Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 10 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

*Update..No..39*

(मेगा अपडेट)

Abb..Takk....

सुबह Mom-Dad से पूछने का सोचकर,

सभी बातों को इग्नोर कर फिर सबमें अन्य ! को हुग करके लेट गया और सो गया...

देखते कल की सुबह क्या नया पैगाम लाती है,...??

Abb..Aage...

रात में हुयी घटना से मेरे सर में अभी भी दर्द उठ रहा था...

सुबह मेरी आँख पानी के छींटों से खुली,

मैंने तुरंत आँखे खोल दी..

सामने अन्य ! खड़े मुस्कुरा रही थी..

ये सब उसकी की हरकत थी...

वो अभी बाथ करके आयी थी,

और मुझे उठाने के लिए अपने बालों का पानी डाली..

मैं उठकर उसका हाथ पकड़ के अपने बिस्तर में खिंच लिया और अपने साथ लिटा लिया....

अन्य - गुड मॉर्निंग हय्यू !!

मैं - G.M. अन्य !!

आज बहुत खूबसूरत लग रही हो..??

एक किश तो दे दो...

अन्य - वो तो मैं हमेशा से बेटिफुल हु, स्माइल करने लगी..

और आगे बढ़कर मेरे गाल में किश कर दिया...

मैंने भी अन्य को अपनी बाँहों में भरकर लेट गया और उसके गलों को चूम लिया...

अन्य - क्या बात है आज बहुत प्यार आ रहा है मुझपर..??

हयान - वो तो हमेसा से आता है,

लेकिन ये जो 1 वीक से हो रहा है न,

मुझे सबकी बहुत फ़िक्र होने लगी है..

मैं किसी को भी हर्ट होते नहीं देख सकता..

अन्य - ओह्ह तो ये बात है, इतनी फ़िक्र करने की जरुरत नहीं,

मैं हु न, माय स्वीट बीआरओ हय्यू !!

हयान - मुझे न सबसे ज्यादा फ़िक्र आपकी hi होती है,

आपको जरा सी भी खरोंच लगती है,

तो दर्द मुझे भी होता है...

अन्य - मुझको भी तो,

होगा भी क्यों नहीं,

हम दोनों एक दूसरे से जुड़े जो हैं.... दिल से.....

अन्य ! मेरी आखों में गौर से देखने लगी और...

अन्य - लेकिन हय्यू !

अभी तुम कुछ छिपाने की कोशिश कर रहे हो...??

आज रात फिर कुछ हुआ है न ...??

मैं - क्यों तुम्हें आज सपना नहीं आया क्या..??

अन्य - नहीं तो.. और तुमको..??

मैं - हम्म आज रात फिर वही आवाज़ आयी,

लेकिन इस बार उन्होंने अपना नाम बताया,

कह रहे थे मैं तुम्हारा गुरु हु,

मेरा और उनका जन्म से नाता है,

कुछ समझ नहीं आ रहा,

रात भर इसी के बारे में सोंचता रहा....

अन्य - फिर साद हो गए,

इतना बेकार फेस मत बनाया करो,

मुझे नहीं अच्छा लगता...

बाकी बातें बाद में,

जल्दी से फ्रेश हो जाओ.. निचे सभी हमारा वेट कर रहे होंगे..??

और आगे बढ़ कर अन्य ! ने मेरे गाल के किश कर दिया...

मैं अन्य ! का ये दादी अम्मा वाला लुक से जो कुझे समझा रही थी,

देख के खुद को मुस्कुराने से रोक न पाया...

मैंने भी आगे बढ़ते हुए

अन्य ! के हेड पे किश कर दिया...

अन्य - जल्दी आना

इतना कहकर वो चली गयी....

मैं भी फटाफट उठ के फ्रेश होने चल दिया...

नाहा धोकर एक डैम रेडी होकर निचे हॉल की तरफ चल दिया,

जहा सभी टेबल पे मेरे आने की राह देख रहे थे...

मैं भी सबके पास जाकर G.M. विश किया,

डैड के पेअर छोङा चाहे बूत उन्होंने मुझे गले से लगा लिया और मेरे माथे पे किश कर दिए..

ऐसा hi माँ ने भी किया...

हमेशा अपने सीने से लगा लेते थे पेअर छूने hi न देते थे..

आज भी वैसा hi किया...

मैं - डैड ! आज गुरु जी को भी बुला लीजिये ब्रेकफास्ट के लिए...

मुझे उनसे कुछ जानना है....??

डैड उठ कर चल दिए सदनं जी के पास,

मैं अन्य ! के पास नाश्ता के लिए बैठ गया.. अपनी सीट पर..

डैड गुरु जी को लेकर आ गए जो की डैड के सामने वाली अपोजिट सीट में बैठ गए...

हम सभी ब्रेकफास्ट करना स्टार्ट किया...

सभी बात करते हुए नाश्ता कर रहे थे...

बीच में बात काट ते हुए बोलै,

मैं - डैड ! आदिगुरु महाराज कौन है...??

मेरे ऐसा सवाल करने से सबका नाश्ता करना रुक गया,

सबके चेहरे मेरी तरफ हो गए...

Mom-Dad तो मुझे सुरप्रीसेड होकर देख रहे थे...

बूत गुर सदनं जी के फेस पे एक स्माइल थी..

मैंने अपना सवाल दुबारा रिपीट किया..

तब सबका ध्यान टूटा...

अन्य - बताओ न डैड !! आप सभी इतना शॉक क्यों हो गए हो..??

माँ - बीटा तुमने ये नाम कहा सुना..??

डैड - है बीटा, आज से पहले तो कभी नहीं पूछा तुमने फिर आज अचानक से ये क्यों..??

मैं - पहले आप लोग बताएं फिर मैं अपनी बात समझाता हु..

डैड - हमें उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है,

लेकिन उनके hi आशीर्वाद से Hi तुम दोनों का जन्म हुआ है !!

अब शॉक होने की बरी हम दोनों की थी...

मैं और अन्य शॉक हो गए....

