Angrakshak Parivar Ka .........MAHI - Page 33 - SexBaba
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Angrakshak Parivar Ka .........MAHI

अपडेट 38

Part 6 (इ)

रानी हेमा के पास जब Geeta-Deepti को होश आया तोह एक सूंदर से जंगल में अपने को पाया. सूंदर से छायादार पेड़ , कारकत्व बहती निर्मल नदी , नीला आश्मान , सुन्दर पशु पक्षी और जहाँ वह थी यह एक बड़ा सा विरकिश और उसके निच्चे सुन्दर सा प्रांगण जहाँ बड़े बड़े सही ताकत के सोफे बीएड सिंघसान बिच में सजावट ...... (यानी सब माया थी )

वह दोनों कुछ पूछती उससे पहले hi रानी हेमा ने कहा," तुम दोनों को यहाँ लाने का प्रोयजन है पुत्रियों क्यूंकि वहां स्वमायवर में तुमको कमजोरी की तरह विशाखा इस्तेमाल न कर सके आर्यन को हारने में ".

गीता नाराज होती हुयी बोलने वाली थी की दीप्ति ने पुछा ," हम दोनों कभी भी माहि की कमजोरी नहीं है रानी माँ अपितु उसकी ताकत बनकर hi हमेशा रहेंगी".

रानी हेमा ने मुस्करा के ताली बजे तोह दो दासी एक थाल में खाने और दुसरे में शीतल पेय लेकर प्रकट हुयी .

" में आर्यन की नहीं बल्कि तुम्हारी भी माँ सामान हूँ और आर्यन की किसी भी चाहने वाली को कोई दुःख या कष्ट हो कभी नहीं चाहूंगी..... दानवो और नागों में एक गुण जमजात होता है उनका अंहकार जोह उनको ताकत और घमंड में चूर, ज्यादा क्रूर और छलकपटी प्रवित्ति का भी बना देता है जिसके लिए वह अपने सारे डाव पेंच जीतने में करते हैं. वहीँ दुसरे प्राणी उनके सामने हार जाते हैं उसूल और नियम में बंधे हुए. तुम दोनों को राज की बात बाटूंगी पहले कुछ सेवहार करो ".

गीता गुस्से से ," तब हम यहाँ नागलोक आये hi क्यों है? जब हमको वहां आर्यन की मदद करने से भी रोका जा रहा है ".

रानी हेमा ने खुद दासियों से थाल लेकर उनको जाने का इशारा किया फिर पहले दीप्ति की तरफ थाल किया तोह उसने पहले गीता को अपने हाथ से एक फ्रूट खिलाया तोह वह भी खा ली ......

रानी हेमा ," तुम दोनों नागलोक बुलाई नहीं गयी हो बल्कि चारे की तरह लायी गयी हो...... तुम जीयो या मारो किसी को यहाँ फरक नहीं पड़ता बस आर्यन और उसकी पतलोक की भरयाण ( पत्नियां) के अल्वा. आर्यन की मदद में हमेशा करुँगी क्यूंकि मैंने अपना पुत्र माना है और तुमको यहाँ सुरक्षित स्थान पे लाकर मैंने आधा कार्य कर दिया है और आधा अभी पूरा करती हूँ ताकि तुम्हारी शिकायत काम हो ".

रानी हेमा ने अपना सीधा हाथ सामने किया तोह एक बड़ा सा 8×6 फट का सीसा यानी मिरर सामने 20 फट की दुरी पर बन गया और तभी ुश्मे नागलोक का स्वयंवर स्थल का लाइव सन दिखाई दिया तोह आर्यन एक नागसानिक की पोषक और अस्तर लिए खड़ा था और दूसरी तरफ एक विशाल सर्प सेना के साथ प्रभा नागिन योद्धा के रूप में सबसे आगे कड़ी थी ......

Geeta-Deepti दोनों अपनी जगह से जैसे उछाल hi पड़े यह क्या मिरर एक लेद स्क्रीन बन चूका था जोह लाइव ट्रांसमिशन दिखा रहा था......

रानी हेमा हसकर ," हम भी महाराज मयासुर की पत्नी हैं तोह हमारे पास भी कुछ शक्तियां हैं ...... है है है ..... अब आराम से देखो और सही समय पे में तुमको वहीँ ले चलूंगी ".

दीप्ति खुश होती बोली ," रानी माँ आप कुछ राज की बात की वार्ता करने वाली थी ?"

गीता भी संभल के बोली," पर यह प्रभा को क्या हो गया है जोह पूरी नागों की सेना लिए आर्यन के खलिहाफ़ कड़ी हो गयी...... नहीं रानी माँ यह गलत हो रहा है इश्को रोकना होगा".

रानी हेमा ," इशलिये में तुम दोनों को यहाँ लायी हूँ, वह जोह सामने कड़ी है वह कोई आम नागिन या जोह तुम चलचित्र( टीवी और फिल्म्स) में देखते हो वह वाली नागिन नहीं है. यह नागलोक के महँ राजा वासुकि और नागरानी की दूसरी पुत्री महाबलशाली राजकुमारी प्रभा है जोह अपनी पे आ जाये तोह पतलोक क्या धरतीलोक हो या स्वर्गलोक तक जीत ले. वहीँ बड़ी नागिन राजकुमारी विशाखा को तुम दीप्ति और प्रभा ने चकमा देकर मार दिया था दिव्या तलवार के समय लेकिन अब वह भी प्रभा के साथ है. यह दोनों बहेनो के अंदर नागलोक की आधी नाग्शक्ति विराजमान है और दोनों कभी किसी लोकों को नुक्सान न पहुंचा दे इशलिये आधी नाग्शक्ति ,Saya-Chaya-Maya तीनो मेरी पुत्रियों के पास थी पर अब वह किसी और को उनसे मिल चुकी है ".

गीता का धयान रानी हेमा की बातें सुनने से ज्यादा ुष मिरर पे आगे क्या होगा ुष्पर था जबकि दीप्ति मामले की घेरे तक जाना चाहती थी तोह रानी हेमा से पूछी ," फिर वह आधी शक्ति दोनों राजकुमारिओं को मिल गयी तोह ?"

रानी हेमा ," समझो पार्ले hi आ जाएगी..... यही आर्यन का मुख्या कार्य और परीक्षा है...... किसी भी तरह दोनों बहेनो की शक्तियां पूरी भी कर दे और उसको वह दोनों भेने धारण भी न कर पाएं विनाश के लिए..... "

दीप्ति की समझ में अब कुछ कुछ आ रहा था ," यानी आप कहना चाहती हैं की आधी नाग्शक्ति आर्यन के अंदर विराजमान हो चुकी है ?...... तीनो दानव राजकुमारिओं ने आर्यन को नाग्शक्ति का हिस्सा दे दिया पर कैसे और माहि अभी तक उसको झेल कैसे लिए ?"

गीता के भी कान खड़े हो गए ," पक्का कमीना तीनो को छोड़ छोड़ के शक्तियां ले लिया होगा ....... मादरचोद कभी नहीं सुधेरगा ...... महह्हह्ह्ह्ह ....."

दीप्ति ने गीता का मुँह बांध किया अपने हाथ से ," दीदी रानी माँ भी साथ बैठी हैं ऐसे गाली मत दो, प्लीज बड़ो का लिहाज रखो ".

गीता अभी भी गुस्से में hi थी दीप्ति बोली," माफ़ कर देना रानी माँ मेरी दीदी को गुस्सा जल्दी आ जाता है ...... दीदी आप सोच समझ के बोलै करो वह तीनो इनकी पुत्रियां हैं ".

गीता ने जब रानी हेमा की तरफ देखा तोह उसको भी लगा की आर्यन तोह है छूछीचूर रानी माँ को भी फसा लिया होगा ...... पर कोई माँ अपनी बेटियों के लिए बुरा नहीं सुन सकती .......

रानी हेमा भी जोर से अठास लगाती है पड़ी ........ है है है है ...... सही जीवनसाथी मिली है मेरे पुत्र आर्यन को, तुम्हारा गुस्सा hi उसको नियंतरण में रखेगा जब इतनी बीवियां और प्रियसी होगी..... पुत्री दीप्ति हम कभी पुत्री गीता की बात का बुरा नहीं मानेगा आखिर जिस का हिरध्या hi इतना बड़ा हो उसके अप्सब्द भी सच्चे होते हैं भले hi कड़वापन लिए हुए..... hi hi hi hi ...... पूरी बात नहीं सुन्ना चाहोगी ?"

दोनों ने हाथ जोड़कर चमा मांगी नमन किये हुए और आगे जानने की उत्सकता दिखाई.....

रानी हेमा ," विशाखा और प्रभा दोनों सगी भेने जब पैदा हुयी तोह दोनों को आधी आधी नाग्शक्ति मिली भविष्य को धयान में रखकर...... सब सही चल रहा था पर विशाखा महत्वाकांशी थी और अपनी शक्तियां पुराने से पुराने विलुप्त हो चुके हज़ारों सालों पहले महाबलशाली सर्पों की अर्धना करने लगी..... उसको कई शक्तियां भी मिली जिनमे कुछ काली या क्रूरता से परिपूर्ण थी. वहीँ अपने साथी नाग से उसका मैं विछेद जैसा हो गया, राजा वासुकि भी चिंतित थे की विशाखा hi उनको नागलोक का उत्तराधिकारी देगी. विशाखा ने करीब 100 साल से ज्यादा एकांत में एक प्राचीन नागों की शक्ति प्रपात कर ली और जब वह वापस लौटी तोह अपनी प्रेमी साथी नाग को अपनी छोटी भें प्रभा के साथ देखा...... राजा वासुकि को भी िंह 100 सालों में प्रभा से उम्मीद दिखाई दी की वह विशाखा की जगह उनको उत्तराधिकारी देगी...... प्रभा और साथी नाग ने विशाखा को सच्च सच्च बता दिया की वह दोनों प्रेम करते हैं और उनको माफ़ कर दे. विशाखा की काली शक्तियां इतनी हावी हो चुकी थी की उनके सच्चे प्रेम को अपना अपमान मान ली और जिस छोटी भें को बहोत प्रेम करती थी उसके सामने उसके प्रेमी "सरपु" को ज़िंदा निगल गयी और काली शक्तियों से प्रभा को बाँध के उसकी नाग्शक्तियाँ खींचने चहई तोह राजा वासुकि ने खुद उनको प्रभा के अंदर से निकलते hi अपने अंदर समां लिया और विशाखा ने काल श्राप देकर प्रभा का अंत कर दिया और उसको हमेशा के नागलोक क्या पतलोक में कभी नहीं दुबारा जनम लेना वाला मंतर मार के भसम कर दिया..... यह पूरा नागलोक प्रभा की ुष हिरध्या विदारक आंत का गवाह है".

दीप्ति की आँखों में जहाँ आंसूं थे प्रभा के लिए वहीँ गीता की आँखों में विशाखा के लिए नफरत.

गीता ," यानी ुष दिन कोई कुछ नहीं किया आज शेर बन रहे हैं क्यूंकि विशाखा को दीप्ति और प्रभा ने मार गिराया..... अच्छा hi किया उसकी एहि सज़ा थी वार्ना में और आर्यन उसको कच्चा चबा के खा जाते जिसने हमारी प्रभा को ऐसा दर्दनाक दंड दिया ...... और तू क्यों रू रही है देख प्रभा ज़िंदा है और विशाखा मारी जा चुकी है. रानी माँ मुझे लगता है इतहास फिर से न दौराहे जाए मुझे अब वहां किसी पे जारा भी भरोसा नहीं ".

गीता ने दीप्ति की आंसूं साफ़ कर उसका गाल चूम के अपने हाथ से सीतल पेय पिलाया तोह दोनों का एक दुसरे के लिए घेरा स्नेह देखकर रानी हेमा भी खुश थी, बहोत भाग्यशाली हो पुत्र आर्यन जोह तुमको दो दो सच्ची और हंसकाल प्रेयसी मिली है जीवनसाथी के रूप में..... जहाँ सगी बहेनो में इतना प्रेम नहीं होता वहीँ िंह दोनों में तोह जैसे एक दुसरे के प्राण बसए हो......

रानी हेमा से दीप्ति ने पुछा ," फिर वह आधी नाग्शक्ति माहि तक कैसे पहुंची जबकि यह तोह डेढ़ हज़ार साल पुराणी घटना है फिर दिव्या तलवार "सहायक " के लिए विशाखा का पागलपन भी तोह था ?"

रानी हेमा ने उत्तर दिया," आधी नाग्शक्ति के लिए कई साल याग करके भी भगवन शेषनाग ने विशाखा को वरदान नहीं दिया बल्कि एक दूसरी शक्ति जल्दी hi, एक पवित्र शक्ति, उसके पास होगी ...... वह थी दिव्या तलवार जिसके मोह में विशाखा ने सबसे मुँह मोड़ लिया..... चूँकि आधी नाग्शक्ति प्रभा की थी और उसके मरने के बाद राजा वासुकि को भगवन शेषनाग ने राजा माया की मदद लेने को कहा...... तुमको बता दूँ महाराज मयासुर मेरे पतिदेव ने अपनी दानवी शक्तियां Saya-Chaya-Maya में छुपा राखी थी ..... दूसरी बात एक श्राप के कारन दानव वतासुर की गुलाम थी तीनो तोह कोई कैसे शक्ति ले पायेगा किसी की सोच से परे था. राजा मयासुर ने राजा वासुकि को भी अपने राज बतया तोह उनको भी यह युक्ति ठीक लगी कभी तीनो राजकुमारिओं से कोई शक्तियां हासिल नहीं कर पायेगा...... "

गीता हैरानी से," यानी दोनों इतने महँ पतलोकों के शक्तिशाली राजाओं से भी चूक हो सकती है किसने सोचा था और मेरे आर्यन ने सेंध hi नहीं दोनों की बेटियां भी पता ली वाह मेरे आर्यन तू ने तोह कमाल कर दिया...... जहाँ कोई सोच भी नहीं सकता वहां आर्यन पहुंच hi गया और अब मुझे तोह लगता है विशाखा वाली भी आधी नाग्शक्ति ले hi लेगा..... दोनों राजाओं ने अपनी गांड खुद आर्यन से मरवाने का मैं बना लिया हो तोह हम क्यों आर्यन को रोकें दीप्ति ?"

दीप्ति ने गीता को रानी माँ की तरफ इशारा किया तोह गीता जीभ अपने दांतो में दबा के बोली ," सॉरी रानी माँ मुँह से निकल गया ..... "

रानी हेमा भी मुस्करये बिना न रह सकीय तब दीप्ति बोली," काया माहि पूरी नाग्शक्ति को झेल लेगा ?"

रानी हेमा ," वह hi झेल सकता है और नागलोक क्या पूरे पतलोक का भविष्य भी बदल सकता है..... तुम दोनों को उसको खुला छोड़ना होगा उसको पतलोक में जोह उसका मैं करे कितनी भी प्रियसी बांये कितने भी विवाह करे..... देखना वह और शक्तिशाली बनेगा और जोह सपने तुम सब उसके साथ देख रहो हो पूरे कर सकेंगे..... पतलोक की जोह स्त्री या युवती आर्यन के साथ होगी वह उसको उतना hi बलसाली और धारयवान बनेगी ".

दीप्ति ," महीईईई संभल के ....... " उसकी चीख ने बाकी दोनों का धयान भी मिरर में चल रहे युद्ध पे स्वंयवर स्थल की तरफ गया......

गीता ," चीख क्यों रही है देख लियो सब मर जायेंगे आर्यन न मरेगा ".

रानी हेमा ," विशाखा को भूल रही हो पुत्री गीता, दीप्ति ने उसकी शक्तियों का 20व हिस्सा भी नहीं देखा था और वह किसी को आर्यन के अंदर जागृत करने की पूरी कोशिश करेगी ".

दीप्ति और गीता एक साथ ," क्या ..... क्या ..... "

पर कीसये जिसके अंदर 6 आत्मा हो ?????

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आर्यन की एक बार चरों और नज़र दौड़ी तोह उसको सब पहले की तरह नफरत की दृष्टि से नहीं देख रहे थे..... आर्यन भी मैं में "आखिर सपोला hi सपोले को पहचानता है".

विशाखा जोह अब एक प्रीतिबिम के रूप में सबके सामने आर्यन को मुखातिब होकर बोली," आर्यन तुम कोई भी अस्तर, रूप या चल कपट भी इस्तेमाल कर सकते हो अगर प्रभा के साथ मुझे भी हरा दिया पूरा नागलोक क्या पतलोक को भी तुम्हारे सामने झुकना पड़ेगा. तुम को मारने में हम दोनों कोई कसार नहीं छोड़ेंगे तुम चाहो तोह हमको मार भी सकते हो ...... hi hi hi hi hi ...... "

आर्यन निर्या hi चुटिया बना विशाखा की शरत और चेतवानी सुन्न रहा था..... उसने राजा वासुकि की तरफ देखा तोह वह भी मुस्करा रहे थे ...... उन्होंने तोह और भी खुले मैं से युद्ध बिना किसी नियम से स्वीकारती दे दी......

आर्यन ने अपनी बात राखी बड़े धैर्य से ," देखो विशाखा मुझे सर्प बने कुछ पल hi हुए हैं पर सर्पों की बुराई और अच्छे आने में समय तोह लगेगा..... दुश्मन जब अपना सागा हो तोह मुश्किल जरूर होती है...... मगर मेरी तरफ से तुम दोनों बहेनो को क्या किसी को भी छूट है जोह तुम्हारी तरफ से लड़ने को त्यार हो मुझे पहरेज नहीं. हाँ अगर मेरी मौत यहीं लिखी है तोह फिर डिअर क्यों करनी. में प्रभा की कसम खाता हूँ आज इसी नागलोक के स्वयंवर में ुषको अपनी बना लूंगा और तुमको प्रभा की दासी ".

जहाँ प्रभा के चेहरे पे खुसी चा गयी अपने बड़े भाई पे गर्व करते हुए वहीँ विशाखा के प्रतिबिम्ब रूप से अब गुस्सा झलक रहा था.

जब राजा वासुकि के इशारे पर सैनिक सर्प ने बड़े से हथोड़े से घंटे पे मारा तोह तनननननन की आवाज से स्वयंवर प्रतियोगिता का आखिरी पड़ाव शुरू हो गया .......

आर्यन ने सब पतलोक के राजाओं की तरफ मुख करके अपना पहन और दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन किया......

राजा बलि महाराज के साथ असुर गुरूजी ने भी उसको मैं hi मैं आशीर्वाद दिया ....... राजा वासुकि ने पूरा स्थल एक अदृश्य कवच से धक् दिया.......

कुछ मिंटो बाद सर्प सैनिक ने घोसना की ," महँ नाग राजकुमारी प्रभा अपनी सेना के साथ पधार रही है ".

आर्यन अब नाग योद्धा की पोषक पहनकर के एक हाथ में भला दुसरे में ढाल और कमर पे एक तलवार और कटारी लगये एक तरफ त्यार खड़ा था ...... तभी नाग राजकुमारी प्रभा एक योद्धा की पोषक में नागों के विचिरत से रथ में जोह पूरा नागों से hi बना था और आगे 3 बड़े बड़े विशाल नाग ुष रथ को खींचते हुए युद्धस्थल के बिच ला रहे थे...... पीछे धम्मं धम्म्म्म की आवाज करते बड़े बड़े नगाड़ों का बंद और नागलोक का झंडा लिए 2 टोली सैनिक की रथ के पीछे और उनके पीछे हज़ारों की संख्या में नाग सैनिको की सेना थी...... आर्यन पहले अपनी लाड़ली छोटी भें को इतनी बड़ी नाग राजकुमारी के योद्धा रूप में उसकी सुंदरता में खू सा गया पर जब हज़ारों नाग सैनिकों ने आधे से ज्यादा युद्धस्थल घेर लिया तब होश में आया.......

आर्यन अपने मैं में ," अरे प्रभा तोह लगता है पूरी सेना hi ले आयी लड़ने के लिए...... कितनी सूंदर लग रही है मेरी प्यारी भें ".

तभी एक नागबां आर्यन के चरों में आकर गिरा जोह प्रभा ने अपने बड़े भाई के सम्मान में सर्प धनुष से मारा था...... वह नागबां पुष्पों में बदल गया.

आर्यन भी मुस्करा दिया यानी पूरी तयारी से आयी है मेरी भेना..... चल फिर हो जा त्यार ......

आर्यन ने अपनी कमर से तलवार निकली और पूरी ताकत से ऊपर की तरफ फेंकी तोह कुछ hi पल इतनी उचाई तक गयी की दिखनी गायब हो गयी और फिर हुयी गर्जना बिजली से चमकने लगी और ऐसा लगा िश अँधेरे लोक में कोई तूफान आने वाला है.

सब समझ तोह गए यह आर्यन की फेंकी तलवार का नतीजा है पर जब ऊपर से बिजली कड़कती वही तलवार तेजी से जब निच्चे प्रभा के रथ की तरफ आने लगी भीषण गर्जन और बिजली के साथ तोह सब डरने लगे...... प्रभा ने एक बार आर्यन की तरफ देखा तोह वह मुस्करा रहा था तोह उसके चेहरे पे भी मुस्कान फेल गयी जैसे पक्का भाई ने गिफ्ट दिया है.....

रथ से सिर्फ 10 मीटर ऊपर एक विस्फोट हुआ और पूरी सेना पे पुष्प की वर्षा होने लगी...... और वह चमकती तलवार अब प्रभा की कुंडली के समाने रथ पर पड़ी थी जिसको उसने उठा के चूम लिया और आर्यन को देखकर हसने लगी...... ( आर्यन ने मायावी शक्ति का पर्दशन किया था)

राजा वासुकि और राजा माया एक दुसरे की तरफ देखे की यह हो क्या रहा है..... ?

आर्यन की पतलोकों की भरयाण (पत्नियां) खुश थी की दोनों पर्तिदावन्दी होकर भी एक दुसरे को पूरी इज्जत देते हैं.

दानव गुरूजी ," है है है है ....... दोनों को देखकर एक सीख तोह मिलती hi है की दुश्मनों को भी एक दुसरे की इज्जत करनी चाहिए तब युद्ध लड़ने का जज्बा दूंगा हो जाता है ".

राजा बलि महाराज ने चुटकी ली ," परन्तु गुरूजी यह दोनों तोह एक दुसरे को पुष्प पुष्प फ़ेंक रहे हैं ".

दोनों राजाओं ने दानव गुरूजी की तरफ देखा तोह मुस्करा के बोले," दोनों अपने कर्मो और युद्ध कौसल में निपुण है.... आर्यन बड़ा है तोह प्रभा ने उसके प्यार पे तीर मार्के अपना सम्मान प्रकट किया वहीँ आर्यन ने अपनी तलवार देकर उसको और उसकी सेना को विजयीभव कहा ".

राजा माया ," परन्तु गुरूजी ऐसा कब हुआ".

राजा बलि महाराज ने और मजे लिए ," गुरूजी आप हमको क्या छोटा बच्चे समझ रहे हैं क्यों राजा वासुकि आप ने देखा न".

राजा वासुकि भी चिढ़कर ," एहि तोह मेरी समझ में नहीं आ रहा ...... "

तभी एक जोर की फुंकार गुंजी अकर्मंण्णन ....... जोह प्रभा की थी और नगाड़ों की आवाज के साथ 100 से भी ज्यादा सर्पों ने प्रभा के इशारे पे आर्यन पे हमला कर दिया .......

रानी पुष्पलता ," समझ में आ गया राजा वासुकि ...... अपनी पूरी सेना hi भेज देते अकेले आर्यन को मारने ".

पर अब सबका धयान आर्यन पे hi था की अकेला पूरी सेना से कैसे लड़ेगा......

आर्यन ने अपनी पोजीशन लेकर अपनी लोटस शील्ड लगा ली तभी एक साथ विष छोड़ते 50 बाण उसकी शील्ड पे लगकर बेअसर हो गए ...... यह प्रभा का पहला वार था पर अब उसको अहसास हुआ की भाई ने लोटस शील्ड लगा ली है ऐसे तोह ुष्पर कुछ असर नहीं होगा...... मेरे नाग सैनिक मारे जायेंगे और झट से नाग्शक्ति से अपने सारे सैनिक सुरक्षित कर दिए......

आर्यन ने अपनी तरफ बढ़ते नागसानिकों को तेजी से रंगते आते देख के अपना भला पूरी ताकत से सबसे आगे वाले का सीना निशाना लेकर मारा तोह जितनी तेजी से उसका उसका भला ुष नागसानिक को लगता बस ुषको छूकर भला गलता चला गया ....... आर्यन भी हैरान होकर आशम्भव यानी यह भी शील्ड लगये हुए हैं.......

आर्यन को घेर के जब एक के बाद एक लगातार हमले होने लगे जिसको वह अपनी ढाल से या कटारी से बचता तब तक सब ने उसको घेर लिया तोह निच्चे बैठकर एक बड़ी उछाल मारा उनसे दूर होने के लिए तोह प्रभा ने अपना भला जोरसे हवा में उड़ते आर्यन पे मारा ....... वार इतना सटीक था आर्यन को कुछ हुआ तोह नहीं पर निच्चे युद्ध स्थल पे गिरा और नाग सैनिकों ने वार पे वार करने शुरू कर दिए .......

आर्यन कभी एक को घूंसा जड़ता तोह दुसरे का वार अपनी ढाल पे लेता..... पर प्रभा ने तोह अब 200 और नागसानिकों को आर्यन को कैद करने के लिए भेजा.....

दानव गुरूजी ," क्यों राजा वासुकि आपके चेहरे की मुस्कान बता रही की आपको अपनी छोटी पुत्री प्रभा पे गर्व महसूस हो रहा है ".

राजा वासुकि ," सही कहा गुरूजी आपने, प्रभा को हम सब चंचल hi समझते थे जबकि यह उसका योद्धा वाला रूप बहोत सुसज्जित है और सारे नाग सैनिकों को भी नाग्शक्ति से सुरक्षित कर दी है ".

राजा माया ," पर आर्यन के पास भी कमल कवच (लोटस शील्ड) है और मायावी शक्ति भी ".

रानी पुष्पलता मैं में , कब इस्तेमाल करेगा आर्यन अपनी नयी शक्तियां......

आर्यन ने अपनी स्पीड बढ़ा छोटी छोटी चल्लंघ लगा नाग सैनिकों पे वार करके बचता तोह 2 नए वार ुष्पर होते ...... एक बार जोरसे उछाल के फिर दूसरी तरफ भगा तोह दीप्ति ने अपने नागबां से फिर निच्चे गिरा दिया ....... और एक बाण मार के उसकी गर्दन को जमीन पे एक नागरसि से कास दिया ........

फिर 2 और बाण उसके हाथों को बाँध दिए तोह आर्यन ने आँख बांध करके मंतर पढ़ा ....... धमममममम Dhapppppppppp .......

नागसानिक जोह आर्यन के पास जाकर हमला करने hi वाले थे की पूरा स्थल कांप गया ......

Gurrrrrrrrrrrrrrr बाबर शेर की धाड़ और खुनी गेंदे की फुन्ननननननन फुन्नननननन के साथ उन्ह नागसानिकों की तरफ बिजली की फुर्ती से दौड़े .......

सब दरसक गण क्या सब महाबली भी देखते रह गए वहीँ राजा वासुकि को भी गायत हो गया यह दोनों खूंखार जीव आर्यन के अंदर से आये हैं बहार तोह पूरा युद्धस्थल हमारे कवच से बंधा है ....... मगर जिन्होंने ऐसे जीव पहली बार देखे तोह दर गए उनके शारीर पे गोल्डन कट्वच उनको और हिंसक के साथ युद्ध के लिए hi त्रिनेड दिखा रहा था ......

(स्क्रीन पे दोनों देखकर गीता दीप्ति ने हीफी किया ...... दोनों उनको देखकर खुश थी की आर्यन ने सही वार किया ...... )

राजकुमारी स्वर्णलता ," दीदी देखो वह दोनों फिर बुला लिए आर्यन ने ...... hi hi hi अब आएगा मजा ....... खा जाओ इन नागसानिकों को ....... "

रानी पुष्पलता और कामलता के शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी ..... क्या हालात की उनके लोक में िंह दोनों दैत्य रूप आर्यन के दोस्तों ने हाँ बाबर शेर और खुनी गेंदे को अपना दोस्त hi बतया था आर्यन ने .......

देखते hi देखते दोनों ने नागसानिकों की रेल बना बना के घायल कर दिया पर अभी तक मरे नहीं थे नाग्शक्ति की वजह से ...... आर्यन अपने बंधन से आजाद होकर के अपनी लोटस शील्ड भी दोनों के ऊपर चढ़ा दिया और ुशी जगह लेता लेता नाग सैनिकों की चीख पुकार सुन्न रहा था ......

प्रभा ने उनको नागरसि से बांधने की कोशिश की तोह कोई असर न हुआ पर अब दोनों प्रभा के रात को टारगेट कर दिए प्रभा ने दोनों विशाल हिंशक पुषों को अपनी तरफ आते देखा तोह छान भर में अपना विशाल रूप धार के रथ से उछाल के दोनों के सामने उनको अपनी पूँछ में साथ लपेटी hi थी की एक जोरदार किक उसके पहले पहन पे और दुसरे पहन पे आर्यन का घूंसा पड़ा ...... उधर बाबर शेर ने उसके सरीर में दांत और नाखून से वार किया वही गेंदे ने अपने सींघ से.....

प्रभा पे दोनों जानवर के वार का कोई असर न था पर आर्यन के वारों की चोट ने उसको बेहोश कर दिया ...... आर्यन ने सीटी बजे और तीनो प्रभा को अचेत छोड़कर उसकी नागसेना को मारने लगे क्यूंकि प्रभा की नाग्शक्ति का असर उसके अचेत होते hi नागसानिकों पे से ख़तम हो गया..... 5 मं में बस खून hi खून था कटे फटे नाग सैनिकों का और आर्यन ने प्रभा के पास जाकर उसके सर पे हाथ रखा और मंतर पढ़ा तोह उसकी चेतना लौट आयी ......

( प्रभा ने अपनी नाग्शक्ति से खुद को सुरक्षित नहीं किया था यह उसकी भूल साबित हुयी और आर्यन ने पूरी मायावी शक्ति से उसके दोनों पहन पे वार किया जिसको वह नहीं झेल पायी)

आर्यन को कुंडली में बाँध उसने दोनों मुँह से उसकी गर्दन पे वार किया पर सायद आर्यन त्यार था दोनों हाथो से उसका पहन पकड़ के चिल्लाया ," तुम हार चुकी हो प्रभा तुम्हारी सेना भी नहीं बची, मुझे मजबूर मत करो नहीं फिर से लम्बी बेहोशी में भेज दूंगा ".

प्रभा आर्यन की बात सुनकर ढीली पड़ी और जब चरों तरफ सिर्फ लाशें और खून पड़ा था गेंदा और शेर अपनी अपनी जीभ से अपनी चेहरे से खून चाट रहे थे...... तभी तंत्र की आवाज के साथ घंटा बजा तोह राजा वासुकि ने खड़े होकर कहा ..... " महार्यं को विजयी घोसित किया जाता है ".......

प्रभा अपनी सेना खोकर सदमे में थी तोह आर्यन ने उसको सहारा देना चाहा पर वह सर झुका के वहां से अपने माता पिता के पास आकर रुकी..... नागरानी ने उसको गले लगा के कहा," आखिर तुम्हारा प्यार जीत गया प्रभा , तुमको खुश होना चाहिए ".

प्रभा सर झुका के ," पर में अपने नागसानिकों को नहीं बचा पायी ".

दानव गुरूजी ," तुम एक को hi चुन सकती थी युद्ध परिणाम में आर्यन या अपनी सेना..... तुम ने अपनी सेना चुनी पर आर्यन ज्यादा तेज़ निकला उसने तुमको बेहोश कर तुम्हारी सेना को हरा दिया. तुम्हे दुखी नहीं होना चाहिए ".

राजा वासुकि ," पुत्री प्रभा, मैंने इतनी साहसी योद्धा नहीं देखि जोह अपने सैनिकों को साथ लिए लड़ी..... यह युद्ध नहीं था वार्ना तुम्हारी जान भी जानी थी और स्वयंवर की शर्त मत भूलो तुमको आर्यन ने जीत लिया है अब वह hi तुम्हारा वर है ".

विशाखा ," तुम आराम करो प्रभा, तुम ने अच्छी तरह मुकाबला किया ".

विशाखा का प्रतिबिम्ब अब प्रभा के अंदर समां गया और छोटी भें को साँवन्तना देते हुयी बोली," प्रभा मेरी छोटी भें जिस घडी का तुमको इंतज़ार था वह ज्यादा दुर्र नहीं है. फिर िश घडी के लिए तोह तू हज़ारों वर्षों इंतज़ार किया है. तेरे नागसानिकों ने तुझे बचने के लिए अपने प्राण तक नौछवर कर दिए..... एक बार को लगा आर्यन तुझे hi न मार दे पर वह बहोत चाहता है तुझे. अब ऐसे दुखी होकर अपने सच्चे प्रेम का उपहास तोह मत उड़ाओ ".

प्रभा ," अपने प्रेम के लिए कितनी कुर्बानियां देनी होगी दीदी फिर अब आप भी कहाँ रुकने वाली हो".

विशाखा हसकर," तू बोले तोह में नहीं लड़ती आर्यन से ".

प्रभा खुश होती हुयी ," सच्च दीदी आप नहीं लड़ेगी, हम ऐसे hi तीनो बहोत प्यार से हसी खुसी रहेंगे ".

विशाखा गंभीर स्वर में," हम तीनो नहीं सिर्फ तुम और आर्यन ...... मुझे तुमको मुकत करना होगा, तुम हमेशा खुश रहना ".

प्रभा ," ऐसा मत कहो दीदी में एक बार आप से अलग हो गयी थी अब फिरसे एक साथ हैं, हमेशा रहेंगे ".

विशाखा ," प्रभा ऐसे में कभी आर्यन को अपना नहीं पाऊँगी मेरी भें. मुझे आजाद कर दो तुम्हे तुम्हारी खुशियां मुबारक हो ".

प्रभा ने मैं कड़ा करके वह कहा जोह विशाखा सुन्ना चाहती थी ," दीदी अब जियेंगे तोह साथ मरेंगे भी साथ. आप सर झुका के मत रहो आप जोह चाहोगी वही होगा ".

प्रभा फिर एक बार अपनी बड़ी भें के आगे झुक गयी जोह उसकी बहोत बड़ी गलती साबित होने वाली थी...... ????

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आर्यन ने अपने पुराने दोस्त बाबर शेर और खुनी गेंदा वापस गायब कर दिए यह कहकर अभी एक बार और तुमको बुलाना पड़ेगा .....????

आर्यन जब योद्धा दीर्घा में अपने को साफ़ करके फिर से त्यार होने लगा तोह राजकुमारी स्वर्णलता और राजकुमारी माया उसकी दोनों भार्या आकर उसको बधाई दी पर उसके सर्प रूप की वजह से झिझक के दुर्र कड़ी हुयी थी.....

हाथ जोड़कर आर्यन ने भगवन शेषनाग को स्मरण किया तोह अपने मानव रूप में बदल गया ...... दोनों दौड़ के उससे लिपट के चूमा छाती करने लगी.....

आर्यन भी दोनों को अपनी गॉड में बिठा ख़ुशी से सेहला रहा था किश करते हुए..... कुछ hi पल में वहां रानी पुष्पलता के साथ बाकी तीनो रानी कामलता और राजकुमारी साया चाय भी आयी ...... दोनों शर्मा के उसकी गॉड से उठ गयी पर कामलता ने पहले मैदान मार के उसके ऊपर चढ़ के किसी करने लगी.

रानी पुष्पलता ने उसके बड़े खुलों पे धौल जमाया ," कामु यह तोह देख लो हम कहाँ है फिर कुछ रिश्ते राजदार hi सही होते हैं ".

कामु ने एक बार और किश करके हटी," दीदी अपने प्यार को बधाई hi दे रही थी hi hi hi hi ......फिर आर्यन मुझे सबसे ज्यादा पसंद करता है ..... हैं न आर्यन ? ".

आर्यन ," कामु यू अरे डार्लिंग बेबी .... पुछःह पुछःह ....... " उसके दोनों गाल चाट लिया तोह तीनो दानव राजकुमारियां हसने लगी तोह स्वर्णलता भी न समझे हुए भी हसने लगी.....

इतने में साया चाय भी आर्यन से लिपट के प्यार जताई तोह रानी पुष्पलता चीड़ सी गयी......" ठीक है करो सब अपनी मनमानी ...... यह नागलोक है ना की अपने लोक में हैं "....... वह पलट के जाने लगी सबको हस्ता देखकर...... दानव सैनिक भार hi रोक दिए थे.....

पर आर्यन ने उसको भी आगे बढ़कर गॉड में उठा के अपने से लपेट hi लिया...... सबके सामने उसको अपनी गॉड में बिठा के खूब किसी करके पुछा," तुम कुछ परेशां हो पुष्पु ?"

5 और आर्यन की बीवियों के सामने खुद को उसकी गॉड में बैठकर गर्व के साथ शर्म भी आ रही थी पर आर्यन के उसके मैं के भाव जानकार खुसी हुयी की उसका प्यार उसको समझता है ......

रानी पुष्पलता ," सब देख रही हैं आर्यन ..... छोड़ दो न .....विशाखा बहोत खूंखार और शक्तिशाली है आर्यन, उसको प्रभा समझने की भूल मत करना. उसको सीधे लड़के हराना मुश्किल होगा तोह अपनी शक्तियां पूरी लगा देना वार करते हुए बिना औरत समझे".

आर्यन ने पुष्पु का गोरा गाल चाट के कहा ," विशाखा को हरा के तुम्हारे सामने नहीं झुकाया तोह मेरा नाम आर्यन नहीं मेरी रानी...... में यहाँ हारने नहीं अपनी प्रभा को जीतने आया हूँ. तुम सबको जितना विश्वास होगा उतने मेरे जीतने के चांस होंगे पर विशाखा को अपने पिछले जनम के पापों का हिसाब देना पड़ेगा ......"

आर्यन की गुस्से से लाल होती आँखों को देखकर पुष्पलता ने आर्यन के लबों पे धावा बोल अपने चूतड़ उसके लिंग पर रागादि तोह वह भी नार्मल होता गुस्सा हटा के प्यार करने लगा..... सब की सब उससे चिपट के चूम रही थी जहाँ जगह मिलती...... सबने आर्यन को शांत कर दिया. एहि आर्यन की ताकत भी थी की उसके चाहने वालियां उसको गुस्सा नहीं होने देती है चाहिए कुछ भी हो.

सबको गले मिलकर विदा कर आर्यन अब नए अस्तर सास्तर के साथ जब युद्धस्थल में प्रवेश किया तोह अब नागलोक वालों को भी विश्वास सा हो रहा था की इतने हज़ारों सालों के बाद आर्यन hi स्वयंवर प्रतियोगिता योद्धा विजेता बनेगा. आखिर दिव्या तलवार भी उसके पास है राजकुमारी विशाखा उसको हरा नहीं पायेगी.

विशाखा की शक्ति नागलोक और उनके वाशियों से थी जोह लाखों की संख्या में नागों का लोक था पर आज तोह ना जाने कितने और लोकों से नाग सिर्फ आर्यन को जीत ता देखने आये थे आखिर वह दिव्या तलवार का मालिक होने के साथ प्रभा को जीत भी चूका था......

सर्प भासा में सिर्फ हिसस हिसस जैसा लगता किसी मानव को पर आर्यन की जय जय कार हो रही थी पूरे स्वयंवर स्थल के प्रांगम में...... वहीँ दुसरे लोकों के दानव और पिश्चाहों के साथ गॉब्लिन्स और डॉकयार भी आर्यन की तरफ थे......

राजा वासुकि के साथ अब राजा माया को भी एक उम्मीद जगी काश यह विशाखा को हरा के उसको अपना ले ...... वहीँ आर्यन सिर्फ विशाखा से अपनी छोटी भें प्रभा के अपमान और दुष्टता का बदला लेना चाहता था......

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विशाखा अब प्रभा के सरीर पे कब्ज़ा करके अपने पिताश्री राजा माया का आशीर्वाद लेकर अपनी गुफा में पहुंची और सबसे पहले एक मंतर पढ़कर प्रभा को निष्किरये करती बोली ," भें तू मेरी या आर्यन की लड़ाई नहीं देख पायेगी इशलिये तू सुप्त अवस्था में रह ".

प्रभा ने ना जाने क्यों अपना सबकुछ विशाखा के हवाले छोड़ दिया और विशाखा अपनी गुफा में बैठकर एक याग शुरू कर ऐसे ऐसे प्राचीन नागों का आह्वान करने लगी जोह हज़ारों साल पहले मार चुके थे, उनकी आत्मा और शक्ति को पा ली...... यहाँ नागलोक में उन्ह नागों की मणि भी विशाखा के पास थी ....... देखते hi देखते वह बदल के एक महाकाय रूप ली और कितने क्रूर नाग उसके सरीर में समां गए ...... फिर याद की भगवन शेषनाग को तोह उनके प्रकट होते hi अपने 5 पहनो को निच्चे करके वरदान मांगी तोह उन्होंने भी आशीर्वाद दिया ," थाथात्सु ".

विशाखा की खुसी देखते hi बनती थी , तुमको मुझे अपना पड़ेगा में दिव्या तलवार से दुर्र नहीं रह सकती ...... चाहिए नागलोक क्या पतलोक भी उजाड़ जाए ..... में सिर्फ दिव्या तलवार के मालिक साथ रहूंगी...... में तुम्हारी छवि अभी तक नहीं भूली......

" जेहरली नागिन का बदला बहोत खतरनाक होता है "...... वही विशाखा तोह पहले hi मारी जा चुकी थी अब जोह करने जा रही थी उसको दिव्या तलवार के मालिक से प्रेम हुआ था जोह आर्यन hi था पर मानव रूप नहीं वही दिव्या तलवार का प्रेमी उसका साथी हो ऐसी तमना लिए.

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रानी हेमा के साथ िश सूंदर वन्न में दोनों भेने Geeta-Deepti जैसे हर युद्ध स्थल के दृश्ये या रहस्य पे आंदोलित होती...... सब उनको मिरर रुपी स्क्रीन पे दिख रहा था पर अब विशाखा को देखकर दोनों डर रही थी की यह क्या करने वाली है पर रानी हेमा ने उनके सामने से पल भर गायब होकर फिर से आर्यन की 6 नयी पतलोक की पत्नियों और प्रेयसी के साथ प्रकट हुयी.......

राजकुमारी माया ," माँ हम सबको यहाँ क्यों लायी ?"

रानी हेमा ने गीता और दीप्ति की तरफ इशारा किया जोह एक आलीशान गद्दी पे बैठकर स्क्रीन पे देखती नज़र आयी ..... दीप्ति ने खड़े होकर सबको नमस्ते किया पर गीता मोह फेर के वापस से स्क्रीन पे देखने लगी ......

रानी पुष्पलता ," महारानी हेमा जी में िंह सबको वहां सुरक्षित रखती ".

रानी हेमा ," मैंने अपने पुत्र के अनुसार hi किया है वह नहीं चाहता की कोई भी उसकी चाहने वाली वहां हो जब विशाखा से उसका सामना हो यहाँ तक में उसकी मुँह बोली माँ भी नहीं ".

बाकी सब दीप्ति से गले मिली पर गीता की बेरुखी सबको डरा रही थी तोह दीप्ति ने माया के कान में कहा दीदी ने सब देखा जब आप सब माहि के साथ थी.....

माया ने आगे बढ़कर गीता के प्यार छुए तोह उसने प्यार सिकोड़ के कहा ," दूर हैट नहीं तोह यहीं सबको मार दूंगी, कमींयों को कोई नहीं मिला मेरे आर्यन के अल्वा ...... आज विशाखा ने नहीं मारा तोह हरामी को में खुद मार दूंगी ".

माया का चेहरा उतर गया वहीँ रानी पुष्पलता को बहोत गुस्सा आया की इतनी हिम्मत की माया को कैसे दांती गीता?

