Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 9 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

सच में आप क्या बोल रहे है..??

डेली 1 अपडेट आता hai....kabhi कभी तो 1 सिन में 2 उपदटेस आ जा रहे है....

इससे ज्यादा फ़ास्ट नहीं दे सकता...

और आप कह रहे इससे भी जल्दी अपडेट दू...

अगर ये मजाक था तो ाचा laga...m

वेलकम भाई !!

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड कमेंट..

बस ऐसे hi साथ बने रहे .....
 
*Update..No..36*

( मेगा अपडेट )

Ab...Takk..


जबकि पाप अपने Charam-Utkarsh सीमा पे था तो इसके अंत के लिए किसी न किसी को सामने तो आना hi था.....??

क्या अब सही समाया hai...uski वापसी का...??

अगर सही समय होता तो अब तक आदिगुरु महाराज को भी आ जाना चाहिए था....??

Abb...Aage...



हम सभी डाइनिंग टेबल में बैठे थे अपनी अपनी जगह एग शेप के टेबल में..

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1सत सीनियर मेंबर सीट, डैड

डैड के बाएं 2ंद चेयर में माँ,

3रद नानी,

4तह रश्मि मौसी

5तह रिया मौसी,

डैड के दाहिने तरफ

1सत अन्य,

2ंद हयान,

3रद माहि

4तह अखिल

5तह विजय अंकल

6तह जैन अंकल

ये हमारा अब डेली फिक्स सिटींग अरेंजमेंट था,

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टोटल 13 चेयर्स थी,

डैड के जस्ट सामने अपोजिट की सीट हमेशा खली रहती थी,

कभी कभी, तेंजिन, गुरु डचेन और शंकर दादा के आने से वो भी फुल हो जाया करती थी...

गुरु सदनं जी हमेशा अपने रूम में hi भोजन किया करते थे..

ऐसे hi यहाँ वहां की बाटे करते हुए हम सभी डिनर ख़त्म किया.

सभी अपने अपने रूम की तरफ चल दिए...

मैं और अन्य भी अपने रूम आ गए...

अन्य अपना नाईट सुईठे लेकर बाथरूम में चली गयी चेंज करने...

IMG_20200207_021844.jpg


मैंने भी चेंज कर लिया, एक ब्लू T-Shirt और एक पतला सा पजामा पहन लिया और बीएड पर जाकर लेट गया....






अन्य वापस चेंज करके आ गयी,

उसने पिंक कलर की गाउन टाइप का नाईट सुईठे पहना हुआ था,

जिसमें अन्य!! बहुत ख़ूबसूरत लग रही थी...

बीएड पर आयी और मेरे पेट पर अपना सर रख कर लेट गयी...




मेरी तरफ देखते हुए...

अन्य - हय्यू !! क्या तुम्हें अभी नींद आ रही है...??

मैं - नहीं तो क्यों..??

अन्य - बीएस ऐसे hi,

चलो न नानी के पास चलकर कहानी सुना जाये...??

मैं - आईडिया तो मस्त है !!

चलो चलते है थोड़ा नानी को भी परेशां किया जाये....!!

अन्य !! मुस्कुरा ने लगती है, और हम दोनों जाकर नानी का दूर नॉक करते है...

दरवाज़ा खोलते हुए नानी सामने हम दोनों को खड़ा पति है...

नानी - क्या हुआ मेरे बचो, आज फिर कहानी सुनने का मैं है क्या..??

अन्य - मन तो है लेकिन सोंच रहे है आज आपको परशान किया जाये...??

नानी - अच्छा तो कुछ प्लान बनाकर आये हो दोनों..??

अपनी बूढी नानी को परेशां करने का...

हम दोनों मुस्कुराते हुए नानी के साथ बीएड पर बैठ गए....

मैं - अच्छा मेरी प्यारी नानी !! जल्दी से एक कहानी सुना दो...

नानी भी मुस्कुराने लगी...

और हम दोनों को खींचकर,

हमारे सर को अपनी गॉड में रखकर सहलाने लगी...





हम तो नानी को परेशां करने का सोंचकर हमेशा आया करते थे,

लेकिन नानी हमेशा ऐसे hi प्यार से हमें थपकी देकर कहानी सुनाने लगती थी...

नानी की ममता का सुखद अहसास पाकर,

सब कुछ भूल कर

हम प्यार की हसीं वादियों में खो जाया करते थे... आज भी वैसा हुआ.....

नानी ने कहानी सुनना शुरू किया....

कहानी......

बहुत समय पहले की बात है..

एक नगर में एक बहुत खूबसूरत राजकुमारी रहती थी..

बिलकुल मेरी बेटी अन्य की तरह...

दिखने में जितनी सुन्दर थी उतनी hi स्वाभाव की दयालु भी थी...

उसके Mata-Pita और गांव वाले उसे बहुत प्यार करते थे..

वो भी सभी से उतना hi प्यार करती थी....

............

...........

........................

एक दिन एक काले जादूगर ने उस राजकुमारी को अपनी जादुई शक्ति से पकड़ लिया...

और शादी करने की जिद्द करने लगा...

जब राजकुमारी ने मन कर दिया तो उस जादूगर ने उसे पत्थर का बना दिया....

और किसी कैद खाने में कैद कर दिया.....??

इतना सबा सुनाने के बाद नै खामोश हो gayi....kisi गहरी सोंच में चली गयी...

अन्य - फिर क्या हुआ नानी..??

राजकुमारी कैसे आज़ाद हुयी..??

नानी अपनी सोंच से बहार निकलते हुए...

