Adultery BHABHI MAA - Page 7 - SexBaba
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Adultery BHABHI MAA

अपडेट 60


मैं बहुत hi मायूस होकर अपने कमरे में पंहुचा भाभी अभी भी वही थी ..

वो मुझे देखकर थोड़ी घबरा सी गयी

“क्या हुआ सोनू , तू नंगा hi नेहा के पीछे भाग पड़ा था और तू इतना क्यों मायूस लग रहा है , मैंने महिमा को भी उसके कमरे की और जाते देखा , उसने कुछ कहा क्या ??“

इतने देर बाद अब मुझे अपनी शारीरिक अवस्था का बोध हो रहा था , मैं तब से नंगा hi था और मुझे पता भी नहीं चला :ो

जब मानसिक द्वन्द चल रहा हो तो लोग शारीरिक अवस्था को भूल जाया करते है , शायद यही मेरे साथ भी हो रहा था ..

“महिमा ने मुझे साफ कह दिया की अगर नेहा को पाना है तो अपनी भाभी और कोमल को मार डालो “

मैंने ये नज़ारे झुका कर कहा

भाभी मेरे पास आयी और मेरे हाथो को पकड़कर मुझे बिस्टेर में बिठा दिया .. वो प्यार से मेरे बालो को सहलाने लगी

“बीटा , नेहा ने हमें जिस अवस्था में देखा है एक लड़की के लिए ये कितना पीड़ादायक हो सकता है ये बात मैं समझ सकती हु , मुझे भी ऐसी hi तकलीफ हुई थी जब तेरे भैया ने किसी दूसरी ायरत के लिए मुझे अपने घर से निकाल दिया था ..

मुझे सम्हालने के लिए तो तू था , लेकिन नेहा ??

नेहा के पास तो कोई भी नहीं है , और महिमा ने जो भी बोलै है वो गुस्से में बोलै है , उसकी बात को दिल से मत लगा , हमारे रिश्ते को बस हम hi समझ सकते है , दुनिया में कोई भी इसे महज हवस की भूख hi समझेगा , हमारे दिल में एक दूसरे के लिए जो प्रेम है वो तो बस हमें hi पता है , और रही बात हमें मरने की तो तेरी ख़ुशी के लिए मैं मरने को भी तैयार हु “

मैंने सर उठाकर भाभी की और देखा , उनके मासूम से चेहरे में एक अजीब सी चमक थी ,और आँखों में आंसुओ की दो बुँदे नाच रही थी ..

मैंने भी अपने भावनाओ को सम्हाल नहीं पाया और उनसे जोरो से लिपट गया …..

“मुझे माफ़ कर दो भाभी , मैंने आपके प्यार पर शक किया “

वो बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहला रही थी , उनके स्पर्श ने मुझे अभी तक बाईट हुए दिनों में भाभी के साथ बिताये हर लम्हे को जैसे फिर से उजागर कर दिया था , मुझे मेरी वो भाभी यद् आ गयी जिसने मेरे लिए अपने पति से झगड़ा किया और उसकी सजा को हसंते हसंते स्वीकार भी किया, ये मेरी वही भाभी थी जिसने समाज में अपनी बदनामी की फ़िक्र नहीं है , न hi जीवन में आने वाले किसी भी मुस्किलो की फ़िक्र की बस मेरे साथ रही ,मेरा सहारा बानी … मुझे मुसीबतो से बचते रही और मुझे पता भी चलने नहीं दिया, मुझे माँ का प्रेम और बहन का स्नेह दिया और पत्नी की तरह मेरे देह की अग्नि को भी शाट करने से नहीं हिचकिचाई ….

जब दिया बिना मांगे दिया और मैं पागल हर कमजोर मौको पर उनको शक की निगाहो से देखता रहा ..

उनके हर स्पर्श में हमेशा hi मेरे लिए प्रेम था , उनकी हर दवा मेरे लिए hi रही , उनकी गॉड मेरे लिए हमेशा से जन्नत hi रही , है हमारे बिच जिस्मानी सम्बन्ध बने हमने प्रेम की सीमाओं को पार कर हवस के दरिया में छलांग लगा दिया . लेकिन ये हवस क्यों था , क्या ये जिस्म की भूख के कारण उत्पन्न हुआ था , नहीं शायद नहीं ……

ये हवस भी तो उस प्रेम के चरम की निशानी थी जो हमारे दिलो में इतने दिनों तक था , और अगर ये महज जिस्मानी भूख hi थी तो भी उससे प्रेम की महक गायब नहीं हुई थी ..

जब मैंने पहली बार भाभी के जिस्म को महसूस किया था और मेरे अंदर हवस की आग आयी थी तब भी भाभी ने मुझे अपनी ममता के अंचल में सहारा दिया था मुझे मेरे जिस्म की भूख से परिचय करवाया था और मुझे लड़खड़ाने से सम्हाला था, अगर ये महज जिस्म की भूख थी तो जो हमारे बिच अब हो रहा था वो बहुत पहले hi हो जाना था ..

न जाने कितने कमजोर पालो में हमने अपने जिस्म की आग के चार्म पर भी खुद को रोक लिया था , वो प्रेम hi था जिसके कारण हम रुक पाए थे , लेकिन जब एक बार हमारे बिच की वो दिवार गिर गयी तो फिर खुद को रोकने का मतलब भी तो नहीं रह गया था ……

सब सोचकर मेरे आँखों में अनुस आने लगे थे , भाभी के जिस्म में अभी महज एक झीनी सी निघ्त्य hi थी लेकिन फिर भी मेरे मन में हवस की चिंगारी भी दूर दूर तक कही नहीं थी , उनके जिस्म से उठाने वाली खुसबू ने भी मुझे उसकी ममता का hi आभास दिलाया था …

“अरे पागल तू बच्चो जैसे रोने लगा …”

उन्होंने मेरे आंसुओ को अपने होठो से पिया

“भाभी मुझे लगता है की महिमा तिवारी से मिली हुई है “

उन्होंने मुझे बड़े hi प्यार से देखा

“इन सबसे हमें क्या मतलब है सोनू , हमें सब छोड़कर यंहा से निकल जाना चाहिए , बस तेरी नेहा तुझे मिल जाए “

मैं बस उनके उज्वल चेहरे को hi देखता रह गया

“भाभी अगर नेहा मुझे आपके बदले मिले तो मुझे नेहा नहीं चाहिए ,मेरे जीवन में नेहा के होने का कोई भी मूल्य नहीं रह जायेगा अगर आप मेरे जीवन में ना हो”

मेरी बात सुनकर वो हलके से मुस्कुराई

“अच्छा तो तुझे दोनों चाहिए , और साथ hi सस और रानी भी क्यों ??”

उनकी आवाज में थोड़ी शरारत थी जिससे मेरे होठो में भी फीकी hi सही लेकिन एक मुस्कान आ गयी

“भाभी सस केवल दोस्त है और रानी के रहने और न रहने से मुझे कोई भी फर्क नहीं पड़ता , असल में अब तो मैं फिर सस और रानी के पास जाना भी नहीं चाहता ..

और रही आपके मिलने की बात तो आप तो मुझे मिली हुई hi हो , हमेशा से आपका जीवन मेरे लिए hi तो रहा है .. और जिस्म के मिलान से मुझे कोई भी मतलब नहीं है मुझे तो केवल आप चाहिए आपका जिस्म नहीं …”

भाभी के चेहरे का भाव अचानक से hi बदल गया वो थोड़ी गंभीर हो गयी

“नेहा तुझे मिलेगी बीटा और मैं भी और हम दोनों का जिस्म भी ….और अगर हमारे बिच कोई आया तो मैं उसे हटा दूंगी ”

उनकी आवाज में एक संकल्प था एक ऐसा संकल्प जिसने मुझे डरा hi दिया , ये मेरी भाभी नहीं बल्कि उनके अंदर की वो ताकत बोल रही थी , उनकी आंखे लाल होने लगी जैसे भाभी अपने शरीर से अपना कण्ट्रोल खो रही हो , मैंने झट से उनके चेहरे को पकड़ लिया

“भाभी ..”

मैंने उनके झटका दिया , वो जैसे थोड़े होश में आयी और मेरे चेहरे को पकड़कर मेरे होठो में अपने होठो को दाल दिया …

मैं बेहद hi आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है , भाभी पुरे ताकत से मेरे होठो को चूसे जा रही थी उनकी सांसे तेज होने लगी थी ..

जब उन्होंने मुझे छोड़ा तो उनके आँखे भरी हुई थी ..और चेहरा मायूस

“सोनू शायद महिमा सही कह रही थी … नेहा को पाने के लिए तुझे मुझे मरना होगा “

उनकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौक गया ..

मैं आंखे फाडे हुए उन्हें देखने लगा

“सोनू ये ताकत अजीब है , जब ये मेरे अंदर हावी होती है तो मुझे बस तुम्हे पाने की तीव्र िक्खा होने लगती है , मैं तुम पूरा पाना चाहती हु , तुम्हारे जीवन के किसी भी दुःख को किसी भी कीमत में दूर कर देना चाहती हु , मेरे मन में ख्याल आया की मैं महिमा को जान से मार दू .. क्योकि वो तेरे और नेहा के बिच में आ रही है …… लेकिन जब तुमने मुझे फिर से किश किया तो मुझे समझ में आया की मैं क्या सोच रही थी “

भाभी घबरा गयी थी , उनकी होटल अजीब सी हो गयी थी मैंने झट से उन्हें अपने बांहो में भर लिया था …….

अब मैं उनके बालो को सहला रहा था और वो किसी बच्चे की तरह मुझसे लिपट गयी थी …..

मैं जैसे किसी सोच में डूब गया था आखिर ये भाभी को क्या हो रहा है, वो मुझसे प्रेम तो करती थी हमेशा से करती थी , लेकिन अब इस प्रेम में एक आसक्ति जगाने लगी थी , एक गहरी आसक्ति जो भाभी और मेरे दोनों के समझ से बहार थी …….



 
अपडेट 61
“क्या कोमल के साथ भी कुछ ऐसा होता था ??”

डॉ. ने ये प्रश्न भुवन से किया था , मैंने भाभी के बिहेवियर को देखकर परेशां हो गया था और ये बात डॉ. को बताई उन्होंने तुरंत hi भुवन और मुझे अकेले में बुलाया , हम अभी नदी के किनारे रेट पर बैठे हुए थे ..

भुवन ने भाभी के साथ हुई घटना को सुना तो उसका चेहरा भी गंभीर हो गया ..

“है लेकिन कोमल को पहले इस ताकत पर घमंड था बाद में धीरे धीरे उसने जीवा के कहने पर कुछ मासूमो को भी मार दिया और वंहा से उसे इस ताकत को लेकर ग्लानि के भाव आने शुरू हो गए ..

वो अपनी hi ताकत से डरने लगी थी क्योकि ताकत का होना और उसके कण्ट्रोल का होना दोनों hi अलग अलग बात होती है और कोमल की ताकत उसके कण्ट्रोल से बहार जाने लगी , तभी हम लोगो ने फैसला कर लिया था की हम ये सब छोड़कर दूर चले जायेंगे , केवल मेरे प्रेम के जरिये hi उसे शांत किया जा सकता था, लेकिन आरती के होने के बाद से वो जयदा शांत हो गयी और आरती के आने से हमारा जीवन hi बदल गया हम वो नहीं रह गए जो हम हुआ करते थे …”

“हुम्म्म “

डॉ. गहरे विचारो में गम हो गया था ..

“क्या बात है डॉ. क्या कोई परेशानी वाली बात है , देखिये हमें किसी से कोई बदला नहीं लेना मैं भाभी को लेकर कही दूर चला जाऊंगा , लेकिन मैं भाभी को इस तकलीफ में नहीं देख सकता “

डॉ. के चेहरे पर आ रहे भाव मुझे डरने लगे थे

“मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा .. ये कोई श्राप या कोई जादुई ताकत न होकर कोई मानसिक बीमारी भी तो हो सकती है जो की जेनेटिकली एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलती हो .. मेडिकल साइंस में ऐसे कई रोग है जो की माँ बाप से बच्चो को हो जाते है , ये कोई मानसिक बीमारी हो सकती है “

डॉ. की बात से न सिर्फ मैं बल्कि भुवन भी बुरी तरह से चौक गया था

“ऐसे कैसे हो सकता है डॉ. , मैंने खुद उस पुस्तक में पढ़ा था की ये ताकत एक श्राप है “

भुवन बेचैन होते हुए बोलै

“है जो चीजे समझ नहीं आती हम उसे जादू कहना शुरू कर देते है , ये तो हमेशा से होता आ रहा है, हो सकता है की जब किसी को ये विकृति जगी होगी तो उसे समझ न आया हो और उन्होंने इसे श्राप का नाम दे दिया हो .. सोचने वाली बात है की ऐसे कंडीशन के मरीज तो आज भी मौजूद है , वो अपना आप खो देते है और अद्भुत ताकत उनके अंदर आ जाती है , कई स्किज़ोफ्रेनिअ के मरीजों में ऐसी कंडीशन पायी जाती है , उनकी ताकत इतनी हो जाती है की कई लोग एक साथ भी उसे सम्हाल नहीं सकते .. “

“लेकिन ये भी तो कॉन्फिडेंस के साथ नहीं कहा जा सकता की ये कोई बीमारी hi होगी , और प्यार का मिलना और प्यार के द्वारा सम्हालना ये भी तो कोई इत्तेफाक नहीं है , और ये चीजे भी तो उस पुस्तक में थी “

मैंने अपनी दुविधा सामने राखी , डॉ. ने मुस्कुराते हुए बोलना शुरू किया

“है सही बोले तुम , लेकिन अगर इसका पैटर्न देखो तो चीजे जयदा क्लियर हो जाती है …. कोमल और आरती दोनों के साथ एक चीज हुई और पुस्तक के हिसाब से और भी कई लोगो के साथ , और वो था की उनका पहला प्यार सक्सेसफुल नहीं हुआ था , इसलिए वो ताकत नहीं जाएगी ..

