A wedding ceremony in village - Page 17 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

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अपनी गांड में अंदर बहार होती ऊँगली ने गरिका को चरमसुख के बेहद करीब पंहुचा दिया था पर बिहारी काका ने उसकी छूट पर अपना लुंड रगड़ना बंद कर दिया था क्युकी गरिमा की उत्तेजनापूर्ण अवस्था को देखकर उन्हें आभास हो रहा था की क्या पता आज रात इस गद्रे बदन वाली औरत को छोड़ने का मौका मिल जाए इसलिए वो अभी यही अपना वीर्य बर्बाद नहीं करना चाहते थे क्युकी एक रात में एक बार्स झड़ने के बाद इस उम्र में अपना लुंड दुबारा खड़ा करना उनके लिए आसान नहीं था तो ऐसे में अगर वो अभी रगड़ रगड़ कर hi झाड़ जाते और बाद में अगर मौका मिलता भी तो शायद वो उस मौके का भरपूर लाभ न उठा पाते इसीलिए उन्होंने अपने लुंड के चरमसुख को थोड़ा ताल दिया. पर गरिमा की गांड में उंगली करना उन्होंने बंद नहीं करा और गरिमा ने उन्हें चूमना बंद नहीं करा. ऐसे में गरिमा हर घडी अपने चरमसुख के करीब और करीब आती जा रही थी और एक सिसकारी भरते हुए गरिमा बिहारी काका की छाती निढाल होकर लेट गई. ज़िन्दगी में वो कई बार झड़ी थी अपनी छूट में उंगली करके भी बहुत बार चरमसुख हासिल करा था पर गांड में ऊँगली करवाकर चरमसुख प्राप्त करने का उसका ये पहला अवसर.

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गरिमा निढाल सी बिहारी काका के सीने पर लेती थी और बिहारी काका भी उसे बड़े प्यार से अपनी बहो में जकड़े लेते थे. झड़ने के बाद गरिमा की सासे तेज़ तेज़ चल रही थी और बिहारी काका आगे बढ़ने से पहले उसे शांत होने का पूरा अवसर दे रहे थे और शायद अपने लुंड को भी थोड़ा शांत होने का अवसर देना चाहते थे ताकि चुदाई के समय वो धोका न देदे. गरिमा की छूट से बहकर अत पानी बिहारी काका के जांघिये पर आ रहा था और उसे आगे से गीला कर दिया था. काका को भी अपने जांघिये पर गरिमा कामरुस की चिपचिपाहट का एहसास हो रहा था. कुछ पल लेते रहने के बाद गरिमा काका के सीने से हटकर उनके बगल में ले गई. गरिमा को मज़ा तो बहुत आया पर अब भी उसकी छूट एक लुंड चाहती थी जो उसकी अंदर गहराई तक उतर के उसे पूरी तरह तृप्त करदे.

गरिमा गहरी गहरी सासे लेते हुए: जीतू के बाबू क्या आप खुश है आज बड़े दिनों बाद अपनी निर्मला के साथ यु रात गुज़र कर.

काका: है लगभग लगभग आपने वो सब करा और मुझे करने दिया जो मई निर्मला के साथ करता था.

गरिमा: अब भी आप लगभग कर रहे है.

काका: है इसके आगे की चीज़े करने में शायद आप असहज महसूस करे.

गरिमा: जब तक आप बताएंगे नहीं मुझे कैसे पता चलेगा मई कैसा महसूस करुँगी.

काका: नहीं जाने दीजिये इतना hi बहुत मेरे लिए.

गरिमा: बताइये न ये मुझे तै करने दीजिये मई वो कर सकती हु या नहीं.

काका: ठीक है अगर आप यही चाहती है तो सुनिए. जब मई निर्मला के पीछे यु ऊँगली करता था तो वो भी आपकी तरह उत्तेजना से भर उठती थी और गहरी गहरी सासे लेते हुए ऐसे hi झाड़ जाती थी. पर........

काका: पर हमारी रात यही ख़तम नहीं होती थी बल्कि यहाँ से तो हमारी रात शुरू होती थी.

गरिमा: क्या करते थे आप इसके बाद.

काका: आप वो नहीं कर पाएंगी क्युकी अपने गलत के लिए मन करा है हुए शायद वो भी आपकी नज़र में गलत हो.

गरिमा: मैंने सिर्फ आपका वो अपने अंदर लेने के लिए मन करा अगर आप उसकी बात कर रहे है तो रहने दीजिये अगर कुछ और हो तो आप मुझे बता सकते है.

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काका: है है तो कुछ और पर शायद वो भी आपको गलत लगे.

गरिमा: ये मुझे तै करने दीजिये आप बताइये क्या करते थे आप दोनों इसके बाद.

काका: ठीक है बताता हु, उसका चिपचिपा पानी मेरे जांघिये में लग जाता था जैसे अभी लग गया तो ऐसे में मई अपना जांघिया उतर देता था.

गरिमा: तो मैंने तो आपसे कहा की कपडे आपके है आप अगर असहज हो और उतरना चाहते है तो उतर सकते है.

काका: पर मुझे बिना कपड़ो के देख कर आपको असहज तो नहीं लगेगा.

गरिमा: मई सुबह hi आपको बिना कपड़ो के देख चुकी हु तो इसमें नया कुछ नहीं होगा आप उतर लीजिये.

काका: पर........

गरिमा: पर क्या.

काका: पर बात सिर्फ मेरे कपडे उतरने की नहीं है जब मर्द अपने कपडे उतर दे तो भला उसकी औरत उसके बगल में लेट कर कैसे कपडे पेहेन कर रख सकती है. नीचे उसके चूतड़ तो पहले hi नंगे होते थे अपना जांघिया उतरने के बाद मई उसे फिर से अपनी बहो में भर लेता था और उसके मोठे मोठे स्तनों को अपने मुट्ठी में भर लेता था और उसके स्तनों को मसलते मसलते उसके ब्लाउज को उतर कर उसे ऊपर से भी नंगा कर देता था और फिर जी भर पर उसके स्तनों को अपने होंठो में भर कर चूसता था और वो भी मेरा सर अपनी छाती में दबा दबाकर मेरा भरपूर साथ देती थी.

बिहारी काका के इन शब्दों को सुनते सुनते hi गरिमा एक बार फिर उत्तेजना से भर उठी. वो खुद भी अपने स्तन उनसे चुसवाना चाहती थी और ये ज़ाहिर भी नहीं करना चाहती थी की ये सब वो चाहती थी और बिहारी काका ने उसे खुद ये मौका दे दिया था. दूसरी तरफ बिहारी काका ने इस उम्मीद से ये बाटे कही थी की गरिमा ने जब इतना कुछ करवा लिया है तो क्या पता इसके लिए भी मान जाए. इधर गरिमा अंदर hi अंदर तो तैयार थी पर अब ये सोच रही थी की ये बात काका से कैसे कहे अगर यही कह देगी तो काका को ऐसा लगेगा की वो भी अपने दूध चुसवाने के लिए मरी जा रही है. इसीलिए ज़रूरो था की उन्हें परमिशन दी जाए पर संस्कार के शब्दों में लपेट कर.

गरिमा सोचते हुए: आपकी बात सच में कठिन है.

गरिमा के ये शब्द सुनकर काका थोड़े विचलित हो गए की कही गरिमा मन तो नहीं करने वाली है.

गरिमा: पर मैंने आपको वडा करा था की उस काम के अलावा मई वो सब कर सकते है जो आप अपनी बीवी के साथ करते थे तब मैंने सोचा नहीं था की ये भी हो सकता है पर अब मई वडा कर चुकी हु. और अगर देखा जाए तो ये उतना गलत भी नहीं है अब आप मुझे बिना कपड़ो के देख hi चुके है और आज मैंने अपने कूल्हों को खुद से आपके सामने बेपर्दा करा तो अगर वो गलत नहीं था तो अगर मेरे स्तन बेपर्दा हो जाएंगे तो उसमे क्या गलत हो जाएगा. और रही स्तन चुसवाने की बात तो है ये थोड़ा कामुक है हुए आज तक अपने होश हवस में सिर्फ मेरे मेरे पति ने स्तानक को चूसा है पर सिर्फ स्तन चुसवाना सम्भोग काना तो नहीं होता है अब अगर आपकी ख़ुशी के लिए मई आपके होंठो पर किश कर सकती हु तो अपने स्तन भी आपके होंठो में दे सकती है. बस हमे इतना ख्याल रखना है की इस कामुकता के आवेश में इतना न खो जाए की वो सब कर बैठे जो हमे नहीं करना है.

बिहारी काका को यकीन नहीं हो रहा था की गरिमा इतनी जल्दी अपने दूध छुडवाने को भी तैयार हो गई अब उन्हें कही न कही यकीन हो गया था की दूध चूसते चूसते यदि वो उसे छोड़ भी दे तो वो मन नहीं करेगी.

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काका: क्या सच में आप ये करना चाहती है.

गरिमा: अगर आपकी ख़ुशी इसमें है तो है मई यहाँ से जाने से पहले आपको ये ख़ुशी भी देकर जाना चाहती हु बशर्ते आप ये वडा करे की आप बहक नहीं जाएंगे.

काका: है मई इस बात का पूरा ख्याल रखूँगा वडा करता हु.

इतना कह कर बिहारी काका ने गरिमा को अपनी बहो में जकड लिया और बेतहाशा उसके चेहरे पर चुम्बनों की बौछार करदी.

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पर अब उन्हें इस बात का ध्यान रखना था की छोड़ने से पहले उसकी रज़ामंदी लेना ज़रूरी था क्युकी उसने बहकने से बचने की ज़िम्मेदारी उन पर भी दाल दी थी. गरिमा के चेहरे को चूमते हुए उन्होंने उसके बड़े बड़े उभारो को अपने हाथो में भर लिया और उन्हें हौले हौले दबाने लगे. यु तो कल भी उन्होंने इन स्तनों से खेला था पर आज की बात hi अलग थी क्युकी आज इसमें गरिमा की रजामंदी भी शामिल थी. गरिमा इस कामुक क्रिया में बिहारी काका का भरपूर साथ दे रही थी. बिहारी काका गरिमा के स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से दबाते सहलाते अपने हाथ गरिमा की पीठ की तरफ ले गए और एक एक करके पीछे लगे ब्लाउज के हुक खोलते चले गए. हुक खुलते hi ब्लाउज आगे से ढीला हो गया और गरिमा की पीठ पीछे से पूरी नंगी हो गई.

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बिहारी काका को कबसे इसी पल का इंतज़ार था गरिमा के बड़े बड़े नंगे स्तनों को अपनी मुट्ठी में भरने का. इसलिए एक हाथ से गरिमा की नंगी पीठ को सहलाते सहलाते वो अपना दूसरा हाथ आगे ले आए और उसे आगे से ढीले हो चुके गरिमा के ब्लाउज के अंदर सरका दिया और गरिमा की एक चुकी को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

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कितने बड़े बड़े दूध थे जैसे किसी दुधारू गए के थान हो उनको मसलने मात्रा से उनका लुंड उत्तेजना में फिर झटके खाने लगा. बिहारी काका भी भी लुंड की मौन जबान को समझ गए वो उन्हें इन थानों का दूध पीने को उत्तेजित कर रहा था. और बिहारी काका ने भी अपने लुंड की उत्तेजना को समझते हुए गरिमा के उरोजों को नाम के लिए ढके उसके ब्लाउज को उसके शरीर से अलग कर दिया और गरिमा ने भी अपना ब्लाउज उतरने में मदद करके काका को आगे बढ़ने की स्वीकृति देदी. गरिमा के स्तनों को नंगा करने के बाद बिहारी काका ने अपने होंठ गरिमे के गले पर रख दिए और उसकी गर्दन को चूमते चूमते अपनी जीभ निकल कर वह चेतना शुरू कर दिया.

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गर्दन हर औरत का वीक स्पॉट होता है और गरिमा भी अपनी गर्दन पर बिहारी काका की सासो की गर्माहट को महसूस कर उत्तेजित हुए बिना न रह सकीय और बिहारी काका के बदन पर अपनी बहो की पकड़ को और कास लिया.

गरिमा की टाइट होती पकड़ से बिहारी काका उसकी उत्तेजना को समझ रहे थे और उन्हें अपनी मंज़िल यानि गरिमा की छूट अपने करीब और करीब आती नज़र आ रही थी. उस छोटे से किचन एक जवान औरत और एक बुद्धा मर्द एक दुसरे को अपने आगोश में भरे चटाई पर लेते थे. किचन में पंखा चल रहा था इसके बावजूद दोनों के बदन के पसीना पसीना हो रहे थे. शायद ये उनके अंदर उफान मार रही उत्तेजना की गर्मी थी जो पसीना बनकर उनके जिस्म से बहार आ रहा था. गरिमा की गर्दन को चूमते छत्ते बिहारी काका अपने होंठ नीचे लेन लगे. वो गरिमा के उन दोनों ुचे पर्वतो के बीच के समतल हिस्से को अपने होंठो से चूम रहे थे. और उसे चूमते चूमते hi उन्होंने उसकी एक उभरी छाती को अपने होंठो में भर लिया. अपने स्तनों पर बिहारी काका के खुरदुरे होंठो की छुअन और उनकी सासो की गरमाहट ने गरिमा को कामुकता से सराबोर कर दिया और बिहारी काका के बालो को अपनी मुट्ठी मै भींच लिया हुए पागलो की तरह उनके सर के ज्यादा से ज्यादा अपने स्तन पर दबाने लगी जैसे उनसे रिक्वेस्ट कर रही हो की वो उसकी पूरी छाती को ज्यादा से ज्यादा अपने होंठो में समां ले और बिहारी काका ने भी एक सच्चे पति की तरह अपना मुँह और चौड़ा खोल कर उसकी ज्यादा से ज्यादा चुकी को अपने मुँह में भर लिया और ऊसर लोल्लयपोप की तरह चूसने लगे.

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बिहारी काका किसी पागल कुत्ते की तरह गरिमा के स्तनों को चूस रहे थे. जैसे कोई सिगरेट पीने वाला धुआँ निकलते वक़्त अपने होंठो को गोल कर लेता है वैसे hi वो होंठो को गोल करके कुछ अलग hi अंदाज़ में गरिमा के स्तन चूस रहे थे और चूसते चूसते होंठो क्र अंदर hi अपनी जीभ गरिमा के निप्पल पर घुमा रहे थे. उनके चूसने में एक अलग hi जूनून अलग hi आनद था जैसे एक बरसो के भूके शिक्षा को एकदम से लज़ीज़ खाना मिल गया हो और वो बावला सा हो गया हो. गरिमा को उनकी चूसै में बहुत मज़ा आ रहा था और वो मादक सिसक्रिया लेने को मजबूर हो गई थी उसे उम्मीद नहीं थी की एक 56 साल का बुद्धा उसे उस कदर उत्तेजना से भर देगा.

गरिमा: ममम ाः ाआममम आह जीतू का बापू.

काका: है निर्मला मज़ा आ रहा है.

गरिमा: बहुत.... ममममम

इधर नीचे काका का लुंड पूरी तरह तना हुआ बार बार उस जांघिये की दीवारों पर दस्तक दे रहा था जिसके भीक मांग रहा हो की उसे भी इन कपड़ो की कैद से आज़ाद कर दिया जाए.
 
काका: निर्मला मेरा पप्पू भी अकड़ गया है आज़ाद होना चाहता है अगर तुम कहो तो उसे भी आज़ाद करदु.

गरिमा भी सब समझ गई: मममम आ हा है अआज़ाअद कार्डो कार्डो उसे भी आज़ाद.

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गरिमा से मंज़ूरी मिलते hi बिहारी काका ने अपने हाथ नीचे ले जाकर ढीली पद चुकी अपने जांघिये की गाँठ को भी खोल दिया और जांघिये को सरका कर अपनी टैंगो से निकल कर वही चटाई के बगल में फ़ेंक दिया. बिहारी काका के बदन का वो आखिरी बचा कपडा उतारते hi उनका सफ़ेद बालो सा भरा वो बूढ़ा शरीर पूरी तरह नंगा हो गया. और जंघया उतारते hi बड़ी देर से अपने शिकार पर लापपके को तरस रहा रहा वो रंग में कला और सफ़ेद झांटो से भरा लुंड एक नाग की फुँकारते हुए आगे आ गया. अब काका का मोटा भरी थुलथुल शरीर पूरी तरह गरिमा के नाज़ुक चिकने गद्रे बदन के ऊपर था. जिस रसोई में पेट की भूक शांत की की जाती थी वह दो नंगे अपने जिस्म की भूक शांत करने को एक दुसरे में गुथे पड़े थे. हलाकि गरिमा के बदन पर अब भी उसका घाघरा बंधा था पर कमर तक ऊपर हो चूका बस नाम के लिए वह मौजूद था उसके होने की वजह टी गरिमा की छूट के नंगा होने के साथ hi समाप्त हो गई थी. अब उन वासना में डूबे नंगे जिस्मो के बीच उस घाघरे का अस्तित्व दिखाई भी नहीं पद रहा था.

