Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नवाज़ का लौड़ा अब पीछे से आरती की गांड पर साड़ी के ऊपर से दस्तक दे रहा था जैसे कह रहा हो जल्दी दरवाज़ा खोल मुझे अंदर आना है.... नवाज़ के दोनों हाथ आरती की कमर के इर्द गिर्द से आगे होक उसके हाथ को वो पकड़ लेता hai..uske बदन को चिपक के ..





और फिर मन में कहता है

अस्स्सस्स्स्स क्या बदन है आरती रन्नीई teraaaa....ab जाकर हाथ लगी है तू mere....kabse तेरे जवान जिस्म पर मेरी नज़र थी और मेरे लौड़े को बोहत तड़पाया है तेरी छूट ने.... लगता है उसका बदला लेने का वक़्त आ गया है

….

इधर नवाज़ से चिपक के खड़े होने से आरती बेचैन होने लगी थी … वो बहुत असमंजश में फांसी थी की वो आगे क्या करे .. यहाँ से चले जाये या नवाज़ को पीछे धकेल दे .. वो जानती थी उसने ऐसा नहीं किया तो नवाज़ गलत मतलब ज़रूर niklega...jo वो नहीं चाहती थी ..... वो सोचने लगी ये भी हो सकता था की नवाज़ ये बात जान जाये की मई उसे विरोद नहीं कर रही हु .. अगर वो ये जान गया तो वो मेरा गलत फायदा उठा सकता है .....

वो सोचने लगे .. ये भी हो सकता हैं की वो मेरा हाथ पदक le....aur मुझे इधर उधर छुए ....... मेरे बदन पर अपना हाथ भी लगाए........ और नवाज़ ने ऐसा किया तो मई क्या करू .. नवाज़ ने अगर ऐसा मेरे साथ किया तो मुझे उसे ओपपोसे करना चाहिए.. मैं नहीं चाहती की नवाज़ मेरे बदन को छुए .... मेरे बदन पर सिर्फ और सिर्फ अधिकार मेरे हस्बैंड का हैं ...... और किसी का नहीं .....

पर ये तो मुझसे चिपक के खड़ा है .. ये गलत हैं ...... मैं अपना ये हसीं बदन किसी और को ऐसे चुने नहीं दे सकती ..... ये पाप हैं .....

और ऐसे hi हुआ जैसे आरती ने सोचा था .. उसके हाट को पकड़ के नवाज़ उसको जोरसे कास लेता है....





नवाज़ ने अचानक यूँ कास के पकड़ने से वो नवाज़ के जिस्म को खुद पर महसूस करने लगती है … उसका कलेजा ज़ोरो से धड़कने लगा . .......साथ में वो लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगी … एक अजीब सी बेचैनी उसके अंदर उठ रही थी … लुम्बी लुम्बी साँसे लेने के बाद वो थोड़ी नार्मल हुई तभी उसके कान के पास आपने मू ले जेक नवाज़ कान मई धीरे से कहता है..





मेमसाब .... एक बात बोलू … आप सच में बहुत खूबसूरत है ...... मैंने आपके जैसी खूबसूरत औरत इससे पहले कभी नहीं देखि ....

और इतना कहकर नवाज़ धीरे से मुस्कुरा देता हैं वही आरती बिना कुछ बोले वही खामोश सी कड़ी रहती हैं .. बिना नवाज़ की तरफ देखे..

आरती के साथ वो इतना कुछ कह रहा था पर आरती उसे एक भी बार न रोक रही थी......... और न hi उसे मन कर रही thi...isi वजह से उसकी हिम्मत अब बढ़ने लगी थी ....

अब वो आरती के हाथ को पकड़ के उसके हाथ पाई आपने उंगली फेरने लगता है.... आरती की मुलायम गोरी स्किन पर उसको

खुरदुरे हाथ फेरने में उसे मज़ा आ रहा tha….thodi देर वहां हाथ फेरने के बाद आरती वो हाट नवाज़ के हाथ से चुरा लेती है और वो हाथ उप्पर उठा के वो पैकेट नवाज़ को देती है पर अब नवाज़ को वो पैकेट नहीं चाहिए था .. अब नवाज़ उसका वो हाट फिर से पकड़ लेता है





दूसरा हाट उसके कमर पर रख लेता है अब अपने कला चेहरा उसके चहरे के पास ले जाता है वैसे hi

तब नवाज़ के मू से एक तेज़्ज़ दुर्गन्ध .. शयद टोबाको की .. निकल के आरती के सांसों में घुलने लगती hain........jisse उसकी सांसे तेज़्ज़ हो जाती है ..... उसपर मदहोशी चने लगती है .... न जाने उस स्मेल में ऐसा क्या था जिससे वो पूरी तरह से मदहोश होने लगी थी ...........

वो एक लुम्बी सी साँस लेती हुई उस स्मेल को अपने बदन के अंदर उतरने लगती hai.........jis से उसकी आँखे बंद हो जाती हैं ...... वहीँ नवाज़ बड़े गौर से आरती के तरफ देखे जा रहा था........

उसको देखते हुई नवाज़ आपने होंठ उसके गोर गोर गाल पर रखता है..





और कहता है..

वैसे मेमसाब आप हर कपड़ों में बहुत सुन्दर लगती हो पर इस साड़ी मई कातिल लग रही हो

नवाज़ की इस बात से उसके तन बदन में आग लग जाती है .... वो सोचती है अब उसका यहाँ एक पल भी रुकना रिस्की है ....

ऐसा सोचते हुई वो झट से उसके हाट को झटका देके उसकी तरफ बिना देखे किचन से बहार चली जाती है .. नवाज़ कुछ कर नहीं पाया सिर्फ आरती को ऐसे जाते हुई देखते रहा ..
 
ऐसा सोचते हुई वो झट से उसके हाट को झटका देके उसकी तरफ बिना देखे किचन से बहार चली जाती है .. नवाज़ कुछ कर नहीं पाया सिर्फ आरती को ऐसे जाते हुई देखते रहा ..

अब श्याम के टाइम हाल मई शेठ जी और आरती टीवी देख रहे थे तब नवाज़ बहार से हाल मई आया

अरे नवाज़ आज क्या क्या काम किया..

शेठ जी ने नवाज़ को कहा ...

हाँ साब एक रूम साफ़ हो गया..

वो कामचोर कहा है..

तब नवाज़ आरती की तरफ इशारा करते हुई पूछता है..

कोण कामचोर..

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई आरती कहते है..





नीता

तब तक उसका ससुर कहता है

हाँ वो कामचोर नीता कहा है..

तब नीता वह आते है..

क्या बाबूजी.. मुझे कामचोर कहते हो.. देखो आज मैंने कितना काम किया है..

कितना काम किया है कामचोर तुमने

बाबूजी मैंने आज एक रूम टोटल क्लीन करवा दी..

वो तो नवाज़ ने की होंगे

मैंने हेल्प कर दी उसकी इसलिए हो गए वो

इसलिए तो मई तुजे कामचोर कहता हु.. तेरा काम इधर किचन मई था और तू नवाज़ ने जो काम किया है वो आपने किया है ऐसे बता रही है और तेरे वजह से अकेले आरती को काम करना पड़ता है..

हाँ पापा आप की बात सही है पर क्या करू ये नीता कामचोर सुनती कहा है ..

क्या दीदी आप भी.. आप तो अब शेठ जी जैसे बाते कर रही हो

सही तो बोल रही है बेटी वो तेरे बारे मई

दीदी आप ने तो कहा था नवाज़ के साथ जाने को

हाँ जाने को कहा था वह रुकने को नहीं

तब नवाज़ कहता है

शेठ जी वो मई यहाँ नया हु na..yaha का ज्यादा कुछ पता नहीं इसलिए रुख गए थे वो मेरे साथ..

नवाज़ नीता की साइड लेके बात कर रहा है ये जानकार नीता निचे देख के स्माइल करती है..





और मैं मई कहती है..

कमीना उसकी साइड लगे hi न.. उसके साथ मज़े करने को जो मिल रहे है...

तभी शेठ जी बोलते है..

शेठ - अच्छा.. वैसे आरती बीटा ये खेत का काम बहुत जल्दी सिख गया .. इतनी जल्दी ये सिख जायेगा ऐसे उम्मीद तो मुझे भी नहीं थी .. चलो घर का काम भी बहुत जल्दी सिख जाये यही उम्मीद है..

तब आरती आश्रय से नवाज़ की तरफ देखने लगी..





उसे ये आईडिया नहीं थी की नवाज़ के काम पाई पापा इतने ज्यादा फ़िदा है.. वो नवाज़ को देखते हुई कहने लगी..

इस काळा लोफर मई पापा को क्या दिख गया जो इसकी इतने तारीफ करने लग गए है ..

नीता - लगता है यहाँ का काम भी जल्दी hi सिख जायेगा ये शेठ जी ..

शेठ - हाँ जल्द hi सिख जायेगा

हाँ साहब जल्द से जल्द सीखने की कोशिश कर रहा हु

आरती की तरफ देखते हुई कहता है.. आरती उसकी और देख रही थी ..

स - वैसे नवाज़ अब इस वक़्त घर मई आये हो .. कुछ चाहिए क्या तुम .

तब नवाज़ कुछ बोले उससे पहले आरती झट से बोलती है..

वो पापा उनोने सुबह से खाना नहीं खाया ..श्यादा इसलिए आये होंगे

आरती ने आपने बारे मई ये कहा ये सुन के नवाज़ कुश हो जाता है.. पर आरती सोचती है ये मैंने क्या कह दिया .. और अपनी उंगली चबाने लगी..





उंगली चबाते हुई सोचने लगी.. ये बाँदा मुझे पागल बना देगा... अब मई क्या करू.. मैंने इसे उनोने कैसे कहा.. पापा ने सुना होगा तो मई मर गयी.. फिर वो अपनी गलती पर सफाई देने लगी.. और वो फिर से कहते है..

वो नीता और नवाज़ दोनों ने सुबह से खाना नहीं खाया इसलिए वो दोनों खाना खाये आगये होंगे

तब शेठ जी कहते है

कामचोर तुजे तो भूख नहीं लगी होंगे पर नवाज़ ने तो काम किया है उसे तो भूख लगे होंगे.. सुबह से बुखा क्यों रखा उसे

तब आरती मैं मई कहते है

उसको भी कहा भूख लगी होंगे..

नीता कहते है..

वो मैंने बोलै था पर उसने कहा बाद मई कहते है

क्यों तुजे भूख नहीं लगे क्या नवाज़

ऐसा शेठ जी ने कहा तब नवाज़ ने कहा

भूख तो सुबह hi लगी थी पर तब मेमसाब ने खाना नहीं बनाया था..

तब आरती गुस्से से उसकी और देखती है





और इशारे से उसे पूछते है..

मैंने कब खाना देने से मन किया था तुम..

तब इशारे से वो कहता है..

दिया तो नहीं न आपने

तब बुरा सा मू बनके आरती उसे सॉरी कहती है..





तब शेठ जी कहते है

मतलब सुबह जब तुम यहाँ किचन मई थे तब खाना नहीं खाया था क्या

नहीं न शेठ जी

तब आरती की तरफ देखते हुई शेठ जी कहते है

बीटा ऐसे कैसे तुमने दिनभर इसको भूका कैसे रखा . .

तब बुरा सा मू करते हुई कहते है..





सॉरी पापा जी.. वो काम मई भूल गए.. उस टाइम खाना नहीं बना था पर मैंने इन् लोंगो को बाद मई आने को बोलै था पर ये लोग बाद मई नहीं आये..

हम काम मई लग गए थे.. तो नहीं आ पाए मेमसाब

ऐसा नवाज़ आरती की तरफ देखते हुई कहता है और दूसरी तरफ आरती गुस्से से नवाज़ को देख रही थी..





काम मई नहीं पर बाटे करते बैत गए होंगे

तुम सच कह रही हो बहु.. ये नीता बात बहुत करते है.. नवाज़ से बाते करते बैत गए होंगे ..

तब आरती मैं मई कहती है ..

इस नवाज़ ने क्या जादू किया है पापा जी पर पता नहीं पर पापा जी इसको बहुत अच्छा मानते है..

नीता - शेठ जी.. मैंने ऐसा कुछ नहीं किया वो हम लोंगो को भूख नहीं लगी इसलिए हम नहीं आये ..

आरती - ठीक है अभी किचन मई जाओ तुम दोनों ..

शेठ जी.. हाँ अभी जाओ.. बहु इन् दोनों को खाना दे दो.. पेट भर के खाओ तुम लोग..

नवाज़ - ठीक है शेठ जी..

ऐसा कह के वो किचन मई चला गया खाना खाने.. और किचन मई निचे बैठ गया .. उसके बगल मई नीता बैठ गयी.. तब आरती उन्दोनो को खाना देने लगी.. अब वो दोनों निचे बैठे थे और आरती खड़े थे उनके सामने.. खाने की प्लेट नवाज़ के सामने रखने के लिए उसे जुकना पड़ा.. जिस वजह से उसकी आधे से ज्यादा चूचिया नवाज़ के आँखों के सामने आ गयी.. जिन मई एक तक नवाज़ देखे जा रहा था.. और आरती पराठा हाथ मई लेके उसकी आँखों मई देख रही थी.. जुख के.. जब उसे पता चला की नवाज़ कहा देख रहा है तब वो धीरे से बोली..

कमीना..

और दूसरे हाथ से आपने चुकी को देख लिया और पराठा उसके प्लेट मई रख के खड़े हो गए.. और नवाज़ स्माइल करके उसे देखने लगी.. और नीता गुस्से से उसे देख रही थी.. तब नीता नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

नीता - नवाज़ पराठा लो न खा खो गए.. दीदी बहुत अच्छा पराठा बनती है..

तब बहुत धीरे से नवाज़ बोलता है..

नीता तेरे दीदी का सबकुछ बहुत अच्छा है.. तू नहीं जानती ..

ये नीता सुन नहीं पाए.. क्यों की उसने बहुत धीरे से बोलै था.. आरती ने भी नहीं सुना था पर उसे भी पता चल गया था इसने कुछ न कुछ गन्दा hi बोलै होगा

आरती - कमीना नहीं सुदरेगा..

न- कही नहीं ( और आरती की चूचियों को देखते हुए पराठा ले लिया और आरती को देखते हुए खाने लगा)..

और इधर नीता पराठा कहते हुई उसे बाते करने लगी.. नवाज़ भी आरती को देखते हुई उसे बाते करने लगा.. और आरती सामने कड़ी थी.. किचन सिंक को सत् के.. उन्दोनो को घूरे जा रही थी.. उनको वो कुछ बोल नहीं रही थी .. उसके चहरे पर गुस्सा नहीं था अब.. पर ख़ुशी भी नहीं थी.. शयद नवाज़ नीता से बात कर रहा है ये देखकर वो जेलस हो गयी थी..

वो जब ज्यादा बाते करने लगे तब शेठ जी बोल पड़े

शेठ जी - बाते मत करो.. तुम दोनों पहले चुप चाप खाना खाओ उसके बाद जितनी मर्ज़ी बात कर लेना..

न - क्या शेठ जी.. खाना कहते हुई भी आप हमें आपने मान की नहीं करने दे रहे हो..

स - खाओ जैसे मैं करे पर बिना बाते करते हुई..

शेठ जी के ऐसे कहने से आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती है..

न - क्या शेठ जी.. मई इतने दिन बाद तो मिली हु नवाज़ से और आप बात भी नहीं करने दे रहे हो ..

तब स्माइल करते हुई आरती कहते है





अरे पापा जी करने दो न उससे अपनी नवाज़ से बातें ….अब्ब रोज-2 थोड़ा नवाज़ यहाँ ऐनी वाला है….. इससे बाते करने ..

स- वो भी सही बात है तुम्हारे बीटा पर सुबह से तो नवाज़ के साथ है ये ..बाते तो बहुत की होंगे इसने ..

तब नीता कहते है

नहीं न.. बात कुछ नहीं हो पाए.. अब बात कुछ करना चाहा रहे है तो शेठ जी आप मन कर रहे हो… आप को नहीं लगता की आप कुछ ज्यादा स्ट्रिक्ट हो रहे हो..

तब आरती कहते है..

ा - मालिक ने टाइम तो टाइम स्ट्रिक्ट होना चाहिए.. नहीं तो नौकर बिगड़ जाते है .. ( नवाज़ की तरफ देखते हुए वो कहते है..)





तब नवाज़ कहता है..

