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अपडेट 38 (पतलोक)
Part-4(D)
आर्यन की यादें सपनो में ......
"गाजा शक्ति" अतियंत प्राचीन शक्तियों में से एक थी जोह राजा बलासुर के दानव पूर्वज को भगवन श्री गणेशजी से मिली थी सिद्धि प्रपात करके. राजा बलासुर के पुरखो से यह अटाला लोक के हर राजा को पीढ़ी दर पीढ़ी मिली, लेकिन जब आर्यन को मिली तीनो अटाला लोक की रानियों से मिलान चाकर बनाकर तोह यह पहली दानवी महाशक्ति थी जिसको गहरे करते हुए 6 अलग अलग आत्मा के 7-8 रूप आर्यन से बहार आये पर एक आखिरी रूप किसी को नहीं दिखा और बहोत बड़ी ऊर्जा से सब चकचोँद हो गए थे पर िश घटना से धरतीलोक के रति के गाओं के पास पुराने जंगल में बड़े गुरूजी की आंखें खुल गयी, "आशम्भव यानी वह जीवट होने की लालसा भी अब रखता है तोह आर्यन का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा बस वह समय से पहले प्रकट हुआ तोह आर्यन का सरीर hi नष्ट न हो जाए उसकी पूरी ऊर्जा के कारन".
वहीँ ुशी पल महाराजा शेषनाग ने प्रकट होकर आर्यन को शांत किया और सबको दांत कर और चेतावनी देते अन्तर्दंध हो गए.
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आज समूचे पतलोक के 7 लोकों के प्रमुख महाबली भी हिल गए की उन्होंने सही निर्णेय लिया था महार्यं को दिव्या तलवार को आसानी से ले जाने के लिए. परन्तु यह एक सामान्य मानव का जीवन कैसे जी रहा आर्यन के रूप में जबकि इश्के अंदर 6 शक्तिसालिओं की शक्तियां इश्को शांत कैसे रहने देती होंगी ? एक मानव के लिए तोह यह नामुमकिन है.
तब दानव गुरूजी बोले ," तुम सब जोह सोच रहे हो उसका एक hi उत्तर है वह है प्रेम जोह इश्को हर कदम पर मिला है. इश्कि शकितयों को बंधा गया जनम के समय फिर एक साथ इतनी माताओ का प्रेम स्नेह मिला. इश्के साथ 3 जुड़वाँ बहेनो के साथ अलवर की राजकुमारी दीप्ति का जनम हुआ इसको मजबूत बंधन में बाँधा रखा जा सके. इतनी बहेनो के प्रेम की दूरी से इश्कि शकितयों को दबाये रखा. फिर जवान होते हुए अनेक प्रेमिका और पत्नियों के निस्चल प्रेम की वर्षा. यानी आर्यन को समय hi कहाँ मिला जोह बाकी शकितयाँ अपनी बुरी या अच्छी ताकत से ईशपर असर दाल के कुछ करवाती. हाँ कभी कभी प्रयाश हुआ है पर जिसकी इतने चाहने वालियां हो उसको हमेशा संभाल लिया गया. यह बालक पिछले जनम का महार्यं का गुण िश जनम में भी लाया है. इश्के खून की रिश्ते वाळिओं ने समय के अनुसार इससे अपने रिश्ते बदल लिए. यानी इतनी प्रेमिका और पत्नियों का प्रेम hi इश्कि ताकत बन रहा है. इश्को नुक्सान पहुंचा आशम्भव होगा पर उनको आसान है. लेकिन वह सब भी कमजोर नहीं है सब एक बड़ा घेरा बना रही हैं जब आर्यन 21 साल का होगा तोह खुद को कुर्बान तक कर देंगी पर इश्को आंच न आये ऐसी उनकी युक्ति लगती है. रानी हेमा आप अगर चाहयेगी तोह धरतीलोक पर जाकर िश प्रक्रिया में सहयोग देकर पूर्ण करवा सकती हैं ".
रानी हेमा थोड़ा नाराजगी से ," गुरूजी यह कभी नहीं होगा में कभी पृथ्वीलोक पर कदम नहीं रखूंगी, जिस लोक में मेरी कोख जनम देने से पहले hi उजाड़ दी वहां में कभी नहीं जाउंगी ".
दानव गुरूजी ," आर्यन को फिर भी तुम ने अपना पुत्र मन उसके मानव होने के बावजूद भी, उसके लिए भी नहीं करोगी ?"
रानी हेमा की आँखों से अंगारे बर्ष रहे थे क्रोध से ," कदापि नहीं, आर्यन मेरा पुत्र पतलोक में है जहाँ में किसी को उसको हानि नहीं पहुंचने दूंगी पर पृथ्वीलोक कदापि नहीं जाउंगी"......
दानव गुरूजी सिर्फ मुस्करा भर दिए सोचते हुए की यह तोह समय hi बातयेगा की रानी हेमा अब आर्यन को ऐसे hi मौत के काल में जाने देंगी या नहीं..... ?
राजा माया ," लेकिन रानी यह तुम्हारा स्वार्थ नहीं दरसता आर्यन को न बचा कर ?"
रानी हेमा ," कैसा स्वार्थ स्वामी, आर्यन की जनम देने वाली सारू, पालने वाली रति, दूध पिलाने वाली अनेको माँ वहां हैं तोह मेरी उसको वहां जरूरत कभी नहीं होगी फिर मैंने हमेशा उसके लिए मात्र धरम निभाया है पतलोक में और मुझे गर्व है अपने पुत्र आर्यन पर".
दानव गुरूजी ," में तोह अभी भी कहूंगा की आप को ुष के जन्मदिन वाले दिन जरूर जाना चाहिए आखिर आपके आशीर्वाद से hi वह पतलोक का भी भला कर पा रहा है".
रानी हेमा बस शांत रही क्योंकि वह रति की जगह नहीं लेना चाहती थी और यह उन्ह सब को होता दिख रहा था. पतलोक के सब महाबली जानते थे की रानी हेमा का जितनी अधिक पकड़ अपने नए मोह बोले पुत्र आर्यन पर होगी वह उतना hi हमारा साथ देगा.
यानी यहाँ भी चौदर्य माधव सिंह की बात सच्च थी आर्यन मातृत्व प्रेम में अपनी माँ के लिए गलत भी कर डालेगा जोह भविष्य में बहोत विध्वंश कारी होगा. यह hi पतलोक के रानी हेमा से क्या धरतीलोक वाले रति से चाहा रहे थे की वह आर्यन से कुछ बहोत गलत करवा के शर्मिंदा होकर पीछे हो जाये.
आधे घंटे बाद आर्यन नींद से जगह तब रानी माँ हेमा को अपने पास बिस्टेर के सिरहाने बैठा देखकर ख़ुशी से उनके गले लग गया ," आप कब आयी रानी माँ, मैंने एक बुरा सपना देखना जिसमे मुझे आपको और माँ ( रति) में से एक को चुनना पड़ता, ऐसा दिन भगवन कभी न लाये".
रानी माँ हेमा भी चकित होती अपने को सामान्य दिखती धड़कते दिल से पूछ hi बैठी ," तुम ने रति को चुना होगा िश्मे सोचने जैसा क्या है. वह तुम्हारी असली माँ है भले उसने जनम नहीं दिया है".
अब आर्यन चुप हो गया पर रानी माँ हेमा विचलित थी की वह उत्तर नहीं दिया. आर्यन ने देखा आस पास कोई नहीं है बाद वह दोनों hi हैं तो बड़ी मीठी आवाज में बोलै," रानी माँ क्या आप मुझे अपना मीठा दूध पीला सकती हो बहोत भूख लगी है ".
उसकी मीठी आवाज और अपनापन रानी माँ हेमा का दिल पिघला दिया और उन्होंने ने बड़े प्रेम से अपनी गॉड में आर्यन का सर रखकर अपना दूध पिलाते हुए उसके बालों में उंगलियन फिरा रही थी. आर्यन दूध पीटा नींद की आगोश में चला गया पर रानी माँ हेमा को दुविधा में दाल फिया की रति और मुझमे से किसको चुना आर्यन ने ? यानी यह भविष्य में जरूर होगा पर कब और आर्यन किसको चुनेगा?
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आर्यन की जब नींद खुली तोह वह स्वर्णगैर महल की महारानी के साही कक्ष में बिलकुल अकेला था अपनी जीभ अपने होते पर फिरता अपने सर प् चपत लगता खुद से बोलै," रानी माँ हेमा कितनी अच्छी हैं मुझे सपनो में hi दूध पीला देती हैं काश में हमेशा उनके पास रह पता ".
वह बिस्टेर से खड़ा होकर स्नानगृह से त्यार होकर अब राजदरबार की तरफ चल दिया तोह उसको पहले हंसिका कक्ष के बहार मिल गयी जिसको उसने बाँहों में बहार कर गाल चूम के पुछा कैसी हो जानेमन. बिचारि शर्माती हुयी से आर्यन की बाँहों में लिपट के बोली ," आप का प्रेम पाकर खुश हूँ महाराज महार्यं ".
आर्यन ने हसकर कहा ," मुझे तोह आर्यन hi रहने दो महाराज स्तब्ध मेरे लिए नहीं है में बस तुम्हारी तरह एक सेवक hi हूँ "...... और उसके दोनों बड़े बड़े चूतड़ दबा के मसलने लगा.
हंसिका ," मत करिये मेरे प्यारे आर्यन अभी तक आपका दिए दर्द के साथ मिला पूर्ण सुख मुझे फिर से जोश चढ़ा देगा ".
तभी आर्यन की पीछे से किसनी ने खोली भर ली ," क्या बात है दोनों अकेले अकेले ? मुझे मत भूलो आर्यन मैंने hi हार के तुमको सब से मिलवाया है ".
आर्यन ने ुष सांडनी 9 फट की राजकुमारी त्रिवेटा के सर पर पीछे हाथ दाल के अपनी तरफ आगे करके उसके मोठे मोठे होंटो को चूमते बोलै," तू तोह मेरे दिल की रानी है त्रिवेटा ..... पुछःह पुछठ ....... तुम सच्च में मदमस्त हो ".
हंसिका ने आर्यन के खड़े होते लुंड को अपनी जांघ से रगड़ा तो उसका एक चूतड़ और त्रिवेटा की एक चूची जोरसे दबा दिया ...... दोनों सिसक पड़ी ......
तभी गलिहारे में आवाज गुंजी ," यह क्या हो रहा है ????? "
आवाज सुनते hi बिजली की गति से आर्यन से दुर्र हटकर दोनों कदमो के बल सर झुका के बेथ गयी.... रानी पुष्पलता का क्रोध से तमतमय चेहरा देखकर आर्यन जल्दी से उसके पास पहुंचकर बाँहों में लिए चूमने लगा और गॉड में उठाकर वापस ुशी के कक्ष में ले गया..... पुष्पलता उसको रोकती रही पर वह नहीं मन.
दोनों ने चैन की सांस ली पर रानी पुष्पलता की अगले दो घंटे चीखिआ hi गूंजती रही स्वर्णमहल में, आर्यन ने उसका तीनो तरह से ढोल बजा दिया था.....
चाहती तोह ऐसा रानी पुष्पलता भी थी तभी अपने कक्ष में आर्यन को जगाने आयी थी पर दो दासियों, जोह उसकी छोटी बहेनो की सेनापति थी लेकिन पुष्पलता के लिए सिर्फ दासी बराबर, को आर्यन से लिपटे चूमे छाती करते देखि तोह उसकी झांटें सुलह गयी की इनकी इतनी हिम्मत मेरे नर (पति) पर दूर दाल रही हैं. यानी पुष्पलता के हिसाब से आर्यन तीनो बहेनो का पति था बस विधिवत विवाह स्वर्णलता के साथ हुआ है और आज राजकुमारी माया से विवाह से पहले सबके सामने स्वर्णलता उसको वरमाला डालेगी.
पहले दो घंटे बस ...... फट्ट्ट्ट थप्प्प्प पहछहः पहछहः फट्ट्ट्ट थप्प्प्प ..... मररररररर गईइइइइइइ ारयणणणणणण ..... कोईइइइइइइ बचावू ..... हननननन जोरसीईई...... मगर कोई उसकी सुनने वाला न था, बहोत चूड़ी वह मर्दानी, रानी पुष्पलता ......
अपनी hi दी शक्ति उसको भारी पद रही थी लेकिन वह दिल से चाहती थी आर्यन उसको पलंग तोड़ चुदाई करे. स्वर्णमहल के हर एक कुँए तक मेरी चीख्यों की गुंज्ज से पता चलना चाहिए की मुझे भी छोड़कर रुलाने वाला मेरा मालिक िश अटाला लोक का नर अब आ गया है. अगला राउंड प्यार वाला था और तीसरा मिला जुला मजा आर्यन ने पुष्पलता से लिया.
दोनों छोटी भेने कामलता और स्वर्णलता तळतळा लोक गयी हुयी थी विवाह की तयारी करने रानी हेमा के साथ. उन्ह दोनों को भी पता था की दीदी को आर्यन का प्यार काम मिला है पर उनको कहाँ पता था की उनकी दीदी चुड़ते चुड़ते मरने hi वाली थी जब त्रिवेटा ने कक्ष में आकर आर्यन को हंसिका के साथ आकर उसके ऊपर से बलपूर्वक खींच के अपने ऊपर चदया और हंसिका खुद रानी पुष्पलता को स्नानगृह में उठा के ले गयी और उसको होश में लायी.
तब हंसिका ने पुष्पलता को बतया की पिछले 2 पहर ( 7-8 घंटे) से आप आर्यन के साथ थी और आपको बेहोशी में भी अपने से अलग नहीं किया..... अब त्रिवेटा hi आपकी जगह उसको झेल रही है.
रानी पुष्पलता मुस्करा भर दी ," चिंता की बात नहीं है हंसिका ,अब आर्यन भी दानवो की शक्ति रखता है. चल भोजन की व्यवस्था कर उसको खाने की खुसबू रोकेगी. में अब ठीक हूँ पर यह याद रखना हमारे सामने अपना पढ़ मत भूलना, हमसे पीछे आर्यन को तुम दोनों खुश कर सकती हो. अपनी महारानी के चरणों में सर रखकर खुसी खुसी हंसिका चली गयी...... अंदर बिस्टेर पर त्रिवेटा की गांड पहाड़ चुदाई चल रही थी.
अपने को अपनी शक्ति से सही करने में और त्यार होने में रानी पुष्पलता को थोड़ा समय लगा. जब बहार आयी तोह आर्यन अपनी झांघो पे दोनों को नंगी बिठाये स्वादिस्ट भोजन की दावत ुधा रहा था ..... यानी उसने हंसिका को भी त्रिवेटा के साथ फिर से चूड़ा था और अब भोजन कर रहा था. पुष्पलता का इशारा करते hi दोनों नंगी शरमति हियी उठकर भाग गयी.
आर्यन बस भोजन में लगा था..... काम से काम 200 आदमीओ का खाना डकार चूका था तब जाकर सुष्ट हुआ.
अब पुष्पलता उसकी गॉड में बैठकर बोली," चलो न आर्यन कहीं अच्छी जगह घूम के आते हैं, तुम ने स्वर्णगैर के उधड़यां ( बाग़ बगीचे) नहीं देखे होंगे ".
आर्यन को सृष्टि और नींद आ रही थी पर रानी पुष्पलता की प्यारी मीठी बातें सुनकर बोलै ," वहां भी प्यार करेंगे, एक मं में अपना बैग ले लूँ क्या पता कोई दुर्लभ जड़ीबूटी मिल जाये. में त्यार होकर आता हूँ"...... उसका गाल चूम के फ्रेश होकर अपने बैग में जरूरी चिजियन चेक किया और दोनों निकल गए अटाला लोक की सीआर पर.
