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- Dec 5, 2013
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माँ की रगड़ाई

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छुटकी को तो सीधे एडल्ट सीन में इंट्रेस्ट था वो फ़ास्ट फारवर्ड करते बोली, वो बताइये न दी, कैसे आप ने और अरविन्द भैया ने मिल के, आप ही तो कह रही थीं की माँ कभी भी रात भर में एक दो बार से ज्यादा नहीं झड़ती थी जबकि आप सात आठ बार, अरविन्द भैया चार बार,...
गीता उस रात की बात याद करके खिलखिलाने लगी और उसने भी गाड़ी चौथे गियर में डाल दी। और बताना शुरू किया,...
मैं और माँ रोज की तरह 69 कर रहे थे, अरविन्द भैया को ;ललचाने के लिए

और माँ इस लिए भी करती की मेरी चुनमुनिया गीली रहेगी तो पेलवाने में ज्यादा दिक्क्त नहीं आएगी ,... अब उसने कडुआ तेल में कंजूसी शुरू कर दी थी, और मैं कहती थी तो मुझे ही हड़काती थी,
' छिनार कल गन्ने के खेत में, आम क बगिया में बँसवाड़ी में पेलवायेगी गाँव क लौंडन से तो क्या कुल तेल क बोतल लेके आएंगे अरे थूक लगा लें तो गनीमत जान, ... "
बेचारा अरविन्द भैया उसका खूंटा टनटना रहा था, पूरे बित्ते भर का, लेकिन बेचारा हाथ भी नहीं लगा सकता था उसे मालूम था उसकी माँ के हर अंग में आँखे हैं और अगर कहीं उन्होंने भैया को ' उसे ' छूते देख लिया, तो बस आफ़त। डांट तो पड़ेगी ही क्या पता दो चार हाथ भी लग जाए। और बात भी सही है घर में दो दो मस्त माल नंबरी चुदवासी,... और घर का लड़का ६१, ६२,... हम दोनों की बेइज्जती।
और जब वो तड़पता तो मुझे बहुत मज़ा आता लेकिन आज मैं सोच रही थी आज भैया का खूंटा एकदम लोहे का खम्भा हो जाये तभी,...
आज कुछ भी हो हम दोनों भाई बहन को मिल के माँ की माँ चोद देनी थी, बिना तीन चार बार झाड़े उसे,...
और बहुत सी ट्रिक तो मैंने माँ से ही सीखी थीं ( कुछ ट्रिक्स तो माँ ने सिर्फ मुझे सिखाई थीं भैया को भी नहीं ) . और सबसे बड़ी बात हर लड़का औरत अलग अलग जगह पे छूने से गर्माती है, असली खेल है पांच मिनट के अंदर ये समझ जाना और बिना उसके कहे,... और माँ के साथ तो मैं और भैया कब से छल कब्बडी खेल रहे थे,... तो मुझे मालूम था की माँ की भारी भारी मांसल जाँघे, और बड़े बड़े चूतड़ ही खजाने की चाभी हैं, वहां हलके हलके सहलाना, जोर से नहीं न दबाना न और कुछ बस ऊँगली की टिप से सरसारते हुए सहलाना,...
दूसरी बात मुझे अंदाज लग गयी थी, बिन माँ के बताये, ... माँ की एक और चाभी थी हचक के गाँड़ मारना उनकी,... उन्हें मालूम था की हचक के उनके पिछवाड़े की ली जाए तो बस वो अपने को झड़ने से नहीं रोक पाएंगी, इसलिए वो गाँड़ ,मरवाने से बचती थी और कभी भैया ने जिद करके माँ की मार भी ली तो उस समय मुझे दूर ही रखती थीं
तो बस मैंने हलके हाथों से मैंने माँ की गोरी गोरी जाँघों का सहलाना शुरू किया, मेरी जीभ भी उनकी फांको पे नाच रही थी पतुरिया की तरह, कहीं भी एक पल नहीं टिकती थी,...

