Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 35 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

माँ की रगड़ाई





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छुटकी को तो सीधे एडल्ट सीन में इंट्रेस्ट था वो फ़ास्ट फारवर्ड करते बोली, वो बताइये न दी, कैसे आप ने और अरविन्द भैया ने मिल के, आप ही तो कह रही थीं की माँ कभी भी रात भर में एक दो बार से ज्यादा नहीं झड़ती थी जबकि आप सात आठ बार, अरविन्द भैया चार बार,...

गीता उस रात की बात याद करके खिलखिलाने लगी और उसने भी गाड़ी चौथे गियर में डाल दी। और बताना शुरू किया,...

मैं और माँ रोज की तरह 69 कर रहे थे, अरविन्द भैया को ;ललचाने के लिए





और माँ इस लिए भी करती की मेरी चुनमुनिया गीली रहेगी तो पेलवाने में ज्यादा दिक्क्त नहीं आएगी ,... अब उसने कडुआ तेल में कंजूसी शुरू कर दी थी, और मैं कहती थी तो मुझे ही हड़काती थी,

' छिनार कल गन्ने के खेत में, आम क बगिया में बँसवाड़ी में पेलवायेगी गाँव क लौंडन से तो क्या कुल तेल क बोतल लेके आएंगे अरे थूक लगा लें तो गनीमत जान, ... "

बेचारा अरविन्द भैया उसका खूंटा टनटना रहा था, पूरे बित्ते भर का, लेकिन बेचारा हाथ भी नहीं लगा सकता था उसे मालूम था उसकी माँ के हर अंग में आँखे हैं और अगर कहीं उन्होंने भैया को ' उसे ' छूते देख लिया, तो बस आफ़त। डांट तो पड़ेगी ही क्या पता दो चार हाथ भी लग जाए। और बात भी सही है घर में दो दो मस्त माल नंबरी चुदवासी,... और घर का लड़का ६१, ६२,... हम दोनों की बेइज्जती।

और जब वो तड़पता तो मुझे बहुत मज़ा आता लेकिन आज मैं सोच रही थी आज भैया का खूंटा एकदम लोहे का खम्भा हो जाये तभी,...

आज कुछ भी हो हम दोनों भाई बहन को मिल के माँ की माँ चोद देनी थी, बिना तीन चार बार झाड़े उसे,...

और बहुत सी ट्रिक तो मैंने माँ से ही सीखी थीं ( कुछ ट्रिक्स तो माँ ने सिर्फ मुझे सिखाई थीं भैया को भी नहीं ) . और सबसे बड़ी बात हर लड़का औरत अलग अलग जगह पे छूने से गर्माती है, असली खेल है पांच मिनट के अंदर ये समझ जाना और बिना उसके कहे,... और माँ के साथ तो मैं और भैया कब से छल कब्बडी खेल रहे थे,... तो मुझे मालूम था की माँ की भारी भारी मांसल जाँघे, और बड़े बड़े चूतड़ ही खजाने की चाभी हैं, वहां हलके हलके सहलाना, जोर से नहीं न दबाना न और कुछ बस ऊँगली की टिप से सरसारते हुए सहलाना,...

दूसरी बात मुझे अंदाज लग गयी थी, बिन माँ के बताये, ... माँ की एक और चाभी थी हचक के गाँड़ मारना उनकी,... उन्हें मालूम था की हचक के उनके पिछवाड़े की ली जाए तो बस वो अपने को झड़ने से नहीं रोक पाएंगी, इसलिए वो गाँड़ ,मरवाने से बचती थी और कभी भैया ने जिद करके माँ की मार भी ली तो उस समय मुझे दूर ही रखती थीं

तो बस मैंने हलके हाथों से मैंने माँ की गोरी गोरी जाँघों का सहलाना शुरू किया, मेरी जीभ भी उनकी फांको पे नाच रही थी पतुरिया की तरह, कहीं भी एक पल नहीं टिकती थी,...





बीच बीच में लम्बे नाख़ून से माँ की जांघ सहलाना शुरू, थोड़ी देर में माँ ने कसमसाना शरू कर दिया, और अब मेरे होंठों ने कस के माँ की दोनो रसीली फांको को दबोच के चूसना शुरू कर दिए और एक हथेली माँ के चूतड़ों पे , अंगूठा बस उनके पिछवाड़े के छेद को छू छू के हट जाता

ओह्ह्ह ओह्ह माँ ने सिसकियाँ भरनी शुरू की और इस बढ के क्या सबूत होता की माँ को मज़ा आ रहा था,...

