Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest - Page 14 - SexBaba
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Chawla Family Ki Kahani - Adultery, Romance,Eroticism, Incest

अपडेट 125 आरव डेस्पेरेट

आरव ग़ुस्सा हुआ और कहा, “दमन आईटी मन व्हाट थे हेलल इस थिस, मैं ने इतना कुछ प्लान किया हुआ है, मैं इतना खुश था के अगर मैं वहां नहीं जा सका तो तुम होगी तो मैं एन्जॉय कर पाउँगा तुम्हारे साथ, ी रियली वांट तो मेक लव विथ यू, मैं तुम्हारे जिस्म के कपडे को एक एक करके उतारना चाहता हूँ , तुम्हारे बूब्स को तो देख लिया हूँ बाकी के जिस्म को एक्स्प्लोर करना चाहता हूँ, ी वांट तो किश योर व्होले बॉडी, ी वांट तो पेनेत्रते यू, मुझसे यह ख़ुशी मत छीनों प्लीज, यू विल हैवे तो के, यू विल के नाह भाबी प्लीज नाह मत करो नाह प्लीज ी बेग ऑफ़ यू!!” ……

अब आगे………

आरव अपने सर के पीछे अपने हाथ फरते हुए इधर उधर चलने लगा अपने कमरे में सब सोचते हुए के यह किआ हो गया, उस्सने तो बड़े अरमानों के साथ सोच रखा था के सान्वी को यहाँ बुलाएगा और उसस्के साथ रात गुज़रेगा, बहुत एन्जॉय करेगा उसस्के साथ….. मगर सान्वी अब सब उल्टा बोलने लगी थी….

आरव सोचने लगा के अभी कुछ देर पहले hi तो सान्वी ने ब्रा में उस्सको खुद को दिखाया था, तो आरव ने सोचा के ग़लती उसी का है, उस्सको इतना कुछ नहीं बोलना चाहिए था, अगर उस्सने इतना कुछ नहीं बोलै होता सान्वी को तो अभी वो फिर से स्क्रीन पर दिखती, सुबह 3 बजे तक दोनों स्काइप पर बातें करते आराम से, ख़ुशी से, वो सान्वी के जिस्म को और भी ज़्यादा देखता, आरव ने धीरे धीरे सान्वी के ब्रा भी उतारवाने को सोच लिया था जैसे उस दिन देखा था, आरव ने सब सोच लिया था के उस्सको ब्रा उतारने को कहता यह कहकर के उस दिन तो मैं तुम्हारे सामने था आज तो इतना दूर हूँ तो स्क्रीन पर तो देखने दो न अपने ब्यूटीफुल बूब्स को, वो कैसे भी करके सान्वी को बेहला फुस्सला कर उस्सकी ब्रा उतरवा लेता यह आरव को पूरा यकीन था, सब रिकॉर्ड करता वो और बाद में देख कर स्लो मोशन और पॉज करके शैग करता इतना सब कुछ सोच रखा था आरव ने और अब किआ वो सब नहीं हो पाएगा? यह सब सोच कर आरव के दिमाग़ में बहोत बड़ा हलचल मचा हुआ था, वो जैसे अब सच में पागल हो रहा था और एक दिमाग़ी पेशेंट की तरह बेहवे करने लगा और थोड़ा बहोत हंससने लगा और रोने लगा साथ साथ….. यह सब वो कान के पास फ़ोन लगाए हुए कर रहा था और सान्वी सुन रही थी…..

सान्वी ने सुना के आरव की सांसें कुछ अजीब सुनाई देने लगे, और उस्सको आरव की हंसी और रोने की आवाज़ भी सुनाई दिए तो सान्वी ने पूछा, “किआ हुआ आरव?”

तो आरव सच में जैसे टूट गया था, उस्सने फुट फुट कर ज़ोर से रट हुए कहा,

“तुम ऐसा नहीं कर सकती मेरे साथ!! तुम मुझको धोका दे रही हो, मैं पागल हो जाऊंगा भाबी…. तुम मुझसे यह सब नहीं छीन सकती…. तुझे मुझसे यहाँ मिलने आना hi होगा नहीं तो मैं कुछ कर बैठूंगा सच में भाबी अब तुम क्यों मुझको इतना तड़पा रही हो? क्यों मुझको तुम अब सताने लगी हो? इस लिए के मैं ने इतनी साड़ी बातें कही नाह? तो मैं अपने सभी कहे हुए बातों को वापस लेता हूँ ी ऍम सॉरी, ी ऍम वैरी सॉरी, मुझे माफ़ कार्डो भाबी मगर मुझसे यह सब मत चीनों प्लीज !!!!”

इतना कहकर आरव ने अपने मोबाइल को ज़मीन पर ज़ोर से फेंका और सब टुकड़े टुकड़े हो गए और आरव फर्श पर घुटनों के बल होकर अपने सर को जैसे सजदे में झुका कर ज़ोरों से रोने लगा……

सान्वी ने मोबाइल को गिरते हुए सुना… और आरव का उस तरह से रट हुए सुनकर खुद सान्वी भी रोने लगी, और कम्युनिकेशन तो टूट गया आरव के मोबाइल के टूटने से…. दोनों अपने जगह रो रहे थे… सान्वी ने अपने मोबाइल को बीएड पर रख कर टिश्यू निकला और ेंसुओं को पोंछते हुए अपने स्काइप पर लॉगिन करके आरव को ऑनलाइन देखा के वो ऑनलाइन hi था और जिस जगह पर आरव फर्श पर रो रहा था वो सान्वी को पार्टली दिखने लगे… क्युके आरव ऑनलाइन था स्काइप पर जबसे उस्सने सान्वी की रिकॉर्ड किये हुए वीडियो देख रहा था वो अपने स्काइप से लोग ऑफ नहीं हुआ था तो सान्वी कनेक्ट हो गया तुरंत.. अब आरव को उस हाल में देख कर सान्वी को बहोत दुःख हो रहा था तो उस्सने कहा, “आरव मैं यहाँ हूँ आओ स्काइप पर सुना तुमने आरव??!!

आरव ने नहीं सुना और जल्दी से वापस अपने मोबाइल को समेटा और सभी बिखरे हुए पुर्ज़े को दोबारा मिलाने की कोशिश में लग गया रट हुए…. सान्वी सब सुन रही थी, आरव के रोने की आवाज़ सुनाई दे रही थी स्काइप पर सान्वी को…. सान्वी के दिल की धड़कनें बहुत तेज़ हो रहे the….phir भी सान्वी आरव से उसस्के आखरी बातों को सुन्ना चाहती थी और अपने आखरी वर्ड्स को उस से कहना चाहती थी..

आरव कुछ दूर एक चेयर पर बैठ कर मोबाइल बना रहा था के उस्सकी नज़र लैपटॉप पर हुआ तो सान्वी को देखा तब झपट कर लैपटॉप के पास आया और सान्वी को देखते हुए और ज़ोरों से रोने लगा…..

सान्वी ने बिल्कुल आराम से कहा, “हुसस्ससष्ठ छुप हो जाओ आरव, देखो तुम्हारा नाक बहने लगा है जाओ एक टिश्यू से पोंचो अपने नाक और ेंखों को और सुनों किआ कह रही हूँ अभी थोड़ी देर में 3 बज जाएंगे और हम बात नहीं कर पाएंगे सो बे क्विक आरव!”

आरव ने अपने कमीज़ से hi अपने नाक पोंछा और रट हुए hi सान्वी को देहते हुए कहा,

“भाबी प्लीज ऐसा कुछ मत कहो, मत कहो के हम बात नहीं करेंगे, मैं ने सॉरी कहा नाह लो कान पकार्टा हूँ, आप के पेयर परता हूँ भाबी प्लीज ऐसा कुछ मत करना… ी लव यू भाबी…. प्लीज ऐसा कुछ मत करना…..”

यह कहकर वो और भी रोने लगा

सान्वी ने कहा, “मोबाइल को किआ हुआ आरव?”

आरव: “टूट गया, मैं ने ग़ुस्से में फेंक दिया था निचे…..”

सान्वी: “अपने ग़ुस्से को काबू में करना सीखो, बहोत पैसे हैं नाह तुम्हारे पास उस्सको संभालना सीखो, आसानी से मोबाइल खरीद लोगे पता है मुझे, उन् लोगों के बारे में सोचो जीन के पास एक भी मोबाइल नहीं, एक मामूली मोबाइल के लिए जो तरसते हैं उन् को सोचो, तुम्हारे पास इस से भी बाध्य मोबाइल ाजेगा इस्सके मतलब यह नहीं के जो है उस्सको इस तरह से बर्बाद करो, ग्रो उप आरव, ग्रो उप!!”

आरव: “प्लीज लेक्चर मत दो मुझे नाह भाबी….. मुझे पता है… आप बुसस इतना केहदो के जो कुछ भी आप ने कहा वो सब सिर्फ मुझको सताने के लिए था, वो सब आप ने ग़ुस्से में कहा था…. प्लीज और बोलो के मुझसे मिलने होगी नाह!”

सान्वी ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा,

“क्यों आरव? क्यों मुझको तुमसे वहां मिलने आना चाहिए?”

आरव: “मैं आप को बहोत मिस कर रहा हूँ, आप के सीने से लग्न चाहता हूँ, आप को ज़ोर से होल्ड करना चाहता हूँ….”

सान्वी: “उसस्के बाद आरव? फिर किआ आरव?”

आरव चुप रहा.

तो सान्वी ने कहा, “उसस्के बाद तुम मेरे बूब्स को छुओगे, मेरे कपडे उतारोगे, मेरे जिस्म के हर कोने को एक्स्प्लोर करोगे तब आरव? और किआ किआ करना है तुमको मेरे जिस्म के साथ आरव?”

आरव का रोना बांध हुआ और स्क्रीन पर सान्वी को देखते हुए कहा, “वो पहली बार तो नहीं होगा नाह? कौन सी नयी बात होगी भाबी?!”

तो बे कॉन्टिनोएड इन नेक्स्ट अपडेट…… तहत विल बे थे लास्ट अपडेट ऑफ़ थे फ्लैशबैक बिटवीन थी तवो, आफ्टर तहत वे विल बे बैक तो नार्मल तो थे नाईट वेयर सान्वी वास् इन ऊर्जे ऑफ़ सेक्स एंड वास् थिंकिंग ऑफ़ थी डेज…..
 
अपडेट 126 एन्ड ऑफ़ फ्लैशबैक

सान्वी ने बहोत hi प्यार और आराम से आरव से कहा,

“आरव मैं ने अभी कहा नाह के वो सब डिलीट हो चूका है, फॉरगेट आल, जब कुछ डिलीट हो जाता परमानेंटली तो किआ उस्सको वापस ला सकते हैं? नहीं नाह? सो, इतस आल देलेटेड एंड यू आल्सो डिलीट आल फ्रॉम योर मेमोरी, तहत नेवर हप्पेनेड एंड विल नेवर हैपन यू गोत आईटी आरव. It’s थे एन्ड माय डिअर!”

तो आरव को बुसस एक रास्ता नज़र आया जिस से वो सान्वी को अपने तरफ आने के लिए बिल्कुल मजबूर कर सकता है (ात लीस्ट आरव का ऐसा सोचना था) उस्सने कहा,

“सुनों भाबी चलो मैं तुमको अब ब्लैकमेल hi करके यहाँ launga…dekho मैं ने तुमको रिकॉर्ड कर लिया है जिस वक़्त तुम मुझसे चाट कर रही थी स्काइप पर, और अगर तुम मुझसे मिलने नहीं आयी तो भैया और डैड को दिखा दूंगा वो सब कुछ…. देखो भाबी मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता बुसस एक बार ाजाओ हम एन्जॉय करेंगे फिर बात ख़तम तब कभी नहीं बुलाऊँगा तुमको…. बस एक बार अपने अंदर लेलो मुझको देखना तुमको बी सुकून आएगा एक प्यास है जो दोनों तरफ से बुझ जाएगी भाबी…..”

सान्वी फिर भी बिल्कुल कूल रही और तब भी सान्वी ने बहोत आराम और सुकून भरी आवाज़ में कहा,

“आरव तुम समझते हो के मुझे नहीं पता के तुम मुझको रिकॉर्ड कर रहे थे जिस वक़्त मैं स्क्रीन पर झुकी थी और जब मैं ब्रा में आयी थी? मैं ने तो इसी लिए वो सब किया था यह समझ कर के अब दूर रहोगे तो मुझको स्क्रीन पर देख कर दिल बहलाओगे, सो ी वास् अवेयर तहत यू मस्ट बे रिकॉर्डिंग में एंड वाचिंग में… कैसे वाच करते हो मुझको उसस्के बाद? रिवाइंड करके? पॉज करके? स्लो मोशन में करके? मेरे हर एक जिस्म के हिस्से पर पॉज करके उस्सको बार बार देखते हो और शैग करते हो एहि नाह? मैं कोई बच्ची नहीं हूँ आरव! सब कुछ मेरे समझ में अत है. तो किआ कहा तुमने मुझको उन् रिकॉर्ड की हुई वीडियोस से ब्लैकमेल करोगे? तुमको बताऊँ मैं किआ करुँगी? बोलूं? बताऊँ तुमको आरव?!”

आरव बहोत हैरान हुआ सान्वी के बातों को सुनकर और उस्सको देखते हुए कहा, “भाबी अगर तुमको सब पता है है तो सोचो कितना आराम दिया तुमने मुझको, कितना खुश किया तुमने मुझको, मैं कितना खुश हुआ…. और अब क्यों सब कुछ उल्टा बोल रही हो… मैं तुमको पाने के लिए कुछ भी कर सकता हूँ हाँ मैं ब्लैकमेल करके तुमको अपने पास ला सकता हूँ, और अगर तुम नहीं आयी तो एहि एक तरीका बाकी रह गया है मेरे पास और किआ करूँ मैं…. Ok यह सब नहीं बताऊंगा किसी को बुसस तुम अगले महीने को एक वीकेंड स्पेंड करने ाजाओ मेरे साथ यहाँ हम खूब एन्जॉय करेंगे यह मेरा सब से बड़ा सपना है भाबी इससे पूरा कार्डो नाह please….tum होगी मुझे पता है, तुम मुझे सत्ता रही हो, मगर होगी ज़रूर ी क्नोव आईटी है नाह भाबी?!”

सान्वी: “यू अरे रॉंग आरव. यह कभी नहीं होगा यू गोत आईटी?”

आरव: “भाबी ओह माय गॉड यह सब किआ हो रहा है, सुनों तो भाबी अगर मैं ने आप को इतना कुछ नहीं कहा होता तो आप ऐसे मुझसे हर रोज़ कंटिन्यू बात करती नाह? हम हर रोज़ ऐसे hi मज़े से बातें करते रहते, हर रात को भैया के आने तक हम हर रात को बातें करते, तुम और मैं कितने खुश होते एव्री नाइट्स को नाह? तो बुसस वैसे hi अब कंटिन्यू करें नाह? सो सिंपल!”

सान्वी: “नॉट सिंपल आरव अस थिस इस नॉट गोइंग तो हैपन एनीमोर. टुनाइट ात 3 इस थे लिमिट ऑफ़ आवर चाट. थिस विल नेवर हैपन अगेन, अंडरस्टुड? आईटी इस थे एन्ड! ी रिपीट थे एन्ड!!

आरव ने तब बहोत ग़ुस्से में कहा,

“तो फिर ठीक है मैं सच में भैया को इन् रिकॉर्डिंग्स के कपीस सेंड करता हूँ और डैड को भी, कहूंगा के तुम मुझको सडके करती हो और मैं बहक गया और ज़्यादा आगे बढ़ना चाहा इसी लिए तुमने मुझको दूर भेज दिया यहाँ पर….” और एक सरकास्टिक हंसी हँस्ते हुए आरव ने सोचा के अब सान्वी पागल होगी और बिनती करेगी के वो ऐसा कुछ नाह करे और उस से मिलने के लिए राज़ी हो jaegi…aarav ऐसा सोच रहा था खुश होते हुए….

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा,

“आरव मुझे पता है तुम सच में ऐसा कर सकते हो, और वो लोग तुम्हारा यकीन भी कर लेंगे ी एग्री. मैं कुछ नहीं बोल पाऊँगी अपने सफाई में क्यों के रिकॉर्डिंग्स में तो वैसा hi दिखेगा के मैं अपने ब्लाउज उतार रही हूँ, या झुक कर तुमको अपने बूब्स दिखा रही हूँ वग़ैरा वग़ैरा…. Okay सेंड करो मगर सेंड करने से पहले मैं किआ करुँगी वो नहीं सुन्ना चाहोगे आरव?”

आरव ने हँस्ते हुए पूछा, “और कर भी किआ सकती हो? तुमको यहाँ आना होगा और बीएड पर मेरे साथ सोना होगा, एंड यू विल दो आईटी दमन आईटी बिकॉज़ ी लव यू, यू गेट में!”

