Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 16 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 144 आनंद कॉन्टिनुएस विथ हिज टेल

आनंद ने देखते हुए कहा,

“अरे वह बेटी के दिल में अब बाप का प्यार उभरने लगा वाओ!! छुड़वाने के बाद बाप का प्यार जागने लगा? और तेरा किआ हाल है चावला? तेरा खड़ा तो नहीं हो रहा उस तरह से संजना को अपने जिस्म से सत्ता कर? हैं हाहाहाहाहा!!...... अब आगे के बातों को सुनों तुम दोनों……..

अब आगे……

आनंद ने संजना को गुरर्ते हुए कहा;

“तुझे कुछ हो रहा है या नहीं चावला मुझे तो इससे छोड़ने का बड़ा मैं करने लगा अभी अभी…. साला किआ तुझे पता है के मैं इस्सकी माँ को छोड़ hi नहीं पाया था उन दिनों जब वो प्रेग्नेंट थी? नाह! कुछ नहीं कर पाया साला डॉक्टर ने मन किया हुआ था नाह! डर का के मेरे लुंड का नस पहात जाए और ज़िन्दगी भर के लिए कुछ नाह कर पाउँगा, इस लिए मुझे कण्ट्रोल करना पड़ा था उन् दिनों, हालां के उससे छोड़ने को बड़ा मैं कर रहा था…. सिर्फ 6 महीने बाकी थे मेरे ऑपरेशन के बाद उस के साथ सेक्स करने की और 6 महीने बाद संजना जन्मी और वो मर्डर गयी…. नहीं छोड़ पाया मैं उससे, बिल्कुल भी नहीं छोड़ा उस्सको तेरे छोड़ने के बाद रे!! ….. जब मुझे पता चला के कितने दिनों से मेरे पीठ पीछे तू उस्सको छोड़ने अत था तब तुझे पता है मेरा लुंड खड़ा हो गया था तुझको उसस्के साथ बिस्तर पर सोचकर, मुझे उस्सको तेरे साथ देखने का मैं करने लगा था, मेरे लुंड को खड़ा होना मन था उस वक़्त, मैं डर गया, कहीं मेरा नस नाह पहात jaaye…aur तेरी वजह से मेरा लुंड ाबाहिज हो सकता tha…mahinon तक मेरा लुंड खड़ा होता रहा तुझे इस्सकी माँ के साथ सोच सोच कर…. साला डॉक्टर ने पोर्नहरफिक मूवीज देखने से मन किया था ताके लुंड खड़ा नाह हॉवे, मैं में सेक्स का ख्याल लाने के लिए स्ट्रिक्टली मन किया था डॉक्टर लोगों ने क्यूंकि बिल्कुल प्रेशर नहीं होना चाहिए था लुंड के नसों पर…., मगर तुम ने वो कारनामा किया सावित्री के साथ साथ के मेरा लुंड खड़ा होने लगा था, तेरी वजह से मुझे या मेरे लुंड को कुछ हो सकता था पता है तुझे?! मगर साथ साथ एहसान भी किया था तुमने, के मुझे पता तो चला के मैं फिर से खड़ा हो सकता हूँ उसी वक़्त…. संजना की माँ किआ औरत थी नाह रे चावला? उस्सकी बॉडी 100% संजना जैसे थी नाह? किआ तुमने नोट किया है कभी के संजना की जांघ और गांड पर एक्साक्ट्ली उसी जगह पर कला टिल है जहाँ सावित्री की थी? हम्म? कभी ख्याल किया है तुमने? मैं तो जब संजना बेबी थी उस्सको नहलाता था तभी देख लिया tha…Savitri ने अपना ट्रेड मार्क चोरर दिया था अपने शरीर के टुकड़े पर…. क्यों स्वीटहार्ट सही कह रहा हूँ नाह डार्लिंग, दिखा तो ज़रा वो जांघ पर तेरा कला टिल, दिखा, दिखा नाह पापा को!!....”

और आनंद ने संजना को बाँहों में भर्र के किश किया और उस्सकी ड्रेस को ऊपर करना चाहा मगर संजना ने उस्सको पुश किया और वापस चावला साहब के गॉड में जा बैठी. और चावला ने संजना को अपने बाहों में भरते हुए उस्सकी पेशानी को चूमा और खामोश किया. तब संजना ने आनंद से पूछा,

“मगर जीन दिनों चावला जी हमारे यहाँ आये थे पहली बार तब तो आप को नहीं पता था के वो यहाँ आने वाले हैं?? और फिर……??”

संजना ने इतना hi कहा था के बीच में आनंद ने शैतानी हंसी हँस्ते हुए कहा;

“हाहाहाहाहा तुम किआ समझती हो के तेरा पापा यहाँ खुद आया था? अरे नहीं वो सब मेरा प्लान किया हुआ था उस्सको यहाँ तक लाने को और तुझसे मिलने के liye…sab मेरा बनाया हुआ प्लान था…. मेरा प्लान काम कर गया और वो तुम से मिल गया…. जानना चाहती हो वो सब कैसे हुआ था? हम्म तो सुनों! चावला जी तुमको सुजय याद है? वही तेरा एक्स सेक्रेटरी? हैं? याद आया? हाहाहाहा!! उस्सको मैं ने भेजा था तेरे यहाँ नौकरी करने के लिए और तेरे सभी इनफार्मेशन मुझ तक पहुंचाने के लिए. सुजय हमारे कंपनी में मुलाज़िम थी, वही सेक्रेटरी का hi काम करती थी जब मैं ने तेरी कंपनी में सेक्रेटरी के लिए अर्ज़ी पढ़ा. तब मैं ने उस्सको तेरे यहाँ अप्लाई करने को कहा ज़्यादा पैसे की लालच देकर…. उस्सको मेरा एक प्यादा बनाया मैं ने… और तुमने आरव के लिए लड़की तलाशना शुरू किया जो तुमने सुजय को बता दिया और उस्सने मुझे बताया, तब मैं समझ गया के तुमको यहाँ तक लाना होगा ताके तू संजना को देखे क्यों के मुझे पक्का यकीन था के इस्को देखते hi तू इस्को आरव के लिए चोसे करेगा क्यूंकि तुझको इस में सावित्री की चाबी दिखेगा और तू खुद इस्को पाना चाहेगा….. तेरे राग राग से वाकिफ जो था मैं हाहाहाहा और बिल्कुल वही हुआ….. हाँ मैं ने सुजय को सिर्फ तुम्हें हमारे शहर तक लाने को कहा था क्यूंकि मुझे पक्का यकीन था के अगर तू इस शहर तक आया तो अपना फार्महाउस तक तो कैसे भी करके आएगा, और संजना को ज़रूर देखेगा इस्सके ज़िम्मा मेरा था…. और तू इधर आया और बाकी मैं ने चाल चली संजना को तेरे सामने भेज कर…. क्यों संजू डार्लिंग प्लान एहि था नाह के तू इस से मिले, इस्को पहचाने और बाकी जो हुआ सब सही हुआ…..! वो सब मेरा मुकरना इस्सकी शादी से शुरू में इंकार करना वग़ैरा सब मेरा नाटक था ताके तू इस्को किसी भी कीमत पर अपनाये…. हाँ मैं ने जान बुझ कर छूठ दे रखा था संजना को तेरे साथ, तू इस्को छोड़ने लगेगा आरव से पहले यह नहीं सोचा था मैं ne…mujhe पता था के खून की फुंकार एक दूसरे को अपने तरफ ज़रूर खींचेगा, मुझे पक्का यहकीन था के तुम दोनों एक दूसरे के तरफ एक चुम्बक की तरह चिपकोगे, इस्सके मुझे पूरा यकीन था क्यूंकि मैं ने पढ़ा हुआ था इस बारे में…. इस्को इंग्लिश में ग्स कहते हैं, मतलब जेनेटिक सेक्सुअल अट्रैक्शन. तबू है….. बहोत सारे ऐसे रिलेशनशिप हैं दुन्या में जहाँ भाई बेहेन बचपन से बिछड़े हुए होते हैं और जब जवानी में मिलते हैं एक दूसरे से तो सेक्सुअली अत्त्रक्ट होते हैं एक दूसरे से और सेक्स कर बैठते hein…maa और बेटे के साथ और बाप और बेटियों के साथ भी ऐसा बहोत हुआ है, गूगल पर सर्च करके देख लेना हज़ारों की तादात में ऐसे केसेस भरे हुए हैं दुन्या भर में.. मैं ने एक बाप बेटी की कहानी पढ़ी जो रियल हैं. दोनों ने अपने देश में एक साथ जीने की, शादी करने की और बचे पैदा करने की अर्ज़ी दिए हुए हैं कोर्ट में में क्यूंकि इन्सेस्ट रिलेशनशिप मन है उस देश में…. तो उस देश को चोरर कर वह दोनों उस देश में गए जहाँ इन्सेस्ट पर कोई रुकावट नहीं है…. वहां ग्स एंटर होता है और कोर्ट उन् दोनों को साथ रहने की मंज़ूरी देती है…. दोनों बात बेटी चुदाई करते हैं….. बचपन में दोनों बिचार गए थे, माँ, बेटी को लेकर कहीं और जीने चली गयी थी, और बाप किसी और के साथ कहीं और रहने लगा था. मगर 20 साल बाद बाप बेटी मिले और एक दूसरे के तरफ आकर्षित हुए और चुदाई शुरू हो गयी दोनों के बीच और बिचारणा मुश्किल हो gaya…donon एक दूसरे को इतना पसंद करते थे के एक दूसरे के बिना जीना ना मुमकिन हो गया tha…aaj दोनों एक साथ रहते हैं दोनों के बचे भी हैं एक या दो नहीं 5 बचे हैं बाप बेटी के!!! हाहाहाहा!!! यह सब पढ़ कर मुझे यकीन हो गया के जब तू संजना से मिलेगा तो वो खून की फुंकार ग्स तुम दोनों को एक दूसरे के तरफ खींचेगा और तुम दोनों ज़रूर मिलोगे….. मगर मैं ने सोचा था के शायद जब यह तेरी बहु बन जायेगी तब अपने घर में बाद में तू अपनी बहु को छोड़ना शुरू करेगा यह नहीं पता था के आरव से शादी करवाने से पहले खुद इस्को छोड़ने lagega…khoon की फुंकार बहोत जबरदस्त था के तुम दोनों से इंतज़ार hi नहीं हुआ और चुदाई शुरू कर दिए पहले hi तुम दोनों ने वूऊऊ!! बिल्कुल सही लिखा है साइकोलोजिस्ट वालों ने जिनको इस रिश्ते के बारे में बेहतर मालूमात हैं!

चावला साहब और संजना बिल्कुल खामोश सुन रहे थे आनंद को. दोनों के बोलती बिल्कुल बांध थे. शॉक में थे दोनों मगर सही बात यह थी के दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे चुम्बक की तरह और दोनों के दिल में एक दूसरे के लिए बहोत प्यार था, बल्कि अब प्यार बहोत ज़्यादा स्ट्रांग था और एक दूसरे से दूर होने का बिल्कुल मैं नहीं था…. संजना का तो मैं कर रहा था के चावला साहब के जिस्म के अंदर घुस कर कहीं छुप जाए, और वही फीलिंग उस वक़्त चावला साहब को हो रहा था के वो संजना को अपने दिल की गहराई में कहीं छुपा ले और आनंद के सामने नहीं आने दे…..

चावला साहब खड़ा हुआ, संजना को अपने सीने से लगाए हुए, संजना ने उस्का एक बाज़ू थमा हुआ था जिस वक़्त वो खड़ा हुआ और खुद अपने सर को उनके काँधे पर रखा हुआ था आनंद के तरफ देखते हुए, और चावला ने कहा, “आनंद अब तुझको जो उखाड़ना है तू उखाड़ ले, हम चलते हैं… एक पैसा नहीं मिलेगा तुझे बता देता हूँ और कभी भी मैं यहाँ नहीं आने वाला अब और नाह hi संजना को तेरे पास आने दूंगा…. और वैसे जो कुछ भी तुमने मुझे बताया इस्सके किआ सबूत है तेरे पास? तू कैसे साबित करेगा के संजना मेरी बेटी है? हो सकता है के जो कुछ तुमने अभी कहा सब झूट भी हो!! हो सकता है संजना खुद तेरी बेटी है मगर तू यह सब मेरे पैसे ऐठने के लिए कह रहा है….. मैं चलता हूँ और फिर कभी मिलने की कोशिश मत करना मुझसे या संजना से!”

आनंद उन् दोनों के बीच खड़ा होते हुए और रोकते हुए कहा,

“रुको साहब इतनी जल्दी भी किआ है, प्रूफ चाहिए आप को? अरे आज की दौर में सब कुछ सही मिल जाता है, आप अपना डीएनए टेस्ट करवा लो….. पैसे वाले हो झट से रिजल्ट मिल जाएगा के तेरा डीएनए और संजना की डीएनए एक है यह नहीं? रिजल्ट खुद कहेगा के तुम बाप बेटी हो….. है हिमत? तो डीएनए टेस्ट करवा के देखलो तब कहना के किस्को प्रूफ चाहिए मुझे या तुझे….”

चावला साहब आनंद को धक्का देते हुए घर से निकलने लगा संजना को अपने बाहों में भरे हुए पर आनंद बोलता गया उनके कार तक चलते हुए,

“अगर आप ने मुझको 10 करोड़ नहीं दिल वाया तो मैं आप की ऑफिस में आकर सबको बता दूंगा के संजना आप की खून है, आप की बेटी है, मैं आप के घर आकर आरव को भी बता दूंगा, विवान और आप के बहु को भी बता दूंगा…. सुना आप ने मुझे 10 करोड़ देदो मैं किसी को ज़िन्दगी भर कुछ नहीं बाटूंगा…. 8 दिन का वक़्त देता हूँ आप को मुझे 10 करोड़ देना hi पड़ेगा, आप को सोच लो, बेइज़त होना है सोसाइटी में या 10 करोड़ देकर आराम से और मज़े से जीना है संजना के साथ? अगर यह बात फेल गयी तो आप की खदान तीतर बितर हो जाएगी, आप पर लोग थूकेंगे, आप का बड़ा बीटा, आप की बड़ी बहु, आप की पोती सब आप से नफरत करने लगेंगे, संजना को भी धित्कारेंगे सब, आप दोनों सुसाइड करने की काबिल हो जाओगे सोच लो चावला साहब, संजना तुम्ही कुछ समझाओ अपने बाप को, केहदो दिमाग़ से काम लें…..”

आनंद चिल्लाता रहा मगर संजना और चावला कार में बैठ गए और चावला साहब ने कार स्टार्ट की और वहां से ड्राइव करते हुए निकल पड़े……..

चावला साहब ड्राइव कर रहे थे, बिल्कुल खामोश ख्यालों में डूबे और संजना ने अपना सर उनके गॉड में रख दिया और अपने बाहों को उनके कमर में कस लिया…. चावला साहब ने एक हाथ संजना के सर के बाल पर फर्र्ना शुरू किया, और कुछ दूर जाकर, एक सुनसान जगह पर ब्रेक लगाया…..

संजना उठी और उनको अपने बाहों में भर लिया, और अपने मुंह को संजना ने चावला साहब के मुंह में दिया और दोनों पागलों की तरह किश करने लगे जैसे पुअरना आशिक थे दोनों….. चावला साहब का हाथ संजना के जिस्म पर फरने लगे, लाड टपकने लगे थे दोनों के मुंह से, एक अजीब सी कशिश थी, एक प्यास जैसी थी दोनों के बीच, एक डर भी था, एक खौफ्फ़ जैसा भी फील हो रहा था, लगता था दोनों उस तरह से किश करते हुए उस डर और खौफ्फ़ को मिटाने की कोशिश में लगे हुए थे….. उस वक़्त सेक्स की भूक तो नहीं थी मगर दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म में घुलना चाहते थे किसी भी तरह, जल्द hi दोनों हांफने लगे और अचानक दोनों के ेंखों से ेंसुओं का धार बहना शुरू हुआ…… दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर ज़ोरों से रोने लगे, कसके पकड़े हुए थे दोनों एक दूसरे को और दो छोटे बच्चों की तरह ज़ोरों से फुट फुट कर रोने लगे…..

और कुछ देर बाद अपने ेंखों को पोंछते हुए संजन ा ने कहा,

“पापा किल तहत बास्टर्ड!! किल हिम नाउ!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2220 वर्ड्स)
 
अपडेट 145 संजना ास्क्स अबाउट हेर मदर

चावला साहब का हाथ संजना के जिस्म पर फरने लगे, लाड टपकने लगे थे दोनों के मुंह से, एक अजीब सी कशिश थी, एक प्यास जैसी थी दोनों के बीच, एक डर भी था, एक खूफ जैसा भी फील हो रहा था, लगता था दोनों उस तरह से किश करते हुए उस डर और खूफ को मिटाने की कोशिश में लगे हुए थे….. उस वक़्त सेक्स की भूक तो नहीं थी मगर दोनों के जिस्म एक दूसरे के जिस्म में घुलना चाहते थे किसी भी तरह, जल्द hi दोनों हांफने लगे और अचानक दोनों के ेंखों से ेंसुओं का धार बहना शुरू हुआ…… दोनों एक दूसरे को बाहों में भर कर ज़ोरों से रोने लगे, कसके पकड़े हुए थे दोनों एक दूसरे को और दो छोटे बच्चों की तरह ज़ोरों से फुट फुट कर रोने लगे…..

