ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 7 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 55

अब तक आपने देखा......

अभी Ritu..Addu...Deepu....k साथ घूमने जाता है.....

वह ऋतू और ाद्दु को किसी अधेड़ क साथ बात करते हुए देखता है....

और एक रहस्य्मय व्यक्ति का पह

ऋतू और ाद्दु की तरफ ट्रक तेज़ी

से आना.....

और अब आगे........


जैसे hi ट्रक एकदम करीब आया ऋतू और ाद्दु को रोंदने hi वाला था

ki.......dhadammm............

एक भयंकर आवाज क साथ उस ट्रक क सामने क परखचे उड़ गया और भयाबकार टक्कर से धुआँ उठा.....

उस भयंकर आवाज से ऋतू और शालू पर जो किसी ने सम्मोहन किया था वह टूट gaya......jaise hi दोनों को होश आया

दर कारे दोनों एक दूसरे को चिपक gaye......sab का ध्यान इस और गया..

और जब धुआँ hata....toh वह खड़ा था संघारक (रवस ने अब अपनी पावर्स भी अभी को देदी थी, और अब अभी था संघारक)

लोगो ने संघारक का नाम बहुत सुना tha........waha लोगो की भीड़ इकट्ठी हो गयी थी........

तभी सामने aaya.....aur ऋतू से आवाज बदल kar.....Aap ठीक तोह हो न

कही कुछ चोट तोह नहीं आयी......

ऋतू की घबराहट क कारण आवाज hi नहीं निकल रही थी ....फिर bhi.....himmat जूता kar......k...kkkkan ...h..oo....tum

अभी - मैं हु अपरिधियो क लिए मौत

जो मुज़हे संघारक क नाम से जानते है....

जैसे hi कुछ लोगो ने नाम सुना तोह वह लोगो में कुसूर फुसर होने लगी ....कुछ लोग नारे लगाने लगे

Sangharak...Sangharak...

और अभी टेलिपोर्ट होकर नार्मल ड्रेस में भीड़ क पीछे aagaya....aur दौड़ कर ऋतू और ाद्दु को गले लगा लिया..

अभी - दी मैंने कितनी आवाजे लगायी लेकिन आपने तोह मेरी आवाज सुनी hi nahi....yadi आपको कुछ हो जाता तोह...

mein....bhi नहीं रहता.....

ऋतू - रट hue.....pata नहीं भाई बस मुज़हे इतना याद है में किसी से बात कर रही थी उसके बाद क्या hua....muzhe कुछ भी नहीं pata....aut जब होश aaya....toh में यहाँ थी....

ाद्दु - भाई जल्दी से चलो यहाँ पर....

मुज़हे बहुत दर लग रहा है....

में - न ....गुड़िया डरते nahi....mein hu..na.......abhi ने उससे गले लगाया और सर पर हाथ फेरने लगा.....

उसस्के baad.....Restaurent से दीपू को लिया और घर की और निकल गए....

कार में बैठे बैठे सोचने लगा

की आज का दिन hi कुछ अजीब था....

पहले वह ladki....phir वह naag...aur ......अब यह हादसा

तभी अभी को पह बजने लगा तोह देखा उसी अननोन न से कॉल आरही है...

अभी इस समय कॉल नहीं उठा सकता tha......lekin क्रोध की वजह से उसकी आंखें ला हो गयी.....

ाद्दु गाड़ी में भी ाद्दु को पकड़ कर बैठी थी......

ऋतू दी गुमसुम सी बैठी थी ....दीपू को तोह कुछ पता नहीं था...

ऐसे hi हम घर pahunche......aur अपने रूम में चले gaye.....Addu मेरे hi साथ thi....mom को हमने बता दिया था को बहार से hi खा कर आये है.......

ाद्दु मेरे पास hi सो गयी थी.....

मैंने अपनी टीम को मेरे सेल पर आये हुए कॉल को ट्रेस काने क लिए कहा

अब मेरा सेल मेरी टीम क साथ कनेक्टेड tha......tabhi मुझे कॉल आयी

उधर से - ha...ha...ha..Bahut खूब Rakshak.....aakhir तूने बचा hi लिया ...लेकिन कब तक......

में - haramjade.....tu एक बार सामने aaja.....phir देख तेरी आत्मा भी पुनर्जन्म लेने क लिए डरेगी...

वह - अर्र्रे ..arre...arre..itna गुस्सा..

सामने भी aaunga....abhi तोह शुरुवात hai....abhi से घबरा गए..

ha...ha...ha......

और कॉल कट हो गयी ....

तभी शलाका को कॉल आयी....

सर आपके साथ बात करते हुए उसने 4 लोकेशन badli......hume समाज नहीं आरहा है यह उस्सने कैसे किया....

इतस इम्पॉसिबल....

में - वह सब छोड़ो उस्सकी आखरी लोकेशन बताओ.....

और में टेलिपोर्ट होकर उस जगह पहुंचा ....वह एक गुफा थी.....

जब में अंदर गया तोह waha....koi नहीं tha......jab मैंने चारो तरफ देखा तोह एक कागज पर कुछ लिखावट dekhi.......likha था ......

लेटस बेगिंस थे race....Rakshak....

अपराधी कितना भी शातिर हो लेकिन कोई क्लू छोड़ hi देता है........

निचे गलती से उस्सने सिग्न किये था...

जहा छोटे से अक्षर में लिखा था

सर

में वापस aagaya......socha की कौन हो सकता hai.....aur सिग्न का फोटो क्लिक करके शलाका को भेज दिया.......

विचार aaya....yeh क्या हो रहा है ...उस लड़की को हील करना चाहता था नहीं कर paaya.....iss अनजाने दुश्मन तक पहुंचना चाहता हु लेकिन नहीं पहुँच पा रहा हु......

सिग्न देखकर कुछ कुछ तोह शक हुआ

lekin......phir सोचा यह कैसे हो सकता है.......

आज की इस हादसे क कारण अभी ाद्दु को उस लड़की तक नहीं ले जा पाया....

सोचा की कल देखते है.....

मुज़हे नींद नहीं आरही थी सोचा क्या karu......tabhi रिम्पी का ख्याल आया तोह थोड़ी देर उससे बातें की.....

फिर भी मैं अशांत tha.....ki लॉकेट चमकने लगा......

में - सॉरी जान आज क इस व्यस्तता में तुमसे बात करना hi भूल गया...

आज मेरा मैं बड़ा अशांत है....

काश तुम यहाँ आसक्ति.....

तभी वह एक रौशनी प्रगट हुई.....

और उस्में से निकली मेरी प्यारी शिवली

वह कुछ बोलने hi वाली thi....k मैंने ाद्दु की तरफ इशारा करके चुप कराया और उससे लेकर टेलिपोर्ट होकर चाट पर चला गया......

चाट पर पहुँचते hi ...

शिवली - क्या हुआ जान ..क्यों इतने परेशां हो......

में - क्या तुम्हे नहीं pata.....tumahara तोह मैं इस लॉकेट से जुड़ा हुआ है न....

शिवली - मुज़हे सब पता hai......lekin आप क्यों भूल जाते हो की आप इस श्रुस्ती क महारक्षक हो......

ऐसी बढ़ाये तोह आपके सामने आती hi rahegi.......aur भविष्य में तोह ...

में - क्या बह्विसय mein.....batao

शिवली - अभी नहीं jaan.....muzhe क्षमा करना......

में - क्या तुम मुज़हे प्रेम नहीं करती

शिवली - ऐसी बात मत करो जान .....तुम्हारे लिया तोह मेरा सारा जीवन समर्पित hai.......paratu बाबा ने तुम्हरी कसम देकर बताने से मन किया hai......bas इतना hi बता सकती हु क भविस्य में आने वाले संकेत से केवल ...तुम्हे संसार की नश्वरता का ज्ञान hi बचा सकता है

में - ठीक है तुम अब जाओ .....और में मुद गया......

उस्सने पीछे से मुज़हे बाहि में भर liya.....aise तोह नाराज न हो जश्न नहीं तोह में जी नहीं paaungi...aur उस्सकी आंखों से आंसू बहने लगे जिन्हे मैंने अपनी पीठ पर महसूस किये

में पलटा और उस्का चेहरा पकड़ कर ुसदकए आंसू का पिने लगा...

में - जान में तुमसे कभी नाराज नहीं हो sakta......woh तोह बस ऐसे hi

और मैंने अपने होंठ उसस्के होंठो पर रख दिए और चूमने लगा , इस चुम्बन में सिर्फ प्यार था वासना का लेश मात्रा भी नहीं था.....

थोड़ी देर ऐसे hi हम एक दूसरे की बाहो में the......meri साड़ी परेशानी उसस्के प्यार ने हर ली थी.....

शिवली - जान अब हमारे मिलान का समय आने वाला है ....अभी 15 दिन बाद आनेवाली शिवरात्रि पर हमारा विवाह होगा......

फिर वह चली gayi....aur में भी अपने रूम में आकर सो गया था

दूसरे दिन ओढ़कर मैंने होनी डेली रूटीन पूरी ki......Abhi बर्फ रेडी नहीं हुआ था तोह सोचा डैड से मिल लू

डैड , माँ और डीडू हॉल में बैठकर न्यूज़ देख रहे the....ussmein वायरल वीडियोस क ऊपर प्रोग्राम आ रहा था....

न्यूज़ रीडर - अब आप अगला वीडियो देखे

एक hi रात में यह वीडियो पूरे वर्ल्ड में फ़ैल गया है.....

देखो कैसे एक रहस्य्मयी इंसान ने तेजी से आते ट्रक क परखचे उदा दिते और दो लड़कियों को बचाया.....

फिर कल वाले हादसे का वीडियो चला...


डैड और माँ मेरी तरफ देखने लगे

तभी न्यूज़ रीडर - क्या जिस संघारक क नज़्म से पूरा अंडरवर्ल्ड कांपते hai....yeh वही है या कोई और........123 इस नंबर पर संस करके baataye......har न्यूज़ की पूरी खबर दिखायेगा हमारा चैनल.....

डैड - बीटा यह सब क्या है इतना कुछ हो गया और तुमने हमे बताया नहीं

दी - डैड मैंने hi बेतु को मन किया था बताने क liye.......socha आप परेशां हो जाओगे.......

डैड - बीटा मेरे लिए मेरी परेशानी से ज्यादा तुम सब इम्पोर्टेन्ट हो....

तब तक बर्फ आगया tha.....Addu और दीपू भी निचे आगये थे.....

डैड ने कॉल करके फॅमिली की सिक्योरिटी को और बड़ा दिया और दी दीपू और ाद्दु को किसी अनजान से मिलने क लिए मन किया

मैंने पहले hi सुबह उठते hi सबको अपने शक्ति त्रिशूल की शील्ड से सुरक्षित कर दिया था....


तब तक रिम्पी आगयी .....और हम चल दिए कॉलेज......

क्लोलेगे में आज भी डेली की तरह प्रैक्टिस hui......aur कुछ पड़े....

अभी क लिए इतना hi .....अगला अपडेट कल

रीडर्स क लिए -

क्या आप में से कोई बता सकता है की वह अनजान दुश्मन कौन है.....


और अब तक की कहानी में अभी क होनेवाली पत्नियों में से कितनो का जीकर हुआ है......
 
अपडेट - 56

अब तक आपने dekha.....Abhi को रहस्यमय दुश्मन का एक क्लू mila..........Abhi के उद्विघ्ना मैं को शिवली ने शांत कर दिया था..........

अब आगे..........


अभी ने शक्ति त्रिशूल से बनायीं शील्ड द्वारा अपने परिवार और अपने घर को सुरक्षित कर दिया tha......isisliye एक गुफा में baithe.....Vichtra से दिखने वाले आधे मानव और आधे क साथ

वह अंजना dushman......jisne काला चोंगा पहना हुआ tha......jissase ुंस्का मुँह नहीं दिख रहा था ....अपने सामने रखे क्रिस्टल क गोले को घर कर देख रहा tha......kaha गया तू रक्षक......

यह कैसे पॉसिबल hai.......nahiiii मेरे मालिक की शक्तिया अपार hai........tuzhe नहीं छोडूंगा रक्षक........

जैसे तूने मुज़हे मेरे अपने की मौत क आग में जलाया hai.....waise hi अब मैं भी तुज़हे वह दर्द दूंगा .....जिससे ....तू तड़पता rahega...........ha....ha...ha......


सम्मन जल रही आग में उस्सने .....एक कटोरे में भरे किसी इंसान क ताज़े खून की आहुति दी..........

और अग्नि और भड़क uthi......aur उस प्रकाश में चमक उठा मला सुधाकर का चेहरा.......

अब सवाल यह आता है की िस्सने इतनी शक्ति कहा से हासिल की ........

तोह देखते है छोटा सा फ्लैशबैक.......

दरअसल जब मला को मारा समजह्कर ...अभी की टीम ने उससे जंगल में उस छोड़ आये जहा पहले भी कई अपराधियों की लाशो को ठिकाने लगाने क लिए लाया जाता tha.........waha.....

मयासुर क ड्रग से ....जो ...इंसान अजीब से जीवो में बदल गए थे वह इसी जंगल में एक गुफा में रहते थे इस जगह को , मयासुर ने ऐसे बंद दिया था की कोई जीव बिना किसी शैतान क पुजारी की आज्ञा क बिना बहार न जा sake.......MS क जाने क बाद वह जीव यही बांधकर यह gaye....yaha फेंकी हुई लाशो को और जंगली जानवरो को खाकर ....अपनी भूक मिटने लगे.....

जब मला अपनी मौत क बहुत करीब tha...toh रात को वही जीव यहाँ aaye.....aur जैसे hi वह उससे खाने क लिए आगे bade......toh उनके लीडर को मला की बॉडी में कुछ हलचल , और उसस्के श्री में बहुत मात्रा में नेगेटिव एनर्जी महसूस की........

जिससे देखकर उन जीवो का लीडर बहुत खुश हुआ .....उससे मला में यहाँ क बंधन से आज़ादी नज़र आने लगी.....

फिर उस्सने मला की बॉडी को ले jaakar...gufa क अंदर मस क द्वारा स्थापित एक काले पत्थर पर छोड़ diya.......uss समय मला खून से सना हुआ था......

मला के खून से वह पत्थर सं गया और उस्में से एक काले रंग की ऊर्जा निकली ....और मला क बॉडी में समां gayi.......kuch hi देर में वह एकदम ठीक हुआ .........

और आवाज आयी .......इब्लीस की.......

और इसी गुफा में अपना बदला लेने क लिए इब्लीस की साधना करते हुए पावर्स हासिल की........

यहाँ अभी अपनी टीम क साथ बैठा था ......

शलाका - सर आपने जो सिग्न की ..पिछ भेजी थी वह पता चल गया है किसकी है .......हमने अज्ज तक जिस भी गैंग का सफाया kiya.....usske सारे लीडर्स की राइटिंग हमने कही न कही से निकली और उस सिग्न से मैच kiya........and थे रेसियत इस शॉकिंग.....

अभी - मुज़हे पता hai....k...Woh मला सुधाकर का सिग्न है,

अर्नाल्ड - लेकिन सर ...हाउ इस थिस possible...........woh तोह मर गया tha......aur जैसे की आपने bataya....ki उसस्के पास कुछ स्पेशल पावर्स है...

अगर वह मला hi है तोह उसस्के पास पावर्स आयी कहा से......

अभी - वह तोह में पता कर hi lunga.......lekin इस बार उससे ऐसी मौत मिलेगी क देखने वालो की रूह काँप जायेगी.........

फिर अभी ने कण्ट्रोल रूम में बैठकर सारे शहर की गतिविधिओ को देखने laga.......Jab से रवस ने अपनी शक्तियां और संघारक क सारे अधिकार अभी को दिए तब से घर क निच्चे बेसमेंट में बने कण्ट्रोल रूम अब अभी और उस्सकी टीम hi देखती थी.......

शलाका - सर शहर में एक कोई इ कंपनी नाम से कोई कंपनी आयी hai........aur आते hi ussne.......yaha की बहुत साड़ी छोटी ...मोती कम्पनीज खरीदी......

और साथ hi सीज़ कॉलेज भी खरीद लिया है....

