A wedding ceremony in village - Page 18 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

अगर किसी ने इन उपदटेस को ध्यान से पड़ा तो इसमें मैंने एक नया नाम मेंशन करा है जिसका अब तक इस स्टोरी में कही कोई जिक्र नहीं हुआ. क्या किसी रीडर ने नोटिस करा वो नाम.
 
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क्यूँ भाई क्यूँ

क्यूँ सोचा तूने मरने का, मुसीबतें तो सबके पास होती हैं

अपने आप को पहचान कर ही तो नई दास्तान लिखनी होती है

अरे ज़िन्दगी देखने का हुनर थोड़ा उन लोगों से सीख लेते मेरे भाई

जिनके पास देखने को आँख ही नहीं होती है

बहुत गलत करा मेरे भाई बहुत गलत करा
 
शबाना की लाइफ में अभी अभी घाटे ट्विस्ट और तुरंस से पूरी तरह अनजान नेहा आज रा विक्रम के साथ एन्जॉय न कर पाने की खिसियाहट को भूलते हुए विक्रम को पीछे छोड़ कर आगे मूव ों करते हुए आज रात में अपनी ज़िन्दगी की अब तक की सबसे ज़बरदस्त फंतासी को एन्जॉय करने के लिए खुद को तैयार कर रही थी. पर क्या चल रहा था उसके दिमाग में क्या करने वाली थी वो.

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नेहा ने एक बार फिर वो रेड डबल स्प्लिट ड्रेस पेहे ली. नेहा यहाँ शादी में जितनी भी ड्रेसेस ले वो सब एक तरफ और ये ड्रेस एक तरफ. इस ड्रेस में नेहा किसी बोम्ब्शेल से कम नहीं लगती थी. और इस ड्रेस के साथ उसका मेकअप तो सोने पे सुहागा था. वो बिलकुल वैसा hi मेकअप कर रही थी जैसा उसने शादी वाली रात में करा था, होंठो पर चटक सुर्ख लाल लिपस्टिक आँखों में काला बिल्लौरी काजल बालो में कर्ल बदन पर मादक सुगंध वाला परफ्यूम. उफ़ क्या कातिल हुस्न था उसका एक आवर्त के बदन को किस तरह हॉटनेस की प्रतिमान में तब्दील करा जाता है ये कोई नेहा से सीखे. नेहा उस ड्रेस और उस चटक मेकअप में बेहद हॉट और सेडक्टिव लग रही थी शायद शादी वाली रात से भी ज्यादा हॉट क्युकी उस रात उसके चेहरे पर वो सेडक्टिव लुक नहीं था जो आज था क्युकी आज उसके तैयार होने का मकसद कुछ खास था.

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उस खास मकसद से तैयार होकर नेहा एक बार फिर उस रूम से बहार आ गई. बहार आकर उसने एक नज़र गुस्से में विक्रम के कमरे की तरफ देखा और फिर गर्दन झटकते हुए हवेली के गेट के बहार आ गई. बहार आकर उसने पहले भीमा की झोपडी की तरफ देखा बिचाने आज भीमा बहार नहीं अंदर सो रहा था. नेहा के जाने के बाद शायद मायूसी में अंदर चला गया. नेहा ने चैन की सांस ली की उसे उस जमादार को फेस नहीं करना पड़ेगा और इधर उधर देखते हुए उस रात के घने सन्नाटे में अपने कदम सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बड़ा दिए. नेहा पैरो में हीलदार सांडले होने के बावजूद तेज़ तेज़ कदमो से सर्वेंट क्वार्टर की तरफ चली जा रही थी इस रात के सन्नाटे में अब उसे देखने वाला कोई नहीं था. नेहा उस सर्वेंट के दरवाज़े तक पहुंच गई. हवेली के लगभग सभी मेल सर्वेन्ट्स यही सोते थे, क्युकी ये काफी बड़ा हाल नुमा कमरा था, शादी वाली रात में नेहा कल्लू के साथ यहाँ आई थी. नेहा ने दरवाज़े को हल्का सा पुश करा और दरवाज़ा छर्रा की आवाज़ करता हुआ खुल गया अंदर काफी अँधेरा था.

दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनकर कुछ लोगो ने अपनी चद्दर से मुँह बहार निकल कर देखा. बहार से आती हलकी हलकी रौशनी में दरवाज़े पर कड़ी किसी औरत की आकृति तो उन्हें समझ आ रही थी पर कमरे ने अँधेरा होने की वजह से उन्हें ये समझ नहीं आ रहा था वो औरत कौन है.

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कल्लू तो नेहा से मिलने के बाद अभी अभी लेता था तो वो भी जाग रहा था तो उसने भी दरवाज़े की तरफ देखा और उस औरत की काया और उसका पहनावा देख कर उसके मन में बस एक hi नाम आया नेहा. और उसने अपना हाथ ऊपर करके अपने पास hi लगे स्विचबोर्ड में कमरे की बत्ती का स्विच ों कर दिया. बत्ती ों होते hi जितने लोग जगे हुए थे और दरवाज़े की तरफ देख रहे थे दरवाज़े पर नेहा को देख कर चौंक पड़े. बत्ती ों होने पर ांकबो पर चमक पड़ने पर और भी लोग उठ बैठे और कुछ अब भी सो रहे थे. कल्लू इस वक़्त नेहा को यहाँ वो भी उसी ड्रेस में देखकर हैरान था क्युकी कुछ देर पहले तो नेहा ने उससे सीधे मुँह बात भी नहीं की थी और अब यहाँ इस अवतार में आ गई.

कल्लू अपनर बिस्तर से उठकर: मेमसाब आप इस वक़्त यहाँ.

भोला: मैडम जी आप यहाँ क्या कर रही है.

नेहा भी मुस्कुराते हुए अपनी अदाओ में चलती हुई अंदर आ गई और अंदर आकर उस सर्वेंट क्वार्टर का दरवाज़ा अंदर से बंद करके सिटकनी लगा दी.

नेहा भोला की तरफ देखते हुए: हम्म मुझे याद आया की मैंने आप लोगो से वडा करा था की जाने से पहले कुछ वक़्त आप लोगो के साथ स्पेंड करुँगी आपके साथ पार्टी करुँगी तो आज मुझे वो वादा याद आया और मई आ गई

ये बोलते हुए नेहे ने कल्लू को भी मुस्कुरा कर देखा क्युकी कल्लू ने hi उसे वो वडा याद दिलाया था. कमरे में एक लड़की की आवाज़ सुन कर जो अब तक नहीं जगे थे वो भी हड़बड़ा कर उठ कर बैठ गए. और अपने सामने हवेली की बोम्ब्शेल नेहा को देख हैरान रह गए. जिस नेहा को इमेजिन कर करके वो हर रात मुठ मारते थे वो आज साक्षात् इस उत्तेजक लिबास में इतनी रात में उनके सामने थी. नेहा ने भी मुस्कुरा कर उस कमरे में मौजूद हर शिक्षा को ध्यान से देखा. उस कमरे में उस वक़्त कुल 10 लोग थे जिनमे से 5 के साथ उसका कही न कही कामुक इंटरेक्शन हो चूका था पर बाकि 5 अब भी उसके कामुक अवतार से अनजान थे.

वो 5 लोग जिनके साथ का कामुक इंटरेक्शन hi चूका था उनमे पहला था भोला इस हवेली का लेबर जो हवेली में सामान सत्ता धोने का काम करता था और जिसने शादी वाली सबसे पहले शराब के नशे में नेहा का चुम्बन लिया था. कद काठी में थोड़ा छोटा पर बदन से बेहद हत्ता कट्टा और बेहद बदसूरत रंग में इतना कला की कला कौआ भी उसके सामने गोरा लगे. शरीर पर इतने घने भल की बदन का असली रंग उन बालो के नीचे दिखाई hi न दे. कपडे इटंर गंदे और बदबूदार की सूंघ लो तो महीनो होश न आए न जाने कितने दिनों से नहाया नहीं.

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दूसरा था कल्लू जो हवेली में वेटर था और चाय नाश्ता सर्वे करता था और शादी वाली रात नेहा ने सबसे पहले उसीसे इंटरेक्शन किया था और जाते जाते उसे किश भी दी थी. और कल्लू hi इस हवेली में वो पहला शिक्षा था जिसके होंठ नेहा की छूट तक पहुंचे थे. कद में ठीक थक और रंग में सावला और जोकर जैसी शकल वाला न ज्यादा हत्ता कट्टा न एकदम मरियल.

तीसरा था भूरा हवेली के नौकरो में सबसे लुम्बा, और नौकरो में यही एक था जिसने नेहा का अच्छे से रगड़ के मज़ा लिया था. जी है ये वही भूरा था जिसने उस तंग सर्वेंट बाथरूम में बिना तेल लगाए और बिना आगे झुकाए खड़े खड़े hi अपने तगड़े लुंड से नेहा की गांड मार दी थी.

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वो चौथा शिक्षा जिसके साथ नेहा का इंटरेक्शन हुआ था वो था इस हवेली के नौकरो में सबसे कम आगे का नौकर छोटू उम्र में भले hi छोटा था पर नेहा के साथ अगर किसी सबसे ज्यादा और सबसे इरोटिक समय गुज़ारा था वो छोटू hi था. और छोटू hi वो एकमात्र नौकर था जिसे नेहा जैसी हुस्न की मल्लिका के रसभरे होंठो के गर्माहट का एहसास अपने लुंड पर महसूस करने का सुख मिला था.

और वो पांचवा शिक्षा जिसे नेहा के साथ िटरेक्ट करने का मौका मिला था वो थे रामु काका. सभी नौकरो में सबसे एज्ड 57-58 साल के पर ठरक के मामले में इतने ज्यादा ठरकी की अपनर hi गाँव के लड़के छोटू की गांड तक को नहीं बख्शा. उनका भी नेहा के साथ एक इंटरेक्शन हुआ था जब किचन में टेबल के नीचे छुपकर नेहा ने उन्हें एक ज़बरदस्त हैंडजॉब दिया था. हलाकि तब उन्होंने नेहा से बहुत रिक्वेस्ट की थी की वो एक बार अपने होंठो से उनके लुंड को चूम ले पर उनके लुंड पर उगे घने घने गंदे बालो को देख कर नेहा ने साफ़ मन कर दिया. और तब रामु काका ने मन hi मन सोच लिया था की कभी मौका मिला तो इससे अपना लुंड ज़रूर चुसवाऊँगा. तो क्या वो मौका आज आ गया था.

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ये तो थे वो 5 जिन्हे के साथ थोड़ा बहुत सेक्सुअल इंटरेक्शन करने का मौका मिला पर इनके अलावा 5 नौकर ऐसे भी थे जिन्हे अब तक नेहा से बात करना भी नसीब नहीं हुआ. इनमे पहला था कन्हैया उम्र 30-32 साल जो इस हवेली में बिजली जनरेटर का काम देखता था. कद काठी में एकदम नार्मल कल्लू जैसा hi न ज्यादा हत्ता कट्टा न ज्यादा दुबला. चेहरे पर हलकी हलकी मूछे और रंग भी थोड़ा ठीक थक.

दूसरा था घनश्याम ये इस हवेली का माली और केयरटेकर जो काफी समय से यहाँ की देखभाल कर रहा था और हवेली में फूलो की सजावट भी इसके जिम्मे थी. उम्र में लगभग 40-42 साल का था बाल आधे सफ़ेद आधे काले. सभी नौकरो में थोड़ा सभ्य और शालीन. इसकी बीवी भी यही काम में लगी थी पर जानना नौकरो के साथ हवेली के अंदर सोती थी.

तीसरा था हरबक्स जो मलखान सिंह के घर में साफ़ सफाई करता था और शादी में अस ा नौआ आया था और अब हवेली में झाड़ू खटका लगता था. उम्र से 50-51 साल का शरीर से एकदम मरियल और कम बोलने वाला. पुरे चेहरे पर जगह चेचक के दाग, गाल गड्ढो में धसे हुए शरीर से बीमार नज़र आता था. पर काम और चुस्ती फुर्ती में कभी पीछे नहीं रहता शायद इसीलिए बरसो से मलखान सिंह के घर में काम पर लगा था.

चौथे थे गोपी काका. काका इसलिए क्युकी ये भी रामु काका से 3-4 साल hi छोटे थे और ये भी खाने के काम में लगे थे. बस रामु काका जहा खाने का काम देखते थे तो गोपी भैया यहाँ हलवाईयाँ थे और मिठाई मालपुए लड्डू रसगुल्ला ये सब बनाते थे. उनका काम उनके शरीर को देखकर hi साफ़ पता चल जाता था. सर से आधे गंजे पेट या कहे तोंद इतनी ज्यादा बहार निकली की कहना मुश्किल था कितनी मिठाई बनाते होंगे और कितनी खुद खा जाते होंगे. पेट इतना ज्यादा बहार निकला हुआ था की एक्स्ट्रा लार्ज बनियान भी पूरा पेट ढकने में नाकाम थी. अगर ये बाँदा ये नेहा के ऊपर लेट जाए तो नेहा इसका वजन कैसे बर्दाश्त करेगी ये अपने आप में एक सवाल है.

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ये 9 नौकर तो पहले दिन से हवेली में थे हुए जब नेहा पिछली बार यहाँ आई थी तब भी ये सब थे पर इनके अलावा एक नौकर और था जिसे बाद में मलखान सिंह के छोटे भाई अभिलेख सिंह ने स्पेशलय बुलाया था. जोगेन्दर इस हवेली का दुस्वा नौकर जो वास्तव में नौकर नहीं बल्कि एक पहलवान था. ये वही पहलवान था जिसका दंगल वाले दिन लखन सिंह से मुकाबला हुआ था. जिसे अभिलेख सिंह ने अभी दो दिन पहले hi अपनी और अपने मेहमानो की मालिश के लिए बुलाया था. अब चूँकि वो एक पहलवान था जिसने लखन सिंह जैसे जीवट शिक्षा की भी हालत ख़राब करदी थी तो उसकी कद काठी का विश्लेषण करना ज़रूरी नहीं था. फिर भी बता दू चेहरे पर घनी रौबदार मूछे चौड़े कंधे भुजाए इतनी मोती की नेहा की जाँघे भी उनके सामने पतली लगे. कसरत और दंड बैठक करके बनाया गया मजबूत कसरती शरीर जिसका एक एक कट साफ़ नज़र आ रहा था. और जब वो बाकियो के साथ खड़ा था तो उसके बदन की सबसे विशेष बात जो उसे सबसे अलग बनती थी वो था उसका लंगोट. उसके बदन पर कपडे के नाम पर कुछ था तो बस एक लंगोट बाकि उसका बदन पूरी तरह बिना कपडे के था.

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नेहा ने भी एक नज़र ओने बी ओने उन सब नौकरो को देखा और आखिर में उसकी नज़रे भी जोगिन्दर पर जाकर hi ठहर गई खासकर उसके लंगोट और उसके बीच के फूले हुए हिस्से पर. वही हमेषा अखाड़े में पहलवानो के बीच रहने वाला जोगिन्दर भी अपने सामने इतनक मस्त चिकनी लौंडिया देख अपने सीने पर हाथ फेर रहा था. उस दिन दंगल वाले दिन विनीता पर उसकी नियत ख़राब हुई थी पर लखन सिंह ज़बरदस्त दांव ने विनीता को चूमने और उसे अपना मूट पिलाने का मौका उसके हाथो से निकल गया पर आज यु नेहा को इतनक हॉट ड्रेस में देखकर उसके अंदर के अरमान दुबारा हरे हो गए. और वो उस दिन की साडी कसार नेहा पर उतरने के लिए मचल उठा पर क्या आज उसे वो मौका मिलने वाला था या आज भी उसका कलपद hi होने वाला था. पर अगर मौका मिलता भी तो कैसे क्युकी वह वो अकेला तो था नहीं कुल 10 नौकर थे और सबके लुंड नेहा को देख देख कर झटके खा रहे थे. सबके दिल के अरमान मचल रहे थे ऐसे में वह उस बंद कमरे में अलग अलग साइज रूप और प्रकार के 10 मचलते लुंड थे पर छूट के नाम पर सिर्फ एक नाज़ुक सी नेहा की छूट.

और नेहा इतनी रात में यहाँ आई hi क्यों थी क्या चल रहा था उसके दिमाग में. क्या फिर वो किसी को अपने साथ मज़ा करने का मौका देने वाली थी पर किसको उसे यहाँ बुलाने वाले कल्लू को या उसकी पहली किश लेने वाले बदसूरत भोला को या उसकी गांड मरने वाले भूरा को या सबसे क्यूट और प्यारे छोटू को या सबसे उम्रदराज़ रामु काका को उनकी उम्र का फायदा मिलने वाला था. या फिर आज नेहा किसी नए कन्टेंडर को मौका देने वाली थी गोर चित्ते कन्हैया को या सूखे पाखे हरबक्स को या बेहद सीधे घनश्याम को या गोपी भैया की मोती तोंद उसे एक अलग फंतासी का एहसास देने वाली थी या उसकी भी नियत आज जोगिन्दर की मजबूत कद काठी पर दोल जाने वाली थी. किसकी किस्मत आज खुलने वाली थी या कुछ ज़बरदस्त होने वाला था. पर जिस अंदाज़ में नेहा सज सवार कर इतने हॉट सेडक्टिव अंदाज़ में यहाँ आई थी इतना तै था की कुछ बहुत ज़बरदस्त होने वाला था.

