A wedding ceremony in village - Page 5 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

वो आदमी एक बार नेहा से अलग होकर कही चला गया नेहा को उसके कमरे के एक कोने तक जाने की आहात सुनाई दी और फिर वापस आने की भी आहात सुनाई दी जैसे वो कुछ लेने गया था पर क्या लाया था वो नेहा की छूट की गर्मी को ठंडा करने के लिए, औरत की छूट की गर्मी को तो बस एक hi चीज ठंडा कर सकती मर्द का लुंड पर उसके लिए उसे कही जाने की क्या जरुरत थी वो तो उसके पंत के अंदर hi मौजूद था और अपनी गांड पर छुवन से नेहा ने उसके बड़े आकर को भी महसूस कर लिया था. पर अगर वो चीज लुंड नहीं थी तो क्या थी जो उसकी छूट की गर्मी को ठंडा कर दे.

नेहा ये सोच hi रही थी की नेहा को उस चीज का एहसास अपनी छूट पर हो गया जो वो आदमी लाया था और उस चीज की एक चुवान ने नेहा की छूट को अंदर तक रोमांचित कर दिया. नेहा ने जाने kyaa-kyaa कयास लगा लिए थे पर वो चीज कुछ और नहीं सेक्युबे थे जिसे उस आदमी ने सीधा नेहा की छूट के ऊपर रख दिया. बर्फ की ठंडी चुवान से नेहा को एक झटका सा लगा उसने सोचा भी नहीं था की वो बर्फ के टुकड़ो से उसकी छूट की गर्मी को ठंडा करेगा. वो लगातार उसे नेहा की छूट के ird-gird घुमा रहा था.

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नेहा की पंतय बर्फ के पानी से आगे से गीली और ठंडी हो गयी थी. घूमते घूमते वो सेक्युबे पिघल कर छोटा हो गया, नेहा भी थोड़ा रिलैक्स हुई की चलो बर्फ से मुक्ति मिली पर अभी तो ये शुरुआत थी. उस सेक्युबे के पिघलते hi उस आदमी ने दो और क्यूब उठाए और इस बार उन्हें नही की छूट पर पैंट के ऊपर से रगड़ने की बजाए नेहा की पंतय के अंदर हाथ डालकर सीधा नेहा की छूट के मुहाने पर रख दिया.

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नेहा को 440 वाल्ट का झटका लगा जिस बर्फ को इंसान 10 सेकंड के लिए हाथ में नहीं पकड़ सकता वो सीधा उसकी छूट के मुँह पर राखी थी. नेहा आगे की ठंडक को बर्दाश्त करने की कोशिश कर hi रही थी की उस आदमी ने दो और बर्फ के टुकड़े उठाकर पीछे से उसकी पंतय में हाथ डालकर उसकी गांड के छेड़ पर रख दिए. नेहा की पंतय aage-peechhe दोनों तरफ से एकदम ठंडी पद गयी थी. नेहा की टांगो के बीच का हिस्सा aage-peechhe दोनों तरफ से सुन्न सा पद गया था.

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बर्फ के कुछ टुकड़े इंसान को इस कदर बेबस और बेचैन कर सकते है ये नेहा को भी आज पता चला. नेहा की टाँगे भी सुन्न पद गयी थी उससे अब खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पर हाथो से बंधे होने की वजह से वो वह तंगी सी कड़ी थी उसके पेअर तो कबका उसका साथ छोड़ गए थे. नीचे बर्फ के चार टुकड़ो ने नेहा की छूट और गांड की तो बंद बजा hi राखी थी अब उस आदमी ने एक बर्फ का टुकड़ा अपने मुँह में भरा और अपना मुँह नेहा के ताने हुआ निपल पर रख दिया.

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वो आदमी अपने मुँह में भारी बर्फ को नेहा के निप्पल के ird-gird घूमने लगा. नीचे से नेहा की छूट और गांड तो ठंडी पद hi चुकी थी अब नेहा की चूचिया भी बर्फ से ठंडी पद गयी थी. नेहा को पहली बार एहसास हुआ था की बड़सम क्या होता है. कैसे सेक्स में अपने पार्टनर को तकलीफ देकर भी सेक्स का मजा उठाया जा सकता है. वो आदमी एक चुकी से दूसरी चुकी पर मुँह लेजाकर उसपर बर्फ घिसे जा रहा था. नेहा के मुँह से बस आह की आवाज hi निकल पा रही थी वो भी घुटी घुटी सी.

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नेहा के स्तनों को बर्फ से गीला करते हुए वो अपना चेहरा ऊपर की तरफ लाने लगा और नेहा के क्लीवेज से होते हुए नेहा की गर्दन पर आकर रुक गया और अपने मुँह में दबी उस बर्फ को नेहा की सुराहीदार पतली गर्दन पर रगड़ने लगा. नेहा अपनी गर्दन को upar-neeche करके बचने का भरसक प्रयास कर रही थी पर वो बेबस थी. नेहा की गर्दन भी ठंडी पद चुकी थी और उसमे से पानी की बूंदे बह कर नीचे उसके स्तनों के बीच की दरार से बहती हुई उसकी कमर की गहरी नाभि तक आ रही थी.

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नेहा की गर्दन से भी खेल कर उसे ठंडा करके वो आदमी और ऊपर नेहा के चेहरे के सामने आ गया अभी भी थोड़ी बर्फ उसके मुँह में बची थी. उसने अब उस बर्फ को अपने होंठो में दबाए दबाए नेहा के चेहरे पर घिसना शुरू कर दिया कभी गालो पर कभी माथे पर कभी नाक पर कभी रिबन के ऊपर से नेहा की पलकों पर.

नेहा के चेहरे का हर हिस्सा बर्फ से ठंडा पद गया था और गीला हो गया था. आखिर में उस आदमी ने उस टुकड़े को नेहा के होंठो पर रख दिया और नेहा के होंठो पर घिसने लगा नेहा ने भी जवाब में अपने होंठ खोल दिए और उस आदमी ने वो बचा हुआ बर्फ का टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर धकेल दिया और वो टुकड़ा नेहा के मुँह के अंदर घुल कर उसके अंदर समा गया.

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बर्फ तो नेहा के अंदर समा गयी थी पर उनके होंठ अब भी जुड़े थे एक बार फिर वो एक पैशनेट किश में डूब गए थे. नेहा ने आज तक कई मर्दो को किश करा था पर जो बात इस किश में थी वो नेहा को आज तक महसूस नहीं हुई थी. उस आदमी में भूरा जैसी ताकत थी कल्लू जैसी औरत के जिस्म की भूख और छोटू जैसी मासूमियत एक मर्द का परफेक्ट कॉम्बिनेशन था उसमे. नेहा उसे अपनी बाहो में भर लेना चाहती थी पर हाथ बंधे होने के कारण वो ऐसा भी नहीं कर सकती थी. काफी देर तक दोनों यही एक दूसरे में फ्रेंच किश करते हुआ खोए रहे, नेहा की पंतय की बर्फ भी अब पिघल कर paani-paani हो चुकी थी.

उस आदमी ने खुद को नेहा से अलग करा और नेहा के सामने घुटनों के बाल बैठ गया. अब नेहा की बर्फ से पूरी तरह भीग चुकी पंतय उसकी आँखों के सामने थी और गीले कपडे में से नेहा की छूट की फांक भी साफ़ नज़र आ रही थी. उस आदमी ने अपनी उंगलिया नेहा की पंतय में फंसे, नेहा भी दम साध कर तैयार हो गयी अपने जिस्म के आखिरी कपडे के उतर जाने के लिए आज तक वो कई मर्दो के सामने नंगी हुई थी पर कभी किसी ऐसे मर्द के सामने नंगी नहीं हुई जिसकी उसने शकल तक नहीं देखि. उस आदमी ने धीमे धीमे नेहा की पंतय को नीचे सरकना शुरू कर दिया और नेहा की पंतय को उसके पैरो से निकलकर अपने चेहरे से लगा लिया. बर्फ से ठंडी हो चुकी उस पंतय में से आती नही की छूट के रूस की खुशबू किसी को भी मदहोश करदे वो भी उस महक में मदहोश हो गया. कुछ देर पहले दुल्हन के लिबाज़ में सज संवर कर आई नेहा अब हाथ बांधे आँखे में पट्टी बंधे वह एक अनजान जगह पर नंगी कड़ी थी.

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उसने वो पंतय अपने कोटे की जेब में दाल लिया और खुद अपना चेहरा नेहा की छूट के करीब ले आया. नेहा ने भी अपने चेहरे के saath-saath अपनी छूट का भी अच्छे से मेकअप करा था शायद उसे पता था की आज उसके चेहरे की मुँह दिखाई के saath-saath उसकी छूट की छूट चटाई भी होने वाली है इसीलिए बाल का एक कटरा भी छूट पर नहीं था. बर्फ में दबे दबे छूट नार्मल से थोड़ा ज्यादा फूल गयी थी और एकदम गुलाबी और थोड़ी नीली पद गयी थी. कुछ यही हाल पीछे नेहा की गांड का भी था. बाथरूम में भूरा से बिना तेल के गांड मरवा कर नेहा काफी दर गयी थी इसीलिए आज पहले से अपनी गांड में तेल लगाकर आई थी क्या पता वो स्ट्रेंजर नवाबी शौक रखता हो.

नेहा की छूट के करीब अपना मुंह लाकर उसने एक पल के लिए नेहा की छूट की महक को सुंघा और फिर अपने होंठ नेहा की छूट पर रख दिए. उसने नेहा की ठंडी पद चुकी फूली हुई छूट की फांको को अपने होंठो में दबा लिया और उन्हें अपने होंठो में लेकर चूमने लगा. सुन्न पद चुके नेहा के पैरो में एक बार फिर जान आ गयी ठंडी पद चुकी नेहा की छूट उस आदमी के होंठो की गर्मी से गरम होने लगी.

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Wo aadmi nehaa ke neeche ke hontho ko apne upar ke hontho me bharkar choos rahaa tha. nehaa apne haatho ko aazad karne ki bharsak koshish kar rahi thi vo is shakshaa ke sir ko apni chut par dabaane ke lie maari jaa rahi thi par laakh koshish ke baad bhi vo aisaa nahi kar paa rahi thi. chut ko chooste chooste usne apni jeebh nehaa ki chut ke andar daakhil kar di. uski jeebh nehaa ke chut ki deewaro se ragadti hui andar tak pahunch gayi.

Uski jeebh kafi lumbi thi jo nehaa ki chut me kafk andar tak jaa rahi thi aur uski halki-halki daadi bhi thi jo nehaa ki chut ke baahar ke hisse me ghis kar use aur uttejit kar rahi thi. nehaa kaa uttejnaa ke maare bura haal thaa wo uttejnaa me uchak kar apne panjo par khadi ho gayi thi. vo aadmi lagaataar apni jeebh se nehaa ki chut ko chhod rahaa tha. nehaa ki saanse tej-tej chal rahi thi khade-khade hi uske pet me aithan si ho rahi thi। uski chut ki phaanko me kapkapi si ho rahi thi. vo aadmi bhi samajh gayaa ki nehaa jhadne ke kareeb hai usne peechhe se nehaa ki gaand ko kaskar tham liyaa aur peechhe se dabaav daalkar nehaa ki chut ko apne muh par kaskar dabaa liya. aur teji se apni jeebh ko nehaa ki chut me gol-gol ghumane laga.

Nehaa bhi jaadaa der tak ks chudaai ko bardaashat naa kar paai aur nehaa ki chut se kaamrus bahar behnaa shuru ho gaya, par bajae nehaa ki chut se apnaa chehraa hataane ke usne apnaa munh aur kaskar nehaa ki chut me dabaa diyaa aur nehaa ki chut se behtaa kaamrus uske muh me samane laga. vo shakshaa to us juice ko aise pi rahaa thaa jaise barso kaa pyaasaa ho aur nehaa ki chut se behtaa paani peekar hi apni pyaas bujhaa rahaa ho. nehaa ke juice kaa katra katra us aadmi ke muh me samaa gayaa tha. aur us aadmi ne chat chat kar nehaa ki chut ko andar aur bahar dono taraf se achhi tarah se saaf kar diyaa tha.

Nehaa ki uttejnaa kaafi had tak shaant pad chuki thi aur uskaa shareer haaphta huaa vahi zanjeer se bandha latkaa huaa tha. vo shakshaa ab bhi nehaa ki chut se muh satae baithaa thaa. chut se nikle kaamrus kaa ek-ek katra usne apne muh me bhar liyaa tha. Iske baad vo ek baar phir nehaa ke saamne khadaa ho gayaa aur apne honth nehaa ke hontho par rakh die nehaa ke gaalo par halkaa saa dabaav daalaa jisse uske honth khud baa khud khul gaye, phir usne apne hontho ko sikodaa aur apne muh me bhara nehaa kaa kaamrus nehaa ke muh ke andar thook diya. neha ne ab tak doosro kaa lund to muh me liyaa thaa par apnaa khud kaa juice kabhi taste nahi karaa tha. kaamrus aur us shaksha ke thook kaa milajula taste nehaa ke muh me bhar gayaa thaa nehaa to waise bhi is tarah kaa dirty sex imagine karke hi aai thi isilie usne apnaa chehraa hataane ki bilkul bhi koshish nahi ki। thook aur apnaa khud kaa juice nehaa ke halak se hotaa huaa uske andar samaa gaya.

Nehaa ke thook gatak lene ke baad us aadmi ne bhi apne honth nehaa se alag kar lie. jhad jaane ke baad barf ki thandak ki wajah se nehaa ko bahut tej toilet lag aai thi. aur ab usse control bhi nahi ho rahaa tha.

nehaa- mujhe bahut kaske toilet lagi hai please mere haath khol do mujhe toilet jaanaa hai please master.

maater- mootne jaanaa hai to yahi moot le khade-khade.

nehaa- yahaa nahi nahi please khol do naa toilet karke phir baandh dena.

master- chal theek hai teri toilet ke lie kuchh aur cheez dimaag me aa rahi hai main tera haath khol rahaa hu par khabardaar apni aankho se blindfold hataaya to.

nehaa- hm nahin haataungi।

Us aadmi ne nehaa ke haath khol die par aankh par patti bandhe bandhe nehaa toilet karne kaise jaa sakti thi.

nehaa- aapne haath to khol die par aankh par patti bandhe hue main toilet karne kaise jaaungi.

master- tu toilet neeche se karti hai yaa aankho se toilet karne ke lie chut khuli honi chaahie aankhe nahi.

nehaa- par toilet karne ki jagah kaise dhundoongi mai.

master- wahaa main tujhe le chaltaa hu par tujhe wahaan is tarah le jaaungaa jo waastav me teri aukaat hai jo sach me tu hai.
 
वो आदमी एक मिनट के लिए कही गया और फिर वापस आकर नेहा के गले में कुछ बाँधने लगा.

नेहा- ये क्या है.

मास्टर- पत्ता कुटिया का पत्ता डॉकलेर तेरी औकात एक कुटिया की है और बिना कुत्ते के पत्ते के कुटिया किस काम की लोग जब कुत्तो को बाहर मुताने ले जाते है तो गले में पत्ता बाँध कर ले जाते है तू भी ऐसे hi चलेगी मेरे साथ.

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उस आदमी की ऐसी बाते सुनकर नेहा को अंदर से बड़ी किनकी फीलिंग हो रही थी एक अलग तरह की फंतासी थी जो आज वो फेस कर रही थी उसने आज तक बड़सम के बारे में बस सूना था आज उसे फेस भी कर लिया. उस आदमी ने नेहा के गले में कुत्ते का पत्ता बाँध दिया और उससे एक चैन भी जोड़ दी.

मास्टर- चल अब तुझे मुताने ले चलता हु.

नेहा चुपचाप चलने को हुई पर अचानक एक तमाचा उसके गाल पर पड़ा. तमाचा इतना जोरदार था की नेहा ज़मीन पर गिर पड़ी. अचानक से पड़े इस झापड़ से नेहा को कुछ समझ नहीं आया की क्या गलती हो गयी उससे.

मास्टर- कुत्ता दो पैरों पर चलता है या चार पैरो पर.

नेहा- चार पैरो पर.

मास्टर- फिर तू दो पैरो पर कैसे चली जा रही है चल चौपया बन.

नेहा को भी अपनी गलती समझ आ गयी वो तुरंत अपने हाथ आगे ज़मीन पर करके चौपाया बन गयी, उसने दोगी पोजीशन में सेक्स तो कई बार करा था पर सच में दोगी कभी नहीं बानी थी.