लेकिन माँ आखिर माँ थी हम दोनों ने उन्ही से सीखा था , ... तो माँ ने काउंटर अटैक शुरू कर दिया, वो कस कस के मेरी चूत चूस रही थी और साथ में अपनी मोटी जीभ मेरी कसी किशोर चूत में ढकेल दी , जो मजा भैया के मोटे लौंड़े में आता था उससे कम माँ की जीभ से नहीं आता था





और साथ में अपने दोनों हाथों से माँ ने मेरे चूतड़ मसलने शुरू कर दिए

अब मेरी हालत खराब हो रही थी, और माँ जानती थी की अब मेरी शरारतें धीमी हो जाएंगी, लेकिन मुझे अंदाज था ये होने ही वाला है और मेरे पास मेरा प्यारा दुलारा मीठा मीठा भैया था न, ... बस तो मैंने उसको इशारा किया, तकिए कुशन जो कुछ भी पलंग पे हो माँ के मोटे मोटे चूतड़ों के नीचे लगा के खूब ऊपर उठा दे,... बस माँ के मस्त चूतड़ हवा में एक बित्ते ऊपर उठ गए,... मैंने अपने दोनों हाथों से माँ की गाँड़ फैला दी,...

बस इतना इशारा काफी था, भइया ने तो पता नहीं कबसे लम्बे छेद के पहले ही गोल दरवाजे में घुसना शुरू कर दिया था,... बस उसने एक करारा धक्का मारा और माँ जो कस कस के चूस के मेरी हालत खराब कर रही थीं, उन की हालत खराब हो गयी, उनके बेटे ने पहले धक्के में ही अपना पहाड़ी आलू ऐसा मोटा सुपाड़ा अपनी माँ की गांड के पेल दिए अब वो लाख चूतड़ पटकें





मैंने भी गियर चेंज किया,...

और दो उँगलियाँ एक साथ माँ के भोंसडे में पेल दी, फिर तीसरी भी और अंगूठे से माँ की क्लिट रगड़नी शुरू कर दी , इस दोहरे हमले से माँ की हालत खराब हो गयीऔर भैया ने भी खूब ताकत से माँ की गाँड़ में धकेला उनके चूतड़ पकड़ के कस के जोर लगा के, दो धक्के में गाँड़ का छल्ला पार और उसी समय मेरी तीसरी ऊँगली भी अंदर, दस पंद्रह मिनट तक मैं माँ की बुर और भैया पिछवाड़े पूरी ताकत से,... लेकिन मैं समझ गयी इत्ती आसानी से काम नहीं चलेगा, मैंने भैया से गुहार लगाई,

" अरविन्द भैया चल हम दोनों मिल के माँ को मजा देते हैं मेरी उँगलियों से इसका कुछ नहीं होने वाला है '

मैंने कैची की तरह अपनी उँगलियाँ फैला के माँ का भोंसड़ा खोल दिया और भैया ने भी अब अपनी दो उँगलियाँ अंदर ढकेल दी. पांच उँगलियाँ, तीन मेरी दो अरविन्द भैया की और पिस्टन की तेजी और ताकत, साथ में न भैया ने गाँड़ मारने में ताकत कम की न मैंने क्लिट चूसने में,... फिर मुझे याद आया माँ ने सिखाया था, बुर की गली में अंदर, दो सवा दो इंच अंदर कुछ मसल्स बहुत हल्की सी फूली होती है हलकी ऊँगली से पता चलता है, वो जगह क्लिट से भी ज्यादा खतरनाक होती है,..सारी नर्व्स वहीँ होती हैं,... बस अब मैंने वहीँ ध्यान दिया,...

आधे घंटे से ऊपर हो गए थे, बस एक बार जगह वो मिल गयी तो बस ऊँगली के पीछे के नकल से मैंने पहले हलके हलके फिर कस के रगड़ना शुरू किया,

अरविन्द भैया का मोटा लंड भी माँ की गाँड़ में,...





माँ ने आखिरी कोशिश की, वो नीचे लेटी थी मैं उनके ऊपर 69 वाली पोज़ में, उन्होंने पूरी ताकत से मुझे पलटने की कोशिश की, छटपटा रही थीं वो, पर एक तो हम भाई बहिन की पांच उँगलियाँ उनके अंदर धंसी, अरविन्द भैया का मोटा खूंटा उनकी गाँड़ में जड़ तक धंसा और सबसे बड़ी बात अरविन्द भैया के देह में बहुत ताकत थी, रोज सुबह १५० डंड पेलता था, अखाड़े भी जाता था,... मैं अकेली होती तो माँ पार पा लेती लेकिन आज हम दोनों भाई बहन, ...

