Apne Pyaare rishte - Page 9 - SexBaba
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Apne Pyaare rishte

अपडेट 74

अब तक आपने देखा

चलते हुए में कुछ दूर hi पंहुचा था तोह मुझे वह चट्टान दिखाई देने लगी उसे देख के में जहा था वही रुक गया और उस चट्टान के मेरे करीब आने का इंतज़ार करने लगा जैसे hi वह चट्टान मेरे करीब आयी में तुरनर साइड हो गया जिससे वह चट्टान बिना मुझे छुए पीछे की और निकल गयी उसके जाते hi मेने भी फिर से चलना शुरू कर दिया

अब आगे

ऐसे hi कुछ देर और चलने के बाद अब एक साथ 2 चट्टानें मेरे तरफ आने लगी थी जिनको और आते देख में फिर से देवर से सात कर खड़ा हो गया जिससे वह चट्टानें मुझे सिर्फ चुकार निकल गयी लेकिन इस बार इनके चुने से मुझे असहनीय पीड़ा का अनुभव हुआ जिसके वजह से अभी में चल भी नहीं प् रहा था चलना तोह दूर की बात मेरे में अब खड़े रहने की भी ताकत नहीं थी जिसकी वजह से में वही गिर गया और दर्द से तड़पने लगा तभी मेरी नज़र सामने से आ रहे अब तक के सबसे बड़े चट्टान पर पड़ी जिसका साइज hi इतना बड़ा था की वह लग भाग पुरे टनल को कवर करके चल रहा था जब वह मेरे तरफ आ रहा था तोह में जमीं में हो रहे कम्पन को भी में महसूस कर प् रहा था जिससे ये तोह तय था अभी तक जो भी हुआ वह बस ट्रेलर था अभी और भी बड़ी चुन्नौतिया आणि बाकि है जिनके लिए में तैयार नहीं हु मुझे अभी और ट्रेनिंग की जरुरत है

यही सोचते हुए मेरे मुँह से वह निकल गया जो शायद नहीं निकलना चाहिए था

में :- में हार मानता हु मुझे अभी और अभ्यास की जरुरत है मुझसे अब और नहीं होगा

मेरे ये बोलते hi वह चट्टान जो मेरे तरफ बढ़ रही थी वह जहा थी वही पर वह टूट गयी और उसके वह छोटे छोटे टुकड़े आके मेरे ऊपर गिरने लगे जिससे मुझे और भी कई जगह छोटी मोती छोटे आयी लेकिन जब वह चट्टान पूरी तरह टूट गयी तोह बहार जाने का रास्ता भी खुल गया

फिर में कैसे तैसे अपने दर्द पर काबू प् कर उस रस्ते से बहार निकल गया और अब मेरे सामने था बहार जाने का दरवाजा जिसके दूसरे और में अपने रूम को देख सकता था जैसे hi में उस रस्ते से बहार निकलने लगा वैसे hi मेरे नज़र सामने बैठे एक 3 मुँह वाला शेर पर गयी जिसे देख के hi मेरी आगे बढ़ने की हिम्मत hi नहीं हुई इसीलिए में जहा था वही बैठ गया और उस शेर के जाने की रह देखने लगा अभी इतना चलके और इतनी छोटे खाने के बाद मेरे में हिम्मत नहीं थी की में फिर से किसी से भी लड़ाई करू या अब कुछ और करू इसीलिए में वही बैठ गया और ध्यान लगाने लगा क्यूंकि मुझे भी अब थोड़ी देर रिलैक्सिंग की जरुरत थी तोह में ध्यान लगा के रिलैक्स hi कर रहा था की तभी मेरे सामने जो शेर बैठा था उसकी जोरदार डरकाळी से मेरा ध्यान टूट गया जब मेने उसके और देखा तोह वह वही आराम से लेता था तोह में फिर से ध्यान लगाने लगा लेकिन इस बार किसी आदमी की आवाज मुझे आने लगी

आवाज :- आ गया रोटदु बचा

जब ये आवाज मेरे कानो में पड़ी तोह मेरा ध्यान फिर से टूट गया लेकिन जब मेने आस पास देखा तोह वह कोई भी नहीं था में अभी यहाँ वह देख hi रहा था की तभी मुझे फिर से उस आदमी की आवाज सुनाई दी

आवाज :- देखो इस बचे को कैसे मूर्खों की तरफ यहाँ वह देख रहा है

जब मेने ध्यान से देखा तोह वही 3 मुँह वाले शेर का एक सर ये बोल रहा था जिसे देख और सुन के तोह मेरे आस्चर्य से आखे hi फटी की फटी रह गयी में अभी उसे देख hi रहा था की तभी उस शेर के 2 सर ने भी बोलना शुरू किआ

हेड 2 :- देखो तोह इस रोटदु को कैसे हमे घर रहा है जैसे पहली बार किसी शेर को बोलते हुए देख रहा है

हेड1 :- देखो तोह थोड़ी देर पहले कैसे रो रहा था (मेरी नक़ल करते हुए) में हार मानता हु मुझे अभी और अभ्यास की जरुरत है मुझसे अब और नहीं होगा


ऐसे hi धीरे धीरे उस शेर के 3no सर मेरा मजाक उड़ने लगे जिससे मुझे भी अब गुस्सा आने लगा था लेकिन मेने अपने गुस्से को जैसे तैसे करके काबू किया और ध्यान लगाने लगा मुझे ध्यान लगता देख वह और भी ज्यादा मजाक उड़ने लगे जिससे मुहे गुस्सा तोह बहुत आ रहा था लेकिन मैंने जैसे तैसे अपने गुस्से पर कण्ट्रोल करके ध्यान लगाने लगा लेकिन जब में ध्यान लगाने लगा तोह वह 3no सर एक साथ बहुत जोर से चिल्लाने लगे जिससे मेरा ध्यान बार बार भांग हो रहा था जिस वजह से अब मेरा गुस्सा अपने चरम पर था लेकिन फिर भी में अपने गुस्से को काबू करके फिर से ध्यान लगाने लगा लेकिन वह अभी भी चिल्ला रहे थे लेकिन मैंने इस बार अपना ध्यान भांग नहीं होने दिया जिससे मुझे ध्यान लगाने में सफलता भी प्राप्त हो गयी अब उस शेर की आवाज आना भी बंद हो गयी थी और में शांति से ध्यान लगा प् रहा था जिससे जल्द hi मुझे अपने शरीर में एक नयी ऊर्जा का संचार होते हुए महसूस होने लगा जिससे मेरे सरे घाव भर गए और थकन भी मिट गयी जब मुझे शरीर में संचारित ऊर्जा का ाबहस होने लगा तोह अब में भी ध्यान से उठ गया जब मेने अपना ध्यान तोडा तोह सामने का नज़ारा देखके तोह मेरे होश hi उड़ गए में अभी अपने कमरे में सोया हुआ था और दीदी मेरे पास hi मुझसे लिपट के सो रही थी ये देखके तोह मेरे दिमाग ने hi काम करना बंद कर दिया की मेने जो इतनी मेहनत की इतना दर्द सहा वह सब झूट था केवल मेरे मन का वहां था
 
अपडेट 75

अब तक आपने देखा की कैसे राज ने गाइड की दी हुई चुनौतियों को पूरा करने के बाद जब उसने अपनी आखे खोली तोह वह अपने hi कमरे में था

अब आगे

जब मेरी आखे खुली तोह दिमाग ने hi काम करना hi बंद कर दिया की मेने जो इतनी मेहनत की जो इतनी छोटे खायी वह सब बस एक सपना था मतलब उसका कोई महत्व नहीं था में इसी सोच ने था की तभी मेरे मोबाइल का अलार्म बज उठा जिससे में होश में आया और दीदी के उठने से पहले hi अलार्म बंद करके में चाट पर पहुंच गया जहा गाइड पहले से hi मौजूद था

ग :- क्या हुआ राज इतने शांत क्यों हो

में :- अब आपको क्या बताऊ मेरी हालत ऐसी हो गयी है जिसमे मुझे सच और झूठ का अंतर hi नहीं समझ प् रहा हु

ग :- ज्यादा मत सोचो राज जो भी तुमने अपने स्वप्न में देखा वह सब सच है बस वह बाहरी दुनिया में करना संभव नहीं था इसीलिए मेने तुम्हारे स्वप्नों का सहारा लिया

में :- लेकिन बाहरी दुनिया में क्यों संभव नहीं था

ग :- अगर तुम्हे जितना समय वह लगा उससे इस दुनिया के समय चक्र के साथ तुलना करोगे तोह वह 2 महीनों के इतना होगा

में :- फिर ये हम आपकी दुनिया में भी तोह कर सकते थे

ग :- कर सकते थे लेकिन तुम भूल रहे हो तुम्हे वह कितनी छोटे आयी थी और अब तुम्हारे पास तुम्हारी शक्तिया नहीं है जिससे तुम्हारे जखम अपने आप भर जाये तोह फिर तुम अपने परिवार को क्या और कैसे समझाओगे