अभी - क्या कुछ इल्लीगल एक्टिविटीज का पता चला

शलाका - नहीं sir.....sab कुछ नार्मल hai.....aur तोह उस्सने अस्प्के द्वारा चलाये जा रहे अनाथ आश्रम ......और नारी निकेतन में सब में कोई टोटल 100कर दिए है.....

हमने पता करने की कोशिश की ....लेकिन अब तक हमे इस इ कंपनी क ओनर क बारे में पता नहीं चला........


उस्सकी बातें सुनकर ....जाने क्यों अभी क चेहरे पर मुस्कराहट आगयी.......

अभी बेसमेंट से निकलकर ...घर aagaya...aur ाद्दु क रूम में चला गया....


ाद्दु अभी क दिया टेडी को पकड़ कर बैठी थी.......

अभी - क्या कर रही हो गुड़िया......

ाद्दु - अरे भाई aap......maine तोह देक्ग hi नहीं.....

अभी - उसस्के सर पर प्यार से हाथ फेरते hue......aise क्या सोच रहा है मेरा baccha....jo मेरे अंदर आने की भी खबर नहीं हुई........

ाद्दु - भाई अगर में मार जाती तोह.....

अभी -- Adduuuu....chup कर बीटा ऐसा नहीं बोलते.....

ाद्दु - नहीं भाई ....मुज़हे बहुत दर लग रहा है.......

में - ाद्दु .....अच्छा तुज़हे वह याद है.......

जिसने ुस्सदिन तुम्हे बचाया था ....क्या नाम था उस्का...

sssss...saang...kya

ाद्दु - हस्ते hue......bhai.......Sangharak.....

और भाई वह कितना पावर फूल hai......kaise एक पंच में ...ट्रक को तोड़ दिया tha.....aur उसस्के पास मैजिक भी hai....kaise गायब हो गया था......

bhai.....lagta है वह कोई ....सुपर Hero....hai...

में - अच्छा गुड़िया मिलेगी उसी सुपर हीरो से.......

ाद्दु - हां ..लेकिन यहाँ कहा है भाई सुपर हीरो....

में - पहले तू अपनी आंखें बंद कर....

फिर ाद्दु ने अपनी आंखें बंद कर दी

और अभी अपने संघारक रूप में आगया.....

में - गुड़िया अब आंखें खोलो

जब उस्सने आंखें खोली तोह हैरान हुई

ाद्दु - भाई आप कहा हो.....

में - गुड़िया में hi संघारक हु....

ाद्दु - अरे भाई wah.....aap तोह सुपर हीरो ho......ab में नहीं डरूंगी भाई...

में दोनों बाहे failakar.....aaja मेरी गुड़िया...

और ाद्दु को मैंने गले लगा लिया......

मेरे इस रूप को देखकर अब उसस्के अंदर का सारा दर दूर होगया .....

में - गुड़िया मेरे साथ

chalogi......tumhe एक दीदी से milana...hai.......

ाद्दु - कौन है भाई वह.....

में - गुड़िया वह बहुत बीमार है ...हमे उससे मिलने जाना है

फिर में ाद्दु को लेकर हॉस्पिटल की चाट पर टेलिपोर्ट हो गया...

ाद्दु - अरे वह भाई आपके पास तोह सचमुच का मैजिक hai....hum घर से सीधा यहाँ आगये ...

में - गुड़िया लेकिन यह बात टॉप सीक्रेट है ...प्रॉमिस करो तुम किसी को नहीं बताओगी....

ाद्दु - प्रॉमिस भाई.....

फिर हम चल दिए उसी रूम क ओर जहा वह लड़की एडमिट थी ...जो मुज़हे जख्मी हालत में तालाब पर मिली थी......

इस समय डॉक्टर उस्का चेक उप कर रहे थे...

में - Sir...kya..kuch....sudhar..

आया.....

डॉक् - हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे है.....

अभी में इनकी ब्लड रिपोर्ट hi देख रहा tha....hairan करने वाली बात है , की इनका ब्लड आम इंसानो जैसा नहीं hai.......aur कौन से ग्रुप का है यह भी पता नहीं चल रहा है.......

मैंने सोचा अब यह डॉक् बवाल मचाएगा....

तोह उस्सकी मेमोरी में से साड़ी बातें मैंने हटा दी....

फिर डॉ चला गया......

अब ाद्दु और में उसस्के बीएड क पास गए..

ाद्दु - भाई इनको क्या हुआ है......

में - बेतु तुम hi इनका हाथ पकड़ कर पूछ लो

तोह ाद्दु ने जैसे hi उस्का हाथ pakda...ek ऊर्जा सी मैंने ाद्दु क शरीर से निकलकर उस लड़की क अंदर जाते हुए मैंने महसूस की.....

उस्सकी बॉडी में हलचल शुरू हो गयी

और उस्सकी आंखें खुल गयी.....

आंखें खुलते hi वह इधर उधर देखने लगी.....

उस्सकी नीली आँखों में जाने कैसी कशिश थी....

की न जाने क्यों में उस्में खोता चला गया....

जब उस्सकी नज़र ाद्दु पड़ी......

ाद्दु - अरे देखो न भाई इनको होश आगया......

दीदी आप कौन है और आपको क्या हुआ....

लड़की - mein....meinn...kaun hu......aur यहाँ

ाद्दु - भाई इन्हे तोह कुवह भी याद नहीं है...

जब उस लड़की ने मेरी तरफ देखा तोह उस्सकी आँखों में आंसू aagaye...aur जहटके से उठकर मेरे गले लग कर रोटी रही ......और रट रट बेहोश हो गयी...

फिर में ाद्दु और उस लड़की को लेकर घर क एक रूम में टेलिपोर्ट हो गया......

उस्सको वह बीएड पर litaya.....woh ाद्दु की प्राणशक्ति से बिलकुल थी थी बस कुछ मानसिक पीड़ा क कारण बेहोश हो गयी थी.......

ाद्दु थोड़ी देर मुजह्से बातें करके अपने रूम में चली गयी

और मैंने निचे आकर माँ डैड को साड़ी बातें बताई....

दोनों जाकर उस लड़की को देख आये.....

ऋतू दी घर पर नहीं thi.....woh नारीनिकेतन क कुछ कामो में बिजी थी........

फिर आया एक नया savera.......phir सुबह रूटीन क बाद में ध्यान में बैठा

जैसे जैसे ध्यान गहरा होता गया......7 चक्रो की ऊर्जा मुज़हे दिखने lagi.......aur दिखी कुण्डलिनी शक्ति जो दो मुँह वाले सर्प की तरह....

मूलाधार चक्र क निचे हमारी 3 मुख्या नदी

IDAA.....PINGALA....AUR शुष्मना

कुंडली शक्ति शुष्मना नाड़ी क द्वार पर सादे तीन फेरे लेकर बैठी होती है.....

इस्सके जागृत होने पर व्यक्ति अनंत शक्तियों का स्वामी हो जाता है.....

आज अचानक सर्प शक्ति कुंडली का दर्शन कर क , में अपने अंदर और ज्यादा शक्ति और ऊर्जा को महसूस करने लगा.....

ध्यान में मुज़हे महागुरु की आवाज आयी...

पुत्र अब समय आगया है , तुम्हारे 14 लोको की शक्तियों को प्राप्त करने का...

इस्सकी शुरुवात .....भुवलोक क यक्ष्य लोक से होगी...

ध्यान क बाद में एक बार फिर उस लड़की क रूम में गया

वह अभी सो रही थी .....उसका मासूम चेरा देखकर जाने क्यों ऐसा लग रहा था की मेरा इससे कोई गहरा सम्बन्ध है......


उसस्के बाद रिम्पी क साथ मस्ती करते हुए कॉलेज गया.......

अभी क लिए इतना hi ---

अगला अपडेट जल्द hi.......
 
सुबेरब , शानदार अवेसमे रिव्यु भाई :अप्प्लायसे: :applause::applause:

आपके सपोर्ट क लिए बहुत बहुत थैंक्स भाई :thanks::thanks:

बिलकुल सही bhai....paancho वही है...

कस की लड़की का नाम मदालसा....

और अनजान दुश्मन क बारे में ..

लेटेस्ट अपडेट में पता चलेगा....

बस ऐसे hi साथ बनाये रखे.....

???????

लेटेस्ट अपडेट 56 पोस्टेड.....
 
अपडेट 57

अब तक आपने देखा क अभी ने रिम्पी को अपना सच बता दिया....

और ाद्दु की प्राणशक्ति से हॉस्पिटल में उस लड़की को ठीक करके घर लेकर आया


अब आगे......

कॉलेज में कुछ खास नहीं hua....bas थोड़ा यर दोस्तों से मिलना...

थोड़ी padai......Sports practice.....aur रिम्पी क साथ थोड़ी मस्ती...


शाम को जब में कॉलेज से घर aaya....toh माँ मुज़हे लॉबी में hi बैठी हुई मिली

में - ही mom....aur उनके पास hi सोफे पर बैठ गया...

माँ - अरे मेरा betu.....shukar है आज अपनी माँ क पास बैठ gaya.......kitne दिन से तुज़हे सही से देखा तक नहीं.....

में - माँ की गोदी में सर रखकर लेते हुए..

माँ आप तोह सब जानती हो ......कॉलेज और रक्षक ...Sangharak.....bas इसी में इतना ुलाज़ गया हु ...क चाहकर भी में समय निकला करता.......

मेरा भी बहुत मैं करता है आपकी ममता की चाव में थोड़ा आराम कर लू......

माँ मेरे बालो में हाथ फेरते हुए .....

जानती हु मेरे bacche......aur समजह्ती भी हु ...........तू हर दिन कितने खतरों का सामना karta.......usse ...देखकर ...कभी कभी एक माँ का दिल घबरा जाता है.....

और माँ की आँखों से दो बून्द आंसू क मेरे चेहरे पर आ गिरे

में माँ क आंसू पोंछते हुए.....

में - क्यों चिंता करती हो माँ......

आपके बेटे को कुछ नहीं हो सकता.....

अच्छा mom...uss लड़की को होश आया क नहीं.....

माँ - हां बीटा होश तोह आगया लेकिन उससे अपना नाम तक याद नहीं......

पहले तोह बहुत देर वह गुमसुम सी थी लेकिन ाद्दु की बातो ने उस नार्मल कर दिया

अभी ाद्दु और दीपू भी उसी क साथ hai........thodi hi देर में ाद्दु उससे इतना घुलमिल गयी

में चलो माँ देखते है , में भी जरा देखु तोह......

और में माँ क साथ उस रूम में चला gaya....waha जाकर देखा तोह वह तीनो टीवी पर जुरैसिक वर्ल्ड देख रहे the.....woh ाद्दु क पीछे दुबककर बैठी हुई थी और धीरे से ाद्दु क पीछे से गार्डन निकलकर टीवी क तरफ देखती और फिर दुबक जाती...

उस्सकी इस हरकत का ाद्दु और दीपू खूब मज़ा ले रहे थे.....

में - गुड़िया यह क्या चल रहा है....

दीपू - देखो न भाई यह दीदी टीवी पर यह दिनुसार देखकर दर रही है ...कहती है यह मुज़हे कगा jaayega.....hiii...hi...hi...

ाद्दु - हां भाई इससे तोह कुछ भी पता नहीं है ...कभी टीवी देखकर दर जाती hai.....kabhi...light देखकर......

में - टीवी बंद कर देता हु......

माँ - ाद्दु गलत baat.....aise किसी की हँसी नहीं उड़ाते बीटा....

ाद्दु - सॉरी माँ.......

माँ - उस लड़की क पास जाते हुए.....

कैसे हो बीटा अब ......देखो तुम इससे अपना hi घर संजो....

में उसस्के पा jaakar.........ab कैसी तबियत है तुम्हारी......

वह गार्डन निचे करके बैठे हुए thi....aur वैसे hi अपनी आँखों को उप्पेर करते हुए........

मुज़हे क्या हुआ hai........muzhe तोह मेरे नाम भी नहीं pata..........kal मैंने तुम्हे देखा तुम मुज़हे मार रहे थे न.....

ाद्दु - अरे बुद्धू ...(.अपने सर पर हाथ मारते हुए....) बही मार नहीं रहे थे तुम होश में आकर भाई क गले लगकर रो रही थी......

वह - में बुद्धू नहीं हु ....और किसी छोटी सी बच्ची क तरह मुँह फुलाकर बैठ गयी..

उसकी इस ऐडा पर मुज़हे बहुत प्यार आरहा tha.....dil कह रहा था क अभी गले लगा लू...

माँ - अरे क्यों परेशां कर रही हो इससे और उसस्के सर पर हाथ फेरते हुए....

मेरी तरफ बेतु इससे तोह अपना नाम याद नहीं hai.....lekin कुछ तोह नाम होना चाहिए...

में - माँ इस्सके नाम सुलेखा है.......

सुलेखा - मीरा नाम सुलेखा ..haa.....lekin मुज़हे कुछ याद क्यों नहीं आरहा है......


फिर सर padakar.....muzhe दर्द हो रहा है...........अह्ह्ह्ह......

तब मैंने उसस्के सर पर हाथ रखकर अपने हीलिंग पावर का इस्तेमाल किया तोह उस्का दर्द ख़तम hi gaya.........aur वह मेरी तरफ देखने लगी

सुलेखा - क्या आप मुज़हे जानते ho......muzhe क्यों ऐसा लग रहा है क मैंने आपको देखा है

मैंने उसस्के आंखों में उसस्के जीवन की कुछ ज़हालकिया dekhi....usske माता pita...sakhi saheli......aur उस्का वह मेरी पेंटिंग बनाना......

लेकिन उसके साथ क्या हुआ कैसे वह घायल हुई और यहाँ पहुंची.....

यह सब नहीं दिख रहा tha....jaise कोई अंजनी शक्ति मुज़हे रोक रही थी...

अब में उस्का मेरे प्रति प्यार जान चूका था....

मेरे प्रति उस्का इतना गहरा प्रेम देखकर क वह अपना नाम तक भूल गयी ....लेकिन दिल से मेरी तस्वीर भुला न paayi......tabhi तोह होश में आते hi जब मुज़हे अपने सामने देखा.........

गले लगकर मानो आंसू से अपने जुदाई का दुःख बयां कर रही हो, उसके इस प्यार को देखकर मेरी आंखें भी नाम हो गयी.....

सुलेखा - आप क्यों रो रहे ho....aapko ऐसे रट देखकर मेरा भी रोने का मैं कर रहा है...

में - अरे में कहा रो रहा hu..woh तोह बस आँखों में कुछ चला गया है...

और में वह से निकल गया......

अपने रूम में आकर सोचने लगा की वह कौनसी ऐसी शक्ति है जो मुज़हे सुलेखा क पास्ट तक पहुँचने नहीं दे रहा है.......

पहले तोह में उससे हील भी नहीं कर पा रहा tha.......lekin aaj.......lagta है किसी बहुत पावरफुल शक्ति ने िस्सपर कोई मैजिक किया है.....

जो ाद्दु क प्राणशक्ति से थोड़ी कमजोर हो गयी....

अब सुलेखा घर में घुल मिल गयी थी

ाद्दु और दीपू क साथ खूब बनती थी....

मैंने कई बार नोटिस किया की उस्सकी आंखें मुज़हे hi धुनती रहती थी.....

और जब में उससे बात करने jaata....toh सरमाकर भाग जाती....

खैर ऐसे hi दिन बीतने lage......aur महाशिव रात्रि का दिन नज़दीक आया.....

हम लोग हर साल अपनी शिवरात्रि गाओं क राणा महल में hi मानते थे ..

तोह मैंने कॉलेज से 4 दिन की छुट्टी li......Rimpy भी हमारे साथ जारही thi......Addu और दीपू ने भी स्कूल से 4 दिनों की लीव ले ली थी......

महाशिवरात्रि क 2 दिन पहले हम निकल गए गाओं की तरफ.....

पहली गाड़ी में माँ और डैड थे....

दूसरी में मैं बैठ गया तोह मेरी दोनों तरफ रिम्पी और सुलेखा बैठ गयी

सुलेखा को मेरे साथ बहित देहकर रिम्पी को गुस्सा आरहा था और रिम्पी को मेरे पास बैठे देखकर सुलेखा उससे खा जाने वाली नज़र से देख रही थी

और दोनों क बिच में मैं fasa...tabhi मेरी जान ाद्दु ने बचायी

ाद्दु - भाई मुज़हे और दीपू को आपके साथ बैठना है

रिम्पी - गुड़िया तुम सुलेखा दी को लेजाओ

ाद्दु - नहीं .....मुज़हे भाई क साथ hi जाना है

और फिर रिम्पी और सुलेखा ऋतू दी क साथ बैठ गयी और में बच्चा पार्टी क साथ.....

