बससससस.. करो ..(नम्रता एक पहेली) - Page 3 - SexBaba
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बससससस.. करो ..(नम्रता एक पहेली)

हार्ट अपडेट:-16 हार्ट

अब्ब तक हमने देखा:-

बिरजू के सामने बार बार नम्रता की बड़ी गांड घूम रही thi.......aur उसके तने हुवे बूब्स .........

वोह सिर्फ इस सोच मैं था की लुंड को शांत कैसे किया जाये......

अह्ह्ह्ह साली ne.........aaag लगाके चली gayi....ahh

एक 60 साल के बुड्ढे के लिए ये बोहोत हे बड़ी बात थी नम्रता जैसे लड़की के नयन सुख Lena.........par अब्ब्ब

बिरजू के शीतनी दिमाग मैं कुछ और हे चल रहा था.........

Abbb....kya

.....होगा ..

.

क्या बिरजू की अंदर की आग उसको नम्रता की करीब लेके जाएगी .......या phir..........iss बार भी नम्रता को बिरजू ....सिर्फ सपनो मैं छोड़ेगा.......................

अब्ब्ब आएगी ...................

शाम हो चुकी थी .....दिवाली के लाइटिंग में सनशाइन सोसाइटी झगमगा उठी थे. ...उसके वजह से शाम और भी खूबसूरत लग रही थी ...सब जगह दिवाली की तैयारी चालू थी

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यहाँ सावला भी अपने झोपड़े में लेता पड़ा था उसके दिमाग में एक हे चीज घूम राहु थी वो यानि नम्रता की जवानी ... नम्रता के जवानी ने उसे पागल कर रखा था ..........उसके सामने उसका चेहरा उसका बदन ...उसकी muskan....uske बड़े बड़े संतरे .....मलाई जैसी गांड ...उसके सामने आ रही थी .....उसको कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करे ....बस उसे नम्रता का ख्याल आ रहा था .....उसके साथ बीत्या हुवा उस दिन का साफ सफाई वाला वक्त ....और उसमे हुवे वोह इंसिडेंट उसको याद आ रहे थे ......

और अचानक से उसके दिमाग में आया की क्या वोह नम्रता को प् सकता हे ....क्या नम्रता उसकी हो सकती हीइ.

( सावला भले हे अडानी था लेकिन उसके दिल में थोड़ा सॉफ्ट कार्नर था ....जो उसको अच्छा इंसान बना हे पर क्या नम्रता के आगे वो कार्नर काम करेगा )

सावला :- सही ऐसे कैसे सोच सकता हु में अभी तोह वो छोटी हे 21 उम्र होगी उसकी और में तेरा बुद्धा कुछ भी सोच रहा हु में

लेकिन .....लेकिन......

नम्रता बेटी को उस दिन अच्छा नहीं लगा होता तोह वो मेरा हैट निकल सकती थी ....मेने उसके जब ड्रेस के ऊपर से उसके गांड पे जबान राखी तोह वोह भड़क सकती थी .....उसने ऐसा क्यू नहीं किया ....

क्या नम्रता को वोह सब पसंद आए रहा था .....

अह्ह्ह्ह मेरा लैंड खड़ा हो रहा हे उसके बारे में सोच के .......अह्ह्ह

जब मेने उसके सलवार के ऊपर से उसके गांड में अन्घुता डाका तोह कैसे सिसकारियां निकल रही थी क्या सच में उसको वोह पसंद आए. रहा था ........ahh.....kya मुलायम गांड थी उसकी अह्ह्ह्ह

और वोह भी अपनी गांड कैसे मेरे मुह्ह पे दबा रही थी .....और आवाज भी निकल रही थी ........तब उसके चेरे पे अलग हे भाव थे क्या वोह भाव संतुष्टि के थे......

अह्ह्ह नम्रत क्या तुम सच में मेरी हो सकती हो .......

यही सब सोचते सोचते कब सावला ने अपना लुंड धोती से बहार निकालके नम्रता को यद् करके कब मुठ मरने लगा उसको भी समाज नै आया ....नम्रत के सिर्फ एक झलक से उसका लुंड टाइट होता हे और अब्ब उसके लुंड को नम्रता के छूट की भूक लग चुकी थी अब्ब्ब सिर्फ सावला के मन को अहसास होना बाकि था .....और तभी सावला के दिमाग में कुछ आया जो एकदम खतरनाक थाहा.

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सावला :- अह्ह्ह्ह लड़की तोह बोहत मस्त हे ऐसी लड़की जिंदगी में कभी नहीं देखि और न कभी देख पावूंगा क्या किस्मत को यही मंजूर था की में उअके करीब जावु अगर ऐसा होगा toh....shyad नम्रता को में पा सकता हु ..

अभी बची हे कितनी उम्र हे मरते मात कुछ सुख मिलेगा तोह भगवन के ऊपर जेक पेअर पकडूँगा ...क्या वोह सुख नम्रता हो सकती हे ......

अहहहहजह उसका नाम भी लू तोह निचे हलचल हो जाती हे .......

अगर इस्सस दिवाली में नम्रता जैसी लड़की मिले तोह चंडी हो जाएगी कितने दिन भिकारी रंडियो को छोडूंगा ....

अह्ह्ह्हह है हो गया तय ......में नम्रता को पानेकी पूरी कोशिश karunga.....aur प्लानिंग से करूँगा .....शायद उसके शर्मीले पैन से मुझे वोह आसानी से मिल सकती हे पर बड़ा मुश्किल काम होगा अगर उसने किसीको बताया तोह ........

पर नै मुझे उसे पाना हे इस बुड्ढे लुंड को अब्ब एक जवान छूट चाहिए अभी ये नहीं मानेगा ....अह्ह्ह्ह

अह्हह्ह्ह्ह

और तभी सावला का ढेर सारा रास निकलता हे और वोह नींद के अघोष में चला जाता हे ..................

नेक्स्ट डे ..................

आज दिवाली का पहला दिन था सनशाइन सोसाइटी में छोटा सा मॉर्निंग को प्रोग्राम रखा था इस्सलिये सब तैयारी में लग चुके थे ........

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इधर नम्रता मॉर्निंग को उठ चुकी थी आज वोह बोहत हे सूंदर लग रही थी एक अलग सी चमक उसके चेरे पर दिख रही थी उसके बड़े बड़े स्तन उसके छाती पे खुल के ए थे इसलिए वोह और भी मादक दिख रही थे ......ब्लैक टी शर्ट में वोह एकदम हॉट लग रही थी .....

यहाँ नम्रता की माँ भी तैयारी करके रेडी हो चुकी थी ......नम्रता के डैड सिक्योरिटी अफसर में होने के कारन उन्हें आज भी अपने दुइटी पे जाना था सो ाआज रोज की तरह उठके वोह अपने काम पे चले गए ......

इधर बिरजू भी अपने वॉचमन के केबिन से बहार आके सब तैयारी देख रहा था ....तभी उसकी नजर नम्रता के डैड पे गयी

...

बिरजू :- साला अच्छा हुवा ये आज नहीं हे ...नहीं तोह इसका अलग हे सर दर्द रहता हे .....

इधर सावला रोज की तरह वैसे हे उठके सोसाइटी के तरफ रोज के काम के लिए निकल पड़ा था उसके लिया क्या दिवाली और क्या दूसरा दिन ....आज भी वैसे हे उठके वोह अपने काम को निकल पड़ा था .....वैसे हे गन्दा वही धोती ......

सोसाइटी के अंदर आते हे सावला ने सब सोसाइटी साफ किए उसके बाद वैसे हे वोह नम्रता के घर की तरफ जाने के लिए निकल पड़ा जाते जाते उसके दिमाग में सिर्फ यही बात चल रही थी की नम्रता को कैसे पटाया जाये इसके लिए उसने सोचा की वोह पहले स्लो ट्रैक से उसके इमोशन के साथ खेलेगा उसकी वजह से वोह डायरेक्ट किसी को बता नै सकती ......

सावला नम्रता के घर की डोरे बेल्ल बजता हे नम्रता की माँ दरवाजा खोलती हे ......

माँ :- अरे चाचा आईये आज जल्दी आ गए

सावला :- है वोह जरा आज जल्दी हो गया सोसाइटी में साफ सफाई करके और दिवाली के वजह से लोगो ने पहले हे सब किया था तोह आज ज्यादा काम नहीं था ....

माँ :- अच्छा ठीक हे अपने भी ाची सफाई के घर की नम्रता के साथ मिलके

सावला :- है नम्रता बेटी ने बोहत मदत की ...कहा पे हे वो

माँ :- अरे वोह नाहा रही हे थोड़ी देर पहले उठी ....अब्ब निचे प्रोग्राम भी हे न वह जाना पड़ेगा ...

सावला :- है चलो में अपना काम करता हु . ..

में:- है मुझे भी नाश्ता बनाना हे ....

नम्रता की माँ किचन में चली जाती हे और सावला हॉल में झाड़ू लगाना चालू करता हे. ....उसके दिमाग में यही चल रहा था की कब नम्रता आएगी और वोह उसे देखेगा .......

इधर नम्रता वाशरूम में अपने गोर बदन पे पानी डालते हुवे ......नाहा रही थी पानी की वजह से उसकी गोरी गोरी चूचिया कड़ी हो गयी थी .............उसने अपनी पंतय और ब्रा हमेशा की तरह उसी जगह पर लटकती थी .......

नहाने के बाद नम्रता बहार आती हे टॉवल लगा के और कपडे पहने के लिए चल देती हे वोह सोच रही थी की आज क्या पहने तभी उसके दिमाग में अत हे अब्ब्ब अच्छा वाला सलवार कमीज पहन लेती हु .........

वोह एक टाइट सा हरे रंग का सलवार निकलती हे और उसपे पिंक कलर की कमीज निकलती हे .....और पहन लेती हे ....

अंदर ब्लू कलर का टाइट सा ब्रा पहन लेती हे ाब्ब उसके बड़े बड़े 34 के बूब्स एक सलवार में और ब्रा में कैद हो जाते हे पर तभी भी उसके बूब्स का ऊपरी हिस्सा उस सलवार से आसानी से दिख रहा था ........

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कमीज में उसकी गांड एकदम भर दिख रहे थी ....क्या पता आज वोह किसको घायल करने वाली थी ......

इधर सावला अब्ब नम्रता के रूम को साफ करने के लिए आगे बढ़ रहा था

वोह दूर को खटखटा ता हे ....

नम्रता दूर ओपन करती हे .....

सावला अंदर आते हे उसे पुरे रूम में नम्रता के बदन की खुशबु महसूस होती हे ..........

वोह नम्रता को इकटक देकता रहता हे उसके पुरे जिस्म को अपने आँखों से स्कैन कर लेता हे . .....

नम्रता को भी पता चल जाता हे की सावला क्या देख रहा हे वोह कुछ नै बोलती वोह भी चुप चाप कड़ी रहती हे और अपने आप पे थोडासा हस्ती हे .......... .......

नम्रता:- अरे चाचा क्या देख रहे हो .....

सावला :- कुछ नहीं बीटा ....बास यही

नम्रता :- अच्छा ठीक हे

सावला :- बड़ी खूबसूरत लग रही हो बेटी ....

नम्रता थोड़ी शर्माती हे

सावला :- वैसे तुम्हे दिवाली की शुभ कामना बेटी ऐसे हे खूबसूरत रहो .....

नम्रता:- है चाचा आपको भी

और नम्रता अपना नाजुक सा कोमल हाट सावला की तरफ बढ़ती हे .... सावला को समाज नै अत नम्रता क्या कर रही हे .......नम्रता सावला का हैट हैट में लिए उसे दिवाली की विश करती हे .....

सावला को यकीन नहीं होता नम्रता ने खुद उसका हैट उसके हैट में लिया उसका लुंड फाटक से खड़ा हो जाता हे .....

अब्ब सावला नम्रता के रूम को साफ करने आगे बढ़ता हे .......

नम्रता बीएड पे बेथ जाती हे और सावला को झाड़ू मरते वक्त डेक्टि हे ....

उसको भी सावला को उसको इस तरह से ताड़ना अच्छा लगता था ......क्या पता उसने सावला रूम में रहते हुवे भी अपनी चुनरी अपने बदन पे नहीं लिए थी ..........

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सावला भी नजर चुरा चुरा के नम्रता को देखे जा रहा था. .... नम्रता के 34 के बूब्स उसके सलवार में तन चुके थे .......और सावला निचे झुक के झाड़ू लगा रहा था उसके कारन ....उसको नम्रता के टाइट कमीज से नम्रता के तइस और बहार निकले हुवे गांड का परत पूरी तरह से दिख रहा था ......

नम्रता भी बिनदात बैठी हुवी थी ......

सावला को नम्रता के चूचिया साफ तरीके से दिख रहे थी वोह बिच बिच में अपने लुंड पे हैट रखते हुवे अपने लुंड को काबू कर रहा था .....

उसको नम्रता का ब्लू ब्रा की स्ट्रिप कमीज के ऊपर से पूरी तरह से दिख रही थी .......जब नम्रता को लगा सावला की नजर कहा जा रही हे वोह अपने हैट से अपने जिस्म को धक् लेती हे ....

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और उठके अपनी चुनरी पहन लेती .हे ...

सावला भी ऐसे दिखता हे जैसे उसने कुछ देखा हे नहीं .....नम्रता भी सावला को एक मुस्कान देती हीइ.....

सावला अपना काम करने लगता हे ...........

नम्रता भी उठके किचन की तरफ निकल जाती हे .....

इधर अब्ब सावला नम्रता का बाथरूम साफ करने उसके बाथरूम में चला जाता हे .....

हमेशा की तरह उसे बाथरूम में नम्रता के जिस्म का और उसके छूट का गदराया हुवा स्मेल अत हे ..... नम्रता की ुसेड पंतय ब्रा वही पड़ा था ......

वोह नम्रता के पंतय को उठा ता हे उसपे सफ़ेद सफेस डेग थे .....सावला उसको अपने नक् पे लगा के सूंघता हे .....जवान छूट के रास का स्मेल लेके उसका लुंड सलामी देने लगता हे ....उसी हनेशा की तरह उसके पंतय को लुंड पे लगाके अपना लुंड हिलने का मन होता हे पर तभी ....उसका दिमाग कुछ कहता हे .

आबेद सावला कितने दिन तक पंतय को छोड़ेगा . ...अब्ब सिर्फ लड़की की छूट चाहिए बंद कर ऐसे चड्डी को छोड़ना .......

और तभी सावला डीडे करता हे अब्ब छोड़ेगा तोह सीधा वोह नम्रता को चाहे कोनसी भी कीमत चुकनी पड़े ..........

इधर वोह बाथरूम साफ कर के बहार आ जाता हे ...............

इधर नम्रता का नाश्ता हो चूका था ....

नम्रता की माँ बाजु वाले आंटी के यहाँ गयी थे ....

नम्रता टेबल पे बैठी हुवी थी ....

नम्रता:- अरे चाचा हो गया काम ..

सावला :- है बेटी हो गया ......

नम्रता:- आओ नाश्ता कर लो बैठो यहाँ पे . ..

नम्रता:- अरे बैठो शर्माओ मत ....

नम्रता सावला को एक प्लेट में नास्ता और एक गिलास पानी देती हे ....

सावला भी नाश्ता कर लेता हे और उस गिलास में अपने गंदे मुह्ह को मुह्ह लगा के पानी पिता हे और उस गिलास को निचे रख देता हे ....

नम्रता को बिच बिच सावला की घिन आ रही थी उसके पास जाने पर गन्दी से बदबू आ रही थी .... और उसने जब उस गिलास को मुह्ह लगाया तो नम्रता को बोहत घिन ayi............Namrata देख रही थी के कैसे उस गिलास में सावला के मुँह के अंदर की थूक मिक्स हो रही हे .......

नम्रता को घिन तोह आ रही थे लेकिन उसी थोड़ा अच्छा भी लग रहा tha.....usee सावला को देख यद् आता हे कैसे सावला ने उस दिन उसको ahhhhhhhh.....achanak से उसके बदन में बिजली दौड़ती हे. ...... उसे यद् आता हे इसी मुहहह के थूक को कैसे वोह उस दिन कुट्टी जैसी अपने ड्रेस के ऊपर से चाट रही थी ......और अपने आप पे शर्म करते हुवे वोह अपने गाल में हस्ती हे..........

इधर सावला का नाश्ता हो जाता he........aur वोह एक कोन में बेथ जाता हे ...... नम्रता सावला की प्लेट और गिलास उठाने जाती हे ....और उसके सामने झुकती हे ....अपने 34 के सैंट्रो के दर्शन पास से वोह सावला को करवाती हे ....

सावला भी नैन सुख लेता हे .....

नम्रता अंदर जेक वोह प्लेट रख देती हे ...बेसिन पे और गिलास को भी वही रखती हे ....

तभी नम्रता का दिमाग उसके साथ गन्दा खेल खेलने लगता हे ....क्या सच में नम्रता जवान हो चुकी थी .....क्या सच में नम्रता की छूट रेडी हो चुकी थी ......

नम्रता फिर से पीछे मुड़ती हे और उस गंदे गिलास के और एकटक देखने लगती हे .....उअसकी सांसे ऊपर निचे होने लगती he.......use भूक लगी थे ुसस्स चीज की

नम्रता धीरे से वोह गिलास उठती हे और अपने हैट में ले लेती हे उसपे सावला के गंदे यह के निशान भी थे .....

नम्रता धीरे से उस गिलास को सूंघती हे और उसे सावला के बदन और मुहहह की स्मेल आती हे उसे घिन आती हे लेकिन वोह उस गिलास को छोड़ भी नहीं रही थी .....इसका मतलब उसे अच्छा लग रहा था ......वोह उस गिलास को और करीब लेती हे .......अब हर एक सेकंड को उसकी बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे ........

सावला की वोह गंध नम्रता को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी मनो उसकी वजह से नम्रता मदहोश हो रही थी ........

नम्रता वोह गन्दा गिलास अपने यह पे लगा लेती हे .....और बड़े मजे से ुसस्स गंध का मजा लेती hesss......savla के थूक मिक्स हुवा पानी वोह बड़े मजे से पी लेती हे .....उसके 34 के संतरे टाइट हो जाते हे सलवार के उपरसे उसके बड़े बड़े बूब्स ऊपर निचे होने लगते हे ..........

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उसको वोह पानी पिटे वक्त बिच बिच में बोहत घिन आ रही थी पर फिर भी उसके मन की वासना मन नहीं रही थी .....उसका एक हैट अचानक से उसके ऊपर निचे होने वाले बूब्स पे जाता हे ......

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और तभी सावला नम्रता को आवाज लगा ता हे की नम्रता बीटा ........

नम्रता उसकी आवाज से चौक जाती हे और वोह गिलास रख के हॉल में निकल पड़ती हे ....तभी उसकी नजर उसके चुनरी पे जयति हे और वोह उस चुनरी को निकल के फ्रिज पे रख देती हे और मंद सा मुस्कुराते हुवे हॉल में निकल पड़ती हे ....

अब्ब्ब नम्रता को भी सावला का उसकी तरफ देखना अच्छा लग रहा था .....और अब्ब नम्रता को भी सावला को तरसना अच्छा लगने लगा था .....ये एक इंदिरेक्ट्ली अट्रैक्शन था नम्रता को सावला के प्रति .........

अब्ब्ब आगे क्या होगा ......इधर मॉर्निंग के 9 बजे थे ..... सोसाइटी में प्रोग्राम की पूरी तैयारी हो चुकी थी ........

इधर सावला अब्ब पूरी कोशिश करने वाला था नम्रता को पटाने की ........

नम्रता को भी एक अट्रैक्शन डायरेक्टली नहीं पर इंदिरेक्ट्ली सावला के प्रति हमदर्दी और अट्रैक्शन होने लगा था ..........

तो बे continued..............stay तुनेड
 
बड़े दिन बाद अपडेटेड दिया इस्सलिये टाइम लगा

दोस्तों आपके पास कुछ सुग्गेस्टियन्स हो या कुछ

आईडिया हो तोह जरूर बताना में जरूर मंद में लूंगा

अपडेट केसा लगा कमैंट्स करके बताना
 
हार्ट अपडेट:- 17 हार्ट

अब्ब्ब आगे क्या होगा ......इधर मॉर्निंग के 9 बजे थे ..... सोसाइटी में प्रोग्राम की पूरी तैयारी हो चुकी थी ........

इधर सावला अब्ब पूरी कोशिश करने वाला था नम्रता को पटाने की ........

नम्रता को भी एक अट्रैक्शन डायरेक्टली नहीं पर इंदिरेक्ट्ली सावला के प्रति हमदर्दी और अट्रैक्शन होने लगा था ..........

. अब्ब्ब आगे ................

नम्रता उसी हल में किचन से हॉल की तरफ बढ़ती हे और जाते जाते अपनी चुनरी निकल के जाती हे जीसस वजह से पहले से शोले की तरह भड़के हुवे बूब्स का और उभर दिखने लगता हे .....

नम्रता के चेरे पे एक स्माइल थी और ते स्माइल नार्मल नहीं थी इस स्माइल के पीछे कुछ तोह वजह थे ....जिस के बस उसने अपनी चुनरी निकल दी .......

नम्रता के स्तन का उभर और उसकी गोरी गोरी चमड़ी एकदम दिख रही थी ऊपर से उसके ब्लू ब्रा का पत्ता भी दिख रहा था ...........

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हॉल में एंटर करते हे सावला एकदम चौक कर नम्रता को देखता हे क्यू की ुस्सेस तुरंत समझ आ गया की नम्रता अपनी चुनरी उतर के आयी हे ......

जिस के वजह से सावला के भी चेरे पर एक कामिनी स्माइल आए जाती हे ......

सावला :- क्या हुवा बेटी ....

नम्रता:- कुछ नै चाचा .....ऐसा क्यू पूछा

सावला :- तुम्हारी चुनरी कहा गई ....

नम्रता:- voo...voo मुझे

सावला :- है बोलो

नम्रता:- वो मुझे गर्मी लग रही हे इसलिए निकल दे

सावला :- अच्छा ठंडी में गर्मी हो रही हे तुम्हे बीटा ...( और मुस्कुराता हे )

नम्रता:- ( वो भी हलकी स्माइल देती हे ) है हो रही हे आपको क्या ....

सावला :- तोह चुनरी निकल के क्या होगा ...

नम्रता:- मतलब

सावला :- चुनरी निकालके गर्मी थोड़ी जाएगी ....

नम्रता:- तो .....

सावला :- तुम्हे गर्मी निकलना नै आता ...

नम्रता:- अम्म नै अत कैसे निकलते हे

ये बोलते वक्त नम्रता बड़ी प्यारी मुस्कान देती हे और जैसे कुछ पता न हो .......ऐसा दिखती हे ......

सावला :- अच्छा जाओ अपने रूम में .......बीएड पे लेट जाओ ...पूरा बदन बीएड पे रखो ......अपनी एक ऊँगली लो ........ासको दबाओ....