में (सोचते हुए) :- नहीं ये सपने वाला आईडिया hi सुपर्ब आईडिया है

ग (मुस्कुराते हुए) :- परीक्षा तुमने दे दी अब अपना nikal(result) भी जान लो

में :- (मायूस होते हुए) :- मेने तोह उसे आधे में hi छोड़ दिया था उसके बारे में जान कर क्या करूँगा

ग :- फिर भी जा लो तुम धीमे थे लेकिन उत्तीर्ण हो गए

में :- मतलब

ग :- मतलब ये की ये परीक्षा तुम्हारी काबिलियत जानने के लिए नहीं बल्कि तुम्हे सिख देने के लिए और कमजोरियों को ख़तम करने के लिए थी

सबसे पहला पड़ाव भूलभुलैया का जिसमे तुम्हे विषम से विषम परिस्थितियों में सफलता पूर्वक ध्यान लगाना सीखा पहले तुम आस पास के वातावरण के सहारे से ध्यान लगा रहे थे और इस पड़ाव में तुम्हारी पहली कमजोरी बातों को ध्यान से न सुन्ना इसे ख़तम कर दिया बोलो है या न

में :- (शॉकिंगली) हां

दूसरा पड़ाव जिसमे तुमने अपने अहंकार को कहातम कर दिया जो तुम्हे अहंकार था की तुम सर्व श्रेष्ठ और सब जानते हो उसे पड़ाव 2 ने ख़तम कर दिया और उस में तुमने सीखा की तुम्हारे सामने जो चुनौती तुम्हे आसान लगती है और जिसे तुम आराम से पार कर चुके हो वही अगर विकराल रूप धारण करे तोह तुम्हे भी ख़तम करने की ताकत रख सकती है इसीलिए किसी भी दुश्मन या चुनौती को काम मत समझ न ठीक है

में :-(हां में सर हिलते हुए) हम्म्म

ग :- अब बारी है तीसरे पड़ाव की जो की तुम कह सकते हो की वह तुम्हारी परीक्षा थी जिसे तुमने सफलता पूर्वक पार कर लिया है जिसमे तुम्हे सर्व प्रथम अपने क्रोध पे काबू पाना था फिर असामान्य परिस्थितियों में अपने भावनाओं पर काबू प् के ध्यान लगाना था जिसमे तुम सफल हुए और इसी के साथ तुमने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी और सबसे बड़ी ताकत पर तुमने काबू प् लिया है

में :- कोनसी

ग :- तुम्हारा क्रोध वही तुम्हारी कमजोरी और ताकत है जो काबू में हो तोह तुम्हे शक्ति भी देता है और अगर काबू के बहार हो जाये तोह तुम्हारा सर्व नाश करने की भी ताकत रखता है

में :- आप के बारे में जब भी सोचता हु की अब में आपको जान गया आपकी शक्तियों को जान गया तभी आप ऐसा कुछ कर देते है जिससे में हैरान हो जाता हु

अभी में इतना बोलै hi था की तभी पीछे से किसी की आवाज आयी

"तुम इनके बारे में जानते hi क्या हो राज जब जान जाओगे तोह इनकी किसी भी बात से हैरान नहीं होंगे"

जब मेने पीछे मुद के देखा तोह वह काल खड़े थे

में :- आप यहाँ

काल :- में तोह बस तुम्हे शुभ कामनाये देने आया था तुम्हारी सफलता के लिए

में :- जी धन्यवाद

ग :- राज अब ये साडी बाटे भूल के आराम करो कल से तुम्हारे सप्त चक्रों का जागृत होना शुरू होगा जिसके लिए तुम्हे अपनी पूरी शारीरिक और मानसिक ताकत को एक करके चक्रों को अपने अधीन करना होगा

में :- जी जैसा आप कहे

फिर उसके बाद वह दोनों भी वह से निकल गए और में भी अपने कमरे में आ गया जहा इस वक़्त दीदी आराम से बीएड पे लेती थी तोह में भी जेक उनके बगल में लेत गया और उन्हें निहारने लगा

में अभी उन्हें निहार hi रहा था की तभी उनकी आँख खुल गयी जब उन्होंने मुझे ऐसे अपने आपको निहारता देखा तोह उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान आ गयी जो उनके हसीं चेहरे को और भी खूबसूरत बना रही थी

दीदी :-(मुस्कुराते हुए) क्या देख रहे हो भाई

में :- देख नहीं रहा हु निहार रहा हु इस दुनिया के सबसे ज्यादा खूबसूरत चेहरे की खूबसूरती को

दीदी :- (शरमाते हुए) चुप करो शर्म नहीं आती अपनी बहन से ऐसी बाते करते हुए

में :- (उन्हें अपने बाँहों में भरते हुए) आपके लिए तोह हम बेशरमी की भी साडी हाडे तोड़ सकते है आप बस इज़ाज़त देके तोह देखिये

दीदी :- कोई जरुरत नहीं छुओ चाप उठो और निचे छालो नहीं तोह माँ यहाँ आ जाएगी

में :- (उन्हें किश करते हुए) मुझे कोई परेशानी नहीं है

दीदी :- उम्म्म भाई छोड़ो भी मुझे फ्रेश होने भी जाना है

इतना बोलके दीदी उठ कर बाथरूम चली गयी और में वैसे hi बीएड पर पड़ा रहा

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 76

दीदी :- उम्म्म भाई छोड़ो भी मुझे फ्रेश होने भी जाना है

इतना बोलके दीदी उठ कर बाथरूम चली गयी और में वैसे hi बीएड पर पड़ा रहा

अभी दीदी को बाथरूम में गए कुछ hi देर हुई थी की में भी उनके पीछे पीछे बाथरूम में घुस गया जब में अंदर गया तोह मेरी ससे hi थम गयी मेरे लुंड तन के जैसे एकदम रोड की तरह हो गया था में भी क्या कर सकता था अंदर का नज़ारा hi कुछ ऐसा था अंदर दीदी शावर के निचे पूरी तरीके से नंगी कड़ी थी शावर से गिर रहे पानी की बुँदे उनके शरीर को और भी सेक्सी बना रहे थे इस वक़्त वह किसी कामदेवी से काम नहीं लग रही थी अभी में उन्हें देखने में hi बिजी था की तभी उन्होंने अपनी पीठ मेरी तरफ कर दी जिससे अब उनकी वह मखमली फंड मेरे सामने थी जिसे देख के अब मेरे से और काबू करना मुश्किल हो रहा था

में भी अब अपने सरे कपडे निकल के दीदी के सहोवेर के निचे खड़ा हो गया और अपने लिंग को उनके गांड पर घिसने लगा और अपने दोनों हाथों से उनके मुलायम बूब्स की मालिस करने लगा इस दो तर्फे हमले से दीदी भी एक दम से दर गयी और तुरंत पीछे मुद गयी जिससे मेरा लुंड जो अब तक केवल उनकी गांड के ऊपर था वह अब उनके छूट के ऊपर आ गया जिससे दीदी की भी सिसकी निकल गयी

दीदी :- आह्हः भाई क्या कर रहा है अगर किसी ने देख लिया तोह

में :- आप भी जानती हो और में भी की बहार का दरवाजा लॉक है इसीलिए कोई नहीं हमे देख सकता इसीलिए अब सिर्फ मजे करो और करने दो

इतना बोलके मेने उनके कान लॉ को अपने मुँह में भर के उसे चूसने लगा और मेरा लुंड तोह उनके छूट पर hi था जिसे मेने धीरे धीरे ऊपर निचे करने लगा जिससे अब दीदी से भी ज़्यादा कण्ट्रोल नहीं हो रहा था

दीदी :- भाई रुक जा अगर अभी में बहक गयी तोह बहुत बड़ी दिक्कत हो जाएगी प्लीज समझा कर में भी अब तक खुद को कैसे कण्ट्रोल की हु ये मुझे hi पता है

दीदी कह तोह सही रही थी लेकिन मेरा तोह कलपद हो गया था तोह अब मेरा मूड भी ऑफ हो गया था इसीलिए में अपने शरीर को पांच कर अपने कपडे वापस पहन लिए और निचे आ गया जहा पर इस वक़्त तोह कोई नहीं था तोह में वही सोफे पर बैठ गया और टीवी देखने लगा

वही दूसरी तरफ

इस वक़्त मां और ममी अपने कमरे में बैठे बाटे कर रहे थे

मां :- तुम समझती क्यों नहीं राज के साथ वह सब नहीं हो सकता वह तुम्हारे बेटे जैसा होगा

ममी :- ये बाते आपको सोचनी चाहिए थी और वैसे भी राज में बुराई क्या है घर की बात घर में hi रह जाएगी न बदनामी का दर होगा न कोई और दिक्कत होगी

मां :- अगर वह नहीं मन तोह

ममी :- इसकी चिंता आप मत करो वह सब में संभल लुंगी

मां :- ठीक है जो करना है वह करो लेकिन एक बार याद रखना राज और हमारे बिच के सम्बन्ध अब कही सुधर रहे है तोह ये याद रही किसी भी तरह से ये सम्बन्ध फिर न बिगड़े