शाम होते होते हम गाओं पहुंचे, पंछी अपने घरो में लौट रहे थे , उन्हें देखकर हमे भी ऐसे लगा क दुनिया की भगा दौड़ी कर के हम अपने घोसले में आगये हो.....

दादा दादी गेट पर hi बड़ी बेसब्री से हमारा इंतजार कर रहे थे

पहले डैड और माँ ने उनका आर्शीवाद लिया

फिर जैसे hi मैं पेअर चुने लगा तिह डैड जी ने मुज़हे कास कर गले लगा लिया...


दादा जी - आ गले लग जा मेरे शेर...

कैसा है मेरे बच्चे....

में - आपके आशीर्वाद से ....अच्छा हु दादा जी

फिर ऋतू दी .....Rimpy.....Addu ..Deepu...aur सुलेखा भी दादा दादी से मिले

दादी जी ने सुलेखा क बारे में पूछा तोह ....डैड ने उन्हें सब बता दिया

दादा जी - बड़ी प्यारी बच्ची hai....(sir पर हाथ फेरते हुए) कुछ याद नहीं तोह क्या हुआ .....अब हम hi तुम्हारा परिवार है....

फिर हम शाम को शाम को गाओं के नदी किनारे घूमने चले गए....


वह की शुद्ध हवा , पहाड़ी चारो तरफ hariyali...aur नदी का बहता कल कल करता हुआ पानी , सहर से दूर प्रकृति क पास ......सब एक दम खुश थे......

रिम्पी तोह मेरा साथ छोड़ hi नहीं रही thi.....aur सुलेखा बस दूर से देख देख कर ..उदास सी हो रही थी......

नदी क किनारे चलते चलते हम पहाड़ी क नजदीक एक बंद पड़े मंदिर क पास pahunche......iss मंदिर का दरवाजा बंद tha.......jane कितने सदियों से बंद tha.....yeh मंदिर आम मंदिरो से अलग था मंदिर चारो तरफ .....ड्रैगन जैसे किसी जीव की मुर्तिया बानी हुई थी.....

मैंने सोचा दादा जी को इस बारे में जरूर पता hoga.....unse hi पूछ लूंगा.....

फिर हम वापस महल आगये........

दादा जी से जब उस मंदिर क बारे में पूछा ...तोह उन्होंने ताल diya.......kaha समय आएगा तोह तुम्हे खुद hi इस बारे में पता चलेगा.....

ऐसे hi दो दिन बिट गए और अब आया महा शिवरात्रि का दिन.......

महल में सुबह से hi पूजा और हवन की तैयारी चल रही थी........

में दादा जी और डैड क साथ महल क गुप्त शवलया गए....

वह हमने रुद्राभिषेक से भगवन भोलेनाथ का पूजन किया...

पूजा ख़तम hi हुई थी क मेरे गले में पड़ा लॉकेट चमकने लगा.......

तोह में समाज गया अब यक्ष लोक जाने का समय आगया है.....

में - डैड अब मुज़हे अपनी पहली शक्ति प्राप्त करने क लिए जाना है ........

लेकिन समाज नहीं आरहा आज क दिन मेरे न रहने पर सब क्या सोचेंगे......

तभी मेरे लॉकेट से एक और अभी निकला जो बिलकुल मेरी hi तरह tha......mein सोचने लगा की यह अब कहा से aagaya.....meine तोह इससे नहीं प्रगट किया .........

तभी वह गक प्रगट हुआ ......मित्र यह शिवली की मायावी विद्या द्वारा रचित है ....

जब तक आप अपना वह का कार्य पूरा नहीं कर लेते तब तक यह यही रहेगा.....

फिर में गक क साथ निकल गया भुवा लोक में स्थित कुबेर जी की नगरी अलकापुरी..

यहाँ पहुंच कर मैंने अपने सुक्ष्म शरीर की ऊर्जा को बढ़ाया ....तोह मुज़हे वह नगर दिखाई दिया....


और में पहुंचा वह क मुख्या Shivalya.....Shivali से मिलने की उमंग मेरे मैं को सुंगंधित कर रही थी......

आज क लिए इतना hi.....

अगला अपडेट कल........
 
अपडेट - 58

अभी अलकापुरी क सौनदर्या को देखते देखते शिव मंदिर पहुंचा.....

शिवालय क मुख्या द्वार को दिव्या पुष्पों से सजाया गया था.......

और उस द्वार क दोनों तरफ यक्ष कन्या हाथ में पुष्पों क थल लेकर कड़ी थी.....

और वही पास में बड़े बड़े ढोल ...और नगाड़े बजने वाले थे.....

जैसे hi अभी वह पहुंचा .....उसका स्वागत बड़े जोर शोर से हुआ......

अंदर पहुंचकर देखा तोह ....शिवालय का प्रांगण नगर प्रमुख यक्षों से भरा पड़ा है........

गक अभी को एक कसख में ले gaya.......Abhi की नज़ारे शिवली को खोज रही थी....

गक - मित्र अभी और थोड़ी प्रतीक्षा कर lo........vivah से पहले अआप उन्हें नहीं देख सकते....

में - कोई बात नहीं mitra......lekin तुम मेरे साथ hi बने rahna.....yaha इतने लोगो क बिच ...मुज़हे कुछ अलग सा लग रहा hai.......aur पहली बार विवाह कर रहा हु न....

गक - ha...ha....ha....kya...mitra ...aap..bhi

तभी वह कुबेर जी aagaye.......Alkapuri क राजा स्वयं धन क स्वामी कुबेर जी को वह देखकर यक्षों की भीड़ बढ़ने लगी......

कुबेर जी ने अभी को होनेवाले विवाह की शुभ कामनाये dekar......aur उपहार स्वरुप एक दिव्या haar......jisse पहन कर न भूक लगेगी न प्यास

देकर चले गए......

अब गक ने अभी को स्वर्ण अलंकारों और मुकुट से सजाया....

और विवाह मंडल पर ले गया......

.वह जब शिवली अपनी सखियों क साथ आयी ....तोह अभी जैसे स्तब्ध रह गया........

सैकड़ो चन्द्रमा क शीतल प्रकाश सा चमकता हुआ उसका सौंदर्या शब्दों में नहीं बताया जा sakta......laal वस्त्रो में बहुत सूंदर लग रही थी....

उस्सकी आँखों की चमक और अधरों की मुस्कान .....अद्वितीय थी....

वह भी अभी को इस रूप में देखकर मंत्र मुग्धा सी हो गयी थी....

फिर दोनों ने पहले मिलकर शिव पूजन kiya......aur फिर पूरी हुई विवाह की रस्मे.....

शिवली क पिता जी ...जो मंदर क मुख्या pujari........woh आज बहुत भी प्रस्सना थे.....

क आज उनके बेटी की इच्छा पूरी हो रही है.....

और साथ hi साथ उदास bhi.....kyu की अब वह उनसे दूर जारही है

विवाह की रस्में पूरी होने क बाद .....सभी सखियों ने शिवली को मिलान कक्ष तक पहुँचाया...

जो पूरा फूलों सर सजा हुआ था.....

वह जाकर शिवली सजे हुए बिस्टेर पर बैठ गयी और अपने प्रियतम का इंतज़ार करने लगी

तभी गक भी अभी को कक्ष तक छोड़ गया....

अभी जैसे hi अंदर gaya......toh शिवली को घूँघट ओढ़े बैठे हुए देखा......

वह उस और bada.....Shivali का हृदय जोरो से धड़क रहा था....,..

अभी उसस्के पास बैठते हुए .....शिवू ..देखोगी नहीं मेरी तरफ .....और उससे धीरे से पकड़ कर अपनी और मोड़ते हुए.......

उस्सकी ठुड्डी को अपनी ऊँगली उप्पेर करता hua........Uff Shivu......tumahara यह सौंदर्य ....मुज़हे और घायल कर रहा hai......ab और देर तुमसे दूर नहीं रह सकता hu.........aur अभी आगे बढ़ते हुए
उसको बाँहों me...bhar लेता है...

और उसकी आखों में देखने लगता है..... दोनों अब अपने दिल की बाते आखों से कर रहे थे. .....दोनों की गर्म सासे एक दूसरे को उत्तेजित कर रही थी.

दोनों के होंठ नजदीक आते जा रहे थे. और फिर मिल जाते है..... और दोनों एक दूसरे क होंटो को चूसना सुरु का देते है. बहुत hi धीरे -2 एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे. ....अथाह प्रेम और मिलान की aas.....dono को और अधीर कर रही थी.....

अभी उसकी पथ पर हाथ फेर रहा था..... उखड़ती सांसो ने उनका चुम्बन तोड़ दिया.... लेकिन फिर से दोनों के होंठ मिल जाते है...... पर इस बार चुम्बन थोड़ा सा और गहरा था..... अभी क हाथ कपड़ो क ऊपर से शिवली के बदन पर चल रहे थे..... दोनों क इस मिलान से वह एक ऊर्जा उत्पन्न हो रही thi.....chumban फिर से टुटा दोनों एक दूसरे को देख रहे थे..... एक ख़ुशी सी जलक रही थी दोनों क चेहरे पर......

अभी शिवली को देखते हुए उसे बिस्टेर पर लिटा देता है. और ..... उसके पास लेट जाता है. और अपने होंटो को फिर से उसके होंटो पे रख कर चूमने लगता hai.....or अपनी जीब को भी उसके मुँह में दाल देता है. ....शिवली भी उसकी जीब को चूसने लगती है...... अभी का हाथ इस समय उसस्के के नंगे पेट पर चल रहा था ...,और. वो उसको रहला रहा था...... और निचे हाथ अपना काम कर रहा tha......Abhi ने अपनी एक ऊँगली उसकी गहरी नाभि में रख कर कुरेदने लगा था. ....तो शिवली और उत्तेजना से उसके होंटो को चूसने लगी.... और अपनी जीब भी उसने अभी के मुँह में गुसा दी..... . अब अभी का जो हाथ पेट को सहला रहा था. ..वह नीचे की और आने लगा और शिवली क सरीर की उत्तेजना और बढ़ने लगी...... उसकी योनि से कुछ बुँदे निकल गयी थी.


अभी क हाथ अब उसके स्तनों तक पहुँच चुके थे.... . शिवली को तोह कुछ होश hi नहीं tha....Abhi का हाथ स्तनी पर महसूस करते hi ....उसका जिस्म काँप gaya......Abhi उससे मकमल जैसे मुलायम स्तनों को दबाने लगा

शिवली - Jaaann.....sssss..ahhhhh.

..यह ..kkaisa...ahsas है

शिवली मदहोश सी होती जा रही थी. ....अभी ने अब उसस्के स्तनों को वस्त्रो क आवरण से आज़ाद कर diya......kesar मिले हुए दूध की रंगत liye......aur गुलाबी ....निप्पल.......

अभी ने किश तोड़ी .....और बैठ कर इस सुंदरता हो निहारने लगा...

शिवली ने जब देखा अभी उसके स्तनों को देख रहा hai.......toh sharmakar......apne दोनों हाथो से स्तनों को छुपाने का प्रयास करने लगी....

अभी - यह क्या जान .......ऐसे sharmaogi...toh कैसे हमारा मिलान होगा.....

और उसके हाथ को हटा कर .....डेरे -2 दबाने लगा......

शिवली -- ssss..ahhhh...haa...kkkya karu......ufff...jaan ....मुज़हे लज्जा भी आरही है...

अभी - हाय मेरी शिवू........ मिलान भी चाहती हो और शर्म भी आरही है.....

अब अभी को साबरा नहीं हो रहा था. ..

..अब वह निचे की और सरकते हुए..... उसकी गर्दन को चूमने लगा........ और वो निचे की और बढ़ने लगा और उसके हाथ शिवली क स्तनों को दबाने में लगे थे. .....अब वो उसके स्तनों के बिच के हिस्से को चूमने लगा .....उसके गोर स्तनों को देख कर तो वो भी बहुत उत्तेजित हो गया था.... गोर गोर और गोल स्तनों पर चमकते हुए गुलाबी निप्पल.......

शिवली की ऐसी अवस्था थी क .........एक तो उसको शर्म आ रही thi.....aur दूसरा वो और ज्यादा उत्तेजित होती जा रही thi....,..Uski योनि कॉमर्स बहा रही थी. .....

अभी अब शिवली क गुलाबी निप्पल्स चूसने लगा..... अब उससे रुका नहीं जा रहा था. .....अभी का एक हाथ अब उसके लहंगे का नाडा खोलने लग गया tha......aur अब वह सिर्फ पंतय में thi........aisa नज़ारा देखकर ......अभी को अब सबर करना मुश्किल हो रहा था.....

तो वो उसके ऊपर से उठकर काढ़ा हो जाता है अपने सरे कपड़े उतर देता है. और एक दम निर्वस्त्र.. उसकी और बढ़ता है. .....पहले तोह अभी को इस तरह देखकर शिवली ने अपनी आंखें बंद कर di......phir धीरे धीरे खोलकर अभी को देखने लगी........

.

पर उसके लिंग को देख कर उस्सने अपनी आखें फिर बंद di.......dheere से फिर आंखें खोलकर देखने lagi.......wo उसके तने हुए विशाल लिंग को देख कर और भी उत्तेजित होने lagi.......sath में दर भी लग रहा था..... की इतना बड़ा लिंग जब उसके अंदर जायेगा तो उसका क्या होगा......

इस समय कई तरह की भावनाये उसस्के मैं में प्रगट होने lagi......dar भी था, उत्तेजना भी थी, अतः प्रेम भी था और स्त्री का gahna....lajja..bhi.......

शिवली - ऐसे मत देखो. na...jaan .....मुज़हे बहुत शर्म आरही है....

अभी – देख रहा हु ...शिवू....

तुम्हारे इस अद्भुत सौंदर्य को जान…….

और महसूस कर रहा हु तुम्हारे प्रेम की गहराई को...

शिवली अभी क आँखों में अपने लिए अतः प्रेम dekhkar.....Usska हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींच लेती hai.....aur चूमने लगती है..…

अभी भी अब उसको चूमते हुए निचे की और जाने लगा.....

एक अद्भुत सप्तरंगी ऊर्जा उनके शेर से निकल रही थी.....

अभी अब शिवली क निप्पल को खूब चूसने लगा और उसका एक हाथ पेट से निचे होते हुए ....पंतय क ऊपर से ....शिवली की योनि को सहलाने लगा

अपनी योनि पर अभी का स्पर्श महसूस काके शिवली तोह जैसे काँप गयी

उस्सकी सिसकारियां और तेज़ हो gayi.......jisski आवाज अभी को और जयदा उत्तेजित कर रही थी

अब अभी निचे की और आने लगा और पेट पर चूमने laga...aur उसकी नाभि में जीभ चलने लगा



शिवली – ऊऊह्ह्ह आआह्ह्ह्हह्ह, आअह्ह्ह्ह…. Haan.....ufff ....जाने ....क्या हो रहा hai....saare शारित में जैसे ऊर्जा की अधिकता हो gayi....hai....kuch अलग सी तरंगे ...शरीर में दौड़ रही है...... ओह्ह्ह आअह्ह्ह्हह

अब अभी का हाथ उस्सकी पेंटी क अंदर चला gaya.....Shivali की गर्म ...makhmali....aur कामरास से भरी हुई योनि का स्पर्श होते hi.....

दोनों क शरीर को जहटके लग रहे the.....Abhi उसकी योनि को सहलाने लगा...

दोनों की सिसकारियों से वह कमरा गूंज रहा था

अभी उसकी योनि को मसलता hua....ab....usski जांघो को चूमने laga.....ek..haath..se...yoni...ko...masalta....aur...ek..haath..se....usski...jangho...ko...sahlane laga........Shivali की ...योनि kaamras...se..bhar..gayi...thi..

शिवली - sshhh...ahhhh....jaan.

.kuch...karo..na..ab..aur मुजह्से सहन नहीं हो रहा ...yeh..kaamagni...kahi..muzhe..jala..na..de....