अब मजेदार चीज तो ये है की भुवन कोमल के साथ बचपन से था और तिवारी से जयदा प्यार उससे करता था, भले hi कोमल तिवारी के साथ थी लेकिन उसके दिल में ये बात जरूर थी की भुवन उससे प्यार करता है और वो भी भुवन को एक दोस्त की तरह hi सही लेकिन बहुत प्यार करती थी , जस्ट वैसे hi अंकित भी आरती के साथ तब से था जब से उसने राजू से शादी की राजू ने बेवफाई की लेकिन अंकित उसके साथ हमेशा रहा और इसीलिए आरती के दिल में भी अंकित के लिए एक भरोषा और अनकंडीशनल प्रेम ने जन्म लिया ..

मतलब दोनों hi कंडीशन में सिचुएशन लगभग एक सी थी , पहले प्यार से धोखा और फिर दूसरा प्रेम जो की छिपा हुआ था उसका बहार आना ..

अब एक और मजेदार बात ये है की अगर हम मानसिक बीमारियों का पैटर्न देखे तो वो ऐसे hi नहीं हो जाते , वो तब hi बहार आते है जब किसी प्रकार का मानसिक दबाव हो , एक uddipan(stimulation) की जरुरत होती है , सभी इंसानो की ताकत अलग अलग होती है इसलिए स्टिमुलेशन भी अलग अलग होता है, अधिकतर किसी बहुत hi बुरी चीज या घटना के सामने आने से hi मानसिक विकार जाग जाते है …

तो क्या ये नहीं हो सकता की इस केस में पहले प्रेम का धोखा स्टिमुलेशन का काम करता हो और फिर दूसरा सच्चा प्रेम जो की उन्हें भी हमेशा से लगता है की यही सच्चा प्रेम है लेकिन वो इसे उजागर नहीं कर प् रहे होते .. तो इस सच्चे प्रेम के मिल जाने से वो ताकत अचानक से फुट जाती हो ..

और फिर जैसा उनका बिहेवियर हो जाता है अपने प्रेमी के प्रति वो किसी मानसिक रोगी के hi लक्षण है , जैसे बहुत hi जयदा प्रेम करना और साथ hi एक आसक्ति का भाव आना ..

क्योकि कोमल ने पुस्तक पढ़ी थी इसलिए उसने इसे जादू की तरह hi लिया और अपने ताकत को एन्जॉय करने लगी , ऐसे भी वो हमेशा से जीवा और सम्पत के साथ रही थी तो उसे मारपीट वाला माहौल hi मिला था , लेकिन आरती के केस में ऐसा नहीं था, उसे बचपन से बहुत hi प्रेम से पला गया, राजू को छोड़ दो तो सभी ने उसे सम्मान और प्रेम दिया है , वो मारपीट जैसी चीजों से भी बहुत दूर थी .. तो उसके मन में इस ताकत से उठाने वाले विचारो को लेकर ग्लानि के भाव जल्दी hi आने शुरू हो गए .. “

डॉ. की बात सुनकर भुवन और मैं दोनों hi सोच में पढ़ गए थे ..

अगर ये बीमारी थी तो इसका लीलाज क्या था , एक इलाज तो हमें पता था वो था प्रेम ..

डॉ. ने बोलना जारी रखा

“और जैसा की अधिकतर मानसिक रोगियों के साथ होता है प्रेम से hi ये रोग भी काबू में आ जाता है ….

इसका कारण भी सामान्य सा है की अगर कोई आपसे प्रेम दिखाए तो उस प्रेम के अहसास से अपने पर काबू करना आसान हो जाता है ..”

हम सभी चुप थे की मेरे दिमाग में एक प्रश्न आया

“तो क्या हमें भाभी को बता देना चाहिए की वो बीमार है ..”

“नहीं अंकित अभी नहीं .. इससे वो और भी परेशां हो जायेगी और उससे उसका खुद पर से कण्ट्रोल खोने लगेगा .. उसे तुम्हारे प्रेम की जरुरत है उसे बस इन सबसे दूर रखो तो hi ठीक होगा, अभी तो मैं भी अपनी इस थ्योरी पर कन्फर्म नहीं हु, मुझे भी थोड़ा रिसर्च का मौका दो .. अगर ऐसा है तो ऐसे केस या इससे मिलते जुलते केस और भी होंगे , और प्रेम से बड़ी कोई थेरेपी दुनिया में नहीं है .. हम भारतीयों में परिवार का बहुत मुलाय होता है ये भी एक तरह से थेरेपी का काम करती है , पहले जब संयुक्त परिवार होते थे लोग अपनी समस्या एक दूसरे से खुलकर बोल लेते थे और हलके हो जाते थे इसलिए मानसिक रोगी बहुत hi काम थे, जिन समाजो में अकेलेपन की समस्या है वंहा मानसिक रोग भी बहुत जयदा है क्योकि उनके पास प्रेम hi तो नहीं है .. न माँ बाप का प्यार मिल पता है न hi दोस्तों का न hi रिश्तेदारों का , मिलता है तो बस टेंशन … तो अभी तो बस प्यार से रखो बाकि की बाटे बाद में देखते है .. अगर आरती को जयदा मानसिक टेंशन नहीं दिया जाए तो हो सकता है की वो खुद से hi ठीक होने लगे , जैसे की कोमल हो गयी … अब कोमल का खुद पर बहुत hi कण्ट्रोल है और यद् रखना हर मानसिक बीमारी अपने आप में एक मानसिक ताकत भी होती है , बीमारी और ताकत में बस एक hi चीज का फर्क होता है वो है कण्ट्रोल का .. कण्ट्रोल कर लिया तो ताकत और अगर न कर पाए तो बीमारी … ( ये मैं ऐसे hi नहीं बोल रहा हु , असल में साइकोलॉजी में हर बीमारी के साथ एक चीज मैंने देखि है और वो है उनकंट्रोलबले, और साथ hi साथ कई मानसिक बीमारिया ऐसी भी है जिसे हम योग और ध्यान की सिद्धिया मानते है , ताकत और जादू मानते है लेकिन वही बात है कण्ट्रोल का फर्क होता है ) “

डॉ. की बात से मुझे बहुत hi शांति मिली , तभी थोड़ी hi दूर हमें किसी के होने का अहसास हुआ ..

हम सभी की नजर उस और गयी ..

वो नेहा थी , आँखों में आंसू लिए वो हमारी बातो को सुन रही थी ..

“तुम ..”

मैं कुछ और बोल पता उससे पहले hi डॉ. वंहा से उठ गए

“तुम दोनों बात करो हम चलते है “

डॉ. ने ये कहते हुए मुझे आँख मार दी थी …..

डॉ. और भुवन के जाने के बाद नेहा मुझसे आकर लिपट गयी ,मैं आश्चर्य में था की ये क्या हो रहा है ..

“मुझ माफ़ कर दो अंकित , मेरी माँ सच में तिवारी के साथ मिली हुई है , मुझे माफ़ कर दो की मैंने भाभी के बारे में बुरा सोचा .. भाभी बीमार है और मैं.. “

मैं नेहा के इस हृदयपरिवर्तन से चौक गया था

“तुम.. तुमने मुझे माफ़ कर दिया “

उसने सर उठाया उसके होठो में एक मुस्कान थी लेकिन गहरी नहीं बस हलकी सी

“है भी और नहीं भी “

“मतलब ??”

“मतलब की तुमने भाभी के साथ जो किया उसके लिए मैंने तुम्हे माफ़ किया लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हु और तुम्हे किसी और के साथ नहीं देख सकती .. तुम भाभी से hi प्यार करते हो मुझसे नहीं , मुझसे प्यार करना शायद तुम्हारा भरम था “

“नहीं नेहा ऐसा नहीं है , मैं तुम दोनों से प्यार करता हु .. और रही साररिक सम्बन्धो की तो मेरे सम्बन्ध सस और एक रानी नाम की ायरत से भी रहे है “

मेरी बात सुनकर नेहा ने मुझे छोड़ दिया और बड़े hi गौर से मेरे चेहरे को देखने लगी

“तुमने समझाना मेरे बस का नहीं है अंकित , तुमने जो किया वो शायद तुम्हारे लिए ठीक हो लेकिन मेरे लिए नहीं .. मैं आज hi यंहा से जा रही हु अपने पुराने जीवन में लौट रही हु , तिवारी से हमें कोई दर नहीं है उसका संरक्षण माँ के साथ है , मैं एक सिंपल सी लड़की हु अंकित और तुम बहुत hi कॉम्प्लिकेटेड हो… हमारा अलग हो जाना hi सही रहेगा “

इससे पहले की मैं उससे कुछ कह पता वो वंहा से निकल गयी , मैं उसे रोकना चाहता था लेकिन मुझे भाभी का ख्याल आया, नेहा के रहते मैं भाभी पर ध्यान नहीं दे पता शायद वक़्त की भी यही नजाकत थी की मैं नेहा को जाने दू …

वो आँखों में आंसू भरे जाने लगी मैं बस नदी की रेट में खड़ा हुआ उसे जाते देखता रहा ……..



मैं उसे रोकना तो चाहता था लेकिन मेरे आँखों के सामने बस भाभी की तस्वीर आ रही थी ………..
 
अपडेट 62
सिगरेट के गहरे कास के साथ साथ hi मैं अपने दिमाग में भरे हुए विचारो को काम करने की कोशिस कर रहा था , साथी hi खड़ा हुआ था अज्जू ,

जब उसने मुझे फ़ोन किया तो मैं खुद को रोक hi नहीं पाया और उससे मिलने चल पड़ा था, हम कॉलेज के पास hi अपने एक अड्डे में बैठे थे जंहा बैठकर अधिकतर हम सिगरेट के कास लगाया करते थे ,

अज्जू को भी मेरे और भाभी के बारे में पता चल गया था साथ hi नेहा से ब्रेकउप के बारे में भी , लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं कहा था , वो समझता था की कुछ चीजे समझ से बहार hi होती है उस समय में दिल की सुननी चाहिए ,लेकिन जब आप अपने दिल की सुनो तो दुनिया को समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है की आखिर आपने ये डिसिशन कैसे ले लिया …

वो न तो मुझे समझा रहा था न hi मुझे जज कर रहा था बस मेरे साथ खड़ा हुआ सत्ता मार रहा था , अभी मुझे ऐसे hi दोस्त की जरुरत थी जो की मेरे जीवन में उंगली न करे बल्कि बस मेरे साथ खड़ा रहे ..

अभी थोड़ी hi देर हुए थे की हमें अक्की भी आता हुआ दिखा , जब मैंने आँखों hi आँखों में अज्जू को पूछा की ये यंहा कैसे वो उसने आँखों से hi जवाब दे दिया की उसे उसने hi बुलाया है..

लेकिन अक्की के तेवर कुछ सही नहीं लग रहे थे

और

चटकककक

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गलो में पड़ा , ऐसा लगा जैसे चारो और hi सितारे घूम गए हो ,,,

“अक्की ..??”

अज्जू चिल्लाया लेकिन अक्की शायद किसी और hi दुनिया में था एक और छठा मेरे तरफ घुमा और मेरे गलो पर पद गया

“सेल तू इतना नीच निकल जायेगा मैंने सोचा hi नहीं था , मैं तेरे और नेहा को लेकर कितना खुस था लेकिन तूने … तूने नेहा को धोखा दिया है , वो भी … वो भी अपनी भाभी के लिए , तू तो उसे अपनी माँ के सामान मंटा था न .. छियई तुझे तो अपना दोस्त बोलते हुए भी शर्म आती है “

मैं समझ सकता था की अक्की और नेहा बचपन से साथ रहे है , उन दोनों के बिच की बॉन्डिंग थोड़ी अलग hi थी , नेहा को जो दुःख पंहुचा उससे अक्की को बी बहुत hi तकलीफ हुई थी ..

मैं समझ तो सकता था लेकिन मैं समझा नहीं सकता था ..

“यार अक्की हो जाता है “ अज्जू ने उसे समझने की कोशिस की

“नहीं अज्जू ऐसा नहीं होता भाई , इसने जो किया वो किया लेकिन नेहा को कैसा लग रहा होगा ये हम सोच भी नहीं सकते, उसने तो अपने दिल से इससे प्यार किया था भाई , लेकिन बेचारी का अब रो रो कर बुरा हल हो गया है “

“मैं समझ सकता हु भाई “ मैं कुछ बोलने hi वाला था

“मत बोल मुझे भाई, जो तूने नेहा के साथ किया है वो मैं कभी माफ़ नहीं करूँगा “

ये बोलकर अक्की पलटा hi था की , मैं चिल्ला पड़ा

“अक्की “ मैं अक्की के ऊपर खुद गया था , एक लोहे की रोड अक्की के ऊपर घुमाई गयी थी मैंने सही समय में अक्की को जमीं गिरा दिया था , मैंने देखा की कोई 10 -15 लोग थे और सभी के हाथो में हथियार थे .. मैं इन सभी के चेहरे पहचानता था

“अबे जीवा भाई ने बुलाया है चुप चाप चल सेल तुझे कहा कहा नहीं धुन्धड़ा और तू यही बैठा सिगरेट पि रहा है “

एक आदमी जोरो से हंसा वो मेरे पास hi था उसके हाथो में तलवार थी ..

