Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 34 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

आखिरी पोस्ट पेज ४२० पर

प्लीज पढ़ें, लाइक करें और कमेंट दें

भाग ४९ -

मस्ती - माँ, अरविन्द और गीता की

( माँ -बेटा और बेटी - छोटा परिवार -सुखी परिवार )
 
Last update is on Page 420

please do read, like and comment.

a three some among, mother, son and daughter,
 
जोरू का गुलाम

भाग १७९ -

कैसे ननदिया होगी गाभिन और मिसेज मोइत्रा के रसगुल्ले


अपडेट पोस्टेड

Erotica - जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६ बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ बुच्ची 2... लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से लो खाओ खीर, अपनी बहिनिया के दूध के कटोरों से इमरतिया ने दोनों को अलग किया, थोड़ी देर में बुच्ची हंसती खिलखिलाती फर्श पर लेटी थी, अपने उभारों को उचकाती और...

exforum.live

please do read, like and share your comments.
 
Erotica - रंग -प्रसंग, कोमल के संग

भाग ६ - चंदा भाभी, ---अनाड़ी बना खिलाड़ी Phagun ke din chaar update posted please read, like, enjoy and comment तेल...

exforum.live

Please do read

रीत की प्रीत

and share your comments
 
रीत करन -चंद्र ग्रहण

कभी कभी रिश्तों को नज़र लग जाती है

पूनम के के चाँद पर ही ग्रहण लगता है और चांदनी थर्राने लगती है

please do read these posts in Rang Prasang and share your feelings, thanks.

Erotica - रंग -प्रसंग, कोमल के संग

भाग ६ - चंदा भाभी, ---अनाड़ी बना खिलाड़ी Phagun ke din chaar update posted please read, like, enjoy and comment तेल...

exforum.live
 
पिछला भाग -

भाग ४९ -पृष्ठ ४२० - मस्ती - माँ, अरविन्द और गीता की

अगला भाग

भाग ५०

माँ संग रगड़ाई -

अरविन्द, गीता और माँ
 
भाग ५०

माँ का नाइट स्कूल

माँ -गीता -अरविन्द
 
भाग ५० - माँ का नाइट स्कूल

माँ -गीता -अरविन्द





how to download high quality images from facebook

माँ रसोई में चली गयी खाना गरम करने के लिए, लेकिन वहां से भी कान पारे, मेरी चीखें जरा भी कम हुयी तो वहीँ से भैया को कभी डांट लगाती तो कभी उकसातीं, और वो गाँड़ मारने की रफ्तार बढ़ा देता,...

जब माँ खाना ले के निकली आधे घंटे बाद तो उसी समय भैया मेरी गाँड़ में झड़ रहा था, हालत ये थी की जमीन पर चूतड़ रख के बैठा भी नहीं जा रहा था, माँ ने अपने हाथ से मुझे खाना खिलाया खूब दुलार से, ... भैया ने भी,... खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था दोनों ने पकड़ के मुझे सहारा देकर उठाया,... भैया चिढ़ा रहा था माँ ने उसे भी डांटा,..

पर छुटकी उसे तो रात का किस्सा सुनना था ये तो बस चटनी थी, और उसने कैंची चलाई और गीता से बोला,

:" दीदी तो उस दी क्या रात को कुछ नहीं आपने सिर्फ आराम किया ?"





गीता बड़ी जोर से खिलखिलाई और उस कच्ची अमिया, छुटकी को गले में लिपटा के कस के पहले चुम्मी ली और कचकचा के गोरे गुलाबी गाल काट लिए।

" अरे नयकी भौजी क छुटकी बहिनिया, रोज तोहार गाँड़ बिन नागा यह गाँव में जब मारी जायेगी न तो समझोगी। एक दो बार जीजा डबल जीजा से चुदवाने, गाँड़ मरवाने से कुछ नहीं होता, अभी तो आयी हो,... अरे ओह दिन नहीं, रोज बिना नागा रात भर,... रात में तो माँ का नाइट स्कूल चलता था, ये ये बात माँ ने सिखाई मुझे, क्या बताऊँ, ... माँ ने ऐसी एक्सरसाइज सिखाई है की दिन रात कोई चुदवाये गांड़ मरवाये, कितने भी मोटे मोटे मूसल से, चोदने वाले को लगेगा पहली बार चोद रहा है,... चूँची भी ढीली नहीं होगी मिजवाने दबवाने से,... और सिर्फ मुझको भी नहीं भैया को भी, लौंडिया को बिन चोदे कैसे खाली छू के , वो भी बिना चूत में हाथ लगाए कैसे पागल कर दो , खुद ही लौंड़ा अपने हाथ से पकड़ के अपनी बिल में घुसवायेगी, सिर्फ गाँड़ मार के कैसे लौंडिया को झाड़ दें,... "





