Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 11 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 84 संजना टेल्स समथिंग

तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई भी नहीं मैं तो मज़ाक कर रही हूँ!!”

चावला साहब ने कहा, “नहीं तुम मज़ाक नहीं का रही थी, मैं तुमको इतना तो पहचानता हूँ के तुम मज़ाक नहीं कर रही थी तुम्हारा किसी और के साथ कुछ नाह कुछ तो ज़रूर है अब बता भी दे नाह मुझे ख़ुशी होगी, और सच में मेरा जमके खड़ा हो गया है देख, ले छह कर देख नाह मुझे बहोत बेचैनी है जान्ने के लिए ी ऍम वैरी एक्ससिटेड हनी तेल्ल में आल!!”

संजना हस्ती जा रही थी मगर कुछ नहीं बता रही थी. चावला साहब बेताब थे सब सुनने के लिए और ज़ोर से संजना के निचे अपने मोठे तन्ने हुए लुंड को दबाते जा रहे थे, फिर कहा, “बोल नाह मेरी jaan…kaun है? या कितने हैं? उफ्फ्फ किआ एक दो से ज़्यादा हैं? हैं बाप रे बोल बोल नाह मैं ख़ुशी से पहले नहीं समां रहा हूँ बता नाह बेबी!!”

संजना ने अपने उँगलियों से दिखाया के 7 हैं!!! चावला साहब के ेंखें मोठे हुए और एक सांस लेते हुए कहा, सात? सात लोग हैं और जो तुमसे हमारे तरह इश्क करते हैं? कब? कहाँ? कैसे करते हैं?”

संजना ने कहा, “हम्म्म नहीं एक और है जिस को अभी अभी जाना है वो नई है तो 8 हुए सब मिलकर!!”

चावला साहब ने संजना को गॉड में उठाया और बैडरूम में लगाए, उस्सको बीएड पर बिठा कर कहा, “okay अब मुझको सब कुछ एक एक करके डिटेल में बता के कब और कैसे सब शुरू हुआ, और कौन कौन है और कब से? मुझको जान्ने से पहले या बाद में? किआ तुम्हारे पापा को पता है? किआ वो तुमको शेयर करता है? हँ? अरे बोल बोल नाह मैं पागल हो रहा हूँ देख यह शैतान खड़ा हो गया!!” और जल्दी से चावला साहब ने अपने पांत उतार दिए और बॉक्सर में बीएड पर बैठ गए अपने लुंड का फॉर्म संजना को दिखाते हुए.

संजना ने हीहीहीही करते हुए उनके लुंड को बॉक्सर के ऊपर hi करेस किया और उस्सने भी एक लम्बी सांस लेकर कहा, “मैं ने होनेस्त्ली आप को बोल दिया 8 हैं….. मैं सच बताने जा रही हूँ आप को. एक नाह एक दिन बताना hi था, अब अगर आप सब सुनकर नाराज़ हुए या आप को ग़ुस्सा आया तो?”

चावला साहब ने कहा, “बिल्कुल भी ग़ुस्सा नहीं आएगा डार्लिंग, मैं तो खुश हो रहा हूँ! मुझे खुद समझ में नहीं ारः के क्यों मुझे ख़ुशी हो रही है जब के मुझको ग़ुस्सा आना चाहिए था नाह? तो एहि बात है तुझ में जो किसी मर्द को तुम्हारे किसी और के साथ होने पर ग़ुस्सा नहीं उतेजिन्ह होता है, तुम हो hi ऐसी के शायद तुमको किसी 9तह या 10तह भी मिल गए तो भी शायद मुझको गुस्सा नहीं आएगा और मय्बे तुम्हारे पापा को भी ऐतराज़ नहीं होगी, पता नहीं किआ है तुझमें जो सेक्स को लेकर तुझपर ग़ुस्सा नहीं अत तुम बताओ नाह मेरी जान सब शुरू से बताओ प्लीज! और सुनों मैं भी अपने बारे में तुमको कुछ बताऊंगा मगर तुम्हारे बताने के बाद पहले तुम!”

संजना ने एक बहोत प्यारी मुस्कान के साथ उनके चेहरे में देखते हुए कहा, “रियली? आप भी? किआ आप भी किसी और के साथ? हम्म्म? बोलिये नाह?”

