Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 18 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट:::81

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मैं अपने रूम में पोंहचा तो माँ और तीनो तितलियाँ बीएड पर बैठी हुए थी.

माँ:- बोल आया अपनी दीदी को विज्जू बीटा..

विजय:- हाँ माँ मैंने दीदी से बोल दिया है. वो तो ये सुनते hi"aaj nahi'kal" बहुत खुश हो गई थी... वो खुद भी कुछ बेचैन थीं..

प्रिय:- (हस्ते हुए) छूट खुलवाना आसान थोड़ी न है..

प्रिय की बात पारर सबब hi हस्सन लगे.

मई बीएड पर ला जा कर माँ की गॉड में सर्र रख कर लेट गया..

प्रिय मेरे ऊपर आ कर लेट गई. मेरे गालों पर और मेरे होंटो पर किश करने क बाद मेरे आँखों में देखने लगी.. प्रिय कुछ देर ऐसे hi मुझे देखती रही.. पालक तक्क नहीं झपक रही थी.

विजय :- क्या देख रही हो मेरी तितली..

प्रिय:- खुद को देख रही हों तुम्हारी आँखों में..

विजय:- तो फिर देख लिया खुद को मेरी आँखों में ..

प्रिय:- हाँ खुद क साथ सबब को भी तुम्हारी आँखों में देख लिए है मैंने.

जहान्वी:- प्रिय ये तुमने सही बोलै. विज्जु क दिल में हम सबब हाँ, तो हम सबब hi विज्जू की आँखों में दिखेंगे ना..

श्रुति:- मैं भी नज़र आई हों क्या प्रिय.??

प्रिय:- हाँ श्रुति तुम भी मुझे विज्जू की आँखों में नज़र आई हो..

श्रुति:- तो फिर मैं क्या कर रही थी विज्जू की आँखों में..

जहान्वी:- हाँ प्रिय मुझे भी बताओ, मैं विज्जू की आँखों में क्या कर रही थी.

प्रिय:- विज्जू की आँखों से होते हुए मैं विज्जू क दिल में उत्तरी तो मुझे वहां एक प्यार भरी दुन्या दिखी, जहाँ विज्जू क दिल में रहने वाले सभी हस्सी ख़ुशी एक दूसरे के हाथो को थामे हुए मुझे दिख रहे थे.. और हम तीनो माँ क साथ विज्जू से प्यार कर रही हाँ.. और विज्जू सबब को hi पुरे मन से अपना प्यार बाँट रहा था...

माँ:- चुदाई वाला प्यार बाँट रहा था, या ...... माँ नौटंकी करते हुए बोली.

माँ की मसखरी से हम सबब hi हस्सन लगे...

प्रिय:- माँ विज्जू के प्यार का हर रंग hi तो हमारे लिए सकूँ लुटाने वाला होता है... चुदाई वाला प्यार हम कौन सा वासना क लिए करते हाँ.. हमारी छूट की आग भी तो विज्जू के लिए hi है.. विज्जू क बिना इसे भी भड़कने की इजाज़त नहीं है....

माँ:- तुम ठीक बोली प्रिय बेटी.. ये सबब hi विज्जउ बीटा क प्यार क रंग हाँ.. विज्जू अब्ब हमारे पास है तो सभी रंग भी तो हमे अपने विज्जू से चाहिए.. और चुदाई वाला रंग तो फिर भी ाअत्मा मिलान होता है... छूट की आग तो कैसे भी करके बुझ जाती है.. पारर हमारी आत्मा तो बास विज्जू क सुपर्ष के लिए बेचैन रहती है..

माँ एक हाथ से मेरे सर्र क बालों को सहलाने लगी तो दूसरे हाथ से प्रिय क सर्र को..... श्रुति प्रिय के चुत्तड़ को सेहला रही थी. तो जहान्वी प्रिय क हाथ को पकडे सेहला रही थी.. मेरी hi तरह से बाकी सबब भी प्रिय से बहुत ज़यादा लाड किया करती थीं.. मैं सबब के लिए खास था, तो प्रिय भी सबब के लिए ख़ास थी... मेरी गैर मौजूदगी में सभी ने प्रिय को बहुत प्यार दिया था... प्रिय मेरे बाद सबब की लाड़ली थी.. प्रिय मेरी और माँ की hi नहीं जहान्वी और श्रुति की भी लाड़ली बन बाई थी...

विजय:- और आत्मा मिलान क लिए मेरे लुंड को बहुत ख़ुशी होती है..

priya:-wo तो मुझे भी दिख रहा है. अभी से hi खड़ा हो कर मुझे चुभने लगा है..

जहान्वी:- उसे तो आदत रहने लगी है, खड़े रहने की... जैसे हमारी कसार गीली रहा करती थी विज्जू के लिए..

माँ:- विज्जउ बीटा, कोठे से निकलने क बाद का हमे सबब कुछ नहीं पता, तू हमे सबब आज तफ्सील से बता, बड़ा मंत्र है तेरे himmat-wala बनने क सफर को जाने का..

माँ की बात सुन कर तीनो भी बोल पड़ी..

तीनो:- हाँ विज्जू हमे भी सबब जानना है... तुम Hiammat-Wala कैसे बने.

माँ:- (तीनो से) विज्जू बीटा क लिए ये सफर कितना मुश्किल था वो तो हमने जान hi लिया था, वो सबब शॉर्टकट डिटेल थी... पारर था कितना मुश्किल न, जैसे आज हमारा विज्जू बन्न चूका है.. इस मंज़िल तक्क पोहचने क लिए कितनी पीडन झेली होंगी हमारे विज्जू ने ...............माँ बात करते हुए मेरी पीड़ा को खुद में महसूस करते हुए रोने आंसू बहाने लगी..

विजय:- माँ, मेरा आप तक्क पोहचने का रास्ता hi इतना कांटो भरा था, मुझे आप तक्क पोहचने क लिए उन्ही कांटो के ऊपर से गुज़ारना पड़ा, पीड़ा तो फिर मिलनी hi थी... और फिर ऐसे hi तो नहीं हर किसी को अपनी मंज़िल मिल जाती... मेरी मैनिल भी तो इस दुन्या में चाँद गिनी चुनी मुश्किल तरीन मंज़िलो में से एक थी. जिस्सको पा लेना नामुमकिन की हद्द तक्क मुश्किल होता है..... आप सबब मुझसे इतनी दूर थे क आप सबब तक पोहचने क लिए मुझे ये दर्द झेलना hi था...

माँ:- हाँ विज्जू बीटा, हम भी सबब समझते हाँ. पर दिल को भी तो वही दर्द होने लगता है ना, जो तुमने झेले हाँ, हम सबब एक दूसरे से आत्ताच हाँ ना..

तो एक को दर्द होगा तो दूसरे को भी वैसा hi दर्द सहना पड़ेगा..

प्रिय:- विजजूउ भाई, हमे बाओ ना, कैसे तुम स्टेप बी स्टेप Himmat-Wala बने.

विजय:- प्रिय मेरी जान, तुम सबब मेरे दिल में थे, और तुम सबब क लिए मेरे दिल में हर वक़्त बहुत सा दर्द रहने लगा था, तब्ब मुझे पता था क तुम सबब के लिए मैं कुछ नहीं कर सकता, मेरी आगे भी कम् थी, और मुझे कुछ समझ भी नहीं थी, क मैं कैसे इस काबिल बन्न सकता हों. क मैं तुम सबब को कोठे वाली ज़िन्दगी से निकाल सकूं.. और मैं ये भी नहीं जानता था क मुझे इस सब में कितना समय लगने वाला है. और फिर जितना समय मुझे लगने वाला था, डर था मेरे लेट होने से कही कुछ उल्टा सीधा न हो जाए, तुम सबब को कही मुझसे और भी दूर न कर दिया जाए...

इस सबब क चलते हर्र कुछ वक़्त क बाद मेरी दिमागी हालत बिगड़ने लगती थी, मेरे लिए खुद पर काबू पाना मुमकिन नहीं रहता था..... फिर मुझे पूजा दीदी मिलें, जिन्हो ने मुझे आप सबब क जैसा hi प्यार देना शुरू कर दिया.. और मुझे भी पूजा दीदी में आप सबब क चेहरे hi दिखने लगे थे... पहले मैं तुम सबब से दूर था, तो मेरे लिए ये सबब सहन करना मुमकिन नहीं था.... पर फिर मुझे पूजा दीदी में तुम सबब का प्यार और चेहरे दिखने लगे.. पूजा दीदी ने मुझे माँ के जैसे hi संभाला था. वर्ण मैं कभी भी कुछ भी सही से करने लायक नहीं रहता..

पल पीएलए दिमागी हालत बदल जाया करती थी..

उस वक़्त बास मेरे अंदर सिर्फ एक दरदिन्दा बनने की चाह hi रहती थी.. और दरिंदा कभी किसी का नहीं होता..

दरिंदा बनने क बाद पता नै मैं आप सबब को लाने लायक रहता भी नहीं... मुझे नहीं पता.

पूजा दीदी के प्यार ने मुझे इंसान बने रहने में बड़ी मदद दी और फिर उनके प्यार ने मुझे मेरे अंदर से शांत करना शुरू कर दिया.. पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को बदल दिया.. मुझे जिस चीज़ की भी ज़रूरत होती, वो वैसे hi रूप में उभर कर सामने आने लगतीं..

कभी वो मुझसे बहुत ज़यादा प्यार करने लगती, तो कभी मुझसे कई कई महीने ज़रूरत की hi बातें करने लगती थे, और वो भी इतनी होती थी क मेरे लिए कही और ध्यान देने का टाइम hi नहीं बछता था.. मेरी एक एक मूवमेंट पर किसी माँ क जैसे नज़र रहती थी पूजा दीदी की.... जब उहने लगता क मुझे किसी की वजा से डिसरबुराँस हो रही है, तो सभी को लाइन में खड़ा कर दिया करती... कभी 2-2 महीने हम खूब मस्ती किया करते.. पुरे नंगे हो के साड़ी साड़ी रात मस्ती में hi गुज़ार देते थे.. पारर जब्ब उन्हें लगता क अब्ब आगे क स्टेप के लिए कुछ चेंज करना है, तो सिर्फ मस्ती hi बंद नहीं होती थी.. सभी को वारं कर दिया करती थीं पूजा दीदी.. विज्जू के इस हद्द तक hi सबब ने बात करनी है, इससे आगे वो किसी को बात करते हुए देखे ना.. विज्जू का खुद को Himmat-WAla बनने की राह में कोई परेशानी ना ल्याए...