हम कहा बिगड़ गए है मेमसाब.. हम तो अच्छे नौकर है.. है न शेठ जी

तब शेठ जी कहते है ..

तुम तो अच्छे हो

शेठ जी आगे कुछ बोले इस से पहले नीता कहती है..

मेमसाब आपके नौकर अच्छे hi है.. बैगडे हुई नहीं है.. नवाज़ को देख लो कितनी जल्दी सब कुछ सिख गया.. खेती का और अब घर का.. बहुत जिम्मेदार इंसान है नवाज़..

तब आरती नखरा करते हुई कहते है

मुझे पता है कितना जिम्मेदार इंसान है तुम्हारा नवाज़..

तब शेठ जी कहते है..

बहु एक एक और पराठा दो दोनों को

तब आरती नीता को और नवाज़ को पराठा देती है.. इस बार भी आरती के झुकने के टाइम उसके चूचिया देखने लगा और आरती गुस्से से उसे देखने लगी.. तब शेठ जी कहते है..

तुम लोग खाना खाओ आराम से मई बहार बैठा हु

हाँ शेठ जी ऐसा कह के नवाज़ पहले शेठ जी को देखता है.. वो बहार जाते hi आरती को देखता है . .. और उसको आँख मरता है.. और कहता है..

आप बहार आराम करो शेठ जी ..

आरती को आँख मरते hi वो और ज्यादा गुस्सा हो जाती है. ...





पर नीता यहाँ और आपने ससुर बहार हॉल मई बैठे था इस वजह से कुछ कर नहीं पाए..

और इधर नवाज़ स्माइल करते हुई आरती की तरफ देखते हुई खाना खाने लगता है.. अब नीता निचे गर्दन करके थोड़ा जुख के खा रही थी.. इस वजह से उसकी चूचिया थोड़े बहार आ गयी थी.. उसकी चूचिया वो देखने लगा.. नवाज़ को यु नीता की चूचियों देखते हुए आरती उसे गुस्से से देखते हुई अचानक से मुस्कुरा दी..





और नवाज़ ने ये तिरछी नज़र से देखा. .. शयद आरती को ये पता नहीं था की नवाज़ ने ये देख लिया है..

नीता आराम से बैठ कर अपना खाना खाने लगी थी ..उसके ऐसे झुक के खाने की वजह से उसकी चूचिया भी कपडे से बहार आने को तड़प उठी थी.. नवाज़ उसकी चूचिया देख रहा है और आरती नवाज़ को देख रही है इस बात से बेखबर नीता खाना खाने मई लगी हुई थी.. और इधर आरती नवाज़ नीता की चूचियों को घूरते हुए देख रहा है वो बड़े गौर से देख रही थी.. ये देख के उसके फेस पैर अलग hi कातिल मुस्कान आगयी थी..





अब नवाज़ कुछ पल नीता की चूचिया देखता और फिर आरती को देखता.. नीता के चूचिया को खाना कहते हुए नवाज़ देखता और बिच बिच में आरती को देखता.. दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा जाते..





ऐसे hi 3-4 बार हुआ तो आरती को एक दूसरे को देखते हुए एक शरारत सूजी और उसने खुजाने के बहाने से अपने साड़ी अपनी चेस्ट पर से हलकी सी बाजु की और अपनी गोर चुके के क्लीवेज नवाज़ को दिखने लगी..





अब ये उसने क्यों किया ये वो भी नहीं जानती थी.. नवाज़ का अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहती थी.. या वो जो नीता की चूचिया देख रहा था वो आरती नहीं चाहती थी की नवाज़ देखे. .. पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया वो नहीं जानती थी..

पर इधर आरती की गोर चूचिया या यु कहे उसके क्लीवेज देखते hi नवाज़ की आँखों में चमक आ गयी पैर ये चमक जल्द hi चली गयी क्युकी नीता ने जल्द hi उन्हें फिर से आपने साड़ी से धक् लिया और खड़े हो कर उसको देख कर हँसाने लगी..





वो खुल कर नहीं है रही थी.. उसे थोड़ा दर था नवाज़ का.. उसे पता था नवाज़ किस किसम का बाँदा है.. वो उसे ज्यादा उकसा नहीं चाहती थी.. वो जानती थी उसे अगर ज्यादा उकसाया तो वो आपने आप खो सकता है.. उसने अब जो हरकत की थी वो डरते हुई की थी.. उसने क्यों की उसे पता नहीं पर अब उसे नवाज़ से डर लगाने लगा..

तब नवाज़ उसे एक उंगली कर कर एक बार और दिखाओ ऐसे कहता है तब वो उसे गुस्से से देखते है





और नकहरा करते हुई वो कहती है...

क्या है???

तब नवाज़ इशारे से कहता है..

एक बार दिखाओ न

तब वो इशारे से न मई गर्दन हिलाते है . ..





तब नवाज़ ऐसे hi उसे 2-3 बार रिक्वेस्ट करता है तब वो उसे बड़ी आँखे दिखते हुई इशारे से कहते है. .

उसके देखो . ..





नवाज़ भी नाराज़ होते हुई नीता की चूचिया को देखने लगा.. और आरती उसको देखते रही.. और मैं मई कहने लगी.. कमीना साला.. कभी मेरे बूब्स को देखता है और कब नीता को.. साला बहुत हरामी है.. कुछ देर ऐसा hi चला.. आरती फिर सामने के नज़ारे मई खो से गयी..

तभी बहार से शेठ जी आते है और कहते है

अरे तुम दोनों ने खाना खा लिया क्या.. मई तो तुम दोनों को पूछने आया था की और कुछ चाहिए क्या.. बहु तुमने पूछा न इन् दोनों को की उन और कुछ चाहिए क्या

तब आरती आपने तंदरी से बहार आ जाती है..

हाँ पापा

अब दोनों का खाना ख़तम हो गया था.. नवाज़ हाट धोने के लिए उठ खड़ा हो गया.. आरती वाश बेसिन के पास की कड़ी थी.. जैसे hi वो जान गयी की नवाज़ यही उसके पास आने वाला है तब वो बाजु हैट गयी..

नवाज़ हैंड वाश करता है और घूम के आरती के सामने खड़ा हो जाता है .. आरती भी उसको डरते हुई देखते है.. तब नवाज़ कहता है..

पानी मिलेगा क्या मेमसाब

तब आरती गर्दन से हाँ बोलती है उसकी आँखों मई देखते हुई..





आरती उसे पानी देती hai..dono एक दूसरे को देख रहे थे और इधर शेठ नीता को कुछ समजा रहे थे.. नवाज़ लगातार आरती को देखे जा रहा था.. तब कुछ सोचकर आरती अब किचन से बहार के रूम के लिए चल दी .. जब आरती मटकते हुए वह से निकली तो नवाज़ की नज़र उसकी गांड पैर चली गयी जिसे मुड़कर आरती ने भी देख लिया और दिल में खुश होते हुए बहार चली गयी.. आरती के जाने के बाद नवाज़ भी जल्दी से बहार निकल गया क्युकी वो आरती से कुछ बाते करना च रहा था.. किचन से निकल के नवाज़ ने पहले हाल मई देखा वो वह नहीं थी.. फिर उसने 2-3 रूम थे वह आरती को देखा.. वह भी उसने देखा तब वह भी आरती नहीं थी तब उसे आरती की आवाज़ उप्पर छत्त पर आ जाती है.. वो शयद किसी से बात कर रही थी.. मोबाइल पाई .. तब नवाज़ हॉल से चल के सीधा छत्त पैर पहुंच गया जहा आरती कड़ी थी एक डीप गले की ब्लाउज पहन कर और मोबाइल पाई किसी से बात कर रही थी..





नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता

उधर से - अरे मेरे मीटिंग है.. मई नहीं आ सकता

वो कुछ हो मई अकेले नहीं जा सकती

अकेले कहा हो पापा जी है न

पापा जी तो सीनियर लोंगो के साथ बीजी हो जायेंगे मई अकेले हो jaunge..aur फिर मई बोर हो जाउंगी

तब वो आगे वाला बाँदा हँसाने लगता है

आप को हसी आ रही है क्या मेरे हालत पर

तब नवाज़ समाज जाता है आरती मेमसाब अरविन्द साहब से बाते कर रही है

ा - एक काम करो तुम बोर हो जाओगे न वह तब नीता को साथ मई लेके जाओ

तब आरती हँसाने लगी..

मतलब रस्ते मई और यहाँ आने तक मुझे वो पका देंगे.. दिन भर वो बक बक करती है..

अब दोनों हसने लगे..

ा- तुम बोर भी नहीं होना चाहते और तुम कोई पकाये भी नहीं

हाँ ऐसा hi कुछ समाजो पति महाराज

तो हम इस चीज़ का हम सलूशन कैसे लाये

वो आप की प्रॉब्लम है मेरे नहीं

प्रॉब्लम तो तुम्हारे है

पत्नी के प्रॉब्लम का सलूशन करना पति का धर्म होता है

हम्म्म

सिर्फ हम्म्म्म से काम नहीं चलेगा ..

सलूशन सोचता हु

सोचो सोचो ... बी थे वे और एक प्रॉब्लम है

अब कोनसा प्रॉब्लम है

आप ड्राइवर तो आपने साथ लेके गए होंगे और ड्राइवर तो आप के साथ hi आएगा.. फिर हम कैसे जाये..

इसका सलूशन है

क्या

पापा ने कहा है नवाज़ अच्छा ड्राइविंग करता है..

आप दोनों बाप बेटे को क्या हो गया है... मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है.. उस नवाज़ ने आप दोनों पर क्या जादू किया है पता नहीं चल रहा है.. उसपे जो इतना भरोसा कर रहे हो..

ये सुनकर नवाज़ मैं मई कहता है..

अब इसको क्या हो गया है.. मेरे खिलाफ ये लौंडे क्यों छोटे मालिक को उकसा रही है..

अरविन्द - क्यों क्या हो गया है

कुछ नहीं

उसकी कुछ नेगेटिव बात तुम पता लगी है तो बता दो

वो भी बता दूंगी वक़्त आने पर

नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

ठीक है.. अब मुझे काम है.. रखता हु.. पापा के साथ जाओ तुम..

ठीक है जाउंगी..

ऐसा कह के वो कॉल रख लेते है.. और थोड़ा सामने आके कहते है...





ये है तुम्हारे साहब.. मुझे अकेले जाने को कह रहे है एक प्रोग्राम मई.. और खुद नहीं आ रहे है..

बिजी होंगे.. बड़े आदमी है...

हाँ वो तो है.. पर आदमी ने इतना भी बिजी नहीं रहना नहीं चाहिए की अपनी धर्मपत्नी को किया वडा पूरा कर न सके

बात तो आप सही कह रहे हो.. वैसे मेमसाब आप कब जा रहे हो और कहा..

तब नखरा करते हुई कहते है..





तुम पता नहीं है क्या

नहीं तो

तुम्हारे साहब तो कह रहे तुम hi लेके जाओगे मुझे

मुझे नहीं पता मेमसाब

सुन्ना है तुम बहुत अच्छी ड्राइविंग करते हो

हाँ वो तो करता हु

वो भी देख लेंगे

देख लीजियेगा... पर कब जाना है..

तब उसकी और देखते बड़े अड्डा के साथ कहते है..

आरती - तू खाना कहते वक़्त क्या देख रहा था .. तुझे शर्म नहीं आती..

नवाज़ कुछ कहता उससे पहले hi खुद hi आरती कहती है..

शर्म कैसे आएंगे.. तू तो 1 नंबर का बेशर्म है.. काम से पापा को तो डरता न.. उनोने देखा होता तो तेरे खैर नहीं थी..

न - वो मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था.. बस नज़र पद गयी

ा- नज़र पद गयी थी तो हैट भी तो सकती थी न

न- वो देखने में इतनी सॉफ्ट लग रही थी की मैं hi नहीं कर रहा था नज़र हटाने का

तब मुस्कुराते हुई आरती कहते है ..

लगता है तेरे घर एक बार आना पड़ेगा

नवाज़ आश्रय से पूछता है

मेरे घर

हाँ तेरे घर .. लगता है तेरे घर आके तेरे अब्बू और अम्मी को बताना पड़ेगा की नवाज़ जवान हो गया है.. अब उसका निकाह कर दो

क्या आरती मेमसाब.. आप भी न. आप क्यों ऐसे बाते कर रही हो.. थोड़े दिन मुझे ऐसे फ्री की जिंदगी जीने दो.. बाद मई वो सब तो है hi न..

हाहाहा..
 
तुम पता नहीं है क्या

नहीं तो

तुम्हारे साहब तो कह रहे तुम hi लेके जाओगे मुझे

मुझे नहीं पता मेमसाब

सुन्ना है तुम बहुत अच्छी ड्राइविंग करते हो

हाँ वो तो करता हु

वो भी देख लेंगे

देख लीजियेगा... पर कब जाना है..

तब उसकी और देखते बड़े अड्डा के साथ कहते है..

आरती - तू खाना कहते वक़्त क्या देख रहा था .. तुझे शर्म नहीं आती..

नवाज़ कुछ कहता उससे पहले hi खुद hi आरती कहती है..

शर्म कैसे आएंगे.. तू तो 1 नंबर का बेशर्म है.. काम से पापा को तो डरता न.. उनोने देखा होता तो तेरे खैर नहीं थी..

न - वो मैंने जानबूझ कर नहीं देखा था.. बस नज़र पद गयी

ा- नज़र पद गयी थी तो हैट भी तो सकती थी न

न- वो देखने में इतनी सॉफ्ट लग रही थी की मैं hi नहीं कर रहा था नज़र हटाने का

तब मुस्कुराते हुई आरती कहते है ..

लगता है तेरे घर एक बार आना पड़ेगा

नवाज़ आश्रय से पूछता है

मेरे घर

हाँ तेरे घर .. लगता है तेरे घर आके तेरे अब्बू और अम्मी को बताना पड़ेगा की नवाज़ जवान हो गया है.. अब उसका निकाह कर दो

क्या आरती मेमसाब.. आप भी न. आप क्यों ऐसे बाते कर रही हो.. थोड़े दिन मुझे ऐसे फ्री की जिंदगी जीने दो.. बाद मई वो सब तो है hi न..

हाहाहा..

और हँसाने लगी..

अब उस वक़्त दोनों उप्पर चाट पर खड़े the..ek दूसरे को देखते हुई.. फिर अचानक आरती निचे जाने के लिए चाट के दूर तरफ जाने लगे. . तब नवाज़ कहता है..

बिना बताई जा रहे हो मेमसाब आप मेरे घर कब आ रहे हो

तब आरती कहती है.. हस्ते हुई.. उसकी और देख कर..





बताने से क्या होगा..

हम्म.. आपने गेस्ट का बड़ा अच्छा ध्यान रखते है..

तब आश्चर्य से उसकी और गर्दन करके देख के स्माइल करते है..

अच्छा जी.. मई और तुम्हारी गेस्ट..

अरे गेस्ट के लिए तो हम तन -मन - धन सब हाज़िर किये रहते है.. बस गेस्ट खुश होना चाहिए..

नवाज़ के इस बात को सुन कर आरती मुस्कुराये बिना नहीं रह सकीय.. और फिर आगे की और सीढ़ियों की तरफ जाते हुई कहते है..

और तुम क्यों लगता है मई तुम्हारे गेस्ट बनूँगी..

हां आपकी बात भी सही है.. आप इतने आमिर.. इतनी होशियार.. इतने सुन्दर.. अग्रवाल फॅमिली की बहु भला मेरे जैसे गरीब की गेस्ट क्यों बनेगे..

आरती ज़ोर से हंसी और सीढ़ियां के और जाते हुए रुकी और उसकी और घूमते हुई बोलती है ..

“तुम नाह नवाज़ इमोशनल ब्लैकमेल करने में बहोत माहिर हो.. "

ये कोई इमोशनल ब्लैकमेल नहीं है

तो क्या है

आपने hi तो कहा की आप मेरे घर आओगे.. अब घर आने वाला गेस्ट hi तो होता है न मेमसाब..

ारे वो तो मैंने ऐसे hi कहा था

आप बड़े लोंगो की बात मुझे कुछ समाज नहीं आता.. कोनसी बात ऐसे बोलते हो.. कोनसे बात मज़ाक मई बोलते हो और कोनसे बात आप की सीरियस होती है..

तब आरती हँसाने लगी उसको सुनकर और कहने लगी..

