से निकली thi...sirf आवाज़ hi नहीं निकली थी बल्कि मेरे मुँह से इस आवाज़ के साथ खून भी बाहर निकला था....

और यही देखकर अवंतिका की भी चीख निकल गयी thi....wo अपनी पूरी ताकत लगा कर खड़े होने की कोशिश कर hi रही थी की.....

कुछ ऐसा हुआ जो उन दोनों में से किसी ने भी नहीं सोचा था.......

मेरे सीने के बीच में एक तेज़ प्रकाश उत्पन्न हुआ और उसी प्रकाश के बीच मेरी किताब बाहर निकली....

और उसके बाद जो hua,usse एक तरफ अलेसेन्द्र देखकर खो सी गयी वहीँ अवंतिका की आँखें भर आयीं पर इस बार उनमे उदासी के साथ साथ ख़ुशी और उत्तेजना भी छुपी हुई थी....

हुआ ये की मेरे बुक के बाहर आते hi वो खुल गयी और उसके बीच से ऊपर हवा में hi कुछ chalchitr,kuch दृश्य दिखने लगे....

इन दृश्यों में मेरी ज़िन्दगी की हर ख़ास चीज़ें दिख रही thi.....AVANTIKA के पितः से पहली बार milna,mere सपने जिनमे उसका aana,bhavishyawani की वही मेरी शक्ति बनेगी और इसके साथ और भी बोहोत कुछ....

और ये सब देखकर अवंतिका की रुलाई फूट gayi.....uski आँखें एक बार फिरसे बंद हो गयी पर तभी.....

मेरे बुक से दोबारा एक रे निकली और अवंतिका के बंद आँखों के ऊपर पड़ी और अगले hi पल.....

अवंतिका के आँखों के सामने उसका सपना आ गया जिसमे उसके सपनो के राजकुमार की पीठ उसकी तरफ थी....

पर अगले hi पल वो पलटा और उसका चेहरा देखकर अवंतिका की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा क्यूंकि वो लड़का मई hi था.....

अवंतिका ने दोबारा अपनी आँखें kholi...dard तोह उसके पुरे शरीर में पहले सा hi था पर इश्क़ के ज़ख्म के आगे कोई और ज़हर क्या चीज़ है....

मेरे बुक के ऊपर अभी भी कुछ नए दृश्य दिख रहे थे जिनमे से एक था की कैसे मैंने दिग्विजय को मारा था....

ये देखकर अवंतिका इतने दर्द में भी मुस्कुरा उठी पर तभी.........

उसकी नज़र एक दृश्य पर पड़ी जो बाकी दृश्यों से ज़्यादा बड़ा रूप लेकर दिख रहा था और उस दृश्य पर नज़र जाते hi अवंतिका का चेहरा खिल उठा....

अवंतिका- ALESENDRA,mera बैग कहाँ hai...jab मई यहाँ आयी थी तोह वो मेरे साथ था....

अभी अलेसेन्द्र कुछ कहती की उससे पहले अवंतिका का बैग जोकि बाहर hi पड़ा हुआ tha,wo हवा में तैरता हुआ अवंतिका के पास पहुँच गया....

अवंतिका ने कांपते हाथों से अपना बैग खोला और उसके अंदर से एक चीज़ बाहर निकली....

अलेसेन्द्र- ये क्या है अवंतिका????

अवंतिका- हम दोनों का ilaaj.....SWETH फूल......

जी हाँ doston,us दृश्य में स्वेत फूल hi दिख रहा था और स्वेत फूल hi इलाज kyun,thodi देर में आपको पता चल जाएगा...

अवंतिका ने काम्पटी हाथों से hi जितना हो सका उतना स्वतः फूल को मसला और उसके ऐसा करते hi फूल में से रास रिसने लगा...

अवंतिका ने झट से पहले रास की कुछ बुँदे मेरे होंठों पर टपका दी और फिर कुछ बुँदे उसने खुद पि ली....

मेरे होंठों के ऊपर जो रास की बुँदे गिरी thi,wo धीरे धीरे मेरे मुँह के अंदर जाने लगी और जब वो पूरी अंदर चली गयी तोह.........

एक साथ दो चीज़ें हुईं....

1सत- अवंतिका के अंदर का ज़हर स्वेत फूल के रास के अंदर जाते hi ख़त्म हो गया...

2ंद- मेरी बॉडी एक बार फिरसे चमकने लगी और जब मई नार्मल हुआ तोह मेरे सारे ghaav,khoon सब कुछ ठीक हो चूका था...

अब बस ऐसा लग रहा था जैसे मई बस सोया हुआ हूँ....

वहीँ अवंतिका के ठीक होते hi अलेसेन्द्र तुरंत उसके पास गयी और दोनों गले लग गयी...

अलेसेन्द्र- तुम दोनों ठीक हो गए AVANTIKA..dekho विक्रम के भी सारे chot,uska निकला सारा खून अब गायब है....

पर ये हुआ kaise....aur वो फूल आखिर है क्या????

अवंतिका ने एक बार मेरी तरफ देखा फिर अलेसेन्द्र को वही बातें बताई जो मैंने उससे यहाँ आने से पहले बताई thi....wo अपने तरीके से बता रही है मई आपको अपने तरीके से बताता हूँ.

सेठ PHOOL..WHITE FLOWER.....isse बड़े से बड़ा chot,zakhm ठीक हो सकता hai..marta हुआ आदमी भी मौत के मुँह से वापस आ सकता है पर मई तोह कोई आम बाँदा हूँ नहीं और नाही अवंतिका क्यूंकि वो मेरी शक्ति है...

फिर ये फूल हम दोनों को कैसे बचा सकता hai....??ye जानने के लिए आपको ये जानना होगा की राखत फूल की hi तरह स्वेत फूल किस्से बना है....

जब गॉड ने ास्मोडियस यानी मेरे भाई को खुद से दूर किया तब ास्मोडियस ने खुदको डेविल्स लार्ड बनाने का सोचा....

उसने पाप की एक नयी मिस्साल बनाने की कसम khaayi....par जैसे hi उसकी सोच ने हक़ीक़त का रूप liya,toh उसकी सारे हीवेनली पावर उसके बॉडी से निकल गए.....

पर गॉड के पास जाने के बजाये वो पावर एअर्थ की तरफ चल पड़े और उन्ही पावर्स ने एअर्थ पहुंचकर एक नया रूप liya....SWETH फूल का रूप....

और क्यूंकि मई GOD'S सोन hun,toh एक GOD'S सोन की hi पावर मुझे और मेरी शक्ति को ठीक कर सकती थी और वो GOD'S सोन ना चाहते हुए भी मेरा भाई ास्मोडियस है....

अवंतिका की बात सुनकर अलेसेन्द्र का मुँह खुला का खुला रह गया....

अवंतिका- कितना अजीब है naa.jis भाई ने विक्रम को मौत के मुँह तक पहुँचाया tha,ussi की शक्ति ने उससे मौत के मुँह से वापस भी खींच लिया.....

अलेसेन्द्र- अद्भुद........

अवंतिका लगातार मेरी hi तरफ देखे जा रही थी पर मैंने अभी तक कोई मूवमेंट नहीं की थी जिसकी वजह से उसके मन में एक बार फिरसे दर बैठने लगा था...

अवंतिका- V.J.........please उठ जाओ naa..tumhe मेरी आखों में आंसू बर्दाश्त नहीं होते naa,toh प्लीज उठ जाओ वर्ण मई रो दूंगी....

ये बोलते बोलते अवंतिका के आँखों से एक बार फिरसे आंसू निकल गए....

अलेसेन्द्र को भी अब मेरी फ़िक्र दोबारा होने लगी थी क्यूंकि अब तक तोह मुझे उठ जाना चाहिए था...

दोनों में से कोई कुछ फिरसे कहता की तभी.....

फाउंटेन ऑफ़ लाइट की रौशनी एक बार फिरसे तेज़ हो गयी और उस रौशनी के बीच कुछ और रोशनियां चमकने लगी....

कुछ देर बाद फाउंटेन की रौशनी काम हो gayi...roshni की वजह से अवंतिका और अलेसेन्द्र ने अपनी आखें बंद कर ली थी पर जैसे hi उन्होंने आँखें kholi,dono फिरसे चौंक गयी.......

और वो इसीलिए क्यूंकि मेरे बुक के ऊपर रौशनी से बने 6 गोल कंचे हवा में तैर रहे थे....

अवंतिका और अलेसेन्द्र उन कंचो को ध्यान से देखने लगीं....

मेरे बुक के जो फर्स्ट 2 पेजेज the,jinme कुल 3 गोल खांचे बने the,unme उन 6 लाइट कंचो में से 3 आकर फिट हो गए....

और ऐसा होते hi मेरी बुक बंद होकर मेरे अंदर समां गयी.....

वहीँ बचे हुए 3 लाइट कंचो में से 2 अवंतिका के सामने आकर रूक गए और 1 अलेक्सांद्र के सामने आकर ठहर गया....

1सत KANCHA-kangan नहीं हूँ,

फिर भी कहांकूंगी

सही समय आने पर

तेरी हथेली पर चमकूँगी

ये बोलकर वो लाइट कांचा अवंतिका के अंदर समां गया....

और ऐसी hi लाइन बोलकर 2ंद कांचा अलेसेन्द्र के अंदर समां गया...

अलेसेन्द्र और अवंतिका ने एक दूसरे की तरफ देखा और अगले hi पल एक साथ दोनों के मुँह से निकला

दोनों- भविष्यवाणी......

जी हाँ doston,ye भविष्वाणी थी..2 हो चुकी thi,meri भविष्यवाणियां मेरी किताब में सुरक्षित थी और एक का अभी होना बाकी था जोकि अवंतिका के सामने हवा में रुकी हुई थी....

अवंतिका कुछ देर तक उस कंचे को देखती रही और फिर जैसे hi उसने उस कंचे को छुआ

उस कंचे से तेज़ रौशनी निकलने लगी और अगले hi पल......

भविष्यवाणी-

खेले तुम दोनों ने

बोहोत से खेल

अब तुम दोनों के साथ

भी एक खेल होगा.....

ज़िन्दगी तोह बच गयी

स्वेत फूल se,par

आँख तभी khulegi,jab

आत्मिक शक्ति का मेल होगा..

जैसे hi भविष्यवाणी ख़त्म hui,KANCHA गायब हो गया....

अवंतिका कुछ देर भविष्वाणी में कहे गए शब्दों के बारे में सोचती रही की पर उससे कुछ सूझ hi नहीं रहा था की तभी अचानक.....

उससे मेरे अपने घर में कहे गए आखरी शब्द याद आये की दिमाग से नहीं दिल से सोचना...

और अगले hi पल अवंतिका की आँखें बंद हो चुकी thi...usse उसके दिल की गहराईयों में बस मेरा hi चेहरा नज़र आ रहा था...

मेरी तस्वीरों को अवंतिका महसूस कर hi रही थी की अचानक उससे स्विट्ज़रलैंड में हम दोनों के बीच हुई शायरी में बात वाली सन दिखने लगी और जैसे hi उससे मेरी कही गयी SHAYRI/PAHELI सुनाई दी....

अवंतिका की आँखें खुल gayi....ek सेकंड बस एक सेकंड के लिए उसके मन में शर्म जाएगी पर उसी पल में उसके अंदर से एक आवाज़ उठी की....

अभी नहीं तोह कभी नहीं......

इस आवाज़ के अवंतिका के अंदर गूंजते hi उसकी शर्म ख़त्म हो gayi..aur अगले hi पल अवंतिका का चेहरा मेरे चेहरे की तरफ झुकता चला गया......

अब इस लम्हे के ऊपर क्या लिखूं.....

आखें band,andhera कमरा

नजाने रोशन कब हो गया...

तेरे लबों ने जो छुआ मेरे लबो को,

एक hi पल में तू मेरा रब हो गया...

अवंतिका के होंठों ने मेरे होंठों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था....

ना कोई hawas,naa कोई प्यास

ऐसा था मेरे प्यार का एहसास....

जैसे hi अवंतिका के होंठ मेरे होंठों से jude,meri बॉडी को एक झटका laga....aisa लग रहा था जैसे अवंतिका अपने होंठों के ज़रिये मेरे अंदर जान फूँक रही हो...

कुछ पलों के इस मिलान के बाद अवंतिका ने धीरे से अपना सर पीछे किया और जैसे hi उसकी नज़र मेरे चेहरे पर gayi,uski ख़ुशी का ठिकाना ना रहा...

मेरी आँखें खुल गयी थी और मई एक तक उसकी तरफ देख रहा था....

अवंतिका ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों गालों को थामा और.......

अवंतिका- ी लव ु.......

मई- ी लव ु तू.......

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V..J......
 
अब तक आपने पढ़ा की अवंतिका न सिर्फ स्वेत फूल के ज़रिये विक्रम की जान बचती HAI,BALKI पहेली को समजह विक्रम के होंठों को चुम कर उसकी चेतना भी लौटती है

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट-88

PLANET-ISLA

PLACE-INSIDE फाउंटेन

अब चलें BHI.....EK दूसरे की आँखों में खोने के लिए आप दोनों के पास पूरी उम्र पड़ी है....

मई- वक़्त का क्या भरोसा,

नजाने कब पलट जाए...

ख्वाहिश की आरज़ू बस ये है

की वक़्त इसी पल में सिमट जाए...

अवंतिका- जिस रास्ते में दर्द न हो,

वो सफर कैसा????

वक़्त पालते पर तू साथ हो,

दो दर कैसा.....????

अलेसेन्द्र हम दोनों की बात सुनकर मुस्कुरा di....par उसकी मुस्कराहट से उसके दिल में पनपते सवाल और उस सवाल से बढ़ती बेचैनी ख़त्म नहीं हुई थी....????

अब ऐसा कौन सा सवाल है जो अलेसेन्द्र को परेशां कर रहा hai,ye आपको अगले अपडेट में पता चल जाएगा???

मेरी आँखें खुलने और हमारे इज़हारे इश्क़ के बाद से hi मई और अवंतिका एक दूसरे की आँखों में लगातार देखे जा रहे थे...

वैसे हम दोनों का एक दूसरे की आँखों में झांके का सिलसिला नया ना होकर भी नया था....

और वो इसीलिए क्यूंकि आज से पहले हम दोनों ने जितने बार भी एक दूसरे की आँखों में झाँका tha,us वक़्त हम दोनों की hi आँखों में दो अलग अलग फीलिंग्स होती थी...

जहाँ मेरी आखों में एक बेचैनी रहती थी वहीँ अवंतिका के आखों में ढेर सारे सवाल....

पर आज हम दोनों के hi आँखों में एक सुकून tha..aisa सुकून जिसकी ख्वाहिश हम दोनों को नजाने कब से थी....

कुछ देर तक अलेसेन्द्र ने भी हम दोनों से कुछ नहीं कहा पर जब उससे एहसास हुआ की हमे यहाँ आये काफी वक़्त गुज़र चूका है तब उसने अपनी बात कही जिसके जवाब में इश्क़ से भरे दो दिलों से अपने अपने ख़यालात निकले....

पर मुझे भी इस बात का एहसास था की वाकई लार्ड क्रूसेडर, किंग सोलोमन, उनकी वाइफ, डिफेंडर और मेरे दोस्तों को भी अब हमारी चिंता सत्ता रही होगी और प्रजा भी मुझसे मिलने के लिए बोहोत अधीर हो रही होगी इसीलिए.......

मई- बाकी की बातें बाद में करें.....????

ये बात मैंने अवंतिका से कही थी..

अलेसेन्द्र- बाकी की baatein???aap दोनों ने बात कब ki...tab से तोह बस एक दूसरे की आँखों में देखे जा रहे हो...???

मई- आँखों की बातों से ख़ूबसूरत और दिल सुकून मरहम कुछ नहीं होता अलेसेन्द्र......

मेरी बात सुनकर अलेसेन्द्र और मेरी जान मुस्कुरा दी....

मई- चले ाव......

अलेसेन्द्र- अरे waah..abhi अभी इज़हार हुआ और तुरंत नया नाम भी मिल गया.....

जहाँ अलेसेन्द्र ने हम दोनों को छेड़ा वहीँ अवंतिका के आँखों में मेरे मुँह से ाव सुनकर ख़ुशी और सवाल की मिक्सचर भरी स्माइल आ गयी...

अवंतिका- चलो....

हम तीनो आगे बढे hi थे अचानक मुझे कुछ ख्याल आया या फिर ये कहूं की किसीने मुझे कुछ ख्याल करवाया...

और ये किसीने और कोई नहीं फाउंटेन ऑफ़ लाइट की रौशनी hi थी....

मई- एक सेकंड......

दोनों hi मुझे सवाल भरी नज़रों से देखने लगे...

मई उन दोनों को देखकर मुस्कुराया और अगले hi पल.......

मेरी आँखें बंद हो चुकी थी....

ऊर्जा विटनी करोति......

एनर्जी स्प्रेड आउट......

मेरे स्पेल बोलते hi मेरी बॉडी से तेज़ रौशनी के बीच वाइट रेज़ निकले और फाउंटेन के अंदर जो लाइट फैली हुई थी उनमे सामने लगे...

इसी बीच......

मेरी रेज़ से फाउंटेन की लाइट से कनेक्ट होते hi मैंने कुछ महसूस किया...

जो मैंने महसूस किया वो और कुछ नहीं ********* था...

और जैसे hi मुझे ये ज्ञात हुआ मैंने उस ********की मंज़िल की तरफ झाँका और........

ना सिर्फ मुझे उस चीज़ की मंज़िल दिखी बल्कि उस मंज़िल की हक़ीक़त भी दिखने लगी जिससे देखकर मेरे दिल में एक दर्द सा उठा....

khair,mujhe इस बात की संतुष्टि और ख़ुशी भी थी की फाउंटेन में मेरे आने का मकसद पूरा हुआ...

मेरे शरीर से वाइट रेज़ कुछ देर तक निकलते रहे और फिर जब मेरा काम ख़त्म हुआ तोह मेरी बॉडी से रौशनी निकालनी बंद हो गयी.....

जब मैंने अपनी ाख्ने खोली तोह दोनों को मेरी तरफ घूरता पाया....

मई- अब नाही ास्मोडियस फाउंटेन की शक्ति को पास सकता hai,aur नाही इससे अपवित्र कर सकता है.....

मेरी बात सुनकर अलेसेन्द्र बोहोत खुश हो गयी....

मई- अब चलो.....

हम तीनो ख़ुशी ख़ुशी बहार आ gaye....humare बाहर आते hi फाउंटेन जिसने बाहर से अब भी खुदको अदृश्य hi रखा tha,wo फिरसे उज्वलित हो गयी....

अब फाउंटेन को कोई खतरा नहीं tha...jahan फाउंटेन को अपने असली रूप में देखकर अलेसेन्द्र ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी वहीँ मेरे चेहरे पर भी संतुष्टि भरी मुस्कान थी.....

मई- ALESENDRA,yahan जो कुछ भी hua,uske बारे में किसीको पता नहीं लग्न चाहिए....

अलेसेन्द्र- जी...

मैंने अवंतिका का हाथ अभी भी थामा हुआ tha...kuch देर तक फाउंटेन की रौशनी को जी भर कर देखने के बाद हम तीनो वापसी के लिए गायब हो गए......

प्लेस- KING'S पैलेस....

किंग सोलोमन- काफी देर हो गयी विक्रम को गए हुए....

अश्ली- haan,mujhe तोह घबराहट हो रही hai.ALESENDRA भी उनके साथ गयी हुई है...

डिफेंडर- QUEEN,aap भूल रही हैं की विक्रम कौन hain....aur उनके रहते प्रिंसेस पर कोई आंच नहीं आ सकती....

लार्ड क्रूसेडर- bilkul.....bharosa रखिये...

तभी.......

सभा के बीच एक तेज़ रौशनी हुई और उस रौशनी के बीच हम तीनो प्रकट हुए....

जहाँ मुझे सामने देखकर सभा में मौजूद सभी खड़े हो गए वहीँ क्वीन अश्ली ने अपनी बेटी को सकुशल देख राहत की सांस ली....

मई- माफ़ kijiyega...hume थोड़ी देर हो गयी...

किंग सोलोमन- कृपया आप हमसे माफ़ी न maange...agar आप हमे युगों तक भी इंतज़ार करने के लिए कहते तोह भी हम ख़ुशी ख़ुशी कर लेते...