स्वर्णलता ने गौर किया तो पाया की आर्यन सिर्फ हिंसक या अतिउतेजित अवस्था में hi दानव जैसा होता है जबकि प्रेम से बात करो तोह एक आज्ञा कयारी बच्चे जैसा. वह उसका हर कहना मान रहा था और यह रूप आर्यन का उसको बहोत प्यारा लग रहा था. एक बार को रानी पुष्पलता को लगा क्यों हम सब इश्को दानव या नाग बनाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि यह मानव रूप में hi कितना प्यारा है.
रानी पुष्पलता ने मैं hi मैं फैसला किया की क्या बुराई है िश्मे की आर्यन में जोह ऐसा है, सबसे शक्तिशाली होते हुए भी बस प्रेम hi करता है. अब मुझे और कामलता को आर्यन बस पति के इसी रूप में चाहिए सायद स्वर्ण इशलिये िश को इसी रूप में निस्चल प्रेम करती है.
पतलोक की तीन रानियों, तीन राजकुमारियों के साथ दो सख्ती साली नागिन का दिल आर्यन जीत चूका था. वहीँ अब पतलोक के प्रमुख महाबली भी उसके पक्ष में थे.
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मगर एक नागलोक के नागदंश के साथ तळतळा लोक का हिमासुर नाम का दानव भी आर्यन के खिलाफ परसों नागलोक के स्वयंवर में उसको मारने का सद्यांतर रच चुके थे.
अब सब प्रभा के हाथ में था की वह बिना किसी की सुनए आर्यन को वर चुन लेगी या फिर प्रतियोगिता होकर hi रहेगी क्योंकि आखिरी में आर्यन को प्रभा को हराना होगा तभी उसकी नागिन बनेगी जोह आशम्भव hi था. लेकिन एक उपाए रानी हेमा ने भी निकला था की यह 6 दानव रानियां और राजकुमारी आर्यन से दिल से मिलान करके उसको अपना नर बना लेगी तोह जोह शकितयाँ इनसे मिलेगी वह Prabha-Vishaka जैसी नागिन से मुकाबला करने के काबिल बना देंगी फिर भी जीतना आर्यन को hi होगा .
नागदंश और हिमासुर दोनों गुस्से में प्रभा से लड़ने नहीं आर्यन को मारना चाहते थे जोह सिर्फ एक मनुष्य होकर दानव, असुर, नाग और सर्प जातियों को अपनी शक्ति पर्दशन से तूच दिखाया था अब तक.
दोनों अपने अपने इष्ट देव से तपस्या करके आर्यन को मारने की शक्ति प्रपात कर रहे थे स्वयंवर प्रतियोगिता में. लेकिन आर्यन तोह मस्तमौला की तरह बस अपने hi मस्ती में मस्त था.
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स्वर्णगैर घुमते हुए आर्यन वहां के आस पास के मनोरम प्राचीन स्थान के बाद अब उधड़यां घूम रहा था. उसको नयी जगह और वहां की विशेता को गहराई से जान्ने का सूक तो बचपन से रहा था.
आर्यन ने बहोत सारे नमूने और औसधि भी खुद रानी पुष्पलता से मिलती जानकारी के साथ इकठे किये. आर्यन ने पुछा ," पुष्पु यह जल की पूर्ती पतलोक का कोनसा तत्व पूरा करता है ?"
रानी पुष्पलता हसकर ," जल की जरुरत hi कहाँ होती है जब यहाँ की मिटटी से डायरेक्ट जीवन दायनी ( ऑक्सीजन) और जीवनदासी ( हाइड्रोजन) मिल जाती है फिर यह धरतीलोक के पुष्प या फल नहीं हैं, इनकी दीर्घ काल आयु होती है ..... अभी तुम्हारे हाथ में जोह फल पकड़ा है उसकी आयु तुम्हारी धरती के हिसाब से 12 हज़ार साल से ज्यादा होगी".
आर्यन ने तुरंत हाथ हटा लिया और बोलै," पर यह पाक चूका है पर कितने समय पहले ?"
उसकी हालत देखकर पुष्पलता ने ुष फल को तोड़कर आर्यन के बैग में डालते हुए कहा," यह हम पतलोक के वासी निर्णय लेते हैं कब तोडना है. वार्ना जरुरत पर हम अपने hi लोगों को खा जातें हैं तुम ुष युद्ध मैदान में देख चुके हो. बस अफ़सोस तुमको खा नहीं पाया कोई hi hi hi hi hi hi "....... आर्यन को इतनी डिअर से बस अपने में hi वयसत देखकर वह उसको चिढ़ाती हुयी उसकी हसी उड़ाई ......
आर्यन अपने एक्सप्रेशन चेंज करता मुस्करा कर एक हाथ पुष्पलता की कमर में दाल के उसको अपने करीब खींच के बोलै," उनको मौका था पर मुझे नहीं खा पाए ताकि में उनकी रानियों को खूब खा सकूँ ..... पुछःह पुछठ ..... कामिनी ..... तू मुझे डरा रही है, अब तेरी कहिअर नहीं ...... अब तेरी योनि यहीं उधड़यां में फाड़ता हूँ ".
और वहीँ उसकी न नुकर नखरे के बावजूद उसको मखमली घास पर कुटिया पोज़ में करके अपना खूंटा गाड़ दिया पुष्पलता की योनि में ..... एक घंटे तक चूड के अपना विरए उसकी छूट में भर के अलग हुआ...... आर्यन अब पुष्पलता को चिडता हुआ बोलै ," मजा आया पुष्पु ?..... है है है है ...... तुम बहोत नशीली हो मेरी जान "
पुष्पलता अब भी नखरे दिखा के मोह बना रही थी लेकिन शिकायत उसको भी नहीं थी. उसको सही नर मिला था जोह सही समय उसको मिलान का पूर्ण सुख देता था. दोनों थोड़ी डिअर और घूम के अब स्वर्णमहल से साही अंदाज में त्यार होकर पूरे लश्कर के साथ निकले तळतळा लोक.
दोनों जब साही यान से तळतळा लोक पहुंचे तोह दोनों का भाव स्वागत हुआ ..... सब बड़ों का आशीर्वाद लेकर आर्यन बहोत खुश था यहाँ िश लोक की सुंदरता और सजावट देखकर .
राजा माया और रानी माँ हेमा के प्यार चुकार आर्यन ने कहा," आप दोनों को देखकर मुझे अपने माँ बाप की भी याद नहीं आती ऐसा लगता है आप hi मेरे माँ बाप हो यह तोह आपकी रची माया भी नहीं है क्योंकि चल में पहले hi पकड़ लेता हूँ पर क्यों में बस आपकी िश माया के भरम जाल में बस आपकी hi माया hi खोझता हूँ, आप से महँ कोई नहीं राजा माया पर आप की बेटियां आपकी माया से भी ऊपर हैं. तीनो दिल से बहोत साफ़ हैं और आपकी माया से दूर, आप की माया की वजह से यहाँ आया हूँ ".
राजा माया ने रानी हेमा के कान में कहा," अपने पुत्र से बोलो की मेरा नाम महँ राजा मयासुर है फिर क्यों मुझे हमारी छोटी पुत्री माया जैसा बोल रहा है ?"
रानी हेमा ने आर्यन को आशीर्वाद देते हुए साया की तरफ इशारा किया तोह वह आर्यन को अपने साथ ले गयी और एक आसान पर बिठा के तीनो भेने उशसे खिलखती बातें करने लगी ..... चाहती तोह तीनो गले लगकर उसको चूमना भी.
तब रानी हेमा ने जवाब दिया ," क्योंकि आपकी कोई भी माया ने नहीं बल्कि आपकी पुत्री 'माया' ने उश्के दिल पर असर किया है, अगर वह मयासुर बोलने लगा 7 बार तोह विवाह आप करते ुष से क्या? यह हमारे देने से पहले hi बेटी मांग कर आशीर्वाद ले लिया है. अब देखो साया और चाय को भी मांग लेगा".
इतना सुन्नते hi राजा माया की भी सिटी पित्ती गम हो गयी क्योंकि यह तीनो बेटियां hi उनकी सर्वशख्तियाँ थी. यानी की राजा मयासुर की शक्तियां िंह तीनो दत्तक पुत्री में थी.
रानी हेमा ने उनके कान में कहा," समय आ गया है एक अपनी शक्ति आर्यन को स्वेछा से दे दिज्ये वर्ण तीनो लेकर जाएगा और अपनी लाड़ली पुत्रियों की तरफ देखो कैसे सिर्फ उसके लिए राल ( सलीवा) बहा रही हैं".
7 बार माया बोलकर दोनों के चरण छूकर आशीर्वाद लेकर माया नाम की बेटी को आर्यन पा चूका था पर अब बारी अगली दोनों की थी.
राजा बलि महाराज ने भी राजा माया के मैं में एहि बात केहि," एहि वक़त है आर्यन को अपनी तरफ करने का राजा माया वार्ना सब चीन जायेगा और भूल रहे हो उसकी माँ रानी हेमा हर एक वार विफल कर देगी".
राजा वासुकि ने उनके मैं में कहा ," राजा माया इतना में जरूर कह सकता हूँ आर्यन एक सिद्ध मनुष्य है, आज तक प्रभा और विशाखा खुश हैं. तुम भी अपनी बेटी देकर खुश रहोगे".
दानव गुरूजी ने मस्तिक्ष संपर्क से कहा ," राजा माया, आप ने पुनर जीवन सिर्फ भगवन शिवशंभु से मिला है और यह लड़का खुद भगवन भोलेनाथ की किरपा से पैदा हुआ है. माया के साथ उसकी दोनों भेने भी खुश रहेंगी".
राजा माया को अपनी मौत दिखने लगी जब आर्यन साया और चाय का हाथ पकड़ के आया उनके सिंघासन की तरफ .....
झट से राजा माया बोले ," पुत्र आर्यन की माया से विवाह की तयारी करो में अभी आता हूँ"..... और सच्च में वह अन्तर्द्धन्द्ध ( गायब) हो गए डर से जबकि आर्यन मांगने नहीं कुछ उनको बताने आया था.
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आर्यन के प्रभा के साथ जाने के बाद माया रूठी हुयी चली गयी अपने कक्ष में पर जब िश घटना का सच्च उसको चाय, साया ने बतया तोह शरमाते हुए बोली," क्या मेरी सच्च में शादी हो गयी आर्यन से दीदी या मुझे आप दोनों बेहला रही हो".
चाय हसकर ," हमारी भी हो जाती अगर पिताजी महाराज चाहते...... तेरी वजह से hi 1/3 शक्ति काम हो गयी उनकी ..... अगर हम दोनों का विवाह भी इसी तरह हो जाता तोह तळतळा का नया राजा आर्यन बन जाता ".
माया खुश होती हुयी ," सच्च फिर तोह आर्यन यहीं हम तीनो के पास रहता, आप दोनों ने ऐसी गलती कैसे कर दी जल्दी पिताजी को ढूंढो और तीनो शादी करते हैं ".
"तुम्हारी तीनो की शादी आर्यन से राजा माया की मौत होगी ......
1% = रानी हेमा और हर पुत्री में 33% = तुम में से एक अंदर है उनकी पावर. वतासुर की गुलाम तुम तीनो इशलिये थी कभी आजाद न हो पर आर्यन पतलोक आ गया जिसका कभी किसी ने नहीं सोचा था. "गाजा शक्ति" देकर हम ने उसको पतलोक में अमर बना दिया है यानी उसपर कोई दानव शक्ति काम नहीं करेगी और नाग शक्ति तुम तीनो hi उसको दे सकती हो मेरी प्यारी छोटी बहेनो ".
साया ने हाथ जोड़कर कहा ,"रानी पुष्पलता दीदी हमारे पास नाग्शक्ति शक्ति कहाँ से होगी ..... है है है है है ..... मजाक की भी हद है ..... "
तभी रानी हेमा की आवाज आयी ," राजा वासुकि की छिपी शक्ति तुम तीनो के अंदर हैं पर उन्होंने बंदिश राखी जोह तीनो बहेनो को अर्धांग्नी बना लेगा उसको आधी नाग्शक्ति मिलेगी और तुम तीनो के साथ आर्यन भी त्यार है. आधी नाग्शक्ति विशाखा और प्रभा के पास है. यानी दो लोकों के राजाओं की शक्तियां क्या जीवन भी तक पर है. तुम्हारे पिताश्री पक्का अभी राजा वासुकि को hi चेताने गए हैं, देखो पिता hi अब पुत्रियों के मोहताज हो गए".
रानी पुष्पलता ," एक गुण मैंने आर्यन में नोट किया है वह बहोत खुशाल एक साधारण सा मानव hi रहना चाहता है जबकि क्रोध या अपनों को संकट में देख सामने वाला काल बन जाता है. दोनों राजा उसको हरा तोह अब नहीं पाएंगे पर उसको शक्ति पाने से रोकना जरूर चाहेंगे ".
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राजा माया के राजदरबार से गायब होते hi प्रभा वहां आयी और रानी हेमा से अनुमति लेकर आर्यन को अपने साथ ले गयी तळतळा लोक घूमने और बातें करने .....
आर्यन ने जब साथ चलते हुए अपनी छोटी भें प्रभा को उदास देखा तोह बिफर के उसको अपने सीने में समेत लिया ," क्या हुआ बेबी ? व्हाई यू अरे सो साद बोल मुझे ? " ....... दोनों अभी साथ अकेले hi यहाँ एक सूंदर वन्न में घूमने आये थे.
प्रभा भी अपने बड़े भाई की बाँहों में उसकी बगल से हाथ निकल पीछे से कंधे पे रख के बोली," भाई आप मुझे भूल hi गए..... जब से यहाँ पतलोक आये हो मेरी तो आप को याद भी नहीं आयी बस इधर उधर hi दुसरे लोकों में घुमते रहते हो ".
आर्यन ने अपनी िश सबसे छोटी नादान भें का सर चूम के बोलै," तेरी वजह से यहाँ आया की तुझे तेरे पिछले जनम के परिवार से मिलना का मैं है पर सब ने मुझे hi दुर्र रहने को कह दिया. क्या करता इधर उधर भटक रहा था पर हमेशा तेरी hi चिंता रहती, चल अब वापस चलते हैं वहां सब हमारी hi बैठ जो रहे होंगे".
प्रभा को लगा कहीं भाई बगैर मुझसे नाग विवाह किये वापस न चले जा पर अभी तक एक बहोत स्ट्रांग रिश्ते था जिस की वजह से Bhai-Bhen का आवरण नहीं टूट रहा था दोनों के बिच और दूसरा आर्यन सिर्फ प्रभा का बड़ा भाई नहीं था बल्कि उसकी एक पैरेंट की तरह केयर करने वाला, उसका दोस्त, उसका पहला प्यार और उसका आइडल था फिर कैसे बोल दे में आप से शादी करना चाहती हूँ और आप से बहोत प्यार करती हूँ.
आर्यन अपनी छोटी भें प्रभा से मिलकर सारे पतलोक को भूल गया. उसके लिए प्रभा वही छोटी सी नन्ही सी बेबी hi थी जोह बच्चों को जिन्दा रखने वाली मशीन में बीमार सोई हुयी थी पैदा होने के कुछ घंटो बाद और ठीक होने के बाद अपने भाई से मिली एक महीने बाद. आर्यन उसकी इशलिये इतनी ज्यादा केयर करता था की मेरी भें फिर से वापस ुष मशीन में नहीं जाएगी. (यानी बेबी इनक्यूबेटर)
निर्मला चाचीजी बचपन में आर्यन को दूध पिलाने की कोशिश करती प्रभा के पास रहने पर भी पर वह मन करता की मेरी बेबी डॉल को ज्यादा जरुरत है. प्रभा भी उन्ह खुश किस्मत लोगों में से थी जिसको रति और आर्यन बहोत प्यार करते थे.
