Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 31 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 38 (पतलोक)

Part-4(D)

आर्यन की यादें सपनो में ......

"गाजा शक्ति" अतियंत प्राचीन शक्तियों में से एक थी जोह राजा बलासुर के दानव पूर्वज को भगवन श्री गणेशजी से मिली थी सिद्धि प्रपात करके. राजा बलासुर के पुरखो से यह अटाला लोक के हर राजा को पीढ़ी दर पीढ़ी मिली, लेकिन जब आर्यन को मिली तीनो अटाला लोक की रानियों से मिलान चाकर बनाकर तोह यह पहली दानवी महाशक्ति थी जिसको गहरे करते हुए 6 अलग अलग आत्मा के 7-8 रूप आर्यन से बहार आये पर एक आखिरी रूप किसी को नहीं दिखा और बहोत बड़ी ऊर्जा से सब चकचोँद हो गए थे पर िश घटना से धरतीलोक के रति के गाओं के पास पुराने जंगल में बड़े गुरूजी की आंखें खुल गयी, "आशम्भव यानी वह जीवट होने की लालसा भी अब रखता है तोह आर्यन का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा बस वह समय से पहले प्रकट हुआ तोह आर्यन का सरीर hi नष्ट न हो जाए उसकी पूरी ऊर्जा के कारन".

वहीँ ुशी पल महाराजा शेषनाग ने प्रकट होकर आर्यन को शांत किया और सबको दांत कर और चेतावनी देते अन्तर्दंध हो गए.

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आज समूचे पतलोक के 7 लोकों के प्रमुख महाबली भी हिल गए की उन्होंने सही निर्णेय लिया था महार्यं को दिव्या तलवार को आसानी से ले जाने के लिए. परन्तु यह एक सामान्य मानव का जीवन कैसे जी रहा आर्यन के रूप में जबकि इश्के अंदर 6 शक्तिसालिओं की शक्तियां इश्को शांत कैसे रहने देती होंगी ? एक मानव के लिए तोह यह नामुमकिन है.

तब दानव गुरूजी बोले ," तुम सब जोह सोच रहे हो उसका एक hi उत्तर है वह है प्रेम जोह इश्को हर कदम पर मिला है. इश्कि शकितयों को बंधा गया जनम के समय फिर एक साथ इतनी माताओ का प्रेम स्नेह मिला. इश्के साथ 3 जुड़वाँ बहेनो के साथ अलवर की राजकुमारी दीप्ति का जनम हुआ इसको मजबूत बंधन में बाँधा रखा जा सके. इतनी बहेनो के प्रेम की दूरी से इश्कि शकितयों को दबाये रखा. फिर जवान होते हुए अनेक प्रेमिका और पत्नियों के निस्चल प्रेम की वर्षा. यानी आर्यन को समय hi कहाँ मिला जोह बाकी शकितयाँ अपनी बुरी या अच्छी ताकत से ईशपर असर दाल के कुछ करवाती. हाँ कभी कभी प्रयाश हुआ है पर जिसकी इतने चाहने वालियां हो उसको हमेशा संभाल लिया गया. यह बालक पिछले जनम का महार्यं का गुण िश जनम में भी लाया है. इश्के खून की रिश्ते वाळिओं ने समय के अनुसार इससे अपने रिश्ते बदल लिए. यानी इतनी प्रेमिका और पत्नियों का प्रेम hi इश्कि ताकत बन रहा है. इश्को नुक्सान पहुंचा आशम्भव होगा पर उनको आसान है. लेकिन वह सब भी कमजोर नहीं है सब एक बड़ा घेरा बना रही हैं जब आर्यन 21 साल का होगा तोह खुद को कुर्बान तक कर देंगी पर इश्को आंच न आये ऐसी उनकी युक्ति लगती है. रानी हेमा आप अगर चाहयेगी तोह धरतीलोक पर जाकर िश प्रक्रिया में सहयोग देकर पूर्ण करवा सकती हैं ".

रानी हेमा थोड़ा नाराजगी से ," गुरूजी यह कभी नहीं होगा में कभी पृथ्वीलोक पर कदम नहीं रखूंगी, जिस लोक में मेरी कोख जनम देने से पहले hi उजाड़ दी वहां में कभी नहीं जाउंगी ".

दानव गुरूजी ," आर्यन को फिर भी तुम ने अपना पुत्र मन उसके मानव होने के बावजूद भी, उसके लिए भी नहीं करोगी ?"

रानी हेमा की आँखों से अंगारे बर्ष रहे थे क्रोध से ," कदापि नहीं, आर्यन मेरा पुत्र पतलोक में है जहाँ में किसी को उसको हानि नहीं पहुंचने दूंगी पर पृथ्वीलोक कदापि नहीं जाउंगी"......

दानव गुरूजी सिर्फ मुस्करा भर दिए सोचते हुए की यह तोह समय hi बातयेगा की रानी हेमा अब आर्यन को ऐसे hi मौत के काल में जाने देंगी या नहीं..... ?

राजा माया ," लेकिन रानी यह तुम्हारा स्वार्थ नहीं दरसता आर्यन को न बचा कर ?"

रानी हेमा ," कैसा स्वार्थ स्वामी, आर्यन की जनम देने वाली सारू, पालने वाली रति, दूध पिलाने वाली अनेको माँ वहां हैं तोह मेरी उसको वहां जरूरत कभी नहीं होगी फिर मैंने हमेशा उसके लिए मात्र धरम निभाया है पतलोक में और मुझे गर्व है अपने पुत्र आर्यन पर".

दानव गुरूजी ," में तोह अभी भी कहूंगा की आप को ुष के जन्मदिन वाले दिन जरूर जाना चाहिए आखिर आपके आशीर्वाद से hi वह पतलोक का भी भला कर पा रहा है".

रानी हेमा बस शांत रही क्योंकि वह रति की जगह नहीं लेना चाहती थी और यह उन्ह सब को होता दिख रहा था. पतलोक के सब महाबली जानते थे की रानी हेमा का जितनी अधिक पकड़ अपने नए मोह बोले पुत्र आर्यन पर होगी वह उतना hi हमारा साथ देगा.

यानी यहाँ भी चौदर्य माधव सिंह की बात सच्च थी आर्यन मातृत्व प्रेम में अपनी माँ के लिए गलत भी कर डालेगा जोह भविष्य में बहोत विध्वंश कारी होगा. यह hi पतलोक के रानी हेमा से क्या धरतीलोक वाले रति से चाहा रहे थे की वह आर्यन से कुछ बहोत गलत करवा के शर्मिंदा होकर पीछे हो जाये.

आधे घंटे बाद आर्यन नींद से जगह तब रानी माँ हेमा को अपने पास बिस्टेर के सिरहाने बैठा देखकर ख़ुशी से उनके गले लग गया ," आप कब आयी रानी माँ, मैंने एक बुरा सपना देखना जिसमे मुझे आपको और माँ ( रति) में से एक को चुनना पड़ता, ऐसा दिन भगवन कभी न लाये".

रानी माँ हेमा भी चकित होती अपने को सामान्य दिखती धड़कते दिल से पूछ hi बैठी ," तुम ने रति को चुना होगा िश्मे सोचने जैसा क्या है. वह तुम्हारी असली माँ है भले उसने जनम नहीं दिया है".

अब आर्यन चुप हो गया पर रानी माँ हेमा विचलित थी की वह उत्तर नहीं दिया. आर्यन ने देखा आस पास कोई नहीं है बाद वह दोनों hi हैं तो बड़ी मीठी आवाज में बोलै," रानी माँ क्या आप मुझे अपना मीठा दूध पीला सकती हो बहोत भूख लगी है ".

उसकी मीठी आवाज और अपनापन रानी माँ हेमा का दिल पिघला दिया और उन्होंने ने बड़े प्रेम से अपनी गॉड में आर्यन का सर रखकर अपना दूध पिलाते हुए उसके बालों में उंगलियन फिरा रही थी. आर्यन दूध पीटा नींद की आगोश में चला गया पर रानी माँ हेमा को दुविधा में दाल फिया की रति और मुझमे से किसको चुना आर्यन ने ? यानी यह भविष्य में जरूर होगा पर कब और आर्यन किसको चुनेगा?

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आर्यन की जब नींद खुली तोह वह स्वर्णगैर महल की महारानी के साही कक्ष में बिलकुल अकेला था अपनी जीभ अपने होते पर फिरता अपने सर प् चपत लगता खुद से बोलै," रानी माँ हेमा कितनी अच्छी हैं मुझे सपनो में hi दूध पीला देती हैं काश में हमेशा उनके पास रह पता ".

वह बिस्टेर से खड़ा होकर स्नानगृह से त्यार होकर अब राजदरबार की तरफ चल दिया तोह उसको पहले हंसिका कक्ष के बहार मिल गयी जिसको उसने बाँहों में बहार कर गाल चूम के पुछा कैसी हो जानेमन. बिचारि शर्माती हुयी से आर्यन की बाँहों में लिपट के बोली ," आप का प्रेम पाकर खुश हूँ महाराज महार्यं ".

आर्यन ने हसकर कहा ," मुझे तोह आर्यन hi रहने दो महाराज स्तब्ध मेरे लिए नहीं है में बस तुम्हारी तरह एक सेवक hi हूँ "...... और उसके दोनों बड़े बड़े चूतड़ दबा के मसलने लगा.

हंसिका ," मत करिये मेरे प्यारे आर्यन अभी तक आपका दिए दर्द के साथ मिला पूर्ण सुख मुझे फिर से जोश चढ़ा देगा ".

तभी आर्यन की पीछे से किसनी ने खोली भर ली ," क्या बात है दोनों अकेले अकेले ? मुझे मत भूलो आर्यन मैंने hi हार के तुमको सब से मिलवाया है ".

आर्यन ने ुष सांडनी 9 फट की राजकुमारी त्रिवेटा के सर पर पीछे हाथ दाल के अपनी तरफ आगे करके उसके मोठे मोठे होंटो को चूमते बोलै," तू तोह मेरे दिल की रानी है त्रिवेटा ..... पुछःह पुछठ ....... तुम सच्च में मदमस्त हो ".

हंसिका ने आर्यन के खड़े होते लुंड को अपनी जांघ से रगड़ा तो उसका एक चूतड़ और त्रिवेटा की एक चूची जोरसे दबा दिया ...... दोनों सिसक पड़ी ......

तभी गलिहारे में आवाज गुंजी ," यह क्या हो रहा है ????? "

आवाज सुनते hi बिजली की गति से आर्यन से दुर्र हटकर दोनों कदमो के बल सर झुका के बेथ गयी.... रानी पुष्पलता का क्रोध से तमतमय चेहरा देखकर आर्यन जल्दी से उसके पास पहुंचकर बाँहों में लिए चूमने लगा और गॉड में उठाकर वापस ुशी के कक्ष में ले गया..... पुष्पलता उसको रोकती रही पर वह नहीं मन.

दोनों ने चैन की सांस ली पर रानी पुष्पलता की अगले दो घंटे चीखिआ hi गूंजती रही स्वर्णमहल में, आर्यन ने उसका तीनो तरह से ढोल बजा दिया था.....

चाहती तोह ऐसा रानी पुष्पलता भी थी तभी अपने कक्ष में आर्यन को जगाने आयी थी पर दो दासियों, जोह उसकी छोटी बहेनो की सेनापति थी लेकिन पुष्पलता के लिए सिर्फ दासी बराबर, को आर्यन से लिपटे चूमे छाती करते देखि तोह उसकी झांटें सुलह गयी की इनकी इतनी हिम्मत मेरे नर (पति) पर दूर दाल रही हैं. यानी पुष्पलता के हिसाब से आर्यन तीनो बहेनो का पति था बस विधिवत विवाह स्वर्णलता के साथ हुआ है और आज राजकुमारी माया से विवाह से पहले सबके सामने स्वर्णलता उसको वरमाला डालेगी.

पहले दो घंटे बस ...... फट्ट्ट्ट थप्प्प्प पहछहः पहछहः फट्ट्ट्ट थप्प्प्प ..... मररररररर गईइइइइइइ ारयणणणणणण ..... कोईइइइइइइ बचावू ..... हननननन जोरसीईई...... मगर कोई उसकी सुनने वाला न था, बहोत चूड़ी वह मर्दानी, रानी पुष्पलता ......

अपनी hi दी शक्ति उसको भारी पद रही थी लेकिन वह दिल से चाहती थी आर्यन उसको पलंग तोड़ चुदाई करे. स्वर्णमहल के हर एक कुँए तक मेरी चीख्यों की गुंज्ज से पता चलना चाहिए की मुझे भी छोड़कर रुलाने वाला मेरा मालिक िश अटाला लोक का नर अब आ गया है. अगला राउंड प्यार वाला था और तीसरा मिला जुला मजा आर्यन ने पुष्पलता से लिया.

दोनों छोटी भेने कामलता और स्वर्णलता तळतळा लोक गयी हुयी थी विवाह की तयारी करने रानी हेमा के साथ. उन्ह दोनों को भी पता था की दीदी को आर्यन का प्यार काम मिला है पर उनको कहाँ पता था की उनकी दीदी चुड़ते चुड़ते मरने hi वाली थी जब त्रिवेटा ने कक्ष में आकर आर्यन को हंसिका के साथ आकर उसके ऊपर से बलपूर्वक खींच के अपने ऊपर चदया और हंसिका खुद रानी पुष्पलता को स्नानगृह में उठा के ले गयी और उसको होश में लायी.

तब हंसिका ने पुष्पलता को बतया की पिछले 2 पहर ( 7-8 घंटे) से आप आर्यन के साथ थी और आपको बेहोशी में भी अपने से अलग नहीं किया..... अब त्रिवेटा hi आपकी जगह उसको झेल रही है.

रानी पुष्पलता मुस्करा भर दी ," चिंता की बात नहीं है हंसिका ,अब आर्यन भी दानवो की शक्ति रखता है. चल भोजन की व्यवस्था कर उसको खाने की खुसबू रोकेगी. में अब ठीक हूँ पर यह याद रखना हमारे सामने अपना पढ़ मत भूलना, हमसे पीछे आर्यन को तुम दोनों खुश कर सकती हो. अपनी महारानी के चरणों में सर रखकर खुसी खुसी हंसिका चली गयी...... अंदर बिस्टेर पर त्रिवेटा की गांड पहाड़ चुदाई चल रही थी.

अपने को अपनी शक्ति से सही करने में और त्यार होने में रानी पुष्पलता को थोड़ा समय लगा. जब बहार आयी तोह आर्यन अपनी झांघो पे दोनों को नंगी बिठाये स्वादिस्ट भोजन की दावत ुधा रहा था ..... यानी उसने हंसिका को भी त्रिवेटा के साथ फिर से चूड़ा था और अब भोजन कर रहा था. पुष्पलता का इशारा करते hi दोनों नंगी शरमति हियी उठकर भाग गयी.

आर्यन बस भोजन में लगा था..... काम से काम 200 आदमीओ का खाना डकार चूका था तब जाकर सुष्ट हुआ.

अब पुष्पलता उसकी गॉड में बैठकर बोली," चलो न आर्यन कहीं अच्छी जगह घूम के आते हैं, तुम ने स्वर्णगैर के उधड़यां ( बाग़ बगीचे) नहीं देखे होंगे ".

आर्यन को सृष्टि और नींद आ रही थी पर रानी पुष्पलता की प्यारी मीठी बातें सुनकर बोलै ," वहां भी प्यार करेंगे, एक मं में अपना बैग ले लूँ क्या पता कोई दुर्लभ जड़ीबूटी मिल जाये. में त्यार होकर आता हूँ"...... उसका गाल चूम के फ्रेश होकर अपने बैग में जरूरी चिजियन चेक किया और दोनों निकल गए अटाला लोक की सीआर पर.

स्वर्णलता ने गौर किया तो पाया की आर्यन सिर्फ हिंसक या अतिउतेजित अवस्था में hi दानव जैसा होता है जबकि प्रेम से बात करो तोह एक आज्ञा कयारी बच्चे जैसा. वह उसका हर कहना मान रहा था और यह रूप आर्यन का उसको बहोत प्यारा लग रहा था. एक बार को रानी पुष्पलता को लगा क्यों हम सब इश्को दानव या नाग बनाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि यह मानव रूप में hi कितना प्यारा है.

रानी पुष्पलता ने मैं hi मैं फैसला किया की क्या बुराई है िश्मे की आर्यन में जोह ऐसा है, सबसे शक्तिशाली होते हुए भी बस प्रेम hi करता है. अब मुझे और कामलता को आर्यन बस पति के इसी रूप में चाहिए सायद स्वर्ण इशलिये िश को इसी रूप में निस्चल प्रेम करती है.

पतलोक की तीन रानियों, तीन राजकुमारियों के साथ दो सख्ती साली नागिन का दिल आर्यन जीत चूका था. वहीँ अब पतलोक के प्रमुख महाबली भी उसके पक्ष में थे.

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मगर एक नागलोक के नागदंश के साथ तळतळा लोक का हिमासुर नाम का दानव भी आर्यन के खिलाफ परसों नागलोक के स्वयंवर में उसको मारने का सद्यांतर रच चुके थे.

अब सब प्रभा के हाथ में था की वह बिना किसी की सुनए आर्यन को वर चुन लेगी या फिर प्रतियोगिता होकर hi रहेगी क्योंकि आखिरी में आर्यन को प्रभा को हराना होगा तभी उसकी नागिन बनेगी जोह आशम्भव hi था. लेकिन एक उपाए रानी हेमा ने भी निकला था की यह 6 दानव रानियां और राजकुमारी आर्यन से दिल से मिलान करके उसको अपना नर बना लेगी तोह जोह शकितयाँ इनसे मिलेगी वह Prabha-Vishaka जैसी नागिन से मुकाबला करने के काबिल बना देंगी फिर भी जीतना आर्यन को hi होगा .

नागदंश और हिमासुर दोनों गुस्से में प्रभा से लड़ने नहीं आर्यन को मारना चाहते थे जोह सिर्फ एक मनुष्य होकर दानव, असुर, नाग और सर्प जातियों को अपनी शक्ति पर्दशन से तूच दिखाया था अब तक.

दोनों अपने अपने इष्ट देव से तपस्या करके आर्यन को मारने की शक्ति प्रपात कर रहे थे स्वयंवर प्रतियोगिता में. लेकिन आर्यन तोह मस्तमौला की तरह बस अपने hi मस्ती में मस्त था.

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स्वर्णगैर घुमते हुए आर्यन वहां के आस पास के मनोरम प्राचीन स्थान के बाद अब उधड़यां घूम रहा था. उसको नयी जगह और वहां की विशेता को गहराई से जान्ने का सूक तो बचपन से रहा था.

आर्यन ने बहोत सारे नमूने और औसधि भी खुद रानी पुष्पलता से मिलती जानकारी के साथ इकठे किये. आर्यन ने पुछा ," पुष्पु यह जल की पूर्ती पतलोक का कोनसा तत्व पूरा करता है ?"

रानी पुष्पलता हसकर ," जल की जरुरत hi कहाँ होती है जब यहाँ की मिटटी से डायरेक्ट जीवन दायनी ( ऑक्सीजन) और जीवनदासी ( हाइड्रोजन) मिल जाती है फिर यह धरतीलोक के पुष्प या फल नहीं हैं, इनकी दीर्घ काल आयु होती है ..... अभी तुम्हारे हाथ में जोह फल पकड़ा है उसकी आयु तुम्हारी धरती के हिसाब से 12 हज़ार साल से ज्यादा होगी".

आर्यन ने तुरंत हाथ हटा लिया और बोलै," पर यह पाक चूका है पर कितने समय पहले ?"

उसकी हालत देखकर पुष्पलता ने ुष फल को तोड़कर आर्यन के बैग में डालते हुए कहा," यह हम पतलोक के वासी निर्णय लेते हैं कब तोडना है. वार्ना जरुरत पर हम अपने hi लोगों को खा जातें हैं तुम ुष युद्ध मैदान में देख चुके हो. बस अफ़सोस तुमको खा नहीं पाया कोई hi hi hi hi hi hi "....... आर्यन को इतनी डिअर से बस अपने में hi वयसत देखकर वह उसको चिढ़ाती हुयी उसकी हसी उड़ाई ......

आर्यन अपने एक्सप्रेशन चेंज करता मुस्करा कर एक हाथ पुष्पलता की कमर में दाल के उसको अपने करीब खींच के बोलै," उनको मौका था पर मुझे नहीं खा पाए ताकि में उनकी रानियों को खूब खा सकूँ ..... पुछःह पुछठ ..... कामिनी ..... तू मुझे डरा रही है, अब तेरी कहिअर नहीं ...... अब तेरी योनि यहीं उधड़यां में फाड़ता हूँ ".

और वहीँ उसकी न नुकर नखरे के बावजूद उसको मखमली घास पर कुटिया पोज़ में करके अपना खूंटा गाड़ दिया पुष्पलता की योनि में ..... एक घंटे तक चूड के अपना विरए उसकी छूट में भर के अलग हुआ...... आर्यन अब पुष्पलता को चिडता हुआ बोलै ," मजा आया पुष्पु ?..... है है है है ...... तुम बहोत नशीली हो मेरी जान "

पुष्पलता अब भी नखरे दिखा के मोह बना रही थी लेकिन शिकायत उसको भी नहीं थी. उसको सही नर मिला था जोह सही समय उसको मिलान का पूर्ण सुख देता था. दोनों थोड़ी डिअर और घूम के अब स्वर्णमहल से साही अंदाज में त्यार होकर पूरे लश्कर के साथ निकले तळतळा लोक.

दोनों जब साही यान से तळतळा लोक पहुंचे तोह दोनों का भाव स्वागत हुआ ..... सब बड़ों का आशीर्वाद लेकर आर्यन बहोत खुश था यहाँ िश लोक की सुंदरता और सजावट देखकर .

राजा माया और रानी माँ हेमा के प्यार चुकार आर्यन ने कहा," आप दोनों को देखकर मुझे अपने माँ बाप की भी याद नहीं आती ऐसा लगता है आप hi मेरे माँ बाप हो यह तोह आपकी रची माया भी नहीं है क्योंकि चल में पहले hi पकड़ लेता हूँ पर क्यों में बस आपकी िश माया के भरम जाल में बस आपकी hi माया hi खोझता हूँ, आप से महँ कोई नहीं राजा माया पर आप की बेटियां आपकी माया से भी ऊपर हैं. तीनो दिल से बहोत साफ़ हैं और आपकी माया से दूर, आप की माया की वजह से यहाँ आया हूँ ".

राजा माया ने रानी हेमा के कान में कहा," अपने पुत्र से बोलो की मेरा नाम महँ राजा मयासुर है फिर क्यों मुझे हमारी छोटी पुत्री माया जैसा बोल रहा है ?"

रानी हेमा ने आर्यन को आशीर्वाद देते हुए साया की तरफ इशारा किया तोह वह आर्यन को अपने साथ ले गयी और एक आसान पर बिठा के तीनो भेने उशसे खिलखती बातें करने लगी ..... चाहती तोह तीनो गले लगकर उसको चूमना भी.

तब रानी हेमा ने जवाब दिया ," क्योंकि आपकी कोई भी माया ने नहीं बल्कि आपकी पुत्री 'माया' ने उश्के दिल पर असर किया है, अगर वह मयासुर बोलने लगा 7 बार तोह विवाह आप करते ुष से क्या? यह हमारे देने से पहले hi बेटी मांग कर आशीर्वाद ले लिया है. अब देखो साया और चाय को भी मांग लेगा".

इतना सुन्नते hi राजा माया की भी सिटी पित्ती गम हो गयी क्योंकि यह तीनो बेटियां hi उनकी सर्वशख्तियाँ थी. यानी की राजा मयासुर की शक्तियां िंह तीनो दत्तक पुत्री में थी.

रानी हेमा ने उनके कान में कहा," समय आ गया है एक अपनी शक्ति आर्यन को स्वेछा से दे दिज्ये वर्ण तीनो लेकर जाएगा और अपनी लाड़ली पुत्रियों की तरफ देखो कैसे सिर्फ उसके लिए राल ( सलीवा) बहा रही हैं".

7 बार माया बोलकर दोनों के चरण छूकर आशीर्वाद लेकर माया नाम की बेटी को आर्यन पा चूका था पर अब बारी अगली दोनों की थी.

राजा बलि महाराज ने भी राजा माया के मैं में एहि बात केहि," एहि वक़त है आर्यन को अपनी तरफ करने का राजा माया वार्ना सब चीन जायेगा और भूल रहे हो उसकी माँ रानी हेमा हर एक वार विफल कर देगी".

राजा वासुकि ने उनके मैं में कहा ," राजा माया इतना में जरूर कह सकता हूँ आर्यन एक सिद्ध मनुष्य है, आज तक प्रभा और विशाखा खुश हैं. तुम भी अपनी बेटी देकर खुश रहोगे".

दानव गुरूजी ने मस्तिक्ष संपर्क से कहा ," राजा माया, आप ने पुनर जीवन सिर्फ भगवन शिवशंभु से मिला है और यह लड़का खुद भगवन भोलेनाथ की किरपा से पैदा हुआ है. माया के साथ उसकी दोनों भेने भी खुश रहेंगी".

राजा माया को अपनी मौत दिखने लगी जब आर्यन साया और चाय का हाथ पकड़ के आया उनके सिंघासन की तरफ .....

झट से राजा माया बोले ," पुत्र आर्यन की माया से विवाह की तयारी करो में अभी आता हूँ"..... और सच्च में वह अन्तर्द्धन्द्ध ( गायब) हो गए डर से जबकि आर्यन मांगने नहीं कुछ उनको बताने आया था.

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आर्यन के प्रभा के साथ जाने के बाद माया रूठी हुयी चली गयी अपने कक्ष में पर जब िश घटना का सच्च उसको चाय, साया ने बतया तोह शरमाते हुए बोली," क्या मेरी सच्च में शादी हो गयी आर्यन से दीदी या मुझे आप दोनों बेहला रही हो".

चाय हसकर ," हमारी भी हो जाती अगर पिताजी महाराज चाहते...... तेरी वजह से hi 1/3 शक्ति काम हो गयी उनकी ..... अगर हम दोनों का विवाह भी इसी तरह हो जाता तोह तळतळा का नया राजा आर्यन बन जाता ".

माया खुश होती हुयी ," सच्च फिर तोह आर्यन यहीं हम तीनो के पास रहता, आप दोनों ने ऐसी गलती कैसे कर दी जल्दी पिताजी को ढूंढो और तीनो शादी करते हैं ".

"तुम्हारी तीनो की शादी आर्यन से राजा माया की मौत होगी ......

1% = रानी हेमा और हर पुत्री में 33% = तुम में से एक अंदर है उनकी पावर. वतासुर की गुलाम तुम तीनो इशलिये थी कभी आजाद न हो पर आर्यन पतलोक आ गया जिसका कभी किसी ने नहीं सोचा था. "गाजा शक्ति" देकर हम ने उसको पतलोक में अमर बना दिया है यानी उसपर कोई दानव शक्ति काम नहीं करेगी और नाग शक्ति तुम तीनो hi उसको दे सकती हो मेरी प्यारी छोटी बहेनो ".

साया ने हाथ जोड़कर कहा ,"रानी पुष्पलता दीदी हमारे पास नाग्शक्ति शक्ति कहाँ से होगी ..... है है है है है ..... मजाक की भी हद है ..... "

तभी रानी हेमा की आवाज आयी ," राजा वासुकि की छिपी शक्ति तुम तीनो के अंदर हैं पर उन्होंने बंदिश राखी जोह तीनो बहेनो को अर्धांग्नी बना लेगा उसको आधी नाग्शक्ति मिलेगी और तुम तीनो के साथ आर्यन भी त्यार है. आधी नाग्शक्ति विशाखा और प्रभा के पास है. यानी दो लोकों के राजाओं की शक्तियां क्या जीवन भी तक पर है. तुम्हारे पिताश्री पक्का अभी राजा वासुकि को hi चेताने गए हैं, देखो पिता hi अब पुत्रियों के मोहताज हो गए".

रानी पुष्पलता ," एक गुण मैंने आर्यन में नोट किया है वह बहोत खुशाल एक साधारण सा मानव hi रहना चाहता है जबकि क्रोध या अपनों को संकट में देख सामने वाला काल बन जाता है. दोनों राजा उसको हरा तोह अब नहीं पाएंगे पर उसको शक्ति पाने से रोकना जरूर चाहेंगे ".

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राजा माया के राजदरबार से गायब होते hi प्रभा वहां आयी और रानी हेमा से अनुमति लेकर आर्यन को अपने साथ ले गयी तळतळा लोक घूमने और बातें करने .....

आर्यन ने जब साथ चलते हुए अपनी छोटी भें प्रभा को उदास देखा तोह बिफर के उसको अपने सीने में समेत लिया ," क्या हुआ बेबी ? व्हाई यू अरे सो साद बोल मुझे ? " ....... दोनों अभी साथ अकेले hi यहाँ एक सूंदर वन्न में घूमने आये थे.

प्रभा भी अपने बड़े भाई की बाँहों में उसकी बगल से हाथ निकल पीछे से कंधे पे रख के बोली," भाई आप मुझे भूल hi गए..... जब से यहाँ पतलोक आये हो मेरी तो आप को याद भी नहीं आयी बस इधर उधर hi दुसरे लोकों में घुमते रहते हो ".

आर्यन ने अपनी िश सबसे छोटी नादान भें का सर चूम के बोलै," तेरी वजह से यहाँ आया की तुझे तेरे पिछले जनम के परिवार से मिलना का मैं है पर सब ने मुझे hi दुर्र रहने को कह दिया. क्या करता इधर उधर भटक रहा था पर हमेशा तेरी hi चिंता रहती, चल अब वापस चलते हैं वहां सब हमारी hi बैठ जो रहे होंगे".

प्रभा को लगा कहीं भाई बगैर मुझसे नाग विवाह किये वापस न चले जा पर अभी तक एक बहोत स्ट्रांग रिश्ते था जिस की वजह से Bhai-Bhen का आवरण नहीं टूट रहा था दोनों के बिच और दूसरा आर्यन सिर्फ प्रभा का बड़ा भाई नहीं था बल्कि उसकी एक पैरेंट की तरह केयर करने वाला, उसका दोस्त, उसका पहला प्यार और उसका आइडल था फिर कैसे बोल दे में आप से शादी करना चाहती हूँ और आप से बहोत प्यार करती हूँ.

आर्यन अपनी छोटी भें प्रभा से मिलकर सारे पतलोक को भूल गया. उसके लिए प्रभा वही छोटी सी नन्ही सी बेबी hi थी जोह बच्चों को जिन्दा रखने वाली मशीन में बीमार सोई हुयी थी पैदा होने के कुछ घंटो बाद और ठीक होने के बाद अपने भाई से मिली एक महीने बाद. आर्यन उसकी इशलिये इतनी ज्यादा केयर करता था की मेरी भें फिर से वापस ुष मशीन में नहीं जाएगी. (यानी बेबी इनक्यूबेटर)

निर्मला चाचीजी बचपन में आर्यन को दूध पिलाने की कोशिश करती प्रभा के पास रहने पर भी पर वह मन करता की मेरी बेबी डॉल को ज्यादा जरुरत है. प्रभा भी उन्ह खुश किस्मत लोगों में से थी जिसको रति और आर्यन बहोत प्यार करते थे.

