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हार्ट अपडेट:-16 हार्ट
अब्ब तक हमने देखा:-
बिरजू के सामने बार बार नम्रता की बड़ी गांड घूम रही thi.......aur उसके तने हुवे बूब्स .........
वोह सिर्फ इस सोच मैं था की लुंड को शांत कैसे किया जाये......
अह्ह्ह्ह साली ne.........aaag लगाके चली gayi....ahh
एक 60 साल के बुड्ढे के लिए ये बोहोत हे बड़ी बात थी नम्रता जैसे लड़की के नयन सुख Lena.........par अब्ब्ब
बिरजू के शीतनी दिमाग मैं कुछ और हे चल रहा था.........
Abbb....kya
.....होगा ..
.
क्या बिरजू की अंदर की आग उसको नम्रता की करीब लेके जाएगी .......या phir..........iss बार भी नम्रता को बिरजू ....सिर्फ सपनो मैं छोड़ेगा.......................
अब्ब्ब आएगी ...................
शाम हो चुकी थी .....दिवाली के लाइटिंग में सनशाइन सोसाइटी झगमगा उठी थे. ...उसके वजह से शाम और भी खूबसूरत लग रही थी ...सब जगह दिवाली की तैयारी चालू थी
यहाँ सावला भी अपने झोपड़े में लेता पड़ा था उसके दिमाग में एक हे चीज घूम राहु थी वो यानि नम्रता की जवानी ... नम्रता के जवानी ने उसे पागल कर रखा था ..........उसके सामने उसका चेहरा उसका बदन ...उसकी muskan....uske बड़े बड़े संतरे .....मलाई जैसी गांड ...उसके सामने आ रही थी .....उसको कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करे ....बस उसे नम्रता का ख्याल आ रहा था .....उसके साथ बीत्या हुवा उस दिन का साफ सफाई वाला वक्त ....और उसमे हुवे वोह इंसिडेंट उसको याद आ रहे थे ......
और अचानक से उसके दिमाग में आया की क्या वोह नम्रता को प् सकता हे ....क्या नम्रता उसकी हो सकती हीइ.
( सावला भले हे अडानी था लेकिन उसके दिल में थोड़ा सॉफ्ट कार्नर था ....जो उसको अच्छा इंसान बना हे पर क्या नम्रता के आगे वो कार्नर काम करेगा )
सावला :- सही ऐसे कैसे सोच सकता हु में अभी तोह वो छोटी हे 21 उम्र होगी उसकी और में तेरा बुद्धा कुछ भी सोच रहा हु में
लेकिन .....लेकिन......
नम्रता बेटी को उस दिन अच्छा नहीं लगा होता तोह वो मेरा हैट निकल सकती थी ....मेने उसके जब ड्रेस के ऊपर से उसके गांड पे जबान राखी तोह वोह भड़क सकती थी .....उसने ऐसा क्यू नहीं किया ....
क्या नम्रता को वोह सब पसंद आए रहा था .....
अह्ह्ह्ह मेरा लैंड खड़ा हो रहा हे उसके बारे में सोच के .......अह्ह्ह
जब मेने उसके सलवार के ऊपर से उसके गांड में अन्घुता डाका तोह कैसे सिसकारियां निकल रही थी क्या सच में उसको वोह पसंद आए. रहा था ........ahh.....kya मुलायम गांड थी उसकी अह्ह्ह्ह
और वोह भी अपनी गांड कैसे मेरे मुह्ह पे दबा रही थी .....और आवाज भी निकल रही थी ........तब उसके चेरे पे अलग हे भाव थे क्या वोह भाव संतुष्टि के थे......
अह्ह्ह नम्रत क्या तुम सच में मेरी हो सकती हो .......
यही सब सोचते सोचते कब सावला ने अपना लुंड धोती से बहार निकालके नम्रता को यद् करके कब मुठ मरने लगा उसको भी समाज नै आया ....नम्रत के सिर्फ एक झलक से उसका लुंड टाइट होता हे और अब्ब उसके लुंड को नम्रता के छूट की भूक लग चुकी थी अब्ब्ब सिर्फ सावला के मन को अहसास होना बाकि था .....और तभी सावला के दिमाग में कुछ आया जो एकदम खतरनाक थाहा.
सावला :- अह्ह्ह्ह लड़की तोह बोहत मस्त हे ऐसी लड़की जिंदगी में कभी नहीं देखि और न कभी देख पावूंगा क्या किस्मत को यही मंजूर था की में उअके करीब जावु अगर ऐसा होगा toh....shyad नम्रता को में पा सकता हु ..
अभी बची हे कितनी उम्र हे मरते मात कुछ सुख मिलेगा तोह भगवन के ऊपर जेक पेअर पकडूँगा ...क्या वोह सुख नम्रता हो सकती हे ......
अहहहहजह उसका नाम भी लू तोह निचे हलचल हो जाती हे .......
अगर इस्सस दिवाली में नम्रता जैसी लड़की मिले तोह चंडी हो जाएगी कितने दिन भिकारी रंडियो को छोडूंगा ....