माँ - लेकिन बीटा तुम्हें उनके बारे में कैसे मालूम हुआ..??

मैं - मुझे अभी तक मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला,

आखिर है कौन..??

डैड - वो तुम्हारे गुरु सदनं जी के भी गुरु है,

इससे ज्यादा हमें कुछ नहीं पता...

मैं गुरूजी की तरफ देखने लगा.. अपने सवाल के जवाब के लिए...??

सदनं जी - पुत्र वो मेरे गुरु है है !!

किन्तु मुझे भी उनके बारे में कुछ नहीं पता,

कैलाश पर्वत पर उनसे भेट हुयी थी और वहीँ मुझे उन्होंने शिष्य स्वीकार किया और ज्ञान की ज्योति जगाई मेरे मन में...

मैं फिर अपने सपने वाली बात उन्हें बताई...

मैं - आज रात में मेरे सपने में आये थे,

कह रहे थे की समय आ चूका है,

मेरे आगे बढ़ने का..

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा की किश चीज़ का समय आ चूका है, वो किश बारे में बात कर रहे थे...

सदनं जी - वो तो गुरुवार hi जाने,

और भी तो कुछ कहा होगा तुमसे...??

मैं - है कह रहे थे की वो मुझसे और अन्य ! से जल्द मिलने आने वाले है...

मेरी इस बात से Mom-Dad और गुरु जी, एक डैम खुश हो गेट...

सबकी ख़ुशी उनके चेहरे पे देखे जा सकती थी...

माँ - बीटा सच कह रहे हो न, ये कोई मजाक तो नहीं न...??

मैं - है माँ मैं सच कह रहा हु,

बूत आप लोग इतना खुश क्यों है...??

सददन जी - न जाने कितना समय बीत चूका है उनके दर्शन किये हुए...

तुम्हारे जन्म के बाद से अभी तक उनकी कोई खबर नहीं..

ये तो बहुत ख़ुशी की बात है की गुरुवार आ रहे है..

पुत्र हयान ! जब तुम दोनों उनसे मिलोगे तो तुम्हारे सभी प्रश्नो का हल मिल जायेगा..

अब तो मुझे भी उनसे मिलने की बहुत ज्यादा इच्छा होने लगी थी..

क्युकी मुझे भी अपने और अन्य के साथ हो रहे सभी इन्सिडेंट्स के बार में जान था..

माँ - ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, हमें उनके आने की ख़ुशी में पूजा का आयोजन करना चाहिए...

डैड - है सही कहा उनके आदर - सत्कार के लिए मैं बंदोबस्त करता हु...

इसी तरह ख़ुशी ख़ुशी हमने ब्रेकफास्ट ख़त्म किया...

मैं और अन्य !! गुरु जी के साथ अपने ट्रेनिंग और गुरु ज्ञान के लिए गार्डन चल दिए....

इधर माँ डैड अपने काम में बिजी हो गए....

मैं और अन्य ! गुरु डचेन के पास ट्रेनिंग कर रहे थे..

अन्य ! और तेंजिन करते प्रैक्टिस कर रही थी...

और इधर मैं गुरु डचेन के पास बैठा शौलिने पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था..

खुद को कण्ट्रोल करते हुए मैं सामने खड़ी लकड़ी के मोठे

खम्बे पर हाथ मारा वो चकना चूर हो गया...

मेरी पावर्स को देख कर गुरु डचेन और भी ज्यादा हैरान हो गए....

रोज उन्हें मेरी पावर का कोई न कोई नमूना देखने को मिलता था...

मेरे ऐसा करने के बाद गुरु डचेन ने मुझे कुंग - फु प्रैक्टिस के लिए बोलकर खुद सदनं जी की तरफ चले गए....


डचेन - आज आप मेरे सवालों का जवाब दे दीजिये..

आज फिर से मैं बहुत ज्यादा हैरान और इनके बारे में जानने के लिए परेशां हु....

मुझे एक बात समझ नहीं आ रही आखिर इन दोनों के अंदर कौन सी नेचुरल पावर्स है,

जो इन दोनों को अपने से सौ गुना ज्यादा ताकतवर को हारने की क्षमता रखते है..

सदना जी - शायद आप कुछ भूल रहे है..??

यहाँ आने का मार्ग..??

डचेन - मैं कुछ समझा नहीं, की आप कहना क्या चाहते हो..??

सदनं जी - आखिर तुम भागकर इसी गांव में hi क्यों आये, और कही भी तो जा सकते थे.. ?

डचेन - मुझे यहाँ की राह दिखाई गयी थी..

सदनं जी - और वो राह आदिगुरु महाराज ने दिखाई थी, जो मेरे भी गुरु है,

ये सब नियति है, तुम्हें चुना गया था,

तभी तुम यहाँ आये, तुम्हारा भविष्य तुम्हें यहाँ ले आया..

डचेन - उसका अर्थ है की गुरूजी का कहना सत्य है,

मई चुना गया हु उस ईश्वर की महिमा में योगदान के लिए...

हो सके तो मुझे उस रहस्य से अवगत कराएं और मेरे कार्य को समझाएं...??

कौन है ये दोनों..??

सदनं जी - तो सुनिए.......

फ्लैशबैक -

आदिगुरु ध्यान में लीं मुस्कुरा रहे थे...

ऐसा लग रहा था जैसे उनके मुख से तेज़्ज़ टपक रहा...

ईश्वर की महिमा प्रतीत हो रही थी मुस्कान में...

सदनं बिलकुल ख़ामोशी से गुरुदेव के सामने बैठ गया और उनके अलौकिक रूप में खो गया....

कुछ देर बाद आदिगुरु ने अपने नेत्र खोले.....

सदनं को खुद में खोया हुआ पाया....

आदिगुरु मुस्करा उठे सदनं के इस तरह ध्यान में मगन होने को देखकर....

""कहो शिष्य कैसे आने हुआ..." गुरूजी बोले...

सदनं - हड़बड़ाकर प्रणाम गुरुदेव और उठकर गुरु के चरणों को श्पर्श किया...

