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- Dec 5, 2013
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*Update..No..39*
(मेगा अपडेट)
Abb..Takk....
सुबह Mom-Dad से पूछने का सोचकर,
सभी बातों को इग्नोर कर फिर सबमें अन्य ! को हुग करके लेट गया और सो गया...
देखते कल की सुबह क्या नया पैगाम लाती है,...??
Abb..Aage...
रात में हुयी घटना से मेरे सर में अभी भी दर्द उठ रहा था...
सुबह मेरी आँख पानी के छींटों से खुली,
मैंने तुरंत आँखे खोल दी..
सामने अन्य ! खड़े मुस्कुरा रही थी..
ये सब उसकी की हरकत थी...
वो अभी बाथ करके आयी थी,
और मुझे उठाने के लिए अपने बालों का पानी डाली..
मैं उठकर उसका हाथ पकड़ के अपने बिस्तर में खिंच लिया और अपने साथ लिटा लिया....
अन्य - गुड मॉर्निंग हय्यू !!
मैं - G.M. अन्य !!
आज बहुत खूबसूरत लग रही हो..??
एक किश तो दे दो...
अन्य - वो तो मैं हमेशा से बेटिफुल हु, स्माइल करने लगी..
और आगे बढ़कर मेरे गाल में किश कर दिया...
मैंने भी अन्य को अपनी बाँहों में भरकर लेट गया और उसके गलों को चूम लिया...
अन्य - क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है मुझपर..??
हयान - वो तो हमेसा से आता है,
लेकिन ये जो 1 वीक से हो रहा है न,
मुझे सबकी बहुत फ़िक्र होने लगी है..
मैं किसी को भी हर्ट होते नहीं देख सकता..
अन्य - ओह्ह तो ये बात है, इतनी फ़िक्र करने की जरुरत नहीं,
मैं हु न, माय स्वीट बीआरओ हय्यू !!
हयान - मुझे न सबसे ज्यादा फ़िक्र आपकी hi होती है,
आपको जरा सी भी खरोंच लगती है,
तो दर्द मुझे भी होता है...
अन्य - मुझको भी तो,
होगा भी क्यों नहीं,
हम दोनों एक दूसरे से जुड़े जो हैं.... दिल से.....
अन्य ! मेरी आखों में गौर से देखने लगी और...
अन्य - लेकिन हय्यू !
अभी तुम कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हो...??
आज रात फिर कुछ हुआ है न ...??
मैं - क्यों तुम्हें आज सपना नहीं आया क्या..??
अन्य - नहीं तो.. और तुमको..??
मैं - हम्म आज रात फिर वही आवाज़ आयी,
लेकिन इस बार उन्होंने अपना नाम बताया,
कह रहे थे मैं तुम्हारा गुरु हु,
मेरा और उनका जन्म से नाता है,
कुछ समझ नहीं आ रहा,
रात भर इसी के बारे में सोंचता रहा....
अन्य - फिर साद हो गए,
इतना बेकार फेस मत बनाया करो,
मुझे नहीं अच्छा लगता...
बाकी बातें बाद में,
जल्दी से फ्रेश हो जाओ.. निचे सभी हमारा वेट कर रहे होंगे..??
और आगे बढ़ कर अन्य ! ने मेरे गाल के किश कर दिया...
मैं अन्य ! का ये दादी अम्मा वाला लुक से जो कुझे समझा रही थी,
देख के खुद को मुस्कुराने से रोक न पाया...
मैंने भी आगे बढ़ते हुए
अन्य ! के हेड पे किश कर दिया...
अन्य - जल्दी आना
इतना कहकर वो चली गयी....
मैं भी फटाफट उठ के फ्रेश होने चल दिया...
नाहा धोकर एक डैम रेडी होकर निचे हॉल की तरफ चल दिया,
जहा सभी टेबल पे मेरे आने की राह देख रहे थे...
मैं भी सबके पास जाकर G.M. विश किया,
डैड के पेअर छोङा चाहे बूत उन्होंने मुझे गले से लगा लिया और मेरे माथे पे किश कर दिए..
ऐसा hi माँ ने भी किया...
हमेशा अपने सीने से लगा लेते थे पेअर छूने hi न देते थे..