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मई बे थे बिग्गेस्त फंतासी ऑफ़

नेहा शर्मा

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इधर नेहा उन 10 मर्दो के बीच अकेली थी और उधर नीतू उस कब्रिस्तान में अकेली थी उस घनी होती रात में बेसब्री से अघोरी का इंतज़ार कर रही थी. हवा सन्न सन्न चल रही थी सियार के चिल्लाने की आवाज़े पल प्रतिपल तेज़ होती जा रही थी. अघोरी बाबा ने कभी नीतू को इतनी देर रात तक अकेला नहीं छोड़ा था पर आज वो इतनी देर क्यों कर रहे है क्या उन्होंने अपना इरादा बदल दिया है, क्या वो अपने ब्रह्मचर्य समर्पण के लिए तैयार नहीं, क्या वो बिना बताए hi मुझे यहाँ अकेला छोड़ कर चले गए या जानबूझ कर वापस नहीं आ रहे ताकि उन्हें इस साधना में शामिल न होना पड़े यही सब विचार नीतू के दिमाग में इस वक़्त चल रहे थे. उसकी नज़रे एकटक बस दरवाज़े पर hi लगी थी पर हर बीतते पल के साथ धीमे धीमे उसकी उम्मीद ख़तम होती जा रही थी.

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और आखिर उसने हताश होकर अपना सर अपनी गोड़ में रखकर हताशा में अपनी आँखे बंद कर्ली. पर जब वो पूरी तरह हताश हो गई थी तभी उसे झोपडी के बहार किसी के पदचाप सुनाई पड़े और ज्योही उसने नज़रे ऊपर उठाई सामने अघोरी खड़ा था और उसके हाथ में एक झोला था जिसमे कुछ सामान था.

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अघोरी को देख नीतू की उम्मीद दुबारा जाग उठी और वो पागलो की तरह दौड़ कर अघोरी के सीने से लिपट गई. उसकी आँखे आसुओ से भर आई थी पर इसके बाद जो हुआ वो साडी उप्पेक्षाओ के विपरीत था. अघोरी के हाथ से वो झोला ज़मीन पर गिर गया और अघोरी ने उसे अपने दूर करने की बजाए अपने हाथो को उठा कर उसे अपनी बलिष्ठ भुजाओ में समेत लिया. अघोरी अपनी हथेली को नीतू की पीठ पर ऊपर से नीच तक फिरा कर उसके बदन के कटाव को उसकी चिकनाहट को महसूस कर रहा था. नीतू भी अघोरी का ये व्यवहार देख कर हैरान रह गई. है वो जानती थी की उसने भावावेश में आकर अघोरी को अपनी बहो में भर लिया था पर अघोरी भी उअके जवाब में उसे अपनी बहो में भर लेगा इसकी उसे उम्मीद नहीं थी. पर अघोरी के बलिष्ठ शरीर कासी मांसपेशियों उसके बदन से आती भभूत जंगली वनस्पतियो और पसीने की मिली जुली सुगंध उसे उत्तेजना से सराबोर कर रही थी. पिछले कुछ दिनों से उसने इस पल कितनी बेसब्री से इंतज़ार करा था ये वही जानती थी. वो अघोरी की बहो में पिघली सी जा रही थी ऐसा एहसास तो उसे कभी अपने प्रेमी राज की बहो में भी महसूस नहीं हुआ.

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शायद ये अघोरी की ना hi थी जिसे हां करने की चाहत और ज़िद्द ने उसके मन अघोरी के लिए ऐसे एहसास पैदा कर दिए थे. जो चीज़ हमे आसानी से मिल जाती है उसके लिए हमे वो ख़ुशी नहीं होती पर जिस चीज़ को हाइल करने के लिए हमे यदि छोटी का ज़ोर लगाना पड़े जब वो चीज़ हासिल होती है तो उसे हासिल करने की ख़ुशी और उस पल का एहसास कुछ अलग hi होता है. कुछ उसी एहसास से इस वक़्त नीतू भी गुज़र रही थी एक ऐसे मर्द ने जिस पर गाँव की सुन्दर से सुन्दर औरते मोहित थी जिसके साथ सम्बन्ध बनाने को आतुर थी पर उसने किसी को भाव नहीं दिया आज वो मर्द उसे अपनी बहो में जकड़े खड़ा है ये विजय उसे एक अलग hi सुकून दे रही थी शायद इस साधना के पूरा होने और राज की जान बचने से भी ज्यादा. और जब नीतू के हाथ अघोरी की पीठ उसके कंधो उसकी कमर को छूटे तब वो एक अलग hi उत्तेजना से भर उठती थी ये सोचकर की वो एक ऐसे मर्द के साथ सम्बन्ध बनाने वाली है जिसके साथ सम्बन्ध बनाने का औरते फैंटसीज करती है, जो हर लिहाज़ से इस इलाके का सर्वश्रेष्ठ मर्द है, उसने देखा था दंगल के दौरान जब लखन जी और उस पहलवान का दंगल हो रहा था उस वक़्त की भी गाँव की ज्यादातर औरतो की नज़रे अघोरी के बलिष्ठ शरीर पर hi थी और आज वो अघोरी उसे अपनी बहो में भरकर खड़ा है.

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सिर्फ गाँव की औरते hi क्यों शहर की औरते भी अफ्रीकन नीग्रो हब्शी मर्दो के बड़े बड़े लुँडो को लेकर फैंटसीज करती रहती है. जिस भी औरत या मर्द को पोर्न वीडियो देखने का शौक होगा उसने जीवन में कई बार इन हब्सी नीग्रो अफ्रीकन मर्दो के पोर्न वीडियो ज़रूर देखे होंगे. जहा औरतो ने ये इच्छा की होगी की जीवन में एक बार उन्हें भी ऐसे तगड़े हब्शी मर्द के लम्बे लुंड से छोड़ने का मौका मिले वही मर्द अपने लुंड और उन हब्शियो के लुंड की तुलना करके जलते होंगे की काश उनके लुंड भी इतने लम्बे होते. पर हब्शी नीग्रो मर्द तो कई होते है अघोरी जैसा वर्जिन हब्शी नीग्रो मर्द ढूँढा तो घास के ढेर में सुई ढूंढ़ने जैसा था जिसने आज तक किसी औरत को गलत नज़र से नहीं देखा किसी को अपनी बहो तक में नहीं भरा यहाँ तक की कभी अपने लुंड स्खलन तक नहीं करा. यानि उसका प्रथम आलिंगन प्रथम प्यार प्रथम सम्भोग और उसके लिंड से निकलने वाला पहला वीर्य नीतू को मिलने वाला था. और ये तो एक आम इंसान भी बता सकता है की जब पहली बार किसी लिंग से स्खलन होता है तो उससे निकला पहली वीर्य कितना ज्यादा गाड़ा और कितना सारा होता है और जब वो लिंग अघोरी जैसे मर्द का हो तब तो उसकी मात्रा का अनुमान लगाना भी मुश्किल था.

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तकरीबन 20 मं से वो यही एक दुसरे को अपनी बहो में जकड़े खड़े थे जैसे बरसो के बिछड़े प्रेमी काफी समय बाद एक दुसरे से मिले हो.

नीतू अघोरी के कंधे पर सर रखे आँखे बंद करे: कहा रह गए थे आप मई कबसे आपका इंतज़ार कर रही थी.

अघोरी: माफ़ कर दीजिये पटल स्वामी हदीस की साधना में लीं था इसीलिए इतना समय लग गया. पर अब तो वापस आ गया हु.

नीतू: आज अगर आप वापस न आते तो मई यही अपनी जान दे देती.

अघोरी: अपने ऐसा सोचा भी कैसे की मई वापस नहीं आऊंगा क्या आप मुझस इतना hi समझ पाई है.

नीतू: नहीं ऐसा नहीं है बस मन बड़ा व्याकुल हो रहा था इसलिए मन में उलटे ख्याल आ रहे थे मुझे माफ़ कर दीजिये ऐसा सोचने के लिए.

अघोरी: कोई बात नहीं मई समझता हु पर मई जो वचन देता हु उसे पूरा करता हु और मैंने आपकी ये साधना पूरी करवाने का वचन दिया था तो मुझे आना hi था. और अगर मेरी वजह से आपकी जान चली जाती तो मई भी अपने प्राण त्याग..... (पर बात पूरी करने से पहले नीतू ने अपने हाथो से उसका मुँह बंद कर दिया)

नीतू: अयस्क गलत बात मुँह से मत निकालिये. और क्या आप सिर्फ साधना पूरी करवाने के लिए वापस आए है क्या मेरे लिए आपके मन में कभी कोई प्रेम का भाव नहीं आया.

अघोरी: ये बताना मेरे लिए बेहद मुश्किल है क्युकी प्रेम का भाव क्या होता है ये मुझे पता hi नहीं क्युकी मैंने कभी किसीसे प्रेम करा hi नहीं बस इतना कह सकता हु की जैसा भाव मेरे मन में आपके लिए उत्पन्न हुआ वैसा आज से पहले किसी के लिए नहीं हुआ.

अघोरी के मुँह से ऐसी प्रेम भरी बाते सुनकर नीतू ने उन्हें और कास कर जकड लिया.

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नीतू: आपकी बहो में कितना अच्छा लग रहा है जी कर रहा है यही आपको अपनी बहो में जकड़े राहु.

अघोरी: पर हमारी साधना का समय हो रहा है. हम जिस उद्देश्य से यहाँ आए है हमे उस उद्देश्य से नहीं भटकना चाहिए.

नीतू: हम्म शायद आप सही कह रहे है.

नीतू और अघोरी एक दुसरे से अलग हो गए. अघोरी वो झोला उठाकर झोपडी के बीच बने उस तंत्र घेरे के समीप आया जहा ये साधना हो रही थी और उसने एक बार फिर उस तंत्र घेरे में हवन कुंड रखकर उसमे लकड़ी घी भभूत डालकर अग्नि प्रज्वलित की और नीतू को अपने सामने स्थान ग्रहण करने को कहा. नीतू अघोरी को प्रणाम करके उसके सामने वाले आसान पर आकर बैठ गई.

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अघोरी: आज की रात हमारी तंत्र साधना की सबसे महत्वपूर्ण रात है. क्युकी यही वो रात है जब आपको अपने कौमार्य का मेरे ब्रह्मचर्य के साथ समागम करना है.

नीतू समझ गई की सीधे शब्दों में कहा जाए तो आज उसे अघोरी के 15-16 इंची हब्शी लुंड से अपनी छूट मारवणी है या कहे फडवणी है. पर वो तो सोच रही थी ये क्रिया कल होगी क्युकी साधा में अभी कल का दिन भी बाकि था.

नीतू: पर साधना में तो कल का भी दिन बाकि है अगर आज hi ये रसम होगी तो कल क्या होगा.

अघोरी: कल इस साधना के समापन की अंतिम क्रिया होगी जिसमे हम पटल के स्वामी हदीस का आवाहन करेंगे और वो स्वयं आकर आपके कौमार्य और मेरे ब्रह्मचर्य का प्रशाद ग्रेहेन करेंगे और आपको अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे और आपके प्रेमी राज का मृत्यु योग अपने साथ पटल ले जाएंगे. पर उसके बारे में मई आपको कल बताऊंगा पर उससे पहले हमे अपने कौमार्य और ब्रह्मचर्य को समागम करके एक करना होगा वो भी काम असंयम तंत्र विधि से. और ये बहुत जटिल और पीड़ादायक है इसलिए आपको खुद को मजबूत करना होगा.

पीड़ादायक शब्द सुनकर नीतू की थोड़ी हवइया छूटने लगी की ऐसा क्या है इस विधि में जो ये इतनी पीड़ादायक है.

नीतू: जी पीड़ादायक से आपका क्या मतलब है.

अघोरी: देखिये इतना तो आप जानती hi है की प्रथम समागम में जब स्त्री की योनि का कौमार्य भांग होता तो उस प्रक्रिया में उसे काफी दर्द होता है.

अब इतना तो नीतू को पता hi था की पहली बार छुड़वाने में जब छूट की झिल्ली फटती है तो काफी दर्द होता है खून भी निकलता है अब इसमें कोई राकेट साइंस तो था नहीं इस दर्द से तो हर औरत को गुज़ारना पड़ता है. फिर यहाँ ऐसा खास क्या था.

नीतू: जी ये तो मई जानती हु की पहली बार में थोड़ा दर्द तो होता है और वो बर्दाश्त करना पड़ता खून भी निकलता है.

अघोरी: जी पर जो शब्द थोड़ा अपने इस्तेमाल करा है वो आपके एशियाई मूल के मर्दो पर तो लागु होता पर चुकी अपने इस क्रिया के लिए मेरा चुनाव करा है और मई जिस नीग्रो प्रजाति से हु उन्हें उनके विशाल लिंग के अकार की वजह से hi हब्शी बुलाया जाता है और जब आपके जैसी एक नाज़ुक कोमल एशियाई मूल की महिला अपना पहला समागम मेरे जैसे हब्शी मूल के पुरुष के साथ करती तो उसमे होने वाले दर्द को थोड़ा तो बिलकुल नहीं कहा जा सकता.

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अघोरी: इसके अलावा मैंने आज तक अपनी इन्द्रियों को काबू में रखा था अपने लिंग को कभी इतना उत्तेजित नहीं होने दिया की मेरा ध्यान मेरी साधना से भटके. पर समागम के दौरान मुझे अपनी इन्द्रियों को अपने नियंत्रण से छोड़ना होगा. ऐसे में उत्तेजित अवस्था में मेरे लिंग का अकार क्या होगा ये खुद मई भी नहीं जनता क्युकी मैंने उत्तेजित होने hi नहीं दिया पर इतना ज़रूर जनता हु की वो ऍकर एशियाई मूल के मर्दो के लिंग के दुगने से भी बड़ा होगा. इसीलिए मई खुद को इस साधना में शामिल नहीं करना चाहता था ताकि आपको वो तकलीफ न झेलनी पड़े. पर अब चुकी हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा आपको खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से इसके तैयार करना होगा.

नीतू अघोरी के एक एक शब्द को बड़े ध्यान से सुन रही थी और समझ भी रही थी की वास्तव में उसकी ये पहली चुदाई किसी मैने में आसान नहीं होने वाली थी.

अघोरी: इसके अलावा एक आखिरी बात.

नीतू: अब इसके अलावा और भी कुछ बाकि है.

अघोरी: जी बेहतर होगा आपको वो सब पहले hi बता दू जो आपको बर्दाश्त करना है ताकि आप उसके लिए मानसिक रूप से तैयार है बाकि संगम की प्रक्रिया मई आपको बाद में समझा दूंगा.

नीतू: जी बताइये.

अघोरी: जैसा की आप जानती है की ये जो हम कर रहे है वो एक तंत्र साधना है और ये पूजा से भिन्न होती है. पूजा और तंत्र साधना दोनों में hi हम देवो का आवाहन करते है पर पूजा एक सौम्य प्रक्रिया है और तंत्र साधना एक रौद्र क्रिया. इसलिए इनमे की जाने वाली क्रियाओ में भी स्वरुप का फ़र्क़ है. यदि इन दोनों में स्त्री पुरुष का समागम होता है तो पूजा में ये समागम सौम्य होगा और प्रेम और कामुकता से परिपूर्ण होगा. पर तंत्र साधना में होने वाला समागम उसका एक वीभत्स रूप है. जिसमे स्त्री को पूरी तरह खुद को पुरुष को समर्पित कर देना होता है. उसे केवल अपना बदन hi नहीं मान सम्मान और स्वाभिमान सब कुछ अपने पुरुष को समर्पित करना पड़ता है. इसलिए आपको भी खुद को पूरी तरह मुझे समर्पित करना होगा. आज रात आपके बदन के ज़र्रे ज़र्रे पर सिर्फ और सिर्फ मेरा अधिकार होगा और मई अपनी पूरी उत्तेजना के साथ आपके बदन का उपभोग करूँगा. और चूँकि ये मेरे भी प्रथम अनुभव है इसलिए मई ये नहीं कह सकता की मेरी उत्तेजना किस पड़ाव तक जाएगी. पर जिस भी पड़ाव तक जाए आपको आज रात उसे सहना hi होगा और न सिर्फ सहना होगा बल्कि उसमे सहयोग भी करना होगा. इस दौरान मई न सिर्फ आपके जिस्म से आपका नाज़ुक बदन का मर्दन करूँगा बल्कि आपको गंदे गंदे शब्दों गलियों से बुलाऊंगा पर ये सब इस साधना का हिस्सा है. क्युकी यदि आपको अपने प्रॉमी की आत्मा को पटल में जाने से रोकना है तो आपको खुद आज रात उस यातना से गुजरना होगा, तन और मन से उस पीड़ा को महसूस करना होगा और उन परिस्थितियों में भी अपनी कामुकता को बनाए रखना है. सीढ़ी भाषा में कहु तो आज की रात आप मेरी रखैल है और मई आपका मालिक, मेरी हर इच्छा पूरी करना और मुझे हर तरह से खुश रखना hi आपका एकमात्र कर्त्तव्य है.

इसके बाद अघोरी ने वो झोला उठाया जो वो अपने साथ लाया था और उसमे से एक कागज़ में लिप्त पैकेट नीतू की तरफ बड़ा दिया.