गुरुदेव आप तो सब जानते है, भला आपसे कौन सी बात छुपी है, मेरे मन में फैले इस अज्ञानता को दूर कीजिये...

ये कैसा चमत्कार है गुरुवार....

आदिगुरु - यह चमत्कार नहीं ईश्वर की लीला है...

जो नहीं होना चाहिए था वो हुआ...

किन्तु जो भी हुआ अच्छे के लिए हुआ,

किसी की उदंडता आज कुछ अच्छा कर गयी है...

खुद अपने hi हाथो अपना अस्तित्व मिटने की राह चुनी...

सदनं - किसकी गलती से इस धरती लोक फायदा हुआ है गुरुदेव....

आदिगुरु - काली शक्ति को पूजने वाले, सरे ब्रम्हांड को अंधकार की ओर ले जाने वाले एक पापी ne...Kiya है पाप, महा पाप...

ईश्वर को मैंने वाली, दिव्या शक्ति की धारक रह चुकी एक देव कन्या के साथ दुर्व्यवहार किया...

वो भी तब किया जब वो बिलकुल शक्ति हीं हो चुकी थी...

लेकिन इस पापी ने असहाय कन्या के साथ अपनी शक्ति के दम पर महा पाप किया...

सदनं - गुरुवार अब उन् देव कन्या का क्या हुआ...??


आदिगुरु - वो खौफ नक् काली रात याद है तुम्हें..

जिस दिन ये दोनों आये थे यहाँ..

उन दोनों को चुना गया था ईश्वर ने चुना उन दो प्रेमियों को,

जो तन - मन दोनों से एकदम साफ़ ह्रदय वाले,

ईश्वर को सच्चे दिल से मैंने वाले, न कोई लोभ न कोई पाप किया ho...ishwar पर सच्ची श्रद्धा रखने वाले हो...

देव कन्या ने दुबारा जन्म लिया है,

वो भी इन् दोनों की संतान बनकर....

सदनं - धन्यवाद गुरुवार मेरे सभी प्रश्नो का जवाब मिल गया....

बाकी सब पता चल जायेगा....

आदिगुरु - यह इतना भी सरल नहीं होने वाला,

बहुत कठिन समय ाँ पड़ा है..

वो बालक Hi है उस कठिनाई का कारन...

सदनं - समझ से तो मेरे भी पड़े है,

एक तरफ वो कन्या जिसके मस्तिष्क से तेज़्ज़ और धरती लोक के Sukh-Samridhi के संकेत दिखाई देते है...

Kintu...wo बालक..??

वो तो अत्यंत विनाशकारी और काली शक्तियों का धारक प्रतीत होता है...

मैंने कुछ गलत कहा हो तो क्षमा करें गुरुवार ??

आदिगुरु - नहीं !! तुमने सत्य कहा है,

किन्तु तुम ये भूल रहे की उन दोनों ने एक hi माँ के कोख से जन्म लिया,

विभिन्नता होते हुए भी समय आने पर एक हो जायेंगे...

जहाँ से मैं देख रहा हु कुछ बुरा होने के बाद कुछ ाचा होने के संकेत मिल रहे....

एक बात हमेशा याद रखना...

""बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर कयों ना हो.. ,

उसका अन्तिम संस्कार अच्छाई ही करती है !!""

""हर बुरे इंसान में एक अच्छे छिपी होती है...

जरुरत है तो सिर्फ प्रेम और मार्गदर्शन की..""

सदनं - अति उत्तम गुरुवार...

धन्यवाद मुझे सच से अवगत करने के लिए...

मेरे लिए कोई आदेश महागुरु....

आदिगुरु - शिष्य अभी तो कुछ नहीं लेकिन समय आने पर तुम्हे अत्यंत hi आवश्यक कार्य करना hoga....margdarshan करना होगा...

तुम्हारा मार्गदर्शन भविष्य में Sukh-Samridhi और Lok-Kalyan के लिए सराहा जायेगा....

सदनं - जी गुरुवार !! कोटि कोटि धन्यवाद्..

मुझे इस महत्वकांक्षी कार्य का भागीदार बनाने के लिए....

आदिगुरु - कुछ कठिनाइयां कार्य में बढ़ा बनेगी किन्तु तुम उस मार्ग में अडिग होकर चलना... सब सुखद होगा..

सदनं - जो आज्ञा गुरुवार !! मैं अपने कार्य को पूरी लगन से करूँगा...

आदिगुरु - तथास्तु !!

समय आने पर तुम्हे तुम्हारे कार्य से अवगत कर दिया जायेगा...

फ्लैशबैक एन्ड

आज के लिए बस इतना hi..

सॉरी फॉर डिले...

......

......

गिव में योर वैल्युएबल रिव्यु एंड सुग्गेस्टिव..

सपोर्ट के लिए थैंक्स गाइस !!

 
ही गाइस !!

नेटवर्क प्रॉब्लम और सफ साइट बिजी होने कारन स्लो चल रही है...

सो अपडेट पहले इन्कम्प्लीट दिया था...

बूत दुबारा एडिट करके ...कम्पलीट कर दिया है...

मैंने वेड के मुताबिक मेगा अपडेट दे दिया....

आप लोग बहुत जल्दी नाराज़ हो जाते हो....

मुझपर भी रहम करो...

डेली अपडेट देता हु...

कभी मेगा तो कभी शार्ट...

छोड़िये कोई नहीं..

आप सभी की ख़ुशी में मेरी भी ख़ुशी है...

थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग....

सो प्ल्ज़ रीड एंड गिव योर वैल्युएबल सुग्गेस्टिव
 
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Aapke Review ko दekhakr Tasalli hoti hai ki Meri Mehnat Bekar nahi Ja Rahi....

यह अपडेट लिखने में मुझे काफी समय लगा..

काफी गहरायी तक उतरना पड़ा घ मुझे...

""बुराई चाहे कितनी भी ताकतवर कयों ना हो.. ,

उसका अन्तिम संस्कार अच्छाई ही करती है !!""

""हर बुरे इंसान में एक अच्छे छिपी होती है...