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बिहारी काका बिना रुके गरिमा के स्तनों का रूस चूसे जा रहे थे. जब एक स्तन उनकी लार से तरबतर हो गया तो वो दुसरे स्तन पर चले गए पर बरसो बाद मिले इन अमृत कलशो को वो एंटी जल्दी अपने होंठो की कैद से मुक्त नहीं करना चाहते थे. गरिमा तो अपनी कामुकता में इस कदर खो गई थी की अपने दूध चुसवाते हुए वो कब दुबारा झड़ी और कब तीसरे राउंड के लिए दुबारा तैयार हो गई उसे पता भी नहीं चला. भरी काका की बालो से भरी जाँघे गरिमा की जांघो में रगड़ रही थी, बिहारी काका को अपने ऊपर लेटने की भरपूर जगह देने के लिए गरिमा ने अपनी टांगो खोल दी ताकि उनका भरी भरकम शरीर उसकी टांगो के बीच फिट हो सके. पर टाँगे खुल जाने से उसकी छूट भी पूरी तरह खुल गई और काका का लुंड तो अपने पूरे शबाब पर था hi. वो तो गरिमा के स्तनों चूसने की वजह से बिहारी काका का शाइर थोड़ा नीचे की तरफ था जिस वजह से उनका लुंड भी गरिमा की छूट से नीचे था और गरिमा की जांघो पर रगड़ता हुआ नीचे से आकर हल्का सा गरिमा की छूट में टच भर हो जाता था. पर ये छड़ भर का hi स्पर्श दोनों को उत्तेजित कर रहा था और वो दोनों hi अपने अपने यौन अंगो को ज्यादा से ज्यादा एक दुसरे के करीब लाना चाहते थे.

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इसलिए काफी देर से गरिमा की चूचियों को चूस कर गीला कर चुके बिहारी काका फाइनली उन्हें आज़ाद करके दुबारा से गरिमा के क्लीवेज और गर्दन को छत्ते हुए सरक कर ऊपर आ गए. उनका चेहरा एक बार गरिमा के चेहरे के सामने था. बिहारी काका के सरक कर ऊपर आने पर गरिमा ने भी अपनी आँखे खोल दी. दोनों एक दुसरे की आँखों में आँखे दाल कर देख रहे थे, दोनों की आँखों में वासना और हवस साफ़ नज़र आ रही थी. गरिमा काका के बालो को सहलाते हुए मुस्कुरा रही थी और बिहारी काका गरिमा के चेहरे के भावो को समझने की कोशिश कर रहे थे की क्या वो छोड़ने को तैयार है. बिहारी काका को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था की गरिमा उन्हें अपने बदन के साथ इतना सब करने दे रही थी और गरिमा के दिमाग में यही चल रहा था की कस बुड्ढे में इतनी ज्यादा वासना भरी थी इसका ुए अंदाज़ा भी नहीं था, कल रात हमारे बीच जो सम्भोग हुआ वो तो इसका 20% भी नहीं था शायद उत्तेजना के साथ दर भी होने की वजह से पर आज वो दर का माहौल हैट जाने के बाद अब उसकी ये वासना की आग उभर कर सामने आई है.

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गरिमा: क्या देख रहे हो जीतू के बापू.

काका: देख रहा हु मेरी निरमला कितनी सुन्दर इतने सालो बाद उसका रूप जैसे और भी निखार गया है.

गरिमा: आपको इतने सालो बाद मेरे साथ यु समय बिताकर अच्छा तो लगा न.

काका: मई बता नहीं सकता मुझे कितना अच्छा लगा.

गरिमा: कितना अच्छा लगा.

काका: बहुत...... तुम्हारे ये रसीले होंठ कितना जैसे कोई मीठा रूस भरा हो इनमे जितना चूसता हु उतना hi ज्यादा मन करता है. मन करता है तुम्हारे इन रसभरे होंठो को चूमता राहु चूमता राहु साडी रात यही तुम्हारे ऊपर लेता बस इन्हे चूमता राहु.

गरिमा: तो क्या आपको किसीने रोका है आपकी अपनी बीवी के होंठ आप जैसे चाहे चूस सकते है जितनी देर चाहे चूम सकते है.

काका थोड़ा शरारत भरे अंदाज़ में मुस्कुराते हुए: क्या सच में मई जैसे चाहे जितनी देर चाहे इन्हे चूस सकता हु.

गरिमा ने मुस्कुराते हुए अपना सर हां में हिला दिया. और गरिमा के हां में सर हिलाते hi बिहारी काका ने हौले हौले आहिस्ता आहिस्ता एक बार फिर अपने होंठ गरिमा के होंठो की तरफ बड़ा दिए. और एक बार अपने होंठ गरिमा के होंठो से जोड़ दिए.

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बिहारी काका एक बार फिर गरिमा के होंठो को चूस रहे थे और गरिमा भी उनके नीचे लेती एक अच्छी पत्नी की तरह उन्हें बहो में भरे उनका भरपूर साथ दे रही थी. और इस बार उनका चुम्बन पहले से भी ज्यादा कामुक और वासनापूर्ण था उनकी लहराती जीभ एक दुसरे से टकरा रही थी उनकी सासो की गर्माहट एक दुसरे के मुँह में समां रही थी. पर इस बार वासना सिर्फ उनके होंठो से नहीं निकल रही थी वासना का असली खेल तो नीचे उनकी जांघो के बीच उनके यौन अंगो के बीच हो रहा था. बिहारी काका का तना हुआ लुंड अपनी असली जगह पहुंच गया था उनके घनी झाटो से भरे टट्टे गरिमा की छूट की फैंको के ऊपर रगड़ खा रहे थे. जब गरिमा को एहसास हुआ की बिहारी काका का लुंड उसकी छूट बेहद करीब है तो उसने अपनी टैंगो को और फैला दिया. ये बिहारी काका के लिए ग्रीन सिग्नल था की वो आगे बाद सकते है और बिहारी काका ने अपनी कमर हिला कर अपने लुंड को गरिमा की ऊपर नीचे रगड़ना शुरू कर दिया.

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गरिमा ने भी उत्तेजना के मरे उन्हें कास कर अपनी बहो में इस कदर भींच लिया की उसके बड़े बड़े दूध उनकी बालो से भरी छाती में डाब रहे थे और अपनी छूट पर एक तने हुए लुंड की रगड़ के जोश गरिमा का चुम्बन भी थोड़ा वाइल्ड हो गया. वो भी नीचे से अपनी कमर को मूव करके काका को अपना लुंड उसकी छूट में रगड़ने में मदद कर रही थी.

गरिमा की इन कामुक हरकतों से काका अब समझ चुके थे की अब वो छोड़ने को तैयार है इसलिए वो अपना एक हाथ नीचे ले गए और अपना लुंड अपने हाथो में थम लिया और अपने लुंड का टोपा गरिमा की छूट के मुहाने पर रख दिया. गरिमा को भी अपनी छूट के मुहाने पर लुंड के टोपे का एहसास हो गया था वो समझ गई थी वो अब उसकर अंदर अपना लुंड डालने वाले है और ऐसा नहीं था की वो इसके लिए तैयार नहीं थी वो भी यही चाहती थो पर एक तो वो औरत का ये अनमोल खज़ाना यही वो काका को नहीं देना चाहती थी वो चाहती थी की वो अपनी तरफ से कुछ एफर्ट करे और दूसरा वो चुदाई के लिए है करना चाहती थी पर इस तरह की ऐसा लगे की वो यहाँ छोड़ने के इरादे से नहीं आई थी और परिस्थितिवश ये सब हो गया. काका ने अपना लुंड गरिमा की छूट में हल्का अंदर सरकाया hi था की गरिमा ने अपने होंठ उनके होंठो से अलग करे और हाथो से एक तेज़ धक्का देकर उन्हें अपने ऊपर से परे धकेल दिया और चटाई से उठाकर किचन की स्लाबे के पास आकर कड़ी हो गई.

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खड़े होने से उसकी कमर में हिल्गा घाघरा नीचे हो गया और उसकी कमर के नीचे का हिस्सा वापस से घाघरे में धक् गया पर कमर से ऊपर अब भी वो नंगी थी. अचानक हुई इस घटना से बिहारी काका एकदम शॉक रह गए उन्होंने सोचा भी नहीं था की चुदाई के इतना करीब पहुंच कर उनका अचानक से कलपद हो जाएगा. वो तो यही सोच रहे थे की गरिमा भी गरम हो गई है और अब वो चुदाई करने से नहीं रोकेगी पर गरिमा के इस रिएक्शन ने उन्हें शॉक कर दिया.

गरिमा: मैंने आपसे मन करा था न मई ये गलत काम नहीं करुँगी और अपने भी मुझे वडा करा था की आप ये नहीं करेंगे.

काका का मुँह रुआंसा हो गया वो समझ गए की सुबह की तरह अब उनकी फिर झाड़ पड़ने वाली है इसलिए वो फिर गरिमा के सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए.

काका हाथ जोड़े हुए: बिटिया मुझे माफ़ कार्डो हम बहक गए थे इतने दिनों बाद कोई औरत यु हमारे इतने करीब थी और वो सब कर रही थी जो हम अपनी निर्मला के साथ किया करते थे तो हम जैसे उसी वक़्त में चले गए थे तुम्हे निर्मला hi समझ बैठे थे.

गरिमा: देखिये एक तो अब आप मुझे बिटिया बिटिया मत कहा करिये एक तरफ तो मेरा बदन इस कदर आपको आपकी बीवी की याद दिला देता है की आप मुझे छोड़ने को तैयार हो जाते है और जहा मई कुछ कह दू पहात से आप बिटिया बिटिया करने लगते है. और दूसरा ये हर बात में हाथ मत जोड़ा करिये मई आप पर गुस्सा नहीं कर रही हु मई आपकी स्थिति समझ सकती हु आपके साथ ये सब करते हुए मई भी उत्तेजित फील करने लगी थी हुए मेरा भी मन करने लगा था की मई आपसे छुड़वा लू पर.....

गरिमा के लहजे में ये पॉलिटेनेस्स देख और ये जानकार की उसका मन भी छोड़ने का है काका के मन में एक बार फिर उम्मीद की किरण जग उठी.

काका: पर क्या अगर तुम्हारा भी ये करने का मन था और हम भी अपने होशो हवास में किसी औरत के साथ ये सब करने को तरस रहे तो फिर अगर आज तुम ये कर लोगी तो क्या हो जाएगा.

गरिमा: कैसी बाते कर रहे है अपने मुझे कोई बाजारू अकर्ता समझ रखा है क्या जो यही किसी के भी साथ ये सब करलु.

काका गरिमा के बदले तेवर देख दर गए की कही उन्होंने कुछ गलत तो नहीं बोल दिया.

काका: नहीं नहीं बिटिया मेरा मतलब है mm..memsaab मेरे कहने का वो मतलब नहीं है पता नहीं मई भी कितना बावला हो गया हु कुछ भी अनब सनाब बाके जा रहा हु. आप मेरे साथ ये सब कैसे कर सकती है.

काका की ये मनोदशा देख गरिमा को महसूस हुआ की आगरा ये गुस्सा का ड्रामा ज्यादा करा तो कही सुबह की तरह फिर काका मरे दर के सेहम न जाए और उसकी छुड़वाने की इच्छा अधूरी hi रह जाए. इसलिए गरिमा काका को थोड़ा रिलैक्स करने के लिए उनके करीब आई और बड़े प्यार से उनका कन्धा सहलाते हुए प्यार से बात करने लगी.

गरिमा: देखिये प्लीज आप मायूस नहीं होइए मई आपकी स्थिति समझ सकती हु आप एक औरत के साथ के लिए तरस रहे है. पर अगर मेरे हाथ में होता तो मई आपकी ये ख्वाहिश ज़रूर पूरी कर देती पर क्या करू मई अपनी माँ से किये वादे से बंधी हु.

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काका: माँ से किया वादा कैसा वादा.

गरिमा ने इस सिचुएशन के लिए एक कहानी पहले से सोच राखी थी.

गरिमा: वो क्या है जब मेरी शादी नहीं हुई थी और मई कॉलेज में पड़ती थी तो मेरे मोहल्ले में एक गुप्ता आंटी रहती थी जिनकी मेरी hi उम्र की एक लड़की थी जिसका मोहल्ले के hi एक लड़के से चक्कर चल गया और उसने उसके साथ सब कुछ कर डाला. बात तब खुली जब वो पेट से हो गई, मोहल्ले में सबको इसका पता चल गया गुप्ता अंकल आंटी की बड़ी बदनामी हुई. लोग उनके घर जाने से कतराने लगे अपनी लड़कियों को उनकी लड़की से दूर रखने लगे ताकि वो भी बिगड़ न जाए. मोहल्ले के सब लोगो को अब अपनी अपनी लड़कियों की चिंता थी कही वो भी गुप्ता जी की लड़की जैसा काण्ड न करदे. मेरी माँ को भी मेरी चिंता थी तब उन्होंने मुझसे कसम खिलवाई की मई ज़िन्दगी में सिर्फ उसीके साथ सम्बन्ध बनाउंगी जो मेरी मांग में सिन्दूर भरेगा और मैंने भी अपनी माँ को वचन दिया. इसलिए मई आपके सब कर सकती थी पर वो सिर्फ उसीके साथ कर सकती हु जिसने मेरी मांग में सिन्दूर भरा है.

काका: पर कल रात तो हमारे बीच वो सब हुआ था तो तब तो आपका वादा टूट गया.

गरिमा: पर कल रात तो मई नशे में थी तो जब मुझे होश hi नहीं था तो मई क्या कर सकती थी पर इस वक़्त तो मई पुरे होश में हु.

काका सोच में डूब गए क्युकी वो हर कीमत पर आज रात गरिमा को छोड़ना चाहते थे.

काका सोचते हुए: अच्छा अगर आज भी आप भांग के लड्डू खा ले तो.

गरिमा को तरीका तो अच्छा लगा पर अगर वो भांड के लड्डू खा लेगी तो खुद चुदाई का मज़ा कैसे ले पाएगी.

गरिमा: पर अगर सिर्फ आपके साथ सम्भोग करने के लिए भांग के लड्डू कहती हु तो वो भी वादा तोडना hi होगा न.

गरिमा की बात सुनकर बिहारी काका सोच में डूब गए और उन्होंने सोचते देख कर गरिमा को बड़ा मज़ा आ रहा था की बुद्धा कितना डेस्पेरेट है मुझे छोड़ने के लिए. सोच सोच बुड्ढे अगर मुझे छोड़ना है तो थोड़ा दिमाग तो लगा. अचानक कुछ सोचकर उनका चेहरा खिल उठा और वो एकदम से चटाई से उठकर किचन में रखे सामन में कुछ ढूंढ़ने लगे वो हर जार हर डब्बे को खोलकर खुछ ढून्ढ रहे थे गरिमा को समझ नहीं आ रहा था वो क्या ढून्ढ रहे है. वो तो पीछे उनसे नंगे बदन उनके झाटो से भरे चूतड़ों को देखकर hi एक्ससिटेड हो रही थी और सोच रही थी की अगर इन्हे कोई तरीका न सुझा तो दिल बड़ा दिखते हुए छुड़वाने के लिए मान जाएगी. पर वो ये सोच hi रही थी की बिहारी काका एक डब्बे में से एक कागज़ की पुड़िया निकल कर गरिमा के सामने आकर खड़े हो गए.
 
गरिमा: क्या है इस पुड़िया में.

काका: आपके अपनी माँ से किये गए वादे का तोड़.

गरिमा: मई कुछ समझी नहीं.

काका: अभी समझाता हु.

पर बजाए कुछ समझने के बिहारी काका ने वो पुड़िया खोली और में कोई चीज़ अपनी चुटकी में भर कर अचानक से हाथ बड़ा कर उसे गरिमा की मांग में भर दिया. गरिमा अचानक हुई इस घटना से शॉक रह गई. उसने अपनी मांग में हाथ लगाकर देखा तो उस चीज़ को देख वो शॉक रह गई क्युकी वो सिन्दूर था जो बिहारी काका ने उसकी मांग में भर दिया था. गरिमा का मुँह खुला का खुला रह गया और बिहारी काका तो अब गरिमा का प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे थे.

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गरिमा: ये क्या किया अपने ये सिन्दूर मेरी मांग में भर दिया.

काका: आपने कहा था की अपने अपनी माँ से वादा करा है की आप उसी आदमी के साथ सम्बन्ध बनाएगी जिसने आपकी मांग में सिन्दूर भरा हो तो मैंने आपकी मांग में सिन्दूर भर दिया अब अगर आप मेरे साथ सम्भोग करेगी तो आपकी माँ का वादा नहीं टूटेगा.

गरिमा ने पहले तो मन hi मन बुड्ढे के दिमाग की तारीफ की और सोचा की चुदाई का नशा भी चरस गांजे से कम नहीं है अगर एक बार इंसान को तालाब लग जाए तो उस तालाब को पूरा करने के लिए वो दिमाग से कितना शातिर हो जाता है. पर उसने अपनी सोच काका पर ज़ाहिर नहीं करि.

गरिमा तेज़ आवाज़ में: पर एक औरत की मांग में सिन्दूर भरने का क्या मतलब होता है इसका मतलब जानते है आप. सिर्फ मुझे छोड़ने के लिए अपने मेरी मांग में सिन्दूर भर दिया.

गरिमा की आवाज़ की तेज़ी देख कर बिहारी काका फिर दर गए की कही जोश जोश में उन्होंने बहुत बड़ी गलती तो नहीं करदी. उन्होंने फिर से गरिमा के आगे हाथ जोड़ लिए पर इससे पहले वो कुछ कहते या अपना दुखड़ा रट गरिमा ने उनके जुड़े हुए हाथ पकड़ लिए.

गरिमा: ये क्या कर रहे है आप मेरे सामने हाथ जोड़ रहे है पाप चढ़ाएंगे क्या मुझपर.

काका: जी क्या मतलब मई तो बस अपनी गलती की माफ़ी मांग रहा था.

