ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 13 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अद्भुत ...प्रशंसनीय ....अति उत्तम रिव्यु ृतिमा जी :अप्प्लायसे: :applause::yes2:

थैंक यू सो मच आपके ....सपोर्ट इतने फैंटास्टिक कमेंट क लिए

:थैंक्स: :thanks::thanks:

आपका हर रिव्यु एक से बढ़कर एक होता है ....

ऐसे hi साथ बनाये रखे..?????



लेटेस्ट अपडेट 99 पोस्टेड...
 
सुपर्ब ..शानदार ..अद्भुत ..रिव्यु भाई....

:अप्प्लायसे: :applause::applause:

थैंक यू सो मच अकील भाई आपके प्यार ....सपोर्ट और सुपर फैंटास्टिक कमेंट क लिए

:थैंक्स: :thanks::thanks:

आपका अनुमान हमेशा परफेक्ट होता है भाई ....:applause::applause:

ऐसे hi साथ बनाये रखे..?

लेटेस्ट अपडेट 99 पोस्टेड...
 
अपडेट - 100



अब तक आपने देखा ...अभी ने कस को उल्ज़हाने क लिए रिंकू को अपना रूप देकर ....रक्षक सेना में भेज दिया .......

अभी तपलोक जाकर अपनी अगली शक्ति विभक्त को ले आया ......



अब आगे.....

अभी और विबहकता का मिलान अब शीग्र जरुरी था ........इसीलिए शिवली रिम्पी को लेकर वह से चली गयी.....

गोलार्क से मिलकर अभी को ैव्हा लगा ....उससे गोलार्क में अपने मित्र गक की hi छवि दिख रही thi.......Lekin गोलार्क क मैं में तोह कुछ और hi चल रहा था .......

उसस्के अभी को समय निकलकर अपने घर आने क लिए कहा और चला गया ..........

तहा गुफा में अब अभी और विभक्त hi रह गए थे .....

दोनों को विवाह क लिए कोई खास रीती रिवाजो की जरुरत नहीं थी ........

दोनों ने पहले परमात्मा को शिक्षा मानकर एक दूसरे को अपना जीवन साथी माना फिर अभी ने अपने हाथ में चीरा लगा कर .....विभक्त की मान भर दी .......

विभक्त एक सिद्ध योगिनी थी ......उअसके अंदर काम वासना का लेश मात्रा भी नहीं था ...........

अभी को अपना पति स्वीकार करने क बाद वह अभी क पेअर चुने क लिए आगे बड़ी को अभी ने उससे कंधे से पकड़कर उठाया .....

अभी - यह क्या कर रही हो विभु ....तुम्हारा स्थान वह नहीं मेरे हृदय में है ..........

और उससे गले से लगा लिया ..........

दोनों बस एक दूसरे क आलिंगन में समय हुए थे ........युगो बाद आज दोनों फिर मिल रहे थे .....एक दूसरे क गले लगकर उन्हें दिव्या अनभूति हो रही थी....

दोनों क शरीर से अनेक प्रकार की ऊर्जा निकलकर एक प्रकाश पुंज में बदल रही थी......

अब दोनों एक की आँखों में देखने लगे ....उनकी आंखें इस समय चमक रही थी ..........

दोनों क हाथ एक दूसरे की पीठ पर कैसे हुए थे .......अब दोनों क होंठ एक दूसरे क करीब आये ...... दोनों एक दूसरे की साँसों से आती हुई गर्मी को महसूस कर रहे थे ........और कब उनके होंठ आपस में मिल गए उन्हें पता hi नहीं चला .......

युगो बाद अभी क सानिद्य और प्रेम को महसूस करके विभक्त के सारे शरीर में रोमांच सा दुड्ने लगा था......

यहाँ आप सोच रहे होंगे को ..अभी क शक्तियों का जन्म तोह अभी क साथ hi हुआ था ....तोह यह युगो की बात ...कहा .से आयी...

विभक्त और शिवली एक योगिनी थी दोनों को अपने इस जनम क पहले की साड़ी smritiya...yaad थी .......

दोनों बस एक दूसरे को चुम रहे थे .....अभी को विभक्त क साथ एक अलग hi दिव्या अहसास हो रहा था .....दोनों क मैं में इस समय वासना का कोई लेश मात्रा भी नहीं था .....

बहुत hi धीरे -2 दोनों एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे. ....अथाह प्रेम और मिलान की aas.....dono को और अधीर कर रही थी.....

अभी विभक्त पथ पर हाथ फेर रहा था..... उखड़ती सांसो ने उनका चुम्बन तोड़ दिया....

लेकिन फिर से दोनों के होंठ मिल जाते है...... पर इस बार चुम्बन थोड़ा सा और गहरा था.....

अभी क हाथ कपड़ो क ऊपर से विभक्त के बदन पर चल रहे थे..... दोनों क इस मिलान से वह एक ऊर्जा उत्पन्न हो रही थी.....

चुम्बन फिर से टुटा दोनों एक दूसरे को देख रहे थे..... एक ख़ुशी सी जलक रही थी दोनों क चेहरे पर......

अभी विभक्त को देखते हुए उसे निचे लिटा देता है. और ..... उसके पास लेट जाता है. और अपने होंटो को फिर से उसके होंटो पे रख कर चूमने लगता hai.....or अपनी जीब को भी उसके मुँह में दाल देता है. ....विभक्त क लिए यह ाशस बिलकुल नया था ....

अब तक दिव्या शरीर क कारण वह साड़ी सांसारिक भावो से परे थी .....लेकिन पांच तत्त्व क शरीर को पाते hi जैसे उसके अंदर साड़ी भावनाये प्रगट होने लगी ......और इस कारण अभी क इस तरह करने से अब वह भी मदहोश होने लगी....

अब विभक्त भी अभी की जीब को चूसने लगी

अभी का हाथ इस समय उसस्के के पेट पर चल रहा था ...,और. वो उसको सहला रहा था......

अभी अब ऊँगली से उसकी गहरी नाभि कुरेदने लगा था. ....तो विभक्त क अंदर एक तूफ़ान सा उठने लगा ....वह और अधिक तन्मयता से उसके होंटो को चूसने लगी...

. और अपनी जीब अभी के मुँह डालकर उसकी जीभ को सहलाने लगी.... .

अब अभी का जो हाथ पेट को सहला रहा था. ..वह नीचे की और आने लगा जिससे विभक्त क सरीर की उत्तेजना और बढ़ने लगी...... उसस्के अंदर अब प्रेम क साथ साथ वासना का संचार होने लगा और उसकी योनि से कुछ बुँदे कॉमर्स की निकल गयी...

वह अब आंखें बंद करके इस नए अहसास का अनुभव कर रही थी

अभी क हाथ अब उसके स्तनों तक पहुँच चुके थे.... . विभक्त को तोह कुछ होश hi नहीं tha....k क्या हो रहा है .......वह अब प्रेम और वासना क वशीभूत होकर बस मिलान क लिए तड़पने लगी...

अभी का हाथ अपने स्तनों पर महसूस करते hi ....उसका जिस्म काँप gaya......Abhi उससे गोल सैंट्रो जैसे स्तनों को दबाने लगा

जिससे विभक्त क मुँह से आवाजे आने लगी .......वह अपना बचा कुछ भी होश खोते जा रही थी

अभी ने अब उसस्के स्तनों को वस्त्रो क आवरण से मुक्त कर देता hai.....kesar मिले हुए दूध की रंगत liye....uske स्तन .......और छोटे ...गुलाबी ....nipple.......Abhi को जैसे अपना मर्दन करने क लिए निमंत्रण दे रहे थे......

अभी बस एकटक ....बैठ कर इस सुंदरता हो निहारने laga......Vibhakta को इस बात का आभास hi नहीं था क उसस्के स्तन अभी क सामने निर्वस्त्र हो चुके है

अभी क हाथ जब उसके लगे स्तनों पर पहनकर दबाने लगे .....तब विभक्त को अपनी नग्नता का आभास hua......aur फिर उस्सने .....sharmakar......Abhi क हाथ हटा दिए ...और अपने स्तनों को छुपाने क लिए अभी क सीने से लग गयी.......

उसके स्तन अभी क कठोर सीने से रगड़ खाने लगे .....जिससे दोनों मिलान क लिए अब और अधीर होने लगे....

अभी - क्या बात है Vibhu.......aise sharmaogi...toh कैसे हमारा मिलान होगा.....

विभक्त -- ssss..ahhhh...haa...kkkya karu......ufff...jaan ....मुज़हे लज्जा भी आरही hai.....aur एक अलग सा रोमांच भी अपने भीतर महसूस कर ताहि हु ....

क्या करू कुछ समाज नहीं आरहा ....

अभी - विभु ..इतना सोचना किसलिए बस ...हमे अपने मिलान की और बढ़ना hai.....mein हु न .....

..अब अभी को साबरा नहीं हो रहा था. ..

..अब वह निचे की और सरकते हुए..... विभक्त क बदन क हर हिस्से को चूमने लगा .....

उसके गोर स्तनों को देख कर तो वो भी बहुत उत्तेजित हो गया था.... गोर गोर और गोल स्तनों पर चमकते हुए गुलाबी निप्पल.......

अभी से अब और रुका नहीं जा रहा tha.....toh वह पूरी तरह निर्वस्त्र हो gaya.......aur उससे और उसके लम्बे राणे हुए लिंग को अपने सामने ऐसे देखकर विभक्त की आंखें बंद हो गयी..

अभी अब बारी बारी स्तनों को चूसने भी लगा और दबाने भी लगा .....इससे विभक्त की योनि और ज्यादा कॉमर्स बहाने lagi.....aur वह जोर जोर से सिसकारियां भरने लगी...

अब अभी निचे की और आने लगा और पेट पर चूमने laga...aur उसकी नाभि में जीभ चलने लगा

विभक्त अभी क इस वार से और ज्यादा मचलने लगी..

अब अभी का हाथ उस्सकी योनि पैर चला gaya....Vibhakta की गर्म ...makhmali....aur कामरास से भरी हुई योनि का स्पर्श होते hi.....

दोनों क शरीर को जहटके लग रहे थे.....

अभी उसकी योनि को सहलाने laga.....dono की सिसकारियों से वह कमरा गूंज रहा था..

अभी उसकी योनि को मसलता hua....ab....usski जांघो को चूमने laga.....ek..haath..se...yoni...ko...masalta....aur...ek..haath..se....usski...jangho...ko...sahlane laga........Vibhakta की ...योनि kaamras...se..bhar..gayi...thi..