अघोरी: इसमें आपकी आज की साधना में पहने जाने वाले वस्त्र है. आप उस परदे के पीछर चली जाइये और ये वस्त्र पेहेन कर आ जाइये. तब तक मई भी इस साधना के लिए तैयार हो जाता हु उसके बाद हम ये साधना आरम्भ करेंगे.

नीतू: जी

नीतू वो पैकेट लेकर उस परदे के पीछे चली गई और अघोरी भी झोले में से वैसा hi एक पैकेट निकल कर झोपडी के बहार चला गया शायद उसमे उसके वस्त्र जो उसे इस साधना में पेहेन्ने थे. नीतू के दिमाग अघोरी का एक एक शब्द हथोड़े की तरह बज रहा था. अभी जो कुछ अघोरी ने कहा उसे सुनकर एक तरफ तो नीतू कही न कही उत्तेजना से भर गई थी की उसे आज अपनी ज़िन्दगी में चुदाई का एक लाइफटाइम एक्सपीरियंस मिलने वाला है जो शायद hi किसी को मिल पता हो. पर दूसरी तरफ अघोरी का लुम्बा चौड़ा डील डॉल हत्ता कट्टा बदन और उसके लुंड के उत्तेजित अकार की कल्पना करके उसके बदन में कपकपी सी छूट रही थी की आज सुबह उसने उन्हें इतना कुछ सुनाया कही न कही उसकी गुस्सा भी उनके मन में होगी और कही उत्तेजना की अवस्था में वो गुस्सा उन पर हावी हो गया तो वो उसका क्या हाल करेंगे.

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नीतू को ये भी दर सत्ता रहा था की क्या उसका नाज़ुक अनछुए बदन उनके हट्टे बदन को और उसकी कुंवारी छूट उनके उत्तेजना से भरे लिंग को झेल पाएगी. अब नीतू को थोड़ा दर लग रहा था की कही उसने कोई गलत फैसला तो नहीं कर लिया. उसके ज़हन में वो सरे इंटर्रशियल वीडियो घूम रहे थे जो उसने कॉलेज के दिनों में देखे थे. जिनमे वो काळा हब्शी मर्द उन नाज़ुक गोरी चिट्टी लड़कियों को छोड़ छोड़ कर उनकी छूट का भोसड़ा बना देते थे. आज अघोरी के दैत्याकार लुंड से छोड़ना के बाद क्या उसकी छूट की तिघटनेस बचेगी, एक बार इतने बड़े लुंड का अनुभव लेने के बाद क्या वो भविष्य में राज के साथ अपनी सेक्स लाइफ को एन्जॉय कर पाएगी. पर अब ये सब सोचने विचरने का समय निकल चूका था, और कही न कही इतने बड़े लुंड से छोड़ने की उत्तेजना भी उसके दर पर हावी हो रही थी और न सिर्फ राज को बचने के लिए बल्कि चुदाई का ये लाइफटाइम एक्सपीरियंस लेने के लिए भी अघोरी से छुड़वाने का फैसला कर लिया था. अब देखना ये था की क्या उसका नाज़ुक बदन और कच्ची छूट उसके इस फैसले का परिणाम झेलने को तैयार थे.
 
कामासनं

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नीतू वो पैकेट लेकर परदे के पीछे आ गई और खुद को आज की क्रिया के लिए मानसिक रूप से तैयार करते हुए उसने वो पैकेट खोला उसमे काले रंग के तेह करे वस्त्र थे. जब नीतू ने वो वस्त्र खोले तो वे रंग में एकदम काले और बेहद कामुक और अत्यंत उत्तेजक और बदन दिखाऊ थे. ऊपर अपने वाकछा स्थल को ढकने के लिए एक ब्लौसेनुमा कपडा था जिसमे न जिसमे न स्लीव्स थी न आगे से या पीछे से लगाने के लिए कोई हुक, यानि पुराने समय की स्तरीय जिस तरह अपने उभर को कपडे से धक् पीछे उसके दोनों सिरों में गांठ लगा लेती थी नीतू को भी वैसे hi अपने उभारो को छुपाना था, यानि उसके स्तन बस एक गाँठ की सुरक्षा में थे. उसके नीचे एक बेहद पतला छोटा लँगोटनुमा कपडा था, नीतू के लिए ये समझना मुश्किल नहीं था की उसकी आज रात की पंतय है और इसी कपडे को लंगोट की तरह बांध कर उसे अपनी योनि को ढकना है पर कब तक, कब तक ये छोटा सा कपडा अघोरी के एनाकोंडा को उसकी गुफा में घुसने से रोक पाएगा, पर अभी तो एक बिल hi था जिसमे घुसकर अघोरी निश्चित hi उसे गुफा बना देने वाला था. और उसके नीचे अंतिम वस्त्र था एक हाफ पेटिकटनुमा वस्त्र जो न इतना लुम्बा था की उसे पेटीकोट कहा जा सकता था और न hi इतना छोटा की उसे मिनी स्कर्ट कह दिया जाए, वो कला हाफ पेटीकोट नीतू के घुटनो तक hi पहुँचता था.

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नीतू ने एक एक कर अपने पहने हुए सरे वस्त्र उतर दिए और उन कामुक उत्तेजक वस्त्रो को पेहेन कर खुद को अपने जीवन की पहली और शायद सबसे यादगार चुदाई के लिए तैयार करने लगी. नीतू ने सबसे पहले उस लंगोट को अपनी कमर और योनि पर बांध कर उसे धक् लिया, ये एक जापानी सूमो रेसलर की तरह का लंगोट था जिसमे उसकी योनि तो ढकी थी पर कूल्हे पूरी तरह नंगे. उसके ऊपर उसने वो हाफ पेटीकोट पेहेन कर अपने कूल्हों के नंगेपन को भी कपड़ो में धक् लिया. और सबसे आखिर में उसने अपने स्तनों को उस कपडे से धक् कर अपनर हाथ पीछे ले जाकर उस कपडे में गांठ लगा दी. नीतू ने खुद को ऊपर से नीचे तक देखा उसने जीवन में कई स्टाइलिश तरह के कपडे पहने थे पर जो उत्तेजना उसे आज इन कपड़ो में महसूस हो रही थी वो उसे आज से पहले कभी महसूस नहीं हुई थी. उन कपड़ो को पेहेन कर जब वो बहार आई तो बहार का दृश्य देख कर उसकी आँखे फटी की फटी रह गई. क्युकी बहार आज अघोरी एक नए hi अवतार में उसके सामने था.

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हमेशा उसके जिस्म पर रहने वाली भभूत आज गायब था वो अपने बदन को अच्छे से साफ़ करके आए थे, न hi वो अब कोई हड्डी या रुद्राक्ष की माला पहने थे. हमेशा गंदे सन्डे और बेतरतीब वस्त्रो में रहने वाले अघोरी आज बेहद सलीके से एक लुम्बी काली धोती पहने थे और अपने ऊपरी बदन पर भी गले एक तरफ से दूसरी तरफ तक नीचे लटकरा हुआ अंगोछा डेल थे. और जो बात आज उसे रोज़ से एकदम अलग बना रही थी वो थे उसके बाल, नीतू ने आज तक जब भी उन्हें देखा हमेशा खुले घने लुमे बालो में देखा पर आज आज अघोरी ने अपने बालो को बेहद सलीके से पीछे पोनीटेल करके बंधा हुआ था. हमेशा चेहरे पर लटकते बालो में नीतू ने कभी अघोरी का चेहरा ढंग से देखा hi नहीं था पर आज चेहरे पर से उन बालो का पर्दा हटने के बाद जब नीतू ने अघोरी को देखा तो देखती hi रह गई. रंग काल होने के बावजूद उनके नैन नक्शा बेहद तीखे और सुन्दर थे. जितना आकर्षक उनका बदन और डील डॉल था उतना hi आकर्षक उनका चेहरा भी था. नीतू हैरान थी की इतने दिनों से उनके साथ रहते हुए भी उनके इस चेहरे पर कभी उसका ध्यान कैसे नहीं गया. नीतू तो बहस उन्हें एकटक देखती hi रह गई उसे तो दिल hi दिल में उनसे प्यार सा हो गया. अगर राज उसकी ज़िन्दगी में न होता और ये सब उसके लिए न हो रहा होता तो वो शायद अभी घुटनी के बल बैठ कर उन्हें प्रोपोज़ कर देती.

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ये तो नीतू के दिल का हाल था पर अघोरी उसके लिए तो ये एकदम नया अनुभव था जब वो एक स्त्री की तरफ उन नज़रो से देख रहा था. जिन इन्द्रियों कामनाओ और इच्छाओ को उसने अपने मन में कई टालो में कैद करके रखा था की वो कभी उसके दिमाग में ऐसे कामुक ख्याल को जनम न दे पर आज उसने उन सब टालो को खोल दिया था. जिस वासना को उसने कभी अपने आस पास भी नहीं फटकने दिया आज वो खुद उस वासना का अपने अंदर आवाहन कर रहा था. आज एक स्त्री उसके सामने उन कामुक कपड़ो में कड़ी थी उसमे समां जाने के लिए यही बात धीमे धीमे अघोरी के दिलोदिमाग पर हावी होती जा रही थी. अघोरी नीतू के बदन को ऊपर से नीचे तक निहार रहा था तीखी बंगाली बड़ी बड़ी आँखे छोटे छोटे होंठ सुराहीदार गर्दन उन्नत वाकछा पतली कमर और कमर के बीच में वो गहरी नाभि अघोरी का धटन बरबस hi अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे. अघोरी अपनी सहेलियों की तरह रंग में गोरी नहीं थी वो सावले वार्ना की थी पर उसका ते डार्क टोन hi उसे अपनी सब सहेलियों से अलग बनता था और अघोरी जिस देश से आया था वह तो काले रंग को hi सुंदरता का प्रतीक मन जाता था ऐसे में नीतू का ये सावला सलोना रूप तो उसकी नज़रो में सौंदर्य का पर्याय था.

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दोनों काफी देर यही एक दुसरे को निहारते रहे फिर अचानक बहार एक उल्लू के अलाप से उनका ध्यान भांग हुआ और उन्हें एहसास हुआ की बेशक आज उन्हें वासना के सरोवर में उतरना है पर उसके लिए पहले इस विधि को प्रारम्भ काना ज़रूरी है. इसलिए अघोरी ने खुद पफ काबू करते हुए नीतू को उस हवन कुंड के पास आकर बैठने को कहा और खुद भी उस हवन कुंड के दूसरी तरफ आकर बैठ गया.

अघोरी: आज की साधना क्या है ये तो मई आपको बता चूका हु पर अब मई आपको ये बताता की आज की साधना में हमे करना क्या है. इस साधना को हम कामसनाम साधना कहते है. इस साधना ज्यादातर लोग अनजान थे पर इस साधना को दुनिया के सामने लेन का श्रेया पंडित भद्रसेन जी को जाता है जिन्होंने सर्वप्रथम ये साधना शीला नाम की एक विधवा स्त्री के साथ की थी. जिस पर उन्होंने एक पुस्तक भोली भली विधवा और पंडित जी नमक एक पुस्तक भी लिखी है.

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जिसमे उन्होंने अपने और शीला के मध्य हुई साधना को विस्तार से बताया है. इसमें उन्होंने बताया है की सर्वप्रथम उन्होंने शीला का अपने हाथो से श्रृंगार करा फिर उसके बदन के अलग अलग हिस्सों पर चन्दन का टिका लगाया इसके पश्चात् उन्होंने कुछ काम उत्तेजक आसान किये तत्पश्चात उन्होंने आपसे में काम क्रिया की. वह ये साधना शीला के मृत पति की आत्मा की शांति के लिए की गई थी. और ये पूजा के रूप में की गई थी इसलिए उसका स्वरुप सौम्य था पर यहाँ पर यहाँ आपके होने वाले पति को मृत्यु से बचने के लिए ये तंत्र के रूप में की जा रही है इसलिए रस्मे वही होंगी पर उनका स्वरुप उनसे थोड़ा भिन्न होगा और थोड़ा उग्र होगा जिसके बारे में मई पहले hi आपको बता चूका हु.

नीतू: जी

अघोरी: तो साधना आरम्भ करने से पहले हम पटल के स्वामी हदीस के प्रति समर्पण करेंगे और उन्हें अपना अपना कौमार्य और ब्रह्मचर्य समर्पित करेंगे.

नीतू: जी

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अघोरी: तो जो मई बोलू मेरे साथ आप भी दोहराइये बस मेरे नाम की जगह अपना नाम बोलिये और ब्रह्मचर्य की जगह कौमार्य बोलिये समझ गई न.

नीतू: जी

अघोरी: तो हम शुरू करे.

नीतू: जी

नीतू और अघोरी दोनों हाथ जोड़ कर साधना की मुद्रा में बैठ गए और अघोरी ने हदीस के प्रति समर्पण आरम्भ कर दिया.

अघोरी: हे हदीस पटल के स्वामी मृत्यु के देवता

नीतू: हे हदीस पटल के स्वामी मृत्य के देवता

अघोरी: मई इदरीस अल्बा (नीतू को पहली बार अघोरी का नाम पता चला था) मैंने आज तक किसी स्त्री के साथ कभी कोई काम क्रिया नहीं की.

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नीतू: मई नीतू रॉय मैंने आज तक कभी किसी पुरुष के साथ काम क्रिया नहीं की.

अघोरी: मई तन और मन से पूरी तरह शुद्ध ब्रह्मचारी हु.

नीतू: मई तन और मन से पूरी तरह शुद्ध कुंवारी हु.

अघोरी: पर आज मई अपना ये ब्रह्मचर्य आपकी उस साधना में समर्पित कर रहा हु.

नीतू: पर आज मई अपना ये कौमार्य आपकी साधना में समर्पित कर रही हु.

अघोरी: ब्रह्मचर्य और कौमार्य के मिलान से hi जीवन की उत्पत्ति होती है. और आज हम अपने ब्रह्मचर्य और कौमार्य के मिलान से जीवन का निर्माण कर रहे है.

नीतू रेपेटेड आईटी.

अघोरी: हम इस मिलान से बनने वाले जीवन को आपको समर्पित करते है और आपसे विनती करते है की इस जीवन के बदले में आप राज बनर्जी के जीवन पर लगा मृत्यु योग दूर करदे.

नीतू रेपेटेड आईटी.

अघोरी: हे हदीस हम आपसे आज इस साधना को करने की अनुमति मांगते है अगर आपको राज के जीवन के बदले हमारे ब्रह्मचर्य और कौमार्य से निर्मित ये जीवन स्वीकार है तो हमे अनुमति प्रदान करे.

नीतू रेपेटेड आईटी.

अघोरी: हे हदीस हमे ऐसा कोई संकेत दे की आप इस साधना की अनुमति देते है की नहीं कोई संकेत दे पटल स्वामी हदीस कोई संकेत दे.

नीतू रेपेटेड आईटी. पर ये सब बोलते हुए उसके गूसबम्प्स खड़े हो रहे थे. उसे अपने आस पास की हवा काफी भरी होती महसूस हो रही थी. और अचानक हवन कुंड की एक तेज़ लपट ऊपर उठी और कुछ पल ऊपर बवंडर की तरह घूम कर पुनः हवन कुंड की अग्नि में समां गई.

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अघोरी: हदीस की अनुमति और उनका आशीर्वाद मिल गया है. और अब हमे पंडित भद्रसेन द्वारा लिखित पुस्तक भोली भली विधवा और पंडित जी में वर्णित विधियों के अनुसार hi साधना को संपन्न करेंगे क्या आप तैयार है.

नीतू: जी मई तैयार हु.

अघोरी: तो आइये मेरे सामने मेरे एकदम समीप आकर बैठ जाइये.

शीला सॉरी मेरा मतलब है नीतू उठकर पंडित जी अरे मतलब की अघोरी के सामने उसके एकदम समीप जाकर बैठ गई. भोली भली विधवा और पंडित जी का वर्शन 2.ो आने को बेताब था. पर वह तो पंडित जी ने अपने लिंग से शीला की योनि को पूर्णतः तृप्त कर दिया था और उसके मृत पति की आत्मा को शांति दिला दी थी (हेहेहे) पर यहाँ मामला उल्टा था अघोरी के लिंग का अकार देखते हुए नीतू के तृप्त होने का तो सवाल hi नहीं था बल्कि सवाल तो ये था की क्या नीतू की योनि इस लिंग के प्रहार को झेल पाएगी.

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चालू चपत नीतू और अघोरी बाबा

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नीतू और अघोरी एक दुसरे के एकदम समीप बैठे थे.

अघोरी: तो हम ये साधना प्रारम्भ करते है.

नीतू: जी

अघोरी: इस साधना के पूजन स्वरुप के प्रारम्भ में श्रृंगार और चिन्हांकन होता है पर चुकी ये तंत्र स्वरुप है इसलिए यहाँ श्रृंगार नहीं होगा सिर्फ चिन्हांकन होगा.

नीतू: जी इसमें क्या होगा.

अघोरी: पंडित भद्रसेन ने इसमें शीला का बदन के अलग अलग हिस्सों पर स्वस्तिक बनाया था पर हम यहाँ स्वस्तिक नहीं बल्कि तंत्र के टारे का चिन्ह बनाएँगे.

अघोरी ने अपने झोले से एक मिश्रण निकला उसमे चिटा की राख मदिरा और राखत का मिश्रण करके एक लेप बनाया और नीतू को अपने और करीब आने को कहा. नीतू अघोरी के और समीप आ गई.

