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- Dec 5, 2013
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अपडेट NO 74
Mla:-dekh यार वह चालक लोमड़ी है कुछ भी उसके दिमाग में चल सकता है हम्मे अपने बदन तक को हाथ लगाने से मन कर दिया था कुछ दिन पहले... ऐसा कहना उसका प्लान हो सकता है तू नज़र रख और मौका मिले तोह बात करने की खोसिस कर उस से तू
Raychand:-jada उसने फड़के की खोसिस की ना तोह जान से मरने में मुझे वक़्त नहीं लगे गए
Mla:-aisa कुछ करने की जरूरत नहीं पड़े गयी मैं जनता हु अपनी बेटी को वह कभी मुझे धोखा नहीं देगी यह उसका प्लान है तू उस से बात कर पहले
Raychhand:-teek है मैं बात करने की कोसिस करता हु तू भी उस से खोसिस कर कुछ पता लगे तोह
उसके बाद रायचंद कॉल कट कर देता है और सोचने लगता है आखिर क्या वजह है यह सब झूट कहने की कनिका डरा उससे कुछ समझ नहीं आ रहा था तोह वह बात कर के hi जानने का फैसला करता है
अब आगे......... ....
साम को राज अपनी बुआ के साथ हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ा था बाकि सब भी आने वाले थे पर राज ने बोलै वह कल आ जाये गए इस लिए आज जाकर क्या फ़ायदा कल मिल लेना बार बार हॉस्पिटल जाना ाचा नहीं होता
राज और बुआ दोनों जा रहे थे दोनों में अभी ख़ामोशी थी जिसे दोनों तोडना तोह चाहते थे पर तोड़ नहीं पा रहे थे आखिर कर राज hi इससे तोड़ने की पहल करता है
Raj:-bua पापा आपसे बहुत प्यार करते है
Kavya:-haa बीटा बहुत ज्यादा प्यार करते है तुम्हरे पापा पर हमरे प्यार को पता नहीं किसकी नज़र लगी के इतने साल हम्मे दूर रहना पड़ा
Raj:-aisi क्या वजह थी पापा
Kavya:-bas मेरी hi ज़िंदगी से जुडी कुछ कड़वी बाते थी राज जिसे तुम्हरे पापा बर्दास्त नहीं कर पाए कर तोह मैं भी नहीं पायी थी पर बस, मुझे भैया के सीने पर एक बार फिर सर रख सोना था इस लिए हार दिन ज़हर पी भी ज़िंदा रहती थी
Raj:-apne बहुत दुःख देखे है बुआ पर अब और नहीं मैं अब सब ठीक कर दुगा
Kavya;-Raj मेरा एक काम करे गए
Raj:-aap बस हुकम करो बुआ मैं आपकी बात हर हल में पूरी करो गए
Kavya:-mere बाद अगर मैं ना राहु तोह मेरी बेटी का ख्याल तू रखे गए बीटा
Raj:-woh मेरी बहिन है बुआ यह मेरा फ़र्ज़ है अप्प ना भी कहती तोह भी मैं उसका ख्याल रखता
Kavya:-bas यही सुन्ना था बीटा मुझे बीटा उससे अपने पास रखना उससे एकला कभी मेरे पति के घर मात जाने देना
Raj:-bua मैंने कल पापा को भी देखा था फूफा पर गुस्सा होते आप भी उस से गुस्सा है ऐसा लग रहा है फिर.....