रानी हेमा ने उसको हाथ दिखा के रोका और दीप्ति माया को अपने साथ गीता से दुर्र बैठा के बोली," दीदी का गुस्सा तुम तीनो जानती हो अभी उनके पास मत जायो थोड़ी डिअर में ठीक हो जाएगी ".

रानी हेमा ," तुम सब आर्यन की कमजोरी हो इशलिये यहाँ लायी हूँ ".

रानी पुष्पलता ," पर यह तोह नरकलोक के पास का पिछले हिस्सा है यहाँ आप कैसे हैं..... और तुम सब भी कोई बेवकूफी मत दिखाना वार्ना जिन्दा hi मिर्त्युलोक में होगी".

रानी हेमा," यह छदम स्थान है यहाँ कोई न जीवट होता न hi मिर्त्ये इशलिये विशाखा से बचा के लायी हूँ".

गीता भी मुड़कर ," रानी माँ कहीं हम सबकी सेटिंग अपने hi तोह नहीं विशाखा के साथ सेट कर दी ...... इनका मुझे पता नहीं पर आर्यन मुझे बहोत प्यार करता है, वह मुझे खोजते हुए यहाँ भी आ जायेगा. और तू दीप्ति वहां कहाँ बैठी है यहाँ बेथ मेरे पास ".

दीप्ति भी सर झुका के अपनी हंसकाल दीदी के पास बैठी तोह गीता ने उसको अपने से लगा लिया ......

रानी हेमा मुस्करा भर दी तोह पुष्पलता भी िश चंडी देवी को समझने की कोशिश कर रही थी आखिर यह कैसे मानेगी..... ?

चाय ने स्वर्णलता और कामलता को धीरे से समझाया यह hi आर्यन का पहला प्यार है और सबको इसी से इजाजत मिलेगी..... साया ने बतया थोड़ी कड़क है पर स्त्रीओं का बहोत सम्मान करती है बस थोड़ी मोह पहात है. इश्कि बिना अनुमति के आर्यन नहीं मिल सकता पर एक और है वह मान गयी तोह यह भी मन नहीं करेगी..... आर्यन की जुड़वाँ भें hi कह लो मीणा नाम है.

रानी हेमा ने ताली बजे तोह दोनों दासियाँ अब 6 थाल लेकर आयी सबके लिए.....

रानी पुष्पलता ," रानी हेमा वहां आर्यन को मेरी मदद चाहिए होगी ".

रानी हेमा," जरूर होगी पर उशसे दूर रहकर सबको सुरक्षित रखो एहि मदद होगी ".

गीता ," अरे बाप रे यह कौन सा रूप लिए विशाखा आयी है ?????"

सबका ध्यान ुष स्क्रीन पे गया......

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विशाखा

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विशाखा का सूंदर रूप

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विशाखा का योद्धा रूप
 
अपडेट 38

Part -6 (फ)

विशाखा - नागलोक की राजकुमारी..... (1सत part)

नाम hi विशाखा नहीं था वह सबकी लाड़ली नाग राजकुमारी थी ...... उसका पैदा होना एक आशीर्वाद था नागलोक के राजा वासुकि और नागरानी के लिए..... भगवन शेषनाग से प्राप्त ardh-Naagshakti की स्वामिनी राजकुमारी विशाखा जनम से hi अध्भुत थी और बड़ी होती हुए नैसर्गिक नाग योद्धा..... उसके जनम के 500 साल बाद प्रभा का जनम हुआ तोह विशाखा जैसे पूरी हो गयी हो छोटी राजकुमारी प्रभा को भी आधी नाग्शक्ति मिली थी ..... दोनों भेने एक दुसरे की पूरक थी जहाँ विशाखा खुद एक शक्ति का प्रतीक थी वहीँ प्रभा बस चंचल और चुलबली...... दोनों का आपस में स्नेह hi उन दोनों को नागलोक की पूरी शक्ति बांये हुए था.

दोनों अगले उत्तराधिकारी देंगी यह भविष्वाणी पहले hi हुयी थी फिर एक बुरा समय आया दुसरे पतलोक के लोकों से युद्ध और देवतों के खिलाफ युद्ध में अपने पिताश्री का विशाखा ने भरपूर साथ दिया और नागलोक पर कभी आंच न आने दी पर यह एहम एक और भावना को विशाखा में जनम दिया और अधिक शक्तिशाली बनना जिसको कोई हरा न पाए और वह ुष में सफल भी हुयी पर अपनों से इतनी दूर होती चली गयी की यहाँ तक भगवन शेषनाग भी डरने लगे उसकी हटधर्मिता और महत्वकांशा देखकर......

आज उसने स्वयंवर में आर्यन से मुकाबला करने से पहले फिर से भगवन शेषनाग से वरदान माँगा ," भगवन मुझे पूरी नाग्शक्ति चाहिए ताकि में नागलोक का मान बढ़ा सकूँ. आज आपने मन किया तोह यहीं मेरे साथ प्रभा के भी प्राण त्याग कर दिए जायेंगे ".

भगवन शेषनाग ने भी बिना देरी किये "थाथात्सु" कहकर वरदान दे दिया..... यहीं विशाखा भूल कर रही थी की उसके पास पूरी नाग्शक्ति है जबकि आधी तोह किसी और (आर्यन) के पास थी..... जिसको खुद गायत न था.....????

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पुराण जंगल ......

रानी विजयलक्ष्मी ( अणि ) चिंतित सवार में," गुरूजी यह विशाखा कहीं प्रभा को hi अपने साथ आर्यन से न मरवा दे या फिर आर्यन को ख़तम कर दी तोह रति का रुदन काल बनकर बरसेगा पूरी सृष्टि पे..... वह आर्यन के लिए कुछ भी कर जाएगी".

बड़े गुरूजी ( विशाल पेड़) ," प्रभा को आर्यन कभी नुक्सान नहीं पहुंचा सकता यानी विशाखा को भी नहीं, अब दोनों भेने एक हैं ..... या कह लो प्रभा शान्ति का रूप है तोह विशाखा क्रुद्ध रूप, दोनों एक साथ hi पूर्ण नाग्शक्ति बनेगी. यह hi आर्यन को समझना होगा और यही उसकी परीक्षा पूरा नागलोक क्या पतलोक लेगा. वहां जाना क्या किसी भारी लोक वाले के लिए संभव है फिर इतने समय तक जीवित रहना तोह अत्यंत hi मुश्किल है. फिर भी देख लो अब उसके चाहने वालों की सांखा ज्यादा है वहां तोह आर्यन खुलकर लड़ सकता है ".

निशांक गुरूजी ," परन्तु आर्यन है बहोत चालक पहले hi अपनी नयी बीवियां सुरक्षित कर ली रानी हेमा की मदद से. सारू तुम्हारी जगह न ले ले यह रानी हेमा मुझे ऐसा संशा है..... क्यों गुरूजी ?"

गुरूजी बस मुस्करा भर दिए लेकिन सारू ने हाथ जोड़कर कहा ," चमा करना छोटे गुरूजी पर मेरी जैसी भाग्यवान तोह कोई स्त्री नहीं होगी. महार्यं पिछले जनम में मेरे सर्वेश थे, पति परमेश्वर, और िश जनम में पुत्र होने के बाद भी मुझे पूर्ण किया. में उनके लिए मर्डर के कभी ऋण चूका नहीं पाऊँगी. फिर रानी हेमा तोह खुद माँ देवी का अवतार हैं, उनका पुत्र होना आर्यन का गौरव hi बढ़ेगा िश जनम में ".

सारू का उत्तर निशांक गुरूजी को शर्मिंदा सा कर दिया वहीँ महारानी विजयलक्ष्मी का क्रोध बढ़ा दिया ......

रानी विजयलक्ष्मी दांती ," निशांक तुम रति पे ध्यान दो और आर्यन से कोण सा बदला ले रहे उसका उपहास उदा कर...... काम से काम तुम्हारे मित्र महार्यं जैसा नहीं है वह िश जनम में, जिसको हर स्त्री भोग विलास की वास्तु लगती थी. आर्यन अभी मजबूर है अपनों के प्रेम की वजह से पर कमजोर नहीं है. राजकुमारी मीनालोचनि तुम्हारे पास तोह हमेशा सुझाव रहता है ".

निशांक गुरूजी बगले झाँकने लगे फटकार सुनके वहीँ सबका ध्यान मीणा पे गया जोह घेरि चिंता में थी.....

मीणा ," मुझे आर्यन के लिए डर लग रहा है कहीं वह प्रभा के लिए अनिष्ट न कर दे..... प्रभा अब भले hi उससे विवाह करनी चाहती हो पर महारानी वह अपनी सब छोटी बहेनो को बेटी की तरह प्यार करता है और प्रभा उसकी बहोत अजीज है. नागलोक वाले प्रभा को खोने में दुबारा नहीं चूकेंगे पर आर्यन गुस्से में सब नष्ट नाबूत कर देगा".

मीणा की बात सच्च hi थी फिर दानव शक्ति के साथ उसकी दो दानव पत्नियां अपने गर्भ में ुश्का अंश पालने की रह पर थी...... आधी नाग्शक्ति के साथ आर्यन क्या क्या कर सकता है यह सब पहले hi एक बार मिरदुला को जीवित करते समय महसूस कर चुके थे जब सबको लगता था की उसकी शक्तियां बंधी हुयी हैं.

बड़े गुरूजी ," बस विशाखा उसका 6थ्व अंश न जागृत कर दे तोह बेहतर होगा".

महारानी विजयलक्ष्मी झुंझला कर," वह अवश्य ऐसा करेगी गुरूजी, ुषको आर्यन से नहीं दिव्या तलवार के ुष धारक से प्रेम है और उसके लिए जान गवा दी वार्ना आर्यन के अल्वा उसको दीप्ति और प्रभा कभी मार नहीं पाती ".

मीणा ," गुरूजी आप कुछ मदद करिये मेरे भाई की ताकि वह सही सलामत यहाँ वापस आये ".

बड़े गुरूजी ," नागलोक में आर्यन की सही परीक्षा होगी जोह उसकी आगे की रह तय करेगी और समय रहते वहां बहोत बड़े सुरवीर और महँ योद्धा आर्यन को संभाल लेंगे ".

सारू ," लेकिन गुरूजी वहां कौन उसकी मदद करेगा इतनी शक्तियां धारण करने में कठनाई न आये?".

महारानी विजयलक्ष्मी ," गुरूजी आप पक्का राजा बलि महाराज के बारे में बोल रहे है न ?"

बड़े गुरूजी मुस्करा के ," उनकी वजह से hi आर्यन वहां इतने समय टिका हुआ है. वह उनके आशीर्वाद के कारन hi पतलोकों में अभी तक जीत रहा है और उनकी वजह से hi राजा वासुकि और राजा माया कुछ आर्यन का बुरा नहीं कर पा रहे है वार्ना उनको पिछले 1000 सालों से किसी ने नहीं देखा था वह एकांतवास में रहते थे. पर दिव्या तलवार का आर्यन को वापिस पाने का आशीर्वाद क्यों देते जब पहली बार वह पतलोक में उनसे भेंट किया था ......?

समय की धरा को वही भली भाँती समझते हैं और भगवन शेषनाग ने आर्यन को सर्प रूप देकर रह तोह दिखा दी है बस ुष्पर खुद उसको आगे बढ़ना होगा. अब वह दोनों भी आर्यन को सफल देखना चाहयेगे पर बिना सहयता दिए ".

सारू और मीणा की मुश्किल आसान तोह नहीं हुयी मगर चिंता की लकीर रानी विजयलक्ष्मी के चेहरे पे भी थी आखिर वह इतनी शक्तिशाली होकर कुछ नहीं कर सकती थी वार्ना धरतीलोक पे विशाखा को कड़ी टक्कर देती.

उधर दिल्ली में रति का मैं बेचैन सा था आर्यन के लिए जैसे अनिष्ट होने वाला है पर यह इत्तिफ़ाक़ नहीं था. डॉली , नेहा और अमेरिकन में जाने भी बहोत वैकुअल महसूस कर रहे थे और सबको आर्यन की याद आ रही थी.

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नागलोक.......

विशाखा के आने का आह्वाहन युद्ध प्रांगण में घंटे की तनननननन से हुआ...... पहली बार उसका शक्ति साली रूप देखकर आर्यन भी उसको देखता hi रह गया ...... विशाखा पूरे पांच पहन पे मणि जेड महा विशाल नागिन के रूप में थी ...... उसके सरीर से अनगिनत सर्प अंदर भर होते हुए एक क्वाचा सा बना रहे थे.

विशाखा के अंदर अपनी छोटी भें प्रभा का अंश तालस्ता आर्यन निराश सा होने लगा आखिर प्रभा है कहाँ जबकि हर बार प्रभा का अहसास उसको पहले होता था विशाखा का बाद में.

मैं में व्याकुलता लिए वह विशाल सर्पों की सेना और Naag-Rath पे सवार राजकुमारी विशाखा अपनी सम्मोहित करती सर्प आँखों से उसको वश में करने की कोशिश कर रही थी......

आर्यन ने झट से नज़र निच्चि की और एक बार पीछे देखकर पलटा तोह विशाखा अब अकेली नज़र आयी कोई सेना नहीं थी..... आर्यन ने पलट के राजा वासुकि की तरफ देखा तोह वह भी बाकी सबकी तरह सिर्फ विशाखा को देख रहे थे.

आर्यन हाथ जोड़कर ," महाराज वासुकि जी यह क्या में पूरी सेना के साथ लड़ लूंगा अगर राजकुमारी विशाखा अकेली मुझसे हारी तोह आप बोलोगे की छलकपट हुआ ".

सच्च यह था आर्यन विशाखा पे वार बिना उसकी आँखों में देखकर करना चाहता था ....

पर तभी विशाखा ने पीछे से वार कर अपनी नाग खडग ( नागलोक की सबसे शक्तिशाली तलवार) से आर्यन की गर्दन काटकर पहन उदा दी ..... कटाछठ .....

आर्यन का कटा पहन धरातल पे गिरते hi अब मानव सर में बदल गया था और आगे बढ़कर विशाखा ने आर्यन का सर उठा के सरीर पे विष की फुंकार छोड़ी तोह पूरा धड़ गाल गया ...... आर्यन का सर उठा के राजा वासुकि के चरों में फेंकी..... पूरा युद्धस्थल स्तब्ध रह गया ...... सबका सम्मोहन अब टूटा तोह जैसे चीख पुकार hi मच गयी..... कैसे ? Kyun?Kisliye ? पर सबकी सोच hi मार दी थी विशाखा ने......

दिल्ली में रति की नींद में आँख खुली और जोरसे चीखी ारयणणणणणण ..... और बेहोश हो गयी ........

वहीँ स्क्रीन पे देखती आर्यन की सब बीवियों और प्रिएशन की जान निकल गयी चीख्यों के साथ ारयणणणणणण .... महीईईई..... महारयणणणणणण ......

विशाखा हसकर ," अब कोई रोके मुझे पूरी नाग्शक्ति मिलने के बाद सारे पतलोकों का क्या सारे लोकों को जीतने से मुझे कोई नहीं रोक सकता..... अब दिव्या तलवार भी मेरी होगी उसको चल से पाने की सजा तोह देनी hi थी "....... और अगले hi वार में राजा वासुकि पे नाग्शक्ति का वार करके कैद कर लिया और युद्धस्थल के बिच निच्चे फ़ेंक दी.....

अपनी पांचो मणि की शक्ति से पूरा युद्धस्थल कैद करने लगी तोह ुष से पहले hi राजा बलि महाराज अपने साथ दुसरे लोकों के दरसकान गण के साथ विलुप्त हो गए और विशाखा का थक्का गूंज रहा था..... " है है है है .... कायरों भाग जायो और मेरे गुलाम नागो पकड़ के लाओ आर्यन की परयेशन को आज दिव्या तलवार भी मेरी होगी मैंने मारा है आर्यन को यह उसकी हर औरत को पता चलना चाहिए ...... है है है है है है ".

अपने सरीर से अनगिनत प्राचीन सर्पों को आजाद किया तोह खून की होली खेली जा रही थी जोह राजा वासुकि के साथी और सैनिक सर्प थे ... . राजा माया भी बंधे पड़े थे और दोनों पे कोड़े और गदा बरसा के आर्यन की प्रेयसी कहाँ है? उसकी रानी माँ हेमा कहाँ है ? पता पुछा जा रहा था...... मुश्किल से पल भर में hi पैसा बदल गया था और नागलोक के स्वयंवर स्थल के प्रमुख सिंघासन पे अब राजकुमारी विशाखा विराजमान थी.

राजा वासुकि के सिंघासन पे बैठकर स्वयंवर स्थल में विशाखा अठास लगा के आर्यन की मुंडी दिखा के सबको बोली," है है है है है..... यह बनेगा मेरा वर्कर एक वार भी नहीं झेल पाया ".

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बहोत घिनोना रूप लग रहा था विशाखा का सबको िश समय पर अब कहीं दूर अपने लोक में खड़े राजा बलि महाराज के आगे सबने झुकार धन्यवाद् कहा. तब दानव गुरूजी बोले," महाराज अब आप hi िश पागल और घमंडी नागिन विशाखा को रोक सकते हैं ".

राजा बलि महाराज ," नहीं गुरूजी इश्को हम में से कोई नहीं रोक सकता "......अब तोह जैसे सबकी उम्मीद hi जाती रही....

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रानी हेमा ने गुस्से में आर्यन की सब चाहती को एक माया बंधन में बाँध दिया और सीधा विशाखा के सामने प्रकट हुयी गुस्से से रोटी हुयी ," तू जीने के काबिल नहीं है विशाखा ..... दस्ता तुझे में जान से मार दूंगी तू ने मेरे बेटे आर्यन को मारा ...... ".

रानी हेमा के गुस्से में सारे वार विशाखा ऐसे hi झेल गयी हस्ते हुए जैसे उसको कोई गुलगुली कर रहा हो और उधर रानी पुष्पलता ने अपनी शक्ति से रानी हेमा का बंधन तोह तोड़ कर सबको आजाद करवा दिया पर 8 की 8 िश छदम स्थल से रोटी हुयी गायब होने की कोशिश करती तोह वहीँ लौट जाती ......

8ों के प्राण तोह वैसे hi विशाखा ने आर्यन को मार के हर लिए थे..... रह गया तोह बस विचूब , बदला , गुस्सा जोह विशाखा को मार के hi ख़तम होता ......

गीता रूट रूट हंसती हुयी बोलती ," नहीं तू नहीं मर्डर सकता कुत्ते तुझे मारने का हक़ सिर्फ मुझे है ...... ारयणणणणण में छोडूंगी नहीं विशाखा को ...... तू नहीं मर सकता ...... "

बाकी सबका हाल भी बहोत बुरा था दीप्ति तोह सांस hi नहीं ले पा रही थी......

स्वयंवर स्थल पर जब उन्ह प्राचीन काले नागों ने जैसे hi रानी हेमा को पकड़ने की कोशिश की तोह तेज़ आवाज गुंजी ," ना तुम्हारी पूँछ रहेगी न सर अपनी मालकिन की hi पूँछ चाटो अगर मेरी रानी माँ को चुहया तोह पूरे नागलोक के एक एक बिल को फूड के तुम सबको निमपता दूंगा........"

आवाज सुनकर रानी हेमा रोट्ये हुए ," ारयणणणणणण ..... "

विशाखा सिंघासन से कड़ी होकर कभी आर्यन को और कभी हाथ में पकड़ी उसकी मुंडी को देख कर उसकी तरफ फेंकी तोह आर्यन जोह चलकर उसके सिंघासन की तरफ आ रहा था एक रेट की तरह भीकर गया.....

विशाखा चीखती हुयी ," ारयणणणण धोका ........ यानी वह भी नकली था..... फिर 3 आर्यन सामने आये उसके बाद 10 उसके बाद 100 .....

विशाखा और उसके नाग सैनिक लग गए आर्यन को ख़तम करने यानी उसके क्लोन्स को..... पर इतने में सबको ख़तम करते दोनों राजा वासुकि और राजा माया को आजाद करवा के रानी हेमा भी गायब हो गयी थी किसी से मानसिक संपर्क होने से ......

विशाखा ने गुस्से से विष की फुंकार चरों और छोड़ी और दादी," मेरी माँ नागरानी को यहाँ लाओ "...... चरों और नागलोक के सर्प hi उसकी विष फुंकार और विष से मरने लगे .......

दो राजा और फिर रानी हेमा का गायब होना उसके लिए अत्यंत अचंभित करने वाला था ....... कैसे उसकी नाग्शक्ति को कोई तोड़ सकता है ? कौन ऐसा है जोह आशम्भव को संभव कर दे ? हॉँण्णन यह आर्यन hi होगा उसका दिव्या तलवार का रूप ...... पर क्या वह इतनी घेरि मायाजाल रच सकता है जिसको में भी नहीं समझ सकीय .......

बिच मैदान में अपनी सगी माँ को कैद खड़ा करके जोरसे बोली," तुम मायावी शक्ति इस्तेमाल करके मुझसे बच नहीं सकते आर्यन यह तुम्हारा धूर्त रूप मुझसे न छिपेगा..... यदि तुम पल भर में मेरे सामने नहीं आये तोह अपनी प्यारी भें प्रभा की माँ को खो डोज ".

नागरानी रूट हुए," विशाखा पुत्री मैंने तुझे जनम दिया है, में तेरी भी सगी माँ हूँ ".

तभी फिर से राजा वासुकि ने वहां प्रकट होकर विशाखा पे वार किया तोह वह पीछे जाकर गिरी ," घिन आ रही है हमको अपनी hi बेटी से..... गलत कर रही हो, यह मत भूलो की प्रभा का यह सरीर है जोह हमारे आशीर्वाद से तुमको भी मिला है ".

विशाखा ," है है है है ...... फिर मिरत भी मेरे साथ hi होगा ..... है है है है ..."

राजा वासुकि और नागरानी भी अब विलुप्त हो गए ...... पर जैसे विशाखा एहि चाहती थी ...... अब तोह कोई सामने आये...... वह दिव्या तलवार का योद्धा ?

विशाखा ने एक तरफ़ा नागलोक पे कब्ज़ा कर लिया था और सर्प की भाषा में दादी ...... सिष्ठ्हह साहहहहह सूउऊउउउ शिममममम नाहा सीहताआआ .....

" त्यार हो जायो मेरे गुलामो तुमको पतलोक के सारे लोकों पे हमला करके पहला जीतना है और ुष स्वर्गलोक को तोह नरकलोक से भी बतर बानगी "..... है है है है है ......

आर्यन अब बिना देरी किये नागलोक के स्वयंवर स्थल के मैदान में खड़ा होकर बोलै ," नहीं विशाखा अभी स्वयंवर पूरा नहीं हुआ है अगर में हरा तोह तुम स्वछन्द हो पर जोह भी युद्ध होगा यहीं होगा".

िश बार विशाखा ने नाग रस्सी से आर्यन पे प्रहार किया तोह उसको बाँध के महसूस किया की आर्यन अपने सही रूप में है कोई मायावी रूप नहीं.

विशाखा के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ गयी और अपना मनमोहक स्त्री वाला रूप धारण करके बड़ी कातिल ऐडा से सिंघासन पे बैठी बैठी बोली," पूरा अवसर दूंगी तुम्हे तोह आर्यन, आखिर तुम भी शातिर हो पर अब कोई परपंच नहीं चलेगा और मुझे हारने का खाब भूल hi जायो...... में सिर्फ तुमसे hi (उसको) पाऊँगी".

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विशाखा

आर्यन ने अपनी तरफ बढ़ते विशाल सर्पों को बारी बारी देखा और विशाखा का घमंडी चेहरा देखकर अपनी आँखें बंद करके मायावी शक्ति का ावव्हां किया और पहले विशाल मानव रूप धारण किया और तुरंत विशाल नाग रूप में बदल गया फिर एक बाबर शेर का रूप धारण कर लिया.

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विशाखा के सारे प्राचीन गुलाम नागों के सामने आर्यन के विशाल रूप बदलते देखे तोह हिसस हिसस करके उसका उपहास सा उड़ने लगे .......

25फट के नरसिंघ भगवन जैसा रूप लिए आर्यन जोरसे धाड़ मारा तोह पूरा नागलोक के भार तक उसकी क्रोध भरी गुरहाट गूँज गयी Gurrrrrrrrrrrrrrr ....... नागलोक के हर वासी के सरीर में कम्पन महसूस हुयी क्यूंकि नागों के सरीर बहोत संवेदनशील होते है जोह हलके से कम्पन को भी महसूस कर सकें.

एक डर की लहर नागलोक वाशियों में महसूस हुयी पर नाग योद्धा तोह मिरत थे उनकी सिर्फ आत्मा hi थी नकली सर्प सरीर के साथ नाग्शक्ति की वजह से दिखाई दे रही थी पर यह धाड़ उनके भी तरपान तक हिला दी .......

विशाखा भी मैं hi मैं या तोह दिव्या तलवार मेरी होगी नहीं तोह उसका धारक पर नाग और मनुष्य के रूप के बाद यह कैसे ुष सिंह का रूप धार लिया..... जरूर वह बाबर शेर भी इसका एक हिस्सा है यानी खुनी गेंदा भी आएगा पर वह दिव्या तलवार वाला कब आएगा.

उसने अपने 10 प्राचीन नाग सैनिकों को आर्यन से लड़ने का आदेश दिया.....

विषक मैं में "मतलब आर्यन के हर रूप को हराना होगा तभी दिव्या तलवार का स्वामी प्रकट होगा..... है है है है ...... खेलना चाहते हो न तुम खेलो...... जीत मेरी hi होगी, या तोह आर्यन मरेगा मेरे हाथों नहीं तोह उसको आना hi होगा दोनों तरफ से जीत मेरी hi होगी ...... है है है है है ...... आर्यन मारा तोह दिव्या तलवार मेरी hi होगी ".

आर्यन के हाथ में बड़े बड़े नाख़ून जब यूँ विष फुँकारते योद्धा से सर्प सरीर में घुसते तोह आर पार हो जाते एक बार दो बार फिर बरम बार एहि हो रहा था ....... मगर उनकी पूँछ का वार हथोड़े सा पड़ता और विष उसके सरीर को गलता पर घाव बहोत तेजी से भर जाते......

आर्यन जल्दी समझ गया ओह्ह्ह यह तोह नाग योद्धा की आत्माओ की सेना लेकर आयी है और उसने पत्र बदला और अपना बड़ा सा मोह पहाड़ के 100 से ज्यादा पिश्चाहों को उन्ह 10 योद्धा पे छोड़ दिया ......

जहाँ नागलोक वाले आर्यन का उपहास उदा रहे थे अब हमला करते पिश्चाहों के कारण स्तब्ध थे ..... आर्यन ने पिश्चाहों से उन्ह की पूँछ एक दुसरे से बंधवा दी और 10 के 10 नागों को घेरवा के अपना पिश्चाहों के साथ वापस निगल के फिर से दादा gurrrrrrrrrrrrrrr ......

अब तोह हर कोई उससे डरने लगा ...... यानी .....यानी ..... यह मिरत प्राचीन सर्पों की आत्मा तक खा गया कहीं हम जिन्दा सर्पों को निगला तोह डकार भी नहीं लेगा ......

सबको खुनी गेंदे और बाबर शेर के साथ आर्यन की छोटी राजकुमारी प्रभा से युद्ध याद आ गया कैसे तीनो ने पूरी प्रभा की साड़ी सर्प सेना विध्वंश करते मार के खायी थी.......

विशाखा को अपने मैं में उन्ह 10 प्राचीन सर्पों की पीड़ा सुनाई दे रही थी की आर्यन के सरीर में कितने कष्ट में हैं......

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विशाखा कड़ी होकर अब दुविधा में थी कैसे बाकी सर्पों को आर्यन से भिड़ने भेजे कहीं उनका भी वही हाल न पर कुछ तोह करना hi था तोह सब सर्प योद्धा को हिसस हिंसा के संकेत दी ..... सारे सर्प योद्धा एक साथ एक दुसरे में ुलजः के एक बड़ी गंध की तरह आकर लेते हुए नाग्शक्ति से विशाल 50 फट व्यास( डीएमटीर) का गोला बना लिए और उसको झट से विशाखा ने आर्यन पे देकर मारा ...... सब इतनी जल्दी हुआ की आर्यन वार न बचा सका उसने अपने विशाल नाख़ून वाले हाथों से वार को रोकने की कोशिश की मगर उड़ता हुआ सीधा धरताल से रगड़ता करीब 500 फट दूर जाकर गिरा......

आर्यन के सच्च में बाबर शेर वाले नुत बोल्ट हिल गए घातक वार था और अध्भुत भी जोह उसकी सोच से परे मगर आर्यन के खड़े होते देखकर विशाखा भी हैरान थी आशम्भव नाग्शक्ति को कैसे झेल गया पक्का दिव्या तलवार की शक्ति के कारन होगा.....

उसने फिर से विशाल गंध को नाग्शक्ति से आर्यन पे प्रहार किया तोह शीर्घ hi एक बार फिर से खुनी गेंदे मानव का रूप धार 15 फट लम्बा नुकीला सींघ लिए आर्यन ने वह गंध अपने सींघ में फसा ली और धरताल पे पटक पटक के सब प्राचीन 1000 सर्पों की जोह गंध में समाहित थे उनकी हालत पतली कर दी......

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आधा मानव और आधा गेंदे वाला अवतार सबके लिए नया था पर बहोत हिंसक रूप लिए गंध फूड के आर्यन उन्ह सर्पों को भी निगल गया ...... अब तोह विशाखा की भी पहली बार हवा खुश्क हुयी आखिर यह मानव चीज़ क्या है......

हर रूप एक से एक शक्तिशाली और उसके मैं में अब हज़ारों सर्पों की चीख पुकार सुनाई दे रही थी तोह अपने सर घूमता हुआ महसूस की जल्दी hi उसने उन्ह प्राचीन नाग योधन से नाग्शक्ति हटा के संपर्क hi तोड़ पायी थी की आर्यन ने सबको अपना मोह खोल के आजाद किया तोह हज़ारों प्राचीन नाग योद्धा की आत्मा उसके मोह से बहार निकली और सब उसके आगे पहन झुकए थे तब आर्यन भी अपना मानव रूप धारण करके उनके आगे हाथ जोड़कर धरातल पे घुटनो के बल बेथ के सर झुका के सबको आदर से बोलै ," आप सब आजाद हैं किर्पया अपने गंतव्य की तरफ प्रस्थान करें. नागलोक में आपको कोई नहीं बाँध पायेगा ".

सबने आर्यन को आर्शीवाद दिया विजयीभव और अन्तर्लुप हो गए...... विशाखा के सारे गुलाम एक साथ गायब होकर जाने से उसको बहोत बड़ी छाती पहुंचा चूका था आर्यन.

विशाखा कहाँ हार माने वाली और गुस्से से बोली ," तू ने यह अच्छा नहीं किया आर्यन मेरी इतने हज़ारों सालों की तपस्या पल भर में नष्ट कर दी..... तुझे इश्क हर्जाना अपनी मौत के साथ चुकाना होगा".

आर्यन ढीट सा मुस्करा के बोलै," वह तुम्हारे पूर्वज hi तोह होंगे विशाखा मगर मिर्त्यु के बाद भी तुम उनको गुलाम बना के राखी थी..... में कभी उनसे नहीं लड़ता अगर तुम सीधा मुझसे लड़ती पर तुम तेरी कायर नागिन सिर्फ अपनों को लज्जित करोगी...... "

विशाखा गुस्से से चीखी ," तुम मुझे कभी नहीं हरा सकते तूच मानव ....अभी तोह मैंने एक वार भी नहीं किया अपनी जीत का जासं मानाने लगे...... आज तुमको अहसास तक न होगा की तुम ने मुझे ललकार के कितनी बड़ी भूल की ".

आर्यन ," जा जा तुझ जैसी पगलेट नागिन से कौन डरता है ...... आज तेरे पास क्या बचा है कामिनी नागिन जोह अपने सेज माँ बाप की भी न हुयी..... आज पूरे नागलोक का एक सर्प भी तेरा साथ दे तोह हार मान के चला जाऊंगा. तू तोह वह विषैली मादा है जिसने अपनी सगी भें को मौत के घात उतर दिया. अपना प्रेमी तड़पा तड़पा के मारा..... तुझसे ज्यादा निच्च और पतित तोह िश पुरे भरमांड में कोई नहीं होगा ".

विशाखा क्रोध और नफरत के चरम पे थी और गुर्राते हुए आर्यन के सामने कड़ी होकर चिल्लाई ," दिव्या तलवार के डैम पे तू इतना बोल रहा है न तोह दिखा जोर आज तुझे कोई नहीं बचा पायेगा ".

इतना बोल कर विशाखा का सरीर 5 अलग अलग नागिन के रूप में बनता चला गया और हर एक जिनका चेरा लिए रूप लिया था वह थी उसकी जान अजीज सारू, गीता, मीणा, जाने और डॉली ........

5 के अठास और सुर एक hi थे विशाखा वाले पर चेहरे उसकी प्रिएशन के ...... "है है है है है ...... अब तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता क्यूंकि तेरे अंदर की आधी छिपी नाग्शक्ति मैंने खींच ली आर्यन और अब में हूँ पूर्ण नाग्शक्ति की स्वामिनी...... है है है है पहले हमको हरा मगर एक एक घाव इनके असली सरीर पे होगा और हाँ मुझे नहीं 5 गुना चोट प्रभा को मिलेगी जोह अभी सुप्तावस्था में है ....... है है है है ...... मेरे पास पाने को सबकुछ है पर तेरे पास हारने और मौत के शिव कुछ नहीं . ....... है है है है है ..... . "

मायावी शक्ति के कारन आर्यन जान गया था की विशाखा सत्य hi बोल रही है पर अपनों को कैसे चोट दे और प्रभा की जान पे जरा सी आंच भी कैसे आने दे......

आर्यन आज अपने आप को बहोत बेबस समझ रहा था, वहीँ उसके चाहने वाले भी मजबूर थे उसकी कोई मदद नहीं कर सकते थे ......

तो बे कॉन्टिनोएड........

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अपडेट 38

Part 7

आर्यन की चेतवानी वाली आवाज रानी माँ हेमा के लिए सुनकर गीता के साथ बाकी उसकी 7 प्रिएशन का भी ुष लाइव मिरर पे गया तोह गीता अपने आंसूं पहुँचती बोली," यह कुत्ता कभी नहीं मारेगाआ...... ".

दीप्ति जोरसे चिल्लाई ," डीडीइइइइइ ...... " और दौड़ के उससे लिपट गयी रोटी हुयी और दिलासा देती गीता को चूमने लगी ," माहि जिन्दा है दीदी ..... माहि जिन्दा है ...... "

गीता भी दीप्ति को चूमने लगी अपने आंसूं साफ़ करते ," हरामी कुटिया की दम है कभी नहीं सीढ़ी होगी न मरेगा बस मुझे मार के मरेगा ..... आने दे इसके जूते में चीलूंगी ...... "

गीता कुछ और बोलती बाकी 6 की 6 भी उसकी तरफ दौड़ कर दीप्ति के साथ गीता को गिरा ली और दोनों को चूमने लगी ...... दीप्ति भी सब में पिष रही थी पर गीता सबको रोकने की कोशिश कर रही थी लेकिन कोई नहीं मान रही थी ......

चंडी देवी ने आखिरी हथियार उसे किया ," अब तुम में से कोई मेरी चुम्मी लिया तोह आर्यन के धोरे न आने दूंगी ".

सब डरते हुए पीछे हैट गयी ..... निच्चे पड़ी गीता ने दीप्ति को परे धकेल के बोलै ," तू भी हैट कितनी भरी हो गयी है तू ....... अह्ह्ह्हह कमींयों यह क्या तरीका है किसी को प्यार दिखने का.... मुझे लड़कियां इतनी पसंद नहीं है...... "

आर्यन को जिन्दा देखकर जैसे गीता की हर वाणी मीठी लग रही थी और अब दुवेश तोह नाम मटर का भी न था आखिर उनका प्रीतम ,सैयां , हरजाई , होने वाला पति तोह एक hi साक्ष था.

दीप्ति हस्ते हुए बाकी सबकी तरफ बोली हमला ..... और फिर 7no गीता का पूरा चेहरा चूम चूम के गीला कर दिया.....

कुछ डिअर बाद सब अलग हुयी तोह गीता बोली ," मानती हूँ तुम सब अपने अपने लोक की रानी महारानी राजकुमारी हो पर अपना अधिकार यही तक रखोगी तोह हम सबके लिए अच्छा होगा ".

रानी पुष्पलता ," हाँ तुम ठीक कह रही गीता पर मेरी छोटी भें स्वर्णलता और छोटी राजकुमारी माया को अधिकार जरूर देना पृथ्वीलोक आने का हम चरों कभी नहीं वहां आएँगी बिना तुम्हारी अनुमति के ".

गीता स्क्रीन पे आर्यन को 10 प्राचीन सर्पों को निगलते देखि तोह उत्तर दी ," यहाँ अलग दुनिया है और सब शक्तिशाली भी पर तुम नहीं जानती रानी पुष्पलता वहां आर्यन एक प्यारा सा बहोत लाडला बीटा है मेरी माँ रति देवी का और बाकी अपनी मम्मीयों का..... हमारे खानदान में सबकी सांस िश बेवकूफ से जुडी है, में मान भी जॉन मगर तुम सबको मीणा से परमिशन लेनी होगी. वह चाहेगी तोह आर्यन किसी को मन नहीं करेगा "....... गीता ने यह बात अपने आंसूं साफ़ करते बोली..... आखिर उसका आर्यन िंह 6 दानव स्त्रीओं की वजह से hi जिन्दा था.

कामलता," मगर दीप्ति तोह बोल रही थी ..... "

दीप्ति ने कामलता के मोह पे हाथ लगा के चुप करवाया कहीं फिर रैयता न फेल जाए और आगे बढ़कर गीता के गले लगकर बोली ," मैंने कहा था दीदी आप नहीं मानोगी इशलिये सब मीणा से सिफारिश करें ".

गीता ने प्यार से एक चपत दीप्ती के सर पे लगा के उसको अपनी गॉड में बिठा के बोली," तुम सबको में खड़ूस और घमंडी नज़र आती हूँ पर सच्च यह है की जिस असली प्यार को में पायी तब तक बहोत डिअर हो चुकी थी इशलिये मुझे वह प्यार सबसे बाटना पड़ेगा एहि मेरी बेरुखी की सजा है ".

रानी पुष्पलता से लेकर बाकी अब गीता को सम्मान की दृष्टि से देख रही थी आखिर कितना विशाल हिरदय है िश लड़की का जोह अपने में सबको संजोय रही है..... ," नहीं गीता भें तुम जोह आर्यन के लिए हो वह हमेशा रहोगी बस तुम्हारी चाहया में कई और चाहत के फूल खिल पाएंगे..... आप का अपनापन हमेशा मिशाल होगा सबके लिए ".

राजकुमारी माया ," में तोह अपने को दासी मानती हो गीता दीदी की ".....

Saya-Chaya ने भी वही कहा तोह गीता ने अपने अंदाज़ में कहा ," चलो फिर मेरे प्यार दबाओ तीनो ".

दीप्ति जोरसे हसने लगी तोह बाकी सब भी Saya-Chaya-Maya के अल्वा हसने लगी पर जल्दी hi उनको भी हसी आ गयी..... गीता ने भी आखिर इनको अपना लिया था .......

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दिल्ली ......

रति की बेहोशी नहीं टूट रही थी ऊपर से सारू और मीणा अभी पुराने जंगल में थी अणि के साथ. दो इंजेक्शंस डॉ अंजू के लगगने के बाद भी जब वह होश में न आयी तोह बबिता, रोटी हुयी महिमा, को लेकर फार्महाउस के इमरजेंसी रूम के दूर पे नॉक की .....

डॉ अंजू ने भी बहार आकर नर्स के बताने पे दूर पे महिमा को रूट देखा तोह खुद गॉड लेकर उसको चुप करते हुयी पूछी ," बबिता यह दीदी( रति) के लिए या देवी माजी ( आर्यन की दादी) के लिए रू रही है ..... नहीं मेरा बच्चा चुप हो जा ".

महिमा ," दादी से मिला है ...... भूउउउउ ..... दादी ...... दादीयी...... "

डॉ अंजू ," अभी होश नहीं आया है दीदी को बबिता इश्को तू hi संभल .... में उनको देखती हूँ ".

बबिता ने जबरदस्ती महिमा को गॉड लिया तोह वह उसकी पकड़ से निचे फिसल गयी और डॉ अंजू के पीछे रूम में दौड़ गयी ..... जबतक कोई उसको रोकता महिमा बीएड पे चढ़ रति का गाल चूम के उशसे लिपट गयी ..... एक नर्स और डॉ अंजू उसको पकड़ते की रति की आँखें खुल गयी ," मेरा माहि ..... मेरा माहि ..... तू ठीक है ....... "

महिमा उसका गाल चूम के ," ी लव यू दादी ...... ी लव यू दादी ...... "

दोनों एक दुसरे को किसी करते, रति को माहि अपने पास दिखा तोह शांत हो गयी पर कोई और भी था जोह महिमा को माहि रति को दिखा रहा था वह थे निशांक गुरूजी......

डॉ अंजू ने आँखों में आसूं लिए नर्स को महिमा को रति से अलग करने से रोक दिया और उसको बहार जाने को कहा......

डॉ अंजू की भी चूची पि चुकी थी महिमा..... तोह उसको अहसास था आर्यन और महिमा के टच में कोई अंतर नहीं बल्कि यह तोह अपने बाप से भी मीठी बातें बनती है , इतनी छोटी सी लड़की..... लेकिन अब उसको भी हैरानी नहीं थी यह आर्यन का असली खून है और रति महिमा को hi अपना माहि समझ के अचेत अवस्था से भार आ गयी ..... अपने सीने से लगा अब छोटी माहि को चूची पीला रही थी.

कुछ तोह हुआ था आर्यन के साथ पतलोक में जोह यहाँ थे उससे अनजान पर एक गैप जोह आर्यन की कमी से आया था उसको उसकी बेटी ने भर दिया था कुछ समय के लिए.

महिमा का शील्ड [img=22x0] अब रति क्या पूरे फार्महाउस में सबको नार्मल करके स्वतः hi हैट गया.

वहीँ दुर्र जंगल में बड़े गुरूजी के चेहरे की मुस्कान अब अपने दाविथा को महिमा को सुपने का मैं बन ली थी.....

"अब मुझे ******** के साथ वापस नहीं जाना होगा और मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है ".

अपना हाथ उठा के उन्होंने एक अनजानी शक्ति महिमा के अंदर पहुंचा दी पर जिसका अहसास उन्होंने रानी विजयलक्ष्मी को भी होने दिया जांभोज के......?

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पुराने जंगल में......

ध्यान की मुद्रा में बैठी अणि ( रानी विजयलक्ष्मी) की आँखें खुल गयी और उसके चेहरे की कुटिल मुस्कान बता रही थी जैसा उसको बहोत बड़ा उपाए मिल गया है ......

अणि मुस्करा के ," में पतलोक नहीं जा सकती तोह क्या हुआ भाई पर आपकी चाहती को कौन रोक सकता है और मुझे पता है आप उसको कोई हानि नहीं होने डोज..... वह मारेगी नहीं बल्कि आपको जीवित करेगी आखिर आपका असली अंश जोह है बस नाग्शक्ति से दुर्र रहने की कोशिश करना ".

अणि ने क्या डाव पे लगा दिया था यह तोह आगे पता चलेगा मगर आर्यन उसके िश कृत्ये को कभी माफ़ नहीं करेगा यह वह भी जानती थी .......????

डॉली , जाने के साथ नेहा भी ध्यान मुद्रा में सारू और मीणा के साथ मानसिक संपर्क से नागलोक की घटना का अवलोकन कर रही थी वहीँ अणि ने अपने 5 स्वर्णयोधा पतलोक के मुख द्वार पे थोड़ी दुरी पे तैनात कर दिए परहीदारी करते सही समय के इंतज़ार में.

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नागलोक स्वयंवर स्थल ......

