Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ] - Page 53 - SexBaba
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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

अपडेट 038





अपडेट इस पोस्टेड ों पेज NO 1449


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( NEXT UPDATE भी रेडी है ... जितना जल्दी पढ़ लो अब तुम लोग ये अपडेट )
 
होली पर लंबी छुट्टी के चलते 28 को ही गांव आ गया हूं दोस्तों



यहां थोड़ी व्यस्तता है और नेटवर्क इश्यू है

हालांकि यहां गोपनीयता भी उतनी नहीं मिलती

फिर भी अगर मौका मिलता है तो अपडेट पोस्ट कर दिया जाएगा ।

अन्यथा होली के बाद ही मिलेगा अपडेट



HAPPY HOLI आप सभी को
 
हैप्पी होली





सभी पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
 
अपडेट 039





अपडेट 39 इस पोस्टेड ों पेज NO 1458
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 039


मदन के कमरे से निकल कर ममता ने पहले मंजू को जगाया और फिर बहु को जगाने के लिए ऊपर चली गई

क्योंकि घर में काम बहुत पड़े थे ।

08 बजने वाले थे

थोड़ी ही देर सोने दरवाजे पर दस्तक हुई और अन्दर कमरे में हलचल होने लगी ,जल्दी जल्दी दोनों बहने सोनल और निशा जिसको जो मिला पहन लपेट कर खुद को सही करने लगा , अमन ने कंबल में पड़े रहना सही समझा

: बहु!!!

: जी , जी मम्मी जी आई

: तू जा न दरवाजा खोल जल्दी बस ( निशा ने सोनल को कहा )

सोनल ने जाकर दरवाजा खोला

सामने देखा तो सोनल ने जल्दी जल्दी में अमन के टीशर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे और उसकी गोरी टांगें जांघ तक दिख रही थी

सोनल थोड़ा शर्माती हुई लजा कर झुक कर अपनी सास के पैर छुने लगी

तभी ममता की नजर निशा पर गई जो कमरे में एक ट्राली बैग खोलकर बैठी थी

: अरे ठीक है , तुम लोग ऐसे ?

: अरे वो बस निशा अपने समान निकाल रही है, वो भी आज घर जाएगी न

: अरे तो शादी का कितना काम है ,कैसे होगा ?

: मैने कहा इसको , तो बोल रही है घर पर पापा परेशान है । मिल कर चली आएगी

: अच्छा ठीक है और बहु सुन थोड़ा ( ममता ने एक नजर अमन को देखा वो आंखे बंद सोने का नाटक कर रहा था और फिर वो सोनल के पास खड़ी होकर हल्के से फुसफुसाई ) मैने जो कहा था वो चेक किया तूने

इस पर सोनल शर्मा कर मुस्कुराई और हा में सर हिलाया

ममता को अंदर सिहरन हुई और वो बेचैन होने लगी कि आखिर क्या बात होगी ।

: क्या मिला ? ( ममता एक गहरी सांस लेकर बोली )

: मैने अपने मोबाइल में सब ले लिया है , इसको जाने दो फिर दिखाती हूँ

तभी निशा जो पहले से ही हड़बड़ी में थी अपना बैग सेट कर चुकी थी

: मेरा हो गया सोनल , मै फ्रेश होने जा रही हूँ , अभी राहुल आ जाएगा

: अरे बेटा कुछ चाय पानी कर ले फिर जाना

: नहीं आंटी , घर पर सब राह देख रहे है

: अच्छा ठीक है तू फ्रेश हो ले तबतक मै अमन को कह कर तेरा बैग नीचे रखवाती हु

फिर निशा चली गई और ममता ने झट से दरवाजा लगाया ।

: हा बहु अब बोल

सोनल मुस्कुराई और ना में सर हिला कर अमन की ओर इशारा किया

: क्या हुआ वो सो रहा है न ?

: उम्हू जगे है वो भी

: इसकी तो .... हे अमन उठ तो बेटा जल्दी ( ममता तेजी से उसकी ओर गई और बिना ये समझे कि अमन कम्बल में नंगा होगा तेजी से चादर खींच ली )

: अरे मम्मी जी रुको नहीईई

सोनल ने उसे रोकना चाहा लेकिन ममता तबतक कंबल खींच चुकी थी और सामने अमन का बड़ा बांस के खूंटे जैसा 09 इंच का लंबा लंड आसमान की ओर मुंह उठाये तनमनाया हुआ था






अमन भी ममता की इस हरकत से हड़बड़ा कर चौक गया

: मम्मीइई यार ये क्या कर रहे हो

वो जल्दी जल्दी उठ कर बैठ गया

उसके नंगे चूतड़ों और लंड को देख कर ममता की हसी छूट गई

: तू नंगा क्यों है कपड़े तेरे कहा है ?

: उससे पूछो ( अमन उखड़ने का नाटक करता हुआ सोनल की ओर इशारा कर बोला )

ममता सामने देखती है तो सोनल तो अमन के ही टीशर्ट और शॉर्ट्स में थी

: अरे तो क्या हो गया तू बहु कि साड़ी लपेट ले हाहाहाहा

ममता खिल कर हस पड़ी और सोनल मुस्कुरा कर शर्माने लगी

: अब उठ शर्मा क्या रहा है जैसे मैने तेरा देखा नहीं है ( ममता बोली फिर उसे सोनल का ख्याल आया और उसने एकदम से बात पलट दी ) बचपन देखती आ रही हूँ उठ अब

: बक्क यार मम्मीइई

अमन उठा और तकिए से अपने चूतड़ ढकता हुआ बाथरूम चला गया

और दोनों सास बहु हसने लगी

: इधर आ जल्दी जल्दी ( ममता ने बड़ी उत्सुकता से कहा और सोनल उसके पास आई )

: एक मिनट

सोनल बोलकर अपना मोबाइल खोल कर जल्दी जल्दी कैमरा फाइल्स दिखाने लगी

: ये देखिए ? इन्होंने ही ऑर्डर किया था अपने मोबाइल से

: अच्छा !! तभी तो मै सोचूं कि इसके पापा को इतनी अकल कहा से आई

सोनल को हंसी आई

: अच्छा बहु सुन , वो तूने सरप्राइज वाली बात पूछी अमन से

इस पर सोनल मुस्कुराने लगी

: क्या हुआ बोल न

: उम्हू , बात करने दें तब न

: क्यों ? ( ममता पहले समझ नहीं पाई और फिर वो समझ गई कि रात में बात करने की फुर्सत क्यों नहीं मिली होगी ) अच्छा समझ गयी

: और पता है मम्मी जी, मैने वहाँ इनको कई बार देखा मॉल में कपड़ों की फोटो लेते हुए , मैने उनका मोबाईल चेक किया वो सब पापा जी को ही फोटो भेज रहे थे अंडर गारमेंट की

: आखिर चल क्या रहा है इन बाप बेटे के दिमाग में

: पता नहीं मम्मी जी

: अरे जानती है बहु अब तुझसे क्या छिपाना , ना जाने कैसे कैसे शौक हो रहे है इसके पापा को , ये ब्रा पैंटी जो मंगवाई थी अमन के पापा ने पता है किस लिए ?

: पहनने के लिए न ?

: अरे तू नहीं जानती है बहु , इसके पापा बहुत ठरकी है , इन्होंने सिर्फ़ वही ब्रा पैंटी के साथ मुझसे सारे साज श्रृंगार करवाए और फिर मेरी तस्वीरें निकाली , वीडियो बनाये और फिर ...

: फिर क्या ?

: तू नहीं जानती फिर क्या करेंगे हा सब कुछ सुनना चाहती है बेशर्म हो गई है तू भी अब ( ममता हस कर बोली )

: सॉरी ( सोनल मुस्करा कर बोली तभी उसका माथा ठनका और उसे यादा कि लगभग ऐसी ही मिलती जुलती हरकत अमन ने भी उसे करवाई थी ) मम्मी जी एक बात बतानी है आपको

: हा बोल न बहु

: वो अभी आपने जो बताया न फोटो निकालने वाली बात , सेम इन्होंने मेरे साथ भी किया था

: क्या ?

: हा मम्मी जी , अब तो मुझे भी कुछ गड़बड़ लग रहा है

: अब तो इन दोनों के बीच क्या खिचड़ी पक रही है पता लगाना ही पड़ेगा बहु

: हा मम्मी जी , मै भी कुछ देखती हूँ अगर मिलता है तो बताती हूँ आपको

: हा ठीक है और सुन ...( फिर ममता धीरे से सोनल ने कान फुसफुसाई )

सोनल शांत होकर बस नजरे उठा कर ममता को देख रही थी

: आप जो कह रही है अगर ऐसा हुआ होगा तो बहुत गलत हो जाएगा मम्मी जी

: लेकिन शक दूर करने का यही तरीका है बहु ... पहले मैने जो कहा है वो चेक करके बताना मुझे फिर देखते है क्या करना है

: ओके मम्मी जी

फिर ममता निकल गई कमरे से और वही थोड़ी देर बाद नीचे आकर निशा अपने पापा को फोन घुमाने लगी कि राह में कि अभी तक राहुल आया क्यों नहीं

लेकिन उसे क्या पता था कि राहुल निकल तो रहा था घर से लेकिन जब उसने देखा कि उसके पापा सुबह सुबह उसकी माँ को पीछे से दबोच रहे है तो वो भी खुद को रोक नहीं सका और बढ़ गया अपनी मम्मी पापा की ओर

: उम्ममम सीईईई हटिए न निशा के पापा अह्ह्ह्ह सीईईईईई कितना उम्मम आपने कहा बस किस करेंगे ओह्ह्ह्ह इसीलिए मैं नहीं पहन रही थी इस नाइटी ओह्ह्ह कितनी तंग है उसपर से आप ओह्ह्ह

राहुल जो सामने अपने पापा को मम्मी की नंगी कड़क गोल मटोल चूचों को पीते देख रहा था वो लपक एक दूसरे ओर बढ़ कर शालिनी के नंगे चूचों पर टूट पड़ा

: ओह्ह्ह्ह राहुल तू , तू गया नहीं निशा को लेने






: बस मम्मी जा रहा हूँ रुको न उम्ममम सीईईई कितना सॉफ्टी है उम्मम

दोनों बाप बेटे एक साथ शालिनी की नंगी चूचियों पर टूट पड़े

दोनों की जीभ तेजी से शालिनी की तने हुए गुलाबी निप्पल को फ्लिक कर रही थी और शालिनी की हालत खराब हो रही थी

इधर राहुल ने अच्छे से अपनी मम्मी की चुची को पकड़ कर चूसने लगा

: उम्ममम बेटा आराम से ओह्ह्ह्ह सीउईईई ओह्ह्ह ये क्या जी उम्मम आप भी न

: बस मेरी जान थोड़ा सा , अब मूड बन गया है ऐसे दुकान में बैठा नहीं जाएगा सीईईई थोड़ा सा

जंगी अपना लंड बाहर निकाल कर शालिनी के मुंह के पास हिलाता हुआ बोला और शालिनी ने ना चाहते हुए भी उसका लंड पकड़ लिया

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान उम्मम तेरे ये रसीले होठ उम्ममम ओह्ह्ह और उफ्फ सुबह सुबह तुझसे चुसवाने का मजा ही अलग है ओह्ह्ह्ह चाट ले ओह्ह्ह उम्ममम

इधर जंगी सिसकियां राहुल के कानो में गई और उसने अपनी के निप्पल मुंह में भरे हुए आंखे उठा कर देखा तो उसकी मम्मी पापा का मोटा लंबा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी थी

राहुल का लंड भी अकड़ गया था और उससे रहा नहीं गया , उसने भी झट से अपना लंड निकाल कर सुपाड़ा खोल कर अपनी माँ के आगे कर दिया

: तू जायेगा नहीं क्या ?