गरिमा: गलती से hi सही पर आपने मेरी मांग भरी है भले hi एक रात के लिए hi सही पर पत्नी बनाया है मुझे और आपकी एक रात की पत्नी होने के नाते मई अपने सामने आपको हाट कैसे जुड़वाँ सकती हु. मर्द अपनी औरत के सामने हाथ जोड़ता अच्छा नहीं लगता.

बिहारी काका को अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था की जो उन्होंने अभी सुना वो सच है गरिमा ने सच में खुद को उनकी एक रात की पत्नी कहा.

काका: क्या सच में तुम ये मानती हो की अब तुम मेरी एक रात की पत्नी हो.

गरिमा: अब अपने मेरी मांग सिन्दूर से भरी है तो मेरे न मानने का सवाल hi नहीं है. औरत की मांग में सिन्दूर उसका पति hi भरता है और वो अपने भरा है तो इस रात के लिए आप hi मेरे पति है.

ये जानकर की गरिमा ने उन्हें अब अपना आज रात का पति मन लिया है उनका दर अचानक से कॉन्फिडेंस में बदल गया, उनके दर से कपट पेअर आगे बढ़कर गरिमा के करीब आ गए उनके जुड़े हुए हाथ अब कॉन्फिडेंस के साथ गरिमा की कमर तक पहुंच गए और गरिमा की कमर में हाथ डालकर उसे अपने बदन से सत्ता लिया और उन्स्की रुआंसी आँखे अब गरिमा की आँखों में डालकर उस अपने मर्द होने का एहसास करा रही थी.

काका: तो क्या एक पति को अपनी पत्नी पर जो अधिकार होता है आज रात के लिए मुझे वो अधिकार है.

गरिमा काका की आँखों में डालकर देखते हुए शारतमाते हुए: जी बिलकुल.

काका को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था की आज सुबह वो जिस औरत के सामने हाथ जोड़ रहे थे वो अब उनकी पत्नी बानी उनकी बहो में शर्मा रही थी.

काका: क्या तुम्हे छोड़ने का तुम्हारी छूट में अपना लुंड डालकर झटके देने का हक़ भी.

गरिमा: पत्नी का फ़र्ज़ होता है अपने पति को हर तरह से खुश करना वो चाहकर भी इस फ़र्ज़ से पीछे नहीं हैट सकती भगवान् का औरत बनाने का उद्देश्य hi यही था मर्द की कामइच्छाओ की पूर्ति. तो भला मई आपको अब खुद को छोड़ने से कैसे रोक सकती हु पति होने के नाते ये आपका हक़ है.

काका गरिमा की आँखों में देखते हुए: सच में

गरिमा: हम्म

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इतना सुनते hi बिहारी काका ने अपने होंठ गरिमा के होंठो पर रख दिए और पागलो की तरह उसके होंठो को चूसने लगे और होंठो को चूसते चूसते वो गरिमा के बड़े बड़े स्तनों को अपने हाथो में लेकर मसलने रगड़ने लगे. कुछ देर पहले उनके चुम्बन उतने जोशीले नहीं थी जो जोश अब उनमे दिखाई दे रहा था. गरिमा ने अपने होंठो को पूरी तरह काका के हवाले कर दिया था वो अपना बदन किचन की स्लाबे पर टिकाए कड़ी काका से अपने चुसवा रही थी और दूध दबवा रही थी. गरिमा के होंठो को चूसते चूसते काका ने अपने हाथ नीचे लेकर उसके कूल्हों को घाघरे के ऊपर से थम लिया और उसका थोड़ा ऊपर उचककर उस किचन की स्लाबे के ऊपर पाँव लटककर बिठा दिया.

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काका: तो अब तुझे निर्मला मानकर छोड़ू या गरिमा मानकर.

गरिमा: अब ये तो आप पर निर्भर करता है चाहे तो अपनी मरी हुई पत्नी निर्मला का प्रतिरूप मानकर छोड़ ले या जिसकी मांग में सिन्दूर भरा वो नईनवेली पत्नी मानकर छोड़ ले फैसला आपका.

बिहारी काका ने गरिमा की आँखों में आँखे दाल कर मुस्कुरा कर देखा और अपने होंठ गरिमा की गर्दन पर रख दिए और गरिमा की गर्दन को चूमते हुए नीचे बैठते हुए अपने होंठ उसकी क्लीवेज स्तनों पेट नाभि पर रगड़ते हुए नीचे लेन लगे.

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और फाइनली गरिमा के किचन स्लाबे से लटके हुए पैरो के पास घुटनो के बल बैठ गए और गरिमा का घाघरा नीचे से अपने हाथो में थम लिया और आहिस्ता आहिस्ता उसका घाघरा ऊपर सरकने लगे और घाघरे को ऊपर सरकते हुए उन्होंने अपने होंठ गरिमा के पैरो पर रख दिए.

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जैसे जैसे उसका घाघरा ऊपर उठता जा रहा था उसकी गदराई जंघे नंगी होती जा रही थी और बिहारी काका के खुरदुरे होंठ गरिमा की चिकनी मुलायम जांघो को चूमते हुए ऊपर की और बढ़ते चले आ रहे थे. अपनी अंदरूनी जांघो पर काका के होंठो का मादक स्पर्श गरिमा बड़ा कामुक एहसास दे रहा था. इस कामुकता में गरिमा ने अपनी आँखे बंद कर्ली और बिहारी काका के बालो में हाथ फेरने लगी. न बिहारी काका के हाथ थमने का नामनले रहे थे और न उनके होंठ और उन दोनों की hi एक सीमा थी. और उस सीमा पर पहुंच कर वो दोनों hi कुछ पल को थम गए गरिमा का घाघरा उसकी कमर तक ऊपर हो चूका था. गरिमा की हलके हलके बालो से ढकी छूट अपनी बिहारी काका की आँखों के सामने थी.

बिहारी काका बिना पलके झपकाए उस जन्नत के द्वार को निहार रहे थे और गरिमा उन्हें अपनी छूट को निहारते हुए देख रही थी. पर उसके ज़हन में यही सवाल चल रहा था की बिहारी काका उसकी छूट चाटेंगे क्युकी गरिमा इस गाँव में आने से पहले छूट चटवाने के मज़े से पूरी तरह अनजान थी. वो हरिया hi था जिसने जीवन में पहली बार उसे छूट चाटने की मज़े से परिचित करवाया था. और शायद उस शाम उस बीच सड़क में की गई छूट चटाई ने गरिमा को इस कदर मदहोश कर दिया था की वो हरिया के घर जाने और उससे छुड़वाने को मजबूर हो गई. और अब आज एक दूसरा मर्द उसकी छूट को उन्ही नज़रो से निहार रहा था. पर क्या काका उसकी छूट चाटेंगे या उनको भी उसके पति की तरह उसमे घिन आती है. वो ये सब सोच hi रही थी की उसके देखते देखते बिहारी काका ने अपने होंठ उसकी छूट के मुहाने पर रख दिए और अपने घनी घनी मूछो से भरे होंठ उसकी छूट पर रगड़ने लगे.

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उत्तेजना के साथ साथ उसे गुदगुदी भी हो रही थी क्युकी बिहारी काका की मूछे उसकी छूट में गुदगुदी कर रही थी. अपने होंठ गरिमा की छूट पर रगड़ते हुए उन्होंने गरिमा की छूट की फैंको को फैलाया और गरिमा की छूट को अंदर से देखा. दो बार झड़ने के बाद गरिमा की छूट अंदर से अपने hi जूस से सराबोर थी. पर इसकी परवाह न करते हुए बिहारी काका ने अपनी जीभ गरिमा की छूट के अंदर दाल दी.

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गरिमा की मुँह से एक सिसकारी निकल गई. बिहारी काका को अपनी जीभ पर गरिमा के कामरुस का खट्टा खट्टा स्वाद महसूस हो रहा था और ये स्वाद उनके जोश में और वृद्धि कर रहा था की इस उम्र में भी उन्होंने अपने से आधी उम्र की शादीशुदा औरत को इस कदर झड़ने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने अपनी पूरी जीभ गरिमा की छूट के अंदर दाखिल करदी और उसे गरिमा की छूट में गोल गोल घूमने लगे. उत्तेजना के उन्माद में गरिमा ने अपने जबड़ो को भींच लिया अपनी जांघो को कास लिया और अपने हाथो से बिहारी काका का सर अपनी छूट पर दबाने लगे. गरिमा नीचे से अपने कूल्हों को झटके देकर काका की जीभ के साथ रदम मिला रही थी और उसकी ये उत्तेजना काका को भी एहसास करा रही थी की वो किस कदर उत्तेजित है. बिहारी काका गरिमा की छूट में अपनी जीभ तेज़ तेज़ चलाए जा रहे थे पर गरिमा अपने हाथो का दबाव बिहारी काका के सर पर बड़े जा रही थी. काका जैसे अनुभवी व्यक्ति को समझ आ गया था की औरत इतना उन्माद तभी दिखती है जब वो झड़ने के करीब हो. और अगर चुदाई से एकदम पहले वो तीसरी बार झाड़ गई तो शायद उसमे चुदाई की शक्ति न बचे और न उत्साह रहे इसलिए उसके ये तृतीया स्खलन लुंड छूट के मिलान तक के लिए स्थगित करना होगा. इसलिए गरिमा के झड़ने से पहले hi उन्होंने गरिमा की छूट से अपने होंठ हटा लिए.

अचानक से अपने आनंद में ब्रेक लग जाने पर गरिमा आँखे खोलने को मजबूर हो गई. आँखे खोलने पर बिहारी काका अपना सफ़ेद झांटो से भरा कला कलूटा लुंड हाथो में लेकर सहलाते हुए उसके सामने खड़े मुस्कुरा रहे थे.

गरिमा: आपने बंद क्यों कर दिया.

काका: लगता है मेरी जानेमन को छूट चटवाने बहुत अच्छा लगता है.

गरिमा शरमाते हुए: आपका चेतना था hi इतना मदहोश कर्म वाला की हुक उसमे खो से गए थे. चाटिये न हमे अच्छा लग रहा था.

काका अपना लुंड दिखते हुए: अरे हमारे इस लोडे पर भी दया कार्डो बड़ी देर से अपने अंदर ज्वालामुखी रोके बैठा है इसे भू मौका देदो. वर्ण कही यही अपना सारा लावा वास्ते न करदे.

गरिमा ने हाथ आगे करके बिहारी काका का लुंड अपने हाथो में थम लिया: नहीं नहीं हम इसके लावे की एक बूँद भी वास्ते नहीं जाने देंगे. वो तो मेरे लिए मेरी आज की रात के पति का प्रसाद है.

काका: पर प्रसाद तो मुँह में लिया जाता है तो क्या तुम मेरा ये मुँह में लोगी. हमारी पत्नी ने कभी हमारा मुँह में नहीं लिया उसे इसमें घिन आती थी पर हम जब अंग्रेजी फिल्मो में लड़कियों को ऐसा करते देखते थे तो हमारा बड़ा मन करता था. क्या तुम हमारी ये इच्छा पूरी करोगी.

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गरिमा ने आज तक अपने पति का लुंड भी मुँह में नहीं लिया था हरिया का लुंड भी मुँह में लेने से मन कर दिया था. उसने एक नज़र बिहारी काका का झांटो से भरा लुंड देखा जो देखने में hi बेहद घिनौना था उसे मुँह में लेना तो दूर होंठो से चूमना भी उसके लिए असंभव था, ऐसा करने का सोच कर hi उबकाई सी आने लगी.

गरिमा: देखिये मैंने आज तक अपने पति का भी नहीं लिया उन्होंने भी कई बार कहा पर ये मुझसे नहीं होता प्लीज मुझे उलटी से आती है प्लीज मई ये नहीं कर सकती.

काका थोड़े मायूस हो गए: चलिए कोई बात नहीं हम आपको उलटी नहीं करवाएंगे पर एक और रिक्वेस्ट है.

गरिमा: कहिये

काका: जिस दिन तुम यहाँ आई और हमने पहली बार किचन में तुम्हारी फूली हुई गांड देखि उस दिन से हम तुम्हारी गांड के दीवाने है और एक बार तुम्हारी गांड मरना चाहते है. क्या आज रात हम तुम्हारी गांड मार सकते है.

गांड मरवाने की बात सुनकर भी गरिमा का रोम रोम सिहर उठा उसकी गांड अब तक पूरी तरह कोरी थी न उसके पति ने न हरिया ने उसकी गांड मारी थी हुए उसे पता गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है और इस वक़्त वो ये दर्द नहीं झेलना चाहती थी.
 
गरिमा: देखिये आज तक मैंने अपने पति से भी अपनी गांड नहीं मरवाई है मई इसमें कम्फर्टेबले नहीं हु. इसलिए इस नात के लिए भी आपसे माफ़ी मांगती हु पर मेरी ये फूली हुई छूट अपने एक रात के पति की सेवा में हाज़िर है. और क्या आपको मेरी छूट पसंद नहीं आई जो इसे छोड़कर मेरे पीछे वाले छेड़ के पीछे पड़े है. (अपनी छूट दिखते हुए)

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काका: अरे नहीं नहीं इस छूट की सुंदरता के आगे तो दुनिया जहाँ की सुंदरता भी कम है.

गरिमा: और वैसे भी अपने लुंड की गर्मी को शांत करने के लिए अपने मेरी छूट को झड़ने से रोक दिया तो ये मेरी छूट का आपके लुंड पर क़र्ज़ है और अब अपने लुंड की गर्मी से तृप्त करना आपके लुंड का फ़र्ज़ है. और मई छाती हु जब आज रात आप मुझे चोदे तो आपका चेहरा मेरी आँखों के सामने हो एकदम सामने.

इतना कह कर गरिमा ने काका को उनके लुंड से अपने करीब खींचते हुए उनके लुंड का टोपा अपनी छूट के मुहाने पर रख दिया.

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गरिमा की गरमा गरम बातो ने काका के जोश को भी बड़ा दिया और उन्होंने गरिमा की गांड का ख्याल छोड़ कर आज रात उसकी छूट को अपनी मर्दानगी दिखने का मन बना लिया.

बिहारी काका आहिस्ता आहिस्ता अपना तना हुआ लुंड गरिमा की छूट के मुहाने पर रगड़ने लगे.

काका: ऐसा क्या तो तुम पूरी तरह तैयार हो अपने इस पति का लुंड अपने अंदर लेने के लिए.

गरिमा: मई तो कबसे अपनी टाँगे खोले तैयार बैठी हु.

काका मुस्कुराते हुए: सोच लो ये गाँव का देहाती लुंड है तुम्हारी शहरी छूट का कचुम्बर न निकाल दे.

गरिमा: मई तो चाहती हु ये मेरा कचुम्बर निकाल दे.

काका: ऐसी बात है तो ले.

इतना कहते हुए बिहारी काका ने किचन स्लाबे पर बैठी गरिमा को कास कर अपनी बहो में जकड लिया और अपने होंठो में गरिमा के होंठो को कास कर सी लिया ताकि गरिमा की चीख उसके होंठो से बहार न आ पाए. और नीचे अपनी कमर का तेज़ झटका आगे की और मारा. ये झटका इतना प्रबल था और गरिमा की छूट दो बार झड़ने की वजह से इतनी गीली थी की एक hi झटके बिहारी काका का पूरा का पूरा लुंड गरिमा की छूट के अंदर उतर गया.

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गरिमा इस ज़बरदस्त झटके से दर्द से तिलमिला उठी, वो चीखना चाहती थी पर उसकी चीख बिहारी काका के होंठो में hi डाब कर रह गई. गरिमा को आज जिस दर्द का एहसास हुआ वो उसे आज तक नहीं हुआ था. उसके पति को उसे आहिस्ता आहिस्ता छोड़ने की आदत थी और हरिया ने जो उसे दो बार छोड़ा उसमे आहिस्ता आहिस्ता उसके अंदर लुंड डाला था पर आज बिहारी काका ने चुदाई की शुरुआत में होने वाले उस असली दर्द का एहसास कराया था. वो दर्द से बुरी तरह तड़प रही थी और बिहारी काका की पीठ पर मुक्के मार रही थी पर बिहारी काका इसे उसकी उत्तेजना समझ रहे थे और ये समझते हुए अपना लुंड लगभग पूरा बहार खींचा और अगले hi पल एकदम से उसे गरिमा की छूट पूरा अंदर पेल दिया. गरिमा अपने होंठो को हिला कर बोलना छह रही थी पारा बिहारी काका के होंठ उसके होंठो को कास कर जकड़े हुए थे. उन्हें यही लग रहा था की गरिमा उनके ज़बरदस्त झटको के मज़े में अपनी उत्तेजना ज़ाहिर कर रही है. यही सोचते हुए गरिमा की छूट में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया. वो पूरा लुंड बहार लेट और पूरी ताकत से गरिमा की छूट में अंदर तक पेल देते. उनके धक्को में नए जवान मर्द जैसी तेज़ी और गति नहीं थी पर ज़ोर और ताकत असीम थी. उनका लुंड हरिया जितना लुम्बा भी नहीं था पर मोटाई में बेहद मोटा था की गरिमा की छूट में जितना अंदर तक भी जा रहा था उसकी छूट की दीवारों को फैलता हुआ अंदर जा रहा था.

