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- Dec 5, 2013
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हार्ट अपडेट- 24
दोनों लिफ्ट के यहाँ पोहच जाते हैं....
और दोनों अंदर अस जाते हैं...
बिरजू पीछे जेक खड़ा हो जाता हैं....
नम्रता अपनी गांड लिए बिरजू के आगे कड़ी हो जाती हैं....
नम्रता की बड़ी बड़ी गांड देख के बिरजू .....अपना लुंड पीछे हिलने लगता हैं...
वोह नम्रता के ट्रांस्फेरेंट गांड को देख पागल हो जाता हैं...
वोह उसकी गांड को पूरा निहारता हैं
और वोह देख
उसके दिमाग में कुछ बोहत कमीना चल रहा था ....
अब्बब्बब आएगी ..............
रूम मैं पूरा सन्नाटा चाय हुवा था.......
हर तरफ बस सुचिता के बदन की खुस्भु .घूम रही थी ....मनो पुरे रूम में सुचिता के छूट का रास छिड़क दित्य हो .
अगर कोई बहार का आदमी रूम मैं आया तोह उसका वोह स्मेल लेके हे लुंड कड़क हो जायेगा ......
हॉल के सोफे पैन सुचिता का पूरा रास गिर चूका था जिस से सोफे के ऊपर की शीट पूरी गीली हो चुकी थी ....
और अभी भी सुचिता के गंगा से काम रास बहे जा रहा tha.....itna रास बह रहा था मनो उससे ...10 आदमी ो की प्यास भुज जाया ..
अब्दुल सुचिता के नंगे पैन को एकटक देख रहा tha.....usee अभी भी .....अपने कुसमट पे यकीं नहीं आए रहा था...
सुचिता और अब्दुल की ये पहली फिजिकल मुलाकात थी .....और पहले हे मुलाकात मैं..
उसी सुचिता की काम रास से भरी हुवी ....छूट देखने को मिली और चखने को मिलने वाली थी ......
सुचिता अपने छूट को अब्दुल को ऐसा देख वोह अपने छूट को .अपने दोनों उंगलियों को ढकने की कोशिश करती हैंन....
अपने जवानी मैं लड़को के तरफ कभी भी न देखने वाली सुचिता ......शादी शुदा होते हुवे भी ......एक
गैर मर्द बुड्ढे के सामने अपने टंगे फैला के ...सोई थी .......
अब्दुल दूर से हे छूट के खुशबु से पागल हो रहा था.....
छूट से निकलता हुवा काम रास उसे सुचिता के तरफ ाआकर्षित कर रहा था.....
सुचिता की छूट के अजु बाजु की स्किन ऐसे उचार के अब्दुल के सामने नाच रही थी..
बाजु से अपने होल से गिलावट बढ़ रही थी .सफ़ेद सफ़ेद गधा रंग का छूट का रंग लगातार बहे जा रहा tha...Komal लाल और गुलाबी रंग का मिश्रण और उसमे ....ज्यादा गीलापन ....सुचिता के छूट को ....काम देवी का दर्जा दे रहा tha......agar कोई होता तोह सीधा सुचिता के छूट में अपना लुंड घुसा देता ........
अब्दुल बुड्ढे की और सुचिता के आपस मैं नजरो की भिडान होती हैं दोनों के नजरो में हवस साफ दिखाई दे रही थी ......
सुचिता के मन में ऑक्वर्ड के फीलिंग तोह थी मगर उसके हवस को हरये उतनी नहीं थी .........
दोनों एक दूसरे से कुछ नहीं कहते .......
सुचिता की साड़ी उसके कमर तक थी .......
और निचे नंगी उसकी ....पंतय .....सोफे के एक कोने मैं लटक रही थी ......
अब्दुल. धीरे से उसके छूट को देख निचे झुकतीअ हैं.
सुचिता भी अपनी छूट उसके आगे कर देती हैं...
अब्दुल ाअब सुचिता के छूट के एकदम मुँह लेके करीब था....
दोनों में ाकाहिर की ....नजर मिले होती हैं...
हॉट होने के कारन सुचिता अब्दुल के सर पे अपना हैट रख देती हैं.
..
अब्दुल अपनी लाल सुचिता के छूट पे टपकने हे वाला होता हैं की .....तभी ....
तभी ....
सुचिता झट से अब्दुल का सर पकड़ लेती hainn......aur एक झटके मैं.....
सुचिता अब्दुल का. .....गन्दा muhhh.....Apne छूट पे दबा देती हैं....
अब्दुल को ये अनएक्सपेक्टेड था......
इस्सलिये वोह भी जोश मैं आजके .......अपना मुह्ह पूरा खोल देता हैं......
और
..
कुत्ता जैसे कुट्टी का चाटने के लिए टूट पड़ता हैं....
वैसे हे अपने मुह्ह से अपनी गन्दी लाल tapkate.....huve....Abdul सुचिता के छूट पे टूट पड़ता हैं.....
