ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 12 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 93



अब तक आपने देखा कस ने स्वर्ग पर आक्रमण करने क लिए अपने मायावी आंतक नाम क असुर को चुना .......

शिवली ने अभी की अगली यात्रा क बारे में बताया..........

और अगली शक्ति कोई गंधर्व काया क बारे में भी



अब आगे........

भुवा लोक क यक्ष भूमि से ऊपर है सौहा लोक ........जिसका विस्तार पृथ्वी से कोई तीन गुना है......

इस लोक में प्रवेश करने क लिए 7 द्वार है ......जहा देव सैनिक हमेशा पहरा देते रहते है.....

स्वः लोक का मुख्या आकर्षण स्वर्ग है जहा का आकर्षण , हैट व्यक्ति को है ........कई कवी और लेकिन भी किसी जगह की सुंदरता की उपमा स्वर्ग क नाम से hi देते है...

स्वर्ग लोक मैं देवताओ का वस् है जो त्रिदेवो को आगया अंसार इस श्रिस्ति का संचालन करते है .....

स्वर्ग चारो तरफ से अलकनंदा जो गंगा की hi रूप है उससे गीता हुआ hai.....yaha हर प्रकार की सिद्धिया साक्षात् वस् करती hai......Swarg.... रोग... व्याडि ..Vridhawastha....Bhuk प्यास आदि से रहित hai........Yaha क बगीचे में कल्पवृक्ष है जो हर प्रकार की समृद्धि देने वाला है.....

यहाँ देवताओ क राजा इंद्रा का शासन है.........

स्वर्ग क अधिकार में दो नगर और है जो इस लोक क दूसरे हिस्से में है ....एक है गंधर्व nagar......jaha देवताओ की सभा में गाने वाले और सृष्टि में संगीत विद्या फ़ैलाने वाले गन्धर्वो का वास है .......इनका राजा रंजन गंधर्व hai.....inki पत्नी संध्या और बेटी शामली है......

वही दूसरी और किन्नर नगर है जो निर्त्य कला में निपुण है......

देवराज अपनी सभा में बैठकर देवगुरु बृहस्पति और बाकि देवताओ क साथ किसी विषय पर मंत्रणा कर रहे थे.......

तभी स्वर्ग में जोरो से कम्पन हुआ ...यह था संकेत क किसी ने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया है........

देवराज तुरंत अपनी देव सेना लेकर स्वर्ग क प्रताम द्वार पर पहुँच गए और देखा तोह वह द्वार टुटा हुआ पड़ा है .....और सैनिक मारे जा चुके है........

और सामने देखा तोह एक विशालकाय दैत्य दोनों हाथ कमर पर रख कर जोर जोट से हसरहा tha........yeh था आंतक.....

आंतक - ha....ha....ha....Aayiye देवराज .......मुज़हे तुम्हारी hi प्रतीक्षा thi.......yeh बेचारे सैनिक तोह ऐसे hi मारे गए........

देवराज - तुम्हारा इतना दुःसाहस क तुमने यहाँ प्रवेश करने का प्रयत्न किया .......

आंतक - दुःसाहस तोह आपने किया है ...जो हमरे असुर सम्राट क पुत्र को बंदी बना लिया है.......

देवराज - हमने ऐसा कुछ नहीं किया है........

आंतक - देवता होकर असत्य वचन ....ha...ha...ha....

सीधे से मारकेश को लौटा दो ...नहीं तोह तुम्हारे स्वर्ग की ऐसी दशा होगी की फिर कोई स्वर्ग की सुंदरता की उपमा नहीं देगा .......

देवराज - अपनी वाणी को विराम दो asur....tum शायद इंद्रा के कोप को नहीं जानते तभी यहाँ अकेले आगये हो ...........

आंतक - वैसे तोह में अकेला hi काफी हु ....परन्तु मेरा नाम आंतक है .....शत्रु का अंत करने से पहले उसकी आखरी इच्छा तोह पूरी कर hi सालता हु .......

और उसने मंत्र पढ़कर दोनों हाथ ऊपर उठा दिए.......

और वह लाखो दिव्या असुरो की सेना प्रगट हो गयी.....

आंतक - लो देवराज अब सेना भी आगयी.........

देवराज - आकर्मण ....Har.har.mahadev....

और दोनों और की सेना आपस में भीड़ गयी.......

तीन तत्वों क देवता अपनी तत्वों की ऊर्जा से असुर को समाप्त कर रहे थे ......

तोह आंतक ने अपने भीतर से पांच असुर प्रगट किये .....जो उन्ही पांच तत्त्व की ऊर्जा से बने हुए थे......

अग्नि देवता क साथ ज्वलासुर ......वरुण देवता क साथ .....jalasur........Aur वायु देव क साथ पावणासुर ........

यह तीनो असुर उन तीन देवताओ क hi प्रतिरूप दिखाई दे रहे थे .........

तीनो देवता अपनी पूरी ऊर्जा क साथ युद्ध कर रहे थे परन्तु उन तीन असुरो को कुछ होने की बजाये वह देवताओ की ऊर्जा को अपने भीतर सोख रहे थे.......

यहाँ यमराज जी भी अपने यौम पाश से असुरो को यमलोक भेज रहे the........lekin जितने असुर माते जाते उतने hi फिर प्रगट हो jaate......Antak ने और एक असुर प्रगट किया कालनिधि ...जो यमराज से भीड़ गया......

यहाँ देवराज ने देखा क आंतक बार बार दिव्या असुरो को अपने भीतर से प्रगट कर रहा hai.....toh वह स्वयं युद्ध में उतर आये ......

देवराज ने आंतक पर अनेको दिव्यास्त्रों से वार किया जिससे आंतक एक hi हाथ से रोकता और उसका मुख स्वर्ग की और मोड़ deta......isse स्वर्ग को बड़ी हन्नी हो रही थी..........

आंतक ने अब तक सर्फ देवताओ की ऊर्जा को उनके hi विरुद्ध करके लड़ रहा था.........

देवराज ने अब अपने वज्रा क प्रयोग करना शुरू किया और भयंकर विद्युत् ऊर्जा से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह भी व्यर्थ .........

सभी देवता कमजोर पद रहे the......Aur असुरो का कुछ भी अहित नहीं हो रहा था.......

देवराज विवश होकर नारायण अस्त्र का प्रयोग करने hi वाले थे ...क देवगुरु ने उन्हें रोक दिया .....

सावधान देवराज .......यह असुर वरदान की शक्ति से बलवान हो रहा है ...इससे और इसके शरीर से प्रगट हुए असुरो को कोई किसी भी अस्त्र से नहीं मार सकते hai........isliye जब तुम त्रिदेवो क अस्त्र चलोगे को क तोह वरदान क कारण इस असुर को तोह कुछ नहीं होगा .....

जिससे िन्नस्रो की विनाशकारी शांति इस लोक को नष्ट कर देगी.....

अब आंतक ने सभी देवताओ को अपने पाश में बंद दिया जो एक दिव्या पाश tha.........phir कुछ सोचकर ...देवराज वह से निकलकर अभी क रूम में प्रगट हुए .....

अभी बीएड पर बैठा कुछ सोच रहा tha......k अचानक देवराज को अपने सामने देखकर समझ गया क अब समय आगया है अगली शक्ति हासिल करने का .......

अभी - प्रणाम देवराज ......

देवराज - विजयी भाव पुत्र........

अभी - आप यहाँ स्वयं आये हो कोई विशेष बात .......

देवराज - तुम्हे शीग्र hi हमारे साथ चलना होगा vats....abhi और बातो का समय नहीं है....

तब मैंने अपना एक प्रतिरूप वह छोड़ा और देवराज क साथ तुरंत युद्धस्थल क लिए निकल पड़ा ......

जब हम वह पहुंचे तोह उस समय देव सैनिको की स्थिति बड़ी विकत thi......Jine असुर मारे जा रहे थे उतने hi और प्रगट हो रहे थे.......

और तत्वों क देवता आंतक क पाश में बंधे the...........Jaise hi आंतक ने मुज़हे और देवराज को देखा ......

आंतक - आगये देवराज .....और यह किस्से साथ लाये हो ........

अभी - मेरा परिचय तोह तुम्हे मिल hi जाएगा .......और अग्नि शूल से आंतक पर वार किया ........लेकिन वह वार उसका कुछ नहीं बिगड़ सका ......आंतक ने उस वार को वापस अभी पर किया लेकिन अभी को लगते hi वह ठंडा हो गया....

अभी ने देखा क देव सैनिक कमजोर पड़रहे है ....तोह उस्सने पृथ्वी तत्त्व और वायु तत्त्व मिलकर भयंकर धूल से बवंडर बनाया जिसमें सारे ासुर तिनके की भाटी ुद्रहि थे और एक दूसरे से टकराकर समाप्त होने लगे .....

धुल भरु आदि चलने क वजह से वह कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ..........

तभी आकाश में मेघ गरजने लगे और बारिश होने लगी और बवंडर और आंधी शांत हो गयी.......

आंतक - ओह्हो तोह तुम मायावी भी हो ......लेखों आंतक क पास तुम्हारी हर माया का जवाब है .....

जो असुर बवंडर में मारे गए वह जमीं पर गिर gaye....Abhi ने ध्यान दिया क असुरो क शव जमीं पर गिरने क बाद गायब हो रहे है और फिर जीवित होकर लौट रहे है.......

अभी ने फिर ऐसी माया की रचना की की जितने असुर थे उतने hi अभी हर असुरो क सामने आगये .....असुर अपने हतियारो से हुम्ला तोह कर रहे थे .....लेकिन कोई भी माया प्रकाश क सात रंगो से निर्मित होती है .....दिखने में यह स्थूल दिखती है लेकिन वह चाय से जतदा कुछ नहीं होती....

असुरो को माया में उल्ज़हाकार अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल को प्रगट कर क आकाश में एक घेरा सा बनाया और अग्नि तत्त्व की भयका ज्वालाओ को आकाश में स्थित कर दिया.... और अपने दिव्या धनुष से एक ऐसा अस्त्र चल्या जिसमें से निरन्तर तीर निकलकर असुर सैनिको को लगने लगे और और वह ऊपर उस घेरे में पहुंचकर जलकर राख हो जाता था ....

इस तरह असुरो की संख्या काम होने लगी ....यह सब करने में अभी को कुछ hi ..पल लगे .......

आंतक अभी की माया को समाज चूका था .....और उसने अपनी ऊर्जा से उस माया को समाप्त कर दिया .....

लेकिन तब तक असुरो की आड़े से अधिक सेना मारी जा चुकी थी ........

आंतक ने क्रोध में भरकर एक दिव्या शूल का वार अभी पर किया .....यह शूल उससे पारा शक्ति द्वारा प्राप्त हुआ tha.......Abhi ने उस प्रहार को अपने शक्ति त्रिशूल पर रोका ......जब दो शक्तिया आपस में टकराई तोह भयंकर ऊर्जा प्रगट हुई ........

प्रारशक्ति क मारक ऊर्जा क कारण अभी का कवच कमजोर पड़ा और इससे अभी जख्मी हुआ ........क्यों क अभी का कवच उससे देविक और आसुरी ास्त्रो से बचा सकता था .....लेकिन पराशक्ति और त्रिदेवो क ास्त्रो को कोई कवच नहीं रोक सकता था...

आंतक अभी आउट वार करता उसी समय सूर्य अस्त हो गया .....और आंतक ने आज क लिए युद्ध समाप्ति की घोषणा की .....

आंतक - आज तोह तुम बच गए ....जाओ और कल पूरी तैयारी कर क आना ......में भी देखु कितना बल है तुममे......

और वह वह से चला जाता है ...........

अभी शक्ति क प्रहार से घायल होने क कारण मूर्छित हो जाता है .......जिससे देवराज स्वर्ग में अपने महल ले जाते है..........

पराशक्ति की ऊर्जा क कारण दक्ष से मिलान क बाद मिली हुई हीलिंग पावर धीरे धीरे काम कर रही थी ........

देवराज ने भी स्वर्ग क वैद अश्विनी कुमार से औषदि तैयार की और अभी क लिए भेज दी........

यहाँ अभी की आंखें खुली तोह अपने सामने एक लड़की हाथ में औषदि का कटोरा लिए अभी की तरफ आश्चर्य से देख रही थी......

यह लड़की थी शामली जो गन्धर्व राज की कन्या thi.....aur यही थी अभी की अगली शक्ति........

अभी बस उससे एकटक देखने लगा .....किसी असपारा जैसा सौंदर्य ...और चेहरे पर masumiyat....Aankhe जैसे हिरणी की तरह बड़ी बड़ी ......अभी बस उस रूप सौंदर्य को देखकर जैसे खो सा गया था......

ध्यान में कई दिनों से जिस कन्या को अभी देख रहा था आज वह सामने थी

तभी अश्विनी कुमार अंदर आते हुए .....अरे शामली तुमने अभी तक यह औषदि इन्हे लगायी नहीं.....

शामली - गुरुदेव ....औषदि तोह है परन्तु कहा लागू इनको तोह कोई घाव hi नहीं है ......तब तक हीलिंग पावर अपना काम कर चुकी थी....

अश्विनी औषधि वापस लेते हुए ...कोई बात नहीं तुम इनका ख्याल रखो ....ध्यान रहे यह देवराज का आदेश hai.....aur वह चले जाते है...

अभी - तुमने ऐसा क्यों कहा की कोई घाव नहीं है ,

शामली - सत्य hi तोह कहा ....कहा है मुज़हे तोह दिखाई नहीं दे रहा

अभी - अपना हाथ इधर लाओ .....

शामली - क्यों...

अभी - तुम्हे अपने घाव दिखाना है.....

और अभी उस्का एक हाथ पकड़कर अपने दिल पर रख देता है........

अभी - तुम्हारी इन आँखों क बाण ने मेरे हृदय पर घाव कर दिया है .....देखो तोह कैसा जोरो से धड़क रहा है.......