ममी :- आप बस उसे यहाँ लेन का इंतज़ाम करो बाकि में संभल लुंगी

मां :- में पिताजी से बात करता हूँ

इतना बोलके वह अपने कमरे से बहार निकल गए और नाना नानी के कमरे में पहुंच गए जहा छोटे मां भी मौजूद था

मां :-(दूर नॉक करते हुए) में अंदर आ सकता हु पिताजी

नाना :- अरे तुम्हे कब से परमिशन की जरुरत पड़ने लगी आओ अंदर आओ

मां :- पिताजी में आपसे कुछ बात कहना चाहता था

नानी :- बोल तुझे कब से परायों की तरह बात बात में परमिशन लेनी पड़ी साफ़ साफ़ बता क्या बात करनी है

स. मां :- है भैया बोलो क्या बात है आप इतना परेशान लग रहे हो

मां :- पिता जी में कह रहा था की परसो आपके और माँ की शादी की साल गिरह है तोह में सोच रहा था की घर में एक पार्टी अर्रंगे की जाये

नाना :- तुम्हे पता है न अरुण की मुझे और तुम्हारे माँ को ये फ़िज़ूल खर्चे पसंद नहीं है

मां :- में जानता हूँ पिताजी लेकिन ये फ़िज़ूल खर्चा नहीं है में ये कह रहा था की हम पार्टी करंगे और उस पार्टी में राज को इन्विते करेंगे वह आ गया तोह उसे मानाने में उसकी नाराज़गी काम करने में आसानी होगी

स. मां :- भैया सही कह रहे है पिताजी मुझे भी ये आईडिया सही लग रहा है हमे राज से बात करनी चाहिए

नाना :- ठीक है में फ़ोन लगता हु

इतना बोलके नाना जी अपना फ़ोन निकल कर नंबर डायल कर देते हैं

वही मेरे यहाँ

में इस वक़्त आराम से बैठकर टीवी देख रहा था की तभी मेरे दादाजी भी आ गए

दादाजी :- क्या बात है राज ऐसे क्यों बैठे हो

में :- निचे आया तोह कोई था नहीं तोह क्या करता इसीलिए टीवी देकने लगा

दादाजी :- आज तुम्हारे दादी का अपॉइंटमेंट था न रेगुलर चेक उप के लिए तोह तुम्हारे माँ डैड उन्हें लेके डॉक्टर के पास गए है

में :- ठीक है फिर में चलता हु आज बहार से hi कुछ खा लूंगा

दादाजी :- ठीक है (अपनी जेब से पैसे निकलते हुए ) ये लो रखो काम आएंगे

में :- कहा काम आएंगे गांव के बहार में जाऊंगा नहीं और गांव में मुझसे कोई पैसा लेगा नहीं तोह क्या फायदा ये रख के

दादाजी :- लेकिन फिर भी रखो क्या पता कहा जरुरत पद जाये

में :- अगर जरुरत पद गयी तोह है मेरे पास आप चीन मत कीजिये

इतना बोलके में घर से निकल गया आम के बगीचों के लिए

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 77

में अभी आम के बगीचों के लिए निकल गया hi था की तभी घर का टेलीफोन बजने लगा

दादाजी :- hello

सामने से :- समशेर में शेखर बोल रहा हु

(एक शार्ट इंट्रो

नाना :- शेखर चौधरी

नानी :- सिमा चौधरी

बी. मां :- अरुण

ममी :- कामिनी

स. मां :- संजय

मौसी :- दीपा

बकियीन का इंट्रो बाद में

भाई लोग hi सकता है मेने पुराने उपदटेस में कुछ अलग नमीं का उसे किया हो लेकिन अब यही नाम फाइनल है)

दादाजी :- है बोलिये शेखर जी

नाना :- वह में कह रहा था की परसो मेरी और सिमा की शादी की साल गिरह है तोह में राज को इन्विते करना छह रहा था

दादाजी :- लेकिन क्या ये ज्यादा जल्दी नहीं हो रहा है मतलब शायद राज को अभी और समय लग सकता है पास्ट को भुला के नयी शुरवात करने के लिए

नाना :- हो सकता है लेकिन जब तक वह हमसे मिलेगा नहीं हमारे साथ घुलेगा नहीं तब तक कैसे हमारे बिच की दूरिया काम होंगी

दादाजी :- बात तोह तुम्हारी भी सही है में पहले बाकि सब से बात करता हु फिर राज को बता दूंगा

नाना :- ठीक है

इतना बोल के नानाजी ने फ़ोन रख दिया और दादाजी भी सोफे पर बैठ कर नाना के प्रस्ताव के बारे में सोचने लगे

तह वही दूसरी तरफ में अभी आम के बगीचों में पंहुचा hi था की सरे मजदूरों ने आके में आस पास घेरा बना लिया

में :- क्या बात है इतने सरे एक साथ कही मुझे अकेला पके मारने का प्लान तोह नहीं है

मेरे बोलते hi सरे मजदूरों के चेहरे पर मुस्कान आ गयी

मजदूरों 1 :- क्या छोटे मालिक आप भी आप तोह हमारे लिए भगवन सामान हो आपको मारना तोह दूर आपको चुना भी हमारे लिए दुर्लभ है

में (उसके कन्धों पे हाथ रखते हुए) :- क्या काका आप भी मुझे खुद को मालिक कहल वन पसंद नहीं और आप हो की भगवन बना रहे हो मेरा इतना छोटा सा तोह नाम है राज आप सब खामखा उसे खींच तान के छोटे मालिक बना देते हो और है एक आखरी बात मुझे चुना कोई बड़ी बात नहीं है में आप सब के बेटे सामान hi हु तोह मुझे अपना बीटा hi समझो न की मालिक

फिर कुछ देर ऐसे hi मजदूरों से बात की जहा सब मुझे थैंक्स बोल रहे थे पगिर सब अपने कामों में लग गए और में भी जेक हरिया के साथ बैठकर सरे बगीचे का निरिक्षण करने लगा

हरिया :- छोटे मालिक आपको पता है कल जो आपने इन सब को आम की पेटिया गिफ्ट की उसके वजह से कल जितना काम पुरे दिन में हुआ था उतना काम आज आधे दिन में hi कम्पलीट हो गया

में :- ये तोह पता था की ऐसा होगा ये जो मजदूर है ये हमारे पास hi काम क्यों करते है जब की गांव में और भी खेत है बगीचे है

हरिया :- पैसों के लिए

में :- नहीं क्यूंकि ये हमारी इज्जत करते है हमे hi अपना सब कुछ मानते है और अगर हम इनकी इस रेस्पेक्ट की वैल्यू नहीं करेंगे तोह इनके मन में धीरे हमारे लिए जो रेस्पेक्ट है वह काम हो जाये गई अगर आज में इन्हे बोलू की बिना सोये रात भर काम करना है फिर भी ये सब एक सेकंड में रेडी हो जायेंगे और काम भी शुरू कर देंगे इनके लिए पैसों की इतनी वैल्यू नहीं है जितनी प्यार और रेस्पेक्ट की है

जब में ये सब बोल रहा था तब हरिया मुझे ऐसे देख रहा था जैसे कोई भूत देख लिया हो

में :- ऐसे क्या देख रहे हो काका

हरिया :- आप ने तोह इतनी सी उम्र में जीवन का सर hi समझ लिया

में :- चलिए अब बस भी कीजिये में जरा राउंड लगा के आता हु

इतना बोलके में वह से निकल गया मुझे कोई राउंड नहीं लगाना मेरे मन में तोह बस इस वक़्त सोनिया का hi ख्याल आ रहा था मुझे भी नहीं मालूम की ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ लेकिन आज कल जैसे मेरी सेक्सुअल देसिरेस जैसे बढ़ती hi जा रही थी

में अभी चलते हुए उसी जगह पहुंच गया था जहा कल मुझे सोनिया के दर्शन हुए थे लेकिन आज वह बस कुछ बकरिया hi थी जो अपना घास चरने में मस्त थी में पूरी जगह ढूंढने लगा लेकिन वह कोई नहीं था तोह में निराश हो गया और वह से जाने लगा तोह मुझे वही थोड़ी दूरी से किसी बकरी के चीखने की आवाज आने लगी जब में वह पंहुचा तोह वह सामने एक

बड़ी सी नदी बह रही थी वह क्या नज़ारा था नदी का साफ़ पानी और ये ठंडी हवा शायद इसे hi जन्नत कहते है फिर वही नदी के अंदर मुझे इस जन्नत के परिवके भी दर्शन हो गए जब उसे देखा तोह जैसे मेरे दिल की सुकून सा मिल गया वह पे कुछ बकरिया घास खा रही थी और वही नदी के अंदर सोनिया मुझे तैरती हुई दिखी जिसकी पीठ मेरी तरफ थी लेकिन उसकी पीठ मुझे पूरी नंगी दिख रही थी जिसे मेरा लुंड लोअर के अंदर hi 90° खड़ा हो गया लोअर पहने हुए वजह से अब मुझे दर्द भी हो रहा था तोह मेने उसे भी लोअर से आजाद कर दिया और धीरे धीरे मसल ने लगा वो भी पानी में शायद ऊँगली कर रही थी क्युकी उसकी आँखे मजे में बंद हो चुकी थी में अभी ये सब देख मजे ले hi रहा था की मेरा फ़ोन बजने लगा जिसकी वजह