विभक्त - sshhh...ahhhh....naath .....यह क्या हो रहा है मुज़हे ...उफ़

.kuch...karo..na..ab..aur मुजह्से सहन नहीं हो रहा ..

अब विभक्त का हाथ भी अभी क बदन पर चलने laga.....Abhi क बदन ..पर हाथ फेरते हुए ..उसका हाथ अभी क लिंग तक पहुंचा ....

विभक्त क नरम हातो का अपने लिंग पर स्पर्श paakar....Abhi...ki..saanse aur...siskariya और तेज़ हो गयी.....

अब अभी से और सबर नहीं हुआ और उसने .....विभक्त को निर्वस्त्र कर दिया ....अभी ...उसस्के ...अद्भुत सौंदर्य को और gulabi...smooth....fuli...hui..kaamras...chodti हुई योनि को देख कर तोह जैसे वह पागल हो गया....

और पागलो की तरह योनि को चूमने laga....aur जीभ से उस्सकी योनि को कुरेदते hue...kaamras पिने लगा....

विभक्त उसस्के सर को दबती hui.....ahhhhh जान यह क्या कर diyaa....uff ..yeh..kaisi.....agan ..है..

uffff....jaan अब aur....der....mat...karo..ahhh

दोनों अब अपनी वासना क चरम पर पहुंच चुके the......isiliye अब

अभी पीछे हैट जाता है. ....और उसको बिस्टेर पैर लिटा देता है.

विभक्त अब मिलान क लिए आतुर थी... ...अभी अब विभक्त के ऊपर था और उसकी योनि पर लिंग को लगा कर दिया था.....

लिंग योनि के उप्पेर रखते hi दोनों मदहोश से हो जाते है ...... और अब एक पल भी नहीं दोनों से रुका नहीं जा रहा था. ......

अभी ने तुर्रंत hi विभक्त की कमर को कास के पकड़ कर उसको अपने निचे दबा लिया... और धीरे 2 अंदर डालने लगा......

विभक्त को बहुत अधिक पीड़ा का अभाव होने लगा....

जिससे देखकर अभी रुक जाता hai.....Vibhakta ने जब अभी की तरफ देखा ...तोह वह समाज गयी उससे होने वाली पीड़ा क आभास से अभी रुक गया है....

विभक्त - आप ऐसे रुक क्यों गए ....हमारा यह मिलान आवश्यक hai......Iss मिलान में मिलने वाला दर्द भी ....प्रेम का hi एक रूप होता है ......

अभी ने विभक्त की स्वीकृति पाकर एक जोर का जहतका लगाया.... ..

उसका लिंग उसकी योनि और उसके कुंवारे पैन को चीरता हुआ अड़े से जायदा घुस गया. ....

विभक्त ने कसकर अपना मुँह बंद कर diya....aur दर्द सह liya.....usski आँखों क किनारे से आंसू निकल pade....aur चेहरे पर मुस्कराहट.....

अभी ने तुर्रंत hi दूसरा दक्का लगा दिया और इस बार पूरा लिंग अंदर था........ विभक्त ने कसकर अपना मुँह बंद कर रखा था इसीलिए उस्सकी चीख उसस्के अंदर hi डाब दर रह गयी .....लेकिन आँखों से बहते आंसू उसका दर्द बया कर रहे थे ......

अभी विभाका क दर्द को महसूस करके निचे ज़्हुका और उसके होंठो को अपने होंठो में भरकर चूसने लगा और साथ साथ में उसके स्तनों को भी धीरे धीरे दबाने लगा ......

जिससे विबहकता का दर्द आनंद में बदलने लगा..

अब अभी लिंग को धीरे 2 अंदर बहार करने laga....jisse दोनों की ...आनंद से भरी सिसकारियां वह गूंजने लगी ..

अभी का लिंग बिना रुके आगे पीछे हो रहा था. ....और अब अभी उसके स्तनों को चूसने में लगा था.... और लिंग अपने गति से योनि क अंदर बहार हो रहा था.....

विभक्त की योनि बहुत अधिक मात्रा में कॉमर्स छोड़ रही thi....woh इस मिलान क आनंद क हर पल को अपने भीतर संजो रही थी.....

दोनों की कमर एक साथ ताल से ताल मिला कर थिरक रही थी. ..

दोनों दो से एक हो रहे थे ...और उनके शरीर से निकलने वाले अनेक रंग और अनेक प्रकार की ऊर्जा.... का प्रकाश और तेज़ हो रहा था....

दोनों उत्तेजना की चरमसुख की और बाद रही थे.... दोनों कामसुख ..और मिलान क आनंद ...में दुब चुके थे....

दोनों क मुँह से अजीब अजीब आवाजे निकल रही थी .....

और एक दूसरे कुछ भी बोले जा रहे थे. पैर वो रुके नहीं थे अभी तक, और कुछ hi देर में

दोनों का कॉमर्स छूटने लगता hai........dono उस पल क चरम सुख को आंखें बंद करके महसूस करने लगे..

मिलान होते hi अभी क श्री में वह प्रकाश समां गया और उसका कुछ अंश विभक्त क शहर में भी समां गया.....

अभी क शरीर में प्रकाश समाते hi .....उसके शरीर से उसके अनेक रूप निकल....

सब में अलग अलग शक्तिया थी......

अब अभी से अलग वह 6 रूप थे....

1 नागराज अभी

2 प्रेतराज अभी

3 महा भेड़िया

4 ताल्लुक की ऊर्जा से पूर्ण महाराज अभी

5 यक्ष अभी

6 गन्धर्व अभी

अभी क लिए इतना hi ....


अगला अपडेट रात को .....
 
Superb...Shandar &.fantastic..Reiveiw भाई

:अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:

ठंकु सू मच भाई .....आपके इस जबरदस्त कमेंट क लिए.......

:thanks::thanks::thanks:

बही अब अगला नंबर रिम्पी का hi है....

और गोलार्क भी तोह कुछ न कुछ तोह करेगा hi ...देखते है आगे क्या होता है...

लेटेस्ट अपडेट 100 पोस्टेड....
 
सुपर्ब... फैबुलस ...अवेसमे fantastic..Reiveiw ृतिमा जी

:अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे: :अप्प्लायसे:

ठंकु सू मच ....आपके साथ और इस एक्सीलेंट कमेंट क लिए.......

:thanks::thanks::thanks:

शिवली उस समय अभी और रिम्पी की चिंता में थी लिसिलए वह गोलार्क पर ध्यान नहीं दे पायी.....

और गोलार्क भी कोई सदाहरण यक्ष नहीं है ....इस्स्में जन्म से तोह यक्षों की शक्ति थी hi ...लेकिन गक क मरने क बाद उसकी भी साड़ी ऊर्जा इस्स्में समां गयी थी......

लेटेस्ट अपडेट 100 पोस्टेड....
 
ठंकु सू मच भाई .....आपके इस कमेंट क लिए.......

:thanks::thanks::thanks:

बही ऋतू क बारे में इतना hi बता सकता हु ...अपडेट 8 में ऋतू क अंदर अभी की एक शक्ति समां गयी थी ....जिससे कोई साधारण मानव शरीर नहीं धारण कर सकता था....

और भाई इस स्टोरी में इन्सेस्ट नहीं है....

बाकी राज तोह समय क साथ hi खुलेंगे...

लेटेस्ट अपडेट 100 पोस्टेड....
 
अपडेट - 101

अब तक आपने देखा क अभी क विभक्त क साथ मिलान में उससे विभक्त सिद्धि प्राप्त hui.....jisse अब वह अपने एक एक पावर क रूप अलग कर सकता है......

अब आगी......

अभी विभक्त से मिलान क बाद उससे लेकर नाग लोक में सुलेखा और शिवली क पास gaya........waha इस समय रिम्पी भी थी ........रिम्पी अब पूरी तरह स्वस्थ थी.....

अभी ने अब रिंकू को वापस बुला लिया और उससे अपना रूप और शक्ति त्रिशूल वापस ले लिया ........

अभी ने अब वही से अपने अगले प्लान पर काम करना शुरू कर दिया ........

अभी ने अपनी सभी पत्नियों को वह बुलाया ........और अपनी योजना क बारे में बताया ...........

अपने सारे रूप प्रगट करने से पहले अभी ने ऐसी शील्ड का निर्माण किया क कस अपने क्रिस्टल बॉल में वह क्या हो रहा है यह देख न पाए...

अब अभी ने अपने रूप अपनी पत्नियों क सामने प्रगट kiya......Apne पति क इतने रूप देखकर ...शिवली और विभक्त को छोड़कर सभी आश्चर्य चकित हो गए .......

तब अभी ने बताया क यह में hi हु मुज़ह में और इनमें कोई अंतर नहीं hai......yeh सब मेरी आत्मा क hi अंश है ....और मुजह्से hi जुड़े है......

लेकिन पत्नियों ने कहा की वह तोह अभी क संपूर्ण रूप से hi प्रेम करती है ....इस तरह कैसे उसके रूप क साथ रहेगी .....तोह अभी ने उन्हें समज़हाए क यह रूप सिर्फ जब जरुरत होगी तभी यवसाहन दिया ....किसी भी मिलान क समय में उसस्के सारे रूप एक हो जाएंगे.....

और इस समय कस को उलज्ज़ः ने क लिए ...यह जरुरी भी है.......

तब सभी मान गयी....

और अपने रूप को उनके साथ उनके लोक भेज दिया .....प्रेत राज अभी (प्) को भफर क साथ वाइटल lok.......Maha भेड़िया अभी (बा) को दक्ष क साथ अटल लोक .......राजा अभी (रा) , और गन्धर्व अभी (गए) को Shalu...aur ..शामली क साथ Tallok.......Naag राज अभी ( न) को रसातल ....सुलेखा क पास .......

अब अभी क भीतर दो रूप और थे एक ा1 का और एक यक्ष का ......अभी अब शिवली और रिम्पी को लेकर वह से पृत्वी लोक आगया .....

अभी क रूप अपनी अपनी जगह सक्रिय हो गए और वह तैनात रक्षक सेना क साथ मिलकर असुरो की हर गतिविधियों को नाकाम करने लगे ......

यहाँ राजस्थान में उदय अपने कुछ साथियो क साथ वह चल रहे षड़यंत्र क कुछ क्लू का पीछा करते हुए चित्तौरगढ़ पहुंचा .....वह एक धर्मशाला में अपने साथियो को chodkar........nikal गया चित्तौरगढ़ कलिए की और....