४० मिनट के लगातार तूफानी चुदाई के बाद जब भैया उनकी गाँड़ में झड़ा तो साथ साथ माँ भी,...





और बड़ी देर तक,... मैं तो तब तक दो तीन बार पार लग चुकी थी.
 
माँ बेटी बेटे की मस्ती





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४० मिनट के लगातार तूफानी चुदाई के बाद जब भैया उनकी गाँड़ में झड़ा तो साथ साथ माँ भी,... और बड़ी देर तक,... मैं तो तब तक दो तीन बार पार लग चुकी थी.

लेकिन अगली बार भैया को माँ ने मेरे ऊपर ही चढ़ाया, अपने चूस के खड़ा किया और जब भैया मुझे चोद रहा था तो वो मेरे मुंह में अपनी पहले बुर फिर गाँड़ रगड़ रही थी जिसमें से अभी भी भी भैया का सड़का टपक रहा था,...





पर थोड़ी देर बाद,... और जैसे मैं और माँ मिल के भैया का चूसती थीं, उसी तरह हम दोनों भाई बहन ने मिल के चूस चूस के ,...

जब भैया अपनी जीभ माँ के भोसड़े में पेलता तो मैं माँ की क्लिट रगड़ती और माँ को अच्छी तरह गरम करने के बाद भैया ने माँ को चोदना शुरू किया। माँ को मैंने और भैया ने बाँट लिया था उनकी एक बड़ी सी चूँची भैया के हवाले और दूसरी मैं रगड़ रही थी। भाई का मोटा मूसल माँ के भोंसडे में,... और मेरे दोनों होंठ माँ की क्लिट पे,

भैया दो बार झड़ा था एक बार अपनी माँ की गाँड़ में, दुबारा सगी छोटी बहन की चुनमुनिया में तो इतनी जल्दी तो हार मानने वाला नहीं था, चोद चोद के माँ को थेथर कर रहा था , और अकेले तब भी उसके बस का नहीं था, लेकिन उसकी छोटी बहन की जीभ कम नहीं थी , तो एक बार जब भैया ने अपनी पिचकारी माँ की बिल में छोड़ी साथ माँ भी गई उस पार,... और इस बार बड़ी देर तक वो कांपती रही।

पूरी रात हम तीनो ने खूब मस्ती की और पहली बार माँ के हर छेद में भैया ने मलाई छोड़ी और तीन बार माँ को हम दोनों ने मिल के झाड़ दिया।

लेकिन उसका बदला माँ ने सुबह लिया स्कूल जाने के पहले माँ ने लिया सूद समेत, जिस तरह भैया से गाँड़ मरवाई मेरी,... पता नहीं का उन्होंने नाश्ते में खिला दिया था अपने बेटे को वो पूरा सांड़ हो रहा था,... मैं रो रही थी चीख रही थी,... और स्कूल के रस्ते में दोनों सहेलियों के कंधे पकड़ के ही गयी समझो टांग के ले गयीं वो सब।





छुटकी सुन रही मुस्करा रही थी, गीता और उसके भाई अरविन्द का किस्सा सुन सुन के,... और गीता भी मुस्कराने लगी और उसने एक मजेदार बात बतायी,

माँ एक बदमाशी और करती कभी कभी रात में मुझ जबरदस्ती ढेर सारा खिलाती कुछ प्यार से कुछ दुलार से कुछ जबरदस्ती डाँट डांट के,... लेकिन उस दिन रात के आखिरी फर बल्कि भोर में जब मुझे बड़ी जोर की लगती थी न,... इत्ता रात में खायी होती, एकदम रोका नहीं जाता,... उस समय जबरदस्ती मुझे पकड़ के दबोच के निहुरा के भैया से गाँड़ मेरी मरवाती। अपने हाथ से अपने बेटे का पकड़ के मेरे पिछवाड़े,... और मैं जब दुहाई करती माँ, बस जाने दे बहुत जोर से लगी है, लौट के,.. तो हंस के मेरी छोटी छोटी चूँची दबा के निप्स खींच के बोलतीं

" अरे स्साली छिनार काहें घबड़ा रही है, मेरा बेटा इतनी मोटी डॉट लगाए हैं, कुछ नहीं होने वाला है "