आज भी वैसा hi किया...
मैं - डैड ! आज गुरु जी को भी बुला लीजिये ब्रेकफास्ट के लिए...
मुझे उनसे कुछ जानना है....??
डैड उठ कर चल दिए सदनं जी के पास,
मैं अन्य ! के पास नाश्ता के लिए बैठ गया.. अपनी सीट पर..
डैड गुरु जी को लेकर आ गए जो की डैड के सामने वाली अपोजिट सीट में बैठ गए...
हम सभी ब्रेकफास्ट करना स्टार्ट किया...
सभी बात करते हुए नाश्ता कर रहे थे...
बीच में बात काट ते हुए बोलै,
मैं - डैड ! आदिगुरु महाराज कौन है...??
मेरे ऐसा सवाल करने से सबका नाश्ता करना रुक गया,
सबके चेहरे मेरी तरफ हो गए...
Mom-Dad तो मुझे सुरप्रीसेड होकर देख रहे थे...
बूत गुर सदनं जी के फेस पे एक स्माइल थी..
मैंने अपना सवाल दुबारा रिपीट किया..
तब सबका ध्यान टूटा...
अन्य - बताओ न डैड !! आप सभी इतना शॉक क्यों हो गए हो..??
माँ - बीटा तुमने ये नाम कहा सुना..??
डैड - है बीटा, आज से पहले तो कभी नहीं पूछा तुमने फिर आज अचानक से ये क्यों..??
मैं - पहले आप लोग बताएं फिर मैं अपनी बात समझाता हु..
डैड - हमें उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है,
लेकिन उनके hi आशीर्वाद से Hi तुम दोनों का जन्म हुआ है !!
अब शॉक होने की बरी हम दोनों की थी...
मैं और अन्य शॉक हो गए....
माँ - लेकिन बीटा तुम्हें उनके बारे में कैसे मालूम हुआ..??
मैं - मुझे अभी तक मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला,
आखिर है कौन..??
डैड - वो तुम्हारे गुरु सदनं जी के भी गुरु है,
इससे ज्यादा हमें कुछ नहीं पता...
मैं गुरूजी की तरफ देखने लगा.. अपने सवाल के जवाब के लिए...??
सदनं जी - पुत्र वो मेरे गुरु है है !!
किन्तु मुझे भी उनके बारे में कुछ नहीं पता,
कैलाश पर्वत पर उनसे भेट हुयी थी और वहीँ मुझे उन्होंने शिष्य स्वीकार किया और ज्ञान की ज्योति जगाई मेरे मन में...
मैं फिर अपने सपने वाली बात उन्हें बताई...
मैं - आज रात में मेरे सपने में आये थे,
कह रहे थे की समय आ चूका है,
मेरे आगे बढ़ने का..
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की किश चीज़ का समय आ चूका है, वो किश बारे में बात कर रहे थे...
सदनं जी - वो तो गुरुवार hi जाने,
और भी तो कुछ कहा होगा तुमसे...??
मैं - है कह रहे थे की वो मुझसे और अन्य ! से जल्द मिलने आने वाले है...
मेरी इस बात से Mom-Dad और गुरु जी, एक डैम खुश हो गेट...
सबकी ख़ुशी उनके चेहरे पे देखे जा सकती थी...
माँ - बीटा सच कह रहे हो न, ये कोई मजाक तो नहीं न...??
मैं - है माँ मैं सच कह रहा हु,
बूत आप लोग इतना खुश क्यों है...??
सददन जी - न जाने कितना समय बीत चूका है उनके दर्शन किये हुए...
तुम्हारे जन्म के बाद से अभी तक उनकी कोई खबर नहीं..
ये तो बहुत ख़ुशी की बात है की गुरुवार आ रहे है..
पुत्र हयान ! जब तुम दोनों उनसे मिलोगे तो तुम्हारे सभी प्रश्नो का हल मिल जायेगा..
अब तो मुझे भी उनसे मिलने की बहुत ज्यादा इच्छा होने लगी थी..
क्युकी मुझे भी अपने और अन्य के साथ हो रहे सभी इन्सिडेंट्स के बार में जान था..
माँ - ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, हमें उनके आने की ख़ुशी में पूजा का आयोजन करना चाहिए...