अपनी गन्दी पान की जांबां वोह सुचिता के नंगे कोमल छूट के अजु बाजु वाले स्किन पे फेरना चालू करता हैं...
वोह एकदम से टूट पड़ता hainn.....pure जोश के साथ ....जिस से सुचिता का सुख सातवे आसमान पे जाता हैं...
सुचिता: अह्ह्ह्हह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब्दुल .....ाऊऊऊ......
अब्दुल ये आवाज सुन के और जोश मैं आए जाता हैं....
सुचिता ाअब और काम रास बहाना चालू करती हैं....
उसकी बड़ी से छूट और फूल जाती हैं......
अब्दुल सूचि के छूट का पूरा ..... पोरशन अपने मुह्ह में ले लेता हैं....
और उसको चाटने लगता हैं....
सुचिता अब्दुल के जबान से हो रहे सुख को ....महसूस करते हुवे अपने हटो से उअका सर जोर जोर से अपने छूट पे दबती हैं......
सुचिता:- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अम्म्मम्म नाहा
अब्दुल रुकने माँ नाम नहीं ले रहा था......
वोह अब ओने सेक् के लिया रुकता हैं....
सुचिता ायकः बंद का के प्रेशर से अपना सारा रास बहार फेकती हैं .....
अब्दुल उस गड़े रंग के रास को देखते रहता हैं...
आज उसको जन्नत नसीब होने वाली थी .....वोह रास चख के ..
वोह अपनी जबान उस रास की तरफ बढ़ता हैं...
थोड़ा थोड़ा कर के ......वोह उस उस रास को अपने गंदे जबान से चाटता हैं.....
सुचिता अपने छूट पे अब्दुल की जबान महसूस कर के मध् जोशी में जा चुकी थी .......
अब्दुल पूरा पुर अपने जबान से चाट के साफ कर देता हैं....
सुचिता .....मनो निढाल होक .......नंगी पड़ी रहती हैं...
और आआँख बंद कर के ....अब्दुल को रुकने का इशारा करती हैं....
अब्दुल सुचिता ke.....chut के यहाँ मुह्ह रख के रुक जाता हैं........
और थोड़े देर के लिए हॉल मैं सन्नाटा च जाता हैं ...
इधर लिफ्ट मैं...........
नम्रत और बिरजू दोनों अंदर घुस जाते हैं ......
नम्रता सामने कड़ी हो जाती हैं......
बिरजू जेक पीछे खड़ा हो जाता हैं...
बिरजू झट से .... लास्ट फ्लोर का बटन दबा देता हैं.....
नम्रता:- अरे बाबा मुझे ........11तह फ्लोर पे जाना हैं.....
बिरजू :- अरे बीटा ....... टेरेस पे मुझे छोटा सा काम hainn.........ek मिनट का फिर तुम निचे साथ मैं. आए जायेंगे ....
नम्रता:- ठीक हैं बाबा ...
.
और बिरजू बटन प्रेस कर के पीछे खड़ा हो जाता हैं..
.
नम्रता को थोड़ा ऑक्वर्ड फील होता हैं ...पर कोई बात नहीं ......वोह तैयार हो जाती हैं.....
नम्रता बिरजू के ठीक आगे कड़ी थी .....
पुरे लिफ्ट मैं ....... नम्रता के अंग के महक घूम जाती हैं.......
जोह की बोहत कातिलाना थी.......
बिरजू वोह महक अपने जेहन में उतर लेता हैं..
और बुड्ढे बिरजू का लुंड अपने औकात पे आजके सलामी देने लगता हैंन...
बुड्ढा लगा तर .....नम्रता के गांड को उसके लेग्गिंग्स के ऊपर से ताड़े जा रहा था. ....
नम्रता के उभरी हुवी जवान गांड ....बहार निकल के .....बिरजू को मनो .....दर्शन दे रही थी.....
नम्रता की उभरी हुवी गांड और रौशनी मैं उसकी खूबसूरती देख बिरजू का बुद्धा लुंड पूरा टाइट हो जाता हैं..
नम्रता के पुरे फिगर को वोह अपने आँखों से जी भर के देखता हैं
नम्रता भी थोड़ी तिरछी नजर से बिरजू के तरफ देख रही थी ....
नम्रता के मन में बड़ी जल्दी बिरजू के लिए हंडारडी भर गयी थी .........और उसको थोड़ा बुरा भी लग रहा था..... क्यू की कितनी बार नम्रता के डैड ने उसके सामने बिरजू को थप्पड़ मरे थे ......वोह भी छोटी गलतियों के लिए ........
नम्रता को उसके लिए बुरा फील होता हैं..
लेकिन नम्रत के इधर 36 के गांड को देख कर बिरजू की हालत ख़राब हो रही थी ......
उसको सब अपने लुंड को काबू मैं रखना मुश्किल हो रहा था....
बिरजू अपने यूनिफार्म वाले पंत के ऊपर से नम्रता के गांड को देख के ....अपने .