“ोकक ोकक इन दोनों को पहले जाने दो फिर… “

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi अज्जू बोल पड़ा

“सेल इसे हाथ तो लगा के दिखा “ अज्जू गरजा , मैंने देखा की उसके हाथो में एक पिस्तौल थी , उसने पिस्तौल को लोडे कर लिया , अज्जू ने एक गलती कर दी थी क्योकि ये लोग कोई सामान्य गुंडे नहीं थे बल्कि जीवा और सम्पत गैंग के खास लोग थे ऐसे पिस्तौल से खेलना उनका रोज का काम था

“सालो तुम लोग ऐसे नहीं मानोगे “ वो मुस्कुराया और मैंने देखा की उसके साथ साथ कई लोग अपने पीछे से पिस्तौल निकाल रहे है मैं तुरंत hi एक्शन में आया और अपने पेअर से उस आदमी कोई गिरा दिया लेकिन बाकियो की पिस्तौल अज्जू की और घूम गयी थी मैंने अज्जू की तरफ खुदा , अज्जू ने भी दो गोलिया चला दी लेकिन बदले में अज्जू की और एक साथ कई गोलिया चल पड़ी थी , मैंने अज्जू को गिरा कर बचा लिया था लेकिन ये बड़ी मुसीबत आ गयी थी , तब तक एक आदमी दौड़ कर आ गया था ,

“भाई ये ऐसे नहीं मानेगा इसे तोड़ कर ले जाते है “

और तभी उसने अपना तलवार मेरे पीठ पर गदा दिया ..

“aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh”

मैं जब तक पीछ मुद कर देखता तलवार मेरे पसलियों में गड चूका था ..

“मादरचोद मेरे दोस्त को मारा “

अज्जू गरजा था , उसने पास hi गैस में बन बन रहे गर्म गर्म चाय को उस आदमी के मुँह में फेक दिया , फिर से गोलिया चली लेकिन तब तक अज्जू भी खुद को सम्हाल चूका था मुझे बाजु में लिटा दिया गया था और जंहा अज्जू ने अपनी गन पर हाथ जमा लिए थे वही अक्की अपने एक हाथ में चाय बनाने का बर्तन और दूसरे में सामने पड़े हुए आदमी की तलवार पकडे हुए उस लोगो की तरफ दौड़ पड़ा था , मैं भी मुकिल से hi सही लेकिन खड़े होने की कोशिस कर रहा था , गोलिया चलने लगे थी अक्की के तलवार के और अज्जू की गोली के निशाने में जो भी आ रहा था वो घायल हो जाता था दोनों के अंदर न जाने कहा से ऐसा योद्धा जाग गया था , तलवार मेरे पसली के आर पर थी लेकिन फिर भी मैं जैसे तैसे खड़ा हुआ , तभी

धाययययय

एक गोली सीधे अक्की के कंडे पर लगी और उसका तलवार निचे गिर पड़ा और तभी उसके सामने खड़े आदमी ने अपने हाथो में रखे लोहे की रोड से उसका मुँह तोड़ दिया

“अक्की …” मैं उसकी तरफ भगा न जाने कहा से मेरे अंदर एक ताकत का जन्म हो गया था लेकिन तभी

धाय

एक गोली आकर मेरे कंधे पर लगी लेकिन मैं रुका नहीं और अपने हाथो से hi अपने पसलियों में गाड़ी हुई तलवार खींच कर निकाल ली ..

“आह्ह्ह्हह्ह “

दर्द तो था बहुत दर्द था लेकिन दोस्तों को लड़ते हुए देख कर अंदर ऐसा जोश आ गया था की दर्द का अहसास hi नहीं हो रहा था ..

मेरी आंखे बंद हुई और मेरे सामने भाभी के चेहरा आ गया जब वो रेल की पटरी पर मौत का तांडव कर रही थी , मैं भी चिल्लाया और दुःसाहमणो के ऊपर खुद पड़ा , हम 3 दोस्तों मेरे शिव बाकि दोनों लड़ाई झगड़ो से कोशो दूर थे , मैंने टैनिंग ली थी वही आज काम आ रही थी लेकिन मैं बुरी तरह से जख्मी था और सामने वालो के हाथो में पिस्तौल थी , हमने पहले पिस्तौल वालो को hi मारा , हम 3no भी बुरी तरह से जख्मी हो चुके थे लेकिन हम तब तक डेट रहे हम न सिर्फ अपनी अपनी जान बचा रहे थे बल्कि एक दूसरे का साथ भी दे रहे थे, लेकिन मेरा बहुत खून बाह चूका था , मैं खड़े होने की हालत में नहीं था , आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा था , सब कुछ धुंधला धुंधला सा दिख रहा था , मुझे किसी ने बैठा दिया ..

“तू फ़िक्र मर कर जब तक हम जिन्दा है तुझे कुछ नहीं होगा “

ये अक्की की आवाज थी , मैं मुश्किल से आंखे खोलकर कुछ देखने की कोशिस कर रहा था की मेरे कानो में पुलिस की गाड़ी की आवाज आयी , और तभी एक और आवाज

“मादरचोद साला “

और ऐसा लगा की मेरे सर में आकर कुछ लगा ………………..

अभी ऐसा लग रहा था जैसे शरीर में जान है भी की नहीं , या सब कुछ जैसे सपना सा हो और मैं एक गहरी नींद से उठा हु , शरीर को हिलने की कोशिस कर रहा था लेकिन हिला नहीं पा रहा था , बस आँखों को थोड़ा हिला प् रहा था, कानो में किसी की आवाज आ रही थी वो एक ायरत थी साथी hi 2-3 लोग और थे जो बहस कर रहे थे , आंखे थोड़ी और खुली तो सामने टीवी चल रहा था मैं अधखुली आँखों से बस यही देख प् रहा था की कोई न्यूज़ चैनल चल रहा है और शायद किसी चीज का कोई डिबेट चल रहा था

मैंने सुनने की कोशिस की ..

“ये क्या हो रहा है शहर में आये दिन बेरहमी से क़त्ल हो रहे और लॉ एंड आर्डर की धज्जिया उड़ाई जा रही है , आखिर कोण है ये शिवा जो ऐसे बेरहमी से लोगो को मार रहा है “एक आदमी जोरो से चिल्लाया तभी एक महिला की आवाज मेरे कानो में पड़ी

“जो भी है लेकिन काम से काम वो शहर का कचरा hi तो साफ़ कर रहा है अभी तक पुराने जीवा गैंग के मेंबर्स को hi मारा गया है यंहा तक की सालो से छिपे हुए सम्पत और जीवा को भी मार कर बिच चौराहे में लटका दिया है उसने भाई डैम तो है बन्दे में “ायरत की आवाज में एक अजीब सी ख़ुशी थी

“पुलिस इसे एक आदमी का काम मानकर ताल रही है जबकि खुद मिनिस्टर तिवारी भी अपने 2 वफादारों की मौत पर कुछ नहीं बोल रहे है , पहले मंत्री जी के 2 लोग मरते है फिर उनके दुश्मन का पूरा गैंग hi ख़त्म कर दिया जाता है , क्या ये किसी प्रकार की कोई साजिस नहीं है , सर्कार की ताकत का इस्माल करके कही मिनिस्टर साहब अपनी पुराणी दुश्मनी तो नहीं निकाल रहे है “

एक दूसरे आदमी ने वयंग मारा था , जिससे एक दूर भड़क गया शायद ये तिवारी की hi पार्टी का कोई था

“देखिये मंर्ती जी के ऊपर खुद भी हमले हो रहे है , और आप ऐसे बेबुनियाद इल्जाम मंत्री जी पर नहीं लगा सकते अगर आपके पास कोई सबूत है तो आप सीधे अदालत जाइये “

और फिर कई लोग एक साथ बोल उठे ऐसा लगा जैसे बहस बहुत बाद गयी हो और कोई किसी की बात नहीं सुन रहा हो ……

तभी अचानक से सभी की आवाज संत हो गयी

“देखा आप लोगो ने शिवा नाम का ये शख्स क़त्ल पर क़त्ल किये जा रहा था लेकिन कल सनसनीखेज रूप से प्रख्यात गैंगस्टर जीवा जो की सालो से छिपे हुए थे और उसके साथी सम्पत को मारकर बिच चौराहे पर टांगने के बाद राजनैतिक सरगर्मी बाद गयी है , कहा जाता है की जीवा का मंत्री दया संकर तिवारी से पुराण याराना था जो की बाद में दुश्मनी में बदल गयी , अब शक की सुई मंत्री जी पर hi अटक गयी है हलाकि उनके ऊपर भी कुछ दिनों से हमले बाद गए है ………”



मैं कहा था और कितने दिनों से था और ये शहर में क्या हो रहा था , मैं कुछ और सोच पता लेकिन मेरी आंखे बंद होने लगे थे , मानसिक टेंशन लेते hi मुझे नींद आने लगी और मैं फिर से बेहोश हो गया था …………..
 
अपडेट 63
महिमा अभी एक टेबल में छाती के बल बंधी हुई थी, जिस्म पर कोई भी कपडा नहीं था और वो रोये जा रही थी लेकिन उसकी सुनने वाला कोई भी नहीं था ,

“उस दिन तो तू बच गयी थी लेकिन आज तुझे कौन बचाएगा “

एक कामिनी सी हंसी सुनकर महिमा की रूह तक काँप गयी थी ,

“प्लस करीम भाई मुझे छोड़ दो , मैंने आपका क्या बिगाड़ा है “

महिमा की बात सुनकर करीम जोरो से हंस पड़ा

“तूने नहीं मेरी जान तेरी इस भरी हुई जवानी ने बिगाड़ा है , तेरे पति को हमने ठिकाना लगा दिया लेकिन तुझे ना प् सकने की दर्द मैं नहीं भूल पाया , मेरा जानवर आज भी तुझे पाने के लिए मारा जा रहा है ये देख “

करीम ने अपने नंगे लटकते हुए लिंग को महिमा के पिछवाड़े पर गदया

“नहीं ………”

महिमा की कनपटी हुई आवाज निकली जिसे सुनकर करीम का लिंग और भी फुंकार मरने लगा , महिमा मजबूर थी करीम ने उसकी बेटी को किडनैप कर लिया था और उसे बदले में महिमा की जवानी चाहिए थी , करीम की सबसे बड़ी कमजोरी थी जवान लड़किया थी, जो उसे पसंद आ जाती उसे वो भोग कर hi रहता था , लेकिन महिमा को तिवारी के वचन ने उस दिन बचा लिया था , सत्य ने अपनी जान के बदले महिमा की इज्जत और अपनी बेटी के भविष्य का सौदा किया था , लेकिन करीम के मन में ये महिमा को भोगने की िक्खा रह गयी और वो सिर्फ भोगता hi नहीं था बल्कि नोच डालता था , वो जानवर था जो अपने शिकार को पूरी तरह से नोच नोच कर खता था ..

और ये बात साडी दुनिया को पता थी , महिमा को भी ये बात पता थी , डॉ. जैसे hi अपने कामो में वयस्त हुआ और तिवारी का थोड़ा ध्यान हटा वैसे hi करीम ने महिमा की दुखती हुई राग उसकी बेटी नेहा पर हाथ मारा और उसे किडनेप कर लिया था ,

अब वो तिवारी के बोलने पर भी महिमा को नहीं छोड़ने वाला था लेकिन तिवारी के मन में महिमा के लिए अब भी कोई सॉफ्ट कार्नर मौजूद था , उसने करीम को मन लिया था की वो करीम की भूख मिटने के लिए एक लड़की उसे लेकर देगा बदले में करीम महिमा को छोड़ देगा , महिमा को केवल तिवारी का hi भरोषा था , उसके पति के जाने के बाद भी तिवारी ने उसे सपोर्ट किया था लेकिन आज ..

आज तो महिमा को लग रहा था की तिवारी भी उसकी इज्जत नहीं बचा पायेगा ..

“मुझे छोड़ दो तिवारी जी आते hi होंगे “महिमा ने अपने बचाव में कहा

वही करीम जोरो से हंस पड़ा

“तुझे क्या लगता है अगर मैं तिवारी के आते तक रुकूंगा , मुझे पता है की उस सेल चूतिये तिवारी का दिल तुझपर आ गया है , उस दिन भी उसने तुझे बचा लिया और आज भी बचा hi लेगा , इसलिए उसके आने से पहले hi मैं तुझे नोच डालूंगा, “

करीम की बात सुनकर महिमा फिर से काँप गयी थी

“नहीं ….”

उसने अपने कांपते हुए स्वर में कहा था

“चुप कर वर्ण तेरी बेटी का गाला तेरे सामने hi काट दूंगा , लाओ रे इसकी बेटी को उसके सामने hi इसकी माँ का बलात्कार करेंगे “

करीम की बात सुनकर महिमा सकते में आ गयी

“नहीं नहीं मेरे साथ जो करना है वो करो लेकिन मेरी बेटी को कुछ मत करना ,मैं .. मैं अब कुछ नहीं कहूँगी जो करना है कर लो “

करीम के चेहरे में एक कामिनी सी मुस्कान आ गयी थी

“अरे मेरी जान मछली चटपटायेगी नहीं तब तक मजा कैसे आएगा “

करीम ने अपनी उंगली महिमा के योनि पर चला दी , महिमा बस दबे हुए स्वर में चुहक उठी थी ..

करीम ने बड़े hi इत्मीनान से महिमा की योनि की गहराइयों में अपनी उंगलिया चलनी शुरू की , महिमा बस रो रही थी वो कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर प् रही थी ..

“छी इस साली रंडी को तो कुछ करने में मजा hi नहीं आ रहा है , लाओ से इसकी बेटी को “

“नहीं नहीं तुम जो बोलोगे मैं वो करुँगी लेकिन बेटी को नहीं “

महिमा छटपटाई

वही करीम जोरो से हंस पड़ा

“साली कुटिया तू अगर ऐसे hi सुस्त पड़ी रहेगी तो मुझे कैसे मजा आएगा , तुझे दर्द दे कर छोडूंगा तभी तो मुझे सुकून आएगा “

करीम ने महिमा के योनि को जोरो से अपनी मुठ्ठी में दबा दिया था ,

“आआह्ह्ह नहीं “ महिमा चिल्ला उठी थी

“अब आया न मजा , अब देख कुटिया “

करीम ने पास hi रखा अपना बेल्ट उठा लिया और जोरो से महिमा के पीठ में दे मारा

“आह्हः “

महिमा चिल्ला उठी थी , करीम ने इशारा किया और उसके लोगो ने नेहा को भी उसके सामने लेकर उसके सामने एक कांच की दिवार के उस पर खड़ा कर दिया , महिमा को लगा जैसे उसकी दुनिया hi लूट गयी हो , नेहा बस अपनी माँ को नहीं देख प् रही थी लेकिन वो महिमा की आँखों के सामने थी , वही करीम जोरो से महिमा को बेल्ट से मारे जा रहा था और फिर जब उसका मन भर गया उसने अपना लिंग महिमा की योनि में घुसा दिया , महिमा दर्द से चिल्ला रही थी और जितना वो चिल्लाती करीम को उतना hi मजा आता था , करीम तब तक नहीं रुका जब तक की उसने अपना पूरा वीर्य महिमा की कोख में नहीं दाल दिया ……….