.......यह किला चारो तरफ से ऊँची दीवारों से गहरा है....

यहाँ का विजय स्तम्ब और कीर्ति स्तम्भ प्राचीन शिल्प कला का अद्भुत नमूना है..........

यहाँ क मंदिर ...और कुछ खंडहर इस किले की अपने समय की भव्यता दर्शाते है.......

उदय को ऐसा आभास होने लगा क यही उसकी जन्मस्थली है .......

उदय घूमते घूमते किले पर स्थित नीकंठ महादेव मंदिर में दर्शन कर के किले की दीवार क साथ साथ चलकर उसकी भव्यता देख रहा था ,....चलते चलते वह किले क पीछे वाले गेट तक पहुंचा जहा से निचे की तरफ शहर से बाहरी इलाके में रास्ता जाता है .....जहा वह क ठाकुरो और राजवंश क खेत और फार्महाउस है ....इसको वह की भाषा में डोली कहते है....

उडाय वह गेट पर खड़े होकर निचे की हरियाली देख रहा था ...क उससे निचे जानने वाले रास्ते क साइड वाली ज़हादियो क पीछे कुछ हल चल सी महसूस हुई .....उससे वह कुछ नेगेटिव एनर्जी भी महसूस हुई .......

वह देखने क लिए ज़हादियो क पीछे पहुंचा तोह देखा मैं रास्ते से निचे एक पगडण्डी सी जाती है ....वह अभी ताज़े बने हुए कदमो क निशान बने है थे .....वह उन् निशा क पीछा करते हुए किले की निचली दीवार तक पहुंचा ....तोह देखा दीवार तक जाकर वह निशान गायब हो गए है........

उस्सने दीवार को टटोलकर देखा लेकिन कोई फायदा नहीं .........

तब उदय वही बैठ गया और अपनी पृत्वी तत्त्व की ऊर्जा को बढ़ाने लगा ......अब उसकी ऊर्जा इतनी बाद गयी थी ....की वह धरती क निचे बारीक़ से बारीक आवाज को सुन सकता था ......

अब उससे अपना ध्यान सुनाई देने वाली आवाजों पर लगाया ....तोह उससे अनेको आवाजों क बिच किसी दो व्यक्ति क आवाज आने लगी ...जो किसी विनाशक अस्त्र क बारे में बात कर रहे the.......unki बातें सुनकर उससे यहाँ होने वाले षड़यंत्र क बारे में पता चला ......

1 - अब बहुत जल्द हमारा विनाशकारी अस्त्र तैयार हो जाएगा .......जिससे पृथ्वी पर ऐसा विनाश होगा क रक्षक भी नहीं बचा पायेगा ......

2 - लेकिन एक बढ़ा और है वह है संघारक पता नहीं उससे किस तरह हमरी योजनाओ क बारे में पता चल जाता है.......

1- वह अब कहा से आएगा ...हमारी चल में फसकर वह और उसके साथी जयपुर में hi मारे गए है.....

2 - लेकिन मुज़हे अब भी नहीं लग रहा क इतनी आसानी से वह मारा गया हो गए......

1 - अगर वह जीवित भी होगा तोह भी वह हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता ....अब हमारे साथी यहाँ की सर्कार में घुस चुके है ....और बहुत जल्द इस देश की बागडोर अब हमारे हाथो में होगी .

हमारे साथी अब यहाँ क पावरफुल राजवंसियो का और बुसनेस्स मन का रूप ले चुके है और यहाँ से सारे देश फैलने लगे है.....

2 - हां जब एक साथ चार महानगरों में धमाके होंगे तोह इस देश में अफरा तफरी मच जायेगी .....रक्षक तोह बाकी लोको की रक्षा में ुलसह होगा ...और संघारक यदि जीवित होगा तोह उस्का पूरा ध्यान धमाकों पर होगा उतने देर में हम इस देश की सत्ता पर कब्ज़ा कर लेंगे ......

यह दो थे लोभा सुर और मोहासुर

उनकी बातें सुनकर उदय को अंदाजा हो गया क इस कोले क निचे कोई गुप्त तहखाना है जिसका गुप्त मार्ग यही कही से जाता है ...जहा इनकी साड़ी गतिविधयी चल रही hai.....ussne टेलिपोर्ट होकर वह पहुंचना चाहा ...लेकिन kisi....adrisya शील्ड क कारण वह वह नहीं जा पाया ......

अब उदय वह से धर्मशाला अपने साथियो क पास वापस आगया .....और अपने रूम में आगया .....वह एक नकाब पॉश अपने सातियो क साथ बैठा किसी विषय पर बात कर रहा था .....ुआड़ी की तरफ रहस्यमयी हँसी क साथ ..देखकर .....आओ उदय ...अब पता चला तुम्हे हमने किले मैं क्यों भेजा था ......

उदय - तोह तुम्हे पहले से hi सब पता था .....तुम बड़े hi रहस्यमयी हो संघारक...

अब चलते सुतल लोक में ........

सुतल लोक में दानवो का वास है जिसमें दो तरह क दानव है एक कस को माने वाले ...और दूसरे महाराज बलि को माने वाले .......

यहाँ दोनों दाल में कोई दंगल हो रहा था .......जहा राजा बलि विशेष अतिथि क रूप में आये थे ....वही कस क दानवो का यहा का मुखिया वीरूपक्ष भी वही बैठा था .......और बलि को प्रसन्ना करने क लिए बार बार उनकी प्रशंसा कर रहा था.......

इस समय ममराज बलि क तरफ क पहलवान आगे थे ......जिनका मुख्या पहलवान था वज्रबाहु ....इस समय आखाड़े में कस की तरफ का दानव चारो खाने चित मिटटी में पड़ा था और और वज्रा बहु उस्सकी चट्टी पर पेअर रखकर खड़ा था ....

बिलकुल खली की स्टाइल में ....

वज्रा बहु -( ताल ठोककर) है कोई और तुम्हरे पास जो हमे चुनौती दे ........

M.Bali - कहो वीरूपक्ष (वीके) है कोई और तुम्हारे पास जो हमारे वज्रबाहु को हरा सके....

वीके - महाराज अब हम कहा आप जैसे समर्थ वैन राजा से स्पर्धा कर सकते है......

तभी कस क दानवो में से एक दानव सामने आया ....में स्वीकार करता हु तुम्हारी यह चुनौती....

और वह ताल ठोककर वज्रा बहु क सामने आया ......दोनों आमने सामने थे दोनों पंजे मिलकर एक दूसरे को ताकत लगाकर गिराने की कोशिश कर रहे थे ....वज्रा बहु बगलतोड़ वाला डाव लगाकर सामने वाले का हाथ पीछे मोड़ दिया ...लेकिन सामने वाला भी कोई काम नहीं था ...उसने पलटकर अपना हाथ छुड़ा दिया और एक जहटके से वज्रा बहु को पेट क बल निचे गिरा दिया ......और उसस्के पेट को पकड़ कर उससे पलटने की कोशिस करने लगा ......

वज्रा बहु ने भी फुर्ती दिखा कर उससे गिरा दिया और कैची डाव लगा दिया .....सब दानव इस रोमांचकारी मुकाबले को आंखें फाडे देख रहे the......aise hi डाव पेच कहलते रहे....

तभी उस दानव ने वज्रा बहु क पेअर से निकलकर उससे कंधे पर उठा लिया और पटक दिया इससे वज्रा बहु चारो खाने चित.....

और कस क सभी दानव ख़ुशी से चिल्लाने लगे......

लेकिन विरुपाक्ष न जाने क्यों खुश नहीं था ...लेखों बनावटी हसी क साथ.....

वीके - क्षमा करे महाराज आज आपका योद्धा जित नहीं पाया.....

म बलि - कोई बात नहीं .VK.yeh तोह एक खेल hai....haar जित तोह चलती है ....वैसे तुम्हारा यह पहलवान बड़ा जबरदस्त है कहा से लाये इससे....

अब उस जीते हुए दानव को मंच पर बुलाया गया......

M.Bali - बहुत अच्छे लड़ लेते हो ...क्या नाम है तुम्हारा ......

वह - विकत....

विकत को दंगल जितने का पारितोषक मिलता है .....आउट फिर सब अपने अपने इलाके में निकल जाते है....

यहाँ जा कस क दानव अपनी जीत का जश्न मन रहे the....tab वह वीके आया ......

उससे देखकर सभी दानव खड़े होगये ....

वीके - अच्छा क्या नाम है तुम्हारा .....Vikat.....kisne कहा था तुम्हे दंगल में आने क लिए ......आज की हमारी हार से में राजा बलि को और खुश करके उनके निकट हो जाता ....जिससे हम अपने लक्ष्य क और निकट हो jaate......hume किसी भी तरह बलि को उस क्षेत्र से बहार निकलना होगा जिसकी रक्षा नारायण का सुदर्शन करता hai....aur यह रभी संभव है जब हम उनका विश्वास जित लेंगे ...

विकत - में आज hi पटल लोक से असुरसम्राट क आदेश से आया hu......aur जब मैंने अपने दानवो को हार ते देखा और अपमानित होते देखा तोह मुजह्से रहा नहीं गया ......

क्या हमारा कोई मान सम्मान नहीं ....हम बल से परिपूर्ण है हमे कोई षडियंत्र की जरुरत नहीं .....और यह नारायण की बात यह तोह हजारो साल पुराणी हो गयी ......अब यह सब मिथ्या है ...हम सीधे हुम्ला करके भी इस लोक पर अपने अधिकार पा सकते है....

कई भइओ क्या तुम्हे रोज अपमानित होना पसंद है या वीरो की ततः युद्ध करना ....अब ..यह निर्णय तुम्हारे हाथो ...है.....

सभी दानव एक स्वर से चिल्ला उठे .....haa...haa.....Vikat सही कह रहा है .......हम सीधा हुम्ला करेंगे ......अब हमे बलि की और सकता स्वीकार नहीं है .....

कल तक जो दानव वीके की हर बात मानते थे आज वह अनजान दानव की बातो में आकर उसके hi विरुद्ध हो गए यह बात देखकर वीके को आश्चयॅ हुआ ....

वह वह से अपने निवास स्थान आया और कस को सम्पर्क करने का प्रयत्न करने लगा ...लेकिन आज संपर्क नहीं हो पारहा tha......usse किसी षड़यंत्र का आभास होने लगा ......