लुंड को दबाने लगता हैं....
पर उससे भी उसको ....कुछ फायदा नहीं होता ..
जन्नत के बूत की पारी सामने होते हुवे ......ऐसा कैसे संभव था......
बिरजू .....abb.......pura ...... कॉंफिडेंट मैं आए जाता हैं.....
वोह धीरे से अपना हैट आगे बढ़ाता ..है.
पर फिरसे दर जाता hainn....used ये सही टाइम नहीं लगता ...
पर उसका लुंड कहा मन्सने को तैयार था...
और बिरजू का बैकग्राउंड भी यही था...
उसने सोसाइटी के कही औरतो पे तरय मारा था..
और पकड़ा भी गया था ......पर हरभर ......अब्दुल की वजह से बच जाता था...
बिरजू एकदम बेधड़क बुद्धा tha.....aur अगर उसने दारू पीई होती तोह ....अब तक नम्रता के गांड को कबका नंगा कर के रखा होता.....
पर अपने अनुभव से उसने अब सिख लिए थी .....वोह नम्रता के बारे में रिस्क नहीं लेना चाहता था......
पर उसका लुंड कुछ और कह रहा था ..
नम्रता के उछली गांड के तरफ
बिरजू का हाट धीरे से जाता हैं..
..
नम्रता एकदम .....अनजान thi.....aur कड़ी कड़ी ......वेट कर रही थी कब लिफ्ट पोहच jaye....Abhi तोह सिर्फ 7तह फ्लोर क्रॉस हुवे थे .
बिरजू का नम्रता के जांघ की तरफ बढ़ता हैं....
गंदे बुड्ढे का .....गन्दा haat.....namrata के जांघो को टच करता हैं.....
और धीरे से वोह जांघ के बिच हाट रख देता हैं.....
अपने जांघो पे हैट महसूस होते हे नम्रता सावधान हो जाती हैं.....
और दर जाती हैं लेकिन कुछ रिएक्शन नहीं देती न कुछ बोलती हैं...
साला बुद्धा बिरजू भी शातिर था..
....
बिरजू .:- नम्रत बीटा ....
नम्रता:- है बबब ( धीमी आवाज मैं)
बिरजू ...:- तुम निचे बैठी ....थी तोह बोहत गन्दी चीज tumhare......idhar लगी हुवी हैं..
नम्रता:- क्या लगा हैं बबब
बिरजू :- बता नहीं सकता देखना पड़ेगा .
नम्रता कुछ नहीं बोलती .....
और उससे सिक्योर फील होता हैं.
इस्सलिये वोह कुछ नहीं रियेक्ट करती ...
बिरजू धीरे से जांघ को सहलाता हैं...
और थोड़ा ऊपर बढ़ता हैं.....
नम्रता:- निकला क्या बबब.
बिरजू :- नहीं बास हिलो मत तुम ...निकल देता हु.
बिरजू ......धीरे से अपनी कामिनी मुस्कान देते हुवे नम्रत के जांघो को सहलाते हुवे अपना हैट गांड के ऊपर हैट रख देता हैं ..
..और धीरे से सहलाता हैं......
इस्सस की वजह से नम्रता थोड़ी सेहर जाती हैं.
बिरजू धीरे से अपना गन्दा कला हाट ....
नम्रता के गांड के दरार के यहाँ ....ले जाता हैं....
नम्रता:- बबब रहने दो ......में घर जेक निकल दूंगी ....
बिरजू :- बीटा .....बोहत गन्दी चीज हैं...
नम्रता:- तोह निकालो न जल्दी ....
बिरजू ाब्ब सवाल में और परेशानी मैं पद जाता हैं....
पर उसके दिमाग मैं कुछ सूझता हैं...
वोह बुद्धा अपने मुह्ह ने रखे तम्बाकू के .....कुछ गीले टुकड़ो को एक हैट से .....
निकल के ..... नम्रता के गांड के यहाँ लगा देता हैं.....
नम्रता को वोह महसूस होने हे वाला था की
बिरजू:- बीटा देख के बैठा करो कही भी ....
नम्रता:- है लेकि. लगा क्या हैं .....
बिरजू:- किसी ने तम्बाकू का थूका हुवा .....लगा hain....udhar ....
नम्रता:- चींईईईई........
बिरजू :- हआ.. नम्रता....
नम्रता:- ऐसे कैसे लोक होते हे गंदे सीई
बिरजू फायदा लेके........... नम्रता के बड़े गांड को धीरे से दबाते हुवे .....अपने गंदे हटो को ....ुसस्स तम्बाकू ...को नम्रता के गांड पे रगड़ता हैं....
नम्रता को कुछ गिला गिला .....उसके गांड पे फील होता हैं......
बिरजू ......झट से अपना हैट हटा देता हैं.....
नम्रता:- निकल गया .....
बिरजू :- नहीं .....
नम्रता:- फिर .......
बीजू ..:- टेरेस आ गया
और लिफ्ट खुल टी हैं.......