क्यों दुखी हो गए क्या मेरे मज़ाक से.. मैंने तो मज़ाक मई कहा तो वो

आप मज़ाक हो गया पर मेरा दिल टूट गया.. मुझे लगा आप मेरे घर आओगे.. मेरे बस्ती मई आप आओगे तो मेरा रुतबा बढ़ेगा.. मई आप की अच्छे से सेवा करूँगा.. आप मेरे अम्मी अब्बू को अपनी शादी.. मतलब निकाह की बात करोगे..

तब झट से आरती कहती है..

अपनी शादी.. ी मैं निकाह.. क्या बोल रहे हो तुम..

थोड़ा गुस्सा था आरती के बोलने मई..

अपनी मतलब मेरे.. जल्दबाजी मई बोल गया.

अच्छा ऐसा क्या..

मुझे लगा आप मेरे अब्बू और अम्मी से मेरे निकाह के बारे मई बात करोगे और आप के कहने से मेरा निकाह हो जायेगा.. मई कितना खुश था.. आप ने सब सत्यानाश कर दिया..

ारे बापरे इतना सारा सोच लिया तुमने मेरे एक छोटी से बात पर..

आप के लिए चौथी बात होंगे मेरे लिए नहीं..

ठीक है बाबा आ जाउंगी तेरे घर और तेरे अम्मी अब्बू से बात कर लुंगी..

ऐसे उसके और देखते हुई.. हाँ मई गार्डन हिलाते हुई कहने लगी..





धन्यवाद मेमसाब

अब मई जाऊ निचे.. मुझे किचन मई बहुत सारा काम है

ठीक है मेमसाब.. मई भी आ जाता हु निचे आपके साथ

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है

तुम क्यों और मेरे साथ

क्या आप चाहते हो क्या मई रात भर यही अँधेरे मई मरू .. मेरे घर मई नहीं जाऊ

तब हस्ते हुई कहते है





अरे बाबा मई वो नहीं कह रही थी

तो

अभी यहाँ थोड़े देर थहलो और थोड़े देर बाद निचे आ जाना

अभी क्यों नहीं

शर्माकर निचे देखते हुई कहते है





तुम पता है

मुझे कुछ नहीं पता मेमसाब

मेरे पीछे आते हुई तुम ठीक से नहीं आओगे

मतलब

मतलब निचे आते हुई मेरे बैक को देखते हुई आओगे और उससे मुझे शर्म आती है

नहीं मेमसाब हमने कब आपके पिछवाड़े को देखा





बेशरम!! पिछवाड़ा नहीं बैक.. अश्लील बाते मत करो मुझसे

वही वही मैंने कब देखा

रोज hi देखते हो.. मुझे पता नहीं क्या..

वो जूथ है

ऐसा कह के उसके पास वो आता है..

सच है.. मई जूथ नहीं बोलती

ऐसे कहते हुई वो सिडिया उतरने लगे.. अब पहले सीडी पाई नवाज़ था और उसके निचे पांचवे सीडी पर आरती कड़ी थी.. नवाज़ वही खड़े होक अपने जीब को होंठों पर फ़ेरेट हुई आरती को सीडिया उतरते हुई देख रहा था. उसकी गांड का मटकाना नवाज़ को मदहोश करता जा रहा था.. उस साटन वाले साड़ी में कितना खूबसूरत और आकर्षित करती जा रही थी आरती.. उप्पर से निचे उतरराते हुई एक दो बार उसने मुड़कर नवाज़ को देखा भी था.. जब वो निचे उतरी हॉल मई तब उसने फिर से एक बार देखा जैसे की वो नवाज़ को इशारा कर रही हो उसके पीछे आने को..

अब उसके पीछे नवाज़ भी जाता है निचे .. वो सोचता है अगर ये किचन मई जायेगे तो मई भी इसके पीछे जायेगा.. और हुआ भी ऐसा hi कुछ.. निचे आकर आरती किचन मई चली गयी और नवाज़ भी उसके पीछे जाने लगा.. तभी शेठजी नवाज़ को आवाज़ देने लगते है..

नवाज़ बीटा जरा इधर तो आना

आरती जान गयी थी नवाज़ उसके पीछे आ रहा है.. अब वो कोई न कोई बात करेगा उसे लगता है.. कुछ तो बहाना बनके मेरे पीछे आएगा ऐसा उसे लग रहा था और वो चाहा भी कुछ ऐसा hi रही थी.. पर जब उसके ससुर ने नवाज़ को आवाज़ दी तो वो जान गयी की पापा जी अब नवाज़ को कुछ न कुछ काम बताएँगे ..

आवाज़ आते hi पीछे मुद के नवाज़ की और देखने लगी.. और नवाज़ को स्माइल दी और इधर नवाज़ का चेहरा पूरा उतर चूका था.. वो मान मई कहता है..

इस लौड़े ने मुझे क्यों बुलाया अब.. अच्छा खासा आरती के पास जा रहा था.. और कामिनी नीता भी नहीं थी.. ऐसा मौका कब मिलने वाला था पर इस बूढ़े से मेरे ख़ुशी देखि नहीं जा रही है..
 
आरती जान गयी थी नवाज़ उसके पीछे आ रहा है.. अब वो कोई न कोई बात करेगा उसे लगता है.. कुछ तो बहाना बनके मेरे पीछे आएगा ऐसा उसे लग रहा था और वो चाहा भी कुछ ऐसा hi रही थी.. पर जब उसके ससुर ने नवाज़ को आवाज़ दी तो वो जान गयी की पापा जी अब नवाज़ को कुछ न कुछ काम बताएँगे .. आवाज़ आते hi पीछे मुद के नवाज़ की और देखने लगी..





और नवाज़ को स्माइल दी और इधर नवाज़ का चेहरा पूरा उतर चूका था.. वो मान मई कहता है..

इस लौड़े ने मुझे क्यों बुलाया अब.. अच्छा खासा आरती के पास जा रहा था.. और कामिनी नीता भी नहीं थी.. ऐसा मौका कब मिलने वाला था पर इस बूढ़े से मेरे ख़ुशी देखि नहीं जा रही है..

तब शेठजी कहते है

नवाज़ इधर आना जरा

जी शेठजी

कहके एक बार आरती को देखता है तब वो स्माइल कर रही थी .. उसे हसी आ रही थी नवाज़ के हालत पर ..





नवाज़ अब बुरा सा मू बनके शेठजी के पास जाता है..

हाँ बोलिये शेठजी

तू अब क्या कर रहा है

कुछ नहीं.. वो मेमसाब का कुछ काम है किचन मई.. वो करना है..

किचन मई क्या काम करना है..

तब शेठजी आरती की और देखते हुई कहते है

आरती beta..kitchen मई तुम नवाज़ की जरुरत है क्या??

नहीं तो पापाजी

नवाज़ की तरफ स्माइल करते हुई कहते है तब नवाज़ ने तिरछी नजरों से आरती को देखा तो वो उसके तरफ देख रही थी ....





तब नवाज़ मैं मई कहता है..

लौंडे हाँ बोलने मई तेरा क्या जाता ..

नवाज़ ये तो नहीं बोल रही है..

तब आरती की और देखते हुई शेठजी फिर से पूछते है

बीटा तुमने कुछ काम बोलै है क्या नवाज़ को

आरती ऐसा बोलकर मुस्कुरा दी ...

नहीं पापाजी

नवाज़ ये तो नहीं बोल रही है

अब नवाज़ को बोलने की लिए कुछ नहीं बचा था तो वो बात बदल देता है..

यहाँ कुछ करना है क्या

हाँ उसके लिए hi बुलाया था तुजे

बोलिये क्या करना है

यहाँ इस हॉल मई बहुत सरे वार्डरॉब है.. और उसमे बहुत साडी फाइल्स है.. सब वार्डरॉब से फाइल निकालनी है.. वार्डरॉब ठीक से साफ़ करनी है और फाइल भी साफ़ करनी है और अच्छे से फाइल वार्डरॉब मई रखनी है ….

ठीक है शेठजी कहके अब नवाज़ एक वार्डरॉब के पास गया.. और फाइल निकालने लगा.. और फिर शेठजी सोफे पाई बैठके नवाज़ को बताने लगे क्या क्या करना है और कैसे कैसे करना है.. ाअब नवाज़ वार्डरॉब से फाइल निकल के वार्डरॉब साफ़ करने लगा और फिर फाइल पाई जो धूल मिटटी जमी हुई थी वो साफ़ करने laga..aur फिर फाइल अन्दर रखने लगा..

अब शेठजी ने सोफे पाई बैठ कर टीवी ों किया और टीवी देखने लगे. अन्दर किचन मई बर्तनों को आरती धोने लगी.. सोफे के पीछे के वार्डरॉब की फाइल निकलते हुई नवाज़ आरती को देखने लगा.. क्यों की वो किचन दूर के एक्साक्ट्ली सामने खड़ा था.. . आरती की साडी साटन की मटेरियल की थी.. और आरती बर्तन धोते हुई जब किचन सिंक पर जुख जाती थी तब उसस्के नितम्बों का आकर उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख जाता था और आरती के कमर का झुकने से बिल्कुल नज़र आ जाती थी नवाज़ ko….aarti को इस तरह से देख कर नवाज़ आरती के ननगे जिस्म को इमेजिन करने लगा और सोचने लगा बिना कपडे के आरती का का जिस्म कैसा होगा … क्या वैसे hi गोरा होगा जैसे अभी उसकी कमर दिख रही है? फिर वो सोचने लगा.. आरती कुंवारी नहीं है… शाधिशुद्धा है पर माँ भी नहीं बानी है अभी तक .. क्या उसके साथ एक कुंवारे लड़की इतना मज़ा आएगा क्या muje..iska फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहा है….. जब से नवाज़ यहाँ आया है तब से वो आरती के आम और उसके क्लीवेज को अक्सर देखा करता था.. उसके नवल और उसके नंगे कमर को देखा करता था… पर अब इस वक़्त वो उसके जिस्म मई इंटरेस्टेड हो रहा था …. वो सोच रहा था क्या इस्सकी जांघें भी इतनी गोर होंगे या इससे ज्यादा गोर होंगे.. और इसकी छूट… कैसे होंगे.. एक कुंवारे लड़की जैसे या शाधिशुद्धा औरत जैसे.. अब नवाज़ को आरती की छूट को देखने का मैं हो रहा tha…wo सोचने लगा.. आरती मेमसाब के ज़्यादा करीब मई कैसे जा सकता हु और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता हु…. यही वो सिकहने लगा..

फिर वो आरती की तरफ देखते हुई आपने चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रहा था धीरे धीरे..
 
अब शेठजी ने सोफे पाई बैठ कर टीवी ों किया और टीवी देखने लगे. अन्दर किचन मई बर्तनों को धोने लगी.. सोफे के पीछे के वार्डरॉब की फाइल निकलते हुई नवाज़ आरती को देखने लगा.. क्यों की वो किचन दूर के एक्साक्ट्ली सामने खड़ा था.. . आरती की साड़ी साटन की मटेरियल की थी.. और आरती बर्तन धोते हुई जब किचन सिंक पर जुख जाती थी तब उसस्के नितम्बों का आकर उस साटन मटेरियल में अच्छी तरह से दिख जाता था और आरती के कमर का झुकने से बिल्कुल नज़र आ जाती थी नवाज़ ko….aarti को इस तरह से देख कर नवाज़ आरती के ननगे जिस्म को इमेजिन करने लगा और सोचने लगा बिना कपडे के आरती का का जिस्म कैसा होगा … क्या वैसे hi गोरा होगा जैसे अभी उसकी कमर दिख रही है? फिर वो सोचने लगा.. आरती कुंवारी नहीं है … शाधिशुद्धा है पर माँ भी नहीं बानी है अभी तक .. क्या उसके साथ एक कुंवारे लड़की इतना मज़ा आएगा क्या muje..iska फिगर बिल्कुल एक कुंवारी लड़की जैसे hi दिख रहा है….. जब से नवाज़ यहाँ आया है तब से वो आरती के आम और उसके क्लीवेज को अक्सर देखा करता था.. उसके नवल और उसके नंगे कमर को देखा करता था… पर अब इस वक़्त वो उसके जिस्म मई इंटरेस्टेड हो रहा था …. वो सोच रहा था क्या इस्सकी जांघें भी इतनी गोर होंगे या इससे ज्यादा गोर होंगे.. और इसकी छूट… कैसे होंगे.. एक कुंवारे लड़की जैसे या शाधिशुद्धा औरत जैसे.. अब नवाज़ को आरती की छूट को देखने का मैं हो रहा tha…wo सोचने लगा.. आरती मेमसाब के ज़्यादा करीब मई कैसे जा सकता हु और अपने हरकतों को और मज़बूत कर सकता हु…. यही वो सोचने लगा..

फिर वो आरती की तरफ देखते हुई आपने चेस्ट पर अपना हाथ फेरर रहा था धीरे धीरे..

अब नवाज़ आरती को देखती हुई काम कर रहा था पर आरती पीछे मुद के नहीं देख रही थी.. ऐसे hi 10-15 मिनट हो गये थे.. अब शेठजी किचन मई देखते है.. वह आरती चुपचाप काम कर रही थी.. तब शेठजी नवाज़ को धीरे से आवाज देते है.. इधर आओ

हाँ शेठजी

धीरे से बोल.. अन्दर बहु सुन लगे

हाँ बोलिये

नवाज धीरे से बोलता है

दारू है क्या.. कुछ जुगाड़ हो सकता है क्या

घर मई तो इतना सारा स्टॉक है

है नहीं था

मतलब

तेरे मेमसाब ने सब फेक दिया

इतना सारा.. और इतने महंगे दारू

हाँ बाबा.. अब कहा मिल सकते है क्या

हां

कहा

गाँव मई एक जगह

ब्रांड

आप का मिल जायेगा

तो लेके आओ.. चुप चाप से और आरती को पता नहीं चलेगा

नहीं पता चलेगा मेमसाब को

तब शेठजी नवाज को पैसे देते है.. नवाज़ किचन की तरफ देखता है तब आरती किचन मई काम कर रही थी उसका इधर ध्यान नहीं था.. तब नवाज़ चुपचाप बहार जाता है और कुछ समय मई वापिस दारू लेके आ जाता है..

नवाज़ ने कुछ देर बाद एक ड्रिंक्स बनाये शेठजी के लिए और उनके पास निचे बैठ गया सोफासेट के पास.. और शेठजी से बात करने लगा . शेठजी ने पहला ड्रिंक ख़तम किया और एक और बनाने को कहा जो नवाज़ ने बना के दिया उनको….. फिर तीसरा भी बना के दिया.. अब शेठजी तीसरा ड्रिंक पिने लगे और इधर नवाज़ चौथा ड्रिंक बनाने लगा तो आरती ने कहा,

यह आखरी है okay? इस से ज़्यादा नहीं पीना ठीक है पापा जी ?

आरती बहार आयी हुई थी और वाल से सत् के कड़ी हुई थी .. और नवाज़ और आपने ससुर क्या कर रहे है ये देख रही थी..

तब शेठजी ने स्माइल करते हुई देखा और कहा

तुजे पता चला बेटी

तब नखरा करते हुई कहती है..





हाँ मई तो ाँधे और बहरी हु.. मुझे कहा से पता चलता.. आप दोनों.. मालिक और नौकर की छलखि..

तब नवाज़ जोरोसे हसने लगा..

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखने लगी..





तब थोड़ा डरते हुई शेठजी कहते है

तुम गुस्सा होंगे इसलिए तुमसे छुपा के नवाज़ को बोलै.. और कोई बात नहीं

हाँ.. और कोई बात नहीं.. अआप्को शुगर है.. बप है.. तो मई आप को ड्रिंक कैसे करने दू..

गुस्सा करते हुई आरती कहती है





थोड़े hi ले रहा हु

थोड़े hi है क्या ये पापाजी.. ये आप का छोटा पेग है

अब बस करूँगा

पक्का

हाँ पक्का बेटी.. मई तुमसे जूथ क्यों बोलूंगा

सेठजी ने चौथी पेग ख़तम किया तो नशा सा चा गया था और हिमत भी बढ़ गयी थी और सोचा के अब और थोड़ा पिता हु.. इसलिए उसने नवाज़ से कहा

एक और पेग बना लो

तब नवाज़ आरती की तरफ देखने लगा

तब शेठजी उससे कहते है

उधार क्या देख रहा है तेरे मेमसाब की तरफ.. एक और पग बना ले

तब आरती ने कहा

पापाजी आपने ये लास्ट बोलै था

एक और सिर्फ

तब नवाज़ आरती की और देखते हुई कहता है

बना लू क्या

तब शेठजी कहते है गुस्से मई

उसे क्या पूछ रहा है.. मई मालिक हु या वो.. तेरे टंका कोण देता है

आप

तब एक और पेग बना ले

तब नवाज़ एक पेग बनता है

तब शेठजी आरती की तरफ देखते हुई पूछता है

अरविन्द नहीं आया क्या अभी तक

तब आरती गुस्से कहती है

नहीं

आज कल अरविन्द कितने बजे ारः है फैक्ट्री से वापस?