पूजा दीदी का कह देना hi काफी होता tha.sab भी तो मुझे दिल से प्यार करते थे. पर पूजा दीदी का आर्डर भी सबब के लिए पत्थर की लकीर hi होता था..

प्रिय तुम सबब के लिए दिल में प्यार भी था, कुछ कर पाने का जूनून भी था, डेरिंग और ज़िद्दी पत्र भी मुझमे बहुत था.. पर मुझे खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहता था. और मेरा मेरे मक़सद क लिए फोकस अक्सर hi टूट जाय करता था..

पूजा दीदी ने मेरे लिए खुद को सर्फ़ कर दिया था. 24 ऑवर hi वो मेरे साथ रहा करती थीं... वो मुझे हर किसम क हालत में टूटने नहीं दिया करती थीं.. जब्ब मैं अपने मक़सद से पीछे हटने लगता था, तो वो स्ट्रिक्ट भी हो जाई करती थी..

मेरे अंदर की हिम्मत को सही सिम्त देने क लिए पूजा दीदी ने एक महा गुरु का रोले ऐडा किया है... वो भी जल्द से जल्द तुम सबब को खुद क पास देखना चाहती थीं..

जब्ब पूजा दीदी आप सबब क लिए इतनी फ़िक्र मंद हो सकती हाँ, तो मेरे लिए तो आप सबब hi ख़ास थे. फिर मैं क्यों पीछे रहता.. करना तो मैं पहले से hi सबब कुछ चाहता था.. पारर पूजा दीदी की आप सबेस प्यार की इंटेंसिव देख कर मुझे और भी ज़यादा हिम्मत मिलने लगती. और मैं जल्द से जल्द तुम सबब को लाने क लिए और भी ज़यादा दर्द झेलने लगा.. हार्ड से हार्ड कसरत करने लगा ......... ........................................................................................ धीरे धीरे हुआ.. पूजा दीदी मेरे साथ थी... तो मैं जल्द से अंदर से भी पूरी तरह से बदलने लगा...........................

मैंने अपनी कहानी सुनाने से पहले अपनी गुरु अपनी पूजा दीदी की डिटेल बताई.. पूजा दीदी ने hi तो विजजू को अंदर से मरने नहीं दिया था, वर्ण जैसे मेरे हालत थे, मैं इक दरिंदा बन्न सकता था.. पूजा दीदी ने मुझे इंसान बनने में बहुत मदद दी थी... इतना हक़ तो पूजा दीदी का ज़रूर बन्नता था.. क वो अक्सर hi मेरी बातों में ज़ेरे बहस आएं... जब्ब भी मेरे हिम्मत वाला बनने की बात हो और पूजा दीदी को डिसकस न किया जाए तो सबब कुछ hi फीका फीका लगता है..

और फिर ये पूजा दीदी के साथ और पूजा दीदी क प्यार के साथ इंसाफ नहीं होता..

फिर मैंने मुंबई से निकल कर राज सर के साथ आउट ऑफ़ स्टेशन ट्रेनिंग पर जाने तक की कहानी डिटेल से बता दी....................

2 घंटा लगा मुझे सबब बताने में.. अभी भी कई जगा मैंने शार्ट में बताया था... मेरी कहानी इतनी लम्बी थी डिटेल में, क पूरी रात hi गुज़र जाती और सूबा हो जाती.. अभी राज सर के साथ ट्रैंनिंग वाली कहानी नहीं बताई थी, उसकी डिटेल भी बहुत लम्बी थी..

माँ और तीनो की ऑंखें मेरी कहानी सुन कर नम्म हो गई थीं.. मेरी कहानी में दर्द hi दर्द था.. कितना दर्द झेला था मैंने. खुद को माँ और बहनो को लाने लायक बनाने क लिए....

मेरी कहानी सुन्नते सुन्नते जहान्वी और श्रुति भी माँ के दोनों घुटनो पर सर्र रख चुकी थी... वो भी आंसू बहा रही थी... प्रिय मेरे दर्द को सुनते सुनते खुद भी दुखी हो गई थी.. उसके भी आंसू बहने लगे थे.. जब्ब मुझे गोली लगी थी. उस बात को सुन कर चरों के hi दिल देहल उठे थे..

पहले ये बात चरों को नहीं पता था.. वो भी आज ये बात जान गयी थी .. इसलिए उन्हें और भी ज़यादा दर्द होने लगा था.. मैंने इसलिए ये सबब बता दिया था.. क अब्ब आगे पता नहीं मेरे साथ क्या कुछ होने वाला है.. अब्ब जब्ब सबब hi मेरे पास the..to सबब को hi सबब पता होने चाहिए था ... अब्ब तो मेरी आगे आने वाली लाइफ hi ऐसी सिचुएशन और हादसात से भरपूर थी..

प्रिय ने मुझे फिरसे चूमना शुरू कर दिया. प्रिय अपने होंटो से मेरे गालो को चाटने लगी.. प्रिय आंसू भी बहा रही थी और मुझे चाट भी रही थी, प्रिय क आंसू मेरे गालों पर गिर रहे थे, मेरे गालो को चाटने से वो प्रिय की जीब ले लग कर प्रिय के पेट में उतरने लगे थे..

माँ, जहान्वी और श्रुति भी प्रिय को देखते हुए मुझसे अपने प्यार का इज़हार करने लगी थी.

माँ:- ऐसे hi तो नहीं उस रात मेरा दिल तड़प रहा था, दिल की धड़कन बैठती जा रही थी, (हलकी आवाज़ में रोना शुरू हो गई) मुझे मेरे विज्जू को देखना था, पारर मैं bad-naseeb किसी से कह भी नहीं सकती थी. उस वक़्त मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई मेरे दिल को मुठी में लिए दबा रहा था.. विज्जू बीटा उस दिन मुझे भी बहुत कुछ झेलना पड़ा था. मुझे लग्ग रहा था क मैं तुझे देखे बिना hi कही इस दुन्या से न चली जाओ, ितं दर्द हुआ था मुझे उस रात.. माँ हों ना, तेरी तकलीफ मुझ तक तो पोहनचनि hi थी. तुझे कुछ हो और मेरा दिल शांत रहे ये तो होने से रहा... मैं तो सालों से hi दर्द सेह रही थी, पर मेरी तरह से मेरा विज्जू भी कितना तड़पता रहा है सालों तक........

माँ रट हुए अपने दिल का हाल बयां कर रही थी, माँ क आंसू मेरे चेहरे पर गिरने लगे तो कुछ प्रिय क ऊपर....

माँ रोये तो बच्चो के दिल मचल जाय करते हाँ.. और अंदर hi अंदर जैसी कोई ारी सी चलती हुई महसूस होने लगती है. हम चरों hi माँ क दर्द को समझ रहे थे.... माँ मेरे दर्द को सुन्नते सुन्नते खुद फिरसे दर्द में चली गई थी..

गुज़रे वक़्त में अगर दर्द की इन्तहा मिली हो तो वही दर्द यादें बन कर वापिस ज़रूर लौट आता है..

वो दर्द भरा सालों का भयंकर सफर गुज़र तो चूका था, पर अपने निशाँ इतनी जलती कैसे ख़तम करता... हम चरों hi उठ बैठे और माँ से दुलार करने लगे.. माँ ने हम चरों को hi अपनी बहन में समेत लिया था... और हम माँ को चूम कर शांत करने लगे.. पारर दर्द था hi इतना, जब भी आता था, कुछ टाइम ले hi जाता था...

माँ का मंद डाइवर्ट करना ज़रूरी हो गया था.... मैंने आँखों hi आँखों में तीनो को इशारा किया तो वो मेरा इशारा समझते हुए माँ से मस्ती करने लगीं..

तीनो hi माँ को इधर उधर हाथ लगाने लगीं. कभी माँ की पेट में गुदगुदी करती तो जभी माँ की कमर पर हाथ फेरने लगती. कभी माँ को हलकी चुटकी kaat;ti तो कभी माँ के पैरों के तलवों को अपनी उँगलियों से कुरेदने लगती.

डिनर क बाद रूम में आते hi किसी ने ड्रेस चेंज नहीं किया था, और माँ इस वक़्त साड़ी में थीं. माँ की कमर दिख रही थी. जिसे प्रिय अपनी ॉन्गलियों से टटोलने लगी..

कोठे पर रहते माँ से प्यार तो बहुत किया था सभी ने. पारर मस्ती कभी नहीं की थी. वहां माँ का दिल हर टाइम hi दुखी रहता था. तो माँ के दिल की हालत को समझते हुए सभी माँ से सिर्फ ढेरों प्यार hi किया करती थीं.. मस्ती मज़ाक वहां माँ की ज़िन्दगी में नहीं था..

तब्ब माँ मस्ती सहन करने लायक नहीं हटीं.. माँ क अंदर ज़ख्म hi इतने थे क खुश होने क लिए भी माँ को दर्द के पुलों पार्स गुज़ारना पड़ता.. और कोठे पर माँ से मस्ती के लिए तीनो को hi माँ को फिरसे वही दर्द देना पड़ता....

इसलिए सभी माँ से प्यार करती थीं पर माँ से मस्ती नहीं... अब्ब माँ को नयी खुशियां मिल चुकी थीं. दलदल से रिहाई भी मिल चुकी थी..

और आज माँ मस्ती की हालत में भी आ चुकी थी, माँ भी तीनो की hi मेरी सेक्स पार्टनर बन चुकी थी.. तो तीनो hi तितलियाँ माँ के मज़े लेने का सोचने लगी. मैंने तो माँ के मंद को डाइवर्ट करने का सोचा tha,parr तीनो hi आगे और आगे निकलने लगीं.. माँ के मंद को डाइवर्ट करने के लिए वो माँ से मस्ती करने का सोचने लगी..

प्रिय माँ की कमर पर हाथ चलते हुए माँ की बैक साइड में लेजाने लगी.. जैसे hi माँ की बैकबोन में प्रिय की एक फिंगर घुसी माँ उछाल पड़ी.. माँ के लिए माँ की बैक बहुत सेंसिटिव थी. माँ के चुत्तड़ hi नहीं माँ के चुत्तडों के आस पास का एरिया hi माँ क लिए सेंसिटिव था..