देखा जाए तोह आर्यन सबसे प्यार करता था पर रति कुछ hi लोगों पे जान लुटाती थी आर्यन के अल्वा ..... पहला no. सारू का था क्योंकि वह उसकी पहली संतान थी दूसरी थी गीता जोह उसको भगवन ने आशीर्वाद में दी और तीसरी थी नेहा और अणि जैसा जुड़वाँ नाटियां दोनों सगी बेटियों की बेटियां जोह थी. 4तह थी उसकी अपनी पोती डॉली जिसको वह बहोत प्यार करती थी अपनी बड़ी बहु कविता के कारन पर जब निर्मला ने प्रभा को जनम दिया तोह रति को ुष निर्जीव सी नवजात बच्ची से जाने कैसा लगाव हो गया की पूजा अर्चना में डूब गयी और व्रत पे व्रत रखकर भोलेनाथ से उनकी ुष बच्ची पर कृपया मांगी की में मन्नत पूरी करुँगी.
चम्तकार hi हो गया एक महीने बाद जिस बच्ची को सेज माँ बाप के साथ सब डॉक्टर्स भी बोल दिए की यह नहीं बचेगी पूरा सरीर पीला पड़ा था प्रभा का मशीन में....... बस एक आर्यन जोह लगभग तीन साल से काम था और दूसरी उसकी माँ रति को विश्वाश था की प्रभा नयी किरण की तरह ठीक होकर हमारे साथ hi खेलेगी.
आज की डेट में वही प्रभा खेलना तोह छोड़ो पोल वॉल्टिंग करती है और असली सच्च यह था वह अब अपनी पिछले जनम की बड़ी भें नागिन विशाखा को अपने अंदर लिए नागलोक की सबसे शक्तिशाली नागिन बन गयी है.
आर्यन अब ुष अजीब से उधड़यां में आ गया, अपनी भें प्रभा को एक छोटी बच्ची की तरह अपनी पीठ पे बिठाये . प्रभा को वहां घुमा रहा था जोह उसको िंह विचितिर फूलों और पेड़ों की जानकारी दे रही थी जब आर्यन पूछता.....
अपने साइड में लटके बैग में वह अपनी छोटी सी कैंची और नाइफ से कुछ फूल और पतियों के साथ फल के हिस्से काट के सैंपल सा लेकर रख लेता, यह सब प्रभा को बहोत बोरिंग लग रहा था.
वह कुछ सोच के बोली ," भाई अगर आपको विशाखा दीदी से प्यार हो गया तोह क्या मुझे भूल जाओगे आखिर उनसे आपका विवाह होगा ?"
आर्यन अभी एक छोटे सी नरगी पट्टी को हाथों से चेक कर रहा था फिर सूंघ कर ुष पेड़ के छोटे से फल को जोह पक्क चूका था, तोड़ते हुए अपने बैग में डालते हुए बोलै ,"देखो बेबी विशाखा न बहोत कुरूर घमंडी थी और अब तुमको कण्ट्रोल करना सीखना चाहिए की वह बहार न आये तुम पर हावी न हो ...... याद है उसने क्या किया था वहां अलवर के दिव्या ख़ज़ाने वाले तहखाने में सबको बंदी बना लिया था में सिर्फ तुम्हारे लिए चुप था की तुम को नुक्सान न पहुंचा दूँ ".
प्रभा को अब रास्ता मिल गया ," भाई वह विशाखा दीदी न बहोत जिद्दी है मुझे भड़कती रहती है पर मैंने साफ़ बोल दिया की में अपने प्यारे भाई की गुड गर्ल हूँ गलत काम नहीं करुँगी..... ठीक किया न भाई? "
आर्यन अब आगे बढ़कर एक पेड़ पे रेंग रहे कीड़े को हाथ में पकड़ के अपनी हथेली में रख के उसको इधर उधर हिला के खुश हो रहा था ......
प्रभा को आर्यन का अपनी बातों पे ध्यान न देना अच्छा नहीं लगा उसने फूक मार के उसको उदा दिया ..... देखते hi देखते वह एक बड़े दानव में बदल गया तब आर्यन ने बिना उसको मौका दिए ुष दानव के मोह पे मुक्का मार के बेहोश कर दिया और प्रभा ने ुष्पर थूक दिया ...... अगले hi पल उसका पूरा सरीर गाल गया प्रभा के थूक से.
आर्यन ने अपनी पीठ पे लड़ी छोटी भें की तरफ देखा गर्दन घुमा के देखा तोह उसने आर्यन का गाल चूम लिया ," ुंहःहःह भाई वह डिसट्रब कर रहा था हम पर निघा रखते हुए".
आर्यन उसकी मासूमियत भरी नज़र देखकर बोलै," ऐसा किसी को मारने का अधिकार हम को नहीं मिल जाता बेबी पर हाँ वह जासूसी तो पक्का कर रहा था. तुम अभी इतनी बड़ी नहीं हो और अपनी पावर को कण्ट्रोल करना सीखो, कल हम दोनों के साथ अपने भी होंगे फिर गुस्सा और नफरत कुछ हासिल नहीं होने देगी. अच्छा बोल तू कुछ कह रही थी ".
आर्यन की एहि बात रति को पसंद नहीं थी वह अपनी बहेनो और मम्मियों की गलत हरकत को भी सही तारक देकर डिफेंड करता था जबकि उन्ह में से कुछ ज्यादा hi नटखट thi......Jaggu मम्मी की भी गलत हरकत उसने ऐसे ताल दी जैसे कुछ नहीं हुआ क्योंकि उसके लिए उसकी मुम्मियाँ और भेने कभी गलत नहीं कर सकती और किया तोह में सही कर दूंगा. िंह सबसे ज्यादा तोह अपनी चंदा देवी, गीता, के लिए करता था. उसको पूरी दुनिया भी गलत करार कर दे तब भी आर्यन गीता को डिफेंड करेगा की वह गलत कर नहीं सकती .
रति सबको वश में कर सकती थी पर गीता को नहीं और उसकी हटधर्मिता को आर्यन का पूरा सेह मिलता है यह रति मानती थी. इसी बात का गीता भी फायदा उठती थी की मेरा आशिके लौंडा (आर्यन) मेरे साथ hi रहेगा खिलाफ नहीं.
प्रभा ने फिर से अपने भाई की गर्दन पे अपनी बाँहों का कसाव भड़ता हुए आर्यन का लेफ्ट गाल चूम लिया ," hi hi hi hi hi ..... भाई ी लव यू ...... पुछःह पुछठ ".
आर्यन एक बार को अणि को दांत दे पर प्रभा को कभी खुद क्या अपनी निर्मला मम्मी को भी नहीं डाटने देता था इशलिये ब्रिगेडियर जसवंत सिंह( प्रभा के नानाजी) भी आर्यन को बहोत पसंद करते थे की यह भी हम फौजी की तरह सब परिवार को एक hi प्रेम की नज़र से देखता है जैसे हम पूरे देश की जनता को देखते हैं पर आर्यन को सीखना होगा अपने hi कुछ देशवासी हमारे देश को दीमक लगा देते हैं जोह आर्यन अपने परिवार वालों के लिए कभी नहीं समझा.
नवाब सिंह हमेशा आर्यन के बारे में सही बोलता था की उसके गुरूजी कहते थे की आर्यन को घर की औरशन का प्यार बाँध के रखता है और यह सच्च भी था सायद वह सभी औरशन और लड़कियां, आर्यन के अंदर से उन्ह दूसरी 5 अलग अलग आत्मों को कभी हावी hi नहीं दी थी ...... पर एक को प्रभा के अंदर वास करती नागिन विशाखा जरूर बहार लाना चाहती थी जोह दिव्या तलवार यानी 'सहायक' का मालिक है पर क्या वह बहार आएगा? और विशाखा ऐसा क्या करेगी ?
प्रभा को िश उधड़यां में घूमते हुए जब काफी दूर आर्यन ुष बहते झरने के पास पोंछा तो बोलै," यह सब राजा माया ने यहाँ क्यों बांया है जबकि यहाँ के वाशी तोह पानी और नहाने में विश्वास hi नहीं रखते यानी सब उनकी hi रची माया है ".
इतना सूंदर झरना देखकर प्रभा को एक आईडिया तोह आ गया की भाई को दिखाना पड़ेगा में भी डॉली और नेहा दीदी की तरह पूरी जवान हूँ ..... वह आर्यन की पीठ से उतर के झरने की तरफ बढ़ती हुयी बोली," भाई में तोह नहाने वाली हूँ आप भी आ जाओ कहीं में दुब न जॉन".
उसने बोलते हुए अभी धरतीलोक की पहनी अपनी जीन्स और t-shirt उतर दी सिर्फ लाइट पिंक पेंटी और ब्रा में दौड़ के झरने के बहते ठन्डे पानी में कूद गयी...... आर्यन अपनी भें की सुंदरता तो देखना छोड़ो बस इसी चिंता में पूरे कपडे पहने उसके पीछे कूद गया की इश्को न्युमोनिअ न हो जाये पानी में .....
आर्यन उसको पकड़ा तोह और उशसे लिपट के अंदर ले जाते हुए प्रभा बोली," भाई बहोत मजा आ रहा है पर आप कपडे क्यों पहनो हो ".
आर्यन िश समय राजशाही पोषक में था यानी ऊपर कुर्ते जैसा निच्चे लुंगी या धोती जैसा विस्तार कह लो ......
ऊपर पहने अंगवस्त्र के साथ प्रभा ने निचे लुंगी जैसा विस्तार भी खींच दिया और आर्यन पूरा नंगा हो गया पर जैसे उसको परवा hi नहीं थी उसको अपने से चिपटा के बोलै ," तू पागल हो गयी है ठण्ड लग गयी न तो मम्मी (निर्मला) मुझपे गुस्सा होंगी ".
प्रभा को आर्यन की नौटंकी लग रही थी पर अब जैसे जिद्द में आर्यन से लिपटे हुए अपनी ब्रा पेंटी भी उतर के जल में भ दिए ...... पर आर्यन को उन्ह सबकी परवाह भी कहाँ थी वह प्रभा को बहार लाकर अपने साथ नुदे लिपटते हुए पूछ रहा था ," अरे यू ऑलराइट बेबी? क्या जरुरत थी पानी में जाने की".
आर्यन का लुंड देखकर hi प्रभा भी हैरानी के साथ खुश होती सोचने लगी ," वाओ, क्या दमदार हथियार है भाई का ?"
प्रभा ने पानी से बहार निकलते हुए एक दो बार लुंड की फीलिंग अपने लेग्स , तइस से महसूस की तब विशाखा ने प्रभा को बोलै," प्रभा तू अभी भी आर्यन की छोटी बच्ची जैसी hi है मुझे मौका दे एंड 10 मं में उसका लिंग तेरे हाथ में होगा".
प्रभा अपने मैं में ," नहीं दीदी हम दोनों ने तय किया था की जब में भाई से मिलूंगी आप बहार नहीं आयोगी ".
विशाखा (मैं में) ," हाँ बोलै था पर मुझे यह नहीं पता था तेरा नग्न बदन देखकर भी आर्यन ऐसे hi ठंडा रहेगा...... देख एक बात तोह अच्छी है इश्क लिंग ठीक ठाक है पर अब समय आ गया है की या तोह तू साफ़ बात कर या फिर मुझे करने दे. हम विवाह करने वाले हैं न की किसी अरे गैर को जिस्म की नुमिश कर रहे हैं. एहि अपना आर्यन, अटाला लोक की 3 रानियों को भोग के आ रहा है. अब रानी हेमा की दत्तक पुत्री माया से भी विवाह करने वाला है चाहे एक से करे पर में बोल रही हूँ मुझे मौका दे ".
अब प्रभा के लिए क्लियर था पर इतने सूंदर सरीर को घास पे लिटा आर्यन अपने साथ लाये बैग में से निकाले साफ़ टॉवल जैसे विस्तार से उसके बदन को पहुंच के उसको लपेट दिया.
आर्यन ने देखा तोह प्रभा सुभाकने लगी ....... ऐसा लगा जैसे उसको खुद कोई खून के आंसूं रुला रहा हो ......
आर्यन बिलकुल नंगा उसके बदन को अपनी गॉड में बिठाकर बोलै," हे हे हे ..... क्या हुआ बेबी गर्ल? तेरी आँखों में आंसूं ?"
प्रभा झूट में गुस्से से बोली ," क्योंकि आप मुझे प्यार नहीं करते? आप सिर्फ मीणा दी, नेहा दी और डॉली दी को प्यार करोगे ...... बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ..... क्या में इतनी बदसूरत हूँ की आप ने एक सेक् भी मुझे प्यार भर नज़रों से नहीं देखा बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......."
आर्यन के लिए कपरिसों वर्ड hi नहीं था पर अपनी छोटी सी चुहिया भें की दर्द भेदी ललकार सुनी थी तो रूट हुए बोलै," 1 दिन की थी जब तुझे मशीन में देखा, मेरी मम्मी ( निर्मला) बहोत दुखी थी, सारे परिवार वाले दुखी थे की तू नहीं बचेगी पर ुष दिन भी सबको बोलै था की मेरी बेबी मेरे साथ जरूर खेलेगी फिर अपनी निर्मला मम्मी का दूध पिया जोह तुझे पीना चाहिए था. आज तक तोह तेरी बात ताली नहीं पर अगर विशाखा की जिद्द है तोह पहली बार ना बोल रहा हूँ".
प्रभा झट से आर्यन से लिपट के गोदी में चढ़ उसका पूरा चेहरा चूमते हुए बोले जा रही थी ," भाई भाई भाई भाई ..... में सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ बस मुझे अपना लो नहीं तोह में जी नहीं ...... "
आर्यन ने उसकी बात पूरी hi नहीं होने दी जबकि उसको बोलै गया था प्रभा को मत चूमना खासकर लबों पर पतलोक में ..... मगर दोनों भाई बहेनो ने चूमते हुए और एक दुसरे से लिपट के झरने में छलांग लगा दी..... इशलिये मीणा बोलती थी प्रभा को आने दो वह कुछ भी आर्यन से करवा लेगी.
आर्यन बस कड़वा ज़हरीला रास चूस के भी खुश था पर उससे ज्यादा तोह प्रभा पानी के अंदर आर्यन से लिपटी ुषको विष पीला रही थी अनजाने में...... प्रभा की पहली लव किश उसके बड़े भाई के गोर सरीर को नीला करती जा रही थी और आर्यन भी नहीं रोक रहा था उसको..... क्योंकि उसके सरीर में बहोत खतरनाक ज़हर उतरता जा रहा था. वह अपनी प्रभा की खुसी के लिए जान देने पर उतारू था.
तभी वहां किसी ने प्रकट होकर प्रभा की पीठ पर लाठ मारी और वह इतने प्यारे पलों में विहीन देखकर गुस्से में आ गयी..... क्यों बद्तमीज है जोह मेरे प्यार के बिच आ रहा है.....
उसके सामने तीनो अटाला लोक की रानियां को साथ तीनो दानव कन्या और पूरी सेना कड़ी थी जब आर्यन को किश करना छोड़कर पलटी..... गुस्से से वह सबकी तरह देखकर जब अपना पानी में प्रतिब देखि तोह खुद डर गयी," एक 120 फट की 5 फानन वाली नागिन का रूप धारण किये वह पिछले कुछ समय से आर्यन को बिच वाले पहन से चूम रही थी ........
उसका जेहेर पानी का रंग भी काला कर दिया था और आर्यन की बॉडी पानी ने उसकी पूँछ में लिपटी थी...... अचानक आर्यन के नीले पड़े सरीर देखकर वह डर से फुंकरति गायब हो गयी......
उसके गायब होते hi आर्यन के सरीर के घेरे काट वह सारा पानी का कालापन अपने अंदर समेत कर पूरा साफ़ कर दिए और आर्यन सीधा खड़ा होकर हाथ जोड़कर बोलै," आप सब जाओ यहाँ से मेरी छोटी भें को आपने रुला दिया?"
रानी स्वर्णलता के अल्वा अब कोई वहां नहीं था और आर्यन अपने विस्तार पहनकर अपना बैग उठा के पुछा," प्रभा अब कहाँ होगी तुम्हे पता है ?"
