Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 12 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग १७

छुटकी - प्यार दुलार और,...

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आज का दिन होली तो होती नहीं गाँव में , पर मैंने तय कर लिया था की आज शाम अपनी जेठानी मंजू के यहाँ एक चक्कर जरूर लगा के आउंगी।

तब तक सासू की आवाज आ गयी , खाने के लिए और मैं अंदर ,...

,,,,,

छुटकी अभी भी मेरी सासू जी की गोद में ठसके से खाने की टेबल पर बैठी थी , और उसके एक ओर मेरी मंझली ननद थीं , दूसरी ओर मैं बैठ गयी। सामने ये और नन्दोई जी , छुटकी उन दोनों लोगों को ललचा रही थी , इनसे ज्यादा मेरे ननदोई जी लार टपका रहे थे मेरी छोटी बहन की कच्ची अमिया देख कर , और ऊपर से मेरी सासू जी जिस तरह छुटकी के गाल सहला रहीं थी , कभी कभी हलके से चिकोटी काट लेतीं , मैं समझ रही थी , दुलार से ज्यादा वो रस ले रही थीं और मेरी ननद तो और , उसके उभारों को पकड़ के अपने मर्द को ललचा रही थीं।

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मैं समझ गयी मेरी छोटी बहन की जितनी रगड़ाई , उसके जिज्जा और डबल जिज्जा ( मेरे ननदोई ) करेंगे उससे कहीं ज्यादा ये महिलायें करेंगीं।

सास मेरी प्यार से उसे अपने हाथ से खिला रहीं थी , अगर वो मना भी करती तो ,

खाने के बाद मैं आ कर अपने कमरे में सो गयी , छुटकी को सासू जी अपने साथ ले गयी थीं , अपने कमरे में।

मेरी नींद घंटे भर बाद खुली , सांझ थोड़ी देर में होने वाली थी , और छुटकी मुझे जगा रही थी।

"क्या हुआ सोने दे न , रात को तेरे जीजा नहीं सोने देते और अब दिन में तू भी ,... " मैं झुंझलाते हुए बोली।

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" दी , मुझे चाहे जो कह लीजिये , लेकिन मेरे इतने अच्छे वाले जीजा को कुछ मत कहिये , वरना झगड़ा हो जाएगा ,... " खिलखिलाते हुए वो बोली ,

मैंने आँखे खोली और मुझे विश्वास नहीं हुआ , हॉट नहीं सुपरहॉट ,

मैंने बोला था न की छुटकी चेहरा अपनी उम्र से भी कम एकदम भोला ,लगता था अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे हों , लेकिन फिगर उसकी क्लास की लड़कियों से बीस नहीं बाइस पर आज उसका चेहरा भी एकदम ,... नमक तो उसके चेहरे पर हरदम था , लेकिन आज वो एकदम ,...

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मैं मुस्करायी

और छुटकी भी मुस्करायी ,

सासू माँ का कमाल , उसकी बड़ी बड़ी आँखों में उन्होंने पतली सी काजल की रेख जो डाल दी थी , हल्का सा मस्कारा और आई ब्रो ,

आँखे सच में कटार लग रही थीं , और ऊपर से जस्ट अ टच ऑफ़ लिपस्टिक , डार्क रेड , एकदम किसेबल ,

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मैंने उसे दुलार से अपनी बाहों में भर लिया ,...

पर वह छटक के अलग हो गयी ,

" उठिये न , बड़ी मुश्किल से जीजू माने हैं , वो तो डबल जीजू ,... और माँ " ( मेरी सास को वो माँ कहने लगी थी )

पता ये चला की छुटकी ने ही जीजू से अपने कहा की वो बोर हो रही है , तो मेरे नन्दोई ने उससे बोला की चल तुझे आम के बगीचे में घुमा लाते हैं , सांझ को लौट आएंगे , इन्होने अपनी साली को छेड़ते हुए बहाना बनाया तो मेरी सास की ओर से इन्हे डांट पड़ गयी , जाओ न तुम दोनों घुमा लाओ उसको , सुबह से घर में बैठी है , थोड़ा गाँव भी देख लेगी , .... "

और उस के बाद मेरी सास ने उसे तैयार कर दिया , अरे गाँव में निकल रही मेरी बेटी तो गाँव वालों को मालूम तो होना चाहिए शहर से कोई आया है।

( असल में प्लान तो इनका भी यही था की अमराई में उसके पिछवाड़े का ,...

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और ननदोई जी ने इनसे उगलवा लिया था की पिछवाड़े का ताला तो वही खोलेंगे ,... और पिछवाड़े के मामले में नन्दोई जी इनसे २२ नहीं तो २० थे ही , एक तो नन्दोई जी का मोटा बहुत था , फिर एकदम बेरहम , बेदर्द ,... ये तो तब भी बहुत ख्याल करते थे और अपनी बाग़ भी एकदम गझिन , दिन में भी न दिखाई पड़े , डेढ़ दो बीघे में फैली , पचासों आम के पेड़ )
 
छुटकी चली,...

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( असल में प्लान तो इनका भी यही था की अमराई में उसके पिछवाड़े का ,... और ननदोई जी ने इनसे उगलवा लिया था की पिछवाड़े का ताला तो वही खोलेंगे ,... और पिछवाड़े के मामले में नन्दोई जी इनसे २२ नहीं तो २० थे ही , एक तो नन्दोई जी का मोटा बहुत था , फिर एकदम बेरहम , बेदर्द ,... ये तो तब भी बहुत ख्याल करते थे और अपनी बाग़ भी एकदम गझिन , दिन में भी न दिखाई पड़े , डेढ़ दो बीघे में फैली , पचासों आम के पेड़ )

लेकिन मामला ये अटका था कपडे का , वो मेरे पास थे ,

" यही पहन के चली जाती " मैंने अपनी छोटी बहन को चिढ़ाया , लेकिन समझती मैं भी थी , वो भी ,

वो झुंझला रही थी , की हँसते हुए मैंने उसके उभारो को हलके से सहलाते हुए कहा , इसका ढक्कन ढूंढ रही हो , क्यों , तेरे जीजू तो देख ही चुके हैं।

" दी तू भी न , डबल जीजू भी तो चल रहे हैं न , दो न जल्दी ,... " वो चिढ़ते हुए बोली।

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बेचारी को क्या मालूम जीजू से डबल ताकत से उसके डबल जीजू ये कच्चे टिकोरे कुतरेंगे।

और उस को ये भी नहीं मालूम था की उसके कपड़ों में से सारी ब्रा चड्ढी मैंने वहीँ घर पर निकाल के रख दी , सिवाय एक ,

और एक जो उस ने पहन रखी थी , और वो उस के जीजू ने ट्रेन में ही निकाल के बाहर , ... तो जब वो गाँव में आयी बास फ्राक के नीचे कुछ नहीं था ,

हाँ एक ब्रा और पैंटी मैंने इस लिए छोड़ी थी ,... मैंने नन्दोई को अपने भाई से कहते सुना था ,

सुन स्साले , ... जो गाय सीधे से दुहने नहीं देती न , उसका पैर छान के , बस एक बार वो आ जाए वो ,... और जो तू कह रहा हैं न बार बार छोटी है , छोटी है ,... आने दे , जब यहाँ से जायेगी न तो जिस भोंसडे से निकली है उससे भी चौड़ा भोंसड़ा कर के हम लोग भेजेंगे "

छुटकी की समौरिया , .... एक अपनी चचेरी ननद को जो मैंने टोका तो मेरी जेठानी हँसते हुए बोली ,