मैं प्रिय को देख रहा था.. माँ ऑंखें बंद किये खुद क आंसू रोकने में लगी हुई थीं.. मैंने जहान्वी और श्रुति को प्रिय की तरफ ध्यान देने का कहा..

दोनों ने जैसे hi प्रिय को देखा तो वो भी सबब समझ गईं.. और प्रिय क साथ मिल कर माँ के मज़े लेने लगीं.. माँ भी अब्ब हमारी hi टीम में शामिल हो चुकी थी.. माँ को जितनी देर में एहसास होता, तब्ब तक्क जहान्वी ने माँ के होंटो को अपने होंटो में ले लिया और श्रुति ने अपने होंठ माँ के क्लीवेज से लगा दिया.. और चाटने लगी..

माँ ने अचानक से अपनी ऑंखें खोली तो तीनो को खुद में समाये देख कर उनकी ऑंखें कुछ बड़ी हो गईं... माँ ने एक आंख से मुझे देखा और आँखों से hi कहने लगी........ विज्जू बीटा इन शैतान की कहलाओ को क्या हुआ है.. आज अपनी माँ के साथ ऐसा क्यों कर रही हाँ...

मैं माँ को देख कर स्माइल देने लगा.. माँ आँखों में आंसू लिए हैरानगी में थीं.. फिर माँ भी सबब समझ गई और जहान्वी क सर्र क बालों को सहलाने लगी.

जहांनी ने माँ को किश करना छोड़ा, जहान्वी सिर्फ माँ की तवज्जो पाने क लिए माँ को किश कर रही थी..

माँ:- जहान्वी बीटा ये सब क्या है..

प्रिय माँ को बोलते सुन कर माँ की कमर को सहलाते हुए बोली..

प्रिय:- माँ अब्ब आप हमारी टीम में शामिल हो गई हाँ ना..

माँ:- क्या मतलब टीम में.? हम तो पहले से hi एक हाँ.. और टीम की ीमसे क्या बात.. हम तो शुरू से hi एक टीम हाँ..

प्रिय:- माँ आप मेरी बात नहीं समझ रही हाँ.......... प्रिय ने माँ के गांड की लकीर में ऊँगली घुसते हुए बोली...

माँ:- वो तो मैं समझ hi लूंगी.. तुम मेरी गांड में ऊँगली क्यों कर रही हो..

पहले ये तो बताओ..

priya:-(naughty स्माइल देते हुए) माँ यही तो समझने की कोशिश कर रही हों..

इतना बोल कर प्रिय ने माँ को बीएड पर लिटाया दिया और माँ क ऊपर चढ़ कर माँ क होंटो को अपने होंटो में लेने लगी... माँ कुछ कुछ प्रिय का मक़सद समझ रही थी... माँ भी अंदर से खुश हुई होगी.. पर बहार से वो शो नहीं करवा रही थी.. अब्ब वो भी मूड में आने लगी थीं...

प्रिय ने माँ क होंटो को अपने होंटो में लिया और चूसने लगी.. माँ प्रिय को कोई

रिस्पांस नहीं दे रही थी.. माँ प्रिय को रोक भी नहीं रही थी. कुछ देर प्रिय पुरे जोश में माँ क होंटो को पीने में लगी रही... फिर प्रिय ने माँ को किश करना छोड़ा और माँ की आँखों में देखने लगी.....

माँ सीरियस होकर प्रिय को देखने लगी.. मैं तो माँ की नौटंकी समझ रहा था. पर प्रिय माँ को ऐसे देख कर कुछ डर सी गई.. कही उसने माँ की मंशा क अगेंस्ट जा कर माँ को ग़ुस्सा तो नहीं दिला दिया.. माँ को प्रिय को घूर कर देखने लगी और प्रिय माँ से नज़रें चुरा कर साइड में देखने लगी...

प्रिय को खुद क गालों पर माँ की नज़रों की तपश फील हो रही थी.. जिस वजा से प्रिय की ऑंखें कुछ कुछ नम्म सी होने लगीं..

प्रिय:- सरररय माँ............

प्रिय क ऐसे बोलते hi मैं और माँ ज़ोर ज़ोर से हस्सन लगे... जहान्वी और श्रुति भी माँ को ऐसे देख कर कुछ डर गई थीं.. क्यों की पहले कभी उन्हों ने माँ के साथ ऐसा नहीं किया था........

तीनो माँ क मज़े लेने लगी थी.. पारर माँ ने तीनो के मज़े ले लिए थे..

हमारे हस्ते hi तीनो भी सबब समझ गईं.. और फिर वो भी हमारे साथ hi हस्सन लगीं..

प्रिय:- माँ मैं तो भूल hi गई थी. विज्जू ने आप की छूट की सैर कर ली है. तो आपको ग़ुस्से करने की क्या ज़रूरत है.. और फिर मैं भी तो आपकी लाड़ली हों.. मैंने ये कैसे सोच लिया क आपको मेरी किसी भी हरकत पर घुसा आएगा..

विजय:- प्रिय मेरी तितली.. तुम सबब नौटंकीबाज़ हो, तो क्या माँ नौटंकी नहीं कर सकती.. तुहे क्या पता प्रिय... माँ कितनी मज़े की चीज़ हाँ.. अभी तो तुमने माँ क असल रंग तो देखे hi नहीं हाँ.. मैंने देखे थे सूबा.. माँ हर बात में लाजवाब हाँ..

जहान्वी:- हाँ विज्जू, हमने भी माँ का ये रंग देख लिया है.. सच में एक बार तो मैं भी डर गाइट hi..

श्रुति:- और मेरी तो गांड से हवा निकालनी बंद हो गई थी.. माँ की नाराज़गी हमसे सहन नहीं हो सकती थी.. इसलिए हम तीनो hi दर गई थीं..

प्रिय:- विज्जू हमने माँ से कभी मस्ती नहीं की है.. और अब तो माँ तुम्हरे लुंड से चुद क हमारी टीम भी शामिल हो चुकी हाँ.. तो हमारा भी पूरा पूरा हक़ है माँ पर.. हम भी माँ क साथ सबब करेंगी... और जैसे विज्जू ने हम तीनो को एक साथ छोड़ा है.. माँ को भी विज्जू हमारे सामने hi छोड़ेगा.. क्यों माँ आपको कोई आपत्ति है इसमें.......

maa:-(smile देते हुए) मुझे क्यों आपत्ति होने लगी.. सबब कुछ तो तुम्हारे सामने खुला हुआ है.. किसी बेगाने से मई तुम्हरी नज़रो के सामने रह कर चुद सकती हों. तो फिर अपने विज्जू का लुंड लेने में कैसी शर्म..

प्रिय:- तो फिर आज आप विजजू क लुंड पर चढ़ कर अपने कमाल दिखाएंगी..

प्रिय बोलते hi कड़ी होकर अपने कपडे उतरने लगी.. जहान्वी श्रुति ने भी अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए..

मैं माँ को देखने लगा.. माँ ने मुझे खनेच कर खुद के ऊपर गिरा लिया और मुझे किश करने लगी... सूबा की चुदाई तो बातों की नज़र हो गई थी.. पारर अब्ब माँ के पुरे पुरे मज़े लेने का समय आ गया था.. माँ भी तो पूरी तरह से पूरा प्यार पाने क लिए मचल रही थीं.. आज सूबा एक बार माँ ने मेरे लुंड से ताबड़ तोड़ चुदाई करवा क अपने दर्द को चेक कर लिया था.. अब्ब प्यार से एक एक लम्हे को वो फील करना छह रही थीं..

तीनो तितलियाँ नंगी हुई तो माँ के कपडे खोलने लगीं..

पहले मुझे साइड में हटाया और माँ को बिठा कर तीनो hi बड़े प्यार से एक एक करके माँ की शरीर के सारे hi कपडे उतरने लगीं.. माँ तीनो को देख कर मुस्कुरा रही थीं...

जब्ब माँ पूरी तरह से नंगी हो गई तो..

प्रिय:- विज्जू तेरे कपडे भी हम hi उतारें, या तुम खुद hi उतारोगे..

विजय:- तुम्हारे रहते मुझे क्या ज़रूरत है उतरने की..

तीनो:- हाँ ये भी सही कहा तुमने....

फिर तीनो ने मुझे भी नंगा कर दिया.. मेरा लुंड तो प्रिय की वजा से पहले से hi खड़ा था....

प्रिय:- माँ विज्जू का लुंड तो पुरे मूड में है.. आपकी छूट के काया हाल हाँ..

माँ:- उसका हाल भी सही नहीं है.. देख लो उसपर भी पानी की बूँदें चमक रही हाँ.. सारा दिन hi इसका यही हाल रहा है.. एक हिसाब से मेरा हाल भी तुम जैसा hi है.. मेरी सही से पहली चुदाई सूबा hi हुई है.. जैसे तुम सबब विज्जू से चुद के महसूस कर रही हो, कुछ वैसा hi मैं भी महसूस कर रही हों.. दिल जिससे पूरी तरह से संतुष्ट हो, उसके साथ हुई चुदाई को याद करते रहने से छूट हर वक़्त hi गीली रहने लगती है......... क्यों तुम तीनो की छूट ने सारा दिन पानी नहीं छोड़ा है क्या.???

तीनो माँ की बात पर हस्सन लगी..

तीनो:- माँ आप सही कह रही हाँ.. हमारी छूट भी पानी बहाने से खुद को रोक नहीं पा रही है.. पर माँ छूट में बेचैनी नहीं है. हमारी छूट हमारे दिल की hi तरह से मज़े में है. छूट अंदर से बहुत शांत है.. बास छूट ने विज्जू के लुंड को अच्छे से चुम्म लिया है ना, तो ख़ुशी से आंसू बहा रही है..

मई चरों की hi बातें सुन रहा था, मुझे भी ये सबब बहुत अच्छा लग रहा था.. और मेरे लुंड को भी..

माँ:- बोलो प्रिय बेटी कैसे करना है, आज सब तुम्हारे हिसाब से hi होगा..

प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई के ऊपर लेट कर विज्जु को किश करें, और मैं पीछे से आपकी गांड को चाटोगी..

vijay:-(hassta हुआ) प्रिय माँ की गांड तो तुम चाट लोगी.. पर माँ से सहन नहीं होगा.. माँ की गांड का छेड़ माँ के लिए बहुत hi ज़यादा सेंसिटिव है..