नम्रता स्कॉक होती हे और सावला के और अच्चरिया से देख के बोलती हे क्या चाचा

सावला:- अरे अपने ऊँगली को एक के रिमोट पे दबाओ .........अपने आप गर्मी चली जाएगी तुम्हारी और ठंडा लगेगा ....

और सावला उसके तरफ देख के अपने गंदे पिले डट निकल के हरामी की तरह हसने लगता हे

नम्रता को भी बड़ी शर्म आती हे और वोह सीरियस फेस बनके सावला की और देख टी हे

सावला :- क्या हुवा नम्रता तुमने कुछ अलग सोचा क्या .....और हस्ता हे ..

नम्रता:- नै नेने कुछ नहीं सोचा आप हसो मत ....

सावला :- क्यू आईडिया अच्छा नै लगा ......

नम्रता:- अच्छा हे ........पर इतनी भी नै हो रही गर्मी की एक में सोजावू अभी ...

सावला :- फिर कितनी हो रही हे बताओ .....

नम्रता:- थोड़ी सी .......

सावला :- तोह दूसरा भी आईडिया हे ....( और नम्रता की तरफ देख के हसने लगता हे)

नम्रता:- कोनसा आईडिया बताओ जरा

सावला :- नै तुम्हे अच्छा नै लगेगा ...

नम्रता:- बताओ तो सही कुछ नहीं बोलूंगी

सावला :- नहीं तुम मुझे घर से बहार निकल डौगी......

नम्रता:- अरे नहीं चाचा आप बोलो ....

सावला :- उस दिन की तरह कर ने से तुम्हारी गर्मी जा सकती हे ( और हल्का सा हस्ता हे)

नम्रता :- किश दिन की तरह चाहा. क्या बोल रहे हो

सावला:- वो साफ सफाई वाले दिन की तरह ......

नम्रता को वो सुन के एक अच्चरिया होता हे और वो थोडासा मुस्कुराती हे और सावला की तरफ देख के हस्ती हे और बोलती हे...

नम्रता:- कुछ भी चाचा ..........

सावला:- है .......सच कह रहा हु नम्रता...

नम्रता:- नहीं में ऐसा कुछ नै करुँगी .

सावला :- उस दिन तोह किया था तुमने .

नम्रता:- वोह अपने किया था और गलती से हुवा था ........( और थोड़ी तीखी नजरो से सावला को डेक्टि हे )

सावला:- अच्छा तोह तुम अच्छा नहीं लगा था उस दिन ...

नम्रता:- बिलकुल नहीं ...

सावला :- तोह आवाज क्यू निकल रही थी तुम

नम्रता:- ऐसा हे वो आ रहा था अंदर से

सावला :- तोह बताओ केसा लग रहा था ...

नम्रता:- बोलै न कुछ नै लग रहा था. ..

सावला :- ठीक हे तो इतना बताओ अगर फिर से हुवा तो वोह वाला आवाज निकलोगी ( और नम्रता की तरफ देख के हल्कासा मुस्कुराता हे )

नम्रता भी थोड़ा निचे देख के मुस्कुराते हे और अपनी गर्दन थोड़ा ऊपर कर के बोलती हे

नम्रता:- है देखूंगी ...........

सावला :- अच्छा तोह मिटने की हे तुम्हारी गर्मी .

नम्रता:- नहीं अभी नहीं ...

सावला :- फिर कभ ....बताओ

नम्रता:- कभी नहीं ...

सावला :- अभी तोह बोली देखूंगी...

नम्रता:- है मतलब ....

सावला :- क्या मतलब बताओ ....

नम्रता:- मतलब ज्यादा नहीं ....सिर्फ थोडासा ...

सावला:- अच्छा कितना ....और कब ...

नम्रता:- देखूंगी पर अभी कुछ नहीं करना

सावला :- ठीक हे लेकिन गर्मी तोह अब हे न ..

नम्रता:- है तोह ....

सावला :- है तोह अभी करने से गर्मी जाएगी न बीटा.....( और हलकी से कामिनी स्माइल देती हे )

नम्रता अब्ब सावला के बातो में ादक चुकी थी .. इससे बहार निकलना अब्ब थोड़ा मुश्किल था और ......अब्ब सब नम्रता पे निर्भर था.....

नम्रता:- क्या करोगे आप चाचा बताओ

सावला :- उस दिन की तरह करूँगा बास

नम्रता:- है लेकिन क्या. ....

सावला :- उस दिन जैसे तुम्हारे कमीज पे पीछे से जबान राखी थी .

नम्रता:- अम्म और ...

सावला ;- और चाटूँगा पूरी तुम्हारी कमीज पूरी गीली कर के ....उस दिन की तरह ...

नम्रता:- नहीं ...में नहीं करुँगी ऐसा कुछ ..

सावला:- अरे नम्रता ज्यादा नहीं थोड़ी देर ...

तभी सावला अपना मास्टरस्ट्रोक उसे करता हे .....

सावला:- उस दिन तुम्हे पता नै कितने दिनों बाद मुझे अपने मन को शांत कर ने का मौका मिला नम्रता,. सिर्फ तुम्हारी वजह से तुम बोहत अच्छी हो और मुझे उस दिन तुम्हारे वोह साथ कर ने में मजा आया .... बोहत दिनों बाद मुझे मेरी बीवी की यद् आयी समझ लो मुझे बीटा ..

नम्रता:- लेकिन चाचा में आपकी बीवी थोड़ी हु

सावला :- है लेकिन कर सकती हो न 5 मिनट

नम्रता अब्ब थोड़ी से मुस्कुराती हे और ऐसा लग रहा था अब्ब नम्रता फास चुकी हे सावला के जल में .....

नम्रता:- लेकिन मुझे चुना नहीं .....

सावला:- है नहीं छूवूँगा हैट नहीं लगा ूँगा तुम्हे ...

नम्रता:- लेकिन कोई आया तोह ....माँ आ सकती हे

सावला:- अगर मैडम आयी तोह रुक जायेंगे हम .

नम्रता:- ok पर लाइफ में फिर से कभी नहीं आप मुझ से ये करने के लिए बोलोगे

सावला :- है बीटा कभी नहीं बोलूंगा ...

नम्रता को अब्ब हलकी से शरारत और एक्सिटिंग लग रहा था जिस वजह से उसके बड़े बड़े बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे.......

सावला :- कहा करे नम्रता....

नम्रता:- सिर्फ पांच मिनट्स है चाचा ...

सावला:- है नम्रता....

नम्रता कुछ सोचती हे और बोलती हे

नम्रता:- यहाँ मत चाचा ...मेरे बैडरूम में चलो वह पे ....

सावला नम्रता के तरफ देख के मुस्कुराता हे और बोलता हे ...

सावला :- जैसे तुम कहो बीटा ....

और नम्रता अपने बैडरूम के तरफ अपनी बड़ी गांड हिलाते हुवे चलने लगती हे .......उसके पीछे सावला भी चल पड़ता हे उसे भी अपने किस्मत के ऊपर यकीन नहीं हो रहा था लेकिन जो भी हो रहा था उसके फायदे का हो रहा था ......

पीछे से चलते वक्त वोह अपने लुंड को जोर से दबाता हे और नम्रता के गांड को डेल्ह कर उसका लुंड जोर जोर से सैमी देने लगता हे .....

नम्रता जेक बीएड पे बेथ जाती हे ........

और उसकी थोड़ी कमीज ऊपर हो जाती हे जिस वजह से सावला को नम्रता के गोल गांड का व्यू दीखता हे ........और इतनी मादक गांड देख के तोह किसीका भी पिघल जायेगा ......

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नम्रता:- क्या करना हे चाचा जल्दी बोलो 5 मिनट्स हे सिर्फ ....और माँ आ गयी तोह मुझे मत कुछ बोलना .....

सावला उसकी तरफ मुस्कान देता हे और कहता हे ...

सावला :- तुम्हे देखने के लिए तोह 5 साल काम पद जायेंगे .....5 मिनट की क्या बात कर रही हो .....

नम्रता को अपनी ऐसी तारीफ सुनके थोड़ी शरण आ जाती हे. ..और वोह निचे देखने लगती हे ......

सावला :- उस दिन की तरह तुम मुझे अपनी कमीज के ऊपर से वोह दो ....में अपनी जबान से चाटता हु .....

नम्रता को ये सुन के बोहत मादक फील होता हे और वोह शर्म से और अपनी गर्दन झुका लेती हे.......

सावला :- दो न नम्रता अब्ब समय जा रहा हे ..

नम्रता:- क्या करू में आप बताओ मुझे कुछ मालूम नहीं ...

सावला :- बास तुम ऐसे कुट्टी की तरह अपने हटो पे और घुटनो पे रहो ....और मुझे अपनी गांड दो ......

नम्रता:- सीईई ऐसे कैसे वर्ड बोल रहे हो चाचा .........और गुस्से से डेक्टि हे ....

सावला :- अब बीटा गांड को गांड हे कहेंगे. न ...हम अडानी लोग ऐसे हे बोलते हे. . .

नम्रता को और शर्म आती हे ...वोह दिखा तोह रही थी ...की वो गुस्सा हे लेकिन वोह शब्द सुनके उसके भी मन में गुदगुदी हो रही thi......usko भी वो वर्ड अच्छा लग रहा था ..

नम्रता:- ठीके ठीके चाचा होती हु में वैसा ...

नम्रता उठके अपने नाजुक हैट बीएड पे रखती हे .......अपने सकवार को सँभालते हुवे बीएड पे कुट्टी जैसी पोजीशन ले लेती हे ......क्या खूबसूरत लग रही थी और मादक .....उस पोजीशन में उसके 34 के आजम ऐसे लटके हुवे थे जो कोई भी देख कर चूसने का मन करे . ..

उअसकी गांड थोड़ी बहार निकल रही थी ......जिस की वजह से वोह और भी मादक लग रही थी .......और उसके फेस पे एक अलग हे मुस्कान थी ...

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सावला को नम्रता को इस हालत में देख के ....उसका लुंड और टाइट हो गया ......उसे ऐसा लग रहा था अभी नम्रता के कमीज़ फाड् दे और उसके गांड को राबड़ी की तरह चोदे .....लेकिन उअसका दिमाग उसपे काबू कर रहा tha....par लुंड तो बेकाबू हो रहा था ......

नम्रता के मन में भी हलचल चल रही थी और उसके लटके हुवे बूब्स उसे और भी मादक बना रहे थे ......

नम्रता:- क्या कर रहे हो चाचा .....

और पहले हे बता रही हु मुझे चुना नहीं और सिर्फ 5 मिनट्स है ........

सावला :- है .....

और अब्ब्ब शुरू होता हे गन्दा खेल जिस में नम्रता का पहला कदम गिर चूका था .....

वो बुद्धा नम्रता के खूबसूरत गांड की तरफ ..........अपना बदबूदार मुँह बढ़ा था हे. .......100-200 पैसे में रंडी छोड़ने वाला बुद्धा आज .....एक हाई क्लास गर्ल की गांड कहते का .......क्या नसीब था सावला का .......अहह

नम्रता के कमीज से मादक गंध आए रही थी जिसे सूंघ के सावला और पागल हो जाता हे. ...... नम्रता के कममीज़ की गंध वो अपने जेहन में बसा लेता हे .......

नम्रता अपनी गांड और थोड़ी पीछे करती हे उसके मन में भी .....बोहत कुछ चल रहा था ...अब्ब अच्छा या बुरा ...वोह नहीं पता ....

सावला अपना गन्दा मुह्ह और नम्रता के गांड के पास ले जाता हे .....और हल्केसे उसके गांड की खुशबु लेता हे .......उसकी गरम गरम ससे नम्रता के गांड पे गिर रही थी .....

नम्रता को भी सावला की गरम गरम ससे अपने कमीज पे महसूस हो रही थी .......जिसके वजह से उसके शरीर में बिजली दौड़ पड़ती हे .....

सावला धीरे से अपनी जबान बहार निकलता हे ....जोह बोहत गन्दी थी .....और हलके से उस जबान को ..... नम्रता के गद्देदार ...गांड के ..... कमीज के ऊपर रखता हे ......और ..... परफेक्ट एक्दम्मम वोह अपनी जबान नम्रता के ......... कमीज पे गांड के होल की जगह रखता हे ........

और नम्रता के चेरे पे अलग हे एक्सप्रेशन अत हे .........और उसके मुह्ह से धीरे से ....अह्ह्ह्हह निकलता हे ......

सावला नम्रता के कमीज के ऊपर से धीरे से अपनी गीली गीली जबान को ....थोड़ा हिलता हे ......और ...बोलता हे ....

सावला:- नम्रता में तुम्हारे कमर पे हैट राखु ..........

नम्रता,:- नहीं मेने कहा न मुझे टच नहीं करना तोह. नहीं .....

सावला धीरे से जबान पे प्रेशर देके ....गांड को चतत हे ...

नम्रता:- अह्ह्ह्हह धीरे .....

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सावला:- पकड़ने दो कमर को .......कुछ. नै करूँगा ....ठीक से होगा अगर कमर को पकड़ा तोह .......

नम्रता:- ahhh....thike पकड़ो ...

सावला अपने गंदे काळा हैट .....धीरे ...से नम्रता के गोर गोर कमर को पकड़ता हे ........और सावला के हैट टच होते हे नम्रता के शरीर में बिजली दौड़ती हे ........

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सावला कास के नम्रता की कमर पकड़ता हे .......और अपने जबान को नम्रता के गानन्द पे रगड़ना शुरू करता हे ...........

नम्रता अह्ह्ह्हह अम्म धीरे ....

और तभी ..........

जोर से दरवाज़े की घंटी बजती हे ....

नम्रता घबरा जाती हे ......

सावला भी घबराता हे .....वो झट से नम्रता को छोड़ देता हे ........

नम्रत भी झट से उठती हे ......

सावला नम्रता से दूर होता हे ....

नम्रता:- लगता हे माँ आ गई ....

सावला :- है ........ऐसा हे लगता. हे ...

नम्रता:- जाओ आप हॉल में बैठो ...

सावला हॉल की तरफ निकल पड़ता ...हे...

नम्रता अपने सलवार को ठीक करती हे ...

अपनी गीली कमीज को ..अपने सलवार से धक् लेती हे तभी भी गांड के इधर सावला की ....सलीवा गिरी पड़ी थी ...वो थोड़ी थोड़ी दिख रही थी ........

नम्रता भी दूर खोलने निकल पड़ती हे .....उसके मन की घबरात हैट उसके चेरे पे साफ दिख रही थी ....

इधर सावला भी निचे बैठा tha...uska लावड़ा अभी भी बोहत टाइट था ....हैट लगी हुवी बड़ी मछली उसके हैट से फिसल चुकी थी ........

नम्रता दूर खोलती हे .......

सामने उसकी माँ थी .......उअसकी माँ बाजु वाले आंटी से साड़ी का कुछ काम था वोह कर के आई थी ......

माँ :- इतनी देर बीटा क्या कर रही थी ....

नम्रता:- वोह माँ में ....वोह ... बैडरूम में थी तेरी कर रही थी ....

माँ :- अरे सावला चाचा आप गए नहीं नाश्ता किया अपने ....

सावला :- हआ अभी सब काम हुवा मालकिन .....और नम्रता ने दे दिया मुझे नाश्ता .....अभी निकल रहा हु में ...

माँ :- अरे रुकिए .....अभी हम भी निचे आ रहे हे प्रोग्राम के लिए हमरे साथ हे चलिए ......

सावला :- ठीक हे ......

माँ :- अरे नम्रता तुम ये सलवार पहनोगी ाचा सा ड्रेस पहनो जाओ बीटा .......

नम्रता:- ठीक हे माँ

माँ अपने रूम में निकल पड़ती हे तैयारी करने के लिए ......

सावला हॉल में बीटा रहता हे .......

नम्रता भी अपनी गीली गांड लेके निकल पड़ती हे अपने रूम की तरफ.............

सावला उसे जाते वक्त देखता हे ........

नम्रता..... भी जाते वक्त कुछ सोच रही थीइइइइइइ

और तभी नम्रता पीछे मुड़ती ....हे

.....और सावला को एक. ... बोहत हे मादक मुस्कान देती हीइ.........

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और सावला भी उसकी तरफ देख के अपने गंदे पिले डट निअक्ल के एक कामिनी मुस्कान देता हे .............

अब्ब्ब क्या होगा आगे ......क्या नम्रता फास चुकी थी सावला के जल में .....

क्या सावला ने नम्रता पे जीत हासिल की थी......

या फिर नम्रता को दूसरा मुका मिला था अपने माँ के रूप में सावला के चंगुल से छूटने का ............................

तो. .... बे ..

कॉन्टिनोएड.......

सत्य टुन्नेद...........

सत्य होम ......saty....safe.......
 
अपडेट- 18

नम्रता..... भी जाते वक्त कुछ सोच रही थीइइइइइइ

और तभी नम्रता पीछे मुड़ती ....हे

.....और सावला को एक. ... बोहत हे मादक मुस्कान देती हीइ.........

और सावला भी उसकी तरफ देख के अपने गंदे पिले डट निअक्ल के एक कामिनी मुस्कान देता हे .............

अब्ब्ब क्या होगा आगे ......क्या नम्रता फास चुकी थी सावला के जल में .....

क्या सावला ने नम्रता पे जीत हासिल की थी......

या फिर नम्रता को दूसरा मुका मिला था अपने माँ के रूप में सावला के चंगुल से छूटने का ............................

अब्बब्बब आएगी ..................

नम्रता अपने गीली गांड को लेके आगे बढ़ती हे ...........और हलके से दरवाजा लागल लेती हे लास्ट तक वो सावला को डेक्टि हे . ...और जोर से दरवाजे को लॉक कर लेती हे .........

इधर सावला हॉल में बेथ के अपने किस्मत पर रो रहा था ........हैट आया हुवा इतना अच्छा मौका ......उसके हैट से छूटा था वो बार बार अपने किस्मत को कोस रहा था ....आखिर क्या किस्मत थी उसकी .......तभी तभी वो पल यद् कर के अभी भी उसका लावड़ा ...... सलूट दे रहा था ...आखिर क्या गांड थी नम्रता की ........

नम्रता अपने रूम में आते हे बीएड पे बेथ जाती ....he.....vo खुदको बारीकी से ऑब्सेर्वेद करती he....vo खुद अपने बूब्स को ऊपर निचे होते हुवे देख रही थी......

सावला के मुह्हह्ह से गीली हुवी उसकी कमीज धीरे धीरे उसे मधहोइसही में दाल रही थी ....पर ....अभी उसको तैयारी करनी थी .......पर तभी भी उसको समाज नहीं रहा था आखिर कैसे वो सावला को वो सब करने में है बोली और कैसे उसने ...कुट्टी की तरह होक ऐसा करने दिया ... कॉलेज में कभी बॉयज से बात भी न करने वाली में ऐसा आखिर क्यू किया मेने आखिर क्या हुवा हे मुझे ....

कितने गंदे हे वो चाचा कभी नहाते भी होते या नहीं ........डट तो पुरे पिले हे ....अजीब सी बदबू आती हे unse....shiiiii......mujhe क्यू अच्छा लग रहा हे पर ......

और ये सब सोचते हुवे नम्रता रेडी होने के लिए कड़ी होती हे

...

वो गीली कमीज निकल के रख देती हे ......अपना सलवार भी निकलती हे .......

और .....अपने नई ड्रेस पहन लेती ...हे...

इधर हॉल में सावला बैठा tha.......tabhi उसे ...... दरवाजा खोल ने की आवाज आती हे.....

उसको पैरो के पैजन की आवाज कण पे सुनाई देती हे...........

एक अलग से खुस्भु उस आवाज के साथ ....सावला को आयति हे ......

धीरे धीरे वो आवाज पास आयति हे .....

और क्या सावला उसे देख के पूरा घायल हो जाता हे .........क्या रूप था उसका .......

सावला ने अब तक .......उसको ऐसा कभी नहीं देखा था ....सिंपल से लगने वाली vo....aaj कितनी गजब लग रही थी.........

सावला उसे हवस के नजरो से नहीं to......ek बेठी को देख रहा tha.....jisme इतनी खूबसूरती थी की कोई भी पागल हो .........

सच खा था किसी ने की ट्रेडिशनल में प्यार और खूबसूरती बहार के आती हे .......

सावला उसके हॉल में आने तक उसे हे डेक रहा था .......

और तभी ...........हॉल का माहौल टोहड़ा बदल गया जब वो बाला हॉल में आयी ....

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अरे चाचा ...........क्या देख रहे हो ऐसे .

सावला :- कुछ नहीं मैडम .

माँ :- अच्छा ठीक हे लगता हे नम्रता अभी तक आयी नहीं ....

सावला :- है ...तैयारी कर रही होगी ...

माँ :- hmm..usko थोड़ा टाइम लगता हे ...

और नम्रता की माँ वह सोफे पे बेथ जाती हे .....

माँ :- वैसे चाचा .....ाप्प कहा रहते हो ... मतलब यहाँ से कही दूर रहते हो ह

या पास में हे ...

सावला :- है मैडम ....वो यहाँ से 10 मिनट दूर हीरा घर ...

माँ :- अच्छा ठीक हे .....पर आप ने ये मैडम मैडम क्या लगाया हे ...कितने बड़े हो आप .....

सावला:- ऐसे हे में बड़ा हु लेकिन समाज के नजरो से आप बड़े हो इस्सलिये मैडम बोल ता हु

...आखिर हम जैसे गरीब आपके बदौलत काम धंदा कर पेस्ट हे ....

माँ ;- ठीक हे लेकिन मैडम मत बोलो ...

सावला :- तोह क्या बोलू आप हे बताओ ...

माँ :- सुचिता नाम हे नेरा सिर्फ सुचिता बोलोगे तोह भी चलेगा .....

सावला :- ठीक हे मैडम सुचिता .....

सुचिता :- अरे फिर से मैडम ..( और हसने लगती हे ........)

सावला भी मुस्करा देता हे और वो भी हसने लगता हे ....

सावला :- है ठीक हे सुचिता ....नहीं बोलूंगा मैडम .....

इधर नम्रता अपने कमरे में एक बोहत सुन्दर ट्रेडिशनल ड्रेस पहन लेती हे ....और अपनी खूबसूरती को ध्यान में रखते हुवे अपने बदन पे थोड़ा गर्व कर के शीशे में देखती हे ....और फाइनल मुस्कान देके ......रेडी हो जाती हे ......

नम्रता ने आज मस्त सा टाइट ट्रेडिशनल ड्रेस पहना था ....जिस में उसका जिस्म का उभर पूरा दिख रहा था .....और उसके निप्पल का टॉप उसमे ट्रांसपेरेंट दिख रहा था .......

नम्रता अपने रूम से भर आती हे .....उसके बदन से बोहत अच्छी खुस्भु आए रही थी .........वो खुस्भु सूंघते हे सावला को पता चल जाता हे की नम्रता आए रही हे .......

नम्रता आयति हे तोह डेक्टि हे उसकी मून और सावला बात कर रहे थे. ......

सुचिता:- अरे बीटा आ गयी ......बोहत देर लगा दी ........