: बस कर दो न मम्मी मेरा भी, ऐसे टाइट लेकर जाऊंगा बाहर






शालिनी को हसी आई और वो उसका भी लंड पकड़ कर सहलाने लगी और फिर उसके सुपाड़े को चुभलाने लगी

: ओह्ह्ह्ह मम्मीइई फक्क यश ओह्ह्ह्ह कितना आराम मिलता है आपके मुंह ओह्ह्ह और चूसो ओह्ह्ह्ह

शालिनी बारी बारी से दोनों बाप बेटे के लंड चूस रही थी

: ओह्ह्ह्ह हा मेरी जान ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितने रसीले होठ है तेरे ओह्ह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह ये तो उम्मम क्या कर रही है

: अह्ह्ह्ह हा मम्मी करो ऐसे ही ऐसे ही ओह्ह्ह उम्ममम फक्क यू मम्मी ओह्ह्ह्ह






शालिनी दोनों के लंड को पास कर के दोनों के सुपाड़े की टिप पर एक साथ जीभ चलाने लगी और दोनों की हालत बिगड़ने लगी

: बस मेरी जान रुक जा

: क्या हुआ ( शालिनी ने आंखे उठा कर जंगी को देखा )

: बस थोड़ा सा ( जंगी उसको उठा कर बिस्तर पर झुका दिया और अपना लंड उसकी बुर में लगाने लगा )

: उम्मम सीई मुझे पता था आप नहीं मानेंगे

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान तुझे देख कर भला कितना मन मानेगा उम्ममम ओह्ह्ह कितनी रस छोड़ रही है तेरी बुर

: अह्ह्ह्ह्ह तो क्या करूं, दोनो ने मेरे चूचियां इतनी चूस दी कि अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरे राजा उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम उफ्फ

: मम्मीईईई ( राहुल अपना लंड लिए शालिनी के पास होकर भुनभुनाया )

: ओह्ह्ह्ह तुझे भी चैन नहीं है न , आ इधर

शालिनी ने उसका लंड पकड़ कर अपने पास खींचा और मुंह में लेकर फिर से चूसने लगी

: सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई उम्ममम कितना अच्छा लगता है आपके मुंह में पेलना






: ओह्ह्ह्ह हा बेटा सही कह रहा है ओह्ह्ह्ह तेरी माँ के सभी छेद कमाल के है ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मेरी जान कितनी रसीली बुर है तेरी उम्मम

जंगी पूरे जोश में करारे झटके मारने लगा और शालिनी के मुंह में राहुल का लंड गले तक जाने लगा

: ओह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीई ऐसे ही ओह्ह्ह फक्क यू मम्मी ओह और लो उम्मम

राहुल भी अपनी मां का सर पकड़ कर तेजी से उसके मुंह में पेलने लगा

अब आगे पीछे दोनों तरफ से शालिनी लंड ले रही थी

: ओह्ह्ह्ह पापा उम्मम मुझे भी करने दो न ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मुझे भी मम्मी के बुर में डालना है ओह्ह्ह

: ओह ठीक है बेटा आजा बेटा, कल रात की तरह करें

: हा पापा मजा आएगा

: क्या नहीं फिर से नहीं ( शालिनी थोड़ा दर्द से बोली)

: बस मेरी जान एक बार,फिर निशा के आने से तुझे आराम हो जायेगा, प्लीज

शालिनी ना चाहते हुए भी राजी हो गई और सामने सोफे पर राहुल के लंड पर बैठ कर आगे झुक गई

मौका पाते ही राहुल ने तेजी से अपने चूतड़ उछालने लगा और तेजी से अपना लंड अपनी माँ की रस भरी बुर के पेलने लगा , शालिनी सिसकिया तेज हो गई और वो चीखने लगी राहुल के तेज झटके से उसके पूरा बदन हिल्कोरे खा रहा था और उसकी नंगी चूचियां राहुल के मुंह पर झूल रही थी

राहुल उन्हें पकड़ कर मुंह में भर लिया और चूसने लगा

इधर जंगी अपना लंड तैयार कर रहा था हिला कर

: राहुल

: अह्ह्ह्ह्ह हा पापा आजाओ

राहुल थोड़ा सरक गया और अपनी मां को ऊपर खींच लिया , फिर जंगी अपना सुपाड़ा चिकना कर अपना लंड राहुल के लंड के ऊपर से शालिनी की बुर में डालने लगा

शालिनी एकदम से तड़प उठी: ओह्ह्ह्ह नहीं रुक जाओ न बहुत दर्द होता है ओह्ह्ह्ह प्लीज निशा के पापा ओह्ह्ह नहीं बहुत मोटा है ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम उफ्फ

: बस बस मेरी जान हो गया हो गया ओह्ह्ह्ह कितनी टाइट है

: हा पापा लग रहा है मम्मी की बुर भी सूज गई है

: हा बेटा कल रात सच में हमने ज्यादा कर दिया था ओह्ह्ह्ह सीईईई उफ्फ लेकिन तेरा आईडिया बड़ा कमाल का है ओह्ह्ह्ह मेरी जान कितना मजा आ रहा है उम्मम

: उम्मम जल्दी अह्ह्ह्ह करो न लग रहा है फट जायेगा ओह्ह्ह सीईईई मम्मीइई ओह्ह्ह्ह कितना अंदर डालोगे उम्मम चोदो न अब जल्दी






: ओह्ह्ह्ह सीईईई मेरी जान उम्मम अह्ह्ह्ह्ह ले मेरी जान ओह्ह्ह सीई ओह्ह्ह उम्ममम

: ओह्ह्ह पापा कितना टाइम है अंदर

: हा बेटा सही कह रहा है ओह्ह्ह्ह रुक पीछे डाल देता हूँ

: उम्मम हा वही करो

फिर जंगी ने लंड निकाल कर गाड़ में डाल दिया और हचक के पेलने लगा

शालिनी की सिसकिया तेज उठने लगी

: उम्मम ओह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह मम्मीइई और और तेज ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह ऐसे ही रुकना मत पेल बेटा तू भी उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह






दोनों बाप बेटे सांस थाम कर तेज ताबड़तोड़ पेलाई शुरू कर चुके थे और शालिनी की चीखे कमरे ने गूंज रही थी

: ओह्ह्ह्ह मम्मीई आयेगा ओह्ह्ह जल्दी आएगा

: हा मेरी जान मेरा भी ओह्ह्ह्ह आजा

जंगी जल्दी से हटा और शालिनी नीचे बैठ गई और राहुल भी खड़ा हो गया

फिर दोनों बाप बेटे मिल कर अपना लंड हिला कर शालिनी के चूचों पर पिचकारी छोड़ने लगे






: ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह मम्मीइई

: ओह्ह्ह्ह मेरी जान ले ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई मेरी जान ले ओह्ह्ह

दोनों ने अच्छे से लंड झाड़ा और तभी दरवाजे पर एक ई रिक्शे ने हार्न बजाया और बाहर से निशा की आवाज आई जो राहुल को आवाज दे रही थी

: देखो वो घर भी आ गई तुम लोगो के चक्कर में , जाओ अब

शालिनी ने डांट लगाई और उठ कर बाथरूम की ओर जाने लगी

: हा बेटा चल चलते है

फिर दोनों बाप बेटे अपना पेंट पहन कर चल दिये बाहर जहां निशा दुकान के बाहर खड़ी थी ... थोड़ी नाराज सी राहुल पर

वही दूसरी ओर चमनपुरा चौराहे पर राज के घर में सुबह सुबह अलग ही खेल चल रहा था , 05 बार झड़ने के बाद कल देर रात में सोया अनुज को पता नहीं चला कि कब सुबह हो गई और 08 बजने वाले थे । उसकी आंखे तो खुलने का नाम नहीं ले रही थी , कानो में उसकी माँ की थोड़ी भुनभुनाहट और फुसफुसाहट सुनाई दे रही थी । दिमाग सचेत होने लगा था लेकिन उसने राह देखी आँखो को पूरी तरह खुलने की

: हम्ममम पहले अपने पापा से पूछ ले कि आज आ रहे है या नहीं ?

: मोबाइल मेरे कमरे में है मम्मी

राज की आवाज सुनाई देते ही अनुज की सोई हुई आंखे झट से खुल गई और दिमाग सन्न , ये सोच कर कि उसका भैया भी यही सोया है लेकिन वो आया कब ? क्या उसे भी पता है कि मैने कल रात को मम्मी के साथ ?

: अच्छा ठीक है चल उठ , छोड़ मुझे देख आठ बजने वाले है अह्ह्ह्ह धत् बदमाश छोड़ न मेरा बेटा प्लीज सीईईई ओह्ह्ह सुबह सुबह क्यों तंग कर रहा है

: मम्मी बस थोड़ा सा दूदू पीने दो न

: तू न कभी कभी अनुज से भी छोटा हो जाता है पागल सीईईई ओह्ह्ह आराम से खींच मत ओह्ह्ह कल रात भी तूने ज्यादा जोर से किया था उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई बेटा ओह्ह्ह्ह और अनुज ने भी रात में मिज दिया था

: कितनी बार ?

: बस एक ही , उसका बस रहे तो रात भर न छोड़े अब देखो कैसे सो रहा है घोड़े बेच कर हीहीही चल उठ अब

अनुज को समझ आ रहा था कि उसकी माँ राज भइया से कुछ भी नहीं छिपाती , उसने सोचा था कि उसका रिश्ता प्राइवेट रहेगा लेकिन राज के साथ उसे वैसे भी कोई आपत्ति नहीं थी उसपर से उसका ही सपना था कि उसकी माँ दोनों को एक साथ दुलार करें

और वो अपना लंड टनटनाए घूम गया अपनी मां की ओर करवट लेकर और चिपक गया

: मम्मी आई लव यू

: ले ये भी उठ गया

अनुज ने सामने देखा और अपने भैया से नजर मिलाई

राज ने एक शरारती मुस्कुराहट से उसे देखा और वापस रागिनी की छातियां पीने लगा , वो देखते ही अनुज को जोश आने लगा और उसने रागिनी की दूसरी चुची जो उसकी ओर थी पकड़ कर मुंह ने रख ली






: तू भी शुरू हो गया अह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह बस करो बेटा लेट हो जाएगा स्कूल के लिए, चलो उठो

रागिनी ने दोनों के सर उठाए और उठ कर बैठ गई नंगी पीठ और गाड़ के गोल चबूतरे बिस्तर में धंसे हुए साफ दिख रहे थे दोनो भाइयों को

अनुज ने सामने देखा तो उसका भईया भी नंगा सोया था और आगे बढ़ कर वो रागिनी के मुलायम फूले कूल्हे चूमने लगा और रागिनी को गुदगुदी हुई

: अह्ह्ह्ह धत्त हट अब मै जा रही हूँ हीहीही

रागिनी झटके से उठ कर बिस्तर से निकली और उसके नंगे चूतड़ों की थिरकन देख कर अनुज का लंड अकड़ गया

रागिनी अपने बाथरूम में चली गई और दोनों भाई हंसते हुए बिस्तर पर सीधे हो गये

: तो तूने कर ली न अपने मन की उम्मम , अब तो पास हो जाएगा न बोर्ड में

राज ने मजे लेते हुए कहा अनुज से , इस पर अनुज ने मुंह बना कर अपने भइया को देखा

: हीहीही शक्ल तो देख , अच्छा ये बता कैसा लगा कल रात

: आपको जैसा लगा होगा वैसा ही

अनुज ने मुंह बना कर जवाब दिया

: अच्छा बेटा एटीट्यूड उम्मम , अभी मम्मी को बोलता हूँ फिर वो तुझे छूने भी नहीं देंगी , साले रात में भेज दिया मम्मी को तो भाव खा रहा है

: हूह जाओ जाओ , मम्मी खुद से आई थी मेरे पास और खुद से किया था सब

: हा हा बताया मम्मी ने कि कैसे तूने दर्द का नाटक बना कर मनाया मम्मी को चल चल सिखा मत मुझे ... पढ़ाई कर पढ़ाई

ये बोल कर राज उठ गया और बाथरूम के लिए अपने कमरे में चला गया और अनुज को भी प्रेशर था तो वो भी ऊपर छत पर चला गया

थोड़ी देर बाद अनुज तैयार होकर नीचे आया तो देखा उसकी माँ नाइटी पहन कर किचन में नाश्ता बना रही है और राज कही नजर नहीं आ रहा है

मौका पाते हुए अनुज अपनी मां से लिपट गया

: मम्मी आज स्कूल नहीं जाना मुझे

: अच्छा तो क्या करना है ? ( रागिनी दुलार में बोली )

: आपको प्यार करना है खूब सारा ( अनुज अपनी मां को पीछे से पकड़ कर अपना लंड पैंट के ऊपर से उसकी गाड़ पर दबाने लगा )

: हम्म्म फिर परीक्षा में पास कैसे होगा उम्मम ,

: हो जाऊंगा न मम्मी , मैम है न वो हेल्प करती है मेरी

: अच्छा तो तूने उनको भी पटा रखा है उम्मम हीहीही

: क्या मम्मी आप भी , सबको थोड़ी न पटाऊंगा

: अच्छा और वो लड़की पुल वाली , जिसके बारे में तेरा भैया बोल रहा था वो .... सच सच बता मेरी बहु वही है न ?

अनुज शर्म से लाल होने लगा

: क्या मम्मी अभी हम लोग बस अच्छे दोस्त है और अभी मै 10वीं में हूँ , तो कहा आप शादी के लिए बोल रही हो

: अच्छा रात में तो नहीं याद आया तुझे कि तू दसवीं में है उम्मम हीहीही

अनुज शर्मा गया और कस कर अपनी माँ को अपनी बाहों में भर लिया

: मम्मी आई लव यू उम्माह

: बस बस बहुत हो गया प्यार व्यार , अब पढ़ाई पर ध्यान दे समझा , ले चल नाश्ता कर

: ओके मम्मा

फिर अनुज ने नाश्ता करने लगा और जानता था कि अब तो उसकी मम्मी उसकी हो गई है .... कल की थकावट भी भारी थी , उसने छक कर नाश्ता किया और निकल गया कालेज के लिए

हमेशा की तरह आज भी उसकी लाली उसकी राह देख रही थी पुल पर

अनुज को देखते ही लाली की बेचैनी बढ़ गई और भाग कर उसके पास गई

: आराम से बाबू , क्या हुआ

: याद आ रही थी तुम्हारी और क्या ? ( लाली का मन था कि कल की तरह चिपक ही जाए अनुज से लेकिन आज सड़क पर आवा गमन तेज थी )

: अच्छा सच्ची में

: हम्ममम , लव यू

: लव यू सो मच मेरा बाबू

: हग करना है मुझको चलो उस वाले बगीचे में

अनुज ने सड़क से हट से कालेज के पीछे वाले बगीचे की ओर देखा , उसकी फट गई कि कही किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी ।

: नहीं यार ऐसे नहीं , क्लास में चलो लेट हो जाएगा ?