डैड - है सही कहा उनके आदर - सत्कार के लिए मैं बंदोबस्त करता हु...
इसी तरह ख़ुशी ख़ुशी हमने ब्रेकफास्ट ख़त्म किया...
मैं और अन्य !! गुरु जी के साथ अपने ट्रेनिंग और गुरु ज्ञान के लिए गार्डन चल दिए....
इधर माँ डैड अपने काम में बिजी हो गए....
मैं और अन्य ! गुरु डचेन के पास ट्रेनिंग कर रहे थे..
अन्य ! और तेंजिन करते प्रैक्टिस कर रही थी...
और इधर मैं गुरु डचेन के पास बैठा शौलिने पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था..
खुद को कण्ट्रोल करते हुए मैं सामने खड़ी लकड़ी के मोठे
खम्बे पर हाथ मारा वो चकना चूर हो गया...
मेरी पावर्स को देख कर गुरु डचेन और भी ज्यादा हैरान हो गए....
रोज उन्हें मेरी पावर का कोई न कोई नमूना देखने को मिलता था...
मेरे ऐसा करने के बाद गुरु डचेन ने मुझे कुंग - फु प्रैक्टिस के लिए बोलकर खुद सदनं जी की तरफ चले गए....
डचेन - आज आप मेरे सवालों का जवाब दे दीजिये..
आज फिर से मैं बहुत ज्यादा हैरान और इनके बारे में जानने के लिए परेशां हु....
मुझे एक बात समझ नहीं आ रही आखिर इन दोनों के अंदर कौन सी नेचुरल पावर्स है,
जो इन दोनों को अपने से सौ गुना ज्यादा ताकतवर को हारने की क्षमता रखते है..
सदना जी - शायद आप कुछ भूल रहे है..??
यहाँ आने का मार्ग..??
डचेन - मैं कुछ समझा नहीं, की आप कहना क्या चाहते हो..??
सदनं जी - आखिर तुम भागकर इसी गांव में hi क्यों आये, और कही भी तो जा सकते थे.. ?
डचेन - मुझे यहाँ की राह दिखाई गयी थी..
सदनं जी - और वो राह आदिगुरु महाराज ने दिखाई थी, जो मेरे भी गुरु है,
ये सब नियति है, तुम्हें चुना गया था,
तभी तुम यहाँ आये, तुम्हारा भविष्य तुम्हें यहाँ ले आया..
डचेन - उसका अर्थ है की गुरूजी का कहना सत्य है,
मई चुना गया हु उस ईश्वर की महिमा में योगदान के लिए...
हो सके तो मुझे उस रहस्य से अवगत कराएं और मेरे कार्य को समझाएं...??
कौन है ये दोनों..??
सदनं जी - तो सुनिए.......
फ्लैशबैक -
आदिगुरु ध्यान में लीं मुस्कुरा रहे थे...
ऐसा लग रहा था जैसे उनके मुख से तेज़्ज़ टपक रहा...
ईश्वर की महिमा प्रतीत हो रही थी मुस्कान में...
सदनं बिलकुल ख़ामोशी से गुरुदेव के सामने बैठ गया और उनके अलौकिक रूप में खो गया....
कुछ देर बाद आदिगुरु ने अपने नेत्र खोले.....
सदनं को खुद में खोया हुआ पाया....
आदिगुरु मुस्करा उठे सदनं के इस तरह ध्यान में मगन होने को देखकर....
""कहो शिष्य कैसे आने हुआ..." गुरूजी बोले...
सदनं - हड़बड़ाकर प्रणाम गुरुदेव और उठकर गुरु के चरणों को श्पर्श किया...
गुरुदेव आप तो सब जानते है, भला आपसे कौन सी बात छुपी है, मेरे मन में फैले इस अज्ञानता को दूर कीजिये...
ये कैसा चमत्कार है गुरुवार....
आदिगुरु - यह चमत्कार नहीं ईश्वर की लीला है...
जो नहीं होना चाहिए था वो हुआ...
किन्तु जो भी हुआ अच्छे के लिए हुआ,
किसी की उदंडता आज कुछ अच्छा कर गयी है...
खुद अपने hi हाथो अपना अस्तित्व मिटने की राह चुनी...