" अरे ई सब अपने भइया के फायदे के लिए , हमारे देवर के फायदे के लिए करती हैं , जहाँ पाया निहुरा के फ्राक उठाया , ठोंक दिया। "

सच में गाँव में औरतों को छोड़िये लड़कियां भी चड्ढी बनयाईन कम ही पहनती थी , इसलिए

लेकिन अभी मैंने उसकी ब्रा पैंटी निकाल दी

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और एक टॉप स्कर्ट जो थोड़ी पुरानी थी , एकदम टाइट होती थी ,

और इसमें उसके कबूतर की चोंचे एकदम साफ़ झलक रही थीं , ... परफेक्ट , मैंने सोचा।

" हे जरा मुड़ पीछे से ठीक कर दूँ , जीजू और डबल जीजू दोनों के साथ जा रही है ," मैं बोली और स्कर्ट थोड़ी सी और ऊपर खींच दी।

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आलमोस्ट उसके गोरे गोरे मांसल नितम्बों की झलक साफ़ साफ़ दिख रही थी और वो हलकी सी भी झुकती तो उसकी सफ़ेद चड्ढी भी ,...

बाहर ये और नन्दोई जी बड़ी बेसबरी से छुटकी का इन्तजार कर रहे थे और उनके साथ मेरी मंझली ननद और सास भी ,

सासू जी ने छुटकी के पिछवाड़े अपना हाथ रख दिया और जिस तरह से वो सहला रही थीं , साफ़ था उनकी बीच की दोनों उँगलियाँ सीधे , छुटकी की पिछवाड़े दरार पर रगड़ रही थी , और

नन्दोई जी की निगाह वहीँ टिकी हुयी थी , एकदम चिड़िया की आँख की तरह , और असर उनके खूंटे पर हो रहा था , एकदम तना , पैंट में तम्बू तना हुआ ,

मैं उन्हें देख कर मुस्करा रही थी , चिढ़ा रही थी , उकसा रही थी , ...मेरी सास ने भी अपने दामाद को छेड़ते हुए कहा ,

" मेरी बेटी का ध्यान रखना , जरा अच्छी तरह से , बेटी बेटी में भेद मत करना ,... "

और ये बोलते हुए मेरी सास की दोनों उँगलियाँ ठीक छुटकी के पिछवाड़े स्कर्ट के ऊपर से , कस के जैसे उन्हें दिखाते हुए दबा दिया ,

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बेचारे मेरे नन्दोई , एक कच्ची कली का कसा कुंवारा गदराया पिछवाड़ा , ... कलेजा उनका मुंह को आ गया।

मैं नन्दोई जी को चिढ़ाने का मौका क्यों छोड़ती , मैंने सासू जी से कहा ,

" अरे एकदम नहीं माँ जी , ये मेरी ननद और ननद की ननद में कोई भेद नहीं करते तो आपकी बेटी में कोई भेद क्यों करेंगे ,... "

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मेरी सास ने मुस्कराते हुए अपने बेटे को अब निर्देश जारी किया , " अरे घर लौटने की कोई जल्दी नहीं है , जरा मेरी बेटी को अच्छी तरह से ,... सब कुछ ,... और बेटी तुम भी घबड़ाना मत ,... "

बेचारी छुटकी उसे क्या मालूम था वो हिम्मत के साथ हँसते हुए बोली ,

" नहीं माँ , जीजू और डबल जीजू दोनों तो हैं मेरे साथ ,... "

वो लोग घर से बाहर गए और मैं किचेन में साथ में सासू जी और मेरी ननद ,

मैं चाय बना रही थी की सासू जी ने बोला की सुन तेरी जेठानी वो मंजू कल आयी थी तुझे याद कर रही थी , आज कल तेरे जेठ भी बाहर गए हैं "

मंजू यानी चुन्नू की भाभी ,

"मैं भी सोच रही थी जरा उन के यहाँ हो आऊं " सासू जी और ननद को चाय देते हुए में बोली ,
 
चुन्नू

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वो लोग घर से बाहर गए और मैं किचेन में साथ में सासू जी और मेरी ननद ,

मैं चाय बना रही थी की सासू जी ने बोला की सुन तेरी जेठानी वो मंजू कल आयी थी तुझे याद कर रही थी , आज कल तेरे जेठ भी बाहर गए हैं "

मंजू यानी चुन्नू की भाभी ,

"मैं भी सोच रही थी जरा उन के यहाँ हो आऊं " सासू जी और ननद को चाय देते हुए में बोली ,

" हाँ बड़ी हैं फिर आज भी आने जाने लायक है , कल से तो तीन दिन तक होली का हुड़दंग ही चलेगा , ... " सासू जी ने चाय सुड़कते हुए कहा ,

थोड़ी देर में मैं मंजू भाभी के घर की ओर थी।

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मेरे मन में जो नैना ने चुन्नू के बारे में बोला था , वो घूम रहा था।

मंजू भाभी ने मुझे देखते ही मुस्कराकर कहा, जाओ, ऊपर के कमरे में है कल से ही बहुत गुस्सा है तुमसे, जब से पेपर दे के आया है,

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' तो मैं ही मनाऊंगी, ... बस आती हूँ देवर जी को मना के "

और सीढ़ी से मैं ऊपर चढ़ के उसके कमरे में , मुंह उसका फूला था, होली के मौसम में कोई मायके जाता है, पर उनका तो फायदा हो गया न सास, सलहज, साली सबका मज़ा लिया और छोटी साली को उठा भी ले आये, ...

पर अभी तो मुझे रूठे देवर को मनाना था,... '

मुंह उसका फूला था, मुझे देख के दूसरी ओर चेहरा कर लिया, पर उसकी दवा आती थी मुझे , मैंने गुदगुदी लगाई , पर हँसते हँसते वो बोला, ...

" जाइये मैं नहीं बोलता आपसे , एक तो होली में इम्तहान, और कल पेपर के बाद क्यों नहीं आयीं,... "

" गलती हो गयी, सजा दे दो पर गुस्सा मत हो और अभी तो हमारी तुम्हारी होली भी बाकी है , लेकिन पहले ये बताओ पेपर कैसा हुआ,... "

मैं उससे सट के बैठ गयी, नैना की बात एकदम सही थी , स्साला लेने लायक हो गया है।

अब उसके चेहरे पे मुस्कान आयी,... बोला, ...

" तभी तो मैं और गुस्सा हूँ आपसे, जो बताया था आपने पढ़ाया था, बस पेपर एकदम वैसा,... बाकी सब तो रो रहे थे , लेकिन मेरा एकदम बहुत अच्छा और आयी नहीं आप। "

मैंने मन ही मन सोचा अभी असली पढ़ाई रज्जा तेरी करानी बाकी है , पहले मैं मजा लूंगी , फिर तेरी बहनों पे तुझे चढ़ाउंगी , सगी न सही , चचेरी, फुफेरी सही।

" अरे अभी तो मेरी तेरी होली उधार है , अब तो इम्तहान का बहाना भी नहीं है , " उसका गाल सहलाते मैं बोली।

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" नहीं नहीं , भाभी प्लीज मैं होली नहीं खेलता, ... "

छटकते वो बोला।

और इसी अदा पे तो मैं निहाल हो गयी। बहुत मज़ा आता है इन कमसिन उमर वालों पर जबरदस्ती करने में,

" तुम मत खेलना, मैं तो खेलूंगी, सबसे छोटे देवर हो मेरे, होली में भले बच गए इम्तहान के चक्कर में लेकिन अब थोड़ी , और अभी तो चार दिन पूरे बचे हैं "

और एक बार फिर गुदगुदी लगाते मैं पहले पेट , फिर मेरा हाथ नेकर के अंदर और मैंने उसे पकड़ लिया,

ठीक ठाक बल्कि अच्छा खासा था, ... मेरे पकड़ते ही वो कसमसाने लगा, जैसे कोई जीजा होली में साली की नयी नयी आती चूँची पकड़ के दबा दे,...