अघोरी: इस लेप से मई आपके शरीर 6 तंत्र त्रिकोण बनाऊगा तीन सीधे तीन उलटे वो भी उन जगह पर जहा से उन्हें यदि जोड़ा जाए जो वो आपस में मिल कर तंत्र तारा बना दे.

नीतू: जी

अघोरी: तंत्र तारे में दो त्रिकोण विपरीत तरफ से एक दुसरे से जुड़े होते है यानि मई आपके शरीर के उन्ही स्थानों को चिन्हांकित करूँगा जहा से ये दो त्रिकोण बने.

नीतू: जी

अघोरी: प्रथम त्रिकोण जिसका सिरा ऊपर की तरफ होता है उसका ऊपरी सिरा होगा आपकी गर्दन पर और गर्दन से होते हुए आपके दोनों वक्षो को मिलते हुए आपके वक्षो के बीच के हिस्से जिसे आप अंग्रेजी में क्लीवेज कहती है वह पर आकर ख़तम होगा. क्या आप तैयार है.

नीतू का दिल धक् धक् कर रहा था क्युकी साधना के प्रारम्भ में hi अघोरी उसके बूब्स को स्पर्श करने वाला था. पर अपने उत्तेजना को काबू करते हुए उसने हामी में सर हिला दिया और अपनी गर्दन को उठा दिया.

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अघोरी ने अपने हाथ की तर्जनी ऊँगली को उस लेप में डुबोया और अपने हाथ नीतू की गर्दन पर रख दिए और नीतू के गर्दन से त्रिकोण की दोनों रेखाए खींचते हुए नीतू के स्तनों के ऊपरी हिस्से को स्पर्श करते हुए नीतू के क्लीवेज तक वो त्रिकोण बना दिया. इस हलके से स्पर्श ने नीतू के उत्तेजना से भर दिया. यु तो कल रात उसकी योनि साधना के दौरान भी अघोरी ने उसके स्तनों को छुआ था पर तब उसके शरीर पर सिन्दूर भस्म शराब पेशाब खून इतना कुछ डाला जा रहा था की अपने स्तनों पर एक मर्द के हाथो के स्पर्श से होने वाली उत्तेजना कही खो गई थी. पर आज ऐसा कुछ नहीं था आज अपने स्तानक पर स्पर्श हुई अघोरी की उंगलिया उसे अलग hi कामुकता का एहसास करा रही थी. नीतू की तो इच्छा थी की अघोरी उसके स्तनों को मसले दबाए पर अभी इसका समय नहीं आया था.

अघोरी: अब इस त्रिकोण का दूसरा सिरा होगा आपकी जांघो और योनि के जुड़ाव की जगह जहा अमूमन हमे बहुत ज्यादा श्वेद यानि पसीना निकलता है. दूसरा त्रिकोण मई आपकी दाई जगह और योनि के बीच के पसीने से भरे हिस्से में बनाऊगा.

ये जगह नीतू में लिए थोड़ी वेयर्ड थी क्युकी ये जगह से पसीने से भरी होती है पर अघोरी ने कहा है तो करना तो था hi.

अघोरी: आप उठ कर कड़ी हो जाइये और अपनी दाई टांग उठा कर मेरे कंधे पर रख ले.

नीतू: जी

नीतू उठ कर कड़ी हो गई और बाहुबली कात्ताप टाइप पोज़ में अपनी दाई टांग अघोरी के कंधे पर रख दी. अघोरी ने दुबारा अपनी तर्जनी उंगली को उस लेप में डुबोया और नीतू का पेटीकोट थोड़ा ऊपर उठाया और अपने हाथ नीतू के पेटीकोट के अंदर दाल दिए. नीतू के बालो से भरी ब्याह नीतू की जांघ पर रगड़ रही थी ये अनुभव उसके लिए उम्मीद से ज्यादा कामुक था. अघोरी अपनी हथेली नीतू की जांघ और योनि के बीच के हिस्से पर ले गया. वो हिस्सा पहले से गर्मी की वजह से पसीने से गिला था. अघोरी ने उसी जगह पर वो दूसरा त्रिकोण बना दिया. अपना जांघो के इस हिस्से पर अघोरी की उंगलियों के चलने से नीतू को बदु गुदगुदी हो रही थी पर वो किसी तरह उसे कण्ट्रोल कर रही थी.

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अघोरी: अब इस त्रिकोण का तीसरा सिरा आपकी बाई जांघ के इसी हिस्से पर बनेगा तो अब आप अपनी दाई तंग मेरे कंधे से हटाकर अपनी बाई तंग मेरे दुसरे कंधे पर रख ले.

नीति ने अपनी दाई तंग हिटलर अपनी बाई तंग अघोरी के दुसरे कंधे पर रख दी. और अघोरी ने एक बार फिर वही क्रिया दोहराते हुए नीतू की बाई जांघ और योनि और जांघ के बीच के पसीने वाले हिस्से पर वो तीसरा सीधा त्रिकोण बना दिया. अब बरी थी तीन उलटे त्रिकोण बनाने की.

अघोरी: अब मई तीन उलटे त्रिकोण बनाऊंगा और ये उलटे त्रिकोण आपकी उलटी तरफ यानि आपकी पीठ की तरफ से बनेगे. इसलिए आप मेरी तरफ पीठ घुमाकर बैठ जाइये.

नीतू अघोरी की बात मानते हुए उसकी तरफ पीठ करके बैठ गई.

अघोरी: पसीना अर्थात श्वेद हमारे शरीर का अवशिष्ट जल होता है जो हमारे बदन की दुर्गन्ध से युक्त होता है और काली शक्तिया दिर्गन्ध की तरफ जल्दी आकर्षित होती है और पवित्र शक्तिया दुर्गन्ध से दूर भगति है इसीलिए पूजा में नाहा धोकर बैठने को कहा जाता है ताकि हमारे शरीर से पसीने की दुर्गन्ध न आए और इसलिए पूजा में कपूर और अन्य सुगन्धित हवन सामग्री इस्तेमाल करि जाती है ताकि काली शक्तिया वह से दूर रहे और पवित्र शक्तिया आकर्षित हो. पर यहाँ हमे काली शक्तियों को hi आकर्षित करना है इसीलिए ये त्रिकोण हम उन जगहों पर बना रहे है जहा हमारे शरीर से सबै ज्यादा दुगंध आती है. जैसे गर्दन पर इंसान को सबसे ज्यादा पसीना आता है जो बहकर हमारी छाती तक आ जाया है. और जांघो के बीच पसीना अत रहता है. उसी तरह वो हिस्से जो पसीने और दुर्गन्ध से भरे रहते है वो है हुमारु बगले यानि आर्मपिट्स जहा की दुगंध को छुपाने के लिए हम तरह तरह के डॉ इस्तेमाल करते है. इसलिए साफ़ है इस उलटे त्रिकोण के ऊपरी दो सिरे बनेगे आपकी दोनों बगलो पर.

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नीतू को बड़ी शर्म आ रही थी की यहाँ कब्रिस्तान में आने के बाद उसे अपनी बगलो को साफ़ नहीं कर पाई न वह कोई डॉ लगा पाई ऐसे में अब उसकी बगलो से आती दुर्गन्ध से अघोरी क्या सोचेगा पर फिर उसने सोचा की शायद ये दुर्गन्ध hi इस साधना का हिस्सा है. यही सोचते हुए उसने अपनी दाई बगल उठा दी. अघोरी ने एक बार फिर अपनी ऊँगली को उस लेप में डुबोया और नीतू पसीने से भरी बगल में एक उल्टा त्रिकोण बना दिया, नीतू को हलकी गुदगुदी हुई पर उसने बर्दाश्त कर्ली. इसके बाद यही क्रिया नीतू की बाई बगल में भी दोहराई गई और इस साधना का पांचवा त्रिकोण वह बना दिया गया. अब बस उलटे त्रिकोण का निचला सिरा और इस साधना का छडा त्रिकोण बचा था. नीतू भी सोच रही थी अब ऐसी कौन सी जगह हो सकती है जो दुर्गन्धयुक्त होती है जहा ये छडा त्रिकोण बनाएगा, सबसे ज्यादा दुर्गन्ध तो हमारे मॉल में होती है पर वह कैसे त्रिकोण बनेगा. नीतू के ये सोचना हुआ अघोरी ने वो छड़ी जगह बता दी.

अघोरी: अब बरी है छडे और आखिरी त्रिकोण की, तो हमारे शरीर की सबसे दुर्गन्ध युक्त चीज़ हमारा मॉल है और वो हमारे गुदा द्वार से अत है यानि वो छडा त्रिकोण आपके गुदा द्वार पर बनेगा.

ये सुनकर नीतू के गूसबम्प्स खड़े हो गए की अघोरी उसकी गांड के छेड़ पर अपनी ऊँगली से एक त्रिकोण बनाएगा. ये कुछ ऐसी जगह होती है जिन्हे नार्मल सेक्स के दौरान नहीं छुआ जाता है पर किंकी सेक्स में इनका hi सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता और कुछ किंकी फीलिंग इस नीतू महसूस कर रही थी. पर फिलहाल तो अघोरी क्र अगले आदेश का इंतज़ार कर रही थी.

अघोरी: तो आप एक फिर कड़ी हो जाइये पर इस बार मेरी तरफ पीठ करके.

नीतू उठा कर कड़ी हो गई.

अघोरी: अब अपना पेटीकोट अपनी कमर तक ऊपर उठा लीजिये.

नीतू ने धड़कते दिल से अपना पेटीकोट कमर तक ऊपर कर लिया. अब उसके सावले नितम उस पतले से लंगोट में अघोरी के सामने लगभग पूरी तरह नग्न थे. पर उसकी गांड की दरार तो अब भी उस लंगोट के पीछे छपी हुई थी. अघोरी ने हाथ आगे बड़ा कर उस लंगोट को खींच कर नीतू की गांड की दरार से हटा कर उसकी गांड की दरार को खोल दिया.

अघोरी: अब आप अपने दोनों नितम्बो को खींच कर थोड़ा खोल दे ताकि मेरी ऊँगली अंदर दाखिल हो सके और त्रिकोण बना सके.

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Neetu ne apne peticote ko upar uthae uthae apne haath se apne dono nitambo ko thama aur unhe thoda door door kheech kar apni gaand ki darar ko Aghori ke samne khol diya. Aghori ne apni ungli ko ek baar phir us lep me duboya aur apni ungli neetu ki gaand ki darar ke andar daal di. Neetu ko badi erotic aur kinky feeling ho rahi thi ki usne kabhi sapne me bhi nahi socha tha ki ek din wo yu is tarah wo ek kabristaan me rehne wale Aghori ke saame apna peticote upar kare apne chutado ko khole khadi hogi aur uski ungli apni gaand me dalwa rahi hogi. Par wo kehte hai na TRUTH IS STRANGER THAN FICTION ( सच कल्पना से ज्यादा अकल्पनीय है ). Aghori ne wo chhada trikon neetu ki gaand ki darar me bana diya jiska ek sira neetu ki gaand ke chhed ke andar tak jata tha jiske liye Aghori ne puri ungli neetu ki gaand ke chhed ke andar ghused di. Neetu to achanak se chihuk uthi use yakeen nahi hua ki anghori ne apni puri ungli uski gaand ke chhed me andar tak daal di. Par kahi na kahi use maza bhi aa raha tha ki ek brahmchari Aghori uski gaand ke andar ungli daal raha hai. Neetu ki saase tez tez upar neeche chal rahi ki aur maze ke alag sansaar me pahuch hi gai thi ki Aghori ne apni ungli nikal li. Neetu ke maze par jaise tusharapaat ho gaya ho aur usne man mosos kar apna peticote neeche kar liya.

Is chhade trikon ke sath hi Pandit Bhadrasen dwara rachit pustak Bholi Bhali Vidhwa aur Pandit Jee me varnit sadhna ka pratham charan Chinhankan ka aadha bhag poorna ho gaya. Ab bari thi is charan ke dwitiya bhaag ki jisme Neetu ko Aghori ke badan par isi tarah chinhankan karna tha.

Aghori: Ab apki bari hai mere badan par unhi jagah usi tarah chinhankan karne ki jaise maine apke badan par kara. Ab apko bhi mere badan par saamne ki taraf se teen seedhe aur peeche ki taraf se teen ulte trikon banane hai.

Itna keh kar Aghori ne apne seene par rakha wo duppatanuma kapda hata diya aur chhati khol kar neetu ke samne baith gaya.

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नीतू भी पुनः अघोरी के सामने आकर बैठ गई और उसके हट्टे काटते सीने को निहारने लगी क्या कसरती बदन था और बिना भभूत और माला ताबीज़ के कितना आकर्षक लग रहा था. नीतू ने अपनी तर्जनी ऊँगली उस लेप में डुबोई और अघोरी की गर्दन से लेकर उसके दोनों choochak(nipple) को स्पर्श करते हुए अघोरी की छाती पर प्रथम त्रिकोण बना दिया. अपनी उंगलियों से अघोरी के चूचको को छूने का एहसा नीतू के बेहद कामुक था और नीतू अपनी उंगलिया फिरा कर अघोरी के चूचक को कुछ पल महसूस करती रही जब तक की अघोरी खुद उठ कर खड़ा नहीं हो गया.

खड़े होकर नीतू कुछ समझ पति इससे पहले hi अघोरी ने खुद अपनी दे टांग उठा कर नीतू के कंधे पर रख दी. अघोरी की सिर्फ एक तंग का वजन इतना ज्यादा था की नीतू का कन्धा एक और झुक गया. पर नीतू ये भी समझ गई की अब उसे अघोरी की जांघो में पसीने वाली जगह पर दो त्रिकोण बनाने है. नीतू ने अघोरी की जांघो के उस हिस्से को देखा वह काफी पसीना और थोड़ा गन्दा था. नीतू काफी हाइजीनिक टाइप थी पर आज उसके सामने दूसरा ऑप्शन नहीं इसलिए उसने अपनी ऊँगली दुबारा लेप में डुबोई और अघोरी की जांघ में दूसरा त्रिकोण बनाने लगी. जब वो ये त्रिकोण बना रही थी तो बरबस hi उसका ध्यान उस लंगोट के फूले हुए हिस्से पर जा रहा था जो नीतू की उंगलियों की गति के साथ साथ झटके खा रहा था जिससे साफ़ था की अपने बदन पर चलती नीतू की उंगलियों से अघोरी भी कही न कही उत्तेजना का अनुभव कर रहा है. अघोरी की दाई जांघ के बाद उसकी बाई जांघ पैट भी नीतू ने तीसरा सीधा त्रिकोण बना दिया.

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इसके बाद अघोरी नीतू की तरफ पीट्ज करके बैठ गया और अपने हाथो को फैला लिया. यानि अब नीतू को उसकी आर्मपिट्स पर दो उलटे त्रिकोण बनाने थे. नीतू ने एक नज़र अघोरी की बगलो पर डाली वह काफी बाल थे जाने कितने सालो से अघोरी ने अपनी बगलो के बाल नहीं बनाए होंगे.

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अगर नार्मल कंडीशन होती तो वो किसी मर्द के इस हिस्से को छूना भी पसंद नहीं करती पर आज उसे ये करना hi था. इसलिए नीतू ने एक बार फिर अपनी उंगलियों को लेप में डुबोया और बालो से भरी अघोरी की बगल पर भी एक उल्टा त्रिकोण बना दिया. लेप का ज्यादातर हिस्सा तो अघोरी के बगल के बालो में hi उलझ कर रह गया. इसी तरह नीतू ने अघोरी की दूसरी बगल में भी पांचवा त्रिकोण बना दिया. अब केवल छडा और आखिरी त्रिकोण बचा था जो उसे अघोरी की गांड की दरार में उसकी गांड के छेड़ के अंदर तक ऊँगली दाल कर बनाना था. अघोरी भी उठ कर खड़ा हो गया और नीतू की तरफ अपने कूल्हे झुका लिए और अपने लंगोट की हल्का ढीला करके उसे अपने चूतड़ों के ऊपर से हटाकर अपने हाथो से अपनों कूल्हों को नीतू के लिए खोल दिया.

नीतू ने जीवन में पहली बार किसी मर्द की गांड को इतने करीब से देखा था. अघोरी के चूतड़ उसके बदन से ज्यादा काले थे शायद शमशान में चिटा की गरम राख में बैठ कर तंत्र साधना करने की वजह से. नीतू के लिए ये बेहद अजीब सा छान उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की कभी कोई मर्द उसके सामने यु अपनी गांड झुकाए खड़ा होगा की वो उसकी गांड में ऊँगली गले और वो भी ऐसा कला हब्सी हत्ता कट्टा मर्द. नीतू को अघोरी की गांड का छेड़ साफ़ दिखाई दे रहा था. गांड के साथ साथ लंगोट हटा होने की वजह से उसे अघोरी के लुंड के नीचे लटकते उसके बड़े बड़े टट्टे भी हलके हलके नज़र आ रहे थे. अघोरी की गांड और उसके तत्तो में भी काफी बाल थे और वह से काफी दुर्गन्ध भी आ रही थी उसे यु किसी मर्द की गांड में ऊँगली डालने में घिन भी आ रही थी. पर इस अजीबोगरीब साधना को लेकर अब उसकी एक्ससिटेमेंट भी बढ़ती जा रही की अभी प्रारम्भ में ये सब हो रहा है तो अब आगे क्या क्या होगा. यही सोचते विचरते उसने एक बार फिर अपनी उंगली को लेप में डुबोया और कापते हाथो के साथ अपनी उंगली अघोरी की गांध के छेड़ की तरफ बड़ा दी. और अघोरी की झांटो से भरी गांड में त्रिकोण बनाते हुए अपनी ऊँगली अघोरी की गांड की छेड़ के अंदर दाल दी.