पहले तोह वह समाज नहीं पायी पर जब समाज आया तोह वह शर्माकर हाथ छुड़ाकर भागने लगी ......

अभी - देखो ...देवराज ने आदेश दिया है तुम ऐसे नहीं जा सकती ......

अभी की बात सुनकर वह वापस मुद जाती है....

आज क लिए इतना hi.....

अगला अपडेट कल.......

 
अपडेट - 94

अब तक आपने देखा क स्वर्ग पर आंतक ने आक्रमण कर दिया है ....

देवराज अभी को अपने साथ युद्ध भूमि ले जाते है.....

पहले दिन क युद्ध विराम क बाद ...अभी घ्याल होकर बेहोश हो जाता है ...और जब आंखें खुलती है ....तोह अपने सामने शामली को पाया है ...जिससे इतने दिन से ध्यान में देख रहा था....


अब आगे .........

शामली चुप चाप सर निचे कर क बैठी जाने क्या सोच रही thi............k अभी की आवाज से वह अपनी सोच से बहार आयी.....

अभी - वैसे शामली क्या नाम है तुम्हारा........

शामली - मेरा नाम Sh.....(lekin जब उससे अभी की बात समझ आयी) .....तोह .....आप बड़े वह हो ....मेरा नाम लेकर मुजह्से hi नाम पूछ रहे हो

अभी - अच्छा यह वह मतलब क्या hai........waise तुम जाती बहुत hi अच्छी , और वह सरोवर क किनारे बैठ कर जो गीत गए रही थी वह तोह अप्रतिम है....

शामली - यह सब आपको कैसे पता.......

अभी - मुज़हे तोह यह भी थी hai.....k सरोवर क जल में तुम किसका चेहरा देखती हुई जाती hoo.....ab तोह में तुम्हारे सामने हु......

शामली - लेकिन आपको कैसे पता चला क में आपका hi चेहरा देख रही थी.....

लेकिन अहसास होते हुए क उसके मुँह से सच निकल gaya......toh उसने एक हाथ अपने सर पर मारा और अपने दांतो टेल ऊँगली दबा दी.........

अभी - उफ़ यह मासूम अड्डा ......हम से hi प्यार और हम से hi parda..........aur अभी यथकार उसके पास जाता है और अपने हाथ से उसके चेहरे को ऊपर उठता है......

जब तुम मुजह्से इतना प्रेम करती हो तोह जब में तुम्हारे सामने आया तोह क्यों अपने प्रेम को अपने ह्रदय में छुपा लिया......

अभी की बातों से शामली का प्यार जो वह अब तक दिल में दबाए बैठी थी आँखों क रास्ते बहार आने लगा...

शामली - आपने तोह मुज़हे कभी देखा नहीं था ...इसीलिए दर था क कही आप मेरा प्रेम अस्वीकार न करदे........

अभी उसके आंसू पोंछता हुए उससे अपने गले लगता है.......

अभी - जिस प्रेम में इतनी शक्ति हो क बिना मिले hi अपने प्रेमी का चेहरा दिख जाए उस प्रेम को कैसे कोई अस्वीकार कर सकता hai......Jaise तुम मुज़हे सरोवर क जल में देखती थी ......मैं तुम्हे अपने ध्यान में देखता था......

मुज़हे भी कई दिनों से तुम्हारी hi प्रतीक्षा थी और देखो आज तुम मिल गयी.....

शामली भी कसकर अभी को पकड़ लेती है .....इतने वर्षो की प्रतीक्षा उसकी आज जो ख़तम हो गयी hai......dono एक दूसरे को बाँहों में खोये हुए थे.......

एक दूसरे की धड़कन और उसमें छिपे एक दूसरे क प्रति प्रेम को महसूस कर रहे थे......

अभी ने शामली का चेहरा ऊपर किया .....और उसको आँखों में देखने लगा जहा उसके लिए बेशुमार प्यार क अलावा और कुछ नहीं था......

शर्म क कारण शामली क कांपते होंठ अभी को जैसे निमंत्रण दे रहे थे ...अभी होंठ शामली क होंठो क करीब आगये दोनों क साँसे एक दूसरे से में समां रही थी ....अभी ने अपने होंठ शामली क होंठो पर रख दिए .......

शामली का जिस्म काँप गया प्रेम क इस पहले चुम्बन क अहसास से ....

अभी उसके होंठो को बस अपने होंटो से शाला रहा था ........अब अभी उसके उप्पेर क होंठ को मुँह में भरके धीरे2 चूसने laga.....Shamli क हाथ अभी क पीठ पर कास गए ....वह बस अपने प्रेमी क हर क्रिया को महसूस कर रही थी......

थोड़ी देर ऐसे hi चुम्बन क बाद दोनों अलग हुए ......

क तभी वह एक सैनिक भीतर आकर देवराज का सन्देश अभी को देता है क देवराज ने उससे सभा में बुलाया hai.........Toh अभी भी शामली से फिर मिलने का इशारा करके सैनिक क साथ चला जाता है .....

यहाँ सभा में केवल देवराज और देवगुरु बैठे हुए थे ...क्युकी बाकी देवताओ को तोह आंतक ने अपने पाश में बांध रखा था.........

अभी भी जाकर दोनों को प्रणाम करता है फिर बैठ जाता है.........

देवराज - अब आपका स्वस्थ कैसा है........

अभी - मैं बिलकुल ठीक हु देवराज , आप बताइये क्या कोई मार्ग मिला आंतक क नाश का ...

देवगुरु - हम इसी बात पर विचार कर रहे the........kya आपको कोई मार्ग सुज़हा

अभी - देवगुरु एक बात मुज़हे समाज नहीं आयी .......क ...आंतक ने एक असुर होकर भी सुर्यस्था क समय युद्ध रोक दिया जब क असुरो की शक्ति रात्रि क समय hi अधिक होती है.......

देवगुरु - यही बात तोह उससे बाकी असुरो से अलग करती hai......Antak बाकी असुरो जैसा काली शक्तियों का उपासक नहीं hai.....Antak ब्रह्मा जी का उपासक है.......

प्रकाश अँधेरे को ख़तम कर सकता है ....प्रकाश प्रकाश को सप्त नहीं कर सकता ..........

शायद इसीलिए देवता भी उसका या उसके निर्मित असुरो का कुछ नहीं बिगड़ पा रहे है......

आंतक युद्ध पूरे नियम क साथ लड़ता है......

अभी - तोह क्या इसके अंत का कोई उपाय नहीं है........

नारायण ...नारायण की धुन गाते हुए तभी वह देवऋषि नारद आते है जिन्हे देखकर देवराज और अभी खड़े हो जाते है और प्रणाम करते है.....

नारद जी - उपाय है देवराज ........आंतक ने बड़ी भयानक तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रस्सना किया और अमरता का वरदान माँगा...

तब ब्रह्मा जी ने अमरता का वरदान देने में असमर्थता दर्शायी और उससे अपनी मृत्यु का एक कारण चुनने क लिए कहा.......

तब आंतक ने बड़े विचार क बाद एक विशेष प्रकार की ध्वनि की ऊर्जा ( साउंड एनर्जी) को चुना....

इसिलए लिए कोई अस्त्र शास्त्र उस्का कुछ नहीं बिगड़ सकते......

अभी - और वह विशेष ध्वनि क्या है देवमुनि

नारद जी - में इतना hi कह सकता हु क वह ध्वनि संगीत क किसी राग से जुडी हुई है.......

इतना कहकर नारद जी वह से चले गए...

देवगुरु - हमे इस विषय में गन्धर्वा राज रंजन (गर) की सहायता लेनी होगी ........

देवराज - ठीक है गुरुदेव हिम अभी सन्देश भेजकर उन्हें यहाँ बुलाते है........

देवगुरु - देवराज निति कहती है क सहयता मांगने वालो को स्वयं उसके पास जाना चाहिए जिससे सहयता लेनी हो ......चाहे वह चक्रवर्ती सम्राट hi क्यों न हो.....

देवराज - आप उचित कह रहे है गुरुदेव ....चलिए ....

फिर हिम तीनो गन्धर्व नगर में गर क भवन पहुंचे .......यहाँ पहुँचते hi हमे अर्धरात्रि का राग ....राग शिवरंजनी ....में मधुर संगीत सुनाई देने laga.......jo विणा बजाते हुए शामली गए रही थी ...और गर उस्का साथ दे रहे थे .......

उस राग की दिव्यता में हम तीनो ऐसे खो गए क हमे कोई सुध hi नहीं रही क हुमा यहाँ क्यों आये है........

जब वह संगीत बंद हुआ तोह हमे होश आया .........गर और शामली आँखे बंद करके गए रहे the......jab गीत समाप्त हुआ तोह दोनों ने आँखे खोली....

गर देवराज और देवगुरु को साक्षात् अपने सामने देखकर एकदम से खड़े हुए और उन्हें प्रणाम किया ......

गर - आज तोह में धन्य हो गया जो स्वयं देवराज और देवगुरु मेरे भवन आये है .......आइए आसान ग्रहण कीजिये ...........

और अभी क तरफ देखते हुए - और शायद आप वही रक्षक है जो देवताओ का युद्ध में साथ दे रहे hai.......aayiye आप भी विराजमान होईये.....

गर - देवराज कहियहे सेवक क लिए क्या आज्ञा है.....

देवराज - इस समय हम तुमसे संगीत की शक्तियों बारे में जानने आये है ......

गर - क्या बात है देवराज युद्ध क समय संगीत क बारे में जाना चाहते हो ...आश्चर्य है ....

देवराज - क्यों की इस युद्ध में संगीत की आवश्यकता hai.....aap बताये

गर - तोह सुनिए देवराज .....संगीत में वह शक्ति है जो सारे सृष्टि तोह क्या स्वयं भगवन को भी वश में कर दे ......

भगवन का हर रूप इसी संगीत से सम्पूर्ण श्रिस्ति का सञ्चालन करता है.........

शिव का डमरू, कृष्णा की murli....Vishnu का shankh......Aur ब्रह्मा जी क पास निरन्तर बजती हुई माँ सरस्वती की विणा .....और सामवेद से आती हुई रगो की ध्वनि.......

यह सब संगीत क hi मूल है......

जहा राग मेघ मल्हार बरसात करा सकता है .....वही राग बसंत समय से पहले hi बसंत ऋतू को ला सकता है .......राग शिव रंजनी साक्षात् महादेव को प्रगट करसकता है.....

राग भैरवी संपूर्ण नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकता है .......

राग भैरव जीवो क मैं क अंधकार को मिटाकर प्रकाश से भर देता है.....

आप बताइए इस युद्ध में संगीत की क्या आवश्यकता ाँ पड़ी है..

तब देवराज नारद जी की बताई साड़ी बातें गर को बता देता है......

गर - अच्छा तोह यह बात है ........देवराज भले hi आंतक काली शक्तियों का उपासक नहीं है लेकिन है तोह वह असुर hi और कस क लिए काम करता है .....इसलिए उसके मन की आसुरी प्रवृति तोह वही है ....जो अंधकार का रूप है .......

और उस अंधकार में hi उसके प्राण छिपे हुए है जो केवल गोधूलि वेला क राग अहीर भैरव से hi समाप्त होना संभव hai........Aur इस राग में पारंगत है मेरी पुत्री शामली है .........

अभी - परन्तु इस भयंकर युद्ध भूमि में जहा हर तरफ अस्त्र शास्त्र चल रहे हो वह हम शामली को कैसे ले जाए.......

शामली - मेरी धृष्टता क लिए मुज़हे क्षमा करे ......क में आपके मध्य में बोल रही हु .....परन्तु यह आवश्यक है.....

मारिभूमि की रक्षा से बढ़कर प्राणो का मूल्य नहीं होता .........इसीलिए यदि आज मुज़हे यह अवसर प्राप्त हुआ है .....तोह प्राणो की रक्षा क मोह में मैं न जाओ यह संभव नहीं है .....

डॉ - वह पुत्री में धन्य हो गया तुम जैसी संतान पाकर ........

ऐसे और थोड़ी देर मंत्रणा चलती रही फिर हम वापस स्वर्ग क महल में आगये.....

सुबह शंख नाद क साथ सवेरा हुआ .........और फिर पहुंचे युद्ध भूमि पर....

फिर आमने सम्मन आयी दोनों तरफ की सेना .......

आंतक - अच्छा तोह देवताओ का रक्षक ठीक होगया .........

अभी तोह सिर्फ एक hi वार किया tha.......Ab जरा और दिखाओ कितना बल है तुममे ......

शामली को वह लाने क लिए आंतक को युद्ध में उलझना जरुरी था ...........तोह अभी ने भी अपनी गदा का आवाहन किया ......

अभी - आंतक वरदान में प्राप्त शक्तियों द्वारा वह लड़ते है जिन्हे अपने बाहुबल पर विश्वास नहीं होता .......यदि सच में तुम एक वीर योद्धा हो मुजह्से अपने बाहुबल से युद्ध करो .........

आंतक - रक्षक चिंता मत करो .....अब आंतक अपने बाहुबल से hi इस युद्ध को जीतेगा .....यह आंतक का वचन है......

और गदा लेकर अभी की तरफ दौड़ा और एक जोड़कर वार किय ....जिससे अभी ने सर पर गदा लेजाकर टोका .......और एक किक उसके पेट में मारी और पीछे धकेल दिया ......

जिससे अन्त्यज एयर क्रोध में भर गया ......और फिर प्रहार किया दोनों गड़ाओ क टकराने से वह भयकर आवाज होने लगी थी ......तभी आंतक ने अभी क वार को ब्लॉक करके उसके फेस पर एक जोरदार पंच maara....jisse अभी को कोई चोट तोह नहीं आयी लेकिन इतने फाॅर्स की वजह से वह दूर जाकर गिरा ........

