Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 29 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

बेटा /बेटी किसके

( बाप के /की माँ के ?)





लेकिन फिर गीता का उदास चेहरा देख के माँ ने उसे दुलार से गले लगा लिया और चूमते हुए बोलीं,

" अरे स्साली काहें कुम्हला रही है, तू मेरी कोख से पैदा हुई मेरी बेटी है और तेरा भाई मेरी कोख से जन्मा, मेरा बेटा,... तो तू भाईचोद और तेरा भाई बहनचोद,... "

और माँ ने वो लॉजिक दिया जिसकी काट नहीं थी, दुलराते,चूमते अपनी बिटिया की कच्ची अमिया सहलाते बोलीं,

" अच्छा बता, तुझे दही जमाना है , दूध रखा है लेकिन घर की दही का जामन नहीं बचा, कोई बिल्ली चाट गयी, पर दही जमाना जरूरी है तो का करेगी तू "





" अरी माँ, ये भी कोई बात है , ग्वालिन भौजी या चाची या आस पड़ोस से जामन मांग लूंगी, अरे कटोरी भर भी तो नहीं होता, चम्मच दो चम्मच बहुत है जमाने के लिए "

खिलखिलाते हुए गीता ने जवाब दिया, गाँव की लड़की, दही जमाना रोज का काम।





" अच्छा, सेर भर दही आपन कहतरी में जमाय ली, लेकिन जउने पड़ोसिन से जामन मांग के लायी थी, वो आ जाए और कहे की ये दही तो हमरे जामन का है, कुल दही हमको दो "





माँ ने बड़ी सीरियसली पूछा।

" अरे वाह," तमक के गीता बोली,

" अरे एक चम्मच जामन ले आयी थी दो चम्मच ले लें , कटोरी भर ले ले, ...





कहतरी हमारी, दूध हमार, अंजुली भर जामन से दही उनका, ... ये कैसे "





माँ खिलखिलाने लगी फिर प्यार से उसे चिपका के बोलीं,

" यही तो, तेरे लिए चम्मच भर जामन,चाहे तेरे चाचा का, फूफा का हो, मामा का हो, लेकिन कहतरी तो हमारी है, ... "उस पेट को, सहलाते जिसमे गीता और उसका भाई ९ महीने थीं,... वो बोलीं और जोड़ा दूध भी हमारा, तो जरा सा जामन कहीं से मैं लूँ क्या फर्क पड़ता है "





गीता समझ गयी माँ की लॉजिक और दुलार से उनकी गोद में चिपक गयी, रिश्ता तो माँ का ही है।

माँ ने अब बात और आगे बढ़ाई

" देखो कुछ बातें औरतें ही समझ सकती हैं इसलिए ये सब माँ बेटी की बात हैं किसी भी मरद के दिमाग में नहीं घुसतीं, बिधना उसे बनाये ही नहीं ऐसे, अच्छा चलो एक बात बताओ , जब तू हमरे पेट में आयी तो नौ महीने कहाँ रही "

गीता ने दुलराते हुए माँ के गोरे गोरे चिकने पेट को सहलाते हुए खिलखिला के कहा,

" यहाँ,... "





" और पेट के अंदर से जो लात चलाती थी, कौन सहती थी ? तेरी दादी पेट छू के खूब खुश होक चिढ़ाते बता देती थीं , बहु बिटिया होगी इतना लात चला रही होगी,... बहुते चंचल होगी, कुलच्छिनी "

और मैं हंस के कहती थी हाँ सासू जी एकदम अपनी बुआ पे पड़ेगी। कदम घर में नहीं टिकेगा। इस घर की बेटी, इस घर की बेटी की तरह होगी। और दादी बहुत खुश, हम ननद भौजाई की छेड़छाड़ में वो बहू का ही साथ लेती थीं आखिर वो भी इस गाँव की बहू थीं , मेरी तरह बेटी थोड़ी थीं। अच्छा ये बता की जब तू पैदा हुयी तो दर्द किसको हुआ मुझको या तेरे बाऊ जी को ,... "





" आपको " बड़ी बड़ी आँखों से बेटी ने माँ को देखते हुए कहा।

" और पूरे दो साल चुसूर चुसूर दूध कौन पिलाया , मैं की तोहरे बुआ के खसम तोहार बाऊ " हँसते हुए माँ ने फिर पूछा।

" माँ ने "

तो अब सोच के बताओ , नौ महीने मेरे पेट में रही , दर्द हमको हुआ , दूध हमने पिलाया , और सब बिसरा के माँ नहीं बाउ जी ,... साफ़ साफ़ बोल, किसकी बेटी है माँ की या बाप की,... "

और अब गीता ने माँ को चिपका लिया और कान में बोली माँ की।





लेकिन माँ का एक सवाल बचा था , और उन्होंने वो पूछ लिया,

" और तीन साल पहले जो तुझे खून खच्चर चालू हुआ,... तो रोती घबड़ाती किसके पास आयी "

" माँ आप के पास " अब गीता एकदम माँ की गोद में आ गयी थी , ...

और माँ उसे समझा रही थी, सुन कुछ बातें ऐसी होती हैं , औरतों के तन मन की बात जो सिर्फ और सिर्फ औरतें ही समझ पाती हैं एक दूसरे से सुख दुःख कह पाती हैं,





लेकिन माँ को लगा बड़ी सीरियस बातें हो गयी और उन्होंने ट्रैक बदला

माँ ने अब छेड़ते हुए गीता के गाल पे चिकोटी काट के चिढ़ाया,

" समझी छिनरो, चूतमरानो ,.... तुम और तेरा भाई इसी कोख में से निकला है , इसलिए तुम दोनों सगे हो, बाप चाहे जो हो. और इसलिए, तेरा भाई अपनी बहन को चोद के बहन चोद है और तू अपने भाई से चुदवा चुदवा के पक्की भाईचोद हो। "





गीता भी तो उन्ही की बेटी थी, माँ को चूमते बोलीं,...

" हे मेरे भाई को कुछ मत बोलना, जल्द ही मादरचोद भी बन जायेगा, घबड़ा काहें रही है तू। "

माँ ने चुम्मी का जवाब और कस के गाल काटते बोला,

" उस स्साले, तेरे बहनचोद भाई की हिम्मत ही नहीं है, मादरचोद बनने की।"

" अरे इस का दीवाना है वो "

गीता ने माँ के आँचल को ढलकाते हुए कहा, ...

" मुझे मालूम है, .. जिस तरह से चोरी से छिप छिप के देखता है , कित्ती बार मैंने देखा है और उसका पजामे में खूंटा खड़ा हो जाता है , लेकिन स्साले की हिम्मत ही नहीं है सिवाय मेरी बेटी को चोदने की,... "





" अरे माँ, बेटी तुम्हारी है तुम पे गयी है , तुम भी तो कुंवारेपन में मामा से ही फड़वायी थी,... तो,…

लेकिन मेरा भाई देखिये जल्द ही बहनचोद से मादरचोद बनेगा , "

माँ ने बात बदलने की कोशिश की की मुंह से क्या निकल जाये और कहने लगी तू कह रही थी न जब तू पेट में आयी होली की रात तो उस दिन मेरी बड़ी रगड़ाई हुयी थी , लेकिन असली रगड़ाई तो एक साल पहले मायके की होली में हो चुकी थी। "

गीता ने उत्सुकता से पूछा और माँ ने शादी के बाद की दूसरी होली का जिक्र शुरू कर दिया था। पहली होली में तो वो सौरी में थी , छट्टी भी नहीं हुयी थी, बेटा हुआ था, इसलिए वो देवरों से बची रहीं। और दूसरी होली में रस्म के मुताबिक़ अपने मायके में थी,

और माँ ने शुरू किया होली का किस्सा
 
माँ की

मायके की होली





और माँ ने शुरू किया होली का किस्सा

और होली का किस्सा सुन सुन के ही गीता की गीली हो गयी, चुनमुनिया फड़फड़ाने लगी, कसमसमाने लगी, भैया होता न तो, स्साले को पटक के चोद देती।

गीता की कोई सगी मौसी तो थी नहीं है चचेरी, मौसेरी, ममेरी, खासतौर से उसके ननिहाल के रिश्ते की माँ की बहने और सब माँ से बड़ी, लेकिन ज्यादा नहीं,... ख़ास तौर से मझली मौसी नानी की तीन लड़कियां, गीता की तो मौसियां ही लगती थीं,गीता को भी नहीं बख्शती थीं, मिलते ही पहले जुबना का उभार नापती थीं, भरतपुर पे धावा बोलती थीं. तो बस वही तीन मौसियां और मौसा जी लोग, माँ के तो जीजा ही लगेगें,





बस उन तीनों ने एक साथ धावा बोला, वो भी अकेले नहीं मौसियों के साथ.

कुछ देर तक तो मुकाबला चला एक जीजा ने चोली के अंदर हाथ डाला, दूसरे ने पेटीकोट का नाड़ा पकड़ा,...

ओर माँ की बहने, रीनू चीनू और टीनू

तीनो नंबरी छिनार, रीनू सबसे छोटी अपने दोनों जीजा को ललकार के बोली,

" अरे जीजू , साली की चोली में तो रोज ही हाथ डालते हो , आज चोली खोलने का नहीं फाड़ने का दिन है और नाड़ा खोलना मत तोड़ देना। मेरी ये बहन बहन बहुत चालाक है, नाड़ा खोलोगे तो फिर बांध लेगी,





साड़ी तो अपनी छोटी बहन की तीनों बहनों ने ही मिल के उतार दी थी, ब्लाउज, पेटीकोट आंगन में कुछ देर में और फिर रंग की बहार, कोई जगह नहीं बची जहाँ तीनो जिज्जा ने रंग न लगाया हो, पर वो भी जानती थीं की असली होली तो चमड़े की पिचकारी से होने वाली थी और मन उनका भी कर रहा था, चूँचियाँ रगड़ रगड़ के चूत में ऊँगली कर के वो भी पनिया रही थीं, तीनो जीजू उन्हें चोदने के लिए कबसे ,

लेकिन उन्होंने बोल रखा था शादी के बाद जब मायके आएंगी तब

और मौसा लोगों की भी क्या गलती उन सबकी शादियों में मम्मी छोटी साली थीं तो खूब रगड़ाई की उन्होंने, अच्छी वाली गालियां सुनायीं और कोहबर में घुसते समय धक्के में भी मारे और पैंट के ऊपर से पकड़ के रगड़ के नाप जोख भी की,





और सबसे तगड़ा था छोटी मौसी वाली, रीनू मौसी के मर्द का, और वो मजाक भी बोल के नहीं चूम के, मसल के करते थे. और रीनू ने अपने पति का ही पक्ष लिया,

"हे जो सबसे छोटा है, पहला हक उसका, और छोटे जीजा बड़े औजार वाले आंगन में लेट गए, कुतुबमीनार हवा में,... लेकिन वो नाटक कर रही थीं,...

नहीं नहीं जिसको करना हो खुद करे, ऊपर आये,..

पर तीन तीन बहने, ... मिल के भाले के ऊपर चढ़ा दिया,... ऊपर से बड़ी और मझली एक एक कंधा दबा रही थी, रीनू कमर पकड़ के नीचे खींच रही थीं,





और एक बेटा निकल गया था उसी रास्ते, कोई कन्या कुँवारी तो थी नहीं, हालांकि बच्चा जनने के बाद उनकी माँ और सास ने जो जो जतन कराये, सिखाये, तो उनकी चुनमुनिया अभी भी टाइट थी, .... और ये भी नहीं की पहली बार वो खूंटे के ऊपर चढ़ी है, पचासों बार,...