जरुरत है तो सिर्फ प्रेम और मार्गदर्शन की..""




थैंक्स शाहब आपके बेहतरीन रिव्यु के लिए...!!

 
*Update...No..40.*

मेगा अपडेट



फ्लैशबैक एन्ड...

Abb..Aage..

गुरु सदनं जी, गुरु डचेन को जितना जानना आवश्यक था, सभी सत्य से अवगत करवा देते है...

जिसे सुनकर गुरु डचेन बहित खुश होते है...

डचेन - कोटि कोटि धन्यवाद ऋषिवर !! आज मेरा जीवन सफल हो गया,

मेरी आत्मा आज बहुत प्रशन्न हो गयी इस सत्य को जानकर की मैं भी इस सृष्टि के कल्याण के लिए एक छोटा सा भागिदार हु..

मुझे तो विश्बाश नहीं हो रहा मैं इतने उच्च कोटि के बालक और बालिका को अपनी कलाओं का ज्ञान दे रहा हु...

ये मेरे सौभाग्य की बात है की मुझे इनका गुरु चुना गया...

सददन जी - सौभाग्य की बात तो मेरे लिए भी है की मैं इन अद्भुत पारलौकिक शक्तियों का गुरु हु और इनके ज्ञान और मार्ग दर्शन को लिए चुना गया हु....

अब हम दोनों की कठिन परीक्षा का समय आ चूका है...

इधर.....

मैं दोनों के साथ Kung-fu प्रैक्टिस कर रहा था...

तभी गुरु सदनं की आवाज़ आयी...

उनके साथ गुरु डचेन भी थे...

सदनं जी - 6 साल के लम्बे समय से तुम तीनो ज्ञान और कला सीखते चले आ रहे हो...

मेरे विचार से अब तक तुम लोग माहिर हो चुके होंगे...

कल तुम तीनो की परीक्षा होगी और तुम्हें उस परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना होगा...

तुम्हारी परीक्षा तीन चरणों में होगी...

1सत - ज्ञान और जीवन

2ंद - फाइटिंग स्किल,

3रद - वेपन एंड टेक्नोलॉजी.

आज तुम तीनो अपनी अपनी प्रैक्टिस कम्पलीट कर लो..

एक बात का ख़ास ध्यान रहे तुम दोनों को,

अंतिम चरण तक तुम्हें लड़ना होगा...

आदिगुरु के आने में समय काम बचा है उनको तुम्हारे प्रदर्शन में कोई त्रुटि न दिखे..

कल सुबह 5 बजे तुम्हारी परीक्षा का समय निर्धारित किया जा है....

साडी बातें समझने के बाद दोनों गुरु हमें गार्डन में प्रैक्टिस के लिए छोड़कर अपने अपने कमरे की तरफ चले गए...

हम तीनो भी कल के एग्जाम के लिए खुद के रेडी करने लगे...

लगातार 2 घंटे की प्रैक्टिस के बाद हम तीनो लंच के लिए हॉल की तरफ चल दिए आज तेंजिन भी हमारे साथ लंच करने आयी थी...

हम सभी जाकर फ्रेश हुए और लंच के लिए टेबल के बैठ गए...

माँ ने हमारे लिए खाना सर्वे किया...

खाना खाने के बाद हम तीनो लोग एक कमरे में आ गए और रेस्ट करने लगे एक hi बीएड पर लेटकर....

मैं - जिन ! तुम्हें क्या लगता है, हमें किस्से लड़ना होगा...??

जिन - वो तो कल hi पता चलेगा...

अन्य - मेरे ख्याल से पहले हम तीनो को एक दूसरे से फाइट होगी..

फिर जो जीतेगा उसे गुरु डचेन से लड़ना होगा...

मैं - मुझे भी कुछ ऐसा hi लग रहा है...

जो भी हो हमें खुद को रेडी रखना होगा...

अन्य - शाम को एक राउंड और प्रैक्टिस कर्नेगे एक दूसरे से फाइट करके जिससे की कोई कमी न बचे...??

जिन - कल का दिन बहुत ख़ास होने वाला है मेरे लिए..

कल पता चल जायेगा हम तीनो के कौन बेस्ट है...??

अन्य - वो तो मैं पहले से हु,

कल फिर से एक बार साबित कर दूंगी...

इस बात पर हम तीनो हसने लगे...

जिन - एक बात कान खोलके सुन ले हयान !!

खुद के गुस्से पर काबू Rakhna,Warna इस बार मैं तुझे नहीं छोड़ने वाली...??

मैं - वो तो वक़्त hi बताएगा, कौन किसे हारता है,

कल ये तेरी छोटी नाक और न पिचका दी तो कहना...??

मेरी इस बात पर जिन का मुँह बिलकुल रोने जैसा हो गया...

मैं और अन्य ! जोरर से हसने लगी...

हमारे हसने से जिन को गुस्सा आने लगा..

सीधा उचकते हुए मेरे पेट पे आकर बैठ गयी..

मैं - मम्मी ! कोई इस भैंस को मेरे ऊपर हटाओ...

मोती न जाने कितना कहती है...

है रे मैं पिचक गया....

जिन - मैं तुझे भैंस दिखती हु, देख तुझसे भी ज्यादा गोरी हु,

क्या बोलै मोती..

पहले खुद को देख सैंड जैसा हो गया है...??

मैं - अन्य ! प्ल्ज़ हेल्प में, इस मोती को हाथ मेरे ऊपर से .अअअअअ.. चटककक

जिन - फिर से मोती,

ये बता तुझे मैं मोती कहा से दिखती हु,....

मुझे मस्ती सूझी...

मैं अपना हाथ बढ़ाते हुए जिन के हिप्स पे रख दिया,

मैंने - यहाँ से दिखती है मोती, देख तो पहले खुद को आईने पे.. मोटली कही की...!!

जिन - गंदे Ladke...Ruk तुझे बताती हु,

हल्का ऊपर उठकर एक बार फिर तेज़ी से मेरे ऊपर कूद गयी...