यहाँ पटल लोक में कस अपने क्रिस्टल पर हर जगह का हॉल देख रहा tha.....Apne क्रिस्टल पर अलग अलग जगह पर एक hi समय में अभी को देखकर उसका सर चकराने laga...tha......

अब वह सुतल लोक की गतिविधिया देखने लगा ......तोह उससे सब कुछ अपनी योजना अनुसार hi होता दिखाई देने लगा .....

कस को समाज नहीं आरहा था क रक्षक क्या चाल चल रहा है ....

कस - वह रक्षक वह क्या खूब हमे hi भरमाने का प्रयत्न .....लेकिन तुम कुछ भी कर लो तुम हमारे असली लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच सकते ....

बहुत जल्द यह सारा ब्रह्माण्ड होगा कस की मुट्ठी में ....Ha...ha....ha...ha

यहाँ अभी क दो रूप प्रेतराज अभी और महाभेदिया अभी ....कंटक और वजारा बहु की सेना क साथ गुप्त रूप से सुतल लोक को घेर रहे थे.......

और वह राजस्तान में संघारक और उडाय का दाल कस की षड़यंत्र को विफल करने क लिए रणनीति बनाने लगे .........

संघारक ने सबसे पहले उन् लोगो की लिस्ट तैयार कराई जो अचानक गायब होकर कुछ दिन बाद लौट आये थे.....

उनमें से कुछ को संहारक और उदय की टीम काबू करके अपने गुप्त स्थान पर ले आये ...तोह उन्हें पता चला .....क ...यह कोई असुर नहीं है.....

..लोभासुर .....mohasur....aur कामासुर ...ne...apni पाप की ऊर्जा इन् में अधिक मात्रा में प्रवेश कराकर इनको मैं से असुर बनाया tha.....tan से तोह यह अभी भी मानव थे .....लेकिन कालीऊर्जा और पाप की ताकत क कारण इनका मैं असुर बन चूका है.......

संघारक ने उनका उपचार शुरू किया ......और इस में उसकी सहयता की शिवली और विभक्त ने अपनी योग शक्ति क dwara.....aise एक एक करके संघारक लोभा सुर क द्वारा दानव बनाये गए मानवो को फिर ठीक करके उनकी जगह वापस पहुँचाने लगा .....लेकिन इन् सब में समय भी अधिक लग रहा tha....aur शिवली और विभक्त की ऊर्जा भी ज्यादा खर्च हप रही थी ..

.जिससे उन्हें बहुत ज्यादा थकन होने लगो ...लेकिन लगातार दो दिन लगातार जागते है दोनों अपने काम में लगी रही ....बिच बिच में बस थोड़ा आराम कर लेती थी..

अब बारी थी संघारक की लोभासुर ..मोहासुर और कामासुर को फसाने की

आज क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 102



अब तक आपने देखा क सुतल लोक में कस क दानवो में विकत क कारण मतभेद हो गया......

उडाय को असुरो द्वारा होरहे षड़यंत्र क बाते में पता चल ...

संघटक और उसकी टीम जीवित है .....

शिवली और विभक्त क कारण असुरो में बदले हुए मानव ठीक होने लगे ........



अब आगी ......

सुतल लोक में वीरू पक्ष क भवन एक कहष में .....एक दानव कन्या .....CHAITALI.....jo वीके ...की बेटी थी ...बैठी किसी क विचारो में खोयी थी .......

चैताली मैं में - न जाने कौन है वह ....जब से देखा है .....उसीकी क बारे में सोच रही हु .....यह मुज़हे क्या हो गया hai.......hayye क्या बलवान है ...कैसे उस वज्रबाहु को ....उस्सने चारो खाने चित कर दिया .......

उससे देखकर ऐसे लग रहा है जैसे में इसीका जन्म जन्मान्तर से प्रतीक्षा कर रही thi.........Sach में नाम की तरह तुम भी बड़े विकत हो........

और भवन क बहार धीरे धीरे एक एक करके कस क दानव विकत की तरफ होने लगे ......जो भी दानव एक बार उससे मिलता वह उसी की तरफ हो जाता .....

यहाँ आपको बताना जरुरी है ....दानव और असुर दोनों अलग प्रजाति क है.......

दानव जहा जन्म से hi विशाल के और बलवान होते है .....और दिखने में भी कोई खास नहीं होते ...यह बल प्रधान जाती है .....इनका जनम कश्यप ऋषि की दनु नाम की पत्नी से हुआ था

और असुर रूप ... बल और में देवताओ जैसे hi होते hai....yeh बल क साथ साथ अपने ज्ञान का भी प्रयोग करते hai....bas इनमें तमोगुण की अधिकता ..ahankar.....Aur बुराई क प्रति प्रेम क कारण ...पटल लोक मिला hai.....yeh कश्यप ऋषि की दिति नाम की पत्नी से उत्पन्न हर है.....

वीके जब देखा तोह विकत से बात करने क लिए अपने भवन बुलाया ........

जब चैताली को पता चला क विकत उसके पितश्री से मिलने भवन आया है ....तोह वह भी उससे देखने की इच्छा से दरवाजे की ूत में कड़ी हो गयी ...जहा से उससे विकत साफ धिकायी दे रहा था जो बातें वह हो रही थी वह सब सुनाई भी दे रहा था....

वीके - ाहिर तुम चाहते क्या हो .....अपने आपको हमरे दाल का hi बताते हो और हम से विरुद्ध दानवो का भड़का रहे ho.......muhze तोह यह भी लग रहा क तुम कोई वास्तविक दानव भी हो क नहीं......

विकत - आप मेरी बात छोड़ो ...परन्तु आप तोह एक दानव hi होना ......

वीके - हां हु ...toh.....tum कहना क्या चाहते हो ....

विकत - मेरे कहने का यह तात्पर्य है क आप एक दांव होकर भी दानवो को विनाश क मार्ग पर ले जा रहे ho.......Jiss लोक में रहते हो उसी क राजा क विरुद्ध षड़यंत्र रचते हो ....

वीके - में दानवो क विरुद्ध नहीं हु .......यह लोक हम दानवो का है और इसपर हमारा hi अधिकार होना chahiye.....lekin बलि तोह एक असुर hai....hume उसकी सत्ता स्वीकार नहीं .....

विकत - यदि M.Bali असुर है तोह कस क्या है वह भी तोह एक असुर है.......

वीके - हां असुर है परन्तु उन्होंने हमे वचन दिया है क राजा बलि को यहाँ से हटाकर यहाँ हमारा राज स्थापित करेंगे .......

विकत - वह कस ने कहा और आपने मान लिया ......अप्प क्या सोच्त्र हो कस ऐसे hi आपको यह लोक औप देगा ......क्या आप उसके चल को नहीं जानते .......बलि क हट्टे hi वह सब दानवो को अपना गुलाम बना लेगा ........

और एक बात आप बातये क्या बलि ने कभी यहाँ दानवो पर कोई अत्यवहार कोय या उन्हें अपना सेवक बनाया ....नहीं न .....उन्होंने तोह अपने से शत्रुता रखनेवाले और बार बार षड़यंत्र बंननेवाले दानवो को कुछ नहीं किया .....

आप क्या समजह्ते है ....क्या उन्हें आपके चल क बारे में नहीं पता ...वह सब जानते हुए भी चुप है ...इसी आशा में क आप सब एक न एक दिन संभल जाओगे .......

और यदि आप यहाँ अपनी सकता चाहते हो ...तोह सीधे उसने बात करो ....मुज़हे पूरा विश्वाश है क आपकी समस्या का हाल निकल आएगा .......

वीके - परन्तु वह विष्णु का पुजारी है जिसस्ने हमेशा हम दानवो का नाश hi किया है.......

वीके - नाश उन्ही दानवो का हुआ है जो श्रिस्ति का विनाश hi चाहते थे .....जो असहाय लोगो को मारते थे ....जो ....अपने बल क माध में अंधे होकर अपने को hi भगवन मां बैठे थे ...

वीके - शायद तुम ठीक कहते हो परन्तु कस ...यदि अब हम उस्सकी इच्छा क विरूद्ध कुछ करेंगे तोह वह हमे जीवित नहीं छोड़ेगा .......अब बहुत देर हो गयी है....

विकत - आप कस की चिंता न करे .......इसकलिये ...

में आपको वचन देता हु क कस आपका कुछ अहित नहीं कर पायेगा ...

वीके - तुम इतने विश्वास क साथ कैसे कह सकते हो .....तुम दानव नहीं हो sakte........kuan हो तुम ..

विकत ने पहले वीके की आँखों में देखकर उसके मन क भावो को पढ़ा फिर अपने वास्तविक रूप में प्रगट हो गया ......अब वह अभी था ...

अभी को देखर वीके क चेहरे पर मुस्कराहट आगयी.....

वीके - ओह्ह्ह्ह तोह ब्रह्माण्ड का रक्षक अभिनव .....मेरा अंदेशा सही था .....जब अचानक हमारे दानव तुम्हारे पक्ष में होगये तब मुज़हे लगा क तुम कोई दानव नहीं हो....

अभी - तोह अब आपका क्या विचार है.......

वीके - में आपके साथ हु ......परन्तु आप अपना वचन याद रखना .......

यहाँ दरवाजे क पीछे छिपकर वीके की पुत्री चैताली सभी बातो को सुन रही thi....aur जब उस्सने अभी क वास्तविक रूप को देखा तोह चौक गयी .....लेकिन अभी की बातो ने और उसके रूप ने चैताली क हृदय में उसके प्रति आदर और प्रेम जगा दिया .......

अभी - आप इस बारे में अपनी पुत्री से भी विचार कर सकते ho.....jo छिपकर हमारी बातें सुन रही है.....

चैताली अपने बारे में सुकर ...तुरंत ...वीके ....क सामने आयी ......

चैताली .- नहीं पिताश्री ......मैंने कुछ नहीं सुना ...में तोह बस....

वीके - अच्छा अगर नहीं सुनी तोह तुम्हे कैसे पता इन्होने आपके बारे में कुछ कहा.......

वीके की बात सुनकर चैताली को अपनी बेवकूफी और उतावला पैन समाज आगया और शर्माकर चली गयी .....

वीके - मेरी बेटी है चैताली ...बड़ी तोह हो गयी hai...lekin अभी भी बचपना नहीं गया....

फिर थोड़ी देर ऐसे hi बाते होती रही......