पर न जीजा छोड़ते हैं और न मैं छोड़ने वाली थी और थोड़ी ही देर में सोते से वो जग गया, मूसल चंद तो नहीं लेकिन साढ़े पांच छह से तो कम नहीं ही रहा होगा, और कड़ा भी बहुत ,

लेकिन सबसे अच्छी बात, जो इस उमर के लड़कों में होती है छूते ही टनटना गया. वो छटपटा रहा था छूटने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बार चिड़िया चंगुल में आ जाए तो फिर,...

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कुछ देर तक तो मैं दबाती रही, बस उसके कड़ेपन का मोटापे का अंदाज ले रही थी, बहुत अच्छा लग रहा था, फिर हलके हलके सहलाते मैंने छेड़ा,

" हे देवर जी, एच पी,... अरे हैंडप्रैक्टिस करते हो न,... किसका नाम ले ले कर अपनी किस बहन "

उसकी कोई सगी तो थी नहीं तो चचेरी बहनों का नाम ले ले कर मैंने छेड़ा, नीता, मीता, नैना, रीता, किस किस का, या और है कोई
 
भाग १८

चुन्नू की पढ़ाई





" अरे अभी तो मेरी तेरी होली उधार है , अब तो इम्तहान का बहाना भी नहीं है , " उसका गाल सहलाते मैं बोली।

" नहीं नहीं , भाभी प्लीज मैं होली नहीं खेलता, ... " छटकते वो बोला।

और इसी अदा पे तो मैं निहाल हो गयी। बहुत मज़ा आता है इन कमसिन उमर वालों पर जबरदस्ती करने में,

" तुम मत खेलना, मैं तो खेलूंगी, सबसे छोटे देवर हो मेरे, होली में भले बच गए इम्तहान के चक्कर में लेकिन अब थोड़ी , और अभी तो चार दिन पूरे बचे हैं "

और एक बार फिर गुदगुदी लगाते मैं पहले पेट , फिर मेरा हाथ नेकर की अंदर और मैंने उसे पकड़ लिया,

ठीक ठाक बल्कि अच्छा खासा था, ...

मेरे पकड़ते ही वो कसमसाने लगा, जैसे कोई जीजा होली में साली की नयी नयी आती चूँची पकड़ के दबा दे,... पर न जीजा छोड़ते हैं और न मैं छोड़ने वाली थी और थोड़ी ही देर में सोते से वो जग गया, मूसल चंद तो नहीं लेकिन साढ़े पांच छह से तो कम नहीं ही रहा होगा, और कड़ा भी बहुत ,





लेकिन सबसे अच्छी बात, जो इस उमर के लड़कों में होती है छूते ही टनटना गया. वो छटपटा रहा था छूटने की कोशिश कर रहा था, लेकिन बार चिड़िया चंगुल में आ जाए तो फिर,... कुछ देर तक तो मैं दबाती रही, बस उसके कड़ेपन का मोटापे का अंदाज ले रही थी, बहुत अच्छा लग रहा था, फिर हलके हलके सहलाते मैंने छेड़ा,

" हे देवर जी, एच पी,... अरे हैंडप्रैक्टिस करते हो न,... किसका नाम ले ले कर अपनी किस बहन " उसकी कोई सगी तो थी नहीं तो चचेरी बहनों का नाम ले ले कर मैंने छेड़ा, नीता, मीता, नैना, रीता, किस किस का, या और है क्यों,..."





वो जितना शर्मा रहा था, मैं उतने ही कस कस के मुठिया रही थी, और एक झटके में उसका ऊपर का चमड़ा खींच के, अच्छा खासा मोटा सुपाड़ा, लीची ऐसा रसदार, गप्प से मुंह में लेने लायक,.... ' हे आज से ये ऐसे ही खुला रहेगा, समझे ' खुले सुपाड़े पर अंगूठा रगड़ते मैं बोली,





बड़ी मुश्किल से सिसकते हुए उसके मुंह से निकला, भाभी,... छोड़ दीजिये न"

उसके कान में मैंने अपनी जीभ गोल गोल घुमाई, पल्लू मेरा कब का गिर गया था, उभार पीछे से मैं उसके पीठ पर रगड़ रही थी, हल्के हल्के। एक हाथ तो औजार पे था , पर दूसरा तो खाली था,... बस उसके नाख़ून, उसके ब्वाय टिट्स पर, और जोर से खरोंच के,... चिढ़ाया उसको,... "

"क्या छोड़ दूँ , साफ़ साफ़ बोल न, नूनी मत कहना, अब ये नूनी नहीं रही, सच्ची बोल दे एक बार फिर छोड़ दूंगी,... "

बड़ी मुश्किल से दस बार ल बोलने के बाद उसके मुंह से लंड निकला, तो मैंने मुट्ठी ढीली कर छोड़ दिया, लेकिन अगले पल कस के दबोच लिया और अबकी फुल स्पीड से मुठियाने लगी, पांच मिनट तो हो ही गए थे,

जित्ती उसकी हालत खराब हो रही थी उत्ता मुझे मज़ा आ रहा था, और अब साथ में कभी मेरी जीभ उसके इयर लोब्स को छू लेती, कभी गाल को सहला देती, कभी गले के पीछे रगड़ देती, और उँगलियाँ सांप बिच्छू की तरह उसके सीने पर डोल रही थीं, कभी उसके ब्वाय टिट्स को नोच लेती,..

वो गहरी गहरी साँसे ले रहा था, देह उसकी एकदम टेन्स हो गयी थी, और वो एकदम लोहे की रॉड, इतना कड़ा, मैं बिना रुके पूरी तेजी से आगे पीछे आगे पीछे, ... कभी अंगूठे से बेस को दबा देती तो कभी बॉल्स भी सहला देती, ... बीच बीच में मैं घड़ी भी देख रही थी, दस मिनट हो गए मुठियाते,... लेकिन अभी,





पर एक दो मिनट के बाद उसके मुंह से आवाज निकली, पूरी जोर से छुड़ाने की कोशिश करते चुन्नू बोला,

" भाभी, मेरी अच्छी, भाभी प्लीज छोड़ दीजिये न "

" नहीं छोडूंगी, ... क्यों छोडूं बोल,... " कस के मुट्ठी में दबाते, रगड़ते मैंने उसे चिढ़ाया।

" भाभी, भाभी,... पता नहीं कैसा कैसा लग रहा है,... प्लीज भाभी,... हो जाएगा, कुछ निकल जाएगा,... " अब उस की आँखे बंद हो रही थीं , देह और कड़ी,...

" अरे तो निकल जाने दे न, क्या करेगा बचा बचा के,... निकलने दे "

मैंने मुठियाने की रफ्तार फुल स्पीड पर कर दी, ...एक बार फिर मेरी निगाह दीवाल घडी पर , बारह मिनट हो गए थे, और अब.,...