विशाखा के 5 नागिन रूप में अपनी hi प्रेमिकाओं की सकल देखकर आर्यन अब बेबस सा सोचने लगा यह कैसा षड्यंत्र रचा है विशाखा ने जोह मायावी तोह बिलकुल नहीं है ......

वह कुछ सोचता ुष पे पहला वार सारू मुख वाली नागिन ने जल शक्ति से किया तोह उसकी लोटस शील्ड [img=22x0] टूट गयी..... यानी विशाखा मजाक नहीं कर रही है...... सच्च में यह मम्मी की असली पावर धारण किये पूरी हंसकाल है नागिन रूप में.....

(***विशाखा के 5 नागिन रूप को में विशाखा hi लिखूंगा बस ब्रैकेट में ुष मुख वाली का नाम)

विशाखा ( सारू) ," तुम को कुछ नयी रणनीति अपनानी चाहये आर्यन और अभी भी सोच रहे होंगे यह कैसे संभव है ...... है है है है ..... 'प्रेम मेरे थुच मानव प्रेम '...... तुम्हारी प्रिएशन का खुद प्रभा से घेरा लगाव है जोह आसान मार्ग बना दिया और दूसरा तुमको मेरे नाग्शक्ति धारित सर्पों को नहीं निगलना चाहिए था. फिर जब गायत हुआ की भगवान् शेषनाग ने मुझे पूर्ण नाग्शक्ति पाने के आशीर्वाद से तुम्हारे hi पास भेजा है तोह कैसे मुझे न मिलती..... अब देखो कितने मजबूर कितने लाचार हो ....... है है है है ....... "

आर्यन अभी कुछ प्रसन पूछता की विशाखा ( सारू) ने अपनी पूछ के वार से उसको दूर फ़ेंक दिया ......

आर्यन खड़ा हुआ अपने को सैन्यात करते हुए जैसे मोटा कोड़ा उसके सरीर पे पड़ा हुआ ...... फिर वार हुआ उसकी अब जैसे 5ों नागिनों ने फुटबॉल जैसी बना दी ......

आर्यन हाथ दिखा के जब रोका ," रुको ..... अह्हह्ह्ह्ह ...... मेरी तेरे से क्या दुश्मनी है विशाखा जोह मुझे और प्रभा को कष्ट दे रही है..... माना तू ताकतवर है मगर अपने होने वाली पति को ऐसे पीटेगी ...... तुझसे लड़कर में प्रभा को चोट नहीं पहुँचूँगा इशलिये तू अपनी जगह नागलोक में खुश और में प्रभा के साथ पृथ्वीलोक पे...... "

विशाखा तंज़ मारती बोली ," आर्यन तू कायर hi रहेगा.... वैसा बनना जो तेरे अंदर असली योद्धा है. हिम्मत दिखा तू जीत भी तोह सकता है".

आर्यन थोड़ा निरशा दिखता," नहीं विशाखा में अपनी हार मानता हूँ अब मेरे परिवार को आजाद कर दे हम कभी पतलोक नहीं आएंगे".

विशाखा (मीणा ) ," ओह्ह्ह्ह तोह मानव गन आखिर तेरे अंदर जगह hi गया, मौत देखकर दम दबा के भाग लो..... तुझे तोह जिन्दा नहीं जाने दूंगी तोह युद्ध कर बुला खुनी गेंदे , बाबर शेर या दिव्या तलवार वाले को में भी देखूं कितना डैम है तुझमे या सायद तेरे अंदर अपनी रति माँ का दूध पानी बन गया .... है है है है है ...... "

आर्यन चिल्लाता हुआ जैसे hi विशाखा ( मीणा ) की तरफ कूदकर वार किया उससे पहले विशाखा (गीता ) ने अपनी पूँछ में लपेट के धरातल पे पटक दिया.....

अह्ह्ह्हह की आवाज उसके मोह से निकली ...... विशाखा ( जाने ) ," मुझे पे तेरी 5 प्रिएशन की शक्ति काम नहीं करेगी न hi कोई पतलोक की शक्तियां ..... बुला दिव्या तलवार को तभी असली युद्ध होगा ...... है है है है ...... नहीं तोह मारा जायेगा , अपनी प्रियेशिओं का सोच तेरे बाद इनका क्या होगा ..... क्या होगा तेरी प्रभा का जिसको मैंने तेरे hi फ़िक्र में सम्मोहित करके बाँध लिया है सुप्तावस्था में".

विशाखा का एक एक कटाछ जैसे आर्यन का गुस्सा उबाल पे ला दिया था और अब उसने aar-paar की लड़ाई सूची पर उशसे पहले बड़े गुरूजी की आवाज मस्तिक्ष में सुनाई दी ," भूल के भी " सहायक" का मत प्रयोग करना वॉश वार्ना अनिष्ट हो जायेगा".

आर्यन ने मैं में hi बड़े गुरूजी को आश्वासन दिया की वह ऐसा नहीं करेगा पर िश पगलेट नागिन विशाखा को सबक जरूर सिखाऊंगा .......

विशाखा 5 नागिनों वाला रूप धरे आर्यन को ललकार रही थी ताकि वह गुस्से में दिव्या तलवार वाले योद्धा के रूप में आये....... मगर आर्यन ने अब अपनी रानी हेमा से मिली नयी शक्ति इस्तेमाल की..... मरदाना एकरासँ शक्ति जोह किसी भी मादा के लिए कमजोरी साबित होती.

यह शक्ति उसको रानी हेमा से मिली थी जब उन्होंने उसको अपना दूध पिलाया था ...... आर्यन ने आँख बांध कर अपनी एकरासँ शक्ति 1000 गुना बढ़ा दी और रूपवान भी हज़ारों गुना हो गया ...... उसका रोऊ किसी को भी हर ले, जब अपनी नीली आँखों से उन्ह पांचों अपनी प्रेमिकाओं की शकल वाली नागिनों से बार बार नज़र के प्रेम बाण चोदे तोह जैसे वह उसकी तरफ सम्मोहित होती जा रही थी......

आर्यन के सरीर की गंध उनके जैकब्सन ऑर्गन ( सर्पों का सूंघने का अंग जोह उनके पहन के अगले भाग में होता है ) के अंदर खलबली मचा दी क्यूंकि वह बहोत तेज सुगंध की तरह उनको मदहोशी में पहुंचा दी...... ( क्यूंकि सबका छदम रूप था पर असली सरीर तोह िश समय नागिन का था)

कुछ पलों में 5 की 5 नागिन आर्यन के सरीर से लपेटने लगी जैसे वह कोई बीन बजा रहा हो और उनके चेहरे आर्यन की प्रेमिकाओं से पूर्ण सर्प रूप में आ गए जिनके पहन मणि जड़ित थे.......

उधर ध्यान में बैठी सारू मीणा से विशाखा की शक्ति हटी तोह नार्मल होती hi उठ कड़ी हुयी वही हाल डॉली , गीता और जाने का था ...... बड़े गुरूजी ने मंतर पढ़कर 5ों के मानष्टीक्स पे अवरोध लगते हुए कहा ," अब तुम 5ों राजकुमारियां ( प्रिंसेसेस ) विशाखा के वश में नहीं आयोगी पर बदले में कोई भी तुम्हारी नादानी आर्यन पे भारी पड़ेगी ".

विशाखा चाहा के भी आर्यन की पुरुष शक्ति से चूत नहीं पा रही थी ...... अब पांचों नागिन फिर से जुड़कर विशाखा के रूप में पहले पांच पहन वाली नागिन और कुछ hi पल में अपने मननमोहक स्त्री रूप में आर्यन से लिपट के उसको बेहताशा चूमे की कोशिश करती पर आर्यन उसको दूर धकेल देता.....

जोह भी यह दृश्य देख रहा था वह तो स्तब्ध hi रह गया सबसे ज्यादा पतलोक और नागलोक वाले...... विशाखा भूल गयी थी सरीर प्रभा का है जोह मानव योनि में जनम ली है िश बार तो सरीर से स्त्री पर शक्ति का उसके असर नागिन रूप पर हो रहा था फिर आर्यन भगवान् शेषनाग ने विशाखा के पिछले प्रेमी का सर्प रूप आर्शीवाद में दिया था.

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छदम स्थान ...

गीता को गुस्सा आ रहा था की अगर िश नागिन ने आर्यन को चूमा तोह साले का हैंडपंप उखड दूंगी.... कुटिया मुझे वशीभूत करि जिन्दा नहीं छोडूंगी एक बार मेरे हाथे चढ़ जाये ...... रानी हेमा जोह अब वापस उन्ह 8ों के साथ थी गीता को शांत रहने को बोली.....

रानी हेमा से रानी पुष्पलता पूछी ," ऐसी क्या शक्ति है आर्यन के पास जोह विशाखा इतनी बेशर्मी पे उतारू है और अब देखो अपने विस्तार तक उतर नग्न होने को त्यार है ".

रानी हेमा मुस्करा के ," मैंने भी नहीं सोचा था की मेरी दी मरदाना एकरासँ शक्ति का इस्तेमाल आर्यन ऐसे करेगा. पर सटीक वार किया पहली बार शक्ति का प्रयोग करके ".

गीता अपने माथे पे हाथ मार के बोली," रानी माँ आपको भी एहि शक्ति मिली आर्यन को देने के लिए..... सब लड़कियां औरतें वैसे hi इश्को देखकर मर मिटी हैं अब तोह जोह बची वह भी इश्के पीछे पद जाएगी ".

सब ने उत्सकता से रानी हेमा की तरफ देखा तोह उत्तर दी ," यहाँ पतलोक की स्त्रीओं के लिए मैंने ुषको शक्ति दी थी पर आर्यन ने कभी प्रयोग hi नहीं की आज तक ".

रानी स्वर्णलता ," पर रानी माँ बिना शक्ति के उनका आकर्षण अत्यधिक है, मैंने दूसरी बार में महसूस किया फिर शक्ति के बाद विशाखा का ऐसा करना कितना सुभाविक है ...... "

दीप्ति ," देखो माहि विशाखा को निर्वस्त्र होने से रोक रहा है ".

रानी पुष्पलता ," वह विशाखा को नहीं प्रभा को रोक रहा है, भूल गयी सरीर प्रभा का है जिशप विशाखा ने अभी कब्ज़ा किया हुआ है ".

रानी कामलता," एहि मौका है आर्यन के पास िश कलमुही विशाखा को प्रभा से पृथक करने का ".

रानी हेमा ," दोनों का पृथक होना आशम्भव है, आर्यन बस विशाखा को हरा के hi अपने अधीन कर पायेगा ".

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स्वयंवर स्थल के युद्ध मैदान में विशाखा फ्री में सबको कामुक दृश्ये दिखा रही थी ...... आर्यन ने जब उसको अपनी अंगिया खोलते देखा तोह झट से उसको बाँहों में भर के भींच लिया की ऐसा न कर मेरी रानी भें .......

विशाखा को न कुछ सुनाई दे रहा था न आर्यन के अलावा कोई दिखाई दे रहा था ...... अपने तने विशाल चूचक आर्यन के सीने में रगड़ उसके होंठ चूमने लगी तोह आर्यन ने झट से दोनों को येलो लोटस शील्ड में कवर कर लिया ताकि अब कोई देख न सके.

आर्यन प्यार से विशाखा को चूमने से रोककर उसके कान में मदहोश करने वाली मीठी वाणी में बोलै," कहाँ है मेरी रानी भें क्या मुझे भी भूल गयी".

ऐसे hi उसने बार बार अपनी छोटी भें प्रभा को पुकार के सुप्तावस्था से उठा hi लिया विशाखा की मदहोशी का फायदा उठाकर और प्रभा को महसूस करके आर्यन ने अपनी आकर्षण शक्ति ख़तम करके लोटस शील्ड हटा ली.

विशाखा पे आकर्षण शक्ति का असर ख़तम होते hi वह अपने को आर्यन की बाँहों में पायी और प्रभा को महसूस होते hi पीछे हटने लगी तोह आर्यन ने उसको बोलै ," तुम्हारी अंगिया खुली हुयी है उसको बाँध लो विशाखा यह सरीर मेरी प्रभा का तुम्हारा नहीं, इश्को हर रूप में सिर्फ में hi देख सकता हूँ ".

विशाखा को वास्तिविकता का गायत हुआ और सबकुछ कुछ पलों में उसके दिमाग़ में रविन्द होता चला गया ...... यह शक्ति इश्के पास कैसे ? निस्चय hi रानी हेमा ने दी होगी ...... पर इतना गुना असर मेरे ऊपर कैसे हुआ...... ?

विशाखा ने अपनी शक्ति से खुद को नागिन रूप में बदला तोह प्रभा उसके मैं में बोली ," दीदी आप वादा तोड़ रही हो आपको भाई को हराना है न की उसको मारने या अपमानित करना है ...... आप सीधे वार करो चाहे घातक हो पर स्वयंवर की मर्यादा मत तोड़ो..... अपनों का hi अपमान या लज्जित करके क्या हासिल होगा आपको. अगर जीत गयी तोह भाई की तरफ देखना भी नहीं मगर हारी तोह ऐसा प्रेमी और पति िश संसार में तोह नहीं मिलेगा आपको फिर जिसको आप ढूंढ रही हो वह भी भाई के अंदर hi विराजमान है, उसका दिल जीतने के अनेक मौके होंगे".

विशाखा कभी आर्यन को देख रही थी कभी अपनी छोटी भें की बातों का विश्लेषण करती सोच रही थी ....... "मुझे सर्व शक्तिशाली बनना है और दिव्या तलवार के बिना यह संभव नहीं होगा चाहे पूर्ण नाग्शक्ति मेरे पास हो...... नहीं िश थुच मानव से विवाह तोह कदापि नहीं करुँगी चाहे पूरी कायनात से बैर क्यों न लेना पड़े ......"

विशाखा ने पक्का इरादा करके कहा ," आर्यन अब न तुम कोई चल करना न में करुँगी सीधा युद्ध लड़ेंगे अगर में जीती तोह दिव्या तलवार मेरी होगी और हारी तोह जोह तुम कहो ".

आर्यन भी िश पगलेट नागिन की सरत सुनकर सोच में पद गया, लेकिन उसको अपनी छोटी भें प्रभा को पाने का सुनहरा मौका लगा की इश्क दिमाग़ फिर से पालते उशसे पहले इश्को फसंता हूँ ......

आर्यन ," मंजूर है तुम्हारी सरत पर मुझसे भी तुम एक परतीयगा करोगी तभी में तैयार हूँ ".

विशाखा अभिमान में पूछी ," कैसी प्रतिज्ञा ?"

आर्यन ," एहि परतीयगा की तुम अगर हारी तोह सबके सामने सर झुकार मेरी छोटी भें प्रभा से उसके प्यार पकड़ के माफ़ी मांगोगी और अपने माता पिता के साथ रानी माँ हेमा से और हाँ मेरी साड़ी होने वाली बीवियों से भी ".

विशाखा की 10 की 10 सर्प चक्षु में एक डैम क्रोध से लबालब हो गए पर उसका अभिमान hi उसको विवेक भी दिया ," अच्छा अवसर है विशाखा यह कभी मुझे हरा hi नहीं सकता और हार के दिव्या तलवार भी देगा...... िश बेवकूफ ने खुद मौत चुनी है ".

विशाखा ," मुझे स्वीकार है में परतीयगा करती हूँ ".

आर्यन कुटिल मुस्कान लिए ," न न .... ऐसे नहीं पहले नागलोक के भगवन और हम सबके भगवन शेषनाग की कसम खाकर परतीयगा करो तभी में शरत मानुगा ......"

विशाखा सोच में पड़ने लगी तोह आर्यन जैसे उसको ललकारा ," सोच क्या रही विशाखा दिव्या तलवार के लिए तुम इतना भी नहीं कर सकती तोह उसको धारण करने की हिम्मत कैसे करोगी ".

विशाखा क्रोध में ," में भगवन शेषनाग की कसम लेती हूँ की अपनी प्रतिज्ञा पूरी करुँगी अगर तुम हरा पाए तोह ".

आर्यन हसकर ," अब तुमको कैसे हार माननी है वह भी बता दो क्यूंकि में तुमको मार नहीं सकता और मुझे मार के तोह दिव्या तलवार पता नहीं कहाँ गायब हो जाएगी किसी को भी नहीं पता.... यानी न तुम मुझे मार सकती हो न में तुम्हे क्यूंकि तुम प्रभा के सरीर में सिर्फ एक किरयेदार हो ...... ठीक है न ..... है है है है ......"

"बहोत बोल रहे हो आर्यन, तुम मुझे बेबस और शक्तिहीन कर दो में हार जाउंगी और तुमको मरने से बदतर हालात में पहुंचा दूंगी तोह में जीती" ...... स्वीकारते हो विशाखा अकड़ के पूछी.

आर्यन मजे लेते हुए ," क्या तुम ने किसी मानव को आज तक हराया है ?"

विशाखा बिलकुल आर्यन के नजदीक जाकर उसको अपनी नाग कुंडली में घेरती हुयी ऊपर उठा के अपने पांच मुख के सामने लाकर फुंकाररी ," मुझे जिन्दा मानव निगलने में मजा आता है क्यूंकि मेरे विष से मानवों की हड्डी तक पल भर में गाल जाती है ".

आर्यन ने विशाखा की पूँछ सेहला के कहा ," मेरी प्रभा बहोत स्वीट यानी मीठी है और उसका विष मेरे लिए मीठ hi होगा...... अगर तुम चाहे तोह किसी भी अपने को बुला लो ताकि तुम्हारी हार पे कोई रोने वाला भी चाहिए ".

विशाखा ने आर्यन को अपनी पूँछ में लपेट हुए के धरातल से 40 फट ऊपर उठा के अपने पांच पहनो के मुख के सामने लालकर कहा ," चलो तुम्हे मेरी तरफ से चूत है अगर तुम्हारा चाहने वाले तुम्हारी मदद भी करेगा में बिलकुल बुरा नहीं मानूंगी ...... अब त्यार हो जा ".

आर्यन को उछाल के इतनी तेजी से युद्ध स्थल के घंटे की तरफ फेंकी तोह उड़ता हुआ आर्यन जानते से टकराता ुष पहले hi हवा में गोल गोल घूमता अपने दोनों प्यार मारा तनननननननन की आवाज गूंजी क्यूंकि उसने धातु और चमड़े के अटाला लोक के जुटते जैसे फेन रखे थे.

विशाखा भी आर्यन की फुर्ती देखकर प्रभावित हुयी पर अगले hi पल घंटे के पास खड़ा आर्यन अपना नाग रूप धारण करके बोलै ," घंटा मैंने तुम्हारी तरफ से बजा दिया है अब वार सम्भालो "........

आर्यन अब सर्प रूप में भी दौड़ लगा के लम्भी चल्लंघ लगा कर विशाखा की तरफ पहले तीर कमान को जोह उसने युद्ध स्थल से खडग और गदा भी फेंका सब बेकार पर अब 30 मीटर ऊँची उछाल मार के विशाखा के एक पहन पे हाथ जोड़कर प्रहार किया तोह तप्प्प्प्प की आवाज हुयी पर विशाखा को कुछ न हुआ.

आर्यन ," ओह्ह यह तोह पत्थर जैसी है साला मेरा हाथ hi में दर्द हुआ ईशपर असर hi नहीं ".....

विशाखा ने पूँछ को हंटर की तरह घुमाया और वार पड़ते hi आर्यन उड़ता हुआ सीधा दरसक दीर्घा में जाकर गिरा...... यानी वार 1/10तह सेकंड से भी काम समय पे हुआ और इतनी वेघ से आर्यन गिरा की पत्थर की 12 सीढ़ियां टूट गयी और आर्यन की कमर भी हिल गयी ...... अह्ह्ह्हह यह इतनी स्पीड से मारती है क्या ......

विशाखा उपहास उड़ाती हुयी बोली," फिर से कोशिश करो आर्यन सायद तुम्हारा बाबर शेर तुम्हारी कोई मदद कर पाए या भी गेंदा क्यूंकि मानव या सर्प रूप तुम्हारे बहोत कमजोर लग रहे हैं ....... है है है है ...... "

आर्यन भी उठकर अब विशाखा की तरफ दौड़ते हुए दो तलवार उठा लिया और सत्ता सत्ता घूमता तलवार बाजी के पटरे दिखता करीब जाकर धरातल में दोनों तलवार घुसा तेजी से नाली जैसी खोदता तान तान की तेज आवाज करता धरातल में कम्पन पैदा करता विशाखा का ध्यान भटकता उसके समीप पहुंच के उसके 6 हांथो में से 2 में पकडे तीर कमान और भले को तोड़ के एक किक उसकी पूँछ पे ज्यादा तोह विशाखा अपनी जगह से तेजी से हिली ......

आर्यन अगला वार करा उसकी नागखडग पे...... दोनों उसकी तलवार चकना चूर हो गयी बस तलवार की मुठ हाथ में रह गयी.....

आर्यन भी चकित होकर " ओह्ह यह तोह कोई शक्तिशाली तलवार लगती है ".

विशाखा ने हस्ते हुए उसको फिर से पूँछ के वार से दूर उछाल के खडग जब आर्यन पे फ़ेंक के मारी तोह फुर्ती से उसने झुक के खडग की मुठ पकड़ा तोह चमत्कार hi हो गया आर्यन के हाथ में खडग अपना विशाल रूप और लाल रौशनी करती चमक भिकर्ति उसको विशाखा जितना सर्प रूप दे दी .......

हज़ारों साल से भगवन शेषनाग की नागखडग विशाखा के पास थी जोह उन्होंने उससे पर्सन होकर दी थी पर उसका असली रूप तोह आज hi विशाखा को दिखा .......

आर्यन कभी अपने को और कभी नागखडग को देख रहा था...... विशाखा तोह जैसे भोंचक्की रह गयी पर अगले hi पल नागखडग आर्यन के हाथ से गायब हो गयी......

अब यह दूसरा अचम्बा था विशाखा के लिए पर आर्यन ने जांभोज के भगवान् शेषनाग को याद करके ऐसा किया..... नागखडग से विशाखा यानी प्रभा पे तो वह कभी वार नहीं कर सकता था. वह तो विशाखा को पहले निहथि करना चाहता था ....... जिसमे वह कुछ हद तक सफल भी हुआ.....

आर्यन को अपने सामान देखकर विशाखा ने अब सीढ़ी लड़ाई का मैं बना लिया, िश मानव से तोह कभी नहीं हर सकती परन्तु नागखडग की यह कोनसी शक्ति थी और गायब कहाँ हो गयी ?????

तो बे कॉन्टिनोएड......

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अपडेट 38

Part-7 (बी)

विशाखा ने आर्यन द्वारा उसकी दूसरी तलवार 'नागखडग' को हथ्याने पे अपनी साड़ी सोच परे कर घातक नाग्शक्ति का वार करने के लिए आँखें बांध की क्रोध में तो प्रभा की आवाज उसके मैं में गूंजी .....

" दीदी गलती तोह नहीं कर रही हो ? कहीं आर्यन भाई आपकी साड़ी नाग्शक्ति hi न सूख लें आखिर आधी शक्ति उनको पहले भी मिली थी ?"

विशाखा गुस्से में थी और प्रभा की बात सुनकर अब अपनी विवशता के कारन नाग्शक्ति का वार न करके अपने 5 सर्प मुख खोल के विष की ज़हरीली फुंकार से वार किया तोह आर्यन ने भी अपने सर्प मुख से विष की फुंकार ुष्पर छोड़ी ....... दोनों विशाल नाग रूप में थे और युद्ध अब आरपार पे आ गया था.

आर्यन जहाँ उसको निहथि करने की चेष्टा कर रहा था वही विशाखा आर्यन को हारने के लिए मौत देने से भी नहीं चुकने वाली थी.

दोनों के सरीर इतनी विषैले सर्पविष से थोड़े घायल जरूर हो रहे थे पर दोनों के सरीर जल्दी hi स्वतः hi घाव भरते जा रहे थे ..... . पल पल जहाँ विशाखा का क्रोध चरम पे था वहीँ आर्यन की सर्प आंखें उत्तेजित होकर विशाखा की तरफ आसक्त थी ......

विशाखा ने अपना वार बदलते हुए आर्यन से दुरी बना अपनी पांच अलग अलग मणियों की शक्तियां धारण करके पंचरंगा रूप धार लिया और आर्यन पे वार करने को आगे बढ़ी तोह आर्यन ने भी अभी तीन मुखी रूप धार लिया ..... पहला सर बाबर शेर का तीसरा खुनी गेंदे का और मध् वाला 10 पहन वाले सर्प का .......

जितनी तेजी से विशाखा अपने हथियार लिए आर्यन की तरफ बढ़ने लगी उतनी hi तेजी से आर्यन का हर सर विभाजित होता संख्या बढ़ने लगा..... यानी अब बाबर शेर के भी 4 मुख हो चुके और खुनी गेंदे की भी और 100 सर्प मुख ......

विशाखा जब तक समझती वह आर्यन के बिलकुल नजदीक जाकर वार करती ुष पहले अब 1000 सर से ज्यादा आर्यन के थे और आकर में 10 गुना हो चूका था ..... उसने विशाखा को अपनी पूँछ में लपेट के कुंडली मारी और अपने सारे मुख खोल के उसकी शक्ति सूखने लगा हर अस्तर को उसके हाथों से निकाल के ......

विशाखा की चीखें गूंजने लगी और आर्यन और बड़ा अकार लेता जा रहा था ...... नागलोक क्या पतलोक के बड़े बड़े सुरमा िश रूप के देखने के लिए वहां प्रकट होने लगे और हाथ जोड़ने लगे सर झुका के ........

भगवन शेषनाग ने आर्यन के सरीर में अपना अंश भेजा था जिसको विशाखा हारते हुए भी अपने को चला महसूस कर रही थी ......" धोका ..... इतना बड़ा षड़यंत्र मेरे साथ ...... सब नागलोक वाले अपनी शक्तियां िश मनुष्य को देकर मुझे हराना चाहते है, यह सब इश्क हज़ार देखेंगे ..... "

अगले पल उसने वह किया जोह प्रभा ने उसको मन किया था ..... नाग्शक्ति का पूरे विहग से वार और आर्यन ने विशाखा को दुर्र पहनकर झट से अपना मानव रूप धारण किया और हाथ जोड़कर नाग्शक्ति के तेज प्रकाश और वार को झेलता हुआ धरातल पे निर्जीव सा गिरा गया ..... सबकी सांसें थम गयी, आखिर आर्यन ने ऐसा क्यों किया वह तोह स्वयं महाबली भगवान् शेषनाग की शक्ति के रूप में था फिर क्यों अचानक से अपना साधारण मानव रूप ले लिया ...... ?????

भगवन शेषनाग भी अपने ध्यान में बोले," हम तुम्हारा उपकार कभी नहीं भूलेंगे आर्यन आज तुम ने हमारी लाज राखी...... परन्तु रति के लिए तुमको जीवित रहना होगा ?"

राजा बलि महाराज (मैं में) ," मनुष्य योनि hi तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी है पुत्र आर्यन यह हमेशा तुमको मजबूर करेगी असफल होने में...... और यह मुर्ख विशाखा जैसे सबकुछ टाक पे लगा दी है ".

विशाखा को अपनी जीत इतनी खुसी दी की आर्यन के निर्जीव सरीर पे विष की फुंकार छोड़ उसको अपने 5 पहनो से डसने लगी..... हर तरफ से दस्ते विष भर्ती विशाखा ने आर्यन का सरीर काला कर दिया था जोह हमेशा दूध की तरह गोरा और आकर्षक होता था .......

आखिर कर विशाखा ने अपना एक मुँह में आर्यन को दबाते हुए निगलने की कोशिश की तोह तेजी से एक ओझासवी तेज प्रकाश पूरे नागलोक को प्रकोष्ट करता चला गया..... विशाखा की साड़ी आंखें को चूंडिया दिया जिसकी शक्ति के कास्ट ने उसको आर्यन को दूर फ़ेंक पे मजबूर कर 10 की 10 आंखें बांध करवा दी ......

एहि हाल सबका था पर जब प्रकाश काम हुआ तोह एक छोटी सी बहोत hi सूंदर और प्यारी मानव बच्ची प्रकट हुयी ..... "महिमा " ...... एहि नाम आर्यन की होने वाली घरवालिओं के मुख से निकला था...... पर यहाँ कैसे? ..... ओह्ह्ह्ह अणि ( रानी विजयलक्ष्मी ) को यह नहीं करना था ? आखिर िश मासूम ने क्या बिगाड़ा था ?

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पुराण जंगल......

महारानी विजयलक्ष्मी (अणि) पुराने जंगल में महल के अपने कक्ष में आँखें बांध किये नागलोक के स्वयंवर स्थल में आर्यन और विशाखा की प्रतिदव्न्दिता पे पल पल नज़र रखे ुष ख़ास पल के इंतज़ार में थी.

बड़े गुरूजी ने मानसिक संपर्क करते हुए कहा," सावधानी से महारानी तुम्हारा एक गलत प्रयास कई प्राणो को डाव पे लगा सकता है. रति का वचन अगर नागलोक में उपयोग हुआ तोह पार्ले लाने से कोई नहीं रोक सकेगा ".

महारानी विजयलक्ष्मी ने उतर दिया," नाग्शक्ति के पूर्ण वार को आर्यन नहीं झेल पायेगा गुरूजी और आप भी जानते है विशाखा ऐसा पक्का करेगी अपनी हटधर्मिता और घमंड में".

बड़े गुरूजी," महिमा, अभी शिशु अवस्था में है और सबकी चेहती भी. आर्यन उसके लिए किसी को दण्डित करने से नहीं चुकेगा चाहे हम hi क्यों न हो".

महारानी विजयलक्ष्मी ," हम हालत के अनुसार hi महिमा को वहां भेजेंगे और हमारी शक्तियां भी उसके प्रदान करेंगे. वह असाधारण बच्ची है जिसके पास जनम से बहोत शक्तिशाली कवच है जोह कभी आज तक किसी मानव क्या देवतों या दानवों के पास भी नहीं था. आप चाहिए हमे न बताये गुरूजी मगर इतना हम ुषको पहली बार hi छूकर समझ गए थे की उसके पास िश भरमांड की नहीं कुछ अलग शक्ति है जोह सिर्फ आपके समीप या आर्यन के दिव्या तलवार वाले रूप में थी. महिमा के लिए हम भी अपने प्राण लगा देंगे परन्तु आर्यन पे नाग्शक्ति के वार का ताप महिमा ख़तम कर देगी .... ऐसा हमे पूर्ण विश्वास है ".

बड़े गुरूजी ने भी महारानी को आगे कुछ नहीं कहा.

(*अणि ने लंदन से वापस आने के बाद जब महिमा को पहली बार अपनी शील्ड से कवर करना चाहा तोह उसको झटका लगा था जबकि राहुल और वसु पे शील्ड कवर हो गयी थी. महिमा की आँख खुल गयी थी और अणि के गले लग गयी थी प्यार से ...... यह आप सारू और अणि के इंडिया आने वाले अपडेट में पहले पढ़ चुके हैं )

महारानी विजयलक्ष्मी के आगे कोई कैसे विरोध कर सकता है उनके फैसले पे, बड़े गुरूजी भी उनको सलाह hi दे सकते थे. वह एक दिव्या आत्मा थी और हमेशा जनन कल्याण hi पिछले 5000 वर्षो से करती आयी थी. उसने धरतीलोक पे आये बड़े बड़े संकट भी ताल दिए थे और न जाने कितने पापियों का संहार कर चुकी थी.

अनीता उर्फ़ अणि का जनम महारानी विजयलक्ष्मी के आशीर्वाद से हुआ था, तब भी बड़े गुरूजी ने महारानी को सारू के गर्भ में समाने से रोक न सके थे. अणि के अंदर चंचलता और जिद्दी होने के साथ मूडी होना जनम से महारानी की ऊर्जा की वजह से था. अणि कभी किसी का गलत नहीं करती थी पर मजे मजे में सामने वाले की गांड मरवा देती थी..... यह हम सब भी जानते हैं.

रति सबसे बड़ी बढ़ा थी अणि (व्) के लिए जोह उसके लक्ष ने अड़ंगा ऐडा सकती थी ...... रति ने आर्यन पे पूरा कब्ज़ा कर लिया था हर रूप से अपने प्रेम स्नेह और लगाव से. अणि जहाँ आर्यन की कमजोरी थी वहीँ रति उसकी पूर्ण प्रेमिका के साथ माँ थी चाहे जनम न दिया हो. अणि जानती थी जल्दी hi समय आएगा जब रति लाचार होगी और उसका भाई उसके पास होगा और वही मौका होगा अपने लक्ष को पूर्ण करके हमेशा के लिए धरतीलोक से मुक्ति पाने का.

आर्यन बचपन से hi अणि को अपनी छोटी भें नहीं अपनी बेटी की तरह केयर करता था जिसका लाभ वह हमेशा उठती थी पर आर्यन से ज्यादा अणि को कोई नहीं समझाता था. आर्यन अपने बापू ( चौधरी माधव सिंह) से बोलै था की मेरी से अच्छी आपकी उत्तराधिकारी अणि बनेगी. मगर उसके बापू ने उससे वचन लिया की वह हमेशा hi परिवार के अंगरक्षक के साथ उत्तराधिकारी भी रहेगा. उनको भी अणि से डर लगता था , गलत को भी सही कर देगी यह लड़की और रति का जीना हराम. अणि को सिर्फ आर्यन hi कण्ट्रोल कर सकता है और बाकी सब औरतें रति के बहार नहीं जाएँगी.

विशाखा के नाग शक्ति का वार करते hi आर्यन पे महारानी विजयलक्ष्मी ने अपने 5 स्वर्ण योद्धाओं को पतलोक के द्वार पे अकर्मंण्णन का आदेश दिया और एक हाथ आगे करते हुए अपनी शक्तियों का पुंज बबिता की चूची से दूध पीती महिमा के पास भेजा दिल्ली फार्महाउस पे.....

महिमा को घेरते hi शक्ति पुंज ने समय रोक दिया और महिमा को लिए सीधे पतलोक के मुख द्वार पे प्रकट हो विधुत गति से नागलोक के अंदर ओजश्वानि प्रकाश के रूप में प्रकट हुआ ......

नागदंश जोह आर्यन द्वारा दुबारा जीवदान दिए जाने पे पतलोक के द्वार पे अपने दानव और नाग परहरिओं के साथ तैनात था ,उन्ह स्वर्ण योद्धाओं से भिड़ा हुआ था िश ओझासवी प्रकाश के आगे निश्तेज सा होता कुछ न कर पाया .......

स्वर्णयोधा को भी वह सब मार न सके जोह अब ुष शक्ति के पतलोक में प्रवेश करते hi अदृश्य हो गए महारानी के आदेश पे ......

नागदंश समझ गया की कोई बड़ा शत्रु उसके लोक में प्रवेश कर चूका है उनका ध्यान भटकता हुआ पर किस्मे इतना समर्थ है ? ...... देवता क्या कोई अन्य लोक का वासी ऐसा करने का दशांश नहीं कर सकता.

नागलोक में आर्यन को अचेत अवस्था से निकल के महिमा वापस विलुप्त होकर अपनी मम्मी बबिता की चूची से दूध पीती खुश थी फार्महाउस के बैडरूम में..... समय फिर शुरू हो गया और अपने निप्पल पे काट लेने से बबिता ने महिमा के एक धप लगा के कहा ," सीईईई..... कटेगी तोह दुद्दू नहीं पिलने वाली ..... "

अपनी hi प्यारी मुस्कराती बेटी महिमा का माथा चूम ली बबिता जिसको कहाँ पता था िश नन्ही सी, प्यारी पारी सी, बेटी उसके पति और अपने बाप आर्यन की जान बचा के आयी है जिसको िश भरमांड में तोह रति hi बचा सकती थी अपना वचन मांग के मगर नतीजा विध्वंश कारी होता.

उधर महारानी विजयलक्ष्मी के चेहरे पे विजयी मुस्कान थी तोह बड़े गुरूजी भी महारानी को हाथ जोड़कर अभिवादन किये तोह महारानी ने भी वैसा hi उनके आदर में किया.

मीणा चैन की सांस लेकर सारू को बोली," अणि ने अपने भाई की रक्षा की जैसे उसने वहां चीन में जा की थी..... आज इतना तोह गायत हुआ की अणि कभी आर्यन को हारने तोह नहीं देगी ".

सारू अपने आंसूं पूछती बोली," अणि नटखट जरूर है पर आर्यन की हर बात मानती है चाहे मेरी भी न सुने ".

छोटे गुरूजी , निशांक ," परन्तु पद्मदेवी ( सारू) श्रेय तोह महिमा पुत्री को मिलना चाहिए, वह नन्ही सी बच्ची सारे लोकों पे भरी पड़ी और विशाखा तोह जैसे गूंगी hi पद गयी अपने घमंड के आगे ".

बड़े गुरूजी ," महारानी के लिए यह इतना बड़ा कार्य भी नहीं है पर आर्यन वॉश से उनका स्नेह अवश्य बढ़ा है. जल्दी hi समय आएगा जब दोनों को एक दुसरे के लिए बहोत कुछ नौछवर करना होगा. वह कठिन गाढ़ी hi दोनों को लक्ष प्राप्ति की तरफ अग्रसर करेगी".

फिर से चरों नागलोक में चल रहे दृश्यों को देखने लगे जहाँ विशाखा का वजूद hi ख़तम होता दिख रहा था ...... ?

Ani(V) भी अपने कक्ष से उन्ह चरों के पास आ गयी थी .......

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नागलोक में......

सवाल अनेक थे पर जवाब किसी के पास न था ...... पतलोक और नागलोक के वासी अभी भी ुष असधारण बच्ची को देखकर सकते में थे यह कोई साधारण शिशु नहीं है..... जिसका प्रकट होना hi इतना तेज लिया हुआ था ......

महिमा तोह दौड़ के अपने डैडी आर्यन के पास पहुंची जोह निर्जीव सा पड़ा था पर उसके ऊपर बैठकर महिमा ने गाल चूमा उसके हिलाते हुए ," डड्डियययय ..... डड्डियययय ...... उठो न डैडी ...... कितना सोयेगे ?""''

आर्यन के कान जैसे बांध hi थे तोह कोई पर्किर्या नहीं हुयी न hi वह कुछ बोलै. महिमा अब आर्यन के सीने पे चढ़कर उसके पूरे चेहरे को किसी करने लगी डैडी डैडी बोलते हुए .......

सबको दिख रहा था यह बच्ची बहोत ख़ास है इतना तेज लिए और आर्यन की कोई सगी है बिलकुल उसको जैसी दिखती है.

विशाखा पे तोह जैसे बदला हावी था परन्तु प्रभा की गुस्से वाली आवाज गूंजी ," िश पे वार मत कर देना नहीं तोह में स्वयमिर्त्यु मंतर से खुद को ख़तम कर लुंगी...... वह मेरी भी पुत्री सामान है, ऐसा दशांश मत करना दीदी ".

विशाखा भी प्रभा की चेतवानी सुनकर दरी अगर प्रभा नहीं तोह उसका वजूद hi कहाँ है पर यह बच्ची है कौन ?????

आर्यन की सब प्रेसिओं जहाँ महिमा को सुरकिषत करना चाहती थी वहीँ बड़े गुरूजी के मानसिक सन्देश ने जहाँ गीता और दीप्ति को रोका वहीँ रानी हेमा ने सब दानव रानियों और राजकुमारिओं को .......

महिमा ने अपने डैडी आर्यन का माथा चूमा तोह उसका सरीर काले वर्ण से पहले जैसा होने लगा और आर्यन के चेहरे पे तेज लौटने लगा .......

विशाखा ने जोरसे पुछा," कौन हो तुम पुत्री ...... ? "

अपने डैडी का गाल चूम के जब महिमा ने पलट के अपनी नीली गुस्से वाली बड़ी बड़ी आँखों से विशाखा को देखा तोह उसकी रूह तक कांप गयी ...... महिमा कड़ी होकर आर्यन के ऊपर से उसकी तरफ बढ़ी hi थी की फिर से गायब हो गयी जैसे आयी ...... अणि ने उसको वापस पृथ्वीलोक अपनी शक्ति से बुला लिया था .......

नागदंश अपने पतलोक के पेहरिओं के साथ नागलोक में प्रकट हुआ और बोलै ," कोई नागलोक तक बिना हमारी आज्ञा के आया है बहोत शक्तिशाली है ...... उसके साथ 5 स्वर्णयोधा हमने कई बार मार दिए पर वह फिर जीवित होकर विलुप्त हो गए महाराज वासुकि ".

आर्यन भी होश में आता हुआ मुस्करा के उठ बैठा ," मेरा सूना बच्चा ी लव यू बेबी ..... मेरी माहि पुछठ पूछह "...... पर अपने को नागलोक में पाकर उसको सपने जैसा लगा की जैसे महिमा उसको किसी करती जगा रही हो और वह भी उसको पुचकार रहा था ......

अब तोह सब हैरान hi नहीं विषमय से आर्यन को देख रहे थे जोह कुछ समय पहले मिरत सा लगा था......

गीता सच्च hi कहती थी 'हम सब मर्डर जायेंगे पर यह कमीना आर्यन कभी नहीं मरेगा '

विशाखा तोह डबल शॉक में थी, आखिर वह इतनी सूंदर बच्ची कौन थी ? और यह आर्यन बच कैसे गया इतने घातक प्रहार से ? मेरी नाग्शक्ति भी मुझे महसूस नहीं हो रही है ? जैसे कोई भी शक्ति नहीं है मेरे पास ?

आर्यन ुषको निहथि करता नाग्शक्ति hi नहीं बेहोशी में हर दंश झेलता विशाखा की दूसरी शक्तियां भी सूख गया था जिसका अहसास अब उसको हुआ था.

महिमा ने अपने कवच से आर्यन को फिरसे अपने से जोड़कर नाग्शक्ति का ताप ख़तम कर दिया था. दोनों बाप बेटी का कितना घेरा रिश्ता है यह तोह आगे पता चलेगा आर्यन के 21 वर्ष के होने पे. एक लम्बे सफर पे आर्यन और महिमा जाने वाले हैं जहाँ कोई नहीं जा सकता ???????

आर्यन ने विशाखा की तरफ देख कर कहा ," तुम हार चुकी हो विशाखा, मैंने तुमको अस्तरों के साथ शक्तिविहीन कर दिया है शर्तों के अनुसार और हम दोनों जिन्दा है चाहे तुमने पूरी कोशिश की मुझे मारने की...... क्यों राजा वासुकि अब आपकी बड़ी बेटी एक आम सर्प कन्या है न ?...... आज इश्के पास कुछ भी नहीं है और सरीर भी मेरी चाहती भें प्रभा का है जोह अपना तोह पिछली बार खो दी थी दिव्या तलवार के लालच में".

विशाखा कुछ करती उशसे पहले hi प्रभा ने मानव रूप धारण कर लिया अपने सरीर से निकाल विशाखा सिर्फ एक प्रतिबिम्ब बनकर बस चटपटा रही थी प्रभा से अलग होकर ...... कैसे , कब , किस तरह आर्यन ने मुझे हराया ?"

भगवन शेषनाग की आवाज विशाखा के मैं में गूंजी ," तुम हार चुकी हो पुत्री, आर्यन ने तुमसे तुम्हारी शक्तियां और वार झेल के िश स्वयंवर को जीत लिया है तुमको निहथा करके ".

विशाखा चाहा कर कुछ बोल hi नहीं पा रही थी जैसे उसको दुबारा मार दिया गया पर िशबार शक्तिहीन करके.

राजा माया ने राजा वासुकि की तरफ देखकर कहा ," महाराज आज हम सब भी आर्यन के ऋणी है वार्ना आपकी पुत्री ने तोह स्वयंवर hi पतलोकों का विनाश करक बना दिया था ...... पुत्र आर्यन हम दोनों भी हाथ जोड़कर चमा चाहते हैं जोह हर पल तुमको हे की दृष्टि से देखते थे ".