मैं जोरर से चिल्लाया मार दिया रे मोती ने...

तोड़ दी हड्डी meri...Ahhahaa

अन्य - बस भी कर मोती जिन.. बचे की जान लेगी क्या,..??

जिन - तू तो हमेशा इसी की साइड लेती है,

जाओ मुझे तुम दोनों से बात नहीं करनी है..??

मेरे ऊपर से उठकर जाकर सोफे बैठ गयी..

रोने जैसा मुँह बनके...

अन्य - रुला दिया न बेचारी को...??

मैं - मैंने कहा रुलाया है, वो तो आप के कहने से है हुआ है सब...

मैं उठा और जिन के पास गया...

मैं - ोये छोटी नाक वाली जंगली बिल्ली ज्यादा नाटक न दिखाओ अब...

इतनी सी बात पर भी कोई रोटा है भला...

जिन चुप रही कुछ न बोली अपने फेस को सोफे में छिपा लिया...

मुझे बी शरारत सूझी मैं जिन को अपनी गॉड में उठके बीएड पे पटक दिया....

जिन चिल्लाई मुम्मियीईई..

लेकिन मैं इतने पे न रुका उसके कमर के ऊपर जेक बैठ गया...

अब रोना धोना छोड़ अन्य से हेल्प मांगने लगी.. प्ल्ज़ मुझे बचा इस गधे से...

अन्य - मुझे नहीं पड़ना तुम दोनों के बीच में,

मेरे बोलने ओर अभी तू रोई थी, अब ये भी न रोने लगे कहीं...??

मैं - है तो मेरी जंगली बिल्ली...

अब कैसा लग रहा है,

आ रहा है न मज़ा...??

जिन - प्ल्ज़ रहने दे न, दुःख रहा है पेट पे प्ल्ज़ उठा जा,.

मैं - देखो तो मोती को,

जब तक खुद बैठी थी,

तब मेर दर्द का कोई ख्याल न था अब खुद के लिए प्ल्ज़ प्ल्ज़ कह रही...

जिन - प्ल्ज़ हैट जा फिर तुझे किश दूंगी पक्का....

मैं - अब नहीं चाहिए तेरी किश विस्स,

उस दिन शर्त लगी थी अन्य ! से, तब तो महारानी के नखरे थे... आज खुद से दे रही....

अन्य - हय्यू !!बस बहुत हुआ, दुःख रहा होगा, हटो जल्दी से...

मैं तुरंत हैट गया...

जिन - थैंक्स यार अन्य !! बचा लिया मुझे इस गधे से वर्ण आज मेरी हड्डी फ्रैक्चर हो जाती, और कल ये गधा विनर बन जाता....??

मैं - है जो कहना है कह ले तुम्हे तो कल मैं वहीँ फाइट में मज़ा चखाउंगा....??

जिन - वो तो वक़्त बताएगा कौन किसे मज़ा चखता है..??

मैं - कल का तो नहीं तुम अभी देखो... मेरी जंगली billi....Pyari सी...

मैं आगे बढ़ते हुए जिन को अपने दोनों बाजुओं की गिरफ्त में ले लिया..

और उसके गाल पे जबरदस्ती किश कर दिया...

जिन तो बचने की बहुत कोशिश की बूत न कामयाब रही...

.अपने गाल पोछते हुए

जिन - छी कितना गन्दा हो गया है तू...

एक लड़की के साथ जबरदस्ती करता है...

मैं - तू लड़की कहा से लगती है, तू मेरी प्यारी जंगली बिल्ली है,

मैं तेरे साथ चाहे जो भी करू,..??

वो सिर्फ प्यार होगा न की जबरदस्ती समझे छोटी नाक वाली.... हहह ः

सीरियस होते हुए...

अन्य - हय्यू ! गन्दी बात, बिना किसी के इजाजत के ये सब गलत है...??

मैं मुस्कुराते हुए...

मैं - अच्छा जी माय क्यूट एंजेल....

पूछ के तो कर सकता हु न...??

मैं आगे बढ़ते हुए अन्य ! को अपनी बाँहों में भर के बीएड पे लेट गया और किश करने लगा...!!

अन्य - No No..help में जिन हेल्प में....

जिन भी मेरे ऊपर कूद गयी...

और गुदगुदी करने लगी हम दोनों के..

ऐसे hi हम तीनो एक दूसरे को गुड़ गुड़ी करते रहे... जब हंस हंस के सांस उखाड़ने लगी तो..

एक दूसरे को गले लगाकर लेट गए...

और तेज़ तेज़ सांसे लेने लगे...

मैं बीच में था

अन्य! और जिन मेरे दोनों बाजु हुग किये लेते हुए थे...

हम तीनो ऐसे लेते हुए आराम करने लगे..

दरवाज़े पर माँ खड़े मुस्कुरा रही थी..

माँ तो तब hi आ गयी थी जब जिन चिल्ला रही थी हेल्प में....

माँ वही खड़े सब देख कर मुस्कुरा रहीं थी...

कितना प्यार hai....kisi की नज़र न lage...inhein

हम तीनो को अपने हाल में छोड़कर वापस चली गयीं...

वैसे ये एक दोस्त, एक बड़ी बहन का सच्चा प्यार था,

जिन मेरी बहुत अच्छी एकलौती दोस्त बन गयी थी...

बनेगी भी क्यों न अखिल और माहि के जाने के बाद

मैं, अन्य ! और जिन बस तीन hi तो बचे थे...

हम उम्र के...

तो हम तीनो के लिए ये आम बात थी...

यह प्यार वासना रहित प्यार था जिस में किसी भी प्रकार के बुरे विचारों की जगह न थी...

4 बजे तक यूँही लेते आराम करते रहे थके होने के करना नींद भी आ गयी थी...

माँ ने आकर हमें जगाया..

हम तीनो फिर से लग गए प्रैक्टिस में...

7 बजे तक लगातार पसीना बहते रहे...

जैन अंकल हमारी हेल्प कर रहे थे...

तलवार बाज़ी और वेपन में तो हम तीनो इन बीते 6 सैलून में माहिर खिलाडी बन गए थे...