फिर जो पिचकारी छूटी तो भी मेरे हाथ रुके नहीं, मुट्ठी भर मलाई,कुछ तो सीधे मेरे चेहरे पे ,





गाल पर लगी मलाई मैंने उसके गालों पर अपने गालों से रगड़ दी , और मुस्करा के मैं बोली " हैप्पी होली , चल भाभी देवर की होली की शुरआत हो गयी। "

और चलने के पहले मैंने उसका एक कस के चुम्मा लिया कर चेता भी दिया, ' कल असली होगी देवर भाभी की, तैयारी कर के रखना, और अगर दरवाजा बंद मिला न तो मेरी तेरी, देवर भाभी की हरदम के लिए कुट्टी,...





नीचे मैं उतरी तो मंजू भाभी ने मुस्कराते हुए पुछा, देवर का गुस्सा कम हुआ की नहीं।

मैंने अपनी हथेली खोल के दिखा दी , देवर रस से सनी थी,... " पिघल गया, लेकिन असली होली देवर भाभी की कल होगी, असली वाली,...हाँ देवर के पिचकारी में रंग है ये पता चल गया "

मंजू भाभी के यहाँ ही कल भौजाइयों का जमावड़ा होना था, तय हुआ की ११ बजे सब लोग अपने घर का काम निपटा के,...

" एकदम लेकिन मैं दस बजे ही आ जाउंगी, ... " चलते हुए मैं बोली

" देवर से रंग खेलने,... " हंस के वो बोलीं, लेकिन मैंने बाहर निकल के मुड़ के अपना इरादा साफ़ कर दिया,... 'देवर की नथ उतारने।'



 
छुटकी के पिछवाड़े की,...





मंजू भाभी के घर से बाहर निकली ही थी, की दो चार और भौजाइयां ( गाँव के रिश्ते से मेरी जेठानियाँ ) मिल गयीं, और कल के दिन ननदों के साथ होने वाली होली के बारे में बात होने लगी, और कैसे किसकी रगड़ाई की जायेगी, एक दो ने नैना की भी बात की, की कुंवारेपन में भी पक्की छिनार थी और अकेले दो -तीन भौजाइयों को निपटा देती थी,... लेकिन फिर बात छुटकी की ओर मुड़ गयी, कल की ननदों के साथ होली में तो वो हमारी ही टोली में होनी ही थी. लेकिन मुझे अचरज इस बात का था, की वो सुबह ही आयी थी, लेकिन शाम तक सारे पुरवा, टोलों को इस बात की खबर हो गयी थीं.

घर की ओर मैं गाँव के बाहर बाहर से निकली, बगल में ही हम लोगों की वो ढाईबीघे की आम की गझिन बाग़ जहाँ दुपहरिया में भी अमावस रहती थी, जहाँ ये और मेरे नन्दोई छुटकी को,...

और तभी, एक जोर की चीख सुनाई पड़ी, बहुत तेज दिल दहलाने वाली, अगर मैं आवाज नहीं पहचानती तो मैं भी हिल जाती, आधे गाँव में तो सुनाई दी हो होगी, ... छुटकी की चीख,

इसका मतलब ननदोई जी ने पिछवाड़ा फाड़ दिया मेरी छुटकी बहिनिया का,...

मैं बहुत जोर से मुस्करायी, बेचारी, कल ही तो चूत उसके जीजा ने फाड़ी थी और जीजा के जीजा ने आज बेचारी की गाँड़ फाड़ दी,...





कुछ देर तक तो मैं ठिठक कर वहीँ खड़ी रही, इन्तजार करती रही अगली चीखों का, इतनी बार इनसे और अब तो नन्दोई जी से भी गाँड़ मरा चुकी थी, मुझे मालूम था की अभी तो चीखों की शुरुआत है, ... असली चीख तो तब निकलेगी जब मूसल नन्दोई जी का गाँड़ का छल्ला पार करेगा,...

कान पारे वही बाग़ की ओर ,... लेकिन कुछ नहीं,...

थोड़ी देर बाद मैं घर की ओर चल दी, सांझ होनवाली थी,... रास्ते में भी कहीं कोई देवर मिल जाता कोई ननद तो उन्हें छेड़ने में ही, गरियाने में, ... जब मैं अपने पुरवा में घुसने ही वाली थी, एक पतली सी संकरी सी गली, पीछे से किसी ने दबोच लिया, और हाथों से मेरी आँखें बंद कर दी.

एक पल के लिए तो मैं घबड़ायी,... पर अगले पल ही उन कोमल हथेलियों को पहचान गयी, और कौन छिनारो में छिनार, मेरी सबसे छिनार ननद, नैना,... और हथेली से ज्यादा उसकी खिलखिलाती हंसी जो लड़कियों की ससुराल में बंद हो जाती है पर मायके आते ही खिलते, फूटते लावे की तरह एक बार फिर से,...





"अरे हमरे कौन देवर से कबड्डी खेल के आ रही हो,... " मैंने चिढ़ाया , तो उसने हथेली खोल दिया और हँसते हुए बोली,...

" भौजी, आपके लिए खुश खबरी, आपकी छुटकी बहिनिया की गांड खूब हचक के कूटी जा रही है, और मैं कानो सुनी नहीं आँखों देखी बोल रही हूँ. "





अब मेरे कान खुल गए, कानों सुनी तो ठीक, चीख तो मैंने भी सुनी थी और आधे गाँव ने सुनी होगी, लेकिन आँखों देखी, और मैं ये जानने के लिए भी परेशान थी की एक चीखतो दूसरी चीखें क्यों नहीं निकली,..

और नैना ननद ने सब बातों का हल बता दिया, वो आम की बाग़ के बाहरी हिस्से में ही एक पेड़ पे चढ़ी किसी यार के साथ मौज मस्ती कर रही थी,... और वहीँ से उसने देखा,...





छुटकी की ब्रा और पैंटी फाड़ के पहले तो उसकी मुश्के कसी गयी, और जब ननदोई जी पीछे से चढ़े तो पहले तो वही समझी बेचारी की उसकी गुलाबो की सेवा होने वाली है , और उन्होंने किया भी वही, थोड़ी देर तक तो वो उसकी चूत चोदते रहे, और जब चूत का पानी अच्छी उनके लंड में लग गया तो पहले तो एक ऊँगली से मेरी छुटकी बहना की गाँड़ में,... और उसके बाद एक ऊँगली के ऊपर दूसरी ऊँगली सटा के गाँड़ में , और थोड़ी देर के बाद गाँड़ में ही वो कैंची की तरह फैला दिया ,...

मान गयी मैं अपने नन्दोई को सच में असली रंग रसिया हैं, मेरे जोबना और चूतड़ दोनों के इतने दीवाने हैं, मुझे भी अच्छा लगता है उन्हें ;ललचाना , लेकिन मैं जानना चाहती थी की कैसे उन्होंने अपनी सलहज की सबसे छोटी बहना की फाड़ी,...

और नैना थी न मेरी ननद भी सहेली भी , उस ने सब हाल खुलासा बयान किया,

नन्दोई जी ने अपने दोनों पैरों को छुटकी के पैरों के बीच में फंसा के , खूब चौड़ा कर दिया, फिर दोनों ऊँगली पिछवाड़े से निकाल के सुपाड़ा वहां पिछवाड़े वहां सटा दिया, और खूब करारा धक्का मारा बड़ी मुश्किल से आधा सुपाड़ा घुसा,





नन्दोई जी का सुपाड़ा मोटा भी तो बहुत है , मैं सोच रही थी,... और छुटकी, उमरिया की बारी, कच्ची कली, फिर एकदम कसा पिछवाड़ा, अगवाड़े तो होली में भौजी लोग झांटे आने से पहले ही होली में ऊँगली शुरू कर देती हैं, ननद की उमर नहीं रिश्ता देखा जाता है ये बात तो मैंने अपने मायके में ही सीख ली थी, ...