अब शिवली का हाथ भी अभी क लिंग पर चला गया tha....woh उससे हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी

शिवली क नरम हातो का अपने लिंग पर स्पर्श paakar....Abhi...ki..saanse aur...siskariya और तेज़ हो गयी.....

अभी - ahhhhh...ufff...sssss..

jaan...haa..aise..hi....tumahare..iss स्पार्ह ने अह्ह्ह

अब अभी से और सबर नहीं हुआ और उसने ...शिवली की पेंटी निकल दी...

उस्सकी gulabi...smooth....

fuli...hui..kaamras...chodti हुई योनि को देख कर तोह जैसे वह पागल हो gaya....aur पागलो की तरह योनि को चूमने laga....aur जीभ से उस्सकी योनि को कुरेदते hue...kaamras पिने लगा....

शिवली उसस्के सर को दबती hui.....ahhhhh जान यह क्या कर diyaa....uff ..yeh..kaisi.....agan ..है..

uffff....jaan अब aur....der....mat...karo..ahhhj

और वह अभी को खींचने लगी....

अभी समाज gaya.....aur वह अब 69 पोजीशन में आगया....

उस्का लिंग

शिवली को छू रहा था

जिससे वह और ज्यादा उत्तेजित होने लगी....

यहाँ अभी उस्सकी योनि को चूस रहा था....

और शिवली ...लिंग को मुँह में लेने का प्रयत्न कर रही थी......

उसने अपना पूरा मुँह खोल कर लिंग को मुँह में लेने की कोसिस की.... पैर वो गया hi नहीं....

तोह शिवली फिर से कोसिस करती है..... और अपना पूरा मुँह खोल लेती है.... और उसके सुपडे को होंटो में दबा कर कोसिस करती है. इस बार थोड़ा लिंग मुँह में था.... लेकिन उसस्के लिए यह बहुत कठिन था.....

उस्सने चूसना छोड़ कर लिंग को चाटने लगी और चाट चाट कर उसके पुरे लिंग को गिला कर देती है.

दोनों अब अपनी वासना क चरम पर पहुंच चुके the......isiliye अब

अभी पीछे हैट जाता है. ....और उसको बिस्टेर पैर लिटा देता है.

शिवली भी इस मिलान क लिए आतुर थी... ...अभी अब शिवली के ऊपर था और उसकी योनि पर लिंग को सेट कर दिया था..... लुंड योनि के उप्पेर रखते hi दोनों मदहोश से हो जाते है ...... और अब एक पल भी नहीं दोनों से रुका नहीं जा रहा था. ......

उसने तुर्रंत hi शिवली की कमर को कास के पकड़ कर उसको अपने निचे दबा लिया... और धीरे 2 अंदर डालने लगा......

शिवली को बहुत अधिक दर्द होने लगा....

शिवली - ahhh....jaan...yeh ...pida....lagata है जैसे मेरे प्राण निकल रहे है....

अभी - लिंग को बहार निकलता हुआ ....shivu....tumahara दर्द मुजह्से देखा नहीं जा रहा.....

शिवली - यह दर्द तोह हर कुवारी कन्या का सपना होता hai...jaan.....aap....ek hi बार में पूरा अंदर कर do...jitna दर्द ho....mein सहलूंगी...

अब अभी ने एक जोर का जहतका लगाया.... उसका लिंग उसकी योनि और उसके कुंवारे पैन को चीरता हुआ अड़े से जायदा घुस गया. ....शिवली ने कसकर अपना मुँह बंद कर diya....aur दर्द सह liya.....usski आँखों क किनारे से आंसू निकल pade....aur चेहरे पर muskurahat.....…phirvbhi एक सिसकी निकल hi गयी..... आआअह्हह्हआआ….

अभी ने तुर्रंत hi दूसरा दक्का लगा दिया और इस बार पूरा लिंग अंदर था...... और वो अंदर किसी चीज से टकरा रहा था...... शिवली की एक और जोरदार चीख गूंज उठी.....

अभी इस पर भी नहीं रुका और फिर लिंग धीरे 2 अंदर बहार करने laga....Or धीरे 2 शिवली का दर्द ....आनंद से भरी सिसकियों में बदलने लगा

लिंग बिना रुके आगे पीछे हो रहा था. और अभी का मुँह उसके स्तनों को चूसने में लगा था.... तभी शिवली के हाथ उसके सर को पाकर कर दबाने लगता है... तो अभी की नजर उसके चेहरे पर पड़ती है. ....उसके चेहरे पैर दर्द ...

मिलान की ख़ुशी... बहते aashu...aur सम्भोग का aanand....k भाव एक साथ थे......

शिवली की योनि बहुत अधिक मात्रा में कॉमर्स छोड़ रही thi....ab उस्सको मज़ा आने लगा था....

वो जोर जोर से सिसकिया ले रही थी और बड़बड़ा रही थी – आआह्ह्ह्ह और चूसिये… खा जाइये इनको…. आअह्ह्ह्ह जोर से दकके मारो न जान… बहुत मज़ा आ रहा है अब ….. आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह सससस आअह्ह्ह आअह्ह्ह और तेज़ करो….

अभी - अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ जान ....यह मिलान बड़ा आनंद दायक hai..ahhhhh

और अभी क दकके तेज़ होते जा रहे थे...... योनि में पानी की बजह से ......आवाजे आ रही थी. ...

और दोनों की कमर एक साथ ताल से ताल मिला कर थिरक रही थी. दोनों दो से एक हो रहे थे ...और उनके शरीर से निकलने वाले सप्तरंगी ऊर्जा का प्रकाश और तेज़ हो रहा था....

दोनों उत्तेजना की चरमसुख की और बाद रही थे.... दोनों अपने जीवन क पहले कामसुख ...में दुब चुके the....aur कुछ भी बोले जा रहे थे. पैर वो रुके नहीं थे अभी तक, और कुछ hi देर में

दोनों का कॉमर्स छूटने लगता hai.....yeh इनके जीवन का पहला स्खलन tha....dono उस पल क चरम सुख को आंखें बंद करके महसूस करने लगे..

तभी दोनों क शरीर से निकलने वाली सप्तरंगी ऊर्जा ...एक होकर एक प्रकाश पुंज में बदल जाती hai.......aur अभी क शरीर में समां जाती है....

उस क शरीर में समाते hi अभी क साहिर को जहटके लगे ..फिर शांत हो गया...

अब अभी की जुबानी.....

मुज़हे ऐसे लग रहा tha....mere अंदर एक अद्भुत ऊर्जा का संचार हो रहा है.....

अभी ने अपनी आखें kholi.....aur देखा क शिवली आँखें बंद कर क आज हुए प्रथम मधुर मिलान क आनंद का अभाव कर रही थी.....

अभी ने Shivali....k माते पर किश किया....

और शिवली ने अपनी आँखें खोली.......

अभी - Jaan.....kaisa लग रहा है हमारे प्रथम मिलान क बाद...

शिवली - इस अलौकिक अनुभव को में शब्दों में नहीं बयां कर सकती....

अब से में आपके चरणों की दासी hu.....aap hi मेरे लिए मेरे भगवन है....

अभी - उससे गले लगते हुए ...नहीं जान तुम्हारी जगह चरणों में नहीं मेरे दिल में है...

और दोनों एक दूसरे की आगोश में सो गए

इस तरह अभी को अपनी shakti....Mayavi विद्या प्राप्त हो गयी....

अभी क लिए इतना hi.......


अगला अपडेट जल्द hi........
 
अपडेट -59

अब तक आपने देखा क अभी और शिवली का मिलान हो गया hai.......aur उससे मायावी विद्या की शक्ति प्राप्त हो गयी है

अब आगे.........


मिलान की रात बिट गयी अब आया नया savera.........Subah अभी और शिवली ने एक साथ भगवन भोले नाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया...........

अब समय था विदाई ka...........Dono ने शिवली क पिता से आशीर्वाद लिया.........

शिवली बहुत दुखी थी अब तक तोह वह अभी से दूर रही थी लेकिन अब मिलान क बाद अभी से दूर रहना उससे गवारा नहीं था......

अभी - Jaan.....samzha करो न.......

.बस कुछ समय aur.......baad में हम सभी साथ rahenge.......abhi मुज़हे बहुत काम है........

शिवली - अब में तुमसे और दूर नहीं rahsakti......muzhe पता hai.....aap को अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना है.........

अभी - तुम मुजह्से दूर कहा ho......iss लॉकेट क रूप में तोह हमेशा साथ ho......aur वैसे भी हम जब चाहे अब एक दूसरे से मिल सकते है....

शिवली की आँखों में आंसू aagaye.....Abhi ने उससे गले lagaya......aur उसस्के होंठो पर अपने होंठ रख दिए , एक प्यार भरे किश क साथ दोनों अलग हुए.....

और अभी गक ....और कुबेर जी को मिलकर वह से विदा हुआ.......

वह से विदा होकर अभी अपने महल क रूम में टेलिपोर्ट हो गया.......

वह पहुँच कर देखा तोह ाद्दु अभी क बीएड पर सोई हुई है......

और मायावी अभी वही पास बैठा हुआ hai.....abhi को dekhkar......woh उसस्के पास आया .....और अभी को देखते हुए अदृश्य हो gaya.......usske अदृश्य होते hi......usski कल की साड़ी स्मृतिया अभी में समां गयी........

अभी अब सोते हुए ाद्दु क पास गया जो टेडी को पकडे हुए सो रही thi.......usske मासूम से चेहरे को देखकर अभी को प्यार aaya......toh उस्सने ाद्दु क माथे पर किश कर दिया.....

और ाद्दु क चेहरे पैट मुस्कराहट aagayi.......aur उस्सकी आंखें खुल गयी....

ाद्दु - गम भाई......

अभी - गम गुड़िया ......अभी उठ jaao.....aaj हमे वापस जाना है betu....jaao जैसी से फ्रेश हो जाओ.......

ाद्दु - क्या भाई सोने दो na......abhi तोह बहुत देर रही....

और अभी का हाथ पकडे फिर सोने लग जाती है......

तभी ऋतू दी रूम में एंटर करते हुए.......

दी - गम bhai......ufff यह महारानी अभी तक सोई है......

addu.....uth जा न .....देख ...अभी हमे गाओं क मंदिर भी जाना है ...और ...फिर घर भी तोह जाना hai.....aur ाद्दु का हाथ पकड़कर उठा दिया...

ाद्दु - आँखें मलते hue......kya didu.....aap....bhi.....Aur फिर दी क साथ चली गयी.....

अब में भी वह से निकलकर निच्चे pahuncha......aur बहार aaya......waha महल क बहार बने हुए पार्क में

दादा जी और डैड बैठकर कुछ बातें कर रहे the........meine वह जाकर दोनों क चरण छुए.........

दादा - खड़े होकर मुज़हे गले लगते hue.........kaisa है मेरा sher........aur हमारी पहली बहु ..कैसी है........

में दादा जी की तरफ देखकर ---- क्या दादू आप bhi.....kaun सी bahu.....abhi तोह मेरी शादी भी नहीं हुई.......

दादा जी - Ha...ha...ha....beta तेरे baap..ka भी बाप हु में .....मुजह्से कुछ छिपा नहीं है.......

वैसे कब मिला रहा है बहु को........

डैड - बीटा सब कुछ ठीक तोह हो गया na......matlab.......shaktiyon को प्राप्त करने का पहला चरण........

में - हां dad....mein जिस कार्य क लिए गया था वह पूरा हो गया......

तभी महल से एक सेवक आया........

छोटे मालिक .....aapko.....Badi रानी ( दादी) ने बुलाया है.....

फिर में वह से दादी क पास gaya......Dadi और माँ वह बैठी हुई बातें कर रही रही.......

मुज़हे dekhkar......mom खड़े हो गयी ......आगया betu.....aur मुज़हे गले लगाकर......

मेरी बहु कहा है ....usse....saath नहीं लाया.....

mein....sochte हुए की ....अरे यहाँ तोह सबको पता hai........aur में सोच रहा था क माँ को कैसे बताऊंगा.......

में - क्या माँ .......यानि क आपको सब पता है......

दादी - और हां मुज़हे भी......

फिर मैंने दादी क चरण छुए.......

दादी - हमेशा खुश रहो beta.......aur मेरे पीछे देखकर ....आओ beti....tum भी ..क्यों ऐसे कड़ी हो.....

मैंने सोचा अब दादी किसे बुला रही hai...toh पीछे मुड़कर देखा तोह वह शिवली थी....

शिवली भी आगे आयी और दादी क चरण छू लिए.......

दादी उसस्के चेहरे पर हाथ फेरते hue.......kitni पायरी बच्ची hai.......jug जग जियो मेरी बच्ची......

और फिर उससे गले लगा लिया........

फिर शिवली ने माँ क पेअर chuye.......mom ने अपना हाथ उसस्के सर पर रखा ........सच में बेतु ....हमारी bahu.....toh ...बहुत hi सूंदर है ....बिकुल पारी की tarah....aur उठाकर उससे गले lagaya.....toh

शिवली की आँखों में आंसू आगये...

माँ उसस्के आंसू पोछते huye......arre क्या हुआ बीटा क्यों रो रही ho.....kahi मेरे बेतु ने कुछ कहा तोह नहीं.....

शिवली - नहीं ....maaji....Baxhpan से मैंने कभी माँ का सुख नहीं जाना इसीलिए जब आपने मेरे सर पर हाथ रखा तोह मेरे आंसू निकल आये.....

माँ - बीटा मैं भी तोह अब तुम्हारी माँ hi हु na.......ab जब भी माँ से मिलने का मैं करे .....आजाना.....

फिर ऐसे hi मीणा मिलाना और कुछ बातें चलते रही......

और शिवली मुजह्से मिलकर वापस चली गयी

फिर हम सब फॅमिली गाओं क बड़े शिवालय पहुंचे........

वह एक जनसभा का आयोजन था.....

मंदिर में दर्शन कर क हम उस सभा ंविं गए....

वह गाओं वाले अपनी समस्या बता रहे थे.........

दादा जी और डैड उनकी समस्या सुन रहे थे.....

टी

अभी एक बुद्धा पुजारी सा दिखने वाला खड़ा हुआ...

B..pujari - राजा साहब अब अब उसस्के जागने का समय नज़दीक aagaya.....hume इस बारे में भी कुछ सोचना चाहिए.....

दादा जी - पुजारी जी ...आप बैठ जाईये हम इस बारे में बाड़ा में बात करेंगे......

उसके बाद हम सब महल वापस आ गए .......मैंने दादा जी लो पूछा की वह पुजारी क्या बात कर रहा tha.....toh उन्होंने बात टालते हुए कहा की बीटा जब उचित समय आएगा तब तुम्हे सब पता चल जाएगा......

में भी मैं में सोचने laga....na जाने और कितने रहसय है जो मुज़हे अब तक पता नहीं.....

फिर लंच होने क बाद हम वापस अपने घर आगये.......

घर पहुंचकर मैंने भी रिम्पी को उसस्के घर छोड़ दिया........

रात को डिनर क बाद जब में अपने रूम में आया और बीएड पर लेटकर असंख्येन बंद करके कुछ सोचने laga......ki तभी मुज़हे ऐसा लगा की कोई मुज़हे देख रहा है..........

में वैसे hi आँखें बंद करके -- क्या देख रही हो शिवू .........

शिवली - आपको कैसे पता chala....ki में hi हु

में - बस ऐसे hi मेरा प्यार तुम्हे महसूस कर सकता है......

और मैंने उससे पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और फिर हमारे होंठ मिले और किश शुरू hogaya.....thodi देर ऐसे hi एक दूसरे को प्यार करने क बाद....

शिवली - क्या बात है जान .....आप क्यों परेशां हो रहे थे.....

में - परेशां नहीं तोह ........

शिवली - आप मुजह्से नहीं छुपा सकते अब मेरा मैं आपसे जुड़ चूका है....

आप सुलेखा क बारे में सोच रहे थे न....

में - हां जान समझ नहीं आरहा है क कैसे उसस्के दर्द को दूर करू.......

शिवली - उसपर नागमणि और काले जादू का प्रयोग हुआ hai.........kaala जादू एक तामसिक विद्या है ....इसीलिए आपकी सात्विक शक्तिया उसस्के सच तक नहीं पहुँच पारहि थी.......