अपनी गांड के छेड़ में घुसती नीतू की उंगली को महसूस कर अघोरी भी सिसकारी लेने को मजबूर हो गया और ये सिसकारी नीतू ने भी सुनी और इसे सुन कर नीतू को भी बड़ा मज़ा आया की लगता है अघोरी बाबा को भी मज़ा आ रहा है. इसी मज़े में नीतू ने ज़ोर लगाकर अपनी पूरी ऊँगली अघोरी की गांड के अंदर घुसेड़ दी. नीतू की ऊँगली के पूरा अंदर घुसने के साथ अघोरी की गांड की दरारो में कम्पन सा हुआ और कम्पन देख कर नीट भी एक्ससिटेड हो गई और अघोरी की गांड के अंदर अपनी ऊँगली गोल गोल घूमने लगी. खुछ देर पहले जहा ऊँगली डालने में भी उसे घिन आ रही थी अब वही अपनी उंगली को गोल गोल घुमका वो मज़े ले रही थी. करीब 1 मं तक वो यही मुस्कुराते हुए अघोरी की गांड में ऊँगली घूमती रही जब तक उसे अघोरी ने टोका नहीं.

अंघोरी: मेरे ख्याल से छड़ त्रिकोण बन गया है तो अब आप अपनी ऊँगली निकल ले.

नीतू को अघोरी के यु टोकने पर बड़ा ऐम्बर्रास्मेंट हुआ और उसने एक झटका में अपनी उंगली निकल ली. अघोरी अपना लंगोट ठीक करने लगा और नीतू ने इस दौरान अघोरी की गांड में गई उस उंगली को अपनी नाक के करीब लेकर सूंघ कर देखा. उसकी उंगली से हद से ज्यादा दुर्गन्ध आ रही थी पर वो दुर्गन्ध नीतू के दिमाग में अंदर तक उतर गई. न जाने क्यों उसे ये दुर्गन्ध भी अच्छी लग रही थी. और उस ऊँगली को सूंघते सूंघते बरबस hi वो उंगली उसके होंठो तक पहुंच गई. और उन होंठो ने भी उस उंगली के लिए रास्ता खोल दिया और वो उंगली नीतू के मुँह में समां गई. नीतू अघोरी की गांड में डाली गई अपनी उंगली को चूसने लगी. नीतू को यकीन नहीं हो रहा था की वो ऐसा कर रही है, इतनी सोफिस्टिकेटेड हाइजीन को फोल्लोवे करने वाले नीतू किसी की गांड के छेड़ से निकली उंगली को यु चाट रही है. उस गन्दी गांड की बदबू से भरी उंगली जिसमे शायद उसकी गांड के अंदर की गंदगी भी लगी हो उसको चाटने में नीतू को अजीब सा आनंद आ रहा था जैसे उसमे से बदबू नहीं गुलाब की खुशबू आ रही हो उसकी गांड के अंदर की गंदगी नहीं बल्कि मीठा मीठा शेहेह लगा हो.

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नीतू अपनी उंगली को चाटने में इस कदर मशगूल थी की उसे पता hi नहीं चला की अघोरी कबका अपना लंगोट सही करके उसके तरफ पलट कर उसे अपनी उंगली छत्ते देख रहा है. नीतू को अपनी उंगली चाटने में मशगूल देख अघोरी ने हल्का सा खास कर उसे अपनी देखने का एहसास करा दिया. अघोरी के खस्ने की आवाज़ सुन नीतू भी अपने सेंसेस में वापस आई और टपक से उसने वो उंगली अपने मुँह से निकल ली. नीतू को अपनी हरकत पर बड़ी शर्म आ रही थी उससे अघोरी से नज़रे भी नहीं मिले जा रही थी की पता नहीं अघोरी उसके बारे में क्या सोच रहा होगा. पर अघोरी एकदुम नार्मल बेहवे करते हुए दुबारा नीतू के सामने आकर बैठ गया और अपनी बात केहनी आरम्भ कर दी.

अघोरी: इसी के साथ चिन्हांकन का ये प्रथम चरण पूरा हुआ. अब बरी है इस साधना के दुसरे चरण की.

साधना का प्रथम चरण पूरा हो गया और प्रथम चरण पूरा होते होते hi नीतू एक सोफिस्टिकेटेड हाइजीनिक महिला से एक गांड से निकली ऊँगली को चूसने चाटने वाली औरत में तब्दील हो गई थी. पता नहीं ये साधना आज नीतू से और क्या क्या करवाने वाली थी और क्या असर पड़ने वाला था उसका नीतू की शख्सियत पर. क्या इस रात के बाद नीतू वही नीतू रह पाएगी या ये साधना नीतू की शख्सियत को पूरी तरह बदल कर रख देने वाली थी.

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पंडित जी ने भोली भली विधवा शीला का तो अच्छे से उद्धार कर दिया था अब देखना ये था की हमारे अघोरी बाबा इस चालू चपत नीतू के साथ क्या क्या करने वाले थे.
 
चिन्हांकन की प्रथम चरण पूर्ण हो चूका थी अब बरी थी साधना की आखिरी चरण की काम असंयम जिसमे उन्हें पंडित भद्रसेन और शीला की तरह आपस में कुछ काम उत्तेजक आसान करने थे.

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अघोरी: साधना के द्वितीय चरण में हमे कुछ आसान करने होंगे. और वो आसान कामसूत्र की पुस्तक और योग पर आधारित है जिसमे स्त्री पुरुष को एक दुसरे के करीब आना पड़ता है. इन असानो को करवाने का मुख्या उद्देश्य hi है हमे एक दुसरे के करीब लाना एक दुसरे के कामुक स्पर्श के प्रति सहेज करना आगे आने वाले वासनामि वातावरण के लिए तैयार करना और योग के माध्यम से हमारे शरीर को इतना लचीला और ऊर्जापूर्ण बनाना की आगे होने वाली कामक्रिया के वेग को सेहेन कर सके. तो क्या आप तैयार है.

नीतू: जी

अघोरी: कामयोगा कम से कम वस्त्रो में किया जाता है इसलिए आपको अपना ये पेटीकोट उतरना होगा.

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नीतू पेटीकोट के अंदर बस एक छोटा सा लंगोट पहने थी पर उसने भी सोचा की उसे कुछ समय बाद तो वैसे भी नंगा होना hi है तो अभी के लिए ये पेटीकोट hi सही. वो चुपचाप कड़ी हुई ौड बिना हिचकिचाए एक झटके में अपने पेटीकोट की गाँठ खोलकर उसे अपने पैरो से निकल कर उतर दिया. अघोरी ने भी अपनी धोती उतर कर फेक दी. अब वो दोनों नीचे जापानीज सूमो रेसलर टाइप के लंगोट में थे और नीतू के सीने पर बस एक कपडा था. इन्ही वस्त्रो में उन्हें अब ये काम आसान करने थे.

अघोरी: तो हम शुरू करे.

नीतू: जी

अघोरी: प्रथम आसान में हम एक दुसरे की तरफ पीठ करके ध्यान की मुद्रा में बैठेंगे और एक दुसरे की पीठ को आपस स्पर्श करते हुए कुछ पल के लिए ध्यान करेंगे.

अघोरी और नीतू एक दुसरे की तरफ पीठ करके ध्यान की मुद्रा में बैठ गए. नीतू की पीठ पीछे से लगभह पूरी नग्न hi थी ऐसे में उसे अपनी पीठ पर अघोरी की नग्न पीठ का स्पर्श अत्यंत कामुक लग रहा था. कुछ पल वो यही ध्यान को मुद्रा में रहे.

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अघोरी: अब द्वित्य आसान से हमे एक दुसरे की तरफ मुख करना है और अपने ललाट यानि माथे से माथे जोड़कर और अपने पैरो को पीछे की तरफ मोड़कर अपने हाथो को नमस्कार की मुद्रा में जोड़कर बैठना है. और केवल एक दुसरे के बारे में सोचना है ताकि एक दुसरे के दिमाग में चल रहे कामुकता भरे विचारो का हमारे दिमाग में अदन प्रदान हो जाए और आगे की क्रिया के दौरान हमारे मन किसी तरह की ग्लानि का भाव न आए की हम कुछ गलत कर रहे है.

नीतू: जी

नीतू और अघोरी एक दुसरे के सामने पेअर मोड़ कर बैठ गए अपने हाथ जोड़ लिए और अपने मस्तक आपस में जोड़ लिए. और आँखे बंद करके एक दुसरे के बारे सोचने लगे. कुछ पल वो इसी मुद्रा में बैठे रहे उसके बाद अघोरी वापस सीधा होकर बैठा गए और अगले आसान के बारे में बताने लगे.

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अघोरी: मस्तक के बाद अब हमे अपनी नासिका यानि नाक का स्पर्श करवाना है. इस आसान में हम अपनी एक तंग मोड़ कर और दूसरी फैला कर बैठेंगे, अपनी एक हथेली सर से ऊपर एक हथेली सर से नीचे रखते हुए जोड़कर अपनी नासिकाओं को इतना करीब लाएंगे की एक दुसरे की सुगंध को अपने अंदर आत्मसात करले.

अघोरी उस आसान में बैठ गया और उसका अनुसरण करते हुए नीतू भी उसी आसान में बैठ गई दोनों ने अपनी हथेलियों को जोड़ लिया और अपने चेहरे को आपस में नज़दीक लेकर अपनी नाक को आपस स्पर्श करा दिया और एक दुसरे की सुगंध को महसूस करने लगे.

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अघोरी: नासिका के बाद हम अपने पैरो के तलवो को हवा में व् शेप में ऊपर उठा कर आपस में जोड़ेंगे और एक दुसरे के हाथो को आपस में थम कर बैठेंगे ताकि हमारे शरीर में पड़ने वाले खिचाव से रक्त का प्रवाह तीव्र हो जाए क्युकी सम्भोग में राखत के प्रवाह का विशेष महत्व है.

अघोरी और नीतू अपने तलवो को ऊपर उठाकर आपस में जोड़कर इस अजीबो गरीब से आसान में बैठ गए. पर अघोरी की बात सच थी नीतू को अपने शरीर में रखता का प्रवाह तीव्र प्रतीत हो रहा था.

अघोरी: अब इसी आसान को आगे बढ़ाते हुए हम अपने शेयर को इसी मुद्रा में पेअर ऊपर किये हुए लेते हुए अपने नितम्बो को आपस में स्पर्श कराएंगे और अपने नितम्बो के छिद्र के अंदर बने त्रिकोण का आपस में ज्यादा समपर्क करेँगे इसके लिए हमे अपने नितम्ब आपस में रगड़ने होंगे. ठीक है न

नीतू: जी

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नीतू को ये आसान बड़े अजीब लग रहे थे पर कही न कही उसे अब इनमे मज़ा भी आ रहा था. नीतू और अघोरी अपने पेअर ऊपर किये हुए अपने नितम्ब एक दुसरे के करीब ले आए और नीचे अपनी कमर हिला हिला कर अपने नितम्ब आपस में रगड़ने लगे. जापानी स्टाइल का लंगोट होने की वजह से उनके नितम्ब पीछे से पूरी तरह खुले थे इस कारन उनके नग्न कोमल त्वचा का आपस में स्पर्श हो रहा था जो अपने आप में बेहद कामुक और उत्तेजक था. और ये अघोरी के लिए बेहद उत्तेजनापूर्ण था नीतू के नग्न कोमल नितम्बो के अपने सख्त खुरदुरे नितम्बो पर स्पर्श उसके मन में भी वासना का संचार कर रहा था.

अघोरी: नीतू तुम्हारे नितम्ब कितने कोमल और चिकने है इनका स्पर्श कितना कामुक है मई तो अब तक इस स्पर्श से अनजान था. मेरे नितम्ब तो कितने खुरदुरे और सख्त है.

नीतू: मर्दो के नितम्ब सख्त hi अच्छे लगते है और जब मर्द आपके जैसा हो तो कहना hi क्या.

अघोरी: क्या तुम्हे अपने नितम्बो पर मेरे नितम्बो का स्पर्श अच्छा लग रहा है.

नीतू: हम्म

अघोरी: मुझे भी अब हम अगला आसान करते है.

नीतू: जी

अघोरी: अब मई ज़मीन पर पीठ के बल लेटूँगा और तुम्हे मेरे दोनों तरफ घुटने मोड़ कर इस प्रकार बैठना है की हमारे लंगोट के अंदर कैद जननांग एक दुसरे के अधिक से अधिक करीब रहे.

अघोरी ज़मीन पर पीठ के बल लेट गया और नीतू उसके कमर के दोनों तरफ पेअर मोड़ कर बैठ गई. इस तर्ज की उसकी लंगोट में कैद योनि अघोरी के लिंग के ठीक ऊपर थी उन लंगोट के कपड़ो के बावजूद वो अपनी योनि पर अघोरी के बड़े लिंग का दबाव साफ़ महसूस कर रही थी.

अघोरी: क्या आपको लंगोट के ऊपर से मेरा लिंग महसूस हो रहा है.

नीतू: जी

अघोरी: क्या लगता है आपको उसका आकर कितना होगा.

नीतू: 10-12 इंच

अघोरी: आपको बता दू इस वक़्त वो अपनी पूर्ण तनाव में नहीं है क्या अब भी आप आगे बढ़ना चाहती है.

नीतू: जी

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अघोरी ने अपने हाथ नीतू की नाभि पर रख दिए और अपनी ऊँगली को नीतू की नाभि में गोल गोल घूमने लगा. नीतू ने भी आनंद में अपने हाथ अघोरी के सीने पर रख दिए और अपनी आँखे बंद कर्ली. अघोरी के खुरदुरे सख्त हाथ नीतू के कोमल पेट को सेहला रहे थे.

अघोरी: कितनी गहरी नाभि है आपकी और कितनी मुलायम त्वचा है आपके पेट की. ऐसा प्रतीत होता है जैसे मई रेशम को छू रहा हु. क्या मेरा यु आपकी नाभि और पेट सहलाना आपको असहज कर रहा है.

नीतू ने न में सर हिला दिया.

अघोरी: तो आपको कैसा लग रहा है.

नीतू: अच्छा बहुत अच्छा

नीतू की रज़ामंदी मिलते hi अघोरी अपने हाथ ऊपर बढ़ाने लगा और नीतू के स्तनों के एकदम नीचे जाकर रुक गया और नीतू के ब्लाउज को नीचे से अपनी ऊँगली से कुरेदने लगा. नीतू का उत्तेजना के मरे बुरा हाल हो रहा था वो अपनी योनि को अघोरी के लिंग पर रगड़ रही थी.

अघोरी: आपका वक्ष का आकर भी बेहद कामुक है और ये कितने सख्त है. क्या मई इन्हे बिना वस्त्रो के देख सकता हु.

नीतू: आप तो पहले hi देख चुके है.

अघोरी: टबमे और ाबमे फ़र्क़ है क्या आपको वो फ़र्क़ महसूस नहीं हो रहा.

नीतू: हो रहा है.

अघोरी: तो क्या मई आज इन्हे बिना वस्त्रो के देख सकता हु.

नीतू: मैंने आपको रोका है क्या.

इतना सुनते hi अघोरी अपने हाथ नीतू की पीठ की तरफ ले गया और पीछे ले जाकर नीतू के उस ब्लाउज की गांठ खोल दी. गाँठ खुलते hi नीतू का ब्लाउज उसके सीने से जुड़ा होकर पेड़ से टूटे पत्ते की तरह अघोरी के सीने पर आ गिरा. अब नीतू के स्तन पूरी तरह नग्न थे.

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नीतू के काले सावले बदन पर वो नोकदार उभर बेहद आकर्षक लग रहे थे और उनसे भी आकर्षक लग रहे थे उनके मुहाने पर बने वो गहरे भूरे रंग के निप्पल.

अघोरी: वैसे तो मई पहले भी इन पर्वत से उभरे हुए स्तनों को देख चूका हु पर आज जिन नज़रो से इन्हे देख रहा तो इनकी सुंदरता मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही है.

नीतू: तो भर लीजिये इन्हे अपने मुँह में आज ये जिस्म और इसका हर अंग सिर्फ और सिर्फ आपका है.

अघोरी: उसका भी समय आएगा पर अभी हमे अगले आसान पर जाना है जहा आपके अंदर की कामाग्नि चरम पर पहुंच जाएगी पर आपको खुद पर काबू रखना होगा.

नीतू: जी बाबा

अघोरो: अब आप अपनी दोनों जांघो को मेरे दोनों कंधो के इर्द गिर्द करके मेरे कंधो पर इस तरह बैठ जाए की आपकी योनि का मुख मेरे होठो के एकदम सामने आ जाए.

सीढ़ी सरल भाषा में कहे तो अघोरी नीतू को अपनी छूट उसके होठो पर रखने को कह रहा था नीतू का ये सुनकर hi बुरा हाल हो रहा था उसके तन बदन में सैकड़ो चीटिया सी काट रही थी. नीतू अघोरी के ऊपर से उठ गई और अघोरी भी सीढ़ी मुद्रा में बैठ गया और नीतू उसके समीप आकर अपने पैरो को उसके को अघोरी के कंधो पर लटका कर यु बैठ गई की अब उसकी छूट अघोरी के होठो को स्पर्श कर रही थी.