अह्ह्ह्हह है हो गया तय ......में नम्रता को पानेकी पूरी कोशिश karunga.....aur प्लानिंग से करूँगा .....शायद उसके शर्मीले पैन से मुझे वोह आसानी से मिल सकती हे पर बड़ा मुश्किल काम होगा अगर उसने किसीको बताया तोह ........
पर नै मुझे उसे पाना हे इस बुड्ढे लुंड को अब्ब एक जवान छूट चाहिए अभी ये नहीं मानेगा ....अह्ह्ह्ह
अह्हह्ह्ह्ह
और तभी सावला का ढेर सारा रास निकलता हे और वोह नींद के अघोष में चला जाता हे ..................
नेक्स्ट डे ..................
आज दिवाली का पहला दिन था सनशाइन सोसाइटी में छोटा सा मॉर्निंग को प्रोग्राम रखा था इस्सलिये सब तैयारी में लग चुके थे ........
इधर नम्रता मॉर्निंग को उठ चुकी थी आज वोह बोहत हे सूंदर लग रही थी एक अलग सी चमक उसके चेरे पर दिख रही थी उसके बड़े बड़े स्तन उसके छाती पे खुल के ए थे इसलिए वोह और भी मादक दिख रही थे ......ब्लैक टी शर्ट में वोह एकदम हॉट लग रही थी .....
यहाँ नम्रता की माँ भी तैयारी करके रेडी हो चुकी थी ......नम्रता के डैड सिक्योरिटी अफसर में होने के कारन उन्हें आज भी अपने दुइटी पे जाना था सो ाआज रोज की तरह उठके वोह अपने काम पे चले गए ......
इधर बिरजू भी अपने वॉचमन के केबिन से बहार आके सब तैयारी देख रहा था ....तभी उसकी नजर नम्रता के डैड पे गयी
...
बिरजू :- साला अच्छा हुवा ये आज नहीं हे ...नहीं तोह इसका अलग हे सर दर्द रहता हे .....
इधर सावला रोज की तरह वैसे हे उठके सोसाइटी के तरफ रोज के काम के लिए निकल पड़ा था उसके लिया क्या दिवाली और क्या दूसरा दिन ....आज भी वैसे हे उठके वोह अपने काम को निकल पड़ा था .....वैसे हे गन्दा वही धोती ......
सोसाइटी के अंदर आते हे सावला ने सब सोसाइटी साफ किए उसके बाद वैसे हे वोह नम्रता के घर की तरफ जाने के लिए निकल पड़ा जाते जाते उसके दिमाग में सिर्फ यही बात चल रही थी की नम्रता को कैसे पटाया जाये इसके लिए उसने सोचा की वोह पहले स्लो ट्रैक से उसके इमोशन के साथ खेलेगा उसकी वजह से वोह डायरेक्ट किसी को बता नै सकती ......
सावला नम्रता के घर की डोरे बेल्ल बजता हे नम्रता की माँ दरवाजा खोलती हे ......
माँ :- अरे चाचा आईये आज जल्दी आ गए
सावला :- है वोह जरा आज जल्दी हो गया सोसाइटी में साफ सफाई करके और दिवाली के वजह से लोगो ने पहले हे सब किया था तोह आज ज्यादा काम नहीं था ....
माँ :- अच्छा ठीक हे अपने भी ाची सफाई के घर की नम्रता के साथ मिलके
सावला :- है नम्रता बेटी ने बोहत मदत की ...कहा पे हे वो
माँ :- अरे वोह नाहा रही हे थोड़ी देर पहले उठी ....अब्ब निचे प्रोग्राम भी हे न वह जाना पड़ेगा ...
सावला :- है चलो में अपना काम करता हु . ..
में:- है मुझे भी नाश्ता बनाना हे ....
नम्रता की माँ किचन में चली जाती हे और सावला हॉल में झाड़ू लगाना चालू करता हे. ....उसके दिमाग में यही चल रहा था की कब नम्रता आएगी और वोह उसे देखेगा .......
इधर नम्रता वाशरूम में अपने गोर बदन पे पानी डालते हुवे ......नाहा रही थी पानी की वजह से उसकी गोरी गोरी चूचिया कड़ी हो गयी थी .............उसने अपनी पंतय और ब्रा हमेशा की तरह उसी जगह पर लटकती थी .......
नहाने के बाद नम्रता बहार आती हे टॉवल लगा के और कपडे पहने के लिए चल देती हे वोह सोच रही थी की आज क्या पहने तभी उसके दिमाग में अत हे अब्ब्ब अच्छा वाला सलवार कमीज पहन लेती हु .........
वोह एक टाइट सा हरे रंग का सलवार निकलती हे और उसपे पिंक कलर की कमीज निकलती हे .....और पहन लेती हे ....
अंदर ब्लू कलर का टाइट सा ब्रा पहन लेती हे ाब्ब उसके बड़े बड़े 34 के बूब्स एक सलवार में और ब्रा में कैद हो जाते हे पर तभी भी उसके बूब्स का ऊपरी हिस्सा उस सलवार से आसानी से दिख रहा था ........
