चालू चपत नीतू और अघोरी बाबा
नीतू और अघोरी एक दुसरे के एकदम समीप बैठे थे.
अघोरी: तो हम ये साधना प्रारम्भ करते है.
नीतू: जी
अघोरी: इस साधना के पूजन स्वरुप के प्रारम्भ में श्रृंगार और चिन्हांकन होता है पर चुकी ये तंत्र स्वरुप है इसलिए यहाँ श्रृंगार नहीं होगा सिर्फ चिन्हांकन होगा.
नीतू: जी इसमें क्या होगा.
अघोरी: पंडित भद्रसेन ने इसमें शीला का बदन के अलग अलग हिस्सों पर स्वस्तिक बनाया था पर हम यहाँ स्वस्तिक नहीं बल्कि तंत्र के टारे का चिन्ह बनाएँगे.
अघोरी ने अपने झोले से एक मिश्रण निकला उसमे चिटा की राख मदिरा और राखत का मिश्रण करके एक लेप बनाया और नीतू को अपने और करीब आने को कहा. नीतू अघोरी के और समीप आ गई.
अघोरी: इस लेप से मई आपके शरीर 6 तंत्र त्रिकोण बनाऊगा तीन सीधे तीन उलटे वो भी उन जगह पर जहा से उन्हें यदि जोड़ा जाए जो वो आपस में मिल कर तंत्र तारा बना दे.
नीतू: जी
अघोरी: तंत्र तारे में दो त्रिकोण विपरीत तरफ से एक दुसरे से जुड़े होते है यानि मई आपके शरीर के उन्ही स्थानों को चिन्हांकित करूँगा जहा से ये दो त्रिकोण बने.
नीतू: जी
अघोरी: प्रथम त्रिकोण जिसका सिरा ऊपर की तरफ होता है उसका ऊपरी सिरा होगा आपकी गर्दन पर और गर्दन से होते हुए आपके दोनों वक्षो को मिलते हुए आपके वक्षो के बीच के हिस्से जिसे आप अंग्रेजी में क्लीवेज कहती है वह पर आकर ख़तम होगा. क्या आप तैयार है.
नीतू का दिल धक् धक् कर रहा था क्युकी साधना के प्रारम्भ में hi अघोरी उसके बूब्स को स्पर्श करने वाला था. पर अपने उत्तेजना को काबू करते हुए उसने हामी में सर हिला दिया और अपनी गर्दन को उठा दिया.
अघोरी ने अपने हाथ की तर्जनी ऊँगली को उस लेप में डुबोया और अपने हाथ नीतू की गर्दन पर रख दिए और नीतू के गर्दन से त्रिकोण की दोनों रेखाए खींचते हुए नीतू के स्तनों के ऊपरी हिस्से को स्पर्श करते हुए नीतू के क्लीवेज तक वो त्रिकोण बना दिया. इस हलके से स्पर्श ने नीतू के उत्तेजना से भर दिया. यु तो कल रात उसकी योनि साधना के दौरान भी अघोरी ने उसके स्तनों को छुआ था पर तब उसके शरीर पर सिन्दूर भस्म शराब पेशाब खून इतना कुछ डाला जा रहा था की अपने स्तनों पर एक मर्द के हाथो के स्पर्श से होने वाली उत्तेजना कही खो गई थी. पर आज ऐसा कुछ नहीं था आज अपने स्तानक पर स्पर्श हुई अघोरी की उंगलिया उसे अलग hi कामुकता का एहसास करा रही थी. नीतू की तो इच्छा थी की अघोरी उसके स्तनों को मसले दबाए पर अभी इसका समय नहीं आया था.
अघोरी: अब इस त्रिकोण का दूसरा सिरा होगा आपकी जांघो और योनि के जुड़ाव की जगह जहा अमूमन हमे बहुत ज्यादा श्वेद यानि पसीना निकलता है. दूसरा त्रिकोण मई आपकी दाई जगह और योनि के बीच के पसीने से भरे हिस्से में बनाऊगा.