अब कस क पक्ष क अधिकतम दानव अभी क पक्ष में हो गए थे ....बस कुछ hi बच्चे थे जिनको बुराई में hi मज़ा आता था.....

यहाँ कस को भी अंदाजा हो गया था .....क कुछ तोह गड़बड़ चल रही है सुतल लोक में .....इस्सलिये उस्सने .....किसी ऐसे असुर को भेजने का सोचा .....जो बलि की hi तरह नारायण का उपासक हो .......

बड़ी खोज क बाद उससे बिभीषन क वश का असुर ....प्रलम्ब ...मिला जो नारायण का उपासक tha...aur उसके पास स्वयं नारायण द्वारा दिया गया नारायणास्त्र था .......राम रावण युद्ध क बाद राम जी ने बिभीषन क वंश को अभयदान दिया tha....jiske कारण नारायण या उनका अवतार ...उसके वंश क किसी भी असुर की हत्या नहीं करेगा ...

पर प्रह्ना था क कैसे उससे बलि क विरुदफः प्रयोग करे .......

इस्सके लिए कस स्वयं उससे मिला ....और उसस्के सामने अपना प्रस्ताव रखा .......लेकिन वह नहीं माना .....

कस - आप समझ क्यों नहीं रहे हो इस्स्में आपका hi लाभ है .........आपके पूर्वज ने राम जी की कितनी सहयता की थी .....लेकिन उनको क्या मिला केवल लंका का राज .......

और बलि को सिर्फ यज्ञ करने और गलती से दान करने क कारण साक्षात् नारायण का साथ.........

यदि आप उस लोक पर अपना अधिकार करते हो तोह आपके इष्ट नारायण सदा आपके संग रहेंगे ....क्यों की उन्होने सुतल लोक का द्वारपाल होने का वचन दिया है......

और उनके आपके पूर्वज को दिया हुए वचन क कारण आप को वङ्का अभयदान प्राप्त है ...इसीलिए वह युद्ध में आपके सामने नहीं आएंगे..........

एक तरफ नारायण का सानिध्य और मेरी मित्रता और दूसरी तरफ सारे जीवन नारायण क दर्शन की प्रतीक्षा अब आप hi विचार करे आपको क्या चाहिए....

यहाँ दूसरी तरफ राजस्थान में चित्तौरगढ़ क गुप्त तह खाने में लोभा सुर ...Mohasur...aur कामासुर अपने काम में लगे हुए थे....

अपने वश में किये हुए साइंटिस्ट की टीम एटॉमिक वेपन बनने में लगी हुई थी ....जो इतना पावर फूल था क उसके एक विस्फोट से ....पूरा का पूरा एक शहर का पल भर में नाश हो सकता था .....ऐसे 4 वेपन वह बन रहे थे ........

लोभासुर (लड़) - और कितना समय लगेगा ....इस्सके बनने में .....

सकी - वेपोन तोह बन गए बस उनको एक्टिवटे करने क लिए उनकी चिप बना बाकी है ....एक बन गयी hai.......baaki 3 आज hi बन जायेगी.....

मोहासुर (मर) - बस हम अभी अपने लक्ष्य क बिकुल करीब है .......

तभी वह आवाज आयी ....सही कहा लक्ष्य क करीब तोह तुम पहुँच गए ....लेकिन वह लक्ष्य है तुम्हारी मौत .....

जब LR....aur ..मर ने उस तरफ देखा तोह ....वह था संघारक ........राकेश क काल रूप क साथ.......

लड़ - तोह तुम ज़िंदा बच गए लेकिन अब और नहीं........

और उसने अपनी एनर्जी बीम संघारक पर छोड़ी ....जिससे ..संघारक ने अपनी तलवार पर रोक दिया .....

उस समय कामासुर (KR)....aaya ....और जब उस्सने ....संघारक और राकेश को देखा तोह .....अपनी एनर्जी बॉल से पीछे से उनपर वॉर करने hi वाला था क राकेश फुल स्पीड में वह पहुँच गया .....और उसकी गर्दन पकड़कर उठा दिया एक जहटके से आगे फ़ेंक दिया....

और कोई होता तोह उसकी गार्डन hi उखड जाती ........क्र गिरते hi तुरंत खड़ा हो गया.......

क्र - इतने आसानी से नहीं .....कोशिस कर क देख लो ..जरा हम भी देखे कितना दम है तुममें......

अब एक तरफ थे 3 और एक तरफ थे 2......

संघारक ने विचार किया की यहाँ इनसे लड़ना मतलब किले का ध्वस्त हो जाना .....तोह उसने राकेश की तरफ कुछ इशारा किया ......और तेज़ी से अपनी तलवार से एक पोर्टल बनाकर तीनो को .....रेट से भरे इलाके में ले आये ......

तीनो असुरो को पता hi नहीं चला क क्या hogaya.....jab तीनो ने चारो तरफ देखा तोह समाज में आया .......

अब तीनो अपने एनर्जी बॉल्स से संघारक पर वॉर करने लगे .......

( अभी क संघारक रूप क पास सिर्फ दिव्या तलवार की शक्ति ...फाइटिंग स्किल्स ....स्पीड और टेलिपोर्ट की hi शक्तिया थी )

संघारक तेज़ी से अपनी तलवार घूमते हुए हुए आगे बढ़ने लगा .....उनमें से कुछ एनर्जी बॉल्स उससे भी लगे जिससे थोड़े बहुत निशान उसके जिस्म पर पद गए......

उसने अपने स्पीड से आगे बढ़कर मर क पेट में किक मारी और साथ hi तलवार का एक जोरदार वॉर लड़ की गार्डन पर किया .......मर तोह किक क पावर से दूर जाकर गिरा .......लेकिन लड़ को कुछ नहीं हुआ .....

संघारक अभी इस बारे मेह सोच hi रहा था ....क ...क्र ...ने ...तेज़ी से आकर उसके जबड़े पर जोरदार पंच मारा .....जिससे संघारक क मुँह से थोड़ा सा खून आगये ....

तीनो असुर तहके मारकर हसने लगे .....

बस इतना hi जोर है ......अभी तोह शुरुवात है .......

तब संघारक ने अपना मन शांत किया और उनके अंत क कारण क बारे में विचार किया ......इतने में तीनो उसपर टूट पड़े .....लेकिन संघारक क मैं शांत होने की वजह से उससे उनके एक एक वार का पता चल रहा था ....और वह निंजा तकनीक का इस्तेमाल करके ...उनके वार को ....कभी बैक फ्लिप कभी फ्रंट फिल्प ......से ब्लॉक भी का रहा था ......और साथ साथ में किक और पंचेस से उनपर एआर भी कर रहा था .......

तभी उसका एक वार गलती से क्र क अंडकोष पर पड़ा जिससे वह तड़प उठा .....जिससे देखकर संघारक को उनके खात्मे का राज पता चला ....

उस्सने उनके नामो पर ध्यान दिया ........

कामासुर क प्राण उसके लिंग और अंडकोष में थे ....

लोभासुर क प्राण उसके मैं में ........

और मोहासुर क प्राण उसके ह्रदय में थे ........

तब संघारक ने एक जोरदार वार क्र क दोनों टैंगो क बिच किया जिससे क्र का लिंग और अंडकोष पूरी तरह कुचल गया और वह चीखते हुए निचे गिर पड़ा और समाप्त हो गया .......

अपने साथी की ऐसी मौत देखकर दोनों असुर समझ गए क संघारक को उनके मौत का राज़ पता चल गया है ........तोह उनोहने यहाँ से निकलने में hi अपनी भलाई समझी ......

अभी वह जज पाते क संघारक ने अपनी तलवार को मर क दिल का निशाना बनाकर छोड़ा और तलवार सीधा मर क दिल क आरपार हो gayi....aur वह भी समाप्त हो गया......

लेकिन तब तक लोभासुर वह से भाग गया था.....

यहाँ लैब में राकेश संघारक क इशारे को समाज गया था ........और उन् एटॉमिक वेपन क पास पहुंचा .....तोह देखा ...क एक वेपन एक्टिवटे कर दिया है ....

उसनर साइंटिस्ट को पूछा लेकिन वह तोह हिप्नोतिसे थे .......जब तक राकेश ने उनका हिप्नोटिस्म तोडा तब तक देर hi चुकी थी .....

साइंटिस्ट का कहना था क अब एक्टिवटे हो चूका वेपन को रोका नहीं जा सकता ....यदि इसकी चिप निकल दी जाए तोह यह समय से पहले यही ब्लास्ट हो जाए गए ..........और यह सारा शहर और किला समाप्त हो जाए गए ........अभी 2 हर इसके ब्लास्ट में बाकी थे .......

बक्की क तीनो वेपोन को राकेश राकेश ने सइंटीस्टो की मदत से डिस्मेंटल कर दिया और ....उनके ब्रेन से सब यादे मिटा दी .....और टेलिपोर्ट होकर उन्हें किले पर छोड़कर ......वापस वेपन क पास आगया ...इस सब में कोई 1 हर लग गए .....

इस वेपन का क्या करे उससे कुछ समाज नहीं आरहा था ....

यहाँ लोभासुर पटल लोक में कस क पास पहुंचा और सब बता दिया .....कस ....ने क्रिसल में देखा क राकेश वेपोन लेकर वह से निकल ने hi वाला है .......

कस - मुर्ख असुर यदि हारकर hi आना था तोह कुछ तबाही मचा कर आना था .....

तब लोभासुर उससे बताता है की बिना पासवर्ड डेल यदि वह वेपन वह से हटाया जाएगा तोह वह समय से पहले hi ब्लास्ट हो जाएगा ....

यहाँ राकेश जैसे hi वेपन उठाने गया तोह वह स्क्रीन पर उससे पासवर्ड माँगा gaya........Lekin राकेश ने उस और ध्यान नहीं दिया और उस वेपन को उठा लिया .......

उसके उठाते hi उसमें से बीप बीप की आवाज तेज़ होने लगी तोह राकेश ने देखा की अब सिर्फ 1 मं बाकी है ...उससे कुछ समाज नहीं आरहा tha....ki क्या करे ...वह उस वेपोन को लेकर अंतरिक्ष में गया .....और उसी समय अंतरिक्ष में एक जोर दर धमाका हुआ जिसकी गूंज पृथ्वी तक पहुँच गयी....

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट रात को......

.

 
अपडेट - 103



अब तक आपने देखा सुतल लोक में अभी ने अपनी बातों से वीके को अपनी तरफ कर लिया ...