लेकिन जीजा का लंबा तो बांस ऐसा था ही मोटा भी बहुत,( हालांकि बड़े जीजा वाले का सबसे मोटा था, कलाई से भी ज्यादा ) .

बस दो चार मिनट बाद वो मस्त होक जीजा के ऊपर चढ़ के चोद रही थीं और नीचे से जीजा भी कस कस के धक्के लगा रहे थे थे, ... बांस पूरा उन्होंने घोंट लिया था लग रहा बच्चेदानी के अंदर घुस गया है लेकिन मजा भी आ रहा था, मायके के आंगन में बहनों के सामने,...





लेकिन उन्हें पता नहीं था तीनों बहनों की असली साजिश क्या है,... और क्यों उन्हें आंगन में छोटे जीजा के बांस के ऊपर चढ़ाया गया है,

रीनू ने ही अपने मर्द को इशारा किया, बाकी दोनों जीजा लोग भी आंगन में खड़े मुठिया रहे थे, ललचा रहे थे,

रीनू दी खुद बड़े वाले जीजा का कभी चूस के कभी मुठिया के ,...



 
माँ के मायके की होली का मज़ा,

एक एक पर तीन तीन





,... लेकिन उन्हें पता नहीं था तीनों बहनों की असली साजिश क्या है,... और क्यों उन्हें आंगन में छोटे जीजा के बांस के ऊपर चढ़ाया गया है,

रीनू ने ही अपने मर्द को इशारा किया, बाकी दोनों जीजा लोग भी आंगन में खड़े मुठिया रहे थे, ललचा रहे थे, रीनू दी खुद बड़े वाले जीजा का कभी चूस के कभी मुठिया के ,...

छोटे जीजा ने उन्हें खींच के एकदम अपनी देह पर चिपका लिया , इंच भर भी जगह नहीं बची थी , उन्हें भी बहुत अच्छा लग रहा था, और जीजू ने अपने दोनों हाथों से उनकी पीठ को और पैरों से चूतड़ को जकड़ लिया बाकी दोनों बहनें भी दबोचे थीं,... बांस अलग पूरा अंदर तक घुस गया था,





पर तब तक उन्हें कुछ भी नहीं अंदाज लगा ,

पता तब चला जब रीनू स्साली चूत मरानों ने उनकी गांड अपने अंगूठों से कस के फैलाई और बड़े जीजू को उकसाया,

" अरे जीजू देख क्या रहें हैं, मार लीजिये स्साली की गाँड़,... बहुत लौंडे लौंडियो की आप ने गाँड़ मारी है लेकिन मेरी छुटकी बहना ऐसी मस्त कसी गाँड़ नहीं मिली होगी, होली का मौका है पेलिए नहीं फाड़ दीजिये,





जब तक वो समझे उचके, छुड़ाने की कोशिस करें बड़े जीजू ने उनकी गाँड़ में सुपाड़ा पूरा पेल दिया, ... दोनों चूतड़ कस के दबोच के,....





वो जोर से चिल्लाईं

उउउउउउ उईईई

पर ज्यादा चिल्ला भी नहीं , मंझले जीजू तैयार बैठे थे , खुले मुंह में उन्होंने लंड डाल दिया,... और दोनों हाथ से कस के सर को दबोच लिया





बस बेचारी चिल्ला भी नहीं पा रही थीं , कुछ देर में उन्होंने लंड चूसना भी शुरू कर दिया, स्वाद तो मस्त था ही,... गाँड़ भी मारी जा रही थी,... बुर भी चोदी जा रही थी.

जब छोटे जीजू जिनके लंड पे मैं चढ़ी थी मुझे ऊपर पुश कर के अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकालते तो उसी के साथ हचक के जड़ तक पीछे से मेरी गाँड़ में बड़े जीजू अपना मोटा लंड ठूंस देते ,





था भी उनका खूब मोटा और कोहबर में सबसे ज्यादा रगड़ाई भी मैंने की थी हालांकि ८- ९ में पढ़ती रही होउंगी लेकिन थी तो सबसे छोटी साली, उन्हें लिपस्टिक लगाया, उनकी मांग में सिन्दूर डाला, निहुरा के हम सब लोगों के जूता चप्पल की पूजा कराई ,

लेकिन वो कोहबर से निकलते बोल के गए थे साली एक दिन मेरा भी मौका आएगा, और मैं भी जान बूझ के उनको दरेरती अपनी नयी नई आ रही छोटी छोटी चूँची रगड़ती उनसे बोली,

" आने दीजिये मौका मैं पीछे नहीं हटने वाली, छोटी स्साली हूँ आपकी कोई मजाक नहीं दी के पहले मेरा हक़ है। "





तो बस वही खूब हचक हचक के गाँड़ में अपना मोटा बम्बू पेल रहे थे ,

थोड़ी देर तक तो दोनों जीजू बारी बारी से , एक निकालता दूसरा डालता, ... लेकिन फिर पांच सात मिनट के बाद दोनों साथ साथ डालने निकालने लगते





और चूँचियाँ भी दोनों ने बाँट ली थी खूब कस कस के निचोड़ रहे थे ,...

कुछ देर में दोनों के तूफानी धक्के जब एक साथ घुसते तो लगता गाँड़ के अंदर की पतली चमड़ी फाड़ के मिल जाएंगे,... और मैं चीख भी नहीं सकती थी , मंझले जीजू ने कस के अपना लंड हलक तक पेल रखा,... था,...





मुंह बुर गाँड़ सब में डाट लगी थी और सिर्फ कान खुले थे जिसमें तेरी छिनार तीनो मौसियां मिल के मुझे चिढ़ा रही थीं , मेरे जीजा को उकसा रही थीं ,

" बहुत बोलते थे न तेरी बहन मिलेगी तो ये करेंगे वो करेंगे , तो पेलो न आज मेरी बहन , तुम तीनो के बीच अब ये बेचारी चीख भी नहीं सकती , और एक से एक गन्दी गालियां मुझे ,...

और ऊपर से बहने तीनो खूब मज़ाक उड़ा रही थीं, सबसे ज्यादा रीनू बोली,

"ये होता है छोटी साली होने का फायदा, एक साथ तीन तीन मूसल हर छेद की एक साथ सेवा,..."





तो बड़ी वाली ने रीनू को चिढ़ाया,... अपनी बारी भूलती है , दो जीजू तेरे तो , तेरे ऊपर भी साथ चढ़े थे





पर रीनू कम्मिनी बचपन की, उदास मुंह बना के बोली

लेकिन एक छेद तो तब भी बचा रह गया,

कुछ देर बाद मंझले जीजू ने मुंह से लंड बाहर निकाला तो मैंने अर्ज लगाई ,

" मेरी कमीनी बहनों , मैं चुदवा लूंगी तुम तीनो के मर्दों से आखिर मेरे जीजा है लेकिन बारी बारी से ,"

तीनों बहने एक साथ बोलीं,





एकदम नहीं।

फिर मंझली ने कारन बताया,

" स्साली टाइम कित्ता लगेगा बारी बारी से , आधे घंटे से कम तेरा कोई जीजू झड़ता नहीं, फिर तेरी ऐसी मस्त स्साली , मजे ले ले के चोदेगे सब,... गाल काटेंगे चूँची रगड़ेंगे, और तीनों तीनों छेद का मजा लेंगे तो तीन छेद तीन जीजू , ९ बार आधे घंटे के हिसाब से साढ़े चार घण्टे पूरे फिर बीच में उलटने पलटने का टाइम ,... कम से कम पांच घंटे, अभी बज रहा है दस तो पांच घंटे जोड़ के बजेगा तीन,...





और फिर मौसी ने जो रच रच के पकवान बनाएं हैं वो भी खाना है और दो बजे तक वापस भी लौटना है ,... इसलिए चढ़ेंगे तो तीनों साथ साथ,"

मंझली की गणित सच में अच्छी थी , बिना नकल के हाईस्कूल गुड सेकेण्ड क्लास दो बार में पास हो गयी थी।

और बड़ी ने अपना हिसाब बताया, ..

एक तो तेरे साथ मजे लेगा , बाकी दो क्या करेंगे,... पांच दिनों से इन तीनो को हम तीनों बहनो ने उपवास कराया है तो चुदेगी तो तू आज ऐसे ही। "





लेकिन रीनू ने जो बात बताई उसको सुन के दिल दहल गया,

" अरे अभी दोपहर को बड़ी मौसी के दोनों दामाद आएंगे और शाम को छोटी वाली मौसी के ,... "





हम लोगों ने मिल के पहले से पारी बाँट ली है, "

मैं जोड़ने लगी तीन मौसियां , तीनो के तीन दामाद , नौ और वो सब तीनों छेद का मज़ा लेंगे ,...

लेकिन साली कौन जिसे जीजा लोग होली में सोचने का मौका दें

फिर एक बार झड़ने के बाद तीनो ने बिना सुस्ताये जगह बदल ली , छोटे जीजू गाँड़ मार रहे थे , बड़े जीजू ने तो गाँड़ में झड़ने के बाद सीधे गाँड़ से निकला मुंह में ठेल दिया





और मंझले वाले को मेरी बुर,...

तो तीन बार ट्रिपलिंग हुयी आपकी,

गीता ने मुस्कराते हुए पूछा,... और माँ ने खीझ के उसके गाल मींड़ते हुए बोला,

" जब तीन तीन चढ़ेंगे न एक साथ तेरे ऊपर तो पता चलेगा, अभी तो मेरा बेटा अकेले तेरी गाँड़ फाड़ देता है। और एक बार नहीं तीन बार, और मेरी कमीनी मौसेरी बहनें हर बार , मेरे बिल साफ़ कर देती ही जिससे उनके मर्दों का सूखी बुर, गाँड़ में दरेरता रगड़ता घुसे। ढाई तीन घण्टे तक लगातार मूसल चले तीन तीन। "



 
पोस्टिंग करना, आज कल आग की दरिया में चलने जैसा है , लाइक भी करने पर अक्सर ये पूछा जाता है की क्या आप वास्तव में लाइक करना चाहते हैं ,... एकदम लॉक कर दिया जाए कहने की इच्छा होती है, और हर बार तीन बार विज्ञापन की देवियों के बाद बड़ी मुश्किल से थ्रेड तक पहुंचना

और पोस्ट करने के बाद , फिर कमेंट्स का,...बल्कि नो कमेंट्स का इन्तजार,...

लेकिन असली समस्या लालच की है अगर मन में ये भाव जाए कर्म करो और फिर,...

लेकिन गलती पाठको की भी नहीं है ठंड इतनी है उँगलियाँ ठिठुर जाती होंगी और जीवन की आपाधापी में , रोज की गहमागहमी में ,...

लेकिन तब भी कुछ मित्र आते हैं पोस्ट होते ही २४ घंटे के अंदर दो मित्रों ने तारीफ़ की , शायद इसलिए की वो मित्र हैं पर के सर्वे के मुताबिक़ २. ३ दिनों के अंदर पर ४८. ७ % पाठक ऐसे फोरम में आते हैं तो कम से कम ३ दिनों के बाद ही आके देखना चाहिए , ये आदत गड़बड़ है की दही जमाने के लिए रख दिया और हर दस मिनट पर देख रहे हैं की जमी की नहीं

कभी नहीं जमेगी तो फिर रविवार के अवकाश के दिन देखूंगी , शायद कुछ और मित्रों ने कहा हो कुछ

असली बात तो भूल ही गयी,

सहृदय रसिक पाठक /पाठिकाओं से निवेदन है की

पिछले पेज की तीसरी पोस्ट जिसका शीर्षक है



बेटा /बेटी किसके



( बाप के /की माँ के ?)