: आज भी दीदी नहीं आएगी तो उनका पीरियड खाली ही रहेगा ... चलो मुझे कुछ बात भी करनी है

ना चाहते हुए अनुज उस ओर बढ़ गया ।

लाली पूरी तरह बेफिक्र थी , फट तो अनुज की रही थी

बदनाम तो दोनों वैसे भी थे कालेज में तो अनुज को यही सोच कर थोड़ी हिम्मत आ रही थी ।

: हम्म्म कहो ! ( अनुज बोला और उसके बोलने की देरी थी कि लाली एकदम से उससे लिपट गई )

: अरे बाबू क्या हुआ ?

: आई लव यू, प्लीज मुझे आपसे प्यार है और मै किसी के साथ वो सब नहीं करना चाहती हूँ

: हा ठीक है लेकिन .... तुम बता रही थी न कि पूजा ने कोई शर्त रखी है

: हा वो कमीनी मेरी मम्मी के साथ वो सब करना चाहती है

: हा तो करने दो .. वो तो तुम्हारी रियल मॉम नहीं है न ( अनुज ने थोड़ा छेड़ा लाली को )

: धत्त क्या तुम भी ( लाली अनुज से लिपटी हुई उसके सीने पर मुक्का चलाती हुई बोली )

: और कोई तरीका है तुम्हारे पास

: पता नहीं मुझे समझ नहीं आ रहा है , मॉम थोड़ी है भी वैसी ... लेकिन मुझे नहीं लगता वो मानेंगी और फिर मै कहूंगी कैसे ?

अनुज थोड़ा उलझा

: एक मिनट ? तुमने कहा तुम्हारी मॉम थोड़ी वैसी है मतलब ?

लाली थोड़ा शर्माने लगी

: अह तुमने देखा था उस रोज घर पर मम्मी को पापा के दोस्त के साथ ? वो थोड़ी ओपन माइंडेड है और बायसेक्सुअल भी ( लाली की बात सुनकर अनुज थम सा गया तो लाली उसे समझाने लगी ) बायसेक्सुअल मतलब

: हा हा समझ गया , किसके साथ ?

: वो मै नहीं बता सकती और प्लीज इस बारे में मत पूछना ( लाली थोड़ा शांत होकर बोली )

: ओके , फिर तुम कैसे करोगी पूजा की हेल्प ?

इस पर लाली थोड़ी मुस्कुराने लगी

: क्या हुआ बोलो न

: यार सच कहूं तो मुझे सब पता है कैसे क्या करना है , बस थोड़ी सी नर्वस हूँ । थोड़ा अजीब भी लग रहा है कि मै अपनी मॉम को ऐसे ....

अनुज को समझ आ रहा था कि उसकी उम्मीद से कही आगे की है लड़की ये , अपनी समस्याओं का समाधान भी है बस थोड़ा ड्रामा कर रही है ।

: ठीक है तुम बताओ , अगर कुछ गलत लगा तो हम मिल कर उसको ठीक करेंगे

लाली जैसे अनुज की हामी की राह में थी और एकदम से वो चहक उठी

: ओके , सुनो मै पूजा को मॉम के कमरे में भेज कर मॉम की पैंटी चुराने को बोलूंगी और टाइम ऐसी होगी कि उसको मॉम अपनी पैंटी स्मेल करते देख लें । फिर ऐसा एक दो बार और होगा ताकि मॉम की नजर उस पर पड़े और अगर मॉम को थोड़ा भी भनक लगी कि पूजा लेस्बो है तो मॉम खुद से ही उसके करीब हो जाएंगी ।

अनुज को ये सब थोड़ा फिल्मी सा लगा

: किसी पोर्न वीडियो से सोचा है न

लाली की आंखे बड़ी हो गई मानो उसकी चोरी पकड़ी गई हो और उसका चेहरा गुलाबी होने लगा शर्म से

: हा लेकिन तुमको कैसे पता ?

: मै भी देखता हूँ हीहीही पोर्न वीडियो

: अच्छा बच्चू और करते क्या हो देख कर ( लाली ने थोड़ा आंखे महीन कर उसे घूरा )

: वही जो तुम करती हो हीहीही

अनुज खिलखिला कर बोला और लाली शर्म से लाल हो गई

: यार तुम न , अच्छा छोड़ो वो ये बताओ कैसा है मेरा प्लान

: प्लान ठीक है लेकिन वो क्या है कि इंडिया के पेरेंट्स और फॉरेन के पेरेंट्स में बहुत अंतर है । इतना आसान नहीं होगा कि तुम्हारी मॉम तुम्हारी सहेली को लेस्बीयन जानकर सीधा उसको पकड़ ही ले, पूजा की मम्मी से शिकायत हो जाए इसके ज्यादा चांस है । उसपर से पूजा की उम्र भी तो हम लोगों जितनी है । ऐज गैप बहुत मैटर करता है इनसब में

: तुम्हारी बात ठीक है बेबी लेकिन मै मेरी मोम की चॉइस जानती हूँ , उन्हें इसी उम्र की लड़कियां ही पसंद है

: तुम्हे कैसे पता ?

: बस पता है , वो सब छोड़ो न तुम

लाली ने एक बार आधी अधूरी बात खत्म कर दी , जिसपर अनुज को थोड़ा उलझन सा महसूस हुआ ।

: ठीक है अगर तुम्हे सही लग रहा है तो इसी प्लान के साथ आगे बढ़ते है ।

: हा ठीक है लेकिन पहले तुम एक मोबाइल लो

: क्यों ? ( अनुज उलझा हुआ बोला )

: यार मै परेशान रहती हूँ और तुम न ऑनलाइन आते हो और मुझे बात करनी होगी

अनुज को भी लाली की बात सही लगी और कही न कही वो भी अंदर से इस बात के लिए बहुत उत्साहित हो रहा था कि आखिर कैसे लाली अपनी सहेली को अपनी मां से मिलन कराएगी और फोन रहेगा तो अपडेट भी मिलता रहेगा ।

लेकिन उसके लिए एक समस्या थी कि अभी हाल ही में उसको उसके जन्मदिन पर लैपटॉप गिफ्ट मिला है और फिर उसकी बोर्ड परीक्षाओ की वजह से पहले ही उसके भइया और मम्मी कितनी सख्ती रखे हुए है। ऐसे में वो अगर डिमांड करता है नए मोबाइल के लिए... भले उसके घर वाले मना न करे लेकिन इतना जरूर करेंगे कि परीक्षा पास करने के बाद ले लेना । लेकिन अनुज के उससे बड़ी दिक्कत ये थी कि क्या वो इतनी छोटी सी समस्या को अपनी अमीरजादी नई gf के साथ शेयर कैसे करे कि उसके घर पर कितनी पाबंदियां है उसपर ।

अनुज लगातार दिमाग लगा रहा था और उसे एकदम से राहुल का ख्याल आया कि हा वो बंदा ही अब उसकी मदद कर सकता है , राहुल तो शुरू से ही जुगाड़ू रहा है और वो उसकी बात जरूर मानेगा ।

: ठीक है आज ही मै कुछ करता हूं इस बारे में

: ओके फिर मजा आएगा हीही

: क्या तुम भी , चलो अब क्लास में ( अनुज ने लाली को कहा )

: हा चलो

दोनों खुशी खुशी क्लास की ओर बढ़ गए ।

वही दूसरी ओर राज भी अपने दुकान के लिए रागिनी के साथ निकल रहा था कि गेट पर ही रागिनी को शकुंतला ने रोक लिया

ना चाहते हुए उसे भी रुकना पड़ा

थोड़ा हाल चाल और तभी राज का मोबाइल रिंग हुआ

उसने देखा कि काजल भाभी ही फोन कर रही है ,

उसने धीरे से फोन उठाया और अपनी मां से थोड़ा दूर होकर बोला

: हम्मम बोलिए

: हम्ममम के बच्चे अगर आज मेरा समान नहीं लाए न तो समझ लेना ( काजल भाभी ने थोड़ा धमकाया राज को और उसे हसी आई ) हंसो मत समझे, आ जाना चाहिए आज

: अरे आपको कैसे पता कि मै हस ( राज ने इधर उधर देखा और छत की बालकनी में उसकी नजर गई जहां से काजल खड़ी उसे देख रही थी आंखों में इयरफोन लगाए ) ओह वहा हो आप

: हम्मम तो आज मिल जाएगा न मेरा समान मुझे

: क्या भाभी नकली आइटम के पीछे लगी हो , असली सामान लेकर देखो बहुत मजा है उसमें

: अच्छा , ठीक है फिर आज दोनों लेकर आना देखती हूं कौन सा अच्छा है कौन नहीं

काजल भाभी ने राज को खुल्लमखुला ऑफर फेंका और राज के कान और लंड दोनों खड़े हो गए

: सच में

: हम्ममम लेकिन दोनों साथ में रहेगा तो ही , अब रखो बाय

काजल भाभी ने फोन काट दिया और इधर राज की बेचैनी बढ़ गई । क्योंकि अब तो किसी भी तरह उसे गायत्री काकी से आज के आज ही काजल भाभी का डिल्डो ले ही पड़ेगा ।

उसने फौरन बबलू काका को फोन घुमा दिया

: हा बबलू काका

: जी छोटे सेठ नमस्कार

: हा नमस्ते

: कहिए छोटे सेठ क्या बात है , दुकान बस खुल ही गई

: अच्छा सुनिए ( राज ने एक नजर अपनी मां और शकुंतला ताई को बात करते देखा और फिर एक गहरी सांस लेकर ) वो आज आप गायत्री काकी को बुला लो दुपहर में

: क्या ? सेठ जी वापस आ गए क्या ?

: नहीं नहीं , मुझे काकी से बात करनी है

: लेकिन छोटे सेठ मै रात उसे बहुत समझाया , वो जिद पर अड़ी है

: ठीक है उनको मै समझाऊंगा , आप उन्हें 2 बजे तक आने को कहो

: जी ठीक है छोटे सेठ

फिर राज ने फ़ोन रखने वाला था कि चंदू उसके मोबाइल पर फोन घुमाने लगा

"अबे यार इसको क्या खुजली हो रही है अब " , राज खुद से बडबडा कर चंदू का फोन उठाया

: हा बोल भाई

: बोलना क्या है ? अपना वादा याद है न ? ( चंदू चहक कर बोला )

: वादा ? कैसा वादा ?

: अरे भाई कल ही तू बोला न कि मालती से थोड़ी अंदर ही बात निकालू और आज मैने उसको जल्दी आने को कहा है , थोड़ा ज्यादा समय होगा तो सही रहेगा

" अरे यार ये वाला लफड़ा भी तो है और फिर मालती की गाड़ देखी थी कल क्या गर्म लड़की थी , साली की चूत के फांकों ने चंदू का लंड को कस रखा था और ऐसे चूतड़ फेक रही थी उफ्फफ .... क्या करूं , पापा का भी कुछ पता नहीं है आज आएंगे या नहीं "

: क्या हुआ भाई कुछ बोल न

: अरे यार थोड़ा पापा से बात करना पड़ेगा कि आज आ रहे है या नहीं , उसी हिसाब से बताता हूं .... रुक थोड़ा तू

फिर राज ने तुरंत उसको होल्ड पर रख कर अपने पापा रंगी के पास फोन लगा दिया

3 4 रिंग के बाद ही फोन उठ गया

: हा हैलो नमस्ते पापा

: नमस्ते बेटा , अरे मै तेरा नाना बोल रहा हूं ( फोन पर दूसरी ओर बनवारी था )

: अरे नानू आप , नमस्ते ... कैसे हो आप और पापा कहा है ?

: अरे बेटा मै मजे हूं और तेरे पापा भी मजे में है ... वो थोड़ा बाथरूम में गए है कोई जरूरी बात है क्या ?