से हम दोनों चौक गया और उसने जैसे hi मुझे देखा पानी में बैठ गयी ये सब इतनी जल्दी हुआ की मुझे कुछ ध्यान hi नहीं रहा और में ये भी भूल गया की मेरा लुंड अभी भी बहार hi है और फ़ोन निकल के देखा तो अननोन नंबर था भगवान् कसम इतना गुस्सा आया की पूछो मत

फ़ोन काट के मैंने उसकी तरफ देखा तो वो एक तक मेरे लुंड को घूरे जा रही थी ये सब देख के मैंने भी थोड़ी हिम्मत जुताई

में :- ऐसे घर घर के क्या देख रही हो अगर चाहिए तोह चुके भी देख सकती हो

मुझे भी समझ नहीं आ रहा था की में क्या कर रहा हु क्या बोल रहा हु किसी भी चीज का होश नहीं था

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 78

मैंने उसकी तरफ देखा तो वो एक तक मेरे लुंड को घूरे जा रही थी ये सब देख के मैंने भी थोड़ी हिम्मत जुताई

में :- ऐसे घर घर के क्या देख रही हो अगर चाहिए तोह चुके भी देख सकती हो

मुझे भी समझ नहीं आ रहा था की में क्या कर रहा हु क्या बोल रहा हु किसी भी चीज का होश नहीं था

सोनिया :- देखिये छोटे मालिक हमारे पास मत आना वर्ण हम शोर मचा देंगे इसे अंदर करिये और भाग जाइये यहाँ से

में :- देखो मुझे जबरदस्ती पसंद नहीं है वो तो बस तुम्हारी सुंदरता में इतना खो गया की ध्यान hi नहीं रहा और शोर मचाना है तोह मचा सकती हो बस फिर ये सोच लेना की गांव वालों को क्या जवाब डौगी जब में उन्हें आज और कल की हरकत उन्ही बताऊंगा

सोनिया :- देखिये छोटे मालिक हम गरीब घर से है हमारी बदनामी करके आपको क्या मिलेगा

में :- बदनामी का दर तुम्हे अब लग रहा है तब कहा गया था दर जब खुले मैदान में तुम अपने कपडे उतर के बैठी थी

सोनिया :- मुझे….

में :- वह सब बाद में पहले बहार आओ और कपडे पहनो नहीं तोह ठण्ड तोह लगेगी hi और अगर किसी ने हम दोनों को इस हालत में देख लिया तोह पता नहीं क्या क्या सोचेंगे

इतना बोलके में सोनिया की तरफ पीठ करके खड़ा हो गया अभी मुझे थोड़ा थोड़ा रीलीज़ होने लगा की इतनी देर में क्या से क्या हो गया है और अब में इससे बहार निकलने के लिए तरीका ढूंढने लगा

अभी में सोच hi रहा था की तभी सोनिया ने मुझे आवाज दिया और जब मेने मुड़के देखा तोह वही जैम गया उसने अभी कपडे तोह पहन लिए थे लेकिन वह कपड़ों में और भी ज्यादा खूबसूरत दिख रही थी उसके वह गीले बाल जो बार बार उसके चेहरे पे आ रहे थे और वह उन्हें बांधने की जगह उन्हें अपने साइन के ऊपर रख रही थी जिससे में उसके साइन का भाग जो पानी से पूरा गिला हो गया था वह न देख सकू लेकिन उसके ऐसे करने से में और भी ज्यादा उसकी तरफ अत्त्रक्ट हो रहा था

सोनिया (जोर से छिलके) :- छोटे मालिक

मुझे अपनी तरफ आकर्षित होता देख वह भी अब शर्माने लगी थी हाय उसका वह शर्माता चेहरा किसी के भी दिल को अपने वाश में करने के लिए काफी था

में (हड़बड़ाते हुए) :- हआ बोलो तुम्हे शर्म नहीं आयी ऐसे खुली जगह पर अपने कपडे उतर के बैठी हो

सोनिया :- हां तो आपको शर्म नहीं आयी किसी को ऐसे देखते हुए

में :- ाचा तुम पानी क्या कर रही थी आंखे बंद करके

सोनिया :- वही जो आप कर रहे थे बेशरम कही के

में :- ाचा जी हम करे तो बेशरम और तुम्हारा क्या वैसे शादी नहीं हुई क्या तुम्हारी जो ये करने की जरुरत पड़ी

सोनिया :- शादी तो हो गयी है पैर मरद किसी काम का नहीं है दिन भर शराब पीकर पड़ा रहता है

में :- देखो में तुम्हारी मजबूरी समझता हु लेकिन ये जगा इन सब चीजों के लिए ठीक नहीं है ये सब 4 दीवारी में हो तोह ठीक है सोचो जरा अगर किसी गलत इंसान ने तुम्हे अगर ऐसे हालत में देख लियाबटोह कितना बड़ा अनर्थ हो सकता है

सोनिया :- माफ़ करना छोटे मालिक लेकिन हम भी मजबूर है बचपन से माँ पापा को वह सब करते देखा तोह पापा शराब पाइक आते थे और फिर जैसे उन्हें दुनिया से कोई मतलब hi नहीं रहता था माँ पापा को वह सब करता देख में भी अपने मन में अपने होने वाले पति के साथ वह सब सोचने लगा करती थी लेकिन मेरे रंग की वजह से मेरी शादी देरी से हुई लेकिन जितना शादी को देरी hi रही थी उतनी hi मेरे अंदर गर्मी बढ़ती जा रही थी और जब शादी हुई तोह वह भी शराबी से जिसे कुछ होता तोह नहीं है और मेरे रंग की वजह से कोई दोस्त तोह बना नहीं जो भी मेरे करीब आया सिर्फ मुझे भोगने के इरादे से आया लेकिन मेने कभी भी किसी को कुछ नहीं करने दिया

में :- अगर चाहो तोह हम दोनों एक दूसरे की कमी को पूरा कर सकते है अगर तुम चाहो तोह वैसे भी मुझे जबरदस्ती पसंद नहीं है

सोनिया :- में भले hi गरीब हु या मजबूर हु लेकिन में इतनी भी मजबूर नहीं हु की किसी और के साथ वह सब करू

में :- ठीक है मेने वैसे भी कहा है की मुझे जबरदस्ती पसंद नहीं है और है ये सब अबसे खुले आम मत करना ये सब अगर किसी ने देख लिया तोह बदनामी होने लायक भी इज़्ज़त नहीं बचेगी

इतना बोलके में वह से जाने लगा

वही दूसरी तरफ

अभी सरे लोग हॉल में बैठे हुए थे माँ और डैड भी दादी को लेकर वापस आ गए थे अभी इस वक़्त सब हॉल में बैठे थे

दादाजी (सब से) :- मुझे तुम सब से कुछ बात करनी है

डैड :- बोलिये न पिताजी

दादाजी :- आज शेखर का फ़ोन आया था

नानाजी का नाम सुनके जहा सब शॉक हो गए वही दीदी के चेहरे पर कन्फूसिओं साफ़ दिख रहा था और वह होना लाज़मी भी था क्यूंकि दीदी ने न आज तक मेरे नाना को देखा था न hi उनका नाम कभी घर में लिया गया था

दादाजी :- वह चाहता है की कल उसकी शादी की साल गिरह है तोह उसने राज को भी इन्विते किया है

दीदी :- ये शेखर कोण है दादाजी

दादाजी :- राज के नाना का नाम शेखर है

माँ :- लेकिन उन्होंने राज को क्यों बुलाया है उन्होंने आज तक जो भी किया वह उन्हें काम लग रहा है क्या जो उन्होंने राज को फिर परेशान करने के लिए बुलाया है

दादाजी :- (डैड से) तुम क्या कहते हो आखिर राज तुम्हारे भी बेटे सामान है

डैड :- मेरे हिसाब से राज को जाना चाहिए क्यूंकि पिछले कुछ दिनों में जितने भी बार में उनसे मिला हु उनके आखों में अपने नवासे को मिलने की तड़प और अपने पास्ट में की हुई गलतियों के लिए पश्चाताप देखा है और अब राज भी कोई बचा नहीं है जैसे कोई भी मार दे अब राज खुद की रक्षा कर सकता है और अगर आज भैया और भाभी भी होते तोह वह भी यही कहते

दादी :- में भी धर्म से सहमत हु

दादाजी :- रीना तुम भी बोलो राज तुम्हारा भी भाई भाई है

दीदी :- में क्या बोलू दादाजी न में उनसे कभी मिली हु न उन्हें कभी देखा है इसीलिए मेरा मन्ना है की इस फैसले को राज के ऊपर hi छोड़ देना चाहिए

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 79



में :- ठीक है मेने वैसे भी कहा है की मुझे जबरदस्ती पसंद नहीं है और है ये सब अबसे खुले आम मत करना ये सब अगर किसी ने देख लिया तोह बदनामी होने लायक भी इज़्ज़त नहीं बचेगी