चावला: “हाँ अभी अभी शुरू हुआ तुमसे शुरू होने के बाद, वार्ना मेरे ज़िन्दगी में कोई भी नहीं था, तुमसे यह सब करने लगा तो मुझे लगा के उस से भी शायद शामे हो सकता है और हुआ भी….”

संजना ने बड़े प्यार और कोमलता से पूछा, “कौन है? कब मिली? बोलो नाह?”

चावला साहब: “नाह, पहले तुम सब बताओ उसस्के बाद मैं सब बताउगा, मेरा तो सिर्फ एक है तुम्हारे तो 8 है तो तुम पहले बताओ…..”

तो संजना ने बता शुरू किआ इस तरह से:

“आप को याद है वो दिन जब आप आरहे थे कार में और मैं आप को बाहर वेट कर रही थी तो कुछ लोग बाइसिकल से गुज़रे थे आप के कार के पास और आप ने पूछा था वह लोग कौन थे?”

चावला साहब: “हाँ हाँ बिल्कुल याद है, तब मुझको तुमको लेकर जलन फील हो रही थी के कोई और तुम्हारे साथ कुछ करता तो नहीं…. मुझे कुछ शक हुआ था उसी वक़्त मगर तुमने कहा था के वो रघु और उसस्के साथी थे है नाह?”

संजना: “हाँ रघु hi था अप्पने चमचों के साथ”

चावला साहब: “तो किआ रघु? वो तुम्हारे साथ एन्जॉय करता है?”

संजना: “वेट वेट बताती हूँ नाह….. और आप को याद है उस दिन जब आप आये थे तो मैं ने दरवाज़ा खोलने को लेट आयी थी 10 मिनट के बाद? और आप पीछे के तरफ बाहर जाकर बाथरूम के इम्पोसट को बंद किया था?

चावला: “हाँ हाँ सब याद है उसी दिन मैं ने तुमको शूट किया है बाथरूम मैं, उस दिन मुझको थोड़ा शक हुआ था मगर फिर नज़र अंदाज़ कर दिया, तो किआ कोई था यहाँ तुम्हारे साथ? हम्म?”

संजना उनके ेंखों में प्यार से देखते हुए हाँ में सर हिलाया, फिर कहा,

“और उस दिन जब टेंट बनाना वाले टेंट बना रहे थे और सुपरवाइजर और कुछ आदमी अंदर आये थे घर में, तो आप बहोत ग़ुस्सा हो रहे थे के मैं ने क्यों उंनलोगों को अंदर आने दिया और क्यों मैं उस छोटी ड्रेस में उन् लोगों के पास बाहर गयी थी… याद है?”

चावला साहब: “हाँ उस दिन तो मुझे बिल्कुल लग रहा था के तुम जिस तरह ड्रेस थी तुम्हारे पुरे जांघें दिख रहे थे, तुम्हारे क्लीवेज भी बिल्कुल सामने थे, और इतने मर्द लोग सब की नज़रें तुम पर hi ठीके हुए थे तो मुझे बहोत शक हुआ था उस दिन को तो किआ तब भी?”

संजना ने फिर से हाँ में सर हिलाया.

चावला साहब उस मंज़र को याद करने लगे के किश तरह उन् लोगों के नज़र हर बार संजना पर ठीके रहते थे और कैसे उन्हों ने उस सुपरवाइजर से बात किये थे मगर उस्सने कुछ भी नहीं बताया था ….. और चावला साहब सोचने लगे उन् दो दिनों में एक दिन को तो वो बहोत hi लेट पहुंचा था यहाँ और एक दिन तो बिल्कुल भी नहीं आये थे तो संजना बिल्कुल अकेली थी उन् लोगों के बीच….. यह सब सोचकर चावला साहब का लुंड और भी फनफना गए….

और चावला साहब ने संजना को बाहों में भरके लम्बा वाला किश किया और संजना के हाथ को अपने बॉक्सर के ऊपर अपने लिंग पर रखे हुए किश जारी रखा, संजना को खूब चूमा और छाता उन्हों ने और संजना उनके लिंग को अपने कोमल हाथ से रगड़ती गयी काफी देर तक….

उसस्के बाद चावला साहब ने कहा, “अब बताना शुरू करो शुरू से, पहले दिन किश ने तुमको छुवा, किश किया, कैसे शुरू हुआ ेट्स सब पहले दिन से बताओ बेबी…..