करीम के बाद उसके सभी खास लोग भी महिमा को लालची नजरो से देख रहे थे , वो सभी उसे नोच कर खाना चाहते थे लेकिन अभी करीम का दिल नहीं भरा था ……

तभी वंहा तिवारी आ गया, उसके साथ एक और लड़की थी ..

तिवारी भी करीम के आगे मजबूर था लेकिन तिवारी ने करीम को मन लिया की करीम को जब भी जरुरत होगी महिमा उसके पास आ जायेगी , और अभी के लिए करीम और उसके गैंग के बाकि लोगो की भूख ये लड़की मिटाएगी …

शर्त ये थी की महिमा को बाकि के लोगो के सामने न परोसा जाये और हैवानियत न दिखाई जाए .. करीम मन गया था क्योकि उसे अब नयी मछली मिल गयी थी जो की और भी जयदा छटपटा रही थी , मांग में सिंदूर भरे वो नयी लड़की ऐसी लग रही थी जैसे उसकी अभी अभी नयी नयी hi शादी हुई हो , जवान और बहुत hi खूबसूरत , करीम को अब महिमा hi फीकी लगने लगी थी …

अब महिमा की जगह पर उस लड़की को लिटा दिया गया था , आज करीम और उसके साथी मिलकर उस लड़की के चिथड़े नोच डालने वाले थे , लेकिन महिमा की जान बच गयी थी , महिमा ने कपडे पहने और नेहा के साथ बहार आ गयी , नेहा ने एक बार उस ायरत को देखा जो की टेबल में बंधी हुई थी और उसके मुँह पर कपडा ठूंसा गया था , वो लाल रंग की साड़ी में थी, हाथो में भरी हुई लाल चुडिया और गहरे लाल रंग का सिंदूर से भरी हुई मांग …

‘ये कितनी सूंदर है ‘ नेहा के दिमाग में आया था ..

“मैं इस जानवर को जिन्दा नहीं छोडूंगी , ये तो आपको भी कुछ नहीं समझता “

वंहा से निकट hi महिमा ने तिवारी को कहा था ..

“आज के बाद नहीं , बहुत हो गया तुमपर हाथ डालकर इसने मेरे साबरा की सिमा को भी तोड़ दिया है , अब इसे रिश्ते से हटाना hi पड़ेगा “

तिवारी जैसे खुद में hi भुनभुनाया और उसने फ़ोन घुमा दिया ……………….

*************

नेहा के पुरे चेहरे में पसीना था , वो अभी हॉस्पिटल में मेरे बाजु में बैठी थी , उसने अपने सपने में वो देखा था जिसे देखकर उसकी रूह कैंप गयी थी , कल hi तो महिमा ने उसे बताया था की वो तिवारी की इतनी तारीफ क्यों करती है , कल hi महिमा ने नेहा को मुझसे दूर रहने के लिए कहा था और अपनी कहानी बताई थी , लेकिन नेहा मुझे ऐसी अवश्था में नहीं छोड़ सकती थी , मैं अभी भी कोमा से बहार आया hi था लेकिन कोई मुझसे जयदा बात नहीं करता था , कभी भाभी तो कभी नेहा रत रत भर मेरे बाजु में बैठे रहते थे , मुझे बताया गया की अक्की और अज्जू ठीक है , हॉस्पिटल के बहार बहुत कुछ हो चूका था या हो रहा था लेकिन मुझे कुछ भी नहीं बताया जा रहा था ..

आज रत के 2 बजे थे लेकिन नेहा की आँखों में नींद hi नहीं था उसके मन में अपनी माँ की कही बात और उस ायरत का चेहरा बार बार घूम रहा था जिसे उसने सालो पहले देखा था …..

“आखिर वो ायरत कोण थी और करीम ने उसके साथ क्या किया , और उसके बाद उसका क्या हुआ होगा ….?????????”



नेहा के दिमाग में अचानक से ये सवाल उठा ………….
 
अपडेट 64
जब मेरी आंखे खुली तो मेरे सामने जो मुखड़ा था उसे देखकर मुझे बहुत hi सुकून मिला , वो शायद रत भर जगाने की वजह से अभी सो रही थी ..

प्यारे से चेहरे पर कोई मासूमियत टपक रही थी ..

मुझे मेरे शरीर में अभी बहुत hi कमजोरी से लगी लेकिन मैंने अपने होठो को फड़फड़ाने का प्रयास किया ..

“नेहा.. “

मैं बड़ी hi मुश्किल से बोल पाया था

नेहा ने झट से आंखे खोल ली जैसे वो इसी शब्द को सुनने का इन्तजार कर रही थी और मुझे अपनी और देखकर बात करता हुआ देखकर रट हुए मेरे साइन से लग गयी ..

मुझमे अभी इतनी हिम्मत नहीं थी की मैं उसके बालो को सहला पता ..

“तुम्हे होश आ गया अंकित, कितने दिनों से मैं इस पल का इन्तजार कर रही थी ..”

मैंने अपने होठ हिलाये लेकिन मेरी आवाज बहुत hi हलकी थी , मैं उसे कुछ बोलना चाहता था लेकिन मैं बस फुसफुसाई hi सकता था , उसने मुझे ऐसा करते देखा तो उसके होठो में मुस्कान आ गयी ..

उसने बड़े hi प्यार से मेरे बालो को सहलाया ..

“तुम अभी आराम करो मैं डॉ. को बता कर आती हु की तुम्हे होश आ गया है”

थोड़ी hi देर में वंहा डॉक्टर और कुछ नर्स आ गयी , मैं पुरे तरह से होश में आ चूका था , मैं सब देख और सुन सकता था साथ hi साथ हलकी आवाज में कुछ बात भी कर प् रहा था लेकिन अभी शरीर को पूरी तरह से हिलने की ताकत मुझमे नहीं थी ..

डॉक्टर ने मुझे देखा और मुस्कुराये ,

“कुछ hi घंटे में आपके शरीर में ताकत धीरे धीरे वपस आने लगेगी , don’t वोर्री अभी जयदा बोलने का प्रयास मत कीजिये ,आप आराम कीजिये “

डॉ. के जाने के बाद नेहा मेरा हाथ थामे मेरे पास hi बैठ गयी उसकी आंखे अभी भी नाम थी जिसे वो कुछ कुछ देर में पोंछ लिया करती थी , थोड़ी hi देर में मेरे कमरे में डॉ. चुटिया, कोमल , भुवन और काजल भी आ गए , मैं उन्हें देखकर खुस हो चूका था , मैं कुछ बोलने की कोशिस कर रहा था , मेरे होठो को फड़फड़ा हुआ देखकर कोमल मेरे होठो के पास अपने कानो को ले आयी ..

“भाभी ..”

मैं बस इतना hi बोल पाया था , जब कोमल उठी तो वो अपने आँखों में आये हुए आंसुओ को पोंछ रही थी , उसने भी मेरे बालो को सहलाया ,

“तुम आराम करो तुम्हारी भाभी ठीक है और जल्द hi तुमसे मिलने आएगी “

मैं समझ नहीं पा रहा था की आखिर ऐसा क्या हो गया है की भाभी मुझसे मिलने नहीं आयी ..

थोड़ी देर बस अक्की , अज्जू और मोनिका भी वंहा आ गए , अक्की और अज्जू अभी ठीक लग रहे थे लेकिन अभी भी उनके शरीर में कही कही पर छोटो में लगी पट्टी दिखाई दे रही थी ,

सभी मुझे देखकर खुस थे , मैं भी सभी को देखकर खुस था लेकिन अभी भी मेरी आंखे भाभी को hi धुंध रही थी , या कहो की उन्हें देखने के लिए तरस रही थी लेकिन भाभी का अभी भी कोई आता पता नहीं था …

रत होते होते मैं अपने शरीर और होठो को थोड़ा जयदा हिला प् रहा था , आज मुझे मुँह से खिलने की परमिशन दी गयी और नेहा ने अपने हाथो से मुझे जूस पिलाया ,रत भी गुजर गयी थी लेकिन न तो भाभी आयी न hi किसी ने उनके बारे में बात तक की ..

सुबह जब नींद खुली मैं फिर से नेहा को अपने बिस्टेर के पास hi बैठे बैठे सोता पाया ,

“नेहा “

मैं खुद को ज्यादा अच्छा फील कर रहा था , आज मैं ढंग से बोल पा रहा था, लेकिन अभी भी आवाज थोड़ी कमजोर थी , नेहा ने झट से आंखे खोल ली, और मुस्कुराते हुए मेरे माथे पर किश कर लिया ..

“अब कैसे हो “वो मुस्कुराते हुए बोली

“तुम साथ हो तो मुझे कुछ हो सकता है क्या “

मेरी बात सुनकर उसने मेरे गलो को हलके से सहलाया ,

“तुम जल्दी ठीक हो जाओ न “

“मैं कितने दिनों से यंहा हु “

वो थोड़े देर के लिए चुप हो गयी फिर मुस्कुराते हुए बोली

“3 महीने हो गए उस एक्सीडेंट को “

हे भगवन मैं 3 महीनो से बेहोश था ,

“नेहा मुझे सच सच बताओ भाभी कहा है “

मेरी बात सुनकर नेहा का गाला थोड़ा भर गया था , वो कुछ बोल नहीं प् रही थी .. उसने मुझे रुकने का इशारा किया और तुरंत hi कमरे से बहार चली गयी ..

उसे ऐसा करते हुए देख मैं बेचैन हो गया था

वो थोड़े देर बाद कमरे में आयी ,

“अंकित भाभी अभी तुमसे मिलने तो नहीं आ सकती लेकिन मैं तुम्हारी बात उनसे करवा दूंगी “

नेहा की बात सुनकर मेरी बेचैनी और भी बढ़ गयी थी

“आखिर वो है कहा जो मुझसे मिलने के लिए नहीं आ सकती , ऐसा नहीं हो सकता की मेरी भाभी मुझे ऐसे हालत में छोड़कर चले जाए “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी देर के लिए चुप हो गयी ,

“उन्ही से पूछ लेना की वो कहा गयी है और क्यों गयी है , ऐसे भी मैं उनसे बात नहीं करती “

“क्यों ..??”

“कौन लड़की अपनी सौत को पसंद करती है “

इससे पहले की मैं कुछ समझ पता वो कड़ी हो चुकी थी उसके होठो में एक बड़ी सी मुस्कान थी ,

“मैं फ्रेश होकर आती हु “

इतना बोलकर वो टॉयलेट में घुस गयी

सौत ???? :?:

क्या नेहा ने भाभी को अपनी सौत के रूप में स्वीकार कर लिया ? :लव:

मेरे मन में तो कई किलो के लड्डू फुट गए थे :व्हॅप्पी:

लेकिन ये भाभी आखिर गयी कहा थी …………

******************

थोड़ी hi देर बाद पूर्वी और विकाश वंहा आये..

“अब कैसे हो अंकित “

विकाश ने मुस्कुराते हुए कहा

“ठीक हु सर ..:)

थोड़ी और औउपचारिक बात के बाद पूर्वी अपना मोबाइल पकड़ कर बहार गयी और थोड़ी देर बात फिर से कमरे में आयी वो किसी से बात कर रही थी ..

“है है ये लो “

उसने फ़ोन मेरे तरफ बढ़ाया और मुझे सपोर्ट देकर मेरे कानो में फ़ोन को लगा दिया ,

“कैसा है मेरा बीटा, तुझे होश आ गया “

ये वही आवाज थी जिसे मैं सुनने को तरस गया था , ये मेरी भाभी थी , पता नहीं क्यों ये आवाज सुनकर hi मेरे आँखों आंसू आ गए थे , शायद वही हल फ़ोन के उस पार मेरी भाभी का भी रहा होगा

“आप कहा हो “

मेरा गाला भर हुआ था , मैं बड़ी hi मुश्किल से बोल पाया था ..

“बीटा अभी मैं तुझसे बहुत दूर हु ,लेकिन जल्द hi हम मिलेंगे तू फ़िक्र मत कर , मेरी गैरमौजूदगी में नेहा तेरा अच्छे से ख्याल रखेगी, लेकिन अभी नेहा को वो वाला ख्याल रखने मत बोलना “

वो जोरो से हंस पड़ी जिसे सुनकर मैं थोड़ा शर्मा गया था , लेकिन उनको हँसता हुआ देखकर मुझे भी यकीं हो गया था की वो जंहा भी है ठीक है ,

“आपको देखने का मन कर रहा है “

“मुझे भी कर रहा है बीटा , मैं वडा करती हु हम जल्द hi मिलेंगे , तू बस जल्दी से ठीक हो जा “

हमने थोड़ी देर बात की फिर भाभी ने मुझे आराम करने को बोलकर फ़ोन रख दिया , भाभी गयी कहा थी :कंफ्यूज:

तभी मुझे उस दिन टीवी पर देखि खबर की यद् आयी , और मैं जैसे उछाल पड़ा

“क्या भाभी ने hi जीवा और सम्पत को मारा है ???”

मेरी बात सुनकर पूर्वी और विकास दोनों hi चौक गए थे , साथ साथ नेहा भी ..

“तुम.. तुम ये क्या बोल रहे हो “

नेहा कनपटी हुई आवाज में बोली

“मुझे पता है की जीवा और सम्पत मरे गए है , उसी के हाथो जो शिवा के नाम से कतल कर रहा है , और जीवा गैंग के कई लोगो को बुरी तरह से मारा गया है , तो क्या भाभी ने उन्हें मारा है , और क्या वो फरार है ??”