माँ:- विज्जू बीटा प्रिय की भी तो माननी पड़ेगी ना.. तुम बीएड पर लेटो मैं तुम्हे किश करती हों..

मैं बीएड पर लेट गया और माँ मेरे ऊपर आ कर मेरे लुंड पर अपनी छूट को रखते हुए मुझे किश करने लगी... प्रिय माँ की गांड क पीछे आ कर अपना मोहन माँ की गांड पर लाने लगी.. मैंने और माँ ने अपने अपने पैरों को कुछ खोल लिया था.. जिस वजा से प्रिय को बैठने के लिए काफी जगा मिल गई.. प्रिय घुटनो पर झुकी माँ के चूतड़ों को चाटने लगी.. माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे मोहन में hi सिसकी लेने लगी.. माँ के लिए अपने चुत्तडों पर प्रिय की जीब सहन करना आसान नहीं था.. माँ ने प्रिय की जीब के सुपर्ष को कुछ देर सहन किया और फिर मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी....

मैं माँ क होंटो की क्या बात करों. माँ क जैसी होंठ किसी क नहीं थे.. माँ के होंटो की शेप बहुत की कमाल की थी.. कुदरती लालजी लिए हुए, हनी जैसी मिठास खुद में समोए हुए थे.. माँ के होंटो का टास्ते मुझे किसी और hi दुन्या में लेजाने लगा.. माँ को प्रिय की गांड चटाई से बहुत बेचैनी हो हो रही थी. पर माँ खुद पर जबर करते हुए बहुत hi प्रेम से धीरे धीरे करके मेरे होंटो अपने होंटो में लिए किश कर रही थी..

प्रिय ने भी माँ को ज़यादा तंग नहीं किया था. उसने भी माँ के चूतड़ों को नरमे से साइड में खेंच कर माँ की गांड की दरार को खोला था.. और माँ की पूरी hi दरार में अपनी जीब फेरने लग गई थी... मेरी hi तरह प्रिय भी माँ की गांड के छेड़ में गम होने लगी थी.. उसे भी यकीनन माँ की गांड क छेड़ में अपने मतलब सा सबब कुछ मिल रहा था.. माँ थी तो माँ से सबब hi अपने मतलब का hi मिलेगा.... प्रिय से जितना हो सका माँ की गांड के छेड़ को चाट रही थी..

जहान्वी और श्रुति अकेले रह गई थीं. तो दोनों hi प्रिय की चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया... प्रिय की बहार को निकली हुई गांड दिलकश पोज़ बना रही थी. जिससे जहान्वी और श्रुति अपना मैं बेहला रही थीं..

कुछ देर गुज़री तो माँ की गांड में लगी आग माँ से सहन न हुई और माँ ने मुझे किश करना छोड़ दिया.. माँ गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. माँ ने सर घुमा कर प्रिय को देखा. मुझे प्रिय का चेहरा नहीं दिखा, मेरी प्रिय माँ की गांड में मोहन छुपाये लगी हुई थी..

माँ:- hmmmmmmha..siiiiiiiiii..ufffff.. ohhhhhhhh..ahhhhhhh .. हाआआई .. प्रिय क्यों मेरी जान निकलना चाहती है.. बास करदे बीटा.. कही छूट पानी hi न छोड़ दे.. अंदर आग बहुत भड़क चुकी है.. तेरी जीब से के चाटने से मुझसे सहन करना मुश्किल होने लगा.. कही विज्जू क लुंड क बिना hi न पानी निकल जाए.

प्रिय ने सर्र उठा कर माँ को देखा तो प्रिय की ऑंखें लाल हो चुकी थीं..

प्रिय माँ की गांड से मस्त तो हुई hi थी. पारर शूरति और जहान्वी की म्हणत ने भी प्रिय को बहुत हॉट कर दिया था.. शायद जहान्वी और श्रुति ने प्रिय की छूट को भी सेहला दिया था.. जिस वजा से प्रिय की आँखों का रंग बदल गया था.

प्रिय की छूट ने भी पानी की नदियां बहाने शुरू कर दी होंगी...

प्रिय माँ को और मुझे देखते हुए उठ कड़ी हुई.. और साइड में लेट कर गहरी गहरी साँसे लेने लगी.. शूरती और जहान्वी प्रिय से लिपित गईं.. और माँ रहत की सांस लेते हुए मेरे लुंड पर बैठ गई..

मैंने माँ क बूब्स को दोनों हाथो में लिया और उन्हें धीरे धीरे मसलने लगा..

माँ अपनी सांस बहाल करती रही.. और मैं माँ के दूध को हलके हलके दबाता रहा..

2 मिंट में hi माँ थोड़ा सा उठी और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट करने लगी.. माँ ने दिन में टाइम निकल कर अपनी छूट को फिरसे टाइट कर लिया था.. माँ को अपनी छूट की केयर करना बहुत अच्छा लगता था.. मेरे लुंड का सूपड़ा माँ की छूट पर लगा तो मुझे पता चल गया था.. माँ ने सच ने hi आज अपनी छूट को टाइट कर लिया था..

माँ की छूट बहुत hi ज़यादा गीली हो गई thi..maa ने कोशिश की और मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी.. मेरा लुंड थोड़ा सा hi माँ की छूट क पानी से जेल हुआ था.. ज़ायदा तर खुश्क hi था.. माँ कोशिश करके मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने लगी. पर माँ को दर्द होने लगा था.. लुंड कोटा था और माँ की छूट आज कुछ ज़यादा hi टाइट हो गई थी.. अभी मेरे लुंड का सुपडे hi माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा था.. माँ को दर्द हुआ तो माँ ने उठ कर मेरे लुंड को अपनी छूट से बहार निकल लिया और मुझे देखने लगी..

विजय:- क्या हुआ माँ, ऐसे क्या देख रही हो..

माँ:- विज्जू बीटा, तेरा लुंड बोहत मोटा है, अपनी छूट में लेने के लिए इसे हर बार hi गीला करना पड़ेगा...

विजय:- माँ तो फिर सूबा कैसा चला गया था..

माँ:- सूबा भी तो दर्द हुआ था ना. पारर मैं कुछ बोली नहीं थी.. और फिर मैं लेती हुई थी, तो कुछ दर्द देता हुआ आसान से hi अंदर घुस गया था.. पारर अब्ब वो कुछ खुश्क भी है और मैंने आज अपनी छूट को कुछ ज़यादा hi टाइट भी कर लिया है.. जिस वजा से लुंड को घुसने में परेशानी हो रही है..

विजय:- तो आप इसे मोहन में ले कर चूस लें, कुछ गीला हो जाएगा..

माँ:- विज्जू बीटा वही तो करने लगी हों.. ऐसे तो ये मेरी छूट में जाने से रहा..

माँ मेरे लुंड पर झुक गईं और उसे पकड़ कर पहले अच्छे से चाटने लगी.

मैंने तीनो की और देखा तो वो तीनो hi खुद में लगी हुई थीं.. जहान्वी प्रिय के मोहन पर अपनी छूट को रखे उसकी छूट चाट रही थी, तो श्रुति जहान्वी की छूट में मोहन घुसाए हुए thi..teeno ने hi मुझे और माँ को पूरा पूरा टाइम दे दिया था. और खुद की छूट को एक दूसरे की छूट में घुस के शांत करने लगी थें..

मुझे माँ से प्यार करके जल्द hi सो जाना था.. पहले hi बातों में बहुत समय बीत चूका था.. और मेरे लिए जल्द सो कर कल सूबा जल्दी उठना भी ज़रूरी था..

अब्ब गैंग्स से टंका भीड़ चूका था, जो किसी के सावधान होने से पहले hi सभी को उसकी साँसों से मुक्त करना था.. जितनी जल्दी हो सके इस शहर की गंदगी को ख़तम करना था...

मैंने माँ को देखा तो माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिया चूस रही थी. माँ एक हाथ की मीठी बना कर मेरे बचे हुए लुंड को मसल रही थी.. मेरा 4" लुंड माँ क मोहन में था. एक हाथ से माँ मेरे लुंड को मुठी में लिए मसल रही थी. तो दूसरे हाथ से माँ मेरे लुंड की बॉल्स को हलके हलके से दबा और सेहला रही थी.

माँ मूड में आ चुकी थी, और माँ मेरे लुंड को पूरी तरह से महसूस करते हुए मज़े ले रही थीं. और मुझे मज़ा दे भी रही थीं..

माँ को पूरी मस्ती me,aur पूरी ख़ुशी में देख कर मेरा मैं अंदर से बहुत खुश होने लगा.. माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लिए अपना पूरा हक़ वसूल रही थीं..

कुछ देर माँ मेरे लुंड को अच्छे से मोहन में लिए चूसती रही. फिर उसे मोहन से निकाल दिया.. और मुझे देखने लगी..

माँ;- विज्जू बीटा, कैसा लगा अपनी माँ का पहला ब्लोजॉब.... सूबा तो बास तेरे लुंड को साफ़ hi किया था.. इसका सवाद तो अब्ब मिला है मुझे..

विजय:- माँ तो फिर कसिए लगा मेरे लुंड का सवाद...

माँ:- जैसा सोचा विज्जू बीटा, बिलकुल वैसे hi सबब मिला है मुझे, सालो तक्क जिस सुरूर क लिए मचल रही थी, वही मिला है आज मुझे..

माँ इतना बोल कर फिरसे मेरे लुंड के ऊपर बैठने लगी.. माँ ने अपने दोनों पेअर मेरी दोनों साइड में कर लिए थे.. मेरा लुंड पूरी तरह से छत को सलामी दे रहा था.. जब्ब माँ की छूट मेरे लुंड से 1" क फासले पर रह गई तो माँ ने मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के लिप्स पर सेट किया... और अपनी गांड को थोड़ा सा हिला कर मेरे लुंड क सुपडे से अपनी छूट के लिप्स खोलने लगी.. जब लुंड माँ की छूट क लिप्स को खोल कर अंदर घुसा तो वो सीधा hi माँ की छूट क छेड़ में जा घुसा..