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इससे पहले की नीतू कुछ सोचती समझती अघोरी नीतू को अपनी बलिष्ठ भुजाओ में उठाकर खड़ा हो गया. नीतू को लगा की कही वो गिर न जाए क्युकी एकदम से वो ज़मीन से 7.5 फुट ऊपर उठ गई थी. पर अघोरी की पकड़ और ताकत इतनी मजबूत थी की गिरना तो नीतू ज़रा सा बेंड भी नहीं हुई. नीतू को अगला झटका तब लगा जब अघोरी ने बिना देर खड़े होते hi नीतू की योनि की फूली हुई फैंको को उसके लागत के ऊपर से hi अपने होंठो के बीच भर लिया और लंगोट के ऊपर से नीतू की योनि को अपनी खुरदुरी जीभ से चाटने चूसने लगा. नीतू को लगा था की अघोरी हर बार की तरह इस बार भी पहले उससे अनुमति मांगेगा पर इस बार तो उसने डायरेक्ट हमला कर दिया. ये कहना मुश्किल था की अघोरी के इस उतावलेपन की वजह साधना का कोई नियम hi था या एक औरत की योनि से आती मादक सुगंध ने इस ब्रह्मचारी अघोरी को भी इतना अधीर कर दिया. पर वजह जो भी हो अघोरी पागलो की तरह नीतू की योनि को जीभ से कहते जा रहा था. नीतू का छोटा सा लंगोट अघोरी की लार से गीला हो चूका था. नीतू की उत्तेजना तो चरम पर पहुंच गई थी उसका आँखे बंद थी और मुँह खुला था और वो उत्तेजना के मरे अघोरी के बालो को कास कर पकडे थी, पकडे क्या खींच hi रही थी. कोई सामान्य पुरुष होता तो दर्द से पीछे हैट जाता पर अघोरी सामान्य नहीं थी उसे तो जैसे दर्द का कोई एहसास hi नहीं था वो अनवरत बिना रुके नीतू की योनि छत्ता गया छत्ता गया छत्ता गया जब तक की नीतू की योनि ने उसके आगे हार मानकर समर्पण नहीं कर दिया.

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नीतू निढाल सी अघोरी के कंधो पर झुक कर बैठ गई. नीतू की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी उसकी पकड़ ढीली पद गई थी. हम सब समझते थे की इसका मतलब क्या था नीतू ने अपना चरमसुख प् लिया था. पर आज की रात अभी ख़तम नहीं बल्कि अभी तो शुरू हुई थी जब अघोरी की जीभ ने चाँद मिंटो में नीतू का ये हाल कर दिया था उसके लंगोट के अंदर से फुफकारता नाग नीतू का क्या हाल करने वाला था.
 
नीतू की योनि और ऊपर के लंगोट को पूरी तरह गीला करने के बाद अघोरी ने नीतू को अपने कंधे से उतर कर नीचे ज़मीन पर बिठा दिया और खुद नीतू के सामने आकर खड़ा हो गया. नीतू ने एक नज़र ऊपर उठा कर देखा एक 7.5 फुट की दानवाकार आकृति बड़ी बड़ी जताए एकदम काला बदन और बदन पर बस एक नाम मात्रा का लंगोट जिसके अंदर छुपे लिंग के तीव्र तनाव ने उसके होने न होने को एक सामान कर दिया था. और अगले hi पल वो बचा हुआ आखरी कपडा भी अघोरी के शरीर से अलग होकर नीचे ज़मीन पर आ गिरा. नीतू की नज़र जब अघोरी के तने हुए लुंड पर पड़ी उसका मुँह आश्चर्य उत्तेजना आउट भय इन तीनो भावो के मिले जुले प्रभाव के कारन खुला का खुला रह गया. क्युकी इस वक़्त उसके सामने एक बारह इंच से भी ज्यादा बड़ा एकदम काला लुंड, जो अघोरी के बदन से भी ज्यादा कला था नीतू के चेहरे के ठीक सामने था. अघोरी के लुंड की एक एक नस इस कदर फूली हुई की अंदाज़ा लगाना बेहद आसान था की उनमे इस वक़्त उनमे खून का दौडान कितना अधिक था. इन फूली हुई नसों को देखकर hi अधूरी की उत्तेजना की एहसास हो रहा था और ये भी अंदाज़ा लग रहा था की आज कितना अधिक वीर्य इस लिंग से निकल कर नीतू की योनि में समां जाने वाला था.

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अघोरी ने थोड़ा आगे बाद कर अपना तना हुआ झटके खता लिंग नीतू के होंठो पर रख दिया जो इस बात का संकेत था की साधना का अगला आसान मुख मैथुन था. नीतू ने अघोरी के लिंग के झटको की प्रतिक्रिया में बरबस hi अपना मुख खोल दिया पर अंदर hi अंदर वो अब भी इस दुविधा में थी की क्या वो इस दानवाकार लिंग को अपने मुँह में ले पाएगी. अघोरी का लिंग नीतू के होठो पर यहाँ वह रगड़ खा रहा था. उत्तेजना के मारे नीतू की आँखे बंद हो गई थी और उसके मुँह से निकल रही गरम गरम भाप अघोरी के लिंग के तनाव में और इज़ाफ़ा कर रही थी. नीतू पूरी तरह अघोरी के लिंग के अपने होठो से हो रहे स्पर्श में खो सी गई थी की वो लिंग को अपने मुँह में लेना hi भूल गई थी. उसकी चेतना तब लौटी जब उसे अपने खुले बालो में हाथो की एक तेज़ पकड़ महसूस हुई. और इससे पहले कुछ सोचती या समझती अघोरी ने उसकी गर्दन में पीछे से दबाव डालकर अपना आधे से ज्यादा लिंग नीतू के मुँह के अंदर दाखिल कर दिया.

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अघोरी के लिंग का आधा भाग hi नीतू के हलक के मुहाने तक पहुंच चूका था और अभी तो आधा भाग नीतू के मुँह के बहार hi था. अघोरी ने नीतू को पहले hi जगह कर दिया था की ये कोई प्रेम क्रिया नहीं जहा अघोरी नीतू से अनुमति मांग कर कुछ करता ये एक तंत्र साधना थी जहा नीतू को पूरी तरह खुद को समर्पित कर देना था और इस साधना में होने वाली सम्भोग क्रिया का रूप भी काफी प्रताड़ना भरा होने वाला था और कही न कही अघोरी ने नीतू को पहले hi इस सबके लिए आगाह कर दिया था की अगर वो इस साधना के लिए अघोरी का चुनाव करती है तो उसे उसके विशाल हब्शी लिंग के प्रहारों को झेलना होगा जिसके लिए नीतू ने भी जोश जोश में सहमति दे दी थी जिसका एहसास नीतू को अब हो रहा था. अघोरी ने नीतू के बाल पकड़ कर अपना आधा लुंड तो नीतू के मुँह में दाल hi दिया था और अब उसने नीतू के मुँह में धक्के लगाना भी शुरू कर दिया. अघोरी के लिंग की लम्बाई तो लम्बाई उसकी मोटाई भी इतनी ज्यादा थी की उसे अपने मुँह में जगह देने में नीतू का पूरा जबड़ा फ़ैल गया था. नीतू का पूरा मुँह उसे अंदर लेते दर्द करने लगा था पर अघोरी को जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था वो लगातार धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था. और हर धक्के के साथ उसका लिंग नीतू के मुँह में धीरे धीरे करके और अंदर और गहराई में उतरता जा रहा था.

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कुछ पल तक तो नीतू किसी तरह बर्दाश्त करती रही पर नीतू के मुँह गर्माहट पाकर अघोरी के लिंग का आकर और बड़ा होता जा रहा था. अघोरी के लगातार तेज़ होते जा रहे धक्को और उसके लिंग के फूलते आकर की वजह से नीतू का सास लेना भी दूभर हो रहा था. नीतू अब अघोरी को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी पर अफ्रीका के 7.5 फूटे हब्शी अघोरी को पीछे धकेलना नीतू जैसी दुबली पतली लड़की के बस की बात कहा थी. पर नीतू को आश्चर्य इस बात का हो रहा की थी अघोरी का ये कौन सा रूप है जिससे वो अब तक अनजान थी क्या ये अघोरी की दबी उत्तेजना है या ये वाकई में साधना का भाग है. पर अब जो भी हो अब स्थिति नीतू के हाथ से बहार थी वो छह कर भी अब पीछे नहीं हैट सकती क्युकी अब इस गाड़ी को पूरी तरह अघोरी चला रहा था और इसे एक्सेलराते करना या इसमें ब्रेक लगाना सब कुछ अघोरी के हाथ में था. और फिलहाल अघोरी का कोई इरादा इसमें ब्रेक लगाने का नज़र नहीं आ रहा था. अघोरी को नीतू के मुँह में लिंग पेलते पेलते 20 मं से ज्यादा हो चूका था न तो वो झड़ने का नाम ले रहा था न एक पल के लिए भी लिंग बहार निकल कर नीतू को सास लेने का मौका दे रहा था.

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नीतू की चेतना भी धीमे धीमे उसका साथ साथ छोड़ती जा रही थी. और जब नीतू को लगने लगा की आज शायद वो अघोरी का लुंड चूसते चूसते hi दम घुटने से मर जाएगी, लोग क्या जानेगे की लुंड चूसते चूसते दम घुटने से हुई महिला की मौत, अघोरी ने अपना लिंग नीतू के मुँह से बहार निकल लिया.

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नीतू की तो जैसे जान में जान आ गई. पहले अघोरी ने नीतू की योनि को चाट चाट कर उसे निढाल कर दिया था और उसका मुख छोडन करके ऑलमोस्ट उसकी जान निकल hi दी थी. नीतू अभी खुद को संभल भी नहीं पाई थी की अघोरी ने उसे बालो से पकड़ कर खींच कर ऊपर उठाया और जब नीतू की नज़र अघोरी के चेहरे पर पड़ी तो उसकी पैरो टेल की ज़मीन निकल गई उसका चेहरा दर के मरे पीला पद गया, जो खौफनाक मंज़र इस वक़्त उसकी आँखों के सामने था उसे देख कर उसका दिल दहल उठा. क्युकी...... क्युकी........ क्युकी अघोरी की आँखों की काली पुतलिया गायब थी और उसकी आँखे पूरी तरह सफ़ेद थी उसकी चेहरे के भाव भी बदले हुए थे जो सौम्यता जो दयालुता अघोरी का स्वाभाव था वो आज उसके चेहरे से गायब थी और उसके चेहरे पर एक अजीब कठोरता क्रूरता और शैतानियत का भाव नज़र आ रहा था. ये जो कोई भी था पर ये अघोरी नहीं था.

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नीतू का तो अब दर के मरे बुरा हाल था जिस अघोरी के दम पर वो यहाँ आई थी वो खुद अब बदल चूका था. नीतू खुद को छुड़ाने का भरसक प्रयास करने लगी पर अघोरी खुद में इतना बलशाली था और अब उसके अंदर कोई और मौजूद था जो अघोरी से भी कही गुना ज्यादा बलशाली था.

Aghori(Badli हुई आवाज़ में): क्यों नाटक कर रही है चुपचाप कड़ी रह और खुद को मेरे हवाले कर दे.

अघोरी की आवाज़ पूरी तरह बदली हुई थी इस आवाज़ में एक अजीब सा वहशीपन था.

नीतू: क.. क.. क... कौन हो तुम, तुम अघोरी बाबा नहीं हु.

अघोरी: नहीं मई अघोरी नहीं हु, मई वो हु जिस3 मिलने के लिए तू ये साधना कर रही है, मई वो हु जिसके हवाले तूने खुद को अपनी इच्छ्हा साधना के शुरू में करा था और अब जब मई यहाँ तेरा समर्पण लेने आया हु तो तू नाटक कर रही है. मई हदीस हु हदीस अंधकार की दुनिया का बेताज बादशाह.

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तूने खुद मुझे बुलाया थाविस अघोरी के साथ मिलकर अपने प्रेमी की जान बचने के लिए और बदले में अपना कौमार्य मुझे समर्पित करा था तो आज मई वो लेने आया हु इस अघोरी के शरीर के माध्यम से और बदले में तुझे इस अघोरी का ब्रह्मचर्य दूंगा जिसमे मेरा तेज भी होगा.

नीतू के तो तोते उड़ गए अघोरी ने उसे ये तो बताया की उसे हदीस को अपना कौमर्य समर्पित करना है पर वो कौमार्य लेने खुद हदीस आएगा ये नहीं बताता था. नीतू बस एक छोटे से लंगोट में एक डेमों गॉड की बहो में थी. अघोरी या अब यु कहे की हदीस ने नीतू की उस आखिरी कपडे को भी खींच उसके शरीर से अलग कर दिया. अब नीतू पूरी तरह नग्न अवस्था में एक डेमों गॉड की भाव में झूल रही थी. उसने कभी समपणे में भी नहीं सोचा था की एक दिन वो एक पारलौकिक शक्ति के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाएगी और इस सम्बन्ध का उसके आने वाले भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा. पर अब कुछ भी सोचने या पीछे हटने का समय जा चूका था. न अब नीतू में पीछे हटने की छमता था न इतनी हिम्मत की वो हदीस को न कह सके. उसे अपनी जांघो के बीच कुछ कठोर सा डंडे जैसे कुछ महसूस हो रहा था उसने एक नज़र नीचे नज़र झुका कर देखा उसकी आँखे फटी की फटी रह गई. नीचे वो अघोरी का लिंग था जिसका अकार 20 इंच से भी ज्यादा बड़ा हो चूका था शायद हदीस के प्रभाव के कारन, पर क्या इतना बड़ा लिंग नीतू जैसी दुबली पतली लड़की अपने अंदर ले पाएगी.

Aghori(oh सॉरी मेरा मतलब है हदीस) ने नीतू का चेहरा बालो से पकड़ कर अपने चेहरे के करीब लाया और अपने अपने खुरदुरे होंठ नीतू के रसभरे होंठो पर रख दिए. नीतू को Aghori(Hades) के मुँह से एक बेहद तीव्र दुर्गन्ध आ रही थी जैसे अनगिनत मुर्दे साद रहे हो और उनके शवों से दुर्गन्ध आ रही हो. वो पीछे हटने को छटपटा रही थी की अचानक Aghori(Hades) ने अपनी श्वास अंदर खींच कर एक तेज़ फूँक नीतू के मुँह के अंदर दाखिल कर दी और अचानक से नीतू की छटपटाहट शिथिल पद गई जो नीतू अब तक अघोरी को अपने से परे धकेल रही थी उसने अघोरी के बदन को अपनी बहो में भर लिया, अपने होंठ अघोरी के होंठो से जोड़ दिए और बेतहाशा पागलो की तरह अपने होंठो को अघोरी के होंठो पर रगड़ने लगी. Aghori(HADES) ने अपना 20 इंची लिंग नीतू की योनि के मुहाने पर सेट करा. नीतू ने अघोरी के होंठो को चूमते चूमते अपनी आँखे बंद कर ली शायद उस लिंग के अपनी योनि पर हो रहे स्पर्श से उसे अंदाज़ा हो गया था की अगले पल क्या होने वाला है. पर अब उसके अंदर का दर पूरी तरह ख़तम हो चूका था और वो इस 20 इंची लिंग अपनी योनि में लेने के लिए उत्तेजित हो रही थी. और एक hi झटके में Aghori(HADES) ने अपना पूरा का पूरा लिंग नीतू की योनि के अंदर दाखिल कर दिया. जी है सिर्फ एक झटके में वो पूरा वो 20 इंच से भी थोड़ा बड़ा लिंग नीतू की कुंवारी योनि की दीवारों से रगड़ खता उन्हें चौड़ा करता हुआ नीतू के कुंवारेपन की झिल्ली की फाड़ता हुआ नीतू की बच्चेदानी तक पहुंच गया था या शायद उससे भी ज्यादा अंदर.

जो नीतू कल तक अपनी योनि में अघोरी की दो उंगलियों के जाने में भी दर्द महसूस कर रही थी आज उसकी योनि एक 20 इंची लिंग पैवस्त हो चूका था और वो दर्द में दूर उत्तेजना और उन्माद में अघोरी के होंठो को चूस रही थी. अघोरी ने नीतू के चूतड़ों के पीछे अपने दोनों हाथ रखे और एक झटके में नीतू को अपनी बहो में उठा लिया. नीतू ने अघोरी का इशारा समझते हुए अपने दोनों पेअर अघोरी की कमर के इर्द गिर्द लपेट लिए.

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ऐसा करने से Aghori(HADES) का लिंग नीतू की योनि में और भी ज्यादा गहराई तक समां गया था. अघोरी ने नीतू को अपनी बहो में भरे भरे पीछे एक दीवार से जाकर सत्ता दिया और उसके बाद अनवरत बिना रुके तेज़ तेज़ धक्के मरना शुरू कर दिया. अघोरी अपना लिंग आधे से ज्यादा बहार निकलता और एक तेज़ झटके के साथ उसे नीतू की योनि में बहुत गहराई तक उतर देता. अघोरी के हर धक्के पर नीतू का पूरा बदन हिल जाता. अघोरी का हर धक्का इतना ज्यादा तीव्र और तेज़ था की अगर हदीस ने नीतू को अपनी फूक से इस सम्भोग को सहने की ताकत न दी होती तो शायद आज उसकी जान hi चली जाती.