नम्रता:- है वो ड्रेस चूसे करने में टाइम लग गया ....

सुचिता:- वैसे खूबसूरत लग रही हो बीटा. ...नजर न लगे तुम्हे ....हे न चाचा ....

सावला :- है है बोहत खूबसूरत लग रही हो .....किसी की नजर न लगे नम्रता को ....

( ये बोलते हुवे ..सावला हल्का सा नम्रता को देख के मुस्कुराता हे )

नम्रता भी समाज जाती हे चाचा क्या बोल रहे हे ......

सुचिता:- चलो अब बोहत हो गयी बाट ....निचे प्रोग्राम चालू हो गया होगा ........

और सब निचे जाने के लिए निकलते हे ......

नम्रता और सावला लिफ्ट के यहाँ जेक रुकते ...हे सावला के हैट में उसका कचरे का बैग था. .

नम्रता की माँ दरवाजे को लॉक लगा रही थी ......

इधर सावला नम्रता से बात करने का तरय करता हे .....

सावला :- क्या हुवा बीटा नाराज हो .....

नम्रता:- नहीं तोह चाचा .....

सावला :-. फिर ाब्ब क्या करे ......

नम्रता:- किश चीज का क्या करे .....

सावला :- अरे जो चीज अधूरी रह गयी हे उसका क्या करे ......

नम्रता:- वो आपकी किस्मत आपको नहीं मिला में कुछ नहीं कर सकती .......

और नम्रता सावला की तरफ देख के हस्ती हे

सावला :- अच्छा ठीक हे तुमने इस बुड्ढे को नाराज कर दिया .....एक चीज मागि थी .....क्या मेरे लाइफ में कुछ नहीं हे ......और नम्रता की तरफ ....देकता हे .....

नम्रता थोड़ी मुस्कुराती हे .........

और उसकी माँ आए जाती हे ....

सब मिल के लिफ्ट में चढ़ जाते हे ....

सुचिता:- अरे चाचा आप रुकने वाले हो या घर जा रहे हो ...

सावला :- रुकने वाला हु ....

सुचिता लिफ्ट में आगे कड़ी थी ....

और सावला और नम्रता साथ में पीछे खड़े थे ......

तभी नम्रता की नजर जाती हे .......

वो देखती हे की सावला उसके माँ के पिच वाले हिस्स्से को देख रहा हे .............

वैसे देखा जाये तोह सुचिता की गांड बोहत बड़ी थी .....लघबघ 36 की गांड थी ......20 साल हो चुके थे सुचिता और संजय के शादी को फिर भी ....सुचिता की बॉडी बोहत मेन्टेन थी ................और वोह बोहत खूबसूरत लग रही थी......

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नम्रता देखती हे कैसे सावला की नजर उसके माँ के गांड पे तिकी हुवी हे .....उसको बोहत बुरा लगता हे ..........

सब निचे आ जाते हे ......निचे प्रोग्राम का माहौल बना चूका था ....

चारो तरफ स्पीकर की आवाज थी......

नम्रता की माँ उनके बिल्डिंग के .......कुछ औरतो के यहाँ जेक बेथ जाते हे ......

सावला भी .......एक साइड दूर खड़ा हो जाता हे .........उसको भी चारो तरफ हरियाली दिख रही थी ..........

नम्रता अपने माँ के साथ जाती हे .....

और तभी उसको सोसाइटी का वॉचमन बिरजू दीखता हे .....बिरजू की भी नजर नम्रता पे पड़ती हे................

बिरजू सब लोगो को कोल्ड ड्रिंक्स बाटने का काम कर रहा था .....

उसके हाथ में कोल्ड ड्रिंक थी और सामने उसे उसके सपनो का हॉट मॉल दिख रहा था. ...

नम्रता की भी ये पहली मुलाकात नहीं थी पिछले बार जब बिरजू इनविटेशन कार्ड देने आया था तब उनकी जान पहचान हो चुकी थी .....

बुद्धा बिरजू उसके तरफ देख के अपनी कामिनी स्माइल देता हे .

...

और नम्रता भी उसको बदले में फ्रेंडली स्माइल देती हेबेई

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उसकी स्माइल देख के बिरजू का उसके यूनिफार्म में बड़ा हो जाता हे .

बिरजू ...:- ये भगवन इतनी काम उम्र में क्या हुस्न दिया हे उसको ...अह्ह्ह्ह इतने बड़े मम्मी तोह रंडिया के भी नहीं रहते अह्ह्ह्हह.....

क्या गांड हे .....एकदम भर निक्की huvi......aese लगता हे शादीशुदा औरत he.....iske सामने तोह सब औरते फइलल हे ..

तभी नम्रता अपने माँ के बाजु में जेक एक खुर्सी पे बैठ जाती हीइ........

बिरजू कोल्ड ड्रिंक्स लेके नम्रता के पास जाता हे .....

बिरजू:- मम कुछ ठंडा लो ....

नम्रता:- नहीं ठीक हे काका .....

बिरजू :- अरे लेलो शर्माओ मत अपना हे प्रोग्राम हे....

लेलो ......

नम्रता:- नहीं मुझे प्यास नहीं हे......

बिरजू ;- अरे बोहत गर्मी हे लेलो ......

नम्रता एक मुस्कान देती हे और वो गिलास ले लेती ही....

.

बिरजू ग्लासेज केले आगे बढ़ता हे ......

नम्रता बैठी तोह थी सामने बोरिंग सा प्रोग्राम चालू था ....

सब जगह चेहरेल पहल thiii.......boht ज्यादा आवाज था....

लग बाघ सोसाइटी के सभी लोग आ चुके थे ....

सोसाइटी का चेयरमैन अब्दुल राकेश भी था.... . ......

एक प्रकार से एकदम माहौल बन चूका था .....

पर नम्रता के मन में कुछ अलग हे चल रहा था ....उसको कुछ रह सा गया हे ऐसा लग रहा था ....और अकेले होने के कारन उसे वह बोहत ऑक्वर्ड लग रहा था .......

तभी नम्रता के माँ के नंबर पे एक कॉल अत हे .....उसका मोबाइल नम्रता के पास था ..........

नम्रता वो मोबाइल उसके माँ के पास देती हे .......

उसकी माँ कॉल पे बात करते हुवे आगे निकल जाती हे ......

अब्ब्ब नम्रता को और भी बोर हो रहा था ....

बिरजू भी काम के कारन बिजी था उसे लग तोह रहा था यही चांस हे नम्रता को पटाने का पर ........काम की वजह से और अब्दुल राकेश के दर की वजह से ....वो काम कर रहा था ......

सावला भी एक जगह खड़ा था ....उसका भी मन नहीं लग रहा था.....

कुछ टाइम ऐसे हे निअक्ल जाता ...हे ......

नम्रता भोत बोर हो रही थी कुछ देर मोबाइल देखने के बाद वोह इधर उधर देखती हे ......उसे सब बिजी दिख रहे थे ..उसकी माँ अभी भी नहीं आयी थी......

उसने इधर उधर देखा तोह उसको सावला भी कही नहीं दिखा ......

नम्रता की नजर ऐसे हे अपने खुर्सी के यहाँ जाती heeeee.......toh उसे एक कागज का टुकड़ा दीखता हे .........उसको वो कुछ अजीब लगता हे ....

वो निचे झुकती हे .....और उस कागज के टुकड़े को उठा लेती he.....halke से उससे खोलती हे.....

उसपे एकदम गन्दी राइटिंग से लिखा होता हे...........

""कृपा कर के बुलिडिंग के पीछे आओ ""

नम्रता वोह पढ़ के थोड़ा हैरान हो जाती ही ....की किसने लिखा होगा ....

क्या ये कागज मेरे liye.....he .....या गलती से रह गया होगा किसीका ........

ये सब सोचते सोचते उसी इंटरेस्टिंग लग रहा था ......उसका मन का एक कोना बोलै जेक देख टी हु कोण हे......

नम्रता तुरंत अपने खुर्सी से उठती हे .......और पीछे की और जाने के लिए निकलती हे अपने ट्रेडिशनल ड्रेस को हैट में पकडे हुवे वो आगे बढ़ती हीईई.........

और जिसके ऊपर उसको डाउट tha.....vahi इंसान वह खड़ा था .... एकदम बिल्डिंग के पीछे. ...

नम्रता को देख हे वोह मुस्कुराता हे ....

नम्रता भी उसी देख मुस्कुराने लग ते हे .......

नम्रता:- क्या सावला चाचा .......यहाँ क्या कर रहे हो....

सावला:- कुछ नहीं में घर जा रहा हु यही बताना था....

नम्रता:- है. तोह वह भी आके बताते न ...

सावला:- है यहाँ बताया तोह कुछ प्रॉब्लम हे .

नम्रता:- नहीं पर ऐसे इधर थोड़ा ऑक्वर्ड लग रहा हे मुझे...

सावला:- ठीक हे.....

नम्रता:- है ....जावु me...abb.

सावला :- है ......

नम्रता जाने के लिए निकलती हे ....सावला उसकी बड़ी बड़ी गांड देखता हे .....

नम्रता पीछे मुद के सावला के तरफ देखती हे.......

सावला :- नम्रता बीटा ....

नम्रता:- है चाचा कुछ हुवा क्या ...

सावला :- बड़ी खूबसूरत दिख रही हो ..आज..

नम्रता:- शुक्रिया चाचा ....

सावला नम्रता के पास जाता हे....

नम्रता भी कुछ नहीं बोलती .....

दोनों के भी नजरे एक दूसरे से मिलती हे.....

सावला :- क्या हुवा....

नम्रता:- कुछ नहीं ....

सावला :- थोड़ी देर पहले हमने जो किया ...वो अच्छा लगा ....या नहीं ...

नम्रता:- है अच्छा था थोडासा

सावला :- लेकिन कुछ पूरा हुवा हे नहीं ...

नम्रता:- हा....

सावला :- पूरा करे....

नम्रता:- nahi...Abhi nahii....kuch भी चाचा ..

सावला :- है हो सकता हे तुम है बोलो सिर्फ ...

नम्रता:- नहीं ....नहीं ....कभी नहीं..

सावला :- मेहरबानी करो बीटा आरसे किसी मर्द को अधूरा नहीं छोड़ते .....कृपा करो...

नम्रता:- लेकिन चाचा कैसे करेंगे आप ...

सावला :- बतावु ...

नम्रता:- है..

सावला :- तुम यहाँ दिवार से चिपको ....और कड़ी हो जाओ .......और में तुम्हारा ड्रेस ...ऊपर कर के .....तुम्हारी गांड को चाटूँगा .......

नम्रता:- नहीं चाचा .....मुझे यहाँ ऐसा कुछ नहीं किया ....मुझे किसीने देख लिया तोह ..

सावला :- कुछ नहीं होगा .....करते हे..

नम्रता:- नहीं चाचा .....में नहीं करुँगी प्लस दूर रहिये आप ...

सावला को अब्ब लग रहा था नम्रता को ऐसा नहीं प् सकते...... इस्सलिये वो थोड़ा ट्रैक चेंज करता हे....

सावला:- ok नहीं करते लेकिन ....

नम्रता:- क्या लेकिन

सावला :- मुझे ऐसे अधूरा कैसे Rahu...mere फीलिंग को संजो ....में नहीं रह सकता सेसा प्लस कृपा करो मुझ पे ....

नम्रता:- में क्या कर सकती हु चाचा. ...

सावला :- मुझे voh.......tumhari ...

नम्रता:- बोलो chacha......kya

सावला :- तुम्हारा वोह....

नम्रता:- मेरा क्या...

सावला :- तुम्हारे अंदर वाला चाहिए...

नम्रता:- मतलब क्या चाहिए....( नम्रता को थोड़ी शर्म आती हे )

सावला :- वही निचे वाला .......( और एक मुस्कान देता हे )

नम्रता:- क्या निचे वाला

सावला :- वो तुम्हे निचे जो पहना हे .....वो क्या कहते हो तुम लोग use......ha पंतय

नम्रता को ये सुनते हे बोहत अजीब सा लगा आखिर कोई ऐसे मांगता हे क्या ....और वो सोचते हे ....उसे बोहत शर्म भी आती हे...

नम्रता;- कुछ भी .चाचा वो कैसे दू में आपको ....

सावला :- अब्ब ये तोह बोहत आसान he...beta ..

अब्ब न मत करो ...

नम्रता:- लेकिन यहाँ कैसे चाचा .......

सावला :- तुम थोड़ा पीछे हो जाओ ....और निकलो

नम्रता:- और क्या करोगे आप उसको ...

सावला :- कुछ नहीं तुम दो ....में कल सुबह तुम्हे लुटा दूंगा ......

नम्रता:- अच्छा ....और यहाँ कैसे निकलू ...

सावला :- थोड़ा पीछे हो जाओ ......और ऊपर कर के निकालो .....और दो मुझे....

नम्रता:- और आप ....

सावला :- में घूम जाता हु....

नम्रता कुछ सोचती हे .....उसको ये इंटरेसिंग लगा ...और उसका कोई नुकसान भी नहीं tha.....toh मन जाती हे......

सावला पीछे घूम जाता हे......

नम्रता थोड़ा पीछे hoke...kuch सोच रही ...थी....

.

उसे दर लग रहा था ..और थोड़ा मजा भी आ रहा था.....

उसने अनारकली टाइप निचे से ड्रेस पहना था ......

और मॉर्निंग के इंसिडेंट के वजह से उसकी छूट ने उसके पंतय पे बोहत सारा पानी छोड़ा tha.......jiske वजह से उसको शर्म आए रही थी ......

नम्रता अपने नाजुक हटो से अपने ड्रेस को पकड़ती हे...........

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सावला को महसूस होता हे की अब्ब नम्रता ने अपने ड्रेस को पकड़ा होगा .......

उसका लुंड वो इमेजिन कर के बोहत टाइट हो चूका था ........ और वोह थोड़ा पानी छोड़ रहा ....था क्यू की नम्रता की बदन की खुस्भु वोह आसानी से सूंघ सकता था....

नम्रता थोड़ा ऑक्वर्ड होक अपने ड्रेस को ऊपर लेने के लिए निचे झुकती हे .....उसे थोड़ा मजा भी आ रहा था.

और बड़ी नजाकत से अपने कोमल गोर घुटनो तक वोह ड्रेस लेती हे........

सावला को इधर नम्रता की खुस्भु आ रही थी उसे बार बार पीछे मुड़ने का मन हो रहा था ....लेकिन वोह सोचता हे अगर पीछे मूसा तोह ....कुछ भी नहीं मिलेगा......... इस्सलिये वोह अपने आप पर काबू करता हे......

नम्रता aaabn......thoda इंट्रेस्ट ले रही थी उसने ऐसा कभी नहीं किया था....... इस्सलिये उसे अब्ब मजा आ था था ......

वो अपने dress's को थोड़ा ऊपर कर लेती he......abbb उसकी ब्लैक कलर की पूरी गीली पंतय आधी दिख रही ....थी ....

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और अब्ब्ब नम्रता अपने कमर तक अपना ड्रेस ऊपर कर लेती हे..........

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पंतय के ऊपर हो जाने से चारो तरफ उसके पंतय की खुशबु बहार निकलती हे ....ऊपर से ....उसकी पंतय पूरी गीली thi.....uski वजह से और गंध आने लगती ....हे....

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वो धीरे से अपने कमर पे हैट रखती he....aur दोनों हटो से पंतय को निकलने की कोशिश करती हे......

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इधर सावला के नक् में नम्रता के छूट की खुस्भु ाआती हे .....अगर कोई भी आदमी रहता तोह अभी नम्रता के ऊपर टूट पड़ता ........पर सावला ने गजब का कण्ट्रोल कर रखा था.....

इधर नम्रत अपने पंतय को निकलने की कोशिश करती हे ....लेकिन गीली होने के कारन वोह उसके छूट को चिपक जाती हे ......और धीरे से निकलती हे जिसकी वजह से .....""चाप .."चाप आवाज अत हे ..........और नम्रता की आधी छूट और उसके ऊपर ke.....balo का हल्का सा ....झुण्ड दीखता ....हे.....

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अब्ब्ब नम्रता अपनी पूरी पंतय निकलती हे .....

और निकल के अपने हैट में लेती हे.......

वो एक बार उसे देखती he.......aur उसको शर्म आती हे .....क्यू की वोह पंतय बोहत गीली थी ....और उसपे बोहत सफ़ेद डेग the.....uska सारा रास ुसस्स पंतय पे गिरा huva.....tha......

वोह अपने पंतय को देखती हे ...और श्रम से मुस्कुराती हे.....

नम्रता:- चाचा हो गया....

सावला :- अच्छा ठीक हे ....दो मुझे...

नम्रता:- पहले बताओ क्या करोगे आप इसका ..

सावला :- कल बता ता हु बीटा अभी दो मुझे ..

नम्रता श्रम से सावला के हैट में अपनी पंतय देती हे....

सावला उस पंतय को देख के बोहत खुश हो जाता हे .... नम्रता का पूरा रास उस पंतय पे tha........uska लुंड वो देख के गन्दी धोती में उछलने लगता हे.....

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नम्रता को अपनी पंतय सावला के हैट में देख कुछ अलग हे फीलिंग आ रही thi....uske वजह से नम्रता के बड़े बड़े संतरे ऊपर निचे हो रहे थे ........

सावला को भी नम्रता की पंतय की खुस्भु लेके वोह भी जन्नत में चला गया था.......

नम्रता एकटक सावला को देख रही थी ...

सावला भी नम्रता को देख रहा था....

सावला एक मुस्कान नम्रता को देता हे....

नम्रता शर्माके उसकी तरफ डेक्टि हे ..

सावला .. ... नम्रता के पंतय को उसके सामने दबाने लगता हे .......

जिससे देख नम्रता को अजीब लगता हे. ...और मजा भी अत हे ...

सावला नम्रता के पंतय को छूट की जगह उस चिप चिप्स रास के ऊपर अपना अन्घुता रखता हे.....

नम्रता वो देख के पानी हो जाती हे...

सावला धीरे से उसके पंतय के ऊपर उसके छूट की जगह अपना अन्घुता घिसने लगता हे......

नम्रता के बूब्स वोह देख के तेजी से ऊपर निचे होने लगते हे .....

सावला abbbn...aur जोर से अंघूठे को ....घिसता ....he.....aur आवाज अणि लगती हे ...

""Ghassssss.""ghassssss

वो आवाज सुन के नम्रता को बोहत अच्छा फइलल होने लगता हे ......

सावला का अन्घुता पूरा गिला हो चूका था. ...

वो नम्रता के सामने ुसस्स अंघूठे को अपने मुहहह के पास ले जाता हे......

नम्रता वोह देख के बोहत चौक जाती हे....

सावला उस अंघूठे को पूरा चाटता हे .....

और अजीब से चाटने की आवाज निकलता हे ...

नम्रता पूरी लाल लाल हो जाती हे शर्म से....

सावला अब्ब रुक जाता हे.

और नम्रता के और देखने लगता हे ...

सावला:- क्या हुवा बीटा .....बोलो

नम्रता:- कुछः नहीं ....चाचा ....

सावला :- अच्छा लग रहा हे ....तुम्हे....

नम्रता:- हा चाचा आप क्या कर रहे हो ये.......

सावला:- कुछ नहीं ऐसे हे ......

नम्रता:- ठीक हे......

सावला धीरे से नम्रता की तरफ बढ़ाता he....panty न होने के कारन अब्ब्ब नम्रता को छूट का. "" व्"". शेप पूरा दिख रहा था. .

सावला नम्रता के बदन की तरफ बढ़ता हे..

और उसके पास जाता he.....aur थोड़ी दुरी बनके .....

.

सावला :- क्या हुवा .... नम्रता

नम्रता:- कुछ नहीं चाचा..........

सावला :- अच्छा नहीं लग रहा ....

नम्रता:- लग रहा हे चाचा.......

सावला उसके और करीब जाता हे .....उसका एक हैट उसके कंधे पे रखता हे .....

नम्रता उसी कुछ नहीं कहती .....

सावला कंधे पे सहलाता हे.........

नम्रता अपनी आँखे बंद कर लेती हे.....

सावला उसके kandhe.....pe वही अन्घुता घूमने लगता .....हे और नम्रता के और करीब जाता हे......

अब्ब्ब दोनों के बिच में सिर्फ हवा जाये इतना हे अंतर था.......

क्या होगा ाब्ब्ब...

सावला को नम्रता की पंतय तोह बाथरूम में भी मिल सकती थी ..........वो भी बड़ी आसानी से ....

क्या ये उसका कोई प्लान था .....

क्या नम्रता को सावला पसंद आने लगा था ..

क्यू नम्रता एक बुड्ढे की साडी बाते मन रही थी....

अब्ब्ब क्या होगा आगे....

स्टे तुनेड...........

सताय सेफ.......

स्टे होम
 
अपडेट:- 19

सावला उसके और करीब जाता हे .....उसका एक हैट उसके कंधे पे रखता हे .....

नम्रता उसी कुछ नहीं कहती .....

सावला कंधे पे सहलाता हे.........

नम्रता अपनी आँखे बंद कर लेती हे.....

सावला उसके kandhe.....pe वही अन्घुता घूमने लगता .....हे और नम्रता के और करीब जाता हे......

अब्ब्ब दोनों के बिच में सिर्फ हवा जाये इतना हे अंतर था.......

क्या होगा ाब्ब्ब...

अब्बब्बब ाएगीएएएए..........

सवाल :- क्या हुवा नम्रता....

नम्रता:- कुछ नहीं चाचा ....

सावला :- कयास लग रहा हे .....

नम्रता:- पता नहीं चाचा ...

सावला :- ....अच्छा या बुरा .....

नम्रता:- पता नहीं .......

सावला धीरे धीरे नम्रता के कंधे को सहलाते हुवे .....उसके पास जा रहा था......

. अब्ब्ब सावला के खड़े लुंड को ... नम्रता के छूट का आकर्षण होने लगा tha....vo भी खड़े होते हुवे ...... नम्रता के छूट की तरफ कुछ कर रहा था.....

नम्रता को इस वक्त कुछ समझ नहीं आ रहा था .....वो बास फ्लो में बहे जा रही thi......use बस अच्छा लग रहा था ...पर इतना भी नहीं ....की....

नम्रता:- चाचा ठीक नहीं ये है....

सावला :- बीटा शांत रहो Namrata.....kuch मत कहो ..

सावला धीरे से नम्रता के बैक पे हैट रख देता he......savla का कला गन्दा हैट नम्रता के कोमल गोर पीठ पर था ....

सावला का अपने पीठ पे हैट टच होते हे ... नम्रता के शरीर से एक .....अलग हे ....विबे आयी ....

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अब्ब्ब सावला धीरे धीरे नम्रता के पीठ को सहलाता हे .....

अब्ब नम्रता के चेरे के ऊपर थोड़े ख़ुशी के भाव थे. ......जैसे की उससे जोह चाहिए वोह मिल गया होऊ

वैसे देखा जाये तोह सावला कोई पड़ा लिखा नहीं था .....और न हे ज्यादा चालक ......और नहीं राक्षस या नियत से बुरा ......