और कुछ देर बाद अपने ेंखों को पोंछते हुए संजन ा ने कहा,

“पापा किल तहत बास्टर्ड!! किल हिम नाउ!”

अब आगे…….

जब संजना ने वो बात कही तो चावला साहब हैरान संजना के चेहरे में देखते हुए सोचा के संजना ग़ुस्से में हैं आनंद के व्योहार को लेकर इसी लिए उस्सने ऐसा कहा और उस्सको और भी ज़ोर से बाहों में कसके कहा,

“No स्वीटहार्ट, ऐसा नहीं कहते. उस्सने तुमको पाल पास कर बड़ा किया है. उस्सने दूसरी शादी नहीं की. उस्सने तुम्हारा ख्याल रखा, कैसे भी हो पालने वाला जनम देने वाला से बड़ा होता है, याद rakhna…abhi उस्सको पैसों की ज़रुरत है इसी लिए वो भाउक्ला गया है, मेरे ख्याल से वो पछतायेगा और माफ़ी मांगेगा…. कुछ दिनों उस्सको उस्सकी हालत पर चोरर देते हैं तब सोचेंगे किआ करना है, कैसे इस मामले को निपटना है….. तुम ज़्यादा मत सोचो इस बारे में अभी!”

संजना: “no आप उस्सको नहीं जानते, मैं उस्सको बहोत अछि तरह से पहचानती हूँ आखिर मेरा बाप था नाह वो? उसस्के राग राग से वाकिफ हूँ मैं. वो बहोत लालची है और कुछ भी कर सकता है….. वो सच में आप के ऑफिस या घर आकर सबको सब कुछ बता सकता है वो है वैसा आप मेरा यकीन करो!”

चावला साहब कुछ ख्यालों में फिर गम हो गए थे संजना को वैसे hi बाहों में भरे हुए और संजना ने उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा,

“अब किआ हुआ? किश सोच में डूबे हुए हो आप?!”

चावला साहब के ेंखों से बहते हुए ेंसुओं को देख कर संजना ने उससे पोंछते हुए फिर से सवाल किया तो चावला साहब संजना के गाल को चूमते हुए सिसकते आवाज़ में कहा,

“तुम मेरी बेटी हो और किआ किआ किया मैं ने तुम्हारे साथ, धित्कार है मुझ पर!”

संजना ने बड़े आराम से कहा,

“ोफो पापा तो किआ हुआ? हम अपने रिश्ते को वैसा hi रखेंगे…. हम दोनों के बीच कोई चेंज नहीं होने वाला, ी लव यू. ी रियली लव यू…. अब पापा बुला रही हूँ आप को, फिर भी मेरे अंग अंग आप को चाहता है मैं चाहती हूँ के हम दोनों के बीच सब कुछ वैसा hi बना रहे जैसे पहले था……. आप क्यों उल्टा सोचने लगे अब? मुझे कोई फरक नहीं पड़ता रिश्ता पहचान कर, आप प्लीज अब मुझसे कहीं दूर मत होना मैं सेहेन नहीं कर पाऊँगी…….”

चावला साहब हैरानी से संजना के चेहरे में घूर्णे लगे और संजना ने कहा, “चलो हम उस पार्क में चलते हैं जहाँ आप गए थे उस बार जब मैं ड्राइविंग सीखने गयी थी…. वहां आराम से खुली हवा में बात karenge…chaliye नाह पापा!!”

और चावला साहब ने फिर कार स्टार्ट किया और दोनों उस पार्क में पहुंचे और एक बेंच पर बैठकर एक दूसरे को बाहों में लिए, संजना ने चावला साहब के गालों पर हलके से हाथ फरते हुए कहा,

“देखिये, मैं इतने दिनों से उस्सको अपने पापा समझ कर अपने साथ सेक्स करने दे रही थी है नाह? तो मतलब मैं अपने पापा के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखती थी okay? तो बिल्कुल वैसे hi आप के साथ वही रिलेशनशिप क्यों नहीं रख सकती? आईटी इस थे शामे नाह? आप मेरे ससुर भी हो और पापा भी तवो इन ओने हीहीहीहीहीही!!”

चावला साहब ने संजना को अपने सीने पर दबाते हुए सोचा के संजना कितनी स्ट्रांग है के ऐसे मुश्किल हालात में भी वो कितनी आसानी से यह बातें कह गयी….

अस्सल में बात यह थी के संजना का प्यार इतना स्ट्रांग था चावला साहब के लिए के वो उस प्यार को खोना नहीं चाहती थी, चाहे ग़लत हो मगर उसस्के लिए चावला साहब के करीब रहना, उसस्के आग़ोश में रहना, उस से प्यार करना और उंनका प्यार पाना बहोत ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट था, तो संजना इस लिए उस रिश्ते को वैसा hi कायम रखना चाहती थी हमेशा के लिए. वो नहीं चाहती थी के अब बाप बेटी बन कर सिर्फ बाप बेटी की तरह रहे, वो चाहती थी के शारीरिक सम्बन्ध वैसे hi बरकरार रहे जैसे शुरू से थी दोनों में… क्यूंकि उन् दोनों में शुरुवात तो आकर्षित होने से hi हुआ था, दोनों एक दूसरे के तरफ सेक्सुअली hi अत्त्रक्ट हुए थे, और संजना की जिस्म को यह मंज़ूर नहीं था के वो चावला साहब के जिस्म से अलग रहे….. क्यूंकि शुरुवात हो चुकी थी अब उस्सको रोकना नामुमकिन था संजना के लिए…… फिर संजना ने कहा,

“अभी अभी हम दोनों ने कार में कितने पशनातेली किश किया नाह? हम्म किया के नहीं? तो वो किआ था? सब कुछ जान्ने के बावजूद हम ने क्यों और कैसे एक दूसरे को उस तरह से इतना पशनातेली किश किया? हालां के हमको पता चल गया के हम बाप बेटी हैं फिर भी हम ने एक दूसरे को क्यों वैसे किश किया मुंह में जीब चूस्ते हुए? यह हम दोनों की बॉडी की मांग थी नाह पापा? हम अब इस्को रोक नहीं सकते हैं…. यह अपने आप होता रहेगा, वे फील अत्त्रक्टेड तो एच इतर, आवर बॉडी नीड तो गेट मेल्टेड ईंटो एच इतर इतस आवर नीड, हमारी ज़रुरत बन चुकी है यह….. मैं तो नहीं रोक पाऊँगी खुद को, किआ आप रह पाओगे मुझसे सेक्स किये बिना?”

इतना कहा और दोनों फिर एक दूसरे को पशनातेली किश करने लगे एक दूसरे को ज़ोर से बाहों में भर कर…. तो साबित हो गया के यह दोनों तो जुड़ा नहीं हो सकते हालां के दोनों को पता चल गया के दोनों बाप बेटी हैं!

किश के दौरान चावला साहब का हाथ संजना के बूब्स को प्रेस किया तो संजना ने उनके हाथ को अपने बूब पर दबाते हुए किश रोकते हुए कहा, “हम्म्म देखा नाह? आप को भी चाहिए नाह पापा? आप का हाथ मेरे बूब पर क्यों गए अपने आप? बाप कभी बेटी की बूब दबाता है किआ? हीहीहीही!!! यह हम नहीं रोक सकते अब पापा, इस्को ऐसे hi चालू रखेंगे हम okay?!!” चावला साहब मुस्कुराया और कहा, “तुम बहोत स्ट्रांग हो के ऐसे हालत में भी सब कुछ इतना ैसिलय ले लेते हो, ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू! हालात का ऐसे hi सामना करते हैं डार्लिंग, ी ऍम रियली प्राउड ऑफ़ यू माय लव.”

और संजना ने अपने सर को उनके सीने पर रख कर आराम से पूछा, तो किआ आप डीएनए टेस्ट करवाओगे?” तो चावला साहब ने मुस्कुराते हुए कहा, “उस्सकी ज़रुरत नहीं क्यूंकि वो सच कह रहा था…” तो संजना ने उनके सीने पर अपने उँगलियों को फरते हुए पूछा,

“आप मम्मी से प्यार करते थे? अब मुझे आप के और उन् के बारे में बताओ…. वो भी बहोत हॉट और सेक्सी थी नाह? वो आप से बहोत एन्जॉय करती होगी नाह? मेरी तरह? मैं उसी पर गयी हूँ किआ सच में? वो कह रहा था कुछ देर pehle…ab आप बताओ अपना वर्शन मुझे प्लीज, ी वांट तो हेअर!”

चावला साहब ऊपर आसमान को देखते हुए, थोड़ा मुस्कुराते हुए बीते दिनों को याद करते हुए कहा,

“हम्म्म प्यार हो गया था तेरी मम्मी से उन् दिनों…. बेबी मैं वैसा बिल्कुल नहीं था, मेरा बहोत इज़त था गाओं में, मैं किसी के तरफ देखता भी नहीं था, लोग मेरा इज़त करते थे, हमारा बड़ा नाम था, मेरे दादा पर दादा के ज़माने से हम ज़मींदार थे और सेंकरों लोगों के घर चलता था हमारे यहाँ काम करके….. तेरी मम्मी सच में बेहद खूबसूरत और अच्छी थी…. उन् दिनों तेरे पापा, मतलब आनंद का एक ऑपरेशन होने वाला था और वो अपने फुफु के यहाँ गया हुआ था किसी दूर के शहर में क्यूंकि इस शहर में तब हॉस्पिटल नहीं था, वो दूर के शहर गया हुआ था कोई 3 या 4 महीनों के लिए. वहीँ से ट्रीटमेंट करता था और हॉस्पिटल में एडमिट हुआ था. तब वह लोग हमारे गाओं में एक छोटी सी झौंपड़ी जैसे मकान में रहते थे. जब आनंद की शादी हुई थी तभी मैं ने कहा था के उस्सकी पत्नी इतनी खूबसूरत है के लगता था कोमल के फूल कीचड़ में आ गयी है, तेरा पापा उसस्के लायक बिल्कुल भी नहीं था, पता नहीं किश ने उन् दोनों की बात चलाई थी के आनंद को वो मिल गयी थी….”

संजना बहोत ध्यान से सुन रही थी और पूछा, “तो किआ आप तभी से मम्मी को चाहने लगे थे जब वो शादी करके आयी थी आप के गाओं में?”

चावला साहब ने रिप्लाई किया, “अरे नहीं बिल्कुल भी नहीं – वो तो हर किसी के जुबां पर एहि बात थी के इस लंगूर के हाथ कैसे चाँद का टुकड़ा लग गया….. बात तो तब शुरू हुई जब आनंद ने उस्सको अकेला चोर्रा और अपने फुफु के शहर चला गया उस ऑपरेशन के लिए…. तो मुझे उस्का तनख्वा देने जाना पड़ा तेरी मम्मी को नाह! तब हमारी पहली मुलाक़ात हुई और बात चित…. गाओं के औरतें उन् दिनों गाओं के ट्रेडिशनल ड्रेस पेहेनते थे जो केवल एक टॉप और एक स्कर्ट जैसा होता था और उस में तेरी मम्मी इतनी खूबसूरत दिखती थी के किआ बताऊँ मैं तुमको….. वो बहोत hi गोरी थी, उस्सकी कमर का रंग और टांगों और जाँघों के रंग सीधे मेरे ेंखों में समा गए जिस वक़्त मैं ने उस्सको अपने आँगन में देखा उस रोज़…. अब क्यूंकि आनंद गाओं में नहीं था और वो अकेली थी तो कुछ जवान मर्द उसस्के घर के इर्द गिर्द घुमा करते थे मौके के तलाश में थे उस्सको पाने के liye….wo भी जवान अकेली औरत थी और इतनी हॉट थी के कोई भी उसस्के तरफ आकर्षित हो जाता tha….mujhko बाद में पता चला के कुछ लोग और उसस्के पीछे लगे हुए थे उन् दिनों मगर जब मेरा आना जाना हुआ वहां तो सब ग़ायब हो गए….”

संजना की इंटरेस्ट और ज़्यादा बढ़ने लगी अपनी मम्मी के बारे में सुनकर और दिलचस्पी से कहा चावला साहब के चेहरे को चूमते हुए, “हीहीहीहीही, आप मुझे मम्मी से अपनी पहली रोमांटिक एनकाउंटर बताओ नाह, आप कैसे उसस्के करीब गए, उस्सने कैसे आप को करीब आने दिया सब कुछ डिटेल में बताओ नाह मुझे प्लीज, किआ वो भी आप से मेरी तरह प्यार करने लगी थी? किआ वो हिचकिचाई थी या आसानी से आप के बाहों में आगयी थी, सब बताओ नाह मुझे ी वांट तो क्नोव आल इन डिटेल्स….. आप दोनों ने खूब मज़े लुटे होंगे नाह?”

तो बे कॉन्टिनोएड…….
 
अपडेट 146 संजना वरीड एंड स्ट्रेस्ड

संजना की इंटरेस्ट और ज़्यादा बढ़ने लगी अपनी मम्मी के बारे में सुनकर और दिलचस्पी से कहा चावला साहब के चेहरे को चूमते हुए, “हीहीहीहीही, आप मुझे मम्मी से अपनी पहली रोमांटिक एनकाउंटर बताओ नाह, आप कैसे उसस्के करीब गए, उस्सने कैसे आप को करीब आने दिया सब कुछ डिटेल में बताओ नाह मुझे प्लीज, किआ वो भी आप से मेरी तरह प्यार करने लगी थी? किआ वो हिचकिचाई थी या आसानी से आप के बाहों में आगयी थी, सब बताओ नाह मुझे ी वांट तो क्नोव आल इन डिटेल्स….. आप दोनों ने खूब मज़े लुटे होंगे नाह?”

अब आगे…..

चावला साहब ने संजना को अपने और उस्सकी माँ के बारे में सब कुछ बताया के किश तरह से वो उसस्के करीब हुए थे और कैसे सेक्स हुआ दोनों के बीच और कितने महीनों तक दोनों सेक्सुअल रिलेशनशिप में बंधे रहे.

फिर चावला साहब ने समझाया के क्यूंकि उन्ही दिनों को वो ज़मीन बेचने और शहर में नए ज़मीन और घर बनाने में लग गए थे तो धीरे धीरे उस्सकी माँ से दूर होता गया और तब तक आनंद वापस भी आगया था दूसरे शहर से तो चावला साहब ने सावित्री से मिलना बांध कर दिया. और हाँ वो फार्महाउस उस्सने सावित्री के लिए hi दिया था आनंद को. चावला साहब नहीं चाहते थे के सावित्री वैसे झौंपड़े में रहे इसी लिए अपने फार्महाउस को आनंद के नाम कर दिया था ताके सावित्री को अच्छा घर मिले रहने के लिए……

संजना सब कुछ आराम से सुन रही थी के उस्सकी मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज आनंद ने भेजा था और उस में लिखा था, “तेरी माँ बहोत सारे आदमियों के साथ छुड़वाई थी उन् में से वो रघु भी है… यकीन नहीं तो पूछ लेना रघु से और रघु के दोस्त भी हैं साथ में…… रंडी थी तेरी माँ, चावला उस से दूर हुआ तो दूसरों के साथ ेश करने लगी थी, और चावला से मिलने से पहले भी कई से छुड़वाई थी समझ ले किसी थी, तू भी वैसा hi है बिल्कुल, बिल्कुल अपनी माँ पर hi गयी है तू, सब से चुदवाती फिरती है तू भी, रंडी की औलाद रंडी कहीं की!! अपने बाप से बोल के मुझे 10 करोड़ देदे वार्ना तेरा जीना मुश्किल कर दूंगा उस घर में याद रखना तू! आरव को पता चला के तू अपने बाप से भी चुदवाती है और मुझसे भी तो वो तुझे चोरर देगा, घर से बाहर निकल देगा, अगर मुझे पैसा नहीं मिला तो मैं आरव और विवान को सब कुछ बता दूंगा, सुना तुमने!”

चावला साहब ने पूछा, “किस्सका मैसेज है स्वीटहार्ट?! तो संजना मोबाइल को चावला साहब को देते हुए रोने लगी!”

चावला ने मैसेज पढ़ा और कहा, “यह तो कमीनेपन पर उतर आया है आनंद, साला इतना कमीना होगा मैं ने नहीं सोचा था पैसे के लिए इतना गिर्र सकता है आदमी? पागल हो गया है वो…”

संजना ने ेंसू पोंछते हुए कहा,

“मैं ने आप से कहा नाह के वो बहोत लालची है और मुझे अच्छी तरह से पता है के वो कितना कमीना है…. मैं उस्सको बहोत अछि तरह से जानती हूँ पापा, एक hi रास्ता है उस्सको मारना hi पड़ेगा नहीं तो वो सच में मेरा और आप का जीना मुश्किल कर देगा….. किल हिम पापा किल हिम!!”

चावला साहब: “ओह no तुम क्यों ऐसा सोच रही हो? इस बात को अपने दिमाग़ से nikaalo…zaroorat पड़ी तो मैं उस्सको 10 करोड़ दे दूंगा, खरीद लूंगा उस कंपनी को उसके लिए, तुम फ़िक्र मत करो वो ऐसा कुछ नहीं करेगा…. प्लीज टेक आईटी इजी नाह!”