स्वर्ण भी आँखों में अलख लिए ," वहां मत जाइये स्वामी, आप नियम तोड़ रहे हैं".
आर्यन ने गुस्से से स्वर्ण को देखा और जमीन पर बैठकर मुक्का मारते बोलै," तुम जा सकती हो उसके पास?"
स्वर्ण डर गयी पर उसकी हिचक देखकर आर्यन ने उठकर उसको अपने पास बुलाकर गले लगाकर माथा चूम के बोलै," मेरा सन्देश लेकर जाओ स्वर्ण की में उसका भाई उससे कल विवाह करने आऊंगा उसके स्वयंवर में बस उसकी बहती नाक नहीं चाहिए ".
तभी वहां रानी पुष्पलता आयी और बोली," स्वर्ण वहां नहीं जा पायेगी आर्यन वर्ण इश्को भी खो डोज. वहां सिर्फ तुम्हारी गाजा शक्ति जा सकती है, अपना सन्देश एक अदृश्य नाग बना के भेजो. उन्ह अँधेरी सुरंग और गुफा में वह hi जा पायेगा ".
आर्यन अब हैरान होता हुआ ," फिर में और दीप्ति इतनी आसानी से कैसे वहां तक पहुंच गए थे पिछली बार ?"
रानी पुष्पलता ," क्योंकि तुम को भेजा गया था सब पररहि और अड़चन हटा के फिर भी जिन्दा वापस आये ?"
आर्यन अब गुस्से से अपने को बेबस पाटा बोलै ," में और मेरी प्यारी भें प्रभा बस पतलोक सिर्फ इशलिये आये थे की उसको अपने परिवार से मिलना था पर तुम सब हम को hi इस्तेमाल करके अपना मतलब साध रहे हो. अगर मेरी भें प्रभा को कुछ हुआ तोह भूल जाऊंगा की यहाँ कोई और भी रहता है. पुष्पु मेरी छोटी भें प्रभा को वापिस करवा दो, हम दोनों फिर कभी यहाँ नहीं आएंगे. यह भी कोई राजा की माया है ".
रानी पुष्पलता आगे बढ़कर आर्यन का हाथ पकड़ कर बोली," आर्यन यह कोई माया नहीं है बस खुद को सम्भालो तुम्हारा सन्देश में खुद लेकर जाउंगी चाहे नागलोक के नाग मुझे देश देश के मार दें तुम्हारा सन्देश पहुंचा दूंगी ".
आर्यन को अब अपनी hi नहीं उन्ह सबकी बेबसी नज़र आ रही थी की प्रभा अभी दुर्र है पर सुरक्षित नहीं..... आर्यन ने पलकें झपका के अपना सन्देश देने का इशारा कर दिया पर अंदर अंदर hi अब वह घुट रहा था.
वह जानता था नागलोक की राजकुमारी प्रभा से ुष को विवाह करना पड़ेगा पर धरतीलोक पर ुष अपनी छोटी नाजुक भें प्रभा को कितने प्यार से रखता था. रानी पुष्पलता ने सन्देश भेज दिया था प्रभा के पास जिसको बिना पढ़े hi उष्ण नष्ट कर दिया.
अब दोनों नागिन बहेनो का गुस्सा बढ़ रहा था एक दुसरे के प्रति भी और बाकी सबके भी, क्यों आर्यन को वह पल भर भी प्यार नहीं कर पायी...... ? क्या जरुरत थी दीदी को वहां असली रूप धारण करने की. वहीँ विशाखा अपने वार में hi चूक गयी, आर्यन जहर से नीला पद गया पर वह दिव्या तलवार का मालिक क्यों बहार नहीं आया उसको बचने ?
आर्यन वहां से बिना किसी से बात किये निकल गया राजा माया के महल की तरफ अपने गीले विस्तार पहनकर और अपना बैग पीठ पे टाँगे..... रस्ते में साया, चाय के साथ तीनो अटाला लोक की रानियों ने कोशिश की उसको मन पाए पर सब बेकार. हंसिका और त्रिवेटा ने भी कोशिश की पर आर्यन बस फीकी से मुस्कान देता पैदल hi बढ़ा जा रहा था.
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रानी माँ हेमा अभी भी दुविधा में थी की आर्यन ने इशलिये जवाब नहीं दिया क्योंकि रति को ुष ने माँ चुना होगा. उधर अपने को विवाह के लिए सजवाती राजकुमारी माया के पास सन्देश आया की आर्यन, राजमहल लौट आया है पर बहोत दुखी है. वह किसी से बात नहीं कर रहा है बस गुमसुम है.
सब कुछ छोड़कर माया दौड़ती जब आर्यन को झुके कंधो के साथ सर झुकाये वापस अंदर आता देखि तोह तेजी से दौड़कर ुष से लिपट के बोली ," क्या हुआ आपको आर्यन, ऐसी सकल क्यों बना राखी है और आपके वाटर गीले कैसे हुए.... किसने आपके साथ गलत किया , बस नाम बता दिज्ये में उसको जान से मार दूंगी. मेरे आर्यन को दुखी करने की किस्मे हिम्मत आ गयी उसका वंश उजाड़ दूंगी में ....... "
देखते hi देखते राजकुमारी माया एक खुनी दानवे के रूप में बदलने लगी तोह आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के कहा," कुछ नहीं हुआ मुझे माया डार्लिंग बस थक गया हूँ चलते चलते ..... फिर तुम्हारे होते हुए मुझे कौन परेशां कर सकता है ".
माया अपने पुराने रूप में आकर आर्यन के गले लगकर उसको चूमने लगी ," पुछःह पहुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हैं न आर्यन ...... ी लव यू तू माय बेबी ...... एक बार उसका नाम बोल दो में उसको जिन्दा नहीं छोडूंगी ".
तभी रानी पुष्पलता ने पीछे से आकर बोलै," आर्यन मुझसे नाराज हो गया इशलिये ऐसा हो गया है ".
आर्यन को छोड़कर माया सीध दौड़ के रानी पुष्पलता के प्यार पकड़ के बोली," चमा कर दिज्ये रानी शैब्या मेरे आर्यन की गलती को हम दोनों यहाँ से दुर्र पृथ्वीलोक चले जायेंगे..... आप को कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ..... "
राजकुमारी माया भी शक्तिशाली थी पर पृथ्वीलोक पर रहकर वह प्रेम करना और बड़ो की इज्जत करना सीख गयी थी.... वह आर्यन के लिए सबसे माफ़ी मांगने के लिए त्यार थी जोह दानव गुण नहीं था.
आर्यन ने आगे बढ़कर राजकुमारी माया को उठाया और गले लगते हुए बोलै," अरे पगली में किसी से नाराज नहीं हूँ और यह सब तेरा मजाक उदा रही हैं. अगर मेरी प्यारी माया को किसी ने परेशां किया तोह हम दोनों किसी से बात नहीं करेंगे ..... है न माया ी लव यू बेबी ".
माया भी रोटी हुयी खुश होकर ," ी लव यू तू आर्यन मोरे थान एनीथिंग इन थिस वर्ल्ड ..... पुछःह पुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हो न ? "
माया ने दीप्ति से बहोत कुछ सीखा था और वह जानती थी धरतीलोक में आर्यन उनका नहीं होगा पर पतलोक में आर्यन को वैसा hi प्यार देगी. देखा जाए तोह माया hi आर्यन को समझ पायी थी एक इंसान के रूप में बाकी सब उसकी ताकत से प्रभावित थे. एक और थी उसकी जैसी स्वर्णलता जोह आर्यन को मानव रूप में hi प्यार करती थी.
रानी पुष्पलता को लग गया की यह माया, आर्यन का धरतीलोक वाले मानव रूप की पकड़ रखती है और खुश होती हुयी बोली," माया अब आर्यन को राजमहल में ले जाओ और घुम्यो. हम तब तक तुम्हारी माताजी से मिलते हैं ".
आर्यन भी प्रभा की चिंता करता समझ गया की यहाँ से कुछ नहीं होगा फिर ुष डायन जैसी कमीनी विशाखा जोह प्रभा के साथ है, मुझे कुछ ऐसा करना होगा विशाखा मेरी बेबी प्रभा को इन्फ्लुएंस न कर पाए. और माया कितनी अच्छी है सूंदर होने के साथ सॉफ्ट हार्ट भी," में तेरी आँखों में मेरी वजह से कभी आंसूं नहीं आने दूंगा माया ..... प्रॉमिस ".
माया जोह उसका हाथ पकडे हुयी थी बोली," गॉड प्रॉमिस आर्यन ".
आर्यन भी हसकर उसको गले लगाकर उसकी नादानी देखकर गाल चूम लिया ," चलो जाओ रेडी हो जाओ ".
माया ने उसका हाथ पकड़ा ," मुझे कुछ नहीं सुन्ना आप मेरे साथ hi रहोगे चाहिए यह विवाह हो या न हो".
आर्यन को खींचती अपने साथ लिए दासियों को निर्देश देती ले गयी अपने साथ अपने कक्ष में.
इधर अब बाकी दोनों दानव कन्यों के साथ तीनो रानियां और राजकुमारी त्रिवेटा और हंसिका वहीँ थी तब hi रानी हेमा और प्रभा की सगी माँ प्रकट हुयी ......
रानी पुष्पलता गुस्सा से ," आप कैसी माँ हो जोह अपने बेटे को बचने नहीं आयी फिर वह जबरदस्ती नागलोक जाने की जिद्द कर रहा था ".
रानी हेमा की बजाये जवाब स्वर्ण ने दिया ," माफ़ी चाहती हुयी रानी माँ अपनी बड़ी दीदी की तरफ से पर आर्यन आज कुछ सबसे अलग सुभाव में नजर आया, हम सब डर गए थे पर अभी माया ने उसको मन लिया जैसे छोटे बच्चे को मानते हैं ?"
रानी हेमा भी हसकर," वह अभी भी पतलोक में बस सीख hi रहा है और ुष समय अगर विशाखा उसको निगल जाती तोह प्रभा को मुक्ति मिल जाती. उसके सरीर पर दर्द नहीं दे पायेगा कोई पर हाँ आर्यन की आत्मा पर चोट मत करना. प्रभा को अभी भी वह छोटी नन्ही बच्ची समझता है और माया में उसको राजकुमारी दीप्ति नजर आयी जिससे वह मिलकर खुश होता हुआ उसकी बात सुनने लगा".
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राजकुमारी माया अपने साथ आर्यन को अपने तिलसमी कक्ष में ले गयी जहाँ बिलकुल धरतीलोक जैसा माहौल था .....
आर्यन हस्ते हुए कहा," तेरे पर दीप्ति का इफ़ेक्ट ज्यादा नहीं है..... है है है .... बस अपनी छोटी भें प्रभा की चिंता ज्यादा रहती है मुझे. अब इतना तोह मुझे भी समझने चाहिए की यह hi उसकी असली दुनिया है. वैसे माया तू आज पहले से बहोत खूबसूरत लग रही है ".
आर्यन की तरफ पलट के मटकती हुयी चल में उसकी गॉड में बैठकर बोली," एक बार और बोलो आप न की में सुन्दर हूँ".
आर्यन ने उसकी चीन के निच्चे हाथ रखकर चेहरा ऊपर करके बोलै," माया तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो जिसको में दिलो जान से चाहने लगा हूँ".
माया ने आर्यन का हाथ हटा के उसके गले में लिपट के बोली," यह तोह आप हर लड़की को बोलते होंगे की वह आपको खूबसूरत लगी. मुझे कैसे अलग लगेगा की में सच्च में खूबसूरत हूँ ".
आर्यन ने उसका चेहरा उठा के अपने सामने करके पहले माथा चूमा तोह माया की पलकें बांध हो गयी फिर उन्ह दोनों झुकी पलकों वाली आँखों को चूमा फिर बारी बारी दोनों गाल कई बार फिर नाक ..... लास्ट में दोनों लबों को बारी बारी चूम के लास्ट में थोड़ी चूम के बोलै ," यू अरे थे मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन थिस यूनिवर्स ".
माया अपने लबों को खोली तोह उसको चूसने लगा ..... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ .... माया तुम बहोत मीठी हो अपने दिल की तरह..... "
आर्यन ने उसकी मदहोशी वाली आँखों को बारी से चूम के कहा," जब तुम उन्ह सब लड़कियों जैसी hi खूबसूरत हो तोह ज्यादा या काम बोल कर उनकी बेइज्जती किसी के सामने मुझसे तोह न होगी. माया हर औरत सूंदर होती बस सही नजर चाहिए वार्ना हवस या मजबूरी से सिर्फ ख़ाक hi मिली है".
माया ने आर्यन पर चूमि की झड़ी लगा दी ," पुछःह पहुछठ .... तुम बोलते बहोत हो ..... आज मुझे पूरा प्यार चाहिए विवाह के बाद ...... पुछःह पुछठ .... ी लव यू आर्यन ...... "
और फिर आर्यन से ढेर साड़ी बातें और जलपान करवा के उसको अपने कक्ष से बहार धकेलती हुयी वापस अपने सिंगार दर्पण के आगे गद्दी पर बैठकर बोली," मुझे आज ऐसा त्यार करो ताकि यह रात मुझको हमेशा याद रहे "..... और 4 दासियाँ राजकुमारी माया की तारीफ करती उसको फिर से स्पेशल त्यार करने में लग गयी ......
आर्यन अब एक कक्ष में आराम करते सोच लिया था की प्रभा को वह स्पेशल फील करवाएगा. अगर मेरी छोटी सी गुड़िया मुझे इतना प्यार करती है तोह उसका पूरा हक़ है मुझपर..... मगर िश विशाखा का कुछ करना हो बगैर प्रभा को हर्ट किये?
उधर राजा माया और राजा वासुकि भी किसी तरह आर्यन को उनकी पूर्ण शक्ति पाने से रोकने के लिए आखिर कार अपने लिए पियादे चुनन hi लिए..... दोनों अपने अपने लोक के हिमासुर और नागदंश को वरदान देने पर सहमत हो गए......
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रानी हेमा के कक्ष में......
रानी हेमा ने जवाब दिया ," आर्यन से बीटा सिर्फ विशाखा hi पा सकती है क्योंकि मेरी दी हुयी शक्ति से बाकी सब पुत्रियां hi जनम लेंगी पर चिंता क्यों करती हो वह पूरे पतलोक का राजा बनेगा और उसकी भेने उसको मदद hi करेंगी क्योंकि यह आर्यन के खून में है ".
रानी पुष्पलता ," लेकिन आपकी बेटी माया या मेरी छोटी भें स्वर्ण जीवट नहीं बचेंगी और न hi प्रभा ?"
रानी हेमा गंभीर होकर ," प्रभा को विशाखा ज़िंदा रखेगी पर यह कड़वा सच्च hi िंह दोनों को तुम्हारे साथ आर्यन का संसर्ग जिन्दा भी रख सकेगा. तुम दोनों बड़ी बहेनो और मेरी दो बड़ी बेटियां इशलिये hi तोह बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगी ताकि उन्ह दोनों छोटी बहेनो के बच्चे तुम पालपोष के बड़े कर सको..... पुष्पलता याद रखना िश्मे पतलोक की भलाई है वार्ना कितने वर्षों बाद इतने प्रतापी बालक जनम लेंगे".
एक राज रानी हेमा ने भी छुपा लिया था की आर्यन के अंदर एक पवित्र संजीवनी शक्ति है जिससे उसकी औरत को ताकत मिलती है और उसके बच्चे की शक्तिशाली माँ भी बहोत खाश हो जाती है. यानी आर्यन hi बचा सकता है उन्ह तीनो को पर कैसे यह वह भी जानता होगा .
माया को चाय और साया आज अपने हाथों से त्यार कर रही थी...... स्वर्णलता और कामलता भी आयी हुयी थी और तीनो दानव कन्याँ को सलाह भी दे रही थी.
उन्होंने ने निरयने लिया ,चाय और साया पहले आर्यन के साथ मिलान करेंगी और उसके बाद hi माया की सुहागरात होगी.....
