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देव झड़ने के बाद शबाना से परे हैट गया और ज़मीन पर लेट कर गहरी गहरी सासे लेने लगा. देव तो झाड़ गया था पारा कुंदन प्रताप का तो अभी शुरू भी नहीं हुआ था वो तो शबाना के कामुक अंगो उसके स्तनों और छूट गांड को चाट चाट कर hi अपने लुंड हिला रहे थे. देव के हटने के बाद कुंदन भी शबाना के पीछे से हैट गया और उठ कर खड़ा हो गया और शबाना के चूतड़ों को चौड़ा कर के उसके गांड के छोटे से कैसे हुए छेड़ को निहारने लगा जो शबाना के डोगग्य पोजीशन में होने की वजह से थोड़ा चौड़ा हो गया था कुंदन एक नज़र अपने झाटो से भरे झटके कहते लुंड को देखता तो एक नज़र शबाना के गांड को देखता. वो अपना लुंड शबाना की गांड में डालने को मचल रहा था पर उसके मन में ख्याल आया अगर शबाना को खड़ा करके उसके पीछे से ये लुंड उसकी गांड में उतरा जाए तो वो उसकी गांड में और कास कर अंदर जाएगा और मज़ा दो गुना हो जाएगा. ये सोचते हुए अपना लुंड सहलाते सहलाते उसकी नज़र शबाना के नीचे उसके दूध चूसते प्रताप पर पड़ी जिसका लुंड भी बार बार झटके खा रहा था और शबाना की छूट में घुसने को बेताब था. ये सोचकर कुंदन के मन में कुछ नै तरह से शबाना को दोहरी चुदाई का ख्याल आया क्युकी ये कुत्ता बनाकर छोड़ने की पोजीशन तो बहुत पुराणी हो गई थी.
कुंदन: आए प्रताप चल इस दुधारू गए के नीचे से निकल बहुत बछड़े की तरह पी लिया दूध अब अपने लुँडो का भी कुछ सोच बड़ी देर से गरम होकर झटके पे झटके खाए जा रहे है इन्हे भी ठंडा करना. चल निकल बहार और खड़ा कर ये एक लुंड अंदर लेने के लिए तड़प रही थी आज इसे एक साथ दो लुँडो का मज़ा देते है.
कुंदन के अलफ़ाज़ शबाना के कानो में जा रहे थे और वो उनका मतलब भी समझ रही थी पर विरोध करने का अंजाम उसने देख लिया था और यहाँ कोई ऐसा था नहीं जो उसे बचा ले क्युकी जिसके भरोसे पर वो यहाँ आई थी वो तो उसके दर्द का मज़ा ले रहा था. कुंदन ने एक बार फिर शबाना के बालो को मुट्ठी में जकड़ा और उसे खींचकर खड़ा कर दिया प्रताप भी शबाना के नीचे से निकल कर उसके सामने आकर खड़ा हो गया. दोनों शबाना के बदन से इस कदर आकर चिपक गए थे की शबाना उनके बीच छुप सी गई थी. और दोनों के लुंड इस कदर अकड़ कर सामे की तरफ तन गए थे की पीछे से लालू का लुंड शबाना के चूतड़ों में रगड़ रहा था तो आगे से प्रताप का लुंड शबाना की छूट में यहाँ वह घिस रहा था.
पीछे से कुंदन शबाना की नंगी चिकनी पीठ और गार्डन को अपनी जीभ से चाटने लगा तो आगे से प्रताप ने अपने होंठ शबाना के होंठो पर रख दिए. शबाना को किश करते करते कुंदन प्रताप ने उसकी एक ब्याह को आपमें अपने कंधो पर रखा और शबाना के चूतड़ों और जांघो के नीचे हाथ का सहारा देकर उसे एक साथ अपनी गोड़ में उठा लिया. कुंदन शबाना के चूतड़ों को पीछे से थामे था तो प्रताप ने आगे से उसकी जांघो को अपनी कमर पर लपेट थाम रखा था इस पोजीशन में शबाना के दोनों छेड़ उसकी गांड और छूट पूरी तरह खुल गए थे. प्रताप को शबाना के होंठो को चूम hi रहा था कुंदन भी शबाना के गालो को छत्ता हुआ उसके होंठो तक पहुंच और दोनों एक साथ शबाना के होंठो को चूसने लगे.