आल टाइप्स की गन और वेपन की नॉलेज और उसे आने लगा था...

कंप्यूटर और हैकिंग में हम तीनो का तो कोई तोड़ न था...

बीते 6 सैलून में लगातार डेली रूटीन के हिसाब से जैन अंकल और रिया मौसी नॉलेज प्रोवाइड करती आ रही थी...

कंप्यूटर हैकिंग के लिए जैन अंकल ने अफगानिस्तान से U.S नेवी के एक सोल्जर फ्रेंड को बुलाया था ट्रेनिंग के लिए..

जिनसे हमे बहुत कुछ सीखने कल मिला...

हालाँकि स्पेशल ट्रेनिंग में जिन को शामिल नहीं किया गया..

बस कुछ बेसिक नॉलेज hi दी गयी...

क्युकी गुरु डचेन ने जिन को अन्य का फ्यूचर बॉडीगार्ड के तौर पर त्रिनेड करवा रहे थे सदनं जी के कहने पर...

शाम की ट्रेनिंग कम्पलीट करने के बाद सीधा डिनर किया और सोने चल दिए क्युकी आज डबल प्रक्टिसे के कारन बहुत ज्यादा थक चुके थे..

सारा बदन टूट रहा था...

रात में माँ ने हम दोनों की डेली रूटीन के हिसाब से मस्सगे दी...

ऐसा गुरु सददन जी का आदेश था..

डेली नाईट को सोने से पहले किसो आयुर्वेदिक आयल से मस्सगे..

इस मस्सगे अस हम दोनों को बहुत आराम मिलता और साडी थकावट और दर्द दूर हो जाते थे...

इस मस्सगे का असर तो सुरु के 6 महीनो में दिख गया था..

हमारी बॉडी बिलकुल सख्त और मज़बूत होती जा रही थी..

कभी कभी मेरी मस्सगे खुद गुरु सदनं जी करते थे जब भी वो मुझसे जिम में वर्कआउट करवाते थे...

माँ के मस्सगे करने के बाद हम दोनों ने बरी बरी शावर लिया...

और अपना नाईट ड्रेस पहनकर बेस पर लेट गए...

एक दुसरो को बाँहों में जकड़े हुए हमें कब नींद आ गयी कुछ होश hi न रहा....

अब तो इंतेज़रर था अगली शुबह होने का...??

आज के लिए बस इतना hi...

लाइक्स, कमैंट्स, और वोट्स का रखना dhyan.....Aapka दोस्त हयान..!!
 
माफ़ी की कोई जरुरत नहीं भाई !!

जब समय तब कमेंट karein..No प्रॉब्लम..!!

है भाई सच कहा डिटेलिंग शायद ज्यादा हो गयी है....

फ्लैशबैक को भी छोटा दिखाया जा सकता था...

सपने के बाद की मुष्ठिति के वरनन का विचार मेरे मन नहीं आया...

शायद इसीलिए मैं नहीं कर पाया...

शायद आपके रेविएवस पहले आते तो कुछ सुधर कर पता नेक्स्ट उपदटेस में....

बूत जो अब अगला aayega....Usmein कोशी करूँगा...

थैंक्स bhai....For ब्यूटीफुल रिव्यु एंड सुग्गेस्टिव ...
 
आप यक़ीन मनो..

आपसे ज्यादा मैं बेताब हु..

हीरो की एंट्री के liye...But समझ नहीं आ रहा है कैसे जबरदस्त एंट्री du....Koi सिचुएशन भी तो न बन रही...

सब चीज़ तो नार्मल चल रहा है...

बहुत बहुत धन्यवाद एक बार फिर आपके बेहतरीन रिव्यु के लिए....

मेरे लेखनी को इनाम देने के लिए...

आगे कोशिश और rahegi...ki कॉमेडी और रोमांस भरपूर आये उपदटेस में...

सच तो ये है की स्टोरी मैंने स्लो राखी hai...Daily ीपड़ते देने के बाद भी....

लेकिन वडा करता हु..

क्युकी आदिगुरु आ रहे है...

हीरो की एंट्री गज़ब की होगी...

थैंक्स शाहब...!!
 
अपडेट No. 41*

(मेगा अपडेट)

(प्रैक्टिस टेस्ट )



कबीर हाउस...

सुबह 4:30 बजे अलार्म से हम दोनों की आखें खुली...

आज का दिन हमारे लिए ख़ास था... क्या सीखा क्या Paya...Khud को परखने का समय आ चूका था...

जल्दी से हम दोनों फ्रेश होकर निचे पहुंचे..

जहा माँ ने पहले से हमारे लिए ब्रेकफास्ट रेडी कर चुकी थी..

आज हमारा मुकाबला होना था इस्सलिये सभी जग चुके थे,

आज के मुकाबले को सभी देखने के लिए बहुत उत्सुक थे...

ब्रेकफास्ट करने के बाद...

मैं और अन्य ! गार्डन पहुँच गए...

जहा गुरु डचेन, सदनं जी, पहले से मौजूद थे...

हम दोनों ने जाकर उनका आशीर्वाद लिया...

वही पास में hi तेंजिन रनिंग प्रैक्टिस कर रही थी..

हम दोनों भी उसके पास जाकर मिले और खुद को आज होने वाली परीक्षा के लिए तैयार करने लगे....

धीरे धीरे मैदान में सभी आ गए..

गुरु डचेन, सदनं जी और जैन अंकल आपस कुछ बातें कर रहे थे...

उनके साथ hi हमारे सभी सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े थे जिनको कुछ बताएं समझायी जा रही थी....

हम तीनो यूँही सुबह सुबह खुद को रेडी करने लगे थे...

तभी हम तीनो के पास माँ डैड आये और हमें पीने के लिए जूस दिया...

हम भी प्रैक्टिस के बाद थोड़ा रेस्ट करने लगे वही घांस में बैठकर जूस पीते हुए...

कुछ देर hi गुज़री थी की गुरु सदनं जी हमारे पास आये और हम तीनो को एक साथ एक जगह खड़े होने को कहा....