नम्रता लिफ्ट के बहार आके ......कड़ी हो जाती हैं..
बिरजू :- बास एक मिनट में आया ......
नम्रता खड़ा हो के ......डेक्टि hainn.....Birju टेरेस पे जाता हैं.
और नम्रता झट से अपने गांड के यहाँ अपना हाट लेके जाती हैं.....
उससे कुछ गिला गिला महसूस होता हैं......
वोह चीज उसके हाट पे लग जाती हैं ....
अपने उंगलियों पे कुछ लगा देख नम्रता अपने उंगलियों को देखती हैं.....
और इन् तम्बाकू के पार्टिकल्स को देखने लगती हैं...
नम्रता:- शिज्जी ये कब Laga......chi.... नम्रता को बोहत गन्दा फील होता हैं....
नम्रता वोह उंगलियों को अपने नाक के यहाँ लेके जाती hainn.....aur थोड़ा सूंघती हैं.....
उससे बिरजू के गंदे सलीवा की .....और .....तम्बाकू की गन्दी बदबू आती हैंन....
बॉब सिंह के नम्रता को बड़ी घिन आयति हैं....
नम्रता वोह उंगलियों को अपने ड्रेस के रख के साफ कर देती हैं....
सामने से बिरजू अपना काम कर के वापस आता है न.
.
एंड फिरसे दोनों लिफ्ट मैं चल देते हैं......
बिरजू :- 11तह फ्लोर न ...
नम्रता:- जी बाबा
और लिफ्ट चल पड़ती हैं....
बिरजू ......अपने लुंड को दबाते हुवे .......
अपने जेब में से रुमाल निकलता हैं.....
बिरजू :- साफ करू बीटा वोह अच्छा नहीं लग रहा .....
नम्रता:- नहीं बाबा मैं कर लुंगी घर जेक ....
बिरजू उसकी नहीं सुनता .....और उसके गांड पे अपना रुमाल रख देता हैंन....
रुमाल जांघ के यहाँ लेके voh......apna हाट गांड पे रख के .....
नम्रता के बड़े गांड को ......जोर से दबाता हैंण्ण्ण्न.....
नम्रता:- अह्ह्ह्हह बस्बा क्या कर रहे हो ....
नम्रता को ये बिलकुल एक्सेप्ट नहीं था...
वोह थोड़ा चौक जाती हैंन ......
नम्रता:- अह्ह्ह बाबा क्या हुवा
बिरजू :- कुछ नहीं
अब्ब्ब बिरजू थोड़ा सावधानी से ......नम्रत के गांड के दरार में ऊँगली दाल देता हैं....
नम्रता:- अह्ह्ह बाबा क्या कर रहे हो ..
बिरजू नम्रता को जवाब बही देता .....
वोह अपने हैट को ....थोड़ा पीछे कर के नम्रता के जांघो को दूर कर के उसके गांड के दरार में एक ऊँगली दाल देता हैंन..
नम्रता के मुहहह से सिसकारी निकलती हैं...
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाबा दुःख रहा हैं
और बिरजू झट से ऊँगली निकल देता हैं.....
और खड़ा होक नम्रता को रुमाल के ऊपर की .......गन्दी तम्बाकू दिखता हैं...
नम्रता को भी थोड़ा अच्छा फील होता हैं.....
और उसी लगता हैं उसे मिसुन्दरस्टण्डींग हो गई....
और वोह बिरजू को एक स्माइल देती हैं....
नम्रता का फ्लोर आता हैं...
नम्रता लिफ्ट से बहार निकलती हैं.....
बिरजू भी बहार आता है ....
बिरजू :- कल आओगी न निचे....... Namrata...baat करने ..
नम्रता मुस्कुराती hainn....aur बोलती हज़ींन...
नम्रता:- हआ बाबा......
बिरजू निकल पड़ता हैं.....
नम्रता ुसेड पीछे मूड के देखती hainn....Birju भी उससे देकता हैं...
नम्रता:- बाबा लेकिन जगह साफ रखना बैठ ने ले लिए ....
और दोनों एक दूसरे के निगाहो में देख के मुस्कुराते हैं..
नम्रता को पूरा निहार निहार के बिरजू चला जाता हैं..
नम्रता दूर बेल्ल बजती हैं......
यहाँ अंदर सुचिता नंगी हे हडबडी हुवी उठती हैं..
अब्दुल की तोह हवा टाइट हो जाती हैं ....
सुचिता का पूरा बदन कपङे लगता हैं.....
सुचिता:- अगर नम्रता के पापा होंगे तोह हम मर जायेंगे ....
अब्दुल की तोह पूरी गांड फैट जाती हैं.....
अब्ब्ब क्या होगा नम्रता को सुचिता और अब्दुल के बारे मैं पता चल जायेगा ....
या फिर ......कुछ बता मोड़ आएगा इस कहानी मैं..
तो बे कॉन्टिनोएड.......
स्टे तुनेड.........
स्टे होम .......