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कमीज में उसकी गांड एकदम भर दिख रहे थी ....क्या पता आज वोह किसको घायल करने वाली थी ......
इधर सावला अब्ब नम्रता के रूम को साफ करने के लिए आगे बढ़ रहा था
वोह दूर को खटखटा ता हे ....
नम्रता दूर ओपन करती हे .....
सावला अंदर आते हे उसे पुरे रूम में नम्रता के बदन की खुशबु महसूस होती हे ..........
वोह नम्रता को इकटक देकता रहता हे उसके पुरे जिस्म को अपने आँखों से स्कैन कर लेता हे . .....
नम्रता को भी पता चल जाता हे की सावला क्या देख रहा हे वोह कुछ नै बोलती वोह भी चुप चाप कड़ी रहती हे और अपने आप पे थोडासा हस्ती हे .......... .......
नम्रता:- अरे चाचा क्या देख रहे हो .....
सावला :- कुछ नहीं बीटा ....बास यही
नम्रता :- अच्छा ठीक हे
सावला :- बड़ी खूबसूरत लग रही हो बेटी ....
नम्रता थोड़ी शर्माती हे
सावला :- वैसे तुम्हे दिवाली की शुभ कामना बेटी ऐसे हे खूबसूरत रहो .....
नम्रता:- है चाचा आपको भी
और नम्रता अपना नाजुक सा कोमल हाट सावला की तरफ बढ़ती हे .... सावला को समाज नै अत नम्रता क्या कर रही हे .......नम्रता सावला का हैट हैट में लिए उसे दिवाली की विश करती हे .....
सावला को यकीन नहीं होता नम्रता ने खुद उसका हैट उसके हैट में लिया उसका लुंड फाटक से खड़ा हो जाता हे .....
अब्ब सावला नम्रता के रूम को साफ करने आगे बढ़ता हे .......
नम्रता बीएड पे बेथ जाती हे और सावला को झाड़ू मरते वक्त डेक्टि हे ....
उसको भी सावला को उसको इस तरह से ताड़ना अच्छा लगता था ......क्या पता उसने सावला रूम में रहते हुवे भी अपनी चुनरी अपने बदन पे नहीं लिए थी ..........
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सावला भी नजर चुरा चुरा के नम्रता को देखे जा रहा था. .... नम्रता के 34 के बूब्स उसके सलवार में तन चुके थे .......और सावला निचे झुक के झाड़ू लगा रहा था उसके कारन ....उसको नम्रता के टाइट कमीज से नम्रता के तइस और बहार निकले हुवे गांड का परत पूरी तरह से दिख रहा था ......
नम्रता भी बिनदात बैठी हुवी थी ......
सावला को नम्रता के चूचिया साफ तरीके से दिख रहे थी वोह बिच बिच में अपने लुंड पे हैट रखते हुवे अपने लुंड को काबू कर रहा था .....
उसको नम्रता का ब्लू ब्रा की स्ट्रिप कमीज के ऊपर से पूरी तरह से दिख रही थी .......जब नम्रता को लगा सावला की नजर कहा जा रही हे वोह अपने हैट से अपने जिस्म को धक् लेती हे ....
और उठके अपनी चुनरी पहन लेती .हे ...
सावला भी ऐसे दिखता हे जैसे उसने कुछ देखा हे नहीं .....नम्रता भी सावला को एक मुस्कान देती हीइ.....
सावला अपना काम करने लगता हे ...........
नम्रता भी उठके किचन की तरफ निकल जाती हे .....
इधर अब्ब सावला नम्रता का बाथरूम साफ करने उसके बाथरूम में चला जाता हे .....
हमेशा की तरह उसे बाथरूम में नम्रता के जिस्म का और उसके छूट का गदराया हुवा स्मेल अत हे ..... नम्रता की ुसेड पंतय ब्रा वही पड़ा था ......
वोह नम्रता के पंतय को उठा ता हे उसपे सफ़ेद सफेस डेग थे .....सावला उसको अपने नक् पे लगा के सूंघता हे .....जवान छूट के रास का स्मेल लेके उसका लुंड सलामी देने लगता हे ....उसी हनेशा की तरह उसके पंतय को लुंड पे लगाके अपना लुंड हिलने का मन होता हे पर तभी ....उसका दिमाग कुछ कहता हे .
आबेद सावला कितने दिन तक पंतय को छोड़ेगा . ...अब्ब सिर्फ लड़की की छूट चाहिए बंद कर ऐसे चड्डी को छोड़ना .......
और तभी सावला डीडे करता हे अब्ब छोड़ेगा तोह सीधा वोह नम्रता को चाहे कोनसी भी कीमत चुकनी पड़े ..........
इधर वोह बाथरूम साफ कर के बहार आ जाता हे ...............
इधर नम्रता का नाश्ता हो चूका था ....
नम्रता की माँ बाजु वाले आंटी के यहाँ गयी थे ....
नम्रता टेबल पे बैठी हुवी थी ....
नम्रता:- अरे चाचा हो गया काम ..