अपने आगे पीछे दो दो मर्दो की गरम गरम सासे न चाहते हुए शबाना को भी उत्तेजित कर रही थी. वो कुछ पल को साडी बर्बरता वो मार वो सिगरेट की जलन सब भूल गई थी और उनकी किसिंग में डूब सी गई थी. वो कुछ पल को अपने सेंस से बहा सी हो गई उसे होश तब आया जब उसे अपने गांड और छूट दोनों छेड़ो पर एक साथ दो लुँडो का दबाव महसूस हुआ. वो छटपटाना छह रही थी आज़ाद होना छह रही थी पर दो गाँव के हट्टे काटते मर्दो की पकड़ से छूटना इतना आसान कहा था वो भी तब जब वो उनकी गोड़ में उठी हुई हो. प्रताप और कुंदन दोनों के लुंड किसी मैने में लालू से कम नहीं था और बार शबाना की छूट और गांड के छेड़ो पर दस्तक दे रहे थे. शबाना के ज़हन में अपना और लालू का वो फर्स्ट एनकाउंटर घूम रहा था जब लालू ने घोड़ी बनाकर उसकी गांड मारी थी. उस दर्द के बार में सोच सोच कर hi उसके रौंगटे खड़े हो जाते थे और यहाँ तो दो दो मर्द एक साथ उसके अंदर दाखिल होने की कोशिश कर रहे थे. जब एक लुंड ने उसकी गांड में दर्द का भूचाल ला दिया था एक साथ दो लुंड लेना तो उसके लिए बेहद डरावना था. कुंदन ने अपना लुंड का टोपा शबाना की गांड में छेड़ के मुहाने पर रख दिया और प्रताप ने अपने लुंड का आगे का हिस्सा शबाना की छूट में फसा दिया.
शबाना बुरी तरह छटपटा रही थी अपनी कमर को हिला हिला कर उनके लुंड अपने दोनों छेड़ो से अलग करने की भरसक कोशिश कर रही थी पर उनकी मजबूत पकड़ के सामने उसकी हर कोशिश बेकार थी. वो ज़बान से बोलकर उन्हें रोकना चाहती थी पर एक साथ दो मर्दो के होंठो ने उसके आवाज़ को बंद कर रखा था. वो न बोल सकती थी न हिल सकती थी. कुंदन ने अपने लुंड पर हल्का सा दबाव डाला और उसके लुंड का टोपा की शबाना की गांड के छेड़ को खोलता हुआ उसके अंदर जाकर फस गया. सिर्फ लुंड का टोपा यानि शायद एक चौथाई हिस्सा अंदर जाने भर से शबाना में बदन में दर्द की एक लेहेर दौड़ गई अभी तो तीन चौथाई अंदर जाना बाकी थी और अभी तक प्रताप ने तो कुछ करा hi नहीं था. शायद वो दोनों एक साथ शबाना के अंदर दाखिल होना चाहते थे. और कुंदन ने प्रताप आँखों आँखों में इशारा करा और दोनों एक साथ धक्का मारते हुए अपना अपनाब आधा लुंड शबाना के दोनों छेड़ो के अंदर एक साथ दाखिल कर दिया. शबाना दर्द से बुरी तरह तड़प उठी जिस औरत ने यहाँ इस गाँव में आने से पहले अपने पति तक का लुंड अपने किसी छेड़ में नहीं लिया था आज एक साथ दो दो तगड़े लुंड उसके दोनों छेड़ो को अंदर दाखिल हो गए थे.