वोह भी फ्लो में जोह उसे मिल रहा था वोह ले रहा था .....है लेकिन कोशिश वोह पूरा करता tha......ek गन्दा बुद्धा जिस के पास कुछ भी नहीं hai...........uske हैट में आज ...एक पारी थी जिस की जवानी .....उभर कर आयी थी ....एक Kali.......jo अभी खिली है ........

सावला उसी धीरे से और करीब कर ता हैं ...

नम्रता अपने आँखे बंद कर लेती हे...

सावला वोह देख के खुश हो जाता हे ....

वोह अपना दूसरा हैट भी नम्रता के बैक पे रखता ....हैंन और नम्रता को और पास लेता हैं .

नम्रता भी थोड़ी पास हो जाती hain......aur अनादर हे अंदर उससे बहोत शर्म आ रही थी .....उसके मन में बोहत हलचल हो रही थी

अब्ब दोनों एक दूसरे के बोहत पास थे...

फिर भी सावला रिस्क नहीं लेना चाहता था.....

वोह नम्रता के और पास जाने की कोशिश करता हे लेकिन नम्रता थोड़ी पीछे हैट जाती हैं और कुछ नहीं कहती .........

सावला को भी अब्ब लग रहा था नम्रता हाट अस चुकी हेरे......

नम्रता ता को भी जो हो रहा था उसका अंदाजा नहीं tha....ha पर उससे बोहत अलग फीलिंग आ थाई थी.......

जो उसे एक्ससिटेमेंट के अलग हे लेवल पे लेके जा रही थी....

सावला नम्रता के पीठ को सहलाते सहलाते उसके कमर के पास जाता हे ....जो की पूरी ओपन thi.....jis के वजह से सावला के गंदे गंदे काळा हैट नम्रता के दूध से बदन पे सेहला रहे थे..............

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कमर के यहाँ से सावला का .....हाथ धीरे से नम्रता के गांड पे चला जाता हैंण्ण्न

नम्रता की बड़ी बड़ी गांड पे अपने हाथ रखते हे सावला का ....तूफानी लुंड जोर जोर से सलामी देने लगता हैंन......

नम्रता को अपने गांड पे सावला का हैट पके बड़ा उनकंफर्टबले फील होता हैंन..

सावला धीरे से नम्रता की गांड प्रेस करता हैंण्ण्न.......

नम्रता:- ोुछःह चाचा क्या कर रहे हो

सावला :- कुछ नहीं बीटा क्या हुवाआ....

नम्रता:- निकालिये .....अच्छा नहीं लग रहा ...

सावला :- ठीके बीटा ...जैसा तुम कहो

लेकिन सावला का लुंड मैंने के लिए तैयार नहीं tha.....usee नम्रता की गांड चाहिए थी...

इतना दूध जैसा माला देख के ऊपर से इतनी बड़ी गांड कोई कैसे छोड़ेगा......

सावला नम्रता के बात को नजर अंदाज करते हुवे नम्रता के .....गांड को धीरे धीरे सहलाता हे उसके ड्रेस के ऊपर सीस ......

नम्रता:- अहह चाचा क्या कर रहे हो छोड़ो

सावला को पता था वोह क्या कर रहा हे....

सावला और नम्रता की धीरे धीरे गांड सहलाता रहता he......jees के वाहह से नम्रता के बदन में बिजली दौड़नी शुरू होती हेरे

उसको खुद के अंदर का शारीरिक बदलाव अच्छा लगने लगता हे.......

सावला अब्ब जोर से नम्रता की गांड दबाता हे........

नम्रता:- ouchhhhhh..ahh

और नम्रता फाटक से सावला का हैट अपने गांड के ऊपर पकड़ लेती हेबेई



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..क्या सन था ..... सावला के हाथ में नम्रता की कोमल बढ़ी गांड thi......aur नम्रता ने सावला का हैट पकड़ के रखा था.......

नम्रता का अब्ब्ब पूरा पानी होने लगा था ...

उसने सावला का हाथ रोका तोह था ...पर उस रोखने में कोई दम नहीं था.....

सावला:- क्या हुवा नम्रता बीटा ...

नम्रता:- कुछ नहीं चाचा ....

सावला :- तोह.....

नम्रता पूरी शर्मा जाती हैंन....

नम्रता:- तोह कुछ नहीं.....

सावला :- हैट छोड़ो फिर.....

नम्रता:- नहीं वोह दबाओ मत ....

सावला :- अछ्हा तोह क्या करू बीटा ....बोलो ...

अब्ब्ब नम्रता भी रिस्पांस करने लगे थी उसको भी अच्छा लगने लगा था....

नम्रता सावला का हैट धीरे से पकड़ती हे .....और थोड़ा सा हिलती हैंण्ण्न .....

अपने हैट में सावला के हैट को पकड़ के. ..अपने हे गांड को धीरे से सहलाती हैंण्ण्न.....

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और मनो ऐसा कह रही ho......ki दबाओ mat.....dhire से सेहलावो .......

और इस तरह इंदिरेक्ट्ली सावला को एकप्रकार से सिग्नल हे मिल गया हो .... नम्रता के तरफ से

अब्ब्ब नम्रता अपना हैट हटा देती हैं....

और शांत रहके पानी आँखे बंद कर के फील लेती हैं......

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सावला अब्ब्ब नम्रता के गांड के दादर के बिच पानी उंगलिया फेरना शुरू करता हैं...

अब्ब्ब नम्रता के छूट में गीलापन आने लगता हैं......

अब्ब्ब तोह नम्रता ने पंतय भी पहनी नहीं थी .....उस को अपने छूट के निचे गीलापन महसूस होता hainnn.......aur उसी वोह और भी उछाल जाती हैंन...

इधर सावला नम्रता के गांड के दरार में उसके ड्रेस के ऊपर se.......hat डालने की कोशिश करता hain.....andar पंतय न होने के कारन ........ नम्रता की .....गांड आसानी se....savla को महसूस होती हैंन......

सावला को ...अब्ब मजा आने लगा था ...इस खेल मैं और अब्ब्ब लग रहा था ये खेल अलग हे लेवल पे जाके रुकेगा.......

सावला नम्रता के गांड के दरारों को दबोचना शुरू करता हैंण्ण्न....

नम्रता भी आँखे बंद कर के पूरा मजा उठती हैं....

सावला को ड्रेस के ऊपर से नम्रता का होल ढूंढ़ना मुश्किल हो रहा था....

उससे तोह ऐसा लग रहा था ...अभी ऊपर करू इसका ड्रेस और ....गानन्द में उतर दू पूरा लुंड ....लेकिन अब्ब ुसेड दिमाग से काम लेना था.......

नम्रता को सावला की परेशानी समझ रही थी.....

वोह धीरे से खड़े खड़े ....अपने पेअर एक दूसरे से थोड़े दूर करती हैंन.....

जीसस की वजह से उसकी गांड की दरार थोड़ी ढीली पद जाती hai.nnnn

फिर सावला झट से उसके दरार में एक ऊँगली डालने की कोशिस करता हैंण्ण्न

पैंट्री न होने के कारन सावला की ऊँगली झट से नम्रता के ड्रेस को लेके उसके गांड में घुसने की कोशिश करती हैंन....

नम्रता:- ouchhhh.ahm....chacha यह

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सावला को नम्रता की कोमल मादक आवाज सुन के और नशा चढ़ता हैं...

और वोह ऊँगली और अंदर घुसाने की कोशिश करता हैंण्ण्न......

नम्रता को अब्ब्ब दर्द होता hainn....achha लगने वाला खेल अब्ब सुख देने वके दर्द पे अटक जाता हुन्न्न.....

नम्रता:- ोुछहहहह चाचा मत करो ....

निकली .....ये गलत लग रहा हैं......

सावला को भी पता चलता hainn....itni जल्दी वर नहीं कर सकता ......

वोह भी धीरे से नम्रता को बोलता हैं...

सावला :- नम्रता बीटा ...कुछ नहीं कर रहा ...शांत हो जाओ ....में हु न...

नम्रता:- .....ha.......firse मत करना......

सावला ....अब नम्रता को ....थोड़ा पास लेने की कोशिश करता हैं.....

सावला अब्ब्ब अपने दोनों हैट नम्रता के गानन्द पे रखता hainn.....aur उसको करीब करता हैंन.....

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सावला के असेसा अचानक करीब करने से नम्रता को सरप्राइज तोह होता hain....Lekin उसका विरोध करने का मन नहीं होता ....

सावला का लुंड उसके धोती मैं पूरा टेंट कर के खड़ा थान......

उसको नम्रता के गीली छूट की खुशबु अस थाई थी .....

जिसकी वजह से वोह और जंगली शेर की तरह अपने नाजुक शेरनी के पास आने के लिए तड़पता हैं.....

नम्रता के आँखे बाद थी ....

सवाल एक गरीब बदसूरत ......गन्दा बुद्धा .....जिस के पसीने की भी बदबू गटर की तरह आयति होगी ....वोह अब्ब इस्सस कमसिन पारी के एकदम करीब आए चूका था.....

आखिर कर. ...... नम्रता के ड्रेस के ऊपर के छूट पर ..........सावला का खड़ा तूफानी लुंड टच होता ....हैंण्ण्न....

सावला नम्रता को अपने गंदे बहो में भर लेता हैंण्ण्न......

सावला का खड़ा लुंड नम्रता के ड्रेस के ऊपर जेक तड़फ raha....than....bich बिच में झटके दे रहा था .....

नम्रता की गीली छूट abbb...aur गीली होने को thi........uske छूट का गिला पैन इतना बढ़ चूका था. ...की अब्ब्ब ड्रेस के ऊपर से भी गिला पैन महसूस होने लगा था ......

सावला का मुँह अभी भी नम्रता से दूर था. ....

पर नम्रता के बड़े बड़े 34 के संतरे सावला के thik........gande साइन पे लग रहे थे ......

सावला धीरे से अपने लुंड को ..... नम्रता के छूट के ऊपर सहलाने के लिए प्रेशर देता हैंण्ण्न

नम्रता:- ahhhh.......ahh

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सावला को समझ रहा था नम्रता को क्या लग रहा हैंन.......

इस्सलिये सावला अपने लुंड को और जोर से नम्रता के छूट पे रगड़ने की कोशिश करता है ंन्न....

नम्रता के छूट अब्बब्बब और फूलने लगी थी मनो ौसी कब का इंतज़ार था .....इसका ....

सावला धीरे से नम्रता को पूरा अपने साइन से लगा लेता हैंण्ण्न

अह्ह्ह्ह क्या सन था. ....

एक आमिर घर की लड़की .....ऐसे भर एक बुड्ढे के सामने .....अपने तन को सॉफ रही थी....

नम्रता को अब्ब्ब. उसके मन में अच्छा तोह लग रहा था ...

पर.......

सावला अभी नम्रता के ोठो के तरफ अपन मोर्चा सम्भलता हैंन.....

वोह धीरे धीरे नम्रता के रसीले ोठो की तरफ बढ़ता हैंन.....

और तभी नम्रता को ..........पाने माँ डैड की ियंगे उसके आँखों के सामने घूमने लग ते हैंण्ण्ण्न.......

नम्रता को सावला की बदबू .........अपने जेहन में अब्ब्ब घिन से आने लगती हैंन.....

उसके पसीने के बदबू se.............use उलटी जैसा होने लग ता ....हे.....

अपना गोरा सुडोल बदन .......बुड्ढे सावला के साइन से चिपका देख उसी घिन जैसा महसूस होता हैंण्ण्न......

नम्रता अब्ब्ब बैक तो थे नेचर अस जाती हैंण्ण्न...

नम्रता:- छोड़ो चाचा ......

सावला:- क्या हुवा बेटी ....

नम्रता:- मैंने कहा छोड़ो मुझे चाचा. .

सावला को कुछ समझ नहीं अत आखिर हुवा क्या ..........

नम्रता जोर से सावला को दूर करती hainn....uske शकल देख के तोह नम्रता को और भी घिन आती हैं की सखी में एअसा कैसे जार सकती हूह्ह......

नम्रता:- दूर रहो मुझ से चाचा. ....नहीं तोह में पापा को बता दूंगी .....

सवाल :- नहीं बीटा ऐसा मत करना माफ़ करो ..

नम्रता गुस्से से सावला की तरफ डेक्टि हैंन..

और वह से निकलती हैंण्ण्ण्न......

और फिर से सावला को देख के बोलती हैंन.....

नम्रता:- घर चले जाओ चाचा ......जाओ

और मेरी जो चीज आपके पास हैं वोह रख lo.....mujhe देने की जरुरत नही.........

और नम्रता वह से निकल जाती हैं....

सावला सोचता हे रहता hainn....akhir उससे क्या गलत हुवा .....और फिर से एक बार अपने किस्मत पे रोने लगता हैंण्ण्ण्न. और अपने नसीब को कोसने लगता हैंन.......

सावला :- अब्ब्ब इस्सस साली के चड्डी से हे घर जेक काम चला न होगा .....कितने नखरे hainn.......isme .....एक दिन साडी आग निकल के रहनगा .....और सावला भी अपने घर की और चल पड़ता हैंन.....

इधर चलते चलते नम्रता को अपने आप पे बोहत घिन आ रही थी........

उसे लग रहा था उसने माँ डैड को धोका दिया hainnnn......voh अपने आप को कोस रही थी.......

और अपने घर की तरफ निकल पड़ती hainn......fir उसी यद् आता हैं ...

छवि तोह माँ के पास हैंन....

वोह अपने माँ को कॉल करती हैंन....

लेकिन उसकी माँ कॉल नहीं उठा रही थी......

वोह फिर से तरय करती hainnn........par वही रिजल्ट

नम्रता:- आखिर कहा गयी माँ .....बता के तोह जाती.......

नम्रता अपने घर के पास पोछ्छती हैं

रूम तोह लॉक था ........

पर .........

पर......

नम्रता को धीरे धीरे अंदर से कुछ ावाज्ज आती हैंन......

पर आवाज इतनी भी क्लियर नहीं थी..........

पर उसको डाउट अत हैंन.......

अंदर कोई तोह हैंण्ण्न.......

वोह फिर से अपने माँ को कॉल तरय करती हैंन..

इस बार सुचिता .... नम्रता का कॉल रिसीव करती हैंन.......

सुचिता:- बोलो नामु क्या हुवा .....

नम्रता:- माँ कहा हो आप ....

सुचिता:- बास. आए रही हु बीटा ......

नम्रता:- लेकिन हो कहा आप ....

सुचिता:- मैं वोह अपने बिल्डिंग के आंटी के पास आयी हु अभी आयी .....

तुम निचे हे रहना ........

नम्रता:- ok माँ जल्दी आओ.......

और नम्रता कॉल एन्ड करती हैंन.......

वोह फिरसे अंदर सुनने की कोशिश करती हैं

लेकिन इससे बार उसे कुछ सुनाई नहीं देता. ...

उसी लगता हैं उसी वहां हुवा हो....

और वोह निचे जाती हैंण्ण्ण्न. ......

क्या. ...... सच में अंदर कोई नहीं था......

आखिर नम्रता की माआ. ...इतने देर से कहा थी......

क्या नम्रता को वहां हुवा या सच में अंदर कोई था.......

स्टे तुनेड........

स्टे. होम......

स्टे सेफ .....................
 
अपडेट:- 20

सुचिता:- मैं वोह अपने बिल्डिंग के आंटी के पास आयी हु अभी आयी .....

तुम निचे हे रहना ........

नम्रता:- ok माँ जल्दी आओ.......

और नम्रता कॉल एन्ड करती हैंन.......

वोह फिरसे अंदर सुनने की कोशिश करती हैं

लेकिन इससे बार उसे कुछ सुनाई नहीं देता. ...

उसी लगता हैं उसी वहां हुवा हो....

और वोह निचे जाती हैंण्ण्ण्न. ......

क्या. ...... सच में अंदर कोई नहीं था......

आखिर नम्रता की माआ. ...इतने देर से कहा थी......

क्या नम्रता को वहां हुवा या सच में अंदर कोई था.......

अब्बब्बब ाआगेइये..........

नम्रता सोच में डूबता हुवे निचे पोहच जाती हैं ....उसी अभी भी उसका मन खाये जा रहा था की ......घर मैं आवाज आए रही थी .....

और तभी उसके फ़ोन पे रिंग बचती हैं.....

फ़ोन को देखते हे नम्रता को ख़ुशी होती हैं .....उसके डैड का कॉल था ...

डैड ( संजय) :- ..hello नामु क्या कर रही हो

नम्रता:- hello डैड कुछ नहीं प्रोग्राम चालू हैं.

संजय:- अच्छा beta......mom कहा हैं.

नम्रता:- आंटी के यहाँ गई हैं...

संजय:- ok बीटा..

नम्रता:- घर जल्दी आना ...

संजय:- बीटा आज देर हो जाएगी थोड़ी .....

नम्रता:- क्या डैड आपको फेस्टिवल में भी टाइम नहीं मिलता ......

संजय:- अरे बीटा ........आजावूंगा में घर पे

नम्रता:- ok डैड...

संजय:- एन्जॉय करना बीटा प्रोग्राम और माँ को बताना के कॉल किया था मैंने .....आज तुम लेट उठी इस्सलिये कॉल किया बीटा ..

नम्रता:- ok डैड

संजय:- bye नामु .... टेक केयर.

नम्रता:- bye....dad

. और नम्रता कॉल रख देती hainn.....usee डैड से बात करके ाचा लग रहा था.....

पर तभी उसी अपने आँखों के सामने एक औरत दिखती हैं ....जिसे देख के नम्रता को थोड़ा झटका बैठतात हैंन..

नम्रता:- अरे आंटी तोह यहाँ hain.....mom ने तोह कहा में इनके घर में hu.........mom ने ऐसा क्यू कहा .....

अब्ब नम्रता और भी सोच में दुब चुकी थी......

अब्बब्बब चलते hainnnnnnnnnn

नम्रता के घर मई......

आखिर कर क्या हो रहा था ....वह.....

है ...सच मैं अंदर कोई tha....aur कोई नहीं नम्रता की माँ सुचिता हॉल में कड़ी थी ....और चेरे से तोह लग रहा था काफी गुस्सा थीई.......

उसके सामने ठीक एक अधेड़ बड़ी उम्र का आदमी बैठा था साइड pe.....aadmi काम और बूढ़ा ज्यादा था.......

सुचिता:- कितनी बार बोलै हैं आपको ऐसे पब्लिक में मुझे इशारे मत करना .....

पर्सन:- अरे क्या हुवा .....तुम बेटी जैसे हो मेरी .

सुचिता:- है किसीने देखा तोह क्या सोचेंगे ....बेटी को कोई ऐसे इशारे करता हैं.

पर्सन:- अच्छा बाबा शांत हो जाओ न..

सुचिता:- है ...और क्या करू में ..

पर्सन:- गुस्सा अच्छा लगता हे तुम पे.

सुचिता:- इस्सलिये गुस्सा देते हो...

पर्सन:- है तोह क्या करू तुम्हे देख के कण्ट्रोल नहीं होता. ....लगता हैं तुझ में खो जावु .....

सुचिता:- ज्यादा मत खोइए.....

पर्सन:- क्यू मेरी मर्जी ....

सुचिता:- अच्छा .....

पर्सन:- क्या लग रही हो सूचि .....

सुचिता :- बताओ न क्या लग रही हु फिर...( और शर्माती हैं )

पर्सन:- खुदा ने क्या बनाया हैं तुम्हे...

ये आँखे है .....इसका तोह मैं दीवाना हु..

ये तुम्हारा बदन क्या लगता हैं....

और आज ये सारी hay..........mere जैसे कितने बुद्धो का तुम्हे देख के पानी पानी होता होगा खुदा जाने ......

हययययय कोई कहेगा क्या तुम एक 21 साल की लड़की. की माँ हो......

10 साल से देख रहा हु तुम्हे ....इतना बॉडी को मेन्टेन करते हुवे किसीको नहीं देखा ..

अपनी इतनी तारीफ सुन के सुचिता का गुस्सा अब्ब ठंडा हो चूका था......

सुचिता एक बड़ी हे hoshiyar.....aur खूबसूरत हाउसवाइफ और एक माँ thi........par कुछ चीजे ऐसे थी .....जिसके वजह से आज वोह उस सिचुएशन में थी ......

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बात तोह सच थी .....38 के आगे में भी सुचिता ने अपने बॉडी को काफी मेन्टेन कर के रखा था ...

उसकी गांड बोहत बहार दिखती थी ....जो उसके बदन को बोहत मादक लगता था....

उसके बड़े बड़े संतरे .....toh....lajawab थे...

उसके ब्लाउज ने वोह हमेशा तने रहते थे ...aur...aese पोजीशन में रहते थे की कभी भी ब्लाउज को डैड के बहार आ जाये....

सुचिता का फिगर का tha......jo की ....किसी भी मर्द को हवस से भर दे...

पर्सन:- आओ न अब्ब्ब क्यू दुर्र कड़ी हो

सुचिता:- नहीं नम्रता के 2 कॉल आके गए ..अब्ब जाना होगा निचे ..नहीं तोह .गड़बड़ हो जाएगी .....

पर्सन:- कुछ नहीं होगा आ जाओ ....

सुचिता:- सिर्फ 15 मिनट्स......

पर्सन:- ok मेरी जान ...

सुचिता :- आपकी जान आपकी बीवी हैं ...में नहीं

पर्सन:- अरे उसमे तुम्हारी जैसी बात कहा ..अब्ब बुद्धि हो चुकी हैं वोह.

सुचिता:- अब्ब्ब आप जैसे बोहत जवान हो...

पर्सन:- है तोह तुम लेती नहीं .....नहीं तोह समाज जाती अभी भी कितना दम हैं इस बुड्ढे मैं ...

सुचिता :- अच्छा ........देखेंगे कभी...

वोह बुद्धा आदमी सोफे पे बैठा हुवा था. ..वोह सुचिता का हाट अपने और खींचता hainn......aur अपने तरफ खींच के ....सुचिता को अपने जांघो पे बैठने का इशारा करता हैं...

सुचिता भी शर्माती hainnnn.....aur...uske जांघो को देख के .....बोलती हैं

सुचिता:- दर्द तोह नहीं होगा न apko.....dekhna

पर्सन:- तू बेथ बतात हु तुझे दर्द क्या होता हैंण्ण्न....

सुचिता धीरे से उसके जांघ पे बैठ जाती हैं..........

उसकी बड़ी बड़ी गांड उस बुड्ढे ke.....jangho पे रखती hainnn....usee बोहत अच्छा फील होता हैंन.

फिर वोह बुद्धा सुचिता को जोर से पकड़ लेता हैंन

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जोर से पकड़ने के वजह से सुचिता के ...बड़े बड़े 36 के संतरे डाब जाते हैंण्ण्ण्न.......

सुचिता थोड़ी पीछे होक उससे सपोर्ट करती हैंन. .....

वोह भी सुचिता के नैक पे अब्ब किश करता hainn.....aur वैसे हे पकड़ के. ....उसके सैंट्रो पे प्रेशर देता हैंन.......