सावला :- है बेटी हो गया ......
नम्रता:- आओ नाश्ता कर लो बैठो यहाँ पे . ..
नम्रता:- अरे बैठो शर्माओ मत ....
नम्रता सावला को एक प्लेट में नास्ता और एक गिलास पानी देती हे ....
सावला भी नाश्ता कर लेता हे और उस गिलास में अपने गंदे मुह्ह को मुह्ह लगा के पानी पिता हे और उस गिलास को निचे रख देता हे ....
नम्रता को बिच बिच सावला की घिन आ रही थी उसके पास जाने पर गन्दी से बदबू आ रही थी .... और उसने जब उस गिलास को मुह्ह लगाया तो नम्रता को बोहत घिन ayi............Namrata देख रही थी के कैसे उस गिलास में सावला के मुँह के अंदर की थूक मिक्स हो रही हे .......
नम्रता को घिन तोह आ रही थे लेकिन उसी थोड़ा अच्छा भी लग रहा tha.....usee सावला को देख यद् आता हे कैसे सावला ने उस दिन उसको ahhhhhhhh.....achanak से उसके बदन में बिजली दौड़ती हे. ...... उसे यद् आता हे इसी मुहहह के थूक को कैसे वोह उस दिन कुट्टी जैसी अपने ड्रेस के ऊपर से चाट रही थी ......और अपने आप पे शर्म करते हुवे वोह अपने गाल में हस्ती हे..........
इधर सावला का नाश्ता हो जाता he........aur वोह एक कोन में बेथ जाता हे ...... नम्रता सावला की प्लेट और गिलास उठाने जाती हे ....और उसके सामने झुकती हे ....अपने 34 के सैंट्रो के दर्शन पास से वोह सावला को करवाती हे ....
सावला भी नैन सुख लेता हे .....
नम्रता अंदर जेक वोह प्लेट रख देती हे ...बेसिन पे और गिलास को भी वही रखती हे ....
तभी नम्रता का दिमाग उसके साथ गन्दा खेल खेलने लगता हे ....क्या सच में नम्रता जवान हो चुकी थी .....क्या सच में नम्रता की छूट रेडी हो चुकी थी ......
नम्रता फिर से पीछे मुड़ती हे और उस गंदे गिलास के और एकटक देखने लगती हे .....उअसकी सांसे ऊपर निचे होने लगती he.......use भूक लगी थे ुसस्स चीज की
नम्रता धीरे से वोह गिलास उठती हे और अपने हैट में ले लेती हे उसपे सावला के गंदे यह के निशान भी थे .....
नम्रता धीरे से उस गिलास को सूंघती हे और उसे सावला के बदन और मुहहह की स्मेल आती हे उसे घिन आती हे लेकिन वोह उस गिलास को छोड़ भी नहीं रही थी .....इसका मतलब उसे अच्छा लग रहा था ......वोह उस गिलास को और करीब लेती हे .......अब हर एक सेकंड को उसकी बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे ........
सावला की वोह गंध नम्रता को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी मनो उसकी वजह से नम्रता मदहोश हो रही थी ........
नम्रता वोह गन्दा गिलास अपने यह पे लगा लेती हे .....और बड़े मजे से ुसस्स गंध का मजा लेती hesss......savla के थूक मिक्स हुवा पानी वोह बड़े मजे से पी लेती हे .....उसके 34 के संतरे टाइट हो जाते हे सलवार के उपरसे उसके बड़े बड़े बूब्स ऊपर निचे होने लगते हे ..........
]
उसको वोह पानी पिटे वक्त बिच बिच में बोहत घिन आ रही थी पर फिर भी उसके मन की वासना मन नहीं रही थी .....उसका एक हैट अचानक से उसके ऊपर निचे होने वाले बूब्स पे जाता हे ......
और तभी सावला नम्रता को आवाज लगा ता हे की नम्रता बीटा ........
नम्रता उसकी आवाज से चौक जाती हे और वोह गिलास रख के हॉल में निकल पड़ती हे ....तभी उसकी नजर उसके चुनरी पे जयति हे और वोह उस चुनरी को निकल के फ्रिज पे रख देती हे और मंद सा मुस्कुराते हुवे हॉल में निकल पड़ती हे ....
अब्ब्ब नम्रता को भी सावला का उसकी तरफ देखना अच्छा लग रहा था .....और अब्ब नम्रता को भी सावला को तरसना अच्छा लगने लगा था .....ये एक इंदिरेक्ट्ली अट्रैक्शन था नम्रता को सावला के प्रति .........
अब्ब्ब आगे क्या होगा ......इधर मॉर्निंग के 9 बजे थे ..... सोसाइटी में प्रोग्राम की पूरी तैयारी हो चुकी थी ........
इधर सावला अब्ब पूरी कोशिश करने वाला था नम्रता को पटाने की ........
नम्रता को भी एक अट्रैक्शन डायरेक्टली नहीं पर इंदिरेक्ट्ली सावला के प्रति हमदर्दी और अट्रैक्शन होने लगा था ..........