देखा जाए तोह आर्यन सबसे प्यार करता था पर रति कुछ hi लोगों पे जान लुटाती थी आर्यन के अल्वा ..... पहला no. सारू का था क्योंकि वह उसकी पहली संतान थी दूसरी थी गीता जोह उसको भगवन ने आशीर्वाद में दी और तीसरी थी नेहा और अणि जैसा जुड़वाँ नाटियां दोनों सगी बेटियों की बेटियां जोह थी. 4तह थी उसकी अपनी पोती डॉली जिसको वह बहोत प्यार करती थी अपनी बड़ी बहु कविता के कारन पर जब निर्मला ने प्रभा को जनम दिया तोह रति को ुष निर्जीव सी नवजात बच्ची से जाने कैसा लगाव हो गया की पूजा अर्चना में डूब गयी और व्रत पे व्रत रखकर भोलेनाथ से उनकी ुष बच्ची पर कृपया मांगी की में मन्नत पूरी करुँगी.

चम्तकार hi हो गया एक महीने बाद जिस बच्ची को सेज माँ बाप के साथ सब डॉक्टर्स भी बोल दिए की यह नहीं बचेगी पूरा सरीर पीला पड़ा था प्रभा का मशीन में....... बस एक आर्यन जोह लगभग तीन साल से काम था और दूसरी उसकी माँ रति को विश्वाश था की प्रभा नयी किरण की तरह ठीक होकर हमारे साथ hi खेलेगी.

आज की डेट में वही प्रभा खेलना तोह छोड़ो पोल वॉल्टिंग करती है और असली सच्च यह था वह अब अपनी पिछले जनम की बड़ी भें नागिन विशाखा को अपने अंदर लिए नागलोक की सबसे शक्तिशाली नागिन बन गयी है.

आर्यन अब ुष अजीब से उधड़यां में आ गया, अपनी भें प्रभा को एक छोटी बच्ची की तरह अपनी पीठ पे बिठाये . प्रभा को वहां घुमा रहा था जोह उसको िंह विचितिर फूलों और पेड़ों की जानकारी दे रही थी जब आर्यन पूछता.....

अपने साइड में लटके बैग में वह अपनी छोटी सी कैंची और नाइफ से कुछ फूल और पतियों के साथ फल के हिस्से काट के सैंपल सा लेकर रख लेता, यह सब प्रभा को बहोत बोरिंग लग रहा था.

वह कुछ सोच के बोली ," भाई अगर आपको विशाखा दीदी से प्यार हो गया तोह क्या मुझे भूल जाओगे आखिर उनसे आपका विवाह होगा ?"

आर्यन अभी एक छोटे सी नरगी पट्टी को हाथों से चेक कर रहा था फिर सूंघ कर ुष पेड़ के छोटे से फल को जोह पक्क चूका था, तोड़ते हुए अपने बैग में डालते हुए बोलै ,"देखो बेबी विशाखा न बहोत कुरूर घमंडी थी और अब तुमको कण्ट्रोल करना सीखना चाहिए की वह बहार न आये तुम पर हावी न हो ...... याद है उसने क्या किया था वहां अलवर के दिव्या ख़ज़ाने वाले तहखाने में सबको बंदी बना लिया था में सिर्फ तुम्हारे लिए चुप था की तुम को नुक्सान न पहुंचा दूँ ".

प्रभा को अब रास्ता मिल गया ," भाई वह विशाखा दीदी न बहोत जिद्दी है मुझे भड़कती रहती है पर मैंने साफ़ बोल दिया की में अपने प्यारे भाई की गुड गर्ल हूँ गलत काम नहीं करुँगी..... ठीक किया न भाई? "

आर्यन अब आगे बढ़कर एक पेड़ पे रेंग रहे कीड़े को हाथ में पकड़ के अपनी हथेली में रख के उसको इधर उधर हिला के खुश हो रहा था ......

प्रभा को आर्यन का अपनी बातों पे ध्यान न देना अच्छा नहीं लगा उसने फूक मार के उसको उदा दिया ..... देखते hi देखते वह एक बड़े दानव में बदल गया तब आर्यन ने बिना उसको मौका दिए ुष दानव के मोह पे मुक्का मार के बेहोश कर दिया और प्रभा ने ुष्पर थूक दिया ...... अगले hi पल उसका पूरा सरीर गाल गया प्रभा के थूक से.

आर्यन ने अपनी पीठ पे लड़ी छोटी भें की तरफ देखा गर्दन घुमा के देखा तोह उसने आर्यन का गाल चूम लिया ," ुंहःहःह भाई वह डिसट्रब कर रहा था हम पर निघा रखते हुए".

आर्यन उसकी मासूमियत भरी नज़र देखकर बोलै," ऐसा किसी को मारने का अधिकार हम को नहीं मिल जाता बेबी पर हाँ वह जासूसी तो पक्का कर रहा था. तुम अभी इतनी बड़ी नहीं हो और अपनी पावर को कण्ट्रोल करना सीखो, कल हम दोनों के साथ अपने भी होंगे फिर गुस्सा और नफरत कुछ हासिल नहीं होने देगी. अच्छा बोल तू कुछ कह रही थी ".

आर्यन की एहि बात रति को पसंद नहीं थी वह अपनी बहेनो और मम्मियों की गलत हरकत को भी सही तारक देकर डिफेंड करता था जबकि उन्ह में से कुछ ज्यादा hi नटखट thi......Jaggu मम्मी की भी गलत हरकत उसने ऐसे ताल दी जैसे कुछ नहीं हुआ क्योंकि उसके लिए उसकी मुम्मियाँ और भेने कभी गलत नहीं कर सकती और किया तोह में सही कर दूंगा. िंह सबसे ज्यादा तोह अपनी चंदा देवी, गीता, के लिए करता था. उसको पूरी दुनिया भी गलत करार कर दे तब भी आर्यन गीता को डिफेंड करेगा की वह गलत कर नहीं सकती .

रति सबको वश में कर सकती थी पर गीता को नहीं और उसकी हटधर्मिता को आर्यन का पूरा सेह मिलता है यह रति मानती थी. इसी बात का गीता भी फायदा उठती थी की मेरा आशिके लौंडा (आर्यन) मेरे साथ hi रहेगा खिलाफ नहीं.

प्रभा ने फिर से अपने भाई की गर्दन पे अपनी बाँहों का कसाव भड़ता हुए आर्यन का लेफ्ट गाल चूम लिया ," hi hi hi hi hi ..... भाई ी लव यू ...... पुछःह पुछठ ".

आर्यन एक बार को अणि को दांत दे पर प्रभा को कभी खुद क्या अपनी निर्मला मम्मी को भी नहीं डाटने देता था इशलिये ब्रिगेडियर जसवंत सिंह( प्रभा के नानाजी) भी आर्यन को बहोत पसंद करते थे की यह भी हम फौजी की तरह सब परिवार को एक hi प्रेम की नज़र से देखता है जैसे हम पूरे देश की जनता को देखते हैं पर आर्यन को सीखना होगा अपने hi कुछ देशवासी हमारे देश को दीमक लगा देते हैं जोह आर्यन अपने परिवार वालों के लिए कभी नहीं समझा.

नवाब सिंह हमेशा आर्यन के बारे में सही बोलता था की उसके गुरूजी कहते थे की आर्यन को घर की औरशन का प्यार बाँध के रखता है और यह सच्च भी था सायद वह सभी औरशन और लड़कियां, आर्यन के अंदर से उन्ह दूसरी 5 अलग अलग आत्मों को कभी हावी hi नहीं दी थी ...... पर एक को प्रभा के अंदर वास करती नागिन विशाखा जरूर बहार लाना चाहती थी जोह दिव्या तलवार यानी 'सहायक' का मालिक है पर क्या वह बहार आएगा? और विशाखा ऐसा क्या करेगी ?

प्रभा को िश उधड़यां में घूमते हुए जब काफी दूर आर्यन ुष बहते झरने के पास पोंछा तो बोलै," यह सब राजा माया ने यहाँ क्यों बांया है जबकि यहाँ के वाशी तोह पानी और नहाने में विश्वास hi नहीं रखते यानी सब उनकी hi रची माया है ".

इतना सूंदर झरना देखकर प्रभा को एक आईडिया तोह आ गया की भाई को दिखाना पड़ेगा में भी डॉली और नेहा दीदी की तरह पूरी जवान हूँ ..... वह आर्यन की पीठ से उतर के झरने की तरफ बढ़ती हुयी बोली," भाई में तोह नहाने वाली हूँ आप भी आ जाओ कहीं में दुब न जॉन".

उसने बोलते हुए अभी धरतीलोक की पहनी अपनी जीन्स और t-shirt उतर दी सिर्फ लाइट पिंक पेंटी और ब्रा में दौड़ के झरने के बहते ठन्डे पानी में कूद गयी...... आर्यन अपनी भें की सुंदरता तो देखना छोड़ो बस इसी चिंता में पूरे कपडे पहने उसके पीछे कूद गया की इश्को न्युमोनिअ न हो जाये पानी में .....

आर्यन उसको पकड़ा तोह और उशसे लिपट के अंदर ले जाते हुए प्रभा बोली," भाई बहोत मजा आ रहा है पर आप कपडे क्यों पहनो हो ".

आर्यन िश समय राजशाही पोषक में था यानी ऊपर कुर्ते जैसा निच्चे लुंगी या धोती जैसा विस्तार कह लो ......

ऊपर पहने अंगवस्त्र के साथ प्रभा ने निचे लुंगी जैसा विस्तार भी खींच दिया और आर्यन पूरा नंगा हो गया पर जैसे उसको परवा hi नहीं थी उसको अपने से चिपटा के बोलै ," तू पागल हो गयी है ठण्ड लग गयी न तो मम्मी (निर्मला) मुझपे गुस्सा होंगी ".

प्रभा को आर्यन की नौटंकी लग रही थी पर अब जैसे जिद्द में आर्यन से लिपटे हुए अपनी ब्रा पेंटी भी उतर के जल में भ दिए ...... पर आर्यन को उन्ह सबकी परवाह भी कहाँ थी वह प्रभा को बहार लाकर अपने साथ नुदे लिपटते हुए पूछ रहा था ," अरे यू ऑलराइट बेबी? क्या जरुरत थी पानी में जाने की".

आर्यन का लुंड देखकर hi प्रभा भी हैरानी के साथ खुश होती सोचने लगी ," वाओ, क्या दमदार हथियार है भाई का ?"

प्रभा ने पानी से बहार निकलते हुए एक दो बार लुंड की फीलिंग अपने लेग्स , तइस से महसूस की तब विशाखा ने प्रभा को बोलै," प्रभा तू अभी भी आर्यन की छोटी बच्ची जैसी hi है मुझे मौका दे एंड 10 मं में उसका लिंग तेरे हाथ में होगा".

प्रभा अपने मैं में ," नहीं दीदी हम दोनों ने तय किया था की जब में भाई से मिलूंगी आप बहार नहीं आयोगी ".

विशाखा (मैं में) ," हाँ बोलै था पर मुझे यह नहीं पता था तेरा नग्न बदन देखकर भी आर्यन ऐसे hi ठंडा रहेगा...... देख एक बात तोह अच्छी है इश्क लिंग ठीक ठाक है पर अब समय आ गया है की या तोह तू साफ़ बात कर या फिर मुझे करने दे. हम विवाह करने वाले हैं न की किसी अरे गैर को जिस्म की नुमिश कर रहे हैं. एहि अपना आर्यन, अटाला लोक की 3 रानियों को भोग के आ रहा है. अब रानी हेमा की दत्तक पुत्री माया से भी विवाह करने वाला है चाहे एक से करे पर में बोल रही हूँ मुझे मौका दे ".

अब प्रभा के लिए क्लियर था पर इतने सूंदर सरीर को घास पे लिटा आर्यन अपने साथ लाये बैग में से निकाले साफ़ टॉवल जैसे विस्तार से उसके बदन को पहुंच के उसको लपेट दिया.

आर्यन ने देखा तोह प्रभा सुभाकने लगी ....... ऐसा लगा जैसे उसको खुद कोई खून के आंसूं रुला रहा हो ......

आर्यन बिलकुल नंगा उसके बदन को अपनी गॉड में बिठाकर बोलै," हे हे हे ..... क्या हुआ बेबी गर्ल? तेरी आँखों में आंसूं ?"

प्रभा झूट में गुस्से से बोली ," क्योंकि आप मुझे प्यार नहीं करते? आप सिर्फ मीणा दी, नेहा दी और डॉली दी को प्यार करोगे ...... बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ..... क्या में इतनी बदसूरत हूँ की आप ने एक सेक् भी मुझे प्यार भर नज़रों से नहीं देखा बुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह......."

आर्यन के लिए कपरिसों वर्ड hi नहीं था पर अपनी छोटी सी चुहिया भें की दर्द भेदी ललकार सुनी थी तो रूट हुए बोलै," 1 दिन की थी जब तुझे मशीन में देखा, मेरी मम्मी ( निर्मला) बहोत दुखी थी, सारे परिवार वाले दुखी थे की तू नहीं बचेगी पर ुष दिन भी सबको बोलै था की मेरी बेबी मेरे साथ जरूर खेलेगी फिर अपनी निर्मला मम्मी का दूध पिया जोह तुझे पीना चाहिए था. आज तक तोह तेरी बात ताली नहीं पर अगर विशाखा की जिद्द है तोह पहली बार ना बोल रहा हूँ".

प्रभा झट से आर्यन से लिपट के गोदी में चढ़ उसका पूरा चेहरा चूमते हुए बोले जा रही थी ," भाई भाई भाई भाई ..... में सिर्फ आपसे प्यार करती हूँ बस मुझे अपना लो नहीं तोह में जी नहीं ...... "

आर्यन ने उसकी बात पूरी hi नहीं होने दी जबकि उसको बोलै गया था प्रभा को मत चूमना खासकर लबों पर पतलोक में ..... मगर दोनों भाई बहेनो ने चूमते हुए और एक दुसरे से लिपट के झरने में छलांग लगा दी..... इशलिये मीणा बोलती थी प्रभा को आने दो वह कुछ भी आर्यन से करवा लेगी.

आर्यन बस कड़वा ज़हरीला रास चूस के भी खुश था पर उससे ज्यादा तोह प्रभा पानी के अंदर आर्यन से लिपटी ुषको विष पीला रही थी अनजाने में...... प्रभा की पहली लव किश उसके बड़े भाई के गोर सरीर को नीला करती जा रही थी और आर्यन भी नहीं रोक रहा था उसको..... क्योंकि उसके सरीर में बहोत खतरनाक ज़हर उतरता जा रहा था. वह अपनी प्रभा की खुसी के लिए जान देने पर उतारू था.

तभी वहां किसी ने प्रकट होकर प्रभा की पीठ पर लाठ मारी और वह इतने प्यारे पलों में विहीन देखकर गुस्से में आ गयी..... क्यों बद्तमीज है जोह मेरे प्यार के बिच आ रहा है.....

उसके सामने तीनो अटाला लोक की रानियां को साथ तीनो दानव कन्या और पूरी सेना कड़ी थी जब आर्यन को किश करना छोड़कर पलटी..... गुस्से से वह सबकी तरह देखकर जब अपना पानी में प्रतिब देखि तोह खुद डर गयी," एक 120 फट की 5 फानन वाली नागिन का रूप धारण किये वह पिछले कुछ समय से आर्यन को बिच वाले पहन से चूम रही थी ........

उसका जेहेर पानी का रंग भी काला कर दिया था और आर्यन की बॉडी पानी ने उसकी पूँछ में लिपटी थी...... अचानक आर्यन के नीले पड़े सरीर देखकर वह डर से फुंकरति गायब हो गयी......

उसके गायब होते hi आर्यन के सरीर के घेरे काट वह सारा पानी का कालापन अपने अंदर समेत कर पूरा साफ़ कर दिए और आर्यन सीधा खड़ा होकर हाथ जोड़कर बोलै," आप सब जाओ यहाँ से मेरी छोटी भें को आपने रुला दिया?"

रानी स्वर्णलता के अल्वा अब कोई वहां नहीं था और आर्यन अपने विस्तार पहनकर अपना बैग उठा के पुछा," प्रभा अब कहाँ होगी तुम्हे पता है ?"

स्वर्ण भी आँखों में अलख लिए ," वहां मत जाइये स्वामी, आप नियम तोड़ रहे हैं".

आर्यन ने गुस्से से स्वर्ण को देखा और जमीन पर बैठकर मुक्का मारते बोलै," तुम जा सकती हो उसके पास?"

स्वर्ण डर गयी पर उसकी हिचक देखकर आर्यन ने उठकर उसको अपने पास बुलाकर गले लगाकर माथा चूम के बोलै," मेरा सन्देश लेकर जाओ स्वर्ण की में उसका भाई उससे कल विवाह करने आऊंगा उसके स्वयंवर में बस उसकी बहती नाक नहीं चाहिए ".

तभी वहां रानी पुष्पलता आयी और बोली," स्वर्ण वहां नहीं जा पायेगी आर्यन वर्ण इश्को भी खो डोज. वहां सिर्फ तुम्हारी गाजा शक्ति जा सकती है, अपना सन्देश एक अदृश्य नाग बना के भेजो. उन्ह अँधेरी सुरंग और गुफा में वह hi जा पायेगा ".

आर्यन अब हैरान होता हुआ ," फिर में और दीप्ति इतनी आसानी से कैसे वहां तक पहुंच गए थे पिछली बार ?"

रानी पुष्पलता ," क्योंकि तुम को भेजा गया था सब पररहि और अड़चन हटा के फिर भी जिन्दा वापस आये ?"

आर्यन अब गुस्से से अपने को बेबस पाटा बोलै ," में और मेरी प्यारी भें प्रभा बस पतलोक सिर्फ इशलिये आये थे की उसको अपने परिवार से मिलना था पर तुम सब हम को hi इस्तेमाल करके अपना मतलब साध रहे हो. अगर मेरी भें प्रभा को कुछ हुआ तोह भूल जाऊंगा की यहाँ कोई और भी रहता है. पुष्पु मेरी छोटी भें प्रभा को वापिस करवा दो, हम दोनों फिर कभी यहाँ नहीं आएंगे. यह भी कोई राजा की माया है ".

रानी पुष्पलता आगे बढ़कर आर्यन का हाथ पकड़ कर बोली," आर्यन यह कोई माया नहीं है बस खुद को सम्भालो तुम्हारा सन्देश में खुद लेकर जाउंगी चाहे नागलोक के नाग मुझे देश देश के मार दें तुम्हारा सन्देश पहुंचा दूंगी ".

आर्यन को अब अपनी hi नहीं उन्ह सबकी बेबसी नज़र आ रही थी की प्रभा अभी दुर्र है पर सुरक्षित नहीं..... आर्यन ने पलकें झपका के अपना सन्देश देने का इशारा कर दिया पर अंदर अंदर hi अब वह घुट रहा था.

वह जानता था नागलोक की राजकुमारी प्रभा से ुष को विवाह करना पड़ेगा पर धरतीलोक पर ुष अपनी छोटी नाजुक भें प्रभा को कितने प्यार से रखता था. रानी पुष्पलता ने सन्देश भेज दिया था प्रभा के पास जिसको बिना पढ़े hi उष्ण नष्ट कर दिया.

अब दोनों नागिन बहेनो का गुस्सा बढ़ रहा था एक दुसरे के प्रति भी और बाकी सबके भी, क्यों आर्यन को वह पल भर भी प्यार नहीं कर पायी...... ? क्या जरुरत थी दीदी को वहां असली रूप धारण करने की. वहीँ विशाखा अपने वार में hi चूक गयी, आर्यन जहर से नीला पद गया पर वह दिव्या तलवार का मालिक क्यों बहार नहीं आया उसको बचने ?

आर्यन वहां से बिना किसी से बात किये निकल गया राजा माया के महल की तरफ अपने गीले विस्तार पहनकर और अपना बैग पीठ पे टाँगे..... रस्ते में साया, चाय के साथ तीनो अटाला लोक की रानियों ने कोशिश की उसको मन पाए पर सब बेकार. हंसिका और त्रिवेटा ने भी कोशिश की पर आर्यन बस फीकी से मुस्कान देता पैदल hi बढ़ा जा रहा था.

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रानी माँ हेमा अभी भी दुविधा में थी की आर्यन ने इशलिये जवाब नहीं दिया क्योंकि रति को ुष ने माँ चुना होगा. उधर अपने को विवाह के लिए सजवाती राजकुमारी माया के पास सन्देश आया की आर्यन, राजमहल लौट आया है पर बहोत दुखी है. वह किसी से बात नहीं कर रहा है बस गुमसुम है.

सब कुछ छोड़कर माया दौड़ती जब आर्यन को झुके कंधो के साथ सर झुकाये वापस अंदर आता देखि तोह तेजी से दौड़कर ुष से लिपट के बोली ," क्या हुआ आपको आर्यन, ऐसी सकल क्यों बना राखी है और आपके वाटर गीले कैसे हुए.... किसने आपके साथ गलत किया , बस नाम बता दिज्ये में उसको जान से मार दूंगी. मेरे आर्यन को दुखी करने की किस्मे हिम्मत आ गयी उसका वंश उजाड़ दूंगी में ....... "

देखते hi देखते राजकुमारी माया एक खुनी दानवे के रूप में बदलने लगी तोह आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के कहा," कुछ नहीं हुआ मुझे माया डार्लिंग बस थक गया हूँ चलते चलते ..... फिर तुम्हारे होते हुए मुझे कौन परेशां कर सकता है ".

माया अपने पुराने रूप में आकर आर्यन के गले लगकर उसको चूमने लगी ," पुछःह पहुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हैं न आर्यन ...... ी लव यू तू माय बेबी ...... एक बार उसका नाम बोल दो में उसको जिन्दा नहीं छोडूंगी ".

तभी रानी पुष्पलता ने पीछे से आकर बोलै," आर्यन मुझसे नाराज हो गया इशलिये ऐसा हो गया है ".

आर्यन को छोड़कर माया सीध दौड़ के रानी पुष्पलता के प्यार पकड़ के बोली," चमा कर दिज्ये रानी शैब्या मेरे आर्यन की गलती को हम दोनों यहाँ से दुर्र पृथ्वीलोक चले जायेंगे..... आप को कोई शिकायत का मौका नहीं देंगे ..... "

राजकुमारी माया भी शक्तिशाली थी पर पृथ्वीलोक पर रहकर वह प्रेम करना और बड़ो की इज्जत करना सीख गयी थी.... वह आर्यन के लिए सबसे माफ़ी मांगने के लिए त्यार थी जोह दानव गुण नहीं था.

आर्यन ने आगे बढ़कर राजकुमारी माया को उठाया और गले लगते हुए बोलै," अरे पगली में किसी से नाराज नहीं हूँ और यह सब तेरा मजाक उदा रही हैं. अगर मेरी प्यारी माया को किसी ने परेशां किया तोह हम दोनों किसी से बात नहीं करेंगे ..... है न माया ी लव यू बेबी ".

माया भी रोटी हुयी खुश होकर ," ी लव यू तू आर्यन मोरे थान एनीथिंग इन थिस वर्ल्ड ..... पुछःह पुछठ ..... आप सक्छ बोल रहे हो न ? "

माया ने दीप्ति से बहोत कुछ सीखा था और वह जानती थी धरतीलोक में आर्यन उनका नहीं होगा पर पतलोक में आर्यन को वैसा hi प्यार देगी. देखा जाए तोह माया hi आर्यन को समझ पायी थी एक इंसान के रूप में बाकी सब उसकी ताकत से प्रभावित थे. एक और थी उसकी जैसी स्वर्णलता जोह आर्यन को मानव रूप में hi प्यार करती थी.

रानी पुष्पलता को लग गया की यह माया, आर्यन का धरतीलोक वाले मानव रूप की पकड़ रखती है और खुश होती हुयी बोली," माया अब आर्यन को राजमहल में ले जाओ और घुम्यो. हम तब तक तुम्हारी माताजी से मिलते हैं ".

आर्यन भी प्रभा की चिंता करता समझ गया की यहाँ से कुछ नहीं होगा फिर ुष डायन जैसी कमीनी विशाखा जोह प्रभा के साथ है, मुझे कुछ ऐसा करना होगा विशाखा मेरी बेबी प्रभा को इन्फ्लुएंस न कर पाए. और माया कितनी अच्छी है सूंदर होने के साथ सॉफ्ट हार्ट भी," में तेरी आँखों में मेरी वजह से कभी आंसूं नहीं आने दूंगा माया ..... प्रॉमिस ".

माया जोह उसका हाथ पकडे हुयी थी बोली," गॉड प्रॉमिस आर्यन ".

आर्यन भी हसकर उसको गले लगाकर उसकी नादानी देखकर गाल चूम लिया ," चलो जाओ रेडी हो जाओ ".

माया ने उसका हाथ पकड़ा ," मुझे कुछ नहीं सुन्ना आप मेरे साथ hi रहोगे चाहिए यह विवाह हो या न हो".

आर्यन को खींचती अपने साथ लिए दासियों को निर्देश देती ले गयी अपने साथ अपने कक्ष में.

इधर अब बाकी दोनों दानव कन्यों के साथ तीनो रानियां और राजकुमारी त्रिवेटा और हंसिका वहीँ थी तब hi रानी हेमा और प्रभा की सगी माँ प्रकट हुयी ......

रानी पुष्पलता गुस्सा से ," आप कैसी माँ हो जोह अपने बेटे को बचने नहीं आयी फिर वह जबरदस्ती नागलोक जाने की जिद्द कर रहा था ".

रानी हेमा की बजाये जवाब स्वर्ण ने दिया ," माफ़ी चाहती हुयी रानी माँ अपनी बड़ी दीदी की तरफ से पर आर्यन आज कुछ सबसे अलग सुभाव में नजर आया, हम सब डर गए थे पर अभी माया ने उसको मन लिया जैसे छोटे बच्चे को मानते हैं ?"

रानी हेमा भी हसकर," वह अभी भी पतलोक में बस सीख hi रहा है और ुष समय अगर विशाखा उसको निगल जाती तोह प्रभा को मुक्ति मिल जाती. उसके सरीर पर दर्द नहीं दे पायेगा कोई पर हाँ आर्यन की आत्मा पर चोट मत करना. प्रभा को अभी भी वह छोटी नन्ही बच्ची समझता है और माया में उसको राजकुमारी दीप्ति नजर आयी जिससे वह मिलकर खुश होता हुआ उसकी बात सुनने लगा".

_______________

राजकुमारी माया अपने साथ आर्यन को अपने तिलसमी कक्ष में ले गयी जहाँ बिलकुल धरतीलोक जैसा माहौल था .....

आर्यन हस्ते हुए कहा," तेरे पर दीप्ति का इफ़ेक्ट ज्यादा नहीं है..... है है है .... बस अपनी छोटी भें प्रभा की चिंता ज्यादा रहती है मुझे. अब इतना तोह मुझे भी समझने चाहिए की यह hi उसकी असली दुनिया है. वैसे माया तू आज पहले से बहोत खूबसूरत लग रही है ".

आर्यन की तरफ पलट के मटकती हुयी चल में उसकी गॉड में बैठकर बोली," एक बार और बोलो आप न की में सुन्दर हूँ".

आर्यन ने उसकी चीन के निच्चे हाथ रखकर चेहरा ऊपर करके बोलै," माया तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की हो जिसको में दिलो जान से चाहने लगा हूँ".

माया ने आर्यन का हाथ हटा के उसके गले में लिपट के बोली," यह तोह आप हर लड़की को बोलते होंगे की वह आपको खूबसूरत लगी. मुझे कैसे अलग लगेगा की में सच्च में खूबसूरत हूँ ".

आर्यन ने उसका चेहरा उठा के अपने सामने करके पहले माथा चूमा तोह माया की पलकें बांध हो गयी फिर उन्ह दोनों झुकी पलकों वाली आँखों को चूमा फिर बारी बारी दोनों गाल कई बार फिर नाक ..... लास्ट में दोनों लबों को बारी बारी चूम के लास्ट में थोड़ी चूम के बोलै ," यू अरे थे मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन थिस यूनिवर्स ".

माया अपने लबों को खोली तोह उसको चूसने लगा ..... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह पुछःह पुछठ .... माया तुम बहोत मीठी हो अपने दिल की तरह..... "

आर्यन ने उसकी मदहोशी वाली आँखों को बारी से चूम के कहा," जब तुम उन्ह सब लड़कियों जैसी hi खूबसूरत हो तोह ज्यादा या काम बोल कर उनकी बेइज्जती किसी के सामने मुझसे तोह न होगी. माया हर औरत सूंदर होती बस सही नजर चाहिए वार्ना हवस या मजबूरी से सिर्फ ख़ाक hi मिली है".

माया ने आर्यन पर चूमि की झड़ी लगा दी ," पुछःह पहुछठ .... तुम बोलते बहोत हो ..... आज मुझे पूरा प्यार चाहिए विवाह के बाद ...... पुछःह पुछठ .... ी लव यू आर्यन ...... "

और फिर आर्यन से ढेर साड़ी बातें और जलपान करवा के उसको अपने कक्ष से बहार धकेलती हुयी वापस अपने सिंगार दर्पण के आगे गद्दी पर बैठकर बोली," मुझे आज ऐसा त्यार करो ताकि यह रात मुझको हमेशा याद रहे "..... और 4 दासियाँ राजकुमारी माया की तारीफ करती उसको फिर से स्पेशल त्यार करने में लग गयी ......

आर्यन अब एक कक्ष में आराम करते सोच लिया था की प्रभा को वह स्पेशल फील करवाएगा. अगर मेरी छोटी सी गुड़िया मुझे इतना प्यार करती है तोह उसका पूरा हक़ है मुझपर..... मगर िश विशाखा का कुछ करना हो बगैर प्रभा को हर्ट किये?

उधर राजा माया और राजा वासुकि भी किसी तरह आर्यन को उनकी पूर्ण शक्ति पाने से रोकने के लिए आखिर कार अपने लिए पियादे चुनन hi लिए..... दोनों अपने अपने लोक के हिमासुर और नागदंश को वरदान देने पर सहमत हो गए......

______________

रानी हेमा के कक्ष में......

रानी हेमा ने जवाब दिया ," आर्यन से बीटा सिर्फ विशाखा hi पा सकती है क्योंकि मेरी दी हुयी शक्ति से बाकी सब पुत्रियां hi जनम लेंगी पर चिंता क्यों करती हो वह पूरे पतलोक का राजा बनेगा और उसकी भेने उसको मदद hi करेंगी क्योंकि यह आर्यन के खून में है ".