माँ ने मुझे एक स्माइल दी, और फिर मेरे लुंड पर अपनी छूट का दबाओ बढ़ने लगी. माँ जैसे जैसे नीचे हो रही थी, मेरा लुंड माँ की छूट में ग़ायब होता जा रहा था..

मैं बाबत घोरसे माँ की छूट में अपने लुंड को जाता हुआ देख रहा था... धीरे धीरे करके मेरा लुंड 5" तक्क माँ की छूट में घुस गया. आगे जाने में उसे कुछ दिक्कत होने लगी तो माँ रुक गई.. और मेरे पेट पर एक हाथ रख कर खुद को सँभालने लगीं.. माँ के चेहरे पर कुछ दर्द क आसार दिखने लगे थे.. माँ की छूट अभी भी बहुत टाइट थी और मेरा लुंड बहुत ज़ायदा फस फस कर माँ की छूट में घुस रहा tha....maa ने कुछ देर की रेस्ट ली और फिर से अपनी छूट का दबाओ मेरे लुंड पर बढ़ने लगीं.. इस बार कुछ दिक्कत हुई पारर माँ नहीं रुकी और माँ ने खुद की छूट क दर्द को साइड में रखते हुए कुछ ज़यादा hi ज़ोर लगा कर मेरे लुंड पर बैठने लगी. जिस वजा से माँ को कुछ दर्द होने लगा.. पारर माँ आज मेरे लुंड चुसाई क बाद मेरे लुंड को अपनी छूट में पूरी तरह से उतार के पूरा पूरा मज़ा लेना चाहती थीं..

मैंने और माँ दोनों ने hi अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं.. मैं माँ की छूट में अपने लुंड क घुसने का एक एक सेंटीमीटर सवाद ले रहा था.. शायद माँ भी कुछ ऐसे hi मज़े में थी.. लुंड घुसा कर, या छूट में ले कर अंदर बहार करने में, और लेने में भी बहुत मज़ा है, पर बंद आँखों से सबब देखकर और महसूस करके मज़े लेने का भी अपना एक अलग hi चार्म होता है.. और हम दोनों माँ बीटा उस चार्म को पूरी को तरह से महसूस कर रहे थे...

जब्ब मुझे लगा क माँ रुक गई है, तो मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो माँ मुझे hi देख कर मुस्कुरा रही थी..

माँ:- क्यों विज्जू बीटा, अपनी माँ की छूट में लुंड को घुसते हुए पूरा मज़ा ले रहे ho..meri hi तरह से एक एक सेकंड को भरपूर एन्जॉय कर रहे हो.......... माँ दर्द भरी नॉटी स्माइल देते हुए बोली..

विजय:- हाँ माँ, अभी तो सही से टाइम मिला है, सबब महसूस करने का.. शान्ति से hi सबब महसूस किया जा सकता है...

प्रिय और वो तीनो किस स्टेज पर थीं मुझे अभी नहीं पता था.. मुझे तो तब्ब पता चला जब्ब प्रिय अचानक से hi आ कर मेरे मोहन पर अपनी छूट रख कर बेथ गई..

प्रिय:- माँ चलो विजू क लुंड पर ऊपर नीचे हो के दिखाओ, मुझे भी आपकी छूट में विज्जू के लुंड को आते जाते हुए देखना है.. सूबा तो आप दोनों ने hi चुप कर चुदाई कर ली थी, अब्ब मेरे सामने करो.. क्यों जहान्वी मैंने सही कहा ना..

jhanvi,shruti:- हाँ प्रिय तुमने एक दुम्म सही बोलै है..

प्रिय माँ की तरफ झुकी, तो माँ प्रिय की मंशा समझते हुए प्रिय के होंटो को अपने होंटो में ले कर किश करने लगी..

मैं प्रिय के चूतड़ों को पके प्रिय की छूट चाटने में लग गया था.. प्रिय की छूट जहान्वी की म्हणत से पानी छोड़ चुकी थी.. मैंने पहले प्रिय की छूट ो अच्छे से देखा था, रात की चुदाई के कारण मेरी प्रिय की छूट अभी भी कुछ कुछ सूजी हुई थी.. मैं बहुत प्यार से अपनी प्रिय की छूट को चाटने लगा..

माँ प्रिय को किश करते हुए धीरे धीरे मेरे लुंड पर ऊपर नीचे भी होने लगीं. हम तीनो में से किसी को भी जल्दी नहीं थी.. सोना तो जल्दी hi था, पर छुड़ाए में जल्दी कैसी...

श्रुति और जहान्वी भी आ गई और दोनों साइड में हो कर माँ और प्रिय के साथ शामिल हो गईं... श्रुति माँ और प्रिय का एक एक दूध पकड़ कर धीरे धीरे करके मसलने लगी, तो जहान्वी माँ की छूट और मेरे लुंड पर हाथ रख कर हलके हलके सहलाने लगी.

हम पांचू hi सुरूर ने जाने लगे. सभी hi एक दूसरे के अंगों में वियस्त थे. और धीरे धीरे इस सबब का आनंद ले रहे थे.. माँ ने अपनी गांड को कुछ और भी उठा लिया था जिस वजा से मेरे लुंड माँ की छूट से कुछ और भी बहार आ गया था. जो जहान्वी के हाथ में सही से आने लगा था. माँ मेरे लुंड को 3" बहार रखते हुए थोड़ा थोड़ा ऊपर नीचे होने लगी थी, और जहान्वी मेरे लुंड को और माँ की छूट को हलके हलके सेहला लिया करती... जहान्वी माँ की छूट से ज़यादा छेड़ छड़ नहीं कर रही थी. कही माँ जल्दी न झाड़ जाए.. वो बास इस सबब का अंदड़ ले रही थी..

मैं प्रिय की पहले से पानी छोड़ चुकी छूट को चाट रहा था. मेरी जीब प्रिय की सूजी hi छूट के लिप्स को खोले अंदर घुसी हुई थी.. प्रिय को कुछ पैन भी हुआ था. मेरी जीब से, या शायद कुछ जलन हुई थी.. पर प्रिय वो सहन कर गई थी.. मैं अच्छे से प्रिय के चूतड़ों को खोले प्रिय की खुल चुकी छूट में अपनी जीब घुसे हुए अंदर बहार करने में लगा हुआ था.. कभी मेरी जीब प्रिय क गांड को भी चायत लेती थी..

कुछ देर बाद प्रिय अपनी छूट मेरी जीब से साफ़ करवा कर उठ गई.. प्रिय को उठते देख कर जहान्वी और श्रुति भी साइड में हो गईं..

माँ:- क्या हुआ प्रिय बेटी, ऐसे साइड में क्यों हो गई हो..

प्रिय:- माँ आप विज्जू भाई से अच्छे से चुद लें. मेरा जितना दिल किया वो मैंने कर लिया.. अब्ब रात भी बहुत हो गई है. तो आप विज्जू भाई के लुंड का पूरा पूरा आनंद ले लें.. ये सबब तो अब्ब चलते hi रहना है.. हम सबब hi तो साथ शामिल हो चुके हाँ.. और वैसे hi अब्ब हम तीनो की hi छूट शांत है. तो आप दोनों भी खुद को शांत करलें, फिर सोते हाँ..

jhanvi,shruti:- हाँ माँ, हम तब्ब तक्क बाथरूम में जा के फ्रेश होती हाँ. आप विज्जू भाई से चुदाई का भरपूर आनंद ले लें..

माँ:- ठीक है बीटा, तुम तीनो को जैसे सही लगे, वर्णा मुझे कोई आपत्ति नहीं है.. मुझे तो सबब के साथ मिलकर भी उतना hi मज़ा आ रहा था.. जितना अकेले में आता है.. अब्ब तो मैं भी तुम तीनो के जैसे hi सिर्फ विज्जू बीटा से छुड़ा करूंगी.. और हम अब्ब पांचू hi एक साथ सोया करेंगी..

प्रिय:- matlab.?..kya आपने पापा के साथ सोना छोड़ दिया है..

माँ:- नहीं बीटा. कभी कभी उनके पास भी चली जाया करोगी.. पर चुदाई सिर्फ अपने विज्जू बेटे से hi करवाया करोनंगी.. रंजीत ने भी ok बोल दिया है.. तो फिर अब्ब मैं अपने दिल की क्यों न मानो..

तीनो hi ख़ुशी से उछाल पड़ीं.

तीनो:- सच में maa.fir तो बहुत मज़ा आया कैरगा.. पांचू hi एक रूम में..

माँ:- हाँ बीटा, अब्ब विज्जू लौट आया है हम सबब की लाइफ में, तो विज्जू से दूर रहने का मैं नहीं होता.. और फिर विज्जू बीटा को जल्द hi तो आगे क सफर पर भी निकलना है... मेरा बदला लेगा न मेरा बीटा विज्जू.. तो विज्जू को जाना पड़ेगा.. तब्ब तक्क विज्जू का प्यार खुद में समां लेना चाहती हों. फिर पता नहीं कितना समय विज्जू के बिना रहना पड़े..

विजय:- माँ मैं बीच बीच में आता रहूँगा ना..

माँ:- नहीं विज्जू बीटा... जल्दी से बदला पूरा करो, और वापिस लौट कर हमेशा के लिए hi हमारे बीचे में रहो.. दुश्मनो को लम्बी सजा देनी है. पारर किसी भी मुआमले को लम्बा नहीं खेंचना है.. जितनी जल्दी हो सके सबब को hi सबक़ सीखा कर लौट आना ...

तीनो:- हाँ विज्जू अब्ब हम हमेशा hi साथ रहना चाहती हाँ. तुम जब्ब जाओ तो सबब जल्दी hi ख़तम करके लौट भी आना..

विजय:- ठीक है, जैसे तुम सबब कहो, वर्ण मेरा तो इरादा था, सकूँ से सभी को तड़पा तड़पा कर मारूंगा. पारर अब सबब कहते हाँ क मुझे सबब जल्द hi ख़तम करना है, तो जल्द hi ख़तम करके लौट आऊँगा..