हमारे मिलान क बाद अब आपमें यक्षों क भी गन आगये hai....yaksho में रजोगुण क साथ साथ तमो गन भी होता hai......ab आप सुलेखा को ठीक कर सकते हो......

में - शिवली तुम क्या ho......tumhe सब कुछ कैसे पहले से hi पता है तुम बहुत रहस्यमयी ho.......aur उससे बाहों में भर लेता हु.....

शिवली - जान आपसे कुछ मांगू ......

में - यह क्या बात कर रही हो jaan......tumhara तोह मुजहपर अब पूरा हक़ है....

में तुम्हे वचन देता हु .....बोलो क्या चाहिए

शिवली - बस इतना hi क आप कभी मेरा मैं नहीं पढोगे....

क्यों की कुछ ऐसे रहस्य है जो समय से पहले आपका जानना उचित नहीं.....

में - ठीक है ...आओ अब सो जाते है .....

और में उससे बाहों में लेकर सो जाता हु......

सुबह 4 बजे अपने समय पर मेरी आँखें खुली ......शिवली भी चली गयी....

अब में अपना डेली रूटीन पूरा करके ध्यान में बैठ gaya......aaj ध्यान में मुज़हे अपने अंदर बहुत अधिक मात्रा में सप्तरंगी ऊर्जा दिखाई di....aur साथ साथ कुछ गहरे नीले रंग की भी ........

आज में सुलेखा के रहस्य तक पहुंचना चाहता tha......issliye.....maine मायावी विद्या का प्रयोग करके अपने दो रूप और बनाये......

अब वह तीन अभी थे कोई भी उनमें फर्क बता sakta.....har बात में तीनो एक जैसे

अभी क इन् रूपों को र1 , र2 ऐसा लिखूंगा

मैंने एक रूप को कॉलेज क लिए भेज diya.....aur एक को संघारक की भूमिका निभाने......

फिर मैंने राकेश को ताड़ किया ....वह मेरे भीतर से प्रगट हुआ....

राकेश - थोड़ा नाराज़ सा धिक् रहा था.....

में - क्या बात है मित्र मुजह्से नाराज हो

राकेश - नहीं ...आप तोह मेरे मालिक हो ...में आपसे कैसे नाराज हो सकता हु.....

में - मालिक नहीं .....मित्र हु ....मैं जानता हु क इतने दिन बाद तुम्हे याद किया इसीलिए नाराज हो....

परन्तु क्या करू मित्र कुछ कामो में ुलाज़ गया था...

फिर मैंने राकेश को गले लगाया......

राकेश - मुस्कुराते हुए ....कहो मित्र क्यों याद किया...

में - राकेश तुम मला का पता karo.....aur उसस्के हर काम की जानकारी मुज़हे दो......

लेकिन हां .....तुम अभी कुछ मत करना ....उसको तोह में hi मौत दूंगा....

और राकेश चला गया.........

यहाँ र1 रिम्पी क साथ कॉलेज चला gaya.....Aur अभी सुलेखा क रूम में.......

सुलेखा बीएड पर गुमसुम सी बैठी कुछ सोच रही थी.....

जैसे hi अभी को अपने पास dekha.....woh उठ कर कड़ी हो गयी....

अभी - अरे ..अरे क्यों घबरा रही ho....baitho.....

उससे कंधे से पकड़कर बिठा दिया और खुद भी उसस्के पास बैठ गया....

अभी - क्या सोच रही हो.....

सुलेखा - कुछ nahi......lekin आप yaha......aaj ...गए colllll...mein ...

में - ha..ha..ha..tum भी वह कोलळळ नहीं कॉलेज होता hai........haa नहीं गया मुज़हे तुमसे कुछ बात करनी है.......

सुलेखा - क्या.....

में - तुम हमेशा मुज़हे क्यों देखती रहती हो...

सुलेखा - में कहा देखती हु.....

में - देखो सुलेखा में जानता हु की तुम मुजह्से प्यार करती हो...

सुलेखा - लेकिन आप तोह उस रिम्पी से प्यार करते है.....

में उस्का हाथ पकड़कर .....उस्सकी आँखों में dekhkar...kya तुम मुजहपर विश्वास करती हो....

तोह मेरे साथ chalo....aaj तुम्हे तुम्हारे मैं में चल रहे सारे प्रश्नो क उत्तर मिल जाएंगे.....

और में उससे लेकर उसी जगह टेलिपोर्ट होकर चला gaya.....jaha वह मुज़हे mili.thi.......ab उसस्के मैं में जहाँककर मुज़हे सब कुछ पता चल गया था की उसस्के साथ क्या हुआ था......

तोह उससे वह सब याद दिलाने क लिए .....मैंने अपनी माया से वही दृस्य उसस्के सामने प्रगट किया जिसके बाद उसकी याददास्त चली गयी थी..........

नाराज प्रसन्ना और नागरानी उलूपी बेड़ियों में बंदी हुए थे और सेनापति विशांक हाथ में नाग मणि लेककर हिस्से जा रहा था....

विशांक - ha..ha...ha.....Sulekha मैंने सोचा की तुजशे विवाह कर के नागलोक का राजा बन jaaunga.....lekin ......तूने मेरे सारे इरादों पर पानी फेर दिया......

देख तेरी इस करनी का फल तेरे माता पिता कैसे भुगत ते है......

और अपनी काली शक्ति और नाग मणि की शक्ति को मिलकर एक आग का गोला नप और उलूपी की और फेंकता है aur.......uss आग में दोनों जलने लगे.....

अपने माता पिता को देखकर सुलेखा की चीख निकल gayi.......nahhi ...छोड़ दो मेरे mata...pita ko.....tum जो kahoge.....mein वह करने को तैयार hu.......mat मारो उन्हें......

विशांक - ha...ha...ha...ha...ab आयी न रास्ते par.......aur कुछ मंत्र बोलता हुआ हाथ आगे जरता hai....aur वह आग शांत हो जाती है.....

नप और उलूपी की हालत बहुत बेकार हो गयी थी...

विशांक - दसियो को बुलाकर --- ले जाओ राजकुमारी को और विवाह क लिए तैयार करो.....

यहाँ जब सुलेखा को दसिया तैयार कर रही थी क तभी ....उसकी सखी विनय aagayi........baaki दसियो को वह से बीच diya......mein अपनी सखी को तैयार करुँगी .......देखु तोह कितनी सूंदर लग रही है........

और धीरे se..uske कान में ........

राजकुमारी जी विवाह क बाद विषक आपके माता पिता की बलि चने वाला है .....आप उन्हें मुक्त करने का कोई उपाय कीजिये.......

तब तक में यहाँ आपका रूप लेकर इन् सबका ध्यान हटती हु.....

अब विनय ने सुलेखा का रूप धार लिया और सुलेखा ने विनय ka......aur

अपने माता पिता को छुड़ाने पहुंच गयी महल क गुप्त रास्ते se......jaha उसस्के माता पिता बंद the......waha का प्रहरी राजा का वफादार था ..उस्सकी मदद से से सुलेखा ने अपने माता पिता को chudaya.....aur गुप्त रास्ते से बहार निकलने lagi......abhi वह तीनो बहार निकलने hi वाले थे क ......

धाड़ाम उनके सामे विनय की लाश आकर giri......aur आवाज आयी ....

विशांक ki........Rajkumari यह तूने ठीक नहीं किया ......मुज़हे hi चलने चली थी........

.और एक भयंकर ऊर्जा का वार उन् तीनो पर कर diya.....jisse वह विस्फोट हुआ लेकिन नप और उलूपी ने अपने प्राण देकर सुलेखा को सुरक्षित कर दिया और गुप्त द्वार से बहार निकल दिया......

अपने माता पिता को मरते हुए देखका

सुलेखा की चीख निकल

गयी..
नहह्ह्ह्हह्ही........

आज क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल....
 
अपडेट - 60



अब तक आपने देखा अभी अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करके सुलेखा क सामने वही दृश्य प्रगट करता hai....jisske वजह से उस्सकी याददास्त चली गयी thi........aur उस्में वह अपनी सखी विनय को और माता पिता को मरते हुए देखती है



अब आगे........

जैसे hi सुलेखा ने यह दृश्य देखा तोह उसकी चीख निकल गयी ....नाहीई......

और वह घुटनो क बल जमीन पर बैठकर रोने लगी........

तभी उस अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस hua.......jab उस्सने वह देखा तोह अब न तोह नागलोक था न hi वह दृश्य सामने अभी खड़ा tha........jaise hi उस्सने अभी को देखा ......वह खड़े हो गयी और अभी क गले लगकर रोने लगी.....

सुलेखा - रट hue......aagaye आप .....देखो न कैसे उस्सने मेरे माता पिता और सखी को मारा........

और फुट फुटकर रोने लगी............

अभी उसस्के सर को सहलाकर उससे शांत करा रहा था............

अभी - बस ..अब और ...नहीं...

Sulekha..aaj निकल दो अपने अंदर का सारा दुःख bahar........aaj क बाद

....मेरा वचन हैं क इन् आँखों में फिर कभी में यह आंसू नहीं आने दूंगा......

तभी सुलेखा अभी से अलग होते hue..........Abhi क सीने में अपने हाथो से मुक्के मरते हुए......

सुलेखा - क्यों आये हो आप मेरी जिंदगी में ......मैंने तोह आपको कभी देखा भी नहीं था .....फिर kyu........aap क hi वजह से मेरे सामने ....मेरे माता पिता और सखी की मृत्यु हुई hai........yadi आप ....मेरे सपनो में और मेरे मंत्र में न आते ....तोह मुज़हे आपसे प्रेम न hota.......aur विषक क द्वारा मेरे माता पिता की मृत्यु न होती .......aur.phir जमीन पर बैठकर रोने लगी......

सुलेखा द्वारा अभी क सीने पर किये गया प्रहार से अभी क शरीर को तोह कोई चोट नहीं आयी.....

लेकिन वह हर प्रहार उसस्के दिल पर लगा.......

और उसकी आँखों में आंसू आगये.....

अभी - मंत्र में ....विषक .....तैयार होजा .......आरहा हु में .......

और सुलेखा की और dekhkar......Sulekha पॉच लो इन् आँसूवो को .........

तुम यदि अपने माता पिता की मृत्यु का मुज़हे कारण मानती हो तोह वही hi सही........

उसस्के लिए तुम्हे जो सजा ठीक लगे विह तुम मुज़हे dedena.......lekin उसस्के पहले .......मुज़हे विषक ...को उसस्के किये की सजा दे दू.......

काहलो तुम्हे घर छोड़ aao............utho.....bas आज अपने इस अपराधी की बात मान लो ..उसस्के बाद तुम स्वतंत्र ho....apna जीवन जीने क लिए......

अभी की बातें सुनकर सुलेखा को अहसास हो गया की उसने अपने दुःख में कितनी बड़ी गलती kardi.....jiska इंतजार वह बरसो से करती आरही थी ....

जब आज वह उसस्के सामने hai......toh उससे उस अपराध का दोष दे दिया जो उस्सने किया hi नहीं

सुलेखा - Nahi...mein घर नहीं जाउंगी ...में भी आपके साथ चलूंगी

अभी - एक अपराधी क साथ तुम क्यों jaaogi.....chinta मत करो ......बिना तुम्हारे दिए दंड को भोगे ........में कही नहीं भागूंगा...

bas.....pahele ....अपना काम कर लू......

अभी की बात सुनकर सुलेखा से रहा नहीं गया

सुलेखा - बस करिये आप ......आप कोई अपराधी nahi.....apradhi तोह में हु .....की में hi देवता को ..अपने दुःख में अंधी होकर अपराधी कह बैठी...

मुज़हे क्सहम कर do.........mera सब कुछ तोह समाप्त होगया यदि आप भी दूर होगये तोह में जीवित नहीं रह पाउंगी......

और फिर रोने लगी.......

अभी ने उससे कंधे से उठाकर गले लगा liya..........Chup हो जाओ सुलेखा

में तुम्हे छोड़कर कही नहीं जा raha.........bahut रो लिया तुमने ...अब रोने की बारी ....उनकी है .....जिन्होंने तुम्हे रुलाया hai........aur उस्का चेहरा हाथ में पकड़ कर .....उससे शांत होने को कह रहा था......

लेकिन वह है की रोये जा रही थी.......

तोह अभी ने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और उससे चूमने लगा.........

अचानक हुए इस चुम्बन को पहले तोह सुलेखा समाज नहीं paayi......phir वह भी अभी का साथ देने lagi.......dono एक दूसरे के होंठो को चुम रहे the......issmein कोई वासना नहीं thi.....tha तोह बस एक दूसरे क लिए अतः प्रेम.....

अपने चुम्बन को तोड़ ते हुए अभी सुलेखा की आंखों में देखकर......

अभी - में ऐसे hi इतने देर से तुम्हे चुप करा रहा tha......lekin अब पता चल गया तुम कैसे चुप होती ho.......ab कभी दुबारा इसे करोगी तोह ऐसे hi चुप कराऊंगा.....

सकेखा अभी क सीने में अपना मुँह छुपकर......

क्या आप bhi......bade वह हो.....

अभी उससे कास क गले लगता है.....

अभी - सुलेखा अब तुम्हे घर छोड़कर मुज़हे जाना hoga......naaglok

सुलेखा - में भी आपके साथ चलूंगी

अभी - नहीं ......वह पता नहीं कौन कौन से खतरे honge..........tum घर पैट hi सुरक्षित हो.......

सुलेखा - मुज़हे ापर पूरा विश्वास है आप मुज़हे कुछ नहीं होने doge........aur में आपने सामने ....उस विषक को मरते हुए देखना चाहती हु.....

में - ठीक है ...toh....phir चले.........

अब नागलोक तक पहुँचने क लिए

अभी सुलेखा को लेकर टेलिपोर्ट हो gaya......lekin ये क्या वह फिर उसी तालाब और वॉटरफॉल क सामने पहुँच गया.......

तब अभी ने सोचा हो न हो नागलोक जाने का गुप्त मार्ग यही कही होना चाहिए........

अभी ने चारो तरफ नज़र daudayi......toh उस्सकी नज़र वाटफॉल तक जाकर रुक gayi........usske मैं में आया .....हो सटका है इसी में से वह गुप्त मार्ग हो जहा से सुलेखा यहाँ तक आयी........

अभी और सुलेखा उस जहरने क निचे पहुंचे और गिरते हुए पानी को पार करके देखा की उस जहरने क पीछे एक गुफा hai....toh दोनों उस गुफा में आगे बड़े.......

थोड़ी hi दूर जाकर देखा की गुफा वह बंद hai...........Abhi को वह किसी तरह की सात्विक ऊर्जा का आभास हुआ जो आगे का रास्ता रोके हुए थी.............

में - कौन है yaha.......jo गुप्त रूप से हमारा रास्ता रोके हुए है..........

सुलेखा उस बंद गुफा को देखकर कुछ कुछ समाज रही थी........

सुलेखा - माँ आप यही हो na.....pita shri....mein आप दोनों को महसूस कर सकती hu.....tabhi वह एक नीला प्रकाश प्रगट hua.......or उस्में से प्रगट हुए दो आकृतिया.......

जिन्हे देखकर सुलेखा की आँखों में आंसू आगये.......

सुलेखा - क्या पिताश्री क्यों किया आपने aise.........mera जीवन बचने क लिए आपने अपना जीवन का बलिदान क्यों दिया.........

(वह दो आकृतिया नागराज प्रासना और उलूपी की आत्माये थी जो जो अपनी आत्मशक्ति से इस द्वार को बंद किये हुए थी ताकि विशांक सुलेखा तक न पहुँच पाए......)

नप की आत्मा - पुत्री हम तुम्हे अपनी आँखों क सामने मरते कैसे देख सकते the......aur अब शरीर त्यागने क बाद हमे पता चला क तुम्हारा जनम क्यों हुआ hai......ab हम बहुत खुश है क संसार क एक महा उद्देश्य को पूरा करने क लिए पहली आहुति हमारी हुई........

पुत्री कोई भी धरम कार्य बलिदान क बिना पूरा नहीं हो सकता.......

हम बहुत खुश hai.....k तुम्हे..

अपना जीवन साथी मिल गया है......