सान्वी ने कहा, “हाहाहाहा एंड यू डरे से यू लव में इडियट? जब किसी से प्यार करते हैं तो उस्सको ऐसे रुस्वा नहीं करते, उस्सको ब्लैकमेल नहीं करते… सुनों आरव, जो मैं कहने जा रही हूँ कान खोल कर ग़ौर से सुनों बेकौए ी विल नॉट रिपीट थिस अगेन रिकॉर्ड कर रहे हो तो ठीक है रिवाइंड करके दोबारा सुन लेना…. आरव अगर तुमने मेरे इन् वीडियोस को अपने डैड और भैया को भेजा, तो ी विल कीट सुसाइड. यहाँ बाज़ार में बड़े आसानी से ज़हर मिल जाता है, जैसे तुमने वीडियो शेयर किया, और विवान और तेरे डैड ने मुझसे एक भी सवाल किया तो ी ऍम टेकिंग ा दोसे ऑफ़ पाइजन तब मेरे लाश को नंगा करके छोड़ना मुझे तुम. मर गयी तो तुमको को आना hi पड़ेगा नाह यहाँ, तेरे बाप के पास प्राइवेट जेट वाले दोस्त हैं किसी प्राइवेट जेट से तुमको वापस लाएंगे डेथ सेरेमनी को अटेंड करने के लिए, तब आकर अपने प्यास बुझा लेना मेरे लाश से…… आरव ी मैं व्हाट ी जस्ट साइड एंड विल नेवर रिपीट. अब जो तुमको करना है तुम करो बच्चू!”

आरव की हवा निकल गयी, वो बिल्कुल hi फुसस्स हो गया. सर झुका लिया अपना और जैसे उस्सकी आवाज़ hi नहीं निकल रही थी वापस सान्वी को कुछ कहने के लिए. दोनों एक दूसरे को कुछ देर स्क्रीन पर देखते रहे बिल्कुल खामोश, सान्वी की ेंखों में जैसे खून खौल रहे थे उस वक़्त, आरव को सिर्फ उस्सकी तेज़ सांसें सुनाई दे रहे थे, और खुद अपने दिल को धड़कते हुए सुन रहा था वो और उधर सान्वी बहोत गंभीरता से आरव को देखे जा रही थी, उसस्के चेहरे में कोई भाव नहीं दिख रहे थे, समझ में नहीं रहा था के वो खुश थी, ग़ुस्से में थी या उदास थी, सान्वी के चेहरे को पढ़ना उस वक़्त नामुमकिन था, उसस्के होंठों पर एक किस्सम का मुस्कान था, पता नहीं वो किश तरह की मुस्कान थी, विक्टोरियस होने वाली, विजय हासिल करने वाली, या अपने बड़े होने पर हुक्म चलाने वाली जैसी मुस्कान थी….

और आरव ने बिना सान्वी को स्क्रीन पर देखे, ढाबे हुए आवाज़ में कुछ इस तरह से जैसे एक बच्चे ने कोई ग़लती किया हो और उस्सको दांत पद रहा है तो किश तरह से वो नज़रों को चुरा कर धीरे से जवाब देता है, आरव ने उस वक़्त कुछ उसी अंदाज़ में जवाब दिया,

“आप ऐसा कुछ भी नहीं करोगे क्यूंकि मैं ऐसा कुछ नहीं करने वाला…. मैं भला आप के इन् वीडियोस को किसी को भी दिखा सकता हूँ किआ? यह तो मेरे अमानत हैं, सब मेरे अपने हैं सिर्फ मेरे, जीते जी कभी भी कोई भी इस्को नहीं देख पाएगा मेरे इलावा, आप बी नहीं!”

सान्वी: “ग्रेट. तुम ने अपने िम्मातुरे होने का सबूत दिया है बार बार, तुम इतना रॉंग भी नहीं हो, 18 साल के उम्र के लड़के से और उम्मीद भी किआ किया जा सकता है? That’s व्हाई ी कीप रेपेटिंग ग्रो उप आरव. गर तुम मातुरे होते तो मई बे मैं तुम्हारे अरमानों को पूरा भी कर देती हु कनौस, अगर तुमने ज़रा सी भी मातुरित्य दिखाया होता, मुझे शायद तुम सडके कर लेते, मैं टूट और झुक सकती तुम्हारे तरफ, हाँ तुमने ग़लती की वो सब कुछ कहकर कुछ देर पहले, हो सकता है मैं तुमसे मिलने भी चली आती अगर तुमने वो सब कुछ नहीं कहा होता, तुमने मुझको गाली दिया आरव, कभी भी किसी लड़की को गाली मत देना, इतस ुणबीरबले तो बे कॉल्ड ा व्होरे व्हेन ओने इस नॉट. एक व्होरे को भी व्होरे कहो तो उस्सको गली लगती है, और तुमने तो अपने भाबी को ऐसे ट्रीट किया; तो इस से मेरे समझ में आया तुम अभी बच्चे हो, मातुरे होते तो मैं तुम्हारे पास आजाती, तुम्हारे सात सो भी जाती तुमको सेक्सुअली खुश बी कर जाती मुझे खुद लगता है के मैं वो सब कर जाती…. बूत नॉट नाउ, no आईटी विल बे थे ग्रेटेस्ट मिस्टेक ऑफ़ माय लाइफ िफ़ ी दो तहत. होनेस्त्ली बोलोँ तुमको आरव? यस, ी हद स्टार्टेड तो लव यू. ी नेवर थॉट इन माय लाइफ तहत ी विल एवर लव समवन ेल्स…. तुम पर तरस कहते कहते प्यार करने लगी थी तुमको…. मगर प्यार होता किआ है? प्यार तब होता है जब किसी के साथ ज़्यादा क्लोज रहो और एक दूसरे के साथ ज़्यादा वक़्त बिताओ, एक दूसरे के हरकतों को पसंद करने लगो, एक दूसरे के बिना रहना मुश्किल होने लगे तो प्यार होता hai…tumhare साथ ज़्यादा रहते रहते प्यार करने लगी थी तुमसे…. इसी लिए शायद तुम्हारे हर ज़िद को पूरी करने लगी थी मैं जैसे अपने जिस्म को दिखाना, तुमको मुझे छूने देना, तुमको मेरे सीने से लगने dena…tabhi प्यार बढ़ने लगी तुम्हारे लिए… तुमसे दूर होने को बहोत hi दुःख हुआ मुझे, जैसे मेरे जिस्म से एक हिस्सा टूट कर दूर हो रहा है वैसा लगा मुझे जब तुमसे बिछड़ी thi…airport पर तुमको जाकर कर रहने को मैं कर रहा था, तुमको रोकने का मैं कर रहा था….. बूत आरव तुमने बहोत बहोत चाह किया जो इतना कुछ कह दिया और प्रोवे कर दिया के तुम कितना िम्मातुरे हो, सो तहत ी गेट थे चांस तो करेक्ट थे मिस्टेक्स एंड अमेंड!... यू विल ग्रो उप ी क्नोव; यू विल बिकम रेस्पोंसिबल एंड यू विल बिकम मातुरे…. अगले 3 सालों में ी क्नोव तहत ी विल सी ानोथेर आरव हु विल बे ा मातुरे एंड रेस्पोंसिबल पर्सन… ी वांट तो मीट तहत आरव नाउ. सो दो नॉट के इन फ्रंट ऑफ़ में एंड दो नॉट टॉक तो में टिल यू दो नॉट बिकम तहत आरव व्होम ी वांट तो सी! तब के तब देखेंगे!

आरव ने कुछ भी नहीं कहा. एक लव्ज़ भी नहीं. उस्सने सब कुछ सुना जो सान्वी ने कहा और रिकॉर्ड भी किया, मगर एक लव्ज़ नहीं बोलै, बिल्कुल खामोश सुनता गया और अचानक सान्वी ने कहा,

“योर पेरेंट्स हैवे के आरव, ी ऍम साइनिंग ऑफ, बे गुड, दो गुड, खूब पढ़ो और अपने डिग्री को अपना लक्ष्य बनाओ, और दिन रात पढ़ाई में कसंतर्ते करो; ी वांट यू तो गेट थे रिजल्ट अस थे फर्स्ट डिवीज़न फर्स्ट…. और मैं तुम्हारे ग्रेजुएशन सेरेमनी में ज़रूर आउंगी जिस दिन तुम डेकोरेट किये जाओगे, ी प्रॉमिस. सो गुड bye आरव. थे अरे गेटिंग इन थे गेराज नाउ ी हैवे तो सिग्न off…..ek बार सर उठके मुझको देखो तो सही, कब से बात कर रही हूँ और तुम सर झुकाये बैठे हो!”

तब आरव ने सर ऊपर करके सान्वी को देखा और सान्वी ने अपने हाथ को किश कर के आरव को गुडबाय किश किया, और सिग्न ऑफ कर दिया एक मुस्कराहट के साथ.

आरव के ेंखें भर आये थे और उस्सको सब धुंधला दिखा, और जैसे सान्वी डिसअप्पेअर हो गयी आरव ने ज़ोर से बहोत hi ज़ोर से चिलाते हुए रोने लगा… ज़मीन पर लेट गया और ज़ोरों से अपने हाथों को ज़मीन पर पीटते हुए रोटा गया रोटा गया और रोटा गया.. फिर अपने सर पीटने लगा, फिर छाती पीटने लगा मगर उस्का रोना नहीं रुक रहा था…. एक छोटे से मैटरनल स्कूल के बचे की तरह रोटा gaya…ussko लगा के अब वो सान्वी से बिछड़ रहा है, उसस्के लिए अब जाकर असली बिछड़ना hua…usske दिल के टुकड़े होने लगे, उस्सको लगा के उस्का दिल टुकड़ों में होकर उसस्के छाती में गिर्र रहे हैं.. उस्सको सांसें लेना मुश्किल होने laga…wo दौड़ कर बाहर गया सांस लेने के लिए, खुली हवा में बैठ कर रोटा रहा घंटों भर….. कल का दिन उसस्के क्लासेज का पहला दिन था सुबह के 3.30 हो गए थे और वो बैठा बाहर रट जा रहा था…..

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दूसरे दिन क्लासेज के बाद आरव ने एक नया मोबाइल ख़रीदा और, रात को सान्वी को कॉल किया सान्वी ने नहीं liya…eisa पूरा एक हफता गया, हर रोज़ आरव सान्वी को फ़ोन करता मगर सान्वी नहीं उठाती.

फिर 15 दिन बीत गए बिना सान्वी से किसी कांटेक्ट के, फिर एक दिन आरव ऑफ था, क्लासेज नहीं थे उसस्के तो दिन में आरव ने सान्वी को फ़ोन किया, और उधर फ़ोन को उठाया गया और उधर से एक महिला की आवाज़ आयी,

“कोण बोलता तू किश को मांगता रे तू?”

आरव: “तुम कौन हो? मुझे सान्वी से बात करना है, उस्सकी मोबाइल तुम्हारे पास कैसे?”

उधर से जवाब आया, “मैं मेमसाब का बाई बोलता, वो बीएड पर लेती है मैं आया होता, उस्सकी देख भाल करता तू किआ बोलता मन?!”

आरव: “किआ हुआ भाबी को? तुम क्यों उस्सकी देख भाल कर रही हो?”

जवाब: “अरे मन तेरे भाबी को बचा होने का, उस्सको रेस्ट करने का डॉक्टर बोलै तो चावला साब मेरे को ऑफिस से इधर काम पर लगाया तू किआ बोलता मन?!”

उस वक़्त सान्वी सब देख रही थी बाई को आरव से बात करते हुए, सान्वी ने hi आया को बोलै कॉल रिप्लाई करने के लिए और मोबाइल को स्पीकर पर किया था ताके वो भी सुन सके के आरव किआ कह रहा था…. सान्वी आरव तक वो गुड न्यूज़ देना चाहती थी इसी लिए अपने बाई को रिप्लाई करने को बोलै…. और सान्वी बाई को उस तरह से आरव को रिप्लाई करते हुए देखते हंस रही थी बीएड पर लेते हुए.

आरव ने कहा, “तुम भाबी को फ़ोन दो नाह प्लीज”

तो सान्वी ने हाथ के इशारे से बाई को नाह कहा, तो बाई ने आरव से कहा,

“अरे तेरा भाबी नाह बोलता मन मैं किआ करती वो तुमसे बात नहीं करना मांगती मन!”

तो आरव ने कहा, “बाई तुम सिर्फ उस मोबाइल को भाबी के कान के पास लेजाकर लगादो इतना कर सकती हो किआ?”

बाई: “हाँ करती है मैं यह लो उसस्के कान पर लगा दिया तुम बात करो!”

आरव को नहीं पता था के सान्वी की मोबाइल स्पीकर पर है और कहा, “भाबी कोंग्रटुलतिओन्स, मैं चाचा बनने वाला हूँ यह कब हुआ भाबी?”

सान्वी ने धीरे से कहा, “थैंक्स. जैसे मैं ने कहा था के सिर्फ ोक्सासिओंस पर बात करेंगे तो कर लिया अब off….no मोरे टॉक्स… हाँ मुझे खुद नहीं पता था के मैं प्रेग्नेंट hoon…last टाइम तुमसे बात करने के बाद मुझको उलटी हुई और उसी रात को तबियत बहोत खराब हुई, नेक्स्ट डे डॉक्टर के पास चेक के दौरान पता चला के ऑलमोस्ट 2 मोनथस से प्रेग्नेंट हूँ! सो कॉंग्रट्स तो यू आल्सो फॉर बिकमिंग चाचा एंड bye टेक केयर एंड स्टडी हार्ड.”

आरव ने थैंक्स कहा और कॉल एन्ड कर दिया सान्वी ने…. आरव को एक अजीब सी ख़ुशी महसूस हुई दिल की गहराई में….. शायद इस लिए के सान्वी ने उस से बहोत अचे तरीके से बात किये, दूसरा शायद इस लिए के वो चाचा बनने वाला था……

उस दिन के बाद आरव ने कबि भी कोई फ़ोन नहीं किया सान्वी को. बिल्कुल भी नहीं.. उस्सने सच में अपने डिग्री को अपना लक्ष्य बनाया और स्टडी में hi ध्यान लगाया….. और सिर्फ तीन सालों के बाद hi आरव अपने घर वापस पहुंचा जब दीप्ति तक़रीबन 3 साल की हो गयी थी तब आरव ने उस्सक्को पहली बार देखा!

तो बे कॉन्टिनोएड……….. (3900 वर्ड्स फ्रॉम बोथ उपदटेस)
 
अपडेट 127 – बैक तो नार्मल डेज

आज से सिर्फ एक अपडेट आएगा इस थ्रेड पर फ्रेंड्स, और उपदटेस सिर्फ मोंडेस से फ़रिदेस तक होगा वीकेंड्स में नहीं. थैंक्स आल ऑफ़ यू.

दोस्तों, फ्लैशबैक तब शुरू हुई थी जिस दिन सान्वी को सेक्स की ज़रूरत महसूस हुई थी जब उस्सने आरव को संजना के साथ सेक्स करते सुना था अपने कमरे के अंदर… तहत वास् ों अपडेट 103. मैं ने सोचा था कोई 6 या 8 उपदटेस में सान्वी की फ्लैशबैक को एन्ड कर दूंगा मगर यह तो अपडेट 103 से 126 तक चला गया :डी

मतलब यह सब कुछ सान्वी सोच रही थी उस रात को अपने कमरे में बीएड पर लेते हुए वो इस लिए के उस्सको चावला साहब ने कहा था के किआ पता के अब उस्सको आरव सेक्स की नज़र से देखने लगा है क्यूंकि अब वो शादी शुदा है और सेक्स करने लगा और समझने लगा है….. इसी बात को लेकर सान्वी ने वो सब कुछ सोचा के वो किश तरह से धीरे धीरे आरव के करीब गयी थी और किश तरह से उस से दूर हुई थी और कैसे 3 साल बाद आरव यूनिवर्सिटी से वापस नार्मल होकर वापस आया था….

अब उसस्के वापस आने से लेकर अब तक सान्वी और आरव के रिश्ते कैसे रहे यह बीच बीच में छोटे छोटे फ़्लैश बैक में बताया जाएगा; उस तरह के 23 उपदटेस के फ्लैशबैक में नहीं…..

तो इस दिन को याद होगा आप सब को के हुआ यह था के आरव अचानक से सवेरे ऑफिस से वापस आगया था जबकि सान्वी और चावला साहब काउच पर इंटिमेट हो रहे थे, सान्वी की जांघें दिख रहे थे और आरव गेराज के दरवाज़े से अचानक अंदर आगया था, तब सान्वी आअराव से बातें करने गयी जब चावला साहब अपना व्हिस्की पीते हुए आरव और सान्वी को बात करते हुए घुर्र रहा था…. जिस तरह से आरव सान्वी के हाथ पाकर रहे थे, जिस तरह से उसस्के बालों से खेल रहा था बात करते वक़्त, वो सब कुछ hi देख कर चावला साहब ने सान्वी से कहा था के हो सकता है के आरव भी उसस्के तरफ सेक्सुअली इंटरेस्टेड हो रहा है….

मगर चावला साहब को तब भी यह सब बिल्कुल पता नहीं था जो कुछ पिछले 23 उपदटेस में आप लोगों को बताया गया. मगर सान्वी को तो सब अच्छी तरह से पता था. तो करना यह है के हमको सान्वी के मैं का पता लगाना होगा के अब 5 सालों के बाद उस्सकी किआ नज़र्या है आरव के तरफ, आरव के लिए. इस वक़्त सान्वी ने उन् पिछले गुज़रे हुए दिनों के बारे में सोचने के बाद किआ फील किया? और राइट नाउ सान्वी किआ सोच रही है जब पूरा विज़न कर लिया तब? चलें सान्वी के कमरे में वही देखते हैं के सान्वी किआ कर रही है इस वक़्त…..