सदनं - किसकी गलती से इस धरती लोक फायदा हुआ है गुरुदेव....
आदिगुरु - काली शक्ति को पूजने वाले, सरे ब्रम्हांड को अंधकार की ओर ले जाने वाले एक पापी ne...Kiya है पाप, महा पाप...
ईश्वर को मैंने वाली, दिव्या शक्ति की धारक रह चुकी एक देव कन्या के साथ दुर्व्यवहार किया...
वो भी तब किया जब वो बिलकुल शक्ति हीं हो चुकी थी...
लेकिन इस पापी ने असहाय कन्या के साथ अपनी शक्ति के दम पर महा पाप किया...
सदनं - गुरुवार अब उन् देव कन्या का क्या हुआ...??
आदिगुरु - वो खौफ नक् काली रात याद है तुम्हें..
जिस दिन ये दोनों आये थे यहाँ..
उन दोनों को चुना गया था ईश्वर ने चुना उन दो प्रेमियों को,
जो तन - मन दोनों से एकदम साफ़ ह्रदय वाले,
ईश्वर को सच्चे दिल से मैंने वाले, न कोई लोभ न कोई पाप किया ho...ishwar पर सच्ची श्रद्धा रखने वाले हो...
देव कन्या ने दुबारा जन्म लिया है,
वो भी इन् दोनों की संतान बनकर....
सदनं - धन्यवाद गुरुवार मेरे सभी प्रश्नो का जवाब मिल गया....
बाकी सब पता चल जायेगा....
आदिगुरु - यह इतना भी सरल नहीं होने वाला,
बहुत कठिन समय ाँ पड़ा है..
वो बालक Hi है उस कठिनाई का कारन...
सदनं - समझ से तो मेरे भी पड़े है,
एक तरफ वो कन्या जिसके मस्तिष्क से तेज़्ज़ और धरती लोक के Sukh-Samridhi के संकेत दिखाई देते है...
Kintu...wo बालक..??
वो तो अत्यंत विनाशकारी और काली शक्तियों का धारक प्रतीत होता है...
मैंने कुछ गलत कहा हो तो क्षमा करें गुरुवार ??
आदिगुरु - नहीं !! तुमने सत्य कहा है,
किन्तु तुम ये भूल रहे की उन दोनों ने एक hi माँ के कोख से जन्म लिया,
विभिन्नता होते हुए भी समय आने पर एक हो जायेंगे...
जहाँ से मैं देख रहा हु कुछ बुरा होने के बाद कुछ ाचा होने के संकेत मिल रहे....
एक बात हमेशा याद रखना...
""बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर कयों ना हो.. ,
उसका अन्तिम संस्कार अच्छाई ही करती है !!""
""हर बुरे इंसान में एक अच्छे छिपी होती है...
जरुरत है तो सिर्फ प्रेम और मार्गदर्शन की..""
सदनं - अति उत्तम गुरुवार...
धन्यवाद मुझे सच से अवगत करने के लिए...
मेरे लिए कोई आदेश महागुरु....
आदिगुरु - शिष्य अभी तो कुछ नहीं लेकिन समय आने पर तुम्हे अत्यंत hi आवश्यक कार्य करना hoga....margdarshan करना होगा...
तुम्हारा मार्गदर्शन भविष्य में Sukh-Samridhi और Lok-Kalyan के लिए सराहा जायेगा....
सदनं - जी गुरुवार !! कोटि कोटि धन्यवाद्..
मुझे इस महत्वकांक्षी कार्य का भागीदार बनाने के लिए....
आदिगुरु - कुछ कठिनाइयां कार्य में बढ़ा बनेगी किन्तु तुम उस मार्ग में अडिग होकर चलना... सब सुखद होगा..
सदनं - जो आज्ञा गुरुवार !! मैं अपने कार्य को पूरी लगन से करूँगा...
आदिगुरु - तथास्तु !!
समय आने पर तुम्हे तुम्हारे कार्य से अवगत कर दिया जायेगा...
फ्लैशबैक एन्ड
आज के लिए बस इतना hi..
सॉरी फॉर डिले...
......
......
गिव में योर वैल्युएबल रिव्यु एंड सुग्गेस्टिव..
सपोर्ट के लिए थैंक्स गाइस !!