नानी - वो राजकुमारी अब हमेशा के लिए कैद हो गयी...

कोई भी उसे छुड़ा न paya...bas एक पत्थर की मूरत बनकर रह गयी...??

हयान - नानी आप हमेशा एहि कहानी सुनती हो वो भी अधूरी...??

बताओ न राजकुमारी कब आज़ाद होगी...??

नानी - इसके आगे मुझे नहीं आती...??

अन्य - ठीक है अब हम जा रहे सोने, हमें नहीं सुन्नी फिर वही पुराणी कहानी....

ये कहकर हम दोनों

उठकर अपने कमरे की तरफ चल देते है...

माँ दरवाजे के पाए खड़े सब सुन रही थी....

नानी अभी न जाने कहा खोयी हुयी थी..??

जैसे कुछ याद करने की कोशिश कर रही हो....

मीरा - क्या हुआ माँ, आप इतना क्यों परेशां हो..??

माजी - बेटी मुझे कुछ समझ नहीं आता,

जब भी मैं दोनों को कहानी सुनाने लगती हु,

हमेसा मेरे मुँह से एहि कहानी निकलती है...

वो भी अधूरी कहानी..??

दोनों बचे रूठ कर चले जाते है..??

मीरा - कोई बात नहीं माँ,

आप सो जाओ मैं उन्हें समझा देती हु....

इधर हम दोनों...

अन्य ( रट हुए) - हय्यू !!

नानी हमेशा एहि कहानी क्यों सुनती है..??

फिर भी हम बोर नहीं होते...

ऊपर से एक अजीब सा दर्द उठने लगता है उनकी कहानी सुनकर..

ऐसा क्यों..??

मैं - है अन्य !! मेरे साथ भी ऐसा होता है,

एक बेचैनी सी होने लगती है , ऐसा लगता है जैसे उस राजकुमारी से हमारा कोई रिलेशन हो..!!

न जाने कब पूरी होगी ये कहानी....

""कौन सी कहानी है जो पूरी नहीं हो रही ""

माँ ने दरवाज़ा खोलकर आते हुए कहा...

और आकर हम दोनों के साथ लेट गयी...

हम दोनों का रोना बंद हो चूका था

हम दोनों भी माँ से लिपट गए....

माँ - मेरे बचो..

वो कहानी इस लिए पूरी नहीं हो रही क्युकी,

तुम दोनों अभी छोटे हो..??

जब तुम दोनों बड़े हो जाओगे...

तो जाकर उस राजकुमारी को आज़ाद करा देना...

अन्य - हस्ते हुए...

क्या माँ आप भी न..

वो तो सिर्फ एक कहानी है न..??

माँ - जुबतुम्हेँ पता है कहानी है तो फिर क्यों आप दोनों अपनी नानी से रूठ कर चले आये....

देखो कितना साद दिख रहे हो दोनों...

देखो बचो, नानी अब बूढी हो गयी है,

उनकी यद् दश्त कमज़ोर हो gayi...issliye मंद मत किया करो...

हयान - Okay माँ !!

बूत हम दोनों को ये कहानी अच्छी लगती है..??

लेकिन अधूरी होने के कारन बुरा लगता है...

माँ - ok ok ..अब कुछ नहीं चलो दोनों सो जाओ,

वर्ण सुबह ट्रेनिंग के लिए लेट उठोगे...

माँ हम दोनों को किश करती है,

हम गुड नाईट विश करते है...

माँ के जाने के बाद,

अन्य - हम दोनों न जब बड़े हो जायेंगे, तब चलेंगे उस राजकुमारी को बचने....

हँसते हुए....

मैं - हम्म अन्य !!

मैं, अन्य ! को अपनी बाँहों में समेत लेता हु,

अन्य भी मुझसे लिपटकर लेट जाती है...

एक दूसरे की आगोश में नींद की हसीं वादियों में खो जाते है....

16 यर की आगे हो जाने के बाद भी, हम दोनों एक साथ hi सोते थे.....

वही दूसरी तरफ......

अननोन प्लेस

आज मंजुला और ृषीधर का मन बहुत व्याकुल हो रहा था, उन्हें अपने पुत्री की याद बहुत सत्ता रही थी इस्सलिये आज वो दोनों यहाँ आये हुए थे... एलिज़ाबेथ की मूरत के पास बैठे निहार रहे थे...

अचानक उस पत्थर की मूरत से आंसू बहने लगे....

मंजुला ये देखकर घबरा उठी....

ृषीधर भी सोंच में पद गया की आखिर ये कैसा चमत्कार है बेजान मूरत की आखों से पानी कैसे बाह निकला....

अब इन दोनों को कौन समझाए की एक माँ चाहे कितना भी पत्थर दिल हो लेकिन अपने अंश को रोटा नहीं देख सकती...

और एहि वजह थी की आज उसके आखों से आंसू बाह निकले....

मंजुल - देखिये न मेरी बेटी तकलीफ है,

जरूर कुछ हुआ है...

आप कोई उपाय कीजिये न..??

ृषीधर - मैं किसी भी प्रकार का उपाय करने में असमर्थ हु..

मुझे माफ़ कर दो..

मंजुला - तो आप गुरु जी की सहायता क्यों नहीं लेते,

वो शायद हमरी कोई मदद कर दे...

ृषीधर - कई सैलून से उनकी कोई खबर नहीं, कहा ढूँढू उन्हें,

उस संकट की घडी में भी वो नहीं आये...

जबकि उनको सभी बातों का ज्ञान है...