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मास्टर- शाबाश अब तू बानी सच मेल मेरी कुटिया चल जरा भौंक कर दिखा और मेरी कुटिया की तरह जीभ निकला कर दिखा.

नेहा के लिए ये अलग तरह की उत्तेजना थी उसे एक कुत्ते की तरह ट्रीट करना उसे भौकने को कहना.

नेहा- भौ भौ वू भौ भौ.

मास्टर- हाहाहा मजा आ गया क्या मस्त कुटिया मिली है चल तुझे मुतवा कर आता हु चल मेरे peechhe-peechhe चौपाया बनकर चली आ.

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वो आदमी उसे गले में पत्ता बंधे कॉटेज के बहार ले आया, उस पल को पार करके वो तालाब के दूसरी तरफ आ गए. चाँद की दूधिया रौशनी में पूरी तरह नंगी गले में पत्ता डाले कुत्ते की तरह चौपाया चल रही नेहा बड़ी सेडक्टिव लग रही थी. नेहा को कुत्ते की तरह chalte-chalate वो एक पेड़ के पास ले आया.

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मास्टर- ले आ गए हम तेरी टॉयलेट की जगह पर मूट ले यहाँ पर.

नेहा- ये तो हम कही झाड़ियों के बीच है यहाँ कैसे.

मास्टर- तो यहाँ कौन सा कोई तुझे मुत्ते देख रहा है, कर ले जो कारण है यहाँ.

नेहा मूतने के लिए जैसे hi बैठने को हुई एक तेज सन्ति उसके चूतादो पर पड़ी नेहा की हलकी सी चीख निकल गयी उसे दर्द भी बहुत हुआ अब उससे क्या गलती हो गयी.

नेहा- अब मैंने क्या गलत कर दिया.

मास्टर- कभी किसी कुत्ते को मुत्ते नहीं देखा क्या कुटिया कैसे मुट्ठी है एक तंग उठाकर, तू भी मेरी कुटिया है ना तो वैसे hi मूट जैसे एक कुटिया मुट्ठी है एक तंग उठा और पेड़ पर धार मार.

नेहा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की उसे इस तरह मूतना पड़ेगा कुत्ते की तरह एक तंग उठाकर, पर जैसा जैसा वो कह रहा था वैसा hi नेहा को करना पड़ेगा नेहा ने चौपाया बने बने hi अपनी एक तंग उठाई और मूतना शुरू कर दिया. पेशाब की धार इतनी तेज थी सीधा पेड़ को भिगो रही थी. पर jaise-jaise धार धीमी पड़ी वो नेहा की टांगो को गीला करने लगी. नेहा की टाँगे अपनी hi पेशाब से भीग गयी बचपन में तो उसने बहुत बार खुद को अपनी पेशाब से गीला कर लिया था पर जवानी में ऐसा पहली बार हुआ शायद इस तरह तंग उठाकर मूतने की वजह से.

पेशाब करके नेहा तो शांत हो गयी थी पर अभी तक वो चौपाया hi बानी हुई थी क्युकी उस आदमी ने उसे उठने को नहीं कहा था और बिना उसकी मर्जी के उसमे उठने की हिम्मत नहीं थी क्या पता वो फिर वो तमाचा रसीद कर दे. पर इस बार नेहा को उठने की जरुरत hi नहीं पड़ी क्युकी उसके कुछ करने से पहले hi उस आदमी ने खुद उसे अपनी बाहो में उठा लिया और नेहा के हलके फुल्के बदन को अपने हट्टे काटते कंधो में लटका लिया.

नेहा के हाथ उस शख्स के कपड़ो को छूकर महसूस कर रहे थे. अब तक नेहा के हाथ बंधे होने से वो उसे छू भी नहीं सकीय थी अब नेहा महसूस कर रही थी की उसने एक सूट पेहेन रखा था और वो भी चिकना और मंहगा. वो नेहा को अपनी कंधे पर लड़े हुए तालाब के किनारे तक ले आया और नेहा को वही ज़मीन पर पानी में बिठा दिया. नेहा को अपनी चूतादो के नीचे तालाब के किनारे का पानी और रेट साफ़ महसूस हो रही थी. नेहा की आँखे भले hi बंद थी पर उसके कान aas-paas की आवाज़ से सब अंदाजा लगा रहे थे. नेहा को हवाओ के सन्न सन्न बहने की और पानी के कल कल बहने की आवाज साफ़ सुनाई दे रही.

इन्ही आवाजों के बीच एक आवाज ने नेहा का ध्यान अपनी तरफ खींचा ये बेल्ट के बुकुले के खुलने की हलकी सी आवाज थी और उसके बाद चैन के खुलने की आवाज. इन आवाजों से अंदाजा लगाना बहुत आसान था की ये आवाजे कहा से आ रही है. अब तक नेहा का ek-ek कपडा उसके शरीर से अलग कर देने वाला ये बन्दा अब अपने किंग कोबरा को आजाद कर रहा था. चैन खुलने की आवाज के बाद नेहा को पंत उतरने की आवाज आई मतलब वो अपना पंत उतार चुका था और उसके बाद अपना अंडरवियर.

नेहा इसी इंतजार में बैठी थी की कब वो अपना किंग कोबरा उसके पास ले आएगा या तो उसे उसके मुँह में डालेगा या छूट में या फिर अगर गांड का शौक़ीन होगा तो गांड में. पता नहीं वो नेहा के तीन छेड़ो में से किस छेड़ पर पहला हमला करेगा. नेहा इस सोच में डूबी hi थी की उसे अपने बालो पर उस आदमी की पकड़ महसूस हुई. उसने बालो से खींचकर उसे खड़ा किया और इससे पहले वो कुछ समझती उससे पहले hi उस आदमी ने उसे एक बार फिर अपनी बाहो में उठा लिया और कुछ समझने से पहले hi उसे घुमाकर उलटा कर दिया. अब नेहा की टाँगे ऊपर थी और सर नीचे.

उस आदमी ने नेहा को कमर से कसकर पकड़ लिया पहले तो नेहा को इस तरह उलटे लटके हुए दर लगा फिर जल्द hi उसे अपने चेहरे पर किसी सख्त चीज का स्पर्श महसूस हुआ जो tej-tej झटके खा रही थी और उसके चेहरे पर यहाँ वहा छू रही थी. नेहा को समझते देर ना लगी की ये क्या है ये उस आदमी का लुंड था. वो लैंड नेहा के होंठो पर भी टच हो रहा था. नेहा ने आज तक कई मर्दो के लुंड चूसे थे पर ऐसी अजीब पोजीशन में कभी नहीं हलाकि उसकी दिली फंतासी थी की इस तरह की वेयर्ड पोजीशन में सेक्स का मजा लिया जाए.

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उस आदमी ने नीचे से अपनी कमर हिलाकर अपने लुंड का दबाव नेहा के होंठो पर डाला और नेहा ने भी उसके इशारे को समझते हुआ अपने होंठ खोल दिए, उस आदमी का लुंड नेहा की उम्मीद से भी कही ज्यादा लुम्बा था शायद भूरा के लुंड से भी ज्यादा पर भीमा के लुंड के बराबर. उसका लुंड नेहा के मुंह के अंदर समा गया. नेहा के होंठो की गर्मी पाकर उसका लुंड और फूलने लगा. दूसरी तरफ ऊपर उस आदमी ने भी अपने होंठ एक बार फिर नेहा की छूट पर रख दिए और अपनी जीभ बहार निकलकर नेहा की छूट को चाटने लगा. एक बार फिर उसके होंठो को अपनी छूट पर महसूस कर नेहा के होंठ और खुल गए और इसका लाभ उठाकर उस आदमी ने अपनी कमर का एक तेज झटका आगे को मारा और पूरा का पूरा लुंड नेहा के हलक में उतार गया. नेहा का तो सास लेना भी मुश्किल हो गया.

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एक तो सर नीचे होने से नेहा को वैसे hi अजीब लग रहा था और अब हलक में इतना मोटा लुंड. नेहा की तो हालत खराब हो गयी उसकी नाक तक से पानी निकलने लगा. आँखे भी आसुओ से दबदबा आई. उस आदमी ने भी नेहा की ये हालत देख अपना लुंड थोड़ा बाहर खींच लिया पर रखा नेहा के मुंह के अंदर hi. और खुद नेहा की छूट को चाट चाट कर उसे वापस से उत्तेजित करने लगा. धीमे धीमे नेहा भी रिलैक्स होने लगी उसमे वापस से जोश पैदा होने लगा और अब उसने अपने होंठ को उस आदमी के लुंड पर aage-peechhe करना शुरू कर दिया. दोनों स्टैंडिंग 69 पोजीशन में एक दुसरे के जननांग को चूस रहे थे.

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नेहा जैसी कॉक सुकेर तो वहां कोई नहीं थी जिसे ऐसा अनुभव हो और ये अनुभव उसकी चूसै में साफ़ झलक रहा था. मुंह में भरे भरे और आँखों में पट्टी बंधी होने के बावजूद वो अपनी जीभ लुंड पर आगे से पीछे तक फिरा रही थी. लुंड की कौन सी नस आदमी को सबसे ज्यादा उत्तेजित करती है नेहा अच्छे से जानती थी और वो उस शिक्षा की उत्तेजना को चरम तक पहुंचा रही थी और इस उत्तेजना में वो भी पिछली बार से भी ज्यादा जोश में नेहा की छूट को चाट रहा था. पर उलटे लटके होने की वजह से नेहा उस आदमी की बॉल्स से नहीं खेल पा रही थी. पर फिर भी उस आदमी के लुंड की ek-ek नस फूल चुकी थी उनके अंदर भरा वीर्य बाहर आने को बेताब था. और एक तेज फ्लो के साथ उसके लुंड ने अपना वीर्य बहार उगलना शुरू कर दिया. नेहा ना तो अपना मुंह पीछे हटाने की हालत में थी और ना शायद पीछे हटाना चाहती थी. उस आदमी का पूरा वीर्य नेहा के मुंह में भर गया. उस आदमी का वीर्य बहुत गाड़ा था. लुंड छोटा हो गया था पर अब भी नेहा के मुंह में था और नेहा का मुंह उस गाड़े वीर्य से तर बतर हो गया था. दूसरी तरफ नेहा भी दूसरी बार अपना ओर्गास्म पा चुकी थी और उस शिक्षा ने भी एक बार फिर नेहा का सारा जूस अपनी जीभ से चाट लिया. नेहा को अपनी टक्कर का सुकेर मिला था जिसने उसे do-do बार झड़ने पर मजबूर कर दिया.

झड़ने के बाद उस आदमी ने नेहा को वापस से ज़मीन पर उतार दिया ुर अपने कपडे वापस से पेहेन्ने लगा. नेहा उसके कपडे पेहेन्ने की आहात को सुन रही थी. उसे लगा था वो शायद आज चुद जाएगी पर ऐसा नहीं हुआ. वो अब भी वही पानी में बैठी थी और उस आदमी के कुछ कहने का इंतजार कर रही थी.

मास्टर- मज़ा आ गया आज तेरे साथ आज का हमारा सेशन यही तक का था अब तू जा यहाँ से अबसे 5 मिनट बाद तू अपना ब्लैंडफोल्ड हटा देना और चुपचाप यहाँ से वापस हवेली की तरफ चले जाना.

नेहा का दिमाग घूम गया ये शब्द सुनकर क्युकी वो अब भी वह नंगी बैठी थी.

नेहा- पर मेरे कपडे मैं इस वक़्त नंगी हु ऐसे कैसे जाउंगी किसीने देख लिया तो.

मास्टर- इस खेल के शुरू में मैंने क्या कहा कोई अगर मगर नहीं जैसा कहा जाए बिना किसी सवाल बिना कुछ सोचे बस तुम्हे फॉलो करना है. ये समझ लो ये तुम्हारा अगला टास्क है तुम्हे ऐसे hi नंगे अपने कमरे तक जाना है और वैसे भी रात इतनी हो चुकी है सब सो चुके है इस वक़्त कौन जाग रहा होगा तुम्हे देखने के लिए.

नेहा- पर (इस पर के साथ hi एक तमाचा नेहा के गाल पर रसीद हो गया.)

मास्टर- और कुछ कहना है.

नेहा- नहीं

मास्टर- गुड़ तो अबसे 5 मिनट बाद अपना ब्लैंडफोल्ड खोल देना.

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नेहा वही बैठी रही उसे कदमो के दूर जाने की आवाज़े सुनाई दे रही थी वो शिक्षा जा रहा था. 5 मिनट बाद नेहा ने अपनी आँखे खोली वह कोई नहीं था. वो मोबाइल नेहा के सामने hi रखा था जिसे लेकर वो यहाँ आई थी. नेहा ने एक नज़र खुद को ऊपर से नीचे तक देखा. वो यहाँ दुल्हन बनकर आई थी और अब झील के किनारे नंगी हालत में बैठी थी. नेहा उठकर कड़ी हो गयी वो मोबाइल उठा लिया एक नज़र idhar-udhar देखा और वापस ु पेड़ो के बीचे से होते हुए हवेली की तरफ चल दी. नेहा उन झाड़ियों से बाहर आई और एक नज़र सर्वेंट क़्वार्टर और हवेली के गेट की तरफ देखा कही भी किसी के जाग रहे होने का नामोनिशान तक नहीं था. और आते हुए उसने देखा था की भीमा भी सो चुका था शायद अब भी सो रहा होगा.

नेहा भीमा की झोपडी के करीब पहुंची hi थी की लकड़ियों में आग जलाता भीमा उसे दिख गया. भीमा ने भी नेहा को वहा खड़ा देख लिया. भीमा ने नेहा को ऊपर से नीचे तक देखा. इस तरह इतनी रात में नेहा को यहाँ इस सुनसान जगह पर ऐसे नंगे खड़े देख भीमा शॉकेड रह गया.

नेहा भी जैसे जड़ सी हो गयी थी दोनों की नज़रे एक दुसरे पर तिकी हुई थी नेहा को समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे रियेक्ट करे क्यों baar-baar इस तरह भीमा और उसका आमना सामना हो रहा था वो भी ऐसी उत्तेजक सीटुएशन्स में. दूसरी तरफ पिछले कई दिनों से नेहा ने उसकी हालत खराब कर राखी थी कभी उसके सामने कल्लू से छूट चटवा कर कभी उसके सामने अपनी पंतय उतारकर और अब इस तरह आधी रात में नंगे उसकी झोपडी के करीब आकर. नेहा अपने हाथो से अपना नंगापन छुपाने की कोशिश कर रही थी.

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भीमा को लग रहा था की नेहा भी उसकी तरफ आकर्षित हो गयी है और शायद वो भी उसके साथ सम्बन्ध बनाने के लिए hi इस तरह से उसे सिग्नल दे रही है. ये समझते हुए भीमा अपनी जगह से उठा और नेहा की तरफ बड़ा hi था की नेहा दर कर वहा से भाग कड़ी हुई. भीमा इस तरह अचानक से नेहा को भागते देख खड़ा रह गया उसे समझ नहीं आ रहा था की क्यों नेहा इस तरह नंगी होकर उसकी झोपडी के पास आई और फिर क्यों अचानक से भाग गयी. आखिर चल क्या रहा था उसके मन में पर भीमा इतना तो समझ गया था की नेहा उसे खुला इनविटेशन दे रही है चुदाई का आज नहीं तो कल वो उससे जरूर छुडवाएगी शायद वो दर रही है या उसे चिड़ा रही है.

फिलहाल तो नेहा उसकी आँखों से ओझल होकर हवेली के अंदर जा चुकी थी पर पीछे भीमा को एक बार फिर उत्तेजित छोड़ गयी. अब ऐसी सिचुएशन में नेहा की वो पंतय hi उसकी उत्तेजना को ठंडा करने का एक मात्रा जरिया था. भीमा ने अपनी लुंगी खोली अंदर जाकर नेहा की पंतय को एक बार फिर अपने लुंड पर लपेट लिया. और नेहा के नंगे बदन और शोभा के अपने लुंड पर तिलक करने को याद कर करके hi अपने लुंड पर नेहा की पंतय को घिसने लगा. नेहा की पंतय से नेहा को छोड़ने का एहसास हो रहा था. वो ऐसे hi अपना लुंड मसलता रहा जब तक उसने अपना माल नेहा की पंतय पर hi नहीं निकल दिया.