(मेगा अपडेट)
Abb..Takk....
सुबह Mom-Dad से पूछने का सोचकर,
सभी बातों को इग्नोर कर फिर सबमें अन्य ! को हुग करके लेट गया और सो गया...
देखते कल की सुबह क्या नया पैगाम लाती है,...??
Abb..Aage...
रात में हुयी घटना से मेरे सर में अभी भी दर्द उठ रहा था...
सुबह मेरी आँख पानी के छींटों से खुली,
मैंने तुरंत आँखे खोल दी..
सामने अन्य ! खड़े मुस्कुरा रही थी..
ये सब उसकी की हरकत थी...
वो अभी बाथ करके आयी थी,
और मुझे उठाने के लिए अपने बालों का पानी डाली..
मैं उठकर उसका हाथ पकड़ के अपने बिस्तर में खिंच लिया और अपने साथ लिटा लिया....
अन्य - गुड मॉर्निंग हय्यू !!
मैं - G.M. अन्य !!
आज बहुत खूबसूरत लग रही हो..??
एक किश तो दे दो...
अन्य - वो तो मैं हमेशा से बेटिफुल हु, स्माइल करने लगी..
और आगे बढ़कर मेरे गाल में किश कर दिया...
मैंने भी अन्य को अपनी बाँहों में भरकर लेट गया और उसके गलों को चूम लिया...
अन्य - क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है मुझपर..??
हयान - वो तो हमेसा से आता है,
लेकिन ये जो 1 वीक से हो रहा है न,
मुझे सबकी बहुत फ़िक्र होने लगी है..
मैं किसी को भी हर्ट होते नहीं देख सकता..
अन्य - ओह्ह तो ये बात है, इतनी फ़िक्र करने की जरुरत नहीं,
मैं हु न, माय स्वीट बीआरओ हय्यू !!
हयान - मुझे न सबसे ज्यादा फ़िक्र आपकी hi होती है,
आपको जरा सी भी खरोंच लगती है,
तो दर्द मुझे भी होता है...
अन्य - मुझको भी तो,
होगा भी क्यों नहीं,
हम दोनों एक दूसरे से जुड़े जो हैं.... दिल से.....
अन्य ! मेरी आखों में गौर से देखने लगी और...
अन्य - लेकिन हय्यू !
अभी तुम कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हो...??
आज रात फिर कुछ हुआ है न ...??
मैं - क्यों तुम्हें आज सपना नहीं आया क्या..??
अन्य - नहीं तो.. और तुमको..??
मैं - हम्म आज रात फिर वही आवाज़ आयी,
लेकिन इस बार उन्होंने अपना नाम बताया,
कह रहे थे मैं तुम्हारा गुरु हु,
मेरा और उनका जन्म से नाता है,
कुछ समझ नहीं आ रहा,
रात भर इसी के बारे में सोंचता रहा....
अन्य - फिर साद हो गए,
इतना बेकार फेस मत बनाया करो,
मुझे नहीं अच्छा लगता...
बाकी बातें बाद में,
जल्दी से फ्रेश हो जाओ.. निचे सभी हमारा वेट कर रहे होंगे..??
और आगे बढ़ कर अन्य ! ने मेरे गाल के किश कर दिया...
मैं अन्य ! का ये दादी अम्मा वाला लुक से जो कुझे समझा रही थी,
देख के खुद को मुस्कुराने से रोक न पाया...
मैंने भी आगे बढ़ते हुए
अन्य ! के हेड पे किश कर दिया...
अन्य - जल्दी आना
इतना कहकर वो चली गयी....
मैं भी फटाफट उठ के फ्रेश होने चल दिया...
नाहा धोकर एक डैम रेडी होकर निचे हॉल की तरफ चल दिया,
जहा सभी टेबल पे मेरे आने की राह देख रहे थे...
मैं भी सबके पास जाकर G.M. विश किया,
डैड के पेअर छोङा चाहे बूत उन्होंने मुझे गले से लगा लिया और मेरे माथे पे किश कर दिए..
ऐसा hi माँ ने भी किया...
हमेशा अपने सीने से लगा लेते थे पेअर छूने hi न देते थे..
आज भी वैसा hi किया...
