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Part 6 (इ)
रानी हेमा के पास जब Geeta-Deepti को होश आया तोह एक सूंदर से जंगल में अपने को पाया. सूंदर से छायादार पेड़ , कारकत्व बहती निर्मल नदी , नीला आश्मान , सुन्दर पशु पक्षी और जहाँ वह थी यह एक बड़ा सा विरकिश और उसके निच्चे सुन्दर सा प्रांगण जहाँ बड़े बड़े सही ताकत के सोफे बीएड सिंघसान बिच में सजावट ...... (यानी सब माया थी )
वह दोनों कुछ पूछती उससे पहले hi रानी हेमा ने कहा," तुम दोनों को यहाँ लाने का प्रोयजन है पुत्रियों क्यूंकि वहां स्वमायवर में तुमको कमजोरी की तरह विशाखा इस्तेमाल न कर सके आर्यन को हारने में ".
गीता नाराज होती हुयी बोलने वाली थी की दीप्ति ने पुछा ," हम दोनों कभी भी माहि की कमजोरी नहीं है रानी माँ अपितु उसकी ताकत बनकर hi हमेशा रहेंगी".
रानी हेमा ने मुस्करा के ताली बजे तोह दो दासी एक थाल में खाने और दुसरे में शीतल पेय लेकर प्रकट हुयी .
" में आर्यन की नहीं बल्कि तुम्हारी भी माँ सामान हूँ और आर्यन की किसी भी चाहने वाली को कोई दुःख या कष्ट हो कभी नहीं चाहूंगी..... दानवो और नागों में एक गुण जमजात होता है उनका अंहकार जोह उनको ताकत और घमंड में चूर, ज्यादा क्रूर और छलकपटी प्रवित्ति का भी बना देता है जिसके लिए वह अपने सारे डाव पेंच जीतने में करते हैं. वहीँ दुसरे प्राणी उनके सामने हार जाते हैं उसूल और नियम में बंधे हुए. तुम दोनों को राज की बात बाटूंगी पहले कुछ सेवहार करो ".
गीता गुस्से से ," तब हम यहाँ नागलोक आये hi क्यों है? जब हमको वहां आर्यन की मदद करने से भी रोका जा रहा है ".
रानी हेमा ने खुद दासियों से थाल लेकर उनको जाने का इशारा किया फिर पहले दीप्ति की तरफ थाल किया तोह उसने पहले गीता को अपने हाथ से एक फ्रूट खिलाया तोह वह भी खा ली ......
रानी हेमा ," तुम दोनों नागलोक बुलाई नहीं गयी हो बल्कि चारे की तरह लायी गयी हो...... तुम जीयो या मारो किसी को यहाँ फरक नहीं पड़ता बस आर्यन और उसकी पतलोक की भरयाण ( पत्नियां) के अल्वा. आर्यन की मदद में हमेशा करुँगी क्यूंकि मैंने अपना पुत्र माना है और तुमको यहाँ सुरक्षित स्थान पे लाकर मैंने आधा कार्य कर दिया है और आधा अभी पूरा करती हूँ ताकि तुम्हारी शिकायत काम हो ".
रानी हेमा ने अपना सीधा हाथ सामने किया तोह एक बड़ा सा 8×6 फट का सीसा यानी मिरर सामने 20 फट की दुरी पर बन गया और तभी ुश्मे नागलोक का स्वयंवर स्थल का लाइव सन दिखाई दिया तोह आर्यन एक नागसानिक की पोषक और अस्तर लिए खड़ा था और दूसरी तरफ एक विशाल सर्प सेना के साथ प्रभा नागिन योद्धा के रूप में सबसे आगे कड़ी थी ......
Geeta-Deepti दोनों अपनी जगह से जैसे उछाल hi पड़े यह क्या मिरर एक लेद स्क्रीन बन चूका था जोह लाइव ट्रांसमिशन दिखा रहा था......
रानी हेमा हसकर ," हम भी महाराज मयासुर की पत्नी हैं तोह हमारे पास भी कुछ शक्तियां हैं ...... है है है ..... अब आराम से देखो और सही समय पे में तुमको वहीँ ले चलूंगी ".
दीप्ति खुश होती बोली ," रानी माँ आप कुछ राज की बात की वार्ता करने वाली थी ?"
गीता भी संभल के बोली," पर यह प्रभा को क्या हो गया है जोह पूरी नागों की सेना लिए आर्यन के खलिहाफ़ कड़ी हो गयी...... नहीं रानी माँ यह गलत हो रहा है इश्को रोकना होगा".
रानी हेमा ," इशलिये में तुम दोनों को यहाँ लायी हूँ, वह जोह सामने कड़ी है वह कोई आम नागिन या जोह तुम चलचित्र( टीवी और फिल्म्स) में देखते हो वह वाली नागिन नहीं है. यह नागलोक के महँ राजा वासुकि और नागरानी की दूसरी पुत्री महाबलशाली राजकुमारी प्रभा है जोह अपनी पे आ जाये तोह पतलोक क्या धरतीलोक हो या स्वर्गलोक तक जीत ले. वहीँ बड़ी नागिन राजकुमारी विशाखा को तुम दीप्ति और प्रभा ने चकमा देकर मार दिया था दिव्या तलवार के समय लेकिन अब वह भी प्रभा के साथ है. यह दोनों बहेनो के अंदर नागलोक की आधी नाग्शक्ति विराजमान है और दोनों कभी किसी लोकों को नुक्सान न पहुंचा दे इशलिये आधी नाग्शक्ति ,Saya-Chaya-Maya तीनो मेरी पुत्रियों के पास थी पर अब वह किसी और को उनसे मिल चुकी है ".
गीता का धयान रानी हेमा की बातें सुनने से ज्यादा ुष मिरर पे आगे क्या होगा ुष्पर था जबकि दीप्ति मामले की घेरे तक जाना चाहती थी तोह रानी हेमा से पूछी ," फिर वह आधी शक्ति दोनों राजकुमारिओं को मिल गयी तोह ?"
रानी हेमा ," समझो पार्ले hi आ जाएगी..... यही आर्यन का मुख्या कार्य और परीक्षा है...... किसी भी तरह दोनों बहेनो की शक्तियां पूरी भी कर दे और उसको वह दोनों भेने धारण भी न कर पाएं विनाश के लिए..... "
दीप्ति की समझ में अब कुछ कुछ आ रहा था ," यानी आप कहना चाहती हैं की आधी नाग्शक्ति आर्यन के अंदर विराजमान हो चुकी है ?...... तीनो दानव राजकुमारिओं ने आर्यन को नाग्शक्ति का हिस्सा दे दिया पर कैसे और माहि अभी तक उसको झेल कैसे लिए ?"
गीता के भी कान खड़े हो गए ," पक्का कमीना तीनो को छोड़ छोड़ के शक्तियां ले लिया होगा ....... मादरचोद कभी नहीं सुधेरगा ...... महह्हह्ह्ह्ह ....."
दीप्ति ने गीता का मुँह बांध किया अपने हाथ से ," दीदी रानी माँ भी साथ बैठी हैं ऐसे गाली मत दो, प्लीज बड़ो का लिहाज रखो ".
गीता अभी भी गुस्से में hi थी दीप्ति बोली," माफ़ कर देना रानी माँ मेरी दीदी को गुस्सा जल्दी आ जाता है ...... दीदी आप सोच समझ के बोलै करो वह तीनो इनकी पुत्रियां हैं ".
गीता ने जब रानी हेमा की तरफ देखा तोह उसको भी लगा की आर्यन तोह है छूछीचूर रानी माँ को भी फसा लिया होगा ...... पर कोई माँ अपनी बेटियों के लिए बुरा नहीं सुन सकती .......
रानी हेमा भी जोर से अठास लगाती है पड़ी ........ है है है है ...... सही जीवनसाथी मिली है मेरे पुत्र आर्यन को, तुम्हारा गुस्सा hi उसको नियंतरण में रखेगा जब इतनी बीवियां और प्रियसी होगी..... पुत्री दीप्ति हम कभी पुत्री गीता की बात का बुरा नहीं मानेगा आखिर जिस का हिरध्या hi इतना बड़ा हो उसके अप्सब्द भी सच्चे होते हैं भले hi कड़वापन लिए हुए..... hi hi hi hi ...... पूरी बात नहीं सुन्ना चाहोगी ?"
दोनों ने हाथ जोड़कर चमा मांगी नमन किये हुए और आगे जानने की उत्सकता दिखाई.....
रानी हेमा ," विशाखा और प्रभा दोनों सगी भेने जब पैदा हुयी तोह दोनों को आधी आधी नाग्शक्ति मिली भविष्य को धयान में रखकर...... सब सही चल रहा था पर विशाखा महत्वाकांशी थी और अपनी शक्तियां पुराने से पुराने विलुप्त हो चुके हज़ारों सालों पहले महाबलशाली सर्पों की अर्धना करने लगी..... उसको कई शक्तियां भी मिली जिनमे कुछ काली या क्रूरता से परिपूर्ण थी. वहीँ अपने साथी नाग से उसका मैं विछेद जैसा हो गया, राजा वासुकि भी चिंतित थे की विशाखा hi उनको नागलोक का उत्तराधिकारी देगी. विशाखा ने करीब 100 साल से ज्यादा एकांत में एक प्राचीन नागों की शक्ति प्रपात कर ली और जब वह वापस लौटी तोह अपनी प्रेमी साथी नाग को अपनी छोटी भें प्रभा के साथ देखा...... राजा वासुकि को भी िंह 100 सालों में प्रभा से उम्मीद दिखाई दी की वह विशाखा की जगह उनको उत्तराधिकारी देगी...... प्रभा और साथी नाग ने विशाखा को सच्च सच्च बता दिया की वह दोनों प्रेम करते हैं और उनको माफ़ कर दे. विशाखा की काली शक्तियां इतनी हावी हो चुकी थी की उनके सच्चे प्रेम को अपना अपमान मान ली और जिस छोटी भें को बहोत प्रेम करती थी उसके सामने उसके प्रेमी "सरपु" को ज़िंदा निगल गयी और काली शक्तियों से प्रभा को बाँध के उसकी नाग्शक्तियाँ खींचने चहई तोह राजा वासुकि ने खुद उनको प्रभा के अंदर से निकलते hi अपने अंदर समां लिया और विशाखा ने काल श्राप देकर प्रभा का अंत कर दिया और उसको हमेशा के नागलोक क्या पतलोक में कभी नहीं दुबारा जनम लेना वाला मंतर मार के भसम कर दिया..... यह पूरा नागलोक प्रभा की ुष हिरध्या विदारक आंत का गवाह है".
दीप्ति की आँखों में जहाँ आंसूं थे प्रभा के लिए वहीँ गीता की आँखों में विशाखा के लिए नफरत.
गीता ," यानी ुष दिन कोई कुछ नहीं किया आज शेर बन रहे हैं क्यूंकि विशाखा को दीप्ति और प्रभा ने मार गिराया..... अच्छा hi किया उसकी एहि सज़ा थी वार्ना में और आर्यन उसको कच्चा चबा के खा जाते जिसने हमारी प्रभा को ऐसा दर्दनाक दंड दिया ...... और तू क्यों रू रही है देख प्रभा ज़िंदा है और विशाखा मारी जा चुकी है. रानी माँ मुझे लगता है इतहास फिर से न दौराहे जाए मुझे अब वहां किसी पे जारा भी भरोसा नहीं ".
गीता ने दीप्ति की आंसूं साफ़ कर उसका गाल चूम के अपने हाथ से सीतल पेय पिलाया तोह दोनों का एक दुसरे के लिए घेरा स्नेह देखकर रानी हेमा भी खुश थी, बहोत भाग्यशाली हो पुत्र आर्यन जोह तुमको दो दो सच्ची और हंसकाल प्रेयसी मिली है जीवनसाथी के रूप में..... जहाँ सगी बहेनो में इतना प्रेम नहीं होता वहीँ िंह दोनों में तोह जैसे एक दुसरे के प्राण बसए हो......