वीके की पुत्री चैताली क मैं में अभी क लिए प्रेम

राजस्थान में कस क षड़यंत्र को संघारक और राकेश क द्वारा विफल होना ...और क्र ....MR...ka मारा जाना...

राकेश का एटॉमिक वेपन को अंतरिक्ष में ले जाना और ब्लास्ट...



अब आगी ......

एटॉमिक ऊर्जा का धमाका इतना जबरदस्त था ..क राकेश का शरीर उस धमाके में नष्ट hogaya.......aur अभी की मारक shakti.....wapas एक ऊर्जा में बदलकर अभी क शरीर में समां गयी.........

उस समय अभी सुतल लोक में वीके क साथ बैठा हुआ tha........Jab उस्सकी मारक शक्ति न उसके शरीर में प्रवेश किया ....तोह उसके शरीर को एक जहतका लगा .......और अभी क सामने वह दृस्य आगया जब वह ब्लास्ट हुआ ........

अब अभी को पाया चला क राकेश का मानव रूप नष्ट हो चूका है और वह वापस उसके शरीर में समां गया .....अपने बचपन क मित्र को अब दुबारा नहीं देख पायेगा ....इस विचार से उसकी आँखों से दो बून्द आंसू क निकल आये ....लेकिन वीके क सामने अपने आपको वह कमजोर दर्शन नहीं चाहता था........

इसीलिए वह से उठकर वीके क hi भवन में अपने कक्ष की तरफ चल दिया ......

रूम में पहुंचकर अभी को राकेश की साड़ी यादें ताज़ा होने लगी क कैसे उसने एक सच्चे मित्र की भाटी पग पग पर उससे साथ दिया ......गुरुकुल की वह साड़ी बातें क कैसे उसने अभी क तत्वों की शक्ति जागृत करने में सहयता की .....और उसके घायल होने पर कैसे मला क लड़के से उसमे बदला लिया ...सबकुछ .....

अभी को अपने मित्र खोने का दुःख था ......उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे ......उसके मैं में वही भाव प्रगट होने लगे जो गक की मृत्यु पर होने लगे थे ........लेकिन वह जानता था क भावना क अधीन होकर कुछ करना पराजय hi देता है .......

तभी उससे अपने कहदे पर किसी का हाथ महसूस हुआ तोह उसने पलटकर देखा तोह वह शिवली थी....

शिवली - क्या सोच रहे हो जान ........

अभी - तुमसे क्या छिपा hai....tum तोह सबकुछ पहले से hi जानती हो ......

शिवली - अपने आपको सम्भालो की आपकी यह भयनाये फिर किसी अनर्थ का कारण न बन jaaye.......Aur आपका मित्र कही नहीं गया है वह आपके hi भीतर है ........

जरा उससे अपने अंतर मैं में ढूंढो.....

अभी - नहीं जान अब में भावना क ादिन होकर फिर से वही गलती माहि करूँगा जो पहले की थी ....तुम निश्चिंत हो जाओ .....

कुछ देर और बातें हुई जिसमें आगे की रणनीति पर विचार हुआ ..

बाद में शिवली वह से चली गयी........

शिवली क जाने क बाद अपने मैं को शांत करने .....अभी ध्यान में बैठ जाता hai.......Pahle तोह विचलित मैं क कारण ध्यान में कठिनाई हुई ...पर धीरे धीरे वह ध्यान में उतरता चला गया.......

ध्यान में अभी को अपने अंदर आज लाल रंग की ऊर्जा अधिक दिखी जो उसकी उसके मारक शक्ति की ऊर्जा थी ......अपने भीतर उससे कुछ दृश्य दिखाई दिए ........और सुनाई दी राकेश की आवाज .......

जब अभी का ध्यान टुटा तोह देखा सामने चैताली कड़ी thi....Aur अभी को एकटक देख रही थी.......

अभी उसस्के मैं में उठ रहे भावो को समाज़रहा था ....वह जानता था क यही उआकी अगली शक्ति है.....

अभी - ऐसे क्या देख रही हो ......

चैताली - में तोह आपके लिए भोजन लायी थी लेकिन आप ...ध्यान में बैठे थे ...इसीलिए रुक गयी......

अभी - क्या सिर्फ यही कारण था .....देखो चैताली में तुम्हरे अंदर चल रहे भावो को पढ़ सकता हु ........और समाज भी सकता हु......

कहितली - जब आप सब कुछ जानते हो तोह फिर आपका इस बारे में क्या विचार है .......में बस इतना जानना चाहती हु क मेरे मैं में आपके प्रति जो भाव जन्म ले चूका है क्या आपके ह्रदय में भी मेरे लिए वैसा hi भाव है..

अभी उसके पास जाकर उसकी आँखों में देखने लगता है.....

अभी - तुम्हे मेरी आँखों में क्या दीखता hai.....Aut उसके करीब जाकर ....

चैताली का हृदय अभी को अपने इतने पास महसूस करके जोरो से धड़कने लगता है.......

उससे अभी की आँखों में अपने लिए वही प्रेम नज़र आता है जो इसके दिल में अभी क लिए था ....

अभी - देखो चैतू अभी हम एक युद्ध क मुहाने पर खड़े है ....अभी तुम्हे टॉफी प्रतीक्षा करनी होगी ......

चैताली - में भी इस बात को समज़ती हु ....में आपकी प्रतीक्षा करुँगी.....

यहाँ प्रलम्ब कस की बातो में आगया था .....और अपनी पूरी ऊर्जा क साथ क साथ सुतल लोक की तरफ बढ़ चला .....

अभी क शक्ति त्रिशूल द्वारा बनायीं गयी शील्ड भी उससे रोकने में असमर्थ थी .....उसके पास वैष्णवी माया और नारायण अस्त्र था .....जिसका पूरे ब्रह्मांड में कोई तोड़ नहीं था.......

इस समय अभी M.Bali क साथ था ......

म. बलि - रक्षक मज़हर ऐसा आभास हो रहा है की इस युद्ध में हमारा सामना आसुरी विद्या से नहीं , अपितु किसी भयंकर देविक ऊर्जा से होने वाला है.....

में स्वयं इस युद्ध में तुम्हारे साथ रहूँगा ....

अभी - महाराज .....नियति ने इस युद्ध की जिम्मेदारी मुज़हे सौप राखी है .......और ध्यान में दिखे दृस्य क कारण मुज़हे यह आभास हुआ क आपका इस युद्ध में जाना उचित नहीं........

मैंने दृस्य में वैष्णवी माया को हमरे विरुद्ध देखा है ...और आप नारायण क परम भक्त है.....

जब दोनों बात कर रहे था ..उसी समय सुतल लोक की सीमा पर शंख नाद हुआ ....और उस नाद से अभी क द्वारा बनाया गयी शील्ड ख़तम हो गयी...

और प्रलम्ब प्रवेश कर गया ....और सुतल लोक क प्रवेश द्वार पर

अभी और सुतल लोक की दानव सेना द्वार क बहार पहुंची ......

प्रलम्ब इस समय अपनी पूरी ऊर्जा और सिध्दीहियो क साथ खड़ा tha......Iss समय वह प्रचंड अग्नि की तरह तेजस्वी दिख रहा था ...उसका प्रकाश इतना था क साधारण दानव तोह आँख उठाकर उससे डेल्ह भी नहीं पा रहे थे....

इस समय उसके पांच मुख प्रगट हो रखे the.....aur हाट में प्रचंड गदा .....

अभी ने कभी किसी असुर का ऐसा दिव्या रूप नहीं देखा था ........

प्रलम्ब - आपने सामने दानवो की सेना देखकर जोर से गरजा ..........हैट जाओ तुम सब मेरे रास्ते से ......में व्यर्त में तुम सबका संहार नहीं करना चाहता .......

अभी - मृत्यु तोह हर जीव की निर्धारित होती hai.......pahle अपना परिचय do.....aur यहाँ आने का कारण बताओ....

प्रलम्ब - अच्छा तोह तुम हो इनके सेनानायक ......शंखनाद से तोह तुम्हे समाज जाना चाहिए क मेरे आने का कारण क्या है........

अभी - लेकिन महाराज बलि से तुम्हारी क्या शत्रुता है........

प्रलम्ब - व्यर्थ बातो में अपना और मेरा समय नष्ट मत करो युद्ध करो......

और उसने अपना एक हाथ ऊपर उठाकर एक त्रिशूल परगट किया और अभी की तरफ फेंका .......अभी ने उस त्रिशूल को बड़ी वेग से आते देखकर अपने दिव्या धनुष से से तीर चलकर बिच में hi काट दिया .....

अब युद्ध में उसके तरफ कस क समर्थक दानव भी आगये .....दोनों तरफ से दानव आपस में भीड़ गए... ......

अभी ने लगातार प्रलम्ब पर तीर चोदे जिससे उस्सने अपनी गदा क प्रहार से रोक दिया .....

अब उस असुर ने बड़ी वेग से अभी क तरफ अपनी गदा चलायी .....तोह अभी ने भी अपनी गदा क प्रहार से उस असुर की गदा को अपने पास पहुँचने से पहले hi चूर चूर कर दिया ....

अब प्रलम्ब क्रोध में भर आया और उसके पांचो मुख से अलग अलग प्रकार क अस्त्र निकलने लगे .....जो दानवो पर जाकर गिरने लगे ......

अभी - इन् दानवो पर क्यों अपना बल दिखा रहे हो .....कुछ बल है तोह जरा हमे भी दिखाओ .......

प्रलम्ब - ाचा तोह तू मेरा बल देखना चाहता है तोह लो .....और उस असुर क चार सर अलग होकर 4 विशालकाय असुर में बदल गए और अभी की तरफ बढे ........

उनको अपनी तरफ आता देखकर अभी ने अपने अग्नि शूल .....शकतो त्रिशूल और पांच तत्त्व की ऊर्जा से कई प्रहार किये परन्तु उननपर उसका क्कोई असर नहीं हुआ .....

अभी अब अपनी दिव्या तलवार लेकर उनके सामने डट gaya......Sampoorna देवताओ की ऊर्जा का आवाहन उसने अपनी तलवार में किया और उन 4 असुरो क आगे डट gaya.....woh चारो अभी पर तीर तलवार गदा और ऊर्जा क गोलों से प्रहार कर रहे थे ........

अभी बस उन्हें ब्लॉक hi कर पा रहा tha.......Ab अभी ने अपनी माया प्रगट कर दी जिससे उन असुरो को यहा हर जगह अभी दिखाई देने लगे ........