कुछ देर शांत रहने के बाद उन दोनों ने एकसाथ एक और धक्का मारा और उनके तीन चौथाई लुंड शबाना के अंदर दाखिल हो गई. शबाना की और दर्द भरी कराह उसके होंठो में hi घुट कर रह गई. पर इस बार अपने अपने लुंड को अंदर दाल कर hi वो न रुके उनके लुंड ने शबाना की गांड और छूट के अंदर अपने लिए प्रॉपर जगह बना ली थी भले hi इस सबमे में शबाना को कितना भी दर्द हुआ हो पर शबाना के दर्द से उन्हें कोई लेना देना नहीं था. इसलिए अपने लुंड अंदर घुसेड़ देने के बाद एकसाथ रदमीक मोशन में शबाना के दोनों छेड़ो में लुंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया. उनके हर धक्के में शबाना के बदन में दर्द की एक तेज़ लेहेर दौड़ जाती. क्युकी उसकी गांड और छूट अब तक केवल एक एक बार चूड़ी थी इसलिए उसकी तिघटनेस अब तक सलामत थी और ऐसे में दो ड्रग्स की वजह से ज़रुरत से ज्यादा फूले लुंड जब एक साथ उसकी टाइट छूट और गांड की दीवरों को चीरते हुए अंदर बहार हो रहे थे तो वो दर्द उसके बर्दाश्त के बहार था. वो तो गनीमत थी की इस पोजीशन की वजह से उनके पुरे लुंड शबाना के अंदर तक नहीं पहुंच पा रहे थे वर्ण शबाना के दर्द की कल्पना करना भी मुश्किल था. पर इसके बावजूद कुंदन और प्रताप ताबड़तोड़ नीचे से शबाना की गांड और छूट को अंदर बहार पेले जा रहे थे.
शबाना को इस तरह इस कामुक मुद्रा में चुड़ते हुए देख कर ज़मीन पर लेते देव के लुंड में एक बार फिर हल्का हल्का तनाव आने लगा. वो नीचे से शबाना के दोनों छेड़ो में अपने दोस्तों के लुंड अंदर बहार होते देख रहा था और शबाना के चेहरे पर नज़र आते दर्द के भावो को भी समझ रहा था पर ये दर्द भरे एक्सप्रेशन उसके अलग hi मज़ा दे रहे थे. देव उठकर शराब के काउंटर पर गया और वह से एक बोतल उठाकर पीने लगा पर अचानक उसके मन में एक ख़याल आया और वो शराब की बोतल लेकर सीधा शबाना के करीब आ गया और प्रताप और कुंदन को अपने हाथ में पकड़ी बोतल दिखते हुए शबाना की तरफ इशारा करा. वो दोनों भी उसकी बात समझ गए और उन्होंने शबाना के होंठो को अपने होंठो की पकड़ से आज़ाद कर दिया पर इससे पहले की शबाना कुछ कहती चीखती व चिल्लाती देव ने शराब की बोतल शबाना के मुँह में ठूस दी. शबाना जिसने आज तक शराब को हाथ भी नहीं लगाया था आज जबरन उसका गैंग बंग करते हुए उसे शराब पिलाई जा रही थी. और बेचारी शबाना मजबूर थी उसे पीने के लिए. शराब उसके मुँह से ओवरफ्लो होते हुए उसके बदन से बहती हुई उसकी छूट तक जा रही थी क्युकी उसकी टाँगे तो हवा में उठी थी.