सुचिता अपने आँखे बंद कर लेती hainnn.....aur अपने आप में खो जाती hainn....usee मजा ऐनी लगता हैंन.....

वो बुद्धा अब्ब सुचिता के जांघ पे हैट को फेरना चलौ करता हैंण्ण्न......

सुचिता की साड़ी अब्ब्ब ऊपर हो जाती हैंन.....

घुटनो तक साड़ी ऊपर आने के वजह से बुड्ढे के सामने ........सुचिता की गोरी गोरी जंघे आए जाती hainnn....jiss देख बुड्ढे का लुंड तन जाता हैं.....

सुचिता को अपने गांड पे बुड्ढे के खड़े लुंड का अहसास हो जाता हैंन...

जिस के वजह से सुचिता के सहरीर मैं अजीब सा करंट दौड़ने लगता हैंन.....

वोह अपने गांड को उसके खड़े लुंड पे अब्ब घिसने की कोशिश करती हैंन.....

और बुद्धा सुचिता के जांघो को दबाने लगता हैंन...

सुचिता:- ोुछःह अह्ह्ह्ह धीरे. ..

पर्सन:- अहम जान कितने दिन हुवे तुम्हे प्यार नहीं किया....

सुचिता :- अब्ब्ब करो न ....fir.....pyar

पर्सन:- कर रहा हु मेरी जान ...

सुचिता भी जोश में आके उसका अपना हैट पीछे कर के सर पे हाट रख देती हैंन

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उस बुड्ढे का एक हाट सुचित्त की जांघ सेहला रहा था तोह दूसरा हैट ....वोह ...सुचिता के खूब सूरत से नेवेल पे रख देता हैंन...

उसका हाट जैसे हे सुचिता के गोर गोर नैवेल पे टच होता hainnnnn......Suchita के मुह्ह से सिसकारी निकलती हैं...

सुचिता :- ाष्ठ्हहहह अह्ह्ह्ह.....

अब्ब्ब वोह बुद्धा धीरे धीरे सुचिता के पेट पे अपना कला हैट घूमने लगता हैंण्ण्न

सुचिता को बोहत अच्छा लग रहा. ..tha...voh अपना एक हाट उसके सर पे रख के उसके सर को सेहला रही थी.......

बुद्धा धीरे से अपनी गन्दी जबान सुचिता के गर्दन पे रख देता हैंन....

सुचिता के गार्डन पर जबान रखते हे बुद्धा सूचि के नैक को चेतना शुरू करता हैं.....

जिससे सुचिता को बोहत अच्छा फील होता हैंन.....

वो भी उसी सपोर्ट करने के लिए अपने बल साइड में करती हैंन......

और बुद्धा उसकी पूरी नैक गीली कर देता हैं...

और इधर निचे बार बार सुचिता की गांड बुड्ढे के खड़े लुंड पे घिसे जाए रही थी ....जिस के वजह से अब सुचिता के छूट के अंदर गिला पैन बढ़ता जा रहा था ........

इधर बुद्धा अब सूचि को अपने साइड कर लेता हैंन.......

और सूचि के सुनहरी जुल्फों को हातात हैं.....

और ऐसे हे सूचि के चेरे की तरफ देखता हैं......

सूचि :- क्या देख रहे हो .....

बुद्धा :- खूबसूरती देख रहा हु ....जो नसीब वालो को मिलती हैं....

सूचि :- तोह देख लो मगर नजर मत लगाना .

बुद्धा:- तू तोह मेरी जान हैं तुझे कैसे नजर लगावउ....

सूचि :- अच्छा ............

और तभी बुद्धा सूचि के रसीले ोठो की तरफ बढ़ता हैंण्ण्न.....

ऐसा लग रहा था एक लंगूर के हर में रसीले अंगूर लग गए हूऊऊ.....

और वो बुद्धा उस अंगूर का अब्ब्ब रास निचोड़ने जाए रहा था ....

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बुद्धा सूचि को एकदम टाइट पकड़ लेता हैं.....

और उसके होतो की तरफ बढ़ता हैंण्ण्न...

सूचि भी अपने आँखे बंद करके बूढ़े के मुँह के पास जाती हैंन.....

दोनों भी अब्ब एक दूसरे के ोठो से थोड़ी हे दुरी पर थे ......

बुड्ढे के गोदी में बैठी हुई सुचिता अब ....दोनों के भी यह मिलान होने हे वाले थे.

और बुड्ढे के काळा ......होठ ....सुचिता के ...रसीले ....ोठो ...पे टिक जाते हैंन....

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बुद्धा जोर से सुचिता के ोठो को ....अपने ोठो से चूमता हैंण्ण्न.....

सुचिता भी बुड्ढे के ोठो को मजे से चूमने लगती हैं........

बुद्धा अब्ब्ब सुचिता के लरासिले लिप्स को चाटने लगता हैंन....

बुड्ढे के टोँगे की स्पीड बढ़ जाती हैंन

जीसस से सुचिता भी पागल होने लगती हैं....

वोह बुड्ढे को चाटने के लिए अपने लिप्स .....दे रही थी........

जोश में आके बुद्धा सुचिता को कस के पकड़ता hainn.....aur उसके लिप्स चाटते चटाई उसको सोफे पे लिटा ता हैं......

सुचिता अब्ब बुड्ढे के नीचेस आ जाती हैं....

औरर बुड्ढे के लिप्स पे लगे हुवे थूक को निगलके उसके तरफ अपने नशीले आँखों से देखती हैं......

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बुद्धा अपने खड़े लुंड से सूचि के सदी के ऊपर से पूरा प्रेशर देता हैंन......

उस प्रेशर से सुचिता के मुह्ह से सिसक निकल जाती hainn...ahhhhhh

अब्ब्ब बुद्धा सिद्धि सुचिता के मुह्ह में अपनी गन्दी जबान डालने की कोशिश करता हैंन ...

सुचिता अपना muhhh....kholti हैंन.....

और बुड्ढे के जबान को होने मुँह में लेती हैंन...

ओह्ह्ह्ह क्या सन थाहा.......

बुद्धा अपनी जबान पूरी सुचिता के मुहहह में घुसा देता hainn.....aur उसके अंदर के रास को चाटने लगता हैंण्ण्न......

सुचिता की पूरी थूक बुद्धा अपने मुह्ह में उतर leeta......ahhh क्या मीठा रास था उसके मुहहह कसा

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बुद्धा अपना एक हैट सुचिता के ब्लाउज पे लेके जाता hainn.........aur धीरे .....से सुचिता के ....36 के बूब्स को अपने हटो से टटोलता हैंन...

और आहिस्ता आहिस्ता से उसके निप्पल के ऊपर से अपनी एक ऊँगली फेरता हैंन.....

इस्सस से जोश में आके ....

सुचिता बुड्ढे का मुह्ह पकड़ लेती हैं....

और उसके मुह्ह ने अपनी जबान डालती हैंन....

पर बुड्ढे ने खाया हुवे पत्र की टेस्ट उसके जबान पे लग जाती हैंन.....

जिससे सूचि का मजा किरकिरा होता हैं...

सूचि :- आप पैन क्यू कहते हो......

बुद्धा:- अरे अब ाटदत हो गयी हैं....

सुचिता:- चीई कितना गन्दा लगता हैंन....

बुद्धा:- मुझे क्या पता आज तुम मुझ पे टूट पड़ोगी ....

सुचिता:- अच्छा में टूट पद रही hu....call पे कॉल कर के अपने यहाँ बुलाया .....

बुद्धा:- है मेरी तीखी mirchi........mat चूमो मुझे तुम्हे दूसरा सुख देता हु.....

ऐसा बोल के ........बुद्धा सुचिता के सदी के पल्लू को हटा देता हैंण्ण्न.....

........

अब्ब्ब बुड्ढे के सामने सुचिता के बड़े बड़े. .....आजम थे ....जो की ऐसा लग रहा था ...सालो से मसलने के लिए किसी का इंतजार कर रहे होऊ.......

पल्लू निकलते हे.....

सुचिता के ामो को बुद्धा ब्रा के ऊपर से मुहहह लगता हैंण्ण्न.

और सुचिता के दोनों ामो की खुशबु लेता हैंण्ण्ण्ण्न

सुचिता बुड्ढे के सर पर अपना हाथ रख देती हैंण्ण्न

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बुद्धा धीरे से ेक्क्क संतरे को हैट में पकड़ लेता हैं........

और आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगता हैंण्ण्ण्ण्न....

सुचिता:- अहंममममम अह्ह्ह्ह

जिस्सस से सूचि का निप्पल खड़ा होता हैंन...

ब्लाउज के ऊपर से बुद्धा सुचिता के खड़े निप्पल को धीरे धीरे सहलाने लगता हैंण्ण्ण्न ........

जिस की वजह से सुचिता के बड़े बड़े बूब्स और भी तन जाते हैंण्ण्न .....

खड़ा निप्पल देख के ........ बुड्ढे को सुचिता का ब्लाउज निकलने का मन होता हैंन...

इस्सलिये बुद्धा आगे बढ़ता हैंन...

लेकिन सुचिता उससे मन कर देती हैंण्ण्न....

और कड़ी हो जाती हैंण्ण्ण्ण्न.......

बुद्धा वैसे हे सोफे पे बैठा रहता हैंन...

सुचिता:- चलो अब्ब्ब बोहत हुवा. .....निचे नम्रता अकेली बैठी होगी मुझे जाना होगा ...

बुद्धा:- आओ मेरी जान अभी 3 मिनट बाकि हैंण्ण्न.....

ऐसा कह के वोह सुचिता को जोर से अपने जांघो पे बिठा ता हैंन.....

सुचिता भी हस्ती hainnn....aur बैठ जाती हैं...

बुद्धा उसका पेअर अपने हाट में पकड़ लेता हैंण्ण्न .....

बुड्ढे के हैट में सुचिता का गोरा गोरा पेअर आ जाता हैंण्ण्न.....

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बुद्धा धीरे से सुचिता के नंगे पेअर पे अपनी जबान रख देता हैंण्ण्न.....

बुड्ढे के जबान का एहसास होते he....Suchita सिहर उठती हैंण्ण्न......

बूढ़ा धीरे धीरे अपनी गीली जबान लेके आगे बढ़ता हैंण्ण्न.......

सुचिता:- अह्ह्ह्ह क्या कर रहे Hoo......ugh

बुद्धा:- क्यू निकल दू ...जबान ....जणू..

सुचिता:- नहीं ाः अच्छा लग रहा हे ....

बुद्धा:- और ऊपर लू जांघ के तरफ.....

सुचिता:- लो न .....अह्ह्ह

बुद्धा:- तुम साड़ी ऊपर करती जावूओ

सुचिता:- अह्ह्ह्हम्म्म

बुद्धा पेअर से होक अब्ब्ब चाटते छत्ते सुचिता के .......जांघो तक आटा हैंण्ण्न...

अब्ब्ब सुचिता पागल हो चुकी थीईज.......

एक बेहत गुमशुल मधहोइसही ने खो चुकी थी......

बुद्धा सुचिता के जांघो को कुत्ते की तरह चाट रहा ठस्सस्स्स्स

सुचिता का पूरा पेअर बुड्ढे के थूक से गिला हो जाता हैंण्ण्ण्न.....

बुद्धा:- और आगे बधु.....

सूचि :- अहम्म्म्म्म

बुद्धा:- करो न फिर और ऊपर सारी....

सुचिता अपने कमर तक साड़ी ऊपर कर लेती हैंण्ण्ण्ण्न.......

साड़ी ऊपर करते हे अलग हे खुस्भु पुरे रूम में फ़ैल जाती हैं. जिसे सुंग के मुर्दा भी जग जाये ......

बुड्ढे के सामने अब्ब्ब सुचिता की ब्लैक कलर की पंतय थी......

जिस्सस से बोहत हे अच्छी खुस्भु आए रही थी...

जिससे सुंग के बुद्धा पूरा पागल हो जाता हैंन......

सुचिता ने भी अपनी छूट के रॉस से पंतय पूरी गीली कर दी थी.....

बुद्धा धीरे से पंतय के ऊपर अपनी गन्दी थूक वाली जबान टिका हे रहा था. ..

की सुचिता का फ़ोन बैंस लगता हैंन

जीसीए देख सुचिता झट से उठती हैंन...

और अपनी साड़ी निचे करती हैं...

नम्रता का कॉल था.......

सुचिता:- है बीटा आए रही huuuuu.....wait..

नम्रता:- माँ कहा हो aap....kitni देर .

सुचिता:- है बीटा अभी आयी ......

सुचिता नम्रता का कॉल कट करती हैंन..

और झट से अपना अवतार ठीक कर लेती हैं....

सुचिता:- चलो में जाती हु निचे तुम मेरे बाद आना. ...किसीको शक नहीं होना चाहिए.

बुद्धा:- ok जान .....

सुचिता और बुद्धा घर के बहार निकलते हैं......

सुचिता अपने बिखरे बाल ठीक करते करते आगे निकलती hainnn.....uske बदन से बुड्ढे के गन्दी जुबान की खुस्भु आ रही थी ......

और उसके अंदर के गीले पैन की वजह से. ....उसे बोहत हॉट फील होता हैं..

और वैसे हे हालत मैं .... सुचिता आगे बढ़ ते हैंन..

सुचिता आगे जाती हैंण्ण्न....

नम्रता अपने माँ को आता देख खुश हो जाती हैंण्ण्ण्न.....

नम्रता:- क्या माँ कहा थी आप...

सुचिता:- अरे वोह आंटी के पास काम था. ...

नम्रता को पता था माँ झूट बोल रही हैं.......

अब्ब नम्रता को कुछ समझ नहीं रहा था.

तभी उसकी नजर ......अपने बिल्डिंग के इधर जाती hainnnn.....vaha से ....उसकी नजर एक आदमी पे गिरती हैंण्ण्न.....

नम्रता:- ारी यह toh.......ye यहाँ हमारे बिल्डिंग के यहाँ क्या कर रहे हैं......

अरे है माँ को इनका हे कॉल आया था .....तभी माँ कही तोह गयी .....और अब्ब आयी हैं....

वोह आदमी चलते चलते अब्ब्ब आगे बढ़ता हैंण्ण्न.........

जो इतनी देर से सुचिता के मजे उठा रहा था. .

आखिर क्या सम्बन्ध था उसका और सुचिता का ..

और वोऊ बुद्धा आअदमी और कोई नहीं बल्कि..............................

तो बे कॉन्टिनोएड..

स्टे तुनेड..........

स्टे होम..................

स्टे सेफ............................
 
अपडेट - 21

नम्रता:- ारी यह toh.......ye यहाँ हमारे बिल्डिंग के यहाँ क्या कर रहे हैं......

अरे है माँ को इनका हे कॉल आया था .....तभी माँ कही तोह गयी .....और अब्ब आयी हैं....

वोह आदमी चलते चलते अब्ब्ब आगे बढ़ता हैंण्ण्न.........

जो इतनी देर से सुचिता के मजे उठा रहा था. .

आखिर क्या सम्बन्ध था उसका और सुचिता का ..

और वोऊ बुद्धा आअदमी और कोई नहीं बल्कि..............................

अब्बब्बब ाएगीएएएए.....................

........................................................................................................................

नम्रता उस आअदमी को देख के एकदम सरप्राइज हो जाती hain........q की माँ का उसके साथ बात भी करना एकदम इम्पॉसिबल था.....

वोह आदमी और कोई नहीं बल्कि सोसाइटी का चेयरमैन अब्दुल राकेश था...........

और इस्सलिये नम्रता उसे देख एकदम सरप्राइज हुई थी.....

क्यू की नम्रता के डैड का और अब्दुल राकेश का झगड़ा पुरे सोसाइटी को मालूम tha.......aur सबको पता था की ये एक दूसरे से कभी बात नहीं कर सकते ........

और नम्रता के डैड का और अब्दुल राकेश का हमेशा मेटिंग ने झगड़ा होता था ........

नम्रता अब्ब्ब बड़े थिंकिंग में गिर जाती हैं......

और खुदके मन को समजती हैं.....

Shiii.....main भी क्या सोच रही हु ......

माँ का उनके साथ बात करना इम्पॉसिबल हैं.......

माँ ऐसा कर हे नहीं सकती .........

सुचिता:- ोयययय बीटा कहा खो गई.....

नम्रता:- कही नहीं माँ .....

सुचिता:- अच्छा ठीक हैंन.....

नम्रता:- चलो माँ घर जाते हैं....

सुचिता:- क्यू क्या हुवा बीटा. ....

नम्रता:- कुछ नहीं बोर हो रहा hain...ab.

सुचिता:- अच्छा ठीक हैंन......

और नम्रता और उसकी माँ घर निकला जाते हैंण्ण्ण्न.........

सुचिता:- बीटा इवनिंग को फ़िरेवॉर्क देखने होगी न निचे

.....

नम्रता:- है माँ ....मुझे पसंद है देखना .

सुचिता:- ok

नम्रता:- डैड का कॉल आया था मुझे माँ .

सुचिता:- अच्छा क्या बोले डैड.

नम्रता:- यही की आज भी लेट होगा एंड आल

सुचिता:- अच्छा ठीक हैं......

और धीरे धीरे इवनिंग हो जाती हैंण्ण्न......

जैसे जैसे सूरज ढल रहा tha.....vaise वैसे रोशनी बढ़ी जा रही थी.........

हर तरफ एक आनंद एक ख़ुशी का माहौल चाय हुवा था..............

सनशाइन सोसाइटी भी झगमगा उठ रही थी .

........

सब जगह रोशनी छै थी ......

नम्रता के घर में नम्रता बहार बीप लगा रही थी घर के ....

नम्रता की माँ ......अंदर खाना बना रही थी.....

शाम के 7 बज रहे थे........

नम्रता:- हो गया माँ खाना बनके.....

सुचिता:- नहीं बीटा अभी टाइम हैं .....और आधा घंटा. ...

नम्रता:- ok माँ जाना हे हमें निचे ...

सुचिता:- है बीटा बस हो गया ..

तभी सूचि का फ़ोन बजता हैं.......

फ़ोन पे नाम देख के उससे हलकी से मुस्कान आ जाती हैंण्ण्ण्न.....

सुचिता:- hello बोलो ...

अब्दुल :- क्या कर रही हो मेरी जाएं ..

सुचिता:- खाना बना रही हु...

अब्दुल:- अच्छा मैं ायवु मदत करने ..

सुचिता:- क्या करोगे आजके ....

अब्दुल:- तुम्हे पीछे से पकड़ के चाटूँगा ..

सुचिता :- क्या चाटोगे .....

अब्दुल:- तुम जो चाटने डौगी वोह चाटूँगा ...

सुचिता :- अच्छा ....कुछ नै देने वाली मैं .

अब्दुल:- सुभे तोह बड़ी अह्ह्ह उह्ह्ह कर रही थी

सुचिता:- अच्छा टिक हैं.....

अब्दुल:- ायवु का घर बोलो न जान बोहत मन हो रहा हैं मिलनेका ...

सुचिता:- पागल हो गए हो क्या ...

अब्दुल :- क्यू क्या हुवा ....

सुचिता :- नम्रता हैं घर पे और संजय भी आएंगे ...थोड़ी देर मैं

अब्दुल :- देखो न कुछ होता हैं क्या जान सुबह से थका हु .....

सुचिता:- तोह मैं क्या करू ...

अब्दुल:- तुम्हारे खूबसूरत बहो मैं आके आराम करूँगा .....

सुचिता हस्ती hainn....aur मन हे मन शर्माती हैं ......

सुचिता:- अच्छा डेक्टि हु .....bye

अब्दुल:- bye. ...

सुचिता फैट फैट अपना काम निपटती हैं....

और नम्रता के कमरे मैं जाती हैं.....

सुचिता:- बीटा मेरे सर बोहत दर्द का रहा हैं......

नम्रता:- ओह माँ क्या हुवा ....

सुचिता:- कुछ नै ......थोड़ा सोती हु पापा आने तक .....ठीक हो जायेगा ...

नम्रता:- ok माँ ठीक हैंन....

सुचिता:- तुम आओ जेक निचे ...... फ़िरेवॉर्क देख के आओ ......

नम्रता:- ok माँ जाती हु

यही पहन के जावु न या चेंज करू .....

सुचिता:- जाओ बीटा यही पहन के कितनी बार चेंज करोगी .......

नम्रता:- ok माँ bye .....

सुचिता:- कब तक आओगी ....

नम्रता:- टाइम तोह 8 - 9:30 हैं.....

सुचिता:- ok

और नम्रता मॉर्निंग वाला हे ड्रेस पहन के निकल जाती हैंन.......

उसके चेरे पे सावला का टेंशन तोह था हे ....

की कल वोह सावला को कैसे फेस करेगी .....

क्या बोलेगी उसी .....

सावला चाचा ने रॉंग किया .....

पर मेने भी कुछ नहीं कहा .....

क्या उनको ऐसा करना चाहिए था .....

क्या हम दोनों ने गलती की हैं......

लेकिन वोह बड़े हैं ....उनकी रिस्पांसिबिलिटी hainn.......voh केसा कर सकते हैं ऐसा ...

ये सब घर में सोच के नम्रता का मूड ऑफ हो चूका था .......

इस्सलिये उससे थोड़ी देर म को बहलाने के लिए ....निचे आके शांत बैठना था.....

अपने टाइट ड्रेस में नम्रता निचे आए जाती हैंण्ण्न.......

इधर सूचि अपना फ़ोन लेती हैं ....और संजय को कॉल करती हैं......

सुचिता :- hello लव .....

संजय:- hello बेबी ....

सुचिता:- कहा हो .....

संजय :- निकल रहा हु ....अभी टाइम लगेगा. ..

सुचिता:- अच्छा जल्दी आयनन .....

संजय:- ok स्वीट हार्ट..

सुचिता:- है ....

संजय:- नामु कहा हैंन..

सुचिता :- वोह थोड़ा निचे गयी हैंन...

संजय:- ok चलो bye. ..घर आके बात करते हैं....

सुचिता:- ok bye टेक केयर ....

और सुचिता के चेरे पे थोड़ी मुस्कान आए जाती हैंन...

और वोह तुरंत .....अब्दुल को कॉल लगा ते हैं...

सुचिता:- हेलू

अब्दुल :- बोलो

सुचिता:- आए जाओ थोड़ी देर मैं ....

अब्दुल:- अच्छा आखिर मान हे गयी ....

सुचिता शर्मा ते हैंन...

सुचिता:- है तोह थके हो न आप थोड़ा आराम देती हु .....

अब्दुल :- अच्छा ठीक हैं आता हु bye.

अब्दुल सुचिता के बिल्डिंग के तरफ निकल पड़ता हैं.....

सुचिता जेक फ्रेश हो जाती हैंन....

थोड़ा मेक उप करती हैं.....

उसी आज अलग हे आनंद हो रहा था...

सब तैयारी कर के ....सूचि अब्ब वेट कर रही थी अब्दुल के आने का .....

और तभी बेल्ल बजती हैं....