रानी हेमा से दीप्ति ने पुछा ," फिर वह आधी नाग्शक्ति माहि तक कैसे पहुंची जबकि यह तोह डेढ़ हज़ार साल पुराणी घटना है फिर दिव्या तलवार "सहायक " के लिए विशाखा का पागलपन भी तोह था ?"
रानी हेमा ने उत्तर दिया," आधी नाग्शक्ति के लिए कई साल याग करके भी भगवन शेषनाग ने विशाखा को वरदान नहीं दिया बल्कि एक दूसरी शक्ति जल्दी hi, एक पवित्र शक्ति, उसके पास होगी ...... वह थी दिव्या तलवार जिसके मोह में विशाखा ने सबसे मुँह मोड़ लिया..... चूँकि आधी नाग्शक्ति प्रभा की थी और उसके मरने के बाद राजा वासुकि को भगवन शेषनाग ने राजा माया की मदद लेने को कहा...... तुमको बता दूँ महाराज मयासुर मेरे पतिदेव ने अपनी दानवी शक्तियां Saya-Chaya-Maya में छुपा राखी थी ..... दूसरी बात एक श्राप के कारन दानव वतासुर की गुलाम थी तीनो तोह कोई कैसे शक्ति ले पायेगा किसी की सोच से परे था. राजा मयासुर ने राजा वासुकि को भी अपने राज बतया तोह उनको भी यह युक्ति ठीक लगी कभी तीनो राजकुमारिओं से कोई शक्तियां हासिल नहीं कर पायेगा...... "
गीता हैरानी से," यानी दोनों इतने महँ पतलोकों के शक्तिशाली राजाओं से भी चूक हो सकती है किसने सोचा था और मेरे आर्यन ने सेंध hi नहीं दोनों की बेटियां भी पता ली वाह मेरे आर्यन तू ने तोह कमाल कर दिया...... जहाँ कोई सोच भी नहीं सकता वहां आर्यन पहुंच hi गया और अब मुझे तोह लगता है विशाखा वाली भी आधी नाग्शक्ति ले hi लेगा..... दोनों राजाओं ने अपनी गांड खुद आर्यन से मरवाने का मैं बना लिया हो तोह हम क्यों आर्यन को रोकें दीप्ति ?"
दीप्ति ने गीता को रानी माँ की तरफ इशारा किया तोह गीता जीभ अपने दांतो में दबा के बोली ," सॉरी रानी माँ मुँह से निकल गया ..... "
रानी हेमा भी मुस्करये बिना न रह सकीय तब दीप्ति बोली," काया माहि पूरी नाग्शक्ति को झेल लेगा ?"
रानी हेमा ," वह hi झेल सकता है और नागलोक क्या पूरे पतलोक का भविष्य भी बदल सकता है..... तुम दोनों को उसको खुला छोड़ना होगा उसको पतलोक में जोह उसका मैं करे कितनी भी प्रियसी बांये कितने भी विवाह करे..... देखना वह और शक्तिशाली बनेगा और जोह सपने तुम सब उसके साथ देख रहो हो पूरे कर सकेंगे..... पतलोक की जोह स्त्री या युवती आर्यन के साथ होगी वह उसको उतना hi बलसाली और धारयवान बनेगी ".
दीप्ति ," महीईईई संभल के ....... " उसकी चीख ने बाकी दोनों का धयान भी मिरर में चल रहे युद्ध पे स्वंयवर स्थल की तरफ गया......
गीता ," चीख क्यों रही है देख लियो सब मर जायेंगे आर्यन न मरेगा ".
रानी हेमा ," विशाखा को भूल रही हो पुत्री गीता, दीप्ति ने उसकी शक्तियों का 20व हिस्सा भी नहीं देखा था और वह किसी को आर्यन के अंदर जागृत करने की पूरी कोशिश करेगी ".
दीप्ति और गीता एक साथ ," क्या ..... क्या ..... "
पर कीसये जिसके अंदर 6 आत्मा हो ?????
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आर्यन की एक बार चरों और नज़र दौड़ी तोह उसको सब पहले की तरह नफरत की दृष्टि से नहीं देख रहे थे..... आर्यन भी मैं में "आखिर सपोला hi सपोले को पहचानता है".
विशाखा जोह अब एक प्रीतिबिम के रूप में सबके सामने आर्यन को मुखातिब होकर बोली," आर्यन तुम कोई भी अस्तर, रूप या चल कपट भी इस्तेमाल कर सकते हो अगर प्रभा के साथ मुझे भी हरा दिया पूरा नागलोक क्या पतलोक को भी तुम्हारे सामने झुकना पड़ेगा. तुम को मारने में हम दोनों कोई कसार नहीं छोड़ेंगे तुम चाहो तोह हमको मार भी सकते हो ...... hi hi hi hi hi ...... "
आर्यन निर्या hi चुटिया बना विशाखा की शरत और चेतवानी सुन्न रहा था..... उसने राजा वासुकि की तरफ देखा तोह वह भी मुस्करा रहे थे ...... उन्होंने तोह और भी खुले मैं से युद्ध बिना किसी नियम से स्वीकारती दे दी......
आर्यन ने अपनी बात राखी बड़े धैर्य से ," देखो विशाखा मुझे सर्प बने कुछ पल hi हुए हैं पर सर्पों की बुराई और अच्छे आने में समय तोह लगेगा..... दुश्मन जब अपना सागा हो तोह मुश्किल जरूर होती है...... मगर मेरी तरफ से तुम दोनों बहेनो को क्या किसी को भी छूट है जोह तुम्हारी तरफ से लड़ने को त्यार हो मुझे पहरेज नहीं. हाँ अगर मेरी मौत यहीं लिखी है तोह फिर डिअर क्यों करनी. में प्रभा की कसम खाता हूँ आज इसी नागलोक के स्वयंवर में ुषको अपनी बना लूंगा और तुमको प्रभा की दासी ".
जहाँ प्रभा के चेहरे पे खुसी चा गयी अपने बड़े भाई पे गर्व करते हुए वहीँ विशाखा के प्रतिबिम्ब रूप से अब गुस्सा झलक रहा था.
जब राजा वासुकि के इशारे पर सैनिक सर्प ने बड़े से हथोड़े से घंटे पे मारा तोह तनननननन की आवाज से स्वयंवर प्रतियोगिता का आखिरी पड़ाव शुरू हो गया .......
आर्यन ने सब पतलोक के राजाओं की तरफ मुख करके अपना पहन और दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन किया......
राजा बलि महाराज के साथ असुर गुरूजी ने भी उसको मैं hi मैं आशीर्वाद दिया ....... राजा वासुकि ने पूरा स्थल एक अदृश्य कवच से धक् दिया.......
कुछ मिंटो बाद सर्प सैनिक ने घोसना की ," महँ नाग राजकुमारी प्रभा अपनी सेना के साथ पधार रही है ".
आर्यन अब नाग योद्धा की पोषक पहनकर के एक हाथ में भला दुसरे में ढाल और कमर पे एक तलवार और कटारी लगये एक तरफ त्यार खड़ा था ...... तभी नाग राजकुमारी प्रभा एक योद्धा की पोषक में नागों के विचिरत से रथ में जोह पूरा नागों से hi बना था और आगे 3 बड़े बड़े विशाल नाग ुष रथ को खींचते हुए युद्धस्थल के बिच ला रहे थे...... पीछे धम्मं धम्म्म्म की आवाज करते बड़े बड़े नगाड़ों का बंद और नागलोक का झंडा लिए 2 टोली सैनिक की रथ के पीछे और उनके पीछे हज़ारों की संख्या में नाग सैनिको की सेना थी...... आर्यन पहले अपनी लाड़ली छोटी भें को इतनी बड़ी नाग राजकुमारी के योद्धा रूप में उसकी सुंदरता में खू सा गया पर जब हज़ारों नाग सैनिकों ने आधे से ज्यादा युद्धस्थल घेर लिया तब होश में आया.......
आर्यन अपने मैं में ," अरे प्रभा तोह लगता है पूरी सेना hi ले आयी लड़ने के लिए...... कितनी सूंदर लग रही है मेरी प्यारी भें ".
तभी एक नागबां आर्यन के चरों में आकर गिरा जोह प्रभा ने अपने बड़े भाई के सम्मान में सर्प धनुष से मारा था...... वह नागबां पुष्पों में बदल गया.
आर्यन भी मुस्करा दिया यानी पूरी तयारी से आयी है मेरी भेना..... चल फिर हो जा त्यार ......
आर्यन ने अपनी कमर से तलवार निकली और पूरी ताकत से ऊपर की तरफ फेंकी तोह कुछ hi पल इतनी उचाई तक गयी की दिखनी गायब हो गयी और फिर हुयी गर्जना बिजली से चमकने लगी और ऐसा लगा िश अँधेरे लोक में कोई तूफान आने वाला है.
सब समझ तोह गए यह आर्यन की फेंकी तलवार का नतीजा है पर जब ऊपर से बिजली कड़कती वही तलवार तेजी से जब निच्चे प्रभा के रथ की तरफ आने लगी भीषण गर्जन और बिजली के साथ तोह सब डरने लगे...... प्रभा ने एक बार आर्यन की तरफ देखा तोह वह मुस्करा रहा था तोह उसके चेहरे पे भी मुस्कान फेल गयी जैसे पक्का भाई ने गिफ्ट दिया है.....
रथ से सिर्फ 10 मीटर ऊपर एक विस्फोट हुआ और पूरी सेना पे पुष्प की वर्षा होने लगी...... और वह चमकती तलवार अब प्रभा की कुंडली के समाने रथ पर पड़ी थी जिसको उसने उठा के चूम लिया और आर्यन को देखकर हसने लगी...... ( आर्यन ने मायावी शक्ति का पर्दशन किया था)
राजा वासुकि और राजा माया एक दुसरे की तरफ देखे की यह हो क्या रहा है..... ?
आर्यन की पतलोकों की भरयाण (पत्नियां) खुश थी की दोनों पर्तिदावन्दी होकर भी एक दुसरे को पूरी इज्जत देते हैं.
दानव गुरूजी ," है है है है ....... दोनों को देखकर एक सीख तोह मिलती hi है की दुश्मनों को भी एक दुसरे की इज्जत करनी चाहिए तब युद्ध लड़ने का जज्बा दूंगा हो जाता है ".
राजा बलि महाराज ने चुटकी ली ," परन्तु गुरूजी यह दोनों तोह एक दुसरे को पुष्प पुष्प फ़ेंक रहे हैं ".
दोनों राजाओं ने दानव गुरूजी की तरफ देखा तोह मुस्करा के बोले," दोनों अपने कर्मो और युद्ध कौसल में निपुण है.... आर्यन बड़ा है तोह प्रभा ने उसके प्यार पे तीर मार्के अपना सम्मान प्रकट किया वहीँ आर्यन ने अपनी तलवार देकर उसको और उसकी सेना को विजयीभव कहा ".
राजा माया ," परन्तु गुरूजी ऐसा कब हुआ".
राजा बलि महाराज ने और मजे लिए ," गुरूजी आप हमको क्या छोटा बच्चे समझ रहे हैं क्यों राजा वासुकि आप ने देखा न".
राजा वासुकि भी चिढ़कर ," एहि तोह मेरी समझ में नहीं आ रहा ...... "
तभी एक जोर की फुंकार गुंजी अकर्मंण्णन ....... जोह प्रभा की थी और नगाड़ों की आवाज के साथ 100 से भी ज्यादा सर्पों ने प्रभा के इशारे पे आर्यन पे हमला कर दिया .......
रानी पुष्पलता ," समझ में आ गया राजा वासुकि ...... अपनी पूरी सेना hi भेज देते अकेले आर्यन को मारने ".