रानी पुष्पलता ," लेकिन आपकी बेटी माया या मेरी छोटी भें स्वर्ण जीवट नहीं बचेंगी और न hi प्रभा ?"

रानी हेमा गंभीर होकर ," प्रभा को विशाखा ज़िंदा रखेगी पर यह कड़वा सच्च hi िंह दोनों को तुम्हारे साथ आर्यन का संसर्ग जिन्दा भी रख सकेगा. तुम दोनों बड़ी बहेनो और मेरी दो बड़ी बेटियां इशलिये hi तोह बच्चे पैदा नहीं कर पाएंगी ताकि उन्ह दोनों छोटी बहेनो के बच्चे तुम पालपोष के बड़े कर सको..... पुष्पलता याद रखना िश्मे पतलोक की भलाई है वार्ना कितने वर्षों बाद इतने प्रतापी बालक जनम लेंगे".

एक राज रानी हेमा ने भी छुपा लिया था की आर्यन के अंदर एक पवित्र संजीवनी शक्ति है जिससे उसकी औरत को ताकत मिलती है और उसके बच्चे की शक्तिशाली माँ भी बहोत खाश हो जाती है. यानी आर्यन hi बचा सकता है उन्ह तीनो को पर कैसे यह वह भी जानता होगा .

माया को चाय और साया आज अपने हाथों से त्यार कर रही थी...... स्वर्णलता और कामलता भी आयी हुयी थी और तीनो दानव कन्याँ को सलाह भी दे रही थी.

उन्होंने ने निरयने लिया ,चाय और साया पहले आर्यन के साथ मिलान करेंगी और उसके बाद hi माया की सुहागरात होगी.....

*******
 
नेक्स्ट अपडेट 10 मं .....

कीप रीडिंग एंड पोस्टिंग योर व्यूज एंड कमैंट्स ों थे स्टोरी......

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अपडेट 38 (पतलोक)

Part-4 (इ)

अब तक........

आर्यन अब एक कक्ष में आराम करते सोच लिया था की प्रभा को वह स्पेशल फील करवाएगा. अगर मेरी छोटी सी गुड़िया मुझे इतना प्यार करती है तोह उसका पूरा हक़ है मुझपर..... मगर िश विशाखा का कुछ करना हो बगैर प्रभा को हर्ट किये?

अब आगे......

आर्यन को कक्ष के बिस्टेर पर लेते सोच में डूबा देखकर साया ने उसके सीने पर हाथ रखा. आर्यन ने जब साया को अपने पास बिलकुल बन सवार के बैठे देखा तोह उसको छेड़ते हुए बोलै," क्या बात है साया तुम तोह आज किसी दुल्हन की तरह साझसावर के बिलकुल अप्सरा लग रही हो. किसको पता लिया तुम ने हमको भी बताओ ".

साया भी उसकी चुहलबाजी का मजे लेते बोली," है कोई पर तुम क्यों जल रहे हो जबकि माया को अपने प्रेम जाल में फसा के तुम भी तो उशसे विवाह कर रहे हो".

आर्यन हसकर ,"सॉरी माय मिस्टेक, बस इशलिये की तुम पहले मिल जाती तोह तुम को hi पता लेता ...... है है है ".

साया बड़बड़ाती हुयी ," अभी कुछ नहीं बिगड़ा है तुम हाँ तोह कहो".

आर्यन ," क्या कहा तुम ने?"

साया ," अरे में कह रही थी यहाँ अकेले क्या कर रहे हो चलो तुमको घुमाने ले चलती हूँ. एक बार मेरे साथ वहीँ चलोगे जहाँ पहली बार मिले थे ".

आर्यन हैरानी से ," पर वह तोह एक तिलसमी मायावी जंगल था राजा माया द्वारा बांया हुआ फिर वह गायब हो गया था".

साया ने उसका हाथ पकड़ के उठाया ," चलो तोह सही वह जंगल वहीँ है पर तुमने उसका तिल्सम वतासुर दानव को मार के तोड़ दिया था तो तुम और राजकुमारी दीप्ति उससे बहार आ गए. वहां चलते हैं फिर तुमको एक सूंदर जगह भी दिखाउंगी, अब उठ जाओ क्या आलसी की तरह पड़े हो".

आर्यन भी मुस्करा कर ," अच्छा अच्छा चलता हूँ, तुम ऐसा करो बाकी को भी बुला लो सब साथ चलते हैं ".

साया ने आर्यन की तरफ घूर के कहा ," सब वयसत हैं और में तुमको खा नहीं जाउंगी अकेला देखकर जोह डर रहे हो ".

आर्यन भी बड़बड़ाता हुआ हाँ जैसे पिछली बार तू ने कसार छोड़ी थी बिना खाये ," ठीक है में विस्तार बदल लेता हूँ, चाय भी बिजी है क्या ?"

अब साया के चेहरे पर सच्च में क्रोध वाले भाव आने लगे तोह आर्यन ने उसको आँख मार के कहा," गुस्सा मत हो में तुम से मजाक भी नहीं कर सकता क्या ".

और खड़ा होकर विस्तार उठा के परदे के पीछे जा बदल कर आया..... साया उसका हाथ पकड़ के खींचती हुयी महल के दूसरी तरफ से बहार ले गयी ताकि कोई देखे नहीं.

दोनों एक रथ में सवार होकर चल दिए राजमहल की सीमा से दुर्र ुशी जंगल की तरफ जहाँ दानव वतासुर को मारा था..... रस्ते में कई सूंदर दृश्य और 2 नगर भी पड़े.....

आर्यन ने एक बात नोटिस की यहाँ के वासी यानी दानव गण थोड़े शर्मीले टाइप के हैं जोह ज्यादा बातें नहीं करते. साया ने बतया की यहाँ सब हसी ख़ुशी अपने परिवार के साथ रहते हैं. दानवो में कई तरह के लोग होते हैं जैसे योद्धा, कर्मचारी और मेहनतकश. सब के अपने परिवार हैं और देखा जाए तोह कुरूर और दुष्ट कुछ एक होते हैं. हाँ सब दुसरे लोकों के लोगों को पसंद नहीं करते इशलिये तुमको अजीब नजरो से देखते हैं या फिर बात नहीं करते.

आर्यन ," हाँ फिर मुझे मानव समझ के खाने के इंतज़ार में रहते होंगे.... कहीं में अकेला मिल जॉन और झटपट मार के मुझे चबा जाएँ क्यों?"

साया जोर जोर से हसने लगी ," तुमको क्या लगता हम सब लोग बस मानुषो को खाते हैं क्या ? फिर क्या हमारी माँ या पिताश्री भी ऐसा hi करते हैं ? है है है है ....... "

आर्यन भी हसकर ," तुम्हारे पिताश्री जरूर खाते होंगे पर रानी माँ हेमा कभी ऐसा नहीं करती होंगी, वह तोह ममता की देवी हैं और बहोत डेलू माँ भी ".

साया ने कुटिल मुस्कान से बस एक बार आर्यन को देखा फिर मैं में सोची," अगर आर्यन को पता चला की माँ ( रानी हेमा) ने अपने क्रोध में करोड़ों मानव का मार के बलि चढ़ये थी तोह उनसे नफरत करने लगा. अब इश्को कौन समझाए यह जिस पृथ्वीलोक से आया है वहीँ उन्ह की कूख में hi उनका पुत्र मारा गया था. सिर्फ मानवो की गलती से ".

आर्यन ने जब साया को चुप देखा तोह बोलै," क्या सोच रही हो मुझे अकेले में मार के खाने का प्लान बना रही हो क्या?..... hi hi hi.hi hi ".

साया भी खिलखिलाते हुए बोली," प्लान तोह कुछ ऐसा है पर पूरा नहीं कहूँगी तुमको ...... hi hi hi hi hi ".

आर्यन भी झट से अपने पेट के निच्चे दोनों हाथ रख लिया अपने लुंड और तटों को छुपाते हुए ," उनकी तरफ देखना भी मत वार्ना में चक्का बन जाऊंगा यार तेरे मजए के चक्कर में..... मेरी बहोत साड़ी बीवियां और लवर्स हैं ".

साया भी आंखें नाचती हुयी है पड़ी," तुम तोह अभी से डर रहे हो मैंने कुछ किया भी नहीं ".

आर्यन उसको समझते हुए ," देखो साया भगवन ने औरत और मर्द बांये ताकि वह एक दुसरे को सुख देते हुए अपना वंश भी आगे बढ़ा सकें. अब तुम मर्दों के अंगों को खा जायेगी तोह उनकी औरशन का क्या होगा ?"

साया अब आर्यन के पूरे मजे लेती हुयी," पर क्या करूँ मुझे मर्दों के लिंग और वर्षं अच्छे लगते हैं. खाश कर मानवो के बहोत स्वादिस्ट और विरए से भरे वर्षं बहोत जाकेदार होते हैं ".

आर्यन भी सोचने लगा यह किस मुशीबत के साथ में अकेला आ गया, यह पगलेट दानव राजकुमारी तोह मेरे hi लुंड और तटों के पीछे पड़ी है..... अब इश्को मार भी नहीं सकता आखिर माया की बड़ी भें है और रानी माँ हेमा की सबसे बड़ी बेटी. फिर कुछ सोचकर बोलै," अच्छा यह सब छोड़ो, याद करो मैंने पृथ्वीलोक पर तुमको कितने शिकार करने दिए..... िश बार चलोगी मेरे साथ तोह डेली 10 शिकार तुम अकेली कर लेना ठीक है".

साया को आर्यन फैंटा दिखा तो बोली," अब मेरा दूसरों का शिकार करके खाने का नहीं है बस जबसे तुम्हारा लिंग और वर्षं देखे हैं वही नज़रो के सामने घुमते रहते हैं, अब तुम hi बताओ में क्या करूँ ?"

आर्यन को लगा यह पक्का पगला गयी है क्या ? उसको समझते हुए बोलै," देखो आज मेरी और तुम्हारी सबसे छोटी भें माया की शादी है, क्या उसके पास में झुनझुना लेकर जाऊंगा ?"

साया मैं में अब आया है बच्चू पकड़ में, आज तोह ऐसे न जाने दूंगी," आये तुम डरते क्यों हो में दुसरे किसी दानव के अंग लगा दूंगी अपनी शक्ति से पर मुझे एक बार चखने दो बस. में फिर कुछ नहीं मागूंगी ".

आर्यन ने अपना दिमाग़ लगते हुए, यह लगता है कभी ढंग के मर्द से मिली hi नहीं है तभी पागलों जैसी बात कर रही है....... " वैसे तुमको एक बात बता दूँ में तुझे खाने तोह नहीं दे सकता पर हाँ एक बार तुमको विरए चखा सकता हूँ".

साया थोड़ा मायूसी से ," देखो मुझे लगा तुम तो मेरी मजबूरी समझोगे इशलिये अकेले में यह बात करि..... तुम hi मेरी इच्छा पूरी कर सकते हो में कोई जबरदस्ती तोह कर नहीं रही हूँ".

आर्यन समझ गया की इश्से छोटी राजकुमारी चाय भी थोड़ी समझदार है पर एहि अभी भी वैसी hi है जबकि माया तोह कितनी अच्छी इंग्लिश के साथ मैनर्स और सब तौर तरीके भी सीख गयी है.

आर्यन ," चलो एक बार को में मान भी लूँ पर मुझे यह बताओ तुम क्या किसी मर्द के साथ संसर्ग करके खुश नहीं होती जोह इतना घिनोना शौक पाल ली हो".

साया अब रथ को जंगल के किनारे खड़ा करके आर्यन के साथ अंदर घुसते हुए बोली," हम तीनो भेने ुष दुष्ट दानव वतासुर के लिए शिकार ढूंढ़ती थी जोह भटक के मिल जाये, मानव तोह कभी कभार hi मिलते थे तो जोह आम दानव मर्द या औरत इधर आते तोह उनको पकड़ के ले जाते वतासुर के पास , मर्द हमको मिल जाता और स्त्रीओं को वह खूब भोग कर मार के खा jaata....m हमको मर्द से काम चलना पड़ता. कई बार संसर्ग भी किया पर वह डरे रहते तोह मजा नहीं आता था पर उनके अंग खाकर अपनी तृप्ति करते. फिर तुम दोनों मिले बहोत वर्षो बाद मानव को देखकर हम सब hi पागल हो गए थे. उसके बाद तोह तुम को पता hi है जोह तुमने और राजकुमारी दीप्ति ने किया".

आर्यन ," फिर भी तुम मुझे अकेले लेकर यहाँ आयी हो यह जानते हुए भी की में तुमको तुम्हारी बदनीयत के लिए मार भी सकता हूँ फिर भी ऐसा दुःशासह करना चाहती हो. साया तुम अच्छी दांया कन्या भी तोह बन सकती हो अपनी दोनों छोटी बहेनो जैसी".

साया जोह आगे चल रही थी रूककर आर्यन की तरफ पलट के बोली," में उन्ह दोनों जैसी सूंदर कहाँ हूँ और सब माया को hi पसंद करते है. चाय थोड़ी मसकेबाजी जानती है तोह अपना स्वाभाव बदल लेती है, में उन्ह दोनों के जैसी नहीं हूँ. फिर तुम ने भी माया को hi पसंद किया विवाह के लिए जबकि सबसे बड़ी में हूँ मेरा हक़ पहले बनता था ".

आर्यन उसको सीरियस देखकर ," लेकिन तुम तोह महल में बता रही थी तुम ने भी किसी को पसंद कर लिया है फिर सूंदर तोह तुम उन्दोनो से ज्यादा हो क्योंकि तुम कोई आवरण अपने ऊपर नहीं उधोति न hi घूम फिर के बात करने की बजाये सीधा सीधा बोलती हो. ऐसा सिर्फ कोई सच्चा दानव या मानव hi कर सकता है. तुम बड़ी हो तोह दोनों छोटी बहेनो को आजादी है कुछ गलत भी कर दें उनकी बड़ी दीदी यानी तुम देख लोगी या संभाल लोगी. तुम अपने को काम मत समझो साया, और रही मेरी बात तोह तुम खुद सोचो में कैसे हिम्मत कर सकता हूँ इतनी बड़ी राजकुमारी के आगे अपनी जुबान भी खोल पौन. में तुम्हारे काबिल नहीं हूँ और माया खुद मेरे साथ मेरे जैसा बनकर रहना चाहती है. उसकी मोहब्बत को ठुकरने उसके प्रेम और त्याग को गाली देने बराबर है ".

साया ने आर्यन की नीली आँखों में देखते हुए उसकी हर बात सच्च hi महसूस की पर उसने बिना कोई रिएक्शन दिए कहा ," हम नजदीक पहुंच गए हैं, आओ तुमको पहले सरोवर दिखती हूँ फिर वह गुफा ".

आर्यन ने महसूस किया की साया सच्च में अकेली है, आखिर इश्कि क्या गलती है हर कोई अलग अलग नेचर का होता है. मेरे परिवार में hi कोई एक जैसा नहीं है सिवाए Dimple-Payal दीदी को छोड़कर. साया वहां धरती पर भी सिर्फ मेरे लुंड और तटों के लिए गयी थी या मेरा प्यार पाने. देखते हैं आखिर इश्के दिल में क्या है अगर मेरे अंग इश्को ख़ुशी दे सकते हैं तोह क्या गम करना पर बाकी सब मुझे जान से मार देंगी. कभी कभी किसी एक की खुसी के लिए अपनों को hi बड़ा दुःख देना पड़ता है.

दोनों ुष सरोवर के पास पहुंचे तोह बहोत hi सूंदर नजारा था , हरे भरे जंगल में नीला और हरा रंग लिए विशाल सरोवर का पानी और जंगल की पानी में बना प्रतिबिम्ब खूब मनोहर लग रहा था.

आर्यन ," यह आज कितना सूंदर लग रहा और तुम भी बहोत सूंदर हो साया िश सरोवर की तरह ".

साया अब हलके से मुस्करा दी," चापलूसी करने से चाय खुश हो जाती है, मुझपे असर नहीं होता ".

आर्यन हसकर ," हाँ भाई हम तोह हैं hi चाप्लूश फिर भी मैंने तारीफ दिल से की है..... वैसे तुमने अभी तक जवाब नहीं दिया की तुम इतना त्यार होकर किस खुस किस्मतवाले से मिलकर आयी थी ".

साया ," में तुम्हे hi किस्मत वाला बनाने आयी थी पर तुम ने दलील hi इतनी रख दी की अब में खुद दुविधा में हूँ".

आर्यन ," मतलब में समझा नहीं ".

साया ," चलो अब गुफा को भी देख लो क्या हज़ार किया था तुम दोनों ने वतासुर को मारने में".

आर्यन को साथ लिए जब कुछ दुर्र चलने के बाद वह गुफा की जगह पहुंचे तोह देखा वहां एक सूंदर सा सफ़ेद महल था गुफा की जगह और यह बिलकुल दीप्ति के अलवर राजमहल जैसा था पर वाइट कलर का.

आर्यन का खुला मोह देखकर साया हसने लगी ," है है है है ...... यह तुम्हारी होने वाली प्रिये माया ने hi बांया है और इश्को सझया है चाय ने. विवाह के बाद तुम दोनों यहीं रहा करोगे और जोह हमारे बिच बातचीत हुयी उसको भूल जाओ. में मजाक कर रही थी और तुम फँस भी गए मेरी बातों के जाल में".

आर्यन ने देखा उद्यान के साथ गेट से लेकर नक्कासी और हर पोजीशन वैसी hi थी. बस उसको सूंदर बनाते थे बहुमूल्य नाग , मणि , रतन और अनगिनत ज्वेल्स जोह हर तरफ जड़ित थे.

आर्यन," वाओ सू ब्यूटीफुल यार ..... मेरा मतलब था अतिउत्तम पर क्या यह असली है? "

तभी सामने से आवाज आयी ," 100 % असली है , प्रेम की बुनियाद कोई झूटी रखेगा.... माया ने बहोत म्हणत से बांया है "...... यह चाय की आवाज थी जोह बिलकुल साया जैसी hi सजी धजी थी..... बस ड्रेस का कलर अलग था , साया जहाँ सिल्वर कलर की ड्रेस में थी वहीँ चाय पर्पल कलर की......

आर्यन की नजर उसको ढूंढने लगी की अब वह भी आती होगी पर वह आयी नहीं, तब उसकी बेसब्री देखकर चाय ने उसके कंधे पर तप किया तोह आर्यन उत्सकता से पुछा," माया क्या अंदर इंतज़ार कर रही है मेरा?"

चाय ने एक बार साया की तरफ देखा तोह वह भी कंधे उचका दी जैसे कह रही हो मुझसे नहीं कहा गया आर्यन को..... चाय ने अपने माथे पर हाथ मारा ," सावन के गधे को घास hi घास दिखती है".

आर्यन उसकी बात सुनकर ," ओह hello सावन के अंधे को हरा hi हरा दीखता है , यह कहावत है और तू मुझे गधा कह रही है ".

चाय थोड़ा चिढ़कर ," आर्यन या तोह तुम बहोत बड़े नौटाकणी बाज हो या हमको बेवकूफ समझ रहे ho.....Tum अटाला लोक में इतना समय बिता कर अब यहाँ तळतळा लोक बस हसी ठिठोली करने आये हो. वहां नागलोक में प्रभा की ज़िंदगी भी डाव पर है क्यूंकि उसकी बढ़ती ऊर्जा को तुम रोक सकते हो वार्ना सब ख़तम हो जायेगा. हम तीनो दानव भेने पृथ्वीलोक तुम्हारे लिए hi गए थे पर वहां के बजाये हम ने पतलोक चुना तुमसे प्रेम करने के लिए. यह सपनो का महल माया ने बांया की हमारे प्रेम का गव्हा रहे पर तुम क्यों हम सबसे भाग रहे हो ?"

आर्यन ," मतलब जब तुम सब ने प्लान कर रखा है कोई मुझे भी बताओ करो की ऐसा हुआ है और हम आगे ये करेंगे..... और हाँ मुझसे तुम दोनों तमीज से बात किया करो में तुम दोनों को अपनी साली समझता हूँ ...... "

और आर्यन दौड़ लिया महल की तरफ यह सब मेरा hi चुटिया काट रही हैं..... बहनचोद चुदाई करनी है तोह साफ़ साफ़ बोलना चाहिए न.

उसके मोह से साली सुन्न दोनों बहेनो की झांट झुलस गयी, चाय," इश्कि तोह ..... ृक्क तू जरा , दीदी जरा पीछे से पकड़ना इश्को में दूसरी तरफ से घेरती हूँ ..... बच्चू आज तू नहीं बचेगा ".

साया झट से गायब होकर आर्यन के सामने आयी तोह राइट साइड मुड़कर दौड़ लगा दी ...... वह फिर उसके सामने प्रकट होकर अपनी बाँहों में जकड़ना चाही तो फुर्ती से निचे झुक के उसके पेट पर गुल गुली कर जोरसे छलांग लगता िश लम्बे चौड़े गलिहारे के अंतिम चोर पर उसको जीभ चिडता घुस गया ुष महल के विशाल राजदरबार वाले हॉल में ...... उसकी अंदर की सजावट देखकर ठिठका पर अगले hi पल चाय को सामने और साया को सीढ़ी तरफ देखकर हँसा और अब मंदक की पोजीशन बना के फुदक फुदक के इधर उधर कूदने लगा ," पकड़ के दिखाओ बिना कोई शक्ति इस्तेमाल किये तब मानु महँ राजा मयासुर की बेटियां हो ".

अब तोह अगले एक घंटे आर्यन मंदक की तरह उछाल के लौट लौट कर इधर से उधर पूरा राजमहल घुमा डाला पर दोनों भेने उसको जैसे hi पकड़ने की कोशिश करती वह फिसल के उनकी पकड़ से निकल जाता.

दोनों थक कर आखिर में उसको राजदरबार के राजसिंघासन पर बैठा मुस्कारते देखि तोह और चीड़ गयी.....

आर्यन ने ताली बजे तोह 4 दासियाँ 4 बड़े बड़े थाल लिए राजदरबार में आयी तोह दोनों हैरानी से देखने लगी, तब आर्यन बोलै," इनको माया ने भेजा है , रोशीघ्र में जलपान त्यार कर रही थी तब मैंने बोलै जब राजकुमारियां थक जाएगी तब लाना".

चाय भी हस्ती हुयी," मान गयी आर्यन अगर हम ने कोई शक्ति इस्तेमाल नहीं की, तुम ने भी नहीं की पर इतनी फुर्ती मैंने किसी में नहीं देखि. आओ दीदी अपनी हार मानने कोई बुराई नहीं ".

साया ," हाँ तू सही कह रही है मैंने इतनी म्हणत कभी नहीं की थी"..... आखिर दोनों शक्तिशाली राजा मयासुर की बेटियां थी और शक्ति का उपयोग हमेशा करती थी पर आज आर्यन ने उनका पसीना hi निकलवा दिया ......

दोनों अब सिंघासन की आर्मरेस्ट पे आर्यन के अगल बगल बैठी थी और सामने एक बड़ी से बेंच टेबल पर दासियों ने थाल और कई शीतल पेय भी सजा दिए.

चाय अब शीतल पेय पीती हुयी पूछी," आर्यन यह सब करतब देखकर लगता है तुम पहले भी करने में निपुण हो".

आर्यन ने उसके मोह में अपने हाथ से एक घोस्ट का बड़ा टुकड़ा खिलते हुए कहा," बस ऐसे hi यार, मेरी छोटी भें है न अणि वह बहोत स्ट्रांग और मुझसे भी तेज है..... उसको कोई हरा hi नहीं सकता बस कभी कभी उसके साथ ऐसी hi तरकीब अपनानी पड़ती है जिसमे उसका ध्यान तुम्हारी तरह मुझे पकड़ने में रहता है और में सिर्फ डोड्जिंग करता हूँ उसके मूव देखकर...... "

साया ने आर्यन को टोका," तुमको पता है, अणि, वास्तिविकता में कौन है ? धरतीलोक के प्राचीन काल की महा शक्तिशाली महारानी विजयलक्ष्मी ...... उसको कोई धरतीलोक पर तोह नहीं हरा सकता. पतलोक के किसी महाबली में साहस नहीं है उसका मुकाबल कर सके पर ुष की शक्तियां धरतीलोक तक hi ज्यादा हावी हैं और पतलोक वह कभी भूल के भी नहीं आएगी ".

आर्यन ने अब साया को भी मार्श का टुकड़ा खिलते हुए अपने हाथ में उसका पात्र लेकर पिलाने लगा...... चाय अब सिंघासन के एआरएम रेस्ट से उठकर आर्यन की गॉड में बेथ गयी ," आर्यन में बहोत थक गयी हूँ मुझे भी खिलो न ".

आर्यन ने दोसरा गोश्त का बड़ा पीेछे उसको खिलने लगा और दुसरे हाथ से शीतल पेय पीला रहा tha......Chaya भी छोटी बच्ची की तरह उसको भी खिलाती.

साया बस देख रही थी तब चाय ने उसको आँख मार के इशारा किया आप भी आ जाओ यह ऐसे hi पकड़ में आएगा. साया ने भी देखा था की आर्यन अपनी जुड़वाँ मीणा को बहोत प्यार करता है, यहाँ तक की अपनी प्लेट में hi उसको अपने हाथ से खिलायेगा. वह तोह अपनी माँ रति क्या सबको प्यार से खिलते था.

साया को इतने प्यार से पहली बार आर्यन ने खिलाया था तोह आर्यन की तरफ खिश्कार अपने चूतड़ उसकी राइट जंघा पर रखकर बोली," मुझे भी भूक लगी है आर्यन ".

आर्यन अब बारी बारी दोनों को खिला रहा था और शीतल पेय पीला भी रहा था ...... दोनों अब नखरे भी करती तोह आर्यन उनके गाल चूम के मन लेता...... कहते हैं प्रेम और पानी अपना राष्ट ढूंढ लेते हैं .......

हजरों साल दानव वतासुर की गुलामी झेलने वाली उसकी गुफा की जगह पर बनाये सूंदर महल के सिंघासन पर साया और चाय आज आर्यन की गॉड में बैठकर खाते पीती बहोत खुश थी. वहीँ सबसे छोटी माया ने अपनी सुहागरात के साथ दोनों बड़ी बहेनो के मिलान के लिए अपनी सबसे बुरी यादों वाली जगह चुनी.

मगर यह तोह समय hi बातयेगा की अपनी ख़ुशी चुनी या अपने पिताश्री राजा मयासुर की मौत.....?????

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नागलोक.......

राजा माया अब राजा वासुकि के साथ नागलोक की सबसे अँधेरी सुरंग जैसी गुफा में थे .......

राजा माया ने अपनी पूरी वठा जब बताई तोह उनके सामने सैकड़ों पहनो पर लगी शक्तिशाली मणियों के प्रकाश लिए राजा वासुकि , दानवो की प्राचीन भासा में बोले," यह मुझे गायत है राजा माया पर में भी एक तरह से एहि चाहता हूँ. मेरी शक्ति मेरी पुत्री विशाखा से जुडी थी और में एहि चाहता था की वह एक hi है जोह सबसे ताकतवर पुत्र को जनम देगी और मेरी राजगादी वह पुत्र संभालेगा. तुम खुद सोचो तुम्हारे लोक में कितनो सालों से कोई उत्तराधिकारी आया क्या? आर्यन के अंदर अब दानवी महाशक्ति " गाजा शक्ति " है..... यानी दानव या आसुरी शक्ति पर वह रानी स्वर्णलता और राजकुमारी माया दोनों आपकी hi वंशंज है ुष शक्ति को गर्भ में लेंगी. आर्यन सिर्फ एक श्रुत hi तोह हुआ ना उत्तराधिकारी प्रपात करने के लिए, बस उसके माध्यम से हम सबको उत्तराधिकारी मिल जायेंगे अगर हम अड़ंगा न लगये तोह वर्ण हज़ारो साल तक कोई इतनी ऊर्जा या शकितयाँ संभाल पायेगा यह hi एक विषय था..... भगवन शिवशंभु के साथ सब का आशीर्वाद है िश बालक, आर्यन, पर.... हमको उसके मार्ग का रोड़ा न बनकर उसको ुष मार्ग से गुजरने देना चाहिए..... आपकी भार्या रानी हेमा ने ऐसे hi उसको पुत्र नहीं चुना है, आर्यन के लिए पृथ्वीलोक जैसा माहौल और रिश्ते भी बांये गए हैं अपनी नफरत को दुर्र रखकर ....... वह जितना प्यार और स्नेह पायेगा उतना hi सब सरल होगा वार्ना ुष ने क्रोध में आकर दिव्या तलवार का आह्वाहन करते हुए धारण कर ली तोह हमारा भरमांड hi ख़तम न हो जाये जैसा वह पहले भी कर चूका है ".

राजा माया भी अब आशय से हो गए," अब तोह जीवन देने के अल्वा कोई चारा नहीं बचा राजा वासुकि ? पर कहीं हम सबका विश्वास hi न टूट जाये और सब तभा हो जाये जोह देवता गण जरूर चाहेंगे ".

राजा वासुकि ," ऐसा नहीं है राजन, देवताओं का अष्टीवत तोह दानवो के बाद हुआ फिर हम और आप हैं तोह बुराई का प्रतीक और वह अच्छे का. लेकिन वह इतनी अच्छे होते तोह कभी हमसे न हारते और हम इतने बुरे होते तोह हमको कोई वरदान क्या भरमांड के सबसे अच्छे लोक न मिलते..... बस हम ने अपने उपासक नहीं ढूंढे न अपने लोकों में किसी को न आने दिया जबकि जिसको उन्होंने चाहया वह अच्छे करम करके स्वर्ग लोक तक गया...... लेकिन हमने भी किसी बुरे करम करने वाले को पतलोक नहीं आने दिया जबकि हमसे बुरा तोह पूरे भरमांड में कोई नहीं है ऐसा सब को दिखाया गया है..... फिर क्यों हर दानव नरकलोक नहीं जाता, और जोह अच्छा है वह परात्मा में लीं होता है जोह सौभाग्य देवताओं को भी नहीं मिलता. हम नाम और आयु से भी अमर हैं और देवता सिर्फ नाम से. लेकिन एक कार्य उन्होंने भी किया है और हमने भी की कभी अपने लोकों पे आंच आयी तोह खुद को नौछावर होकर पुर्नजन्म लिया पर यह भरमांड नहीं मिटने दिया".

राजा माया ," फिर आर्यन में क्यों देवता की कोई रूचि न होना दर्शता है की वह उसको भी बुरा समझते होंगे ".

राजा वासुकि ," में भी एहि समझता था पर भगवन शेषनाग से जब संपर्क करके एहि सवाल किया तोह उनका जवाब hi सब गुथी सुलझा दिया..... हम किस्मत वाले हैं की दिव्या तलवार यहाँ तक आर्यन को लायी पर आर्यन के दुसरे जनम का इंतज़ार महारानी विजयलक्ष्मी करती आयी है. वह देवतों की बेटी है और िश जनम में आर्यन की सगी छोटी भें बनकर जन्मी hi ....."