पोस्ट संख्या ३१६३

पर हो सके तो अपनी अनभूति, मंतव्य जरूर व्यक्त करेंगे
 
भाग ४३

इन्सेस्ट कथा- माँ के किस्से, मायके के





" तो तीन बार ट्रिपलिंग हुयी आपकी, ", गीता ने मुस्कराते हुए पूछा,...

और माँ ने खीझ के उसके गाल मींड़ते हुए बोला,

" जब तीन तीन चढ़ेंगे न एक साथ तेरे ऊपर तो पता चलेगा, अभी तो मेरा बेटा अकेले तेरी गाँड़ फाड़ देता है। और एक बार नहीं तीन बार, और मेरी कमीनी मौसेरी बहनें हर बार , मेरे बिल साफ़ कर देती ही जिससे उनके मर्दों का सूखी, बुर, गाँड़ में दरेरता रगड़ता घुसे। ढाई तीन घण्टे तक लगातार मूसल चले तीन तीन। "

" अरे उसके बाद तो आपकी छुट्टी हो गयी होगी न फिर काहें कह रही हैं की ससुराल से ज्यादा मायके में रगड़ाई हुयी होली में,... "

गीता फिर से बोली।

"अरे मेरी तीन तीन मौसियां है , मझली वाले के तीन दामाद , जिन्होंने ये रगड़ाई की , उसके बड़ी मौसी के भी दो और छोटी मौसी के भी दो ,... मैं चचेरी मौसेरी ममेरी सब बहनों में सबसे छोटी हूँ, तो सबकी छोटी साली और सबको मैंने यही बोल के टाला था , शादी के बाद,... तो फिर उन तीनों जीजा के जाने के बाद , खाने के बाद, बड़ी मौसी वाले दोनों जीजू और शाम को थोड़ा लेट, छोटी मौसी वाली मेरी दोनों बहने और उनके मर्द,... उन लोगो ने भी साथ साथ ही नंबर लगाया , इसलिए मुंह तो बचता था लेकिन बुर और गाँड़ दोनों का तो कबाड़ा हो गया और आज तक मैंने ऐसा मरद नहीं देखा है जो गाँड़ मारने के बाद लंड सीधे गाँड़ से निकाल के मुंह में न डालता हो , ... सीधे से नहीं तो जबरदस्ती,... फिर भाभियाँ कौन किस मरद से कम और दो सहेलियों की शादी हो गयी थी उनके भी मरद ससुराल आये थे,... "

माँ ने गीता से हाल बयान किया





माँ बेटी एक दूसरे की नज़रों की जुबान समझती थी. माँ समझ गयी इस तरह जल्दी जल्दी बता देने में बेटी को रस नहीं मिला, वो माँ के होली के किस्से खुल के विस्तार से सुनना चाहती थी,... माँ ने खींच के उसे गले से लगा लिया, चल अपनी छिनार मौसियों और भँड़वे मौसा लोगों का किस्सा सुनने का बड़ा मन कर रहा है न तो चल बताती हूँ,...

तीन साढ़े तीन घण्टे तक जो उनके तीनो जीजा ने तीनों छेदों की रगड़ाई की थी उससे उनकी रग रग दुःख रही थी, तीन बार बुर चोदी गयी, तीन बार गाँड़ मारी गयी, और तीन बार मलाई मुंह के रस्ते पेट में गई,... पहले तो वो सोचती थीं की आखिर जीजू में कितनी ताकत एक बार झड़ने के बाद कुछ टाइम तो लगेगा टाइट होने में लेकिन उनकी छिनार बहने, ... लगता है असली शिलाजीत खिला के लायी थीं , प्लानिंग छिनारों ने पूरी की थी,...

और माँ ने अपने मायके में गितवा के मौसा लोग कैसे चढ़े सविस्तार बताना शुरू किया, ... कुछ इसलिए की जवानी की चौखट पे खड़ी लड़की है कुछ सीखेगी ही,

"पहली बार गाँड़ मारने के बाद बड़े जीजा तो सीधे गांड से निकला लिथड़ा चुपड़ा लंड लेके जबतक वो सम्हले उनके मुंह में ठेल दिया और कस के गाल दबा के , नाक दबोच के ,... फिर कोई रास्ता बचता क्या उस गाँड़ से निकले लंड को चूसने चाटने के अलावा,...





और एक बहन, सबसे छोटी रीनू, उनकी समौरिया बस जैसे कोई बोरे का टुकड़ा हो, ... एकदम सैंड पेपर की तरह सीधे पहले उसकी गाँड़ में दो तीन ऊँगली डाल के घुसेड़ दिया बत्ती बना के लम्बी सी और ऐसी ही एक बत्ती बुरिया में और उसे चिढ़ा भी रही थी,...

"खूब गटकी हो मलाई न जीजू लोगों की , अरे साफ़ इसलिए कर दे रही हूँ की तुझे याद रहे की मझले जीजा की मलाई बुरिया में कैसे लगती थी और मेरे मर्द की गाँड़ में , वरना पुराना स्वाद ही रह जाएगा न ,... अरे थैंक यू तो बोल दे मेरी छिनार बहना,..."

और रीनू के मर्द को सबसे बड़ी वाली बहन ने कैच कर लिया ,

बुर का मजा ले लिए न अब गाँड़ में अपनी ताकत दिखाना भंडुए ,... लेकिन पहले जरा तेरा चूस चास के

और मंझली ने दूसरे जीजा को , ... बस पांच मिनट में जबतक बुर गाँड़ की मलाई पोंछ के रीनू ने सुखा दिया , तब तक बाकी दोनों बहनो ने चूस चूस के मेरे दोनों जीजा को टनाटन कर दिया ,





पहली बार मैं छोटे वाले के खूंटे पे चढ़ी थी तो अगली बार मंझले के खूंटे पे और गाँड़ मारी रीनू के मर्द ने,...





हाँ अगली बार दस मिनट का इंटरवल मिला लेकिन तेरी स्साली छिनार मौसिया,...

सब एक एक चीज प्लान कर के आयी थीं, गाँड़ और बुर दोनों की हालत तो खराब थी ही लेकिन सबसे ज्यादा मुंह की , घंटे भर से चियारे चियारे, अरे ऐसा नहीं था की पहले मैंने लंड नहीं चूसा था, ... लेकिन पांच मिनट , दस मिनट बाद उसके बाद मरद मेन कार्यक्रम पे आ जाता था और तोहरे बाऊ, जब पांच दिन वाली छुट्टी में , लेकिन बीच बीच में निकाल के उनका तो मुट्ठ भी मार लेती थी और हलक तक ढकेलना जरूरी नहीं था, ...

गाल थक गया तो जीभ से चाट चूट के , थोड़ा आराम मिल जाए तो फिर अंदर, लेकिन यहां तो जीजू सब सर पकड़ के ऐसे जबरन हलक तक पेले थे पूरे आधे घंटे,... और अगवाड़े पिछवाड़े तो आराम मिल भी गया था जब रीनू स्साली मेरी कमीनी बहना मेरी बुर गाँड़ सुखाती, लेकिन मुंह में तो,.... जो जीजू गाँड़ मार रहे होते वो झड़ना शुरू होते ही मुंह में ठेल देते,...

माँ एक पल के लिए रुकीं फिर उन्होंने अपनी शादी के बाद की मायके की होली का किस्सा जारी रखा,...

तो दूसरे राउंड के बाद मैंने अपने मुंह की ओर इशारा करके दिखाया ,





मैं कहना चाहती थी की मेरा मुंह दर्द कर रहा है तो बड़ी वाली तेरी मौसी बोली

" अरे पियास लगी है ,अभी बड़े और मंझले जीजू की मलाई पी पी के साली जी की प्यास नहीं बुझी "

मेरी तो बोली नहीं निकल रही थी, उधर रीनू तेरी सबसे छोटी मौसी पहले से तैयार खड़ी थी जैसे, बस उसने एक हाथ लम्बा गिलास, ठंडाई सीधे अपने ही हाथ से मेरे मुंह में लगा दिया। जब मैं आधा गटक गयी, थोड़ी जान में जान आयी तब समझ में आया डबल नहीं ट्रिपल भांग पड़ी थी,... लेकिन तबतक मंझली भी रीनू के साथ और दोनों ने जबरन पूरी की पूरी, ... तीन भांग की बड़ी बड़ी गोलियां मेरे पेट के अंदर,... जो दस पंद्रह मिनट के अंदर अपना असर दिखा देती

और तेरी बड़ी मौसी ने मुझे धक्का देके जमीन पे गिरा दिया बोलीं , निहुरे निहुरे बेचारी की पीठ भी थक गयी होगी चल मेरी प्यारी बहना थोड़ा आराम कर ले,... और सच में कच्चा आँगन, जमीन पे पीठ लिटा के लेटना बड़ा अच्छा लग रहा था,...

और अब वो मेरे पीछे पड़ गयीं , " हे स्साली जीजू लोगों के साथ तो बहुत मस्ती की जरा हम बहने भी तो अपनी छोटी बहन से प्यार दुलार कर लें , " और अपनी छोटी दोनों बहनों को आँख मार के इशारा किया,...

और खुद मेरे दोनों जोबन के पीछे पड़ गयी, सहलाते मसलते अपने मरद मेरे बड़े जीजू की ओर इशारा कर के उन्हें उकसा रही थीं , है न मेरे जोबना मस्त , तुम सब अगवाड़े पिछवाड़े के चक्कर में इसको तो भूल ही गए, चल तेरी ओर से मैं ही ,...





क्या मस्त सहला रही थीं , मैं इतनी थकी मजे से में आँखे बंद हो रही थीं,... तबतक मेरी मंझली बहन मेरी जाँघों के बीच पहले तो अपनी हथेली से मसल रगड़ के , ... फिर सीधे मुंह लगा के कस कस के मेरी चूत चूसने लगी,

अच्छा तो बहुत लग रहा था लेकिन मैं नहीं चाहती थी की सब जीजू लोगों के सामने ,... वैसे हर साल गर्मी की छुट्टी में जब मेरी मौसेरी बहने आती थी तो ये सब तो रोज बिना नागा होता था और जाड़े में रजाई में सेंध लगा के, .. लेकिन आज





मैंने मना किया तो बड़ी दी ने मुझे नहीं हड़काया लेकिन जैसा हर बार वो करतीं थी किसी न किसी छोटी बहन को मुंह बंद करने के काम पे लगा देती थीं तो आज रीनू सबसे छोटी वाली को ,... और वो अपनी चूत फैला के सीधे मेरे मुंह पे और मुंह सील , पर उसका तो मुंह खुला था वो लगी गरियाने,...

" स्साली नखड़ा मत चोद अभी हम लोगो के मर्द का तो इतना मस्त चूस रही थी और बहन के नाम पे गाँड़ फट रही है,... और गाँड़ फड़वाने का शौक है तो आज वो भी पूरा कर देतीं हम तेरी गाँड़ में पूरी मुट्ठी पेल के,... लेकिन अभी मेरे मरद को तेरी गाँड़ फाड़नी है इसलिए छोड़ दे रही हूँ,...



 
साली एक, जीजा तीन - --- किस्सा गितवा की माँ का





आज रीनू सबसे छोटी वाली ,... और वो अपनी चूत फैला के सीधे मेरे मुंह पे और मुंह सील , पर उसका तो मुंह खुला था वो लगी गरियाने,...