मंजुला - मुझपर दया करे,

मैं पुत्री का यह हाल नहीं देख सकती,

एक बार कोशिश कीजिये न उन्हें बुलाने की...

ृषीधर - ठीक है मैं कोशिश करता हु,

ृषीधर वहीँ मूरत के पास ध्यान अवश्था में बैठ gaye..aur मन्त्रों का उच्चारण करने लगे...

कुछ hi देर में अचानक वह तेज़ रौशनी फैली और गुरुमहाराज प्रकट हुए....

गुरुमहाराज - पुत्र ृषीधर आखें खोलो,

कहो कैसे याद किया...??

ृषीधर तुरंत आखें खोल दी गुरुमहाराज को अपने समक्ष प्रस्तुत देख कर तुरंत उनके क़दमों में गिर गए और रोने लगे...

मंजुला भी गुरुमहाराज को देखकर बहुत खुश हुयी और प्रणाम किया,

उसे आशा की एक किरण नजर आयी...

गुरुमहाराज - उठो पुत्र !! बताओ क्या परेशानी है...??

ृषीधर - आप तो सब जानते है,

फिर भी मुझसे पूछ रहे..??

कहा थे गुरुवार जबकि हमें आपकी सबसे जरुरत थी...??

गुरुमहाराज - मैं वह था, जहा तुमसे भी ज्यादा मेरी आवश्यकता थी, इस सृष्टि को बचने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य का रहा था,

ृषीधर - क्षमा गुरुवार किन्तु आपकी पुत्री के साथ इतनी दुखद घटना हुयी फिर भी आप नहीं आये देखिये आज वो एक बेजान मूरत बन गयी है....

और आज तो यह बेजान मूरत नीर बहाये जा रही है...

गुरुमहाराज - मुझे सभी बातों का ज्ञान है, लेकिन उस वक़्त इससे भी जरुरी काम को करना था,

वो सब दूसरे से जुड़े है.. न होते हुए भी मैं तुम्हारी की रक्षा कर रहा था...

चिंतित मत हो पुत्र, सब ठीक हो जायेगा..

और ये जो आंसू बाह रहे है वो तो एक माँ का अपनी संतान के लिए प्रेम है..!!

ृषीधर - क्या उनका जन्म हो चूका है..??

क्या उनको अपनी माँ का अहसास हो चूका है..??

गुरुवार कब आएंगे वो दोनों अपनी माँ से मिलने...??

गुरुमहाराज - पुत्र अधीर मत बनो,

सही समय आने पर वो खुद आ जायेंगे..

जहा इतने वक़्त तक संयम रखा है कुछ समय तक और धैर्य रखो...

ृषीधर - जो आज्ञा गुरुवार !!

मंजुला - गुरुवार आप तो एक माँ का दर्द समझते है,

मुझसे अब और धैर्य नहीं रखा जा रहा.

मुझे मेरी पुत्री से मिला दीजिये,

नहीं तो उसके अंश से मिला दीजिये,

गुरुमहाराज - मैं सब समझता हु किन्तु यह असंभव है,

उन्हें खुद से आना होगा, माँ की ममता का मोह उन्हें यहाँ आने पर विवश करेगा,

वो उचित समय जल्द hi आने वाला है,

मंजुला - किन्तु गुरुवार.....

गुरुमहाराज बीच में बात काटते हुए...

पुत्री मंजुला, संयम रखो सब ठीक होगा,

तुम अपनी पुत्री को अब अपने साथ ले जा सकती हो उसे कोई खतरा नहीं....

मंजुला - कोटि -कोटि धन्यवाद् गुरुवार, मेरे लिए इतना hi काफी है,

दोनों ने गुरुवार को प्रणाम किया,

गुरुवार पुनः गायब हो गए...

मंजुला - चलिए अब हम अपनी पुत्री घर ले चलते है....

ृषीधर - हम अपने घर परीलोक में hi है..!!

मंजुला - क्या ...??

मैं कुछ समझी नहीं आप कहना क्या चाहते हो...??

ृषीधर - हम परीलोक में hi है, किन्तु यह जगह सबसे छिपी हुयी है,

इसका निर्माण गुरुमहाराज ने hi किया था, भविष्य में किसी मुसीबत में छिपने के लिए..

मंजुला - क्या..? आदिगुरु महाराज !!

तो आपने अब तक मुझसे यह बात छिपाई क्यों थी,..??

न जाने कितने सैलून से मेरी पुत्री यहाँ अकेले थी...

ृषीधर - वो इस्सलिये क्युकी गुरुमहाराज का आदेश था,

अब क्यों बता रहा यह जानना तुम्हारे लिए उचित नहीं,

ृषीधर और मंजुला एलिज़ाबेथ की मूरत को लेकर अपने घर चले गए.....

वही दूसरी तरफ कस्सदेया ध्यान में बैठा यह सब देख रहा था...

उसे साडी बातें समझने में देर न लगी...

कस्सदेया मुस्कुराया...

ओह्ह तो ये था षड़यंत्र..!!

लेकिन एक बात समझ नहीं जिस रहस्य को अब तक छिपाये बैठे थे वो अब अचानक मुझे क्यों दिखा रहे है ये लोग....??

जरूर फिर से कोई षड़यंत्र रच रहे होंगे...??

बास बहुत हुआ अब मैं इनके जाल में नहीं फसने वाला....

कसदिया जोरर से चिल्लाया, ""तामुल्लू.....

आज के लिए बस इतना hi...

..

...

....