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भीमा की उत्तेजना शांत हो गयी थी उसने आँखे बंद कर ली पर बंद आँखों में भी उसके सामने नेहा का नंगा मादक बदन hi घूम रहा था. नेहा के जिस्म की मादकता में दुबे हुए hi भीमा लेता लेता सो गया. दूसरी तरफ भीमा को अपने नंगेपन के दर्शन करा कर नेहा काफी दर गयी वो एक जमादार के साथ तो किसी भी कीमत पर सेक्स नहीं कर सकती थी और अब इस हालत में और किसी के सामने नहीं पढ़ना चाहती थी. वो भागती हुई अपने कमरे की तरफ चली जा रही थी अचानक उसने दो लोगो को हस्ते हुए सामने से आते देखा जिनसे छुपने के लिए वो एक पिलर के पीछे छुप गयी.

वो लालू और देव थे जो शबाना के कमरे से निकलकर आ रहे थे.

लालू- साला मजा आ गया आज तो मस्त माल थी.

देव- भाई हमारा भी ख़याल रखना हमने भी बड़ी म्हणत करि है.

लालू- अरे बिलकुल भाई तरबूज कटा है तो अब सबमे बांटेगा.

देव- हाःहाहा

दोनों हस्ते हु वह से चले गए नेहा यही सोच रही थी की ये दोनों क्या बात कर रहे थे किसके बारे में बात कर रहे है तरबूज माल. पता नहीं इनकी बातें यही जाने पर अगर लालू और देव यहाँ है तो वो शिक्षा ये तो नहीं हो सकते. नेहा भागकर लौबी में पहुँच गयी. एक नज़र उसने शबाना के रूम की तरफ देखा और मन hi मन खुश हुई की आज ज़रूर शबाना ने उसकी कोचिंग के दम पर धामु से सम्भोग कर hi लिया होगा. उसे पता भी नहीं की उस दरवाजे के पीछे शबाना के साथ kyaa-kyaa हो गया वो किस हालत में वहा पड़ी है. नेहा ने शबाना के कमरे में देखा पर फिर रुक गयी की पता नहीं धामु और शबाना किस हालत में हो अभी झाकना ठीक नहीं है. इसलिए वो तुरंत नीतू आरती के कमरे में घुस गयी और जो कपडे वो पहले पहने थी उन्हें वापस से पेहेन लिया. और लेटकर अभी जो उसके साथ हुआ वो याद करने लगी साथ hi ये भी सोच रही थी की क्यों baar-baar भीमा और वो एक दुसरे के सामने आ जाते है आखिर किस्मत हम दोनों से चाहती क्या है. क्या सोच रहा होगा वो मेरे बारे में की इतनी रात में मैं वहाँ नंगी क्या कर रही थी. किसी को कुछ बता दिया तो अरे वो कैसे बताएगा वो तो गंगा है.

ये सोचते सोचते कब नेहा की आँख लग गयी उसे पता hi नहीं चला.
 
ये डांस पार्टी उस हवेली में जैसे वासना का तूफ़ान ले आई थी किसी की अस्मत उसकी मर्ज़ी के बिना तार तार कर दी गई किसी की हवस की ाग्ने एक पाक रिश्ते की मर्यादा को तार तार कर दिया और किसी के लिए अपनी मर्यादा तार तार करना भी एक खिलवाड़ था बस एक फंतासी थी. पर इन सबसे इतर एक पाक मुहोबत को बचने की जद्दोजहद में एक प्रेमिका हर मुसीबत उठाने को तैयार थी अपनी मर्यादा की क़ुरबानी देने को भी तैयार थी नीतू जो राज के जीवन की रक्षा के लिए एक ऐसा संकल्प कर चुकी थी जिसका क्या परिणाम आने वाला था ये वो भी नहीं जानती थी और अपनी सहेली के इस बुरे वक़्त में आरती एक सच्चे दोस्त की तरह कंधे से कन्धा मिला के कड़ी थी. नीतू और आरती अघोरी के साथ उस शिव मंदिर की तरफ बड़े चले जा रहे थे पर वो सिर्फ तीन नहीं थे उनके पीछे वो साया भी था जो उस तूफ़ान वाली रात आरती और उस गिरते पेड़ के बीच आ गया था पर वो आरती से एक नियत दूरी बनाए था क्युकी आरती नीतू के साथ वो अघोरी भी था जो एक आत्मा को आसानी से महसूस कर लेता और अभी वो अघोरी के साथ उलझना नहीं चाहता था.

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नीतू और आरती अघोरी के साथ उस शिव मंदिर तक पहुंच गए उस शिव मंदिर के पास पहुंच कर आरती को कुछ अजीब सा अनुभव हो रहा था जैसे इस शिव मंदिर से उसका कोई नाता है उसके कदम जैसे उस मंदिर के दरवाज़े पर hi ठिठक से गए थे, पर अघोरी और नीतू तो उस मंदिर के अंदर दाखिल हो गए. वो देखने में छोटा मोटा मंदिर था पर उस मंदिर की महत्ता उसके आकर से नहीं उसके अंदर विराजमान शिवलिंग की दिव्यता से थी और उस शिवलिंग का आस पास के कई गांवो में विशेष महत्व था दूर दूर से लोग वह मन्नत मांगने आते थे. अघोरी नीतू को इस मंदिर मि महत्ता समझा रहा था पर आरती अब भी जड़ सी मंदिर के बहार hi कड़ी थी. मंदिर के अंदर अघोरी ने शिवलिंग के रुद्राभिषेक की तैयारी शुरू कर दी नीतू भी इस काम में उनकी मदद कर रही थी. रुद्राभिषेक की पूरी तैयारी हो जाने के बाद अघोरी और नीतू वही ज़मीन पर बैठ गए तब उनका ध्यान बहार कड़ी आरती पर गया.

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अघोरी: क्या बात है आप बहार क्यों कड़ी है ये भगवान् शिव के रुद्राभिषेक की पूजा है कोई तंत्र साधना नहीं और पूजा में कोई भी शामिल हो सकता है इसलिए आप भी हमारे साथ इस पूजा में शामिल हो सकती है. अंदर आ जाइये और हमारे साथ इस रुद्राभिषेक में शामिल होकर भगवान् शिव से प्रार्थना करिये की आपकी सहेली के प्रेमी के जीवन पर आए संकट को दूर करने के लिए होने वाली तनरा क्रिया में भगवान् शिव अपना ाशितवाद प्रदान करे.

नीतू: हम्म आरती आओ न अंदर बहार क्यों कड़ी हो यु बट बानी.

आरती: हम्म है आती हु पता नहीं ऐसा लगता है जैसे इस मंदिर से मेरा कोई रिश्ता है.

नीतू: क्या कुछ भी तुम यहाँ पहली बार आई हो कुछ भी मत सोचो चलो अंदर आओ.

आरती भी मंदिर के अंदर आ गई, मंदिर के अंदर इस शिवलिंग पर नज़र पड़ते hi आरती को उसमे एक तेज़ प्रकाश सा निकलता दिखा ऐसा लगा जैसे उस अँधेरी रात में वो शिवलिंग सूर्य की भाटी चमक रहा है.

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इतने तीव्र प्रकाश से बचने के लिए आरती ने अपनी आँखे बंद कर्ली, पर नीतू ने उसे हिलाकर आँखे खोलने को कहा.

नीतू: क्या हुआ आरती ये आँखे क्यों बंद कर्ली खोलो आँखे क्या हुआ तबियत ख़राब है क्या.

नीतू की बात सुन आरती ने जैसे hi अपनी आँखे खोली शिवलिंग का प्रकाश गायब हो चूका था और वो एक नार्मल शिवलिंग hi नज़र आ रहा था.

आरती: वो वो वो तेज़ रौशनी कहा चली गई.

नीतू: कैसी तेज़ रौशनी किस रौशनी की बात कर रही हो यहाँ तो इतनी काली अँधेरी रात है.

आरती: अरे वही रौशनी जो अभी इस शिवलिंग से आ रही थी आप लोगो ने नहीं देखि क्या.

अघोरी: नहीं हमने तो कोई रौशनी नहीं देखि यहाँ तो बस इस हवन सामग्री से उठती लपट का प्रकाश है और कुछ नहीं.

आरती: अरे कैसी बाते कर रहे थे अभी तो आ रही थी इतनी तेज़ रौशनी इस शिवलिंग के अंदर से मैंने देखि थी.

नीतू: नहीं आरती तुम्हे कुछ वेहम हुआ है शिवलिंग से कोई रौशनी नहीं आ रही थी शायद तुम थक गई हो और थकावट के कारन तुम्हे ऐसा भ्रम हुआ.

आरती: हम्म शायद भ्रम hi हुआ होगा.

नीतू: अगर तुम थक गई हो तो तुम बहार आराम करलो पूजा हम कर लेंगे.

आरती: नहीं नहीं अब पूजा में शामिल होने आई हु तो बहार बैठकर आराम क्या करू मई ठीक हु.

नीतू: पक्का

आरती: हम्म

अघोरी: तो चलिए अब हम इस शिवलिंग के रुद्राभिषेक की पूजा आरम्भ करते है. कल हमने उस तंत्र साधना का संकल्प करा था जो हम राज के जीवन के लिए करने वाले थे आज हम उसमे भगवान् शिव को प्रसन्न करके उनका आशीर्वाद लेंगे क्युकी राज के जीवन पर काल की छाया है और देवो के देव महादेव तो खुद महाकाल है. और इस छेत्र में इस शिवलिंग का विशेष महत्व है कोई भी काम बिना इनकी अनुमति लिए नहीं होता इसलिए आज हम इनका रुद्राभिषेक कर इनकी अनुमति और आशीर्वाद दोनों लेंगे.

नीतू आरती: जी

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अघोरी ने उस मंदिर में रुद्राभिषेक की पूजा प्रारम्भ करदी और आरती और नीतू ने हवन कुंड में आहुति डालते हुए ॐ नमः शिवाय का जाप प्रारम्भ कर दिया. वो छेत्र सुनसान रात में ॐ नमः शिवाय मंत्र के जाप से गुंजायमान हो उठा था. वो साया अब भी वह से दूरी बनाए खड़ा था और टकटकी लगाए बस आरती को hi निहार रहा था.

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समय पल प्रतिपल बीतता जा रहा था और रुद्राभिषेक बदस्तूर जरी था. नीतू आरती वह 12:45 पर आए होंगे और अब 2:55 हो रहा था. 3 बजने में बस 5 मं बाकी थे कितना सच है और कितना झूट पर कहा ये जाता है की रात के 3 बजे काली शक्तियों रूहानी ताकतों की शक्ति अपने चरम पर होरी है पर फिलहाल तो यहाँ बस एक रूहानी ताकत थी जो कल रात से आरती के सह थी और उसने अब तक आरती को कोई नुक्सान नहीं पहुंचाया था पर अगर इस वक़्त वो चाहती भी तो शायद ऐसा नहीं कर पति क्युकी आरती नीतू दोनों महाकाल की शरण में थी जहा कोई काली शक्ति उन तक नहीं पहुंच सकती थी.

पर आरती और उस साए की कहानी से जुडी एक नै कहानी तो वह से काफी दूर नदी के उस पार उस खँडहर में लिखी जा रही थी जहा आज सुबह गरिमा ने अपने मंगलसूत्र को टाक पर रख कर साडी लोक जाज मर्यादा भूल कर हरिया के साथ सम्बन्ध बनाए थे वो किसी की अधूरी सुहागसेज के ऊपर जो असलियत में केवल सुहागसेज नहीं थी बल्कि उसके नीचे दफ़न थी 300 साल पुराणी वो अधूरी कहानी जो अतीत से वर्त्तमान में प्रवेश करके इस कहानी को एक नया अयं देने वाली थी. यही वो समय था जब वो शिक्षा सशरीर उस पत्थर की सेज रुपी कब्र का सीना पहाड़ कर बहार आ गया था जिसे उसकी सुहागरात में उसकी hi बीवी ने ज़हर देकर मार दिया था. दीवार पर लगी उसकी फोटो एकदम साफ़ हो गई थी उस नाम फोटो के नीछे लिखा उसका नाम के मिट चुके दीवार पर गरिमा द्वारा पोछे गए वीर्य से वापस से उभर कर आ रहे थे और जो नाम वह उबार कर आया था वो था अभय रायचंद. ( अभय रायचंद के बारे में आप गरिमा वाले part में पेज नंबर 17 पर पद सकते है. )

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अभय: मंजरी मंजरी 300 साल पहले तू मेरे प्यार को पहचान hi नहीं पाई थी की किस तरह दीवानो की हद तक प्यार करता था मई तुझे अपनी शादी के दिन hi तूने मुझे मेरी ज़िन्दगी का वो ज़ख्म दिया जिसने मुझे 300 साल की नींद में सोने पर मजबूर कर दिया पर अब मई वापस आ गया हु. और अब तू इस दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो किसी भी रूप में क्यों न हो मई तुझे ढून्ढ लूंगा. जो कहानी तूने 300 साल पहले अधूरी छोड़ दी थी उसे मई अब पूरा करूँगा और ये वडा है तुझसे की अब हमारे बीच कोई नहीं आ पाएगा वो भी नहीं जो 300 साल पहले हमारे बीच आ गया था और जिसकी वजह से हमे अलग होना पड़ा था. मंजरी मंजरी.........

अभय के बहार आते hi वो सुहागसेज खुद बा खुद वापस पहले जैसी हो गई जैसे कभी वो टूटी hi नहीं थी. अभय उसी सेज पर साधना की मुद्रा में बैठ गया और अपनी मानसिक शक्तियों से मंजरी नाम की उस महिला की खोज प्रारम्भ कर दी उसकी मानसिक तरंगे हवा में यहाँ वह मंजरी को खोज रही थी मजरे को खोजते खोजते सुबह के 5 बजने को आए थे पर अब तक अभय माजरी किस दिशा में है ये तक पता नहीं कर पाया था. उधर शिव मंदिर में रुद्राभिषेक की विधि पूर्ण हो चुकी थी और अघोरी नीतू आरती ने शिवलिंग पर जल चढ़ाया और उन्हें प्रणाम करके राज की लुम्बी उम्र की प्रार्थना की और अघोरी ने उन्हें कल की विधि के बारे में बताया.

अघोरी: आज रात इस तंत्र साधना का तीसरी रात होगी और आज की रात की साधना थोड़ी कठिन है और उसमे केवल नीतू को अकेले आना होगा और थोड़ी हिम्मत के साथ आज के चरण को पूरा करना होगा तो अच्छा होगा की आरती आज उसके साथ कब्रिस्तान में न आए क्युकी आज की रात उसे कब्रिस्तान में बहार रुकने की भी अनुमति नहीं होगी. और जल्द से जल्द व ब्रह्मचारी को खोज ले क्युकी बिना उसके ये साडी विधिया बेकार है दिन निकल आया है अब आप दोनों हवेली वापस जाइये, और नीतू आप आज रात मुझे यही शिव मंदिर पर मिलिएगा मई यही आपका इंतज़ार करूँगा आज रात की साधना के लिए.

अघोरी को प्रणाम कर नीतू और आरती मंदिर से हवेली की तरफ चल पड़े और अघोरी वापस अपने निवास स्थान उस कब्रिस्तान की तरफ चला गया. अघोरी के जाते hi वो साया एक बार फिर उनके साथ आ गया. अचानक उस साए हवाओ में किसी की मानसिक शक्तियों की मौजूदगी का एहसास हुआ जो आरती की तरफ बड़ी चली आ रही थी.

साया: ये मानसिक तरंगे ये जरूर उसीकी है वो एक बार फिर हमारी ज़िन्दगी में ज़हर घोलने आ गया है पर इस बार मई उसे ऐसा करने नहीं दूंगा जब तक मई बीच में खड़ा हु तू इसे नुक्सान पहुंचना तो दूर इस तक पहुंच भी नहीं सकता.

उस साए ने उन मानसिक तरंगो को बीच में hi रोक दिया और आरती को अदृश्य सुरक्षा कवच में मेहफ़ूज़ कर दिया जहा वो मानसिक तरंगे आरती तक पहुंच hi नहीं सकती थी. आरती को आभास भी नहीं था की कोई कितनी बेसब्री से उस तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है और कोई उसे उस तक पहुंचने से रोक भी रहा था. आरती को खोजने वाला और उसे रोकने वाला दोनों hi आरती के आस पास थे पर आरती उन दोनों से hi अनजान थी उसे तो आभास भी नहीं था की कोई उसे क्यों खोज रहा है और उसे खोजने वाला उसका हितैषी है या उनके बीच में दीवार बना वो रोकने वाला पर इतना तै था की आने वाला समय आरती पर काफी भरी पड़ने वाला था. इधर उस खँडहर में अपनी मानसिक तरंगो को अवरुद्ध होता देख अभय आग बबूला हो उठा.