और भैया भी, सुबह के समय तो हर लौंडे का खड़ा होता है तो उसका भी , और मारने के साथ पकड़ के गोल गोल मथानी की तरह घुमाता भी, माँ की तरह मेरी हालत खराब करने में उसे भी मजा आता था,

गीता और छुटकी दोनों ये सोच सोच के हंस रही थीं,

और गीता ने माँ का एक और किस्सा सुनाया
 
माँ का पिछवाड़ा





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गीता और छुटकी दोनों ये सोच सोच के हंस रही थीं,

और गीता ने माँ का एक और किस्सा सुनाया

उस रात के बाद , बल्कि उस रात से ही भैया मेरा अरविन्द माँ की गाँड़ का दीवाना हो गया।

फिर कुछ रूक के छुटकी को चूम के उसकी कच्ची अमिया मसलते गीता ने ज्ञान दिया, " जानती हो ये स्साले लौंडे सब के सब गाँड़ के दीवाने होते हैं,... बस एक बार चखने की देर है और असली चक्कर है लड़की जब मिलती नहीं बल्कि लड़की की लेने के पहले आपस में ही,... तो जो लौंडा लौंडिया की गाँड़ न मारे समझ ले वो स्साला खुद गांडू है,... और अरविंदवा तो क्या हचक के गाँड़ मारता है, दोनों चूँची पकड़ के जब गाँड़ में पेलता है दिन में तारे दिखते हैं और दूसरी बात , गाँड़ मरवाते समय जितना चीखो चिल्लाओगी, तड़पोगी उसके चंगुल से छूटने की कोशिश करोगी मरद को उतना ही मजा मिलता है। वो और दबोच के रगड़ रगड़ के,... "

छुटकी ये सब बातें सुन सुन के खुश हो रही थी और उस के आँख सामने पहले दीदी के नन्दोई से फिर जीजू से गाँड़ मरवाने का सीन घूम रहा था लेकिन वो माँ वाली बात सुनना चाहती थी तो उसने गीता को टोका,

" दी, माँ वाली बात,... "

गीता कुछ देर खिलखिलाती रही फिर बोली माँ की गाँड़ तो भैया ने खूब आसन बदल बदल के , पहले तो निहुरा के और माँ को भी चाहे चुदवाना हो या गाँड़ मराना इसी पोज में सबसे अच्छा लगता है, मैंने खुद अपने हाथ से भैया का खूंटा पकड़ के माँ के पिछवाड़े सटाया और अपने हाथ से ही उनका चूतड़ कस के फैलाया, फिर क्या ताकत से भैया ने धक्का मारा,... पूरा सुपाड़ा एक बार में अंदर, गप्पांक

छुटकी ध्यान से सुन रही थी और गीता ने बात आगे बढ़ाई

" लेकिन मुझे भी तो मजा लेना था तो मैं माँ के आगे आयी और अपनी चिकनी चमेली माँ के मुंह पे ,... माँ ने मुझसे बहुत चटवाया था आज मेरा मौका था और जब कोई मर्द दो औरतों को आपस में मस्ती करते देखता है तो वो और गरम हो जाता है तो वही हालत भैया की हो रही थी मुझे चटवाते देख के वो पूरी ताकत से अपना मूसल माँ की गाँड़ में ठोंक रहा था। लेकिन कुछ देर बाद उसने पोज बदला माँ पीठ के बल और वो जैसे चोदते हैं बस आगे की जगह पीछे का छेद। माँ की दोनों टाँगे भैया के कंधे पर,...

" और दी आप क्या कर रही थीं "

छुटकी ने पूछा

" थोड़ी देर तक तो मैं भैया की बदमाशी देख रही थी फिर मैं भी माँ के ऊपर चढ़ के अपनी चूत उनके मुंह पे रगड़ने लगी और झुक के एक साथ होनी तीन ऊँगली माँ की बुर में पेल दिया और अब माँ के दोनों छेदों की पेलाई हो रही थी, एक तरफ से बेटा एक तरफ बेटी,...

