ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 5 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

सुपर शानदार रिव्यु क लिए थैंक यू सू मच नैना जी

:थैंक्यू: :अप्प्लायसे: :thankyou::applause::thankyou:

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखे....

पोस्टेड...
 
अपडेट - 37

अब तक आपने देखा ......

महागुरु ने नैना और रिम्पी

दोनों की सहायता से ड्रग की समस्या का हल निकलने की और इशारा किया.....

और साथ hi साथ एक युद्ध की और इशारा किया.......

अब आगे.........


रवस .........रिम्पी की लैब में अभी को लेकर पहुँच जाता है ......

रवस - बीटा ....तुमने इस छोटी सी उम्र में अद्भुत ज्ञान पाया है.....

आज तुम्हारे hi ......कारन हम इस विनाश को रोक पाए है.......

लेकिन अभी भी लाखो ऐसे है जीन तक यह मेडिसिन नहीं पहुँच पा रही hai....kya कुछ ऐसा हो सकता है की हम उन् तक यह एंटीडोट पहुंचा सके ...........क्या कुछ ऐसे गैजेट है जो मेडिसिन को अफेक्टेड पर्सन तक पहुंचा कर इंजेक्ट कर दे...

रिम्पी - सर मेडिसिन को कैर्री कर क इंजेक्ट कर ने वाले 5 माइक्रो रोबोट मेरे पास है , जो दिखने में बिलकुल हनी बी की तरह hai.....hum उन्हें कंप्यूटर द्वारा ऑपरेट कर क किसी पेशेंट तक पंहुचा सकते है......

यह खुद किसी पेशेंट को पहचान के एंटीडोट इंजेक्ट नहीं कर सकते.....

अभी - अगर इनमें कोई ऐसे सेंसर लगा दे जो ौर्रा को देखकर पहचान जाए की कौन नार्मल है कौन पेशेंट

तोह हमारा काम बन सकता है....

यह ड्रग लोगो क डीएनए में बदलाव ला रहा hai......agar डीएनए में बदलाव आरहा है तोह ौर्रा में भी चेंज आएगा .......

रिम्पी - हां यह हो सकता है एक नार्मल पर्सन और अफेक्टेड दोनों क बॉडी निकलने वाली बॉडी हीट और वेव्स में बहुत अंतर होता है.......

यस हम यह कर सकते है....

लेकिन सर सिर्फ 5 माइक्रो रोबोट से क्या होगा

हमे तोह लाखो तक यह एंटीडोट पहुँचाना है.....

रवस - तुम इस बात की चिंता मत करो

जल्द hi इन् में वह चंगेस करो ...

अभी तुम भी रिम्पी को मदत करो

मुज़हे कल सुबह तक रिजल्ट चाहिए

रिम्पी और अभी रात भर अपने काम में लगे रहे और तैयार हो गए ऐसे 5 हनी बीस रोबोट....

रवस उन् 5 रोबोट्स को नैना क पास ले aaya.....Naina ने अपनी निर्माण शक्ति

( पावर ऑफ़ क्रिएशन) से उन् 5 को 5कर

में बदल दिया और रवस ने उनको हर उन जगह पर पहुंचा दिया

जहा इस ड्रग का असर देखा गया था

ऐसे hi पूरा दिन इस काम में लग गया..

रवस की पूरी टीम बहुत खुश थी ...

रिम्पी और अभी भी बहुत खुश हुए

कई रातो से जग कर जिस काम में लगे हुए थे आखिर वह पूरा हुआ....


नयी सुबह की आशा क साथ वह रात भी बीत गयी..

एक नयी ऊर्जा क साथ सवेरा हुआ ...

अभी अपने रूम में सो रहा था....

तभी ऐसा लगा की जैसे को कोई ठन्डे पानी का बदल उस पर फैट गया हो .......चपक

ओह्ह्ह अह्ह्ह ....बारिश ...बारिश....

करके चिल्लाते हुए उठा ........तोह देखता है क पूरा गिला हो चूका था

और सामने खिलखिलाती हुए ाद्दु हाथ में खली बाल्टी लिए हुए....

ाद्दु - ha..ha....hi....hi...hi..bhai....

.......हैप्पी होली .....hi...hi..hi

में - ाद्दु की बच्ची ....tu.....toh रुक जा abhi.....batata हु ...तुज़हे होली....

और बीएड से उठकर ाद्दु को पकड़ने क लिए दौड़ा.... वह वही बाल्टी छोड़कर रूम में इधर उधर भागने लगी...

और अभी उसस्के पीछे....

ाद्दु - hi..hi..bhai ...मुज़हे नहीं पकड़ सकते ......

में - अच्छा बच्चू ..मुज़हे challenge.....tu ..रुक अब...

और फिर मैंने ाद्दु को पकड़ लिया और उसके पेट में गुड़गुली करने लगा...

वह ...hiiii....hiii...nahiii...hiii.hhhhi

भाई ...chod...do..na....

में - बहुत शैतान हो गयी है तू gudiya......aise कोई उठता है...

देखो मुज़हे पूरा गिला कर दिया

तभी में अपने बीएड क साइड टेबल पर पड़े हुए पानी क जग को उठाने क लिए मुदा ......गुड़िया हाथ से छूटकर दूर की तरफ bhagi.....aur मैंने उस जग का पानी उसकी और फेंका ...लेकिन तब tak....woh दूर खोल chuki...thi

और ....चपक.......

सामने ऋतू दी थी ...जो मुज़हे उठाने आ रही thi......achanak पानी गिरने से

दी भी हड़बड़ा गयी ...

दी - बेतु यह क्या चल रहा है यहाँ

.....सुबह सुबह पानी से भीगा दिए

में - नहीं दी ....यह ..ाद्दु ..ने पहले मुजहपर पानी फेंका था ......इसीलिए

लेकिन आप बिच में आगयी....

दी - कोई बात नहीं बेतु तुम दोनों रुको मुज़हे कुछ बात करनी hai....mein वाशरूम से होकर आयी.......

दी वाशरूम में चली गयी ...

में - देख ...गुड़िया तेरे वजह से दी

भीग गयी.....

ाद्दु - सॉरी bhai.....woh आप इतने दिनों से मिले नहीं ......और जब में यहाँ आयी तोह आप सोये the....maine आपको आवाज भी दी लेकिन आप तोह उठे hi नहीं

इसीलिए...

में - ohh....meri प्यारी gudiya....mein कैसे तुज़हे भूल सकता हु ..वह तोह में काम में बहुत बिजी था बीटा

sorry...mera बच्चा..

और में कान पकड़के निचे बैठ गया ...तोह गुड़िया भी ुचकर मेरी गॉड में बैठ गयी और गले लगा लिया

तभी वाशरूम का दरवाजा खुला और दी हाथ में बाल्टी लेकर.....

हम ने जैसे hi देखा हम जल्दी खड़े हो gaye....aur जैसे hi दूर पर पहुंचे ....तभी माँ आगयी और इधर दी ने तब तक पानी का वॉर कर दिया था ...हम जल्दी से निचे बैठे

और ....chapak........aur माँ पूरी भीग गयी..... यह सब इतने जल्दी हुआ क माँ को कुछ समाज hi नहीं आया...

माँ - ऋतू यह सब क्या hai....kya हालत कर दी है रूम की......

तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी .....

में - सॉरी माँ इस्स्में डीडू की कोई गलती नहीं hai.....aap उन्हें मत दातो

ाद्दु -- नहीं माँ यह मेरी...

माँ - चुप हो जाओ सब अब एक दूसरे की वकालत करना बंद karo.....aur मेरी बात suno......aaj हम सब गाओं जा रहे hai.......jaldi से रेडी हो जाओ...

गाओं का नाम सुनकर हम खुश हो गए ....

यहाँ रवस अपने फॅमिली को साथ लेकर गाओं पहुंचा अभी ..ाद्दु ..और ऋतू

अपने दादा दादी से मिलकर बहुत खुश hue......gaon क खेत पहाड़ और नदी में सब ने खूब एन्जॉय किया

इन्हे यही छोड़ते है देखते है आश्रम में क्या हो रहा है....


आश्रम क सरोवर क किनारे ा1 और शालू बैठे हुए बातें कर रहे थे

शालू - अभी तुम इतने दिन मुजह्से दूर rahe.....tumhe पता hai....k यह दिन कैसे गुजरे hai.......pata नहीं क्यों एक दिन भी तुम्हे न देखु तोह जीवन नीरस सा लगने लगता hai......kya तूने मुज़हे कभी याद किया था....

में - नहीं....

शालू - इस्सके अर्थ यह है क में hi पागल हु ....तुम्हारे ह्रदय में मेरे लिए कोई प्रेम hi नहीं है...

और उसकी आंखों में आंसू आगये

में उसके आसूं पोछते हुए----

सच में शालू तुम पागल ho.......yaad उससे किया जाता है जिसे हम कभी कभी भूल जाते है.......

और तुम तोह मेरी प्रेरणा हो तुम्हे कैसे भूल सकता हु ....और फिर शालू को मैंने गले लगा लिया.......

तभी मेरे गले में पड़ा लॉकेट गरम होने लगा जिससे शालू को चटका लगा ......तोह अलग होते हुए...

शालू - ओह्ह .....यर्ह क्या है तुम्हारे गले में .....गरम ....िस्सने तोह मुज़हे जला hi दिया.......

अब में उससे क्या बताता .....

कुछ नहीं ....यह तोह बस......

तभी कट की आवाज से हम दोनों का ध्यान उस तरफ गया

कट - तुम दोनों का हो गया हो तोह ....

जल्दी चली .....गुरुदेव ने बुलाया है

उतना कहकर वह चला गया....

हम भी वह से उठकर चल दिए ..

गुरु देव शिवालय क प्रांगण में आसान पर बैठे थे और वह पर मेरे सभी मित्र और शिक्षक खड़े थे

महागुरु - बच्चो अब तुम्हारी शिक्षा का पहला चरण समाप्त हुआ

अब तुम सब को एक युद्ध में भाग लेना hoga......issko तुम परीक्षा भी समाज सकते हो .......

यह परीक्षा उन्ही क लिए है जो अस्त्र विद्या , 5 तत्वों की विद्या का अभ्यास कर रहे थे.....

आज तुम सब अपनी अपनी विद्या का अच्छे से अभ्यास कर लो......

कल होगा तुम्हारा सामना ....

यह जान लो क यह युद्ध बड़ा भयंकर होगा ...कई कठिनाई aayegi......mrityu का भय भी होगा.......

तुम्हे उससे भयभीत नहीं होना है

यह युद्ध संसार की रक्षा क लिए है

आगे चलकर तुम्हे जिस उद्दैश्य को पाना है उसके लिए तोह बस यह एक शुरुवात है.....

अपने आप पर और अपनी विद्या पर विश्वास रखो........

आप में से यदि कोई ऐसा है की जिससे संसार से ज्यादा अपने जीवन की चिंता है तोह अभी बता दे.........

यहाँ उन्ही को चुन कर लाया गया है.

जिनकी आगे चलकर एक बहुत बड़े उद्देस्य को पूरा करने में भूमिका होगी........

मृत्यु से भयभीत होने वालो का यहाँ काम नहीं .......

और वैसे भी - शास्त्र कहता है

मृत्युर जन्मता विराम देहें सहा जायते...

हर प्राणी की मृत्यु उसस्के जन्म के साथ hi निर्धारित हो जाती है

इसीलिए जीवन वह hi है जो संसार क कसम आये....

महा गुरु की बाते सुनकर मुज़हे किसी बहुत बड़े युद्ध का आभास हो रहा tha.........saare वह खड़े शिष्यों क मैं में महागुरु क बातो से ऊर्जा सी भर गयी थी सब एक स्वर से तैयार हो gaye.....aur अपने अपने कला को और तेज़ बनाने ल लिए अभ्यास में जुट गए......

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi......
 
अपडेट - 38

अब तक आपने देखा ....ड्रग से अफेक्टेड लोगो का इलाज हो गया

रवस अपने फॅमिली क साथ गाओं आगया .......

और आश्रम में महागुरु ने शिस्यो को युद्ध क लिए तैयार रहने को कहा....

अब आगे...


रवस महल में बने हुए गुप्त शिवालय में ध्यान कर रहा था क उसी समय वह महागुरु की आवाज गुंजी , -- पुत्र उठो हम तुम्हारे महल पहुँच गए है....