Kavya:-(bich में रोक) गुस्सा नहीं हु राज उस इंसान से बस नफरत है नफरत... घिन्न आती है अपने hi बदन से के उसने मेरे बदन को बुआ है दिल करता है अपने हर हिसे को जला दू जिस पर उसके हाथ लगे है
काव्य बुआ की बात सुन्न राज एक दम से ब्रेक लगा देता है इतनी नफरत वह भी अपने पति से क्यों आखिर क्यों थी इतनी नफरत फिर अगर नफरत थी तोह उनसे शादी क्यों की जबकि लगता है इनकी शादी मर्जी से नहीं की है
Kavya:-kya हुआ बाइक क्यों रोका
Raj:-hospital आ गया बुआ चलिए
उसके बाद राज कुछ न कुछ सोचते हुए अंदर आ जाता है अपने पापा से मिलता है काव्य और उसके पापा आपस में बात करने लगते है वह उनकी बाते सुनता है और साथ देता है थोड़ी देर रुकने के बाद राज डॉक्टर से मिलता है जिन्होंने ने उन्हें घर लेकर जाने की इजाजत आज hi दे देते है केयर के साथ रखने का कह साथ hi एक नर्स भी देते है राज भी खुश होता है और जल्द से अपने पापा को ख़ुशी बाटने जाता है के वह सीसे से कुछ देख वह बहार hi रुक जाता है
उससे आखो पर विस्वास नहीं हो रहा था पर जो हो रहा था उसके लिए अजीब तोह नहीं था पर हैरान करने वाला जरूर था
राज गेट पर लगे सीसे से अंदर देख रहा था अंदर उसकी बुआ उसके पापा पर हलकी जोकि हुयी थी और हलके से राज के पापा के होठो को चुम रही थी पर ज्यादा देर नहीं कर पति क्योकि राज के पापा खुद उससे दूर कर देते है
राज देखता है दोनों के आखो में ासु होते है काव्य कुछ बोलती भी है पर वरिंदर उससे चुप करा के खुद से दूर कर देता है
राज को कुछ समझ नहीं आता पर इतना तोह समझ गया के इनके बिच कुछ तोह था जो उससे जाना जरुरी है
राज जब देखता है दोनों दूर है तोह वह थोड़ा पीछे हो डरा आता है जैसे वह अभी आया हो और दूर खोल अंदर आ जाता है
Raj
apa और बुआ खुशखबरी है आपको लीव मिल गयी है बस नर्स भी हमरे साथ जाएगी आपकी देखभाल के लिए मैंने घर फ़ोन कर दिया है हरिया अंकल कार लाते hi होंगे फिर घर चले गए
Varinder:-haa यह ाचा किया वह ज्यादा ाचा फील करो गए बीटा
Raj:-teek है पापा आप रेस्ट करिये मैं बुआ के साथ बहार घूम आता हु
Varinder:-jaa बीटा घूम आ
उसके बाद राज काव्य को लेकर हॉस्पिटल के पार्क में आ जाता है
Raj:-bua आप पापा को किस नज़र से देखती है
राज की बात को सुन्न काव्य घबरा जाती है पर राज के चेहरे को देख थोड़ी नार्मल हो जाती है
Kavya:-bhagwan के रूप में जिसे आप पूजा कर सकते हो पर अपने पास नहीं रख सकते
Raj:-apki बाते अजीब होती है पर दिलचस्प होती है वैसे आपको मुझसे मिल कर ख़ुशी हुयी
Kavya:-bahut ज्यादा बीटा मैं तोह तुझे गोद में खिला ना सकीय इसका अफ़सोस करती हो अंचल भाभी कैसे इस घर की बहु बानी सब जानते थे पर उन्होंने ने अपने प्यार से सब का दिल जीत लिया था मैंने देखा है पर कुछ कर नहीं सकते ना कैसे वक़्त बदला कैसे हालत यहाँ तक के मैं तुझे दुनिया में आते हुए भी नहीं देख सकीय बस इतना जानती थी तू होने वाला है जिस से मैं बहुत खुश थी
Raj:-kya बुआ अब आप मेरे बचे को हमेसा अपनी गोद में खिलना
Kavya:-haa बाट्या भाभी ने संजना और गीता के बारे में दोनों लड़किया एक से बढ़ कर एक है पर दो दो क्यों
Raj:-bua दिल hi तोह है एक को दे दिया जाये या 10 को दे दिया जाये बस प्यार होना चाहिए
Kavya:-kash हर कोई यह बात समझ पता
Raj:-apko कैसी लगी आपकी बहु
