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भाग १७
छुटकी - प्यार दुलार और,...
आज का दिन होली तो होती नहीं गाँव में , पर मैंने तय कर लिया था की आज शाम अपनी जेठानी मंजू के यहाँ एक चक्कर जरूर लगा के आउंगी।
तब तक सासू की आवाज आ गयी , खाने के लिए और मैं अंदर ,...
,,,,,
छुटकी अभी भी मेरी सासू जी की गोद में ठसके से खाने की टेबल पर बैठी थी , और उसके एक ओर मेरी मंझली ननद थीं , दूसरी ओर मैं बैठ गयी। सामने ये और नन्दोई जी , छुटकी उन दोनों लोगों को ललचा रही थी , इनसे ज्यादा मेरे ननदोई जी लार टपका रहे थे मेरी छोटी बहन की कच्ची अमिया देख कर , और ऊपर से मेरी सासू जी जिस तरह छुटकी के गाल सहला रहीं थी , कभी कभी हलके से चिकोटी काट लेतीं , मैं समझ रही थी , दुलार से ज्यादा वो रस ले रही थीं और मेरी ननद तो और , उसके उभारों को पकड़ के अपने मर्द को ललचा रही थीं।
मैं समझ गयी मेरी छोटी बहन की जितनी रगड़ाई , उसके जिज्जा और डबल जिज्जा ( मेरे ननदोई ) करेंगे उससे कहीं ज्यादा ये महिलायें करेंगीं।
सास मेरी प्यार से उसे अपने हाथ से खिला रहीं थी , अगर वो मना भी करती तो ,
खाने के बाद मैं आ कर अपने कमरे में सो गयी , छुटकी को सासू जी अपने साथ ले गयी थीं , अपने कमरे में।
मेरी नींद घंटे भर बाद खुली , सांझ थोड़ी देर में होने वाली थी , और छुटकी मुझे जगा रही थी।
"क्या हुआ सोने दे न , रात को तेरे जीजा नहीं सोने देते और अब दिन में तू भी ,... " मैं झुंझलाते हुए बोली।
" दी , मुझे चाहे जो कह लीजिये , लेकिन मेरे इतने अच्छे वाले जीजा को कुछ मत कहिये , वरना झगड़ा हो जाएगा ,... " खिलखिलाते हुए वो बोली ,
मैंने आँखे खोली और मुझे विश्वास नहीं हुआ , हॉट नहीं सुपरहॉट ,
मैंने बोला था न की छुटकी चेहरा अपनी उम्र से भी कम एकदम भोला ,लगता था अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे हों , लेकिन फिगर उसकी क्लास की लड़कियों से बीस नहीं बाइस पर आज उसका चेहरा भी एकदम ,... नमक तो उसके चेहरे पर हरदम था , लेकिन आज वो एकदम ,...
मैं मुस्करायी
और छुटकी भी मुस्करायी ,
सासू माँ का कमाल , उसकी बड़ी बड़ी आँखों में उन्होंने पतली सी काजल की रेख जो डाल दी थी , हल्का सा मस्कारा और आई ब्रो ,
आँखे सच में कटार लग रही थीं , और ऊपर से जस्ट अ टच ऑफ़ लिपस्टिक , डार्क रेड , एकदम किसेबल ,
मैंने उसे दुलार से अपनी बाहों में भर लिया ,...
पर वह छटक के अलग हो गयी ,
" उठिये न , बड़ी मुश्किल से जीजू माने हैं , वो तो डबल जीजू ,... और माँ " ( मेरी सास को वो माँ कहने लगी थी )
पता ये चला की छुटकी ने ही जीजू से अपने कहा की वो बोर हो रही है , तो मेरे नन्दोई ने उससे बोला की चल तुझे आम के बगीचे में घुमा लाते हैं , सांझ को लौट आएंगे , इन्होने अपनी साली को छेड़ते हुए बहाना बनाया तो मेरी सास की ओर से इन्हे डांट पड़ गयी , जाओ न तुम दोनों घुमा लाओ उसको , सुबह से घर में बैठी है , थोड़ा गाँव भी देख लेगी , .... "
और उस के बाद मेरी सास ने उसे तैयार कर दिया , अरे गाँव में निकल रही मेरी बेटी तो गाँव वालों को मालूम तो होना चाहिए शहर से कोई आया है।
( असल में प्लान तो इनका भी यही था की अमराई में उसके पिछवाड़े का ,...
और ननदोई जी ने इनसे उगलवा लिया था की पिछवाड़े का ताला तो वही खोलेंगे ,... और पिछवाड़े के मामले में नन्दोई जी इनसे २२ नहीं तो २० थे ही , एक तो नन्दोई जी का मोटा बहुत था , फिर एकदम बेरहम , बेदर्द ,... ये तो तब भी बहुत ख्याल करते थे और अपनी बाग़ भी एकदम गझिन , दिन में भी न दिखाई पड़े , डेढ़ दो बीघे में फैली , पचासों आम के पेड़ )
छुटकी - प्यार दुलार और,...