छुटकी बहुत ध्यान से कान पारे गीता की बाते सुन रही थी, फिर छोटी बच्ची की तरह जिद करके बोली,

" दीदी, मुझे भी चाहिये, मुझे भी सीखना है,.... "

गीता ने उसे दुलार से चिपका लिया और कच्ची अमिया दबाती बोली,...

" अबे स्साली तुझे तो सिखाऊंगी ही, मेरे गाँव के लौंडो का फायदा होगा, उन्हें मजा मिलेगा तुझे दर्द,.. चल अभी एक ट्रिक बताती हूँ फिर रात का माँ के साथ का किस्सा, चूत टाइट करने के लिए माँ ने सिखाया था, दिन में चार पांच बार, तुझे तो कम से कम दस बार करना होगा, ... सुन, .. माँ बोली, जब मुतवास लगती है बड़ी जोर से लेकिन क्लास में हो या जा नहीं सकती हो तो का करती हो,

छुटकी खिलखिलाती हुयी बोली,.. अरे कस के बिलिया भींच लेती हूँ और का, एक बूँद बाहर न निकले जिससे,...

चूम के गीता बोली,...

बस एकदम यही करना है कम से कम दस बार और घडी देख के दो मिनट तक पूरी ताकत से और जब ढीली करो तो एक झटके में नहीं बहुत धीरे धीरे पूरे एक मिनट में और यही काम चार पांच बार करो,... कहीं भी कभी भी, दिन में दस बार,... इससे चुदवाने में भी बड़ा मजा आता है , जब लौंडे का औजार पूरा घुस गया हो, तो बस धीरे धीरे कर के दबोच लो,... निचोड़ लो स्साले को,.. बुरिया में ऊँगली डाल के प्रैक्टिस कर, माँ मुझे करवाती थीं, अगवाड़े पिछवाड़े दोनों ओर, ... मैं भी करवाउंगी तुझे, ... तुझे छोटी बहन बनाया है स्साली तो सिखाना ही पड़ेगा लेकिन चल पहले रात का किस्सा बताती हूँ, बहुत सीखेगी तू। "

और गीता ने किस्सा सुनाना शुरू किया, किस्सा नहीं पूरा का पूरा सच,

" रात में सबसे पहले मैं और माँ मिल के अरविन्द भैया की ऐसी की तैसी करते थे,...

माँ मुझे कहती थी उसके सामने भैया का मुंह में ले के चूसूं,...ऐसे नहीं सिर्फ होंठों के जोर से बिना हाथ लगाए, खूब धीरे धीरे भैया का पूरा सुपाड़ा गप्प करना, और साथ में आँखे मेरी भैया को लगातार देखती रहती थीं उसे चिढ़ाती उकसाती थीं, और सपड़ सपड़ चाट के जब सुपाड़ा खूब गीला हो जाए तो बस, मुंह हटा लो और तड़पने दो,...





फिर मैं सिर्फ जीभ की टिप से अरविन्द भैया के मूत वाले छेड़ में घुसा के खूब सुरसुरी करती थी, बेचारा गिनगीनाता रहता, तड़पता रहता, और मैं सिर्फ जीभ की टिप से मूत वाले छेद से हलके हलके पहले मोटे तड़पते सुपाड़े पर फिर उस चमड़े के मोटे मूसल के बेस तक थूक लगा के सहलाते, रगड़ते और बॉल्स तक,...