सान्वी दीप्ति को सुला चुकी थी और उस्सको सम्भोग करने की बहोत मैं कर रहा था इस लिए निचे गयी थी चावला साहब के पास मगर वो नशे में धुत था तो सान्वी वापस आकर चावला साहब के कहे हुए बातों पर आरव को लेकर सोचने लगी थी. और अब उन् दिनों को याद करने के बाद खुद से यह कहने लगी,

“सब कुछ डिलीट कर दिया था मैं ने मेमोरी से तो यह सब आज क्यों वापस आये मेरे ज़हन में? किआ आरव भी यह सब सोचता होगा आज भी? किआ आरव के पास वो मेरे रिकॉर्ड किये हुए वीडियोस आज भी होंगे? मुझे किसी दिन छुपके से उसस्के लैपटॉप में चेक करना होगा… अगर होगा तो मेरे नाम से hi सेव किया होगा उस्सने…. मगर पासवर्ड प्रोटेक्टेड ज़रूर होगा, तो किआ करूँ किआ उस से उन् दिनों के बारे में कुछ सवाल करूँ किआ? वो किआ सोचेगा अगर मैं ने वो सब उस से पूछा तो?... मगर अब तो वो एक मातुरे यंग मन हो गया है, बहोत hi रेस्पोंसिबल और सीरियस भी है… अब तो संजना भी है उस्सकी ज़िन्दगी में….. किआ उन् दिनों को वहां यूनिवर्सिटी में आरव उन् लड़कियों के साथ बाहर गया होगा? किआ शादी से पहले उस्सने सेक्स किया होगा? मैं ने उस से उन् दिनों के बारे में बिल्कुल भी बात नहीं किया और नाह hi उस्सने कभी कुछ कहा मुझसे…. जब से वो वापस आया ऐसा बेहवे किया के कभी भी हम दोनों के बीच कुछ हुआ hi नहीं ….. हम्म्म सही तो किया उस्सने मैं ने उस से कहा था के सब कुछ डिलीट करना है मेमोरी से तो उस्सने वही किया नाह….. ोफो मैं भी नाह पता नहीं किआ किआ सोचने लगी हूँ धत!!”

सान्वी अब वो सान्वी नहीं थी जो उस वक़्त थी जिस ने आरव को उतना नसीहत दिया tha…Saanvi तो अब अपने ससुर से इश्क फरमाती थी और सेक्स के तरफ उस्सकी नज़र्या अब कुछ और hi थे.. जितना अब सान्वी को सेक्स की ज़रूरत और सेक्स की जानकारी थी उन् दिनों तो उतना नहीं थी, उस्सको कभी नहीं पता था के एक दिन अपने ससुर के साथ hi वो प्यार कर बैठेगी… हाँ मगर यह सान्वी ने ज़रूर कहा था आरव से के अगर उन् दिनों आरव मातुरे होते तो शायद वो उसस्के पास चली भी जाती और उस्सको सेक्सुअली खुश कर भी देती….. तो ससुर तो बहोत hi मातुरे इंसान थे, मतलब के सान्वी ने जो आरव में नहीं पाया था वो चावला साहब में मिल गया था सान्वी को… और दोनों के बीच हालात hi कुछ ऐसे पैदा हुए थे, साथ रहने की एक दूसरे के केयर करने ki…aur किन्न हालातों में दोनों एक दूसरे के करीब हुए थे यह सब तो हम जानते hi हैं.. यह भी सान्वी ने ठीक hi कहा था आरव को के जब दो इंसान एक साथ रहते हैं, एक दूसरे के हरकतों को पसंद करने लगते हैं, एक दूसरे के करीब होते जाते hein…yeh सान्वी ने उस वक़्त कही थी आरव को जब वो चावला साहब के बिल्कुल भी करीब नहीं हुए थे.. और उसी के ज़िन्दगी में वैसा hi कुछ हुआ जो नसीहत वो आरव को दे रही थी उन् दिनों को….

सान्वी यह भी सोचने लगी के उस्सने आरव को इतना कुछ कहा सुनाया था उस्सने और आरव के इंटिमेट रिश्ते के बारे में तो अब किआ होगा अगर आरव को सान्वी और चावला साहब के रिश्ते के बारे में पता चला तो? आरव तो बहोत hi सुनाएगा तब सान्वी को, बहोत गालियां भी दे सकता है, ज़रूर यह कहेगा के वो इतना तड़पता रहा उसस्के साथ सोने के लिए और सान्वी उसस्के पिता के साथ सोती रही…. यह सब सोचते हुए सान्वी कभी घबरा जाती.

अब सान्वी यह सोचने लगी के जिस दिन आरव वापस आया कितना खुश था और उस्का व्योहार कैसे था उसस्के तरफ उस दिन को, फिर सोचा के नहीं उस से पहले वो चावला साहब और विवान के साथ उसस्के ग्रेजुएशन सेरेमनी में गयी थी दीप्ति को आया के साथ चोरर कर… पर वहां सिर्फ एक बार आरव से मिली थी और सिर्फ hi hello हुआ था और एकांत फोटो लिए गए थे क्यूंकि आरव अपने दोस्तों के साथ ज़्यादा टर्र रहता था, तो सान्वी ने याद किया के जिस दिन वापस आया था वो दीप्ति को गॉड में लिए कड़ी थी लाउन्ज में और आरव उस से गले मिलने को बढ़ा था मगर क्यूंकि दीप्ति उस्सकी गॉड में थी वो सान्वी से गले नहीं मिल पाया था बुसस सान्वी का हाथ अपने हाथ में लेकर चूमा था और दीप्ति को अपने गॉड में लेकर चूमने लगा था…. उस दिन सान्वी को बहोत अच्छी तरह से याद है के सान्वी की ेंखें भर आयी थी और ेंसू टपकने को hi थे के आरव ने गिफ्ट्स के बैग खोल दिया और सबके लिए गिफ्ट बांटने लगे थे तो सान्वी ने अपने ेंसुनवों को रोक लिया था. उस दिन सान्वी आरव को घंटों भर देखती रही…. मगर उस दिन तो आरव ने कुछ ऐसा नहीं फील होने दिया था के उस्सने सान्वी को मिस किया या उसस्के साथ ऐसा वैसा कुछ था यह है…. तो सान्वी ने सोचा और खुद से कहा भी, “नहीं नहीं आरव ने मुझसे बेहतर सब कुछ डिलीट कर दिया hai….wo सब कुछ भूल चूका है और उस बारे में मुझको भी बिल्कुल नहीं सोचना चाहिए…”

पर तब सान्वी को यह भी याद आया के पिछले दो सालों में जब से आरव वापस आया है कितने hi बार वो उसस्के करीब हुई, आरव ने कई बार उसकी छोटी खींचे, उसस्के काँधे पर हाथ रखा, कितने मज़ाक किये, कितने hi बार एक दूसरे को गिफ्ट diye…..phir भी आरव भी अपने भैया की तरह सिर्फ काम काम काम….

चावला साहब ने तब से ऑफिस जाना बांध किया जब दीप्ति पैदा होने वाली थी, मतलब उसस्के ठीक 1 महीने pehle…aya को भी उस्सने वापस कर दिया था और घर पर रहने लगे थे सान्वी के देख भाल करने के लिए और अपने कंप्यूटर से ऑनलाइन सब कुछ ऑफिस के कामों को कण्ट्रोल करता और फिर विवान तो था hi ऑफिस में हमेशा.

और जब आरव ने भी विवान को ज्वाइन कर लिया ऑफिस में वापस आने के बाद तो दोनों भाई एक साथ जाते सुबह को और वापस भी एक साथ एते थे, एक hi कार से भी जाते थे, मगर कभी कभार आरव को पहले आना होता तो वो कंपनी की ड्राइवर से उस्सको घर ड्राप करने को कहते तब वो पहले आते मगर बहोत hi कम दिनों को ऐसा हुआ करता था….

तो सान्वी को कुछ भी ऐसा नहीं दिखा जो आरव के वापसी के बाद में ऐसा लगे के आरव सान्वी के तरफ ज़्यादा क्लोज होने की या कुछ करने की कोशिश किया हो…. सान्वी ने सोचा के चावला साहब ऐसे hi उस्सको वेहम हो रहा hoga…..yeh सब सोचते सान्वी को नींद आ गयी….

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 128 थ्री टुगेदर


हमेशा की तरह सुबह 5 बजे सान्वी किचन में पायी गयी वही अपनी निघ्त्य में ऊपर गाउन पहने हुए, बाल खुले हुए, जिस्सको बार बार वो अपने चेहरे से हत्ता रही थी काम करते हुए. मगर आज कुछ अजीब हुआ, 5.15 पर संजना ने भी उस्सको ज्वाइन किया किचन में मगर वो सिर्फ निघ्त्य में थी बिना गाउन के, उसी निघ्त्य की स्ट्रैप्स काँधे से बार बार उस्सकी गोरी बाज़ू पर सरक जाती थी, कोई काम करती थी तो बूब्स नज़र आने लगते थे ऊपर से बिना ब्रा के थी…. सान्वी खुद उस्सकी बूब्स देख कर छुप छुप कर हंस रही थी….. सान्वी ने याद किया बाथटब में उस दिन दोनों कैसे एक दूसरे के जिस्म को चुम चाट रहे थे….

सान्वी ने कहा, “तुझे ऐसे बिना ब्रा के निघ्त्य में रहना ाचा लगता है? शर्म नहीं आती तुमको किआ?”

संजना: “ोफो किआ करूँ मेरी तो आदत है घर पर ऐसे hi रहती थी पापा के सामने भी तो मुझे नार्मल लगता है हाँ मगर सिर्फ आप के उस विवान से बचना पड़ेगा बाकी साहब और आरव के सामने तो ऐसे hi रह सकती हूँ हीहीहीही, आप का विवान जी कब उठते हैं?”

सान्वी: “वो तो दस बजे उठेंगे, मगर तुमको उस से क्यों बचना पड़ेगा वो तो तेरे तरफ देखेगा भी नहीं वो अपने बाप की तरह ठरकी नहीं है हेहेहे!”

संजना: “रियली? मुझे तो ठरकी लोग पसंद हैं, वह लोग हम औरतों को इम्पोर्टेंस जो देते हैं, हम को फील करते हैं के हम सेक्सी हैं, हम में कुछ हैं जो उनको अत्त्रक्ट करते हैं, बाकी के जो ठन्डे आदमी होते हैं उन् से तो मैं नहीं इम्प्रेस होती हीहीहीही”

सान्वी: “हे तुम ने मेरे पति को ठंडा कहा! एक बचा पैदा कर चूका है वो हाँ!”

संजना: “अरे उनको तो नहीं कहा मैं ने, बाकी लोगों के बारे में सोच रहा था जी!..... सान्वी आप के गले लगने को मैं कर रहा है लग जॉन किआ?”

सान्वी ने उसस्के चेहरे में मुस्कुराते हुए देखा और अपने बाहों को खोल कर ेंखों के इशारे से उसस्के बाहों में आने को कहा.

संजना झट से सान्वी के बाहों में गयी और दोनों ने एक दूसरे को कस्सके हुग किया…. संजना की निघ्त्य की स्ट्राप सरक गयी थी जिस्सको सान्वी ने ऊपर करते हुए उसस्के काँधे को चूमा, और संजना ने सान्वी के गाल को चूमा फिर उसस्के होंठों पर चूमा और सान्वी बाहर के तरफ देखते हुए कहा, “वो उठने वाला है, उस्का टाइम है वो अभी टेरेस पर एक्सरसाइज करने जायेंगे, देखना तुम…”

संजना: “हम्म आप तो उनके हर लम्हे को पहचानते हो, वो कब किआ करता है सब पता है आप को!”

दोनों एक दूसरे के बाहों में hi थे और सान्वी ने कहा, “हम्म्म इतने दिनों से एक साथ रहते हैं तो पता तो चल hi जाता है ….”

संजना: “ाचा आप मुझे बताओ आप कैसे उंनसे इतना क्लोज हुए के उनके साथ आप भी सोने लगे? मतलब आप को उंनसे प्यार हुआ या सिर्फ ऐसे hi मौज मस्ती के लिए सोते हो?”

सान्वी तब हुग को ब्रेक करते हुए बाहर चावला साहब के कमरे के दरवाज़े के तरफ देखते हुए कहा,

“उफ़ यह एक लम्बी कहानी है संजना, इतने दिनों से एक साथ रहते रेथे समझलो के प्यार हो गया उन् से…. वो बहोत hi केयरिंग इंसान है, मेरे इतना ख्याल रखते थे के मैं इग्नोर नहीं कर पायी, मेरे हस्बैंड से बहोत ज़्यादा वो मेरे ख्याल रखने लगे थे ख़ास कर दीप्ति के पैदा होने से पहले… मैं अकेली रहती थी दिन भर घर में, उन्हों ने ऑफिस जाना बांध कर दिया था मेरे लिए, मेरे देख भाल करने के लिए, 7 महीनों तक उन्हों ने मेरे पथ में दीप्ति को बढ़ते देखा और मेरे हर छोटे छोटे ख्वाहिशों को पूरा kiya….mere हस्बैंड तो ऑफिस के इलावा और कुछ नहीं करता tha….ab समझलो के सेक्स तो उन 7 महीनों में मेरे साथ किया hi नहीं था क्यूंकि मैं प्रेग्नेंट थी… फिर भी मुझे ज़रुरत तो महसूस होती थी, मगर विवान समझता था के प्रेग्नेंट हूँ इस लिए उस्सको नहीं करना चाहिए…… उन् दिनों मैं ने कभी चावला साहब के साथ ऐसे रिश्ते के बारे में नहीं सोचा था…. मगर वो मुझे इतना छूटे थे कभी भी के कभी कभी मेरे जिस्म के रोवाण रोवाण तरस जाते थे प्यार करने के liye…wo जब मुझे छूटे थे तो सेक्स के नियत से नहीं, बुसस मुझको हेल्प करते वक़्त, मेरे दोनों पाऊँ बहोत फूल गए थे जब मैं प्रेग्नेंट थी, ख़ास कर आखरी के 2 महीनों में तो चलना मुश्किल होता था, चावला साहब मुझको उठाकर यहाँ से वहां करते थे….. मैं तो ऊपर रहती हूँ और वो निचे, मुझे कभी निचे आना होता तो मुझको बीएड से उठा कर निचे लेट थे अपने गॉड में…… इतना क्लोसनेस्स बढ़ गए थे के किआ बताऊँ…. मुझे खुद ऐसा लगता था के वही मेरा रियल हस्बैंड है….”

संजना बड़े आराम से सब सुन रही थी और कहा,

“वूऊऊऊऊ हाउ रोमांटिक ा मन हे इस नाह?!”

सान्वी, “हम्म्म रोमांटिक तो वो वो सच में है….”

इतने में चावला साहब के कमरे का दरवाज़ा खुला और सान्वी ने किचन के सिंक के पास पीठ करते हुए फुसफुसाते हुए कहा, “वो उठ गए शह्ह्ह्ह!”

तब संजना चावला साहब के कमरे के तरफ उनको टॉयलेट के तरफ जाते हुए देखा, उनको नज़रों से फॉलो किया, मगर चावला साहब ने नहीं देखा के संजना भी किचन में है, उस्सने सिर्फ सान्वी को देखा और चला गया.

कुछ देर बाद ब्रश वग़ैरा करके चावला साहब चले गए टेरेस पर अपने एक्सरसाइजेज करने को तब संजना किचन से धीरे धीरे सान्वी से बात करते हुए पूछा, “उन्हों ने टिया कफ कुछ भी नहीं लिया? मैं ने सोचा वो यहाँ आएंगे आप से मिलने…”

सान्वी: “नहीं मैं थोड़ी देर में उनको वहीँ टिया देने जाउंगी, तब मुझको जकरेगा और किश करेगा… मगर कभी कभी एते हैं वो भी किचन में और यहीं मुहको बाँहों में भरते हैं, उसस्के मूड पर देपेंद करता है”

संजना ने कहा, “मैं यहीं छुप कर रहूंगी उंनसे मत कहना के मैं जाग गयी हूँ, मैं आप को उनके साथ देखना चाहती हूँ ok? हीहीहीही!”

सान्वी मान गयी और कुछ देर बाद वो एक कप चाय लेकर गयी टेरेस पर उनको देने के लिए.

संजना किचन से सब देख रही थी, सान्वी जब उनके करीब हुए तो चावला साहब ने झुक कर उनको चाय पिलाने को कहा…. सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “क्यों जी आप छोटे बचे हो जो चाय पिलाना पर रहा है आप को?”

चावला साहब ने बड़े आशिकाना मिसेज में कहा, “अरे जानेमन तुम्हारे हाथ से तो ज़हर भी पिळुन मैं!”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “बुसस बुसस ज़्यादा फेंकिए मैट मैं रख देती हूँ चाय यहाँ बाकी के खुद पी लेना आप मैं चली…”

संजना सब सुन रही थी और दोनों को वैसे एक साथ देख कर संजना को बहोत अच्छा लग रहा था, लगता था सच में दो बहोत प्यार करने वाले हैं बिल्कुल जैसे हस्बैंड और वाइफ लग रहे थे दोनों.

और जैसे hi सान्वी ने कप को टेरेस के छोटे से राउंड टेबल पर रखा झट से चावला साहब ने सान्वी को अपने बाहों में लिया और उस्सको किश करने लगे.

संजना किचन से देख कर कहा, “वूऊओऊ हाउ रोमांटिक थे अरे थी तवो, बहोत प्यार हैं दोनों में देखो तो बिल्कुल पति पत्नी लग रहे हैं, वह चावला साहब वह, आप बड़े आशिक hi हो शाबाश!”

सान्वी ने अपने बाहों को उनके गले में दाल दिया था उनको किश करते वक़्त और किश के बाद उनके गले से लग कर कहा, “बड़ा प्यार ारः है अभी और कल रात मुझको आप की ज़रूरत थी तो जनाब नशे में धुत सो रहे थे!”