ये जगह नीतू में लिए थोड़ी वेयर्ड थी क्युकी ये जगह से पसीने से भरी होती है पर अघोरी ने कहा है तो करना तो था hi.
अघोरी: आप उठ कर कड़ी हो जाइये और अपनी दाई टांग उठा कर मेरे कंधे पर रख ले.
नीतू: जी
नीतू उठ कर कड़ी हो गई और बाहुबली कात्ताप टाइप पोज़ में अपनी दाई टांग अघोरी के कंधे पर रख दी. अघोरी ने दुबारा अपनी तर्जनी उंगली को उस लेप में डुबोया और नीतू का पेटीकोट थोड़ा ऊपर उठाया और अपने हाथ नीतू के पेटीकोट के अंदर दाल दिए. नीतू के बालो से भरी ब्याह नीतू की जांघ पर रगड़ रही थी ये अनुभव उसके लिए उम्मीद से ज्यादा कामुक था. अघोरी अपनी हथेली नीतू की जांघ और योनि के बीच के हिस्से पर ले गया. वो हिस्सा पहले से गर्मी की वजह से पसीने से गिला था. अघोरी ने उसी जगह पर वो दूसरा त्रिकोण बना दिया. अपना जांघो के इस हिस्से पर अघोरी की उंगलियों के चलने से नीतू को बदु गुदगुदी हो रही थी पर वो किसी तरह उसे कण्ट्रोल कर रही थी.
अघोरी: अब इस त्रिकोण का तीसरा सिरा आपकी बाई जांघ के इसी हिस्से पर बनेगा तो अब आप अपनी दाई तंग मेरे कंधे से हटाकर अपनी बाई तंग मेरे दुसरे कंधे पर रख ले.
नीति ने अपनी दाई तंग हिटलर अपनी बाई तंग अघोरी के दुसरे कंधे पर रख दी. और अघोरी ने एक बार फिर वही क्रिया दोहराते हुए नीतू की बाई जांघ और योनि और जांघ के बीच के पसीने वाले हिस्से पर वो तीसरा सीधा त्रिकोण बना दिया. अब बरी थी तीन उलटे त्रिकोण बनाने की.
अघोरी: अब मई तीन उलटे त्रिकोण बनाऊंगा और ये उलटे त्रिकोण आपकी उलटी तरफ यानि आपकी पीठ की तरफ से बनेगे. इसलिए आप मेरी तरफ पीठ घुमाकर बैठ जाइये.
नीतू अघोरी की बात मानते हुए उसकी तरफ पीठ करके बैठ गई.
अघोरी: पसीना अर्थात श्वेद हमारे शरीर का अवशिष्ट जल होता है जो हमारे बदन की दुर्गन्ध से युक्त होता है और काली शक्तिया दिर्गन्ध की तरफ जल्दी आकर्षित होती है और पवित्र शक्तिया दुर्गन्ध से दूर भगति है इसीलिए पूजा में नाहा धोकर बैठने को कहा जाता है ताकि हमारे शरीर से पसीने की दुर्गन्ध न आए और इसलिए पूजा में कपूर और अन्य सुगन्धित हवन सामग्री इस्तेमाल करि जाती है ताकि काली शक्तिया वह से दूर रहे और पवित्र शक्तिया आकर्षित हो. पर यहाँ हमे काली शक्तियों को hi आकर्षित करना है इसीलिए ये त्रिकोण हम उन जगहों पर बना रहे है जहा हमारे शरीर से सबै ज्यादा दुगंध आती है. जैसे गर्दन पर इंसान को सबसे ज्यादा पसीना आता है जो बहकर हमारी छाती तक आ जाया है. और जांघो के बीच पसीना अत रहता है. उसी तरह वो हिस्से जो पसीने और दुर्गन्ध से भरे रहते है वो है हुमारु बगले यानि आर्मपिट्स जहा की दुगंध को छुपाने के लिए हम तरह तरह के डॉ इस्तेमाल करते है. इसलिए साफ़ है इस उलटे त्रिकोण के ऊपरी दो सिरे बनेगे आपकी दोनों बगलो पर.