राजा वासुकि ने भी आर्यन के सामने हाथ जोड़कर चमा मांगी तोह आर्यन ने उनको रोकते हुए कहा ," आप इतने महँ राजा होकर मुझसे माफ़ी मांग कर मुझे पाप का भागी न बनाये..... में सिर्फ अपनी छोटी भें प्रभा के लिए आया था. मगर उसको वापस लेजाना मुझसे गलत भी करवा देगा कभी नहीं सोचा था. अब हमे जाने की आज्ञा दीजिये हम अपने धरतीलोक पे hi खुश रह लेंगे और में नागलोक की विशाखा की साड़ी शक्तियां और नागखडग आपको वापस करता हूँ, मुझे सिर्फ मेरी प्यारी भें प्रभा चाहिए और आशीर्वाद देकर विदा करिये".

राजा बलि महाराज ने आगे बढ़कर आर्यन को घुटने से खड़ा करते हुए कहा," तुम ने जोह किया है पुत्र वह यहाँ क्या किसी भी संसार का प्राणी नहीं कर सकता था...... हम ने तुमको चुनकर कोई गलती नहीं की, तुम मानव होकर भी हम सब दानवो, नागो से स्वरश्रेष्ठा हो और स्वयंवर का नतीजा बिना सुने जाना चाहते हो ".

आर्यन कुछ बोलता ुष से पहले भगवान् शेषनाग वहां परकत हुए तोह सबने सीष झुका लिए .....

भगवन शेषनाग ने आर्यन को रोकते हुए कहा ," नहीं आर्यन तुम किसी के आगे सीष नहीं झुका सकते और आज के बाढ़ हमारा सीष भी तुम्हारे आगे झुकेगा...... आखिर कौन किसी दुसरे की प्रतिष्टा और वचन के लिए अपने प्राण तक डाव पे लगा सकता है क्यों विशाखा?"

विशाखा भी सर झुकाये अपारधी महसूस कर रही थी आखिर उसके कीर्त्यै ने भगवन शेषनाग को भी शर्मिंदा करवा दिया ......

भगवन शेषनाग के सीष झुकते hi आर्यन हाथ जोड़कर बोलै ," ऐसा अन्याय न करें भगवन, मैंने अपना कर्त्वा निभाया है और बस आदेश करें हमको पाप का भागी न बनाये, आप तोह अन्तर्यामी है आप hi हम सबके प्रभु है और में अदना सा आपका उपासक ".

आर्यन का एक एक स्तब्ध विशाखा को खून के आत्मग्लानि वाले आंसूं भाव रहा था जोह सच्चे पस्चताप के थे..... वह कितनी गलत थी यहाँ तक अपने भगवन को भी मजबूर कर दी घमंड में चूर होकर.

भगवान् शेषनाग के साथ राजा बलि महाराज और असुर गुरूजी भी आर्यन को देखकर मुस्कराने लगे ....... " तोह हम आर्यन को स्वयंवर विजेता घोसित करते हैं और साथ hi साथ प्रभा और विशाखा आज से तुम्हारी भार्या होती हैं. तुम तीनो सदैव खुश रहो और शीर्घ hi नागलोक का वारिस भी दो यह हम सब कामना करते हैं ".

आर्यन एक बार विशाखा का नाम सुनकर चौंका जरूर था पर प्रभा ने अपने बड़े भाई का हाथ पकड़ के दबा दिया...... मेरे लिए मान जाओ न भाई..... आँखों से hi प्लीज प्लीज वाले एक्सप्रेशन देते हुए.

भगवान् शेषनाग हँसते होते बोले," विशाखा जैसी पत्नी मिलना तुम्हारा सौभाग्य है पुत्र आर्यन. वह घमंडी और मगरूर सही पर सिर्फ तुम्ही को दुसरे रूप में भी प्रेम करती है. प्रभा और विशाखा पूरक हैं एक दुसरे की और तुम्हारे जैसे जीवनसाथी का इंतज़ार इन्होने भी हज़ारों साल किया है. हम तोह चाहते hi की तुम दोनों से एक साथ विवाह करो और बाकी नागलोक वालों से पूछ लेते हैं ".

सबने भगवान् शेषनाग के सामने आर्यन की दोनों बहेनो से विवाह का प्रस्ताव दिलो से स्वागत किया......

आर्यन जानता था वह फंस चूका है पर रानी हेमा की आवाज उसके मैं में आयी," विशाखा तुम्हारी बहोत अच्छी भार्या बनेगी पुत्र और नाईटी भी एहि चाहती है. मेरी सलाह मानो हाँ कर दो िश्मे सबकी की भलाई और ख़ुशी है ".

आर्यन ने मैं में hi रानी माँ हेमा का धयानवाद करते हुए भगवन शेषनाग के सामने सर झुका के कहा ," आप की हर इच्छा सर माथे पे भगवन ".

पूरे नागलोक में क्या पतलोक के दुसरे लोकों में हर्ष का ुलास फेल गया........ धीरे धीरे सब नागलोक में प्रकट होने लगे ......

राजा माया ने खुद स्वयंवर के प्रांगण का घंटा बजा आर्यन को विययता घोसित करते हुए अपनी मायावी शक्ति से पूरा प्रांगण एक विशाल विवाह स्थल में बदल दिया ........

विशाखा के प्रतिबिम्ब ने आगे बढ़कर रूट हुए आर्यन के प्यार छुए तोह स्वतः hi उसका फिरसे नाग सरीर मिल गया...... वह अचंभित हुयी वहीँ प्रभा भी हसने लगी ," दीदी 'सरपु' से सच्ची माफ़ी आज मिली है आपको याद आया हो तोह ...... है है है है ..... "

विशाखा को सरीर भगवन शेषनाग से आशीर्वाद के रूप में मिला था. उन्होंने आर्यन को नागलोक की शक्तियां वापस नहीं बल्कि अपनी दोनों नयी भार्या को देने को कहा जब उचित लगे.

सबकुछ सही होता देखकर वहां रानी हेमा भी जब सबके साथ प्रकट हुयी तोह गीता ने आगे बढ़कर आर्यन का गाल कर दिया फिर 2 फिर 3 पर आर्यन ने उसकी खोली भरकर गीता को गले लगा लिया और उसको शांत करने लगा...... गीता उसको गालियां बक रही थी पर आर्यन उसको पुचकारता किश करता शांत करवाता वहां से दीप्ति का हाथ पकड़ के गायब हो गया. वही दानव कन्याओं और दानव रानियों ने किया ......

किसी की कुछ समझ में नहीं आया तब रानी हेमा ने कहा ," आप सब किसका इंतज़ार कर रहे हो विवाह की तयारी करो, मेरा पुत्र आर्यन सही समय में सबको मन के ले आएगा. गीता उसकी पहली भार्या है और उसका यह अधिकार कोई भी चीन नहीं सकता ".

सबको संतोष हुआ की आर्यन नाराज़ होकर नहीं अपनी बाकी भरयों को मानाने के लिया गया है......

विशाखा सर झुका के शर्मिंदा होती ," में सायद वजह हूँ जिसके कारन ऐसा हुआ है ?"

प्रभा उसके गले लगकर ," वजह तोह आप hi हो पर आज हम दोनों को सरपु भी आपकी वजह से मिला है..... आपके हारने में hi हम दोनों के प्रेम की जीत छुपी थी...... hi hi hi hi ...... है न रानी माँ हेमा जी ...... "

रानी हेमा ," जल्दी hi तुम दोनों सवयं समझ जायेगी, हम अपने पुत्र आर्यन की तरफ से विवाह में सम्लित होंगे तोह हमको भी कुछ तयारी का समय चाहिए ".

नागलोक और पतलोक पे चाय खतरा आखिर कर मिट चूका था बस सबको आर्यन के आने का इंतज़ार था.

तो बे कॉन्टिनोएड .......

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अपडेट 38

Part - 8 (ा)

सारे पतलोकों के महाबली एक साथ नागलोक में एकत्रित थे किसी युद्ध के लिए नहीं बल्कि आज विशेष अवसर था जिसका हज़ारों सालों से इंतज़ार था..... मगर वह िश तरह होगा यह किसी ने भी नहीं सोचा था.

भगवान् शेषनाग वापस अंतर्धान हो गए थे स्वंयवर स्थल से तीनो को आशीर्वाद देकर और यहाँ राजमहल में अपने स्थान से खड़े होकर राजा माया ने राजा बलि महाराज से हाथ जोड़कर पुछा ," आप तोह महँ राजा है महाराज, आपके आर्यन पे विश्वास के कारन आज वह सुबह अवसर आया जोह सब लोकों के लिए कलयाण कारी होगा. मेरे एक संसाए अभी भी है की आर्यन जैसा महँ योद्धा न पतलोक में जनम लिया न स्वर्गलोक में? उसको इतना शक्तिशाली होने पे भी किसी शक्ति या सिंघासन या ताज का कोई मोह नहीं यह आशम्भव सा है किसी मानव के लिए ".

राजा बलि महाराज बस मुस्करा भर दिए और जवाब दिया दानव गुरूजी ने ," इश्क उतर में दूँ महाराज ".

उनका इशारा मिलते hi दानव गुरूजी बोले ," आप कई लोगो के मैं यह प्रश्न जरूर होगा. पर ुष से पहले ये जान लो की आर्यन की असली परीक्षा यहाँ नहीं धरतीलोक पे उसके 21 वर्ष के होने पे होगी. आर्यन से कई लोगों के लक्ष जुड़े हुए हैं और वह उन्ह सबको इतना प्रेम और सम्मान करता है की कहने पे भी नहीं रुकेगा चाहे प्राण hi क्यों न चले जाएँ. राजा बलि महाराज ने दिव्या तलवार के बहाने hi आर्यन को यहाँ पतलोक में आने की आज्ञा दी थी मौन स्वीकारती के साथ. हम सबको उससे दुर्र रहने की चेतावनी भी दी गयी नहीं तोह विनाश कर देगा जोह सच्च था..... मगर आर्यन तोह कभी अपनी माँ रतिदेवी से दुर्र आना hi नहीं चाहता था. दिव्या तलवार ने राजकुमारी दीप्ति को माध्यम बांया आर्यन तक वापस जाने का वहीँ हमने उसके मार्ग में अवरोध न लगाने का फैसला लिया".

राजा बलि महाराज ने दानव गुरूजी को हाथ दिखा के रोक के कहा ," बुझी हुयी राख से एक चिंगारी तभई ला सकती है. आर्यन की सोई सख्तियां फिर से जाग न जाये इशलिये हम ने ऐसा किया. आप सब उसको सिर्फ मानव समझ रहे हो मगर मानव उसका एक रूप है फिर विशाखा को हारने के लिए उसने भगवान् शेषनाग तक का रूप जितनी आसानी से धारण किया वह कोई शक्तिशाली नाग भी कभी नहीं कर पायेगा. उसकी शक्तियां धारण करने और युद्ध कौसल से तोह अब कोई भी यहाँ अनभिग नहीं है. हमने सिर्फ उसका मार्ग दर्शन किया आगे वह कितना सक्छम है उसकी था लेना मुश्किल है".

सब को आर्यन के पतलोक में युद्ध याद गया जैसे वह जीतने के लिए hi बना हो.

राजा वासुकि ने अपना तर्क रखा ," फिर विशाखा क्यों इतना उसको ललकार के तभई के लिए ामिन्त्रित कर रही थी जबकि दिव्या तलवार से तोह वह पल भर में जीत जाता".

राजा बलि महाराज गर्व से बोले," एहि फरक है ुष में और पतलोक के योद्धाओं में..... आर्यन को दिव्या तलवार धारण करने से रोका उसके बड़े गुरूजी ने, विशाखा को मारने से रोका प्रभा ने और सब बड़ों की बात मान लेना स्वयं रानी हेमा ने अधिकार जाता कर किया, जोह उसको पुत्र की तरह मानती है. आर्यन को बाँध के रखना वह भी प्रेम से उसकी शक्तियां या जीतने की युक्तियाँ घटता नहीं बढ़ता है ".

नागदंश जोह बहोत डिअर से सुन्न रहा था हाथ जोड़कर पुछा ," मुझे जीवनदान भी आर्यन ने क्यों दिया जबकि में तोह उनको मारना चाहता था. मगर मुझे वापस लाना तोह आशम्भव hi था न दानव गुरूजी ".

दानव गुरूजी ," प्रभा के लिए क्यूंकि तुम उसके बड़े भाई लगते हो, उसकी शक्तियां कितनी है यह हम सब भी समझने में अश्मर्थ है, जल्दी hi वह अवसर भी आएगा जोह हम सबको विषमित कर सकता है. आर्यन को उसकी मातों और बहेनो ने अपने प्रेम से सींचा है ताकि वह क्रोध न करे. वह सब आजतक ऐसे करने में सफल भी रही हैं और यहाँ भी कई भार्या और रानी हेमा सफल हुयी. जल्दी hi कई लोकों को उनका भावी राजा या रानी मिलेगी जोह अपने लोकों को शक्तिशाली बनेगे ".

राजा वासुकि ने चिंतिंत होते हुए कहा," जब आर्यन hi नागलोक की शक्तियां धारण नहीं करना चाहता तोह यहाँ के सिंघासन को कैसे संभालेगा. हमको अभी भी विशाखा के लिए संदेह है की वह आर्यन से विवाह के उपरान्त कैसा वाहवार करेगी ?"...... उनकी बात का सार सब समझ रहे थे की मिलान कैसे करेगी ..... तभी जानीमानी आवाज गुंजी .....

"जोह पतिव्रता स्त्री करती है अपने पति का सम्मान और सेवा वही कार्य विशाखा भी करेगी महाराज, अभी तक आप ने आर्यन को युद्ध स्थलों में युद्ध लड़ते hi देखा है. उसके पास एक ऐसी शक्ति भी जनम जाट है की हर नारी बस उसके प्रेम में बंधे रहना चाहती है. क्यों पति महाराज मैंने कुछ गलत तोह नहीं कहा ?"....... यह थी रानी हेमा जोह अपनी दासियों के साथ उपहार लेकर विवाह प्रस्ताव पूरा करने आयी थी आर्यन की माँ बनकर.

राजा माया भी तत्काल रानी हेमा का इशारा समझ गए और खांसते हुए राजा वासुकि को बोले ," आप विवाह की तयारी करिये, आर्यन आपकी कोई बात नहीं टलेगा ऐसा हम जरूर कह सकते हैं. बाकी बातें में आपको विवाह समारोह में अवगत करवा दूंगा".......

राजा माया अपनी दो बड़ी पुत्रियों ( साया चाय ) के अल्वा दो अटाला लोक की रानियों ( पुष्पलता और कामलता) का आर्यन से प्रेम सम्बन्ध सबके सामने साजा नहीं करना चाहते थे .......

रानी पुष्पलता की तरह राजा माया और राजा वासुकि भी आर्यन को अपने अपने सिंघासन पे बैठना चाहते थे आखिर अब आर्यन के अंदर दानवी और नाग शक्तियां थी पर आर्यन तोह पहले hi इंकार कर चूका था परन्तु सिंघासन पे बैठे किसी भी राजा या रानी का अंगरक्षक बनने के लिए वह त्यार था.

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गीता का गुस्सा पहात पड़ा था आर्यन पे तब वह अपनी मायावी शक्ति से उसको दीप्ति के साथ गायब करके राजकुमारी माया के बनाये दीप्ति के जैसे महल में प्रकट हुआ.

गीता उसकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी गाली देती हुयी ," हरामी तू कभी नहीं सुधेरगा, छोड़ कुत्ते नहीं तोह तेरा लुंड काट के तेरी गांड में घुसेड़ दूंगी..... साले मुझे हाथ मत लगा नहीं तोह जान से मार दूंगी..... अह्ह्ह्हह छोड़ मुझे तेरी साड़ी गांडू गर्दी निकाल दूंगी ...... " थप्पड़ घूसों के साथ वह प्यार से किक भी मारती आर्यन को जोह उसको बार बार जकड लेता मार खाते हुए और गीता का गाल और होंठ भी चूम लेता......

दीप्ति जोह िश कक्ष को देख के हैरान थी की यह हम क्या मेरे सही कक्ष में अलवर , राजस्थान आ गए क्या ? नहीं यह तोह पतलोक का कोई लोक है पर ऐसा किसने किया बिलकुल सजावट से लेकर एक एक चीज शामे है ......? बहोत डिअर सोचने के बाद......

उसका ध्यान गीता की सिसकारियों से टूटा ," सीईईई अह्हह्ह्ह्ह ढेरी दबा न ..... हुम्म्म्मम्म पुछःह पुछःह ..... में तड़प रही थी ..... पुछःह पुछःह ..... ारयणणणणणण क्या उखड hi देगा मेरे चूतड़. ..... अह्ह्ह्हह्हह ".

5 मं में hi सन एक्शन से रोमांटिकल्ल्य हॉट[img=22x0] हो चूका था..... क्या जादू किया था प्रेम से.....

गीता आर्यन की कमर में अपनी टांगों की कैंची मार के उसको गीली गीली किसी देती अपनी मस्त गांड हवा में हिलती आर्यन के खड़े होते लिंग पे अपनी योनि रगड़ती वस्त्रों के ऊपर से hi प्रेम पिपासा का मज़ा ले रही थी.

दीप्ति भी अब मुस्करा के अपनी हंसकाल भें की नौटंकी समझने लगी थी की िंह दोनों का बचपन से प्यार हमेशा मार पिटाई से सुरु होगा फिर रोमांस में बिलकुल बेशर्मो की तरह कहीं भी चालू हो जायेंगे तब पूरा .

दीप्ति को अपने कंधे पे रानी पुष्पलता का हाथ महसूस हुआ तोह बाकी 5 भी आर्यन- गीता को देख रहे थे ..... आर्यन ने गीता के चूतड़ से अपना देना हाथ दिखा के सबको बहार जाने का इशारा किया पर गीता को कुछ कमी लगी तोह अपने हाथ से उसका हाथ पकड़ फिर अपने चूतड़ पे रख के जोरसे किसी करने लगी ......

सबको गीता जैसा प्यार आर्यन को करना था पर 7ों जानती थी पटरानी का दिल भर जायेगा तब उनका नंबर आएगा. सब दीप्ति के साथ बहार निकल गयी की गीता का गुस्सा शांत करना जरूरी है तभी सबको अपने हिस्से का प्रेम मिलेगा.

आर्यन आगे चलता हुआ गीता को आलीशान सही पलग पे लिटाता ुष्पर पूरा चाहा गया...... गीता की योनि पहले hi गंगा जमुना बहा रही थी और आर्यन के लुंड 'तोपची' की रगड़ जैसे कामविहाल hi कर दी ......

कुछ समय में दोनों मादरजात नंगे होकर एक दुसरे के जननांगो से लबों को भिड़ाये अपना अपना अधिकार दिखा रहे थे यह मेरा है और यह मेरी है....... युद्ध के बाद अब अपनी ऊर्जा वापस पाटा आर्यन अपनी नौसिखिया प्रेमिका गीता की योनि से 3 बार पिघला हुआ माखन निकाल लिया था 10 मं में ...... हर चरमोत्कर्ष के बाद गीता मुख से तोपची को निकल जोरसे चीखती अह्हह्ह्ह्ह माआआआ बचाना ..... चाटट्ट्ट सारायआ रससससससस ...... सीईईई ारयणणणण में गयी ...... फिर सांस साइट करती मोटा कश्मीरी सेब जैसा टोपा फिर से मोह में लेकर चाटने चूसने लगती ........ गीता का वही डायलॉग " मेरा है..... पुछःह पुछःह सलरपप सलरपपपपप ..... "

आर्यन भी गीता को थका देना चाहता था तोह उसके तीसरे बार झड़ते hi अब गीता को उठा के अपने ऊपर लिटा उसकी जांघो के बिच तोपची रखकर उसकी योनि अपने मोठे रोड से रगड़ने के साथ दोनों सुडोल कसरती स्तनों को पीने लगा चूचक से जीभ से अठखेली करता ......

गीता तोह जैसे होश में hi कहाँ थी उसकी कामवासना 'बियॉन्ड थिस वर्ल्ड' थी और जब प्रेमी आर्यन जैसे कामग्रंथ और कामशास्त्रों से पीएचडी पास तोह बिचारि हिस्टीरिया में चली गयी ...... 2 बार और आर्यन का लुंड गीला करके वह पास्ट हो गयी जैसे लाश आर्यन के ऊपर लेती हो.......

आर्यन ने मानसिक संपर्क कर रानी पुष्पलता से दीप्ति को कक्ष में भेजने को कहा......

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दीप्ति जब अपनी 6 दानवी सौतनों के साथ कक्ष से बहार गयी तोह उसका पहला परशान था यह अलवर जैसा हमारा महल यहाँ किसने बनाया ?

रानी कामलता ," खुद सोचो दीप्ति कौन हम में से तुम्हारी जैसी सोच और ख्याल रखती है ?"

दीप्ति ने मुस्करा के ," फिर तोह माया का hi काम है, में एक बार तोह हैरान रह गयी थी पर यहाँ की सुगंध और धरतीलोक की अलग अलग है इशलिये समझ पायी. वैसे माया तुम तोह इश्से सूंदर महल बना सकती थी ?"

माया भी नज़र उठा के दीप्ति को देखि जैसे उसने चोरी की थी. दीप्ति ने उसका हाथ थामा तोह बोली," में आपकी तरह hi बनना चाहती थी राजकुमारी जी और मुझे आपसे अच्छा कोई नहीं लगा था वहां धरतीलोक पे. आपकी तरह hi उनको प्रेम और सेवा करना चाहती थी अगर गलत लगे तोह माफ़ कर देना अपनी दासी को ".

दीप्ति दिलदार लड़की थी, माया को अपने गले लगा के बोली," अधिकार जोह रखते हैं वह सर झुका के नहीं सर उठा के बात करते हैं. माया तुम भी हमारी भें जैसी हो जैसे गीता दीदी, तोह नाम से बुलाया करो और मुझे तुम्हारा महल अपने से भी ज्यादा सूंदर लगा".

रानी पुष्पलता- कामलता - स्वर्णलता तीनो बस Geeta-Deepti की तुलना कर रहे थे की दोनों एक जैसी हैं मगर वह जहर भुजी तलवार है तोह यह एक मजबूत ढाल. दीप्ति को पसंद न करने वाला आज तक कोई धरतीलोक पे पैदा न हुआ यही हाल पतलोक का था जोह उससे मिलता उसकी प्रसंशा करता और गीता से दुर्र रहने में अपनी भलाई......

गीता की तेज सिसकारियां सबके अंदर खलबली मचने लगी तोह दीप्ति ने दरवाजा शील्ड करके सबको महल घूमने को कहा...... बाकी सब भी उसकी भावना समझते हुए साथ हो ली. दीप्ति ने बहोत कुछ बतया आर्यन और उसके परिवार और अपने प्रेम के बारे में.

आखिर पुष्पलता ने कहा ," दीप्ति हम धरतीलोक अगर आएंगे तोह सिर्फ तुमसे मिलने, तुम पहली मानव स्त्री हो जिसने हमारा भी दिल जीत लिया. बस हमारी िंह दोनों लाड़ली छोटी स्वर्णलता और माया का ध्यान रखना यह वहां आती जाती रहेंगी आखिर विधिवत दोनों आर्यन की भार्या हैं ".

कामलता जोश में ," में तोह सिर्फ आर्यन से मिलने जाया करुँगी ..... ". उसका हाथ पुष्पलता ने दबाया की यथाशित होकर कुछ मत बोल.

दीप्ति भी मुस्करा के ," आप कभी भी किसी से मिलने आ सकती हैं रानी कामलता आपको कौन रोक सकता है और रानी जी माफ़ करना छोटा मुँह बड़ी बात पर विधिवत आप सामाजिक रीतियों से कह सकती हैं पर दिलसे माहि से विवाह तोह आप चरों भी कर चुकी हैं और आपने प्रेम किया है कोई जुर्म नहीं. आपका प्रेम आपकी ताकत होता है ना की कमजोरी और अपनों के बिच तोह खुलकर पक्ष रखना चाहिए ".

कामलता ," तुम ठीक कहती हो दीप्ति, हम सब आर्यन से बराबर प्रेम करती हैं पर भार्या का हक़ समाज देता है और प्रेम करने का हक़ हम खुद के लिए रखते हैं. दीदी पे अटाला लोक की जिम्मेवारी है और हम पे उसकी रक्षा की तोह हम तीनो बहेनो ने फैसला किया की छोटी भें स्वर्णलता की आँखों से हम भी प्रेम और सुख का सपना पूरा कर लेंगे आर्यन की बनकर. वही फैसला Saya-Chaya ने भी किया माया का आर्यन से विवाह करा के. बस हम इतना चाहते हैं की आर्यन कभी कभी यहाँ आता रहे यह गीता को तुम समझा सकती हो ".

दीप्ति भी हसने लगी ," आप सायद गीता दीदी से डर रही हैं पर जैसी वह दिखती हैं वैसी है नहीं. बिलकुल नारियल जैसी बहार से कठोर अंदर से बहोत नरम. बस गुस्सा जल्दी आता है उन्हें वार्ना उनका दिल बहोत विशाल है वह माहि को कभी नहीं रोकेंगी बल्कि जल्दी जल्दी यहाँ भेजेंगी. लेकिन हम अभी भी Prabha-Vishaka की बात क्यों नहीं कर रहे आखिर दोनों को स्वयंवर में जीता है माहि ने जैसे मुझे जीता था. आज उनकी खुसी का दिन है ".

साया गुस्से से ," प्रभा फिर भूल कर रही राजकुमारी दीप्ति ,विशाखा कभी नहीं सुधर सकती और आर्यन ने भी विवाह के लिए मन नहीं किया यह मुझे अच्छा नहीं लगा ".

चाय," वह काली शक्तियों वाली नागिन है उसका साया भी किसीको नुक्सान पहुंचा सकता है ".

दीप्ति ने स्वर्णलता और माया की तरफ देखा तोह दोनों कुछ नहीं बोली पर कामलता ने आगे बात जोड़ी ," विशाखा महँ योद्धा है िश्मे किसी को साख नहीं है पर आर्यन ने उसको हरा के उसका घमंड चकना चूर किया है. अब वह उसकी जीती हुयी मादा नागिन है तोह वह वफादारी नहीं तोड़ेगी. नागिन अपने स्वामी के लिए जान दे देगी पर उससे कभी देगा नहीं करेगी क्यों दीदी?"

रानी पुष्पलता ने एक घेरि सांस लेकर बारी बारी सबको देखा फिर कुछ पल बाद छुपी तोड़ी," विशाखा का जनम एक उदेश्ये के लिए हुआ है और वह अब जल्दी hi अपना जीवन सफल करेगी ".

तभी आर्यन की आवाज मैं में सुनाई दी की दीप्ति को कक्ष में भेजो ......

रानी पुष्पलता मुस्कराती हुयी," जाओ दीप्ति तुम्हारे प्रीतम 'माहि' ने तुमको याद किया है "....... hi hi hi hi ......

सब आगे विशाखा का उद्देश्य जाने की इच्छुक थी किन्तु आर्यन का दीप्ति के लिए बुलावा सबकी दिल की धड़कन बढ़ा दिया.....

दीप्ति शर्मा के ," क्या रानी दीदी आप भी हमारा उपहास उदा रही हैं, उनके नाम से "......

रानी पुष्पलता ," अरे में सच्च hi कह रही हूँ. आर्यन ने तुमको कक्ष में बुलाया है शीर्घ जाओ वार्ना यह कामु चली गयी तोह किसी को मिलने का अवसर नहीं देगी ....... "

उसका संजीदा वाकया अब दीप्ति को भी सीरियस कर दिया ," में अभी मिलकर आती हूँ "...... वह जाने लगी तोह पुष्पलता और कामलता हसने लगी और बाकी चरों जिज्ञासा से पुष्पलता को देखने लगी.

"परेशां न हो अपने प्रेम पे भरोसा रखो जल्दी hi तुम्हारा बुलवा भी आएगा"..... पुष्पलता की बात सुनकर सबके दिल कुलचे मारने लगे.

कामलता ने पुछा ," दीदी कहीं आप ुष उद्देश्ये की बात तोह नहीं कर रही थी?"

पुष्पलता ," हाँ कामु जल्दी hi विशाखा चाहेगी तोह पतलोक के नए महाराज को जनम देगी जोह पूरे लोकों का स्वामी होगा ".

स्वर्णलता अधीरता से ," अगर मादा शिशु जन्मी तब क्या होगा दीदी ?"

पुष्पलता ," भगवान् शेषनाग का आशीर्वाद विशाखा को इसी उद्देश्ये के लिए जनम के समय मिला था आधी नाग्शक्ति के साथ और आधी प्रभा को मिली थी और पूर्ण नाग्शक्ति जब बनेगी तोह विशाखा के पैदा किये पुत्र को मिलेगी जोह महाबली और पराकर्मी होगा. पुत्री होगी तोह प्रभा उसको जनम देगी मगर नाग्शक्ति उसको आधी hi प्राप्त होगी आधी उसकी माँ यानी प्रभा के पास रहेगी ".

माया ने थोड़ा झिझकते हुए पुछा," अगर दोनों हुए यानी पुत्र और पुत्री विशाखा और प्रभा ने दोनों को जनम दिया ?"

रानी पुष्पलता हसकर ," फिर दोनों को आधी आधी मिलेगी और दोनों एक दुसरे के पूरक होंगे अपनी माओं की तरह ".

कामलता थोड़े उन्माद से ," अब मुझे समझ आ रहा है क्यों आर्यन के पास पूरी नाग्शक्ति है ताकि वह उसको दोनों या एक शैतान में दाल सके. यानी आर्यन सिर्फ माध्यम है नाग्शक्ति को संरक्ष कर वरदान को पूरा करने का ".

पुष्पलता ," हाँ तुम कुछ हद तक ठीक कह रही हो और तुम दोनों को भी जल्दी गर्भ धारण करना चाहिए, समझी स्वर्ण और माया फिर आर्यन जल्दी यहाँ से वापस धरतीलोक जायेगा इशलिये अधिक समय उसके साथ बिताया और हमारा वक्त भी तुम उससे लेना".

दोनों शर्मा के भाग गयी तोह कामलता ने कहा ," दीदी हम भी तोह आर्यन के लिए तड़पते हैं हमारा वक्त भी उनको दे दिया आपने "..... एहि शिकियत Saya-Chaya की थी .

पुष्पलता ," उनका उद्देश्ये भी वही है जोह विशाखा का है फिर बच्चों की किलकारी हम चरों भी सुन्ना चाहेगी. कुछ पाने के लिए त्याग करना पड़ता है कामु और क्या हमारा मैं नहीं करता. बस यह समय अभी हम सबकी परीक्षा लेगा और आर्यन मिलने नहीं आया तोह तुम सब धरतीलोक चली जाना ".

साया ," महारानी आप ठीक hi कह रही हैं और यह फैसला तोह हम चरों का था की हमारी छोटी बहेनो से hi हमारी नियति बंधी है ".

उधर स्वर्ण और माया एक दुसरे को चिढ़ाती स्वर्ण के कक्ष में आर्यन से मिलान का इंतज़ार कर रही थी अच्छे से त्यार होती हुयी, आखिर उनका पिया स्वयंवर में युद्ध जीत के आया है.... आज पूरा प्रेम देकर खुश करना हमारा भी कर्तव्य है..... ऐसे गाने दोनों के दिलों में बज रहे थे ......

" मेरा पिया घर आया ओह रामजी .....

मेरा पिया घर आया ओह रामजी...... "

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दीप्ति अपनी hi शील्ड हटा के आहिस्ता से कक्ष का दरवाजा खोली तोह सामने बीएड पे गीता आंधी नंगी पड़ी थी ......

तभी पीछे आये अपनी तरफ बढ़ते हाथ को उसने दोनों हाथों में थाम के झट से धोबी पात लगा के अपने सामने निच्चे पटक दिया ुष सख्स जोह आर्यन था..... अपनी कटरी से उसकी गर्दन hi उदा देती अगर समय पे अह्ह्ह्ह दीप्ति न बोलता ......

अपनी गलती का अहसास होते hi कटरी फ़ेंक आर्यन के पास बैठकर सॉरी बोलती उसको उठाने लगी ," सॉरी महीईई ..... ी म एक्सट्रेमेली सॉरी में समझी कोई और है..... आपकी गंध नहीं कुछ कसेली से गंध महसूस हुयी मुझे ...... माफ़ कर दीजिये ..... प्लीज ...... "

आर्यन पहले गीता से मार खाया अब उसकी दूसरी होने वाली बीवी ,दीप्ति, ने धोबी पात लगा दिया ...... बिलकुल नंग धडंग कहाँ दीप्ति को दरवाजे के पीछे छिपकर सरप्राइज देने वाला था कहाँ खड़े लुंड की उत्तेजना में दीप्ति ने दे पटका ..... वह तोह अच्छा हुआ पीठ के बल गिरा वार्ना आज 'तोपची' का राम नाम सत्य हो जाता और अपनी साड़ी बीवियों और लुगायिओं के लिए गंड़वा ...... [img=22x0]

आर्यन सीधा बैठता हुआ," कितनी ताकत है यार तुम में, इतनी जोर से पटका जैसे में बोरा हूँ .... अह्ह्ह्हह पहले नाहा लेता हूँ वार्ना अब क्या कर दो पास आने पे...... "

गीता तोह धप्प की तेज आवाज से उठ गयी और अब आर्यन की हालत देखकर जोरसे हसने लगइईईई ," है है है है ...... वह मेरी शेरनी तू ने सही बदला लिया, साला हमको रगड़ता रहता है ....... अबे ऐसे क्यों चल रहा है कहीं गांड मरवा के आया है क्या ..... है है है है है ...... "

आर्यन बस खीजता सा गीता को आंखें दिखता स्नानगृह में घुस गया वहीँ दीप्ति तोह आर्यन को गलती से पटक कर रोआवसी से हो गयी ......

गीता भी हस्ते हुए दीप्ति को देखकर बोली," वेल दोने दीप्ति, सही किया साला विशाखा से शादी करेगा आने दे बहार दोनों मिलकर कूटेंगे हरामी को ".

दीप्ति बीएड के पास आकर ," सॉरी दीदी मैंने जान कर नहीं किया, मुझसे गलती हो गयी उन्हे से किसी नाग की गंध आ रही थी तोह मुझे लगा कोई कक्ष में घुस आया है ".

गीता ," अरे टेंशन मत ले मुझे बिलकुल बुरा नहीं लगा, तू ने सही किया. िश्मे दुखी होने वाली क्या बात है ".

दीप्ति सच्च में रू दी ," मैंने ुनःपर हाथ उठाया न दीदी में कितनी बुरी हूँ, मुझे सजा दीजिये आप और वह दोनों मिलकर ".

गीता अपने सर में हाथ मार कर यह लड़की किस मिटटी की बानी है, थोड़े मजे लेती हूँ ," देख गलती तोह तू ने की है चल मैंने माफ़ किया अब जाकर उसको देख कही चोट तोह नहीं लगी.... चाल भी बदल गयी थी उसकी .... "

दीप्ति भी झट से कड़ी होकर जाने लगी तोह गीता बोली ," ऐसे जाएगी उसको देखने, अरे वह नंगा था तू भी कपडे उतर के जा माफ़ी जल्दी मिल जाएगी थोड़ा खुश कर देना, मर्द है सोच तोह सालों की लौड़े में hi होती ....... hi hi hi hi hi ...... "

दीप्ति रूट हुए भी शॉकेड थी गीता की बातें सुनकर पर आर्यन की चिंता में स्नानगृह में प्रवेश की तोह आर्यन एक बड़ी हौज वाले सही बाथटब में उसकी तरफ कमर लगये पानी से नाहा रहा था ......

दीप्ति की हिम्मत नहीं हो रही थी अपने कीर्त्यै के बाद पर गीता की बात याद करते hi वह पहले ढेरी से स्नानगृह का द्वार बांध की फिर अपने कपडे उतर के सिर्फ उन्देर्गर्मेन्ट्स में आर्यन की तरफ बढ़ी.....

ब्लैक ब्रा पंतय में दीप्ति सकुचाते अपरध बोध से आर्यन की तरफ बढ़कर निच्चे घुटनो पे बैठकर आर्यन के सीधे कंधे पे हाथ रखती की आर्यन ने पलट के दोनों हाथ उसकी कमर में दाल के हौज में खींच के अपनी गॉड में बिठा लिया सेकंडों में..... दीप्ति शॉकेड रह गयी ......

वहीँ आर्यन ने पहला उसका चेहरा अपने गीले हाथों से साफ़ करता बोलै," मुझे कुछ नहीं हुआ है, यह आंसूं क्यों बेहये जब में बिलकुल ठीक हूँ. हाँ गलती मेरी थी मुझे नाहा के तुमको पकड़ना था. मुझे अच्छा लगा की तुम मेरी गंध तक सूंघ के पहचान जाती हो ".

दीप्ति झट से आर्यन के सीने में मुँह छुपा के उसकी गर्दन में हाथ दाल के बोली," ी म सॉरी मुझे बहोत बुरा लग रहा है प्लीज ".....

आर्यन ने उसको कूल्हों से पकड़ के अपने आगोश में अपने लुंड पे बिठा लिया जोह उसकी पेंटी पे दस्तक दे रहा था..... " बस मेरी आगोश में रहो तुमको अच्छा लगी मेरी जान"...... पुछःह पुछःह ..... उसका माथा और सर चूमने लगा .....

दीप्ति भी जोरसे उसके आलिंगन में बहोत सेफ और खुस महसूस करने लगी ...... ठन्डे पानी में भी तापमान बढ़ने लगा ," यह कभी मत सोचना में तुमसे कभी नाराज़ हो सकता हूँ, तुम मेरे दिल की धड़कन हो और अपनी धड़कन से नाराजगी के बाद आप खुद जीना नहीं चाहोगे जबकि में हमेशा तुमको अपने में समेटे रखना चाहता हूँ ".

दीप्ति को आर्यन का खड़ा शाक्त डंडा गरम करके उसको द्रवित करने लगा और वह खुद आर्यन के सख्त सीने पे अपनी कोमल चूचियां ब्रा में hi रगड़ते हुए उसकी गर्दन और चीन चूमने लगी......

आर्यन ने दीप्ति की कमर सेहला के पुछा ," नहाना है मेरे साथ ?"

दीप्ति ने गर्दन हिला कर कहा ," हाँ ".

आर्यन ने प्यार से उसकी ब्रा का हुक खोला तोह दीप्ति खुद अपनी कमर उठा के पेंटी निकलने लगी. आर्यन मैं hi मैं हसने लगा की नहाने के लिए पेंटी उतरने की क्या जरुरत है पर अपनी प्यारी मंगेतर को और परेशां नहीं करना चाहता इशलिये चुप रहा ......

आर्यन ने ब्रा उतर के हौज के साइड में राखी और दीप्ति ने अपनी पेंटी भी वहां रखकर अब आर्यन की दोनों जांघो के साइड अपने घुटने रखकर उसके लेवल तक सामे से उसकी खोली भर के बोली ," प्लीज लव में माहि ी वांट तो फील यू माय डार्लिंग ".

दीप्ति ने आज बहोत हिम्मत करके अपनी बेकरारी बताई वह भी इंग्लिश में ...... दोनों की नीली आँखों में एक दुसरे को दिल का पैगाम दे दिया और होंठो से होंठ उलझे, सीने से चाहतियाँ, दोनों थाम के एक दुसरे के चूतड़ को छूट पे लौड़ा घिसने लगे....... सीने तक पानी दोनों के गुप्तांगो को परदेसी आवरण देता योंकिरदा छुपाने की नाकाम कोशिश करता परतीत होता ......

"उम्मंहहहहह चुम्म्म्म्म चुम्म्म्म ...... पुछःह पुछःह ...... अह्हह्ह्ह्ह महीईईई ...... ी लोवीएएएए ोुउउउउउ ...... "...... दीप्ति की सिसकियाँ और खुसी गीता के कान में पड़ी तोह मुस्करा उठी जल्दी hi मन ली चलो अच्छा है पर विशाखा की कंचुली उतरनी पड़ेगी यह लँडूर बस चूचियों का रसिया है और उसके पास तोह हैं भी 6-6 और हाथ भी साली के 6 हैं, िश बेवकूफ को बिस्टेर में लेकर कहीं जाने hi नहीं देगी. चलो तुम दोनों मस्ती करो में उन्ह दानवी की सेना को पकड़ती हूँ ....... गीता मैं hi मैं खुद hi फैसला कर अपने कपडे उठा के बड़ा कपडा अपने बदन पे लपेट दुसरे कक्ष में रेडी होने चली गयी.

दीप्ति अपनी कमर को तेजी से ऊपर निचे करती आर्यन के मुसल पे अपनी छूट की पतली लकीर को घिस घिसकर अपनी चूचियां चुस्वाति अपना पिछवाड़ा मसलवा रही थी उसके कठोर हाथों से ...... घुड़सवारी से भी ज्यादा मजा था बस अंदर कब जायेगा इश्क इंतज़ार बहोत भरी होता जा रहा था ..... 2 बार झड़ने के बाद जब रुकी तोह उसकी चूचियां जितनी ढीली आर्यन ने की थी फिर से तन्न गयी, थकान हुयी पर संतुस्ती अब भी नहीं ......

आर्यन के लुंड से पीछे हटकर उसने घेरि सांस ली और हौज के पानी में उसका मोटा टोपा मुँह खोल के 15 सेक् चूसी फिर बहार आयी..... तोह खुद hi हसने लगी तोह आर्यन भी हसने लगा .....

आर्यन ने उसके चेहरे से बाल हटा के उसका गाल सेहला के कहा," चलो पहले नहाते हैं फिर बिस्टेर पे आराम से प्यार करेंगे "......

दीप्ति का मैं नहीं था पर गीता का नाम लेकर वह कोई भेद भाव नहीं करना चाहती थी आखिर उसकी बड़ी दीदी है उनकी वजह से hi वह अपने प्रेमी की बाँहों में है.

दोनों रगड़ रगड़ के एक दुसरे के साथ हसी मजाक करते हुए नहाये ...... माया ने अच्छा सर्वे किया था दीप्ति के महल का बिलकुल डिक्टदिट बांया था, दीप्ति को ऐसा लगा की वह अपने राजकुमारी वाले कक्ष के स्नेह्गढ़ में है. दीप्ति अब आर्यन का खुलकर साथ देती थी अंतरंग पलों में जोह दोनों का प्रेम और प्रगाढ़ करता.

दीप्ति को दो बार ओरल सटिस्फैक्शन देकर जब आर्यन सीधा लेता था और दीप्ति उसके ऊपर बैठी थोड़ा झुकी हुयी उसके कान से खेल रही थी तोह एक सवाल की ," आपको नहीं लगता हम सेल्फिश हैं जोह कुढ़ तोह सटिस्फैक्शन लेकर आपको अधूरा छोड़ देते हैं ?"

आर्यन ने हसकर उसकी नाक पकड़ के हिलायी ," चिंता मत करो पूरा हिसाब लूंगा और मुझे आदत है तुमको पहले hi बता चूका हूँ सब अपने बारे में. हमारे स्पेशल मोमेंट्स हमको खुशियां देते हैं अच्छी यादें भी तोह क्यों दूसरों से कपरिसों करें".

दीप्ति समझते हुए आर्यन के ऊपर फ्लैट होकर बोली ," विशाखा के लिए आपने दीदी से पूछे बगैर हाँ कर दी ".

आर्यन समझ गया बोल दीप्ति के हैं और सवाल गीता का hi है ," में प्रभा के लिए कुछ भी कर सकता हूँ और विशाखा उसकी खुसी की चाबी, मेरी भें खुश रहे ऐसे एक क्या में सैकड़ों विशाखा से विवाह कर सकता हूँ ".

दीप्ति ," नहीं नहीं वह बात नहीं कर रही माहि ...... बात यह है विशाखा हम सबके साथ एडजस्ट हो पायेगी".

आर्यन ने दीप्ति का गाल चाट के कहा ," आये मेरी प्यारी डार्लिंग दीप्ति यह उसका टेंशन है उसको फुटबॉल टीम में ज्वाइन करना है की नहीं हम क्यों टेंशन लें और टीम पहले से पूरी है वह सिर्फ अस ा एक्स्ट्रा ज्वाइन कर सकती है. गीता की तुम टेंशन मत लो में उसको मन लूंगा अब अपनी टेंशन बोलो ".