बीच बीच में लम्बे नाख़ून से माँ की जांघ सहलाना शुरू, थोड़ी देर में माँ ने कसमसाना शरू कर दिया, और अब मेरे होंठों ने कस के माँ की दोनो रसीली फांको को दबोच के चूसना शुरू कर दिए और एक हथेली माँ के चूतड़ों पे , अंगूठा बस उनके पिछवाड़े के छेद को छू छू के हट जाता
ओह्ह्ह ओह्ह माँ ने सिसकियाँ भरनी शुरू की और इस बढ के क्या सबूत होता की माँ को मज़ा आ रहा था,...
लेकिन माँ आखिर माँ थी हम दोनों ने उन्ही से सीखा था , ... तो माँ ने काउंटर अटैक शुरू कर दिया, वो कस कस के मेरी चूत चूस रही थी और साथ में अपनी मोटी जीभ मेरी कसी किशोर चूत में ढकेल दी , जो मजा भैया के मोटे लौंड़े में आता था उससे कम माँ की जीभ से नहीं आता था

और साथ में अपने दोनों हाथों से माँ ने मेरे चूतड़ मसलने शुरू कर दिए
अब मेरी हालत खराब हो रही थी, और माँ जानती थी की अब मेरी शरारतें धीमी हो जाएंगी, लेकिन मुझे अंदाज था ये होने ही वाला है और मेरे पास मेरा प्यारा दुलारा मीठा मीठा भैया था न, ... बस तो मैंने उसको इशारा किया, तकिए कुशन जो कुछ भी पलंग पे हो माँ के मोटे मोटे चूतड़ों के नीचे लगा के खूब ऊपर उठा दे,... बस माँ के मस्त चूतड़ हवा में एक बित्ते ऊपर उठ गए,... मैंने अपने दोनों हाथों से माँ की गाँड़ फैला दी,...
बस इतना इशारा काफी था, भइया ने तो पता नहीं कबसे लम्बे छेद के पहले ही गोल दरवाजे में घुसना शुरू कर दिया था,... बस उसने एक करारा धक्का मारा और माँ जो कस कस के चूस के मेरी हालत खराब कर रही थीं, उन की हालत खराब हो गयी, उनके बेटे ने पहले धक्के में ही अपना पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा अपनी माँ की गांड के पेल दिए अब वो लाख चूतड़ पटकें

मैंने भी गियर चेंज किया,...
और दो उँगलियाँ एक साथ माँ के भोंसडे में पेल दी, फिर तीसरी भी और अंगूठे से माँ की क्लिट रगड़नी शुरू कर दी , इस दोहरे हमले से माँ की हालत खराब हो गयीऔर भैया ने भी खूब ताकत से माँ की गाँड़ में धकेला उनके चूतड़ पकड़ के कस के जोर लगा के, दो धक्के में गाँड़ का छल्ला पार और उसी समय मेरी तीसरी ऊँगली भी अंदर, दस पंद्रह मिनट तक मैं माँ की बुर और भैया पिछवाड़े पूरी ताकत से,... लेकिन मैं समझ गयी इत्ती आसानी से काम नहीं चलेगा, मैंने भैया से गुहार लगाई,
" अरविन्द भैया चल हम दोनों मिल के माँ को मजा देते हैं मेरी उँगलियों से इसका कुछ नहीं होने वाला है '
मैंने कैची की तरह अपनी उँगलियाँ फैला के माँ का भोंसड़ा खोल दिया और भैया ने भी अब अपनी दो उँगलियाँ अंदर ढकेल दी. पांच उँगलियाँ, तीन मेरी दो अरविन्द भैया की और पिस्टन की तेजी और ताकत, साथ में न भैया ने गाँड़ मारने में ताकत कम की न मैंने क्लिट चूसने में,... फिर मुझे याद आया माँ ने सिखाया था, बुर की गली में अंदर, दो सवा दो इंच अंदर कुछ मसल्स बहुत हल्की सी फूली होती है हलकी ऊँगली से पता चलता है, वो जगह क्लिट से भी ज्यादा खतरनाक होती है,..सारी नर्व्स वहीँ होती हैं,... बस अब मैंने वहीँ ध्यान दिया,...
आधे घंटे से ऊपर हो गए थे, बस एक बार जगह वो मिल गयी तो बस ऊँगली के पीछे के नकल से मैंने पहले हलके हलके फिर कस के रगड़ना शुरू किया,
अरविन्द भैया का मोटा लंड भी माँ की गाँड़ में,...

माँ ने आखिरी कोशिश की, वो नीचे लेटी थी मैं उनके ऊपर 69 वाली पोज़ में, उन्होंने पूरी ताकत से मुझे पलटने की कोशिश की, छटपटा रही थीं वो, पर एक तो हम भाई बहिन की पांच उँगलियाँ उनके अंदर धंसी, अरविन्द भैया का मोटा खूंटा उनकी गाँड़ में जड़ तक धंसा और सबसे बड़ी बात अरविन्द भैया के देह में बहुत ताकत थी, रोज सुबह १५० डंड पेलता था, अखाड़े भी जाता था,... मैं अकेली होती तो माँ पार पा लेती लेकिन आज हम दोनों भाई बहन, ...
४० मिनट के लगातार तूफानी चुदाई के बाद जब भैया उनकी गाँड़ में झड़ा तो साथ साथ माँ भी,...