पर अब सबका धयान आर्यन पे hi था की अकेला पूरी सेना से कैसे लड़ेगा......
आर्यन ने अपनी पोजीशन लेकर अपनी लोटस शील्ड लगा ली तभी एक साथ विष छोड़ते 50 बाण उसकी शील्ड पे लगकर बेअसर हो गए ...... यह प्रभा का पहला वार था पर अब उसको अहसास हुआ की भाई ने लोटस शील्ड लगा ली है ऐसे तोह ुष्पर कुछ असर नहीं होगा...... मेरे नाग सैनिक मारे जायेंगे और झट से नाग्शक्ति से अपने सारे सैनिक सुरक्षित कर दिए......
आर्यन ने अपनी तरफ बढ़ते नागसानिकों को तेजी से रंगते आते देख के अपना भला पूरी ताकत से सबसे आगे वाले का सीना निशाना लेकर मारा तोह जितनी तेजी से उसका उसका भला ुष नागसानिक को लगता बस ुषको छूकर भला गलता चला गया ....... आर्यन भी हैरान होकर आशम्भव यानी यह भी शील्ड लगये हुए हैं.......
आर्यन को घेर के जब एक के बाद एक लगातार हमले होने लगे जिसको वह अपनी ढाल से या कटारी से बचता तब तक सब ने उसको घेर लिया तोह निच्चे बैठकर एक बड़ी उछाल मारा उनसे दूर होने के लिए तोह प्रभा ने अपना भला जोरसे हवा में उड़ते आर्यन पे मारा ....... वार इतना सटीक था आर्यन को कुछ हुआ तोह नहीं पर निच्चे युद्ध स्थल पे गिरा और नाग सैनिकों ने वार पे वार करने शुरू कर दिए .......
आर्यन कभी एक को घूंसा जड़ता तोह दुसरे का वार अपनी ढाल पे लेता..... पर प्रभा ने तोह अब 200 और नागसानिकों को आर्यन को कैद करने के लिए भेजा.....
दानव गुरूजी ," क्यों राजा वासुकि आपके चेहरे की मुस्कान बता रही की आपको अपनी छोटी पुत्री प्रभा पे गर्व महसूस हो रहा है ".
राजा वासुकि ," सही कहा गुरूजी आपने, प्रभा को हम सब चंचल hi समझते थे जबकि यह उसका योद्धा वाला रूप बहोत सुसज्जित है और सारे नाग सैनिकों को भी नाग्शक्ति से सुरक्षित कर दी है ".
राजा माया ," पर आर्यन के पास भी कमल कवच (लोटस शील्ड) है और मायावी शक्ति भी ".
रानी पुष्पलता मैं में , कब इस्तेमाल करेगा आर्यन अपनी नयी शक्तियां......
आर्यन ने अपनी स्पीड बढ़ा छोटी छोटी चल्लंघ लगा नाग सैनिकों पे वार करके बचता तोह 2 नए वार ुष्पर होते ...... एक बार जोरसे उछाल के फिर दूसरी तरफ भगा तोह दीप्ति ने अपने नागबां से फिर निच्चे गिरा दिया ....... और एक बाण मार के उसकी गर्दन को जमीन पे एक नागरसि से कास दिया ........
फिर 2 और बाण उसके हाथों को बाँध दिए तोह आर्यन ने आँख बांध करके मंतर पढ़ा ....... धमममममम Dhapppppppppp .......
नागसानिक जोह आर्यन के पास जाकर हमला करने hi वाले थे की पूरा स्थल कांप गया ......
Gurrrrrrrrrrrrrrr बाबर शेर की धाड़ और खुनी गेंदे की फुन्ननननननन फुन्नननननन के साथ उन्ह नागसानिकों की तरफ बिजली की फुर्ती से दौड़े .......
सब दरसक गण क्या सब महाबली भी देखते रह गए वहीँ राजा वासुकि को भी गायत हो गया यह दोनों खूंखार जीव आर्यन के अंदर से आये हैं बहार तोह पूरा युद्धस्थल हमारे कवच से बंधा है ....... मगर जिन्होंने ऐसे जीव पहली बार देखे तोह दर गए उनके शारीर पे गोल्डन कट्वच उनको और हिंसक के साथ युद्ध के लिए hi त्रिनेड दिखा रहा था ......
(स्क्रीन पे दोनों देखकर गीता दीप्ति ने हीफी किया ...... दोनों उनको देखकर खुश थी की आर्यन ने सही वार किया ...... )
राजकुमारी स्वर्णलता ," दीदी देखो वह दोनों फिर बुला लिए आर्यन ने ...... hi hi hi अब आएगा मजा ....... खा जाओ इन नागसानिकों को ....... "
रानी पुष्पलता और कामलता के शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी ..... क्या हालात की उनके लोक में िंह दोनों दैत्य रूप आर्यन के दोस्तों ने हाँ बाबर शेर और खुनी गेंदे को अपना दोस्त hi बतया था आर्यन ने .......
देखते hi देखते दोनों ने नागसानिकों की रेल बना बना के घायल कर दिया पर अभी तक मरे नहीं थे नाग्शक्ति की वजह से ...... आर्यन अपने बंधन से आजाद होकर के अपनी लोटस शील्ड भी दोनों के ऊपर चढ़ा दिया और ुशी जगह लेता लेता नाग सैनिकों की चीख पुकार सुन्न रहा था ......
प्रभा ने उनको नागरसि से बांधने की कोशिश की तोह कोई असर न हुआ पर अब दोनों प्रभा के रात को टारगेट कर दिए प्रभा ने दोनों विशाल हिंशक पुषों को अपनी तरफ आते देखा तोह छान भर में अपना विशाल रूप धार के रथ से उछाल के दोनों के सामने उनको अपनी पूँछ में साथ लपेटी hi थी की एक जोरदार किक उसके पहले पहन पे और दुसरे पहन पे आर्यन का घूंसा पड़ा ...... उधर बाबर शेर ने उसके सरीर में दांत और नाखून से वार किया वही गेंदे ने अपने सींघ से.....
प्रभा पे दोनों जानवर के वार का कोई असर न था पर आर्यन के वारों की चोट ने उसको बेहोश कर दिया ...... आर्यन ने सीटी बजे और तीनो प्रभा को अचेत छोड़कर उसकी नागसेना को मारने लगे क्यूंकि प्रभा की नाग्शक्ति का असर उसके अचेत होते hi नागसानिकों पे से ख़तम हो गया..... 5 मं में बस खून hi खून था कटे फटे नाग सैनिकों का और आर्यन ने प्रभा के पास जाकर उसके सर पे हाथ रखा और मंतर पढ़ा तोह उसकी चेतना लौट आयी ......
( प्रभा ने अपनी नाग्शक्ति से खुद को सुरक्षित नहीं किया था यह उसकी भूल साबित हुयी और आर्यन ने पूरी मायावी शक्ति से उसके दोनों पहन पे वार किया जिसको वह नहीं झेल पायी)
आर्यन को कुंडली में बाँध उसने दोनों मुँह से उसकी गर्दन पे वार किया पर सायद आर्यन त्यार था दोनों हाथो से उसका पहन पकड़ के चिल्लाया ," तुम हार चुकी हो प्रभा तुम्हारी सेना भी नहीं बची, मुझे मजबूर मत करो नहीं फिर से लम्बी बेहोशी में भेज दूंगा ".
प्रभा आर्यन की बात सुनकर ढीली पड़ी और जब चरों तरफ सिर्फ लाशें और खून पड़ा था गेंदा और शेर अपनी अपनी जीभ से अपनी चेहरे से खून चाट रहे थे...... तभी तंत्र की आवाज के साथ घंटा बजा तोह राजा वासुकि ने खड़े होकर कहा ..... " महार्यं को विजयी घोसित किया जाता है ".......
प्रभा अपनी सेना खोकर सदमे में थी तोह आर्यन ने उसको सहारा देना चाहा पर वह सर झुका के वहां से अपने माता पिता के पास आकर रुकी..... नागरानी ने उसको गले लगा के कहा," आखिर तुम्हारा प्यार जीत गया प्रभा , तुमको खुश होना चाहिए ".
प्रभा सर झुका के ," पर में अपने नागसानिकों को नहीं बचा पायी ".
दानव गुरूजी ," तुम एक को hi चुन सकती थी युद्ध परिणाम में आर्यन या अपनी सेना..... तुम ने अपनी सेना चुनी पर आर्यन ज्यादा तेज़ निकला उसने तुमको बेहोश कर तुम्हारी सेना को हरा दिया. तुम्हे दुखी नहीं होना चाहिए ".
राजा वासुकि ," पुत्री प्रभा, मैंने इतनी साहसी योद्धा नहीं देखि जोह अपने सैनिकों को साथ लिए लड़ी..... यह युद्ध नहीं था वार्ना तुम्हारी जान भी जानी थी और स्वयंवर की शर्त मत भूलो तुमको आर्यन ने जीत लिया है अब वह hi तुम्हारा वर है ".
विशाखा ," तुम आराम करो प्रभा, तुम ने अच्छी तरह मुकाबला किया ".
विशाखा का प्रतिबिम्ब अब प्रभा के अंदर समां गया और छोटी भें को साँवन्तना देते हुयी बोली," प्रभा मेरी छोटी भें जिस घडी का तुमको इंतज़ार था वह ज्यादा दुर्र नहीं है. फिर िश घडी के लिए तोह तू हज़ारों वर्षों इंतज़ार किया है. तेरे नागसानिकों ने तुझे बचने के लिए अपने प्राण तक नौछवर कर दिए..... एक बार को लगा आर्यन तुझे hi न मार दे पर वह बहोत चाहता है तुझे. अब ऐसे दुखी होकर अपने सच्चे प्रेम का उपहास तोह मत उड़ाओ ".
प्रभा ," अपने प्रेम के लिए कितनी कुर्बानियां देनी होगी दीदी फिर अब आप भी कहाँ रुकने वाली हो".
विशाखा हसकर," तू बोले तोह में नहीं लड़ती आर्यन से ".
प्रभा खुश होती हुयी ," सच्च दीदी आप नहीं लड़ेगी, हम ऐसे hi तीनो बहोत प्यार से हसी खुसी रहेंगे ".
विशाखा गंभीर स्वर में," हम तीनो नहीं सिर्फ तुम और आर्यन ...... मुझे तुमको मुकत करना होगा, तुम हमेशा खुश रहना ".
प्रभा ," ऐसा मत कहो दीदी में एक बार आप से अलग हो गयी थी अब फिरसे एक साथ हैं, हमेशा रहेंगे ".
विशाखा ," प्रभा ऐसे में कभी आर्यन को अपना नहीं पाऊँगी मेरी भें. मुझे आजाद कर दो तुम्हे तुम्हारी खुशियां मुबारक हो ".
प्रभा ने मैं कड़ा करके वह कहा जोह विशाखा सुन्ना चाहती थी ," दीदी अब जियेंगे तोह साथ मरेंगे भी साथ. आप सर झुका के मत रहो आप जोह चाहोगी वही होगा ".
प्रभा फिर एक बार अपनी बड़ी भें के आगे झुक गयी जोह उसकी बहोत बड़ी गलती साबित होने वाली थी...... ????
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आर्यन ने अपने पुराने दोस्त बाबर शेर और खुनी गेंदा वापस गायब कर दिए यह कहकर अभी एक बार और तुमको बुलाना पड़ेगा .....????
आर्यन जब योद्धा दीर्घा में अपने को साफ़ करके फिर से त्यार होने लगा तोह राजकुमारी स्वर्णलता और राजकुमारी माया उसकी दोनों भार्या आकर उसको बधाई दी पर उसके सर्प रूप की वजह से झिझक के दुर्र कड़ी हुयी थी.....