" स्साली नखड़ा मत चोद अभी हम लोगो के मर्द का तो इतना मस्त चूस रही थी और बहन के नाम पे गाँड़ फट रही है,... और गाँड़ फड़वाने का शौक है तो आज वो भी पूरा कर देतीं हम तेरी गाँड़ में पूरी मुट्ठी पेल के,... लेकिन अभी मेरे मरद को तेरी गाँड़ फाड़नी है इसलिए छोड़ दे रही हूँ,..."





तबतक मेरे बड़े जीजू मेरी मदद को आए, रीनू को हड़काते बोले , ... तुम तीनो मिल के उस बेचारी के पीछे पड़ी हो, खुद तो खा पी रही हो,...

चल रीनू खिला दे , इसे तेरे जीजू लोगों आज बड़े मोहाये हैं अपनी छोटी साली के ऊपर खिला दो उसे कुछ,...और एक साथ दो दो गुझिया मेरे मुंह में रीनू ने ठूंस दी , मैं नहीं खाना चाहती थी क्योंकि मैं जानती थी इसमें भी डबल भांग कम से कम ,

पर तेरी रीनू मौसी ने एक बार फिर से अपनी चूत से मुंह सील कर दिया।

लेकिन मैं मान गई मैं तेरी छोटी मौसी को एकदम मेरे टक्कर की, एक साथ दो दो जीजू,....

बड़े जीजू का मुंह में लेकर चूस रही थी , और मंझले का मुठिया रही थी ,... रीनू के मर्द ने अपनी बड़ी साली के मुंह में लंड ठूंस रखा था





और तेरी मंझली मौसी कस के मेरी रसमलाई चूस रही थी साथ में ऊँगली भी कर रही थी कभी क्लिट रगड़ देती मैं दो बार झड़ने के करीब पहुँच गयी तब उसने छोड़ा मुझे

और तीनो जीजू भी टनटनाये और अबकी जब बड़े जीजू अपना कुतबमीनार तान के लेटे तो मैं खुद उनके ऊपर चढ़ गयी , और रीनू के मर्द ने गाँड़ पे नंबर लगाया,...





खा पी के और साली से चुसवा चुसवा के तीनो के औजार अबकी तो और,... अबकी घंटे भर करीब रगड़ाई हुयी, खाते पीते ढाई बज गया और तीन बजे तेरे मौसा लोग गए. पहली होली में तो तेरे भइया के चक्कर में मैं अपनी ससुराल में बच गयी थी , सौरी ( प्रसूत का कमरा ) पड़ी थी. लेकिन अगली होली में अपने मायके में ही सूद समेत रगड़ी गयी। खाना खा के मैंने सोचा था थोड़ा टांग फैलाउंगी,... लेकिन फिर मेरी बड़ी मौसी वाली बहनें और जीजू ,...

लेकिन गीता ने बीच में ही पतंग काट दी, चिढ़ाते हुए बोली, ' क्या माँ, अभी अभी तो आप मेरे तीन मौसा संग तीनो छेद का मज़ा ले चुकी थीं,... तो वहां तो मेरे मेरे दो ही मौसा थे,... "





माँ खिलखिलायीं, मन ही मन सोचने लगी ये लड़की इस उमर में ही मौसा तक का भी हिसाब रखती है, मेरा भी नंबर डकायेगी,... लेकिन उसे हड़काते बोलीं,

" अरे स्साली तू जानती नहीं तेरी मौसियां कितनी कमीनी हैं, पैदायशी छिनार, खानदानी रंडी,... "

पर गीता का दिमाग तो कहीं और चल रहा था , और बचपन से ही उसकी जिद्द मशहूर थी, जो चाहती थी माँ से करवा के ही रहती थी तो फिर उसने वही रिकार्ड फिर शुरू कर दिया

" माँ तू भी न, तू तो मेरी मौसियों से भी दस हाथ आगे है,... उनसे भी बढ़ के छिनार,... एकदम छटी छिनार,... अरे एक बात कह रही हूँ , मेरे भैया से एक बार चुदवा लो, अपने भइया से महीनों चुदवाया ,शादी के बाद भी पहले भी, मेर किसी मौसा को नहीं छोड़ा , फूफा , चाचा,... लेकिन मेरे भाई की बात आते ही तेरी गाँड़ फट जाती है, छिनरपना करने लगती है,... अरे एक बार बेटी बेटे की बात मान कर के ,... कौन कह रही हूँ रोज रोज,... बस एक बार मेरी बात रख ले ,





माँ ने हँसते हुए गीता को गले लगा लिया और चूम के बोली,...

" अच्छा चल स्साली छिनार, तू उस बहनचोद को मादरचोद बनाने पे तुली है तो,... "

खुश होके माँ की हामी सुन के गीता ने चुम्मी का जवाब चुम्मी से देते हुए माँ के मुंह में अपनी जीभ डाल दी और माँ उसे चूसने लगी और साथ साथ बेटी की कच्ची अमिया को कस कस के दबाने मसलने लगी,... कुछ देर तक ऊपर झापर से फिर कपडे के अंदर हाथ हाथ डाल के और जैसे ही उन्होंने बेटी के गीता के छोटे छोटे निपल रगड़ने शुरू किये, वो पिघलने लगी,...

पर अभी वो माँ के मायके के किस्से सुनने चाहती थी, अब माँ खुल ही रही थीं तो अच्छी तरह से खुल जाएँ,... कितने दिन बाद उसने माँ को इतना खुश देखा था,... तो बात वो वापस ट्रैक पे ले आयी,...

" तो माँ मैं इस लिए कह रही थी की आप ने एक साथ मेरे तीन तीन मौसा लोगों को तो वो दो ही थे और आये कब, ... " गीता ने पूछा और माँ चालू हो गयी।

" अरे कब की छोडो, .. तेरे वो तीनों मौसा लोग गाँव से बाहर भी नहीं निकले होंगे,... मैं बस दरवाजा बंद कर के , पलंग पे लेटी थी की सांकल खटकने लगी। मैं समझी कोई गाँव की भौजाई होंगी,... लेकिन दरवाजा खोला तो बड़ी मौसी वाली,... तेरी दोनों मौसियां , और दोनों मौसा जी , फटफटिया पे,... और तेरी तरह मैं भी सोचती थी की चल ये सब तो दो ही हैं अगवाड़े पिछवाड़े साथ साथ , डेढ़ दो घण्टे में पिचका दूंगी दो दो बार पिचकारी तेरे मौसा लोगो की,... लेकिन तेरो छोटी मौसी बचपन की कमीनी,... बोलने लगी की मुन्ना का नेग बुआ को तो दिया होगा,...
 
दोनों मौसियां ,





दोनों मौसा जी ,

दरवाजा खोला तो बड़ी मौसी वाली,...

तेरी दोनों मौसियां , और दोनों मौसा जी , फटफटिया पे,... और तेरी तरह मैं भी सोचती थी की चल ये सब तो दो ही हैं अगवाड़े पिछवाड़े साथ साथ , डेढ़ दो घण्टे में पिचका दूंगी दो दो बार पिचकारी तेरे मौसा लोगो की,... लेकिन तेरो छोटी मौसी बचपन की कमीनी,...

बोलने लगी की मुन्ना का नेग बुआ को तो दिया होगा,...

गीता को रोकना मुश्किल था बहुत बार माँ ने समझाया था बीच में नहीं बोलते, बात नहीं काटते , पर बच्चे तो बच्चे, ..ऐसे समझदार हो जाएं तो बड़े न हो जाएँ तो गीता बोल बैठी ,

" बुआ को क्या नेग दिया था आपने भैया का होने का "





माँ खिलखिला रही थीं, ... किसी तरह हंसी रोक के बोलीं,

" तू न बेटी तो पता नहीं किस की है , लेकिन रंग ढंग पे बिलकुल अपने बुआ पे गयी है, झटपटिया, मिनट भर भी इन्तजार नहीं,... है तो इसी गाँव की बिटिया न उन्ही की तरह सब की सब छिनार,... अरे एक नेग की जगह दो मांग लिए, पहला तो तुझी को उन्होंने माँगा था,... ' भौजी अगली बार भतीजी चाहिए, पक्का आपकी एकलौती ननद हूँ ना नहीं सुनूंगी,... "

लेकिन एक नेग में गीता को जरा भी मज़ा नहीं आया , और ये बात तो सही थी की बुआ से उसकी एकदम पक्की वाली दोस्ती थी, मज़ाक भी शुरू से एकदम खुल के करती थीं , भौजाइयां मात। उसने झट से पूछ लिया, और दूसरा,...

" वो, वही जो मेरी तीसरी होली में, ससुराल की होली में,... उन्होंने कबुलवाया था,... की तेरी बुआ जब शादी के बाद पहली होली में अपने मायके आएँगी न तो बस उनके सामने ही एकदम खुल्ल्म खुला, इसी आंगन में उनके मरद के साथ,... और मैंने हंस के मान लिया, अरे नन्दोई का तो सलहज पे हक होता है वो भी होली में तो,... तो ये था दूसरा नेग लेकिन तू न असली बात से , तेरी मौसी लोगो वाली बात "

" हाँ बोलिये पक्का अब नहीं बोलूंगी बीच में " गीता कान पकड़ते बोली, और माँ चालू हो गयी,

" तेरी छोटी मौसी बोली , अपनी ननद को नेग दे दिया और बहनों को भूल गयी तो आज पहले होली में हम दोनों बहने तेरी मुट्ठी करेंगी और एक साथ तेरी बुर में भी और गांड में भी वो भी बिना चूड़ी कंगन उतारे और पूरे कोहनी तक वरना एक शर्त मान ले





गीता का मन तो बहुत था पूछने का छोटी मौसी ने क्या ऑप्शन दिया था लेकिन वो चुप रही पर माँ ने खुद ही भेद खोल दिया,

" तेरी छोटी मौसी, सौ रंडी मरी तो पेट में आई होगी, ... बोली,...

' मेरी छोटकी बहिनिया,... गाँड़ में मुट्ठी बचाना है तो हम दोनों के बड़े जीजू को,... चोदेगे भीं और गांड भी मारेंगे तो है ही , स्साली , छोटी स्साली होके अब तक बिन चुदे बची थी,... लेकिन आज उस के पहले बड़े जीजू को तुझे झाड़ना है, लेकिन न मुंह में लेना है न बुर में न गाँड़ में न हाथ में पकड़ना है न कांख में,... और जब ये झड़े न तो एक भी बूँद जमीन पे नहीं गिरना चाहिए,...और तेरी देह के अंदर भी नहीं जाना चाहिए "





मैं एकदम चकरा गयी,

एक तो पहले होली की मस्ती अबकी मैंने भी जिज्जा लोगों को अच्छी तरह से भांग पिला के टुन्न कर दिया था , पाजामा फाड़ के छत पे, ... और तेरे दोनों मौसा लोग तो मेरे जुबना के दीवाने, उसी में उरझे, दोनों हाथों में रंग लगा लगा के दस कोट तो कम से कम , ... दायां वाला तेरे बड़े मौसा के कब्जे में और बायां वाला छोटे मौसा रगड़ रहे थे,...





मुझे भी बहुत मजा आ रहा था मैं उन दोनों की माँ बहिन गरिया रही थी अपने मोटे मोटे चूतड़ दोनों के खूंटे पे रगड़ रही थी और दोनों के टनटना रहा थे, मस्ती से मेरी भी गीली हो रही थी, मन तो मेरा कर रहा था की गप्प से घोंट लूँ,...

लेकिन ये शर्त सुन के मेरा दिमाग चकरा गया,

और दिमाग तो गीता का भी चकरा गया अब उससे रहा नहीं गया,...

