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(भाग ८)
छुटकी पहुंच गयी जीजा के गाँव
जिस तरह वो जाँघों को जाँघों से रगड़ते भींचते चल रही थी , ... और उस का खतरनाक असर उसके ब्वाइश लौंडा मार्का चूतड़ों पर भी पड़ रहा था , लेफ्ट राइट ,लेफ्ट राइट , ... फ्राक उसकी घुटनो से ढाई बित्ते कम से कम ऊपर , और जहां से जाँघे चौड़ी होनी शुरू होती हैं वो साफ़ साफ़ दिख रहा था ,
उसकी पतली कमर जैसे मुट्ठी में समा जाए ,
और उसके ऊपर जैसे सोने के दो लड्डू ,... टाइट फ्राक को छेदती दोनों बरछियाँ ,... देखने वालों के सीने में छेद कर रही थीं ,...
फिर ये भी न जो फ्राक की ऊपर की बटन उन्होंने तोड़ दी थी , उन गुदाज गोलाइयों की घाटी भी साफ़ साफ़ नजर आ रही थी ,...
छुटकी वैसे भी लम्बी ५'४ की , एकदम छरहरी ( सिवाय उभारों और पिछवाड़े को छोड़ कर ) , खूब गोरी, शार्प फीचर्स ,...
और देखने वाले , तड़पने वाले थे कौन मेरे गांव के ही बहनचोद , देवर नन्दोई ,... और उन्हें तड़पाने के लिए और मैं कभी जिस तरह से छोटी के कंधे पर हाथ रख देती थी ,
सब को अंदाज लग गया , नयकी भौजी की छुटकी बहिन है ,...
और रास्ते में जो औरतें लड़कियां मिली , मेरी जेठानी ननदें लगती गांव के रिश्ते में , सब को मैंने साफ साफ बता भी दिया ,
इनकी छोटी साली है ,...
लेकिन सबसे ज्यादा हालत खराब हुयी वो मेरे नन्दोई की थी , और मैं चाहती भी यही थी , ... बेचारे इतना तड़प रहे थे चुन्नू से सिर्फ मेरी छोटी के कच्चे उभारों और लौंडा छाप पिछवाड़े की हाल सुन सुन के सुन के ,
नन्दोई के साथ उनकी पत्नी , मेरी ननद भी थीं और गाँव की दो और लड़कियां ,...
झुक कर मैंने जैसे नन्दोई जी का पैर छूने की कोशिश की , उन्होंने पकड़ के उठा लिया और कस के अँकवार में ,
मैं क्यों मौका छोड़ती , ससुराल में नन्दोई पर , ननद से ज्यादा सलहज का हक होता है ,...
कस के अपने दोनों जोबन उनके सीने पर रगड़ते , मैंने नीचे उनके खूंटे को भी मसल दिया , एकदम तन्नाया था बेचारा मेरी छोटी बहन को देखकर ,
और उनके कान में बताया ,
" मेरी सबसे छोटी बहन , छुटकी , ... "
छुटकी असमंजस में थी की उन्हें नमस्ते करे , पैर छुए , ....
तबतक मेरी ननद ने मुस्कराते हुए ननद का हक अदा किया , उसे चिढ़ाया ,
" अरे ये तेरे जीजू के भी जीजू हैं , डबल जीजू "
और तबतक नन्दोई जी मुझे छोड़कर उसकी ओर लपके और वो भी बाहें फैलाये , ... जीजा से तो वो गले ही मिलती थी ,
नन्दोई ने कस के उसे भींच लिया और छुटकी भी और जोश से , बोली
" आप तो डबल जीजू हैं , आप से तो डबल ,... "
और तब तक वो गाँव वाली लड़की थी उसने छुटकी को छेड़ा ,
" एकदम , अपने जीजू से तो एक साइड से और डबल जीजू से डबल साइड , दोनों ओर ,... "
और मेरे नन्दोई चाहते भी तो यही थे , कस के उन्होंने छुटकी को दबौचे हुए थे लेकिन उनका एक हाथ छुटकी के पिछवाड़े फ्राक के अंदर छोटे छोटे लौंडा मार्का चूतड़ों को सहला रहा था , और आँखे मेरे साजन से सवाल पूछ रहीं थी ,
" पिछवाड़ा कोरा है न ,... "
छुटकी पहुंच गयी जीजा के गाँव
जिस तरह वो जाँघों को जाँघों से रगड़ते भींचते चल रही थी , ... और उस का खतरनाक असर उसके ब्वाइश लौंडा मार्का चूतड़ों पर भी पड़ रहा था , लेफ्ट राइट ,लेफ्ट राइट , ... फ्राक उसकी घुटनो से ढाई बित्ते कम से कम ऊपर , और जहां से जाँघे चौड़ी होनी शुरू होती हैं वो साफ़ साफ़ दिख रहा था ,
उसकी पतली कमर जैसे मुट्ठी में समा जाए ,
और उसके ऊपर जैसे सोने के दो लड्डू ,... टाइट फ्राक को छेदती दोनों बरछियाँ ,... देखने वालों के सीने में छेद कर रही थीं ,...