नीतू को बड़ी शर्म आ रही थी की यहाँ कब्रिस्तान में आने के बाद उसे अपनी बगलो को साफ़ नहीं कर पाई न वह कोई डॉ लगा पाई ऐसे में अब उसकी बगलो से आती दुर्गन्ध से अघोरी क्या सोचेगा पर फिर उसने सोचा की शायद ये दुर्गन्ध hi इस साधना का हिस्सा है. यही सोचते हुए उसने अपनी दाई बगल उठा दी. अघोरी ने एक बार फिर अपनी ऊँगली को उस लेप में डुबोया और नीतू पसीने से भरी बगल में एक उल्टा त्रिकोण बना दिया, नीतू को हलकी गुदगुदी हुई पर उसने बर्दाश्त कर्ली. इसके बाद यही क्रिया नीतू की बाई बगल में भी दोहराई गई और इस साधना का पांचवा त्रिकोण वह बना दिया गया. अब बस उलटे त्रिकोण का निचला सिरा और इस साधना का छडा त्रिकोण बचा था. नीतू भी सोच रही थी अब ऐसी कौन सी जगह हो सकती है जो दुर्गन्धयुक्त होती है जहा ये छडा त्रिकोण बनाएगा, सबसे ज्यादा दुर्गन्ध तो हमारे मॉल में होती है पर वह कैसे त्रिकोण बनेगा. नीतू के ये सोचना हुआ अघोरी ने वो छड़ी जगह बता दी.
अघोरी: अब बरी है छडे और आखिरी त्रिकोण की, तो हमारे शरीर की सबसे दुर्गन्ध युक्त चीज़ हमारा मॉल है और वो हमारे गुदा द्वार से अत है यानि वो छडा त्रिकोण आपके गुदा द्वार पर बनेगा.
ये सुनकर नीतू के गूसबम्प्स खड़े हो गए की अघोरी उसकी गांड के छेड़ पर अपनी ऊँगली से एक त्रिकोण बनाएगा. ये कुछ ऐसी जगह होती है जिन्हे नार्मल सेक्स के दौरान नहीं छुआ जाता है पर किंकी सेक्स में इनका hi सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता और कुछ किंकी फीलिंग इस नीतू महसूस कर रही थी. पर फिलहाल तो अघोरी क्र अगले आदेश का इंतज़ार कर रही थी.
अघोरी: तो आप एक फिर कड़ी हो जाइये पर इस बार मेरी तरफ पीठ करके.
नीतू उठा कर कड़ी हो गई.
अघोरी: अब अपना पेटीकोट अपनी कमर तक ऊपर उठा लीजिये.
नीतू ने धड़कते दिल से अपना पेटीकोट कमर तक ऊपर कर लिया. अब उसके सावले नितम उस पतले से लंगोट में अघोरी के सामने लगभग पूरी तरह नग्न थे. पर उसकी गांड की दरार तो अब भी उस लंगोट के पीछे छपी हुई थी. अघोरी ने हाथ आगे बड़ा कर उस लंगोट को खींच कर नीतू की गांड की दरार से हटा कर उसकी गांड की दरार को खोल दिया.
अघोरी: अब आप अपने दोनों नितम्बो को खींच कर थोड़ा खोल दे ताकि मेरी ऊँगली अंदर दाखिल हो सके और त्रिकोण बना सके.