आज का दिन होली तो होती नहीं गाँव में , पर मैंने तय कर लिया था की आज शाम अपनी जेठानी मंजू के यहाँ एक चक्कर जरूर लगा के आउंगी।
तब तक सासू की आवाज आ गयी , खाने के लिए और मैं अंदर ,...
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छुटकी अभी भी मेरी सासू जी की गोद में ठसके से खाने की टेबल पर बैठी थी , और उसके एक ओर मेरी मंझली ननद थीं , दूसरी ओर मैं बैठ गयी। सामने ये और नन्दोई जी , छुटकी उन दोनों लोगों को ललचा रही थी , इनसे ज्यादा मेरे ननदोई जी लार टपका रहे थे मेरी छोटी बहन की कच्ची अमिया देख कर , और ऊपर से मेरी सासू जी जिस तरह छुटकी के गाल सहला रहीं थी , कभी कभी हलके से चिकोटी काट लेतीं , मैं समझ रही थी , दुलार से ज्यादा वो रस ले रही थीं और मेरी ननद तो और , उसके उभारों को पकड़ के अपने मर्द को ललचा रही थीं।
मैं समझ गयी मेरी छोटी बहन की जितनी रगड़ाई , उसके जिज्जा और डबल जिज्जा ( मेरे ननदोई ) करेंगे उससे कहीं ज्यादा ये महिलायें करेंगीं।
सास मेरी प्यार से उसे अपने हाथ से खिला रहीं थी , अगर वो मना भी करती तो ,
खाने के बाद मैं आ कर अपने कमरे में सो गयी , छुटकी को सासू जी अपने साथ ले गयी थीं , अपने कमरे में।
मेरी नींद घंटे भर बाद खुली , सांझ थोड़ी देर में होने वाली थी , और छुटकी मुझे जगा रही थी।
"क्या हुआ सोने दे न , रात को तेरे जीजा नहीं सोने देते और अब दिन में तू भी ,... " मैं झुंझलाते हुए बोली।
" दी , मुझे चाहे जो कह लीजिये , लेकिन मेरे इतने अच्छे वाले जीजा को कुछ मत कहिये , वरना झगड़ा हो जाएगा ,... " खिलखिलाते हुए वो बोली ,
मैंने आँखे खोली और मुझे विश्वास नहीं हुआ , हॉट नहीं सुपरहॉट ,
मैंने बोला था न की छुटकी चेहरा अपनी उम्र से भी कम एकदम भोला ,लगता था अभी दूध के दांत भी नहीं टूटे हों , लेकिन फिगर उसकी क्लास की लड़कियों से बीस नहीं बाइस पर आज उसका चेहरा भी एकदम ,... नमक तो उसके चेहरे पर हरदम था , लेकिन आज वो एकदम ,...
मैं मुस्करायी
और छुटकी भी मुस्करायी ,
सासू माँ का कमाल , उसकी बड़ी बड़ी आँखों में उन्होंने पतली सी काजल की रेख जो डाल दी थी , हल्का सा मस्कारा और आई ब्रो ,
आँखे सच में कटार लग रही थीं , और ऊपर से जस्ट अ टच ऑफ़ लिपस्टिक , डार्क रेड , एकदम किसेबल ,
मैंने उसे दुलार से अपनी बाहों में भर लिया ,...
पर वह छटक के अलग हो गयी ,
" उठिये न , बड़ी मुश्किल से जीजू माने हैं , वो तो डबल जीजू ,... और माँ " ( मेरी सास को वो माँ कहने लगी थी )
पता ये चला की छुटकी ने ही जीजू से अपने कहा की वो बोर हो रही है , तो मेरे नन्दोई ने उससे बोला की चल तुझे आम के बगीचे में घुमा लाते हैं , सांझ को लौट आएंगे , इन्होने अपनी साली को छेड़ते हुए बहाना बनाया तो मेरी सास की ओर से इन्हे डांट पड़ गयी , जाओ न तुम दोनों घुमा लाओ उसको , सुबह से घर में बैठी है , थोड़ा गाँव भी देख लेगी , .... "
और उस के बाद मेरी सास ने उसे तैयार कर दिया , अरे गाँव में निकल रही मेरी बेटी तो गाँव वालों को मालूम तो होना चाहिए शहर से कोई आया है।
( असल में प्लान तो इनका भी यही था की अमराई में उसके पिछवाड़े का ,...
और ननदोई जी ने इनसे उगलवा लिया था की पिछवाड़े का ताला तो वही खोलेंगे ,... और पिछवाड़े के मामले में नन्दोई जी इनसे २२ नहीं तो २० थे ही , एक तो नन्दोई जी का मोटा बहुत था , फिर एकदम बेरहम , बेदर्द ,... ये तो तब भी बहुत ख्याल करते थे और अपनी बाग़ भी एकदम गझिन , दिन में भी न दिखाई पड़े , डेढ़ दो बीघे में फैली , पचासों आम के पेड़ )







