दीप्ति ," नहीं नहीं मुझे कुछ नहीं पूछना, आप बेफिक्र रहिये ..... मुझे अपने माहि पे पूर्ण विश्वास है ".

आर्यन मुस्कराने लगा और उसकी नाक से नाक रगड़ के बोलै," हम में कुछ छुपा नहीं है दीप्ति जोह हमारे बिच कोई दीवार खड़ा करे और भले hi प्रभा अलग है विशाखा से मगर हैं दोनों एक सिक्के के दो पहलु जल्दी hi तुम भी समझ जायेगी और तुम सबकी परमिशन नहीं होगी तोह में उशसे विवाह नहीं करूँगा चाहे अब भगवन रूठ जाएँ या पूरा संसार अब खुश".

दीप्ति ने आर्यन के चेहरे पे चुम्बनों की बरात कर दी जैसे बहोत बड़ी पहली हल कर दी हो. आर्यन भी जानता था यह सब कभी मानेगी नहीं, सिर्फ प्रभा hi इनको राजी करेगी....... मुझे माफ़ कर देना भगवन शेषनाग [img=22x0]

तो बे कॉन्टिनोएड.......

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अपडेट 38

Part-8(B)

दीप्ति को अपने ऊपर लिटा के प्यार से सुला के आर्यन जब कक्ष से बहार आया तोह पुष्पलता ने उसको मानसिक संपर्क कर स्वर्ण के कक्ष में जाने को कहा.....

आर्यन भी स्वर्ण से मिलना चाहता था तोह कक्ष के प्रवेश द्वार पे दो दासियों ने खड़े होकर उसका अभिवादन किया और द्वार खोल के पीछे हैट गयी ...... आर्यन को एक बड़ा पूजा का थाल लिए स्वर्ण साझी धजी नज़र आयी और उसके बगल में माया भी अप्सरा लग रही थी. दोनों आर्यन को बहोत पसंद थी, योनि से दानव hi सही पर गुण दोनों में एक प्यारी इनोसेंट लड़की जैसे hi थे. आर्यन का लगाव इनके लिए बढ़ता hi जा रहा जिस्मानी सुख से ऊपर दिल में उतर गयी थी दोनों जोह पतलोक के लिए अच्छा संकेत नहीं था. दोनों की प्रसव के बाद मिर्त्यु तय थी और आर्यन ुष समय क्या करेगा इश्क जवाब भविष्य में छुपा था???

आर्यन तो पहले hi Geeta-Deepti की वजह से अभी तक उत्तेजित था पर अब सही जगह उसका तोपची आराम पाने वाला था वह भी एक नहीं उसकी 2-2 भार्या के अंदर ..... "अँधा क्या चाहे दो आँख" .....

माया ने स्वर्णलता को बतया था की आर्यन की माँ रतिदेवी या डॉ अंजू, पूजा की थाल से उनका (आर्यन) स्वागत करती है जब वह जीतकर आता है ..... हम दोनों भी ऐसा hi करेंगी क्यों दीदी ...... आर्यन दोनों के बेजोड़ सुंदरता में खोया हुआ आगे बढ़ने लगा तोह माया बोली," प्राणनाथ हमको आपकी विजय की खुसी में ारता तोह करने दीजिये ".

आर्यन अब पूजा थाल को देखकर रुक गया और हाथ जोड़कर खड़ा हुआ. माया, स्वर्ण को विधि बताती गयी और उसने तिलक से लेकर वार फेर के बाद मिठाई खिलने की सब रस्मे निभाई वही फिर माया ने किया ...... आर्यन सोचा पहले माया करती तोह स्वर्ण को समझने में वक़्त न लगता और मेरा लुंड दुःख रहा है दोनों के हुस्न देखर.

दोनों ने पेअर चुहये तोह आर्यन ने आशीर्वाद की जगह दोनों को निच्चे झुकार गॉड में उठा के अपने दोनों साइड लगा के चूम लिया ," पूछ पूछह ..... अब में नहीं रुक सकता , अब अपना असली पतिधर्म निभाने का समय है "..... फिर अपनी लोटस शील्ड से कक्ष को कवर कर अपनी दोनों पतलोक की बीवियों के अंदर 2 घंटे से ज्यादा कामक्रीडया के बाद उसका तोपची 1-1 बार प्रसाद देकर शांत हुआ जबकि दोनों अनगिनत बार प्रेमसुख पाकर घेरि निंद्रा में चली गयी.

आर्यन अब फ्रेश होकर त्यार हो दोनों का माथा चूमकर कक्ष से बहार आकर सीधा रानी पुष्पलता के कक्ष में पहुंचा और सबसे से गले मिलकर गीता का पुछा तोह वह दीप्ति के पास चली गयी थी.....

आर्यन ने कामु को अपनी गॉड में बिठा लिया और विशाखा के लिए चरों से पुछा तोह सबने गीता के लिए बोल दिया की उसका फैसला सबको मंजूर होगा.

कामु खुद को रोक न पायी और आर्यन के तोपची की एक बार सवारी खुद तोह की hi बाकी तीनो को भी करवा दी..... ऐसे hi नहीं उसको आर्यन कामु बुलाता था वह थी hi एक पलंगतोड़ प्यार देने वाली दानव औरत ..... मगर मैं कोर्स तोह लास्ट में अपने पिछवाड़े की गर्मी से आर्यन को पिघला के पूरा सुख कामु दी. यह बिलकुल उसकी दादी देवी जैसी दानव स्त्री थी हमेशा रेडी और हक़ से प्यार करती थी.

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नागलोक ......

इतना प्रकाश न नागों को कभी पसंद था जितना नागलोक में आज व्याप्त था...... लाखों रतन कोषागार से निकाले गए सजावट के लिए ....... कई तोह अर्ध सर्प अर्ध मानव रूप लिए साझ धज के त्यार थे विवाह समारोह में शामिल होने के लिए ...... पूरे नागलोक वासी hi नहीं समूचा पतलोकों के वासियों को अमतरं था .

विशाखा की गुफा जैसे सबसे ज्यादा सजाई जा रही थी और दोनों भेने Prabha-Vishaka को manav-Nagin रूप में त्यार कर रही थी सेविकायें Naag-Vivaah के लिए ......

प्रभा की खुसी देखते hi बनती थी वहीँ विशाखा बस शांत होकर सबको कार्य करने दे रही थी..... उनकी सगी माँ के साथ राजा वासुकि की दोनों दूसरी महारानी भी अपना सुझाव दे रही थी दोनों के श्रृंगार करवाने में ......

प्रभा जोह मानव रूप में थी बोली," दीदी आप पहले सरपु का वरन करना फिर में करुँगी..... माँ दीदी बड़ी है उनको पहले अधिकार है न ?"

नागरानी ने स्नेह से प्रभा का गाल सेहला के कहा ," तुम दोनों hi तोह हम सबके आँख तारे हो, तुम्हारी ख़ुशी में hi हमारी ख़ुशी है बेटी. आज तुमको वापस अपने सनिध में पाकर भगवन शेषनाग ने हमारी सोई hi इच्छा भी पूरी कर दी. तुम अपने सरपु को यहीं क्यों नहीं रोक लेती बेटी, धरतीलोक पे तोह लोभी और मक्कार किस्म के मानव रहते हैं. यहाँ हमेशा हमारी आँखों के सामने रहोगी ".

अपने कान की बाली को चेक करती प्रभा बोली," आप भी जानती हो माँ मेरा एक और परिवार है जोह िश जनम में मिला है. फिर वह मानव हुए तोह क्या में भी मानव योनि में हूँ, उनका अधिकार मांग कर आप अपने को छोटा मत करो. में आती जाती रहूंगी आप सब से मिलने मगर अब मेरी असली दुनिया वही है माँ. हाँ मेरा अतीत में भूल के आपकी बेटी की तरह पिछले जनम वाली प्रभा रहना चाहती हूँ. मुझे वहां सब बहोत प्यार करते हैं यह आप यहाँ भी देख चुकी हो".

विशाखा पे नज़र दाल के नागरानी ने पुछा ," क्या वह सब विशाखा को स्वीकार करेंगे, आर्यन की धरतीलोक की पत्नियां और यहाँ की भार्या को ऐतराज नहीं होगा क्या बेटी ?"

अपनी बाली से संतुस्ट होकर प्रभा बोली," ऐतराज़ कैसे वह मेरी दीदी है और हम प्यार चुकार माफ़ी मांग लेंगे सब अपने हैं माँ फिर सरपु बहोत अच्छा है...... वह मेरी बात कभी नहीं टलेगा आप बेफिक्र रहो ".

विशाखा ने पहली बार हारने के बाद गुस्से में कहा ," चुप हो जाओ सब ..... "

विशाखा का डर hi इतना था सब डर गए ..... " प्रभा हमको एकांत में बात करनी चाहिए ".

प्रभा ," हम दोनों को अकेला छोड़ दिज्ये आप सब कुछ समय के लिए "...... सबके जाने के बाद.... " आप बेहिचक बोलिये दीदी, में भी आपकी मनोदशा जानती हूँ".

विशाखा इधर उधर ठेलते हुए ," तुम को भी पता है प्रभा में ुष दिव्या तलवार वाले को चाहती हूँ तुम्हारे सरपु या आर्यन को नहीं" ..... फिर दुखी टोन में ..... "मगर अब में कुछ नहीं कर सकती क्यूंकि आर्यन ने मुझे स्वयंवर में जीत लिया है ..... "

प्रभा भी सीरियस होकर ," तोह आप विवाह नहीं करेंगी ".

विशाखा ," में वचन से बंधी हूँ. तोह विवाह करना hi होगा ".

प्रभा हसकर ," फिर तोह त्यार रहो दीदी सरपु के अल्वा आप सबको भूल जाओगी. आप की दिव्या तलवार भी तो सरपु के hi एक रूप के पास है, जोह कभी तोह बहार आएगा मगर सरपु से विवाह न करके आप कभी न दिव्या तलवार देख सकोगी न उसके धारक को ".

विशाखा थोड़ा चिंतित सवार में," मैंने जोह किया है उसके लिए चाहिए आर्यन त्यार हो विवाह के लिए मगर कोई चमा तोह नहीं करेगा फिर िश विवाह का क्या औचित्य है? और आर्यन की दूसरी भरयाण कभी मेरी जैसी नागिन को स्वीकार नहीं करेंगी ? .....कभी नहीं, सायद मेरी एहि सजा है की में ज़िंदगी भर आर्यन की दासी बनकर रहूं".

प्रभा अब गंभीर सवार में बोली," चमा की हकदार आप नहीं हो अपने कीर्त्यै की वजह से लेकिन चमा याचना मांगे से आपके मैं को शांति मिलेगी तोह जरूर सब से मांग लो..... चमा करने का अधिकार तोह उनका है बस आप अपना कर्त्तव्य पूरा करके अपने दिल से भोज निकाल दें. देखना जीवन में नयी रह आपको दिखेगी".

विशाखा की आँखों में अपनी छोटी भें की बातें सुनकर आंसूं आ गए की प्रभा अभी भी सब कुछ भूल के उसको सही राह पे चलने की सलाह दे रही है वार्ना मैंने क्या क्या नहीं किया अपनी छोटी प्यारी भें के साथ. भगवान् शेषनाग मुझे अब जीवित रहने में भी शर्म आ रही मुझे िश जीवन से मुक्ति दो.

प्रभा ने विशाखा को गले लगा लिया और उसको सान्तवना देनी लगी. भगवन शेषनाग की आवाज उसके मस्तिक्ष सुनाई दी ," पुत्री विशाखा तुम को अपना जीवन अब पस्चताप करने में गुजरना है क्यूंकि सरीर जरूर अलग है तुम दोनों बहेनो का पर अब मिर्त्यु एक साथ hi होगी. तभी तुम प्रभा में फिर से जीवित रह पायी यानि तुम्हारी देह नस्ट हुआ आत्मा या शक्तियां नहीं. एक कथन सुना हो की पति के चरों में hi स्वर्ग है. तोह पति तुमको नियति ने दिया है पुत्री स्वर्ग अब तुमको स्वयं ढूंढना होगा. कल्याण हो ".

आंखें बंद किये विशाखा ने भगवन का धन्यवाद् किया और आंसूं पहुंची मैं बना ली की उसको क्या करना है.

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आर्यन अपनी दो प्रेसिओं, दो भरयाण और 4 दानव प्रेमिकाओं के साथ अटाला लोक के वेशभूषा में नागलोक पधारे सही रथ में जहाँ नागदंश नागलोक के द्वार पे उन्ह सबके स्वागत के लिए खड़ा था ......

8-8 अप्सरों सी सूंदर स्त्रीयां आर्यन के साथ रथ में सवार अब नागदंश के आगे दिखाए मार्ग पे पूरी सजावट और नागलोक वासियों का सम्मान स्वीकारते आगे बढ़ रहे थे विवाह समारोह स्थल की ओरे जोह अपना पहन या शीश झुककर स्वागत कर रहे थे....

रानी हेमा भी उनको विवाह समारोह स्थल के द्वार पे मिली और आर्यन रथ से निच्चे उतर अपनी रानी माँ का सबसे पहले आशीर्वाद लिया जिसको पूरे स्नेह के साथ अपने गले लगा के बलियन ली.

रानी हेमा की ख़ुशी देखते hi बनती थी, माँ होने का गौरव बिना जनम दिए हुए भी आर्यन से उनको मिला. विवाह स्थल की भव्यता और विशालता में मजूद पतलोक के समस्त अतिथिगण आर्यन की सुंदरता और एकरासँ से गदगद थे वहीँ उसकी प्रेमिकाओं और भरयाण ने तोह सब मर्दो को जैसे इर्षा hi करवा दी..... 8 तोह साथ लाया है और दो वरमाला डालने वाली हैं ...... इतनी माडों को कैसे संभाल लेता है. वहीँ मादाओं का हाल तोह बस आर्यन का मानव रूप hi बेहाल किये था.

एक वेदी स्थल प्रांगण के बीचो बिच था जहाँ प्रभा मानव रूप में और विशाखा नागिन रूप में वरमाला लिए कड़ी थी ...... उनके एक तरफ राजा वासुकि दूसरी तरफ नागरानी अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह आर्यन से बड़े खुसी खुसी करने का इंतज़ार कर रहे थे ......

आर्यन तोह प्रभा की सुंदरता देख के चकित था बिलकुल निर्मला Mummy(chachi) का यंग अवतार लग रही थी और उनको जवानी से आर्यन बचपन से hi देखता आया था. हाँ अब उनके सरीर में थोड़ा भराव आ गया था उनके जबकि प्रभा तोह बिलकुल छरहरी और ज्यादा हॉट लग रही थी.

विशाखा पर ध्यान गया तोह वह पहन झुकाये कड़ी थी...... यह आर्यन क्या सबने पहली बार देखा होगा. योद्धा थी वह सर काटे hi होंगे पर उसका सर न झुका. आज सबको एक हारी हुयी आम नागिन विशाखा आर्यन की दासी hi नज़र आ रही थी.

आर्यन ने गीता की तरफ देखा तो वह भी मुस्करा के कंधे उचका दी अब तू जाने तेरा काम.

रानी पुष्पलता ," गीता यह तोह पहले hi मर चुकी है इसे क्या तुम जलील करोगी. आर्यन तुम इश्को अपना लो सायद यह फिर से कभी सर उठा के जी सके ".

दीप्ति ," हाँ माहि परिवार क्या.... आज उसके साथ कोई नहीं है..... यह तोह जीवन से भी हारी लग रही है. निर्बल स्त्री को अपनी पनाह देना कभी अनुचित नहीं होता".

आर्यन ने गीता से पुछा ," चंदा रानी अब निर्णय तुम्हारे हाथ में, सोच समझ के फैसला करो जोह हम सबका फैसला होगा ".

रानी हेमा भी आतुर होकर पूछी ," कैसा फैसला ?"

गीता ने जवाब दिया ," कुछ नहीं रानी माँ हम सब विशाखा का घमंड चकना चूर करना चाहते थे और आर्यन उससे विवाह नहीं करेगा यह फैसला लिया था पर उसको देखकर hi लग रहा की यह नागिन मुझे अपनी बहेनो के साथ मेरी जुटती साफ़ करने के लिए चाहिए"...... गीता का अंदाज़ hi निराला था विशाखा को आर्यन की पत्नी स्वीकारते हुए.

रानी हेमा भी ॉश्चारिये से गीता को देखने लगी तोह पुष्पलता ने कहा ," यह हम 8ों का निर्णय था पर गीता सही कह रही है, उसका स्थान हम चुनेगा की वह कहाँ हमारे साथ रहेगी ".

रानी हेमा ," आर्यन तुम भी िंहसे सहमत हो ".

आर्यन हाथ जोड़कर ," रानी माँ यह गलत है या सही यह तोह इनका hi दृष्टिकोण है और में िंहसे बहार तोह नहीं जा सकता जब बात इनके स्वाभिमान की हो. हाँ थोड़ी सब नटखट जरूर हैं पर किसी स्त्री का अपमान न hi करेंगी न होने देंगी. चलिए हम दोनों राजा बलि महाराज से मिलते हैं ".

7ों ने गीता को घेर लिया की आर्यन कभी तुम्हारी बात नहीं काट सकता पर गीता बोली वह हमसे भी दो कदम आगे रहता है, विशाखा का घमंड hi नहीं उसने उसकी रूह तक कचोट दी है और अगर चाहिए तोह विशाखा फिर ठीक वैसी hi हो जाएगी और यह अपना कमीना खसम जरूर करेगा देख लेना.

इनके वाद विवाद चलते रहे उधर बेचैनी से वरमाला लिए प्रभा की नज़र बस आर्यन पे hi थी....' आखिर इतनी डिअर क्यों कर रहा है भाई सबसे बाद में मिल लेना पहले वरमाला तोह पहन लो'...... आर्यन भी सब बड़ों के प्यार चुकार आशीर्वाद लिया और जब भगवन शेषनाग प्रकट हुए तोह सब ने हाथ जोड़कर और सर या पहन झुका के अभिवादन किया.

आर्यन को आशीर्वाद देकर आगे प्रस्थान करने को कहा तोह वह प्रभा के पास गीता और दीप्ति द्वारा ले जाया गया ...... प्रभा अब शर्मा रही थी गीता को आर्यन के साथ देखकर.

दानव गुरूजी ने मंतर पढ़े और घोसना की आर्यन नागलोक की छोटी राजकुमारी प्रभा से स्वयंवर प्रतियोगिता जीतकर विवाह करने का हकदार है. आप सब अपना आशीर्वाद दें िश मंगल कार्य में ......

गीता अब प्रभा के साथ कड़ी थी और दीप्ति आर्यन के ..... गुरूजी के कहते hi प्रभा ने गीता से आज्ञा लेकर आर्यन को वरमाला पहनी तोह धुल बजने लगे और सर्प हिसस हिस्सा के अपनी खुसी प्रकट कर रहे थे ...... दानव गुरूजी ने आर्यन के हाथ में प्रभा का हाथ रखवा के कहा आज तुम्हारा naag-vivaah होता है अब जीवनभर के लिए तुम दोनों साथ रहो ऐसा हमारी शुभकामनाये हैं.

आर्यन और प्रभा दोनों ने आँखें बांध की और दोनों पूर्ण नाग रूप में बदल गए...... दोनों ने एक दुसरे की पहुँच और पहन स्पर्श किया और लिपट गए तोह एक तेज हरी रौशनी दोनों के अंदर समां गयी.

यह शक्ति दोनों को राजा वासुकि और नागरानी से आशीर्वाद में मिली थी..... जोह उनकी स्वीकारती थी..... थोड़ी hi डिअर में दोनों मानव रूप में आ वापस आ गए...... प्रभा को उसका सरपु वापस मिल गया था पिछले जनम का और िश जनम में उसका बड़ा भाई आर्यन.

प्रभा ने पहले hi विधिवत धरतीलोक के विवाह रीति की तयारी करवाई थी जोह वह आर्यन से विश्का के विवाह के बाद दानव गुरूजी से करवाने वाली थी अपने माँ बाप की सहमति से.

दानव गुरूजी ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा ," पुत्र आर्यन अब विशाखा से भी तुमको विवाह करना है, रानी हेमा आप आर्यन के साथ आगे आएं ".

आर्यन हाथ जोड़कर बोलै ," चमा चाहूंगा गुरूजी पर में िश विशाखा से विवाह नहीं करना चाहता ......"

आर्यन के इतना कहने से जहाँ विशाखा के हाथों से वरमाला गिर गयी वही सब स्तब्ध रह गए ...... चरों और हर्ष की जगह मताम का सन्नाटा चा गया.....?

प्रभा हैरानी से ," क्यों सरपु? दीदी पे भी आपका उतना hi हक़ है जितना मुझपर".

आर्यन ने उसको रोका ," पहली बात िशने तुमसे या मेरी सब प्रिएशन से माफ़ी नहीं मांगी....... न hi अपने माँ बाप से जिनको मारने तक उतारू थी ...... न hi समस्त पतलोक वासियों से जिनका जीवन तक टाक पे रखकर यह उनको भी मारने वाली थी ...... ऐसी अपनी बड़ी भें से मेरे विवाह की अपेक्षा कर रही हो".

विशाखा रूट हुए निच्चे झुकार आर्यन के प्यारों में पहन झुका के बोली," में सबसे चमा मांग लुंगी पहले आप मुझे एक दासी hi सही अपना तोह लीजिए ".

आर्यन पीछे हटकर," अगर सबने माफ़ किया तोह मैंने भी माफ़ किया..... याद है न तुमने मेरी इतनी दयालु रानी माँ को मारने का प्रयाश किया था ".

विशाखा ने रूट हुए रानी हेमा से चमा मांगी अपने करतिया की फिर प्रभा के प्यार पद गयी उसने उसको गले लगा के माफ़ किया ...... फिर अपने माँ बाप से लेकर सब बड़ों से और लास्ट में गीता और सबसे माफ़ी मांग आर्यन से विवाह करने की इज्जत मांगी अपनी झोली पहला कर के गीता से .

बहोटों की आँखों में आंसूं भी आ गए उसकी दुखी लाचारी की दसा देखकर सबसे ज्यादा प्रभा उसके पास जाना चाहती थी पर आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के ना में गर्दन हिलायी...... जैसे अभी विशाखा के पस्चताप का समय है विवाह का नहीं.

राजा वासुकि और नागरानी के साथ नागलोक वाले भी विशाखा की हालत और बेबसी देखकर दुखी थे...... विशाखा उनकी महँ योद्धा राजकुमारी थी, नागलोक का अभिमान,..... नाग योनि में बुरे कर्मो को भी ज्यादा हे की दृष्टि से नहीं देखा जाता. आज उनकी राजकुमारी रोटी हुयी सबसे चमा मांगते हुए आर्यन से विवाह की भीख मांग रही थी.

आखिरी में अपना पहन झुकाये रोटी हुयी आर्यन और प्रभा के पैरों में लिपट के फिर से माफ़ी मांगने लगी...... आर्यन ने हाथ जोड़कर भगवन शेषनाग की तरफ देखा तोह उन्होंने एक सख्ती पुंज अपनी दिव्या दृस्टि से आर्यन के सरीर में भेजा तोह उसका अकार बड़ा होकर हज़ारों पहन वाले विशाल सर्प में बदल गया.

विशाखा के साथ प्रभा भी उससे अलग हो गए और सब हैरत से आर्यन के दिव्या सर्प रूप को देखकर डरने लगे, आशम्भव पुराने महाबली सर्पों के पहन उसके पहनो में शामिल थे......

आर्यन सर्पों की भासा में हिसस हिस्सा के बोलै ," में िश विशाखा से विवाह नहीं करूँगा "...... अब तोह किसी में हिम्मत न थी कोई आर्यन के फैसले को काटे , पर अगला वाकया बोलकर सबको हैरत में दाल दिया..... " यह न पहले जैसी घमंडी है, न ताकतवर और न hi शक्तिशाली. ऐसी नागिन से कौन सर्प विवाह करना चाहेगा ".

रानी हेमा ने कहा ," पुत्र आर्यन भूल रहे हो, विशाखा को स्वयंवर में तुमने हरा के विवाह का अधिकार पहले hi ले लिया है वार्ना स्वयंवर में शामिल नहीं होना था ".

आर्यन ," माफ़ करना रानी माँ आपकी आज्ञा नहीं ताल सकता परन्तु एक शरत पे विशाखा से विवाह करूँगा ".

राजा वासुकि भी अब आर्यन के सामने हाथ जोड़कर," कैसी शरत पुत्र आर्यन , हुए बताये हम पूरा करेंगे. हम आपको नागलोक का राजा बना देंगे बस विशाखा को अपना लो ".

आर्यन ," नहीं महाराज मुझे सिंघासन नहीं पहले वाली वही अभिमानी विशाखा चाहिए जिसकी एक नज़र hi दुसमन को चीयर देती थी और जिसकी एक फुंकार सामने वाले के प्राण पल में हर ले. निडर और एक महँ योद्धा तभी में विवाह करूँगा ".

भगवन शेषनाग की आवाज सुनाई दी ," यह तोह तुम hi कर सकते हो वॉश, विशाखा की सब शक्तियां तुम्हारे पास hi तोह हैं. फिर अपनी जीवन संगिनी को शक्ति या अश्वारिये देना पति का मूलभूत अधिकार होता है ".

आर्यन शीश ( हज़ारों पहन) झुकता बोलै," में बस आपसे स्वीकारती मांग रहा था भगवन, िश मुरझाई हुयी विशाखा से विवाह करके में अपनी रानी माँ और रति माँ को क्या मुँह दिखूंगा ".

अब सबकी समझ में आ रहा था की आर्यन विवाह के लिए 'िश' स्तब्ध पे बार बार जोर क्यों दे रहा था जोह अभी लाचार , दयनीय स्थिति में थी .......

आर्यन ने अपने हज़ारों पहनो की आँखों से विशाखा को आवाज देकर अपनी तरफ सम्मोहित किया और एक के बाद एक शक्ति आर्यन से निकल के विशाखा में सामने लगी. आखिरी में नागखडग और पूर्ण नाग्शक्ति जैसे hi विशाखा के सरीर में प्रवेश की तोह उसका रूप भी पहले वाला और अकार भी आर्यन के जितना हो गया था.

आर्यन ने पूर्ण नाग्शक्ति भी विशाखा को hi वापस कर दी यह सबके लिए अचरज की बात थी की आखिर ऐसा क्यों? नाग्शक्ति तोह प्रभा को देने चाहिए थी अगर देनी थी..... या आधी देता ?

विशाखा का पूरा सरीर कुछ पल काम्पा फिर जैसे स्थिर हुयी सीधा आर्यन के आगे फैन झुका के बेथ गयी ," अब तोह मुझे अपना लीजिए स्वामी, में जीवन भर आपकी गुलाम बनकर रहूंगी.

आर्यन ने विशाखा को अपने कुंडली में लेते हुए उसके पहन से पहन मिलकर कहा ," दानव गुरूजी हमारा विवाह करवाइये. में विशाखा को अपनी भरयाणागिन बनने को त्यार हूँ...... विशाखा की साड़ी आँखों में ज़माने भर की खुसी थी.

भगवन शेषनाग को याद करती बोली," भगवन में हमेशा ऋणी रहूंगी जोह आपने मुझे सही मार्ग दिखया, मेरा स्वर्ग हमेशा इनके चरों में होगा".

स्वयं भगवन शेषनाग ने आर्यन और विशाखा का Naag-vivaah करवाया कर दोनों को आशीर्वाद दिया सदैव जनकल्याण करो......

अपनी पुत्री को वापस पहले जैसा देखकर राजा वासुकि और नागरानी के साथ प्रभा भी खुश थी की भाई ने दीदी को पहली से भी अच्छा बना दिया ...... प्रभा भी नागरूप लेकर दोनों के बिच घुसकर उनसे लिपट गयी ......

राजा वासुकि ने आर्यन को नागलोक के सिंघासन को घ्राण करने को कहा तोह उसने विनती की में कभी ुष का अधिकार नहीं रखता मगर विशाखा को आप नागलोक की महारानी बना सकते हैं जिसका समर्थ भी अब यह रखती है".

राजा बलि महाराज ने कहा," आर्यन को किसी पढ़ में मत बांधो राजा वासुकि वार्ना लोभी कह लाओगे. विशाखा सही हकदार है नागलोक की महाराणीअणि बनने के लिए और उसकी संतान जबतक सक्षम नहीं होगी तब तक वह नागलोक की महारानी रहेगी".

राजा वासुकि को ऐसा hi सुझाव औरों ने भी दिया की विशाखा से बढ़कर कोई ुष सिंघासन का उपकात हक़दार नहीं है.

नागलोक की महारानी ,विशाखा, के नाम की घोसना दानव गुरूजी ने प्रस्ताव में राखी तोह आर्यन और प्रभा ने समर्थन किया. राजा वासुकि ने उसको पढ़ संभाले की अनुमति दी तोह विशाखा ने आर्यन के कान में कुछ कहा तोह उसने मुस्करा के सर हिला दिया .......

विशाखा ," में अपने पति परमेश्वर आर्यन की आज्ञा से नागलोक की महारानी बनने को त्यार हूँ परन्तु में कुछ समय प्रभा और इनके साथ बिताने के बाद hi सिंघासन घ्राण karungi".......Vishaka का कारन सुनकर सब मुस्करा भर दिए और सब उसके नाम के नारे लगाने लगे........

आर्यन ने प्रभा से धरतीलोक के रीती रिवाज से भी विवाह किया Geeta-Deepti की उपस्थिति में जोह दानव गुरूजी ने करवाया था. राजा वासुकि और नागरानी ने प्रभा की इच्छा अनुसार उसका कन्यादान भी किया......

Geeta-Deepti विवाह के बाद पृथ्वीलोक लौट गयी और आर्यन अपनी दोनों नयी भयता नागिनों के साथ अब विशाखा की आलीशान विशाल गुफा में था..... तीनो िश समय मानव रूप में थे.

दोनों भेने नागलोक की सबसे सूंदर नागिन के साथ अपने मानव रूप में अप्सरा सी दिखती थीं. आर्यन तोह था hi इतना हैंडसम और चार्मिंग की कोई स्त्री उसके रूप के जादू से कहाँ बच सकती है.

दोनों ने आगे बढ़कर आर्यन के प्यार चूहे तोह दोनों को उठा के अपने आलिंगन में लेकर अपने ताकतवर सीने से लगाकर दोनों के माथे बारी बारी चूम के बोलै," मेरे हृदय में तुम्हारी जगह है पाऊँ में नहीं और अच्छी पत्नियां अपने पति के दिल पे राज करती है न की पैरों की धुल बनती है".

प्रभा ने आर्यन के गाल पे चूम के कहा," सरपु हम दोनों बहेनो के लिए जोह आपने किया वो कभी नहीं विश्रा सकते. यह सर हमेशा आपके सम्मान में झुकेगा क्यों दीदी ?"

विशाखा शर्मा के कांपते सवार में बोली," में दो बार जीवन हारने के बाद भी मुर्ख hi थी जोह यह न समझ सकीय की मेरे पति परमेश्वर मेरे द्वार पे दो बार खुद आकर दस्तक दिए और में उनका hi अपमान, उनसे hi दुस्तता करती रही. अपने चरों में जगह दे डीजे स्वामी मेरा जीवन सफल हो जायेगा ".

आर्यन ने विशाखा का सर उठा के उसका दमकता गाल चूमा तोह बिचारि सिसक पड़ी ..... वहीँ प्रभा ने झट से आर्यन सर अपनी तरफ कर उसके होंठों को प्यासी प्रेमिका जैसी चूमने चूसने लगी ..... आर्यन भी उसका साथ देता कसकर दोनों को अपनी आगोश में तिघ्टलय जकड लिया.

पुछःह पुछःह चुम्म चुम्म की आवाजें विशाखा के कान से लेकर पूरे सरीर में उत्तेजना की लहर पहला रही थी. उसकी छोटी भें बिना हाय आर्यन को चुम्बन पे चुम्बन किये जा रही थी.....

जब प्रभा की सांस उखड़ी तोह ऊपर निच्चे हिलते उसके वक्षों में विशाखा की नज़र पड़ी फिर उसके चेहरे पे, कामुक चेहरे से होंठों की लाली चूस डाली थी आर्यन ने और आँखें जैसी नशीली नागिन जैसी......

आर्यन की तरफ नज़र गयी तोह उसने घेरि सांस लेकर विशाखा के सर के पीछे हाथ रखकर कहा ," इज्जाजत है "...... और झुकार उसके मदभरे होंठो को पहले दो तीन बार हलके से चूमा और फिर निचले लैब के बाद ऊपर के लबों को चूमता चूसता अपनी जीभ विशाखा के थोड़े खुले मुख में डाला तोह अनजाने में hi आर्यन की पीठ और गर्दन पे हाथों का कसाव बढाती चूसने लगी...... सलरपपपपप सलूरर्पपपप हुम्म्म्मम्म ममममममममहहहजहह..... विशाखा की उत्तेजना को आर्यन ने उसके बैएँ पुष्ट जैसे नितम्ब को अपने सीधे हाथ पे भरकर दबाया तोह और मुख खुल गया और उसकी जीभ स्वतः hi आर्यन की जीभ से किरदा करती अपने पति के अन्तर्मुख को नापने लगी जैसे ग्रहप्रवेश nav-vadhu कर रही हो...... चुम्बन इतना घेरा था की विशाखा के अंदर दबी चिंगारी को बढाकर योनि तक हलचल मचा दी.

15 मं तक चलने वाले पहले दोनों के मुखमीरदान ने प्रभा को भी उतना hi उत्तेजित कर दिया जोह अपनी जांघें आर्यन की लेफ्ट जांघ से और चाहतियाँ पसलियों से और लबों से उसका सीना और कन्धा चूमे जा रही थी.

विशाखा की सांसें उखड़ी थी नथुने फूलने लगे और सीना और दिल धौणकी की तरह धधक रहे थे..... आर्यन ने दोनों के चूतड़ों के निचे हाथ दाल के गॉड में उठा लिया और एक नरम बिस्टेर जैसे बिछावन पे दोनों को वजारशान की मुद्रा में अपनी एक एक जांघ पे बिठा लिया. दोनों उसकी गर्दन में हाथ डाले किसी बेल सी लिपटी थी.

आर्यन दोनों की कमर सहलाता हुए बोलै," में बहोत खुशनसीब हूँ जोह इतनी सूंदर राजकुमारियां मेरे पहलु में हैं. में हमारे दाम्पतये जीवन की शुरवात सच्च से करना चाहता हूँ, उसके लिए अपने बारे में में विस्तार से बता रहा हूँ ध्यान से सुन्ना उसके बाद तुमको इनाम भी दूंगा. दोनों ने सर आर्यन के सीने से लगा लिया और वह दोनों को सबकुछ बताता चला गया......

प्रभा के लिए भी बहोत साड़ी नयी जानकारी थी पर विशाखा के मैं में आर्यन के लिए दुर्विचार न आया पूरी कहानी सुनकर बस इतना बोली," आप हमारे स्वामी हो और हम आपकी भार्या. हमारी नज़रों में आप कभी गलत कर hi सकते तो हम पे असर hi नहीं होगा किसी दुवेश का".

प्रभा ," हाँ सरपु दीदी ठीक कह रही हैं, अब हम दोनों की दुनिया सिर्फ आप हो और यहाँ के बहार क्या आप करते हो या करोगे हम उसमे बढ़ा नहीं आपकी संगिनी होंगी चाहिए आप साथ रखो या न रखो. हम िश नागलोक में अपने सपनो का महल बनेयेंगे जहाँ सिर्फ प्यार और खुशियां होंगी. यह गुफा हमारे प्यार की गव्हा होगी".

आर्यन ने दोनों के गाल चूम के कहा," चलो फिर तुमको किसी से मिलवाता हूँ बस आँख बांध कर लो हम बहोत दुर्र जा रहे है". ..... दोनों ने आँखें बांध कर ली जैसे कहीं भी ले चलो स्वामी.

आर्यन ने अणि को याद किया तोह उसने पोर्टल बना दिया जोह सीधा तीनो को पुराने जंगल के सामने ला खड़ा किया.

विशाखा ने हैरत से आर्यन की तरफ देखा तोह उसने कुटिल मुस्कान लिए सर हिला दिया और आँखों से शांत रहने को कहा.

पुराने जंगल में प्रवेश करते hi राजकुमारी मीनालोचनि ( मीणा) और रानी पद्मा (सारू) उनके स्वागत के लिए खड़े थे ुष भेड़िये के साथ जोह जंगल का द्वारपाल था.

आर्यन आज पहली बार मीणा को उसके पिछले जनम के इतने बड़े साइज में दूसरी बार देखा था और पद्मा देवी को तोह उसने पहले भी देखा था...... दोनों बहेनो ने पहले सारू के प्यार चुकार आशीर्वाद लिया और फिर मीणा के गले मिली......

सारू आगे बढ़कर अपने बेटे को खूब चूमि, आखिर जुंग hi तोह जीतकर आया था..... मीणा भी अपने वास्तविक रूप में बदल के आर्यन से मिली तोह दोनों bhai-bhen फिर भावुक हो गए और आर्यन उसको अपनी पीठ पे बिठा के निकल लिया ुष विशाल पेड़ के ऊपर घोंसले की तरफ.

प्रभा हसने लगी और बोली," हाँ अब भाई को में थोड़ी याद रहूंगी, अब तोह बस मीणा दीदी hi हैं उनकी सबकुछ ".

सारू ने भी मुस्कारते हुए कहा," पत्नी होकर अपनी नानन्द से जल रही हो, विशाखा बेटी यह दोनों जुड़वाँ hi हैं एक तरह से और जाड़े डिअर दूर नहीं रह सकते तोह बुरा मत माना. चलो तुमको किसी से मिलवाना है और तू जा अपने भाई भें के पास आखिर है तोह उनकी चमची hi ..... है है है है ...... "

प्रभा भी झूठा गुस्सा दिखाकर पेअर पटकती तेजी से दौड़ गयी तोह कुछ दुरी पे एक पेड़ के पीछे छिपे आर्यन ( उसकी पीठ पे लड़ी मीणा) ने उसको पीछे से गॉड में दौड़ते दौड़ते hi उठा लिया और अपने पीठ पे उसको भी बिठा लिया..... और स्पीड तेज़ कर दी ......

सारू हस्ते हुए विशाखा का हाथ पकड़ के आगे बढ़ी ," कोई कहेगा की िंह दोनों का विवाह हो गया है, दोनों छोटे बच्चों से धामा चौकड़ी में लग जाते हैं ".

विशाखा बस मुस्करा रही थी और आर्यन उसको यहाँ क्यों लाया है उसका भी अंदाज़ा लगाने की कोशिश कर रही थी ....... तभी एक बहोत प्राचीन धरतीलोक की महारानी को अपने सामने देखकर वह हैरान तोह हुयी पर विश्वास नहीं हुआ.

सामने उसके महारानी विजयलक्ष्मी कड़ी थी जिससे आमना सामना उसका 2500 साल पहले हुआ था एक गृह ( प्लेनेट ) पे...... दोनों के आगे वह दृश्ये यादों में चलचित्र की तरह पल भर में आ घूम गया.......

सारू की आवाज से दोनों वास्तव में आ गयी ," यह हैं महारानी विजयलक्ष्मी िश पुराने जंगल की महारानी और िश जनम में आर्यन की छोटी भें अनीता सिंह..... और तुम हो नागलोक की राजकुमारी विशाखा जिससे आर्यन ने प्रभा के साथ विवाह किया है. आशीर्वाद लो विशाखा यह हम सबकी पालनहार है और आज से तुम्हारी भी ".

दोनों के अंदर एक दुसरे के लिए क्रोध को सारू ने उनकी बदलते चेहरे के हाव भाव और आँखों में गुस्से के बदलते रंग को पहचान लिया था..... तभी वास्तिविकता में दोनों को लायी थी और बड़े गुरूजी के साथ निशांक गुरूजी भी वहां प्रकट हुए प्रतिबिम्ब रूप में.

सारू ," इनसे मिलो विशाखा यह हैं हम सबके बड़े गुरूजी, आर्यन इनका hi सिष्ये है और यह हैं हमारे निशांक गुरूजी जोह हमारे गुरु हैं ".

बड़े गुरूजी को देखकर विशाखा ने जमीन पे बैठकर उनके आगे हाथ जोड़कर नमन किया ," सदैव विजयीभव पुत्री विशाखा ...... और आर्यन प्रभा की हमेशा रक्षा करना ".

विशाखा ," आशीर्वाद दिज्ये गुरूजी में उनकी हमेशा सेविका बनकर रहूं. निशांक को में पहले मिल चुकी हूँ पृथ्वीलोक में. काला योद्धा को तुम बचने में असमर्थ रहे न निशांक.

हम तुम्हारी मदद नहीं कर सके इसका हमें खेद है. हम पृथ्वीलोक की नियति नहीं बदल सकते परन्तु आर्यन की मदद जरूर करेंगे ".

फिर कड़ी होकर विशाखा ने आगे बढ़कर महारानी विजयलक्ष्मी के आगे हाथ जोड़कर कहा," आशीर्वाद दिज्ये महारानी, शत्रुता तोह हमारी तब भी नहीं थी आपसे बस घमंड hi इतना ज्यादा था की हम को वह दशांश करना hi पड़ा क्यूंकि हार बर्दाश्त नहीं थी".

महारानी विजयलक्ष्मी अभी भी गुस्से में थी पर सबकी मजूदगी उसके लिए बढ़ा...... " चमा की पार्थी तुम नहीं हो विशाखा, आशीर्वाद तुमको नहीं प्रभा को हम पहले hi दे चुके हैं. हो सके तोह दुबारा सामने मत पड़ना वार्ना हम भूल जायेंगे की तुम आर्यन की भार्या हो. याद रहे यह धरतीलोक है, हमसे टकराव तुम्हारी मौत का कारन बनेगा".

महारानी विजयलक्ष्मी अब विलुप्त हो गयी थी और विशाखा के चेहरे पे निराशा थी.

*(( दोस्तों विशाखा क्यों एक महँ योद्धा है उसके किस्से जब समय और अवसर होगा तभी सामने आएंगे. हाँ यह बता दूँ की हज़ारों साल पहले एक गृह पर दोनों का योध हुआ था और चल से विशाखा ने महारानी विजयलक्ष्मी को हरा दिया था और एक बहुमूल्य चीज ( तत्व) वहां से पतलोक ले गयी थी जिसको महारानी बहोत प्रयास के बाद वहां तक लेने गयी थी ....... डिटेल्स तब आएँगी जब दोनों का सामना एक बार फिर हुआ तो?))

बड़े गुरूजी ," विशाखा पुत्री तुमको निराश होने की जरुरत नहीं है फिर हज़ारों सालों से तुम अपनी गुफा से बहार कहाँ गयी हो. अतीत को भुलाने का तुम्हारा संकल्प तुम्हारी सहयता करेगा और सुधर भी सकती हो. आज तुम्हारे जीवन का सबसे ख़ुशी का दिन है तोह हम तुमको उपहार में कुछ देना चाहेंगे ".

बड़े गुरूजी ने विशाखा की तरफ हाथ किया तोह एक गरुड़ पक्षी का तेज प्रकाशमान पुंज एक छोटी सी मोहर में बदल के गले के हार का रूप ले लिया..... विशाखा ने उसको हाथ में लेकर अपने माथे से लगा के फेन लिया.

" ुष दुष्ट नागिन को गरुड़ शक्ति कैसे दे सकते हैं गुरूजी. मेरे hi दुश्मन आज इतनी हिम्मत की ..... मेरे hi आगे आने का दशांश तक कर डाले. विशाखा को मारती नहीं पर दंड भी नहीं दे पायी अपनों की वजह से "...... अपने कक्ष में बैठी महारानी विजयलक्ष्मी को विशाखा एक फूटी आँख पुराने जंगल में नहीं सुहा रही थी.