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Aghori(HADES) नीतू को वही दीवार से सताए न जाने कितनी देर तक छोड़ता रहा. शायद कई घंटो तक पर इस पूरा प्रक्रिया के दौरान न अघोरी स्खलित हुआ और न hi नीतू. जो नीतू अघोरी के अपनज योनि चाटने भरसे चाँद मिंटो में स्खलित हो गई थी वो आज एक 20 इंच के लिंग से चुड़ते हुए भी स्खलित नहीं हो रही थी. उसकी उत्तेजना उसकी वासना उसकी कामपिपासा जो की त्यों बरक़रार थी. अघोरी का लिंग उसके लिंग की फूली हुई नसे नीतू की योनि की दीवारों में रगड़ कहती हुई अंदर बहार हो रही थी. पुरे कब्रिस्तान में हर तरफ सनत्ता और अन्धकार फैला हुआ था और इस सन्नाटे में केवल अघोरी के ढाक्खो की आवाज़ और नीतू की करहो या यु कहे ाहो की आवाज़ hi सुनाई दे रही थी. रात लगातार गहरी और गहरी होती जा रही थी अघोरी को नीतू को छोड़ते हुए दो घंटे से भी ज्यादा समय हो चूका था. रात के तीन बजने को थे जब रात सबसे ज्यादा काली होती है अन्धकार अपने चरम पर होता है और काली शक्तिया अपने प्रबल रूप में होती है. और शायद अब समय आ गया था इस अनवरत चल रही सम्भोग साधना के समाप्त होने का. Aghori(HADES) ने अपने धक्को की गति बड़ा दी नीतू ने भी अघोरी के बदन पर अपनी पकड़ मज़बूत करदी अपने नाखून अघोरी की पीठ में गाड़ दी पर न अघोरी धक्को से नीतू को कोई दर्द का एहसास था न नीतू के नाखुनो से अघोरी को.

अनवरत चलते कई धक्को के बाद जैसे hi घडी की छोटी सुई तीन पर और बड़ी सुई बारह पर आई अघोरी के लिंग से वीर्य का एक तेज़ बहाव नीतू की योनि के अंत में स्थित छिद्र से होते उसके गर्भ स्थान की स्थान की तरफ बढ़ने लगे. अघोरी के वीर्य या यु कहे वास्तव में हदीस के वीर्य के लाखो करोङो शुक्राणु नीतू के गर्भाशय में मौजूद अंडो के साथ निषेचन करके उसकी कोख में अपने अंश का समावेश करने के लिए बाद चले. अघोरी के स्खलन के साथ नीतू के भी साबरा का बांध टूट गया और तीन घंटो की अपने जीवन की पहली और शायद सबसे यादगार चुदाई के बाद नीतू ने भी अपना चरमसुख प् लिया. उसने अपना सर अघोरी के कंधे पर टिका दिया और तेज़ तेज़ सासे भरने लगी. नीतू को भी अपनी योनि में अघोरी के गाड़े वीर्य की गर्माहट का एहसास हो रहा था. उसे ये भी समझ आ रहा था की अघोरी का वीर्य उसके अंदर कितनी गहराई तक उतर गया था. उसने अपने पैरो को अघोरी की कमर में और कास कर लपेट लिया ताकि अघोरी के वीर्य की एक बूँद भी उसकी योनि से बहार न निकल जाए.

उत्तेजना और उन्माद में उसे ये याद hi नहीं था की जब वीर्य में शुक्राणुओं का औरत के गर्भ में मौजूद अंडो के साथ निषेचन होता तो उसका क्या परिणाम होता है. और वो भी जब वीर्य किसी आम इंसान का न होकर एक डेमों गॉड का हो तो उसका नीतू की ज़िन्दगी में क्या परिणाम होगा. फिलहाल तो वो बस इस वीर्य को गर्माहट को अंदर तक महसूस करना चाहती अपने प्रथम सम्भोग का अंतिम पालो तक पूरा आनंद लेना चाहती थी. काफी देर वो यही एक दुसरे को जकड़े खड़े रहे अघोरी के वेइया में मौजूद एक शुक्राणु का नीतू के गर्भ में मौजूद अंडे के साथ निषेचन हो चूका था और हम सब जानते थे की इसका क्या मतलब था. धीमे धीमे रात का अँधेरा कम होता जा रहा था दूर छितिज से सूरज के उगने के संकेत आने शुरू हो गए और ये संकेत था अन्धकार और अन्धकार के देवता के अपनी दुनिया में वापस जाने के.

"हदीस: तुमने हमे प्रसन्न कर दिया हम तुम्हारी इस साधना से खुश हुए और तुम्हे तुंहारा इच्छित फल प्रदान करते है और तुम्हे कौमार्य के बदले में तुम्हारे प्रेमी की जान बक्शते है."

इतना कह कर अघोरी ने एक अंतिम बार अपने होंठो को नीतू के होंठो पर रखा और इस बार नीतू के अंदर जो श्वास छोड़ी उसे वापस खींच लिया. वी श्वास बहार खींचते नीतू एक पल को अपनी चेतना में वापस आई और अगले hi पल भीषण थकन और दर्द के कारन अघोरी के कंधो में hi मूर्छित हो गई. अघोरी ने नीतू को वही फर्श पर लिटा दिया और नीतू के सामने पालथी मार के बैठ गया और अचानक से अघोरी के मुँह से एक तेज़ हवा का झोका बहार निकला और उनकी झोपडी से बहार निकल कर कब्रिस्तान की ज़मीन में समता हुआ सीधा पटल की दुनिया में चला गया. उस ऊपरी हवा के निकलते अघोरी का शरीर भी एकदम शिथिल सा पद गया उसे सामने बेहोश पड़ी नीतू नज़र आ रही थी पर फिलहाल उसके शरीर में इतनी जान नहीं थी की आगे बाद कर वो नीतू की हालत को देख सके. अघोरी ने खड़े होनर का प्रयत्न किया पर शरीर में ताकत न होने की वजह से वो भी पेड़ से टूटे पत्ते की तरह मूर्छित होकर वही नीतू के बगल में गिर गया. अघोरी और नीतू के नग्न शरीर वही फर्श पर निढाल से पड़े थे.

कई दिनों की अनेको क्रियाओ के बाद अंततः अघोरी और नीतू की ये कामसाधना संपन्न हो चुकी थी. नीतू अपना कौमार्य हदीस को समर्पित कर चुकी थी. अघोरी का ब्रह्मचर्य भी नीतू की इस साधना की अग्नि भस्म हो चूका था. पर हदीस अपना जो अंश नीतू के गर्भ में दे गया था उसका क्या अंजाम होगा ये तो सिर्फ समय के गर्भ में hi छुपा था.

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डे 8 के इस अंतिम पड़ाव में जहा बाकि सभी सहेलियों के इस आठवे दिन के किस्से ख़तम हो चुके जहा शोभा ने विक्रम से वडा करा था की अब वो सुहागसेज पर दुल्हन के लिबास में उसका इंतज़ार करेगी तो उसकी सहेली से उसकी सास बानी विनीता ने लखन सिंह के साथ GAIA(Earth) की इरोटिक मुद पूजा करि थी तो गरिमा ने बिहारी काका के साथ किचन में उनकी बीवी की कुमी को पूरा करा था और नीतू ने फाइनली अपना कौमार्य अघोरी या हदीस को समर्पित कर दिया था, शबाना को विकर्म की वजह से शायद अब लालू नाम के जल्लाद से मुक्ति मिल गई थी तो बेहोश आरती को बचने अजय स्टार लोगन को लेकर आ रहा था. अब आठवे दिन के बस एक आखिरी अपडेट बचा था और वो था इस सहेली गैंग की रियल बोम्ब्शेल नेहा का. जहा नेहा उस हवेली के सर्वेंट क्वार्टर में उस रेड हॉट ड्रेस में कड़ी थी और उसके सामने थे उस हवेली के 10 नौकर 18 साल का छोटू, वेटर कल्लू, लेबर भोला और हरबक्स, ड्राइवर भूरा, रसोइया रामु काका, इलेक्ट्रीशियन कन्हैया, हवेली का केयरटेकर घनश्याम, हलवाई गोपी और आखिर में पहलवान जोगिन्दर.

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नेहा: उस दिन मैंने आप सबसे वडा करा था की एक शाम आप सबके साथ बिताउंगी तो शाम न सही रात सही क्युकी शाम में हवेली में काफी चेहेल पहल रहती और आप सब भी अपने अपने काम में बिजी होते हो इसलिए इतनी रात में आई अगर आप लोग की नींद ख़राब हो रही है तो मई चलती हु.

कल्लू: अरे नहीं नहीं मैडम जी आपको इतनी रात में यहाँ अपने बीच देख कर हमारे बदन का रोया रोया खड़ा हो गया hai.(Waise खड़ा तो कुछ और भी हुआ था पर फिलहाल उसे रहने देते है).

भूरा: हम तो बड़े खुश है की आज आप अपने कीमती समय से कुछ समय हमे देने आए है. सच कह रहे है शहर की बहुत गोरी गोरी मेडम देखि पर आपसी कोई नहीं देखि. आप तो सबसे लाजवाब हो.

भोला: लाजवाब तो मैडम जी का डांस था क्या डांस करा था उस रात दज पर वो कौन सा गण था बड़ा मस्त गण था.

कनहिया: शकीरा शकीरा

नेहा: तो आप लोगो को मेरा डांस अच्छा लगा था.

कल्लू: अच्छा लगा था अरे गज़ब लगा था उस रात तो आपका डांस देख कर न जाने कितने बुड्ढे की जवानी वापस लौट आई थी.

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भोला हस्ते हुए: मेरा तो पंत में hi निकल गया था.

घनश्याम: ऐ भोला क्या बोल रहा है बोलने से पहले कुछ तो सोचा कर क्या बोल रहा किस्से बोल रहा.

नेहा हस्ते हुए: इतस ok दोस्तों के बीच इतना तो चलता है और वैसे भी मई जानती हु की मई हु hi इतनी हॉट की मेरा डांस देखकर अच्छे अच्छा का पंत में hi निकल जाता है.

भोला: क्या मैडम जी अपने हम लोगो को अपना दोस्त बोलै अरे कहा हम सब काळा कलूटे गांव के गवर देहाती और कहा आप इत्ती गोरी चिट्टी शहर की वियति मेम.

नेहा: तो क्या हुआ भोला जी ये किसने कहा की गांव के देसी छोरो और शहर की विलायती मेम की दोस्ती नहीं हो सकती. और ये क्या आप आप और मेमसाब लगा रखा है मुझे तुम कहो या फिर नेहा कहो no आप आप एंड no मेमसाब.

भूरा: तो आप मेरा मतलब है तुम हमारी दोस्त हो.

नेहा: है बिलकुल और आप तो मुझसे मेरी दोस्ती का सबूत पहले hi ले चुके ho.(Neha ने भूरा को आँख के इशारे से वो बाथरूम वाला सन याद कराया)

भूरा: तो दोस्ती के नाते एक चीज़ मांग सकते है.

नेहा: बिलकुल हुकुम कीजिये क्या चाहिए अपनी इस दोस्त से.

भूरा: परसो तो तुम चली जाओगी और कल पता नहीं ये मौका मिले न मिले जाने से पहले एक बार फिर तुम्हारा वही नाच देखना चाहते है एकदम मस्त मस्त वाला जिसे देख कर हम सबका पंत में hi निकल जाए.

नेहा: बस इतनी सी बात आज का ये नाच आप सबके लिए जनर से पहले मेरी तरफ से एक तोहफा.

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सब वही अपने अपने अपने गड्डो में बैठ गए और नेहा उस हॉट रेड ड्रेस में बीच में आकर कड़ी हो गई.

भोला: ऐसा लग रहा है जैसे साला हम किसी कोठे में कोई मुजरा देखने आए है और सामने एक टॉप की नचनिया कड़ी जय.

गोपी काका: भोला तू बड़ा बड़बोला है कुछ भी बोल देता है कुछ भी कर देता है माफ़ करना मेमसाब ये गधा कुछ भी बक देता है.

नेता: इतस ok काका कोठा हो या बार सब जगह नाचने वालिया अपने कस्टमर्स के मज़े के लिए hi तो नाचती है और आज वही काम मई कर रही हु तो यही समझ लीजिये की आप सब किसी कोठे या बार में किसी नाचने वाली का नाच देखने आए है और आज मई hi वो नाचने वाली हु.

भोला: तब तो सच में मज़ा hi आ जाएगा.

नेहा ने अपने मोबाइल में गाना आप खोलकर उसमे हेलेन के ओल्ड कब्रे सांग्स में सबसे ज्यादा पॉपुलर और वर्तमान सिचुएशन पर सबसे ज्यादा सूट करने वाला गण सेलेक्ट करा और मोबाइल कल्लू को देकर नाचने की पोजीशन ली. कल्लू ने गण प्ले करा.

"पिया टूउऊउउउ हे हे हे हे

अब तो ाजाआआ हो हो

पिया टूउउउउ अब तो अजा अहहहहह

शोला सा मन बहके आके बुझा जायआ

तन की ज्वाला ठंडी हो जाए

ऐसे अगन लगा जा हाहाहाहा हाहाहा

मोनिका ो माय डार्लिंग"

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डांस में तो वैसे भी नेहा का कोई सनी नहीं नहीं था उस पर रात का इरोटिक माहौल उस पर भी नेहा की ये हॉट ड्रेस और देखने वाले भी चील लौ क्लास वर्कर्स जिनके लिए ये सब देखना एक सपने जैसा था. इतना गज़ब इरोटिक डांस देखने का मज़ा तो उनकी आँखे ले रही थी और ज़ुल्म बेचारे पप्पू पर हो रहा था. जी नहीं अब आप लोग ये मत सोचने लग्न की ये पप्पू नाम का कोई चैरेक्टर आ गया स्टोरी में, अरे ये तो वो चैरेक्टर है जो सोस्सिप की लगभग हर स्टोरी में होता है जिसके बिना कोई स्टोरी कम्पलीट हो hi नहीं सकती जिसे हम पप्पू नुन्नू किंग कोबरा सांड नाग बन्दूक पाइप लुल्ली मूसल गणना केला और भी न जाने किन किन नामो से बुलाते रहते है. ऊपर वाले ने भी क्या चीज़ बनाई है ये पप्पू साला कोई हॉट लड़की आगे से हिलती हुई दिख जाए पप्पू तन जाता है कोई पीछे से झुकी हुई दिख जाए पप्पू तन जाता है भरी बस में किसी से गलती से टच हो गए पप्पू तन जाता है किसी के बदन से सेंत की मस्त खुशबू भर आ जाए पप्पू तन जाता है यहाँ तक की किसी ने फ़ोन पर ऐडा से hello भर कह दिया तब भी पप्पू तन जाता है चुम्मा मिलता होंठो पर है पर ताँता कौन है पप्पू ऐसा लगता है साला पप्पू न होकर बारात का शामियाना हो तना hi रहता है. जिस चीज़ का जन्म hi तन्ने के लिए हुआ जो अपने जीवनकाल का आधा समय सिर्फ तन्ने में गुज़र देता है फिर भी गर्व या बहादुरी से सीना ताँता है तब कोई पप्पू का नाम भी नहीं लेता. अफ़सोस की बात तो ये है ये है की ये सरे बेगैरत लोग ये सब पड़ते हुए है रहे साला मतलब पप्पू की फीलिंग्स की कोई कदर hi नहीं.

खैर छोडो कहानी में आगे बढ़ते है.

चाँद लम्हो में hi नेहा के मादक डांस ने उन लौ क्लास वर्कर्स का हाल बेहाल कर दिया था. और लगभग वो सब hi खुलेआम या सबसे नज़र बचाकर अपने अपने लुंड मसल रहे थे फिर चाहे वो सबसे कम उम्र का छोटू हो या सबसे उम्रदराज़ रामु काका कोई भी इस उत्तेजना से अछूता नहीं था. जो ज्यादा बोल्ड और बिंदास थे जैसे भोला और भूरा उन्होंने अपने बिस्तरों के नीचे राखी देसी शराब की बोतल और स्मैक वाली सिगरेट निकल ली थी. अब नहीं कोई छुईमुई टाइप लड़की तो थी नहीं जिसने कभी ड्रिंक न किआ हो या सिगरेट न पि हो. जब उसने भोला को दारू पीते और भूरा को सत्ता मरते देखा तो अपनी अदाओ में नाचते हुए वो उन दोनों के पास पहुंच गई. उसने भोला के हाथ से शराब की बोतल ले ली और भूरा के मुँह से सत्ता निकल लिया. नाचते नाचते hi उसने एक hi घुट में आधी शराब की बोतल ख़तम करदी और फिर दो काश सुट्टे के लेने लगी पर उसे ये नहीं पता था की ये नार्मल सिगरेट नहीं चरस वाली सिगरेट है जो दिमाग घुमा कर रख देती है ऊपर से शराब इन दोनों के कॉकटेल ने जल्द hi अपना असर दिखाना शुरू कर दिया. नेहा का सर घूम रहा था उस पर चरस का नशा हावी हो रहा था और इस नशे के प्रभाव से उसके अंदर की हवस की बाद रही थी और आज जिस तरह विक्रम ने उसके ईगो को चोट पहुंचे उसने इस हवस की आग को और भड़का दिया और इस वक़्त तो उसे कही जाने की भी ज़रूरत भी नहीं थी उसके सामने 10-10 लुंड मौजूद थे वो भी अलग अलग क्वालिटी अलग अलग साइज के. वो इनमे से किसी के भी साथ अपनी ठरक की आग को ठंडा कर सकती या शायद सबके साथ एक ज़बरदस्त गैंगबैंग करवा सकती थी.