: अह हा वही पूछना था कि कब वापस आ रहे है ? ( राज थोड़ा हिचक कर बोला )

: अह बेटा आज तो थोड़ा मुश्किल लग रहा है , यही पास में हमने आज एक बड़ी अच्छी खेत देखी है सोच रहा हूं जमाई बाबू साथ रहेंगे तो लगे हाथ सौदा हो जाएगा

: अच्छा !!! ( राज थोड़ा उलझन में बोला ) ठीक है नानू फिर रखता हूं

: ओके बेटा ख्याल रखना

: जी बाय

इधर राज ने चंदू को फोन इजाजत दे दी कि वो मालती को लेकर आ सकता था और वही दूसरी ओर प्रतापपुर गांव में

बनवारी के सामने बैठा हुआ रंगीलाल ठहाका लगा रहा था

: हाहाहा खेती और सौदा वाह बाऊजी कमाल करते है आप भी

: अरे भाई रज्जो के चौड़े चबूतर किसी खेत के कम है क्या ? सींचते जाओ हाहाहाहा

: बात तो सही कही आपने बाउजी ... लेकिन ये सब होगा कैसे

: होगा या नहीं होगा उसकी छोड़ो जमाई बाबू ... फिलहाल रज्जो कमरे में गई है और नहाने जा रही है । और थोड़ा उसके खेत देख ही आते है

: हा बाउजी ये सही रहेगा ....

दोनों जमाई ससुर उठ कर निकल पड़े रज्जो के कमरे की ओर

जारी रहेगी
 
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💥 अध्याय 02 💥

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" जमाई बाबू ध्यान से "

" आइए बाउजी सीईईई एकदम शांत रहिएगा "

:दरवाजा तो बाहर से बंद लग रहा है , अरे नहीं ये तो

: शीईई ( रंगी ने मुंह पर उंगली रख कर बनवारी को शांत रहने को कहा और हौले से दरवाजे को धकेला )

हल्की आवाज से दरवाजा खुला और दोनों पीछे हो गए

कमरे में अपने कपड़े उतार रही रज्जो सजग हो गई

: कौन ? बाउजी ?

रंगी ने मुंह पर उंगली रख कर एकदम चुप रहने को इशारा किया बनवारी को और थोड़ी देर में सब शांत हो गया

फिर पायलों की खनक वापस चली गई और रंगी ने एक आंख से अंदर का नजारा देखा

तो उसकी आंखों बड़ी है गई , चेहरे पर मुस्कुराहट और पजामे में लंड विस्तार लेने लगा

अंदर रज्जो अपनी साड़ी खोल कर कमर से निकाल रही थी

: कुछ दिखा जमाई बाबू ?

: आप खुद देख लीजिए बाउजी

बनवारी ने रंगी की जगह आकर दरवाजे के महीन गैप से अंदर रज्जो को अपनी पूरी साड़ी उतारते देखा और उसका गला सूखने लगा,रज्जो की मोटा चूतड़ों के उभार और ब्लाउज में फुले चूचे देख कर






वही खड़े खड़े उसने अपने धोती में लंड को सहलाया और रंगी झुक कर नीचे बैठ गया और आंखे लगा कर अंदर का नजारा अब दोनों ससुर दामाद देखने लगे

अंदर रज्जो गीता बबीता के बेड पर अपना बैग खोलकर वही बेड के पास खड़ी थी और अपने ब्लाउज के हुक खोलने लगी






ये नजारा देख कर दोनों ससुर दामाद अपनी सुपाड़े मिजने लगे और देखते हो देखते रज्जो ने मोटे चर्बीदार बड़े बड़े रसीले पपीते जैसे चूचे ब्लाउज के बाहर झूल गए , बिना ब्रा के

उसके बड़े बड़े काले मुनक्के जैसे निप्पल देख कर दोनों के मुंह में मिश्री घुलने लगी और रज्जो ने ब्लाउज उतार कर सिर्फ पेटीकोट में आ गई ।

फिर उसने अपने पेटीकोट का नाडा खोलने लगी और ये देखते ही दोनों ससुर दामाद की सांसे चढ़ने लगी और रंगी ने एक बार सर उठा कर ऊपर बनवारी को देखा और बनवारी ने उसे फिर दोनों ने एक शरारती मुस्कुराहट पास की और वापस अंदर देखने लगे ।

इस बात से बेखबर कि जहां रंगी नीचे घुटने के बल होकर दरवाजे के पास से अंदर झाक रहा था वही दिवाल से लग कर चींटियों को एक झुंड जा रहा था और एकदम से उसकी उंगलियों ने वो लाइन तोड़ दी , नतीजा 3 4 चीटियों ने एक साथ उनके हाथ पर काट लिया

एकदम से रंगी तमन्नाया और उसकी सिसकी निकल गई

अंदर जो रज्जो अपना पेटीकोट की डोरी खोल रही थी वो सतर्क हुई और झट से उसने अपना पेटीकोट चूचों पर बांध लिया

: कौन है ?






रज्जो की आवाज आने को थी कि दोनों ससुर दामाद उल्टे पाव बाथरूम की ओर भागे और आंगन में चले गए

रज्जो ने बबीता के कमरे से अपनी गदराई चूचों पर पेटीकोट चढ़ाए हुए बाहर देखा तो सब ओर एकदम सन्नाटा था

कही न कही उसे शक हो गया था कि जरूर कोई उसे देख रहा था ।

वो धीरे से एक नाइटी और तौलिया लेकर वैसे ही पेटीकोट में बाहर निकाल आई और जल्दी जल्दी बाथरूम की ओर बढ़ने लगी

पायलों की आवाज की खनक आते ही दोनों ससुर दामाद में फिर हलचल हुई और वो दोनों पीछे वाले आंगन में लगे जीने से सरपट ऊपर छत पर भागे

लेकिन इस बार रज्जो ने साफ साफ आहट सुनी वो भी तेजी से आंगन में आई लेकिन वहां भी सन्नाटा था ।

वो तेजी से सीढ़ियों को फांदते हुए ऊपर छत से चार सीढ़ी पहले ही रुक कर छत पर पूरा मुआयना किया , पूरी छत खाली थी

रज्जो को लगा कि जरूर ये उसका भरम होगा क्योंकि अगर जमाई बाबू या उसके बाउजी में से कोई होता तो इतनी छिपता क्यों । और वो वापस नीचे आंगन में आ कर , खुले आंगन में ही नहाने बैठ गई

वही ऊपर छत पर टंकी के पीछे छिपे हुए रंगी और बनवारी ने खिलखिला कर इस थ्रिल का मजा लिया

: बाल बाल बच गए जमाई बाबू

: हा बाबू जी हीही

: चलिए नीचे चलते है आइए ( बनवारी ने रंगी को कहा )

: अरे अब इतना रिस्क लिया है तो बचा हुआ काम निपटा कर जाते है न

बनवारी की आंखे चमक उठी कि रंगी क्या कहना चाहता है ।

: जैसा आपको सही लगे जमाई बाबू हाहाहाहा

: वैसे एक बात कहूं बाउजी

: हा कहिए न

: जीजी के रसीले दूध देखे आपने , उन्होंने तो ब्रा भी नहीं डाली थी

: अह्ह्ह्ह्ह जमाई बाबू वैसे तो मैने पहले भी देख रखा है लेकिन आपके साथ वो नजारा बड़ा ही कामुक हो गया था और देखो अभी भी सलामी दे रहा है ये हाहाहाहा

बनवारी ने अपना मूसल मसल कर कहा

: सच कहा बाउजी जीजी ने तो जबरजस्त टाइट कर दिया है

: आइए चलते है कही वो निकल न जाए हीही

: हा हा बाउजी चलिए

फिर दोनों ससुर दामाद तेजी से पीछे वाले आंगन के साथ जीने के पास आ गए और

बनवारी ने हौले से छत की चार दिवारी से आगे झाक कर देखा और पीछे हो गया

: क्या हुआ ( रंगी ने इशारे ने पूछा )

बनवारी में मुस्कुरा कर रंगी को खुद देखने के लिए कहा

रंगी ने भी गर्दन आगे कर हौले से चारदीवारी से झांका और नीचे आंगन का नजारा देख कर उसकी आंखे बड़ी हो गई






नीचे रज्जो वैसे ही पेटीकोट छातियों पर बांधे हुए नहा रही थी । उसका पूरा बदन भीगा हुआ था , पेटीकोट उसके देह से चिपका हुआ था और मोटे पपीते जैसे उसके चूचों की घटिया साफ दिख रही थी हिलती हुई , क्योंकि रज्जो अपनी बाह में साबुन मल रही थी ।

बनवारी ने मुस्कुरा कर रंगी को देखा और अपना मूसल मिजता रहा और फिर रज्जो अपने बाल घुलने लगी , शैंपू उसके बालों से उसके पूरे देह पर जाने लगा , वो आगे झुक कर बालों को शैम्पू कर रही थी और पीछे गीली पेटीकोट में उसके फैले हुए चूतड़ हवा में उठ गए

: ओह्ह्ह बाबूजी क्या लगता है जीजी पेटीकोट निकालेंगी

: निकाल दे तो मजा ही आ जाए जमाई बाबू, कितनी मोटी गाड़ है इसकी अह्ह्ह्ह्ह

बनवारी की सिसकी निकली और रंगी ने उसे पीछे कर लिया और उसे संयम रखने को कहा

छत पर हल्की हलचल से रज्जो फिर सतर्क हुई और उसे अब पक्का हो गया था कि कोई न कोई उसे देख रहा था , शायद कोई नया दीवाना आया होगा उसका

रज्जो के दिल में ये ख्याल आते ही उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और फिर उसने सोचा क्यों न अपने इस नए दीवाने को खुश कर ही दिया जाए

और उसने अपना पेटीकोट चूचों के खोलकर कमर में ढीला कर दिया और घुटनों से खींच कर जांघों तक कर दिया

दोनों ससुर दामाद की चेहरे पर मुस्कुराहट फैलने लगी ,अब रज्जो की मोटी मोटी चूचियां नंगी थी और पेटीकोट उसकी गदराई जांघों तक चढ़ा था






रज्जो अच्छे से अपने देह पर साबुन लगा रही थी बिना भी एक बार ऊपर देखें ।

साबुन की झाग से उसके रसीले मम्में और गुदाज चर्बीदार पेट पर फैल रहे रहे , और रज्जो हाथों से मल मल कर अपने चूचों के नीचे मैल साफ कर रही थी और दोनों हाथों में भर कर अपनी मोटी मोटी चूचियां मसल रही थी

: ओह्ह्ह बाउजी कमाल का नजारा है

: सच कहा जमाई बाबू सीईईई , पीछे वाली दरार देख रहे है

बनवारी ने रज्जो की ढीली गीली पेटीकोट के पिछले हिस्से की ओर रंगी को तकाया

पेटीकोट सिमट आकर कूल्हे के नीचे आ गई थी और रज्जो की मोटी मोटी चर्बीदार गाड़ की दरारों की झलक मिलने लगी

जिसे देख कर रंगी और आगे बढ़ गया और तेजी से अपना मूसल मसलने लगा

इस बात से बेखबर कि सूरज सर पर चढ़ आया है और उसकी परछाइयां आंगन के फर्श पर उभर आएंगी

जैसे ही रंगी की परछाई को रज्जो ने आंगन के फर्श पर बड़ा होता पाया वो मुस्कुरा उठी

: आ गया वापस उम्मम , रुक तुझे मस्त नजारे कराती हु ( रज्जो मन ही मन बुदबुदाई और अपने हाथ में लिए साबुन को अपनी पेटीकोट के अंदर डाल कर पेडू और चूत पर साबुन लगाने लगी

रज्जो ने जैसे अपनी बुर के फांकों को छुआ वो खुद गिन गिना उठा और रंगी ये नजारा देख कर बनवारी को भी आगे खींच लाया

और जैसे ही रज्जो को भनक हुई दूसरी परछाई की , उसके भीतर कामोत्तेजना का वेग उठने लगा

" लग रहा है गोदाम के आदमी है दोनों , लेलो राजा अच्छे से मजे लेलो , पूरा भोसड़ा खोल कर दिखा देती हूं " , रज्जो मन ही मन बड़बड़ाई






फिर रज्जो ने पेटीकोट आगे फैला कर अच्छे से घिस घिस कर अपने बालों वाली चूत पर साबुन लगाने लगी

लटके के रसीले मम्में और बुर की फांकों को देखकर दोनों ससुर दामाद सिहर उठे और तेजी से अपना मूसल रगड़ने लगे

" सीईईई ओह्ह्ह इन हरामियों के चक्कर में मेरी बुर पनिया रही है अह्ह्ह्ह्ह" , रज्जो मन की मन बोली और पेटीकोट के आगे से अपनी उंगली से बुर कुरेदने लगी

" अह्ह्ह्ह सीईईई को बहनचोदूओ को देख लो अपनी बहन का भोसड़ा "






: उफ्फ बाउजी जीजी तो बड़ी परेशान दिख रही है

: अह्ह्ह्ह हा जमाई बाबू , लग रहा है कमल बाबू से मिलने को बेताब है सीईईई

: तो आज मिटा दीजिए न बाउजी जीजी की बेताबी को आप

: क्या मै ( बनवारी का लंड लोहा हो गया एकदम से ) ओह्ह्ह्ह

: हा बाउजी देखिए कैसे आपके लिए ही तो जीजी अपनी चूत धूल रही है






रंगी ने बनवारी को रज्जो को उसकी चूत धुलते दिखाया , जो साबुन लगाने के बाद खिल रही है झांटों की काली झुरमुट अब उलझी नहीं थी साफ और एक सरीखे से क्यारी बना कर चूत के दोनों तरफ फैली हुई थी और रज्जो के बुर की लंबी फॉक झलक रही थी

