ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 3 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

बहुत बहुत शुक्रिया नैना जी साथ बने रहने क लिए...

आपके शानदार कमेंट क लिए बहुत बहुत धन्यवाद ??

नैना जी .. हीरो दोनों रूप.. उन्ही चीजों को जल्दी जल्दी सिख रहा है जो पावर्स जन्म से hi उसके अंदर थी ..जीन पावर्स को महागुरु ने 14 लोको में छुपाया था उनको पाने क लिए अभी बहुत म्हणत करनी पड़ेगी....

हां हीरो क डैड ने कुछ राज़ हीरो को बताये ...लेकिन अभी बहुत से राज़ बाकी है ..नैना

ऋतू और आदिरा का राज...

दो रूप का राज और सबसे बड़ा उस्का अपना ब्रमांड क महारक्षक होने का राज़..

बस ऐसे hi साथ बनाये रखे

:यस1: :यस1: :यस1: :applause::thankyou::thankyou:


नई अपडेट - 20 पोस्टेड...
 
उपदरे - 21

अभी तक आपने देखा ....

ा1 अपनी यात्रा में मंदा गाओं pahuncha......Mukhiya जी से अंगूठी प्राप्त करना......

और पर्वत पर पहुंचना....

वह कुछ अदृश्य शक्तियों का सामना ....अब आगे.....


निचे गिरते hi में फिर आगे जाने लगा .फिर किसीने मुज़हे उठाकर फेंका और वही ...भरी सी आवाज...

अब मुज़हे क्रोध आनेलगा था

फिर भी अपने मैं को शांत करते हुए

में - कौन है यहाँ जो मेरा रास्ता रोकने का प्रयत्न कर रहा है..

देखो मेरी तुम से कोई शत्रुता नहीं है .....मुज़हे जाने दो.....

फिर आगे बड़ा तोह फिर से wahi...hua

में - कौन है सामने क्यों नहीं आता

बस अब बहुत hua.......kahte है न लातो क बहुत बातों से नहीं मानते....

आवाज - ha..ha...ha...bache तू करेगा हमारा mukabla......shatruta तोह तूने कर ली है ..हमारी बात न माकर

अब तुम खुद अपनी मौत के जिम्मेदार hoge.....ha...ha...ha.....

फिर मैंने जल और पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा

मिलकर एक गोला तैयार किया और अपने अन्तःकरण (सुब क्योंकिओस मंद)

को और अपनी घ्यानेन्द्रियो

(शरीर क वह अंग जिससे हम महसूस करते hai...aankh, नाक ..kaan..juban

और त्वचा ) जागृत किया और आगे कदम बढ़ाया ....जैसे hi में आगे बड़ा मुज़हे अपनी दायी और से कुछ ऊर्जा का ाबास हुआ और मैंने दो तत्वों से बना ऊर्जा का गोला उसकी दिशा में छोड़ा ...फिर गुंजी एक दर्द नाक cheekh....aur जब मैंने देखा तोह सामे एक 20 फट ऊँचा दैत्य निचे गिरा हाउ कराह रहा था......

बड़ा भयंकर था दिखने में पूरा शरीर काला और बड़ी बड़ी लाल आंखें.....

में -- देखा मुजह्से उलज़ने का परिणाम ....कही कजोत तोह नहीं आयी

बच्चे ...अल्ले ..alle...le

आवाज - है ..ha..ha बचे अच्छा अंदाज है ...जो निचे गिरा है वह में नहीं

वासी दम है तुममे ...हज़ारो वर्षो से कोई मुकाबले का मिला नहीं

अब आएगा मज़ा.....

तभी वह दैत्य फिर खड़ा हुआ और अपने बड़े से मुद्गर जैसे लकड़ी से उठाकर प्रहार करने आया जैसे hi वह मुज़हे मारता , में अपनी जगह से हैट gaya....aur वह फिर मिटटी में

तभी मेरा मैं में इस खेल को खत्तम काने का विचार आया....

और मैंने पांच तत्वों की ऊर्जा को मिलकर एक तलवार प्रगट की और उसका मुख उस दैत्य पर किया जिससे पांच रंग की किरणे निकली और उस्का शरीर पांच तत्वों में विभाजित हो gaya..aur खेल khatam.....tabhi किसी ने मेरे हाथ पर जोर से प्रहार किया जिससे मुज़हे बहुत दर्द hua...aur तलवार मेरे हातो से दूर गिर गयी...

में तलवार को वापस उठता की तभी एक और प्रहार मुझ पर हुआ...

आवाज -- है है ....है अभी तोह एक hi ख़तम हुआ है बच्चे ..कितनो को मारोगे ...एक ख़तम हुआ तूह दो आएंगे अब रोक का दिहका ...

में फिर से दो तत्वों की ऊर्जा का गोला बनाने लगा की फिर मुज़हे किसी ने उठाकर pheka...ab मेरे मैं में आया की ऐसे तोह कुछ नहीं होगा

इस आवाज वाले को hi देखना होगा..

फिर मैंने अपने चारो तरफ एक बवंडर बनाया और अपने चक्रो को जागृत करने में लग गया...

आवाज - अच्छा तोह बवंडर में चुप रहा है ....तभी आवाज की दिशा से कुछ नीली किरणे निकली और बवंडर वही गायब तब तक में अपने 7 चक्रो को जागृत का चूका था....

क्यों की अभी तक की शिक्षा में इन्ही 5 को जागृत कर पाया था जो 5 तत्वों की ऊर्जा का केंद्र है

1 ...मूलाधार ...पृथ्वी तत्त्व

2 ... स्वाधिस्ठान...... जल तत्त्व

3..... Manipurak......Agni तत्त्व

4..... अनाहत...... वायु तत्त्व

5.... विशुद्धि.... आकाश तत्त्व

जब उस नीली किरणों से मेरा बनाया हुआ बवंडर ख़तम हुआ ..तब तक में इन् चक्रो को जागृत का चूका था और इन 5 तत्वों की ऊर्जा को एक करके एक बंधन बनाया और छोड़ दिया उस तरफ जहा से किरणे आयी थी .....

तभी गुंजी एक चीख ....नाहीईई

और सामने मेरे ऊर्जा क बंधन में तड़पता हुआ एक महादैत्य जो करीब 20 फट बड़ा और स्वर्ण क आभूषण पहने हुए था ...

में... अब क्या कहते हो ...बहुत चुप छुपकर अपनी माया दिखा रहे थे अब क्या हुआ...

महादैत्य - मुऊज़हहॅ ...क्षमा कररर दो ..मैंने तुम्हारी शक्ति को ..अह्ह्ह ..नहीं ..pehchana...chod...do...muzhe..ab ..mein...tumahara सेवक hu...muzhe

छोड़ दो..

में - नहीं मुज़हे किसी सेवक की जरुरत नहीं..... न जाने कितने hi मासूम लोगो को तुमने मारा होगा..

अब तुम्हे मिलेगी ..toh..sirf ...मृत्यु

जैसे hi मैंने उसका खेल समाप्त करने क लिए ...आगे बड़ा ..तभी मेरी अंगूठी जोर से चमकने लगी.... और आयी महागुरु की आवाज

महागुरु - नहीं पुत्र इससे छोड़ दो ..यह तोह अपना दय्यित्व पूरा कर रहा था ...और यह कोई दैत्य नहीं है पुत्र यह एक एक यक्ष्य है...

तब मुज़हे महागुरु की दूरदर्शता का अनुभव hua...ki उन्हें इन् सब घटनाओ का पूर्वज्ञान था ...और ऐसे hi किसी परिस्थिति क लिए उन्होंने यह अंगूठी मेरे लिए छोड़ी थी...

महागुरु की बात सुनकर मैंने उस यक्ष को मुक्त किया...

तब उसने अपना भयंकर रूप को त्याग कर सूंदर रूप धारण कर लिया....

यक्ष्य -- आपका मुज़हे मुक्त करने क लिए बहुत बहुत धन्यवाद अब में आपका सेवक hu......mere लिए लिए क्या आज्ञा hai.......itna कहकर वह अपने घुटने पर हाथ जोड़कर बैठ गया...

मैंने उससे ुहटया ....नहीं मित्र...

तुम मेरे सेवक नहीं मेरे मित्र की तरह hi रहो तोह अच्छा.. है

यक्ष - आप बहुत ाचे हो ...मैंने आपको मरने का प्रयत्न किया और आपने मुज़हे मित्र बनाया....

में - अच्छा अब तोह मुज़हे बाताओ यहाँ एशिया क्या है ...जो यहाँ पर आता है वह वापस जा नहीं पाटा.

और तुम्हारा नाम क्या है...

यक्ष - मेरा नाम गुणांक है और यहाँ नीलकंठ पर्वत क ऊपर से भुवलोक की शुरुवात होती है , जो एक शुक्ष्मा लोक है.. जहा स्थूल शरीर क साथ नहीं जाय jaasakta....waha यक्षों का राज hai.....aur यही से धन क स्वामी कुबेर जी की नगरी, अलकापुरी की शुरुवात होती है....

यहाँ मानवो का आना मन है ...में इस मार्ग का रक्षक हु...

में - तोह तुम यहाँ आनेवालों का क्या करते हो

GUNAK(GK) - हमारा भोजन तामसिक होता है इसीलिए हम यहाँ आनेवाले मानवो क शरीर से उनका शुक्ष्मा शरीर को अलग करके उनके शरीर का भोजन करते है ...और उनके सुक्ष्म शरीर को अपने राज्य ले जाकर दास बनाते है...

में - हम्म्म .... शायद नियति ने मुज़हे इसीलिए भेजा hai....ek बात और batao.....Mein यहाँ भीम जी की गदा को ढूंढ़ते हुए आया hu...kya तुम बता सकते हो वह कहा है

गक - जी आप जिस गदा को ढूंढ रहे हो वह अलकापुरी में hi कुबेर जी के महल में hai....lekin आप वह जा नहीं सकते ...और में भी इस विषय में आपकी कोई सहायता नहीं कर सकता

में - उस की तुम चिंता मत करो बस तुम मुज़हे वह तक ले जाओ....

(यहाँ में आपको बता दू जब महागुरु ने अभी के दो रूप बनाये थे ..तोह ा1 का निर्माण अभी क सुक्ष्म श्री की ऊर्जा से हुआ था)

में अब गक के साथ उस पर्वत शिखर पर पहुंच गया...

गक - यहाँ से शुरू होती है भुवलोक

और अलका पूरी की सीमा....

में - लेकिन मुज़हे तोह यहाँ पर कुछ नहीं दिख रहा है..

गक - मैंने पहले hi कहा था की इन स्टूल आँखों से इस लोक को देखा नहीं जा सकता...

में अभी विचार कर hi रहा था की फिर मेरी अंगूठी चमकने लगी.....

और उससे एक प्रकाश निकलने laga..usne मुज़हे पूरा घेर लिया अब मुज़हे ऐसा लगने लगा की मेरे शरीर क सारे स्थूल अंग उसमे समाते जा रहे है ....और मुज़हे असहनीय पीड़ा का अनुभव होने laga...thodi hi देर में में स्थूल शरीर क साथ hi सारा दर्द भी लगता है उस अंगूठी ने सोख लिया था ....अब मुज़हे बिकुल हल्का लग रहा था जैसे की मेरा कोई वजन hi न हो.....

तब मैंने अपने सामने देखा तोह एक बहुत सूंदर दिव्या नगर दिखाई दिया


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और फिर में गक क साथ उस नगर में प्रवेश कर gaya.....jaise जैसे में आगे जाने लगा उस नगर की सुंदरता को देखकर चकित हो गया ..

सारा नगर स्वर्ण और हर्रे मोतियों से बना हुआ था .....क्यों न हो क्युकी यह धन क स्वामी कुबेर जी की राजधानी जो तहरी.......

गक - मित्र में सदियों से अपने परिवार को नहीं मिला हु क्या उनसे मिल सकता हु..... आप भी चलो हमारे घर .....मुज़हे बड़ी ख़ुशी होगी आपकी सेवा का मौका पाकर.

में - नहीं मित्र अभी मुज़हे बहुत काम करने है ...अभी तुम जाओ

गक - ठीक है मित्र ...परन्तु जब तुम्हे मेरी आवश्यकता हो तब बस एक बार मैं में मेरा नाम लेलेना

में उसी समय aajaunga.....aur एक बात...

जिस वास्तु की आप खोज कर रहे हो वह महल में hai.....jo यहाँ से उत्तर दिशा में स्थित है.....

और जहा तक मुज़हे लगता है कुबेर जी भी आपसे मिलना छह रहे है...

में - तुम ऐसे कैसे कह सकते हो

गक - क्युकी इस नगर में उनकी इच्छा क बिना कोई प्रवेश नहीं कर सकता और आप यहाँ तक पहुंच गए ...इसी से ऐसे लगता है

इतना कहकर गक वह से चला गया

और में भी आगे बड़ा थोड़ी hi दूर जाकर मैंने देखा ...एक दिव्या विमान

मेरे सामने उतरा और उसमें से उतरे कुछ सैनिक......

आज क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट कल......
 