प्रलम्ब - मेरे सामने माया का प्रयोग ......और उसने अपनी वैष्णवी माया को प्रगट कर दिया इससे अभी की माया समाप्त हो गयी ......

लेकिन इंटने समय में अभी ने इंद्रा क वज्रा को याद किया और उन् 4 असुरो पर छोड़ा .....जिससे वह चारो कटजाये और वापस प्रलम्ब में समां गए .....

प्रलम्ब ने अभी पर अपनी वैष्णवी शक्ति चलायी ..........

अभी क पास इसका कोई तोड़ नहीं था - अभी ने बड़े प्रयास किये उससे रोकने क .......इससे पहले अभी को वह शकित लगती .....कहितली उस शक्ति क आगे हाथ जोड़कर कड़ी हो गयी......

वैष्णवी शक्ति एक नारी पर प्रहार नहीं कर सकती थी ....isi.kaaran शांत हो गयी .....

यहाँ दोनों पक्ष क दानवो में घमासान युद्ध चल रहा था ........

जब प्रलम्ब ने dekha....uski शक्ति बेकार चली गयी तोह उसने चैताली पर अग्नि बन का प्रयोग किया ....इससे पहले वह वार चैतू तक पहुँचता अभी ने वरुणास्त्र क प्रयोग से उस वार को विफल कर दिया ........और चैताली को तुरंत युद्ध भूमि से हटाकर ......वीके क भवन ले आया ....

और फिर युद्ध भूमि में लौट आया........

अब असुर अपनी तलवार लेकर अभी क तरफ दौड़ा ....अभी ने भी अपनी तलवार संभल ली ......और उस असुर क वार का सामना करने लगा .......

अपने तलवार क साथ साथ लात और घुसे का भी प्रयोग करने लगा .......जिससे उस असुर को बहुत छोटे आयी ..........

अब उस असुर ने अभी पर अपनी तलवार फ़ेंक कर मारी ......लेकिन दिव्या कवच क कारण ...वह तलवार अभी से टकराकर चूर हो गयी......

प्रलम्ब क अब करीब करीब सारे अस्त्र अभी पर प्रयोग हो चुके थे..........

अब कोई और अस्त्र शेष न रहे पर ......प्रलम्ब ने अब नारायण अस्त्र का आवाहन किये .....जिसके प्रगट होते hi आकाश में भयंकर गर्जना उत्पन्न hui..........Charo तरफ भयंकर आंधी चलने लगी जिस्में ....दानव तिनके की तरह उड़ने लगे .......

अब प्रलम्ब ने नारायण ादत्र को अभी क तरफ छोड़ा ........वह अस्त्र सुदर्शन चक्र क रूप में भयंकर तेज़ और ऊर्जा क साथ अभी की तरफ बढ़ने लगा ........

जैसे जैसे अभी अपने ास्त्रो का प्रयोग नारायणास्त्र पर करता उस्का तेज़ और बढ़ने लगा ......

वह अस्त्र जैसे जैसे अभी क निकट आरहा था अभी का बल और ऊर्जा कमजोर पड़ने लगी जैसे वह अस्त्र उस्सकी साड़ी ऊर्जा सोख रहा हो.....

अभी कैसे इस नारायण अस्त्र से अपने आपको बचाएगा ......और प्रलंब का सामना करेगा

अभी क लिए इतना hi.....


अगला अपडेट कल...
 
अपडेट - 104

अब तक आपने देखा क अभी का प्रलम्ब क साथ युद्ध शुरू हो गया है .........

प्रलम्ब का छोड़ा हुआ नारायण अस्त्र अभी की तरफ बढ़ रहा है.........


अब आगी.......

अभी को नारायण अस्त्र की पहचान नहीं थी ......उस्सने महा गुरु से सुना तोह था ......परन्तु कभी उसके स्वरुप क बारे में नहीं जाना .......

त्रिदेव क ास्त्रो की विद्या बड़ी गुप्त है ....क्यों क इस्सकी विनाश करि शक्ति ......सारी पृत्वी को एक hi वार में समाप्त भी कर सकती है..........

इसीलिए अभी ने उस अस्त्र को रोकने क लिए कई शक्तियों का प्रयोग किया ......लेकिन जब अपनी तरफ बढ़ते हुए नारायण अस्त्र को अभी ने ध्यान से देखा तोह उससे उसमे नारायण की आकृति दिखाई दी... .......तब अभी को समाज आया क यह तोह नारायण अस्त्र है .....जिससे केवल श्राद्धः ...bhakti...aur ...samarpan...se ...hi शांत ...kiya..ja सकता है......

अभी तुरंत घुटनो क बल निचे बैठ गया और दोनों हाथ जोड़कर वेदो में स्थित .....पुरुष सूक्त क द्वारा नारायण की स्तिति करने लगा ...........

जैसे hi ले बढ़ तरीके से अभी ने स्तुति गाना शुरू किया नारायण अस्त्र वही रुक gaya......Aur लौट गया.......

आप सोच रहे होंगे क अभी को नारायण अस्त्र पहचान में देरी क्यों हुई ........और ादत्र ने उस तक पहुँचने में इतना समय क्यों लगाया .........तोह बारायण अस्त्र किसी धातु का विशेष आकृति वाला नहीं है ....यह एक मंत्र hai..........Jo यदि घास क तिनके पर भी पढ़कर छोड़ा जाए तोह वह ादत्र में बदलता है .......इसीसलिए इसका स्वरुप स्पष्ट नहीं है .......

हर गुरुकुल में ास्त्रो का सामना करना सिखाया जाता tha.......isiliye युद्ध कला सिखने वाले सभी को यह पता था क नारायण अस्त्र को केवल समर्पण से रोका जाता hai........yadi नारायण अस्त्र को इतने आसानी से पहचान लिया जाता तोह सभी समर्पण करके इससे रोक लेते ....इससे इस अस्त्र की उपयोगिता समाप्त हो जाती...

और अभी का निर्माण त्रिदेवो क अंश से हुआ है ......भले hi अभी अपने पूर्ण स्वरुप को जान नहीं पाया ...लेकिन उस्में स्थित नारायण क अंश क कारण .....उस अस्त्र की गति धीमी हो गयी थी ......

अब आते है युद्ध भूमि पर ....

नारायण अस्त्र क अपने वार क व्यर्थ जाने पर ....प्रलम्ब तिलमिला गया ........

अब उसने अपनी संपूर्ण ऊर्जा और भक्ति की शक्ति को एक गोले में परिवर्तित किया .........और जैसे hi वह उस्का वॉर अभी पर करने वाला था उस्सकी ...समय बिभीषन जी ...राजा बलि क साथ वह प्रगट हुए ......( बिभीषन जी चिरंजीवी है वह संसार से गुप्त रहकर नारायण की भक्ति में सदा लीं रहते है)

बिभीषन - रुको पुत्र यह अनर्थ मत करो रोक दो इससे .........

जिसे hi प्रलम्ब का ध्यान बिभीषन जी और बलि पर गया तोह वह रुक गया......

उसने श्रद्धा क साथ बिभीषन जी को प्रणाम किया .........

बिभीषन जी - यह क्या करने जा रहे थे पुत्र .....जिस नारायण की तुम उपासना करते हो ......उसीकी का अंश जिस सृष्टि क रक्षक में है उन्ही से युद्ध कर रहे हो .......

और यह युद्ध किस क विरुद्ध M.Bali क ...जिन्हे स्वयं नारायण का सानिध्य प्राप्त hai........M बलि से शत्रुता मतलब स्वयं नारायण से शत्रुता .......क्या तुम अपने hi इष्ट से शत्रुता करना चाहते हो ........कस जैसे नीच असुर की बातो में आकर तुम अपने सारे जीवन भर की भक्ति और तप को क्यों नस्ट करना चाहते हो ......

M.Bali - मित्र ..प्रलम्ब मुज़हे किसी राज का लोभ नहीं

तुम्हरे लिए में इससे त्याग सकता हु .......

प्रलम्ब को अपनी गलती का अहसास हो गया था ......

प्रलम्ब - मुज़हे क्षमा कर दो तातश्री ....में कस की बातो क वशीभूत हप्कार कितना बड़ा अपराध करने जा रहा था .....मुज़हे क्षमा कर दो .......

(और बलि की तरफ ..देखते हुए) ...मित्र तुम्हारे त्याग की भावना ने यह स्पष्ट कर दिया क तुम hi इस लोक को सँभालने योग्य हो .....स्वयं नारायण क निर्णय क विरुद्ध जाकर मुजह्से बड़ा अपराध हुआ है .......

M.Bali - नारायण परम दयालु है मित्र ...तुम्हे अपनी भूल का ाशस हो गया इतना hi बहुत है .

अब युद्ध समाप्त हो चूका था .....कस क समर्थक अधिकतर दानव मारे जा चुके थे ....और जो कुछ बच गए थे वह वह से निकलकर पटल लोक की और भाग गए थे.......

अब अभी ने सुतल लोक को फिर से रक्षा कवच से सुरक्षित कर दिया.......

म. बलि ने वीके को अपना महा मंत्री बनाया ...और सुतल लोक क सभी दानवो क हितो की रक्षा का भर उससे सौप दिया .......

बलि की उदारता देखर सभी दानव एक स्वर से उनकी जय जैकार करने लगे ........

वीके क भवन में

वीके - आपका बहुत बहुत धयवाद रक्षक आज आपके hi प्रयास क कारण ...सुतल लोक क सभी दानवो में एकता हो गयी है .....आपने अपना वचन निभाया .......

यदि में आपकी कुछ सेवा कर सकू तोह िस्डमें मुज़हे बहुत प्रसन्नता होगी ........

अभी - आप हमसे बड़े है ...हमे आपकी सेवा नहीं आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है.......

यदि आप मुज़हे कुछ देना hi चाहते हो ....तोह ...आपके आशीर्वाद से में आपकी पुत्री से विवाह करना चाहता हु.....

वीके - मेरी पुत्री से विवाह ....परन्तु यह कैसे संभव है ...वह एक दानव कन्या hai.......uska विवाह किसी दानव क साथ hi उचित होगा ....

फिर अभी ने उन्हें अपने शक्तियों क रहस्य क बाते में बताया ...साड़ी बातें जानने क बाद

वीके - ओह्ह ...toh...aaki hi शक्ति ने मेरी पुत्री क रूप में जनम लिया है ...........