इतना बोलके में वह से जाने लगा

सोनिया :- ऐसे hi चले जायेंगे पास से देखे bina(itna बोलके सोनिया ने अपना ब्लाउज खोल दिया और अपनी दोनों चूचियों को

हाथ से सहलाया)

सोनिया की बात सुनके में जैसे hi घुमा तो बस मंत्रमुग्ध सा उसकी तरफ चल दिया और उसके पास पहुंच कर मैंने अपने हाथो को उसकी दोनों गदरायी हुई चूचियों पे रख दिया हाथ लगते hi हम दोनों को hi जैसे एक झटका लगा उसका तो शायद मर्द का हाथ लगने से ऐसा हुआ था लेकिन मुझे तो

उसकी चूचियों को प्रेस करके लगा था वो सच में बहुत टाइट थी ऐसा लग रहा था की किसीने कभी इन्हे छुआ hi न हो

में सोनिया का ये अवतार देख के फिर से मदहोश हो रहा था लेकिन इस बार मेने तुरंत hi अपने आप को कण्ट्रोल कर लिया

में :- ये तुम्हे किसी भी दबाव में आके करने की जरुरत नहीं है तुम ये करो या न करो तुम्हारे आबरू पे एक ाच भी नहीं आएगी

सोनिया :- नहीं छोटे मालिक में ये किसी भी दबाव में आके नहीं बल्कि अपनी मर्ज़ी से कर रही हु सच बात ये है की कल जब से आपको देखा था तब से hi आपके प्रति खिचाव महसूस हुआ था इसीलिए मेने कल आपसे लड़ रही थी मुझे लगा था की कोई नया मजदूर होगा उसे अपने जाल में फसा कर मजे लुंगी

में :- एक सेकंड तुम बोली थी की तुमने किसी को हाथ तक लगाने नहीं दिया और दूसरी तरफ मजदूरों को अपने जाल में फ़साने की बात करती हो

सोनिया ;- नहीं छोटे मालिक आप गलत समझ रहे हो में अपने देवता की कसम खाके कहती हु की मेने अपने पति के अलावा और किसी के साथ कुछ नहीं किया

में :- क्या नहीं किया

सोनिया :- (कंफ्यूज होक) मतलब

में :- अरे मेरा मतलब साफ़ है की की तुमने कहा की किसी और के साथ कुछ नहीं क्या तोह में वही पूछ रहा हूँ (उसके कान के पास) क्या नहीं किया

मेरी बात सुनते hi सोनिया के गाल शर्म के मरे लाल हो गए थे

में :- ये जगह ठीक नहीं है एक काम करो जो बगीचे के बहार की तरफ झोपडी बानी है तुम उसमे मेरा वेट करो में आता हु

सोनिया पहले से hi शर्मा रही थी मेरी बात ख़तम होते hi उसने अपने कपडे ठीक किये और झोपडी के तरफ भाग गयी

फिर में भी वह से निकल गया और हरिया को बगीचे का ध्यान रखने का बोल में भी झोपडी के तरफ निकल पड़ा जब में वह पंहुचा तोह दरवाजा खुला हुआ था तोह मेने तुरंत गेट बंद कर दिया

गेट को बंद करके में जैसे hi अंदर गया तो सामने सोनिया अपने सारे कपडे उतार चुकी थी रवि के अंदर आते hi उसे देखते हुए बोली

सोनिया :- अब पहले की तरह देखकर hi समय ख़राब करोगे तो फिर से आप को खली हाथ hi जाना पड़ेगा जायदा टाइम

नहीं इसलिए जो करना है जल्दी कीजिये

में :- मैं तो करता है की हुसैन की मल्लिका का दीदार करता राहु पैर वो फिर कभी कर लूंगा अभी तो पहले इसका स्वाद चखना है जिसे देखते hi मुँह में पानी आ गया

सोनिया :- तो अब क्या सुबह मुहरत का इंतज़ार कर रहे है ाःह आराम सी (सोनिया की बातो के बिच में hi में उसकी छूट को मुँह में भर कर चूसने

लगा)

सोनिया- छोटे मालिक ये क्या कर रहे है आअह्ह्ह ओह्ह्ह गन्दी जगह है. आह्हः लेकिन गजब का मजा आ रहा है ऐसे hi अह्ह्ह

जब मेने उसकी छूट चेतना शुरू की तोह उसे अजीब तोह लगा लेकिन मजा भी आने लगा वही में भी पूरी जीब उसकी छूट में दाल कर मजे से चाट रहा था जिस से सोनिया की मस्त सिसकिया निकल कर पोरे झोपड़े में गूंज रही थी

सोनिया :- ोूहः मालीक मुझी कुछःह हो रहा हीी आआह्ह्ह्हह्ह इतना मजा तो

पहली कभी नहीं ाआयियाआ ऊऊफफफफफफफफफ आआह्ह्ह्हह्ह कुछः काररीये

ाआअह मम्माआ अब ऑर्डर मत तड़पाइए बस अब अपना वह मेरे अंदर डालल दीजिये ऊऊफफफफ कही कोई आगयी तो बिना किये hi रहना पड़ेगा

में भी अब काफी गरम था और दूसरी बार खड़े लुंड पैर धोका नहीं चाहता था इसलिए जल्दी से सोनिया की टैंगो के बिच में आ कर लुंड को छूट पे लगा के धीरे2 पूरा लुंड अंदर घुसाने लगा

जिस से सोनिया की आह्ह्ह्ह निकल गयी

में :- (धक्का मरते हुए) जो भी बोलना है खुल के बोलो तभी पूरा मजा आएगा

सोनिया- ोोूम्म्म्माआ मालिक धीरे आपका बहोत मोटा है अह्ह्ह आईसीए hi

आरामसीए अह्ह्ह मालिक बहुत मस्त लुंड है आपका कसम से मजा आज्ञा आअह्ह्ह ऐसी hi धीरे धीरे धक्के लगाइये

ऊऊफफफफफफफ

में सोनिया के कहे अनुसार hi छोड़ रहा था पैर अब मुझे ऐसे धीरे -2 करने में मजा नहीं आ रहा था इसलिए अब में सोनिया की दोनों टैंगो को उठा कर तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा मेरे ऐसा करने से

सोनिया की छूट में फिर से मीठा मीठा सा दर्द उठने लगा और न चाहते हुए भी वो मेरे तेज़ रफ़्तार धक्को को झेलते हुए सिसक कर बोली

सोनिया- आअह्ह्ह्ह मालिकक नाही मेरी छूट पहात जाएगी मंमाहहह आपका बहुत बड़ा है ऊऊफफफफफ माआ मुझे बचा लो आअह्ह्ह अह्ह्ह मालिकक पलज़्ज़ज़ धीरे

धीरे कीजिये आआह्ह्ह्हह्ह

हहाआयीयी मम्मा कहा फास गईई में

सोनिया की हालत ख़राब हो रही थी वो पहले चूड़ी तो थी पैर उसके पति मुक़ाबले मेरा लुंड 3 गुना मोटा और लम्बा था जिस से सोनिया बिस्तर पे हाथ पाव मार रही थी जिसे चटपटा ते देख में और तेज़ तेज़ धक्के मरते हुए बोलै

में :- नाटक क्यों कर रही हो तुम्हारी छूट तो पहले से hi खुली हुई है और तुम ऐसे चिल्ला रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो वैसे कुछ भी कहो छोड़ने के बाद भी काफी टाइट छूट है तुम्हारी पूरा कास के जा रहा है मैं करता है ऐसे hi अंदर बहार करता राहु दिन रात ( तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए बोलै)

सोनिया :- टाइट तो होगी hi नाआ क्युकी उसका छोटा सा था और सिर्फ 2/3 बार hi किया है

समझे आआह्ह्ह ममअअअअ अपना देखिये गधे जैसा है आअह्ह्ह ममा तू चिल्लाओ ना तो क्या करूण ऊऊफफफफफफ माआ मेरी छूट कैसी फैला

दी है आपने उउउउम्म्म (छूट को हाथ से टटोल कर बोली)

सोनिया की छूट में मेरा लुंड अब आराम से अंदर बहार हो रहा था और दर्द भी पहले से काम था पैर सोनिया को ऐसे चुद ने में hi मजा आरहा था इसलिए वो बार बार मुझे उकसा रही वही मेने भी सोनिया के हाथ पकड़ लिए थे और सोनिया की आँखों में देखकर गहरे धक्के लगा रहा था जिन

में अब दर्द की जगह मजे की तस्वीर नज़र आ रही थी

वही मेरे ऐसा करने से लुंड सोनिया की छूट में अंदर तक जाके लग रहा था जिस से सोनिया की छूट का बांध टूट गया और रास बहाने लगी सोनिया को इतना मजा आज से पहले कभी नहीं आया था

पैर जो आज हुआ उस से उसके जिस्म मजे की लहर सी दौड़ गयी जिस में बहती वो एक दम से अकड़ गयी और

अब वह मुझे पकड़ ने की कोशिश करते हुए बोली

सोनिया :- ऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ममल्लिक्क आपने तो मेरी जाएं निकाल डीई आअह्ह्ह्ह कसम से बहुत मजाआ ायययय आह्ह्ह्ह