थोड़ा बिजी था इस लुए लेट हो गया अपडेट में,

कोई गलती हुयी हो या कोई पॉइंट रह गया हो तो जरूर बताये....

आपका अपना दोस्त हयान !!

थैंक्स !!



दो नॉट पोस्ट एंड रिक्वेस्ट अन्य ुन्देरगे मैटेरियल्स (ेस्पेशलय ऑफ़ चिल्ड्रन) ों स्फोरम तहत शो माइनर इन सेक्सुअल / नॉन - सेक्सुअल एक्ट ऐथेर नुदे और non-nude. तहत इन्क्लुडेस वीडियोस, फुल लेंथ मूवीज, पिक्स, स्टोरीज, पोर्न ेट्स. दोंग सो विल रिजल्ट इन वॉर्निंग्स एंड परमानेंट बांस. सी थिस फॉर मोरे इनफार्मेशन.

िफ़ यू हैवे अन्य क़ुएस्तिओन्स रिगार्डिंग थिस, प्लीज ओपन ा नई थ्रेड इन आस्क स्टाफ.

थैंक्स

सिराज पटेल
 
जैसा की मैंने बताया मैं नई राइटर हु..

मैंने कुछ स्टोरी पढ़ी थी...

रुद्रदीप, अरहान मोहब्बत या नफरत, देव हिडन पावर, तेरे इश्क़ में...

कुछ नहीं तेरे बिन... सोस्सिप में रीड किया करता था बूत वो बंद हो गया तो..

स्फोरम का पता चल...

साडी मेरी फवौरीते स्टोरी बंद हो गयी थी...

तब मेरा भी मन किया स्टोरी लिखने का..

सो मैंने लिखना शुरू किया.?.

फर्स्ट और 2ंद अपडेट लिखते hi मुझे पता चल की मेरी स्टोरी ऐटिटूड स्टोरी से मिलती है जिसे वज भाई लिख चुके है...

वैसे मैं वह से कॉपी नहीं किया था...

मैंने तो इस्लामिक स्टोरी से लिया था प्लाट ...फरिश्ते और ेब्लिश शैतान...

बूत फंतासी स्टोरी में काफी कुछ शामे होता है....

पावर, कॉलेज लाइफ, अच्छी और बुराई की जुंग...

मैं भी आम इंसान हु कोई नयी दुनिया से आया nahi.?...Jo कुछ ज्यादा अलग कर पता...

जितना हो सका मैंने अपनी सोंच दूसरों से अलग राखी..

बूत एक बात साफ कह दू, मैं वज भाई जैसा ग्रेट राइटर नहीं हु,

न hi उनके जैसा सुस्पेंस और मैजिक फंतासी क्रिएट कर सकता हु...

उनका लेवल बहुत ज्यादा है.....

बूत एक चीज़ अच्छी हुयी अब मेरे लिए..?.

मुझे बेस्ट 2 रीडर मिल गए है अब....

भाई एंड भाई,

अब शायद मेरी स्टोरी अच्छी हो जाएगी...

क्युकी आप दोनों मेरी खामियों को मुझ तक पहुंचते हो...

जिससे खुद पर सुधर ला सकता हु ....

आप दोनों मेरी स्टोरी की बुराई सामने करे मैं उसे अच्छा मानकर खुद पर सुधर लाऊंगा...

आपकी बातों को मैं कभी बुरा नहीं manuga...balki मेरेलिए सीख होगी...

थैंक्स बोट्स ऑफ़ यू....

थैंक यू वैरी मच...
 
हम्म वो आदिगुरु hi थे...

मंजुला ने आदिगुरु कही नाम लिया था...

एलिज़ाबेथ की मूर्ति परीलोक के घर में वापस जाना,

कस्सदेया को सब दिख जाना,

आदिगुरु का परीलोक जाना, जबकि परीलोक तो ज़ल्द है...

ये सस्पेंस अभी बरकरार है....

शायद आगे चलके क्लियर हो,

थैंक्स शाहब फॉर योर सुपर मर्वेलौस फैंटास्टिक रिव्यु...

बस ऐसे hi साथ बने रहिये..

और मेरी खामिया और पॉइंट्स क्लियर करते रहे...
 
नहीं bhai...dukhi होने की बात hi नहीं...

बस कमेंट आते इस्सलिये रिक्वेस्ट की थी कमेंट करने की...

रही बात पॉजिटिव व्यू की तो मैं अपने स्टोरी के रीडर्स से बहुत खुश हु...

क्युकी बहुत से बड़े राइटर की स्टोरी चलने के बाद भी रीडर मेरी स्टोरी रीड कर रहे और पसंद भी...

शायद मेरे लिए इससे ज्यादा ख़ुशी की और बात क्या होगी...

जितने भी रीडर है मैं उतने में hi खुश हु...

जिसे अच्छी लगेगी वो खुद जुड़ते जायेगा...

1 मंथ पूरा भी न हुआ और 1.1लाच व्यू मिले स्टोरी को...

मैं बहुत खुश हु...

थैंक्स शाहब आपके इतने ज्यादा सपोर्ट के लिए...!!
 
*Update...No..37*



Ab...Takk...

कस्सदेया मुस्कुराया...

"""7ओह्ह तो ये था षड़यंत्र..!!

लेकिन एक बात समझ नहीं जिस रहस्य को अब तक छिपाये बैठे थे वो अब अचानक मुझे क्यों दिखा रहे है ये लोग....??

जरूर फिर से कोई षड़यंत्र रच रहे होंगे...??""




Abb...Aage..

चलिए कस्सदेया को उसका ख़याली पुलाव पकने देते है...