रवस ने जैसे hi महागुरु की आवाज सुनी ....तोह तुरंत वह से टेलिपोर्ट होकर महल में जहा उनके पूर्वजो की सभा लगती थी उस हॉल में पहुंचा....

वह महागुरु क साथ उनके शिष्यों को भी आया हुआ देखा...

रवस - प्रणाम महागुरु...

महागुरु - यशश्वी भाव पुत्र

वह खड़े ा1 ने जैसे hi रवस को देखा तोह उससे अपनापन सा लगा ...

मैं में ( जाने क्यों ऐसा लग रहा है क मेरा इनसे कोई गहरा नाता है)

महा गुरु क साथ वह आये हुए थे

A1...Rakesh....CT.......uday.......shalu

vajrabahu.....lomesh.....paranjaya...

और ..कार्तिक

शिक्षकों में से भी 5 तत्वों की शिक्षा देने wale...acharaya पवन

....Adniwesh......Dhara (फीमेल).....

Varun......aur आचार्य व्योम .....

आये थे

राकेश ने आगे बढ़कर रवस के चरण छुए

रवस - कैसे हो putra.....itne वर्षो बाद देखा है बिलकुल वैसे hi हो....

और गले लगा लिया....

राकेश को गले लगे देखकर ा1 भी आगे आया .....और उस्सने भी रवस क चरण छू liye.....jaise hi रवस ने उससे देखा तोह तुरंत कंधे से पकड़ कर उठाया...

रवस - अरे बीटा तुम्हारा स्थान वह नहीं मेरे ह्रदय में है ......अरे वह कितना बड़ा हो गया है तू....

और ा1 को गले लगा लिया ....

रवस की आंखें भर आयी .....उनके गले लगा ने से ा1 की भी आँखों में आंसू aagaye.....woh समाज नहीं पा रहा था की ऐसा क्यों हो रहा है...

फिर रवस एक एक करके सबसे मिला

महागुरु - पुत्र अब समय आगया है इस युद्ध क लिए दोनों को एक करने का

तुम उससे लेकर शिवालय पहुंचो में इससे लेकर आता हु

रवस - परन्तु गुरुवार क्या यह सभी इस युद्ध में हमारे साथ चलेंगे

महागुरु - हां पुत्र

रवस - परन्तु गुरुवार यह तोह अभी बहुत छोटे है.....

महागुरु - पुत्र यह सब दिखने में छोटे है परतु बड़े से बड़े योद्धा का सामना करने में शक्षम है....

तुम वह करो जो मैंने कहा है...

रवस फिर वह से चल पड़ा और अभी को अपने साथ लेकर शिवालय pahuncha.....toh वह महागुरु ा1

के साथ खड़े थे

जैसे hi दोनों ने एक दूसरे को देखा

तोह हैरान हो गए....

अभी - अपने मैं में .....अरे यह कौन है जो बिलकुल मेरे जैसा है ....

इससे देखकर क्यों ऐसे लग रहा hai...k जैसे यह मेरा hi एक हिस्सा है.....

तभी महागुरु ने दोनों को अपने पास बुलाया और उनके सर पर हाथ रखा

दोनों क सर पर हाथ रखते hi वह एक तेज प्रकाश उत्पन्न हुआ जिससे रवस की आंखें बंद हो गयी....

और जब आंखें कुली तोह दोनों एक हो गए......

एक होते hi वह भयंकर ऊर्जा हो gayi.....Abhi का शरीर चमकने लगा और आंको से नीले रंग की रौशनी निकल लगी.......

दोनों की यादें एक हो gayi......ab अभी को सब कुछ याद आगया की कैसे उसने जन्म liya.....aur वह कौन है

महा गुरु - स्वागत है महारक्षक

अब समय आगया है पहले युद्ध का

अभी - प्रणाम Mahaguru....mein तोह कबसे इस की प्रतीक्षा कर रहा था...

अब मयासुर को पता चलेगा अपनी सीमाओं क उलंघन का परिणाम क्या होता hai........asuro.....sawadhan ..

तुम्हारी मौत आरही है...

KAAL.......kaha हो....

जैसे hi अभी ने पुकारा तोह राकेश वह प्रगट हुआ और विशाल शेर क रूप में बदल गया और अभी क सामने सर ज़्हुककर खड़ा हो गया

अभी उसस्के सर पर हस्त फेरते हुए

कैसे हो मित्र ......

तभी वह दहाड़ा

अभी - जानता हु मित्र तुम भी दुष्टो क संघार की hi प्रतीक्षा कर रहे हो

अब होगा संघार ....फिर वह लोइन गोल्डन प्रकाश में badlkar.....Abhi क अंदर समां गया और बन गया अभी क चेस्ट पर एक तत्तो...


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अब अभी ने पुकारा -- VAYU....kaha हो

तभी वह एक काल घोडा हिनहिनाते हुए प्रगट हुआ....

यह वही घोडा है जिससे अभी ने दादा जी क फार्महाउस में देखा था.....

असल में वह अभी की hi वह रहकर प्रतीक्षा में tha....yeh अभी का वहां था

घोड़े ने भी अभी को देखकर सर ज़्हुकाया और अभी क श्री में समां गया .....और अभी क हाथ में एक

तत्तो बन गया


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उसस्के बाद तीनो शिवालय से बहार आगये जिस्का दरवाजा अभी क दादा क रूम में खुलता था....

जैसे hi दादा और दादी को अभी वह बैठे देखा तोह ...अभी ने उनके पेअर छुए

दादा - वह मेरे शेर ...आज कुछ बदला बदला सा लग रहा है...

और दादा ने गले लगा लिया

अभी क अंदर ा1 ने तोह कभी परवर देखा hi नहीं था .....अब वह अपने परिवार क बारे में सब जान चूका था.....

दादा दादी को मिलने क बाद अब उस्सकी नज़रे माँ को ढूंढ़ने लगी

अभी - अपने मैं में ( जानता हु मेरे यर तू माँ को ढूंढ रहा है...

इतने वर्षो तक तू उनसे दूर रहा है)

फिर - अभी नैना क रूम में गया

नैना - आओ बीटा में अभी तुझे hi याद कर रही thi.....maa को देखकर अंदर क ा1 की वह याद ताज़ा हो गयी थी जब उससे होने भीतर उनकी छवि दिखी thi.....Aaj माँ को देखकर उसस्के आँखों में आंसू आगये और उस दौड़कर माँ को गले लगा लिया ...

उसस्के आंसू देखकर माँ भी तड़प uthi.....arre बेतु क्या हो गया क्यों रो रहा है beta......chup हो जा न...

मुज़हे bata...dekh तू जानता है में तेरी आंखों में आंसू बर्दास्त नहीं कर सकती....

अभी - कुछ नहीं हुआ माँ बस ....ऐसे hi आज बचपन की यादें ताज़ा हो gayi.....ek बार फिर गले लग गया...

फिर अभी ऋतू और ाद्दु से भी मिला

आज अभी क अंदर ा1 को पर्यावर का प्यार क्या होता है इस बात का अहसास हो गया....

अब वापस महागुरु और अपने मित्रो क पास पहुंचा....

महा गुरु - पुत्र अब और ज्यादा विलम्ब मत करो ताल लोक जाने का मार्ग खोलो

तब अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल को प्रगट किया और आकाश तत्त्व का ध्यान करते हुए हवा में गोल घुमाया

वह प्रकाश का एक गोल घेरा प्रगट हुआ और सभी उस्में समां गए

सबकी आंखें बढ़ हो गयी थी..

जब आँखें खुली और सामने देखा तोह ......

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट जल्दी hi.....
 
अपडेट - 39

अब तक आपने देखा महागुरु अपने शिस्यो क साथ राणा महल पहुँच गए

अभी क दो रूप आपस में मिल गए

और अभी की संघारक शक्ति , काल ( राकेश) और उस्का वहां वायु उसमें समां गए

अभी क द्वारा बनाये गए पोर्ट से सब ताल्लुक में पहुंचे

अब आगे ----+


जैसे hi हम वह पहुंचे तोह देखा की वह की जमीन पहाड़ सब काले है ....एक तरह की नेगेटिव एनर्जी सी वह छायी हुई है....

तभी वह एक बदबूदार हवा कस ज़्होंका चले लगा तोह हमने उस और देखा जहा से यह बदबू आरही थी

वह मानव लाशो का ढेर था...

कुछ सदी गली हालत में तोह कुछ की सिर्फ हड्डिया रह गयी थी .....और कुछ अजीब से जीव उनको का रहे थे


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हम अभी उनको देख hi रहे थे क उंनका ध्यान हमारी तरफ गया ....

और वह कुछ अजीब सी आवाजे निकलने lage.........aur देखते hi देखते वह ल000 क लगभग वह वह जीव इकट्ठे हो गए.....

कट - में सोच hi रहा था क कोई तोह आएगा स्वागत क liye......lo आगये

महागुरु ने उस्सकी और देखा तोह वह चुप हो गया....

वह जीव लार टपकते हुए हमारी तरफ बढ़ने लगे तोह हम भी तैयार हो गए

हमने उनपर अपर अपनी शक्तियों क एनर्जी बॉल्स बनाकर फेंकने लगे...

लेकिन उनपर हमारे एनर्जी बॉल्स का कोई असर नहीं हो रहा था

आचार्य अग्निवेश ने आग क गोलों से उनपर हुम्ला किया लेकिन ये क्या ...

अग्नि का उनको स्पर्श होते hi उनका शरीर पहले से दुगना हो गया...

अभी वह हम तक पहुँचने hi वाले थे क उदय और शालू ने पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा से सामने घने पेड़ो की दिवार सी बना दी और मैंने .....पृथ्वी तत्त्व की ऊर्जा से उनको उन्ही पेड़ो क टहनिओ से जकड दिया.......

मैंने देखा क उन् सारे पेड़ो में आग लग रही है तभी महागुरु ने कहा.....

यह ठन्डे खून वाले प्राणी है (कोल्ड ब्लडेड) इनको शीत लहार से रोको

और सम्पत करो ....

तब आचार्य वरुण और पवन ने अपने ऊर्जा मिलकर उन जीवो पर छोड़ी...

और वह जीव जमने लगे ..

में - सभी अपने अपने शास्त्रों को सम्भालो ...और जो जो जीव जमते जाये उन्हें समाप्त करो......

माइनर भी अपने एक हाथ से जल तत्त्व और वायु तत्त्व की मिली हुई ऊर्जा क गोले उनंजीवो पर फेंकना शुरू किया और एक हाथ में तलवार लेकर उनका नाश

देखते hi देखते उन् सब जीवो का सफाया हो गया....

वही मयासुर एक काले पत्तेर से बने हुए एक महल एक हाल में बैठा अपनी माया से सब देख रहा था....

मस - है ...ha..ha....abhi तोह सिर्फ मयासुर क माया क शुरुवात है....

तुम सब की मृत्यु hi तुम्हे यहाँ ले आयी है

इधर सभी जीवो को समाप्त करके ,हम सब आगे बढ़ने लगे.....

सब सतर्क थे........

मयासुर की माया क कारन हम टेलिपोर्ट होकर भी सीधे उसस्के सामने नहीं पहुँच सकते थे...

अभी हम चल hi रहे थे क जमीं हिलने लगी .....और आकाश से भी हवा तेज़ बहने लगी तभी हमने देखा की जमीं से दानव बहार निकलने लगे..

और भयंकर गर्जना करने लगे....

और तभी आकाश से बड़े बड़े अजीब से पंछी मंडराने लगे......

उन् दानवो को देखकर वज्रबाहु

इनको तोह में मसलूंगा ....तभी उस्सने भी अपनी आंखें बंद की और वह भी एक बड़े से दानव क रूप में बदल gaya......unn दानवो को पकड़ पकड़ कर मसलने लगा.....

तभी आकाश में उड़ने वाले अजीब से पंछियों ने भी हमपर हुम्ला कर diya......meine महा गुरु और सभी अपनी अपनी ऊर्जा क गोले उननपर छोड़ रहे the.......mein भी अपनी तलवार से उनको समाप्त करने में लगा हुआ था....

लेकिन जैसे जैसे हम उन्हें समाप्त करते उनकी संख्या और बढ़ती जाती

यहाँ दानव भी बाद रहे थे तभी एक ने कट को पकड़ लिया और आकाश में ले जाने लगा तोह मैंने अपने ऊर्जा से उससे रोका...