स्टे सेफ ..........
दोनों लिफ्ट के यहाँ पोहच जाते हैं....
और दोनों अंदर अस जाते हैं...
बिरजू पीछे जेक खड़ा हो जाता हैं....
नम्रता अपनी गांड लिए बिरजू के आगे कड़ी हो जाती हैं....
नम्रता की बड़ी बड़ी गांड देख के बिरजू .....अपना लुंड पीछे हिलने लगता हैं...
वोह नम्रता के ट्रांस्फेरेंट गांड को देख पागल हो जाता हैं...
वोह उसकी गांड को पूरा निहारता हैं
और वोह देख
उसके दिमाग में कुछ बोहत कमीना चल रहा था ....
अब्बब्बब आएगी ..............
रूम मैं पूरा सन्नाटा चाय हुवा था.......
हर तरफ बस सुचिता के बदन की खुस्भु .घूम रही थी ....मनो पुरे रूम में सुचिता के छूट का रास छिड़क दित्य हो .
अगर कोई बहार का आदमी रूम मैं आया तोह उसका वोह स्मेल लेके हे लुंड कड़क हो जायेगा ......
हॉल के सोफे पैन सुचिता का पूरा रास गिर चूका था जिस से सोफे के ऊपर की शीट पूरी गीली हो चुकी थी ....
और अभी भी सुचिता के गंगा से काम रास बहे जा रहा tha.....itna रास बह रहा था मनो उससे ...10 आदमी ो की प्यास भुज जाया ..
अब्दुल सुचिता के नंगे पैन को एकटक देख रहा tha.....usee अभी भी .....अपने कुसमट पे यकीं नहीं आए रहा था...
सुचिता और अब्दुल की ये पहली फिजिकल मुलाकात थी .....और पहले हे मुलाकात मैं..
उसी सुचिता की काम रास से भरी हुवी ....छूट देखने को मिली और चखने को मिलने वाली थी ......
सुचिता अपने छूट को अब्दुल को ऐसा देख वोह अपने छूट को .अपने दोनों उंगलियों को ढकने की कोशिश करती हैंन....
अपने जवानी मैं लड़को के तरफ कभी भी न देखने वाली सुचिता ......शादी शुदा होते हुवे भी ......एक
गैर मर्द बुड्ढे के सामने अपने टंगे फैला के ...सोई थी .......
अब्दुल दूर से हे छूट के खुशबु से पागल हो रहा था.....
छूट से निकलता हुवा काम रास उसे सुचिता के तरफ ाआकर्षित कर रहा था.....
सुचिता की छूट के अजु बाजु की स्किन ऐसे उचार के अब्दुल के सामने नाच रही थी..
बाजु से अपने होल से गिलावट बढ़ रही थी .सफ़ेद सफ़ेद गधा रंग का छूट का रंग लगातार बहे जा रहा tha...Komal लाल और गुलाबी रंग का मिश्रण और उसमे ....ज्यादा गीलापन ....सुचिता के छूट को ....काम देवी का दर्जा दे रहा tha......agar कोई होता तोह सीधा सुचिता के छूट में अपना लुंड घुसा देता ........
अब्दुल बुड्ढे की और सुचिता के आपस मैं नजरो की भिडान होती हैं दोनों के नजरो में हवस साफ दिखाई दे रही थी ......
सुचिता के मन में ऑक्वर्ड के फीलिंग तोह थी मगर उसके हवस को हरये उतनी नहीं थी .........
दोनों एक दूसरे से कुछ नहीं कहते .......
सुचिता की साड़ी उसके कमर तक थी .......
और निचे नंगी उसकी ....पंतय .....सोफे के एक कोने मैं लटक रही थी ......
अब्दुल. धीरे से उसके छूट को देख निचे झुकतीअ हैं.
सुचिता भी अपनी छूट उसके आगे कर देती हैं...
अब्दुल ाअब सुचिता के छूट के एकदम मुँह लेके करीब था....
दोनों में ाकाहिर की ....नजर मिले होती हैं...
हॉट होने के कारन सुचिता अब्दुल के सर पे अपना हैट रख देती हैं.
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अब्दुल अपनी लाल सुचिता के छूट पे टपकने हे वाला होता हैं की .....तभी ....
तभी ....
सुचिता झट से अब्दुल का सर पकड़ लेती hainn......aur एक झटके मैं.....
सुचिता अब्दुल का. .....गन्दा muhhh.....Apne छूट पे दबा देती हैं....
अब्दुल को ये अनएक्सपेक्टेड था......
इस्सलिये वोह भी जोश मैं आजके .......अपना मुह्ह पूरा खोल देता हैं......
और
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कुत्ता जैसे कुट्टी का चाटने के लिए टूट पड़ता हैं....
वैसे हे अपने मुह्ह से अपनी गन्दी लाल tapkate.....huve....Abdul सुचिता के छूट पे टूट पड़ता हैं.....