और दोनों वहां से निकले और घर वापस पहुंचे. यह तय हुआ दोनों में के यह बात घर में किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए, नाह आरव को नाह सान्वी को. मगर संजना ने कहा के वो सान्वी के बहोत क्लोज हैं तो वो समझ जाएगी के कोई परेशानी है और हो सकता है के वो सान्वी से कह दें… मगर चावला साहब ने उस्सको सख्त मन किया यह बात बताने के लिए.

घर के अंदर दाखिल होते hi सान्वी ने डायरेक्ट पूछा, “किआ हुआ क्यों बुलाया था तेरे पापा ने दोनों को एक साथ? कोई मसला हुआ है किआ?” संजना मुड़कर वापस चावला साहब को देखते हुए कहा, “आप hi बतादो, मैं फ्रेश होने जा रही हूँ…..” तो चावला साहब ने कहा, “अरे कोई मसला नहीं वो आनंद के कंपनी में कुछ प्रॉब्लम चल रहे हैं कंपनी बंद होने वाला है इसी के बारे में बात करनी थी उससे…..”

संजना ऊपर चली गयी अपने कमरे में और चावला साहब काउच पर बैठ गए और सान्वी उनके पास बैठ कर उनके सर के बालों में अपनी उँगलियाँ फरते हुए कहा, “आप और संजना दोनों परेशां दिख रहे हैं इसी लिए पूछ रही हूँ मुझसे तो आप नहीं छुपाइये, अगर कोई बात है तो शेयर कीजिये मुझसे!” मगर संजना ऊपर अपने कमरे के दरवाज़े को थोड़ा सा खोल कर निचे दोनों के बातों को सुन रही थी….. उस्सको पता था के सान्वी से बात छुपाना मुश्किल है…..

चावला साहब ने सान्वी का हाथ थामते हुए कहा, “बड़ी थकान महसूस हो रही है ऐसे hi सर पर हाथ फेरती रहो नाह मेरी जान!” तो सान्वी रोमांटिक होते हुए उनके सीने से लग कर कहती है,

“हम्म्म अच्छा जी, अभी अभी अपनी संजना के साथ घूम कर आरहे हो, उसस्के साथ रोमांस नहीं किया किआ जो मेरे साथ करने का मूड बन गया हम्म? क्यों जी?!”

चावला साहब ने सान्वी को अपने गॉड में बिठाते हुए कहा, “ऐसी बात नहीं है डिअर, सच में थकान फील हो रहा है…..” और दोनों एक लम्बे किश में खो गए काउच पर बैठे हुए, और ऊपर से संजना ने झांक कर देखा और मुस्कुराते हुए वापस अपने कमरे में घुस गयी.

संजना बहोत परेशान थी आनंद के बातों और मैसेज को लेकर. वो खुद से बड़बड़ाने lagi….”kamaal है जिस ने भी मेरे मम्मी के साथ सेक्स किया उन्ही लोगों ने मेरे साथ भी सेक्स किया, पापा, दूसरा पापा, रघु और पता नहीं कौन कौन….. जिस जिस ने भी मम्मी के साथ सोया मेरे साथ भी soya….kia यह सब प्लांड था? किआ उस पापा ने जान बुझ कर बदला लिया था? किआ उस्सने जान बुझ कर मुझको रघु के साथ करवाया था और इस पापा से भी? अगर हाँ तब तो बहोत बड़ा शैतान है आनंद… मेरे ख्याल से तो उस्सको मारना hi चाहिए मगर साहब जी क्यों नहीं मारना चाहते उसे?!”

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उस रात को संजना आरव से दूर दूर रह रही थी. आरव के लाख पूछने पर संजना ने आरव को बुसस कहा के उसस्के सर में दर्द है….. और एक बार रात के कोई बारह बजे संजना अपनी कमरे से निकली और चावला साहब के कमरे में गयी. उस वक़्त विवान वापस नहीं आये थे ऑफिस से. सान्वी अपने कमरे में थी मगर सोई नहीं थी और उस्सको पता चला जब संजना चावला साहब के कमरे में गयी तो. सान्वी ने सोचा के दोनों एन्जॉय कर रहे होंगे इसी लिए संजना उनके पास गयी. मगर सान्वी सोचने लगी के आरव के घर में मौजूद होने की बावजूद संजना की इतनी हिम्मत थी के आरव को कमरे में चोरर कर चावला साहब के साथ सेक्स करने चली गयी….!!

चावला साहब के कमरे में संजना ने चावला साहब से कहा,

“पापा मैं आरव के साथ नहीं सो पा रही हूँ… उस में मुझे अब मेरा भाई नज़र ारः है….. ी can’t लेट हिम टच में, it’s ा वीयर्ड फीलिंग! अब मैं किआ करूँ?!”

चावला साहब ने लाख समझाया के जैसे उसस्के साथ रहती है वैसे hi आरव के साथ भी रहे, आनंद की बातों को भूल जाए और कोम्प्रोमाईज़ करने की कोशिश करें!!

संजना ने कहा, “पापा आप के साथ बात अलग है, आप के साथ कोई वैसा फीलिंग नहीं होता मुझे आप मुझे कहीं भी छुए, किश करे या सेक्स करे मुझको अच्छा लगता है मगर अब आरव के साथ सेक्स करने के लिए मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं फील होता, मैं hi नहीं करता, दिमाग़ में सिर्फ मेरा भाई अत है…. मैं खुद को उस्सकी बेहेन फील करती हूँ…… ी कन्नोत लेट हिम टच माय बॉडी नाउ… हे इस माय बरोथेर दमन आईटी!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 147 संजना इन मेन्टल तुर्मोइल

उस रात को संजना ने काफी वक़्त चावला साहब के कमरे में उसस्के साथ hi गुज़ारा. घंटों बाद अपने कमरे में गयी जब आरव गहरी नींद में सोया हुआ था. आरव से पीठ कटरके सोई वो सुबह तक और जिस वक़्त आरव ऑफिस जा रहा था तब संजना नार्मल बेहवे कर रहोइ थी उसस्के साथ जैसे कुछ हुआ hi नहीं.

मगर सान्वी यह सोचती रही के रात को वो चावला साहब के साथ हमबिस्तर हुई थी, और आरव के जाने के बाद सान्वी उस्सकी तंग खिंचाई में लग गयी के रात को ससुर के साथ खूब एन्जॉय किया उस्सने. मगर संजना की खामोश और बेरुखी तरह वाली व्योहार से सान्वी को लगा के कुछ गड़बड़ है तो उस्सने सवाल करना शुरू किया संजना से के क्यों वो उस तरह से बेहवे कर रही है उसस्के साथ.

संजना उस्सको सब कुछ बताना चाहती थी, बड़े ज़ोर से उस्सको मैं था सान्वी से सब शेयर करने की मगर क्यूंकि चावला साहब ने बताने से इंकार किया था तो वो बताने से झिझक रही थी और सान्वी से बुसस इतना कहा के उस्का मूड कुछ ठीक नहीं है, बाद में उस्सको बताएगी.

चावला साहब घर से निकले दोनों सान्वी और संजना को यह बता कर के वो किसी नयी कंपनी की डील डिसकस करने के बारे में कहीं जा रहा है, तब संजना ने उनको अलग उनके कमरे में बात करने गयी के किआ वो आनंद से मिलने जा रहे हैं उस्सकी कंपनी के डील के लिए, तो चावला साहब ने उस से कहा के नहीं वो उस से मिलने तो नहीं जा रहा मगर उस कंपनी के बारे में जानकारी के लिए जा रहा है बाद में आकर उस्सको सब कुछ बताएगा.

और दिन के कोई 11 बजे संजना भी घर से निकली. सान्वी ने टोक तक नहीं किया क्यूंकि उस्सकी आदत थी कार लेकर घूमने जाना. हमेशा वो हाईवे पर घूमती थी, दूर दूर तक जाती थी नए रास्तों का पता करने क्यूंकि उस्सको लॉन्ग ड्राइव करना बहोत पसंद था शुरू से hi. 500 से 1000 किलोमीटर्स ड्राइव कर लेती थी दूर तक निकलते हुए अक्सर.

दीप्ति को स्कूल बस में चौररने के बाद सान्वी घर के काम काज में लग गयी थी और आरव का फ़ोन आया दिन के बारह बजे जिस्सको सान्वी ने लिया और दोनों में रोमांटिक बातें चालू हुए. आरव ने बताया सान्वी को के कल रात संजना कुछ बदली बदली सी थी और कुछ नहीं करने दिया उस्सको…… तो दिल hi दिल में सान्वी सोचने लगी के क्यों संजना ने आरव से सेक्स नहीं किया मगर चावला साहब से करने गयी थी उसस्के कमरे में रात को…. सान्वी को भी बात कुछ अटपटा लगा. आरव ने सान्वी से कहा के वो बात चित के दौरान संजना से पता लगाने की कोशिश करे अगर कोई बात है तो, और सान्वी ने खुद आरव से कहा के आज सान्वी खुद संजना की बेहेवियर को बदले हुए देख रही थी और उसस्के बारे में संजना बात नहीं करना चाहती थी यह कहकर के उस्का मूड ठीक नहीं और सान्वी ने आरव को दिलाशा दिलाया के ऐसा होता शायद सच में उस्सकी मूड कुछ ठीक नहीं होगी और सान्वी ने आरव से कहा के सब ठीक हो जाएगा….

आरव फ़्लर्ट करने लगा सान्वी के साथ और कहा के कोई बात नहीं क्यूंकि अगर संजना नहीं तो सान्वी तो है उस्सको खुश करने के लिए. सान्वी उस्सको डांटने लगी के के ऐसे बातें फ़ोन पर नहीं किया करते तो आरव ने कहा के वो घर पर ारः है और सान्वी के साथ लव मेकिंग करेगा….. सान्वी के कहा के नहीं संजना वापस आ सकती है फिर भी आरव ने ज़िद किया और चला गया सान्वी के साथ सेक्स करने…..

दीप्ति स्कूल गयी हुई थी तो आरव ने सान्वी को अकेला पाया घर में क्यों के फ़ोन पर सान्वी ने कह दिया था के चावला साहब भी घर पर नहीं है तो दोनों ने खूब एन्जॉय किया क्यूंकि रात को आरव ने कुछ भी नहीं किया था संजना के saath….donon में एक प्यास सी थी और मैं भरके सेक्स किया दोनों ने और सान्वी ने बहोत आराम और ख़ुशी दिया आरव को.

और आखिर में आरव वापस ऑफिस चला गया सान्वी के साथ खूब एन्जॉय करने के बाद. सान्वी को भी बहोत ख़ुशी और संतुष्टि मिली आरव से सेक्स के बाद…. वो खुद मुस्कुरा रही थी और सोच रही के घर में दो मर्दों की प्रेमिका बन चुकी है, ससुर और देवर की प्रेमिका है और पति की पत्नी…. फिर हँस्ते हुए सान्वी ने खुद से कहा, “अरे संजना भी तो है, उस्सकी किआ हूँ? उस्सकी भी प्रेमिका हूँ या वो मेरी प्रेमिका है? “हे राम कभी भी नहीं सोचा था के एक जवान औरत के साथ भी एक दिन यह सब करुँगी….. ओह माय गॉड!”

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चावला साहब उधर अपने बिज़नेस पार्टनर्स के ऑफिस में आनंद वाले कंपनी की मालूमात लगा रहे थे. काफी डिसकशंस के बाद पता चला के वो कंपनी घाटे पर हैं और उस्का कोई ख़ास प्रॉफिट मेकिंग मार्जिन नहीं दिख रहे थे, जिसस्ने भी उस्सको ख़रीदा घाटे में hi जाएगा वो. तो चावला साहब समझ गया के अगर आनंद को 10 कोर दे भी दिया तब भी वो कंपनी लोस्स hi करेगा. वो चलने वाला नहीं क्यूंकि उस से भी बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट्स लगे हुए हैं ालीमुनियम इंसट्रीज़ में जीन के कारोबार बहोत बेहतर चल रहे हैं, आनंद उन् से कपट नहीं कर पाएगा!

चावला साहब ने सोच लिया के अब आनंद को यह सब समझाना पड़ेगा. उस्सने फाइल्स बनाये, चार्ट्स बनाये आनंद को समझाने के लिए और अपने ऑफिस गए सब पेपर वर्क्स फ़िनलिसे करने के लिए जिस्सको लेकर वो आनंद को दिखाने और समझाने जाने वाले थे.

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और उधर संजना पहुंची आनंद के घर.

आनंद घर पर hi था, क्यूंकि कंपनी तो बंद पड़ा था इन् दिनों वो घर पर hi रहता था और यह संजना को पता था.

जब संजना वहां पहुंची तो आनंद उस्सको देख कर बहोत खुश हुआ और उस्सको बाँहों में भरके प्यार किया. और उस्सको अपने कमरे में लगाया एन्जॉय करने के लिए. थोड़ा सा ड्रिंक लिया हुआ था उस्सने.

संजना हमेशा की तरह एक सेक्सी ड्रेस में थी जिस में उस्सकी क्लीवेज और जांघें दिख रहे थे और आनंद का खड़ा हो गया उस्सको देखते hi. बरसों से आदत तो थी hi दोनों को हमबिस्तर होने की, तो आनंद के लिए यह मामूली बात थी मगर किआ संजना भी वही चाहती थी उस वक़्त?

जब आनंद ने संजना की मुंह को अपने मुंह में लेना चाहा तो संजना ने अपने मुंह हत्ता लिया तो आनंद ने कहा, “क्यों अब सिर्फ अपने बाप का मुंह चाटने में मज़ा अत है? जब पता चल गया के मैं तेरा बाप नहीं तो मैं अजनबी हो गया किआ बेबी?!”

संजना उसस्के बाहों से निकल कर अलग हुई और कहा,

“आप को शर्म नहीं आती ज़रा सा भी? इतने सालों से मेरे जिस्म को नोचते रहे, मैं भी बाप समझ कर सब कुछ करने देती रही, मैं सिर्फ 11 साल की थी जब आप ने सब कुछ शुरू किया था, प्यार करती थी मैं आप se…ab सोचती हूँ के इतने सालों तक आप ने मेरा रपे किया, अभी अगर पुलिस में जाकर रपे की चार्ज लगाऊं आप पर तब किआ कहोगे?!”

आनंद बीएड पर बैठते हुए हंससने लगा और कहा,

“हाहाहाहा पुलिस में किआ कहोगी? के मुझसे चुदवाती थी 11 साल की उम्र से? और फिर पुलिस केस करके चावला फॅमिली को बदनाम करोगी? कोर्ट केस होगा तो आरव को और बाकी सबको पता चलेगा, यह सब भी सोच लिया तू ने हैं? बता!”

संजना बहोत ग़ुस्से में थी और कहा,

“जो मैसेज तुमने भेजा है मैं ने संभल कर रखा हुआ है, मेरी माँ के बारे में इतने गंदे बातें कहे हैं तुमने? वो तुम्हारी पत्नी थी, उसस्के बारे में इतने गंदे शब्द कैसे कहा तुमने बेशरम कहीं का, चुदवाती थी सब से और मैं भी उसी की तरह सब से चुदवाती हूँ एहि कहा नाह तुमने? हाँ चुदवाती हूँ और किश ने मुझे वैसा बनाया? तुम ने कुत्ते, तुमने मुझको वैसा बनाया…. रंडी कहा था मेरी माँ को और मुझे भी अभी दिखाती हूँ तुझे ठहर!!”

आनंद ज़ोरों से हँस्ते हुए बीएड पर आराम से लेट गया और अपने कपडे उतारने लगा संजना को छोड़ने के लिए. तब तक संजना किचन में गयी और एक चाकू लेकर कमरे में वापस आयी, चाकू को अपने पीठ के पीछे करके बीएड पर आनंद के पास गयी, आनंद ने सोचा अब वो बीएड पर लेटने के लिए तैयार हो गयी और आराम से नंगा लेट कर बाहों को फैला दिया संजना को अपने बाहों में लेने के लिए….. मगर संजना एक भूके शेरनी की तरह उसस्के ऊपर झपटी और चाकू को 5 या 6 बार आनंद के सीने में भोंकती गयी…….

तो बे कॉन्टिनोएड इम्मेडिएटली इन नेक्स्ट अपडेट…..
 
अपडेट 148 संजना कॉल्ड चावला साहब

आनंद खून में लतपथ बीएड पर वैसे hi लेते रहे और उस्सको चिल्लाने का भी मौका नहीं मिला बस अपने सीने पर हाथ दबाये वैसे hi लेता रहा बीएड पर और वहीँ मर्डर गया….. बिस्तर खून से लतपथ हो गए थे, खून के बूँदें संजना के कपड़ों पर भी पड़े हुए थे, आनंद के ेंखने मोठे मोठे खुले हुए संजना के तरफ देख रहे थे और अब संजना ने एक सुकून की लम्बी सांस लिया और मोबाइल लेकर चावला साहब को कॉल किया….

चावला साहब ने देखा के संजना की कॉल आरही है तो रिप्लाई किया, “हाँ स्वीटहार्ट, थोड़ी देर मेज घर पहुँचता हूँ……” मगर संजना ने इत्मीनान से कहा, “मैं ने मार डाला उससे पापा!! ख़तम कर दिया उस्सको, मर्डर गया आनंद!”