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पर जैसा की चुदाई का उसूल है कुछ पल की सजा बाद में मज़ा hi मज़ा. गरिमा की भी सजा का दौर निकल गया था उसकी चित बिहारी काका के छोटे मगर मोठे लुंड के लिए उसके हिसाब की जगह बना ली थी और अब अपनी छूट की दीवारों पर उनके मोठे लुंड का घर्षण उसे बड़ा मादक और कामुक एहसास दे रहा था. उसने बिहारी काका की पीठ पर हाथ पटकना बंद करके उन्हें अब अपनी बहो में भर लिया. गरिमा की बहो की गिरफ्त से काका को भी एहसास हो गया की गरिमा का दर्द अब काबू में है और अब वो चीखे चिल्लाएगी नहीं तो उन्होंने आहिस्ता आहिस्ता गरिमा के होंठ से अपने होंठ हटा लिए और गरिमा वासना में लाल हो चुकी आँखों में देखने लगे. मुँह आज़ाद होते hi काका के धक्को की रदम के साथ गरिमा मादक सिसकारियां लेने लगी.

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गरिमा: ममम आठ आए मुझे नहीं पता था आप इतना भरे बैठे हो आआह जान निकल दी मेरी.

काका को इस उम्र में अपने से आधी उम्र की इतनी कामुक औरत की ये हालत करके बड़ा मर्दानगी का अनुभव हो रहा था.

काका: अरे मेरी जान तुम हो hi ऐसी चीज़ की किसी के अंदर का सोया हुआ मर्द जाग जाए और क्या गर्मी है तुम्हारी ईद छूट की.

गरिमा: आह्हः ममम आपका लुंड भी कुछ कम नहीं है और आपके धक्के लगाने का अंदाज़ भी बड़ा निअरला है ममममम.

काका ताबड़तोड़ धक्के लगाए जा रहे थे और गरिमा भी उस किचन स्लाबे पर बैठी हुई उनका भरपूर साथ दे रही थी.

काका: हहह जानेमन मई तो अपनी निर्मला से तीन चार बछर पैदा करना चाहता था पर वो एक बच्चा पैदा करते करते hi चल बसी आज जी कर रहा है तेरी कोख को अपने वीरसे भर कर तुझे भी अपने बच्चे की माँ बना दू.

गरिमा की भी काका के साथ ये सेक्सी कामुक बाते करते हुए छुड़वाने में बड़ा मज़ा आ रहा था ये बाते उसे अलग hi किंकी फीलिंग दे रही थी.

गरिमा: ाःह तो भर दो न मेरी कोख को अपने वीर्य से मेरे एक रात के पतिदेव. अपनी बीवी को बच्चा देना तो पति का फ़र्ज़ होता है तो बना दो मुझे अपने बच्चे की माँ मममम मेरे अंदर निकल दो अपना वीर्य.

काका धक्के पे धक्के लगाए जा रहे थे.

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काका: क्या सच में तू मेरे बच्चे की माँ बनेगी अपनी कोख से जीतू का भाई या बेहेन पैदा करेगी ह्ह्ह्हहफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़.

गरिमा: है करुँगी मममममम ाः.

काका: पर कल तो तू चली जाएगी फिर मुझे कैसे पता चलेगा.

गरिमा: आह मई मम बताउंगी न फ़ोन करके 9 महीने बाद की आपको लड़की हुई या लड़का.

गरिमा की ये मादक बाते उनके जोश दुगना कर रही थी और उनके धक्को की गति बाद गई थी और ये इस बात का संकेत थे वो झड़ने के करीब है और गरिमा उनसे पहले या उनके साथ झाड़ जाना चाहती थी क्युकी लुंड ढीला होने के बाद मर्द की हालत सूखे छुआरे सी हो जाती है. इसलिए उसने काका को अपने धक्के धीमे करने को कहा ताकि वो प्यासी न रह जाए.

गरिमा: आप धक्के धीमे धीमे लगाइये कही ऐसा न की आप झाड़ जाओ और मई प्यासी रह जाऊ.

बिहारी काका ने भी अपने धक्को की गति धीमी कर दी और हौले हौले अपना लुंड उसकी छूट में अंदर बहार करने लगे. गरिमा ने भी अपनज जांघो को कास लिया और पेट में दबाव दाल कर छूट को थोड़ा तंग कर दिया ताकि काका के लुंड का घर्षण बाद जाए. काका का मज़ा भी बाद गया और उसे भी ज्यादा मज़ा आ रहा था. धीमे धीमे वो अपने तीसरे ओर्गास्म के करीब पहुंच रही थी और ये महसूस होने पर उसने काका से अपने धक्को की गति बढ़ाने को कहा.

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गरिमा: हम्म्म्म अब तेज़ तेज़ करो आह मई भी आने वाली आप भी आ जाओ मममम मेरे अंदर आ जाओ मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो.

काका ने दुबारा तेज़ तेज़ धक्के लगाना शुरू कर दिया.

काका: ठीक है मेरी जान आज तुझे अपनी बच्चे की माँ बनुगा. ले मई आ रहा हु तेरे अंदर.

इतना कहते हुए बिहारी काका ने तीन चार तेज़ धक्के मरे और और अपना लुंड गरिमा की छूट जितनी गहराई तक उतार सकते थे उतर दिया और अपना सारा भर गरिमा के कंधो पर दाल दिया. उनके लुंड से निकले ढेर सारे वीर्य ने गरिमा की छूट को अंदर तक भर दिया. उनके वीर्ये की गर्माहट को महसूस करते हुए गरिमा ने भी अपना कामरुस स्खलित कर दिया और बिहारी काका को अपनी बहो में जमद उनके सीने से लग कर वही किचन स्लाबे पर आँखे बंद करे बैठी रही. दोनों के शरीर पसीने लथपथ हो चुके थे, वो दोनों न जाने कितनी देर एक दुसरे को यही बहो में जकड़े रहे. शायद आधे घंटे से भी ज्यादा. गरिमा को आज सेक्स का एक अलग hi अनुभव मिला था जो उसे अपने पति और हरिया से भी न मिला वो भी एक 56-57 साल के बुड्ढे से.

बहार चिडियो के चहचहाने की आवाज़े आ रही थी और रात का अँधेरा भी आसमान से गायब होना शुरू हो गया था शायद सुबह के 4 : 30 बज रहे थे. कुछ देर में लोगो का चलना फिरना भी शुरू हो जाएगा. और रात भर के इस ताबड़तोड़ चुदाई साईओं के बाद गरिमा बुरी तरह थक चुकी थी और अब कुछ देर आराम करना चाहती थी.

गरिमा: सवेरा होने वाला है अब मुझे चलना चाहिए रात भर तो अपने मुझे सोने नहीं दिया थोड़ी देर सो लू.

बिहारी काका ने भी गरिमा की आँखों में मुस्कुराते हुए देखा: तुम्हे जाने देने का मन तो नहीं कर रहा पर क्या करू रोक भी नहीं सकता तुम्हारा आराम करना भी ज़रूरी है.

गरिमा: आपको अपनी उस रात की पत्नी के साथ ये रात गुज़ार कर अच्छा तो लगा न.

काका: आज तुमने मुझे जो अनुभव जो ख़ुशी दी है वो मई मरते दम तक नहीं भूलूंगा.

गरिमा ने बिहारी काका से अलग से होने से पहले लास्ट बार अपने होंठ उनके होंठो पर रख कर एक लुम्बा और पैशनेट किश दिया. काका ने भी उसे कास कर अपनी बहो में जकड लिया.

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एक लम्बे चुम्बन के बाद दोनों एक दुसरे से अलग हुए गरिमा जब स्लाबे से उत्तरी तो उसका घाघरा तो नीचे हुआ hi साथ hi उसकी छूट में भरा बिहारी काका वीर्य भी बहकर उसके पैरो से होता हुआ नीचे आने लगा.

गरिमा: कितना सारा माल निकला है आपने मेरी साड़ी टांगो को गीला कर दिया.

काका: अच्छा ज़रा मुझे भी तो दिखाओ मई भी देखु तुम्हारी जांघो पर बेहटा मेरा वीरता कैसा लगता है.

काका की इस मासूम सी रिक्वेस्ट पर गरिमा ने एक झटके में अपना घाघरा ऊपर उठा दिया. गरिमा अपना घाघरा उठाए कड़ी थी और काका उसके एकदम करीब आ गए और गीली छूट पर अपने हाथ रख दिए और उसमे से बेहटा वीर्य अपनी हथेली में भर लिया. गरिमा ये सोच रही थी की अब ये क्या करने वाले है इस वीर्य को हाथो में भर कर की काका उसके पीछे आकर खड़े हो गए और पीछे से उसके घाघरे को उसके चूतड़ों तक ऊपर उठा दिया.

गरिमा: क्या खुराफात चल रही है अब आपके दिमाग में.

काका: कोई खुराफात नहीं बस एक आखिरी रिक्वेस्ट है.

गरिमा: क्या बोलिये.

काका: तुमने मेरे लुंड को तो अपनी गांड का स्वाद चखने का मौका नहीं दिया पर क्या मेरे लुंड से निकले इस प्रसाद को तुम्हारी गांड को महसूस करने का मौका मिल सकता है.

गरिमा: मतलब मई कुछ समझी नहीं.

काका: मई अपना ये वीर्य तुम्हरी इस कातिलाना गांड पर मलना चाहता हु.

उनकी इस आखिरी रिक्वेस्ट में गरिमा को बड़ी किंकी फीलिंग महसूस हो रही थी.

गरिमा: आखिरी विश तो हर इंसान की पूरी की जाती है तो आप भी पूरी कर लीजिये.

गरिमा थोड़ा आगे को झुक गई और अपने बद्ध बड़े कूल्हे बिहारी काका के लिए खोल दिए. और बिहारी ने पहले तो नीचे झुक कर गरिमा के सौंदर्य के प्रतिमान इन कूल्हों पर एक प्यार भरा चुम्बन लिया और फिर अपने हाथो में भरा वीर्य उसके कूल्हों पर मलना शुरू कर दिया. बिहारी काका ने अपने हाथो में भरा सारा वीर्य गरिमा के चूतड़ों पर मॉल दिया और वीर्य की बची आखिरी बूँद को अपनी तर्जनी उंगली में लिया और उंगली को सीधा गरिमा की गांड के छेड़ के अंदर दाल दिया.

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गांड के छेड़ में उंगली महसूस होते hi गरिमा उठ कर कड़ी हो गई पर उसके खड़े होने के बावजूद बिहारी काका ने अपनी ऊँगली को बहार नहीं निकला बल्कि अपनी ऊँगली अंदर डाले डाले hi गरिमा की गांड में गोल गोल घूमने लगे.

गरिमा: थॉट्स नॉट फेयर सिर्फ चूतड़ों पर मलने की बात हुई थी गांड में ऊँगली करने की नहीं.

काका: क्या करू तुम्हारे झुकने पर गांड का छेड़ नज़र आ गया और उसमे उंगली डाले बिना रह नहीं पाया.

गरिमा: चलिए अब मैंने अब आपकी साड़ी बात मान ली अब आप भी मेरी बात मानिये और ऊँगली बहार निकालिये हुए मुझे जाने दीजिये.

काका: अब तुमने बात मैंने की बात करदी तब तो बात माननी hi पड़ेगी.

इतना कहकर उन्होंने गरिमा की गांड से उंगली निकल ली उनले ऊँगली निकलते hi गरिमा उनसे अलग हैट गई और किचन के दरवाज़े के पास पहुंचकर वह पड़ा अपना ब्लाउज उठा लिया और जाने को मुड़ी की काका ने उसे आवाज़ दी.

काका: सुनो

गरिमा: अब क्या फिर कोई आखिरी इच्छा याद आ गई.

काका: नहीं बस वो याद दिला रहा था की 9 महीने बाद इतना ज़रूर बता देना की मुझे लड़का हुआ या लड़की.

बिहारी काका के इस भोले से सवाल पर गरिमा की हसी छूट गई और हां में सर हिला दिया.

गरिमा: है ज़रूर बताउंगी.

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इतना कह कर गरिमा ने जाते जाते बिहारी काका को एक फ्लाइंग किश दी और काका को वही नंगा खड़ा छोड़ किचन से बहार निकल सीडिया चढ़ते हुए अपने कमरे में चली गई. और काका इस बार पूरी तरह संतुष्ट होकर मुस्कुराते हुए जाते देखते रहे जब तक वो अपने कमरे में नहीं चली गई.

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इधर गरिमा ने अपने कमरे में पहुंच कर अपना दरवाज़ा बंद कर लिया उसे अपनी जांघो पर काका के बहते वीर्य चिपचिपाहट और अपने चूतड़ों पर उनके वीर्य का कड़ापन सा महसूस हो रहा था पहले उसने सोचा की इस वीर्य को धोकर साफ़ करले पर वो रात भर जागने के बाद वो काफी थक चुकी थी और अभी नहाने की उसमे छमता नहीं थी और उसने सोचा हर रात तो वैसे भी उसके पेट पर अपना वीर्य मॉल कर चले जाते थे तो अगर आज रात अपनी जांघो छूट और चूतड़ों पर उनका वीर्य मेल हुए hi वो सो जाएगी तो क्या हो जाएगी उसे कुछ पल और इस वीर्य के अपने बदन पर होने का एहसास hi मिल जाएगा.

यही सोच कर गरिमा अपने बिस्तर पर आकर लेट गई रात भर की चुदाई और चूसै के बदन उसके बदन का ज़र्रा ज़र्रा टूट रहा था उसकी आँखे भी नींद में भरी हो रही थी ऐसे में जब साडी दुनिया के जागने का समय हो रहा था गरिमा रात भर एक बूढ़े से छुड़वाने के बाद नींद के आगोश में चली गई.

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पर यहाँ की सुबह तक पहुंच गई थी इसका ये मतलब नहीं था की रात ख़तम हो गई थी क्युकी गरिमा की कहानी में ये अथवा दिन भले hi ख़तम हो गया पर नेहा शबाना और नीतू की कहानियो में इस आठवे दिन में अब भी बहुत कुछ होना बाकी थी क्युकी वो कहानिया अब भी उस रात के अँधेरे में hi रुकी थी जहा से उन्हें अपने इस आठवे दिन का शेष बचा अध्याय पूरा करना था.
 
शादी की हवेली में नेहा शबाना का कमरा

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जैसा की गरिमा वाले अपडेट के अंत में बताया की बेशक गरिमा का अपडेट अथवा दिन पार करके सूर्योदय की किरण के साथ नैव दिन में प्रवेश कर गया था पर इसका अर्थ ये नहीं था की ये अथवा दिन समाप्त हो गया था. सुबह जब नेहा ने विक्रम के कमरे में जाकर उसीके बाथरूम में शोभा के कमरे में मौजूद होते हुए उस अजीब सी कॉमिक सिचुएशन में विक्रम का लुंड चूसा था और उससे ये वडा लिया था की इस अधूरी रह गई मुलाकात को वो पूरा करने उसी तालाब के पास आएगा उनकी ये मुलाकात होना बाकि था इस दिन में.

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और इतना hi नहीं अस ा राइटर इस आठवे दिन के शुरुआत से मुझे जिस घटना का विशेष इंतज़ार था वो था अघोरी और नीतू की तंत्र साधना का आज का अध्याय जिसमे आज हर हालत में उस ब्रह्मचारी की उपस्थिति अनिवार्य थी. और आज नीतू ने जिस तरह अपने दिल को चीयर कर रख देने वाले प्रश्नो से अघोरी को निरुत्तर कर दिया था वो पल अद्भुत था. अघोरी को ये सोचने पर विवश कर दिया था की नीतू को इस तंत्र साधना तक लेन का असली दोषी वो स्वयं है ऐसे में अब साधना को पूरा करने की ज़िम्मेदारी भी उसीकी है. और ऊपरी मन से hi सही अघोरी ने इसके लिए सहमति भी देदी थी. पर क्या इतने वर्षो से संभल कर रखा गया ब्रह्मचर्य वो इस तरह नष्ट कर पाएगा और जब वो अपना ब्रह्मचर्य नीतू को समर्पित करेगा वो पल क्या होगा यही बात इस घटना को इस आठवे दिन की सबसे विशेष घटना बनती थी हुए नीतू को इस आठवे दिन का सबसे एहम महिला किरदार.

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पर इन घटनाओ को घटने में अभी थोड़ा वक़्त शेष था इनसे पहले उस महिला किरदार की चर्चा करना ज़रूरी था जिसने कल रात अपने साथ घाटे बर्बरतापूर्ण काण्ड के बाद एक अजीब सा मौन धारण कर लिया था. एक ऐसा मौन की उसे सबसे ज्यादा पसंद करने वाले और सबसे ज्यादा वोट्स देकर इस कहानी की सबसे लोकप्रिय नाइका बनाने वाले रीडर्स को भी लगने लगा की वो मर गई क्या. जी हां यहाँ बात हो रही है कहानी की सबसे लोकप्रिय नाइका शबाना खान की. बीती रात उसके साथ जो कुछ हुआ उसने जो कुछ सहा वो जितना मुश्किल उसके लिए सहना था उतना hi मुश्किल मेरे लिए उसे शब्दों में बया करना. ऐसे में उसका चुप हो जाना स्वाभाविक था उसकी जगह कोई भी औरत होती तो शायद ऐसे hi रियेक्ट करती. पर कहानी का सबसे बुरा पहलु ये है की वो कभी नहीं रूकती किसी के लिए नहीं रूकती और शाबान खान की इस कहानी का भी आगे बढ़ना ज़रूरी था. और इस आठवे दिन के इन बीतते कुछ पालो में उसकी ये कहानी एक ऐसा ु टर्न लेने वाली थी जिसकी किसी को कल्पना भी नहीं थी.