अपडेट - 22

अब तक आपने dehka......A1 का गक क साथ yudh.....aur उससे harana....KUBER जी की नगरी अलकापुरी.... में प्रवेश ..

अब आगे ........


जैसे hi में आगे बड़ा तोह देखा एक अद्भुत दिव्या विमान आकाश से मेरे सामने utra.....aashram में मैंने गुरु जी से पुष्पक विमान क बारे में सुना tha....yeh भी वैसा hi कोई था....

उस विमान से कुछ सैनिक उतरे और मेरी तरफ ऐनी लगे.....

मैंने सोचा की अब यहाँ भी युद्ध करना होगा......

तभी एक सैनिक ने कहा .... युवक महाराज ने तुम्हे बुलाया है....

आईये ..... और हमारे साथ चलिए ..

मैंने सोचा चलो अच्छा hi हुआ अब मुज़हे ढूंढ़ना नहीं पड़ेगा...

में उन् सैनिको क साथ बैठ गया और चल पड़ा आकाश मार्ग से महल की और......

जब विमान उतरा तोह मैंने देखा एक बहुत विशाल महल जो स्वर्ण का बना हुआ था..... जब में वह गया.....

तोह देखा महल क दरवाजे पर कुछ दसिया पुष्पों की थालिया लेकर कड़ी thi.....jaise hi में द्वार पर पहुंचा तोह फूलों की वर्षा मेरे ऊपर..

ऐसे स्वागत जीवन में पहली बार हुआ tha......accha तोह बहुत लगा लेकिन

विचार भी आया यह सब मुज़हे इतने श्रद्धा भाव से क्यों देख रहे है...

खैर देकते है आगे क्या कुछ नया होता है.....

तभी वह राजसी भेष में एक यक्ष आगे आया .....आइए श्रीमान ...महाराज आपकी प्रतीक्षा में है...

मैंने सोचा स्वयं धन क स्वामी कुबेर जी और मेरी प्रतीक्षा में....

में उनके साथ चल pada.....aur पहुँच गया ......एक सभा में ...

जो बहुत hi विशाल thi.....ek ऊँचे से और बड़े सिंहघासें पर किसी को बैठे देखा ....उनके चेरे पर एक अलग hi प्राकाः था ....सर पर हीरो से जड़ित स्वर्ण mukut...matthe पर बना हुआ tripund......swarn आभूषण....

और पास में बड़ी सी गदा...

मेरे साथ जो यक्ष आया था उसने

सिंघासन की और श्रद्धा से प्रणाम करते हुए..

प्रणाम महाराज ...आपने जिससे कहा था उससे हम ले आये प्रभु..

मैंने भी प्रणाम किया.....

प्रणाम Maharaj.....Aaj में धन्य हो गया ....जीन धन क स्वामी कुबेर जी क बारे में आश्रम में कथाओ में सुना था ....आज साक्षात उनके दर्शन पाकर में कृतार्थ हो गया...

तभी कुबेर जी ने सभा में बैठे हुए सबको कुछ इशारा किया और पल भर में सब gayab......mein थोड़ा चकित हुआ ....फिर सोचा की यह मायावी नगरी है यहाँ कुछ भी हो सकता है

तभी कुबेर जी खड़े होगये ......

कुबेर जी - धन्य तोह हम हुए है , जो आज आप इस ब्रह्मांड क रक्षक साक्षात यहाँ पधारे है

में कई हज़ार वर्षो से आपकी hi प्रतीक्षा में था...

में अपने चारो और देखने लगा की स्वयं कुबेर जी किस क स्वागत क लिए खड़े हो गए है ...लेकिन वह मेरे सिवा और कोई नहीं था

कुबेर जी - ऐसे क्या देख रहे ho...mein आपको hi कह रहा हु...

में - परन्तु में और ब्रह्माण्ड का

rakshak.....kaise...mein तोह एक साधारण बालक हु ...जो अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए यहाँ आया हु

कुबेर जी - मुस्कुराते hue...Abhi आप अपने वास्तविक रूप से अपरिचित है

इसीलिए ऐसा कर रहे है...

में - मुज़हे कुछ याद नहीं है...


kya aap mera parichy jaante ho...

Kuber ji - Yadi ab tak aapko aapka parichaya prapt nahi hua toh issmein tridevo ki hi iccha hai.....aur unki iccha k virudh mein aapko aapke baare mein kuch nahi bata sakta...

ab aap iss baat ko chodiye aur aayie aasan grahan kijiye ......

mein bhi waha ek aasan par baith gaya......

Kuber ji -- muzhe pata hai aap yaha kya prapt karne aaye ho.......woh aapki hi amant hai.........pichli baar jab aap yaha aaye the toh aapne hi woh divya gada humare mahal mein sthit sarover mein rakhi thi ...woh waha surakshit hai

mein - thik hai ..kya aap muzhe waha ...pahuncha sakte ho.....

Kuber ji - Aaj aap yahi vishram kijiye

kal pratha hi hum swayam aapko waha le chalenge......

mein - jaisi aapki iccha.....

phir unhone apne sewako ko bulaya

aur mahal k ek vishesh kaksh mein mera ...rahene ka prabadh karawaye

Sewak - Yeh raha aapka kaskh.....yeh ek maya mahal hai .....yaha aapko jis bhi vastu ki aawashyakta hogi bas. uske baare mein soshte hi aapje saamne haazir hogi

mein - toh kya yadi mein gada k baare mein sochu toh woh bhi yaha pragat hi jaayegi

Sewak - muskurate hue.. nahi

ab mein uss kaksh ko dekne laga, phir mein waha k ek aasan par baith gaya .

aur socha ki dekhte hai yaha ki maya kaisi hai

toh maine socha kuch khane k liye mil jaaye ....tabhi waha ek mere hi umar ka yuvak falo ki thaal liye aagaya...

jo dikhne mein meri tarah hi tha bas ...

naak aur kaan ka farak tha....

tabhi muzhe Manda gaon k mukhiya ji ki baat yaad aagayi...

aur maine usski aankon mein ek ajeeb udasi dekhi......woh yaha yaksho se kuch alag lag raha tha .....toh mein saari baat samaz gaya...

mein - kya baat hai tum itne udaas kyu ho....bhai...tum ..toh yaksha nahi lagte..kaun ho tum..

meri - baat sunke usne udaas nazro se ek baar muzhe dekha ..aur jaane laga......ki maine usse phir pukara

mein - Vishu....ruko...

mere usko pukarne par woh phir ek baar muda.....ab uski aankon mein hairani k bhav the ....lekin woh ruka nahi ...

ab muzhe yaha kuch accha nahi lag raha tha ....toh socha apne naye bane mitr ko hi yaad kar lu....aur mann mein pukara.....tabhi mere saamne GK

pragat hua..

GK - aapne muzhe pukaara mitr kaho kya aagya hai

mein - aagya toh kuch nahi bas mera yaha mann nahi lag raha hai , toh socha tumhe yaad kar lu.

GK - mein abhi apne gharwalo ko aapke baare mein hi bata raha tha..

ki aapne yaad kar liya

mein- Chalo tumahare ghar chalte hai

GK - kya sach mein ...aap chalenge

Mein - haa kyu nahi ..yaha akele iss maya mahal mein muzhe accha nahi lag raha

Phir GK ne mera haath pakda aur palak zhapkte pahunch gaya usske ghar

muzhe achanak waha GK k saath dekhkar sabhi hadbada gaye ...

tab Gk ne apne ghar walo se mera parichay karaya.....uski patni, aur do bacche muzhe dekhkar bahut khush hue

Mein - tum toh kah rahe the k tum hazaroo saalo se se pariwar se nahi mile toh ye bacche...itna kah kar mein muskurane laga...

GK - kya mitr aap bhi....yaha yaksho ki aayu bahut hoti hai abhi toh mera yeh chotta beta 5 hazaar sasl ka hai jo prithvi k 5 varsh k baalak k barabar dikhta hai...

phir aise hi kuch baatein aur bhojan k saath woh raat bit gayi ...subah 4 baje mein wapas maya mahal pahunch gaya.....socha abhi apn lakshya ki aur thoda samay hai toh dhyan kiya jaaye aur baith gaya dhyan karne.....

aaj dhyan mein muzhe kuch naye rang ki urja apne bhiter mahsus hui....

uss urja par apna dhyan kendrit karke dekhe laga toh woh aur gahri ho gayi.

phir woh saari urja mere mastak ke piche VISHSHUDDHI chakra se upar ki aur kendrit ho gayi aur dikhne laga .

do dal wal kamal safed urja se paipurna.....aur dikhne lagi kuch aakriti.....tabhi mera dhyan tuta....aur saamne dekha toh KUBER JI khade the...

au jo meri taraf hi dekh rahe the...

usske baad mein Unke saath ek Sarover par pahuncha jaha bader hi sunder kamal khile hue the

Kuber ji - Yahi woh sarover hai jaha aapki amaanat rakhi hai,

isse aapko hi prapt karna hoga...

aur itna kahkar woh waha se chale gaye....

ab mein sarover ki bada aur jaise hi mein jal mein utra ...toh mere pair wahi ruk jagaye , chahkar bhi mein aage nahi bad paa raha tha....

tabhi waha uss jal mein hulchul hui aur jal ne bade se bhawar ka rup le liya.....aur pragat hua ek balshali divya purush, jo dikhne mein bada hi divya aur shaktishali dikh raha tha, aur aai awaaj..

aawaj - kaun ho tum ...jo yaha tak pahunch gaye......

mein - mera naam Abhi hai aur mein yaja ek gada lene aaya hu...

aawaj - hmmm aap yaha kuber ji k saath aaye ho......parantu aap woh gada tabhi prapt kar sakte ho jab aap mere teen prashna ka utter de doge..

yadi aap ek bhi jawab nahi de paaye toh aap issi sarower mein kaid ho jaaoge...

mein - muzhe sweekar hai pucho kya puchna chate ho

1 - Acche karmo k punyo ke nash ka mool kya hai

Mein - कामेन कर्म नाशं स्यात्। hamari bhogo ko bhogne ki vaasnaye hi , hamare karmo ka nash karti hai

2 - Gyan k naash ka mool kya hai

mein - क्रोधेन ज्ञान नाशनम्। jab bhi hume krodh aata hai toh hum sab bhul jaate hai , aur aisa anchit karya kar baithte hai, jisse aage hume hi pareshaniyo ka saamna karna padta hai, isiliye Krodh hi gyan ka naash karta hai

3 - Bhakti k naash ka mool kya hai

mein - लोभेन भक्ति नाशं स्यात्।

lobh hi bhakti k naash ka mool hai, Lobhi vyaki k liye niswarth bhakti ko koi mol nahi

atti uttam aapne sabhi prashno ka sahi utrar diy hai.....mein aapko pahele hi pahchan chuka tha prarntu

yeh mera kartya tha jo muzhe pura karna hi tha......

itna kahkar ussne ek badi chamki hui gada ka roop le liya aur mere haatho mein aagaya, uss gada ko apne haatho mein paakar muzhe apne andar apaar shakti ka anbhav hone laga.......phir woh gada prakash roop mein badal gayi aur mere bhiter sama gayi....

gada prapt karne par mein chal pada apne dusre udeshya ki aur

aur phir Pahunch gaya Kuber ji ki sabha mein...

Muzhe dekhkar Kuberji bade khush ho gaye

Kuber ji - aakir aapne apni gada ko prapt hi kar liya....ab aapka yaha ka karya pura ho gaya

mein - Abhi kuch karya adhura hai ...

muzhe aapse kuch aur bhi chahiye...

Kuber ji - Kaho Rakshak ...mera vachan hai aapko ..aap ko chahoge aapko woh prapt hoga...

mein - toh phir aap unn sab manushya ko mukt kar do ...jinhe aapne daas bana rakha hai...

Mere aisa kahne par sabha mein hulchul hone lagi

mein - Dekhiye aapne muzhe vachan diya hai...

Kuber ji - Parantu aap unka kya karoge ..unnka sharir toh khatam ho gaya hai

mein - woh sab mein dekh lunga..aap apne vachan ka paalan kare

kuber ji - thik hai parantu unhi ko hum mukt kar sakte hai , jinnka jeewan prithvi par abhi baaki hai....

aap jab hamari seema pa pahunchoge tab sab k sukshma sharir waha pahunch jaayenge..

mein - Thik hai aagya dijiye ab mein chalta hu...

Kuber ji - Jaane se pahle ek baar aap Hamare Alkapuri k Shivalaya mein jarur darshan kijiye..

mein - ji ..jarur

itna kahkar mein mahal k bahar aagaya aur Vichar kiya ki ..jab kuber ji

ne kaha hai toh jarur jana chahiye..

phir meine GK ko yaad kiya aur GK haazir....

Mein - mitr muzhe yaha k Shivalaya jaana hai kya tum muzhe le chalo ge

GK - kyu nahi mitr ...aur ussne mera haath pakda aur pahunch gaye sidha Shiv mandir k aage...