आंतक - ha..ha...ha...Ab पता चला आंतक का बाहुबल .......

अभी ने देवराज की तरफ देखा तोह उन्होंने गदा की तरफ इशारा किया ......अभी समाज गया

....गदा क टकराव क कारण होने वाली आवज क कारण और युद्ध क इस माहौल क कारण शामली गए नहीं पा रही है.....

अभी - आंतक गदा युद्ध तोह बहुत देख लिया .....असली बाहुबल की परीक्षा तोह मल्ल्युद्ध से होती है ......और अभी अपनी गदा छोड़कर ताल ठोककर मैदान में आजाता है .....

आंतक - वह रक्षक मान गए ....अब तोह और मज़ा आएगा ...और दोनों किसी पहलवान क जैसे एक दूसरे पर अपने डाव पेच चलने लगे ........

देवराज ने देखा क अब आंतक अभी से लड़ने में पूरा मगन है ....तोह सही अवसर jaankar.....woh शामली को वह ले आये ......

यहाँ अभी छलांग लगाकर आंतक क पीछे पहुँच gaya....aur अपनी बाजू से उसकी गार्डन ऐसे कसकर पकड़ ली ....क वह हिल भी नहीं पा रहा था......

उसी समय शामली ने राग अहीर भैरव क सुर छेड़े ....और जैसे hi वह सुर आंतक क कानो में पड़े ....तोह वह जोर से चिल्ल्या ......

आंतक - चल है यह .....रोको इस संगीत को अह्ह्ह्ह .....यह मेरे प्राण ले रहा hai........Tumne चल किया है मेरे saath....ahhh

जैसे जैसे शालिनी गाने लगी आंतक क सर में भयंकर पीड़ा होने लगी ...और उसके नसक कान और मुँह से खून निकलने लगा .......तब अभी ने उससे छोड़ दिया.....

आंतक अपने बाल नोचने लगा चिल्लाने लगा .......और फिर आखिर में एक भयंकर चीख क साथ धरती पर गिर पड़ा .....लेकिन गिरते गिरते उसने अपने आखरी ऊर्जा से एक जलता हुआ शूल शामली की तरफ फेंका ....और गिरकर मर गया .....

वह शूल शामली की तरफ बड़े तेज़ी से बढ़ने लगा .....

अभी क लिए इतना hi ......

अगला अपडेट रात को ......
 
अपडेट - 95

अब तक आपने देखा देवऋषि नारद ने आंतक क अंत का रहस्य bataya.....jo की संगीत क किसी राग में छुपा था

शामली क राग अहीर बहिराव गाने से आंतक का अंत हुआ लेकिन मरते हुए भी उस्सने शामली पर माँ पारा शक्ति द्वारा प्राप्त भयंकर शूल का प्रहार शामली पर कर दिया ........


अब आगे ......

आंतक का वह शूल जैसे hi शामली तक पहुँचने वाला था .......अभी बिच में आगया ......और उस वार को अपने ऊपर ले लिया ........अभी का कवच इस वार को रोकने में सक्षम नहीं था .......जिससे वह बहुत ज्यादा घ्याल हो gaya......aur बेहोश हो कर गिर गया....

अभी को गिरते हुए देखकर शामली की जोरदार चीख निकल गयी .......नहहीइ

और वह दौड़ कर अभी क पास पहुँच गयी और उसके सर अपनी गोदी में लेकर रोने लगी ......शामली क आंसू अभी क चेहरे को भिगो रही थी......

अभी को तुरंत देवराज क महल ले जाय गया....

अभी की हालत का आभास उसकी सभी पत्नियों को हुआ ......लेकिन सबसे ज्यादा शालू पर हुआ ... जिसके मिलान क बाद अभी को कवच प्राप्त हुआ था ......वह भी अभी की hi तरह जख्मी हो गयी थी .......

शिवली आदि सभी पत्नी अभी क पास पहुंचना चाहती thi....parantu बिना देवराज की आज्ञा क स्वर्ग में प्रवेश वर्जित था .......

शिवली को शालू की हालत का भी आभास हो गया था ......इसीलिए शिवली ताललोक पहुंची और शालू का उपचार करने लगी उससे पता था क अभी को ठीक करने क लिए शालू को ठीक करना जरुरी है......

अभी की सभी पत्निया ताल्लुक में इकठ्ठा हो गयी थी ... दक्ष भी अपनी हीलिंग पावर से शालू का उपचार करने में लगी थी.....

यहाँ घर पर जो अभी ने अपना प्रति रूप छोड़ा था वह भी घर पर सबसे बात करते करते अचानक बेहोश हो गया उसके शरीर पर भी वैसे hi घाव हो गए जैसे की अभी क शरीर पर थे ..

उस समय रिम्पी भी वही थी .....ासाहनक अभी की ऐसी हालय देखकर घर में सभी घबरा gaye.......Rimpy अपनी प्रकिति की ऊर्जा .....और ाद्दु प्राणशक्ति की ऊर्जा से अभी का इलाज करने लगी ....

पराशक्ति का वह शूल इतना शक्तिशाली था और अमोघ था क यदि किसी और देवता को लगता तोह वह वही समाप्त हो जाता .....

यह तोह अभी क अंदर भी त्रिदेवो क साथ साथ पराशक्ति का भी अंश था इसलिए अभी क प्राण नहीं निकले ......

यहाँ स्वर्ग में भी शामली अश्विनी कुमारो क औषधि और संगीत विद्या से दिन रात अभी की सेवा में लगी हुई थी ........

3 दिन तक लगातार इतने लोगो का प्रेम ...प्रार्थना ..और sewa..k kaaran.....Uss शूल की ऊर्जा को शांत होना hi पड़ा .....और 3 दिन बाद अभी ने आँख खोली ......तोह देखा .....शामली ....उसका हाथ पकडे बैठे 2 सो गयी है .......

अभी ने उसका हाथ पकड़ लिए .....जब शामली को यह महसूस हुआ तोह उसने आंखें खोली ...और अभी को होश में आया देखकर उसकी आँखों से ख़ुशी क आंसू बहने lage.....aur वह अभी से लिपट गयी .......उसके आंसू अभी क सीने को भिगो रहे थे.......

अभी शामली क सर पर हाथ फेरते हुए .....मैं अब बिलकुल ठीक हु जान .....बस करो अब यह ाशस्रु मत बहाओ .......बस थोड़ी सी चोट लगी थी वह ठीक हो गयी....

शामली अचानक अभी से अलग हुई ....और एक जोरदार थपोड़ अभी क गाल पर मारा ........

अभी का तोह मुँह और आंखें दोनों खुली की खुली रह गयी .........

शामली - क्या जरुरत थी मुज़हे बचने क लिए अपने प्राणो को संकेत में डालने की अगर आपको कुछ हो जाता toh......mar जाने देते मुज़हे.....

अभी ने अपने हाथ उसके मुँह पर रखा ....

अभी - अच्छा मर जाने देता तुम्हे .....तुम्हे बचाकर मैंने अपनी जान hi बचायी है.......

और उससे अपनी बाहो में खिंच लेता है.......

अभी - जान विवाह करोगी मुजह्से ....

शामली - अब भी पूछने की आवश्यकता है......

अभी - क्या तुम मुजहपर विश्वास करती हो....

शामली - अपने प्राणो से भी ज्यादा .....

फिर अभी ने उससे अपने बारे में और अपने 14 विवाह क बारे में सब कुछ बता दिया.....

अभी - क्या अब भी तुम विवाह करना चाहती हो .....

शामली - हां , क्यों क मुज़हे आपके प्रेम पर पूरा विश्वास है .........

तभी किसी क आने की आहात हुई ......

अभी ने देखा क देवराज और गर दोनों साथ आरहे है...

देवराज - तोह रक्षक को अपनी अगली शक्ति मिल गयी है........

अभी ने खड़े होकर दोनों को प्रणाम किया.....

गर - तोह हमारी बेटी को उसका िचित वर प्राप्त हो gaya....(.Shamli क सर पर हाथ फेरते हुए) बीटा अब तोह शीघ्र hi विवाह सम्पन्न करना होगा.....

शामली शर्माकर अपने पिता क गले लग गयी......

यहाँ अभी क ठीक होते hi शालू भी ठीक हो गयी और घर में जो अभी का प्रतिरूप था वह भी....

अब गन्धर्व नगर में विवाह की तैयारी जोर शोर से होने लगी .....

शामली की इच्छा क कारण देवराज ने अभी की पत्नियों को भी यहाँ आने की अनुमति दी ........

शामली ...Shivali....Shalu....Sulekha......Bhadra....daksha से मिलकर बहुत खुश हुई .......अभी की सबुइ पत्निया अपने हाथो से शामली का श्रीनगर करने लगी......

यहाँ अभी ने भी अपने साथ क लिए रिंकू और राकेश को भी देवराज की अनुमति से बुला लिया ...

रिंकू - क्या यार क्या जबरदस्त लग रहा hai....bole तोह एकदम zhakkas...........by थे वे ....लकी है यर तू......

अभी - कोई बात नहीं यर में लिमा को बता दूंगा वह hi तेरे लिए और ढूंढ देगी....

रिंकू - अरे यार में तोह मज़ाक कर रहा tha........Yeh राकेश का भी सोच kuch.....kab तक ऐसे hi अकेला घूमता रहेगा ......

राकेश - में ऐसे hi ठीक हु ......तुम अपना देखो.......

तभी मंडप से बुलावा आया .....अभी अपने दोनों दोस्तों क साथ मंडप में पहुंचा .....अभी की साड़ी पत्निया शामली क साथ मंडप में aayi.....mano संसार की साड़ी सुंदरता इसी मंडप में एकत्रित हो गयी हो....

वह क रीती रिवाजो से विवाह सम्पन्न हो गया......

शिवली और अभी पत्नियों ने शामली को सुहाग सेज तक पहुँचाया.........

जब अभी रूम में अंदर आया .....तोह शामली होने वाले मिलान क बारे में सोचकर शर्माकर सिमट गयी ........

अभी उसके पास जाकर बैठ गया ........तुम खुश तोह हो न जान........

शामली - बस सर हिलाकर जवाब देती है.......

अभी उसके गॉड में सर रखकर लेट जाता है ......बात नहीं करोगी......

अभी उसकी गॉड में लेट कर उसकी आखों में देकने लगा..

शामली भी अभी की आँखों में देकने लगी ......और निचे ज़ह्कते हुए अभी क माथे पर किश कर दिया.....

अभी - जान मत्थे पर तोह हो गया लेकिन अब इन होंठो का क्या........

शामली ने एक हल्का सा किश अभी क होंटो पर कर दिया .....

अभी - यह क्या बात हुई जान ऐसे कोई चूमता hai.....uska सर अपने हाथो से पकड़कर निचे काके उसके होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसने लगता hai.....Shamli क जिस्म में मदहोशी की लहर दौड़ने lagi.....woh भी अभी का साथ देते हुए चूमने लगी.

जब दोनों की सास फूलने लगी तोह दोनों अलग हो गए...

फिर दोनों एक दूसरे को देखने लगे..... अब अभी ने शामली की पीठ पर अपना हाथ चलना सुरु कर दिया. ........उसके स्तन उसकी गॉड में लेते होने क कारण अभी क चेहरे को छू रहे थे..

अभी ने उसकी आखों में देखते हुए पथ पर हाथ चलना जारी रखा. ...और धिरे से उसकी चोली की डोरी को खोल दिया. ......जिससे उसकी चोली उसके कंडे पैर झूल कर रह gayi.....Aur शामिल ने आगे हाथ रखकर चोली को अपने से अलग होने से रोक दिया....

शामली की सासे गरम होने लगी thi.....Abhi ने भी जब देखा की शामली ने हातो से चोली को थम रखा hai.......toh वह उसके हाट पकड़कर हटने लगा.....

अभी का एक हाथ उसकी नंगी पथ को सहला रहा था..... शामली क पीठ पैर अभी का हाथ उसके जिस्म में सरसराहट पैदा कर रहा था. .....उसकी आखें बंद हो चुकी थी........

अभी ने अब शामली क पेट पैर अपने होंठ रख दिए...... और हाथ को उप्पेर ले जाकर सतनो से शामली का हाथ हटाने लगे......

अपनी पेट पैर अभी के होंठ और गरम साँसों को और हाथ को फील करके शामली आखें बंद किये कहरा उडी थी..... अभी उसके पेट को चूमने लगा और उप्पेर की और बढ़ने लगा....

. उसका मुँह अब स्तनों के निचले हिस्से पर था. ...जो चोली और शामली क हाथ से डाका हुआ था.

अभी ने अब उसके हाथो को हटाकर चोली को पूरी तरह हटा दिया ...शामली के दोनों गोल और एकदम गोर स्तन नंगे हो कर उसकी आखों के सामने थे. ....

अभी ने एक स्तन को अपने हाथो में पकड़ा कर सहलाने लगा तो दूसरे स्तन पैर निचे से उसके निप्पल तक चाटने लगा.

शामली की तोह सिसकारियां निकलने लगी ...और अभी उसके बूब्स से खेलता रहा.....

शामली को लिटाते hi अभी ने अपने कपडे उतर दिए. ....और केवल अंडरवियर में शामली के पास लेट गया. ...और उसके स्तनों को सहलाते हुए उस्सको अपने से चिपका लिया और उसके पीछे कमर पर हाथ फेरने लगा. ......इससे शामली और गरम होने लगी थी

अब अभी उसके होंटो को अपने मुँह में भर लिया और उनको चूसने लगा...

शामली भी अब उसका साथ देने लगी. ....

सहसंलि का तो ये पहला मौका था तो इस चुम्बन क हर पल को महसूस करने लगी ....

उसके के स्तन अभी के सीने में दबे पड़े थे. जो अभी के हिलने से उसके सीने पैर रगड़ रहे थे.