" और माँ क्या करती थीं " छुटकी ने मजे लेते हुए पूछा।

" माँ तो और,... " गीता ने किस्सा आगे बढ़ाया,

"थोड़ी देर में हम माँ बेटी मिल के अरविन्द भैया के खूंटे का मजा लेते, कभी गन्ना वो चूसती और रसगुल्ला मैं, कभी एक साइड से वो जीभ लगा के और दूसरी साइड से मैं जीभ लगा के चाटतीं,.. चाटते चूसते कभी माँ, अरविन्द भैया को दिखा दिखा के मेरे होठं चूसने लगती , लेकिन अरविन्द भैया को छोड़ती नहीं थी जब हम वो की जीभ होंठ लंड को छोड़ देती तो माँ की उँगलियाँ मैदान में आ जातीं और वो भैया के खूंटे को पकड़ के मुठियाने लगती और उनकी उँगलियाँ जब खूंटे को पकड़तीं तो मैं भैया की बॉल्स को, ...





तू ही सोच कोई स्साला लौंडा, अगर उसकी जवान होती कच्ची उमर वाली बहन और मस्त बड़ी बड़ी कड़ी कड़ी चूँची वाली माँ, मिल के ऐसी की तैसी करेंगी तो क्या हालत होगी,... "

छुटकी के दिमाग में तो सिर्फ गितवा के भाई अरविन्द का मोटा खड़ा तन्नाया लंड ही नजर आ रहा था उसके मुंह से निकल गया,

" बेचारे अरविन्द भैया"

गीता बड़े जोर से खिलखिलाई,

" और क्या दो दो मस्त माल सामने और चोदने को नहीं मिल रहा,... कम से कम घंटे भर माँ, अरविन्द भैया को तड़पाती लेकिन सबसे ज्यादा मजा तब आता जब भैया को बिना छुए वो उसकी हालत खराब कर देती,

" बिन छुए, ... कैसे" गीता की आँखे विस्मय से फ़ैल गयीं,

" माँ के आगे सब फेल,.. माँ पीछे से मुझे अपनी गोद में दुबका लेती थी फिर उसके दोनों हाथ मेरी छोटी छोटी चूँचियों पे, क्या मस्त दबाती है माँ,... कभी हलके हलके छूती तो कभी कस के दबोच लेती,... कभी मेरी किसमिश ऐसे निपल पकड़ के जोर जोर से पुल करती,





देख देख के भैया की हालत ख़राब, डंडा एकदम टनटना जाता, बेचारे का. लेकिन माँ की उँगलियों से मेरी हालत भी कम खराब नहीं होती, मेरी फांके गीली होने लगतीं, मेरी हथेलियां खुद मेरी पनियाई चूत पे हलके हलके सहलाने लगतीं,... मेरे मुंह से जोर जोर से सिसकियाँ निकलतीं और साथ में उफ्फ्फ माँ के चुम्मी, नहीं चेहरे पे नहीं,... कभी गले पे , कभी कंधे पे, भैया को दिखाते ललचाते, और भैया का खूंटा एकदम हवा में तना पूरे बित्ते भर का, तड़पता,...

और ये सोच के सुन के छुटकी भी गीली हो रही थी पर बिन बोले, टोके गीता की बात वो सुन रही थी,... और गीता सुना रही थी,

" माँ, अरविन्द भैया को ललचाते अपने दोनों हाथों से मेरी अमिया उठा के पकड़ एक उसे दिखातीं और ललचातीं, बोलतीं, " देख, मेरी बेटी के जुबना कितने मस्त है, स्साली इस गाँव क्या आस पास के किसी गाँव में किसी माल का इत्ता मस्त जोबन नहीं है, बोल चाहिए क्या ? और भैया लिबराता देखता तो माँ और उसे हड़काती, स्साले दो साल पहले से इसकी कच्ची अमिया आने लगी थीं , गांव भर के लौंडो को महक लग गयी थी, सब पीछे पड़े थे,.. और तू बुरबक,... अरे तभी पकड़ के चोद देता, दो चार बार जबरदस्ती पेलता रोती गाती कुछ दिन में खुद चुदवाने लगती,... लेकिन तू भी न,... पर सोच ले चाहिए तो मेरी सब बात माननी पड़ेगी "
 
माँ बेटी का प्यार दुलार





how to download high quality images from facebook

" माँ, अरविन्द भैया को ललचाते अपने दोनों हाथों से मेरी अमिया उठा के पकड़ एक उसे दिखातीं और ललचातीं, बोलतीं,

" देख, मेरी बेटी के जुबना कितने मस्त है, स्साली इस गाँव क्या आस पास के किसी गाँव में किसी माल का इत्ता मस्त जोबन नहीं है, बोल चाहिए क्या ? और भैया लिबराता देखता तो माँ और उसे हड़काती, स्साले दो साल पहले से इसकी कच्ची अमिया आने लगी थीं , गांव भर के लौंडो को महक लग गयी थी, सब पीछे पड़े थे,..