फिर ये भी न जो फ्राक की ऊपर की बटन उन्होंने तोड़ दी थी , उन गुदाज गोलाइयों की घाटी भी साफ़ साफ़ नजर आ रही थी ,...
छुटकी वैसे भी लम्बी ५'४ की , एकदम छरहरी ( सिवाय उभारों और पिछवाड़े को छोड़ कर ) , खूब गोरी, शार्प फीचर्स ,...
और देखने वाले , तड़पने वाले थे कौन मेरे गांव के ही बहनचोद , देवर नन्दोई ,... और उन्हें तड़पाने के लिए और मैं कभी जिस तरह से छोटी के कंधे पर हाथ रख देती थी ,
सब को अंदाज लग गया , नयकी भौजी की छुटकी बहिन है ,...
और रास्ते में जो औरतें लड़कियां मिली , मेरी जेठानी ननदें लगती गांव के रिश्ते में , सब को मैंने साफ साफ बता भी दिया ,
इनकी छोटी साली है ,...
लेकिन सबसे ज्यादा हालत खराब हुयी वो मेरे नन्दोई की थी , और मैं चाहती भी यही थी , ... बेचारे इतना तड़प रहे थे चुन्नू से सिर्फ मेरी छोटी के कच्चे उभारों और लौंडा छाप पिछवाड़े की हाल सुन सुन के सुन के ,
नन्दोई के साथ उनकी पत्नी , मेरी ननद भी थीं और गाँव की दो और लड़कियां ,...
झुक कर मैंने जैसे नन्दोई जी का पैर छूने की कोशिश की , उन्होंने पकड़ के उठा लिया और कस के अँकवार में ,
मैं क्यों मौका छोड़ती , ससुराल में नन्दोई पर , ननद से ज्यादा सलहज का हक होता है ,...
कस के अपने दोनों जोबन उनके सीने पर रगड़ते , मैंने नीचे उनके खूंटे को भी मसल दिया , एकदम तन्नाया था बेचारा मेरी छोटी बहन को देखकर ,
और उनके कान में बताया ,
" मेरी सबसे छोटी बहन , छुटकी , ... "
छुटकी असमंजस में थी की उन्हें नमस्ते करे , पैर छुए , ....
तबतक मेरी ननद ने मुस्कराते हुए ननद का हक अदा किया , उसे चिढ़ाया ,
" अरे ये तेरे जीजू के भी जीजू हैं , डबल जीजू "
और तबतक नन्दोई जी मुझे छोड़कर उसकी ओर लपके और वो भी बाहें फैलाये , ... जीजा से तो वो गले ही मिलती थी ,
नन्दोई ने कस के उसे भींच लिया और छुटकी भी और जोश से , बोली
" आप तो डबल जीजू हैं , आप से तो डबल ,... "
और तब तक वो गाँव वाली लड़की थी उसने छुटकी को छेड़ा ,
" एकदम , अपने जीजू से तो एक साइड से और डबल जीजू से डबल साइड , दोनों ओर ,... "
और मेरे नन्दोई चाहते भी तो यही थे , कस के उन्होंने छुटकी को दबौचे हुए थे लेकिन उनका एक हाथ छुटकी के पिछवाड़े फ्राक के अंदर छोटे छोटे लौंडा मार्का चूतड़ों को सहला रहा था , और आँखे मेरे साजन से सवाल पूछ रहीं थी ,
" पिछवाड़ा कोरा है न ,... "