Kavya:-dono समझदार है इस घर को आगे लेकर जा सकती है संजना जहा अंतर्मुखी लगी वही गीता से सबर नहीं होने वाला लगा पर दोनों बहुत प्यार करती है
Raj:-haa बुआ अपने सही समझा चलिए अब पापा को लेकर चलते देखिये हरिया आ गया
राज ने देखा हरी कार ले आया है तोह वह बुआ के साथ उनके पास आ गया डॉक्टर ने भी वरिंदर को कार में ठीक से बैठा दिया नर्स और बुआ साथ बैठ गए राज ने उन्हें जाने के लिए कहा और खुद निकल गया अपनी बाइक से घर की तरफ जहा सब वरिंदर के घर आने का इंतज़ार कर रहे थे
******************
कनिका को राज ने एक रूम दे दिया था साथ अपनी सबसे खास जासूस रश्मि को उसके ध्यान रखने को कह दिया था क्योकि वह अपने सुभाव से सबसे असनी से मिल जाने वाली थी पर जैसे hi रश्मि अपने रूम में रेस्ट करने गयी कनिका को छोड़ उसी वक़्त रायचंद मौका देख कनिका के रूम में आ गया और दरवाजा लगा दिया
Raychand:-tum यहाँ क्या कर रही हो जबकि तेरे बाप को भी कुछ नहीं पता तू यहाँ क्यों आयी है
Kanika:-sale भड़वे यहाँ से निकल अगर छूट के चाकर में आया है तोह और यहाँ मेरा अपना खुद का काम है तोह किसी को बात कर आने की जरूरत नहीं है
Raychand:-meri की लोदी मुझसे ऐसे बात करती है
रायचंद गुस्से में आ कनिका के बाल पकड़ के खींच देता है
Kanika:-ooooo माआआआ टेरिइइइ माआ की छुटत सेल छोड़ मेरे बाल मादरचोद छोड़
रायचंद कनिका छोड़ एक झापड़ जड़ देता है
Raychand:-sali कुटिया तू मुझे गली देगी तेरा तोह वह हज़ार करो गए के याद रखे गयी रंडी की औलाद रंडी
रायचंद फिर एक के बाद एक दो थपड जड़ देता है थपड इतने जोर से थे के कनिका के होठो से खून निकलने लगता है उसके आखो में ासु के साथ गुस्सा और नफरत भर जाती है
Raychand:-aisi क्या देख रही है साली कुटिया सुबह होते यहाँ से निकल जाना नहीं मेरी माँ छोड़ दुगा समझी बहनचाद झट्ट के बाल ठीक से निकले नहीं और मुझसे उलझने चली थी
रायचंद कनिका के मुँह से लाहु निकल उससे गालिया सुन्ना कर वह से चला जाता है वही अपने आखो में ासु और गुस्सा लिया अपने मुँह में जमा खून और थूक कनिका फेक देती है
Kanika:-madarchhhod मुझसे मारा तूने ना मुझे बोलै मेरे झात के बाल नहीं निकले देख इस झट के निचे जो छूट है ना वह कैसे तुझे यहाँ से निकलवाती है कल तू कैसे यहाँ से बहार होगा यह तू छोड़ लेना मर्दरछोड
कनिका आग बबूला हुयी थी वह बार बार अपने दिमाग को ठंडा कर रही थी जो नहीं हो रहा था जब उस से बर्दास्त नहीं हुआ तोह वह अपने कपडे खोल बाथरूम चली जाती है और नाहने लगती है
Mla:-dekh यार वह चालक लोमड़ी है कुछ भी उसके दिमाग में चल सकता है हम्मे अपने बदन तक को हाथ लगाने से मन कर दिया था कुछ दिन पहले... ऐसा कहना उसका प्लान हो सकता है तू नज़र रख और मौका मिले तोह बात करने की खोसिस कर उस से तू
Raychand:-jada उसने फड़के की खोसिस की ना तोह जान से मरने में मुझे वक़्त नहीं लगे गए
Mla:-aisa कुछ करने की जरूरत नहीं पड़े गयी मैं जनता हु अपनी बेटी को वह कभी मुझे धोखा नहीं देगी यह उसका प्लान है तू उस से बात कर पहले
Raychhand:-teek है मैं बात करने की कोसिस करता हु तू भी उस से खोसिस कर कुछ पता लगे तोह
उसके बाद रायचंद कॉल कट कर देता है और सोचने लगता है आखिर क्या वजह है यह सब झूट कहने की कनिका डरा उससे कुछ समझ नहीं आ रहा था तोह वह बात कर के hi जानने का फैसला करता है
अब आगे......... ....