Bada hi sunder Shiv mandir tha adbhut kalakrti ....mandir ki sunderta aur shilpkala ko dekhte dekhte Bhagwan bholenath k Vishal shivling k saamne pahuncha ....woh shivling

swayam prakshit tha ussmein se divya prakash mikal raha tha...mein iss adbhut darshan se bhav vibhore ho gaya tha ...ki tabhi ek bahut hi suril aawaj mein RUDRASTAKAM ki stuti mere kaano mein padi ...

toh meine aawaj ki aur dhyan diya

toh dekha ki ek bahut hi sunder kanya

apni asnkhein band karke tanmayta se gaa rahi thi.....jaane kyu mein usski taraf kheecha chala jaa raha tha......

aur usske aage jaakar niharne laga

jab stuti samapt hui aur usne aapni asnkhien kholi toh muzhe apne saamne dekhkar hairan ho gayi

woh kuch bolna chahti thi lekin bol nahi paa rahi thi ...hum dono bas ek dusre ko dekhe jaa rahe the

mein - mann mein ....na jaane kyu iss dekhkar khicha chala jaa raha hu....

lagta hai jaise mein isse jaanta hu ...

aur mere mann mein yeh kaisi hulchul si mach rahi hai

ladki - mann mein ---- kya mein jo dekh rahi hu woh swapna hai ya satya hai....kitna sunder hai.....kya karu mein ...kaise baat karu....hey Mahadev ...jissko roj mein sapno mein dekti hu ..wahi mere saamne

tabhi GK ki aawaj se hum dono ka dhyan tuta

GK - Arre bete SHIVALI yeh mere swami mere mitra .. Abhi hai

aur mitr Yeh SHIVALI hai jissi mein aaj subah apne pariwar k saath yaha aaya tha tab mila tha

mitr inko yaha badi shradha se dekha jaata hai ...

innka yaha k pujari k yaha hua tha...aur innki aayu yaha k samay ansar nahi balki pritvi k samaay k ansar bad rahi hai..

janm se hi inhe mayavi shakti prapt hui hai...

SHIVALI - Kaka shri kya mein innse ekaanth mein mil sakta hu....

GK ne meri aur dekha ...toh meine bhi ishara kiya jisse woh waha se thodi dur chala gaya..

Mein - haa ji kahiye...

SHIVALI - yaha nahi ...kya aap thodha bahar chaliye....hum mandir k bahar aagaye...

SHIVALI - Aap kya sach mein manushyalok se aaye hai ....

mein -haa

SHIVALI - sharmate hue ...phir baba ne satya kaha tha..

mein - kya kaha tha baba ne...

Ussne apni tirchi nazroo se muzhe dekha...na haane kya tha unn aakon mein aisa toh muzhe Sirf Shalu ki aankon mein dekhkar hota tha...

Shivali - baba se hi puch lo....

tabhi waha pujari ji ko aate dekha ...jab unhone muzhe dekha toh bade khush ho gaye

Pujari - aagye aap ....aapki mein kab se pratiksha kar raha tha.......

mein - meri pratiksha ...kyu

pujari - Shivali ki aur dekhte hue....aapki amaant jo mere paas hai

unki baat sunne k baad Shivali sharmane kagi

kuch kuch meri samaz mein aaraha tha.....aur Shivali ki aankhon mein bhi aapne liye prem dekh liya tha ..

lekin abhi muzhe bahut karya karne the

mein - Pujari ji mein aapki baato ko samaz raha hu ...aur Shivali ki aur dekhkar.... muzhe bhi uss pal ki pratiksha rahegi ...parantu abi muzhe bahut karya karne baaki hai......

aur muzhe jaana hoga.....

meri baat sunkar Shivali ki aanko mein aansoo aagaye...

mein - Shivali se - dekho tumhe dekhkar na jaane muzhe bhi kyu aakarshan hua....aur tumhe chodkar jaane ki baat se mere mann mein bhi dukh ka aubhav ho raha hai

parantu abhi mere kartavya muzhe bula raha hai toh muzhe jaana hoga

lekin mera vachan hai ki mein tumhe lene jarur aaunga....

itna kahkar meine waha se vida li aur GK k ssath pahunch gaya Bhuvalok ki seema oar waha maine dekha lagbhag 12 shukshma sharir jinhe Kuber ji ne mukt kiya tha meri hi peatiksha mein the.

seema se bahar jaate hi meri anguthi se panch rang ki urja nikli aur mera sthool sharir muxhe wapas mil gaya

ab prashna tha ki kaise unn 12 logo ko unke sharir diye jaaye

tabhi mahaguru ki aawaj aayi putra dhyan mein baitho aur apni urja ko aagya chara mein ektrit karo jaise aaj subah kiya tha ...mein samaj gaya aur dhyan karne baith gaya

jab meine apne chakro ka dhyan karte hue Aagya chakra mein pahuncha toh waha se paanch tatva aur jeewan shati ki urja nikalkar sidhe un 12 sukshma sharir par padi aur dekhte hi dekhte unka sthool shari unhe wapas mil gaya

sabhi bahut khush the....mera aabhar vyakt kar rahe the....unhe mein muzhe

vishu bhi mila ....usse dekhkar muzhe badi khushi hui....ki ek maa ko diya hua vachan mein pura kar paaya..

sab ko mvida kiya ........

ab apne agle safar ki chalne ki tayarri

......

abhi k liye itna hi...

agla update jald hi....
 
अपडेट - 23

अब तक आपने dekha......kaise ा1 ने गदा प्राप्त की......

शिवली से मुलाक़ात.....

और विशु आदि बंदियों को मुक्त करना

अब आगे..........


विशु और बाकी लोगो क जाने क बाद ..... फिर मैंने अपने अगले पड़ाव..... मानसरोवर की तरफ प्रस्थान करने की सोचा....

में - तोह गक चले अगले सफर par.......ab मुज़हे कैलाश पर्वत क निकट ....मानसरोवर जाना है ...

गक - जी जरूर परन्तु में केवल आपको मानसरोवर से पहले राक्षस ताल तक hi पंहुचा सकता हु....

उसस्के आगे कैलाश पर्वत का क्षेत्र शुरू हो जाता है ......वह महादेव क इच्छा क बिना कोई मायावी शक्ति काम नहीं करती....

में - ठीक है तोह फिर चलो ......

ा1 चल पड़ा अपने अगले सफर पर...

अब जरा देखते है हमारा अभी क्या कर रहा है....

याना अभी की ट्रेनिंग भी जोरो से चल रही थी वह कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी तेज़ी से प्रोग्रेस करा रहा था ,

रिम्पी क साथ रोज स्कूल जाना अभी भी चालू tha...aise hi एक दिन..

दिवाली क 10 दिन पहले वेकेशन शुरू hui.....sabhi फ्रेंड्स ने बहार घूमने का प्लान बनाया.....

अभी - ( पह पर ) हां ....ठीक है तोह रिम्पी तैयार हो एडवेंचर क लिए....

accha......thik ..hai.....ghana जंगल देखकर फिर न कहना की दर लग रहा है....

अभी की आवाज सुनकर आदिरा जो अभी क रूम में hi सोई थी....

ाद्दु -( अपनी आंखें मलते हुए)

कहा जा रहे हो भैया .....में भी चलूंगी साथ में ...बहुत मज़ा आएगा..

में - नहीं बेतु तुम अभी बहुत छोटी ho.....aur वह फारेस्ट में पता नहीं कुआँ कुआँ से जंगली जानवर होंगे

ाद्दु - नहीं ...भैया में भी chalugi....matlab chalungi....ab में बड़ी हो गयी हु ....भैया प्लस न.....

अब मुज़हे दर भी नहीं लगता.......

में ब्रेव गर्ल हु...

में - नहीं betu...jidd मत करो न..

बस 2 दिन क लिए तोह जा रहा हु .....समाजो करो न गुड़िया

मेरी बात सुनकर वह जोर जोर से रोने लगी ...ुह्ह्ह्ह uhhhh...uhhh

में भी चलूंगी ........nahi....muzhe भी जाना है.

इतने में ऋतू दी भी आगयी .....अरे मेरा शोना baccha....kya हुआ ..क्यों रो रहा hai........Abhi ..तूने रुलाया है

गुड़िया को...( मेरी तरफ बड़ी आंखें काके) ख़बरदार जो मेरी ाद्दु को कुछ कहा तोह...

ाद्दु . नहीं ...दी ...भाई को मत दातो .

नहीं तोह में आपसे बात नहीं करुँगी

हां ...यह मेरे और भैया ..क बिच की बात है....

इतने में माँ भी आगयी ....अरे क्या हो रहा है yaha....Ritu यह ाद्दु क्यों रो रहे hai...tune रुल्या ाद्दु को

ऋतू - हे राम ....ऐसे hi होता है दो क ज़्हगड में घुसो तोह बात अपने पर hi आती है

नहीं ..माँ मैंने कुछ नहीं किया है में यहाँ आई तोह यह रो रही thi..toh मैंने अभी को थोड़ा सा दांत दिया ...

तोह यह चुटकी मुज़हे hi आंखें दिखा रही है...

ाद्दु - सिसकते हुए ...में चुटकी ..नहीं हु ..दी

ऋतू - हां ..हां बहुत बड़ी हो गयी है tu....chutanki....aur दी हसने लगी

ाद्दु - माँ देखो न डीडू मुज़हे चिड़ा रही hai....mein चुटकी नहीं हु

इन् दोनों की यह नटखट लड़ाई देखकर मुज़हे सुर माँ को बहुत हँसी आरही थी लेकिन हम दोनों अपनी हिस्से को अंदर hi दबाये the...agar ाद्दु ने देख लिया तोह और तूफ़ान ाजायर्गा....

माँ ने आगे बढ़कर ाद्दु को अपनी गोदी में भितहया और उसके आंसू पिछने लगी...

माँ - क्या हुआ gudiya...tum रो क्यों रही थी बेतु.....

ाद्दु - माँ अब भाई न मुज़हे पहले जैसा प्यार नहीं karte.....bahi आजकल कहा रहते है मुज़हे मिलते भी नहीं.

और अभी वेकेशन है तोह बहार घूमने ..जा रहे hai.....jab में ..kaja.....muzhe भी जाना hai....toh भाई ने मन किया...

तब मैंने भी सोचा की टर्निंग और स्कूल क चक्कर में सच में बहुत दिन से में गुड़िया से अच्छे से नहीं मिल पाया.......

में - सॉरी gudiya....chup hi जा बेतु

अपने कामो क चक्क्र में में तुम्हे टाइम hi नहीं दे पाया ....

इतना कहकर में कण पदकद कर घुटने पर बैठ gaya.....apni गलती का अहसास होने पर मेरी आँखें भी भर आयी

मुज़हे ऐसे बैठा देखकर ..गुड़िया माँ की गोद से उठाकर मेरे पास आई

और मेरे आंसू पोछते हुए.....

ाद्दु - भाई आप सॉरी मत बोलो न .....देखो में नाराज नहीं हु...

इतना कहकर वह मेरे गले लग गयी..

और मेरे कान में बोलने लगी .....अब तोह मुज़हे ले जाओगे न भाई....

में - उसस्के बार्रे में जब डैड आएंगे तब बात karenge.......abhi तोह बहार चलो आइसक्रीम पार्टी करते है...

ऋतू - यह क्या ..भाई मुज़हे नहीं ले चलोगे....

में क्यों नहीं दी आप भी , और माँ आप भी चलो न .

ऋतू - हां माँ चलो न , हम शॉपिंग भी का लेंगे.. मज़ा आएगा

माँ - बीटा शॉपिंग की क्या जरुरत है, इस सिटी में हमारे 4 शॉपिंग मॉल . उनकी साइट पर जो तुम्हे चाहिए वह सेलेक्ट करो ...विह यही आजायेगा

ऋतू - नहीं माँ शॉपिंग का अलग hi मज़ा है....

ठीक है तुम जाओ मुज़हे अभी कुछ कांम है....

फिर में दी और ाद्दु को लेकर निकलने लगा की तभी रिम्पी का भी पह आगया ....डीडू क सामने में उठाना नहीं चाहता था ...

ऋतू - अभी कॉल क्यों नहीं उठा रहा है किसके है कॉल ला इधर दे....

और दी ने मेरे हाथ से पह चीन लिया

और स्पीकर ों कर diya...ki तभी

मेरे तोते उड़ गए.....

रिम्पी - इतनी देर क्यों लगायी मेरे बाबू ने .....बाबू सुनकर दी मेरे तरफ देखने लगी और मुज़हे बात करने का का इशारा किया ...


में - क्या बात है रिम्पी ...में अभी गाड़ी में हु ाद्दु और दी क साथ आरा शॉपिंग मॉल जा रहा हु ...ाचा तोह में भी वह hi आ रही हु ...

आउटिंग क लिए कुछ शॉपिंग करनी है..

मिलते है मॉल में शोना....

तभी दी - रिम्पी कभी हमरे भी इतने प्यार से कॉल कर लिया कर...

रिम्पी - अरे diiiiiii.....aaap ...हां

और कॉल कट हो गयी...

दी - क्या बात है बेतु यह बाबू ....शोना क्या चल ..रहा है ...हां

और ाद्दु भी मुज़हे देख रही थी अब पता नहीं उससे कुछ समाज में आरहा था की नहीं......

में - नाहीई..... डीईई ....ओह्ह्ह ..कुउच ..नाहीइ ..ऐसे hi .पागल लड़की है वह....

