*Update...No..37*
Ab...Takk...
कस्सदेया मुस्कुराया...
"""7ओह्ह तो ये था षड़यंत्र..!!
लेकिन एक बात समझ नहीं जिस रहस्य को अब तक छिपाये बैठे थे वो अब अचानक मुझे क्यों दिखा रहे है ये लोग....??
जरूर फिर से कोई षड़यंत्र रच रहे होंगे...??""
Abb...Aage..
चलिए कस्सदेया को उसका ख़याली पुलाव पकने देते है...
हम चलते अपने हीरो के पास थोड़ा उसके हाल चाल जान लेते है....
15 - 16 की आगे का एक लड़का रात के अँधेरे में घने जंगल में दौड़ा चला जा रहा था,
उसकी हालत बहुत बुरी दिख रही थी, कपडे फाटे हुए, बॉडी में Jagah-Jagah से खून बाह रहा था,
पीठ पर लकड़ी का नुकीला टुकड़ा घुसा हुआ दिख रहा था किन्तु इतने दर्द में होने के बाद भी एक hi दिशा में रट और किसी का नाम चिल्लाते हुए दौड़ा चला जा रहा था...
तभी सामने का नजारा देखकर अचानक उसके कदम वही पर रुक गए....
क्युकी वह अब चरों ओर से अजीब तरह के दिखने वाले जानवरों से घिर चूका था,
आगे जाने का रास्ता नहींदिख रहा था..
सभी खूखार जानवरों के मुँह से आग के अंगारे निकल रहे थे...
लेकिन तभी एक चीख सुनकर लड़का फिर से दौड़ कर आगे बढ़ा उस लड़की तरफ जो उन दानवों के चंगुल में दर्द से चीख रही थी..
तभी उस लड़के पर किसी ने पीछे से आग के गोले हमला किया,
लड़का तो पहले से hi घायल था, आग से और लहू - लुहान हो गया...
लड़के की ऐसी हालत देख कर लड़की से रुका न गया और वो वह से भगति हुयी आकर लड़के के गले लग गयी...
दोनों एक दूसरे के सँभालने की कोशिश कर hi रहे थे की...
पीछे से दो दानव आगे बढे और दोनों के सीने में नुकीली क़तर घोंप दी..
दोनों की साथ दर्द से चींख निकल गयी....
हैय्यू !! अन्यययि !!
दोनों के बगल में सोई हुयी मीरा इस चीख को सुनकर तुरंत उठ बैठी....
देखा तो हयान और अन्य पूरी तरह से पसीने में भीगे हुए कम्प रहे थे...
मीरा तुरंत आगे बढ़ कर दोनों को अपने सीने से लगा लिया....
और कबीर जो की जग चूका था उससे पानी लेन को कहा....
मीरा दोनों को सँभालने की कोशिश कर रही थी..
लेकिन दोनों का शरीर आग की भट्टी की तरह तप रहा था...
बेहोशी की हालत में दोनों का शरीर कंपा जा रहा था....
कबीर तुरंत पानी और भीगा हुआ कपडा लाया,
मीरा कपडे को अच्छे से दोनों के माथे को सेकने लगी...
कबीर तुरंत वह से उठा और गुरु सदनं जी के पास पहुंचा....
गुरु सदनं जी भी कबीर के साथ भागते हुए आये और अपने कमंडल से गंगाजल का छिड़काव ,
मंत्र पढ़ते हुए दोनों के शरीर पर करने लगे....
धीरे - धीरे दोनों के शरीर की कम्पन काम होने लगी...
दोनों की बॉडी का टेम्परेचर भी नार्मल होने लगा....
मीरा लगातार कपडे को भिगो -भिगो कर पट्टी बदले जा रही थी...
कबीर - गुरूजी ! आज ऐसा सातवीं बार हुआ है,
कुछ समझ नहीं आ रहा है ऐसा क्यों दोनों को एक साथ हो रहा है...??
एक हफ्ते से लगातार दोनों ऐसे रात में चीखते हुए बेहोश हो जाते है...