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तो अब आते है शबाना खान की कहानी पर. शबाना गुमसुम सी चुप बस अपने बिस्तर पर लेती थी. अपने आसुओ को उसने अपने अंदर किसी गहरे कोने में बंद कर लिया था. वो बस यही दुआ कर रही थी की जल्द से जल्द उसकी ज़िन्दगी का बुरा सपना ख़तम हो जाए और इस शादी को ख़तम करके वो अपने घर वापस लौट जाए. पर जब तक ये सब ख़तम नहीं होता तब तक ये सब झेलना उसकी नियति थी क्युकी उसे दर्द देने वाले अब भी उसी हवेली में उसके बेहद करीब मौजूद थे. और उसे दर्द देने के नए नए तरीके सोच रहे थे जैसे उअके दर्द में hi उन्हें मज़ा आ रहा था.

नेहा: क्या हुआ शबाना दी जबसे आप अपनी कजिन के यहाँ से आई हो चुपचाप लेती हो खाना खाने भी नहीं गई कुछ दिक्कत है क्या.

शबाना: नहीं कोई दिक्कत नहीं.

नेहा: तबियत ख़राब है क्या.

शबाना: नहीं सब सही है.

नेहा: अच्छा परसो तो हमे लौटना है तो हमारे पास अब बस दो राते बची है और कल शायद विनीता दी भी वापस आ जाए तो पता नहीं कल समय मिल पाए क्या आज रात आप धामु के साथ कुछ करना करना चाहती है.

शबाना झल्लाते हुए: नहीं मुझे कुछ नहीं करना कुछ नहीं करना.

नेहा शॉकेड होते हुए: Ok Ok रिलैक्स रिलैक्स मत करिये कुछ मई तो बस पूछ रही थी.

नेहा भी सोच में पद गई की अगर शबाना दी जाएगी नहीं तो वो विक्रम से मिलने कैसे जा पाएगी. और शबाना ने बड़ी मुश्किल से अपने आंसुओ को रोका हुआ था वो हर पल उस बात के लिए पछताती थी जब उसने नेहा की बात मानकर धामु के साथ वो करने के लिए हामी भरी थी जिसने उसे आज इस हालत में लेकर खड़ा कर दिया था. और इसीलिए अब वो धामु के साथ कुछ नहीं करना चाहती थी पर ओने वे में घुसना तो आसान होता है पर आप तब तक वापस नहीं लौट सकते जब तक आपको कोई ु टर्न नहीं मिलता. और शबाना की हालत भी कुछ ऐसी hi थी उसने तो बड़ी झुंझलाहट में नेहा को मन कर दिया की उसे कुछ नहीं करना पर तभी उसके फ़ोन में मैसेज आया.

मैसेज- धामु के कमरे की तरफ आ जा और अपनी पूछ को साथ मत लाना रात हो गई और अब हमे शराब के साथ तेरा गदराया हुआ शबाब भी चाहिए. तो जल्दी आजा हम तेरा इंतज़ार कर रहे है.

शबाना ने फ़ोन उठाकर वो मैसेज पड़ा और वो सिहर गई और समझ गई की दिन भर के आराम के बाद उसका टॉर्चर सेशन शुरू होने वाला है. उसने नेहा को मन तो कर दिया था पर अब न चाहते हुए भी उसे वही जाना होगा जहा के लिए उसने अभी अभी मन करा था.

शबाना: नेहा सॉरी वो मई थोड़ी परेशां थी तो तुम पर चिल्ला पड़ी सॉरी.

नेहा: कोई बात नहीं दी इतस ok.

शबाना: वैसे तुम ठीक कह रही हो परसो हमे लौटना है और कल पता नहीं मौका मिल पाए न मिल पाए तो अगर आज मई एक बार और धामु के पास चली जाऊ तो अच्छा रहेगा.

नेहा: हम्म मई तो यही कह रही थी.

शबाना: ठीक है तो धामु के कमरे में जा रही हु.

नेहा: ठीक है रुको मई भी चलती हु.

शबाना: नहीं नहीं तुम रुको थोड़ी दूर hi तो जाना है चली जाउंगी. वैसे भी दो लोगो में पकडे जाने का रिस्क ज्यादा रहता है तो मई अकेली चली जाउंगी.

नेहा: अरे ु सूरे.

शबाना: है तुम यही रुको मई चली जाउंगी.

नेहा: Ok बेस्ट ऑफ़ लक भगवान् करे आपके साथ सब अच्छा हो.

शबाना मन hi मन नेहा की बात पर मुस्कुरा दी की अब तक क्या अच्छा हुआ है उसके साथ जो अब आगे अच्छा होगा. शबाना एक नार्मल सा सलवार सूट पेहेन कर कमरे से निकल गई. उसके जाते hi नेहा ने अपने मोबाइल से विक्रम को मैसेज कर दिया.

मैसेज: Hi माय स्वीटू माय लव माय मास्टर ुर स्लेव इस गेटिंग रेडी तो मीट ु. सो गेट रेडी फ़ास्ट एंड मीट में ात थे प्लेस ऑफ़ लास्ट नाईट. लव ु.

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मैसेज करने के बाद नेहा अपनी आज रात की विक्रम से होने वाली मुलाकात के लिए तैयार होने लगी क्युकी कल तो उसकी शोभा के साथ सुहागरात होगी तो बस यही एक रात है जिसमे वो विक्रम को अपने हुस्न के जलवे दिखा कर घायल कर सकती है. इसके लिए वो अपने कपड़ो में कोई सेक्सी सी ड्रेस ढूंढ़ने लगी. उसे अपने कपड़ो में कुछ कपडे गायब लगे पर विक्रम से मिलने की ख़ुशी में उसने सब इग्नोर कर दिया. उसे शादी के दिन पहनी हुई अपनी उस रेड हॉट ड्रेस का ख्याल आया जिसे उसे देख उस रात कई मर्दो के मुँह खुले के खुले रह गए थे. विक्रम ने स्ट्रेंजर के रूप में पहले दिन उसे इसी ड्रेस में उस पेड़ पर चड्डी टांगने का टास्क दिया था जहा भीमा उसे देख कर मचल उठा था और फिर जब वो सर्वेन्ट्स बाथरूम में वो पार्सल लेने गई थी तब उस तंग बाथरूम में भूरा ने बिना तेल के उसकी गांड मारी थी.

उसने अपने कपड़ो में वो ड्रेस ढूंढी पर उसे वो ड्रेस नहीं मिल रही थी फिर उसे ध्यान आया डांस पार्टी वाले दिन जब वो धामु को यहाँ शबाना के पास छोड़ कर नीतू आरती के जाने के बाद वो शादी के लाल जोड़े वाला पार्सल लेकर उनके कमरे में रुकने गई थी तो ड्रेस भी उसी पसल के साथ वही चली गई थी और वही रह गई थी. पर अब इस वक़्त नीतू के कमरे में जाकर तैयार होने का उसे कोई सेंस नहीं लगा इसलिए उसने अपने कपड़ो में से एक और टाइट फिटिंग ड्रेस निकल ली और आज रात के लिए तैयार होने बैठ गई. उधर विक्रम ने भी नेहा का मैसेज पद लिया उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे कल उसकी सुहागरात रात उसे आज नेहा के पास जाना चाहिए या नहीं. उसका दिल कह रहा था की वो अब शादीशुदा है कल उसकी सुहागरात उसे अपनी hi बीवी की सहेली के पास नहीं जाना चाहिए ये गलत है पर उसका दिमाग कह रहा था की कौन सा पहली बार किसी लड़की के साथ डिंग डाँग कर रहा है इससे पहले भी वो कई लड़कियों के साथ ये सब कर चूका है तो कल अपनी ऑफिसियल शादी की शुरुआत से पहले अगर वो थोड़ा मज़ा कर लेता है तो इसमें क्या बुरा है. और वैसे भी कौन सा मई उसके पास गया था वो खुदसे चलके मेर पास आई तो इसमें मेरी क्या गलती. दिल और दिमाग की इस जुंग में जीत दिमाग की हुई और विक्रम भी आज रात नेहा के साथ मज़ा करने के लिए तैयार होने लगा.

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पर जैसा की शुरू में hi बताया गया की फिलहाल बात हो रही है शबाना खान की तो नेहा और विक्रम की मुलाकात का विश्लेषण हम बाद में करेंगे.

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शबाना रात के सन्नाटे में धामु के कमरे की तरफ चली जा रही थी ये जानते हुए की आज रात उसे फिर लालू और उसके दोस्तों की बर्बरता झेलनी पद सकती है पर इसके अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था. वो धामु के कमरे के करीब पहुंची hi थी की अँधेरे में रस्ते में पड़े एक पत्थर पर पड़ने से वो लड़खड़ा गई और सीधा धामु के कमरे के दरवाज़े से जा भिड़ी जिससे दरवाज़े में ज़ोर की आवाज़ हुई और अंदर सो रहे धामु की नींद खुल गई. दरवाज़े पर हुई इस तेज़ आवाज़ को सुन धामु दरवाज़े की तरफ लपका और दरवाज़ा खोलते hi शबाना को सामने गिरा देख खुश भी हुआ और चिंतित भी. खुश इसलिए की उसकी दुल्हन उसके सामने थी जिसे पुरे दिन से उसने देखा hi नहीं और चिंतित इसलिए की वो गिरी पड़ी है उसे चोट लग गई होगी.

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अचानक से दरवाज़ा खुलने और धामु के बहार आने से शबाना भी शॉक हो गई. उसने आस पास नज़र दौड़ाई की लालू और उसके दोस्त उसे देख तो नहीं रहे कही इस बात पर वो उसे और सजा तो नहीं देंगे की उसने धामु को जगा दिया पर उसे कोई नज़र नहीं आ रहा था. इधर धामु उसका हाल चल पूछने उसके करीब आ गया.

धामु: अरे तुम यहाँ पर क्या मुझसे मिलने आई थी और तुम गिर कैसे गई तुम्हे चोट लग गई होगी न. रुको मई किसीसे दवाई लेकर आता हु.

शबाना बात का बतंगड़ नहीं बनाना चाहती थी इसलिए उसने उसे रोक लिया.

शबाना: नहीं नहीं ठहरो कही मत जाओ मई ठीक हु ठीक हु मई मुझे चोट नहीं लगी.

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शबाना ने खड़े होने की कोशिश की पर उसके पेअर में दर्द था पर धामु कुछ वररेक्ट न करे इसलिए उसने अपना दर्द बर्दाश्त कर लिया.

धामु: नहीं लगी चोट सच्ची.

शबाना: है देखो मई कड़ी हु.

पर पेअर पर दबाव पड़ने पर उसका दर्द चेहरे पर आ hi गया.

धामु: नहीं तुम्हे दर्द हो रहा मई जनता हु तुम इसलिए नहीं बता रही न की कही डॉक्टर तुम्हे इंजेक्शन न लगा दे. मई भी इंजेक्शन से डरता हु पर इतनी रात में इंजेक्शन थोड़ी न लगेगा बुद्धू.

शबाना: नहीं सच में मई ठीक हु बिलकुल ठीक हु. तुम चिंता न करो.

धामु: कैसे चिंता न करू मई तो तुम्हारा दूल्हा हु न बापू कहते है अपनी दुल्हन की रक्षा करना दूल्हे का फ़र्ज़ होता है तो तुम्हारी रक्षा करना तो मेरा फ़र्ज़ है न.

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धामु का ये माऊं प्यार देख कर शबाना की आँखों में आंसू आ गए की एक मंदबुद्धि उसके दर्द को समझता है उसकी फिक्र करता है और उसके पति और लालू और दोस्तों जैसे मर्द जो खुद को दिमाग से ठीक कहते है उसे सिर्फ एक बच्चा पैदा करने की मशीन और एक मज़ा करने की चीज़ समझते है उसके दर्द उसके आंसुओ में उन्हें मज़ा अत है. दिमागी रूप से पागल कौन है ये मासूम इंसान या वो विछिप्त लोग और दुनिया इसे पागल कहती है. आंसू शबाना की आँखों से निकल रहे थे पर दर्द धामु की आँखों में नज़र आ रहा था.

धामु: तुम्हे दर्द हो रहा तभी तुम रो रही हो न.

शबाना: नहीं तुमसे बात करके तो मेरा सारा दर्द दूर हो गया.

धामु: नहीं तुम झूट बोल रही हो जब मई गिर पड़ता हु तो मुझे भी बहुत दर्द होता है.

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धामु का निश्छल प्यार देख कर शबाना उसे गले लगा लेती है और उसके बालो को प्यार से सहलाने लगता है. शबाना उसके गले लगकर फूट फूट कर रो पड़ी जैसे कल रात का सारा दर्द जो सुबह से उसके अंदर भरा पड़ा था आसुओ के सहारे उसकी आँखों से बहार आ रहा था. सुबह से शायद उसे यही चाहिए था एक निश्छल प्यार दुलार और फिक्र से भरा एहसास जिसने उसके अंदर दबे हुए दर्द को बहार ला दिया उसके सूख चुके आसुओ को बहार आने का रास्ता दिखा दिया.

शबाना धामु को अपनी बहो में जकड़े वही लॉबी में बैठी थी की तभी उसके जीवन का वो बुरा सपना लल्लन सिंह उर्फ़ लालू उसके पीछे आकर खड़ा हो गया. शबाना को इस तरह धामु के गले लगकर फूट फूट कर रट देख उसे बहुत गुस्सा आ रहा था पर धामु की मौजूदगी में वो कुछ उल्टा सीधा भी नहीं कर सकता था इसलिए उसने अपने गुस्से को कुछ पल के लिए पी लिया और खुद को नार्मल करते हुए उनके पास आ गया.

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लालू: अरे क्या हुआ शबाना जी आप रो क्यों रही है धामु भैया क्या हुआ आपकी दुल्हन को.

एकदम से अपने पीछे लालू की आवाज़ सुन कर शबाना सेहम गई.

धामु: अरे लालू देखो न ये गिर गई है इन्हे चोट लग गई है कितना रो रही है.

लालू: ओहो ये तो बड़ा बुरा हुआ धामु भैया पर आप चिंता न करो न मई होना अब इतनी रात में डॉक्टर साहब की क्लिनिक तो बंद हो गई होगी पर कोई बात नहीं मुझे डॉक्टर साहब का घर पता है मई इनको वह ले जाता हु और और इनको दर्द की दवा दिलवा दूंगा फिर ये नहीं रोएगी.

धामु: तुम इन्हे डॉक्टर साहब के यहाँ ले जाओगे पर इनको इंजेक्शन तो नहीं लगवाओगे न.

लालू: नहीं नहीं धामु भैया बिलकुल नहीं मई डॉक्टर से मन कर दूंगा की इनको इंजेक्शन न लगाए.

शबाना का दिल की धड़कने ज़ोर ज़ोर से चल रही थी क्युकी वो जानती थी की लालू उसे कहा ले जा रहा है और क्यों पर ये बात वो छह कर भी धामु को नहीं बता सकती थी.

धामु: एक काम करता हु मई भी चलता हु साथ में कही तुम भूल गए और डॉक्टर ने इंजेक्शन लगा दिया.

शबाना भी मन hi मन चाहती की धामु उसके साथ रहे क्युकी शायद धामु की मौजूदगी वो लोग उसके साथ वो सब न कर पाए. धामु के रूप में उस डूबती को एक तिनके का सहारा था. वही लालू जल्द से जल्द इस धामु नाम की आफत से पीछा छुड़ाना चाहता था पर यहाँ वो गुस्से से काम नहीं ले सकता था क्युकी धामु विक्रम का बड़ा भाई था.

लालू: अरे नहीं नहीं भैया आप यही रुको वो क्या है अगर ज्यादा लोग गए तो डॉक्टर साहब गुस्सा करेंगे अब उनका घर है न वो भी इतनी रात में आराम कर रहे होंगे वो तो आपकी दुल्हन को दर्द हो रहा है तो इसलिए मैंने कहा मई उनके यहाँ ले जाता हु.

धामु: पर तुम याद रखोगे न की वो इंजेक्शन न लगाए.

लालू: पक्का मई याद रखूँगा प्रॉमिस.

धामु: ठीक है ले जाओ और दवा दिला कर जल्दी आना और अच्छी दवा दिलाना.

लालू: पक्का पक्का शबाना जी हम चले डॉक्टर साहब के पास.

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न इच्छा होते हुए भी शबाना को उसके साथ चलने को मजबूर होना पड़ा. उस तिनके ने भी उसका साथ छोड़ दिया था. लालू शबाना का हाथ थामे उसे हवेली की गेट की तरफ ले चला और शबाना मुड़कर बस धामु को देख रही थी की काश उसे उसकी हालत का एहसास हो जाए पर धामु को इतनी समझ कहा थी.

लालू शबाना से फुसफुसाते हुए: साली कुटिया एक नंबर रुंडी है बड़ा चिपक रही थी उस पगले के साथ. कल रात मेरे दोस्तों के बड़े बड़े लंडो से मन नहीं भरा तेरा. चल अभी चल कर तेरी साडी गर्मी उतार देंगे. कल मई रेस्ट पर था मेरे दोस्तों ने तेरा बंद बजाय था आज रात हम चारो मिलकर तुझे छोड़ेंगे. तेरे हर छेड़ का भोसड़ा बना देंगे.