मुज़हे ऐसे हकलाते देहकर ाद्दु जोर जोर से हसने लगी.....

तभी हम पहुँच गए आरा मॉल

यह सिटी का टॉप मोस्ट मॉल tha...jiska नाम हम तीनो क नाम क इनिशियल लेटर जोड़ कर रखा गया था ...

हम वह उतर गए हुए ड्राइवर चला गे गाड़ी पार्क करने क तभी वह एक और गाड़ी आकर रुकी और उसमें से रिम्पी अपनी दो फ्रेंड्स क साथ उत्तरी ..

रिम्पी को देहका तोह देखता रह गया

सच में बहुत सूंदर लग रही थी

दी - अरे रिम्पी आओ आओ देखो तुम्हारा शोना भी यही है.

रिम्पी - शरमाते हुए नहीं दी ऐसे कुछ नहीं ..वह तोह ...बस ऐसे hi

दी - कोई बात नहीं चलो शॉपिंग कर लेते है ....फिर हम अंदर गए और

शुरू हुई शॉपिंग .....उफ़ ....,,3 घंटे हो गए थे शॉपिंग करते करते.....

में - उफ़ दी और कितनी देर लगेगी में बहुत बोर हो रहा हु और भूक भी लगी है ....

ाद्दु - हां डीडू बस करो न अब मुज़हे भी आइस - क्रीम कहानी है...

दी - अभी बस थोड़ी देर और लगी बेतु...

तुम ऐसा करो निचे कैंटीन में चाओ हम अभी आते है ...

फाई में ाद्दु क साथ कैंटीन चला गया और एक टेबल अपना आर्डर दिया और दी का वेट करने लगा.... थोड़ी देर में हमारा आर्डर भी aagaya....ki तभी दी

रिम्पी और उसकी दोनों फ्रेंड्स आगे आगयी,

दी की आखें लाल लग रही थी ...मैंने सोचा कुछ तोह हुआ है.....

दी - चलो बेतु हमे यहाँ से चलना चाहिए अब .....कही और कहलते है

में - लेकिन क्यों दी ....यहाँ भी फ़ूड बहुत टेस्टी है, ..ाद्दु भी -- हां डीडू देखो न यह फुल चीज़ पिज़्ज़े कटना अच्छा है ...खाने दो न...

तभी दो लफंगे से लड़के पीछे से आते हुए ......जाने मन बचे के साथ क्या करोगी जाकर ..हमारे साथ चलो न .....मज़ा आजायेगा

उनकी बात सुनकर मेरा खून खौलने laga.....aur गुस्से क कारण मेरी आखें लाल होने लगी

दी - छोड़ो इनको बेतु चलो न ....

ंविं दी की आंखों में देखकर ..

दी आपको मुज़ह पर भरोसा है न..

और दी को शांत करने क लिए मैंने थोड़ी पावर उसे ki...aur दी अब बैठ गयी ...

तब रिम्पी ने बताया की जब हम शॉपिंग करके निचे कैंटीन आरहे थे ...तब इनमे से एक ने दी क हिप पर हाथ मारा और गंदे गंदे कमैंट्स किये ......

मैंने देखा फिर वह दोनों जहा पास hi उनके 4 साथी बैठे थे वह बैठ गए , एक ने बोलै कोई नहीं छमिया यहाँ से बहार निकल का तोह जाओगी ...

में चहु तोह तोह अभी इन् सबको मौत दे सकता था लेकिन मैंने कुछ और सोचा और अपने टेबल से उठ गया

दी मेरा हाथ पकड़कर ...नहीं बेतु मत जा वह 6 है और हो सकतस है उनके पास हतियार भी है...

हम पुलिस में कंप्लेंट करेंगे

रिम्पी - हां अभी इन् सब में मैं तोह भूल hi गयी ..अभी डैड को कॉल कर टी हु ...और वह कॉल लगाने लगी

में - दी जब तक पुलिस आती है में उनसे कुछ बात करके आता हु ..भरोसा रखो मुज़ह पर ....

में पहुंच गया उनके टेबल पर

उनमे से ग1 --- अरे देखो तोह कौन आया है ....बाचे तू जा और अपनी दी को भेज ..ha...ha.haa

में पहले में कुछ बात कर लू और फिर मैंने एक गुंडे की आंको में देखकर अपना काम किया ,

यहाँ गुंडों को g1,g2 लिखूंगा

तोह वह सुन्न हो गया तभी ग2 ...क्या कर रहा है बे .....लेकिन तब तक में उसकी ाक़ों में भी देखकर अपना काम कर चूका था ....और में वह से जाने क लिए जैसे उठा तो ग3....

देख क्या रहे हो पकड़ो साले को पता नहीं बॉस पर क्या जादू किया अभी कोई मुज़हे पकड़ता की तभी ग2 ने अपने hi साथियो पर अटैक कर दिया और में आराम से अपने टेबल पर आकर बैठ गया ..

अब सभी वह का तमाशा देख लगे

ग1 भी हमले में शामिल हो गए ग1 और ग2 कभी आपने बाल नोचते कभी उन चारो को दातो से काटते फिर दोनों ने वह पड़े फोर्क को उठाया और अपने साथियो प् चढ़कर हमला करने लगे वह चीखे गूंजने लगी ..

तभी ग1 की जेब से चाकू गिर तोह उसने उससे उठा लिया और फिर बहने लगा खून थोड़े hi देर में वह 5 लाशें गिरी पड़ी थी और ग1 खून से सना हु हाथ में चाकू लिए कभी हस्स रहा था तोह कभी रो रहा था ...

यह सब देखकर कई लोग दर्रे हुए थे और कुछ लोगो तोह उल्टिया और चक्क्र आने लगे थे.....

तभी वह एंट्री हुई पुलिस की ....

अभी क लिए इतना hi

अगला अपडेट रात को...
 
अपडेट - 24

अब तक आपने देखा.......

अभी का आउटिंग क लिए प्रोग्राम बनना....

मॉल में शॉपिंग...

और कैफ़े का कारनामा.....

अब आगे.......


कैफ़े में सभी बहुत दर्रे हुए थे

रिम्पी और दी मेरे तरफ देख रही थी

और ाद्दु भी दरी हुई थी...

ाद्दु - भाई चलो यहाँ से मुज़हे बहुत दर लग रहा है.....

दी - बेतु मुज़हे तुझे कुछ...

तभी मैंने दी को रोकते हुए....

दी जो भी बातें है वह बाद में पहले यहाँ से chalo...addu दर रही है...

जैसे hi हम लोग वह से निकलने लगे

तोह वह दसप साहब क साथ पुलिस टीम आगयी थी

दसप - हमें देखकर हमारी तरफ आते हुए.... बीटा रिम्पी हम सर का पह आया था क्या हुआ यहाँ पर..

मैंने रिम्पी को इशारा किया और वह समाज गयी .....

अंकल हम यहाँ बैठे हुए थे तब अचानक यहाँ लड़ाई हुई इसीलिए मैंने पापा को पह किया तभी दसप साहब ध्यान वह हुए कांड पर गया...

और वह उस और चल पड़े.....

और हम भी निकल लिए वह से...

घर पहुंच कर अपने रूम में गए ाद्दु मेरे साथ hi थी और दरी हुई थी तोह मैंने अपनी सम्मोहनशक्ति क द्वारा उस्सकी वह भयानक यादें मिटा दी जिससे वह आराम से सो गयी , फिर में फ्रेश होने चला गया ....और सोचने लगा दी को क्या जवाब दूंगा क्यों की दी की यादें भी में नहीं भुला सकता

जब कैफ़े में मैंने दी को शांत करने क लिए उनके ब्रेन में झाँक कर देखा तोह मुज़हे दी क अंदर बहुत अधिक मात्रा में पिंक कलर की ऊर्जा महसूस हुई थी जिससे में ज्यादा देर उनके मस्तिष्क को कण्ट्रोल नहीं का पाया था..... में समज़ने की कोशिश करने लगा तोह मुज़हे कुछ समाज में नहीं aaya...toh सोचा डैड से hi पूछ लूंगा जवाब मिल जाएगा.

जब में बाथरूम से बहार आया तोह दी बीएड पर बैठे ाद्दु क सर पर हाथ फेर रही थी..

में - दी आप ....

दी ---- शह्ह्ह्ह चुप रहने का इशारा करते हुए होने रूम में आने का इशारा किया ..

में भी पहुंच गया दी क रूम में

दी ने मेरा हाथ पकड़कर अपने सर पर रखा ....देख बेतु तुज़हे मेरी कसम है ....सच सच बता तूने वह क्या किया था...

में अपना हाथ हटते हुए ....क्या डीडू क्या अपने बेतु पर विश्वास नहीं hai......yeh कसम देने की क्या जरुरत है ......दी इस संसार में आप मेरे लिए एक माँ एक फ्रंड एक बहिन सब कुछ हो ....

दी - मुज़हे पता है betu....aur अगर इस संसार अगर किसी पर मुज़हे विश्वास है तोह वह तू है....

में - आप जननाना चाहती है तोह

बस इतना अभी जान लो दी की मुज़ह में कुछ स्पेशल पावर्स है दी बस उसी का कुछ इस्तेमाल किया था

दी - एक दिन में कितने शॉक देगा बेतु

पहले वह .....बाबू ..shona....phir अब यह सुपरपोवेर्स .....हे राम ...बेतु तू तोह सुपर हीरो बन गया अब....

में - दी ऐसा कुछ नहीं है वह तोह बस ऐसे hi पता नहीं.....

अच्छा दी अब आप थोड़ी रेस्ट कर लो में थोड़ा घूम कर आता हु

मैंने घर से बहार आकर डैड को पह लगाया...

डैड मुज़हे आपसे कुछ बात करनी गई

डैड - बीटा पहले तोह कोंग्रटुलटिओस ..

तुम्हे अपनी पावर्स का उसे करना शुरू किया ...वेल दोने .....

में - पापा आपको कैसे pata...sab

डैड - बरखुरदार तुम भूल रहे हो हम कौन है ....हमारी नज़र पुरे देश में होती है तोह क्या अपनी फॅमिली पर नहीं होगी...

तुम अभी यहाँ बेसमेंट में पहुंच जाओ बाकी बातें यही पर करेंगे

डैड क साथ बात होते hi में बेसमेंट पंहुचा वह डैड कण्ट्रोल रूम में थे ...

मुज़हे देखते hi डैड - आओ अभी मेरे केबिन में चलकर बात करते है...

फिर हम कण्ट्रोल रूम क एक साइड में बने डैड क केबिन में गए

डैड - हां बोलो बीटा क्या बात करनी है

में - डैड मुज़हे डीडू क बारे में जननाना है ....की उनमें भी.....

डैड - बीटा जो तुम समाज रहे वही सच है ..लेकिन पूरी बात जांनने का समय नहीं आया है..

अच्छा बीटा यह जो तुमने आउटिंग का प्रोग्राम बनाया है ....कहा जा रहे हो.....

में -क्या डैड आपको यह भी पता hai...kuch तोह प्राइवेसी रहखों

डैड - अच्छा बेटे अब तुम्हे प्राइवेसी चाहिए ....लगता है अब बड़े हो रहे हो

अच्छा यह तोह बता दो कहा जा रहे हो

में - बस डैड सिटी क बहार जो फारेस्ट है वही जा रहे hai.....waha कुछ पुराने खाण्डेर है उन्हें देखेंगे

और वही पास में जो पहाड़ी है वह ट्रैकिंग वैगेरे......

लेकिन लगता है प्लान कैंसिल करना पड़ेगा..

डैड - क्यों

में - डैड वह ाद्दु भी जाने की जिद्द कर रही है ..अभी छोटी है उससे कैसे ले जाओ

डैड - तोह ले जाओ वह भी खुश हो jaayegi.aur ..हां ऋतू को भी अपने साथ ले जाना...

में - लेकिन डैड वह खतरा भी हो सकता है....

डैड - बीटा हमारा वंश शूरवीरो का है , हमे ऐसे खतरों क बारे में नहीं सोचन चाहिए ....

और में हु hi तुम चिंता मत करो

अभी चलो ट्रेनिंग हॉल एक एक हाथ हो जाए तलवार बाजी की...

और हम चल दिया निचे बनने हुए ट्रेनिंग hall.....aur डैड क साथ मेरी तलवार बाजी ... डैड क स्पेशल 5 एजेंट्स वही थे और हमारा खेल देख रहे थे ....दोनों में से कोई काम नहीं था

तभी डैड मेरे पीछे देखकर .....अरे

तुम यहाँ में जैसे hi मुड़कर देखने लगा बस उससे समय मेरी तलवार डैड क वॉर से निचे और तलवार मेरी गार्डन पर..

में - डैड आपने चीटिंग की है

डैड - बीटा युद्ध में सतर्कता और ध्यान बहुत जरुरी है ...

सावधानी होती दुर्घटना घाटी.

फिर हम घर आगये ...घर जाकर मैंने दीदी और ाद्दु को भी आउटिंग पर चलने क लिए कहा ..तोह दोनों बहुत खुश हो gaye.....maine साथ जाने वाले सभी फ्रेंड्स को कॉल करके बता दिया की सब सुबह 6 बजे यहाँ पहुँच जाए ....हम यही से चलेंगे...