" और भौजी क्या जबरदस्त आपकी बहना चीखी, आधे सुपाड़े में ही उस की जान निकल गयी " खिलखिलाते हुए नैना बोली।

वो चीख तो मैंने भी सुनी थी लेकिन मैं आगे की बात सुनना चाहती थी,... आगे चीख क्यों नहीं निकली और वो राज नैना ने खोल दिया,

और मेरा इनके ऊपर और प्यार उमड़ पड़ा, सच में इनके ऊपर तो मैं सब कुछ लुटा दूँ, और मैंने मारे ख़ुशी के उनकी बहन महतारी सब गरिया डाली।



 
नैना ननदिया -आँखों देखा हाल





' और भौजी क्या जबरदस्त आपकी बहना चीखी, आधे सुपाड़े में ही उस की जान निकल गयी " खिलखिलाते हुए नैना बोली।

वो चीख तो मैंने भी सुनी थी लेकिन मैं आगे की बात सुनना चाहती थी,... आगे चीख क्यों नहीं निकली और वो राज नैना ने खोल दिया,

और मेरा इनके ऊपर और प्यार उमड़ पड़ा, सच में इनके ऊपर तो मैं सब कुछ लुटा दूँ, और मैंने मारे ख़ुशी के उनकी बहन महतारी सब गरिया डाली।





हुआ ये था की ननदोई जी लाख कोशिश कर रहे थे घुस नहीं रहा था आगे , और छुटकी जोर जोर से सुबक रही थी , उसके गोरे गोरे गाल आंसू में भीग गए थे, और उन्होंने ही रास्ता निकाला ,

अपनी छुटकी साली के साथ ६९ में, वो ऊपर थी, और ये, एक तो उनका ऐसे ही मोटा बांस, फिर वो नयी उमर वाली, और उन्होंने न सिर्फ हलक तक पेल दिया बल्कि अपने दोनों पैरों से कस के मेरी छुटकी बहिनिया के सर को भी पकड़ के दबोच लिया, अब उनके ,मोटे बांस से ज्यादा मोटी डॉट कौन सी उनकी साली के मुंह में लग सकती थी , चीखे चाहे जितना चीखना चाहे , गों गों से ज्यादा कुछ नहीं निकल पायेगा , और भले ही वो ऊपर थी लेकिन उनके हाथ सँड़सी से भी ज्यादा तगड़े थे बस कस के अपनी छोटी साली के सर को उन्होंने दबोच लिया था , और एक बार हलक तो वो एक बित्ते का लंड घुस गया तो फिर तो ,...





साथ साथ उनके मूसल से कम करामाती उनकी जीभ नहीं थी, वो सुरसुराती हुयी साली की कसी बिल में और उनकी दोनों उँगलियाँ उसकी जादू के बटन पे कभीसहला देते तो कभी वो मस्ती से पागल हो जाती और कभी नाख़ून से क्लिट नोच लेते तो दर्द से दुहरी,...

कभी वो कस कस के संतरे की फांको सी रसीली अपनी साली की फांके चूसते तो कभी क्लिट तो कभी जीभ प्रेम गली में घुस के सुरसुराती , सहलाती थोड़ी देर में ही छुटकी की कसी चूत पानी फेंकने लगी , गाँड़ में घुसे मोटे सुपाड़े को भूल जीभ का मजा लेने लगी

नैना खूब खुश हो रही थी सुनाते सुनाते, बोली

" भौजी, भैया और जीजू ने मिल के क्या जबरदस्त गाँड़ मारी साली की,... अब वो चीख सकती नहीं थी , फिर जब वो क्लिट सहलाते तो पिछवाड़े से उसका ध्यान हट जाता,.. बस उसी समय जीजू दोनों हाथों से चूतड़ पकड़ के जोर से हलब्बी धक्का मारते, बस चार पांच धक्के में एक बार पूरा सुपाड़ा घुस गया तो वो रुक गए , फिर भैया ने आपकी छुटकी बहिनिया को चूस चूस के थेथर कर दिया , चार पांच बार तो झड़ी ही होगी वो,...

मैं बहुत खुश छुटकी पर भी लेकिन छुटकी से बढ़ के उसके जीजू पर भी, क्या ट्रिक निकाली अपनी छोटी साली की कुँवारी गाँड़ फड़वाने की , अच्छा हुआ दोनों लोग साथ गए थे और उनको तो छुटकी पर चढ़ने का एक्सपीरियंस भी था, ... लेकिन मैंने नैना ननदिया को हड़का लिया कौन भौजाईननद की गलती निकालने की हड़काने का मौका छोड़ती है ,

" हे बार बार आपकी बहिनिया , आपकी बहिनिया कह रही हो ,... तुम्हारी कुछ नहीं लगती क्या "

" गलती हो गयी नयकी भौजी ( गांव में सब मुझे नयकी भौजी और सासें नयकी या नयको ही कहती थीं ). एकदम लगती है , मेरी छिनार , रंडी मेरे सब भाइयों की रखैल , छुटकी भौजी है। "

फिर उसने आगे का हाल सुनाना जारी रखा।

और उसके बाद आपके नन्दोई ने क्या पेलगाडी चलाई, पूरा अंदर तक पेल के ही रुके, बेचारी टसुए बहा रही थी , चुत्तड़ पटक रही थी, लेकिन ऐसा माल कौन छोड़ता, और मेरे जीजू तो एकदम कमीने हैं, बस गाँड़ की महक लग जाए , फिर कोरी,...





लेकिन भौजी बिना बेरहमी के गाँड़ न मारी जाए, न उसके बिना गाँड़ मारने वाले को मजा न मरवाने वाली को,...





इस मामले में नैना ननद की बात से मैं पूरी तरह सहमत थी, जबतक चीख पुकार न हो रोई रोहट न , दो दिन तक जिसकी मारी जाए वो टांग फैला के न चले,... पूरे गाँव जवार को मालूम न पड़ जाए की आज पिछवाड़े कुदाल चली है,... और इनकी और नन्दोई जी की तो पूरी जे सी बी थी,...

और अब ये पता चल गया की आगे की चीख क्यों नहीं सुनाई पड़ी ,...

नैना ने पूरा हाल खूब रस ले ले के सुनाया , कैसे मेरे नन्दोई ने धक्के पर धक्के मार के पहले आधा लंड पेल दिया , फिर थोड़ी देर बाद जब गाँड़ को लंड की आदत पड़ गयी तो हल्का हल्का पुश कर के पूरा लंड जड़ तक ,... उसके बाद इन्होने भी अपना लंड साली के मुंह से निकाल लिया , नन्दोई जी कभी हलके हलके अंदर बाहर करते तो कभी हचक के ,... एक बार में पूरा तो नहीं लेकिन आधा ठेल देते,...





नैना सुना तो मेरी छुटकी बहिनिया के बारे में रही थी लेकिन मुझे अपना याद आ रहा था किस तरह नन्दोई जी ने ऐन होली , ननद और अपने दोस्त के सामने मुझे हचक के , क्या गाँड़ मारी थी मेरी ,... मेरे पिछवाड़े के तो दीवाने हैं वो,...