चावला साहब के पैरों के निचे जैसे ज़मीन निकल गए और जल्दी से ऑफिस के बाहर निकलते हुए एक कोने में जाकर कहा, “व्हाट? किआ बक रही हो? तुम घर पर हो नाह?”

संजना: “no पापा मैं उसस्के घर पर हूँ! ी किल्ड हिम. हे इस डेड!”

चावला साहब: “व्हाट थे हेलल यह किआ किया तुमने माय लव? ऐसा क्यों किया तुमने? सुनों और कोई है वहां किआ? सिर्फ तुम दोनों हो यह किसी ने देखा या सुना कुछ ऐसा?!”

संजना: “मैं अकेली हूँ पापा वो तो मर्डर गया नाह!”

चावला साहब के पेयर कांपने लगे फिर भी कहा,

“वेट तुम वहां से हिलना भी नहीं, बिल्कुल बाहर मत निकलना, किसी को नहीं पता चलना चाहिए के तुम वहां हो. वहीँ मेरा इंतज़ार करो मैं अभी पहुंचता हूँ और किसी चीज़ को बी हाथ मत लगाना और हाँ अपने मोबाइल स्विच ऑफ करो तुरंत जैसे मैं हैंग करूँ, वेट करो वेट ी ऍम किंग!!”

संजना: “मेरी कार बाहर है पापा, तो ऑब्वियस्ली सबको पता है के मैं यहाँ पर हूँ!”

चावला साहब: “आईटी डस नॉट मटर, बुसस तुम बिल्कुल बाहर मत निकलना, और कोई फुकरे या नॉक करे तब भी मत निकलना. ी ऍम किंग. तुम वहीँ रहो मैं अत हूँ स्वीटहार्ट!”

संजना: “पापा मेरे ड्रेस पर बहोत सारे खून के धब्बे लग गए हैं, मेरे लिए कोई और ड्रेस लेकर आना प्ल्ज़!”

चावला साहब: “ओह no! ok ok मैं तुम्हारे लिए ड्रेस लेकर अत हूँ… और किधर लगे हैं खून? तुम्हारे मोबाइल पर तो नहीं? हाथ धोया तुमने? किश चीज़ से मारा उस्सको गोली मारी किआ?!”

संजना: “चाकू से मारा मैं ने 5/6 बार मारा उस कुत्ते के छाती में! उसस्के काले दिल में चढ़ कर दिया तुरंत मर गया एक आवाज़ भी नहीं निकली उस्सकी!”

चावला साहब: “चाकू को धोया तुमने? और किसी चीज़ को हाथ लगाया किआ? कहाँ कहाँ और खून लगा कतल करने के बाद? सब मिटाना होगा….. वेल वेट वेट मैं निकल रहा हूँ वहीँ वेट करो और कुछ मत छुवो तुम!”

इतना कहकर, बहोत परेशान चावला साहब ऑफिस से धडपडाते हुए निकले, घर गए, संजना के कुछ कपडे लिए और धडपडाते हुए घर से निकले… सान्वी पूछती रही के किआ हुआ क्यों संजना के कपडे ले जा रहे हैं और कहाँ जा रहे हैं, मगर चावला साहब जैसे भौकलया हुआ था बुसस बड़बड़ाता गया के कुछ काण्ड हो गया थोड़ी देर बाद वापस आएगा और घर से निकल गए…..

दो घंटे बाद अपने फार्महाउस पर पहुंचे और देखा के आनंद मारा पड़ा हुआ है बिस्तर पर, और संजना बिल्कुल कूल, आराम से बैठी हुई थी लाश के पास और मुस्कुराते हुए कहा, “देखा पापा अब इस्सकी बोलती बंद हो गयी अब कुछ नहीं कहेगा यह और नाह hi आप को नाह मुझको ब्लैकमेल करेगा यह मारा हुआ कुत्ता!”

चावला साहब के हाथ पेयर कांप रहे थे. संजना ने देखते हुए कहा, “अरे आप क्यों डर रहे हो पापा? मुझे देखो ी ऍम कूल मेरे हाथ पेयर नहीं कांप रहे, अब आप पुलिस को फ़ोन करो और केहदो के मैं ने इस्को मार डाला!”

चावला साहब ने कहा, “शट उप! कोई पुलिस को फ़ोन नहीं करना है…… अभी मुझे सोचने दो के किआ करना hai….issko तुमने नहीं किसी और ने मारा है… सुनों एक प्लान बनाना होगा अब…..”

संजना: “अरे काहे की प्लान पापा साफ़ साफ़ डिक्लेअर कर दूंगी के मैं ने मारा इस्को!!”

चावला साहब: “तुम होश में नहीं ho…jail का हवा खाया है कभी? जेल में सादगी, पता है तुमको किआ होता है इम्प्रैसोनेमेंट?”

संजना: “वही तो चाहती हूँ मैं नाह पापा? इन् सब से दूर, आप से दूर, आरव से दूर, सभी रिश्ते नाते से दूर… ी विल बे फ्री…. मुझे मत बचाओ पापा मुझे जेल हो जाने दो…. ी वांट तहत ओनली!”

चावला साहब: “शट उप….. अपने कपडे बदलो, जल्दी, और तुम्हारा मोबाइल कहाँ है? यहाँ का लोकेशन दिखाएगा उस पर… उस्सको जलना होगा कम्प्लीटली सिम समेत… no no वेट….. मोबाइल को वैसे hi रहने दो, तुमने मुझको कॉल किया था नाह यहीं से…. वेट वेट कुछ और सोचता हूँ……”

जब तक संजना अपने कपडे चेंज करने गयी तो चावला साहब अपने दिमाग़ लड़ा रहे थे के कैसे साबित करें के किसी और ने यह कतल किया है….. उनके दिमाग़ में एक बात सूझी…..

जब संजना वापस आया तो चावला साहब ने उस से पूछा, “किआ तुम रघु से मिले यहाँ आने से पहले? उस्सने तुमको यहाँ एते हुए देखा किआ?”

संजना: “नहीं पापा उस कुत्ते को भी मार डालती अगर मिलता तो, उस्सने मम्मी के साथ और मेरे साथ भी खूब एन्जॉय किया, साला कुत्ते ने मुझे कभी भी पता नहीं चने दिया के वो मम्मी से भी सेक्स किया करता था….”

चावला साहब खुश हुआ और कहा, “ok तो फिर ठीक है, सब बंदोबश्त हो गया, तुमको एक और मर्डर करना होगा, रघु का….. मैं अपनी कार छुपा कर अत hoon…tu जा कर रघु को लेकर इधर आ, और अपने कमरे में उसस्के साथ सेक्स कर… सेक्स करना चाहिए उस्का स्पर्म मिलना चाहिए बीएड पर, बेडशीट पर, तब उस को भी मार डालना, रपे कर रहा था वो तेरा उस्सने तेरे ेंखों के सामने आनंद को मारा फिर तेरा रपे किया इस लिए तुमने उस्सको मार डाला…… मेरे बेहतर से बेहतर वकील दोस्त हैं आसानी से तुमको निकल लेंगे इस केस में तब……!”

संजना को आईडिया पसंद आया क्यूंकि वो रघु को सच में मारना hi चाहती थी, और समझ गयी के चावला साहब किआ करवाना चाहता था, तो वो राज़ी हो गयी.

और चावला साहब ने अपने कार को कहीं दूर छुपाया ताके रघु को पता नाह चले के वो भी यहीं है.

संजना रघु को लेकर फार्महाउस पर आयी. राजू की तो आदत थी संजना से फार्महाउस में मिलना, आनंद के मौजूदगी में भी तो रातों को अत था संजना से मज़ा करने, और दिन में कई बार आया है करने संजना के साथ तो उसस्के लिए यह नार्मल बात थी के संजना ने उस्सको छोड़ने के लिए बुलाया है…..

बड़े आराम से रघु दूसरे कमरे में गया संजना के साथ, दोनों ने कपडे उतारे, और सेक्सुअल इंटरकोर्स करने लगे…… संजना ने उस से कहा, “तुम मेरी मम्मी के साथ भी यह सब करते थे तुम ने कभी मुझे बताया hi नहीं, माँ और बेटी दोनों के साथ तुमने मजा किया रे रघु? हम्म?” रघु बहोत गरम हो गया था और कहा, “डार्लिंग एक्साक्ट्ली वही मजा है तेरे में जो तेरी माँ में थी ऋ, वही खुशभू, वही गर्मी, वही मजा…. तू बिल्कुल अपनी माँ पर गयी है, तुझे आज कैसे पता चला ऋ? आनंद ने बता दिया तुझे के मेरा तेरी माँ के साथ भी अफेयर था? हाहाहाहा….” संजना ने उस से कहा के उसस्के अंदर नहीं झड़ना चाहिए जब वो ेजकुलाते करने को आये तो बाहर निकाले….. रघु ने कहा, “हाँ ठीक है समझता हूँ अब तू शादी शुदा है कहीं प्रेग्नेंट हो गयी तो प्रॉब्लम होगा तो okay मैं बाहर निकल दूंगा वीर्य को don’t वोर्री माय लव…” और सेक्स के दौरान संजना ने अपने नाख़ून से रघु के पीठ पर कई लखीरें किये जिस से रघु के स्किन संजना के नाख़ून में लगे, और संजना ने रघु से खुद को दांत काटने को कहा उसस्के काँधे और बूब्स पर जिस से संजना के जिस्म पर रघु के दांत के निशाँ हुए……

चावला साहब उस कमरे में वेट कर रहे थे जिस में आनंद मारा हुआ पड़ा था……..

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 149 रघु गेट्स किल्ड एंड संजना अरेस्टेड

संजना को अचानक याद आया के चावला साहब ने उस से कहा था के रघु के साथ रपे वाली गेम खेलना और अपने कपडे को फड़वाने रघु से, रघु को कहना के तुमको स्पंक करे, तुमको मारे सेक्स करने से पहले…..

ये सोच कर अचानक संजना ने सेक्स करना रोका और बीएड से उतर गयी और अपने कपडे वापस पेहेन्ने लगी, और रघु हैरान होकर उस्सको बीएड पर बैठ कर देखने लगा फिर पूछा के किआ हुआ, किआ उस्का मैं नहीं है अब करने को!! तो संजना ने मुस्कुराते हुए कहा, “वेट करो नाह तुमको अभी ज़्यादा मज़ा आएगा मैं एक गेम खेलना चाहती हूँ और तुमको इस में पूरी तरह से भाग लेना होगा देखना कितना मज़ा आएगा.”

रघु आराम से संजना को वापस अपने कपडे पहनते हुए देखने लगा और सोच रहा था के संजना किआ करना चाहती है…… फिर संजना वही चाकू लेकर वापस आयी और राजू को दिया….. चाकू को धोकर साफ़ कर दिया गया था और कपडे से उस्सको पांच कर बिल्कुल साफ़ किया गया था हाथ की लखीरों को मिटाने के लिए और उस चाकू को संजना ने रघु को देते हुए कहा,

“गेम यह है के तुम एक अजनबी हो और इस घर में घुस आये हो और मेरा रपे करोगे….. मेरा किसी ने कबि रपे नहीं किया मैं फील करना चाहती हूँ के रपे कोई करे तो कैसा लगता है, मुझसे ज़बरदस्ती करो, मेरे कपडे फाड़ डालो, मुझे मारो भी, और ज़बरदस्ती से सेक्स करो मेरे साथ ी वांट तो फील एंड एन्जॉय ा rape….wo फिल्मों में होता है नाह, और वो पोर्न मूवीज में भी होता है नाह सदोमसोचिस्म या कुछ eisa….kuch वैसा करो आज मेरे साथ…..”

रघु ने पूछा, “और यह चाकू किश लिए है?!”

संजना बोली, “अरे तुम मुझको इस से डराओ ताके मैं तुम से darun…phir इस्को रख देना यहीं बीएड पर, इस्सकी तो ज़रुरत नहीं पड़ेगी फिर”

रघु जोश में आया और हँस्ते हुए कहा, “वह बेबी वह यह सब देसिरेस हैं तुझ में वह बड़ा मज़ा आएगा तुमको रपे करने में अब तो, तू खुद कह रही है तो क्यों नाह करूँ तेरा रपे, चल अभी रेपिस्ट की पर्सनालिटी में डूबता हूँ, चल थोड़ा कंसन्ट्रेट करने दे मुझे कुछ देर…… अब आएगा मज़ा वाओ!”

संजना ने चैन की सांस लिया जब देखा के राजू तैयार हो गया वो सब करने के लिए और वो भी एक्टिंग करने लगी दररने की और अपने क़दमों को पीछे के तरफ बढ़ाने लगी जैसे उसस्के घर में कोई चोर अचानक घुस आया है जब तक के वो बीएड तक पहुंची और कहा,

“मैं सच में रेसिस्ट करुँगी रघु तुमको सब कुछ ज़बरदस्ती से करना होगा ok? समझ गए नाह, ok, अब तुम मेरे घर में घुस आये हो, मैं अकेली हूँ और तुम मेरा रपे करना चाहते हो, के ों शुरू करो अपना एक्टिंग और मेरे तरफ बढ़ो…….”

रघु पर एक्टिंग का भूत सवार हो गया और उस चाकू को हाट में लिए संजना के तरफ बढ़ते हुए उस्सने कहा, “खामोश कर लड़की, वार्ना मैं इस चाकू को तेरे सेने के आर पार कर दूंगा, ख़बरदार अगर चिल्लाई तो, बुसस तेरे को छोड़ना है, छोड़ कर चला जाऊंगा, आराम से मुझे छोड़ने दे वार्ना जान से हाथ धो बैठेगी तू समझी के नहीं….”

तब तक रघु संजना के पास आगया था और संजना दररने की नाटक करते हुए बीएड से टकरा गयी थी और बैठ गयी बीएड पर; तो रघु ने उस चाकू से hi उस्सकी ड्रेस के एक टुकड़े को फॉर डाला और कहा, “अपने ड्रेस को उतार लड़की, वार्ना फाड़ डालूंगा तेरे कपडे को….” संजना ने कहा, “नहीं उतरूंगी निकल जाओ मेरे घर से वार्ना मैं पुलिस को फ़ोन करुँगी!” और दोनों में हत्ता बाहिं होने लगे… चाकू तब भी रघु के हाथ में hi था और उस झपटा झपटी में चाकू की नोख संजना के बाज़ू पर लगी और खून निकलने लगा तो रघु चहुँक गया और कहा, “अरे सॉरी लग गयी तुमको देखो खून निकल आया….”

संजना ने कहा, “ोफो कुछ नहीं, रहने दो, तुम कंटिन्यू करो कितना ाचा चल रहा था, चाहे मुझे चोट लगे या खून निकले तुम कंटिन्यू करो, रियल लग्न चाहिए मुझे ज़्यादा मज़ा आएगा वैसे… तुम जारी रखो, मेरे कपडे को इस चाकू से hi और ज़्यादा फाड़ो नाह, मुझे नंगा करो, अपने हाथ से बाद में मेरे कपड़ों को और ज़्यादा फाड़ो नाह रघु, और बीच में कुछ भी रियल बात मत करो, अपने रोले में कंसन्ट्रेट करो, चाहे तो मुझे एक घूंसा भी मारो मेरे चेहरे पर….. मुझे कोई ऐतराज़ nahin…come ों, कंटिन्यू आईटी नाउ…..”

रघु और जोश में आया और अपने किरदार को बेहतरीन तरीके से निभाने लगे और संजना के साथ ज़बरदस्ती करने लगा….. उस चाकू से उस्सने सच में कई जगह पर संजना के कपडे को फाड़ डाला उस्सने और चाकू को आखिर में बीएड पर रख कर उस्सने अपने हाथ से संजना के कपडे को फाड़ डाला और फिर चाकू से hi संजना को बीएड पर लेता कर उस्सकी ब्रा को कटा और उस्सकी पंतय को भी चाकू से फायदा उस्सने, उस दौरान फिर चाकू लगी संजना के जिस्म पर कई दफा और खून निकले…. एक बार संजना ने ज़ोर दिया के रघु उस्सको एक घूंसा मारे और रघु नहीं मान रहा था उसस्के गाल को सहलाते हुए कहा के नहीं इतनी खूबसूरत चेहरे पर वो घूंसा नहीं मरेगा, मगर संजना ने ज़िद किया के वो मारे और रघु ने एक ग़ुस्सा मार hi डाला जिस से संजना के होंठ फैट गयी और बहोत खून निकला…. रघु ने सॉरी कहा और उसस्के खून को पोंछा और प्यार से उस्सको किश किया, उसस्के बाद रेपिस्ट का रोले जारी रखा…. और इस तरह से दोनों ने सेक्स किया… संजना ने अपने जिस्म पर कई घाव लिए और रघु से दांत कटवाई अपने पीठ पर, कांधों पर, बूब्स पर और सेक्सुअल रिलेशनशिप हुआ दोनों में और झड़ने के वक़्त रघु ने अपने लुंड को बाहर निकाला और संजना के पथ पर ेजकुलाते किया जिस्सको संजना ने चादर से पोंछा, और राजू को अपने बाहों में भर लिया संजना ने, और आहिस्ते से चाकू लिया जो बीएड पर hi थे, सेक्स के दौरान संजना ने चाकू को अपने तकिये के पास कर लिया था, और जिस वक़्त रघु संजना के ऊपर लेता हुआ आखिर में झड़ने के बाद संजना ने चाकू को थमा और ज़ोर से रघु के पीठ में भोंका दो बार……

रघु चिल्लाया और बीएड से उठकर खड़ा हो गया संजना के चेहरे में देखते हुए हैरानी से और पूछा, “ऐसा क्यों किया तुमने…..” और उसस्के मुंह से खून निकलने लगा… पीठ पर जिस जगह चाकू लगा था उस से रघु के फेपर में चढ़ हो गया और उस्सको सांस लेने में तकलीफ हवे लगी थी, फिर भी वो खड़े होकर जाने की कोशिश में लगा हुआ था तो संजना ने ज़ोर से चावला साहब को आवाज़ दिया….

