उसने किश करते हुई तुरंत आपने हाट मई उसका मां ले लिया .. तब आरती सिसक उठी पर नवाज़ के मू मई फिर उसने उसके निप्पल को अपनी उँगलियों के बीच पकड़ कर इतनी बेहरहमी से मसाला की आरती का पूरा बदन दर्द और मज़े के एक अजीब चक्रव्यू में फँस gaya.par वो कुछ कर नहीं पायी क्यों की उसके होंठ नवाज़ के होंटो के अंदर थे . नवाज़ अब bari-bari से उसके दोनों चूचियों के निप्पल्स को इतनी शक्ति से मसल रहा था की आरती की चीखे नाकज के मुंह के अंदर hi घुल रही थी. अब आरती को समझ नहीं आ रहा था की वो दर्द से चिल्लाये या मज़ा ले ..
फिर नवाज़ ने अपना एक हाथ आरती की कमर से हटाया और अपना पूरा मुंह उसकी एक चुकी पर जमा दिया. वो किसी भूखे बचे की तरह उस नरम उभार को चूसने लगा. Chuste-chuste उसने साड़ी और पेटीकोट उप्पेर कर लिया …तब आरती नवाज़ का चेहरा उसके बालो को पकड़ के उप्पर कर लिया . और उसको देखने लगी ..

वो कुछ कहती इस से पहले नवाज़ उसके जांघ को चूमने लगा ..
तब आरती नवाज़ का चेहरा पकड़ते हुई सिसक उठी
naaa….wahhaa नहीं
तब नवाज़ उसके झांग को चूमते हुई अपना एक हाथ उप्पर करके उसके एक मम्मी पाई रख के वह मसलने लगा ..
पलज़्ज़ज़ नवाज़ ये मत करो .. मेरा हस्बैंड कभी भी बहार आ जायेगा .. उसने हमें ऐसा देखा या उसको थोड़ा भी शक हुआ थो मुझे बड़ी दिक्कत होगी
पर नवाज़ ने उसके कहने पर ध्यान नहीं दिया और वो उसकी झांग को चूमने लगा और उसके मम्मी को एक हाट से मसलने लगा . आरती नवाज़ से बार बार रुकने को कह रही थी .. ये ना करने को कह रही थी .. पर नवाज़ तो आरती के बदन से पागल हो गया था .. वो उसके बात पर ध्यान hi नहीं दे रहा तह . तब उसने थोड़ा सा ज़ोर लगाके उसका सर उप्पर उतने की कोशिश की पर उसका उलटा hi असर हुआ ..
नवाज़ ने अपना मुँह उसके पेटीकोट के अंदर dala..aur उसके झांग के उप्परि हिस्से को चूमने लगा .. तब आरती आगे क्या होगा ये सोच के डरने लगी .. इसलिए उसने ुका सर आपने पेटीकोट के अंदर से बहार निकलने लगी . जैसे जैसे वो जोर लगाने लगी वैसे वैसे नवाज़ आपने मू उसके पेटीकोट के और अंदर घुसाने लगा और उसके थेइस को चूमने लगा और इधर आरती की बेचैनी और दर बढ़ाने लगा ..
जैसे hi नवाज़ ने अपना सर उसके पेटीकोट के अंदर से आगे ले जाते हुई उसके चड्डी को चूमा तब आरती ने जोर से उसका सर बहार निकला … जोर से उसको खींचने की वजह से आरती की चूड़ियों की खान खनाहट सी आवाज़ वह गूंजने लगी …साथ मई उसके
तेज़ साँसों की .. …
और आरती अपनी नशीली आँखों से नवाज़ को देखने लगी..

इनके इस झटपट से आरती की साड़ी बहुत उप्पर हो गयी थी .. उसके चड्डी के उप्पर से भी उप्पर.. . नवाज़ आरती के आँखों मई की कामुकता बस देखने लगा .. जैसे hi उसकी नज़र थोड़ी निचे हुई तब उसके आँखों के सामने आरती की चड्डी आ जाती है.. उसकी चड्डी देख के नवाज़ तो बेहाल हो गया .. नवाज़ से रहा नहीं गया ..और उसने फिर से उसके चड्डी पर आपने मू रख दिया और नवाज़ ने इस बार अच्छे से उसके चड्डी चुम ली .. चड्डी क्या उसकी छूट चुम ली .. उसके चड्डी के उप्पर से..
आरती आने वाले पल को सोच के बेचैन होने lagi…usne कुछ सोचा और नवाज़ का सर उप्पर उठा लिया और आरती ने झट से अपनी साड़ी निचे कर दी ..पर नवाज़ से रहा नहीं जा रहा था ..वो उसके उप्पर आके उसके आगे से चिपक gaya..aur उसके गर्दन को चूमने लगा ..