तूने पूरा देखा क्या ,... मैंने नैना से पूछा तो वो बोली

नहीं भौजी ,... अरे जो आपका देवर मेरे ऊपर चढ़ा था पेड़ पे उसने फेचकुर फेंक दिया ,... और मुझको भी कई जगह जाना था , लेकिन फटते हुए तो अपनी आँख से देखा ,... पर मैं अपने जीजा ( मेरे नन्दोई उसके जीजा ही तो लगे ) को जानती हूँ बना दुबारा पेल गाड़ी चलाये उन्होंने नहीं छोड़ा होगा ,...

नैना को और दो चार घर जाना था कल की होली के लिए,... और मेरा घर भी आ गया था,

वो बोली कल सुबह सात बजे तक आ जाएगी, और मैं घर में घुस गयी।
 
भाग १९

ननदों भौजाइयों की रंगभरी कबड्डी





नैना को और दो चार घर जाना था कल की होली के लिए,... और मेरा घर भी आ गया था, वो बोली कल सुबह सात बजे तक आ जाएगी, और मैं घर में घुस गयी।

………………..

मेरी सास और ननद दोनों रसोई में लगी थीं, मैं भी वहीँ पहुँच गयी. कल तो दिन भर होली की मस्ती होनी थी, इसलिए आज ही सब कुछ, बना के,...कल की होली सिर्फ लड़कियों और औरतों की होती थी, मर्द तो सुबह होने के पहले ही घर के बाहर,

और रसोई तो वैसे ही औरतों का राज होता है फिर होली का माहौल, मज़ाक का लेवल एकदम गन्दा वाला पहुंचने में टाइम नहीं लगा, मेरी ननद मेरे पीछे,...

" भाभी, पिछले दो साल से होली में ननदें जीतती हैं , अबकी हैट ट्रिक होगी, फिर तो नंगे आपको और आपकी बहिनिया को नचाएंगे।

और अपना हाथ दिखाते हुए ननद ने चिढ़ाया,

" ये देख रही हो, अरे कलाई तक नहीं कुहनी तक पेलूँगी तोहरी गंडिया में, फिर मुट्ठी खोल दूंगी,... अइसन गाँड़ मारूंगी न की सांझी तक ,जो तोहार महतारी क भोंसड़ा है जिसमे से वो तोहैं और तोहरे दुनो बहिनियां ऊगली हैं, उससे भी चौड़ा हो जाएगा, ...





फिर तो गाँव भर क मरदन से, चमरौटी, भरौटी,अहिरौटी कुल से गाँड़ मरवाइयेगा,बिना तेल लगाए। और हाँ आज भले सेर भर तेल अपनी और अपनी बहिनिया की गंडिया में डाल लीजियेगा, लेकिन हम ननद सब पहले हाथ में बोरा लपेट के उहै तेलवा सुखाएँगे, तब ई चाकर गांड मारेंगे जेके देख के तोहार कुल देवर ननदोई लुभाते हैं। हाँ, कल दिन में खाने में, नाश्ते में बस,... हम होली के दिन तो खाली चटनी चटाये थे, ... अब सब हमरे पिछवाड़े से सीधे तोहरे मुंहे से होयके तोहरे पेट में,... "





मुझे जवाब देने की कोई जरूरत नहीं थी, ...मेरी सास थी न। और ननदों के खिलाफ, भले उनकी सगी बेटियां क्यों न हों, वो हरदम मेरा साथ देती थीं, आखिर थीं वो भी तो इस गाँव की बहू, और मैं भी गाँव की बहू, हाँ इनकी बूआ, मेरी बूआ सास हरदम नंदों का साथ देती थीं.

तो मेरी सास ने सराहती नज़रों से मेरी ओर देखा और जो जवाब मैं सोच भी नहीं सकती थी, वो सब दे दिया।

" अरे माना पिछले दो साल से तुम लोग जीत रही थी, लेकिन तब हमारी बहू नहीं थी,... अब अकेले कुल ननदों का पेटीकोट शलवार फाड़ने की ताकत रखने वाली है, तोहरे भाई क ताकत देख रही है इतने दिनों से तो तुम लोगों को भी पक्का हराएगी, और जानती हो जब ननदें हारती हैं तो गाँड़ बुर में मुट्ठी डालने के अलावा भौजाइयां का का करवाती हैं? "





" अरे तो तोहार बहुरिया है तो नैना भी अबकी एही लिए ससुराल से आगयी है हम ननदों का साथ देने " ननद ने अपना तुरप का पत्ता फेंका।

" अरे तो जो छुटकी आयी है असली हरी मिर्च है , बहू की छुटकी बहिनिया,... वो देखना नैना क फाड़ देगी " सास जी भी चुप नहीं होने वाली थीं, लेकिन लगे हाथ उन्होंने अपनी समधन मेरी माँ को भी लपेटा ,...

" और जो इसकी महतारी क भोंसडे क बात कर रही हो न , तो तुमको मालूम नहीं है वो छिनार मायके क लंडखोर है और गदहा, घोडा, कुछ नहीं छोड़ी है , तो ओकर भोंसड़ा तो ताल पोखर अस चौड़ा है, अरे तोहरे भैया क पूरी बरात ओहमें नहायी थी , लेकिन जहाँ तक हमरी बहू की बात है , अबकी वही जीतेगी,.... बस तैयार हो जाओ हारने के लिए। "

मैच के पहले ही अम्पायर ने फैसला सुना दिया।





और जब अम्पायर अपनी ओर हो तो मैच फिक्सिंग से कौन रोक सकता है. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान रोकी, ननदों भौजाइयों की रंगभरी कबड्डी मैच में, ( अगर आप में से जिसने अल्टीमेट सरेंडर की लेस्बियन रेसलिंग देखी होगी वो भी इस कबड्डी के आगे फीकी थी ) अम्पायर सासों का एक पैनल ही होता है, जिसकी मुखिया मेरी सास ही होती हैं और वैसे भी गाँव में मेरी सास की ही चलती है तो,...
 
कबड्डी





लेकिन जहाँ तक हमरी बहू की बात है , अबकी वही जीतेगी,.... बस तैयार हो जाओ हारने के लिए। " मैच के पहले ही अम्पायर ने फैसला सुना दिया।

और जब अम्पायर अपनी ओर हो तो मैच फिक्सिंग से कौन रोक सकता है. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी मुस्कान रोकी, ननदों भौजाइयों की रंगभरी कबड्डी मैच में, ( अगर आप में से जिसने अल्टीमेट सरेंडर की लेस्बियन रेसलिंग देखी होगी वो भी इस कबड्डी के आगे फीकी थी )





अम्पायर सासों का एक पैनल ही होता है, जिसकी मुखिया मेरी सास ही होती हैं और वैसे भी गाँव में मेरी सास की ही चलती है तो,...

और इस अम्पायर को घूस भी मैंने जबरदस्त दिया था, कच्चे टिकोरे। छुटकी को साथ लाने से, मेरे नन्दोई से ज्यादा अगर किसी के चेहरे पर मैं ख़ुशी देखी थी, तो वो मेरी सास थीं, जिस तरह उन्होंने उस कच्ची अमिया को लपक लिया, ...सच में बड़ी उमर की औरतों की जीभ खटमिठ्वा कच्चे टिकोरे बहुत पसंद होते हैं और छुटकी थी भी बहुत सुंदर प्यारी सी और बस जस्ट उभरती हुयी छोटी छोटी चूँचियों का अहसास सा, रुई के फाहे ऐसी, नीचे भी बस दो चार केसर के धागे से,...