सुबह क इंतजार में रात बीती साड़ी पैकिंग हो गयी थी ....हम कोई 24 बच्चे थे , और 1 बस ड्राइवर और उसका हेल्पर...

और दूसरी गाड़ी में वह लगाने क लिए टेंट्स कुछ खाने पिने का सामन और 2 कुक

इस तरह हम कुल 30 लोग थे

में , ऋतू दी, ाद्दु, भानु , समीर

रिम्पी और उसकी दो फ्रेंड्स स्वीटी और दिव्या, और बाकी कुछ हमारे स्कूल क फ्रेंड्स...

हमारा सफर चल पड़ा अपनी मंज़िल की और....

कुछ गाड़िया और भी निकली बस से दुरी बनाकर रखे हुए......

डीडू की वजह से में रिम्पी क पास बही बैठा था , बस हम दोनों चुप चुप कर एक दूसरे को देख लेते है..

अंताक्षरी क गाने गाते गाते हँसी ख़ुशी से हम पहुँच गए

फारेस्ट क पास hi एक तालाब क पास सिटी से बहार प्रकृति क निकट वह क हरे भरे पेड़ , पहाड़ , तालाब का निर्मल जल

और ताज़ी हवा ..सब बहुत खुश थे

हमने वही तालाब क पास अपने टेंट लगायी ...अभी सुबह क 9 बज रहे थे

ाद्दु तोह इतना खुश थी क चारो तरफ देखती जाती और हर चीज क बारे में पूछती थी ...रिम्पी मेरे साथ कुछ समय बिताना चाहती लेकि ाद्दु पीछा चोदे तब न...

तभी ऋतू दी आयी ....अरे ाद्दु सिर्फ भाई hi प्यारा है हमारे साथ भी खेलो देखो वह पास में सब झरने पर जा रहे hai.....waterfall की सुनकर ाद्दु भी दी क साथ कहल दी

दी - अरे बेतु चल न ...क्या सोच रहा है

में - नहीं दी आप हो आओ मुज़हे यहाँ का काम भी देखना है अभी अभी सब क कौन किस टेंट में रहे गए यह भी देखना है...

रिम्पी - हां दी में भी यही अभी की मदत क लिए रुक जाती हु सब चले दोनों गाड़ियों क ड्राइवर और हेल्पर गाडी में आराम कर रहे थे और कुक अपनी तैयारी में में रिम्पी क साथ तालाब क किनारे जाकर बैठ गया...

रिम्पी - कल तोह तुम ने मरवा hi दिया tha...bata नहीं सकते थे कॉल स्पीकर पर है

में - दी ने एकदम से मोब चीन लिया में क्या करता

रिम्पी - तुमभी न ..अब पता नहीं दी मेरे बारे में क्या सोच रही होगी

में - कुछ नहीं सोच रही ..दी मैंने उनको समज़ह दिया

रिम्पी - और वह कल क्या किया था तुमने उन बदमाशों क साथ

में - अरे कुछ नहीं बस हिप्नोटिस्म सिख रहा हु वही किया था ...तुम इन सब बातो को छोड़ो ..

एक बार फिर से बाबू बोलो न

रिम्पी - अच्छा जी मेरा बाबू को क्या सुंनना है

ऐसे hi हमारी बातें चल टी रही ..

वाटर फॉल से जब सब लोग ायगये तोह हमने खूब एन्जॉय किया ...थोड़ी ट्रैकिंग भी की ..ऐसे hi दिन बिट गया ..

और रात का अँधेरा चारो तरफ फैले laga....sabhi आज थक गए थे इसीलिए सब अपने अपने टेंट में सो गए....

बहार अलाव जल रहा था और में , दी , रिम्पी , स्वीटी और दिव्या बैठे आग सेक रहे थे और ाद्दु दी की गॉड में सो गयी थी ...

दी अच्छा बेतु अब बहुत देर हो गयी है सो जाते है

में ठीक है दी आप और रिम्पी एक टेंट में हो जाओ , स्वीटी और दिव्या एक टेंट में में ाद्दु को लेकर अपने टेंट जा रहा हु.....

फिर सब अपने अपने टेंट में पहुंच गए......

मुज़हे भी नींद आरही थी तोह में भी सू गया ....अचानक मेरी नींद खुल gayi...maune ाद्दु की तरफ देखा तोह सो रही थी कितनी मासूम लग रही थी

फिर मैंने सोचा थोड़ा बहार की हवा खा lu....aur बहार आगया ...

तभी जिस टेंट में स्वीटी और दिव्या सो रहे थे उस के पीछे मुज़हे कुछ सरसरहाट की आवाज आने lagi.....toh मैंने जाकर उनके टेंट में देखा

तोह........

आज क लिए उतना hi ....

अगला अपडेट कल....
 
बहुत hi फैंटास्टिक रिव्यु है नैना जी

:applause::applause::applause::thankyou::applause::applause::applause:

हां जी आपने सही कहा हिप्नोतिसे hi किया है

हीरो की सिक्स्थ सेंस भी धीरे धीरे जाग रही है जिससे उससे कुछ खतरे का अंदाजा हो रहा था

इसीलिए ाद्दु को मन कर रहा था

ऐसे hi साथ बनाये रखे...

लेटेस्ट अपडेट पोस्टेड...
 
अपडेट - 25

अभी तक आपने देखा....

अभी & फ्रेंड्स का आउटिंग क लिए जाना.....

मौज मस्ती क साथ दिन की ...samapti....aur अभी को कुछ आवाज aana......aur स्वीटी और दिव्या क टेंट में देखना...

अब आगे.....


मैंने उनके टेंट में देखा तोह दोनों वह नहीं thi.....aur उनका टेंट भी पीछे से फटा हुआ था.....

मुज़हे किसी बहुत बड़े खतरे का अंदेशा होने लगा ....तभी .....

पीछे ज़हादियों में से कुछ आवाज आयी में तुरंत वह जाकर देखने लगा तोह कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.

वापस उनके टेंट में आया तोह एक जगह कुछ खून क निशान देखकर ,

दिल और घबराने लगा.....

तभी ख्याल आया की ाद्दु भी टेंट में अकेली hai........mein दौड़कर वह गया तोह , उससे आराम से सोता हुआ देखकर

मेरी जान में जान आयी.....

में अब सोच में पद गया क्या करू

अगर उनको ढूंढ़ने जाता हु तोह यहाँ कुछ और गड़बड़ न हो जाए ..और यदि न जाओ तोह अपनी hi नज़रो में गिर jaaunga......tabhi मुज़हे डैड का ख्याल आया ....तोह मैंने उनको कॉल करने की sochi.......jab सेल में देखा तोह ....नेटवर्क नहीं आरहा था...

फिर मैंने कुछ socha......aur सब टेंट में जास्कर सब को जगाया ,

जब सब लोग एक जगह इक्कठा हुआ....

सब सोच रहे थे ...ऐसी क्या बात हुई है ...मैंने उनको इतनी रात को जगाया

सब मेरी तरफ hi देख रहे थे....

दी - क्या बात है बेतु तूने हम सबको इतनी रात को इकट्ठा किया हुआ है....

और इतना परेशां क्यों लग रहा है....

में - सभी पहले शांत ...हो जाओ

और दयँ से मेरी बात सुनो....

तब मैंने उनको साड़ी बात बताई..

जिससे सुकर सब परेशां हो रहे थे

रिम्पी - अभी ....कैसे भी कर के हमे उन्हें ढूंढ़ना होगा ...में उनके पेरेंट्स को क्या जवाब दूंगी.....

पता नहीं क्या हुआ होगा मेरा दिल बहु घबरा रहा है...

में - ऐसे घबराने से कुछ नहीं hoga......hume ध्यैर्य से काम लेना होगा...

दी - अभी ...ाद्दु कही दिख नहीं रही है ...कहा है वह

में - दी अभी वह टेंट में सो रही है....


दी - बेतु अब यहाँ टेंट में सेफ नहीं है ...तुम यही रुको में ाद्दु को लेकर आती हु ....

दी साथ 4 समीर और भानु भी चल दिए....

तभी वह कुछ 20 कमांडोज़ की टीम आयी ...और .....

में सोच hi रहा था ..की अब यह कौन hai........tabhi उनका चीफ बोल पड़ा..

चीफ - सर हम आपकी hi सिक्योरिटी क लिए है ... R.V.S सर ने hi अप्पोइंट किया है

तब तक दी भी ाद्दु को लेकर आगयी

चीफ -हम दूर से hi आप सब पर नजर बनाये रखते है......

हमे वह जंगल में कुछ हलचल महसूस हुई
और कुछ आवाजे आयी

....उस्सकी का पता करने जा hi रहे थे की तभी हमे उन् 4 कमांडोज़ का सिग्नल मिला जो आपके शिविर क पीछे की सेकरतीय देख रहे थे

जब हम वह ...पहुंचे तोह... वह उनकी लाशें पड़ी हुई थी ....


हमने आपको अलर्ट करने क लिए कॉल लगाया तोह देखा सब क मोब क नेटवर्क hi बंद hai......yaha तक की सॅटॅलाइट पह भी बंद पद गए है......

मैंने उन्हें यहाँ जो हुआ बताया.....

तो चीफ ने कहा

चीफ - आपलोगो का यहाँ रहना अभी ठीक नहीं hai.....aap लोग अभी यहाँ से जाओ आप के साथ 10 कमांडोज़ जाएंगे ...हम यहाँ देख लेंगे

सब आपस में बात काने लगे

समीर - नहीं सर हम सब आये है तोह साथ जब तक हमारे दोनों फ्रेंड्स का पता नहीं लगता हम यही रहेंगे

चीफ ने समज़हाने की कोशिश की लेकिन कोई सुंनने को तैयार नहीं था

तब तय हुआ की 10 कॉम यहाँ रहेंगे

में - सर में भी आपके साथ chalunga...yeh सब मेरी hi जिम्मेदारी पर आये है

चीफ ने बहुत मन किया ...

में - आप शायद भूल गए है क में किसका बीटा हु ...ऐसे डरकर दुबकना में नहीं कर सकता....

समीर - में भी चलूँगा साथ में.

में - नहीं समीर तुम्हारा यहाँ रहना ज्यादा जरुरी है...

दी - लेकिन बेतु तू.......

में दी को रोक ते हुए ...दी भरोसा रखो मुज़ह पर ..कुछ नहीं होगा

फिर चल पड़ा में 10 कम की टीम क साथ घने जंगल क अंदर ,

अभी हम कोई 1 कम अंदर आगये थे

लेकिन कही कुछ ऐसा दिख नहीं रहा था की कुछ सुराग हाथ लगे........

ऐसे hi चलते चलते हम घने जंगल क और अंदर पुराने महल क खंडहर तक पहुँच गए .....हम अभी बढ़ने hi वाले थे की मुज़हे वह कुछ खतरा महसूस हुआ....

हम वही रुक गए चीफ ने 2 कम दो भेजा ....और उन्हें सिर्फ वह की जानकारी लाने की हिदायत दी...

हम इंतज़ार कर रहे थे .....तभी वह दोनों आगये

चीफ - कहो क्या कुछ है वह

कम - सर उस खंडहर क निच्चे एक तहखाना है हमने वह कुछ रौशनी देखि ..और तहखाने क अंदर जाने का रास्ता इस खाण्डेर क बैक साइड से है हम वह कुछ लोगो को अंदर जाते हुए देखा है....

चीफ - अच्छा यह पता चला कितने लोग है वह.

कॉम - नहीं सर . यह तोह पता नहीं चल paaya...hum फिर चल पड़े उस तहखानने की aur.....chief ने मुज़हे एक पिस्तौल दी सेफ्टी क लिए

तहखानने क इंटरने तक पहुंचे hi थे की कुछ 10 लोग अंदर से बहार आते हुए दिक्
हे..

हम वही अँधेरे में चुप गए

उन् लोगो क हातो में कुछ था...

वह लोग वही बहार बैठ गए ..और कुछ कहने लगे ...जब हमने ध्यान से देखा तोह वह एक मारा हुआ हिरन था और वह लोग उससे नोच नोच कर खा रहे थे....

हम सब हैरान थे की कोई इंसान कैसे इस तरह कगा सकता है ....तभी उनमें से कोई..

अरे यर अब इन् जानवरो को खाने में मज़ा नहीं आरहा है......

अंदर इतनी साड़ी लड़किया है ...एक को अगर हम खा लेंगे तोह कितना मज़ा आएगा....

नरम नरम मॉस और गरम गरम खून मज़ा आजाएगा

दूसरा - अबे सोच समाज क बात कर ...

तू जानता है न यह सब किसकी अमानत hai.....phir

हां जानता हु लेकिन जिन दो को अभी हम लाये है उनमें से एक को तोह चोट लगी है ... इसीलिए अब काम की नहीं रही

उससे तोह खा सकते है....

उनकी बाते सुनकर मुज़हे एक बात तोह पता चल गयी क यह इंसान तोह हो नहीं सकते .....जो किसी इंसान को जिन्दा खाने की सोच रहे है....