रज्जो का नहाना हो गया था और उसने आखिर में अंतिम दर्शन कराते हुए खड़ी हुई और अपना पेटीकोट भी निकाल दिया और नंगी चलती हुई तौलिया लेने गई

उसने बड़े बड़े चौड़े चूतड़ों को नंगा देख कर बनवारी का फब्बारा फूट पड़ा

: ओह्ह्ह जमाई बाबू संभालिए मुझे ओह्ह्ह

रंगी ने लपक कर बनवारी को पकड़ा और बनवारी आंखे बंद कर झड़ता रहा और झटके खाता रहा

: उफ्फ बाबू जी क्या मस्त चूतड़ है जीजी के ओह्ह्ह मेरा भी आ ही गया बाउजी ओह्ह्ह्ह सीईईई

दोनों ससुर दामाद वही खड़े खड़े छत पर अपना लंड झाड़ने लगे और फिर हट गए और टहलते हुए आगे की ओर जाने लगे जीने की तरफ

इस बात से बेखबर कि उन्हें जीने से उतरते हुए रज्जो देख चुकी थी ,क्योंकि वो अपने कपड़े छत पर डालने आ गई थी नाइटी पहन कर

और जैसे ही रज्जो ने अपने बाउजी और बहनोई को देखा उसकी आंखे सन्न रह गई

: हाय दैय्या ऊपर ये दोनों थे

तभी उसकी नजर छत पर गिरे हुए वीर्य के दाग पर गई और उसकी आंखे बड़ी हो गई ।

इधर दोनों ससुर दामाद निडर और बेफिक्र नीचे अपने कमरे में आ गए थे

चमनपुरा

राज अपनी दुकान पर बैठा हुआ था और बबलू काका थोड़े परेशान दिख रहे थे , ग्राहकों को डील करके वो चल कर राज के पास आए गल्ले पर ।

: छोटे सेठ वो आ रही है

: क्या इतना जल्दी ? मैने 2 बजे कहा था न

: हा लेकिन वो नहीं मानी सेठ जी मिलने के लिए बावरी हुई है , बोली है कि निकल गई है घर से

: सेठ जी मिलने के लिए मतलब ? आपके क्या कह कर बुलाया उनको ?

बबलू काका का चेहरा सफेद पड़ने लगा

: माफ कीजिएगा छोटे सेठ जी , मै अगर उसे कहता कि आप बुला रहे है तो वो नहीं आती , मजबूरन मैने झूठ बोला था

: कितना समय लगेगा उनको आने में ?

: बस थोड़ी ही देर में ... लीजिए आ गई

तभी बाहर एक ई रिक्शॉ रुका और उसमें से एक मस्त गदराई हुई 40 42 साल की बड़े बड़े रसीले मम्में और चर्बीदार कूल्हे वाली औरत उतरी

काफी समय बाद राज ने गायत्री काकी को देखा था






: नमस्ते छोटे सेठ ( गायत्री आते ही राज को नमस्ते बोली)

: अरे काकी आओ आओ अंदर चलते है

राज उसको लेकर केबिन में आ गया

गायत्री थोड़ी उलझन में थी कि यहां तो रंगीलाल को होना चाहिए था फिर राज बाबू कैसे

राज ने बबलू को पानी लाने के लिए भेज दिया

: काहे शर्मिंदा कर रहे है छोटे से , अब मर्द से सेवा लेकर पाप लूंगी

: और बताइए कैसी है आप

गायत्री थोड़ी असहज हो रही थी और बार बार बबलू को देख रही थी ।

: जी अच्छी हु छोटे सेठ , आप बताइए

: बस आप आ गई तो मै भी ठीक हो जाऊंगा हीहीही

गायत्री बस फीकी मुस्कुराहट से राज को देखा और फिर बबलू को इशारा किया कि उसे बात करनी है ।

राज थोड़ा थोड़ा समझ रहा था और वो उठ कर झूठ मूठ का मोबाइल कान पर लगाता हुआ केबिन से बाहर आ गया

थोड़ी देर बाद वो कान लगा कर अंदर की बात सुनता है तो गायत्री बबलू काका से बहस कर रही थी

: ये सब क्या है , आपने कहा था कि सेठ जी ने बुलाया है

: तो क्या करु गायत्री तू मान नहीं रही थी और वो समान छोटे सेठ का ही है ।

: भला उनको उसकी क्या जरूरत होगी

: देख गायत्री तू बहस मत कर , छोटे सेठ ने कल ही किसी को वादा किया है वो समान देने का और तेरी वजह से देर हुई ।

: किसको ?

: वो सब मुझे नहीं पता , तू समान लाई है या नहीं

: हा लाई हूं ( गायत्री उखड़ी हुई आवाज में बोली ) लो ये रखो , पता होता सेठ जी नहीं आयेंगे तो एक आखिरी बार डाल कर खुद को भुला तो लेती

: अरे मेरी जान , मै हूं न मै डाल देता हूं अंदर चल ऊपर

: धत्त नहीं मुझे नहीं करना कुछ, छोटे सेठ क्या सोचेंगे मेरे बारे में

: अरे मेरी भोली , छोटे सेठ बहुत अच्छे है और उन्हें पता है कि तू यहां क्यों आई है

: क्या ? हाय राम !! क्या आप भी , हटिए मुझे नहीं रुकना फिर

: अरे क्या हो गया , इतना क्या सोच रही है , वो हमें डिस्टर्ब नहीं करेंगे । मुझे भरोसा है उनपर

गायत्री की बुर पहले से ही रंगीलाल के लंड के लिए मचल रही थी और अब तो मोटा डिल्डो भी हाथ से जा रहा था , अब अगर वापस चली गई तो बबलू शाम को थक कर आयेगा काम से तो सारी रात उसे तड़पना पड़ेगा

: क्या सोच रही है , ऊपर कमरे में चले ?

: ऊपर कमरे में ?

: हा !!

तभी गायत्री की नजर केबिन ने लगे टीवी पर गई जिसपर ऊपर के कमरे में लगे कैमरे के लाइव फुटेज चल रहे थे ,

गायत्री एकदम से हड़बड़ा गई

: नहीं नहीं ऊपर नहीं, कमरे में कैमरा लगा है और छोटे सेठ देखेंगे तो

: ओह फिर ?

: यही कर लें ? ( गायत्री कुछ सोच बोली )

: क्या यहां ? लेकिन छोटे सेठ

: वो आप जानो अब , लेकिन मै ऊपर नहीं जाऊंगी

: अच्छा ठीक है देखता हूं मै , बात करता हूं छोटे सेठ से ,

इतना बोलकर बबलू बाहर आया और राज वहां से हट गया ।

बबलू राज के पास बाहर आया और खाली दुकान देख कर धीरे से बोला

: छोटे सेठ एक दिक्कत है ?

: क्या हुआ , काकी लेकर नहीं आई क्या उसे ?

: नहीं नहीं, लेकर तो आई लेकिन वो ...

: साफ साफ कहिए काका , क्या बात है ?

: जी वो स्त्री हठ जानते ही है आप , दरअसल कल रात में मैने उसे मनाने के लिए थोड़ा अलग ही तरीका अपना दिया

: कैसा तरीका ?

: दरअसल मैने वो समान गायत्री के आगे से डाल दिया और खुद पीछे से लगा था और उसे इतना आनंद आया कि एक आखिरी बार वो उसे इस्तेमाल करना चाहती है

राज समझ गया कि गायत्री काकी बड़ी गर्म औरत है और दोहरे लंड का एक साथ मजा लेने का सुख मिला होगा तो उन्हें मजा आया ही होगा

: हा तो दिक्कत क्या है काका , लेकर जाइए न ऊपर ?

: नहीं उसे डर है कि आप कैमरे के देखेंगे सब ....

: अरे तो मै कैमरा ऑफ कर देता हूं बस , आप रहेंगे नहीं तो मुझे दुकान में ही बैठना न

: जी छोटे सेठ , लेकिन वो मान नहीं रही है वो कह रही है कि वो नीचे केबिन में ही .... अगर आपको दिक्कत न हो

: अह मुझे भला क्या दिक्कत होगी ( राज का लंड उसके पेंट में टाइट हो रहा था ) ठीक है लेकिन थोड़ा जल्दी रहे और थोड़ा आराम से सब हो

बबलू खुशी खुशी निकल गया वहां से और राज अपना लंड मसल कर रह गया

ये सोच कर कि उसका दुकान भी रंडी खाना सा बन गया

अभी थोड़ी देर में साला चंदू आयेगा अपनी माल लेकर

कल वो ठकुराइन भी चुद गई यहां

पापा ने भी कितने मजे किए होंगे यहां, गायत्री काकी वाली बात भी छिपा गए पापा और वो रंजू ताई

और न जाने कितनो को रगड़ा होगा पापा ने यहां?

अरे हा रंजू ताई , बबलू काका भी तो फूलपुर गांव से है ? क्यों न गायत्री काकी के बारे में इनसे ही कुछ पता लगाऊं

राज ने फौरन एक मोबाइल नंबर डायल किया और कुछ ही रिंग में उधर से फोन उठा

: हम्म्म हेलो कैसे है देवर जी

: नमस्ते भाभी , मै ठीक हूं आप कैसी है ?

: सेक्सी हॉट और मूड में हीहीही ( फोन पर पंखुड़ी खिलखिलाई )

राज का लंड फुदकने लगा पंखुड़ी की खिलखिलाहट और शरारती बातों से और वो अपना लंड मसल कर हल्के से फुसफुसाया

: अच्छा , मूड में हो तो आजाऊं उम्मम

: उम्हू आज तो आपके भइया की राह देख रही हूं , नीचे वाली कटोरी भी लबालब रखी है उन्हें ही चटाउंगी हीहीह

पंखुड़ी मस्ती भरी बातें सुनकर राज का लंड और फूल गया

: ओह्ह्ह फिर मेरी कुल्फी का क्या होगा उम्मम इसका तो ख्याल करो भाभी

: लग रहा है देवर जी के आस पास बहुत सूखा पड़ रहा

: एकदम भाभी अकाल समझती वही हुआ है , और आप भी आज बरसने के मूड में नहीं हो

: ओहो मेरे राजा , मै सच के बरसने आ जाती लेकिन परसो ही आपके भैया आ गए है और एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ रहे

राज समझ गया कि फिलहाल के लिए तो पंखुड़ी भाभी से काम नहीं हो सकता था लेकिन उसे रंजू ताई से बात करनी थी

: अच्छा भाभी ताई कहा है ? थोड़ी बात करनी थी

: वो तो खेत गई है बाउजी के साथ

राज ने जैसा सोचा था वैसा तो कुछ हुआ नहीं ,ऊपर से पंखुड़ी ने उसका लंड और फौलादी कर दिया , फिर उसके सोचा क्यों न भाभी से ही पूछा जाए क्या पता इन्हें ही जानकारी हो

: अच्छा भाभी आपसे एक बात पूछनी थी

: हा कहो न देवर जी

: वो हमारे बर्तन वाले दुकान पर बबलू काका काम करते है , गांव से ही है उनकी पत्नी

: कौन वो गायत्री

: हा हा गायत्री काकी

: क्यों क्या हुआ ? क्या किया उस रंडी ने

: हीहीही क्या भाभी कुछ भी , कितनी अच्छी तो है वो

: हाहाहा अरे मेरे भोलू देवर जी , अभी आप कुछ नहीं जानते उसके बारे में , मौका मिले तो सांड से भी अपना पतीला पिटवा ले लेकिन उस रंडी का पेट नहीं भरेगा

: क्या मतलब ?