कार्तिक अपने ऊर्जा चक्रो से , रवस तलवार से ....Agniwesh...Varun ....पवन ....Dhara....Aur व्योम अपने अपने ऊर्जा गोले se.....Uday गदा से ...शालू तलवार और अपनी ऊर्जा से उननपर हुम्ला करने लगे ...उनकी बढ़ती संख्या देखकर अब मेरा क्रोध बढ़ने लगा और मैंने pukara....KAAL

तभी काल एक विशाल शेर क रूप में उन् दानवो पर टूट पड़ा और मैंने तलवार लेकर आकाश की और छलांग लगायी और अपने वहां वायु की शक्ति से आकाश में उड़ते हुए उन् पक्षियों का संघार करने लगा...

उनकी बढ़ती संद्य को देखकर मेरा क्रोध और बढ़ने लगा ......तभी मेरे मैं में mahaguru....puutra शांत हो जाओ और अपने ज्ञान नेत्रों का प्रयोग करो .....

तभी उड़ते हुए मैंने चित्त को एकाग्र कर क अपने चक्रो की ऊर्जा को जागृत किय और प्रगट हुई मेरे माथे एक प्रकाश किरण .....जो जहा जहा पड़ती वह वह दानव और उड़ने वाले जीवो का नाश होने लगा....

इस तरह एक और छोटी सी विजय हमे प्राप्त हुई.....

तभी मेरे मैं में महागुरु की फिर से आवाज आयी .....पुत्र मयासुर क माया की ऊर्जा मैंने यहाँ महसूस की hai.....woh हमे देख रहा है....

अब हमे उससे वही दिखाना है जो वह दिखाना चाहता है......

मैं गुरुदेव की बात समाज गया और मैंने अपना शक्ति त्रिशूल प्रगट किया

और उसकी सहायता से सभी साथियो को एक रक्षा कवच से सुरक्षित कर दिया ...जिससे मयासुर की माया भेद नहीं सकती थी......

यहाँ मयासुर सब देख रहा था की अचानक उसने देखा की सब क सब गायब हो गए अभी वह यह सोच hi रहा था की सारे कहा चले गए...

तभी फिर सारे उसी जगह दिखाई देने लगे......

मयासुर ने देखा की उसके इस हमले में महागुरु ..अभी और बाकी साथी भी जख्मी होगये....

मस - ha...ha..ha चले थे मुज़हे समाप्त करने अब खुद समाप्त हो जाएंगे ....तभी उस्सने और बड़े और खातर नक् जीवो को वह भेजा.....

माया सुर देख रहा था उन् भयंकर जीवो को देखकर महागुरु समेत सब बहुत दर गए

फिर भी सब अपनी पूरी शक्ति लगाकर

लड़ रहे थे क तभी एक जीव ने महागुरु को निगल लिया अपने गुरु को ऐसे समाप्त होते देखकर सभी हताश हो gaye.......ab उनन्साब में लड़ने की ऊर्जा hi नहीं बची

उनकी साड़ी ऊर्जा वह जीव सोख रहे थे और एक एक करके सबको खा रहे थे

कुछ hi देर में उन् जीवो ने महागुरु और उनके सभी ष्षियो को अपना ग्रास बना लिया.....

अपने शत्रुओ को इतनी आसानी से समाप्त हुआ देखकर उंनका अहंकार और बढ़ने लगा.......

अहंकार hi विनाश का मूल है यह असुरो को कौन समज़हाए...

सब असुर प्रासना थे और मयासुर की जय जयकार करने लगे.......

तभी मयासुर को एक भयंकर विस्फोट की आवाज सुनाई दी............

आज क लिए इतना hi.......

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट -40

अब तक आपने अभी & टीम को मुश्किलों का सामना करते हुए आगे बढ़ते हुए देखा....

मयासुर और उसके साथी अपने दुश्मन क समाप्त होने का जासं hi मन रहे थे......

एक विस्फोट की आवाज आयी......

अब आगे........


जैसे भयंकर विस्फोट की आवाज आयी सब का जश्न रुक गया.......

अभी मयासुर कुछ करता क तभी एक असुर जो महल क मुख्या द्वार का रक्षक था घायल अवस्था में वह आया

s.....wa..mi माहल.. पर आयकर....

बोलते बोलते वही धराशायी हो गया...

यहाँ रास्ते में सभी जीवो और दानवो का संघार करते हुए ....

अभी सब क साथ मयासुर क महल तक पहुँच चूका था .....और उसीने अपने अग्निशूल क द्वारा भयंकर विस्फोट से महल क मुख्या द्वार को धराशायी कर दिया था....

मयासुर ने महल क एक उंच्चे निरक्षण स्तम्भ (मीनार) पर से जब अभी ...महागुरु और सभी को सुरक्षित देखा तोह उससे अपनी आँखों पर भरोसा नहीं हुआ....

मयासुर - अच्छा तोह मयासुर से hi माया khel......bahut अच्छा ....है अब

देखो मेरी ...माया बच्चे...

तभी यहाँ अभी महल की और देख रहा था की कही से भी कोई खतरा आसक्त hai......ki तभी देकते hi देखते वह महल वह से अदृश्य हो गया..........

अब सब ने सामने देखा तोह एक बहुत hi सुंदर फूलों से भरा हुआ बगीचा वह प्रगट हो गया जिस्में एक बच्ची तितलियों क पीछे भाग रही है

अचानक अपने सामने से दृश्य बदलते देहकर हैरान थे.....

सभी उस बची की मासूमियत और खिलखेलती हुई हँसी से मोहित हो गए

जाने कैसी माया थी क सबको अब अपने साथी दिखाई देने बंद हो गए सब भूल गए की वह यहाँ युद्ध क लिए आये hai.........ab उस बच्ची क जगह सबको वह नज़र आनेलगा जिससे वह संसार में सब से ज्यादा प्रेम करते hai........Shalu को abhi.....RVS को ाद्दु

ऐसे hi.....sabko वह नज़र आनेलगे जिस क प्रति उनके मन में मोह हो

तभी सब ने वह भयंकर सर्प को dekha......aur उसने उस मायावी बच्ची को निगल लिया सबको ऐसा दिखा की उनका कोई अपना काल क ग्रास में समां गया

सब अपनी अपनी जगह बैठकर रोने लगे

इस माया से महागुरु और अभी अछूते थे .......सबको बिलख बिलख कर रोटा हुआ देखकर अभी उनको सँभालने का प्रयत्न कर रहा था

महागुरु - पुत्र हमे शीग्र hi इस माया को तोडना होगा.....

अभी ने उस माया को तोड़ने का प्यत्न किया लेकिन सब व्यर्थ ....

महागुरु - माया को यदि कोई भेद सकतस है तोह वह है अंतर्मन का prakash......apne अंतर्मन की दृष्टि का प्रयोग करो.....

अभी ने फिर अपने अंतर्मन में धयान लगाया तोह उसस्के शरीर से एक दिव्या प्रकाश प्रगट हुआ जो वह चारो तरफ फैल गया......

और समाप्त हुई वह माया....

सब की चेतना वापस आगयी ...तोह अपने आपको जमीन पर बैठा रोटा देखकर सबको आश्चर्य हुआ...

अभी - गरजते हुए ......मयासुर....

क्या तुम इस माया क पीछे छुपकर अपने आपको बचाना कहते हो मुर्ख

हिम्मत है तोह हमारा सामना करो

महल की तरफ से तभी मयासुर बहुत से असुरो क साथ आता हु....

मयासुर - बच्चे अब तक तोह में तुम सब क साथ खेल रहा था.....

अब तैयार हो जाओ मरने क लिए .....

तभी एक अग्नि का गोला ( फायर बॉल)

मयासुर ने अभी क तरफ छोड़ा....

और अभी ने उस्सको बिच में hi रोक कर वापस उन् असुरो पर छोड़ा जिससे कई असुर आग में ज़हूलास गए....

अपने वॉर को ऐसे अपने विरुद्ध जाता देखकर वह गुस्से में भरकर अपनी तलवार लेकर अभी की तरफ दौड़ा....

अभी की तलवार और मस की तलवार जब टकराई थो भयंकर अव्वज हुई

महागुरु भी एक त्रिशूल से असुरो का संघहार करने lage.....Kartik तोह जैसे असुरो क लिए मृत्यु डाटा बन गयी जो भी उसके सामने आता पल भर में टुकड़ो में बदल जाता.....

राकेश भी अपने काल रूप में अपने पंजो से असुरो को चिर पहाड़ रहा था

रवस भी अपने संघारक रूप में अपनी खुनी तलवार की प्यास बुजहा रहा था.....

वज्रबाहु भी बड़े से दानव

(हल्क जैसा) लेकर असुरो को मसालराः था...

उदय शालू , कट और सभी आचार्य अपने अपने तत्वों की ऊर्जा से ासुरो को मुक्ति प्रदान कर रहे थे .......

यह मेरा युद्ध मयासुर से जोर से चल रहा था दोनों एक दूसरे क वॉर को बखबि रोक रहे थे.....

तभी मस सामने से अदृस्य हो गया अभी में उससे देख hi रहा था

की तभी तलवार का जोर दर प्रहार मेरी पीठ पर हुआ और गुंजी cheekh....nahiiiii

यह आवाज शालू की थी जो मुज़पर प्रहार होने से विचलित हो गयी थी...

लेकिन उस प्रहार से मुज़हे कुछ नहीं हुआ ......मैंने अपने श्री पर देखा क एक कवच aagaya....mein सोच hi रहा था क यह कवच कहा से आगया

तोह ऊपर से आवाज आयी ......मित्र इस महायुद्ध क लिए मुज़हे भूल गए तभी में उस और देखा तोह वह

गक खड़ा tha.......yeh कवच शिवली ने भेजा है.....

और अब गक ने भी अपने भीतर से अपने मायावी दानव प्रगट किये और भीड़ गया....

यहाँ अब में .....मयासुर पीठ पर हुम्ला करता है......

मस - ha...ha..ha बातो में समय न गवा युद्ध कर ....और अबकी बार वह एक गदा से मुज़ह पर हुम्ला करने लगा ...तोह मैं भी अपनी गदा से उसपर वार करने laga......meri गदा क प्रहार से उस्सकी गदा चूर चूर हो गयी......

और मैंने एक जोर का वार उसकी चट्टी पर kiya.....jisse ुसदकए मुँह से खून निकलने लगा .....अब वह वह से गायब होकर .....आकाश से हुम्ला करने लगा

में भी अपने वहां वायु की शक्ति से आकाश में उड़ते हुए ुसस्पर हुम्ला करने लगा.......

मयासुर बार बार छिपकर वार करता उनमें से कुवह मुज़हे लगे और थोड़े बहुत घाव भी हो गए.....

तभी मैंने अपने अग्नि शूल और और वयवस्त्र की प्रचंड ऊर्जा को मिलकर .....मयासुर पर प्रहार किया

और वह आकाश से धरती पर आगरा..

मैंने सोचा की अब इस्सके खेल ख़तम हो गया hai....mein भी निचे आगया

तोह देखा की मयासुर बहुत जख्मी हो गया था बड़ी मुश्किल से खड़ा होने का प्रयत्न कर रहा था ....

तभी उसके चेरे पर एक मुस्कान उभरी

में उसकी मुस्कान को समाज पाटा की उससे पहले मुज़हे एक चर्ख सुनाई दी

अह्ह्ह ...Abhiiiiiiiiii......Maine देखा की शालू दूर बहुत जख्मी हालत में थोड़ी दूर पर पड़ी थी .......में उसके और बड़ा hi था क मेरे सामने एक महा भयंकर असुर क्रोधसुर आगया ....तभी महागुरु...

पुत्र तुम शालू को dekho.....tab तक में इससे संभालता हु...

और महागुरु उससे लड़ने लगे और मैं ..पहुंचा शालू क पास.....

शालू का सर गॉड में रखकर....

शालू क्यों किया तुम ने ऐसे .....क्या समज़ती हो तुम अपने आपको ....शालू utho.....utho.....nahi...mein तुम्हे कुछ नहीं होने dunga......shalu

हुआ यह था क जब अभी मयासुर को देखरहा था की तभी क्रोधासुर ने अपनी प्रचंड ऊर्जा ...से ऊपर पीछे से हुम्ला कर दिया ......तोह अभी को बचने क लिए ....शालू बिच में आगयी.....