मई- पर क्वीन को तोह घबराहट हो रही थी.....

मेरी बात सुनकर अश्ली का सर नीचे हो गया...

किंग सोलोमन- इनकी तरफ से हम आपसे माफ़ी मांगते hai.kripya इन्हे माफ़ कर दें विक्रम......

ये बोलकर किंग सोलोमन अपने हाथ जोड़ने hi वाले थे की...

मई- आपको हाथ जोड़ने की ज़रुरत नहीं है किंग SOLOMON....mai समझ सकता हूँ की घबराहट क्वीन अश्ली को नहीं बल्कि एक माँ को हो रही थी.....

और माँ के तर्क पर कैसी नाराज़गी....

डिफेंडर- LORD,mujhe एक असीमित ऊर्जा का आभास हो रहा hai.kya??????

मई- पहले इस्ला की प्रजा से मिल len..uske बाद आपके सवाल का जवाब आपको मिल जाएगा....

किंग सोलोमन- आपको हमारी प्रजा याद रही यही हमारे लिए बोहोत बड़ी बात है...

पूरी प्रजा महल के बाहर hi आपका इंतज़ार कर रही है....

मई- चलिए फिर...

हम सब महल के बाहर की तरफ निकल गए....

महल के बाहर और कुछ दिखाई नहीं दे रहा tha...dikhayi दे रहा था तोह बस दूर दूर तक फैली इस्ला और वारियर्स वर्ल्ड की प्रजा...

मेरे बाहर आते hi सामने कड़ी प्रजा की नज़र मुझपे पढ़ गयी जिससे देखकर सभी मेरे नाम के नारे लगाने लगे..

और जैसे जैसे उनकी आवाज़ पीछे की तरफ बढ़ती gayi,samast प्रजा को मेरे आने का अनुमान हो गया और पूरा इस्ला मेरे नाम से गूंज उठा...

पर मुझे सिर्फ सामने खड़े लोग hi देख पा रहे the,piche के नहीं पर उनके दिलों में भी मुझे देखने की प्रबल इच्छा थी जिससे मई अनदेखा नहीं कर सकता था.....

इसीलिए.......

मई किंग सोलोमन & पार्टी से थोड़ा आगे खाली जगह पर चला गया.....

मई- ाव........

मैंने अवंतिका को पुकारा और अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया....

अवंतिका थोड़ा jhijhaki,par धीरे धीरे वो मेरी तरफ बढ़ी और उसने मेरा हाथ थाम लिया.....

और अगले hi पल........

अवंतिका- अरे ये...?????

मई- पीछे की प्रजा मुझे देख नहीं पा रही है.....

इसके बाद अवंतिका ने कुछ नहीं कहा और सामने का नज़ारा देखने लगी....

वहीँ जो हो रहा था उससे देखकर साड़ी प्रजा शॉकेड भी थी और बेहद खुश भी....

तोह हो ये रहा था की अवंतिका का हाथ थामने के बाद हमारी हाइट बढ़ने लगी और देखते hi देखते हम दोनों 100 फ़ीट के हो चुके थे....

अब पीछे की प्रजा भी मुझे देख पा रही थी और इसी वजह से मेरे नाम की आवाज़ जो हर तरफ गूंज रही thi,uska वॉल्यूम और बढ़ गया....

मई- जितने खुश आप सब मुझे देखकर hain,utna hi खुश मई भी हूँ आप सब के बीच आकर....

मई आप सभी का इनसे भेट करना चाहता हूँ क्यूंकि अगर मई ऐसा नहीं करता तोह आप मेरे आधे रूप को hi देख पाते...

ये हैं AVANTIKA,meri शक्ति..........

मैंने अवंतिका का हाथ ऊपर कर अपनी बात कही....

मेरी बात सुनकर प्रजा अवंतिका के नाम की जयजयकार करने लगी पर अवंतिका ये सब देख और सुन थोड़ी नर्वस हो गयी....

मैंने अपना हाथ ऊपर कर सबको शांत रहने का इशारा किया....

MAI-ek और बात जिससे बताते हुए मुझे बेहद ख़ुशी हो रही है और वो ये की इस्ला की सबसे अमूल्य धरोहर जो अब वारियर्स वर्ल्ड की भी hai,"FOUNTAIN ऑफ़ लाइट" अब पुनः लौट चुकी है और अब वो कभी विलुप्त नहीं होगी.....

मेरी बात सुनकर पूरी प्रजा और मेरे पीछे खड़े किंग सोलोमन & पार्टी ख़ुशी से झूम उठे...

डिफेंडर की भी शंका दूर हो gayi...unhe पता चल गया की जिस ऊर्जा को वो महसूस कर रहे हैं वो फाउंटेन की hi है....

MAI-ab हमे इजाज़त दें.....

ये बोलकर मई और अवंतिका अपने नार्मल हैघट में वापस आ गए....

अवंतिका- ये सब तुमसे मिलना चाहते the..fir मुझे क्यों?????

मई- मई और तुम अब रहे hi nahi,ab बस हम बचे hain....isiliye hi तोह मैंने तुम्हे ाव नाम से पुकारा....

अवंतिका- matlab??yahi तोह मई तुम्हे मुझे इस नाम दे पुकारने पर भी पूछना चाहती thi..AV तोह अवंतिका को शार्ट करके बना है ना???

मई- naa....AV मुझे और तुम्हे हम बनाने के लिए मैंने कहा है...

ा से अवंतिका मतलब तुम

व् से विक्रम मतलब मई

और ाव मतलब हम......

प्लेनेट- मांसलिकेल

प्लेस- ास्मोडियस पैलेस....

भुविका- इससे क्या hua????itna khun????par ये ठीक क्यों नहीं हो रहा????

जैसे hi ास्मोडियस अपने पुत्र बिल्जेबब को या ये कहूं उसके आधे मरे हुए शरीर को वापस लेकर अपने महल pahuncha,toh भुविका बिल्जेबब की हालत को देखकर शॉकेड हो गयी....

ास्मोडियस- व्याकुलता अधीरता का दूसरा नाम होता है BHUVIKA.....aur अधीरता सिर्फ स्वयं को उज्वलित और शक्तिशाली बनाने के लिए दिखानी chahiye,betuke सवाल पूछने के लिए नहीं....

भुविका ास्मोडियस की बात सुनकर चुप हो गयी....

ास्मोडियस- बिल्जेबब की हालत उन दो कारणों में से एक की वजह से हुई hai,jiski वजह से मैंने तुम्हे तुम्हारी शक्तियों तक पहुँचने से रोका था...

वो शक्तियों बिल्जेबब की हैं और अगर तुम उन शक्तियों को पा लेती तोह तुम बिल्जेबब से जुड़ जाती और अगर ऐसा हो जाता तोह जो हालत बिल्जेबब की hai,wahi तुम्हारी भी हो जाती....

भुविका ध्यान से ास्मोडियस की बातों को सुन रही थी...

ASMODEUS-aur एक baat,jaisa की मैंने बताया की जिन शक्तियों को तुम पाना चाहती ho,wo बिल्जेबब की hain,fir भी बिल्जेबब विक्रम के सामने ज़्यादा देर खड़ा नहीं हो पाया और वो भी तब जब विक्रम ने बिल्जेबब के ऊपर अपनी पूरी शक्तियों से प्रहार तक नहीं किया था....

बिल्जेबब की ये हालत तुम्हारे लिए सीख है की चाहे जो भी हो jaaye,tum विक्रम से सीधे नहीं तकराओगी.....

शक्तु मिलने जाने के पश्चात् जब भी तुम्हे अपने महा शक्तिशाली होने की ग़लतफहमी होने lage,toh बिल्जेबब की ये हालत याद कर लेना.....

भुविका- फिर मेरा बदला कैसे पूरा होगा...!!!!

ास्मोडियस- मुर्ख ladki.....meri बातों को भूलने की गलती कभी मत करना....

ास्मोडियस के TARK,SATYA से भी ज़्यादा सच्चे होते हैं....

तुम बदला logi,par उसमे विक्रम मरेगा nahi,par haan,uski ज़िन्दगी ज़रूर मर जायेगी.....

भुविका को ास्मोडियस की बात तोह समझ नहीं aayi,par वो ये जान गयी थी की ास्मोडियस के प्लान्स कभी फ़ैल नहीं होते....

ास्मोडियस ने अपने बेटे के शरीर को जो की उससे कुछ दूर हवा में तैर रहा tha,usse अपने पास आने का इशारा किया...

बिल्जेबब के शरीर के अपने पास आते hi ास्मोडियस ने अपना हाथ बिल्जेबब के सीने के ऊपर रख दिया और......

उपजंयति सार्धं आत्मन विबजूति

हील विथ माय पावर

स्पेल बोलते hi ास्मोडियस के शरीर से एक काली ऊर्जा निकली और उसके सामने हवा में तैरते उसके बेटे के शरीर में सामने लगी...

कुछ देर तक ये क्रिया चलती रही फिर ास्मोडियस के शरीर से ऊर्जा निकालनी बंद हो गयी....

बिल्जेबब के सारे ज़ख्म ठीक हो चुके the....uske शरीर पर नए काले वस्त्र भी आ चुके थे....

पर इसके बाद कुछ नहीं hua...BEELZEBUB का शरीर अभी भी हवा में तैरता हुआ पड़ा था....

वहीँ भुविका को लगा की ास्मोडियस के स्पेल बोलने के बाद बिल्जेबब तुरंत उठ जाएगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ...

इसका कारण जानने के लिए भुविका ास्मोडियस से कुछ पूछने hi वाली थी की.....

हाआआअह्ह्हआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह........

बिल्जेबब एक झटके में उठ gaya...uske उठते hi उसका शरीर ज़मीं पर आ गया...

बिल्जेबब को उठता देख भुविका ने संतुष्टि भरी ाँस ली hi थी की...

आह्हः...

आह्ह्ह्ह........

बिल्जेबब के मुँह से दर्द भरी चीत्कारियाँ निकलने लगी जिससे सुनकर भुविका फिरसे शॉकेड हो गयी पर उसका शॉक तब और बढ़ गया जब उसने ास्मोडियस की तरफ देखा...

अपने पुत्र को चीखते हुए देखने के बावजूद ास्मोडियस के चेहरे पर मुस्कराहट थी....

भुविका- ये इससे क्या हो रहा है???

ास्मोडियस- इससे जो ज़ख्म हुए the,wo इससे विक्रम ने दिए थे जिससे मेरी ऊर्जा के अलावा और कोई ठीक नहीं कर सकता था...

पर मेरी ऊर्जा को संभालना आसान नहीं hai...ye दर्द इससे मेरी ऊर्जा की hi वजह से हो रहा hai...par फ़िक्र मत karo,kuch hi देर की बात hai,ye ठीक हो जाएगा....

और हुआ भी ऐसा hi जैसा ास्मोडियस ने कहा tha...kuch देर तक असहनीय दर्द झेलने के बाद धीरे धीरे बिल्जेबब का दर्द काम होने लगा और फिर ख़त्म हो गया...

अपने आप को ठीक कर जब बिल्जेबब ने सामने देखा तोह अपने पितः को खड़ा पाया इसीलिए वो तुरंत अपने घुटनो पर झुक गया..

ास्मोडियस- और कोई ख्वाहिश????

ास्मोडियस के सवाल पर बिल्जेबब ने तुरंत ना में सर हिलाया जिससे देखकर ास्मोडियस ज़ोर से हसने लगा...

वहीँ भुविका सोच रही थी की ास्मोडियस किस ख्वाहिश की बात कर रहा है???

भुविका- कैसी ख्वाहिश????

ास्मोडियस- मेरे साथ विक्रम का सामना करने की ख्वाहिश......

बात दरअसल ये है की मिर्रोर्स वर्ल्ड से जब बिल्जेबब को असली ास्मोडियस ने क्रॉस वर्ल्ड में बुलाया था और अपनी योजना बताई थी तब बिल्जेबब ने उससे रिक्वेस्ट किया था की जब भी ास्मोडियस और विक्रम का आमना सामना ho,tab बिल्जेबब भी अपने पितः के साथ मिलकर विक्रम से लाडे....

तब ास्मोडियस ने मुस्कुराते हुए बिल्जेबब को एक बार में hi हाँ कह दिया tha..ASMODEUS की मुस्कान बिल्जेबब को रहस्यमयी लगी थी पर उसने तब ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था..

पर विक्रम से हुई युद्ध के बाद उससे उसके फादर की मुस्कराहट के पीछे का राज़ समझ आ गया था जिसका मतलब था की तेरे बस की नहीं है बेटे....

बिल्जेबब ये सब सोच hi रहा था की तभी उसके मन ये जानने की तीव्र इच्छा जागृत हुई की उसके बेहोश होने के बाद क्या क्या हुआ...???

क्यूंकि भले hi वो बेहोश हो गया tha,par वो जानता था की विक्रम की भी हालत ठीक नहीं थी और उस हालत में जब असली ास्मोडियस आया होगा तोह उसने ज़रूर विक्रम नाम के कांटे को हमेशा के लिए हटा दिया होगा....

BEELZEBUB-FATHER,kya मई कुछ पूछ सकता हूँ???

ास्मोडियस- विक्रम ज़िंदा है???

ास्मोडियस की बात सुनकर बिल्जेबब को झटका लगा....

बिल्जेबब- व्हाट??? पर kaise????jab तक आप वहां पहुंचे होंगे तब तक तोह उनकी भी हालत ख़राब हो चुकी होगी ना...

ASMODEUS-VIKRAM को उस जगह पर मारा नहीं जा सकता था???

बिल्जेबब को एक और बार ास्मोडियस की बात सुनकर झटका लगा???

बिल्जेबब- ऐसा क्यों????

ास्मोडियस- तुम भूल रहे हो की हमारे बीच युद्ध कहाँ हुआ tha???FOUNTAIN ऑफ़ लाइट के सामने...

फाउंटेन कभी भी विक्रम को अपने सामने मरने नहीं देती....

ये बोलकर ास्मोडियस ने अपना हाथ आगे kiya,ASMODEUS के सामने hi हवा में एक दृश्य दिखने लगा..

ये वही दृश्य था जिसमे फाउंटेन ऑफ़ लाइट ने VIKRAM,AVANTIKA और अलेसेन्द्र को अपने अंदर खींचा था..

पर जैसे hi तीनो अंदर gaye,drishya बंद हो गया....

बिल्जेबब- आपको तोह हमेशा से hi उस फाउंटेन की साड़ी शक्ति चाहिए थी naa,fir आपने फाउंटेन के प्रकट होते hi उसकी शक्तियां क्यों नहीं खींची....

ास्मोडियस- तुम भूल रहे हो की विक्रम वाइट एनर्जी का मालिक है वहीँ फाउंटेन ऑफ़ लाइट वाइट एनर्जी से भरी हुई संपत्ति.....

और मालिक के रहते संपत्ति को चुराया नहीं जा सकता...

इसके पीछे और भी कारण है पर वो तुम्हारा जानना ज़रूरी नहीं....

दोस्तों ास्मोडियस ने अपने बेटे को तोह दूसरा रीज़न नहीं बताया पर मई आपको बता देता हूँ....

बात या फिर ये कहूं असली कारण है सुपरगुप्त बुक जो विक्रम के अंदर मौजूद है और जिसमे स्पीयर भी है....

फाउंटेन ऑफ़ लाइट हो या फिर BOOK,dono hi गॉड की डिवीने और पुरे शक्तियों के प्रतिक हैं....

और जब दोनों एक साथ एक जगह मौजूद हो तोह कोई भी डेविल उस जगह पर कदम तक नहीं रख sakta,us जगह और उसकी पावर का फायदा उठाना तोह दूर की बात है....

और ास्मोडियस अपने बेटे को सुपरगुप्त बुक के बारे में नहीं बताना चाहता था...

ये राज़ बस उन दो भाइयों तक hi सिमित है...

ास्मोडियस की बात सुनकर जहाँ बिल्जेबब साद था वहीँ उसके दिल के किसी कोने में एक्ससिटेमेंट भी बढ़ गयी थी क्यूंकि वो ये बात अचे से जानता था की उसके फादर कोई भी काम अकारण नहीं करते....

जब विक्रम को मारना hi नहीं tha,ya फिर ये कहूं की विक्रम को मारा hi नहीं जा सकता था तोह अपने सीक्रेट को ( भ्रम माया ) रेवेअल करने की ज़रुरत hi क्या थी......

बिल्जेबब को यकीं था की इतना कुछ करने के पीछे ज़रूर कोई बड़ी बात होगी.....

ास्मोडियस- तुम्हे सही samjha...is युद्ध के होने के पीछे मेरा एक बोहोत hi महत्वपूर्ण उद्देश्य था...

मुझे विक्रम से कुछ चाइये था जो मुझे उससे युद्ध करके hi हासिल हो सकता था....

बिल्जेबब- क्या????

ये बात बिल्जेबब ने बोहोत एक्ससिटेमेंट में पूछी थी???

वहीँ दोनों बाप बेटे की बात सुनकर भुविका भी काफी एक्ससिटेड हो गयी थी और ास्मोडियस की कही आखरी बात सुनकर तोह उसकी एक्ससिटेमेंट अपने चरम पर पहुँच गयी थी.....

वो भी चेहरे पर बेचैनी और आखों में जिज्ञासा लिए ास्मोडियस की तरफ देख रही थी....

तभी.......

प्रत्याक्षी भवति....

रेवेअल.....

ास्मोडियस ने अपने सीने के ऊपर हाथ रख इस स्पेल को उच्चारित किया और अपना हाथ सामने की तरफ कर दिया....

ास्मोडियस के सीने के ठीक बीचो बीच एक रौशनी हुई और उस रौशनी के बीच ास्मोडियस के अंदर से एक स्वर्ण बन्दका ( गोल्ड बॉक्स )

बाहर आया और ास्मोडियस के हथेली के ऊपर आकर रूक गया...

इस क्रिया के दौरान बिल्जेबब को अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा झटका लगा था और वो इसीलिए क्यूंकि जब वो गोल्डन बॉक्स ासमोईउस के सीने से बाहर आ रहा था तब ास्मोडियस के चेहरे पर उसने पहली बार दर्द के भाव देखे थे.....

जिससे उससे कमसेकम इतना तोह अंदाज़ा हो hi गया था की उस छोटे से बॉक्स के अंदर जो भी hai,wo बोहोत ख़ास है....

वहीँ बॉक्स के अपने हथेली पर आते hi ास्मोडियस ने उससे खोल दिया और जैसे hi बिल्जेबब और भुविका ने उसके अंदर राखी चीज़ को dekha,dono के चेहरों पर अलग अलग भाव उत्पान हुए...

जहाँ भुविका को कुछ समझ hi नहीं आया वहीँ बिल्जेबब को कुछ कुछ अंदेशा तोह हो गया tha..usse ये भी समझ आ गया था की ासमोईउस को दर्द क्यों हुआ होगा...!!!

पर वो ये जानना चाहता था की उस चीज़ से जो उस बॉक्स के अंदर hai,usse ास्मोडियस करने क्या वाला है..

भुविका- ये????

ास्मोडियस- विक्रम का खून....

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V...J.....
 
अब तक आपने पढ़ा की ास्मोडियस बिल्जेबब और भुविका को विक्रम के खून का कटरा दिखाकर चौंका देता है.

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

अपडेट-89

PLANET-ISLA

PLACE-GUEST रूम

अब भला ये क्या बात HUI???GIRL फ्रेंड आप हमारी हैं पर ज़्यादा तर वक़्त आप अलेसेन्द्र के साथ बीता रही हैं.....

मेरी बात सुनकर अवंतिका के चीक्स पिंक हो gaye....bhale hi ाव की प्यार की शुरुआत प्रोपोज़ से ना होकर सीधे किश से हुई ho,bhale hi ाव की जोड़ी पूर्ण निर्धारित ho,par जब पहली बार इश्क़ का एहसास होता hai,rishton को नए नाम मिलते hai,toh उनसे मन में हरारत पैदा होना नार्मल होता है..

और वही हरारत इस वक़्त अवंतिका महसूस कर रही थी....

अलेसेन्द्र- आप को फुर्सत hi कहाँ है अपनी गिरफ फ्रेंड के liye...kal से तोह आप हमारे पिताजी और लार्ड क्रूसेडर के साथ hi लगे हुए हैं....