ऊपर से बड़े गुरूजी ने गरुड़ शक्ति देकर विशाखा को सुरकिषत कर दिया जोह हर नाग की कमजोरी होती है. नाग गरुड़ शक्ति से बच नहीं सकता चाहे उसके पास नाग्शक्ति hi क्यों न हो. बड़े गुरूजी जानते थे महारानी विजयलक्ष्मी ने विशाखा को यहाँ आने hi िश लिए दिया ताकि अपनी हार का बदला ले सके पर सारू और बड़े गुरूजी के कारन वह कर न सकीय. आर्यन को अणि समझा लेती बाद में, फिर मीणा और प्रभा उसको वेस्ट रखे होंगी.

2 घंटे बड़े गुरूजी के सनिध में विशाखा को ज्ञान और कई युद्ध कौसल की कला सीखने को मिली.

वहीँ आर्यन अपने दोनों प्यारी बहेनो को अपने से लगये घोंसले में मीठी मीठी बातें कर रहा था. तीनो अपने में hi मस्त थे जोह उनका हमेशा से hi ख़ुशी देता था. पुराने जंगल में घूमकर जब वापस विशाल पेड़ के पास आये तोह आर्यन ने बड़े गुरूजी से आशीर्वाद लिया और निशांक से तफरी ली......

बड़े गुरूजी और निशांक से विदा लेकर आर्यन अब विशाखा को अपने साथ अकेले नदी किनारे ले गया.

विशाखा अब यहाँ बहोत खुस थी, सबने उसको दिल खोल के अपनाया बस महारानी को छोड़कर. बड़े गुरूजी के उपहार और ज्ञान ने विशाखा ने उनसे आगे भी मार्गदर्शन का आशीर्वाद माँगा. आर्यन एक हाथ पकड़ के विशाखा को जंगल की जानकारी और विशेस्ता बताता नदी किनारे तक ले आया.

अपने दोनों हाथो में उसके हाथ थाम के बोलै ," क्या तुम अब अपने उपहार के लिए त्यार हो ?"

विशाखा सर झुका के ," आप ने सबकुछ तोह मुझे दे दिया है, मुझे बस अपना प्यार और स्नेह देते रहिये वह hi मेरा उपहार है स्वामी ".

आर्यन ने उसकी थोड़ी ऊपर करके उसके लबों को चूम के उससे 10 कदम पीछे हटा और आँख बांध करके बोलै ," शायककककक ....... ........ ".

तभी तेजी से उसका गरुड़ हेलमेट आकर आर्यन के सर पे धारण हो गया और तेज प्रकाश के साथ सहायक उसके हाथ में परकत हुयी और आर्यन का रूप बदल गया...... इतना प्रकाश था वहां की विशाखा की आंखें hi चौंधा गयी थी और जब तेज काम हुआ तोह प्यार लाडखा के घुटने के बल बेथ गयी और जमीन पे सर रखकर नैनो से आंसूं बह गए.

पल भर में hi आर्यन मानव रूप में खड़ा था पर उसको गायत नहीं हुआ की उसका रूप एक दिव्या पुरुष में बदल गया था. सहायक अभी भी उसके हाथ में थी और हेलमेट भी.

आर्यन ने उसको पुकारा ," अरे ऐसे क्यों रू रही हो में तोह तुमको दिव्या तलवार यानी सहायक से मिलवाने यहाँ लाया था क्यूंकि गुरूजी ने पतलोक में धारण करने को मन किया था. तुम हमेशा से इसे पाना चाहती थी न, इश्के लिए तुम ने सबकुछ खो दिया था न. अगर अब तुम सच्चे मैं से इश्को धारण करना चाहोगी तोह कर सकती हो मगर जरा सा भी मैं में दुवेश तुम्हारी जान ले लेगा इश्को छूटे hi".

विशाखा जैसे गूंगी hi हो गयी थी जब आर्यन ने आगे बढ़कर उसको हिलाया तोह सुबकते हुए उसके गले लगकर बोली," मुझे आप ने अपना लिया बस एहि मेरा सबसे बड़ा उपहार है स्वामी और दिव्या तलवार आपकी है आप hi सम्भालो ".

आर्यन ने मजे लेते हुए ," क्यों दर गयी मरने से ...... तुम तोह बड़ी डरपोक हो यार ...... hi hi hi hi hi ...... "

विशाखा सच्च में बदल गयी थी और उसने वह किया जोह कोई सोच भी नहीं सकता था अपने सीधे हाथ से जैसे hi सहायक की धार को मुठी में पकड़ा तोह उसको एक कम्पन जरूर लगा पर हुआ कुछ नहीं और हाथ हटा लिया..... "मुझे आपकी बाँहों में अब मौत भी खुसी से कबूल है ".

आर्यन हैरान रह गया विशाखा दूसरी बीवी थी जोह दीप्ति के बाद सहायक को छु भी सकीय. विशाखा का मैं साफ़ और दिल निस्चल था कोई भी लालच नहीं.

बस बड़े गुरूजी जानते थे दोनों ने आर्यन से विवाह किया है और दोनों समर्थ है सहायक को धारण करने के लिए. विशाखा को तोह अच्छे से जानती है दिव्या तलवार 'सहायक' आखिर हज़ारों साल उसकी रक्षा की थी विशाखा ने. अब आर्यन की पत्नी बनने के बाद सहायक की स्वामिनी भी बन गयी थी एक तरह से.

आर्यन अब भी हैरान सा विशाखा को देख रहा था अपनी बाँहों में लिए तोह विशाखा ने समझा की वह चाहता है में धारण करके सिद्ध करूँ में हिरदये से भी पवित्र हूँ.

आर्यन के तलवार लिए हाथ पे अपना उल्टा हाथ रखकर विशाखा ने सहायक उसके से ले ली तोह एक तेज बिजली से कड़की पर विशाखा को कुछ नहीं हुआ. अब वह भी चकित थी जिसको वह हज़ारों सालों में भी न धारण कर पायी आज इतनी आसानी से कैसे?

"हैरान न हो पुत्री यह दिव्या तलवार है इश्को इश्के दिव्या पुरुष की दिव्या स्त्री hi धारण कर सकती है और तुम कौन हो यह प्रमाण मिल गया होगा. अपने जीवन को पहचानो और उसका उद्देश्ये भी इशलिये मैंने तुम को यहाँ बुलवाया था. दिव्या तलवार खुद तुमको आर्यन ने दी है यह मैंने नहीं कहा था ..... साधव खुश रहो ".

मैं hi मैं उनको हाथ जोड़कर कोटि कोटि प्रणाम किया विशाखा ने. भगवन शेषनाग ने सही कहा था पति के चरों में hi जन्नत है और मुझसे सुभागसाली कौन होगा .

आर्यन ने उसके आंसूं पूछकर कहा ," तुम चाहे तोह सहायक को अपने पास रख लो बस अब रोना बांध करो यार ".

विशाखा भी रोटी हुयी मुस्करा के ," में अपने पति की संगिनी हूँ सहायक हमेशा आपके पास hi रहेगी, में बस उसके धारक की जीवनसंगिनी बनकर खुश हूँ ".

सहायक को आर्यन ने वापस भेज दिया तोह गरुड़ हेलमेट भी वापस लौट गया. विशाखा को सारे जवाब मिल चुके थे पर बाकियों के आपके मेरे तरह और ज्यादा उलझ गए हैं ??????

तू बे कॉन्टिनोएड......

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अपडेट 38

Part- 8 © (लास्ट अपडेट)

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प्रभा

रानी विजयलक्ष्मी से लेकर सब हैरान थे की विशाखा ने इतनी आसानी से दिव्या तलवार को धारण कैसे कर लिया..... ????

मीणा, सारू , प्रभा और निशांक गुरूजी भी अब बड़े गुरूजी की तरफ देखने लगे जोह आंखें बांध किये मुस्करा रहे थे..... " वह रक्षकः थी 'सहायक' की जिसने अपना कर्त्तव्य बखूबी निभाया था और उसके लिए जीवन भी नौछवर कर दिया...... घमंडी होना hi िश नागलोक की भावी महारानी की ताकत है. राजकुमारी दीप्ति के अंदर तोह खुद दिव्या तलवार का अंश भी है तोह दोनों धारण कर सकती है परन्तु विशाखा का अब हिरदये भी साफ़ है".

उनके चुप होते hi सबकी नज़रों में विशाखा के लिए आदर बढ़ गया था और महारानी विजयलक्ष्मी ने टिपणी की," यह नागिन अपना गुण जरूर दिखाएगी गुरूजी. प्रभा तुम सचेत रहना "......प्रभा ने बस जी महारानी कहकर जवाब दिया.

आर्यन जब विशाखा के साथ पुराने जंगल के बहार आया, प्रभा को पुकारा तोह सारू और मीणा भी साथ आयी.... सारू और मीणा के गले मिलकर उनको जल्दी लौटने का कहके वापस नागलोक लौट गया अपनी नयी बीवियों के साथ.

मीणा बहोत खुश थी आर्यन ने कई पतलोकों की रानियां और राजकुमारियां से विवाह किया और कई प्रियेसिअन भी बना ली थी. मीणा अपने लक्ष्य से ज्यादा दूर नहीं थी और अब समय आने वाला था जब आर्यन ko"Divya-Lok" ( राजकुमारी मीनालोचनि का लोक) ले जाने वाली थी........ सारू और मीणा भी वापस दिल्ली चली गयी.

अणि एकांत में ध्यान लगा के बैठी थी अपने मैं को शांत करती ......

निशांक गुरूजी ने पुछा," गुरुदेव यह कैसी होनी है जोह पल पल कुछ न कुछ अप्रतिहासिक घटित हो रहा है? आर्यन की होने वाली पत्नियों और पतलोक की स्त्रीओं के बिच शक्ति असंतुलन बढ़ता जा रहा है. अब एक और कड़ी राजकुमारी विशाखा के नाम की जुड़ गयी है जोह बहोत तेजी से अपनी शक्तियां और आर्यन पे अधिकार बढाती जाएगी. गुरूजी कहीं सब बिखर न जाए जो ाश हम सबने आर्यन से लगायी है ?????? "

बड़े गुरूजी आँख बांध किये hi बोले," तुम तात्कालिक अंतर देख रहे हो निशांक जबकि नकाराकर्मकता से सकारकर्माता तक का पड़ाव सुहावना होता है पर अचंभित करता है. आर्यन से hi हर घटना और कर्तव्य जुड़ा है परन्तु हम मार्गः निर्धारित कर दें तब भी उसकी शक्तियां और छमता नया रास्ता अख्तियार कर लेती हैं. बंधन में भी उसकी शक्तियों का तालमेल समय समय पे बदलता है और लक्ष्य की जटिलता से प्राप्ति होती है. अभी उसका मैं एक बंधे महासागर की चारदीवारी जैसा है और जल्दी hi चारदीवारी हटने पर स्वयं तात का निर्माण करेगा तब jwaar-bhatta भी आएंगे और सुनामी की भी आशंका है जिसे खुद आर्यन को साधना होगा. हम भी उसके मस्तिक्ष को अब पढ़ नहीं पा रहे हैं बस शांत रखने का प्रयास hi कर सकते हैं"....... अल्पविराम के बाद फिर मुस्करा के पूछे.... " उसकी स्त्रियों के बिच संतुलन की तुम्हे अधिक चिंतित नहीं हो रहे हो ? जबकि निर्णय वह hi करेगा की कौन शक्तियां धारण करने में समर्थ है और कौन धरिये धारण करने में?"

निशांक भी मुस्करा भर दिया ," आप उसका हमेशा पक्ष लेते हैं गुरूजी, पिछली बार भी अपनी स्त्रियों के कारन हरा था. अब तोह लोकों की सीमाइयाँ भी नहीं रही और विशाखा की छमता महारानी विजयलक्ष्मी जी को व्यथित कर रही है ".

बड़े गुरूजी ," महारानी की चिंता तुम मत करो वह सक्षम है अपने लक्ष्य को पूरा करने में और विशाखा सिर्फ एक पड़ाव भर है आर्यन के जीवन में. रति की यादास्त बढ़ो वह बेचैन है और उसके मैं को शांत करो ".

'जी गुरुदेव' बोलकर निशांक गुरूजी भी ध्यान में लग गए वहीँ Ani(V) पुराने जंगल में समय बिता कर दिल्ली लौट गयी. उसने निस्चय कर लिया था की उसको क्या करना है...... ?

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नागलोक.......

आर्यन के विशाखा की गुफा में प्रकट होने पर सामने रानी हेमा के साथ 3ों दानव रानियां ,3ों दानव राजकुमारियां भी वहां इंतज़ार कर रही थी तीनो का.

प्रभा और विशाखा ने रानी माँ का आशीर्वाद लिया वहीँ आर्यन उनके गले लगकर मिला..... प्रभा सबसे गले मिली और विशाखा ने पुष्पलता को प्रणाम किया और बाकियों ने उसको सर झुका के अभिवादन किया तोह उसने हाथ जोड़कर सम्मान प्रकट किया.

विशाखा ," में अपनी गलतियों के लिए आप सबसे एक बार और चमा मांगती हूँ. में वचन देती हूँ मेरी वजह से कभी आप सबको स्वामी से मिलने में कोई बढ़ा नहीं होगी. आप जब चाहे अपना अधिकार ले सकती हैं ".

विशाखा के बदलाव को सब ॉश्चारिये से देख रहे थे तो रानी हेमा ने कहा," तुम इसी लिए जन्मी हो विशाखा की पतलोक को हमेशा सुरकिषत रखो और दिव्या तलवार को धारण कर तुम ने साबित कर दिया, तुमसे महँ योद्धा िश पतलोक में पैदा नहीं हुआ ".

विशाखा सर झुका के ," ऐसा नहीं रानी माँ मेरा घमंड hi मुझपर भरी था और मेरे स्वामी ने मुझ पे उपकार किया की में दिव्या तलवार को छु सकीय ".

रानी हेमा ने विशाखा को गले लगया और बोली," तुम एक अच्छी भार्या बनोगी आर्यन की और जल्दी hi हम सबको एक प्यारा सा नन्हा राजकुमार चाहिए तुमसे ".

विशाखा ने अपना चेहरा छुपा लिया शर्मा के उसके गले लगी कान में बोली," आप से अकेले में बात करनी है रानी माँ".

रानी हेमा ने भी हामी भरी और सबको बोली ," चलो हमको विशाखा से एकांत में वार्तालाप करनी है ".

प्रभा भी साथ जाने लगी तोह आर्यन ने उसका हाथ पकड़ के कहा ," तुम कहाँ जा रही हो, उनको बात करनी है तुम्हारा क्या काम वहां ".

रानी हेमा पलट के ," प्रभा तुम अपने सरपु के साथ रहो में जल्दी विशाखा को भेज दूंगी "...... सब मुस्कराती हुयी चली गयी आखिर प्रभा और विशाखा का आर्यन से मिलान का अवसर जो था.

प्रभा थोड़ा नाटक करती हुयी ," सबके सामने बोलै जरुरी था क्या , देखा सब है रही थी ".

आर्यन हसने लगा," अरे अगर तुम भी चली जाती तो में बोर होता. चलो तुमको जाना है तोह माया को बुला लेता हूँ ".

प्रभा झुंझालती हुयी आर्यन की तरफ बढ़कर उसका गिरबान पकड़ के ," आप मेरे सरपु हो, कोई माया वाया नहीं आएगी सिर्फ में और मेरा सरपु समझे "...... और बिस्तर पे पीछे आर्यन को धक्का दे दी.

आर्यन भी हसने लगा ," चल इधर मेरे पास आ नौटंकी, जब रोका तुझे तो दुसरे को क्यों बुलंगा ".

प्रभा अपने बड़े भाई की गॉड में अधलेटी सी उसकी लेफ्ट बहन के इर्दगिर्द अपने दोनों हाथ लपेटे सीने से लेफ्ट कान लगये उसके दिल की धड़कन सुन रही थी और आर्यन प्यार से उसके बाल राइट हैंड से सेहला रहा था और कमर लेफ्ट हैंड से.

प्रभा बिलकुल छोटी बच्ची बानी हुयी थी और आगे कैसे बढे ये सोच रही थी. सफ़ेद और क्रीमीश टिंच वाली ड्रेस में बिलकुल इनोसेंट अपनी कुटी पाई को आर्यन ने सर पे किश किया तो सर उठा के अपने हैंडसम भाई को निहारने लगी. आर्यन ने उसका माथा चूम लिया फिर बड़ी बड़ी कजरारी आंखें जिनमे दुनिया भर की इनोसेंस थी. अभी कुछ महीने भर पहले 18 की हुयी थी पर हट और बॉडी से पूरी नवयौवना थी और फेस से कुटी.

आर्यन ने स्माइल देकर पुछा," क्या सोच रही है मेरी क्यूट बेबी गर्ल "?

प्रभा ने हिम्मत करते हुए कहा," भाई में अब बड़ी हो गयी हूँ मुझे नाम से बुलाया करो ".

आर्यन हसने लगा ," कब, कैसे और कहाँ से बड़ी हो गयी है, बिलकुल छोटी सी बेबी है मेरे स्वीट सिस्टर ".

प्रभा चिढ़कर ," आपको तोह में बस बच्ची लगती हूँ, फिर मुझे प्यार कैसे करोगे ? और अपनी एएब्रोस मटकने लगी ".

आर्यन उसकी बात पर हस्ते हुए उसके गाल काटने लगा और गिल्ली गिल्ली किस्सियाँ करता उसका गाल भी चाट लेता ..... " तू इतनी स्वीट है तेरे गाल खाने का दिल करता है ".

प्रभा उससे बचने के चेहरा इधर उधर करती ," Hi hi hi ..... भाई मत कर मेरे गाल पूरे गीले कर दिए ..... चीई यककककक. .... पूरा थूक सां दिया..... छोड़ न भाई ...... है है है है है ..... गुलगुली करने लगा ...... "

जब प्रभा को छोड़ा तोह उसकी गॉड से उठकर वह अपना चेहरा ड्रेस की आस्तीन से साफ़ कर आर्यन के ऊपर कूद गयी और उसके निच्चे दबा के गुलगुली करती गीली गीली किसिंग करती ..... आर्यन जांभोज के उससे बचने की असफल कोशिश करता और हसे जा रहा था .

थोड़ी डिअर बाद उसके हाथ दोनों पीछे करके पलट गया और उसके ऊपर आकर लेट के बोलै ," बहोत दम आ गया है मेरी बेबी में, अब जोर लगएगी ".

आर्यन की पकड़ से न छूटने पे प्रभा ने उसके निचले होंठ को अपने दांतो से पकड़ लिया फिर ुष होंठ को चूसने लगी तेजी से ...... आर्यन भी पहले हैरान हुआ फिर प्रभा को ढीला छोड़ा तोह अपनी दोनों लम्बी टांगें उसकी कमर पे लपेट के और गर्दन में बाँहों का हार दाल के एक बार रुकी आर्यन की आँखों में देखकर कहीं नाराज तोह नहीं हुआ भाई. पर आर्यन को ऐसा hi उसको निहारते देखकर ुष नीली आँख वाले को दुबारा किश करने लगी ...... चुम्म्म्म मुहह्हह्हं ..... भाई ी लव यू ..... पुछःह पुछःह ......

आर्यन कोई प्रतिरोध नहीं कर रहा था तोह प्रभा का जोश बढ़ने लगा और अब ऊपर वाले आर्यन के गुलाबी होंठों को चूस कर अपने जीभ उसके मोह में डाली. आर्यन ने अपने अपने जबड़े खोल दिए 5-6 सेक् बाद तोह प्रभा उसकी जीभ को खोज के खेलने लगी.

आर्यन अभी भी वैसे hi झुका था और अपनी छोटी लाड़ली भें को मैं मानी करने दिया..... आखिर उसने प्रभा से विवाह किया था उसका पूरा हक़ था पर एक डर उसको भी था की कहीं अपनी फूल सी भें को नुक्सान न पहुंचा दे. जिस बात से आर्यन भाग रहा था वही प्रभा जी जान लगा के उसको किश कर रही थी......

10 मं से भी काम समय में उसकी सांस उखड़ी तोह आर्यन को कुछ न करते देखकर अपने हाथ और टांगें का कसाव खोले लगी ...... आर्यन सीधा होकर घुटने पे बैठा और प्रभा के चेहरे पे निराशा के एक्सप्रेशन देखकर उसके दोनों कंधे के निच्चे हाथ डालकर अपनी गॉड में बिठा के बोलै ," अब मेरी बारी बेबी ...... पुछःह पुछःह चुम्म चुम्म...... " ....... प्रभा एक नागिन की तरह लिपटी अपने भाई की भाव में सिसकने लगी......

अपने प्यार से हाथों को फिरा के पूरे सरीर को सेंसुअल तरीके से सहलाता डीप किस्सेस करता प्रभा को उत्तेजना बढ़ा के नए अध्धाये सीखने लगा ...... प्रभा अब कुशल खिलाडी के हाथों में कठपुतली सी नाच रही थी और 8 मं में hi 2 बार चरमोत्कर्ष पाकर ढीली हो गयी.

अफीम या चरस का नशा हो गया हो.... प्रभा की ऐसी हालत थी और आर्यन उसकी मनोदशा देखकर उसको प्यार से थपकी और बाल सेहला के साँतववना दे रहा था ," It's ऑलराइट बच्चे, फील करो िश सुख को ...... पुछःह पुछःह ..... यू अरे माय ब्रेव गर्ल न ..... "

आर्यन ," बाथरूम किधर है यहाँ बेबी.... बस दूर दूर तक महल hi दिख रहा है ...... ".

प्रभा ने माधोसी की हालत में एक तरफ इशारा किया ...... तोह 50 मीटर दूर एक दरवाजा नज़र आया. ुशी तरफ प्रभा को गॉड में लिए चल दिया जोह अभी भी सिसक रही थी. आर्यन का शाही विस्तार भी नाभि के पास से गिला हो गया था..... प्रभा तो अभी भी उडनखटोले पे सवार किसी दूसरी दुनिया में मदहोशी के आलम में आर्यन को निहारती एक अबोध तरुणी की तरह शर्मा रही थी ......

आर्यन दरवाजा खोल के अंदर घुसा तोह एक अलग hi नजारा था..... चरों तरफ सुनसान खाली अँधेरा वपत मैदान था. विशाखा की आवाज उसके मैं में गूंजी ," स्वामी अपनी मायावी शक्ति का उपयोग करो ".

आर्यन ने उसको धन्यवाद् कहते हुए आँख बंद करके रति का बाथरूम याद किया और वहां एक मॉडर्न वाशरूम बन गया जोह रति के सुईठे जैसा था. प्रभा को खड़ा करके बोलै ," फ्रेश हो जा बेबी में कुछ खाने का इंतज़ाम करता हूँ ".

प्रभा सपनो की दुनिया से बहार आयी तोह चौंक गयी और आर्यन से लिपट के बोली," हम नानी माँ के बाथरूम में कैसे आ गए ?"

आर्यन हसकर उसका गाल थपथपा दिया," यह नागलोक hi है और बाथरूम मैंने बना दिया है..... जा बीटा फ्रेश होजा या में हेल्प करूँ ".

प्रभा एकदम से वास्तविकता में आ गयी और आर्यन को बहार धकेल के फ्रेश होने लगी...... 'भाई को भी नानी माँ का hi बाथरूम याद आया" ..... फिर खुद hi मुस्करा के मंद मंद मुस्काई ..... " है है है है ...... नानी भी तोह भाई से सबसे ज्यादा प्यार करती हैं ...... "

प्रभा ने सीरियस होकर पइसस करते हुए फैसला किया में नानी माँ को सब सच्च बता दूंगी......

आर्यन अब िश आलीशान गुफा में आँखें बंद करके हर हिस्सा और कोना चेक करने के बाद बोलै," अप्रतिम विशाल ऊँची गुफा ये तो किसी राजमहल से भी ज्यादा बड़ी है और विशाखा के पास कितने astar-sastar हैं...... प्रभा ने तोह अपनी गुफा नहीं दिखाई लगता है सरप्राइज देगी ".

विशाखा उसके मैं में ," यह हम दोनों की hi आरामघा है स्वामी और प्रभा ने एक अन्य गुफा भी चुनी थी. आप प्रभा को संभाले उसका मैं बहोत चंचल है ".

आर्यन ," तुम कब आ रही हो प्रिये, रानी माँ कोनसा पाठ पढ़ा रही हैं तुम्हे..... मुझे कामकला का भी पूरा ज्ञान है ..... है है है है ".

विशाखा ने कोई जवाब नहीं दिया तोह आर्यन ने आँखें खोलकर अब बाथरूम के पास मायावी शक्ति से गुफा का वह हिंसा एक भव्य श्यान कक्ष में तब्दील कर दिया. तभी कुछ नागिन दासियाँ अपने हाथ में बड़े बड़े ढके थाल आर्यन को पहन झुका के आदरभाव से खली पड़ी बड़ी टेबल पे रखकर चली गयी.

आर्यन ने ढके थाल से पात्र उठा के देखा तोह अनेक व्यंजन थे धरतीलोक के.

वाह क्या खुसबू है बहोत समय हो गया अपना भोजन किये..... हाथ में एक बाईट लेकर कुछ सोचकर वापस रख दिया.

उसको अपने परिवार और मीणा की याद आयी. आर्यन जब खाना खता था उसको मीणा हमेशा याद आती जब पास न हो...... आप संगती तोह बदल सकते हैं आदत नहीं......

कुछ डिअर बाद प्रभा शर्माती हुयी वाशरूम से बहार आयी तोह यह अलग शयन कक्ष उसका बड़ा भाई बांये हुए था...... उसको लगा की उसे यहाँ अच्छा नहीं लग रहा है.

नीले गाउन ड्रेस में प्रभा बहोत सुन्दर लग रही थी, आर्यन की आवाज उसके कान में पड़ी," आजा कुछ खा ले में चूसे कर रहा हूँ तुझे क्या अच्छा लगेगा बेबी".

प्रभा भी थोड़ा रिलैक्स होती हुयी ," में तोह आपके हाथ से खाउंगी भाई आपकी गॉड में बैठकर ".

आर्यन भी मुस्करा के पलटा और एक बड़ी थाली में खाना लिए प्रभा की इनोसेंट हसी और इतराने पे खुश होता एक चेयर खींच के टेबल पे थाली रखकर प्रभा को गॉड में बिठा लिया और उसको प्यार से खिलने लगा. प्रभा भी बच्ची बानी हुयी थी यह नहीं ..... यह नहीं वह कहूँगी ..... यह मेरा फेवरेट है...... आर्यन की जान बस्ती थी िश छोटी भें में और पेशेंस उसका कमाल का था जोह हर नखरे उसके उठता था.

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विशाखा

दोनों ने खाना ख़तम किया hi था की विशाखा अपनी गुफा में नागिन रूप में पहुंची और आर्यन प्रभा को देख खुद मानव रूप में बदल गयी. आर्यन ," तुम नाग रूप में भी सुन्दर दिखती हो ".

विशाखा शर्मा गयी और प्रभा ने उसको चुनती काटी जोह नागिन रूप में विशाखा की बड़ी बड़ी आधी खुली चूचियां देख रहा था ...... यानी अर्ध मानव अर्ध नाग रूप लिए थी विशाखा.

विशाखा को पता न चला पर प्रभा ताड़ गयी भाई की नियत ख़राब हो रही है. विशाखा के लिए यह आम बात थी फिर उसका डर hi इतना था की कोई सर उठा के बात कर सके इतनी हिमाकत किसी में नहीं थी. पर आर्यन तोह चुनती काटने के बाद भी विशाखा को 3 अर्ध औरत और कमर के निच्चे जॉइंट नाग रूप में देखना चाहता था जब पहली बार देखि थी 6-6 विशाल चूचियां पूरी तानी हुयी और अकार एक डैम गोल गोल.....

*( दोस्तों याद हो तोह दीप्ति ने भी उसको डांटा था जब दिव्या तलवार के लिए दोनों आये थे पर आर्यन था ढीट hi)

विशाखा स्त्री के रूप में भी बहोत सुन्दर और बड़ी बड़ी चूचियों वाली और जबरदस्त बहार निकले जानलेवा चूतड़ वाली थी..... पतली कमर और घेरि नाभि उसके पिछवाड़े और अगवाड़े में चार चाँद लगते थे .

आर्यन तोह बहोत पहले से hi तड़प रहा था विशाखा के स्पर्श के लिए पर परभा जैसे उसको हिलने नहीं दे रही थी ....... प्रभा को बोलै ," बीटा अब तू आराम कर थोड़ी डिअर ".

प्रभा उसकी मनसा समझती बोली," नहीं भाई मुझे बस आपकी गॉड में रहना है".

विशाखा ," प्रभा अब स्वामी तुम्हारे भाई धरतीलोक पे हैं और यहाँ सरपु पहले हैं समझी ".

विशाखा ने आर्यन को भूके कुत्ते की तरह अपनी तरफ लार टपकते देखा तोह शर्म से पानी पानी हो गयी..... प्रभा और विशाखा में बहोत फर्क था..... प्रभा के लिए आर्यन उसका बड़ा भाई था जिससे वह बहोत प्यार करती थी और विशाखा एक ऐसी नागिन थी जिसका दिल hi नहीं आर्यन ने आत्मा तक जीत ली थी और ऐसी मादा अपने नर को दिल टूट के प्यार करती है.

विशाखा शर्मा के पलटी तोह प्रभा को अपने पिछवाड़े पे तोपची की अकड़न महसूस हुयी...... आर्यन अभी प्रभा न होती तोह पीछे से पूरा लुंड पेल देता विशाखा के पिछवाड़े में.

प्रभा से जलन के कारन रुका न गया तोह आर्यन के सीधे गाल पे काट ली ..... "अह्ह्ह्हह्हह क्या कर रही बेबी ..... काट क्यों रही है ".

प्रभा गुस्से से ," दीदी को घूरना बंद करो, कितनी बुरी नज़र से देख रहो आप जैसे खा जाओगे".

अब तोह आर्यन की गांड पहात गयी और विशाखा भी उसकी तरफ देखकर मैं hi मैं मुस्कराने लगी. चलो मुझे पसंद तोह करते है चाहे मानव रूप में hi सही...... विशाखा को कहाँ पता था की आर्यन तोह उसकी 6-6 चूचियों को पीने का प्यासा है .....

आर्यन ने प्रभा को टेबल पे बिठा दिया और विशाखा का हाथ पकड़ के बोलै," विशाखा तुम खाना खा लो आओ में तुम्हे खिलता हूँ ".

आर्यन से 2-3 इंच छोटी hi होगी विशाखा पर उसने कभी ऐसा भोजन नहीं किया था फिर जब उसका पति बोल रहा है तो इंकार क्यों करती. थाली में 3-4 डिशेस रखकर आर्यन जल्द से जल्द विशाखा के पिछवाड़े को अपने तोपची को फील करना चाहता था.

कुर्सी पे बैठकर अपनी गॉड में बिठा के विशाखा को भी वह भुजंग आर्यन का फील हो गया जोह दोनों पैरों के बिच पहन उठाये खड़ा उसके लेफ्ट नितम्ब के निच्चे दबा था पर उसने भी उसको अपने पिछवाड़े की दरार की गर्मी में अच्छे से फिट कर लिया..... आर्यन उसको प्यार से खिलते हुए गाल भी चूम लेता.

प्रभा की तोह कुछ समझ hi नहीं आ रहा था की भाई इतना फ़िदा हो गया क्या दीदी के ऊपर की में भी नहीं दिख रही उसको. आर्यन से रुका न गया तोह विशाखा के मदभरे होंठों को पीने लगा...... प्रभा टेबल से उतर के जाने लगी रूठ कर तो आर्यन ने उसकी कमर में हाथ डालकर अपनी एक झांग खोल के ुष्पे बिठा कर बोलै ," मैंने विवाह किया है दोनों से और हक़ दोनों पे बराबरी का है. धरतीलोक पे में तेरा भाई भी हूँ प्रभा बेबी पर यहाँ हम तीनो एक दिल एक जान हैं ".

विशाखा ने प्रभा का सर सहलाया तोह आर्यन ने उसको भी डीप स्मूच करने लगा और विशाखा की सीधे चूची वस्त्रों के ऊपर से नाप के भींच दी..... अपने होंठ दबाये विशाखा का िश जालिम का दर्द देना भी सुखद hi अहसास करवा रहा था.....

प्रभा को किश करने के बाद आर्यन ने कहा ," हमारे पहले मिलान का समय रानी हेमा ने कुछ घंटे बाद का बतया है तोह मेरी बाँहों में थोड़ा विश्राम कर लो और प्रभा पहले हम दोनों मिलान करेंगे Rati-kriya के बाद फिर विशाखा की बारी आएगी ".

आर्यन दोनों को गॉड में लिए खड़ा हुआ तोह प्रभा आगे से उससे जल्दी से चिपक गयी और विशाखा को उसने पीछे पीठ पे बिठा लिया....... प्रभा किश करती अपने भाई पे ज्यादा से ज्यादा अधिकार दिखा रही थी वहीँ विशाखा अब आर्यन के प्रेमपाश में पीछे से आलिंगन किये थी.

दोनों को नरम बिस्टेर पे उतार के आर्यन ने पहले अपना कुर्ते जैसा ऊपरी विस्तार उतरा तोह उसका अर्ध नग्न सरीर देखकर दोनों प्रेम से घूरने लगी फिर घूम के उनकी तरफ पीठ करके अपना निचला विस्तार भी उतर दिया...... अब तोह दोनों hi उसकी तरफ आंखें पहाड़ पहाड़ के देख रही थी.

दोनों की तरफ घूमा तोह तोपची को लहराते देखकर दोनों नागिन स्त्रियों की आंखें साराभाई होने लगी.

आर्यन बिस्टेर के बिच लेटकर एक चादर जैसी ओढ़ लिया तो कमर तक तब दोनों की तन्द्रा टूटी..... "अतिसर्गः hi अपने विस्तार उतर के मेरे पास आ जाओ मुझे तुम दोनों का नग्न स्पर्श लेना है बस अभी इश्के आगे नहीं बढ़ सकते. में आँख बंद कर रहा हूँ तुम दोनों विलम्भ न करो".

आर्यन की बलिष्ट काया और सुंदरता के बाद अपने पति के ख़ास अंग को इतनी नजदीक से देखकर दोनों विषमित थी और आर्यन की आवाज वास्तविकता में ले आयी...... दोनों सर झुका के आर्यन के पास बैठकर अब अपने अपने विस्तार उतर के उसकी चादर में लेफ्ट साइड से प्रभा और विशाखा राइट साइड से घुस गयी दोनों ने अपने स्तन तक चादर ओढ़ ली थी.

तीनो के नग्न सरीर में आपस में स्पर्श होते hi एक विधुत तरंग की लहर से पहल गयी...... आर्यन ने दोनों की कमर के निच्चे हाथ दाल के अपने ऊपर खिंच लिया. दोनों जैसी गूंगी सी उत्तेजित होने लगी पर आर्यन के हाथो का पीठ पे स्पर्श से दोनों को सुखद लग रहा था.

आर्यन ," बस िश पल को महसूस करो दिल की घेरे से फिर हमारा एक दुसरे से स्पर्श एक पहचान बनने लगेगा. अगर हम मिलान के दौरान दुसरे रूप यानी नाग रूप या दानव रूप में बदल गए तोह एक दुसरे को हानि न पहुंचा सकें".

विशाखा की उलटी झांग और प्रभा की सीढ़ी जाँघों के बिच तोपची सीधा तन के खड़ा था. दोनों के हाथ स्वतः hi एक साथ ुष पे पहुंचे और पकड़ बना ली.

विशाखा ," स्वामी ...... "..... आर्यन ने उसके होंठों पे ऊँगली रखकर कहा," मुझे आर्यन, माहि या सरपु hi बुलाओ..... में तुम्हारा पति हूँ कोई मालिक नहीं और बिस्टेर में नाम आसान होने चाहिए ताकि खुलकर मिलान हो सके".

प्रभा तोपची को स्पर्श करती हुयी निच्चे तक ऊँगली फिरा के boli,"Sarpu यह बहोत गरम है ".

आर्यन भी अपनी नौसिखिया भरयों को समझते हुए बोलै," हाँ उसको फील कर बेबी और िश अहसास को दिल की घेरे तक समां लो ...... "

विशाखा भी उत्तेजित होती आर्यन की सरीर के हर स्पर्श को दिल की घेरे के बिच बसा रही थी...... तीनो कोई मिथुन क्रिद्या नहीं कर रहे थे बस एक दुसरे का कामुक स्पर्श अपने रोम रोम में बसा रहे थे.

चादर कब की साइड हो चुकी थी विशाखा के ऊपर आर्यन पीठ के बल लेता था और प्रभा आगे से उसके ऊपर..... ऐसा लग रहा था जैसे दोनों आर्यन को सैंडविच की तरह ढकने की कोशिश कर रही हों.

घंटो बीतने के बाद िश स्पर्श पर्किर्या ने अब पहले विशाखा का सरीर रगड़ और स्पर्श से नागिन में बदलने लगा फिर प्रभा का और लास्ट में आर्यन का नाग के पूर्ण रूप में हो गए.......

अब कहाँ तीनो को बिस्टेर की जरुरत थी..... तीनो एक दुसरे को छेड़ते लिपटते गुफा की बिच में विचरण कर रहे थे...... सरपु दोनों के फेरोमोन्स से उत्तेजित होता जा रहा था पर बिच बिच में अर्ध मानव या पूर्ण मानव बनकर पल भर के लिए फिर नाग रूप में आ जाता.

तीनो को समय लग रहा था पर यह स्पर्श hi मैं था एक दुसरे को पहचानने के लिए वार्ना सम्भोग के दौरान किसी की भी जान जा सकती थी. विशेष कर आर्यन की.

**आर्यन= सरपु

प्रभा से लिपटने की कोशिश करता तोह विशाखा अपनी पूँछ में कुंडली लगाती सरपु को पकड़ लेती और विशाखा से लिप्तता तोह प्रभा बिच में घुसकर सरपु से रगड़ने लगती.

गुफा का द्वार तीनो के नाग सरीर से निकलते ूझ से अब पूरा सील हो गया था और गुफा पे भी नाग शक्ति का आवरण था...... यदि कोई िंह तीनो के बिच ववधान डालता तोह मौत का ग्रास होता.

विशाखा के 3 पहनो पे उसकी मनइयन तेज प्रकाश से नहीं थी और प्रभा के 2 पहनो पे भी मनइयन पूरी प्रकाशमान थी. सरपु को दोनों ने कुंडली में दबोच के अपने पहनो से उसके पहन और धड़ में दांत गदा दिए और ज़हर तेजी से सरपु के सरीर में प्रवेश करने लगा.

सरपु झटपटा रहा था पर दोनों नागिन उसको हिलने भी नहीं दे रही थी...... कुछ पलों में सरपु का सरीर बेजान हो गया तोह दोनों ने उसको छोड़ दिया और नाग्शक्ति ने प्रभा और विशाखा के नागसरीर जोड़ दिए...... 5 पहन वाली वह विशाल अब एक नागिन थी जिसमे पूर्ण नाग्शक्ति वपत थी ......बेजान पड़े सरपु की तरफ लपकी नागिन उसको हिला के देखने लगी.

यानी यह भी मारा गया जोह मिलान के लायक नहीं था...... वह उसको निगलने के लिए बिच वाला पहन का मुख खोली तोह सरपु के सरीर में हलचल हुयी और अब वह भी अकार से बड़ा होने लगा और हज़ारों पहनो के दातिए अकार के सर्प में बदल गया ...... उसके आकर के सामने यह 5 पहन वाली नागिन भी एक छोटी सपोली लग रही थी.

सरपु से दूर हैट टी नागिन को पल भर में उसने जकड लिया कुंडली में और फिर तब hi उससे अलग हुआ जब कई घंटों में योजन क्रिद्या पूरी न हो गयी...... एक तेज प्रकाश ने दोनों को धक् लिया जोह नाग्शक्ति थी और अब वह नागिन के अंदर समां चुकी थी.......

थोड़ी डिअर बाद दोनों नागिन यानी प्रभा और विशाखा अलग अलग हो गयी पर दोनों बेसुध और सुष्ट थी......

सरपु भी अब सामान आकर में िस्थिल सा पड़ा था पर धीरे धीरे उसका रूप अर्ध मानव फिर पूर्ण मानव में बदल गया...... प्रभा भी अर्ध मानव फिर स्त्री रूप में आ गयी. विशाखा अपना नागिन रूप नहीं बदल पा रही थी दर्द से बेहाल रंगति हुयी धीरे धीरे दोनों से दूर जा रही थी गुफा के अँधेरे कोने की तरफ.

प्रभा को इतना थका देखकर आर्यन उसको गॉड में उठा लिया और चल दिया गुफा के ुष हिस्से की तरफ जहाँ उसने मायावी कक्ष और बाथरूम बांया था. सब वैसा hi हो रहा था अब तक जैसा रानी हेमा ने अपने पुत्र आर्यन को समझाया था...... मगर एक से ज्यादा दिन बीत गया था िश 'Naag-rati-kridya' में.

बिस्टेर पे लिटा कर आर्यन ने प्रभा के पूरे नग्न सरीर को चूमा और उसके बाद बड़ी सहजता से प्रभा से पहला मिलान किया ...... उसकी छोटी सी छूट की सील खोल डाली.

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प्रभा बहोत चीखी चिल्लाई पर आर्यन जानता था की प्रभा के लिए पहला मिलान कास्ट hi करेगा पर फिर दूसरा फिर तीसरा मिलान सुखदायी था.

प्रभा अब आर्यन की बाँहों में सू रही थी 6 घंटे की मैराथन चुदाई के बाद तब आर्यन के कान में किसी की करुणा पुकार सुनाई दी 'स्वामी'......

आर्यन की आंखें खुली और फिर से पुकार ने जैसे विशाखा की सूद उसको हुयी...... आर्यन आहिस्ता से प्रभा को बिना जगाये बिस्टेर से उठकर विशाखा का अंदाज़ा लगया तो वह दूर एक कोने में दर्द से तड़प रही थी.

आर्यन चलते हुए जब विशाखा को खोजते हुए पहुंचा..... एक अंधकार जगह में वह कररह रही थी...... झट से सरपु का रूप ले आर्यन धरातल पे लहरता विशाखा के नज़दीक पहुंचा और कुछ hi दुरी पे अपना पहन उठाये उसको देखने लगा......

विशाखा का नागिन रूप से बहार आना जरूरी था वार्ना वह हमेशा इसी रूप में रहती. सरपु इंच बी इंच विशाखा के करीब पहुंच के उसके सरीर से लिपटने लगा और अब यौनक्रीडया फिर से शुरू हो गयी थी. विशाखा सरपु पे हावी थी पर वह कुछ कर नहीं पा रहा था. अगले 20 घंटे दोनों जुड़े रहे और जब अलग हुए तोह सरपु की बस साँसे चल रही थी.....

सरपु ने आखिर कर अपना काम कर दिया था विशाखा और प्रभा दोनों गर्भ से हो गयी थी और जल्दी hi अंडे देने वाली थी...... विशाखा जोह अब स्त्री रूप में थी उसको अपनी मायावी शक्ति से आर्यन बिस्टेर पे प्रभा के साथ लिटा के गायब हो गया.

नाग्शक्ति को उसको वररिस मिल गया था और ुष वररिस की रक्षक भी पैदा होने वाली थी........

दोस्तों में यहाँ बता दूँ की आगे चलकर भविष्य में विशाखा ने एक नाग राजकुमार को जनम दिया और प्रभा ने नाग राजकुमारी को.

आर्यन जब गायब हो गया विशाखा की गुफा से तोह सीधा अपनी माँ रानी हेमा के पास प्रकट हुआ..... उसके अंदर बिलकुल जान न थी और बेहोश हो गया.

राजमहल में रानी हेमा भी घबरा के आर्यन के पास लपकी और उसके सर पे हाथ रखकर उसको सुलाने की कोशिश की.

आर्यन का सर अपनी गॉड में रखकर जब उन्होंने दूध पिलाया तोह आधे घंटे में आर्यन की मूर्छा टूटी...... "माँ में यहाँ कैसे आ गया ? जहाँ तक मुझे याद है में गुफा में था और आपके आदेश अनुसार सब अच्छे से पूरा करने की कोशिश किया ".