हम चलते अपने हीरो के पास थोड़ा उसके हाल चाल जान लेते है....

15 - 16 की आगे का एक लड़का रात के अँधेरे में घने जंगल में दौड़ा चला जा रहा था,

उसकी हालत बहुत बुरी दिख रही थी, कपडे फाटे हुए, बॉडी में Jagah-Jagah से खून बाह रहा था,

पीठ पर लकड़ी का नुकीला टुकड़ा घुसा हुआ दिख रहा था किन्तु इतने दर्द में होने के बाद भी एक hi दिशा में रट और किसी का नाम चिल्लाते हुए दौड़ा चला जा रहा था...

तभी सामने का नजारा देखकर अचानक उसके कदम वही पर रुक गए....

क्युकी वह अब चरों ओर से अजीब तरह के दिखने वाले जानवरों से घिर चूका था,

आगे जाने का रास्ता नहींदिख रहा था..

सभी खूखार जानवरों के मुँह से आग के अंगारे निकल रहे थे...

लेकिन तभी एक चीख सुनकर लड़का फिर से दौड़ कर आगे बढ़ा उस लड़की तरफ जो उन दानवों के चंगुल में दर्द से चीख रही थी..

तभी उस लड़के पर किसी ने पीछे से आग के गोले हमला किया,

लड़का तो पहले से hi घायल था, आग से और लहू - लुहान हो गया...

लड़के की ऐसी हालत देख कर लड़की से रुका न गया और वो वह से भगति हुयी आकर लड़के के गले लग गयी...

दोनों एक दूसरे के सँभालने की कोशिश कर hi रहे थे की...

पीछे से दो दानव आगे बढे और दोनों के सीने में नुकीली क़तर घोंप दी..

दोनों की साथ दर्द से चींख निकल गयी....

हैय्यू !! अन्यययि !!

दोनों के बगल में सोई हुयी मीरा इस चीख को सुनकर तुरंत उठ बैठी....

देखा तो हयान और अन्य पूरी तरह से पसीने में भीगे हुए कम्प रहे थे...

मीरा तुरंत आगे बढ़ कर दोनों को अपने सीने से लगा लिया....

और कबीर जो की जग चूका था उससे पानी लेन को कहा....

मीरा दोनों को सँभालने की कोशिश कर रही थी..

लेकिन दोनों का शरीर आग की भट्टी की तरह तप रहा था...

बेहोशी की हालत में दोनों का शरीर कंपा जा रहा था....

कबीर तुरंत पानी और भीगा हुआ कपडा लाया,

मीरा कपडे को अच्छे से दोनों के माथे को सेकने लगी...

कबीर तुरंत वह से उठा और गुरु सदनं जी के पास पहुंचा....

गुरु सदनं जी भी कबीर के साथ भागते हुए आये और अपने कमंडल से गंगाजल का छिड़काव ,

मंत्र पढ़ते हुए दोनों के शरीर पर करने लगे....

धीरे - धीरे दोनों के शरीर की कम्पन काम होने लगी...

दोनों की बॉडी का टेम्परेचर भी नार्मल होने लगा....

मीरा लगातार कपडे को भिगो -भिगो कर पट्टी बदले जा रही थी...

कबीर - गुरूजी ! आज ऐसा सातवीं बार हुआ है,

कुछ समझ नहीं आ रहा है ऐसा क्यों दोनों को एक साथ हो रहा है...??

एक हफ्ते से लगातार दोनों ऐसे रात में चीखते हुए बेहोश हो जाते है...

और देखिये क्या हालत हो जाती है इनकी...

मुझे कुछ बहुत बुरा होने का अहसास हो रहा है..

कोई तो उपाय होगा गुरुवार...??

सदनं जी - पुत्र मैंने बहुत कोशिश की कारन जानने की किन्तु मैं असमर्थ हु,

कुछ तो बहुत बुरा होने की आशंका मुझे भी हो रही है..??

इसका निवारण केवल गुरुमहाराज hi कर सकते है...??

कबीर - मैंने तो उनकी खोज के लिए आपकी बताई हुयी हर जगह पर आदमी भेज दिए है,

लेकिन उनका अब तक कोई पता नहीं चला...??

अब आप hi बताओ मैं क्या करू..??

ऐसे तो सब कुछ तबाह हो जायेगा मेरा....

सदनं जी - पुत्र धैर्य रखो,

यदि गुरुमहाराज ने कहा था की, संकट की घडी में वो आएंगे तो उनकी बात पर विश्वाश रखो वो अवश्य आएंगे..

वो अपना वचन कभी नहीं भूलते....

कबीर - ऐसा hi हो तो अच्छा है....

दोनों पुरे एक हफ्ते से डरे हुए रहते है,

हर पल एक दूसरे के लिए रट देखा है मैंने....

किसी एक को कुछ हुआ तो दूसरे का जीना मुश्किल है....

मेरी परेशानी को समझिये और इसका उपाय खोजिये गुरुवार !!

सदनं जी - मेरा प्रयाश जारी है,

सब उचित होगा....

इतना कहकर गुरु जी वापस चले जाते है....

रात के 3 बज रहे थे..

कबीर और मीरा की आज फिर नींद उड़द चुकी थी...

दोनों का ऐसा हाल उनसे देखा नहीं जा रहा था,

अब दोनों बिलकुल नार्मल हो चुके थे और गहरी नींद में सो रहे थे...

कबीर मीरा भी दोनों के Aaju-Baju, दोनों को अपने सीने से चिपका कर लेट गए....