शबाना का बदन थार थार काँप रहा था पर कुछ बोलने की या विरोध करने की उसमे हिम्मत नहीं थी. लालू उसे लेकर हवेली से बहार निकल आया और उसे लेकर सर्वाणी क्वार्टर की तरफ से जाने वाले एक रस्ते पर ले चला. इधर धामु को रेहरेह कर यही चिंता सताए जा रही थी की कही डॉक्टर उसकी दुल्हन को इंजेक्शन न लगा दे. वो इसी चिंता में परेशां था की तभी उसे ख्याल आया की अभी कुछ दिन पहले उसके चोट लगी थी तब विक्रम ने उसके एक क्रीम लगाई थी जिससे उसकी चोट सही हो गई थी और दर्द भी नहीं हुआ था वो क्रीम अब भी उसके कमरे की अलमारी में राखी थी अगर वो क्रीम से शबाना का दर्द ठीक हो जाए तो उसे डॉक्टर के यहाँ जाने की ज़रूरत hi नहीं पड़ेगी. वो अपने कमरे में राखी अलमारी में वो क्रीम ढूंढ़ने लगा और जल्द hi उसे वो क्रीम मिल भी गई.

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धामु वो क्रीम लेकर बहार जिस तरफ शबाना गई थी उस तरफ दौड़ पड़ा. हवेली के गेट के बहार चारो तरफ अँधेरा था पर दूर सर्वेंट क्वार्टर के पास जल रहे बल्ब में उसे जाते हुए लालू और शबाना का अक्स नज़र आ गया. वो उसी तरफ उनके पीछे दौड़ पड़ा. लालू शबाना को लेकर तेज़ तेज़ कदमो से आगे बड़ा जा रहा था. सर्वेंट क्वार्टर के पीछे कुछ दूरी पर मलखान सिंह की गौशाला बानी था जहा उनकी कुछ पालतू गए बंधी रहती थी जिनसे शादी के दौरान दूध मिलता रहे और लखन सिंह का घोडा बदल भी वही बांध था. लालू शबाना को लेकर उस गौशाला की तरफ चल पड़ा. धामु जब तक सर्वेंट कट्टक पंहुचा लालू शबाना को लेकर गौशाला के अंदर जा चूका था.
 
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धामु उन दोनों को इधर उधर देखने लगा की तभी उसका पेअर सड़क के किनारे सोते एक कुत्ते की पूछ पर पड़ा और कुत्ता बौखला कर उठ बैठा और धामु पर भौकने लगा, इस अचानक हुई घटना से धामु घबरा गया और वापस हवेली की तरफ दौड़ पड़ा पर कुत्ता भी उसके पीछे दौड़ पड़ा. सर्वेंट क्वार्टर में सो रहे नौकरो ने भी कुत्ते के भौकने और किसी के दौड़ने की आवाज़ सुनी जिसे सुनकर उनकी नींद खुल गई. उन्हें लगा की कही कोई चोर तो नहीं आ गया.

रामु काका: अरे ज़रा बहार निकल कर देखो ये कुत्ता किस पर भौक रहा है. कही कोई चोर तो नहीं है

कल्लू: मलखान सिंह की हवेली में इतने लोगो की मौजूदगी में कौन हिम्मत करेगा यहाँ आने की.

रामु काका: शादी का घर है चोरी के लिए बहुत कुछ है यहाँ इसलिए चोरो की हिम्मत का कुछ न कहो. बहार जाकर देखो.

कल्लू: क्या काका आप भी आए छोटू ज़रा देख बहार जाकर.

रामु काका: अरे उस बच्चे को कहा भेज रहे हो तुम लोग जाकर देखो इतने मुश्तंडे मुश्तंडे हो एक चोर को जाकर नहीं देख सकते. कल्लू भोला कन्हैया चलो तुम तीनो देखो जाकर बहार.

कल्लू: जाते है जाते है काका क्या तुम भी सोने नहीं देते.

कल्लू (वो वेटर), भोला ( लेबर ), और कन्हैया ( इलेक्ट्रीशियन ) तीनो बहार देखने आए. बहार धामु हफ्ता हुआ दौड़ा जा रहा था कुत्ता अब भी उसके पीछे था. धामु कभी गार्डन घुमा कर अपने पीछे दौड़ते कुत्ते को देखता तो कभी सामने हवेली की तरफ. दौड़ते दौड़ते अचानक वो हवेली के गेट से बहार आ रहे एक शिक्षा से जा टकराया पर इससे पहले वो भड़भड़ाकर गिरता उस शिक्षा ने उसे थम लिया. धामु ने आँखे खोल कर उस शिक्षा को देखा वो और कोई नहीं उसका अपना छोटा भाई विक्रम था जो इसी समय नेहा से मिलने के लिए तैयार होकर हवेली से बहार आया था और अचानक सामने से आते धामु से जा टकराया. धामु को इतनी रात में यु हवेली के बहार देख विक्रम शॉक रह गया. विक्रम की एक घुड़की में कुत्ता वह से नौ दो ग्यारह हो गया. धामु के थोड़ा रॉल्स होने के बाद विक्रम ने उससे इस वक़्त यहाँ होने का कारन पुछा.

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विक्रम: धामु भाई आप इस वक़्त यहाँ क्या कर रहर हो.

धामु: वो न वो न दुल्हन गिर गई थी उसको चोट लग गई थी मई तो मई तो उसे ये क्रीम देने जा रहा था ताकि डॉक्टर उसे इंजेक्शन न लगा दे.

विक्रम: दुल्हन गिर गई थी डॉक्टर इंजेक्शन क्या कह रहे है आप. कौन दुल्हन शोभा की बात कर रहे है.

धामु: नहीं नहीं शोभा नहीं तुम्हारी दुल्हन नहीं मेरी दुल्हन गिर गई थी.

विक्रम: आपकी दुल्हन आपकी दुल्हन कौन है. किसकी बात कर रहे हो.

धामु: अरे वो है न गोरी गोरी सी खूब सुन्दर सी.

विक्रम: गोरी गोरी सी खूब सुन्दर सी कौन किसकी बात कर रहे हो.

धामु: अरे वो जो शहर से आई है.

विक्रम: शहर से आई है शोभा की सहेलिया उनमे से किसी की बात कर रहे हो.

धामु: ः वही वही.

धामु की बात सुनकर विक्रम सोच में पद गया की भैया किसकी बात कर रहे है शोभा की सहेलियों में से चार विनीता गरिमा नीतू आरती तो हवेली में है hi नहीं. सिर्फ नेहा और शबाना hi है यहाँ उनमे से शबाना तो सीढ़ी साधी है इतनी रात में बहार आएगी नहीं तो क्या ये नेहा की बात कर रहे है पर ये नेहा को अपनी दुल्हन को क्यों कह रहे है. ज़रूर उसने इनके साथ भी फ़्लर्ट करा होगा. वो इसी टाइप की है हर बात में फंतासी ढूंढ़ती है एक कम दिमाग वाले इंसान के साथ फ़्लर्ट करने में भी उसे फंतासी लगी होगी. पर धामु भैया ये क्यों कह रहे की वो गिर गई डॉक्टर उसे इंजेक्शन लगा देगा.

विक्रम: धामु भाई वो कहा गिर गई और कौन सा डॉक्टर उसे इंजेक्शन लगा देगा.

धामु: अरे वो डॉक्टर जिसके पास लालू ले गया है वही.

लालू का नाम आते विक्रम का माथा ठनक गया की ज़रूर लालू की नियत नेहा पर ख़राब हो गई होगी और नेहा तो है hi इस टाइप की वो भी मज़ा करने उसके साथ चलदी होगी. पर साला मुझे यहाँ बुला कर खुद लालू के साथ चली गई.

विक्रम: वो लोग किधर गए है भाई.

धामु: वो उस तरफ.

विक्रम धामु को लेकर उसी तरफ चल दिया जिधर लालू शबाना को लेकर गया था पर उसके दिमाग में अब भी यही था की धामु नेहा की बात कर रहा था शबाना का तो ख्याल भी उसके ज़हन में नहीं था.

सर्वेंट क्वार्टर के सामने खड़े कल्लू भोला कन्हैया ने जब विक्रम और धामु को देखा तो हाथ जोड़ कर खड़े हो गए.

कल्लू: क्या हुआ छोटे मालिक इतनी रात में आप यहाँ.

विक्रम: टहल रहा था और बड़े भैया कुत्ते से दर गए कोई बात नहीं है तुम लोग जय जाकर सो जाओ.

कल्लू: जी छोटे मालिक.

विक्रम धमौ को लेकर आगे बाद गया और वो तीनो वापस सर्वेंट क्वार्टर की तरफ मुड़े की मुड़ते मुड़ते कल्लू की नज़र भीमा की झोपडी के पीछे बानी झाड़ियों पर पड़ी और उसने एक साया उन झाड़ियों के झुरमुट में देखा डीलडौल से वो साया एक आवर्त का था. ध्यान से देखने पर जब कल्लू ने उसकी चल ढल और टाइट टाइट छोटे कपड़ो को देखा तो उन्हें देखते hi वो समझ गया की वो साया किसका है.

कन्हैया: आए कल्लू क्या हुआ चल अंदर ये उधर झाड़ियों की तरफ क्या देख रहा है.

कल्लू: है है वो कुछ नहीं कोई खरगोश था उधर, है तुम लोग चलो अंदर मई जरा मूट कर अत हु

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कन्हैया और भोला अंदर चलाए गए और कल्लू उन झाड़ियों की तरफ चल दिया. भीमा भी उसे उस तरफ जाते देख रहा था पर उसके छोटी जाट होने की वजह से नौकर उसे ज्यादा मुँह नहीं लगते थे इसलिए उसने भी कुछ न पुछा.

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इधर गौशाला में लालू ने शबाना को लेकर अपने दोस्तों के सामने पटक दिया जो वह शराब की महफ़िल सजाए बैठे थे. और शबाना को देखकर अपने लुंड रगड़ने लगे. सबसे पहले कुंदन ने बालो से खींचकर शबाना को उठाया और उसे अपनी बहो में जकड कर उसकी गांड मसलने लगा. पीछे से लालू ने भी शबाना को अपनी बहो में जकड लिया और दूध मसलने लगा. ऐसे में देव और प्रताप क्यों पीछे रहते वो भी अपने पेग ख़तम करके शबाना पर टूट पड़े कोई उसकर होंठ चूस रहा था कोई कमर. शबाना के बदन से खेलते खेलते चारो ने शराब की बोतल उठा ली और शराब पीते हुए शबाना के बदन पर टूट पड़े. शबाना एक बार फिर उन वेह्शी दरिंदो के सामने बेबस लाचार थी, रेहम की कोई उम्मीद न होते हुए भी शबाना हाथ जोड़ कर उनसे रेहम की भीक मांग रही थी पर उसका यु गिड़गिड़ाना तो उन हवस के भूके भेडियो को और सुकून दे रहा था. उसके बदन को चूमते हुए वो शबाना को जगह जगह काट रहे थे शबाना दर्द से तड़प रही थी और वो सब है रहे थे.

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बचने की साडी उमीदे तो शबाना ने छोड़ दी थी पर जब इंसान साडी उमीदे छोड़ देता है तब hi उम्मीद की हलकी सी लौ उसे जीने की नै वजह देदेती है. शबाना की वही उम्मीद उसी तरफ आ रही थी, धामु अपने भाई विक्रम को लेकर सर्वेंट क्वार्टर के पीछे आ गया जहा से वापस लौटा था. उधर नेहा तालाब के पास पहुंच गई थी और अब विक्रम का इंतज़ार कर रही थी, कल्लू उस बाग़ में पहुंच गया था और अँधेरे में यहाँ वह नेहा को ढून्ढ रहा था. तालाब के पास पहुंच कर नेहा ने विक्रम को कॉल लगाया, अपने फ़ोन पर नेहा का कॉल देख विक्रम चौंक गया की अगर ये लालू के साथ है तो मुझे कॉल क्यों कर रही है क्या थ्रीसम करना चाहती है. ये जनन्ने के लिए विक्रम ने फ़ोन उठाया.

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नेहा: मई यहाँ पहुंच गई हु तुम कब तक आओगे.

विक्रम: कहा पहुंच गई हो.

नेहा: तालाब के पास और कहा यही मिलने वाले थे न हम.

विक्रम: तुम लालू के साथ नहीं गई हो.

नेहा: लालू के साथ नहीं तो मई क्यों जाउंगी उसके साथ और कहा. तुम ये बताओ तुम कितनी देर में आओगे मुझे यहाँ अकेले दर लग रहा है.

नेहा लालू के साथ नहीं है ये सुनकर विक्रम सोच में डूब गया की फिर वो किसे ले गया किसी को ले भी गया है की कही धामु भैया ने कोई सपना तो नहीं देखा.

विक्रम: है अत हु थोड़ी देर में अत हु.

इतना कहकर विक्रम ने फ़ोन रख दिया.

विक्रम: धामु भाई लालू तो कही दिख नहीं रहा अपने कोई सपना तो नहीं देखा.

धामु: वो सही में उनको डॉक्टर के पास ले गया था ये देखो मई ये क्रीम भी लाया था.

विक्रम: किसको ले गया था.

धामु: मेरी दुल्हन को.

विक्रम: कौन आपकी दुल्हन नाम क्या है उसका.

धामु: वो तो नहीं पता वो शहर से आई है गोरी गोरी सुन्दर सी दुल्हन.

विक्रम ने लालू का नंबर डायल करा पर फ़ोन स्वीटकॉफ था.

विक्रम: देखिये धामु भाई यहाँ तो कोई दिख नहीं रहा अब पता नहीं वो कहा गया है अभी हम वापस चलते है कल लालू से बात करेंगे.

धामु: पर डॉक्टर ने उनके इंजेक्शन लगा दिया तो.

विक्रम: पर इस वक़्त उस कहा ढूंढे अँधेरे में अभी रात बहुत हो गई है वापस चलते है.

धामु: ठीक है.

इधर गौशाला में उन चारो ने शबाना की सलवार खोल कर नीचे सरका दी थी. गिरने की वजह से शबाना के घुटने से खून बह रहा था उससे ठीक से खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था पर उसका बेहटा खून देखकर भी उनका दिल नहीं पसीज रहा था. शबाना के ांसो बह रहे थे पर और उस गौशाला में बंधे जानवरो को उस पर दया आ रही थी खासकर बदल अपने पाँव पटक पटक कर हिनहिना रहा था खुद को आज़ाद करने की कोशिश कर रह था पर उन पत्थर दिल लोगो पर कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था. पर बदल का यु ज़ोर ज़ोर से हिनहिनाने की आवाज़ सुनकर विक्रम के वापस लौटते पाँव रुक गए.

विक्रम: ये बदल इतनी रात में क्यों हिनहिना रहा है, धामु भाई एक काम करिये आप वापस लौट जाइये मई ज़रा बदल को देख कर अत हु. और जाकर आराम करिये दुबारा अपने कमरे से मत निकल जाइएगा अपनी दुल्हन को ढूंढ़ने. हम दोनों भाई कल सुबह आपकी दुल्हन को देखेंगे ok.

धामु: ठीक है.

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और शबाना की वो आखिरी उम्मीद धमौ भी वापस हवेली की तरफ चला गया पर विक्रम के कदम एक बार फिर उस गौशाला की तरफ चल दिए. पर अब क्या वाकई कोई उम्मीद थी भी क्या विक्रम वाकई उम्मीद के लायक था जो शिक्षा खुद लड़कीबाज हो अयाश हो अपनी नै ब्याहता बीवी को धोका देकर उसीकी सहेली के साथ अयाशी करने जा रहा हो क्या वाकई वो भरोसे के लायक था. वो तो खुद लालू और उसके दोस्तों के साथ लड़कीबाजी का शौक़ीन रहा है क्या वो शबाना को बचने के लिए अपने hi दोस्तों के खिलाफ जाएगा या शबाना का बेपनाह हुस्न को देख कर उसका भी ईमान दोल जाएगा. क्या आज विक्रम के रूप में शबाना को एक मसीहा मिलने वाला था या कल रात की तरह आज रात भी शबाना के साथ वहशियत का नंगा नाच होने वाला था या कुछ उससे भी बदत्तर होने वाला था और उसके गुनहगारों की सूचि में एक और नाम शामिल होने वाला था.

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कल्लू उस आम के बाघ के अँधेरे में नेहा को ढून्ढ रहा था, और नेहा तालाब के पास विक्रम का इंतज़ार कर रही थी, और विक्रम उस गौशाला की तरफ बड़ा चला जा रहा था, और उस गौशाला में एक बार फिर शबाना उन चार हवस के भूके भेडियो के बीच बेबस लाचार सी फांसी हुई थी. गौशाला के पास पहुंच कर विक्रम को अंदर से कुछ आवाज़े अति सुनाई दी और वो बड़े साढ़े कदमो ऐ आहिस्ता आहिस्ता गौशाला की दीवार के पास पहुंच और वही दीवार में बने एक झरोखे से ज्योही उसने अंदर झक कर देखा अंदर का मंज़र देख कर उसके होश उड़ गए. अंदर उसके चारो दोस्त लालू देव कुंदन और प्रताप किसी लड़की को अधनंगी हालत में अपनी गिरफ्त में जकड़े हुए थे. उस लड़की का चेहरा उसके हट्टे काटते दोस्तों के बीच छुपा था पर वो औरत उनके चंगुल से छूटने की भरसक कोशिश कर रही थी. और जैसे hi विक्रम की नज़र उस आवर्त के चेहरे पर पड़ी उसके पैरो टेल ज़मीन निकल गई. वो शबाना थी जिसे आज तक उसने बेहद पाक ज़हीन महिला के रूप में देखा था जो इस वक़्त अधनंगी हालत में उसके दोस्तों के बीच अपनी अस्मत को बचने की नाकाम कोशिश कर रही थी.