मेऐईं तो आअज से आपकी हो गई उस गांडू को तो हाथ भी न लगाने दूंगी मीटीई

आआआह्ह्ह्हह्ह

सोनिया के झड़ने के बाद मेरा लुंड अब और भी रफ़्तार से अंदर बहार हो रहा था जिस का अब सोनिया पूरा मजा ले रही थी टाँगे उठाये वही में भी उसकी गर्दन को चूमते हुए धक्के लगाए जा रहा था क्युकी अब वो भी मंज़िल के करीब था

सोनिया- आह्हः मालीक एआईसीए होई तेज़ तेज़्ज़ज़ उउउउउउउउउम्म आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ममममीए गयीईइ री ाःह मायआ

सोनिया एक बार फिर से अपनी मंज़िल पैर पहुंच गयी थी जिस उसका प्रेम रॉस हर धक्के के साठवबहार आए रहा था और वो बस बूत बानी मुझ को देख रही थी जो इतनी देर से उसकी छूट की धज़्ज़िया उदा रहा था

मेरा भी अब फाइनल स्टेज पैर पहुंच कर सोनिया की छूट में hi झड़ने लगा था जिस सोनिया को अपनी छूट में मेरा गरम गरम लावा महसूस हो रहा था उसे तो यकीन hi नहीं हो रहा था की आज जो कुछ भी हुआ उसके ऊपर वह होश में तब आयी जब मेरा लुंड उसकी छूट से बहार निकला जिस के साथ hi हम दोनों का कॉमर्स भी उसकी छूट से बेहटा हुआ उसकी गांड की दरार में जाने लगा

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 80

मेरा भी अब फाइनल स्टेज पैर पहुंच कर सोनिया की छूट में hi झड़ने लगा था जिस सोनिया को अपनी छूट में मेरा गरम गरम लावा महसूस हो रहा था उसे तो यकीन hi नहीं हो रहा था की आज जो कुछ भी हुआ उसके ऊपर वह होश में तब आयी जब मेरा लुंड उसकी छूट से बहार निकला जिस के साथ hi हम दोनों का कॉमर्स भी उसकी छूट से बेहटा हुआ उसकी गांड की दरार में जाने लगा

अब आगे

जब हम दोनों भी अपने अपने चरम पर पहुंच चुके थे तोह हम दोनों के बिच हुई घमसान चुदाई के बाद दोनों अपनी सांसें दुरुस्त करने में लगे हुए थे जब कुछ नार्मल हुए तो सोनिया बोली

सोनिया :- ऊऊफफफफ छोटे मालिक आप सच में कमाल है कसम से आज तक इतना मजा नहीं आया अभी भी ऐसा लग रहा है की जैसे आपका लुंड अंदर hi है

में :- तुम भी बहुत मस्त हो सोनिया मुझे भी बहुत मजा आया

सोनिया :- चलिए फिर अब चलते है वैसे भी काफी टाइम हो गया है

में :- हम्म पैर मुझसे मिलते रहना

सोनिया :- ः बिलकुल अब तो आना hi पड़ेगा क्युकी आपका ये मुसल लेने के बाद मुझे नहीं लगता की मेरे पति के लुंड से अब मुझे आराम भी आएगा

उसके बाद सोनिया और मेने अपने कपडे पहने और अपने अपने घर की तरफ चल दिए

में अभी घर पहुंचकर सीधा अपने कमरे में चला गया और लैट्टे hi मुझे नींद आ गयी

में अभी सोया हुआ था की तभी मुझे अपने लुंड पैर गीलेपन का एहसास जब आँख खोल कर देखा तो दीदी बड़े hi सेक्सी अंदाज़ में मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लुंड को मुँह में लेकर चूस रही थी

में :- क्या बात है दीदी सुबह तोह बड़े नखरे दिखा रही थी अभी क्या हुआ

दीदी :- क्या करू तुझे कितनी आवाज दी तू तोह उठ hi नहीं रहा था तोह यही तरीका सही लगा मुझे

उनका जवाब सुनके मेने उन्हें खींच कर अपने बहो में भर लिया

में :- लेकिन अब तोह दोनों उठ गए अब आप पीछे नहीं हैट सकती है

दीदी :- में पीछे हटना भी नहीं चाहती लेकिन अभी पॉसिबल नहीं है

में :- ाचा और अभी तोह आप मेरा लुंड चूस रही थी और अब कह रहे हो कुछ पॉसिबल नहीं है में पूछ सकता हु अगर पॉसिबल नहीं है तोह वह क्या था

दीदी :- मत पूछ मेरे भाई सुबह से बहुत बेचैन हु जब से तूने मुझे रात को लड़की से औरत बनाया है मेरा मैं नहीं लग रहा किसी भी चीज़ में और इस वक़्त तो बस मुझे तेरे साथ प्यार करना है देख मेरी

ये भी कितनी गीली हो रही है

इतना बोलके उन्होंने मेरा हाथ पकड़ के कपडे के ऊपर से hi अपनी छूट पैर रख दिया

में :- तुम तो सच में बहुत गरम हो राखी हो और तुम्हारी छूट भी बहुत गीली पैर अभी यहाँ तो कुछ भी नहीं हो सकता थोड़ा इंतज़ार करो फिर तो पूरी रात अपनी है

दीदी :- वो तो मुझे भी पता है पैर अभी के लिए कुछ तो कर ताकि मेरी बेचैन काम हो प्ल्ज़ भाई

दीदी की बात सुनकर मेने भी अपना हाथ निचे ले जा कर दीदी की पेंटी उतार ने लगा जिस में दीदी ने भी मेरा पूरा साथ दिया

में (पंतय उतर के) :- अब आप सामने दरवाजे पर नज़र रखना बस ok

दीदी :- हम्म तू बस मुझे इस बेचैनी से मुक्त कर वर्ण में मर जाउंगी

इतना बोलके उन्होने अपने दोनों पेअर खोल दिए जिस से उनकी छूट पूरी तरह से खुल कर सामने आ गयी जिस देख कर में फिर से गरम हो गया और धीरे आगे बढ़ने लगाऔर बहुत hi प्यार से दीदी की छूट के साथ जीभ से खेल ने लगा

अपनी छूट पैर अपने भाई की जीभ का एहसास होते hi दीदी की सानें तेज़ चल ने लगी जितना वो पहले बेचैन थी अब उसकी छूट उस से ज्यादा बेचैन हो रही थी और वो बस आँख बंद किये अपनी छूट चूसै का भरपूर मजा ले रही थी

वो ये भी भूल चुकी थी की दरवाजा खुला है और कोई भी आ सकता है लेकिन वो तो बस इस वक़्त जल्द से जल्द इस बेचैनी से छुटकारा चाहती थी वह अब हलकी हलकी सी आवाज़ में सिसकिया ले रही थी और में भी पूरी तरीके से मन लगा कर उनकी छूट चूसने में लगा था जिससे वह भी अब झड़ने वाली थी अभी वह आँखे बंद करके मजे में खोने लगी और बहुत hi जल्द वह अपने चरम पर थी और धीमे आवाज में चीखते हुए वह झड़ने लगी

फिर हम दोनों ने अपने आपको ठीक किया और फिर में और दीदी दोनों निचे चले गए जहा सरे बैठे हुए थे

दादाजी :- आओ राज

भले hi सब नार्मल दिखने की तरय कर रहे थे लेकिन फिर भी मुझे माँ और दादी के फेस पे हलकी सी टेंशन की लकीरे साफ़ दिख रही थी में अभी कुछ बोलता की तभी दादाजी ने बोलना शुरू किआ

दादाजी :- राज तुम्हारे नाना का फ़ोन आया था

नाना का नाम सुनके hi मेरे मन में फिर से वही सरे बाते चलने लगी जिससे दो पल के लिए में जैसे फ्रिज hi हो हो गया लेकिन कोई नोटिस करे उससे पहले hi मैंने अपने आपको कण्ट्रोल में कर लिया

में :- क्या कह रहे थे वह

दादाजी :- कल उनकी शादी की साल गिरह है तोह वह सब चाहते है की तुम भी वह आओ उनके साथ सेलिब्रेशन में शामिल हो

में :- और आप क्या चाहते है की में क्या करू

माँ :- कोई..