सभी एक दूसरे को देखने लगे थे, मैं कई दिनों से बेहोश था उन्हें समझ hi नहीं आया की आखिर मुझे ये सब कैसे पता चल गया था

“ये सब तुम्हे कैसे पता ??”

आखिर पूर्वी बोल उठी

“जब मैं पहली बार होश में आया तो ये न्यूज़ टीवी में चल रही थी “

मैं मुस्कुराते हुए बोलै

“देखो अंकित आरती ने उन्हें मारा है या नहीं इसका अभी फैसला नहीं हुआ है , जाँच तो चल hi रही थी , लेकिन आरती को मौकैवरदत में देखा गया था साथ hi उसके खिलाफ हमें गवाह भी मिले है … “

मैं पूर्वी को आश्चर्य से बस देखता hi रहा उसने बोलना जारी रखा

“अंकित अभी आरती जेल में है , लेकिन फ़िक्र की कोई बात नहीं है अगर वो बेगुनाह होगी तो हम उसे बचा लेंगे “

पूर्वी की बात सुनकर मैं रो पड़ा था वही नेहा तुरंत मेरे पास आ गयी और मुझसे लिपट कर मुझे दिलाशा देने लगी ..

“फ़िक्र मत करो अंकित भाभी को कुछ नहीं होगा “

“मुझे उनसे मिलना है”

मैंने मुश्किल से बोल पाया था



“तुम पहले ठीक हो जाओ फिर मैं खुद तुम्हे उनसे मिलवाने ले जाऊंगा “ इस बार विकाश ने कहा था
 
अपडेट 65
वो सामने कड़ी थी , एक सफ़ेद साड़ी पहने हुए , होठो में बस हलकी सी मुस्कान थी , आँखों में बस हलके से आंसू थे , वो अभी अभी उस कमरे में आयी थी ..

“तुम दोनों बात करो मैं बहार हु “

पूर्वी ने मुझसे कहा , मैं उनके साथ hi आज जेल आया था , तबियत इतनी ठीक हो चुकी थी हॉस्पिटल से बहार जाया जा सके , भाभी मेरे सामने कड़ी थी लेकिन कोई भी शब्द हम दोनों के होठो से नहीं निकल रहे थे …….

वो मेरे पास आयी मैं अभी एक व्हील चेयर पर था , वो मेरे पैरो के पास बैठ गयी और अपना सर मेरे गॉड में रख दिया …

“आपने ये क्यों किया भाभी “

मैं जनता था की भाभी पर लगाए गए सभी इल्जाम सही है ,

“कोई तुझे छोड़ पंहुचा दे तो क्या मैं उसे छोड़ सकती हु “

उन्होंने अपना सर उठाये बिना hi ये कह दिया था

“लेकिन अब मुझे आपसे साडी जिंदगी दूर रहना होगा, मैं आपको ऐसे हालत में नहीं देख सकता “

इस बार मेरा बांध टूट पड़ा मैं फुट कर रोने लगा था , उन्होंने अपना सर उठाया और मेरे गलो को प्यार से सहलाते हुए मेरे होठो पर अपने होठो को रख दिया , उन नरम होठो का स्वाद लेते हुए जैसा दुनिया का पूरा गम hi भूलने लगा था ,

उन्होंने मेरे गलो में आ रहे आंसुओ को भी अपने होठो में भर लिया ,

“बीटा दुनिया की कोई ताकत मुझे तुझसे दूर रख सकती है क्या “

भाभी के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी थी , लेकिन ये मुस्कान मुझे डरा गयी

“आप ऐसा कुछ नहीं करोगी जिससे आप कानून के नजरो में और गुनहगार हो जाओ “

मुझे लगा की भाभी कोई खुरापात तो नहीं करने वाली है , लेकिन भाभी बस हंस पड़ी

“फ़िक्र मत कर मैं कुछ नहीं करने वाली लेकिन कुछ ऐसा जरूर होने वाला है की मैं बेगुनाह साबित हो जाउंगी ,”

भाभी ने इतने कॉन्फिडेंस के साथ कहा था की मैं भी चौक गया ..

उन्होंने बस मेरे बालो में हाथ फेरा

“मेरा बीटा कैसा है , नेहा ख्याल तो रख रही है न “

उन्होंने बात को hi बदल दिया था , मैं उनकी बात सुनकर थोड़ा मुस्कुराया

“मुझे तो अभी भी यकीं नहीं हो रहा है की नेहा आखिर मान कैसे गयी “

भाभी हंस पड़ी थी

“अरे बीटा ये लड़किया थोड़ी अजीब होती है , प्यार के लिए कुछ भी कर जाती है , तेरे ऊपर हमले के बाद मैं तो खुद पर आप hi खो बैठी थी ,उसके बाद मैंने जो किया वो तो तुझे पता hi है , लेकिन तेरे उस हालत को देखकर शायद नेहा का दिल पिघल गया हो , और शायद बाद में उसे अक्की या अज्जू ने कुछ समझाया हो .. हमारे रिश्ते को समाज कभी मंजूर नहीं कर सकता , लेकिन अगर हमारे अपने इसे मंजूर कर ले तो हमें और क्या चाहिए, नेहा ने हमारे इस रिश्ते को मंजूरी दे दी और मुझे किसी की मंजूरी नहीं चाहिए “

भाभी मेरे आँखों में देख रही थी उनकी आँखों में एक चमक थी , हमारी आंखे बस थोड़ी देर तक के लिए मिली रही और फिर हमारे होठ फिर से मिल गए ………..

भाभी से मिलने के बाद पूर्वी ने मुझे बताया की भाभी के खिलाफ गवाही देने वाली कोई और नहीं बल्कि सम्पत की gf/rakhail रानी है , मुझे मन किया की मैं रानी से भी मिल लू लेकिन अभी मेरी hi हालत ऐसी नहीं थी , फिर भी मैंने पूर्वी से रिक्वेस्ट किया

“क्या तुम मुझे रानी के पास ले जा सकती हो “

“उस हादसे के बाद से उसका भी कोई पता नहीं है की वो कहा रहती है ,शायद सुरक्षा करने से कही छिप गयी है “

“लेकिन रानी को किस्से खतरा है “

“ी don’t क्नोव , क्या तुम आरती के वकील से मिलना चाहोगे “

मैंने है में सर हिला दिया ………

उसके बाद हम भाभी के वकील से मिले , अच्छा वकील था उसने बताया की रानी के अलावा बल्कि लोगो की गवाही में कोई डैम नहीं है , फॉरेंसिक टेस्ट वगैरह से भाभी के वंहा होने की तो पुस्टि होती है लेकिन ये प्रूफ नहीं किया जा सकता की भाभी ने hi खून किये है , क्योकि उनके अलावा भी बहुत से लोग वंहा थे …

हॉस्पिटल जाने के बाद मैंने नेहा से रिक्वेस्ट किया की वो एक बार मुझे फिर से हवेली ले चले मैं रानी एक बार मिलना चाहता था ……..

*************

हवेली की हालत किसी मरघट के जैसी थी पूरी तरह से सुना पड़ा था , नेहा और मेरे साथ अक्की अज्जू मोनिका और सस भी साथ थे, कही कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी हम आगे बड़े तो पता लगा की ये हवेली hi पुलिस ने सील कर राखी है , क्योकि जीवा और सम्पत को यही मारा गया था ..

रानी का वंहा तो कोई भी पता नहीं चला …….

दो तीन दिनों के बाद hi मुझे भी हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गयी थी .

मैं और नेहा , कोमल और भुआवन के साथ डॉ. के दूसरे घर में hi रुके हुए थे , नेहा की माँ महिमा भी कभी कभी वंहा आती लेकिन मुझसे सीधे मुँह बात भी नहीं करती थी , वो नहीं चाहती थी की मेरे और नेहा के बिच कुछ रहे , लेकिन नेहा की जिद थी की वो शादी करेगी तो मेरे साथ … महिमा अपनी बेटी को तो नहीं छोड़ सकती थी लेकिन मुझे अपना भी नहीं प् रही थी वजह भी साफ hi थी , और वजह थी भाभी ……..

अभी रत का समय था सभी लोग डिनर टेबल पर बैठे हुए थे , नेहा और कोमल खाना परोक्ष रहे थे , तभी मेरे फ़ोन की घंटी बजी ..

देखा तो अज्जू का फ़ोन था

“अबे जल्दी टीवी ों करके *** न्यूज़ चैनल देख “

वो बड़े hi उत्तेजना के साथ बोल रहा था

“क्यों क्या हुआ ??”

“अबे देख तो सही ..”

मैंने भी तुरंत hi न्यूज़ चैनल खोला …

एक सनसनीखेज खबर

‘स्टेट मिनिस्टर दया संकर तिवारी और उनके बेटे सागेर तिवारी का बेरहमी से क़त्ल करने के बाद शिवा नाम से क़त्ल करने वाली महिला ने आत्मसमर्पण किया ..

पहले इसी महिला के बयां पर आरती नाम की महिला को शिवा समझकर गिरफ्तार किया जा चूका है , और उससे पहले शिवा के नाम पर एक चंचल नाम की महिला को भी गिरफ्तार किया जा चूका है ..

लेकिन पहले के दोनों केस में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था लेकिन इस बार इस महिला ने खुद hi आत्मसमर्पण किया है , महिला की पहचान जीवा और सम्पत के साथ हवेली में hi रहने वाली रानी के रूप में की गयी है ……”

हम सभी के होश उड़े हुए थे , आखिर ये हो क्या रहा था, चैनल में रानी की फोटो चलने लगी …

“ये.. ये रानी है “

नेहा ने मुझे देखते हुए कहा उसकी आवाज उखड़ी हुई थी ..

“है क्यों ..??”

“ये तो ……..”

नेहा गहरे सोच में डूब गयी थी

“या ये तो वही है , है है वही है “

“कोण “ हम सबने लगभग एक साथ कहा

“वही जिसे तिवारी ने करीम कोई मेरी माँ के बदले सौपा था “



हमें नहीं पता था की नेहा क्या बोल रही है , लेकिन फिर नेहा जैसे जैसे अपने बचपन में बाईट उस हादसे के बारे में बताते गयी हम सब के होश hi उड़ गए ……
 
अपडेट 66
रानी के बयां पर भाभी को छोड़ दिया गया था , मैं नेहा , भाभी, कोमल और भुवन के साथ बैठा हुआ था ..

“बीटा आखिर ये क्या और कैसे हो गया ??” भुवन ने भाभी से प्रश्न किया

“पापा असल में बात तब की है जब तिवारी का सबसे खास सहयोगी और वफादार भवानी एक लड़की को उठा कर ले आया था , लड़की के घर वालो ने जब इसका विरोध किया तो उसके घर वालो को hi मार दिया गया , तिवारी ने सब चीजों में पर्दा डालने के लिए उस लड़की की शादी भवानी से कर दी , लेकिन वो महज नाम की भवानी की बीबी थी असल में वो भवानी और तिवारी के दोस्त मल्होत्रा के लिए महज एक सेक्स स्लेव बनकर रह गयी थी ..

नेहा की माँ महिमा तिवारी को पसंद थी और जब वो करीम के साथ मुसीबत में फांसी तो तिवारी ने करीम को एक नयी लड़की दिलवाने का वडा किया और उसने ये परेशानी भवानी को बताई भवानी ने अपनी बीबी को hi ले जाने को कहा, ऐसे भी वो लोग अब नयी लड़की के तलाश में थे और इससे बोर हो गए थे ..

तिवारी ने उस लड़की को करीम को सूप दिया और नेहा और महिमा को बचा ले आया ..

वो लड़की कोई और नहीं बल्कि रानी थी …

करीम और उसके साथियो ने रानी को नोच डाला था , और तभी उसने कसम खा ली थी की अगर वो जिन्दा बची तो वो उन सबसे बदला लेगी जिसने जिसने उसकी जिंदगी को बर्बाद किया है …

और रानी की शायद भगवन ने सुन ली क्योकि तिवारी जैसे hi रानी को करीम को सूप कर आया उसने भी कसम खा ली थी की वो करीम को ख़त्म करेगा ..

महिमा और नेहा को सेफ जगह पंहुचा कर उसने जीवा को फ़ोन लगा दिया और करीम का ाड़ड्रेससी देकर उसके साथ एक डील की , इस डील के मुताबिक तिवारी अपनी राजनीती करेगा और करीम का इलाका और धंधा जीवा ले लेगा , ये भी तिवारी की एक चल hi थी ..

तिवारी ने करीम के कुछ लोगो को भी भड़का दिया था और यही समय था जब जीवा और तिवारी के लोग मिलकर करीम पर हमला कर दिए थे और करीम को मार दिया गया ..

रानी की किस्मत थी की वो उस नर्क से बच गयी , और जब सम्पत ने उसे देखा तो अपने साथ ले गया … बस ऐसे रानी सम्पत के पास पहुंच गयी ..

जीवा और सम्पत को लगा था की अब वो लोग इस शहर पर राज करेंगे लेकिन तिवारी ने करीम के पुराने लोगो को अपने साथ करके करीम एक मर्डर वाले गंगवार का इल्जाम जीवा और सम्पत के सर पर फोड़ दिया , अपनी राजनीतिक पंहुचा का इस्तमाल करके पुलिस से जीवा के ऊपर दबाव बनाने लगा …

कुछ hi दिनों में hi जीवा टूट चूका था , तिवारी के पास बहुत hi पावर आ चुकी थी लेकिन लड़ाई में किसी का फायदा होता नहीं है, ऐसे hi तिवारी को भी बहुत नुक्सान हो रहा था , इधर जीवा और सम्पत दोनों hi गायब हो चुके थे …

तिवारी भी अपने खेत्र में निकल गया था , कुल मिलकर कोई भी एक दूसरे पर हमला नहीं करने के एक मौन सहमति से बांध चुके थे ..