शालू -- ाअभ्ही तुम ठीक तोह हो न

और अपना एक हाथ अभी क गालो पर रखते hue......lagta है तुम्हारा साथ यही तक था ...आआअह्ह्ह्ह.....

aabhii...mein तुमसे ....और सहलु की आंखें बंद हो गयी....

अभी - नहहह्हियी शालू तुममम ऐसे नहहहिं कर सकती.....

अब अभी का क्रोध बहुत बढ़ गया था

भयंकर गर्जना क साथ.....

सभी दूर हाट जाओ अब सिर्फ में hi इन् का संहार कुरुगा ...

अभी क श्री से भयंकर ऊर्जा की लपटे निकल रही थी .....और गूंज उठी सभीआसुरो की चीख पुकार ......अभी का भयंकर रूप हो गया था जैसे महाकाल hi सृष्टि क संघार क लिए प्रगट हो गए हो....

कुछ hi पालो में सभी असुर राख में बदल gaye.....mayasur वह से भाग चूका था .....लेकिन सिर्फ एक hi असुर क्रोधासुर अभी क सामने डाटा हुआ था...

जैसे जैसे अभी का क्रोध बढ़ता जाता वैसे waise....krodhasur भी बाद रहा tha.....aur भयंकर गर्जना क साथ अभी पर वॉर कर रहा था .....

सभी दूर खड़े देख रहे थे.....

महागुरु अभी को कुछ बताने का प्रयत्न कर रहे थे ....लेकिन अभी क इस भयंकर रूप क सामने वह भी भी जा पा रहे थे.....

अभी क्रोधासुर क प्रहारों को बड़ी मुश्किल से जहेल रहा था ...क्या करे कैसे इस असुर का सामना करे...

कुछ समाज नहीं आरहा था...

रभी उसस्के फैले में पड़ा लॉकेट चमकने laga.......aur उस में से आवाज आयी

शांत हो जाओ अभी ....धैर्य से काम लो ...यह असुर तुम्हारी क्रोध से hi ऊर्जा प्राप्त कर रहा है और तुम्हारे शक्तियों को अपने भीतर सोख रहा है

अगर तुम शांत नहीं हुए तोह सब समाप्त हो जायेगे.....

लॉकेट से आनेवाली आवाज शिवली की थी

अभी अब अपने आपको शांत करने लगा

और ॐ का उच्चारण करते हुए....

ह्रदय चक्र को जागृत किया जिससे एक दिव्या शीतल प्रकाश करोडासुर पर पड़ा और वह तड़पने लगा देखते hi देखते उस्सकी साड़ी ऊर्जा समेत हो गयी

और फिर वह कही विलुप्त हो गया....

युद्ध समाप्त hua.....Abhi अपने घुटने क बाल जमीं पर बैठ गया

ओह्ह्ह शालू ...मुज़हे ...क्षमा कर ..दो ..में तुम्हे नहीं बचा पाया....

में hi तुम्हारे प्रेम क लायक नहीं हु ......

तभी एक हाथ अभी को अपने खंड पर महसूस हुआ और पीछे मुड़कर देखा तोह शालू धरा का सहारा लेकर कड़ी थी अपने दर्द को अपने भीतर छुपाये अभी को देख रही थी....

यही तोह प्रेम होता है...

शालू को देखकर में जल्दी से उठा और गले लगा liya.........usse जीवित dekhkar.....muzhe ऐसा लगा जैसे सबकुछ पा लिया हो....

दोनों एक दूसरे की बहून में सब कुछ भूल गए की यहाँ सब लोग उन्हें hi घर घर कर देख रहे है.....

तभी कट - अरे मित्र अब बस भी करो

हम सब यहाँ खड़े खड़े बुड्ढे हो जाएंगे ...

तभी हम अलग हुए शालू शरमाजर धरा क पीछे चुप गयी ....और मैं भी शर्म क मारे सर ज़्हुककर खड़ा था....

तभी महागुरु आये और मुज़हे गले लगा लिया -- बहुत बहुत अभिनन्दन

पुत्र इस विजय क लिए

में - गुरुदेव यह हम सब की विजय hai.....yadi आपका आशीर्वाद न होता और सब का साथ न hota...yeh विजय मेरे लिए कठिन थी

ताल्लुक ासुरो क नाश बाद बहुत सूंदर हो गया था हर तरफ हरियाली

सूंदर सूंदर पुष्प चारो तरफ खिल रहे the.....aur उस काले महल की जगह चमकता हुआ स्वर्ण महल

रवस - गुरुदेव कहीं यह भी कोई माया तोह नहीं......

महागुरु - नहीं पुत्र ..असुरो क यहाँ आने से पहले तललोक ऐसे hi था जो आसुरी शक्तियों की वजह से उजाड़ था

लेकिन अब उनके विनाश क पश्च्यात अब वह अपने असली रूप में आगया था

महागुरु - शालू तुम्हारे पिता यहाँ क राजा थे जिनकी हत्या करके मयासुर ने अपना शाशन स्थापित किया...

अब तुम इस लोक की रानी हो ...पुत्री अभी तुम छोटी हो इसीलिए ...धरा और आचार्य वरुण तुम्हारे साथ इस राज्य का कार्यभार संभालेंगे....

फिर महागुरु ने शालू का

राज्याभिषेक किया .....और फिर आचार्य वरुण और धरा को वह छोड़कर सब वापस पृथ्वी लोक पहुंचे ...

शालू अभी से दूर होने पर बहुत दुखी thi....paratu अपना कर्त्तव्य की पूर्ती क लिए अपने पिता क परया को आगे बढ़ाने लगी.........

अभी ने भी उससे आने का वचन दिया था......

पृथ्वी लोक पहुंचे से पहले अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल दौरा एक कवच का निर्माण कर दिया था जिससे अब कोई असुर पटल से पृथ्वी पर न आसके..

परन्तु अभी भी पृत्वी पर लोभा सुर मोहासुर गुप्त रूप से मानव मन को प्रभावित कर रहे थे

पृथ्वी पर पहुँचने क बाद अभी क शरीर से महागुरु ने ा1 को अलग कर दिया और अपने शिष्यों और ा1 को लेकर

आश्रम पहुँच गए....

और अभी अपने परिवार और फ्रेंड्स क साथ .....समय आगे बड़ा ....

अब अभी का एडमिशन कॉलेज में हो गया, और अब सभी तरह क फाइटिंग स्किल्स और टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट हो गया था

.....ाद्दु ...देहरादून क स्कूल में अपनी पड़े कर रही थी...

ऋतू अपनी पड़े पूरी कर चुकी थी...

और अपने पापा क साथ बुसिनेस्स का काम देख रही थी ....

नैना का समय अपने बच्चो और पति

की ख़ुशी में गुजरने लगा....

आज अभी का कॉलेज में पहला दिन था

बड़ा hi खुश tha....apni कॉलेज लाइफ क शुरू होने से.....

अभी क लिए इतना hi.....


अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 41

अब तक आपने देखा की कैसे अभी और उसके साथियो ने मस का मुकाबला किया और मस को वापस पटल लोक जाने पर विवश किया.....

शालू को ताल्लुक की रानी बनाया गया....

और अभी क कॉलेज में अद्मिस्सों क बाद पहला दिन


सभी दिंनिंग टेबल पर सुबह क नास्ते क लिए बैठे थे...

सिर्फ अभी को छोड़कर...

रवस - नैना आज अभी क कॉलेज का पहला दिन है ...कहा है वह...

नैना - लगता है अभी तक उठा नहीं

तभी अभी घर में बने जिम से निकलते हुए एक हैंड टॉवल से अपना पसीना पोछते हुए आया....

अभी - गुड मॉर्निंग dad..mom

एंड गुड मॉर्निंग डीडू

रवस - गम बेटे ...यह क्या अब तक तुम रेडी नहीं हुए, और ऐसे hi नंगे पुंज घूम रहे हो

जाओ जाकर जल्दी तैयार हो जाओ रिम्पी आती hi होगी....

अभी - सुबह सुबह दांत पड़ने की वजह से बुरा सा मुँह बनता हुआ..

टेबल से एक एप्पल उठता है....

सॉरी डैड वह में .....बस अभी आया

ऋतू - बेतु यह क्या जा पहले फ्रेश होकर आ ....

अभी - दी जा रहा हु न ...आप भी आजकल बहुत स्ट्रिक्ट हो गयी ho....bilkul हिटलर

ऋतू - माँ देखो न यह मुज़हे हिटलर बोल रहा है .....क्या में हिटलर लगती हु

माँ - अरे बीटा तोह खाने दे न एप्पल ....अभी टाइम है हो जाएगा फ्रेश....

तभी ने एप्पल खाने क लिए जैसे मुँह खोला तोह उसका मुँह खुला का खुला रह gaya........Saamne से रिम्पी को आते देखा तोह जैसे दिल धड़क कर बहार आने को हो रहा था....

ब्लैक ड्रेस में कितनी बेटिफुल लग रही थी..


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ऋतू - गम माँ ...गम अंकल गम.....

जैसे hi उसकी नज़र अभी पर पड़ी तोह वह भी बस देखती रही

मन में (हाय मेरा शोना क्या लग रहा hai....man कर रहा है क ब्रेकफास्ट क बदले इससे hi खा जाओ)


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दोनों को ऐसे एक दूसरे को घूरते हुए देखकर रवस खस्ने लगे

रवस - खम्म .....ख्मंमं...

डैड की आवाज सुनकर में और रिम्पी हड़बड़ा गए

हमारी हालत देखकर माँ और डीडू मुँह दबाकर हसने लगी ..

माँ - आजा बीटा आज तेरी पसंद का ब्रेकफास्ट बनाया है आजा बैठ जा

और में चल दिया फ्रेश होने फुल स्पीड क साथ...

फ्रेश होकर में निचे आया...

और बर्फ किया ....

रिम्पी - तोह chale.....college

में - लेकिन आज no कार ओनली बाइक ...

माँ - नहीं बीटा कार से जाओ सेफ्टी रहेगी.....

मैंने बड़ा मनाया तब जाके बड़ी मुश्किल से माने...

तोह मैंने अपनी बंव बाइक निकली रिम्पी थोड़ा दुरी बना कर बैठी थी

में - स्वीटू थोड़ा पास बैठो और मुज़हे कास कर पकड़ लो नहीं तोह गिर जाओगी....

रिम्पी - में ठीक hi बैठी हु तुम चलाओ

जैसे hi मैंने बाइक स्टार्ट की और अक्सेलरेटर घुमाया ज़हत से रिम्पी ने मुज़हे कास कर पकड़ लिया...

रिम्पी - Oucc...h थोड़ा धीरे चलाओ न बाबू प्लस मुज़हे दर लग रहा है

में - लेकिन मुज़हे तोह मज़ा आरहा hai....bas ऐसे hi पकड़े रहो..

रिम्पी - में सब समजह्ती हु आजकल तुम बहुत बदमाश होते जा रहे हो

(मैं में और हॉट भी)

में - क्या समझ आरहा है मेरी स्वीटू को...

रिम्पी - कुछ नहीं ...चुप चाप चलो..

ऐसे hi कहती मीठी बातें करते हम कॉलेज पहंचे...

जैसे hi हमारी बाइक कॉलेज कैंपस में एंटर हुई तोह बहुतो का ध्यान हमारी hi तरफ था...

बाइक पार्क करके हम एंटर हुए...

तोह देखा कुछ सीनियर्स रैगिंग ले रहे hai......toh मैंने सोचा की चलो थोड़ी हलकी फुलकी रैगिंग तोह छाती है

यह कॉलेज रवस क इंस्टीटूट्स में से एक था जिससे अभी ऋतू और आदिरा क नाम पर रखा था

आरा इंस्टीटुडे ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी

रिम्पी ने मेरा हाथ कसकर पकड़ रखा था....

हम अभी आगे जा hi रहे थे की किसी ने

ल1 - यह हीरो जरा अपनी हीरोइन को लेकर जरा यहाँ भी आ जरा इंट्रो तोह करा दे.....

में रिम्पी क साथ उनकी और जाने लगा तोह

रिम्पी - चलो अभी हमे इनसे नहीं उलज़ना है..

में - नहीं रिम्पी जरा देखे तोह इन्हे

हां भाई क्यों बुलाया है.....

ल2 - अबे सर बुला हम सीनियर्स है तेरे भाई नहीं


में - ok सर , मेरा नाम अभी और में फर्स्ट यर का स्टूडेंट हु आज मेरा पहला दिन है ....