अभी को भी उसके स्तनों का अहसास पागल कर रहा था. ...अभी अब उसके स्तनों पैर आ गया. ..

और उसके निप्पल को मुँह में ले कर लेते -2 चूसने लगा. इससे शामली के सरीर में एक सिरहन सी दूध गयी. और वो अभी के सर को अपने स्तनों पैर दबाने लगी.

उसका का हाथ उसकी जांघो पर चलते हुए उसके लहंगे को उप्पेर उठा रहा था. ..

जब उसका लहंगा पूरी तरह ऊपर हो गया तो अभी ने अंदर हाथ गुसा दिया और सीडी उसकी पंतय के उप्पेर से उसकी योनि पैर रख दिया.

अभी का हाथ अपनी योनि पैर महसूस करते hi शामली तड़प उठी और उसकी योनि कॉमर्स बहाने लगी....

दोनों वासना और प्रेम की आग में जलने लगे दोनों से अब सबर करना मुश्किल हो रहा था .....

अभी ने अपना अंडरवियर भी उतर diya.....aur उसका तना हुआ लिंग मनो शामली को चुनौती दे रहा हो

शामली तोह उसका लिंग देख कर दर गयी

अब अभी ने शामली को भी निर्वस्त्र कर diya....uske बेपर्दा हुस्न को अभी अपनी आँखों से पिने लगा

शामली यु अभी को घूरता देख अभी से चिपक जाती है. ....तो अभी उसके नंगे जिस्म पैर हाथ फेरने लगता है. ....अभी का लिंग शामली के पेट पर चुबने लगता है

उसकी चुंबन शामली को गरम कर रही थी. ...अभी हाथ फेरते हुए अपना हाथ उसकी योनि पैर रख कर सहलाने लगता hai....Shamli आह्हः ाःह करने लगती है.

दोनों अब बीएड पर लेट जाते है शामली अभी के सरीर को चूमने लगती है. अभी भी उसके बदन पैर हाथ पैर रहा था. उसे मसल रहा था.

शामली की सिसकिया तेज़ होती जा रही thi....jo अभी को और उकदा रही थी....

अभी अब उसकी योनि की और बढ़ता है और उसको चुम लेता है और योनि की खुसबू से और जायफा मदहोश हो कर योनि को चाटने लगता है. ....दोनों क अंदर वासना अपनी चरम पर बढ़ने लगी ...और दोनों क शरीर से तरंगे निकलकर एक ऊर्जा क रूप में परिवर्तित हो रही थी

अब शामली की योनि से कॉमर्स आने लगा था. ....अभी मिलान का सही समय जान कर उसके उप्पेर आ गया. और उसकी दोनों टैंगो को छोड़ा कर अपना लिंग शामली की योनि पैर रख दिया.

अभी - जान तुमको थोड़ा दर्द होगा. पैर फिर अच्छा भी lagega.....hamre मिलान क लिए ...तुम्हे दर्द सहना होगा

शामली ने हाँ में गार्डन हिला दी ...

अभी का लिंग उसकी योनि पैर रगड़ रहा था. और दोनों को बहुत ज्यादा उत्तेजना महसूस हो रही थी

अभी ने अपने लिंग को उसके छेद पैर दबा दिया. तो उसका टोपा उसकी योनि में घुस गया. ..

शामली की तोह एक चीख निकल गयी..

अभी ने उसे संत करने के लिए उसके स्तनों को सहलाना सुरु कर दिया. और धिरे -2 अपने लिंग पैर दबाब भेदने लगा.....

अभी ने लिंग को थोड़ा सा पीछे खींच कर एक जोर का दक्का लगा दिया. उसका लिंग उसकी योनि को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा....

शामली तो चीखे जा रही थी. उसकी आखों में दर्द के आशु थे. ...और मन में मिलान की ख़ुशी....

अभी शामली को संत करने के लिए उसके होंटो को चूसते हुए उसकी स्तनों को मसल रहा था.

अब दोनों की काम क्रिया शुरू हो चुकी थी...

शामली की चूड़ियों खनक और पायल की ज़हानकर बहुत hi मदुर संगीत निकल रही थी.

अब दोनों की गति और तेज़ होने lagi.....Dono क मुँह से लगातार सिसकिया निकल रही thi...aise hi दोनों साथ साथ अपने चरम पर पहुंचे और स्खलित होगये....

दोनों क शरीर से निकली ऊर्जा बे एक दिव्या ऊर्जा का रूप लिया और अभी क शरीर में प्रवेश कर गया...

और अभी को प्राप्त हुई संगीत शक्ति और अदृश्य होने की शक्ति .......अब दोनों एक दूसरे की बाहों में ठक्कर सोगये.....

आज क लिए इतना hi....

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 96



अब तक आपने देखा क अभी का मिलान शामली से हो गया है .....जिससे उससे संगीत विद्या और अदृश्य होने की शक्ति प्राप्त हुई.......



अब आगे......

सुबह जब अभी की आँख खुली तोह देखा शामली अभी क सीने पर सर रखकर सोई हुई thi..........dono अभी निर्वस्त्र थे ......अभी ने शामली क मत्थे पर एक किश किया और उससे अपने उप्पेर से हटा कर धीरे से उठने लगा ....तोह शामली ने उससे कास कर पकड़ लिया .........अभी भी वह नींद में थी ......जो किसी मासूम बच्ची की तरह लग रही थी ......तोह अभी भी थोड़ी देर उससे बहून में लेकर सो gaya..........aur एक हल्का सा चुम्बन उसके होंठो पर कर दिया .......जिससे उसके चेहरे पर एक हलकी सी स्माइल आगयी ......और वह उठ गयी........

अभी को अपनी तरफ इतने प्यार से देखते हुए देखा तोह उसने भी अभी क माथे पर एक किश कर दिया ...

शामली - ऐसे क्या देख रहे हो जान........

अभी - कुछ नहीं बस हमारे मिलान की यादें संजो रहा हु....

शामली - अब तोह हमारा विवाह हो गया है ......हम तोह अब साथ hi रहेंगे ....तोह यादो का क्या करना है....

अभी - नहीं जान अभी मुज़हे बहुत से कार्य पूरे करने hai......bahit जल्द हम सब साथ होंगे...

शामली - नहीं ....अब ...में आपसे दूर नहीं रह सकती .......में आपके साथ hi चलूंगी........

अभी - साथ तोह में भी चाहता हु परन्तु में विवश हु ........और वैसे भी हमारे मिलान से तुममे भी वह शक्ति आगयी है ...जिससे तुम जब चाहे मुजह्से बात कर सकती हो और जब चाहे मिल सकती हो .....तोह फिर तुम मुजह्से दूर कैसे हो.....

जान हिम अभी एक युद्ध में है और अभी समय बहुत काम बच्चा है ....इस काम समय में मुज़हे अपनी संपूर्ण शक्तियों को प्राप्त करना है.........

कुछ देर प्यार क पल बिताने क बाद ...अभी और शामली दोनों उठ गए .......सुबह तैयार होने क बाद .......अभी और शामली ने गर और उसकी पत्नी संध्या से आशीर्वाद लिया .......

गर - यशश्वी भाव putra.....humari बच्ची का ैव्हे से ध्यान रकना पुत्र यदि कोई भूल इससे हो जाए तोह नादान समाज कर इससे क्षमा कर देना ........हम आज आपका अपना hi एक अंश दे रहे है........

फिर अभी ने उन्हें बताया क अभी वह शामली को अपने साथ नहीं ले जासकता ......

तभी वह शिवली और शालू आगयी ....

शालू शामली क पास जाते हुए .....अब हमारी बहन हमारे hi साथ रहेगी ताल्लुक में ....है न दी ......

शिवली - हां बिलकुल शामली क तुम्हारे यहाँ आने से तुम्हारा मैं भी लगा रहेगा .......

क्यों ठीक है न शामली ....

शामली - दी जैसा आप उचित संजू....

अभी को भी यह ठीक लगा ....क्यों की अभी क अनुपस्थिति में ताल्लुक की साड़ी जिम्मेदारी अकेले शालू को देकनि पड़ती है , शामली क वह जाने से शालू को भी उस्का साथ मिल जाएगा.....

फिर हुई विदाई अभी शामली ...शिवली और शालू क साथ पहले ताल्लुक गया......

और वह शामली को शालू क साथ छोड़कर शिवली क साथ निकल गया .......जाने से पहले अभी ने वाइटल और अटल लोक का भी हाल जस्ना चाहा तोह शिवलु को लेका पहले तोह वाइटल लोक gaya.....aur प्रेतराज से मिला .....

भद्रा इतने दिन बाद अभी और शिवली से मिलकर बहुत खुश हुई .......उसने उन्हें एक दिन क लिए वही रोक लिया ..........

रात को अभी भद्रा क साथ कुछ प्यार भरे पल बिताकर सो gaya.......subah प्रेतराज से विदा होने क लिए मिला तोह प्रेतराज ने बताया ...क उस्सकी अगली यात्रा शीघ्र hi शुरू होने वाली है .....जिस्सकी शुरुवात उसीके गाओं से होगी.....

फिर वह से अटल लोक जाता hai......Aur वह क राजा आहुक से मिलता hai.......Daksha भी अभी को मिलकर बहुत खुश हुई ......एक दिन अभी और शिवली वही रुके ........वह अभी को आहुक से सुतल लोक क बारे में पता चला.....

सुतल लोक क राजा बलि का संदेसा आहुक तक आया था जो क अभी क लिए था ..........

अभी सोचने लगा क एक तरफ तोह प्रेतराज की बात क मुज़हे अपने गाओं जाना hoga.....aur दूसरी तरफ ...महाराज बलि का सन्देश .....क्या यह दोनों एक hi लक्ष्य की और इशारा कर रहे है...

शिवली - आप जो सोच रहे हो वह वह नहीं है......

अभी - तुम्हे कैसे पता ........ओह्ह मैं तोह भूल hi गया तुम तोह पहले से hi सब जानती हो.......

शिवली - वह इसिलए क्यों क मैं आपके मैं से hi जुडी हुई हु ........

गाओं से जो मार्ग जाता है वह अलग लोक है और राजा बलि सुतल लोक क राजा है......

अब यह आपपर है क आप किस मार्ग को पहले चुनते हो ........

थोड़ी देर चर्चा क बाद अभी रसातल क नागलोक में शिवली क साथ पहुँचता hai.....Waha उससे सुलेखा से पता चलता है .....क रसातल से उप्पेर जो टाळाटाळ लोक है वह बहुत सी ऐसी गतिविधिया चल ताहि है जो भयंकर विनाश का कारण बन सकती है.......

पहले तोह दो मार्ग थे अब यह तीसरा ...अभी को अब निर्णय लेना था क किस और पहले जाए.......

स्वर्ग की हार क बाद कस ने ऐसा क्या किया क सभी लोको की गतिविधिया तेज़ हो गयी.......

देखते है ......

जब आंतक का अंत हो गया........

कस अपने सिंघासन पर बैठा हुआ ......

कस - यह मुर्ख आंतक ....इतना अवसर मिलने क बाद भी रक्षक को समपय नहीं कर paaya......murkh ....पराशक्ति क शूल क अमोघ होते हुए भी मारा गया........

अगर वह रक्षक को देखते hi उस शूल से वार करता तोह तोह रक्षक समाप्त हो जाता .....

यहाँ एक तोह मारकेश का कुछ पता नहीं चल रहा है .......दूसरी और आंतक भी मारा गया.......

और मेरा बड़ा बीटा दुर्मुख जब से यहाँ से गया है उसकी भी कोई खबर नहीं है.......

तभी कस सभी असुरो और दानवो की सभा बुलाता है ....

कस - असुर वीरो अब समय आगया है हमे अपनी पूरी शक्ति से हमारे शत्रुओ को सबक सीखने ka....hume दिखाना होगा क हम असुर hi इस श्रिस्ति hi पूरे ब्रह्माण्ड पर राज करने योग्य है.......

जिस जिस लोक तक भी हमारी पहुँच है, वह की गतिविधिया तेज़ कर दो ......

अब देखता हु रक्षक किस किस लोक की रक्षा करता है....

का क आदेश पर असुरो की गतिविधिया तेज़ होगयी.......

पृथ्वी पर भी भरी मात्रा में असुर फैल चुके थे और कस क अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रहे थे.....

अभी अपनी अगली यात्रा से पहले अपने परिवार से मिलने क लिए घर गया .....तक तक रात हो चुकी थी और सभी सी गए थे.........

वह जब उस्सने अपने प्रतिरूप को अपने भीतर समाया तोह उससे घर में घाट रही साड़ी घटनाओ क बाते में पता चला........

कुछ दिनों से बदल रहे अभी क प्रति ऋतू क व्यव्हार क बारे में जानकार , अभी को समाज नहीं आरहा था की क्या करे......

क्युकी कुछ दिनों से ऋतू क मैं में अभी क लिए अलग भावनाये जनम ले रही थी .....वह अब दिन रात उसी क बारे में सोचने lagi..thi...

अभी अपने रूम में इसी बारे में सोच रहा था क दूर पर नॉक हुई .....तोह अभी ने दूर खोला तोह देखा क सामने ऋतू कड़ी थी....

अभी - दी आप इतने रात को .......क्या बात है...

ऋतू - बस नींद नहीं आरही थी ......और तेरे रूम का लाइट ों देखा तोह लगा तू भी अभी नहीं सोया होगा .......

अभी - अंदर aayiye....abithkar बातें करते है.....

दोनों अंदर आकर बीएड पर बैठ जाते है.......

अभी - हां दी बोलो ...क्या बात है........

ऋतू - बेतु ..क्या सच में तुज़हे नहीं पता क बात क्या hai........sab कुछ जानते हुए तू कई नहीं समाज ता ........

अभी - क्युकी आप जो चाहा रही है वह सरासर गलत है di.......yeh नहीं हो सकता .........