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Part-4(D)
आर्यन की यादें सपनो में ......
"गाजा शक्ति" अतियंत प्राचीन शक्तियों में से एक थी जोह राजा बलासुर के दानव पूर्वज को भगवन श्री गणेशजी से मिली थी सिद्धि प्रपात करके. राजा बलासुर के पुरखो से यह अटाला लोक के हर राजा को पीढ़ी दर पीढ़ी मिली, लेकिन जब आर्यन को मिली तीनो अटाला लोक की रानियों से मिलान चाकर बनाकर तोह यह पहली दानवी महाशक्ति थी जिसको गहरे करते हुए 6 अलग अलग आत्मा के 7-8 रूप आर्यन से बहार आये पर एक आखिरी रूप किसी को नहीं दिखा और बहोत बड़ी ऊर्जा से सब चकचोँद हो गए थे पर िश घटना से धरतीलोक के रति के गाओं के पास पुराने जंगल में बड़े गुरूजी की आंखें खुल गयी, "आशम्भव यानी वह जीवट होने की लालसा भी अब रखता है तोह आर्यन का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा बस वह समय से पहले प्रकट हुआ तोह आर्यन का सरीर hi नष्ट न हो जाए उसकी पूरी ऊर्जा के कारन".
वहीँ ुशी पल महाराजा शेषनाग ने प्रकट होकर आर्यन को शांत किया और सबको दांत कर और चेतावनी देते अन्तर्दंध हो गए.
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आज समूचे पतलोक के 7 लोकों के प्रमुख महाबली भी हिल गए की उन्होंने सही निर्णेय लिया था महार्यं को दिव्या तलवार को आसानी से ले जाने के लिए. परन्तु यह एक सामान्य मानव का जीवन कैसे जी रहा आर्यन के रूप में जबकि इश्के अंदर 6 शक्तिसालिओं की शक्तियां इश्को शांत कैसे रहने देती होंगी ? एक मानव के लिए तोह यह नामुमकिन है.
तब दानव गुरूजी बोले ," तुम सब जोह सोच रहे हो उसका एक hi उत्तर है वह है प्रेम जोह इश्को हर कदम पर मिला है. इश्कि शकितयों को बंधा गया जनम के समय फिर एक साथ इतनी माताओ का प्रेम स्नेह मिला. इश्के साथ 3 जुड़वाँ बहेनो के साथ अलवर की राजकुमारी दीप्ति का जनम हुआ इसको मजबूत बंधन में बाँधा रखा जा सके. इतनी बहेनो के प्रेम की दूरी से इश्कि शकितयों को दबाये रखा. फिर जवान होते हुए अनेक प्रेमिका और पत्नियों के निस्चल प्रेम की वर्षा. यानी आर्यन को समय hi कहाँ मिला जोह बाकी शकितयाँ अपनी बुरी या अच्छी ताकत से ईशपर असर दाल के कुछ करवाती. हाँ कभी कभी प्रयाश हुआ है पर जिसकी इतने चाहने वालियां हो उसको हमेशा संभाल लिया गया. यह बालक पिछले जनम का महार्यं का गुण िश जनम में भी लाया है. इश्के खून की रिश्ते वाळिओं ने समय के अनुसार इससे अपने रिश्ते बदल लिए. यानी इतनी प्रेमिका और पत्नियों का प्रेम hi इश्कि ताकत बन रहा है. इश्को नुक्सान पहुंचा आशम्भव होगा पर उनको आसान है. लेकिन वह सब भी कमजोर नहीं है सब एक बड़ा घेरा बना रही हैं जब आर्यन 21 साल का होगा तोह खुद को कुर्बान तक कर देंगी पर इश्को आंच न आये ऐसी उनकी युक्ति लगती है. रानी हेमा आप अगर चाहयेगी तोह धरतीलोक पर जाकर िश प्रक्रिया में सहयोग देकर पूर्ण करवा सकती हैं ".
रानी हेमा थोड़ा नाराजगी से ," गुरूजी यह कभी नहीं होगा में कभी पृथ्वीलोक पर कदम नहीं रखूंगी, जिस लोक में मेरी कोख जनम देने से पहले hi उजाड़ दी वहां में कभी नहीं जाउंगी ".
दानव गुरूजी ," आर्यन को फिर भी तुम ने अपना पुत्र मन उसके मानव होने के बावजूद भी, उसके लिए भी नहीं करोगी ?"
रानी हेमा की आँखों से अंगारे बर्ष रहे थे क्रोध से ," कदापि नहीं, आर्यन मेरा पुत्र पतलोक में है जहाँ में किसी को उसको हानि नहीं पहुंचने दूंगी पर पृथ्वीलोक कदापि नहीं जाउंगी"......
दानव गुरूजी सिर्फ मुस्करा भर दिए सोचते हुए की यह तोह समय hi बातयेगा की रानी हेमा अब आर्यन को ऐसे hi मौत के काल में जाने देंगी या नहीं..... ?
राजा माया ," लेकिन रानी यह तुम्हारा स्वार्थ नहीं दरसता आर्यन को न बचा कर ?"
रानी हेमा ," कैसा स्वार्थ स्वामी, आर्यन की जनम देने वाली सारू, पालने वाली रति, दूध पिलाने वाली अनेको माँ वहां हैं तोह मेरी उसको वहां जरूरत कभी नहीं होगी फिर मैंने हमेशा उसके लिए मात्र धरम निभाया है पतलोक में और मुझे गर्व है अपने पुत्र आर्यन पर".
दानव गुरूजी ," में तोह अभी भी कहूंगा की आप को ुष के जन्मदिन वाले दिन जरूर जाना चाहिए आखिर आपके आशीर्वाद से hi वह पतलोक का भी भला कर पा रहा है".
रानी हेमा बस शांत रही क्योंकि वह रति की जगह नहीं लेना चाहती थी और यह उन्ह सब को होता दिख रहा था. पतलोक के सब महाबली जानते थे की रानी हेमा का जितनी अधिक पकड़ अपने नए मोह बोले पुत्र आर्यन पर होगी वह उतना hi हमारा साथ देगा.
यानी यहाँ भी चौदर्य माधव सिंह की बात सच्च थी आर्यन मातृत्व प्रेम में अपनी माँ के लिए गलत भी कर डालेगा जोह भविष्य में बहोत विध्वंश कारी होगा. यह hi पतलोक के रानी हेमा से क्या धरतीलोक वाले रति से चाहा रहे थे की वह आर्यन से कुछ बहोत गलत करवा के शर्मिंदा होकर पीछे हो जाये.
आधे घंटे बाद आर्यन नींद से जगह तब रानी माँ हेमा को अपने पास बिस्टेर के सिरहाने बैठा देखकर ख़ुशी से उनके गले लग गया ," आप कब आयी रानी माँ, मैंने एक बुरा सपना देखना जिसमे मुझे आपको और माँ ( रति) में से एक को चुनना पड़ता, ऐसा दिन भगवन कभी न लाये".
रानी माँ हेमा भी चकित होती अपने को सामान्य दिखती धड़कते दिल से पूछ hi बैठी ," तुम ने रति को चुना होगा िश्मे सोचने जैसा क्या है. वह तुम्हारी असली माँ है भले उसने जनम नहीं दिया है".
अब आर्यन चुप हो गया पर रानी माँ हेमा विचलित थी की वह उत्तर नहीं दिया. आर्यन ने देखा आस पास कोई नहीं है बाद वह दोनों hi हैं तो बड़ी मीठी आवाज में बोलै," रानी माँ क्या आप मुझे अपना मीठा दूध पीला सकती हो बहोत भूख लगी है ".
उसकी मीठी आवाज और अपनापन रानी माँ हेमा का दिल पिघला दिया और उन्होंने ने बड़े प्रेम से अपनी गॉड में आर्यन का सर रखकर अपना दूध पिलाते हुए उसके बालों में उंगलियन फिरा रही थी. आर्यन दूध पीटा नींद की आगोश में चला गया पर रानी माँ हेमा को दुविधा में दाल फिया की रति और मुझमे से किसको चुना आर्यन ने ? यानी यह भविष्य में जरूर होगा पर कब और आर्यन किसको चुनेगा?
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आर्यन की जब नींद खुली तोह वह स्वर्णगैर महल की महारानी के साही कक्ष में बिलकुल अकेला था अपनी जीभ अपने होते पर फिरता अपने सर प् चपत लगता खुद से बोलै," रानी माँ हेमा कितनी अच्छी हैं मुझे सपनो में hi दूध पीला देती हैं काश में हमेशा उनके पास रह पता ".
वह बिस्टेर से खड़ा होकर स्नानगृह से त्यार होकर अब राजदरबार की तरफ चल दिया तोह उसको पहले हंसिका कक्ष के बहार मिल गयी जिसको उसने बाँहों में बहार कर गाल चूम के पुछा कैसी हो जानेमन. बिचारि शर्माती हुयी से आर्यन की बाँहों में लिपट के बोली ," आप का प्रेम पाकर खुश हूँ महाराज महार्यं ".
आर्यन ने हसकर कहा ," मुझे तोह आर्यन hi रहने दो महाराज स्तब्ध मेरे लिए नहीं है में बस तुम्हारी तरह एक सेवक hi हूँ "...... और उसके दोनों बड़े बड़े चूतड़ दबा के मसलने लगा.
हंसिका ," मत करिये मेरे प्यारे आर्यन अभी तक आपका दिए दर्द के साथ मिला पूर्ण सुख मुझे फिर से जोश चढ़ा देगा ".
तभी आर्यन की पीछे से किसनी ने खोली भर ली ," क्या बात है दोनों अकेले अकेले ? मुझे मत भूलो आर्यन मैंने hi हार के तुमको सब से मिलवाया है ".
आर्यन ने ुष सांडनी 9 फट की राजकुमारी त्रिवेटा के सर पर पीछे हाथ दाल के अपनी तरफ आगे करके उसके मोठे मोठे होंटो को चूमते बोलै," तू तोह मेरे दिल की रानी है त्रिवेटा ..... पुछःह पुछठ ....... तुम सच्च में मदमस्त हो ".
हंसिका ने आर्यन के खड़े होते लुंड को अपनी जांघ से रगड़ा तो उसका एक चूतड़ और त्रिवेटा की एक चूची जोरसे दबा दिया ...... दोनों सिसक पड़ी ......
तभी गलिहारे में आवाज गुंजी ," यह क्या हो रहा है ????? "
आवाज सुनते hi बिजली की गति से आर्यन से दुर्र हटकर दोनों कदमो के बल सर झुका के बेथ गयी.... रानी पुष्पलता का क्रोध से तमतमय चेहरा देखकर आर्यन जल्दी से उसके पास पहुंचकर बाँहों में लिए चूमने लगा और गॉड में उठाकर वापस ुशी के कक्ष में ले गया..... पुष्पलता उसको रोकती रही पर वह नहीं मन.
दोनों ने चैन की सांस ली पर रानी पुष्पलता की अगले दो घंटे चीखिआ hi गूंजती रही स्वर्णमहल में, आर्यन ने उसका तीनो तरह से ढोल बजा दिया था.....
चाहती तोह ऐसा रानी पुष्पलता भी थी तभी अपने कक्ष में आर्यन को जगाने आयी थी पर दो दासियों, जोह उसकी छोटी बहेनो की सेनापति थी लेकिन पुष्पलता के लिए सिर्फ दासी बराबर, को आर्यन से लिपटे चूमे छाती करते देखि तोह उसकी झांटें सुलह गयी की इनकी इतनी हिम्मत मेरे नर (पति) पर दूर दाल रही हैं. यानी पुष्पलता के हिसाब से आर्यन तीनो बहेनो का पति था बस विधिवत विवाह स्वर्णलता के साथ हुआ है और आज राजकुमारी माया से विवाह से पहले सबके सामने स्वर्णलता उसको वरमाला डालेगी.
पहले दो घंटे बस ...... फट्ट्ट्ट थप्प्प्प पहछहः पहछहः फट्ट्ट्ट थप्प्प्प ..... मररररररर गईइइइइइइ ारयणणणणणण ..... कोईइइइइइइ बचावू ..... हननननन जोरसीईई...... मगर कोई उसकी सुनने वाला न था, बहोत चूड़ी वह मर्दानी, रानी पुष्पलता ......
अपनी hi दी शक्ति उसको भारी पद रही थी लेकिन वह दिल से चाहती थी आर्यन उसको पलंग तोड़ चुदाई करे. स्वर्णमहल के हर एक कुँए तक मेरी चीख्यों की गुंज्ज से पता चलना चाहिए की मुझे भी छोड़कर रुलाने वाला मेरा मालिक िश अटाला लोक का नर अब आ गया है. अगला राउंड प्यार वाला था और तीसरा मिला जुला मजा आर्यन ने पुष्पलता से लिया.
दोनों छोटी भेने कामलता और स्वर्णलता तळतळा लोक गयी हुयी थी विवाह की तयारी करने रानी हेमा के साथ. उन्ह दोनों को भी पता था की दीदी को आर्यन का प्यार काम मिला है पर उनको कहाँ पता था की उनकी दीदी चुड़ते चुड़ते मरने hi वाली थी जब त्रिवेटा ने कक्ष में आकर आर्यन को हंसिका के साथ आकर उसके ऊपर से बलपूर्वक खींच के अपने ऊपर चदया और हंसिका खुद रानी पुष्पलता को स्नानगृह में उठा के ले गयी और उसको होश में लायी.
तब हंसिका ने पुष्पलता को बतया की पिछले 2 पहर ( 7-8 घंटे) से आप आर्यन के साथ थी और आपको बेहोशी में भी अपने से अलग नहीं किया..... अब त्रिवेटा hi आपकी जगह उसको झेल रही है.
रानी पुष्पलता मुस्करा भर दी ," चिंता की बात नहीं है हंसिका ,अब आर्यन भी दानवो की शक्ति रखता है. चल भोजन की व्यवस्था कर उसको खाने की खुसबू रोकेगी. में अब ठीक हूँ पर यह याद रखना हमारे सामने अपना पढ़ मत भूलना, हमसे पीछे आर्यन को तुम दोनों खुश कर सकती हो. अपनी महारानी के चरणों में सर रखकर खुसी खुसी हंसिका चली गयी...... अंदर बिस्टेर पर त्रिवेटा की गांड पहाड़ चुदाई चल रही थी.
अपने को अपनी शक्ति से सही करने में और त्यार होने में रानी पुष्पलता को थोड़ा समय लगा. जब बहार आयी तोह आर्यन अपनी झांघो पे दोनों को नंगी बिठाये स्वादिस्ट भोजन की दावत ुधा रहा था ..... यानी उसने हंसिका को भी त्रिवेटा के साथ फिर से चूड़ा था और अब भोजन कर रहा था. पुष्पलता का इशारा करते hi दोनों नंगी शरमति हियी उठकर भाग गयी.
आर्यन बस भोजन में लगा था..... काम से काम 200 आदमीओ का खाना डकार चूका था तब जाकर सुष्ट हुआ.
अब पुष्पलता उसकी गॉड में बैठकर बोली," चलो न आर्यन कहीं अच्छी जगह घूम के आते हैं, तुम ने स्वर्णगैर के उधड़यां ( बाग़ बगीचे) नहीं देखे होंगे ".
आर्यन को सृष्टि और नींद आ रही थी पर रानी पुष्पलता की प्यारी मीठी बातें सुनकर बोलै ," वहां भी प्यार करेंगे, एक मं में अपना बैग ले लूँ क्या पता कोई दुर्लभ जड़ीबूटी मिल जाये. में त्यार होकर आता हूँ"...... उसका गाल चूम के फ्रेश होकर अपने बैग में जरूरी चिजियन चेक किया और दोनों निकल गए अटाला लोक की सीआर पर.