अपनी गन्दी पान की जांबां वोह सुचिता के नंगे कोमल छूट के अजु बाजु वाले स्किन पे फेरना चालू करता हैं...
वोह एकदम से टूट पड़ता hainn.....pure जोश के साथ ....जिस से सुचिता का सुख सातवे आसमान पे जाता हैं...
सुचिता: अह्ह्ह्हह ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब्दुल .....ाऊऊऊ......
अब्दुल ये आवाज सुन के और जोश मैं आए जाता हैं....
सुचिता ाअब और काम रास बहाना चालू करती हैं....
उसकी बड़ी से छूट और फूल जाती हैं......
अब्दुल सूचि के छूट का पूरा ..... पोरशन अपने मुह्ह में ले लेता हैं....
और उसको चाटने लगता हैं....
सुचिता अब्दुल के जबान से हो रहे सुख को ....महसूस करते हुवे अपने हटो से उअका सर जोर जोर से अपने छूट पे दबती हैं......
सुचिता:- ओह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अम्म्मम्म नाहा
अब्दुल रुकने माँ नाम नहीं ले रहा था......
वोह अब ओने सेक् के लिया रुकता हैं....
सुचिता ायकः बंद का के प्रेशर से अपना सारा रास बहार फेकती हैं .....
अब्दुल उस गड़े रंग के रास को देखते रहता हैं...
आज उसको जन्नत नसीब होने वाली थी .....वोह रास चख के ..
वोह अपनी जबान उस रास की तरफ बढ़ता हैं...
थोड़ा थोड़ा कर के ......वोह उस उस रास को अपने गंदे जबान से चाटता हैं.....
सुचिता अपने छूट पे अब्दुल की जबान महसूस कर के मध् जोशी में जा चुकी थी .......
अब्दुल पूरा पुर अपने जबान से चाट के साफ कर देता हैं....
सुचिता .....मनो निढाल होक .......नंगी पड़ी रहती हैं...
और आआँख बंद कर के ....अब्दुल को रुकने का इशारा करती हैं....
अब्दुल सुचिता ke.....chut के यहाँ मुह्ह रख के रुक जाता हैं........
और थोड़े देर के लिए हॉल मैं सन्नाटा च जाता हैं ...
इधर लिफ्ट मैं...........
नम्रत और बिरजू दोनों अंदर घुस जाते हैं ......
नम्रता सामने कड़ी हो जाती हैं......
बिरजू जेक पीछे खड़ा हो जाता हैं...
बिरजू झट से .... लास्ट फ्लोर का बटन दबा देता हैं.....
नम्रता:- अरे बाबा मुझे ........11तह फ्लोर पे जाना हैं.....
बिरजू :- अरे बीटा ....... टेरेस पे मुझे छोटा सा काम hainn.........ek मिनट का फिर तुम निचे साथ मैं. आए जायेंगे ....
नम्रता:- ठीक हैं बाबा ...
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और बिरजू बटन प्रेस कर के पीछे खड़ा हो जाता हैं..
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नम्रता को थोड़ा ऑक्वर्ड फील होता हैं ...पर कोई बात नहीं ......वोह तैयार हो जाती हैं.....
नम्रता बिरजू के ठीक आगे कड़ी थी .....
पुरे लिफ्ट मैं ....... नम्रता के अंग के महक घूम जाती हैं.......
जोह की बोहत कातिलाना थी.......
बिरजू वोह महक अपने जेहन में उतर लेता हैं..
और बुड्ढे बिरजू का लुंड अपने औकात पे आजके सलामी देने लगता हैंन...
बुड्ढा लगा तर .....नम्रता के गांड को उसके लेग्गिंग्स के ऊपर से ताड़े जा रहा था. ....
नम्रता के उभरी हुवी जवान गांड ....बहार निकल के .....बिरजू को मनो .....दर्शन दे रही थी.....
नम्रता की उभरी हुवी गांड और रौशनी मैं उसकी खूबसूरती देख बिरजू का बुद्धा लुंड पूरा टाइट हो जाता हैं..
नम्रता के पुरे फिगर को वोह अपने आँखों से जी भर के देखता हैं
नम्रता भी थोड़ी तिरछी नजर से बिरजू के तरफ देख रही थी ....
नम्रता के मन में बड़ी जल्दी बिरजू के लिए हंडारडी भर गयी थी .........और उसको थोड़ा बुरा भी लग रहा था..... क्यू की कितनी बार नम्रता के डैड ने उसके सामने बिरजू को थप्पड़ मरे थे ......वोह भी छोटी गलतियों के लिए ........
नम्रता को उसके लिए बुरा फील होता हैं..
लेकिन नम्रत के इधर 36 के गांड को देख कर बिरजू की हालत ख़राब हो रही थी ......
उसको सब अपने लुंड को काबू मैं रखना मुश्किल हो रहा था....
बिरजू अपने यूनिफार्म वाले पंत के ऊपर से नम्रता के गांड को देख के ....अपने .
लुंड को दबाने लगता हैं....