तो बे continued..............stay तुनेड
अब्ब तक हमने देखा:-
बिरजू के सामने बार बार नम्रता की बड़ी गांड घूम रही thi.......aur उसके तने हुवे बूब्स .........
वोह सिर्फ इस सोच मैं था की लुंड को शांत कैसे किया जाये......
अह्ह्ह्ह साली ne.........aaag लगाके चली gayi....ahh
एक 60 साल के बुड्ढे के लिए ये बोहोत हे बड़ी बात थी नम्रता जैसे लड़की के नयन सुख Lena.........par अब्ब्ब
बिरजू के शीतनी दिमाग मैं कुछ और हे चल रहा था.........
Abbb....kya
.....होगा ..
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क्या बिरजू की अंदर की आग उसको नम्रता की करीब लेके जाएगी .......या phir..........iss बार भी नम्रता को बिरजू ....सिर्फ सपनो मैं छोड़ेगा.......................
अब्ब्ब आएगी ...................
शाम हो चुकी थी .....दिवाली के लाइटिंग में सनशाइन सोसाइटी झगमगा उठी थे. ...उसके वजह से शाम और भी खूबसूरत लग रही थी ...सब जगह दिवाली की तैयारी चालू थी
यहाँ सावला भी अपने झोपड़े में लेता पड़ा था उसके दिमाग में एक हे चीज घूम राहु थी वो यानि नम्रता की जवानी ... नम्रता के जवानी ने उसे पागल कर रखा था ..........उसके सामने उसका चेहरा उसका बदन ...उसकी muskan....uske बड़े बड़े संतरे .....मलाई जैसी गांड ...उसके सामने आ रही थी .....उसको कुछ सूझ नहीं रहा था क्या करे ....बस उसे नम्रता का ख्याल आ रहा था .....उसके साथ बीत्या हुवा उस दिन का साफ सफाई वाला वक्त ....और उसमे हुवे वोह इंसिडेंट उसको याद आ रहे थे ......
और अचानक से उसके दिमाग में आया की क्या वोह नम्रता को प् सकता हे ....क्या नम्रता उसकी हो सकती हीइ.
( सावला भले हे अडानी था लेकिन उसके दिल में थोड़ा सॉफ्ट कार्नर था ....जो उसको अच्छा इंसान बना हे पर क्या नम्रता के आगे वो कार्नर काम करेगा )
सावला :- सही ऐसे कैसे सोच सकता हु में अभी तोह वो छोटी हे 21 उम्र होगी उसकी और में तेरा बुद्धा कुछ भी सोच रहा हु में
लेकिन .....लेकिन......
नम्रता बेटी को उस दिन अच्छा नहीं लगा होता तोह वो मेरा हैट निकल सकती थी ....मेने उसके जब ड्रेस के ऊपर से उसके गांड पे जबान राखी तोह वोह भड़क सकती थी .....उसने ऐसा क्यू नहीं किया ....
क्या नम्रता को वोह सब पसंद आए रहा था .....
अह्ह्ह्ह मेरा लैंड खड़ा हो रहा हे उसके बारे में सोच के .......अह्ह्ह
जब मेने उसके सलवार के ऊपर से उसके गांड में अन्घुता डाका तोह कैसे सिसकारियां निकल रही थी क्या सच में उसको वोह पसंद आए. रहा था ........ahh.....kya मुलायम गांड थी उसकी अह्ह्ह्ह
और वोह भी अपनी गांड कैसे मेरे मुह्ह पे दबा रही थी .....और आवाज भी निकल रही थी ........तब उसके चेरे पे अलग हे भाव थे क्या वोह भाव संतुष्टि के थे......
अह्ह्ह नम्रत क्या तुम सच में मेरी हो सकती हो .......
यही सब सोचते सोचते कब सावला ने अपना लुंड धोती से बहार निकालके नम्रता को यद् करके कब मुठ मरने लगा उसको भी समाज नै आया ....नम्रत के सिर्फ एक झलक से उसका लुंड टाइट होता हे और अब्ब उसके लुंड को नम्रता के छूट की भूक लग चुकी थी अब्ब्ब सिर्फ सावला के मन को अहसास होना बाकि था .....और तभी सावला के दिमाग में कुछ आया जो एकदम खतरनाक थाहा.
सावला :- अह्ह्ह्ह लड़की तोह बोहत मस्त हे ऐसी लड़की जिंदगी में कभी नहीं देखि और न कभी देख पावूंगा क्या किस्मत को यही मंजूर था की में उअके करीब जावु अगर ऐसा होगा toh....shyad नम्रता को में पा सकता हु ..
अभी बची हे कितनी उम्र हे मरते मात कुछ सुख मिलेगा तोह भगवन के ऊपर जेक पेअर पकडूँगा ...क्या वोह सुख नम्रता हो सकती हे ......
अहहहहजह उसका नाम भी लू तोह निचे हलचल हो जाती हे .......
अगर इस्सस दिवाली में नम्रता जैसी लड़की मिले तोह चंडी हो जाएगी कितने दिन भिकारी रंडियो को छोडूंगा ....