सूचि फैट से जेक दरवाजा खोलती हैंण्ण्न

सुचिता :- आओ जल्दी ....कोई देख लेगा ...

अब्दुल जल्दी से अंदर आता hainn....aur सुचिता ....झट से दरवाजा लगा लेती हैं....

अब्दुल खड़ा होक सूचि को देखता रहता हैंन.....

सूचि भी उसकी तरफ अपने नशीली आँखों से नजरे उठके देख ते hainnn.....Mano कोई स्वर्ग की अप्सरा देख रही हो......

सूचि अपने हाट से अपने ओने साइड रेशमी जुल्फों को साइड में करती हैंन .....

और अब्दुल के आँखों में आँख मिलके देखने लगती हैं....

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अदुल को उससे देख के हे लुंड खड़ा हो जाता हैंन.

साड़ी मैं उसके तने हुवे 36 के आजम लटके हुवे थे ......

और उसकी गांड फूल के बहार आ चुकी थी.....

अब्दुल को कण्ट्रोल नहीं होता .....

अब्दुल:- हॉट लग रही हो सूचि जान ...

सुचिता:- असाच आप लगता हैं पहले से हॉट होक आये हो ....

अब्दुल:- नहीं अभी तुमको देख के डबल हो गया हु......

सुचिता:- अच्छा. ....फिर .....

अब्दुल:- फिर क्या ......

सुचिता है के आगे बढ़ती हैं......

और अब्दुल उस के हटो की पकड़ लेता हैं...

और अपनी तरफ खींचता हैंन....

ाहहम क्या कर रहे हो.....

अब्दुल:- वही जो तुझे मुझ से चाहिए ....

सुचिता :- क्या चाहिए मुझे ....

अब्दुल :- प्यार और सुख. ...

सुचिता :- अच्छा और तुम मुझ से क्या चाइये

अब्दुल:- मुझे तोह सिर्फ तुम चाहिए.....

अब्ब्ब ये बुद्धा सिर्फ तुम्हे देख के खुश होता

हे

.....और तुम्हारे लिए हे तड़पता हैं...

सुचिता :- अच्छा ठीक हैं...

ऐसा कह के बुद्धा सुचिता का अपने पास टाइट पकड़ लेता हैं.......

और अपने दोनों हैट पीछे से उसके पेट पे रखता हे .....

अपना पूरा प्रेशर सुचिता के गांड पे देता हैंन.....

अब्दुल का बुद्धा बड़ा लुंड उसके पंत से खड़ा होक ......सुचिता के गांड पे प्रेशर देता हैंन

जिस की वहज से सुचिता को बोहत हॉट फील होता हैंन.....

अब्दुल धीरे से सुचिता के .....नैवेल पे हैट रख देता. ...हैं....

सुचिता धीरे से अपनी .....सदी को नैवेल के यहाँ से साइड करती हैंन.....

अब्दुल धीरे धीरे सुचिता के नैवेल पे अपना हाट घूमना चालू करता है न.....

अब्दुल के काळा काळा सख्त हटो से सुचिता की कोमल नैवेल पे बोहत अच्छा लग रहा था ....वोह अपने आँखे बंद कर के अब्दुल के हटो का फील उठा रही थी ...

अब्दुल अपना बड़ा लुंड पीछे से सुचिता के गांड पे घुमा रहा था.

उअसका तब लुंड का अहसास सुचिता को अररराम से हो रहा था

सुचिता भी उसके लुंड के अपने सदी पे घिसने से पागल हो जाती hainnn.....ahh

अब्दुल जोर जोर से अब्ब्ब सूचि के नैवेल पे हैट घुमा रहा था. .....

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सूचि भी पागल हो रही थी ....

अब्दुल :- जाएं .....

सूचि :- है बोलो ....

अब्दुल :- मुझे तुम्हारे पेट को चेतना हैं..

सूचि :- ुहममम छतो न ....

अब्दुल धीरे से उससे ....दरवाजे के बाजु के दिवार पे डाटा देता हैं.....

सूचि चुपचाप दिवार को चिपक के कड़ी हो जाती हैं......

अब्दुल अपने दोनों घुटनो पे निचे बैठ जाता हैंन.....

और अपनी एक ऊँगली ....आराम से सुचिता के गोर गोर दूध जैसे नैवेल पे घूमने लगता हैंन....

अहम्म्म्म उह्ह्ह........

अब्दुल :- केसा लग रहा हे ...

सूचि :- अच्छा . ..अहह चारो न चाटने वाले थे .

अब्दुल :- इतनी जल्दी ....

सूचि :- है टाइम काम हैं....

सुचिता का गोरा गोरा पेट ुसस्स 60 साल के बुड्ढे के सामने था....

अब्दुल अपनी गन्दी से पाएं वाली लाल लाल जबान बहार निकलता हैंन........

जिस पे बोहत सारा सेवा ....और पैन की गन्दगी थी .....

सुचिता अपने आँखों से सब देख रही थी ....और फील ले रही थी .....

अब्दुल धीरे ....से अपनी गन्दी गीली जबान सुचिता के गोर से पेट पे रखता हैंन.....

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उसके जबान का फील होते he......usss गीले पैन से सुचिता ..के मुहहह से सिसकारियां निकलती हैं.

अह्ह्ह्ब्ब्ब्ब ठंडा हैंण्ण्ण्न......

अब्ब्ब अब्दुल अपनी पूरी जबान बहार निकल के .....उसके पेट के नाभि मैं अपनी जबान घुसा देता हैंन......

सूचि :- अह्ह्ह्ह

अब्दुल अब्ब धीरे धीरे अपनी जबान की स्पीड बढ़ता हैंण्ण्न.....

अब्ब वोह थोड़ा थोड़ा करे सुचिता के पुरे पेट को .....चाटने लगता हैंण्ण्ण्ण्न....

सुचिता का पूरा पेट लाल लाल हो जाता हैं.....

क्यू की अब्दुल का पूरा पैन का थूक उसके पेट पे लग जाता हैंन....

सुचिता मनो स्वर्ग में चली जाती हैं......

अब्दुल अब्ब्ब स्लो हो जाता हैंन.....

और सुचिता के तरफ देखता हैंन......

और खड़ा होता हैंन......

सुचिता का अब्ब्ब हॉट लेवल बोहत बढ़ चूका था ....उससे समाज नहीं आया अब्दुल क्यू रुका ....

अब्दुल खड़ा होक सुचिता को एकदम चिपक जाता हैंन .....अहंमम

और धीरे से सुचित्त को बोलता हैंन...

अब्दुल :- ी लव यूओ जान

सुचिता:- है ....

अब्दुल:- मुझे पता हे तुम मुझे ी लव यू नहीं कहोगी ......

सुचिता:- है तुम्हे पता हे क्यू ... सो मुझे मत कहो ...की तुम नै बोलती ...

अब्दुल :- है तुम अपने अकड़ू पति से बोहत प्यार करती होओओओ ....और में तुमसे ....

सुचिता:- हा. ...

अब्दुल :- लेकिन में तुमसे बोहत प्यार करता हु जान

सुचिता:- है. ..अब्दुल

अब्दुल :- अह्ह्ह्ह आओ मेरे प्यार में दुब जाओ जान

सुचिता:- है लेलो मुझे पूरा. ......

अब्दुल कास के एकदम टाइट सुचिता की हुग करता हे. . .

वोह इतनी निर्दयता से सुचिता को कसता हे जैसे किसी जंगली ने पकड़ लिया हो .....

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सुचिता भी झट से बिल्ली की तरह बुड्ढे . ..अब्दुल को अपने साइन से लगा लेती हैं. ....

दोनों भी एक दूसरे को ऐसा पकड़ लेते हैं ....जैसे दोनों एक हे हो ....

अब्दुल का खड़ा टाइट लावड़ा ......सुचिता के साड़ी के ऊपर से छूट पे टिक जाता हैं ....

और वैसे हे अब्दुल जोर से .....सुचिता को बोहत जोर वाला प्रेशर देता हैंण्ण्न......

जिस प्रेशर को लेटस हे सुचिता जोर से मुह्ह से .... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करती हैंन......

दोनों एक दूसरे को टाइट हुग करते हैं....

जीसस से सुचिता के 36 की बड़े बड़े संतरे ......

अब्दुल के छाती पे मसल जाते हैंन.....

दोनों भी ाब्ब पागल हो रहे थे .....

अब्दुल पीछे से सुचिता की बड़ी बड़ी 34 की गांड अपने हाट में सदी के ऊपर से पकड़ लेता हैंण्ण्ण्ण्न

और जोर जोर से दबाने लगता हैंन ...

गांड पे हुवे ऐसे अचानक हमले से सुचिता पूरी पूरी दांग हो जाती हैं .........

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अपने गांड को ऐसा मसलता देख उसके मुह्हह्ह्ह्हब सससससस बसेस

हॉट वाली जोर जोर से सिसकारियां निकलती हैं....

सुचिता:- अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह....

अब्दुल बे रेहमी से उसकी गांड मसल मसल के लाल जार देता हैंन........

सुचिता :- अह्ह्ह्ह धीरे अह्ह्ह धीरे. .....

अब्दुल उसकी एक नहीं सुन रहा था ... .सदी के ऊपर से अब्दुल उसकी दरार ढूंढ़ने की कोशिश करता hainnn.....par उससे नहीं मिलती. ....

अब्दुल :- निकलडू जान ....

सुचिता:- नहीं न ....निकल नहीं सकती ...

अब्दुल:- क्यू मजा आएगा बेबी .....

सुचिता:- नहीं कोई भी आए सकता हैं....

अब्दुल उससे फाॅर्स नहीं करता लेकिन

एक जोर वाला धक्का देके अपना गुस्सा निकलता हैंन......

सुचिता को अपने ऊपर का वोह झटका ाचा लग ता हैं.......

अब्ब्ब दोनों भी बोहत गरम हो चुके थे ......

सुचिता अपने दोनों हटो से बुड्ढे अब्दुल का सर सेहला रही थी ........

और अब्ब्ब वोह वक्त आता हैंन.....

अब्दुल धीरे से ......अपने muhhh.....Suchita की तरफ बढ़ता हैंन......

उसके मन में ात hainnn....voh कुछ नहीं करेगा जो कुछ करेगी सूचि करेगी .....

और वैसे हे होता हैंन......

अब्दुल का मुह्ह पास देख के .....सुचिता .....

झट से ाउसके मुहहह को पकड़ लेती हैं......

क्या हॉट सन था...

एक जवान औरत एक अपने बाप के उम्र के आअदमी को ऐसे पकडे हुवी थी.......

सुचिता के रसीले हॉट को देख अब्दुल का लुंड और सलामी देने लगता हैं.......

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सुचिता अपने रसीले हॉट धीरे धीरे अब्दुल के पास लेके जाती हैंन....

और उसके गंदे भद्दे ोठो पे टिका देती हैंण्ण्न

अह्ह्ह क्या सन था .........

अब्दुल धीरे से उसके ोठो को चूमता हैंण्ण्न

सुचिता भी उसके ोठो को चूमने लगती हैंन.

..

अब्ब दोनों अपने गर्मी के हॉट लेवल पे थे ....

सुचिता धीरे से अपनी जीभ बहार निकलती हैंन

सावला अपना मुह्ह खोलता हैंन....

सुचिता अपनी जीभ झट से सावला के मुह्ह में घुसती हैंन......

सुचिता उसे बुड्ढे के मुह्ह के अंदर अपनी रसीले जीभ फिरके पूरा गन्दा सलीवा अपने जीभ पे लेती हैंण्ण्न...

अब्दुल :- बेबी अभी पान नहीं लग रहा तुम्हे

अभी गन्दा नहीं लग रहा. ....

सुचिता:- अहंमम छतो बैठो .....अच्छा लग रहा hainnnn....ahhh

अब्दुल अपना थूक धीरे से सुचिता के मुह्ह में डालता हैंन....

सुचिता को घिन आती हैंन.....

पर वैसे हे उससे निगल जाती हैंन ....

अब्ब्ब दोनों भी अपनी अपनी टपकती जीभ बहार निकलते हैंण्ण्ण्न .......

दोनों के जीभ से थूक टपक रही थी .......

और तभी दोनों भी एक दूसरे पे हमला बोल देते हैंन.......

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दोनों एक दूसरे के जीभ को अपना थूक लगा रहे थे ......

दोनों के भी थूक को एक दूसरे बड़े मजे से ....अपने मुह्ह ने ले रहे थे ......

दोनों को भी बड़ा मजा आ रहा था ....

अब्ब्ब अब्दुल अपने जीभ से सुचिता के पुरे चेरे हो चेतना चालू करता हैंन.....

पर सुचिता उससे रोकती हैं.......

अब्दुल भी रूम हटा हैंन.....

सुचिता उसको नशीली नजरो से देख के उसका हैट पकड़ती हैं ......

और धीरे से अपने ब्लाउज पे रख टी हैं.....

सुचिता अब्ब बोहत हॉट हो गई थी .......

अब्दुल भी उसके 36 के बड़े बड़े ायमो पे अपना हाट रखता हैं........

और धीरे धीरे उसको सहलाना चालू करता हैंण्ण्न. ......

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सुचिता के बड़े बड़े निप्पल खड़े हो जाते hainnn.......joh ब्लाउज से साफ दिखाई दे रहे थे ........

अब्दुल उन निप्पल को सहलाना चालू करता हैंन......

सुचिता:- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह है.

सुचिता को बड़ा मजा आ रहा था ....

सुचिता मनो उसको स्वर्ग का अहसास हो रहा था .....

अब्दुल भी अब्ब्ब जोश में आ चूका था ....

वोह निप्पल सहलाते सहलाते .........

सुचिता जे साड़ी के ऊपर से अपने लुंड से प्रेशर भी दे रहा था छूट के ऊपर .....

जिससे सुचिता को .....और भी अपने अंदर अंगद फील होता हैंण्ण्न अंगार फील होता हैं

अब्ब्ब अब्दुल जोर से सुचिता का एक संतरा अपने रगड़े हटो से मसलता hainn.....aur उसके मसलने से सुचिता के अनादर से एक हे आवाज आती हैं....

सुचिता:- ोुछहहहहह माँ

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अब्दुल अपने हाट पीछे ब्लाउज पे ले जाता हैं.....

और अपने हटो से उसके पीछे ब्लाउज को और

सुचिता ने पहने ब्रा को खींचता हैंन...

जोर जोर से मसलता हैंन.......

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ऐसा लग रहा था ब्लाउज और ब्रा अभी फैट हे जायेगा ......

सुचिता अब्ब्ब बोहत पागल हो रही थीई.....

सुचिता:- अह्ह्ह्ह धीरे धीरे फैट जायेगा ब्लाउज

अब्दुल :- तोह. निकलने दो न .....

सुचिता:- अह्ह्ह्हह

अब्दुल:- बोलो क्या करू .....

सुचिता:- निकल दोऊ......

ऐसा बोल को वोह अब्दुल को फिरसे चूमने लगती हैंन............

इधर सोसाइटी के पार्क में ......

नम्रता अकेली सोच में डूबी बैठी हुवी थी...........

बिरजू उसपे नजर रख के था .....

और तभी बिरजू नम्रता के पास जाने का फैसला करता हैंन......

और वोह धीरे धीरे नम्रत की तरफ बढ़ता हैंन.....

क्या बिरजू नम्रता से नजदीकी बढ़ा पायेगा ....

आएगी .....सूचि और अब्दुल का क्या होगा .....

तो बे कॉन्टिनोएड.....................

स्टे तुनेड..............................

स्टे होम ...............................

स्टे सेफ ...................................
 
अपडेट:- 22

सुचिता:- अह्ह्ह्ह धीरे धीरे फैट जायेगा ब्लाउज

अब्दुल :- तोह. निकलने दो न .....

सुचिता:- अह्ह्ह्हह

अब्दुल:- बोलो क्या करू .....

सुचिता:- निकल दोऊ......

ऐसा बोल को वोह अब्दुल को फिरसे चूमने लगती हैंन............

इधर सोसाइटी के पार्क में ......

नम्रता अकेली सोच में डूबी बैठी हुवी थी...........

बिरजू उसपे नजर रख के था .....

और तभी बिरजू नम्रता के पास जाने का फैसला करता हैंन......

और वोह धीरे धीरे नम्रत की तरफ बढ़ता हैंन.....

क्या बिरजू नम्रता से नजदीकी बढ़ा पायेगा ....

आएगी .....सूचि और अब्दुल का क्या होगा .....

ाअब आएगी :- .............

इधर नम्रत शांति से निचे सोसाइटी के गार्डन मैं बैठी थी .......

वोह कोई सोच में डूबी हुवी थी .....क्या पता क्या सोच रही हो .......

पर उसके मन में कुछ तोह चला रहा था ..और उसके चेरे से साफ लग रहा था की कोई बात से वोह बोहत नाराज थी ......

इधर दूर से बिरजू वॉचमन उसी काफी देर से देख रहा था......

और उसके पुरे बदन को अपने आँखों से निहार रहा था......

नम्रता की सलवार बोहत हे टाइट थी .....जिस से उसके 34 के बड़े बड़े बूब्स तने हुवे थे ........और गांड भी लेग्गिंग्स में से बोहत उठ कर दिख रही थी ......

पर बिरजू दूर खड़ा होने के कारन उसी इतना नहीं दिख रहा था....

आज बिरजू के दिमाग में अलग हे खिचड़ी पाक रही थी ....और वोह नम्रता को इतने आसानी से हैट से जाने नहीं देना चाहता था .....

बिरजू :- आअज इस को नहीं छोडूंगा ......इसका बाप बोहत झाड़ता हैं मेरे ऊपर .......इतनी कोमल काली हैं ये और इसका बाप जैसे खुला सांड कभी चैन से जीने नहीं देगा ......

और धीरे से बिरजू नम्रता की तरफ बढ़ता हैं..

नम्रता को बिरजू को आते देख. ....थोड़ी उनकंफर्टबले होती हैं......

नम्रता ठीक से अपने पैरो के ऊपर एक पेअर रख के बैठ जाती हैंन.....

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उसी पास एते आते नम्रता के टाइट गांड का और तइस का दर्शन होता हैंन

जो देख के उसका लुंड अपने पंत मैं हिलने लगता हैं........

बिरजू नम्रता के आगे खड़ा होता हैं ....

बिरजू:- अरे नम्रता यहाँ क्या कर रही हु...

नम्रता:- कुछ नहीं बाबा

( बिरजू दिखने मैं बोहत बुद्धा लगता tha....aur उसके बाल भी पुरे सफ़ेद हो चुके थे .... इस्सलिये उससे सब बाबा बुलाते थे ..)

बिरजू :- मुझे पहचाना न ...

नम्रता:- ऐसा क्या बात कर रहे हो आप तोह वॉचमन हो उस दीं तोह आये थे आप घर दिवाली का बताने के लिए ....

बिरजू :- अरे है मैं भी भूल जाता हु .......

नम्रता:- है .....

बिरजू :- यहाँ क्या कर रही हो अकेली

नम्रता:- कुछ. नहीं वही फटाको का सेलिब्रेशन देखने आयी थी ....

बिरजू:- उसी तोह टाइम हैंन.....

नम्रता:- है....

बिरजू नम्रता के ठीक सामने खड़ा था.....

नम्रता निचे बैठी थी .......

उसके टाइट बदन के कारन और डीप नैक वाले गले के कारन

नम्रता के तने हुवे 34 के बूब्स का गोरा पैन .....और नम्रता की गहरी ब्रा में छुपे हुवे सैंट्रो की दरी बिरजू को .....बड़ी आसानी से दिख रही थी .....

नम्रता के निगाहे निचे होने के कारन उसे बिरजू कहा देख रहा हैं समज नहीं आ रहा था.....

तभी बिरजू देख ता हैं नम्रता के नैक पे थोड़ा पसीना था..........

उसके नजरे उस पसीने पे तिकी थी......

बिरजू उससे हे देख रहा था......

वोह पसीने की एक बूँद नम्रता के .....

नैक से हलकी सी बहती हैं.......

वोह धीरे से बहती हुवी नम्रता के नैक को चूमता हुवी ......हलकी हलकी निचे बहती हैं......

और निचे आटे आटे ..... नम्रता के छाती की तरफ आयति हैंन......

बिरजू वोह देख के पागल हो जाता हैं.....

वोह बून्द धीरे से नम्रता के डीप नैक वाले सलवार के अंदर एंटर करती hainn......aur धीरे से दोनों ायमो की बिच मैं से रास्ता बनते हुवे ....

ब्रा के अंदर उसकी दरी मैं बह जाती हैंन.....

अह्ह्ह वोह देख के बिरजू के नजरे नम्रता के उभरे हुवे स्तनों पे टिक जाती हैं.......

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नम्रता ने अपने दोनों हैट अपने जांघ पे रखे थे जिस से बिरजू और उत्तेजित हो जाता हैं........

वोह बस नम्रता के बदन को अपने आँखों से निचोड़ रहा था......

तभी उसके दिमाग में कुछ चलता हैंन...

अहह बिरजू होश में आए सिर्फ देखने से नै पत्नी वाली ये हसीना ....कुछ करना भी पड़ेगा .......

नम्रता को बड़ा हे ऑक्वर्ड लग रहा था....

बिरजू :- अरे नाम नम्रता हे हैं न तुम्हारा ....

नम्रता:- है बाबा ....बताया था न उस दिनन.....

बिरजू :- haaaa........tum बड़ी अच्छी लड़की हो ....

नम्रता:- है ....बाबा शुक्रिया ...

बिरजू:- उम्र कितनी हैं तुम्हरी ....

नम्रता:- 22 हैं बाबा ....

बिरजू :- अरे तुम तोह मेरे बेटी से भी छोटी हो ...

नम्रता:- अच्छ आपको बेटी भी हैं......

बिरजू :- है गाओं में हैं. ...

नम्रता:- ok ..बाबा

बिरजू :- तुम्हरी तरह हे खूबसूरत हैं ...

नम्रता:- अच्छा ठीक हैं बाबा

नम्रता को बिरजू ऐसा खड़ा था सो उससे ऑक्वर्ड लगता हैं

और नम्रता उससे अपने बाजु मैं बैठ ने के लिए कहती है.

बिरजू भी नम्रता के बाजु मैं बैठ जाता हैं.......

नम्रता,:- और कितना टाइम लगेगा बाबा .........चालू होने मैं...

बिरजू:- क्या पता मेंबर्स के ऊपर हैं. ....जब बोलेंगे तब चालू कर देंगे ....

नम्रता:- अच्छा ठीक हैं फिर .....

बिरजू :- है ....

बिरजू धीरे से अपनी जांघ नम्रता के जांघ को टच करता hain.....boht हे हलके से टच करता हैं.....

नम्रता को महसूस तोह होता हैं लेकिन वोह कुछ नहीं कहती .....

नम्रता:- तोह बाबा आपका पूरा परिवार गाओं में रहता हैं.

बिरजू थोड़ा कुछ सोचता हैं ......और है में जवाब देता हैं..

नम्रता को भी अब थोड़ा बात करने मैं इंटरेस्ट आने लगता हैं

नम्रता:- तोह कोण कोण हैं आपके परिवार मैं....