मई- अरे waah,aapne अभी गर्ल फ्रेंड kaha....hamare गृह की भाषा सिख रही हैं आप...

अलेसेन्द्र- haan,maine तोह आपसे कहा था ना की मुझे आपके गृह की भाषा मुझे सीखनी hai,toh सीख ली....

मेरी और अलेसेन्द्र की बातों के दौरान अवंतिका बस एक तक मुझे देखे जा रही थी....

सुबह का वक़्त hai.....mai तोह कल hi अपने आगे के सफर के लिए निकलना चाहता tha,par किंग सोलोमन और लार्ड क्रूसेडर ने मुझे एक दिन इस्ला में बिताने का निवेदन किया जिससे मई मन नहीं कर पाया...

जैसा की मैंने बताया था की इस्ला ब्रम्हांड का सबसे ख़ूबसूरत गृह hai,isiliye मई अवंतिका के साथ यहाँ की वादियों का लुत्फ़ उठाना चाहता था पर कल ऐसा संभव नहीं हो पाया...

kaaran,KING सोलोमन और लार्ड क्रूसेडर ने मुझे एक पल के लिए भी छोड़ा नहीं था...

अलग अलग विषयों में वो अपना तर्क देते और फिर मुझे मेरा तर्क puvhte....uske बाद कुछ समय मैंने डिफेंडर के साथ बिताया...

उसकी साड़ी शक्तियां तोह जागृत हो चुकी thi,par उन शक्तियों के दायरे को बढ़ने के लिए उससे क्या क्या करना chahiye,ye मई उससे बताने लगा...

उसके बाद नंबर आया मेरे तीनो दोस्तों का जिनमे से तोह भावी राजा थे और एक ग्लूटो की रानी....

तीनो से काफी देर तक मई उनके ग्रहों के बारे में बात करता रहा....

मेरी और अवंतिका की मुलाकात सीधे रात के डिनर के वक़्त hi हुई thi...par डिनर के बाद भी मुझे काफी देर तक किंग सोलोमन और लार्ड क्रूसेडर के साथ रुकना पड़ा और जब मई उनसे बात ख़त्म कर अवंतिका के रूम में पहुंचा तब तक वो सो चुकी थी....

वैसे तोह मुझे हर चीज़ यूँही साफ़ साफ़ दिखती है पर फिर भी दिहन अवशता में मई हर चीज़ की जड़ को देखने में ज्यातर कामियाब होता हूँ...

अपने रूम में पहुँच मै ध्यान अवशता में बैठ gaya..kuch देर तक अपनी फॅमिली दोनों दोस्त और GOD'S मेसेंजर्स को देख और कुछ सुग्गेस्टियन्स देकर मई ध्यान से बाहर आया...

कल का पूरा दिन और साड़ी रात यूँही गुज़र गयी थी....

पर आज का अगर पूरा दिन ना भी सही तोह कमसेकम पहला पेहेर मई अवंतिका के साथ बिताना चाहता था इसीलिए मई अभी अवंतिका के रूम में आया था जहाँ आलरेडी अलेसेन्द्र बैठी हुई थी...

आगे के सन से पहले चलिए एक बार ये जान लेते हैं की अवंतिका मुझे एकटक क्यों देख रही hai..kya चल रहा है उसके दिल में....!!!!

अवंतिका के सामने से चलकर आने वाला लड़का जिसने अभी अभी उससे अपनी G.F कहा tha,usse वो पिछले 3 साल से जानती थी....

पर जिस रिश्ते से वो उससे जानती thi,uske मायने अब बदल चुके the....dhadkan तोह मुझको देखकर अवंतिका की पहले भी तेज़ होती थी पर अब तोह उसके शरीर में बहते लहू की गति भी तेज़ हो चुकी थी....

और जैसे hi मैंने अवंतिका को अपनी G.F kaha,ussi वक़्त अवंतिका के दिल से एक आवाज़ आयी.......

V.J सिर्फ मेरा है.......

और ये ख्याल राखत संचार को तेज़ करने के लिए काफी tha....wo मुझे एकटक देखते हुए मेरे chehre,mere वजूद को खुदमे सामने की कोशिश कर रही थी....

मई- हसीं बोहोत हैं

इस जहाँ में,

पर तुझसे कोई

खूबसूरत नहीं है...

हम तेरे hi hain,dil को

यकीं दिलाने की ज़रुरत

नहीं है......

मेरी बात सुन अवंतिका के चेहरे पर ऐसी मुस्कराहट आयी की आज पहली बार ऐसा लगा जैसे मेरा शायरी कहना सफल हो गया.....

वहीँ.....

अलेसेन्द्र- आप हमारी तौहीन कर रहे हैं VIKRAM.....kya हम ख़ूबसूरत नहीं हैं.....

अलेसेन्द्र ने अपनी बात कह चेहरा घुमा liya...AVANTIKA को ये ाचा नहीं laga...wo अलेसेन्द्र को कुछ कहने hi जा रही थी की मैंने रोक diya....mai धीरे से अलेसेन्द्र के ठीक पीछे पहुँच गया और.....

मई- तुम वो पंक्ति हो, जो हर

शायर अपनी शायरी में

लिखता है....

अवनि की khusoorti,uska अक्स

आयने में तुम्हारे जैसा

दीखता है....

मेरी बात सुन अलेसेन्द्र palti..uske चेहरे पर मुस्कान नहीं हसी थी....

मई- देखिये मैडम के चेहरे ko...ye बस हम दोनों की टांग खींच रही थी.....

अवंतिका ने कुछ कहा nahi,wo भी है दी...

MAI-AV,kal के लिए सॉरी yaar..kal हमारे नए रिश्ते का पहले दिन था और मई तुम्हे टाइम hi नहीं दे पाया....

अवंतिका- तुम्हे मुझे किसी भी चीज़ के लिए सॉरी कहने की ज़रुरत नहीं hai..bhale hi तुम अपने आप को सिंपल रखना और दिखाना पसंद करते ho,par इससे तुम्हारी सच्चाई तोह नहीं बदल जायेगी ना...

तुम्हारी सच्चाई की वजह से तुम्हे बोहोत सी रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ भी मिली hain,jinpar अगर तुमने ध्यान नहीं दिया तोह इस पुरे यूनिवर्स को उसका खामियाज़ा भुगतना पद सकता है...

इसीलिए पहले kaam,fir मई.....

मई मन में- तेरी ये ऐडा भी मुझे

भा गयी.....

खुद को पीछे रख भी

तू सबसे आगे आ गयी....

मई- THANKS........aur इससे पहले की तुम कहो की मुझे थैंक्स कहने की ज़रुरत नहीं hai,mai तुम्हे बता दूँ की ज़रुरत है...

क्यूंकि एक अचे हमसफ़र के मिल जाने से दिल का भोज काम हो जाता hai,aur जब दिल पे बोझ काम ho,toh दिमाग अपने आप दौड़ने लगता है.....

अलेसेन्द्र- बिलकुल sahi....aur कल वक़्त नहीं बिता पाए तोह क्या hua,aaj बितलो....

मई- इसीलिए hi तोह आया hun...AV,kahin बाहर चलें...???

अवंतिका- एक शर्त पर????

अवंतिका की बात सुनकर अलेसेन्द्र चौंक gayi....par इससे पहले की वो अवंतिका के शर्त वाली बात के बारे में कुछ पूछती,

मई- मंज़ूर है.....

मेरी बात सुनकर जहाँ अवंतिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी वहीँ अलेसेन्द्र ने भी फ़िलहाल के लिए बोलना कैंसिल कर दिया....

अवंतिका- तुम्हे तोह पता है ना की मई क्या पूछने वाली हूँ...

ALESENDRA-arre कोई मुझे भी बताएगा की किस बारे में बात हो रही है...???

MAI-hmm....kal फाउंटेन के अंदर जो कुछ भी hua,AV उसके बारे में पूछना चाहती है...

मेरी बात सुनकर अलेसेन्द्र के दिमाग में भी कल की वो घटना ताज़ा हो गयी जिसकी वजह से उससे बेचैनी हुई थी....

अलेसेन्द्र- कल के बारे में तोह मुझे भी कुछ बताना है....

मई- तुम जो सोच रही ho,us बात की चिंता मुझे भी है पर मुझे फ़िलहाल उस बारे में कोई जानकारी नहीं है...

अवंतिका- किस बारे में बात हो रही है..??

ALESENDRA-mai हमेशा से hi ास्मोडियस की साड़ी ऊर्जाओं को महसूस कर सकती हूँ.... कल जब नकली ास्मोडियस V.J से लड़ रहा tha,tab भी मैंने उस ऊर्जा को फील किया था और जब असली ास्मोडियस आया तब भी...

पर जब असली ास्मोडियस aaya,toh उसके अंदर की ऊर्जा का बहाव कुछ अलग सा tha...aisa लग रहा था जैसे उसके अंदर सब कुछ हल्का हो गया hai....aisa पहले कभी भी नहीं हुआ....

MAI-hmm.filhal इस बारे में सोच कर कोई फायदा नहीं hai,sahi वक़्त आने पर सब अपने आप पता चल जाएगा.....

मैंने अलेसेन्द्र को बोल तोह दिया tha,par उसने जो कहा tha,uski टेंशन मुझे भी थी...

पर फ़िलहाल के लिए मैंने अपना दिमाग झटक दिया....

मई- और जहाँ तक आपका सवाल hai,jo रौशनी से बने कंचे तुम दोनों के अंदर hain,aur जो कंचे मेरे अंदर hain,wo भविष्यवाणियां हैं जो सही वक़्त आने पर खुदही हमारे सामने आ जाएँगी....

अवंतिका- एक सवाल अब भी रह gaya...FOUNTAIN से निकलने से जस्ट पहले तुमने कुछ देर तक अपनी आखें बंद की थी और उस दौरान तुम्हारे चेहरे पर कुछ पल के लिए दुःख के भाव आये the...kyun???

अवंतिका की बात सुनकर जहाँ अलेसेन्द्र चौंक गयी वहीँ मई मुस्कुरा उठा....

-अवंतिका किस हद तक मुझे समझने लगी hai,ye उसकी बातों से पता लगने लगा है....

मई- क्यूरियस की वजह से.....

मेरे मुँह से क्यूरियस नाम सुनकर अलेसेन्द्र चौंक gayi...aur चौंकती भी क्यों naa,yahi तोह वो गृह था जिसकी सकारात्मक ऊर्जा से उनका गृह बना था....

जहाँ अलेसेन्द्र शॉकेड हुए कड़ी thi,wahin अवंतिका को कुछ समझ नहीं aaya.aur इससे पहले की अवंतिका या अलेसेन्द्र कुछ कहते.....

मई- क्यूरियस वो प्लेनेट है जिसकी वजह से इस्ला बना hai...par अब वो प्लेनेट इस ब्रम्हांड के अनबुझे पहेलियों में से एक बन गया है...

उससे ास्मोडियस ने किसी बंजर गृह के अंदर छुपा दिया है...

अलेसेन्द्र- ये सब तोह मुझे मालुम hai..par आप उसकी वजह से फाउंटेन में उदास क्यों हुए थे???

अलेसेन्द्र की एक्ससिटेमेंट देखते hi बनती थी...

मई- तुम्हारे गृह के जन्म का कारण जिस सकारात्मक ऊर्जा के बारे में फाउंटेन ने तुम्हे बताया hai,wo खुद फाउंटेन hi है....

और मई उदास इसीलिए हुआ था क्यूंकि फाउंटेन ने मुझे क्यूरियस के लोगों की हालत दिखाई थी जो की बोहोत दयनीय है....

ास्मोडियस ने उस गृह के लोगों के बीच एक श्राप को डाला और उसके बाद उस गृह को छुपा दिया ताकि अगर कोई चाहे भी तोह वहां के लोगों को ठीक ना कर पाए..

पर क्यूंकि फाउंटेन वहीँ के लोगों की दें hai,isliye उनसे ये आज भी जुडी हुई hai...wo फाउंटेन hi थी जिसने मेरे दिमाग में उस गृह के हालत को सपने के रूप में दिखाया था और मुझे वहां मौजूद एक लड़की के थ्रू उस श्राप के नाम से अगवत कराया था जिससे हज़ारो सालों से वो बेकसूर लोग झेल रहे हैं....

अवंतिका- पर ध्यान के आखरी पलों में तुम्हारे चेहरे पर एक मुस्कान आयी thi,wo क्यों???

मई अवंतिका की बात सुनकर फिर मुस्कुरा utha....agar ऐसा hi चलता रहा तोह एक दिन ये मेरी हर हसी और हर गम का अकाउंट भी मैनेज करने लगेगी....

मई- वो इसीलिए क्यूंकि फाउंटेन ने मुझे वो गृह बिंदु दिखा दिया है जिसके ज़रिये मई क्यूरियस तक पहुँच सकता हूँ....

अलेसेन्द्र- kya???sach!!!!mai बता नहीं सकती की मेरी कितनी इच्छा hai,ek बार उन लोगों को नमन कर सकूँ जिनसे मेरा और मेरे गृह का अस्तित्व है....

मई- फ़िक्र मत karo,sab कुछ ठीक हो जाएगा...

अलेसेन्द्र- वो तोह होगा hi,aap जो साथ हैं...

मई- आपकी शर्त या ये कहूं की आपके सारे सवालों के जवाब मई दे चूका hun,toh क्या अब हम कहीं बाहर चलें...

अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बस मुस्कुराते हुए हाँ में अपनी पलकों को झपकाया पर मुझे उसकी मुस्कराहट के पीछे एक उदासी दिखी...

पर अलेसेन्द्र के सामने मैंने कुछ कहना सही नहीं समझा...

मई- अगर चल कर महल के मुख्या द्वार से होते हुए बाहर गए तोह हमारे पीछे भीड़ लग jaayegi..kis किस को मन करता rahunga..hum सीधे hi चलते हैं...

ये कहकर मैंने अवंतिका का हाथ थामा hi था की....

अलेसेन्द्र- VIKRAM...tumne कहा की तुम्हे फाउंटेन ने किसी लड़की के मुँह से वहां मौजूद श्राप का नाम

बताया tha..kya है वहां पर फैले श्राप का नाम???

मई- कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन...

अवनि का हाथ थामे मैंने अपनी बात कही और हम दोनों गायब हो गए....

PLACE-FLOATING माउंटेन.......

अवंतिका- wow.....aisa नज़ारा मैंने आज तक नहीं dekha....kamal है naa,har सदी में एक से एक पैन्टेर्स ने जन्म लिया पर प्रकृति से बड़ा चित्रकार और कोई नहीं....

इस वक़्त हम इस्ला के सबसे ऊँचे फ्लोटिंग माउंटेन के ऊपर खड़े थे....

फ्लोटिंग माउंटेन मतलब ऐसा माउंटेन जो हवा में तैर रहा हो....

सामने का नज़ारा अध्भुध tha..hamare पैरों के नीचे से hi कुछ चौड़ी जगह खुली हुई थी जिसके आखरी छोर से झरना बह रहा tha...saamne हमारे पहाड़ की hi तरह कई पहाड़ हवा में तैर रहे थे....

हवा में हलकी हलकी ठंडक थी जो मौसम को बेहद खुशनुमा बना रही थी....

AVANTIKA-agar तुम्हे बुरा न लगे तोह एक बात बताऊँ??

मई- बोलो....

अवंतिका- भले hi तुम और तुम्हारा भाई गॉड के बेटे हो पर उनकी सबसे बड़ी रचना तुम दोनों नहीं ये प्रकृति hi है....

जिसके बिना किसी भी इंसान का कोई अस्तित्व hi नहीं...

अब इस पगली को कौन समझाए की अगर मई या मेरा भाई हक़ीक़त से नाराज़ होने लगते तोह कहानी का नाम ऐटिटूड होता hi नहीं....

मई- क्या मई कुछ पूछूं???

अवंतिका- हम्म...

उसने ये बात सामने नज़ारे का मज़ा लेते हुए कही....

मई- मेरे भाई को जिससे डेविल लार्ड भी कहा जाता hai,jab कल तुमने उससे इतने नज़दीक से dekha,toh तुम्हे कैसा महसूस हुआ....???

MAI-pata hai,jab युद्ध के बाद तुम मेरी गोद में आधे बेहोशी की हालत में लेते हुए the,aur जब तुम्हारा भाई अचानक प्रकट हुआ और उसने तुम पर हुम्ला किया तोह कई थॉट्स मेरे दिमाग में आ जा रहे थे पर एक थॉट था जो लगातार मेरे दिल मेरे दिमाग में बना हुआ था और अब भी बना हुआ है....

और वो ये की वो कितना भी ताकतवर क्यों ना हो jaaye,kitni hi शक्तियां और क्यों ना हासिल karle,par उन शक्तियों से वो बस किसी को मार सकता है या सजा दे सकता hai,par क्या वो किसीको जीवन दे सकता है....????

nahi...ye ताकत सिर्फ गॉड के पास hai..jis दिन तुम्हारे भाई को इस बात का अंदाज़ा हो गया की मारने वाले से बचने वाला बड़ा होता hai,shayad उस दिन वो बेकसूरों को मारना छोड़ दे....

अवंतिका ने अपनी बात ख़त्म की पर जब कुछ देर बाद भी उससे मेरा कोई रिस्पांस सुनाई नहीं diya,toh वो मेरी तरफ पलटी और.......

मई एक तक उससे देख रहा था...

अवंतिका- क्या hua???aise क्यों देख रहे हो???

मई- जब दिल की बात जुबां कहने लगे तोह खूबसूरती और बढ़ जाती hai...wahi देख रहा हूँ....

इस बार अवंतिका ने शर्मा कर अपनी नज़रें नहीं jhukayi..wo भी एक तक मेरी आँखों में देखने लगी....

नजाने कितने jhagde,manupalations से होकर हम दोनों का रास्ता गुज़रा है, और फिर एक दिन सारे निगेटिव्स साइड हो गए और हम दोनों दोस्त बन गए....

पर जब रिश्ता दोस्ती का हो और एहसास मोहोब्बत ka,tab झटके तोह लगते hi हैं...

ऐसे hi कुछ झटके हमसे भी टकराये पर कहते है naa,jab मंज़िल तय हो तोह क्या फर्क पड़ता है की रास्ता कैसा है???

इतने सारे हर्डल्स के बाद आज मई और अवंतिका हम बनकर एक साथ खड़े हैं....

मई- एक बात batao....jab मैंने अलेसेन्द्र से क्यूरियस के बारे में बात कर रहा था तब तुम उदास क्यों हो गयी थी..

अवंतिका- तुम्हे नहीं pata???tumse क्या छुपता है..

मई- मैंने तुम्हारे मन को पढ़ने से खुद को रोक लिया है...

अवंतिका- क्यों???

मई- इश्क़ खुद एक मैजिक hai..uske ऊपर और कोई मैजिक का उसे karna,acha नहीं लगता...

AVANTIKA-mai भी तुम्हारे साथ क्यूरियस जाना चाहती हूँ पर तुमने मई कहा हम नहीं...

मई- वहां खतरा होगा ाव....

अवंतिका- जहाँ खतरा ना ho,mai वहां जाना भी नहीं चाहती......

मई- ठीक hai...hum साथ चलेंगे..

अवंतिका- अभी....

MAI-abhi!!!kya तुम यहाँ और कुछ देर नहीं बिताना चाहती...

अवंतिका- मई जानती हूँ की जब तक तुम वहां के लोगों को उनकी प्रोब्लेम्स से छुटकारा नहीं दिला dete,tumhare दिल को चैन नहीं आएगा...

और मई ऐसा कैसे होने दे सकती हूँ???

मई- ठीक hai.....chalte hain..par उसे पहले यहाँ पर एक आखरी काम बचा hai,wo करलें...

ये कहकर मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया जिससे अवंतिका ने थाम लिया और अगले hi पल हम दोनों गायब हो चुके थे...

PLACE-GRAH सेतु....

मई- अब हमे जाना होगा डिफेंडर....

मई अवंतिका को लेकर सीधा गृह सेतु के प्रवेश द्वार के सामने प्रकट हुआ..

मेरे प्रकट होने के अगले hi पल डिफेंडर भी मेरे सामने प्रकट hua..mera आखरी काम यहाँ पर इसी जगह पर था....