सददन जी - सर्व प्रथम मैं तुम तीनो को आज की परीक्षा के लिए विजयी होने का आशीर्वाद देता हु...

अपनी पूर्ण क्षमता और लगन से अपनी कुशलता का प्रदर्शन करना....


यह परीक्षा खुद की शक्ति को परखने का एक जरिया है...



खुद के चित्त को एकाग्रित और मन को शांत करके, क्रोध विमुक्त होकर परीक्षा की ओर अग्रसर होना...

क्युकी आज तुम तीनो की सहन शीलता का इम्तेहान है...

ऐसे hi कई बातें Samjhayi...Rule Regulation..etc..

फेज 1- अस्त्र - शाश्त्र...

A.Dhanush,

B.Weapons - गन, रिफेलस ेट्स..

C.Sword - तलवारबाज़ी

सददन जी - जैसा की तुम्हें पता है शत्रु कभी भी हमला कर सकता है..

चाहे दिन हो या रात इस लिए तुम्हें इस रात के अँधेरे में अपनी निशाने बजी का प्रदर्शन करना होगा...


गुरु डचेन, सदनं जी, और जैन अंकल तीनो हमें बरी बरी से किश प्रकार और कैसे क्या करना अच्छे से समझा दिए....

गुरूजी का आदेश मिलते hi हमने अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया...

सुबह के 5:15 हो रहा था, हल्का हल्का उजाला था..

सामने की तरफ निशाने लगाए हुए थे जिसपर हमें अचूक निशाना भेदना था..

सबसे पहले हमें तीर कमान दिया गया...

जो की हमरे लिए बिलकुल खेल जैसा था..

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सबसे पहले अन्य ! की बरी आयी..

उसने तीनो निशाने बिलकुल सटीक लगाए..

फिर मेरी और जिन की बरी आयी...

हम तीनो ने बिलकुल सही निशाना भेदा..

किसी भी प्रकार की कोई गलती न हुयी...

सभी हमारी प्रतिभा खुश हुए...

धनुष की शिक्षा हमें सदनं जी ने दी थी....

वेपन्स और तलवार बाज़ी की ट्रेनिंग जैन अंकल और उनके साथियों से सीखी थी..

जिसमें तलवार चलने में गुरु डचेन ने हमारी बहुत सहायता की थी...

फिर बरी आयी वेपन्स की

हम तीनो ने गन और राइफल से भी बिलकुल अचूक निशाना लगाया...

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8 साल के Hard-work के बाद आज हम इस मुकाम में पहुँच पाए... जहा अब से शायद hi ककी गलती होती..

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निसानी बाज़ी की प्रतियोगिता बिलकुल बराबर गयी कोई किसी से काम न निकला सबको बराबर अंक मिले...

अब बरी थी तलवार बाज़ी प्रतियोगिता की..

जिसमें हम अपने सामने वाले प्रतिद्वंद्वी को हरा सकते थे..

फिर से गुरु जी ने हमें कुछ बातें समझायी..

मैं तो समझा था हमारा मुकाबला एक दूसरे से होगा लेकिन..

मेरा, गुरु डचेन से

अन्य ! का जैन अंकल से

और तेंजिन का एक गार्ड से मुकाबला फिक्स किया गया...

फिर शुरू हुयी तलवार बाज़ी...

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मैं लगातार अपने गुस्से को शांत किये हुए गुरु डचेन पर अटैक किये जा रहा था, लेकिन मेरे सरे अटैक बेकार होते जा रहे थे.. गुरु डचेन बड़ी आसानी से मेरे वार को रोक रहे थे..

कुछ ऐसा hi हाल अन्य ! और जिन का भी था...

लगातार 30 मं के मुकाबले के बाद भी कोई हल नहीं निकल रहा था...

मुझे खुद पर अब गुस्सा आ रहा था की मेरे वार इतने आसानी से कैसे रोके जा रहे...

अब शिष्य चाहे जितना ताकतवर हो जाये लेकिन गुरु तो गुरु hi होता है...

इसलिए अब मैं सीधा अटैकिंग मोड पे आ गया..

मैंने अपनी पूरी ताकत और एकाग्रता से वार करने लगा...

अपनी हर कोशिश और चालाकी दिखने लगा..

अंत में मुझे सफलता मिली..

मैंने अपनी चतुराई दिखते हुए..

कलाबाज़ी की और अपनी

तलवार को फिस्सलाते हुए गुरु डचेन के हाथ के पंजे में लगी जिससे उनकी मुठी खुल गयी और तलवार गिर गयी...

मुकाबला यहीं पर रोक दिया गया...

गुरु डचेन मेरी इस चालाकी से बहुत खुश हुए और मुझे शाबाशी दी...

गुरु डचेन - आज तुमने मुझे खुश कर दिया,

मेरी सी गयी सभी कलाओं का सही प्रदर्शन दिखया है तुमने..

मैंने झुक कर उनके पेअर छू लिए...

यह मुकाबला था एक टेस्ट था,

जिसमें अपनी प्रतिभा को दिखाना था न ki....kisi को घायल करना था...

बस वही soojh-Boojh दीखते हुए हमने अपनी तलवार बाज़ी की प्रतिभा को ख़त्म किया...

यह मुकाबला भी वैसा hi गया कोई किसी को न हरा पाया..??

सिवाय मेरे..

इस वजह से मुझे 1 अंक एक्स्ट्रा मिला..

जिससे मैं बहुत खुश हुआ....

सुबह के 6:30 बज चुके थे..

उजाला हो चूका था...

हम वही पर बैठकर रेस्ट करने लगे..

क्युकी यह मुकाबला 30मं से ज्यादा चला जिससे हमारी हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी...

कुछ देर रेस्ट करने के बाद हाथ मुँह धूल कर फिर से तरोताजा हुए...

हमने पहला चरण बड़ी hi आसानी से पार कर लिया था अब थी बारी दूसरे चरण की...