अब हमने ज्यादा देर न करते हुए अँधेरे में उनको घेर लिया और फिर fire.......aur इससे पहले वह कुछ समज़ते गुंजी गोलियों की आवाज और उनकी सीखे...

हमने सोचा की की सारे मारे गए .

और हम आगे बड़े hi थे क उस खंडहर क चारो तरफ से बड़ी भयंकर गुर्राहट क साथ आये कुछ साये हमने अपने आपको जब चारो तरफ से घिरे हुए पाया.......

उनमें से कुछ आगे आये तोह वह जलती हुई मशालों की रौशनी में उनको देखा तोह हमे अपनी आँखों पर विश्वास नहीं hua......yeh सब आधे भेड़िये और आधे इंसान( वरवोल्फ)

हमे समाज में नहीं आया की क्या करे तभी ...ध्यान आया की जानवर आग से डरते है......

तोह मैंने एक जम्प लागई और मशाल हाथ में ले ली, मुज़हे देखकर कम भी मशाल लेने आगे बड़े की तभी 2 वफ ने 2 कम पर हुम्ला कर दिया और ख़तम.......

तभी चीफ ने फायर का आर्डर दिया

बंदूके चीखी लेकिन यह क्या , इनपर गोलियों का कोई असर न होते हुए देखकर बड़ी हैरानी हुई हमे अब अपनी मौत सामने दिखने लगी.....

हमने अपने हाथ में मशाल लेकर घेरा बनाया और आप क जरिए आपने आपको बचने क कोशिश करने लगे

अचानक उनोहोने हम पर हुम्ला kardiya.....lekin वह हम तक पहुँच पाते तब उनके और हमारे बिच आये 6 नकाब पॉश जिनके हातो चमकती हुई तलवार ने उन्हें रोक दिया था और कुछ भेड़िये शैतान को प्यारे....

में उन्हें पाचन गया ...यह डैड और उनके agents....the...

तभी एक भेड़िया जो शायद उंनका हेड था गुर्राया

गरररह हम्म्म कौन हो तुम क्यों हमारे बिच में पद रहे हो.....

डैड - मैं हु संघारक तुम सब की मौत ....फिर शुरू हुई मार काट

डैड ने एक तलवार मेरे तरफ बड़ाई और अब में भी ुणभेड़ियो का सामना करने laga,.......bhediye काटते जा रहे थे फिर भी खयाम नहीं हो रहे थे..

डैड की स्पीड देखकर में हैरान था

मेरे साथ आये सबहि कम ने बहुत मुकाबला किया लेकिन वह उन् भेडियो का सामना न का पाए...

जैसे जैसे में लड़ता जा रहा था मेरी स्पीड बढ़ती hi जा रही थी में भी बात से हैरान था....

भेड़िये थे की खत्तम होने का नाम hi नहीं ले रहे थे......

भेड़िया - है हां ..है कितनो को मारोगे तुम लोग ऐसे लड़ते लड़ते थक जाओगे toh....phir तोह तुम सबकी मौत

तभी वह एक पिंक कलर की शील्ड से वह जगह कवर हो गयी जिससे भेडियो की संख्या बढ़नी बाण हो gayi.....aur सभी भेड़िये क कटे सगरीर जमीं पर

तभी ऊपर से वह शील्ड होती और जो उस्में जो सामने आया उसको देख कर तोह में शॉक हो गया

में - अरे माँ ...आप yaha...kaise और ..यह sab....kya....dad

डैड - बता अभी समय नहीं है इन् बातो का ...जाओ निचे जास्कर सभी लड़कियों को ले आओ......

अभी में अंदर जाने hi लगा था की जोर से हवा चलने lagi.....aur दहकते hi dekhte....sabhi मरे हुए भेड़िये में से ब्लैक स्मोक सा निकल और एक जगह िकखाथा हो गया और रूप लिया एक महाभयअबकार भेड़िया मानव का

जो करीब 30 फट ऊँचा था

और गुंजी हँसी-- ha..ha..ha....tuch

मानव तुम करोगे हमारा मुकाबला

तोह आओ अपने मरने का शौक पूरा करो.....

माँ ने कुछ हाथ आगे करके करने की कोशिश की तभी उस भेड़िये ने ब्लैक एनर्जी से हुम्ला किया और माँ दू जाकर गिर गयी ....और बेहोश हो गयी

में .....माँ .....दरिंदे अब तोह तू गया ...और तलवार लेकर पहुंच गया उसके सामने.....

डैड - ऐसे नहीं हम सभी को हुम्ला करना hoga.....aur हम सब एक साथ

बढे ....तभी उसस्के हाथ में मुद्गर प्रगट हुआ और उसने एक hi वार में हम सबको धराशायी कर दिया .....हमारी हालत बहुत बुरी थी

अब अपने ऊपर गुस्सा आरहा था क में अपने माँ डैड क लिए कुछ नहीं कर पा रहा हु.......

तभी वह एक लाल रौशनी का घेरा

प्रगट हुआ और उस में से निकला एक साया....

भेड़िया - अब तुम कौन हो ..जो मौत लेने आये हो

तभ एक भयंकर आवाज गुंजी.......

महाकाल का अंश हु मैं

शैतान ध्यान से देख मज़हको

मौत हु में.....

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 26

अब तक आपने देखा......

अभी का स्वीटी और दिव्या की खीज में जाना....

खंडहर में मानव भेडियो से सामना.....

और एक साये का प्रगट होना..

अब aage.....aur आवाज

महाकाल का अंश हु में

काल हु में

शैतान ध्यान से देख मज़हको

मौत हु में...


जैसे hi डैड ने उस साये को देखा और आवाज सुनी तोह उनके चेहरे पर हलकी मुस्कराहट आगयी

में सोच में था की अब यह कौन आगया....

जैसे hi उस भेड़िये ने

काल (राकेश का असली रूप) का नाम सुना उस्सकी हँसी रुक गे ....थोड़ी देर क किये दर gaya...lekin फिर...

भेड़िया - काल तू भी आगया......

अब पहले तुज़हे की ख़तम करूँगा..

फिर इन् मचारो को मसलंगा बड़ा मज़ा आएगा.....

तब तक माँ को होश आगया था

मेरे पास आकर.....

माँ - बेतु तू ठीक तोह है न .....

देहको जी मैंने पहले hi इस आउटिंग क लिए आपको मन किया tha....dekho कितनी चोट लगी है इससे.....

फिर माँ ने मुज़हे गले लगाया...

ऐसी hi होती है माँ ..खुद तोह दर्द में थी और मेरे चोट की चिंता कर रही थी...

में - माँ मुज़हे कुछ नहीं हुआ है ....देखो में बिलकुल ठीक हु....

डैड - नैना कुछ नहीं हुआ है इससे

मेरे शेर बीटा है .......

अब डैड क 5 एजेंट्स भी संभल गए थे वह भी हमारे पास आगये .....

तभी वह महाभेदिया बड़े क्रोध से दौड़ता हुआ आया और काल पर हुम्ला कर दिया ...लेकिन उस तक पहुँचता उससे पहले hi काल ने एक एनर्जी बीम उस पर छोड़ी ...और वह उछलता हुआ दूर जाकर गिरा...

अब उस्का क्रोध बहुत बाद हाय था ...

उसने हाथ ऊपर किये और एक चमकती हुई बिजली जैसे ऊर्जा उसस्के हाथ में aagayi...aur उस्सने ..काल पर हुम्ला कर दिया...... तभी बदला काल का रूप

और बदल गया उसका चेहरा भयंकर शेर क रूप में.....

और गुंजी भयंकर दहाड़ ....उस दहाड़ ....की ऊर्जा से वह बीजी जाने कहा गायब हो गयी

पालक जहापकते hi काल पहुँच गया उस क पास और गार्डन से पकड़कर

काल - बहुत हुआ खेल तेरा.....

इतना कहकर काल ने अपना पंजा घुसा दिया उसके छाती में और दिल बहार

देखते hi देखते वह ख़तम हुआ और उसके शरीर क टुकड़े हो गए...

काल वापस अपने योद्धा रूप में आया और एक नज़र मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हे वह से अदृश्य हो गया..

जाने क्या उस्सकी आंखों में था ...

जो मुज़हे कुछ अपनापन से लगा

तभी डैड की आवाज से मेरा ध्यान टुटा

डैड - एजेंट्स इन् सब भेडियो की बॉडीज को ख़तम कर दो..

अभी चलो अंदर देखते है

जब हम अंदर तहखाने में pahunche....toh वह देखा करीब 50 लड़किया बड़ी बुरी कंडीशन में थी सभी बेहोश thi.....unke हाथ और पेअर बंधे हुए थे उन्ही में मुज़हे

दिव्या भी दिखी और वही पास एक कोने में जख्मी हालत में स्वीटी पड़ी हुई थी .....उसस्के सर से खून बहरहा tha.....meine चेक किया तोह ...उसकी साँसे बड़ी धीमी धीमी चल रही थी .......डैड ....यहाँ आओ देखो इससे

तभी बहार से चॉपर की आवाजे आने lagi......jo शायद पापा ने hi बुलाये थे ...

अब तक उन सभी लड़कियों को खोल दिया गया था .....लेकिन होश नहीं आया था shayad....koi ड्रग्स दिया गया हो

तभी वह कुछ डॉक्टर्स की टीम आगयी .. सब लड़कियों को वह से हॉस्पिटल ले जाय gaya....Sweety का भी फर्स्ट अिध कर क हॉस्पिटल ले जाय गया..

अब डैड , माँ और में वह पहुंचे ,जहा दी , ाद्दु और सारे फ्रेंड्स थे ...वह सभी टेंस थे ाद्दु बार बार मेरे बारे में पूछ रही थी और दी उससे संभल रही थी .....

कमांडोज़ अपना काम कर रहे थे

रिम्पी और सभी फ्रेंड्स हमारा इंतजार का रहे थे....

तभी सब ने मुज़हे डैड और माँ क साथ आते देखा ....ाद्दु दौड़ कर मेरे गले गयी ....

ाद्दु - अरे भाई आप कहा गए थे

में कब से डीडू को पूछ रही थी ...वह मुज़हे बता hi नहीं रही थी....

में - कही नहीं बेतु माँ & डैड हमे सरप्राइज करने आरहे थे...

तोह उन्ही को रिसीव करने गया था...

ाद्दु क गले लगते hi जाने कैसे मेरा सारा दर्द चला गया था......

फिर दी और सारे फ्रेंड्स मुज़हे पूछने लगे ....बेतु यह क्या ...माँ डैड यहाँ kaise......aur दिव्या और स्वीटी को ढूंढ़ने गया था क्या वह मिली......

और तेरे साथ जो कम गए थे वह कहा है....

अब में क्या बताता दी ko....toh डैड की तरफ देखा.....

डैड - अरे अरे ...बीटा ...एक साथ ...कितने सवाल

वह बात ऐसी है ....हमने सोचा की तुम सबको ज्वाइन कर के सरप्राइज दू

अभी हम यहाँ पहुंचे hi थे की मुज़हे अभी का पह आगया ..तब मैंने

कम क चीफ से बात की ...

जंगल में ढूंढ़ने पर वह दोनों मिल गयी बस बेहोश की....

तोह कम उन्हें अपने साथ हॉस्पिटल

ले गए जब अभी वापस आरहा था तोह यह हमे यही मिला..

काहलो अब सो जाओ कल सुबह देखते है.....

सुबह हुई हम में से किसी का मैं नहीं था एन्जॉय करने का .....

लेकि माँ , डैड और ाद्दु क कहने पर थोड़ा बहुत घूमे और शाम को वापिस लौट गए..

घर पहुँच का रिम्पी ने अपनी फ्रेंड्स को मिलने की इच्छा की ...तोह डैड ने कल साथ चलबे का वडा किया

दी ाद्दु को लेकट रूम में चली गयी और में माँ और डैड क रूम में

में - अब डैड आप दोनों में से कोई मुज़हे बताएगा ....की यह डाब क्या हो रहा है ...और माँ आपके पास यह सुपर पावर्स..

डैड - आने वाले समय में एक महायुद्ध होनेवाला है यह उसी की तैयारी समाज लो.....

और बीटा हमारी फॅमिली कोई साधारण नहीं तुम , में, नैना ऋतू और ाद्दु

सब में कुछ न कुछ पावर्स है...

लेकिन साती बाते जांनने का अभी समय नहीं आया है....

में - उफ़ यह सही समय ...सही samay.....kab आएगा वह..

दूसरे दिन हम सभी हॉस्पिटल में उन् सभी लड़कियों की तबियत देखने गए रिम्पी भी साथ थी

सब होश में आगयी थी सिर्फ स्वीटी hi बेहोश thi....dad क कहने से दसप साहब भी आये थे और सभी लड़कियों

से उनके घर का पता पूछ रहे थे.

फिर हम स्वीटी क पास गए जो अभी तक बेहोश thi...Usse देखकर रिम्पी को बहुत बुरा लग रहा था

ाद्दु - भाई यह रिम्पी दी की फ्रंड है न कि हुआ है इससे.....

में - कुछ नहीं बेतु बस थोड़ी बीमार है..