आरती ने शेठजी को देखा और पूछा,

“क्यों?”

तो शेठजी ने आश्रय से आरती को देखा और कहा,

“अरे भाई किआ अब यह भी पूछना मन है किआ?”

तब आरती ने चहरे पर स्माइल लेट हुए कहा,





“रोज तो 11-12 बजे तक आते है पर आज नहीं आने वाले.. कुछ देर पहले फ़ोन किया था उनोने एक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है और काफी वर्कर ओवरटाइम कर रहे हैं कहा उनोने इसलिए आज नहीं आने वाले !”

शेठजी ने एक सिप लेते हुए कहा,

“हम्म गुड गुड अच्छा संभाल रहा है काम वो; मेरे जाने के बाद बिल्कुल कंपनी को चला पाएगा, मुझे अब कोई फ़िक्र नहीं कंपनी की!”

तब नवाज़ कहता है..

हाँ शेठजी.. छोटे मालिक अच्छे से कंपनी हैंडल कर रहे है

आरती को कुछ समाज नहीं आया.. तब उसने कहा,

“क्यों? आप कहाँ जा रहे हो जो आप के जाने के बाद कहा आप ने?”

शेठजी ने कहा, “बूढ़ा हो रहा हूँ अब मर गया तो उसी को संभालना होगा नाह कंपनी को!”

तब नवाज़ ने उनके बाज़ू को पकड़ते हुए कहा,

“आप बूढ़े थोड़े hi हो? आप तो बहोत मज़बूत सॉलिड स्टड हो जी!! आप क्यों मरने लगे अभी?

शेठजी ने अपने व्हिस्की का एकांत सिप लेते हुए कहा,

“पता नहीं .. आदमी का क्या भरोसा.. कब क्या हो जय.. वैसे मेरे बप काम ज्यादा होती रहती है.. लास्ट मंथ मई एक बार जब बप लौ हुई थी तो एक डर सा लगा, के पता नहीं कब ऐसे hi एक दिन टपक जाऊं हहहहए!”

तब नवाज़ ने अचानक पूछा, “किआ आप किसी बात या चीज़ से घबराये थे? घबराने से भी बप लौ या हाई होता है, स्ट्रेस लेने से भी होता है, तो उस वक़्त जब बप लौ हुई थी किआ आप किसी चीज़ से घबराये या स्ट्रेस लिए थे?”

तब आरती कहती है





ऐसा कुछ नहीं हुआ था.. पापाजी को कोई स्ट्रेस नहीं था या वो घबराये भी नहीं थे

फिर बप लौ क्यों हुआ था

उसदिन पापाजी का एक्ससरसिओं ज्यादा हुआ था इस वजह से बप लौ हुआ था

एक्स.. ेररर.. क्या लौ हुआ था

तब आरती हस्ती है





मेरे उनपद नौकर.. उसदिन पापा जरा ज्यादा वाकिंग किये हुई थे इस वजह से बप लौ हुआ था

अच्छा अच्छा समाज आया

मेरे उनपद नौकर कहने से नवाज़ खुश हुआ था

तब शेठजी कहते है

बीटा तुम लगता है क्या मुझे दारू ज्यादा हुई है

तब चेहरे पर स्माइल लेट हुई आरती कहती है

आप को छड़ी है

तुम क्या लगता है मई नशे मई हु इसलिए ऐसा बोल रहा हु

हाँ ..

पर क्यों लगा तुम ऐसा

तब आरती ने हँस्ते हुए कहा,





“मुझे लगता है के आप को जब से इस नवाज़ का साथ मिला है तब से आप ज्यादा दारू पि रहे हो.. इस नवाज़ ने आप की आदतें बिगाड़ दिए है .. कहीं आप इस्सके जैसे पक्कड़ तो बने नहीं न.. बताइये मुझे?!”

न - मेमसाब मई पिता नहीं हु और शेठजी मेरे मालिक है.. िंनोने बोलै तो मुझे वो करना पड़ेगा..

तब आरती नखरा दिखते हुई कहती है..

हाँ मुझे पता है तुम मालिक के कितनी सुनते हो और अगर मालिक ने गलत काम करने को कहा तो करना नहीं चाहिए.. मालिक का नहीं सुनना चाहिए..

ये बात आपने गलत बोल दी मेमसाब

कोनसी बात

यही की मालिक का नहीं सुनना चाहिए

मैंने ऐसा नहीं कहा की मालिक का नहीं सुनना चाहिए

अभी तो कहा

मैंने ये नहीं कहा जो तुम बोल रहे हो मैंने कहा अगर मालिक गलत बोलते है तो मालिक की नहीं सुनना चाहिए और गलत काम नहीं करना चाहिए

फिर ये भी गलत है

भला इसमे क्या गलत है

हम मालिक को गलत कैसे बोल सकते है

तब आपने सर पर हाथ मार्के आरती कहते है.

हे भगवान्.. ये लड़का मेरा दीमक ख़राब कर रहा है

अब मैंने क्या किया मेमसाब

तब गुस्से से आरती उसको देखते है

अब आप गलत हो तो मई आप को गलत कैसे बोल सकता हु

हाँ बोल सकते हो

पर शेठजी को कैसे बोल सकता हु.. उनके वजह से हमारी दाल रोटी चल रही है

फिर क्या शेठजी को दारू पिलाओगे

तब शेठजी कहते है

यार तुम लोग मिया बीवी के जैसे जगदे मत करो

शेठजी ने मिया बीवी उन्दोनो को कहा इस वजह से नवाज़ खुश होता है और आरती आश्रय से आपने ससुर को देखती है.. वो तो नशे मई था तो उसे आपने बात पर ध्यान नहीं था तब वो नवाज़ को देखते है तो वो स्माइल करते हुई देखता है और इधर नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्मा जाती है..





तब शेठजी कहते है..

ारे आरती बीटा.. वो हमारा नौकर है.. जो हम कहेंगे वो वही करेगा.. और मेरे कही बात को वो कैसे नहीं बोल सकता है..

आप सही कह रहे हो पापाजी

मुझे छड़ी है इसलिए मई ऐसा नहीं बोल रहा हु

आरती ने नवाज़ को देखते हुई डेंटन में अपने होठ को दबाते हुए कहा..

“पापा जी आप को चढ़ गयी है .. आप नशे में हैं इसलिए ऐसे बातें कर रहे है ? "

शेठजी ने आरती की और देखते हुई कहा,

“अरे बहु सुनो तो, इधर आओ मेरे पास”

आरती उसी जगह रुकी .. कुछ देर कुछ सोचा और एक दो कदम चलके उनके करीब आयी तो शेठजी ने कहा,

“कौन कहता है के जब मैं नशे में होता हूँ तब ऐसे बाते करता हूँ? "

तब आरती नवाज़ की तरफ देखते है.. तब शेठजी कहते है..

इस ने कहा क्या

तब आरती झट से कहती है..

नहीं नहीं पापा जी ये क्यों कहेगा

स- क्या तुम लगता है मुझे चढ़ गयी है..

तब आरती हाँ मई गर्दन हिलाते है.. तब शेठजी कहते है..

नहीं बहु मुझे नहीं छड़ी hai..tume याद है 4-5 दिन पहले हम किचन मई थे तब मैंने तुम कहा था.. अरविन्द अब ाचे से फैक्ट्री चला रहा है.. अब मई आराम से मर सकता हु..

मरे आपके दुसमन

यही कहा था तुमने उसी वक़्त भी

ठीक है.. आप सही मई गलत.. चलो अब सोने.. नवाज़ तुम शिदे से पकड़ो.. मई इस साइड से पकड़ते हु.. पापाजी को बैडरूम तक लेके जाते है..

मुझे क्या इतने ज्यादा हुई है क्या जो मई खुद चल के बैडरूम तक नहीं जा सकता

न - नहीं आप को ज्यादा नहीं हुई है

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखने लगी..

स- ये हुई न बात.. देखो बहु नवाज़ की बात सुनो.. मुझे ज्यादा नहीं हुई है.. 1-2 पैक मई और लगा सकता हु न नवाज़

न - हाँ शेठजी

तब आरती बहुत गऊसे से नवाज़ को देखती है

न - पर यहाँ नहीं बैडरूम मई बैठके पि लो आप.. सही रहेगा

आरती को अब समाज आया की नवाज़ ने ऐसा क्यों कहा

स- ऐसा क्या..

न - हाँ शेठजी

तब झटके से आरती कहते है

ा - अब मेरे नहीं तो आपने प्यारे चहिते नवाज़ की बात सुनो

स - हाँ वो मेरा प्यारा और चाहता है hi

ा- तो ठीक है उसकी बात सुनो

स- क्या बात सुननी है नवाज़ तेरे

तब आरती इशारे से नवाज़ को कहते है.. बैडरूम मई चलने का बोलो

न - हाँ शेठजी.. यहाँ नहीं हम बैडरूम मई जाते है.. वह जेक आप आराम से और 2-4 पेग पीओ

तब आरती फुसफुसाती है

तुम भी कमाल हो नवाज़.. पापा 1-2 पेग की बात कर रहे हो और तुम उन 2-4 पेग पिलाने पाई तुले हुई हो

नाराज़ी दिखते हुई आरती कहते है..

आप टेंशन न लो.. पाई कुछ नहीं पिलाऊंगा उन और आराम से उन बैडरूम मई भी लेके जाऊंगा

तब शेठजी कहते है..

नवाज़ बीटा क्या तुम लगता है क्या मई और 2-4 पेग ले पाउँगा

हाँ शेठजी.. आप तो इस गाँव के बब्बर शेर है.. आप को इतने दारू से क्या होगा..

तब आरती मैं मई कहते है..

ये तो मेरे ससुर को चने के पेड़ पर चढ़ा रहा है.. तारीफ कर कर के और दारू पीला पीला कर मार hi डालेगा ये कमीना

स - तो फिर चलो बैडरूम मई

हाँ शेठजी

तब आरती उसे इशारा करती है उनका हाट पकड़ो

तब नवाज़ हाँ मई गर्दन हिलता है

शेठजी आप उठिये

हाँ उठता हु.. जरा हाट तो देना मुझे

इस बात पर आरती हस्ती है.. नवाज़ शेठजी को हाथ देता है और धीरे धीरे शेठजी नवाज़ का हाथ पकड़ के आपने बैडरूम मई जाते है.. और उन्दोनो के पीछे आरती चल रही थी.. और नवाज़ उनको छोत पाई बिठा देता है.. तब नवाज़ विजयी मुद्रा से आरती की और देखता है.. और धीरे से बोलता है ताकि नशे मई दूत शेठजी न सुने

कर दिखाया न.. शेठजी को लाया न बैडरूम मई..

तब आरती कहते है

ज्यादा ऊधो मत.. उनको बीएड पाई सुला दो

तब नवाज़ उनके पेअर बीएड पाई रखता है और उन थोड़ा निचे खिसकने बोलता है और खुद की उनको थोड़ा निचे खिसका देता है और गर्दन पीछे कर के उन सुला देता है..

तब नवाज़ आरती की और घूम के कहता है..

अब तो खुश

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है..

हाँ.. धन्यवाद नवाज़.. बहुत अच्छा काम किया तुमने..

धन्यवाद मेमसाब

तभी शेठजी बीएड पाई पड़े पड़े hi कहते है.. उनकी आँखे बंद थी..

नवाज़

हाँ शेठजी

मुझे एक बात बताओ

हाँ पूछिए

तुम्हारा और नीता का कुछ है क्या..

शेठजी की इस बात से नवाज़ को बहुत आचार्य होता है .. तब वो कुछ सोच के वो घूम के आरती की और देखता है.. अब आरती का चेहरा खुल उठा था.. वो चहरे पाई अलग hi रिएक्शन देती है...





नवाज़ के देखने से वो उसे देखते हुई न मई गर्दन हिलाते है और धीरे से बोलती है..

मैंने नहीं बताया.. मेरे और ऐसा देखो मत जैसा पिताजी को मैंने बताया हो

तब शेठजी फिर से कहते है..

बताओ न

आप क्या पूछ रहे है मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है

ज्यादा शहाणा मत बनो.. तुम्हारा और नीता का कुछ चक्कर है क्या

नहीं न शेठजी.. आप को किसीने बताया

बताने की क्या जरुरत है.. मई क्या ऐसे hi इतने प्रॉपर्टी का मालिक हु क्या.. और इतने लोंगो को हैंडल करता हु क्या

आरती हँसाने लगी और नवाज़ की हालत पतली हो जा रही थी

तुम वो कामचोर पसंद है क्या

तब आरती जोर से हस्ती है

तब आँख खोल के शेठजी आरती को देखता है..

बहु तुम ऐसा कुछ लगा क्या

आरती को ये समझ नहीं आ रहा था की वो आपने ससुर की बाटिओं का जवाब दे या नहीं ..... मगर कहीं न कहीं शेठजी ने उसे पूछने के बाद आरती के होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान ज़रूर तैर गयी थी ...... कहीं न कहीं उसे नवाज़ और नीता के बारे पूछने वाली बात उसके दिल को भा गयी thi..........ek तरफ तो वो ससुर की बात से खुश हो गयी थी .. खुश होने के बाद भी अब वो एक शब्द कुछ न बोल पायी...............

आरती अब चुप चाप ख़ामोशी से कड़ी थी ....... वो कुछ डीडे नहीं पा रही thi..wo बस यु खड़े खड़े होकर निचे देखते कुछ सोच रही पर डीडे कुछ कर नहीं पा रही थी. कुछ समय तक वो इसी उलझन में डूबी रहती हैं .. जैसे hi शेरहजी फिर से पूछते है..

बेटे मई तुमसे कुछ रहा हु

तब अगले hi पल गर्दन उठा के पहले आपने ससुर को देखती है और फिर नवाज़ को देखती है. .. तब नवाज़ उसको देखता है और मैं मई कहता है. .

क्या कहेगे ये लौंडे अब

ऐसा सोचकर वो आरती को देखने लगा.. आज आरती ने साड़ी पहनी हुई thi...jo उसके अंगो के उभार को saaf-saaf दिखा रहे रहे ....और साथ में उसके खुले हुए baal...uski जवानी को और ज्यादा दिलकश बना रहे थे..

तब वो नवाज़ को देखते हुई कहते है.. इशारे से.. धीरे से..

अब मई क्या कहु इनने

तब वो देख लेती है नवाज़ क्या देख रहा है.. उस्सको पता चल गया की नवाज़ की नज़रें उस्सकी छाती और काँधे पर है.. नवाज़ उस्सकी ब्लाउज के अंदर लटके उस्सकी गोआल गोआल मम्मी और निघ्त्य के स्ट्रैप्स को hi देख रहा था.. तब आरती ने गुस्से से उसकी और देखा और धीरे से कहा..

“हो गया ? देख लिया जो देखना था दिल खुश हुआ तुम्हारा ?”

तुरंत नवाज़ दूसरे तरफ देखने लगा और ऐसे दिखने लगा मैंने कुछ देखा hi नहीं.. … तब आरती ने मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को ठीक किया ……. तभी उसके ससुर ने फिर से पूछा ...





तब आरती हड़बड़ी मई हाँ मई गर्दन हिलाते है..
 
तुरंत नवाज़ दूसरे तरफ देखने लगा और ऐसे दिखने लगा मैंने कुछ देखा hi नहीं.. … तब आरती ने मुस्कुराते हुए अपने साड़ी को ठीक किया ……. तभी उसके ससुर ने फिर से पूछा ..

तब आरती हड़बड़ी मई हाँ मई गर्दन हिलाते है..

तब शेठजी कहते है..

हाँ.. है न मुझे भी ऐसा hi लगा

तब नवाज़ झट से कहता है

नहीं नहीं साहब ये सच नहीं है..