तो सान्वी को जाकर हुए hi चावला साहब ने कहा, “अरे तो तू आयी क्यों नहीं? मुझको जगा के शुरू तो करती, तुमको नहीं पता किआ करना चाहिए था मुझको उठाने के लिए?”

सान्वी ने कहा, “हाँ पता है आप के पंत उतार कर आप को वहां सहलाना चाहिए था तब वो खड़ा होता और आप जागते….”

चावला साहब: “हाँ तो फिर किया क्यों नहीं?!”

सान्वी: “वो करने को मैं नहीं था कल, सिर्फ अंदर लेने को बहोत मैं कर रहा था उस वक़्त, आप को उठाने में बहोत वक़्त लगता नाह जी!”

चावला साहब ने और ज़ोर से सान्वी को जकरते हुए अपने लिंग को ज़ोर से दबाया सान्वी के निचे और कहा, “तो चलो मेरे रूम में अभी पूरा कर देता हूँ तेरी तमनाः!”

सान्वी ने उनके बाहों से निकलते हुए कहा, “नहीं नहीं अभी नहीं, बाद में अब, किचन में बहोत कुछ करना है अभी…..”

और सान्वी चली गयी वापस.

जब वो किचन मैं आयी तो संजना ने कहा, “वह भाबी किआ सन था! वो आप को बेहद चाहते हैं नाह?! किआ हर सुबह को ऐसा hi होता है आप दोनों के बीच?”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम्म हाँ ऑलमोस्ट एव्री मॉर्निंग यह होता है, कभी कभी तो मुझको उठा के अपने कमरे में लेजाते हैं और वो सब करके वापस किचन में आती हूँ हाहाहा!”

संजना बहोत इम्प्रेस और खुश हुआ वो सब देख और जान कर. शुक्र है बिल्कुल भी जलन नहीं थी दोनों में.

और कुछ देर बाद जब चावला साहब किचन में गए तो संजना को वहां पाकर बहोत हैरान हुआ और सान्वी के चेहरे में देखते हेउ पूछा, “अरे, तुमने बताया नहीं के यह भी किचन में है आज!”

संजना हंसती जा रही थी ज़ोरों से…. सान्वी ने चावला साहब को बताया के संजना ने बताने से मन किया हुआ था इसी लिए उनको नहीं बताया. तब चावला साहब संजना के तरफ बढ़ा और उस्सको जकरा, और सान्वी सिंक के पास बर्तन धोते हुए दोनों को देखते हुए हंस रही थी और कहा, “अब तेरी बारी है संजना!”

क्यूंकि संजना सिर्फ निघ्त्य में थी बिना गाउन के तो जिस दम चावला साहब ने उस्सको जकरा उस्सकी स्ट्राप तो निचे गए hi थे और जब चावला साहब संजना को किश करने लगे तो संजना के बूब्स बाहर आ गए जिस्सको सान्वी देख कर हंससने लगी….

किश के बाद चावला साहब ने सान्वी को भी पास बुलाया और दोनों बहुओं को एक एक बाज़ू में लेते हुए दोनों को अपने सीने से ज़ोर से लगाते हुए कहा, “वह मैं कितना खुश किस्मत हूँ के ऐसे दो अनमोल हीरे मिले हैं मुझे मेरे घर में, एक फोटो होना चाहिए था अभी….. तो संजना ने कहा “वेट मैं अपनी मोबाइल लेकर आई हूँ” और वो जाने लगी तो चावला साहब ने कहा,

“आरी सुन ऊपर कहाँ जाएगी अपनी मोबाइल लेने, मेरे कमरे से मेरे मोबाइल लेकर आह नाह जल्दी से मेज़ पर है मेरे बीएड के पास…..”

जब संजना किचन में वापस आयी उनके मोबाइल लेकर तो देखा के दोनों किश कर रहे हैं तो एकांत फोटो ले लिया सान्वी और चावला साहब को किश करते हुए… फिर वो भी गयी उनके बाहों में और और चावला साहब ने उन् दोनों को एक साथ अपने बाहों में भरके कई सेल्फीज़ लिए, कुछ क्लिक्स उन्हों ने किये और कुछ संजना ने क्लिक किये कोई 20 फोटोज लिए तीनों ने एक साथ.

तो बे कॉन्टिनोएड…….
 
अपडेट 129 सान्वी & चावला अगेन

संजना ने सान्वी के सामने चावला जी को मुंह में किश किया और सान्वी ने संजना की बट पर उस वक़्त हलके से एक चमाट मारी हँस्ते हुए…

और कुछ देर बाद सब अलग हो गए. चावला साहब अपने कमरे में चले गए, सान्वी किचन में बिजी रही और संजना आरव को उठाने के लिए अपने कमरे में गयी.

जब दोनों भाई तैयार हो गए ऑफिस के लिए तो एक साथ ब्रेकफास्ट कर रहे थे किचन के पास डाइनिंग रूम में, वेल डाइनिंग रूम और किचन एक hi रूम थे, मगर थोड़ा सा डिस्टेंस था जिस जगह पर ओवन, सिंक वग़ैरा थे उस जगह से.

विवान चेयर पर बैठे टेबल पर झुके खा रहे थे, और एक तरफ आरव थे. सनजना ने कपड़े वदल लिए थे अब, वो एक सिंगल ड्रेस में थी जो उस्सकी घुटनों के ऊपर थे, मतलब उस्सकी जांघें दिख रहे थे और वो बैठी भी इस तरह से थी के कोई नज़रें फेरर कर देखे तो उस्सकी पंतय भी दिख जाते. खाते वक़्त आरव बातें कर रहा था. वो सान्वी की तारीफ़ कर रहा था के ब्रेकफास्ट स्वादिष्ट बानी है. और सान्वी के तरफ देखते हुए कह रहा था वो. उस वक़्त संजना सान्वी को देख कर मुस्कुरायी और आरव ने भी सान्वी के तरफ देखा था. तब विवान ने कहा, “क्यों पहली बार उस्सकी बनायी ब्रेकफास्ट खा रहे हो किआ तुम?” तुरंत उस्सको सुनकर संजना ने कहा, “हीहीहीही आप बोलते भी हो?” यह सुनकर विवान का निवाला हाथ में रह गया और खुले मुंह उस्सने पहले संजना को देखा फिर सान्वी के तरफ तो सान्वी ने भी हँस्ते हुए कहा, “संजना ने ठीक hi तो कहा, कब आप की आवाज़ सुनाई देती है इस घर में?!” तो विवान ने मुंह बनाते हुए कहा, “मुझे बेकार की बातें करना पसंद नहीं बिल्कुल, वो तो आरव का काम है उस से बातें करो तुम दोनों मैं निकलता हूँ अब” और मुड़कर आरव के तरफ देखते हुए कहा, “तू आज अपनी कार से आना मुझे वो डील के लिए कुंजल फर्म के यहाँ जाना है बाद में ऑफिस आऊंगा.” इतना कहकर वो निकला गए.

सान्वी ने उनके बाउल उठाते हुए कहा, “यह कभी भी अपने ब्रेकफास्ट कम्पलीट नहीं करते, हमेशा थोड़ा सा चोरर जाते हैं!”

तो आरव ने सान्वी के तरफ देखते हुए कहा, “आप कम्पलीट कार्डो नाह भाबी, कहते हैं झुटान खाने से प्यार बढ़ता है!” और उस्सको विंक किया आरव ने तो संजना जो उसस्के पास बैठी थी उस्सको कहा, “अरे!! अपने भाबी को ेंख मारते हो तुम?!” तो आरव एक मस्करी भरे मुस्कान से सान्वी को देखते हुए संजना को रिप्लाई किया, “वो मेरी भाबी कम फ्रेंड ज़्यादा थी!!” तो संजना ने कहा, “थी?! अब नहीं है?” तब सान्वी भी मुड़कर आरव का जवाब सुनने के लिए उसस्के चेहरे में देखने लगी तो आरव ने संजना को रिप्लाई किया मगर सान्वी के तरफ देखते हुए, “अब तुम आगयी हो नाह संजू डार्लिंग, तुम्हारे आने से पहले की बात कर रहा था मैं!”

इतना कहकर आरव भी उठा, वाश बेसिन में अपना हाथ धोया, मिरर में देख कर अपने बाल सवार और कुछ सामान हाथ में लेकर, संजना को किश किया, उस वक़्त सान्वी सिंक के पास कड़ी दोनों को देख रही थी. जिस वक़्त आरव झुक कर संजना को अपने गाल दे रहा था किश करने के लिए वो सान्वी को देख रहा था, सान्वी भी उसी को देख रही थी, मगर जैसे उस्सने देखा के आरव उस्सको देख रहा है तो सान्वी ने अपनी नज़रें एक तरफ कर लिए. और उस्सने संजना को bye कहा और बाहर के तरफ निकलने लगा तो संजना ने कहा, “भाबी को bye नहीं कहोगे?!” तो आरव बिना पीछे मुड़े कहता गया थोड़ा ऊंचे आवाज़ में “bye भाबी!” सान्वी उसी को मुस्कुराते हुए देख रही थी और धीरे से कहा, “bye आरव”

गेराज में तो किचन के दरवाज़े से hi जाते हैं, तो आरव सान्वी के पास से hi होकर गुज़रा, और सान्वी को एक खुशभु महके आरव के साथ जिस्सको सूंघ कर सान्वी को कुछ याद आया…..

यह वो परफ्यूम था जो सान्वी ने आरव को गिफ्ट किया था जिस दिन वो एयरपोर्ट जा रहा था यूनिवर्सिटी के लिए… सान्वी ने hi आरव के कपड़ों में, उसस्के गले पर इस परफ्यूम को लगाया था उस दिन और जिस वक़्त सान्वी आरव के बाहों में थी एयरपोर्ट पर जाकर हुए, तो आरव के कपड़ों से वो पेर्फुमेस सान्वी के कपडे में ट्रांसफर हुए थे… तो आरव के रवाना होने के बाद कई दिनों तक सान्वी ने उस साडी को नहीं धोया था सिर्फ आरव की वो खुशभू को अपने साडी में बरकरार रखने के लिए…… इस वक़्त सान्वी उस दिन को और उन् लम्हों को याद करने लगी thi…tab तक आरव की कार गेट से निकलते देखा सान्वी ने, संजना बाहर चली गयी थी गेट के पास आरव को सी ऑफ करने, अंदर से सान्वी उस्सको देख रही थी….

और अचानक सान्वी की विज़न को तोडा दीप्ति ने स्टैर्स से उतारते हुए अपने नन्ही नन्ही पाऊँ को एक के बाद एक स्टैर्स उतारते हुए कहा, “मम्मीयिययी, चाचींईईई मैं उठ गईइइइइइ!!!”

उस्सकी आवाज़ बाहर तक गयी जिस्सको सुनकर संजना भागती हुई अंदर आयी सान्वी को देखते हुए, और जल्दी से जाकर दीप्ति को गॉड में उठाते हुए उस्सको हज़ारों चुंबन देते हुए उस्सको टॉयलेट की तरफ ले गयी….. सान्वी उस्सको देखती रही मुस्कुराते हुए, तब तक चावला साहब अपने कमरे से निकली सान्वी को देखते और कहा, “यह दीप्ति जब जागती है तो शोर तो करती थी hi अब उस्सको एक पार्टनर मिल गयी है और ज़्यादा शोर करने के लिए संजना में!!” तो सान्वी ने उनके पास जाते हुए उनके गिरेबान को ठीक करते हुए कहा, “हम्म और उस पार्टनर को किश ने ढूंढा? आप ने hi तो!”

और चावला साहब ने सान्वी को जकरा और अपने कमरे में चलने को कहा. तो सान्वी बोली, “अरे दीप्ति को ब्रेकफास्ट खिलाना है अभी!” चावला साहब ने अपने होंठों को सान्वी के गर्दन पर ब्रश करते हुए कहा, “अरे उस्सको संजना संभाल लेगी नाह, हम तो अब आराम से अंदर रह सकते हैं चलो तो, कल रात की कमी पूरा कर देता हूँ नाह!”

सान्वी ने कहा, “नहीं वेट, पहले मैं संजना को समझाड़ूं के दीप्ति को किआ देना है उसस्के बाद आती हूँ, आप यहीं ठहरो!”

और सान्वी ने जाकर दीप्ति को संजना के साथ ब्रश कराई और वापस आये तीनों किचन में तो सान्वी ने दीप्ति का ब्रेकफास्ट सर्वे किया जिस्सको संजना ने लिए खिलाने के लिए, तो चावला साहब आकर सान्वी को बाहों में भरा संजना के सामने और कहा, “तुम दीप्ति को संभालना तब तक हम कुछ देर में आते हैं okay?” तो संजना दोनों को देखते हुए एक नटखटी ऐडा से कहा, “मैं भी ज्वाइन करूँ?!” तो सान्वी ने उस्सको हलके से मारा तब संजना ने कहा, “इतस okay मैं मज़ाक कर रही थी आप दोनों जाओ मैं संभाल लुंगी दीप्ति को!”

कमरे में पहुँचते hi चावला साहब ने झट से सान्वी की गाउन को निकाल फेंका और उस्सकी निघ्त्य में उस्सको जाकर; खड़े हुए दोनों एक दूसरे को किश करते हुए चलते गए बीएड के तरफ, उस दौरान सान्वी की बाहें चावला साहब के पीठ पर फेरर रहे थे और चावला साहब वैसे hi किश जारी रखते हुए चलते जा रहे थे मगर उसी वक़्त सान्वी की निघ्त्य की स्ट्राप को सरकाते हुए बढ़ रहे थे बीएड के तरफ और बीएड तक आने पर सान्वी की निघ्त्य निचे फर्श पर पाए गए…. चावला साहब का एक हाथ सान्वी के बूब को दबाने लगे तब तक बीएड आगया और चावला साहब बीएड पर बैठे, और सान्वी ने उनके टीशर्ट निकला, वो उस वक़्त कड़ी थी उनके सामने, फिर सान्वी ने चावला साहब को लेटाया बीएड पर, और उनके पंत उनतारने लगे….. दिख रहा था कैसे सान्वी को उनकी ज़रुरत ज़्यादा थी उस वक़्त. चावला साहब लेते हुए सान्वी के चेहरे में देख रहे थे, और उनको दिखा के जिस बेसब्री और ख़ुशी से सान्वी उनके पंत फिर अंडरवियर निकाल रहे थे उनके लिंग को हाथ में लेकर सहलाते और चूमते हुए, बिल्कुल ऐसा लगा जैसे किसी भटके हुए मुसाफिर को मंज़िल गयी हो. सान्वी कल रात से उनके साथ हमबिस्तर होना चाहते थे, उस आग को उस्सने बरकरार रखा रात भर और अभी बुझाने का वक़्त सामने आया था सान्वी के लिए.

चावला साहब का लुंड जमके खड़ा हो गया था सान्वी के मुलायम हाथों में आकर, और सान्वी ने खुद उनके दोनों टांगों के थोड़ा सा फेलाते हुए उनके लिंग को पहले किश किया, फिर अपनी जीब फेर्रा उसस्के ऊपर सान्वी ने तब मुंह में ले लिया और चुस्सने लगी नज़रों को ऊपर बीएड पर करके चावला साहब के चेहरे में एक तड़प देखते हुए……

चावला साहब से सेहेन नाह हुआ और जल्दी से सान्वी को अपने ऊपर उठाया, सान्वी उनके ऊपर थी, और सान्वी की पंतय अब भी उसस्के जिस्म पर थे मगर तब चावला साहब के लिंग पर रागढ रहे the…Chawla साहब सान्वी को उस पोजीशन में किया के सान्वी के बूब उनके मुंह में थे और जिस्म बिल्कुल उनके ऊपर थी सान्वी के. सान्वी खुद अपनी कमर को हिलाते हुए चावला साहब के लिंग पर अपनी योनि को पंतय समेत रागढ रही थी गर्दन को ऊपर उठाये हुए छत ताकते हुए.

तब धीरे धीरे चावला साहब के हाथ सान्वी के नितम्बों से होते हुए उस्सकी पंतय को निकल फेंका और झट से सान्वी ने अपने हाथ से उनके लिंग को अपने फिसलती हुई योनि के अंदर डाला और खुद अपनी कमर हिलाते हुए लुंड का मज़ा अपने अंदर महसूस करने लगी हांफते हुए.

चावला साहब पीठ पर लेते हुए थे और सान्वी उनके ऊपर कसमसाते हुए अपने जिस्म के अंदर उनके लिंग को अंदर बाहर होते हुए महसूस किये जा रही थी और चावला साहब के जीब भी चूस रही थी एक साथ.

ज़िदा देर नहीं लगी सान्वी को फील करते के चावला साहब भी उसस्के निचे अपने कमर को उठाकर ढाका देने लगे और सान्वी की चीख निकली, “आआआअह्ह्ह्ह उउउउउइइइइइइइ स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्हह्ह uuuufffffffffff….. सान्वी झड़ने लगी उस्सकी योनि से जैसे नदी बहने लगे और चावला साहब का लुंड और भी बहोत ज़्यादा आसानी से अंदर बाहर होने लगा…. सान्वी लेट गयी उनके छाती के ऊपर अपने गाल सटाते हुए और हांफते हुए ज़ोरों से जबकि चावला साहब ने कुछ ढके और दिए तब जल्दी से अपने लिंग को बाहर निकाल के तमान वीर्य को सान्वी के और अपने जिस्म के बीच में चोर्रा…. सान्वी के पथ और चावला साहब के पथ के बीच सारे वीर्य लत पथ हो गए, और दोनों के पथ जैसे चिपक गए उनके वीर्य से…..