काहलो रिम्पी सर को इंट्रो दे दिया

उनमें एक लड़की भी थी - अरे अभी तोह इंट्रो अधूरा है ....ओह्ह्ह मैडम जी अब क्या तुम्हे इनविटेशन देना पड़ेगा

चल इंट्रो छोड़ थोड़ा ठुमके लगा कर दिखा .....

रिम्पी - सॉरी में डांस नहीं आता

ल3 - तोह हम सीखा देते है मेरी जान

हाय ...क्या चीज़ है यर.....

उससे इतना बोलै hi था क उसस्के 4 दांत बहार एयर मुँह से खून निकल ने लगा

किसी को कुछ भी समाज नहीं आया

अभी - आगया मज़ा अब हम चले

वह कोई 8 लड़के थे कुछ hi देर में सब निचे पड़े कराह रहे थे...

अभी - तुम लड़की हो इसीलिए छोड़ रहा hu.....ladki होकर लड़कियों की इज़्ज़त नहीं करती ..

अभी फिर रिम्पी क साथ क्लास गया

प्रेफ़ेसर भट्टाचार्य हमारा इंट्रो ले रहे थे......

तभी हम हमारी क्लास में वह hi लड़की एंटर हुई .....उसस्के साथ कोलकेगे का पेओन था उस्सने आते hi प्रोफ को विश किया

प्रोफ - यस ...क्या हुआ

पेओन - सर प्रिंसिपल सर ने अभी नाम क स्टूडेंट को बुलाया.....

तभी लड़की ने मेरी तरफ इशारा किया

पेओन मुज़हे जानता था...

अभी वह कुछ बोलता उससे पहले मैंने उससे चुप करा दिया....

और उठकर जिसने लगा तोह रिम्पी भी चल पड़ी saath....woh लड़की मेरी तरफ देख देख बड़ा खुश हो रही थी जैसे उसने कोई बहुत बड़ा काम किया है

हम प्रिंसिपल ऑफिस में पहुंचे

जैसे hi प्रिन्सी सर ने मुज़हे देखा

वह कुछ बोलते उससे पहले मैंने

उन्हें भी इशारा किया....

लड़की - सर यही है वह जिसने मेरे फ्रेंड्स को बुरी तरह मारा.....

प्रिन्सी - लिमा तुम जाओ में इससे बात करता हु...

लिमा चली गयी...

प्रिन्सी - यह क्या है बीटा अपने hi कॉलेज में आते hi हंगामा कर दिया....

ोहिर मैंने उनको पूरी बातें बताई

सर हम इससे इंडिया का टॉप मोस्ट कॉलेज बनाने की सोच रहे है और यहाँ यह सब चल रहा .....और अस्प्ने न तोह इससे हैंडल किया और नाही वताया

आपको पारा है हर साल इसी रैगिंग की वजह से कितने स्टूडेंट्स सुसडे तक कर लेते है....

प्रिन्सी - सॉरी बीटा .....

में - सर आप मेरे गुरु है और आप मुज़हे सॉरी बोले तोह यह ठीक नहीं....

फिर में रिम्पी क साथ ऑफिस से बहार निकल गया....

रिम्पी - शोना अभी मेरा क्लास अटेंड करने का मूड नहीं है....

चलो न थोड़ा गार्डन में बैठते है..

फिर में कॉलेज कैंपस क फर्दें में आगया रिम्पी मेरे कंधे पर सर रखकर बैयहि थी...

में - क्या सोच रही हो स्वीटू

रिम्पी - तुम्हारे बारे में ...

में उसकी आंखों में देख कर

में - मेरे बारे में ...और वह क्या

रिम्पी - कुछ नहीं...

तभी मैंने कहा उधर देखो क्या है जैसे hi उस्सने मुँह घुमाया तोह मैंने उसस्के गुलाबी गालो को चुम लिए

रिम्पी -- बाबू तुम न बहुत शैतान हो गए हो...

ऐसे hi हम बाते करते रहे और हो गया लंच टाइम ..और हम चल दिए कैंटीन...

कैंटीन पहुंचकर मैंने आर्डर दिया और रिम्पी को बैठने का बोलकर में वाशरूम गया ......

जब में वाश रूम गया तोह स्कीन hi कुछ ऐसे tha.....Rimpy का घुटना एक लड़के का अक्खरोट फोड़ चका था और वह दोनों हाथो से उससे पकड़ कर बैठा हुआ था...... और चटक ..चटक...

तगाप्पड़ पद रहे थे लिमा क गाल पर

और कुछ स्टूडेंट्स स्कीन का मज़ा ले तहे थे

में दौड़कर गया और उससे पकड़ कर शांत किया - क्या हुआ स्वीटू इतना गुस्सा...

रिम्पी - यह बीच तुम्हे मुजह्से छीनने की बात कर रही थी, और इसके साथ आया यह बंदर मुस्हे उठाकर ले जाने वाला था...

फिर हम अपने टेबल पर बैठे


हाफ टाइम में भी बहुत काम स्टूडेंट्स कैंटीन में आये थे

मैंने वह काउंटर पर खासे लड़के से poocha...kya बात है भाई इतने बड़े कॉलेज क कैंटीन में सिर्फ कुछ hi स्टूडेंट्स नज़र आरहे है

लड़का - क्या बताये बाबू --- बस यह जश्न लो क हाफ टाइम में आधे से ज्यादा कॉलेज क बच्चे पीछे क पार्क में जाते है --- और वही अपना समय बिताते है...

मैंने सोचा ऐसा क्या होता है वह

तभी एक लड़के ने मेरे खंधे पर हाथ रहा..

मैंने मुंडका देखा...

लड़का - ही मेरा नम्म दीपक .

सेकंड यर स्टूडेंट...

में - ही मेरा नाम

तभी उस्सने मुज़हे रोकते हुए..

में तुम्हे जानता हु तुम अभी हो इस कॉलेज क तिह मैंने उससे चुप रहने का इशारा किया ...और अपने टेबल पर ले आया...

में - दीपक क्या तुम्हे पता है कॉलेज क पीछे वाले पार्क में क्या होता है

दीपक - (धीरे से ) ड्रग्स

मुज़हे इस ड्रग नज़्म से hi नफरत हो गयी थी क्यों की मुज़हे वह बात याद जाती तिह जब ड्रग की वजह सेबड़ा विनाश हुआ था....

में गुस्से में कॉलेज क पीछे पहुंचा लेकिन तब तक सभी वह से जा चुके थे....

फिर मैंने रिम्पी को घर छोड़ा और अपने घर aagaya...aur कल क्या करना है उसके बारे में सोचने लगा..

अभी क लिए इतना hi.......

अगला मेगा अपडेट आज रात को...
 
अपडेट - 42

अब तक आपने अभी क कॉलेज का पहला दिन देखा ....थोड़ी जहडप थोड़ी बहस क साथ

कॉलेज में ड्रग रैकेट का पता चला....

अब आगे .......


कॉलेज से लौट ने क बाद में सीधा अपने रूम में चला गया....

हमारे कॉलेज में यह सब गड़बड़ देख कर मेरा ....टेंशन से बुरा हाल हो गया tha......socha की डैड को बता दू .......लेकिन डैड ने इस कॉलेज कॉलेज की नीव गरीब और आमिर दोनों बहके एक साथ पड़े ......जहा गरीबो को साड़ी सुविधाएं मुफ्त थी........

यह इंस्टीटुडे उनका एक सपना था

यदि उनको पता चलेगा की उनके कॉलेज में यह सब हो रहा है तोह

अभी में यही सब सोच रहा था

की मेरा पह बजा जब मैंने कॉल देखि तोह ....जल्दी से उठाया....

पह पर -- क्या भाई अब आप अपनी गुड़िया को प्यार नहीं करते....

में - नहीं बेतु ...मेरी गुड़िया (ाद्दु)

ऐसे नहीं बोलते ....

ाद्दु - एक तोह आपने मुज़हे वह से दूर किया ...और रोज सुबह पह करने का प्रॉमिस kiya....lekin आज आपने पह क्यों नहीं किया.....

में - वह क्या है न बेतु आज कॉलेज का फर्स्ट डे tha..isiliye सुबह बिजी था न बेतु ...सॉरी अब तोह माफ़ कार्डो......

ाद्दु - क्या भाई आपको पता है न मुज़हे आपके मुँह से सॉरी सुनना अच्छा नहीं लगता....

ऐसे hi कुछ देर उससे बात होती रही

ाद्दु से बात karke...mera मंद हल्का हो गया था ....

और रही सही कसार रिम्पी क कॉल ने पूरी कर दी....

फिर में निचे आगया वह माँ कुछ महिला मंडल की कुछ लेडीज क साथ नए नारी निकेतन क स्थापना की बात कर रही थी .....

कुछ देर ऐसे hi समय बिता और रात को डिनर पर सब बैठे थे

माँ - क्या बात है बेतु ...आज कुछ परेशां लग रहा है ..क्या हुआ

में - माँ कुछ भी तोह नहीं ठीक हु में

ऋतू - अरे हां आज तेरा कॉलेज का पहला दिन था कैसे बिता....

में - मुस्कान क saath....bahut अच्छा रहा दी .....हमारा कॉलेज इस थे बेस्ट

डैड - चलो अच्छा है तुम्हे कॉलेज पसंद आया....

फिर सब अपने अपने रूम में चले गए....

में अभी लेता hi था ....की मेरे दूर पर नॉक हुई...

मैंने दूर खोल कर देखा तोह डैड थे

में - डैड अप्प इस समय..

डैड अंदर आते हुए - हां बैठो बेटे अब बताओ क्या हुआ कॉलेज में

में - कुछ नहीं डैड सब ठीक hi रहा

डैड - बीटा कभी कभी बहार की सफाई करते करते अपने घर की गन्दगी हमे नज़र hi नहीं आती

में - डैड ी विल हैंडल थिस प्रोब

डैड - तू तोह मेरे शेर है बीटा...

ी ऍम प्राउड ऑफ़ you....lekin जरा ध्यान से ....फिर भी में तोह हु hi

इतना कहकर डैड चले गए और में सू गया ...

सुबह जल्दी उठकर में कॉलेज क लिए तैयार हो गया .....और चल दिया रिम्पी क साथ कॉलेज....

हैसे hi में वह पहुंचा ......

वह स्टूडेंट क रूप में कुछ जुड़े टाइप क लोग देखे...

मुज़हे देखकर उन्होंने एक दूसरे को इशारा किया में समाज गया क कुछ तोह गड बाद जरूर है...

फिर में रिम्पी क साथ क्लास अटेंड करने चला गया ....रिम्पी गर्ल्स रौ में जाकर बैठ गयी और में जगह ढूंढ hi रहा था की सम्मन hi बैठे एक स्टूडेंट ने अपने पास जगह बनायीं

लड़का - आओ दोस्त यहाँ बैठा...

फिर अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए ...

hello ी ऍम संकुश ......तभी उसके साइड में बैठे हुए ने भी हाथ आगे badaya.....hii ..ी ऍम रिन्कुश

मैंने दोनों से hi हाथ मिलाया

दोनों hi बहुत अच्छे थे संकु रिंकू की जोड़ी....

तभी प्रोफेसर आये और क्लासेज होने लगी फिर लंच टाइम में रिम्पी को साथ लेकर कैंटीन जाने लगा तोह नए बने दोस्तों को भी पूछा....

तोह वह दोनों रिम्पी को देख डरने लगे ...

में - क्या हुआ यारो यह रिम्पी है माय बस्ती....

संकु - हां भाई कल देखा था कैंटीन में ...कैसे चंडी का रूप लिया था ....कही हम दोनों का भी भुर्ता न बना दे......

में - अरे नहीं यह ऐसी नहीं है

फिर हम सभी कैंटीन में चले गए......

हम सब ने अपना खाना आर्डर किया

और बातें करने लगे.....

तभी एक स्टूडेंट हमारे पास आकर

- आप में से अभी कौन है

में - क्या बात है भाई...

लड़का - प्रिंसिपल सर ने तुम्हे ऑडिटोरियम में बुलाया है...

में समाज गया दाल में कुछ तोह काला hai.....lekin फिर भी चल पड़ा

में - फ्रेंड्स एन्जॉय थे फ़ूड , में अभी आया

जब में ऑडिटोरियम पहुंचा तोह देखा की वह कोई नहीं था

तोह जैसे hi में जाने क लिए मुदा

तोह एक जोरदार किक मेरे पीठ पर पड़ी

और में सामने की और गिर गया

में देखना चाहता था की कौन है इसीलिए ऐसे hi पड़ा था ..तोह किसी की आवाज आयी .....