MAI-waise तोह ओपचारिकता कहती है की मई किंग SOLOMON,LORD क्रूसेडर और पूरी प्रजा से एक बार और भेट करूँ पर उसमे समय लग जाएगा...

जहाँ मुझे जाना है वहां के लोगों ने बोहोत दर्द सहा hai...aur अब जब मई उनके दर्द से अवगत hun,toh मुझसे रुका नहीं जाएगा....

डिफेंडर- LORD,aapka हर फैसला मनुष्य जाती के हित में hi होता है फिर उसपे सवाल कैसा???

MAI-aayiye मेरे साथ...

ये कहकर मई और अवंतिका गृह सेतु के प्रवेश द्वार के अंदर चले गए और हमारे पीछे पीछे डिफेंडर भी आ गया...

अच्छेद्य द्वाराम सार्धं स्वः तेजस्विता....

अनब्रेकेबल दूर विथ माय एनर्जी....

स्पेल बोलते hi मेरे बॉडी से तेज़ वाइट किरणे निकली और तेज़ी से गृह सेतु के दोनों प्रवेश द्वारा की तरफ चल पड़ी..

अगले hi पल दोनों प्रवेश द्वार के चारों तरफ एक तेज़ चमक उभरी और फिर सब नार्मल हो गया....

मई- ये गृह सेतु अब पूरी तरह सेफ hai...agar कभी दोनों ग्रहों पर कोई आकस्मिक विपदा आये तोह मेरे आने तक आप दोनों गृह के लोगों को इस गृह सेतु के अंदर ले आईयेगा...

सबके अंदर आते hi गृह सेतु के दोनों द्वार अपने आप बंद हो जाएंगे....

बहुप्रयोगम स्तालिखा......

मल्टीयसे प्लेट.....

मेरे स्पेल बोलते hi मेरे हाथों में एक बड़ी सी प्लेट आ गयी...

मई- द्वार के बंद होने के बाद आप किसी भी तरह का स्पेल का प्रयोग नहीं कर paayenge....aisi स्थिति में इस प्लेट से जो भी चीज़ maangenge,ye आपको दे देगी...

डिफेंडर ने मेरे हाथों से उस प्लेट को ले लिया..

ये सब मैंने इसीलिए किया था क्यूंकि मेरे भाई का कोई भरोसा तोह था nahi..agar वो फिर कोई गेम खेले तोह कमसे काम यहाँ के लोगों के पास कुछ बैक उप तोह हो...

मई- अब आप बाहर jaayiye..hume जहाँ जाना hai,wahan जाने के लिए ये जगह उचित है...

डिफेंडर एक बार मेरे आगे झुका और फिर वहां से चला गया....

मैंने ये जगह इसीलिए चुनी क्यूंकि क्यूरियस की गृह बिंदु के अंदर से होते हुए क्यूरियस तक पहुँचने के लिए मुझे बोहोत ज़्यादा कंसन्ट्रेट करने की ज़रुरत थी और ये जगह बोहोत शांत thi.yahan ध्यान लगाना बोहोत आसान था......

मैंने अवंतिका का हाथ थामा और नीचे बैठ गया...

MAI-AV..mai अपने चित्त को तुम्हारे चित्त के साथ जोड़ने जा रहा hun....apni आखें बंद करो और जहाँ मेरा चित्त ले jaaye,wahan चल पड़ना.....

अवंतिका ने अपना सर हाँ में हिलाया और अपनी आखें बंद कर बैठ गयी...

अगले hi पल.......

मेरा चित्त अवंतिका के चित्त से जुड़ चूका tha..hum दोनों के hi माथे से तेज़ रौशनी प्रकाशित हो रही थी..

वहीँ मई अपने चित्त के सहारे एक रौशनी नुमा अनंत रास्ते में दौड़े जा रहा था...

हमे दौड़ते हुए काफी वक़्त गुज़र चूका था पर मुझे अभी तक हमारी काम की चीज़ नहीं दिखी थी...

मुझे किसी की तलाश थी और वो चीज़ कुछ और दूर तक आगे जाने के बाद मुझे दिख गयी...

मई और ाव उसकी तरफ बढ़ गए....

वो एक काला उभरता हुआ सा गोला था जो किसी पल छोटा हो रहा था ुर किसी पल बड़ा....

पर जैसे hi मई उसके पास gaya,mujhe अपने सर में तेज़ दर्द होने लगा...

ऐसा hi दर्द अवंतिका के सर में भी हो रहा था पर हमने हार नहीं मानी...

एक दूसरे से जुड़े रहकर हम एक दूसरे के दर्द को पीने लगे और कुछ देर तक जब वो काला गोला हमारे कंसंट्रेशन को हिला नहीं पाया तोह......

उस गोले से दो रेज़ निकली जिसने मुझे और अवंतिका को जकड लिया और अगले hi पल......

मई और अवंतिका उस गोले के अंदर चले गए...

यहाँ हमारे चित्त उस गोले के अंदर गए वहां गृह सेतु में मौजूद हमारी बॉडीज भी गायब हो गए......

प्लेनेट- मांसलिकेल

प्लेस- ास्मोडियस पैलेस

आपका कोटि कोटि ध्यन्यवाद डेविल लार्ड......

ास्मोडियस- धन्यवाद कमज़ोरों के शब्दकोष में उपयोग होने वाला शब्द है BHUVIKA.....dhanyawad कहने के बजाये जो काम तुम्हे सौंपा गया hai,uspe अपना सारा ध्यान केंद्रित करो....

याद रहे, मई सिर्फ रास्ता दिखा सकता hun,us रास्ते की मंज़िल तक तुम्हे खुद पहुंचना hoga......halki सी chuk,aur तुम्हारा अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा...

और तुम्हे मिटने वाला और कोई नहीं मई hi रहूँगा... ास्मोडियस को अपनी योजना में बाधा या किसी भी किस्म की रुकावट पसंद नहीं है....

भुविका- ऐसा कभी नहीं होगा डेविल LORD....aur अगर हुआ तोह आपको कुछ करने की ज़रुरत hi नहीं पड़ेगी...

मई खुद अपने आप को ख़त्म कर लुंगी....

ये बोलते वक़्त भुविका की आँखें क्रोध से लाल हो चुकी थी और उसकी वाणी में एक गज़ब की दृढ़ता थी जिससे देख कर ास्मोडियस के चेहरे पर विजेताओं वाली मुस्कान आ गयी....

ास्मोडियस- अपनी मंज़िल को शीघ्र खोजो मेरे BHAI...tumhari मंज़िल hi मेरी जीत है.....

इस बात को बोलते वक़्त ास्मोडियस के आँखों के सामने एक लाइव दृश्य चल रहा tha..aur ये दृश्य वही था जिसमे विक्रम अवंतिका का हाथ पकड़ ध्यान अवस्था में बैठ गृह बिंदु के ज़रिये क्यूरियस में पहुँचने की कोशिश कर रहा था...

वहीँ भुविका ने जब ास्मोडियस की बात suni,toh उससे कुछ समझ नहीं aaya..wo ास्मोडियस से उसकी बात का मतलब पूछने hi वाली थी की...........

भुविका के बाजू में एक काला धुआं उठा और उसी धुंए ने कुछ hi पलों में बिल्जेबब का रूप ले लिया...

बिल्जेबब- काम हो गया फादर....

ास्मोडियस- मुझे पता है..

जैसे hi ास्मोडियस ने अपने सीने के अंदर से स्वर्ण बॉक्स को निकला और भुविका और बिल्जेबब को बताया की उस बॉक्स के अंदर विक्रम का खून है तभी से उन दोनों के दिमाग में बोहोत से सवाल गूंज रहे थे....

पर ास्मोडियस से कुछ भी पूछने की हिम्मत उनमे से किसी में भी नहीं थी...

ास्मोडियस भी उन दोनों की मनोदशा अचे से जानता tha,par कुछ कहना छोड़ उसने कुछ किया जिससे देखकर बिल्जेबब और भुविका की आँखें बड़ी हो गयीं...

बंधनिया

कैप्चर.....

ास्मोडियस द्वारा इस स्पेल के उच्चारित होते hi कुछ नया हुआ जिससे भुविका और बिल्जेबब देख तोह पा रहे the,par उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था....

उसके बाद ास्मोडियस ने बिल्जेबब को एक कार्य दिया जिससे सुनाने के बाद बिल्जेबब की जिज्ञासा अपने चरम पर पहुँच गयी और वो ास्मोडियस से पूछे बिना नहीं रह पाया....

बिल्जेबब- इससे क्या होगा फादर??????

ास्मोडियस- इसका जवाब तुम खुद विक्रम की ज़ुबानी सुन लेना....

ास्मोडियस की बात सुननने के बाद बिल्जेबब के पास अपने फादर द्वारा सौंपे गए काम को पूरा करने के अलावा और कुछ नहीं बचा था इसीलिए अपने काम की चीज़ को ले वो ास्मोडियस के सामने सर झुककर गायब हो गया और कुछ hi देर बाद अपना काम ख़त्म कर पुनः प्रकट हो गया....

ASMODEUS-ab तुम दोनों अपने गंतव्य की और तुरंत अग्रसित हो जाओ...

BHUVIKA,jab तक मई ना kahun,aage मत बढ़ना...

भुविका का सवाल उसके मन में hi रह gaya..wo और भुविका ने अपना सर झुकाया और गायब हो गए...

प्लेनेट- एलोप्टुस

प्लेस- स्टॉर्मी डेजर्ट

BEELZEBUB-Taiyar हो.....

भुविका- हमेशा....

अपना वर्ड कॉन्फिडेंटली बोल भुविका दयँ अवशता में बैठ गयी और कुछ hi पलों में उसका चित्त उसके शक्तियों के बादल के सामने खड़ा था....

भुविका ने वापस अपनी वाइट शक्तियां जो उससे सरहद पर मिली थी, उससे खुद को धक् लिया और आगे badhi...SAMAY संचालकों की रे रोप ने फिर भुविका को रोकने की कोशिश की पर भुविका के चारो तरफ फैले वाइट एनर्जी के धुंए की वजह से वो कुछ कर नहीं पायी...

भुविका चलती हुई अपनी शक्तियों के सामने कड़ी हो गयी पर वो आगे नहीं बढ़ रही थी....

और तभी......

ास्मोडियस- अब........

ये वही वक़्त था जब विक्रम और अवंतिका को उस काले गोले ने अपने अंदर खींच लिया था जिसके बाद विक्रम और अवंतिका के शरीर भी गायब हो गए थे....

ास्मोडियस की आवाज़ के कान और चित्त में गूंजते hi भुविका अपने शक्तियों के बीच उतर गयी.....

ध्यान में बैठी भुविका का शरीर हवा में उठने laga..uske चारों तरफ वाइट और ब्लैक एनर्जी की रेज़ घूमने लगी और धीरे धीरे वो साड़ी रेज़ भुविका के अंदर समां गयी...

जैसा की मैंने बताया था की एलोप्टुस अब एक बंजर गृह था पर भुविका के अंदर दोनों ेनेर्गीएस के समाते hi एलोप्टुस के वायु मंडल में हज़ारों सालों के बाद बिजली कड़की......

बिजली कड़कते hi भुविका की आँखें खुल gayi....BHUVIKA के आँखों की पुतलियां लगातार अपना रंग बदल रही थी....

कभी वो काली हो जाती तोह कभी सफ़ेद.....

बिल्जेबब जो इस वक़्त भुविका के सामने hi खड़ा tha,uske चेहरे पर भी भुविका के नए रूप को देखकर मुस्कान आ गयी...

बिल्जेबब की hi तरह भुविका के शरीर पर भी लम्बे वस्त्र आ गए पर भुविका का वस्त्र आधा काला था और आधा स्वेत....

अभी दोनों में से कोई कुछ कहता उससे पहले hi दोनों गायब हो गए और अगले hi पल वो दोनों ास्मोडियस के सामने थे....

ास्मोडियस- शक्ति मुबारक हो भुविका.....

भुविका जिसने अपनी शक्ति हासिल करने के बाद अभी तक एक शब्द भी नहीं कहा tha,uske लाभ हिले....

भुविका- अब???

ास्मोडियस- तुम्हारा प्रतिशोध और.....

अपनी बात अधूरी छोड़ ास्मोडियस ने अपना हाथ आगे किया जिसके ऊपर अगले hi पल कुछ आ गया...

ास्मोडियस- इसका उपयोग करने का वक़्त आ गया....

बिल्जेबब- ये तोह!!!!!!

ास्मोडियस- hmm....mere नायब संग्रहों में से ek....SAMAY संचालकों से मेरी हासिल की हुई.....

परिवर्तक............

आज के लिए इतना HI....

आपका अपना V...J....
 
अब तक आपने पढ़ा की विक्रम गृह बिंदु को ढूंढ अवंतिका के साथ उसके अंदर समां जाता है वहीँ ास्मोडियस के हाथ में परिवर्तक आ जाता है

अब आगे:-

CHAPTER-2

( कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन )

मेगा डार्क अपडेट-90

प्लेस- हेवन

क्या आप दोनों भी वही महसूस कर रहे हैं जो मई महसूस कर रहा हूँ....

सत CECILIA/ST अल्फ़्रिक - हाँ....

सत सेबेस्टियन के सवाल में भी एक किस्म की घबराहट थी और वही घबराहट बाकी के दोनों सेंटस के जवाब में भी थी....

सत सकिलिअ- सदियों पश्चात आज हमे परिवर्तक की ऊर्जा महसूस हुई है....

सत अल्फ़्रिक- पर क्या faayda....jab से लार्ड ऑफ़ एंगेल्स को अपनी शक्ति मिली hai,tabhi से ास्मोडियस ने खुदको और खुदके आस पास हो रही सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों को नज़रबंद कर दिया है....

हम परिवर्तक को महसूस तोह कर सकते hain,par उससे देख नहीं सकते...

सत सकीला- पर समस्या वो नहीं hai....hum परिवर्तक को इसीलिए महसूस कर पा रहे हैं क्यूंकि ास्मोडियस ने चुराने के बाद पहली बार उससे सामने लाया है...

हम सभी एंगेल्स लार्ड ऑफ़ एंगेल्स की ऊर्जा से जुड़े हुए hain...aur ये कोई संजोग नहीं हो सकता की जैसे hi हममे लार्ड की ऊर्जा महसूस होना बंद hua,thik उसी वक़्त परिवर्तक की ऊर्जा ने हमे खुद से अवगत कराया...

सत अल्फ़्रिक- किन्तु हम लार्ड को महसूस क्यों नहीं कर पा रहे hain...aisa लग रहा है जैसे वो हम सभी से काट गए हैं....

सत सेबेस्टियन- असली चिंता का विषय ये नहीं है की हम लार्ड को महसूस क्यों नहीं कर पा रहे hain,chinta का विषय ये है की क्या वो हममे महसूस कर पा रहे हैं...

क्यूंकि अगर ऐसा नहीं hai,toh इसका अर्थ ये है की वो परिवर्तक को भी महसूस नहीं कर पा रहे honge...aur ऐसी स्थिति में परिणाम बोहोत भयंकर हो सकता है....

सत सकीला- पर हम कर भी क्या सकते hain....hum तोह उन तक पहुँच भी नहीं sakte....ab जो भी karenge,wo लार्ड hi करेंगे...

यहाँ गोड्स मेसेंजर इस उम्मीद में थे की लार्ड ऑफ़ एंगेल्स कुछ करेंगे पर वो ये नहीं जानते थे की ास्मोडियस ऐसा होने नहीं देगा....

जब तक विक्रम गेम को SAMJHEGA,ASMODEUS गेम ख़त्म कर चूका होगा!!!!!

PLANET-RAW PLANET.......BANJAR गृह.....

प्लेस- रॉकी लैंड

ये है COURIOUS.........par यहाँ के अट्मॉस्फेरे में तोह ऑक्सीजन को ृविवे करने वाले परतकलेस hi नहीं हैं और नाही पानी ko....ek सेकंड!!!!!

अवंतिका बोलते बोलते रूक गयी....

अवंतिका- जब यहाँ ऑक्सीजन hi नहीं है तोह मई सांस कैसे ले रही हूँ....

अपनी बात या फिर ये कहूं की बात के बाद खुदसे hi सवाल करने के बाद अवंतिका ने मेरी तरफ देखा....

मई- मेरी बॉडी के ऑक्सीजन वेव्स से....

अवंतिका- पर!!!!!

पर के बाद आने वाला कैसे अवंतिका के अंदर hi रह गया...

अवंतिका- कभी कभी मई तुम्हारी पहचान भूल जाती हूँ....

मई- मेरी पहचान तुम्हारी मोहोब्बत hai..bas ये बात हमेशा याद रखना....

अवंतिका- ओहो मिस्टर ROMANTIC....aapko नहीं लगता की फ़िलहाल आपको उस प्रॉब्लम पे फोकस करना चाहिए जो इस वक़्त हमारे सामने है....

मई- फोकस मुझे सिर्फ उस गृह बिंदु पर करना था जिसके अंदर समां कर हम यहाँ पहुंचे हैं...

यहाँ पहुँच gaye,samjho क्यूरियस पहुँच गए....

अवंतिका- क्यूरियस पहुँच गए matlab!!!ye क्यूरियस नहीं है?

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!!!!

मई- nahi....ASMODEUS ने क्यूरियस को जिस बंजर गृह के अंदर छुपाया tha,ye वही गृह है....

अवंतिका- तोह अब!!!!

मैंने कुछ कहा नहीं बस अपनी इंडेक्स फिंगर को निचे ज़मीं में रख प्रेशर दिया और अगले hi पल ज़मीं में दर्द पड़ने लगी और देखते hi देखते मेरे ऊँगली के निचे की जगह दो हिस्सों में बात गयी और उन दो हिस्सों के बीच एक अनंत पतली सी खायी दिखने लगी....

ऐसा होते hi मेरी उसी ऊँगली से एक रे निकली जो उस ज़मीं के दो हिस्सों के बीच आये गैप के अंदर चली गयी और अगले hi पल.......

जिस गैप या खाई में मेरी रे गयी thi,wahan से तेज़ रौशनी निकल बाहर आने लगी....

अवंतिका- wow....ye कैसे हुआ???

मई- ास्मोडियस ने इस गृह को अंदर और बाहर से अपने ब्लैक मैजिक के बंधन से बाँध दिया था....

जो रे मेरी ऊँगली से निकली थी वो मेरे शरीर की ऊर्जा थी जिसने इस गृह के अंदर के काली बंधनो को काट दिया है...

ये रौशनी असल में वो रास्ता है जो हमे क्यूरियस पहुंचाएगी....

अवंतिका- ohh.par ये गृह तोह अब भी बंजर hai..kya ये हमेशा ऐसा hi रहेगा...

मई- ये गृह तोह हमेशा ऐसा hi tha..yahan ज़िन्दगी कभी नहीं panpi....par जैसे hi क्यूरियस आज़ाद hoga,wo इस गृह के माया से अलग हो जाएगा....

अवंतिका- haash...chalo,baaki साड़ी प्रोब्लेम्स तोह ख़त्म hui..ab बस क्यूरियस की प्रॉब्लम बाकी है...

मई- एक और प्रॉब्लम है???

अवंतिका मेरी बात सुन चौंक गयी...

अवंतिका- एक और problem!!!wo क्या?

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मई- मई ब्रम्हांड की हर जगह को महसूस कर सकता हूँ और अपने सारे एंगेल्स को हर वक़्त देख सकता hun..par यहाँ आते hi मुझे बाहरी दुनिया का कुछ भी नज़र नहीं आ रहा है.....

मैंने कोशिश भी की बहार झाँकने की पर मई नाकामियाब रहा....

अवंतिका- शायद इस जगह में फैले मैजिक की वजह se..tumne hi तोह बताया था न की इस जगह को ब्रम्हांड के नक़्शे से तुम्हारे भाई ने छुपाया हुआ है...

मई- hmm.shayad...par ज़्यादा देर तक ऐसा रहना सही नहीं hai...hume क्यूरियस की प्रॉब्लम जल्दी hi ख़त्म कर वापस लौटना होगा....

मैंने अवंतिका का हाथ थामा और उस रौशनी के ऊपर हाथ रखा जो उस गैप से आ रही थी और अगले hi पल.......