ऋतू - तू hi बता क अब मैं क्या करू .....बेतु .....मैंने बहुत बार कोशिस की क तेरे बारे में न सोचु लेकिन हो नहीं paata......ek को बड़ी मुश्किल से चुना था लेकिन वह भी धोका hi मिला .....अब और हिम्मत नहीं है......

अभी - दी आप समज़ती क्यों नहीं है .......यह ठीक नहीं hai......Aapko कोई ाचा मिल जाएगा ....जो आपको समाज सके ....अपने प्यार से आपके सारे दुःख खुसियो में बदल दे .....

ऋतू - बेतु ..ज़हूत बोलने बंद कर दे ...यह यु भी जानता hai...k यह पॉसिबल नहीं है .......कई क मेरे अंदर की पावर्स तेरे साथ जुडी हुई है ....इसीलिए मैं किसी और की नहीं हो सकती.....

अब यह तेरे उप्पेर है क तू क्या चाहता है ....अपने दी को ऐसे hi तड़पते हुए मरते देखना चाहता है ...या....

अभी - diiiiii.....aur ऋतू क मुँह पर अपना हाथ रख देता है...

अगर दुबारा मरने की बात की तोह अपने बेतु का मारा हुआ मुँह देखोगी ......और अभी क आँखों में आंसू आजाते है.........

ऋतू अभी क आंसू देखकर उससे गले लगा लेती है ......

थोड़ी देर तक दोनों एक दूसरे क गले लगे रहते है .....फिर अभी ऋतू क मत्थे पर किश करके अलग होता है......

अभी - मुज़हे अभी कुछ जरुरी काम निपटने है ....आपके सवाल क लिए मुज़हे कुछ समय chahiye......ab आप जाईये....

ऋतू - मुज़हे तुम्हारी हां का इंतज़ार रहेगा .....लेकिन कही इतनी देर न कर देना की ......अपनी बात अधूरी छोड़ते हुए जाने लगती है......

लेकिन फुर कुछ याद आता है.......

ऋतू - अच्छा बेतु वह शिवली कौन है ....उसे में जब मैंने माँ से पूछा था तोह उन्होंने कहा था क बेतु से hi पूछ लेना ....

अभी - वह ....कुछ ...नहीं दी ....बस ऐसे hi .....रिम्पी की फ्रंड है

ऋतू पास आकर अभी का एक हाथ अपने सर पर रख देती है...

तू जानता है बेटी तू मुजह्से ज़हूत नहीं बोल सकता.....

तुज़हे मेरी कसम है सब सच सच बता दे .....

अभी - दी आपने यह क्या किया .....में आपको अभी बही बताना चाहता था ...लेकिन आपने कसम देकर मुज़हे मजबूर कर दिया.....

फिर अभी ने अपनी अब तक की 6 शादियों क बारे में और बाकी 8 क बारे में बताया ........

ऋतू पहले तोह सुनकर शॉक हो गयी ....उससे अभी अपने से चिंता हुआ नज़र आने लगा ..

ऋतू - इतनी बड़ी बात तूने मुजह्से छुपाई ....अब समाज आया क तू मेरी बात क्यों नहीं समाज रहा hai.....kyu मेरे प्यार को ठुकरा रहा है.......

अभी - ऐसी बात नहीं है दी .....आप अपने आपको उन सबसे कम्पायर क्यों कर रही हो ....और मेरा उनसे विवाह विधि का विधान है .....वह सब मेरी hi सहक्तियो क अंश है.....

ऋतू - मेरी शक्ति भी तोह तुजशे hi जुडी हुई है .......फिर मैं क्यों नहीं....

अभी - दी मैंने कहा न क मुज़हे थोड़ा समय चाहिए ...उसके बाद आपके साड़ी शिजायत ख़तम हो जायेगी .......

थोड़ी डेट बात होने क बाद ऋतू अभी को हुग करके चली जाती है.....

सुबह अपनी डेली रूटीन पूरी करके अभी ाद्दु और दीपू से मिलता है .....माँ डैड से मिलकर .....अपनी टीम क पास चला जाता है.....

वह शलाका से उससे पता चलता है क राजस्थान में कुछ बहुत से गत्विधिया ऐसी चल रही है जो वह समाज नहीं पा रही ...

वह पहले तोह लोग गायब हो जाते है और बाद में कुछ दिनों बाद वापस मिल जाते है .....

और यह सब उन्ही क साथ हो रहा है जिनकी या तोह गोवर्नमेंट में पहुँच बहुत ऊपर तक है ...या किसी रजवाड़े से ताल्लुक राहकते है......

अभी - क्या तुम लोगो ने कोई इललीगल एक्टिविटी नोट की ...

शलाका - अभी तक तोह नहीं हुई .....

अभी - तुम अपनी नज़र बनाये रखो ......और अंडरवर्ल्ड की क्या रिपोर्ट है .....

शलाका - फिलहाल तोह अंडरवर्ल्ड भी शांत है....

अभी - ध्यान रहे ...तुम्हे हमेशा सतर्क रहना hoga....kahi यह शांति आने वाले तूफ़ान का आगाज़ न हो ......

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट रात को ....

 
अपडेट - 97



अब तक आपने देखा कस ने कई जगह अपने असरो की गतिविधिया तेज़ कर दी......

ऋतू का अभी क लिए प्रेम और आकर्षण.........



अब आगे ........

कस क असुर अब ताल्लुक ...Atallok....Vital.lok...Aur...Rasatal में भी घुसने की कोशिश करने लगे जिन्हे अभी ने असरो से मुक्त किया tha......Lekin अभी क शक्ति त्रिशूल द्वारा बनाये गए सुरक्षा शील्ड को भेद नहीं पारहे थे ........

सुतल lok....aur तलातल में भी अब असुरो की गतिविधिया तेज़ होने लगी थी..........

पृथिवी पर भी गुप्त रूप से वह बढ़ रहे थे...........

अभी को इस बात का आभास होने लगा था .........

साड़ी गतिविधियों पर नज़र बनाये रखने क लिए अभी ने अपनी रक्षक सेना की एक सभा को ताल्लुक में आयोजित किया ........

अभी - साथियो कस ने अपनी लगातार होने वाली हार क कारण अब अपने असुरो की गतिविधयी तेज़ कर दी hai..........Muzhe ऐसा आभास हो रहा है जैसे किसी बहुत बड़े षड़यंत्र की शुरुवात हो गयी hai......hume उसकी हर गतिविद्धियो पर नज़र बनाये रखना होगा और साथ में असुरो को रोकना भी होगा......

आप सब हमारी योजना को सुदृढ़ बनाने क लोए अपने अपने सुज़हव दे सकते है......

कंटक - यह एक रहस्यमयी कैरक्टर है , इसके जन्मस्थान क बारे में किसी को कुछ नहीं पता अभी क गुरुकुल का साथी hai.....iski विशेष शक्ति है क इसके शरीर से निकलते हुए कांटे जो बहुत जहरीले होते है...

कंटक - मित्र मेरी सेना ताल्लुक और अटल लोक की सीमाओं की सुरक्षा में तत्पर है ....इन् दिनों बहुत बार हमारी असुरो से झड़प हुई है जो घुसपैठ करने का प्रयत्न कर रहे थे .....

अभी - ठीक है कंटक तुम अपना कार्य ऐसे hi चालू रखो अगर कोई व्यवधान आये तोह मुजह्से संपर्क करना

वज्रा बहु - यह सुतल लोक का वासी था ....और महाराज बलि क वंश क एक दानव का पुत्र था .....मूल से दानव होने पर भी महाराज बलि की भक्ति और त्याग का इसपर गहरा प्रभाव था ......यह भी अभी क गुरुकुल का साथी था .....

वज्रा बहु - मित्र हम वाइटल लोक और सुतल लोक पर अपनी दृष्टि बनाये हुए hai.......iss समय महाराज बलि क विरुद्ध कस क समर्थक दानव कोई षड़यंत्र रच रहे है....

अभी - मित्र तुम अपने गुप्तचर दानवो को किसी तरह उनमें शामिल करो जिससे हमे उनके षड़यंत्र क बारे में पता चलता रहे....

उदय - यह राजस्थान क एक राज परिवार से सम्बंधित था जिसमें जन्म से hi पृथ्वी तत्त्व क ऊर्जा अधिक thi.....iske माता पिता की मृत्यु रहस्य्मयी तरीके से हुई thi.....Mahaguru इससे अपने आश्रम ले आये थे......

उदय - मित्र मेरी सेना पृथ्वी पर नज़र बनाये हुए है ..परन्तु ....कठिनाई यह है क पृत्वी पर से हर लोक का मार्ग जाता hai......aur असुरो ने भी कई जगह गुप्त पोर्टल बनाये है इसीलिए हमारी इतनी निगरानी क बावजूद ...पृथ्वी पर अश्रुओ की संख्या में वृद्धि हो रही है......

अभी - उदय इस समय तुम्हारी आवश्यकता राजस्थान में जयादा hai.....tum वह की अचल रहा है इस बात का पता करो और इस कार्य में राकेश का साथ लो

साहू - यह एक गन्धर्व है ...जो धनुर विद्या में निपुण है .......यह भी अभी का गुरुकुल का साथी है....

अभी - मित्र साहू तुम अपनी दृष्टि भुवा लोक और स्वः लोक पर बनाये रखो .......

कार्तिक - इसका जन्म तपः लोक में किसी तपस्वी की ऊर्जा से हुआ था ...जिसे महागुरु अपने आश्रम में ले आये थे ....यह हर तरह क शास्त्र विद्या में पारंगत था.......

अभी - कार्तिक तुम तलातल लोक और रेस्टल दोनों पर अपनी नज़र बनाये रखो .....इससे उसके निकट पटल लोक की गतिविधयों क बारे में भी तुम्हे पता चलता रहे गए

चंद्र कांत (कट) - यह अभी का गुरुकुल का मित्र था .......जो तलवार बजी और हर तरह क फाइटिंग स्किल्स में निपुण tha.......Iske पास कुछ मैजिकल पावर्स भी थी ......यह महागुरु को पृत्वी क एक कबीले में मिला था .......उसके सारे कबीले का नाश किसी रहस्य्मयी टिके से हुआ था और सिर्फ वही बचा था......

अभी - कट - तुम इन सब के संपर्क में रहोगे ...तुम अपने साथ रिंकू और आचार्यो भी भी लेलो ...

अभी - तोह मित्रो एक बात का ध्यान हमसे रखना क हम सब एक दूसरे से संपर्क बनाये राख्नेगे .........

इस प्रकार युद्ध निति और योजनाओ पर विचार हुआ ......और सब चले गए अपने अपने कर्त्तव्य पथ पर...

अब वह केवल अभी और उसकी पत्नीटा रह गयी .....

शिवली - जान .....असुरो क इस तरह गत्विधिया तेज़ करने का कारण मुज़हे कुछ और hi लग रहा है....

अभी - और वह क्या है.......

शिवली - हो सकता है यह सब आपको भरमाने क लिए हो ......ताकि आप इन् सब में उलझी रहे और वह .......अपना कार्य पूरा कर सके .......

कभी कभी हमे जैसा दीखता है वैसा होता नहीं है.......

अभी - शायद तुम ठीक कहती हो जान ......लेकिन अभी तोह हम एहि कर सकते है........

अब मुज़हे अपने अगले सफर क बारे में सोचना होगा ...क्या तुम बता सकती हो .....इस बारे में .

शिवली - जान जब विधि ने आपको श्रिस्ति की रक्षा क लिए चुना है ....तोह विदी hi आपको अपने लक्ष्य तक पहुँचने का मार्ग dikhayegi......Bas सही निर्णय लेना आपके हाथ में है....

शालू - दी आप सचमें अद्भुत हो , ाको कैसे हर बात का पता होता है..........

सुलेखा - हां शालू दी तोह हमारे बारे में सब कुछ जानती है .....लेकिन कभी कभी लगता है क हम दी क बारे में कुछ भी नहीं जानते ....

भद्रा और दक्ष भी उनकी हां में हां मिलते है.....

शिवली - शामली तुम कुछ नहीं बोलोगी इस बारे में ....

शामली - में क्या बोलू .....बस अब तक इतना hi समाज पायी हु की जब तक आपका साया हम सब पर है तब तक कोई विपत्ति हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती.....

अभी - वह र मेरी शामू क्या बात कही है ........

ऐसे hi तोड़ी देर छेद चढ़ होती रही .....

अभी - अब तुम सब भी अपने अपने लोक की हर घटना पर अपनी नज़र बनाये रखो और एक दूसरे से संपर्क भी .....यदि कोई भी खतरे की आशंका हो तोह तुरंत मुजह्से संपर्क करो .......

अब अभी वह से वापस अपने घर आजाता है........

सुबह डाइनिंग टेबल पर नास्ता करते हुए .....

रवस - तोह बीटा तुम्हारी छुट्टियां कब ख़तम हो रही है.....

अभी - डैड छुट्टियां तोह 2 दिन बाफ कहातम हो रही रही ........लेकिन अभी में कॉलेज नहीं जा पाऊंगा .......आप तोह जानते hi हो अभी मेरा लक्ष्य प्राप्त करने में बहुत काम समय रह गया है........

रवस - हम्म वह भी ठीक hi hai.....Lekin तुम इसकेलिए अपना प्रतिरूप भी छोड़ सकते हो .......

अभी - आप ठीक कह रहे है डैड ......

ाद्दु - भाई मेरी भी स्कूल कल से चालू हो रही hai.......aur मुज़हे बहुत सी शॉपिंग भी करनी है .....

ऋतू - और मुज़हे bhi.....Shopping करनी है ......

अभी - तोह ठीक है आज शाम का प्रोग्राम बनाते है ....डिनर भी बहार hi करेंगे .......

ऋतू - तोह ध्यान रखना ....श्याम को मुज़हे पिक करने सही टाइम पर आजाना .....नहीं तोह भेजेगा अपना कोई डुप्लीकेट.......