स्वर्णलता ने गौर किया तो पाया की आर्यन सिर्फ हिंसक या अतिउतेजित अवस्था में hi दानव जैसा होता है जबकि प्रेम से बात करो तोह एक आज्ञा कयारी बच्चे जैसा. वह उसका हर कहना मान रहा था और यह रूप आर्यन का उसको बहोत प्यारा लग रहा था. एक बार को रानी पुष्पलता को लगा क्यों हम सब इश्को दानव या नाग बनाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि यह मानव रूप में hi कितना प्यारा है.
रानी पुष्पलता ने मैं hi मैं फैसला किया की क्या बुराई है िश्मे की आर्यन में जोह ऐसा है, सबसे शक्तिशाली होते हुए भी बस प्रेम hi करता है. अब मुझे और कामलता को आर्यन बस पति के इसी रूप में चाहिए सायद स्वर्ण इशलिये िश को इसी रूप में निस्चल प्रेम करती है.
पतलोक की तीन रानियों, तीन राजकुमारियों के साथ दो सख्ती साली नागिन का दिल आर्यन जीत चूका था. वहीँ अब पतलोक के प्रमुख महाबली भी उसके पक्ष में थे.
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मगर एक नागलोक के नागदंश के साथ तळतळा लोक का हिमासुर नाम का दानव भी आर्यन के खिलाफ परसों नागलोक के स्वयंवर में उसको मारने का सद्यांतर रच चुके थे.
अब सब प्रभा के हाथ में था की वह बिना किसी की सुनए आर्यन को वर चुन लेगी या फिर प्रतियोगिता होकर hi रहेगी क्योंकि आखिरी में आर्यन को प्रभा को हराना होगा तभी उसकी नागिन बनेगी जोह आशम्भव hi था. लेकिन एक उपाए रानी हेमा ने भी निकला था की यह 6 दानव रानियां और राजकुमारी आर्यन से दिल से मिलान करके उसको अपना नर बना लेगी तोह जोह शकितयाँ इनसे मिलेगी वह Prabha-Vishaka जैसी नागिन से मुकाबला करने के काबिल बना देंगी फिर भी जीतना आर्यन को hi होगा .
नागदंश और हिमासुर दोनों गुस्से में प्रभा से लड़ने नहीं आर्यन को मारना चाहते थे जोह सिर्फ एक मनुष्य होकर दानव, असुर, नाग और सर्प जातियों को अपनी शक्ति पर्दशन से तूच दिखाया था अब तक.
दोनों अपने अपने इष्ट देव से तपस्या करके आर्यन को मारने की शक्ति प्रपात कर रहे थे स्वयंवर प्रतियोगिता में. लेकिन आर्यन तोह मस्तमौला की तरह बस अपने hi मस्ती में मस्त था.
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स्वर्णगैर घुमते हुए आर्यन वहां के आस पास के मनोरम प्राचीन स्थान के बाद अब उधड़यां घूम रहा था. उसको नयी जगह और वहां की विशेता को गहराई से जान्ने का सूक तो बचपन से रहा था.
आर्यन ने बहोत सारे नमूने और औसधि भी खुद रानी पुष्पलता से मिलती जानकारी के साथ इकठे किये. आर्यन ने पुछा ," पुष्पु यह जल की पूर्ती पतलोक का कोनसा तत्व पूरा करता है ?"
रानी पुष्पलता हसकर ," जल की जरुरत hi कहाँ होती है जब यहाँ की मिटटी से डायरेक्ट जीवन दायनी ( ऑक्सीजन) और जीवनदासी ( हाइड्रोजन) मिल जाती है फिर यह धरतीलोक के पुष्प या फल नहीं हैं, इनकी दीर्घ काल आयु होती है ..... अभी तुम्हारे हाथ में जोह फल पकड़ा है उसकी आयु तुम्हारी धरती के हिसाब से 12 हज़ार साल से ज्यादा होगी".
आर्यन ने तुरंत हाथ हटा लिया और बोलै," पर यह पाक चूका है पर कितने समय पहले ?"
उसकी हालत देखकर पुष्पलता ने ुष फल को तोड़कर आर्यन के बैग में डालते हुए कहा," यह हम पतलोक के वासी निर्णय लेते हैं कब तोडना है. वार्ना जरुरत पर हम अपने hi लोगों को खा जातें हैं तुम ुष युद्ध मैदान में देख चुके हो. बस अफ़सोस तुमको खा नहीं पाया कोई hi hi hi hi hi hi "....... आर्यन को इतनी डिअर से बस अपने में hi वयसत देखकर वह उसको चिढ़ाती हुयी उसकी हसी उड़ाई ......
आर्यन अपने एक्सप्रेशन चेंज करता मुस्करा कर एक हाथ पुष्पलता की कमर में दाल के उसको अपने करीब खींच के बोलै," उनको मौका था पर मुझे नहीं खा पाए ताकि में उनकी रानियों को खूब खा सकूँ ..... पुछःह पुछठ ..... कामिनी ..... तू मुझे डरा रही है, अब तेरी कहिअर नहीं ...... अब तेरी योनि यहीं उधड़यां में फाड़ता हूँ ".
और वहीँ उसकी न नुकर नखरे के बावजूद उसको मखमली घास पर कुटिया पोज़ में करके अपना खूंटा गाड़ दिया पुष्पलता की योनि में ..... एक घंटे तक चूड के अपना विरए उसकी छूट में भर के अलग हुआ...... आर्यन अब पुष्पलता को चिडता हुआ बोलै ," मजा आया पुष्पु ?..... है है है है ...... तुम बहोत नशीली हो मेरी जान "
पुष्पलता अब भी नखरे दिखा के मोह बना रही थी लेकिन शिकायत उसको भी नहीं थी. उसको सही नर मिला था जोह सही समय उसको मिलान का पूर्ण सुख देता था. दोनों थोड़ी डिअर और घूम के अब स्वर्णमहल से साही अंदाज में त्यार होकर पूरे लश्कर के साथ निकले तळतळा लोक.
दोनों जब साही यान से तळतळा लोक पहुंचे तोह दोनों का भाव स्वागत हुआ ..... सब बड़ों का आशीर्वाद लेकर आर्यन बहोत खुश था यहाँ िश लोक की सुंदरता और सजावट देखकर .
राजा माया और रानी माँ हेमा के प्यार चुकार आर्यन ने कहा," आप दोनों को देखकर मुझे अपने माँ बाप की भी याद नहीं आती ऐसा लगता है आप hi मेरे माँ बाप हो यह तोह आपकी रची माया भी नहीं है क्योंकि चल में पहले hi पकड़ लेता हूँ पर क्यों में बस आपकी िश माया के भरम जाल में बस आपकी hi माया hi खोझता हूँ, आप से महँ कोई नहीं राजा माया पर आप की बेटियां आपकी माया से भी ऊपर हैं. तीनो दिल से बहोत साफ़ हैं और आपकी माया से दूर, आप की माया की वजह से यहाँ आया हूँ ".
राजा माया ने रानी हेमा के कान में कहा," अपने पुत्र से बोलो की मेरा नाम महँ राजा मयासुर है फिर क्यों मुझे हमारी छोटी पुत्री माया जैसा बोल रहा है ?"
रानी हेमा ने आर्यन को आशीर्वाद देते हुए साया की तरफ इशारा किया तोह वह आर्यन को अपने साथ ले गयी और एक आसान पर बिठा के तीनो भेने उशसे खिलखती बातें करने लगी ..... चाहती तोह तीनो गले लगकर उसको चूमना भी.
तब रानी हेमा ने जवाब दिया ," क्योंकि आपकी कोई भी माया ने नहीं बल्कि आपकी पुत्री 'माया' ने उश्के दिल पर असर किया है, अगर वह मयासुर बोलने लगा 7 बार तोह विवाह आप करते ुष से क्या? यह हमारे देने से पहले hi बेटी मांग कर आशीर्वाद ले लिया है. अब देखो साया और चाय को भी मांग लेगा".
इतना सुन्नते hi राजा माया की भी सिटी पित्ती गम हो गयी क्योंकि यह तीनो बेटियां hi उनकी सर्वशख्तियाँ थी. यानी की राजा मयासुर की शक्तियां िंह तीनो दत्तक पुत्री में थी.
रानी हेमा ने उनके कान में कहा," समय आ गया है एक अपनी शक्ति आर्यन को स्वेछा से दे दिज्ये वर्ण तीनो लेकर जाएगा और अपनी लाड़ली पुत्रियों की तरफ देखो कैसे सिर्फ उसके लिए राल ( सलीवा) बहा रही हैं".
7 बार माया बोलकर दोनों के चरण छूकर आशीर्वाद लेकर माया नाम की बेटी को आर्यन पा चूका था पर अब बारी अगली दोनों की थी.
राजा बलि महाराज ने भी राजा माया के मैं में एहि बात केहि," एहि वक़त है आर्यन को अपनी तरफ करने का राजा माया वार्ना सब चीन जायेगा और भूल रहे हो उसकी माँ रानी हेमा हर एक वार विफल कर देगी".
राजा वासुकि ने उनके मैं में कहा ," राजा माया इतना में जरूर कह सकता हूँ आर्यन एक सिद्ध मनुष्य है, आज तक प्रभा और विशाखा खुश हैं. तुम भी अपनी बेटी देकर खुश रहोगे".
दानव गुरूजी ने मस्तिक्ष संपर्क से कहा ," राजा माया, आप ने पुनर जीवन सिर्फ भगवन शिवशंभु से मिला है और यह लड़का खुद भगवन भोलेनाथ की किरपा से पैदा हुआ है. माया के साथ उसकी दोनों भेने भी खुश रहेंगी".
राजा माया को अपनी मौत दिखने लगी जब आर्यन साया और चाय का हाथ पकड़ के आया उनके सिंघासन की तरफ .....
झट से राजा माया बोले ," पुत्र आर्यन की माया से विवाह की तयारी करो में अभी आता हूँ"..... और सच्च में वह अन्तर्द्धन्द्ध ( गायब) हो गए डर से जबकि आर्यन मांगने नहीं कुछ उनको बताने आया था.
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आर्यन के प्रभा के साथ जाने के बाद माया रूठी हुयी चली गयी अपने कक्ष में पर जब िश घटना का सच्च उसको चाय, साया ने बतया तोह शरमाते हुए बोली," क्या मेरी सच्च में शादी हो गयी आर्यन से दीदी या मुझे आप दोनों बेहला रही हो".
चाय हसकर ," हमारी भी हो जाती अगर पिताजी महाराज चाहते...... तेरी वजह से hi 1/3 शक्ति काम हो गयी उनकी ..... अगर हम दोनों का विवाह भी इसी तरह हो जाता तोह तळतळा का नया राजा आर्यन बन जाता ".
माया खुश होती हुयी ," सच्च फिर तोह आर्यन यहीं हम तीनो के पास रहता, आप दोनों ने ऐसी गलती कैसे कर दी जल्दी पिताजी को ढूंढो और तीनो शादी करते हैं ".
"तुम्हारी तीनो की शादी आर्यन से राजा माया की मौत होगी ......
1% = रानी हेमा और हर पुत्री में 33% = तुम में से एक अंदर है उनकी पावर. वतासुर की गुलाम तुम तीनो इशलिये थी कभी आजाद न हो पर आर्यन पतलोक आ गया जिसका कभी किसी ने नहीं सोचा था. "गाजा शक्ति" देकर हम ने उसको पतलोक में अमर बना दिया है यानी उसपर कोई दानव शक्ति काम नहीं करेगी और नाग शक्ति तुम तीनो hi उसको दे सकती हो मेरी प्यारी छोटी बहेनो ".
साया ने हाथ जोड़कर कहा ,"रानी पुष्पलता दीदी हमारे पास नाग्शक्ति शक्ति कहाँ से होगी ..... है है है है है ..... मजाक की भी हद है ..... "
तभी रानी हेमा की आवाज आयी ," राजा वासुकि की छिपी शक्ति तुम तीनो के अंदर हैं पर उन्होंने बंदिश राखी जोह तीनो बहेनो को अर्धांग्नी बना लेगा उसको आधी नाग्शक्ति मिलेगी और तुम तीनो के साथ आर्यन भी त्यार है. आधी नाग्शक्ति विशाखा और प्रभा के पास है. यानी दो लोकों के राजाओं की शक्तियां क्या जीवन भी तक पर है. तुम्हारे पिताश्री पक्का अभी राजा वासुकि को hi चेताने गए हैं, देखो पिता hi अब पुत्रियों के मोहताज हो गए".
रानी पुष्पलता ," एक गुण मैंने आर्यन में नोट किया है वह बहोत खुशाल एक साधारण सा मानव hi रहना चाहता है जबकि क्रोध या अपनों को संकट में देख सामने वाला काल बन जाता है. दोनों राजा उसको हरा तोह अब नहीं पाएंगे पर उसको शक्ति पाने से रोकना जरूर चाहेंगे ".
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राजा माया के राजदरबार से गायब होते hi प्रभा वहां आयी और रानी हेमा से अनुमति लेकर आर्यन को अपने साथ ले गयी तळतळा लोक घूमने और बातें करने .....
आर्यन ने जब साथ चलते हुए अपनी छोटी भें प्रभा को उदास देखा तोह बिफर के उसको अपने सीने में समेत लिया ," क्या हुआ बेबी ? व्हाई यू अरे सो साद बोल मुझे ? " ....... दोनों अभी साथ अकेले hi यहाँ एक सूंदर वन्न में घूमने आये थे.
प्रभा भी अपने बड़े भाई की बाँहों में उसकी बगल से हाथ निकल पीछे से कंधे पे रख के बोली," भाई आप मुझे भूल hi गए..... जब से यहाँ पतलोक आये हो मेरी तो आप को याद भी नहीं आयी बस इधर उधर hi दुसरे लोकों में घुमते रहते हो ".
आर्यन ने अपनी िश सबसे छोटी नादान भें का सर चूम के बोलै," तेरी वजह से यहाँ आया की तुझे तेरे पिछले जनम के परिवार से मिलना का मैं है पर सब ने मुझे hi दुर्र रहने को कह दिया. क्या करता इधर उधर भटक रहा था पर हमेशा तेरी hi चिंता रहती, चल अब वापस चलते हैं वहां सब हमारी hi बैठ जो रहे होंगे".
प्रभा को लगा कहीं भाई बगैर मुझसे नाग विवाह किये वापस न चले जा पर अभी तक एक बहोत स्ट्रांग रिश्ते था जिस की वजह से Bhai-Bhen का आवरण नहीं टूट रहा था दोनों के बिच और दूसरा आर्यन सिर्फ प्रभा का बड़ा भाई नहीं था बल्कि उसकी एक पैरेंट की तरह केयर करने वाला, उसका दोस्त, उसका पहला प्यार और उसका आइडल था फिर कैसे बोल दे में आप से शादी करना चाहती हूँ और आप से बहोत प्यार करती हूँ.
आर्यन अपनी छोटी भें प्रभा से मिलकर सारे पतलोक को भूल गया. उसके लिए प्रभा वही छोटी सी नन्ही सी बेबी hi थी जोह बच्चों को जिन्दा रखने वाली मशीन में बीमार सोई हुयी थी पैदा होने के कुछ घंटो बाद और ठीक होने के बाद अपने भाई से मिली एक महीने बाद. आर्यन उसकी इशलिये इतनी ज्यादा केयर करता था की मेरी भें फिर से वापस ुष मशीन में नहीं जाएगी. (यानी बेबी इनक्यूबेटर)
निर्मला चाचीजी बचपन में आर्यन को दूध पिलाने की कोशिश करती प्रभा के पास रहने पर भी पर वह मन करता की मेरी बेबी डॉल को ज्यादा जरुरत है. प्रभा भी उन्ह खुश किस्मत लोगों में से थी जिसको रति और आर्यन बहोत प्यार करते थे.