और वो ऐसा कर सकती थी क्युकी शी इस थे ओने एंड ओनली नेहा शर्मा

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नेहा के दिमाग पर चरस और शराब का नशा चढ़ता जा रहा था और इस नशे ने उसके डांस और उसकी हरकतों को और भी ज्यादा मादक बना दिया था. नाचते नाचते वो पहले कन्हैया के सामने चली गई और उसके सामने झुक कर अपने मुम्मे हिला हिला कर उसे बाज़ारू रंडी की तरह अपने क्लीवेज दिखने लगी.

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कन्हैया का तो मन कर रहा था की इन हिलते मम्मो को अपनी मुट्ठी में भींच ले पर वो नेहा की हरकतों से अनजान था इसलिए हिम्मत नहीं कर प् रहा था उसके बाद नेहा कन्हैया के बगल में बैठे घनश्याम के आगे पहुंच कर उनके चेहरे से एक हाथ भर की दूरी में अपने कूल्हे उनके चेहरे की तरफ करके गोल गोल मटकने लगी अधेड़ उम्र के घनश्याम भी लुंड को मसल मसल कर hi संतोष कर रहे थे कुछ देर उनको भी अपनी अदाओ से तैसे करने के बाद नेहा उनके बगल में बैठे चिकनी चाँद वाले हरबक्स के सामने पहुंच गई और एकदम से अपनी एक तंग उठाकर हरबक्स की चिकनी चाँद पर रखड़ी एकदम बाहुबली टाइप पोज़ में जैसे बाहुबली ने अपनी तंग कट्टप्पा की चाँद पर राखी थी. पर ऐसा करने से उसकी स्प्लिट ड्रेस की तंग पूरी तरह खुल गई और अंदर पहनी काली चड्डी हरबक्स के सामने बेपर्दा हो गई उसका तो दिल हॉर्स पावर की गति से धक् धक् करने लगा, उसका तो मन कर रहा था की अभी हाथ आगे बड़ा कर इस चड्डी को नीचे खींच कर नेहा की छूट को नंगा कर दे पर उसने भी बस अपने मुँह तक आई लार को जातक कर hi संतोष कर लिया.

इसके बाद नेहा यहाँ मौजूद लोगो में सबसे शरीफ और बार बार भोला की बदतमीज़ी भरी बातो में टोकने वाले गोल मटोल गोपी काका के सामने पहुंच गई जिनका मुँह तो पहले hi नेहा के इस लुंड झाड़ू डांस से खुल गया था और वो एकटक बिना पलके झपकाए नेहा की एक एक ऐडा को मुँह फाडे देख रहे थे.

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नेहा को भी उनका ये बचकाना सा चेहरा बड़ा अच्छा लगा और उसने हाथ आगे बड़ा कर गोपी काका को खींच कर खड़ा कर लिया और उन्हें एकदम बीचो बीच लेकर उनके इर्द गिर्द उनके बदन से बदन रगड़ कर नाचने लगी. नेहा कभी उनके मोठे भद्दे शरीर से लिपट जाती जैसे एक मदमस्त बेल किसी मोठे पेड़ के इर्द गिर्द लिपट जाती है तो कभी उनकी बहो में झूल जाती जैसे कोई नागिन किसी पेड़ की शाखा पर झूल रही हो. गोपी काका भी बेचारे हैरान से नेहा की हरकतों के साथ नदी के तेज़ बहाव में पहले पत्ते की तरह बहे जा रहे थे. उन्हें समझ hi नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे नेहा जैसी खुद से आधी उम्र की बाला की हुस्न पारी को अपनी बहो में भर ले या वो जो कर रही चुपचाप यहाँ खड़े रह उसे वो सब करने दे. शबाब तो वह पहले से hi था अब वह शराब का दौर भी चालू हो चूका था, सब नेहा की मदमस्त अदाओ से बाद चुके कमरे के तापमान की वजह से सूख चुके अपने गले को शराब से तर कर रहे थे.

गोपी काका का तो हाल बेहाल था अपने बदन पर रगड़ कहते नेहा के बदन ने पाजामे के अंदर उनके लुंड में भूचाल मचा दिया था. वो बार बार झटके पे झटके खाए जा रहा था और ये झटके अब हर किसी को दिखाई दे रहा थे यहाँ की उनके इर्द गिर्द नाच रही नेहा को भी अपनी बदन पर कभी कहर उनके झटके कहते लुंड का स्पर्श महसूस हो जाता था. पर उसके लिए तो एक नया एक्सपीरियंस भर था की इतने सरे गांव के लौ क्लास देहाती नौकरो के सामने यु रुंडी की तरह नाच रही और उनके लुंड को झटके खाने को मजबूर कर रही है ये एक्सपीरियंस तो उसे एक अलग किंकी फीलिंग दे रहा था. नशे ने उसके अंदर की उत्तेजना की आग को चरम पर पंहुचा दिया था और गोपी काका के झटके खातर लुंड के भावावेश में नेहा ने hi उन्हें अपनी बहो में जकड लिया और इससे पहले की गोपी काका कुछ सोचते समझते नेहा ने अपने रसीले लाल होंठ गोपी काका के भद्दे मोठे होंठो पर रख दिए और उन्हें पागलो की तरह चूसने लगी जैसे किसी रसभरे फल का रास चूस रही हो. इतनी उत्तेजना को काबू में रखना गोपी काका जैसे सीधे साढ़े मर्द के लिए भी अब नामुमकिन था और फाइनली उनके भी साबरा का बांध टूट गया और उन्होंने भी अपनी बहे नेहा के बदन के इर्द गिर्द लपेट कर उसे अपनी बहो में जकड लिया.

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वह मौजूद हर शक्श को तो जैसे साप सूंघ गया था, उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की नेहा जैसी हॉट पटाखा लड़की गोपी काका जैसे भद्दे मोठे तोंदियल आदमी को यु पागलो की तरह किश कर रही है. सामने चल रही हॉट किसिंग देख कर hi उनके लुंड उनकी चड्डियों से बहार आने को मचल रहे थे. सबको गोपी काका की किस्मत पर रश्क हो रहा था की काश उनकी जगह मई होता पर ठेठ गवर देहाती भोला सिर्फ रश्क तक hi कहा रिकने वाला था वैसे भी वो तो नेहा के होंठो की चुम्मा का पहले से दीवाना था और इस वक़्त तो नेहा खुद से चुम्मा दे रही थी तो वो कहा रुकने वाला था उस पर भी वो नशे में पूरी तरह धुत्त था. वो अपनी जगह से उठकर सीधा लड़खड़ाता डगमगाता नेहा के पीछे जाकर खड़ा हो गया, नेहा के बालो को अपनी मुट्ठी में जकड़ा और झटके से खींच कर उसका मुँह अपनी तरफ कर लिया और सीधा अपने होंठ नेहा के होंठो पर रख दिए. गोपी काका भी जैसे किसी हसीं सपने से जागे हो, वो अभी सब नौकरो के आगे क्या कर गए ये सोच कर hi वो बड़ा झेप रहे थे पर जब उन्होंने सामने भोला और नेहा को चुम्बनरत अवस्था में देखा तो उनका लुंड दुबारा हिलोरे खाने लगा. भोला के मुँह से बीड़ी खैनी की दुर्गन्ध आ रही थी पर नेहा को तो जैसे कोई फ़र्क़ hi नहीं पद रहा था वो तो आज एक अलग hi मज़े में थी.

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भोला जैसे देहाती को जब ऐसी हूर पारी मिल जाए तो वो कुछ ज्यादा hi उतावला बावला और अहीर हो जाता है और यही बावलापन उसकी चुम्बन में साफ़ नज़र आ रहा था. वो तो पागल जानवर की तरह नेहा के होंठो पर टूट पड़ा था. भोला ने आगे बढ़कर पहल करि तो उसे नेहा के होंठो को चूमने का मौका मिला अब यही तमन्ना वह मौजूद बाकि लोगो में भी आ चुकी थी. कन्हैया और अब तक शरीफ दिखा रहे घनश्याम भी नेहा के करीब आ गए. कन्हैया जिसके सामने नेहा कुछ देर पहले अपने मुम्मे हिला रही थी उसने पीछे से हाथ डालकर नेहा के मुम्मे अपने हाथ में ले लिए और अपने हाथो से उन्हें सहलाने मसलने लगा, घनश्याम जिसके सामने नेहा ने अपने कूल्हे मटकाए थे वो नेहा के पीछे उकडू होकर बैठ गया और नेहा के कूल्हों को हाथ में लेकर महसूस करने लगा. उन तीनो ने नेहा की उस रेड ड्रेस को नीचे से पकड़ा और उसे ऊपर करते हुए नेहा के शरीर से उतर कर वही ज़मीन पर फ़ेंक दिया.

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अब नेहा का गोरा चिकना छरहरा बदन केवल एक ब्रा और पंतय में उन तीन देहाती नौकरो के हाथो का खिलौना बना था जिसे वो हर तरह से छूकर महसूस कर रहे थे.

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हरबक्स जिसकी गंजी चाँद के ऊपर नेहा ने अपनी तंग रखकर उसे अपनी छोटी चड्डी के दर्शन कराए थे वो नेहा की चड्डी की बेपर्दा देखकर उसे उतरने के लिए मचल उठा और उठकर नेहा के करीब आ गया और कुछ पल नेहा की चड्डी में छूट के पास वाले हिस्से पर उंगलिया फिरने लगा. वो हिस्सा पूरी तरह गीला हो चूका था. हरबक्स ने चड्डी के गीलेपन को अपनी उंगलियों में भरा और फिर वो उंगलिया अपनी मुँह में भरकर नेहा की छूट से निकले पानी के स्वाद को चख कर देखने लगा. इस मादक स्वाद ने उसके अंदर की उत्तेजना की आग भड़का दिया उसकी आँखे हवस के मरे लाल हो गई थी और उसने बिना देर अपने हाथ नेहा की चड्डी की इलास्टिक में फसा कर एक झटके में नेहा की चड्डी को नीचे सरका दिया. नेहा भी हवस और वासना में पूरी तरह सराबोर थी, ये सब उसके लिए एकदम नया और एक अनोखा एक्सपीरियंस था इतने सरे लौ क्लास वर्कर्स उसके बदन को नंगा करे उसके जिस्म के साथ खेले. इसलिए उसने भी बिना किसी न नुकुर के अपनी टंगे ऊपर करके हरबक्स को अपनी चड्डी उतरने में मदद करदी. नेहा को इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था की उसकी चड्डी उतरना वाला कितना बदसूरत है उसे किश करने वाला कितना नशेड़ी और बदबूदार है बल्कि उनकी बदसूरती और गंदापन उसे एक अलग किंकी फीलिंग दे रहा था.

हरबक्स ने नेहा की चड्डी उतारकर उसे अपने चेहरे पर चढ़ा लिया और नेहा की चड्डी का उसके छूट के पानी से गीला हुआ हिस्सा अपने चेहरे के सामने की तरफ रखा ताकि वो उसमे से आ रही महक को अंदर तक महसूस कर सके. नेहा के बदन के सभी कपडे उतर चुके थे सिवाय एक ब्रा के और नेहा के हिलते मुम्मो के दीवाने कन्हैया ने नेहा के उन बंधे कबूतरों को भी उस कपडे की कैद से आज़ाद कर दिया. अब नेहा का बदन उन नौकरो के बीच पूरी तरह नंगा था जिसे देखकर उनके लुँडो में खून का दौडान कई गुना बाद गया था. घनश्याम हरबक्स भोला और कन्हैया तो पूरी तरह नेहा के बदन को मसलने रगड़ने में जुटे थे वही कल्लू नेहा की छूट को छोड़ने भूरा एक बार फिर नेहा की गांड मरने और रामु काका किचन में जो नेहा ने उनका लुंड मुँह में नहीं लिया था उसका बदला लेकर नेहा को अपना लुंड चूसने ले लिए मचल रहे थे. छोटू बूचरा अब भी असमंजस में था की वो क्या करे कैसे रियेक्ट करे था तो वो भी उत्तेजित पर इतने बड़े बड़े आदमियों के बीच घुसकर नेहा को भोगने की उसमे हिम्मत नहीं थी. और दूसरी तरफ बेचारे गोपी काका जिनसे ये सब शुरू हुआ अब वो अलग कोने में खड़े यही सोच रहे थे की वो भी आगे बाद कर इस हवस के खेल में शामिल हो या कही कुछ गड़बड़ न हो जाए.

पर वह मौजूद मर्दो में एक मर्द ऐसा भी था जिसकी तरफ से अब तक कोई रिएक्शन देखने को नहीं मिला था और वो था पहलवान जोगिन्दर. पर उसके लंगोट में उभर आए तनाव को देख कर साफ़ पता चल रहा था की वो भी किस कदर उत्तेजित है. पर वो झुण्ड में शिकार करने वालो में से नहीं था उसे तो औरत को अकेले भोगने में मज़ा अत था वो भी पूरी तरह और अब उसके शिकार करने का समय हो गया था. वो अपनी जगह से उठाकर नेहा की तरफ चल दिया, जोगिन्दर को अत देख कन्हैया, हरबक्स, घनश्याम नेहा को छोड़कर ऐसे पीछे हैट गए जैसे जब किसी शेर को अत देख कर जंगली कुत्ते शिकार को छोड़कर पीछे हैट जाते है. पर नशेड़ी भोला तो अपनी hi धुन में था वो तो अब भी नेहक के होंठो को चूमने में जूता था जब तक उसकी कनपटी पर जोगिन्दर का ज़ोरदार झापड़ नहीं पड़ा. भोला बड़ी ताज़ी और गुस्से में पीछे पलटा पर जोगिन्दर को देख कर उतनी hi तेज़ी और शांति से अलग हैट गया. नेहा जो अब तक उन नौकरो के साथ वासना के उन्माद में डूबी आँखे बंद किये हुए थी अचानक से यु सबके हैट जाने से जैसे नींद से जगी और उसकी नज़र सीधा सामने खड़े जोगिन्दर पर पड़ी.

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मज़बूत कसरती बदन लम्बाई और ताकत में विक्रम और भीमा से भी बीस, और उस पर बदन पर बंधा एक छोटा सा लंगोट जिसमे से फूला हुआ लुंड साफ़ नज़र आ रहा था. ऐसे तगड़े हट्टे काटते पहलवान का मरदाना लुंड देखकर तो चरित्रवान से चरित्रवान औरत का चरित्र दोल जाए फिर यहाँ तो महा ठरकी नेहा थी तो उसकी नियत डोलना तो स्वाभाविक था.

जोगिन्दर को तो नेहा के पास जाने की ज़रूरत hi नहीं पड़ी वो खुद ऐडा से चलती हुई अपने कूल्हे मटकती हुई जोगिन्दर के करीब पहुंच गई. और बिना झिझक बिना शर्म के सीधा अपना हाथ लंगोट के ऊपर से hi उसके फूले हुए लुंड पर रख दिया और अपनी हथेली से उसे हौले हौले सहलाने मसलने लगी.

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जोगिन्दर अब भी जस का तस खड़ा था. पर अंदर hi अंदर वो भी उत्तेजित हो रहा था. नेहा की नाज़ुक हथेलियों की छुअन भर से जोगिन्दर का लुंड झटके पे झटके खाने लगा जो नेहा को अंदर hi अंदर और भी ज्यादा एक्ससिटेड कर रहा था. नेहा जल्द से जल्द इस लुंड को अपने हाथो में लेकर उसकी मोटाई उसकी कसावट उसकी नसों की गर्माहट को महसूस करना चाहती थी इसलिए उसने एक झटके में जोगिन्दर के लंगोट की गांठ खोल दी और उसके बदन के एकलौता नाम मात्रा का कपडा भी उसके बदन से जुड़ा होकर नीचे फर्श पर आ गिरा. जोगिन्दर का लुंड देखकर वह मौजूद बाकि सभी नौकरो का मुँह खुला का खुला रह गया. लंगोट के ऊपर से देख कर उन्होंने उसके लुंड के साइज का अनुमान तो लगाया था पर वास्तविक विशाल आकर उन्होंने आज देखा. इतने मज़बूत और मूसल लुंड के आगे अब उन्हें अपने लुंड बड़े छोटे लग रहे थे और जब तक नेहा जोगिन्दर के साथ किसी और को नेहा के सामने अपना लुंड नंगा करने की न हिम्मत थी न शर्म.

जोगिन्दर उस कमरे में नंगा होने वाला पहला मर्द था और ये तो तै था की वो आखिरी नहीं होने वाला था अभी इस कमरे में और भी कई लुंड नंगे होने वाले थे. और उन सभी लुँडो की मंज़िल बस एक hi थी. चाबियां तो अनेक थी वो भी अलग अलग साइज थी पर उन चाबियों को इस्तेमाल करने वाला टाला एक hi था. बस ये टाला इतनी चाबियां ले पाएगा ये बड़ा सवाल था.

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