देव वो बोतल तब तक शबाना के मुँह में ठूसे रहा जब तक पूरी बोतल खली नहीं हो गई. और जब देव ने बोतल निकली तो शबाना को अपना सर घूमता सा लग रहा था. कुंदन और प्रताप अब भी शबाना की गांड छूट को पेले जा रहे थे. और शराब के नशे में अब शबाना का दर्द भी कुछ कम हो गया था और उसके चेहरे जे दर्द के भाव भी अब ख़तम हो गए थे और मुँह से करहो की जगह अब ाहो की आवाज़े आ रहे थे. शबाना की आँखे दो लुँडो के धक्को की उत्तेजने के मारे बंद हो गई थी उसने कुंदन प्रताप के गले में पड़ी बहो को कास कर उसने अपने बदन से भींच लिया था. शायद शबाना एक बार फिर अपने ओर्गास्म के करीब पहुंच गई थी. शबाना के इस कामुक बदले हुए रूप से कुंदन प्रताप का जोश भी दुगना हो गया था उनके धक्को की गति भी बाद गई थी. उनके हर धक्के पर शबाना के मुँह से उह आह की आवाज़े आ रही थी जिसे सुनकर वो और तेज़ तेज़ धक्के लगाए जा रहे थे. और दो लुँडो की मार के आगे शबाना की छूट ने समर्पण कर दिया और छूट की दीवार उसके जूस से चिकनी हो गई इस लिए प्रताप का लुंड भी आसानी से अंदर बहार हो रहा था हर धक्के में उनके लुंड शबाना की छूट और गांड में रगड़ते हुए अंदर को जा रहे थे. और इस रगड़ की वजह से वो अपनी उत्तेजना के चरमबिंदु पर पहुंच चुके थे जिस वजह से उन्होंने एक साथ शबाना के बदन को कास कर भींच लिया और एक साथ उन दोनों के लुँडो ने शबाना की दोनों छेड़ो की गर्मी के आगे अपने हथियार दाल दिए.
उन दोनों के लुँडो से वीर्य की धार शबाना के दोनों छेड़ अंदर तक भर गए थे और शबाना के पेअर हवा में होने की वजह से वो वीर्य शबाना के दोनों छेड़ो में फेज लुँडो के अगल बगल से बैठ्कर बहार आ रहा था. वो दोनों अब भी शबाना को अपने बीच में दबाकर उठाए खड़े हुए थे और उनके लुंड अब भी शबाना के दोनों छेड़ो में फेज हुए थे हुए लुंड सब भी थोड़ा थोड़ा वीर्य शबाना की छूट और गांड को अंदर तक गरम और गीला कर रहा था. हर निकलते वीरा की बूँद के साथ उनके लुंड का अकार छोटा पड़ता जा रहा था और जब उनके वीर्य का आखिरी कटरा तक निकल गया तो उनके लुंड सूखे छुआरे की तरह शबाना के दोनों छेड़ो से बहार आ गए.
कुंदन प्रताप और शबाना तीनो गहरी गहरी सासे ले रहे थे. कुंदन और प्रताप ने शबाना को अपनी बहो से उतार कर नीचे खड़ा कर दिया पर वो अब भी शबाना को अपनी बहो के जकड़े हुए थे और उसके कंधे गालो और होंठो को चाट रहे थे. पर वो दो तो शबाना को चाट hi रहे थे उनके बगल में खड़ा देव ने भी शबाना की कमर में हाथ डालकर उसके बदन से चिपक गया. शबाना के पुरे बदन से शराब की महक आ रही थी, जितनी शराब उसने खुद पी थी उससे ज्यादा तो उसके शरीर से बहकर नीचे गई थी.
देव ने शबाना के बदन से नीचे बह कर जाती शराब को देखा और उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठो के नीचे ठुड्डी पर लगी शराब को अपनी जीभ से चाट लिया पर वो शराब को छत्ते हुए उसे न जाने क्या सूझी की वो भागकर दुबारा शराब काउंटर के पास गया और एक और बोतल ले आया. और वो शराब की बोतल शबाना के बदन पर उडेलनि शुरू कर दी. कुंदन और प्रताप ने जब देव को इस तरह शबाना के बदन पर शराब डालते देखा तो उन्होंने अपने होंठ शबाना के पेट पर रख दिए और अपनी जीभ निकल शबाना के बदन पर ऊपर से बह कर आती शराब को चेतना शुरू कर दिया.