रघु चावला साहब को अंदर आते हुए देख कर चहुँक गया और कहा, “साहब, िस्सने मुझको चाकू मार दिया आप मुझे जल्दी से हॉस्पिटल लेचलो…..”

चावला साहब ने संजना के हाथ से चाकू वापस लिया और कपडे से पकड़ा चाकू को और उस्सने रघु के गर्दन के दाएं हिस्से पर ज़ोर से चाकू को भोंका, जिस से वहां की नस कट गयी और रघु ज़मीन पर गिर्र पड़ा!!! मर्डर गया वो वहीँ…..

चावला साहब और संजना ने मिलकर उस्सको उठाके बीएड पर कर दिया…..

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उसस्के बाद चावला साहब ने सब कुछ शुरू से संजना को समझाया के पुलिस को किआ और कैसे बताना है…. संजना के होंठ से अब भी खून निकल रहे थे और होंठ सूझ गयी थी, उसस्के जिस्म से कई जगह से खून निकल रहे थे जहाँ जहाँ चाकू की नोक लगे थे…. चावला साहब ने संजना को समझाया के वो आखरी चाकू जो उस्सने खुद रघु को मारे वो किस तरह और कब मारा रघु को वो सब समझाया संजना को….. संजना वैसे तेज़ दिमाग़ वाली थी, आखिर थी तो चावला का hi खून तो उस्सको सब कुछ आसानी से समझ में आगया के कैसे पुलिस को बताना होगा के किश तरह से रघु ने उस्का रपे किया और आखिर में संजना ने उस्सको मारा सेक्स करने के बाद…..

पुलिस को फ़ोन करने से पहले चावला साहब और संजना ने मिलकर सब कुछ सही से प्लान किया के कितने बजे से रघु और आनंद घर में झगड़ रहे थे, डिसकस कर रहे थे किसी बात को लेकर, और जिस वक़्त उस्सने आनंद को मारा संजना अपनी कमरे में थी और जब आनंद को चाकू लगा तो वो ज़ोर से चिल्लाया तब संजना भागते हुए उसस्के कमरे में गया तो देखा रघु उस्सको और भी चाकू मारते जा रहा था सीने में, संजना चिलायी और भाग कर वापस अपने कमरे में गयी तब, उस वक़्त उस्सने चावला साहब को फ़ोन करके कहा के रघु चाकू से उसस्के बाप को मार रहा है…. दोनों ने अपने अपने मोबाइल में देखा के तब किआ टाइम हुआ था जिस वक़्त संजना ने चावला को कॉल किया था, उसी टाइम को मेंशन करना होगा पुलिस को बयां देते वक़्त….. और चावला साहब अभी अभी यहाँ आया जब संजना ने रघु को मार दिया ठीक कुछ मिनट बाद चावला साहब यहाँ आये…

यह सब कुछ दोनों ने डिसकस कर लिया और प्लान बना लिया तब चावला साहब ने अपने कार को वापस फार्महाउस के सामने लाने से पहले संजना के उन् कपड़ों को जलाया जिस पर खून लगे थे जब उस्सने आनंद को मारा था. दूर जाकर जलाया उन् कपड़ों को और मिटी के निचे राख को दबा दिया और तब पुलिस को फ़ोन किया चावला साहब ने. इनफार्मेशन रूम में फ़ोन किया के एक मर्डर हुआ है और एड्रेस दिया, तब इनफार्मेशन रूम वालों ने उस इलाके के पुलिस वालों को वहां भेजा…..

और कौन पुलिस इंस्पेक्टर आया? वही वाला जिस ने चावला साहब की हेल्प किया था जब उस्का मोबाइल चुराया था एक शराबी ने इसी छोटे से शहर में याद होगा सब को, और वो पुलिस इंस्पेक्टर तो चावला साहब को पहचानता था और संजना को भी, सब पहले मिले थे…..

तो सब कुछ देखने और जांच पड़ताल करने के बाद उस इंस्पेक्टर ने कहा, संजना ने सेल्फ डिफेन्स में मारा रघु को, और रघु ने आनंद को मारा जिस्का गवाह खुद संजना है….. फिर भी फॉरेंसिक डिपार्टमेंट वालों को बुलाया गया जिन्हों ने बहोत सारे फोटोग्राफ्स लिए, उँगलियों के निशाँ लिए गए, बेडशीट पर सीमेन के सैम्पल्स लिए गए जहाँ जहाँ खून थे सब के सैम्पल्स लिए गए, और फॉरेंसिक के फोटोग्राफर और पुलिस के फोटोग्राफर वालों ने संजना के जिस्म पर पाए गए सभी खून के और चोट के निशाँ को फोटोग्राफ किया…

घंटों भर सब तहकीकात करते रहे जब तक चावला साहब ने अपने वकील को भी फ़ोन करके बुला लिया…. उस्सने भी काफी फोटोग्राफ्स लिए क्राइम सन के और संजना के जिस्म की भी…..

आखिर में इंस्पेक्टर ने चावला साहब से कहा क्यूंकि मर्डर हुए हैं संजना को पुलिस स्टेशन लेजाना पड़ेगा और उस्सको पुलिस सेल में डालना पड़ेगा, बाद में वकील साहब उस्सको बैल पर निकाल सकते हैं…..

तो वही हुआ आखिर में….. एम्बुलेंस आये, डेड बॉडीज को ले जाया गया पोस्ट मोर्टेम के लिए, फार्महाउस को सील किया गया और संजना को सेल में डाला गया…..

चावला साहब ने उस्सको दिलाशा दिलाया के घबराने की कोई बात नहीं कल तक वकील साहब उस्सको वहां से निकल लेंगे.

संजना ने धीरे से चावला साहब से कहा, “पापा मुझे जेल हो जाने दीजिए, सब कुछ सच सच बता देना चाहिए के दोनों को मैं ने hi मारा है, मैं अब आप सब से दूर होना पसंद करुँगी…. प्लीज मुझे अब वापस नहीं आना आप की दुन्या में मुझे भी मार डालना चाहिए था वहीँ पर….. मुझे खुद को चाकू भोंक लेना चाहिए था…..”

चावला साहब ने संजना से कहा, “खबरदार अगर कुछ और बयां दिया पुलिस को…. ग़ौर से सोचो इस में तुम मुझको भी बर्बाद कर डौगी क्यूंकि मैं भी शामिल हूँ इन् सब में….. बिल्कुल नहीं मुकरना, बिल्कुल कुछ भी मत कहना…. तुमको पुलिस को कोई बयां hi नहीं देनी है. वकील ने इंस्पेक्टर साहब से बात कर लिया है. कल उसस्के सामने तुम बयां डौगी, और बिल्कुल वही कहोगी जो हम दोनों ने कहा और प्लान किया है समझी तुम. देखो स्वीटहार्ट, अभी तुम कुछ तेनसेद हो, स्ट्रेस है समझता हूँ, मगर यू अरे ा स्ट्रांग लेडी, यू अरे ा चावला दो नॉट फॉरगेट… बे स्ट्रांग माय बेबी, ी लव यू, मेरे लिए स्ट्रांग रहना, एक रात की बात है. तुम संभाल लोगी मुझे पता है. घबराओ मत कुछ नहीं होगा कल सब ठीक हो जाएगा…..”

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और चावला साहब घर वापस पहुंचे तो सान्वी को बाहों में भर कर रोने लगे सब कुछ बताते हुए उस्सको……. आज नहीं छुपा पाए वो कुछ bhi…chawla साहब ने खुद सान्वी को बता दिया के संजना उस्सकी बेटी है और सब समझाया के कब और कैसे सब पता चला वग़ैरा वग़ैरा……

संजना चावला साहब को ज़ोर से बाहों में भरके उनके सर को सेहला रहे थे जैसे एक बचे को सहारा दे रही थी. उस्सको बहोत hi हैरानी हुई सब बात जान कर और सोचने लगी के इसी लिए संजना आरव के साथ कुछ बेरुखी से पेश आरही थी कल से…..

सान्वी ने चावला साहब के सर को अपने गॉड में लिया फिर अपने सीने से लगाया और अपने बूब्स पर ज़ोरों से दबा कर उनके सर को सहलाते गए…. देखने में लगता था वो उस्सकी पत्नी थी और चावला साहब उस्का पति….. बहोत प्यार चालक रहा था उन् दोनों के दरमियान….. दीप्ति एक कोने में कड़ी सब देख रही थी……

सान्वी मैं hi मैं सोचने लगी इतने दिनों से चावला साहब खुद अपनी बेटी के साथ सेक्सुअल रिश्ते में thi…aur आरव संजना का भाई है जिस से उस्सने शादी किया….. सान्वी के अंदर एक अजीब सी सेक्सुअल फीलिंग ारोउसे हुई इन् सब बातों को सोच कर…… दोनों ने डीडे किया के आरव और विवान को इस बात का पता नहीं चलना चाहिए के संजना उन् दोनों की बेहेन है.

तो बे कॉन्टिनोएड……………. (2350 वर्ड्स)
 
अपडेट 150 विवान एंड आरव ब्रिंग संजना बैक होम

चावला साहब ने संजना और आनंद दोनों के मोबाइल ले लिए थे, घर आने के बाद उस्सने दोनों के मोबाइल से उस मैसेज को डिलीट किया जो आनंद ने संजना को भेजा था गालियां देते हुए. शुक्र है के पुलिस वालों ने किसी की मोबाइल की मांग नहीं की थी. अगर शहर में हादसा हुआ होता और बड़े पुलिस वाले होते तो ज़रूर मोबाइल्स ज़प्त कर लेते. मगर हो सकता है के बाद में मोबाइल माँगा जाए, मगर चावला साहब उनके रिश्तेदार है तो उस्का हक़ बनता है अपनी बहु और समधी के मोबाइल को अपने साथ लेने की तो इस से उनको ज़्यादा प्रोब्लेम्स नहीं होगी यह सोचा था उन्हों ने.

जब देर शाम को आरव और विवान को सब कुछ पता चला तो वो दोनों संजना से मिलने गए उस शहर के पुलिस स्टेशन में एक पैनल ऑफ़ लॉयर्स के साथ. विवान बहोत स्ट्रांग था इस बारे में कंपनी के वकीलों के साथ और उस्सने अपने तरफ से बहोत बड़े बड़े वकीलों को लगाया अपने साथ. वहां के पुलिस ने उन् सब को मिलने दिया. अब क्यूंकि पुलिस इंस्पेक्टर चावला साहब के खानदान को बरसों से जानता था तो उनको कोई दिक्कत नहीं थी उन् लोगों को मिलने से….

और संजना ने आरव और विवान दोनों को बता दिया के वो उन् दोनों की बेहेन है और चावला साहब उस्का पिता. संजना ने दोनों से इल्तेजा किये के चावला साहब को नहीं पता लगने दें के उन् दोनों को यह बात पता है. विवान को थोड़ा बहोत चावला साहब के अफेयर के बारे में उन् दिनों पता था जब वह लोग गाओं चोर कर शहर आने वाले थे. क्यूंकि उन् दिनों बात काफी फेल चुकी थी गाओं में चावला साहब और आनंद की पत्नी को लेकर. विवान बड़ा भाई था तो उस्सको मालूम था इस लिए उस्सको कोई झटका नहीं लगा और उस्सने संजना को आज पहली बार सीने से लगाया पुलिस स्टेशन में आरव के सामने. दोनों भाई समझ गए के उन् के पिता को शायद शर्मिंदगी महसूस होगी इस लिए दोनों ने भी डीडे किये के सही है अपने बाप को नहीं पता चलने देंगे के उन् को पता है के संजना उस्सकी बेटी है.

संजना, विवान और आरव एक तरफ अकेले में बातें कर रहे थे जबकि सभी लॉयर्स केस की तहकीकात कर रहे थे, तसवीरें वग़ैरा देखते हुए. किसी वकील ने इन् तीनों को बातें करते हुए नहीं सुना.

बाद में उन् में से सबसे बड़ा वकील संजना से मिलने गया और उस्सकी बॉडी पर लगे खरचों का मुआएना किया तब इंस्पेक्टर से बात करने गए और आखिर में तय हुआ के संजना को उसी वक़्त पैरोल पर रहा किया जाए और कल फिर पुलिस स्टेशन में वो आजाएगी हाज़िरी देने जब तक केस कोर्ट में फाइल किया जाएगा. इंस्पेक्टर ने पैरोल पर संजना को रहा कर दिया.

जब तक वकील लोग पेपर्स सिग्न कर रहे थे, तब विवान और आरव एक तरफ आपस में बातें कर रहे थे. विवान ने कहा, “साला अपनी बेहेन के साथ शादी कर लिया तुमने, एन्जॉय करो छोटे!!” आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं ईंटे दिनों से ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप में था और मुझे पता बी नहीं था कमाल है भाई!” तो विवान ने पूछा, “अब जान कर कैसा लग रहा है तुझे? किआ उसस्के साथ आगे निभा पाएगा तू?”

आरव के समझ में नहीं ारः था के किआ जवाब दें अपने बड़े भाई को और उसस्के चेहरे में देखता रहा. तो विवान ने कहा, “अरे किआ सोच रहा है? एन्जॉय कर अब तो तुझको और भी बहोत ज़्यादा एक्साइट होना चाहिए के बेहेन मिल गयी तुझको मज़ा करने के लिए, यह ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप बड़ा हॉट होता है और इस्सके एक अजीब कशिश होती है, मैं तेरे जगह होता तो अब तो डबल सेक्स करता उसस्के साथ!!”

तब आरव ने कहा, “भाई सच में मुझको और ज़्यादा एक्ससिटेमेंट हो रहा है सब सोच कर और उस्सको इसी वक़्त लेटने का मैं करने लगा है, सही कहा आप ने सच में अलग hi बात है, दिमाग़ में अलग सेक्स की ख्वाहिश होने लगी संजना को सोच कर अब तो, ऐसा क्यों है?!”

विवान ने कहा, “खून की फुंकार है छोटे, ऐसा hi होता है जब अपने खून के साथ सेक्स किया जाता है तो. उम्मीद है के संजना के तरफ से भी वही कशिश हो वार्ना तेरे लिए मुश्किल पर जाएगा, अगर उसस्के तरफ से भी ऐसा hi सेक्सुअल फीलिंग होगी तो तुम दोनों की सेक्स लाइफ बहोत मज़बूत होगा, बहोत क्लोज रहोगे दोनों और तुम्हारे सेक्स लाइफ में बहोत तरक्की करोगे उसस्के साथ मेरा यकीन करो!”

अजीब बात थी के संजना के जिस्म पर इतने घाव देखने के बावजूद दोनों सेक्स के बातें कर रहे थे. हालां के आरव को पता चला के रघु ने उस्का रपे किया, किसी ग़ैर मर्द ने उसस्के अंदर अपने लुंड घुसाया फिर भी आरव को उस वक़्त संजना के साथ सेक्स करने की तड़प जाग रही थी….. विवान ने भी संजना पर हुए रपे को नज़र अंदाज़ किया बिल्कुल जैसे कुछ हुआ hi नहीं, बल्कि उस्सको खून के इलज़ाम से आज़ाद करने पर ज़्यादा ध्यान दे रहे थे.

उधर चावला साहब और सान्वी को पता चल चूका था के दोनों भाई संजना से मिलने गए हुए हैं. चावला साहब सान्वी से एहि बात कर रहा थे के कहीं संजना उन् दोनों को असलियत बता नाह दे! मगर सान्वी ने भी सोचा के वो कभी नहीं बता पाएगी के वो उन् दोनों के बेहेन हैं.

जब संजना को रहा किया गया तो आरव ने उसस्के कांधों पर हाथ करके उस्सको सीने से लगाते हुए कार तक चलके गए और विवान ने दोनों को पीछे वाले सीट पर बैठने को कहा. विवान आगे बैठा मगर एक ड्राइवर ड्राइव कर रहा था. बाकी के लॉयर्स अपने अपने कार में गए हुए थे. सब को चावला साहब के घर में वापस मिलना था उसी वक़्त केस के बारे में डिसकस करने के लिए.