ाद्दु - शायद इब्नी बुखार है में देखु ...इतना कहकर ाद्दु ने अपना हाथ उसस्के माथे पर rakha...aur तभी उससे होश आगया ....

इनको यही छोड़ते है देखते है विल्लन पार्टी क्या कर रही है......

दुर्मुखासुर बड़े करोड़ से. ----

नही ...यह tune....accha नहीं किया kaal......meri पूजा में तूने विघ्न डाला है

पिताश्री तोह तप कर रहे है और में कन्यामेध यज्ञ क द्वारा हम सबके मालिक इब्लीस को को प्रसन्ना करके और शक्तियों को प्राप्त करना चाहता था....

आज की आहुतिया आखरी thi...tune अच्छा नहीं किया....

डा - स्नेनापति दुर्जय पृथ्वी पर जो हम बुराई paap...aur नशा गैलरी है वह कैसा चल रहा है....

सेनापति - yuraj.....waha पता नहीं संघाराह नज़्म से कोई है जो हमारे

कार्यो को रोक रहा है ......

डा - तोह पता करि usska...kaun है woh.....ek मानव हमारे कार्यो में बढ़ा पहुंचा रहा है और तुम शक्तिशाली असुर होकर कुक नहीं कर रहे हो ..

ध्यान रहे इस श्रिस्ति क 7 लोक पूरे हमारे अधीन है ...उन् का उपयोग करो....

क्रोधासुर, लोभासुर और मोहासुटुम जास्कर मनुष्य क मन बदलो

और माया सुर तुम वह जाकर वह क विज्ञानं को देखो ......

फिर सभा समाप्त हुई.....

अभी क लिए इतना hi.....

अगला मेगा अपडेट आज रात को...
 
अपडेट - 27

अब तक आपने देखा की कैसे राकेश ने काल का रूप धरकर ...सबकी की रक्षा की ....

सभी लड़कियों को बचाया गया

कुछ पटल लोक की बातें

अब आगे ....


दुर्मुखासुर के कहने पर यहाँ धरती पर असुर फैलने लगे...

mohasur....lobhasur और कामासुर मानव मन को बदलकर उसमे पाप करने की भावनाओ को बढ़ाने लगे

वह उन्ही को अपने मोहरा बनते जो नाशे का आदि हो या स्वाभाव से कुछ दुर्गुण इनके अंदर हो

और मयासुर आधुनिक विज्ञानं में भी दानवो की पकड़ मजबूत करने में लगा हुआ था उसने डीके

रीसर्च ी
ंस्टीटुडे

क नाम से एक कंपनी शुरू की जहा कई तरह क एक्सपेरिमेंट्स किये जा रहे थे जिससे मानवो को विनाशकारी असुर में परिवर्तित किया जाए....

और उसने दूसरी तरग हैकिंग क लिए

अलग अलग देशी में कुल 12 कंप्यूटर इंस्टिट्यूट बनाये ...जहा से हैकिंग क जरिये अनेक अपराधो को किया जा रहा था....

एक दिन अभी और R.V.S घर क निचे बने हुए बेसमेंट में स्क्रीन्स देख रहे थे...

की वह क एक operator....ne कहा

ऑपरेटर - सर हमारे सिस्टम को कोई हैक करने की कोशिश कर रहा है.

डैड - तोह अभी क्या सिचुएशन है...

ऑपरेटर - सर हमारा सिस्टम वर्ल्ड का बेस्ट सिस्टम में से है जिससे हैक करना पॉसिबल नहीं....

हमने पता किया हैकर क बारे तोह पता नहीं कर पा रहे है सर..

यही चिंता की बात है हमारे पास बेस्ट हैकर्स है वह भी पता नहीं लगा पा रहे hai....aap यह देखिये सर

तभी उसने एक न्यूज़ चैनल से कनेक्ट किया

न्यूज़ रिपोर्टर - आज काल देश में यह क्या हो रहा है....

क्या हमारा पैसा अब बैंको में भी सुरक्षित नहीं.....

हो रहा है लोगो क अकाउंट से पैसे गायब........

कई बैंको और गोवत. ऑफिस का हो गया है डाटा चोरी ....

में - डैड यह सब कौन लोग है..

आप कुछ करते क्यों नहीं हो...

डैड - बीटा में उनको ट्रैक करने की बहुत कोशिश कर रहा हु लेकिन नहीं कर पा रहा हु....

जाने कौनसी शक्ति है जो मुज़हे रोक रही है ....में भी इसी बात को लेकर परेशां हु...

तभी डैड को कॉल आता है है

डैड - accha...haa ..क्या ....में अभी आता हु ...

में - क्या हुआ डैड..

डैड - किसी ने रॉ का सर्वर हैक कर लिया है हमे वह जल्दी जाना चाहिए

फिर डैड ने अपनी बेस्ट हैकिंग एक्सपर्ट जुली को लेकर जाने वाले थे तभी में

डैड में भी चलूँगा साथ हो सकता है में कुछ मदत करू

बेटे वह रॉ का हेड ऑफिस है अभी वह हर कोई नहीं जा सकता ..फिर भी यदि तुम्हारी जरुरत हुई तोह में चीफ से कह कर तुम्हे बुला लूंगा

फिर डैड ने आँखें बंद की और आज्ञा अपने मास्क वाले रूप में और जुली को लेकर चल दिए

तभी मेरा पह बज उठा ...देखा तोह रिम्पी की कॉल thi........meine कॉल पिक की ...

रिम्पी - ही मेरा बाबू शोना क्या कर रहे हो ...

में - कुछ नहीं रिम्पी वस् कंप्यूटर पर कुछ काम कर रहा हु

तुम बताओ मेरी स्वीटू कैसी हो

आजकाल तोह तुम कॉल भी नहीं करती

रिम्पी - ज़हूत ...बिजी तोह तुम रहते हो ....हमेशा में hi तुम्हे कॉल करती हु..

अच्छा छोड़ो पहले यह बताओ क्यों परेशां हो ...क्या हुआ

में - नहीं स्वीटू में कहा परेशां हु ...कुछ नहीं हुआ है

रिम्पी - देखो ज़हूत मत bolo...muzhe पता चल जाता है बताओ न तुम्हे मेरी कसम

में - क्या यर रिम्पी तुम भी ..कसम देने की क्या जरुरत thi...thik है तोह सुनो .....यहाँ किसी का कंप्यूटर हैक हो रहा है सारा डाटा ट्रांसफर हो रहा है किसी सर्वर पर ...वह डाटा बहुत इम्प है ......उस्समे बहुत सी जिन्दगिया देव पर लगी है.....

क्या करू कुछ समाज नहीं आरहा है

रिम्पी - ऐसा किसका कंप्यूटर है जिसके हैक होने से इतनी प्रोब हो जायेगी

और तुम भी तोह आजकल कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सिख रहे हो क्या तुम नहीं रोक सकते इस हैकिंग को...

तभी डैड की कॉल आयी..

में - रिम्पी तुम्हारे पास इसका कोई सलूशन हो तोह बताना अभी में कोशिश करके देखता हु ....

में - हां ..hello... डैड

डैड बीटा यहाँ सर्रा डाटा किसी अनजान सर्वर पर ट्रांसफर हो रहा है

अभी सिर्फ 15 मं है हमारे पास

कटा तुम कुछ कर सकते हो

डैड में तरय कर सकता हु ी विल तरय माय बेस्ट..

लेकिन में वह कैसे इतने जल्दी औ

तभी डैड मेरे सामने आये और मुज़हे लेकर टेलिपोर्ट हो गए ...

वह सभी पूरी कोशिश कर रहे थे.

में भी बैठ गया और के बोर्ड पर कुछ करने laga.....kaafi तरय करने क बाद बड़ी मुश्किल से थोड़ी देर रोक पाया ...तभी मुज़हे रिम्पी का कॉल आया.....

रिम्पी - बाबू इस समय तुम सिटी लाइब्रेरी क बेस मेन्ट में क्या कर रहे हो ..

में - तुम्हे कैसे पता चल ..

रिम्पी - तुम्हारे पह से ...वह छोड़ो हैकिंग रुकी

में -
कोशिश कर रहा हु

रिम्पी - क्या इस समय तुमने वह वाच पहनी है जो मैंने गिफ्ट की थी

में - हां क्यों

रिम्पी - वह वाच क साथ साथ एक गैजेट भी है उसस्के उप्पेर एक डैमोंड जैसा बटन है उससे पुश करो उससे वह उसब पॉइंट ओपन होगा उसको वह कनेक्ट करो ...बस फिर में देखती हु ...

मैंने वैसे hi किया थोड़ी hi देर में सब कंप्यूटर बंद पद गशये ..

.अभी में सोच hi रहा है यह क्या हो गया तभी सारे पक ों हो गए और स्क्रीन पर आया डाटा रेट्रीविंग.....

तभी हॉल में तालिया बजने लगी

वह से निकल कर डैड क साथ घर वापस आगया ...और रिम्पी को कॉल किया...

में - थैंक्स माय स्वीटू ...मगर यह तुमने कैसे किया ..और यह गैजेट्स

रिम्पी - ऐसे मैंने बहुत से गैजेट्स बनाये ..तुमने वाच वह कनेक्ट की तोह मेरा सिस्टम वह से कनेक्ट हो gaya......aur maine....apne घर बैठे बैठे अपने पक पर से सब किया ....

वैसे तुम रॉ क हक़ में क्या कर रहे थे

में - तुम्हे कसिए पता....

रिम्पी - अरे बुद्धू जब मेरा पक वह से कनेक्ट हो गया तोह मुज़हे पता नहीं चलेगा क्या ..

में - यू अरे तू जीनियस माय सववेतु

इन्हे यही छोड़ते है और देखते है ा1 क्या कर रहा है

भुवलोक में यक्षों से अपनी गदा प्राप्त करके गक को लेकर में पहुंच

गया में चीन तिब्बत में सतलुज नदी क किनारे से थोड़ी दूर राक्षस ताल

गक - मित्र में बस यही तक आपके साथ हु आगे भगवन भोलेनाथ का क्षेत्र शुरू होता है

में - ठीक है मित्र अब तुम जाओ जब भी मुज़हे जरुरत होगी में तुम्हे बुला लूंगा..

गक मुजह्से विदा लेकर चल गया ...

वह मैंने चारो तरफ देखा बड़ा सूंदर दृश्य था मध्य में मानसरोवर ज़हील उसके पश्चिम दिशा में राक्षश ताल जहा में इस समय खड़ा था और उत्तर दिशा में परम पावन भगवन भोलेनाथ का निवासस्थान कैलाश पर्वत...

राक्षस ताल से थोड़ी दूर बहने वाली सतलुज नदी में स्नान किया फिर विचार किया की भोलेनाथ क क्षेत्र में बिना उनके आशीर्वाद से कैसे कार्य सफल होगा तोह मैंने वही नदी की मिटटी से पार्थिव शिवलिंग बनाया और जल से रुद्राभिषेक क्या और भोलेन्थ से अपने कार्य की सिडफी क लिए आशीर्वाद maanga......aur चल पड़ा मंजिल की और

राक्षस ताल से चलते चलते पहुँच गया में मानसरोवर

अभी संध्या का समय हो रहा था

यहाँ तक तोह बड़ी आसानी से पहुंच गया था .....आश्रम में हमे सिखाया गए था की सुर्यास्था क बाद जल क किसी स्रोत को छेड़ा नहीं जाता ...

तोह अब सुबह hi कुछ का सकता था

तोह माइनर सोचा की थोड़ा ध्यान hi किया जाए...

में ध्यान में बैठ गया...

आज बड़ी जल्दी में आज्ञा चक्र तक पहुंच गया था ...वह मुज़हे आसिम ऊर्जा का ाशस होने लगा उस ध्यान में मुज़हे अलग अलग दिव्या आकृतिया दिखने लगी ..ऐसे hi बड़ी देर तक ध्यान करता रह ...जब मेरा ध्यान खुला तोह

देक्ग मध्य रात्रि हो गयी थी अब इस सुनसान सरोवर क किनारे ठंडी ठंडी हवाएं बाह रही थी .....मुज़हे भूक और नींद का आभास भी हो रहा था ...

अपनी शक्तियों क द्वारा में इसकी व्यस्त भी कर सकता था लेकिन उस क्षेत्र में अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं करना चाहता था

तभी मैंने देखा एक नागा सन्यासी बड़ीबड़ी जताये जिनके सर पर थी और पुरे शरीर पर भस्म ....

सन्यासी - ारे बीटा यह ठण्ड में ऐसे अकेले ...लगता है तुम्हे भूक भी लगी है ...लो यह फल लो कगा लो

उन्होंने अपने कमंडल से से कुछ फल निकल कर मेरी और बढ़ाये ...

और मैंने उनसे फल ले लिए और खाने लगा तभी मुज़हे अपने पीछे कुछ आवाज आई मैंने मुड़कर देखा तोह कोई नहीं ths....aur आगे देखा तिह वह नागा बाबा - भी गायब

में समाज गया हो न हो यह साक्षात भोलेनाथ hi थे......