अब वह अभी और चैताली क विवाह की तैयारी शुरू हुई ........अभी की सभी पत्निया इस विवाह में भाग लेने आयी .......

सभी चैताली से mili.........Shivali ...सुलेखा ...और ..Shalu.....apne हाथो से चैताली ....को तैयार किया .........

म .बलि भी विवाह में आये और .....चैताली को दानवो की काली ऊर्जा की वह शक्ति प्रदान की जो अंतिम युद्ध में बहुत काम आएगी .....

विवाह की साड़ी विधिया संपूर्ण हुई .......

कहितली सुहाग सेज पर अभी का इंतजार कर रही thi.......Jab अभी क आने की आहात हुई तोह वह कड़ी हो गयी......

अभी धीरे 2 चैताली की और बड़ा ....

अभी - चैतू ....क्या सोच रही हो ....तुम खुश तोह हो न ....

चैताली - जब मैंने आपको पहली बार देखा था उसी समय मैंने आपको अपना जीवन साथी मान लिया था ......आज आप से विवाह भी हो गया .........अपने सपनो को इतने शीग्र पूरा होने पर एक भय लग रहा है ......क कही यह सवपना टूट न जाए....

अभी उसके करीब जाकर उसकी आँखों में देखता है

अभी - तुम्हे क्या लगता है ....क्या मेरी आखों में तुम्हे ....क्या मेरे प्रेम पर विश्वास नहीं ....

चैताली ...अभी ..के पास का कर आपमें होंठ अभी क पर रखकर अपने प्रेम और विश्वास का प्रमाण देती है

अभी भी उसका साथ देते हुए उसके होंठो को चूमने लगा ...... ..जब दोनों क होंठ आपस में मिले अभी क अंदर एक ऊर्जा का संचार होने लगा .....उसकी आंखें लाल होने लगी .......अभी क भीतर दानव ऊर्जा सक्रिय होने लगी ......

और उसीके कारण ...दोनों का ये किश थोड़ा वाइल्ड होता जा रहा था .......चैताली ...अभी.... क होंटो को ऐसे चूस रही थी जैसे इनको खा hi जाएगी.....

अभी की भी अपनी भावनाये उग्र वासना का रूप लेने लगी .. अब वो अपने आप को बिलकुल भी रोकना नहीं चाहता था.

अभी भी चैताली के होंटो को चूसने से जयादा चबा रहा tha.......Dono क हाट एक दूसरे क पीछे कैसे हुए थे ......

दोनों एक दूसरे की जीबो को चूस रहे थे. ........जब सांसे उखाड़ने लगी तो दोनों अलग हो गए और हाफने लगे...... दोनों अभी नार्मल हो hi गए थे क ....अभी चैताली को लेकर बीएड पर गिर गया .....

अभी उसकी चोली में कैद उन बड़े-2 स्तनों को गुर रहा था जो साँस लेने से उप्पेर निचे हो रही थी. फिर एक दम से अभी ने चोली को एक साइड से पकड़ कर खींच दिया. चोली फैट कर अभी क हाथो में थी. चैताली के मुँह से एक आह्हः निकल गयी.

अभी अब उसके नंगे स्तनों को घर रहा था....... चैताली क निप्पल एक दम तन कर खड़े थे.

अभी दोनों हाथो से उसके स्तनों को मसलना सुरु कर दिया. वो थोड़ा जोर से इन मासूम स्तनों को मसल रहा था ... और चैताली दर्द और मज़े से अपनी गर्दन ीदार से उदार कर रही थी. और बड़बड़ा रही थी. – आआह्ह्ह हाआनंनं jaan....ufffggg iiiinnn,….ko… ऐसे…. हीईई मस्स्स्सलललल्लू

जब दोनों स्तन मसलने से लाल पद गए तो अभी ने एक को मुँह में ले कर चूसना सुरु कर दिया. चैताली अपनी लाल हुयी स्तनों पैर अभी के गीले थूक को महसूस करके hi सिहर गयी और उसकी एक सिसकी निकल गयी

अब अभी अपने वस्त्र उतर केर फेक दिए . और फिर से उसके स्तनों को चूसने लगा. चैताली– आअह्ह्ह्हह ोुर्ररर जज्जूवार्डर सीई करके सिसकारियां भरने लगी ......

अभी भी चैताली के स्तनों पैर दन्त गाड़ने लग गया. कुछ hi देर में उसके दोनों स्तनों पैर अभी के दांतो के निशान नजर आ रहे थे. जैसे hi अभी स्तनों को निहार कर अभी की आखों में देखने लगा चैताली ने एक hi जटके में अभी को बीएड पैर गिरा कर उसके उप्पेर आगयी. और उसके सीने पैर किश करने लगी.

चैताली भी अब अपना लहंगा खोलकर अभी क उप्पेर आगयी....

अभी की आखों के सामने चैताली की चिकनी नंगी झंघे और ब्लैक पंतय में छुपी योनि आ गयी. पंतय आगे से पूरी गीली हो चुकी थी. जिसकी वजह से चैताली की योनि के होंटो की शेप पंतय के बहार से hi दिखाई दे रही थी.

अभी उस नज़ारे को देख कर एक दम उत्तेजित हो गया. उसका लिंग भर आने को तड़पने लगा.

और अभी के हाथ चैताली की योनि पैर पहुंच गए और एक दो बार उसे मसल दिया.

चैताली भी इतनी जोर से योनि के मसले जाने को बर्दाश नहीं कर पा रही थी ...उसकी योनि कॉमर्स बहाने लगी ..... चैताली को मस्ती सी छेड़ने लगी. ..

और वह अभी के सीने पैर किश करने लगती है.....

अभी के सीने पैर चैताली ने कई जगह अपने दांतो के निशान बना दिए. फिर उसके छोटे -2 निप्पल को मुँह में ले कर चूसने lagi...Abhi को मज़े और मस्ती के सागर ने गोते खाने लगा. उसके हाथो की पकड़ चैताली क हिप्स पर और भी बाद गयी. ..

दोनों की प्टेम लीला और उग्र रूप ले रही थी ....और अपने चरम की और बाद रहे थे

अभी क शरीर में अब दानव ऊर्जा पूरी तरह सक्रिय हो गयी थी ....

अब अभी ने उस अपने उप्पेर से हटा केर पूरी तरह नग्न हो गया. .

और उसको बीएड के किनारे लेता और निचे बेथ कर उसकी पेंटी को साइड कर योनि पैर मुँह रख दिया. चैताली तो पागल सी हो गयी. अभी क होंटो ने उसकी योनि में भूचाल ला दिया था.

अभी ने अब एक hi जटके में उसकी पंतय को फाड् कर फेक दिया. ....उसकी योनि को चाटने लगा.

चैताली सिसकने लगी..

चैताली की सिसकिया अभी को अंदर से और भी बड़का रही थी. ....अभी ने चैताली की योनि पैर अपने दन्त गदा दिए.

दोनों अब 69 पोजीशन में aagaye.....Abhi ...अपना लिंग उसके मुँह में दाल दिया.... चैताली भी

मज़े से उसके लिंग को चूसने लगी. अभी अदा लिंग ...hi था मुँह में.

अभी ने अब दकके मर कर अपना पूरा लिंग उसके मुँह में उत्तर दिया. ...Chaitali....ki आखें बड़ी हो गयी. .....अभी उसके मुँह में दकके मरने लगा. जब भी लिंग पूरा मुँह में होता तो गले में एक उभर दिखाई देता.

चैताली की हालत बहुत ख़राब हो रही थी. पैर अभी उसके मुँह को चोदे जा रहा था. और चैताली की योनि को भी बेदर्दी से चूस रहा था ....

कुछ देर में अभी ने उसके मुँह से लिंग को बहार खींच कर अपने ाँद उसके मुँह में दे दिए. चैताली भी उनको चुस्ती रही.... चैताली ने फिर उसके ांडो को मुँह से निकल कर बोलै

चैताली – जान अब मुझसे बर्दाश नहीं होता. अपनी दासी की योनि ने अपना ये मुशल उत्तर दो न.

अभी – हाँ मेरी जान चैतू आ मेरा भी अब बर्दाश करना मुश्किल है.

चैताली की बात सुनते हुए अभी अपने लिंग को उसकी योनि पैर रगड़ना सुरु कर दिया था.

अभी इससे बहुत बादक रहा था. तो उसे बोलै – ठीक है तो ये लो सम्भालो ise.Aur जोर से धक्का मारा

चैताली –आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह (बहुत तेज़ chikh)aaaahhhhhhh

अभी चैताली की दर्द भरी चीख सुन कर भी रुका नहीं. बल्कि घूरती hi दकके मरने लगा .

चैताली –आअह्ह्ह्ह ोूररर तेइज़्ज़्ज़्ज़ काअररररर ननननाआ फ़फ़फ़फ़ाड़द्द डीएई आअह्ह्ह्ह

दोनों एक दूसरे को बोल बोल कर और उकसाने लगे

अभी चैताली की बातो से बहुत उत्तेजित हो रहा था. चैताली की योनि ने पानी छोड़ना सुरु कर दिया था जिससे लगा तर फच -2 की आवाजे और चैताली की चीखने की आवाजे आ रही थी.

अभी ने उसके स्तनों को चूसते हुए ...दोनों टांग फैलाकर पूरी तेज़ी से लगा हुआ था.....

चैताली क स्तन एक दम लाल हो चुके थी. जगह जगह अभी क दांतो क निशान बन चुके थे ...

अभी इस टाइम इतनी तूफानी स्पीड थी की चैताली के मुँह से कुछ भी साफ़ सुनाई नहीं दे रहा था. कमरे में बस कामलीला से होने वाली आवाज की और दोनों क सिसकारियों की मिली जुली आवाजे गुज रही थी.

इस तरह से दोनों क मिलान से अभी क श्री में बदलाव आने लगा ...अब उसका बल दुगना हो गया था ......दोनों क श्री से ऊर्जा निकलकर एक जगह इक्कठा होने लगा .....

ऐसे hi दोनों अपने चरम तक पहुंचे और सकलित होगये ....और वह ऊर्जा पुंज अभी क शरीर में समां गया.....

अब अभी को प्राप्त हुई दानवीय शक्ति क साथ महिमा सिद्धि ...जिससे ..अभी अब अपना रूप इच्छा अनुसार बड़ा सकता था....

दोनों अब एक दूसरे क बाहो में सो गए...

अभी क लिए इतना hi


अगला अपडेट रात को ....
 
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