हाथ जोड़कर आर्यन ने भगवन शेषनाग को स्मरण किया तोह अपने मानव रूप में बदल गया ...... दोनों दौड़ के उससे लिपट के चूमा छाती करने लगी.....
आर्यन भी दोनों को अपनी गॉड में बिठा ख़ुशी से सेहला रहा था किश करते हुए..... कुछ hi पल में वहां रानी पुष्पलता के साथ बाकी तीनो रानी कामलता और राजकुमारी साया चाय भी आयी ...... दोनों शर्मा के उसकी गॉड से उठ गयी पर कामलता ने पहले मैदान मार के उसके ऊपर चढ़ के किसी करने लगी.
रानी पुष्पलता ने उसके बड़े खुलों पे धौल जमाया ," कामु यह तोह देख लो हम कहाँ है फिर कुछ रिश्ते राजदार hi सही होते हैं ".
कामु ने एक बार और किश करके हटी," दीदी अपने प्यार को बधाई hi दे रही थी hi hi hi hi ......फिर आर्यन मुझे सबसे ज्यादा पसंद करता है ..... हैं न आर्यन ? ".
आर्यन ," कामु यू अरे डार्लिंग बेबी .... पुछःह पुछःह ....... " उसके दोनों गाल चाट लिया तोह तीनो दानव राजकुमारियां हसने लगी तोह स्वर्णलता भी न समझे हुए भी हसने लगी.....
इतने में साया चाय भी आर्यन से लिपट के प्यार जताई तोह रानी पुष्पलता चीड़ सी गयी......" ठीक है करो सब अपनी मनमानी ...... यह नागलोक है ना की अपने लोक में हैं "....... वह पलट के जाने लगी सबको हस्ता देखकर...... दानव सैनिक भार hi रोक दिए थे.....
पर आर्यन ने उसको भी आगे बढ़कर गॉड में उठा के अपने से लपेट hi लिया...... सबके सामने उसको अपनी गॉड में बिठा के खूब किसी करके पुछा," तुम कुछ परेशां हो पुष्पु ?"
5 और आर्यन की बीवियों के सामने खुद को उसकी गॉड में बैठकर गर्व के साथ शर्म भी आ रही थी पर आर्यन के उसके मैं के भाव जानकार खुसी हुयी की उसका प्यार उसको समझता है ......
रानी पुष्पलता ," सब देख रही हैं आर्यन ..... छोड़ दो न .....विशाखा बहोत खूंखार और शक्तिशाली है आर्यन, उसको प्रभा समझने की भूल मत करना. उसको सीधे लड़के हराना मुश्किल होगा तोह अपनी शक्तियां पूरी लगा देना वार करते हुए बिना औरत समझे".
आर्यन ने पुष्पु का गोरा गाल चाट के कहा ," विशाखा को हरा के तुम्हारे सामने नहीं झुकाया तोह मेरा नाम आर्यन नहीं मेरी रानी...... में यहाँ हारने नहीं अपनी प्रभा को जीतने आया हूँ. तुम सबको जितना विश्वास होगा उतने मेरे जीतने के चांस होंगे पर विशाखा को अपने पिछले जनम के पापों का हिसाब देना पड़ेगा ......"
आर्यन की गुस्से से लाल होती आँखों को देखकर पुष्पलता ने आर्यन के लबों पे धावा बोल अपने चूतड़ उसके लिंग पर रागादि तोह वह भी नार्मल होता गुस्सा हटा के प्यार करने लगा..... सब की सब उससे चिपट के चूम रही थी जहाँ जगह मिलती...... सबने आर्यन को शांत कर दिया. एहि आर्यन की ताकत भी थी की उसके चाहने वालियां उसको गुस्सा नहीं होने देती है चाहिए कुछ भी हो.
सबको गले मिलकर विदा कर आर्यन अब नए अस्तर सास्तर के साथ जब युद्धस्थल में प्रवेश किया तोह अब नागलोक वालों को भी विश्वास सा हो रहा था की इतने हज़ारों सालों के बाद आर्यन hi स्वयंवर प्रतियोगिता योद्धा विजेता बनेगा. आखिर दिव्या तलवार भी उसके पास है राजकुमारी विशाखा उसको हरा नहीं पायेगी.
विशाखा की शक्ति नागलोक और उनके वाशियों से थी जोह लाखों की संख्या में नागों का लोक था पर आज तोह ना जाने कितने और लोकों से नाग सिर्फ आर्यन को जीत ता देखने आये थे आखिर वह दिव्या तलवार का मालिक होने के साथ प्रभा को जीत भी चूका था......
सर्प भासा में सिर्फ हिसस हिसस जैसा लगता किसी मानव को पर आर्यन की जय जय कार हो रही थी पूरे स्वयंवर स्थल के प्रांगम में...... वहीँ दुसरे लोकों के दानव और पिश्चाहों के साथ गॉब्लिन्स और डॉकयार भी आर्यन की तरफ थे......
राजा वासुकि के साथ अब राजा माया को भी एक उम्मीद जगी काश यह विशाखा को हरा के उसको अपना ले ...... वहीँ आर्यन सिर्फ विशाखा से अपनी छोटी भें प्रभा के अपमान और दुष्टता का बदला लेना चाहता था......
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विशाखा अब प्रभा के सरीर पे कब्ज़ा करके अपने पिताश्री राजा माया का आशीर्वाद लेकर अपनी गुफा में पहुंची और सबसे पहले एक मंतर पढ़कर प्रभा को निष्किरये करती बोली ," भें तू मेरी या आर्यन की लड़ाई नहीं देख पायेगी इशलिये तू सुप्त अवस्था में रह ".
प्रभा ने ना जाने क्यों अपना सबकुछ विशाखा के हवाले छोड़ दिया और विशाखा अपनी गुफा में बैठकर एक याग शुरू कर ऐसे ऐसे प्राचीन नागों का आह्वान करने लगी जोह हज़ारों साल पहले मार चुके थे, उनकी आत्मा और शक्ति को पा ली...... यहाँ नागलोक में उन्ह नागों की मणि भी विशाखा के पास थी ....... देखते hi देखते वह बदल के एक महाकाय रूप ली और कितने क्रूर नाग उसके सरीर में समां गए ...... फिर याद की भगवन शेषनाग को तोह उनके प्रकट होते hi अपने 5 पहनो को निच्चे करके वरदान मांगी तोह उन्होंने भी आशीर्वाद दिया ," थाथात्सु ".
विशाखा की खुसी देखते hi बनती थी , तुमको मुझे अपना पड़ेगा में दिव्या तलवार से दुर्र नहीं रह सकती ...... चाहिए नागलोक क्या पतलोक भी उजाड़ जाए ..... में सिर्फ दिव्या तलवार के मालिक साथ रहूंगी...... में तुम्हारी छवि अभी तक नहीं भूली......
" जेहरली नागिन का बदला बहोत खतरनाक होता है "...... वही विशाखा तोह पहले hi मारी जा चुकी थी अब जोह करने जा रही थी उसको दिव्या तलवार के मालिक से प्रेम हुआ था जोह आर्यन hi था पर मानव रूप नहीं वही दिव्या तलवार का प्रेमी उसका साथी हो ऐसी तमना लिए.
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रानी हेमा के साथ िश सूंदर वन्न में दोनों भेने Geeta-Deepti जैसे हर युद्ध स्थल के दृश्ये या रहस्य पे आंदोलित होती...... सब उनको मिरर रुपी स्क्रीन पे दिख रहा था पर अब विशाखा को देखकर दोनों डर रही थी की यह क्या करने वाली है पर रानी हेमा ने उनके सामने से पल भर गायब होकर फिर से आर्यन की 6 नयी पतलोक की पत्नियों और प्रेयसी के साथ प्रकट हुयी.......
राजकुमारी माया ," माँ हम सबको यहाँ क्यों लायी ?"
रानी हेमा ने गीता और दीप्ति की तरफ इशारा किया जोह एक आलीशान गद्दी पे बैठकर स्क्रीन पे देखती नज़र आयी ..... दीप्ति ने खड़े होकर सबको नमस्ते किया पर गीता मोह फेर के वापस से स्क्रीन पे देखने लगी ......
रानी पुष्पलता ," महारानी हेमा जी में िंह सबको वहां सुरक्षित रखती ".
रानी हेमा ," मैंने अपने पुत्र के अनुसार hi किया है वह नहीं चाहता की कोई भी उसकी चाहने वाली वहां हो जब विशाखा से उसका सामना हो यहाँ तक में उसकी मुँह बोली माँ भी नहीं ".
बाकी सब दीप्ति से गले मिली पर गीता की बेरुखी सबको डरा रही थी तोह दीप्ति ने माया के कान में कहा दीदी ने सब देखा जब आप सब माहि के साथ थी.....
माया ने आगे बढ़कर गीता के प्यार छुए तोह उसने प्यार सिकोड़ के कहा ," दूर हैट नहीं तोह यहीं सबको मार दूंगी, कमींयों को कोई नहीं मिला मेरे आर्यन के अल्वा ...... आज विशाखा ने नहीं मारा तोह हरामी को में खुद मार दूंगी ".
माया का चेहरा उतर गया वहीँ रानी पुष्पलता को बहोत गुस्सा आया की इतनी हिम्मत की माया को कैसे दांती गीता?
रानी हेमा ने उसको हाथ दिखा के रोका और दीप्ति माया को अपने साथ गीता से दुर्र बैठा के बोली," दीदी का गुस्सा तुम तीनो जानती हो अभी उनके पास मत जायो थोड़ी डिअर में ठीक हो जाएगी ".
रानी हेमा ," तुम सब आर्यन की कमजोरी हो इशलिये यहाँ लायी हूँ ".
रानी पुष्पलता ," पर यह तोह नरकलोक के पास का पिछले हिस्सा है यहाँ आप कैसे हैं..... और तुम सब भी कोई बेवकूफी मत दिखाना वार्ना जिन्दा hi मिर्त्युलोक में होगी".
रानी हेमा," यह छदम स्थान है यहाँ कोई न जीवट होता न hi मिर्त्ये इशलिये विशाखा से बचा के लायी हूँ".
गीता भी मुड़कर ," रानी माँ कहीं हम सबकी सेटिंग अपने hi तोह नहीं विशाखा के साथ सेट कर दी ...... इनका मुझे पता नहीं पर आर्यन मुझे बहोत प्यार करता है, वह मुझे खोजते हुए यहाँ भी आ जायेगा. और तू दीप्ति वहां कहाँ बैठी है यहाँ बेथ मेरे पास ".
दीप्ति भी सर झुका के अपनी हंसकाल दीदी के पास बैठी तोह गीता ने उसको अपने से लगा लिया ......
रानी हेमा मुस्करा भर दी तोह पुष्पलता भी िश चंडी देवी को समझने की कोशिश कर रही थी आखिर यह कैसे मानेगी..... ?
चाय ने स्वर्णलता और कामलता को धीरे से समझाया यह hi आर्यन का पहला प्यार है और सबको इसी से इजाजत मिलेगी..... साया ने बतया थोड़ी कड़क है पर स्त्रीओं का बहोत सम्मान करती है बस थोड़ी मोह पहात है. इश्कि बिना अनुमति के आर्यन नहीं मिल सकता पर एक और है वह मान गयी तोह यह भी मन नहीं करेगी..... आर्यन की जुड़वाँ भें hi कह लो मीणा नाम है.
रानी हेमा ने ताली बजे तोह दोनों दासियाँ अब 6 थाल लेकर आयी सबके लिए.....
रानी पुष्पलता ," रानी हेमा वहां आर्यन को मेरी मदद चाहिए होगी ".
रानी हेमा," जरूर होगी पर उशसे दूर रहकर सबको सुरक्षित रखो एहि मदद होगी ".
गीता ," अरे बाप रे यह कौन सा रूप लिए विशाखा आयी है ?????"
सबका ध्यान ुष स्क्रीन पे गया......