"लेकिन माँ ये कैसे देह के अंदर भी नहीं झड़ें और जमीन पे नहीं गिरे और फिर बिना अगवाड़े , पिछवाड़े मुंह में लिए,... " उसके मुंह से निकल गया,

" वही तो " माँ बोलीं,

फिर मुस्करा के कहा लेकिन रसता निकाला तेरी नानी ने अब साफ़ साफ़ बोल तो सकती नहीं थी तो इशारा कर दिया,...

मुझसे बोलीं, "पाहुन लोग तो जितना हमारी समधिन के साथ नहीं होली खेले होंगे उतना रंग तो अपने साली के जोबन पे लगा दिए लगता है माई, मौसी , बुआ , चाची सब को बिसाती के दुकान पे रख के, रंग खरीद के लाये थे,... "

बस मेरी चमकी, मेरे जोबन पे लगा रंग,... और हाथ से खूंटा पकड़ने को मन किया था बाकी, तो बस मैंने हाथ से धक्का देके उसी कच्चे आंगन में तो तेरे बड़े मौसा को गिराया , और साथ में स्साली अपनी उस कमीनी बहिनिया से बोली,

" चल अगर मैं हार गयी तो माना तू कमीनी गदहा चोदी, मेरी गाँड़ मार लेना , लेकिन अगर मैं जीत गयी न तो मुझे क्या मिलेगा "

वो जानती थी की इत्ती टेढ़ी शर्त मेरे बस की बात नहीं है , तो सीना तान के बोली,

" अरे यार तू हम सब आठ मौसेरी मौसरी बहनों में सबसे छोटी है , चल जो भी तू कहेगी,... "





बड़े जीजू का टनटनाया तो पहले से था , बस मैंने दोनों चूँची के बीच उसे दबोच लिया , मेरे दोनों हाथ मेरी दोनों चूँचियों पे थे और साल भर में ही ससुराल में दबवा मिजवा के सब नयी दुल्हनों की तरह मेरी भी ३४ से बढ़के ३६ की हो गई थी, और एक कड़क, कड़ी कड़ी,... बस उन्ही दोनों चूँचियों से तेरे मौसा का लंड पकड़ के रगड़ना शुरू कर दिया,...





और अपनी शर्त भी सुना दी,

" तो कमीनी सुन अगर मैंने जीजू का जैसे कहा है ऐसे झाड़ दिया न तो साल भर चाहूँ तब दोनों जीजू के साथ जितनी बार चाहूँ उतनी बार तुम दोनों कमिनियों के सामने , ... "

मेरी बात पूरी होने के पहले तेरे दोनों मौसा एक साथ बोले, ... " अरे इस स्साली के साथ तो साल भर नहीं जिंदगी भर,... हम दोनों हारने के के लिए तैयार हैं "

मैं उनसे भी तेज बोली , मुझे भी मंजूर है।

बस यही तो मैं चाहती थी, बस मैंने दोनों मोटी मोटी चूँचियों के बीच पकड़ के कस कस के रगड़ना शुरू कर दिया और तेरे बड़े मौसा के कान में फुसफुसा के बोली,

" जीजू बस आपके हाथ में जरा आप भी साथ दो न तो ये दोनों जोबन जिंदगी भर के लिए ये स्साली आपके नाम लिख दूंगी,... बस जितना तेज मैं चूँची रगड़ रही थी , उतने ही तेज वो धक्के मार रहे थे,... चूँची से लंड चोदने की कला होती भी नहीं है सबके पास,...





बेचारी तेरी दोनों मौसियां चुप , तेरी नानी ही बोली ,

" अरे जीजा का तो साली पे हक़ होता है, और साली का बहन के पहले अपने जीजू पे और सबसे छोटी साली का तो सबसे ज्यादा,... और साली को चोदने के पहले अगर कोई जीजा पूछे तो फिर तो जीजा साली का रिश्ता ही नहीं, जब मन करे तब,... "





गीता को नहीं बिस्वास हुआ बोली , " नानी को बुरा नहीं लग रहा था और ऊपर से वो मौसा के साथ थीं ,... "

गीता की माँ हँसते हुए बोली,

" तू अपनी नानी को जानती नहीं, मुझे भी बाद में पता चला सब प्लानिंग तो उन्ही की थी. जब मेरी मायके में होली में आने की तारीख तय हुयी थी तभी से उन्होंने मेरी सब मौसेरी बहनों को, उनके मरदों को,... दो दो बार,... और गाँव की भौजाइयों को भी मन कर दिया था की वो लोग शाम को या होली के अगले दिन , तेरे भाई को एक साल का था,... तेरे मामा के साथ , एक दो दिन पहले सहर भेज दिया था , कोई टीका होता है साल भर होने पे लगता है वो लगवाने, और बोल दिया था होली के दो चार दिन बाद ही आने को,... तो होली के दिन घर में सिर्फ मैं और तेरी नानी ही थीं। “

और फिर वापस गीता के मौसा लोगों के साथ उस होली के किस्से पे आ गयीं,

" तो बस तेरी छोटी मौसी का मुंह देखने लायक था,... और तेरे बड़े मौसा , औजार भी मस्त,... "

गीता ने तो अब एक ही देखा था, बस उसके मुंह से वही निकला,

" माँ क्या मेरे भैया से भी बड़ा, ... मोटा, ... "

माँ ने जोर से डांटा, गुस्से में बेटी का कान भी उमेठ दिया, फिर दुलार से बोलीं,

" स्साली तू भी न , क्या नाम ले लिया, बीच में। अरे मैंने इत्ते देखे हैं, ... एक से एक , फिर कुछ रुक के गर्व से बोलीं,... लेकिन मेरे बेटे जैसा कोई नहीं है,... न लम्बाई, न मोटाई,... आस पास भी नहीं,... "

" तो तो ले क्यों नहीं लेती अंदर छिनार, मेरे भैया का,... बुर तो छनछना रही होगी, और सामने स्साली नौटंकी , तुझे न चुदवाया तेरे बेटे से तो तेरी बेटी नहीं "





गितवा ने मन ही मन सोचा लेकिन चुप रही

और माँ ने होली वाली बात आगे बढ़ाई,...

" वैसे तो २० मिनट से पहले नहीं होता गाँव में , लेकिन लगता था तेरे मौसा को पहली बार चूँची चोदन का सुख मिल रहा था और जो मैं अरज कर रही थी और तेरी छोटी मौसी के हारने से जो तेरे मौसा लोगों का जिंदगी भर का फायदा होने वाला था,..बस वो कुछ ज्यादा ही गरमाये थे,.... और मैं अब रगड़ भी नहीं रही तो वो खुद ही मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूँची पकड़ के , क्या मस्त धक्के मार रहे थे, मुझे भी खूब मजा आ रहा था और मेरे हाथ फ्री हो गए तो मैं बाकी बदमाशियां,... तेरी मौसी ने खूंटा हाथ से छूने पे रोक लगायी,... बाकी चीज़ थोड़ी , बस मैं चालू हो गयी , तेरे मौसा की हालत खराब , बस पंद्रह मिनट में,... "

और माँ उस पल की याद करके खिलखिलाने लगीं।

लेकिन गितवा माँ से सीखने का ये मौका गंवाना नहीं चाहती थी,... उसने पूछ ही लिया , माँ बता न बाकी क्या किया की मौसा जी की ऐसी की तैसी हो गयी,...

" अरे सब लोग जो सोचते हैं मरद खाली लंड पकड़ने से गर्माता है आधी बात जानते हैं , जैसे औरतों के देह में सोलह जगहे होती हैं गरम करने की चूत और चूँची के अलावा भी वैसे ही मर्द भी, हाँ थोड़ देख के टटोल के अंदाज लग जाता है किस मरद को काम बाण कहाँ लगेगा, ... तो बस तेरे मौसा का पिछवाड़ा,...

मैं उनके चूतड़ हलके हल्के सहला रही थी,... कभी पेल्हड़ और गांड के बीच वाली जगह ऊँगली से रगड़ती तो कभी पिछवाड़े के छेद के चारो ओर ऊँगली से हलके हलके दबाती और ध्यान से उनकी आँखों को देख रही थी, क्या छूने से वो ज्यादा मस्त हो रहे हैं , बस हाँ और जोर से नहीं , बस हलके हलके जैसे कोई पंख से छू रहा हो हो और जो ज्यादा गर्माते तो नाख़ून से, ... और मर्दों के निपल भी ,... लेकिन जैसे मैं लेटी थी वहां हाथ नहीं पहुँचते ही इसलिए खाली पिछवाड़े ,... "

माँ एक पल के लिए चुप हो गयीं फिर उन्होंने उस राउंड का आखिरी हिस्सा भी बता दिया,...

" मुझे डर था की कहीं झड़ते समय मारे मस्ती के वो जमीन पे एक बूद गयी आज मेरी गाँड़ के चिथड़े हो जाएंगे ,... लेकिन तेरे बड़े मौसा बहुत समझदार,... ये बात उन्होंने भी सुनी थी,... तो सम्हाल के क्या कोई पिचकारी मारेगा सारी की सारी मलाई सिर्फ मेरी दोनों चूँचियों पे गिरायी, ... और जो दूसरी बार झटके से निकलती है वो निपल के ऊपर,... और निपल तो पूरा जैसे आइसक्रीम से ढंक गया हो ,





बाकी वाली कहीं सरक के नीचे न चली जाए तो उन्होंने अपने हाथ से ही मेरी दोनों चूँचियों पे फैला दिया और कहा लाल, बैंगनी , काही रंग तो बहुत कोट लगाया था स्साली तेरे जोबन लेकिन असली रंग तो अब चढ़ा है,... और चूँकि मैं शर्त जीत गयी थी, मारे ख़ुशी के मैंने अपनी चूँची उनके मुंह में पेल दी और वो चूसुर चुसूर चूसने चाटने लगे,...

गीता खूब खिलखिलाई और बोली माँ आप भी न मौसा जी को उन्ही की मलाई खिला दी,...

" अरे यही तो असली मजा है बुर बजबजाती रहे और तब मरद चाटे,... अरे तू छिनार, तेरे मायके में,.. मेरी ससुराल में कितनी तो अपने बहनोइयों से , यारों से चुदवाती हैं और मरद के लिए मलाई कुप्पी में ले के आतीं हैं और ऊपर चढ़ के उसके जबरदस्ती सपड़ सपड़ चटवाती हैं,... "

अब माँ खिलखिलाने लगीं।

गीता समझ गयी, हमला उसके गाँव पे था और वो क्यों चुप रहती , झट से जवाब दिया,

"तो आपकी देवरानियां जेठानियाँ होंगी ऐसे, "





माँ हंसने लगीं और उसे दुबका के बोली,... " नहीं नहीं सब इस गाँव की लड़कियां हैं तेरी बुआ लगेंगी, तेरी बहने ,... मेरी ननदें,... नन्दोईयों को, तेरे बहनोई को मलाई खिलाती हैं। "

गीता मान गयी माँ को, सूद के साथ लौटा दिया था उन्होंने। लेकिन वो भी जानना चाहती थी उसके बाद क्या हुआ,...

" माँ मान गयी आपको ,... तो शूली पे चढ़ने से बच गयी आप, बड़े मौसा को तो निपटा दिया अपने इत्ती कस के तो उनकी तो थोड़ी देर के लिए छुट्टी,... " गीता ने बात आगे बढ़वाई, और माँ ने गतांक से आगे बताना शुरू किया,...
 
माँ की होली की मस्ती - मायके में





" माँ मान गयी आपको ,... तो शूली पे चढ़ने से बच गयी आप, बड़े मौसा को तो निपटा दिया अपने इत्ती कस के तो उनकी तो थोड़ी देर के लिए छुट्टी,... " गीता ने बात आगे बढ़वाई, और माँ ने गतांक से आगे बताना शुरू किया,...