अभी - नहीं दी प्रॉमिस में hi चलूँगा साथ में ....

बर्फ क बाद दी डैड क साथ चल दी ऑफिस ...और में चल पड़ा ..रिम्पी से मिलने ......

जब में रिम्पी क रूम क बहार गैलरी में पहुंचा तोह देखा क वह मेरी फोटो से बात कर रही है....

रिम्पी - ऐसे क्या मुस्कुरा रहे हो ....हां हां मुस्कुराओगे क्यों नहीं .....तुम तोह अपनी पत्नियों में मगन रहते हो .....और यहाँ मैं बस तुम्हारा इंतज़ार करती रहती हु.......

देखो तोह तस्वीर से कैसे घर घर कर देख रहे हो ......

मुज़हे कुछ शरत सुजहि ....और ...शामली से मिलान से मिली हुई अदृश्य शक्ति का प्रयोग करके अदृश्य हो गया और चुपके से रिम्पी क पास पहुँच गया .......

में - बस बाते करती रहोगी जान ...किश नहीं करोगी....

मेरी आवाज सुनकर रिम्पी इधर उधर देखने लगी .....उठकर गैलरी में भी देखा लेकिन मैं उससे कही नहीं दिखा .....

तोह उसने सोचा क शयद उस्का वहां होगा ...और फिर तस्वीर क सामे बैठ गयी .......

अभी मैंने उसके होंठो पर हल्का सा किश कर दिया ......तोह वह एक दम चौंक गयी.....

रिम्पी - मई जानी हु तुम यही कही हो .......लेकिन दिख क्यों नहीं रहे हो .....

लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया ...और उसके होंठ पर एक गहरा किश कर दिया .......

रिम्पी - देखो चुप चाप मेरे सामने आजाओ नहीं तोह .........

मैं उसके सामने अब विज़िबल होते हुए ....नहीं तोह क्या ....और उससे बाहों में भर लिया ....

रिम्पी - तुम्हे मुज़हे परेशां करने में मज़ा आता है न .......

अभी - अरे नहीं जान ...में और तुम्हे परेशां करूँगा .....में तोह कुवह और करूँगा ......

रिम्पी - क्या करोगे .......

तोह जवाब में माइनर अपने होंठ उसके होंठो पर रखे और धीरे धीरे चूसने लगा ......दोनों एक दूसरे क ररस को पि रहे थे ....

.रिम्पी क हाथ अभी की पीठ पर कास गए थे ....और अभी भी उसकी पीठ सहला रहा था ........दोनों अपने प्रेम की गहराई को अपने इस गहरे चुम्बन से महसूस कर रहे थे ......

अब डॉन की जीभ एक दूसरे को सहला रही थी .....दोनों की चलती हुई तेज़ साँसे और बदन की रगड़ और ज्यादा दोनों को मदहोश कर रही थी ...अभी ने रिम्पी को बीएड पर लिटाया और खुद उसके उप्पेर आगया ......रिम्पी भी अभी को बेतहाशा चूमे जा रही थी उसके ...स्तन अभी क छाती से डाब रहे थे .......और रगड़ रहे थे ......

इससे रिम्पी क स्तन और जयादा कड़क हो गए .......अभी को अपने सीने पर उसके निप्पल चुब्ते महसूस हो रहे थे ......अभी क हाथ उसके स्तनों पर पहुँच गए ........एयर मर्दन करने लहे .....जिससे रिम्पी क मुँह से सिसकारी निकलने लगी .......

दोनों मिलान क लिए तड़प उठे लेकिन चाहकर भी अभी वह संपूर्ण मिलान नहीं कर सकते थे .......

अभी क लिंग की चभन अपने पेट पर महसूस करके रिम्पी की योनि कॉमर्स छोड़ने लगी .......

लेकिन दोनों बड़े मुश्किल से अपने आपको रोके हुए थे .......

रिम्पी - अभी की आँखों में देखकर .....जान यह दुरी अब और बर्दाश्त नहीं होती .......

अभी - बस जान कुछ दिन और ........अभी मुज़हे अपने एक सफर पर निकलना है .......

रिम्पी - लेकिन जान इस बार में तुम्हारे साथ चलूंगी ........हर वार में hi पीछे रह जाती हु ........

अभी - तभी तोह जाने से पहले तुम्हे मिलने आया हु ....मेरा अंतर मैं भी यही कह रहा है.....

तोह तैयार रहना हम कल hi निकलेंगे .......

तोड़ी देर और रिम्पी से प्यार की बातें hui........Phir रिम्पी क डैड से मिला और वही रिम्पी क साथ लंच किया और निकल गया अपने सीक्रेट बेस पर.......

वह शलखा और टीम से मिलकर यह पता चला क जयपुर क पास आउटर एरिया में .....एक बहुत बड़ी कोई रीसर्च लैब बन रही है .....जो वह की गोरनमेंट की परमिसदिओं से बन रही है........

वह पर देश भर क एटॉमिक साइंस से रिलेटेड सइंटीस्ट को बुलाया जा रहा है......

अभी ने उनको पूरी तरह वह नज़र रखने को कहकर वह से निकल गया ....

इस काम में शाम होगयी .....

उसके बाद घर आकर ाद्दु और दीपू को लेकर निकल गया शॉपिंग मॉल .....रस्ते में ऋतू को पिक किया ..........

अभी क अब तक शॉपिंग मॉल क जितने भी एक्सपीरियंस थे वह कुछ अच्छे नहीं थे ........वह बस सोच रहा था क काम से काम इससबार तोह सब ठीक हो जाए ........

लेकिन अभी क किस्मत में कहा सब कुछ सीधा सीधा होना लिखा था ......कुछ तोह गड़बड़ होनी hi थी.....

अभी तीनो को लेकर शॉपिंग माल pahuncha.......Addu और दीपू ने पहले अपनी शॉपिंग क ज़िद्द की ....तोह अभी दोनों को बुक्स और ड्रेसेस की शॉपिंग करने में बिजी हो गया ........

ऋतू उनकी शॉपिंग से बोर हो रही थी.........

ऋतू - बेतु तू इनको शॉपिंग कर तब तक , में वाशरूम होकर आती हु .....तब तक तू जल्दी से निपटा ले........

अभी यहाँ ाद्दु और दीपू क साथ बिजी हो जाता है और .......ऋतू निकल जाती है वाशरूम .......

दोनों की शॉपिंग ख़तम हो गयी , लेकिन ऋतू अभी तक वाशरूम से नहीं आयी.......

आज क लिए इतना hi......


अगला अपडेट कल.......
 
अद्भुत सुपर्ब शानदार रिव्यु ृतिमा जी

:अप्प्लायसे: :applause::applause:

रितिका जी व्यक्ति क पास कितनी भी सात्विक ऊर्जा क्यों न हो परन्तु ....बुराई का साथ देने पर उसका नाश हो होता hai.....isska उदहारण ..महाभारत क ..भीष्म पितामह ...और गुरु ड्रोन ...जिन्हे संसार में कोई भी नहीं हरा सकता था ...लेकि बुराई क साथ ने उनका hi विनाश कर दिया

अच्छा लगा यह जानकार क आप कहानी पूरी तन्मयता से पड़ती है .....आपके कमैंट्स का हमेशा hi इंतज़ार रहता है

ठंकु सू मच आपके साथ और फैंटास्टिक कमेंट क लिए...

ऐसे hi साथ बनाये रखे...?

लेटेस्ट अपडेट 97 पोस्टेड.....
 
फैंटास्टिक अवेसमे & ब्रिलियंट रिव्यु ृतिमा जी

:अप्प्लायसे: :applause::applause:

ृतिमा जी अभी की साड़ी पतिनियो का जनम अभी क साथ hi हुआ है ....जब की ऋतू का जनम पहले और ाद्दु का बाद में हुआ...

और दोनों को अभी की शक्तिया कैसे मिली वह अपडेट -8 में hai.......Ab कैसे अभी को वह शक्तिया वापस मिलेगी यह तोह आगे hi पता चलेगा ....

देखते है आगे क्या होता है........

ठंकु सू मच आपके साथ और फैंटास्टिक कमेंट क लिए...

ऐसे hi साथ बनाये रखे...?

लेटेस्ट अपडेट 97 पोस्टेड.....
 
अपडेट - 98



अब तक आपने देखा अभी ने अपनी रक्षक सेना को अलग अलग लोको पर नज़र रखने और रक्षा करने का भर सौंपा........

अभी ऋतू ाद्दु और दीपू क साथ मॉल में



अब आगे .......

ाद्दु और ड्रेपु की शॉपिंग हो गयी थी ......बच्चो की शॉपिंग में अभी क दिमाग का ऐसा भुर्ता बन गया था क उससे ध्यान hi नहीं रहा क ऋतू को गए बड़ी देर हो रही है.......

लेकिन जब दीपू ने कहा ...haashhhh....Shopping तोह हो gayi.....ab चलो न भैया कुछ कहते है मुज़हे बहुत भूक लगी है.......

ाद्दु - हां भाई मुज़हे भी ......

अभी - ऑर्डर दी तोह अभी आयी नहीं ....चलो देकते है ...कहा रह गयी.........

फिर अभी ने वह बिल पाय किया और ाद्दु और दीपू को थोड़ा विकट करने का kahkar.......Wash रूम की और गया ......जो की एक गलियारे में था ......अभी ने जब वह जाकर देखा .क एक लड़का जमीन पर पड़ा अपने दोनों गाल पर हाथ रखे हुए बैठा है.......

और एक लड़का खड़ा है ...जिसके दोनों गलो पर ऋतू तड़ातड़ चांटे बरसाए जा रही thi......Meine वह पहुंचकर दी को रोका .........लेकिन दी तोह रुक ने का नाम hi नहीं ले रही थी .......

और कुछ लोग वह खड़े बस देख रहे थे....

तोह मैंने कमर से पकड़कर दी को अलग किया .......

मैं - छोड़ दो इससे दी ...छोड़ दो....

ऋतू - तू छोड़ मुज़हे .....इससे तोह ......बताती हु मैं Abhi.......iski हिम्मत कैसे हुई मुज़हे ऐसे बोलने की ......इन् हैसे लफंगो ने लड़कियों का बहार निकलना हराम कर रखा है........

मैं - ऐसा क्या हुआ ...क्या बोलै िस्सने .....

ऋतू - इसी से पूछ लो .........

में लड़के की कालर पकड़कर ....क्यों बे ऐसा क्या बोलै तूने .....

लेकिन वह बोलने की हालत में नहीं था ...बस निचे सर ज़्हुकाये खड़ा था.......

तभी निचे बैठा लड़का बोलै -

गलती हो गयी भाई अब तोह हम अपनी गफ को भी नहीं छेड़ेंगे ......बस इस चंडी से हमे बचा ले ..

दी आगे बड़ी ....और एक जोरदार चांटा उसस्के गालो पर मार दिया .......पहले hi दोनों क गाल ...बंदर क पिछवाड़े जैसे लाल हो गए थे.........

मैंने फिर एक लड़के की आँखों में देखा तोह साड़ी बात समाज में आगयी..........

हुआ यह था क जब दी वाश रूम से निकलकर बहार आरही थी तोह यह दो लड़के गर्ल्स टॉयलेट क बहार किसी लड़की को फासने क चक्कर में थे ..........

ऋतू को देखकर दोनों की लार टपकने लग गयी.....

ल1 - अरे देख भाई क्या पताका आ रहा है........

ल2 - अबे यह पताका नहीं ...बम ...है bomb.....aur वह भी सेक्स bomb.....haaye लगता है आज तोह मज़ा hai......yar बस एक बार मिल जाए तोह मज़ा आजाये ..

दोनों की बातें ऋतू ने सुन ली थी ....और इग्नोर करके जाने लगी ...k..ek ने हाथ पकड़ लिया ......तोह बस क्या tha......Ritu की एक किक उसके पेट पर ......और वह निचे .......

जब दूसरा ऋतू को पकड़ ने आगे आया ऋतू ने लगातार चांटे मार कर उसके गाल लाल कर दिए ......जिससे उसके दोनों कान सुन्न हो गए ......फिर उसके बाल पकड़ कर जहटके से निचे गिरा दिया ......

तब तक वह और लोग भी इक्कठा हो गए the.....aur तमाशा देख रहे थे.......

अपने साथी की हालत देखकर , ल1 फिर खड़ा हो गया और चाकू निकलकर ऋतू की तरफ बड़ा .....तोह ऋतू ने उस्का हाथ पड़कर मरोड़ दिया ...और उसके गाल भी लाल का दिए .........

तब तक अभी भी वह पहुँच गया था.........

अभी में दी को रोक hi रहा था ...क तब तक कोई मॉल क गॉर्डस को ले aaya.....Maine दोनों को उनके हवाले किया ...और दी को लेकर निकल गया .....

दी - चलो बेतु चलते है अब मेरा शॉपिंग का बिकुल मूड नहीं है.......

में - अरे दी क्यों अपना मूड उन् लफंगो की वजह से ख़राब कर रही हो ...छोड़ो न उनको .वैसे आप सच में हॉट ...मतलब बहुत खूबसूरत लग रही हो

ऋतू - क्या बोलै तूने ........

में - एहि की ब्यूटीफुल लग रही हो.....

दी - नहीं तूने कुछ और बोलै......

में - वह तोह ऐसे hi मुँह से निकल गया ....अब मेरी पिटाई न शुरू कर देना .......

दी - पिटाई तोह नहीं कुछ और करना होगा ....वैसे आज तू भी बहुत हैंडसम लग रहा है....

और चलते चलते जब हम गलियारे क आखरी चोर तक पहुंचे तोह दी ने मुज़हे धक्का देकर दीवार से चिपका दिया ....और दोनों तरफ अपने हाथ रखकर मेरी आँखों में देकने लगी .....