संजना ने बताना शुरू किया,

“ये तब की बात है जी जब मैं कॉलेज जाती थी और पापा ने मेरे साथ करना शुरू कर दिया था. पापा के बिना मैं नहीं रह पाती थी. पीछे लेने लगे थे पापा मुझे. जब मैं सुबह कॉलेज जाती पापा के साथ और पापा कंपनी की बस में चले जाते तो मैं बस स्टॉप पर स्कूल की बस का वेट करती थी उन् दिनों रघु और एकांत नौजवान लोग मुझसे बस स्टॉप पर चेरर कहानी करते रहते थे… दिन बा दिन उन् जवानों की संख्या बढ़ते गए मेरे पास बस स्टॉप पर. क्यूंकि सब इसी गाओं के थे, सबको मैं जानती थी तो बुसस यूँही एकांत बात कर लेती थी. उन् में वो लड़का जो शराबी है जिस ने हमको कार में देखा था उस दिन, जिस्सके पूर्वजों का ज़मीन है वो भी एते थे मुझे चेररने को, और क्यूंकि उसस्के पास मोटरसाइकिल था वो तो कभी कभी बस को फॉलो करते हुए मेरे कॉलेज तक आजाते थे. क्यूंकि पापा को मेरे जांघें बहोत पसंद थे आप की तरह तो वो मेरे यूनिफार्म को काफी छोटी बनवाते थे जिस में मेरी जांघें खुद दिखे उस्सको बहोत पसंद था के मैं वैसे यूनिफार्म पहनूं. तो वो सब लड़के मेरे जांघ देखते थे और सब एक्साइट होते थे, उन् में से कुछ तो खुले आम बस स्टॉप पर कहते थे के मेरे जाँघों को देख कर सब मुठ मारते हैं और मुझको अपने लिंग को हाथ में पकड़ने को कहते थे. मैं उन् सब के बातों को अनसुना करती रहती थी.

और एक दिन उन् में से दो मेरे बस में चढ़े, और मेरे पास बैठे बुसस में और मेरे जाघों पर हाथ फ्री पुरे रास्ते…. अपने हाथ को अंदर तक किये मेरे पंतय तक…. क्यूंकि ड्रेस छोटे थे बैठने से ड्रेस और भी ऊपर हो जाते थे तो मेरी जांघें ज़्यादा नज़र आते तो उन् लोगों को बहोत ख़ुशी होती और सब बहोत उत्तेजित होते थे…. वो दोनों ने सब बात बाकी के दोस्तों को बता दिए के उन् लोगों ने मेरे जाघों को छुआ और पंतय भी…. तो बाकी के सब वही करना चाहते थे…. पता नहीं मैं क्यों उन् लोगों को रोकती नहीं थी शायद मुझे अच्छा लगता था जब वह लोग वैसा करते थे….

एक एक करके सब बस में गए मेरे साथ किसी दिन को एक, दूसे दिन को एक उसरा और तीसरे दिन को एक तीसरा… आपस में सब मेरे पीछे बात करते थे क ीक नाह एक दिन यह लोग मुझसे सेक्स करेंगे…. मैं तो पापा से करती थी तो मुझे सब पता था के यह लोग किआ चाहते हैं मुझसे…

मगर अस्सल बात तब शुरू हुई जब एक दिन पापा मुझे पहाड़ों पर घुमाने को लगाए थे. वो एक संडे का दिन था, और वहां पहुँचने पर बारिश होने लगे थे. हम दोनों बिल्कुल भीग गए थे. मैं एक छोटी स्कर्ट और ब्लाउज में थी. भीगने की वजह से मेरा ब्लाउज चिपक गए थे मेरे छाती पर और ब्रा और बूब्स दिखने लगे थे, तो पापा को करने का मैं किया… उसी जगह जहाँ पहले बार आप ने मुझे कार में किश किया था और एक बूढ़ा आदमी लड़की काट के वापस आरहे थे वही पापा मुझे बाहों में भरके किश कर रहे थे, मेरे स्कर्ट को ऊपर उठा के पंतय को निचे करके अपने लिंग को मेरे योनि के ऊपर रगड़ने लगे थे, मैं उस्सको बाहों में भरे किश कर रही थी और वो कमर हिलाते हुए रागढ रहे थे के रघु ने सब देख लिया. वो काफी देर से एक पेयर के निचे छुपा हुआ था बारिश से बचने के लिए और खड़ा होकर हम दोनों को कुछ देर से देख रहा था……

तो बे कॉन्टिनोएड………(3000 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
आप की इस प्यारे कमेंट और ओपिनियन के लिए बहोत धन्यवाद डिअर.