मंजू भाभी के यहाँ तो मुझे उस कबड्डी का हाल पता ही चल गया था, बाकी बचा खुचा सास रानी ने बता दिया, बिना किसी सेंसर के,

अगर भाभियाँ जीत जाती हैं तो साल भर नंदों को उनकी बात,





और उस दिन तो जो सारी ननदों की, कुँवारी हों, बियाहिता हों वैसी दुर्गत होगी, लेकिन असली मस्ती आती है अगले दो दिन, ...

जब देवर भी, ... बस भौजाई लोग मिल के किसी भी देवर को, ज्यादातर कच्ची उमर वाला या कुंवारा पकड़ के उसकी आँख में पट्टी बाँध के घर के अंदर, जहाँ ननद भौजाइयों का झुण्ड, बस उस देवर की कोई सगी बहन हो उसी की उम्र की नहीं तो चचेरी पट्टी दारी की, ....

पहले देवर के कपडे फटते थे, फिर उसकी सगी बहन,

जबरदस्ती मुट्ठ मरवाई जाती थी





और एक बार खड़ा हो गया तो, सीधे मुंह में लेकर चूसवाया जाता था, सारी मलाई घोंटनी पड़ती थी,....





और अगर किसी ननद ने ज्यादा नखड़े किये तो भौजाइयां ही चूस चूस के पहले खूंटा खड़ा करती थीं, फिर दो तीन भाभिया मिल के उस ननद को पकड़ के , उसके सगे भाई के खूंटे पे बैठाती थीं, फिर खुद पकड़ के ऊपर नीचे, जबरदस्त चुदाई,... और धमकाती भी थीं , सीधे से चोद नहीं तो तेरी तो गाँड़ फाड़ेंगे ही इसकी भी ,...

मंजू भाभी के साथ मिलकर कल हम लोग यही जोड़ी बना रहे थे, किस देवर पर किस ननद को, सबसे पहले सगी ननदें, ... लेकिन उसके पहले जरूरी था जीतना , और मैं जानती थी, लड़ाई जंग के मैदान में नहीं उसके पहले जीती जाती है, प्लानिंग रिसोर्सेज,...

गाँव में कल कोई मर्द नहीं रहते हैं, तो इसलिए औरतों का राज पोखर के बगल में जो बड़ा सा मैदान है उसी में, ठीक साढ़े बारह बजे से, डेढ़ घंटे की ननद भौजाई की,...

और दो बजे के बाद वहीं बगल में पोखर में घंटे भर तक साथ साथ नहाना, फिर सबके घर से जो खाना आता था वहीं बगिया में खाना, सांझ होने के पहले होली खतम, सब लोग अपने अपने घर और सूरज डूबने के साथ मरद

नन्द भाभी का मज़ाक सिर्फ बातों तक सीमित रहे, बहुत मुश्किल है और वो भी जब मेरी जैसी भाभी, मेरी छिनार ननद जैसी ननद हो,... और आग में घी डालने वालने वाली मेरी सास हों.

तो मैंने सीधे ननद के ब्लाउज के ऊपर हाथ डाल दिया, चट चट दो बटने टूट गयी, मेरी ननदिया के जोबन थे भी जबरदंग , आखिर जब चूँचियाँ उठान थीं, तब से मेरे सैयां से मिजवा रही थीं, जैसे मेरे सैयां मीजते रगड़ते रहे होंगे, अपनी बहिनिया का वैसे ही मैंने भी, और छेड़ा,...

" क्यों ऐसे मसलते दबाते थे न ,... "

लेकिन मेरी सास को ऐसे आधे तिहे में मज़ा नहीं आने वाला था, हंस के बोलीं वो,...

"अरे बहू, ब्लाउज थोड़ी दबाते होंगे, ब्लाउज के अंदर वाला,... "

और मैं आज कल की बहुओं की तरह नहीं हूँ जो सास की बात पे उन्ह कर के टाल जाएँ, मैं तो एकदम सतजुग वाली आज्ञाकारी बहू, सास की हर बात मानने वाली, खासतौर से अगर बात सास की बेटियों का ब्लाउज फाड़ने की हो,...तो मैंने सास की बात मान ली,... और दोनों हाथ ननद के ब्लाउज के अंदर,
 
ननद मस्तानी





लेकिन मेरी सास को ऐसे आधे तिहे में मज़ा नहीं आने वाला था, हंस के बोलीं वो,...

"अरे बहू, ब्लाउज थोड़ी दबाते होंगे, ब्लाउज के अंदर वाला,... "

और मैं आज कल की बहुओं की तरह नहीं हूँ जो सास की बात पे उन्ह कर के टाल जाएँ, मैं तो एकदम सतजुग वाली आज्ञाकारी बहू, सास की हर बात मानने वाली, खासतौर से अगर बात सास की बेटियों का ब्लाउज फाड़ने की हो,...तो मैंने सास की बात मान ली,... और दोनों हाथ ननद के ब्लाउज के अंदर,

सच में जोबना एकदम टनाटन, चढ़ती जवानी में अगर इन्हे देख के मेरे सैंया बौरा गए हों,.... तो दोष उनका नहीं इन कच्ची अमिया की रही होगी,





कस कस के मसलते मैंने जैसे जाड़ा शुरू होने पर समर ड्रेसेज का लाइफ टाइम ऑफर आता हैं उसी तरह का ऑफर दिया,

सैंया से सैंया बदलने का,

आखिर ऐन होली के दिन इनके सैंया, मेरे नन्दोई ने मेरी हचक के गांड मारी थी, इन्ही के सामने और इस समय मेरी छुटकी बहिनिया की कूट रहे होंगे,... तो ऑफर सिर्फ सैंया से सैंया बदलने का नहीं था बल्कि एक दूसरे के सामने, मैंने वैसे भी सोच रखा था, बहनचोद तो सब मर्द होते हैं मेरी ससुराल वाले, लेकिन मेरी आँख के सामने , मेरे सैंया हचक के अपनी बहिनिया चोदे, और नन्दोई का तो वैसे ही सलहज पर हक होता है,

पर मेरी ननद ने मना कर दिया, ... जैसे हर वो लड़की मना करती है , जिसका मन तो होता है गप्प करने का लेकिन शर्माती है बोलने में, ... तो थोड़ा लजा के थोड़ा छिनारपने से वो बोलीं,...

' धत्त "

पर मैंने उनके कान में मेरे साजन ने अपनी सास का सब हाल कबूल किया था कैसे उनके साथ शादी के पहले तो बस ऊपर झाँपर,... लेकिन जब ननद की शादी होगयी,... सील टूट गयी उसके बाद भैया बहिनी ने खूब गचागच,...

वो जोर से हँसने लगीं, बोलीं,... ' तो भौजी जो कुल किस्सा मालूम है तो पूछ काहें रही हो "





कस के उनके निपल पुल करते हुए मैं बोली,... अरे ननद रानी आँखों देखने का मज़ा और है , कानों सुनी से,... फिर जंगल में मोर नाचा किसने देखा , तो हो जाय एक दिन आमने सामने,... "





हे अगर आप सच में उनका कन्फेसन सुनना चाहते हों,अपनी सास के सामने उन्होंने क्या कबूला अपने किस किस मायके वाली पे वो चढ़े तो चलिए आपको फ्लैश बैक में ले चलती हूँ,...

फ्लैश बैक,
 
फ्लैश बैक,





हे अगर आप सच में उनका कन्फेसन सुनना चाहते हों,अपनी सास के सामने उन्होंने क्या कबूला अपने किस किस मायके वाली पे वो चढ़े तो चलिए आपको फ्लैश बैक में लेचलती हूँ,...