मैं - डैड ! आज गुरु जी को भी बुला लीजिये ब्रेकफास्ट के लिए...
मुझे उनसे कुछ जानना है....??
डैड उठ कर चल दिए सदनं जी के पास,
मैं अन्य ! के पास नाश्ता के लिए बैठ गया.. अपनी सीट पर..
डैड गुरु जी को लेकर आ गए जो की डैड के सामने वाली अपोजिट सीट में बैठ गए...
हम सभी ब्रेकफास्ट करना स्टार्ट किया...
सभी बात करते हुए नाश्ता कर रहे थे...
बीच में बात काट ते हुए बोलै,
मैं - डैड ! आदिगुरु महाराज कौन है...??
मेरे ऐसा सवाल करने से सबका नाश्ता करना रुक गया,
सबके चेहरे मेरी तरफ हो गए...
Mom-Dad तो मुझे सुरप्रीसेड होकर देख रहे थे...
बूत गुर सदनं जी के फेस पे एक स्माइल थी..
मैंने अपना सवाल दुबारा रिपीट किया..
तब सबका ध्यान टूटा...
अन्य - बताओ न डैड !! आप सभी इतना शॉक क्यों हो गए हो..??
माँ - बीटा तुमने ये नाम कहा सुना..??
डैड - है बीटा, आज से पहले तो कभी नहीं पूछा तुमने फिर आज अचानक से ये क्यों..??
मैं - पहले आप लोग बताएं फिर मैं अपनी बात समझाता हु..
डैड - हमें उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है,
लेकिन उनके hi आशीर्वाद से Hi तुम दोनों का जन्म हुआ है !!
अब शॉक होने की बरी हम दोनों की थी...
मैं और अन्य शॉक हो गए....
माँ - लेकिन बीटा तुम्हें उनके बारे में कैसे मालूम हुआ..??
मैं - मुझे अभी तक मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला,
आखिर है कौन..??
डैड - वो तुम्हारे गुरु सदनं जी के भी गुरु है,
इससे ज्यादा हमें कुछ नहीं पता...
मैं गुरूजी की तरफ देखने लगा.. अपने सवाल के जवाब के लिए...??
सदनं जी - पुत्र वो मेरे गुरु है है !!
किन्तु मुझे भी उनके बारे में कुछ नहीं पता,
कैलाश पर्वत पर उनसे भेट हुयी थी और वहीँ मुझे उन्होंने शिष्य स्वीकार किया और ज्ञान की ज्योति जगाई मेरे मन में...
मैं फिर अपने सपने वाली बात उन्हें बताई...
मैं - आज रात में मेरे सपने में आये थे,
कह रहे थे की समय आ चूका है,
मेरे आगे बढ़ने का..
मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की किश चीज़ का समय आ चूका है, वो किश बारे में बात कर रहे थे...
सदनं जी - वो तो गुरुवार hi जाने,
और भी तो कुछ कहा होगा तुमसे...??
मैं - है कह रहे थे की वो मुझसे और अन्य ! से जल्द मिलने आने वाले है...
मेरी इस बात से Mom-Dad और गुरु जी, एक डैम खुश हो गेट...
सबकी ख़ुशी उनके चेहरे पे देखे जा सकती थी...
माँ - बीटा सच कह रहे हो न, ये कोई मजाक तो नहीं न...??
मैं - है माँ मैं सच कह रहा हु,
बूत आप लोग इतना खुश क्यों है...??
सददन जी - न जाने कितना समय बीत चूका है उनके दर्शन किये हुए...
तुम्हारे जन्म के बाद से अभी तक उनकी कोई खबर नहीं..
ये तो बहुत ख़ुशी की बात है की गुरुवार आ रहे है..
पुत्र हयान ! जब तुम दोनों उनसे मिलोगे तो तुम्हारे सभी प्रश्नो का हल मिल जायेगा..
अब तो मुझे भी उनसे मिलने की बहुत ज्यादा इच्छा होने लगी थी..
क्युकी मुझे भी अपने और अन्य के साथ हो रहे सभी इन्सिडेंट्स के बार में जान था..
माँ - ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, हमें उनके आने की ख़ुशी में पूजा का आयोजन करना चाहिए...