क्या सच नहीं है.. अब बहु भी तो यही कह रही है

क्या मेमसाब.. आप कुछ भी कह रही हो…

वो क्यों कुछ भी कहेंगे

पर साहब ये सच नहीं है

क्या सच नहीं है

यही की मई नीता को पसंद करता हु

तो किसको पसंद करता है

तब वो आरती को देखता है तब आरती शर्मा जाती है और शरमाते हुई निचे देखने लगता है ..

तब शेठजी कहते है

बता न

तब नवाज़ कुछ नहीं बोलता है

तब शेठजी कहते है

तू नीता से शादी नहीं करना चाहता क्या

नहीं चाहता शेठजी

तो क्या ऐसे hi मज़े मरना चाहता है क्या

तब आरती हसने लगती है

शेठजी मेरा और उसका कुछ है hi नहीं

अच्छा मुझे घुमा रहा है

तब नवाज़ डर जाता है

तब शेठजी आरती को कहते है

बहु

हाँ पापाजी

ये कुछ भी कहे इस के बात पाई ध्यान मत दो.. तुम नीता से बात करो.. अगर वो शादी को रेडी है तो मई इसके आबू और ामी और उस कामचोर के घरवाले से बात करता हु.. और फिर हम इन् दोनों की शादी करवा देते है..

जी पापाजी

तब गुस्सा करते हुई नवाज़ कहता है

क्या मेमसाब जी पापाजी का क्या मतलब है

क्या मतलब है तू जनता है

आप नहीं मेमसाब जानती है मई उसे पसंद नहीं करता

तो किसको पसंद करता है

तब वो फिरसे आरती को देखता है तब आरती शर्मा जाती है..

बता न किसको पसंद करता है

मेमसाब को पता है

उतना बोलते hi आरती शर्माके वह से चला जाती है ..

मेमसाब आप ऐसा नहीं जा सकते

ऐसा बोल के नवाज़ भी उसके पीछे चला जाता है..

शेठजी - ारे तुम दोनों कहा जा रहे हो

अब शर्माकर आरती किचन मई आती है तब नवाज़ भी उसके पीछे आता है

आपने ऐसा क्यों कहा

क्या गलत कहा मैंने

सही भी नहीं कहा न आपने मेमसाब

अब ये सब भूल जाओ ...कुछ पिने का मन है क्या …

क्या पीलोगे आप ....

...क्या पियेंगे आप...

नवाज़ आरती के बूब्स देख कर कहता है..

वैसे मन तो है की ..... ढूढ़ .... पिऊ….

आरती ने जब नवाज़ को घूरते हुई देखा तो उसके नजर का पीछा किया और तुरंत hi अपनी साड़ी सही कर के बोली....

aarti(muskura कर)- अभी नहीं .... मतलब घर में ढूढ़ नहीं hai...kuch और बोलो..

नवाज़ आरती को देखते हुए कहता है -

तो फिर गुलाबी sharbat....milega क्या...

आरती शर्मा कर कहती है -

मैं ब्लैक चाय लती हु...

फिर आरती शर्मा कर गैस की तरफ जाती है और ब्लैक चाय बनाने लगती है

मन hi मन नवाज़ के बारे मई सोच कर बड़बड़ाने लगी…

ये नवाज़ भी न.. ...बड़ा फ़ास्ट है.... पापाजी के सामने क्या कहने की कोशिश कह रहा तह.. की मुझे पसंद करता है ये तो नहीं कह रहा tha..aur वो भी पापाजी को.. हे भगवान्.. ये लड़का कितना दरिंगबाज़ है.. ..और अब ....मेरे ढूढ़… मेरे बूब्स को देख के.. हे माँ .... मेरे होंटो को देखते हुई कह रहा था.. गुलाबी sharbat...sab समझती हु mai...par मैं भी बड़ी होसियार hu..haaa...

तब झट से नवाज़ कहता है

क्या सोच रही हो मेमसाब

तब आरती कहते है

कुछ नहीं

और नवाज़ को चाय दे देती है और खुद उसके सामने खड़े होक चाय का एक कप लेके चाय पिने लगी.. अब दोनों एक दूसरे की और देखते हुई चाय पिने लगे .. अब उनके चाय ख़तम हो गयी थी तो नवाज़ चाय कप रखने के लिए वाशबेसिन के पास चला गया तब उसी वक़्त आरती भी आपने चाय का कप रख रही थी. तभी नवाज़ ने चाय का कप वाशबेसिन के वह चाय का कप रखा और धीरे से आपने हाट आरती के हाट के पास सरका दिया.. आरती ने कुछ नहीं कहा तो नवाज़ ने आपने हाथ सरका कर आरती के हाथ पर रख दिया...

आरती चौंक कर कहती है -

नवाज़ ….

तब नवाज़ झट से आपने हाथ हटाता है और कहता है..

सॉरी मेमसाब.. वो गलती से हो गया..

आरती कुछ नहीं बोलती और बहार हॉल मई जेक सोफासेट पाई बैठ जाती है.. आपने दोनों हाथो मई सर को पकड़ के.. तब नवाज़ बहार आ जाता है..

मेमसाब.. क्या हुआ आप को.. सर दर्द कर रहा है क्या आप का

आरती कुछ नहीं बोलती.. वैसे hi बैठे रहती है..

वैसे तुम्हारा हाथ…

ये कहते hi आरती अपनी गर्दन उप्पर करके नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते है.. उसे आँखे दिखा कर कहते है..

क्या कहा …

सूर्य.. सॉरी.. आप का हाट गरम लग रहा था ...आप को क्या बुखार है क्या ..दिखाओ जरा....

और आरती की तरफ जाने लगा..

तब झट से आरती कहते है..

कुछ नहीं हुआ है मुझे.. मेरे नज़दीक आने के बहाने मत ढूंढो..

मई बहाने नहीं ढूंढ रहा हु.. सचमुच आपका हाथ मुझे गरम लगा … .

सब तुम्हारे मेहरबानी

नखरा करते हुई आरती कहती है

अब इस मई मेरे क्या मेहरबानी मेमसाब

अगर तुम पापा को दारू नहीं पिलाते तो ये सब नहीं होता

मतलब मेरे बात सही है आप को बुखार आया है

बुखार नहीं आया है सर फटा जा रहा है

देखु तो जरा

ऐसा कह के नवाज़ झट से आरती के माथे पर हाथ रख देता है … आरती तो सकपका hi gai...par नवाज़ ने हाथ नहीं हटाया....

अरे आपका माथा तो गरम hai...aur आप कह रही है बुखार नहीं है..

ारे नवाज़ बोलै न सर फटा जा रहा है इस वजह से थोड़ा गरम हुआ होगा

ठीक है मेमसाब.. चलो आप रेस्ट कर लो…

नहीं कुछ नहीं हुआ मुझे ...वो बस थोड़ा पापा की वजह से टेंशन.. इस वजह से सर दर्द कर रहा है और माथा गरम हुआ होगा ..

अरे ये ठीक nhi..aap रेस्ट कर लो अब..

हाँ कर लुंगी..

एक काम karo...aap लेट jao...main सर दबा देता hu...accha लगेगा ...आप को..

नवाज़ के कहते hi आरती शॉकेड सी हो gai...aur उसके और देखते हुई कहते है..

नहीं कोई जरुरत नहीं है

कैसे जरुरत नहीं है.. आप का सर फटा जा रहा है न.. सर दबाने से आराम मिलेंगे

नहीं नवाज़ ...कुछ ज्यादा नहीं दुःख रहा है.. और हल्का सा माथा गरम है.. गोली खा लुंगी.. सब ठीक हो जायेगा … तुम परेशान मत ho…aur घर चले जाओ..

कैसा परेशान न हु मई.. मेरे मालकिन का सर दुःख रहा है और मई परेशान न हु और चुचाप से घर जाऊ ..

हाँ

नहीं होगा ऐसा कभी.. एक काम करो.. अगर लेटने मई आप को शर्म आ रही है तो ऐसे hi सोफे पाई बैठकर अपनी गर्दन पीछे करो मई आपका सर दबा देता हु..

ऐसा कह के उसके पीछे जाता है..

कोई जरुरत नहीं है नवाज़.. तुम घर जाओ..

तब नवाज़ गुस्से मई बोलता है..

बोलै न गर्दन पीछे करो ...सुना karo...leto जल्दी...

नवाज़ के ऐसे गुस्से से कहने से आरती दर गयी ..... पर तुरंत hi गर्दन पीछे कर ली ....

अब नवाज़ पीछे से आरती के पास आया और फिर दोनों हाथो से उसके सर की मालिस सुरु कर दी… ये देख कर आरती पूरी हैरान थी फिर भी उसने कुछ नहीं कहा... आरती आँखे बड़ी कर के नवाज़ को देखे जा रही थी...

मेमसाब ऐसे क्या देख रही हो आप ...सर दबा रहा hu...bas...

आरती शर्मा कर कहते है -

कुछ नहीं...

नवाज़ यहाँ आरती के सर की मालिश करने लगा और वह आरती के दिल में कई सवाल पैदा होने lage....aarti मैं मई कहते है.. ये तो सच में बहुत hi ज्यादा फ़ास्ट hai...dekho कैसे मुझ पर हुकुम चला रहा है और मेरा सर की मालिश कर रहा है जैसे मैं इसकी बीवी हु...

पर क्या ये सब यही कर रहा hai....kya मेरी मर्ज़ी भी है इस सब me...maine कैसे किसी गैर नारद की बात मान ली और तुरंत अपनी गर्दन पीछे कर ली ...मैंने क्यों उसे नहीं roka...kyo उसको आपने माथे को चुने दिया .... फिर वो कुछ सोचकर खुद से कहते है . ..

देखा जाय तो मैं काफी टाइम से उसकी बात मान रही hu...usne कहा मुझे ड्रेस नहीं तो मैंने इनके अरविन्द जी का नया ड्रेस दिया.. मई कोई भी पुराण ड्रेस दे सकती थी पर मैंने इस गंदे इंसान को मेरे पति का नया ड्रेस दिया.. .. मई ऐसे क्यों बेहवे कर रही हु.. … मई इतने जल्दी उसकी बात मान रही हु..

क्या हो रहा है आरती तुम्हे ....क्या तू नवाज़ को पसंद करने lagi...agar नहीं तो क्यों उसकी हर बात मानती hai...kyo उसके लिए उसके हेल्प की.. बॉक्स उतरवाने के लिए.. ...क्यों उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन्ना चाहती hai...aur जब वो तारीफ नहीं करता तो उसके तारीफ की वेट करती है.. ....हे भगवन ....आखिर ये सब हो क्या रहा है मेरे sath...aaj तो हद hi हो gai....wo मेरे hi बूब्स देख कर ढूढ़ मांग रहे थे पिने ko...aur होंठो को देख कर गुलाबी sharbat...fir भी मई गुस्सा नहीं हुई उल्टा शर्मा gai...ye सब क्या hai...Kyon मई उस गंवार का साथ पसंद करती हु.. क्यों उसके आपने और देखने का इंतज़ार करती hai...kyon..kya तुझे उनसे pyaar...nhi..nhi....

मैं शादीसुदा हु… इस बड़े खानदान की बहु ...तो मैं क्यों किसी से प्यार karu...mera पति है na...bas वो थोड़ा बिजी रहते hai...saayad isliye...par ये सही है kya...pata nhi....par ये अच्छा लगता है … नवाज़ साथ होता है तो दिल खुश रहता है… यही सब सोचते हुए आरती की आँखे बंद हो gai…kuch देर ऐसे hi आँखे बंद करके पड़ी रही .. .. फिर से अचानक आँखे खोल दे और वह से उठ गयी.. और कहती है..

हो गया बस..

ऐसा कह के किचन मई जाती है और पानी पिने लगते है.. नवाज़ भी उसके पीछे जाता है और उसको देखते हुई कहता है

मुझे भी पानी दो मेमसाब

तब आरती उसको पानी देते है.. नवाज़ पानी पिता है और कहता है..

आपका सर कैसा है अब मेमसाब

ठीक है अब

दुःख तो नहीं रहा है न

नहीं

मैंने कहा था न की मेरे सर दबाने से आप को हल्का हल्का फील होगा

हाँ.. अब हल्का हल्का फील हो रहा है..

और पलट कर नवाज़ को देखते है

थैंक यू नवाज़

मेंशन नॉट मेमसाब

उसके मेंशन नॉट कहने से आरती हस्ती है

अब क्या कह दिया मैंने गलत..

तब स्माइल करते हुई आरती कहती है

कुछ नहीं

और कुछ सेवा मैडम

नहीं

ऐसा शरमाते हुई वो कहते है

इस नाचीज़ के लिए और कुछ सेवा होंगे तो बेझिझक बताये मैडम आप

बहुत स्टाइल से नवाज़ कहता है तब नखरा करते हुई आरती कहते है

“नीता के आशिक़ जी जाओ अपने घर .. अब कोई सेवा नहीं है यहाँ .. जो भी सेवा होंगे अब कल.. यहीं रात गुजरने का इरादा है किआ आज रात? 9 बज गए है ”

तब नवाज़ नौटंकी करते हुई कहता है ,

“ी ऍम ा साद मन टुनाइट! इतने खूबसूरत मेमसाब मुझे आपने घर से निकल रही है ”

तब नखरा करते हुई आरती कहते है..

ये मन!! घर से निकल नहीं रही हु.. तो कल आने को बोल रही हु

और फिर हस्ते हुई कहते है..

भला मई कैसे आपने नीता के प्यारे से.. हैंडसम एंड डैशिंग.. दरिंगबाज़ आशिक़ को घर से कैसे निकल सकती हु..

और हसने लगी..

तभी आरती के हस्बैंड अरविन्द को कॉल आ जाता है.. वो हस्ते हुई कॉल उठाते है..

हाँ बोलिये पति महाराज जी

हाँ नवाज़ का बच्चा अभी घर पाई है क्या

है न नवाज़ का बच्चा घर पाई hi है

तब नवाज़ आचार्य से आरती की और देखता है तब आरती इशारे से धीरे से मोबाइल बाजु मई कर के उसे कहती है.. तुम्हारे बारे मई hi पूछ रहे है.. तब नवाज़ उसे धीरे से कहता है.. कह दो उन मई घर चला गया तब आरती कहती है मैंने कह दिया आलरेडी तुम यहाँ हो..

तब नवाज़ सर पाई हाट मरता है और धीरे से कहता है.. या अल्ला.. अब ये क्या नए मुसीबत है… नवाज़ के ऐसे करने से आरती कहते है.. अब क्या हो गया.. मुझसे क्यों जूथ बुलावा रहे हो और वो भी मेरे प्यारे पतिराज को.. वो मुझे उधर बुला लेंगे और रात भर उधर फैक्ट्री मई रहना पड़ेगा.. मच्छर की खाये मई.. तब आरती हस्ती है.. अच्छा ऐसा क्या.. तब

तब उधर से अरविन्द कहता है..

इतने देर तक वह रुखा है.. यहाँ फैक्ट्री मई तो कभी नहीं रुकता

यहाँ नज़ारा देखनेलायक है न इसलिए रुका होगा.. उसे नज़ारा पसंद आया होगा

क्या मतलब

कुछ नहीं बाबा.. पापा ने उसे कुछ काम दिया था.. वो हाल मई के सभी फाइल ठीक करने को कहा तह तो काम करते करते उसे देर हो गयी शायद..

ठीक है पापा ने अच्छा काम किया है.. बी थे वे उसे बुलाना जरा..

कहा

तुम्हारे पास

क्या पागल हो क्या.. अपनी इतने प्यारे.. ब्यूटीफुल.. नाज़ुक.. हॉट से पत्नी के पास एक काले गंदे नौकर को लेन को बोल रहे हो

तब अरविन्द थोड़ा गुस्सा हो जाता है..

आरती मई बिलकुल मज़ाक के मूड मई नहीं.. उसे मई बात करने के लिए तुम्हारे पास बुलाने को बोल रहा था ..

वैसे बोलो न फिर

ऐसे कह के नवाज़ को बुलाती है..

नवाज़ इधर आओ.. तुम्हारे छोटे मालिक बुला रहे है.. तुमसे फ़ोन पाई बात करना चाहते है..

तब अरविन्द कहता है

कहा है वो

बहार हॉल मई पापा जी के पास

जल्दी बुलाओ

जल्दी आओ नवाज़

तब नवाज़ कहता है

आया मालकिन

फिर नवाज़ उसके पास आ जाता है

क्या काम है मालकिन जी

तब अरविन्द कहते है

उसे मोबाइल दो

कर लो आपने छोटे मालिक से बात

ऐसा कह के वो उसे आपने मोबाइल देते है.. और नखरा करते हुई बोलती है..