दोनों हांफते हुए कुछ देर वैसे hi लेते रहे एक दूसरे के ऊपर, किश करते, और एक दूसरे को सहलाते हुए जब बाहर से दीप्ति की आवाज़ सुनाई दिए चिलाते हुए “मुम्ममइय्यययय वापस ाजाआऊवो!!!”

तो बे कॉन्टिनोएड……….
 
अपडेट 130 सान्वी एंड चावला इन लव

संजना उस दिन शाम को 3 बजे अपनी कार लेकर निकली अपने पापा से मिलने जाने को. दीप्ति भी जाना चाहती थी मगर सान्वी ने कहा के दीप्ति को बुरी आदत पर जाएगी इस तरह से हर रोज़ कार में गुमने को, तो संजना ने दीप्ति को समझा बीझा कर घर पर hi रहने दिया और वो चली गयी.

सान्वी और चावला साहब तबसे लेकर शाम 7 बजे तक अकेले रहे एक लोविंग कपल की तरह कभी एक दूसरे के बाहों में तो कभी दीप्ति उनके बीच में जैसे चावला साहब hi दीप्ति के पिता थे.

चावला साहब कल की सान्वी और आरव के एक साथ रहने की बात को लेकर एक कन्वर्सेशन करने लगे सान्वी के साथ. तब दीप्ति उन् के बीच नहीं थी, उस्सको हमें थमा कर ऊपर उस्सकी छोटी जेल में चोर दिया था सान्वी ने. मगर बात किसी और सब्जेक्ट से शुरू हुई थी तब जाके आरव पर होने लगे.

लाउन्ज में काउच पर बैठे, सान्वी चावला साहब के बाहों में थे, उस्का सर उनके छाती से लगे हुए थे बिल्कुल प्यार में डूबे थे दोनों. हमेशा की तरह सान्वी उनके छाती के बालों में अपनी उँगलियाँ फरते हुए बात किये जा रही थी, और चावला साहब सान्वी के सर के बालों में अपने उँगलियाँ फरते हुए बात कर रहे थे.

सान्वी ने बड़े प्यार से पूछा,

“आप किश दिन को मुझसे इस तरह के चाहने लगे थे, बहोत पहले की बात है, दीप्ति के जनम से पहले या बाद में?”

चावला साहब ने कहा, “तुम यकीन नहीं करोगे अगर सच कहूंगा तो!”

सान्वी: “क्यों यकीन नहीं करुँगी, यकीन करुँगी आप बताएँ तो!”

चावला: “अगर मैं कहूं के जिस दिन तुम इस घर में पहले दिन आयी थी तभी से मैं तुमको चाहने लगा था तो यकीन करोगी?”

सान्वी ने हँस्ते हुए कहा, “नहीं अभी तो आप झूट बोल रहे हो!”

चावला: “देखा मैं ने कहा नाह के तुम यकीन नहीं करोगी!”

सान्वी उनके सीने से उठते हुए उनके चेरे में देखने लगी थोड़ा हैरानी से और कहा,

“मगर यह कैसे मुमकिन है? आप तो मेरे तरफ देखते भी नहीं थे उन् दिनों को, कब और कैसे आप मुझे चाहने लगे थे तब भला?”

चावला “तुम दुल्हन की लिबास में थी, मैं पीछे लाउन्ज में खड़ा था, तुम्हारा स्वागत विवान के दूर के चहियों और उनके बेटियों ने किया था, मैं तुम्हारे सामने था मगर तुम्हारी नज़र झुके हुए थे, मैं वहां किचन के पास खड़ा सीधे तुम्हारे चेहरे मं देख रहा था, जिस वक़्त तुमने वो चावल वाले बर्तन पर लात मार्के गिराया था मेरी नज़र तुम्हारे पाऊँ पर पड़े थे, तुम ने कुछ देर अपने पाऊँ को ऐसे hi हवा में उठाये रखा था, मैं तुम्हारे पाऊँ की रंग और उँगलियों को देख रहा था, अदमीरे कर रहा था, कितनी कोमल और नाज़ुक दिख रहे थे, फिर मैं ने नज़र ऊपर उठाकर तुम्हारे ेंखों को देखा , उन् में एक उदासी थी, शायद अपने घर को चौररने वाली उदासी थी, फिर तुम्हारे गालों को, नाक को, पेशानी को, थोड़ी को, तुम्हारे नाक की उस नथनी में जो चैन लगा हुआ है जो कान की बाली तक जाता था उस्सको देखा, तब देखा एक बार तुम्हारी नज़र मुझ पर पड़े उस वक़्त मैं ने नज़रों को हटाया एक पल के लिए….”

उस वक़्त सान्वी बहोत hi हैरान चावला साहब को सुन रहे थे और, अपने पाऊँ को अपने करीब किया और चावला साहब को दिखाते हुए कहा, “यह रहा किआ है इस में नार्मल तो है…..”

चावला साहब ने कहा. “तुम मेरी नज़रों से देखोगी तब नाह तुमको वो दिखेगा जो मुझे दिखा था….”

और चावला साहब ने तुरंत सान्वी की उस पाऊँ को चूमा, सान्वी को हंसी आयी और पाऊँ को खिंच लिया मगर अब चावला साहब सान्वी के पाऊँ को और चूमना और प्यार करना चाहता था… तो वो निचे फर्श पर बैठ गए और, सान्वी की पाऊँ को अपने हाथ में पकड़ने की कोशिश में था मगर सान्वी ने अपने पाऊँ को साडी के अंदर छुपा लिया हँस्ते हुए….

“नहीं चोररये नाह हम्म किआ कर रहे हो आप किआ है मेरे पाऊँ को चोररये नाह मुझको गुदगुदी हो रहा है हाहाहाहाहा!” ऐसा कुछ कहने लगा सान्वी जब चावला साहब उसस्के पाऊँ को पकड़ने की कोशिश में लग गया था….

आखिर में चावला साहब ने सान्वी की एक पाऊँ को अपने हाथ में ले लिया और वह, किआ बात है, कभी एक हसीं जवान औरत की गोरी पाऊँ को करीब से देखा है किसी ने? बहोत रोमांटिक होता है जब एक मर्द एक खूबसूरत गोरी, पाऊँ को अपने हाथों में लेता है, सहलाता है, चूमता है. यह सब चावला साहब करने लगा सान्वी के पाऊँ को… सान्वी के रौंदते खड़े हो गए थे उस वक़्त, और सिकुड़ सी गयी थी उस छुवन से….. वो चावला साहब के चेहरे में देख रही थी पाऊँ को अपने तरफ खींचने की कोशिश में, मगर चावला साहब को जैसे उसस्के उस पाऊँ से प्यार था, उस्सने पाऊँ को थोड़ा सा ऊपर उठके उसस्के तलवे को चुम्मा, और उसस्के उँगलियों को मुंह में ले लिए चुस्सने को… सान्वी ने ेंखें मुंध लिए और एक गहरी सांस लेते हुए तड़पती आवाज़ में कहा, “उफ्फ्फ प्लीज चोररये नाह किआ कर रहे हो आप, प्लीज बुसस कीजिये नाह अब तो!!”

चावला साहब ने तब ऊपर नज़रें करके सान्वी के चेहरे में देखा हाथ में पाऊँ को लिए हुए और कहा, “क्यों कैसा लग रहा है तुमको?”

सान्वी ने ेंखें खोली और उनके नज़रों की गहराई में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “उफ़ मैं नहीं बता सकती के कैसा लग रहा है आप बड़े वो हो! मुझको बहोत अजीब laga…weise आप ने पिछले 5 सालों में तो कभी नहीं कहा कुछ भी मेरे पाऊँ के बारे में और पिछले कई बार इश्क करते वक़्त भी आप ने तो मेरे पाऊँ को कबि भी नहीं छुआ ऐसे तो आज किआ हुआ आप को?!”

चावला साहब ने मुस्कुराते हुए हाथ में में पाऊँ को थामे और सहलाते हुए कहा, “तुम तो ऐसे कह रहजी हो जैसे पिछले 5 सालों से तुमसे यह सब करता आया हूँ, हम ने तो सिर्फ 4 या 5 बार सेक्स किया है डार्लिंग, और हर बार रश में किया हैं, कभी ऐसे आराम से प्यार करने मौका कब मिला हैं हमें? तुम्हारे जिस्म के हर एक हिस्से को प्यार करता हूँ, पुरे जिस्म को एक्स्प्लोर करने का मौका hi कहाँ मिला है अभी? तुम्हारे साथ कभी 6 घंटे भी मिले साथ बिताने को तो भी कम होगा तुम्हारे पुरे जिस्म के हर कोने को छूना और चूमना और निहारना….”

संवी ने चावला साहब के गाल पर प्यार से अपने हाथ फरते हुए कहा, “इतना प्यार करते हो आप मुझसे? मुझे मालूम नहीं था, मैं समझी आप सिर्फ सेक्सुअली अत्त्रक्ट हो मेरे तरफ!!”

चावला साहब ने कहा, “मैं अगर किसी से प्यार नाह करूँ तो सेक्स कर hi नहीं पाउँगा, मुझे पहले प्यार करना चाहिए तब सेक्स करूँगा वार्ना बिल्कुल भी सेक्स नहीं करूँगा…..”

सान्वी, “इस्सके मतलब वो वासना नहीं था हमारे बीच?”

चावला साहब, “बिल्कुल भी नहीं, तुम किआ उस्सको वासना समझते थे इतने दिनों से?”

सान्वी: “पता नहीं?” मेरे समझ में तो कुछ भी नहीं आया, हाँ शायद मैं इस्को वासना hi समझती रही हूँ!!..... मगर एक बात बताइये, मैं ने पिछले 5 सालों में आप को कभी भी मेरे पाऊँ को देखते हुए नहीं देखा!”

चावला साहब: “तुम किआ जनों के कब मैं तुम्हारे पाऊँ को देखता हूँ! उस वक़्त तुम मेरे तरफ देखते hi नहीं जिस वक़्त मैं वहां देखता हूँ…”

सान्वी: “मगर कब?”

चावला साहब: “जब तुम कपडे सूखने को डालती हो चाट पर, जब तुम टीवी देखती हो लाउन्ज में, जब तुम लेती रहती हो काउच या बीएड पर, जब तुम चलती आती हो कहीं भी….”

सान्वी: “और उस वक़्त मैं क्यों आप को नहीं देखती के आप मेरे पाऊँ को देख रहे हो?”

चावला साहब: “वो तुम जानों नाह?! शायद तुम यह सोचती हो के मैं निचे ज़मीन देख रहा होता हूँ हहहहए!”

और चावला साहब ने तब सान्वी के दूसरे पाऊँ को हाथ में लेकर चूमने और चाटने भी लगे, सान्वी की आवाज़ तड़प में निकली और और उस्सने फिर ेंखें मुंध लिए उंनसे रोकने की बिनती करते हुए. सान्वी की दिल की धड़कनें तेज़ होने लगी थी और और वो थोड़ा सा हांफने भी लगी थी और चावला साहब धीरे धीरे पाऊँ को किश करते हुए उस्सकी साडी को ऊपर उठाते हुए ऊपर बढ़ने लगे और उस्सकी जाँघों के तरफ जा पहुंचे…. सान्वी लेट गयी काउच पर और हांफते हुए कहा, “ोफो अभी यहाँ करोगे किआ आप?!”

चावला साहब: “करना ज़रूरी है किआ? इतना कुछ hi करना काफी होगा, क्यों तुम्को और करने का मैं कर रहा है तो बोलो करते हैं नाह किआ हर्ज है!”

सान्वी, “नहीं मुझको और नहीं करना अभी कुछ देर पहले तो किया नाह?!” वैसे अगर आप को मैं कर रहा है टी कीजिये!”

चावला साहब, “बूढ़ा हो रहा हूँ और अब तो दो दो संभालना है इस लिए बचा कर एनर्जी को रखना होगा मुझे तो इस्को जाया क्यों करूँ जानेमन, जब तुमको ज़रूरत होगी तो हिचकिचाना मत बस इशारा कर देना मैं समझ जाऊंगा okay स्वीटहार्ट?!”

सान्वी: “हम्म्म ठीक है मगर आप नशे में नहीं होंगे तब नाह इशारा करूँ, कल रात को कितना चाहिए था मुझे मगर आप लुढ़क गए थे, इसी लिए कहती हूँ ज़्यादा मत पिया करो आप!!... या थोड़ा सा पियो, फिर करने के बाद जितना चाहे पी लेना…”

चावला साहब: “हाँ यह सही कहा तुमने, करने के बाद लुढ़क जाऊंगा तो chalega…to तुम मेरी जान मुझको इशारा तब करना जब मैं पीना शुरू करूँ, ठीक है?!”

सान्वी: “हम्म ठीक है… मगर मेरे समझ में नहीं ारः की आप कैसे मुझसे शुरू से प्यार करते हो? आप तो बहोत सीरियस रहा करते थे, मैं तो आप से डर्टी थी बात करने को भी… आड़ है आरव के लिए खाना लेजाती थी ऊपर तो आप किश तरह से ग़ुस्से में देखते थे मुझे, और आप नहीं कहते थे के मैं हर बार आरव के लिए खाना ले जॉन ऊपर?!”

चावला साहब: “हाँ तो अब भी तुम नहीं समझी के क्यों मई नहीं चाहता था के तुम ऊपर अकेली उसस्के साथ उसस्के कमरे में रहो? अब आयी किआ बात समझ में?!”

सान्वी: हाय राम तबसे?? आप को जलन होती थी जब मैं आरव के कमरे में जाती थी? उन् दिनों से आप मुझको चाहते थे? दीप्ति के आने से पहले? मेरा प्रेग्नेंट होने से पहले? उफ़ मेरी माँ!! मुझे क्यों कुछ नहीं दिखा था तब?

चावला साहब: “तब से? अरे जिस दिन तुमने इस घर में कदम रखा था तबसे कहा मैं ने!! किआ करता मैं ने इस घर में एक औरत को नहीं देखा था पिछले 18 सालों से…. 18 सालों के बाद एक तुम जैसी खूबसूरत औरत आयी थी इस घर में, मैं अकेला था, तनहा था, और तुम बहोत अच्छी थी, बेहद खूबसूरत और कमाल की अदाओं वाली थी, तुम्हारे इंग अंग को देखता था मैं… एक दिन तो तुम नाहा रही थी अपने कमरे में तब मैं ग़ुस्सा था छुपके से तुमको झाँकने के लिए और तुम्हारे उतारे हुए कपड़ों को सुंघा था तुम्हारे घर में ान ेके 1 हफते की बात बता रहा हूँ!!”

सान्वी: “रियली? तो यह तो ठरकीपन वाली बात हुई इस में प्यार कहाँ था?!”

चावला साहब: “लो कल्लो बात अरे प्यार करता था तुमसे तभी तो तुम्हारे कपड़ों से भी प्यार करता थान नाह?!

सान्वी पागल होती जा रही थी उनके बातों को सुनकर और सोच रही थी क्यों उन् दिनों को hi उस्सने भी उंनसे प्यार नहीं कर लिया था…..

चावला साहब ने पूछा, “और तुम कब से मुझसे प्यार करने लग गयी यह तो बताओ….”

सान्वी: “जब मैं प्रेग्नेंट थी, जीन दिनों आप ने ऑफिस जाना बांध कर दिया, आप मेरे ेंखों के सामने रहते थे चारों पेहेर तब!! तबसे आप के लिए दिल में जगह बना लिया था मैं ने और तब से आज तक आप की हर हरकतों पर नज़र रखते आयी हूँ… दिन बा दिन आप के लिए प्यार और भी बहोत ज़्यादा बढ़ता गया और मैं डूबती गयी आप के प्यार में…. आप से दूर रहना मुश्किल हो गया था, जीन दिनों आप संजना के यहाँ जाने लगे थे तो मैं जैसे बीमार हो जाती थी, उन् दिनों आप को सामने देखने के लिए तड़पती थी आप को बहोत hi मिस करती थी, लगता था दिन भर घर में कुछ कमी है, लगता था मेरे जिस्म का एक अंग मिसिंग है….. बहोत दुःख होता था मुझे…..”

चावला साहब ने “ओह माय पुअर स्वीटहार्ट” कहकर बड़े ज़ोर से सान्वी को गले लगाया और दोनों एक दूसरे के बाहों में इस तरह से खो गए जैसे इस दुन्या में नहीं थे दोनों……

तो बे कॉन्टिनोएड…… (2200 वर्ड्स)
 
अपडेट 131 Sanjana’s part


संजना जबसे शादी के बाद ड्राइविंग करके अपने गाओं जाती रही अपने पापा से मिलने तो कई सारे वाक़ियात पेश आये उस तरफ भी जो अभी तक नहीं कहा गया है.

संजना थी तो बहोत hi सेक्स माइंडेड और कितनों के साथ जा चुकी थी यह तो सबको पता hi है. मगर किआ किसी ने सोचा के शादी के बाद जब वो घर से कार लेकर निकलती है तो किआ किआ करती है? किश किश से मिलती है, कहाँ कहाँ जाती है?

तो चलिए ज़रा उस के बारे में कुछ पता करते हैं.

जब शुरू में संजना शादी करके चावला फॅमिली मेंबर बन गयी तो उस्का स्टेटस अपने आप बढ़ गयी क्यूंकि वो मरस. चावला जो बन गयी थी.