विशाखा
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Part 6 (इ)
रानी हेमा के पास जब Geeta-Deepti को होश आया तोह एक सूंदर से जंगल में अपने को पाया. सूंदर से छायादार पेड़ , कारकत्व बहती निर्मल नदी , नीला आश्मान , सुन्दर पशु पक्षी और जहाँ वह थी यह एक बड़ा सा विरकिश और उसके निच्चे सुन्दर सा प्रांगण जहाँ बड़े बड़े सही ताकत के सोफे बीएड सिंघसान बिच में सजावट ...... (यानी सब माया थी )
वह दोनों कुछ पूछती उससे पहले hi रानी हेमा ने कहा," तुम दोनों को यहाँ लाने का प्रोयजन है पुत्रियों क्यूंकि वहां स्वमायवर में तुमको कमजोरी की तरह विशाखा इस्तेमाल न कर सके आर्यन को हारने में ".
गीता नाराज होती हुयी बोलने वाली थी की दीप्ति ने पुछा ," हम दोनों कभी भी माहि की कमजोरी नहीं है रानी माँ अपितु उसकी ताकत बनकर hi हमेशा रहेंगी".
रानी हेमा ने मुस्करा के ताली बजे तोह दो दासी एक थाल में खाने और दुसरे में शीतल पेय लेकर प्रकट हुयी .
" में आर्यन की नहीं बल्कि तुम्हारी भी माँ सामान हूँ और आर्यन की किसी भी चाहने वाली को कोई दुःख या कष्ट हो कभी नहीं चाहूंगी..... दानवो और नागों में एक गुण जमजात होता है उनका अंहकार जोह उनको ताकत और घमंड में चूर, ज्यादा क्रूर और छलकपटी प्रवित्ति का भी बना देता है जिसके लिए वह अपने सारे डाव पेंच जीतने में करते हैं. वहीँ दुसरे प्राणी उनके सामने हार जाते हैं उसूल और नियम में बंधे हुए. तुम दोनों को राज की बात बाटूंगी पहले कुछ सेवहार करो ".
गीता गुस्से से ," तब हम यहाँ नागलोक आये hi क्यों है? जब हमको वहां आर्यन की मदद करने से भी रोका जा रहा है ".
रानी हेमा ने खुद दासियों से थाल लेकर उनको जाने का इशारा किया फिर पहले दीप्ति की तरफ थाल किया तोह उसने पहले गीता को अपने हाथ से एक फ्रूट खिलाया तोह वह भी खा ली ......
रानी हेमा ," तुम दोनों नागलोक बुलाई नहीं गयी हो बल्कि चारे की तरह लायी गयी हो...... तुम जीयो या मारो किसी को यहाँ फरक नहीं पड़ता बस आर्यन और उसकी पतलोक की भरयाण ( पत्नियां) के अल्वा. आर्यन की मदद में हमेशा करुँगी क्यूंकि मैंने अपना पुत्र माना है और तुमको यहाँ सुरक्षित स्थान पे लाकर मैंने आधा कार्य कर दिया है और आधा अभी पूरा करती हूँ ताकि तुम्हारी शिकायत काम हो ".
रानी हेमा ने अपना सीधा हाथ सामने किया तोह एक बड़ा सा 8×6 फट का सीसा यानी मिरर सामने 20 फट की दुरी पर बन गया और तभी ुश्मे नागलोक का स्वयंवर स्थल का लाइव सन दिखाई दिया तोह आर्यन एक नागसानिक की पोषक और अस्तर लिए खड़ा था और दूसरी तरफ एक विशाल सर्प सेना के साथ प्रभा नागिन योद्धा के रूप में सबसे आगे कड़ी थी ......
Geeta-Deepti दोनों अपनी जगह से जैसे उछाल hi पड़े यह क्या मिरर एक लेद स्क्रीन बन चूका था जोह लाइव ट्रांसमिशन दिखा रहा था......
रानी हेमा हसकर ," हम भी महाराज मयासुर की पत्नी हैं तोह हमारे पास भी कुछ शक्तियां हैं ...... है है है ..... अब आराम से देखो और सही समय पे में तुमको वहीँ ले चलूंगी ".
दीप्ति खुश होती बोली ," रानी माँ आप कुछ राज की बात की वार्ता करने वाली थी ?"
गीता भी संभल के बोली," पर यह प्रभा को क्या हो गया है जोह पूरी नागों की सेना लिए आर्यन के खलिहाफ़ कड़ी हो गयी...... नहीं रानी माँ यह गलत हो रहा है इश्को रोकना होगा".
रानी हेमा ," इशलिये में तुम दोनों को यहाँ लायी हूँ, वह जोह सामने कड़ी है वह कोई आम नागिन या जोह तुम चलचित्र( टीवी और फिल्म्स) में देखते हो वह वाली नागिन नहीं है. यह नागलोक के महँ राजा वासुकि और नागरानी की दूसरी पुत्री महाबलशाली राजकुमारी प्रभा है जोह अपनी पे आ जाये तोह पतलोक क्या धरतीलोक हो या स्वर्गलोक तक जीत ले. वहीँ बड़ी नागिन राजकुमारी विशाखा को तुम दीप्ति और प्रभा ने चकमा देकर मार दिया था दिव्या तलवार के समय लेकिन अब वह भी प्रभा के साथ है. यह दोनों बहेनो के अंदर नागलोक की आधी नाग्शक्ति विराजमान है और दोनों कभी किसी लोकों को नुक्सान न पहुंचा दे इशलिये आधी नाग्शक्ति ,Saya-Chaya-Maya तीनो मेरी पुत्रियों के पास थी पर अब वह किसी और को उनसे मिल चुकी है ".
गीता का धयान रानी हेमा की बातें सुनने से ज्यादा ुष मिरर पे आगे क्या होगा ुष्पर था जबकि दीप्ति मामले की घेरे तक जाना चाहती थी तोह रानी हेमा से पूछी ," फिर वह आधी शक्ति दोनों राजकुमारिओं को मिल गयी तोह ?"
रानी हेमा ," समझो पार्ले hi आ जाएगी..... यही आर्यन का मुख्या कार्य और परीक्षा है...... किसी भी तरह दोनों बहेनो की शक्तियां पूरी भी कर दे और उसको वह दोनों भेने धारण भी न कर पाएं विनाश के लिए..... "
दीप्ति की समझ में अब कुछ कुछ आ रहा था ," यानी आप कहना चाहती हैं की आधी नाग्शक्ति आर्यन के अंदर विराजमान हो चुकी है ?...... तीनो दानव राजकुमारिओं ने आर्यन को नाग्शक्ति का हिस्सा दे दिया पर कैसे और माहि अभी तक उसको झेल कैसे लिए ?"
गीता के भी कान खड़े हो गए ," पक्का कमीना तीनो को छोड़ छोड़ के शक्तियां ले लिया होगा ....... मादरचोद कभी नहीं सुधेरगा ...... महह्हह्ह्ह्ह ....."
दीप्ति ने गीता का मुँह बांध किया अपने हाथ से ," दीदी रानी माँ भी साथ बैठी हैं ऐसे गाली मत दो, प्लीज बड़ो का लिहाज रखो ".
गीता अभी भी गुस्से में hi थी दीप्ति बोली," माफ़ कर देना रानी माँ मेरी दीदी को गुस्सा जल्दी आ जाता है ...... दीदी आप सोच समझ के बोलै करो वह तीनो इनकी पुत्रियां हैं ".
गीता ने जब रानी हेमा की तरफ देखा तोह उसको भी लगा की आर्यन तोह है छूछीचूर रानी माँ को भी फसा लिया होगा ...... पर कोई माँ अपनी बेटियों के लिए बुरा नहीं सुन सकती .......
रानी हेमा भी जोर से अठास लगाती है पड़ी ........ है है है है ...... सही जीवनसाथी मिली है मेरे पुत्र आर्यन को, तुम्हारा गुस्सा hi उसको नियंतरण में रखेगा जब इतनी बीवियां और प्रियसी होगी..... पुत्री दीप्ति हम कभी पुत्री गीता की बात का बुरा नहीं मानेगा आखिर जिस का हिरध्या hi इतना बड़ा हो उसके अप्सब्द भी सच्चे होते हैं भले hi कड़वापन लिए हुए..... hi hi hi hi ...... पूरी बात नहीं सुन्ना चाहोगी ?"
दोनों ने हाथ जोड़कर चमा मांगी नमन किये हुए और आगे जानने की उत्सकता दिखाई.....
रानी हेमा ," विशाखा और प्रभा दोनों सगी भेने जब पैदा हुयी तोह दोनों को आधी आधी नाग्शक्ति मिली भविष्य को धयान में रखकर...... सब सही चल रहा था पर विशाखा महत्वाकांशी थी और अपनी शक्तियां पुराने से पुराने विलुप्त हो चुके हज़ारों सालों पहले महाबलशाली सर्पों की अर्धना करने लगी..... उसको कई शक्तियां भी मिली जिनमे कुछ काली या क्रूरता से परिपूर्ण थी. वहीँ अपने साथी नाग से उसका मैं विछेद जैसा हो गया, राजा वासुकि भी चिंतित थे की विशाखा hi उनको नागलोक का उत्तराधिकारी देगी. विशाखा ने करीब 100 साल से ज्यादा एकांत में एक प्राचीन नागों की शक्ति प्रपात कर ली और जब वह वापस लौटी तोह अपनी प्रेमी साथी नाग को अपनी छोटी भें प्रभा के साथ देखा...... राजा वासुकि को भी िंह 100 सालों में प्रभा से उम्मीद दिखाई दी की वह विशाखा की जगह उनको उत्तराधिकारी देगी...... प्रभा और साथी नाग ने विशाखा को सच्च सच्च बता दिया की वह दोनों प्रेम करते हैं और उनको माफ़ कर दे. विशाखा की काली शक्तियां इतनी हावी हो चुकी थी की उनके सच्चे प्रेम को अपना अपमान मान ली और जिस छोटी भें को बहोत प्रेम करती थी उसके सामने उसके प्रेमी "सरपु" को ज़िंदा निगल गयी और काली शक्तियों से प्रभा को बाँध के उसकी नाग्शक्तियाँ खींचने चहई तोह राजा वासुकि ने खुद उनको प्रभा के अंदर से निकलते hi अपने अंदर समां लिया और विशाखा ने काल श्राप देकर प्रभा का अंत कर दिया और उसको हमेशा के नागलोक क्या पतलोक में कभी नहीं दुबारा जनम लेना वाला मंतर मार के भसम कर दिया..... यह पूरा नागलोक प्रभा की ुष हिरध्या विदारक आंत का गवाह है".
दीप्ति की आँखों में जहाँ आंसूं थे प्रभा के लिए वहीँ गीता की आँखों में विशाखा के लिए नफरत.
गीता ," यानी ुष दिन कोई कुछ नहीं किया आज शेर बन रहे हैं क्यूंकि विशाखा को दीप्ति और प्रभा ने मार गिराया..... अच्छा hi किया उसकी एहि सज़ा थी वार्ना में और आर्यन उसको कच्चा चबा के खा जाते जिसने हमारी प्रभा को ऐसा दर्दनाक दंड दिया ...... और तू क्यों रू रही है देख प्रभा ज़िंदा है और विशाखा मारी जा चुकी है. रानी माँ मुझे लगता है इतहास फिर से न दौराहे जाए मुझे अब वहां किसी पे जारा भी भरोसा नहीं ".
गीता ने दीप्ति की आंसूं साफ़ कर उसका गाल चूम के अपने हाथ से सीतल पेय पिलाया तोह दोनों का एक दुसरे के लिए घेरा स्नेह देखकर रानी हेमा भी खुश थी, बहोत भाग्यशाली हो पुत्र आर्यन जोह तुमको दो दो सच्ची और हंसकाल प्रेयसी मिली है जीवनसाथी के रूप में..... जहाँ सगी बहेनो में इतना प्रेम नहीं होता वहीँ िंह दोनों में तोह जैसे एक दुसरे के प्राण बसए हो......