रास्ते में जाते वक़्त बार बार विवान मुड़कर दोनों को देख रहा…. विवान के दिल में अब एक अलग तरह की सोच पैदा होने लगा था संजना के प्रति….. और पीछे के सीट पर आरव संजना के गाल पर हाथ फेरर रहा था आहिस्ते आहिस्ते, उस्सको कम्फर्ट करते हुए, उस कठिन मौके पर उस्सको दिलाशा देते हुए और उसस्के गाल को चूमते हुए…. विवान बार बार दोनों को देख रहा था….. आरव ने आहिस्ते आहिस्ते संजना के बूब पर अपना हाथ किया और हलके से सहलाया और संजना ने “आह” किया क्यों के उस बूब पर रघु ने दांत कटा हुआ था तो उस्सको दर्द हुआ मगर आअराव समझा के उतेजिना से उस्सने वैसा किआ फिर उस्सकी दूसरे बूब को दबाया तो संजना ने विवान के तरफ देखते हुए आहिस्ते से कहा, “चोर्रो नाह देखो भाई देख रहा है!” तो आरव ने आहिस्ते से पूछा, “किस्सका भाई? मेरा भाई या तेरा भाई देख रहा है हम्म?!” संजना ने हलके से उस्सको एक ग़ुस्सा मारते हुए कहा, “तुमको शर्म नहीं अति अपने बड़े भाई के सामने मेरे बूब्स दबाते हुए चोर्रो नाह बेशरम कहीं का!”

आरव ने कहा, “अरे रात हो रही है कुछ नज़र नहीं ारः उससे, वो समझ रहा है के हम थोड़ा सा प्यार कर रहे हैं, उस्सको कैसे दिखेगा के मेरे हैट तुम्हारे बूब्स पर हैं? चलो एक किश दो नाह मुझे!”

संजना ने थोड़ा नखरा करते हुए कहा, “नहीं, देखो मेरे होंठ सूझे हुए है!” तब आरव ने कहा, “साले ने तुम्मो मारा था, उस्सको उसस्के मरने पर भी मैं घूंसे से उस्का थोपरा बिगाड़ देता अगर मिलता मुझे तो!!”

अब अजीब बात यह थी के कल रात को संजना को आरव में अपना भाई नज़र ारः था और इस वक़्त आरव फ़्लर्ट कर रहा था उसस्के साथ तो संजना करने दे रही थी. संजना खुद को hi नहीं समझ पा रही थी. ऊपर से अभी अभी उस्सने दोनों को बताया था के वो उनके बेहेन हैं….. फिर भी आरव की सेक्सुअल देसिरेस को देखते हुए संजना शायद समझ गयी थी के आरव को कोई दिकत नहीं वो बेहेन है के नहीं उस्सको उस से बहोत प्यार था और उस्सको अपना पत्नी hi मंटा था शायद इस लिए संजना खुश थी.

और संजना ने धीरे से फिर कहा, “पापा को मत पता चलने देना के मैं ने तुमको बता दिया के तुम मेरे भाई हो, और भाई से भी केहदो के वो कुछ पता नहीं चलने दे उनको!”

आरव ने सुन लिया और धीरे से मुड़कर कहा, “शहहह ड्राइवर सुन लेगा, फ़िक्र मत करो कुछ नहीं बताएंगे डैड को okay.!”

संजना को जब पता चला के विवान उनके बातों को सुन रहा था तो उस्सको शर्म आयी और अपने मुंह पर हाथ रखते हुए फुस्फुसाते हुए आरव के सीने पर अपना सर रख के कहा, “देखा उस्सने हमारी साड़ी बातों को सुना!”

तब आरव ने भी फुस्फुसाते हुए संजना के गर्दन को चूमते हुए कहा, “कौन सी बेहेन? तुम मेरी बेहेन हो? या पत्नी? Ok ठीक है घर चल कर इस बेहेन को अपनी बीएड पर नंगा करता हूँ क्यों डार्लिंग अपने भाई के साथ बीएड पर होगी नाह?!” संजना ने हँस्ते हुए उस्सको फिर ग़ुस्सा मारा उसस्के छाती पर….. विवान ने सब कुछ सुना और उस्सको एक एक्ससिटेमेंट हुई दोनों के बातों को सुनकर!!

घर पहुंचने पर चावला साहब हैरान और खुश हुए संजना को वापस पाकर और उन् वकीलों का शुक्रिया ऐडा किया और लाउन्ज में सब बैठे डिसकस करने के लिए.

सान्वी ने संजना को सीने से लगाया, दीप्ति भी दौड़ कर लिपट गयी संजना के साथ और विवान खड़ा संजना को घुर्र रहा था जो सान्वी ने नोटिस किया.

सान्वी संजना को उस्सकी कमरे में लगाई और उस्सको एक हॉट शावर लेने को कहा. सान्वी ने आरव को अंदर आने से मन किया यह कहकर के वो संजना के जिस्म पर लगे घाव को देख रही है और पट्टी करेगी जहाँ ज़रुरत है… तो आरव निचे रह गया अपने डैड, विवान और वकीलों के साथ.

लॉयर्स ने कहा के क्लियर एंड साफ़ सेल्फ डिफेन्स केस है और सभी प्रूफ्स साफ़ कहते हैं के संजना ने कुछ भी ग़लत नहीं किया, उस्सकी रपे हुई, उस्सकी डैड का खून किया रघु ने और खुद को बचने के लिए संजना ने रघु को मारा वार्ना रघु उस्सको मार देता. बहोत आसानी से केस जीत लिया जाएगा कोर्ट में इस में कोई भी शक नहीं है. सभी वकीलों ने एहि कहा जिस्सको सुनकर चावला साहब और दोनों बेटों को बहोत सुकून मिला. कहा गया के कल सुबह को सब फाइल कोर्ट में भेजा जाएगा, और पुलिस ने भी बड़े आसानी से एहि रिपोर्ट बना दिए हैं जो वकीलों ने कहा. तो सब कुछ आसानी से हो जाएगा. कुछ भी अगेंस्ट नहीं था संजना के.

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उधर सान्वी ने संजना को शावर में नंगा किया उसस्के जिस्म पर जहाँ जहाँ घाव लगे थे सहलाया, नरमी से सब जगह को चुम्मा और दोनों लेडीज इश्क फरमाने लगे बाथरूम में….. दोनों के जिस्म एक दूसरे से सट्टे हुए थे, संजना ने सान्वी के कपडे भी उतार डेल और संजना सान्वी की बूब्स को चुस्सने लगे….. दोनों के जिस्म गर्मी से तप रहे थे और बिल्कुल बेकाबू हो गए थे दोनों और इस कदर अपने जिस्म को दोनों एक दूसरे के जिस्म से रागढ रहे थे जैसे के दो जिस्म एक जान थे दोनों उस वक़्त….. घंटा भर दोनों अंदर रहे यहाँ तक के सभी लॉयर्स वापस चले गए और आरव ऊपर जाकर अपने कमरे का दरवाज़ा खटखटाने लगे… सिर्फ उसस्के बाद दोनों महिलाएं शावर से बाहर निकले अपने अपने जिस्म को टॉवल में लपेटे हुए, फिर ड्रेस हुए तब आरव को अंदर आने दिया गया!

जब आरव ने अपनी भाबी को भी भीगे हुए देखा तो कहा, “ाचा तो यह बात थी, दोनों एक साथ नाहा रहे थे वाओ!! अरे भाबी मुझे तो इस्सके साथ नहाने देती! कितना मिस किया मई ने अपनी संजू को! अब आप जाओ और मुझे अपनी डार्लिंग के साथ वक़्त बिताने तो दो!!”

हँस्ते हुए सान्वी ने आरव के गाल पर हलके से मारते हुए कहा, “चल जा एन्जॉय कर अपनी डार्लिंग के साथ मैं चली तेरे भैया के पास!”

और आरव ने संजना को बीएड पर धकेलते हुए उसस्के ऊपर चढ़ा और कहा, “आज मैं अपनी बेहेन के साथ सेक्स करूँगा, बोलो सिस्टर, करने डौगी नाह इस बरोथेर को हम्म?!”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “शैतान बन गए हो तुम, बेशरम, तुमको बिल्कुल शर्म नहीं अत किआ?”

आरव ने कहा, “अरे जब मुझको पता चला तो सोचने लगा के इतने दिनों से हम ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप में थे तो बड़ा एक्ससिटेमेंट हुआ और तुम्हारे साथ सोने की इच्छह और भी बढ़ गयी ऐसा क्यों हुआ पता नहीं!”

संजना के मुंह से यह निकल गयी, “तुम सब एक हो सब इन्सेस्ट के पुजारी इस घर में इसी लिए!!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………. (2150 वर्ड्स)
 
अपडेट 151 विवान एंड सान्वी टॉक अबाउट थम

आरव ने कहा, “अरे जब मुझको पता चला तो सोचने लगा के इतने दिनों से हम ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप में थे तो बड़ा एक्ससिटेमेंट हुआ और तुम्हारे साथ सोने की इच्छह और भी बढ़ गयी ऐसा क्यों हुआ पता नहीं!”

संजना के मुंह से यह निकल गयी, “तुम सब एक हो सब इन्सेस्ट के पुजारी इस घर में इसी लिए!!”

अब आगे…….

संजना ने वैसा कह दिया फिर अपने जीब को डेंटन में दबाते हुए आरव के चेहरे में देखा के वो किआ सवाल करेगा उस्सकी उस बात पर मगर शुक्र है के आरव संजना के बूब्स को चाटने में लग गया था और उस्सकी बातों को नज़र अंदाज़ किया! वार्ना संजना के बात का तो एहि मतलब था के सब इस घर में इन्सेस्ट के पुजारी हैं के चावला साहब बाप है और उसस्के साथ सेक्स करता है और आरव भाई है और वो बेहेन के saath….matlab तो एहि था और अगर आरव ने इस बात पर सवाल किया होता तो एहि पूछता के सब इस घर में इन्सेस्ट के पुजारी हैं तो मतलब विवान और पापा भी!!! ऐसी बात ज़रूर होते दोनों के बीच और किआ पता के संजना यह बात भी बता देती आरव को के खुद उस्का बाप भी उसस्के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखता है और वो भी उसस्के शादी के पहले से hi…. अब सोचने की बात यह है के अगर आरव को पता चला के उस्का बाप उसस्के शादी के पहले से hi संजना के साथ सेक्स करता था, और एहि बात अगर विवान को भी पता चला तो कैसा रहेगा इन् सब के रिलेशनशिप घर में?

सान्वी को सब पता है, और एक दिन सान्वी जान्ने की कोशिश में थी के संजना विवान को किसी लगती है…. तो किआ अगर विवान और आरव को पता चला के संजना खुद अपने बाप से सेक्स करती है तो किआ ज़्यादा एक्ससिटेमेंट बढ़ेगा, किआ शेयरिंग वाली फीलिंग आएगी सब में या जलन और ग़ुस्सा जनम लेगी?

चलो फिलहाल सान्वी के कमरे में देखते हैं किआ होता है उसस्के बाद संजना के कमरे के तरफ बढ़ेंगे.

सान्वी ने विवान को नहाने के लिए टॉवल वग़ैरा देदिया नहाने के लिए और दीप्ति को सुलाने चली गयी.

विवान नहाने के बाद जब सान्वी के साथ बीएड पर पाया गया तो बात संजना से hi शुरू हुई दोनों के बीच. शुरुवात विवान ने hi किया. सान्वी दिलचस्पी से उस्सको सुन रही थी क्यूंकि उस्सको खुद जानना था के विवान किआ सोचती है संजना के बारे में. लास्ट टाइम सान्वी ने सोचा था के वो खुद संजना को सेक्सुअली पसंद करती है, उसस्के ससुर संजना को पसंद करती है, आरव उस्सको चाहता है तो विवान किआ संजना के तरफ रूचि रखता है या नहीं, यह बात खटकी थी एक रोज़ सान्वी के मैं में और आज खुद विवान संजना के बारे में बात करना शुरू किया तो सान्वी बड़े आराम से उसस्के चेहरे में देखते हुए उस्सको सुनने लगी.

विवान ने कहा, “एक बेहेन मिल गयी घर में hi वह किआ बात है! बहोत अछि है नाह संजना? तुम उसस्के साथ कितनी क्लोज हो?!”

सान्वी शॉकेड उस्सको देखने लगी तो विवान ने सब कुछ बता दिया सान्वी को जो कुछ संजना ने बताया पुलिस स्टेशन में उन् दोनों को….. फिर सान्वी को भी बताना पड़ा के उस्सको सब पता है पहले से hi… उस्सने भी सब कुछ बता दिया जो कुछ चावला साहब ने उस्सको बताया…. मगर अब सान्वी इस सोच में डूब गयी के आरव को पता है के संजना उस्सकी बेहेन है और उसस्के साथ अभी अभी उस्सने दोनों को बैडरूम में चोर्रा और दोनों सेक्स करने जा रहे हैं….. सान्वी हैरान थी के उस्सने आरव के नज़र में संजना के लिए बहोत सेक्सुअल फीलिंग्स देखि थी मतलब यह जानते हुए के वो उस्सकी बेहेन है वो सेक्सुअली और भी अत्त्रक्टेड लग रहे थे संजना के तरफ और खुद संजना भी भूकी लग रही थी यह जानते हुए के आरव उस्का भाई है…. सान्वी समझ गयी के दोनों आरव और संजना इस रिश्ते से और भी सेक्सुअली इंटरेस्टेड हो गए हैं क्यूंकि जो कुछ उस्सने देखा संजना के कमरे में उस से सान्वी ने एहि नतीजा निकला के दोनों एक दूसरे में डूबने के लिए कितने उतावले थे….. सान्वी सोचने लगी के भाई बेहेन होते हुए भी दोनों में इतने सेक्सुअल फीलिंग्स और इंटरेस्ट कैसे हैं!!!

सान्वी ने विवान के सीने पर सर रखते हुए और उसस्के छाती के बालों में उँगलियाँ फरते हुए कहा, “ाचा जी, इतने दिनों से संजना इस घर में है और आज पहली बार आप को संजना दिखा किआ? मैं उस से बहोत hi क्लोज हूँ, क्यों?!”

विवान सान्वी के सर के बालों में अपना हाथ फेरते हुए कहता है, “सोचने की बात है के आरव को अब पता है वो उस्सकी बेहेन है और दोनों बीएड पर सेक्स करेंगे कैसा लगेगा आरव को सोचा है तुमने?!”

सान्वी ने विवान के चेहरे में सर उठा कर देखा और उसस्के दिमाग़ में चलते कश्मकश को समझने की कोशिश करते हुए कहा, “भाई बेहेन बनने से पहले दोनों हस्बैंड वाइफ है जी, तो मेरे ख्याल से तो नार्मल होगी दोनों के रिलेशनशिप….. क्यों आप को कुछ अजीब लग रहा है किआ?!”

विवान ने तब सोचा के वो संजना के बारे में कुछ ज़्यादा hi सोच रहा है और सान्वी को शायद ाचा नाह लगे इस लिए उस्सने टॉपिक को चेंज किया और कुछ और बात करने लगा मगर सान्वी उसी टॉपिक पर बात करना चाहती थी तो उस्सने पूछा,

“आप बताओ मुझे के आप को संजना किसी लगती है, मतलब अभी नहीं, बेहेन जान्ने से पहले किआ आप ने कभी उस्सको ग़ौर से देखा या सोचा कभी?!”

विवान: “वैसे तो मैं ने उस्सको कभी ग़ौर से देखा hi नहीं, हाँ शादी वाले दिन गद्य लग रही थी… उसस्के बाद सिर्फ एक बार सुबह को तुम्हारे साथ उस्सको किचन में देखा था मैं ने, वो भी तेरी तरह एक निघ्त्य में hi थी और खूबसूरत दिख रही thi…mujhe बहोत अच्छा लगा था तुम दोनों को एक साथ किचन में देख kar…wo खिलखिलाती रहती थी, जब देखो उसस्के होंठों पर एक मुस्कान और हंसी रहती थी… उस्का हंसमुख चेहरा उस दिन मुझे ऑफिस में दिन भर याद raha….aur एक बार रात को मैं ने उस्सको डैड के पास देखा था लाउन्ज में टीवी देखते हुए, तब भी वो निघ्त्य में hi थी और आरव शायद ड्रंक था उस रात को, और वो डैड के काफी क्लोज बैठी थी, दोनों में काफी क्लोसनेस्स है मैं ने सोचा था उस रात को……”

सान्वी सोचने लगी वो किश रात की बात कर रहे थे? खुद सान्वी को नहीं पता था वो बात. तो सान्वी ने पूछा, “कितने दिन हुए इस बात को? और मैं कहाँ थी उस वक़्त उस रात को?”

तो विवान ने कहा, “एहि कोई एक महीने पहले की बात है, तुम अपने कमरे में थी यहीं, मैं बारह बजे रात को घर आया था तो दोनों को लाउन्ज में देखा था…. क्यों पूछ रही हो?!”

सान्वी: “ऐसे hi… किआ संजना ने निघ्त्य के ऊपर रोबे पहनी हुई थी उस वक़्त या सिर्फ निघ्त्य में थी?”

विवान: “अरे यह किआ सवाल हुआ? अपने ससुर के साथ बैठी हुई थी तो रोबे भी पहनी होगी नाह? मैं ने ख्याल नहीं किया ह्म्म्मम्म शायद अरे हाँ संजना की बाहें दिखे थे मुझे मतलब रोबे नहीं पहनी हुई thi…are हाँ तो वो पापा के साथ वैसे बैठी थी और बहोत क्लोज जैसे….. ओह!!”