और देखिये क्या हालत हो जाती है इनकी...
मुझे कुछ बहुत बुरा होने का अहसास हो रहा है..
कोई तो उपाय होगा गुरुवार...??
सदनं जी - पुत्र मैंने बहुत कोशिश की कारन जानने की किन्तु मैं असमर्थ हु,
कुछ तो बहुत बुरा होने की आशंका मुझे भी हो रही है..??
इसका निवारण केवल गुरुमहाराज hi कर सकते है...??
कबीर - मैंने तो उनकी खोज के लिए आपकी बताई हुयी हर जगह पर आदमी भेज दिए है,
लेकिन उनका अब तक कोई पता नहीं चला...??
अब आप hi बताओ मैं क्या करू..??
ऐसे तो सब कुछ तबाह हो जायेगा मेरा....
सदनं जी - पुत्र धैर्य रखो,
यदि गुरुमहाराज ने कहा था की, संकट की घडी में वो आएंगे तो उनकी बात पर विश्वाश रखो वो अवश्य आएंगे..
वो अपना वचन कभी नहीं भूलते....
कबीर - ऐसा hi हो तो अच्छा है....
दोनों पुरे एक हफ्ते से डरे हुए रहते है,
हर पल एक दूसरे के लिए रट देखा है मैंने....
किसी एक को कुछ हुआ तो दूसरे का जीना मुश्किल है....
मेरी परेशानी को समझिये और इसका उपाय खोजिये गुरुवार !!
सदनं जी - मेरा प्रयाश जारी है,
सब उचित होगा....
इतना कहकर गुरु जी वापस चले जाते है....
रात के 3 बज रहे थे..
कबीर और मीरा की आज फिर नींद उड़द चुकी थी...
दोनों का ऐसा हाल उनसे देखा नहीं जा रहा था,
अब दोनों बिलकुल नार्मल हो चुके थे और गहरी नींद में सो रहे थे...
कबीर मीरा भी दोनों के Aaju-Baju, दोनों को अपने सीने से चिपका कर लेट गए....
....
....
...
सुबह 8 बजे अन्य की आँख khuli...to
खुद को हयान की आगोश में पाया...
जो बड़ी hi मासूमियत के साथ सो रहा था...
अन्य हयान के चेहरे में खो जाती है,
अपने आप hi उसकी आँख से आंसू छलक पड़ते है...
ये आंसू बेशुमार प्यार और खोने के डर के थे...
आसूं की बुँदे जैसे hi हयान के फेस पे पड़ती है तो उसकी भी आँखें खुल जाती है,
सामने अन्य को खुद को घूरते हुए और आंसू बहते हुए पाया....
हयान तुरंत आगे बढ़ कर अन्य को अपने सीने से लगा लेता है,
और खुद भी रोने लगता है....
रट हुए....
हयान - कुछ नहीं हुआ अन्य ! सब ठीक है देखो मैं तुम्हारे सामने तो हु,
वो तो बस एक बुरा सपना था....??
सुबकते हुए....
अन्य - लेकिन एहि सपना रोज़ - रोज़ hi क्यों...??
ऐसे मैं डेली तुम्हें नहीं देख सकती....??
प्यार से अन्य के सर को सहलाते हुए...
हयान - हम दोनों ठीक है किसो को कुछ नहीं हुआ...
तुम hi अकेले नहीं,
मैं भी डेली इसी दर्द से गुजरता हु...
जब तक हम दोनों साथ है हमें कुछ नहीं होगा....
कोई नहीं हमें जुड़ा कर सकता मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा...
तुमने भी तो वो आवाज़ सुनी थी...
वो आएंगे हमारी हेल्प करने....??
अन्य - वो तो बस एक आवाज़ है, न hi कोई नाम न hi कोई पहचान !!
तो फिर कैसे हम उन पर यक़ीन करें...??
हयान, अन्य को अपनी बाँहों से अलग करते हुए....
अन्य के गाल पर एक किश करता है....