अह्ह्ह्हह है हो गया तय ......में नम्रता को पानेकी पूरी कोशिश karunga.....aur प्लानिंग से करूँगा .....शायद उसके शर्मीले पैन से मुझे वोह आसानी से मिल सकती हे पर बड़ा मुश्किल काम होगा अगर उसने किसीको बताया तोह ........
पर नै मुझे उसे पाना हे इस बुड्ढे लुंड को अब्ब एक जवान छूट चाहिए अभी ये नहीं मानेगा ....अह्ह्ह्ह
अह्हह्ह्ह्ह
और तभी सावला का ढेर सारा रास निकलता हे और वोह नींद के अघोष में चला जाता हे ..................
नेक्स्ट डे ..................
आज दिवाली का पहला दिन था सनशाइन सोसाइटी में छोटा सा मॉर्निंग को प्रोग्राम रखा था इस्सलिये सब तैयारी में लग चुके थे ........
इधर नम्रता मॉर्निंग को उठ चुकी थी आज वोह बोहत हे सूंदर लग रही थी एक अलग सी चमक उसके चेरे पर दिख रही थी उसके बड़े बड़े स्तन उसके छाती पे खुल के ए थे इसलिए वोह और भी मादक दिख रही थे ......ब्लैक टी शर्ट में वोह एकदम हॉट लग रही थी .....
यहाँ नम्रता की माँ भी तैयारी करके रेडी हो चुकी थी ......नम्रता के डैड सिक्योरिटी अफसर में होने के कारन उन्हें आज भी अपने दुइटी पे जाना था सो ाआज रोज की तरह उठके वोह अपने काम पे चले गए ......
इधर बिरजू भी अपने वॉचमन के केबिन से बहार आके सब तैयारी देख रहा था ....तभी उसकी नजर नम्रता के डैड पे गयी
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बिरजू :- साला अच्छा हुवा ये आज नहीं हे ...नहीं तोह इसका अलग हे सर दर्द रहता हे .....
इधर सावला रोज की तरह वैसे हे उठके सोसाइटी के तरफ रोज के काम के लिए निकल पड़ा था उसके लिया क्या दिवाली और क्या दूसरा दिन ....आज भी वैसे हे उठके वोह अपने काम को निकल पड़ा था .....वैसे हे गन्दा वही धोती ......
सोसाइटी के अंदर आते हे सावला ने सब सोसाइटी साफ किए उसके बाद वैसे हे वोह नम्रता के घर की तरफ जाने के लिए निकल पड़ा जाते जाते उसके दिमाग में सिर्फ यही बात चल रही थी की नम्रता को कैसे पटाया जाये इसके लिए उसने सोचा की वोह पहले स्लो ट्रैक से उसके इमोशन के साथ खेलेगा उसकी वजह से वोह डायरेक्ट किसी को बता नै सकती ......
सावला नम्रता के घर की डोरे बेल्ल बजता हे नम्रता की माँ दरवाजा खोलती हे ......
माँ :- अरे चाचा आईये आज जल्दी आ गए
सावला :- है वोह जरा आज जल्दी हो गया सोसाइटी में साफ सफाई करके और दिवाली के वजह से लोगो ने पहले हे सब किया था तोह आज ज्यादा काम नहीं था ....
माँ :- अच्छा ठीक हे अपने भी ाची सफाई के घर की नम्रता के साथ मिलके
सावला :- है नम्रता बेटी ने बोहत मदत की ...कहा पे हे वो
माँ :- अरे वोह नाहा रही हे थोड़ी देर पहले उठी ....अब्ब निचे प्रोग्राम भी हे न वह जाना पड़ेगा ...
सावला :- है चलो में अपना काम करता हु . ..
में:- है मुझे भी नाश्ता बनाना हे ....
नम्रता की माँ किचन में चली जाती हे और सावला हॉल में झाड़ू लगाना चालू करता हे. ....उसके दिमाग में यही चल रहा था की कब नम्रता आएगी और वोह उसे देखेगा .......
इधर नम्रता वाशरूम में अपने गोर बदन पे पानी डालते हुवे ......नाहा रही थी पानी की वजह से उसकी गोरी गोरी चूचिया कड़ी हो गयी थी .............उसने अपनी पंतय और ब्रा हमेशा की तरह उसी जगह पर लटकती थी .......
नहाने के बाद नम्रता बहार आती हे टॉवल लगा के और कपडे पहने के लिए चल देती हे वोह सोच रही थी की आज क्या पहने तभी उसके दिमाग में अत हे अब्ब्ब अच्छा वाला सलवार कमीज पहन लेती हु .........
वोह एक टाइट सा हरे रंग का सलवार निकलती हे और उसपे पिंक कलर की कमीज निकलती हे .....और पहन लेती हे ....
अंदर ब्लू कलर का टाइट सा ब्रा पहन लेती हे ाब्ब उसके बड़े बड़े 34 के बूब्स एक सलवार में और ब्रा में कैद हो जाते हे पर तभी भी उसके बूब्स का ऊपरी हिस्सा उस सलवार से आसानी से दिख रहा था ........