मैंने उन्हें मन hi मन प्रणाम किया

और विचार करने लगा की तभी मेरी अंगूठी चमकने लगी

और आई महागुरु की आवाज

पुत्र कल दिवाली का शुभ मुहूर्त है

सुबह 4 बजे सभी त्रिदेव और सभी देवता यहाँ स्नान करने आते है...

सबसे पहले त्रिदेव स्नान करते है ुसदकए बाद देवता ...ध्यान रहे जब त्रिदेव क स्नान क बाद देवता सनसन कर रहे हो वही समय है तुम्हे तुम्हारे लक्ष्य को पाने का ...

और आवाज बंद हो गयी.....

सुबह 4 बजे मैंने देखा क 3 प्रकाश पुंज आकर उस सरवर में समां गयी ...और वह सरोवर अद्भुत ऊर्जा से चमकने लगा....

आज क लिए इतना hi ..


अगला अपडेट कल..
 
अपडेट - 28

अब तक आपने देखा ा1 मसरोवर पहुँच गया है hai......subah 4 बजे 3 प्रकाश पुंज उस झील में प्रवेश कर gaye.......ab आगे..

उन् 3 परेश पुंज के झील में प्रवेश करते hi वह झील एक दम चमक लगी .....बड़ा hi दिव्या दृश्य था .....वह झील 3 प्रकार क प्रकाश से प्रकाशित हो रही thi......waha से निकलती ऊर्जा की किरणे मुज़ह तक भी पहुँच रही थी ...जैसे hi वह किरणे मुज़ह तक पहुँचती ....तोह मुज़हे ऐसा लगता था जैसे कोई स्नेह से मेरे सर पर हाथ फेर रहा हो....

तभी वह तीनो प्रकाश पुंज उस झील से निकले ...थोड़ी देर आकाश में स्थित hue......muzhe ऐसा लग रहा था जैसे वह मुज़हे hi देख रहे है

फिर वह तीनो प्रकाश पुंज आकाश में विलीन हो गए.....

अभी में झील क शांत जल को देख रहा hi था और सोच रहा था की आगे क्या करना hai......tabhi मैंने अनेक प्रकार की ऊर्जा को वह मर्हसुस किया...

लेकिन मुज़हे दिख कुछ नहीं रहा था

तभी मुज़हे गुरु जी की बात याद आती hai......jo हमें इन् चमड़े की आँखों से नहीं दिख पाटा वह ज्ञान चक्षु से दिख जाता है...

तभी मैंने अपनी ऊर्जा को आज्ञा चक्र पर केंद्रित कर दिया .....अब मुज़हे वह चक्र स्पष्ट रूप से दिखने लगा tha......do दाल वाले कमल क saman.....jisske भीतर अनंत ऊर्जा का एक bindu......iss चक्र में पांच तत्वों की एकत्रित ऊर्जा होती hai.....aur देवता है पांच मुखी सब सदाशिव

जो परब्रह्म जा hi सगुन रूप है

इतनी ऊर्जा क जागृत होने बाद मैंने और सरोवर की और ध्यान दिया तोह देख अलग अलग जगह से प्रकाश पुंज उस झील में प्रवेश कर रहे थे....

तभी मैंने भी झील में प्रवेश करने का सोचा और चल दिया झील की और...

जैसे hi मैंने अपना पेअर जिल क पानी में डाला तोह वैसे hi तेज़ जहतका मुज़हे लगा और में पीछे की और गिरा

भुवा लोक में तोह मेरा सामा यक्षों क सातझ हुआ था जो तामसिक शक्ति का प्रयोग करते है...

परन्तु यहाँ तोह हर तरफ सात्विक ऊर्जा है जिस्का में सामना कैसे करू

समाज नहीं आरहा था.....

मैंने 2 ---3 बार कोशिश की लेकिन सब व्यर्थ रहा उस झील में मैं प्रवेश hi नहीं कर पा रहा tha.....abhi समय भी काम था सूरज निकलने से पहले मुज़हे अपना काम करना था....

तभी मेरे मैं क भीतर से आवाज आई ....अरे भाई कब तक मूर्खो की तरह गिरते पड़ते rahega.....aawaj स्पस्थ आई ....में इधर उधर देखने लगा

फिर से आवाज आयी ....अरे इधर उधर क्या देख रहा hai.....mein तुम्हारा hi एक हिस्सा मनोमय कोष हु.....

ध्यान से सुनो देवताओ से देवता hi बनकर मिल सकते हो .....इस बात को ध्यान में रखो...

में - अच्छा तोह फिर देवता कैसे बनु ...

तुम्हारे आज्ञा चक्र से ऊपर ब्रमरन्ध्रा है वह अपनी ऊर्जा को एकत्रित करो....

अभी बहुत काम समय बचा था ...

मैंने फिर अपनी समस्त ऊर्जा को वह ले जाने का प्रत्न करने लगा

परन्तु असफल रहा.....

में हाश होगया था एक गूदेव को क्या कहूंगा....

तभी मुज़हे ध्यान आया .....गुरु बिना ज्ञान नहीं ....अब तोह वह hi इस संकट से मुज़हे उबार सकते है....

मैंने मन hi मन गुरुदेव को पुकारा

तभी मेरे मैं में आवाज गुंजी

पुत्र तुम जिनसे मिलना चाहते हो उनकी आज्ञा लिए बिना और सहायता क बिना कैसे उन् से मिलना संभव

स्वस्ति वाचन से उन्हें प्रसन्ना करो और प्रार्थना करो....

तभी मैंने ...स्वस्ति वाचन का पाठ शुरू किया

स्वस्ति न इन्द्रो बृद्धश्रवा

स्वस्ति नाहा पूषा........

फिर मैंने प्रार्थना की ---

हे इंद्रा देव में अपने गुरुवार की आज्ञा से यहाँ आया हु कृपया मेरी सहयता कीजिये ....तभी सरोवर क और से एक सफ़ेद ऊर्जा मुज़ह पर पड़ी और में मेरा ध्यान ब्रह्मरन्ध्रा में पहुंच गया और मेरा शरीर प्रकाशवान हो गया अब में आराम से जल में उतर गया...

जैसे hi में झील क जल में उतरा तोह वह एक बहुत बड़ा देवताओ का समूह

मेरे सामने tha....jinnka सहरी बहुत hi दिव्या था सबके hi शरीर से अलग अलग तरह की ऊर्जा निकल रही थी

उन् सब क आगे जो थे वह बड़ा सा मुकुट और सफ़ेद प्रकाश से जगमगा रहे थे...

मैंने उन्हें प्रणाम किया ...

प्रणाम इंद्रा देव मुज़हे दर्शन देने क लिए बहुत बहुत धन्यवाद

िद्र देव - यशश्वी bhava....putra

तुम जिस वास्तु की खोज में यहाँ आये हो वह तुम्हारी hi है ......उस में हम सभी देवताओ की ऊर्जा समाहित है

इसीसलिए पहले तुम्हे प्रमाण देना होगा की तुम अब उस तलवार को धारण करने योग्य हो गए हो......

में - हे देव आप यह भी बता दीजिये किस प्रकार का प्रमाण देना होगा

इंद्रा देव - पुत्र तुम्हे अग्निदेव ..Vaayudev....aur वरुणदेव और मेरे वहां ऐरावत क वेग को रोक कर दिखाना पड़ेगा...

तभी वरुण देव और व्यू देव की सम्मिलित शक्ति से वह एक बवंडर प्रगट hua......mein कुछ समज़ता उससे पहले उस्सने मुज़हे अपने भीतर समां लिया ...यह इतना अचानक हुआ की मुज़हे कुछ सँभालने का मौका भी नहीं मिला....

में उस बवंडर में फास गया था

तभी अग्निदेव ने भी अपनी ऊर्जा उस बवंडर में लगा di.....ab वह का टॉपमान भी बहुत बढ़ने लगा ऐसा लगने लगा की जैसे कोई उबलते पानी में डूबा डूबा कर निकल रहा था

अब में और देर नहीं कर सकता था

मैंने अपने आप को संभाला और अपनी 5 तत्वि की सम्मिलत ऊर्जा से एक आपने चारो तरफ एक कवच का निरमः किया ...जिससे में उस भयंकर बवंडर में भी स्थिर हो गया

फिर मैंने आकाश तत्त्व की ऊर्जा से एक

वैक्यूम बनाया जिसस्ने उस बवंडर को अपने भीतर सोख लिया.....

तभी मुज़हे जोर से किसीने उछाल फेंका तोह देखा कई सूंड वाला एकदम सफ़ेद एक बादसा हाथी अपनी सभी सूंड को ऊपर उठाकर चिंघाड़ रहा है..

ऊपर से निचे आते हुए माइन उससे देखा ...अब वह फिर मुजहपर वार करने दौड़ कर आया तोह में उसस्के पैरो से बिच से बचकर पीछे की और निकल गया और पंच पड़कर छलांग लगते हुए उसस्के पीठ पर सवार हो gaya.........ab वह मुज़हे गिराने क लिए उछलने लगा सभी देवता इस खेल को उत्सुकता से देख रहे थे ...

तभी देवराज Indra...jaldi करो पुत्र अभी बस सूर्यादय होने hi वाला है

और ऐसे होते hi हम सब तहा से पृष्ठं कर जाएंगे....

तभी मुज़हे ध्यान आया की हाथी अंकुश से hi वश में होते है

तब मैंने अपनी शक्तियों को अपने हाथ में एकत्रित कर क वह प्रहार किया जहा अंकुश लगाया जाता है

और ऐरावत शांत ....

देवराज - बहुत अच्छा पुत्र अब तुम वयोग्य हो गए हो अपनी तलवार धारण करने क लिए .....परन्तु ध्यान रहे यह परम विध्वंसकारी है

इस्सके प्रयोग तुम तभी करोगे जब अति आवश्यकता हो

तभी सभी देवताओ क शरीर से उर्जाये निकल कर एक जगह एकत्रित हो गयी और

प्रगट हुई एक विशाल चमकती हुई दिव्या तलवार....


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तभी वह तलवार प्रकाश में बदलकर मुज़ह में समां गयी, जिससे मुज़हे तेज़ तेज़ जहटके लगने लगे और असहनीय पीड़ा का अनुभव होने लगा

में वही कठिनाई से उस्सको अपने भीतर सहन कर रहा tha...tabhi

वरुण देव - पुत्र तुम यहाँ जाटत्व की प्रधानता वाले क्षेत्र में आये और अपनी अभिलिषित वास्तु को प्राप्त किया

इससे में बहुत प्रसन्ना हु

यह लो मेरी तरफ से उपहार

VARUNASTRA...jo मेरी शक्तियों से परपूर्ण है......

वरुणदेव से अस्त्र पाकर मैंने सभी देवताओ को को प्रणाम किया ....

तब तक सूर्योदय भी हो चूका तब और सभी देवता प्रस्थान कर गए

मैंने भी सूर्य नारायण को अर्घ्य चढ़ाया और मानसरोवर को प्रणाम किया...

पीहर कैलाश पर्वत की परिक्रम्मा करके वापस राक्षस ताल पर आके अपने मित्र को याद किया

तभी वह गक प्रगट हुआ

गक - बहुत बहुत अभिनन्दन मित्र.

आपने अपने दूसरे पड़ाव को भी पार कर liye..ab कहो क्या आज्ञा है

में - मित्र अभी तोह गुरु देव क बताये तीसरे पड़ाव की और जाना है ...लेकिन मुज़हे अभी मेरे मित्रो की बाहत याद आरही hai..unhe देखने का बहुत दिल कर रहा है क्या तुम इस्स्में मेरी सहयता कर सकते हो मित्र.....

गक - क्यों नहीं मित्र जरूर....

और उसने अपने हाथ हवा में लहराया तोह वह आश्रम का दृश्य मुज़हे दिखने लगा

जहा मेरे मित्र अभ्यास कर रहे थे

उन्हें देखकर में बफा प्रसन्ना था ...

ऐसे सबको देखा ...राकेश को एकांत में बैठकर ध्यान करते हुए देखा, उसस्के शेर से एक अद्भुत प्रकाश निकल रहा था

फिर मुज़हे दिखा आश्रम का सरोवर दिखा जहा शालू को बैठे देखा जो उदास मन से जल की तरफ देख रही थी , उस्सकी आंखों में आंसू देखकर न जाने क्यों मेरा मैं बहुत दुखी होने लगा..

में अपने मैं में शालू ...शालू इतना दुखी मत हो .....

तभी शालू इधर उधर देखने लगी..

अभी... अभी ..कहा हो ...

फिर ...शयद मेरा भ्रम होगा

तभी गक - मित्र लगता है आपकी आवाज वह तक पहुचंह रही है...

आपका अन्तःकरण भी जागृत हो रहा है.....

उस्सकी बात समज़कर में फिर शालू से संपर्क करने लगा ..शालू इधर उधर क्या देख रही हो में तुम्हारे हृदय में hi हु

तुम उदास न हो में जल्दी hi आनेवाला हु....

अपने मैं में अभी की आवाज सुनकर शालू बहुत प्रसन्ना हुई..

अब मरीन चल पड़ा गक साथ अपने अगले पड़ाव .....ज्वालामुखी पर्वत की तरफ.....

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi ....
 
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