: अरे रंडियों के तरह सारा दिन बस ब्लाउज पेटीकोट में रहती है ,कोई आ भी जाए तो बस दुपट्टा ले लेगी और बातें ऐसी मीठी मीठी करेगी कि कहो मत , जवान बूढ़े सब तैर चुके है , पर पता नहीं क्यों कुछ महीनो से सब कुछ शांत हो गया था , अब तो उसके घर लोगों का आजाना भी नहीं होता , बता रही थी बाजार में ही कही काम पर जाती है

राज को अब सारी बातें समझ आ गई थी कि कैसे बबलू की बीमारी ने गायत्री को बहका दिया था और जब उसके पापा ने इस स्थिति को समझ कर सही रास्ता निकाला तो उसने वो सब काम बंद कर दिए ।

अब चीजें राज के लिए साफ हो गई थी और उसकी दिलचस्ती वापस केबिन में जाने के लिए होने लगी थी

लेकिन दुकान तो खाली था तो फिर क्या किया जाए

राज उठ कर केबिन की ओर दबे पाव बढ़ने लगा , केबिन लगभग साउंड प्रूफ था मतलब जबतक दरवाजे पर कान न लगाओ अंदर की बात बाहर आनी लगभग ना मुमकिन ही थी

कान लगाया नतीजा गायत्री काकी की तेज मादक सीसकियो ने राज को अंदर से झंझकोर दिया और लंड एकदम अकड़ कर फूल गया , पैंट के एक बड़ा सा तंबू बनाए हुए

तभी बाहर एक और ई रिक्शॉ आई

" अरे बहनचोद बवाल , ये मादरचोद फोन नहीं किया और इसे भेज दिया "

सामने मालती आई थी और तेजी से रिक्शे से उतर कर अंदर आ गई , शायद उसने पहले ही पैसे का हिसाब कर लिया होगा रिक्शे वाले से ।

कमाल की लग रही थी टाइट जींस और टॉप में , उसके मोटे दूध एकदम शेप में थी फुले हुए और गदराई जांघों पर चिपकी हुई जींस देख कर राज का मन ललचा गया

एकदम से राज उसे देखा और उसने भी सामने से राज को स्कैन किया

राज इस बात से बेखबर था कि उसका लंड अकड़ कर उभर आया होगा पेंट में, शायद उसकी नजर पड़ गई थी और फिर एक असहज सी हो गई

: हाय मालती

: हाय राज ( एक फीकी मुस्कुराहट से वो थोड़ा नजरे चुराते हुए बोली )

: वो साला कहा रह गया ( राज ने हक से कहा जिसपर मालती मुस्कुरा रही थी)

: आ रहा है, एक साथ नहीं निकल सकते थे न

: ओह्ह्ह्ह हा ( राज को याद आया कि वो काम भी मालती के घर ही करता है न )

: अंदर चले ?

: अरे हा , आओ ऊपर

फिर राज मालती को आगे कर ऊपर जीने की सीढ़ियां चढ़ने लगा ,जींस में उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ फूले हुए दाएं बाएं उठ रहे थे






राज का मन था अभी उन्हें काट ले लेकिन दोस्त का माल था कैसे करता ।

वो उसे कमरे तक ले गया

: बैठो तुम , मै आता हूं

मालती कुछ सोच रही थी कमरे में खड़े होकर कमरे में लगे सीसीटीवी को देख कर और राज वापस जाने को हुआ , वो कुछ पूछना चाहती थी इस बारे में राज से लेकिन हिम्मत नहीं कर पाई और राज चला आया वापस

उसने चंदू को फोन घुमाया लेकिन उसने नहीं उठाया

धीरे धीरे 15 20 मिनट हो गए और बबलू काका बाहर नहीं आए

अब तो लंड और भी फूलने लगा कि क्या चल रहा है अंदर

थोड़ा सोच कर राज ने दरवाजा खटखटाया

: काका हो गया क्या ?

एकदम से केबिन में चुप्पी हो गई और 1 मिनट बाद केबिन का दरवाजा खुला

: जी छोटे सेठ ( बबलू दरवाजे की ओट में खड़ा होकर बोला)

राज ने अंदर देखा तो गायत्री की साड़ी फर्श पर दिखी लेकिन वो शायद दरवाजे के पास खड़ी थी छिप कर

: वो दरअसल उपर एक गेस्ट आए हैं तो नाश्ता मंगाना था , आपको टाइम लगेगा

तभी एकदम से बबलू के चेहरे के हाव भाव बदले जैसे कोई उसे निचोड़ रहा हो , समझ गया कि गायत्री नीचे बैठी दरवाजे के पास उसका लंड चूस रही थी

: दूसरा चल रहा है ( राज ने मुस्कुरा कर फुसफुसाया )

तो बबलू ने हा ने सर हिलाया

: ठीक है लेकिन थोड़ा दुकान पर ध्यान दीजियेगा मै ही कुछ लेकर आ रहा हूं ओके

राज हट गया और बबलू दरवाजा लगाने वाला था कि राज ने फिर से टोका

: अह सुनिए काका

: जी छोटे सेठ ( बबलू वापस दरवाजा से मुंह निकाल कर बोला )

: आपको भी कुछ चाहिए

: नहीं ( बबलू ने न में सर हिलाया )

: और काकी को ?

: उसे जो चाहिए वो मिल गया है अह्ह्ह्ह गायत्री आराम से ओह्ह्ह्ह

राज हट गया और उसने जाकर पास में ही 3 जूस बोला और वापस आ गया ।

इस बार केबिन का दरवाजा खुला था और गायत्री काकी की सिसकिया आने लगी थी

: ओह्ह्ह सीई बहुत टाइट है ओह्ह्ह्ह सीई आराम से ओह्ह्ह

: वो तूने नीचे उसे डाल रखा है इसीलिए टाइट हो रहा है इसके ओह्ह्ह्ह लेकिन बहुत अच्छा लग रहा है गायत्री ओह्ह्ह्ह सीईईई कितनी मखमली गाड़ है तेरी ओह्ह्ह

: उफ्फ कितना फूल जाता है यहां आपका लंड ओह्ह्ह्ह घर पर इतना बड़ा क्यों नहीं होता आपका सीईईईई

: उफ्फ मेरी रंडी तुझे सेठ जी चुदाई कराता देख लंड और फूल जाता है उफ्फ मन करता है जब सेठ जी तुझे आपके लंड पर बिठाए तो पीछे से मै भी घुसा दु ओह्ह्ह ले मेरी जान ऐसे ही ओह्ह्ह दो दो लंड का मजा देने का मन करता है तुझे

: उफ्फ मेरे राजा ओह्ह्ह्ह तो किया क्यों नहीं , सीईईई कितना मजा आ रहा है ऐसे एक साथ दो दो लंड उम्मम

: कैसे करता मेरी जान , जब वो तेरे पास होते है तो मुझे दुकान देखनी होती है न ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह्ह

: उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईईईई चोदो मुझे और तेज उम्मम मेरे राजा लेकिन इस बार आएंगे सेठ जी तो चाहिए मुझे ओह्ह्ह्ह अंदर और कस लो भर दो मेरी गाड़ को ओह्ह्ह मेरे राजा ओह्ह्ह उम्ममम सीईईई ओह्ह्ह कितना गर्म है माल है ओह्ह्ह्ह

राज वहां से हट गया और बिना अंदर झांके ,मालती के लिए जूस का गिलास लेकर ऊपर चला गया

: क्या हुआ वो आया नहीं

: फोन किया मैने उसको .. लो पकड़ो ( राज ने उसे जूस का गिलास दिया )

उठाया नहीं वो फिर से ट्राई करता हूं

राज ने खड़े खड़े वही फिर से चंदू को फोन घुमाया लेकिन उसने फोन नहीं उठाया और मालती परेशान होने लगी

: तुम परेशान न हो , बैठो अभी वो आ जाएगा

: मम्मी ने बोला है कि जल्दी आने को और ये है कि समझता नहीं

राज क्या ही बोलता , उसे भी चंदू पर गुस्सा आ रहा था कि भोसड़ी का चोदने के लिए माल बुला कर खुद भी आया

: तुमने ट्राई किया कॉल करके ?

: नहीं न यार , मम्मी के फोन आते तो टेंशन होती इसीलिए फोन नहीं लाई मै

: अच्छा ठीक है थोड़ा देर रुको ? नहीं तो वापस चली जाना

: ओके

फिर राज वापस जाने लगा नीचे तो मालती ने उसे टोका

: अच्छा सुनो , वो नीचे के लोग चले जाए तो बताना , मै नीचे आ जाऊंगी यहां अकेले अच्छा नहीं लग रहा

"नीचे के लोग " इसका मतलब मालती नीचे आई थी जब मै जूस लेने गया था , राज खुद से बड़बड़ाया

" ओह साला दरवाजा भी खुला था और उसने तो सब सुना ही होगा " , ये सोच कर राज का लंड और फूलने लगा मालती की नजर उसके लंड पर गई

: सॉरी वो मेरे नौकर की बीवी है , वो खाना लेकर आई थी और ये साला भीड़ गया सॉरी

: अरे यार मुझे उससे नहीं मतलब है , बस वो लोग चले जाए तो बताना ( मालती थोड़ा मुस्कुरा कर बोली )

राज समझ गया कि उसे बहुत explain करने की जरूरत नहीं है ।

वो वापस चला आया नीचे

थोड़ी देर बाद बबलू दुकान में आया और इशारे में कहा सब ठीक है ,

फिर राज खुद जूस के गिलास लेकर केबिन में गया

: अंदर आजाऊँ काकी ?

: अह हा छोटे सेठ आ जाइए

राज जूस का गिलास लेकर अंदर गया तो गायत्री दरवाजे पर खड़ी थी साड़ी पहन चुकी थी बस पल्लू ले रही थी इतने में राज केबिन में दाखिल हुआ

हल्की सी उसके मोटे चर्बीदार चूचों की घटिया दिखाई दी और राज ने नजरे फेर ली

इस पर गायत्री मुस्कुरा दी

: अरे इसकी क्या जरूरत थी बाबू

: अरे लीजिए और पीजिए

गायत्री ने जूस लिया और गटक गई और फिर उठ कर अपना झोला लेकर जाने लगी

: अच्छा मै चलती हूं , खेत भी देखना है

: एक मिनट काकी रुकिएगा

: क्या हुआ ?

: बस यही चाहिए

राज ने लपक कर उसके झोले से डिल्डो को निकाल लिया और गायत्री उदास हो गई और वापस जाने लगी

: काकी सुनिए

: हा बेटा ( उखड़े हुए स्वर वो बोली )

: मै आपके लिए दूसरा मगा दूंगा , ये किसी और का है प्लीज

गायत्री समझ गई और थोड़ी लजा भी गई फिर मुस्कुरा कर बोली

: तू न एकदम अपने पापा जैसे हो , बिंदास और साफ दिल

राज ने सही मौका देखा और बोला

: हा और तकलीफें भी पापा जैसी है मेरी भी ( उसका लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था पैंट में)






गायत्री की नजर पड़ी उसके बड़े से लंड पर और समझ गई हथियार सेठजी जितना ही तगड़ा है , जवान खून है देर तक टाइट रहेगा

: पहले मेरी तकलीफ दूर करो फिर मै आपकी , ठीक है ( गायत्री मुस्कुराई )

: हा लेकिन आज कुछ ज्यादा ही तकलीफ लग रही है ( राज ने तुक्का फेंका )

गायत्री थोड़ी असहज हुई और एक बार बाहर देखा , बबलू को ग्राहकों के साथ व्यस्त और झोला रख कर बैठ गई नीचे राज के पैरो में

वही चमनपुरा में ही निशा भी अपने पैरों के बल बैठी हुई थी और उसके सामने थे उसके पापा और भाई

जो दोनों अपना लंड हिला रहे थे उसके आगे और निशा पूरी तरह से तैयार थी उनके लंड मुंह में लेने के लिए

जारी रहेगी

(पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें

अगर अगले 24 घंटे में 25 लाइक्स आ जाते है तो कल भी एक अपडेट पोस्ट कर दिया जाएगा )
 
UPDATE 041

पढ़िए अनुज रागिनी की रोमांच भरी दास्तान






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थोड़ी देर में फिर से ट्राई करता हूं
 
💥 अध्याय 02 💥

UPDATE 041


दिन चढ़ कर दुपहरी तक आ गई थी

अनुज की ज्यादातर पीरियड आज खाली थी तो वो वापस निकल आया , उसके दिमाग में अब बस किसी तरह से एक मोबाइल और सिम का जुगाड नाच रहा था

बंदा भी एक था ... राहुल

अनुज को उससे थोड़ी चिढ़ सी होती थी , इसीलिए उसने राहुल से दूरी बनाने लगा था । ऐसा नहीं था कि अनुज को राहुल से कुछ लाभ नहीं थे , राहुल के संगत में ही उसने पहली चूत का स्वाद लिया था और मौका पाकर शालिनी को लपेट लिया। लेकिन फिर वो राहुल से दूरी बनाता था क्योंकि कही न कही आप मां के लिए पोजेसिव था , राहुल के फ्री माइंड का लड़का था जिसे चूत चोदने से मतलब है किसकी हो फर्क नहीं पड़ता , मिल बाट कर खाने में यकीन रखने वाला, और वैसी ही दिलदारी थी उसकी। वही अनुज थोड़ा छिपा हुआ और अपनी चीजों पर अपना अधिकार समझने वाला ... जैसे फिलहाल उसकी सबसे कीमती चीज थी उसकी मां रागिनी ... अनुज जानता था कि राहुल से मिलने का मतलब है फैमिली सेक्स पर बातचीत और अनुज तो इतना पोजेसिव था अपनी मां को किसी से बांटना तो दूर , वो ये भी नहीं चाहता था कि राहुल उसकी मां लेकर कुछ बोले भी । यही वजह है कि अनुज थोड़ा हिचक रहा था राहुल से मदद लेने में