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कमीज में उसकी गांड एकदम भर दिख रहे थी ....क्या पता आज वोह किसको घायल करने वाली थी ......
इधर सावला अब्ब नम्रता के रूम को साफ करने के लिए आगे बढ़ रहा था
वोह दूर को खटखटा ता हे ....
नम्रता दूर ओपन करती हे .....
सावला अंदर आते हे उसे पुरे रूम में नम्रता के बदन की खुशबु महसूस होती हे ..........
वोह नम्रता को इकटक देकता रहता हे उसके पुरे जिस्म को अपने आँखों से स्कैन कर लेता हे . .....
नम्रता को भी पता चल जाता हे की सावला क्या देख रहा हे वोह कुछ नै बोलती वोह भी चुप चाप कड़ी रहती हे और अपने आप पे थोडासा हस्ती हे .......... .......
नम्रता:- अरे चाचा क्या देख रहे हो .....
सावला :- कुछ नहीं बीटा ....बास यही
नम्रता :- अच्छा ठीक हे
सावला :- बड़ी खूबसूरत लग रही हो बेटी ....
नम्रता थोड़ी शर्माती हे
सावला :- वैसे तुम्हे दिवाली की शुभ कामना बेटी ऐसे हे खूबसूरत रहो .....
नम्रता:- है चाचा आपको भी
और नम्रता अपना नाजुक सा कोमल हाट सावला की तरफ बढ़ती हे .... सावला को समाज नै अत नम्रता क्या कर रही हे .......नम्रता सावला का हैट हैट में लिए उसे दिवाली की विश करती हे .....
सावला को यकीन नहीं होता नम्रता ने खुद उसका हैट उसके हैट में लिया उसका लुंड फाटक से खड़ा हो जाता हे .....
अब्ब सावला नम्रता के रूम को साफ करने आगे बढ़ता हे .......
नम्रता बीएड पे बेथ जाती हे और सावला को झाड़ू मरते वक्त डेक्टि हे ....
उसको भी सावला को उसको इस तरह से ताड़ना अच्छा लगता था ......क्या पता उसने सावला रूम में रहते हुवे भी अपनी चुनरी अपने बदन पे नहीं लिए थी ..........
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सावला भी नजर चुरा चुरा के नम्रता को देखे जा रहा था. .... नम्रता के 34 के बूब्स उसके सलवार में तन चुके थे .......और सावला निचे झुक के झाड़ू लगा रहा था उसके कारन ....उसको नम्रता के टाइट कमीज से नम्रता के तइस और बहार निकले हुवे गांड का परत पूरी तरह से दिख रहा था ......
नम्रता भी बिनदात बैठी हुवी थी ......
सावला को नम्रता के चूचिया साफ तरीके से दिख रहे थी वोह बिच बिच में अपने लुंड पे हैट रखते हुवे अपने लुंड को काबू कर रहा था .....
उसको नम्रता का ब्लू ब्रा की स्ट्रिप कमीज के ऊपर से पूरी तरह से दिख रही थी .......जब नम्रता को लगा सावला की नजर कहा जा रही हे वोह अपने हैट से अपने जिस्म को धक् लेती हे ....
और उठके अपनी चुनरी पहन लेती .हे ...
सावला भी ऐसे दिखता हे जैसे उसने कुछ देखा हे नहीं .....नम्रता भी सावला को एक मुस्कान देती हीइ.....
सावला अपना काम करने लगता हे ...........
नम्रता भी उठके किचन की तरफ निकल जाती हे .....
इधर अब्ब सावला नम्रता का बाथरूम साफ करने उसके बाथरूम में चला जाता हे .....
हमेशा की तरह उसे बाथरूम में नम्रता के जिस्म का और उसके छूट का गदराया हुवा स्मेल अत हे ..... नम्रता की ुसेड पंतय ब्रा वही पड़ा था ......
वोह नम्रता के पंतय को उठा ता हे उसपे सफ़ेद सफेस डेग थे .....सावला उसको अपने नक् पे लगा के सूंघता हे .....जवान छूट के रास का स्मेल लेके उसका लुंड सलामी देने लगता हे ....उसी हनेशा की तरह उसके पंतय को लुंड पे लगाके अपना लुंड हिलने का मन होता हे पर तभी ....उसका दिमाग कुछ कहता हे .
आबेद सावला कितने दिन तक पंतय को छोड़ेगा . ...अब्ब सिर्फ लड़की की छूट चाहिए बंद कर ऐसे चड्डी को छोड़ना .......
और तभी सावला डीडे करता हे अब्ब छोड़ेगा तोह सीधा वोह नम्रता को चाहे कोनसी भी कीमत चुकनी पड़े ..........
इधर वोह बाथरूम साफ कर के बहार आ जाता हे ...............
इधर नम्रता का नाश्ता हो चूका था ....
नम्रता की माँ बाजु वाले आंटी के यहाँ गयी थे ....
नम्रता टेबल पे बैठी हुवी थी ....
नम्रता:- अरे चाचा हो गया काम ..