में - क्या कर रही हो दी ....लोग देख रहे है ......लगता है आज आपका इरादा ठीक नहीं है.......

तभी ऋतू ने अभी क होंठो पर किश कर दिया और अलग हो गयी ......अभी तोह एक दम सन्न रह गया उससे समाज नहीं आरहा था क कैसे रियेक्ट करे ........

ऋतू - अब ऐसे hi खड़े रहेगा ....या चलेगा भी......

और अभी का हाथ पकड़ कर चलने लगी .......

ाद्दु - क्या भाई कितनी देर कर di......Chalo न मुज़हे भूक लगी है .....

फिर हम वही एक रेस्टॉरेंट में गए और डिनर किया .......

उसके बाद दी की शॉपिंग हुए .....दी ने साड़ी ड्रेसेस मेरी पसंद क लिए और मेरे लिए अपनी पदंड का एक जैकेट लिए........

फिर हम कोई रात 11 बजे करीब घर आगये .....

ाद्दु और दीपू दोनों अपने अपने रूम में जाकर सो गए........

में अपने रूम में बीएड पर बैठा hi था क दी मेरे रूम में आगयी ....

में - दी आप ......

दी - आज जो हुआ उससे तू नाराज़ तोह नहीं है न ....

में - नहीं तोह में क्यों नाराज़ होऊंगा ......

ऋतू - अभी क पास आकर बैठ जाती है.....

अभी - दी अभी बहुत रात हो गयी है हमे सो जाना चाहिए ......

दी - इसीलिए तोह आयी हु ......आज में तेरे साथ hi सोऊंगी........

अभी - ok दी लेकिन ...no शरारत ठीक है .....वैसे भी मैं थक गयी हु .....

फिर ऋतू ने अभी क होंठो पर हल्का सा किश किया और दोनों एक दूसरे की बाहों में सोगये .......दोनों क मैं में कोई वेदना नहीं थी .....था तोह बस एक दूसरे पर विश्वास और एक अंजना सा प्यार......

सुबह मैं अपने समय से उठा .....अपनी डेली रूटीन पूरी करके .....ध्यान में बैठ गया ........

आज ध्यान में मुज़हे फिर कई दृस्य दिखाई देने लगे ...........उन् दृश्यों में पहले तोह एक तपस्विनी ध्यान में बैठी हुई दिखी .....जिसकी लम्बी जताये थी .....और चेहरे पर ऐसा तेज़ थे ......क ुसस्पर नज़र hi नहीं ठहरती थी ..........

और दिखाई देने लगा गाओं का वह मंदिर जो नदी क किनारे था जिसके चारो तरफ ड्रैगन जैसे जीव की मुर्तिया बानी थी............

और अपने अंदर क अलग अलग roop........Ek महा नाग का roop.....ek ...pretroop.....ek भेड़िया का रूप .....एक यक्ष का ..roop.....ek ..गंधर्व का roop....Aur एक ा1 का roop.....uska ध्यान किसी की आवाज से टुटा .........

तोह देखा सामने शिवली बैठी थी.......

अभी - शिवू ....ाचा हुआ तुम आगयी ........जाने कैसे मेरी साड़ी दुविधाओं को तुम जान लेती हो......

फिर मैंने उससे ध्यान में दिखे दृश्यों क बाते में बताया.......

शिवली - जान यह सब दृश्य आपके भविष्य से जुड़े है ..........जिसमें वह तपस्विनी आपकी अगली शक्ति होगी .......

अभी - और वह मेरे अलग अलग रूप .......

शिवली - जैसे जैसे आप अपनी शक्तिया प्राप्त करोगे वैसे वासी आपके अलग अलग रूप जागृत होते रहेंगे ......आगे आने वाले युद्ध में और शक्तियों को प्राप्त करने की यात्रा में आपको अपने यह रूप विभक्त करने पड़ेंगे आपकी अगली शक्ति इसी से सम्बंधित है........

अभी - अब यह भी बता दो क मुज़हे अब किस लोक में जाना होगा.....

शिवली - में बस इतना बता सकती हु क उस लोक में कोई भी शरीर क साथ नहीं जा सकता .....वह केवल दिव्या आत्माये वास करती है .....jinka...divya ...sharir.....bas ...unki.....tapasya की ऊर्जा से हुआ hai.......jaha....har ...taraf....Satya....ka...prakash...hai.....ab आपको निर्णय लेना है क आपको क्या करना है.......

इतना कहकर शिवली चली gayi...........mein भी इस पर विव्हर करने लगा क फिर कैसे जाय जाए

उसी समय मेरा पह बज उठा .....तोह देखा क शलाका की कॉल thi..........usse बात करने पर पता चला .......क ....जयपुर क निकट जो लैब बानी है उस्में कोई विनाश करि एटॉमिक वेपोन बनाने की तैयारी चल रही है.......

और जो लोग गायब होकर वापस आगये थे ....उन सबके परिवार में लगातार मौते हो रही है........

शलाका की बात सुनकर मुज़हे यह अहसास हो गया क जो लोग गायब हुए थे वह सब मर चुके है और उनकी जगह ....कस क असुरो ने ले ली है.....

लेकिन क्यों आखिर असह्नाक इतनी साड़ी गतिविधिया एक साथ करने क पीछे उसकी योजना क्या है.........

लगता है शिवली का अंदाजा सही है .....

अभी अब तक अपने दो hi रूप अपने से अलग कर सकता था ....एक संघारक का रूप जो रवस ने अपनी साड़ी शक्ति उससे देने क बाद मिला tha......aur दूसरा अपने अंतर मन का प्रतिरूप जो भावना प्रधान था .......

सीक्रेट बेस में संघारक .....जयपुर में हो रही गतिविधियों पर रोक लगाने क liye........apni टीम क साथ निकल गया........

संघारक अपनी team....Shalaka ...रजनी ..sameer....neeraj.... क साथ जयपुर पहुँच गया........

जयपुर क उस लैब क सारे पह कॉल्स शलाका क डिवाइस से जुड़ गए the.....unn कॉल से उन्हें पता चला क यह लोग देश क चार महानगर उड़ने की फ़िराक में है.......

संघारक अपनी टीम क साथ उस लैब में पहुंचा ......

लैब क बहार कोई 20 लोग कंमाडो की वर्दी में वह पहरा दे रहे थे .......

जो दिखने में तोह बिकुल कोमंडोस की तरह दिख रहे the.....lekin उनकी चमकती हुई आंखें और चल ढल यह बता रही थी क वह कोई इंसान नहीं थे...

आस पास घनी कंटीली ज़हादिया thi.....Rajni समर और नीरज अपनी निंजा तकनीक का इस्तेमाल कर करके ......छुपते हुए लैब क निकट पहुँच गए .......और संघारक उन् सम्मानदास क सामने .....

स1 - कौन हो तुम ....और यहाँ कहा चले आरहे हो ........

संघारक - अपनी मौत को भी नहीं पहचानते .......और अपने तलवार क एक वार से उसकी गार्डन उदा देता है ........बक्की सब का ध्यान उस और जाता है ....और सभी ुसस्पर फायर करने लग जाते hai......lekin संघारक क तलवार की तेज़ी क कारण एक भी गोली उस तक नहीं पहुँचती ........

इस मौके का फायदा उठाकर ....रजनी समीर और नीरज लैब क अंदर पहुँच जाते hai.......Ander सिर्फ दो गॉर्डस उनको मिले जिन्हे उन्होंने ख़तम कर दिया .....और वह पहुँच गए लैब क मैं , सेक्शन में ...

वह दो लोग और मिले जो ड्रेस से साइंटिस्ट लग रहे the......Unhone दोनों को अपने कब्जे में ले liya........yaha लगे हुए .....Hi टेक मचिनेस और सुपर कंप्यूटर उनके समाज से बहार tha....toh उन्होंने शलाका को मश्ग भेजा ......

यहाँ संघारक अपनी तलवार को घूमते हुए आगे बढ़ रहा था ......अब तक 5 को मौत क घाट उतर चूका था.......

शलाका भी मौका देखकर अंदर चली गयी........

तभी संघारक की नजर मारे गए सम्मानदास की तरफ गयी ....तोह देखा क उनका शरीर धुआँ बनकर गायब हो रहा है.......

उसदी समय उदय वह अपनी एक टीम क साथ आगया.......

उदय - सावधान मित्र यह एक जाल है.......

उदय क ऐसा बोलते hi उन् सम्मानदास का शरीर एक दम लाल लावै क जैसा होगया ......तोह तुरंत उदय ने अपने पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा से एक शील्ड से सबको कवर कर दिया ......और वह कमांडोज़ क शरीर जोरदार ब्लास्ट करते हुए फैट गए ....उदय की बनायीं शील्ड क कारण सब सुरक्षित थे ......

तभी संघारक को अंदाजा हो गया क लैब क अंदर उस्सकी टीम खतरे में है........

वह दौड़ता हुआ अंदर पहुंचा ......और जल्दी से सबको लेका टेलिपोर्ट होने hi वाला tha........k जोरदार धमाका हुआ .......बुओंम.....

यहाँ पटल लोक में बैठा कस अपने क्रिस्टल में यह सब देखकर जोरदार तहका लगाकर है पड़ा .......

अभी क लिए इतना hi .......


अगला अपडेट रात को.......
 
अपडेट - 99



अब तक आपने देखा अभी का संघारक रूप राजस्थान पहुँच जाता है ...और वह कस की एटॉमिक लैब तक पहुँच जाता ........जहा उससे अंदाजा होता है क यह यह जाल है तोह वह अपनी टीम को बचने अंदर जाता है .......और होता है जबरदस्त धमाका जिसमें लैब क परखच्चे उड़ जाते है......



अब आगे.......

पटल लोक में ....

कस - ha....ha....ha....Kaisi रही रक्षक ......तुम्हारा एक अंश तोह कहातम हो गया इसी तरह .......कहा तक रोकोगे मुज़हे ......14 लोको में ऐसी तबाही फैलाऊंगा क स्वतं त्रिदेव भी नहीं समाज पाएंगे क किस्से बकहय जाए और किस्से छोड़ा जाए .....ha...ha....ha.......

यहाँ लैब क परखच्चे उड़ गए थे .......और लैब क ांडेट जो लोग थे उनका कोई नमो निशान नहीं था .

उदय और उसकी टीम ने जब उस लैब की ऐसी हालत की ऐसी हालत देखि तोह ...उन्होंने अंदर गए हुए लोगो को ढूंढ़ना व्यर्थ समज़ह .......

उदय वह से जयपुर क अपने सीक्रेट बेस पर aagaya.......Apne काम क साथ साथ वह अपने जन्म स्थान और अपने माता पिता क बारे में भी खोज करने लगा ......

इसकेलिए वह वह क पुअरनि लाइब्रेरी और संग्रहालय में खोज करता रहा ......जहा उससे कई राजपूत राजाओ क छत्र मिले ....उन चित्रों क आभूषण को देखते देखते एक चित्र में उससे वैसा hi लॉकेट दिखा जो बचपन से उसके परिवार की निशानी क रूप में साथ था .......

और वह लॉकेट उससे ले गया चित्तौरगढ़ किला .........

यहाँ वज्रा बहु सुतल लोक में चल रहे षड़यंत्र तक पहुँच चूका था ......जहा उससे पता चला क राजा बलि को बंदी बनाने की योजना पर करुआ किया जा रहा hai.......Lekin वामन रूप में बलि से तीन पग भूमि क बदले तीनो लोक लेने क कारण .....भगवन विष्णु को उसका पहरेदार बनना पड़ा .....और जब तक बलि क द्वार की रक्षा .....भगवन विष्णु करेंगे तब तक .....KS...ki कोई चल कामियाब नहीं हो सकती थी......

और तभी संभव है जब महाराज बलि क द्वारा कोई अनुचित कार्य कराया जाए........

बाकि लोको में भी असुरो क घुसपैठ करने की कोशिशे और तेज़ हो gayi.......jiske वजह से रक्षक सेना उसी में ुलाज़ कर रह गयी.......

कस पटल लोक में रक्षक सेना की हर गतिविधियों पर नज़र बनाये हुए था .....उसने ताल्लुक पर हमले तेज़ का दिए ......जिससे अभी को वह जाना hi पड़ा ..........

अभी क वह पहुँचते hi असुर वह से पीछे हो gaye......aur अटल लोक की तरफ बढ़ गए..........

अभी उनके पीछे बस एक लोक से दूसरे लोक लगा हुआ था इनसब में कई बार वह तैनात रक्षक सेना की टुकड़ी साथ मिलकर उसका असुरो से सामना हुआ .....

यहाँ पटल लोक में कस ....अपने क्रिस्टल में सब कुछ देख रहा था ....

कस - रक्षक बस ऐसे hi उलझी रहो बहुत जल्द इस सारे ब्रह्माण्ड का सञ्चालन मेरर हातो में होगा ......ha...ha...ha.....

यहाँ बहवा लोक में यक्ष भूमि अलका पूरी क निकट ....गंधा मादन पर्वत क एक गुफा क अंदर .....रिम्पी और शिवली बैठी हुई थी .....रिम्पी क शरीर से ग्रीन कलर की ऊर्जा किसी क निर्जीव शरीर पर पद रही thi.......jo वह गुफा में कुछ विशेष प्रकार क पत्तो पर लिटाया गया था ........और शिवली पूरी तरह सटक thi......Gufa की रक्षा में .....

उस्सने उस गुफा को ऐसे शील्ड से कवर कर दिया था ....क बहार से यह गुफा किसी को दिखाई न दे.....

वह निर्जीव शरीर hai.......Abhi का ...अगर अभी का शरीर यहाँ है तोह वह रक्षक सेना क दाथ कौन है .........

आइये देखते है यह सब क्या माजरा है .......

