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जुगल बंदी
और फिर मैं और मेरे साजन की जुगल बंदी शुरू हो गयी ,
मैं उनकी साली की चूत चूस रही थी और वो उसकी चूँची , दूसरा जोबन अब उनके हाथों में था और कस के रगड़ा मसला जा रहा था ,
छुटकी के उछलने कूदने की चिंता न मुझे थी , न उन्हें इतनी कस के उसी की ब्रा से उन्होंने अपनी साली के हाथों को डिब्बे की खिड़की से बाँध रखा था
थोड़ी देर में उसकी बुर एकदम पनिया गयी थी बस , अगर वो अपने जिज्जा के लंड से चुदने से घबड़ा रही थी तो मेरी जीभ थी न ,...
दोनों अंगूठों से मैंने उस कली की कली को फैलाया और मेरी पूरी जीभ अंदर ,
और जीभ की टिप से चूत की अंदरूनी दीवालों को , क्या कोई मर्द बुर चोदेगा जिस तरह से मेरी जीभ चोद रही थी ,साथ में मेरे होंठ कस कस के निचले होंठ चूस रहे थे ,
खूब खेली पक्की छिनार भी पांच छह मिनट में इस चुसाई में पानी छोड़ देती और ये तो नयी बछेड़ी थी , ...
ऊपर से उसके जिज्जा भी साथ साथ उसके निप्स कभी होंठों से चूसते कभी जीभ से जोर जोर से फ्लिक करते
चार पांच मिनट में वो कगार पर पहुँच गयी , ... बस मैं थोड़ी देर और चूसती तो वो पानी छोड़ देती , जोर जोर से वो सिसक रही थी चूतड़ पटक रही थी ,
मैंने ' उनकी ' ओर देखा , और उन्होंने जोर से सर हिला के मना कर दिया
और बस उसने झड़ना शुरू ही किया था की हम दोनों ने उसे छोड़ दिया
और उन्होंने कचकचा के अपनी साली के निप्स काट लिए ,
झड़ना रुक गया और दर्द के मारे चीख निकल गयी उसकी ,...
हम दोनों ने उसे छोड़ दिया , एक दो मिनट बाद जब वो साँसे लेने के लायक होई तो एक बार मैं फिर से ,
और अबकि जीभ से चपड़ चपड़ चाट रही थी अगवाड़े पिछवाड़े दोनों ओर।
कुछ देर बाद फिर छुटकी की वही हालत होने लगी , मैं उसको तड़पा रही थी बार बार कगार तक ला कर छोड़ रही थी , उसकी क्लीट एकदम कड़ी , ... फूली ,...
मैं बस अब जीभ की टिप से सीधे क्लिट को सहला रही थी , और जैसे ही उसने झड़ना शुरू किया मैंने कचकचा के क्लिट काट ली , ... और वो एकदम से चीख पड़ी
पौन घंटे तक , ... छह सात बार वो आलमोस्ट झड़ने के कगार पर पहुंचा के हम दोनों ने उसे रोक दिया ,
मैं उनकी बदमाशी समझ रही थी ,
होली के पहले वाली रात को भी तो उन्होंने मेरे साथ यही किया था ,...
सारी रात चोदा था छह सात घंटे , सच में बड़ी ताकत है इनमें ,...
लेकिन मुझे झड़ने नहीं दिया , खुद ही सिर्फ दो बार झड़े ,... एक बार मेरी बुर में और एक बार सुबह ,... जब ननद दरवाजा खटखटा रही थी , मुझे होली खेलने के लिए निकालने के लिए ,... उस समय वो मेरी गाँड़ में झड़ रहे थे , ....
उसका मतलब मैं सुबह समझी , होली खेलते , ... बस मन कर रहा था कोई मुझे झाड़ दे , मेरी ननद , नन्दोई , देवर कोई भी ,...
तो बस कल सुबह यही हालत इस गौरेया की भी होगी , जब हम लोग इनके मायके पहुंचेंगे , मेरी छुटकी बहिनिया एकदम गर्मायी होगी ,
वो एकदम थेथर हो चुकी थी अब तो बस दो तीन मिनट मैं उसकी चूत चूसती तो वो झड़ने के कगार पर पहुंच जाती , ...
जैसे मेरी ऊँगली लगेगी तो भी वो झड़ जाएगी
गाड़ी धीमे हो रही थी , स्टेशन की लाइट दिख रही थी , लग रहा था कोई बड़ा स्टेशन आ रहा है , ... गाड़ी कुछ देर तक यहाँ रूकती , ...
मैंने इनकी ओर देखा छुटकी की ओर इशारा कर के , ... उसकी ब्रा से तो उसके हाथ बंधे थे और चड्ढी नीचे पड़ी थी , ... और खिड़की खूली हुयी थी
उन्होंने आँख से इशारा कर के मना कर दिया , तब भी मैंने चादर से उसे आधा तिहा ढक दिया और खुद उनकी शर्ट पहन ली , ...
इन्होने भी शार्ट अपना ऊपर चढ़ा लिया , गाडी रुक गयी थी ,... कोई बड़ा स्टेशन था ,
चाय चाय की आवाज करता कोई लड़का हमारी खिड़की के पास बार बार चक्कर लगा रहा था ,...