रानी हेमा से दीप्ति ने पुछा ," फिर वह आधी नाग्शक्ति माहि तक कैसे पहुंची जबकि यह तोह डेढ़ हज़ार साल पुराणी घटना है फिर दिव्या तलवार "सहायक " के लिए विशाखा का पागलपन भी तोह था ?"
रानी हेमा ने उत्तर दिया," आधी नाग्शक्ति के लिए कई साल याग करके भी भगवन शेषनाग ने विशाखा को वरदान नहीं दिया बल्कि एक दूसरी शक्ति जल्दी hi, एक पवित्र शक्ति, उसके पास होगी ...... वह थी दिव्या तलवार जिसके मोह में विशाखा ने सबसे मुँह मोड़ लिया..... चूँकि आधी नाग्शक्ति प्रभा की थी और उसके मरने के बाद राजा वासुकि को भगवन शेषनाग ने राजा माया की मदद लेने को कहा...... तुमको बता दूँ महाराज मयासुर मेरे पतिदेव ने अपनी दानवी शक्तियां Saya-Chaya-Maya में छुपा राखी थी ..... दूसरी बात एक श्राप के कारन दानव वतासुर की गुलाम थी तीनो तोह कोई कैसे शक्ति ले पायेगा किसी की सोच से परे था. राजा मयासुर ने राजा वासुकि को भी अपने राज बतया तोह उनको भी यह युक्ति ठीक लगी कभी तीनो राजकुमारिओं से कोई शक्तियां हासिल नहीं कर पायेगा...... "
गीता हैरानी से," यानी दोनों इतने महँ पतलोकों के शक्तिशाली राजाओं से भी चूक हो सकती है किसने सोचा था और मेरे आर्यन ने सेंध hi नहीं दोनों की बेटियां भी पता ली वाह मेरे आर्यन तू ने तोह कमाल कर दिया...... जहाँ कोई सोच भी नहीं सकता वहां आर्यन पहुंच hi गया और अब मुझे तोह लगता है विशाखा वाली भी आधी नाग्शक्ति ले hi लेगा..... दोनों राजाओं ने अपनी गांड खुद आर्यन से मरवाने का मैं बना लिया हो तोह हम क्यों आर्यन को रोकें दीप्ति ?"
दीप्ति ने गीता को रानी माँ की तरफ इशारा किया तोह गीता जीभ अपने दांतो में दबा के बोली ," सॉरी रानी माँ मुँह से निकल गया ..... "
रानी हेमा भी मुस्करये बिना न रह सकीय तब दीप्ति बोली," काया माहि पूरी नाग्शक्ति को झेल लेगा ?"
रानी हेमा ," वह hi झेल सकता है और नागलोक क्या पूरे पतलोक का भविष्य भी बदल सकता है..... तुम दोनों को उसको खुला छोड़ना होगा उसको पतलोक में जोह उसका मैं करे कितनी भी प्रियसी बांये कितने भी विवाह करे..... देखना वह और शक्तिशाली बनेगा और जोह सपने तुम सब उसके साथ देख रहो हो पूरे कर सकेंगे..... पतलोक की जोह स्त्री या युवती आर्यन के साथ होगी वह उसको उतना hi बलसाली और धारयवान बनेगी ".
दीप्ति ," महीईईई संभल के ....... " उसकी चीख ने बाकी दोनों का धयान भी मिरर में चल रहे युद्ध पे स्वंयवर स्थल की तरफ गया......
गीता ," चीख क्यों रही है देख लियो सब मर जायेंगे आर्यन न मरेगा ".
रानी हेमा ," विशाखा को भूल रही हो पुत्री गीता, दीप्ति ने उसकी शक्तियों का 20व हिस्सा भी नहीं देखा था और वह किसी को आर्यन के अंदर जागृत करने की पूरी कोशिश करेगी ".
दीप्ति और गीता एक साथ ," क्या ..... क्या ..... "
पर कीसये जिसके अंदर 6 आत्मा हो ?????
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आर्यन की एक बार चरों और नज़र दौड़ी तोह उसको सब पहले की तरह नफरत की दृष्टि से नहीं देख रहे थे..... आर्यन भी मैं में "आखिर सपोला hi सपोले को पहचानता है".
विशाखा जोह अब एक प्रीतिबिम के रूप में सबके सामने आर्यन को मुखातिब होकर बोली," आर्यन तुम कोई भी अस्तर, रूप या चल कपट भी इस्तेमाल कर सकते हो अगर प्रभा के साथ मुझे भी हरा दिया पूरा नागलोक क्या पतलोक को भी तुम्हारे सामने झुकना पड़ेगा. तुम को मारने में हम दोनों कोई कसार नहीं छोड़ेंगे तुम चाहो तोह हमको मार भी सकते हो ...... hi hi hi hi hi ...... "
आर्यन निर्या hi चुटिया बना विशाखा की शरत और चेतवानी सुन्न रहा था..... उसने राजा वासुकि की तरफ देखा तोह वह भी मुस्करा रहे थे ...... उन्होंने तोह और भी खुले मैं से युद्ध बिना किसी नियम से स्वीकारती दे दी......
आर्यन ने अपनी बात राखी बड़े धैर्य से ," देखो विशाखा मुझे सर्प बने कुछ पल hi हुए हैं पर सर्पों की बुराई और अच्छे आने में समय तोह लगेगा..... दुश्मन जब अपना सागा हो तोह मुश्किल जरूर होती है...... मगर मेरी तरफ से तुम दोनों बहेनो को क्या किसी को भी छूट है जोह तुम्हारी तरफ से लड़ने को त्यार हो मुझे पहरेज नहीं. हाँ अगर मेरी मौत यहीं लिखी है तोह फिर डिअर क्यों करनी. में प्रभा की कसम खाता हूँ आज इसी नागलोक के स्वयंवर में ुषको अपनी बना लूंगा और तुमको प्रभा की दासी ".
जहाँ प्रभा के चेहरे पे खुसी चा गयी अपने बड़े भाई पे गर्व करते हुए वहीँ विशाखा के प्रतिबिम्ब रूप से अब गुस्सा झलक रहा था.
जब राजा वासुकि के इशारे पर सैनिक सर्प ने बड़े से हथोड़े से घंटे पे मारा तोह तनननननन की आवाज से स्वयंवर प्रतियोगिता का आखिरी पड़ाव शुरू हो गया .......
आर्यन ने सब पतलोक के राजाओं की तरफ मुख करके अपना पहन और दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन किया......
राजा बलि महाराज के साथ असुर गुरूजी ने भी उसको मैं hi मैं आशीर्वाद दिया ....... राजा वासुकि ने पूरा स्थल एक अदृश्य कवच से धक् दिया.......
कुछ मिंटो बाद सर्प सैनिक ने घोसना की ," महँ नाग राजकुमारी प्रभा अपनी सेना के साथ पधार रही है ".
आर्यन अब नाग योद्धा की पोषक पहनकर के एक हाथ में भला दुसरे में ढाल और कमर पे एक तलवार और कटारी लगये एक तरफ त्यार खड़ा था ...... तभी नाग राजकुमारी प्रभा एक योद्धा की पोषक में नागों के विचिरत से रथ में जोह पूरा नागों से hi बना था और आगे 3 बड़े बड़े विशाल नाग ुष रथ को खींचते हुए युद्धस्थल के बिच ला रहे थे...... पीछे धम्मं धम्म्म्म की आवाज करते बड़े बड़े नगाड़ों का बंद और नागलोक का झंडा लिए 2 टोली सैनिक की रथ के पीछे और उनके पीछे हज़ारों की संख्या में नाग सैनिको की सेना थी...... आर्यन पहले अपनी लाड़ली छोटी भें को इतनी बड़ी नाग राजकुमारी के योद्धा रूप में उसकी सुंदरता में खू सा गया पर जब हज़ारों नाग सैनिकों ने आधे से ज्यादा युद्धस्थल घेर लिया तब होश में आया.......
आर्यन अपने मैं में ," अरे प्रभा तोह लगता है पूरी सेना hi ले आयी लड़ने के लिए...... कितनी सूंदर लग रही है मेरी प्यारी भें ".
तभी एक नागबां आर्यन के चरों में आकर गिरा जोह प्रभा ने अपने बड़े भाई के सम्मान में सर्प धनुष से मारा था...... वह नागबां पुष्पों में बदल गया.
आर्यन भी मुस्करा दिया यानी पूरी तयारी से आयी है मेरी भेना..... चल फिर हो जा त्यार ......
आर्यन ने अपनी कमर से तलवार निकली और पूरी ताकत से ऊपर की तरफ फेंकी तोह कुछ hi पल इतनी उचाई तक गयी की दिखनी गायब हो गयी और फिर हुयी गर्जना बिजली से चमकने लगी और ऐसा लगा िश अँधेरे लोक में कोई तूफान आने वाला है.
सब समझ तोह गए यह आर्यन की फेंकी तलवार का नतीजा है पर जब ऊपर से बिजली कड़कती वही तलवार तेजी से जब निच्चे प्रभा के रथ की तरफ आने लगी भीषण गर्जन और बिजली के साथ तोह सब डरने लगे...... प्रभा ने एक बार आर्यन की तरफ देखा तोह वह मुस्करा रहा था तोह उसके चेहरे पे भी मुस्कान फेल गयी जैसे पक्का भाई ने गिफ्ट दिया है.....
रथ से सिर्फ 10 मीटर ऊपर एक विस्फोट हुआ और पूरी सेना पे पुष्प की वर्षा होने लगी...... और वह चमकती तलवार अब प्रभा की कुंडली के समाने रथ पर पड़ी थी जिसको उसने उठा के चूम लिया और आर्यन को देखकर हसने लगी...... ( आर्यन ने मायावी शक्ति का पर्दशन किया था)
राजा वासुकि और राजा माया एक दुसरे की तरफ देखे की यह हो क्या रहा है..... ?
आर्यन की पतलोकों की भरयाण (पत्नियां) खुश थी की दोनों पर्तिदावन्दी होकर भी एक दुसरे को पूरी इज्जत देते हैं.
दानव गुरूजी ," है है है है ....... दोनों को देखकर एक सीख तोह मिलती hi है की दुश्मनों को भी एक दुसरे की इज्जत करनी चाहिए तब युद्ध लड़ने का जज्बा दूंगा हो जाता है ".
राजा बलि महाराज ने चुटकी ली ," परन्तु गुरूजी यह दोनों तोह एक दुसरे को पुष्प पुष्प फ़ेंक रहे हैं ".
दोनों राजाओं ने दानव गुरूजी की तरफ देखा तोह मुस्करा के बोले," दोनों अपने कर्मो और युद्ध कौसल में निपुण है.... आर्यन बड़ा है तोह प्रभा ने उसके प्यार पे तीर मार्के अपना सम्मान प्रकट किया वहीँ आर्यन ने अपनी तलवार देकर उसको और उसकी सेना को विजयीभव कहा ".
राजा माया ," परन्तु गुरूजी ऐसा कब हुआ".
राजा बलि महाराज ने और मजे लिए ," गुरूजी आप हमको क्या छोटा बच्चे समझ रहे हैं क्यों राजा वासुकि आप ने देखा न".
राजा वासुकि भी चिढ़कर ," एहि तोह मेरी समझ में नहीं आ रहा ...... "
तभी एक जोर की फुंकार गुंजी अकर्मंण्णन ....... जोह प्रभा की थी और नगाड़ों की आवाज के साथ 100 से भी ज्यादा सर्पों ने प्रभा के इशारे पे आर्यन पे हमला कर दिया .......
रानी पुष्पलता ," समझ में आ गया राजा वासुकि ...... अपनी पूरी सेना hi भेज देते अकेले आर्यन को मारने ".