माँ:- ये पैलेस किश लिए है विज्जू बीटा. पहले जल्दी से सभी को बर्बाद कर देना, जिस को पैसों का घमंड है, जिसको अपनी पावर का घमंड है, वो जल्दी hi चकनाचूर करके सभी को उठवा के यही पैलेस में ले आना, और फिर जैसे मैं करे उनके साथ सलूक करना.. मैं भी सब को मिलने वाली सजा को देखना चाहती हों.. मैं भी सबब की आँखों में ऑंखें दाल कर गुज़रा हुआ वक़्त फिरसे दोहराना चाहती हों.. पारर इस बार वक़्त की लगाम मेरे हाथ में होगी. और बाकी सबब को मैं बताओगी. क जब्ब वो साहिब इ iqtdaar(saarvabhaum) थे. तो कैसे हिटलर बन्न कर मेर ज़िन्दगी का फैसला करने बैठ गए थे..

अब्ब सबब की hi ज़िन्दगी का फैसला मैं करुँगी.. मुझे बहुत बेचैनी है विज्जू बीटा.. जल्द hi सबब को मेरे सामने लाइन हाज़िर करो.. मैं उस तरफ सोचना नहीं चाहती. पारर जैसे hi मेरी सोच उस तरफ जाती है तो मुझसे सहन नहीं होता..

विजय:- माँ आप टेंशन न लें, बास दिल्ली में कुछ काम बाकी है, दोनों गैंग्स को मैंने ख़तम करना शुरू कर दिया है. जल्द hi सभी को ख़तम करके मैं निकलता ुओं आपका बदला लेने क लिए..

तीनो बाथरूम में घुस गईं और माँ मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगीं..

4 बार माँ ने मेरे लुंड को सुपडे तक्क बहार निकल कर अपनी छूट में लिया.. मेरा लुंड माँ की छूट क पानी से चमकने लगा था.... जब्ब माँ को कुछ तसल्ली हुई तो माँ मेरे चेहरे पर झुक गई और मेरे होंटो को अपने होंटो में ले कर चूसने लगी.. नीचे मेरे लुंड का भी माँ अपनी छूट में अंदर बहार कर रही थीं..

कुछ देर माँ मुझे किश करते हुए चुदती रही.. मैं माँ की पीठ पर अपने दोनों हाथ फेरते हुए माँ की गांड के छेड़ की और जाने लगा. कभी माँ के चुत्तड़ो को सहलाने लगता. तो कभी माँ की गांड क छेड़ में ऊँगली करने लगता..

माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे लुंड पर पूरी तरह से बैठ गई.. और मेरे सीने पर हाथ रख कर थोड़ा सा झुकी और फिर अपनी गांड को को गोल गोल घूमने लगीं...






माँ के ऐसा करने से मुझे बेहद सुरूर आने लगा.. मेरा लुंड तो पहले से hi बहुत ज़यादा सख्त हो चूका था.. पारर इस बार माँ के ऐसा करने से उसकी अकड़न और भी बढ़ गई थी.. मेरा लुंड माँ की छूट में और भी फसने लगा था.. मेरे अंदर खून ने अपनी रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी थी.. माँ का ये अंदाज़ बहुत hi ज़यादा मज़े वाला था..

माँ के बूब्स गोल गोल घूमने से उछाल रहे थे.. जो मुझे बहुत hi ज़यादा बेचैन कर रहे थे.. माँ की दूध फूलने लगे थे और माँ के पिंक निप्पल अकड़ने लगे थे.. जो माँ क फूल चुके दूध पर बहुत hi भले लगने लगे थे..

मैंने हाथ बढ़ा कर माँ के डोडो बूब्स पकड़ लिए.. मुझे ऐसा लगा. जैसे टाइट करके भरे गए घुबरी को मैंने अपने हाथ में ले लिया हो. थोड़ा सा दबाओगे तो पहात जायेंगे.. पर सवाद बहुत आने लगा था मुझे.. मेरे हाथ माँ के बूब्स पर गए थे क मेरा लुंड माँ की छूट में झटके खाने लगा...

माँ क गोल गोल घूमने से मेरा लुंड 3" बहार आने लगा था.. और मेरा मैं था क नीचे से एक झटका मारो और मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में जा समाये.. मुझे माँ क ऐसे करने से इतना मज़ा मिल रहा था...

माँ 7 मिंट तक गोल गोल घूमती रही, फिर रुक गई..

मुझे देख कर मुस्कुराने लगे..

माँ:- क्यों बीटा, करा दी ना जन्नत की सैर..

विजय:- हाँ माँ, सच में hi मुझे पूरी जन्नत दिख गई थी.. माँ क्या धांसू अंदाज़ अपनाया है आपने..

माँ:- विज्जू बीटा मैंने ये पहली बार किया है.. पारर सालों से hi मैं ख़यालू की दुन्या में रहते हुए तेरे लुंड से ऐसी hi चुदाई करती रही हूँ.. और भी मैंने कई अंदाज़ बदल बदल कर चुदाई की है तेरे साथ ख्यालों में...

वहां कोठे पर तो टांगें उठाये या घोड़ी बन कर hi चुदती रही हों.. ये सबब मेरे अपने अंदाज़ हाँ, जो मैं में लिए मैंने अपनी एक अलग hi दुनय बना ली थी..

और तेरे साथ सबब करने का सोचा करती थी..

विजय:- माँ फिर अपना और कोई अंदाज़ दिखाओ ना..

माँ:- सारे अंदाज़ आज hi तो मैंने नहीं दिखने वाली तुझे विज्जू बीटा.. धीरे धीरे करके सबब करोगी ना.. इतने साल दलदल में फेज रह कर गुज़र दिए हाँ.. थोड़ा थोड़ा करके सुरूर loongi..sabb एक hi बार तो मैं नहीं करने वाली.

माँ मेरे ऊपर लेट गई और अपनी गांड उठा कर मेरे लुंड को सुपडे तक बहार कर दिया..

माँ:- विज्जउ बीटा... अब्ब तुम नीचे से धक्के मार कर मेरी छूट में अपना लुंड डालो.. धीरे धीरे करना विज्जू बीटा जल्दी मैट करना.. बास नार्मल स्पीड hi रखना.. जब्ब छूटने लगो तो अपनी स्पीड बढ़ा सकते हो.. उससे पहले नहीं

विजय:- ठीक है माँ. जैसे आप कहें..

फिर मैंने नीचे अपनी गांड उठा कर माँ की छूट में अपना लुंड दाल दिया.. इस अंदाज़ में भी मुझे बहुत मज़ा आने लगा. और मैं माँ की बताई गई स्पीड क हिसाब से माँ को छोड़ने लगा.. माँ मुझे किश करने लगी.. और मई माँ की छूट के मज़े लेने लगा.. माँ की छूट बास प्रिय की छूट से थोड़ा सा hi कम् टाइट थी.. वर्ण माँ की छूट भी किसी कुंवारी लड़की से कम् नहीं थी....

माँ मुझे किश करती रही जब्ब तक्क उनकी सांस नहीं फूल गई..

माँ ने किश तोड़ी तो माँ की छूट भी पानी बहाने वाली हो गई थी..

माँ की सांस तो फूल hi चुकी थी,. माँ का जिस्म भी अकड़ने लगा.. माँ अब्ब झड़ने वाली थी..

माँ के बूब्स मेरे मोहन पर लटक रहे थे.. जिनकी तपश मुझे अपने चेहरे पर फील हो रही थी.

कुछ देर में माँ अंत सीमा पर पोहंची तो माँ भी अपनी गांड को मेरे लुंड पर हिलाते हुए झड़ने लगी. माँ मेरे ऊपर गिर गई थी.. पर मैं माँ की छूट को और भी खोलने में लगा रहा...

जब तक माँ की सांस बहाल हुई मैं माँ की छूट में लुंड दाल कर माँ की छूट ने जो पानी छोड़ा था, उसे लुंड से निकलने लगा..

माँ:- विज्जू बीटा, अब्ब पोजीशन बदलते हाँ ना.. मई थक गई हों..

विजय:- हाँ माँ, मेरा भी मैं है, मैं आपको किसी और पोजीशन में छोड़ों..

माँ:- अच्छा, तो मेरा विज्जू अपनी माँ को किश पोजीशन में छोड़ने का मैं रखता है..

विजय:- माँ मैं आपकी गांड को देखते हुए छोड़ना चाहता हों..

माँ:- मतलब, मैं अपन विज्जू की घोड़ी बन जाऊं..... माँ नॉटी स्माइल देते हुए बोली. माँ की छूट ने पानी छोड़ कर माँ को फ्रेश कर दिया था..

विजय:- हाँ उस तरह से आपकी छूट और गांड का व्यू यकीनन बहुत अच्छे से दिखेगा...

माँ मेरे ऊपर से उठी और साइड में घोड़ी बन्न गई.. मेरी तरफ देखते हुए बोली.

माँ:- लो विज्जू बीटा बन्न गई तुम्हारी माँ तुम्हारी घोड़ी... अब्ब देख लो अच्छे से मेरी छूट और गांड.. तेरे लिए hi इसे मेन्टेन किये रखा है... देख और चेक कर मैंने इसे तेरे लिए सही से संभल रखा है या नहीं..

मैं भी माँ को एक स्माइल देता हुआ माँ की गांड के पीछे चला गया.. बाथरूम से मेरी तितलियों के मस्ती करने की आवाज़ें भी सुनाई दे रही थी. वो तब्ब तक्क नहीं आने वाली थी, जब्ब तक्क माँ और मैं अच्छे से एक दूसरे का प्यार न पा लें.. माँ एक बार मेरे प्यार से अपनी छूट को बेहला चुकी थी... अब्ब मैं दूसरी बार माँ की छूट को बहलाने वाला था.. मेरा फुल अकड़ा हुआ लुंड माँ की गांड के पास hi हवा में झूल रहा था..

और मैं बड़े घोरसे माँ की छूट और गांड को देखने लगा.. इस पोजीशन में मैं माँ को सालों बाद देख रहा था. पहले तब्ब देखा था, जब्ब माँ किसी और के लुंड क लिए घोड़ी बना करती थी............

मैं कुछ देर माँ की छूट और गांड को देखता रहा और अपने दिल को शांत करता रहा... पर मेरा लुंड तो माँ की छूट में घुस क्र hi शांत होने वाला था.. उसे अब्ब बहुत ज़यादा बेचैनी हो रही थी. और मुझे उसकी बेचैनी को अब्ब ख़तम करना था...