अभय: किसकी इतनी हिम्मत हुई मेरी मानसिक तरंगो को रोकने की. किसीने मेरी मानसिक तरंगो को रोका मतलब मंजरी आस पास hi है और मेरी मानसिक तरंगो को रोकने का काम सिर्फ वही कर सकता है मतलब मेरे साथ साथ वो भी उस दुनिया से वापस आ गया. तू कितनी भी कोशिश करले मेरे और मंजरी के बीच आने की पर न तू तब सफल हुआ था न आज होगा जो हाल तेरा तब करा था उससे भी ज्यादा बुरा हाल करूँगा. देखता हु कब तक मेरी तरंगो को मंजरी रक् पहुंचने से रोकता है. अभय नदी की कोई छोटी धरा नहीं जिसे तू रोक लेगा अभय वो सुनामी है जिसे बड़े से बड़ा बांध भी नहीं रोक सकता.

अभय लगातार मंजरी को खोजने का अपना प्रयास जारी रखे हुए था और वो साया लगातार आरती पर अपना सुरक्षा कवच बनाए हुए था और आरती उन दोनों से अनजान आने वाले खतरे से पूरी तरह बेखबर थी. नीतू और आरती हवेली तक पहुंच गए थे जहा अभी भी काफी सन्नाटा था वो चुपचाप बिना किसी की नज़रो में आए अपने रूम तक पहुंच गई और अपने कमरे में आ गई जहा रात की थकी हारी नेहा घोड़े बेच कर सो रही थी उन्हें यही लगा की किसी को उनके न होने का पता न चले इसीलिए नेहा यहाँ उनके रूम में सो गई. रात भर की जाएगी नीतू और आरती भी थोड़ी थोड़ी जगह बना कर वही बिस्तर पर नेहा के अगल बगल में लेट गए और लेटते hi कब उनकी आँख लग गई उन्हें पता hi नहीं चला.

हवस वासना प्यार अपनापन साज़िश ग़लतफ़हमी प्रतिशोध रक्षा समर्पण बलात्कार ऐसे कई भावो से भरा इस वेडिंग सेरेमनी का ये पांचवा दिन ख़तम हुआ. ये पांचवा दिन अपने अंदर बहुत कुछ समेटे हुए थे इसने एक घरेलु खुशहाल पतिव्रता पत्नी को वासना के उन्माद में बहक कर किसी पराए मर्द के साथ सम्बन्ध बनाते देखा, तो एक पाक ज़हीन महिला की अस्मत को हवस में डूबे एक भूके भेड़िये की साज़िश के हाथो तार तार होते हुए भी देखा. इसने एक बाप बेटी की उम्र वाले औरत और मर्द को विपरीत हालातो में भी खुद पर काबू रखते और प्यार अपनेपन की वजह से एक नए प्रेम के बीज को अंकुरित होते देखा तो शराब के नशे में भावनाओ की ग़लतफहमी बेहेह कर एक सेज बाप को अपनी कुछ दिन पहले कन्यादान की गई बेटी की कोख को अपने बीज से भरते हुए भी देखा. इसने एक और औरत का बलात्कार होते हुए भी देखा और खुद एक औरत को अपनी इच्छा से अपना बलात्कार करवाते भी देखा. इसने प्रेम के लिए खुद की मान मर्यादा को कुर्ञ्बान करने को तैयार प्रेमिका भी देखा तो प्रेम में चोट खाए एक प्रेमी की आँखों में धड़कती प्रतिशोध की ज्वाला भी.

पर अब ये कहानी अपने मध्यांतर को पा चुकी थी कहानी के प्रथम पांच दिन पुरे हो गए थे और अब कहानी मध्यांतर के बाद की कहानी में प्रवेश करने वाली थी यानि अपने छठे दिन देखना था कहानी में अब क्या नए मोड़ क्या नए परिदृश्य उभर कर आने वाले थे.

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पांचवे दिन की रात सभी सहेलियों के लिए बड़ी थकन भरी थी शोभा पर शराब का सुरूर था नेहा और शबाना की ताबड़तोड़ चुदाई हुई और नीतू आरती ने तो पूजा के चलते साडी रात hi जाग कर कटी और गरिमा की तो गाँव आने के बाद से बहुत देर से नींद खुलती थी. पर खुले जंगल में अधनंगी हालत में अपनी सहेली के ससुर के साथ आलिंगनबद्ध सोइ हुई विनीता और लखन की आँख चिडियो की चहचहाहट के साथ तड़के सवेरे hi खुल गई. रात में सोते हुए अनजाने में उन्होंने एक दुसरे को जल्द लिया था पर जीवन में पहली बार विनीता को इतनी सुकून की नींद आई थी पर सुबह जागते hi वो एक दुसरे से अलग होकर उठ बैठे. अपने आपको संयत करने के बाद वो वापस अपने निवास स्थान की तरफ चल दिए. वह पहु कर उन्होंने नहाधो कर खुद को अच्छे से साफ़ करा कुछ भोजन बनाकर खाया इस पुरे समय विनीता के मन में कल का घटनाक्रम hi घूम रहा था जब उसने अपने निजी ज़िन्दगी का दागदार पहलु लखन सिंह के साथ साझ करा कुछ यही हाल लखन सिंह का भी था वो भी विनीता की निजी ज़िन्दगी की बुरे अनुभव को दूर करने के लिए कुछ करने की हालत में नहीं. दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी छै हुई थी ये ख़ामोशी उस फ़ोन की घंटी से टूटी जो अघोरी ने लखन को दिया था. रात भर की शिव पूजा करवाकर अघोरी ने लखन विनीता को आज की ग्रहशांति साधना की विधि समझने हेतु फ़ोन करा था.

लखन: प्रणाम बाबाजी.

अघोरी: खुश रहो कल रात की बृहस्पति साधना ठीक से हो गई थी.

लखन: जी बाबाजी (अब लखन उन्हें क्या बताता की रात में उन्हें कितनी मुश्किल हुई थी.)

अघोरी: तो क्या आप दोनों तैयार है आज के गृह की शांति साधना के लिए.

लखन: जी

अघोरी: क्या आपकी पत्नी भी मेरी बात सुन रही है.

विनीता के लिए पत्नी का सम्बोधन सुन लखन को बड़ा अजीब महसूस हो रहा था खास कर कल की रात के बाद. पर लखन ने अघोरी की बात सुन स्पीकर ों कर दिया.

लखन: जी बाबा जी अब सुन रही है.

अघोरी: तो सबसे पहले आप अपने माकन के पीछे की तरफ जाए और देखे वह क्या है.

लखन विनीता माकन के पीछे की तरफ गए वह तीन चीज़े राखी थी पहली एक आदमकद देवता की मूर्ति कड़ी थी जो दो डॉलफिन पर सवार थी उसके हाथ हथियार पकडे होने की मुद्रा में तो थे पर उसका हथियार उसके हाथ से गायब था. उसके बगल में एक बक्सा रखा था जिस पर विनीता का नाम लिखा था और तीसरी चीज़ एक छोटा सा एक्वेरियम था जिसमे एक बेहद सुन्दर गोल्डफिश तैर रही थी. फ़ोन अब भी चालू था लखन ने अघोरी को यहाँ मौजूद सामान के बारे में बता दिया जिसके बाद अघोरी ने उन्हें आज के गृह और उसकी साधना की विधि बताना शुरू की.

अघोरी: कल की तरह आज भी आपको एक नहीं दो ग्रहो की साधना करनी है शाम ढलने से पहले एक गृह और रात में दुसरे गृह की. कल आपने ग्रहमाला के दो सबसे बड़े गृह और रिश्ते में पिता पुत्र शनि यानि क्रोनस और उसके पुत्र बृहस्पति यानि ज़ीउस की साधना करि थी. आज आप ग्रहमाला के दो सबसे अंतिम गृह और रिश्ते में दादा पोता की साधना करेंगे. पहला गृह है नेप्तुने

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जिसे ग्रीक माइथोलॉजी में पोसिएदोन कहते है यानि समुद्र का देवता. पोसिएदोन ज़ीउस का भाई और क्रोनस का बीटा था जिसे क्रोनस ने उसके बाकि चार भाई बहनो के साथ खा लिया था और फिर ज़ीउस ने क्रोनस का पेट पहाड़ कर अपने भाई बहनो को आज़ाद कराया और फिर ज़ीउस पोसिएदोन और हदीस इन तीन भाइयो ने मिलकर क्रोनस का अंत करा और पोसिएदोन समुद्र का देवता बना.

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और दूसरा गृह है यूरेनस ग्रीक माइथोलॉजी का प्रथम रूलर किन्तु इसके बारे में और इसकी साशना की विधि मई आपको बाद में बताऊंगा क्युकी यूरेनस की साधना नेप्तुने की तुलना में आपके लिए ज्यादा मुश्किल होगी और अभी बताने सर शायद आप इतने विचलित हो जाए की प्रथम गृह की साधना भी ठीक से न कर पाए इसलिए पहले नेप्तुने यानि पोसिएदोन की साधना के बारे में समझ ले.

यूरेनस के बारे में अघोरी के कहे गए इन अल्फाज़ो विनीता और लखन को संशय में दाल दिया की ऐसी क्या विचलित करने वाली बात जिसे अघोरी अभी बता भी नहीं रहा, पर फिर भी दोनों ने खुद को संयत रखा और फिलहाल नेप्तुने पर अपना ध्यान केंद्रित करा.

Vineeta/Lakhan: जी बाबा हम तैयार है.

अघोरी: तो सुने आपको सामने तीन चीज़े दिख रही होंगी एक मूर्ति एक गोल्डफिश और एक बक्सा और नेप्तुने साधना भी तीन चरण में होगी क्युकी तीन पोसिएदोन का प्रिय अंक है. पसीडों का हथियार है ट्राइटन

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एक दिव्या त्रिशूल पर सामने कड़ी मूर्ति में उसका ट्राइटन गायब है.

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जो यहाँ से 33कम दूर दक्षिण दिशा में स्थित एक मत्स्य मंदिर में है, लखन को उस मत्स्य मंदिर में जाकर वो ट्राइटन लेकर आना है और यहाँ उसकी पूजा करके उसे पोसिएदोन की मूर्ति में उसके स्थान पर स्थापित करना है. अब वह जाना कैसे है तो पोसिएदोन का प्रिय खेल है हॉर्सरेसिंग आज भी ग्रीस में पोसिएदोन को खुश करने के लिए हर साल हॉर्सरेसिंग का आयोजन होता है तो यहाँ भी हमे वही करना है कुछ hi दूर पर वही सफ़ेद घोडा जिस पर यात्रा के दौरान अपने सवारी की थी आपका इंतज़ार कर रहा है लखन को उसी घोड़े पर जाकर दिन ढलने से पहले वो ट्राइटन लाना है.

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दुसरे चरण में वो बक्सा है जिसमे विनीता का नाम लिखा है जिसमे विनीता के लिए एक विशेष पोषक है पोसिएदोन की पसंद पर आधारित ये पोषक विनीता लखन के जाने के बाद पहनेगी और खुद को अच्छे से तैयार करेगी. लखन के लौटने पर उसी पोषक में पोसिएदोन की पूजा करेंगी और लखन द्वारा लाया गया ट्राइटन उनके हाथ में स्थापित करेगी.

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और तीसरे चरण के अंतर्गत वो गोल्डफिश अति है समुद्र का राजा पोसिएदोन को मछली विशेष प्रिय है उनका वहां भी डॉलफिन मछली है इसलिए मछली की सेवा से सीधा उनका आर्शीवाद मिलता है इसलिए लखन के लौटने तक विनीता को उस गोल्डफिश की सेवा करनी है उसे भोजन करना है समय समय पर उसका पानी बदलना है उस गोल्डफिश को प्रॉपर अटेंशन देनी है और ट्राइटन की स्थापना के बाद दोनों को मिल कर इस गोल्डफिश को जंगल में बहती नदी में छोड़ कर आना है. यही है नेप्तुने यानि पोसिएदोन साधना के तीन चरण. तो क्या आप दोनों तैयार है इस साधना में अपने अपने पत्र ऐडा करने के लिए.

Vineeta/Lakhan: जी बाबा

अघोरी: तो प्रथम चरण के अंतर्गत लखन को ट्राइटन की खोज में निकलना चाहिए ध्यान रहे उन्हें दिन ढलने से पहले वापस आना है.

लखन: 30 कम hi तो है बाबा बहुत जल्दी आ जाऊंगा.

अघोरी हल्का मुस्कुराते हुए: सफर तो छोटा है पर कही समुद्र जैसा तिगुना लुम्बा न हो जाए.

लखन जनता था की अघोरी की हर बात में कुछ रहस्य होता हैंइस बात में भी होना चाहिए, पर लखन अघोरी से अनुमति लेकर पोसिएदोन की मूर्ति को प्रणाम कर विनीता को वही छोड़ ट्राइटन को लेन के लिए दक्षिण दिशा की तरफ चल पड़ा कुछ दूर चलने पर hi उसे वो सफ़ेद घोडा नज़र आ गया.

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वो बिना देर किये उस घोड़े पर सवार होकर तेज़ी से ट्राइटन लेन के सफर पर बाद चला.

इधर विनीता ने भी इस पूजा में अपने हिस्से का काम आरम्भ कर दिया, विनीता भी उस मूर्ति को प्रणाम कर वो बक्सा और वो गोल्डफिश का ाकारियूम घर के अंदर ले आई. उसने वो बक्सा खोल कर देखा उसमे सबसे ऊपर मछली का भोजन रखा था विनीता ने सबसे पहले उसमे से नियत मात्रा में भोजन उस ाकारियूम में दाल दिया फिर उसने बक्से में और देखा तो उसमे सौंदर्य प्रसाधन का सामन यानि मेकअप किट थी जिससे उसे अपना श्रृंगार करना था और उसके नीचे मरमेड यानि जलपरी की शेप का एक बेहद खूबसूरत ब्लू गाउन रखा था जो ऊपर से थोड़ा कम चौड़ा पर नीचे मरमेड के डैनो की तरह फैला हुआ घेरदार था. विनीता खुद को शाम की पूजा के लिए तैयार करने लगी.

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इधर हवेली में दोपहर के 12 बज रहे थे सबकी आँख आज बड़ी देर से खुली. शबाना तो वैसे hi नंगी हालत में ज़मीन पर बैठे बैठे बिस्तर की धोक लेकर कब सो गई थी उसे पता hi नहीं चला. सुबह आँख खुलते hi उसे अपने जिस्म की नग्नता का एहसास हुआ और ये एहसास होते hi उसके ज़हन में रात में उसके साथ हुए बर्बरतापूर्ण घटनाक्रम की यादे ताज़ा हो गई. रात की बाते याद करते hi वो एक बार फिर फूट फूट कर रोने लगी.

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नीतू आरती के कमरे में रात भर की जगी नीतू आरती अब भी सोइ थी पर नेहा की आँख खुल गई वो अंगड़ाइयां भर्ती हुई उठ बैठी. नेहा की आवाज़ सुन नीतू आरती की भी नींद खुल गई.

नेहा: आप लोग कब आ गए थे दी मुझे पता hi नहीं चला.

नीतू: सुबह 4 या 5 बजे आए होंगे तुम गहरी नींद में सो रही थी इसलिए नहीं उठाया किसी को हमारे न होने का पता न चले इसिलए हमारे कमरे में सो गई थी न.

अब नेहा उन्हें क्या बताती की उसके उनके कमरे में रुकने की सिर्फ यही एक वजह नहीं थी बल्कि दो वजह और थी पहली शबाना और धामु को रात में सेक्स के लिए प्राइवेसी देनी थी और दूसरा उस स्ट्रेंजर मास्टर से मिलने के लिए खुद को दुल्हन की तरह तैयार करना था.

नेहा: जी बिलकुल इसीलिए तो रुक गई थी आपके कमरे में ताकि किसी को पता न चले.

नीतू: ोू ु र सो स्वीट हमेशा सबकी मदद करने के लिए तैयार रहती है.

नेहा: मेरा तो नेचर hi ऐसा है. चलिए आप दोनों थकी होंगी आराम करिये मई ज़रा अपनी शबाना दी को देखो वो उठ गई की नहीं.