साम को राज अपनी बुआ के साथ हॉस्पिटल के लिए निकल पड़ा था बाकि सब भी आने वाले थे पर राज ने बोलै वह कल आ जाये गए इस लिए आज जाकर क्या फ़ायदा कल मिल लेना बार बार हॉस्पिटल जाना ाचा नहीं होता
राज और बुआ दोनों जा रहे थे दोनों में अभी ख़ामोशी थी जिसे दोनों तोडना तोह चाहते थे पर तोड़ नहीं पा रहे थे आखिर कर राज hi इससे तोड़ने की पहल करता है
Raj:-bua पापा आपसे बहुत प्यार करते है
Kavya:-haa बीटा बहुत ज्यादा प्यार करते है तुम्हरे पापा पर हमरे प्यार को पता नहीं किसकी नज़र लगी के इतने साल हम्मे दूर रहना पड़ा
Raj:-aisi क्या वजह थी पापा
Kavya:-bas मेरी hi ज़िंदगी से जुडी कुछ कड़वी बाते थी राज जिसे तुम्हरे पापा बर्दास्त नहीं कर पाए कर तोह मैं भी नहीं पायी थी पर बस, मुझे भैया के सीने पर एक बार फिर सर रख सोना था इस लिए हार दिन ज़हर पी भी ज़िंदा रहती थी
Raj:-apne बहुत दुःख देखे है बुआ पर अब और नहीं मैं अब सब ठीक कर दुगा
Kavya;-Raj मेरा एक काम करे गए
Raj:-aap बस हुकम करो बुआ मैं आपकी बात हर हल में पूरी करो गए
Kavya:-mere बाद अगर मैं ना राहु तोह मेरी बेटी का ख्याल तू रखे गए बीटा
Raj:-woh मेरी बहिन है बुआ यह मेरा फ़र्ज़ है अप्प ना भी कहती तोह भी मैं उसका ख्याल रखता
Kavya:-bas यही सुन्ना था बीटा मुझे बीटा उससे अपने पास रखना उससे एकला कभी मेरे पति के घर मात जाने देना
Raj:-bua मैंने कल पापा को भी देखा था फूफा पर गुस्सा होते आप भी उस से गुस्सा है ऐसा लग रहा है फिर.....
Kavya:-(bich में रोक) गुस्सा नहीं हु राज उस इंसान से बस नफरत है नफरत... घिन्न आती है अपने hi बदन से के उसने मेरे बदन को बुआ है दिल करता है अपने हर हिसे को जला दू जिस पर उसके हाथ लगे है
काव्य बुआ की बात सुन्न राज एक दम से ब्रेक लगा देता है इतनी नफरत वह भी अपने पति से क्यों आखिर क्यों थी इतनी नफरत फिर अगर नफरत थी तोह उनसे शादी क्यों की जबकि लगता है इनकी शादी मर्जी से नहीं की है
Kavya:-kya हुआ बाइक क्यों रोका
Raj:-hospital आ गया बुआ चलिए
उसके बाद राज कुछ न कुछ सोचते हुए अंदर आ जाता है अपने पापा से मिलता है काव्य और उसके पापा आपस में बात करने लगते है वह उनकी बाते सुनता है और साथ देता है थोड़ी देर रुकने के बाद राज डॉक्टर से मिलता है जिन्होंने ने उन्हें घर लेकर जाने की इजाजत आज hi दे देते है केयर के साथ रखने का कह साथ hi एक नर्स भी देते है राज भी खुश होता है और जल्द से अपने पापा को ख़ुशी बाटने जाता है के वह सीसे से कुछ देख वह बहार hi रुक जाता है
उससे आखो पर विस्वास नहीं हो रहा था पर जो हो रहा था उसके लिए अजीब तोह नहीं था पर हैरान करने वाला जरूर था
राज गेट पर लगे सीसे से अंदर देख रहा था अंदर उसकी बुआ उसके पापा पर हलकी जोकि हुयी थी और हलके से राज के पापा के होठो को चुम रही थी पर ज्यादा देर नहीं कर पति क्योकि राज के पापा खुद उससे दूर कर देते है
राज देखता है दोनों के आखो में ासु होते है काव्य कुछ बोलती भी है पर वरिंदर उससे चुप करा के खुद से दूर कर देता है
राज को कुछ समझ नहीं आता पर इतना तोह समझ गया के इनके बिच कुछ तोह था जो उससे जाना जरुरी है
राज जब देखता है दोनों दूर है तोह वह थोड़ा पीछे हो डरा आता है जैसे वह अभी आया हो और दूर खोल अंदर आ जाता है
Raj
Varinder:-haa यह ाचा किया वह ज्यादा ाचा फील करो गए बीटा
Raj:-teek है पापा आप रेस्ट करिये मैं बुआ के साथ बहार घूम आता हु
Varinder:-jaa बीटा घूम आ
उसके बाद राज काव्य को लेकर हॉस्पिटल के पार्क में आ जाता है
Raj:-bua आप पापा को किस नज़र से देखती है