तमाम जुगाड और तरीके अपना कर भी वो नए मोबाइल का जुगाड नहीं फिट कर पा रहा था

कालेज से लौटते वक्त एक दुकान पर गया भी कि कोई 2nd हैंड पिस मिल जाए , वो भी उसके पापा के पहचान वाला निकला । मजबूरन अनुज को झूठ बोलना पड़ा कि उसे नहीं, उसके एक दोस्त को जरूरत है घर पर इस्तेमाल के लिए। उस पर भी दुकान वाले ने एक हफ्ते का समय मांग लिया

निराशा ही हाथ लगी अनुज के , अब तो राहुल ही एक मात्र सहारा था ।

ऐसी निराशा में भी आशा की तरह खिल रही थी उसकी मां , दुकान पर ग्राहकों के बीच उसने रागिनी को देखा

दिल उम्मीदों से भर आया और पेंट में लंड हरकते करने लगा

दुकान में दाखिल होते हुए रागिनी ने अनुज को देखा , फिर घड़ी देखी कि ये तो समय से पहले आ गया , फिर वो थोड़ी मुस्कुराई और ग्राहकों से डील करने लगी

अनुज पीछे वाले कमरे में गया और बैग रख कर बैठ गया अपने जूते उतारते हुए उसने देखा अपनी मां को काउंटर पर खड़े हुए ग्राहकों को समान देते हुए

उफ्फ वो बड़े बड़े गोल मटोल चर्बीदार चूतड़ों के उभार , साड़ी में पूरा गोल भूगोल , कमर की मुलायम चर्बी और ब्लाउज से झांकती गुदाज पीठ

अनुज ने नथुनों में उसके मा के जिस्म की महक आने लगी थी, वो महक जो उसने बीते रात समा लिया था अपनी सांसे में , अनुज का लंड उसके पैंट में बिस्तार लेने लगा और उसकी नजरे अपनी मां के बड़े भड़कीले चूतड़ों पर जम गई

तभी रागिनी पलटी और उसने अनुज को देखा , मदहोश आंखे और बेचैन हालात

रागिनी समझ गई उसका बेटा कामुक हो रहा है और फिर कुछ समान लेने के लिए वो मुस्कुराती हुई पीछे वाले कमरे में आई , इस अदा से अपने मोटे चूचे को सूती ब्लाउज में हल्की उछालती हुई कि अनुज का गला सूखने लगा

: क्या हुआ उम्मम ,इतना जल्दी

: आज पीरियड खाली था

रागिनी चूड़ियों का सेट निकाल रही थी और मैचिंग चूड़ियां खोजने में वक्त लग रहा था , बाहर ग्राहक आपस में बाते कर रहे थे

अनुज पीछे वाले कमरे के दरवाजे से लग कर बैठा था और उसकी मां दिवाल के पीछे थी , सबकी नजरों से दूर

अनुज की नजरे अपनी मां पर थी जो कमर से झुक कर अपने कूल्हे हवा में उठाए हुए चूड़ी के डब्बे खोज रही थी

झुके होने से रागिनी के चूतड़ खूब फैल गए थे साड़ी में , जिन्हें देख एक अनुज का हाथ खुद ब खूब अपना लंड को मिसने के लिए बढ़ गया

अंदर से बेताब और ललचाया हुआ अनुज , कभी बाहर दुकान में ग्राहकों को देखता तो कभी अपनी मां के फूले हुए चूतड़ों को

रहा नहीं गया उससे वो उठ कर चला गया अपनी मां के पीछे






और बड़े ही आहिस्ते से उसने अपनी मां के मुलायम फूले कूल्हे को सहलाया

रागिनी एकदम से सिहर उठी और जब उसे अहसास हुआ कि ये अनुज है तो मुस्कुरा उठी

: अनुज क्या कर रहा है बेटा , दुकान में देख न

: देख तो रहा हूं मम्मी

रागिनी ने गर्दन फेर कर देखा तो अनुज कमरे की खिड़की से बाहर दुकान में देख रहा था लेकिन उसके पंजे अभी भी उसकी गाड़ को सहला रहे थे

: मम्मीई

: हा बेटा

: मन कर रहा है ? देदो न

: क्या ? ( रागिनी आंखे बड़ी कर मुस्कुराती हुई खड़ी होकर उसकी ओर पलटी )

: आप बहुत सेक्सी लग रहे हो साड़ी में

: हीही पागल , हट यहां से

: मम्मी बस बैठ जाओ न

अनुज तेजी से अपनी बेल्ट खोलने लगा , मानो वासना ने उसमें कितनी तेजी ला दी हो

रागिनी खिलखिलाई और उसे धकेल कर बाहर चली गई

अनुज का लंड अकड़ कर फूल गया और उसने वापस देखा अपनी मां के चूतड़ों साड़ी में उछल कूद करते हुए

काउंटर पर खड़े होकर रागिनी ने वापस मुड़ कर मुस्कुराते देखा तो अनुज नहीं दिखा उसे

लेकिन अनुज ने सब कुछ देखा उस खिड़की से

और अपना लंड निकाल लिया बाहर

तनाव से उसके लंड में दर्द शुरू हो गया था और कालेज की पैंट टाइट थी

थोड़ी देर रागिनी वापस आई चूड़ियां लेने

: अरे पागल है क्या ?

रागिनी अनुज को ऐसे लंड निकाल कर बैठा देख बिफर पड़ी

: क्या करु दर्द हो रहा है तो ?

: हम्म्म जानती हूं तेरा क्यों दर्द हो रहा है ऐसे ठीक हो जाएगा न

ये बोलकर रागिनी अपने चौड़े मुलायम चूतड़ों को लेकर अनुज के गोद में बैठ गई

अनुज का लंड अपनी मां की गुदाज मुलायम गाड़ का स्पर्श पाकर और फूलने लगा और अनुज ने आंखे बंद कर ली






रागिनी उसे सताते हुए उसके लंड पर बैठी हुई चूड़ियों का सेट निकाली और उठ कर मुस्कुराती हुई बाहर निकल गई

कुछ 12 15 सेकंड का खेल रहा होगा और अनुज की हालत खराब हो गई । उन पलो में न अनुज कुछ बोल पाया कुछ समझ गया

महसूस हुआ तो बस इतना कि उसका लंड घुसता जा रहा है किसी मुलायम चर्बीदार खोल में गहरे तक और नसे उसकी और फड़कती रही , लंड और अकड़ता रहा ।

जब रागिनी हटी तो उसका सुपाड़ा लाल था , तप रहा था , आग उगल रहा था जिसकी आंच से अनुज का चेहरा भी पसीना पसीना होने लगा

उसने खड़े होकर अपना लंड हाथ में लेकर हिलाया और खिड़की से राह देखता रहा कि कब ग्राहक हटे और वो अपनी मां को वापस बुला सके ।

समय बीता

ग्राहक भी चले गए

लेकिन रागिनी वही रही काउंटर के पास सामान सहेजते हुए

आखिरकार अनुज को खुद जाना पड़ा

अनुज के आते ही रागिनी सतर्क हुई और थोड़ी उससे दूर सरक गई

चेहरे पर शरारती मुस्कुराहट, जानती थी उसका बेटा उससे चिपकने की कोशिश करेगा

अनुज ने देखा अपनी मां को मस्ती करते हुए , ना जाने क्या मिल रहा होगा ऐसे उसे तड़पा कर , अनुज सोचता है और सरक कर अपनी मां के करीब

जो काउंटर पर पड़े समान को सहेज रही थी और जल्द ही उसने वापस अपने चूतड़ों पर अनुज की हथेली को रेंगता महसूस किया






हाथों में फोल्ड कर रही ब्रा को उसने मुट्ठी में पकड़ लिया और रुक गई , जब अनुज ने उसके चूतड़ों की दरारों के इर्द गिर्द अपनी हथेली फिराई

एक करंट सा लगा उसके बदन में और पूरा जिस्म झनझना गया

वो सिहर उठी और फिर उसने गहरी सास ली

: उम्मम अह्ह्ह्ह्ह ये क्या कर रहा है तू अनुज

: करने दो मम्मी , कितना सॉफ्ट है

: दुकान में है हम लोग , कोई देख लेगा हाथ हटा

रागिनी ने उसका हाथ झटक कर वापस काम में लग गई

फिर अनुज मुस्कुरा कर रागिनी को देखा और रागिनी उसकी चतुराई समझने लगी और जब उसने अनुज को झुकता हुआ देखा वो उसकी मनसा समझ गई

: नहीं अनुज मारूंगी तुझे, नहीं बोल रही हूं न

अनुज खिलखिला उठा और बैठ गया काउंटर के ओट में अपनी मां के पैर के पास , दुनिया बाजार की नजरो से छिपा

रागिनी के पैर कांपने लगे ,मानो वो इस आने वाले रोमांच के लिए तैयार नहीं थी और कब आखिर उसने ऐसे खुली जगह में छिप कर मस्ती थी

आखिरी बार राज ने शायद उसके दूध चुभलाए थे वो भी पीछे के कमरे में

लेकिन अनुज वो तो दुकान में ही शुरू हो गया था ।

जो कुछ भी था सब कुछ एक बंद कमरे में था लेकिन ये तो ....

अनुज ने पंजे रागिनी की साड़ी के अंदर घुस गए थे , उसकी गुदाज मुलायम जांघों को सहलाते हुए और वो ऊपर से उसके उभरे हुए चूतड़ों को चूम रहा था

: नहीं बेटा मान जा न सीईईई ओह्ह्ह उम्ममम गिर जाऊंगी मै

अनुज अपने चेहरे को रागिनी की साड़ी के ऊपर से उसके चूतड़ों पर अपने चेहरे घुमा रहा था ,महसूस कर रहा था असल वो कितनी ज्यादा मुलायम है जितना वो अपनी मां के चूतड़ों को कल्पना करता था

नथुनों में भर भर अपने मा के जिस्म की महक समा ले रहा था और रागिनी ने काउंटर का सहारा लेकर खड़ी थी ,अपनी सांसों पर काबू करती हुई

तभी उसे कुछ अहसास हुआ , उसके पैरो में रोम रोम खड़े होने लगे , एक सर्द सिहरन भरा अहसास कैसे वो नीचे ने निर्वस्त्र हुई जा रही थी






धकधक करके उसकी सांसे चढ़ने लगी , चेहरे पर पसीना होने लगा और फिर भी अपनी भावनाओं को पूरी कोशिश कर काबू करती हूं

नीचे से अनुज ने उसकी साड़ी उठानी शुरू कर दी थी और रागिनी काउंटर को और मजबूती से पकड़ने लगी

अब उसकी आवाज गायब सी थी ,जो कुछ कहानी बयां हो रही थी उसकी गर्म सांसों से

अनुज उसकी साड़ी ऊपर कर दी और उसके नंगे चूतड़ों को सहलाने लगा






: अह्ह्ह्ह सीईईईईई मेरा बेटा उम्मम ये क्या करवा रहा है तू ओह्ह्ह्ह मै ... अह्ह्ह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह नहीं रुक जा ओह्ह्ह सीईईई





अनुज नहीं माना रागिनी के नंगे चूतड़ों को सहलाते हुए उन्हें चूमना जारी रखा

तभी एकदम से रागिनी स्थिर हो गई बाहर उसके परिचय की कोई महिला थी

: अरे सेठानी , मेरा समान आया

: अह न नहीं दीदी , बस एक दो रोज में आ जाएगा ( रागिनी हकला कर बोली )

: क्या हुआ तबीयत तो ठीक है न तेरी

: जी .... अह जी अच्छी हु ( रागिनी फीकी मुस्कुराहट से बोली ) बस थोड़ा काम ही थकान है , सोनल के पापा भी नहीं है

: अच्छा अच्छा , और सोनल बिटिया का सब ठीक है

: जी दीदी सब ठीक है ....

: अच्छा आती हूं किसी रोज जरा देर हो रही है ( सड़क पर खड़ी वो औरत वही से चली गई

: हा ... अह्ह्ह्ह्ह सीईईई क्या कर रहा है बेटा उम्मम रुक जा नहीं उम्मम

अनुज थोड़ा देर के लिए रुका जरूर था लेकिन अब वो आगे बढ़ गया था , उसने रागिनी की दरारों में जीभ फिराना शुरू कर दिया था और रागिनी एकदम से अकड़ गई

उसने अपने चूतड़ों को कस लिया और अनुज को रोकने लगी

: रुक जा अनुज यहां अंदर चल

अनुज थम गया और उठ कर अपने मुंह पोंछ कर मुस्कुराने लगा

रागिनी ने नजरे उठा कर उसे देखा और मुस्कुराइए

अनुज रागिनी को लेकर पीछे वाले कमरे में गया और

दोनों ने कमरे में वही खिड़की वाली जगह पर खड़े हो गए

: कितना बेसब्रा है रे तू , कही वो रुबीना चढ़ आती दुकान पर तो

अनुज दांत दिखा कर हसने लगा

: बदमाश कही का

: मम्मी आई लव यू

( अनुज ने बगल से खड़े होकर अपनी मां को कमर से पकड़ लिया और उसके गाल चूम लिए)

: कुछ प्यार व्यार नहीं करता तू , एकदम अपने पापा जितना ठरकी है तू भी , तुम लोगो को बस वही चाहिए

: क्या ? ( अनुज ने हस कर बोला )

: मारूंगी अभी बदमाश छोड़ मुझे अब

: उम्हू बिल्कुल नहीं, छोड़ने के लिए थोड़ी न पकड़ा है आपको

: फिर ? ( रागिनी अनुज का इरादा समझ रही थी फिर भी मुस्कुरा कर वो उसकी ओर देख कर बोली )

: मुझे चाहिए ?