लेकिन रानी के अंदर तो तिवारी से बदला लेने की आग जल hi रही थी , वो बस मौके के तलाश में थी , वो सम्पत को बाहड़काया करती थी लेकिन सम्पत उसे ये बोलकर चुप करवा देता था की सही मौका आने दे .. ऐसे भी जीवा गैंग को अपना खुद का धंधा चलने में प्रॉब्लम हो रही थी ..

रानी को उम्मीद की किरण तब दिखानी शुरू हुई जब main(aarti) और सोनू उनके पास पहुंचे …. इससे उनके गैंग में भी एक उत्त्साह का संचार हो रहा था , लोगो को भरोषा था की जैसे कोमल के रहते गैंग अपने चरम पर पंहुचा वैसे hi आरती भी गैंग को उद्धार करेगी , सबसे जयदा भरोषा तो सम्पत और जीवा को था ..

फिर सोनू की दोस्ती तिवारी की बेटी से हो गयी , इससे सम्पत को और भी भरोषा हो गया की तिवारी से ये लोग जरूर बदला ले पाएंगे और उसे ख़त्म कर देंगे ..

तभी रानी को मौका मिला , उसने शुरू से कोमल उर्फ़ सकती के किस्से सुन रखे थे , उसे पता था की आरती सकती की बेटी है , और साथ hi उसे एक नाम भी मिल गया था वो था शिवा का नाम …

और अब सम्पत उस पर जयदा ध्यान भी नहीं देता था उसका पूरा ध्यान बस आरती को उसके प्यार से मिलकर उसकी सकती को जगाना था..

रानी को पहला मौका तब मिला जब भवानी ने mujhe(aarati को) सम्पत के साथ देख लिया , भवानी ने मुझे maa(komal) समझ लिया , लेकिन सम्पत की नजर भवानी पर पद गयी , वो नहीं चाहता था की भवानी जाकर तिवारी को कुछ भी बताये इसलिए अपने लोगो के साथ मिलकर भवानी का पीछा किया और उसे किडनेप कर लिया ,रानी के कहने पर भवानी को रानी को सूप दिया गया ,

अब रानी के सामने वो इंसासन था जिसने उसकी जिंदगी बर्बाद की थी , एक हसती खेलती लड़की को उठा कर अपनी रखैल बना लिया था ,

रानी ने उसे इत्मीनान से तड़फा तड़फा कर मारा , लेकिन अब दिक्कत थी की अगर तिवारी को पता चल जाता की सम्पत ने उसके आदमी को उठाया था तो तिवारी फिर से भड़क जाता इसलिए रानी ने सम्पत को दिमाग दिया की क्यों न सकती के मरने के स्टाइल और शिवा का नाम दोनों को मिक्स कर दिया जाए , इससे तिवारी भी कंफ्यूज हो जायेगा … और फिर जो हुआ वो दुनिया के सामने था , रानी ने खून से शिवा लिख दिया जो की सकती का स्टाइल था , तिवारी भी दर गया की कही सकती वापस तो नहीं आ गयी लेकिन वो कंफ्यूज इसलिए था की आखिर komal(sakti) उसके आदमी को क्यों मार रही है , उसे लगा की अगर ये सकती होती तो सकती लिखती ये कोई दूसरा hi है , इस तरह से शिवा नाम का सफर शुरू हुआ “

कमरे में सन्ति छ गयी

“ोूह तो क्या आपको ये पहले से पता था “

आखिर मैंने पूंछ hi लिया

“नहीं ये तो मुझे रानी ने बाद में बताया … “

“लेकिन रानी ने विजय को क्यों मारा ??” ये सवाल नेहा का था , ये शिवा के नाम से हुआ दूसरा कतल था

“असल में विजय उसी मल्होत्रा का बीटा था जिसने भवानी के साथ मिलकर रानी के साथ कई बार बलात्कार किया था , रानी विजय को नहीं मरना चाहती थी लेकिन मल्होत्रा तक उसकी पहुंच नहीं थी ,न hi उसकी पहुंच तिवारी तक थी , और उनके जिगरे में खौफ बढ़ने के लिए कोई तो चाहिए hi था …?? और विजय सही मोहरा था क्योकि वो सस का बर्फ भी था , इससे हलचल और तेज होती .. ऐसे भी वो अपने बाप की तरह जिस्म का भूखा था , और जिस्म का नशा सरे नशे की तरह hi इंसान को कमजोर बना देता है ,

ऐसे इसकी एक बैक स्टोरी भी है और वो ये है की विजय सस के जिस्म के लिए पागल था , और उसे ये भी पता था की सागेर( सस का भाई) के साथ सस के नाजायज रिश्ते है , असल में वो जनता थकी सागेर सस के साथ जबरदस्ती करता है , सागेर और विजय दोनों hi दोस्त थे , और विजय सस को लाइन मारा करता था , उससे पहले hi रानी ने विजय को पता लिया था , विजय अभी अभी जवान हुआ लड़का था और उसे बहकना रानी के लिए बाये हाथ का खेल था, रानी के लिए ये जानकारी इकठ्ठा करने का एक श्रोत भी था और वो ये सम्पत के इजाजत से कर रही थी …

इधर सस भी बिगड़ने लगी थी और विजय को अपने फ़क बडी के रूप में अपना चुकी थी और इसका कारण था की विजय उसके भाई का दोस्त था और वो अपने भाई सागेर को जलना चाहती थी , क्योकि सागेर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया करता था …

विजय से hi रानी को सस और सागेर के बारे में पता चला लेकिन रानी को सस की मजबूरी की भी समझ थी इसलिए उसने ये बात सम्पत से छुपाई और खुद सस से जा मिली तब तक सस का दिल अंकित से मिलकर थोड़ा नरम भी हो चूका था , उसने अपने बारे में सस को सब बताया , सस ने उसे खुद के साथ जोड़ कर देखा, जिस तरह उसके बाप ने रानी की जिंदगी बर्बाद की थी वैसे hi सागेर ने सस की जिंदगी को ख़राब कर दिया था …

थोड़े दिनों बाद सस की मदद से रानी ने विजय को रिश्ते से हटा दिया “

“क्या सस रानी से मिली हुई है ??” जैसे मेरे ऊपर बोम्ब फूटा

भाभी मुझे देखकर मुस्कुराई

“सागेर का क़त्ल सस ने किया है , रानी ने सस से वडा किया था की सस को उसके भाई ने जो मानसिक प्रताड़ना दिया था उसका बदला भी वो लेगी और सस को अपने भाई को मरने का मौका देगी ..”

कमरे में बस शांति hi शांति छ गयी , लेकिन भाभी ने बोलना जारी रखा

“शिवा के नाम से कई क़त्ल हुए है लेकिन सभी क़त्ल अलग अलग लोगो ने किया है … भवानी और विजय का क़त्ल रानी ने किया , फिर गांव में हुए क़त्ल माँ (कोमल) ने , और जीवा गैंग के कुछ लोगो और जीवा और सम्पत का क़त्ल मैंने किया था , तिवारी का क़त्ल रानी ने किया और सस ने अपने भाई सागेर्स का क़त्ल किया , सभी क़त्ल एक hi नाम से हुए वो नाम था शिवा का ……… तो सबकी जिम्मेदारी किसी को तो लेनी hi थी …

रानी ने तो आत्समर्पण कर दिया है, उसके पास से हथियार बररामद होंगे जिससे यही लगेगा की वही शिवा है लेकिन जो कहानिया वो सुनाएगी उसपर पुलिस कभी यकीं नहीं करेगी …

वो बताएगी की कोई शिवा नाम का आदमी उससे सम्मोहित करवा कर ये सब करवाता था, इसलिए वो लोगो को मरने के बाद अपना नहीं बल्कि उसका नाम लिखती थी, जब वो इन सबसे परेशां हो गयी तो खुद को पुलिस के हवाले कर दिया क्योकि इन सबमे उसके बॉयफ्रेंड सम्पत की भी जान चली गयी ……..”

“लेकिन पुलिस उनकी बातो पर यकीं क्यों करेगी ????“

“वो सब करना वकील का काम है , झूठे गवाह से लेकर बाकि की स्टोरी वकील hi बनायेगे, कानून इस बात को कभी नहीं मानेगा लेकिन इससे रानी को पागल तो साबित किया जा सकता है , वो फांसी से बच जायेगी और शायद उसे एक अच्छी लाइफ भी मिल जाये ..

उसने हम लोगो के लिए खुद को पुलिस के हवाले कर दिया , उसने जीवन में बहुत दुःख देखा है , असल में बस दुःख hi देखा है … लेकिन वो हमारी ख़ुशी को छीनने नहीं देना चाहती थी , जब मैं हॉली में घुस कर कत्लेआम कर रही थी तब वो बस खड़े होकर मुझे देख रही थी ,, जीवा और सम्पत को मरने के बाद मैं जब मैं शांत हुई तब मैंने उसे अपने पास खड़े पाया ..

उसने मुझे आराम से बिठाया और अपनी पूरी कहानी सुनाई और अपना आगे का प्लान बताया , उसने मुझे सोचने के लिए समय भी दिया , उसने कहा की वो तिवारी को भी जान से मरना चाहती है , लेकिन तिवारी की सिक्योरिटी तब तक टाइट रहेगी जब तक शिवा पकड़ में ना आ जाये , मेरे पकडे जाने से तिवारी थोड़ा शांत हो जाता …

फिर प्लान के अनुसार सस ने तिवारी को फ़ोन किया की उसे पता है की पार्टी में गोली चलने का प्लान किसका था, और उसने उसका नाम बता दिया सात hi ाड़ड्रेस्से भी जंहा वो मिलेगा …”

“व्हाट कौन था वो जिसने पार्टी में तिवारी पर गोली चलवाई थी , वो तो सम्पत था न ???” मुझे यद् आया की मैंने सम्पत को देखा था

“है वो सम्पत hi था लेकिन उसने गोली चलायी थी , चलवाने वाला तो कोई दूसरा hi था , तिवारी के घर के अंदर का hi कोई ..”

“कौन सस??” नेहा ने अपनी दुविधा राखी

“नहीं .. सस नहीं सस का भाई सागेर ..”

“व्हाट ..??” हम सभी एक बार चौक गए

“है असल में वो अपने पिता पर गोली चलवाकर सिम्पथी बनाना चाहता था , वो ऐसे भी अपने बाप से परेशां था, शिवा के नाम की दहसत का फायदा उठा कर वो अपने बाप को थोड़ा और डरना चाहता था , पहले पार्टी को गोलिया चलवाकर सिम्पथी बटोरकर चुनाव जितना फिर शिवा के नाम से अपने बाप को मारवा देना … और उसकी सीट पर खुद बैठ जाना , बस यही प्लान था , उसके लिए उसने तिवारी के सबसे बड़े दुश्मन सम्पत से हाथ मिलाया था क्योकि और किसी के अंदर इस काम को करने का गुदा भी नहीं था , सम्पत को उनकी पुराणी ताकत लौटने का दवा भी किया गया था और जीवा को पॉलिटिक्स में लेन का भी प्लान था उन लोगो का …

सस ने सागेर को भी वही बुला लिया था , दोनों बाप बेटे आमने सामने थे .. तब सस ने अपने बाप को अपने भाई के कारनामे के बारे में बता दिया , पहले दोनों में hi हाथापाई हुई और दोनों hi जख्मी हो गए थे .. तब रानी ने एंट्री मरी और तिवारी को उसके कारनामे के बारे में बताया , तिवारी गिड़गिड़ाया लेकिन …

रानी सस के सामने उसके पिता का कतल नहीं करना चाहती थी , इसलिए सस को सागेर के साथ अकेले छोड़ दिया .. सस ने अपना गुस्सा सागेर पर निकाल दिया वही रानी भी अपना अंतिम बदला ले चुकी थी ………

हर बार की तरह रानी ने साबुत सफाई से मिटाये और शिवा का नाम लिख दिया , सस को घर भेज खुद पुलिस स्टेशन चली गयी…..”

एक बार मैंने रानी के चेहरे को यद् किया , हँसता हुआ खिलखिलाता हुआ चेहरा था उसका किस्से पता था की वो अंदर कितना दर्द और नफरत लेकर चल रही थी …………..
 
अपडेट 67
दिन गुजरते जा रहे थे इधर भाभी के साथ साथ चंचल भी छूट गयी थी जिसको गांव के लोगो के जुर्म में शिवा के नाम से फंसा दिया गया था , लेकिन न जाने वो फिर गांव नहीं आयी ..

रानी के ऊपर केस चालू था और वकील की सलाह पर उसे मनोरोगी hi साबित करना सही लग रहा था , रानी ऐसे भी एक्टिंग में माहिर थी :lol1:

इधर तिवारी और उसके भाई के जाने के बाद सस ने hi पुरे बिज़नेस की भागदौड़ सम्हाल ली , साथ hi वो खुद भी अब अपने बाप की सीट से चुनाव लड़ रही थी , हम सभी उसके लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे ,हमरे बिच अब जिश्मनि रिश्ते ख़त्म हो चुके थे लेकिन हम बहु थी अच्छे दोस्त की तरह जरूर रहते थे , तिवारी के जाने के बाद अब अज्जू के पिता भी अज्जू की मोनिका से शादी को मान चुके थे , अक्की स्नेहा मैडम का फेवरेट स्टूडेंट तो बन गया था लेकिन अभी तक कुछ बोल नहीं पाया था ..

नेहा की माँ महिमा नेहा और मेरे रिश्ते से अब भी खुस नहीं थी और अपने प्रेमी तिवारी की मौत से दुखी होकर वो अब डॉ. चुटिया के आश्रम में चली गयी थी , वो वंहा रह कर क्या कर रही थी ये तो वही जाने :lol1:

वही भाभी अब कोमल और भुवन के साथ गांव के घर में रहना चाहती थी , वो चाहती थी की मैं नेहा के साथ शादी करके शहर में hi राहु , लेकिन मैं उनसे दूर नहीं रहना चाहत था , गांव में मेरा भाई भी पागल हुआ घूम रहा था , भाभी उसे माफ़ कर चुकी थी और वो उसकी देखभाल खुद hi करना चाहती थी , तय ये हुआ की कभी कभी मैं और नेहा गांव जाया करेंगे और कभी कभी भाभी हमारे पास रहने आया करेगी ..