....

....

...

सुबह 8 बजे अन्य की आँख khuli...to

खुद को हयान की आगोश में पाया...

जो बड़ी hi मासूमियत के साथ सो रहा था...

अन्य हयान के चेहरे में खो जाती है,

अपने आप hi उसकी आँख से आंसू छलक पड़ते है...

ये आंसू बेशुमार प्यार और खोने के डर के थे...

आसूं की बुँदे जैसे hi हयान के फेस पे पड़ती है तो उसकी भी आँखें खुल जाती है,

सामने अन्य को खुद को घूरते हुए और आंसू बहते हुए पाया....

हयान तुरंत आगे बढ़ कर अन्य को अपने सीने से लगा लेता है,

और खुद भी रोने लगता है....

रट हुए....

हयान - कुछ नहीं हुआ अन्य ! सब ठीक है देखो मैं तुम्हारे सामने तो हु,

वो तो बस एक बुरा सपना था....??

सुबकते हुए....

अन्य - लेकिन एहि सपना रोज़ - रोज़ hi क्यों...??

ऐसे मैं डेली तुम्हें नहीं देख सकती....??

प्यार से अन्य के सर को सहलाते हुए...

हयान - हम दोनों ठीक है किसो को कुछ नहीं हुआ...

तुम hi अकेले नहीं,

मैं भी डेली इसी दर्द से गुजरता हु...

जब तक हम दोनों साथ है हमें कुछ नहीं होगा....

कोई नहीं हमें जुड़ा कर सकता मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा...

तुमने भी तो वो आवाज़ सुनी थी...

वो आएंगे हमारी हेल्प करने....??

अन्य - वो तो बस एक आवाज़ है, न hi कोई नाम न hi कोई पहचान !!

तो फिर कैसे हम उन पर यक़ीन करें...??

हयान, अन्य को अपनी बाँहों से अलग करते हुए....

अन्य के गाल पर एक किश करता है....

हयान - जब उस आवाज़ पर यक़ीन नहीं है, तो सपने पर क्यों यक़ीन करती हो....

छोडो अब इन बातों को चलो फ्रेश हो जाओ,

वर्ण Mom-Dad हमें ऐसे रोटा हुआ देखेंगे तो उन्हें भी और तकलीफ होगी..??

वैसे भी कितना परेशां रहते है.

जबसे ये सब शुरू हुआ है....

अन्य - हम्म हय्यू !

सही कहते हो, हम उनकी ख़ुशी के लिए तो खुश होने का दिखावा तो कर hi सकते है.....??

हयान - ये कही न तुमने स्वीट एंजेल वाली बात,

अन्य मुस्कुरा देती है और आगे बढ़ कर

हयान के माथे को चूम लेती है और G.M. विश करती है...

बदले में हयान भी ऐसे hi करता है...

ये सब नज़ारा दरवाजे के पास खड़े मीरा और कबीर देख रहे थे...

उनकी आँख में आंसू थे...

मीरा - कितना प्यार है न दोनों में,

कभी कभी इनका प्यार देख कर डर लगने लगता है,

की किसी एक साथ भी कोई अनहोनी हो गयी तो मैं तो....

कबीर मीरा के मुँह पे हाथ रख देता है..

कबीर - कुछ नहीं होगा किसी को,

ईश्वर ने कितनी मन्नतों के बाद हमें इन दोनों को दिया...

मुझे उनपर पूर्ण श्रद्धा से विश्वाश है,

वो हमारे साथ किछ भी बुरा नहीं होने देंगे....

मीरा - सच कहा आपने कुछ नहीं होगा, मुझे भी विश्वास है...

लेकिन आपने देखा नहीं इतने दर्द में होते हुए भी दोनों,

हमरी ख़ुशी के लिए खुश रहने का दिखावा करने की बातें कर रहे थे...??

कबीर - जितना वो Ek-Dusre से प्यार करते है,

उतना hi हम दोनों से भी करते है...

इसलिए हम दोनों की ख़ुशी के लिए अपने दर्द को Dar-Kinar कर रहे....

"अब चलो भी ब्रेकफास्ट रेडी करो...

दोनों फ्रेश होकर आते होंगे....??

मीरा किचन की तरफ चल दी और कबीर माजी का हाल चाल जानने उनकी भी तबियत अब ठीक नहीं रहती...

बुढ़ापे ने दस्तक दे दी थी..

आईये थोड़ा इन्हें भी जान लो...

रश्मि दी की फॅमिली जैन के साथ सिंगापुर गयी हुयी थी...

अखिल और माहि के अद्मिस्सों के लिए...

क्युकी इन दोनों को गांव राश न आया,

गुरु डचेन की शिक्षा भी इनके लिए पूरी हो चुकी थी....

इसलिए लंदन में स्टडी के लिए जिद्द करने लगे...

सब ने उन्हें सिंगापुर में स्टडी का सुझाव दिया...

हालाँकि रश्मि और विजय की जान को लंदन में खतरा था इस्सलिये उन्होंने वह न जाकर सिंगापुर को चुना...

हयान और अन्य का भी मन था अब दुनिया देखने का ...

वैसे तो उन्हें सभी देश और कंट्री और मॉडर्न कल्चर की नॉलेज थी..

बूत बुक्स और इंटरनेट से भी अलग दुनिया होती है..

जिसे हम वह रहके hi महसूस कर सकते है...

किन्तु सदनं जी ने बिना आदिगुरु के आदेश के सोनपुर से बहार जाने से रोके रखा.....