बिरजू :- एक बेटी हैं और एक बीटा दोनों भी पढाई करते hain.......aur उनको मेरी बहिन संभालती हैं....

नम्रता:- और आपकी वाइफ ....वोह कहा हैंन .....

बिरजू थोड़ा दुखी सा चेरा बना ता हैं और ...... नम्रता के आँखों में देख के कहता हैं...

बिरजू :- नहीं वोह बेटे को जनम देके चली गयी मुझे हमेशा हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़ के .....

नम्रता ये सुन्नन के उसी गलत फील होता hain.....use गिल्ट फील होता हैं उसने ऐसा पूछा इस्सलिये

..

नम्रता,:- सॉरी बाबा. मुझे ऐसा नहीं पूछना चाइये था

बिरजू:- नहीं बीटा तुम्हारी कोई गलती नहिये गलती तोह मेरी हैं.

मेरे वजह से वोह नहीं रही इस दुनिया ....

नम्रता:- ऐसा क्या हुवा बाबा

बिरजू :- मेरा काम छूटा था ...और वोह हमेशा बीमार रहती थी .........पैसे न होने के कारन हमरी हालत पहले से ख़राब थी .....और ऐसे मैं वोह बीमार पद गयी ..... आम डॉक्टर के पास इलाज किया लेकिन पता चला उसको कैंसर hainn......mere पास पैसे नहीं थे ......और एक दिन मेरे हटो मैं हे उसने अपना दमन तोडा इन्ही हटो मैं.....

और बिरजू रोटी हुवी शकल बना लेता हैंन......

नम्रता का दिल बोहत पिघल जाता हैं.......

और वोह कुछ सोचे बैगेर बिरजू के हैट पकड़ लेती हैं और कहती हैं.....

नम्रता:- बाबा कोई बात नहीं जो हुवा वोह हुवा अब क्यू रो रहे हो .......

बिरजू :- शुक्रिया बीटा तुम बोहत अच्छी हो ......

बिरजू को नम्रता के कोमल हटो का टच बोहत अच्छा लग रहा tha.........aur ........वोह धीरे से नम्रता के हैट को दबता हैं .....

नम्रता को थोड़ा अजीब लगता हैं पर वोह अभी भी थोड़ी इमोशनल थी ........

बिरजू उससे कहने लगता हैं......

बीटा तुम जैसी लड़किया बोहत काम होती हैं...

जो एक बुड्ढे के दर्द को समाज सके भगवन तुम्हे हमेश अच्छा जिंदगी दे ......

( बिरजू बोल तोह ऐसे रहा था जैसे कोई साधु हो पर उसके मन में अलग हे खिचड़ी पाक रही थी ......और नम्रता को उसकी जरा भी खबर नहीं थी ....)

नम्रता को बिरजू के साथ जोह हुवा सुन के अच्छा नहीं लग रहा था ......

और इधर बिरजू. ..... नम्रता के हटो को धीरे धीरे सेहला रहा था .....

ुन्नन बुड्ढे काळा हटो में नम्रता के गोर गोर हाट थे .......

नम्रता को फील होता हैं उसके हाट बिरजू सेहला रहा हैं......

वोह झट से अपने हाट निकल देती हैं......

बिरजू कुछ नहीं कहता ........

नम्रता भी कुछ नहीं कहती .........

नम्रता:- आपको आपके बीवी की रोज यद् आयति होगी न.....

बिरजू:- है रोज आयति हैंन. .

उसके हस्ता तुम्हारी तरह हे थे ......एक दम मुलायम ....

अभी मैंने पकड़ा तोह मुझे उसकी हे याद आयी ......

नम्रता को थोड़ी शर्म आयति हैंन......

बिरजू ाअब नम्रता के जांघो पे फोकस करता hainnn.....Apne मोठे मोठे गन्दी जांघ वोह नम्रता के कोमल जांघ को बार बार तोच कर रहा था.....

नम्रता उस चीज को इग्नोर कर रही थी .......

पर बिरजू का लावड़ा नम्रता को देख के अपने पंत के ऊपर टेंट बनाये खड़ा था......

और बिरजू अपनी जंघे धीरे धीरे नम्रता के जांघो के ऊपर घिस रहा था.......

ऐसे घिसने की वजह से नम्रता के अंदर भी अलग हे एनर्जी फील हो रही थी ......पर उसे ऑक्वर्ड भी लग रहा था.

बिरजू:- बोहत अच्छा लगा लग रहा हैं तुमसे बात कर के नम्रता...

नम्रता:- है बाबा ......

बिरजू :- ऐसे हे कभी कबर बात करती जाओ ......

नम्रता:- है क्यू नहीं बाबा .....

बिरजू :- मेरा भी दुःख थोड़ा काम हो जायेगा तुमसे बात कर के. .....

नम्रता के अंदर की अच्छे बिरजू ने समज ली थी और वैसे हे वोह खेल रहा था.....

नम्रता:- है बाबा. जरूर ......

बिरजू:- लेकिन हम बायत कैसे करेंगे .....

नम्रता:- बाबा मुझे नहीं पता .....

बिरजू :- हा ......वैसे तुम्हे क्या दर्द तोह मेरा हे ...

नम्रता को बिरजू को ऐसा देख रहा नहीं जाता ....और वोह बोलती हैंण्ण्न.....

नम्रता:- बाबा वैसे मैं रोज शाम को थोड़ा बहार बैठने आयति hu....toh आओ आके बात कर सकते हो .....( और एक हलकी सी स्माइल देती हैं.)

बिरजू:- बोहत बोहत शुक्रिया बीटा. तुम जैसी बेटी सबको मिले

और बिरजू मन में कहता हैं .....ः....( पहला देव सफल हुवा अब्ब. देख ता हु ये कैसे नहीं परती मुझे )

और बिरजू अपनी जांघ भी निकलता हैं .......वोह सोचता हैं आज समझ आ गया इससे तोह खली फुकट पानी फिर जायेगा

बिरजू :- सच्ची बीटा आओगे न तुम .....

नम्रता:- है बाबा वैसे भी मुझे घर पे बोहत बोर होता हैं.

बिरजू :- शुक्रिया बीटा. .....

और तभी आयटीश बजी चालू होती हैं .......

नम्रता उठती हैं .....और देखने के लिए आगे बढ़ती हैंन......

बिरजू भी आगे बढ़ता हैंन.........

इधर नम्रता के घर में बड़ा गरम माहौल था......

नम्रता की माँ सुचिता अब्दुल के साथ बोहत खुल चुकी थी ....

अब्ब्ब दोनों में काम वासना की लेजर दौड़ रही थी......

उन दोनों के बर्ताव से तोह अभी तक ऐसा हे लग रहा था ...की अब तक दोनों में कभी सम्भोग नहीं हुवा पर है नार्मल दोनों एक दूसरे को मिलते थे ....

लेकिन आज की बात कुछ और थी.....

इतने देर के शारीरिक घर्षण और किसिंग के बाद सुचिता पसीने से पूरी गीली हो चुकी थी .....उसके नैक पे चेहरे पे पसीना साफ दिखाई दे रहा था......

उसका ब्लाउज भी थोड़ा भीग चूका था......

और उसके चेरे पे अलग हे संतुष्टि वाली मुस्कान थी.....

शारीरिक आकर्षण और घर्षण के कारन उसके बूब्स उसके सदी मैं पुरे तन चुके the.......aur ब्रा तोह ऐसा लग रहा था फटने को आए हो .......

उसके ोठो पे अब्दुल के ोठो का रास साफ दिखाई दे रहा था.....

उसके वजह से उसके ोठो पे लिपस्टिक गीले पैन की वजह से और कामुक दिख रही थी .....

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अब्दुल :- अम्मम्म जान कितने बड़े हो रहे हैं देखो तुम्हरे .....

सुचिता :- अह्ह्ह्ह तुम्हारे वजह से ......

अब्दुल :- ओह्ह्ह माइन क्या किया ...

सुचिता :- भोले मत बनो इतना सब आप हे कर रहे हो .....

सुचिता :- फेरो न उसपे ऊपर अपने कड़क कड़क हाथ ....अच्छा लग रहा हैं......

अब्दुल :- ऐसे ऊपर से ठीक नहीं होता जान निकल दो ये ब्लाउज...

सुचिता:- कोई आएगा तो ह गड़बड़ होगी .....

अब्दुल :- नहीं ....ठीक कर लेना .......

सुचिता :- अहंमम निकालो ....

अब्दुल :- नहीं तुम हे निकालो ...

मैं देखूंगा तुम्हे .....

और अब्दुल सुचिता को छोड़ देता हैं......

और थोड़ा दूर हो जाता हैं......

सुचिता भी उसेर्स देख के मुस्कुराती हैं......

और अपने साड़ी का पल्लू निचे करती हैं.......

अब्ब्ब ब्लाउज मैं सिर्फ उसके बड़े बड़े .....तने हुवे बूब्स और ब्रा थी ......

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जिससे देख अब्दुल का लुंड एकदम टाइट हो जाता हैं......

सुचिता के ब्लाउज में बूब्स देख अब्दुल अपना हैट पंत के ऊपर से लुंड पे घूमने लग ता हैं......

फिर सुचिता धीरे से अपने ब्लाउज को बूब्स के निचे लेती हैं........

और हल्का सा अब्दुल की तरफ मुस्कुराने उसको अपने बड़े बड़े गोर सैंट्रो की दर्शन देती हैं.......

जिससे देख के अब्दुल का लुंड सुचिता को बूब्स को खड़ा होक सलामी देने लगता हैं........

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सुचिता अब्दुल को ललकारने के लिए अपने कोमल हटो से धीरे से अपने दोनों बड़े बड़े ायमो को दबती हैं.....

अब्दुल को ाअब रहा नहीं जा रहा था........

वोह तेजी से सुचिता की तरफ बढ़ता हैं.......

लेकिन सुचिता उसी रोकती हैं.

.....

और हलकी से स्माइल देती हैं.....

सुचिता:- इतनी भी क्या जल्दी हैं रुको थोड़ा ....

अब्दुल :- रूप की पारी सामने हैं

....और कोई कैसे रूक सकता hainnn...Bhala ....

सुचिता मुस्कुराती हैं.

...

और अपने दोनों हैट अपने ब्लाउज पे लेके जाती हैं...

धीरे से अपना ब्लाउज निचे लेती हैं.......

उसके

निचे वाले बटन को निकलती हैंन......

और झट से सुचिता अपने बदन से उसके पसीने से गीले हुवे ब्लाउज को निकल देती हैं.......

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जिससे देख अब्दुल के लुंड को ाअब रहा नहीं जाता

.

और वोह वही जोर जोर से अपने ..

लुंड को दबाने लगता हैं..........

सुचिता को वोह देख के बोहत हॉट फील होता हैं.....

अब्ब्ब वोह सिर्फ ब्रा मैं थी ......अपने ब्लैक कलर के ब्रा मैं......

पर ब्रा के ऊपर उसने अपने बूब्स निकल कर रखे थे......

बड़े बड़े बूब्स उनमे हल्का सा पिंक कलर.......

गोरा गोरा क्लोर......

अज्ज्ज पहली बार अब्दुल ने सुचिता के बड़े बड़े बूब्स नंगे देखे थे ......

सुचिता :- आओ अब्ब्ब क्या देख रहे हो

अब्दुल :- ओह्ह्ह्ह आया मेरी जहां .......

दोनों भी एक दूसरे को कास के गले लगा लेते हैं.......

सुचिता के नंगे बूब्स अब्दुल के पसीने वाले साइन में उसके शर्ट के ऊपर से घिस रहे थे......

अब्दुल सुचिता को कस्ते हुवे सोफे के ऊपर ले जाता हैंन...

और उधर दोनों फिर से किसिंग स्टार्ट कर देते हैं..

अब्दुल सुचिता को सोफे पे लिटा देता हैं अऊर खुद उसके ऊपर लेट जाता हैं...

अब्दुल अपना पूरा प्रेशर सुचिता के ऊपर दाल देता हैं...

और सुचिता के बदन को टटोलने लगता hainn.....uske सामने सुचिता के बड़े बड़े नंगे बूब्स नाच रहे थे ..

अब्दुल धीरे से अपना हाट सुचिता के ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स में घुसता हैंन.

..

अऊर सुचिता के नंगे बूब्स को अपने हटो से टटोलता हैंन.......

अब्दुल के हैट के टच से सुचिता के निप्पल और भी कास जताए हैं........

और अब्दुल अपने हैट से धीरे से सुचिता के बड़े बड़े बूब्स को दबाता हैं.

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सुचिता:- अह्हह्ह्ह्ह ोुछः.......

अब्दुल और जोर से सुचिता के गोर बूब्स को दबाता हैं

...

सुचिता:- अह्हह्ह्ह्ह धीरे .....

अब्दुल को और जोश अत hain.........aur वोह अब ......तेजी से सुचिता के बूब्स को दबाना चालू करता हैं......

सुचिता के बूब्स की स्किन बोहत सॉफ्ट थी ......जिस के vajha....se दबाते हे उसी बोहत दर्द हो रहा था .....

अब्दुल को अब रहा नहीं जाता .....और वोह जोर जोर सुचिता के बूब्स अपने दोनों हटो से मसलने लगता हैं

अपने काळा काळा हटो से अब्दुल सुचिता के गोर गोर बूब्स मसल रहा था.

..एक बुड्ढे के हाट main......Suchita के आअज दोनों ...गोर गोर बूब्स मसले जा रहे थे.......

सुचिता को अपना दर्द सेहन नहीं होता .....

सुचिता :- अह्ह्ह्हह्हह ोुछभ मर गयी .....धीरे न ....

अब्दुल सुनने का नाम नहीं ले रहा था ......

वोह जोर जोर से अपने ......हटो को ......पहाड़ जैसा बनके ....सुचिता के कोमल बूब्स का रास निकल रहा था ....

निचोड़ के दबा रहा था.......

अब्ब्ब सूचित को दर्द सेंट्र्ल नहीं होता और ....वोह ...जाहत से अब्दुल के सर को पकड़ लेती हैं......

और उसके सर को पकड़ के .....अपने नंगे बूब्स में दबा देती हैं.....

और उसके सर के ऊपर जोर जोर ....से दबती हैं......

ओह्ह्ह क्या सन था एक हाउसवाइफ जोर जोर से एक बुड्ढे का सर अपने गोर गोर बूब्स में डाब रही थी .......

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सुचिता को बड़ा मजा आए रहा than....Apne बूब्स को ऐसे अब्दुल के मुह्ह में दबाके .....

अब्दुल तोह स्वर्ग में चला जाता हैं.....

उससे अपने जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल देखने को मिलता हैंन....

वोह सुचिता के बूब्स के गंध को अपने नाक में भर लेता हैंण्ण्ण्न

बड़ी हेठी खुसबू थी सुचिता के बूब्स की.........

ऊपर से उसपे बोहत सारा पसीना था.....

इस्सलिये गिलावट के वजह से अब्दुल को अऊर भी मजा आए रहा था ......

सुचिता भी अब्दुल का मुहहह अपने बूब्स के ऊपर ......फील कर रही थी......

अब्दुल झट से अपनी गन्दी जबान बहार निकल लेता हैं....

वोह देख के सुचिता शर्मा जाती हैंण्ण्न....

अब्दुल अपने जबान को कुछ देर दूर हे रखता हैंण्ण्न

और सुचिता के बूब्स को घूरने लगता हैंन....

उसके जबान से अभी से लाल टपक रही थी.....

उसके जबान से होते हुवे धीरे से उसकी गन्दी लाल सुचिता के बूब्स पे टपकती हैं.....

जिस से सुचिता के बदन में बिजली कड़कने लगती हैं....

सिर्फ थोड़ी सिल्वा से ऐसा हुवा जब .....ये चाटने लगेगा तब क्या होगा .....

ये सोच के सुचिता के निचे हरकत होने लगती हैंन...

उसकी छूट हल्का हल्का पानी छोड़ रही थी ......

जो सुचिता को महसूस हो रहा था .....

अब्दुल धीरे से सुचिता के एक बूब्स को कास के पकड़ता hainnnn......aur आजम जैसा दबाता हैं....

और धीरे से अपनी गन्दी काली जबान जिस पे बोहत सारा सलीवा था उससे सुचिता के बूब्स को आजम जैसा चाटता हैं....

और आइस क्रीम जैसा अपनी जबान उसपे फेरना चालू करता है ....

अब्दुल के गीले जबान अपने बदन पे लगते हे. सुचिता अब्दुल की कास के पकड़ लेती hainn....aur उसके सर को जोर से पकड़ के उसको एकदम सात जाती हैंन......

और उसके बदन का प्रेशर अपने ऊपर लेके अपने पुरे शरीर को उसके हवाले कर देती हैं.

अब्दुल सुचिता के. बूब्स को पूरा गिला कर देता हैं....

सुचिता को वोह गिला पैन बोहत अच्छा लगता हैं......

फिर सुचिता अपने दोनों बूब्स पकड़ के अब्दुल के मुह्ह में घुसाने का तरय करती हैंन.

.

अब्दुल को भी समाज आता है. सुचिता को क्या चाहिए ....

वो अपने मुह्हह्ह में पूरा बूब्स लेता हैं.....

सुचिता का ......और ....

सुचिता भी ....अपने हटो से अपने बूब्स को सपोर्ट देती हैं.......

अब्दुल उसके बूब्स को अपने मुहहह के अंदर खींच लेता हैंन....

उसके टाइट निप्पल को अपने डाट में पकड़ के जोर से खींचता हैंण्ण्न......

images-12.jpg


और निप्पल को डायट में दबा लेता हैं....

सुचिता :- अह्ह्ह्हह्हह अब्दुल क्या कर रहे हो.......

अब्दुल कुछ नहीं सुनता और सुचिता के पुरे बूब्स को होने दातो से चबाता हैं.......

सुचिता:- माआआआ मर गई........

अब्दुल ाअब उससस बूब्स को देखता hainn.....uspe अपने दातो की बाईट देके ुस्सेस बोहत हॉट फील होता हैंण्ण्ण्न..

सुचिता का गोरा गोरा बूब्स पूरा लाल हो चूका था...

उस पे अब्दुल के दातो का निशान उठ के दिख रहा था...

फिर .....अब्दुल दूसरे बूब्स के और बढ़ता ..हैं....

और दूसरे बूब्स को पकड़ लेता हैं.....

और कास के उसी भी चबाता हैंण्ण्ण्न.....

सुचिता :- अह्हह्ह्ह्ह जानवर जैसा न करो अब्दुल .....

Ahhhhhh............nahi......ahhhhhhhhh

अब्दुल कुछ सुनने को तैयार नहीं था.....

अब्ब्ब वोह सुचिता के पुरे बूब्स के ऊपर थूक देता हैं

..

और ....अपने थूक से पुरे बूब्स गीले कर देता हैंन.....

सुचिता भी ाब्ब जोश में आ जाती हैं........

उसके बूब्स के ऊपर का गिला पैन उसी हॉट कर रहा था....

वोह महसूस कर रही थी ......उस के छूट से काम रास बह जा रहा tha....jiss से उसकी पंतय पुररी गीली हो जाती हैंण्ण्न.

अब्दुल कुत्ते जैसा दोनों बूब्स को चाट रहा था......

तभी Suchita.......ke छूट में बिजली कड़कती हैं.....

और वोह थोड़ा ऊपर होती हैंन....

अपने पीठ को ुचा करती हैंन....

और अपने गीले बूब्स को देखती हैंन.....

अब्दुल के गंदे जबान को देखती हैं.....

और अपना मुहहह पसस लेके जाती हैंण्ण्न

अब्दुल के जबान को टच करती हैंण्ण्न....

और अपने हटो से बूब्स थोड़ा ऊपर कर के अब्दुल के ......गीले सेवा को अपने बूब्स को वोह भी

कुट्टी जैसी चाटने लगती हैं........

images-11.jpg


ायबबबब दोनों की जबान एक दूसरे को टच हो रही थी ....

सुचिता ाअब पूरी प्यासी हो चुकी थी.......

अब्दुल के मुहहह के रास को वोह ऐसे चाट रही थी जैसे. ..कोई. क्रीम हो .....

वोह अब्दुल के जबान को बिच बिच मैं टच करती हैंन...

अब्दुल सेआप किवतारह अपनी जबान सुचिता के बूब्स पे फिर रहा था ....

सुचिता के सारी से पंतय से निकल के उसके जांघ पे उसका कम्मं रॉस बह रहा था .....

अब्दुल को पता चलता हैं.......

की सुचिता के छूट से ाअब काम रास बहना चालू हो गया होगा .......

अब्दुल .........अपना प्रेशर सुचिता के साड़ी के ऊपर से उसके छूट से देता हैं .....

अब्दुल के लुंड की बिजली सुचिता के छूट में ऐसे घुसती हैं.....

सुचिता :- अह्ह्ह्हह्हह अब्दुल्ल अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

अब्दुल को भी ाअब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था ......वोह ....उठ

के अपना morcha......Suchita के निचे जाने की कोशिश करता हैं......

सुचिता :- अह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो अह्ह्ह

अब्दुल :- मुझे चेतना हे तुम्हारा .....

सुचिता :- नहीं ाःह वोह नहीं मिलेगा इतना बस हुवा ....अहह

अब्दुल :- नहीं मुझे चाहिए .....और जोर से एक हैट से बूब्स दबाता हैं..

सुचिता:; अह्हह्ह्ह्ह नहीं बोलै न....

अब्दुल ाअब जोर से सुचिता के आजम को रगड़ता है .....

और गन्ने की तरह दबाता हैं.....

सुचिता :- ahhhhhhhhhh अब्दुल मर जावूँगी mainn....ahhh

अब्दुल :- अह्ह्ह्ह देखने दो फिर सिर्फ कितना गिलाभुवा हैं....

सुचिता :- अह्ह्ह्ह बस देखना है .....

अब्दुल :- है मेरी जाएं ......

और अब्दुल अपनी कामिनी मुस्कान देके सुचिता के निचे चला जाता हैं......

और अपने हटो se......Suchita की साड़ी ऊपर करने निचे झुक जाता हैं.....

सुचिता कुट्टी की तरह अपने बड़े बड़े बूब्स को देखती हैं......

और मन हे मन हस्ती हैं........

यहाँ निचे सोसाइटी में सब ख़तम हो चूका था.....

नम्रता आयटीश बजी देख के ........खुद हो गयी थी ....

और थोड़ी देर खड़ा होक .........वोह घर के लिए निकलने लगती हैं........

और तभी बिरजू ूसीएएएए आवाज लगता हैं.......

बिरजू :- नम्रता.......

नम्रता पीछे मुद के देखती हैं.........

अब्ब्ब ाआगे क्या होगा .......

नम्रता और बिरजू की नजदीकियां बढ़ेगी ...........

सुचिता .......अपना ........काम रास को .....अब्दुल के .....मुह्ह में उतरने देगी...........

तो बे कॉन्टिनोएड........

स्टे टुन्नीद.......