" बात तो तेरी सही है लेकिन मैं जिस तरह से तेरे बड़े मौसा का खूंटा अपनी चूँची में रगड़ रही थी न , तो देख देख के छोटे मौसा का फनफना गया एकदम हालत खराब थी बेचारे की ,.. और तेरी दोनों मौसियां , खानदानी छिनार, पांच दिन से अपने मर्दों को उपवास करा रही थीं मेरा भोग लगवाने को,... तो बस वहीँ कच्चे मिट्टी वाले आंगन में लिटा के, ..दोनों टाँगे उठा के ,... एक धक्के में पूरा खूंटा पेल दिया, मेरी तो चीख निकल गयी, क्या धक्का मारा तरह सीधे बच्चेदानी में लगा और दोनों चूँची पकड़ के हुमच हुमच के चोदने लगे, ...





और ऊपर से तेरी नानी अपने दामाद का साथ दे रही थीं बोल रही थीं,...

" अरे बरस दिन का त्यौहार होली और आज के दिन जो जीजा साली को उसके आंगन में पटक के न पेले,... आज लग रहा है यह आँगन में जीजा साली की होली हो रही है , लाल पियर रंग तो सब लगा लेते हैं साली जीजा क होली तो सफ़ेद रंग क ही निक लगती है,... आज देखाय दे आपन ताकत,... अरे हमार समधन क ताल पोखर ना हो जहां तोहरी ससुरारी के कुल मरद डुबकी लगाते हैं , हमार एक;एकलौती बिटिया और तोहार सबसे छोट साली हो,... "





बस माँ की ललकार सुन के मैं भी कस कस के नीचे से चूतड़ उठा उठा के धक्के मारने लगी दोनों पैरों को उनके कमर पे लपेट लिया, हाथ से पीठ को दबोच लिया और मेरे नाख़ून उनके कंधे पे गड़ने लगे, मेरे जुबना के तो मेरे सब जीजा कुंवारेपन से दीवाने थे बस अपनी दोनों चूँची तेरे मौसा के सीने पे रगड़ने लगी ,..

जब चोदते समय मरद को लगे चुदवाने वाली को मज़ा आ रहा है वो भी साथ दे रही है तो बस वो दूने जोश से चोदता है और दुबारा भी उसका मन करेगा , वरना अक्सर एक बार लौंडे जिस लड़की पे चढ़ जाते हैं , फिर दूसरी के चक्कर में पड़ जाते हैं। "

माँ की बात गीता सुन भी रही थी, सीख भी रही थी समझ भी रही थी, ... और गाँठ भी बाँध रही थी। लेकिन कहानी भी वो बढ़वाना चाहती थी , माँ पहली बार इस तरह खुल के अपने मायके के किस्से सुना रही थीं, ... तो उसने पूछ लिया,... और माँ बड़े मौसा,...

" अरे यही तो असली खेल है , भले एक साथ तीन चार लौंडे हो , लेकिन सबको लगे लड़की तो बस उन्ही को देख के मस्त हो रही है उन्ही से चुदवाने के लिए गरमा रही है, असली खेल तो मन का है , तन का खेल तो मिनटों का होता है , सटाया, घुसाया , डाला रगड़ा फ़ुस्स ,... असली तो मरद गरमाते हैं सोच सोच के , तो जब तेरे छोटे मौसा मेरे ऊपर चढ़े थे और मैं नीचे से चूतड़ उठा उठा के उनका साथ दे रही थी , उन्हें एड लगा रही थी ,... मेरी आँखे तेरे बड़े मौसा को देख के मुस्करा रही थीं , चिढ़ा रही थीं , होंठ गोल कर के चूसने का इशारा कर रही थी,... तो तेरे छोटे मौसा ने आठ दस मिनट हचक के मुझे चोदा होगा , और तेरे बड़े मौसा गरमा रहे थे , बस ऊँगली के इशारे से मैंने उन्हें पास बुलाया,





" और " गीता भी खूब गरमा रही थी , थूक गटकते हुए बोली।

" और थोड़ी देर तक तो उन्हें मुठियाती रही , अभी आधा सो रहा था ,..





लेकिन साली के हाथ की गरमी किस स्साले का नहीं टनटना जाता बस दो तीन मिनट में , और फिर मैंने मुंह में , पूरा नहीं सिर्फ सुपाड़ा जैसी स्कूल वाली लड़कियाँ नहीं लॉलीपॉप मुंह में लेकर चूसती है मजे ले ले कर एकदम वैसे ही ,...





बस दो चार मिनट और उनका एकदम खड़ा हो गया था,...

बस मैंने तेरे छोटे मौसा को एक मिनट के लिए उठने का इशारा किया,... और वो अब मेरे नीचे मैं उनके ऊपर चढ़ी ,





पंद्रह मिनट से चोद रहे यही पूरी रफ़्तार से वो , तो वो भी थोड़ा चेंज, ... और बड़े मौसा तेरे कोहबर से ही मेरी कच्ची अमिया के साथ साथ पिछवाड़े के ,.. कोहबर में मैं उनकी गोद में चढ़ के बैठी थी,... और अपने छोटे छोटे चूतड़ ,... और तेरी दोनों मौसियां बस उन सबो ने मेरे पिछवाड़े ,... फिर एक साथ दोनों छेदो का मजा,.. मजा मुझे भी आ रहा था , तेरे बड़े मौसा एक बार झड़ चुके थे तो दूसरी बार तो उन्हें आधा घंटा लगना ही था।





लेकिन गितवा जानती है तेरे बड़े मौसा गाँड़ बड़ी मस्त मारते हैं,... अरे यार चूत तो कोई स्साला चोद लेगा, असली मर्दानगी मर्द की गाँड़ मारने में ही पता चलती है,...

गीता के मुँह से निकलते निकलते रह गया ,... " माँ एक बार मेरे भैया से गाँड़ मरावेगी न तो सब अपने भाई, जीजा देवर नन्दोई को भूल जाओगी "

लेकिन माँ ने जो अगली बात कही तो वो चुप नहीं रह पायी, माँ ने बोला,...

" तेरे मौसा इत्ते मस्त ढंग से गाँड़ मार रहे थे खूब ताकत लगा लगा के,... मैं भी उन का साथ देने लगी, असली मजा मजा देने में है जब गाँड़ मारने वाले को लगे की मरवाने वाली भी मजा ले रही है तो वो दूनी ताकत से मारता है और तब आता है गाँड़ मरवाई का असली मजा , "

ये बात गीता को समझ में नहीं आई की गाँड़ मरवाने वाली कैसे मज़ा दे सकती है , उसे मालूम था की उसके भाई को पिछवाड़े बहुत मजा आता है अगर वो भी कुछ सीख लेती तो , और उसने माँ से पूछ लिया,...

" गाँड़ मरवाने वाली कैसे मरद को मजा दे सकती है,... " गितवा ने धीरे से माँ से पूछा।





" अरे पगली, ये सब सीखना तो बहुत जरूरी है वो भी तेरी उमर में,... देख गाँड़ में मरद जब ठेलता तो उसे बहुत मज़ा मिलता है क्योंकि खूब कसा कसा, एकदम रगड़ के दरेरते हुए घुसता है दूसरे सिर्फ एक बार नहीं दुबारा जब गाँड़ का छल्ला पार होता है तो फिर उसे मज़ा है क्योंकि नीचे दबी लौंडिया तड़पती है, मचलती है और एक बार फिर खूब कसा कसा,... जबत पहले सुपाड़ा रगड़ता है फिर पूरा लंड,... लेकिन जब एक बार अंदर घुस गया तो पूरा जड़ तक , तो ,...

माँ चुप हो गयी , और गीता एकदम ध्यान से सुन रही थी , और माँ ने समझा के बताना शुरू किया,...

देख मान ले लंड एकदम जड़ तक गाँड़ में घुस गया है , पूरा ठोंक दिया है ,... तो अब तेरा काम शुरू होता है, बस हलके उस मोटू को अपने अंदर भींच, कस के पूरी ताकत से सिकोड़, जैसे कुछ तेरी गाँड़ से निकलने वाला है और तू उसे बस सिकोड़ के रोक रही है,... फिर थोड़ी देर बाद खूब धीमे धीमे उसे छोड़, बस दस बीस बार करेगी तो मरद पागल हो जाएगा,...

अरे तुझे चूत के लिए सिखाया था न मूत रोकने के लिए जैसे चूत सिकोड़ते हैं उसी तरह चूत को हरदम टाइट रखने के लिए बस वही काम गाँड़ में भी ,... पक्की हो जाएगी तू।

.. और फिर धक्का मारते हुए अगर रुक जाये थोड़ी देर तक उसी तरह से सिकोड़ और ढीला छोड़ के फिर खुद हलके हलके धक्का मार,...

मर्द को जब लगता है न लड़की को उसका लंड पसंद आ रहा है तो उससे ज्यादा ख़ुशी की बात कुछ नहीं होती बस वो और ताकत से मजे ले ले के मारता है , और तेरे बड़े मौसा तो मुझे पता था की नंबरी लौण्डेबाज स्कूल के जमाने के , कोई चिकना उनके स्कूल का बचता नहीं था, या तो सीधे से नेकर सरका दे या वो जबरदस्ती , गन्ने बाजरे के खेत में ले जाके निहुरा के ,

गितवा मुस्करा रही थी , ... मालूम तो उसे भी था ये सब लड़के भी आपस में,... लेकिन उसे अजीब नहीं लगता था जब हम लड़कियां आपस में , सब सहेलियां,... तो लड़के भी ,.. तो क्या हुआ, ...पर माँ के मुंह से ये सब खुल्लम खुल्ला सुनना,.. उसे बहुत अच्छा लग रहा था,... पर बात बनाते हुए वो बोली ,

"तो बड़े मौसा जी ने तो बड़ी देर तक"

" एकदम, जैसा मैं कह रही थी की वो पिछवाड़े के शौक़ीन और फिर अभी तो झड़े थे और मुझे उनसे गाँड़ मरवाने में बहुत मज़ा आ रहा था ,





खूब लम्बे लम्बे धक्के माते थे फिर तेरे छोटे मौसा जब पंद्रह मिनट चोद चुके थे तब उन्होंने गाँड़ मारनी शुरू की, ... तो दस मिनट के बाद में तो छोटे मौसा ने करीब २५ मिनट चोद के पानी छोड़ दिया, पर मैं नीचे लेटे तेरे मौसा जी के ऊपर से उठी नहीं , दो

चार मिनट ऐसे ही , फिर बड़े मौसा जी ने ही मेरे कान में कुछ समझाया और खुद ही मुझे उठा के जमीन पे ही पीठ के बल लिटा के गाँड़ मारना शुरू कर दिया ,... उसके मजे अलग है , आप मारने वाले को देख सकते हैं , चुम्मा चाटी , चूँची दबाने के साथ साथ वो चूस भी रहे थे , आधे घंटे से ज्यादा ही मेरी गाँड़ मारी और फिर कटोरी भर मलाई,... सब की सब पिछवाड़े,... "





माँ अब चुप हो गयी थी और सेकेण्ड राउंड का किस्सा उसने एक लाइन में समेट दिया, ... खाने पीने के बाद मैं ही शूली पे चढ़ी , तेरे बड़े मौसा के और छोटे वाले पिछवाड़े ,... पांच बजे के करीब वो लोग गए। कुछ देर तक माँ चुप रही लेकिन गीता ने बात छेड़ दी , और आपकी छोटी मौसी वाली दोनों मेरी मौसियां वो कब आयीं,... ?
 