हे श्रिस्ति क महा रक्षक ..... मेरी बेटी का ख्याल रखना ....अब हम मुक्त हो सकते है......

और दोनों की आत्मा आकाश में विलीन हो गयी........

उनके वह से जाते hi वह एक पोर्टल खुल gaya....Abhi सुलेखा को लेकर उस में चला gaya......aur जब बहार आया तोह देखा नालोक की एक पहाड़ी क पास दोनों खड़े है ......अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल से उस पोर्टल को बंद कर दिया ....अउ आगे बड़ा......

सुलेखा - यही पास में एक गाओं है .......हमे वह जाना chahiye......yeh नागलोक की राजधानी से बहुत दूर है.........

अपनी पहचान छुपाने क लिए दोनों ने .....अपना रूप बदल लिया ....अब अभी भी नागलोक का hi कोई युवक लग रहा था...........

दोनों चलते चलते उस गाओं में पहुंचे..........

तोह देखा की वह एकदम सन्नटा फैला हुआ tha........gaon में कोई नज़र नहीं आरहा था.......

दोनों एक घर क दरवाजे पर pahunche......aur आवज lagayi......badi देर क बाद एक बुड्ढे से व्यक्ति ने द्वार khola......uske चेहरे से दर और उदासी साफ़ ज़्हलकटी थी......

अपने सम्मन अजनबियों को dehkar..aur हैरान हो गया......

अभी - काका हम बहुत दूर से चलकर आये hai.......socha थोड़ा इस गाओं में आराम कर le.....lekin यह एक जो हमे सुना था बिलकुल उसस्के विपरीत है......

बुड्ढे व्यक्ति ने उन्हें चुप रहने का इशारा किया और अंदर ले आया....

दोनों को बैठते हुए......

काका - तुम लोग यहाँ क्यों आये ho......jaante नहीं यहाँ तुम जैसे जवान लोगो क लिए बहुत खतरा है....

अभी - काका हम तोह कलाकार है ..और यह मेरी पत्नी hai........humne यहाँ क नागराज प्रस्सना क बारे में बहुत कुछ सुना है क वह बड़े hi दयालु है ...तोह हम उनके सामने अपनी कला का प्रदर्शन करने आये है......

काका - बीटा वह अब पुराणी बात हो गयी इस समय यहाँ विषक और असुरो का राज चलता hai........Vishak एक शैतान का पुजारी hai......ussne नागराज को धोका देकर यहाँ का राज हटिया लिया है ......ना जाने वह और उनका परिवार अब कहा है.......

जब से उनका राज्य गया ...तब से यहाँ असुरो का आतंक मचा हुआ hai......Vishank से उनकी मित्रता है .....जब चाहे किसी को उठा लेते hai.....yaha क सारे जवान नाग उनके बंदी बने हुए hai........aur नाग कान्ये दसिया .......

सुना है रोज एक नाग कन्या की वह बलि दी जाती है.....

पूरे नाग लोक में इस समय आतंक फैला हुआ है....

उस बुड्ढे की बात सुनकर सुलेखा की आँखों में आंसू आगये.....

काका - बेटी तुम क्यों रो रही ho.......ab तोह हमारे आंसू भी सुख गए .....

ासुरो ने मेरे बेटे और बहु को हमरी असंख्य क सामने खा लिया और हमारे जवान पोते को उठा कर ले gaye.......abhi रात होने वाली है .....कल सुबह hi तुम दोनों भी यहाँ से चले जाना....

में - काका जाएंगे तोह अब यह असुर यहाँ से.......

अब उन् सब की मौत यहाँ आगयी है...

काका - नहीं बीटा ....तुम अकेले कैसे उनका सामना कर सकते हो...

क्यों अपने और अपनी पत्नी क प्राण संकट में दाल रहे हो....

तब मैंने अपना और सुलेकगा का रूप उनके सामने प्रगट किया

और उन्हें सब बता दिया और साथ hi अपने रक्षक होने का भी परिचय दिया....

काका - बहुत दुःख हुआ नप क बारे में jaankar....aur ख़ुशी भी हुई राजकुमारी जी को जीवित देखकर..

आपके बारे में मैंने अपने पूर्वजो से सुना था ...क ..एक दिन इस ब्रह्माण्ड का रक्षक नागलोक का राजा banega......kya आप वही है....

मैंने तब अपनी माया से अपने पूर्व जनम क रूप को प्रगट kiya.....jisse देखकर वह बुड्ढा हाथ जोड़कर घुटनो क बल बैठ गया.....

में - अरे काका आपके यह हाथ हमारे सर पर अच्छे लगते है....

और मैंने उन्हें हाथ पकड़कर उठा दिया.....

फिर मैंने अपने पांच तत्त्व की शक्ति से वह कुछ फल और खाने का सामन प्रगट किया और काका की मदत से उस गाओं क हर घर में पहुँचाया.....

रात को हम खाना खाकर कल से शुरू होनेवाले एक नए संघर्ष क बारे में विचार करते करते सोगये.....

अभी क लिए इतना hi.......

अगला अपडेट जल्द hi.......

 
अपडेट - 61



अब तक आपने देखा को अभी सुलेखा क साथ नागलोक पाहुवह गया hai......waha एक गाओं क एक घर से उससे यहाँ होनेवाले अत्याचार क बारे में पता चलता है



अब आगी.........

रात बिट गयी अब अभी ने आगे बढ़ने का socha.......kaka से मिलकर विदाई ली और सुलेखा क साथ वह से निकल गया............

नाग लोक क नगर में बिना रोक टोक क घूमने क लिए ......अभी ने मायावी विद्या से सुलेखा और अपने आप को असुर रूप में बदल लिया........


अब दोनों असुरो की तरह hi लग रहे the..........Dono ने इस रूप में आसानी से नगर में प्रवेश पा लिया था.........

उस नगर में जगह जगह असुर वह क वासिओ पर अत्याचार कर रहे थे.......

वह गाड़ियों में पशुवो की जगह वह क युवाओ को लगाया गया था ...जिनपर चाबुक से प्रहार किया जा रहा था......

.कही कोई असुर सारे आम किसी नाग कन्या को नग्न करके अत्याचार कर रहा था.......

कुछ को बिना किसी अपराध क सिर्फ मनोरंजन क लिए सर्रे आम मौत क घाट उतरा जा रहा था ....कुल मिलकर वह नर्क जैसा hi माहौल था......

ऐसे hi दोनों नगर में आगे बढ़ते badte.......Mahal तक पहुंचे...

जैसे hi दोनों महल क अंदर प्रवेश कर रहे थे ...की वह क पहरेदार ने रोका........

यह तुम दोनों कहा भीतर जा रहे हो.....

अभी - हम महाराज से मिलना चाहते hai.......unke लिए विशेष समाचार है........

प - क्या समाचार है .........यही batao......tum ाबदेर नहीं जा सकते हो........

अभी - नहीं हमे जो बताना है वो हिम महाराज से hi barayenge....aur तुम हिमे नहीं रोक सकते ...तुम्हे पता नहीं क महाराज ने हम असुरो क साथ संधि की है.....

प - क्या तुम्हे नहीं पता क नाग हो या असुर या महाराज का विश्वास paatra....andar वही जा सकता hai........jisske पास महाराज की दी हुई विशेष मुद्रा है..........

में - मुद्रा haa.....woh तोह thi........Abhi अपने कपड़ो में मुद्रा ढूंढ़ने का बातक करता hai.......arre लगता है उसी जगह छूट गयी जहा हम रात को रुके थे ठीक है अभी आता हु.....

अभी वह से निकल gaya.......aur नगर में कई असुरो से पूछताछ करने क बाद उससे पता चला क महल में वही प्रवेश कर सकता जिसके पास विशेष मुद्रा हो......

और वह मुद्रा सिर्फ महाराज क गुप्तचरों और महल क सैनको क hi पास hai......unmein से भी हर कोई महाराज से नहीं मिल sakta.......Vishak से केवल उसस्के विश्वास पात्र mantri.....ya मुख्या असुर योद्धा hi मिल सकते थे......

अभी ने कई बार टेलिपोर्ट होकर सीधा विषक क महल क अंदर जाने का प्रयत्न किया लेकिन ...वह महल इब्लीस की काली शक्तियों क सुरक्षा घेरे में था........

अभी ने पता किया क महल का मुख्या रक्षक कुछ रसिया किस्म का नाग है,

इस समय वह नाग कन्याओ क साथ मज़े करने रंग महल गया हुआ था

अभी ने अपनी माया से सुंदर सी नाग कन्या प्रगट ki.....aur सुलेखा क साथ रंग महल चल दिया.....

वह पहुंच का उस्सने देखा क बहुत से महल क अधिकारी नाच गाने क साथ मदिरा का आनंद उठा रहे है

कुछ उनमें से जबरदस्ती उन् नागकन्याओ को नग्न कर रहे है......

वह दृश्य सुलेखा से देखा नहीं गया .....लेकिन क्या करे....

अभी ने मुख्या अधिकारी क सामने अपनी मायावी कन्या को ले गया.....

और उससे प्रणाम किया......

माँ - कौन हो तुम ...और अप्सरा जैसी कन्या कौन है तुम्हारे साथ.......

में - हम दोनों आज hi पटल लोक से आये hai.....asur राज ने यहाँ क मुख्या अधिकारिओ क लिए विशेह उपहार भेजे थे ....में महल गया था लेकिन आप वह नहीं थे, वह से मुज़हे पता चला की आप यहाँ milege.....toh आपका यह उपहार आपको सौंपने यहाँ आ गया.......

माँ - अरे वह इतना सूंदर उपहार .....

में - इससे भी सूंदर और hai......ek कमरे की तरफ इशारा करते hue.....yadi आप चाहे तोह इन्हे भी देख सकते है.......

उस्सने हाथ में पकड़ी हुई सरब की सुराही क आकर की सोने की बॉटल राखी .....और जहटके से उठा ..

माँ - लेकिन मुज़हे चारो क चारो चाहिए.....

में - जरूर वह चलिए ...यहाँ और भी अधिकारी है ...अगर इन्हे पता चलेगा तोह आपको कुछ नहीं मिलेगा.........

माँ - ha...ha...chalo.....woh पूरा नशे में मस्त tha......aur जैसे hi उस्सने आगे कदम बढ़ाया.........

धदमममममम ........ayiiiiiiiii.....woooooo....ahhhhhh

और वह देखकर मैंने अपना हाथ अपने सर में maara..........aur मेरी हँसी निकल गयी

सोचा कुछ काम शांति से निकल लू लेकिन सब bekar......ab बल से hi काम लेना पड़ेगा......

आएये देखते है क्या hua......jaise hi वह अधिकारी आगे बढ़ा उस्का पेअर फिसल गया और सीधा वह उस सोने की बानी हुई बॉटल पर गिरा और वह बॉटल आधी उसस्के पिछवाड़े में घुस गयी. थी.......

यह सब इतने जल्दी हुआ की पहले तोह किसी को समाज hi नहीं aaya....toh कुछ की हास्य निकल गयी...

और कुछ ने इस कांड का मुज़हे और सुलेखा को दोषी मानकर अपने शास्त्र निकल लिए..........

और सुलेखा तोह उस अधिकारी की ऐसी हालत देखकर जोर जोर से हसने लगी.......

माँ - अरे देख क्या रहे हो haramiyo......uthao muzhe.....ahhhhh....

और पकड़ो इन् दोनी को सालो ने मेरी hi ले ली ahhhhhh......yeh बॉटल ....

और अब वह क कुछ उस्सको सँभालने क लिए बड़े और कुछ मेरे और सुलेखा की और.....

मैंने भी अब इनका खात्मा hi उचित समज़ह और अपनी तलवार प्रगट की ..

और पहले तोह एक लात उस बॉटल पर लगायी जो आधी उस अधिकारी क पिछवाड़े में घुसी thi......jo अब पूरी तरह अंदर घुस चुकी थी और उसस्के प्राण बहार ........

सुलेखा - इन्हे समाप्त करने का अवसर तोह मुज़हे मिलना chahiye.....kyu की यह सब मेरे पिता क दोषी है जो विषक क हाथो बिक गए.....

तोह मैंने एक तलवार उसकी और बड़ा दी और वही खड़ा होकर देखने लगा.....

अब सुलेखा तलवार को किसी निंजा की तरह लहराकर आगे बड़ी ......आगे से तभी 4 सैनिक उस्सकी और बड़े और चारो ने एक साथ हुम्ला कर दिया.....

जब तक उनकी तलवार उससे छू पाती वह उछलकर उनके पीछे पहुँच gayi.........aur बिजली क तेज़ी से पल भर में hi दो का सी धड़ से अलग किया

बाकि दो अभी मुड़े hi थे क सुलेखा की तलवार उनका पेट फाड् चुकी थी.....

मुज़से रहा नहीं गया सुलेखा की यह तेज़ी देखकर जोर से सिटी bajayi......waha मेरी नागिन बहुत खूब...

अपने साथी यो का ऐसा हाल देखकर बचे हुए पहले तोह थोड़ा दर गए लेकिन फिर सब एक साथ आगे bade........waha कुल मिलकर 25 क लगभग और बचे the.......sab एक साथ सुलेखा की और आगे बड़े.....

सुलेखा तलवार लहराते हुए आगे बड़ी और वह गूंज ुति सीखे एक भी तलवार उससे छू तक नहीं पा रही थी वह चारो तरफ सैनिको क टुकड़े काट कर गिरने lage......aur खून से वह जगह लाल हो गयी थी......

तभी एक सैनिक चुपके से सुलेखा क पीछे से तलवार का वार करने hi वाला था .......तभी मैंने उस्सको अपनी तलवार क एक वार से बिच से चिर दिया........

वह का दृस्य देखकर वह कहदी नाग कन्याये दर क मारे थार थार काँप रही थी.......

सारे सैनिक मारे जा चुके थे

सुलेखा ने चारो तरफ देखा तोह किसी को वह एक खम्बे क पीछे किसी को चुप्पे dekha......toh सुलेखा रणचंडी बनाकर वह पहुंची और जैसे hi अपनी तलवार उठायी

वह दोनों हाथ जोड़कर थार थार कांपते हुए जोर से चिल्लाया.....

नाहीई ....मत मारूओ मम्मूअजहू.......

और मैंने सुलेखा का हाथ पकड़ liya........tab तक वह जो दिखने में महल का कोई अधिकारी लग रहा tha......aage से गिला और पीछे से पीला हो गया था........

में - रुक जाओ मेरी नागिन .....यह हमारे काम आसक्त है.....

वह - मिएँ आपके क्याआ काम आसक्त hu.....kahi आप मुज़्ज़हए खाने वाले तोह नहीं होओओओ

देखो मुज़ह अकेले को खाकर आपको क्या मिलेगा.......

सुलेखा मेरी तरफ देखने lagi......yeh क्या बोल रहा hai......hum इससे क्यों खाएंगे.....

लड़ाई क दौरान वह यह भूल चुकी थी क हम अभी भी असुरो क भेस में है....

सहायद इसीलिए नागकन्याए .भी भयभीत थी........

तब हमने अपना वास्तविक रूप प्रगट किया सुलेखा को देखकर वह अधिकारी चौंक गया ....और सभी नाग कन्याओ क चेहरे पर ख़ुशी ......

वह - राजकुमारी ji....aap....muzhe माफ़ कर दे राजकुमारी ji.......main उस समय विशांक का साथ देने क लिए विवश था........

सुलेखा - विवश थे .......इतना बड़ा vishwasghat......pahele तोह .....मुज़हे ....पिताश्री और माता को मुक्त करने में मदत का नाटक किया aur.....jab हम निकल रहे थे तब विषक को तुमने सब कुछ बता diya.......Tumhe मैंने देखा था उस दिन विषक क साथ.....

तुम्हारे hi कारण मेरी बचपन की सखी विनय और माता पिता की मृत्यु मुज़हे देखनी पड़ी .....अब में तुम्हे जीवित नहीं देख सकती......

वह - मुज़हे क्षमा करे राजकुमारी ji......muzhe मत मारो ....में आपको महल में पहुंचे का मार्ग बता सकता hu.......aur विशांक क अंत का मार्ग भी......

में - ठीक है तोह फिर bolo.....hum तुम्हे जीवित छोड़ देंगे.....