और फिर मैं और मेरे साजन की जुगल बंदी शुरू हो गयी ,
मैं उनकी साली की चूत चूस रही थी और वो उसकी चूँची , दूसरा जोबन अब उनके हाथों में था और कस के रगड़ा मसला जा रहा था ,
छुटकी के उछलने कूदने की चिंता न मुझे थी , न उन्हें इतनी कस के उसी की ब्रा से उन्होंने अपनी साली के हाथों को डिब्बे की खिड़की से बाँध रखा था
थोड़ी देर में उसकी बुर एकदम पनिया गयी थी बस , अगर वो अपने जिज्जा के लंड से चुदने से घबड़ा रही थी तो मेरी जीभ थी न ,...
दोनों अंगूठों से मैंने उस कली की कली को फैलाया और मेरी पूरी जीभ अंदर ,
और जीभ की टिप से चूत की अंदरूनी दीवालों को , क्या कोई मर्द बुर चोदेगा जिस तरह से मेरी जीभ चोद रही थी ,साथ में मेरे होंठ कस कस के निचले होंठ चूस रहे थे ,
खूब खेली पक्की छिनार भी पांच छह मिनट में इस चुसाई में पानी छोड़ देती और ये तो नयी बछेड़ी थी , ...
ऊपर से उसके जिज्जा भी साथ साथ उसके निप्स कभी होंठों से चूसते कभी जीभ से जोर जोर से फ्लिक करते
चार पांच मिनट में वो कगार पर पहुँच गयी , ... बस मैं थोड़ी देर और चूसती तो वो पानी छोड़ देती , जोर जोर से वो सिसक रही थी चूतड़ पटक रही थी ,
मैंने ' उनकी ' ओर देखा , और उन्होंने जोर से सर हिला के मना कर दिया
और बस उसने झड़ना शुरू ही किया था की हम दोनों ने उसे छोड़ दिया
और उन्होंने कचकचा के अपनी साली के निप्स काट लिए ,
झड़ना रुक गया और दर्द के मारे चीख निकल गयी उसकी ,...
हम दोनों ने उसे छोड़ दिया , एक दो मिनट बाद जब वो साँसे लेने के लायक होई तो एक बार मैं फिर से ,
और अबकि जीभ से चपड़ चपड़ चाट रही थी अगवाड़े पिछवाड़े दोनों ओर।
कुछ देर बाद फिर छुटकी की वही हालत होने लगी , मैं उसको तड़पा रही थी बार बार कगार तक ला कर छोड़ रही थी , उसकी क्लीट एकदम कड़ी , ... फूली ,...
मैं बस अब जीभ की टिप से सीधे क्लिट को सहला रही थी , और जैसे ही उसने झड़ना शुरू किया मैंने कचकचा के क्लिट काट ली , ... और वो एकदम से चीख पड़ी
पौन घंटे तक , ... छह सात बार वो आलमोस्ट झड़ने के कगार पर पहुंचा के हम दोनों ने उसे रोक दिया ,
मैं उनकी बदमाशी समझ रही थी ,
होली के पहले वाली रात को भी तो उन्होंने मेरे साथ यही किया था ,...
सारी रात चोदा था छह सात घंटे , सच में बड़ी ताकत है इनमें ,...
लेकिन मुझे झड़ने नहीं दिया , खुद ही सिर्फ दो बार झड़े ,... एक बार मेरी बुर में और एक बार सुबह ,... जब ननद दरवाजा खटखटा रही थी , मुझे होली खेलने के लिए निकालने के लिए ,... उस समय वो मेरी गाँड़ में झड़ रहे थे , ....
उसका मतलब मैं सुबह समझी , होली खेलते , ... बस मन कर रहा था कोई मुझे झाड़ दे , मेरी ननद , नन्दोई , देवर कोई भी ,...
तो बस कल सुबह यही हालत इस गौरेया की भी होगी , जब हम लोग इनके मायके पहुंचेंगे , मेरी छुटकी बहिनिया एकदम गर्मायी होगी ,
वो एकदम थेथर हो चुकी थी अब तो बस दो तीन मिनट मैं उसकी चूत चूसती तो वो झड़ने के कगार पर पहुंच जाती , ...
जैसे मेरी ऊँगली लगेगी तो भी वो झड़ जाएगी
गाड़ी धीमे हो रही थी , स्टेशन की लाइट दिख रही थी , लग रहा था कोई बड़ा स्टेशन आ रहा है , ... गाड़ी कुछ देर तक यहाँ रूकती , ...
मैंने इनकी ओर देखा छुटकी की ओर इशारा कर के , ... उसकी ब्रा से तो उसके हाथ बंधे थे और चड्ढी नीचे पड़ी थी , ... और खिड़की खूली हुयी थी
उन्होंने आँख से इशारा कर के मना कर दिया , तब भी मैंने चादर से उसे आधा तिहा ढक दिया और खुद उनकी शर्ट पहन ली , ...
इन्होने भी शार्ट अपना ऊपर चढ़ा लिया , गाडी रुक गयी थी ,... कोई बड़ा स्टेशन था ,
चाय चाय की आवाज करता कोई लड़का हमारी खिड़की के पास बार बार चक्कर लगा रहा था ,...