और सारे गाओं में सबको पता चल गया था के चावला की बहु बानी है संजना तो सब उस्सको रेस्पेक्ट करने लगे यहाँ तक के उस छोटे से शहर में जहाँ वो कॉलेज जाती थी वहां के बहोत सारे लोगों को भी पता चल गया के वो चावला की बहु बन गयी है, और जब वो कार लेकर उस शहर में जाती कभी अपने पापा से मिलने, फिर मॉल में कुछ खरीदने, या पेट्रोल पंप पर पेट्रोल लेने, या कहीं से भी गुज़रती उस शहर में तो हर किसी को पता था के अब वो सिर्फ संजना नहीं जिस्सको वह लोग पहले से जानते थे मगर अब वो मरस. चावला है. चावला की टैग लग गयी थी उस पर तो रेस्पेक्ट सभी के तरफ से ऑटोमेटिकली उसस्के तरफ बढ़ गए थे.

तो शादी के बाद संजना ने खुद को संभालने की कोशिश किया के अब वो शादी शुदा है और सीरियस हो जाना चाहिए एक ज़िम्मेदार बहु की तरह. मगर जिस वक़्त शादी के बाद भी उस्सने चावला साहब को, याने अपने ससुर के साथ सेक्स किया, फिर गाओं जाकर अपने पापा से भी सेक्स किया तो संजना अपने आप को फिर से वही संजना महसूस करने लगी जो वो पहले thi…matlab फ्री सेक्स के बारे में और जिस्म की गर्मी को मिटाने के लिए उसस्के लिए किसी से भी सेक्स करना नार्मल लगने लगा.

संजना उस टाइप की लड़की थी जो लाइफ को खूब एन्जॉय करना जानती और चाहती थी, और ख़ास कर सेक्स को लेकर वो बहोत hi ओपन थी और उसस्के लिए सेक्स सिर्फ एक प्यास थी जिस्सको बुझाना होता था जिस किसी से भी उस्सको पसंद आये. उस्सको सेक्स वैसे पसंद था जिस से कोई बंधन नाह हो, बुसस एक बार हो और किस्सा ख़तम. प्यार, लगाओ, अपनापन सिर्फ आरव, चावला साहब और अपने पापा के साथ था, बाकी वो ऐसा सोचती थी के अगर अपने पहले आशिकों के साथ एक बार एन्जॉय कर लिया जाए तो बुसस एक मोमेंट की प्लेअसुरे था उसस्के लिए और कुछ नहीं….

संजना और सान्वी में एहि एक फरक था. सान्वी एक बंधन में बांध कर जीना चाहती थी मगर विवान वैसा नहीं था तो उस्सको चावला साहब से वो बंधन वाला प्यार मिला…. मगर संजना के लिए सब बहोत डिफरेंट थे इस लिए के वो सेक्स को लेकर बहोत कम उम्र से hi ओपन थी और कितनों से एन्जॉय कर चुकी थी तो उसस्के लिए यह सब बहोत नार्मल बात होती thi…magar वो जानती थी के कौन सा रिश्ता सीक्रेट और बिल्कुल प्राइवेट होना चाहिए और कौन से रिश्ते को आम पब्लिक को पता चलना चाहिए, मतलब संजना को पता था के सोसाइटी में से किआ छुपाना चाहिए और किआ सामने लाना चाहिए. उस्सको पता था के हमारे सोसाइटी में कितने चीज़ों को तबू समझा जाता है और संजना तबू चीज़ को मानती hi नहीं थी अपने दिल से. उसस्के लिए सब कुछ नार्मल था और कुछ भी तबू नहीं होती थी, संजना के लिए सिर्फ समाज ने सब कुछ तबू किया हुआ है…. उसस्के नज़र्या बिल्कुल अलग होते थे समाज के बनाये हुए उसूलों और दस्तूरों से….

तो शादी के कोई दो हफ्ते बाद जब वो एक दिन गयी थी अपने पापा के यहाँ, तो वैसे तो वो शाम को जाती थी हमेशा क्यूंकि उसस्के पापा काम से शाम के 5 बजे घर वापस एते थे तब उसस्के साथ वक़्त बिताती 7 बजे तक तब वापस अपने चावला फॅमिली के घर आती और कभी कभी आरव उस्सको लेने जाते थे ड्राइवर के साथ जो कार लेकर वापस अत था और आरव संजना के कार में वापस एते थे. ऐसा बहोत बार हुआ.

तो एक दिन ऐसा हुआ था के संजना दिन के बारह बजे अपने पापा के घर जा चुकी थी.

अपने पापा के घर में उस्सने कुछ काम किये और बाहर निकली थी कुछ नज़ारा देखने को के, रघु गुज़र रहा था अपने बाइसिकल पर तो वो रुक कर उस से बात करने लगे…. इस से पहले कोई 3 बार संजना जा चुकी थी वहां और एक बार रघु के दूकान पर रुक कर संजना ने कुछ ख़रीदा भी था, मगर ज़्यादा बात नहीं हुई थी रघु से उस दिन को. और हर बार जब संजना आती तो ऑफ़ कोर्स रघु के दूकान के सामने से गुज़रती तो थी hi, मगर सिर्फ वेव करती थी रघु को अगर दीखता था तो. अब रघु भी उसस्के तरफ ज़्यादा रेस्पेक्ट से देखता क्यूंकि वो एक बंव ड्राइव करते हुए गुज़रती, और संजना की स्टेटस बड़ा दीखते थे सबको, तो रघु को भी वैसा hi दीखता, के संजना अब वो सनजना नहीं रही जिस से वो कभी मज़ा किया करता था….

मगर इस दिन को जब संजना अपने घर के सामने कड़ी ठंडी हवा खा रही थी तो रघु गुज़र रहा था साइकिल पर तो वो रुक कर बात करने लगा संजना से.

रघु: “hello मैडम जी किआ हाल है!”

संजना: “हीहीहीही मैडम जी क्यों कह रहे हो मैं तो वही संजना हूँ, एक बंव ड्राइव करती हूँ तो मैडम जी हो गयी मैं?”

रघु: “अरे तौबा तौबा, तुम तो चावला फॅमिली की मेंबर हो रेस्पेक्ट तो बनता है बाप!”

संजना: “अरे चोर्रो यार, यह सब कहने की बातें हैं मैं वही हूँ जो थी पहले कोई बड़ी नहीं हूँ मैं!”

रघु: “अगर वही हो तो हमारा वो भी हो जाए क्यों? अकेली हो नाह अभी?!”

संजना: “अरे नहीं रघु ी ऍम मैरिड नाउ, पति है मेरा, मैं किसी की पत्नी हूँ तो ठीक लगता है किआ वो सब करना अब… जब यहाँ रहती थी, शादी नहीं हुई तब बात और थी नाह यार!”

रघु: “देखा एहि तो कह रहा हूँ के अब चावला बन गयी हो तभी तो यह डिफरेंस हुआ है नाह!”

संजना: “ोफो अब तुम मेरा मुंह मत खुलवाओ वार्ना गाली दूंगी तुमको अभी हाँ!! मेरा किसी से भी शादी होता, चाहे चावला हो या किसी और से भी तब भी मैं एहि कहती तुमको!”

रघु: “हम्म अगर, यहीं गाओं में उस उल्लू से शादी करती तब भी मुझको नहीं लेने देती? बोल!”

संजना: “तुमको कैसे पता के मेरा शादी उस से होता?”

रघु: “तेरे बाप ने कहा था के तेरा शादी उस से करवाएगा ताके तुम उसस्के ेंखों के सामने रहो!”

संजना: “और तुम किआ समझते हो के मैं उस पागल से शादी करती किआ?”

रघु: “मुझे तो ख़ुशी होता के तुम उसी से शादी करती, तब तो मैं तुमको रोज़ मिलता और खूब एन्जॉय करता उसस्के सामने hi वो कुछ भी नहीं समझता के हम मिया कर रहे हैं!! हाहाहा!”

संजना ने हँस्ते हुए रिप्लाई किया, “वह बीटा यह सब सोच लिया था तुमने? तेरा सपना तो टूट गया रे रघु!”

रघु: “अगर तू चाहे तो वो सपना अब भी पूरा हो सकता है, बुला ले नाह अंदर एक बार ज़रा चख के तो देखूं के शादी के बाद तेरा स्वाद बदला है के वही है अब भी!”

संजना: “नहीं यार यह ठीक नहीं होगा ाचा नहीं लगता नाह!”

रघु: “ाचा तो एक बात बता मुझे, किआ तू अपने पापा को खुश नहीं करती अब भी? क्यों अति रहती हो बार बार उस्सको खुश करने के लिए hi नाह? शादी करने के बाद भी अगर पापा को खुश करने अति है तो मुझे भी वैसे hi खुश कार्डो नाह एक बार, सिर्फ आज फिर कभी नहीं कहूंगा!”

संजना उस्सको मुस्कुराते हुए देखती है और पूछती है, “तुमको कैसे पता के मैं उसस्के लिए आती हूँ? यह मेरा घर है इस्को मिस करती हूँ इस लिए आती हूँ!”

रघु: “चल झूटी मुझे सब पता है…”

संजना: “किआ तू अब भी झाँकने अत है जब मैं पापा के साथ होती हूँ?”

रघु: “हम्म अब समझी तू!”

संजना: “बदमाश कहीं का बेशरम, मगर तू कैसे अत है तेरा तो दूकान चलता है उस वक़्त?!”

रघु: “कौन सी बड़ी बात है चुंगल को दूकान संभालने को कहता हूँ कुछ देर के लिए तुमको देख कर वापस चला जाता हूँ मुठ मार्के तेरे नाम पर!!”

संजना फिर से हँस्ते हुए कहती है, “तू नहीं सुधरेगा रे रघु, तू शादी क्यों नहीं कर लेता अब?”

रघु: “किश से करूँ? तू तो चली गयी, उस पगले के बदले मैं खुद तेरे पापा से तेरा हाथ मांगने वाला था, मैं तुझको तेरे बाप से शेयर करने को तैयार होता और उस से कहता के तेरी शादी मुझसे करदे और जब भी चाहे वो भी तुझे लें!”

संजना ने फिरसे हँस्ते हुए कहा, “अरे वह तो फिर कहा क्यों नहीं पापा को वो तो ज़रूर मान जाता, तब तो सच में मज़ा अत नाह?!”

रघु: “साला जब कहने वाला था तो तेरी मांगनी की खबर दिया तेरे बाप ने मुझको, फूटी किस्मत जो है मेरी साला!”

संजना: “अरे अरे बेचारा रघु ने मुझको मिस कर दिया हीहीहीहीही! मगर फिर भी मुझसे खूब ेश किया नाह तुमने बिना शादी के तो तुमको खुश होना चाहिए!”

रघु: “एक बार और करते हैं नाह ेश, चल न अंदर अत हूँ main…chal नाह ऋ संजना बेबी!”

संजना: “नहीं आज नहीं, जब मैं करेगा तो बताउंगी तुझे, अभी नहीं, फिर कभी रघु!”

रघु: “यह तेरा फिर कभी, कभी भी नहीं आएगा पता है मुझे!”

संजना: “हीहीहीही! क्यों?”

रघु: “तुम नहीं आओगी मेरे साथ अब, तुमको आमिर लोगों की लेथ लग गयी है अब नाह इसी लिए!”

संजना: “बिल्कुल भी नहीं, मैं अब भी वही संजना हूँ और वही रहूंगी, मुझे अमीरी या पैसों से कोई भी लगाओ नहीं है…. समझा तू? अब चल भाग यहाँ से वार्ना मैं गली देना शुरू करती हूँ हु भी ज़ोर से चिल्ला कर चल भाग!”

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वो उस दिन हुआ था जब संजना तीसरी बार गाओं गयी थी… अब आते हैं आज जब संजना आयी है दीप्ति को घर पर चावला और सान्वी के साथ चोरर कर…. फिर बाद में देखते हैं किआ किआ किया था संजना ने गाओं में…….

शाम को आनंद वापस आया काम से तो संजना ने ख़ुशी से उस्सको रिसीव किया उसस्के बाहों में जाकर कसके उस्सको जकरते हुए. आनंद खुश नहीं दिख रहा था थक्का हुआ और फिकरमंद दिख रहा था तो संजना ने पूछा,

“किआ बात है पापा आप बहोत स्ट्रेंज दिख रहे हो आज!! आप तो मुझे देख कर ख़ुशी से उछलते थे!”

आनंद ने एक लम्बा सांस चोरते हुए कहा,

“किआ बताऊँ बेबी, काम में कुछ प्रोब्लेम्स चल रहे हैं कुछ दिनों से!”

संजना: “कैसा प्रॉब्लम पापा?”

आनंद: “कंपनी के मालिक ने अन्नोउंस किया के कंपनी बांध होगा अब!!”

संजना: “अरे मगर क्यों? स्टील कंपनी कितना ाचा चल रहा था!”

रघु: “रेसीवेर्शिप में चला गया है, ओनर ने बन्क्रप्त डिक्लेअर किया हुआ है, रीज़न दिया है के अल्लिमिनियम इंडस्ट्रीज की एक्सपेंशन की वजा से स्टील के काम बिल्कुल गिरर्र गए हैं और वो आगे नहीं बढ़ सकता…. कोई 2000 वर्कर्स हैं सब रास्ते पर आजायेंगे…. अल्लिमिनियम भी स्टार्ट किया गया है और मुझे सभी अल्लिमिनियम के यूपीएस एंड डाउन्स का बहोत अच्छी तरह से पता है, मेरा बुसस चलता तो पुरे फैक्ट्री को अल्लिमिनियम में hi कन्वर्ट कर देता तब 100% प्रॉफिट होता, मगर साला यह मालिक चुटिया लग रहा है मुझे, वो मालिक का बीटा है, ेश करता है, बाप मर गया और बीटा पैसों को उदा रहा है, कंपनी को लोस्स करा रहा है……”

संजना: “तो अब किआ होगा? आप बेकार हो जाओगे किआ?”

आनंद: “नहीं संजना मैं कुछ नाह कुछ तो करूँगा कंपनी को बचाने के liye….ek बहोत hi बड़ा दो चलना है मुझे अब… दो नहीं बल्कि असलियत को अब सामने लेन के वक़्त आगया लगता है मुझे!”

संजना: “ोफो आप किआ बड़बड़ा रहे हो पापा मेरी तो कुछ समझ में नहीं आरहे हैं, उफ़, आप जाइये एक गरम शावर ले लीजिये, और बे क्विक कहीं आरव फ़ोन नाह करे के वो आने वाला है उसस्के आने से पहले हमको लव कर लेना चाहिए okay जल्दी करो आप…. मेरा मैं हो रहा है आप के साथ हीहीहीहीही!!”

तो बे कॉन्टिनोएड………….. (2050 वर्ड्स)
 
अपडेट 132 संजना विथ रघु ों लॉन्ग ड्राइव

उस दिन का तो संजना का होगया. तो हम अभी संजना पर hi रहते हैं और देखते हैं किआ किआ गाओं में उसस्के अगले बार जाने पर…..

दो दिन बाद वो फिर गयी गाओं हमेशा की तरह, हफ्ते में कभी तीन या चार बार जाती रहती है. उस्सको कार जो मिल गयी तो घूमने का शौख बढ़ गया उस्का और वो घूमती रहती है और वो होता है नाह नयी कार के ओनर्स लोगों के साथ के जितना भी ड्राइव करो उतना hi और दूर तक ड्राइव करने की छह पैदा होता है और नयी जगाओं को एक्स्प्लोर करने का मज़ा अत है.

तो संजना जब कबि 10 या 11 बजे घर से निकलती थी तो कहीं और भी चली जाती थी ड्राइव करते नए रास्तों पर, हाईवे से किसी भी एक ब्रांच रोड में चली जाती यह देखने के रास्ता किधर को लेजाता है, फिर वापस मुड़ती…. इस तरह से खूब शेर करती थी संजना. तो इस दिन को वो थोड़ा घूम घाम के वापस अपने गाओं गयी तो रघु के दूकान के पास रुकी और हॉंक किया. रघु जल्दी से दूकान के अंदर से निकला और संजना के कार के पास आकर कहा, “जी मैडम जी किआ चाहिए आप को? आप तो अब मैडम जी हो के कार से उतर भी नहीं रही, चलिए आप को यहीं सर्वे कर देता हूँ बोलिये तो किआ खिदमत करूँ!”

संजना कार से निकली और हँस्ते हुए कहा, “ोफो मैं सिर्फ यह देख रही थी के तुम यहाँ हो के नहीं, और किआ मैडम जी लगा रखे हो तुम? मुझे सिर्फ यह पूछना था के मेरे साथ कार में थोड़ा घूमने चलोगे? दूकान बांध करना होगा अगर चलना है तो, कहो किआ ख्याल है?”

रघु ने कहा, “आरी यह तो कमाल का आईडिया है ऋ संजना, क्यों नहीं चलूँगा, ज़रूर चलूँगा मगर किधर चलना है?”

संजना: “मैं ने हमेशा जानना चाहा है के यह रास्ता जो गुज़रता है आखिर एन्ड किधर होता है, किश इलाके में जाकर निकलता है या किश गाओं या शहर से जा मिलता है, शायद लम्बी ड्राइव करनी पड़े तो थोड़ा घूमेंगे, तो किआ कोई 3 या 4 घंटे साथ चल सकते हो किआ?!”

रघु: “अरे तेरे साथ तो 24 घंटे रह सकता हूँ मैं क्यों नहीं रे, चल अभी क्लोज करके अत हूँ शॉप को, वेट कर. संजना ने एक तवो पीेछे पहनी हुई थी, ब्लाउज उस्सकी कमर तक hi थे जैसे के एक चोली होता है और उस्सकी स्कर्ट तो कहने की ज़रुरत नहीं उस्सकी जांघें बिल्कुल दिख रहे थे, सनग्लास भी पहनी hi थी, हाथ में चैन, गले में चैन, उँगलियों में अंगूठियां, कान में बाली, लिपस्टिक, क्रेन पाउडर, बिल्कुल हॉट सेक्सी डॉल दिख रही थी संजना. वो थी तो सेक्स सिंबल 100%. और कोई भी मर्द उस्सको बीएड पर लेटना hi चाहता जैसे उस्सकी लुक थी उस वक़्त.