भौजी





माँ अब चुप हो गयी थी और सेकेण्ड राउंड का किस्सा उसने एक लाइन में समेट दिया, ... खाने पीने के बाद मैं ही शूली पे चढ़ी , तेरे बड़े मौसा के और छोटे वाले पिछवाड़े ,... पांच बजे के करीब वो लोग गए। कुछ देर तक माँ चुप रही लेकिन गीता ने बात छेड़ दी ,

"और आपकी छोटी मौसी वाली दोनों मेरी मौसियां वो कब आयीं,... ?

" तू भी न एक एक बात पूछ के ही दम लेगी "

माँ मुस्कराईं, फिर हंस के बोलीं की लेकिन तुझे एक बात समझा देती हूँ,... सबसे बड़ी दुश्मन कोइ होती है तो वो भौजाइयां,.... नंबरी कमीनी, होली में तो और पगला जाती हैं, आधी के मरद पंजाब, दुबई छनछनाई रहती हैं तो सब मरदो की बहनों के ऊपर,... और तेरे इस गाँव की. तेरे मायके की भौजाइयां तो नंबरी नहीं दस नंबरी कमीनी हैं,... हाँ जब तक ननद कुँवारी है, मतलब उसकी फटी नहीं है तब तक तो सिर्फ ऊपर झाँपर से,

गीता ने माँ की बात काट दी। कोई भी उसके गाँव को कुछ बोलता है तो वो कटखनी बिल्ली की तरह चाहे वो माँ ही क्यों न हों, झपट के बोली,

" अरे माँ ये नहीं कहती की हमारी भौजाई सब कितनी सीधी हैं, ननद के ऊँगली कर कर के तो नहीं जब तक कुँवारी,... "





अब बात काटने की पारी गीता की माँ की थी, हंस के बोली

" अरे स्साली खाली भाईचोद होने से अकल नहीं आती, अरे तेरी भौजाइयां इस लिए छोड़ती है की जानती हैं की हमारी ससुरार और तोहरे मायके की माटी -पानी का असर है, की यहाँ की बियाई कोई बिटिया बिना चोदवाये गवने नहीं जाती। तो घी कहाँ गिरेगा, खिचड़ी में ही न,... अरे कउनो इस गाँव का लड़का ही चोद के फाड़ेगा, उन की ननद को,... तो बस अपने देवर के फायदे के लिए,... और मरद चोदेगा तो और जोर से चोकरेगी और भौजाइयों को चिढ़ाने का मौका भी मिल जाएगा, बस इसी लिए, बिन चुदी को बक्श देती हैं। अबकी होली में पता चलेगा , जब तोहरी भौजाइयों को पता चल जाएगा की उनकी इस ननदिया की फट गई, जितना हमारे बेटवा के पेलने पे पिराया होगा न उससे दस गुना रगड़ रगड़ के,... "





प्यार से माँ ने गीता के गाल पे चिकोटी काट ली , और गीता भी समझगयी माँ , माँ हैं उनसे जीता नहीं जा सकता है , लेकिन चिढ़ाने का हक तो था ही तो बात बदलते हुए हंस के बोली,

"अरे आपकी भौजाई ने क्या किया आपके साथ ये बताना आप गोल कर गयीं और मेरी भौजाइयों को गरियाने लगीं। पहले अपनी भौजाई का हाल बताइये , फिर बात तो आप अपने जीजू की कर रही थीं ये भौजाई कहाँ से आगयी बीच में।"

माँ मुस्करायीं एक बार फिर वो उस मायके में हुयी जीजा और भाभियों के साथ की होली की यादों में खो गयी थी , और एक बार फिर उन्होंने शुरू किया,

" तेरी वो दोनों मौसियां, मेरी सबसे छोटी मौसी की दोनों बेटियां मुझसे ६-७ महीने ही बड़ी रही होंगी, ... दोनों जुड़वा और दोनों की शादी भी एक साथ एक मंडप में हुयी थी।





दोनों मेरी पक्की सहेलियां लेकिन उन लोगों के आते आते शाम बस होने ही वाली थी तो पानी वाली होली तो नहीं हुई लेकिन भांग वाली ठंडाई, मिर्च वाले दहीबड़े , और भांग पड़ी गुझिया सब चली ही, और सूखी होली में दोनों ने मेरी चोली में हाथ डाला और शैतान बहनों ने चोली के बंध खोल दिए , की कहीं फट न जाये, और दोनों जोबन उन दोनों के मर्दों के हवाले और अबीर गुलाल लगा लगा के दोनों ने खूब मसला रगड़ा, पर मैं कौन कम थी मैंने पजामे का नाडा भी खोल दिया बल्कि तोड़ दिया,

लेकिन तभी पड़ोस की भौजी आ गयीं, बस मेरे बड़े जीजा से दुआ सलाम की उन्होंने अपने बड़े बड़े जोबन रगड़ के ,... और जीजा लोगों से कानफुसी भी और मुझे चिढ़ा के बोलने लगी,

"अब होगी असली होली , स्साली का अगवाड़ा पिछवाड़ा एक साथ, दो दो जिज्जा होने का फायदा "





लेकिन मैं कौन कमजोर ननद थी मैंने भी तुरंत जवाब दिया,

" अरे नहीं भौजी आपके नन्दोई साली सलहज में फरक नहीं करते , मैं पीछे थोड़े हटने वाली हूँ पर दो जीजू एक साली एक सलहज, बस एक साली के साथ एक जीजू और ननदोई सलहज के साथ,... बड़े बड़े मस्त ऐसे चूतड़ वाली सलहज, नन्दोई को देख के और मजे मजे से मटका रही हों और बच जाए तो बड़ी नाइंसाफी होगी, ..

मेरे बड़े जीजू केसाथ भौजी बतिया रही थीं , वो रुक के बोलीं,

" छिनार चल बताती हूँ , पहले ननद भौजाई का हिसाब हो जाए , फिर नन्दोई जीजा का भी,... "

और जब तक मैं सम्ह्लू, भौजी ने टंगड़ी मार के मुझे उस कच्चे मिटटी के आंगन में गिरा दिया और वो मेरे ऊपर , कपडे हम दोनों के दूर,... और फिर 69 चालू , उन्होंने मेरे शहद के छत्ते में मुंह मारा और मैंने उनकी प्रेम गली में सेंध लगाई,...





मेरे दोनों होंठों के बीच भौजी के निचले होंठ मैं कस कस के चूस रही थी चाट रही थी, जीभ अंदर डाल के पेल रही थी लेकिन साथ साथ दोनों हाथों से भौजी के बड़े बड़े चूतड़ दिखा के फैला के बीच का छेद दिखा के जीजू लोगों को ललचा रही थी और बीच में उन्हें ललकार भी रही थी सलहज के मस्त पिछवाड़े पे हमला करने के लिए बड़े जीजू तो पास में ही थे , मैंने उन्हें खींच के उनकी सलहज के पास , ... और खुद फैला के छेद, अपने हाथ और पैर से भौजी को कस के जकड़ लिया था

बस भौजी के नन्दोई ने पिछवाड़े मूसल ठोंक दिया,...





और मैं न क्या कहते हैं एकदम सामने वाले सीट पे, भौजी की चूत पे ननद का कब्ज़ा और गाँड़ पर नन्दोई का, क्या हचक के जीजू पेल रहे थे पांच दस धक्कों में मूसल पूरा अंदर था ,... जीजू ने पेला तो अपनी सलहज की गाँड़ में सूखा था लेकिन एक बार उनकी सलहज के पिछवाड़े घुस गया फिर तो ,... अंदर तो मक्खन ही मक्खन भरा था,... और उसका असर भी मुझे दिख रहा था जब जीजू का मोटा मूसल बाहर आता तो लिथड़ा चुपड़ा ,... और फिर तो उनकी कमर का जोर और अंदर की चिकनाई सटासट, सटासट,...

बीच बीच में मैं भी जीजू के रसगुल्ले को जीभ निकल के चाट लेती तो उनका जोश दूना हो जाता ,





और भौजी अब बेचारी क्या करतीं खूंटा तो गाँड़ में घुस ही गया था , बस मुझे गरिया रही थीं जीभ की जगह तीन तीन उंगलिया मेरी बुर में पेल के हचक के चोद रही थीं,... अंगूठे से मेरी क्लिट रगड़ रही थीं

तो मैं भी जवाब में उनकी क्लिट मुंह में लेके चूसने लगती और भौजी गिंगिनाने लगती।

पांच छह मिनट हचक के गाँड़ मारने के बाद , मेरी समझ में नहीं आया, जीजू का तीन चौथाई लंड अंदर और थोड़ा सा करीब दो इंच बाहर और उसे पकड़ के गोल गोल मथानी की तरह भौजी की गाँड़ में घुमा रहे थे और भौजी भी उनका साथ दे रही थीं,... खूब तेजी से गोल गोल ,





और भौजी ने ऊँगली से मेरी बुर चोदने की रफ्तार बढ़ा दी थी

छह सात मिनट तक वो मथानी चलती रही तभी अचानक भौजी ने कस के मेरी क्लिट काट ली और नाख़ून मेरी बुर पे गड़ा दिए,... मैं जोर से चीख पड़ी और उसी समय उनके नन्दोई ने अपनी सलहज की गाँड़ से मथा, अच्छा ख़ासा लिथड़ा चुपड़ा मोटा मूसल निकाल के मेरे मुंह में पेल दिया, ...





मैं हाथ पैर फेंक रही थी, हटाने की उन्हें कोशिश कर भौजी ने अपना पूरा वजन मेरी देह पर डाल रखा था और उनकी पकड़ सँड़सी से भी मजबूत थी , और जीजू ने भी पूरी ताकत लगा दी थी थोड़ी देर में आधे से ज्यादा लंड, उनकी सलहज की गाँड़ से निकला मेरे मुंह एक अंदर था और तब मैं समझी ननदोई सलहज की मिली जुली , लगी बुझी थी और जान बुझ के भौजी ने 69 किया और अपने नन्दोई को गांड में लिया,...

जब वो समझ गयी की मैं अब कुछ नहीं कर सकती तो उठीं और मुझे चिढ़ाने लगीं

" अरे चल तेरे पिछवाड़े का स्वाद तो बहुत नन्दोई लोगो ने चिखाया होगा अब ज़रा अपनी भौजाई के पिछवाड़े का भी स्वाद ले ले,.. अरे चटखारे ले ले के चाट,... सब तेरी भौजी का ,... "

जीजू कस के ठेले हुए थे और भौजी ने साफ़ साफ़ बोल दिया कस के मेरे निपल मलते

" ननद रानी, जबतक ये मेरी गाँड़ से निकला मेरे नन्दोई का खूंटा चाट चूट के साफ कर के नहीं,... तब तक न नन्दोई निकालनेगे न मैं तेरे ये निपल छोडूंगी

मैं समझ गयी अब कोई बचत नहीं है और चार पांच मिनट में अच्छी तरह से चाट के ,... लेकिन जैसे जीजू ने निकाला मेरे मुंह से तुरंत उनकी सलहज अपना पिछवाड़ा फैला के खोल के सीधे मेरे मुंह के ऊपर और नाक कस के दबा दिया , ...

" ननद रानी अभी यही तो मेरे नन्दोई के खूंटे पर से इतना स्वाद ले ले के चाट रही थी, चल मुंह खोल जैसे लड्डू खाने के लिए खोलते हैं खूब बड़ा सा , हाँ हां और थोड़ा और बड़ा , ... बस मुंह बंद करने की सोचना भी मत वरना तेरी नाक, और एक बार फिर से हचक के मेरे मुंह पे ,...