नेहा शबाना के रूम की तरफ चल पड़ी. शबाना को एहसास हुआ की नेहा किसी भी पल आ सकती है और उसे इस हालत में रोटा हुआ कमरे और बिस्तर को अस्त व्यस्त देख वो दस सवाल करेगी और शायद समझ भी जाए की रात में यहाँ क्या हुआ और पता नहीं मई उसे झूट बोल भी पाऊँगी की नहीं. और अगर लालू को पता चल गया की कल रात के बारे में मैंने नेहा को बताया तो पता नहीं वो क्या करे क्या पता उसने कोई और स्पिकम लगा रखा हो मुझे नेहा के सवालो से बचना होगा और उसके लिए इस कमरे और खुद की हालत ठीक करनी होगी.

शबाना ने भाग कर दरवाज़े की सटकनी लगा दी ताकि नेहा अचानक से अंदर न आ जाए और कमरे की अस्त व्यस्त हालत को ठीक करने लगी. जल्दी जल्दी उसने बिस्तर की चद्दर को ठीक करा होने नंगे बदन को कपड़ो से ढाका तब तक नेहा भी दरवाज़ा पर पहुंच गई. नेहा ने दरवाज़ा खटखटाया शबाना ने अपने आंसुओ को पोछते हुए अपने अंदर के दर्द को अपने में छुपाते हुए चेहरे पर एक झूटी हसी के साथ दरवाज़ा खोल दिया.

नेहा: क्या कर रही थी दी बड़ी देर करदी दरवाज़ा खोलने में वैसे कैसी रही कल की रात और धामु कहा है चला गया या फिर भगा दिया. वैसे कल रात अपने कोई फ़ोन नहीं करा.

शबाना चुप थी वो घुटी ज़बान में बहुत कुछ कहना छह रही थी पर जैसे लालू की धमकी ने उसके होंठो को सील दिया था पर नेहा के सवाल लगातार जारी थी कल रात इस कमरे में घाटी बर्बरता से अनजान नेहा तो बस ये जानने को बेताब थी की क्या धामु के रूप में शबाना को उसकी समस्या का हल मिला की नहीं. लालू उसे कह कर गया था की जो जैसा चल रहा है उसे वैसा hi चलने देना अगर किसी को कुछ भी कहा या इस खेल को रोका तो लालू क्या कर सकता है ये वो जानती थी. इसलिए जैसा लालू बोलने को कह गया था वैसा बोलने के अलावा शबाना के पास दूसरा कोई चारा नहीं था.

शबाना: हम्म सब ठीक रहा इस बार पहले से बेहतर रहा तुम्हारी ट्रेनिंग काम आई पर अभी भी कुछ दिन ये चलने देना होगा ताकि प्रेगनेंसी कन्फर्म हो जाए.

नेहा: ओह दी मई बता नहीं सकती ये सुनकर मई कितना खुश हु, आपकी प्रॉब्लम दूर हो जाए आपकी शादीशुदा ज़िन्दगी ठीक जाए मई बस इतना चाहती आप चिंता मत करो मई हर रात धामु को इस कमरे तक पंहुचा दूंगी.

शबाना ने एक झूटी हसी है दी क्युकी कुछ बातमे या जताने की उसमे न हिम्मत थी न हालत. नेहा बाथरूम में जाने को हुई पर शबाना ने उसे रोक दिया क्युकी वह अब भी लालू की पेशाब फॉश पर होगी इसलिए खुद पहले नहाने का बोल कर वो बाथरूम में घुस गई और बाथरूम को अच्छे से साफ़ कर दिया. शबाना लालू के चंगुल में इस कदर बुरी तरह फास गई थी की खुद अपने साथ हुए बंग के सबूत अपने हाथ से मिटने को मजबूर थी और बहार नेहा मन hi मन इस बात से खुश थी की उसकी सबसे पक्की सहेली उसकी वजह से इतना खुश है.

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इधर उठने के बाद नीतू आरती के कमरे में.

नीतू: यार आरती पूजा के दो दिन तो जैसे तैसे काट गए पर समस्या अभी भी जस की तस है वो ब्रह्मचारी मुझे अब तक ऐसा कोई ब्रह्मचारी पुरुष नहीं मिला जिसे मई इस पूजा के लिए तैयार कर सकू.

आरती: नीतू मई तो इस तरह की तंत्र पूजा में विश्वास hi नहीं करती पर चुकी तू करना चाहती है इसलिए तेरा साथ दे रही हु. और रही बात वो ब्रह्मचारी पुरुष ढूंढ़ने की तो हम यहाँ किसी को नहीं जानते तो एक अनजान जगह पर हम ऐसा पुरुष कैसे ढून्ढ सकते है.

नीतू: फिर क्या करे बिना उसके तो ये पूजा संभव hi नहीं है.

आरती: एक तरीका है.

नीतू: क्या?

आरती: कोई शक्स तेरी मदद कर सकता है जो यहाँ का हो यहाँ के लोगो को जनता हो, शोभा तुम्हे शोभा को सब सच सच बता देना चाहिए की रात में हम कहा जाते है. वो अघोरी बाबा को बहुत मानती भी है ये बात भी मानेगी और शायद उसे ऐसे किसी पुरुष के बारे में पता हो. तुझे उससे हेल्प लेनी चाहिए.

नीतू: तू सही कह रही है अब शोभा hi इस मामले में हमारी मदद कर सकती है. ठीक है नाहा धोकर मई शोभा से मिलकर जस बारे में बात करती हु.

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नीतू शोभा से अपने कौमार्य भाग के लिए एक ब्रह्मचारी ढूंढ़ने की मदद मांगने वाली थी और दूसरी तरफ शोभा तो खुद नशे की हालत में अपना कौमार्य अपने बाप के हाथो लुटा चुकी थी.

शोभा के कमरे में

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दोनों बाप बेटी दीं दुनिया से बेलहाबार बिंदास नंगे hi एक दुसरे से चिपके सो रहे थे. शराब और नशे की गोलियों ने शोभा को बेसुध सा कर दिया था और मलखान ने तो कल शराब पीने के सरे रिकॉर्ड हो तोड़ दिए थे तो उसक बेसुध होना तो लाज़मी था. पर फिर भी एक फर्स्ट टाइमर और हबिटुअल ड्रिंकर में फ़र्क़ होता है ीालिये मलखान सिंह को ऐसे हैंगओवर्स की आदत थी इसलिए उसकी नींद पहले खुली. उसका सर पूरी तरह चक्र रहा था रात में कुछ ज्यादा hi पी ली थी. वो अपनी आँखे माल्टा हुआ सीधा बाथरूम में घुस गया और सर में एक बाल्टी पानी डाला तब जेक उसका हैंगओवर कुछ कम हुआ उसने मुँह अच्छे से धोया. एक नज़र उसने खुद को ऊपर से नीचे तक देखा शरीर पर एक भी कपडा नहीं वो कल रात की बाते याद करने की कोशिश करने लगा की रात में वो अपनी बीवी सरला के साथ उसकी चुदाई की थी फिर हल्का मुआकुरा दिया की ज़रूर ये उसका सपना होगा उसने सपने में अपनी बीवी को याद किया होगा सपने में उसे छोड़ा होगा और इसी दौरान अपने कपडे उतर दिए होंगे. अपना मुँह अच्छे से धो कर मलखान सिंह बाथरूम के बहार आया उसका मुँह खुला का खुला रह गया, उसकी नज़र सीधा बिस्तर पर बिना कपड़ो के नंगी लेती उस औरत पर पड़ी जिसकी पीठ उसकी तरफ थी और चेहरा दूसरी तरफ. मलखान ने एक नज़र पुरे कमरे पर डाली और कमरा देख कर उसे समझ आ गया की ये उसका कमरा नहीं है मतलब कल रात जो उसने किया वो सपना नहीं हक़ीक़त थी और वो सब उसने अपनी बीवी सरला के साथ नहीं बल्कि किसी और महिला के साथ कर दिया. उसे अब साडी बा समझ आ गई की कल रात वो शराब के नशे में शादी में आई किसी महिला के कमरे में घुस आया और शराब के नशे में उसके साथ ये सब कर डाला.

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पर वो अब ये जानने को उत्सुक था की उसने ये सब किसके साथ करा ये महिला कौन है जिसकी पीठ उसकी तरफ है. उस महिला की नंगी उभरी गांड एक बार फिर उसके लुंड में तनाव पैदा कर रही थी. वो धीमे धीम बिना आवाज़ करे बिस्तर के दूसरी तरफ जाने लगा जिस तरफ उस महिला का मुँह था. जैसे hi मलखान उस तरफ पंहुचा और उसकी नज़र उस महिला के चेहरे पर पड़ी उसका कलेजा हलक तक आ गया दिमाग ने काम करना बंद कर दिया हाथ पाँव सुन्न पद गए धड़कने तेज़ तेज़ चलने लगी कुछ देर उस महिला की गांड देख कर उसके लुंड में जो तनाव आया था वो उसका चेहरा देखते hi एक झटके में गायब हो गया. उसने शराब के नशे में अपनी बीवी समझ कर अपनी hi नै नवेली दुल्हन बानी अपनी hi बेटी शोभा को छोड़ दिया जिसकी अभी सुहागरात भी नहीं हुई थी.

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मलखान ने अपना माथा पकड़ लिया उससे वह खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था और उसका पेअर उसका साथ नहीं दे रहे थे उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था की कुछ दृश्य उसके सामने है वो सच है या सपना. अगर समाज में लोगो को पता चल गया तो उसके खानदान की इज़्ज़त मिटटी में मिल जाएगी वो किसी से आँख भी नहीं मिला पाएगा. पर फिलहाल जल्द से जल्द यहाँ स्व निकलना ज़रूरी है कोई शोभा के कमरे में आ गया तो वो निकल भी नहीं पाएगा उसने ज़मीन पर पड़े अपने कपडे उठाए और जल्दी जल्दी उन्हें पेहेन कर शोभा को चद्दर से ढककर दरवाज़े के बहार झांक कर देखा बहार सन्नाटा देख वो तुरंत शोभा के रूम से बहार आ गया.

शोभा के रूम से निकल कर वो तेज़ी से एक मंज़िल चढ़ कर अपने रूम में पहुंच सीडिया चढ़ते हुए अब रात की बाते याद आ रही थी कैसे वो एक मंज़िल नीचे hi अपना फ्लोर समझ बैठा था. वो तेज़ी से अपने रूम में आ गया और दरवाज़ा बंद करके वही ज़मीन में बैठ कर मुँह छुपा कर रोने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसने इतनी घटिया हरकत कैसे कर डाली कैसे एक बाप अपनी hi बेटी के छठी उसे खुद से घिन सी आ रही थी छत पर लगा पंखा देख उसके मन में तरह तरह के ख्याल आ रहे थे की अभी इसी पंखे से लटक कर अपनी जान दे दे. पर दुनिया को क्या बटेगा अपने आत्महत्या की वजह. वो शोभा के बारे में सोच रहा था की उसने उसे क्यों नहीं रोका क्या उसे पता है की कल रात उसके साथ मई था अगर पता था उसने रोका क्यों नै और अगर मैंने ज़बरदस्ती की तो मई कैसे अब अपनी बेटी से नज़रे मिला पाउँगा. कल रात उसने भी ड्रिंक करा था हो सकता है वो भी नशे में हो पता नहीं शोभा का अब क्या रिएक्शन होगा जब वो उठकर खुद को इस हालत में बिना कपड़ो के देखेगी पर ये तो तभी पता चलेगा जब वो जागेगी.

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हवेली में मौजूद सब सहेलियों की कहानिया आगे बाद चली थी तो गाँव में लखन की कोठी में मौजूद गरिमा भी हमेशा की तरह आज भी देर से जगी और रोज की तरह आज भी उसका सर भरी भरी लग रहा था. अचानक गरिमा की नज़र अपने पेट पर पड़ी आज भी उसके पेट पर वही सफ़ेद पपड़ी जुमी थी गरिमा ने वो पपड़ी खुरचकर उसे सूंघ कर देखा उसकी महक कुछ अजीब थी ये पपड़ी देख गरिमा को बाथरूम में तंगी अपनी पंतय में जीतू द्वारा निकला वीर्य याद आया तो क्या रात में किसीने उसके ऊपर वीर्य निकला क्या पिछली 4 रातो से कोई उसके ऊपर वीर्य निकलता है और उसे उसके पेट पर मॉल देता है. गरिमा उठकर दरवाज़े के पास गई और दरवाज़े की सिटकनी चेक करि वो अच्छे से बंद थी उसने बंद सिटकनी से अंदर से दरवाज़ा खींच कर खोलने की कोशिश करि पर दरवाज़ा नहीं खुला कमरे में ऐसी कोई खिड़की नहीं थी जहा से अंदर आया जा सके जो थी उनमे लोहे की जाली लगी थी जो खुल नहीं सकती थी.

गरिमा (मन में): ये शायद में मेरे मन का वेहम है मई कुछ ज्यादा hi सोचने लगी भला अंदर से बंद कमरे में कोई कैसे आ सकता है, ये ज़रूर मेरा hi पानी होगा यहाँ आने के बाद मेरे साथ जो कुछ भी हुआ या हो रहा है उसकी वजह से शायद मई hi इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई हूँगी की रात में सोते सोते अपनी छूट में ऊँगली करती रहती हूँगी और फिर वही पानी अपने पेट पर मॉल लेती हूँगी इसीलिए शायद दिन में मेरी आँख देर से खुलती है. है यही हुआ होगा है पर जो कल मैंने अपनी आँखों से देखा वो तो वेहम नहीं था वो तो सच था 18 साल का वो लड़का जीतू सच में मेरे पहनी हुई पंतय को अपने लुंड पर लपेट कर मेरा नाम ले लेकर मुठ मार रहा था. क्या वो मेरी तरफ आकर्षित है मुझे याद है जब उसने मुझे टॉवल में देखा था तभी वो थोड़ा उनकंफर्टबले सा हो गया था. एक बच्चे की माँ होने के बावजूद क्या मेरे जिस्म में अब भी इतना आकर्षण है की एक टीनएज लड़का अपनी उम्र की लड़कियों को छोड़ मेरे नाम की मुठ मार रहा है.

ये सब सोचते हुए गरिमा की सासे भरी हो गई उसकी ज़हन में अपने और हरिया के बीच उस खँडहर में घाटे पल एक बार फिर ताज़ा हो गए. उसे हरिया की याद सताने लगी पर हरिया तो कल hi अपने गाँव चला गया था और अब तीन दिन से पहले नहीं आने वाला था तब तक गरिमा को उसकी यादो से hi काम चलना था. गरिमा अपने और हरिया के बीच हुए हर इंटिमेट पल को याद कर hi रही थी की अचानक कुछ अजीब हुआ गरिमा को अपनी इमेजिनेशन में उन इंटिमेट पालो में अपने साथ हरिया की जगह जीतू नज़र आने लगा. गरिमा ने अपना पेटीकोट छूट तक ऊपर चढ़ा लिया और अपनी छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगी. हरिया फिलहाल उसकी इमेजिनेशन से जा चूका था और अब उसकी जगह जीतू ने लेली थी और जीतू के साथ सेक्स इमेजिन करते करते hi गरिमा की चड्डी उसके पानी से गीली हो गई. गरिमा वही बिस्तर पर सर टिका कर बैठ गई और अभी अभी उसके मन में जो ख़यालात आए उन पर मंथन करने लगी.