जाहहहहन नवज़ज़्ज़ज़ बस करो अब
और आरती की फिर से आँख बंद हो गयी…. क्यों की चूमते वक़्त उसका लुंड छूट के उप्पर लगा था ..साड़ी के उप्पर से …तभी नवाज़ ने एक झटका mara…tab आरती आह्ह्ह्ह करती है
तब नवाज़ आरती का एक मम्मी को मसलता है .. और फिर उसके मंगलसूत्र मई किश करने लगा .. .फिर वो एक हाट उसके छूट के उप्पर ले जेक उसको जोर से मसलता है ..
आआह्ह्ह्हह …. ममममममयीय…. मर गयी ..
ये देंगे क्या .. …मुझे आज….
तब आरती कुछ नहीं कहती तब नवाज़ हलके से धक्का मरते हुई कहता है
डौगी न….
आह्ह्ह्हह्ह
तब नवाज़ उसके गर्दन को और गाल को चूमने लगा

और निचे छूट को मसलने लगा साड़ी के उप्पर से .. फिर नवाज़ उसके कान के लौ को मुँह मई लेकर उसकी छूट को मसलता हुई उप्पर से धक्के लगते हुई बोलै…
बोल न रानी
आरती अब मदहोश हो गयी थी . .. उस मदहोशी के हालत मई उसे ऐसा लग रहा था वो अपना सब कुछ नवाज़ को सौंप दे .. और हुआ भी ऐसा hi कुछ ..
मदहोशी के हालत मई वो बोल पड़ी ...
कर लेना कल.. जो मन करे आपका ..
नवाज़ ये सुन के खुश हो गया और मुस्कुराने लगा ... वो उप्पर आके उसको किश करने लगा ..
किश तोड़ते हुई वो कहने लगा
सच रानी
तब आरती शर्मा गयी ..

चलो हटो जी !!
तूने अभी तो कहा
आरती जान गयी की उसने क्या गलती किये है
वो आपने मुझे पागल जो किया .. उसी पागलपन मई मू से निकल गया ..
फिर और पागल हो जा
ऐसा बोलते हुई उसके होंठ मई आपने होंठ ले liye..aur उसका होंठ काट liye…tabhi बाथरूम के दूर खुलने की आवाज़ आयी.. तब आरती ने नवाज़ को बाजु धकेल दिया और मुस्कुराते हुई बीएड के निचे उतर gayi…nawaz तुरनत बहार चला गया और इधर आरती अपने साड़ी और ब्लाउज ठीक करते हुए हल्का सा मुस्कुरा के मिरर के सामने कड़ी हो गयी ..
जैसे hi अरविन्द बहार आया आरती मिरर के सामने से बिना आपने पति के तरफ देख के किचन के तरफ चली जाती है…
कुछ देर बाद अरविन्द किचन में आ गया .. अरविन्द किचन मई गया तो उसने देखा की आरती रोटी मई घी लगा रही hai..ye देख के अरविन्द कुश हो गया .. वो धीरे से उसके पीछे आ गया …आरती को नहीं पता था की अरविन्द उसके ठीक पीछे खड़ा hai…aarti के दिमाग मई इस वक़्त नवाज़ hi था .. थोड़े देर पहले नवाज़ ने जो उसके साथ किया था उस वजह से उसके यौवन को पुरे तरह से जगा दिया tha…aarti के दिमाग मई वो hi सब चल रहा tha…wo सोचने लगी मैंने ऐसे कैसे कहा .. अब कल वो सच मई मेरे साथ वो करने की जिद्द्द करेंगे तो मई क्या कहु उन और कैसे रोकू उन
तब अरविन्द कहता है…
घी के रोटी .. आज तो मज़ा आ जायेगा ..
तब आरती आपने विचारो से बहार आ जाती hai..aur पलट के आपने हस्बैंड की और देखती हुई कहते है..
खाना खा लो
ऐसा कहते हुई आरती किचन से बहार जाने लगती है..
कहा जा रही हो
नवाज़ को बुलाने .. उसको भूख लगी है बोल रहा तह ..
तब आरती नवाज़ को आवाज़ देती है .. आपने हाल के दूर पर से
नवाज़ नवाज़ ..
पर नवाज़ कोई रिप्लाई नहीं देता ..
तब आरती आगे आके मतलब दूर से बहार आके नवाज़ के रूम की तरफ जाने लगी .. अरविन्द भी उसके पीछे पीछे जाता है.. ये जान कर आरती बिना उसके रूम मई जाये उसके रूम के बहार से hi नवाज़ को आवाज़ देती है..
: हिलू..
नवाज़ कोई रिप्लाई नहीं देता
suno…nawaz .. बहार आ जाओ ..…खाना बन गया है …
अभी भी नवाज़ आवाज़ नहीं देता
तब अरविन्द कहता है
लगता है. वो सो गया hai….aana होता तो अब तक आ जाता…
तब आरती जल्दी से नवाज़ के रूम के दूर के पास गयी और अंदर झांक के देखने लगी … अंदर नवाज़ टाँगे फैला के सो रहा था ..
क्या हुआ
तब आरती कहती है .. बुरा सा मू बनके
सो रहा है
सोने दे उसे
ऐसा बोल के उसके रूम का दरवाज़ा अरविन्द बंद कर देता है ..
ऐसे भूके कैसे सोने दू
अब कर भी क्या सकती हो
वो हमारे लिए कितना काम करता है
हां पर
आप उसे उठा लोगे
अरविन्द कुछ सोच के कहता है
तब अरविन्द अंदर जेक उतने लगता है पर वो उठता नहीं है तब अरविन्द रूम से बहार आ जाता है .. इस बार आरती कर भी कुछ नहीं पायी .. वो न चाहते हुई आरती आपने पति के साथ आपने घर मई आ जाती है..