हयान और अन्य को ये आवाज़ और सपने 1 हफ्ते से लगातार आ रहे थे...

लेकिन क्यों आ रहे थे इसका कारन अब तक किसी भी सदस्य को न मिला...??


क्या है उस सपने की हक़ीक़त...??

किसकी थी वो आवाज़...??

जानने के लिए साथ बने रहिये.....

आज के लिए बस इतना hi....

....

.....

लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka अपना दोस्त हयान..!!

थैंक्स गाइस !!
 
नोट - गाइस अभी स्टोरी में ठहराव नहीं aayega...Jub तक की...

हीरो हीरो नहीं बन जाता है....

जब तक की वो खुद की फॅमिली का जिम्मेदारी नहीं यथा लेता...

इस्सलिये कोई न कोई कही भी आता जाता रहेगा...

जिअसे की आज रश्मि की फॅमिली गयी सिंगापुर.

2. पुक्स अपलोड नहीं हो प् rahi...website बहुत स्लो चल रही ...अगर कोई मिस्टेक या पॉइंट छोट रहा हो...

तो प्ल्ज़.. मुझे रेमिंद करे थैंक्स.!!
 
बहुत से करैक्टर है जो स्टोरी से आउट hi चल रहे....

परदे के पीछे अपना काम कर रहे है....

फ़िलहाल तो हयान, अन्य, मीरा, कबीर, सदनं जी का hi रोले ज्यादा आ रहा है अब्जी....

तेंजिन, डचेन, माहि, अखिल, रश्मि, रिया, विजय , इनका रोले आगे आएगा...

जब हीरो अपने फॉर्म में आएगा....

कॉलेज लाइफ अस्टार्ट हो जाएगी...

सबकी....

फॅमिली गाथेरिंग में हसी मजाक होगा तब.....

हयान और अन्य को मारा नहीं जा सकता लेकिन,

नुकसान तो पहुंचाया जा सकता है,..??

सपने का राज़ आगे के अपडेट में पता चल जायेगा...??.

अभी दोनों क्या प्यार शुरू कहा हुआ.???.

थैंक्स शाहब हमेशा की तरह डिटेल्स और फैंटास्टिक रिव्यु देने के लिए....!!!
 
*Update..No..38*

Abb..Takk..

कस्सदेया मुस्कुराया.

ओह्ह तो ये था षड़यंत्र !!

लेकिन एक बात समझ नहीं आयी जिस रहस्य को अब तक छिपाये बैठे थे वो अब अचानक मुझे क्यों दिखा रहे है ये लोग....??

जरूर फिर से कोई षड़यंत्र रच रहे होंगे...??

बास बहुत हुआ अब मैं इनके जाल में नहीं फसने वाला....

कसदिया जोरर से चिल्लाया, ""तामुल्लू.....!!

Abb..Aage...

तामुल्लू जिसे पटक लोक की रक्षा की जिम्मेदारी दी गयी थी....

कस्सदेया की आवाज़ से तुरंत हाजिर हो गे....

तामुल्लू - मालिक की जय हो !!

मेरे लिए क्या आदेश है मालिक..??

कस्सदेया - तुम्हें धरती लोक जान है एक अतिमहत्त्वपूर्ण आवश्यक कार्य को अंजाम देने...

तामुल्लू - किन्तु मालिक !! महामहिम का आदेश था की हम से कोई भी धरती लोक पर न जाये, जब तक की महामहिम वापस न आये...??

तेज ावा में...

कस्सदेया - मुझे मत याद दिलाओ, सभी बातों का ज्ञान है मुझे,

तुमसे जितना कहा जाये बस उतना करो...??

तामुल्लू - जी मालिक !

कहिये मुझे क्या करना होगा...??

कस्सदेया - जिसकी वजह से महामहिम को क़ैद में जाना पड़ा,

उस षड़यंत्र का मुझे पता चल चूका है,

अब तुम्हें धरती लोक जाकर उसे ख़त्म करना है...!!

तामुल्लू - माफ़ करना मालिक !!

किन्तु महामहिम ने कहा था उसके आड़े न आया जाये, उसे हाथ भी न लगाए...??

कस्सदेया तामुल्लू की बात से चिढ गया...

और गरजते हुए बोलै...

कस्सदेया - तो क्या वो षड़यंत्र पे षड़यंत्र रचते रहे और मैं खामोश बैठा राहु,

ये मुझे कतई गवारा नहीं....

तुमसे जितना कहा जाये उतना करो..

दररते हुए...

तामुल्लू - इजाज़त हो तो मालिक एक सलाह दू...??

कस्सदेया - कहो क्या कहना चाहते हो..??

तामुल्लू - जैसा की आपको ज्ञात है, उसे मरने से मन किया गया है, तो इसके पीछे जरूर कोई उद्देश्य होगा महामहिम का..

तो क्यों न आप भी कोई षड़यंत्र रचे उसके खिलाफ जिससे की हमारा काम भी हो जाये और आदेश का पालन भी हो...??

कस्सदेया - कहना क्या चाहते हो साफ़ साफ़ कहो...??

तामुल्लू - मालिक !!

वो भी तो काली शक्तियों का प्रतिरूप है, तो क्यों न हम इस बात का फायदा उठायें...??

कस्सदेया - अब कही तुमने बुद्धिमान वाली बात,

""षड़यंत्र,

षड़यंत्र बहुत पसंद है न षड़यंत्र रचना, तो बचो इस षड़यंत्र से वो खुद सृष्टि के विनाश का कारन बनेगा...""

कस्सदेया जोरर जोर से दहाड़ मरकर हसने लगा......