मैं थोड़ा सा और आगे हुआ और अपने लुंड को माँ की छूट पर टिका दिया.. मैंने अपनी गांड को आगे किया तो मेरा लुंड माँ की छूट के लिप्स को खोलता हुआ अंदर घुसने लगा.. पीछे से जांघों के दबने की वजा से माँ की छूट क लिप्स बड़े दिखने लगे थे.. माँ अपनी छूट टाइट रखते हुए छोड़ना चाहती थी. वर्ण अपने पेअर खोल कर अपनी छूट को लूसे कर सकती थीं..

मैंने माँ की कमर को पकड़ा और थोड़ा सा ज़ोर लगा कर अपने लुंड को माँ की छूट में पुश करने लगा.. माँ की छूट पानी छोड़ चुकी थी तो लुंड आराम से अंदर जाने लगा.. जैसे जैसे लुंड माँ की छूट में जा रहा था.. माँ की छूट और भी खुलती जा रही थी.. अब्ब मुझे सही से माँ की छूट दिख रही थी.. और मेरा पूरा फोकस माँ की छूट के खुलने पर hi था.. और मैं घोर से माँ की छूट में अपने लुंड को जाते हुए देख रहा था.... कुछ देर में मेरा 5" लुंड माँ की छूट में घुस गया था.. मैं उतना hi लुंड माँ की छूट में अंदर बहार करने लगा.. अगर सारा डालता तो माँ की छूट छुप जाती और मैं अभी ये सबब देखते रहना चाहता था.

5 मिंट तक मैं ऐसे hi माँ की छूट में लुंड को 5" तक अंदर बहार करता रहा.. माँ की छूट एक बार फिर गरम होने लगी थी..

जिस स्पीड से मैं कर रहा था. मैं तो मज़ा की इन्तहा तक पोहंचा हुआ hi था.. पर माँ भी मेरी धीरे से की जानी वाली चुदाई को दिल से महसूस कर लगी थी..

माँ फिरसे ग्राम हुई तो मैंने अब्ब माँ को छोड़ने की स्पीड कुछ बढ़ा दी.. माँ को और भी मज़ा आने लगा.. पहले जो चुड़ते हुए माँ की सिसकियाँ नहीं निकली थें.. इस बार माँ की सिसकियाँ उनके मोहन से निकलने लगीं.

माँ:- ahhhhhhhhhhhh vijjjjjjjuuuuuuuuuu betaaaaaaaaaaaa.. siiiiiiiiiiiiiii

कितना मस्त स्पीड से लगे हुए हो.. बहुत अच्छे बीटा.. ऐसे hi हम्मम्मम्मम्हा

अपनी माँ को छोड़ते रहो... तुम्हारी माँ की छूट फिर से ख़ुशी क मारे रोने लगी है.. उसे इतने प्यार की आदत जो नहीं है.. बहुत अच्छे विज्जू बेताआआआ...

माँ अपनी छूट में मेरे मोटा और 8.7" लुंड को पूरी से रगड़ खा क जाता हुआ महसूस कर रही थी..

मैं माँ की कमर को पकडे अपने बचे हुए लुंड को भी माँ की छूट में उतार कर अंदर बहार करने लगा था.. इस बार मेरी नज़र माँ की पीठ पर थी.. मैं वही से अपनी नज़र को नीचे लाते हुए माँ की गांड तक का सफर करने लगा.. और साथ में माँ की चुदाई भी होती रही.. माँ इस पोजीशन में कोई आस्मां से उत्तरी हुई अप्सरा लग रही थी.. माँ का पूरा बदन hi चमकदार था.. माँ को अंदर से बहुत ज़यादा ग़म लगे थे.. अंदर से माँ बहुत hi ज़यादा ज़ख़्मी हुई थी.. पारर माँ की खूबसूरती बहार से ज़रा भी नहीं डगमगाई थी.. माँ की स्किन अपने आप में एक मिसाल थी...

माँ की चर्बी से पाक स्किन मेरे सामने अपने जलवे दिखा रही थी, और मैं माँ की छूट में घुसा अपने लुंड क जलवे दिखा रहा था...

माँ की छूट ने पानी बहाना तेज़ किया तो मेरे लुंड को माँ की छूट में घुसने के लिए और भी आसानी होने लगी.. अब्ब मेरा लुंड पूरा hi माँ की छूट में घुसने लगा था.. जो घोड़ी बानी माँ की बच्चेदानी को चूम कर बहार आ रहा था..

जब भी मेरा लुंड माँ की बच्चेदानी को चूमता था माँ की सिसकियाँ तेज़ होने लगती थी.. और माँ फुल चार्म में आती जा रही थीं..

माँ एक बार फिरसे झड़ने वाली हुई तो माँ ने इस बार अपनी गांड को ज़ोर से हिला कर मेरा लुंड लेना शुरू कर दिया था..

माँ का जिस्म एक बार फिरसे अकड़ने लगा...

माँ:- विज्जउ बीटा.. मैं एक बार फिरसे झाःदने वाली हूँ.. थोड़ी सी स्पीड बढ़ा दो... siiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaaa ........ उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह

हाँ ऐसे hi विज्जू बीटा .. थोड़ा और तेज़ .. थोड़ा और ज़ोर से .. मेरी छूट गई.

माँ सिसकियाँ लेते हुए फिरसे झड़ने लगीं..

अब्ब मेरा लुंड भी अपनी अंतिम सीमा पर tha..to मैंने भी इस बार अपनी स्पीड कुछ और भी बढ़ा दी.. और एक रिधम से माँ की कमर को पकडे माँ को छोड़ने लगा..

माँ भी अब्ब समझ गई थी.. मेरे लुंड अब्ब उनकी छूट में अपना पानी उगलने वाला है.... माँ थक चुकी थी. पारर माँ ने मुझे लगा रहने दिया.. मेरा लुंड जैसे जैसे चार्म क करीब पोहचने वाला था. मेरी स्पीड बढ़ने लगी थी.. माँ को कुछ दर्द होने लगा था.. पर माँ ने मुझे नहीं रोका..

मेरा बदन का सारा hi खून इकठा हो कर मेरे लुंड तक्क आने लगा था.. जिस वजा से वो और भी फूल गया था.. और किसी भी समय वो माँ की छूट में पानी उगलने वाला था..

10 धक्कों के बाद hi मेरे लुंड ने लावा माँ की छूट में छोड़ना शुरू कर दिया.

मेरे लुंड से निकलने वाला वीर्य सीधा माँ की बच्चेदानी में जा कर भरने लगा.. मुझे महसूस हुआ जैसे माँ की बच्चेदानी ने मेरा सारा hi वीर्य खुद में सामना शुरू कर दिया है.. और फिर जब्ब मेरे लुंड का सारा hi पानी निकल गया तो मैं साइड में जा क लेट गया और अपनी साँसों को ठीक करने लगा..

माँ उसी पोजीशन में लेती रही.. तीनो शायद बाथरूम क दूर से जी हमें देख रही तीन.. हमारी चुदाई ख़तम होते hi वो रूम में आ गए.. तीनो hi नंगी थी. और आते hi बीएड पर लेट गयी..

एक कपडा उठा कर प्रिय ने मेरे लुंड को साफ़ किया और उसे रूम की एक साइड में फ़ेंक दिया.

लुंड मोहन में लेके साफ़ इसलिए नहीं किया. क अभी ऐसा आकरके वो ग्राम होने क मूड में नहीं थीं..

माँ को उसी पोजीशन में देख कर प्रिय बोली..

प्रिय:- माँ आप अभी तक ऐसे घोड़ी क्यों बानी हुई हाँ.. बीएड पर लेट जाएँ ना.

माँ;- नहीं प्रिय बेटी, मैं अपने विज्जू के वीर्य को अपनी बच्चेदानी में सोख लेना चाहती हों..

हम चरों hi माँ की बात सुनकर माँ को देखने लगे.. और माँ घोड़ी बानी सर मूड हमे देख कर स्माइल देने लगी..

माँ:- प्रिय बेटी मैंने सोच लिया है.. मैं अपने विज्जू से अपनी मांग भी भरवाओगी. और अपने विज्जू क लुंड क वीर्य से एक और नन्हा विज्जू अपने पेट से जनम दूंगी .. मेरा बास चले तो मैं na-jaane और क्या कुछ कर जाऊं.. इतना मुझे अपने विज्जू पर प्यार आने लगा है...

4 दिन हुए हाँ हमें पैलेस में आये हुए. तो धीरे धीरे करके सभी अरमान याद आने लगे han..officially मैं रंजीत की बीवी बन क रहूगी.. पर सेक्रेटली मैं विज्जू की माँ और वाइफ दोनों hi बने रहना चाहती हों.. क्यों क्या किसी को ऐतराज़ है कोई.

तीनो:- नहीं माँ, ये तो बहुत ख़ुशी की बात है, कुछ ऐसा hi तो हम तीनो ने भी सोचा हुआ है, हम भी अपने विज्जू के विज्जू को जनम देना चाहती हाँ.. जहान्वी तो एक बार विज्जू क वीर्य को अपने अंदर ले चुकी है. अब्ब मेरी ुर श्रुति की बारी है..

मेरी सांस अब्ब तक्क ठीक हो चुकी थी.. और मैं चरों को hi देख कर अपना सर्र खुजाने लगा था.. मुझे हैरत ज़रूर थी, पारर कुछ भी मेरे लिए शॉकिंग नहीं था.. जब्ब चरों hi मिलकर रेगुलर बाकी बची ज़िन्दगी मेरे लुंड से छोड़ने वाली थीं. तो फिर ये सबब तो होना hi था.. पर माँ की बात सबब से अलग थी.. माँ का ऐसा मैं जान कर मुझे जितनी हैरत हुई थी. उस से बढ़ कर मुझे ख़ुशी भी हुई थी.. शायद मेरे अंदर भी कही न कही ऐसा hi कुछ छुपा हुआ था.. अब्ब माँ ने कहा तो मैं अंदर से पूरी तरह से संतुष्ट हो गया था..

जैसे मेरे अंदर से मचल रहे अरमानो को उसके मतलब का सबब मिल गया हो..

माँ:- विज्जू बीटा तुम्हे कोई दिक्कत है मेरी इस खुवाहिश को लेके..

विजय:- नहीं माँ, मैं भी बहुत खुश हुआ हूँ आपके दिल की बात जान कर.. मेरे लिए तो आप सबब से बेस्ट हाँ.. आप कुछ भी सोचें, मेरे लिए उससे बढ़ कर ख़ुशी किसी और बात में कहैं होगी.. मैं तो वो ाहर सूरत hi करूँगा जो आपके दिल में हो..