राजा माया ," वह यहाँ पतलोक में प्रवेश नहीं कर सकती मारी जाएगी यह आप भी जानते हो ".

राजा वासुकि," हाँ यह सत्य है की वह यहाँ नहीं आ सकती पर दानव गुरूजी का आर्यन के लिए प्रेम वाला संवाद याद है..... आर्यन की जान बस्ती है ुष अनीता सिंह नाम की अपनी छोटी भें में जिसको धरतीलोक पर सब प्रेम से 'अणि' कहते हैं जोह आर्यन ने प्रेम से उसको नाम दिया उसके जनम के बाद और वह hi अब महारानी विजयलक्ष्मी है...... यानी जिस दिन ुष ने ठान लिया तोह आर्यन बर्बाद कर देगा सब कुछ उसके लिए लेकिन कुछ तोह उसका भी लालच है जिसके लिए उसने सब जानते हुए आर्यन को पतलोक आने दिया. यानी देवता गण हम से 2500 साल पहले से जानते हैं की महार्यं फिर पूर्ण जनम लेगा आर्यन के रूप में मगर महाशक्तियों का स्वामी जिसको हम भी अपनाएंगे लेकिन होगा हम सब का भी भला यानी उनको नुक्सान का डर ज्यादा है पतलोक के लाभ से ".

राजा माया भी अब डर गए उनसे बहोत बड़ी गलती हो गयी ," फिर आप भी क्यों त्यार हो गए नागदंश को वरदान देने के लिए और में हिमासुर को वरदान देकर आ रहा हूँ?"

राजा वासुकि," हम राजा हैं दोनों के और आर्यन से मुकाबला है तोह पहले उन्हसे hi जीत ले तब प्रभा के रूप में पक्का विशाखा उसकी परीक्षा लेगी..... यहीं हमारे हाथ बंधे हैं राजा माया क्योंकि दो बहोत बड़ी शक्तियां आपस में hi चुनाव कर सकती हैं. हम सबके लिए आर्यन का जीतना जरूरी है वार्ना कितने हजारों साल बस शक्तियां hi रहेंगी हमारे पास पर कोई उत्तराधिकारी नहीं".

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नागलोक की विशाखा की गुफा में .....

प्रभा अब अपनी बड़ी भें विशाखा से लड़ रही थी ," आप मेरा सरीर छोड़ दो, मैंने गलती की आपको माफ़ करके ...... में आज अपने बड़े भाई को मार डालती जिसने मुझे एक बेटी की तरह बड़ा किया...... में नहीं जीना चाहती यह नागिन वाली जिंदगी ".

विशंका भी गुस्से से ," जब मैंने बोलै मुझे बहार आने दे, नहीं दीदी में संभाल लुंगी फिर तू भूल रही है उसके अंदर कितने भरमांडो की ऊर्जा है ...... मैंने खुद नागिन वाला रूप नहीं धारण किया था पर जब विष उसके अंदर गया तोह उसका थूक भी हमारे मोह में आया पूरा रूप स्वतः hi बदलता चला गया में क्या करती...... मैंने खुद रोकने की कोशिश की फिर सोचा जब हम रुक नहीं पा रहे तोह वह भी रूप बदल लेगा इशलिये उसके सरीर पर जगह जगह काट के ज्यादा विष दाल रही थी लेकिन हुआ नहीं तोह मेरी की क्या गलती है ".

अभी भी नागिन के रूप में दो पहन थे िश शक्तिशाली नहीं के ,कमर से ऊपर स्त्री के नंगे यानी उनके धड़ के निच्चे जुड़ा सर्प सरीर था और ऊपर दोनों सूंदर नागिन एक प्रभा और दूसरी विशाखा ..... पहली के सर पर 2 और दूसरी के सर 3 मणियों वाले सर्प मुकुट थे और दोनों का वाद विवाद चल रहा था अपनी गुफा में .......

प्रभा रूट हुए ," ऐसे तोह में कभी भाई को पा नहीं पाऊँगी और रही सही कसार आप पूरी कर देती हो..... वह मेरे लिए जान भी लुटा देगा पर उफ़ नहीं करेगा, आप को क्या फर्क पड़ेगा जब अपनी सगी भें मुझे पिछले जनम में मार के निष्कासित hi कर दिया नागलोक से ".

विशाखा भी अब थोड़ी ठंडी पड़ती हुयी," वह अलग समय था प्रभा पर अब में वैसी नहीं हूँ मेरी भें, अगर तू सच्च में यह मान रही है मेरी वजह से ऐसा हुआ है तोह तू hi मेरा सर काट के फ़ेंक दे उफ्फ्फ तक नहीं करुँगी पर क्या मुझे मार के तुझे आर्यन मिल जायेगा ?"

अब प्रभा भी उसके तारक पर सोचने लगी आखिर वह करे तोह क्या करे..... प्रभा," बस मुझे अकेला छोड़ दो जब आपकी जरुरत होगी में याद करुँगी ".

विशाखा भी कुछ न बोली पर वह भी हैरान थी की आर्यन सरीर से जीवट किस्म का है और दिल से बिलकुल भोला, मगर वह इतना सहनशील होगा यह ताजुब की बात है. प्रभा उसको नहीं झेल पायेगी मुझे hi कुछ करना होगा पर वह दिव्या तलवार का मालिक फिर से बहार आएगा ..... सोचते हुए वह गायब हो गयी और प्रभा अब सिर्फ अकेली अँधेरे में आंसूं बहती सू गयी ......

उसको एक नाग के रूप में आर्यन का सन्देश भी आया रानी पुष्पलता की तरफ से पर उसने बगैर पढ़े नष्ट कर दिया. वह किसी से मिलना नहीं चाहती थी बस खुद को अपनी गुफा में कैद कर लिया.

इधर प्रभा की रानी माँ परेशां होती रानी हेमा के पास आयी तोह उन्होंने कहा," यह तोह अच्छा hi हुआ की प्रभा अब विशाखा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देगी. प्रभा एक नयी आशा की किरण बनकर पुर्नजन्म लेकर नागलोक का भविष्य सवारने hi आयी है बस धरतीलोक पर उसका आर्यन से रिश्ता दोनों के बिच दीवार जरूर बनेगा पर तोड़ hi देंगे दोनों. उन्ह दोनों का एक दुसरे के निस्चल लगाव है. विशाखा पहली भी लालची और शक्तियों की भूकी थी और अब भी वैसी hi होगी पर उसकी जरुरत है नागलोक के उत्तराधिकारी के लिए तभी तोह अभी भी जीवित है. हो सकता है आर्यन से मिलान के बाद उसकी सोच बदल जाये मगर आर्यन अपनी मर्जी का मालिक है वह प्रभा के लिए तोह सब कुछ करेगा पर विशाखा को अपना पायेगा यह देखना होगा.

प्रभा की रानी माँ," रानी हेमा मेरे लिए दोनों बेटियां hi अनमोल हैं बस विशाखा को लाड ज्यादा किया और उसकी जिद्द के आगे झुकना हमारी hi गलती थी..... प्रभा ने खुद को कैद कर लिया है अब कल क्या होगा ?"

रानी हेमा बड़े इत्मीनान से बोली," जा कर तयारी करो कल आपकी दोनों पुत्रियों का स्वयंवर होने के बाद विवाह है , मेरा पुत्र आर्यन जरूर आएगा आप बिफकार रहिये ".

प्रभा की माँ चिंतित होकर पूछी ," लेकिन वह जीत पायेगा, नागलोक में नागों का बल 100 गुना बढ़ जाता है फिर वह तोह नाग भी नहीं है".

रानी हेमा मुस्करा के ," आप व्यर्थ hi चिंतित हो रही हैं वह किसी के लिए नहीं बस प्रभा के जीतने की हर कोशिश करेगा, आखिर कैसे वह अपनी सब से लाड़ली छोटी भें को किसी और की होने देगा. मुझे आर्यन के लिए डर नहीं है बस विशाखा कुछ अनिष्ट न करवा दे उशसे ".

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सफ़ेद राजमहल महल......

जैसे आर्यन अभी राजा त्रिभुवन के सिंघासन पे बैठा था और उसकी एक एक जंघा पर गीता और दीप्ति बैठी हो ..... कितना मनोरम दृश्य होगा पर कुछ अलग था.... यह शामे अलवर राजमहल की कॉपी एक वाइट महल था तळतळा लोक में और उसकी गॉड में राजा माया के दो बड़ी पुत्रियां राजकुमारी साया और चाय बैठी थी और प्रेम से उसके हाथो से खा पि रही थी.

दोनों के लिए उनके हज़ारों साल के जीवन का सबसे सुखद पल था वार्ना उन्होंने एक हिंसक दानवी की तरह बस नोचा खोस्टा था......

राजकुमारी माया ने जब झाँक के देखा तोह मुस्करा के अपनी दासियों के पास गयी..... " में िश महल को मंतर से अदृश्य कर रही हूँ तुम उनकी सेवा करना और जुबान खुली तोह जीवट नहीं बचोगी ".

राजकुमारी माया बस देखने आयी थी की आर्यन के पास उसकी दोनों बड़ी भेने खुश रहेंगी की नहीं ...... पर गीता और दीप्ति की जगह अपनी बड़ी बहेनो को बैठे देखा तोह समझ गयी की आर्यन आज दोनों को स्त्री होने का असली आभास करवा देंगे.

राजकुमारी माया और रानी स्वर्णलता दोनों सबसे छोटी भेने थी पर दोनों अपनी दोनों बड़ी दीदी पर जान वार्ति थी और एहि गुण उनको अपने चुने प्रीतम आर्यन को अपनी hi दीदियों के साथ बाटने में ख़ुशी hi दिया न की इर्षा का एक भी छोटा सा अंश.

आर्यन उनके जीवन में अभी आया था और वह मानव है उसकी जीवन आयु भी कितनी होगी एहि कोई 80-100 साल के लग भाग पर वह सब हज़ारों साल से सगी भेने थी. जीवन के हर उतर चढ़ाव देखे थे पर यह खुसी के पल हैं इनको समेत के उनको ना जाने कितने हज़ारों साल और जीना हो...... फिर आर्यन की दुनिया पृथ्वीलोक पर है वह वहीँ खुश रहेगा हम उसको यहाँ बाँध कर कहाँ रख पाएंगे...... राजकुमारी माया तोह आर्यन के हर परिवार के साक्ष से पर्सनली मिली थी, उसको पता था अगर आर्यन को यहाँ रोका तोह उन्ह सबके प्राण hi चीन की बात है पर वह चाहती थी अपना धरतीलोक का जीवन पूरा कर आर्यन हमेशा के लिए यहाँ पतलोक में आ जाए...... मगर उसको भी नहीं पता था की आर्यन का धरतीलोक पर भी जीवन कुछ hi दिनों का है अगर जीवट बचा तोह .....?????

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अपडेट 38 (पतलोक)

Part- 5 (ा)

दोनों के मोह एक रुमाल जैसे अपने विस्तार से पहुंचा तोह चाय ने आर्यन का लेफ्ट गाल पर किश करके कहा," थैंक्स आर्यन, आज लगा जैसे में पहली बार खा रही हूँ ..... ी लव यू यार ..... पुछःह पुछठ ".

साया भी धरतीलोक का कल्चर जानती थी और चाय को अनुसरण करना सही रहेगा ...... उसने भी आर्यन का दूसरा गाल झिझकते हुए चूमा ," थैंक्स आर्यन, चाय सही बोल रही है इतने प्यार से हमको हमारे माँ बाप ने भी कभी नहीं खिलाया होगा ".

आर्यन ने बारी बारी दोनों के गाल चूम के बोलै," अरे थैंक्स की बात कहाँ से आयी, मैंने hi तुमको परेशां करके दौड़ा दौड़ा के थका दिया था तोह no सॉरी और no थैंक्स. माँ बाप की जगह कभी किसी को मत देना वह दोनों महँ हैं, उनकी वजह से हमको जीवन और उसको अच्छे से जीने का मौका मिलता है..... ाचा जाओ तुम दोनों आराम करो में जरा महल घूम के आता हूँ".

आर्यन ने ताली बजे तो वही 4 दासियाँ आ गयी..... साया तोह गॉड से कड़ी हो गयी पर चाय बोली," नहीं में नहीं थकी हूँ बस तुम्हारी गॉड से उठने का मैं नहीं है मुझे अपनी पीठ पे बिठा के ले चलो में भी तुम्हारे साथ रहूंगी ".

आर्यन ने चरों दासियों को बोलै," ऐसा करो तुम सब आराम करो हमको जरुरत होगी बुला लेंगे, वैसे मैंने पूरा महल देख लिया है तोह में संभाल लूंगा".

सब सर झुका के खाली थाल और बर्तन उठा के ले गयी तब आर्यन ने चाय की कमर में गुड्डूड़ी करते हुए कहा," तू ज्यादा बदमाशी नहीं कर रही नौटंकी ".

चाय ने आर्यन का गाल चूम के कहा," याद करो तुम ने वादा किया था पर अभी तक निभाया नहीं है, हम इंतज़ार कर रहे हैं ".

आर्यन अब सकपकते हुए उत्तर दिया ," हाँ हाँ याद है तुम मेरे साथ धरतीलोक चलना में नहीं मुकरुँगा ".

साया हैरानी से पूछी ," कैसे वादा चाय ?"

चाय कुछ बोलती ुष से पहले hi आर्यन खड़ा होकर िश अपने से 6 इंच लम्बी और 50कग ज्यादा वजनी चाय को अपनी पीठ पर बिठा के बोलै ," चलो चलो घूमते हैं".

साया को चाय से मान मर सन्देश मिल गया, जब राजा जबर सिंह के सामने अलवर महल में आर्यन अनजान बनकर चाय की मदद से उसकी तीनो रानियों को एक साथ, उसको अलमारी में कैद करवा के चूड़ा था तब सुबह सुबह वादा किया था उसको भी पूरा प्यार देगा .

साया मैं में चाय को बोली," यह मुझसे डर रहा है चाय कहीं में इश्क लिंग और वर्षं न खा जॉन".

चाय हैरानी से रोष प्रकट की ," आप अपना दिमाग़ ठीक करो दीदी, यह ऐसा वैसा कोई आम मनुष्य नहीं है यह अब हमारा भी नर (पति) है माया की तरह पर आप ऐसा सोची भी कैसे, यहाँ की छोड़ो वहां धरतीलोक पर तोह जीते जी सबको मारने की बात कर रही हो ...... आपकी दवात के लिए में 1000 सोसिप्स साइलेंट रीडर्स ले आयूंगी पर इश्को बक्श दो यह नपुंसक हो गया तोह स्टोरी कैसे चलेगी".

साया गुस्से से उसको मैं में केहि ," चुप एक दम चुप मैंने नहीं यह hi सोचे बैठा है और तू सब पर इलज़ाम लगा रही है फिर वह साइलेंट रीडर्स तोह अदृश्य होते हैं उनकी क्यों मरवाने की सोची ".

चाय मुस्करा के बोली," आप बस मेरी हाँ में हाँ मिलना और येड़ा बनकर पैदा खाने के लिए रेडी रहो उन्ह रीडर्स की तरह है है है है है..... माया आयी थी और हमको आर्यन के साथ देखकर चली गयी ".

साया ," मुझे पता है, तुम दोनों की गंध में दुर्र से सूंघ सकती हूँ".

आर्यन अपनी hi बातें दोनों से करता जा रहा था ," वैसे चाय तुमको वह याद करता है ..... और पता है वहां क्या हुआ ...... "

चाय भी लगी थी आर्यन को जवाब देते हुए साया को अपनी प्लान समझने की बस एहि समझो को एहि हमारा पतिदेव है ......

साया," मैंने तोह ुष वतासुर से आजाद होने के बाद अपना सबकुछ मान लिया है बस तेरी तरह बोल नहीं पाती".

चाय ," देखो आर्यन, दीदी भी थक गयी हैं उनको भी पीठ पे बिठा लो ".

साया ने झट से अपना चेहरा वैसे hi थकने वाला किया तोह आर्यन बोलै," कोई नहीं तुम भी आ जाओ में भी देखता हूँ मेरी कितनी कैपेसिटी है ".

साया ने थैंक कहा तोह आर्यन बोलै ," फिर से थैंक्स बोली तोह बात नहीं करूँगा तुझसे, तू हम सब में सबसे बड़ी है साया बस हुकुम चल्या कर क्यों चाय? "

चाय ," ऑफ कोर्स आर्यन यू अरे अब्सोलुतेल्य राइट ..... लेकिन तुम भी दीदी का दिल जीत नहीं पाए ".

आर्यन अब दोनों को उद्यान में ले आया था, बोलै," वैसे यहाँ आकर पता नहीं क्यों मुझे ज्यादा अच्छा लग रहा है..... और साया मेरी लिए सबसे स्पेशल है क्यों साया ?"

पता नहीं साया को यह बात आर्यन की बहोत अच्छी लगी तोह पीठ से उचक के उसकी गर्दन पे चूम ली ," हाँ आर्यन में मानती हूँ, पर थैंक्स नहीं बोलूंगी..... है है है है ".

चाय ने झूटमूठ का रूत के, आर्यन की पीठ से उतर के कहा," अब तुम दीदी को hi घुमाओ में स्पेशल नहीं हूँ न ".

आर्यन ने उसको पकड़ के अपने सीने से लगया और उसके होंठो को चूम के बोलै," तू सबसे स्पेशल है बस साया थोड़ी सुपर स्पेशल है "......

चाय ने आर्यन के लिप्स को नहीं छोड़ा और जोश से चूम के कहा ," ी क्नोव आर्यन पर हम तीनो भेने बराबर हैं यानी हमको प्यार करके माया से शादी कर पयोगे और नहीं किया तोह माया के साथ सुहागरात भी नहीं मन पयोगे ".

आर्यन थोड़ा झाला के मान hi गया ," एक शरत पर इश्से वादा करवायो यह मेरा सामान नहीं खा जाएगी तोह में तुम तीनो बहेनो से शादी भी करूँगा, बच्चे भी पैदा करूँगा पर में हमेशा यहाँ नहीं रह सकता चाय पर फ्री होंगे तोह पक्का आऊंगा नहीं तोह तुम आ जाना, अब खुश ...... साला 2 दिन से तुम सब पतलोक वालों ने मेरी गांड मार ली इमोशनल अत्याचार कर कर के ...... "

साया और चाय ने आर्यन को खड़े खड़े बिच में दबोच के चूम छाती शुरू कर दी...... 'अँधा क्या चाहिए दो आँख ' ..........

कुछ देर बाद ..... सुंदरता , वैभवो से परिपूर्ण राजमहल के मुख कक्ष में आर्यन के साथ दोनों दानव कन्याँ बिलकुल नंग ढांड घुटने के बल बिस्टेर पर सर झुकाये आर्यन के खड़े सख्त प्रचंड लिंग और वर्षनो को चूस चाट रही थी......

अभी तोपची भी अपने आकर से डेढ़ गुणा बढ़ गया था रानी माँ हेमा से मिली शकितयों की वजह से , धरतीलोक की तो कोई स्त्री इतने बड़े लिंग को नहीं झेल सकती पर पतलोक वाळिओं के तोह मजे थे..... एक तोह आर्यन बहोत हैंडसम और गोरा चिटा था ऊपर से उसकी और उसके तोपची की बलिस्टता और आकर्षण किसी के मुँह क्या योनि से भी राल टपकवा दे .......

दोनों की मनोकामना hi नहीं पूरी हुयी बल्कि दोनों को अपना असली नर साथी मिल गया था..... बस था वह मानव पर ताकत और शक्ति में तोह पूरे पतलोक पर भरी पड़ेगा.

चाय तोह जैसे 'तोपची' के कश्मीरी सेब जैसे लाल सूंदर टोपी के पीछे पड़ी थी...... और साया और निच्चे झुक के आर्यन के मोठे मोठे अमरूद के आकर के गोर चिकने वर्षों को बारी बारी मोह में भरके मथती किसी वाशिंग मशीन की तरह...... दोनों के हाथ एक साथ ऊपर निचे आर्यन के लिंग को मुठिया रहे थे......

दोनों सूंदर तोह थी hi आखिर राजकुमारी जोह तेरी और साइज में दानव भी तोह चूचियां से लेकर चूतड़ भी बड़े बड़े और बिलकुल टाइट और कमर तोह दोनों की झुकार कुटिया पोज़ में और जानलेवा दृश्य बना रही थी ......

आर्यन दोनों के सर सेहलता बस मस्ती की हुंकार भरता उनको और जोश दिला रहा था ," हुन्न्न्नन्नन्न आईसीईए hi साया मेरी गोटियां चूस....... चाय और मोह में ले यार ...... सीईईई अज्झहहहहह साया जोरसे से खुरच ले चाहिए खून निकल आये ...... यार में हवा में ुध रहा हूँ इतना मजा कभी नहीं आया...... सभाष और अच्छे से चूसो चाटो चाहिए तोह खा जाओ, यह तुम्हरे यार का लौड़ा है त्यार करो आज तुम्हारी योनि और गांड नहीं बचेगी ".

चाय के चूतड़ पर दो थप्पड़ मार के चटककककक चटककककक ...... उसके बालों से पकड़ के खींच के सीधा किया और अपने से चिपटा के उसके लबों को चूमने लगा उसका भरी भरकम पिछवाड़ा दबाते हुए ," पुछःह पुछठ ....... चाय अपने दूध पीला यार ...... "

चाय को लिंग चूसने में मजा आ रहा था पर आर्यन की इच्छा सुनकर एक बार लम्बा चुम्बन जीभ से जीभ भिड़ा कर लेकर उसके मोह में अपने उल्टा चूचक दाल दी ," अच्छे चूस मेरे यार ...... अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण कात्तट्ट्ट्ट मत्तत्तत बस चुस्सस्स्स्स ....... " ....... और खुद आर्यन की गर्दन और पीठ सेहलेने लगी वहीँ साया ने पूरा कब्ज़ा कर लिया था......

पूरे लिंग को अपने थूक से गीला कर दोनों वर्षों को अपने हाथ में लिए हौले हौले मसलती गहरे गहरे चोपे मार रही थी ....... इतना स्वादिस्ट और खूबसूरत लिंग उसने नहीं देखा था पर एक फट से भी ज्यादा लम्बा साइज और 6 इंच से ज्यादा मोटा देखकर मान गयी की आर्यन के अंदर हमारे साथ hi दानवी शक्ति भी जागृत हो जाती है ....... 3-4 बार दांत से खून भी निकला पर जल्दी hi घाव भर जाता ......

अगले 20 मं में आर्यन ने अपने मोह पर बिठा कर चाय की मीठी योनि चूस चाट के दो बार योनिरस पि डाला वहीँ साया ने अपना हिंसक कृत्ये दिखतये आर्यन का लुंड और तटों को चूस, काट के घायल करके जब पूरा विरए का ज्वार लाया तोह ....

आर्यन ने चाय को अपने ऊपर से हटा के साया के बाल कसके पकड़ के एक हाथ से उसका पूरा मोह खोल के अपना लुंड उसके गले में पार उतर दिया ...... धप्प्प धप्प्प धप्पा धप्प्प...... 10 धक्कों में 20 से ज्यादा पिचकारी उसके मोह में विरए की चूड़ी तब लुंड बहार खींचा...... इतनी देर में साया की हालत ख़राब कर दी ....... लेकिन वह आंसूं भाते भी खुश थी .....

आर्यन के जननांग खुद हील होने लगे पर लिंग को साया ने नहीं छोड़ा जब तक एक एक कटरा विरए का पूरा चटकारा लेकर न चूस चाट गयी......

तीनो संतुस्ट होकर बिस्टेर पर अगल बगल पसर गए, तब साया ने आर्यन के सीने पर सर रखे हुए कहा," आर्यन तुम्हारा विरए सबसे स्वादिस्ट है, बस मेरी इतनी इच्छा है की कभी कभी मुझे यह पीने को मिलता रहे..... आज तुमको में अपनी रूप बदलने की शक्ति देती हूँ जोह मुझे रानी माँ से मिली है बस मन मत करना वार्ना मेरे प्रेम का अपमान होगा ".

आर्यन ने उसके रूट चेहरे को ऊपर उठा के अपनी जीभ से आंसूं छाते ,"साया तू रोटी हुयी नहीं बल्कि आदेश देती गुस्सा होती हुयी अच्छी लगती है..... जब तू चाहयेगी मेरे ाँगो को भी खा लेना पर रूना मत"....... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म..... दोनों चूमा छाती में लगे थे उधर चाय अब निच्चे खिशक कर फिर आर्यन के लिंग को चूस के खड़ा कर दी ......

अब चाय ने बिना देरी किये आर्यन का लिंग अपनी योनि में रूट छीकते लिया वहीँ साया अपनी योनि का रसपान उसके मोह पे बैठकर उसको करा रही थी......

अगले 6 घंटे दोनों बहेनो को आर्यन ने आगे पीछे दोनों तरफ से 2-2 बार बजा डाला..... पर विरए साया ने चखा , चाय तोह आर्यन से छोड़कर hi इतनी खुश थी की वह ठान ली की वह पृथ्वीलोक भी जाकर आर्यन से प्यार लेती रहेगी उसकी मदद करने के बहाने.

तीनो बहेनो के रोले डिफाइन थे साया अब आर्यन की दोस्त काम प्रेमिका, चाय उसकी हेल्पर काम प्रेमिका और माया उसकी अर्धांगी बनने जा रही थी ......

तीनो ने स्नानग्रह में एक बार और प्यार किया ..... फिर त्यार होकर खुसी खुसी राजा मयासुर के राजमहल लौट आये..... रात हो चुकी थी यानी अँधेरा बढ़ गया था क्योँकि आधे रतन सिर्फ दिन के समय अधिक प्रकाश करते है जैसे यहाँ दिन जैसा हो ......

पूरा राजमहल सजाया था और दुसरे लोकों के विशेष अथिति गण के साथ पूरा तळतळा लोक निमंत्रित था..... आर्यन को रानी माँ हेमा ने खुद त्यार किया.....

एक बड़े प्रांगण में जोह 100 फुटबॉल स्टेडियम के साइज का था..... सब पतलोक के वाशियों के सामने पहले अटाला लोक की रानी स्वर्णलता ने आर्यन को राजा बलि महाराज की आज्ञा लेकर वरमाला पहनाई तोह हर तरफ से स्वर्ण पुष्पों की वर्षा होने लगी.....

रानी पुष्पलता ने सबके सामने आर्यन को अटाला लोक का दामाद और उन्ह दोनों के होनी वाली संतान को अटाला लोक का नया उत्तराधिकारी घोसित करते हुए आशीर्वाद दिया और साथ में की अब आर्यन हमारे लोक का अंगरक्षक है.

फिर बारी आयी राजा मयासुर की सब्सि छोटी पुत्री राजकुमारी माया की जोह इतनी सजी धजी सूंदर लग रही थी की पूरे पतलोक में ऐसी सुंदरी न होगी. बहोत से महाबली दानव भी उसकी सुंदरता पर ाहिएँ hi भरते रह गए.

आर्यन बस मंतर्मुग्ध से बिना पलके झपकियें माया की खूबसूरती में खोया था मोह फाड़े ......

तब स्वर्णलता ने उसको खोनी मारी ," आप hi नज़र लगा डोज क्या माया को?"

आर्यन बस झेप के ," मैंने इतनी सूंदर दानव युवती नहीं देखि..... यह तोह हर अप्सरा को अपने आगे पानी भरवा दे".

रानी स्वर्णलता चिढ़ते हुए," अच्छा अब आना हमारा पास बात भी नहीं करेंगे हम सब ".

आर्यन मुस्करा के स्वर्णलता का हाथ पकड़ लिया," तोह एक खंज़र िश दिल में भी उतर देना स्वर्ण क्योंकि दिल तोह तुम्हारे पास है मेरी लिए इतनी बेरुखी करने से पहले".

स्वर्णलता ने आर्यन के मोह पर हाथ रखकर कहा," आप क्या हो हम सबके लिए अभी आपको गायत नहीं है बस हम में से किसी को भुला मत देना आर्यन..... हम सब ने हज़ारों साल वीराने में काटे हैं मगर अब आप हैं हमारे".

राजा माया ने घोसना की," दिव्या तलवार के स्वामी, महार्यं, से राजकुमारी माया विवाह करना चाहती है.... क्या है कोई जोह आर्यन की ललकार को मुकाबला दे सके?"

दानव हिमासुर पहले hi नागदंश ने यहाँ नहीं आने दिया था, क्यूंकि उसको पता था वहां आर्यन इश्को हरा देगा और सब उपहास hi उड़ाएंगे......

राजा माया ने जब कोई प्रतिरोध न सुना तोह आर्यन को वरमाला पहनाने की माया को अनुमति दी ...... माया ने शरमाते हुए वरमाला पहनाई आर्यन के गले में और नीले रंग के पुष्पों की वर्षा के साथ सबकी तालियां और बधाई के शोर गुजने लगे ......

थोड़ी देर बाद शाही दावत और निरतये शुरू हो गया पर दानव गुरूजी से माया ने पृथ्वीलोक की तरह विवाह करवाया अपने माता पिता को सम्लित करके..... सब उसके लिए खुश थे...... यानी 7 फेरों के साथ मंगलसूत्र पहना और सिंदूर से मांग भरवाई.

सबने Swarna-Aryan-Maya को जोह एक बड़े सिंघासन पर बैठे थे भेंट ( गिफ्ट ) दिए और आशीर्वाद भी..... आर्यन को किसी ने गिफ्ट नहीं दिया सबने स्वर्ण और माया को दिए.....

आर्यन को भी पता था की वह सबकी आँखों में खटक रहा है तोह आमंत्रित गण उशसे दंग से बात भी नहीं कर रहे ..... कोई नहीं कमीनो आज रात दोनों तुम्हारी राजकुमारिओं को इतना छोडूंगा की पूरे पतलोक तक यह मेरी दोनों नयी बीवियों की चीखिआ तुम्हे बताये में इनका कौन हूँ और तुम्हारा दामाद हूँ .

आखिर में धूम धाम से आयोजन के समापन के बाद पूरे सम्मान के साथ आर्यन को एक गरुड़ पक्षी जैसे विमान में उसकी दोनों नयी भार्या, स्वर्ण और माया, के साथ विदा किया गया .....

पर आर्यन ने पलट के रानी पुष्पलता और कामलता के साथ राजकुमारी साया और चाय की तरफ भी शिकायत भरी नज़र से देखा पर चरों बस दुखी के एक्सप्रेशन बना के सर झुका ली ......

आर्यन ने रथ रुकवा कर उतर गया और रानी पुष्पलता के पास जाकर उनको कान में बोलै," पुष्पु अगर तुम चरों वहां नहीं आयी तोह में कभी उन्ह दोनों को स्पर्श भी नहीं करूँगा".