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विक्रम की नज़रे जब उसकी नंगी जांघो पर पड़ी तो उसे उसके घुटनो से बेहटा खून भी नज़र आया जिसे देखकर वो समझ गया की ये जो कुछ हो रहा है उसकी मर्ज़ी के खिलाफ हो रहा है और उसके दोस्त उसकी इज़्ज़त लूट रहे है. विक्रम तेज़ी से गौशाला के दरवाज़े के पास आया उसे हाथ से धकेला पर वो अंदर से बंद था. विक्रम ने पीछे हटके एक ज़ोरदार लात उस दरवाज़े पर मारी, विक्रम की एक hi मज़दूत लात में दरवाज़ा झाड़ से खुल गया और विक्रम गौशाला के अंदर आ गया. अचानक से दरवाज़ा खुलने को आवाज़ ने सबको चौका दिया लालू कुंदन देव प्रताप और शबाना सब चौंक पड़े, और जब सबकी नज़र गौशाला के अंदर आए विक्रम पर पड़ी तो कुंदन देव प्रताप हड़बड़ा गए और शबाना को छोड़ कर पीछे हैट गए, विक्रम को देख कर शॉक लालू भी हो गहा पर उसने शबाना का हाथ नहीं छोड़ा. और शबाना के मन में एक उम्मीद की किरण जगी की शायद विक्रम उसे इन दरिंदो से बचा ले.

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कुंदन देव प्रताप घबरा रहे थे की पता नहीं विक्रम अब कैसे रियेक्ट करेगा पर लालू को पता था की विक्रम को कैसे हैंडल करना है.

लालू: आओ मेरे यार आखिर तुम्हे पता चल hi गया. (अपने दोस्तों के घबराए चेहरे देख कर) अरे तुम लोग इससे दर रहे हो ये अपना जिगरी है भाई है अपना इससे डरने की क्या ज़रूरत. भाई समझा इन्हे मुँह देख इनके कैसे हवइया उडी पड़ी है इनकी. वैसे मन्ना पड़ेगा भाई कमल की कुत्ते वाली नाक है तेरी कही बुइ किसी चौकस माल की ठुकाई हो तू सुनहगते हुए पहुंच hi जाता है.

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विक्रम खामोश खड़ा लालू की साड़ी बाते सुन रहा था उसके चेहरा एकदम भावशून्य था न ख़ुशी की स्माइल न गुस्सा इसलिए उसके अंदर के भाव के अंदाज़ा लगाना मुश्किल था.

लालू: भाई तू चुप क्यों खड़ा है बोल मेरे भाई अच्छा समझा समझ गया समझ गया समझ गया अपना भाई गुस्सा है की हमने अकेले अकेले मज़ा करा और इसे इन्विते भी नहीं करा. है भाई सॉरी ये गलती तो है अपनी इसके लिए हम सब कान पकड़ कर माफ़ी मांगते है. आई सालो गलती क्या मेरे अकेले की थी सालो तुम तीनो ने भी तो इस रुंडी के साथ मज़े करे है चलो सॉरी बोलो अपने यार को कान पकड़ कर.

देव कुंदन प्रताप भी विक्रम की तरफ से कोई गुस्से की प्रतिक्रिया न देख अब थोड़ा रिलैक्स हो गए थे.

देव कुंदन प्रताप: सॉरी विक्रम भाई माफ़ कार्डो.

दूसरी तरफ शबाना को भी विक्रम के चेहरे पर कोई गुस्सा न देख यही लगने लगा की विक्रम भी अपने दॉतो जैसा hi है और वो भी उसकी मज़बूरी का फायदा उठाएगा आज अपने दोस्तों के साथ मिलकर वो भी उसका बंग करेगा. जबकि विक्रम सिर्फ शबाना की आँखों से बहते आंसू और उसके घुटनो से बेहटा खून देख रहा था.

लालू: सिर्फ माफ़ी से कच्छ नहीं होगा अब आज रात इस रुंडी को कोई हाथ भी नहीं लगाएगा. आज रात ये सिर्फ अपने यार की है और आज सिर्फ विक्रम इसकी ठुकाई करेगा. विक्रम जा छोड़ दे इस रन..............

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लालू बस इतना hi बोल पाया था की विक्रम का एक ज़ोरदार घुसा उसके मुँह पर पड़ा. घुसा इतना जबर्दरस्त की लालू 360° एंगल घूम कर ज़मीन पर शबाना के पैरो पर जाकर गिरा. एक पल के लिए उसके सर घूम गया. देव कुंदन प्रताप जो थोड़ा रिलैक्स हो गर थे विक्रम के ये बदले हुए तेवर देख शबाना को छोड़ कर दो कदम पीछे हैट गए. शबाना को भी एक उम्मीद की किरण नज़ारा आई और उसने भी अपना सलवार ऊपर करके उसका नाडा बांध लिया.

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लालू दुबारा उठा कर खड़ा हुआ पर इस बार उसकी आँखों में गुस्सा और होंठो से बेहटा हल्का सा खून था.

लालू: सेल तूने मुझपर हाथ उठाया अपने बचपन के दोस्त पर हाथ उठाया. वो भी सेल इस दो टेक की रन.....

इतने पर hi फिर एक तेज़ तमाचा लालू के गाल पर पड़ा.

लालू गुस्से में चीखते हुए विक्रम के मुँह के एकदम नज़दीक आकर: हाए विक्रम ( गुस्से में लालू का सीना ऊपर नीचे हो रहा था ) सेल तू दोस्त है इस लिए लिहाज कर रहा हु. और तू क्या खुद को बड़ा महान दिखा रहा है सेल भूल गया तू भी हमारे जैसा है. आज बड़ा महापुरुष बन रहा है जब हमारे साथ मिलकर रंडीबाज़ी करता था तब ये म्हणता कहा चली गई थी. और तू इसके लिए मुझे मार राग है न इसकी दोस्त वो साली नेहा के साथ तेरा कि चल रहा है न सब पता है अपने को. आज भी ये रात में सज धज कर उसीसे मिलने आया है न.

लालू की ये बात सुन विक्रम शॉक हो गया की इसे इस बारे में कैसे पता पर उससे ज्यादा शॉक शबाना को लगा की नेहा जो उसकी इतनी मदद कर रही थी अपनी hi सहेली के पति के साथ अफेयर कर रही है.

विक्रम ने एक ज़ोर का धक्का लालू के सीने पर मारा और अब तक खामोश खड़े विक्रम ने अपनी ज़ुबान को खोला.

विक्रम: सेल तू अपने साथ मेरी तुलना कर रहा है सेल विक्रम सिंह तेरे जैसा नहीं है. है विक्रम ायश है लड़कीबाजी करता है कई रूढ़ियों को भी छोड़ा है और है नेहा के साथ भी मैंने सेक्स करा है पर मैंने आज तक कभी किसी लड़की का बंग नहीं करा उसकी मर्ज़ी के खिलाफ उसके साथ ज़बरदस्ती नहीं करि है. नेहा भी अपनी मर्ज़ी से मेरे पास खुद चल कर आई थी मई नहीं गया था उसके पास. तो सालो तुम सब खुद को मेरे साथ कपड़े न करो.

लालू ताली बजाते हुए: ोोोू तब तो तुम महान हो शक्तिमान हो ज्ञानी हो अंतर्यामी हो मई तो कहता हु तुम पुरुष hi नहीं हो महापुरुष हो महापुरुष. बूत सुन ले भाई मई कमीना नहीं महकमीना हु और अगले दो दिन तक ये साली मेरी रुंडी बनकर रहेगी. तुम इसके साथ मज़े करने है तो अब भी हमारे साथ आजा वर्ण अबाउट टर्न होकर यहाँ से बहार निकल जा.

लालू ने शबाना की तरफ घूमकर उसको बालो से पकड़ने के लिए उसकी तरफ हाथ बढ़ाया पर इस बार विक्रम ने आगे बाद कर उसके बड़े हुए हाथो को बीच में रोक दिया. और उसके हाथो को नीचे झटक कर शबाना का हाथ थम कर उसे ले कर चल दिया. लालू ने अपने दोस्तों की तरफ देखा जो डरे हुए खड़े थे और उनके सामने विक्रम इस तरह शबाना को ले जा रहा था जिससे लालू उनके सामने विक्रम से कमजोर साबित हो रहा था. और ये बात लालू के बेहद इन्सुल्टिंग थी और ऊपर से वो शराब के नशे में भी था जिस वजह से वो तरी सुद्बुध में नहीं था. ऐसे में विक्रम का यु उसकी बेज़्ज़ती कर के शबाना को ले जाना उसकी बर्दाश्त के बहार था और उसने भी आगे बाद कर शबाना का दूसरा हाथ थम लिया. शबाना एक हाथ पकड़ कर विक्रम उसे बचाकर बहार ले जा रहा था तो उसका हाथ पकड़ कर लालू उसे जाने दे रहा था. बात अब उन दोनों की ज़िद और ईगो की हो गई थी और इस ज़िद और ईगो की लड़ाई ने उन बचपन के जिगरी दोस्तों को एक दुसरे के सामने खड़ा कर दिया था.

विक्रम: देख लालू हाथ छोड़ दे और चला जा यहाँ से मई बेवजह तुझसे झगड़ा नहीं करना चाहता.

लालू: झगड़ा तो तू कर चूका और तू भी सुन ले मई इन चुतियो की तरह तुझसे डरता नहीं हु न तेरे बाप से डरता हु तो मुझे ये अपना ऐटिटूड मत दिखाइयो.

विक्रम: दुबारा मेरे अपने बीच भूल कर बुइ मेरे बाप को मत लाना वर्ण मई भूल जाऊंगा की तू कभी मेरा दोस्त था.

लालू: अबे ूए भली चाहता है तो अब तू यहाँ से कल्टी मार कर चलता बन और है दोस्त है इसलिए दो बार तेरा हाथ उठाना बर्दाश्त कर लिया अबकी बार गलती से भी हाथ उठाया न तो यही गया के गोबर में ज़िंदा गाड़ दूंगा तेरेको समझा.

विक्रम: तू मुझे गड़ेगा चल आ तो आ हो hi जाए.

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विक्रम और लालू शबाना के हाथ छोड़ कर एक दुआरे के आमने सामने आकर खड़े हो गए.

विक्रम: अकेला आएगा या तेरे ये चूज़े भी आएँगे.

लालू: वो तो सेल हिंजड़े है पर तेरे लिए मई अकेला hi काफी हु.

दो जिगरी दोस्त एक दुसरे से भीड़ गए पर उसे सही मैने में भिड़ना नहीं कहा जा सकता था क्युकी विक्रम की ेनोरमॉउस मुस्कले पावर के सामने लालू कही टिकता नज़र नहीं आ रहा था.

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विक्रम ने लालू के चेहरे पर ताबड़तोड़ घूसों की बरसात करदी. देव कुंदन प्रताप दूर खड़े अपने लीडर को कुत्ते पीटते देख रही थी. पर उनमे इतनी हिम्मत नहीं थी की आगे बाद कर विक्रम को रोक सके. उस गौशाला में विक्रम लालू का वही हाल कर रहा था जो ब्रोक लेस्नर ववे रिंग में अपने ॉपपोनेंट का करता है. विक्रम ने लालू को अपनी भुजाओ में उठा लिया और उसे गया के गोबर में ले जाकर पटक दिया. लालू में अब इतनी ताकत भी नहीं बची थी की वो उठकर खड़ा भी हो सके. लालू कल पीटनर के बाद विक्रम उन तीनो की तरफ मुखातिब हुआ.

विक्रम: तुम तीनो के दिल में भी भिड़ने की कोई हसरत बची हो तो आओ तुम लोग भी अपनी अपनी हसरते पूरी करलो.

तीनो: नहीं नहीं विक्रम भाई भला हम आपसे कैसे लड़ सकते है भला चींटी हाथी का क्या मुकाबला.

विक्रम फिर शबाना से मुखातिब हुआ

विक्रम: ये लोग आपको यहाँ तक ले आए तो आप चीखी चिल्लाई कई नहीं.

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शबाना नज़रे झुका कर: ये लोग मुझे ब्लैकमेल कर रहे थे मेरे गंदे गंदे वीडियो के सहारे.

विक्रम: कैसे गंदे वीडियो.

शबाना: लालू ने दंगल वाले दिन जब सब चले गए थे तब धामु जी को मिसगिदे करके मुझे नशीला कोल्डड्रिंक पीला दिया और फिर धामु जी को मेरे साथ गलत हरकत करने के लिए मिसगिदे करा और अपने मोबाइल के जरिया उसका पूरा वीडियो बना लिया.

विक्रम: क्या कहा इस कमीने ने अपनी घटिया हरकतों में मेरे मासूम भाई का इस्तेमाल करा इसिलए वो दुल्हन दुल्हन कर रहा था.

शबाना: मुझे तो पता भी न चलता की उसके पीछे इसका हाथ है पर डांस पार्टी वाली रात जब मैंने सबके सामने इसे झापड़ मार दिया तो उसका बदला लेने के लिए इसने मेरा बंग करा और उसका भी वीडियो बना लिया. और मुझे धमकी दी की धामु के वीडियो का सहारा लेकर ये सबके सामने मुझे hi चरक्टेरलेस साबित कर देगा और वो वीडियो मेरे माँ बाप के मोहल्ले में चलवा देगा मेरी बहनो की ज़िन्दगी बर्बाद कर देगा. ऐसे में मुझे इसकी बात मैंने को मजबूर होना पड़ा. कल रात ये मुझे अपने फार्महाउस लगाए वह इसके इन तीनो दोस्तों ने मेरा बंग करा.

विक्रम की आँखों में खून उतर आया था वो गुस्से में देव कुंदन प्रताप को घूर रहा था.

विक्रम: आपके साथ इतना सब होता रहा और अपने किसी को खबर तक नहीं लगने दी. पर नेहा को कैसे इसका पता नहीं चला वो तो आपके साथ आपके कमरे में रहती थी जब ये सब हो रहा था तब वो कहा थी.

तब शबाना ने विक्रम को अपनी और धामु की वो साडी बाते बता दी. जिसे सुनकर वो शबाना पर भी बरस पड़ा.

विक्रम: आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या आप कैसे धामु भैया की मासूमियत के साथ उनकी फीलिंग्स के साथ इस तरह खेल सकती है अपने एक बात भी सोचा की जब आप यहाँ से चली जाएगी तब वो कैसे आपका जाना बर्दाश्त कर पाएंगे. और नेहा ने भी इसमें आपका साथ दिया डिसगस्टिंग आप अपने स्वार्थ के लिए इस हद तक गिर गई.

शबाना की आंखे आसुओ से भर गई.

शबाना रट हुए: मई जानती हु मैंने जो गुनाह किया उसकी कोई माफ़ी नहीं और शायद ये उसी गुनाह की सजा है जो मुझे मिल रही है.

विक्रम: जो अपने किया वो बेहद गलत है पर उसका ये मतालबा नहीं की इन लोगो को आपके साथ ज़बरदस्ती करने का हक़ मिल जाता है, ये भी गलत है.

विक्रम ने एक बार फिर अपनी नज़रे उन तीनो की तरफ टेडी करि.

विक्रम: इनके जितने भी वीडियो बनाए है सरे अगले 10 मिनट में मुझे मेरे सामने चाहिए और ध्यान रखना सारे वीडियो अगर एक भी वीडियो बच गया और बाद में गलती से भी कही से भी लीक हो गया तो लीक चाहे कही से भी हो तुम सब नहीं बचोगे. तो जल्दी से वो वीडियो मेरे हाथ में लेकर रखदो.

देव: लता हु लता हु मई सरे वीडियो लेकर अत हु.

देव वह से भाग कर अपने कमरे में गया और वह से 10 मिनट के अंदर सरे वीडियो वाली पेन्ड्रिवेस लेकर विक्रम को दे दी. विक्रम ने शबाना के सामने hi उन साडी पेन ड्राइव को अपने जूते से कुचल कर तोड़ दिया.

विक्रम: सिर्फ इतना काफी नहीं है मुझे तुम चारो के मोबाइल चाहिए.

देव: मोबाइल क्यों भाई.

विक्रम ने एक बार फिर अपनी नज़र टेडी की.

देव: देते है न भाई देते है.

देव ने अपना कुंदन परतप और गोबर में गिरे पड़े लालू का मोबाइल लेकर विक्रम को दे दिया. विक्रम ने उनके सामने उनके मोबाइल्स को अपने जूतों से कुचल कुचल कर टुकड़े टुकड़े कर दिया.

विक्रम: अब जाओ यहाँ से अभी इसी वक़्त इस हवेली को छोड़ कर दफा हो जाओ तुम्हारा सामान तुम्हारे घर पंहुचा दिया जाएगा और अपने इस लीडर को भी उठा कर ले जाओ जो मुझे ज़िंदा गोबर में गाड़ रहा था. जाओ यहाँ से.

देव कुंदन प्रताप चुपचाप गोबर में पड़े लालू को उठाकर वह से निकल लिए और गाडी में बैठकर वह से दूर निकल लिए.
 
इधर हवेली में उस तालाब के पास नेहा अब भी काफी देर से विक्रम का इंतज़ार कर रही थी. नेहा ने एक बार फिर विक्रम को फ़ोन मिलाया पर विक्रम इस वक़्त शबाना के साथ था उसने अपने फ़ोन नेहा की कॉल देखि. शबाना ने भी उसके फ़ोन पर नेहा का नाम देख लिया.