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गरिमा (मन में): ये क्या था मई जीतू के साथ ये सब कैसे सोच सकती हु वो एक नाबालिग बाछा है. वैसे सोचना तो हरिया के साथ भी नहीं चाहिए था पर उसके साथ सिर्फ सोचा hi नहीं बल्कि किया भी वो भी एक नहीं दो नहीं चार चार बार किया. मेरे अंदर दबी वासना की आग में तड़पती औरत बहार आने को मचल रही है. शादी से पहले हम सहेलिया आपस में कितना कुछ कहती थी की ज़िन्दगी को खुल कर एन्जॉय करेगी पर अब ज़िन्दगी बच्चो का लंच बनाना पति के कपडे प्रेस कर देना घर की साफ़ सफाई और खाना बनाने तक hi सिमित होकर रह गई है यही एन्जॉयमेंट रह गया है लाइफ में. और पति उन्हें भी 10-15 दिन में जब फुर्सत मिल जाती है तो 4-5 धक्के लगाके एन्जॉयमेंट की दोसे पूरी कर देते है ऐसा लगता है जैसर सेक्स नहीं किसी लोन की मंथली इन्सटॉलमेंट हो जिसे टाइम से भरना hi उनकी ड्यूटी है. शायद यही वजह है की हरिया के साथ जब मुझे उस एन्जॉयमेंट का हल्का सा एहसास भर मिला तो मई खुद पर काबू न रख पाई और खुद को हरिया के हवाले कर दिया और अब जीतू को लेकर मेरे मन में इस तरह के ख्याल आ रहे है. पर क्या मुझे ऐसा सोचना चाहिए वो एक बच्चा है वो भी नाबालिग पर फिजिकली मातुरे है और सबसे बड़ी बात मेरी तरफ आकर्षित है ये एक्सपीरियंस मुझे दुबारा नहीं मिलेंगे फिर अपनी उसी बोरिंग लाइफ में hi जाना है तो क्या न यहाँ इस अनजान जगह पर एक नै लाइफ को एक्स्प्लोर करा जाए. थोड़ा सडके करा जाए उस 17 साल के बच्चे को यहाँ कौन महजू जनता है.

सेक्स का नशा भी ड्रग्स की तरह होता है एक बार लत लग गई तो इंसान तरह तरह से जस्टिफाई करके अपने हर काम को सही ठहरा hi लेता है. ड्रग्स के लिए उसे किसी का खून भी करना पड़ा तो उसे भी जस्टिफाई ठहरा देगा. कुछ कुछ यही हालत इस वक़्त गरिमा की भी थी हरिया के साथ पिछले कुछ दिनों में उसने जिन नए अनुभवों को जिया उनका मज़ा लिया उसने उसे उनकी लत लगा दी थी और अब हरिया के जाने के बाद उसे जीतू में हरिया का विकल्प नज़र आ रहा था. एक घरेलु हाउसवाइफ को सेडक्टिव की दुनिया से परिचित करा दिया था क्या यहाँ से जाने के बाद भी ये सेडक्टिव उसका पीछा छोड़ने वाला था ये सेडक्टिव उसे कहा ले जाने वाला था ये तो वक़्त hi बताएगा. लगभग हर हाउसवाइफ इस सेडक्टिव को दबा कर रखती है उसे इस कदर दबा लेती है खुद को घर के कामो इस कदर बिजी कर लेती है की उसे इस सेडक्टिव का एहसास hi नहीं होता. पर ये सेडक्टिव हर हाउसवाइफ की ज़िन्दगी का एक अनुनजागर हिस्सा शायद मेरी आपकी हाउसवाइफ का भी इसलिए सावधान रहे कही उनका भी ये सेडक्टिव पहलु बहार न आ जाए.

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ा हाउसवाइफ सेडक्टिव

इधर हवेली में सबसे आखिर में शोभा की आँख खुली रात में पिलाई गई शराब और उसमे मिला कर दी गई नशे की गोली का हैंगओवर अभी भी था. शोभा को अपना सर बड़ा भरी भरी सा लग रहा था.

शोभा: उफ़ विक्रम ने ये क्या पीला दिया ऐसा लग रहा है जैसे सर में कोई ढोल नगाड़े बजा रहा हो.

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थोड़ा रिलैक्स होने पर जब शोभा ने अपने ऊपर पड़ी चद्दर हटाई तो शॉक रह गई उसके जिस्म पर कपडे का नामोनिशान तक नहीं था. उसकी साड़ी ब्लाउज पेटीकोट यहाँ तक की इनरगार्मेंटस भी ज़मीन पर यहाँ वह बिखरे पड़े थे. बिस्तर पर उसके पैरो के नीचे कुछ चिपचिपा चिपचिपा सा उसे महसूस हुआ, उसने टांग उठा कर देखा तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गई बिस्तर पर काफी जगह खून के लाल लाल धब्बे बने थे और जो चिपचिपा पदार्थ उसे अपने पैरो के नीचे मेहोस हुआ वो पुरुष का वीर्य था उसने जांघो के बीच अपनी छूट को देखा तो वह भी हल्का खून और कुछ वीर्य लगा था उसने अपनी छूट के अंदर ऊँगली दाल कर देखा तो उसकी ऊँगली खून और वीर्य के मिलेजुले मिश्रण से गीली हो गई उसे ये समझते देर न लगी की रात में यहाँ क्या हुआ. उसने दिमाग पर ज़ोर डाला और उसे रात की घटनाए हलकी हलकी याद आने लगी की किस तरह उसकी चुदाई हुई थी.

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शोभा: मतलब रात में विक्रम यहाँ आया था उसने hi मेरे साथ सुहागरात मनाई ओह विक्रम ी लव ु. ु अरे ा डार्लिंग ा स्वीटहार्ट तुम मुझे कितना प्यार करते हो मेरे एक बार कहने पर hi तुम मेरे साथ सुहागरात मानाने को तैयार हो गए. पर सहित शराब के नशे की वजह से मई अपनी फर्स्ट नाईट को अच्छे से एन्जॉय भी नहीं कर पाई. अब अगर मेरी किसी सहेली ने मुझसे पूछ लिया शादी की पहली रात में संयजी ने क्या क्या करा तो मई क्या बताउंगी मुझे तो ढंग से कुछ याद भी नहीं. कोई बात नहीं याद नहीं तो क्या हुआ फर्स्ट नाईट तो है hi और अच्छा hi है लोग फर्स्ट नाईट को एक बार एन्जॉय करते है मई दो दो बार एन्जॉय करुँगी वो भी एकदम नै फीलिंग के साथ लोगो के पास फर्स्ट नाईट का एक एक्सपीरियंस होता है मेरे पास दो दो कॉन्फेशन होंगे आखिर कार मई सबसे स्पेशल जो हु और अब मुझे उस जमादार भीमा को लेकर गंदे गंदे खयालात भी नहीं आएँगे. अपने होशो हवस में विक्रम के साथ फर्स्ट नाईट मनाकर मई अपनी सहेलियों को बगाउंगी अपनी फर्स्ट नाईट के बारे में.

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माय फर्स्ट नाईट कॉन्फेशन

पर पहले मुझे विक्रम से मिलना होगा

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शोभा ने वो खून और वीर्य से सनी चद्दर बाथरूम में दाल दी और खुद को भी अच्छी तरह से साफ़ करने लगी. अच्छी तरह से नहाधो कर एक सुन्दर सी साड़ी पेहेन कर लाल लिपस्टिक लगा कर बाल खोलकर मेकअप करके शोभा किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी. तैयार होकर शोभा सीधा विक्रम के रूम की तरफ चल दी ऊपर वाली मंज़िल में कॉरिडोर में खड़ा उसका बाप मलखान सिंह उसे विक्रम के कमरे की तरफ जाते देख रहा था उसका दिल ज़ोर से धक् धक् कर रहा था की कही शोभा विक्रम को सब बताने तो नहीं जा रही. शोभा विक्रम के कमरे के पास पहुंची hi थी अचानक विक्रम कमरे से बहार आ गया उसके साथ में लालू भी था. विक्रम को देखते hi शोभा बिना किसी शर्म के लालू के सामने hi विक्रम के सीने से लग गई. विक्रम को उम्मीद नहीं थी की कल रात की शराब के बाद शोभा का ये रिएक्शन होगा उसे तो लगा था शोभा गुस्सा होगी की वो रात में आया क्यों नहीं पर यहाँ तो उसका उल्टा हो रहा था. शोभा का ये रिएक्शन देख मलखान सिंह भी आश्चर्य चकित था की बजाए गुस्सा होने के चीखने चिल्लाने के शोभा हस्ते हुए ख़ुशी ख़ुशी विक्रम को गले लगा रही है. शोभा ने लालू की भी परवाह न करते हुए बेधड़क उसके सामने विक्रम के गाल में एक पप्पी दे दी और विक्रम के कान में हलके से थैंक यू बोल कर वापस अपने कमरे की तरफ भाग गई. विक्रम को समझ नहीं आया की अचानक से ये क्या हुआ और क्यों हुआ शोभा इतनी खुश क्यों थी और उसने उसे किस बात के लिए थैंक यू बोलै.

लालू: क्या बात है गुरु भाभीजी तो बड़ी खुश लग रही है बिंदास पप्पी देकर चली गई ऐसा क्या कर दिया भाई जो आज भाभीजी के मिलजाज़ hi बदले है.

विकर्म: यार मुझे तो खुद समझ नहीं आ रहा ये चक्कर क्या है वो किस बात पर इतनी खुश है.

लालू: पर मुझे सब समझ आ गया.

विक्रम: क्या समझ आ गया.

लालू: दरअसल मैंने तुझे जो नशे की गोली दी थी उसमे नशे के साथ साथ थोड़ा उत्तेजना का एलिमेंट भी था उसकी वजह से भाभी रात में उत्तेजित हो गई होंगी और चुकी तू इस वक़्त उनके दिलो दिमाग में बसा है तो उन्हें रात में तेरे सपने देंखे होंगे और सपनो में hi तेरे साथ डिंग डाँग कर लिया होगा और अब जब उठी तो हैंगओवर की वजह से उन्हें लगा वो सब सच था और इसी ख़ुशी में उन्होंने तुझे आकर हुग करा और ये पप्पी दी समझा.

विक्रम: हम्म यही हुआ होगा पर मुझे उसे बता देना चाहिए की मई उसके रूम में नहीं आया था.

लालू: भाई मत बता और बताना भी तो 4 दिन बाद जब ऑफिशियली तेरी सुहागरात हो जाए. अभी बताएगा तो वो फिर तुझे फाॅर्स करेंगी सुहागरात के लिए तब तू क्या करेगा क्या तू लखन अंकल के अगेंस्ट जाकर उनके साथ सुहागरात मानाने को तैयार है.

विक्रम: नहीं कभी नहीं.

लालू: तो फिर खामोश रह उन्हें खुश रहने सोचने दे जो वो सोच रही है. किसी तरह से तीन दिन काट ले उसके बाद बता देना जो बताना हो.

विक्रम: हम्म तू ठीक कह रहा है अभी चुप रहना hi ठीक रहेगा.

छुपकर उनकी बाते सुन रहा मलखान सिंह भी आश्वस्त हो गया की शोभा यही समझ रही है की रात में उसके साथ जो कुछ हुआ वो विक्रम ने किया और विक्रम उसे अभी कुछ कहेगा नहीं मतलब रात में जो कुछ हुआ उसके बारे में किसीको कुछ नहीं पता. बस अब मुझे इस गिल्ट से बहार निकल कर खुद को नार्मल रखना है ऐसे जैसे कुछ हुआ hi न हो किसी को शक करने का एक मौका नहीं देना और शराब से खुद को दूर रखना होगा और अपनी बेटी से भी दूर रहना होगा क्युकी उसके सामने कही मेरा गिल्ट मुयःपार हावी न हो जाए और मई उसके सामने टूट कर कुछ उल्टा सीधा न कह दू.

शोभा वह से सीधा अपने रूम में आ गई वो बस रूम में आई hi थी की दरवाज़े पर नॉक हुई उसने दरवाज़ा खोला तो सामने नीतू कड़ी थी. नीतू थोड़ी टेंस थी, शोभा ने नीतू को अंदर बुलाया और उआकी परेशानी का कारन पुछा.

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शोभा: क्या बात है नीतू तू कुछ परेशां लग रही है किसी ने कुछ कहा कोई प्रॉब्लम है.

नीतू: है यार एक प्रॉब्लम तो है जिसमे केवल तू hi मेरी मदद कर सकती है.

शोभा: बता न क्या बात है मई हर तरह से तेरी मदद करुँगी.

नीतू ने शोभा को अघोरी की कही गई हर बात बता दी जिसे सुन कर शोभा शॉकेड रह गई.

शोभा: मतलब तुम और आरती पिछली दो रातो से अघोरी बाबा के साथ जंगल के अंदर जा रहे थे और तुम मुझे अब बता रही हो तुम जानते हो ये कितना डेंजरस कितना रिस्की था.

नीतू: मई जानती हु पर मई राज के लिए हर रिस्क उठाने को तैयार हु तू मेरी जगह होती और विक्रम के ऊपर ऐसा कोई खतरा होता तो तू क्या करती.

शोभा: शायद मई भी यही करती पर फिर भी तुझे ये सब मुझे पहले hi बता देना चाहिए था.

नीतू: यार अब तो बता रही हु न अब उस ब्रह्मचारी को ढूंढ़ने में तू मेरी मदद कर है ऐसा कोई ब्रह्मचारी पुरुष तेरी नज़र में.

शोभा: यार ऐसा कोई ब्रह्मचारी पुरुष ढूंढ़ना तो बहुत मुश्किल है इसमें दो प्रॉब्लम है पहली की एक औरत कुंवारी है की नहीं ये तो हम जांच से पता कर सकते है पर एक पुरुष ब्रह्मचारी है की नहीं ये जांचने का कोई तरीका नहीं अगर यहाँ लोगो को पता चल जाए की उन्हें तुझसे सम्बन्ध बनाने है तो तेरे साथ सेक्स करने के लिए वो झूट भी बोल सकते है की वो ब्रह्मचारी है. और दूसरी प्रॉब्लम ये की ये सिर्फ सेक्स करने की hi बात नहीं है ये एक तंत्र साधना से जुड़ा है जहा किसी का मृत्यु योग हटाना है जब लोगो को ये पता चलेगा तो पीछे भी हैट सकते है इस दर से की कही राज के ऊपर आया मृत्यु योग उनके ऊपर न आ जाए. गाँव में आज भी शादी के बाद पति पर आने वाले संकट को टालने के लिए दुल्हन की शादी पहले पीपल के पेड़ या कुत्ते से करने की परंपरा है जिसे पति पर आने वाला संकट पीपल और कुत्ते पर चला जाए तो लोग यही समझेंगे की तुम राज का संकट टालने के लिए उन्हें बलि का बकरा बना रही हो तो इस साधना के लिए कोई क्यों तैयार होगा.

नीतू: फिर क्या मुझे ऐसा कोई ब्रह्मचारी नहीं मिलेगा क्या ये साधना अधूरी रह जाएगा.

शोभा: देख तुझे इसके लिए कोई ऐसा चाहिए जो पक्का कनफर्म्ड ब्रह्मचारी हो जिस पर कोई डाउट न हो और इतना हिम्मती को इस साधना के बारे में जानने के बाद भी इसके लिए तैयार हो जाए.

नीतू: यार तूने अभी तो कहा की ऐसा इंसान मिलना नामुमकिन है.

शोभा सोचते हुए: वैसे एक इंसान है मेरे ज़हन में जिसमे ये दोनों क्वालिटीज़ है वो एक कनफर्म्ड ब्रह्मचारी भी है और इस साधना को झेलने की कैपबिल्टी भी रखता है. पर फिर भी इसके लिए तैयार होगा इसमें डाउट है.

नीतू: तू नाम बता मुझे कुछ भी करना पड़े पर मई उसे इस साधना के लिए तैयार कर लुंगी. चाहे कितने भी पैसे क्यों न खर्च करने पड़े.

शोभा: वो पैसे से नहीं बिकेगा.

नीतू: तू नाम तो बता.

शोभा: अघोरी बाबा

नीतू: क्या अघोरी बाबा तेरा मतलब है है ये अपने वाले अघोरी बाबा.

शोभा: हम्म गाँव की कई औरतो ने इनके हट्टे काटते शरीर पर मोहित होकर उनपर डोरे डेल पर उन्हें आज तक किसी के साथ सम्बन्ध नहीं आया वो आज भी एक बाल ब्रह्मचारी शायद यही ब्रह्मचर्य उनकी शक्तिको का कारन है. और वो खुद ये साधना करा रहे तो उनमे इतनी कैपबिल्टी है की वो इस साधना के प्रभाव को झेल सके. पर वो इस साधना के लिए अपना बरसो से कमाया हुआ ब्रह्मचर्य क्यों छोड़ देंगे.

शोभा की बातो ने नीतू को सोच में दाल दिया था उसे अब अघोरी में hi इस समस्या का हल नज़र आ रहा था और उसके ज़हन में अघोरी को इस साधना के लिए तैयार करने के विचार उथल पुथल मचा रहे थे.

शोभा: क्या सोच रही हहि.

नीतू: तू सही कह रही है अब अघोरी बाबा hi इस साधना को पूरा कर सकते है मुझे किसी भी तरह उन्हें इस साधना के लिए तैयार करना होगा.