फिर से सर झुका के सबको नमन कर आर्यन वापस रथ में चढ़कर चल गया...... वहीँ रानी पुष्पलता ने बाकी तीनो को आर्यन की शरत बताई तोह तीनो खुश होती जल्दी वहां जाने के लिए बोली.

साया," आर्यन बहोत जिद्दी है वह उन्ह दोनों की तरफ देखेगा भी नहीं..... हम सिर्फ हौसला अफजाई के लिए चलते हैं महारानी पुष्पलता "

रानी पुष्पलता," फिर कामु को यहीं छोड़ देते हैं इश्को देखते hi आर्यन बहोत उत्तेजित हो जाता है ".

राजकुमारी साया," आप सही बोल रही हो दीदी यह चाय तोह आर्यन की पीठलगू है आप और में hi चलते हैं वार्ना वह बुरा मान जायेंगे ".

रानी कामलता ," कोई जाए या न जाए में तोह अपने आर्यन के पास जा रही हूँ ..... आप सब मंत्रणा करो ".

कामलता सच्च में आर्यन को बहोत पसंद करने लगी थी..... वह उसको थका डालता था छोड़ते छोड़ते पर उसको आर्यन दिल से पसंद आ गया हमेशा के लिए..... वही हाल साया और माया का था .....

रानी पुष्पलता," हम सब जायेंगे आखिर वह हम सबका भी नर (पति) बन गया है चाहिए बाकी पतलोक वासी न जानते हो पर आपस में तोह हम सबको विश्वास करना होगा ".

जब सही सवारी से सफ़ेद राजमहल के सामने चरों पहुंची और रथ से निच्चे उतर के रानी पुष्पलता ने कहा," इतना सूंदर महल माया ने बांया यह तोह हर्ष की बात है..... आर्यन के साथ माया के मिलान का समय है हमको उसका सम्मान रखना चाहिए फिर कल आर्यन कैसे ुष प्रभा को हरा दे इश्कि युक्ति भी सोचनी होगी, आर्यन वहां हल्का पड़ेगा नागलोक में मगर हमारी दी शक्तियां उसको मदद hi करेंगी ".

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दीप्ति के जैसे कक्ष में माया और स्वर्ण घूंगट डाले सुहागरात के लिए भाव सजे बिस्टेर पर बैठी थी जब आर्यन अंदर गया.....

आर्यन ने जाकर जब दोनों का घूंगट उठाया और अपने हाथ से दोनों को एक एक राजमा जैसा बीज देकर बोलै," यह पृथ्वीलोक का अंधकारी बीज है ..... जिस दिन तुम दोनों को में प्रेम से न देखूं ुष दिन मेरी आँखों में मार देना में अँधा जो जाऊंगा ".

अब तोह दोनों का पारा चढ़ गया, तभी पीछे से चाय की आवाज आयी," ऐसा तोह न बोलै यार ..... कमसे काम आर्यन कोई अच्छा गाना hi सुना दो दोनों को उनको भी समझ में आएगा की तुम उनको कितना चाहते हो".

आर्यन ने पीछे पलट के देखा तोह अपनी चरों दानव स्त्रीओं को एक साथ देखकर उनकी तरफ लपका और खुसी खुसी सबको बारी बारी चूम के अपने गले लगा कर बोलै," तुम सब बहोत अच्छी हो, आज से में तुम सबका गुलाम हूँ. जोह चाहे मांग लेना में कभी मन नहीं करूँगा , हमेशा तुमको दिल से चाहता रहूँगा चाहिए पास हूँ या दूर".

पुष्पलता," तुम गीत भी गए लेते हो, अब तोह हम सब भी जरूर सुनेगे ..... "

आर्यन ने झट से एक गाना पुष्पु को बाँहों में भरके हलके हलके डांस करते हुए गया ,

" तुम्हे देखीं मेरी आंखें, ुष में क्या मेरी कहता है.... हाल क्या मेरे दिल का यह तोह बस मुझे पता है ...... "

जब गाना ख़तम हुआ तोह चरों ने ताली बजे और घूंगट में बैठी दोनों को लगा की यह मेरे लिए hi गाय है.....

आर्यन ," चाय डार्लिंग तू तोह गीता को जानती है और मेरी माँ रति ुष से बड़ी आइटम है...... बस मेरे यहाँ के रिश्ते एक परखेगी और दूसरी मुझे hi गाली देगी ".

चाय ," एक बार िंह मेरी दोनों बहेनो को देखो यह अपना सर्वेश तुम पर लुटा दी हैं और गीता दीदी की में भी मुरीद हूँ यार मगर तुम बाकी किसी का नाम क्यों लेते जबकि दीप्ति, जाने, डॉली और मीणा कभी शिकायत नहीं करेंगी ".

आर्यन हसकर ," प्रभा को वापस ले गया तोह सबको मन लूंगा और अब हमको भी प्राइवेसी दो यार..... जल्दी hi तुम सबसे मिलूंगा"...... और आँख मार दिया.....

चरों अपनी दोनों छोटी बहेनो को बधाई देकर और आर्यन को दोनों का ख्याल रखने का बोल के चली गयी ........

आर्यन ने कामु के कान में कहा," तुम यहीं रुक जाना में इनको सुलाकर तुम्हारे पास आऊंगा "....... कामलता बहोत खुश हुयी, इशलिये पुष्पलता बोली थी िश कामु को नहीं ले जाते इश्को देखकर hi आर्यन मदमस्त हो जाता है.

आर्यन ने आगे बढ़कर दोनों के घूंगट उठाये और दोनों के गले में एक एक सुन्दर मोतियों का हार पहना के बोलै," यह मेरी तरफ से दोनों सुंदरता की देवियों को छोटा सा नजराना ".

दोनों ने हाथ फिरा के उन्ह सफ़ेद और गुलाबी मोतियों के हार को देखकर ुष्पर हाथ फिर के आर्यन के सामने बैठकर उसके प्यार चुने चाहिए तोह दोनों को गले लगते बोलै," कदमो में सर कभी नहीं झुकेगा क्योंकि तुम दोनों मेरी सरमोरे हो..... स्वर्ण और माया में तुम को एक सच्च और बता देता हूँ मेरे रिश्ते अपनी सगी खून वाळिओं से भी हैं बस कभी यह मत समझना में तुमसे काम प्यार करता हूँ ".

दोनों आर्यन के गले लगे थी तब माया बोली," आप ऐसा कभी मत सोचना आर्यन की हम सबकी वजह से आपको कोई अड़चन आएगी..... में जितना से मिली हूँ आपकी एक एक प्रेमिका और स्त्री सब अपने में ख़ास हैं और एक खासियत देखि मैंने किसी में कोई द्वेष नहीं है बस आपके लिए मोह ज्यादा है..... मेरी दोनों बड़ी दीदी को इतना खुश और खिला खिला मैंने कभी नहीं देखा. रानी पुष्पलता और रानी कामलता भी इतनी खुशमिजाज हो सकती हैं में पहली बार देखि हूँ. स्वर्ण दीदी तोह अब किसी प्रेम दीवानी की तरह लगने लगी हैं. बस मुझे भी थोड़ा स्थान अपने दिल में दे देना स्वामी एहि मेरे जीवन सफल कर देगा "......

बोलते बोलते भावुक हो चली माया को आर्यन ने अपनी एक बहन में उठा कर उसको लबो को चूम के बोलै ," मुझे किस्मत का धनि बना कर यह अपने प्यार को रुस्वा न कर मेरी जानेजिगर ..... दिल ने तुझे पाया है यह अब तेरे बगैर कैसे धड़केगा पता नहीं ...... पुछःह पुछठ ..... ी लव यू माया, और क्या रूट हुए मुझे प्यार करोगी ?"

स्वर्ण दूर होने लगी दोनों से पर आर्यन ने उसको अपने से दुर्र न होने दिया बल्कि और अपने साथ कास रखा था माया को दिल की बातें बताते हुए..... स्वर्ण भी माया की पीठ थप थापा रही थी.....

स्वर्ण और माया को उठाकर आर्यन अपनी गॉड में hi लेजाकर सुहागरात की सेज पे बिठाया तोह माया ने बिस्टेर के पास रखे एक थाल से बड़ा सा पात्र के ऊपर ढकी तस्तरी उठाकर आर्यन की तरफ किया.....

आर्यन ुष बड़े से पात्र में 5 लीटर के करीब ढूढ़ देखकर बोलै," इतना कौन पीयेगा..... तू तोह मुझे पेटू समझ ली है माया डार्लिंग ...... hi hi hi hi ....."

माया ने शर्मा के कहा ," यह तोह पीना hi होगा आपकी दो पत्नियां यहाँ है और सुहागरात पर ऐसी hi रसम होती है ".

आर्यन ने स्वर्ण की तरफ देखा तोह वह मुस्करा रही थी तोह आर्यन ने उसकी आज्ञा के ऊपर से दायी चूची दबा दी .... सीईईई ारयणणणण ......

आर्यन ," में तोह डायरेक्ट दूध पीटा हूँ क्यों स्वर्ण ...... है है है है है ".

आर्यन के हाथ पर चपत लगाती स्वर्ण बोली," यह दूध माया आपके गोअन की गए का चुरा के लायी है और िश्मे कई चीजिएं भी मिलायी हैं ".

माया बस सर निच्चे किये मुस्करा रही थी तोह आर्यन भी हैरान सा की यह लड़की अब यहाँ नहीं रह पाएगी पर पात्र को उठाकर पहले एक घूँट पिया और माया को पिलाया यह बोल कर की ऐसे प्यार बढ़ता है...... फिर स्वर्ण को भी .....

दोनों को करीब 1/3 और खुद बाकी पीकर अब सुहागरात की सेज पर पालथी मार्के बैठे आर्यन की लेफ्ट झंघ पर माया बैठी थी और राइट पर स्वर्ण.

स्वर्ण जाना चाहती थी ताकि माया को पूरा प्यार मिले मगर आर्यन और माया ने उसको मन कर दिया..... जब रिश्ता सबके सामने बना है तोह साथ hi पूरा भी करेंगे.

आर्यन से खुश नसीब कौन होगा, उसकी गॉड में अटाला लोक की सबसे सूंदर रानी स्वर्णलता और तळतळा लोक की सबसे सूंदर राजकुमारी माया बैठी थी जिनको वह बारी बारी चूम रहा था..... तीनो बातें करते प्रेम सागर में डूबे थे...... अब समय आ गया था तीनो पूर्ण मिलान के लिए आगे बढ़ें......

वहीँ सुबह आर्यन की आंखें गुल को अपनी बाँहों में लिए खुली लखनऊ में उसके जगाने पर..... इशलिये आर्यन इतना खुश था ..... एक वह सुखद पल थे और एक यहाँ धरतीलोक पर सबसे अच्छी सुबह .......

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दूसरी तरफ ुशी समय म्हटला लोक में .......

राजा बलि महाराज के साथ दानव गुरूजी भी िश समय एक याग कर रहे थे..... राजा बलि महाराज पूर्ण पतलोक के लिए अपने बाद एक शक्तिशाली उत्तराधिकारी के लिए जोह संभव है आर्यन पैदा कर पाए.....

मंत्रो का उच्चारण और दोनों की निष्ठां देखकर राजा मयासुर और राजा वासुकि के साथ रानी हेमा और रानी पुष्पलता ने भी अपना राखत हवन कुंड में अंगूठे पर कट लगा के चदया.....

कुछ पलों बाद दानव, दैत्य, सर्पों और नागों के प्राचीन पुरवज प्रकट हुए अंगी में ...... सबने ने हाथ जोड़कर सर झुका दिए.

दानव गुरूजी ," पतलोक के महाबलिओं को हम सबका नमन, आज आपका आह्वाहन करते हुए हम आशीर्वाद चाहते हैं की पतलोक को भी सबसे ससक्त उत्तराधिकारी मिले..... विशाखा के लिए आप सबने भविष्वाणी की थी, पर उसकी मिर्त्यु हो गयी है और अब वह अपनी छोटी भें प्रभा के सरीर में है फिर विशाखा का पुत्र तोह होने से रहा".

जोह उन्ह प्रकट हुयी 7 आकिर्टियों में सबसे बड़े बुजुर्ग थे मुस्करा के बोले," इतना वर्षों बाद भी तुम नहीं जान पाए तोह क्यों एक मनुष्य से अपना उत्तराधिकारी चाहते हो ?"

रानी हेमा से रुका न गया," माफ़ करना महाबली, वह मनुष्य के साथ और भी शक्तियां रखता है बस अभी सरीर मनुष्य का है..... उसने दानव शकितयाँ भी गिह्ऱन कर ली थोड़ी परेशानी के बाद पर उससे बड़ा माध्यम नहीं है जोह इतनी शक्तियां प्रभा के अंदर विशाखा तक पहुंचा सके..... वह मानव है, दानव के साथ नागलोक और अन्य लोकों की शकितयाँ को धारण कर सकता है. वह दिव्या तलवार का आह्वाहन कर सकता है..... वह धारक के साथ दिव्या तलवार का मालिक भी है".

दानव महाबली," हमको गायत है पुत्री पर तुमको उसको दुबारा बुलाना hi तुम्हारे उसके लिए पुत्र प्रेम दर्शता है ...... हम सब इतना hi आशीर्वाद दे सकते हैं की तुमको उत्तराधिकारी मिले मगर फैसला उन्ह माओ का होगा..... हाँ जनम देते hi मिर्त्यु नहीं टलेगी, जैसा पिता वैसा hi पुत्र होगा..... यानी तीन नयी राजकुमारिआं hi पतलोक के राजकुमार को लेकर आएँगी. वह उन्ह तीनो को दुर्र नहीं जाने देगा अगर जीवन लिया तोह".

सब को सोचता छोड़कर याग की आग भी भुज गयी पर विशाखा को किसका सरीर दिया जाए की वह राजकुमार पैदा कर सके???? ........ आर्यन के लिए पहले ुष रूठी प्रभा को कौन मनाये...... ????

दानव गुरूजी ," मुझे इसी बात का डर था की आर्यन जोह अपने अंदर निहित शक्तियां नहीं पहचान पा रहा है वह कैसे हम सबका कार्य पूरा कर पायेगा? यह न साबित हो की वह बस ऊर्जा और शक्तियां सूखता जाए पर कभी किसी में प्रदान न कर पाए..... तब पतलोक भी असुरक्षित होगा ".

राजा बलि महाराज ने याग से खड़े होकर कहा," गुरूजी आपने नहीं देखा है जोह मैंने आर्यन के अंदर देखा है..... वह महाभक्त है विशु भगवन का और आशीर्वाद में मिला है रतिदेवी को भगवन शिवशंभु से, उसकी जुड़वाँ भें राजकुमारी मीनालोचनि ,दिव्यलोक की राजकुमारी भगवन भरमा के रचित दिव्यलोक की है जोह िश जनम में आर्यन का सर्वेश है..... तीनो भगवन का आशीर्वाद जिसके सर पर हो और जोह शक्तिरूप धारण कर ले महाकाल का..... उसको भी अपने पिछले के जनम के भरमांड नष्ट करने के लिए पश्चाताप करवाने यहाँ भेजा गया है ऐसा लगता है ..... अब सबकुछ हमारी पतलोक की पुत्रियों पर है वह कैसे उससे मैं चाहया फल ले पाए ".

थोड़ी देर ख़ामोशी के बाद रानी हेमा बोली," आर्यन की मनुष्य योनि से में नफरत करती हूँ पर एक माँ होने का अहसास hi मुझे उशसे मिला है..... अगर मेरा पुत्र आर्यन विफल रहा तोह में एलान करती हूँ स्वेच्छा मिर्त्यु धारण करुँगी, अब में तभी सबको अपनी सकल दिखूंगी जब मेरा पुत्र आर्यन सफल होगा".

राजा मयासुर के साथ सबने रानी हेमा को रोकने का प्रयास किया पर वह न रुकी..... तभी एक दिव्या प्रकाश का वहां आगमन हुआ जिसको महसूस करते hi सब सास्तर लिए और हमले की लिए त्यार हो गए......

"में वह हूँ जिसको िश जनम में आर्यन का गुरूजी कहते हैं, में पहले से मिर्त्य हूँ यह सिर्फ मेरी आत्मा की ऊर्जा है ".....

पूर्ण जंगल वाले बड़े गुरूजी से सबको आर्यन के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने चेतावनी भी दी बस दिव्या तलवार के मालिक को मत जगा देना वर्ण आर्यन का सरीर hi नष्ट हो जायेगा और पतलोक की खुशियों तोह बाद में यहाँ कभी पतलोक भी होता था ऐसा हो जायेगा..... बड़े गुरूजी सबको और दुविधा में छोड़ गए जोह महारानी विजयलक्ष्मी के कहने पर यहाँ चेतवानी देने आये थे.

राजा बलि महाराज," अब अपने अपने भगवन से प्राथना करो की आर्यन कामयाब हो पर कोई उसकी मदद नहीं करेगा..... वह जीते या हारे ".

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सुहागरात सेज पर.....

स्वर्ण जमुनी रंग की आज्ञा - हाफ साड़ी जैसो वस्त्रो में थी टिपिकल दानव स्त्री का ड्रेस बस यह नागो और आभूसन से जड़ित था वहीँ टिपिकल लाल गोटेदार लहंगे और चोली में माया बिलकुल पारी लग रही थी ......

दोनों को अपनी गॉड में बीतए बहार वाली चूचियां दबाता हुआ आर्यन बारी बारी से चूमता उसकी ड्रेस खोलने लगा ..... स्वर्ण तोह झट से पूरी निर्वस्त्र कर दी पर अब माया को दोनों ने निच्चे बिस्टेर पर गिरा कर हस्ते हुए पूरा नंग किया तोह स्वर्ण बोली," अद्भुत सौंदर्य है तुम्हारा माया, आर्यन देखो मोह फाड़े देख रहा है".

अपना चेहरा छुपती माया बोली," सब इन्ही के लिए संभल का रखा है दीदी ....."

स्वर्ण और आर्यन ने एक दुसरे को देखा तब आर्यन ने उसके कान में कुछ बोलै तोह मुस्करा के उसका गाल चूम ली..... आर्यन ने जैसे hi झुकार माया के लबों को चूम के कहा," देखो माया अब तेरी आंखें मुंडी तोह कैसे प्यार कर पाउँगा तुझे ?"

माया ने आर्यन की गर्दन में बाँहों लपेट के कहा," आप को हर इज्जत है आर्यन बस मुझे भी ख़ास फील कराओ दीप्ति की तरह...... आर्यन मैंने सच्चा प्रेम किया है आप से बस आज मुझे पूरा कर दो, फिर कभी कुछ नहीं मांगूंगी ..... "

स्वर्ण को रक्ष हुआ अपनी से छोटी रिश्ते की भें पर..... मगर उसको खुसी थी माया खुद में एक मायावी शक्ति का रूप है जोह आर्यन की हो जाएगी ...... यह बात पुष्पलता ने उसको बताई थी की आर्यन का माया से मिलान जरूरी है.

आर्यन ने झुकार माया की बड़ी उठी छातियों को अपने हाथो के पंजों में थाम के मसल भर दिया तोह सिसक पड़ी ..... पर अपना जीभ से उसके गुलाबी चूचक को छेड़ा तो सिसकी के साथ माया ने अपनी छातियां और तान दी...... सीईईई ारयणणणण चुस्स्सस्स्स्स लोओओओओ .....

पीछे से आर्यन की पीठ पर हाथ फेरती जब स्वर्ण ने उसका ऊपरी विस्तार गले तक किया तोह मोह में भरे माया के निप्पल को निकला तोह पुकककक की आवाज आयी..... स्वर्ण ने झट से आर्यन का विस्तार निकल दिया सर से तोह दुसरे चूचक पर टूट पड़ा," पुछःह पुछःह सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप मुहह्ह्ह्ह मुह्हह्ह...... तेरा निप्पल से तोह सेहद निकल रहा है माया ...... "

दोनों चूचियों को बुरी तरह से दबाते हुए बारी बारी चूस चाटने के साथ जोरसे दांत भी गदा देता तोह माया की चीत्कार बहोत जोरसे से निकलती ..... आर्यन के बालों में हाथ फिरती उसके सर को और जोरसे अपनी छाती पर दबती......

स्वर्ण ने आर्यन का निच्चे का लुंगी सा विस्तार भी निकाल के उसका फनफनया तोपची पकड़ लिया......

आर्यन चूचियों के बाद जब माया के पेट और नाभि चूमता उसके कटी प्रदेश पर योनि को देखा तोह एक सूंदर सा लम्बा चीरा लिए किसी सीप सी उभरे मोठे आधार वाली अमृत जैसे मोती सी बूँद बहा रही थी जिसको आर्यन ने अपनी जीभ पर लेकर चाट लिया..... सबसे अलग बिलकुल सहेड की तरलता और स्वाद लिए योनि रास ने उसको पगला hi दिया ...... दोनों हाथो से माया की झांघो को पहला के उसने पहले बहार आये योनि रास को चाट लिया फिर उसके श्रुत को अपनी उंगलिओं से खोल के अपनी झीभ hi अंदर दाल के खुदाई करता तेजी से आगे पीछे रास रुपी अमृत पीने लगा ......

माया बस अपनी चूचियों को भींचती ारयणणणणणण ारयणणणणणण करती बेहिसाब उत्तेजित होती 2 मं में hi झाड़ गयी ....... उधर आर्यन के दोनों घुटनो के निच्चे अपना सर दिए पीठ के बल लेती स्वर्ण अपने मोह में उसका प्रचंड लिंग लिए अपना मुख छोडन करवाती अपनी छातियां और योनि रगड़ रही थी......

माया की जब आँख खुली तोह छत्त में लगे दर्पण में तीनो को नंगा लाइन पटरी देखकर शर्मा गयी ...... वह पीठ के बल थी और आर्यन घुटनो पर झुका अभी भी उसकी योनि चूस रहा था और स्वर्ण दीदी आर्यन के पीछे लेती उसका लिंग चूस रही थी ...... पर उसको अभी लिंग नहीं दिखाई दे रहा था......

आर्यन का सर सेहलते माया ने उसके हाथ को पकड़ के ऊपर खींचा तोह मुस्कारते हुआ उसकी चूचियों की तरफ बढ़ा ...... आधा चेहरा योनि रास से भीगा था तोह माया ने पास पड़े आर्यन के विस्तार से उसका चेहरा पहुंचा और फिर दोनों के लैब जुड़ गए..... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म.....

स्वर्ण के मोह से लिंग निकल गया पर हाथ से नहीं छोड़ी, पलट कर आर्यन के लिंग को थाम उसकी बड़ी बड़ी जूतियां चूसने लगी......

उधर दोनों चूमा छाती में लगे थे और स्वर्ण ने लिंग मुंड माया की योनि पर रगड़कर उसके चीरे पर टोपा फिट कर दिया......

माया भी लिंग को प्यार करना चाहती थी और अभी तक उसको झलक भी नहीं मिली थी पर अपनी योनि पर स्पर्श पाकर वह जोश में आर्यन की झांघो पर अपनी टांगें चढ़ा ली पर एहि उसकी गलती साबित हुयी.......

आर्यन के चूतड़ थपथपा के स्वर्ण आगे आकर दोनों के पास बेथ गयी और आर्यन की मजबूत कसरती पीठ चूमने लगी ......" ुहममममम ुहममममम ......" बस एहि आवाज माया की तरह से आयी..... एक धक्के में योनि को भेदता करीब आधा लिंग माया के अंदर था...... वह बस अपने आर्यन दुवारा सील किये मोह से दर्द भरी आवाज भी न निकल पायी .....

स्वर्ण ने आर्यन की पीठ पर काटा तोह उसने माया के लबों को आजाद किया ," मरररररररर जाउंगी अह्ह्ह्हह्हह ारयणणणणणण माआआआआ मरररररर gayiiiiiiiiii ....... मुझे नहीं लेना ार्यानंन्न माफ्फ कर दूऊऊऊओ ....... didiiiiiiiiiii बचाऊऊऊ....... मेरे अंदर किसी ने मोटा स्तम्भ घुसा दिया है ...... में नहीं बचुंगीीीी ...... अह्हह्ह्ह्ह मररररर जौंगीीी ....... "

माया की हालत देखकर स्वर्ण ने उसका मोह फिर अपने एक हाथ से बांध किया और आर्यन को बोली," अब हिलना मत बस इश्को गरम करो यह खुद पूरा ले लेगी अभी इश्कि असली सील बाकी है ...... तुम चूचियां चूसो".

आर्यन ने चूचियां मसली और माया की गर्दन चाटने लगा वहीँ स्वर्ण ने उसके कान को चूसना शुरू किया ...... माया अभी भी रोटी हुयी हाथ पेअर पटक रही थी पर उसकी एक न चल रही थी.....

उसकी चीख्यों की गूंज के पूरे महल में 4 बड़ी बहेनो के कानो तक क्या सब दास दासियों तक पहुंच गयी थी...... सबके चेहरों पर खुसी थी आखिर माया थी भी सबकी प्यारी.

आर्यन ने जकड के रखा था अपना लिंग आधा योनि में फसये और इधर दोनों की म्हणत रंग लायी..... माया ने अपना सरीर ढीला छोड़कर अब उत्तेजना का अहसास पा रही उसका रूना काम हुआ तोह उसकी योनि भी अब अपने अंदर आये मेहमान का स्वागत करती हलकी हलकी संकुचन करती अपना बाधित मार्ग खोलती रास छोड़ने लगी और अंदर का मुख द्वार भी खुलकर आगे बढ़कर आर्यन के लिंग के टोपी पर चढ़ने लगा.....

स्वर्ण ने माया के सरीर की झुरझुरी पहचान के उसके मोह से हाथ हटा के उसके लबों को चूम के कहा," अब दर्द को भूल के अपने नर का वरन कर माया यह समय कभी एक बार hi जीवन में आता है ...... बधाई हो माया अब आर्यन को भी सुख दे, देख कितनी देर से रुका हुआ है ".

आर्यन ने झुकार माया के आंसूं छाते ," बहोत दर्द हो रहा है क्या माया , तुम कहो तोह निकल लेता हूँ जान".

माया भी ख़ुशी से रूट हुए मुस्करा के बोली," नहीं आप मेरे दर्द की परवा मत कीजिए, बस मुझे प्यार करो ारयणणणणणण सीईइईसीईई हम्मम्मम्मम्म बहोत प्यार करो मुझे ".

स्वर्ण ने आर्यन का गाल चूम के," अभी आराम से थोड़ा थोड़ा अंदर करो जोरसे नहीं तब hi इश्कि योनि त्यार होगी".

आर्यन अब हलके हलके धक्कों के साथ आगे और आगे योनि में लिंग ठेलने लगा..... माया अब उसको चूमकर अपनी ख़ुशी भी जाता रही थी..... फिर एक समय जब उसका टोपा योनि की अंदर की दूसरी सील को क्रॉस किया तोह योनि ने आधा से ज्यादा अगले हिस्से पर एक खाल का आवरण बना के जकड लिया.....

आर्यन ने थोड़ा सा लिंग बहार खींचा और तेज धक्के साथ योनि के आखिरी सिरे तक पहुंचा दिया...... "अह्हह्ह्ह्ह सीईई ारयणणणणणण " ...... "माया ी लव यू" ..... दोनों ने एक दुसरे को पूरी तरह से पा लिया......

अब स्वर्ण बिस्टेर से उतर के साइड होकर कड़ी हो गयी क्यूंकि माया की शक्ति ने एक अदृश्य शील्ड में दोनों मिलनरत साथियों को घेर लिया था पर दोनों को परवाह hi कहाँ थी..... आर्यन का लिंग गप गैप योनि के अंदर भार तेजी से हो रहा था ...... दोनों के अंदर शक्ति का आदान प्रदान हुआ जिसको स्वर्ण ने देखा पर वह दोनों तोह अपनी सुहागरात में लगे थे एक दुसरे को चूमते पुचकारते प्रेम के लबाज बोलते .....

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राजकुमारी माया

आर्यन के अंदर राजा मयासुर की सबसे बड़ी शक्ति मायावी शक्ति प्रवेश कर चुकी थी और वहीँ दुर्र अपने राजमहल में राजा मयासुर को भी अहसास हुआ की उनकी सबसे छोटी बेटी ने आर्यन से दिल से मिलान करके उनकी शक्ति दी है.

लेकिन उनको अब डर था कहीं साया ,चाय ने भी आर्यन को मायावी शक्ति दे दी तोह उनके लोक का क्या होगा जिसका निर्माण का आधार इन्ही शक्तियों पर निर्भर है ......

दानव गुरूजी ने उनको समझते हुए कहा, अगर आपकी पुत्री माया गर्भवती हुयी तोह यह साड़ी शकितयाँ उसके बच्चे में आएँगी और यह भी जल्दी hi होगा. पर रानी हेमा ने कहीं पुत्र मोह में गलत निर्णय तोह न ले लिया ?????

राजा मयासुर," गुरूजी अब हम सबकी ाश आर्यन पर hi तिकी है पर मुझसे तोह सब कुछ चीन जायेगा ?"

आर्यन के पतलोक में हितेषी रानी माँ हेमा , राजा बलि महाराज और उसकी छोटी भें प्रभा ने उशसे सही समय पर मुँह मोड़ लिया अब आशा की किरण उसकी यह नयी 6 भार्या थी जोह उसकी मदद करेंगी या नहीं एहि देखना था ..... ???????

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अपडेट 38 (पतलोक)

Part - 5(बी)

मायावी शक्ति जब आर्यन को मिली तब स्वर्ण ने सब देखा और जब माया ने 4 बार चरमसुख पा लिया तोह माया ने आर्यन को कहा ," में थक गयी हूँ अब आप दीदी को प्यार करो ".

जब दोनों ने बिस्टेर पर देखा तोह स्वर्ण वहां नहीं थी, वह एक तरफ पड़े सोफे पर नंगी बैठी उनको hi देख रही थी.....

अब आर्यन और माया को अपनी गलती का अहसास हुआ की दोनों अपनी prem-leela में इतने दुब गए की स्वर्ण को भी भूल गए.....

आर्यन ने माया के माथे पर किश करके 2 धक्के उसके योनि में मारे और अपना अभी तक बिना झाड़ा सख्त लिंग उसकी योनि से बहार निकलने लगा..... " नहीं आर्यन उसकी योनि को विरए से भर के hi बहार निकलना, चाहिए तो आसान बदल लो. हर स्त्री के लिए वह सबसे सुखद पल होता है"...... स्वर्ण की आवाज सुनकर दोनों रुक गए.

आर्यन अपनी मुस्कान देते हुए ," पर तुम इतनी दूर क्यों बैठी हो? एक शरत पर वही करूँगा पर तुमको भी मुझे अपना अमृत पिलाना होगा मेरे मुख पर बैठकर "...... और मुस्करा के आँख मार दिया......

आर्यन की शरत सुनकर एक कातिल मुस्कान लिए स्वर्ण जब कड़ी होकर अपनी योनि और चूची को सेहलती बड़ी ऐडा से कमर मटकती उनके पास आने लगी तोह स्वर्ण का रूप यौवन दोनों को किसी कामदेवी वाला लग रहा था. स्वर्ण का िश समय हुस्न hi जानलेवा था ुष्पर उसकी बेशर्मी वाली कामुक अदाएं दोनों को विस्मित कर रही थी......