देखा जाए तोह आर्यन सबसे प्यार करता था पर रति कुछ hi लोगों पे जान लुटाती थी आर्यन के अल्वा ..... पहला no. सारू का था क्योंकि वह उसकी पहली संतान थी दूसरी थी गीता जोह उसको भगवन ने आशीर्वाद में दी और तीसरी थी नेहा और अणि जैसा जुड़वाँ नाटियां दोनों सगी बेटियों की बेटियां जोह थी. 4तह थी उसकी अपनी पोती डॉली जिसको वह बहोत प्यार करती थी अपनी बड़ी बहु कविता के कारन पर जब निर्मला ने प्रभा को जनम दिया तोह रति को ुष निर्जीव सी नवजात बच्ची से जाने कैसा लगाव हो गया की पूजा अर्चना में डूब गयी और व्रत पे व्रत रखकर भोलेनाथ से उनकी ुष बच्ची पर कृपया मांगी की में मन्नत पूरी करुँगी.
चम्तकार hi हो गया एक महीने बाद जिस बच्ची को सेज माँ बाप के साथ सब डॉक्टर्स भी बोल दिए की यह नहीं बचेगी पूरा सरीर पीला पड़ा था प्रभा का मशीन में....... बस एक आर्यन जोह लगभग तीन साल से काम था और दूसरी उसकी माँ रति को विश्वाश था की प्रभा नयी किरण की तरह ठीक होकर हमारे साथ hi खेलेगी.
आज की डेट में वही प्रभा खेलना तोह छोड़ो पोल वॉल्टिंग करती है और असली सच्च यह था वह अब अपनी पिछले जनम की बड़ी भें नागिन विशाखा को अपने अंदर लिए नागलोक की सबसे शक्तिशाली नागिन बन गयी है.
आर्यन अब ुष अजीब से उधड़यां में आ गया, अपनी भें प्रभा को एक छोटी बच्ची की तरह अपनी पीठ पे बिठाये . प्रभा को वहां घुमा रहा था जोह उसको िंह विचितिर फूलों और पेड़ों की जानकारी दे रही थी जब आर्यन पूछता.....
अपने साइड में लटके बैग में वह अपनी छोटी सी कैंची और नाइफ से कुछ फूल और पतियों के साथ फल के हिस्से काट के सैंपल सा लेकर रख लेता, यह सब प्रभा को बहोत बोरिंग लग रहा था.
वह कुछ सोच के बोली ," भाई अगर आपको विशाखा दीदी से प्यार हो गया तोह क्या मुझे भूल जाओगे आखिर उनसे आपका विवाह होगा ?"
आर्यन अभी एक छोटे सी नरगी पट्टी को हाथों से चेक कर रहा था फिर सूंघ कर ुष पेड़ के छोटे से फल को जोह पक्क चूका था, तोड़ते हुए अपने बैग में डालते हुए बोलै ,"देखो बेबी विशाखा न बहोत कुरूर घमंडी थी और अब तुमको कण्ट्रोल करना सीखना चाहिए की वह बहार न आये तुम पर हावी न हो ...... याद है उसने क्या किया था वहां अलवर के दिव्या ख़ज़ाने वाले तहखाने में सबको बंदी बना लिया था में सिर्फ तुम्हारे लिए चुप था की तुम को नुक्सान न पहुंचा दूँ ".
प्रभा को अब रास्ता मिल गया ," भाई वह विशाखा दीदी न बहोत जिद्दी है मुझे भड़कती रहती है पर मैंने साफ़ बोल दिया की में अपने प्यारे भाई की गुड गर्ल हूँ गलत काम नहीं करुँगी..... ठीक किया न भाई? "
आर्यन अब आगे बढ़कर एक पेड़ पे रेंग रहे कीड़े को हाथ में पकड़ के अपनी हथेली में रख के उसको इधर उधर हिला के खुश हो रहा था ......
प्रभा को आर्यन का अपनी बातों पे ध्यान न देना अच्छा नहीं लगा उसने फूक मार के उसको उदा दिया ..... देखते hi देखते वह एक बड़े दानव में बदल गया तब आर्यन ने बिना उसको मौका दिए ुष दानव के मोह पे मुक्का मार के बेहोश कर दिया और प्रभा ने ुष्पर थूक दिया ...... अगले hi पल उसका पूरा सरीर गाल गया प्रभा के थूक से.
आर्यन ने अपनी पीठ पे लड़ी छोटी भें की तरफ देखा गर्दन घुमा के देखा तोह उसने आर्यन का गाल चूम लिया ," ुंहःहःह भाई वह डिसट्रब कर रहा था हम पर निघा रखते हुए".
आर्यन उसकी मासूमियत भरी नज़र देखकर बोलै," ऐसा किसी को मारने का अधिकार हम को नहीं मिल जाता बेबी पर हाँ वह जासूसी तो पक्का कर रहा था. तुम अभी इतनी बड़ी नहीं हो और अपनी पावर को कण्ट्रोल करना सीखो, कल हम दोनों के साथ अपने भी होंगे फिर गुस्सा और नफरत कुछ हासिल नहीं होने देगी. अच्छा बोल तू कुछ कह रही थी ".
आर्यन की एहि बात रति को पसंद नहीं थी वह अपनी बहेनो और मम्मियों की गलत हरकत को भी सही तारक देकर डिफेंड करता था जबकि उन्ह में से कुछ ज्यादा hi नटखट thi......Jaggu मम्मी की भी गलत हरकत उसने ऐसे ताल दी जैसे कुछ नहीं हुआ क्योंकि उसके लिए उसकी मुम्मियाँ और भेने कभी गलत नहीं कर सकती और किया तोह में सही कर दूंगा. िंह सबसे ज्यादा तोह अपनी चंदा देवी, गीता, के लिए करता था. उसको पूरी दुनिया भी गलत करार कर दे तब भी आर्यन गीता को डिफेंड करेगा की वह गलत कर नहीं सकती .
रति सबको वश में कर सकती थी पर गीता को नहीं और उसकी हटधर्मिता को आर्यन का पूरा सेह मिलता है यह रति मानती थी. इसी बात का गीता भी फायदा उठती थी की मेरा आशिके लौंडा (आर्यन) मेरे साथ hi रहेगा खिलाफ नहीं.
प्रभा ने फिर से अपने भाई की गर्दन पे अपनी बाँहों का कसाव भड़ता हुए आर्यन का लेफ्ट गाल चूम लिया ," hi hi hi hi hi ..... भाई ी लव यू ...... पुछःह पुछठ ".
आर्यन एक बार को अणि को दांत दे पर प्रभा को कभी खुद क्या अपनी निर्मला मम्मी को भी नहीं डाटने देता था इशलिये ब्रिगेडियर जसवंत सिंह( प्रभा के नानाजी) भी आर्यन को बहोत पसंद करते थे की यह भी हम फौजी की तरह सब परिवार को एक hi प्रेम की नज़र से देखता है जैसे हम पूरे देश की जनता को देखते हैं पर आर्यन को सीखना होगा अपने hi कुछ देशवासी हमारे देश को दीमक लगा देते हैं जोह आर्यन अपने परिवार वालों के लिए कभी नहीं समझा.
नवाब सिंह हमेशा आर्यन के बारे में सही बोलता था की उसके गुरूजी कहते थे की आर्यन को घर की औरशन का प्यार बाँध के रखता है और यह सच्च भी था सायद वह सभी औरशन और लड़कियां, आर्यन के अंदर से उन्ह दूसरी 5 अलग अलग आत्मों को कभी हावी hi नहीं दी थी ...... पर एक को प्रभा के अंदर वास करती नागिन विशाखा जरूर बहार लाना चाहती थी जोह दिव्या तलवार यानी 'सहायक' का मालिक है पर क्या वह बहार आएगा? और विशाखा ऐसा क्या करेगी ?
प्रभा को िश उधड़यां में घूमते हुए जब काफी दूर आर्यन ुष बहते झरने के पास पोंछा तो बोलै," यह सब राजा माया ने यहाँ क्यों बांया है जबकि यहाँ के वाशी तोह पानी और नहाने में विश्वास hi नहीं रखते यानी सब उनकी hi रची माया है ".
इतना सूंदर झरना देखकर प्रभा को एक आईडिया तोह आ गया की भाई को दिखाना पड़ेगा में भी डॉली और नेहा दीदी की तरह पूरी जवान हूँ ..... वह आर्यन की पीठ से उतर के झरने की तरफ बढ़ती हुयी बोली," भाई में तोह नहाने वाली हूँ आप भी आ जाओ कहीं में दुब न जॉन".
उसने बोलते हुए अभी धरतीलोक की पहनी अपनी जीन्स और t-shirt उतर दी सिर्फ लाइट पिंक पेंटी और ब्रा में दौड़ के झरने के बहते ठन्डे पानी में कूद गयी...... आर्यन अपनी भें की सुंदरता तो देखना छोड़ो बस इसी चिंता में पूरे कपडे पहने उसके पीछे कूद गया की इश्को न्युमोनिअ न हो जाये पानी में .....
आर्यन उसको पकड़ा तोह और उशसे लिपट के अंदर ले जाते हुए प्रभा बोली," भाई बहोत मजा आ रहा है पर आप कपडे क्यों पहनो हो ".
आर्यन िश समय राजशाही पोषक में था यानी ऊपर कुर्ते जैसा निच्चे लुंगी या धोती जैसा विस्तार कह लो ......
ऊपर पहने अंगवस्त्र के साथ प्रभा ने निचे लुंगी जैसा विस्तार भी खींच दिया और आर्यन पूरा नंगा हो गया पर जैसे उसको परवा hi नहीं थी उसको अपने से चिपटा के बोलै ," तू पागल हो गयी है ठण्ड लग गयी न तो मम्मी (निर्मला) मुझपे गुस्सा होंगी ".
प्रभा को आर्यन की नौटंकी लग रही थी पर अब जैसे जिद्द में आर्यन से लिपटे हुए अपनी ब्रा पेंटी भी उतर के जल में भ दिए ...... पर आर्यन को उन्ह सबकी परवाह भी कहाँ थी वह प्रभा को बहार लाकर अपने साथ नुदे लिपटते हुए पूछ रहा था ," अरे यू ऑलराइट बेबी? क्या जरुरत थी पानी में जाने की".
आर्यन का लुंड देखकर hi प्रभा भी हैरानी के साथ खुश होती सोचने लगी ," वाओ, क्या दमदार हथियार है भाई का ?"
प्रभा ने पानी से बहार निकलते हुए एक दो बार लुंड की फीलिंग अपने लेग्स , तइस से महसूस की तब विशाखा ने प्रभा को बोलै," प्रभा तू अभी भी आर्यन की छोटी बच्ची जैसी hi है मुझे मौका दे एंड 10 मं में उसका लिंग तेरे हाथ में होगा".
प्रभा अपने मैं में ," नहीं दीदी हम दोनों ने तय किया था की जब में भाई से मिलूंगी आप बहार नहीं आयोगी ".
विशाखा (मैं में) ," हाँ बोलै था पर मुझे यह नहीं पता था तेरा नग्न बदन देखकर भी आर्यन ऐसे hi ठंडा रहेगा...... देख एक बात तोह अच्छी है इश्क लिंग ठीक ठाक है पर अब समय आ गया है की या तोह तू साफ़ बात कर या फिर मुझे करने दे. हम विवाह करने वाले हैं न की किसी अरे गैर को जिस्म की नुमिश कर रहे हैं. एहि अपना आर्यन, अटाला लोक की 3 रानियों को भोग के आ रहा है. अब रानी हेमा की दत्तक पुत्री माया से भी विवाह करने वाला है चाहे एक से करे पर में बोल रही हूँ मुझे मौका दे ".
अब प्रभा के लिए क्लियर था पर इतने सूंदर सरीर को घास पे लिटा आर्यन अपने साथ लाये बैग में से निकाले साफ़ टॉवल जैसे विस्तार से उसके बदन को पहुंच के उसको लपेट दिया.
आर्यन ने देखा तोह प्रभा सुभाकने लगी ....... ऐसा लगा जैसे उसको खुद कोई खून के आंसूं रुला रहा हो ......
आर्यन बिलकुल नंगा उसके बदन को अपनी गॉड में बिठाकर बोलै," हे हे हे ..... क्या हुआ बेबी गर्ल? तेरी आँखों में आंसूं ?"
प्रभा झूट में गुस्से से बोली ," क्योंकि आप मुझे प्यार नहीं करते? आप सिर्फ मीणा दी, नेहा दी और डॉली दी को प्यार करोगे ...... बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ..... क्या में इतनी बदसूरत हूँ की आप ने एक सेक् भी मुझे प्यार भर नज़रों से नहीं देखा बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......."
आर्यन के लिए कपरिसों वर्ड hi नहीं था पर अपनी छोटी सी चुहिया भें की दर्द भेदी ललकार सुनी थी तो रूट हुए बोलै," 1 दिन की थी जब तुझे मशीन में देखा, मेरी मम्मी ( निर्मला) बहोत दुखी थी, सारे परिवार वाले दुखी थे की तू नहीं बचेगी पर ुष दिन भी सबको बोलै था की मेरी बेबी मेरे साथ जरूर खेलेगी फिर अपनी निर्मला मम्मी का दूध पिया जोह तुझे पीना चाहिए था. आज तक तोह तेरी बात ताली नहीं पर अगर विशाखा की जिद्द है तोह पहली बार ना बोल रहा हूँ".
प्रभा झट से आर्यन से लिपट के गोदी में चढ़ उसका पूरा चेहरा चूमते हुए बोले जा रही थी ," भाई भाई भाई भाई ..... में सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ बस मुझे अपना लो नहीं तोह में जी नहीं ...... "
आर्यन ने उसकी बात पूरी hi नहीं होने दी जबकि उसको बोलै गया था प्रभा को मत चूमना खासकर लबों पर पतलोक में ..... मगर दोनों भाई बहेनो ने चूमते हुए और एक दुसरे से लिपट के झरने में छलांग लगा दी..... इशलिये मीणा बोलती थी प्रभा को आने दो वह कुछ भी आर्यन से करवा लेगी.
आर्यन बस कड़वा ज़हरीला रास चूस के भी खुश था पर उससे ज्यादा तोह प्रभा पानी के अंदर आर्यन से लिपटी ुषको विष पीला रही थी अनजाने में...... प्रभा की पहली लव किश उसके बड़े भाई के गोर सरीर को नीला करती जा रही थी और आर्यन भी नहीं रोक रहा था उसको..... क्योंकि उसके सरीर में बहोत खतरनाक ज़हर उतरता जा रहा था. वह अपनी प्रभा की खुसी के लिए जान देने पर उतारू था.
तभी वहां किसी ने प्रकट होकर प्रभा की पीठ पर लाठ मारी और वह इतने प्यारे पलों में विहीन देखकर गुस्से में आ गयी..... क्यों बद्तमीज है जोह मेरे प्यार के बिच आ रहा है.....
उसके सामने तीनो अटाला लोक की रानियां को साथ तीनो दानव कन्या और पूरी सेना कड़ी थी जब आर्यन को किश करना छोड़कर पलटी..... गुस्से से वह सबकी तरह देखकर जब अपना पानी में प्रतिब देखि तोह खुद डर गयी," एक 120 फट की 5 फानन वाली नागिन का रूप धारण किये वह पिछले कुछ समय से आर्यन को बिच वाले पहन से चूम रही थी ........
उसका जेहेर पानी का रंग भी काला कर दिया था और आर्यन की बॉडी पानी ने उसकी पूँछ में लिपटी थी...... अचानक आर्यन के नीले पड़े सरीर देखकर वह डर से फुंकरति गायब हो गयी......
उसके गायब होते hi आर्यन के सरीर के घेरे काट वह सारा पानी का कालापन अपने अंदर समेत कर पूरा साफ़ कर दिए और आर्यन सीधा खड़ा होकर हाथ जोड़कर बोलै," आप सब जाओ यहाँ से मेरी छोटी भें को आपने रुला दिया?"
रानी स्वर्णलता के अल्वा अब कोई वहां नहीं था और आर्यन अपने विस्तार पहनकर अपना बैग उठा के पुछा," प्रभा अब कहाँ होगी तुम्हे पता है ?"