पर उससे भी उसको ....कुछ फायदा नहीं होता ..
जन्नत के बूत की पारी सामने होते हुवे ......ऐसा कैसे संभव था......
बिरजू .....abb.......pura ...... कॉंफिडेंट मैं आए जाता हैं.....
वोह धीरे से अपना हैट आगे बढ़ाता ..है.
पर फिरसे दर जाता hainn....used ये सही टाइम नहीं लगता ...
पर उसका लुंड कहा मन्सने को तैयार था...
और बिरजू का बैकग्राउंड भी यही था...
उसने सोसाइटी के कही औरतो पे तरय मारा था..
और पकड़ा भी गया था ......पर हरभर ......अब्दुल की वजह से बच जाता था...
बिरजू एकदम बेधड़क बुद्धा tha.....aur अगर उसने दारू पीई होती तोह ....अब तक नम्रता के गांड को कबका नंगा कर के रखा होता.....
पर अपने अनुभव से उसने अब सिख लिए थी .....वोह नम्रता के बारे में रिस्क नहीं लेना चाहता था......
पर उसका लुंड कुछ और कह रहा था ..
नम्रता के उछली गांड के तरफ
बिरजू का हाट धीरे से जाता हैं..
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नम्रता एकदम .....अनजान thi.....aur कड़ी कड़ी ......वेट कर रही थी कब लिफ्ट पोहच jaye....Abhi तोह सिर्फ 7तह फ्लोर क्रॉस हुवे थे .
बिरजू का नम्रता के जांघ की तरफ बढ़ता हैं....
गंदे बुड्ढे का .....गन्दा haat.....namrata के जांघो को टच करता हैं.....
और धीरे से वोह जांघ के बिच हाट रख देता हैं.....
अपने जांघो पे हैट महसूस होते हे नम्रता सावधान हो जाती हैं.....
और दर जाती हैं लेकिन कुछ रिएक्शन नहीं देती न कुछ बोलती हैं...
साला बुद्धा बिरजू भी शातिर था..
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बिरजू .:- नम्रत बीटा ....
नम्रता:- है बबब ( धीमी आवाज मैं)
बिरजू ...:- तुम निचे बैठी ....थी तोह बोहत गन्दी चीज tumhare......idhar लगी हुवी हैं..
नम्रता:- क्या लगा हैं बबब
बिरजू :- बता नहीं सकता देखना पड़ेगा .
नम्रता कुछ नहीं बोलती .....
और उससे सिक्योर फील होता हैं.
इस्सलिये वोह कुछ नहीं रियेक्ट करती ...
बिरजू धीरे से जांघ को सहलाता हैं...
और थोड़ा ऊपर बढ़ता हैं.....
नम्रता:- निकला क्या बबब.
बिरजू :- नहीं बास हिलो मत तुम ...निकल देता हु.
बिरजू ......धीरे से अपनी कामिनी मुस्कान देते हुवे नम्रत के जांघो को सहलाते हुवे अपना हैट गांड के ऊपर हैट रख देता हैं ..
..और धीरे से सहलाता हैं......
इस्सस की वजह से नम्रता थोड़ी सेहर जाती हैं.
बिरजू धीरे से अपना गन्दा कला हाट ....
नम्रता के गांड के दरार के यहाँ ....ले जाता हैं....
नम्रता:- बबब रहने दो ......में घर जेक निकल दूंगी ....
बिरजू :- बीटा .....बोहत गन्दी चीज हैं...
नम्रता:- तोह निकालो न जल्दी ....
बिरजू ाब्ब सवाल में और परेशानी मैं पद जाता हैं....
पर उसके दिमाग मैं कुछ सूझता हैं...
वोह बुद्धा अपने मुह्ह ने रखे तम्बाकू के .....कुछ गीले टुकड़ो को एक हैट से .....
निकल के ..... नम्रता के गांड के यहाँ लगा देता हैं.....
नम्रता को वोह महसूस होने हे वाला था की
बिरजू:- बीटा देख के बैठा करो कही भी ....
नम्रता:- है लेकि. लगा क्या हैं .....
बिरजू:- किसी ने तम्बाकू का थूका हुवा .....लगा hain....udhar ....
नम्रता:- चींईईईई........
बिरजू :- हआ.. नम्रता....
नम्रता:- ऐसे कैसे लोक होते हे गंदे सीई
बिरजू फायदा लेके........... नम्रता के बड़े गांड को धीरे से दबाते हुवे .....अपने गंदे हटो को ....ुसस्स तम्बाकू ...को नम्रता के गांड पे रगड़ता हैं....
नम्रता को कुछ गिला गिला .....उसके गांड पे फील होता हैं......
बिरजू ......झट से अपना हैट हटा देता हैं.....
नम्रता:- निकल गया .....
बिरजू :- नहीं .....
नम्रता:- फिर .......
बीजू ..:- टेरेस आ गया
और लिफ्ट खुल टी हैं.......