आप को एक बात बताऊँ? इस कहानी की टाइटल मैं संजना रखने वाला था... मैं करैक्टर इस में संजना की थी,

और मैं ने hi दोनों चरक्टेर्स को क्रिएट किया दोनों संजना और सान्वी को मैं ने बनाया, मगर सान्वी की भूमिका को इस लिए ऐसा बनाया क्यूंकि वो एक हाउसवाइफ है, घरेलु औरत है हालां के आमिर घर की है मगर घर के अंदर रहने वाली औरत इस से बेहतर तो सोच नहीं पाया दिखने को... अब बहुत सारे लोगों को उस की करैक्टर ज़्यादा पसंद आरहे हैं जैसे आप को.

आप से मैं एक सवाल पूछना चाहता हूँ, मुझे आप ये बताइये के किआ आप ने सभी उपदटेस को शुरू से पढ़े हैं या सिर्फ इंडेक्स से सान्वी वाले उपदटेस पर क्लिक करके पढ़े हैं आप ने?

यह मैं इस लिए पूछ रहा हूँ क्यूंकि आप ने शायद ये तीसरी बार कहा के सान्वी चावला साहब का कितना ख़याल रखती है ेट्स और आप के ख्याल से चावला साहब के तरफ से उनके लिए प्यार नहीं है... और आप को यह भी लगा के सान्वी बहोत जल्दी मान गयी उंनसे हमबिस्तर होने के लिए इसी लिए मुझे लगता है आप सभी उपदटेस को ठीक से नहीं पढ़ते ho....ek पूरी अपडेट लिखे है मैं ने जो सिर्फ इन् दोनों के बारे में है..... 5 सैलून से प्यार हैं इन् दोनों में और आप कह रहे हो के बहुत जल्दी हो गया और इन् के प्यार को ज़्यादा नहीं dikhaya..rahi बात चावला साहब के प्यार की सान्वी के तरफ और उसस्के केयर की तो आप भूल गए जीन दिनों दीप्ति पैदा हुई थी तो कौन ख़याल रखता था सान्वी का? सिर्फ चावला साहब, उसस्के पति सान्वी का उतना ख़याल नहीं रखते थे जितना चावला sahab...pichle 5 सालों से इन् दोनों के बीच गहरा रिश्ता होता चला आया भाई और आप को ऐसा नहीं लगता?? ...

मुझे तो लगता है के आप नहीं पढ़ रहे हो कहानी को सही तरीके से!!

फ़िक्र ना करें आप सान्वी संजना तो नहीं बनेगी मगर जो मैं ने सोचा के कहानी के लिए वो सब तो होकर रहेगा भाई चेंज तो नहीं कर सकता किसी की करैक्टर या रोले को जो होना है वो तो होगा hi इस कहानी में

आप की तवज्जो के लिए बहोत धन्यवाद.

ऐसे hi साथ बने रेहयेगा

थैंक्स वैरी मच.
 
बहोत शुक्रिया भाई. ख़ुशी है के आप ने शुरू से सब उपदटेस पढ़े हैं.