रघु के लिए तो यह एक लाटरी से कम नहीं थी के संजना ने खुद उस्सको अपने साथ चलने को कहा, और रघु ने सोच लिया के कैसे भी हो कहीं भी जाए मौका तो ज़रूर मिलेगा उस्सको उसस्के साथ सेक्स करने को.

उस दिन बात चीत के दौरान संजना ने उस से कहा था फिर कभी, तो रघु सोचने लगा के एहि वो ‘फिर कभी’ होगा उसस्के लिए.

रघु दूकान बांध करके ख़ुशी से आया सजाना के पास और पैसेंजर वाले ड्राइवर के बगल के सीट पर बैठ गया और कहा, “चल ऋ संजना तू ड्राइव कर मैं तुझे देखता हूँ!”

संजना ने कार स्टार्ट किये और कहा, “अरे रघु कितना देखेगा मुझे, कई सैलून से मुझे देखते आ रहा है, अब रास्ता देख!”

रघु: “तू इतनी मस्त चीज़ है के तुझे देखते hi रहने को मैं करता है ऋ, देखने को किआ तुझे अपने अंदर उतारने को मैं करता है…. मेरी किस्मत बहोत अछि है के तुझको जानता हूँ और करीब भी हुआ हूँ वार्ना ऐसी किस्मत कहाँ किसी की के तुझ जैसे रानी महारानी के साथ इस तरह कार में बैठ कर घूम सके! लगता है तू मालकिन मैं तेरा नौकर फिर भी मैं तुझको जहाँ चहुँ छह भी सकता हूँ चुम सकता हूँ रागढ सकता हूँ किआ किस्मत पाया है मैं ने नाह?!”

संजना मुस्कुराते हुए ड्राइव किये जा रही थी रघु को सुनते हुए…. और रघु ने अपना हाथ उसकी जगह पर रखा और सहलाया….. संजना थोड़ा सेहम कर कहा,

“अरे मैं ड्राइव कर रही हूँ नाह?! एक्सीडेंट हो जाएगा किआ कर रहा है तू?!”

रघु: “कैसे रोकूं अपने आप को मैं तुम्ही बताओ! तुमको ऐसे देख सकता हूँ भला बिना छुए? तू क़यामत ध रही है और मैं सिर्फ देखूं ऐसा तो नहीं हो सकता नाह मेरी जान!”

संजना: “ोफो, यह सही मौका नहीं है रे रघु तू धीरज तो रख नाह… थोड़ा इस रास्ते का मुआएना तो करने दे, वो देख उधर एक मोड़ ारः है, हाथ हत्ता अपना मैं कंसन्ट्रेट नहीं कर पाऊँगी ड्राइविंग पर!”

रघु का हाथ संजना के दोनों जाँघों के बीच में था और बढ़ रहा था उस्सकी पंतय की तरफ, और आगे मोड़ देख कर रघु ने हाथ निकाल लिया मगर तुरंत फिर रास्ता सीधा था तो वापस अपने हाथ को वहीँ किया संजना के जाँघों के बीच.

तब संजना ने पूछा, “तू इधर आया है कभी किआ? किधर निकलेगा यह रास्ता रघु?”

रघु के उँगलियाँ तब तक संजना के पंतय को छह चुके थे और संजना ने अपने दोनों जाँघों को दबा लिए जिस से रघु का हाथ जैसे कैद हो गया संजना के जाँघों के बीच. रघु की नज़र उस्सकी जाघों पर गड़े हुए थे, वो रास्ता तो बिल्कुल नहीं देख रहा था मगर संजना की जिस्म को निहार रहा था, और तब तक रघु ने अपने चेहरे को संजना के काँधे तक कर दिया और अपने जीब को उसस्के गले पर फेर्रा….. संजना ने ांसाते हुए कहा, “तू ज़रूर मुझसे एक्सीडेंट करवाएगा रघु ऐसा मत कर नाह!”

तो रघु ने कहा, “तुमको लेने का बड़ा मैं कर रहा है ऋ, किआ करूँ, देख मेरा कैसे खड़ा हो गया है!!”

संजना ने एक बार उसस्के पंत पर उसस्के मोठे लौड़े को पहला हुआ देखा और हंससने लगी! फिर कहा, “मगर यह रास्ता तो ख़तम hi नहीं हो रहा हमने करीबन 20 कंस ड्राइव कर लिए और नाह कोई गाओं, नाह कोई शहर आया है किधर जाता है यह रास्ता यार?!”

तब रघु ने कहा, “मैं कभी भी नहीं आया हूँ इधर…. एक किश करने दे नाह रानी!!”

संजना ड्राइव करती जा रही थी और रघु का चेहरे उस्सकी गाल से सट्टे हुए थे और उस्सने संजना के गाल पर जीब फेर्रा, तो संजना ने कहा, “रुक रुक, एक कच्ची गली देख कर मोड़ता हूँ, कितना सुसान जगह है एक परिंदा भी नहीं दिख रहा, तू साबरा तो कर, रोकता हूँ तब मज़ा करेंगे okay? अभी हट यहाँ से!”

राजू बहोत खुश हुआ और सीदह बैठ गया अपने लुंड सहलाते हुए….. फिर उस्सको आगे एक कच्ची गली दिखा तो कहा, “वो देख आगे एक कच्चा रास्ता है उस में मोड़ नाह, फिर थोड़ा आगे चल कर देखते हैं…..!”

संजना ने कार उस रास्ते में घुमाया और दोनों तरफ देखते हुए कहा, “अरे बाबा दोनों तरफ जंगल है, इतने बड़े बड़े पेयर, लगता है शाम हो गयी…. यह फारेस्ट डिपार्टमेंट की होगी नाह?”

तब एक सिग्न बोर्ड दिखा जिस पर लिखा हुआ था “एंडेमिक प्लांट्स!” तो दोनों जान गए के वो फारेस्ट डिपार्टमेंट का hi इलाका था… फिर और थोड़ा आगे जाकर एक और पतली सी गली थी जिस में संजना ने कार मोड़ा और रोक दिया कार को….

रघु ने जल्दी से अपने पंत उतार दिए और कहा “चल पीछे के सीट पर चलते है वहां ज़्यादा स्पेस है…..”

दोनों कार से निकले, संजना सर ऊपर उठाकर उन् बड़े बड़े दरख़तों को देखने लगी और कहा, “यह पेयर कितने साल पुराने होंगे रघु?”

रघु का मैं तो सिर्फ संजना को छोड़ने का था वो कहाँ से पैरों को देखता बिना देखे hi उस्सने कहा, “200 साल के तो होंगे शायद ज़्यादा भी….” यह कहकर उस्सने पीछे का दरवाज़ा खोला और अंदर बैठ गया संजना को अंदर आने का इंतज़ार करते हुए….. और उस्सने अपने अंडरवियर भी उतार दिए और लुंड को हाथ में लेकर सहलाने लगे….

संजना ने चारों तरफ ग़ौर से देखा और जब सर झुकाया कार के पीछे सीट पर तो देखा रघु अपने लुंड को हाथ में लिए बैठा हुआ था…. वो हँस्ते हुए अंदर बैठी और कहा, “तू इतना बेताब है रे! क्यों तुझसे सब्र नहीं होता हम्म्म?!”

रघु ने झट से संजना का हाथ पाकर कर खींचते हुए अपने लुंड पर किया, उसस्के खींचने से संजना झुक्क गयी उसस्के ऊपर और हाथ किआ संजना का पूरा चेहरा hi उसस्के लुंड पर चली गयी….. रघु ने अपने लुंड को संजना के गालों पर मसला और उसस्के होंठों पर दबाया…. संजना पथ के बल हो गयी सीट पर और खुद अपने मुंह खोल दिया रघु के लुंड को अपने मुंह में लेते हुए…..

रघु बैठे हुए पोजीशन में था, और अपने लुंड को संजना के मुंह में फील करते, उस्सकी गरम जीब को लुंड के टिप पर फील करते हुए रघु ने सर ऊपर उठाया और एक ख़ुशी की आह निकली उसस्के गले से और वो एन्जॉय करने लगा….

संजना के बूब्स रघु के जाँघों पर दबे हुए थे और वो रघु के लुंड को अपने मुलायम हाथों में लिए उस्सको चूस रही थी, जबकि रघु का हाथ उसस्के बूब्स को मसलने लगे थे धीरे धीरे, रघु ने उस्सकी ब्लाउज के अंदर हाथ घुसेड़ दिया था उसस्के कमर के टेल से hi, ब्लाउज एक टॉप की तरह थी और बहोत लार्ज थी, जिस से आसानी से हाथ अंदर चले गए, उस दौरान राजू ने उस्सकी ब्रा को उन्हुक कर दिया, संजना चुस्ती जा रही थी और रघु उस्सकी टॉप और ब्रा निकाल रहा था….

जब टॉप और ब्रा निकाल दिया रघु ने तो, अब संजना उठी, और बाहर देखते हुए कहा, “माना के यह जगह सुनसान है मगर एक फारेस्ट अफसर तो आ सकता है नाह?!”

रघु ने दोबारा अपने लुंड को संजना के मुंह में ठुस्स्ते हुए कहा, “अरे अगर अफसर आया भी तो कहाँ से उस्सको पता होगा के हम कौन लोग हैं, और फिर वो पैदल तो नहीं आएगा नाह? या तो उस्सकी मोटरसाइकिल की आवाज़ सुनाई देगी या जीप की, तो हम उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले रुक जाएंगे”

संजना ने फिर रुकते हुए कहा, “हाँ तू तो ऐसा कह रहा है के मुझे सभी कपडे पेहेन्ने का मौका मिल जाएगा उसस्के यहाँ पहुँचने से पहले!!”

रघु ने कहा, “कौन सी साडी या सलवार पहनी है तुम्हें? सिर्फ टॉप और स्कर्ट तो खींचनी है अपने ऊपर, वो तो फटाफट कर लेगी तू….. फिर रघु ने सोचा, ‘िस्सने जान बुझ कर ऐसे कपडे पहने हुए हैं जिस्सको झट से पेहेन सके, इस्को पहले से पता था के यह मुझसे यहाँ आकर छुडवाएगी, इस्को छुड़वाने की शौख है लगता है अभी पेलता हूँ इस्को मैं!!”

और देर नाह करते हुए रघु ने जल्दी से संजना की स्कर्ट भी खिंच डाले और पंतय बाकी थी संजना पर तब रघु ने अब अपना मुंह किया उस्सकी जाँघों के बीच और पहले उस्सकी पंतय को hi चुस्सने लगा, फिर धीरे धीरे पंतय को उतार फेंका और उस्सकी छूट की पंखुरियों के बीच अपने जीब चलाने लगा रघु जिस से संजना कसमसाने लगी और सिकुड़ सी गयी रघु के काँधे पर दांत काटते हुए…

संजना की पानी छूटने लगी थी, जिस्सको रघु चुस्सने लगा था और संजना की तड़पती आवाज़ सुनाई देने लगे जिस वक़्त रघु का जीब उस्सकी छूट के चढ़ के अंदर ग़ुस्से, और रघु जैसे जीब से hi छोड़ रहा था संजना को…. जीब को जितना हो सके अंदर बाहर करता गया वो और संजना ने मुठी भरके रघु के सर के बाल को खिंचा……

संजना तैयार हो गयी थी अपने अंदर लेने के लिए और हांफते हुए उस्सने खुद रघु से इल्तेजा किये एक नशीले नज़रों से उसस्के चेहरे में देखते हुए, “अब दाल दे अंदर रे रघु मुझसे अब और इंतज़ार नहीं हो रही….. ग़ुस्सादे रे रघु… उफ्फ्फफ्फ्फ़…..”

राजू ने उस्सको लेता दिया सीट पर और चढ़ गया संजना के ऊपर जिसस्ने दोनों टांगों को फैला दिया था और अपनी फिसलती हुई छूट के अंदर रघु के लौड़े को ग़ुस्ता हुआ महसूस करते हुए संजना की चीख निकली, “आआआअह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ उईईईईई…….”

रघु ढाका देने लगा…. संजना ने उसस्के जिस्म पर अपने बाहों को कर दिया, अपने नाख़ून से रघु के पीठ पर जैसे खींचते हुए निशाँ बना दिए संजना ने अपने अंदर उसस्के लुंड के धक्के रिसीव करते हुए, और अपने जीब को संजना ने उसी दौरान रघु के मुंह में दाल दिया उसस्के जीब को चूस्ते हुए… रघु ढाका देते वक़्त कभी संजना के बूब्स को छत्ता, चुस्ता तो कभी उसस्के गर्दन छत्ता चुस्ता, तो कभी उस्सकी जीब chussta…hanffne लगा था मगर धक्कों को बरकरार रखा रघु ने जब तक के संजना ने झड़ते हुए “ोीीमाआआआ आआआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्छ्हःहःह रघुउउउउउउउ आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हूँ गया रे meraaaaaaaaaaa!” संजना अपने जिस्म को ऐंठ रही थी रघु के निचे ओर्गास्म के दौरान और रघु पेलता गया और झट से लुंड को बाहर निकालते हुए उस्सने अपना पानी चोर्रा संजना के पथ पर और लुंड को मसलता गया खुद अपने पानी को सनजना के पथ पर रघड़ते हुए…..

और दोनों हांफते हुए हंससने लगे कार के पीछे वाले सीट पर लेट करे……

तो बे कॉन्टिनोएड……….. (2200 वर्ड्स)
 
अपडेट 133 आरव एंड सान्वी

एक दिन चावला साहब को ऑफिस जाना पारा क्यूंकि यूरोप वाले डेलीगेट्स आये हुए थे. और उन् लोगों के साथ पूरा दिन बिताना था उनको विवान के साथ. मगर आरव की ज़रुरत नहीं थी उस मीटिंग में. तो उस दिन, दिन के बारह बजे आरव घर वापस आगया. और संजना घर पर नहीं थी, वो कहाँ गयी थी यह किसी को पता नहीं था, क्यूंकि अब वो बिना बताये जाने लगी थी, अपने यारों से मिलने, लॉन्ग ड्राइव करने, फिर अपने पापा से मिलने…. तू उस दिन किधर गयी थी किसी को पता नहीं था मगर सब एहि समझते के वो अपनी गाओं गयी है.

आरव इस दिन को बहोत दिनों बाद, बल्कि कहना चाहिए महीनों बाद या सालों बाद अकेला पाया गया घर में सान्वी के साथ! दीप्ति अब मैटरनल स्कूल जाने लगी थी. दिन के 2.30 को स्कूल बस उस्सको वापस घर चोरते थे.

जब आरव घर आया तो ऑफ़ कोर्स पहले संजना को ढूंढा और मुस्कुराते हुए सान्वी ने उस से कहा के उस्सको अपने ससुराल में जाकर अपनी पत्नी को ढूंढ़ना चाहिए. तो आरव ने कहा, “नहीं उस्सको घूमने दो, मुझे हिमत नहीं के इतने दूर ड्राइव करके वहां जॉन, अब वो ड्राइविंग जानती है तो अपने आप वापस आजाएगी, अभी नई ड्राइवर बानी है तो एन्जॉय करने दो उससे, एक दिन खुद तंग आजाएगी और घर पर खुद बैठेगी!”

सान्वी एक खूबसूरत साडी में थी और उस्सकी ब्लाउज v-cut थी और स्लीवलेस थी, जिस से उस्सकी गोरी बाहें और क्लीवेज काफी हद तक दिख रहे थे, और कमर से लेकर उस्सकी क्लीवेज तक की स्किन बाखूबी नज़र आरहे थे और आरव की नज़र कई बार उन् जगाओं पर पड़े और सान्वी ने वो नोटिस किया.

किचन की डाइनिंग टेबल वाले चेयर पर बैठा बात कर रहा था सान्वी से क्यूंकि उस वक़्त भी सान्वी कुछ कर रही थी किचन में.

उस वक़्त सान्वी के दिमाग़ में चावला साहब की कही हुई बात गूंझ रहे थे और जैसे फ़्लैश बैक में सान्वी चावला साहब की आवाज़ सुन रही थी यह कहते हुए, “अब आरव शादी कर चूका है और सेक्स करता है संजना के साथ तो उस्सको अब सेक्स के बारे में सब पता है और तुम्हारे तरफ भी झुक सकता है, तुमसे मेरी तरह आकर्षित भी हो सकता है…..”

सान्वी उन् बातों को सोच कर आरव को चोरी छुपे नज़रें चुराते हुए देख रही थी….. उस्सने अछि तरह से देखा के आरव उस्सकी क्लीवेज और कमर को बार बार देख रहा था….. सान्वी को फिर वह दिन याद आये जीन दिनों को आरव उस्सकी छाती पर सर रख कर रेस्ट किया करता था और जीन दिनों को आरव सान्वी की पल्लू को निचे करवाया करता था…. इन् बातों को याद करके सान्वी के मैं में कुछ हलचल पैदा हुए!! और वो कितने सालों बाद उस तरह से आरव के साथ अकेली थी इस दिन को….. वार्ना जबसे आरव वापस आया था यूनिवर्सिटी से, पिछले 3 सालों में एक दिन भी इन् दोनों को अकेले ऐसे नहीं पाया गया था…. आरव खुद जैसे अवॉयड करता था सान्वी के साथ रहने से….. सिर्फ उस्सकी मांगनी और शादी के दिनों को कुछ सान्वी के पास हुआ था आरव, वो भी भीड़ में कितने लोगों के बीच मगर अकेले ऐसे पिछले तीन सालों में इस दिन को मौका मिला था दोनों को अकेले रहना….. अगर आरव ने शादी नहीं किया होता तो शायद अब भी वो अवॉयड करता या वापस घर नहीं अत किसी बहाने ऑफिस में hi रह जाता.