: क्या ?

: वो

: क्या वो ? ( रागिनी को मजा आ रहा था जिस तरह से अनुज अभी भी बोलने में झिझक रहा था )

: बोल दूं

: हा बोल तभी न दूंगी ( रागिनी हंसी)

: पक्का

: हा पक्का

: मुझे न

: हम्मम ( रागिनी ने हुंकारी भरी )

: आपकी न

: हम्म्म

: बुर चाहिए ( अनुज हौले से रागिनी के कान में बोला )

रागिनी के कान खड़े हो गए और आंखे बड़ी कर अपनी हंसी रोकती हुई वो अनुज को देखी

: धत्त बेशर्म , ऐसे मांगा थोड़ी जाता है । इतना खुल कर तो तेरे पापा भी नहीं कहते

: तो वो कैसे कहते है

: वो कुछ नहीं कहते बस शुरू हो जाते है

: ओके ( अनुज चहक कर बोला और रागिनी को छोड़ दिया )

: ओके मतलब , अरे बोल न

रागिनी थोड़ी उलझी कि अनुज क्या करने वाला है

तभी अनुज ने अपनी मां को घुमाया और वापस उनको खिड़की के पास दिवाल से लगा दिया

: अह्ह्ह्ह बदमाश , जबरजस्ती करेगा अब मेरे साथ उम्मम

: नहीं तो , आपने खुद बोला कमरे में चल

: दुष्ट है तू रे बहुत , अगर कोई ग्राहक आया तो

: इसीलिए तो आप खिड़की से बाहर देखना

अनुज हस कर वापस पीछे से रागिनी की साड़ी उठाने लगा और उसके नंगे चूतड़ों को छूने लगा

रागिनी अब खुल कर अनुज के स्पर्शो पर प्रतिक्रिया देने लगी

: उम्मम बेटा ओह्ह्ह्ह

: मम्मी ( अनुज अपने नथुनों को रागिनी के गाड़ की नंगी दरारों में लगा कर उनकी गंध अपने नथुनों में भरता है बोला)

: सीईईई हा बेटा बोल न

: मस्त है

: क्या

: आपकी गाड़ उम्ममम थोड़ा ढीला करो न

रागिनी अनुज की बातों से पिघल रही थी और उसने अपनी टाइट चूतड़ों को ढीला कर दिया , नतीजा उसके पूरे बदन में कंपकंपी होने लगी

अनुज ने अच्छे से दोनों पंजों से अपनी मां की गाड़ को फाड़ कर अपनी जीभ की टिप को रागिनी के गाड़ की सुराख पर रखा

: उफ्फफ अनुज सीईईई बेटा क्या कर रहा है

अनुज ने बिना कुछ बोले ढेर सारी लार मुंह में घुलाई और जीभ से सब अपनी मां की गाड़ के सुराख पर लीपने लगा , रागिनी मचल उठी उसी गिले गिजगीजे अहसास से और अनुज अच्छे से अपनी मां के चूतड़ों के सुराख को चाटने लगा

रागिनी खिड़की का सालीया पकड़ झुक गई और गाड़ और फैला दिया अनुज के आगे






अनुज को और जगह मिल गई और जीभ की टिप से रागिनी की गाड़ कुरेदने लगा और चाटने

रागिनी सिसकती रही उसकी बुर कुलबुला रही थी , खुजा रही थी , बुर का रस उसकी चूत में ऐसे महीन धार में रिस रहा था जैसे कोई कीड़ा रेंग रहा हो

उसने अपने हाथ आगे से अपनी बुर पर रख दिया और साड़ी के ऊपर सहलाने लगी

जैसे ही अनुज को अपनी मां की बेचैनी की खबर मिली वो उसे घुमा दिया , अब रागिनी की पीठ दिवाल से लग गई थी और अनुज उसकी साड़ी उठा कर झपट गया अपनी मां की रस छोड़ती बुर पर

: ओह्ह्ह सीईईई आराम से बेटा उम्ममम कितना अच्छा ओह्ह्ह्ह अच्छे से उम्मम ऐसे चाट ले ओह्ह्ह मेरे लाल उफ्फफ तेजी जीभ मुझे पागल कर रही है बेटा उम्मम






अनुज अपनी मां की जांघों को पकड़े हुए तेजी से अपनी जीभ को उसकी बुर की फांकों में नचा रहा था

रागिनी के पैर कांप रहे थे और वो उसका सर पकड़ कर खड़ी थी सिसक रही थी , पूरी कोशिश में खुद को सम्भाल रही थी

नीचे अनुज का लंड रॉड जैसा अकड़ गया था उसके पेंट में और सुपाड़े में जबरजस्त खुजली हो रही थी

वो उठ खड़ा हुआ और रागिनी ने उसे मदहोश और वासना से लबालब आंखों से देखा

अनुज ने बस अपना पैंट खोला और लंड बाहर निकाल

रागिनी समझ गई और सरक पर बैठ गई अनुज के पैरों में

एक बार फिर से अनुज का लंड उसकी मां के मुंह में था

अनुज ने आंखे बंद कर अपनी मां की नर्म मुलायम होठों की ठंडक अपने लंड पर महसूस की और जैसे ही रागिनी ने उसके सुपाड़े को चुभलाया अनुज सिसक पड़ा , उसका बदन अंदर से सिहर उठा






: ओह्ह्ह्ह मम्मीईईई अह्ह्ह्ह सीईईई अह्ह्ह्ह ऐसे ही चूसो उम्मम आप बहुत अच्छे हो

: चुस्ती हूं इसीलिए

: अह्ह्ह्ह नहीं

: फिर

अनुज के पास कोई जवाब नहीं था और वो सिसक कर मुस्कुरा पड़ा

: बदमाश कही का

और रागिनी वापस उसका लंड गिला करने लगी

उसके लंड को गले तक उतारने लगी

: उम्मम यश मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह और अंदर उम्मम अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फक्क्क् यू मम्मी ओह्ह्ह्ह गॉड सीईईई ओह्ह्ह






अनुज रागिनी का सर पकड़ उसके मुंह में पेलने लगा और सिसकने लगा

: अह्ह्ह्ह मम्मी मुझे चाहिए , मुझे आपको पेलना है आओ जल्दी

अनुज ने अपना लंड निकाल दिया बाहर और रागिनी ने भी अपनी सांसे कंट्रोल की

और उठ गई

: कहा पर

रागिनी बोली और


एक सवाल ये भी कह गई कि कहा चोदना चाहता है वो अपनी मां को , बिस्तर पर करेगा तो दुकान की देखरेख नहीं हो पायेगा तो कैसे करेगा

अनुज ने दिमाग दौड़ाया और वही पास में कमरे के दरवाजा के पास उसे ले गया और हल्की गैप से दरवाजा खुला रखा कि रागिनी बस बाहर देख पाए

रागिनी दरवाजे को पकड़ कर झुक गई

अनुज ने उसकी साड़ी समेत कर पीछे से उठाई और उसके नंगे चूतड़ों समेत उसकी बुर की फांके भी दिखने लगी

अनुज ने अपना सुपाड़ा सेट किया

: मम्मी डालू

: हा जल्दी कर कोई आ जाएगा अह्ह्ह्ह सीईईईईई कितना टाइट है रे ओह्ह्ह्ह उम्ममम

अनुज ने अपना लंड उतार दिया अपनी मां की बुर में

: आपकी भी कितनी कसी है ओह्ह्ह सीईईई फक्क यू मम्मी ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू माय सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह सीईईई ओह्ह्ह गॉड






रागिनी से ज्यादा अनुज सिसक रहा था , जैसे जैसे उसका लंड उसकी मां की कसी बुर में जा रहा था और वो करारे तेज झटके देकर चोदने लगा रागिनी को ,उसकी चर्बीदार चूतड़ अनुज को रिवर्स भेज रहे थे

वो गुदाज मुलायम स्पंजी स्पर्श अनुज को अपनी जांघ और लंड के आस पास बहुत भा रहा था ,बार बार वो दुगनी जोश से अपना लंड रागिनी की बुर में डालता

नतीजा रागिनी की बुर में जबरदस्त हलचल मचने लगी

: ओह्ह्ह हा बेटा ऐसे ही और कस कर हा मेरे राजा बेटा ओह्ह्ह्ह उम्ममम पेल मुझे उम्ममम कितना अच्छा पेल रहा है ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह

: मम्मी !!

: हा बेटा उम्मम

: पापा आ जाएंगे तो भी पेलने दोगे न ( सहज सा सवाल उठा था अनुज के मन में )

: हा बेटा क्यों नहीं , वैसे भी तेरे पापा आज भी आयेंगे

: क्या सच में मम्मी

: अह्ह्ह्ह हा बेटा रुक मत न ओह्ह्ह आने वाला है मेरा ओह्ह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह सीईईई और तेज हा मेरे लाल उफ्फफ ओह्ह्ह और कसके उम्ममम ऐसे ही पूरा अंदर तक भर दे बेटा ओह्ह्ह्ह सीईईई

: लो मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स अह्ह्ह्ह्ह सीईईई फक्क यू मम्मी ओह्ह्ह्ह गॉड सेक्सी हो आप ओह्ह्ह कितना मस्त चुदवाती हो ओह्ह्ह मम्मीइई ओह्ह्ह्ह यशस्स मेरी सेक्सी डर्टी मम्मा ओह्ह्ह्ह उम्ममम

: हा बेटा पेल ऐसे ही आ रहा मेरे ओह्ह्ह सीईईई तुझसे रोज चुदवाऊंगी मेरे लाल ओह्ह्ह कितना अच्छा कर रहा है ओह्ह्ह्ह

: ऐसे ही छिप छिप कर क्या मम्मी ?

: हा बेटा तेरे पापा से छुप कर ऐसे ही दूंगी तुझे ओह्ह्ह्ह

: और भइया....

: तेरे भइया के सामने दूंगी ओह्ह्ह्ह बेटा आ रही हूं मै रुकना मत ओह्ह्ह पेलते रह मेरे लाल ( रागिनी झड़ने लगी और उसने अपने चूत के छल्ले को कस लिया नतीजा अनुज के लंड पर दबाव बढ़ गया )






: सच में ओह्ह्ह्ह गॉड मम्मी कितनी गंदी हो आप , आपके मुंह से गंदा गंदा सुनना कितना अच्छा लगता है ओह्ह्ह मम्मी मै आज आपको भैया के सामने नंगा करके पेलूंगा ओह्ह्ह्ह यशस्स ओह्ह्ह्ह मम्मी आ रहा है मेरा ओह्ह्ह गॉड फक्क यश ओह्ह्ह्ह मम्मीई अंदर डाल दूं

: अह्ह्ह्ह डाल दे बेटा जहां तेरा मन है ओह्ह्ह्ह उम्ममम कितना गर्म है

: ओह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह उम्ममम ओह्ह्ह फक्क यू भर दूंगा आपकी बुर को ओह्ह्ह उम्ममम अह्ह्ह्ह फक्क यू मेरी सेक्सी मम्मा ओह्ह्ह्ह गॉड फक्क यश

अनुज झड़ गया और हांफता हुआ बैठ गया वही दिवाल से लग कर

रागिनी भी हांफती हुई घुटने के बल होकर औंधी हो गई

अभी भी उसके चूतड़ नंगे थे और हवा में

: आई लव यू मम्मी

: मै भी मेरा बच्चा

रागिनी ने गर्दन फेर कर अनुज को देखा और मुस्कुराई ।

एक ओर जहां अनुज दरवाजे की ओट में छिप कर अपनी मां को चोदने के सफल हो गया

वही उसका बड़ा भाई राज भी जो इसी प्रयास में लगा था और अपना लंड निकाल कर गायत्री के सामने परोस चुका था , इस बात से बेखबर कि उसकी प्राइवेसी खंडित हो चुकी थी

कुछ हिल सा रहा था परछाईयो में दरवाजे के बाहर

मगर कौन ?

जारी रहेगी

( जानता हूं कि अपडेट छोटा है लेकिन मुझे पता नहीं था कि इतना जल्दी इतना अच्छा रिपोंस मिल जायेगा । आपकी प्रतिक्रियायो के लिए धन्यवाद, ऐसे ही मोटिवेट करते रहो , अपडेट फटाफट आयेंगे, भले ही छोटे बड़े क्यों न हो )
 
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