और जीजू ने ,... झड़े तो वो थे नहीं ,... अब सीधे मेरी गाँड़ में खूंटा गाँड़ दिया और लगे हचक के मेरी गाँड़ मारने ,... मेरे मुंह के ऊपर उनकी सलहज चढ़ी और पिछवाड़े सलहज के नन्दोई ,... अब अपने छोटे नन्दोई का भौजी ने मुंह में ले लिया,... पहले बड़े जीजू गाँड़ में मेरी झड़े और छोटे वाले जैसे ही भौजी के मुंह में झड़ना शुरू किये भौजी ने जैसे कोई होज पकड़ के , सीधे मेरे चेहरे पे चूँची पे बाल पे सब मलाई जीजू की,...





अब माँ ने थोड़ा सा ब्रेक लिया और बोलीं इस लिए मैं कह रही थी की ननदों के लिए सबसे बड़ा खतरा भौजियां होती हैं ,..देवर , जीजू नन्दोई क्या करेंगे अगवाड़े पिछवाड़े का मजा ले के ,... और मैं तुझसे अभी से बोल रही हूँ अबकी इस होली में तेरी,... तेरी भौजाइयां तो मेरी गाँव वालियों से १०० गुना ज्यादा कमीनी हैं क्या करेंगी पता नहीं।

और जोड़ा,

'और खाली मेरे जीजू थोड़े ही थे मेरी सहेलियों के भी, जिनकी शादी हो गए थे उनके भी मर्द, तेरी नानी ने सब को बोल रखा था फिर भौजाइयां भी तो थीं आग लगाने वाली रात को खड़े होने की हालत नहीं थी , याद भी नहीं आ रहा था कितने मर्दों ने ,..आधी बाल्टी से कम बीर्य नहीं घोंटा होगा मेरे तीनों छेदो ने। '

गीता छुटकी को माँ की मायके की होली का किस्सा बता रही थी

लेकिन छुटकी तो कुछ और जानना चाहती थी, वो गीता के पीछे पड़ गयी,

" गीता दीदी, आप असली बात गोल कर रही हैं ये बताइए, भैया का माँ ने कब कैसे घोंटा,... और ये मत कहियेगा की भैया माँ के ऊपर नहीं चढ़ा। सीधे उसी बात पे आइये। "



 
भाग ४४

रिश्तों में हसीन बदलाव







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उर्फ़ मेरे पास माँ है


अब माँ ने थोड़ा सा ब्रेक लिया और बोलीं इस लिए मैं कह रही थी की ननदों के लिए सबसे बड़ा खतरा भौजियां होती हैं ,..देवर , जीजू नन्दोई क्या करेंगे अगवाड़े पिछवाड़े का मजा ले के ,... और मैं तुझसे अभी से बोल रही हूँ अबकी इस होली में तेरी,... तेरी भौजाइयां तो मेरी गाँव वालियों से १०० गुना ज्यादा कमीनी हैं क्या करेंगी पता नहीं।





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और जोड़ा, 'और खाली मेरे जीजू थोड़े ही थे मेरी सहेलियों के भी, जिनकी शादी हो गए थे उनके भी मर्द, तेरी नानी ने सब को बोल रखा था फिर भौजाइयां भी तो थीं आग लगाने वाली रात को खड़े होने की हालत नहीं थी , याद भी नहीं आ रहा था कितने मर्दों ने ,..आधी बाल्टी से कम बीर्य नहीं घोंटा होगा मेरे तीनों छेदो ने। '

गीता छुटकी को माँ की मायके की होली का किस्सा बता रही थी

लेकिन छुटकी तो कुछ और जानना चाहती थी, वो गीता के पीछे पड़ गयी,

" गीता दीदी, आप असली बात गोल कर रही हैं ये बताइए, भैया का माँ ने कब कैसे घोंटा,... और ये मत कहियेगा की भैया माँ के ऊपर नहीं चढ़ा। सीधे उसी बात पे आइये। "

गीता बड़ी जोर से हंसी और छुटकी को गोद में दबोचती चूम के बोली,

"तू सच में मेरी असली छोटी बहन है कभी मेर्ले में बिछुड़ गयी होगी। अरे भैया कैसे छोड़ता माँ को और फिर मैं छोड़ने देती उसे,... लेकिन माँ ने बहुत नखड़ा किया, पर हम भाई बहन के , अरे अगर बेटे बेटी मिल जाएँ तो माँ कभी भी नहीं जीत सकती। थोड़ा छल कपट, थोड़ी जबरदस्ती , पहले तो बस थोड़ा सा , लेकिन दो तीन दिन में वो एकदम हम भाई बहन के रंग में रंग गयी , एकदम मिल के मजे लेने लगी,... "





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गीता थोड़ी देर सुस्ताई फिर बोली,

" उसी रात, हम भाई बहन ने पहले गंठजोड़ कर लिया था, आज कुछ भी हो भैया का मूसल माँ की बिल में जाना ही है। "

लेकिन छुटकी उकता रही थी, गीता से सीधे मुद्दे पे जाने के लिए जिद्द कर रही थी,

" दीदी, बोल न भैया बने मादरचोद की नहीं,... "





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गीता खिलखिलाने लगी, हंस के बोली,

" स्साली, तेरा गांडू भैया मादरचोद नहीं पैदायशी मादरचोद है,वो स्साला पैदा ही अपनी माँ को चोदने के लिए हुआ था, और फिर लंड भी उसका इतना कड़क है एक बार गलती से भी, रस्ता भूलके भी किसी की बुर में घुस जाए न, तो वो स्साली कित्ती भी छिनारपने के लिए मशहूर हो, अपनी टांग नहीं सिकोड़ सकती। बस एक बार माँ के भोंसडे में लंड घुस जायेगा न तो माँ खुद ही भैया का लंड मांगेगी। और मेरी ये सोच काम कर गयी। "





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छुटकी खूब खुश, हंस के बोली,

" वह दीदी, तो भैया और माँ के रिश्तों में,.. क्या कहते हैं , वो,... हाँ 'रिश्तों में हसीन बदलाव' आ गया।

गीता ने प्यार से छुटकी को गले लगा लिया बोली, तू तो कच्ची उमर में ही सब सीख गयी. एक दम सही बोल रही है,... रिश्तो में हसीन बदलाव, ..एकदम यही हुआ. ये सोच न माँ बेटे से हसींन रिश्ता क्या होगा है न। लेकिन बेटे की नूनी कौन सबसे पहले पकड़ती है ?

छुटकी समझदार थी , झट से बोली,

' और कौन माँ पकड़ के सू सू कराने के लिए, चमड़ी खोल के तेल लगाने के लिए जसी आगे चल के मस्त सुपाड़ा बने , कुंवारियों की चूत फाड़ने के लिए, मस्त मस्त गाँड़ मारने के लिए,... "

"और मुंह कौन लगाता है सबसे पहले " छुटकी का इम्तहान जारी था , उसकी मुंहबोली बहन अपनी छोटी बहन का टेस्ट ले रही थी

" माँ,और कौन। " छुटकी ने न सिर्फ झट से जवाब दिया बल्कि आगे एक्सपेलनेशन भी दे दिया

" अरे चमड़ी सुपाड़े की चिपक न जाए इसलिए फूंक के खोलती है , मुंह भी, और खोल के तेल भी "





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" तो सोच न माँ जब पकड़ती होगी तो ये न सोचती होगी की जब ये बड़ा और मोटा होगा तो एक बार मैं भी,... आखिर घर की खेती है... तो बस, और असली हसींन रिश्ता है लंड और बुर का, मजा दोनों को उसी में आता है , लंड बना है चोदने के लिए,...

" एकदम दी ,... "

अब छुटकी और गीता में परफेक्ट बहनापा हो गया था। और गीता की बात को उसने आगे बढ़ाया,

"लंड बना है चोदने के लिए बेवकूफ समझते हैं मूतने के लिए। और बुर बनी है चुदवाने के लिए और कमीनी लड़कियां टाँगे सिकोड़ के रखती हैं। "

" एकदम छुटकी,... तो सबसे हसीन रिश्ता तो वही हुआ जिसमें मजे आएं तो माँ और के बेटे, मेरे भैया के रिश्तों में भी हसीन बदलाव आ गया। बन गया वो पक्का मादरचोद ,... "

तो रिश्तों में ये हसीन बदलाव कैसे हुआ, गीता ने हाल खुलासा सुनाया।

फिर गीता ने रात का किस्सा सुनाया, उसने और उसके भाई ने मिल के, ... भाई ने क्या पिलानिंग सब गीता की ही थी,

गीता ने भैया को सिखा दिया था और भैया ने वही बातें माँ से कहा, ... और कबड्डी शुरू होते ही माँ ने कहा,

" गीता सुन, बड़ी चुदवासी है न तू छिनार, तेरी बुर में आग लगी है तो तुझे मेरे बेटे के खूंटे पे चढ़ना होगा , "





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" नहीं माँ , " गीता ने नखड़ा किया "रोज तो चोदता है, एक दिन खेत में काम करने गया तो क्या घुटने टूट गए, ... मुझसे नहीं होगा। आप भी न बचपन से इसी का साथ देती हैं "

माँ ने फुसफुसा के गीता को सारी ट्रिक समझायी,...

" अरे स्साली कुछ नहीं करना है , टाँगे फैला के जैसे झूले पे चढ़ते हैं, बस उसी तरह, चढ़ जा, और अपनी बुरिया में दोनों ऊँगली से पहले फैला दे , फिर सटा दे, .. एक बार ज़रा सा फंस जाए,... फिर मैं हूँ न , मैं तेरे कंधे पकड़ के दबा दूंगी,सट्ट से चला जाएगा, अरे बहुत मज़ा आएगा,... "

लेकिन गीता ने जिद्द पकड़ ली नहीं उससे नहीं होगा,... सटक के कही इधर उधर हो गया तो कैसे फैलाएगी , कैसे सटायेगी , .. बहुत जिद्द करने पे बोली,

" माँ, एक बार आप चढ़ जाओ न फिर आप को देख के मैं भी सीख जाउंगी,... "

लेकिन माँ उसके पीछे पड़ी रही आखिर तय ये हुआ की गीता पहले एक बार ट्राई करेगी , अगर उससे नहीं हुआ तो माँ खुद चढ़ के , अंदर ले के उसे दिखाएगी, लेकिन सिर्फ अंदर लेगी चुदवायेगी नहीं,

गीता जानती थी की भैया का मस्त लंड सिर्फ एक बार घुसने की देर है कौन लौंडिया फिर टांग सिकोड़ सकती है, माँ तो खूब खेली खायी, घाट घाट की पानी पी , अपने भैया को नहीं मना की तो मेरे भैया को क्यों मना करेगी। '

वो चढ़ी तो पांच मिनट कोशिश भी हुयी,... पर भाई बहन की लगी सधी, आज तो असली शिकार माँ का होना था,.. कभी वो ठीक से सटाती नहीं, खुद छेद चिपका लेती, तो कभी भाई खुद उसका अपनी कमर हिला के सरका देता,...





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और

माँ चढ़ी,

और गीता को समझाती रही देख ऐसी अपनी बुरिया को फैलाना चाहिए , ऐसे सटाओ और कमर के जोर से , दोनों हाथ से कंधे को पकड़ के कस के धक्का लगाओ ,

अबकी उनके बेटे ने माँ की कमर कस के पकड़ लिया था और उनके धक्के के साथ उसने जोर का ऊपर पुश किया,

गप्पाक से सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया,... और
 
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