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"[color=rgb(184,]नकबेसर कागा ले भागा[/color]
चन्दा भाभी ने ढोल संभाली।
[color=rgb(65,]"नकबेसर कागा ले भागा अरे सैयां अभागा ना जागा।
अरे सैयां अभागा ना जागा."[/color]
वो मेरी ओर इशारा करके गा रही थी।
साथ में रीत और गुड्डी भी। संध्या भाभी ने रीत के कान में कुछ पूछा और उसने फुसफुसा के बताया।
मैं समझ गया साजिश मेरे ही खिलाफ है, और संध्या उठ गई और डांस भी करने लगी-
[color=rgb(209,]अरे नकबेसर कागा ले भागा मेरा सैयां अभागा ना जागा, अरे आनंद साला ना जागा,
उड़ उड़ कागा चोलिया पे बैठा, आनंद की बहिना के चोलिया पे बैठा, चोलिया पे बैठा। अरे अरे,[/color]
और उन्होंने रीत को खींच लिया डांस करने के लिए और दोनों मिलकर मेरी ओर इशारे करते हुए-
[color=rgb(41,]अरे उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के, चोलिया पे बैठा। अरे जोबन के सब रस ले भागा।[/color]
और उसके बाद तो संध्या भाभी और रीत ने जो अपने जोबन उछाले, अपनी जवानी के उभार कोई आइटम गर्ल भी मात हो जाए और वो भी मुझे दिखाकर।
"अरे इस बहना के भंड़ुवे को भी खींच ना."
संध्या भाभी ने रीत को इशारा किया और उस शैतान को तो बहाने की भी जरूरत नहीं थी।
उसने मेरा हाथ खींचकर खड़ा कर दिया। खड़ा तो मेरा वैसे भी पहले से ही था। मैं भी उनके साथ चक्कर लेने लगा। गाना संध्या भाभी और दुबे भाभी ने आगे बढ़ाया-
[color=rgb(184,]अरे उड़ उड़ कागा साया पे बैठा। उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के। साया पे,[/color]
"अरे अभी वो स्कर्ट पहनती है." गुड्डी ने आग लगाई।
दूबे भाभी ने तुरंत करेक्शन जारी किया-
[color=rgb(184,]अरे उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के स्कर्ट पे बैठा,[/color]
लेकिन गाना आगे बढ़ता उसके पहले मैंने रीत को कसकर अपनी बाहों में खींच लिया और कसकर उसके उभारों को अपने सीने से दबा दिया और अपने तने हथियार से उसकी गोरी-गोरी जाँघों के बीच धक्के मारते हुए मैंने गाना बढ़ाया-
[color=rgb(243,]अरे उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा, उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा,
अरे बुरियो का सब रस ले भागा, अरे बुरियो का सब रस ले भागा।[/color]
चंदा भाभी और दूबे भाभी भी मेरा ही साथ देने लगे गाने में।
रीत ने उनकी ओर देखकर बुरा सा मुँह बनाया, तो चन्दा भाभी हँसकर बोली-
"अरे यार हमारी भी तो ननद हो तो गाली देने का मौका हम क्यों छोड़ें?"
मैंने फिर से उसके उभार को पकड़कर धक्का मारते हुए गाया-
[color=rgb(51,]"अरे उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा, उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा,
अरे बुरियो का सब रस ले भागा, अरे बुरियो का सब रस ले भागा।[/color]
"तुम कागा हो क्या?" रीत चिढ़ाते हुए बोली और दूर हट गई।
"एकदम तुम्हारे लिए कागा क्या सब कुछ बन सकता हूँ." मैंने झुक के कहा। और मैं झुक के उठ भी नहीं पाया था की होली शुरू हो गई।
चन्दा भाभी ने ढोल संभाली।
[color=rgb(65,]"नकबेसर कागा ले भागा अरे सैयां अभागा ना जागा।
अरे सैयां अभागा ना जागा."[/color]
वो मेरी ओर इशारा करके गा रही थी।
साथ में रीत और गुड्डी भी। संध्या भाभी ने रीत के कान में कुछ पूछा और उसने फुसफुसा के बताया।
मैं समझ गया साजिश मेरे ही खिलाफ है, और संध्या उठ गई और डांस भी करने लगी-
[color=rgb(209,]अरे नकबेसर कागा ले भागा मेरा सैयां अभागा ना जागा, अरे आनंद साला ना जागा,
उड़ उड़ कागा चोलिया पे बैठा, आनंद की बहिना के चोलिया पे बैठा, चोलिया पे बैठा। अरे अरे,[/color]
और उन्होंने रीत को खींच लिया डांस करने के लिए और दोनों मिलकर मेरी ओर इशारे करते हुए-
[color=rgb(41,]अरे उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के, चोलिया पे बैठा। अरे जोबन के सब रस ले भागा।[/color]
और उसके बाद तो संध्या भाभी और रीत ने जो अपने जोबन उछाले, अपनी जवानी के उभार कोई आइटम गर्ल भी मात हो जाए और वो भी मुझे दिखाकर।
"अरे इस बहना के भंड़ुवे को भी खींच ना."
संध्या भाभी ने रीत को इशारा किया और उस शैतान को तो बहाने की भी जरूरत नहीं थी।
उसने मेरा हाथ खींचकर खड़ा कर दिया। खड़ा तो मेरा वैसे भी पहले से ही था। मैं भी उनके साथ चक्कर लेने लगा। गाना संध्या भाभी और दुबे भाभी ने आगे बढ़ाया-
[color=rgb(184,]अरे उड़ उड़ कागा साया पे बैठा। उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के। साया पे,[/color]
"अरे अभी वो स्कर्ट पहनती है." गुड्डी ने आग लगाई।
दूबे भाभी ने तुरंत करेक्शन जारी किया-
[color=rgb(184,]अरे उड़ उड़ कागा आनंद की बहिना के स्कर्ट पे बैठा,[/color]
लेकिन गाना आगे बढ़ता उसके पहले मैंने रीत को कसकर अपनी बाहों में खींच लिया और कसकर उसके उभारों को अपने सीने से दबा दिया और अपने तने हथियार से उसकी गोरी-गोरी जाँघों के बीच धक्के मारते हुए मैंने गाना बढ़ाया-
[color=rgb(243,]अरे उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा, उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा,
अरे बुरियो का सब रस ले भागा, अरे बुरियो का सब रस ले भागा।[/color]
चंदा भाभी और दूबे भाभी भी मेरा ही साथ देने लगे गाने में।
रीत ने उनकी ओर देखकर बुरा सा मुँह बनाया, तो चन्दा भाभी हँसकर बोली-
"अरे यार हमारी भी तो ननद हो तो गाली देने का मौका हम क्यों छोड़ें?"
मैंने फिर से उसके उभार को पकड़कर धक्का मारते हुए गाया-
[color=rgb(51,]"अरे उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा, उड़ उड़ कागा रीत के पाजामी पे बैठा,
अरे बुरियो का सब रस ले भागा, अरे बुरियो का सब रस ले भागा।[/color]
"तुम कागा हो क्या?" रीत चिढ़ाते हुए बोली और दूर हट गई।
"एकदम तुम्हारे लिए कागा क्या सब कुछ बन सकता हूँ." मैंने झुक के कहा। और मैं झुक के उठ भी नहीं पाया था की होली शुरू हो गई।