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शबाना: विक्रम तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो मुझे ख़ुशी है की शोभा की शादी तुमसे हुई है. मई मानती हु की मैंने मजबूरी में बहुत गलत काम करा है पर तुम्हे नहीं लगता की जो तुम और नेहा जो कर रहे हो वो शोभा के साथ बहुत गलत हो रहा है. वो पगली तुमसे बेइंतिहा प्यार करती है, बाकि सब सहेलिया पब जाती थी लड़को के साथ नाचती जाती थी पर वो साफ़ मन कर देती थी की वो जो भी प्यार भरे लम्हे जियेगी सिर्फ अपने विक्रम के साथ, झल्ली है वो तुम्हारे प्यार में, तुम्हारे अलावा उसने कभी किसी और के बारे में सोचा भी नहीं ऐसे में तुम उसकी मौजूदगी में उसीकी सहेली के साथ ये सब कर रहे हो. पहले तुमने जो कुछ करा वो तुम्हारा पास्ट था पर अब शादी के बाद तुम जो भी करोगे वो उसके साथ धोका होगा, उस बेचारी को अगर ये पता चल गया तो वो बेचारी अपनी जान देदेगी.

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नेहा की कॉल लगातार आए जा रही थी और विक्रम शबाना की एक एक बात सुन रहा था और वो बाते उसकी अंतरात्मा को कचोट रही थी. उसे पिछले कुछ दिनों में हुई शोभा की एक एक बात याद आ रही थी कैसे वो उसके साथ कुछ प्यार भरे पल बिताने के लिए रिक्वेस्ट करती थी और वो उससे पीछा छुड़ाने के तरीके खोजता था. डांस पार्टी वाले दिन तो उसने उसे नशे की गोली खिला दी थी, वो गोली भी तो उसे लालू ने hi दी थी. और आज सुबह जब वो उससे मिलने आई थी तब भी वो नेहा के साथ बाथरूम में गलत हरकते कर रहा था. उसे एहसास हो रहा था वो नेहा की हॉटनेस और बोल्डनेस पर इस कदर फ़िदा हो गया था की उसने शोभा के साथ कितना गलत करा इसका उसे एहसास hi नहीं हुआ. उसने शबाना के सामने hi नेहा की कॉल को रइवे करा.

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नेहा: कहा हो तुम मई कबसे यहाँ इंतज़ार कर रही हु कितनी देर में आओगे.

विक्रम शबाना की आँखों में देखते हुए: कभी नहीं.

नेहा: मतलब

विक्रम: मतलब मई नहीं आ रहा हु मई अपनी बीवी को जितना धोका दे सकता था दे दिया अब बस अब और नहीं. मेहमान बनकर आई हो मेहमान बनकर रहो और मेहमान बनकर hi चली जाओ.

नेहा: ये अचानक से........

विक्रम ने नेहा की पूरी बात सुने बिना hi फ़ोन काट दिया.

नेहा ने उसे दुबारा कॉल करा पर विक्रम ने दुबारा नेहा की कॉल नहीं उठाई.

शबाना: मुझे ख़ुशी है तुमने सही फैसला करा.

विक्रम: गलत रस्ते पर चल पड़ा था पर आज अपने दोस्तों को या विकृत रूप देख कर मुझे एहसास हो रहा है की कैसे मई उनके जैसा बनता जा रहा था. मई आपसे भी माफ़ी मांगता हु की यहाँ बाउजी की अनुपस्थिति में जब साडी जिम्मेदारी मेरी थी आपके साथ यहाँ गए सब हुआ.

शबाना: मैंने भी तुम्हारे भाई धामु के साथ जो करा उसके लिए मई दिल से शर्मिंदा हु.

विक्रम: आज अगर मई यहाँ आपको बचने पहुंच पाया तो उसकी वजह वही है, वो hi यहाँ तक लेकर आए.

शबाना: क्या यहाँ से जाने से पहले मई एक बार उनसे मिल सकती हु.

विक्रम: ठीक है कल मिल लीजियेगा पर अब उनके मन में कोई झूटी आस मत जगाइएगा.

शबाना: जो गलती करि है उसे सही करने की कोशिश करनी बस एक बार.

विक्रम: अब हमे चलना चाहिए.

विक्रम और शबाना उस गौशाला से निकल गए पर नेहा के लिए यु विक्रम का उसे रिजेक्ट करना बेहद इन्सुल्टिंग था जब तक उसका मन था उसने उसके साथ बड़सम का गेम खेला उसे तरह तरह के आड़े टेड़े टास्क दिए और उसने उन्हें पूरा करा उसने जहा भी नेहा को बुलाया नेहा गई जैसे बुलाया वैसे गई. और जब आज पहली बार नेहा ने उसे बुलाया तो उसने साफ़ मन कर दिया.

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पर इस अपमान का घूँट पीकर नेहा वापस हवेली की तरफ चल दी पर आम के बाघ में उसे किसी मर्द की परछाई दिखी उसे लगा की ये भीमा तो नहीं. पर उसकी कद काठी भीमा जितनी हटती कटती नहीं थी. उस शिक्षा ने भी नेहा को देख लिया और जब वो नेहा के करीब आया तो नेहा कल्लू को इस वक़्त यहाँ देख कर चौंक गई.

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नेहा: तुम यहाँ इस वक़्त, इस वक़्त तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

कल्लू: अरे मेमसाब ये तो मुझे आपसे पूछना चाहिए था की आप इस वक़्त यहाँ क्या कर रही है.

नेहा का मूड वैसे hi ऑफ था हुए ऐसे में उसका गुस्सा कल्लू पर उतर गया.

नेहा: मई यहाँ कुछ भी करू तुमसे मतलब.

कल्लू: गुस्सा क्यों हो रही मेमसाब मई तो बस पूछ रहा था.

नेहा: पूछ लिया अब मई जाऊ.

कल्लू: कुछ देर रुक जाओ न मेमसाब उस दिन के बाद तो अपने दुबारा हमे अपनी सेवा करने का मौका hi नहीं दिया.

नेहा समझ रही थी की सेवा से उसका क्या मतलब है वो उस दिन वाली छूट चटाई वाली सेवा की बात कर रहा था. विक्रम से मिलने की वजह नेहा भी अंदर से एक्ससिटेड होकर आई थी पर विक्रम की ना ने फिलहाल उसका मूड ऑफ कर दिया था.

नेहा: नहीं इस वक़्त मेरा कोई सेवा करवाने का मूड नहीं है.

कल्लू: मेमसाब सिर्फ उस दिन जितना hi करवा लो हम कई दिनों से भरे बैठे है. परसो तो आप लोग चली जाओगी आज थोड़ा मज़ा कर लेना दो.

नेहा: मज़ा कर लेने दो तूने समझ क्या रखा है मुझे सेल मुझे कोई बाज़ारू औरत समझता है क्या जो मई सबको मज़ा देती फिरू. साला जिसका जब मन करे मुझे अपनी गुलाम बना ले और खुद को मेरा मालिक समझने लगे और जब मन भर जाए तो दूध की मक्खी की तरह निकल कर फेक दे. तू समझता क्या है मुझे.

कल्लू: ये आप क्या कह रही है मेमसाब भला हमारी क्या औकात जो हम आपको गुलाम समझे हमारी औकात तो आपको जूती के बराबर भी नहीं. पर उस दिन जब आप हम नौकरो के कमरे में आई थी और हमसे इतने प्यार से मिली थी तो हमे लगा था आप ूच नीच नहीं मानती. और उस दिन इस जगह आपने मुझे वो सब करने दिया तो मुझे लगा आपको इसमें मज़ा अत है तभी बोल दिया.

नेहा: पर अभी मुझे कोई मज़ा नहीं करना.

इतना बोल कर नेहा आगे बाद गई.

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कल्लू पीछे से: मेमसाब उस दिन शादी वाली रात उस लाल ड्रेस में आप बहुत खूबसूरत लग रही थी ध्यान है जब आप उस ड्रेस में हमारे कमरे में आई थी सरे नौकर आपको देखते रह गए थे और सबने आपसे एक रिक्वेस्ट की थी की जाने से पहले एक बार आप उस ड्रेस में हमारे कमरे में आए और कुछ वक़्त हमारे साथ गुज़ारे और अपने आने का वादा भी करा था. सोचा आपको याद दिला दू.

नेहा: मुझे सब याद है पर इस वक़्त मेरा किसी के साथ वक़्त गुजरने का कोई मूड नहीं है.

इतना कह कर नेहा उस बाग़ से बहार निकल गई, जब भीमा ने नेहा को बहार निकलते देखा तो उसकी तरफ बड़ा पर पीछे ऐ आते कल्लू को देलहकार ठिठक गया. कल्लू भी भीमा को देखकर थोड़ा ठिठक गया. ऐसे वो पीछे से नेहा को आवाज़ नहीं दे सकता था. उसके देखते देखते नेहा हवेली की तरफ चली गई. तब तक शबाना अपने कमरे में पहुंच चुकी थी वो खुश थी की फाइनली उसे इस ज़िल्लत से मुक्ति मिल गई और विक्रम शोभा के कमरे के सामने खड़ा था.

विक्रम ने शोभा के दरवाज़े को हल्का पुश करा. दरवाज़ा अंदर से खुला था तो विक्रम ने बड़ी धीमी आवाज़ के साथ दरवाज़ा खोला और अंदर आ गया अंदर शोभा गहरी नींद में थी. विक्रम शोभा के बिस्तर के करीब गया और बिस्तर के करीब hi बैठकर उसे निहारने लगा.

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जिस चेहरे में उसके लिए हमेशा सिर्फ प्यार hi प्यार रहा उसकी खानदान से जुड़े उस श्राप के बाद भी ये प्यार कम न हुआ और मैंने इसके साथ धोका किया बेवफाई की.

रुख ज़िन्दगी ने मोड़ लिया कैसा,

हमने सोचा नहीं था कभी ऐसा.

आता नहीं यकी क्या से क्या हो गया,

किस तरह मई तुमसे बेवफा हो गया.

इन्साफ कार्डो मुझे, मुझे माफ़ कार्डो,

इतना hi कार्डो करम.

मासूम सा चेहरा कपड़ो में एकदम सादगी कोई मेकअप नहीं पर फिर भी इतनी सुन्दर कैसे में इस सुंदरता को अब तक नहीं देख पाया और दुनिया की उस बनावटी सुंदरता के पीछे आवारा बना भागता दौड़ता रहा.

आवारगी में बन गया दीवाना,

मैंने क्यों सादगी को नहीं जाना.

चाहत यही है की, इस कदर प्यार दू,

कदमो में तेरे मई, दो जहा वार दू.

चैन मेरा लेलो, ख़ुशी मेरी लेलो,

देदो मुझे देदो सरे गम.

मई बेशक दुनिया का सबसे अच्छा पति नहीं हु पर अब दुनिया के सबसे अच्छे पतियों से भी अच्छा पति बनकर दिखाऊंगा ये वादा है मेरा. अपनी गलतियों के बारे में सोचते हुए उसकी आँखे आंसुओ से भर आई.

मेरे अश्क़ कह रहे मेरी कहानी,

इन्हे समझो न तुम सिर्फ पानी.

रो रो के आसुओ के दाग धूल जाएंगे,

इनमे वफ़ा के रंग आज घुल जाएंगे.

पास तुम रजोगी, भूल अब न होगी.

करूँगा न तुमपे सितम.

रब की कसम यारा रब की कसम,

दिल दे दिया है, जान तुम्हे देंगे,

देगा नहीं करेंगे सनम.

जाते जाते विक्रम ने शोभा के माथे को किश करा और मन hi मन शोभा को लिफेलॉन्ग वफादारी का वचन देकर कमरे से बहार आ गया.

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बहार नेहा हवेली के दरवाज़े पर hi पहुंची थी की उसकी नज़र शोभा के कमरे से निकलते विक्रम पर पड़ी. नेहा ने विक्रम को कॉल मिलाया पर विक्रम ने अपने मोबाइल में नेहा की कॉल देखकर काट दिया और अपने कमरे की तरफ चला गया.

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नेहा के लिए हद से ज्यादा इन्सुल्टिंग था की किसी ने उसका इस तरह उसे करके फ़ेंक दिया. गुस्से में पेअर पटकते हुए वो अपने कमरे की तरफ चल दी एक तरफ उसके मन में विक्रम का रौदे ऐटिटूड गुस्सा पैदा कर रहा था पर दूसरी तरफ उसे कल्लू का उसके सामने गिड़गिड़ाना याद आ रहा था जो उसे कही न कही सुकून दे रहा था. धीमे धीमे अपने कमरे की तरफ बढ़ते हुए विक्रम उसके दिमाग से फ्लश होने लगा और कल्लू के साथ हुई अभी की बाते बार बार उसके ज़हन में कौंध रही थी. कैसे वो उसकी उस शादी वाली ड्रेस की तारीफ कर रहा था एक किश के लिए उसके आगे गिड़गिड़ा रहा था.

उसे उस दिन शादी वाली रात उन नौकरो से किया वादा भी याद आ रहा था की वो यहाँ से जाने से पहले एक बार उस शादी वाली ड्रेस में उनके साथ टाइम स्पेंड करेगी. वो सोचने लगी की विक्रम उसके लिए सिर्फ एक मर्द जिसके साथ उसने मज़ा करा अब अगर वो उसमे इंटरेस्टेड नहीं तो वो उसके लिए अपना मूड ख़राब करे कौन से उसे उससे कोई प्यार है तो वो क्यों अपनी फैंटसीज में ब्रेक लगाए, आज वो मज़ा करने निकली थी तो उसके लिए अपनी ये रात ख़राब करे जिसे उसमे इंटरेस्ट hi नहीं या इस रात में अपनी एक नै फंतासी को एन्जॉय करे. यही सब सोचते हुए उसके कदम अपने कमरे में जाने की बजाए नीतू आरती के कमरे की तरफ बाद गए. हस कमरे में पहुंच कर नेहा ने एक बार फिर वो रेड ओने लेग स्ट्रिप ड्रेस निकल ली जिस ड्रेस ने उसे पिछले कुछ दिनों काफी इरोटिक और सेडक्टिव पालो से रूबरू कराया था. नेहा अपनी अभी की ड्रेस उतर कर एक बार फिर रेड स्ट्रिप ड्रेस पहनकर तैयार होने लगी. और ये साफ़ था की वो ये ड्रेस किसलिए और किनके लिए पेहेन रही थी बस देखना ये था की उसका ये फैसला क्या रूप लेने वाला था और इस रात को कितना रंगीन बनाने वाला था.

हवेली में नेहा तैयार हो रही थी ार उस हवेली से 4-5 किलोमीटर दूर बीच सड़क पर वो ब्लैक स्कार्पियो कड़ी थी. तीन लोग स्कार्पियो के पास खड़े थे और एक शिक्षा वही नीचे ज़मीन पर बैठा था. वो तीन कुंदन देव और प्रताप थे और चौथा लालू था. देव कुंदन प्रताप में हिम्मत नहीं हो रही थी लालू के पास जाने की और लालू अब भी गोबर लिसा सना ज़मीन पर बैठा गुस्से और बेज़्ज़ती की आग में जल रहा था. काफी देर खड़े रहने के बाद हिम्मत करके देव लालू के पास गया.

देव: लालू भाई माफ़ करदे वह विक्रम के सामने हमारी बोलती बंद हो गई थी.

लालू हस्ते हुए: तुम लोगो क्या खुद को इतना इम्पोर्टेन्ट समझते हो जो मई अपना गुस्सा तुम जैसे उसेलेस लोगो पर बर्बाद करूँगा. हो क्या तुम लोग. चल पानी दाल मुँह साफ़ करा मेरा.

कुंदन लालू पर पानी डालने लगा.

कुंदन: मतलब तू सब भूल गया.

लालू: ये किसने कहा लालू तो शनि को वो सादे सटी है जो एक बार इंसान की कुंडली में बैठ जाए तो उसे बर्बाद करे बिना छोड़ती. और इस वक़्त लालू की ये सादे सटी विक्रम सिंह की कुंडली में बैठ गई है.

देव: भाई तू बल्ली भैया को क्यों नहीं फ़ोन करता वो विक्रम के दिमाग ठिकाने लगा देंगे.

लालू चिल्लाते हुए: ूए लालू इतना कमज़ोर नहीं की अपने झगडे खुद हैंडल न कर सके. न मई बल्ली भैया को फ़ोन करूँगा न hi तुममे से कोई उन्हें कुछ बताएगा. मई नहीं चाहता वो सोचे की उन्हे छोटा भाई अपने ये छोटे मोठे झगडे खुद सोल्वे नहीं कर सकता. उस विक्रम और शबाना के साथ जो करना है वो सिर्फ मई करूँगा सिर्फ मई. लालू अपना पलटवार करेगा और ज़रूर करेगा पर सही समय और सही वक़्त पर पर इतना तै है की वो पलटवार खौफनाक होगा.

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लालू विक्रम और शबाना से बदला लेने को बेताब था अब देखना ये था वो ये बदला कब और कैसे लेने वाला था और वो कितना खतरनाक होने वाला था. वही नेहा आज की रात में एक नै फंतासी को एन्जॉय करने के लिए तैयार हो रही थी बस देखना ये था वो फंतासी क्या थी और कितनी हॉट और इरोटिक थी. पर जो भी हो नेहा की पास्ट परफॉरमेंस को देखते हुए इतना तो तै था की आज की रात में भी वो रीडर्स को कुछ नया और बेहद इरोटिक एक्सपीरियंस देने वाली थी.
 
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