वह - तोह suniye......aapne जिस अधिकारी को सबसे पहले मारा है वह महल क बाहरी सुरक्षा में तैनात सैनिको का अधिकारी था......

उसस्के पास एक मोहर है जिससे डीहकहकार वह महल क अंदर सेनानायक को साड़ी सुचना देने महल क भीतर जा सकता tha......aap उसका रूप लेकर महल में प्रवेश पा सकते है....

विषक ने अपने कमरे को और अपने आपको काली शक्तियों से सुरक्षित कर रहका hai...........isiliye उसका वध करना बहुत कठिन है..........

यदि फिर भी कोई किसी भी तरह उसका वध karde......toh उसकी रक्षा करने वाली काली शक्ति .......संपूर्ण नागलोक का विनाश कर देगी.....

में - ऐसे से तोह किस प्रकार उसका विनाश होगा

वह - एक रास्ता है .....जहा तक मुज़हे पता hai..........ki उसके कमरे में एक गुप्त मार्ग है जो किसी गुफा तक जाने का रास्ता hai......waha वह किसी काली शक्ति की उपासना करता hai........aur उसकी वह उपासना एक नागकन्या की बलि पर समापत होती है.........

यदि किसी प्रकार उस बलि को रोक दिया jaaye..........toh जो काली शक्ति उसकी रक्षा करती hai......wohi उस्सकी बलि ले लेगी............

लेकिन उस गुफा की रक्षा भयंकर मायावी असुर करते है.....

में - तुम्हे यह सब कैसे पता.....

वह - विषक ....को भोग क लिए और बलि क लिए में hi कन्या लेजाकर देता हु....

अब तोह आप मुज़हे मुक्त का डोज .....

में - हां क्यों nahi.....tumne जो इतनी महत्वपूर्ण जानकारी जो दी है......

सुलेखा मुक्त कर दो इससे........

और सुलेखा ने एक hi वार से उस्का सर धड़ से अलग कर दिया........

सुलेखा - मुस्कुराते हुए --- लो कर दिया मुक्त.....

में - मैं में --- बाप रे कितनी खतरनाक है मेरी यह नागिन .....विवाह क बाद न जाने मेरा क्या हाल करेगी....

सुलेखा - क्या सोच रहे ho....ab आगे क्या करे...

में - हड़बड़ाते हुए - ककककुछ nahi...bas ऐसे hi......waise तुम बहुत अच्छी लड़ती हो ....

सुलेखा - मैंने यह सब अपने पिता से सीखा था.....

उसस्के बाद मैंने पहले वाले अधिकारी का और सुलेखा ने आखरी वाले का रूप ले लिया और उनकी मोहरे लेकर चल दिए महल की और.....

आज क लिए इतना hi......


अगला अपडेट कल .......
 
अपडेट - 62



अब तक आपने देखा की कैसे , अभी और सुलेखा ने महल क अंदर जाने का मार्ग ढूंढ लिया hai......aur दोनों रूप बदलकर चल दिए महल की और...



अब आगे......

अभी ने जिसका रूप गहरा था उसका नाम था जीवा और सुलेखा ने जिसका रूप धरा उसका नाम था Madan......Dono महल में अब आसानी से प्रवेश कर गए.........

महल क अंदर पहुंचकर अभी को कुछ भरी सा महसूस हुआ........

शायद यह काली शकियो क तामसिक गन का प्रभाव हो.........

अभी सेनानायक क कक्ष में पहुंचा .....

यहाँ का सेनानायक इस समय भक्षासुर नाम का एक असुर tha.......jo महल में इधर से उधर चलकदमी कर रहा था.......

अभी - प्रणाम सेनानायक जी.....

बक - आओ आओ जीवा ......में अभी तुम्हे hi बुलाने वाला tha........abhi अभी महाराज से खबर आयी है क अपने राज्य में कोई दो घुसपैठिये घुस आये है .....महल की सुरक्षा और बढ़ा do.....aur अपने गुप्तचरों को चारो तरफ फैला दो.......

अभी - ji.....senanayak ......

तभी वह एक और असुर aaya......shayad यह कोई सेनानायक का कोई गुप्तचर हो...

बक - खो क्या खबर है......

गुप्त - जी मैंने पता लगाया , वह कोई दो असुर hai......jinhone रंग महल में हमारे सैनिको को मारा है.......

मुज़हे यह पहले hi आदेश था इसीलिए मैंने वह से निकलने से पहले hi उन दो अधिकारियों का शरीर नष्ट कर दिया था..........

लेकिन इतने काम समय में रंग महल में जो हुआ इन्हे कैसे पता लग gaya.....yeh देखकर में भी थोड़ा हैरान हो गया.....

मैं चाहता तोह अभी इनदोनो को समाप्त कर सकता था , लेकिन इतनी शीग्रता अभी उचित नहीं...

अभी वह से निकल कर महल क अंदर का हाल देखने छुपते हुए महल देखने लगा.......

और विशांक का कक्ष ढूंढ़ने लगा..........

महल में घूमते घूमते ....वह महल क एक कोने में एक कक्षा था जो शायद वह का भंडार घर ( अनाज का स्टोररूम ) था उसस्के बहार से गुजहरा तोह उससे वह किसी क होने का अहसास हो गया........

तोह उस्सने ज़हरोंके से वह जहाँककर देखा ...तोह waha......ek बुड्ढे से मंत्री क साथ चार योद्धा से दिखने वाले बैठे थे......

वह पांचो कुछ बोल नहीं रहे थे बस एक दूसरे को इशारे कर रहे थे..........

तब मैंने देखा की उस कमरे का द्वार बंद tha.....toh उसी ज़हरोंके को तोड़कर उस्में

से वह प्रवेश कर गया......

मुज़हे अचानक वह देखकर .....

पहले तोह वह घबरा gaye.......phir अपनी अपनी तलवार लेकर खड़े हो gaye......muzhe कुछ अजीब सा laga....kyu की इस समय में जीवा क भेष में था जो वह का एक अधिकारी था......

में - क्या कर रहे हो तुम यहाँ par.......aur मुज़हे देखकर यह तलवारे क्यों निकल li.......ab ...समज़ह तुम सब मिलकर यहाँ महाराज क विरुद्ध कोई षड़यंत्र कर रहे हो........

बुद्धा मंत्री - षड़यंत्र हम नहीं तुम जैसे लालची नागो ने किया है हमारे महाराज और राजकुमारी जी क साथ.......

उस्सकी बातो से मैं समाज गया की अभी भी नागराज प्रस्सना क वफादार इस महल में हैं ....

अभी वह कुछ और बोलता की मैंने उन्हें रोक diya.......aur अपने असली भेष में aagaya........aur अपने शक्ति त्रिस्क़ूल और मायावी विद्या से एक ऐसा घेरा बना लिया क अब यहाँ की बातें कोई भी कालीशक्ति सुन नहीं सकती.........

में - लगता है में सही जगह आगया.....

बुद्धा मंत्री (बाबा) - कुआँ हो तुम .......

में - बाबा में कोई ाकपका शत्रु नहीं हु .......में यहाँ राजकुमारी जी क साथ .....विषक क अत्याचारों से नाग लोक को मुक्त करने आया हु.......

बाबा - नाहीइ ज़हूत बोल रहे हो तुम .......

राजकुमारी जी अब जीवित नहीं hai.........tum जरूर उस विषक क hi कोई गुप्तचर ho........lekin हमारी खबर उस तक पहुँचाने से पहले hi हम तुम्हे समाप्त कर देंगे .......और बाबा ने उन् 4 योद्धाओ को इशारा किया......

अब वह चारो मेरी तरफ तल्वाक लेकर bade.......aur मुज़हे घेर liya.......abhi वह मुजहपर वस्र करते ....में उछलकर उनके घेरे क बहार aagaya....woh चारो आपस में तर्करा गए

में उनसे लड़ना नहीं चाहता था......

एक ने फिर बड़ी फुर्ती से मुजहपर हुम्ला किया तोह माइनर उसका हाथ पकड़ liya.....abhi में कुछ बोल पाटा की उस्सने एक जोरदार किक मेरे पेट में maari......jisse मेरे कदम थोड़े लड़खड़ाए ....लेकिन जल्द hi में संभल गया.......

मैंने सोचा यह ऐसे नहीं मानेंगे.

तभी दो तरफ से दो ने मुजहपर छलांग लगी दी ....में बिजली की फुर्ती से वह से हाथ गया और दोनों फिर टकरा गए........

अभी वह कुछ और कर पाते क मैंने पृथ्वी तत्त्व का प्रयोग करके वह कुछ बेले प्रगट की जिससे वह पांचो बंद गए....

में - आप सब मेरी बातो पर विश्वास क्यों नहीं का rahe......ki राजकुमारी सुलेखा अभी जीवित hai......mein अभी उन्हें लेकर आपके सामने आता hu......aur हां इस बंधन क लिए क्षमा करे...

यहाँ सुलेखा ने मदन का रूप ले लिया था और महल क अंदर घूमते घूमते सोच hi रही थी की क्या किया जाए.......

तभी उससे वह विषक का एक कुटिल मित्र कनक , जिससे वह जानती थी 10 सैनिको क साथ आता दिखाई diya........jo उस्सकी तरफ hi आरहा था.....

अब यह विषक का सलाहकार बन गया था.....

कनक - अरे मदन .....उस तरफ कहा जा रहे ho.....mein तुम्हे hi ढूंढ रहा tha.....aao तुम्हारे कक्ष में hi चलकर बात करते है....

सुलेखा जो मदन क भेष में थी - में तोह बस ऐसे hi.......cahliye आप आगे चलए huzoor......mein आपके साथ कैसे चल सकता हु .........

और फिर कनक आगे आगे और सुलेकगा पीछे पीछे.....

एक कक्ष में पहुँच gaye.......Sainiko को बहार hi रोक दिया और कनक और नकली मदन दोनों अंदर चले गए ......

सुलेखा - कहिये हुज़ूर .......आज्ञा कीजिये में आपकी क्या सेवा कर सकता हु.......

कनक - मदन आज्ञा महाराज की है इस बार उन्हें बलि क लिए रोहिणी नक्षत्र में जन्मी कन्या बलि क लिए chahiye......yeh उनकी आखरी बलि है......

पहले तोह उन्होंने इस काम क लिए राजकुमारी सुलेखा को चुना tha......lekin अब वह नहीं rahi.......iss बलि क बाद हमारे महाराज को कोई भी शक्तिशाली शत्रु नागलोक में महाराज का सामना नहीं कर पायेगा.....

और उनके मनोरंजन क लिए भी 2 और सूंदर कन्याओ का प्रबंद करना होगा.......

और साथ साथ में मेरा भी ध्यान रखना...........

इस्सके लिए तुम्हारे पास कल तक का समय hai...........aur ध्यान रहे सावधानी se......mahal में कोई अनजान शत्रु घुस आये है.........

सुलेखा - जी हुज़ूर .....में पूरा प्रयत्न karunga........aap चिंता न करे......

और फिर कनक वह से चला गया........

उसस्के जाने क बाद सुलेखा सोचने लगी की कितने बिच है यह लोग .....न जाने kitni...maasum कन्याओ की बलि दी होगी इन् दुष्टो ने.....

अब क्या किया jaaye......Abhi कहा हो aap......jab दिल से उस्सने अभी को pukara......toh उसकी पूजकर अभी तक पहुंची और वह वह टेलिपोर्ट होकर पहुँच गया......

अभी को अपने सामने देखकर सुलेखा ने उससे गले लगा लिए

अभी - सुलेखा चलो तुम्हे किसी से मिलाना है.....

सुलेखा - किस्से ....

अभी - शायद तुम्हारा कोई अपना हो

फिर में सुलेखा को लेकर उस कमरे में चला गया ......जहा उन् 5 लोगो को बांधकर आया था....

सुलेखा इस समय भी मदन क रूप में थी

जिससे देखकर बाबा और ग़ुस्से में हो गए ...

बाबा - पापी nich.....tu....bhi इसके साथ मिला hai.......na जाने कितनी नागकन्याओ को तूने अपनी लालच की वेदी पर बलि चढ़ाया hai.....thu है तूज़ःपर.....

में - अरे अरे बाबा यह वह नहीं है जो आप सोच राहु ho......tabhi मैंने सुलेखा क असली रूप को उनके आगे प्रगट किया........

सुलेखा को अपने सामने देखकर उन्हें विश्वास नहीं हुआ .......

बाबा को देखकर सुलेखा की आँखों में आंसू आगये.....

सुलेखा - इन्हे ऐसे बंदकर क्यों रहका hai......mere नाना जी क देहांत क बाद इन्होने hi मेरी माँ का पालन किया tha.....aurvmere लिए यह नाना जी hi hai.....iss बात को विषक नहीं जानता.......

तब मैंने उनके सारे बंधन खोल दिए .....

सुलेखा ने आगे बढ़कर बाबा क पेअर chuye....toh उन्होंने उससे गले लगा लिया अपनों की मौत को अपने आखो के सामने देखने क इतने दिन बाद किसी अपने से मिलकर सुलेखा को रोना आगया

बाबा - सर पर हाथ फेरते hue.....Mat रो मेरी bacchi......mat ro....mein तेरी कोई सहायता नहीं कर बीटा मुज़हे माफ़ kardo........jab अपने नगर में मुज़हे यहाँ का समाचार मिला तोह में तुरंत यहाँ aagaya.....lekin तब तक सब ख़तम hi चूका tha.......toh मैंने बदला लेने क लिए यहाँ नौकरी कर ली और भीतर भीतर अपनी योजना पर काम कर रहा हु.......

लेकिन यह विषक बहुत शक्तिशाली hai....aur नागमणि भी िस्डके पास है इसीलिए हम अभी तक कुछ कर नहीं सके......

लेकिन बेटे तुम यहाँ कैसे .....और यह कौन है.......

तब मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया.......

मेरा परिचय पाकर उनकी आँखों में चमक आगयी.........

में - बाबा आपके पास इस समय इस महल में कितने योद्धा है......

बाबा - 250 क करीब सैनिक जो नागराज को अपने पिता सामान मानते थे

में - उन्हें किसी भी तरह आज रात इस कक्ष में एकत्रित कर लो......

यह कक्ष मेरे सुरक्षा घेरे में hai......koj भी आसुरी शक्ति यहाँ नहीं पहुँच सकती........

तभी बहार गलियारे में से बहुत सी आवाजे आने लगी थी .........

इब्लीस की शक्तियों द्वारा विषक को महल में किसी शत्रु क आने का पता चल गया था.......

और उस्सने अपने कमरे में स्थित काली शक्तियों क क्रिस्टल में देखकर पूरे महल देख दाल लेकिन उससे कही कोई नज़र नहीं आया.......

उसने सारे महल क चप्पे चप्पे परसुर तैनात कर दिए........

और आदेश दे दिया की सारे नाग सैनिको को और महल में कोई भी अनजान दिहे उस्सको बंदी बनाया जाए.........

सारे नाग सैनिको को ढूंढ ढूंढ कर बंदी बनाया जाने laga........aaj उन्हें आपने दयालु नागराज की याद आने lagi......aur अपने आप से घिन होने लगी की कैसे लालच और दर क वश में उन्होंने अपने पिता सामान राजा को hi धोका diya....ab उहने उसी की सजा मिल रही है.....

कुछ असुरोने भंडार घर का दरवाजा भी खोल कर dekha......lekin अभी क सुरक्षा घेरे क कारण उन्हें वह कुछ दिखाई नहीं दिया......

अभी - लो baba.....woh ..कहावत hai..na

विनाश काळा विपरीत बुद्धि......

जो नाग सैनिक विषक क लिए काम कर रहे थे अब वह उन्हें hi बंदी बनाने पर तुला है.......

अब यह सब हमारे काम आसक्ति है..........

में - यहाँ कुल मिलकर कितने नाग सैनिक होंगे बाबा......

बाबा - बीटा यही कोई 5000 क लगभग.....

फिर मैंने अपनी योजना सुलेखा और वह उपस्थित चारो को बतादि.....

और उसी कमरे में रात होने का इंतजार करने लगा......

रात क समय असुरो की भोग और वासना की प्रवृति बढ़ जाती है .....और इसदि बात का हमें लाभ उठाना था.........

और उस समय विषक भी गुफा में अपनी पूजा में व्यस्त hoga......ktuki तामसिक पूजा रात को hi होती है......