आर्यन ने जोरसे एक धक्का माया की योनि में मारा तो वह चिहुँक पड़ी और आर्यन उसको लेकर पलट के अपने ऊपर ले लिया.....

माया को हल्का दर्द हुआ पर जब आर्यन ने उसके कंधे को पीछे धकेल के कहा ," अब तुम मेरे घोड़े की सवारी करो जान, में तुम्हारी दीदी का खजाना चकता हूँ".

माया भी अपनी शर्म त्याग कर," दीदी कितनी सूंदर है न ? बिलकुल काम सशत्र में वर्णित काम देवी जैसी ...... "

स्वर्ण अब बिस्टेर पर चढ़कर आर्यन के सर के दोनों तरफ पियर करके कड़ी होकर अपनी योनि के होंठ को जोरसे भिंची तोह एक पतली धार किसी पक्के फल को निचोड़ ने वाली के रास जैसी निच्चे टपकी तोह आर्यन ने अपनी जीभ पूरी निकाल के ुष रास को लपक के घातक गया......

माया तोह आंखें फाड़े देखती रह गयी दोनों का करतब ...... स्वर्ण फिर निच्चे होकर अपनी योनि आर्यन के मुँह से लगा के माया की दोनों चूचियां दबा दी ," ोये बैठी hi रहेगी अब सवारी कर, तुझे लगेगा जैसे आर्यन की लगाम तेरे हाथ में ...... "

माया भी चूची दबाने से सिसकती ," अह्ह्ह्हह सीईई didiiiiiiiiiii ..... वैसे hi दर्द कर रही हैं इन्होने मसल मसल के लाल कर दी हैं ".

आर्यन ने एक एक हाथ से दोनों के चूतड़ों को पकड़ के निच्चे से धक्के माया की योनि में और जीभ स्वर्ण की योनि में पेलने लगा .......

स्वर्ण ने आगे होकर माया का गाल चूम के उसकी चूचियां सेहलती उसकी आँखों में देखकर उसके लबों को चूम ली," हम आर्यन की पत्नियां है इतना हक़ तोह बनता hi है ".

माया ने भी शरमाते हुए स्वर्ण की मस्त चूचियां थाम के उसके गाल चूम के ," आप को देखकर hi मेरा मैं करने लगा आपके स्तनों को एक बार चाखुन ...... अह्हह्ह्ह्ह ारयणणणणणण ढेरी ढेरी ...... Didiiiiiiiiiii मुझे चीयर देता है जब अंदर जाता तोपची ".

स्वर्ण ने माया के लबों को चूसते हुए अपनी कमर भी हिलने लगी हलके हलके ताकि आर्यन के लैब उसकी योनि के पूरे चीरे को चाट सकें..... जल्दी में आर्यन अब माया के नितम्बों को थाम धप्प्प धप्प निच्चे से छोड़ने लगा..... वहीँ माया के मोह में अपनी एक चूची लगा स्वर्ण ने आर्यन की गर्दन पकड़ ली और जोरसे जोरसे अपनी कमर आगे पीछे हिलाकर उसको योनि रास पिलाने लगी......

ाहिएँ बस ..... पुछठ पुछःह...... पहछहः पहछहः..... ह्म्म्मम्म ह्म्मम्म्म्म ...... ारयणणणणणणण ...... माया...... didiiiiiiiiiii ....... की घोंज रही थी और पूरा कक्ष उनके योनि रास की खुसबू से ( गंध जोह आर्यन के लिए तो खुसबू hi थी) .......

िश पोज़ में जब दोनों 2 बार झाड़ गयी तोह आर्यन ने स्वर्ण को अपने ऊपर से हटाकर अपनी पीठ पर लेते को कहा जब माया को फिर से निच्चे लेकर ताबड़ तोड़ चुदाई करने लगा ....... पूरा राजमहल फिरसे चीख्यों से गूंजने लगा माया की...... ओह्ह्ह्हह्हह माआआआआ मरररररर gayiiiiiiiiii..... बच्चाआआ लोओओओओओ ारयणणणण सीईई...... ढेऱीीी थोड़ाआआआ रुक्खक्क्क्क जाआऊवो मेंनननन मररररररर जौंगीीी अह्हह्ह्ह्ह..."

स्वर्ण ऊपर लेती अपनी योनि आर्यन की कमर पर और चूचियां कंधे से रगड़ कर उसके कानो को चूसकर और उकसा रही थी ....... "बबहार दे अपने बीज अपनी िश नयी घरवाली की योनि में, असली नर पहली रात में hi अपनी स्त्री को गर्भ से कर देता था..... तू असली नर है मेरे बालम, आर्यन, ...... दिखा अपनी मर्दाग्नि" ...... और इसी के साथ आर्यन के कान पर काट ली.

आर्यन भी 4-5 धक्कों बाद छीकता हुआ झड़ने लगा ...... एक के बाद एक पिचकारी गरम गरम ताजे विरए की माया के गर्भसे में जाने लगी तोह उसकी योनि ने अंदर से उसके टोपी को चरों तरफ से लपेट लिया...... 15-16 पिचकरी के बाद भी योनि के कसाव और संकुचन ने 3-4 छोटी छोटी पिचकरी के साथ एक एक बूँद सोख के लिंग को आजाद किया कुछ पलों बाद......

माया अब भीषण चुदाई की थकान से नींद की आगोश में चली गयी वहीँ आर्यन ने अपना लिंग बहार खींचा तोह खून, yoni-virye रास से सना था ......

स्वर्ण भी झट से उसकी पीठ से उतर के उसके सकुडते साणे लिंग को चाटने लगी..... सलरपपपपपपप सलरपपपपपपप ...... फिर माया की रास छोड़ती नयी ताज़ी फटी हुयी योनि को चूस चाट के साफ़ की.....

आर्यन ने स्वर्ण को अपनी बाँहों में भर के चूम के कहा," में इश्को साफ़ करके लाता हूँ".....

स्वर्ण ," नहीं इश्को सूने दो थोड़ी डिअर ताकि इश्कि ठक्कन काम हो फिर तुम्हारे जैसा नर तोह रुला hi डालता है अगला दौर में".

आर्यन ने स्वर्ण की चूचियां मसलते हुए कहा," अब रोने की बारी मेरी जान की है मगर माया बेबी डिसट्रब होगी, चल कामु के पास चलते हैं वहीँ प्यार करूँगा तुझे".

फिर आर्यन ने एक ब्लैंकेट जैसा कपडा अपनी नयी भयता, माया, को उढ़ाकर उसके लबों को चूम के उसका सर थप थापा कर अपनी लोटस शील्ड से उसको कवर कर दिया......

स्वर्ण को ऐसे hi नंगे उठाये वह 3 कक्ष पार करके जब अगले का दरवाजा धकेला तोह अंदर बिस्टेर पर कामलता बिलकुल नंगी लेती थी टांगें पेहलाये और पुष्पलता उसकी बगल में पूरे विस्तार में, दोनों hi सूने का नाटक कर थी....... जबकि आर्यन का आना hi दोनों के दिल की धड़कन बढ़ा दिया......

स्वर्ण को भी अपनी बड़ी बहेनो के सामने छोड़ने में बहोत मजा आता था ......

दरवाजा लगा कर आर्यन ने लोटस शील्ड से जब पूरा कक्ष कवर किया यानी अब कोई चीख पुकार किसी को सुनाई नहीं देगी..... आर्यन आगे बढ़कर अपनी पीठ पर लड़ी स्वर्ण को इशारा किया अपने होंठो पर ऊँगली रखकर की चुप रहना.....

दोनों नंगे hi थे तोह आर्यन ने कामु की योनि संगी और किसी मदमस्त हाथी की तरह उसकी आंखें लाल होने लगी पर नहीं अभी उसने मोह नहीं लगया.....

वह पुष्पु की तरफ बढ़कर ढेरी ढेरी उसकी निचली लावणी सी ड्रेस खोल के उसकी योनि को बेपर्दा करके चूम लिया..... उसकी खूबू और भी मस्त थी पर स्वर्ण जोह कटहल से आर्यन को सब उसकी पीठ पर लड़ी देख रही थी सोच रही थी आर्यन हम तीनो में से किस भें को ज्यादा प्यार करता है ?

पहले कामु दीदी फिर फुलपु दीदी मगर नहीं ...... उसने बड़े आराम से स्वर्ण को अपनी पीठ से उतर के उसको दोनों बड़ी बहेनो के बिच पीठ के बल लिटा के उसकी योनि चूसनी शुरू की तोह स्वर्ण ने अपना मोह अपने दोनों हाथो से बांध कर लिया की सिसकियाँ न निकले ......

2 मं चूस के अपना अब पूर्ण खड़े लिंग को योनि के चीरे पर घिसके अगला भाग गीला कर अंदर उतरता चला गया उसके ऊपर झुकार कान में बोलै," सुहागरात की बधाई मेरी प्यारी स्वर्ण ...... पुछःह पुछठ ..... में तुमसे दिलसे प्रेम करता हूँ मेरी रानी".

स्वर्ण तोह वैसे hi खुश थी पर आर्यन ने उसको सुहागरात की बधाई ऐसी दी की थोड़ा इमोशनल होकर उसके मोह में अपनी जीभ दाल कर किश करती ...... फचक फचक ...... ठप्प धप्प.... की आवाज के साथ धक्कों को सेहती उसकी योनि अध्भुत मिलान में पूरा लिंग अंदर लील गयी.....

दोनों बड़ी भेने जहाँ स्वर्ण से जल रही थी की अभी तोह छुड़वा कर आ रही है फिर हम को क्यों जलने को हमारे बिच लेटकर छुड़वा रही है...... मगर आर्यन के प्यारे शब्दों ने जाता दिया की स्वर्ण को सुहागरात का सुख अब यहीं उनके समीप मिल रहा है ......

दोनों ने अपना नाटक छोड़ कर पलट कर आर्यन और स्वर्ण से लिपट के चूम चूम के खूब बधाई दी...... अगले एक घंटे के में स्वर्ण के 5 बार झड़ने के बाद जब आर्यन झाड़ा तोह दोनों बड़ी बहेनो ने स्वर्ण और आर्यन के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया की गर्भवती भाव ....... एक शक्तिशाली दिव्या ऊर्जा निकल के आर्यन से स्वर्ण में सामने लगी.......

आज रात एक नहीं 2 स्त्रीयां आर्यन से मिलान कर पतलोक के नए उत्तराधिकारी बच्चों की माँ बनने की नीव अपने गर्भ में धारण कर लेने वाली थी.

दानव गुरूजी के महायाग के कारन दो लोकों के पास संतान का आशीर्वाद मिल चूका था पर जोह आर्यन से विवाह करने यहाँ पतलोक आयी थी वह अभी भी अपने को सबसे अलग कैद किये हुए थी. अब उसको कौन मनाये क्यूंकि रानी हेमा भी अब अज्ञातवास में जा चुकी थी जोह प्रभा को मन भी पाती.

थोड़ा सुस्ताने के बाद आर्यन तीनो अटाला लोक की रानी बहेनो को बिस्टेर पर घोड़ी बांये बारी बारी से योनि में लिंग पेलता और कामु की तोह गांड में भी पेलता..... 4 बार तीनो के झड़ने के बाद जब बाकी दोनों थक गयी तोह कामु और आर्यन का पागलपन शुरू हुआ...... दोनों एक दुसरे को पीठ पीठ कर लड़ते हुए चुदाई करते दर्द देते हुए ...... (इशलिये कामु असली औरत थी आर्यन की दादी देवी , मामी कविता और बिना की तरह..... दर्द में भी प्यार hi ढूढंते थे जबकि आम लोग कभी पसंद न करें.)

स्वर्ण और पुष्पु बस बिस्टेर पर लेटकर मोह फाड़े देखती hi रह गयी..... कभी आर्यन छीकता, कभी दर्द से कामु रोटी हुयी दोनों बहेनो को पुकारती ..... मगर दोनों एक दूसरे को लहूं लुहान करते अभी भी गुदा मैथुन कर रहे थे ....... पर आखिरी सन बहोत घिनोना था दोनों बहेनो के लिए.....

आर्यन के लुंड से गांड मरवाती कूदती हुयी कामु ने अपनी योनि का मुख खोल आर्यन के चेहरे पर थप्पड़ मारते हुए दोनों गालों को पकड़ उसका मोह खोल मूट की धार मारी ...... जोह सीधा उसके मोह के साथ चेहरे पर भी पड़ी.....

आर्यन ने अपने हाथों से उसकी दोनों चूचियां नूच डाली जिसमे में खून निकलने लगा....... फिर मूट की धार फिर थप्पड़ और फिर नोचना खोस्ट्ना ...... वील्डस्ट बड़सम एक साथ चल रहा था दोनों का.....

मूट से सना आर्यन जब एक पल को कामु की पकड़ ढीली देखा तोह उसके हाथो को पकड़ के अपने गाल से छुड़ा उसकी एक चूची पर सर उठा के मार्श में दांत गदा दिया ......

कामु की भीषण चीखिआ गूंजने लगी पर आर्यन के लिए सही मौका था िश अपने से डेढ़ फट लम्भी और 150 कग ज्यादा वजनी हथनी को कण्ट्रोल करने का ...... उसने दूसरी चूची पर हमला कर उसको भी काट डाला और खून पीते हुए उसको अपने ऊपर से साइड में निच्चे पटक दिया.....

कामु अभी संभल पाती उसकी भारीभरकम घायल चूचियां पर अपनी गांड टिका के उसका मोह खोल दोनों जबड़ों में हाथ की उंगलियन ऊपर निच्चे फसा के हिलने नहीं दे रहा था .......

कामु भी अपनी टांगें और घुटने आर्यन की पीठ पर मारती पर उसके दोनों हाथ आर्यन के प्यारों के नीचे दबे थे......

आर्यन ने अपना लिंग उसके मोह में डाला पर वह चाहकर भी मोह चला नहीं सकती थी ...... आर्यन गुर्राकर ," अगर तेरे दांत हिले कामु तोह मोह चीयर दूंगा अब त्यार रह मेरा पानी चखने के लिए ..... "

अब अगले आधे घंटे आर्यन ने कामु के घेंट तक छोड़ते उसके चेहरे पर थप्पड़ मारते हुए बेरहमी से मुख छोडन किया फिर झड़ने के बाद उसके मोह में मूट भी दिया जिसको वह पि गयी...... लेकिन दर्द, घायल और प्रताड़ित होने के बाद भी वह रूट हुए मुस्करा दी ........

उधर स्वर्ण बहोत बार कोशिश की आर्यन से कामु को बचा पाए पर पुष्पु ने उसको कसकर पकड़ के बिस्टेर पर hi रखा वर्ण उसकी मौत आ जाती.....

दोनों संतुस्ट होकर कुछ डिअर पड़े रहे कालीन पे...... फिर आर्यन उठा और कामु को गॉड में उठा के स्नानग्रह में ले गया......

अब पुष्पु ने हाथ हत्या और बोली," उनके बिच मत आना वह दोनों "गाजा शक्ति" के कारन सुरक्षित हैं पर उनका इश्से भी ज्यादा हिंसक रूप में देख चुकी हूँ अपने कक्ष में और खुद पर भी. तू भाग्यशाली है स्वर्ण जोह आर्यन तुजसे बहोत प्रेम करता है".

स्वर्ण अभी थोड़ी दरी हुयी थी, उसको हिंसक दानवो का पता था पर अपने पति आर्यन जोह मानव था, उसका हिंसक रूप जैसे उसके लिए विचलित कारी था......

आर्यन जब थोड़ी डिअर बाद कामु को गॉड में लेकर आया तोह दोनों चूमा छाती करते हस्ते हुए बहार आये...... दोनों के सरीर के झकम भी भर गए थे ......

स्वर्ण ने अपने बड़ी भें पुष्पलता की खोली भर ली और सूने का नाटक करने लगी ...... आर्यन ने कामु को बड़े प्यार से बिस्टेर पर लिटाकर स्वर्ण की पीठ को चूमा तोह थरथरा गयी और पुष्पलता से और जोरसे चिपक गयी.....

पुष्पु ने आर्यन का गाल सेहला के कहा," आर्यन इश्को यहीं रहने दो तुम अब राजकुमारी साया और चाय को सम्भालो...... दोनों तुम्हारी शील्ड के कारन अभी तक बहार बेचैन घूम रही हैं....... यह डर गयी है इश्को सूने दो".

आर्यन तोह स्वर्ण को वापस सुहागरात कक्ष में साथ ले जाना चाहता था पर उसका गाल चूम के बोलै," में सुबह इसे लेने ायूँगा मुझे मेरी दोनों पत्नियां अपनी बाँहों में एक साथ चाहिए "...... पुष्पु और कामु को चूम के अपनी लोटस शील्ड हटा कर कक्ष से बहार नंगा hi निकल गया.

पुष्पलता ," तू ठीक तोह है न कामु?"

स्वर्ण झट से पलट के कामु से लिपट कर उसको चूमते हुए पूछने लगी की "आप कैसे यह सेहती है..... ऐसे में होने नहीं दूंगी .... आर्यन को अपने किये की सजा भुगतनी होगी ...... वह कोई दानव नहीं है जोह आप पर अत्याचार किया ..... में ...... "

उसका मोह बंदकर कामु बोली," कोई गलत स्तब्ध मत बोलना हमारे आर्यन के बारे में उसको मैंने hi उत्तेजित करके ऐसा सम्भोग चाहया था..... "

स्वर्ण अभी भी अचंभित थी तब पीछे से पुष्पु ने उसका सर सेहला के कहा," कहीं तोह ुषको भी दानव शक्ति की ऊर्जा काम करने का मौका मिलता है फिर तू और में तोह मारे hi जाएंगे..... मैंने कोशिश की थी पर बेहोश हो गयी पर तेरी सेनापति हंसिका ने बचा लिया त्रिवेटा को आर्यन के सामने करके..... अब यह अभिशाप भी है और वरदान भी पर आर्यन ने तेरे या मेरे ऊपर नहीं दिखाई न hi Saya-Chaya-Maya पर यानी वह टक्कर मिलने पर hi इतना हिंसक होता है ".

स्वर्ण अभी भी समझने की कोशिश कर रही थी तब कामु ने कहा," देख में बिलकुल ठीक हूँ और अब तुझे अपने पति से बच्चे पैदा करने की कोशिश करनी चाहिए..... है है है है है"

बच्चे की बात पर स्वर्ण शर्मा के बोली," वह चले गए क्योंकि मैंने उन्हसे मोह फेर लिया था दीदी ".

पुष्पलता ने स्वर्ण का सर सेहला के कहा," वह बोल कर गया है सुबह आएगा तुझे लेने तोह त्यार रह वह नहीं थकने वाला फिर से तुझे प्यार करेगा".

स्वर्ण खुश होती हुयी," लेकिन दीदी आपको क्या मजा आ रहा था ऐसा करते हुए ?"

पुष्पलता ने जवाब दिया," जोह तू ले रही थी आर्यन और माया के अंगो को चाट के और कामु हम सबमे सबसे ज्यादा शक्तिशाली और ताकतवर है तोह इश्क अंदाज़ अलग है ...... आराम करते हैं अब राजा मयासुर की पुत्रियों की बारी है इशलिये में कक्ष मंतर से बाँध देती हूँ की सू सकें सिर्फ आर्यन hi प्रवेश कर पायेगा ".

अटाला लोक की रानियों को उनका आर्यन और उसका प्रसाद मिल गया था पर अब बारी थी रानी हेमा की तीनो पुत्रियों की वह कैसे संभाल पायेगी िश रात्रि में बने दानव जैसे कामासुर राक्षश, आर्यन को ?

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थोड़ा पीछा चलते हैं......

आर्यन और स्वर्ण को अपना कक्ष पार करता देखकर Saya-Maya दोनों अपने कक्ष से बहार आ गयी पर अगले hi पल रानी पुष्पलता के कक्ष में घुसते hi द्वार बांध होने के साथ शील्ड देखकर दोनों निराश होकर पीछे हैट गयी ......

मैं में कितने विचार आ जा रहे थे पर अब एक निम्ता ने मैं में जनम ले लिया है..... हम सिर्फ दानव राजकुमारी हो सकती हैं और शापित भी थी पर वह तीनो रानियां हैं आर्यन की..... हम तोह उसका भीख मांग के प्यार पायी जबकि अटाला लोक में सबको हरा के जीत लाया रानी स्वर्णलता को फिर दोनों बड़ी रानियां भी मुँह बोली कहकर पत्नी सुख ली आर्यन से पराजित होकर ...... छोटी ( माया ) सही बोली थी यह तीनो आर्यन की गुलाम हैं उसके खिलाफ नहीं जाएँगी.... तभी तीनो "गाजा शक्ति" ुशी को अपना 'नर' स्वीकार करने के बाद सौंप दी..... लेकिन हम तोह आर्यन के साथ भी रहने को त्यार हैं कभी पतलोक तक वापस नहीं आएँगी.....

पहले एक घंटे दोनों लोटस शील्ड से जड़ित कक्ष के बहार घूम घूम कर जलती रहे फिर उनको अपनी छोटी भें राजकुमारी माया की याद आयी की पहले एक बार चीखी थी पर फिर तोह बहोत जोरसे चीखी थी यानी कहीं वह ..... नहीं नहीं ......

साया चिंतित होती बोली ," देख मुझे ठीक नहीं लग रहा है उधर माया से संपर्क नहीं हो रहा है और इधर आर्यन भी बाधित है ..... "

चाय थोड़ा चिढ़कर ," तब दीदी आप hi बोली थी और इंतज़ार करो और इंतज़ार करो , मैंने बोलै था आर्यन फर्क नहीं करेगा हमको भी उनकी तरह खुश करेगा "

साया हताश होती हुयी ," हाँ हाँ पता है पर उनकी सुहागरात पर ऐसा जाना सही नहीं है और फिर रानी स्वर्णलता भी माया के साथ थी ".

चाय अब और खीजते हुयी जवाब दी ," हाँ हाँ...... अब तोह अंदर कीर्तन हो रहे है न दीदी..... वह तीनो इतनी प्राचीन शक्तिशाली रानियां आर्यन को अपना नर चुनती है जिसको हमने सबसे पहले चुना..... हम तोह आर्यन के बारे में, उसके परिवार, गिर्ल्फ्रेंड्स के साथ रिश्ते वाली (आँख मार के) लोगों को भी जानते हैं..... मगर एक बात बोल सकती हूँ आर्यन कभी काम या ज्यादा प्यार नहीं करता बल्कि हर औरत की कैपेसिटी और पसंद के अनुसार करता है. अब तोह मुझे भी ुष्पर दया आती है दीदी, औरतें अनेक है लिंग सिर्फ एक ..... "

साया भी उसकी लास्ट वाली बात सुनकर झूटी हसी के साथ बोली ," यहाँ पतलोक में उसने सबको रुला दिया और ठक्कन नाम क्या होता कोई उसको समझाओ पर चल छोटी (माया) को देखते हैं ..... कहीं हमारी भें को कुछ हो तोह नहीं गया?"

चाय," दीदी माया मर्डर जाये तोह बेहतर है ..............? चत्ताकककक ..... फटककककक ...

साया गुस्से से," अगली बार छोटी के लिए कुछ बोली तोह तू जिन्दा नहीं बचेगी ..... तू या में मर्डर जाये कोई फर्क नहीं पड़ता पर माया की वजह से हम सब जिन्दा रहेंगे...... "

चाय झुंझुलाते हुए ," पर अंदर क्या हो रहा है हम देख नहीं पा रहे और कहीं आपकी तीनो चाहती रानियां मेरे आर्यन के साथ गलत की तोह में लड़कर मर्डर भी जाउंगी पर इनको नहीं छोड़ेंगी ".

साया को भी पता था आर्यन की तीनो जुड़वाँ बहेनो के साथ उसकी सगी भें अणि बहोत पावरफुल होने के साथ गुस्से वाली भी है..... भले वह पतलोक न आये पर उसके पास दूसरी दुनिया के गुलाम भी हैं..... वह भड़क गयी तोह सबको बिल से निकाल निकाल के मारेगी..... उसके गोल्डन सानिक्स आज तक कोई मारने की कोशिश किया वह 2 नए सानिक्स में बदल गए...... यानी निर्जीव सैनिक शक्ति शाली होने के साथ अनेक. ( मीणा भी नेहा की प्रोटेक्शन करते गोल्डन सैनिक को टच नहीं की थी न hi सारू , वह अंधेरी दुनिया के प्रचीन योद्धा था)

साया थोड़ा मायूसी से," देख वह तीनो भी पिताजी ( राजा मयासुर) का hi खून है फिर हम उनकी तरह रानियां नहीं है..... आर्यन ने वादा निभाया अब क्या चाहती है तू साफ़ बोल दे ".

चाय अब आगे बढ़ते हुए सुहागरात वाले कक्ष के सामने खड़े होकर दरवाजा धकेल दी और अंदर पूरी सजावट के साथ कक्ष अस्त वस्थ देखकर जब ब्लैंकेट में मुस्कान लिए माया के चेहरे पर पड़ी तोह चाय को इतनी ख़ुशी हुयी और वही पिचि कड़ी साया को भी.....

सच्चा प्रेम मिला है हमारी माया को..... दोनों खुश होती आगे बढ़ी चुने को कोशिश की तोह दोनों को करंट लगा .....? " लोटस शील्ड"

दोनों ने फिर ुष शील्ड पर जोह प्रहार किये पर मजाल है सब सोख लिए शील्ड ने ..... सारू की शील्ड को तोड़ने के लिए ुष से ज्यादा प्रेम करने वाला चाहिए था यानी साया और चाय भी आर्यन को सारू से ज्यादा प्रेम नहीं करती थी.....

(सारू की लोटस शील्ड सिर्फ अणि तोड़ सकती थी पर वह खुद चाहती थी की सारू की शील्ड हमेशा अभेद रहे पर एक और थी जोह आर्यन की िश शील्ड के साथ उसके दिल भी सीना चीयर के निकाल लेगी..... पिछले जनम के दुश्मन शैतान सिंह की सिर्फ शकितयाँ hi नहीं उसकी नयी बेटी वजूद में आने वाली थी.

कहीं बहोत दुर्र धरतीलोक पर ," महार्यं तब भी हरा था और अब भी हारे गए ..... िशबार और दर्दनाक मौत दूंगा ..... सिर्फ उसकी जीवित मुंडी सारे भीषण कृत्ये देखेगी ...... "

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आर्यन 3 घंटे बाद जब कक्ष से निकला तोह साया और चाय ..... माया के सुहागरात वाले कक्ष में थी और सीधा जाकर उनको पकड़ के नंगा कर दिया चूम छाती नाराजगी दुर्र करता....

माया को उठाया कर बोलै," प्यार कर बेबी तेरी भेने भी साथ ले आया हूँ " ....... और तीनो खिली हुयी माया पर टूट पड़े और आर्यन ने फिर से लिंग उसकी दोनों बड़ी बहेनो के हाथ से माया की योनि में उतार दिया ....... दर्द होने के बाद इतनी खुसी थी तीनो को जैसे सब पा लिया हो.... 10 मं में माया एक बार झाड़ के बोली," आज मेरी दोनों बड़ी दीदी की भी सुहागरात है सिद्ध करो आर्यन आप उनके भी पति हो .... यह दोनों मुझसे भी ज्यादा आपसे प्रेम करती हैं, पर इनको बांध के रखा है पिताजी ने वाचां से ....... "

माया से गलती hi हो गयी ....... आर्यन ने अपना लिंग खींचकर योनि से बहार खींच के लहरा के साया और चाय के सर पर हाथ रखकर बोलै," माया के सर पर हाथ रखकर बोलता हूँ आज से तुम दोनों भी मेरी भार्या हो और वाचां देता हूँ जितना प्यार माया से करता हूँ उशसे काम तुम दोनों से कभी नहीं करूँगा........ और चाय तू बोल नहीं सकती थी की तू मुझसे शादी करना चाहती है..... जबकि आधी शादी तू ने hi करवाई हैं यार ".

चाय रूट हुए आर्यन के गले लगी गयी," तू इतना अच्छा क्यों है यार ? दीदी में नहीं मरने दूंगी मेरे माहि को ...."

आर्यन एक बार नहीं दो बार तीन बार गायब होकर वापस आया ...... आर्यन को शुन्य में पहुंचा के 2 और बार के बाद वापस आया तोह गुस्सा हो गया .....

आर्यन ," तुम तीनो पागल हो को मेरे सरीर को क्या समझ ली हो ?"

उधर चाय निच्चे बैठकर आर्यन का मुरझाया 10 ×3 इंची लिंग पकड़ के चूस ली ......

आर्यन गुस्से से ," अबे तू पागल है क्या चाय कड़ी हो और तुम तीनो में किसके पास पावर है पास्ट फ्यूचर की ?"

अब साया डरने लगी क्योंकि उसकी टोन hi गुस्से वाली थी पर फिर से माया को बिस्टेर पर एक बार छोड़ा और साया, माया को 3-3 बार तोह खुश होती माया के ऊपर धकेल दी जा उसको प्यार कर......

आर्यन बोलै ," में अपनी साड़ी नयी बीवियों को एक साथ प्यार करूँगा, तुम बिस्टेर ठीक करो ..... "

और आर्यन जब लौटा सुहागरात कक्ष में तोह तीनो अटाला लोक की नंगी रानियां उसके सरीर पे चढ़ा लाया था ऊपर से बिस्टेर पर माया को Saya-Chaya समझा रही थी जैसा तेरा हक़ है वैसा हम दोनों का भी आर्यन पर है पर तू hi असली पत्नी रहेगी सबके लिए ......

फिर असली खेला स्टार्ट हुआ आर्यन का......

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6-6 को गॉड में उठा के बारी बारी उछाल उछाल के फिर बिस्तर पर पटक पटक के छोड़ा ....... लाइन पटरी कुटिया पोज़ में झुका के एक की छूट मारता दूसरी की चूसता और तीसरी चौथी की योनि में ऊँगली करता ......

सुबह सुबह 4 घंटे बाद वह सबको थका के hi रुका ......

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दानव गुरूजी से मुलाकात के दौरान विवाह के बाद की अगर याद करते अब माया के अंदर अपना विरए भर दिया फिर स्वर्ण के भी मंतर पढ़कर...... दोनों को आर्यन ने 6 से मिली शक्तियां वापस दे दी...... यानी दोनों विरए लिए शक्तियों के साथ पहले hi गर्भ से हो गयी थी और अब सुबह सुबह उनके अंदर प्रवेश करि शक्तियां भी...... पुष्टि होने में करीब एक मॉस समय लगने वाले था...... पर ऐसा करने से हमेशा के लिए सब आर्यन से शक्तियों की वजह से जुड़ गयी यानी जबतक संतान होगी तबतक दोनों आर्यन के आह्वाहन पर उसके पास होगी शक्ति रूप लिए ......