दूर से बात करो.. मेरा मोबाइल तुम्हारे बदन के गन्दगी से मैला नहीं होना चाहिए..

तब वो कहता है..

कहा है गन्दगी.. ..

तब वो मोबाइल की तरफ इशारा करते हुई कहते है.. मू पाई हाट रखकर..

अरविन्द लाइन पाई है.. उनके सामने ये बोल रहे हो..

अच्छा सॉरी

कहके बुरा सा मू बनता है..

ठीक है कोई बात नहीं

अब तो मेरे मज़े hi मज़े है.. साहब का ड्रेस.. साहब की बीबी

तब नखरा करते हुई आरती उसके गाल को धीरे से मरते

बदमाश

तब अरविन्द कहता है

नवाज़

हां मालिक

उधर का काम हो गया क्या

हाँ मालिक आज का काम हो गया.. अब घर जा रहा हु कल सुबह जल्दी आ जाऊंगा

घर नहीं इधर फैक्ट्री आ जाओ

नहीं न मालिक बहुत थक गया हु..

अरे इधर कुछ काम नहीं है.. सिर्फ यहाँ आके सोना है…

वह नींद hi नहीं आती न मालिक

क्यों

मच्छर बहुत काटते है

गुड नाईट लगाएंगे न

किसी दूसरे को बुलाओ न साहब

कोई नहीं है भरसो वाला.. यहाँ सब महंगा सामान है.. तो तुम hi आ जाओ..

ठीक है साहब

ऐसा कहके बुरा से मू करके मोबाइल आरती को देता है.. तब तक उधर से कॉल कट गया था..

क्या हुआ इतना बुरा मू बनाने को

आप को क्या पता हम गरीब की तकलीफ.. उस मच्छर की खायी मई आप के पति हमें सोने को बोलेंगे और खुद यहाँ आकर आपके बहो मई सोयेंगे..

तब आरती नखरा करते हुई उसके छथि मई मुक्का मरते है..

बदमाश!! कुछ भी बोलते हो.. साहब घर पाई नहीं आने वाले है.. वही रुकने वाले.. और मई बोलती हु साहब को कएल लगाने को ..

साहब हाँ बोलते है पर नहीं लगते

अच्छा बाबा यहाँ का देते हु

तब आरती वह का गुड नाइट का लिक्विड और मशीन देते है और उसे चालू कैसे करना है बताती है..

आप कितनी अच्छी है.. और साहब कुछ सुनते hi नहीं है

वो भी अच्छे है पर काम की वजह से भूल जाते होंगे

हाँ.. ऐसा hi होगा

अब मई चलता हु

ठीक है जाओ.. गुड नाईट

गुड नाईट मेमसाब

नवाज़ जाने लगता है.. बहार हॉल मई पहुँच गया था तब आरती कहते है

रुको जरा नवाज़

तब नवाज़ कहता है..

अब क्या है मेमसाब

रुको 2 मिनट्स

ऐसा कह के नवाय बाजु वाले रूम मई जाता है.. और 1 रुग और एक निचे बिछाने वाले सॉफ्ट कारपेट देती है..

ये लेके जाओ..

ये क्यों मेमसाब

वह बिछाने के लिए कुछ नहीं होगा और उप्पर लेने के लिए कुछ नहीं होगा.. रुग की वजह से मच्छर नहीं काटेंगे..

इस्सकी कोई जरुरत नहीं थी मेमसाब

लेके जाओ.. यहाँ बहुत सरे है

आप सचमुच बहुत अच्छी हो

ज्यादा तारीफ करने की कोई जरुरत नहीं है.. अब आप जाओ..

ठीक है.. गुड नाईट..

गुड नाईट नवाज़

तब नवाज़ वह से चला जाता है..
 
ऐसा कह के नवाज़ बाजु वाले रूम मई जाता है.. और 1 रुग और एक निचे बिछाने वाले सॉफ्ट कारपेट देती है..

ये लेके जाओ..

ये क्यों मेमसाब

वह बिछाने के लिए कुछ नहीं होगा और उप्पर लेने के लिए कुछ नहीं होगा.. रुग की वजह से मच्छर नहीं काटेंगे .. ..

इस्सकी कोई जरुरत नहीं थी मेमसाब

लेके जाओ.. यहाँ बहुत सरे है

आप सचमुच बहुत अच्छी हो

ज्यादा तारीफ करने की कोई जरुरत नहीं है.. अब आप जाओ..

ठीक है.. गुड नाईट..

गुड नाईट नवाज़

तब नवाज़ वह से चला जाता है..

अब दूसरे दिन मॉर्निंग

बहार बड़े मालिक और आरती चेयर डालके बैठे थे और चाय पि रहे थे.. नवाज़ मुँह में पान चबाता हुआ वह आ जाता हैं ..

नवाज़ - सलाम साहब ....

शेठजी - ारे नवाज़ सलाम सलाम आओ आओ..

नवाज़ - सलाम .... मेमसाब ..

आरती को देखते हुई कहता है..





सुबह सुबह पान चबाते हुई यहाँ आया है ये देखकर आरती उसे अजीब से नज़रियों से घूरने लगती हैं..........





और कहते है..

आरती - सलाम सलाम.. गुड मॉर्निंग..

नवाज़ - मॉर्निंग.. मॉर्निंग.. सब बढ़िया न मेमसाब ....कोई परेशानी तो नहीं न ....

आरती उसकी और देखते हुई स्माइल करते हुई कहते है





आरती - सब ठीक है.. नहीं नहीं कोई परेशानी नहीं है.. सब ठीक है …

पापा - ारे नवाज़ आओ आओ.. हो गयी क्या सुबह तुम्हारे

हां मालिक

उसकी नज़ारे आरती के बड़े बड़े चूचियों पर थी जो हमेशा की तरह उसकी साड़ी से ढकी हुई थी ........ वो उसे खा जाने वाली नज़रियों से घूरे जा रहा tha......ye जानते हुए भी की आरती उसकी नज़र को ाचे से पहचान रही होगी ....... शायद इसी वजह से आरती के चेहरे पर शर्म की लखीरें साफ़ नज़र आने लगी थी.....





वो कुछ कहती नहीं और नवाज़ को देखते रहते हैं......

आज भी नवाज ने वही शर्ट और पंत पहन रखा था.......... जो आरती ने उसे 2 दिन पहले दिए थे .. मतलब आपने पति का.. उसे देखकर आरती मैं मई कहती शायद ये कपडा वही है जो मैंने इससे दिया है..





हाँ वही है.. पर ये कितना अच्छा था जब मैंने दिया था.. अब कितना गन्दा हो गया है.. ........ इस कपडे को देखने से ऐसा मालूम पड़ता था मनो उस दिन के बाद अब तक ये कपडे कभी धुले hi नहीं......... इसके पंत पर कहीं कहीं धुल मिटटी के साथ साथ कुछ काळा काळा धब्बे भी साफ़ नज़र आ रहे है और शर्ट का भी कुछ हाल वैसा hi है ......... दिन भर घूमता रहता है.. कही पाई भी मू मरता है.. मू मरता है ये वर्ड सुनकर उसे हसी आ जाती है.. कभी ये लड़की तो कभी वो aurat..aur ये क्या हमेशा की तरह इसके जिस्म से वही गन्दी सी स्मेल आ रही है ......और हाथ पवन भी वैसे hi गंदे नज़र आ रहे है जैसे कल यहाँ से जाते वक़्त थे.. मतलब बिना नहाये ये यहाँ आया है.. फिर वो खुद से hi कहती है.. क्या आरती क्या कोई इतने सुबह सुबह नाहटा है क्या.. अभी तो चाय नास्ते का समय है.. तूने तो कहा अभीतक बाथ की है.. पर मई तो इसकी जैसे गन्दी नहीं हु.. नहाया नहीं तो क्यों आया सुबह सुबह यहाँ.. कमीने को मैंने कल hi बोलै tha..saaf सुतरे होक hi मेरे पास आना.. ी मैं हमारे ghar..he हहै.. करके मैं मई हसने लगी.. अब वो अच्छे से उसे देख रही thi..aur फिर नीचे गर्दन करके खुद से कहती है..





हाथ मू धोया या ऐसे चला आया है .......... फ्रेश हुआ है या नहीं… कुछ पता नहीं चल रहा है इस के हलए से.. हाँ फ्रेश होने के नाम पाई सर पर खूब सारा तेल लगाया हुआ है और हमेशा की तरह उलटी मांग से कंघी की है .......... इस गड़े को ये उलटी मांग क्यों पसंद है कुछ पता नहीं चल रहा है..

बहु उस कामचोर को आवाज दो इसको चाय लेन के लिए

पापाजी वो अभी तक नहीं आये है.. मई अन्दर से लेट हु

ऐसा कह के वो उतने लगी

रहने दो मालकिन.. मैंने अभी तक मू धोया नहीं है..

ऐसा कह के वो आरती को देखकर अपने काळा पीले दन्त दिखता हुआ हंस रहा tha.....saath hi साथ पान भी हौले हौले चबाता जा रहा था ......... वहीँ आरती की नज़रें उसपर hi thi.........use देखकर कुछ सोचने लगी और आपने मोबाइल से खेलने लगी..





वो एहि सोच रही थी की अगर सूवर (पिग) को लाख हीरा मोती क्यों न पहनाया जाये वो रहता आखिर कीचड़ में hi हैं ........ कुछ ऐसा hi हाल इस नवाज का भी है ...... वो आपने आप को कहती है मैंने अरविन्द का इतना अच्छा उनुसेड ड्रेस इसको दिया और इस गड़े ने 2 दिन मई ख़राब किया. कमीना ये नहीं सुंदरने वाला.. वो अब मान चुकी थी की ये बाँदा कभी नहीं सुधरने wala........use hi अब इसके साथ एडजस्ट करना होगा........ तब वो खुद को कहती है मई क्यों करू इसके साथ एडजस्ट.. ये कहा मेरा हस्बैंड या बॉयफ्रेंड है.. आरती तू भी कुछ भी बोलते है..

ये सब सोचते हुई कहते है..

अभी तक मू धोया नहीं है

हाँ मालकिन

मतलब ब्रश भी नहीं किया होगा

तब शेठजी कहते है

आरती बीटा ये लोग ब्रश को hi मू धोना बोलते है..

अच्छा ऐसा क्या.. मतलब बिना ब्रश करे hi पान..

आरती के इस बात पर शेठजी और नवाज हसने लगे.. ये दोनों क्यों है रहे है ये आरती को कुछ समाज नहीं आ रहा था..

तब नवाज कहता है

आप भी न मेमसाब.. बहुत भोली हो

नवाज के ऐसे कहने से आरती उसके तरफ बड़े असमाज जैसे देखते है तब शेठजी कहते है

बीटा तंबाकू और पान खानेवाले लोग बिना ब्रश किये हुई hi सुबह सुबह सुरु हो जाते है.. इनने सबसे पहले तंबाकू या पान चाहिए होता है..

तब आरती को बात समाज आये

अच्छा ऐसा क्या

हाँ मालकिन

यहाँ मुझे भी और अरविन्द को भी ये आदत नहीं है न तो आरती बीटा को ये सबकुछ नहीं पता

हाँ समाज आ गया शेठजी

फिर क्या अब बिना ब्रश करे hi ये चाय नास्ता करेगा क्या

नहीं नहीं मालकिन.. मई हाथ मू धोऊंगा न

हाँ तो धो लो जल्दी से तब तुम्हारे लिए चाय लेट हु..

वो क्या न मालकिन मई आते वक़्त ब्रश लाना भूल गया

तब शेठ जी कहते है

ारे तो क्या हुआ.. ये नीम से मू ब्रश करो.. बहुत अच्छा रहता है..

तब वो आरती की और देखता है.. तब वो हाँ मई गर्दन हिलता है..

शेठ जी - मई और अरविन्द रोज इससे से hi ब्रश करते है

और मालकिन आप

मई कभी कभी करते हु

रोज नहीं

हाँ रोज नहीं.. पर ये बहुत अच्छा रहता है इससे ब्रश करो.. बहुत अच्छा रहेगा..

ठीक है आप दोनों कह रहे हो तो कर लूंगा

तब शेठ जी उसे नीम देते है और कैसे ब्रश करना है वो बताते है.. फिर नवाज़ ब्रश करने लगा.. बर्ष करते हुई आरती को देखने लगा..





उस वजह से आरती शर्मा जाती है.. आरती आज पूरी तरह सजी हुई thi...wo भी सुबह सुबह.. उसने रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थी.. उसदिन जब वो वंदना को बोल रहा था की तुम रेड साड़ी मई बहुत अच्छी दिखते हो वो आरती ने सुना था.. उसे क्या हो गया था पता नहीं पर नवाज़ के उस बात पर आरती ने आज अमल किया था.. उसने वही साड़ी पहनी हुई थी जो उसदिन नवाज़ ने वंदना को कहा था पहनने को ...और उसी तरह तैयार थी जैसे उसने वंदना को तैयार होने को बोलै था.. आरती ऐसे तैयार हुई थी इस वजह से वो आरती को घूरता जा रहा था.. आरती भी समझ गई की वो क्या देख रहा है …. नवाज़ के ऐसे देखने से वो शर्मा जाती है.. और कड़ी हो जाते है.. और चोरे चुपके नवाज़ को देखते हुई शर्माने लगी…





अब नवाज़ मू धोने लगा.. तब शेठजी कहते है मई अन्दर जा रहा हु..

हाँ पापाजी

शेठजी अन्दर जाते hi नवाज़ आरती को देखते हुई कहता है





है है क्या ऐडा hai….is साडी में तो किसी अप्सरा से काम नहीं दिख रही हो आप . … मेमसाब

अपनी tàarif सुनकर आरती ने थोड़े देर पहले जो सोचा था की वो तुरंत जवाब नहीं देगी उसपर ब्रेक लग गया और वो गर्दन उप्पर कर के उसकी और देकते हुए बोली





मई नीता नहीं हु .. और वंदना भी..

और स्माइल करते है..

आरती के इस बात पर नवाज़ बिना कुछ बोले hi आरती को देखने लगा.. आरती ने मई नीता नहीं हु ऐसा कहा था पर उसके चेहरे पे कही न कही एक हसी थी .. जो वो नवाज़ से छुपाना छह रही थी… पर नवाज़ ने वो हसी अछि तरह नोटिस कर ली थी.. उसके पीछे का वो मतलब निकलने लगा.. उसकी हसी देखकर नवाज़ को लगा की वो मंज़िल के बहुत करीब है .. वो आपने आप से कहने लगा.. बस उसे अब सिर्फ ऐसा बेहवे करना चाहिए जैसे वो सच में hi आरती से प्यार करता hai…aur इसी प्यार के चलते hi वो उससे जिस्मानी रिश्ता जोड़ना चाहता है … उसके अन्दर कोई हवस नहीं है.. और इसके लिए वो बिलकुल hi तैयार था…

हलाकि उसे हर दिन चुदाई का शौक था. ..और पिछले कुछ दिनों से तो वो बिलकुल भी इस काम से दूर hi था … यहाँ आने के बाद एक दो बार उसने नीता को छोड़ा था.. वंदना का तो अलग है ..पर नीता और आरती मई बहुत फरक था.. वो जनता था की अगर उसने आरती को पता लिया तो उसकी जिंदगी सवार जायेगे.. उसके छोड़ छोड़ के अपनी रांड बनाएगा .. और आरती के जरिये बहुत सारा पैसा भी कमा लेगा.. वो जनता था की इन् लोगो के पास पैसे के कोई कमी नहीं है… पर इस के लिए बहुत धीरे से जाना होगा.. और इसके लिए वो बिलकुल hi तैयार था …

फिर नवाज़ आरती के पास पंहुचा ...वो नवाज़ को करीब पाकर ज्यादा hi शर्मा गई......

हाँ मुझे पता है.. आप न नीता हो न वंदना हो.. आप तो आर्तो हो… आरती अरविन्द अग्रवाल ..

इस बात पाई आरती खुश हो जाती है..

मई तो सिर्फ आपके साडी की तारीफ कर रहा था..

तो ये साड़ी पसंद आयी तुम .....

अरे साड़ी kaha...wo तो...

आरती बीच में कहती है -

तो क्या...