अबे मर गया क्या ....साला दिखने में तोह बड़ा बॉडी बिल्डर जैसा है और एक hi किक से जमीं चाट रहा है

तभी में जमीं से उछाल कर खड़ा हो गया और शुरू हुआ सफाई अभियान

कुछ 20 गुंडे थे कुछ क हातो में चाकू और कुछ क हॉकी...

तभी एक आगे आया और जोर से हॉकी का वार किया तोह मैंने अपने हाथ क एक hi वार से उस हॉकी को तोड़ दिया

इतने सालो की प्रैक्टिस से मेरी बॉडी

एक दम हार्ड हो गयी थी

हॉकी को टूटता देखकर सब एक बार तोह हैरान हो gaye......lekin कुत्ते की दम जो थी सीधी तोह होगी नहीं फिर वह आगे आया लकिन तभी

.....kadak....ki आवाज आयी और वह निचे जमीं पर और आत्मा आकाश में ......अपनी स्पीड का इस्तेमाल करते हुए ...1 मं में सबकी लाशें वह पड़ी थी ....

में - छुपकर क्या देख रहे हो प्रिंसिपल सर बहार आओ

प्रिंसिपल कांपते हुए...

beta.....m...uzhe मआएफ करदु

मुज़हे मात मारो.....

में - अभी तोह तुम्हे छोड़ रहा हु सर .लेकिन अगली बार ..नहीं

मैंने अपनी टीम

( इसके बारे में बाद में आएगा)

को कॉल करके सभी लाशो का सफाया करने को कहा......

और में कैंटीन पहुंचा जैसे की कुछ हुआ hi न हो.....

रिम्पी - क्या काम था ....

में - कुछ नहीं कल क बारे में कुछ बातें हुई....

तुम चलो क्लास में ..में वाशरूम होकर आता हु...

रिम्पी - तुम हो आओ में यही वेट करती हु ...

में - अरे समज़ह करो na...der लगेगी

रिम्पी - Ok जल्दी आना....

और वह संकु और रिंकू क्लास चले गए और में जल्दी से पहुंचा कॉलेज क पीछे गार्डन क पास कुछ पुराने रूम थे जो कहली पड़े थे

वह देखा तोह लाइन लगी हुई थी

जैसे hi में अंदर जाने लगा तोह किसी ने मुज़हे रोका .....यह कहा घुस रहा hai......chal लाइन में आ

में - जाने दे न भाई....

तभी उस्सने चाकू लहराते हुए

Mad......d .........ahhh....ahhh

इससे आगे कुछ बोलता क उसी का चाकू उसी की चट्टी में और वह धड़ाम

यह सब इतना अचानक हुआ की जब वह खड़े स्टूडेंट्स को जब पता चला की क्या हुआ है ...तोह जैसे भगदड़ मच गयी....

और में andar.....gaya तोह देखा एक टेबल पर कुछ पैकेट्स पड़े हुए थे जिनमें शायद ड्रग्स होगा

वह बैठे हुए मैं गुंडा ( डेनियल)

कौन है बे तू और y........abe यह क्या

मार डाला इससे.....

पकड़ो साले को तभी कुछ गुंडे पकड़ने आगे आये लेकिन पल में सब जमीन पर इतने तेज़ी से अपने साथियो को मरते dehkar.......Daniel की हालत ख़राब हो गयी.....

डेनियल - अरे भाई क्यों मार रहा है ...कौन है tu....dekh ये सारे ड्रग्स तू लेले .....पैसे भी लेले ..

में उसकी गार्डन पकड़कर....

मुज़हे यह सब नहीं उस्का नाम बता

जिसके लिए तू काम करता है

अभी वह कुछ बोलता क दरवाजे से एक गोली चली और वह ढेर में कुछ समज़ता उससे पहले hi वह चला गया....

फिर मैंने डैड को जानकारी दी और डैड ने संघारक की आवाज में पुलिस को पह करके ड्रग्स जप्त करने का आदेश दिया ...और में चल पड़ा क्लास रूम


यहाँ डैड क ऑफिस में ..ऋतू दी कंपनी में आये हुए टेंडर्स को देख रही थी....

तभी प् ने आके इन्फॉर्म किया....

मम सर कपय से जो आपकी मीटिंग फिक्स हुई थी वह आगये है...

ऋतू - Ok उहे बिठाओ में आती हु...

अच्छा वह फाइल तोह दो....

प् से फाइल लेकर ऋतू ने अच्छी तरह देखि....

फिर चल दी मीटिंग रूम.....

जैसे hi मीटिंग रूम में पहुंची तोह सामने जाना पहचाना चेरा देहका...

अरे ऐसे क्या देख रही हो मैडम

शायद आपने मुज़हे पहचाना नहीं

ऋतू - अरे नहीं विलास ....कैसे हो ......मैं में ( ओह्ह तोह यह है सर कंपनी का मद ...कैसे घर रहा है )

विलास - तोह आपको में याद हु...

वैसे सॉरी कॉलेज में तुम्हे परेशां करने क लिए..

ऋतू - कोई बात nahi....ab काम की बात

देखो मैंने तुम्हारी फाइल चेक की

एंड सॉरी तो से हम आपके साथ कोई डील नहीं कर सकते

विलास - मैं में (डील तोह में तुम्हारी फिक्स करूँगा जानेमन ...हाय की लग रही है) चलो कोई बात नहीं आगे फिर कभी ...लेकिन तुमसे मिलकर मुज़हे ख़ुशी हुई

फिर विलास वह से बहार आया तभी कॉलेज में हुए कांड का उससे पह आया ....फिर उस्सने किसी को कॉल लगाया

hello जल्दी से इस एड्रेस पर पहुंचो और ऋतू की पिछ जो उसने चुपके से ली थी भेजते हुए

इस लड़की को आज मेरे बीएड तक पहुंचाओ

यहाँ कॉलेज ख़तम होने क बाद अभी ने रिम्पी को घर छोड़ा और सोचा की चलो आज डीडू को ऑफिस में सरप्राइज दिया जाए और पहुँच गया office.....Ritu अचानक अभी को वह देखकर बहुत खुश हुई....

अभी क कहने पर जल्दी अभी क साथ घर निकल gayi.....k रास्ते में कुछ गुंडों ने उनकी गाडी को रोका

तोह अभी की उनसे मुठभेड़ हो गयी...

तब तक गॉर्डस भी पहुँच गए जो दूर रहकर उनकी सिक्योरिटी करते थे

यहाँ विलास को आज हर जगह हार का सामना करना पड़ा इसीलिए वह बौखलाया था ....और बदला लेने की सोच रहा था

अभी और ऋतू जब घर पहुंचे तोह रवस हॉल में hi बैठे थे उनके सामने एक लड़का बैठा हुआ था

मैंने जब उससे देखा तोह न जाने क्यों मुज़हे वह अपना सा लगा...

डैड - अरे आओ बीटा इस से मिलो यह मेरे फ्रंड का बीटा है राकेश में उसस्के गले मिला ...

उससे गले मिलकर ऐसा लगा पता नहीं हमारा कोई बहुत पुराण रिश्ता है

फिर ऐसे hi राकेश और डीडू से बातें हुई और वह दिन भी ख़तम हो गया .....

अगला दिन संडे था तोह डीडू क साथ मेरा शॉपिंग जाने का प्रोग्राम बना.....

जैसे hi अभी और ऋतू मॉल में एंटर कर रहे थे क तभी कुछ नकाब पॉश

वह आये और एक ने ऋतू को गनपॉइंट

पर liya.....Abhi आगे बड़ा hi था की

वही रुक जा नहीं तोह इससे ख़तम कर दूंगा

दूसरा - मारो सेल को इससे पहले इसके गॉर्डस aajaye....aur हुए फायर और अभी का शरीर चलनी हो gaya....girte गिरते.

अभी ने राकेश को पह लगाया....

और आयी ऋतू की आवाज .....नहहीइ

आज क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल.....
 
अपडेट - 43

अब तक आपने फ़्लैश बैक में

अभी क पूर्व जन्म से लेकर अब तक का सफर देखा....

अब आगे.....


में अब ठीक था माँ मेरे पास hi बैठी thi.......aur डैड डिस्चार्ज पेपर्स की फॉर्मेलिटी देखने गए थे

वैसे तोह हमे इन् सब फॉर्मलिटीज की कोई जरुरत नहीं thi........lekin डैड नियम क बड़े पक्के the......aur मेरे लिए सब कुछ खुद करना छह रहे थे.....


मेरी नज़ारे दरवाजे पर थी ....किसी का इंतज़ार में .......सब रिश्तेदार यार दोस्त .......आये ...लेकिन वह क्यों नहीं aayi.....mere दिल की धड़कन रिम्पी

मैंने माँ को बार बार पूछा लेकिन वह भी बात ताल रही थी .....

में सोच में गम tha......kaha हो जान ......क्या अब तुम्हे मुज़से प्यार नहीं raha.......yaa तुम्हे मेरे बारे में पता hi chal........jaane क्यों

उस्का ख्याल आते hi दिल घबरा रहा hai.........Rimpy ......आखिर ..क्यों...

नहीं आयी...,.

और मेरी आँखों से दो बून्द आंसू की निकल hi आयी ....जो माँ ने देख ली

उफ़ यह कम्बखत आंसू.......

आंसू बता देते है हालत दिल के


चाहे कोई बैठा हो बिच महफ़िल के

माँ - क्या बात है बेतु........

मैंने माँ की तरफ देखा तोह वह भी मेरे दिल का हाल समाज गयी....

माँ - रिम्पी आजायेगी beta......kahi आउट ऑफ़ टाउन गयी hogi........tu क्यों इतना दुखी हो रहा hai.......tera यह दर्द में नहीं दरख सकती बीटा...

और माँ ने मुज़हे गले लगा लिया...

और यह निगोड़े आंसू बह चले...

में - तोह क्यों नहीं मुज़हे सच बताती हो maa.....main जानता हु आप जरूर मुजह्से कुछ छिपा रही हो

माँ मेरे आंसू पोछते हुए...

चुप अब ....तुज़हे मेरी कसम है....

में भी क्या करता....

तभी डैड भी आगये और हम चल पड़े घर की और.....

जैसे हम गाड़ी घर क गेट क अंदर पहुँच से मैंने देखा

की पूरा घर फूलों से सजाया गया tha.......Gate से लेकर घर तक ....

हम अभी अंदर जाते क मैं दूर पर

ऋतू दी आरती की थाली लिए कड़ी थी और उनके पीछे खड़ा था पूरा परवर

में - यह असब क्या है डीडू ........इस सब की क्या जरुरत थी

दी - चुप .....चुप चाप खड़ा रह....

दी ने आरती उतरी और तिलक लगाया...

अंदर आते hi मैंने दादू क पेअर छुए तोह उन्होंने खंड से पकड़कर उठाया ......बस कर मेरे बच्चे....

और गले लगा lya....phir दादी क पेअर चुने hi वाला था तोह दादी ने रोक दिए और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेरने lagi......arre बीटा रहने दे ......कितनो क पेअर छुएगा .........

विनय चाचा से मिला ......गले लग जा बीटा यह बिज़नेस क चाकर में तोहसे मिलना hi नहीं हो रहा था

तभी आवाज aayi....Shushila चची की

अरे हम भी है लाइन में.....

अभी चची से milta......Payal दी , और श्रेया आगे आयी और मेरे गले लग गयी

चची - अरे ..अरे ..तुम दोनों भी न

में - चची मिलने दो न ....आज कितने दी बाद देखा है दी को.....

दोनों अलग हुई फिर चची से भी मिला

तभी देखा चची क पीछे एक गुड़िया

जैसी बच्ची हाथ में रोज लिए कड़ी है ...और चुप चुप कर देख रही है

में - अरे चची आपने अपने पीछे किस एंजेल को छुपाया है....

चची - अरे सोनू क्यों ऐसे चुप रही hai.........tabhi तोह बोल रही थी ..भाई को रोज दूंगी ......अब

में - चची .....मेरी एंजेल को कोई कुछ नहीं बोलेगा , और में निचे बैठ gaya......arre मेरी प्यारी एंजेल

अपने भैया से नहीं मिलोगी....