ये एक अंडरस्टैंडिंग थी हम्मे आ गयी थी की नेहा के सामने भाभी के साथ या भाभी के सामने नेहा के साथ किसी प्रकार के जिस्मानी सम्बन्ध नहीं बनाने है , हम सभी जानते थे की हम किस तरह के रिलेशनशिप में है लेकिन फिर भी एक मर्यादा का पर्दा हमने ओढ़ रखा था और शायद ये कही न कही जरुरी भी था ……..

ये अज्जू और मोनिका की शादी की पार्टी थी जंहा हम सभी एक साथ मिले थे , सभी के चेहरे खुश थे , उस शादी में मैंने नेहा और भाभी के साथ पंहुचा था वही अक्की स्नेहा मैडम के साथ और उनकी बेटी के साथ …….

शादी अपने शबाब पर चल रहा था , वही भाभी स्नेहा मैडम के साथ बातो में बिजी थी तो मैं नेहा को लेकर उस होटल की छत पर चला गया , ठंडी हवाएं चल रही थी और नेहा मेरे बहो में थी ..

“बेबी हमारी शादी कब होगी “

नेहा ने मेरे साइन में सर रखते हुए कहा, मैं उसके मासूम चेहरे पर अपनी उंगलिया फेरने लगा

“तुम कहो तो अभी कर लेते है “

“अच्छा तुमने तो अभी तक मुझे शादी के लिए प्रोपोज़ भी नहीं किया है “

“अरे तो ये भी कोई बोलने वाली बात है “

“है बिलकुल , क्या पता की मैं शादी के लिए राजी भी हु की नहीं “

नेहा ने शरारत के साथ कहा

“अच्छा जी आप हमें इंकार करेंगी “ मैंने उसे जोरो से अपनी और खिंच लिया , हमारे होठ मिल चुके थे , थोड़ी देर बाद hi मैं अपने घुटनो में बैठ गया

“ी लव जान क्या तुम मुझसे शादी ….”

मैं इससे जयदा कुछ बोल पता लेकिन नेहा का ध्यान दूसरी तरफ हो चूका था

“ये भाभी के साथ वो ायरत कौन है ??”

ये होटल के बाजु वाली सड़क थी जो हमें छत से दिखाई दे रही थी , भाभी के सामने एक ायरत कड़ी थी और वो ायरत थोड़े गुस्से में भाभी से बात कर रही थी , उसके पास hi स्नेहा मैडम कड़ी थी ..

वो ायरत भी मुझे कुछ पहचानी सी लगी तभी मेरे दिमाग ने क्लिक किया ..

“अरे ये तो स्नेहा मैडम के घर की बाई है “

नेहा मुझसे पहले बोल पड़ी

“है ये तो शोभा है , लेकिन ये यंहा क्या कर रही है ??”

तभी मेरे दिमाग में एक बात आयी और मैं निचे को दौड़ा

“अरे क्या हुआ ??”

नेहा चिल्लाई लेकिन मैंने उसके सवाल का कोई भी जवाब नहीं दिया और तेजी से उतरने लगा , वही नेहा भी मेरे पीछे hi दौड़ी ,मैं निचे गार्डन से भागता हुआ निकला , अक्की ने भी मुझे देख लिया वो भी मेरे पीछे भगा ..

जब मैं उस गली तक पंहुचा तब तक शोभा भाभी के ऊपर गन तने कड़ी थी ..

“मेरा यकीं करो सोभा , कलवा और सम्पत तो मेरे मां थे मैं भला उन्हें क्यों मरूंगी , उन्हें मरने वाली रानी थी जो अब जेल में है “

भाभी उसे समझा रही थी लेकिन शोभा कहा सुनने वाली थी , “kalwa(jiva) hi मेरे जीवन का एक सहारा था लेकिन तुमने मुझसे वो भी छीन लिया, मैं जानती हु की तुमने hi उसे मारा है और फिर रानी को फंसा दिया “

“रानी ने खुद आत्मसमर्पण किया है “

भाभी फिर बोली

“नहीं तुमने उसे फसाया है मेरे कलवा ने तुझे सहारा दिया और तूने “

वो रो पड़ी थी , मुझे दर था शोभा कुछ गलत न कर दे , और उससे भी जयदा दर इस बात का भी था की भाभी अपने रौद्र रूप में ना आ जाये , अगर वो गुस्से में आ गयी तो तबाही मचा देगी …

“देखो शोभा तुम ..” स्नेहा मैडम ने कुछ बोलने का प्रयास किया लेकिन शोभा ने उनकी बात भी बिच में hi काट दी

“आप कुछ नहीं जानती मैडम की मेरा कलवा कितना अच्छा था , दुनिया वाले भले hi उसे कुछ भी कहे लेकिन मैं उसे जानती हु ,वो दुनिया के लिए जीवा था लेकिन मेरे लिए वो हमेशा से मेरा कलवा hi था , मैं इसे नहीं छोडूंगी , मैं अपने कलवा का बदला जरूर लुंगी “

और उसने भाभी को निशाना बना कर गोलिया चला दी

धय धय धाय ……….

3 गोलियों की आवाज से माहौल गूंज उठा

“मैडम “ अक्की चिल्लाया था

स्नेहा मैडम ने भाभी को बचने के लिए उन्हें शोभा के निशाने से हटा दिया लेकिन इससे वो निशाने पर आ गयी थी और गोलिया उनको जा लगी वो जमीं पर सीधे गिर hi जाती की अक्की दौड़ते हुए उन्हें सम्हालता है वही मैं भी तुरंत hi एक्शन मोड में आकर शोभा पर जहपात पड़ा , उसे दबोच कर गन खुद ले ली ..

तब तक वह सिक्योरिटी के कुछ लोग भी आ चुके थे और कुछ पुलिस वाले भी …

***************

कुछ दिनों के बाद

Ajju-Monika ने अपने शादी की सिर्फ दोस्तों के लिए अलग से पार्टी राखी थी , लेकिन उस पार्टी में भाभी को भी शामिल किया गया था ..

सभी दोस्त वंहा मौजूद थे तो मैंने सोच की नेहा को प्रोपोज़ करने का इससे अच्छा मौका क्या मिलेगा …

मैंने माइक उठाया hi था की ..

“भाई सुन न मुझे कुछ बात करनी है “

ये अक्की था

“क्या हुआ यार ??”

उसने मेरे हाथो से माइक छीन ली , वो थोड़ा आगे आया और अपने घुटने के बल बैठ गया , सामने स्नेहा मैडम थी जो की अभी व्हीलचेयर में थी ..

गोलिया लगने के कारण वो कुछ दिन के लिए हॉस्पिटल में थी और अभी अभी hi छूती थी ..

अक्की ने मैडम की आँखों में देखा

“मैंने जब से आपको देखा है तब से मैं आपका दीवाना हो गया हु , मेरे दोस्त कहते थे की ये महज इस उम्र का आकर्षण है प्रेम नहीं , कभी कभी मुझे भी यही लगता था …

अगर ये प्रेम नहीं तो यही सही लेकिन बस आपसे ये कहना चाहता हु की जीवन के हर मोड़ पर मैं बस आपके साथ रहना चाहता हु , इसी आकर्षण के साथ , आपकी हर ख़ुशी में हँसाना और आपके हर दुःख में रोना चाहता हु , इसी आकर्षण के साथ , आपकी हर ख्वाहिशो की अपनी ख्वाहिश मानकर पूरा करना चाहता हु , इसी आकर्षण के साथ … आपको अपना नहीं बनाना चाहता बल्कि आपका हो जाना चाहता हु ……….. इसी आकर्षण के साथ…

विल यू मर्री में ..”

अक्की ने एक अंगूठी उनके सामने कर दी ..

“से यस से यस ..” नेहा मेरे पीछे कड़ी धीरे धीरे बोल रही थी , मैंने देखा की उसकी आँखों में ये सब देखकर आंसू आ गए थे , मैंने देखा की मोनिका , सस ,भाभी और मैडम सभी की आँखों में पानी था ..

मेरे और अज्जू की नज़ारे मिली हमारे होठो में ये सब देखकर मुस्कान आ गयी , हमारा दोस्त जो कभी मैडम को देखकर कुछ बोल भी नहीं पता था आज सीधे मैडम को शादी के लिए प्रोपोज़ कर रहा था ..इतने दिनों में वो मैडम के बहुत करीब जो आ गया था और अक्की को गोली लगने के बाद जैसे मैडम ने उसकी सेवा की थी वैसे hi मैडम को गोली लगने के बाद अक्की ने मैडम और उनकी बच्ची की देखभाल में अपना सुख चैन सब लुटा दिया था …

“यस …” मैडम का बोलना था की तालियों की गूंज और बधाइयों से सारा कमरा गूंज उठा …

मैडम ने अक्की के चेहरे को पकड़ कर पहले उसके माथे को चूमा और दोनों के होठ मिल गए ………

“हाउ रोमांटिक …. काश तुम भी मुझे ऐसे hi प्रोपोज़ करते लेकिन तुम तो …. कुछ आता hi नहीं तुम्हे “

नेहा ने मुँह बनाते हुए कहा

“अरे यार मैं तुम्हे प्रोपोज़ करने hi वाला था लेकिन ये अक्की ने आकर माइक ले ली “

नेहा ने इस बार मुझे गुस्से से देखा

“अब इतना भी झूठ मत बोलै करो .. तुमसे कुछ नहीं हो पायेगा “

वो आगे hi बड़ी थी की मैंने उसे खींच लिया और अपने साइन से लगा लिया …

हमारी आंखे मिल चुकी थी …

वंहा खड़े सभी लोग जो अभी अक्की और मैडम के लिए जश्न मन रहे थे इस अचानक हुए मूवमेंट से थोड़े देर के लिए स्तब्ध हो गए ..

मैंने सीधा नेहा के होठो में अपने होठो को मिला दिया ..

“ोुह्ह्ह “ सभी लोग चिल्ला उठा थे

“विल यू मर्री में “

मैंने जल्बाजी में कहा ..

“ये कोई प्रोपोज़ करने का तरीका है क्या ..” वो मुझसे अलग होकर मुझे मरने लगी वही सभी हंसाने लगे थे

“अरे बताओ तो ..”

“नहीं करती जाओ “

मैंने फिर से उसका हाथ खिंचा

“जान … जान दे दूंगा “

“तो दे दो “

मैंने फिर से उसके होठो को अपने होठो में भर लिया ..

“अरे भाई इतनी hi बेताबी है तो कई कमरे खली है वंहा चले जाओ “

अज्जू ने हमें चिढ़ाते हुए कहा जिसे सुनकर नेहा शर्म से लाल हो गयी …

इस बार मैं अपने घुटनो के बल बैठ गया ..

“मैं तुम्हारी क्या तारीफ करू जान … बस इतना कहूंगा की तुम मेरी जान हो … मुझे जयदा रोमांटिक होना नहीं आता .,..

सीधे सीधे पूंछ रहा हु , दुबारा नहीं पूछूंगा ..

विल यू मर्री में “

मैंने भी अपने जेब से एक अंगूठी निकल कर नेहा के सामने कर दी …

नेहा ने हलके से एक चपत मेरे गलो पर मारी और अंगूठी उठा ली ..

“हम्म्म सूंदर तो है …”

“अरे यार बताओ न ..”

“क्या ??” नेहा ने शरारती अंदाज में कहा

“मुझे जिंदगी भर झेलोगी की नहीं “

नेहा मुस्कुराने लगी

“अब बोल भी दे क्यों मेरे बेटे को तड़फा रही है “ भाभी ने नेहा से कहा

“ठीक है … यस “

नेहा ने भी िताःलाते हुए कह दिया , लेकिन उसके बाद hi हमारे होठ फिर से मिल गए थे ..

“ये हुई न बात …” अज्जू चिलाय और म्यूजिक तेज हो गयी …….

***************

मैंने और अक्की हमने एक hi दिन कोर्ट मैरिज कर ली , कुछ खास दोस्त और मेहमानो के साथ हमने छोटी सी पार्टी भी मिलकर दे दी ..

पार्टी ख़त्म हो चुकी थी सभी लोग अपने अपने घर जा चुके थे …

मैं अपने कमरे की और जा रहा था, आज मेरी नेहा के साथ सुहागरात थी , मैं कमरे में गया तो मैं चौक गया वंहा सुहाग की सेज पर नेहा के साथ भाभी बैठी थी

“बीटा आज से तू नयी जिंदगी की शुरुवात करने जा रहा है”

उन्होंने खड़े होकर मेरे बालो में हाथ फेरा …

“है भाभी …” मैं थोड़ा सा शरमाया था

“नेहा बहुत hi प्यारी है बस उसका ख्याल रखना”

मैंने बस है में सर हिलाया , उनकी आँखों में आंसू थे , उन्होंने अपने आँखों से काजल निकाल कर पहले मेरे माथे पर फिर नेहा के माथे पर लगा दिया …

“तुम दोनों को नयी जिंदगी के लिए बेस्ट ऑफ़ लक “

वो जाने लगी थी की ..

“भाभी …” इस बार नेहा ने भाभी को आवाज दी थी

भाभी भी आश्चर्य से उसे hi देखने लगी

“आप इन्हे इजाजत तो दीजिये “

भाभी फिर से आश्चर्य से नेहा को देखने लगी

“किस बात की “

“अरे अभी तक तो ये बस आपके थे , इन्हे मेरा बनने की इजाजत दे दीजिये वर्ण रत को फिर आपको परेशन करेंगे बोलेंगे की भाभी माँ से इजाजत लेकर आता हु “

नेहा की शरारत भरी बात से जंहा नेहा और भाभी जोरो से हंस पड़ी वही मैं बुरी तरह से झेप गया .. इन दोनों की तो खूब केमिस्ट्री बनाने लगी थी और दोनों मिलकर मेरी hi खिचाई करने लगे थे …..