जब अभी अपने अगली यात्रा क बारे में विचार कर रहा tha.....humare तीन शरीर होते है ....एक स्थूल शरीर ....जो हाड मॉस का hai....ek सुक्ष्म शरीर जो ऊर्जा रूप hai....Aur मरने क बाद इसी सुक्ष्म श्री को लेकर जीवात्मा निकलती है .........तीसरा शरीर होता है कारण sharir.....jo हमारे कर्म फल से बनता है .........

मृत्यु क बाद केवल स्थूल शरीर समाप्त होता है ..........

अब अभी क सामने प्रश्न यह था ...क अगर वह तीनो शरीर से शुद्ध आत्मा ....को योग क द्वारा अलग करता है ....तोह उसका अपने शरीर से संपर्क टूट जाएगा .....और उसकी अब तक की हासिल की हुई साड़ी शक्तिया नष्ट हो जायेगी .....

और शुद्ध आत्मा भाव शुन्य होती hai.....Mukt होती hai......Aatma का अपना कोई लक्ष्य नहीं होता वह केवल परभ्रम से मिलकर एकाकार होने क लिए अग्रसर होती है.....

अगर अभी की आत्मा क साथ भी ऐसा hi हुआ तोह ....सब व्यर्थ हो जाएगा ....वह फिर इस श्री में वापस नहीं ापायेगा ......और फिर कस को रोकनेवाला कोई नहीं होगा...

इसके लिए जरुरी था क उसस्के निर्जीव साहिर में ऊर्जा बानी रहे ......और बिना सुक्ष्म और कारण श्री क वह आगे की यात्रा भी नहीं कर सकता tha........isske लिए उससे किसी की योग शक्ति की आवस्यकता थी.....

तब अभी को ध्यान आया क केवल प्रकृति की ऊर्जा hi ऐसी है जो एक निर्जीव शरीर सुरक्षित रख सकता है .....और यह पावर सिर्फ रिम्पी क पास है .........

और शिवली की योग शक्ति उस्सको तपः लोक तक पहुंचा सकती है .....

यहाँ कस क असुरो ने भी हर जगह उत्पात मचह्या हुआ tha.....Abhi को अब कस की चल समाज आगयी thi.......toh उस्सने कस को भरमाने क लिए .......रिंकू को bulaya.......Rinku में अभी की आत्मा शकित का अंश था ......इसीलिए अभी ने उससे अपना रूप देने का सोचा .....लेकिन माया से यह संभव नहीं था .....क्यों की कस एक महा मायावी असुर था ......उसस्के सामने कोई माया टिक नहीं सालती थी .....

इसीलिए अभी ने अपनी पांच तत्त्व की ऊर्जा और रिम्पी की प्रकृति की ऊर्जा से रोनकु का रूप बदल दिया .......अब वह बिलकुल अभी hi लग रहा tha......Abhi ने उसके रूप को और विश्वसनीय बनाने क लिए अपना शक्ति त्रिशूल उससे दे दिया ......और भेज फिया उससे रक्षक सेना की सहायता करने ......

जिससे देखकर कस भी यही समज़ने लाहा क उस्सने रक्षक को उल्ज़हा रखा है.......

और फिर वह से रिम्पी और शिवली क साथ ....गंधमादन पर्वत पर aagaya......Aur इस गुफा में ...अपने ध्यान योग क द्वारा अपने तीनो शरीर से अलग हो gaya......Aur रिम्पी ने अपनी ऊर्जा से उसके शरीर को सुरक्षित कर दिया .....

फिर शिवली ने अपनी आत्मा शक्ति की ऊर्जा से अभी की आत्मा को तपः लोक तक पहुंचा diya....Yeh लोक सत्य लोक क निकट है .....

तपः लोक एक स्वयं प्रकाशित लोक है .....यहाँ की श्वेत ऊर्जा का hi प्रकाश यहाँ हर जगह को प्रकाशित कर रहा है.......

यहाँ दिव्या आत्माये नित्य निरन्तर तपस्या में संग्लग्न रहती hai.......Unki तप की ऊर्जा से hi उनके दिव्या शरीर बने हुए थे .......

अभी उस लोक में एक हवा की तरह विचरण कर रहा tha.....kyuki वह केवल एक आत्मा था ....उसके पास कोई दिव्या शरीर नहीं था ......

भर्मण करते करते वह एक ऐसी जगह पहुंचा जहा की ऊर्जा बाकी जगह से कुछ अलग थी ........जब अभी की आत्मा उस ऊर्जा क्षेत्र में पहुंची ........तोह देखा क एक योगिनी जिस्सके चेहरे पर अद्भुत तेज़ है ...आंखें बंद कर के बैठी thi.........Abhi की आत्मा भावशून्य होने क बाद भी न जाने किस शक्ति क कारण वह आकर रुकी ........

तभी उस योगिनी ने अपनी आंखें kholi.....Aur मुस्कुराते हुए अभी की आत्मा की तरफ देखा तोह उस में से एक दिव्या ऊर्जा निकलकर अभी क आत्मा क चारो तरफ घूमने लगा और अभी को प्राप्त हो गया एक दिव्या शरीर .......

योगिनी - आपका स्वागत है स्वामी ....बड़ी प्रतीक्षा कराई आपने .....

दिव्या शरीर क प्राप्त होते hi अभी क पृथ्वी पर जन्म से पूर्व की साड़ी यादें ताज़ा हो गयी.....

अभी - कैसे हो विभक्त ....श्रिस्ति में हर घटना का समय निर्धारित होता hai.......Ab समय आगया तुम से मिलने का तोह में यहाँ पहुँच hi गया........

विभक्त - मेरे लिए क्या आज्ञा है स्वामी .......

अभी - तुम्हे अब यह लोक को त्यागना होगा विभक्त और अपने दिव्या शरीर को पांच तत्त्व से जोड़कर स्थूल ..शरीर धारण करना होगा .....तभी हमारा उद्देश्य पूरा हो सकता है........

और इसके लिए तुम्हे मेरे साथ मृत्यु लोक चलना होगा........

विभक्त - आप तोह जन्मजन्मान्तर क मेरे स्वामी हो आपकी आज्ञा hi मेटे लिए मेरा कर्म है.....

अभी - तुम्हे कितनी बार पहले भी कहा hai......Tum यह स्वामी और दासी वाला भाव त्याग दो .......मेरी साड़ी शक्तिया मेरा hi अंश है ...इसीलिए तुम मुजह्से भिन्न नहीं हो .....

यहाँ धरती पर गंधमादन पर्वत क उस गुफा क निकट hi गक क पुत्र गोलार्क को यक्ष लोक क मार्ग की सुरक्षा क लिए लगा दिया था.....

गक क अभी क हाथो मरने क बाद उस्सकी साड़ी ऊर्जा उसके पुत्र गोलार्क में समां गयी थी......

यह अभी को अपने पिता का हत्यारा मानता tha.......aur उससे नफरत करता था ....वह बस एक अवसर की तलाश में था ......की वह अपने प्रतिशोध अभी से ले सके ........

उसनने अदृश्य होकर जब शिवली को उस पर्वत में गायब होते देखा तोह उससे अंदाजा हो गया की यहाँ कुछ न कुछ विशेष चल रहा है .....

तन गोलार्क ने सारा पर्वत छान maara.....lekin उससे कुछ नहीं मिला........

बहुत धुनन्दने पर उससे कुछ पेअर क निशान पहड़ि में एक जगह आकर समाप्त हो रहे थे........

तब उसने अपनी यक्ष माया का प्रयोग किया तोह उससे पता चला यहाँ एक गुफा है जो शिवली ने यक्ष माया का प्रयोग करके बंद कर राखी है ........

उससे अंदाजा हो गया क यदि शिवली यहाँ है तोह अभी भी यही होगा ......उसने वही खड़े होकर शिवली को आवाज लगायी.....

शिवली ने जब गोलार्क की आवाज सुनी .....तोह वह बहार आगयी ......वह गोलार्क को अच्छे से जानती थी और उससे अपना भाई hi मानती थी.......

शिवली - गोलू तुम yaha.....kya कर रहे हो यहाँ .....तुम्हे तोह कुबेर जी ने पहरे पर नियुक्त किया है.......

गोलार्क - दीदी .....वह मैंने आपको यहाँ देखा तोह सोचा अपनी बहन से मिल लू ........वैसे दी एस्प यहाँ क्या कर रही हो ....लगता है जीजू भी यही है......

शिवली - गोलू में कुछ विशेष काम में लगी hu......Itna खाकर शिवली अंदर चली गयी..........

और गोलू भी छुपकर वह प्रवेश कर गया .....शिवली अभी क अभी तक वापस न लौटने क कारण थोड़ी विचलित होगयी thi......Aur रिम्पी की भी बहुत सी ऊर्जा उसे होने क कारण कुछ हालत ठीक नहीं thi........isiliye उसकी सतर्कता काम हो गयी और उस्सने इस बात पर ध्यान नहीं दिया क कोई और भी गुफा में प्रवेश कर गया है......

गोलरक ने देखा क अभी का शरीर निर्जीव पड़ा है......

उससे समज़ते देर नहीं लगी क यहाँ क्या हो रहा hai.....ussne सही मौका जानकार ......अभी क शरीर को नष्ट करने का सोचा ....लेकिन उसी samay....Abhi दिव्या शरीर की सहायता से विभक्त को लेकर पहुँच चूका था......

शिवली रिम्पी को सँभालने में लगी हुई थी ......गोलार्क अभी क शरीर की तरफ बड़ा hi था क...

अभी की आत्मा दिव्या शरीर क साथ अपने शरीर क अंदर प्रवेश कर gayi.....Aur उसके सहरीर में हलचल होने लगी ....और अभी की चेतना वापस आगयी ....

अभी को उठते हुए देखकर ....रिम्पी क चेहरे पर मुस्कराहट उभर आयी और उसकी आंखें बंद हो गयी ........और बेहोश हो गयी....

अभी तुरनत रिम्पी क पास पहुंचा .....शिवलु का ध्यान जैसे hi अभी की तरफ गया ....उसने भी चैन की सांस ली.....

अभी - रिम्पी को अपनी बाहों में उठाकर गुफा में एक जगह लिटा देता है ....और उसके गालो को चुकार उठाने की कोशिश करने लगता है....

अभी - उठो जान ....utho...na ...देखो में अब वापस आगया हु....

शिवली - थोड़ी देर में वह ठीक हो जायेगी ....बस अधिक ऊर्जा खर्च होने क कारण मूर्छित हो गयी ........आप बताये आप जिससे लाने गए थे कहा है....

विभक्त अभी भी दिव्या रूप में थी इसीलिए दिखाई नहीं दे रही थी .....

अभी का ध्यान वह एक कोने में खड़े गोलार्क पर जाता है.....

अभी - शिवू यह कौन है .....yaha...Abhi गक क बेटे को नहीं पहचान सका क्यों की जब उसने उससे देखा था तब वह छोटे बच्चे जैसा था ....लेकि गक की ऊर्जा उस्में सामने क बाद उस्का रूप बदल गया था ....और एक युवा की तरह हो गया था......

शिवली ने जब देखा .....अरे गोलू तुम यहाँ अंदर ...कैसे आये .......

गोलार्क - वह दी मैंने आपको परेशां देखा तोह उसका कारण जाने अंदर आया था....

शिवली - जान यह है गक का बीटा गोलार्क....

अभी - अरे तू तोह इतने जल्दी कितना बड़ा हो गया ...कैसा है तू ....

गोलार्क - में बिकुल कुल ठीक हु भैया....

शिवली - यह सब छोड़ो जान अब अपना कार्य सम्पूर्ण करो....

अभी - विभक्त अब तुम अपनी योग शक्ति का प्रयोग करके .....पांच तत्वों की ऊर्जा को एकत्रित करो और अपने स्थूल शरीर का निर्माण करो.....

उसी समाया वह पांच रंग क पांच तत्त्व की ऊर्जा का घेरा बनने लगा .......और जब वह ऊर्जा ेक्काकर हो गयी ....तोह वह प्रगट हो गयी ...VIBHAKTA....juske चेरे पर एक अलौकिक तेज़ tha......aur सुंदरता तोह इतनी जिसकी कोई तुलना न हो...

अभी - शिवू ...यह है ...विभक्त....

शिवली तोह बस उससे एक तक देखती रही ......

तभी विभक्त आगे बड़ी और रिमय क सर पर हाथ रखा ......उसके हाथ से ऊर्जा निकलकर रिम्पी में सामने लगी ......और रिम्पी की चेतना वापस आगयी और उससे होश आगया .....

रिम्पी ने जब अपने सामने विभक्त को देखा तोह वह भी बस उससे देखती रह गयी.........

अभी - विभक्त अपना तेज़ तुम छुपा लो नहीं तोह बड़ी मुश्किल हो जायेगी .....

तोह उस्सने भी अभी की बात मानकर अपने तेज़ को अपने योग चक्रो में छिपा लिया ......

और रिम्पी और शिवली नार्मल हो gayi......Dono विभक्त से मिलकर बहुत खुश हो गयी......

शिवली - विभक्त क पास jaakar......kaise hi सखी .....आज में बहुत खुश हु तुम्हे एक युग बाद देखकर ........

और विभक्त भी शिवलु क गले मिली ....दोनों को देखकर ऐसा लग रहा था ....क ...कई वर्षो की बिछड़ी सखिया मिल रही हो.....

आज क लिए इतना hi....

अगला अपडेट कल....
 
अवेसमे ..brillaint...shandar..

फैंटास्टिक रिव्यु ृतिमा जी

:अप्प्लायसे: :applause::applause:

बहुत बहुत धन्यवाद ृतिमा जी आपके शानदार सपोर्ट और अवेसमे कमेंट क लिए ...

:thanks::thanks::thanks:

आपके शानदार रिव्यु मुज़हे और अच्छा लिखने की प्रेरणा देते है.....

बस ऐसे hi साथ बनाये रखे...

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