सोनू अपनी माँ को देखती है फिर मरे पास आती है .....रोज आगे करते हुए

वेलकम भैया.....

में उसके छोटे छोटे हातो से रोज लेकर उससे गोद में उठा लेता हु

और उसस्के गाल पर किश कर देता हु...

तोह वह मुज़हे देखकर मुस्कुराने लगती है......

चची - अरे सोना तुम तोह किसी को किसी नहीं करने नहीं देती थी ...और अब देखो.....

तभी मैंने देखा की ाद्दु और पारी सोना को गुस्से से देख रही रही

में - अरे क्या हुआ पारी ाद्दु सिर्फ डेक्टि hi रहोगी भाई से नहीं मिलोगी

शर्मिष्ठा बुआ - ारे बीटा ऐसे कब तक सबसे मिलता रहे गए तू आराम से बैठ जा और सभी मिल लेंगे

में सोफे पर बैठ गया मेरी एक तरफ पारी एक तरफ ाद्दु ..और गोद में सोना....

निराली बुआ - देखो तोह टेरनो महारानियाँ कैसे बैठी है......

सोना -बुआ में महलानी नहीं शोना हु .....और घर क बुआ को देखने lagi.....sabhi उसकी मासूमियत देखकर हसने लगे

फिर एक करके सबसे मिला...

सुनीता और नीलिमा मासी ....सतीश और राजू mama.....Sarmishtha और निराली bua....aur सभी बच्चा पार्टी...

माँ - बस ...bas....chodo अब सब अभी को ....बेतु जा अभी रेस्ट karo....thodi देर फिर फ्रेश होकर आना...

में - माँ में ठीक हु अब ........

रेस्ट कर कर क थक गया.....

माँ - बोलै न ......जाओ तोह...

मैं भी फिर अपने रूम में चला आया....

रूम में आकर बीएड पर बैठा ....की फिर रिम्पी की याद आने लगी.....

मैंने सोचा कॉल कर क देकता हु......

लेकिन मेरा पह भी मेरे पास नहीं था

तभी दी मेरे रूम में आयी ...और मेरे सेल्फ दे गयी...

मैंने फिर रिम्पी को कॉल लगाया तोह स्विच ऑफ आरहा था.....

फिर मैंने अंकल

(रिम्पी क डैड, खेमराज सिंह)

अब हम नहीं गई...... को कॉल lagaya..lekin उनका भी नंबर नॉट रचाबळे आरहा रहा....

तोह में बीएड पर लेट गया और सोचते सोचते न जाने कब नींद आगयी ...

तभी मेरी नींद पह रिंग से खुली , जब मैंने देखा तोह ाद्दु और पारी दोनों तरफ से पकड़कर सोई हुई थी.......

मैंने कॉल रिसीव की और बीएड से उठकर बालकनी में आगया.....

रिंकू का कॉल था ......हल्लो क्या हाल है .......dost....main ..हॉस्पिटल में आया था यर लेकिन उस टाइम तू सोया था....

में - वह सब छोड़ यह बता ...रिम्पी क बारे में कुछ पता है

रिंकू - नहीं यर दो दिन से वह भी कॉलेज नहीं आरही है......

तभी नीलिमा मासी लंच क लिए बुलाने aayi......aur हम मैंने ाद्दु और पारी को उठाया और लंच करने चला गया......

दिन्निग टेबल पर सभी बच्चा पार्टी शोर मचा रही thi.....mere दोनों तरफ की चेयर पर ाद्दु और पारी बैठी थी ......आज सब कुछ मेरी पसंद का बना हुआ tha.......maine खाना शुरू किया hi था क देखा पारी और ाद्दु नहीं खा रही थी ......

में क्या हुआ ...गुड़िया खाना क्यों नहीं खा रही हो ....

ाद्दु - मुज़हे आपके हाथो से खाना है ......

पारी .....मुज़हे भी.....

ऋतू दी - ाद्दु यह क्या है यदि बेतु तुम दोनों को खिलायेगा तोह खुद कब

खायेगा.....

पारी - हम खिलाएंगे भाई को...

ऐसे hi एक दूसरे को खिलते हुए लंच ख़तम हुआ...

डैड क फ्रेंड्स .......माँ की फ्रेंड्स ....बहुत लोगो से मिलते मिलते वह दिन ऐसे hi बीत गया......

रात को बीएड पर लेते लेते ......अपनी लाइफ क बारे ..में सोचने लगा......

ऐसे hi सोचते सोचते रात क 12 बज gaye.....ab मेरा ध्यान बार बस्सर मोबाइल की तरफ जा रहा था ...की न जिसने कब रिम्पी की कॉल आये....

मेरे हर बर्थडे पर रात 12 बजे हम दोनों एक दूसरे को विश करते थे

जब कॉल नहीं अस्यी तोह मैंने उससे पह करने लगा लेकिन वही स्विच ऑफ...

तभी मेरे दूर पर नॉक हुआ ...

और में दरवाजा खोलने चला गया ..

जैसे hi दूर खोला तोह सभी बच्चा पार्टी क saath...Dad ....माँ और ..ऋतू ..di....khade थे

और सबसे आगे आड़ू पाने हाथ में केक लेकर.....

हैप्पी बर्थडे तो यू

हैप्पी बर्थडे तो यू

हैप्पी बर्थडे तो डिअर अभी

हैप्पी बर्थडे तो यू

सभी ने मुज़हे बर्थडे विश किया

मैंने भी माँ डैड का आशीर्वाद लिया

ऋतू दी ने भी विश किया और गले लगाया ...और एक छोटा से बॉक्स मेरी तरफ बढ़ाते हुए .........यह छोटा सा प्यारा से गिफ्ट मेरी तरफ se....mera बेतु

और फिर मेरे बीएड रूम में hi केक काटा और सबको खिलाया...

फिर सब बच्चो ने केक मुज़हे khilaya......khilaya kya.....cake से मेरा पूरी मुँह hi भर दिया...

माँ - arre.....arre..arre हटो सब यह क्या बेतु का सारा मुँह भर दिया....

काहलो चलो सब अभी बहुत रात हो गयी

बेतु तू भी फ्रेश होकर सू जा अब

फिर सब चले गए लेकिन ाद्दु ..पारी ..

और सोना तोह जाने को hi तैयार नहीं थी.........

में भी फ्रेश होकर आगया और लेट गया ाद्दु और परइ और सोना क साथ सो गया......

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 44

अब तक आपने देखा अभी हॉस्पिटल से घर आगया.....

रिम्पी मिसिंग है .......

अब आगी --


सुबह 4 बजे हमेशा की रूटीन की तरह मेरी असंख्येन खुली,

मैंने देखा सोना मेरे ऊपर सोई हुई थी ाद्दु और पारी भी मुज़हे पकड़के सोई थी ....में धीरे से उनको साइड किया और उठ gaya.....teeno सोते हुए बड़ी क्यूट लग रही थी ....बिकुल किसी डॉल की tarah.....maine तीनो क गाल पार किश kiya......toh नींद में भी उन तीनो क चेहरे पर मुस्कान आगयी..

फिर में फ्रेश hua...pahele सोचा थोड़ी एक्सरसाइज कर लू लेकिन तीनो को ऐसे अकेले छोड़ का कैसे जाओ.....

फिर में वही बालकनी में ध्यान में बैठ गया, आज कुछ अलग लग रहा, अपने अंदर एक अलग hi ऊर्जा मुज़हे आज महसूस हो रही थी....

तभी कुछ mantra....mere भीतर गूंजने lage.....aur अलग अलग रंग की क 7 बिंदु दिखाई दिए.....

उन मंत्रो की ध्वनि में मैं ऐसे खोया की पता नहीं कब तह ध्यान करता rha......jab मेरा ध्यान टुटा तोह देखा दिन निकल आगया है आकाश में उगते हुए सूरज की लालिमा ......न जाने क्यों मेरे जीवन में एक नयी सुबह का अहसास करा रही थी....

.......तभी मेरा ध्यान बालकनी क साइड में gaya.....toh मेरी हिस्से निकल गयी.....

मेरी तीनो गुड़िया मेरी तरह ध्यान में बैठने की नक़ल कर रही थी ...

और धीरे से अपनी एक आँख खोलकर मुझे देख रही थी......

में उठकर उनके सामने गया तोह सोना ने एक आँख खोलकर देखा

तोह मुज़हे सामने देहकर मुस्कुरायी


ale....ale....bhai उठ gaye....aur अपने दोनों हाथ मेरे आगे फैला दिए ...तोह मैंने भी उससे गोदी में उठा लिया..

ाद्दु और पारी भी उठ गयी....

गुड मरंग भाई

में - गम माय स्वीट एंगेल्स....

अच्छा तुम तीनो क्या कर रहे थे....

ाद्दु तुम भी ....इनके साथ शामिल हो gayi.....tum अब बड़ी हो गयी हो बच्चा

ाद्दु - hi...hi...hi..kya भाई आप भी..

बड़ी भी बोल रहे हो और बच्चा भी

वह जब हमारी नींद खुली तोह आप बीएड पर नहीं थे ...हमने अस्प्को ढूंढा तोह देखा आप यहाँ ध्यान कर रहे the....toh यह सोना ने पूछा की भाई क्या कर रहे hai....toh मैंने बताये.

की ध्यान कर रहे है ...तोह यह भी ज़िद्द करने लगी ....की मुज़हे भी भाई क जैसे ध्यान करना hai....toh में बस वही सीखा रही रही...

तभी knock....knock...toh मैंने भी दूर ओपन किया ..तोह वह डीडू थी

डीडू ने मुज़हे हल्दी रेडी होने को कहा .....की बेतु जल्दी रेडी हो जाओ हमे मंदिर जाना है......

एंड वन्स अज्ञान हैप्पी बर्थडे....

आज तेरे बर्थडे पर वह मंदिर में पूजा और भंडारा और उसस्के बाद तेरे हातो से गरीबो को कुछ दान का प्रोग्राम है...

और दी चली गयी तीनो को लेकर , एक बार तोह नाहा hi चूका था सोचा एक बार और नाहा लू.....

और फिर में बाटरूम में नहाने चला गया....

जब में बाथरूम से रूम में आया तोह देखा बिलकुल मेरे hi तरह एक लड़का वह खड़ा tha.....jo हूबहुब मेरे hi तरह tha.....usse देखकर में बड़ा हैरान हुआ .....

( यह ा1 tha.....MS क साथ युद्ध क बाद महा गुरु ने दोनों को अलग किया tha.....A1 को तोह सब याद था ...लेकिन अभी ...उस युद्ध की साड़ी बातें भूल गया था...)

अब में ुसदकए सामने gaya....usse देखकर मुज़हे लगा की वह मेरा hi कोई अंग है .....वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगा...

में - कौन हो तुम जो बिलकुल मेरी तरह hi लग रहे हो....

ा1 - अपने आप से hi पूछ रहे हो कौन ho....mein तुम hi हु....

अभी - अरे ऐसे कैसे.....

तभी वह रवस और महागुरु भी आगये मैंने डैड क चरण छुए...

डैड - ने गले लगते हुए ...जन्मदिन की बहुत बहुत शुबकामनाएं बीटा..

फिर - ा1 ने भी डा के चरण छुए तोह डैड ने उससे भी गले लगाया ..

महागुरु - शीग्र चलो पुत्र हमे जल्दी से महल क गुप्त शिवालय पहुंचना है...

फिर डैड ने मेरा हाथ pakda....aur हम चारो गाओं क महल क भीतर गुप्त शिवालय में पहुँच गया....

डैड हर जन्मदिन पर मुज़हे यहाँ लाते थे ....

वह सबने भगवन भोलेनाथ का

रूद्र सकता क मंत्रो से अभिषेक किया .....और उसस्के बाद ा1 प्रकाश रूप में बदल कर अभी क शरीर में समां गया.......

और वह एक तेज़ प्रकाश चमका और शांत हो गया....

अब दोनों रूप एक हो गए थे.....

साड़ी शक्तिया एक हो गयी....

अभी - प्रणाम गुरुदेव....

महागुरु - यशस्वी भाव पुत्र...

पुत्र ...अब तक आश्रम में मेरे पास जितनी भी विद्या ...त्रिदेवो की कृपा से प्राप्त थी वह सब तुम्हे दे दी ...अब

मेरा कार्य पूरा हुआ पुत्र...