पर अब सबका धयान आर्यन पे hi था की अकेला पूरी सेना से कैसे लड़ेगा......
आर्यन ने अपनी पोजीशन लेकर अपनी लोटस शील्ड लगा ली तभी एक साथ विष छोड़ते 50 बाण उसकी शील्ड पे लगकर बेअसर हो गए ...... यह प्रभा का पहला वार था पर अब उसको अहसास हुआ की भाई ने लोटस शील्ड लगा ली है ऐसे तोह ुष्पर कुछ असर नहीं होगा...... मेरे नाग सैनिक मारे जायेंगे और झट से नाग्शक्ति से अपने सारे सैनिक सुरक्षित कर दिए......
आर्यन ने अपनी तरफ बढ़ते नागसानिकों को तेजी से रंगते आते देख के अपना भला पूरी ताकत से सबसे आगे वाले का सीना निशाना लेकर मारा तोह जितनी तेजी से उसका उसका भला ुष नागसानिक को लगता बस ुषको छूकर भला गलता चला गया ....... आर्यन भी हैरान होकर आशम्भव यानी यह भी शील्ड लगये हुए हैं.......
आर्यन को घेर के जब एक के बाद एक लगातार हमले होने लगे जिसको वह अपनी ढाल से या कटारी से बचता तब तक सब ने उसको घेर लिया तोह निच्चे बैठकर एक बड़ी उछाल मारा उनसे दूर होने के लिए तोह प्रभा ने अपना भला जोरसे हवा में उड़ते आर्यन पे मारा ....... वार इतना सटीक था आर्यन को कुछ हुआ तोह नहीं पर निच्चे युद्ध स्थल पे गिरा और नाग सैनिकों ने वार पे वार करने शुरू कर दिए .......
आर्यन कभी एक को घूंसा जड़ता तोह दुसरे का वार अपनी ढाल पे लेता..... पर प्रभा ने तोह अब 200 और नागसानिकों को आर्यन को कैद करने के लिए भेजा.....
दानव गुरूजी ," क्यों राजा वासुकि आपके चेहरे की मुस्कान बता रही की आपको अपनी छोटी पुत्री प्रभा पे गर्व महसूस हो रहा है ".
राजा वासुकि ," सही कहा गुरूजी आपने, प्रभा को हम सब चंचल hi समझते थे जबकि यह उसका योद्धा वाला रूप बहोत सुसज्जित है और सारे नाग सैनिकों को भी नाग्शक्ति से सुरक्षित कर दी है ".
राजा माया ," पर आर्यन के पास भी कमल कवच (लोटस शील्ड) है और मायावी शक्ति भी ".
रानी पुष्पलता मैं में , कब इस्तेमाल करेगा आर्यन अपनी नयी शक्तियां......
आर्यन ने अपनी स्पीड बढ़ा छोटी छोटी चल्लंघ लगा नाग सैनिकों पे वार करके बचता तोह 2 नए वार ुष्पर होते ...... एक बार जोरसे उछाल के फिर दूसरी तरफ भगा तोह दीप्ति ने अपने नागबां से फिर निच्चे गिरा दिया ....... और एक बाण मार के उसकी गर्दन को जमीन पे एक नागरसि से कास दिया ........
फिर 2 और बाण उसके हाथों को बाँध दिए तोह आर्यन ने आँख बांध करके मंतर पढ़ा ....... धमममममम Dhapppppppppp .......
नागसानिक जोह आर्यन के पास जाकर हमला करने hi वाले थे की पूरा स्थल कांप गया ......
Gurrrrrrrrrrrrrrr बाबर शेर की धाड़ और खुनी गेंदे की फुन्ननननननन फुन्नननननन के साथ उन्ह नागसानिकों की तरफ बिजली की फुर्ती से दौड़े .......
सब दरसक गण क्या सब महाबली भी देखते रह गए वहीँ राजा वासुकि को भी गायत हो गया यह दोनों खूंखार जीव आर्यन के अंदर से आये हैं बहार तोह पूरा युद्धस्थल हमारे कवच से बंधा है ....... मगर जिन्होंने ऐसे जीव पहली बार देखे तोह दर गए उनके शारीर पे गोल्डन कट्वच उनको और हिंसक के साथ युद्ध के लिए hi त्रिनेड दिखा रहा था ......
(स्क्रीन पे दोनों देखकर गीता दीप्ति ने हीफी किया ...... दोनों उनको देखकर खुश थी की आर्यन ने सही वार किया ...... )
राजकुमारी स्वर्णलता ," दीदी देखो वह दोनों फिर बुला लिए आर्यन ने ...... hi hi hi अब आएगा मजा ....... खा जाओ इन नागसानिकों को ....... "
रानी पुष्पलता और कामलता के शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी ..... क्या हालात की उनके लोक में िंह दोनों दैत्य रूप आर्यन के दोस्तों ने हाँ बाबर शेर और खुनी गेंदे को अपना दोस्त hi बतया था आर्यन ने .......
देखते hi देखते दोनों ने नागसानिकों की रेल बना बना के घायल कर दिया पर अभी तक मरे नहीं थे नाग्शक्ति की वजह से ...... आर्यन अपने बंधन से आजाद होकर के अपनी लोटस शील्ड भी दोनों के ऊपर चढ़ा दिया और ुशी जगह लेता लेता नाग सैनिकों की चीख पुकार सुन्न रहा था ......
प्रभा ने उनको नागरसि से बांधने की कोशिश की तोह कोई असर न हुआ पर अब दोनों प्रभा के रात को टारगेट कर दिए प्रभा ने दोनों विशाल हिंशक पुषों को अपनी तरफ आते देखा तोह छान भर में अपना विशाल रूप धार के रथ से उछाल के दोनों के सामने उनको अपनी पूँछ में साथ लपेटी hi थी की एक जोरदार किक उसके पहले पहन पे और दुसरे पहन पे आर्यन का घूंसा पड़ा ...... उधर बाबर शेर ने उसके सरीर में दांत और नाखून से वार किया वही गेंदे ने अपने सींघ से.....
प्रभा पे दोनों जानवर के वार का कोई असर न था पर आर्यन के वारों की चोट ने उसको बेहोश कर दिया ...... आर्यन ने सीटी बजे और तीनो प्रभा को अचेत छोड़कर उसकी नागसेना को मारने लगे क्यूंकि प्रभा की नाग्शक्ति का असर उसके अचेत होते hi नागसानिकों पे से ख़तम हो गया..... 5 मं में बस खून hi खून था कटे फटे नाग सैनिकों का और आर्यन ने प्रभा के पास जाकर उसके सर पे हाथ रखा और मंतर पढ़ा तोह उसकी चेतना लौट आयी ......
( प्रभा ने अपनी नाग्शक्ति से खुद को सुरक्षित नहीं किया था यह उसकी भूल साबित हुयी और आर्यन ने पूरी मायावी शक्ति से उसके दोनों पहन पे वार किया जिसको वह नहीं झेल पायी)
आर्यन को कुंडली में बाँध उसने दोनों मुँह से उसकी गर्दन पे वार किया पर सायद आर्यन त्यार था दोनों हाथो से उसका पहन पकड़ के चिल्लाया ," तुम हार चुकी हो प्रभा तुम्हारी सेना भी नहीं बची, मुझे मजबूर मत करो नहीं फिर से लम्बी बेहोशी में भेज दूंगा ".
प्रभा आर्यन की बात सुनकर ढीली पड़ी और जब चरों तरफ सिर्फ लाशें और खून पड़ा था गेंदा और शेर अपनी अपनी जीभ से अपनी चेहरे से खून चाट रहे थे...... तभी तंत्र की आवाज के साथ घंटा बजा तोह राजा वासुकि ने खड़े होकर कहा ..... " महार्यं को विजयी घोसित किया जाता है ".......
प्रभा अपनी सेना खोकर सदमे में थी तोह आर्यन ने उसको सहारा देना चाहा पर वह सर झुका के वहां से अपने माता पिता के पास आकर रुकी..... नागरानी ने उसको गले लगा के कहा," आखिर तुम्हारा प्यार जीत गया प्रभा , तुमको खुश होना चाहिए ".
प्रभा सर झुका के ," पर में अपने नागसानिकों को नहीं बचा पायी ".
दानव गुरूजी ," तुम एक को hi चुन सकती थी युद्ध परिणाम में आर्यन या अपनी सेना..... तुम ने अपनी सेना चुनी पर आर्यन ज्यादा तेज़ निकला उसने तुमको बेहोश कर तुम्हारी सेना को हरा दिया. तुम्हे दुखी नहीं होना चाहिए ".
राजा वासुकि ," पुत्री प्रभा, मैंने इतनी साहसी योद्धा नहीं देखि जोह अपने सैनिकों को साथ लिए लड़ी..... यह युद्ध नहीं था वार्ना तुम्हारी जान भी जानी थी और स्वयंवर की शर्त मत भूलो तुमको आर्यन ने जीत लिया है अब वह hi तुम्हारा वर है ".
विशाखा ," तुम आराम करो प्रभा, तुम ने अच्छी तरह मुकाबला किया ".
विशाखा का प्रतिबिम्ब अब प्रभा के अंदर समां गया और छोटी भें को साँवन्तना देते हुयी बोली," प्रभा मेरी छोटी भें जिस घडी का तुमको इंतज़ार था वह ज्यादा दुर्र नहीं है. फिर िश घडी के लिए तोह तू हज़ारों वर्षों इंतज़ार किया है. तेरे नागसानिकों ने तुझे बचने के लिए अपने प्राण तक नौछवर कर दिए..... एक बार को लगा आर्यन तुझे hi न मार दे पर वह बहोत चाहता है तुझे. अब ऐसे दुखी होकर अपने सच्चे प्रेम का उपहास तोह मत उड़ाओ ".
प्रभा ," अपने प्रेम के लिए कितनी कुर्बानियां देनी होगी दीदी फिर अब आप भी कहाँ रुकने वाली हो".
विशाखा हसकर," तू बोले तोह में नहीं लड़ती आर्यन से ".
प्रभा खुश होती हुयी ," सच्च दीदी आप नहीं लड़ेगी, हम ऐसे hi तीनो बहोत प्यार से हसी खुसी रहेंगे ".
विशाखा गंभीर स्वर में," हम तीनो नहीं सिर्फ तुम और आर्यन ...... मुझे तुमको मुकत करना होगा, तुम हमेशा खुश रहना ".
प्रभा ," ऐसा मत कहो दीदी में एक बार आप से अलग हो गयी थी अब फिरसे एक साथ हैं, हमेशा रहेंगे ".
विशाखा ," प्रभा ऐसे में कभी आर्यन को अपना नहीं पाऊँगी मेरी भें. मुझे आजाद कर दो तुम्हे तुम्हारी खुशियां मुबारक हो ".
प्रभा ने मैं कड़ा करके वह कहा जोह विशाखा सुन्ना चाहती थी ," दीदी अब जियेंगे तोह साथ मरेंगे भी साथ. आप सर झुका के मत रहो आप जोह चाहोगी वही होगा ".
प्रभा फिर एक बार अपनी बड़ी भें के आगे झुक गयी जोह उसकी बहोत बड़ी गलती साबित होने वाली थी...... ????
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आर्यन ने अपने पुराने दोस्त बाबर शेर और खुनी गेंदा वापस गायब कर दिए यह कहकर अभी एक बार और तुमको बुलाना पड़ेगा .....????
आर्यन जब योद्धा दीर्घा में अपने को साफ़ करके फिर से त्यार होने लगा तोह राजकुमारी स्वर्णलता और राजकुमारी माया उसकी दोनों भार्या आकर उसको बधाई दी पर उसके सर्प रूप की वजह से झिझक के दुर्र कड़ी हुयी थी.....