स्टे होम.........

स्टे सेफ ..................
 
डिअर रीडर्स अपडेट पढ़ने के बाद कमैंट्स जरूर करना

एंड इस बार बड़ा अपडेट दिया हैं बिकॉज़ पिछले दो दिन अपडेट नहीं आया था सो

एन्जॉय अपडेट एंड कमैंट्स प्लीज
 
अपडेट:- 23

और अपने हटो se......Suchita की साड़ी ऊपर करने निचे झुक जाता हैं.....

सुचिता कुट्टी की तरह अपने बड़े बड़े बूब्स को देखती हैं......

और मन हे मन हस्ती हैं........

यहाँ निचे सोसाइटी में सब ख़तम हो चूका था.....

नम्रता आयटीश बजी देख के ........खुद हो गयी थी ....

और थोड़ी देर खड़ा होक .........वोह घर के लिए निकलने लगती हैं........

और तभी बिरजू ूसीएएएए आवाज लगता हैं.......

बिरजू :- नम्रता.......

नम्रता पीछे मुद के देखती हैं.........

अब्ब्ब ाआगे क्या होगा .......

नम्रता और बिरजू की नजदीकियां बढ़ेगी ...........

सुचिता .......अपना ........काम रास को .....अब्दुल के .....मुह्ह में उतरने देगी...........

Aaaabb...........aaaage...........

हॉल में सिर्फ एक हे चीज की खुशबु थी और वोह थी सुचिता के बदन की जो ाआब एक गैर मर्द ने उसके ऊपर काबू कर लिया था ......

एक सिक्योरिटी अफसर अफसर की हसीं बीवी एक सोसाइटी मैनेजर के काबू में हो चुकी थी ......

हॉल में गर्मी तोह बोहत बढ़ चुकी थी ......

सुचिता के पुरे बदन का मजा अब्दुल चूस चूस के ले रहा था .....

IMG-20200419-205838.jpg


और आअज तोह हद हे हो गयी थी ......

सुचिता का सदी से बदन खुल के अब्दुल के सामने आए चूका था ......आज जोह वोह मांगे वोह उसे मिल रहा था. . .

दिवाली के पहले हे दीं सुचिता को शरीर का सुख .....और अब्दुल को ....सुचिता का बदन चखने मिला था ....

अब्दुल हाट लगे मॉल को ऐसे हे नहीं जाने देने वाला था ..

सुचिता भी अब्दुल के सामने अपना बदन खोल के अपने बूब्स को नंगा कर के पड़ी हुवी थी......

दोनों के मन में एक हे सवाल था ....अब्ब्ब क्या होगा....

सोफे पे लेती सिचिता की सांसे ऊपर निचे हो रही थी.....

ककी .......अपने पति के अलावा किसी के सामने इतना लिमिट क्रॉस करने की गलती उसने आअज जिंदगी में पहली बार किए थी ....और उस गलती का सुख वोह ले रही थी......

अब्दुल के सामने रोज एक बुध्दि बीवी का शरीर रहता हैं ....लेकिन आज ...आअज उसके सामने ....साक्षात्.....

सुचिता जैसी ..... हाउसवाइफ थी ....एक खूबसूरत बच्ची की माँ ....जिसका बदन चिल्ला चिल्ला के अपना हॉटनेस बया करता हैंन.....

अब्दुल सुचिता के साड़ी अपने डाट में पकड़ के धीरे धीरे ऊपर किया जा रहा था .....

सुचिता पुरे सन का अहसास पड़े पड़े अपने मन में खिलते हुवे अरमानो को महसूस करते हुवे .....सुख का अनुभव ले रही थी .......

सुचिता के पुरे बदन को मनो वासना के झटके बैठ रहे थे .....

अब्दुल भी एक्सिटमेंट में था. .....उसको तोह सिर्फ सुचिता के छूट की खुस्भु आए रही थी.....

जो खुस्भु लेका उसका 8 इंच का लावड़ा बार बार सलामी दे रहा था .....

सुचिता:- अह्ह्ह अब्दुल मुझे गलत लग रहा हैं...

अब्दुल :- ओह्ह्ह जान कुछ गलत नहीं हैं .....

सुचिता:- नहीं अब्दुल सुनिए....

सुचिता:- जान में सिर्फ ऊपर कर के देखूंगा और कुछ नहीं करूँगा .....

सुचिता:- ठीक हैं अब्दुल .......

अब्दुल ाअब सुचिता की साड़ी उसके जांघ तक ऊपर करता हैंन.....

सुचिता के छूट से कबसे काम बड़ी बह रही थी .....

उसेर्स बोहत शर्म आए रही थी ....अगर अब्दुल ने देखा वोह ...और उसे देख के क्या कहेगा.......

सुचिता की छूट ....पूरी गीली हो चुकी .....थी ....और ऊपर से उसकी पंतय मनो .....धूल गयी हो उसके रास से. ....

अब्दुल सुचिता के गोर गोर जांघो को देकता हे रहता हैं..

एक भी बाल नहीं था .....इतने गोर की दूध भी शर्मा जाये. .....

अब्दुल सुचिता की साड़ी ाअब और ऊपर करता हैं ....अब्ब्ब दिल्ली दूर नहीं थी....

तभी अब्दुल कुछ नोटिस करता हैं .......

सुचिता के जांघ से होक कुछ बह रहा था. .....

सफ़ेद सफ़ेद गधा अस पानी अब्दुल का वोह देख के पूरा टाइट हो जाता हैं......

अब्दुल:- जाएं तुम्हारा रास तोह जांघो के ऊपर बह रहा हैं. ....

सुचिता:- अम्म्म haaaa.....aur श्रम ते हैंन....

अब्दुल ाअब सुचिता के पूरी साड़ी ऊपर कर देता हैंन.....

कमर कस ऊपर सुचिता के साड़ी सरकने के बाद अब्दुल को जोह खुस्भु आती हे वोह लेके वोह पूरा पागल हो जाता हैंन....

और अपने सामने जॉब सन था वोह देख के एकदम पागल हो जाता हैं.....

उसके सामने ठीक .....सुचिता की .....

हॉल में सिर्फ एक हे चीज की खुशबु थी और वोह थी सुचिता के बदन की जो ाआब एक गैर मर्द ने उसके ऊपर काबू कर लिया था ......

एक सिक्योरिटी अफसर अफसर की हसीं बीवी एक सोसाइटी मैनेजर के काबू में हो चुकी थी ......

हॉल में गर्मी तोह बोहत बढ़ चुकी थी ......

सुचिता के पुरे बदन का मजा अब्दुल चूस चूस के ले रहा था .....

और आअज तोह हद हे हो गयी थी ......

सुचिता का सदी से बदन खुल के अब्दुल के सामने आए चूका था ......आज जोह वोह मांगे वोह उसे मिल रहा था. . .

दिवाली के पहले हे दीं सुचिता को शरीर का सुख .....और अब्दुल को ....सुचिता का बदन चखने मिला था ....

अब्दुल हाट लगे मॉल को ऐसे हे नहीं जाने देने वाला था ..

सुचिता भी अब्दुल के सामने अपना बदन खोल के अपने बूब्स को नंगा कर के पड़ी हुवी थी......

दोनों के मन में एक हे सवाल था ....अब्ब्ब क्या होगा....

सोफे पे लेती सिचिता की सांसे ऊपर निचे हो रही थी.....

ककी .......अपने पति के अलावा किसी के सामने इतना लिमिट क्रॉस करने की गलती उसने आअज जिंदगी में पहली बार किए थी ....और उस गलती का सुख वोह ले रही थी......

अब्दुल के सामने रोज एक बुध्दि बीवी का शरीर रहता हैं ....लेकिन आज ...आअज उसके सामने ....साक्षात्.....

सुचिता जैसी ..... हाउसवाइफ थी ....एक खूबसूरत बच्ची की माँ ....जिसका बदन चिल्ला चिल्ला के अपना हॉटनेस बया करता हैंन.....

अब्दुल सुचिता के साड़ी अपने डाट में पकड़ के धीरे धीरे ऊपर किया जा रहा था .....

सुचिता पुरे सन का अहसास पड़े पड़े अपने मन में खिलते हुवे अरमानो को महसूस करते हुवे .....सुख का अनुभव ले रही थी .......

सुचिता के पुरे बदन को मनो वासना के झटके बैठ रहे थे .....

अब्दुल भी एक्सिटमेंट में था. .....उसको तोह सिर्फ सुचिता के छूट की खुस्भु आए रही थी.....

जो खुस्भु लेका उसका 8 इंच का लावड़ा बार बार सलामी दे रहा था .....

सुचिता:- अह्ह्ह अब्दुल मुझे गलत लग रहा हैं...

अब्दुल :- ओह्ह्ह जान कुछ गलत नहीं हैं .....

सुचिता:- नहीं अब्दुल सुनिए....

सुचिता:- जान में सिर्फ ऊपर कर के देखूंगा और कुछ नहीं करूँगा .....

सुचिता:- ठीक हैं अब्दुल .......

अब्दुल ाअब सुचिता की साड़ी उसके जांघ तक ऊपर करता हैंन.....

सुचिता के छूट से कबसे काम बड़ी बह रही थी .....

उसेर्स बोहत शर्म आए रही थी ....अगर अब्दुल ने देखा वोह ...और उसे देख के क्या कहेगा.......

सुचिता की छूट ....पूरी गीली हो चुकी .....थी ....और ऊपर से उसकी पंतय मनो .....धूल गयी हो उसके रास से. ....

अब्दुल सुचिता के गोर गोर जांघो को देकता हे रहता हैं..

एक भी बाल नहीं था .....इतने गोर की दूध भी शर्मा जाये. .....

अब्दुल सुचिता की साड़ी ाअब और ऊपर करता हैं ....अब्ब्ब दिल्ली दूर नहीं थी....

तभी अब्दुल कुछ नोटिस करता हैं .......

सुचिता के जांघ से होक कुछ बह रहा था. .....

सफ़ेद सफ़ेद गधा अस पानी अब्दुल का वोह देख के पूरा टाइट हो जाता हैं......

अब्दुल:- जाएं तुम्हारा रास तोह जांघो के ऊपर बह रहा हैं. ....

सुचिता:- अम्म्म haaaa.....aur श्रम ते हैंन....

अब्दुल ाअब सुचिता के पूरी साड़ी ऊपर कर देता हैंन.....

कमर कस ऊपर सुचिता के साड़ी सरकने के बाद अब्दुल को जोह खुस्भु आती हे वोह लेके वोह पूरा पागल हो जाता हैंन....

और अपने सामने जॉब सन था वोह देख के एकदम पागल हो जाता हैं.....

उसके सामने ठीक .....सुचिता की .....

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गोरी गोरी जांघो में फांसी बड़ी सी पंतय दिखती हैंन..

जिस का आजु बाजु का पूरा एरिया भीगा हुवा था. ...

और पंतय तोह इतनी गीली हो चुकी थी ......अगर उसका पानी निकला तोह एक पूरा गिलास भर जायेगा ......

सुचिता के दोनों जांघो में गिला पैन था ........

गोर गोर जांघो पे सुचिता का रास बवाल दिख रहा था...

अब्दुल पीछे हो जाता हैं....

और सुचिता के टाइट पंतय के अंदर और बहार का नजारा देख ke.......apna लुंड अपने पंत के ऊपर से एडजस्ट करता hainn.....aur हल्का हल्का दबाता हैं......

अब्दुल:- जहां क्या बदन हैं tera.....ahhh अल्ल्हा ...ने मुझे ये नजारा दिखाया ......अह्ह्ह्हह

...

सुचिता उसकी तरफ देख शर्मा रही थी......

अब्दुल आएगी होक सुचिता के पंतय और पुरे .....जगह को ताड रहा था......

IMG-20200504-231939.jpg


सुचिता को भी बड़ी शर्म आ रही थी अब्दुल को ऐसा देख तभी ...

अब्दुल धीरे से सुचिता के जांघ के ऊपर अपना हॉट रख देता हैं....

..

सुचिता:- अम्मम्म अब्दुल आप सिर्फ देखने वाले थे ....

अब्दुल:- हां सूचि देख रहा हु कुछ नहीं करूँगा ...

और अब्दुल सुचिता के गीली जांघ को धीरे से सहलाता हैं

.

और गिला पैन होने के कारन अब्दुल का हॉट बड़ी .....तेजी से खिसक रहा tha.....jisse अलग हे घर्षण सुचिता को महसूस हो रहा था.......

सुचिता:- अह्ह्ह्ह अब्दुल हुवा क्या देख के ....

अब्दुल:- नहीं मेरी जाएं ....सबर ...

अब्दुल ाअब धीरे धीरे सुचिता के जांघो को सेहला ने लगता हैंन...... सुचिता भी थोड़ा थोड़ा सपोर्ट कर रही थी......

अब्ब अब्दुल जांघो को अपने हटो से जोर जोर से घिस रहा था.....

सुचिता:- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अहह अब्दुल धीरे......

अब्दुल सुचिता के जांघो को जोर जोर से दबाता hainn.....ah

अब्दुल के हटो को ..... सुचिता का रास लगता हैं...

वोह अपने हैट अपने नक् के यहाँ लेके धीरे से सूंघता है ..

अब्दुल:- अह्ह्ह जान क्या रास हे तुम्हारा .....

सुचिता:- अह्ह्ह्हह्हह

अब्दुल:- जननं एक दफा तुम्हारे जांघो को चुम लू ..

सुचिता:- अह्ह्ह सिर्फ एक बार .....

अब्दुल धीरे से गर्दन झुका ता हैं.....

और सुचिता के गीले गोर गोर जांघो को चुम लेता हैं....

सुचिता::- अह्ह्ह्ह अब्दुल ....

अब्दुल लोहा गरम hain....dekh लेता हैंन.

..

और हलकी से अपनी जबान बहार निकल लेता हैं.....

अपनी गीली जबान वोह सूचि के गीले ....जांघो पे रख देता हैं...

सुचिता:- अह्ह्ह्हह अब्दुल ....

अब्दुल:- हआ जान देख तुझे क्या सुख देता हु मैं...

अब्दुल उसकी गीली गन्दी जबान धीरे धीरे सुचिता के जांघो पे फेरने लगता है .....

सुचिता के जांघो के ऊपर का पूरा रस अब्दुल के जबान पे लग जाता hainn.....aur अब्दुल उसे बड़े मजे से अपने मुँह में लेता हैं....

सुचिता हॉट होक अब्दुल का सर और बालो को पकड़ लेती हैं....

IMG-20200504-231910.jpg


अब्दुल गीली जबान से तेजी से सुचिता के जांघो को चूस रहा था ..

सुचिता फिरसे वासना में आके लगातर अपने छूट से रास बहाये जा रही थी .....

IMG-20200505-022315.jpg


वोह रास सीधा जांघो से होक अब्दुल चाट रहा था....

अब्ब. अब्दुल चाटते चटाई पंतय के करीब जा रहा था ...

बिच बिच में पंतय के यहाँ भी गिला कर रहा था ....

अब्ब. सुचिता को रहा नहीं जाता और. ....

वोह अब्दुल का सर पकड़ के अपने पंतय पे रख देती हैं...

अहह क्या सन था.....

IMG-20200504-232002.jpg


अह्ह्ह अब्दुल ुह्ह्हह्ह..........

अब्दुल ........अपने बुड्ढे गंदे ोठो से सुचिता की ....प्रु पंतय चुम लेता हैं.....

सुचिता जोश में आजके उसके सर को जोर जोर से अपने पंतय पे दबा रही थी ......

सुचिता को ाअब कण्ट्रोल नहीं होता ....

वोह अब्दुल के मुहहह को जोर जोर से अपने ......छूट पे दबा रही थी.....

उसका पानी लगा तर बहे जा रहा था .....जिस से सोफे गिला हो चूका थान....

उसके छूट के और अब्दुल के ....जबान के बिच सिर्फ एक पंतय का पतला कपडा था.......

सुचिता अपने हटो से अब्दुल का मुह्ह अपने पंतय पे घिस रही थी.......

अब्दुल कुत्ते जैसा जबान बहार रख .......पंतय को चाट रहा था ....

तभी सुचिता अपन हाट पंतय के ऊपर ले जाती है...

और थोड़ी से अपनी पंतय निचे करती हैं......

अब्दुल मुस्कान देके वोह part चाटने लगता हैंन...

अह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हह्ह्ज्जज्ज

सुचिता और निचे करती हैं....

अब्दुल उधर भी लाल टपकता हैं.....

सुचिता एक्सिस्टिंग में आजके और निचे करती हैं....

अब्ब्ब गुलाबी गुलाबी part दिखना चालू हो रहा था ....

अब्दुल का लुंड भी पानी छोड़ रहा था .....

सुचिता का तोह काम रास बहे जा रहा था ....

अब्दुल:- अब्ब्बें निकल दो न जाएं कितना तरसाओगी ....

सुचिता:- नहीं मैं नहीं निकलूंगी उह्ह्ह

अब्दुल:- अहह फिर में निकल देता हूउउउउ

सुचिता:- अह्ह्ह्ह आपकी मर्जी .......

अब्दुल को ग्रीन सिग्नल मिल जाता हैं ....

वोह अपने दोनों हाट सुचिता के पंतय के ऊपर ले जाता हैं...

और धीरे धीरे निकलने लगता हैं....

जैसे जैसे पंतय निकल रही थी वैसे आवाज आती हैं...

चाप चाप .....चाप ....चाप....

और अब्दुल सुचिता की पंतय पाओ तक लेक निकल देता हैं....

और उसको जो सामने दीखता हैं ...

उसको अपने आँखों पे यकीं नहीं आटा .....

जिससे उसने जन्नत देख लिए होओओओओ

सुचिता शर्मा के ....अपने उंगलियों को उधर ले जाती हैं...

अब्दुल तोह उस नज़ारे को देल्हता रहता हैंण्ण्न....

उसके सामने और कुछ नहीं ...... सुचिता की......

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कम्मं रास से भरी छूट थी ..........

क्या छूट थी सूचि की मनो ...काम देवी की छूट हो....

पूरी गुलाबी रास से भरी हुवी ......

एक बुड्ढे के नसीब को .......जन्नत का सुख मिल रहा था....

अब्दुल धीरे से उसपे हॉट घूमता हैंन....

सुचिता:- अह्ह्ह्हह ....

अब्दुल ......धीरे धीरे हॉट घुमाके .....उसका हैट छूट के रास से भीग जाता हैंन......

सुचिता के छूट से टपकता रस .....

सोफे पे पूरा दिख रहा था....

अब्दुल:- अह्ह्ह्ह जान क्या छूट हे तेरी ...

सुचिता:- अह्ह्ह्हह है अब्दुल आपके वजह से निकला ये सब ...

अब्दुल:- ैकः सूचि तोह में हे साफ करता हु ....

सुचिता:- अह्ह्ह कैसे करोगे .....

अब्दुल:- अपने मुहहह से साफ करूँगा ....

सुचिता:- ahhhh.......thik होगा....

अब्दुल:- बिलकुल होगा जान ....

सुचिता:- तोह जल्दी करो ..... नम्रता कभी भी आ सकती हैं.....

और अब्दुल को अब्ब्ब वोह सुख मिलने वाला था.......

अब्दुल:- सच में चतु तुम्हारी छूट मेरी जाएं ...

सुचिता:- है छतो .......अह्ह्ह

इस्सस शब्द से रूम में सन्नाटा च जाता हैं........

इधर निचे सोसाइटी में नम्रता घर की तरफ निकल पड़ी थी .......

बिरजू जोर से ाआवाज देता हैं.....

नम्रता रुक जाती हैं....

नम्रता:- क्या हुवा बाबा ....

बिरजू:- कुछ नहीं बीटा main.....upar हे जा रहा tha...socha साथ मैं जाते हैं...

नम्रता:- चलिए न बाबा. .....

बिरजू फिर से नम्रता का पूरा बदन स्कैन कर लेता हैं...

और अपने लुंड को सहलाने लगता हैं.....

नम्रता बिरजू के थोड़ा आगे चल रही थी......

नम्रता की हिलती 34 की गांड देख बिरजू ....पूरा पूरा पागल हो जाता हैं...

बिरजू :- क्या गांड हे रंडी की ......अह्ह्ह्ह

नम्रता आएगी चलते वक्त टोहड़ा पीछे भी देख रही थी ...

नम्रता की टाइट टाइट गांड बिरजू को खुल के ऊपर उठी हुवी दिख रही थी......

IMG-20200505-020555.jpg


बिरजू नम्रता के गांड को देख अपने .

...

लुंड को सहलाये जा रहा था.....

और तभी नम्रता का पेअर थोड़ा फिसलता हैं......

बिरजू वोह देकता हैं....

नम्रता खुद को संभल लेती हैं....

पर बिरजू ुसेड पकड़ लेता हैंण्ण्न.....

बिरजू का एक हाट नम्रता के पीठ पे आए जाता हैं...

और वक्त देख बिरजू फाटक से एक हाट नम्रता के गांड पे रख देता हैंन.

IMG-20200505-023504.jpg


बिरजू का लावड़ा फाटक से खड़ा होता हैं...

नम्रता:- ोुछःह बाबा

बिरजू :- कुछ हुवा तोह नहीं बेटी ....

नम्रता:- नहीं मैंने संभल लिया था बाबा

बिरजू बुद्धा कमीना अनजान बन के धीरे से नम्रता के गांड को दबाता हैं......

और धीरे से हैट की सफाई दिखते हुवे ....फिर से एक बार नम्रता के गांड को दबोचता हैं..

नम्रता को बोहत अजीब फील होता hainn....par वोह ध्यान नहीं देती ....

नम्रता:- बाबा. हो हाय छोड़ो मुझे ...

बिरजू :- ha...beta ....

बिरजू धीरे से नम्रता को छोड़ता है ...

पर छोड़ते वक्त धीरे से ...... नम्रता के गांड के दरार को को सहलाते हुवे छोड़ता हैं...

और बोहत जोर से नम्रता के गांड को मसल के दबाता हैं...

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जो नम्रता को फील होता हैं...

उस के मुह्ह से सिसकारी निकल रही थी ....

अह्ह्ह. ोुछहहह बबब

बिरजू :- कुछ हुवा क्या नम्रता....

नम्रता:- नहीं babab....kuch नै ...

बिरजू कामिनी मुस्कान देता हैं...

.

दोनों लिफ्ट के यहाँ पोहच जाते हैं....

और दोनों अंदर अस जाते हैं...

बिरजू पीछे जेक खड़ा हो जाता हैं....

नम्रता अपनी गांड लिए बिरजू के आगे कड़ी हो जाती हैं....

नम्रता की बड़ी बड़ी गांड देख के बिरजू .....अपना लुंड पीछे हिलने लगता हैं...

वोह नम्रता के ट्रांस्फेरेंट गांड को देख पागल हो जाता हैं...

वोह उसकी गांड को पूरा निहारता हैं

और वोह देख

उसके दिमाग में कुछ बोहत कमीना चल रहा था ....

तो बे कॉन्टिनोएड..........

स्टे होम ..........

स्टे सेफ .........
 
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