कस्सदेया फिर कुछ बातें तामुल्लू को समझने लगा....

जिसे सुनकर तामुल्लू भी मुस्करा उठा...

तामुल्लू - ठीक है मालिक !! मैं उचित समय देखकर अपने कार्य को अंजाम देता हु....!!

इन दोनों की बातें यहीं समाप्त होती है दोनों अपने अपने रह निकल जाते है....!!

कोई था जो इनकी बातों को सुन रहा था,

कुछ परेशानी और रहस्यमयी मुस्कान दोनों के मिले जुले भाव थे इस वक़्त उनके चेहरे में...

अननोन - एक मुर्ख अपनी मूर्खता और उदंतता के लिए कैद में है,

तो दूसरा खुद के अस्तित्व के विनाश के लिए षड़यंत्र रच रहा है..??

आखिर क्या था षड़यंत्र...??

और कौन था जो कस्सदेया की बातों से परेशां और खुश दोनों था...??

किश बात से परेशानी थी...??

और किश बात की ख़ुशी..??

उचित समय आ चूका है उससे मिलने का,

उसे उसके जन्म और जीवन के सार को समझने का..??

अब उसे कोई एक राह चुन्नी होगी अच्छाई की या बुराई की....??

लेकिन यह इतना आसान नहीं होगा,

उसे खुद को समझने के लिए खुद उस बुरे दौर से गुज़र कर सचाई का

सामना करना होगा....??

धरती लोक

इधर कबीर के घर में ...

आज रात एक अजीब बात हुयी आज रात...

हयान को किसी भी प्रकार का कोई सपना नहीं आया और न hi अन्य को...

लेकिन हयान के साथ एक खास बात जरूर हुयी उसे आवाज़ तो सुनाई दी,

साथ में इसका ज्ञान भी हुआ की वो आवाज़ किसकी है...??

आइये हम आगे की कहानी हयान की जुबानी सुनते है....

इधर हयान, अन्य को अपनी बाँहों में जकड़े नींद की खुशनुमा वादियों में सो रहा था....

तभी उसके कानो में आवाज़ गूंजी....

""'कैसे हो पुत्र हयान !! समय आ चूका है, अब तुम्हें शीग्र hi अपनी नियति की ओर अग्रसर होना होगा..""

मैं डर के मरे उठकर बैठ गया और इधर उधर देखने लगा....

सिवाय अन्य ! के जो बगल में बहुत hi मासूमियत के साथ सो रही thi...uske शिव

कोई नजर नहीं आया...

मैं थोड़ा परेशां हो गया,

और फिर से लेटने लगा तभी....

पुत्र तुम idhar-Udhar क्या ढूंढ रहे हो,

मैं तो तुम्हारे अंदर हु,...

मैं अब शांत न रह पाया और दररते हुए बोलै...

कौन हो आप सामने क्यों नहीं आते,..??

मेरी बातों का जवाब क्यों नहीं देते...??

जो भी हो सामने आओ, मुझे इस तरह डराओ मत....!!

""डरने की कोई जरुरत नहीं पुत्र ! मैं तुम्हारा गुरु बोल रहा हु,

शीघ्र hi मैं तुमसे मिलने आऊंगा""

""तुम्हे तुम्हारी सचाई से अवगत करने, मुझे सब आदिगुरु के नाम से जानते है,""

"""मेरा तुम्हारे जन्म के पूर्व से hi नाता है,

भयभीत होने की आवश्यकता नहीं, सब समझ आ जायेगा""

अब मैं चलता हु जल्द मुलाकात होगी,

अब तुम आराम करो !!""

वो आवाज़ आना तो बंद होगयी लेकिन मुझे बहुत बड़ी उलझन में दाल गयी...

लेकिन एक ख़ुशी भी थी मुझे मेरे प्रश्नो का जवाब तो मिला...!!

मैं दुबारा बिस्तर में लेट गया और उस आवाज़ की बातों पर गौर करने लगा,

लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था,

सुबह Mom-Dad से पूछने का सोचकर,

सभी बातों को इग्नोर कर फिर सबमें अन्य ! को हुग करके लेट गया और सो गया...

देखते कल की सुबह क्या नया पैगाम लाती है,...??

आज के लिए बस इतना hi...

शार्ट अपडेट से काम चला लो भाई लोग..

नेक्स्ट में भरपाई कर दूंगा..

थैंक्स गाइस !!

फॉर लाइक्स एंड कमैंट्स...!!
 
बस ऐसे साथ बने रहे....

कल अपडेट देने का मन न था....

बूत देना जरुरी भी था...

वर्ण रीडर नाराज हो जाते...

इसलिए बड़ा करने के लिए केस को पोईं आउट कर दिया...

हम्म आवाज़ आदि गुरु की थी..

षड़यंत्र तो कुछ बुरा hi बनाये honge...But मुस्कान से ऐसा लग रहा इससे नुकसान काम हयान का ज्यादा फायदा होगा...

.अब देखते है हीरो खुद की एंट्री कैसे मरता hai....Sher की तरह घायल चीते की तरह...

थैंक्स शाहब !!

हमेशा की तरह बेहतरीन रिव्यु सेने के लिए...

अपक्व रिव्यु का जवाब भी मैं हमेशा लास्ट में देता न की जल्द बाज़ी में.. जैसे आप बिना जल्दबाज़ी के देते ho...Har एक पॉइंट पर गौर करते हुए...

धन्यवाद..

नेक्स्ट अपडेट आज रात 10 बजे..
 
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