और तू बुरबक,... अरे तभी पकड़ के चोद देता, दो चार बार जबरदस्ती पेलता रोती गाती कुछ दिन में खुद चुदवाने लगती,... लेकिन तू भी न,... पर सोच ले चाहिए तो मेरी सब बात माननी पड़ेगी "

" कौन सी बात माँ की " अब छुटकी से नहीं रहा गया उसने पूछ ही लिया, पर गीता ने नहीं बताया उसने किस्सा जारी रखा,

" मैं भी भैया को ललचाती हुयी बोलती,

आओ न भैया, तेरा मन नहीं कर रहा अपनी बहन की लेने का क्या, उह्ह आह्हः , देख मेरी महारानी किती गीली हो रही है , आओ न अरविन्द भैया, प्लीज,... "

भैया जैसे मेरी ओर आने को होता माँ उसे रोक देती बोलती,

पहले मैं दुलारी प्यारी बेटी की चाशनी चाटूँगी, तू चुपचाप मेरी बात मान और माँ बेटी का प्यार दुलार देख। "

फिर माँ मेरे पास आके मेरी एक टांग उठा के पहले तो मेरी प्यारी गीली बौराई सहेली को हलके हलके थपकाती, फिर हल्के हलके सिर्फ जीभ की टिप मेरी चूत की दोनों फांकों को अलग करती और फांकों के बीच में थोड़ा सा प्रेशर डल के जैसे कोई लौंडा बिनचुदी चूत में अपना सुपाड़ा फंसाता है माँ एकदम उसी तरह से , हलके हलके आगे पीछे,...





मस्ती से में चूतड़ उचकाती और पीछे से भैया निहुरि हुई माँ के पिछवाड़े जीभ लगा के सपड़ सपड़ , जितनी जोर से माँ मेरा चाटती, चूसती, उससे ज्यादा जोर से भैया माँ का,... "





" अरविन्द भैया माँ की बुर चूसता,... " छुटकी से रहा नहीं गया उसने पूछ लिया।

गीता बड़ी देर तक हंसती रही, फिर बोली ,

" तू स्साली सब पूछ के दम लेगी। हां भी नहीं भी। पहले तो वो माँ की बुर में ही मुंह लगाता,... लेकिन कुछ देर बाद माँ हल्के से झटके,...माँ के बड़े बड़े चूतड़ कोई भी लहालोट हो जाता तो अरविन्द भैया भी,... और माँ को एकदम मालूम था तो उस झटके से माँ के पिछवाड़े का छेद, और भैया का मालूम था की वहां ऊपर से चाटने से काम नहीं चलेगा पूरी जीभ अंदर डालनी पड़ेगी जबतक जीभ की टिप पे अंदर का माल न लगे , और फिर जैसे ऊँगली अंदर डाल के घुमाते हैं न उसी तरह से जीभ से, माँ ने अरविन्द और मुझे दोनों अच्छी तरह से ये सब सिखा दिया था, पिछवाड़े चाटना, चूसना,... मैं तुझे भी सिखा दूंगी, घबड़ा मत,"





गीता थोड़ी रुकी फिर फ़ास्ट फारवर्ड किया,...

" और जब भैया मुझे चूसता , तो मेरे मुंह पे माँ की बुर माँ खूब रगड़ रगड़ के मुझसे चुसवाती, ... और बेचारे अरविन्द भैया के ये देख के और हालत ख़राब,... और जब मैं अरविन्द भैया का लंड चूसती तो माँ उसके ऊपर चढ़के उससे अपनी बुर चुसवाती, खूब मजा आता ,लेकिन घंटे भर से पहले मैं अरविन्द भैया को चोदने के लिए नहीं मिलती थी।

और जब चुदाई शुरू होती तो,... कोई रात ऐसी नहीं गयी होगी जब मैं सात आठ बार से कम झड़ी होऊं और भैया भी तीन चार बार से कम कभी नहीं , कम से कम दो बार मेरे अंदर और एक दो बार माँ के अंदर मलाई छोड़ता ,...