डैड (माँ के बात को काटते हुए) :- हम सब को जो बोलना है वह हमने एक दूसरे से डिसकस कर लिया है अब फैसला तुम्हे करना है

में :- अगर ऐसा है तोह में तैयार हु में कल सुबह जल्दी निकल जाऊंगा

दादाजी :- राज में तुम पर जोर नहीं दाल रहा हु लेकिन में चाहूंगा की तुम कुछ दिन वह रुको उनके साथ और उन्हें भी उनके नवासे के साथ कुछ दिन गुजरने का मन होता होगा

में :- जैसा आप कहे दादाजी में भी यही सोच रहा था की कुछ दिन उनके साथ रुकू और उन्हें थोड़ा समझ लू अगर जीवन भर रिश्ता निभाना है तोह शुरवात तोह कही न कही से करनी होगी तोह में कल सुबह जल्दी निकल जाऊंगा तोह शाम तक वह पहुंच जाऊंगा लेकिन कोई भी उन्हें बताएगा नहीं की में आ रहा हु

फिर उसके बाद कोई कुछ नहीं बोलै सब चुप चाप बैठके खाना खाने लगे में भी जल्दी से अपना खाना ख़तम करके अपने कमरे में चला गया

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आज के लिए इतना hi


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अपडेट 81

फिर उसके बाद कोई कुछ नहीं बोलै सब चुप चाप बैठके खाना खाने लगे में भी जल्दी से अपना खाना ख़तम करके अपने कमरे में चला गया और मेरे कमरे के जाने के थोड़ी देर बाद hi दीदी भी कमरे में आ गयी और मेरे बगल में बैठ के मुझे देखने लगी

में :- ऐसे क्या देख रही हो पहले कभी देखा नहीं

दीदी :- नहीं में देख रही हु की मेरा भाई इतना बड़ा हो गया की अपने दर और नफरत को इतने आसानी से सब से छुपा दिया

में :- ये क्या कह रहे हो आप

दीदी :- सच बता तुझे वह नहीं जाना है न तेरे मन में अभी भी वही सब बैठा है न जो तेरे साथ बचपन में हुआ

में :- ये बात सच है लेकिन अगर में उनसे मिलूंगा नहीं उन्हें समझूंगा नहीं और अपने पास्ट को hi पकड़ के रखूँगा तोह में कभी भी अपने नाना नानी से नहीं मिल पाउँगा कभी अपने मां के साथ कोई फेस्टिवल सेलिब्रेट नहीं कर पाउँगा

दीदी :- ाचा बहुत हो गयी तेरी ये बड़ी बड़ी बाटे चल अभी मुझे (मेरे कानो के पास आके) जैम कर प्यार कर जिससे जितने भी दिन तुम यहाँ नहीं होंगे में अपने तुम्हे अपने अंदर फइलल कर सकू

इतना बोलके उन्होंने अपने होटों को मेरे होटों से भिड़ा दिए लेकिन तभी निचे से माँ ने दीदी को आवाज दिया तोह दीदी निचे चली गयी लेकिन जाते जाते मेरे कान के पास आके बोली

दीदी :- गेट रेडी आईएम कमिंग सून

और जब वह वापस मेरे कमरे में आयी तोह आते hi दीदी ने गेट लॉक किया और मुझे पागलो की तरह चुम ने लगी

दीदी :- आअह्ह्ह भाई बस अब और वक़्त मत लगा तेरी दीदी बहुत तड़प रही अब जल्दी से मेरी साडी तड़प

मिटा दे मेरे आंग आंग को खोल कर रख दे (मेरे लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ते हुए) ऊऊफफफफफफफ कितना मोटा है तेरा ये

में :- देखो दीदी मजा करना है तो खुल कर बोलो नाम से वर्ण रहने दो मुझे कुछ नहीं करना

दीदी :- ओह्ह्ह्ह भाई तू जो कहेगा वही करुँगी बस अब तू अपना ये लुंड मेरी छूट की गहराई में उतार

दे प्ल्ज़ फाड़ दे मेरी छूट को आज इतना जोर से छोड़ की ये पूरी फैट जाए ऊऊह्ह्ह्ह मेरे भाई ऐसे hi

जंगली बन जा फाड़ दे मेरे कपडे और भोग ले अपनी दीदी के जिस्म को

अभी तोह दोनों बहिन भाई पागलो की तरह एक दूसरे को नोच ने लगे थे हवस हावी होती जा रही थी वही दीदी तो बस ये च रही थी की जल्दी से मेरा लुंड उसकी छूट में घुस जाए पैर मेरे

दिमाग में तो कुछ और hi चल रहा था इसलिए मेने दीदी को कास के पकड़ा और लुंड को उनके मुँह

में घुसा दिया और तेज़ तेज़ अंदर बहार करने लगा जिससे दीदी की तो हालत hi ख़राब होने लगी थी यहाँ

तक की उनसे सांस भी नहीं लिया जा रहा था जब मुझको इस बात का एहसास हुआ तो मेने लुंड बहार खेंच लिया लुंड बहार आते hi दीदी ने चैन की सांस ली और बोली

दीदी :- आह्ह्ह्ह मुझे मार ने का इरादा था क्या अभी कुछ देर और न निकाल ता तो में मेर hi जाती ऊऊफफफफफफ

में :- ऐसे कैसे मर जाती मेरी जान अभी तो तुम्हे ये लुंड अपनी छूट में भी लेना है और ये सुबह मुझे तड़पने की सजा थी

दीदी :- ह्ह्हआआ तो दाल दे न कब से बोल रही हु पैर तू है की सुनता hi नहीं आअह्ह्ह्ह ारराम्म्म सी भाई ाअरराम सी

में :- अभी तो कह रही थी की अंदर दाल अब दाल दिया तो चीख रही हो तुम लड़कियों का भी कुछ समझ नहीं आता

दीदी :- आआअह्ह्ह्ह भाई आईसीए कोण करता है ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ मममममअअअअ ठुडडा तो रिहहाआममम कर तेरी बड़ी बहिन हु मैंन

में :- आप ने hi तो कहा था दीदी की ऐसे करना है ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अब मुझे बोल रही होऊ

दीदी :- हआ तो इसका मतलब ये थोड़ी है की तुम मेरी जान ले लो ऊऊह्ह्हह्ह आअह्हह्ह्ह्ह

ाआईईसीईई काअरररररररर ोोोोोाआआअह्ह्ह्ह ठुड्ढाआ प्यार भी तो होओओओ आअह्हह्ह्ह्ह ईएएसस्सस्स मेरे बहहहाआईई आआह्ह्हह्ह्ह्ह एआईईएससीईए बाहुट्ट्ट्ट्ट आछ्हा लगघ रहहहआ हासीइइइइइइ उउउउउउफफ्फ्फफ्फ्फ़

में :- ऊऊह्ह्हह्ह डीईडीईई तुइओम्हर भी कुछ पता नहीं चलता कभी कुछ कहती हो तो कभी कुछः आआआह्ह्ह्हह्ह पैर जो भी कहो तुम्हारी छूट है बड़ी मस्त दिल करता हाई बस छोड़ता राहु कभी ना रुककूऊ

दीदी :- ोुह्ह्ह्ह मेरी भाई मेइइइइ तो तुम्हारररीी दीवानी हो गयी हूउउ अब तो तुम्हारे बिना मैं hi नहीं लगता उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ तेर यहाँ सी जाने के बाद मेरा क्या होगा

उउउउउउफफ्फ aaaaaaaahhhhhhhhhhh ोररररर टीज़ज़ज़ कार्र फ्फआयआयड़ड्डड्डड़ डीएई

मममममाःह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaaaahhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhaaahhhh

में :- तो नहीं जाता में फिर हम दोनों रोज़ चुदाई करेंगीए आअह्हह्ह्ह्हह

दीदी :- मात्र तो मेरा भी यही करता है पैर क्या करू छह कर भी नहीं रोक सकती आआअह्हह्ह्ह्हह वह भी तेर अपने है उनका भी तेरे पे हक़ है अह्ह्ह भाई फिरररससीई वहीइ कर राहहा हाइइइइ ारांम सीए कर नाआ

में :- आह्हः आराम से मजा नहीं आ रहा है अब तो ऐसे hi मजे लो ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ आआआह्ह्ह्ह

दीदी :- अह्ह्ह भैई धीरे दर्द hi रहा हैई

में :- आआअह्ह्ह्ह इतना मजा तो आ रहा है दीदी और आप इतना चिल्ला रही होओओओ अगर ऐसे करोगी तो फिर कभी नहीं करूँगा

दीदी :- आआअह्ह्ह्ह आईसीई मत बोलल मेरे भाई कर तू जैसे करना फव्डडड मीरररीी छुट्ट्ट्ट कोऊ आआह्ह्ह्हह्ह मसल मुझी

में :- हआ ये हुई ना बाटत आअह्ह्ह्हह क्या मस्त छूट हाइइइइ तुम्हाररिई देखो कैसे मेरे लुंड कहा रही हाइइइइ ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह

दीदी :- बस्स्स तू खुश है ना तू मेऐईंण भी लघुश हूउउउउ

पूरा कमरा मेरे धक्को से गूंज रहा था ठप्प ठप्प थापपपप

दीदी का बुरा हाल हो चूका था मगर अपने भाई की कृषि के लिए वो अभी भी पूरा साथ दे रही थी

दीदी :- आआआह्ह्ह्हह्ह भाआईईई ोुर्रर्रर्र कितना तिमी लागेगाआ uuuuuuuuffffffffff

में :- आआआहहहहह भूउउउससससस डीडीई कुछ देर और ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीईईईन्न्न भीईईई ायनी वाला हूउउ आह्ह्ह्हह्ह

कुछ hi पल में मैं दीदी की छूट में hi झाड़ गया और उसके ऊपर hi लेता रहा थोड़ी देर बाद जब नार्मल हुआ लुंड बहार निकल के साइड में लुढ़क गया