स्वर्ण भी आँखों में अलख लिए ," वहां मत जाइये स्वामी, आप नियम तोड़ रहे हैं".
आर्यन ने गुस्से से स्वर्ण को देखा और जमीन पर बैठकर मुक्का मारते बोलै," तुम जा सकती हो उसके पास?"
स्वर्ण डर गयी पर उसकी हिचक देखकर आर्यन ने उठकर उसको अपने पास बुलाकर गले लगाकर माथा चूम के बोलै," मेरा सन्देश लेकर जाओ स्वर्ण की में उसका भाई उससे कल विवाह करने आऊंगा उसके स्वयंवर में बस उसकी बहती नाक नहीं चाहिए ".
तभी वहां रानी पुष्पलता आयी और बोली," स्वर्ण वहां नहीं जा पायेगी आर्यन वर्ण इश्को भी खो डोज. वहां सिर्फ तुम्हारी गाजा शक्ति जा सकती है, अपना सन्देश एक अदृश्य नाग बना के भेजो. उन्ह अँधेरी सुरंग और गुफा में वह hi जा पायेगा ".
आर्यन अब हैरान होता हुआ ," फिर में और दीप्ति इतनी आसानी से कैसे वहां तक पहुंच गए थे पिछली बार ?"
रानी पुष्पलता ," क्योंकि तुम को भेजा गया था सब पररहि और अड़चन हटा के फिर भी जिन्दा वापस आये ?"
आर्यन अब गुस्से से अपने को बेबस पाटा बोलै ," में और मेरी प्यारी भें प्रभा बस पतलोक सिर्फ इशलिये आये थे की उसको अपने परिवार से मिलना था पर तुम सब हम को hi इस्तेमाल करके अपना मतलब साध रहे हो. अगर मेरी भें प्रभा को कुछ हुआ तोह भूल जाऊंगा की यहाँ कोई और भी रहता है. पुष्पु मेरी छोटी भें प्रभा को वापिस करवा दो, हम दोनों फिर कभी यहाँ नहीं आएंगे. यह भी कोई राजा की माया है ".
रानी पुष्पलता आगे बढ़कर आर्यन का हाथ पकड़ कर बोली," आर्यन यह कोई माया नहीं है बस खुद को सम्भालो तुम्हारा सन्देश में खुद लेकर जाउंगी चाहे नागलोक के नाग मुझे देश देश के मार दें तुम्हारा सन्देश पहुंचा दूंगी ".
आर्यन को अब अपनी hi नहीं उन्ह सबकी बेबसी नज़र आ रही थी की प्रभा अभी दुर्र है पर सुरक्षित नहीं..... आर्यन ने पलकें झपका के अपना सन्देश देने का इशारा कर दिया पर अंदर अंदर hi अब वह घुट रहा था.
वह जानता था नागलोक की राजकुमारी प्रभा से ुष को विवाह करना पड़ेगा पर धरतीलोक पर ुष अपनी छोटी नाजुक भें प्रभा को कितने प्यार से रखता था. रानी पुष्पलता ने सन्देश भेज दिया था प्रभा के पास जिसको बिना पढ़े hi उष्ण नष्ट कर दिया.
अब दोनों नागिन बहेनो का गुस्सा बढ़ रहा था एक दुसरे के प्रति भी और बाकी सबके भी, क्यों आर्यन को वह पल भर भी प्यार नहीं कर पायी...... ? क्या जरुरत थी दीदी को वहां असली रूप धारण करने की. वहीँ विशाखा अपने वार में hi चूक गयी, आर्यन जहर से नीला पद गया पर वह दिव्या तलवार का मालिक क्यों बहार नहीं आया उसको बचने ?
आर्यन वहां से बिना किसी से बात किये निकल गया राजा माया के महल की तरफ अपने गीले विस्तार पहनकर और अपना बैग पीठ पे टाँगे..... रस्ते में साया, चाय के साथ तीनो अटाला लोक की रानियों ने कोशिश की उसको मन पाए पर सब बेकार. हंसिका और त्रिवेटा ने भी कोशिश की पर आर्यन बस फीकी से मुस्कान देता पैदल hi बढ़ा जा रहा था.
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रानी माँ हेमा अभी भी दुविधा में थी की आर्यन ने इशलिये जवाब नहीं दिया क्योंकि रति को ुष ने माँ चुना होगा. उधर अपने को विवाह के लिए सजवाती राजकुमारी माया के पास सन्देश आया की आर्यन, राजमहल लौट आया है पर बहोत दुखी है. वह किसी से बात नहीं कर रहा है बस गुमसुम है.
सब कुछ छोड़कर माया दौड़ती जब आर्यन को झुके कंधो के साथ सर झुकाये वापस अंदर आता देखि तोह तेजी से दौड़कर ुष से लिपट के बोली ," क्या हुआ आपको आर्यन, ऐसी सकल क्यों बना राखी है और आपके वाटर गीले कैसे हुए.... किसने आपके साथ गलत किया , बस नाम बता दिज्ये में उसको जान से मार दूंगी. मेरे आर्यन को दुखी करने की किस्मे हिम्मत आ गयी उसका वंश उजाड़ दूंगी में ....... "
देखते hi देखते राजकुमारी माया एक खुनी दानवे के रूप में बदलने लगी तोह आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के कहा," कुछ नहीं हुआ मुझे माया डार्लिंग बस थक गया हूँ चलते चलते ..... फिर तुम्हारे होते हुए मुझे कौन परेशां कर सकता है ".
माया अपने पुराने रूप में आकर आर्यन के गले लगकर उसको चूमने लगी ," पुछःह पहुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हैं न आर्यन ...... ी लव यू तू माय बेबी ...... एक बार उसका नाम बोल दो में उसको जिन्दा नहीं छोडूंगी ".
तभी रानी पुष्पलता ने पीछे से आकर बोलै," आर्यन मुझसे नाराज हो गया इशलिये ऐसा हो गया है ".
आर्यन को छोड़कर माया सीध दौड़ के रानी पुष्पलता के प्यार पकड़ के बोली," चमा कर दिज्ये रानी शैब्या मेरे आर्यन की गलती को हम दोनों यहाँ से दुर्र पृथ्वीलोक चले जायेंगे..... आप को कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ..... "
राजकुमारी माया भी शक्तिशाली थी पर पृथ्वीलोक पर रहकर वह प्रेम करना और बड़ो की इज्जत करना सीख गयी थी.... वह आर्यन के लिए सबसे माफ़ी मांगने के लिए त्यार थी जोह दानव गुण नहीं था.
आर्यन ने आगे बढ़कर राजकुमारी माया को उठाया और गले लगते हुए बोलै," अरे पगली में किसी से नाराज नहीं हूँ और यह सब तेरा मजाक उदा रही हैं. अगर मेरी प्यारी माया को किसी ने परेशां किया तोह हम दोनों किसी से बात नहीं करेंगे ..... है न माया ी लव यू बेबी ".
माया भी रोटी हुयी खुश होकर ," ी लव यू तू आर्यन मोरे थान एनीथिंग इन थिस वर्ल्ड ..... पुछःह पुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हो न ? "
माया ने दीप्ति से बहोत कुछ सीखा था और वह जानती थी धरतीलोक में आर्यन उनका नहीं होगा पर पतलोक में आर्यन को वैसा hi प्यार देगी. देखा जाए तोह माया hi आर्यन को समझ पायी थी एक इंसान के रूप में बाकी सब उसकी ताकत से प्रभावित थे. एक और थी उसकी जैसी स्वर्णलता जोह आर्यन को मानव रूप में hi प्यार करती थी.
रानी पुष्पलता को लग गया की यह माया, आर्यन का धरतीलोक वाले मानव रूप की पकड़ रखती है और खुश होती हुयी बोली," माया अब आर्यन को राजमहल में ले जाओ और घुम्यो. हम तब तक तुम्हारी माताजी से मिलते हैं ".
आर्यन भी प्रभा की चिंता करता समझ गया की यहाँ से कुछ नहीं होगा फिर ुष डायन जैसी कमीनी विशाखा जोह प्रभा के साथ है, मुझे कुछ ऐसा करना होगा विशाखा मेरी बेबी प्रभा को इन्फ्लुएंस न कर पाए. और माया कितनी अच्छी है सूंदर होने के साथ सॉफ्ट हार्ट भी," में तेरी आँखों में मेरी वजह से कभी आंसूं नहीं आने दूंगा माया ..... प्रॉमिस ".
माया जोह उसका हाथ पकडे हुयी थी बोली," गॉड प्रॉमिस आर्यन ".
आर्यन भी हसकर उसको गले लगाकर उसकी नादानी देखकर गाल चूम लिया ," चलो जाओ रेडी हो जाओ ".
माया ने उसका हाथ पकड़ा ," मुझे कुछ नहीं सुन्ना आप मेरे साथ hi रहोगे चाहिए यह विवाह हो या न हो".
आर्यन को खींचती अपने साथ लिए दासियों को निर्देश देती ले गयी अपने साथ अपने कक्ष में.
इधर अब बाकी दोनों दानव कन्यों के साथ तीनो रानियां और राजकुमारी त्रिवेटा और हंसिका वहीँ थी तब hi रानी हेमा और प्रभा की सगी माँ प्रकट हुयी ......
रानी पुष्पलता गुस्सा से ," आप कैसी माँ हो जोह अपने बेटे को बचने नहीं आयी फिर वह जबरदस्ती नागलोक जाने की जिद्द कर रहा था ".
रानी हेमा की बजाये जवाब स्वर्ण ने दिया ," माफ़ी चाहती हुयी रानी माँ अपनी बड़ी दीदी की तरफ से पर आर्यन आज कुछ सबसे अलग सुभाव में नजर आया, हम सब डर गए थे पर अभी माया ने उसको मन लिया जैसे छोटे बच्चे को मानते हैं ?"
रानी हेमा भी हसकर," वह अभी भी पतलोक में बस सीख hi रहा है और ुष समय अगर विशाखा उसको निगल जाती तोह प्रभा को मुक्ति मिल जाती. उसके सरीर पर दर्द नहीं दे पायेगा कोई पर हाँ आर्यन की आत्मा पर चोट मत करना. प्रभा को अभी भी वह छोटी नन्ही बच्ची समझता है और माया में उसको राजकुमारी दीप्ति नजर आयी जिससे वह मिलकर खुश होता हुआ उसकी बात सुनने लगा".
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राजकुमारी माया अपने साथ आर्यन को अपने तिलसमी कक्ष में ले गयी जहाँ बिलकुल धरतीलोक जैसा माहौल था .....
आर्यन हस्ते हुए कहा," तेरे पर दीप्ति का इफ़ेक्ट ज्यादा नहीं है..... है है है .... बस अपनी छोटी भें प्रभा की चिंता ज्यादा रहती है मुझे. अब इतना तोह मुझे भी समझने चाहिए की यह hi उसकी असली दुनिया है. वैसे माया तू आज पहले से बहोत खूबसूरत लग रही है ".
आर्यन की तरफ पलट के मटकती हुयी चल में उसकी गॉड में बैठकर बोली," एक बार और बोलो आप न की में सुन्दर हूँ".
आर्यन ने उसकी चीन के निच्चे हाथ रखकर चेहरा ऊपर करके बोलै," माया तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो जिसको में दिलो जान से चाहने लगा हूँ".
माया ने आर्यन का हाथ हटा के उसके गले में लिपट के बोली," यह तोह आप हर लड़की को बोलते होंगे की वह आपको खूबसूरत लगी. मुझे कैसे अलग लगेगा की में सच्च में खूबसूरत हूँ ".
आर्यन ने उसका चेहरा उठा के अपने सामने करके पहले माथा चूमा तोह माया की पलकें बांध हो गयी फिर उन्ह दोनों झुकी पलकों वाली आँखों को चूमा फिर बारी बारी दोनों गाल कई बार फिर नाक ..... लास्ट में दोनों लबों को बारी बारी चूम के लास्ट में थोड़ी चूम के बोलै ," यू अरे थे मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन थिस यूनिवर्स ".
माया अपने लबों को खोली तोह उसको चूसने लगा ..... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ .... माया तुम बहोत मीठी हो अपने दिल की तरह..... "
आर्यन ने उसकी मदहोशी वाली आँखों को बारी से चूम के कहा," जब तुम उन्ह सब लड़कियों जैसी hi खूबसूरत हो तोह ज्यादा या काम बोल कर उनकी बेइज्जती किसी के सामने मुझसे तोह न होगी. माया हर औरत सूंदर होती बस सही नजर चाहिए वार्ना हवस या मजबूरी से सिर्फ ख़ाक hi मिली है".
माया ने आर्यन पर चूमि की झड़ी लगा दी ," पुछःह पहुछठ .... तुम बोलते बहोत हो ..... आज मुझे पूरा प्यार चाहिए विवाह के बाद ...... पुछःह पुछठ .... ी लव यू आर्यन ...... "
और फिर आर्यन से ढेर साड़ी बातें और जलपान करवा के उसको अपने कक्ष से बहार धकेलती हुयी वापस अपने सिंगार दर्पण के आगे गद्दी पर बैठकर बोली," मुझे आज ऐसा त्यार करो ताकि यह रात मुझको हमेशा याद रहे "..... और 4 दासियाँ राजकुमारी माया की तारीफ करती उसको फिर से स्पेशल त्यार करने में लग गयी ......
आर्यन अब एक कक्ष में आराम करते सोच लिया था की प्रभा को वह स्पेशल फील करवाएगा. अगर मेरी छोटी सी गुड़िया मुझे इतना प्यार करती है तोह उसका पूरा हक़ है मुझपर..... मगर िश विशाखा का कुछ करना हो बगैर प्रभा को हर्ट किये?
उधर राजा माया और राजा वासुकि भी किसी तरह आर्यन को उनकी पूर्ण शक्ति पाने से रोकने के लिए आखिर कार अपने लिए पियादे चुनन hi लिए..... दोनों अपने अपने लोक के हिमासुर और नागदंश को वरदान देने पर सहमत हो गए......
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रानी हेमा के कक्ष में......
रानी हेमा ने जवाब दिया ," आर्यन से बीटा सिर्फ विशाखा hi पा सकती है क्योंकि मेरी दी हुयी शक्ति से बाकी सब पुत्रियां hi जनम लेंगी पर चिंता क्यों करती हो वह पूरे पतलोक का राजा बनेगा और उसकी भेने उसको मदद hi करेंगी क्योंकि यह आर्यन के खून में है ".
रानी पुष्पलता ," लेकिन आपकी बेटी माया या मेरी छोटी भें स्वर्ण जीवट नहीं बचेंगी और न hi प्रभा ?"
रानी हेमा गंभीर होकर ," प्रभा को विशाखा ज़िंदा रखेगी पर यह कड़वा सच्च hi िंह दोनों को तुम्हारे साथ आर्यन का संसर्ग जिन्दा भी रख सकेगा. तुम दोनों बड़ी बहेनो और मेरी दो बड़ी बेटियां इशलिये hi तोह बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगी ताकि उन्ह दोनों छोटी बहेनो के बच्चे तुम पालपोष के बड़े कर सको..... पुष्पलता याद रखना िश्मे पतलोक की भलाई है वार्ना कितने वर्षों बाद इतने प्रतापी बालक जनम लेंगे".
एक राज रानी हेमा ने भी छुपा लिया था की आर्यन के अंदर एक पवित्र संजीवनी शक्ति है जिससे उसकी औरत को ताकत मिलती है और उसके बच्चे की शक्तिशाली माँ भी बहोत खाश हो जाती है. यानी आर्यन hi बचा सकता है उन्ह तीनो को पर कैसे यह वह भी जानता होगा .
माया को चाय और साया आज अपने हाथों से त्यार कर रही थी...... स्वर्णलता और कामलता भी आयी हुयी थी और तीनो दानव कन्याँ को सलाह भी दे रही थी.
उन्होंने ने निरयने लिया ,चाय और साया पहले आर्यन के साथ मिलान करेंगी और उसके बाद hi माया की सुहागरात होगी.....
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