फ्लैश बैक,

"हे बोल, भूँड़वे, तेरी माूँ को गदहे चोदें, अपनी महतारी और बाप की बहन के अलावा और

किसको किसको अपने घर में चोदा?

वो थोड़ा सा मुश्कुराये और किर मुझे देखकर मेरी ओर इशारा करके कुछ हिचकिचाते हुए कबूल कर लिया

“मम्मी, इसकी बड़ी ननद को…

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“मम्मी, इसकी बड़ी ननद को…”

मेरी तो फट के हाथ में आ गयी। बड़ी ननद को भी, मम्मी ने आज क्या-क्या पता लगाया।

मम्मी ने किर पूछा-

“क्यों शादी के पहले चोदी थी, या…”





मम्मी की काट के वो जोर से मुश्कुराते बोले-

“मैंने कित्ता बोला बोला वो नहीं मानी बोली- “शादी के बाद भैया, चाहे जितनी बार ले लो… "

चोदा तो शादी के बाद, लेकिन उसके पहले मेरे हथियार की की दीवानी थी वो।

स्कूल से हम दोनों साथ आते थे,

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और आते ही कपड़े बाद में बदलते थे, वो मेरी नेकर खोल के, सीधे मुूँह में लेकर जबरदस्त चूसती थी।

पूरी मलायी गटक लेती थी।

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मैं भी उसकीस्कर्ट उठा के चूसता, कम से कम दो बार पानी निकालता था उसका।

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सब कुछ करवाती थी। लण्ड चूत पे रगड़वाती थी, गाण्ड पे रगड़वाती थी लेकिन बस अंदर नहीं घुसेड़ने देती थी , चूत के ऊपर से तो खूब रगड़ता था लंड मैं , बस अंदर नहीं घुसेड़नी देती थी।

मैं भी उसकी शादी के चार दिन बाद हमारे यहाँ भाई चौथी लेकर जाता है बस, मैंने उसी के बिस्तर पे पे पटक के पेल दिया ।

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फिर तो क्या मायका क्या ससुराल,

और जीजू का थ्रीसम का मन था

तो कई बार तो मैंने और जीजू ने मिल के के उसकी सैंडववच बनायी…”


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मैं भी सोच-सोच के मुश्कुरा रही थी।

तभी तो ननदोई जी और ये इतने ज्यादा खुले हैं।

और इसके पहले ये अपनी माँ और बुआ पर चढ़ने की बात मेरी माँ के सामने कबूल कर चुके थे

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हम तीनों की मस्ती चल रही थी, तभी वो तीनों आये,

गुड्डो बीच में आलमोस्ट टंगी हुयी,..

एक ओर से ये पकडे, एक ओर से नन्दोई जी, कहीं गलती से भी उसका पेर जमीन से लग जाता तो कस के चीख निकल जाती बेचारी की, चेहरा दर्द से डूबा हुआ, गालों पर जैसे आंसुओ की कितनी परत, पूरी देह थकान और दर्द से जैसे टूट रही हो,... लेकिन उस दर्द के पीछे एक अजीब सी हलकी सी ख़ुशी भी, जैसे कोई पहाड़ पर चढ़ने वाला, किसी दुर्गम चोटी पर चोटिल देह के साथ, दर्द से टूटती देह के साथ चढ़ जाए तो जैसे एक अचीवमेंट की मुस्कान थकान के पीछे छुपी होती है,....

न मैं बोली , न मेरी ननद पर हम दोनों के मन में हजार सवाल थे, पर सास की आंखों ने हम दोनों को चुप करा दिया, और गुड्डो भी सीधे दौड़ कर सास की गोद में छुप गयी. और सास ने भी उसे ऐसे गोद में उठा लिया जैसे कोई छोटे से बच्चे को जो कहीं दौड़ते हुए गिर गया हो उसे चोट लग गयी हो, उसी तरह उठा लिया और सीधे अपने कमरे की ओर,...

और उसके साथ ही उनकी आँखों ने एक बार अपनी अपनी बेटी और बहू को बरज दिया की इस बारे में कोई बात न हों,... ननद मेरी रसोई में चली गयीं खाने की तैयारी करने, और ननद के भैया अपने कमरे में,

बचे नन्दोई जी और मैं,....

मैं जान रही नन्दोई जी को मजा तो खूब आया होगा, कच्ची कली की कसी कसी गाँड़ फाड़ने में, अब गाँड़ कसी होगी तो चीख चिल्लाहट होगी ही , रोई रोहट भी , उस समय तो लगता है जोश में उन्होंने मेरी छुटकी बहिनिया की खूब जबरदस्ती ठोक ठोक के लिया, लेकिन अब उसका दर्द देख कर उन्हें थोड़ा सा सेन्स ऑफ़ गिल्ट लगता है हो रहा था,... जैसे किसी बच्चे से कोई महंगा खिलौना टूट जाए, एकदम वैसे ही उनका चेहरा लग रहा था,...

मैंने मुस्करा के उन्हें चिढ़ाया, उकसाया, आँचल गिरा कर ललचाया और आँख नचा के पूछा,...

" क्यों ननदोई जी, कैसी लगी मेरी छुटकी बहिनिया,... " और बिना उनके जवाब का इन्तजार किये मुड़ गयी,मेरी पीठ उनकी ओर , और अपने बड़े बड़े चूतड़ उनकी ओर देख के मटका दिए,...





वही असर हुआ जो मैं चाहती थी, खूंटा तन गया और नन्दोई ने कस के मुझे पीछे से दबोच लिया, उनके दोनों हाथ कस के चोली फाड़ते जोबन पे और तनी तलवार सीधे मेरी दरार के बीच, लग रहा था साडी साया फाड़ के यहीं खड़े खड़े मेरी गाँड़ मार लेंगे,... और जोबन का रस लेते बोले,...

" अरे बहुत रसीली है. लेकिन हमको तो बड़की वाली क ज्यादा मन करता है ,सच में इत्ती गाँड़ मारने को मिली लेकिन तोहार अइसन, ... कोई मुकाबला नहीं बोला कहिया मिली,... "

बस एक झटके में पलट के मैं गुस्से से अलफ़, और उन्हें पकड़ के पहले तो दस गाली उनकी बहन महतारी सब को, नाम ले ले के, मादरचोद , तोहरी महतारी पे हमार नन्दोई चढ़ें, उनके सार चढ़ें, सार क सार चढ़ें, और फिर कस के एक चुम्मी, चुम्मी क्या मेरे होंठों ने उनके होंठों को गपुच कर कचकचा के काट लिया , और जब छोड़ा तो मैंने अपना इरादा बता दिया,...

"स्साले ननदोई , अरे तोहार सलहज हूँ , अगर आगे से पूछा न तो मैं ही उलटे तेरी गाँड़ मार लूंगी, अरे जिसकी बहन की लेने के पहले कभी नहीं पूछते हो,... उसकी बीबी से क्या पूछना,... अरे ननदोई राजा जब चाहा, जहाँ चाहा, चाहे हमरी ननद के सामने,... बस पूछना मना है,... "





और पैंट के ऊपर से उनका खड़ा खूंटा मसल के अपने साजन के पास, हाँ नन्दोई को दिखा दिखा के चूतड़ मटकाना मैं नहीं भूली , सच में जबरदस्त दीवाने थे , मेरे पिछवाड़े के वो।

मैंने अपने साजन से सिर्फ दो सवाल किये और एक का जवाब हाँ में मिला दूसरे का नहीं में।
 
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