डैड - है सही कहा उनके आदर - सत्कार के लिए मैं बंदोबस्त करता हु...
इसी तरह ख़ुशी ख़ुशी हमने ब्रेकफास्ट ख़त्म किया...
मैं और अन्य !! गुरु जी के साथ अपने ट्रेनिंग और गुरु ज्ञान के लिए गार्डन चल दिए....
इधर माँ डैड अपने काम में बिजी हो गए....
मैं और अन्य ! गुरु डचेन के पास ट्रेनिंग कर रहे थे..
अन्य ! और तेंजिन करते प्रैक्टिस कर रही थी...
और इधर मैं गुरु डचेन के पास बैठा शौलिने पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था..
खुद को कण्ट्रोल करते हुए मैं सामने खड़ी लकड़ी के मोठे
खम्बे पर हाथ मारा वो चकना चूर हो गया...
मेरी पावर्स को देख कर गुरु डचेन और भी ज्यादा हैरान हो गए....
रोज उन्हें मेरी पावर का कोई न कोई नमूना देखने को मिलता था...
मेरे ऐसा करने के बाद गुरु डचेन ने मुझे कुंग - फु प्रैक्टिस के लिए बोलकर खुद सदनं जी की तरफ चले गए....
डचेन - आज आप मेरे सवालों का जवाब दे दीजिये..
आज फिर से मैं बहुत ज्यादा हैरान और इनके बारे में जानने के लिए परेशां हु....
मुझे एक बात समझ नहीं आ रही आखिर इन दोनों के अंदर कौन सी नेचुरल पावर्स है,
जो इन दोनों को अपने से सौ गुना ज्यादा ताकतवर को हारने की क्षमता रखते है..
सदना जी - शायद आप कुछ भूल रहे है..??
यहाँ आने का मार्ग..??
डचेन - मैं कुछ समझा नहीं, की आप कहना क्या चाहते हो..??
सदनं जी - आखिर तुम भागकर इसी गांव में hi क्यों आये, और कही भी तो जा सकते थे.. ?
डचेन - मुझे यहाँ की राह दिखाई गयी थी..
सदनं जी - और वो राह आदिगुरु महाराज ने दिखाई थी, जो मेरे भी गुरु है,
ये सब नियति है, तुम्हें चुना गया था,
तभी तुम यहाँ आये, तुम्हारा भविष्य तुम्हें यहाँ ले आया..
डचेन - उसका अर्थ है की गुरूजी का कहना सत्य है,
मई चुना गया हु उस ईश्वर की महिमा में योगदान के लिए...
हो सके तो मुझे उस रहस्य से अवगत कराएं और मेरे कार्य को समझाएं...??
कौन है ये दोनों..??
सदनं जी - तो सुनिए.......
फ्लैशबैक -
आदिगुरु ध्यान में लीं मुस्कुरा रहे थे...
ऐसा लग रहा था जैसे उनके मुख से तेज़्ज़ टपक रहा...
ईश्वर की महिमा प्रतीत हो रही थी मुस्कान में...
सदनं बिलकुल ख़ामोशी से गुरुदेव के सामने बैठ गया और उनके अलौकिक रूप में खो गया....
कुछ देर बाद आदिगुरु ने अपने नेत्र खोले.....
सदनं को खुद में खोया हुआ पाया....
आदिगुरु मुस्करा उठे सदनं के इस तरह ध्यान में मगन होने को देखकर....
""कहो शिष्य कैसे आने हुआ..." गुरूजी बोले...
सदनं - हड़बड़ाकर प्रणाम गुरुदेव और उठकर गुरु के चरणों को श्पर्श किया...
गुरुदेव आप तो सब जानते है, भला आपसे कौन सी बात छुपी है, मेरे मन में फैले इस अज्ञानता को दूर कीजिये...
ये कैसा चमत्कार है गुरुवार....
आदिगुरु - यह चमत्कार नहीं ईश्वर की लीला है...
जो नहीं होना चाहिए था वो हुआ...
किन्तु जो भी हुआ अच्छे के लिए हुआ,
किसी की उदंडता आज कुछ अच्छा कर गयी है...
खुद अपने hi हाथो अपना अस्तित्व मिटने की राह चुनी...