शोभा: पर ये सब तू करेगी कैसे.

नीतू: उन्हें आकर्षित करके उन्हें मन में अपने प्रति प्रेम उत्पन्न करके.

शोभा: पर तू पूरा दिन तो यहाँ रहती है और रात के रात उनके पास जाती है और रात का समय तो साधना की विधि पूरी करने में hi निकल जाता है और तेरे कहे मुताबिक तेरे पास तीन दिन में उन्हें मानना होगा तो ऐसे में तू कैसे उन्हें अपनी तरफ आकर्षित कर पाएगी.

नीतू: मुझे अगले बचे हुए सरे दिन उन्हीके साथ रहना होगा मुझे ज्यादा से जड़ वक़्त उनके साथ बिताना होगा ताकि मई उनके मन में अपने लिए प्रेम उत्पन्न कर सकू और ये तभी होगा जब मई पूरा वक़्त उनके साथ राहु. पर मई यहाँ सबसे क्या कहूँगी की मई कहा जा रही हु यहाँ किसी को इस बारे में पता नहीं चलना चाहिए.

शोभा: उसकी तू टेंशन मत ले वो सब मई देख लुंगी मई यहाँ सबसे कह दूंगी की तेरी एक दूर की मौसी यही बगल के गाँव में रहती है उनका फ़ोन आया तो तू उनके यहाँ चली गई है मुझे बताकर.

नीतू: थैंक्स शोभा थैंक यू सो मच.

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नीतू ने अगले कुछ दिन अघोरी के साथ रहने के लिए खुद को मेंटली तैयार कर लिया पर उसने ये बात आरती को नहीं बताई की वो अगले कुछ दिन अघोरी के साथ उस कब्रिस्तान में रहने वाली है और अघोरी को hi उसके साथ सम्बन्ध बनाने के लिए आकर्षित करने वाली है क्युकी पता नहीं आरती इस पर कैसे रियेक्ट करती क्युकी आरती उसके रात में कब्रिस्तान जाने की बात पर hi बड़ी मुश्किल से एग्री हुई थी तो वही रहने पर पता नहीं क्या करती उसे जाने भी देती की नहीं. क्युकी आरती उसके प्रति काफी कंसर्न थी पर नीतू ने मन hi मन अघोरी के साथ रहने और उसके मन कामसूत्र और लव के भाव उतपन्न करने का निश्चय कर लिया था. कामसूत्र और लव से मिलकर बानी ये कहानी पता नहीं किस अंजाम पर पहुंचने वाली थी.

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कामसूत्र लव
 
काकातुआ के जंगल

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लखन उस श्वेत अश्व पर सवार तेज़ी से उस मत्स्य मंदिर की दिशा में दौड़ा चला जा रहा था जगह जगह उसे रास्ता बताने की सिग्न बोर्ड लगे हुए थे जो उसे बता रहे थे की मत्स्य मंदिर का रास्ता किस तरफ है. लखन उन्ही सिग्नस के सहारे उस मंदिर की दिशा में बड़े जा रहा था. पर तेज़ी से बढ़ते हुए कदम अचानक एक जगह आकर रुक गए क्युकी वह से एक नहीं दो नहीं तीन नहीं बल्कि 9 रस्ते बात अलग अलग दिशाओ में बात रहे थे और इन 9 रास्तो में से कोई एक रास्ता hi सही था पर वो कौनसा था ये अनुमान लगाना मुश्किल था. अचानक लखन की नज़र हर रस्ते के सामने लगे सैंबोर्ड़ पर पड़ी हर सैंबोर्ड़ में भगवान् विष्णु द्वारा लिए गए 9 अवतारों के चित्र बने थे.

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Matsya(machli)/ Kachhap(kachhua)/ Shookar(suvar)/ Narsingh(sher मानव रूप)/ वामन/ परशुराम/ राम/ कृष्णा/ बुद्ध इन 9 सैंबोर्ड़ में hi सही रस्ते का हल छुपा था. इनमे से एक रास्ता मत्स्य मंदिर की तरफ जाना था यानि मछली और मछलक का सिग्न पहले रस्ते पर बना था तो लखन बेधड़क उस रस्ते पर आगे बाद गया. लखन उस रस्ते पर काफी आगे निकल आया था उसे लग रहा था उसकी मंज़िल अब करीब था पर काफी आगे जाकर वो रास्ता आगे से बंद था वह गलत रास्ता का सिग्न बोर्ड लगा था यानि एक मछली के सिग्न के सहारे लखन इतनी आगे जिस रस्ते पर चला आया वो रास्ता गलत था. शायद अघोरी ने इसीलिए कहा था की कही सफर तिगुना लुम्बा न हो जाए अब लखनके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था उसे वापस जाकर दुबारा से उन 9 रास्तो में सही रस्ते का चुनाव करना था.

लखन वापस उसी तरफ लौट चला जहा से मछली के सिग्न वाले रस्ते पर चला था. पर इन सबमे उसका काफी समय वास्ते हो गया था. घोड़े को तेज़ दौड़ता हुआ लखन एक बार फिर उसी जगह वापस पहुंच गया जहा विष्णु के नौ अवतारों के सिग्न लगे थे जो सिग्न उसे सबसे सही लगा यानि मछली का सिग्न वो तो गलत निकला अब बचे हुए 8 रास्तो में उसे हर हाल में सही रास्ता चुनना होगा वर्ण दुबारा उसका बहुत समय व्यर्थ चला जाएगा. लखन ने विष्णु के उन बचे हुए 8 अवतारों के बारे में सोचना आरम्भ किया गौतम बुद्ध वामन परशुराम और नरसिंघ का तो मछली या समुद्र से दूर दूर तक कोई नाता नहीं था. शूकर अवतार में जब हिरण्याक्ष धरती को कीचड के अंदर ले गया था तो उसे बहार लेन के लिए सुवर का अवतार लिया वो भी यहाँ सही नहीं लग रहा, श्री राम ने समुद्र पर रामसेतु बनाया था कृष्णा ने समुद्र के किनारे द्वारका नगरी बसै थी जो समुद्र में समां गई इसके अलावा उनका भी कोई लिंक मछली या समुद्र से नहीं था, कच्छप अवतार समुद्र मंथन के लिए hi लिया गया था विंध्याचल पर्वत को अपनी पीठ पर रखने के लिए कच्छप अवतार उद्देश्य hi समुद्र मंथन था हो न हो यही रास्ता सही रास्ता है और लखन बिना देर किये कछुए के सिग्न वाले रस्ते पर बाद चला.

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इस रस्ते पर भी काफी देर घोडा दौड़ने के बाद लाख सिंह उस टीले के पास पहुंच गया जहा ऊपर बना मत्स्य मंदिर साफ़ नज़र आ रहा था यानि ये रास्ता सही था. चढाई से पहले hi एक जलाशय बना था जिसमे बहुत सुन्दर सुन्दर मछलिया तैर रही थी. लखन ने अपने साथ लाया कुछ भोजन उन मछलियों का डाला वो घोडा भी इतना चल के काफी थक चूका उसे भी थोड़े विश्राम की आवश्यकता थी. इसलिए कुछ देर घोड़े को विश्राम देने के लिए लखन वही रुक गया. जलाशय का पानी पीने और कुछ पल विश्राम करने के बाद लखन दुबारा उस घोड़े पर सवार होकर उस टीले पर बने घुमावदार रास्तो पर चलता हुआ उस मत्स्य मंदिर की तरफ चल पड़ा. उन घुमावदार रास्तो से होता हुआ लखन कुछ घंटो में hi उस मत्स्य मंदिर के मुख्या द्वार पर पहुंच गया उस मुख्या द्वार पर एक द्वारल और मुख्या द्वार के पीछे तीन प्रवेश द्वार थे. जिनमे प्रथम द्वार पर मौर्या वंश द्वार लिखा था दुसरे पर गुप्ता वंश द्वार लिखा था और तीसरे पर सातवाहन वंश द्वार लिखा था.

द्वारपाल: आ गए आप मई आपके hi इंतज़ार में यहाँ खड़ा था यहाँ आपको तीन द्वार दिख रहे है ये तीनो द्वार मंदिर के अंदर बने तीन कक्षों तक जाते है जिनमे से एक में वो ट्राइटन रखा है जिसके लिए आप यहाँ आए है. पर आपको सही रस्ते का चुनाव करना होगा क्युकी अगर अपने गलत द्वार चुना तो आपको पुनः टीले के नीचे जाकर दुबारा चढाई चढ़ कर वापस आना होगा.

लखन पहले hi एक बार गलत रास्ता चुन कर काफी समय व्यर्थ कर चूका था और अब दुबारा वो समय व्यर्थ नहीं करना चाहता था इसलिए उसे बड़े ध्यान से सोच समझ कर द्वार चुनना था. इन द्वारा के नाम पर hi सही द्वार का उत्तर छिपा है लखन उन द्वारा के नामो पर विचार करने लगा. मौर्या गुप्ता और सातवाहन ये तीनो hi बेहद प्राचीन डायनेस्टी और इन तीनो के hi सशक्त बड़े '. थे कई मंदिरो के निर्माण करवाए पर इनमे से कौन मछली या समुद्र से जुड़ा है. लखन का सोचते सोचते दिमाग घूम गया पर उसे समझ नहीं आ रहा था की कौन सा द्वार सही है वो काफी समय तक सोचता रहा पर उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, फिर वो इन वंशो के राजाओ के बारे सोचने लगा मौर्या डायनेस्टी चन्द्रगुप्त मौर्या ने शुरू की फिर बिन्दुसार अशोक बिंबसार राजा बने सातवाहन वंश के बारे में ज्यादा तो नहीं जनता पर इसका सबसे महँ राजा गौतमीपुत्र शातकर्णि था और गुप्ता दुनासत्य जिसका सबसे महँ राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य था और इसकी स्थापना समुद्रगुप्त ने की. समुद्रगुप्त का नाम ज़हन में आते hi लखन को जैसे इस पहेली का जवाब मिल गया समुद्रगुप्त का नाम समुद्र के नाम पर रखा गया निश्चित रूप से ये दूसरा द्वार गुप्ता वंश द्वार hi सही द्वार है.

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लखन सिंह गहरी सास लेता हुआ उस दुसरे प्रवेश द्वार का दरवाज़ा खोल उस गलियारे में प्रवेश कर गया. उस गलियारे से चलते हुए लखन एक गोलाकार कक्षा तक पहुंच गया जहा बीचोबाक सोने सा चमकता ट्राइटन नज़र आ रहा था लखन की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था उसने आगे बाद का वो ट्राइटन अपने हाथो में उठा लिया.

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शाम होने में बस दो घंटे बाकि थे लखन को जल्द से जल्द वापस पहुंचना था. लखन वो ट्राइटन लेकर वापस मंदिर के मुख्या द्वार पर आ गया और उस द्वारपाल को प्रणाम कर घोड़े पर सवार होकर वापसी के लिए वह से निकल पड़ा.
 
इधर लखन की कोठी में गरिमा जीतू को सडके करने के लिए खुद को मेंटली तैयार कर चुकी थी अब उसे ये सोचना था वो ये सब कैसे करेगी. यही सब सोचते हुए गरिमा बाथरूम में नहाने चली गई नहाने के दौरान भी उसके ज़हन में बस उस 18 साल के लड़के को सडके करने का hi ख्याल चल रहा था.

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वो ये सब सोच hi रही थी की उसे ये मौका तुरंत मिल गया वो बाथरूम में नाहा hi रही थी की जीतू उसे नाश्ते के लिए पूछने आया और उसके रूम का मैंडूर खुला होने की वजह से वो सीधा अंदर आ गया और अंदर गरिमा को न पाकर उसने बाथरूम के बहार से गरिमा को आवाज़ लगाई की क्या वो अंदर है.

जीतू: गरिमा दी क्या आप अंदर हो.

गरिमा: है जीतू नाहा रही हु.

जीतू: वो मई नाश्ते के लिए पूछने आया था.

गरिमा उसे थोड़ी देर में आने का कहने वाली थी पर अचानक उसके मन में शरारती ख्याल आने लगे. वो जीतू को सडके करने का मौका hi तलाश रही थी की और इससे बेहतर मौका उसे नहीं मिल सकता था. गरिमा बाथरूम में बस टॉवल लेकर आई थी और अपने लिए एक घाघरा चोली और हरिया की पत्नी की एक छोटी सी चड्डी बहार बिस्तर पर hi रख आई थी. गरिमा ने जीतू को थोड़ी देर में आने को कहने की बजाए वेट करने को कहा.

गरिमा: रुक बहार आकर बताती हु.

बहार बिस्तर पर रखे कपडे देख जीतू समझ गया की गरिमा अंदर कपडे लेकर नहीं गई है बस टॉवल लेकर गई है यानि आज भिनस दिन की तरह टॉवल में hi बहार आएगी और उसे आज फिर गरिमा का गदराया बदन फिर टॉवल में देखने को मिलेगा. दूसरी तरफ गरिमा भी जानती थी की उस दिन जीतू गरिमा को टॉवल में देखकर कितना एक्ससिटेड हो गया था आज मौका है इस एक्ससिटेमेंट की दोसे को एक लेवल ऊपर बढ़ाने का. गरिमा ने जल्दी जल्दी खुद को टॉवल से पोछा और बाथरूम का गेट खोलने की तरफ बाद गई. जीतू गेट खुलने की आवाज़ सुन रहा था और इस आवाज़ के साथ उसके दिल की धड़कने भी ज़ोर ज़ोर से धक् धक् कर रही थी क्युकी वो जनता था की यहाँ से जाने के बाद उसे एक बार फिर अपना हाथ जगन्नाथ बनाना होगा. और अपनी उत्तेजना को अपने हाथो से hi शांत करना होगा.

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वो टॉवल लपेट कर गरिमा उस बाथरूम से बहार आ गई. टॉवल तो वैसे hi छोटा था और आज तो गरिमा ने उसे कुछ ज्यादा hi नीचे करके बंधा था जिस वजह से उसके स्तनों के बीचे की दरार साफ़ नज़र आ रही थी उसने जानबूझ कर टॉवल नीचे से बंधा था क्युकी उसने जीतू को अपने स्तनों को घूरते देखा था. गरिमा ने बाथरूम से बहार आकर जीतू को देखा आज फिर गरिमा का गदराया बदन एक छोटी सी टॉवल में लिप्त देख जीतू का हाथ रिएक्शन के रूप में अपने लुंड पर पहुंच गया पर गरिमा के सामने होने की वजह से उसने अपना हाथ वह से हटा लिया. गरिमा भी जीती की उत्तेजना को समझ रही थी पर आज वो एकदम नार्मल एक्ट कर रही थी क्युकी वो जीतू पर ये ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी की ये सब वो जानबूझ कर रही है. गरिमा बड़े साढ़े कदमो से बिस्तर पर पड़े अपने कपड़ो की तरफ जा रही थी और बिस्तर के बगल में खड़ा जीतू एक्ससिटेमेंट में उसे उस तरफ अत देख रहा था पर अब वक़्त था इस एक्ससिटेमेंट की दोसे को बढ़ाने का जिसका गरिमा ने पहले hi सोच लिया था.

गरिमा पहले hi बाथरूम से टॉवल काफी ढीली लपेट कर आई थी और उसने अपना पेअर खुजलाने के बहाने जीतू से नज़र बचाकर टॉवल को नीचे से हल्का सा झटका दिया और पहले से ढीली बंधी टॉवल सीधा खुलकर गरिमा के पैरो के पास आ गिरी. अंदर तो गरिमा पहले hi कुछ नहीं पहने थी यानि गरिमा अब उस 18 साल के लड़के के सामने पूरी तरह नंगी थी. पर गरिमा को उसके सामने ये भी ज़ाहिर नहीं करना था की ये सब उसने जानबूझ कर करा है उसे जीतू के सामने ये भी ज़ाहिर करना था की ये अनजाने में हुआ और साथ hi उसे अपने बदन का भरपूर दर्शन कराकर उसे उत्तेजित भी करना था. गरिमा ने बड़ी शातिर तरीके से ज़मीन पर पड़ी टॉवल को उठाने की कोई कोशिश नहीं की और न hi आगे बाद कर बिस्तर पर पड़े अपने कपडे उठाने की कोई कोशिश की बल्कि खुद को बड़ी शर्मा हाय वाली दिखने के लिए अपने स्तनों और छूट को एक एक हाथ से धक् कर कड़ी हो गई. हलाकि ये वो भी जानती थी एक हाथ की हथेली से वो अपने दो दो भरी स्तनों को कितना छुपा पाएगी पर उसे तो बस शर्मोहया का ड्रामा करना था. वो चाहती तो तो ज़मीन पर गिरी पड़ी वो टॉवल उठाकर भी अपना जिस्म धक् सकती थी पर जीतू को अपने स्तनों का भरपूर दर्शन करने के लिए वो उन्हें एक हथेली से ढके कड़ी थी.