“जा सोनू जा जी ले अपनी जिंदगी “

भाभी ने बड़े hi फिल्मी अंदाज में कहा वंहा से निकल गयी सभी के होठो में एक मुस्कान आ गयी थी ………..






थे एन्ड
 
नहीं भाई आपके कमेंट के कारन नहीं बंद किया हु , असल में अब लिखने को कुछ बचा भी नहीं था , कहानी को बढ़ाना बस फिजूल में खींचने जैसा hi हो जाता उससे अच्छा था की बंद hi कर दो :अप्प्रोवे:

ऐसे भी मेरी स्टोरीज 60 से 80 उपदटेस के बिच की hi रहती है , सुसपनेसे जंहा ख़त्म हुआ स्टोरी को समेत कर एन्ड कर देता हु

भाई कुछ करैक्टर को पब्लिक डिमांड में भी स्टोरी में लाना पड़ता है :)

और काजल ,पूर्वी और विकाश का इस रूप में इंट्रोडक्शन आने वाली स्टोरी की एक झलक थी , इनकी पूरी अलग से एक स्टोरी लिखने वाला हु तो उसका इंट्रोडक्शन यंहा कर रहा हु ..

ऐसा मैं करते रहता हु जो रेगुलर रीडर्स है मेरी स्टोरीज के वो जयदा अच्छा ड़ालते कर पते है इन चीजों से , जो बस पर्टिकुलर एक स्टोरी पर hi फोसोउस कर रहे है वो इन्हे स्टोरी का एक चैरेक्टर मान कर hi चले तो ठीक है जो बस स्टोरी को आगे बढ़ने में मदद करते है

मैं कॉलेज लाइफ को और अच्छे से दिखने के फ़िराक में था लेकिन स्टोरी आलराय बहुत डिले चल रही थी , दो बार टाइम की कमी के कारण बंद भी कर दिया था इसलिए इस स्टोरी का उतना बज्ज नहीं बना जितना मेरी स्टोरीज में अधिकतर रहता है .. मेरे खुद का इंट्रेस्ट भी थोड़ा काम होने लगा था इसलिए कॉलेज लाइफ को ज्यादा डिटेल्ड वे में नहीं दिखाया , आशा है की अक्की और स्नेहा वाले चैरेक्टर की लव स्टोरी मेरी दूसरी स्टोरी में देखने मिले :)

भाई नार्मल लोगो के जीवन में भी एक बीवी एक प्रेमिका और एक रैंड होती है :डी

वो तो बड़ा आदमी था ,

और स्टोरी के हिसाब से भी कोमल तो भुवन के साथ निकल ली , उसके बाद तिवारी और जीवा अलग हुए उसके बहुत बाद महिमा तिवारी के जीवन में आयी , यंहा स्टोरी के टाइम पीरियड के देखे तो नेहा और सस की उम्र एक है , मतलब उस समय तक तिवारी 2 बच्चो का बाप भी बन चूका था , 2 बच्चे के बाद इंसान अधिकतर बीवी से तो बोर हो hi जाता है , तो अगर तिवारी ने कोई प्रेमिका पाल ली तो मुझे नहीं लगता की इसमें कोई हैरत की बात होनी चाहिए :डेड:

पॉसिबल तो कुछ भी होइ सकता है लेकिन स्टोरी के हिसाब से देखो तो ये पॉसिबल नहीं था ,क्योकि तिवारी को महिमा की नजरो में अच्छा बनने से कोई भी फायदा नहीं होने वाला था , और पूरी स्टोरी में पता नहीं लोगे ने ये बात नोटिस की या नहीं की तिवारी कमीना जरूर था लेकिन सेंसेटिव भी था , जबकि करीम महामदेर्चोद टाइप tha,bian सेंस्टीवेनेस्स के और जीवा महा कमीना था जिसमे ..

अब कमीना होना और सेंसेटिव न होना दोनों अलग चीज है , कमीना आदमी भी अगर सेंसेटिव है तो वो अपने कमीनेपर भी कण्ट्रोल करके चलेगा जिसके कारण hi तिवारी सक्सेजफुल आदमी और नामी आदमी बन पाया

वही सेन्सेशनलेस लोग जानवरो जैसे हो जाते है , वो खतरनाक जरूर हो जाते है लेकिन बहुत कामियाब नहीं हो पते ...

तो महिमा को बचाना और उसे सहारा देना इसी बात का घोतक है की तिवारी सेंसेटिव भी था ,ये हिंट मैंने स्टोरी में कई बार दिया भी है लेकिन लोग इतनी छोटी डिटेल्स को अधिकतर मिस कर जाते है :अप्प्रोवे:

करीम को मरवाना तो उसकी मज़बूरी बन गयी थी , उसने महिमा पर हाथ दाल दिया जिसे वो पेर्सनली सपोर्ट कर रहा था , मतलब करीम ने इंदिरेक्ट्ली तिवारी के ईगो को चलेंगे कर दिया ..दूसरी बात ये धयान देने वाली है की तिवारी ने खुद उसे नहीं मारा बल्कि जीवा से मरवाया .. क्योकि जीवा करीम के टक्कर का आदमी था ..

अब जीवा को किस्से मरवाता , लेकिन जीवा को बर्बाद जरूर करने में कामियाब हो पाया

अब ये समझना बहुत hi सिंपल सी चीज है की महिमा पार्टी में क्यों थी , क्योकि उसे तिवारी ने बुलाया था यार तिवारी के सपोर्ट में थी वो तो ये कमें सेंस वाली बात हो गयी न .. :अप्प्रोवे:

दूसरा तिवारी ने उसे उस टाइम सपोर्ट किया जब उसे इसकी सबसे जदया जरुरत थी , और इंसान कही न कही टूट hi जाता है और प्रेम में भी पद जाता है, दूसरा तिवारी ने उसके पति को मारा नहीं था वो इन्वॉल्व था अब दोनों चीजों में बहुत फर्क हो जाता है , अगर क्रीम के कारण महिमा के सामने नफरत करने के लिए दूसरे लोग जयदा थे

इसका जवाब स्टोरी में hi मिल जायेगा और साथ hi एक कमेंट में भी इसका जवाब दिया की जीवा करीम को मरने के बाद और कमजोर हो गया , कारण तिवारी था तिवारी ने उसके पीछे पुलिस छोड़ दिया था करीम की मौत के कारण , ये पॉइंट स्टोरी में hi बताया गया है ..

दूसरा आरती के जीवा को मरने की बात है तो वो भी स्टोरी पढ़ कर समझ गए होंगे की जब आरती के अंदर वो ताकत जगती है तो उसके सामना कर पाना किसी के बस की बात नहीं थी , और जीवा तो एक बुढ्डा आदमी hi था आरती के सामने ..

दूसरा गैंग के लोगो के होते हुए कैसे मारा तो स्टोरी से ये भी क्लियर है की पहले hi कुछ लोगो को आरती ने मारा था जीवा गैंग के उसके बाद फिर सम्पत और जीवा को मरने गयी , और साथ hi साथ जीवा गैंग के लोगो के अंदर सकती को लेकर खौफ पहले से hi था क्योकि उनसे सकती के किस्से पहले से hi मालूम थे , दूसरा शिवा को वो डरते भी थे और इज्जत भी करते थे ये भी स्टोरी से पता चलता है जब पहली मौत होती है तो गैंग के लोग शिवा के नाम के नारे लगा रहे होते है , इन सबका भी तो साइकोलॉजिकल प्रबह्व गैंग के ऊपर पड़ेगा जब उन्हें पता चलेगा की कैसे अब शिवा उनके गैंग के hi खिलाफ हो गयी है या गया है ...या फिर ये पता चले की शिव कोई और नहीं बल्कि सकती है ..तब तो और भी फटेगी उनकी ..

और साइकोलॉजी से hi वो हार जायेंगे .. ये सब स्टोरी में एक्सपालिन नहीं क्या हु , स्टोरी के हिसाब से देखो तो बस आरती की ताकत वाला फैक्टर hi काफी है और फिर दर भी गैंग के लोगो को भागने या हारने के लिए काफी था

भाई ये जंग तो तीर कमान से भी सिर्फ युद्ध कौसल के भरोशे भी जीती जाती है लेकिन लोग गन का प्रयोग करते है न :डेड:

पावर जीतनी मिल जाये उतना काम होता है , यंहा कोमल जीवा के लिए एक हथियार था जो 50 लोगो का काम अकेले कर देती थी तो उसका उपयोग वो क्यों न करता ,

कोमल के बिना भी उसने डैम दिखा कर कॉलेज में करीम के आदमी को मारा था और फिर करीम को भी मारा , लेकिन जब आपके पास पूरा टैंकर हो तो आप एक पिस्तौल पकड़ कर लड़ाई क्यों लड़ोगे , ये स्वाभाविक सी बात है यार :डोह:

और मुझे लगता है की आपने सकती के ताकत के जागरण को और उसके ताकत को समझा hi नहीं इसलिए आप ऐसा बोल रहे हो की एक नयी सीखी लड़की ..

तब वो आरती में पहली बार जगा तो उसने रेलवे ट्रेक पर कई लोगो को ऐसे hi काट डाला था :डेड:

सुबकसिओस की ताकत क्या होती है इसे जानने के लिए आप होल्ल्य्वूद की लूसी मूवी देखिये उसमे बहुत अच्छे से इस चीज को एक्सपालिन किया है की क्या क्या पावर्स आती है और कटने प्रेसेंट ब्रेन एक्टिव होने पर क्या होता है

अरे भाई ये क्या बोल रहे हो तिवारी से रिलेशन और गैंग के लिए मार काट को निकाल दोगो तो पूरी स्टोरी hi चंग हो जाएगी, तिवारी से रिलेशन के कारण hi तो ये स्टोरी बानी है , अगर उससे कोमल का रिलेशन नहीं होता तो उसके अंदर भुवन के प्यार की समझ hi कैसे आती और फिर वो दर्द नहीं मिलता और न hi वो ताकत ..

इसमें मैंने दो कांसेप्ट दे दिए है ताकत को लेकर

एक बुक में लिखी स्टोरी जो की जादुई है ,

दूसरी जो की डॉ चुटिया ने एक्सप्लेन की वो वैज्ञानिक एक्सप्लनेशन है ताकत की

अब दोनों में से दोनों hi सच हो सकते है , ये मैंने रीडर्स के ऊपर छोड़ दिया है की आप किस चीज को सच मन्ना पसंद करेंगे :अप्प्रोवे:

चंचल कोई छोड़ा नहीं गया चंचल को जेल पहुंचे गया :डोह:

और कैसे साबित हो जाता की खून उसने नहीं किया है :?:

तब तक किसे पता था की आरती में वो ताकत आएगी :डेड: या ये भी किसे पता था की असली शिवा कौन है ...

मेरे स्टोरी के अधिकतर हीरो वैसे hi होते है :डी

असल में वो मेरे लिए बस एक चेरेक्टर है जो स्टोरी बोल रहा है , रीडर्स उसे हीरो मान लेते है या किसी को हेरोइन मान लेते है तो उसमे मेरी गलती नहीं है भाई :अप्प्रोवे:

रीडर्स की डॉट होती है क्योकि वो ऐसी स्टोरी hi यंहा पर पढ़ते है की एक हीरो है वो साला कुछ भी कर रहा है 10 लड़कियों के साथ से कर रहा है फिर भी अच्छा है और लड़की एक से दो से सेक्स की तो रंडी हो गयी ,, तो ये सब पढ़कर भी लोगो के दिमाग में ये ख्याल आ जाता है की स्टोरी है तो कोई न कोई तो हीरो होगा .. लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता , जैसे म्यूजिशियन के लिए सब कुछ सुर होता है चाहे वो गायक हो या फिर गिटारिस्ट या फिर बांसुरी वाला .. वैसे hi राइटर के लिए सब कुछ चेरेक्टर होना चाहिए ..

है कुछ का रोले जयदा तो कुछ का काम जरूर हो सकता है :अप्प्रोवे:

:lol1: तब तो मुझे भी देखनी पड़ेगी सहो :डी

:थैंक्स: धन्यवाद विक्रम भाई इतनी म्हणत करके ऐसे कमैंट्स करने के लिए :)

आने वाली स्टोरी भी पदियेगा , जब लिखना शुर करूँगा तो मश्ग करूँगा आपको :)
 
डॉ साहब .. ये आपकी और एक कहानी पुरे दिन लगा कर आखिर पढ़ hi ली . और यकीं मानिये आपकी कहानिया पढ़ने की शुरुआत वो अम्मा वाली कहानी से हुई थी . लेकिन अभी आपकी 6 कहानियां पढ़ ली . और हर एक कहानी अपने आप में बेमिसाल है . बहुत सी कहानियो में कही कही मुझे कोफ़्त होती है लेकिन आपकी एक भी कहानी में कोफ़्त नहीं महसूस हुई मुझे आज तक . आपकी लेखन शैली hi ऐसी है .



मुझे शुरू से लग रहा था क इस कहानी में भी डॉ चुटिया ,मैरी ,और काजल होंगी hi . जो बाद में आयी hi . शुरू में लगा क अंकित hi शिवा है जो नींद के आवेश में आ कर ये सब क़त्ल कर रहा है बाद में लगा आरती होगी . फिर लगा कोमल होगी पर आपने तो दिमाग की मैया hi छोड़ दी . मतलब एकदम जहर लिखा है अपने . बहुत hi कमाल .और उतनी hi कमाल के आपके इमोशनल उपदटेस लगे .

वैसे आपके डॉ. चुटिया को मई अपनी कहानी में एक जगह जरूर लूंगा . फिर बाद में ये न कहना की ये कॉपीराइट है .



बेस्ट ऑफ़ लक माँ सरस्वती की कृपा आप पर ऐसे hi रहे 🖤🙏
 
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