फेज 2 - बुद्धिमत्ता और ज्ञान

गुरु सदनं जी - अति उत्तम प्रदर्शन अब तक तुम तीनो ने दिया...

अब बारी है तुम्हारे ज्ञान, सोचने - समझने की शक्ति, और बुद्धिमत्ता के प्रदर्शन की...

इस चरण में तुमसे कुछ मौखिक प्रश्न पूछे जायेंगे...

जिसका तुम्हें बड़े hi धैर्य और सोंच समझकर उत्तर देना होगा...

सही जवाब देने वाले को 1 अंक और गलत जवाब देने वाले का एक अंक काट लिया जायेगा...??

प्रश्न केवल एक hi बार किया जायेगा इस्सलिये पूरी एकाग्रता से सुन्ना .....

ऐसे कई बातें समझायी गुरु जी ने..

यह फेज एक प्रकार नॉलेज टेस्ट था जिसमे हमें सिर्फ केस. के ाँस. देने थे...

गुरु डचेन, गुरु सदनं जी, जैन अंकल और रिया मौसी ये सभी करने वाले थे सवाल....

एक प्रकार से हम सभी का इंटरव्यू होने जा रहा था...

बड़ी hi उत्सुकता के साथ हम सवाल पूछे जाने का वेट करने लगे...

घबराहट तो हो रही थी की आखिर कैसे प्रश्न पूछे जायेंगे...??

रश्मि दीदी जनरल नॉलेज के सवाल करने लगी...

जिसका हम तीनो बरी बरी से उत्तर देने लगे...

जैन अंकल ने कंप्यूटर, हैकिंग और वेपन्स सम्बंधित सवाल पूछे..

गुरु डचेन ने लड़ने की कला और युद्ध कौशल सम्बंधित सवाल पूछे..

लास्ट में गुरु सदनं जी ने... अस्त्र, मंत्र, शाश्त्र, ग्रन्थ, धर्म, जीवन सम्बंधित सवाल पूछे...

जिसका मैं और अन्य ! बिलकुल सही जवाब देते गए और और सभी प्रश्नो का सार भी समझते गए...

चारो गुरु मेरे और अन्य ! से सभी सवालों के बिलकुल सही उत्तर पाकर बहुत खुश हुए....

इस फेज में जिन को निराश होना पड़ा..

जवाब तो उसने भी कई दिए थे लेकिन कुछ गलत भी दिए...

क्युकी जिन को शास्त्रों में दिलचस्पी न थी उसे तो बस फाइट और कंप्यूटर पसंद थे..

दूसरा फेज भी बड़ी आसानी से पार हो गया.....


अब लास्ट चरण बचा हुआ था...

जिसका हमें बाहबरी से इंतज़ार था..

मेरे और जिन के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण फेज था..

क्युकी अन्य ! तो पहले से hi इसमें बेस्ट थी...

फेज 3.. युद्ध कला, मार्टिकल आर्ट्स, कॉम्बैट फाइट, ेट्स...???

लास्ट में गुरु जी ने कुछ

पहेलियाँ पूछी थी...

1.ऐसी कौन सी चीज है जिसे तोड़ने पर आवाज नहीं आती है..??

2.ऐसी कौन सी वस्तु है जिसे एक स्त्री खाती भी है और पहनती भी है....??

3. उस चीज का नाम बताएं जिसे आग जला नही सकती,

शस्त्र उसे काट नही सकते,

पानी उसे भिगो नही सकता

और मौत उसे मार नही सकती...??

4. बिन बुलाए आ जाती हूं,

हर जगह रह सकती हूं,

मुझ पर न किसी की रोक,

न मुझको पकड़ सको, न मुझे देख सको,

फिर भी मुझ बिन जी ने सको...??

सभी रीडर्स कमेंट करके पहेली का ाँस दे सकते है...????

वहीँ दूसरी तरफ.....


एक जंगल में...

वैसे तो यह जगह इतनी खतरनाक कभी नहीं दिखती थी..

हमेशा चिड़ियों और जानवरों के शोर की आवाज़ें गूंजती रहती थी...

ठंडी हवा और ख़ूबसूरत पेड़ों से यहाँ का मौसम हमेशा खुशनुमा रहता था....

लेकिन आज इस जंगल में एक अजीब सी ख़ामोशी छायी हुयी थी...

बस कुछ चाँद लोगों की चहल - पहल और बात करने की आवाज़ें गूँज रही थी...

दरअसल इस घने जंगल के अनादर आज शैतानो की एक छोटी सी सभा चल रही थी...

किसी बात पर बहस चल रही थी....

बातों से ऐसा लग रहा था की जैसे किसी षड़यंत्र को अंजाम देने की साज़िश की जा रही हो....??

टोटल 11 मेंबर मौजूद थे वह पर...

जिनमे तामुलु, बुमलीन, साकूबी, नरकिसा. चरों आपस में बहस कर रहे थे

और बाकी 7 मेंबर उन्हें घेरे हुए चरों तरफ खड़े थे....

काफी देर बहस के बाद नतीजा निकला बहस का....

तामुल्लू - ठीक है ! समय आ चूका है अब हमें एक साथ आगे बढ़कर अपने काम को अंजाम देना है....??

कोई भी चूक न होने पाए..

वर्ण अंजाम बहुत भयानक होगा....??

आज के लिए बस इतना hi...

लाइक्स, कमेंट और सपोर्ट का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
ओह्ह माय गॉस

वज bhai...Mere थ्रेड में...

मैं आपकी स्टोरी का बहुत बड़ा फैन हु..

सच में आज बहुत ख़ुशी हो रही आपका कमेंट देख कर..

ऐटिटूड इस माय फवौरीते स्टोरी आपकी राइटिंग स्किल का कोई तोड़ नहीं...

क्या सस्पेंस डाला था आपने..

क्या तिकड़म बैठी वज और अस्मोड़ौस के बूच मज़ा आ गया ....

सेकंड Part का बेसब्री से इंतज़ार है....

बहुत बहुत धन्यवाद् मेरी स्टोरी को रीड करने और कमेंट करने के लिए....

थैंक्स भ...
 
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