हयान - जब उस आवाज़ पर यक़ीन नहीं है, तो सपने पर क्यों यक़ीन करती हो....
छोडो अब इन बातों को चलो फ्रेश हो जाओ,
वर्ण Mom-Dad हमें ऐसे रोटा हुआ देखेंगे तो उन्हें भी और तकलीफ होगी..??
वैसे भी कितना परेशां रहते है.
जबसे ये सब शुरू हुआ है....
अन्य - हम्म हय्यू !
सही कहते हो, हम उनकी ख़ुशी के लिए तो खुश होने का दिखावा तो कर hi सकते है.....??
हयान - ये कही न तुमने स्वीट एंजेल वाली बात,
अन्य मुस्कुरा देती है और आगे बढ़ कर
हयान के माथे को चूम लेती है और G.M. विश करती है...
बदले में हयान भी ऐसे hi करता है...
ये सब नज़ारा दरवाजे के पास खड़े मीरा और कबीर देख रहे थे...
उनकी आँख में आंसू थे...
मीरा - कितना प्यार है न दोनों में,
कभी कभी इनका प्यार देख कर डर लगने लगता है,
की किसी एक साथ भी कोई अनहोनी हो गयी तो मैं तो....
कबीर मीरा के मुँह पे हाथ रख देता है..
कबीर - कुछ नहीं होगा किसी को,
ईश्वर ने कितनी मन्नतों के बाद हमें इन दोनों को दिया...
मुझे उनपर पूर्ण श्रद्धा से विश्वाश है,
वो हमारे साथ किछ भी बुरा नहीं होने देंगे....
मीरा - सच कहा आपने कुछ नहीं होगा, मुझे भी विश्वास है...
लेकिन आपने देखा नहीं इतने दर्द में होते हुए भी दोनों,
हमरी ख़ुशी के लिए खुश रहने का दिखावा करने की बातें कर रहे थे...??
कबीर - जितना वो Ek-Dusre से प्यार करते है,
उतना hi हम दोनों से भी करते है...
इसलिए हम दोनों की ख़ुशी के लिए अपने दर्द को Dar-Kinar कर रहे....
"अब चलो भी ब्रेकफास्ट रेडी करो...
दोनों फ्रेश होकर आते होंगे....??
मीरा किचन की तरफ चल दी और कबीर माजी का हाल चाल जानने उनकी भी तबियत अब ठीक नहीं रहती...
बुढ़ापे ने दस्तक दे दी थी..
आईये थोड़ा इन्हें भी जान लो...
रश्मि दी की फॅमिली जैन के साथ सिंगापुर गयी हुयी थी...
अखिल और माहि के अद्मिस्सों के लिए...
क्युकी इन दोनों को गांव राश न आया,
गुरु डचेन की शिक्षा भी इनके लिए पूरी हो चुकी थी....
इसलिए लंदन में स्टडी के लिए जिद्द करने लगे...
सब ने उन्हें सिंगापुर में स्टडी का सुझाव दिया...
हालाँकि रश्मि और विजय की जान को लंदन में खतरा था इस्सलिये उन्होंने वह न जाकर सिंगापुर को चुना...
हयान और अन्य का भी मन था अब दुनिया देखने का ...
वैसे तो उन्हें सभी देश और कंट्री और मॉडर्न कल्चर की नॉलेज थी..
बूत बुक्स और इंटरनेट से भी अलग दुनिया होती है..
जिसे हम वह रहके hi महसूस कर सकते है...
किन्तु सदनं जी ने बिना आदिगुरु के आदेश के सोनपुर से बहार जाने से रोके रखा.....
हयान और अन्य को ये आवाज़ और सपने 1 हफ्ते से लगातार आ रहे थे...
लेकिन क्यों आ रहे थे इसका कारन अब तक किसी भी सदस्य को न मिला...??
क्या है उस सपने की हक़ीक़त...??
किसकी थी वो आवाज़...??
जानने के लिए साथ बने रहिये.....
आज के लिए बस इतना hi....
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लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka अपना दोस्त हयान..!!
थैंक्स गाइस !!