हाथ जोड़कर आर्यन ने भगवन शेषनाग को स्मरण किया तोह अपने मानव रूप में बदल गया ...... दोनों दौड़ के उससे लिपट के चूमा छाती करने लगी.....
आर्यन भी दोनों को अपनी गॉड में बिठा ख़ुशी से सेहला रहा था किश करते हुए..... कुछ hi पल में वहां रानी पुष्पलता के साथ बाकी तीनो रानी कामलता और राजकुमारी साया चाय भी आयी ...... दोनों शर्मा के उसकी गॉड से उठ गयी पर कामलता ने पहले मैदान मार के उसके ऊपर चढ़ के किसी करने लगी.
रानी पुष्पलता ने उसके बड़े खुलों पे धौल जमाया ," कामु यह तोह देख लो हम कहाँ है फिर कुछ रिश्ते राजदार hi सही होते हैं ".
कामु ने एक बार और किश करके हटी," दीदी अपने प्यार को बधाई hi दे रही थी hi hi hi hi ......फिर आर्यन मुझे सबसे ज्यादा पसंद करता है ..... हैं न आर्यन ? ".
आर्यन ," कामु यू अरे डार्लिंग बेबी .... पुछःह पुछःह ....... " उसके दोनों गाल चाट लिया तोह तीनो दानव राजकुमारियां हसने लगी तोह स्वर्णलता भी न समझे हुए भी हसने लगी.....
इतने में साया चाय भी आर्यन से लिपट के प्यार जताई तोह रानी पुष्पलता चीड़ सी गयी......" ठीक है करो सब अपनी मनमानी ...... यह नागलोक है ना की अपने लोक में हैं "....... वह पलट के जाने लगी सबको हस्ता देखकर...... दानव सैनिक भार hi रोक दिए थे.....
पर आर्यन ने उसको भी आगे बढ़कर गॉड में उठा के अपने से लपेट hi लिया...... सबके सामने उसको अपनी गॉड में बिठा के खूब किसी करके पुछा," तुम कुछ परेशां हो पुष्पु ?"
5 और आर्यन की बीवियों के सामने खुद को उसकी गॉड में बैठकर गर्व के साथ शर्म भी आ रही थी पर आर्यन के उसके मैं के भाव जानकार खुसी हुयी की उसका प्यार उसको समझता है ......
रानी पुष्पलता ," सब देख रही हैं आर्यन ..... छोड़ दो न .....विशाखा बहोत खूंखार और शक्तिशाली है आर्यन, उसको प्रभा समझने की भूल मत करना. उसको सीधे लड़के हराना मुश्किल होगा तोह अपनी शक्तियां पूरी लगा देना वार करते हुए बिना औरत समझे".
आर्यन ने पुष्पु का गोरा गाल चाट के कहा ," विशाखा को हरा के तुम्हारे सामने नहीं झुकाया तोह मेरा नाम आर्यन नहीं मेरी रानी...... में यहाँ हारने नहीं अपनी प्रभा को जीतने आया हूँ. तुम सबको जितना विश्वास होगा उतने मेरे जीतने के चांस होंगे पर विशाखा को अपने पिछले जनम के पापों का हिसाब देना पड़ेगा ......"
आर्यन की गुस्से से लाल होती आँखों को देखकर पुष्पलता ने आर्यन के लबों पे धावा बोल अपने चूतड़ उसके लिंग पर रागादि तोह वह भी नार्मल होता गुस्सा हटा के प्यार करने लगा..... सब की सब उससे चिपट के चूम रही थी जहाँ जगह मिलती...... सबने आर्यन को शांत कर दिया. एहि आर्यन की ताकत भी थी की उसके चाहने वालियां उसको गुस्सा नहीं होने देती है चाहिए कुछ भी हो.
सबको गले मिलकर विदा कर आर्यन अब नए अस्तर सास्तर के साथ जब युद्धस्थल में प्रवेश किया तोह अब नागलोक वालों को भी विश्वास सा हो रहा था की इतने हज़ारों सालों के बाद आर्यन hi स्वयंवर प्रतियोगिता योद्धा विजेता बनेगा. आखिर दिव्या तलवार भी उसके पास है राजकुमारी विशाखा उसको हरा नहीं पायेगी.
विशाखा की शक्ति नागलोक और उनके वाशियों से थी जोह लाखों की संख्या में नागों का लोक था पर आज तोह ना जाने कितने और लोकों से नाग सिर्फ आर्यन को जीत ता देखने आये थे आखिर वह दिव्या तलवार का मालिक होने के साथ प्रभा को जीत भी चूका था......
सर्प भासा में सिर्फ हिसस हिसस जैसा लगता किसी मानव को पर आर्यन की जय जय कार हो रही थी पूरे स्वयंवर स्थल के प्रांगम में...... वहीँ दुसरे लोकों के दानव और पिश्चाहों के साथ गॉब्लिन्स और डॉकयार भी आर्यन की तरफ थे......
राजा वासुकि के साथ अब राजा माया को भी एक उम्मीद जगी काश यह विशाखा को हरा के उसको अपना ले ...... वहीँ आर्यन सिर्फ विशाखा से अपनी छोटी भें प्रभा के अपमान और दुष्टता का बदला लेना चाहता था......
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विशाखा अब प्रभा के सरीर पे कब्ज़ा करके अपने पिताश्री राजा माया का आशीर्वाद लेकर अपनी गुफा में पहुंची और सबसे पहले एक मंतर पढ़कर प्रभा को निष्किरये करती बोली ," भें तू मेरी या आर्यन की लड़ाई नहीं देख पायेगी इशलिये तू सुप्त अवस्था में रह ".
प्रभा ने ना जाने क्यों अपना सबकुछ विशाखा के हवाले छोड़ दिया और विशाखा अपनी गुफा में बैठकर एक याग शुरू कर ऐसे ऐसे प्राचीन नागों का आह्वान करने लगी जोह हज़ारों साल पहले मार चुके थे, उनकी आत्मा और शक्ति को पा ली...... यहाँ नागलोक में उन्ह नागों की मणि भी विशाखा के पास थी ....... देखते hi देखते वह बदल के एक महाकाय रूप ली और कितने क्रूर नाग उसके सरीर में समां गए ...... फिर याद की भगवन शेषनाग को तोह उनके प्रकट होते hi अपने 5 पहनो को निच्चे करके वरदान मांगी तोह उन्होंने भी आशीर्वाद दिया ," थाथात्सु ".
विशाखा की खुसी देखते hi बनती थी , तुमको मुझे अपना पड़ेगा में दिव्या तलवार से दुर्र नहीं रह सकती ...... चाहिए नागलोक क्या पतलोक भी उजाड़ जाए ..... में सिर्फ दिव्या तलवार के मालिक साथ रहूंगी...... में तुम्हारी छवि अभी तक नहीं भूली......
" जेहरली नागिन का बदला बहोत खतरनाक होता है "...... वही विशाखा तोह पहले hi मारी जा चुकी थी अब जोह करने जा रही थी उसको दिव्या तलवार के मालिक से प्रेम हुआ था जोह आर्यन hi था पर मानव रूप नहीं वही दिव्या तलवार का प्रेमी उसका साथी हो ऐसी तमना लिए.
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रानी हेमा के साथ िश सूंदर वन्न में दोनों भेने Geeta-Deepti जैसे हर युद्ध स्थल के दृश्ये या रहस्य पे आंदोलित होती...... सब उनको मिरर रुपी स्क्रीन पे दिख रहा था पर अब विशाखा को देखकर दोनों डर रही थी की यह क्या करने वाली है पर रानी हेमा ने उनके सामने से पल भर गायब होकर फिर से आर्यन की 6 नयी पतलोक की पत्नियों और प्रेयसी के साथ प्रकट हुयी.......
राजकुमारी माया ," माँ हम सबको यहाँ क्यों लायी ?"
रानी हेमा ने गीता और दीप्ति की तरफ इशारा किया जोह एक आलीशान गद्दी पे बैठकर स्क्रीन पे देखती नज़र आयी ..... दीप्ति ने खड़े होकर सबको नमस्ते किया पर गीता मोह फेर के वापस से स्क्रीन पे देखने लगी ......
रानी पुष्पलता ," महारानी हेमा जी में िंह सबको वहां सुरक्षित रखती ".
रानी हेमा ," मैंने अपने पुत्र के अनुसार hi किया है वह नहीं चाहता की कोई भी उसकी चाहने वाली वहां हो जब विशाखा से उसका सामना हो यहाँ तक में उसकी मुँह बोली माँ भी नहीं ".
बाकी सब दीप्ति से गले मिली पर गीता की बेरुखी सबको डरा रही थी तोह दीप्ति ने माया के कान में कहा दीदी ने सब देखा जब आप सब माहि के साथ थी.....
माया ने आगे बढ़कर गीता के प्यार छुए तोह उसने प्यार सिकोड़ के कहा ," दूर हैट नहीं तोह यहीं सबको मार दूंगी, कमींयों को कोई नहीं मिला मेरे आर्यन के अल्वा ...... आज विशाखा ने नहीं मारा तोह हरामी को में खुद मार दूंगी ".
माया का चेहरा उतर गया वहीँ रानी पुष्पलता को बहोत गुस्सा आया की इतनी हिम्मत की माया को कैसे दांती गीता?
रानी हेमा ने उसको हाथ दिखा के रोका और दीप्ति माया को अपने साथ गीता से दुर्र बैठा के बोली," दीदी का गुस्सा तुम तीनो जानती हो अभी उनके पास मत जायो थोड़ी डिअर में ठीक हो जाएगी ".
रानी हेमा ," तुम सब आर्यन की कमजोरी हो इशलिये यहाँ लायी हूँ ".
रानी पुष्पलता ," पर यह तोह नरकलोक के पास का पिछले हिस्सा है यहाँ आप कैसे हैं..... और तुम सब भी कोई बेवकूफी मत दिखाना वार्ना जिन्दा hi मिर्त्युलोक में होगी".
रानी हेमा," यह छदम स्थान है यहाँ कोई न जीवट होता न hi मिर्त्ये इशलिये विशाखा से बचा के लायी हूँ".
गीता भी मुड़कर ," रानी माँ कहीं हम सबकी सेटिंग अपने hi तोह नहीं विशाखा के साथ सेट कर दी ...... इनका मुझे पता नहीं पर आर्यन मुझे बहोत प्यार करता है, वह मुझे खोजते हुए यहाँ भी आ जायेगा. और तू दीप्ति वहां कहाँ बैठी है यहाँ बेथ मेरे पास ".
दीप्ति भी सर झुका के अपनी हंसकाल दीदी के पास बैठी तोह गीता ने उसको अपने से लगा लिया ......
रानी हेमा मुस्करा भर दी तोह पुष्पलता भी िश चंडी देवी को समझने की कोशिश कर रही थी आखिर यह कैसे मानेगी..... ?
चाय ने स्वर्णलता और कामलता को धीरे से समझाया यह hi आर्यन का पहला प्यार है और सबको इसी से इजाजत मिलेगी..... साया ने बतया थोड़ी कड़क है पर स्त्रीओं का बहोत सम्मान करती है बस थोड़ी मोह पहात है. इश्कि बिना अनुमति के आर्यन नहीं मिल सकता पर एक और है वह मान गयी तोह यह भी मन नहीं करेगी..... आर्यन की जुड़वाँ भें hi कह लो मीणा नाम है.
रानी हेमा ने ताली बजे तोह दोनों दासियाँ अब 6 थाल लेकर आयी सबके लिए.....
रानी पुष्पलता ," रानी हेमा वहां आर्यन को मेरी मदद चाहिए होगी ".
रानी हेमा," जरूर होगी पर उशसे दूर रहकर सबको सुरक्षित रखो एहि मदद होगी ".
गीता ," अरे बाप रे यह कौन सा रूप लिए विशाखा आयी है ?????"
सबका ध्यान ुष स्क्रीन पे गया......
विशाखा
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