और बड़ी देर तक,... मैं तो तब तक दो तीन बार पार लग चुकी थी.

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गीता उस रात की बात याद करके खिलखिलाने लगी और उसने भी गाड़ी चौथे गियर में डाल दी। और बताना शुरू किया,...
मैं और माँ रोज की तरह 69 कर रहे थे, अरविन्द भैया को ;ललचाने के लिए

और माँ इस लिए भी करती की मेरी चुनमुनिया गीली रहेगी तो पेलवाने में ज्यादा दिक्क्त नहीं आएगी ,... अब उसने कडुआ तेल में कंजूसी शुरू कर दी थी, और मैं कहती थी तो मुझे ही हड़काती थी,
' छिनार कल गन्ने के खेत में, आम क बगिया में बँसवाड़ी में पेलवायेगी गाँव क लौंडन से तो क्या कुल तेल क बोतल लेके आएंगे अरे थूक लगा लें तो गनीमत जान, ... "
बेचारा अरविन्द भैया उसका खूंटा टनटना रहा था, पूरे बित्ते भर का, लेकिन बेचारा हाथ भी नहीं लगा सकता था उसे मालूम था उसकी माँ के हर अंग में आँखे हैं और अगर कहीं उन्होंने भैया को ' उसे ' छूते देख लिया, तो बस आफ़त। डांट तो पड़ेगी ही क्या पता दो चार हाथ भी लग जाए। और बात भी सही है घर में दो दो मस्त माल नंबरी चुदवासी,... और घर का लड़का ६१, ६२,... हम दोनों की बेइज्जती।
और जब वो तड़पता तो मुझे बहुत मज़ा आता लेकिन आज मैं सोच रही थी आज भैया का खूंटा एकदम लोहे का खम्भा हो जाये तभी,...
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और बहुत सी ट्रिक तो मैंने माँ से ही सीखी थीं ( कुछ ट्रिक्स तो माँ ने सिर्फ मुझे सिखाई थीं भैया को भी नहीं ) . और सबसे बड़ी बात हर लड़का औरत अलग अलग जगह पे छूने से गर्माती है, असली खेल है पांच मिनट के अंदर ये समझ जाना और बिना उसके कहे,... और माँ के साथ तो मैं और भैया कब से छल कब्बडी खेल रहे थे,... तो मुझे मालूम था की माँ की भारी भारी मांसल जाँघे, और बड़े बड़े चूतड़ ही खजाने की चाभी हैं, वहां हलके हलके सहलाना, जोर से नहीं न दबाना न और कुछ बस ऊँगली की टिप से सरसारते हुए सहलाना,...
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तो बस मैंने हलके हाथों से मैंने माँ की गोरी गोरी जाँघों का सहलाना शुरू किया, मेरी जीभ भी उनकी फांको पे नाच रही थी पतुरिया की तरह, कहीं भी एक पल नहीं टिकती थी,...

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ओह्ह्ह ओह्ह माँ ने सिसकियाँ भरनी शुरू की और इस बढ के क्या सबूत होता की माँ को मज़ा आ रहा था,...
लेकिन माँ आखिर माँ थी हम दोनों ने उन्ही से सीखा था , ... तो माँ ने काउंटर अटैक शुरू कर दिया, वो कस कस के मेरी चूत चूस रही थी और साथ में अपनी मोटी जीभ मेरी कसी किशोर चूत में ढकेल दी , जो मजा भैया के मोटे लौंड़े में आता था उससे कम माँ की जीभ से नहीं आता था

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माँ ने आखिरी कोशिश की, वो नीचे लेटी थी मैं उनके ऊपर 69 वाली पोज़ में, उन्होंने पूरी ताकत से मुझे पलटने की कोशिश की, छटपटा रही थीं वो, पर एक तो हम भाई बहिन की पांच उँगलियाँ उनके अंदर धंसी, अरविन्द भैया का मोटा खूंटा उनकी गाँड़ में जड़ तक धंसा और सबसे बड़ी बात अरविन्द भैया के देह में बहुत ताकत थी, रोज सुबह १५० डंड पेलता था, अखाड़े भी जाता था,... मैं अकेली होती तो माँ पार पा लेती लेकिन आज हम दोनों भाई बहन, ...
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और बड़ी देर तक,... मैं तो तब तक दो तीन बार पार लग चुकी थी.