मेरा और अवंतिका का शरीर भी उसी रौशनी में बदल गया और हम उस गैप के अंदर चले गए....

हमारे अंदर जाते hi वो गैप अपने आप भर गया और तभी............

जिस जगह पर मई खड़ा tha,theek उसी जगह पर एक काली आकृति अभृ और देखते hi देखते उस आकृति ने एक रूप ले लिया.....

सर से लेकर काले लबादों में ढाका हुआ वो शक्श उस वीरान गृह के बीच खड़ा मुस्कुरा रहा था.....

उसके हाथों में कुछ था जिससे उसकी उँगलियों ने ऐसे जकड़ा हुआ tha...ye कुछ और कुछ नहीं परिवर्तक था जिससे अपने हथेली की गिरफ्त में पकड़ ास्मोडियस एक तक उस जगह की देख रहा था जहाँ से होते हुए विक्रम और अवंतिका रौशनी में बदल अंदर चले गए थे....

मई- जिस गृह को मैंने पुरे ब्रम्हांड से हज़ारों वर्षों तक चुप्पा कर रखा था वहां मेरे भाई तुम ऐसे hi चले गए...

बिना मुझसे puche.....ye तोह गलत बात है और हर गलती की सजा मिलती है और तुम्हारी सजा है....

पूर्वापरी भवति......

कनेक्ट विथ एच इतर.....

ास्मोडियस ने परिवर्तक को ज़मीन के ऊपर रखा और स्पेल बोलै....

स्पेल बोलते hi परिवर्तक से इनविजिबल अनगिनत रेज़ निकलने लगी और हर तरफ फैले गयी.....

रेज़ निकल hi रहे थे की अचानक परिवर्तक जो की दिखने में गोल सा था और उसके बीच में एक लाल मणि जैसी कोई चीज़ राखी हुई thi,us मणि में लाल रौशनी उभरी....

लाल रौशनी के उभरते hi ास्मोडियस ने उसपर अपनी एक ऊँगली राखी और.......

मोकसायटी.....

देतच......

ास्मोडियस के स्पेल बोलते उस लाल मणि ने कुछ किया और उसका काम ख़त्म होते hi सारे रेज़ वापस परिवर्तक के अंदर समां गए.....

ास्मोडियस- मैंने अपने हिस्से का काम कर दिया है BHAI....par मेरा बाकी का बचा काम मई नहीं कर sakta,usse करने के लिए मुझे तुम्हारी ज़रुरत पड़ेगी.....

हाहाहाहाहा..............

इसी हसी के साथ ास्मोडियस गायब हो गया......

प्लेनेट- क्यूरियस

प्लेस- स्नो वैली

shhhhhh....kitni ठण्ड है यहाँ.....

रौशनी में बदलकर हम जिस जगह पर पहुंचे थे वो एक बर्फ की चादर ओढ़े हुए वाले थी....

इसीलिए अवंतिका को ठण्ड लग्न तोह नार्मल था....

COURIOUS....mere दूसरे पड़ाव की आखरी paheli.....jahan सूरज कभी नहीं उगता पर फिर भी हर तरफ बिछे बर्फ और स्नो की वजह से हमेशा हल्का हल्का उजाला रहता है....

मई चरों तरफ का जायज़ा ले hi रहा था जब अवंतिका ने अपनी बात कही जिसे सुनकर मई चौंक गया....

मेरे चौंकने का रीज़न अवंतिका को ठण्ड लग्न नहीं था बल्कि मुझे भी ठण्ड महसूस करना था...

हालांकि मुझपर ठण्ड का असर अवंतिका के मुकाबले काम tha,par फिर भी था तोह सही...

और ये कोई छोटी बात नहीं thi....jis बन्दे को सूर्य की गर्मी और बर्फ के अंदर की ठण्ड तक से कोई फर्क नहीं पड़ता उससे सिर्फ एक जगह पर खड़े खड़े ठण्ड lagna,zaroor कोई बड़ी बात थी...

और अगले hi पल मेरा शक यकीं में बदल गया क्यूंकि अवंतिका के शरीर को ठण्ड रहित बनाने के लिए मैंने अपना हाथ उसकी तरफ किया पर कुछ भी नहीं हुआ....

मतलब मई यहाँ मैजिक नहीं कर पा रहा tha.....apni साड़ी शक्तियों को देखने के लिए मैंने अपनी आखें बंद की और जो नज़ारा मेरे चित्त के सामने आया उससे देखकर मैंने झट से अपनी आखें खोल दी....

ये शॉक की वजह से हुआ tha...meri साड़ी शक्तियों को या यूँ कहूं मेरे शरीर की हर कोशिकाओं के आगे एक दीवाल सी बानी हुई थी जिसका मतलब ये था की मई अपनी शक्तियों का उसे नहीं कर सकता हूँ....

अवंतिका जो ठण्ड से ठिठुरते हुए मुझे देख रही thi,usse भी मेरे हर बदलते एक्सप्रेशंस को देखकर एहसास हो गया था की कुछ गड़बड़ है....

अवंतिका- कुछ प्रॉब्लम है क्या???

मई- hmm.meri सारे पावर्स यहाँ आते hi दे एक्टिव हो गए हैं....

अवंतिका मेरी बात सुनकर कर शॉकेड हो गयी...

अवंतिका- but,how's तहत पॉसिबल....

मैंने कुछ कहा नहीं बस नीचे बैठ गया और नीचे ज़मीं को जो की बर्फ से ढकी हुई थी उसमे अपना राइट हैंड हल्का धसा दिया...

मैंने अपनी आँखे बंद की और अपनी साड़ी इन्द्रियों को जागकर उस बर्फ नुमा ज़मीं को महसूस करने लगा.....

मेरी इन्द्रियों के जागृत होते hi मेरे अंदर मौजूद शक्तियों में खलबली मच गयी और वो उस दीवाल को जो उन्हें रोकी हुई थी उससे धक्का देने लगी....

इसमें वो पूरी तरह कामियाब तोह नहीं हुई पर ऐसा होने से मुझे हमरे सवाल का जवाब मिल गया और साथ hi एक और संतुष्टि पूर्व तथ्य भी मेरे सामने आ गया...

मई- ये पूरा गृह ास्मोडियस के श्राप की वजह से प्रभावित हो गयी है....

और ऐसी जगह पर सिर्फ एक डेविल hi अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता hai,koi एंजेल नहीं....

अवंतिका- तोह ab!!!bina तुम्हारे शक्तियों के hi हमे आगे बढ़ना होगा!!!!

मई- kyun,tum ज़्यादा देर चल नहीं पाओगी???

अवंतिका- मुझे ये तोह नहीं पता था की इस सफर में कैसी कैसी प्रोब्लेम्स aayengi,par इतना ज़रूर पता था की प्रोब्लेम्स आएँगी ज़रूर....

और मैंने तोह तुमसे पहले hi कहा था naa.ki जिसमे खतरा न ho,mujhe ऐसे सफर में जाना hi नहीं hai....maine तोह ये सवाल इसीलिए पूछा था क्यूंकि बिना तुम्हारे शक्तियों के हमे पता कैसे चलेगा की हमे जाना कहाँ है...

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यहाँ तोह दूर दूर तक किसी इंसान का नामोनिशान तक नहीं दिख रहा hai....aur जैसी ठण्ड यहाँ पर पढ़ रही hai,usme ज़्यादा सफर करना शायद मुमकिन ना हो....

मई- hmm...par हमारे पास कोई ऑप्शन भी तोह नहीं hai...par haan,ye सफर जितना भी मुश्किल और लम्बा क्यों ना ho,tumhe परेशां होने की ज़रुरत नहीं है....

मेरी अलौकिक ी मैं ANGEL'S शक्तियां काम नहीं कर rahi,par शारीरिक और मानसिक शकितियाँ अभी भी इन्टाक्ट है....

और इन शक्तियों के बल पर तोह मई तुम्हे अपनी गोद में उठाकर इस पुरे गृह का चक्कर लगा सकता हूँ...

ये कहकर मैंने अवंतिका को अपनी गोद में उठा लिया....

अवंतिका- अरे मई इतनी भी नाज़ुक नहीं hun....filhal मुझे चलने do....jab मई थक जाउंगी तब मुझे अपनी गोद में उठा लेना...

चलने से मेरी ठण्ड भी कुछ काम हो जायेगी....

मई- ठण्ड की चिंता मत करो....

ये कहकर मैंने अपनी आखें बंद की और एक और बार अपनी इन्द्रियों को जागृत किया....

मैंने अपने चित्त को अपने खून की तरफ मोड़ दिया और जैसे hi मेरा चित्त ने मेरे खून को chua,mera खून गरम होने लगा....

ये सब मेरे अंदर हो रहा tha...par ऐसा होते hi मेरी शरीर से हीट वेव्स निकलकर अवंतिका के अंदर सामने लगे और कुछ hi पलों में अवंतिका का शरीर वार्म हो गया...

अब उससे ठण्ड नहीं लग रही thi...apna काम ख़त्म कर जब मैंने अपनी आखें खोली तोह अवंतिका को खुदको घूरता पाया...

अवंतिका- तुम तोह कह रहे थे की तुम यहाँ मैजिक नहीं कर सकते...

मई- मैंने मैजिक नहीं kiya....ye सब तोह मेरी खुदके सेंसेस को अपने खून से जोड़ने की विद्या की वजह से हुआ hai....ye मुझे गुरूजी ( बाबा विशाखत ) ने सिखाई थी...

ये बोलते हुए मेरे चेहरे पर एक मुस्कान नाच गयी....

अवंतिका- क्या hua,has क्यों रहे हो...

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मई- कितनी अजीब बात है naa,mere पहले सफर( फर्स्ट chapter ) के अंतिम पड़ाव ( धवली झील ) के वक़्त भी मेरे पास कोई अलौकिक शक्तियां नहीं थी..

उस वक़्त भी मेरे चारों गुरुओं की दी हुई शिक्षा और प्रशिक्षण hi मेरे काम आयी thi....unhi के बल पर मई उस सफर में कामियाब हो पाया था....

और इस सफर ( सेकंड chapter ) के अंतिम पड़ाव ( स्वीट पाइजन ) के वक़्त भी वही shikhsha,wahi विद्या मेरे काम आ रही है....

पता है AV.....log जब बड़ी बड़ी मिलेस्तोनेस अचीव करते hain,toh अपने रूट्स भूल जाते हैं..

वो उन चीज़ों को और उन लोगों को भूल जाते हैं जिनकी वजह से उनकी सफर की शुरुआत हुई thi...unhe अपनी शुरुआती दौर की सीख और विद्या याद नहीं रहती...

और ना hi वो अचीवमेंट्स जो उन्हें उस शुरुआती विद्या की वजह से मिली thi...par बेवकूफ इतना भी नहीं समझते की उनकी शुरुआती vidhya,prashikshan hi उनके बड़े बड़े अचीवमेंट्स का बेस है....

अगर बेस hi नहीं रहता तोह वो कभी भी उचाईयों के शिखर पर नहीं पहुँच पाते....

( ऐटिटूड गाइस )

अपनी बात ख़त्म कर जब मैंने अवंतिका की तरफ देखा तोह पाया की वो मुझे hi एक तक देख रही है....

मई- क्या हुआ???

अवंतिका- जब तुम्हारी असलियत मुझे नयी नयी पता चली थी तोह मई हमेशा ये सोचती थी की तुम HI क्यों?

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पर अब साफ़ पता चलता है की तुम HI KYUN????ek बात kahun,tumhari शक्ति का श्रोत कोई एनर्जी नहीं तुम्हारी सोच है....

जब तक ये तुम्हारे साथ hai,tum हर इम्तिहान में पास होंगे....

MAI-galat..tum भूल रही हो की तुम मेरी क्या ho...SHAKTI.....jab तक तुम मेरे साथ ho,mai जितनी बार girunga,wapas खड़ा हो जाऊँगा....

में अवंतिका का हाथ थामा और हम अपने इस अनजान सफर पर निकल पड़े...

ये सिचुएशन काफी तेनसेद thi....manzil कितनी दूर hai,pata nahi,raaste में क्या क्या हो सकता hai,iska कोई अंदाज़ा nahi,meri hi शक्तियां मै अब उसे नहीं कर सकता tha,pure ब्रह्म्हाण्ड से मेरा संपर्क टूट चूका था...

इतने सारे निगेटिव्स के बीच भी अवंतिका का मेरे साथ होना मेरे normal,khush और पॉजिटिव रहने के लिए काफी था....

हसी मज़ाक करते हुए हम नजाने कितनी देर तक चलते rahe,hume पता hi नहीं चला और शायद आगे भी पता नहीं चलता अगर.....

मममममममम...............

इस आवाज़ के कान में पड़ते hi जहाँ मई सतर्क हो गया वहीँ अवंतिका ने दर के मेरा बाज़ू पकड़ लिया....

मई- डरो mat....kuch नहीं होगा...

अवंतिका- पर ये आवाज़.....

मई- बचो.......

ये बोलकर मई अवंतिका को लिए एक तरफ झुक गया.....

झुकने के अगले hi पल जब मैंने और अवंतिका ने सामने देखा...

जहाँ सामने देखकर मेरी सतर्कता और बढ़ गयी वहीँ अवंतिका का दर से बुरा हाल होने लगा....

अवंतिका- ये तोह.....

मई- भेड़िया है........

जी हाँ doston,is वक़्त मेरे और अवंतिका के सामने एक भेड़िया खड़ा था....

जिससे मैंने हमारे सामने आने से पहले hi महसूस कर लिया था और जैसे hi उसने मुझपर छलांग lagayi,mai अवंतिका को साथ लेकर झुक गया....

AVANTIKA-par इसका साइज इतना ज़्यादा कैसे है और इसकी aankhen,baar बार रंग क्यों बदल रही है....

मई- पहले तोह तुम ये डरना बंद karo....maine कहा ना की कुछ नहीं होगा...

आउच.........

ये आवाज़ अवंतिका के मुँह से निकली thi....reason.....hum बात कर hi रहे थे की वो भेड़िया जो की हमसे कुछ फ़ीट दूर हमारे सामने खड़ा tha,usne हमपर छलांग लगा दी....

पर मई सतर्क tha....uske छलांग लगते hi मैंने भी अवंतिका के कमर को पकड़ा और छलांग लगा दी....

हम दोनों का शरीर हवा में तैरता हुआ भेड़िये के ऊपर से होता हुआ वहां लैंड हुआ जहाँ कुछ देर पहले वो भेड़िया खड़ा था....

क्यूंकि ये सब बोहोत जल्दी हुआ था इसीलिए अवंतिका के कमर को होल्ड करते वक़्त मैंने अपना गृप हल्का टाइट रखा था जिस वजह से अवंतिका के मुँह से आउच निकल गया था...

मई- इस गृह की hi तरह इस भेड़िये के ऊपर भी श्राप का कुछ असर हुआ hai....iski आँखें जो कभी काली और कभी सफ़ेद हो रही हैं ये उसी वजह से hai....aur इसकी हैघट भी ब्लैक एनर्जी का साइड इफ़ेक्ट है.....

अवंतिका- तोह अब.....!!!!

मई- अब ये.......

MMMMM...MMMMM....MMMMMM............

ये आवाज़ भेड़िये के मुँह से आ रही थी जो इस वक़्त मेरे दोनों हाथों के गिरफ्त में था...

हुआ ये की जब मई अवंतिका को उस भेड़िये के बारे में बता रहा था तभी उसने दोबारा हमारे ऊपर छलांग लगा दी...

पर इस बार मैंने हम दोनों को डिफेंड करने की नहीं बल्कि इस मटर को जल्दी से निपटने का डीडे किया...

जैसे hi भेड़िया अपना मुँह फाड़े मेरे करीब aaya,maine अपने दोनों हाथों से उसके जॉब्स को ऊपर और नीचे से पकड़ लिया और अगले hi पल......

भेड़िया का मुँह दो भागों में बात चूका tha....maine भेड़िये के दोनों जॉब्स को पकड़कर फाड़ दिया था.....

एक अजीबोगरीब आवाज़ के साथ भेड़िया गिर गया और उसकी मौत हो गयी.....

अवंतिका- haash....bala ताली......

मई- ये प्रॉब्लम नहीं सलूशन थी....

अवंतिका- मतलब!!!!!

मैंने कुछ कहा नहीं बस उस भेड़िये के मुँह से जहाँ से फटने की वजह से खून निकल रहा tha,us खून को अपने उंगलयों में लिया और अगले hi पल मेरी आँखें बंद हो चुकी थी...

मैंने अपनी इन्द्रियां एक बार फिरसे जागृत की और जैसे मैंने अपने खून को महसूस किया tha,thik वैसे hi उस भेड़िये के खून को भी महसूस करने लगा.....

और कुछ hi पलों में उस भेड़िया की ज़िन्दगी का पूरा सफर मेरे बंद आँखों के आगे नाच गया....

और इसी के साथ मुझे मेरी काम की चीज़ भी दिख गयी....

मई- chalo..ab मुझे पता है की हमे कहाँ जाना है.....

मेरी बात सुनकर अवंतिका शॉकेड हो गयी...

अवंतिका- कैसे???

मई- अरे अभी जो मैंने इसके खून को अपने उँगलियों में लिया tha,wo हमारी मंज़िल को ढूंढ़ने के लिए hi तोह किया था.....

अवंतिका- मतलब?

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मई- हम तोह यहाँ अभी आये हैं पर ये भेड़िया तोह यहीं का है naa...toh इसने यहाँ की हर जगह देखि हुई है....

मई इसके खून से हर उस जगह को देख रहा था जहाँ जहाँ ये गया hai....aur इसी दौरान मुझे वो जगह भी दिखी जहाँ मई अपने सपने में पहुंचा था.....

अवंतिका- wow....chalo fir.....waise वो जगह यहाँ से कितनी दूर है.....

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?

मई- ज़्यादा nahi...yahi कुछ 100 कंस......

अवंतिका- व्हाट!!!!!100 kms...aur तुम इससे ज़्यादा नहीं कह रहे ho...tum भूल रहे हो की अब तुम्हारे पास तुम्हारी पावर्स नहीं हैं...

फिर हम....

मई- correction....mere पास सिर्फ मेरी हीवेनली पावर्स नहीं hai.....par जब मई वो नहीं था जो अब hun,tab भी मैंने काफी कुछ सीखा था जो ऐसे टास्कस के लिए परफेक्ट है.....

अवंतिका- ok..toh fir......!!!arreeee,,,,,,oh..my god........itna स्पीड..........

अवंतिका अपनी बात पूरी करती उससे पहले hi मैंने उससे अपनी पीठ में बैठ लिया और अगले hi पल......

मई दौड़ रहा tha.....aapko याद होगा की अक्षांत ने मुझे हवा की तरह दौड़ने की कला सिखाई thi.....aaj वही कला मेरे काम आ रही थी....

पर इस गृह के नेगेटिव एनर्जी की वजह से मेरी स्पीड जितनी होनी चाहिए उतनी नहीं थी फिर भी काफी थी....

मेरे अचानक अवंतिका को अपनी पीठ पर बिठाने पर अवंतिका शॉकेड हुई और मेरी स्पीड देखकर डबल शॉकेड....

पर मैंने उससे फ़िलहाल कुछ भी नहीं कहा क्यूंकि एक तोह इतनी स्पीड में उससे कुछ सुनाई नहीं देता और dusra,ab जब मैंने अपने सपने वाली जगह देख ली thi,toh वहां पहुँचने से पहले मई कुछ कहना नहीं चाहता था....

मई- finally......hum पहुँच गए.....

कुछ hi मिनटों की दौड़ के बाद हम उस मोड़ के पास थे जहाँ से मेरे सपने की शुरुआत हुई thi...humse कुछ hi दूर पर कुछ कच्चे पक्के से घरों का कॉलोनी सा बना हुआ tha...ye वही जगह थी जहाँ मई उस लड़की के पीछे पीछे गया था.....

AVANTIKA-yaar,speed इतनी थी की मेरी आँखों से आंसू निकल कर सुख भी गए....

पर जब मैंने अवंतिका की बात का कोई जवाब नहीं दिया तोह उसने मेरी तरफ देखा तोह मुझे सामने की तरफ देखता पाया...

अवंतिका- हमे यहीं जाना है???

मई- hmm....yahi रहते है वो लोग जो नजाने कितनी सदियों से तड़प रहे हैं....

अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बस मेरा हाथ थाम लिया....

मई- हमे अब और देरी नहीं करनी chahiye...chalo,milte है यहाँ के लोगों से और जानते है की क्या है ये कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन......

हम दोनों आगे बढ़ गए.......

प्लेनेट- थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स

प्लेस- पैलेस हॉल

लार्ड CRUSEDAR-kaun हो तुम!!!!!

आह्ह्ह्ह........

प्लेनेट- इस्ला

प्लेस- पैलेस हॉल

किंग सोलोमन- कौन हो तुम..

अह्ह्ह्हह........

PLANET-GLUTO

PLACE-PALACE हॉल

शैला- कौन हो तुम?

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अह्ह्ह्हह........

PLANET-COURIOUS

प्लेस - डेस्टिनेशन

ये जगह तोह पूरी खाली hai....koi दिख hi नहीं रहा.....

पर मैंने अवंतिका से कुछ कहा नहीं बस इधर उधर देखता रहा.....

अवंतिका- क्या hua???kya देख रहे हो???

मई- यहाँ एक गली होनी chahiye....mai उसी गली से होकर आगे गया tha....wo dekho,wo रही....

मैंने एक तरफ पॉइंट किया जहाँ एक संकरी सी गली थी....

मई और अवंतिका उस और बढ़ गए...

जब से हम दोनों उस कॉलोनी नुमा जगह पर पहुँचनहे the,tabhi से मुझे कुछ अजीब सा फील हो रहा था...

शायद इसीलिए क्यूंकि यहाँ पहुंचकर मई उस दर्द को और ज़्यादा महसूस कर पा रहा था जो यहाँ के लोग नजाने कितनो वर्षो से बर्दाश्त करते आ रहे थे....

आगे क्या hoga,is सच से अनजान हम दोनों उस संकरी गली से होते हुए चलने लगे जो थोड़ी लम्बी थी पर कुछ देर चलने के बाद उस गली का अंत आ गया...

अब हम बर्फ के एक बड़े से मैदान में खड़े the.....humse थोड़ी दूर एक छोटा सा घर tha,bas और बाकी पूरी जगह खाली थी....

अवंतिका- ab???sapne में तुम यहाँ से कहाँ गए the....saamne वाले घर में.....!!!

मई- हम्म.

हम दोनों उसी माकन की तरफ चल पड़े और माकन के दरवाज़ा पे पहुँच मैंने उससे खटखटाया पर.........

मेरे हाथ लगते hi दरवाज़ा खुलता चला गया इसका मतलब उससे बस यूँही अटका कर रखा गया था...

khair,hum दोनों अंदर चले गए पर अंदर कोई नहीं था....

अवंतिका- यहाँ तोह कोई भी नहीं है....

मैंने कुछ कहा नहीं बस हम जहाँ खड़े थे उसके पीछे एक खिड़की thi,wahin से मई बहार की तरफ देख रहा था.....

अवंतिका- क्या hua,wahan कोई दिखा क्या??

मई- nahi..par पता नहीं मुझे ऐसा लग रहा है जैसे वहां कोई है....

अवंतिका जानती थी की मेरी सिक्स्थ सेंस शुरू से स्ट्रांग रही है इसीलिए....

अवंतिका- तोह चल कर dekhen...kahin न कहीं तोह जाना hi होगा तोह वहीँ चलते हैं...

मई- हम्म....

मई और अवंतिका घर से बाहर आये और उसी तरफ चल पड़े....

कुछ देर तक आगे चलने के बाद मेरे चेहरे पर ख़ुशी चमकने लगी और जब मैंने अवंतिका की तरफ देखा तोह उसके चेहरे पर भी शामे भाव थे...

अवंतिका- ु फाउंड थम...

मई- वे फाउंड थम.....

मेरी और अवंतिका की चाल और तेज़ हो gayi..hoti भी क्यों naa,jinke लिए हम इतनी दूर आये hain,hume आखिर वो मिल जो गए थे....

वहीँ सामने...........

1सत- PERSON-aakhir मेरा भी वक़्त आ hi gaya....is दर्द और अँधेरे की दुनिया से वापसी का.....

क्यूरियस के बचे हुए 1000 लोग इस वक़्त एक पेड़ की नीचे इकठ्ठा हुए the...wo बूढी औरत उसी पेड़ के निचे अपनी आखरी साँसें लेना चाहती थी...

और इसका कारण ये था की किसी ज़माने में क्यूरियस में उन पेड़ो की भरमार थी या फिर ये कहूं की क्यूरियस में सिर्फ वही पेड़ हुआ करते थे जो की अब विलुप्त हो चुके है बस एक वही पेड़ है जो बचा हुआ है...

पर उसकी हालत भी कुछ अछि नहीं hai..naa तोह उस पेड़ में कोई पत्ता बचा था और न कोई FAL....puri तरह सुख चूका था वो पेड़....

उस बूढी की बात का किसीने भी कोई जवाब नहीं diya..sabhi चुप चाप आंसू बहते खड़े रहे की तभी.....

आह्ह्ह्ह..........

अह्ह्ह्हह........

ऐसी hi दर्द भरी आवाज़ एक एक करके वहां मौजूद सभी लोगों के मुँह से निकलने lagi..unhone तुरंत कुछ खाया जिसके खाते hi उसका उनके साथ जो हो रहा tha,wo होना रूक गया...

बूढी- ANALIA,tumhari दादी के अंतिम वक़्त में जो कुछ भी hua,aur उसके बाद तुम्हारी दादी ने जब बताया की हमारी मदद करने के लिए हमारे उद्धारकर्ता aayenge,usse सुनकर एक उम्मीद जगी thi,par अब वो उम्मीद भी टूट रही है....

उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना CHAHIYE..KYUNKI उम्मीद वो रस्सी है जिसका एक सिरा परमेश्वर के हाथों में होता है और दूसरा हमारे...

अपने सिरे की रस्सी को छोड़ने का मतलब है भगवन को छोड़ना...

ये आवाज़ उन सब लोगों के पीछे से आयी थी जिससे सुनकर सभी चौंक गए और जब उन सब ने अपने पीछे पलट कर देखा तोह उनकी हैरानी का कोई ठिकाना नहीं रहा.....

जब से क्यूरियस शापित हुआ hai,aaj पहली बार वहां के लोगों ने अपने सामने किसी अन्य गृह के मनुष्य को देखा था..

ऐसा कुछ होने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी....

एक हैंडसम सा लड़का और एक ख़ूबसूरत सी ladki,jo उन सब को मुस्कुराते हुए देख रहे थे....

मई जो मुस्कुराते हुए सभी को देखा रहा tha,aur इंतज़ार कर रहा था की वो सब शॉक से बाहर आएं तोह मई कुछ kahun,par इससे पहले की वो सब शॉक से बाहर aate,kisiko देखकर मई शॉकेड हो गया....

वो बुद्धि औरत जो की एक खाट पर लेती हुई thi,usne भी मेरी आवाज़ सुनी thi....wo भी धीरे धीरे उठी और वो भी बाकियों की तरह मुझे और अवंतिका को देखकर शॉकेड हो गयी....

मई जिससे देखकर शॉकेड हुआ tha,wo भी अपने आखों में हैरत लिए मेरी तरफ आने लगी.....

जी हाँ doston,wo एक लड़की थी जिससे देखकर मई शॉकेड हो गया tha,KYUN....ab सारे राज़ इसी अपडेट में तोह नहीं खोल सकता naa,kuch बेस 3रद chapter का बनाना भी ज़रूरी है....

khair,wo लड़की अब तक मेरे करीब आ चुकी थी.....

लड़की- कौन है आप?

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उस लड़की की आवाज़ सुनकर मई फिर chownka..kyunki ये आवाज़ मैंने अपने सपने में सुनी थी पर उस वक़्त मुझे उसका चेहरा धुंदला सा दिखा था जिस वजह से मई उससे देखते hi नहीं पहचान पाया था....

मई- आप अनलिए hain...haina....

मेरी बात सुनकर वो और उसके पीछे पीछे वहां खड़े सारे लोगों के दिमाग में शार्ट सर्किट होने लगे...

अनलिए- ाआपपपपप ककोऊ मिरररा नामममम कैईसीए पाटता छालल्ला...

अनलिए ने लड़खड़ाती आवाज़ में अपनी बात कही पर इससे पहले की मई उससे कोई जवाब देता

आह्ह्ह्ह.....

अह्ह्ह्हह......

ये दर्द भरी आवाज़ वहां मौजूद हर क्यूरियस वासी के मुँह से एक के बाद एक निकलने लगी...

किसी के हाथ पर एक कट लग रहा था तोह किसी के पाऊँ पर तोह किसी के चेहरे पर....

पर फिर उन सब ने कुछ खाया जिससे उस कट से बने घाव बने the,wo अपने आप भर गए.....

जहाँ अवंतिका ये सब देखकर शॉकेड और दुखी हो रही thi,wahin मई कुछ सोच रहा था और इससे पहले की कोई कुछ कहता...

मई- तोह यही है कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन.....

मेरी बात सुनकर सभी फिरसे शॉकेड हो gaye..par जहाँ अवंतिका ये सुनकर कर शॉकेड थी की यही वो कर्स है जिससे ठीक करने के लिए हम यहाँ आये है वहीँ क्यूरियस वासी ये सोचकर शॉकेड थे की मुझे कैसे पता की वो किस कर्स से ग्रसित हैं....

अनलिए- आपको कैसे पता हमरे श्राप का नाम और आपने अब तक नहीं बताया की आप है kaun,yahan कैसे आ गए और आपको मेरा नाम कैसे पता???

मई- मई वहीँ जिसका ज़िक्र आपकी दादी ने किया था....

यहाँ मेरी बात ख़त्म हुई वहां कुरियस वासी अपने घुटनो पर आ गए.....

सबकी आँखों से आंसू निकल pade.rote तोह वो सब श्राप के मिलने के बाद से hi आ रहे थे पर आज नजाने कितने सदियों बाद उनके आंसू दुःख के नहीं बल्कि ख़ुशी के थे....

मई- उठ jaayiye...maana मई वहीँ हूँ जो आपकी मदद कर सकता है पर मई कोई उद्धारकर्ता नहीं hun..mujhe बस जो काम सौंपा गया hai,mai उन्हें पूरा कर रहा हूँ....

और ANALIA,maine आपको अपने सपने में देखा tha..par आपके चेहरे से अनजान था क्यूंकि सपने में आपका चेरा धुंदला था पर आपकी आवाज़ मुझे साफ़ सुनाई दी थी...

और आप मेरे सपने में इसी कर्स के बारे में बात कर रही थी इसीलिए मुझे इसके बारे में पता है....

मेरे बोलने के बाद भी सभी क्यूरियस वासी अपने घुटनो पर भी थे और एक तक मुझे देखते हुए मेरी बातें सुन रहे थे....

मई- कृपया खड़े हो जाइये.....

मेरे दोबारा बोलने पर सभी खड़े हो जाइये.....

पर उनमे से कोई कुछ कहता उससे पहले hi...

आह.....

अह्ह्ह.....

जैसा उन लोगों एक साथ हमेशा से होता आ रहा hai,wo फिर hua..ek लम्बा cut,aur कट आते hi उनके हाथों में जो फल था उससे उन्होंने खाया जिससे खाते hi वो कट गायब हो गया...

मई उस फल को ध्यान से देख रहा tha...wo फल एप्पल की तरह दिख रहा था पर उसका साइज एप्पल से बड़ा था....

मई उस फल को देख hi रहा था की तभी मई चौंका..

और मेरे चौंकने की वजह ये थी की जिस फल का बाईट उन्होंने लिया tha,cut के भरते hi उस फल की बाईट की हुई जगह फिरसे भर गयी थी....

ANALIA-mere मालिक.... कृपया हमारी मदद karen.....is कर्स से हमें मुक्ति दिलाइये.....

मई- पहली baat,mujhe मालिक ना kahen...mera नाम विक्रम hai..mujhe इसी नाम से सम्बोधित करें...

और दूसरी baat,mujhe अब तक नहीं पता की इस कर्स को कैसे ख़त्म किया जा सकता है...

सब- क्या?

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??

मेरी बात सुनकर सब पहले शॉकेड हुए फिर udaas...unke दिल में जो उम्मीद की किरण जाएगी थी वो वापस मिटने लगी....

अनलिए- तोह अब?

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मई- अब kya????aap सब ने मेरी बात ठीक से सुनी nahi...maine कहा की अब तक मुझे नहीं पता की कर्स को कैसे ख़त्म किया जा सकता hai,ye नहीं की मुझे पता hi नहीं चलेगा...

सभी मेरी तरफ सवालिए नज़रों से देखने लगे....

अवंतिका- पहले ये तोह बताइये की ये कर्स है kya??mera मतलब ये cut,uspe आप सब का फ्रूट खाना जिससे कट मिट जाना उसके बाद फिर ये sab..aakhir ये कैसा श्राप है...

MAI-hmm..mujhe नहीं लगता बात बस ये कट और इस फल की hai....kuch बात और भी है जो इन सब से बड़ी है पर मुझे लग रहा है की वो बात भी इस फल से जुडी हुई hai....haina अनलिए....

अनलिए- हाँ.....

अवंतिका- तोह बताओ ना की आखिर असल बात क्या है और ये कर्स तुम्हे दिया hi क्यों गया???

मई- अनलिए तुम अवंतिका को batao,tab तक मई अपना काम शुरू करता हूँ....

अवंतिका- शुरू करता hun!!!!kya तुम यहाँ की पूरी सच्चाई नहीं जानना चाहोगे???

मई- मुझे अपने आप पता चल जाएगा...

अवंतिका- अपने aap!!!wo कैसे???

पर मैंने कुछ कहा नहीं और तुरंत अनलिए के हाथ से फल को ले लिया...

अवंतिका- V.JJJ..........

पर इससे पहले की अवंतिका कुछ और कह paati,maine उस फल का एक बाईट कर लिया था.....

मई- ये तोह बोहोत मीठा है.....

अवंतिका- अरे ु आउट ऑफ़ ुर mind.....ye एक कुर्सेद फ्रूट hai..aur तुमने इससे खा लिया....

अवंतिका की hi तरह अनलिए और वहां मौजूद सभी क्यूरियस ासी मेरे यूँ उस फल को खाने से चौंक भी गए थे और दर भी गए थे ये सोचकर की अब क्या होगा???

वही अवंतिका लगातार मुझे डांटे hi जा रही थी पर मुझे उसकी बात सुनाई देना बंद हो गया था.....

मेरी आँखें भी बंद हो गयी और.......

फल को खाते hi क्यूरियस किस sachaayi,ASMODEUS का यहाँ आने का मकसद और फिर यहाँ के लोगों का श्रापित hona,sab कुछ मेरी बंद आँखों के आगे घूमने लगा...

आईये आप भी जान लीजिये आखिर कौन हैं ये क्यूरिऑस वासी और क्या है ये कर्स ऑफ़ थे स्वीट पाइजन......

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?

COURIOUS.......CURSE से पहले यहाँ की आबादी 10 थाउजेंड thi......COURIOUS में बच्चे नार्मल तरीके से पैदा नहीं होते थे...

बल्कि यहाँ की हर औरत की कोख में उसके मातुरे होते hi एक ऊर्जा पनपती थी...

इस ऊर्जा में वाइट एनर्जी का भंडार होता tha...aur इसी ऊर्जा से यहाँ बच्चे जन्म लेते the...yahan के लोग 10000 से ज़्यादा साल तक जीते थे....

क्यूरियस वासियों को एक और नाम से जाना था और वो नाम था GOD'S प्रीचर्स.......

यहाँ के लोग ब्रम्हांड के हर गृह में जाकर वहां के लोगों को गॉड के बारे में अवगत करते थे......

वो उन्हें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते the.....unme इतना तेज होता था की डेविल्स उनकी ऊर्जा के दायरे में भी आने से डरते थे क्यूंकि ऐसा करने पर उन सबके शरीर जलने लगते थे....

जैसा की मैंने बताया की यहाँ पर बचे वाइट एनर्जी की मदद से पैदा होते the,par ये वाइट एनर्जी सिर्फ यहाँ के लोगों को hi नहीं मिलती थी बल्कि इस गृह में एक और चीज़ थी जिससे वाइट एनर्जी का गिफ्ट मिला हुआ था....

और वो चीज़ थी कौरीन TREE.....is पेड़ में लगातार वाइट एनर्जी पड़ती thi.....aur उसी एनर्जी से पैदा होते थे सौरिस फल......

क्यूरियस वासी या फिर कहूं GOD'S प्रीचर्स खाने के नाम पर बस इस सौरिस फल को खाते थे...

पर उस वक़्त सौरिस फल का स्वाद खट्टा था.....

यही उनका आहार tha..is फल को खाने से उनके अंदर की वाइट एनर्जी लगातार ृविवे होती रहती थी.....

कौरीन ट्री से hi क्यूरियस गृह की नीव राखी गयी thi....isiliye क्यूरियस वासी कौरीन ट्री को मदर ट्री भी कहते थे...

और जैसा की मैंने बताया की कौरीन ट्री में लगातार वाइट एनर्जी पड़ती रहती थी इसीलिए उस वाइट एनर्जी की पावर को हैंडल करने के लिए कौरीन ट्री ने खुदको पुरे गृह में डिवाइड करना शुरू किया और इसी तरह पूरा क्यूरियस गृह कौरीन ट्री और उसपर फैलने वाले सौरिस फल से भर गया....

पर इसके बावजूद वाइट एनर्जी की मात्रा बोहोत ज़्यादा थी जिसकी वजह से कभी कभी क्यूरियस गृह विबरते होने लगता था....

इसीलिए क्यूरियस गृह के लोगों ने एक्स्ट्रा वाइट एनर्जी को कहीं ट्रांसफर करने का सोचा....

जैसा की मैंने बताया की GOD'S प्रीचर्स पुरे ब्रम्हांड में जाकर गॉड का सन्देश पहुंचते थे इसीलिए वो पुरे ब्रम्हांड और वहां रहने वाले लोगों को अछि तरह पहचानते थे....

उन्हें कोई भी गृह इस लायक नहीं लगा जिससे वो वाइट एनर्जी दे सकें....

और इसीलिए उन सब ने ये फैसला किया की वो अपनी शक्ति को वाइट एनर्जी के साथ मिलकर एक नए गृह का निर्माण करेंगे और उन्होंने ऐसा hi किया....

वाइट एनर्जी में अपनी सचाई की शक्ति को मिलाया और उस एनर्जी को उन्होंने एक आकाश गंगा एक आखरी छोर पर एक छोटे से वीरान गृह पर छोड़ना शुरू किया और देखते hi देखते वो वीरान गृह इस ब्रम्हांड का सबसे ख़ूबसूरत गृह बन गया जिसका बाद में चलकर नाम रखा गया इस्ला......

और उस एक्स्ट्रा वाइट एनर्जी ने भी खुदको एक नया रूप दे दिया और उस नए रूप का नाम था फाउंटेन ऑफ़ लाइट......

पर अचे कर्मो की चमक सिर्फ अछि जगह और अच्छे लोगों को hi नहीं बुरी जगह और बुरे लोगों को भी दिखाई देती है....

और ऐसी hi एक बुरी नज़र को क्यूरियस और क्यूरियस वासियों में वास करते वाइट एनर्जी के बारे में पता चल गया...

ास्मोडियस.........

ास्मोडियस को ये भी पता चल गया की वाइट एनर्जी के एक बोहोत बड़े श्रोत को क्यूरियस वासियों ने किसी प्लेनेट को गिफ्ट किया है.....

पर वो ये नहीं जान पाया की आखिर वो प्लेनेट कौन सा है...

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इतनी असीमित ऊर्जा के केंद्र क्यूरियस के बारे में जानकार और उस ऊर्जा को अपना बनाने के मकसद से क्यूरियस पहुँच गया.....

ास्मोडियस के नाम से क्यूरियस वासी भी अनजान नहीं थे पर उन्हें ये देखकर शॉक लगा की एक शैतान उनके गृह में कदम कैसे रख पा रहा है जबकि कोई भी ब्लैक एनर्जी उनके आस पास भी नहीं भटक पाती थी.....

इससे उन्हें ये अंदाज़ा हो गया की भले hi अब ास्मोडियस कोई एंजेल नहीं रहा पर वाइट एनर्जी के कण अब भी उसके अंदर मौजूद हैं....