Neetu ne apne peticote ko upar uthae uthae apne haath se apne dono nitambo ko thama aur unhe thoda door door kheech kar apni gaand ki darar ko Aghori ke samne khol diya. Aghori ne apni ungli ko ek baar phir us lep me duboya aur apni ungli neetu ki gaand ki darar ke andar daal di. Neetu ko badi erotic aur kinky feeling ho rahi thi ki usne kabhi sapne me bhi nahi socha tha ki ek din wo yu is tarah wo ek kabristaan me rehne wale Aghori ke saame apna peticote upar kare apne chutado ko khole khadi hogi aur uski ungli apni gaand me dalwa rahi hogi. Par wo kehte hai na TRUTH IS STRANGER THAN FICTION ( सच कल्पना से ज्यादा अकल्पनीय है ). Aghori ne wo chhada trikon neetu ki gaand ki darar me bana diya jiska ek sira neetu ki gaand ke chhed ke andar tak jata tha jiske liye Aghori ne puri ungli neetu ki gaand ke chhed ke andar ghused di. Neetu to achanak se chihuk uthi use yakeen nahi hua ki anghori ne apni puri ungli uski gaand ke chhed me andar tak daal di. Par kahi na kahi use maza bhi aa raha tha ki ek brahmchari Aghori uski gaand ke andar ungli daal raha hai. Neetu ki saase tez tez upar neeche chal rahi ki aur maze ke alag sansaar me pahuch hi gai thi ki Aghori ne apni ungli nikal li. Neetu ke maze par jaise tusharapaat ho gaya ho aur usne man mosos kar apna peticote neeche kar liya.
Is chhade trikon ke sath hi Pandit Bhadrasen dwara rachit pustak Bholi Bhali Vidhwa aur Pandit Jee me varnit sadhna ka pratham charan Chinhankan ka aadha bhag poorna ho gaya. Ab bari thi is charan ke dwitiya bhaag ki jisme Neetu ko Aghori ke badan par isi tarah chinhankan karna tha.
Aghori: Ab apki bari hai mere badan par unhi jagah usi tarah chinhankan karne ki jaise maine apke badan par kara. Ab apko bhi mere badan par saamne ki taraf se teen seedhe aur peeche ki taraf se teen ulte trikon banane hai.
Itna keh kar Aghori ne apne seene par rakha wo duppatanuma kapda hata diya aur chhati khol kar neetu ke samne baith gaya.
नीतू भी पुनः अघोरी के सामने आकर बैठ गई और उसके हट्टे काटते सीने को निहारने लगी क्या कसरती बदन था और बिना भभूत और माला ताबीज़ के कितना आकर्षक लग रहा था. नीतू ने अपनी तर्जनी ऊँगली उस लेप में डुबोई और अघोरी की गर्दन से लेकर उसके दोनों choochak(nipple) को स्पर्श करते हुए अघोरी की छाती पर प्रथम त्रिकोण बना दिया. अपनी उंगलियों से अघोरी के चूचको को छूने का एहसा नीतू के बेहद कामुक था और नीतू अपनी उंगलिया फिरा कर अघोरी के चूचक को कुछ पल महसूस करती रही जब तक की अघोरी खुद उठ कर खड़ा नहीं हो गया.
खड़े होकर नीतू कुछ समझ पति इससे पहले hi अघोरी ने खुद अपनी दे टांग उठा कर नीतू के कंधे पर रख दी. अघोरी की सिर्फ एक तंग का वजन इतना ज्यादा था की नीतू का कन्धा एक और झुक गया. पर नीतू ये भी समझ गई की अब उसे अघोरी की जांघो में पसीने वाली जगह पर दो त्रिकोण बनाने है. नीतू ने अघोरी की जांघो के उस हिस्से को देखा वह काफी पसीना और थोड़ा गन्दा था. नीतू काफी हाइजीनिक टाइप थी पर आज उसके सामने दूसरा ऑप्शन नहीं इसलिए उसने अपनी ऊँगली दुबारा लेप में डुबोई और अघोरी की जांघ में दूसरा त्रिकोण बनाने लगी. जब वो ये त्रिकोण बना रही थी तो बरबस hi उसका ध्यान उस लंगोट के फूले हुए हिस्से पर जा रहा था जो नीतू की उंगलियों की गति के साथ साथ झटके खा रहा था जिससे साफ़ था की अपने बदन पर चलती नीतू की उंगलियों से अघोरी भी कही न कही उत्तेजना का अनुभव कर रहा है. अघोरी की दाई जांघ के बाद उसकी बाई जांघ पैट भी नीतू ने तीसरा सीधा त्रिकोण बना दिया.