मतलब साड़ी तभी जचती है न जब कोई उसे पहनता hai...hai की नहीं..

hmm...matlab ये साड़ी कोई और पहनेगी तब भी ये साड़ी जचेगी hi...hai न…

नखरा करते हुई कहते है और घूम जाती है..





नवाज़ थोड़ा परेशान होकर कहता है..

मैंने ऐसा नहीं कहा...

तो क्या कहना चाहते हो तुम …

वो मैं कह रहा था की तुम अच्छी लग रही हो...

आरती आँखे दिखा कर कहती है..

क्या मतलब है तुम्हारा ...

पर उसने तुम कहने पर आपत्ति नहीं जताये..

अरे मेरा मतलब था ki...tum अच्छी लग रही हो.. कमाल दिख रही हो तुम ...इस साडी पर.. अरे aisa-waisa कुछ मतलब नहीं था ...ये साड़ी तुम पर बहुत जांच रही है...

तब बड़ी अड्डा के साथ कहती है..





अच्छा जी ...ये साड़ी अभी मैंने पहनी तो मैं अच्छी hu...koi और पहनेगा तो wo...matlab साड़ी अच्छी लगी तुमको...

तभी अन्दर हॉल से शेठजी आयने की आहात हुई तो दोनों एकदूसरे से दूर हो गए..
 
अरे मेरा मतलब था ki...tum अच्छी लग रही हो.. कमाल दिख रही हो तुम ...इस साडी पर.. अरे aisa-waisa कुछ मतलब नहीं था ...ये साड़ी तुम पर बहुत जांच रही है...

अच्छा जी ...ये साड़ी अभी मैंने पहनी तो मैं अच्छी hu...koi और पहनेगा तो wo...matlab साड़ी अच्छी लगी आपको...

तभी अन्दर हॉल से शेठजी आयने की आहात हुई तो दोनों एकदूसरे से दूर हो गए..

अन्दर से शेठजी आ जाने की वजह से उन्दोनो ने टॉपिक्स बदल दिया .. आरती उसको देखते हुई कहती है..





चाय पिओगे या कॉफ़ी

तब नवाज़ धीरे से कहता है ताकि शेठजी नहीं सुने

आप जो पिलाये वो पिऊंगा

वो हस्ते हुई कहते है .. धीरे से..





मई तो तुम जहर पिलाना चाहती हु

वो भला क्यों

तुम न..

इतना कह के रूख जाती है

बोलिये न . .. मई न क्या

तब उसको देखते हुई आरती कहते है





जाने दो.. क्या पीना है

आप क्या पि रहे हो

कॉफ़ी

तो हमें भी कॉफ़ी hi लाओ

पर तुम्हारे बड़े मालिक ने चाय बोलै है

आप hi हमारे बड़े मालिक हो.. छोटे मालिक हो और स्वेट.. ब्यूटीफुल.. हैंडसम.. चुलबुली मेमसाब हो

तब हस्ते हुई कहते है





अच्छा अच्छा समाज गयी.. कॉफ़ी लेट हु

ऐसा कह के वह से चली गए अन्दर किचन मई .. उसकी अदा देख के नवाज़ पागल हो गया था.. उसके जाने के बाद नवाज़ शेठजी से बाते करने लगता है.. खेत के बारे मई बात करता है.. फिर आज घर मई क्या क्या काम करना है वो पूछता है.. ऐसे hi कुछ टाइम हो जाता है.. अभी तक आरती अन्दर hi थी.. उसने कॉफ़ी नहीं लायी थी तब थोड़े देर बाद नवाज़ ायंदर जाता है.. नवाज़ को अन्दर किचन मई आते देखते hi आरती बड़े अड्डा के साथ कहती है..





मई ला रही थी न कॉफ़ी

बहुत देर हो गए मुझे लगा आप भूल गयी होंगे

बहुत देर?? अन्दर आके 5 मिनट भी नहीं हुई.. कॉफ़ी उबलने मई टाइम लगता है न बबुवा..

5 मिनट्स ??? मुझे लगा एक दिन हुआ

इस बात पर आरती हस्ते है..





तब उसकी नज़र आरती के गाल पाई जाती है.. वह कान के निचे पाउडर उसे दिख जाता है.. शयद जल्दबाजी मई वो पोछना रह गया … वो मैं मई कहता है.. साली ने अन्दर आकर मेकअप किया.. मुझे रिझाने की कोशिश कर रही है.. बहुत चालू है लौंडे

ये क्या कोई इंस्टेंट कॉफ़ी नहीं है

तो कोनसे कॉफ़ी है

स्पेशल कॉफ़ी

अच्छा

ऐसा कह के उसके पास आती है और बड़े अड्डा के साथ कहती है..





और हम कैसे भूलेंगे हमारे प्यारे माइड के प्यारे आशिक़ को

ऐसा कहते हुई वो नवाज़ को कॉफ़ी देने लगती है.. कॉफ़ी लेते हुई नवाज़ उसके पाउडर को हाट लगता है..

शयद पाउडर वैसे hi रह गया

तब शर्मा के वो घूम जाती है..

सेल को पता चला.. अब मई क्या करू.. क्या कहु इससे .. तब आपने आप को संभालते हुई कहते है..

वो सुबह सुबह जल्दबाज़ी मई रह गया होगा

तभी नवाज़ कुछ बोले इस से पहले hi बहार से आवाज़ आता है…

दीदी जी आप क्या कर रही हो

तब वो धीरे से कहते है..

आ गयी कालमुली..

नवाज़ जान लेता है इसने कुछ तो कहा पर क्या कहा ये जान नहीं पाया पर नीता के आते hi वो गुस्से से उसको देखती है तब वो जान गया की नीता को hi कुछ न कुछ बुरा कहा होगा..

तब थोड़े से गुस्से से नीता को देखते हुई कहती है..





देख नहीं रही हो क्या तुम्हारे आशिके को कॉफ़ी बनके दे रही हु

उसके लिए बहुत बहुत धनवाद दीदी जी

वेलकम वेलकम जी

पर नवाज़ को तो कॉफ़ी पसंद नहीं है..

नीता के ऐसे कहने से आरती आचार्य से नवाज़ को देखनी lagi..aur सोचने लगी.. इस नीता को पता है इसको कॉफ़ी पसंद नहीं है और मुझे नहीं पता.. और इस हरामी ने मुझे भी नहीं बताया.. क्यों नहीं बताया.. फिर कुछ सोचकर कहती है.. शयद मई कॉफ़ी पि रही थी.. ोूहः गॉड.. मतलब मेरे इच्छा रखने के लिए.. मतलब नवाज़ मेरे खातिर इतना कुछ कर रहा है.. ओह्ह्ह गॉड ये क्या हो रहा है.. क्या नवाज़ मुझे पसंद करने लगा है.. पर क्यों.. उसके पास नीता है.. वंदना है.. फिर भी . . ये सब सोच कर वो नवाज़ की और देखते हुई स्माइल करने लगी..





शयद दीदी आप को बताया नहीं होगा..

हाँ शयद..

नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..

तेरा नवाज़ मुझे क्यों बताएगा.. उसे क्या पसंद है और क्या पसंद नहीं.. आखिर वो तेरा आशिके है.. ..

तब नवाज़ कहता है..

मेमसाब वैसे बात नहीं है

जाने दो.. मुझे क्या करना है.. तेरे पसंद न पसंद की नीता hi फिकिर करेंगे.. मई क्यों करुँगी.. आखिर वो तेरे माशूका है.. हमें तू क्यों बताएगा.. आखिर हम कोण है तेरे

तब नवाज़ कुछ खहने वाला था की नीता कहती है

दीदी जी आप कहा थी

यही पाई हु

मई आज के नहीं कल की बात कर रही हु

कल कहा नहीं गए थी यही थी .. घर मई..

तो क्यों नहीं आये आप कल

कहा

मैंने कहा था न की श्याम को आने को..

तभी बहार से नवाज़ को शेठजी आवाज़ देते है..

नवाज़ जरा इधर आओ

जी शेठजी

कहके वो बहार चला जाता है.. तब जाते हुई नवाज़ आरती को देखता है और आरती नवाज़ को जाते हुई देखकर इशारा करती है..





ये इशारा नवाज़ कुछ समाज नहीं पाया.. और इधर उसको देखते हुई आरती नीता को कहती है..

क्या कह रही थी तू

कल मुझे एक बात करनी थी आप से.. इसलिए मैंने आप को बोलै था श्याम को आओ

क्या बात करनी थी

हमारा तै हुआ था ..

हमारा मतलब

तब शर्माकर नीता कहती है

मेरा और नवाज़ का

हे भगवान्!! देखो तो नवाज़ का नाम सुनके कितना शर्मा रही है

शर्म तो आएंगे न दीदी.. वो मेरा प्यार है..

अच्छा प्यार..

हाँ प्यार दीदी

वो करता है क्या प्यार तुजसे

ये क्या पूछ रही हो आप दीदी.. वो मई जितना उसे प्यार करते हु उससे ज्यादा मुझको प्यार करता है ..

तुजे कैसे पता

अभी मुझे पता नहीं होगा तो किसी पता होगा.. दीदी.. मई इतने दिनों से उसके सात रह रही हु..

हाँ वो भी hai..Par उसने कभी कहा आपने मू से

तब आरती के आँखों मई देखते हुई नीता कहते है

कई बार

अच्छा

पर दीदी आप क्यों पूछ रही हो इतना

कुछ नहीं ऐसे..

ये कहते हुई बहार हॉल मई देखने लगे वह उसके ससुर नवाज़ को कुछ कह रहे थे पर नवाज़ का पूरा ध्यान किचन मई hi था..

तब आरती कहते है

कुछ नहीं ऐसे hi पूछा.. मैं हुआ इसलिए

ऐसा कहते हुई आरती बात बदल देते है..

वैसे तुम क्या कह रही थी.. तुम दोनों ने क्या तै किया था

बहार जाने का

आरती कुछ नहीं बोलती

वो तो आप को बोलै भी था न..

मई भूल गयी थी ..

तब आरती शर्माकर निचे देखने लगते है.. और कहते है..

हम्म्म्म

फिर हमारा तै हुआ था फिर आप क्यों नहीं आयी..

तब बहार देखते हुई कहते है..





हमारा नहीं तुम दोनों का तै हुआ था और तुम दोनों के बीच मई क्यों कबाब मई हड्डी बनोगे

नहीं दीदी आप कबाब मई हड्डी नहीं बनेगे बल्कि आप हमारे सेफ़गार्ड हो

अच्छा

हाँ दीदी जी

वैसे आप ने कल नहीं आके अच्छा नहीं किया.. हम लोग वेट करते रह गए

तुम दोनों मेरे पास नहीं आये मुझे लगा तुम दोनों चले गए…

हम कैसे जा सकते है आप के शिव.. बाबू जी जाने hi नहीं देंगे

मुझे लगा तुम्हारे आशिक़ ने कोई न कोई जुगाड़ लगाया होगा.. वैसे ये बहुत चालू है.. तो मुझे लगा ये तुजे लेके गया होगा

वो तो चालू है इसमे कोई शौक़ नहीं पर यहाँ बाबू जी के सामने इस की चालाकी नहीं चल सकती

अच्छा

हाँ.. और दीदी जी आप भी जरा बच के इस से.. बहुत चालू है ये.. कही ऐसा न हो मेरे साथ आप को भी आपने जाल मई फसा से.. माइड के साथ मालकिन फ्री..

और नीता हसने लगते है..

तब नखरा करते हुई आरती कहते है..





चल हैट बदमाश ऐसे कभी नहीं होगा

और फिर कहने लगी..

और तू उसके बारे मई सब जानती है फिर भी तुम दोनों के साथ मुझे लेके जा रही है..

मई हु न.. मेरे साथ होते हुई ये कुछ नहीं करेगा.. बाकि के टाइम इससे बच के रहना

अच्छा..

और आज का फिक्स

जाना hi है क्या

हाँ

तो ठीक है ..

फिर कुछ सोचने के बाद कहते है..

जाना कैसे है..

बाइक पाई जाते है

किसकी बाइक

मेरे नवाज़ की बाइक

बाइक है उसके पास.. नवाज़ के पास

हाँ दीदी.. आप मेरे नवाज़ को काम मत ाको

नहीं मेरे माँ!!

आप को तो पता hi है न उसके पास बाइक है . .. उस दिन गयी थी न उसके बाइक पाई

हां भूल गयी थी .. तू एक काम कर पहले तेरे आशिक़ को पूछ

वो रेडी है

वो तो रेडी होगा hi

आप को कैसे पता

मुझे सब पता है

तो क्या पूछना है उससे

उसे नहीं पापाजी को

हे भगवान्?? शेठजी को परमिशन का पूछना है.. वो कैसे परमिशन देंगे.. आप मेरे को मरवाना चाहती हो क्या

प्यार किया तो दर क्यों रही है

दीदी आप चाहते क्या हो .. हमारा प्यार परवाने पाई चढ़ाने से पहले hi ख़तम हो जय

क्यों ख़तम होगा

पहले hi मुझे डर लग रहा है की शेठजी को हम दोनों का पता है

कैसे??

मुझे क्या मालूम

फिर आपको कैसे पता चला

पापाजी ने बताया

हे भगवान् बोल के वो निचे बैठ गयी

दर मत!!

क्या डर मत दीदी.. पक्का आप ने hi बताया होगा

मैंने नहीं बताया.. और पापाजी आप दोनों की शादी करवाना चाहते है

क्या??

बोल कर खुश हो गए..

आप को बोलै

हाँ.. पर तेरा आशिके रेडी नहीं है

वो मेरे बस्ती वालों की वजह से

आरती कहते hai..mann मई ..

कमीने ने पहले hi सब कुछ बता कर इसको पूरा फसा लिया है..

अच्छा ऐसा क्या

हाँ दीदी.. पर आप शेठजी से क्या पूछना चाहती थी..

हमें आज श्याम को गाँव मई एक प्रोग्राम मई जाना है तो कितने बजे जाना है

वो तो पता नहीं

वही पूछने के लिए बोलै है मेरे माँ

अच्छा पूछती हु

और वो पूछने के लिए दरवाजे तक जाती है और फिर घूम के वापिस आती है..

अब क्या हुआ

वो हमें मतलब कोण कोण?

मई, पापाजी और तेरा आशिके

नवाज़ क्यों

तब हसकर आरती कहते है

क्योंकि दूसरा ड्राइवर कोई नहीं है

ठीक है..

बरसा मू करके कहती है

मतलब आज भी हम लोंगो का जाना कैंसिल

मई बे

मायूस होकर वो शेठजी के पास जाती है ..
 
अब क्या हुआ

वो हमें मतलब कोण कोण?

मई, पापाजी और तेरा आशिके

नवाज़ क्यों

तब हसकर आरती कहते है

क्योंकि दूसरा ड्राइवर कोई नहीं है

ठीक है..

बरसा मू करके कहती है

मतलब आज भी हम लोंगो का जाना कैंसिल

मई बे

मायूस होकर वो शेठजी के पास जाती है .. तब आरती को याद आता है कल जब वो नीता और नवाज़ के रूम मई गयी थी तब नवाज़ ने जो कहा था.. जो अब नीता कह रही थी.. पिक्चर को जाने के बात.. जब आरती उन्दोनो के पास जाती है.. तब नवाज़ कहता है..

मैडम जी एक बात करनी थी..

हाँ बोलो

हमें पिक्चर देखने को जाना है

हाँ जाओ पर काम ख़तम खर के

नवाज़ - वो तो कर लेंगे मेमसाब

नीता - पर आप साथ मई चलिए

आरती गुस्से से नीता की तरफ देखते है..

तब नीता कहती है

ऐसा नवाज़ कह रहा है

आरती गुस्से से नवाज़ की तरफ देखने लगती है

ये नया क्या नाटक है तुम दोनों का

नवाज़ - मैडम जी आप आओगे तो hi शेठ जी हम पर शक नहीं करेंगे

वो भला कैसे

मैडम जी शेठजी हम दोनों को कैसे जाने देंगे

मई भी जाने नहीं दंगे

अगर आप साथ मई रहोगे तो शेठजी कुछ नहीं कहेंगे

क्या कुछ नहीं कहेंगे.. मुझे पूछेंगे.. कहा जा रही हो और उन्दोनो को लेके क्यों जा रही हो ऐसा पूछेंगे

नवाज़ - हम कोई बहाना बना के यहाँ से निकल जायेंगे

बहाना .. कोनसा बहाना

कोई भी

कोई भी मतलब

वो मई सोच लूंगा आप सिर्फ रेडी हो जाओ

मई भला क्यों

आप के बिना नहीं हो पायेगा

मुझे पॉसिबल नहीं है

और जाने लगी तब नीता कहती है

दीदी आप आओ न.. हम वेट करेंगे आप का

आरती पलट कर उसके तरफ देख के स्माइल करती है पर कहती कुछ नहीं है और वह से चली जाती है..