अपने विस्तार ठीक करती रानी हेमा की आँखों में भी आंसूं आ गए की सब को अपनी पड़ी है मेरे पुत्र को कितने जातां और सितम झेलने पड़ते हैं ...... आर्यन उनके आंसूं पहुंचता बोलै ,"रानी माँ आप दुखी न हो मुझे कुछ नहीं हुआ बस थोड़ा दूध और पीला दो में बिलकुल ठीक हो जाऊंगा ".

रानी हेमा भी आर्यन की इच्छा सुनकर हसने लगी और फिर से उसके मोह में अपनी चूची लगा के पिलाने लगी. इतना अच्छा दूध किसी का नहीं होगा जितना आर्यन को उनका लगता था. दोनों के बिच माँ बेटे का रिश्ता प्रगाढ़ होता जा रहा था जोह रति के लिए सुबह संकेत नहीं था. बस किसी ज़िद्द से रानी हेमा बंधी थी की वह धरतीलोक नहीं जाएँगी......

***( वहीँ महारानी मिरदुला भी दिल्ली में सारू के पास पहुंच गयी थी जोह आर्यन को दूध पिलाती थी और दोनों सिर्फ ढेरों आशीष अपने बेटे को देती थी)

आर्यन दूध पीकर आराम किया तोह थोड़ी डिअर में स्वर्ण और माया भी उससे मिलने आयी तोह चुपके से आर्यन वहां से निकल के एक एक राउंड दोनों के साथ पूरा कर वापस नागलोक में गुफा में पहुंच गया.

विशाखा और प्रभा जाग गयी कुछ डिअर बाद तीनो ने फिर से मिलान किया पर अब तीनो मानव रूप में थे.

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Aryan-Vishaka-Prabha

3 दिन बिताने के बाद आर्यन वापस लौटा अपनी दानव भार्या और प्रेसिओं के साथ भी कुछ वक़त बिता के.

रानी स्वर्णलता भी अब प्रेग्नेंट थी और भविष्य में एक बेटी को जनम दी जिसका नाम "स्वर्णी" रखा गया और माया ने भी एक बेटी को जनम दिया जिसका नाम "मानवी" रखा गया.

लेकिन दोनों माओं की प्रसव के समय मिर्त्यु का संकट घेर्य हुआ था और कई लोग यह नियति जानते थे ...... ??????

थे एन्ड ऑफ़ अपडेट 38

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अपडेट 39

Part-1

(गीता और माँ का अंचल)

अब प्रेजेंट में....

रति ," गुड मॉर्निंग मेरी बच्ची, तू फ़िक्र न कर जबतक में जिन्दा हूँ तुझे किसी बात की कमी महसूस नहीं होने दूंगी ...... आर्यन के बराबर मेरे प्यार और आशीर्वाद हमेशा तेरे साथ है. दोनों आफ्टरनून में मेरे ऑफिस पहोंचो वहीँ से मेरे साथ पूरी फॅमिली से मिलवाने ले चलूंगी. धयान रखना िश बुद्धू का ...... "

गुल की आँखों के आंसूं साफ़ करता आर्यन, उसको पुचकारते हुए जब रति की कॉल कटी तोह उसके गले लगकर बोली," अब सच्च में मुझे गीता दीदी से जलन हो रही है आर्यन ....... एक तरफ माजी और दूसरी तरफ तू, इतना प्यार तोह संसार में देने वाला कोई नहीं होगा...... मुझे प्यार कर आर्यन में िश पल को जीना चाहती हूँ. मेरी नयी यादें बना दाल जिसमे सिर्फ तू hi तू हो मेरी जान ".

अगले आधे घंटे गुल को सेन्सुअली प्यार करके आर्यन भी नींद की आगोश में चला गया...... गुल और आर्यन का प्यार आगे क्या रंग लाएगा यह तोह वक़्त hi तय करेगा ...... मगर अब आर्यन नींद में नागलोक में अपने अधूरे सपने को पूरा करने घेरि निंद्रा में चला गया.........

अब आगे ......

आफ्टरनून में ठीक 12 बजे दोनों उठे तो कोई गिला सिकवा नहीं था और गुल किसी खिले गुलाब की तरह अंगड़ाई लेती आर्यन का गाल चूम के बोली," गुड मॉर्निंग माय लव मुह्हह्ह्ह्हह ......"

आर्यन भी उसका माथा चूम के बोलै," आफ्टरनून हो गयी है मेरी बेगम ..... पुछःह पुछःह ...... "

गुल सूखी से," मेरी तोह सुबह hi हुयी है मेरे सरताज नयी ज़िन्दगी की".

आर्यन आँख मार कर," चलो िश सुबह में प्यार करके नए सपने बुनते हैं गुल मैडम क्या कहती हो ?"

गुल हस्ते हुए ," बिलकुल नहीं, अभी माजी के पास जाना है वह वेट कर रही होंगी"..... आर्यन के लबों को चूम के ....." बस इतने से काम चलो जी हम रेडी होते हैं".

आर्यन ने उसको बैठते देखा तोह उसके गूरे गूरे नंगे नितम्बों को पकड़ के अपने ऊपर गिरा लिया," साथ में रेडी होते है न ज्यादा मजा आएगा "......उसकी नंगी छातियों में अपना चेहरा रगड़ने लगा...... आर्यन का तोपची भी अकड़ दिखने लगा गुल के कटी प्रदेश पे.....

आर्यन का सर पीछे करके उसकी नाक पकड़ के हिलती हुयी गुल ने कहा," फिर तोह न तुम मुझे रेडी होने डोज न खुद होंगे..... बस यार 10 मं प्लीज फ्रेश तो होने दे".

आर्यन ने भी उसको किश किया और ok बोलकर जाने दिया....... फिर बिना को कॉल करके रति के लिए पुछा तो वो ऑफिस में hi थी.

गीता को कॉल मिलाया तोह वह गाँव जा रही hi अपनी बाइक Harley-Davidson पे दीप्ति के साथ...... जोह बिना उसको पहले hi बता चुकी थी.

गीता ," देख अब में नहीं रुकने वाली वहां बहोत काम अटका पड़ा है. तू मजे ले अपनी नयी लुगाई के ".

आर्यन हसकर," चल मेरी चंदा रानी तू भी क्या याद रखेगी आल थे बेस्ट एन्जॉय थे ट्रिप ".

गीता हैरान होकर ," वह बीटा नयी मिल गयी तोह मुझे भूल गया..... चल फ़ोन रख ".

आर्यन हस्ते हुए कॉल कट कर दिया तोह गीता भी हैरान थी 'साला एक बार भी नहीं बोलै मत जा..... भाड़ में जाये झांट का पिस्सू'.

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गुल

1 बजे रतिदेवी के कंपनी ऑफिस में रोटी हुई गुल को गले लगा रति खुद भी इमोशनल होने लगी. दोनों को रूट देखकर आर्यन ने बिना को इशारा किया की यह हो क्या रहा है? बिना ने भी आँख मार के कंधे उचका दिए इशारे से मुझे क्या पता ?

आर्यन ," बिना आज मीणा आयी है क्या?"

रति ने आर्यन को पलट के देखकर कहा," तू लंच करने चल रहा है और मीणा, डॉली भी साथ आ रही हैं ".

डॉली का नाम सुनकर आर्यन के लुंड ने एक अंगदी ली पर अभी तोह माँ की टोन ऐसी लग रही है जैसे कोई मौका hi नहीं मिलेगा. गुल से 10 मं बातें करके रति ने कहा," चलो हम लोग निकलते हैं और बिना तुम ऑफिस से सारू और रानी साहिबा को कॉल कर दो लंच हमारे साथ करें. गुल बेटी का लगोगे भी फार्महाउस भेजवा देना".

रति और गुल ऑफिस से निकली तोह आर्यन ने बिना का हाथ पकड़ के पीछे रोक लिया.

उसके चेहरे और गर्दन पे कट और लाल निशान देखकर बोलै," ज्यादा दर्द हो रहा है ?"

बिना उसकी आँखों में देखकर," थोड़ा दूध पीला अपनी चंदा रानी को हाथों में जान काम है ".

आर्यन उसके लबों को चूम के अपनी बाँहों में भर के बोलै," मार देगी तुझे किसी दिन जान से दूर रहकर उससे मेरी जान".

बिना हसकर," फिर तोह मेरा नाम शहीदों के नाम के साथ जुड़ जायेगा आखिर दक्का भी तोह उसके मर्द पे मैंने डाला है ".

तभी गेट पे खस्ने की आवाज आयी तोह डॉली थी जोह पेअर पटक के वापस चली गयी आर्यन बिना को लिपटे देखकर ......

आर्यन उसके पीछे जाते हुए बोलै," बिना, चंदा रानी गोअन नहीं पहुंचनी चाहिए अगर निकले..... आज उसके लिए बॉर्डर सील करवा दे ".

बिना," पक्का मार देगी वह मुझे ".

आर्यन बहार निकलते हुए उसको पलट के आँख मारा ," तोह मर्डर जाना "..... वह भी हसने लगी......

कंपनी की बिल्डिंग से निकलती हुयी डॉली को आर्यन ने अपनी कार में जबरदस्ती बिठा लिया जोह उसके रॉब से बोलने पे मान गयी.

आर्यन ," क्या हुआ मेरा बच्चा नाराज है?"

डॉली गुस्से से ," आपको मेरी फ़िक्र hi कहाँ है जाओ बिना के पास ".

आर्यन ने डॉली के गाल पे हाथ फिराया तोह हाथ हटा दी ..... " देख सायद तुझे पता नहीं चंदा रानी ने कल बिना को मार मार के अधमरा कर दिया...... "

डॉली चिढ़कर," मुझे पता है पर वह फिर भी नहीं सुधरी, आप बस उसको hi प्यार करो".

आर्यन ने देखा की यह ऐसे नहीं मानेगी तोह उसकी कमर में हाथ दाल के अपनी गॉड में खींच के बोलै," ज्यादा गुस्सा करेगी तोह कभी बात मत करना मुझसे".

डॉली एकदम से शांत हो गयी तोह आर्यन ने उसको गले से लगाकर बोलै," बिना हमारी बहोत ख़ास है और वह तेरी बड़ी भें जैसी है. सोच कुत्ते की तरह मार पड़ी उसको क्यूंकि...... "

डॉली झट से आर्यन को घूर के ," क्यूंकि गुल को बचा रही थी ...... आपने तोह निकाह भी कर लिए उससे ".

आर्यन हसकर," इधर आ सही से बेथ में तुझे पूरी कहानी बताता हूँ"...... फिर आर्यन ने ड्राइव करते हुए बिना और गुल की स्टोरी बताई तोह डॉली को भी बहोत दुःख हुआ की दोनों की बाद से बदतर ज़िंदगी हो गयी थी और भाई मदद नहीं करता तोह जाने कब की मर्डर गयी होती ......

आर्यन ," अब बता में क्या करता गुल चल मेरी दोस्त भी है और बचपन की अधूरी चाहत भी जिसके लिए किसी ने भी मेरी प्रेम की फ्लाइट नहीं उड़ने दी और बिना को दुबारा जिन्दा करके लाया हूँ ..... बोल गलत किया का मैंने ".

फार्महाउस के कार पार्किंग एरिया में कार कड़ी करि तो डॉली आर्यन का पूरा चेहरा लाल कर दी चूमि लेकर लिपस्टिक से..... " आप बहोत अच्छे हो भाई, में बेकार में भड़क रही थी "...... दोनों ने स्टार्टर यही एक दुसरे के उत्तेजित अंगों को चूस चाट के शांत किया.

डॉली को प्यार से मन के आर्यन जब फार्महाउस के दिंनिंग एरिया में डॉली के साथ पहुंचा तोह गीता एक तरफ सोफे पे गुस्से में बैठी थी और बाकी सब डिनर टेबल पे आर्यन का hi इंतज़ार कर रहे थे.

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हुआ यह ......

गुल जब रति की कार से उतर के उसके साथ अंदर आयी तोह कविता ने एंट्री गेट पे रोक के पहला उसका ारता पूजा की थाली से किया फिर उसकी grah-parvesh की रसम हुयी. सारू आगे आकर गुल का हाथ पकड़ के अंदर ले आयी तोह वह इमोशनल होकर उसके गले लग गयी.

रतिदेवी ने गुल के सर पे हाथ रखकर कहा की यह हमारे खानदान की सबसे स्पेशल बेटी है और आर्यन का रूम आज से इश्क होगा..... बबिता के साथ बाकी सब भी गुल की सुंदरता की तारीफ कर रहे थे. मीणा के साथ Dimple-Payal भी गुल को कोंग्रटुलतिओन्स बोली ," वेलकम तो थे फॅमिली गुल, डिअर लगी पर सही जगह तुम पहुंच hi गयी ".

रति ," मीणा जा बेटी गुल को साथ ले जा और फ्रेश होकर लंच करते हैं ".

" ओह्ह तू यहाँ तक भी पहुंच गयी, निकल बहार नहीं तोह यहीं थोक दूंगी "..... गीता की धाड़ सुनकर सब हैरान हुए और गुल के तोह टूटे hi ुध गए..... गीता को तो वह भूल hi गयी थी.

रतिदेवी तेज आवाज में," गीता अगर जुबान तेरी कड़वे है तोह लगाम hi लगा लिया कर. घर अब उसका भी है और तेरी करतूत मुझे पता है सुकर मन तू मेरी बेटी है वार्ना ऐसी बातें कभी नहीं करती ".

गीता और दीप्ति रेडी होकर निच्चे आयी थी और गुल को लाल चुनरी सर पे ओढ़े और माथे पे टिका चावल लगा देखकर हैरान थी की यह यहाँ कैसे पहुंची..... पक्का आर्यन लाया होगा?

गीता आदत से मजबूर थी तोह भड़क गयी. रति को गुस्से में भी देखकर गीता बिना डरे आगे बढ़ी गुल की तरफ तो गुल दर से कांपने लगी पीछे हैट टी हुयी पर वह नजदीक पहुंचती उससे पहले गुल के सामने रति अपनी कमर पे एक हाथ रखकर कड़ी होती हुयी बोली," मुझे कोई नाटक नहीं चाहिए वार्ना में भूल जाउंगी की तू मेरी बेटी है ".

सारू आगे आकर गीता के कंधे पे हाथ रखकर बोली," गीता बेटी तू अपने रूम में जा प्लीज जा न बीटा ".

सारू की तरफ देखकर गीता रुक गयी पर रति को वार्निंग दी ," कब तक बचोगी इश्को में भी देखती हूँ ".

रति गुस्से से उसकी तरफ बढ़ी तोह डॉ अंजू ने कहा," दीदी आप गुस्सा न करो और गीता बेटी आर्यन से बात करना. तू भी शांत हो जा अपने रूम में जा ".

गीता प्यार पटक के वापस चली गयी तब रति ने दीप्ति को आवाज दी जोह एक तरफ कड़ी बस डर रही थी अब क्या होगा?

दीप्ति जब उसके पास आयी तोह बोली ," राजकुमारी यह गुल है आर्यन की बहोत पुराणी दोस्त और अब उसकी बेगम भी है. आर्यन - गुल ने निकाह किया है और अब इश्के हक़ की तुम्हारी जिम्मेदारी है. तुम राजकुमारी हो क्या इश्के साथ अन्नाये नहीं हो रहा? और तुम्हारी हंसकाल बड़ी दीदी िश मासूम से कोनसा बदला ले रही? में चाहती हूँ तुम भी अपनी गलती सुधारो, आर्यन बोलता नहीं है पर तुम दोनों बहेनो ने जोह किया उसको कोई पाप hi कहेगा ".

दीप्ति शर्मिंदा होकर अपने दोनों हाथ जोड़कर गुल से माफ़ी मांगने लगी तोह गुल ने भी उसको गले लगा के ऐसा न करने को कहा ," आप राजकुमारी हैं ऐसे शर्मिंदा मत कीजिए आप दोनों से में बिलकुल नाराज़ नहीं हूँ. बस मेरा आना सायद मनहूसियत hi मेरे साथ ले आया ".

डॉ अंजू," नहीं गुल बेटी, कभी ऐसा मत कहना वार्ना जिसके नाम से सारे वाडे किये हैं उसका अपमान hi होगा.... तुम स्पेशल हो एहि दीदी ने भी कहा है ".

दीप्ति ," माफ़ी छोटा स्तब्ध है पर में दीदी की तरफ से भी आपसे सच्चे दिल से हाथ जोड़कर चमा चाहती हूँ "..... दोनों फिर से गले लग गयी.....

रति," गुल बीटा अब जाकर फ्रेश हो जाओ आज तुम्हारे लिए स्पेशल लंच कविता और बबिता ने बांया है और रात को एक छोटी पार्टी भी मैंने राखी है जिसमे बस घरवाले hi समहिल होंगे..... दीप्ति बेटी में तुम्हारी समजाहदरी देकर बहोत खुश हूँ और थोड़ी अकाल अपनी बड़ी दीदी को दो. हर समस्या का समाधान गुस्सा या मार पिटाई नहीं होती ".

गुल का हाथ पकड़ के दीप्ति के साथ मीणा और उसकी दो बड़ी भेने अपने रूम में ले गयी.......

रति ," बहु लंच लगवा में फ्रेश होकर आती हूँ और यह आर्यन कहाँ रह गया. अपनी चंडी देवी को खुद संभाले, पागल लड़की ने कल गुल को मारा फिर बिना को बहोत मारा. क्या करूँ में िश बेवकूफ का बस मार पिट hi आती है इश्को ".

गीता निचे आयी तोह हेलमेट लिए थी ..... वह बहोत गुस्से से बिना कुछ बोले जा रही थी..... रति उसको hi देख रही थी पर जब दीप्ति भी पीछे पीछे आयी तोह रति की सटक गयी ," कहाँ जा रही है और दीप्ति तुम इश्के साथ जा रही हो ".

दीप्ति तोह फँस चुकी थी एक तरफ होने वाली सास थी दूसरी तरफ उसकी बड़ी भें गीता.... ," वोओओओ वोओओओओ माजी हम गाओं जा रहे हैं बाइक राइड से...... " और सर झुका ली......

उसकी आवाज था रही थी, रति गुस्से में ," कोई कहीं नहीं जा रहा"...... और गीता की तरफ बढ़कर उसकी उलटे हाथ की कोण्ही पकड़ के खींच के ले जाकर सोफे पे बिठा के बोली ," अगर तू यहाँ से हिली न तेरी टाँगे तोड़ दूंगी...... यह कोई आम लड़की नहीं है समझी और यह हमारे गाओं रश्मो के साथ जाएगी समझी..... गीता कड़ी हुयी तोह रति ने उसको गुस्से से वापस बिठा के बोली," मेरे सबर का इम्तिहान मत ले गीता..... मैंने बोलै न यहीं बेथ ".

गीता बस रति को घूरती रही और जब दीप्ति की तरफ देखि तो वह भी ऊपर जा चुकी थी..... रति ने सारू को कहा ," देख ले इश्को सारू वार्ना आज यह पिटेगी मेरे हाथ से ".

सारू भी अब गीता के पास बैठकर बोली," यह नहीं जाएगी माँ आप फ्रेश हो जाओ "..... रति अपने सुईठे में बडबडते गुस्से से चली गयी.

गीता फिर 5 मं बाद उठी तोह सारू ने उसका हाथ पकड़ के बिठा दिया..... अब वह सारू की बात ताल नहीं सकती थी.

आधे घंटे बाद सब गेस्ट्स और होस्ट्स डिनर टेबल पे थे और गुल का इंट्रोडक्शन रति ने आर्यन की पुराणी बेस्ट फ्रेंड के रूप में दिया. जबकि सबको खबर थी की वह आर्यन की क्या लगती है.

गीता बस सोफे पे गुस्से में बैठी अपने मोबाइल पे गेम खेल रही थी.

___________

गुल जब मीणा के रूम में पहुंची तोह दीप्ति का मोबाइल रिंग हुआ ..... उसने कॉल अटेंड करके बस इतना hi बोलै, 'आ रही हूँ दीदी '......

दीप्ति ने गुल का हाथ पकड़ के कहा," आप को में दीदी बुला सकती हूँ न गुल जी ..... मुझे एक बार फिर माफ़ कर देना छोटी भें समझ के और मुझे जाना होगा गीता दीदी मेरा वेट कर रही हैं..... प्लीज मंद मत करना ".

गुल ने भी प्यार से उत्तर दिया," अगर दीदी मानती हो तो कोई गिला सिकवा मत रखो अपने जेहन में. आप जाइये वह आपका इंतज़ार कर रही होंगी ".

गुल के बारे में कितना गलत अनुमान लगा लिया था दीप्ति ने उसके गले लगकर दीप्ति जब वापस चली गयी तोह डिंपल ने दूर बंद करके कहा," अब आया है ुण्ठ पहाड़ के निच्चे, गुल दीदी के आगे दोनों राजपूत बहेनो की हवा टाइट हो गयी. वाह दीदी तुस्सी चा गए"..... और गुल के गले लग गयी .....

पायल भी गुल से पीछे से लिपट ते हुए," गुल दीदी आप इतने दिन कहाँ थी, में तोह हमेशा hi आपको अपनी भाभी समझती थी. चलो डिअर आये दुरुस्त आये पर नेग बिना लिए में नहीं बक्शने वाली..... क्यों मीणा ?"

मीणा भी हसने लगी ," अरे दीदी भाभी को फ्रेश तोह होने दो फिर हम सब भी यहीं है खूब गप्पे मरेंगे और नेग तो रात में लेंगे वार्ना आर्यन को एंट्री नहीं मिलेगी ...... है है है है है ......."

भाभी सुनकर गुल भी शर्मा गयी और मीणा के सर पे हाथ फिरा के फ्रेश होने चली गयी..... थोड़ा िकान्त भी वह चाहती थी जैसा हेमा गहमी का माहौल बन गया था.

डिंपल ," छोटू के तोह भाग खुल गए, उसके दिल की रानी गुल दीदी जोह मिल गयी है .... है है है है ...... "

पायल भी साथ देती हुयी ," वह डेसेर्वे करता है दीदी पर गीता बहोत भड़क गयी है और छोटू पे भी गुस्सा निकलेगी".

मीणा सीरियस होकर सेल्फ पे फ्रिज से निकल के जूस 4 गिलास में डालती हुयी बोली," कुछ नहीं करेगी वह बस अभी पारा चढ़ा हुआ है और आर्यन मन लेगा. अब गलती तो वह कर दी है पर स्वीकारेगी नहीं, उसको गुल दीदी पे हाथ नहीं डालना चाहिए था. वह आसानी से मन कर देती की गुल उसको पसंद नहीं आर्यन उसको दूर रखे फिर कर भी तो वह एहि रहा था उनको मुंबई भेज के..... पर कहते है न आ बैल मुझे मार ".

डिंपल भी मीणा की बात पे ताली मारी और बोली," कितनी खूबसूरत न है गुल दीदी बिलकुल मखान जैसी स्किन, कितना ग्लो करती है और बिना मेकअप के hi ब्यूटी क्वीन दिखती हैं ".

पायल ," इशलिये चंडी देवी भड़की हुयी है, खुद तोह काली कलूटी बैगन लूटी है.... hi hi hi hi ...... "

पायल हसने लगी तोह डिंपल और मीणा उसको घूरने लगी. अपनी गलती का अहसास होते hi उसने कान पकड़ के सॉरी बोलै तोह दोनों ने पायल को गिरा के गुलगुली करने लगी . डिंपल सवाली थी मीणा भी और गीता िंह दोनों से थोड़ी लेस्स डस्की थी पर गीता की पर्सनालिटी hi काफी हॉट थी...... रॉउडी स्टाइल, मरदाना जैसी तेज आवाज और शेरनी सी चाल hi सब मर्दों की पतलून गीली करवा दे.

डिंपल ," बीटा काले हैं तोह क्या हुआ हम सब दिलवाले है ...... है है है है है ..... "

पायल आँख मार के ," गीता लगती तोह नहीं है दिलवाली ????? "

मीणा भी सीढ़ी बैठकर," उससे बड़ा दिल किसी का नहीं होगा..... बस बिचारि को प्यार जाताना नहीं आता करती कुछ और है कर कुछ और जाती है ".

डिंपल ने मीणा की पीठ थपथपाई.... " शाबाश क्या बात दुश्मन की तारीफ अच्छा संकेत है ".

मीणा सीरियस होकर ," वह कोई दुश्मन नहीं है दीदी बस उसको दोस्त बनाने नहीं आते ".

पायल भी अब उठकर ताली बजाते हुए बोली," वेल फिर जाने हॉल और सो कॉल्ड तुम्हारी राजकुमारी उसकी चमचियाँ हैं ?"

मीणा टपक से बोली," नहीं उन्ह दोनों को भें बना ली दोस्त नहीं बना पायी, असली दोस्त और दुश्मन सिर्फ उसका एक hi रहा है आजतक वह है आर्यन. अब किस्मत देखो दुश्मन भी नहीं रहा, उसका होने वाला पति बनने वाला है ".

डिंपल ," छू छू छू ..... तोह चंडी देवी का खेला ख़तम बस धकाम पिलाई चालू नहीं हो रही इशलिये गुस्सा है" ..... है है है ...... तीनो हस्ती हस्ती लौट पोत हो गयी ......

गुल फ्रेश होकर बहार आयी तोह वह बाथ भी ले चुकी थी मीणा ने उसका लगगे पहले hi मंगवा लिया था तोह ड्रेस चेंज करके एक पतीला सुईठे फेन ली जिसमे और ज्यादा सुन्दर दिख रही थी. तीनो भेने उसको रेडी होने में मदद कर रहे थे. तीनो की पहली पसंद hi गुल थी अस ा भाभी पर अब आर्यन के लिए खुश थी की उसका बचपन का प्यार उसके पास है. तभी तीनो ने मुंबई में गुल को छुपा के रखा था पर अब पिटारा खुल गया तोह खुल गया.....

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रति को सर दर्द की टेबलेट देती डॉ अंजू बोली," इतना गुस्सा मत किया करो दीदी, फिर गीता बच्ची hi तोह है ".

गोली खाकर गिलास से पानी पि और बोली," बच्ची है वह बच्ची..... मैंने सिर्फ डांटा था पर वह तो गुल को मारने hi चली आयी. मेरी क्या इज्जत रह गयी ुष लड़की के सामने जिसको सब ठीक करने का वादा और भरोसा दिलाकर लायी और यह चंडी देवी मुझे hi आंखें दिखा रही थी. आज में जान से भी मार देती अगर कुछ भी चुन छप्पड़ करती तोह ".

डॉ अंजू," हाँ जैसे आर्यन बहोत खुश होता आपकी हरकत पे..... अपने बेटे के प्यार को मार देती ..... दीदी आप कभी कभी ओवर रियेक्ट करती हो".

रति ," यार देख अब तू मेरा दिमाग़ मत खा और मेहमानों को संभाल...... और यह तेरा बीटा क्या तब आएगा जब यह हम सबको गोलियों से भून देगी "...... रति बाथरूम में फ्रेश होने चली गयी और डॉ अंजू भी सोचने लगी आर्यन जांभोज के MAA-Beti के बिच नहीं आना चाहता होगा...... गीता की वजह से आज हम सब िश मुकाम पे हैं और यह जान से मारेंगी जोह खरोच भी लगी गीता को आग लगा देंगी.

बिना ने दूर नॉक किया तोह डॉ अंजू ने किंग कहा ..... बिना को देखकर उनको उसकी मार कुटाई याद आ गयी. बिना को अपने साथ ले जाकर अपने रूम से टेबलेट और क्रीम दी यह बोलकर तू मंद मत करना तुझे पता है उसके मूड का.

बिना भी मुस्करा के बोली," डॉ मैडम यह छोटी मोती चोट मुझपर अब असर hi नहीं करती जबतक जिन्दा हूँ सिर्फ रति मैडम और आर्यन के लिए. गीता ने तोह काम hi मारा में उनकी जगह होती तोह गर्दन एक सेक् में उदा देती ".

डॉ अंजू भी मुस्करा दी ," यह काम वह सौक से करेगी थोड़ा दूर रहा कर उससे. यह आर्यन कहाँ रह गया ?"

बिना भी हसकर ," डॉली मैडम गुस्सा हो गयी हैं उसको मन रहे होंगे".

डॉ अंजू ," यह लड़कियां न बस खिलौना समझती है आर्यन को..... बस उनको मनाता hi रहे यहाँ एक और पहले से भभक के बैठी हुयी है ...... चल दीदी के पास चलते हैं और तू भी अपना ध्यान रखा कर".

प्रभा और गरिमा भी मीणा के रूम में पहुंची और लड़कियों की गप्पे शुरू.... तब hi बंद हुयी जब सबको लंच के लिए बुलाया गया.

अणि और नेहा अपने ऑफिस में मीटिंग में बिजी थी तोह लंच वही करने वाली थी.... लीला और मिरदुला के साथ दीप्ति भी लंच पे गेस्ट थी. कविता और बबिता ने कुक से सब स्पेशल डिश बनवायी थी.

डिनर पे दो ख़ास मेहमान भी आर्यन की ाश में आ रही थी...... ?????

जोह लीला का सो कॉल्ड सरप्राइज थी..... ????

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आर्यन जब अंदर आया तोह गुल को रति के बगल में बैठा देखकर एक बार को डरा पर सीधा अपनी चंदा रानी के पास जाकर पुछा और दुसरे सोफे पे बेथ गया. डॉली सबके पास डिनर टेबल पे ज्वाइन की सबको विश करते हुए.

" तू तोह बाइक ट्रिप पे जाने वाली थी दीप्ति के साथ गयी क्यों नहीं ".

गीता ने गुस्से से आर्यन को देखा फिर रतिदेवी को बस दांत भींच के रह गयी......

गीता को परेशां देखकर आर्यन बोलै ," चल में भी चलता हूँ तेरे साथ क्या बोलती है ".

गीता की आँखों में चमक आयी पर फिर रति को देखकर चुप हो गयी..... आर्यन ," चल दीप्ति को भी ले चलते हैं मजा आएगा यार ".

गीता ने एक बार अपनी माँ को कुटिल मुस्कान के साथ देखा फिर आर्यन को देखकर बोली," हमे अभी निकलना है तू माँ से बात कर ".

आर्यन हसकर ," माँ चंदा रानी बाइक से गाओं जा रही है...... जाने भी दो न वह शेरनी है किसी से नहीं डर्टी क्यों ?"..... और गीता को आँख मार दिया ......

रति ने एक टूक में जवाब दिया" यह कहीं नहीं जाएगी और जाये तोह अकेली जाये दीप्ति बेटी राजकुमारी है वह इश्कि तरह सड़क चाप नहीं है कहीं भी मुँह उठा के चल दे..... और आप सब लंच स्टार्ट करिये ..... आर्यन बीटा ,मीणा को भी भूक लगी है और बच्चों को भी , सब वेट कर रहे हैं".

आर्यन ," मेरा और चंदा रानी का खाना यहीं भिजवा दो क्यों डार्लिंग ? नहीं तो चल आज लंच डेट मारते हैं ...... "

गीता हसकर ," और तेरी मीणा और बच्चों क्या ?"

आर्यन आँख मार के धीरे से बोलै," दो मं में पता के आया तू बाइक रेडी कर ...... गीता उठकर बहार निकल गयी तोह रति चिल्ला के बोली," और बिगाड़ िश चंडी देवी को किसी दिन तेरी माँ को hi मार देगी तब भी हसना ".

आर्यन प्यार से पहले रति को एक बाईट दिया तोह गुस्से से खा के बोली," तू जा यहाँ से तुम दोनों को तोह मेरी एक नहीं सुन्नी".

आर्यन ने फिर मीणा और तीनो बच्चो को थोड़ा थोड़ा खिला के खा सबको सॉरी बोलै ," आज शाम को घूमने चलेंगे यह मेरा पनिशमेंट है लंच एस्केप करने का "......

मिरदुला और लीला भी मुस्करा के परमिशन दे दी...... आर्यन को मीणा बोली," जा भाई तेरी चंदा रानी हॉर्न बजा बजा के हमारे कान फोड़ देगी ".

सबको सॉरी बोलकर दीप्ति को कुर्सी से गोदी में लेकर भाग लिया ," सॉरी माँ चंदा रानी को अच्छा लगेगा अगर दीप्ति साथ जाएगी ".

दीप्ति तो बिचारि कुछ बोल नहीं पायी पर सब हसने लगे और रति ने अपने सर पे हाथ रख लिया ," क्या करूँ में िश लड़के का, इश्को चंदा रानी बोल बोल के चाँद पे hi न बिठा दे ...... देख ले अंजू िश तूफानी लड़की को. बहार कितने दुश्मन घूम रहें हैं पर यह कब सुनती है किसी की और आर्यन भी इश्को सेह देता है ".

डॉ अंजू रति के कंधे पे हाथ रखकर बोली," गलत hi क्या था दीदी वह बाइक से जा रही थी जाने देती और दीप्ति जाएगी उसके साथ तोह पूरी सिक्योरिटी भी साथ होगी. फिर आर्यन कभी बेफिक्री से उसको जाने को नहीं कहता पक्का उसने अर्रंगेमेन्ट्स किया होगा ".

सारू ," माँ अब लंच तोह करो मिरदुला जी और लीला बेटी भी आपकी रिक्वेस्ट पे आयी हैं नाउ no मोरे टॉक्स ..... गुल बीटा यह पन्नेर की डिश तरय करो ".

फिर सबने शान्ति से लंच फिनिश किया पर "पररयययय" तोह कहीं और hi हो रही थी.....

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गीता ने आर्यन की गॉड में जब दीप्ति को पोर्च में आते देखा तोह हेलमेट उसकी तरफ फ़ेंक के मारी जिसको दीप्ति ने हाथो में कैच कर लिया .....

आर्यन," चंदा रानी जल्दी निकल अपनी भें को लेकर में दूसरी बाइक लाता हूँ वार्ना माँ बहार आ जाएगी ".

दीप्ति को इशारा किया जल्दी बेथ जा...... गीता बेमानन से बाइक को रेस दे दी. दीप्ति बोली," सॉरी दीदी ! में माजी की बात नहीं काट सकती थी ..... प्लीज माफ़ कर दो ".

गीता गुस्से से ," तू मेरी भें है या मेरी माँ की बेटी जोह मेरे साथ कड़ी भी न रह सकीय...... जाने दे तू भी डरपोक निकली. आर्यन तोह में गलत भी हूँ तब भी मुझे सपोर्ट करता है चाहे बात बड़ी हो या छोटी ".

तभी एक बाइक वाले ने दीप्ति को इशारा किया की बिलकुल चुप रहना ....... वह आर्यन था दुकाती ब्लैक पे और रेड लाइट पे तूली ने हेलमेट का बोलै दीप्ति के लिए तोह गीता ने एक थप्पड़ जड़ दिया जोह सड़क की धुल चाटने लगा," मादरचोद पहनी तोह हूँ अब साले क्या बाइक को भी हेलमेट पेहेंगा ...... "

आर्यन ने गीता के सामने बाइक रोक कर सिक्योरिटी अफसर वाले को उठाया और अपना कार्ड दिखाया तोह दूसरा भी सलूट मार के दोनों वापस चले गए अपने साथियों के पास ...... "ैप मैडम है गन भी है किसी को ठोकने निकली हैं "...... आर्यन ने अपना इंटेलिजेंस वाला कार्ड दिखाया और गीता को ैप क्राइम ब्रांच बतया .....

दीप्ति को अपना हेलमेट दिया तोह गीता ने अब चिढ़कर बाइक दौड़ा दी और आर्यन उसके पीछे पीछे ...... एक बार रेड लाइट पे रुकी तोह आर्यन बोलै ," यार लंच करें भूक लगी है, सामने मॉल है ?"

गीता एक बार उसको घूरि फिर सोचकर बाइक मॉल में ले जाकर पार्क की.....

अब दीप्ति और गीता तोह लॉन्ग ड्राइव ड्रेसेस में बाइक राइड वाली पहने थी बस आर्यन कौसलस में था ......

तीनो एक पॉश रेस्टोरेंट में पहुंचे तोह आर्यन गीता की साइड बैठकर आर्डर दिया और एक बियर बोलै तोह गीता बोली मेक आईटी 2 तोह आर्यन के सामने बैठी दीप्ति को आँख मारी और बोलै 'मेक आईटी 3 '

दोनों टाइट पेण्ट और एयर टाइट जैकेट में पताका लग रही थी और पास टेबल पे बैठे 4-5 लड़के िश सांड से भी डर रहे थे पर एक को शर्त में दीप्ति का नंबर पूछने के लिए उकसा दिया गया......

वह डेढ़ पसली दीप्ति के पास लड़खड़ाता हुआ आया ," क्या में आपका फ़ोन नंबर ले सकता हूँ मैडम ...... "

आर्यन को साइड कर गीता ने खड़े होकर उसको थप्पड़ जड़ दिया," अपनी माँ से भी पूछ ले मादरचोद तेरा बाप कोनसे नंबर वाला था ".

लौंडा तोह झट से फ्लैट पड़ा था फर्श पे, पर रहीस बाप की औलाद था और उसके 4 दोस्त भी दूर बैठे 4 बॉडीगॉर्ड्स के साथ अब गुस्से में उनकी टेबल के पास आ गए ......

" क्या बोली तू भें....... " उसका डायलाग hi अधूरा रह गया ,आर्यन ने बैठे बैठे hi एक थप्पड़ जड़ दिया तो वह भी पहले वाले की तरह नहीं उठा ......

गार्ड्स ने गन तानी तोह दीप्ति ने कड़ी होकर 10 सेक् में चरों गार्ड्स फर्श से मिला दिए ......

बाकी तीनो लौंडों की पहात गयी थी तोह भागते उशसे पहले आर्यन और दीप्ति ने फुर्ती से गिरा दिए और घेरते हुए आर्यन बोलै ," चलो बीटा झोणी झोणी यस पापा पोएम सुनाओ मैडम को वार्ना साड़ी हड्डियां झाड़ दूंगा ".

दानव hi लग रहा था आर्यन चरों और घूमता हुआ और हैरानी की बात थी न बाउंसर न गार्ड्स कोई भी अंदर तक नहीं आया पर रेस्टोरेंट पूरा खाली हो गया था ...... कान पकड़ के तीनो झोणी झोणी यस पापा 8 बार सुनाये तोह गीता हसने लगी ......

आर्यन ने इशारा किया निकलो और इनको भी उठा ले जाओ ...... नीला के साथ पूरी सिक्योरिटी टीम अंदर घुसी और सब कुछ ठीक करके बहार चली गयी...... नीला ने रेस्टोरेंट ओनर को समझा के एक ब्लेंक चेक दे दिया. वह भी मान गया आखिर नाम hi हुआ है चंडी देवी के आने से. गीता बहोत पॉपुलर होने लगी थी अपने आस पास डिस्ट्रिक्स में और दिल्ली तक युथ में उसकी फैन फोल्लोविंग बढ़ रही थी......

गीता अब आर्यन के कंधे पर सर टिक्का के दूसरी बियर पि रही थी रेस्टोरेंट में और आर्यन दीप्ति से हसकर बात भी कर रही थी...... 2 घंटे बाद तीनो लंच करके फार्महाउस लौटे.

पार्किंग एरिया में अपने साथी को सँभालते वह लोग मिले तोह एक ने पुछा ," वह कौन थी जिसको तुम इतना रेस्पेक्ट दे रहे थे और प्रोटेक्ट कर रहे थे ".

आर्यन ने हेलमेट पहनते हुए कहा ," मैडम रतिदेवी की बेटी गीता देवी उर्फ़ चंडी देवी ".

आर्यन हेलमेट का विसर गिरा निकल लिया दुकाती पे दीप्ति को लेकर...... पीछे वह तीनो लड़के चंडी देवी और रतिदेवी का नाम सुनकर थार थार कांप रहे थे...... टॉमी याद आ गया था उनको ?????

*(आपको तोह याद hi होगा दोस्तों..... मूंगफली ?)

गीता का गुस्सा शांत हो गया था तोह सीधा रति के सुईठे में पहुंची जहाँ डॉ अंजू अपनी असिस्टेंट के साथ फाइल्स देख रही थी ...... गीता को देखकर डॉ अंजू ने बाहिएँ फैला दी तोह उनके गले लग गयी और पूछी ," माँ कहाँ है ?"

डॉ अंजू हसकर ," अभी सू रही हैं जा मिल ले ". ....गीता का माथा चूम के फिर से काम में व्यस्त हो गयी.

डॉ अंजू, गीता को बहोत प्यार hi नहीं सारू की तरह लकी भी मानती थी. कहते थे लाड प्यार ने गीता को बिगाड़ दिया है पर वह रति की सबसे बड़ी ढाल थी. रति का सामना करने से पहले चंडी देवी से पार पाना होगा.

गीता जब रति के बैडरूम में गयी तोह सारू बैठी थी उनके पास ..... गीता को देखकर सारू कड़ी हो गयी और अपनी सबसे छोटी भें का माथा चूम के बहार निकल गयी.

रति के पास बैठकर बीएड पे गीता ने अपने बूट खोले और बिस्टेर में रति से लिपट के अपना सर उसकी छाती पे रख ली ...... रति भी अपनी छोटी बेटी का स्पर्श पाकर नींद से जागकर उसका सर सेहलने लगी..... न कोई बात हुयी न कुछ वार्तालाप गीता अपनी माँ से लिपट के उसकी आगोश में सू गयी.

रतिदेवी जोह इतनी निडर थी बस अपनी िश बेटी के लिए डर्टी थी कहीं कुछ बुरा न हो जाये मेरी मासूम बेटी के साथ. आज जोह कुछ भी उसने बांया था आर्यन के लिए बांया था पर गीता को सबकी नज़र से बचा के रखना चाहती थी जैसे उसकी साड़ी धन दौलत वही थी......

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फार्महाउस के गेट से गीता की बाइक अंदर जाते देख आर्यन ने अपनी बाइक दूसरी दिशा में मोड़ दी जिसके पीछे दीप्ति बैठी थी......

आर्यन अब 100 की स्पीड से पहले 3 कम हाईवे फिर 2 कम दिल्ली के सबसे पॉश एरिया में ले गया दीप्ति को अपने नयी कोठी पे जहाँ फिनिशिंग टच चल रहा था..... कोठी क्या पूरे 7 मंजिल का एक छोटा महल hi था ...... फ्रंट एरिया में कोठी थी उसके पीछे 5 एकर का एरिया गार्डन और उसके निच्चे अंडरग्राउंड सीक्रेट एरिया था.

दीप्ति को हर जगह का विवरण देता जब आर्यन उसको उसके बन रहे आलीशान बैडरूम में ले लगा तोह बोलै," यह कम्पलीट नहीं हुआ है, थोड़ा छोटा है पर कविता मामी ने बहोत जल्दी िश पे काम करवाया है".

आर्यन की पीठ पे अब दीप्ति पीछे से लिपट के इमोशनल होती बोली," गीता दीदी अभी भी नाराज है मुझसे ".

आर्यन ने उसका अपने सीने पे लिपटे सीधा हाथ उठा के अपने हाथ में लेकर चूम के bola,"Chanda रानी ज्यादा डिअर किसी से नाराज नहीं रह सकती सबसे पहले माँ के पास जाएगी और उससे लिपट के सोयेगी फिर उठकर सब पर हुकुम चलेगी".

दीप्ति ने हाथ हटाकर के आर्यन के सामने आकर बोलै," पर रेस्टोरेंट में कितना गुस्सा हो गयी थी..... क्या हमे माफ़ करेंगी उनको लगता है में सिर्फ आपको प्यार करती हूँ माहि ".

आर्यन ," किसी दुसरे को प्यार करने का भी नहीं वार्ना तेरा खून अपुन िच कर डालेगा..... तू क्या मुझे येड़ा बना रही है प्यार मुझसे और पैदा किसी को भी .....".

आर्यन की भासा समझ के दीप्ति ने उसका मोह बंद करके बोलै ," आपको बस मजाक सूझ रहा है, दीदी की फ़िक्र नहीं है"..... और दुखी होने लगी तोह ..... आर्यन ने उसको डॉ अंजू के सेल पे कॉल लगा के सुनवा फिर दिखाया जिसमे गीता अपनी माँ रति से लिपटी सो रही थी ......