राज की बात को सुन्न काव्य घबरा जाती है पर राज के चेहरे को देख थोड़ी नार्मल हो जाती है
Kavya:-bhagwan के रूप में जिसे आप पूजा कर सकते हो पर अपने पास नहीं रख सकते
Raj:-apki बाते अजीब होती है पर दिलचस्प होती है वैसे आपको मुझसे मिल कर ख़ुशी हुयी
Kavya:-bahut ज्यादा बीटा मैं तोह तुझे गोद में खिला ना सकीय इसका अफ़सोस करती हो अंचल भाभी कैसे इस घर की बहु बानी सब जानते थे पर उन्होंने ने अपने प्यार से सब का दिल जीत लिया था मैंने देखा है पर कुछ कर नहीं सकते ना कैसे वक़्त बदला कैसे हालत यहाँ तक के मैं तुझे दुनिया में आते हुए भी नहीं देख सकीय बस इतना जानती थी तू होने वाला है जिस से मैं बहुत खुश थी
Raj:-kya बुआ अब आप मेरे बचे को हमेसा अपनी गोद में खिलना
Kavya:-haa बाट्या भाभी ने संजना और गीता के बारे में दोनों लड़किया एक से बढ़ कर एक है पर दो दो क्यों
Raj:-bua दिल hi तोह है एक को दे दिया जाये या 10 को दे दिया जाये बस प्यार होना चाहिए
Kavya:-kash हर कोई यह बात समझ पता
Raj:-apko कैसी लगी आपकी बहु
Kavya:-dono समझदार है इस घर को आगे लेकर जा सकती है संजना जहा अंतर्मुखी लगी वही गीता से सबर नहीं होने वाला लगा पर दोनों बहुत प्यार करती है
Raj:-haa बुआ अपने सही समझा चलिए अब पापा को लेकर चलते देखिये हरिया आ गया
राज ने देखा हरी कार ले आया है तोह वह बुआ के साथ उनके पास आ गया डॉक्टर ने भी वरिंदर को कार में ठीक से बैठा दिया नर्स और बुआ साथ बैठ गए राज ने उन्हें जाने के लिए कहा और खुद निकल गया अपनी बाइक से घर की तरफ जहा सब वरिंदर के घर आने का इंतज़ार कर रहे थे
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कनिका को राज ने एक रूम दे दिया था साथ अपनी सबसे खास जासूस रश्मि को उसके ध्यान रखने को कह दिया था क्योकि वह अपने सुभाव से सबसे असनी से मिल जाने वाली थी पर जैसे hi रश्मि अपने रूम में रेस्ट करने गयी कनिका को छोड़ उसी वक़्त रायचंद मौका देख कनिका के रूम में आ गया और दरवाजा लगा दिया
Raychand:-tum यहाँ क्या कर रही हो जबकि तेरे बाप को भी कुछ नहीं पता तू यहाँ क्यों आयी है
Kanika:-sale भड़वे यहाँ से निकल अगर छूट के चाकर में आया है तोह और यहाँ मेरा अपना खुद का काम है तोह किसी को बात कर आने की जरूरत नहीं है
Raychand:-meri की लोदी मुझसे ऐसे बात करती है
रायचंद गुस्से में आ कनिका के बाल पकड़ के खींच देता है
Kanika:-ooooo माआआआ टेरिइइइ माआ की छुटत सेल छोड़ मेरे बाल मादरचोद छोड़
रायचंद कनिका छोड़ एक झापड़ जड़ देता है
Raychand:-sali कुटिया तू मुझे गली देगी तेरा तोह वह हज़ार करो गए के याद रखे गयी रंडी की औलाद रंडी
रायचंद फिर एक के बाद एक दो थपड जड़ देता है थपड इतने जोर से थे के कनिका के होठो से खून निकलने लगता है उसके आखो में ासु के साथ गुस्सा और नफरत भर जाती है
Raychand:-aisi क्या देख रही है साली कुटिया सुबह होते यहाँ से निकल जाना नहीं मेरी माँ छोड़ दुगा समझी बहनचाद झट्ट के बाल ठीक से निकले नहीं और मुझसे उलझने चली थी
रायचंद कनिका के मुँह से लाहु निकल उससे गालिया सुन्ना कर वह से चला जाता है वही अपने आखो में ासु और गुस्सा लिया अपने मुँह में जमा खून और थूक कनिका फेक देती है
Kanika:-madarchhhod मुझसे मारा तूने ना मुझे बोलै मेरे झात के बाल नहीं निकले देख इस झट के निचे जो छूट है ना वह कैसे तुझे यहाँ से निकलवाती है कल तू कैसे यहाँ से बहार होगा यह तू छोड़ लेना मर्दरछोड
कनिका आग बबूला हुयी थी वह बार बार अपने दिमाग को ठंडा कर रही थी जो नहीं हो रहा था जब उस से बर्दास्त नहीं हुआ तोह वह अपने कपडे खोल बाथरूम चली जाती है और नाहने लगती है