दानव गुरूजी को भी बाद में नागलोक के द्वार पर गायत हो गया की आर्यन ने उनकी इच्छा का सम्मान रखा की पतलोक की शक्तियां यहीं आने वाली पीढ़ी में रहे. मगर आधी नाग्शक्ति अभी भी आर्यन के पास थी.

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तळतळा लोक........

रथ में त्यार होकर आर्यन के साथ उसकी 2 नवभ्याता और 4 गुप्त अर्धांगियां एक डैम नए कमल के फूलों की तरह खिली हुयी एक दुसरे को छेड़ते हुए राजा मयासुर के राजमहल पहुंची तोह सबका भावस्वगत हुआ......

हर तरफ पूरी जगमगाहट के साथ प्रजा भी सबके बारी बारी नाम लेकर जैकार बोल रही थी..... आर्यन को नए युवराज की तरह घोसित करते नारे लग रहे थे ...... सबकी तरफ हाथ हिलाते अभिवादन स्वीकार करते जब अंदर प्रवेश किये तोह राजा मयासुर का महल जैसे स्वर्ग लोक से भी ज्यादा सूंदर सुसज्जित लग रहा था.....

राजा मयासुर के राजमहल में सब ने आर्यन, माया और स्वर्ण के नामो को सम्भोदित करते हुए बधाई दी.... तीनो ने राजसिंघासन के सामने सर झुका के आशीर्वाद लिया.

राजा मयासुर ने आर्यन के सामने प्रस्ताव रखा ," वीर आर्यन तुम चाहो तोह स्वर्ण और माया के साथ यहाँ या फिर पृथ्वीलोक में रह सकते हो. तुम हमारे पास रहो एहि हमारी भी इच्छा है ".

स्वर्ण और माया, आर्यन के दोनों तरफ कड़ी थी शरमाते हुए परन्तु अपने पिताश्री की इच्छा सुनकर माया बोली," नहीं पिताश्री आप इनको बढ़ए न करें, हम कभी नहीं चाहेंगे की इनके परिजन से इन्हे दुर्र किया जाये...... हम खुद पृथ्वीलोक जाते रहेंगे और यह भी यहाँ हमसे मिलने आते रहेंगे".

रानी स्वर्णलता ने दोनों हाथ जोड़कर मिन्नत करते हुए कहा ," महाराजजज !!!! राजकुमारी माया की बातों से में भी सहमत हूँ फिर किसी भी दानव भार्या को अपने नर का अनुसरण करना चाहिए ".

राजा मयासुर भी अब मुस्करा रहे थे पर उनके सवाल ने दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया ..... " चलो हम मान लेते हैं पर आगे जब तुम दोनों की संतान होगी तोह क्या वह पृथ्वीलोक पर रह पाएगी ....... ?"

अब तोह 6 की 6 भी प्रसन वचाक इस्तिथि में एक दुसरे को देखने लगी की क्या बोलेन. जैसे यह सवाल सीना hi चीयर दिया था िंह सबका, आखिर आर्यन के साथ hi वह बच्चे भी रहने चाहिए तभी तोह उनको पिता का प्यार भी मिलेगा.

जवाब आर्यन ने दिया," आप बेफिक्र रहिये राजा मयासुर, हमारी हर पतलोक की संतान पर पतलोक का हक़ होगा. वह यहीं सुरकषित रहकर आप सबकी चादर चाय में बड़ी होंगी. मगर वह धरतीलोक आएंगे तोह उनकी और उनकी माओ की सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी होगी आप निश्चिंत रहिये ".

राजा मयासुर ने महसूस कर लिया था की आर्यन से उनकी मायावी शक्तियां अब राजकुमारी माया के गर्भ में हैं, यानी दानव गुरूजी ने सही कहा था की आर्यन माध्यम है नए उत्तराधिक्यारिओं को पतलोक में जन्मने का.

तभी रानी पुष्पलता ने कहा," रानी स्वर्णलता भी अटाला लोक के राजकुमार या राजकुमारी को वहीँ अटाला लोक में पालेगी".

आर्यन जोह बहोत देर से रानी माँ हेमा को ढूंढ रहा था पर वह यहाँ थी नहीं तोह पूछ बैठा," रानी माँ नज़र नहीं आ रही हैं? क्या हमसे कोई गलती हो गयी जोह मिलने नहीं आयी ?"

राजा मयासुर ने बात बदलते हुए जवाब दिया ," वह तो नागलोक में hi मिलेगी तुम से अगर स्वंयवर में राजकुमारी प्रभा को जीत पाए ऐसी उन्होंने कसम खाई है ".

अब सब हैरान थे यानी आर्यन हार गया तोह रानी हेमा वापस नहीं आएँगी क्या?

आर्यन भी पहले हैरान हुआ पर अब आगे बढ़कर राजा मयासुर के चरण छूकर बोलै," फिर तोह आप आशीर्वाद दे महाराज, में जीतकर अपनी रानी माँ का मान जरूर रखूँगा..... उन्होंने ने मुझे दिल से पुत्र माना है तोह उनकी इच्छा जरूर पूरी करने की कोशिश यह नाम मटर पुत्र जरूर करूँगा".

रानी पुष्पलता चिंतित स्वर में ," आर्यन वहां तुमको प्रभा को हारने के बाद विशाखा को भी हराना होगा जोह इतना आसान नहीं होगा. कोई भी नागिन अपने नाग को ऐसे hi नहीं चुनती फिर वहां कुछ अनर्थ हो गया तोह स्वर्ण, माया के साथ हम सबका क्या होगा ?...... ( जल्दी hi अपनी गलती का अहसास हुआ ) यानी तुम दोनों लोक के दामाद के साथ अंगरक्षक भी हो?"

आर्यन ने एक हुंकार और दृढ निस्चय से पलटकर कहा ," वहां में भी जा चूका हूँ और विशाखा पहले भी हारी थी तब दीप्ति मेरे साथ थी और अब तोह माया और स्वर्ण का प्रेम hi मुझे जीतने में मदद करेगा..... पर क्या मुझे एक बीन मिलेगी जिशसे वहां के नाग नियंतरण में कर सकूं ".

सब आर्यन की बात पर हसने लगे और वह भी उनके साथ..... आर्यन शांत दिख रहा था. वह प्रभा के बाद अब रानी माँ हेमा के लिए भी चिंतित था..... आखिर ऐसा क्या हो गया जोह रानी माँ मेरे साथ मुझे अपनी छोटी भें को हारने के बाद hi मिलेगी..... काश उनका मीठा दूध मुझे और ताकत देता.... में आपका सर नहीं झुकने दूंगा रानी माँ यह वाचां देता हूँ आप के दूध के कर्ज का .....

( अपने hi आंसूं पहुंच के रानी हेमा ने सब दृश्य दुर्र से अपनी दिव्या दृष्टि से देखकर अपने दोनों हाथ छातियों पर क्रॉस करके खुद से कहा, मेरे दूध की लाज रखना आर्यन यह सब तुमको हरा कर मारने की कोशिश करेंगे..... पर तुम गलती मत करना पुत्र वार्ना पतलोक को नष्ट करके कभी भी पुनर्जीवित तोह देवता गण नहीं होने देंगे. तुम लड़ोगे दानवो के लिए पर जीत की कामना सब भगवन और देवता गण कर रहे हैं )

कई महत्वाक्षी महाबलिओं के साथ दानव गुरूजी से मिलकर बातों से पता चल रहा था की वह उसको बाईपास दे रहे पर क्यों?????

आर्यन एक चीज में बहोत माहिर था बचपन से..... बस देख और सूंघकर अपनों को पहचान लेता था और यहाँ भी जैसे मेरे रानी माँ को hi मुझसे दुर्र कर दिया है सबने और प्रभा बेबी क्यों नहीं आयी अब तक, वह इतना गुस्सा पक्का विशाखा की वजह से होगी. ना प्रभा यहाँ आती न विशाखा को मौका मिलता..... वह धूर्त नागिन है कहीं प्रभा को नुक्सान न पहुंचा दे.......

6 की 6 उसके साथ नागलोक जाना चाहती थी पर आर्यन ने अलग hi शरत राखी ," अगर में वापस नहीं आया तोह मेरे पृथ्वीलोक के परिवार की केयर करना..... वहां अणि सब संभाल लेगी पर तुम सिर्फ निघा रखना बस ुष से मत टकराना. में नहीं चाहता मेरी बीवियां hi मेरे परिवार की खुशाली में रुखवत बने........ ".

आर्यन के मोह पर हाथ रखती माया बोली," आप कभी हार नहीं पयोगे क्योंकि आप के पास सब शकितयाँ हैं, बस नागलोक के राजा वासुकि से मत भीड़ जाना ".

रानी कामलता ," आर्यन तुमको जीतना hi होगा और तुम्हारे साथ में 2 लाक्षा सेना भेज रही हूँ...... एक बार मुझे याद कर लेना में तुम्हारी तरफ से लड़ूंगी "........ सच्च में कामलता कई प्राचीन युद्ध लड़ चुकी थी पर पुष्पलता को भी उसकी बात सुनकर हसी आ गयी ......

पुष्पलता हस्ते हुए ," आर्यन वह प्रभा तुम्हारी धरतीलोक से छोटी भें है, अभी उसका मैं पता नहीं पर उसको उशसे संपर्क करो वह वहीँ पहसेगी ...... उसको अपना प्रेमा दिखा के नियंत्रित करो तुम जीत सकते हो, अब समय आ गया है उसको भी अपनी स्त्री की नज़र से देखो..... हर स्त्री प्यार की भूकी होती है फिर वह तोह अपना प्रेम धरतीलोक से पतलोक तक ले आयी है ..... याद रखना बस अपने क्रोध में यह पतलोक hi नष्ट न कर दो".

दिक्कत यह थी नागलोक में अटाला लोक की रानियां कमजोर थी वहीँ तळतळा लोक की तीनो राजकुमारियां भी...... यानी न मानव शक्ति न hi दानव और न hi नाग शक्ति आर्यन के लिए काम करने वाली थी .....

अब समय था नागलोक का पतलोक के 7 लोकों पर नियंतरण करने का ...... यानी बाकी हर 6 लोक से कभी न कभी एक एक पूरे पतलोक का महाराजा रह चूका था सिर्फ नागलोक को छोड़कर ...... अगर राजकुमारी विशाखा अभी भी गर्भित हो जाए तोह नागलोक के साथ पूरे पतलोक के 7 लोकों का नया उत्तराधिकारी भी जनम लेगा और राजा वासुकि के वंश में भी नया राज सदाश आएगा. लेकिन उससे बड़ा खतरा तोह नागलोक के विनाश से जुड़ा था ......

अगर मनचाहे नाग से विशाखा का मिलान हुआ तोह नागलोक का पतलोक पर राज होगा वार्ना खुद वही hi पुत्र, नागलोक का विध्वंश कर देगा..... अब आर्यन hi उनके लोक का विध्वंश करने वाला था अगर प्रभा ुषको मिल गयी और विशाखा नहीं.

उधर राजा वासुकि की शक्तियां आधी हो गयी थी क्योंकि तीनो दानव कन्यानो ( राजकुमारिओं) ने आर्यन को दिल से अपना लिया था बिना किसी द्वेष से पतिपरमेश्वर के तरह ...... अब दिक्कत यह थी वह भी पहले नागलोक को बचने चाहते थे चाहिए उनकी दोनों पुत्री जीवित न बचे......

उधर पतलोक के 6 लोकों के राजाओं और रानियों के साथ दानव गुरूजी भी सहमत थे की आर्यन को या तोह नागलोक जीतना होगा वार्ना नाश कर देना होगा...... आखिर आधी नाग्शक्ति अभी भी धारण करके वह गजब की सहनसीलता दिखा रहा था......

राजसभा के बाद आर्यन को उसकी दोनों पतलोक की बीवियां अपने हाथों से भोजन करवाई वही बाकी बड़ी 4 भी कहाँ पीछे रहती ..... सब ने आर्यन को हसी खुसी विदा किया की वह आज सिर्फ नागलोक में प्रतिद्विंदिता देखने आएँगी मगर हर एक उसको गले मिलकर अपनी अपनी जीवनशक्ति पावर भी दे दी...... यानी आर्यन अब मारा भी गया तोह यह 6 की 6 मारेंगी ...... सबने प्राणशक्ति ुश्मे डाली थी......

आर्यन जब एक शाही यान से नागलोक के द्वार पर उतरा तोह 2 नकाबपोश सकशो को पहले से उसका इंतज़ार करता देखकर चौंक गया...... उनके साथ खड़े 8 नाग सैनिको की गर्दन काट कर दोनों दौड़ के आर्यन से आकर लिपट गए......

आर्यन अभी खुश बोलता उसको जमीन पर गिरा दोनों नकाब पोशों ने अपना छिपा चेहरा दिखाया और उसको चूमने लगे .......

दोनों को देखकर hi आर्यन की बचें खुल गयी ....... "बिन मांगे मोती मिले मांगे मिले न भीख" ........

उधर पीछे से तीरों और अस्त्रों की वर्षा आर्यन ने अपनी लोटस शील्ड कड़ी करके बोलै ," मेरी जानो को प्यार करने वाले मुझे अपने भी दुश्मन लगते हैं ....... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म ..... तुम यहाँ कैसे चंदा रानी ..... पुछःह पुछठ चुम्म्म चुम्म...... दीप्ति यार तुझे यहाँ नहीं आना चाहिए tha........I लव यू बोथ माय स्वीट हार्ट ..... साला हार्ट अटैक hi आ गया था मुझे ...... पुछःह पुछठ....... "

जी हाँ दोस्तों दोनों प्रभा के विवाह के लिए आमंत्रित थी राजा वासुकि की तरफ से क्योंकि पिछली बार दोनों को दिव्या तलवार आर्यन को पाने और विशाखा के पूर्ण जीवित प्रभा के अंदर होने के बाद अपनी बेटियां माना था और नागलोक वह दोनों कभी भी आ सकती थी जोह आज्ञा उन्होंने आर्यन को भी नहीं दी थी.... दोनों नागलोक के द्वार पर आर्यन का hi इंतज़ार कर रही थी..... रानी हेमा से मानसिक संपर्क होने पर उनको गायत हो चूका था की वह गलत नागों के साथ कड़ी हैं...... लड़ाई का बिगुल दोनों hi बजा दी थी .......

दोनों ने आर्यन के आधे आधे दोनों लिप्स कब्ज़ा के चूमने चूसना शुरू कर दिया उसको चुप करवाते हो ....... चुस्स्सस्स्स्स चुम्म्म्म्म ...... गीता और दीप्ति , राजा वासुकि के बुलवाये पर hi नागलोक पहुंची थी पर इतनी जल्दी पाला बदल लेंगी किसने सोचा था ......

तीनो का प्यार hi इतना घेरा था की आर्यन तोह उनकी सुगंध लेकर समझ गया और वह बहरूपिया नहीं हो सकती थी..... दोनों ने नागलोक पहुंचकर वह काम किया जोह कोई नहीं कर सकता था और आर्यन को आगे मदद मिलती ......

10 मं बाद किसिंग टूटी तोह आर्यन फिर से दोनों को गॉड में उठाये बारी बारी चूम रहा था...... आर्यन की किसिंग hi उनको उसकी तड़प और प्यार जाता दी की अभी भी भूका है......

गीता चिढ़कर ," अबे यहीं चूमा छाती करके मोह दुःख दिया जरा बचा के रख ुष छटांकि के लिए ...... भेनचोद निर्मला दीदी को साथ लाना था चप्पल मार मार के िश प्रभा जैसी चुहिया का इश्क का भूत उतर देती ".

दीप्ति शरमाते हुए," लव यू माहि में रोक नहीं पायी पर यहाँ बहोत खतरा है..... यहाँ हमारी शकितयाँ भी काम काम करती हैं पर प्रभा की मानो तोह 100 गुना..... उसको अपनी तरफ करो, यह रहने लायक जगह नहीं है यह नागलोक के राजकुमार को चुनने की प्रतियोगिता रखे हैं ...... आप इश्को स्वंयवर मत समझो यह मारने का प्लान है जितना मैंने देखा ..... एक एक नाग काम से काम 40-80 फट तक का , किसी के 4 सर या 10 हाथ भी ...... रानी हेमा को ढूंढो वह hi मदद कर सकती हैं".

गीता जोह अब अपना मोह से आर्यन के कान, गाल, गर्दन चूमे जा रही थी बोली," आर्यन भाड़ में गए यह लोक तू दिव्या तलवार को याद कर सबकी गर्दन काट दूंगी जोह तेरी तरफ देखा भी ..... पुछःह पुछठ ..... िश जनम में तू मेरा है बस अब तू मारा तोह सबको मार दूंगी बस वह तलवार मुझे दे".

आर्यन ने दोनों का बारी बारी माथा चूमा और बोलै ," पीछे देख लो तुम दोनों की वजह से बाकी 6 लोक वाले भी अपनी सेना लेकर आ गए ...... आखिर नागलोक से सब डर क्यों रहे हैं ...... ahhhhhhhhhhh "

करीब 82 लक्स सैनिको के साथ सब लोकों के महाबली भी खड़े थे पर एक दम से आर्यन को जमीन के नीचे से निकले बड़े मोह सांप ने अपनी पूँछ में लपेट के जमीन पर 2 बार पटक के बेहोश करके पीछे नागलोक द्वार पर लगी शील्ड के पार फ़ेंक दिया...... 4 नाग एक स्ट्रेचर जैसा अपने फैन बांये बेहोश आर्यन को ले जाने लगे .......

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बहार तोह जैसे खलबली मच गयी इतनी तेजी वाला एक्शन देखकर और कोई हिल भी नहीं पाया ........पर बेहोश आर्यन ने लेफ्ट आँख थोड़ी सी खोल के मारी तोह रानी स्वर्णलता भी हलके से मुस्करा दी , आखिर वह नागलोक में प्रवेश कर hi गया ...... गीता और दीप्ति के गुस्से को स्वर्ण और माया रूट हुए रोकने की कोशिश कर रही थी ुष विष भरी शील्ड की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए ......

रानी पुष्पलता जोरसे बोली ," हमको यहीं डेरा लगाना है और अब अगले नागलोक के आमंत्रण का इंतज़ार करना होगा...... आर्यन को सिर्फ प्रभा hi बचा सकती है वह भी नागिन है ".

गीता गुस्से से ," फिर तुम सब हिजड़ों हो जोह मेरे आर्यन को अपने सामने से इतनी बड़ी सेना होने के बाद ले जाने दिए ...... दीप्ति बुला दिव्या तलवार को अब तोह सबकी मैया छोड़कर जाउंगी ".

दीप्ति के पास जाकर रानी पुष्पलता बोली," राजकुमारी दीप्ति, तुम भी अपने लोक की राजकुमारी हो इतना तोह समझती होगी की आर्यन भी अंदर जाना चाहता था प्रभा के लिए..... हम को भी अंदर जाने का मौका मिलेगा पर अब हम मेहमान hi होंगे जिसका नाम में लुंगी सिर्फ वही hi जाएंगे ".

राजकुमारी दीप्ति ," पर ऐसी कोनसी शक्ति है जोह आप सबको भी रोक सकती है ..... "

रानी पुष्पलता ," नाग्शक्ति ...... जिस दिन एक होगी पार्ले के बाद शान्ति भी स्थापित हो जाएगी ...... बस इतना समझो ुशी शक्ति की वजह से आर्यन को हम सब नहीं हारने देंगे..... पहले आधी हमारे पास भी थी और अब पूर्ण नाग्शक्ति नागलोक में वापस जा चुकी है ".

गीता तोह पहले से बहोत गुस्से में थी," अगर यह आर्यन हारा न तोह मुँह तोड़ दूंगी उसको.... हरामी, कायर ,मेरा पति कभी नहीं बनेगा? देखना वह सबकी माँ छोड़कर आएगा ...... बस एक बार वापस मिल जाए कभी िश पतलोक में तोह नहीं आने दूंगी अब उसे".

गीता की अंत संत गुस्से से भरी बातों के बीच दीप्ति उसके गले लगकर बोली," दीदी वह आप करना बाद में अब यह सोचो उनकी मदद कैसे कर सकते हैं ????? उनको भी यहाँ किसी मकसद से लाया गया है यानी हम सबको कूल रहकर आगे प्लान करना होगा ..... आज उनकी hi नहीं हम सबके भी प्यार की परीक्षा है ".

बड़े बड़े अपने लोकों के राजा भी मजबूर थे अपने hi नियमो में वहीँ आर्यन को नागलोक में एक बंदीग्रह जैसी नाग गुफा में कैद कर दिया गया.......

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अपनी hi गुफा में इधर से उधर टहलती यह 5 फैन वाली नागिन के अलग अलग फैन hi अलग बोली बोल रही थी ...... " देख ले प्रभा कितनी आसानी से आर्यन को कैद कर लिया गया है..... तेरा धरतीलोक का भाई यहाँ सिर्फ साधारण मानव है और अब भी समय है तू भी हटधर्मिता छोड़कर क्यों उसको एक मौका नहीं देती सायद वह जीत पाए..... मैंने ुषको वहां ( अलवर के खोजने वाले तहखाने) में कमजोर hi देखा था.... हाँ उसके अंदर दिव्या तलवार का मालिक hi उसकी शक्ति है जिसकी वजह से वह सबसे ख़ास है".

प्रभा झलाते हुए," आपको प्रेम के स्तब्ध hi नहीं पता, आप क्या जानोगी जब पिछली बार भी मुझे hi निमिन मिर्त्यु देकर यहाँ से फ़ेंक दिया ..... वह क्या हैं आपको भी अंदाज़ा नहीं है और रही बात ुष समय भी वह सब अपनों को बचने की कोशिश कर रहे थे आपकी तरह स्वार्थी लोगों को भी खुद से बचा रहे थे ......"

विशाखा ," अच्छा तुझे अभी भी घमंड है न आर्यन पर..... अगर वह यहाँ जीत गया तोह विशाखा तेरी और आर्यन की गुलामी करेगी अगर हारा तोह तू मदद करेगी ुष दिव्या तलवार वाले को मुझे प्रेम करने ले लिए, वह दिव्या रूप , वह सुंदरता, में नहीं भूल सकती ..... में भले तेरी तरह प्रेम नहीं करती पर क्या मुझे भी मञ्चाःया वर नहीं मिलना चाहिए ...... सोच एक सरीर में और तू हैं और उसके सरीर में कितने पर मैंने क्या दुसरे किसी की चाहा की ? नहीं.... यहाँ तक तेरे भाई आर्यन को भी पूरे सम्मान के साथ सिर्फ तेरे लिए ठुकरा दी...... प्रभा में एक बार ुष दिव्या तलवार के धारक को दिल से मिलना चाहती हूँ सिर्फ एक बार प्रेम करना भी, तू चाहिए तोह संभव है ...... में अपनी नाग्शक्ति भी उसको देने को त्यार हूँ..... सोच ले आखिरी मौका है यहाँ साड़ियां बीत जाएँगी वहां धरतीलोक पर सबकुछ ख़तम हो जायेगा सिर्फ कुछ hi वर्षों में..... ?"

प्रभा बहोत देर तक अपने अंतर्मनन को समझने के बाद बोली," मेरी दो शरत हैं, पहली आप कभी मेरे और मेरे भाई के बिच नहीं आयोगी और दूसरी अगर आपको भाई के अंदर दिव्या तलवार का मालिक मिल गया तोह सिर्फ एक बार मिलान करोगी, उसके बाद आपको मेरा सरीर को त्यागना होगा स्वेछा मिर्त्यु से...... में अपने भाई के साथ एक आम मानव स्त्री की तरह जिंदगी जियूँगी धरतीलोक पर ...... "

विशाखा मुस्करा के ( बेवकूफ) ," मंजूर है पर तू बिच मत आना ..... जा अपने भाई के साथ डेट पर जा तुझे कोई नहीं रोकेगा ..... डेट hi बोलतो हो ना तुम मनुष्य लोग, कभी एक दुसरे का भी सच्चा होकर देखो..... hi hi hi hi hi ...... कल इसी समय तक में तेरा सरीर अपनी नाग्शक्ति के साथ विमुक्त करती हूँ. प्रभा में तब भी नहीं चाहती थी की तुझे कमजोर नाग मिले न अब भी की कमजोर मनुष्य...... बस मुझे िशबार निराश मत करना ".

विशाखा एक ऊर्जा के रूप में प्रभा के सरीर से गायब हो गयी पर सरीर इतना हल्का कभी प्रभा को कभी नहीं लगा........ वह अपने 5 फोहो से एक दुसरे को चूम के बोली ," भाई में आ रही हूँ चाहिए एक दिन hi है मेरे पास पर आपको कुछ नहीं होने दूंगी ...... में आए राहीईई हूंणंन्न भईईई....."

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अपडेट 38

Part 5 ©

पतलोक के मुख द्वार का प्रहरहि अब दानव धरतीपकड़ की जगह नाग ,नागदंश, को बांया गया था और उसको विश्वसनीय नाग गुप्तचर ने आकर सूचना दी की ुष मानव आर्यन को नागलोक में कैद कर लिया है सेनापति विषधर ने...... एक दुखद सन्देश यह है की ुष मानव को बचने को पतलोक के बाकी 6 लोकों की विशाल सेना नागलोक पर अकर्मण करने नागलोक के द्वार पर कड़ी है.....

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नागदंश

नागदंश उतना खुश नहीं हुआ था जितना क्रोधित होकर अपनी पूँछ में ुष गुप्तचर का लपेट के मारने वाला था की हिमासुर जोरसे थक्का लगा के हँसा..... " है है है है है ...... यानि सब राजा वासुकि से लड़ेंगे या भगवन शेषनाग से...... है ः है है ..... अति उत्तम खबर लाये हो गुप्तचर, जा एक दानव स्त्री तुझे दी ...... है है है है है..... नागदंश भ्राता चमा कर दो िश नाग को यह पुस्कृत होना चाहिए दण्डित नहीं ".

नागदंश हैरान होता अब अपने सामने खड़े हिमासुर दानव को अपनी फुंकरति सर्प नज़र से देखता ुष गुप्तचर सर्प को दूर फ़ेंक के गरजा ," हामरे नागलोक पर संकट आया है और तू है रहा है कहीं तू भी तोह उनसे नहीं मिल गया हिमासुर ........ "

हिमासुर के दो साथी दानव भी अब उसकी तरह गुस्से से तलवार खींच लिए.... हिमासुर ने अपनी लम्बी तलवार नागदंश की तरफ लहराकर बोलै," अपने भेजे से थोड़ा विष निकाल के सोच..... वार्ना यहीं तुम सबको मारकर पत्थर में जड़ दूंगा. वह मुर्ख मानव अब सारे पतलोक को नागलोक के सामने मरवाने ले आया है..... क्या तुझे अपने अमर शेषनाग भगवन पर विश्वास नहीं है या राजा वासुकि पर जिनके पास अमरता के सामान नाग्शक्ति है ...... युद्ध हुआ तब भी ुष मानव की मिर्त्यु निश्चित है और नहीं तोह कल उसको में खुद अपने हाथ से मारूंगा तू यह सोच किस नागिन के साथ मौज करेगा विशाखा या प्रभा ?????? ....... है है है है है है ...... "

नागदंश के साथ उसके साथी प्रहरहि बाकी नाग और दानव भी अब अपने अस्तर वापस रख लिए दानव हिमासुर का पूरा वक्तव और उपहास सुनकर......

नागदंश ," तुम भूल रहो hi राजकुमारी विशाखा कितनी शक्तिशाली हैं और उनसे पूरा नागलोक डरता है, उनके बारे में गलत मत बोलो ...... मुझे वह तूच मानव पूरे पतलोक के 7 लोकों के लिए पहले hi अपसकुन लग रहा था..... आज एक दानव रानी और दूसरी दानव राजकुमारी उसकी भार्या हैं और अब वह राजकुमारी प्रभा से विवाह करना चाहता है Naag-Swayamvar में जिसमे हम हार भी गए तोह राजकुमारी विशाखा से कोई नहीं जीत सकता फिर वह नाग है भी कहाँ है ".

हिमासुर ने सब को बहार जाने का आदेश दिया और अपने सेवकों को नागदंश ने 2 नयी दानव स्त्री के साथ विशेष भोजन लाने को कहा हिमासुर के लिए.....

दोनों अपनी अपनी जाती की स्त्रियों से शंभोग के उपरांत उनको मार कर खा रहे थे ....... तब हिमासुर ने नागदंश को जोह समझाया वह सुनकर वह भी खुश हुआ फिर दोनों ुशी गुप्तचर से राजा वासुकि के पास सन्देश भिजवा दिया की वह उनकी तरफ से आर्यन को हरा देंगे.......

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नागलोक के बहार रानी पुष्पलता के सैनिक तम्बू में अभी सब लोकों के सेनापति और महाबलिओं की मंतार्ण चल रही थी..... तभी दानव गुरूजी वहां प्रकट हुए तोह सब ने सर झुका कर उनका आशीर्वाद लिया.

दानव गुरूजी ," राजा महाबली महाराज का ना आना hi संकेत है की वह युद्ध नहीं चाहते परन्तु तुम सब को में रोकूंगा नहीं आखिर आर्यन अब दो लोकों का दामाद और अंगरक्षक भी है और उसको बुलाकर हरण करना अनुचित है पर क्या आप सबका इतनी बड़ी सेना के साथ नागलोक को ललकारना क्रोध नहीं दिलयेगा ?"

रानी पुष्पलता ने हाथ जोड़कर कहा ," चमा चाहती हूँ गुरूजी, लेकिन नागलोक ने कुचेष्टा की है तोह परिणाम भी भुगतने होंगे ...... हम सिर्फ राजकुमारी प्रभा की वजह से रुकें हैं और आर्यन को वह छु भी नहीं पाएंगे...... हम आर्यन के साथ प्रभा के लिए वर्कर रूप में लेकर आये हैं और सेना इशलिये के हम सबको नागलोक पर विश्वास नहीं है ".

राजकुमारी दीप्ति चिंतित होकर कहा ," गुरूजी वह सर्प आर्यन को लपेट के निगल गया और नागलोक के अंदर उसको ुघल कर बेहोशी में ले बंदी बना कर ले गए और हम सब कुछ नहीं कर पाए? आप hi कोई रास्ता दिखिए गुरूजी हम प्रभा का विवाह आर्यन से वहां पृथ्वीलोक में करवा देंगे फिर युद्ध या स्वयंवर की जरुरत hi नहीं होगी ...... क्यों गीता दी ?"

गीता जोह बहोत देर से गुस्से में मैं hi मैं उबाल रही थी बोली," नहीं अब में िश नागलोक को टेशनहस करके hi जाउंगी ...... हरामखोर भूल गए पिछली बार आर्यन ने माफ़ कर दिया था प्रभा के लिए...... बस तू वह दिव्या तलवार हाँ 'सहायक' मुझे दे दे इनकी माँ का भोसड़ा ऐसा मरूंगी नागलोक क्या किसी भी लोक में कोई सनाप क्या कांचवा भी नहीं दिखेगा ".