ास्मोडियस ने उन सबके सामने अपनी डिमांड राखी की वो उससे उस शक्ति श्रोत ( इस्ला ) के बारे में बताएं जिससे उन सब ने खारिज कर दिया....

तब ास्मोडियस ने उन्हें वारं किया की अगर वो उससे उनकी ऊर्जा नहीं देंगे तोह वो उन सब की ज़िन्दगी मौत से भी बदतर कर देगा पर क्यूरियस वासी तब भी नहीं माने....

पर उन्हें आस्चर्य तब हुआ जब ास्मोडियस ने उन्हें कुछ नहीं किया और गायब हो गया....

उन सभी को लगा की ास्मोडियस उन सब को बस कोरी धमकी दे रहा था और कुछ नहीं और यहीं वो देखा खा गए.....

रात के 3 पहर में एक काला साया क्यूरियस के बीच utra....aur वो चलता हुआ एक कौरीन ट्री के पास pahuncha...ye कौरीन ट्री वही पेड़ था जिससे क्यूरियस वासी मदर ट्री कहते थे और जिस पेड़ से hi बाकी के कौरीन ट्रीज ने जन्म लिया था....

ास्मोडियस को पता था की ये पूरा गृह और बाकी के सभी कौरीन ट्रीज इसी मदर ट्री से जुड़े हुए हैं.....

विभजते स्वः पुर्नः शक्ति.......

एंटर माय कम्पलीट पावर......

ास्मोडियस ने कौरीन ट्री को छूकर इस स्पेल को बोलै और अगले hi पल........

ास्मोडियस के शरीर से उसकी साड़ी urja,uski साड़ी शक्ति बहार आने लगी...

ऐसा होते hi ास्मोडियस को बोहोत दर्द और कमज़ोरी महसूस होने लगी जिस वजह से वो खड़ा नहीं हो पाया और घुटनो के बल बैठ गया...

और अगले hi पल.........

ास्मोडियस के शरीर की साड़ी ऊर्जा कौरीन ट्री में सामने लगी और ऐसा होते hi......

पुरे क्यूरियस गृह में कम्पन होने lagi.......kampan इतनी तेज़ और ज़्यादा थी की सभी कुरिओउस वासी अपने घरों से बाहर आ गए और जैसे hi वो अब कौरीन ट्री के पास pahunche,sabko एक तेज़ झटका लगा....

मदर ट्री सूखने लगी thi...uske सारे फल भी गाल गाल कर निचे गिरने लगे थे और मदर ट्री के साथ ऐसा होते hi क्यूरियस की बाकी की कौरीन ट्रीज गायब होने लगे और कुछ hi देर में पूरा क्यूरियस पेड़ रहित हो गया.....

बची तोह बस मदर ट्री और वो भी अब पूरी तरह सूख चुकी thi....doston,ye वही ट्री है जिसके नीचे मेरे आने तक वो बूढी औरत लेती हुई थी....

khair,MOTHER ट्री के सूखते hi उसके अंदर से ास्मोडियस की काली शक्तियां निकली और वापस ास्मोडियस के अंदर समां गयी....

कुछ hi पलों में ास्मोडियस पहले की तरह हो गया और ठीक होते hi वो खड़ा हो गया...

अभी तक किसी की नज़र ास्मोडियस पर नहीं गयी थी पर जैसे hi वो खड़ा hua,sabhi उससे देखकर चौंक गए....

ास्मोडियस- मैंने कहा था ना GOD'S PREACHERS.....agar मरी बात नहीं मानी तोह मई तुम सब की ज़िन्दगी मौत से भी बदतर बना दूंगा.....

अब भुगतो.....

ये कहकर अकस्मादेउस ने अपने हाथ failaye....uski आँखों की सफ़ेद पुतियाँ और गहरी सफ़ेद हो गयी और ऐसा होते hi......

पुरे क्यूरियस गृह में स्नो फॉल शुरू हो गयी.....

ास्मोडियस- अब यहाँ पर सूर्यौदय कभी नहीं hoga.....yahan की रौशनी इसी बर्फ की वजह से होगी जो की मेरा प्रतिक है....

अब आते हैं आप सब पर तोह मैंने सुना है की आप सब का आहार बस एक फल है.....

और वो फल इसी पेड़ में होता था पर अब तोह ये पेड़ रहा नहीं तोह अब क्या करें?

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फ़िक्र मत kijiye....maine एक फल आप सबके लिए बचा कर रखा है.....

ये कहकर ास्मोडियस ने अपने सीने पर हाथ रखा और अगले hi पल उसके सीने से कौरीन फल बाहर निकला...

ास्मोडियस ने कौरीन फल का एक बाईट लिया....

ास्मोडियस- अरे ये तोह खट्टा hai....mujhe पसंद नहीं....

ये कहकर ास्मोडियस ने अपनी काली शक्तियों को जागृत किया और उन शक्तियों को अपने ऊँगली के ज़रिये कौरीन फल में ट्रांसफर करने लगा....

और जैसे hi ास्मोडियस ने उस फल में अपनी काली शक्तियां ट्रांसफर ki,wo बाईट जो ास्मोडियस ने उस फल की ली thi,wo जगह भर गयी....

ास्मोडियस ने दोबारा उस फल की एक बाईट ली...

ास्मोडियस- haan,ab ठीक है.....

ास्मोडियस के बाईट लेने के अगले hi पल वो कौरीन फल का बाईट वाला हिंसा फिर भर गया....

ास्मोडियस- जानते हो मैंने जो काली शक्ति इस फल के अंदर डाली hai,wo किसी भी डेविल के लिए एक वरदान hai,ek ब्लेसिंग है पर तुम्हारे लिए एक श्राप है एक कर्स है....

जानना नहीं chahoge,kaisa CURSE.....lo,khud पता कर लो....

ये कहकर ास्मोडियस ने उस फल को सामने उछाल दिया और तभी.......

वो एक फल हज़ारों फलों में डिवाइड हो गया और सभी क्यूरियस वासियों के आगे हवा में रूक gaya...par किसीने भी उस फल को हाथ नहीं लगाया...

ास्मोडियस- तुम सीधे चलने वाले लोगों को कोई भी सीधी बात सीधे तरीके से समझ क्यों नहीं आती है....

और अगले hi पल......

mmmm...mmmmmmm.....

ये आवाज़ क्यूरियस के कुछ लोगों के मुँह से निकल रही thi..kaaran,un सब का शरीर हवा में उठ गया था और उन्हें ऐसा लग रहा था मानो कोई उनका गाला दबा रहा हो...

1सत क्यूरियस वासी- इन्हे कुछ मत karo...hum खाते हैं....

उसके कहते hi वो सभी लोग जो हवा में चटपटा रहे the,wo नीचे आ गए...

उन सब ने काम्पटी हाथों से अपने सामने हवा में रुके फल को पकड़ा और जैसे hi उसका बाईट लिया....

क्यूरियस वासी- ये तोह.....

ास्मोडियस- मीठा हो गया ना......

सब- हाँ....

अह्ह्ह्ह......

अह्ह्ह्ह......

अह्ह्ह्हह.......

लगातार ऐसी hi दर्द भरी आवाज़ें क्यूरियस वासियों के मुँह से निकलने lagi...sabhi के बॉडी पार्ट्स पर लगातार गहरे कट्स होते जा रहे थे..

ास्मोडियस- ठीक होना चाहते हो तोह फल का एक बाईट लो.....

ास्मोडियस की बात सुन और दर्द को ना बर्दाश्त कर पाने की वजह से उन सब ने फल का एक बाईट लिया और ऐसा करते hi उनके कट्स गायब हो गए.....

ASMODEUS-hahahaha........jaante हो तुम सब ने क्या किया hai......is फल को खाकर तुमने अपनी वाइट ेनेर्गीएस को मेरी ब्लैक एनर्जी का गुलाम बना लिया है.....

तुम्हारी साड़ी वाइट ेनेर्गीएस अब मेरी ब्लैक ेनेर्गीएस की बंधक हैं...

और जब जब तुम्हरी वाइट एनर्जी मेरे ब्लैक ेनेर्गीएस को धक्का देकर बाहर आने की कोशिश karengi,tumhare शरीर पर कट्स पड़ते जाएंगे...

और उस कट को ठीक करने के लिए तुम्हे इस फल का एक बाईट लेना padega....par ऐसा करते hi तुम्हारी वाइट ेनेर्गीएस थक कर वापस थोड़ी देर के लिए सो जाएंगी.....

और एक बाद याद rakhna,agar तुमने अपनी वाइट एनर्जी को बाहर लाने के लिए अपनी कुर्बानी देने की सोची bhi,toh जिस गृह को तुमने वाइट ेनेग्री भेट में दी hai...wo भी तुम सब के साथ नष्ट हो जाएगा.....

क्यूरियस वासी- तुम हमारे साथ ऐसा क्यों कर रहे ho???akhir हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है???

ास्मोडियस- तुम मेरा कुछ बिगड़ भी नहीं sakte..par ास्मोडियस की हर मांग पूरी होनी चाहिए और जो ऐसा नहीं karega,usse सजा मिलेगी....

और ये है तुम्हारी saza....jo फल तुम्हे वाइट एनर्जी देता tha,wahi फल अब तुम्हारे अंदर मौजूद मेरी काली शक्तियों की रक्षा करेगा....

जो तुम्हारा वरदान tha,ab वो तुम्हारा श्राप बन चूका hai....aur वो भी मीठा SHRAAP......CURSE ऑफ़ थे स्वीट पाइजन....

मई- अद्भुद.........

सारे सीन्स ख़त्म होने के बाद मेरे मुँह से अपने आप hi शब्द निकल गया.....

मैंने नज़र घुमाई तोह मेरा दिल hi घूम gaya...AVANTIKA आँखों में आंसू भरे मेरी और देख रही थी....

मई- अरे तुम्हे क्या hua...maine जो kiya,wo करना ज़रूरी tha.....issi तरह से मई यहांज ो भी hua,uske बारे में जान सकता था...

और इस फल से मुझे कुछ नुकसान नहीं हो sakta...koi भी ब्लैक एनर्जी मेरे अंदर जाते hi वाइट एनर्जी में कन्वर्ट हो जाती है....

फिर मई अवंतिका को यहाँ क्या क्या हुआ tha,wo सब बताने लगा....

अवंतिका ने कुछ कहा नहीं बस मेरी बातें सुनते हुए

मेरे गले लगी रही.....

वहीँ अनलिए मुझे और अवंतिका को एक तक देख रही thi....tabhi.....

आह्हः....

अह्ह्ह्ह....

जो होता आया hai,wahi घटनाक्रम फिरसे होने laga...sabhi क्यूरियस वासियों के बोडय के पार्ट्स पर कट्स लगने लगे...

सबने अपने हाथ में रखा फल खा लिया सिवाय अनलिए ke...uska फल तोह मेरे पास था....

सबकी दर्द भरी आह सुनकर अवंतिका ने पहले सामे देखा फिर मेरी तरफ...

अवंतिका- तोह अब???

मैंने कुछ नहीं कहा और अपने हाथ में पकडे फल की तरफ dekha..maine जो बाईट ली थी वो जगह भर चुकी थी...

मैंने तुरंत 34,5 बिट्स में hi पूरा फल खा liya....mai उससे दोबारा जुड़ने का मौका नहीं देना चाहता था और जैसे hi मैंने वो फल पूरा खाया......

हम जिस जगह पर खड़े the,wo हिलने lagi..aisa होने से सभी शॉकेड हुए पर तभी उन्हें अपने जीवन का सबसे बड़ा शॉक लगा....

मदर TREE.......COURIN ट्री जो पूरी सूख चुकी थी उसमे पत्ते आने लगे और देखते hi देखते वो पूरी भर गयी....

ये सब देखकर सभी क्यूरियस वासी ख़ुशी से झूम उठे....

पर अभी उनका श्राप ख़त्म नहीं हुआ tha.....MOTHER ट्री के पुरे भरने के बाद भी अभी तक सौरिस फल उस पर नहीं आया था..

मई उसी के आने का इंतज़ार कर रहा था की तभी.....

मुझे कौरीन ट्री के निचली दाल पर धीरे धीरे एक फल पनपते हुए दिखा जिससे देखकर मई खुश हो गया.....

मई- वो dekho,COURIS फल.....

मेरे कहते hi सभी की नज़र सौरिस फल पर चली गयी जिससे देखकर सभी खुश हो गए....

अनलिए- क्या अब हम श्राप मुक्त हो gaye...aur उस फल को हम खा सकते हैं...

मई- अब्भी nahi....is श्राप की जड़ ये मदर ट्री और इस्पे झूलता हुआ फल hai..mere इस ब्लैक एनर्जी से ग्रसित फल को खाने की वजह से ये फल शुद्ध हो गया है और इसीलिए कौरीन ट्री वापस ठीक हो पायी है...

पर जिस फल को मैंने खाया है वो कौरीन ट्री के प्रभाव में आकर ब्लैक एनर्जी से नहीं घिरा था बल्कि ास्मोडियस ने उसके अंदर अपनी ब्लैक एनर्जी को डाला था...

मेरी एनर्जी की वजह से ये फल तोह ठीक हो गया है पर कौरीन ट्री और उसमे ये झूलता फल अब भी ास्मोडियस की ब्लैक एनर्जी से ग्रस्त है.....

अनलिए- तोह फिर???

मैंने कुछ नहीं कहा और जाकर कौरीन ट्री के नीचे खड़ा हो गया और अगले hi पल वो सौरिस फल जो उस पेड़ पर लटक रहा tha,wo मेरे हाथों में था...

मई- इस फल के अंदर वही ब्लैक एनर्जी है जो कौरीन ट्री में hai....mere इससे खाते hi कौरीन ट्री ठीक हो जायेगी....

मेरी बात सुनकर सब खुश हो गए वहीँ अवंतिका भी मेरे पास आ गयी....

मैंने उस सौरिस फल को खाने के लिए उससे अपने मुँह के पास लाने लगा इस बात से अनजान की ऐसा करते hi मेरी दुनिया घूम jaayegi..duniya छोडो मई hi घूम जाऊँगा.....

जैसे hi मैंने उस कौरीन फल की फर्स्ट बाईट ली......

मई- ओह सहित.................

मेरे बाईट लेते hi दो चीज़े हुईं...

pehli,meri लगभग साड़ी शक्तियां वापस काम करने lagi...lagbhag इसीलिए क्यूंकि मई अब भी क्यूरियस गृह के बाहर का कुछ भी महसूस नहीं कर पा रहा था....

और इसका कारण था की क्यूरियस इस ब्रम्हांड के सभी जीवित ग्रहों से बोहोत अलग tha..yahan की हर चीज़ गॉड की ऊर्जा से बानी थी जिसका बाकी के ग्रहों से कोई लेना देना नहीं था....

और dusri,meri पूरी तरह से लग चुकी thi..mujhe पता चल चूका था की मेरे भाई ने मेरे भतीजे के साथ मिलकर मेरे साथ कितना बड़ा गेम खेला था....

और उस गेम की वजह से मेरा पूरा अस्तित्व बदलने वाला था....

पर इन सब निगेटिव्स के बीच में दो पॉजिटिव चीज़ भी हुई और वो ये की मुझे पता चल चूका था की यहाँ आते hi मुझे जो शॉक लगा tha,us शॉक की हक़ीक़त क्या है और हक़ीक़त जानकार मई मन hi मन ास्मोडियस के दिमाग की तारीफ़ करने से खुदको रोक नहीं पाया.....

और दूसरी ये की मेरे फल खाते hi कौरीन ट्री भी श्राप मुक्त हो गयी और ऐसा होते hi क्यूरियस का मौसम साफ़ होने लगा...

बर्फ गिरनी बंद हो चुकी thi.suraj जिसने खुदको हज़ारों वर्षों तक छुपा कर रखा tha,wo फिरसे उदय हो गया...

और सबसे बड़ी baat,jis बंजर गृह के अंदर ास्मोडियस ने क्यूरियस को छुपा कर रखा tha,wo कवर भी हैट चूका था....

अब क्यूरियस पहले की hi तरह आज़ाद था.....

वहीँ मेरे पास कड़ी अवंतिका ने भी मेरा ओह सहित कहना सुन लिया था और साथ hi मेरे हर पल बदलते भाव को भी अछि तरह से नोट कर रही थी जिस वजह से उससे दर लगने लगा था...

अवंतिका- V.JJJ सब ठीक तोह है ना....

मैंने ना में अपनी मुंडी हिला दी.....

अवंतिका- क्या हुआ?

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मई- यहाँ नहीं.......

मैंने ये बात हलकी लड़खड़ाती ज़ुबान से कही थी जिससे अवंतिका शॉकेड हो गयी पर फिलाहल उसने कुछ नहीं कहा...

मई- अब हमे इजाज़त दें....

और इससे पहले की क्यूरियस वासी कुछ kehte,mai और अवंतिका वहां से गायब हो चुके थे.....

हमारे यूँ अचानक जाने से सभी क्यूरियस वासी साद हो गए पर उनकी श्राप मुक्त होने की ख़ुशी उनकी उदासी से कही ज़्यादा thi..kuch hi देर में ज़्यादातर लोग फिर से ख़ुशी से झूमने लग गए...

वहीँ कुछ दूर पर हम दोनों पुनः प्रकट हुए.....

अवंतिका ये देखकर शॉकेड हुई की हम अभी तक इसी गृह में हैं...

मई उसकी मनोदशा समझ रहा था इसीलिए मैंने बिना टाइम वास्ते किये बिना कहना शुरू किया...

मई- मेरे पास ज़्यादा वक़्त नहीं है अवंतिका इसीलिए मई तुम्हे यही सब बताना चाहता हूँ

मेरी बात सुनकर अवंतिका के होश उड़ गए...

अवंतिका- ज़्यादा टाइम नहीं है मतलब???

अवंतिका का दिल ज़ोरों से बजने लगा था जिसकी वजह मई समझ रहा था...

मई- मई मरने वाला नहीं हूँ AV.....par जो ज़िन्दगी मई जीने वाला हूँ उससे ाचा तोह मई मर जाता...

मेरी बातें सुनकर अवंतिका के आखों से आंसू गिरने लगे....

मई- बाद में रो lena..bohot वक़्त मिलेगा तुम्हे रोने का...

ये सब बोलते वक़्त मेरी जुबां लड़खड़ा रही थी....

मई- वो युद्ध याद है जो मेरे और ास्मोडियस के बीच हुआ था...

अवंतिका ने हाँ में अपना सर हिला दिया...

मई- वो युद्ध ास्मोडियस ने मुझे मारने के लिए नहीं बल्कि मेरा खून हासिल करने के लिए किया था....

अवंतिका- पर....

मई- shhhh.......maine कहा ना मेरे पास ज़्यादा वक़्त नहीं hai....sirf सुनो......

ास्मोडियस ने मेरे खून को अपने खून से मिला diya...par मेरे खून की मात्रा बोहोत काम थी और ास्मोडियस की बोहोत zyada...uske खून के सभी नेगेटिव पार्टिकल्स ने मेरे खून के सभी पॉजिटिव पार्टिकल्स को निगल लिया....

उसके बाद उसने बिल्जेबब को हम दोनों के खून के मिक्सचर को देकर यहाँ क्यूरियस भेजा.....

बिल्जेबब ने हम दोनों के खून के मिक्सचर को कौरीन ट्री की जड़ों में मिला दिया और नतीजा.....

ये कहकर मई लड़खड़ाता हुआ गिर गया....

अवंतिका- V.JJJ.......abhi रहने do..ghar चलकर बाकी की बात करेंगे....

मई- nahi....ghar पहुँचते तक बोहोत देर हो jaayegi..jitni ज़्यादा मई अपनी ऊर्जा इस्तेमाल karunga,utni ज़्यादा मेरी हालत बिगड़ती जायेगी.....

अभी सुनो sab.....mai कहाँ tha,,haan natija...iska नतीजा ये हुआ की कौरीन ट्री के अंदर इस ब्रम्हांड के सबसे खतरनाक शक्ति पनपने लगी....

पर क्यूंकि किसी ज़माने में कौरीन ट्री वाइट एनर्जी की प्रतिक थी इसीलिए वो कुछ देर तक हम दोनों के खून से मिश्रित शक्ति को संभल सकती थी पर सिर्फ कुछ देर तक..