आर्यन ," यह लाइव है मैडम और तुम भी उसकी बातों में आ गयी वर्ल्ड टूर बाइक पे घुमते हैं..... दीप्ति तुम अभी भी समझ नहीं रही हो गीता की लाइफ को खतरा है ".

आर्यन जब चिंतिंत होता है तोह चंदा रानी को गीता बोलता है......

दीप्ति ," मुझे समझ hi नहीं आया और में दीदी को जान कर भी मन नहीं कर पायी ".

आर्यन ने दीप्ति का हाथ थप थापा के बोलै," वह बहोत इमोशनल लड़की है दिखती नहीं पर जब भी उसके साथ बुरा हो जाये रोयेगी नहीं न कुछ बोलेगी बस इधर उधर भटक के अपनी माँ की गॉड में दुबक जाती है. यह मैंने बचपन से देखा है, तुम नहीं समझ पयोगी दीप्ति, गीता हक़ जाता सकती है पर प्यार लेना नहीं जानती. मुझे लगता है में उसको पूरी दुनिया से छुपा सकता हूँ पर वह ुष समय मुझे भी नहीं चुनती बस एक hi उसकी माँ है और वही उसकी ज़िंदगी. में माँ बेटी का बांड तोह टच नहीं कर पाया पर ुष समय उसकी मानसिकता अलग होती है और बचपन में तोह में hi उसका सबसे बड़ा दुश्मन होता था..... बस गीता की एक दुनिया है जिसमे माँ, में और जाने के बाद अब तुम भी हो. याद रखना उसका विश्वास hi उसकी ताकत है और उसके गाओं जाने पे सबसे पहले वही टूटेगा "......

दीप्ति," मतलब आप पिंजरे से बहार नहीं आने डोज उनको..... में भी कैद में थी मेरे माहि और आज आजाद हूँ फिर आप क्यों दर रहे हो जब आप उनकी इतनी केयर करते हो".

आर्यन सीरियस होकर," क्यूंकि जबसे चंदा रानी का पता चला है उसके घरवाले भी उससे मिलने को तड़प रहे हैं. माँ और में डरते हैं कहीं प्यार भरे रिश्तों के धागे टूट न जाये. उसके मां और चाचा बुरे हैं पर गीता का पूरा खानदान है जिसमे ननिहाल और ददिहाल सब हैं. मुझे बस माँ की फ़िक्र है वह गीता को खोने का सदमा बर्दास्त नहीं कर पायेगी ".

दीप्ति भी आर्यन का कन्धा सेहला कर उसको सामने करती बोली," लेकिन कब तक रोकोगे दीदी को वो तो खज़ाना बाटने जाने वाली हैं और रही बात प्यार की तोह अपनी माँ के अंचल को बेटी कभी भुला नहीं पायेगी फिर उनकी जनम देने वाली माँ तोह बचपन में hi स्वर्गवासी हो गयी थी ?"

आर्यन ," हाँ सब सच्च है पर उसके लिया डर लगता है यार. तुमको सायद पता नहीं है मैंने और माँ ने उसके करीब किसी को आने hi नहीं दिया....... पहले जाने आयी फिर तुम पर हम ने तुम दोनों को भी उससे दुर्र रखने की कोशिश की है ".

दीप्ति भी हैरान रह गयी की ऐसी क्या वजह है जोह आर्यन और उसकी माँ किसी को उसके पास नहीं रहने देते ......

आर्यन ," बस इतना समझ लो दीप्ति की गीता की दुनिया मेरी माँ और अब में हूँ. गीता को उसके गाओं जाने से नहीं रोकेंगे पर वह हमारे अनुसार जाएगी. तुम प्लीज हमारी मदद कर सकती हो जिससे वह जल्द से जल्द वापस आ जाये ".

दीप्ति की तरफ जब आर्यन ने पलट के हाथ बाध्य तोह उसने हाथ थम के मदद का वादा किया ......

लेकिन पीछे से किसी के आने पर दोनों चौंक गया ," गीता 2 साल में बहोत बदल गयी है आर्यन, इतना में विश्वास से कह सकती हूँ "......?

तो बे कॉन्टिनोएड....

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अपडेट 39

Part-2(A)

(गीता की दीप्ति)

गीता नींद में सूती हुयी बहोत मासूम लग रही थी और उसके निहारते हुए रति भी उसके गाल और बालों पे अपनी उंगलियन फिरा रही थी..... शाम के 6 बजे गीता की आँख खुली तोह रति ने अपनी आंखें बंद कर ली.

गीता ने अपनी माँ को सूट देखा तोह उसका गाल चूम के एक अंगदी ली और बीएड से कड़ी होकर फ्रेश होने गयी फिर रति के सुईठे से बहार निकल के मीणा के रूम में पहुंची तोह वहां गुल के साथ मीणा, Dimple-Payal हसी मजाक कर रही थी...... सब लड़कियां भी चुप हो गयी और गरिमा जोह बाथरूम से हस्ते हुए निकली वह भी गीता को देखकर शॉक हो गयी.

गीता ने सबको देखा फिर गुल को हाथ दिखा के बोली," मेरी तुझसे कोई पर्सनल दुश्मनी नहीं है पर मुझे गुस्सा न दिलाया कर. तू यहाँ रह सकती है मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं. सॉरी नहीं बोलूंगी, मुझे अपने किये पे कोई अफ़सोस नहीं. आल थे बेस्ट फॉर नई लाइफ ".

गीता के जाने के बाद बस 2 मं ख़ामोशी hi रही और गरिमा तोह सीढ़ी डॉ अंजू के रूम में पहुंची..... पर फिर जोह तीनो बहेनो ने थक्के मारे और गुल भी हैरान थी की अभी क्या हुआ और गीता क्या बोल के निकल गयी......

गुल को भी तीनो ने अपने निच्चे दबा लिया तो वह भी हसने लगी..... " यह कोनसा स्टाइल था सॉरी बोलने का यार में तोह डर hi गयी ".

डिंपल ," है है है ...... चंडी देवी स्टाइल ..... उसका वचन hi उसका शासन है ....... है है है है है ..... "

मीणा ," चलो रेडी होते हैं पहले शॉपिंग करेंगे फिर रात को पार्टी भी गुल भाभी के आने की खुसी में ".

गुल असहजता से ," मेरा जान जरूरी है क्या ?"

पायल ," हाँ भाभीजी आप आज शाम को घर पे नहीं है, चलो मजा आएगा अब तो चंडी देवी भी मान गयी है, मीणा तेरा गेस इतनी जल्दी सही हो जायेगा ुंबलीवबले यार ".

गुल थोड़ा संजिन्दा होकर," एक बात बोलूं तो बुरा मत माना प्लीज..... चंडी देवी नाम एक टैग और कमेंट जैसा लगता है, तुम तीनो गीता दीदी को दीदी भी बुला सकती हो".

Dimple-Payal मुस्करा दी और मीणा ने जवाब दिया ," हम उनको दीदी hi बोलते हैं बस उनके पीछे चंडी देवी बोलने में हमको मजा आता है. हाँ गीता दीदी से ज्यादा आर्यन चीड़ जाता है कोई चंडी देवी बोले तो. इशलिये सबको चंदा रानी बोलने को कहता है तोह हम भी उसका दिल रखने को बोल देते हैं"..... गप्पे मारते मारते फिर चरों रेडी होकर निच्चे आये. तीनो गुल को अकेला न छोड़कर बिजी रख रही थी ताकि वह कुछ नेगेटिव थॉट न लाये.

रति ने वैसे भी गीता की कमजोर नाश पे वार किया था गुल को आर्यन की तीनो बहेनो के प्रोटेक्शन में रख कर. अब गीता न गुल पर वार कर सकती है और न hi आर्यन की बहेनो को डरा सकती थी......

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नयी कोठी.....

आर्यन और दीप्ति के पीछे बबिता कड़ी थी जोह 2 मं पहले आयी थी कोठी का काम देखने क्यूंकि कविता मामी बिजी थी रात की पार्टी के लिए.

बबिता को देखकर दीप्ति शर्मा रही थी..... अभी तक आर्यन उसका मंगेतर hi तो है शादी नहीं हुयी है समाज के सामने.

बबिता ने चुप्पी तोड़ी," मानती हूँ आर्यन वह ाकुडु है पर अब काफी संवेदनशील हो गयी है. गीता बहोत शशिक लड़की है और उसका हिरदये विशाल किसी सागर के सामान. तुम उसके बर्ताव से डर रहे हो की वह अपने गाओं जाकर क्या कर देगी पर मुझे लगता है उसको समझ में सब आता है पर करती कुछ अलग hi है जिससे माजी और सब भी डर जाते हैं. गुल को मारना hi होता तो वह अब तक ज़िंदा नहीं होती इतना तो में भी जानती हूँ पर वह फार्महाउस तक आ गयी है तो गीता की भी अनकही सहमति है. सायद वह राजकुमारी के सामने अपने को कमजोर नहीं दिखाना चाहती हो और अवहग में गुल को सजा दे दी हो ".

आर्यन दोनों हाथ बंधे बबिता को सुन्न रहा था और दीप्ति थोड़ा दूर कड़ी थी सर झुकाये...... बबिता ," बस इतना hi कहना था, वह मेरी बेस्ट फ्रेंड है तोह रोक नहीं पायी ..... सॉरी तो डिस्टर्ब बोथ ऑफ़ यू ".

वह पलटी तोह आर्यन झट से बोलै," सबसे मैं बात लास्ट में कहै तुम ने डार्लिंग..... और डिसट्रब करने की सजा भी सुनती जाओ ".

जब तक बबिता पलटी आर्यन ने उसको बाँहों में भर के उठा लिया," दीप्ति यह मेरी सबसे अच्छी बीवी है..... आज अच्छा लगा कुछ बोली वार्ना गूंगी हो गयी थी. बबिता डार्लिंग यह है तेरी नई पार्टनर दीप्ति सिंह नाम तोह सुना होगा".

बबिता हड़बड़ा गयी थी और आर्यन की बाँहों से उतरने की कोशिश कर रही थी. दीप्ति तोह कुछ समझ नहीं पा रही थी की अब वह क्या करे ?

आर्यन ने बबिता के गाल चूमे और फिर लबों को चूम के बोलै," थैंक्स मुझे माहि जैसी एंजेल देने के लिए. ी लव यू डार्लिंग" ...... और फिर से चूम के उसको निच्चे उतरा तोह वह जाना चाहती थी पर आर्यन ने उसको नहीं छोड़ा.

आर्यन ने उसके पेट पे हाथ फिरा के पुछा," बबिता िश बैडरूम में बीएड बड़ा नहीं हो सकता क्या दीप्ति पूछ रही है और बाथरूम का डिज़ाइन ओल्ड फाशिवेद है..... दीप्ति को बाथरूम में चरों तरफ मिर्रोर्स चाहिए, शी फीलस हरसेल्फ़ ेंगिमाटिक व्हेन लुक ों हरसेल्फ़ विथाउट क्लोथ्स".

बबिता भी आर्यन की कारस्तानी समझती हुयी," लेट में सी फर्स्ट एंड सुग्गेस्टस यू ालतराशंस .... . "

आर्यन से अलग होकर बबिता दीप्ति के पास जाकर उसको गले लगा के बोली," हम दोनों अच्छी फ्रेंड्स हैं एंड नेवर तरय तो ाषामेड उस बिफोर एच इतर. आर्यन हम को भी पता है की हम सब का पति एक सख्स है या प्रेमी कह लो पर हर कोई कम्फर्टेबले नहीं होता एक दुसरे के सामने. क्यों दीप्ति?"

दीप्ति भी सर हिला के ," जी बबिता दीदी, मुझे भी ऑक्वर्ड लग रहा था आपके सामने ".

आर्यन कान पकड़ के," सॉरी यार अब तुम सब नखरे करोगी तोह कैसे प्यार करूँगा. मुझे सब को टाइम देना होता है फिर एक दिन तोह ऐसा आएगा न जब सब मेरी बीवियों बनोगी और साड़ी एक साथ बिस्टेर पे होगी ".....

बबिता ," खाब hi देखते रहना गीता मार मार के कचूमर निकल देगी ".

दीप्ति ," प्लीज माहि it's लुक सो ावक्वार्ड यार दीदी की तोह शर्म करो... "

आर्यन ," अच्छा ठीक है जोह जिसके साथ कम्फर्टेबले होगी उसके साथ ज्वाइन किया करूँगा. बूत अरे यू कम्फर्टेबले विथ एच इतर "...... दोनों के मोह से एक साथ "no" निकला .... फिर दोनों एक दुसरे की तरफ देख के है दी.

बबिता ने आँख मारी दीप्ति को और दोनों आर्यन के पास जाकर उसके गालों पे एक साथ किश की ," इतना प्राइज तुम्हारे लिए काफी है, बस इतने hi कम्फर्टेबले हैं".

आर्यन ने दोनों को बाँहों में भर के कहा," मेरा इतने से क्या होगा, let's शेड ऑफ आवर क्लोथ्स "......

बबिता ," ग्रॉस...... एक , अरे यू माध आर्यन ".

दीप्ति ,"माहि थिस इस उनकेप्टबले ".

आर्यन," ठीक है यार हर बन्दे की फंतासी भी तो हो सकती है..... चिल अब नहीं केन्ता कुछ...... चलो वापस चलते हैं. बबिता वाशरूम में स्पेस बढ़ा कर बालकनी थोड़ी 2 फट काम करने को मामीजी को कहना और यह बेस्ट रूम होना चाहिए माय डार्लिंग प्रिंसेस दीप्ति के लिए".

बबिता और दीप्ति ने आर्यन की कमर में एक एक बाजु दाल ली ," यस सर "...... तीनो फार्महाउस लौटे दीप्ति अब बबिता की कार में थी और आर्यन बाइक पे..... दीप्ति और बबिता का आज अच्छा इंटरेक्शन हुआ था..... चुकी बबिता गीता की फ्रेंड थी तो िंह दोनों की भी अच्छी खासी दोस्ती जल्दी hi हो गयी.

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गीता निच्चे पहुंची एक टीशर्ट और लोअर पहनकर तोह कविता मामी किचन में थी.... " भाबी एक चाय मिलेगी क्या ?"

कविता भी पलट के गीता को देखकर बोली," क्यों नहीं ननद जी ..... सुशीला ( माइड) केक का क्या हुआ और कैटरिंग वाले को भी बोल दे जोह मैंने नॉनवेज डिशेस ऐड करवाई हैं ".

गीता अपनी भाभी को चाय चढ़ाते देख पीछे से उसके गले लगकर बोली," केक , कैटरिंग किसी की बरात आने वाली है क्या?"...... कविता का गाल चूम के एक एप्पल फ्रूट बास्केट से उठा के खाते हुयी पूछी .....

कविता मंद मंद मुस्करा के ," बरात तोह नहीं अभी आ रही है थोड़ा इंतज़ार करो ननदजी हाँ डोली जरूर आ चुकी है".

गीता भी उसकी बात का मतलब समझ के बोली," तोह तयारी करो लौंडिया को भी पता चले हम लड़के वाले हैं"...... और गांड मटकती किचन से बहार एक चेयर पे बेथ गयी दिंनिंग टेबल की ...... कविता मामी भी है दी उसके जवाब पे.

महिमा दौड़ती हुयी आयी और मौसी मौसी कहकर गीता की गॉड चढ़ गयी...... गीता भी 'मेरा बच्चा'..... 'मेरा सोना बाबू' ...... उसको चूम के टेबल पे बिठा ली " भाभी माहि का दूध लाना ".

महिमा लग गयी क्वेश्चन आंसर में गीता को ुलजए ...... महिमा वैसे भी गीता की जान थी, उसको अपना बच्चा भी नहीं चाहिए उसके लिए महिमा hi उसकी बेटी थी...... फिर जिस तरह आर्यन की जान नागलोक में बचायी उससे तोह सबकी बहोत चाहती हो गयी थी. अब किसी को कोई डाउट hi कहाँ था महिमा hi आर्यन की वररिस बनेगी.

गीता की चाय में अपने ोरो बिस्किट्स डूबा के खाती महिमा ने उसका दिल hi हल्का कर दिया...... सही कहा है बच्चे बस आपको खुसियां hi देते हैं अपनी नटखट बातों से ...... रौशनी भी राहुल के साथ थोड़ी देर बाद आयी तोह गीता ने उनका भी दूध माँगा लिया. तीनो बच्चों को गार्डन में लेजाकर गीता उनके साथ कहलने लगी.

आर्यन की बाइक की आवाज सुनकर और हेलमेट उतरने पे तीनो बच्चे उसकी तरफ लपके 'डैडी' 'डैडी' 'डैडी' ...... आर्यन भी एक गार्ड को अपना हेलमेट और के देकर उनकी तरफ दौड़ गया ..... तीनो को घुटने के बल बैठकर गले लगाकर चूमने लगा और घास में लेजाकर लेट गया.

गीता वापस जाने लगी तोह आर्यन उनके कान में बोलै ," जाओ अपनी बड़ी मम्मी को बुला के लाओ फिर घूमने चलेंगे ".

रौशनी के इशारे पे तीनो 'मम्मी' 'मम्मी' 'मम्मी' कहकर उसकी टांगो से लिपट गए ..... गीता भी हैरान थी अचानक उसको मम्मी क्यों बोल रहे हैं. पर आर्यन भी जब पास जाकर बोलै 'मम्मी' ...... गीता भी उसकी नौटंकी समझती हुयी बोली," बच्चो तुम्हारे डैडी नयी मम्मी लाये हैं".

आर्यन ने गीता को एक बहन में उठा लिया और सीढ़ी में तीनो बच्चों को ..... " मेरे तीनो बच्चों की एक hi कॉमन मम्मी है चंदा रानी ..... बोले बच्चो हमारी सबसे अच्छी मम्मी ".

अच्छी मम्मी अच्छी मम्मी अच्छी मम्मी ...... अब सब घास पे लेते थी गीता ने आर्यन के पेट पे सर रखा हुआ था और बच्चे उसके सीने से सर लगा के मस्ती कर रहे थे ..... दोनों बड़े सब तरफ की बातें कर रहे थे गुल की नहीं..... गीता जब रति के पास वापस लौटी थी तभी गुल का chapter क्लोज कर दी थी. आर्यन जाने या गुल जाने, में और मेरी माँ को किसी की जरुरत नहीं फिर आर्यन तो खुद यहीं हमारे पास आएगा कितनी डिअर दूर रहेगा.

कविता मामी ने आकर आधे घंटे बाद कहा," चलो बच्चो रेडी हो जाओ सब घूमने जायेंगे...... गीता और आर्यन तुम भी रेडी हो जाओ सब वेट कर रहे हैं".

गीता ," आप सब जाओ भाभी में यहीं रूकती हूँ ".

कविता ने बच्चों के जाने के बाद कहा," एक कान पे लगूंगी तोह अकाल ठिकाने आ जाएगी, तू बीटा महारानी होकर दूसरी रानियों से जलने के लिए नहीं बानी है. गुस्सा थूक दे काम से काम एक अच्छा गिफ्ट गुल के रूप में आर्यन को दे hi सकती है. तुझसे छिपा सकता था, वहीँ लखनऊ से भेज देता मुंबई पर इश्को क्या पता था तू धार दबोची ुष हालात की मारी लड़की को. तू तोह उसको बचपन से जानती है कितनी बार मिली भी है फिर क्या दिक्कत है. वह दिल जोड़ने वाली लड़की है गीता देखना सच्ची दोस्त बनेगी तेरी बाकी सब की मजबूरी है या तू ने भें बना राखी हैं. बबिता तेरी दोस्त थी उसको भी भें बना ली..... आज की डेट में बबिता तुझसे झिझकती है पर मेरी और रीता की बेस्ट फ्रेंड है...... देख गुल को तू भें कभी नहीं मानेगी पर एक अच्छी दोस्त बना सकती है. सोच न सब कुछ हार के भी जिन्दा बच के आयी है लड़की बस तू अब उसका दिल दुखेगी तो फिर काये की तू चंडी देवी जोह दुखी जनन को पालती भी है ".

कविता मामी इतना बोलकर आर्यन का हाथ पकड़ के जाने लगी तोह गीता भी उनसे लिपट के बोली," माफ़ कर दे भाभी भूल हो गयी मुझसे..... आज देखती हूँ बकरा कोण ज्यादा खाता है तेरी बेगम या चंदा रानी ".

कविता ने आखिर कर गीता को मन hi लिया ..... सब लोग खुस होकर शॉपिंग किये रात की पार्टी के ड्रेसेस, ज्वेल्लेरी और सबने गुल के लिए गिफ्ट भी लिए थे..... रति ने 5 ड्रेसेस अपनी तरफ से गुल को गिफ्ट की और उनकी मैचिंग की ज्वेल्लेरी भी.

आर्यन बस बार बार डॉली और सारू के पास मंडरा रहा था वहीँ सारू उसको मिरदुला की तरफ धकेलती पर आर्यन कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था .....

शॉपिंग से आर्यन और बच्चे जल्दी लौट आये पर लेडीज लगी थी ड्रेसेस ालतराशंस और मेहदी, मेकअप में......

पूरा फार्महाउस जगमगा रहा था सजावट से. बिना ने 2 घंटे में hi इतना सब तेजी से करवा दिया. मोना इंटीरियर डेकोरेशन फंक्शन हॉल की करवा रही थी और नीला कैटरिंग और ड्रिंक्स का अर्रंगेमेन्ट्स देख रही थी.

जैसे फार्महाउस पे आर्यन की कार रुकी उनके पीछे अलवर के राजा शभ की रॉयल कार आकर रुकी फिर 2 उनके सुवस ने दासियाँ थी और 4 बॉडी गार्ड्स की सुवस भी थी. सबसे पीछे एक बड़ा सा ट्रक एंटर किया जोह गिफ्ट्स और मिठाई से फुल था.

आर्यन भी स्वागत करता आगे आया तोह दीप्ति की दोनों मम्मी रानी संगीता और रानी जमुना को देखकर मोह में 2 लाडू फूटे ...... आर्यन इधर उधर देखकर पुछा ," राजा शभ कहाँ है माजी ".

जमुना चमकती आँखों से ," वह तोह जयपुर गए हैं कुवार्सा कल आएंगे, बस हम दोनों hi आपकी सेवा में आये हैं "..... और शर्मा के सर झुका ली ......

उनका डाब लस्कर बहोत से भेंट और गिफ्ट्स लिए आया था तोह आर्यन भी उनको प्रणाम करके आदर से रॉयल सुईठे में तेरा दिया और सारे गिफ्ट्स और भेंट निच्चे एक हॉल में उतरवा दी...... तीनो बच्चे तोह अपनी दोनों नानी के साथ मशगूल हो गए.

दासियों को एक क्वाटर में भेज दिया और रॉयल गार्ड्स को रेस्ट करने को कहा.

आर्यन की रात आज बहोत मुश्किल होने वाली थी पर कल उसको अपनी जग्गू मम्मी के गाओं भी जाना tha.....Ab कैसे सब होगा ?????

आर्यन ने रति को कॉल किया की दोनों रानियां आयी है तू और डॉ अंजू तोह पहोंचो..... रति मजाक में ," अपनी होने वाली सासु माओ की सेवा कर हमको थोड़ा टाइम लगेगा ड्रेस फिटिंग में ".

आर्यन और बच्चे तीनो संगीता और जमुना के साथ रॉयल सुईठे में थे..... तीनो बच्चे अपनी दोनों नानी की गॉड में बैठे उनके लाये टॉयज को खोल के खेलते हुए बहोत खुश थे. महिमा और राहुल को दोनों बार बार अपनी गोदी में लेकर चूम के अपना दुलार देती. वहीँ आर्यन ने अपनी गॉड में रौशनी को बिठा लिया और उसको किसी करके इशारे इशारे में जवाब देता.

आर्यन से बारी बारी नज़ारे मिला के जैसे उससे मिलने की तड़प उनके बर्दास्त से बहार हो रही थी. आर्यन भी दोनों सजी रॉयल ड्रेस पहनी अपनी अनकही रानी प्रेमिकाओं के लिए ाहिएँ भर रहा था.

माइड और दो दासियाँ उनके लिए जलपान और स्नैक्स से भरी ट्राली लेकर आयी तोह जमुना ने राहुल को संगीता की गॉड में दिया और बोली," दीदी में फ्रेश हो लेती हूँ फिर आप हो लेना ".

आर्यन की तरफ एक कातिल मुस्कान दिए जमुना शाही लहंगे में अपनी बड़ी गांड लचकाती बैडरूम में घुसी तोह आर्यन का कलेजा hi बहार आ गया..... अपना थूक गटकते हुयी संगीता से पुछा ," माजी, रानी पुष्प जी नहीं आयी ?"

संगीता ने आर्यन से नज़रे मिला के जवाब दिया ," क्यों हमारा आना आपको अच्छा नहीं लगा क्या कुंवर सा ?"

आर्यन बस मुस्करा भर दिया," यह तोह हमारा दिल जानता है की आप का आना हमारी ख़ुशनसीभी है...... आप आये तो बहार आयी ".

दोनों बच्चे संगीता की गॉड से उतरे अपने खिलोने लेकर, इधर अपना एयरोप्लेन लेकर रौशनी बहार की तरफ दौड़ के उसको हाथ में उड़ाने लगी और महिमा, राहुल भी उसके पीछे हो लिए.

िश ड्राइंग हॉल में कोई नहीं था माइड और दोनों दासियाँ निच्चे जा चुकी थी. आर्यन खड़ा होकर जल्दी से रॉयल सुईठे का दूर सत्ता के संगीता की तरफ बढ़ा तोह उसकी सांसें जैसे रुक गयी, दिल सीना पहाड़ के बहार आने को था, धड़कन इतनी तेज हो गयी की मीलों दौड़ के आयी हो.

बीएड से कड़ी होकर बस अपनी दोनों हथेली बांधे अपने को आर्यन से सिर्फ 1 फट की दुरी पे खड़ा पाया तो धीरे धीरे अपना सर उठा के िश नीली आँखों वाले के जादू से बच न सकीय जब उसने अपनी बाँहों के घेरे में लिया......

यह क्या अहसास है जोह आज तक हमको महसूस नहीं हुआ. तेरी बाँहों में hi अब डैम निकले ऐसी प्राथना है ईश्वर से हमारी...... आर्यन की पीठ पे अपने हाथों का घेरा दाल के सिसक के सीने से लग गयी...... "ारयणणणण बस हमको थाम लो, हम बहोत तड़पते हैं तुम्हारे लिए".

संगीता उम्र के िश पड़ाव पे साचा प्रेम आर्यन, अपने दामाद, से कर बैठी जोह रिस्ता राजवंश बढ़ने से शुरू हुआ था वह जिस्मानी रिश्ते से ऊपर जा चूका था. संगीता भी आर्यन को एक सरल और प्यार करने के ली बानी औरत लगती थी, जमुना तेज तरार थी पर यह एक नरम दिल सबकी केयर करने वाली रानी थी.

संगीता के ढके सर को चूम के आर्यन अपनी गॉड में लेकर बीएड पे बेथ के उसके आंसूं साफ़ करता बोलै," आप ऐसे रोयेंगी तो क्या हमको अच्छा लगेगा. हम भी आप के िश स्पर्श और प्यार के लिए टरशे हैं बस अब चुप हो जाइये ".

संगीता ने आर्यन के सर को अपने हाथ से झुका के उसका माथा चूमा फिर दोनों गाल ," आप ने हम पे क्या जादू कर दिया आर्यन बस हर पल सिर्फ तुम्ही याद रहते हो ".

आर्यन ने आगे उसको बोलने नहीं दिया बस एक प्यार भर चुम्बन उनके लबों पे अंकित किया तो यह प्रेयसी जोह 45 सवां पार थी एक जवान लड़की की तरह उसकी बाँहों में प्रेमरोग में पिघल के प्रतिउत्तर में आर्यन के लिप्स को पहले हलके हलके चूमि फिर चूसने लगी. दोनों इतने आहिस्ता से चूम रहे थे जैसे कोई जल्दी नहीं है बस एक दुसरे को दिलसे दे रहे थे की यह तुम हो और यह में हूँ.

3-4 मं में hi रानी संगीता ने अपनी योनि को भिगो दिया सिर्फ चुम्बन लेते हुए .... सिसक के आर्यन से और लिपट गयी जोह उसकी कंपते सरीर से भाप गया की वह कितनी उत्तेजित थी. प्यार से सहलाता अब दोनों हाथो में उठा लिया...... दोनों बाहिएँ आर्यन के गले में दाल अब वह शर्मा के सीने में चेहरा छुपा रही थी जैसे नयी भयता हो.

आर्यन बैडरूम में अंदर गया तोह दूर के पीछे जमुना जोह 10 मं से झांक के बहार का नज़ारा देख रही थी सर झुका के कड़ी थी..... उसने अपनी चूचियां और योनि बहार का लाइव सन देखकर बुरी तरह रगड़ डाली थी, उसकी चुनरी गायब थी और चेहरा धक् रहा था ....... पर संगीता उसको नहीं देख पायी क्यूंकि वह तोह जैसे स्वर्ग में थी आर्यन की दोनों बाँहों में सर सीने में छुपाये.

संगीता को वाशरूम तक ले जाकर निच्चे उतर दिया और गाल चूम के बोलै," आप फ्रेश हो जाओ और ड्रेस भी चेंज करके पार्टी के लिए दूसरी ड्रेस पहन लो'".

संगीता उसको जाने नहीं देना चाहती थी पर आर्यन ने उसके कान में कुछ कहा तो शर्मा के उसको वाशरूम से बहार भेज के दूर अंदर से लॉक कर ली...... ???

*अब यह तो बाद में पता चलेगा की आर्यन ने उसके कान में क्या कहा.

आर्यन जब बैडरूम में आया तोह जमुना वैसे hi कड़ी थी और संगीता भी उसको नहीं देख पायी थी. आर्यन ने बिना को कॉल किया तीनो बच्चों का ध्यान रकवाये ".

आगे बढ़कर फ़ोन पे बात करते हुए उसने एक हाथ से जमुना को उठा लिया उसके पिछवाड़े पे हाथ लपेट के जोह उससे चिपट गयी खोली भर के...... आर्यन फ़ोन पे बात करता सुईठे का दूर अनलॉक करके बहार झाँका और दो बैडरूम दूर छोड़कर तीसरे कार्नर वाले के अंदर ले गया ," धयान रखना में आता हूँ बिना".

कॉल कट करके उसने िश रूम की सटकनी लगाई और जमुना को बीएड पे फ़ेंक दिया ..... "अह्ह्ह्हह्हह आराम से" ......

आर्यन ने अपने कपडे खोलने शुरू किये तोह जमुना भी उसके शर्ट और बनियान उतारते देख जब उसकी बॉडी देखि तोह बावली hi हो गयी ...... अपनी चुनरी और कुर्ती उतार के लहंगे भी उतर दी. आर्यन अब पेण्ट उतर के सफ़ेद अंडरवियर में अपना बम्बू नहीं छिपा पा रहा था ......

जमुना ने जल्दी जल्दी अपने घेणे भी उतार दिए और आर्यन को घूरने लगी महरूम पंतय और ब्रा में..... दोनों की आँखों में भूके कुत्ते जैसी भूक साफ़ नज़र आ रही थी ......

**( रानी जमुना , आगे 39 साल , शादी को 22 साल हो गए , अलवर के रजवाड़े खानदान की रानी, दिमाग़ से चतुर और स्वाभाव से शांत थी . रंग गोरा था और उम्र के साथ सरीर भी भरा पूरा पूरा गदर्य हुआ था , फिग भी 38-32-38 होगा या उससे ज्यादा hi. आज तक पति राजा त्रिभुवन के अल्वा किसी गैर मर्द का हाथ न लगा था. दीप्ति को अपनी सगी बेटी की तरह प्यार दिया था)

आर्यन ने अपना अंडरवियर उतर के जमुना के चेहरे पे फेंका तो बिच में hi कैच करके उसको सूंघते हुए पहले ब्रा फिर पिछवाड़ा दिखती पेंटी भी उतार के दोनों आर्यन के मुँह पे फेंकी तोह हवा में कैच करके दोनों को बारी बारी सूंघ के आर्यन अपना लुंड मुठियाता दोनों फ़ेंक दिया ..... रानी जमुना भी उसकी बराबरी करती अपने अंदर की प्यास जाहिर कर रही थी और आर्यन को यह औरत बिस्टेर में बहोत पसंद थी.

इसी पल का इंतज़ार था जमुना को, आर्यन का अंडरवियर फर्श पे फ़ेंक के दोनों ने 6 कदमो की दुरी सेक् भी लगने दिए ख़तम कर दी.

दोनों विशाल चूतड़ थाम के आर्यन ने जमुना के ढकते आंग्रे से लबों को चूमते हुए उनकी तपिश काम की और उठा के अपने खूटे पे टांग लिया ...... पुछःह पुछःह चुम्म चुम्म..... सलरपपप सलरपपपपप ......

तोपची को अपनी मोती मोती मसल झांगों में छूट की पंखुड़ी पे दबा के अपने भरी पिछवाड़े को जुम्बिश देकर जमुना रानी ने जैसे सब कुछ पा लिया," अह्ह्ह्हह्हह ारयणणणणणण मेंनननननन मरररररर जाउंगी तेरे बींनणणन्न ..... "

फिर से उसके लबों को चूसते हुए आर्यन उसका मुख अपने लबों से कवर करके अपना लिंग मुंड योनि के छेद तक लाकर फिर से पूरा 12 इंच की सख्ती और 5 इंच के मोठे कड़कपन का अहसास उसकी मुनिया को करवा दिया....... " आंटी ज्यादा समय नहीं है सब वापस आ जायेंगे बस मुझे प्यार करने दो रोकना मत ".

जमुना उसके लबों को चूम के ," तू बोलता बहोत है बस मुझे प्यार कर, तभी में शांत होंगी ..... " फिर से लबों को उलझा दोनों छूट और लौड़े को रगड़ के गीला कर लिए ......

आर्यन उनको बीएड पे पीठ के बल लिटा के बस सर निच्चे कर लौड़ा घरसँ करता चूचियों को भभोंडे लगा ...... चूसते चाट ते जबतक न रुका निप्पल्स सूजने तक ......

जमुना तो बस गंगा hi भ रही थी अपनी छूट से 3ऋ बार...... निच्चे खिसकर उखड़े बैठे आर्यन ने जब अपने जीभ से लम्बा सुदपा मारा छूट के चीरे पे जोह पूरा चुतरस से सना था जैसे जलेबी पड़ी हो चासनी में ऐसी hi उभरी मोती पंखुड़ियों को चूस के निचोड़ डाला और जीभ बाकी बचा रास ुष योनि कुंड से खोदने लगी .......

आंखें फटी हुयी, उनके सुख के आंसूं निकलती होओओओओ हआ मचवा दी जमुना के मुख से पर जालिम कहा रुक रहा था, आयी भी तो वो पूरा समुन्दर अपनी योनि में भरे थी जैसे आर्यन hi उसको खाली कर सकता है ....... चरमोत्कर्ष अब गिनती नहीं मिनटों में बार बार हो रहा था और जालिम आज उसको सूखा करके hi मानेगा......

10 मं यह सपनलोक वाले थे जोह अरमान जमुना लेकर दिल्ली आयी थी उसको आधे घंटा भी बीता न होगा, जीने लगी थी...... यह मर्द नहीं है कामपुरुष का बाप है जोह सुख में जूते लगवा कर मैं को शांत कर देता है.

लेकिन अभी तो सिर्फ warm-up था यह जमुना रानी भूल रही थी...... अब तोपची को आगे सफर उसके अंदर करना था जोह इतना आसान बिलकुल न था जिसका अहसास अपने ऊपर लेते चूमि लेते लौड़े के टोपी घिसने पे हुआ..... अह्ह्ह्हह ारयणणणणणण आराम से डालना बीटा नहीं तोह में उठ भी नहीं पाऊँगी ...... सीईईई कहाँ था रे जिसके लिए में कितना तदपि हूँ...... तुझे तो बस दीदी hi दिखती हैं ".

आर्यन ने उसके गाल पे काट के कहा ," वह बिचारि तोह प्यार करूँगा सुनकर मुझे बाथरूम से बहार निकाल दी, आप को अभी भी जलन हो रही है ".

अपने चूतड़ को उचका के लुंड लेने की कोशिश की तो आर्यन ने पेट की तरफ कर दबा दिया बस रगड़ hi लगी ," अह्हह्ह्ह्ह सीईईई नहीं रे ...... कुछ मं जलन हुयी पर तू ने मुझे यहाँ लाकर दिल जीत लिया मेरा..... बस दाल दे न ...... "

आर्यन सीधा खड़ा हुआ और बोलै ," प्यार करो इसे फिर आपको ज्यादा प्यार देगा ".

घुटने के बल होती बड़ी बड़ी चूचियां और मटकों वाली गांड के साथ उनका नया हैरस्टीले पोर्नस्टार लिसा अन्न की याद आर्यन को दिला गया ...... जमुना लगती भी वैसी hi थी पर बिस्टेर में उशसे भी गरम.

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आर्यन का लुंड को देखकर फिर हैरानी हुयी," यह और बड़ा लग रहा है बीटा..... आज मार hi डालेगा तू मुझे "..... दोनों मुठी में भर के टोपे को चूम के चाटने लगी जैसे साइज और वजन टोल रही हो...... सलरपपपपप सलूरर्पपपप बहोत बड़ा है पर कड़क है, चुम्म्म्म चुम्म्म्मम्म ....... "

आर्यन भी जानता था जमुना और कावेरी दोनों आग हैं आग ...... बिस्टेर पे इनको जितना रगड़ो उतना मजा देंगी वहीँ संगीता प्यार देने वाली औरत थी. जवाला तोह ऑलवेज रेडी टाइप पर पुष्प की याद आते hi उसका लौड़ा ठुमका ...... "अह्ह्ह्हह आंटी काट खाओगी क्या शह्ह्ह्हह्ह और अच्छे से चूसो ...... हाँ और अंदर लो आप का मोह बहोत गरम है ".

***(संगीता और जमुना = राजा त्रिभुवन की रानियां हैं.

कावेरी, जौला और पुष्प = राजा जबेर सिंह की रानियां हैं.)

लुंड पे कसाव बना अपनी दोनों मुठी गोल गोल घुमा के मुँह आगे पीछे करती जमुना बड़ी लगन से आर्यन को खुश कर रही थी...... मर्द को खुश करना वह जानती थी अपनी सौतन संगीता के मुकाबले .......

जल्दी hi आर्यन ने मोर्चा संभाला और बीएड पे उसकी पीठ पीछे साइड से लिटा कर लेफ्ट साइड से चिपक के उसका सर अपनी तरफ करके किश करता हुआ उसकी एक टांग उठा के अपना टोपा जमुना की गीली छूट में थोक दिया जिससे उसकी आंखें दर्द से हैरत में फेल गयी पर अपने आगोश में दबोचे फिर से एक धक्का मारा तोह 8 इंच तक लुंड छूट को चौड़ा करके फिट हो गया और जोरसे से हाथों को क्रॉस किये उसकी दोनों चूचियां दबा दी जोरसे...... ुंहःहःहःहःह ह्म्म्मम्म्म्म पुछःह पुछःह ...... जैसे एहि दर्द लेने तोह दिल्ली आयी थी जमुना, भर दे पूरा मुझे..... जल्दी से माँ बने दे ...... हाँ यह असली काम था यानी ( राजवंश ) जल्दी उसकी कोख में आये और यह दूसरी किश्त थी जिसका अरेंजमेंट महारानी मिरदुला ने किया था किसी को शक भी न हो और सांप भी दूध पि जाये.

अपनी कमर पीछे करके आर्यन ने भीषण आखिर धक्का मारा तोह बच्चेदानी भी पहाड़ दिया आज तोह ऐसा लगा जमुना को जब किल्ला घेरे में जाकर फिट हुआ ....... आँखों में आंसूं आ गए और कॅशे ने जीभा करते जैसे पकड़ बनायीं हुयी थी...... पर वह कहाँ रुकने वाला था ......

दे धापा धप तोपची को उसकी छूट में इतनी तेजी और पावर से पेलता जैसा रूई धुन रहा हो ....... आर्यन ने शोर करती जमुना के मोह पे हाथ रखकर ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर थी ....... फचाककककककक पहचहहहहहह ..... थप्प्प्पप्प थपप्पपपपपप...... 1ो मं चले िश राउंड ने जमुना को हलाल hi कर दिया था पर अब बारी आर्यन ने जमुना के हाथ में दी...... अपने ऊपर बिठाये उसको लुंड पे उछलने में मदद भी करता और हर अंग भी सेहला रहा था .......

जमुना अब भी सिसकते हुए ," दर्द देने में तुझे बहोत मजा आता है ...... आ हहहजनननन ..... मर्डर hi गईइइइइइ थी मेंनननन...... में इतनी घेरि नहीं हूँ रे मेरा पेट hi पहाड़ देता आज तोह ....... "

आर्यन के सीने पे पीछे हाथ रखे िश आसान में अपने अनुसार जितनी घेरे तक ले पाती उतने लुंड पे कोड रही थी और बाकी काम उसका भारी पिछवाड़ा कर देता ...... यानी 8-9 इंच तक तोपची की सवारी करते उसको भी सकूं था ......

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5 मं बाद पोजीशन चेंज की और घूम के आर्यन के सीने पे लेट के छोड़ने लगी......

ऐसे उसको पिछली बार भी मजा आया था ...... आर्यन कमर हिलता कभी डीप स्ट्रोक्स कभी हलके से पेलता और आर्यन के सीने को चूमती चूसती जैसे अपने बड़े नितम्बों को मसलवाने का मजा ले रही थी.

आर्यन की एहि समझ उसको कलाकार बनती थी की गाडी कोनसे गियर में डालनी है....... "पुछःह पुछःह ारयणणणणणण ..... ी लव यू ..... दिल से कह रही हूँ तुम मेरे लिए सबसे अजीज बन गए हो. झूट नहीं बोलूंगी मुझे राजा शक्ति सिंह से भी प्यार था राजा त्रिभुवन से भी पर अब सायद वह मीठा hi लगता है ..... पुछःह पुछःह "

आर्यन ने धक्के तेज मारे तोह अह्ह्ह्ह करती उसको धीरे करने को बोली..... " सायद आप बोर हो गयी थी "......

जमुना ने सत्तर उसके लुंड पे बैठे कूदते हुए उसके सीने पे हथेली जमा के अपनी कमर को स्पीड देते हुए कहा ," बोर तोह हो गयी थी पर प्यार करना तुम से सीखी...... अह्ह्ह्हह्हह...... जानती हूँ यह रिश्ता गलत है पर मुझे कोई झिझक नहीं की में तुमसे प्यार करने लगी हूँ और जीवन भर करुँगी ..... सीईईई ...... अब ऊपर आजा बीटा मुझे पीस दाल में थक गयी हूँ "........

आर्यन ने तुरंत उनको अपने निच्चे लेकर कहा ," आपको थकने नहीं दूंगा रानी जी और में भी आपसे प्यार करता हूँ और रेस्पेक्ट भी...... यह प्यार बस हम दोनों के दिल में कैद रहेगा क्यूंकि बहार वाला कोई हमको समझ hi कहाँ पायेगा ".

आर्यन का चेहरा किस्सियों से भरते हुए इमोशनल होकर जमुना boli,"Bahot बोलता है बस मुझे पेल यार और जोरसे ...... " ..... वही गलती की मिशनरी पोजीशन में आर्यन ने सारे नुत बोल्ट हिला डाले जमुना जी के अगले 15 मं में......

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दर्द तोह बहोत था पर आर्यन के लुंड से निकले 12 पिचकारी वाले प्रसाद ने पूरा तृप्त कर दिया...... उसका दिल्ली आना सफल हुआ ........

तेज म्यूजिक बजने लगा .......

"छत पे सोया था बहनोई

छत पे सोया था बहनोई

मैं तन्ने समझ के सो गयी मुझको राणा जी माफ़ करना

गलती म्हारे से हो गयी

मुझको राणा जी माफ़ करना

गलती म्हारे से हो गयी "

गुल की विवाह रश्मि शुरू हो गयी थी.....

तो बे कॉन्टिनोएड......

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