वो दोनों शबाना के पेट उसके गर्दन उसके स्तन कवज हर जगह से शराब को चाट रहे थे उन्होंने कई बार शराब पी थी पर शराब पीने का जो मज़ा उन्हें आज आ रहा था वो आज से पहले कभी नहीं आया था. अपने दोस्तों इस तरह मग्न होकर शराब पीटा देख देव और 10-12 दारु की बोतल ले आया. और उनमे से 2-3 बोतल और शबाना के बदन पर खली करने के बाद एक बोतल लेकर शबाना की जांघो के बीच बैठ गया और उसकी एक जांघ उठाकर अपने कंधे पर रख ली और उस शराब की बोतल का मुँह शबाना की छूट के अंदर दाल कर उसकी साड़ी शराबा की छूट के अंदर खली करनी शुरू करदी.
शबाना को भी अपनी छूट के अंदर शराब की चिपचिपाहट का एहसास हो रहा था उसे दर भी लग रहा था की कही उसका उसके माँ बनने पर कुछ गलत असर न पड़े वो छूटना चाहती थी पर 6 मर्दाने हाथ उसे इस कदर शिकंजे में जकड़े थे की वो बेबस थी और रही सही कसार उसके दिमाग पर चढ़ती शराब ने पूरी करदी. देवत तब तक शबाना की चूर में शराब डालता रहा था जब तक वो पूरी बोतल खली नहीं हो गई. बोतल खली होने में बाद जैसे hi देव ने शबाना की छूट से बोतल का मुहाना निकला छूट से शराब की तेज़ धार उसके जांघो से बहते हुए नीचे की तरफ आने लगी. ऐसे लग रहा था जैसे शबाना अपनी छूट से शराब की जगह दारु मूट रही हो. पर देव भी इसके लिए तैयार था उसने तुरंत अपने होते शबाना की छूट पर रख दिए ताकि शबाना की छूट से निकलती शराब का एक भी कटरा वास्ते न जाए वो शबाना की छूट से निकलती शराब का एक एक कटरा पिए जा रहा था. उसने तब तक शबाना की छूट से अपना मुँह नहीं हटाया जब तक की उसमे भरी पूरी शराब बहार नहीं आ गई. पर वो यही नहीं रुका उसने शबाना की जांघो पर बह कर आई शराब को अपनी जीभ से चाट चाट कर पूरा साफ़ कर दिया.
उन तीनो को तो जैसे एक नया खेल मिल गया था और शबाना का बेबस सा नंगा बदन उनके लिए बस एक खिलौना भर था वो उसके जिस्म के अलग अलग अंगो पर शराब उड़ेल रहे थे और वह से चाट चाट कर शराब पी रहे थे. शबाना के जिस्म का ऐसा एक भी हिस्सा नहीं बचा था जहा से शराब की महक नहीं आ रही थी और जहा से उन तीनो ने शराब नहीं पी. उसकी गांड कमर पीठ उसके चूतड़ छूट गाल जांघ कोहनी यहाँ तक की शबाना की मुँह में शराब भर कर उसके मुँह से मुँह लगाकर भी उन्होंने शराब पी थी. पुरे कमरे में केवल शराब की hi महक आ रही थी. पर इतनी शराब पीने के बाद भी वो तीनो जस के तस खड़े थे पर बेचारी शबाना से तो खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था. वो पूरी तरह नशे में धुत्त हो चुकी थी उसे नशे में धुत्त देख उन तीनो ने उसे छोड़ दिया उनके छोड़ते hi वो कुछ कदम लड़खड़ाते हुए चली और फिर ज़मीन पर गिर पड़ी. उसे यु बेबस देख वो तीनो और लालू उस पर है रहे थे उसकी बेबसी का मज़ाक उदा रहे थे. कुंदन और देव तो शबाना के एक एक छेड़ का मज़ा ले चुके थे पर देव अब तक शबाना के उन छेड़ो की गर्मी से अनजान था वो तो शबाना के मुँह की गर्मी से झड़ने को मजबूर हो गया था. पर अब शबाना के अलग अलग छेड़ो को एक एक बार छोड़ने के बाद शबाना के बदन से यु कामुक तरह से शराब पीकर उन तीनो के लुंड एक बार फिर झटके खाने लगे थे. और वो तीनो एक बार शबाना के बदन के साथ राउंड तवो खेलने को तैयार थे वो भी इस बार एक साथ.