और जैसे hi मैंने ास्मोडियस के ब्लैक मैजिक को बेकार kiya,COURIN ट्री के अंदर छुपी वाइट एनर्जी हम दोनों के खून की शक्ति को बाहर धक्का देने लगी और उसी धक्के से वो फल बना जिससे मैंने थोड़ी देर पहले खाया था....

अवंतिका- मई अब भी नहीं समझी की तुम कहना क्या चाहते हो.....

मैंने कुछ कहा नहीं बस अपने सर को छुआ और अगले hi पल...

मेरे अंदरूनी दिमाग की रूप रेखा मेरे सामने आ गयी जिससे देखकर अवंतिका शॉकेड हो गयी....

अवंतिका- ye,ye क्या हो रहा है....

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मई- ये मेरा दिमाग है और जो चीज़ मेरे दिमाग को धीरे धीरे अपने कब्ज़े में ले रही hai,wo ास्मोडियस का खून है.....

और जैसे hi वो खून मेरे दिमाग को पूरी तरह अपने कब्ज़े में ले legi,mai खुद भी नहीं जानता की मई क्या बन जाऊँगा....

मेरी बात का मतलब समझ कर अवंतिका तोह जैसे एक सदमे में चली गयी...

मई- होश में आओ AV.....pata नहीं क्यों पर मुझे ऐसा लग रहा है की ये आधी कहानी hai......jahan तक मुझे लगता है ास्मोडियस को भी ये बात पता होगी की मई इस दुनिया से बाहर नहीं झाँक सकता इसीलिए उसने मेरे सामने यहाँ का उसका एक राज़ भी बिना कोई प्रॉब्लम क्रिएट किये हुए पता चलने दिया...

मुझे कुछ अजीब सा लग रहा hai....hume तुरंत निकलना hoga...ye कहकर मैंने ावनतिका का हाथ थामा और अपनी आखें बंद कर मेरे घर के पास जो सुनसान जगह thi,us जगह पर फोकस करने लगा..

अभी जो मेरी हालत thi,usme फोकस करना काफी मुश्क्लि था पर मैंने मैनेज कर लिया और कुछ hi पलों बाद जैसे hi मेरा फोकस अपने सोची गयी जगह पर स्थिर hua,hum दोनों गायब हो चुके थे.....

फ्लैशबैक सन....

प्लेनेट- थे वर्ल्ड ऑफ़ वारियर्स

प्लेस- पैलेस हाल

लार्ड क्रूसेडर- ाचा सुझाव hai..par एक बार बाकी के मंत्री मंडल की भी राय ले लेनी चाहिए......

अब इसकी ज़रुरत नहीं पड़ेगी......

लार्ड क्रूसेडर अपने दोनों युवराजों मोकलसर और अशांत से कुछ बात कर hi रहे थे की उनके पीछे से ये आवाज़ आयी...

लार्ड क्रूसेडर- कौन हो तुम?

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तुम्हारी MOUT...NISHKALIKA की बेहेन भुविका.........

निष्कलिका का नाम सुकर सभी शॉकेड हो gaye...AKSHAANT और मोकलसर अपनी तलवार निकल hi रहे थे की....

डिफेंडर- रूक जाओ और जहाँ से आयी हो वहीँ वापस चली जाओ वर्ण अंजाम बोहोत बुरा होगा....

ये आवाज़ भुविका के पीछे से आयी thi..ye और कोई नहीं डिफेंडर थे जिन्हे अचानक महल के अंदर बोहोत ज़्यादा मात्रा में काली और सफ़ेद शक्ति के होने का आभास हुआ था....

और अगले hi पल वो भुविका के पीछे खड़े थे...

भुविका में कुछ नहीं कहा पर अगले hi पल....

भुविका के सारे शरीर से ऊर्जा की मोती सी रे निकलकर डिफेंडर पर पड़ने lagi..DEFENDER ने भी अपना हाथ आगे कर दिया था जिससे वो उस ऊर्जा को रोक सकें पर वो पूरी तरह कामियाब नहीं हो पाए थे...

भुविका की ऊर्जा इतनी ज़्यादा थी की वो उससे संभल नहीं पा रहे the..wo समझ गए की अगर कुछ देर ऐसा और होता रहा तोह सब कुछ ख़त्म हो जाएगा और इसीलिए.....

भुविका- नाहीई............

भुविका क्रोध की अग्नि में जलती हुई गायब हो गयी....

हुआ ये की डिफेंडर को जैसे hi लगा की वो भुविका की एनर्जी को संभल नहीं paayenge,unhone गृह सेतु और वारियर्स वर्ल्ड के सभी लोगों का आवाहन एक साथ किया...

क्यों गृह सेतु खुद डिफेंडर ने बनाया tha,toh ये करना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी और उनके ऐसा करते hi वो लार्ड CRUSEDAR,AKSHAANT,MOKALSAR और वारियर्स वर्ल्ड के सभी लोग एक रे में बदलकर गायब हो गए और सीधा पहुंचे गृह सेतु के दरवाज़े के सामने...

डिफेंडर- सब जल्दी से अंदर chaliye...mai इस्ला के लोगों को भी लेकर आता हूँ....

सभी के मन में सवाल थे पर फ़िलहाल कुछ भी पूछने का टाइम नहीं था इसीलिए सभी गृह सेतु के नादरा सामने लगे....

मोकलसर- चल ना jaldi..yahan खड़ा क्या सोच रहा है..

अक्षांत- यार वो लड़की निष्कलिका की बेहेन hai..agar वो यहाँ आयी है तोह ग्लूटो भी ज़रूर jaayegi....mai शैला को लेकर आता हूँ....

मोकलसर- चल, मई भी चलता हूँ...

अक्षांत- नहीं मेरे bhai..ek युवराज अपने प्यार को बचने जा रहा hai,toh दूसरे युवराज को जनता की रक्षा करनी पड़ेगी naa..teri ज़रुरत यहाँ ज़्यादा है...

ये कहकर अक्षांत वर्ल्ड दूर से होते हुए ग्लूटो पहुंच गया....

प्लेनेट- इस्ला

प्लेस- पैलेस हॉल

नमस्ते नानाजी......

किंग सोलोमन जो की अपने मंत्री गैन के साथ कुछ विचार विमर्श कर रहे the,is आवाज़ को सुनकर चौंक गए....

और जब उन्होंने अपने सामने देखा तोह एक जवान लड़के को काले कपड़ो में खड़े पाया जिसके चेहरे पर एक ज़हरीली मुस्कान थी.....

किंग सोलोमन- कौन हो तुम?

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बिल्जेबब- समय की विडम्बना तोह dekhiye....ek नाना अपने पोते तक को नहीं पहचान पा रहा है...

किंग सोलोमन बिल्जेबब के मुँह से खुद को उनका पोता कहते सुन शॉकेड हो गए...

बिल्जेबब- चौंकिए mat...mai बताता hun,mai आपकी पुत्री अलेसेन्द्र और मेरे फादर ास्मोडियस का पुत्र हूँ....

इस बार तोह किंग सोलोमन का दिमाग hi फ्यूज हो gaya....unhe समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या कहें पर आखिर उन्होंने खुद को संभल कर आगे बात की...

किंग सोलोमन- यहाँ क्यों आये हो....

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बिल्जेबब- आपको इस जीवन चक्र से मुक्त करने...

बिल्जेबब की बात सुनकर सभा में मौजूद सभी लोगों को क्रोध आ गया पर इससे पहले की उनमे से कोई कुछ कर paata,sabhi के हाथ पेअर अदृश्य रस्सियों से बांध चुके थे...

बिल्जेबब- आप सब भी marenge..par पहले नानू की बारी....

बिल्जेबब के हाथों में एक तलवार चमक gayi...wo उसे लेकर आगे बढ़ा hi था की....

बिल्जेबब- नहीं..................

बिल्जेबब को अपने आस पास एक बोहोत तगड़ी वाइट ऊर्जा का आभास हुआ पर इससे पहले की वो उसके बारे में जान पाटा उस ऊर्जा या ये कहूं डिफेंडर ने जो की अदृश्य होकर यहाँ आया tha,unhone सभा और महल में मौजूद सभी को वहां से गायब कर दिया और उन्हें लेकर वापस गृह सेतु के सामने पहुँच गए...

उन सब को लाने से पहले वो इस्ला वासियों को भी ला चुके थे...

सभी उनसे सवाल पूछने लगे पर डिफेंडर पहले सबको गृह सेतु के अंदर ले गए और फिर गृह सेतु का दरवाज़ा बंद कर दिया....

प्लेनेट- ग्लूटो

प्लेस- पैलेस हॉल

आखिर मुलाकात हो hi गयी शैला.....

शैला जो की अकेले हॉल में बैठकर कुछ सोच रही thi,achanak अपना नाम पुकारे जाने पर चौंक गयी..

शैला- कौन हो तुम???

और बिना अनुमति के अंदर कैसे आ गयी...

वैसे तोह मेरा नाम भुविका है पर तू मुझे अपनी मौत कह सकती hai...aur मौत कभी पूछ कर नहीं आती.....

शैला- तू और मेरी mout...teri तोह mai....ahhhhhhh.....

इसके बाद क्या हुआ वो आपको थर्ड chapter में पता चलेगा.......

प्लेनेट- एअर्थ

प्लेस- गार्डन्स बैकयार्ड.....

NAHI...NAHI नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं.....

ये नहीं हो SAKTA.........MAI पागल हो जाऊँगा..........

और ये सब बोलने के बाद मई नीचे गिर पड़ा.....

अवंतिका- V.JJJJ..please उठ jaaona..dekho,hum घर पहुँचने hi वाले hain..sab ठीक हो जाएगा......

दोपहर का वक़्त hai...hum जब वापस एअर्थ अपने शहर मुंबई के अपने गार्डन जहाँ मई जॉगिंग किया करता था वहां पहुंचे तोह मुझे ऐसे ऐसे शॉक लगे की मेरे दिल से बस यही दुआ निकली की मेरी ज़िन्दगी भी ख़त्म हो जाए....

अवंतिका- उठो ना V.JJJJ...hua क्या hai,ye तोह बताओ....

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मैंने एक नज़र अवंतिका को देखा जिसकी आँखें भीगी हुयी थी पर आज मई इस हालत में नहीं था की उससे चुप करा सकूँ....

मई लट्टे पत्ते खड़ा हुआ और ऊपर देखने लगा....

मई मन में- यही दिन दिखने के लिए मुझे इतनी साड़ी शक्तियां दी थी tune....hey khuda,meri साड़ी शक्ति ले le,par मेरी पुराणी ज़िन्दगी मुझे वापस लौटा दे....

अवंतिका- V.J....please बताओ naa,kya हुआ है....

अवंतिका के सवाल पर मैंने कुछ कहा नहीं बस अपनी ताकत बटोर हवा में एक बार हाथ ghumaya..agle hi पल हवा में दृश्य चलने लगा जिसमे वारियर्स WORLD,ISLA और ग्लूटो में जो जो हुआ वो दिखने लगा जिससे देखकर अवंतिका के आंसू और तेज़ हो गए पर वो खुदको संभल कर बोली....

अवंतिका- ये सब ठीक हो जाएगा V.J...

मैंने अवंतिका की तरफ देखा जिसने अभी तक असली बात नहीं जानी थी पर बताना तोह था hi...

मई- ये साड़ी घटना कल परसो की नहीं है....

अवंतिका- matlab??aise कैसे हो सकता hai..hume गए hi 3 दिन तोह हुए हैं....

मई- haan..hume गए हुए तोह 3 hi दिन हुए हैं पर हम लौटे 1.5 साल बाद हैं.....

मेरी बात सुनकर अवंतिका को ऐसा झटका लगा की पूछो hi मत....

अवंतिका- तुम मज़ाक???

पर इससे ज़्यादा वो कुछ कह नहीं पायी क्यूंकि मेरी आँखें झूठ नहीं बोल रही थी जिससे उसने पहचान लिया...

AVANTIKA-par कैसे???

मई- समय PARIVARTAK....ASMODEUS का अब तक का सबसे बड़ा हथियार जिसका उसने हमारे क्यूरियस पहुँचते hi उसे किया.....

अवंतिका- समय PARIVARTAK....ab ये क्या बाला है???

समय PARIVARTAK-BRAMHAAND में हज़ारों आकाश गंगा हैं और हर आकाश गंगा का अपना समय चक्र है...

गृह की hi तरह आकाश गंगा भी रोटेट और रेवोल्वे होते hain...is दौरान कभी कभी ऐसा होता है की आकाश गंगा में मौजूद अनगिनत गृह अपने एक्सिस में घूमने के बावजूद एक दूसरे से टकराने की कगार में पहुँच जाते हैं...

जब भी ऐसा कुछ होने वाला हो तोह समय परिवर्तक के द्वारा उन ग्रहों के समय चक्र को धीरे कर दिया जाता है..

ऐसा करने से गृह की स्पीड काम हो जाती है और वो जिस गृह से टकराने वाला रहता hai,uski स्पीड बढ़ जाती है...

उन ग्रह के वासियों को इसके बारे में कुछ पता नहीं चलता पर जिस गृह के समय चक्र को परिवर्तक के ज़रिये तेज़ कर दिया जाता hai,wo दूसरे गृह से जिसके समय चक्र को परिवर्तक ने स्लो कर दिया था उससे काफी आगे निकल जाता है....

स्लो हो चुके गृह का एक दिन तेज़ हो चुके गृह के महीनो या फिर कभी कभी सालों के बराबर होता है....

और ास्मोडियस ने परिवर्तक का उसे कर हमारे आकाश गंगा की स्पीड क्यूरियस के मुकाबले 150 गुना तक तेज़ कर दी इसीलिए हमारा वहां बिताया हुआ एक दिन बाकी हर जगह से 1.5 साल जितना लम्बा था....

मेरी बात सुनकर अवंतिका का दिमाग झटका मारने लगा था पर फिर उससे कुछ याद आया..

अवंतिका- हमारे क्लोन्स!!!!

मई- हमारे क्यूरियस में एंटर करते hi हमारे क्लोन्स को मार दिया गया था....

अवंतिका- what????toh क्या हमारे घर वाले ये सोचते हैं की हम मर चुके हैं..

ावनतिका के सवाल को मई अब बड़ी मुश्किल से सुन पा रहा tha..ASMODEUS का खून मेरे दिमाग के 90 परसेंट हिस्से में ज़हर बनकर फैले चूका था....

मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को समेटा और....

मई- nahi..humare क्लोन्स को जिन्होंने मारा था उन्होंने खुद हमारे क्लोन्स की जगह ले ली thi...aur हम दोनों बनकर रहने लगे..

पर अब उन दोनों को पता चल चूका है की हम आ चुके hain,isiliye वो वापस जा चुके हैं...

अवंतिका- कौन थे वो दोनों....??

मई- भुविका और बिल्जेबब......

ये बोलते वक़्त मेरी आँखों में dard,ghussa,ghutan,bebasi सब कुछ दिख रहा था....

मेरी आखों से आंसू गिरने लगे जिससे देखकर अवंतिका को लगने लगा की में अभी तक उससे पूरी बात नहीं बताई है???

अवंतिका- V.JJJaur भी कुछ हुआ है ना???

अवंतिका की बात सुनकर मई उसकी और देखने laga....mere आँखों में इतना दर्द और ग़ुस्सा था की मेरे आंसूं भी गिरने से पहले hi सूखने लगे....

अवंतिका- V..J...PLZ,bataonaa क्या हुआ है???

मई- रोनित कोमा में है.....

मेरी बात सुनकर अवंतिका को भी हल्का सा चक्कर आने लगा पर उसने खुद को संभल लिया...

अवंतिका- उससे तोह तुम ठीक कर hi सकते हो naa....fir इतना दर्द क्यों?

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दर्द अब मेरे दिल में इतना बढ़ गया था की मेरा सर ग़ुस्से और तड़प से हिलने लगा...

MAI-RONIT इसीलिए कोमा में है क्यूंकि अंजलि गुज़र चुकी HAI.....ANJALI इस डेड.............

अपनी बात ख़त्म कर मई नीचे बैठ गया पर अवंतिका तोह खड़े खड़े hi बेहोशी की आलम में जा चुकी थी पर वो जल्दी hi अपने सदमे से बाहर आ चुकी थी क्यूंकि वो जानती थी की मेरी हालत ठीक नहीं है....

अवंतिका- V.J चलो घर.....

मई- मई रोनित को उस हालत में देख नहीं सकूंगा....

अवंतिका- पर घर तोह जाना hi पड़ेगा ना..

मई- घर पर कॉल करके कहना की मुझे अचानक चक्कर आ गया और मई बेहोश हो गया...

अवंतिका को मेरी बात का मतलब समझ नहीं आया...

पर अब उससे समझाने का मेरे पास टाइम नहीं tha...actually अब मेरे पास किसी भी चीज़ के लिए टाइम नहीं tha...jaisa की मैंने बताया की मई जितनी ऊर्जा उसे कर रहा tha,mera टाइम उतना hi काम होता जा रहा था....

मई हमेशा से hi इस ब्रम्हांड के हर एंजेल के साथ जुड़ा हुआ रहता hun..par जबसे मई एअर्थ पर वापस आया tha..ek एक करके सारे एंगेल्स से मेरा संपर्क टूटता जा रहा था...

जिसका ये मतलब था की मेरी पहचान ख़त्म होते जा रही है....

(इसीलिए ास्मोडियस ने कहा था की लार्ड ऑफ़ ANGELS,WHITE एनर्जी का WAARIS,PAR कब तक )

और अब तोह जब ास्मोडियस के खून ने मेरे दिमाग पर लगभग पूरा कब्ज़ा कर hi लिया tha,aisi हालत में मई सिर्फ तीनो GOD'S मेसेंजर्स को hi देख पा रहा था वो भी धुंदला सा...

वो तीनो hi उदास चेहरे लिए मुझे देख रहे थे...

अवंतिका से अपनी बात कह मैंने अपने जबड़े सख्ती से bheenche,taaki होने वाले दर्द को सेहेन कर सकूँ और अगले hi पल....

शकितीयम मोकसायटी.......

पावर्स देतच........

मेरे शरीर से रेज़ निकली और चल पड़ी अपनी मंज़िल की तरफ....

रोनित को घर पर hi रखा गया tha...bohot से मचिनेस से उसके बॉडीज कनेक्टेड the..mere द्वारा छोड़ी गयी रेज़ रोनित के ऊपर मंडराने लगी और अगले hi पल.....

वो रेज़ रोनित के दिमाग में सामने lagi..jitne मचिनेस रोनित के बॉडी से कनेक्टेड the,wo सभी बीप बीप की आवाज़ निकलने लगे और तभी......

रोनित- अंजू..................

वहीँ जैसे hi मेरी बॉडी से मेरी लास्ट एनर्जी nikli,ek साथ दो दो चीखें फ़िज़ा में गुंजी....

एक मेरी और दूसरी अवंतिका की....

एनर्जी के निकलते hi मेरे मुँह से दर्द भरी चीख निकल गयी और मुझे चीखता देख अवंतिका की चीख निकल गयी और फिर सब कुछ शांत....

कमसे काम मुझे तोह कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था......

अवंतिका मुझे हिलाये जा रही थी पर मई बोझिल आखों से उससे जितना हो सके देखते हुए अपने वजूद के आखरी लम्हो को जी रहा था.....

वहीँ मेरे एनर्जी उसे करते hi गोड्स मेसेंजर्स का कनेक्शन भी मेरे दिमाग से टूट गया.....

मेरी बोझिल आँखें और भारी होने लगी और कुछ hi पलों में अवंतिका के ख़ूबसूरत चेहरे को देखते हुए मेरी आँखें बंद हो चुकी थी.....

1 दिन की ज़िन्दगी को 1.50 साल बड़ा बनाने के BAAD,APNI एक दोस्त को खोने के BAAD,AB मेरा WAJUD,MERI पहचान तक मैंने खो दिया था....

जिस पॉजिटिव बन्दे को दुनिया जानती THI,USKI वो पाजिटिविटी नेगेटिविटी में बदल चुकी थी क्यूंकि बदल चूका था मेरा

ऐटिटूड.........

इस CHAPTER के लिए इतना HI......

आपका अपना V.J......
 
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