बाकि की 14 शक्तिया तुम्हे hi प्राप्त करनी hogi...jo 14 लोको में कन्याओ क रूप में प्रगट हुई है...

अब मुज़हे उस परम प्रकाश में विलीन होना है putra.....iss श्री क बंधनो को तोड़ कर उस परब्रह्मा से एक होने का समय आगया है..

अभी - नहीं गुरुदेव ....अभी तोह यात्र बहुत लम्बी है इस संघर्ष क मार्ग में मुज़हे आपके मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता होगी....

महा गुरु - पुत्र शरीर का नाश तिह हर प्राणी का निश्चित है....

तुम्हे जब भी मेरी आवश्यकता होगी तुम मुज़हे अपने अंतर्मनन में paaoge.....atma तोह अनादि ..अन्नत है

आत्मानं ब्रह्मा,

सर्वं खल्विदं ब्रह्मा

और फिर महागुरु का श्री पांच तत्वों में विलीन हो गया......

में अब डैड क साथ वापस अपने रूम में आगया.....

वह बीएड पर एक जोधपुरी सूट था बिकुल राजसी ....जिसके बटन्स डैमोन्द्स क the......aur उस में गोल्ड चेन्स लगी हुई थी में समाज गया क यह दी hi रख कर गयी है....

डैड चले गए.....

तभी मुज़हे ऐसे लगा क कोई मुज़हे पुकार रहा हो .....जैसे कोई मेरा अपना मुज़ह से बिछुड़ रहा हो ..........

एक दर्द भरी pukar.....toh में तुरंत ...टेलिपोर्ट होकर उस जगह पहुंचा

जहा से मुज़हे आवाज आरही थी ...

जब में वह पहुंचा और संम्बे देखा तोह मेरे दिल में एक दर्द सा उठा और असंख्यों में आंसू...

अभी क लिए इतना hi .....

अगला अपडेट रात को .....
 
अपडेट - 45

अब तक आपने dekha......Abhi और ा1 एक हो गए...........

महागुरु की मुक्ति....

और किसी की पुकार दिल में सुनकर कहीं पहुंचना....

अब आगे.......


अभी ने जैसे hi सामने देखा तोह उसके दिल में एक दर्द सा उठा और आँखों में आंसू...

सामने रिम्पी थी .........हॉस्पिटल क िक में वेंटीलेटर पर ......उस्सकी बॉडी से कनेक्टेड मचिनेस ......की धीमी आवाज और धीरे धीरे चल रही साँसे

और रिम्पी क दिल में अभी क नाम की पुकार.....

अभी उस पुकार को सुन सक रहा था...

अभी आगे बड़ा और और रिम्पी क हाथो को को छुआ ....उससे हाथो में लगी सेलाइन की सुइया भी और बदन पर जगह पत्तियां .....बंधी थी....

जैसे hi अभी क हाथ की उँगलियाँ ने रिम्पी क हाथो उंगलियों को छुआ.....

तोह उसस्के हाथो में हलकी सी हरकत होने lagi.....aur बंद आँखों क कोने से आंसू की बुँदे.....

अभी - स्वीटू उठो न baby.....dekho तुम्हारा अभी तुम्हारे सामने खड़ा hai......utho न जान ......क्या हुआ ....तुम्हे .....सॉरी न जान .....यहाँ तुम इस हालत में ho.....aur मुज़हे पता भी नहीं चला .....

अभी रिम्पी का हाथ पकड़कर रोने laga.....tabhi रिम्पी ने भी उस्का हाथ पकड़ लिया ...जैसे कह रही हो ....

क अभी मत रो न तेरा दर्द मुज़हे और तकलीफ दे रहा है...

अभी भी रिम्पी की आंखें बंद थी

(कभी कभी दुःख की अधिकता में हम अपनी शक्तियों को भूल जाते है,

हाल हमारे पास होता है , लेकिन हम समाज hi नहीं पाते है )

अभी रिम्पी का हाथ पकड़े रो रहा tha....tabhi भीतर से ा1 की आवाज आयी

क्यों भाई भूल गया अपनी शक्ति को भूल गया ....जल्दी कर अभी भी समय है..

ा1 की आवाज से अभी शांत हो गया

और अब अपने पांच तत्वों की ऊर्जा को अपने हातो में लाकर रिम्पी क माथे पर रखा ....धीरे रिम्पी क घाव भरने लगे ....सांसे नार्मल होने लगी ....और उस्सको होश आनेलगा.

तभी वार्ड क दूर खुलने की आवाज आयी ..तोह अभी टेलिपोर्ट होकर हॉस्पिटल क एक कोने में aagaya.....aur वह से चलकर .....िक वार्ड क बहार पहुंचा

वह एक चेयर पर खेमराज जी सर पर हाथ रखे बैठे थे उनकी आँखों से निरन्तर आंसू बाह रहे थे...

अभी ने उनके पास जाकर उनके कंधे पर हाथ रखा तोह उन्होंने जब अभी को अपने सामने खड़ा देखा ....तोह उनके सबर का बाढ़ टूट गया

अभी को गले लगाकर फुट फुट कर रोने lge.......beta देखो न क्या हो गया...

यही एक मेरे जीने का सहारा था अब ..

में - अंकल कुछ नहीं होगा रिम्पी को वह ठीक हो जायेगी.....

खेमराज - कैसे ठीक होगी ...बीटा ....डॉक्टर कह रहा tha.....ki ...अब बस कुछ संननसें hi बची hi ...मेरे बच्ची की.......

अभी ....तुम ..तोह उससे ...प्यार ..करते ..ho...na..muzhe pata.hai ......तुम ..उससे पुकार क dekho....shayad ...मेरी बच्ची को हिश आजाये.....

में - अंकल ....रिम्पी ठीक hai....jab तक मेरी सैंसे चल रही hai..ussko कुछ नहीं हो सकता...

और यहाँ जब डॉक्टर नर्स क साथ आया तोह हैरान हो gaya....Rimpy को होश आगया tha.....woh ऑक्सीजन मास्क और सेलाइन की नीडल्स निकलकर बीएड बीएड पर बैठी इधर उदाहर देख रही थी..

और अभी को पुकार रही thi.......yeh देखकर तोह डॉक्टर और नर्स की हालत बाल नोचने जैसी हो गयी.....

अभी यहाँ रिम्पी क डैड को चुप करा रहा था क तभी नर्स वार्ड क बहार दौड़ते हुए aayi.......aur रिम्पी क डैड क सामने पहुँच कर हांफने लगी ..

नर्स - Sir.....jaldi chaliye.....Aapki beti.....ko...hosh आगया है.....

नर्स की बात सुनकर ...खेमराज भी दौड़कर वार्ड क अंदर पहुँच गए

और अभी भी पीछे पीछे...

अंदर पहुँच कर जब खेमराज जी ने अपनी बेटी को बैठे हुए देखा तोह उन्होंने ने डॉकर उससे गले लगा लिया

ओह्ह ..मेरी bacchi...bhagwan तेरा लाख लाख शुक्र है जो तूने मेरी बच्ची मुज़हे लौटा दी....

रिम्पी की नज़र जैसे hi अभी पर पड़ी तोह वह अपने डैड को छोड़कर दौड़कर अभी क पास पहुंची और उससे कास कर गले लगा लिए...

अभी तुम ठीक तोह हो na......aur वह टीवी पर ....दिखा रहे थे क ...

और फिर अभी क श्री को चुकार देखते hue.....kahi चित तोह नहीं लगी....

में - बस ....स्वीटू bas...dekho में ठीक hu...kuch नहीं हुआ मुज़हे

लेकिन तुमने तोह मुज़हे छोड़कर जाने का इरादा कर लिया था....

फिर से रिम्पी ने अभी को गले लगा लिया और धीरे से कान में बोली हैप्पी बर्थडे बाबू...

में - हैप्पी बर्थडे स्वीटू....

बस करो देखो डॉक् ..नर्स और अंकल कैसे घर घर का देख रहे है....

रिम्पी हैट गयी और शर्माकर अपने मुँह निचे कर क कड़ी हो गयी ...

खेमराज - बीटा लगता है अब हमारी बेटी परायी हो गयी है

रिम्पी - शर्माकर ....Dad...aisa क्यों बोल रहे हो ....

और खेमराज जी ने फिर हस्ते हुए गले लगाकर .....देखो तोह शर्म से कैसे लाल हो गयी है...

डॉक् और नर्स अभी भी शॉक में थे

उनको समाज नहीं आरहा था क ...

जिसकी हड्डिया कई जगह से टूट गयी थी

और सारे जिस्म पर काखम थे...

जिससे वह डेड डिक्लेअर करने की सोच रहे थे .....वह बिलकुल ठीक जैसे की कुछ हुआ hi नहीं....

अभी रिम्पी और उसस्के डैड बात कर रहे थे ...तब तक मैंने डॉक् और नर्स क मंद को कण्ट्रोल करते हुए यह बात उनके दिमाग से निकल दी.....

खेमराज जी भी हैरान the....lekin उनके लिए उनकी बेटी जयादा मायने रखती थी

डॉक् - सर आये आपकी बेटी को आप लेजा सकते है ...आइये में अभी डिस्चार्ज पेपर बनवाकर देता हु
...

डॉक् की बात सुनकर रिम्पी क डैड उसस्के

साथ चले गए ,..और वह रह गए रिम्पी और में .....

में - यह सब कैसे हुआ जान ....

रिम्पी - में अपनी फर्द क साथ एक कैफ़े में गयी थी ....तभी वह टीवी पर तुम्हारे घायल होने की न्यूज़ देखि

तोह में तुरंत तुम्शारे पास आने क लिए निकली .....उस समय मुज़हे तुम्हरे अलावा कुछ नहीं दिख रहा tha.....jab में कैफ़े से बहार आयी तोह एक गाडी मुजह्से takrayi....phir मुज़हे कुछ पता नहीं चला ...

में - पागल हसि तू बिकुल इतना प्यार करती हो .....

रिम्पी - अपनी जान से ज्यादा..

और मैंने रिमय को कमर से पकड़के बाहों में बाहर लिया

रिम्पी - अभी....

में --- शह्ह्ह्ह ...उसके होंठो पर ऊँगली रखते hue......dono क दिल जोरो से धड़क रहे the......aur साँसे टकरा रही थी....

रिम्पी क मासूम चहरे को देहक कर मुज़हे प्यार आरहा था मेरी ऊँगली जैसे hi उसके होंठो से तोच हुई उस्का शरीर काँप utha.....usske होंठो की नरमाहट और तेज़ चलती साँसे मेरे मैं में हलचल पैदा कर रही थी ...उसकी आंखें बंद हुई ......और हम दोनों क होंठ आपस में मिल गए..

हम दोनों एक दूसरे क प्यार को महसूस कर रहे the.....koi वासना नहीं शरीफ पवत्र पर्म था .....हमारे होंठ जब आपस में मिले तोह रिम्पी ने मुज़हे और कास कर पकड़ liya....dhire धीरे हमारे होंठो ने एक दूसरे को चुम शुरू hi किया था....

क तभी हम दोनों को जोर का चटका लगा ...और रिम्पी एक जहटके से मुजह्से अलग हो गयी...

मायने देक्ग मेरे गले में पड़ा

लॉकेट लाल होगया था....

उफ़ .....यह ....भी ...अब इससे भी मन

होगा....

तभी अंकल वह आये .....और फिर मैंने उनसे शाम को पार्टी में आने का और रिम्पी का बिरहदय साथ सेलिब्रेट करने का बोलकर वह से निकल gaya......aur घर की चाट पर पहुँच गया.....

जब में निचे आया तोह नीलिमा मासी मुज़हे चाट की ररफ आते हुए दिखी

नीलिमा - कहा गया था तू ...पता है सब कितना परेशां थे ...कितने ..देर से तुज़हे hi ढूंढ रहे hai....aur तू यहाँ चाट पर क्या ...कर रहा था....

में - मैं में --- अरे बापरे ..यहाँ तोह बवाल मचा हुआ है ...

अब तोह कुछ बहाना बनना hoga...aur सब को शांत करना होगा..

में - कुछ नहीं मास्सी ....वह फ्रेंड्स क पह आरहे थे हलचल पूछने क लिए हुए रूम में नेटवर्क नहीं आरहा था तोह चाट पर चला आया...

फिर निचे जाकर सब को समझाबुझाकर अपने रूम में आया

अभी क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल.......
 
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