नम्रता लिफ्ट के बहार आके ......कड़ी हो जाती हैं..
बिरजू :- बास एक मिनट में आया ......
नम्रता खड़ा हो के ......डेक्टि hainn.....Birju टेरेस पे जाता हैं.
और नम्रता झट से अपने गांड के यहाँ अपना हाट लेके जाती हैं.....
उससे कुछ गिला गिला महसूस होता हैं......
वोह चीज उसके हाट पे लग जाती हैं ....
अपने उंगलियों पे कुछ लगा देख नम्रता अपने उंगलियों को देखती हैं.....
और इन् तम्बाकू के पार्टिकल्स को देखने लगती हैं...
नम्रता:- शिज्जी ये कब Laga......chi.... नम्रता को बोहत गन्दा फील होता हैं....
नम्रता वोह उंगलियों को अपने नाक के यहाँ लेके जाती hainn.....aur थोड़ा सूंघती हैं.....
उससे बिरजू के गंदे सलीवा की .....और .....तम्बाकू की गन्दी बदबू आती हैंन....
बॉब सिंह के नम्रता को बड़ी घिन आयति हैं....
नम्रता वोह उंगलियों को अपने ड्रेस के रख के साफ कर देती हैं....
सामने से बिरजू अपना काम कर के वापस आता है न.
.
एंड फिरसे दोनों लिफ्ट मैं चल देते हैं......
बिरजू :- 11तह फ्लोर न ...
नम्रता:- जी बाबा
और लिफ्ट चल पड़ती हैं....
बिरजू ......अपने लुंड को दबाते हुवे .......
अपने जेब में से रुमाल निकलता हैं.....
बिरजू :- साफ करू बीटा वोह अच्छा नहीं लग रहा .....
नम्रता:- नहीं बाबा मैं कर लुंगी घर जेक ....
बिरजू उसकी नहीं सुनता .....और उसके गांड पे अपना रुमाल रख देता हैंन....
रुमाल जांघ के यहाँ लेके voh......apna हाट गांड पे रख के .....
नम्रता के बड़े गांड को ......जोर से दबाता हैंण्ण्ण्न.....
नम्रता:- अह्ह्ह्हह बस्बा क्या कर रहे हो ....
नम्रता को ये बिलकुल एक्सेप्ट नहीं था...
वोह थोड़ा चौक जाती हैंन ......
नम्रता:- अह्ह्ह बाबा क्या हुवा
बिरजू :- कुछ नहीं
अब्ब्ब बिरजू थोड़ा सावधानी से ......नम्रत के गांड के दरार में ऊँगली दाल देता हैं....
नम्रता:- अह्ह्ह बाबा क्या कर रहे हो ..
बिरजू नम्रता को जवाब बही देता .....
वोह अपने हैट को ....थोड़ा पीछे कर के नम्रता के जांघो को दूर कर के उसके गांड के दरार में एक ऊँगली दाल देता हैंन..
नम्रता के मुहहह से सिसकारी निकलती हैं...
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बाबा दुःख रहा हैं
और बिरजू झट से ऊँगली निकल देता हैं.....
और खड़ा होक नम्रता को रुमाल के ऊपर की .......गन्दी तम्बाकू दिखता हैं...
नम्रता को भी थोड़ा अच्छा फील होता हैं.....
और उसी लगता हैं उसे मिसुन्दरस्टण्डींग हो गई....
और वोह बिरजू को एक स्माइल देती हैं....
नम्रता का फ्लोर आता हैं...
नम्रता लिफ्ट से बहार निकलती हैं.....
बिरजू भी बहार आता है ....
बिरजू :- कल आओगी न निचे....... Namrata...baat करने ..
नम्रता मुस्कुराती hainn....aur बोलती हज़ींन...
नम्रता:- हआ बाबा......
बिरजू निकल पड़ता हैं.....
नम्रता ुसेड पीछे मूड के देखती hainn....Birju भी उससे देकता हैं...
नम्रता:- बाबा लेकिन जगह साफ रखना बैठ ने ले लिए ....
और दोनों एक दूसरे के निगाहो में देख के मुस्कुराते हैं..
नम्रता को पूरा निहार निहार के बिरजू चला जाता हैं..
नम्रता दूर बेल्ल बजती हैं......
यहाँ अंदर सुचिता नंगी हे हडबडी हुवी उठती हैं..
अब्दुल की तोह हवा टाइट हो जाती हैं ....
सुचिता का पूरा बदन कपङे लगता हैं.....
सुचिता:- अगर नम्रता के पापा होंगे तोह हम मर जायेंगे ....
अब्दुल की तोह पूरी गांड फैट जाती हैं.....
अब्ब्ब क्या होगा नम्रता को सुचिता और अब्दुल के बारे मैं पता चल जायेगा ....
या फिर ......कुछ बता मोड़ आएगा इस कहानी मैं..
तो बे कॉन्टिनोएड.......
स्टे तुनेड.........
स्टे होम .......
स्टे सेफ ..........