सान्वी समझ गयी के दोनों इश्क फार्मा रहे होंगे उस वक़्त वहीँ लाउन्ज में और संजना खुद गयी होगी उनके पास… मगर जब दोनों ने विवान की कार को गेराज में एते हुए देखा तो रुक गए होंगे और पास बैठने की एक्टिंग किया होगा दोनों ने….. और अब सान्वी सोचने लगी के अब विवान के मैं में किआ चल रहा है तो पूछा, “ओह” क्यों किया? किआ हुआ?!”

विवान: “नहीं सोच रहा हूँ संजना डैड के कितने क्लोज हैं? किआ उस्सको पहले से पता था के डैड उसस्के पापा है किआ?!”

सान्वी: “मुझे किआ पता? तुम खुद पूछ लेना उस से….”

विवान: “सान्वी, अब सोचो डैड को कैसा फील हो रहा होगा के उस्का छोटा बीटा और उस्सकी बेटी एक साथ कमरे में, पति पत्नी का रिश्ता निभा रहे हैं…. डैड को किआ फील हो रहा होगा इस बारे में?!”

सान्वी को विवान का इंटरेस्ट उस बारे में जानकार काफी अजीब लगने लगा, उस्सको लगा के विवान कुछ ज़्यादा hi इंटरेस्ट ले रहा है इस बारे में. तो सान्वी ने कहा,

“पिता जी को मजबूरन सब एक्सेप्ट करना पर रहा है नाह, अब तो पीछे नहीं मूढ़ सकते, वापस कुछ बदल तो नहीं सकते नाह? तो जैसा चल रहा है वैसा hi सब कुछ उनके ख्याल से चलने देना चाहिए, ऐसा hi सोच रहे होंगे वो….. मेरे ख्याल से तो एहि बात होगी उनके दिमाग़ में, क्यों तुमको कुछ ठीक नहीं लग रहा किआ?

विवान ने कुछ नहीं कहा और सान्वी के बूब पर अपने मुंह रखा और चाटने लगा…… सान्वी कसमसाती गयी और जल्द hi सान्वी को बिल्कुल नंगा कर दिया विवान ने और उसस्के ऊपर चढ़ गया….. उस वक़्त विवान के दिमाग़ में संजना दिख रहा था, वो यह सोच कर सान्वी को चुम और चाट रहा था के वो संजना के ऊपर बिस्तर पर लेता हुआ है, उस्सको आरव भी दिख रहा था, वो यह सोचते हुए सान्वी के साथ सेक्स करने लगा जैसे वो आरव है और सान्वी संजना है….. उधर सान्वी के मैं में भी वही खयालात पैदा हुए, वो भी संजना और आरव को hi सोचने लगी और यह सोचते हुए उस्सने भी विवान से सेक्स किया के वो खुद संजना बानी हुई है और आरव उस्का भाई उसस्के साथ सेक्स कर रहा है……. सेक्सुअल इंटरकोर्स बहोत इंटेंस था, और बहोत hi जल्दी दोनों ओर्गास्म को रीच हुए…. बहोत गरम माहौल बन गया और विवान का इरेक्शन ज़बरदस्त रहा पुरे इंटरकोर्स के दौरान….. सान्वी को उस्सने बरसों बाद आज इतनी जोइश में भोगा… सान्वी विवान की सेक्सुअल एपेटाइट को जानती है, उस्सको मालूम है के विवान ऐसा नहीं है, वो बहोत कम सेक्स करता है उसस्के साथ दीप्ति के बिरथ के बाद मगर आज रात को जिस तरह से विवान ने सेक्स किया उस्सको उस्सकी शादी की सुहाग रात याद आगयी….. सान्वी समझ गयी के सब संजना की वजह से हुआ, सान्वी समझ गयी के संजना को सोच कर hi आज विवान ने उसस्के साथ सेक्स किया…….. आज विवान ने सान्वी से नहीं संजना से सेक्स किया यह पक्का यकीन था संवी को……

तो बे कॉन्टिनोएड……………….
 
अपडेट 152 चावला साहब एंड संजना….

उधर संजना और आरव भी उसी तरह ज़बरदस्त सेक्सुअल इंटरकोर्स में लगे हुए थे, बहोत hi इंटेंस इंटरकोर्स चल रहा था दोनों के बीच….. आरव संजना को अपनी बेहेन समझ कर छोड़ रहा था और संजना के मैं में उस्सने आरव को अपना भाई बनाया हुआ था उस दौरान और दोनों इतने गरम, सेक्सुअली अरूसेड थे के दोनों को पता hi नहीं चला कब दोनों ओर्गास्म रीच हो आये और हांफते हुए दोनों एक दूसरे से चिपके बीएड पर हंससने लगे….. और आरव ने हँस्ते हुए hi कहा, क्यों मेरी बहना मज़ा आया भाई के साथ सेक्स करते हुए? आज की इंटरकोर्स बहोत ज़बरदस्त था नाह क्यों सच बता!!” संजना ने उसस्के छाती पर घूंसा मारते हुए कहा, “जंगली कहीं का अपनी बेहेन को छोड़ता है तू, जानवर कहीं का हीहीहीहीहीहीही!”

और हँस्ते हुए संजना ने अपने सूझे हुए होंठ पर हाथ रखते हुए दर्द में “आआह्ह्ह्ह” किया… तो जल्दी से आरव ने उस्सको बाहों में भरके प्यार से उसस्के उस सूझे हुए होंठ को चूमा और संजना को बड़े प्यार से सीने से लगाया…..

उन् दोनों के कमरे के दरवाज़े के पास चावला साहब खड़ा सुन रहा था दोनों को….. वो कुछ कहने के लिए आया था और दोनों को सेक्स करते हुए सुना और दोनों के बातें भी सुने उन्हों ने, उस्सको पता चला के दोनों भाई बेहेन के रिश्ते से और भी सेक्सुअली अत्त्रक्टेड हैं!! और सोचने लगा के आरव को भी पता चल चूका के संजना उस्सकी बेहेन है फिर भी उस्सको कोई फरक नहीं पड़ा. इस से चावला का एक बोझ हल्का हुआ मगर सोचने लगा के कैसे आरव को पता चला, किआ संजना ने उस से कहा? तो किआ विवान को भी पता है यह सोचने लगे चावला साहब….. वो इसी लिए इधर आया था संजना से hi बात करने के लिए के वो किसी बी कीमत पर आरव को पता नहीं चलने डिंक इ वो उस्सकी बेहेन लगती है मगर दोनों के बातें सुनकर चावला साहब हताश भी हो गए और एक तरफ से उनको सुकून भी मिला.

फिर भी चावला साहब ने दरवाज़ा खटखटाया!

आरव झट से बीएड से उतारते हुए संजना से कहा, “ोफो कौन होगा?!”

संजना जल्दी से अपनी निघ्त्य पेहेनते हुए कहा, “जवाब तो दो तब तक मैं कपडा पहनती हूँ!”

आरव ने अपना शार्ट और टीशर्ट पेहेनते हुए कहा, “हाँ अत हूँ, कौन है?!”

तो बाहर से चावला साहब ने कहा, “मैं हूँ आरव मुझे कुछ बात करनी है!”

अब संजना ने आरव को देखते हुए फुस्फुसाते हुए कहा, अरे जाओ दरवाज़ा तो खोलो अब मैं यूंकि कम्बल के निचे रहती हूँ, तुम पापा को अंदर आने को तो कहो पता नहीं उसे किआ कहना है!”

आरव ने दरवाज़ा खिला और अपने डैड को अंदर आने को कहा, और चावला साहब षाले हुए बीएड तक गए और बीएड पर बैठ कर संजना के सर पर हाथ फरते हुए कहा, “किसी हो? दर्द हो रहा है घाव पर?”

आरव देख रहा था के उसस्के डैड में संजना के लिए बहोत प्यार था और फ़िक्र भी, उस्सको ाचा लगा के बाप को बेटी का कितना ख्याल है…. मगर संजना उस वक़्त अपनी निघ्त्य में थिस और उसस्के काँधे पर पतली सी स्ट्राप थी जिस में उस्सकी गोरी बाज़ू साफ़ दिख रहे थे और आरव ने ग़ौर किया के संजना ने ब्रा नहीं पहनी हुई है, और जिस जगह आरव खड़ा हुआ था वहां से उस्सको संजना की आर्मपिट के बगल में संजना की बूब्स काफी दिख रहे थे….

चावला साहब ने तब संजना के सूझे हुए होंठ पर हलके से अपना हाथ फरते हुए कहा, इतनी प्यारी सी होंठ पर इतनी सुझान, कुछ नहीं लगाया तुमने इस पर? कितना दुःख रहा होगा नाह?”

संजना में मुस्कुराते हुए कहा, “सान्वी भाबी ने काफी दवा दिए, और गोलियन भी दर्द बहोत कम है आप फ़िक्र नाह करें मैं ठीक हूँ!”

तब चावला साहब ने कहा, “आरव बीटा मुझे संजना से कुछ प्राइवेट बातें करनी किआ तुम हम दोनों को थोड़ी देर के लिए बात करने के लिए अकेला चोरर सकते हो?!”

आरव ने आराम से कहा, “ऑफ़ कोर्स पापा no वर्रिएस आप दोनों बातें कीजिये मैं लाउन्ज में जाता हूँ, आज मैं भी एक ड्रिंक बनता हूँ आप के बॉटल से हेहेहे!”

चावला साहब ने कहा, “ठीक है बीटा जाओ एक ड्रिंक बना लो आराम मिलेगा, तब तक मैं संजना से थोड़ा बात कर लेता हूँ.”

आरव निचे चला गया और खुश था के उसस्के डैड संजना का कितना ख्याल कर रहा है; वो निचे एक ड्रिंक बना के लाउन्ज के काउच पर बैठ गया और बहोत खुश दिख रहा था. वो सिर्फ एहि सोच रहा था के मुंडेर को लेकर उसस्के डैड संजना से कुछ डिसकस कर रहे होंगे…

आरव के जाने के कुछ लम्हे बाद चावला साहब ने संजना को ज़ोर से अपने बाहों में भरा और उस्सको चूमते हुए पूछा, “आरव को कैसे पता चला के तुम उस्सकी बेहेन हो? मैं ने मन किया था नाह तुमने बताया उस्सको?!”

संजना ने कम्बल हटा दिया और अपने जिस्म को अपने पापा के बाँहों में सिमट दिया और कहा, “पापा उस वक़्त लॉक उप में मैं बहोत तनहा और अकेली महसूस कर रही थी और जब दोनों मुझसे मिलने आये तो मैं टूट सी गयी और मेरे मुंह से सब बात निकल गयी ी ऍम सॉरी, मगर दोनों को कुछ ज़्यादा हैरानी या नाराज़गी कुछ नहीं हुए बल्कि दोनों खुश लगने लगे और मज़ाक भी करने लगे, तो मुझे अच्छा लगा और विवान भाई को तो जैसे सब पहले से पता था, उस्सको आप के और मम्मी के बारे में शुरू से पता था शायद उसस्के बातों से ऐसा लगा मुझे….”

चावला साहब संजना के जिस्म के उन् हिस्सों को देखते हुए जो निघ्त्य में दिख रहे थे, अपने हाथों को उन्ही जगाओं पर फर्र्ना शुरू किया और किश करने लगे संजना को और उनके किश को संजना अछि तरह से रेस्पोंद भी कर रही थी मगर बार बार अपने सूझे हुए होंठ को हाट से छह रही थी….. फिर संजना ने धीरे से कहा,

“पापा कहीं आरव अचानक अंदर वापस नाह आजाये और हमको ऐसे देख लिया तो किआ होगा?!”

चावला साहब ने संजना के बूब को करेस करते हुए कहा, “बिना खटखटाये और इजाज़त लिए वो कभी नहीं आएगा, उस में तमीज़ है, और वो ड्रिंक लेने गया है तो इतनी जल्दी तो नहीं वापस ानेव अला स्वीटहार्ट!”

और चावला साहब का हाथ संजना के जाँघों पर गया और सहलाते हुए उस्सने अपने हाथ को ऊपर किया तो पाया के संजना ने पंतय नहीं पहनी हुई थी और चावला का हाथ सीधे उस्सकी गीली छूट तक चले गए, और उनके छुवन से संजना ने अपने पापा को और भी ज़ोर से बाहों में जाकर लिया और अपने टांगों को फैला दिया बीएड पर…..

चावला साहब अपने दिमाग़ में यह सोचते हुए के अभी अभी उस्सने सुना के दोनों भाई बेहेन कितने एन्जॉय कर रहे थे यह जानते हुए के दोनों भाई बेहेन हैं और ईन्सेस्तुओस एनकाउंटर का कितना मज़ा ले रहे थे, इस बात को सोचते हुए चावला साहब का जमके खड़ा हो गया था और कपडे के अंदर से hi संजना के जाघों पर अपने तन्ने हुए लुंड को दबाया और कहा,

“स्स्स्सस्ठ्ठ आआआहहह, तुम्हारा जिस्म सच में तेरी माँ की तरह hi है, आरी मेरी गद्य तुमने अभी अभी भाई बेहेन के रूप में सेक्स किया नाह आरव के साथ सच बता एहि हुआ था नाह अभी तुम दोनों के बीच? आरव को बड़ा मज़ा आया अपनी बेहेन के साथ सेक्स करते हुए हम्म? सच बता मुझे नाह….”

संजना अपने होंठों को दबाते हुए मुस्कुरायी और धीरे से कसमसाते हुए अपने पापा के बाहों में कहा, “मैं किआ करूँ पापा, आप सबको मैं हर रूप में पसंद हूँ, आप की बहु भी हूँ और बेटी भी उस्सकी पत्नी भी हूँ और बेहेन भी, अब मेरा जिस्म आप सबको इतना ख़ुशी देता है तो मैं कर भी किआ सकती हूँ, हम्म पापा? आप hi बातो नाह!”

चावला साहब ने अपने लुंड को कपडे से बाहर निकल कर संजना के जाँघों के बीच रगड़ते हुए कहा, “मगर सच बता किआ अभी अभी भाई बेहेन के रूप में सेक्स करते हुए ज़्यादा मज़ा आया या जब पति पत्नी की तरह करते थे तुम दोनों तब ज़्यादा मज़ा अत था?”

“संजना ने चावला साहब के कान को अपने दांतों में दबाते हुए और हलके से अपना जीब उनके कान के पीछे फरते हुए कहा, “सच बोलूं? आज उसस्के साथ करते वक़्त बिल्कुल वैसे फीलिंग्स आये जो आप के साथ करते वक़्त अत है, हाँ ज़्यादा हॉट और एक्ससिटिंग था, और शायद आरव को बहोत hi ज़्यादा एक्ससिटेमेंट हुई यह जानकार के वो अपनी बेहेन के साथ कर रहा है, बार बार बहना बहना कह रहा था करते वक़्त, ऐसा क्यों पापा?!”

और तब चावला साहब ने अपने लुंड को संजना के अंदर घुसते हुए कहा, “इसी को ईन्सेस्तुओस अरौसल और लस्ट कहते हैं डार्लिंग अपने खून के साथ करने में एहि वो मज़ा है जो आम रिश्तों में नहीं अत, जब कोई अपने के अंदर अपने जिस्म के किसी हिस्से को डालता है या अपने अंदर उस्सको फील करता है तो एहि एक्ससिटेमेंट होता hai….issi लिए तो आरव को इतना मज़ा आया और तुमको भी, और अब मुझे सब जान कर के तुम दोनों भाई बेहेन कितने खुश थे एन्जॉय करते वक़्त मुझे भी डबल एक्ससिटेमेंट होने लगा और आह, आआह्ह्ह्ह मैं झड़ने वाला हूँ स्वीटहार्ट आआगगगगगगठ्ह स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह लो हो गया देखा कितनी जल्दी झाड़ गया मैं भी !!!”

क्यूंकि संजना अभी अभी झड़ी थी आरव के साथ हु नहीं झाड़ पायी मगर अपने पापा को बहोत खुश किया उस्सने….. चावला साहब लेट गया संजा के ऊपर झड़ने के बाद और हांफते हुए कहा, “तुम हम सब की जान लोगी इस घर में baby….bahot कमाल की चीज़ हो तुम, कोई शक नहीं के इस घर का एक बहोत हैं किरदार बन गयी हो तुम, ऊपर से सान्वी भी तुम पर जान देने लगी है, मर्द हो या औरत तुमसे कोई दूर नहीं रह पाएगा अब….”

संजना ने हँस्ते हुए कहा, “ok अब जल्दी से अपने कपडे पहनिए आरव के आने से पहले मैं कम्बल के निचे चली जाती हूँ….. और हाँ पापा आप ने सब घर के लोगों के बारे में बात किया मगर विवान भाई के साथ तो मेरा कोई वैसा सम्बन्ध नहीं है….”

चावला साहब ने तब पूछा, “विवान क बर्ताव कैसा था जब उस्सको पता चला के तुम उस्सकी बेहेन हो?”

संजना ने कहा, “आज पहली बार उस्सने मुझको गले लगाया पुलिस स्टेशन में और हाँ, वो मुझको और आरव के रिश्ते को लेकर हमारा टांग खिचाई करने लगा tha…aarav को वो इस रिश्ते का जैसे बढ़ावा दे रहे थे और बार बार मुझको देखे जा रहा था, कुछ ज़्यादा hi क्लोसनेस्स दिखा रहा था मेरे तरफ आज वो….”