इसके बाद अघोरी नीतू की तरफ पीट्ज करके बैठ गया और अपने हाथो को फैला लिया. यानि अब नीतू को उसकी आर्मपिट्स पर दो उलटे त्रिकोण बनाने थे. नीतू ने एक नज़र अघोरी की बगलो पर डाली वह काफी बाल थे जाने कितने सालो से अघोरी ने अपनी बगलो के बाल नहीं बनाए होंगे.
अगर नार्मल कंडीशन होती तो वो किसी मर्द के इस हिस्से को छूना भी पसंद नहीं करती पर आज उसे ये करना hi था. इसलिए नीतू ने एक बार फिर अपनी उंगलियों को लेप में डुबोया और बालो से भरी अघोरी की बगल पर भी एक उल्टा त्रिकोण बना दिया. लेप का ज्यादातर हिस्सा तो अघोरी के बगल के बालो में hi उलझ कर रह गया. इसी तरह नीतू ने अघोरी की दूसरी बगल में भी पांचवा त्रिकोण बना दिया. अब केवल छडा और आखिरी त्रिकोण बचा था जो उसे अघोरी की गांड की दरार में उसकी गांड के छेड़ के अंदर तक ऊँगली दाल कर बनाना था. अघोरी भी उठ कर खड़ा हो गया और नीतू की तरफ अपने कूल्हे झुका लिए और अपने लंगोट की हल्का ढीला करके उसे अपने चूतड़ों के ऊपर से हटाकर अपने हाथो से अपनों कूल्हों को नीतू के लिए खोल दिया.
नीतू ने जीवन में पहली बार किसी मर्द की गांड को इतने करीब से देखा था. अघोरी के चूतड़ उसके बदन से ज्यादा काले थे शायद शमशान में चिटा की गरम राख में बैठ कर तंत्र साधना करने की वजह से. नीतू के लिए ये बेहद अजीब सा छान उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की कभी कोई मर्द उसके सामने यु अपनी गांड झुकाए खड़ा होगा की वो उसकी गांड में ऊँगली गले और वो भी ऐसा कला हब्सी हत्ता कट्टा मर्द. नीतू को अघोरी की गांड का छेड़ साफ़ दिखाई दे रहा था. गांड के साथ साथ लंगोट हटा होने की वजह से उसे अघोरी के लुंड के नीचे लटकते उसके बड़े बड़े टट्टे भी हलके हलके नज़र आ रहे थे. अघोरी की गांड और उसके तत्तो में भी काफी बाल थे और वह से काफी दुर्गन्ध भी आ रही थी उसे यु किसी मर्द की गांड में ऊँगली डालने में घिन भी आ रही थी. पर इस अजीबोगरीब साधना को लेकर अब उसकी एक्ससिटेमेंट भी बढ़ती जा रही की अभी प्रारम्भ में ये सब हो रहा है तो अब आगे क्या क्या होगा. यही सोचते विचरते उसने एक बार फिर अपनी उंगली को लेप में डुबोया और कापते हाथो के साथ अपनी उंगली अघोरी की गांध के छेड़ की तरफ बड़ा दी. और अघोरी की झांटो से भरी गांड में त्रिकोण बनाते हुए अपनी ऊँगली अघोरी की गांड की छेड़ के अंदर दाल दी.
अपनी गांड के छेड़ में घुसती नीतू की उंगली को महसूस कर अघोरी भी सिसकारी लेने को मजबूर हो गया और ये सिसकारी नीतू ने भी सुनी और इसे सुन कर नीतू को भी बड़ा मज़ा आया की लगता है अघोरी बाबा को भी मज़ा आ रहा है. इसी मज़े में नीतू ने ज़ोर लगाकर अपनी पूरी ऊँगली अघोरी की गांड के अंदर घुसेड़ दी. नीतू की ऊँगली के पूरा अंदर घुसने के साथ अघोरी की गांड की दरारो में कम्पन सा हुआ और कम्पन देख कर नीट भी एक्ससिटेड हो गई और अघोरी की गांड के अंदर अपनी ऊँगली गोल गोल घूमने लगी. खुछ देर पहले जहा ऊँगली डालने में भी उसे घिन आ रही थी अब वही अपनी उंगली को गोल गोल घुमका वो मज़े ले रही थी. करीब 1 मं तक वो यही मुस्कुराते हुए अघोरी की गांड में ऊँगली घूमती रही जब तक उसे अघोरी ने टोका नहीं.