सान्वी ने सोचा अब उस से यूनिवर्सिटी वाले दिनों के बारे में कुछ बात करें या पूछे के कब वो मातुरे हुआ, कब से रेस्पोंसिबल हुआ और कब उस्का बचपना गया…. मगर सान्वी नहीं समझ रही थी के कैसे बात को शुरू करें!!

सान्वी के दिल में उसस्के लिए प्यार था…. था मगर उन् दिनों को यूनिवर्सिटी के गुज़रे हुए हादसों के बाद सान्वी ने आरव से जैसे दोस्ती को तोड़ दिया था जब आरव ने ब्लैकमेल वाली बात किया था….. मगर 3 साल बाद जब वापस आया था तो सान्वी ने सब भूला दिया था और उस्सको उन् हरकतों के लिए माफ़ कर दिया tha….magar बात बिल्कुल नहीं किये थे दोनों ने उस बारे में…. तो सान्वी चाहती थी के उस बारे में बात को शुरू करें….

और आरव किआ चाहता था? किआ आरव भी वही चाहता था? किआ आरव के दिल में कुछ था जिस्सको वो भी उगलना चाहता था? यह तो तब पता चलेगा अगर दोनों ने उस बारे में बात शुरू किये….

सान्वी पीठ किये हुए था आरव से, सिंक में कुछ धो रही थी, और आरव सान्वी के पीठ, कमर निहार रहा था, और जैसे सान्वी मुढ़ी तो झट से आरव ने एक तरफ देखना शुरू किया तो सान्वी ने कहा,

“क्यों आरव, किआ देख रहा था सच बता!”

आरव: “ंन्न नहीं कक कुछ भी तो नहीं!”

सान्वी मुस्कुराते हुए उसस्के पास आयी और उसस्के चेहरे में देखते हुए कहा, “क्यों अब मुझसे सच्ची बात कहने से तुमको इतना डर लगता है आरव? मुझको देख रहे थे नाह तुम?”

आरव ने सर निचे झुका लिया.

सान्वी ने उसस्के थोड़ी को अपने हाथ से उठाते हुए उसस्के चेहरे में देखा तो पाया के आरव के ेंखें भर्रे हुए थे जैसे ेंसू छलकने hi वाला था!!”

सान्वी इतनी हैरान हुई के उसस्के ेंखें भी भर आये और रोनी आवाज़ में पूछा, “क्यों किआ हो गया ऐसे आरव के तेरी ेंखें भर आये? मैं ने तुम्हारा दिल दुखाया किआ रे?!”

आरव ने झट से सान्वी को बाहों में भरते हुए और अपने चेहरे को उस्सकी छाती में दबाते हुए रोने लगा!!”

सान्वी के ेंखों से ेंसू टपकने लगे और वो अपनी सर को ऊपर उठाकर छत्त देखते हुए एक लम्बी सांस लेकर, आरव के बालों में अपनी उँगलियों को फरते हुए कहा,

“बोलदे आरव जो कुछ भी दिल हैं बोलदे आज, मुझे पता है तुमने 3 साल तक सब कुछ अपने अंदर दबा के रखा हुआ है आज सब उगल दे आरव, मैं सुनूंगी, जीतनेय भी शिकायतें हैं सब बता दे आज!!”

आरव इतना रो रहा था के उसस्के ेंसुओं से सान्वी की ब्लाउज भीग गयी….

सान्वी ने कहा, “मैं ने बहोत दुःख पहुँचाया तुझे नाह आरव? तुम ने बहोत तड़प तड़प के 3 साल बिठाये थे नाह यूनिवर्सिटी में मेरे बिना? मुझे पता है आरव, सब पता है मुझे, आज तू बोल नाह जो कुछ बीता था तुझ पर, सब बोलदे आज आरव मैं सुन्ना चाहती हूँ बता कैसे गुज़ारे थे तुमने वो 3 साल बता मुझे!!!”

यह सब सान्वी ने भी रट हुए कहा!

आरव का चेहरा सान्वी के बूब्स पर दबे हुए थे और उसस्के ेंसुओं से अब सान्वी के बूब्स भी भीगने लगे थे….. सान्वी ने अपने पल्लू से उसस्के चेहरे को पोंछा, साफ़ किया और अपने दोनों हाथों में आरव के चेहरे को लेकर अपने तरफ करके उसस्के चेहरे में देखा, फिर चूमा सान्वी ने, गालों को चूमा, उसस्के माथे को भी चूमा और उसस्के थोड़ी को चूमा, और फिर से उस्सको अपने सीने पर ज़ोर से दबाया सान्वी ने.

दोनों रो रहे थे जैसे सालों से बिचरे थे और अब मिले हैं. सान्वी ने खुद को संभालते हुए कहा,

“अब बोल आरव, बोल, रोना बांध कर….. बता मुझे तुझ पर जो भी गुज़रा है सब बता मुझे.”

सान्वी ने एक चेयर खिंचा और उसस्के पास बैठ गयी उसस्के चेहरे में देखते हुए इस इंतज़ार में के आरव कुछ कहे. आरव के नाक से पानी बहने लगा था और नाक से पानी खींचते हुए आरव सान्वी को देख रहा था, और उसस्के कलाई को अपने हाथ में लेकर अपने गाल पर मारते हुए कहा, “मारो मुझे भाबी, मारो मुझे मैं ने आप को कितना दुःख दिया था पता नहीं कैसे कैसे बातें करके! मारो मुझे ज़ोरों से थपड मारो मुझे!”

सान्वी ने अपने हाथ खिंच लिया उसस्के हाथ से और कहा,

“सस्शह्ह्ह्ह ऐसा नहीं बोलते, तुम्हारा कोई ग़लती नहीं थी, तुम्हारे उम्र का तकाज़ा था और उस हालात को पैदा करने में मेरा भी दोष था… उस में तुम्हारा कोई भी दोष नहीं था आरव……”

आरव की सिसकते आवाज़ तब सुनाई दिया यह कहते हुए,

“भाबी मगर उस दिन, उस वक़्त तो ऐसा लगा था के सिर्फ मैं कुसूरवार था, सिर्फ मैं अकेला गुनेहगार था, मुझे लगा मैं एक मॉन्स्टर हूँ, शैतान हूँ, एक डेविल हूँ, आप ने तो मुझको उस दिन सिर्फ वैसा फील कराया था….. आप ने कहा था आप खुदखुशी करोगी, आत्महत्या करने को तो मैं ने सोच लिया था उसी दिन, उसी वक़्त आप के फ़ोन काटने के बाद…. बहुत रोया मैं भाबी, चिल्ला चिल्ला कर रोया था मैं, अपना सर पीठ पीठ कर, अपना छाती पीह पीठ रोया था मैं उस रात को भाबी… सनता था, आगे पीछे कोई भी सुनने वाला नहीं था. कोई भी मुझको सहारा देने वाला नहीं था बिल्कुल अकेला और तनहा था मैं भाबी, बहोत दुःख हुआ था भाबी, मेरा कलेजा फट रहा था उस वक़्त, मैं मरना चाहता था भाबी …….”

आरव के शिकवे गीले को सुनकर सान्वी ज़ोरों से रोने लगी उसस्के सर को ज़ोर से अपने छाती पर दबाते हुए और बोलती गयी रट हुए,

“तू ने कैसे गुज़ारा होगा वो वक़्त आरव. किआ बीता होगा तुझ पर आरव, मेरे बिना तू रह नहीं पाटा था और मैं ने तुझको वैसे अकेला चोरर दिया था इतने सारे कड़वे बातों को सुना कर…… मैं भी रोई थी आरव, मैं भी नहीं सो पायी थी उस रात को, तुझको फ़ोन करके बात करने को मेरा भी मैं कर रहा था मगर मैं ने तुझको मज़बूत होने के लिए अकेला चोर्रा था आरव, मुझे माफ़ कार्डो आरव प्लीज मुझे माफ़ कार्डो नाह आरव….”

यह कहकर सान्वी जहर जहर बहते ेंसुओं के साथ आरव के चेहरे को फिर बार बार चूमने लगी….

तो बे कॉन्टिनोएड………….
 
अपडेट 134 सान्वी एंड आरव कॉन्टिनोएड….

सान्वी ने वैसे hi आरव को बाहों में भर्रे हुए चल कर लाउन्ज में जाकर काउच पर बैठ गयी, आरव जैसे एक बचा था सान्वी के गॉड में उस वक़्त, क्यूंकि जब सान्वी बैठी तो आरव को अपने पास hi बिठाया और आरव का सर सान्वी के गॉड में पाया गया.

आरव अब भी सिसक रहा था, सान्वी उसस्के सर के बालों में अपने उँगलियों को फेरर रही थी और कभी कभी झुक कर उसस्के माथे को चुम रही थी….. आरव को बहोत सुकून महसूस हो रहा उस तरह से सान्वी के गॉड में अपना सर रख kar.ussko ऐसा लग रहा था के इतने सालों से सान्वी से बिछड़ा हुआ था और अब उस से मिला है. इतने सालों तक आरव ने अपने उस दर्द को अपने अंदर छुपाये रखा था. उसस्के अंदर सान्वी की कमी हमेशा से थी, मगर उस यूनिवर्सिटी वाली रात के हादसे की वजह से अब तक आरव खामोश रहा. वो नहीं चाहता था के सान्वी उस्सको उस तरह से फिर डांटे या फिर कोई वैसा हालात पेश आये उन् दोनों के बीच, इस लिए आरव खामोश रहा था इतने सालों तक, मगर आज क्यूंकि सान्वी ने खुद उस्सको बोलने को कहा तो वो रट हुए सब बोलने लगा था….

आरव ने हमेशा सान्वी के छाती को मिस किया है, जिस तरह से वो उसस्के छाती पर अपना सर रख कर रेस्ट किया करता था वो एक सपना जैसे रह गया था उसस्के दिमाग़ के एक कोने में. तो यूँही उसस्के सर सहलाते हुए सान्वी ने पूछा,

“तो आरव उस दिन के बाद, बल्कि उस रात के बाद दूसरे दिन तुमको क्लासेज ज्वाइन करना था नाह? बहोत मुश्किल से तुमने ज्वाइन किया होगा नाह?”

आरव ने धीमी आवाज़ में कहा, “उस शाम को मैं ने दूसरी मोबाइल ख़रीदा था आप को कितना फ़ोन करता गया था आप इतने पहर दिल हो सकते हो मैं ने कभी नहीं सोचा था, कैसे आप मेरे कॉल्स देख कर बिल्कुल नहीं उठती थी? किश तरह आप से वो देखा जाता था मैं समझ नहीं पा रहा tha…..pehla हफ्ता बहोत कथानियाँ से गुज़रे थे, और आखिर में एक दिन कॉल के दौरान पता चला के आप प्रेग्नेंट हो, उस दिन आखरी बार आप से बात किया था मैं ने….. ख़ुशी हुई थी जान कर के आप प्रेग्नेंट हो हाँ, मैं खुश था उस दिन… अपने नए दोस्तों को बताया था के मैं चाचा बनने वाला हूँ….”

सान्वी: “फिर आरव? फिर तुम्हारे दिन कैसे गुज़रे थे मुझे बताओ पहला महीना? पहले सेमेस्टर कैसे गुज़रा?”

आरव: “जब आप ने बता दिया के आप प्रेग्नेंट हो तो मैं ने ठान लिया के अब आप को फ़ोन नहीं करूँगा क्यूंकि, जिस तरह से आप ने मुझसे दूर होने के लिए ठान लिया था तब मैं ने ठान लिया के अब तो आप से दूर hi होकर कुछ बनना पड़ेगा मुझको तब शायद आप को ख़ुशी milegi…to वही किया…. हर रात आप से बात करने को मैं करता था. घंटों भर मैं हाथ में फ़ोन लिए उस्सको देखता था यह सोच कर के किआ पता आप hi मुझे फ़ोन करोगी… मगर दिन बा दिन पता चलने लगा के आप के तरफ से तो फ़ोन एक्सपेक्ट करना सेहरा में पानी ढूंढ़ना था…. आहिस्ते आहिस्ते समझ गया के मैं अकेला हूँ और अकेला hi रहूँगा….”

सावी ने आरव के गालों को चूमा, और आरव ने कहा,

“आप लेट जैइए नाह अपने पीठ पर और मुझे अपने सीने पर पुराने दिनों की तरह वहां अपने सर लगा कर रहने दीजिये नाह प्लीज!! उसस्के लिए मैं 3 साल तारपा हूँ!!”

सान्वी ने मुस्कुराते हुए आरव को देखकर कहा,

“यहाँ क्यों आरव, मेरे कमरे में चलें?”

यह सुनकर तो आरव के मैं में लाडू फूटनें लगे और तब तक सान्वी उठ कर अपने कमरे के तरफ जाने लगी स्तैर चढ़ते हुए और मूढ़ कर आरव को उससे फॉलो करने का इशारा किया. आरव सान्वी के पीछे स्टैर्स चढ़ने लगा सान्वी के नितम्बों पर नज़रें किये हुए…. उस्सकी मटकती नितम्बों को निहारते हुए सान्वी के पीछे पीछे गया आरव, और अपने बैडरूम के दरवाज़े तक आकर सान्वी ने दूर खोला कर उस्सको वापस बांध करने के लिए आरव को अंदर आने का वेट किया और एते hi आरव ने सान्वी को बड़े ज़ोर से अपने बाहों में जाकर लिया खड़े हुए वहीँ दरवाज़े के पास, और सान्वी के गालों को किश करने लगा….

सान्वी ने दरवाज़ा बांध करके आरव के कांधों से अपने बाहों को करते हुए उस्सने भी आरव को ज़ोर से जाकर लिया और उस्सने भी आरव के गाल पर किश किये, मगर तब आरव ने सावी के होंठों को चूमा, सान्वी की दिल की धड़कन तेज़ हुई और उस्सने भी आरव के होंठ को चूमा, तब आरव ने अपने जीब को सान्वी के होंठ पर फेर्रा…. सान्वी आरव के चेहरे में देखते हुए मुस्कुरायी और उस्सने भी जीब बुसस थोड़ी से बहार करके आरव के होंठ को छुवा…. तब सान्वी ने आरव के लिंग को मोटा होते हुए फील किया अपने जाँघों पर जिस्सको आरव वहां दबा रहा था…..

तब सान्वी ने नज़रें निचे झुकाते हुए कहा, “तुम्हारे पास तो अब संजना है नाह यह सब करने के लिए हम्म?!”

आरव ने एक तड़प भाड़े आवाज़ में कहा, “संजना कभी भी आप नहीं हो सकती भाबी, आप स्पेशल हो मेरे लिए, मेरी ज़िन्दगी में आप की एहमियत अलग hai…jo आप हो वो संजना कभी नहीं हो सकती!”

सान्वी ने अपने नाक को आरव के नाक पर रगड़ते हुए कहा, “क्यों? जो तुम मुझसे पाना चाहते हो वही तो तुमको संजना से भी मिलता है नाह आरव?!”

सान्वी को वैसे hi बाहों में जाकर हुए आरव ने कहा, “भाबी हम यहाँ क्यों आये हैं? मैं आप के सीने पर सर रख कर सोना चाहता हूँ नाह तो बीएड पर तो चलिए आखिर और मुझे वो तो करने दीजिये नाह! किआ हम यहीं खड़े रहेंगे ऐसे?!”

तो वैसे hi एक दूसरे को बाहों में जाकर हुए दोनों चलते हुए बीएड तक गए और सान्वी लेट गयी बीएड पर और अपने बाहों को फैलाते हुए सान्वी ने जैसे आरव को अपने छाती पर इन्विते किया. आरव ने पहले सान्वी की पल्लू हो सरकाया, जो सान्वी ने सरकाने दिया, उस V-cut ब्लाउज में कहने की ज़रुरत नहीं के उस्सकी क्लीवेज कितना बाहर था और कितना छुपे हुए थे, और आरव ने अपना सर सान्वी के उस क्लीवेज से सताया, उस्का गाल सान्वी के बूब्स पर जो तक़रीबन 75% बाहर थे, तो उस 75%बूब्स पर आरव का गाल लगा तो उस्सको सान्वी की बूब्स की गर्मी महसूस हुई और सान्वी को आरव के गाल की गर्मी महसूस हुई उस्सकी बूब्स पर…..

सान्वी की ब्लैक ब्रा की स्ट्रैप्स दोनों कांधों पर साफ़ नज़र आरहे थे और ब्रा की कप भी आधा आरव के नज़रों के सामने था, बल्कि उस्का गाल ब्रा की कप पर एक हिस्स्सा दबा हुआ था….. सान्वी के सांसें लेने से उस्सकी बूब जैसे फूल रहे थे फिर बैठ रहे थे फिर ऊपर हो रहे थे फिर बैठ रहे थे और आरव को बहोत ाचा फील होने लगा उस तरह से सान्वी के छाती से अपने गाल को लगा कर…… उन् दिनों का याद आगया उससे जब यूनिवर्सिटी जाने से पहले वो एहि सब किया करता था सान्वी के इसी कमरे में इसी बीएड पर…… सान्वी के उँगलियाँ आरव के सर पर फरने लगे थे और सान्वी थोड़ा बहोत जैसे हांफने लगी टी…

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
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