ये सब याद करके आरती स्माइल करते है..

अब नीता बहार जा चुकी थी और शेठजी से बाते करने लगती है तब आरती बहार हॉल की तरफ देख रही thi...sayad नवाज़ को hi देख रही थी .... तभी नवाज़ ने अपनी गर्दन उप्पर उठाये और वो अन्दर किचन की और देखने लगा.. तब नवाज़ की नहिगाहे आरती के निगाहों से मिल gai....dono एक दूसरे को देखने लगे और नीता शेठजी से बाते करने लगे.. कुछ देर ऐसा hi चला जब शेठजी नीता और नवाज़ को आपने साथ बहार लेके गए तब ये सिलसिला रुख गया..

अब दोपहर हो गयी थी. ..

आरती एक नीली रंग की हलकी ट्रांसपेरेंट साडी पहन कर बहार आती hain.......uska ब्लौसे डीप कट था और पीठ आधी से ज्यादा नंगी thi.......blowse के अंदर ब्रा की स्ट्रिप्स साफ़ दिखाई दे रही thi.......boobs का करीब 25% हिस्सा बहार की ओरे दिख रहा tha....jo किसी भी मर्द का खून गरम करने के लिए काफी था ..... ब्लौसे इतनी टाइट की मनो अभी उसके दोनों बूब्स ब्लौसे से बहार निकल padenge.....in कपड़ों में वो आज भी पूरी क़यामत लग रही थी......

हॉल मई कुछ देर बैठने के बाद उसे बहार आवाज़ आने लगी.. तो बहार नवाज़ को शेठजी कुछ समजा रहे थे.. आरती को लगा वो अन्दर आ जायेगा … इसलिए वो आपने बैडरूम मई गयी और आपने अच्छे से मेकअप किया और बहार आयी और हॉल मई बैठ गयी.. उसे पक्का पता था नवाज़ अब उसके पास आएगा पर वो अन्दर नहीं आया तब उसका थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद आरती बाहर जाती है और नवाज़ को सामने देखते hi रुक गई और धीरे से मुस्कुराते हुए सीधा एक तक नवाज़ को घूरने लगी .....नवाज़ भी आरती को देखे जा रहा tha...aur उसकी आखो में झांक कर ये समझने की कोसिस में लगा था की उसके मंद में चल क्या रहा है....

अभी नवाज़ को आरती सुबह से ज्यादा खूबसूरत दिख रही thi....usne अब दूसरी साड़ी पहनी हुई थी ...उसको देख कर साफ़ पता चल रहा था की वो अब पूरी तरह सज सवार कर आई hai....bilkul aise...jaise की कोई नै नवेली दुल्हन सजी हो .... नवाज़ उसे ऊपर से नीचे तक देखता हुआ सुखद आनंद की अनुभूति में डूबता जा रहा tha.....aur नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्माने लगी और उसने नजरे झुका li....aarti बहोत खूबसूरत दिख रही थी.. गोरा रंग, लाल होंठ... जो भी देखे बस देखता hi रह jaye.aur इतनी अच्छी खुशभू लगाई थी के नवाज़ को उस्सको सूंघने में बहोत अच्छा लग रहा था.

नवाज़ आँख फाड़े आरती को देख रहा tha.......is वक़्त उसकी निगाह आरती के आम पर थी ..... उसका हाथ एक बार फिर से अपने पेण्ट के ऊपर चला जाता हैं और वो एक बार फिर से अपने लुंड को पेण्ट के ऊपर से मसल देता हैं...... पर आरती की नज़र जोकि होने के वजह से वो ये देख नहीं पाए..

उसको देख के नवाज़ मैं मई कहता है.. कितनी खूबसूरत दिख रही है aab..man करता है की अभी अपनी बाहों में भर लू इस लौंडे को ....आज तो ये मेरे दिल को चीयर hi dalegi....uff.....aise सज कर आई है जैसे कई दिन बाद अपने पति के सामने एक पत्नी आती hai....masha अल्ला …

तब आरती नज़र उप्पर उठाते हुई कहते है ..

देखते hi रहोगे क्या....

उसके ऐसे कहने से नवाज़ चौंक जाता है और चौंक कर कहता है..

क्या ????

तब आरती फिर मुस्कुरा दी और उसे देखते हुई कहते है

ऐसे देखते hi रहोगे क्या

तब नवाज़ की नजरें उस पर अटक सी गई...

आज तो तुम...

आरती (आँखे दिखा कर)- क्या...

नवाज़ उसका इसरा समझ गया…

आप बहुत खूबसूरत लग रही हो

तब नखरा करती हुई कहता है

मतलब पहले नहीं लगती थी

तभी नीता वह आती है.. और नवाज़ को कुछ कहने लगती है.. तब आरती पलट जाती है.. और सोचने लगती है.. क्या मई ये नवाज़ के सामने संजसँवरकर आयी हु ये सब ठीक है या नहीं.. एक नौकर के सामने और आपने माइड के आशिक़ के सामने ऐसा बेहवे करना ठीक रहेगा क्या.. इधर आरती के मन में द्वन्द चल रहा था ...और उधर नीता नवाज़ को बाजु मई लेके जेक बाते कर रही थी.. आरती वो चोरी छुपे देखे जा रही थी.. क्या सचमुच ये सब कर के मैंने गलती की है क्या ये वो खुद को पूछने लगी.. एक तरफ उसे लग रहा था की जो कुछ हो रहा है उसके और नवाज़ मई उसमे कोई गलत नहीं है और दूसरी तरफ ये भी की वो ये सब उसके अकेले की वजह से नहीं हो रहा है.. वो खुद को कहती है.. उसकी भी तो गलती है.. वो लगातार अजीब नज़रो से उसे देखता है..

तभी नीता ने आवाज़ दिया तो वो आपने सोच से बहार आयी

दीदी जी

तब वो पलट के उन्दोनो को देखने लगी और कहते है

हाँ बोलो

तब नवाज़ कहता है

मेमसाब सुना है आप मिल्कशेक बहुत अच्छा बनती हो

तब वो नखरा करते हुई कहते है

और वो किस से सुना

तब नीता कहती है

मैंने कहा

अच्छा जी

नीता कहती थी की मेरे अम्मी से आप अच्छा मिल्कशेक बनती हो

अपनी तारीफ सुनकर आरती खुश हो जाती है और थोड़ा शरमाते हुई कहते है..

मैं नहीं जानती की तुम्हारे अम्मी से अच्छी बनती हु या नहीं पर मेरा मिल्कशेक बहुत लोंगो को पसंद आता है..

तो हमें भी पीला दो

" ठीक हैं तुम यहीं पर ruko.....main तुम्हारे लिए बनती हूँ......."

और आरती घूम जाती है और फिर से किचन की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ नवाज़ की नज़रें एक बार फिर से आरती पर थी........





आरती के घूमते hi वो अपने पंत के ऊपर से अपने लौड़े को धीरे से मसल देता हैं..... उसकी गांड और कमर को देखते hui..wahin अब उसे यकीन हो चला था की ये बुलबुल बहुत जल्द उसके बिछाये जाल में फंसेगी .......और जब वो फंसेगी तो वो उस बुलबुल का शिकार बहुत आराम से करेगा ......... जैसा मर्ज़ी वैसा उसके साथ करेगा ............
 
और आरती घूम जाती है और फिर से किचन की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ नवाज़ की नज़रें एक बार फिर से आरती पर थी........ आरती के घूमते hi वो अपने पंत के ऊपर से अपने लौड़े को धीरे से मसल देता hain.....wahin अब उसे यकीन हो चला था की ये बुलबुल बहुत जल्द उसके बिछाये जाल में फंसेगी .......और जब वो फंसेगी तो वो उस बुलबुल का शिकार बहुत आराम से करेगा ......... जैसा मर्ज़ी वैसा उसके साथ करेगा ............

इसलिए उसने सोचा था की आरती को पाने के लिए और कुछ दिन hi sahi…itane दिनों से आरती की दबी हुयी हवस बहार निकल लूंगा … और वो आरती को जाते हुए बस देखता hi raha..aur अपने आगे की प्लान के बारे में सोचने लगा तो वही आरती चलते चलते एक बार पीछे मुद के नवाज़ को देखते है..





तब उसे नवाज़ नहीं दीखता तो वो आगे बढ़ते है.. अब वो चलते चलते यही सोच रही थी की आज वो नवाज़ से कुछ ज्यादा hi क्लोज चली गयी …





जो उसे करना नहीं चाहिए था… पर उसे समाज मई नहीं आ रहा था की नवाज़ के नज़दीक आते hi जाने उसे क्या हो जाता है.. उसके बातो मई झट से आ जाती हु .. अभी भी उसने मिल्कशेक माँगा और मई झट से रेडी हो गयी.. फिर वो खुद से कहती है.. कुछ सोचते हुई..





फिर मई क्या करती.. नौकर को मिल्कशेक देने मई क्या हर्ज़ है और नीता ने भी माँगा था.. और मई अकेले नवाज़ को थोड़े hi देर रही हु.. दोनों को दे रही हु.. और ये नीता भी मेरे बारे मई हमेशा नवाज़ को कुछ न कुछ बताती रहती है.. और बिचारे नवाज़ का इसमे क्या दोष है.. दोष तो इस कालमुई नीता का है.. कुछ न कुछ मेरे नवाज़ को बोलती रहते है और दोष मेरे नवाज़ पाई डालती है.. फिर उसको याद आता है.. नवाज़ को उसने मेरा नवाज़ कहा था.. तब ये सोच कर शर्मा जाती है..





मैंने उसे कैसे कहा उसे मेरा.. फिर वो कहती है.. नवाज़ मेरा कैसे होगा.. वो तो उसका hi है.. फिर वो पीछे घूम के हॉल को तरफ देखते है..





और कहते है.. ये कालमुई नवाज़ के साथ क्या कर रही होगी इस वक़्त.. पक्का कुछ न कुछ गाँधी हरकत कर रही होगी.. नवाज़ को हमेशा बहकती रहती है... कामिनी कही की..

इधर बहार नवाज़ नीता के हुस्न को देखने लगा.. . नीता ने उसे अपने बूब्स को घूरते महसूस किया .. वो भी यही चाहती थी पर उसे दर लग रहा था की आरती कभी भी बहार आ सकती hai..neeta के चोली मई कासी हुई चूचिओं को उप्पेर नीचे होता देख नवाज़ का लुंड फुंकारें लगा.. और नवाज़ ने इस तरह अपनी चुच्यों को घूरता देख नीता एक दम से शर्मा गए.. उसने अपने चुच्यों को अपने चुनरी से देख लिया . तभी नवाज़ उसके पास गया और नीता के चुनरी को पकड़ लिया…

”क्या नीता तू तो ऐसे शर्मा रही ho……jaise मैं कोई बहार वाला hun…….aur तुजे ऐसे पहले बार देख रहा हु.. मुझे तेरे हुस्ना का दीदार करने दे न ….”

ये कहते हुए नवाज़ ने उसके चुनरी को अपनी और खिंचा . . . नवाज़ के खेंचने से नीता लगभग उसके ऊपर गिरी… अपने आप को गिरने से बचने के लये नीता ने अपने दोनों हाथ नवाज़ के छाती पर रख diye….aur उसकी चुनरी उसकी चोली से सरक कर नीचे गिर गयी …. और तभी नीता के गल्ले मैं अपनी एक बाजु को दाल कर उसे अपनी तरफ खेंचा ….. और फिर नवाज़ ने उसके एक आम पर हाथ रख के उसके आम पर कब्ज़ा किया तब नीता ने उसका हाथ पकड़ उसे वही रोक दिया … तब दोनों की नज़ारे मिली ..





नहीं नवाज़.. ये मत करो

क्यों ..

दीदी कब भी बहार आ सकती है..

तब नवाज़ ने तिरछी नजरों से किचन की तरफ देखा तो उसे आरती वह नहीं देखि.... मतलब किचन के दूर पर उसने देखा.. वो थोड़े साइड पाई खड़े थे तो किचन के अन्दर नहीं देख सकते थे..

अब उसने नीता को घुमा लिया और उसको पीछे से कास कर अपनी बहो में पकड़ लिया और लगातार अपना होठो से उसके गले और गलो को चुम रहा था ..





नीता बस आहे भर रही थी ..वो लगातार नीता को चूस रहा था लेकिन ज्यादा आगे नहीं बढ़ रहा

"नीता ??""

"हआ..."

नीता ने मदहोशी में जवाब दिया..

अच्छा लग रहा है क्या ...???"

"हम्म्म्म"

"और करू ...आगे ...???"

नवाज़ नीता को पूरी तरह खोल देना छठा था ताकि वो खुलकर गंदे बाते करे… और उस बातो से आरती के और नज़दीक जाये.. ये उसका प्लान था.. वो जनता था की वो सिर्फ मालकिन और नौकर नहीं है तो अच्छी सहेली भी है..

"मुझे नहीं पता "

नवाज़ समझ जाता है की सिर्फ बात करने से बात नहीं बनेंगे ...वो गाओं की शर्मीली हसीना है उसे कभी खुद से आगे बढ़ने की नहीं bolegi.to अब अब उसे आगे बढ़ना hi tha...tabhi वो तिरछी नज़र से एक बार से किचन के दूर पाई देखता है तब आरती वह कड़ी थी और उन्दोनो को देख रही thi..gusse से..





वो अब ऐसे दिखता है है जैसे उसे कुछ पता hi नहीं है..

उधर आरती बहुत असमंजस में पद जाती है .. वो सोचते है मई देखु या आगे बाद जाऊ.. मई आपने आप को कैसे समझू … आपने इमोशंस को कैसे कण्ट्रोल करू..

"ओह्ह ..ोीीी मा .... ोुछः ... नवाज़ !!!!!!!"

इस आवाज़ से वो आपने सोच मई से बहार आ जाती है..

नीता के बूब्स अब बहुत टाइट हो चुके थे .. उसके पेट को सहलाता हुई अपने दोनों हाथ उसके दोनों मम्मी पर रख देता है ....

"issshhhhh...nahi नहीं प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़…"

"क्या हुआ नीता ??"

" दीदी कभी भी बहार आ सकती है ''

नवाज़ अब उसके बूब्स को धीरे धीरे मसलने लगा था … नीता अब आहे भर रही थी ..उसकी ससे काफी तेज़ चल रही थी ..अनजाने में उसका हाथ उसके सलवार के ऊपर से गीली हो रही योनि पर चला जाता है ...

"ओह्ह्ह नवाज़ ...प्ल्ज़ मत कर न ...ओह्ह माआ..."

"'नीता यही तो जवानी का खेल है ......नीता एक बात पुछु .."

नीता को बोलता देख नवाज़ उसे और बोलने पर उकसा रहा था ...

"haaaa..ufff.......puchhh"

"तेरे ये मम्मी इतने टाइट क्यों है ?? "

"hiiii...mujhe नहीं पता .. इतना कास कर मत दबाओ न ...उम्म्म्म ..."

नीता अब मस्त होती जा रही थी ..

"नीता तू कभी दबती नहीं है क्या …"

तब नीता न मई गर्दन हिलाते है..

तो फिर किसी से दबवा लिया करो ..

नहीं न … तुहि दबाता है

....इसमें क्या छुपा रखा है नीता ???

नवाज़ अपनी गन्दी बातो से नीता को और गरम कर रहा था .. और आरती को भी..

"aaahhhh..nawaz मत कर ऐसी बाटे...."

तभी नवाज़ उसके मम्मी को जोर से दबाता है

ोीिमा...

बताओ न नीता ..कभी किसी ने दबाया है क्या…

नहिई re...kisi ने नहीं दबाया ..तेरे अल्वा किसी ने नहीं छुआ

नीता इसमें क्या होता है ?

नवाज़ समझ चूका था की अब बाज़ी उसके हाथ मई है .

...ohh...achchhha लग रहा है ..और दबा ना .... दूध होता है इसमें

"नीता किसी पिलाओगी आपने दूध ?"
 
Back
Top