जैसे hi रात hogayi.......manie माया से असुर रूप धारण किया .....और उस जगह पहुँच गया जहा नाग सैनिको को बेड़ियों में बांधकर रखा गया था......

वह पहुंचकर मैंने पहले अपने पांच तत्वों और माया की शक्ति मिलकर कई सूंदर कन्याये प्रगट ki.......jisse देखकर hi ासुर मोहित हो जाए........

यदि सिर्फ मायावी विद्या से कन्याओ का निर्माण करता तोह उनको छूटे hi असुरो को पता चल जाता की यह माया hai.....isiliye मुज़हे पंचतत्वों की शक्ति का भी उपयोग करना पड़ा......

उन् कन्याओ को मदिरा क साथ वह तैने हर असुर क पास भेज दिया ......

थोड़े hi देर में सब नशे और वासना में धुत हो गए और इस बात का फायदा उठाकर मैंने उन् नाग सैनिको को मुक्त करके उसी कक्ष में ले आया......

और वह अपनी माया से निर्मित सैनिको को छोड़ दिया.......

सारे सैनिक अपने द्वारा किये गए नागराज क प्रति विश्वाश घट क लिए शर्मिंदा थे.......

अब हमने आगे जी योजना बनायीं......

ऐसे hi वह रात बीती......

और हुआ एक और युद्ध क आगाज़ का सवेरा

सुलेखा - कनक ने मुज़हे जिन कन्याओ का प्रबंध करने को बोलै था उस्का क्या kare......kyu क यही एक मार्ग है .....विषक तक पहुँचने का......

में - तुमने ठीक पहचाना Sulekha....issje लिए में मायावी कन्या का भी निर्माण नहीं कर sakta......kyu की विषक देखते hi पहचान जाएगा.....

सुलेखा - एक रास्ता hai......aap मदन का रूप लेकर मुज़हे hi ले जाईये .......मुज़हे देखकर विषक का और बातो पर ध्यान नहीं जाएगा......

में - नहीं सुलेखा में तुम्हे खतरे में नहीं दाल सकता....

सुलेखा - आप ऐसा क्यों सोचते hai.....Tridevo ने मुज़हे आपके लिए चुना hai.....muzhe पूरा विश्वास है क आपके रहते मुज़हे कुछ नहीं hi सकता.........

अब यही एक मार्ग hai.......poore नागलोक की सुरक्षा क लिए हमे यह करना hi होगा....

फिर मैंने गक और राकेश को याद किया दोनों वह प्रगट hovgaye.....maine उन्हें यहाँ क सैनिको को साथ लेके महल क ासुरो का नाश करने को कहा ....

और खुद मदन का रूप लेकर शिवानी को लेकर कनक क कमरे की और बढ़ चला....

अभी क लिए इतना hi.....

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 63

अब तक आपने देखा अभी ने गक और राकेश को कैद से मुक्त किते गए सैनिको को लेकर महल को असुरो से मुक्त करने का कहकर .......मदन का रूप लेकर अभी सुलेखा को लेकर चल दिया अपने लक्ष्य की और.....

अब आगे.........

अभी क जाने क बाद राकेश ने नाग सेना की कमान संभल li......GK ने भी अपने दानवो को प्रगट kiya......ab समय था हुम्ला करने का......

राकेश और गक ने सैनिको को दो डालो में बाँट diya.......aur हमले की योजना बनने लगे.......

उन्हें पता नहीं था क इस समय कितने असुर महल में है.......

यहाँ में सुलेखा को लेकर कनक क काश क बहार pahuncha......Toh वह भी असुरो का प्रहर tha.......Hume देखकर असुरो ने हमे घेर लिया......

में - अरे हम क्यों घेर रहे ho......hum महारज की hi आज्ञा से यहाँ आये hai......yadi आपको संदेह हो तोह कनक से पूछ कर देखो ......उन्हें बताना की मदन किसी कन्या को लेकर आया है....

तब उनमें से एक अंदर gaya........aur थोड़ी देर में बहार आया......

असुर - जाओ अंदर...

और में सुलेखा को लेकर अंदर गया.......

मेरे साथ सुलेखा को देखकर hi कनक उछाल कर खड़ा हो गया

कनक - ईएह .....तुवोः ......R..ajkumari hai.....yeh तुम्हे कहा मिली......

में - में पास hi गाओं में आपके बताये अनुसार बलि क लिए कन्या ढूंढ़ने गया था क मुज़हे वह यह मिल गयी........

.जब मैंने इनसे बात की तोह पता चला की इनकी यादास्त चली गयी hai.....ab इन्हे कुछ भी याद नहीं.....

कनक - वह ...मदन ..वह तुमने...

.kya..kiya..hai..tum...nahi..jaante......

राजकुमारी को देखके महाराज कितना खुश होंगे.....

तुम जाओ ....अब तुम्हारा काम हो गया......

अभी महाराज का सन्देश आते hi में इससे लेकर वह चला जाऊँगा.....

में - में तोह नहीं जाऊँगा जाओगे तोह तुम ...और वह भी नरक meine.......aur अपनी तलवार प्रगट की.......

कनक - कौन हो तुम ........

में -- तुम्हारी और तुम्हारे मालिक की maut.......aur इससे पहले वह कुछ करता में अपनी स्पीड से बड़ा और उसका सर धड़ से अलग कर दिया......

कनक मर चूका था तोह अब मैंने अग्नि प्रगट अपनी ऊर्जा से उसस्के शेर को पांच तत्त्व में विलीन कर दिया.....

और खुद उस्का रूप लेकर ....विषक क सन्देश की प्रतीक्षा करने लगा.....

यहाँ अब राकेश और गक क दो दाल असुर सेना पर हुम्ला करने क लिए तैयार कर दिया ...

गक ने सभी सैनिको को अपने यक्ष विद्या से कवच दे दिया था.......

अब उन्होंने गलियारे से निकल कर हुम्ला शुरू कर दिया

राकेश और गक की टीम न एक साथ तीर चला दिया उन् असुरो क ऊपर जो वह महल क गलियारे में थे ......

अचानक हुए हमले से वह भाग डैड मच गयी...….

गक और राकेश ने भी फायर मैजिक से कई आग क गोले बना कर फेकना शुरू किया..., और आगे बढ़ने लगे…….

दोनों दाल महल क गलियारे से निकल कर बहार की की और आरहे थे.........

गक और राकेश क फायर बॉल किसी असुर को नुकसान नहीं पंहुचा प् रहे थे, पर उस महल को बहुत नुकसान पहुंचाया था,

जहा वो सभी सभी असुर अचानक हुए हमले से अपने आपको सुरक्षी करने छुपे हुए थे,, ………..

राकेश अपने दाल क साथ , महल क बड़े से हॉल तक पहुँच गया था .....

राकेश ने बहार से hi अपना मैजिक सा उस का आगे वाला हिस्सा भी उदा दिया, जिसकी वजह सा अब असुर सैनिको क पास छुपना छुपाना की जगह ख़तम हो गयी

और दोनों तरफ सा हुम्ला उनका लिया खतरनाक हो गया……..

अभी वो इन् हमले सा संभाले भी नहीं था की ....

गक दाल क तीर आग बरसते हुआ, आकर उन्हें लगे…..

उनका एक एक साथी तीन तीन तीर चला रहा था और उनकी टीम का हुम्ला भी बहुत खतरनाक हो गया था……

देखता hi देखता लड़ाई सुरु होना का कुछ 15 मिनट में hi आधे से ज्यादा असुर मारे गए……..

असुरो को इतने आसानी से मरते देहकर सभी जोश में आ गए था……

असुरो को मारते मारते राकेश और गक क दाल महल क प्रांगण में आकर एक होगये.....

और अपनी विजय क जोश में नारे लगाने लगे......

कहता है न जोश में आदमी होश खो बैठता है……

बस यही हुआ यहाँ भी……. इस जोश hi जोश में सभी लोगो का ध्यान भटक गया और उन्होंने उनकी तरफ आता हुआ हुम्ला नहीं देखा……

राकेश को कुछ गड़बड़ लगी .....की इतने आसानी से असुर कैसे मारे गए.......

अभी वह यह सोच hi रहा tha....k ...

एक बड़ा सा आग का गोला उनके दाल की तरफ आ रहा tha..........ki

तभी वह एक प्रकाश से कोई प्रगट हुआ और उस गोले की दिशा बदलकर उसी और कर दी जहा से वह गोला आरहा था......

अब देखते है अभी क्या कर रहा है.....

अभी को कनक का रूप धारण किये हुए अभी कुछ hi देर हुआ tha.....ki तभी दो असुर अंदर आते है....

असुर - महाराज विषक ने आपको बुलाया ही चलिए.....

और अभी सुलेखा को लेकर निकल गया विषक क कक्ष की और

जाइए hi द्वार पर पहुंचा तोह द्वार खुल गया ...और दोनों ने भीतर प्रवेश किया ....

अंदर प्रवेश करते hi वह dwar.....band हो गया और उसके जगह एक दीवार आगयी ...

जैसे क वह द्वार वह पर था hi नहीं.....

अंदर आते hi आवाज aayi.....aao मित्र आओ आज तुम्हे वह काम कर diya.....jo में चाहकर भी इतने दिनों से न कर सका.......

कैसे हो राजकुमारी सुलेखा .....बहुत खुसी हुई तुम्हे जीवित देखकर..... ...

अभी देखा क एक काले चोंगे में कोई वह एक आसान पर बैठा हुआ है उसके सामने एक टेबल पर क्रिस्टल का गोला सा है......

अभी - महाराज राजकुमारी जी की यादास्त चली गयी hai......unhe अब कुछ भी याद नहीं है.....

विषक - यादाश्त राजकुमारी की गयी है तुम्हारी गयी hai...mitra कनक ....या.. RAKSHAK.....kyu राजकुमारी सही कहा na......ha....ha...ha....

जब अभी ने देखा की उनकी सच्चाई प्रगट हो गयी hai.....toh उस्सने अपनी गति का प्रयोग करके विषक तक पहुंचने की कोशिश की......

लेकिन यह क्या अभी क कदम जैसे वही चिपक कर रह गए.....

तब तक वह सुलेखा क पास पहुँच चूका tha.....Aur अपनी तलवार निकलकर उसके गार्डन पर रख दी थी....

विषक - न ...रक्षक ...na.....koi चतुराई नहीं......

यह कमरा मेरे मालिक की शक्तियों से सुरक्षित है ...तुम यहाँ कुछ नहीं कर सकते.......

तुमने क्या सोचा तुम इतनी आसानी से मुज़ह तक पहुंचोगे और मुज़हे समाप्त कर doge......ha...ha...ha..aur मुज़हे पता भी नहीं चलेगा.......

उफ्फ्फ्फ़ कितने मुर्ख हो तुम ...रक्षक..

जब तुमने सुलेखा क साथ नागलोक में प्रवेश किया तब से hi मेरी नज़र तुम दोनों पर है........

आज में अपने मालिक को यह आखरी बलि चढ़कर शक्तिशाली बन jaaunga.....ha...ha...ha..

अभी - विषक .....मुज़हे इस तरह विवश करके तुम अपने आपको शक्तिशाली समाज रहे हो.....

समर्थ है तोह मुजह्से युद्ध करो.....

विषक - धैर्य रखो रक्षक तुम्हारी ये इच्छा भी पूरी होगी......

पहले में अपना काम तोह कर lu..........aur हां यदि इतना hi अपने बल और विद्तय पर घमंड है तोह

राजकुमारी को बचा कर दिखाओ ......

और इतना कहकर वह सुलेखा को लेकर एक दिवार में अदृस्य हो गया..........

और अभी केवल पुकारता रह गया......

लेकिन जाने से पहले सुलेखा क चेहरे पर मुस्कराहट thi.....jisse विषक देख नहीं पाया

अब देखते है दूसरी तरफ क्या हुआ जहा राकेश था......

राकेश और गक क दाल अपनी जीत में मगन थे ....क तभी एक बड़ा सा आग का गोला उनकी तरफ आया .....जिसपर किसी का ध्यान नहीं था ..

तभी वह कोई प्रगट हुआ और अपनी ऊर्जा से उस गोले को उसी दिशा में मोड़ दिया ....जहा से वह आया था......

उस अचानक हुए हमले और आने वाले शक्श को देखकर गक सब समाज gaya........aur सामने कड़ी ....थी..... शिवली ....जिसने उस हमले से सबको बचाया था......

और वह गोला जहा गिरा वह तेज़ धमाका हुआ.......

dhadam.......aur गुंजी सीखे असुरो की.....

हुआ या था की जिन असुरसनिको को अब तक राकेश और गक की सेना.... मार रही थी असल में वो असुरसैनिक hi नहीं थे…….

उन्हें तोह विषक ने इब्लीस की माया से ... बनाया था ....उन् सबको उलझने क लिए……. उसकी असली असुर सेना तो गुप्त रूप से उन्हें चारो तरर्फ से घेर रही थी.....

उसमें थे सभी तरह के असुर सैनिक और एक दम शक्ति शैली…….

अब राकेश और गक की साड़ी naagsena....Charo तरफ से असली सेना से घिर चुकी थी......

राकेश - ने शिवली को देखकर प्रणाम किया.....

गक - शिवली बीटा तुम यहाँ......

शिवली - हां काकश्री ......जब आप एक शक्तिशाली वरदान प्राप्त यक्ष होकर भी..... युद्ध क जोश तामसिक आसुरी माया को न जान सकते तोह आना पड़ा........

गक - क्षमा करना putri......mein युद्ध की कल्पना से hi अधीर हो गया था.....

एक बार फिर सा दोनों तरफ सा हमले शुरू गए…......

असुरो की अब असली सेना युद्ध में thi.....aur उनकी उस सेना का सञ्चालन कर रहे थे ....2 जुड़वाँ असुर जो दिखने में बिलकुल एक जैसे थे.......

राकेश ने अपनी भयंकर मारक ऊर्जा क गोलों से..... पहेली रौ क असुर सैनको मारने क लिया ...इस्तेमाल करके.... उनका काम ख़तम कर दिया……......

उधर से भी बड़े बड़े आग क गोले और बड़े पाथेर इनपर आकर गिरने लगे........

सिवली भी अपनी ऊर्जा से उन्हें बचने का प्रयत्न कर रही थी और साथ साथ में उन् असुरो पर वॉर भी......

इस्स्में फिर भी बहुत से नाग सैनिक भी वीरगति को प्राप्त हो गए......

यहाँ गक भी अपनी ऊर्जा और अपने प्रगट की हुई ऊर्जा से उनका सामना कर रहा था.....

जिससे काफी सारे असुर सैनिक मारे गए…….

अपने सैनिको को मरता देख अब वो दोनों जुड़वाँ महा असुर ... खुदको नहीं रोक सके और दोनों एक साथ आ गए लड़ना क लिया……

उन्होने आता hi हुम्ला सुरु कर दिया…….. (यहाँ उनको ज1 ार ज2 लिखूंगा .)

ज 1: उसने सबसे पहले अग्नि तत्त्व की भयंकर ऊर्जा से हुम्ला कर diya.....GK क दाल पर

ज 2: उसने भी अग्नि तत्त्व की ऊर्जा का hi इस्तेमाल karke.......Rakesh की टीम पर आग क बने तीर छोड़ना सुरु कर दिया……..

इस प्रहार का उत्तर न तोह गक क पास था और न hi राकेश क paas......aur शिवली बाकी असुरो से लड़ने में व्यस्त थी.......

इससे पहले वह वॉर उन् नाग सैनिको तक पहुँचता ...........उन ाग्नि ऊर्जा क गोले और अग्नि तीर ......कही से आती हुई भयंकर जाल तत्त्व की ऊर्जा से takrayi......jissase दोनों हमले बेकार हो गए.....

राकेश और गक सोचने लगे क किस्सने इस वॉर से उनकी रक्षा की.....

और अपना हुम्ला बेकार होता देख दोनों जुड़वाँ असुरो को समाज नहीं आया की

किसने उनका हुम्ला किसने बेकार कर दिया…..

अभी क लिए इतना hi

अगला अपडेट कल

रीडर्स क लिए.......


क्या आप में से कोई बता सकता है क असुरो का हमला किसने बेकार किया......



 
Back
Top