सदनं - किसकी गलती से इस धरती लोक फायदा हुआ है गुरुदेव....
आदिगुरु - काली शक्ति को पूजने वाले, सरे ब्रम्हांड को अंधकार की ओर ले जाने वाले एक पापी ne...Kiya है पाप, महा पाप...
ईश्वर को मैंने वाली, दिव्या शक्ति की धारक रह चुकी एक देव कन्या के साथ दुर्व्यवहार किया...
वो भी तब किया जब वो बिलकुल शक्ति हीं हो चुकी थी...
लेकिन इस पापी ने असहाय कन्या के साथ अपनी शक्ति के दम पर महा पाप किया...
सदनं - गुरुवार अब उन् देव कन्या का क्या हुआ...??
आदिगुरु - वो खौफ नक् काली रात याद है तुम्हें..
जिस दिन ये दोनों आये थे यहाँ..
उन दोनों को चुना गया था ईश्वर ने चुना उन दो प्रेमियों को,
जो तन - मन दोनों से एकदम साफ़ ह्रदय वाले,
ईश्वर को सच्चे दिल से मैंने वाले, न कोई लोभ न कोई पाप किया ho...ishwar पर सच्ची श्रद्धा रखने वाले हो...
देव कन्या ने दुबारा जन्म लिया है,
वो भी इन् दोनों की संतान बनकर....
सदनं - धन्यवाद गुरुवार मेरे सभी प्रश्नो का जवाब मिल गया....
बाकी सब पता चल जायेगा....
आदिगुरु - यह इतना भी सरल नहीं होने वाला,
बहुत कठिन समय ाँ पड़ा है..
वो बालक Hi है उस कठिनाई का कारन...
सदनं - समझ से तो मेरे भी पड़े है,
एक तरफ वो कन्या जिसके मस्तिष्क से तेज़्ज़ और धरती लोक के Sukh-Samridhi के संकेत दिखाई देते है...
Kintu...wo बालक..??
वो तो अत्यंत विनाशकारी और काली शक्तियों का धारक प्रतीत होता है...
मैंने कुछ गलत कहा हो तो क्षमा करें गुरुवार ??
आदिगुरु - नहीं !! तुमने सत्य कहा है,
किन्तु तुम ये भूल रहे की उन दोनों ने एक hi माँ के कोख से जन्म लिया,
विभिन्नता होते हुए भी समय आने पर एक हो जायेंगे...
जहाँ से मैं देख रहा हु कुछ बुरा होने के बाद कुछ ाचा होने के संकेत मिल रहे....
एक बात हमेशा याद रखना...
""बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर कयों ना हो.. ,
उसका अन्तिम संस्कार अच्छाई ही करती है !!""
""हर बुरे इंसान में एक अच्छे छिपी होती है...
जरुरत है तो सिर्फ प्रेम और मार्गदर्शन की..""
सदनं - अति उत्तम गुरुवार...
धन्यवाद मुझे सच से अवगत करने के लिए...
मेरे लिए कोई आदेश महागुरु....
आदिगुरु - शिष्य अभी तो कुछ नहीं लेकिन समय आने पर तुम्हे अत्यंत hi आवश्यक कार्य करना hoga....margdarshan करना होगा...
तुम्हारा मार्गदर्शन भविष्य में Sukh-Samridhi और Lok-Kalyan के लिए सराहा जायेगा....
सदनं - जी गुरुवार !! कोटि कोटि धन्यवाद्..
मुझे इस महत्वकांक्षी कार्य का भागीदार बनाने के लिए....
आदिगुरु - कुछ कठिनाइयां कार्य में बढ़ा बनेगी किन्तु तुम उस मार्ग में अडिग होकर चलना... सब सुखद होगा..
सदनं - जो आज्ञा गुरुवार !! मैं अपने कार्य को पूरी लगन से करूँगा...
आदिगुरु - तथास्तु !!
समय आने पर तुम्हे तुम्हारे कार्य से अवगत कर दिया जायेगा...
फ्लैशबैक एन्ड
आज के लिए बस इतना hi..
सॉरी फॉर डिले...
......
......
गिव में योर वैल्युएबल रिव्यु एंड सुग्गेस्टिव..
सपोर्ट के लिए थैंक्स गाइस !!