सावला :- है बेटी हो गया ......
नम्रता:- आओ नाश्ता कर लो बैठो यहाँ पे . ..
नम्रता:- अरे बैठो शर्माओ मत ....
नम्रता सावला को एक प्लेट में नास्ता और एक गिलास पानी देती हे ....
सावला भी नाश्ता कर लेता हे और उस गिलास में अपने गंदे मुह्ह को मुह्ह लगा के पानी पिता हे और उस गिलास को निचे रख देता हे ....
नम्रता को बिच बिच सावला की घिन आ रही थी उसके पास जाने पर गन्दी से बदबू आ रही थी .... और उसने जब उस गिलास को मुह्ह लगाया तो नम्रता को बोहत घिन ayi............Namrata देख रही थी के कैसे उस गिलास में सावला के मुँह के अंदर की थूक मिक्स हो रही हे .......
नम्रता को घिन तोह आ रही थे लेकिन उसी थोड़ा अच्छा भी लग रहा tha.....usee सावला को देख यद् आता हे कैसे सावला ने उस दिन उसको ahhhhhhhh.....achanak से उसके बदन में बिजली दौड़ती हे. ...... उसे यद् आता हे इसी मुहहह के थूक को कैसे वोह उस दिन कुट्टी जैसी अपने ड्रेस के ऊपर से चाट रही थी ......और अपने आप पे शर्म करते हुवे वोह अपने गाल में हस्ती हे..........
इधर सावला का नाश्ता हो जाता he........aur वोह एक कोन में बेथ जाता हे ...... नम्रता सावला की प्लेट और गिलास उठाने जाती हे ....और उसके सामने झुकती हे ....अपने 34 के सैंट्रो के दर्शन पास से वोह सावला को करवाती हे ....
सावला भी नैन सुख लेता हे .....
नम्रता अंदर जेक वोह प्लेट रख देती हे ...बेसिन पे और गिलास को भी वही रखती हे ....
तभी नम्रता का दिमाग उसके साथ गन्दा खेल खेलने लगता हे ....क्या सच में नम्रता जवान हो चुकी थी .....क्या सच में नम्रता की छूट रेडी हो चुकी थी ......
नम्रता फिर से पीछे मुड़ती हे और उस गंदे गिलास के और एकटक देखने लगती हे .....उअसकी सांसे ऊपर निचे होने लगती he.......use भूक लगी थे ुसस्स चीज की
नम्रता धीरे से वोह गिलास उठती हे और अपने हैट में ले लेती हे उसपे सावला के गंदे यह के निशान भी थे .....
नम्रता धीरे से उस गिलास को सूंघती हे और उसे सावला के बदन और मुहहह की स्मेल आती हे उसे घिन आती हे लेकिन वोह उस गिलास को छोड़ भी नहीं रही थी .....इसका मतलब उसे अच्छा लग रहा था ......वोह उस गिलास को और करीब लेती हे .......अब हर एक सेकंड को उसकी बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे ........
सावला की वोह गंध नम्रता को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी मनो उसकी वजह से नम्रता मदहोश हो रही थी ........
नम्रता वोह गन्दा गिलास अपने यह पे लगा लेती हे .....और बड़े मजे से ुसस्स गंध का मजा लेती hesss......savla के थूक मिक्स हुवा पानी वोह बड़े मजे से पी लेती हे .....उसके 34 के संतरे टाइट हो जाते हे सलवार के उपरसे उसके बड़े बड़े बूब्स ऊपर निचे होने लगते हे ..........
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उसको वोह पानी पिटे वक्त बिच बिच में बोहत घिन आ रही थी पर फिर भी उसके मन की वासना मन नहीं रही थी .....उसका एक हैट अचानक से उसके ऊपर निचे होने वाले बूब्स पे जाता हे ......
और तभी सावला नम्रता को आवाज लगा ता हे की नम्रता बीटा ........
नम्रता उसकी आवाज से चौक जाती हे और वोह गिलास रख के हॉल में निकल पड़ती हे ....तभी उसकी नजर उसके चुनरी पे जयति हे और वोह उस चुनरी को निकल के फ्रिज पे रख देती हे और मंद सा मुस्कुराते हुवे हॉल में निकल पड़ती हे ....
अब्ब्ब नम्रता को भी सावला का उसकी तरफ देखना अच्छा लग रहा था .....और अब्ब नम्रता को भी सावला को तरसना अच्छा लगने लगा था .....ये एक इंदिरेक्ट्ली अट्रैक्शन था नम्रता को सावला के प्रति .........
अब्ब्ब आगे क्या होगा ......इधर मॉर्निंग के 9 बजे थे ..... सोसाइटी में प्रोग्राम की पूरी तैयारी हो चुकी थी ........
इधर सावला अब्ब पूरी कोशिश करने वाला था नम्रता को पटाने की ........
नम्रता को भी एक अट्रैक्शन डायरेक्टली नहीं पर इंदिरेक्ट्ली सावला के प्रति हमदर्दी और अट्रैक्शन होने लगा था ..........
तो बे continued..............stay तुनेड