और उसके अलावा जब मैं स्कूल के लिए तैयार हो जाती तो उस समय जबरदस्ती कर के भैया मुझे निहुरा के अगवाड़े पिछवाड़े मलाई जरूर भरता





और गाँड़ तो जब मेरी कमीनी सहेलियां आ जातीं उसके बाद ऐसे हचक हचक के मारता, सहेलियों का कन्धा पकड़ के, उन्ही के सहारे सहारे मैं स्कूल जा पाती"

और माँ कित्ती बार ,...

छुटकी को तो पूरा हिसाब चाहिए था और गीता थोड़ा उदास हो गयी बोली, मुश्किल से एक दो बार। फिर कुछ सोच के मुस्कराते हुए बोली , लेकिन हाँ एक रात मैंने और भैया ने तय कर लिया था की आज माँ की हम दोनों भाई बहन मिल के ,... और उस दिन चार बार माँ झड़ी रात में , .. और फिर गीता ने वो किस्सा माँ का , विस्तार से सुनाया।

वैसे तो कोई दिन नागा नहीं जाता था, जब मैं अरविन्द भैया और माँ, चाहे दिन हो या रात मस्ती नहीं करते थे. हाँ जब मैं नहीं रहती थी, स्कूल में या सहेलियों के साथ मटरगस्ती करने तो माँ और भैया कोई बदमाशी नहीं करते थे, ...

लेकिन एक दिन मैंने और भैया ने तय कर लिया था की आज माँ की जबरदस्त रगड़ाई करनी है, हम दोनों तो वैसे भी मौका पाते ही बदमाशी चालू कर देते थे, चुम्मा चाटी, मेरी छोटी छोटी चूँची दबाना, मसलना , खास तौर से मेरी सहेलियों के सामने उन्हें ललचाते जलाते, और मैं भी कौन कम, बस उसकी जांघिया नीचे सरका के चुसूर चुसूर चूस के खड़ा कर देती और देने के समय अपने चूतड मटका के, मुड़ के जीभ चिढ़ाते हुए बाहर भाग जाती थी.

मैं जानती थी की पकड़ में आउंगी तो अरविन्द भैया हचक के गाँड़ मारेगा, .. तो मारे न,.. मेरा एकलौता प्यारा मीठा सा सगा भाई है, वो स्साला बहनचोद नहीं मारेगा तो कौन मारेगा। लेकिन वो दिन मैंने और अरविन्द भैया ने माँ के नाम कर दिया और सोच के खूब जुगत लगा के,... गितवा छुटकी को सुनाते समझाते बोली।

छुटकी भी खूब ध्यान से सुन रही थी, सुन सुन के सोच सोच के पिघल रही थी। गीता सुना रही थी, उस दिन की बात,

" शाम से ही माँ कुछ उदास लग रही थी. हम दोनों की बात का जवाब हूँ हां में दे रही थी, हम दोनों आपस में बदमाशी भी करते, लड़ते तो डांट नहीं रही थी,... पता नहीं कहा था ध्यान उसका। ग्वालिन भौजी भी, उनसे तो रोज माँ खूब चहक चहक के बात करती थी, और भौजी भी गाँव की कुल लड़कियों औरतों का हाल मिर्च मसाले के साथ,..और अब तो मेरे सामने भी,... कौन किससे फंसी है, हमारे टोला के साथ, चमरौटी, भरौटी, अहिरोटी कोई पुरवा नहीं बचता था,... कौन भौजाई अपने मरद के पंजाब जाने के बाद देवर के साथ बिना नागा सोती है, कौन लड़की जवान हो रही है , कहाँ सास बहु मिल के किस लौंडे को फांस रही हैं, सब कुछ,...

लेकिन उस दिन माँ ने उन्हें भी बस दो चार मिनट में निपटा दिया,... "

छुटकी को तो सीधे एडल्ट सीन में इंट्रेस्ट था वो फ़ास्ट फारवर्ड करते बोली, वो बताइये न दी, कैसे आप ने और अरविन्द भैया ने मिल के, आप ही तो कह रही थीं की माँ कभी भी रात भर में एक दो बार से ज्यादा नहीं झड़ती थी जबकि आप सात आठ बार, अरविन्द भैया चार बार,...





गीता उस रात की बात याद करके खिलखिलाने लगी और उसने भी गाड़ी चौथे गियर में डाल दी। और बताना शुरू किया,...
 
Back
Top