दोनों भाई बहिन में से कोई भी अभी कुछ नहीं बोल रहा था बस दोनों अपनी सांसें दुरुस्त करने में लगे हुए थे जब दोनों कुछ नार्मल हुए तो दीदी ने hi चुप्पी तोड़ी

दीदी :- ओह्ह्ह भाई आज तूने सच में जान ले ली थी मेरी पैर एक बात है मजा भी बहुत आया काश तू मेरा पति होता तो हर रात चुदती तुझसे

में :- मुझे तो लगा था की आप नाराज़ हो गयी होगी मेरे बर्ताव से पैर क्या कृ आपके साथ चुदाई करते वक़्त होश hi नहीं रहता मैं करता है छूट में hi घुस जाऊ वैसे भी आप बहुत खूबसूरत हो दिल करता है आपको फील करता राहु( चूचियों पैर हाथ फेरते हुए)

दीदी :- आह्हः क्या कर रहा है अभी इतनी देर से फील hi तो कर रहा था अब भी मैं नहीं भरा तेरा ोोूछह गंदे छोड़

में :- तुमसे मैं कैसे भर सकता है दीदी ( चुकी चूसते हुए)

दीदी :- ाचा जी इतनी अछि लगती हु में तुझे

में :- अब कैसे बातो आपको दीदी जितना भी प्यार करू तुम्हे काम hi लगता है

दीदी :- चल अब मस्का मत लगा और सजा कल जल्दी उठना है और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और में भी उनकी बहो में चैन की नींद सो गया

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आज के लिए इतना hi


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बीआरओ ी वांट प्रॉपर अंसवेरस में जब स्टोरी पे फोकस्ड था तोह आप सब बोलते हो की इन्सेस्ट है तोह आपको सेक्स hi चाहिए और बाकि की चीजे नहीं और अब में थोड़ा सेक्स पर ज्यादा फोकस्ड हु तोह आप बोल रहे हो की स्टोरी आगे बढ़ाओ अगर सब ऐसे hi कन्फूसिओं क्रिएट करोगे तोह में पहले की तरह स्टोरी को अपने हिसाब से ल्किखना स्टार्ट कर दूंगा
 
अपडेट 82

दीदी :- ाचा जी इतनी अछि लगती हु में तुझे

में :- अब कैसे बातो आपको दीदी जितना भी प्यार करू तुम्हे काम hi लगता है

दीदी :- चल अब मस्का मत लगा और सजा कल जल्दी उठना है और उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और में भी उनकी बहो में चैन की नींद सो गया

सुबह जब मेरी नींद खुली तोह मैंने खुदको वैसे hi दीदी के बहो में सोता हुआ पाया उनका वह मासूम चेहरा देख के तोह जैसे में उसी में गम सा हो गया था

में (धीरे आवाज में) :- जब भी आपको देखता हु तोह पहले से भी ज्यादा प्यारी कैसे दिख सकती हो आप

फिर ऐसे hi देर उनको निहारके में उनके माथे को चुम कर उठ गया और चला गया चाट पर जहा गाइड मेरा वेट कर रहे थे

गाइड :- आओ राज तोह तैयार हो सप्त चक्रों पे काबू पाने के पहले स्टेप पर

में :- है जिस कार्य के लिए इतनी मार खायी है उसे अब पूरा कर के रहूँगा तोह चलो ध्यान लगाओ

फिर में ध्यान मुद्रा में बैठ गया और ध्यान लगाने लगा और जल्द hi मुझे उसमे सफलता भी प्राप्त हो गयी और जब मेने आँख खोली तोह में वही उसी जगह पे था जहा पर मेने पहले भी सप्त चक्रों पे काबू पाने की कोशिस की थी लेकिन हुआ उसके उलट जिसके बारे में आप सब को पता है

लेकिन आज ये जगह अलग लग रही थी ये पहले से ज्यादा सफ़ेद लग रही थी तोह वही जब पहले में आया था तोह जो आँख का चिन्ह था वह आज यहाँ नहीं था और जिस चित्र में पहले केवल मनुष्य hi था वही उस चित्र में मनुष्य के शरीर पे 7 जगह पे खली पैन लग रहा था जैसे वह कुछ लगा हुआ था लेकिन उसे अब निकल दिया हो

में :- यहाँ क्यों लेके आये हैं आप यहाँ पे मेरे हाथों क्या हुआ था याद है न

ग :- मुझे कुछ याद दिलाने की जरूररत नहीं है तुम पहले जब सप्त चक्रों पे काबू पाने का प्रयास किया था तब तुम यहाँ अकेले आये थे जिस वजह से तुम्हे इस जगह का ज्ञान नहीं था तोह चलो तुम्हारी ट्रैंनिंग की शुरुआत यही से करते है सर्व प्रथम में तुम्हे इस जगह के बारे में सब बताता हु ये जगह तुम्हारा अंतर्मन है जहा पर तुम्हारी हर शक्ति उसके गुणों के हिसाब से केंद्रित की जाएगी वही जो तुम्हे लहले यहाँ आँख का चित्र दिख रहा था वह तुम्हारे त्रि नेत्र को दर्शाती थी और जब मेने तुम्हारी त्रि नेत्र को असक्रिय किया तोह वह चित्र भी मिट गया वही ये जो मनुष्य तुम्हे यहाँ दिख रहा है वह तुम हो और जो 7 खली छेद है वह तुम्हारे सप्त चक्र है जैसे जैसे तुम अपने सप्त चक्रों पे काबू पाओगे ये खली छेद भरते जायेंगे

में :- ठीक है में समझ गया अब ये बताइये की में सप्त चक्रों पे काबू कैसे पाउँगा

ग :- सर्व प्रथम तुम सप्त चक्रों के बारे में जान लो पूरा संसार उन्ही चक्रों से बना है इस दुनिया में मौजूद हर सजीव प्राणी में ये सप्त चक्रों का वास होता है परन्तु नहे अपने काबू में केवल कुछ hi लोग कर पते है हर चक्र को जागृत करने के लिए एक खास मंत्र होता है जिसके उच्चारण से वह चक्र जागृत होते है तोह सर्व प्रथम आता है मूलधारा चक्र. उसे जागृत करने का मंत्र है "लम.” ये तुम्हारे धरती तत्त्व से जुड़ता है. ये दर्शाता है तुम कोण हो

यह चक्र तुम्हारे समृद्धि, संपत्ति और सुरक्षा की भावना को खोलता है. यदि तुम्हे काम ऊर्जा महसूस करते हो तो तुम लें मन्त्र का जाप कर सकते हो.

मुलधर चक्र को जागृत करने के लिए तैयार हो राज

में :- जी में पूर्ण रूप से तैयार हु

ग :- तोह अब हम शुरू कर सकते है

इतना बोल के में और गाइड दोनों भी वही जमीं पे बैठ गए और में अपने मुलधर चक्र पे ध्यान लगाने लगा क्यूंकि मुझे जल्द से जल्द ये कार्य संपन्न कर नानाजी के यहाँ के लिए भी निकल न था अभी में ध्यान में बैठा हुआ था की तभी ऐसे लगा की मेरे शरीर के केंद्र भाग में आग लग गयी हो मुझे ऐसे लग रहा था की कोई चीज मुझे अपने गिरफ्त में ले रही हो और उस आग को और भी भड़का रही हो लेकिन मेने उस सब को इग्नोर करके फिर से ध्यान लगाने लगा लेकिन जब भी में उस दर्द को इग्नोर करता ऐसे लगता जैसे वह दर्द पहले से भी बढ़कर मुझे मार रहा है अभी में इस सब से झूंझ hi रहा था की तभी मेरे शरीर को झटके लगने लगे और मुझे ऐसे लगने लगा की अचानक मेरे शरीर में शरीर में प्रवाहित होने वाली ग्रेविटी फाॅर्स और भी ज्यादा पावर फुल हो वाई है और मुझे धरती के तरफ खींच रही हो की तभी मेरे शरीर में अत्यधिक दर्द होने लगा जिसे अब सहन करना मेरे बस में नहीं था जिस वजह से अब मेरे पास ध्यान तोड़ने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा था तोह मेने अपना ध्यान तोडना चाहा तोह में वह भी नहीं कर प् रहा था ऐसा लग रहा था की कोई शक्ति है जो मुझे ध्यान से बहार निकल ने नहीं दे रही है तोह में भी फिर से अपने चक्र पे काबू पाने के लिए ध्यान लगाने बैठ गया और अपनी शरीर की साडी ऊर्जा को अपने मुलधर चक्र में प्रवाहित कर दिया जिस वजह से मुझे बहुत तकलीफ भी हो रही थी ऐसा लग रहा था की कोई मेरे शरीर को 2 हिस्सों में बात रहा हो लेकिन जल्द hi में इस कार्य में कामयाब हो गया और मेरे शरीर को तेज़ तेज़ झटके लगने लगे और एक जोरदार धमाके की आवाज के साथ में ध्यान से बहार आ गया और जब मेने अपनी आखे खोली तोह मेरा सर hi चक्र गया मुझे अपनी आखों पर भरोसा hi बही हो रहा था

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आज के लिए इतना hi


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