तब चावला साहब ने कहा, “तो तू गयी काम से अब, देखना वो भी कदम बढ़ाएगा तेरे तरफ, मुझे पूरा यकीन है के वो भी चाहने लगा तुझे, और कैसे भी करके वो ज़रूर मौके के तलाश में रहेगा तेरे पास आने की, सीने से लगाया तुझे, तो समझो शुरुवात हो गयी…. मेरा यकीन करो उस्सको यह जान कर के तुम अपने भाई के साथ सेक्स करती हो, यह उस्सको बेचैन कर रहा होगा और उस्सको भी तुम्हें चखने का मैं कर रहा होगा….. और सुन गद्य, जब बी उस्सने तुझसे करने की कोशिश की, या करने में सफल हुआ तो मुझे ज़रूर बताना okay बेबी?!”

यह सब सुनकर संजना के मैं में एक अजीब सी आग जैसे दौड़ी, और विवान को सोचते हुए उस्सने मैं में एक अजीब सी फीलिंग हुई फिर चावला साहब से कहा,

“और अगर आरव को कभी यह पता चला के आप भी मेरे साथ सेक्स करते हो तब पापा? तब कैसा लगेगा उस्सको और आप के ख्याल से विवान को पता चला के मैं और आप पहले से hi यह सब करते हैं तब उस्सको कैसा लगेगा? किआ आप तीनों मुझको शेयर करोगे? या दुश्मनी हो जाएगी तीनों के बीच? ऊपर से अगर सब बातें सान्वी भाबी को भी पता चली तो? चलो यह तो सान्वी भाबी को पता है के मेरे और आप के बीच किआ रिश्ता है, और साड़ी बातें आरव, विवान को भी पता चला तब कैसा रहेगा माहौल और हमारे बीच के रिश्ते?!”

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (2100 वर्ड्स)
 
अपडेट 153 लास्ट अपडेट

दूसरे दिन सुबह को मामूल की तरह संजना और सान्वी दोनों किचन में मौजूद थे सुबह को जब चावला साहब एक्सरसाइज कर रहे थे टेरेस पर. यह हर सुबह की रूटीन थी और दोनों महिलाएं चावला साहब से बारी बारी कर के चाय देने जाते और थोड़ा फ़्लर्ट भी होते और कभी चिपका चिपकी भी होते इन लोगों में….

10 बजने के बाद आरव और विवान दोनों तैयार हुए ऑफिस जाने के लिए और इस सुबह को विवान कुछ पहले उठ गया था और उस्सकी नज़र बार बार संजना पर रुक रहे थे. आरव को किचन में ज्वाइन करने से पहले विवान संजना के जिस्म को बार बार घुर्र रहा था और सान्वी ने अछि तरह से नोटिस किया, संजना को भी पता था के विवान उस्सको देख रहा था हर बार. वो भी अपनी निघ्त्य में hi थी सान्वी की तरह मगर दोनों लेडीज के ऊपर वाला गाउन भी था निघ्त्य पर, फिर भी विवान की नज़र नहीं हट रही थी संजना पर से और आखिर में यह चावला साहब ने खुद भी नोट किया.

एक या दो बार ऐसा भी हुआ जब विवान को कुछ सर्वे करना था तो संजना hi गयी उस्सको सर्वे करने और आपस में बात भी किये दोनों ने, मगर सिर्फ फॉर्मल बातें थे. आदत थी संजना की मुस्कुराकर मीठे बातें करना तो वैसे hi किया उस्सने विवान के साथ और एक बार तो संजना की बाँहों को विवान के बाहों से छूना पारा कुछ ऐसे पोजीशन हुए थे और उस दौरान विवान के जिस्म में एक आग दौड़ी जिस को संजना ने खुद फील किया और सान्वी ने नोट किया.

आज विवान आरव से पहले नाश्ता करके घर से निकला और सान्वी से कहा के आरव को अपनी कार से आने को कहे क्यों के उस्सको आज जल्दी ऑफिस पहुंचना था. तो हमेशा की तरह विवान ने सान्वी को हुग और किश किया मगर आज डिफरेंट था क्यूंकि उसस्के सान्वी को हुग करने के बाद संजना को भी हुग किया यह कहते हुए, “चलो आज तुमको भी गले से लगा लेता हूँ और आज के बाद हमेशा ऐसा होगा सिस्टर जो हो, और जिस दम उस्सने संजना को गले लगाया और उस्का पूरा बदन संजना से चिपक गया और उस्सने हलके से उसस्के दोनों गालों पर किश किया. उस वक़्त दोनों चावला साहब और सान्वी मुस्कुराते हुए दोनों को देख रहे थे. संजना को अजीब और ाचा भी लाहा विवान के उस हुग से. जब विवान ने उस्सको बाहों में लिया था तब संजना की बाहें खुद बा खुद खुल के विवान को भी अपने बाँहों में भर लिया था और एक बात हुई जो संजना ने किसी से नहीं कहा वो यह के आहिस्ते से विवान ने संजना के कान में कहा, “बहोत अछि महक रही हो मऊआअह!”

विवान के जाने के 10 मिनट्स बाद आरव निचे तैयार होकर आया नाश्ता लेने. उस्सने भी हमेशा की तरह नाश्ता के बाद सान्वी को हुग किया तब संजना को और चला गया ऑफिस.

घर में सब नार्मल गुज़र रहे थे, दीप्ति भी उठी तैयार किया गया ॉस्को और उस्सकी स्कूल बस आयी तो उस्सको संजना गयी बस तक पहुंचाने को. उस वक़्त चावला साहब सान्वी से चिपका हुआ था किचन में.

दिन के कोई बारह बजे संजना ने डीडे किया बाहर ड्राइव पर जाने को जो उस्सकी आदत थी. उस्सने धीरे से सान्वी से कहा, “तुमको उनके साथ मज़ा करने के लिए चोरर रही हूँ तुम दोनों खूब एन्जॉय करो मैं चली एक लॉन्ग ड्राइव पर.”

पता नहीं क्यों आज संजना को आरव से मिलने का मैं किया ऑफिस जाकर. तो वो गयी उसस्के ऑफिस. आज पहली बार वो वहां गयी थी उस से मिलने के लिए.

और वहां पहुंची तो विवान से मिले वो क्यूंकि आरव किसी इम्पोर्टेन्ट कांफ्रेंस में था तो विवान ने संजना को अपने ऑफिस में रिसीव किया.

उसस्के ऑफिस में सोफे भी थे जिस पर विवान ने संजना को बिठाया और खुद बैठा उसस्के पास. विवान संजना को लेकर बहोत hi अरूसेड था. कल रात को उस्सने जिस तरह से संजना और आरव को दिमाग़ में बसा कर सेक्स किया था सान्वी के साथ वो भुला नहीं था. और संजना को बिल्कुल पता था के विवान उसस्के तरफ आकर्षित है. संजना के मन में भी कुछ हो रहा था क्यूंकि चावला साहब से इस बारे में बात कर लिया था दोनों ने. संजना एक ब्लाउज और स्कर्ट में थी, जो बहोत hi सेक्सी थे. सोफे पर बैठने से उस्सकी स्कर्ट जांघों के ऊपर उठ गए थे और उस्सकी क्लीवेज भी दिख रहे थे उस डोलते ब्लाउज में. और विवान की नज़र वहीँ टिक्के हुए थे. विवान ने अपने ऑफिस के दरवाज़े पर ‘दो नॉट डिस्टर्ब’ का सिग्न लगाया और संजना के करीब बैठ कर हलके से उसस्के गाल से बाल की एक लत्त को हटाते हुए धीरे से पूछा, “तो बताओ कैसा लगा आरव के साथ रात गुज़ारना यह जानने के बाद के वो तुम्हारा भाई है?!” संजना शॉकेड नहीं हुए बिल्कुल उसस्के सवाल से बल्कि उस्सको जैसे पता था यह बात विवान कभी न कभी उस से ज़रूर पूछता. मगर उस्का चेहरा लाल ज़रूर हुआ और मुस्कुराते हुए विवान से कहा, “क्यों आप के ख्याल से कैसा रहा होगा?!”

विवान ने उसस्के जांघ पर हाथ फरते हुए कहा,

“मुझे नहीं पता कैसा रहा होगा मगर मैं आरव होता तो कल रात वाला सेशन सबसे ज़बरदस्त रहा होता, हिस्ट्री क्रिएट करने वाला इंटरकोर्स रहा होता!”

और संजना ने उसस्के हाथ पर अपना हाथ रखते हुए उसस्के हाथ को ज़्यादा जांघ के ऊपर जाने से रोकते हुए कहा, “हम्म्म तो समझ लीजिये के वैसा hi था!”

और आरव ने कहा, “एक भाई को इतना खुश किया और दूसरे भाई को नहीं यह बड़ी ना इंसाफ़ी हुई नाह? मुझे कब वो ख़ुशी डौगी?!”

तो बिना झिजक के संजना ने विवान के गाल पर किश करते हुए कहा, “हम्म्म पता नहीं कभी मौका मिला तो शायद आप को भी वो ख़ुशी मिल जाएगी हीहीहीहीही!!”

और विवान ने झट से संजना के मुंह को अपने मुंह के तरफ किया और ज़ोर से किश करने लगा संजना को बाहों में भरके, और संजना ने उस किश को बहोत अछि तरह से रेस्पोंद किया, बड़े प्यार और आराम से. उस दौरान विवान का हाथ संजना के स्कर्ट के बिल्कुल अंदर चले गए और उसस्के उँगलियाँ संजना के पंतय को टच कर गया और करेस करने लगा, तो संजना किश को रोकते हुए थोड़ा हांफते हुए कहा, “यह उचित जगह नहीं है, घर पर या कहीं बाहर मिलेंगे तो बेहतर होगा….”

विवान का लुंड ज़बरदस्त खड़ा हो गया था और उस से सहा नहीं जा रहा था वो संजना को मानलो तुरंत छोड़ना hi चाहता था वहीँ उसी सोफे पर उसी वक़्त. मगर संजना उठ कड़ी हुई और कहा, “आरव से केहडेना मैं मिलने आयी थी आज पहली बार, बूत सडली वो बिजी है तो मैं एक लॉन्ग ड्राइव करने जा रही हूँ शाम को घर पर मिलूंगी……”

इतना कहकर संजना ऑफिस से निकल गयी.

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निकलते वक़्त संजना बिल्कुल नार्मल थी, बल्कि मुड़कर कई बार विवान को देखा और उस्सको एक ेंख भी मारा मुस्कुराते हुए, विवान बहोत खुश था और अपने पंत के ऊपर अपने लुंड को सहलाते हुए संजना को जाते देख रहा था…..

मगर संजना जब ड्राइव करने लगी तो उसस्के दिल ो दिमाग़ में नेगेटिविटी ने घर banaaye….wo खुद को कॉसने लगी और खुद को बुरा भला कहने लगी. खुद को गालियां देने लगी…. आनंद के बातों को याद करने लगी जिस ने कहा था, “तेरी माँ रंडी थी तू भी रंडी निकली अपनी माँ की तरह सब से चुदवाती फिररति है…..”

हाईवे पर फुल स्पीड से ड्राइव किये जा रही थी संजना और इन् बातों को सोचते हुए उस्सकी मानसिक संतुलन कण्ट्रोल में नहीं थी और उसस्के माथे से पसीने के कुछ बूँदें टपकने लगे थे और संजना खुद से चिल्लाते हुए कहा, “हाँ मैं बुरी औरत हूँ, रंडी हूँ सब से चुदवाती हूँ, अपने बाप से चुदवाती हूँ, अपने भाई से चुदवाती हूँ दोनों भाई से चुदवाती हूँ, हाँ मैं ग़लत औरत हूँ मुझे जीने का कोई हक़ नहीं मुझको मर्डर जाना चाहिए……”

इतना कहा चिल्लाते हुए संजना ने और सामने से एक बहुत बड़ा 30 टोंस वाला भाड़ा हुआ ट्रक सामने से ारः था और संजना ने अपने स्टीयरिंग व्हील को राइट के तरफ एक झटका दिया, 120 कंस की स्पीड से उस ट्रक से टकराया और आधा से ज़्यादा कार ट्रक के निचे घुस गया और संजना की मौत ों थे स्पॉट हो गयी!!!!!!!!

उस्सकी कार लोहे और तीन की चकना चूर हुए उस बड़ी ट्रक के निचे ग़ुस्से हुए पाए गए……

बाद में फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस वाले सब इकठा हुए उस जगह जहाँ ट्रैफिक जैम हो गए और संजना की बॉडी को टुकड़ों में निकला गया उस कार के लोहे और तीन के बीच में दबोचे हुए…. कहीं टांगों के टुकड़े मिले तो कहीं बाज़ू के, तो कहीं जिस्म के टुकड़े… पहचानना मुश्किल था के वो किसी इंसान का बॉडी था या जानवर का…..

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कोई 6 महीनों तक चावला फॅमिली के घर में मातम मनाया गया. बहोत रोना धोना हुआ. आरव जैसे पागल हो गया था…. दीप्ति का भी रो रो कर बुरा हाल हो गया था……

विवान शॉकेड था और सोचा के ठीक जब वो संजना के करीब हुआ और उसस्के साथ िस्ख करने को तैयार हुआ तभी यह सब होना था…. खुद से उस्सने कहा के उसस्के तकदीर में वैसा प्यार और ईन्सेस्तुओस रिलेशनशिप था hi नहीं…..

चावला साहब जैसे बेहाल हो गए थे…. उस्सने यह सोचा के दो इंसानों के खून किया गया इसी लिए ऊपर वाले ने शायद बदला लिया और उस से संजना को चीन लिया गया…..

बेहरे हाल वक़्त गुज़रता गया और चावला साहब को सुकून मिला तो सिर्फ सान्वी के बाहों में. सान्वी ने उनको बहोत संभाला अपने प्यार से, आरव को भी सान्वी ने hi संभाला और खुद अपने पति को भी…..

सान्वी घर के तीनों मर्दों को अकेली संभाल रही थी…. बेशक तीनों से सेक्स करती और तीनों को ख़ुशी देती सान्वी अकेली….

एक साल के बाद घर में सब फिर नार्मल जैसे चलने लगे….. विवान को बिल्कुल पता नहीं चला के सान्वी उसस्के बाप और भाई को खुश करती है. आरव को भी पता नहीं चला के सान्वी चावला साहब के साथ भी सोती है. मगर हाँ चावला साहब को पता था के सान्वी उसस्के दोनों बेटे के साथ सोती है अलग अलग मौके पर.

सान्वी को पता था के कब किश के साथ बिस्तर पर जाना है और कब विवान के साथ. कभी किसी दिन भी ऐसा नहीं हुआ के एक भी मर्द को सान्वी ने मिस किया.

आरव ने फिर कभी शादी नहीं किया. वो संवी से खुश था, उस्सको और कोई नहीं चाहिए था….

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13 इयर्स लेटर – 13 साल बाद

विवान आज काम पर नहीं गया था, चावला साहब सान्वी को लेकर कहीं गया हुआ था और आरव ऑफिस में था.

विवान लाउन्ज से उठकर अपने कमरे में गया तो दीप्ति जो अब 18 साल की हो गयी थी शावर से निकल के एक टॉवल में लिपटी हुई कमरे में आरही थी. उसस्के जिस्म के जगह जगह पर पानी के बूदें दिख रहे थे और विवान ने मुस्कुराते हुए उस्सको देख कर अपने बाहों को खोला, तो दीप्ति ने “हीहीहीहीही” करते हुए उसस्के बाहों में गयी. विवान ने उसस्के कांडों पर अपने जीब चलाते हुए कुछ पानी के बूंदों को छाता और एक लम्बी सांस लेते हुए कहा, “तुम कितनी मिलती जुलती हो संजना से, कौन कहता है संजना नहीं है तुम उस्सकी कार्बन कॉपी हो? तुम बिल्कुल संजना दिख रही हो स्वीटहार्ट.”

दीप्ति ने कहा, “आप लोगों को क्यों मैं संजना चची जैसी दिखती हूँ मैं समझ नहीं पाती, चाचू भी एहि कहते हैं, मैं तो चावला हूँ, पर चची तो चावला नहीं थी तो हम दोनों कैसे एक जैसा दिख सकते हैं डैड?!”

विवान ने अपने जीब को उसस्के काँधे से उसस्के छाती के तरफ बढ़ाते हुए कहा, “तुम अपने चाचू या दादू से पूछना के क्यों तुम संजना जैसी दिखती हो और क्यों वो चावला जैसी दिखती थी…!”

इतना कहते हुए विवान दीप्ति को बीएड तक लगाया और लेटाया तो दीप्ति ने वही ‘हीहीहीहीहीही’ कहते हुए कहा, “डैड मैं ने अंदर कुछ नहीं पहना हुआ है अभी….”

विवान उसस्के ऊपर चढ़ते हुए, और उस्सकी जाँघों पर अपने हाथ को ऊपर फरते हुए कहा, “जब अपने चाचू या दादू के साथ होती हो तब कुछ पहनी हुवी होती हो किआ?!!!”

थे एन्ड!

रिटेन बी शाह खान (कासिनर)
 
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