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इधर गरिमा का ये पैतरा जीतू पर अपना काम कर गया था उसका कौड़ा कोरा नया नवेला लुंड पाजामे के अंदर झटके पे झटके खा रहा था. जीतू को गरिमा की हथेली की बीच की दरार से गरिमा के स्तन साफ़ नज़र आ रहे थे और उन्हें जीतू का मुँह खुला का खुला रह गया और उसकी सासे तेज़ तेज़ चलने लगी. गरिमा को अगर खुद को छुपाना hi होता तो वो जीतू को बहार जाने को भी कह सकती थी पर यही उसने अपना दूसरा डाव चला उसने जीतू को बिस्तर पर पड़ी अपनी पंतय लेकर आने को कहा.

गरिमा: जीतू ऐसे मत देखो वो बिस्तर पर जो मेरी चड्डी पड़ी प्लीज वो उठाकर यहाँ लाओ.

जीतू के तो सोचने समझने की शक्ति hi शुन्य हो गई थी वो तो यही समझ रहा था की सच में गरिमा की टॉवल अनजाने में गिर गई और सच में वो अपने जिस्म को छुपाने की कोशिश कर रही थी. वो चुपचाप गरिमा के कहे मुताबिक वो चड्डी उठाकर गरिमा के पास ले आया. अब जीतू कमरे में नंगी कड़ी गरिमा के एकदम करीब खड़ा और चोर नज़रो से गरिमा के स्तनों को देख रहा था. यहाँ गरिमा ने जीतू को सडके करने का अपना अगला दांव फेंका.

गरिमा: जीतू प्लीज मई अपना हाथ नहीं हटा सकती मुझे शर्म आती है प्लीज तुम मुझे ये चड्डी पहना डोज.

जीतू तो जैसे रोबोट सा हो गया था उसने हां में अपना सर हिला दिया और चुपचाप घुटनो के बल गरिमा के सामने बैठ गया और गरिमा की चड्डी खोलकर गरिमा के आगे फैला दी. गरिमा ने अपनी छूट को ढके ढके एक एक कर अपनी दोनों टाँगे चड्डी में दाल दी. जीतू ने चड्डी को ऊपर तक चढ़ा दिया. चड्डी को ऊपर चढ़ाते हुए उसे हलकी hi सही गरिमा की छूट की थोड़ी सी झलक दिख गई. चड्डी पेहेन लेने के बाद गरिमा ने अपने दोनों हाथो से अपना एक एक स्तन धक् लिया. अब वो छोटी सी चड्डी में ढकी गरिमा की छूट की दरार चड्डी के ऊपर से जीतू को साफ़ दिख रही थी.

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गरिमा: जीतू अब प्लीज मेरी चोली भी ले आओ.

जीतू बिस्तर पर पड़ी वो चोली भी उठा लाया जिसके हुक पीछे की तरफ बंद होते थे.

गरिमा: प्लीज ये भी पहना दो तुम्हे बड़ा अजीब लग रहा होगा पर मुझे हाथ हटाने में शर्म आ रही है.

जीतू: नहीं नहीं ठीक है मई पहना दूंगा.

गरिमा ने एक हाथ हटाकर उस चोली की ब्याह में दाल दिया फिर जब उसने दूसरी ब्याह चोली में डाली तो एक पल के लिए उसके स्तन पूरी तरह जीतू के सामे उजागर हो गए और गरिमा के स्तनों पर भूरे भूरे निप्पल भी जीतू के सामने उजागर हो गए. जीतू का मन तो करा की अभी उन निप्पल को अपने होंठो में भर ले पर उसे दर था पता नहीं गरिमा कैसे रियेक्ट करे. दोनों ब्याह डालने के बाद गरिमा ने जीतू को पीछे हुक लगा देने को कहा.

गरिमा: जीतू प्लीज पीछे आकर हुक लगा दो.

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जीतू गरिमा के पीछे आकर गरिमा की चोली के हुक लगाने लगा. हुक लगते हुए वो पीछे से गरिमा के अधनंगे बदन को इत्मीनान से ऊपर से नीचे तक देख रहा था क्युकी गरिमा का चेहरा सामने की तरफ था. चोली के हुक लगने के बाद गतिमा खुद चले हुए बिस्तर तक आ गई और बिस्तर से वो घाघरा उठाकर खुद पहने लगी जीतू अब भी गरिमा को वो आखरी कपडा पेहेनते हुए देख रहा था. न गरिमा ने उसे जाने को कहा और न खुद उसने जाने की कोशिश करि उसकी तो बिन मांगे hi लाटरी लग गई थी जब वो गरिमा को बुलाने आया था तब उसने सोचना भी नहीं था की आज उसे गरिमा के निप्पल देखने को मिल जाएगी गरिमा को अपने हाथो से चड्डी पहनाने का मौका मिल जाएगा. उसका लुंड पूरी तरह गरम हो चूका था और जीतू जल्द से जल्द उसे ठंडा करने के लिए उतावला हो रहा था. गरिमा ने भी तब तक अपना घाघरा पेहेन लिया था. अपने पुरे कपडे पेहेन्ने के बाद गरिमा चेहरे पर बड़ी परेशानी के भाव लेट हुए जीतू के पास आई और जीतू से बात करने लगी.

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गरिमा: जीतू पता नहीं अचानक से वो टॉवल कैसे खुल गया मुझे अचानक से कुछ समझ hi नहीं आया तुम्हे भी पता नहीं कैसा लग रहा होगा मैंने तुम्हे चड्डी पहनाने को कहा ी ऍम सॉरी.

जीतू: कोई बात नहीं गरिमा दी हो जाता है कभी कभी टॉवल hi तो था कभी भी गाँठ खुल सकती है.

गरिमा: पर जीतू ऐसा नहीं होना चाहिए था बहार किसी को पता चल गया तो तुम्हारे पिताजी को पता चल गया तो.

जीतू: नहीं उन्हें कुछ पता नहीं चलेगा मई उन्हें कुछ नहीं कहूंगा.

गरिमा: प्रॉमिस तुम बहार किसीसे नहीं कहोगे.

जीतू: हम्म प्रॉमिस मई किसी से नहीं कहूंगा.

इतना सुनकर गरिमा ने जीतू को अपने सीने से लगा लिया. गरिमा के भरी भरी स्तन जीतू को अपनी छाती में दबते महसूस हो रहे थे. और जीतू के झटके कहते लुंड का एहसास गरिमा को घाघरे के ऊपर से अपनी छूट के पास महसूस हो रहा था. गरिमा दो मिनट तक जीतू को गले लगाए कड़ी रही दो मिनट बाद जब गरिमा ने जीतू को अलग करा तो उत्तेजना के मरे जीतू की आँखे बंद थी हुए पाजामे के अंदर से उसके लुंड के झटके तेज़ थे. जिन्हे देख गरिमा की तो हसी निकल गई पर गरिमा ने अपनी हसी पर काबू रखा. गरिमा से अलग होकर जीतू ने अपनी आँखे खोली वो अपने लुंड का पानी निकलने के लिए मारा जा रहा था और गरिमा भी उसकी हालत समझ रही थी इसलिए उसने उसे जाने को कहा.

गरिमा: जीतू अब तुम जाओ मई अभी थोड़ी देर में नाश्ते के लिए नीचे अति हु.

जीतू चुपचाप नीचे चला गया गरिमा ने कमरे से निकलकर जीतू को जाते देखा. जीतू किचन में अपने पिता के पास जाने की बजाए सीधा कोठी से बहार निकल गया. गरिमा जानती थी वो कहा जा रहा है और क्यों जा रहा है वो किसी एकांत जगह पर बैठ कर अपने हाथो से अपने लुंड की गर्मी को शांत करेगा जो आज शायद जीवन में पहली बार एक औरत को नंगा देखकर उत्तेजित हो गया था. पर इस छोटे से बचकाने से खेल में गरिमा को भी बड़ा मज़ा आया था हरिया के साथ उसे जो मज़ा मिला ये मज़ा उससे बिलकुल अलग था और गरिमा अब इस खेल को और खेलने का निश्चय कर चुकी थी. और वो दुबारा जीतू को इस तरह सडके करने की तरकीब सोचने लगी.

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इधर हवेली में नेहा शबाना के रूम में

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नेहा को उस मोबाइल पर मश्ग अत है जो उसे स्ट्रेंजर ने दिया था.

मास्टर: तेरा अगला टास्क तुझे यहाँ की रसोई में मिलेगा. वह मैंने तेरे लिए आज का पार्सल रखा है कल की तरह जिसमे आज रात के लिए तेरी ड्रेस राखी है खाना बन जाने के बाद जब हॉल में सबको खाने के लिए बुलाया जाएगा तो रसोई में कोई नहीं होगा तब तू चुपके से किचन में जाकर वो पार्सल वह से ले आना. समझ गई न

नेहा: जी

मास्टर: और ध्यान रहे खाने पर कोई सेक्सी सी ड्रेस पेहेन कर आना मई भी वही पर हूँगा कुछ ऐसा पेहेन कर आना जिसे देख कर वह मौजूद हर मर्द के खून में गर्मी आ जाए कोई मस्त स्कर्ट पेहे कर आ बढ़िया सा मुझे मज़ा आना चाहिए वर्ण तू जानती है रात में मई तुझे किस तरह सजा दूंगा.

नेहा: हम्म समझ गई.

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नेहा ने अपने कपड़ो में से एक शार्ट मिनी स्कर्ट निकली है और उसे पेहेन कर बहार जाने के लिए तैयार हो गई. तब तक शबाना भी बाथरूम से बहार आ गई शबाना का मन नेहा से अपना दर्द बया करने का कर रहा था पर कुछ कहने की उसमे हिम्मत नहीं थी.

नेहा: बड़ी देर लगा दी शबाना दी बाथरूम में.

शबाना: हम्म्म

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तब तक बहार से खाने के लिए सबको आवाज़ दी गई.

नेहा: चलो दी बहार खाने के लिए बुलाया जा रहा मुझे भी बड़े ज़ोर की भूक लगी है.

शबाना: तुम चलो मई दोपहर की ,,., पद कर अति हु.

नेहा: Ok जल्दी आना.

नेहा दरवाज़ा भिड़ा कर बहार निकल गई शबाना अपना वैल पेहे कर वही ,,., पड़ने की मुद्रा में ज़मीन पर बैठ गई. शबाना ,.' से दुआ मांग रही थी की वो जो खता उससे हुई उसे माफ़ करे और लालू नाम का जो ग्रहण उसके ऊपर लग गया है उसे दूर करने के लिए उम्मीद की एक किरण तो भेज दे.

इधर बहार नेहा किचन की तरफ जा hi रही थी की उसे रस्ते में छोटू दिखा जो झाड़ज्यो के पीछे खड़ा रो रहा था. नेहा के बढ़ते हुए कदम वही रुक गए और छोटू को इस तरह रोटा हुआ देख उसके कदम खुद बा खुद छोटू की तरफ बाद गए. छोटू के करीब पहुंच कर नेहा ने जैसे hi छोटू के कंधे पर हाथ रखा वो एकदम से सकपका गया.

नेहा: छोटू क्या बात है तुम यहाँ खड़े रो क्यों रहे हो.

छोटू: N.....n....nahi तो मई कहा रो रहा हु मई नहीं रो रहा हु.

नेहा: झूट मत बोलो मैंने खुद तुम्हे रट हुए देखा है मुझे नहीं बताओगे. उस बुड्ढे रसोइया क्या नाम है उसका रामु उसने तुम्हे फिर परेशां करा.

छोटू: नहीं कोई बात नहीं है सच में आपको कुछ ग़लतफहमी हुई है.

नेहा: तो तुम यहाँ झाड़ियों के बीच क्या कर रहर थे ठीक है मुझे लगा तुम मुझे अपना मानते हो पर नहीं मई गलत थी ठीक है नहीं बताना चाहते तो मत बताओ.

छोटू: ऐसा नहीं आप बहुत अच्छी हो पर मुझे समझ नहीं आ रहा मई आपको कैसे बताऊ आप गुस्सा हो जाओगी.

नेहा: क्यों मई क्यों गुस्सा हो जाउंगी ऐसा क्या कर दिया तुमने.

छोटो: वो कल कमरे में जो कुछ हुआ था अपने किसीको बताने को मन करा था.

नेहा: है तो क्या हुआ तुमने किसीको बता दिया क्या.

छोटू: दरअसल कल रात को डांस पार्टी ख़तम होने के बाद रामु काका ने शराब पी ली थी और शराब पीकर वो फिर मुझे झाड़ियों के पीछे ले गए और वह उन्होंने मेरे साथ गन्दा काम करा मेरे पीछे अपनी सुसु वाली चीज़ डाली मुझे बहुत दर्द हुआ मई बहुत रोया भी पर वो नहीं मने. फिर उन्होंने उस रात के बारे में पुछा जब आपने हमे वह झाड़ियों के पीछे देख लिया था और मेरे क्रीम लगाई थी. वो पूछने लगे की मैंने आपको क्या बताया उन्होंने मुझे कई झापड़ भी मरे कुछ देर तो मई चुप रहा पर जब सहा नहीं गया तो मैंने उन्हें बता दिया और उनकी मार के दर से कल जो कमरे में हुआ वो भी मई उन्हें बता गया. (रट हुए) मुझर माफ़ कर दिया आपने मेरे लिए इतना कुछ करा और मई आपकी बात को छुपा कर नहीं रख पाया.

नेहा को छोटू पर गुस्सा भी आ रहा था पर साथ hi साथ तरस भी आ रहा था की बेचारे को इतना कुछ सहना पद रहा था. अभी उम्र hi क्या है इसकी दर के मरे बता दिया होगा पर अच्छा हुआ जो मैंने शबाना दी को इसके साथ करने को कुछ नहीं कहा वर्ण मेरे साथ साथ उनकी भी बदनामी हो जाती. पर अब जो हुआ सो हुआ मुझे उस बुड्ढे रसोइये से फेस तो फेस मिलना hi होगा इस बच्चे के लिए भी और अब अपने खुद के लिए भी और उससे फेस तो फेस मिलकर उससे बात करनी होगी. वैसे भी वो पार्सल लेने तो मुझे किचन में जाना hi है वो शायद मुझे वही मिल जाए. देखती हु मेरे और छोटू के बारे में जानने के बाद वो बुद्धा रसोइया किस तरह रियेक्ट करता है. उसे लग रहा होगा वो मुझे ब्लैकमेल करके मुझ पर हावी हो जाएगा पर ऐसे ठरकी बुद्धो को डील करना मुझे अच्छे से अत है.

नेहा: छोटू तुम चिंता मत करो मई किचन की तरफ hi जा रही हु मई उस बुड्ढे रसोइये से अच्छी तरह बात कर लुंगी और वडा करती हु वो आज के बाद दुबारा तुम्हे परेशां नहीं करेगा भरोसा रखो मुझ पर.

छोटू: आप मुझसे गुस्सा तो नहीं हो.

नेहा: नहीं बिलकुल नहीं मई तुमसे बिलकुल भी गुस्सा नहीं हु.

छोटू: पर आप उनसे बात करोगी तो कही वो मुझ पर गुस्सा न हो जाए की मैंने आपको सब बता दिया.

नेहा: ऐसा कुछ नहीं होगा मई सब संभल लूंगी बस तुम किचन के बहार hi रहना और देखना कोई अंदर न आए और जैसे hi कोई उस तरफ आए किचन के दरवाज़े की कुण्डी खटका कर मुझे बता देना. बस इतना काम कार्डो बाकि सब मई देख लूंगी.

छोटू: ठीक है.

नेहा वापस किचन की तरफ चल पड़ी पर अब उसके पास किचन में जाने के दो मकसद थे एक वो पार्सल उठाना और दूसरा उस रसोइया रामु काका से बात करना. और वो जानती थी उसे क्या करना है ऐसे अधेड़ उम्र के कामुक हवस के भूके मर्दो को डील करना उसे अच्छे से अत था और इस नै सिचुएशन ने उसके मन में एक नै फंतासी को जन्म दे दिया.

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