अंघोरी: मेरे ख्याल से छड़ त्रिकोण बन गया है तो अब आप अपनी ऊँगली निकल ले.
नीतू को अघोरी के यु टोकने पर बड़ा ऐम्बर्रास्मेंट हुआ और उसने एक झटका में अपनी उंगली निकल ली. अघोरी अपना लंगोट ठीक करने लगा और नीतू ने इस दौरान अघोरी की गांड में गई उस उंगली को अपनी नाक के करीब लेकर सूंघ कर देखा. उसकी उंगली से हद से ज्यादा दुर्गन्ध आ रही थी पर वो दुर्गन्ध नीतू के दिमाग में अंदर तक उतर गई. न जाने क्यों उसे ये दुर्गन्ध भी अच्छी लग रही थी. और उस ऊँगली को सूंघते सूंघते बरबस hi वो उंगली उसके होंठो तक पहुंच गई. और उन होंठो ने भी उस उंगली के लिए रास्ता खोल दिया और वो उंगली नीतू के मुँह में समां गई. नीतू अघोरी की गांड में डाली गई अपनी उंगली को चूसने लगी. नीतू को यकीन नहीं हो रहा था की वो ऐसा कर रही है, इतनी सोफिस्टिकेटेड हाइजीन को फोल्लोवे करने वाले नीतू किसी की गांड के छेड़ से निकली उंगली को यु चाट रही है. उस गन्दी गांड की बदबू से भरी उंगली जिसमे शायद उसकी गांड के अंदर की गंदगी भी लगी हो उसको चाटने में नीतू को अजीब सा आनंद आ रहा था जैसे उसमे से बदबू नहीं गुलाब की खुशबू आ रही हो उसकी गांड के अंदर की गंदगी नहीं बल्कि मीठा मीठा शेहेह लगा हो.
नीतू अपनी उंगली को चाटने में इस कदर मशगूल थी की उसे पता hi नहीं चला की अघोरी कबका अपना लंगोट सही करके उसके तरफ पलट कर उसे अपनी उंगली छत्ते देख रहा है. नीतू को अपनी उंगली चाटने में मशगूल देख अघोरी ने हल्का सा खास कर उसे अपनी देखने का एहसास करा दिया. अघोरी के खस्ने की आवाज़ सुन नीतू भी अपने सेंसेस में वापस आई और टपक से उसने वो उंगली अपने मुँह से निकल ली. नीतू को अपनी हरकत पर बड़ी शर्म आ रही थी उससे अघोरी से नज़रे भी नहीं मिले जा रही थी की पता नहीं अघोरी उसके बारे में क्या सोच रहा होगा. पर अघोरी एकदुम नार्मल बेहवे करते हुए दुबारा नीतू के सामने आकर बैठ गया और अपनी बात केहनी आरम्भ कर दी.
अघोरी: इसी के साथ चिन्हांकन का ये प्रथम चरण पूरा हुआ. अब बरी है इस साधना के दुसरे चरण की.
साधना का प्रथम चरण पूरा हो गया और प्रथम चरण पूरा होते होते hi नीतू एक सोफिस्टिकेटेड हाइजीनिक महिला से एक गांड से निकली ऊँगली को चूसने चाटने वाली औरत में तब्दील हो गई थी. पता नहीं ये साधना आज नीतू से और क्या क्या करवाने वाली थी और क्या असर पड़ने वाला था उसका नीतू की शख्सियत पर. क्या इस रात के बाद नीतू वही नीतू रह पाएगी या ये साधना नीतू की शख्सियत को पूरी तरह बदल कर रख देने वाली थी.
पंडित जी ने भोली भली विधवा शीला का तो अच्छे से उद्धार कर दिया था अब देखना ये था की हमारे अघोरी बाबा इस चालू चपत नीतू के साथ क्या क्या करने वाले थे.