गीता का गुस्सा और मनसा सुनकर जहाँ कुछ लोग खुश थे वहीँ समझदारो को समझ में आ गया की िश के हाथ में दिव्या तलवार कभी ना आये वार्ना यह क्या कर देगी ......

रानी पुष्पलता को भी गीता की बात अच्छी नहीं लगी पर वह भी जानती थी यह खाश लड़की कौन है..... इसी की राजी से आर्यन की इतनी प्रेमिका और बीवियां है इश्से नहीं बिगाड़ सकते. अभी वह कुछ बोलती गीता की बात का समर्थन रानी कामलता ने किया," गीता सही कह रही है डरना अब नागलोक को होगा, उनका घमंड में जरूर चूर करुँगी जोह हमारे आर्यन पर ऐसा हमला किया जोह निहथा था ".

साया और चाय भी एक साथ ," नागलोक वालों ने आर्यन को एक भी छथि पहुंचाई की जुर्रत की तोह भारी कीमत चुकानी होगी ....... "

सेनापति त्रिवेटा और हंसिका निच्चे घुटनो पर बैठकर ," आप आज्ञा दो महारानी (पुष्पलता) हम दोनों hi महाबली आर्यन को आजाद करवा लाएंगे वार्ना मौत को गले लगेंगे ".

राजकुमारी माया जोह रोटी हुयी रानी स्वर्णलता को चुप करा रही थी कड़ी होकर सबको हाथ जोड़कर बोली," अपना शक्ति परिक्षण आप सब बाद में कर लेना में और स्वर्ण दीदी जायेंगे नागलोक अपने पति का जीवनदान मांग ने अब और कोई कुछ नहीं बोलेगा ".

रानी स्वर्णलता भी कड़ी होकर सबके सामने हाथ जोड़कर," माया सही कह रही है हम दोनों जायेंगे, राजा वासुकि भी हमारे लिए पिता टूल हैं और जोह हमारे साथ चलना चाहिए वह भी चल सकते हैं "...... यह बात उसने दीप्ति की तरफ देखती हुयी केहि.....

दीप्ति ने तुरंत कहा ," हाँ में भी सहमत हूँ और दीदी भी आखिर वह हमारे होने वाले पति हैं ...... हम दोनों भी चलेंगे आपके साथ ".

गीता अभी गुस्से से कुछ बोलती की दीप्ति ने उसका हाथ दबा के गले से लगाकर कान में बोलै," दीदी गुस्सा बाद में हो लेना यह सही वक़त और जगह नहीं है.... हमको आर्यन और प्रभा को वापस लेकर अपने धरतीलोक जाना है ".

कोई आगे बोलता उशसे पहले दानव गुरूजी बोले," यह सही प्रस्ताव है आखिर गीता और दीप्ति पुत्री को खुद राजा वासुकि ने बुलावा भेजा था...... हाँ स्वर्णलता और माया को उनका आशीर्वाद भी मिला है आर्यन के साथ विवाह पर तोह यह भी उनकी पुत्री जैसी हैं तोह कोई छथि तोह नहीं पहुंचेगी ऐसा में मानता हूँ ".

अब तोह आर्यन की 4 और ुनोफ़्फ़िसल पत्नियों की झांट सुलग गयी चरों एक दुसरे को देखने लगी तब चाय ने कहा ," आप की आएगा सर माथे पे गुरूजी पर क्या आप को नहीं लगता मुझे और दीदी को गीता और दीप्ति की सुरक्षा करने के लिए जाना चाहिए...... वहीँ रानी पुष्पलता और कामलता भी रानी स्वर्णलता और माया के लिए आवश्यक रहेंगी ".

रानी पुष्पलता भी झट से मान गयी क्योंकि स्वर्ण और माया नए उत्तराधिकारी का बीज और पावर लिए नागलोक में प्रवेश करेंगी तोह शक्तियों का आभास हो जायेगा राजा वासुकि को ........ काश वहीँ हो रानी हेमा भी नागलोक में जब उनकी जरुरत पड़े......

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आर्यन एक अँधेरी से गुफा में निर्जीव सा पड़ा था बहार खड़े पररहि को बहार रहने का आदेश दे जब प्रभा अंदर प्रवेश की तोह दुखी होकर आंसूं hi आ गए और नाग रूप से उसने मानव रूप ले लिया ...... झुकार आर्यन के मुस्कान लिए चेहरे को हाथ में भर्ती उसके गाल को चूम के रूट हुयी लिपट कर बोली ," ी ऍम सॉरी भाई, सब मेरी जिद्द की वजह से हुआ "......

तभी बहार से हल्ला कटा तोह अपना नागिन विशाल रूप धारण कर वह आर्यन को अपनी पूँछ में लपेट ली और जब बहार आयी तोह सब नाग सैनिको से लेकर सेनापति विषधर भी सर (Phan)jhuka दिए......

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राजकुमारी प्रभा

प्रभा सर्प भासा में हिसस हिस्सायी ," हैट जायो मेरे मार्ग से वार्ना सबको लील ( खा) जाउंगी ....... " इतनी तेज़ हिस्स्स सर्पों की वाणी आर्यन भी सुनकर एक बार आँख खोल के मुंध लिया ...... सारे सर्प सैनिक भाग गए वहीँ सेनापति विषधर रास्ता देकर एक साइड दम दबा फानन झुका के रह गया ......

प्रभा तेजी से वहां से गायब हो गयी तब सांस लेता हुआ बोलै ," प्राण तोह बच्च गए अब महाराज वासुकि को क्या जवाब दूंगा ?"

तभी 1000 पहन वाले विशाल नागरूप धारण किये राजा वासुकि प्रकट हुए तोह डर गया ...... " तुम ने सही कार्य किया है विषधर बस अब तयारी करो आर्यन युद्ध न जीत पाए स्वयंवर में ..... बुलाओ हर लोक से महाबलिओं को पर उसको हार का सामना करना पड़े , चाहिए कोई भी सद्यांतर रचो "......

उनके विलुप्त होते hi सेनापति विषधर भी सोच में पद गया ," अब जिसको राजकुमारी प्रभा और विशाखा भी चाहती हूँ उसको कैसे हवा दूँ..... वह मुझे hi मार देंगी फिर मेरे परिवार का क्या होगा ?"

हिस्स्स हिस्साता हुआ वह पहुंचा एक अदृश्य साया के पास जिसने उसको ख़ास निर्देशित किया ......?????

नागलोक जिसके अंदर आते hi दानव सिर्फ अपना वजन hi न सेहन करने की वजह से मर्डर जाते थे ...... वार्ना नागों के शिकार हो जाते थे आज ललकार रहे थे उनके नागलोक के द्वार पर खड़े हुए.

राजा वासुकि के राजदरबार में िश समय उनकी दोनों रानियों के साथ दानव गुरूजी भी थे .......7 प्राचीन नाग महाबलिओं को उनकी सुप्त निंद्रा से उठा के लाया गया था यह कहकर की विशाखा के लिए नया वर्कर आ गया है.

दानव गुरूजी का प्रस्ताव सुनकर राजा वासुकि बोले," आपका और रानी हेमा भें का में बहोत सम्मान करता हूँ परन्तु 6 लोकों की सेना मुझसे कोई हसी मजाक करने नहीं आयी है मेरे द्वार पर..... मुझे और मेरे लोक को मिटने की आशंका है पर हम मरते हुए भी सबको मार डालेंगे ".

दानव गुरूजी ," आप तोह महँ राजा और महा सर्पों के राजा हो ऐसा क्यों सोच रहे हो ?..... आखिर क्या जरुरत थी आर्यन को सबके सामने ऐसे बंधी बनाने की? वह सिर्फ अपनी भें प्रभा के लिए छोटा बन गया वार्ना उसका प्र्रहार बहोत भारी पड़ेगा ".

राजा वासुकि ," हम भी तोह एहि बोल रहे हैं जब आर्यन हमारी पुत्री प्रभा से प्रेम करता है तोह हमारे साथ होना चाहिए..... हम ने उसकी दिव्या तलवार हज़ारों साल सुरकषित राखी हमारी जेष्ठ पुत्री विशाखा ने जीवन तक दान कर दिया है उसकी धरोहर के लिए..... सिर्फ 2 दिन की मेहमान नावजी पाकर आप के सभी दानव राजा और रानियां हमारे खिलाफ हो गए..... हमारी वजह से आज तक देवता गण पतलोक पर अकरम करने से डरते हैं ...... आर्यन पहले भी हमारा था अब भी हमारा है और गुरूजी हमारी पुत्री प्रभा उसको मन लेगी तब देखते हैं दिव्या तलवार किसका विनाश करेगी ...... आप भी जानते वह पिछली बार भी दिव्या तलवार सिर्फ दीप्ति और प्रभा को जिन्दा रखने के लिए लेने आया था िश बार तोह विशाखा भी उसकी अर्धांगी बन ने को त्यार हो..... आप मध्य में न आये गुरूजी िश बार हमको अपना उत्तराधिकारी अवश्य मिलेगा ".

दानव गुरूजी भी विचलित होते हुए ," हाँ अपने प्राण और सर्वनाश करवा के...... थोड़ी बूढी लगाओ आर्यन की कमजोरी उसकी करीबी स्त्रीयां हैं, करा लो स्वंयवर बुलावा भेजकर आदर से सबको आमंत्रित करो..... हार जीत भी दिखेंगे ".

राजा वासुकि अब थोड़ा डरते हुए ," वह विशाखा को नहीं हरा पायेगा किसी भी रूप में, हम चाहा रहे हैं की प्रभा विवाह कर लेगी विशाखा मान जाएगी ".

रानी हेमा की आवाज गुंजी ," विशाखा का घमंड hi मेरा पुत्र तोड़ेगा और आप के नागलोक का भी महाराज वासुकि "....... सबका ध्यान गया तोह पता चल गया की रानी हेमा ने समाधी ली हुयी है और वही जगह hi स्वयंवर का पूर्ण गर्भ है .....

राजा वासुकि भी अब रानी हेमा की विश्वास भरी चेतावनी से ुल्हजीत होते हुए बोले," आर्यन आजाद hi है राजकुमारी प्रभा अपने साथ उसको ले गयी पर हम खोज नहीं पा रहे हैं गुरूजी ".

दानव गुरूजी मुस्करा के ," फिर तोह वहां कोई नहीं जा पायेगा भूल गए आप ने उसको यमराज का आह्वान करके आशीर्वाद के रूप में माँगा था ...... उसकी बनायीं नागलोक में ुष विचरित दुनिया में कौन जा पाया है सिर्फ विशाखा के जिसने वहां प्रभा और अपने प्रेमी को मारा था "...... ??????

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राजकुमारी विशाखा

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दिल्ली ..........

एक डार्क रूम में जब आँखों से पट्टी हटी तोह गुल ने डरते हुए देखा कुर्सी पर बैठे हुए तोह दोनों हाथ जोड़कर बोली," मुझे मार दो या कितना भी सितम कर लो पर मेरे आर्यन को कुछ मत करना ...... में अपनी जान देकर उसकी जान की भीख मांगती हूँ ....... प्लीज ********* के लिए ........ "

तभी लाइट ों हो गयी और उसके सामने गीता पलट के बोली," अबे यार िश पागल लड़की का क्या करें दीप्ति ? तू hi समझा िश बेवकूफ को क्या खाक आर्यन को डरा पाएंगे ?"

अपने सामने गीता को देखकर गुल की आंखें बड़ी बड़ी हो गयी पर उसके साथ उसकी जैसी सूंदर सी हंसकाल देखकर तोह अब वह भी कांप गयी ," या ****** यह कोनसा बदला लिया जा रहा है हमसे..... एक न सूख दो एक जैसी मसूख? ...... कैसे ?" .......

दीप्ति ने अब मोर्चा संभाला," तुमको हम दोनों बहेनो ने hi अगवा किया है.... और तुम बहोत सूंदर हो गुल, डरो मत बस आर्यन को बेवकूफ बनाने का प्लान था".

गुल अब डरते हुए मैं में ," गीता दीदी की डुप्लीकेट इतनी मीठी बातें कर रही है पक्का आर्यन को ब्लैकमेल करके बुलवा लेंगी पर में ऐसा होने नहीं दूंगी अपने आर्यन के साथ "

गुल डरते हुआ ," देखो तुमको जोह चाहिए जितना पैसा चाहिए में दूंगी , जान चाहिए मुझे मार दो पर आर्यन को कुछ मत करो....... वह इनोसेंट है और तुम दोनों गीता दीदी की हंसकाल वाला प्लास्टिक सर्जरी वाला मास्क पहनकर हमको डरा नहीं सकती, गीता दीदी को पता चला तोह गोली मार देगी तुम दोनों को इशलिये बोलती हूँ सरेंडर कर दो वार्ना आर्यन बहोत बुरा हाल करेगा आपका ..... "

गीता हस्ते हस्ते लौट पोत हो गयी वही हाल दीप्ति का भी था ...... चेयर से आजाद कर दीप्ति ने जब गुल को गले लगया तब गीता भी हसी रोक के बोली," यह तेरी hi टाइप की है दीप्ति तू hi संभाल आने दे आर्यन को िश को बिना शादी ले आया ".

गुल झट से दीप्ति से अलग होकर ," हमारा निकाह हो चूका है आर्यन से और आप को बुरा लगा या अच्छा अब अगला सभद संभल के बोलिये".

कहाँ नाजुक सी लड़की गुल और कहाँ रफ़ टफ 6'1" की गीता बिलकुल रॉउडी स्टाइल वाली..... गुल की गर्दन पकड़ के हवा में एक हाथ से उठा दी ," भें की लौड़ी मेरे आर्यन से छुड़वा ली तोह अपने को उसकी लुगाई समझने लगी" ..... अपने सीढ़ी जांघ पर हाथ मार के ...... " तेरे जैसी को उसका लौड़ा न सूंघने दो ********* की पयधिश, ********* देश की कुटिया ..... "

धाप्प्प से पास पड़े पलंग पे गुल को दे मारी ..... उसकी चीख गुंजी और सर दिवार से लगने से वह बेहोश हो गयी ..... गीता कभी किसी लड़की या औरत पर गुस्सा नहीं होती थी पर कहाँ का गुस्सा कहाँ निकला........

एयरपोर्ट से गुल को बिना से गीता ने उठवाया था की आर्यन को पता न चले सरप्राइज देंगे......

दीप्ति ने गीता का हाथ पकड़ा तोह हाथ झटक के बोली," तुझे भी यहीं कैद करवा दूंगी समझी, अब तेरा मोह न खुले ुष भें के लौड़े आर्यन की तोह आज में गांड फाड़ती हुयी कुत्ता ******* की छूट में फसा है ".

गीता हिंदुत्व प्रो थी तोह रति महा प्रो पर राजकुमारी दीप्ति तोह ***** की प्रो राजकुमारी कहलाती थी ..... पर अब दीप्ति ने भी अपनी बड़ी भें जैसी गीता को चुना......

अपनी जीन्स की वैस्ट से पिस्तौल निकाल के बोली ," दीदी यह खून मेरे सर आप को आंच नहीं आने दूंगी ".

इतनी देर से कड़ी बिना की तोह गांड hi पहात के हाथ में आ गयी ......

( बिना का बदला और गुल को बचा के इंडिया लाना आर्यन ने एक साथ किया था.... पर वह जानती थी गुल बहोत अच्छी लड़की है पर यह दोनों छात्रनियाँ इश्को धरम की भेंट न चढ़ा दे )

पिस्तौल ताने दीप्ति के सामने बिना कड़ी हो गयी ," मैडम िश के बदले मुझे मार दो, आज सिर्फ इसी की वजह से में जिन्दा हूँ पर आर्यन सर कभी आप दोनों माफ़ नहीं करेंगे अगर यह मारी गयी तोह, पहले मुझे मार दो बोल देना मैंने िश को मारने की कोशिश की ".

गीता तोह वैसे hi गुस्से में थी और पिल पड़ी बिना पर माँ भें की गाली बक्ति उसको 4-5 मं पटक पटक के खूब मारी..... गुल आगे बढ़ी तोह तो दीप्ति ने उसके माथे पर गन लगा के boli,"Hilyo मत तू वर्ण अभी थोक दूंगी".

अपनी भड़ास निकलने के बाद गीता जब हटी तोह बिना के चेहरे से खून टपक रहा था ...... आज उसने बिना से आर्यन के साथ उसके इतने करीबी होने का बदला ले डाला, पर बिना पक्की पति थी, जरा भी हाथ नहीं उठाया.......

दीप्ति ने गन की नाल निकाल के गुल को कहा," अब तू यहीं रहेगी जब तक मेरी दीदी तुझे जिन्दा रखेगी, पक्का आर्यन को फसा कर यहाँ जासूसी करने के लिए वापस आयी है न ******* से....... "

गीता बहार निकल गयी रूम से तोह नीला को दीप्ति बोली," यह बात यहीं दफ़न रखना Neela......aur बिना को ठीक करो इश्को माजी (रति) और आर्यन पक्का ढूंढेंगे ...... बिना दीदी कभी कभी गलत साइड लेना बुरा पड़ता है..... बस इश्को भूल जायो और यह यहीं कैद रहेगी".

उनके जाने के बाद गुल खुद एक कोने में जाकर बेथ गयी और रूट हुए बोली," आप भी जाओ नीला दीदी एक दुश्मन देश की लड़की की एहि सजा है........ ??????"

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दिल्ली फार्महाउस पर .......

आर्यन तीनो के सामने सर झुकए हाथ जोड़कर माफ़ी मांग रहा था ...... तीनो ने एक दुसरे के कान में कुछ कहा फिर आवाज आयी ," आज आपकी सजा रोकी जाती है पर अगली बार अयस्क मत करना की हम बस आप का इंतज़ार करते रहे ऐसी आशा हम आपसे रखते हैं डैडी ".

आर्यन की तरफ ुष सोफे टेबल पर चढ़कर तीनो ने छलांग लागै तोह तीनो को हवा में कैच करके गॉड में लिए वह चूमने लगा ..... सबसे ज्यादा रौशनी को जोह रू भी रही थी अपने नए डैडी से फिरसे मिलने की खुसी में ..... पर अब रौशनी , महिमा , राहुल और आर्यन एक साथ थे .....

रौशनी सबको लीड करती बोल रही थी की आर्यन को यह करना है वह खरीदना है, नए टॉयज, नए बलून्स , नए ड्रेसेस, नए किड्स बुक्स, ेट्स ेट्स ......

किसी ने आज तक ध्यान नहीं दिया की महिमा का न टॉयज ख़राब होता था न बलून्स ..... उसके कपडे भी वैसे hi एक डैम चखा चक ...... बबिता को भी डाउट हुआ पर महिमा की केयर hi इतने लोग करते थे की उसको लगा उसकी बेटी के लिए सब करते हैं. आर्यन के लिए तोह उसी बेटी महिमा hi लकी होती थी जब भी साथ होती बुरा कुछ हो hi नहीं सकता.

तीनो उसकी पीठ पर लड़कर सवाल की भूचार लगा दिए पर सब देख रहे थे तब रौशनी ने ऐसा सवाल किया की आर्यन भी शर्मिंदा हो गया ," डैडी आप के बारे जब बड़ी दादी (रति) से पुछा तोह उनको भी पता नहीं था ?.... क्या अब आप हमारी तरह दादी से भी प्यार नहीं करते जिनको आपके बारे में सब पता होता है ".

तभी जोरसे आवाज आयी रौशनी की मम्मी रानी लीलावती उर्फ़ लीला की ," बेहवे योरसेल्फ रौशनी ....."

आर्यन ने उसकी तरफ हाथ दिखा के कहा," मेरी बेबी सही बोल रही है ..... सॉरी बीटा आगे कभी ऐसा नहीं होगा ".

अब आगे बढ़कर रति के प्यार छूने झुका तोह उसने बिच में उसको रोककर अपने गले लगा लिया ...... आर्यन ," माफ़ कर दे माँ गलती हो गयी "......

सच्च में रति की आँखों में भी आंसूं थे पश्चाताप के और आर्यन तोह अपनी माँ के स्नेह और आलिंगन से पिघल गया ...... रति खुश होती हुयी मैं hi मैं बहोत खुश हुयी," कुछ भी हो िंह तीनो बच्चों ने मेरा आर्यन को और ज्यादा मेरे पास कर दिया ".

रति ने बारी बारी तीनो बच्चों को आर्यन की पीठ से उतार के चूम के कहा ," जाओ अपने डैडी के लिए खाना रेडी करवाओ ".

बच्चों को किचन तक बबिता ले गयी और आर्यन ने गॉड में उठकर रति को चूमना तोह बोली," वह रानी लीला को जरुरी काम है पहले उन्ह से मिल ले फिर मुझे लेने ऑफिस आ जाना ".

आर्यन ने प्यार से रति को टेबल पे बैठकर कहा ," अपना ध्यान रखा कर माँ , काम मीणा देख लेगी वह है कहाँ?"

रति ," वह सारू से मिलने गयी है जा पहले रानी लीला से मिल ले ".

लीला जोह बहोत देर से आर्यन को hi अपनी आँखों से देख के दिल hi दिल में भावो बेहाल हो रही थी बोली," माजी अगर आप मुझे बेटी मानती हो तोह सिर्फ लीला hi बोलना, रानी का तमगा में उतर के आपके पास बेटी बनकर आती हूँ".

आर्यन ने दोनों हाथ जोड़कर ," कैसी हैं लीला जी ?"

लीला की आंखें आर्यन से 2 सेक् टकरा के hi झुक गयी ," हम ठीक हैं कुवार्सा आप लगता है काफी बिजी रहते हैं जोह कॉल भी अटेंड नहीं करते ?"

आर्यन मुस्करा के ," आप हुकम करें लीलाजी हम फ्री hi हैं अभी ".

" डैडी..... डैडी ..... मुझे टोस्ट खाना है ....... "

महिमा की आवाज सुनकर सब ुष की तरफ hi देखने लगे ..... और आर्यन सब भूल के उसको गॉड में उठा कर किचन की तरह चला गया.....

रति थोड़ा प्यार से ," लीला बेटी, बच्चो में वह बच्चा बन जाता है बुरा मत मानना ".

लीला भी शर्मा कर," बच्चो का पहला हक़ है माजी कुवार्सा पर िश्मे बुरा क्या मानना?"

कविता भी जूस के गिलास टेबल पर रखती हुयी छेड़खानी से बोली ," लीला, बड़ो को भी पूरा टाइम देता है बस त्यार रहा करो ...... "

अब तोह लीला का चेहरा hi लाल हो गया पर रति ने कहा," पूरा हक़ है हमारी लीला बेटी और रौशनी का हम सब पर कविता.... मुझे मेहमान नावजी में कोई कमी नहीं चाहिए ".

कविता भी सर झुका के मुस्करा के बोली," आप आराम करें माजी में सब संभाल लुंगी पर आपका लाडला आप से बगैर मिले तोह कहीं नहीं जायेगा ".

अभी सिर्फ बबिता किचन में थी और 2 मैड्स जोह उसकी हेल्प कर रही थी ..... रौशनी जहाँ इंस्ट्रक्शंस देती तीनो से अलग अलग आर्यन के लिए डिश बनवा रही थी वहीँ किचन सैलाब पर बैठा राहुल एप्पल खा रहा था ......

आर्यन की गॉड में महिमा को देख राहुल कूदने लगा डैडी बोलते हुए पर झट से आर्यन आगे बढ़कर उसको पकड़ लिया ," ऐसे नहीं करते बीटा चोट लग जाती".

रौशनी अपनी कमर पर दोनों हाथ रखते हुए बोली ," राहुल it's बाद हैबिट न .... रेमेम्बेर व्हाट ी टीच यू no सुच हुर्री ....... "

राहुल आर्यन के कंधे में सर छुपकर ," सॉरी दीदी ".

आर्यन को भी अपनी नन्ही पारी रौशनी पिंक बार्बी डॉल ड्रेस में बिलकुल प्रिंसेस लग रही थी हुकुम चलते और दोनों छोटे भाई भें की केयर करते ...... मगर महिमा तोह पहले hi मोह चूप्ये hi थी आखिर बड़ी दीदी की बात न मान डैडी को बुलाने चली गयी ....... पर रौशनी ने महिमा को कुछ नहीं कहा ......

आर्यन ने दोनों को किचन सैलाब पर बिठा कर अब रौशनी को पीछे से उठाकर गॉड में किसी करने लगा तोह खिलखती हुयी बोली," डैडी यू अरे ब्रेकिंग माय फोकस ...... ी हैवे तो मेक सूरे योर डिशेस शुड भी परफेक्ट ".

आर्यन ने अपनी तरफ घुमाकर अपनी नोऽस्य उसकी छोटी क्यूट नोऽस्य से रागादि ," बच्चे ी ऍम योर डैडी ...... तू मेरी माँ मत बनने की कोशिश कर ".

आर्यन का लास्ट सेंटेंस लाउड था तोह सब हसने लगे राहुल और महिमा भी ..... रौशनी थोड़ा चुप होती बोली," सॉरी डैडी ".

आर्यन ," सॉरी की बच्ची, नाउ it's माय टर्न".

आर्यन ने उसको भी स्लैब पर राहुल के साइड बिठाया और दोनों माइड को बहार जाने के लिए बोलै ..... फिर बबिता को पीछे से हुग किया तोह उसने बच्चो का बोलै तब आर्यन बोलै ," क्लोज योर आईज बेबी अप्पकी मुम्मा को थोड़ा प्यार कर लूँ".

तीनो हस्ते हुए अपनी आईज पर हाथ रख लिए "Ok डैडी "...... बबिता को किश करके उसको भी किचन से बहार भेजा.....

अब बच्चों की एक एक डिमांड पर आर्यन झपट टोस्ट , जूस रेडी कर उनको खिलता खुद भी खाता और जोह पहले से रेडी था वह भी .....

सच्च में बच्चे भी आर्यन के hi थे अपने डैडी के साथ आधे घंटे लगे रहे खाने पीने में ...... लास्ट में फादर ,मदर , गॉड सबकी प्रॉमिस लेकर उनको बड़ा बड़ा ग्लास दूध भी पीला दिया...... अब तीनो को लेकर बहार आया तोह महिमा बोली," डैडी नींही आ रही है".

आर्यन उनको गेस्ट विप सुईठे में लेकर पहुंचा तोह लीला बाथरूम में नाहा रही थी ...... तीनो को प्यार से अपने सीने पर सुलाकर खुद भी सू गया ...... लीला बहार आयी और सन देखि तोह एक बार को बुरा लगा अपने के लिए पर रौशनी को बिच में महिमा राहुल के साथ आर्यन के सीने पर सूता देखा तोह खुश भी बहोत हुयी. क्या कमी है आर्यन में रौशनी का फादर न बनने की फिर कभी कभी मुझे भी प्यार कर ले तोह, सॉरी दीप्ति तुम्हारा हस्बैंड मुझे और मेरी बच्ची को भी चलेगा.

लीला अपनी समस्या भूल जब कल रात आयी थी पर आर्यन नहीं मिला, कैसे बेचैनी में पूरी रात काटी वह hi जानती है पर अब देखो किस्मत की बच्चों ने कब्ज़ा लिया.

उसको अहसास हो गया की आर्यन पर अगर सबसे लास्ट अधिकार है तोह मेरा..... सिर्फ सेक्स hi प्यार का पर्दशन नहीं होता कभी कभी सिर्फ बिना बोले hi महसूस करना भी होता है.

लीला रेडी होकर चली गयी अपने काम से जिसके लिए वह आयी थी ..... आर्यन की नींद खुली जब राहुल ने सुसु करने का बोलै ..... अब तोह तीनो बच्चों को बारी बारी फ्रेश भी करवा कर खुद भी रेडी होकर निच्चे पहुंचा तोह कविता मामी ने राहुल को बोलै," अब मेरे पास मत रहना जा अपने डैडी के पास ".

बबिता ," यह सब इश्को माहि शिकती है अब में नहीं सलूंगी तुझे भी समझी".

आर्यन की गॉड से उतारकर दोनों अपनी मम्मी को मानाने लगे.....

कविता मामी ," आर्यन रौशनी बिटिया को भी यहीं छोड़ जा अब बस मेरी और बबिता की यह सबसे अच्छी बेटी यहीं है और सबका ख्याल भी रखती है..... "

आर्यन ने रौशनी को निच्चे उतर के बोलै," बच्चो वह देखो उल्लू ...... "

आर्यन ने बबिता और कविता की चूमि ले डाली आखिर वह भी उल्लू देखने लगी कहाँ है कहाँ है ......

आर्यन को अब अपनी मंजिल पता थी होटल ××××× ..... 30 मं बाद बैकडोर एंट्री से आर्यन सीधा लीला के सुईठे में पहुंचा......

लीला भी आर्यन को अकेले अपने पास देखकर पिघल गयी की ऐसा मौका नहीं मिलेगा .......

अपनी सेसट्री को समझा के अब मुझे कोई नहीं चाहिए उसको बहार भेज के...... आर्यन को सम्मन देखकर दौड़ के कूद के उसकी बाँहों में पकड़ते hi 1 पल की देर नहीं की उसका पूरा चेहरा hi चूम डाली गॉड में लड़े हुए ...... िश हटती कटती संधनी के साइज की लीला को आर्यन भी अपनी गॉड में उठाये जैसे अपनी किस्मत पर रक्ष कर रहा था पर अभी कहाँ पता था उसके दिल को hi उसकी दो धड़कन वाळिओं ने कैद कर लिया था.

लीला अभी भी िश रॉयल ड्रेस में सच्च में क़यामत लग रही थी...... उसका हर अंग सरीर के अनुपात में बड़ा बड़ा उसकी सुंदरता को खाश बनता था पर अब 4 घंटे गयम में उसकी म्हणत भी कसाव ला रही थी......

आर्यन ने किश तोड़कर बोलै," मोती सांस तोह लेना दे सिर्फ तेरे लिए hi आया हूँ यहाँ ..... सच्च में बहोत खूबसूरत लग रही है तू दुर्र मत जाय कर यार, पुछःह पुछःह ...... "

लीला को पता था दीप्ति भी महारानी मिरदुला के साथ आयी है पर आर्यन को बता दिया तोह वहीँ उसके पास न भाग जाए, प्यार अब अपने अष्टीवत का भी था .... क्या मेरे पास रहेगा दीप्ति के आने के बाद भी......

पर लीला को भी नहीं पता था की वह किस भोले भंडारी को पूछ रही है ," आर्यन दीप्ति भी दिल्ली आ चुकी है ..... "

आर्यन उसके गाल चूमता उसके कान को छाता हुआ बोलै," तू क्यों जल रही मेरी चिकनी रानी, उसको गीता ने बुलाया होगा, जब प्यार hi तुझे करना है क्यों तड़पा रही ..... तू बस मुझे अपने िश मस्त जिस्म से आज खेलने दे लीला ......"

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रानी लीला

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