हाँ उस रात को सान्वी जल्दी से ओपन हो गयी इस के बारे में मुझे आप से यह कहना है के हालात को मद्दे नज़र रखते हुए वैसा hi होना चाहिए था, एक कशिश थी दोनों तरफ से एक आग लगी हुई थी, कितने मुश्किलों से अपनी तड़प को बर्दाष्त किया था सान्वी ने चावला साहब से दूर रहकर, चावला साहब रूठा हुआ था उस से कितने दिनों तक, उस्का रहतना, सान्वी का मानना कई दिनों तक, सान्वी ने उनके छाती पर संजना की की हुई लोवेबिट्स देख चुकी थी, मन hi मैं वो दुखी थी, तड़प रही थी, ऊपर से चावला साहब उस से बात नहीं कर रहे थे पिछले 4/5 दिनों से, सान्वी की मानसिक संतुलन बिगड़ गयी थी के घुसे में उस्सने आग लगा दिया था घर में, अब उस दौरान भी थपड खायी थी चावला साहब से फिर डर गयी थी उस आग से.... और उसी वक़्त जब थपड खाने के बाद रो रही थी उनके बाहों में तभी किश किये थे दोनों ने पहले बार 5 सालों में यह पहला किश tha....jism में आग भड़क गए थे और उसी रात को सम्भोग करना लाज़मी हो गया था.... वो उस प्यास को बुझाने का इंतज़ार नहीं कर पायी थी इसी लिए उसी रात को चावला साहब से हमबिस्तर हुई... वैसे वो तो नहीं गयी थी नाह चावला साहब के कमरे में अपने आप? वो तो बुसस निकल रही थी ठंडी हवा खाने के लिए दिल ो दिमाग़ में चावला साहब hi बसे थे उस वक़्त सान्वी के दिल में और देखा के साहब वहीँ बैठे थे किचन में तो दौड़ कर उनके बाहों में चली गयी... अब दोनों तरफ से आग लगी हुई थी बदन में और रात की उस तन्हाई में दोनों फिर मिले तो किआ होगा भाई? वह तो होना बिल्कुल लाज़मी tha...iss में सान्वी ज़्यादा ओपन बिल्कुल नहीं हुई बहोत जड़ो जहद के बाद एक हुए थे दोनों उस रात को........... रही बात चावला साहब ने जो गली दिए थे सान्वी को अरे वो तो नशे के हालत में दिए थे दिल से नहीं नाह? ग़ुस्से में आदमी गाली देताहै, बुरा भला कहता है मगर उस्सको मैं नहीं करता वो ऊपर ऊपर होता है... दिल से कभी बूटा नहीं चाहा है कभी भी चावला साहब ने सान्वी के लिए....

और इस में बुरा मानने की कोई बात नहीं है भाई आप का हक़ है मुझसे कुछ भी कहना और पूछना कहानी के बारे में

बल्कि मैं आप का शुक्र गुज़र हूँ के आप ने इस कहानी को इतना पसंद किया ख़ास कर सान्वी की करैक्टर को.....

मैं पूरा कोशिश करूँगा इस करैक्टर को दायरे में hi रखने की मगर फिर कह देता हूँ जो होना है वो तो होगा hi.....

भाई आप की आखरी गुज़ारिश जो है के कभी मैं एक ऐसी कहानी लिखूं जिस में संवी जैसे करैक्टर पर पूरी स्टोरी हो, अच्छा okay कभी बाद में तरय करूँगा...... सोचना पड़ेगा इस बारे में हाँ मुमकिन है कर सकता हूँ... बुसस थोड़े दिन वेट करना होगा ok बही?

थैंक्स वैरी मच भाई आप मि दिलचस्पी के लिए.
 
और एक नई रजिस्टर्ड इस कहानी पर, आप का स्वागत है मेरे थ्रेड पर,

मुझे बहोत ख़ुशी हुई के आप ऑफलाइन से ऑनलाइन आये यहाँ कमेंट करने को, सच में बेहद खुश हुआ मैं आप के इस कमेंट को देख कर आप का पहला कमेंट इस थ्रेड पर मेरे लिए एक ट्रॉफी के जैसा है.

आप लड़की हो यह जान कर और भी ख़ुशी हुई, बहोत सारे लेडीज मेरे ष्प वाले थ्रेड पर कमेंट करते थे मगर बहोत ज़्यादा मुझको पं करते थे और ईमेल से कमेंट करते थे क्यूंकि इरोटिक कहानियों पर उन् को आना अच्छा नहीं लगता था आप की बोल्डनेस की डाट देता हूँ माय डिअर.

थैंक यू वैरी वैरी मच एंड बे थे मोस्ट वेलकॉमेड. :लव:
 
वैरी सॉरी. आप नयी हो तो शायद आप को नहीं पता मैं वीकेंड्स में उपदटेस नहीं दे पाटा हूँ. आप ने अपनी पहले पोस्ट में कहा था क आप ऑफलाइन से मेरे सभी उपदटेस पोस्ट्स ेट्स को पढ़ रही हो, तो किआ कभी नहीं ग़ौर किया कितने बार मैं ने वीकेंड में सॉरी कहा है रीडर्स को? 84 उपदटेस लिखे हैं मैं ने कितने दिनों में? ये नहीं देखा आप ने?

सॉरी अगेन आज शाम तक उपदटेस आजायेंगे.

थैंक्स.
 
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