माँ की चुनमुनिया मुझे बहुत प्यारी लगती है तो झुक के मैंने चूसना भी शुरू कर दिया और माँ बेटी 69 की पोज़ में और बेटा माँ की गांड़ मार रहा था। कुछ देर तक तो ऐसे ही





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फिर माँ को अपनी गोद में बिठा के और माँ भी ऐसी एक्सपर्ट की खुद उन्होंने अपने पिछवाड़े का छेद अपने बेटे के खूंटे पे सटा के क्या धक्के मारे,... भैया तो खाली उन्हें गोद में ले बैठा था , माँ खुद ऊपर नीचे होकर बेटे से गाँड़ कुटवा रही थीं और मुझे ऐसे देख रही थीं मानो कह रही हों सीख ले बेटी, बहन भाई के गोद में कैसे मजे लेती है। उसके बाद तो कोई दिन नागा नहीं गया जब भैया ने दिन दहाड़े मेरे सामने माँ की गाँड़ नहीं मारी हो और रात में तो माँ का नाइट स्कूल चलता ही था।
 
भाग ५०

माँ का नाइट स्कूल ---माँ -गीता -अरविन्द

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माँ का नाइट स्कूल

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Adultery - छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - भाग ११६ पृष्ठ १२०३ बुच्ची और बुआ की लावा भुजाइ अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें

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आप सब मित्रों के सहयोग से इस कथा यात्रा ने ५० भाग पूरे किये, एक अर्ध शतक,... जो कहानी के शुरू में थोड़ा कठिन लग रहा था लेकिन आप सब मित्रों का सहयोग, हिम्मत बढ़ाना,....

और इस के साथ मैं पिछले २० भागों का नाम और उनकी पृष्ठ संख्या शेयर कर रही हूँ, ... इस यात्रा के मील के पत्थर की तरह ( घटते हुए क्रम में )

इन्सेस्ट की विधा में मैंने बस बेबी स्टेप लेना शुरू ही किया है पर आप सबकी हौसला अफजाई,...

एक बार फिर से आभार

1. भाग ५० माँ का नाइट स्कूल पृष्ठ ४३५

2. भाग ४९ मस्ती -माँ, अरविन्द और गीता की पृष्ठ ४२०

3. भाग ४८ - रोपनी -फुलवा की ननद पृष्ठ 394

4. भाग ४७ रोपनी पृष्ठ ३७५

5. भाग ४६ तीन सहेलियां खड़ी खड़ी, किस्से सुनाएँ घड़ी घड़ी पृष्ठ ३६३

6. भाग ४५ गीता चली स्कूल पृष्ठ ३४८

7. भाग ४४ रिश्तों में हसीन बदलाव उर्फ़ मेरे पास माँ है पृष्ठ ३४१

8. भाग ४३ इन्सेस्ट कथा- माँ के किस्से, मायके के पृष्ठ ३२९

9. भाग ४२ इन्सेस्ट कथा माँ के किस्से, पृष्ठ ३१७

10. भाग ४१ इन्सेस्ट कथा - मामला वल्दियत का उर्फ़ किस्से माँ के पृष्ठ ३०३

11. भाग ४० इन्सेस्ट गाथा - गोलकुंडा पर चढ़ाई -भाई की पृष्ठ २८६

12. भाग ३९ - माँ, बेटा, बेटी और बरसात की रात पृष्ठ २७१

13. भाग ३८ मेरे पास माँ है पृष्ठ २६०

14. भाग ३७ - इन्सेस्ट कथा - और माँ आ गयीं पृष्ठ २५०

15. भाग ३६ -इन्सेस्ट किस्सा- मस्ती भैया बहिनी उर्फ़ गीता -अरविन्द की पृष्ठ २३६

16. भाग ३५ फुलवा पृष्ठ २२५

17. भाग ३४ इन्सेस्ट कथा - चाची ने चांदनी रात में,... पष्ठ २१४

18. भाग ३३ अरविन्द और गीता की इन्सेस्ट गाथा सांझ भई घर आये पृष्ठ २००

19. भाग ३२ - इन्सेस्ट गाथा अरविन्द और गीता, पृष्ठ १७८

20. भाग ३१ इन्सेस्ट कथा उर्फ़ किस्सा भैया और बहिनी का पृष्ठ १६५

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रीत -करन पुनर्मिलन

Erotica - रंग -प्रसंग, कोमल के संग

भाग ६ - चंदा भाभी, ---अनाड़ी बना खिलाड़ी Phagun ke din chaar update posted please read, like, enjoy and comment तेल...

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2. भाग ४९ मस्ती -माँ, अरविन्द और गीता की पृष्ठ ४२०

3. भाग ४८ - रोपनी -फुलवा की ननद पृष्ठ 394

4. भाग ४७ रोपनी पृष्ठ ३७५

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