माँ:- विज्जू बीटा, इस ख़ुशी क मोके पर मैं भी तुझे एक इनाम देना चाहती हूँ..

vijay:-kaisa इनाम माँ.?

तीनो:- माँ कही आप विज्जउ को गांड देने वाले इनाम की बात तो नहीं कर रही.

माँ:- नहीं बीटा.. वो तो है hi विज्जू की, विज्जू स्पेशल है, विज्जू क अंश को खुद की कोख में लेने वाली हों, तो विज्जू क लिए इनाम भी तो स्पेशल hi होना चाहिए ना..

विजय:- माँ अब्ब बोल भी दो ना. कैसा इनाम देने वाली हाँ आप.

माँ वैसे hi घोड़ी बानी अपनी गांड को उठाये हुए थी.. पर माँ ने अपने सर्र को बीएड से टिका दिया था. माँ नहीं चाहती थी क मेरे वीर्ये क एक कटरा भी उनकी छूट से बहार निकले.. माँ तो जैसे एक hi बार में फिरसे माँ बनना चाहती थीं..

माँ जैसे पोज़ में थीं, ऐसे में माँ बात करते हुए कुछ अजीब सी भी लग रही थी, घोड़ी बने हुए सर्र को बीएड से टिकाये हमे अपनी गर्दन मूड देख हमसे बाते कर रही थीं.........

maa:-(ek बार नज़र घुसा कर सबब को देखा) पूजा की शादी विज्जू से करवाने का मैं है मेरा.. मुझसे एक गलती गलती हुई है.. सबब जानते हुए भी मैंने पूजा को उतना टाइम नहीं दिया.. जितना वो डेसेर्वे करती थी.. पूजा न होती तो विज्जू शायद हमे कोठे की दलदल से बचा तो लेता .. पर क्या फिर विज्जू हमारे लिए असली विज्जू रह पाता..

विज्जू के सारे प्यार भरे रंग hi सलामत नहीं हाँ.. पूजा की वजा से विज्जू के प्यार करने रंग और भी ज़यादा गहरे हो गया है.. विज्जू की ऑंखें देख कर मुझे पता चलता है. पूजा ने विज्जू के लिए कितना कुछ किया होगा.. पूजा भी इनाम की मुस्तहिक़ है.... विज्जउ बीटा कल तुम पूजा को छोड़ क रानी और नताशा को को छोड़ लेना...

पूजा बेटी तो हम सबब से भी ज़यादा तेरे प्यार क लायक है.. उसे एक नहीं कई रातें तुझसे अकेले में बिताने का इनाम मिलना चाहिए..

माँ की बात सुनकर हम चरों hi सुन्न रह गए थे... माँ की छूट ने मेरा सारा hi वीर्य सोख लिया था.. एक भी कटरा माँ की छूट से बहार नहीं निकला था.. माँ सीढ़ी हो कर बैठ गई.. और अपनी छूट को ऊँगली लगा कर चेक करने लगी..

माँ हमारे शॉकिंग चेहरों को नज़रर अंदाज़ करते हुए अपनी छूट को देखने में लगी हुई थी.. पर माँ अपना चेहरा अपनी छूट की और किये मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

कुछ देर बाद माँ हमे देखने लगी. माँ क होंटो पर अब्ब भी मुस्कराहट थी.. और अब्ब तक्क हमारे चेहरों पार्स शॉकिंग भाव कन्वर्ट होकर जोश से भर गए थे.

हम चरों ने hi माँ पर यलग़र कर दी और माँ को पकड़ लिया.. अच्छा खासा शोर होने लगा था रूम में .. हम चरों hi कुछ न कुछ बोल रहे थे...

कुछ देर बाद सबब शांत हुए तो..

माँ:- मतलब मैंने सही सोचा है..

विजय:- माँ ये तो मेरे दिल की आवाज़ थी.. पर मुझे नहीं पता था, ये सबब इतनी जल्दी होने वाला है..

प्रिय:- माँ आपने बहुत सही और बहुत hi अच्छा सोचा hai..puja दीदी पूरा पूरा का हक़ बनता है इस इनाम क लिए... विज्जू क लिए आगे पता नहीं क्या है.. और विज्जू की लाइफ में पता नहीं कितनो की शादी होना लिखी है.. पर पूजा दीदी को विज्जू की पहली पत्नी होने का हक़ मिलना hi चाहिए था.. जो आप ने खुद hi उन्हें दे दिया है.. मैं तो बहुत खुश हों. विज्जू और पूजा दीदी क लिए..

जहान्वी:- हम तो हाँ hi विज्जउ की और सदा hi विज्जू की लाइफ में रहने वाली हाँ.. पर ऑफिशियली पूजा दीदी को hi विज्जउ की पहली वाइफ होना चाहिए.. जितनी स्ट्रगल पूजा दीदी ने विज्जू क लिए की है.. वो इसी इनाम के लायक हाँ...

श्रुति:- हमे सबब पता था.. पर इन 4 दिनों में हमारी पूरी hi लाइफ बदल गई थी. तो जितना पूजा दीदी डेसेर्वे करती थें.. उतना हम उन्हें थैंक्स भी नहीं बोल सकीं.. यहाँ आते hi कुछ दिन पररर लगा कर उड़द गए.. पर हमने पूजा दीदी को सही से थैंक्स भी नहीं बोलै..

माँ:- हाँ बीटा तुम सबब भी सही हो.. जितना पूजा बेटी ने किया है. उतना उसे टाइम देना चाहिए था.. पर यहाँ ए दिन hi हमें कितने हुए हाँ.... और फिर हालत भी तो रोज़ रोज़ बदल रहे हाँ.. अभी तो हमारी सालों की थकन भी सही से नहीं उत्तरी.. इसलिए हम सबब इस बात पर पूरा ध्यान नहीं दे सकीं.. ये हम चरों की गलती है.. और अब्ब हम विज्जू और पूजा की शादी करके अपनी गलती को सुधरेंगी.. और पूजा को थैंक्स बोल कर उसका हक़ और इनाम उसे देंगे...

विज्जू बीटा पूरी रात hi तुम पूजा बेटी क साथ गुजरोगे तो उसे उसका पूरा हक़ देना.. शरीर मिलान से भी और आत्मा मिलान से भी..

विजय:- हाँ माँ, पूजा दीदी मेरे लिए भी बहुत ख़ास हाँ..

मेरी बात सुन मेरी तीनो तितलियाँ जोरसे हस्सें लगीं..

मैं और माँ तीनो को देख कर अचंभे में आ गए, क ऐसा क्या हुआ है जो अचानक से hi हस्सन लग पड़ीं..

माँ:- अब्ब ऐसे क्यों हस्स रही हो.. खैर तो है ना...

प्रिय:- (हस्ते हुए) माँ विज्जउ की शादी होने जा रही है पूजा दीदी से.. अब्ब तो विज्जू पूजा दीदी को, दीदी कहना छोड़ दे...

तीनो फिरसे हस्सन लगी और माँ भी इस बार तीनो के साथ मिलकर हस्सन लगीं..

और मैं सोचने लगा क दीदी को दीदी कहना छोड़ना मेरे लिए कितना मुश्किल होने वाला था ....



वर्ड काउंट: 10413



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अपडेट:::82

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सिद्धार्त नाथ अपने आदमियों क साथ हॉस्पिटल में मौजूद था, उसके साथ उसके ख़ास गुंडे अरु फ्रेंड्स भी थे.. किशन अरोरा जो वक़्ती तौर पर अपने हवास खो बैठा था. अब्ब पूरी फार्म में नज़र आ रहा था. किशन की ऑंखें खून उबाल रही थी.. सिद्धार्थ को इस वक़्त सिर्फ अपने भाई की चिंता th...abhi वो ग़ुस्से में नहीं था. बास अपने भाई क लिए hi टेंशन में दिख रहा था.. अलोक की फॅमिली भी आई हुई थी... और साइड में बैठी आंसू बहा रही थी..

अघा भी वही था.. उसे भी घुसा आ रहा था, क उसके होते हुए कौन ऐसा है जो उसके बॉस को hi शूट कर दिया, और फिर यहाँ से बच कर निकल भी गया.. लेकिन वो भी कुछ करने लायक नहीं था. कुछ जानता भी तो नहीं था..

किशन ने अपने आदमियों से क्लू ढूंढ़ने क लिए कह दिया. बिल्डिंग की छत से स्नाइपर गन क शिव कुछ नहीं मिला था.. कोई नहीं जान पाया ये काण्ड करने वाला कौन है.... अगर किशन अरोरा विजय क बारे में जान जाता तो अपने सभी आदमियों से कहता क "नहीं रहने दो, हम उस लड़के का कुछ नहीं उखड सकते, कही हम भी न मारे जाएँ"

दिल्ली क एक बड़े हिस्से पर राज कर रहा था किसान अरोरा, तो उछालना तो था hi..

किशन इस वक़्त अपने आदमियों पर फ़िज़ूल का hi ग़ुस्सा उतार रहा था.. जब सबब हो चूका था, तो अब्ब सर्र पीटने से फायदा भी क्या होने वाला था..

कम और कमिश्नर दिखावा करने क लिए कुछ देर क लिए आये थे, फिर जल्द hi वापिस भी चले गए थे..

अब्ब सबब हो चूका था, तो कुछ किया भी तो नहीं जा सकता था.. गैंग पर हमला हुआ था, तो शहर का बड़े बुसिनेस्स्में लोगों ने कम पर अपना ग़ुस्से उतरने की कोशिश की.. तो कम ने कह दिया, जिसने ये सबब किया है, उसे सरे आम बीच चौराहे पर काट दो, पारर मुझे मत सुनाओ, खुद hi आग से खेलते हो, जब हाथ जलते हाँ तो मुझे बातें सुनना शुरू कर देते हो.. आग में हाथ डालोगे तो क्या आग तुम्हे कुछ नहीं कहेगी.. खुद की अगर गैंग बनाई है, तो खुद की रक्षा भी करना सीखो, मेरा दमाग चाटने की कोशिश मैट करो..

सबब hi कम की बात सुन कर चुप हो गए थे.. कम ने ठीक hi तो कहा था...

महेंद्र सिंह भी कुछ देर क लिए शांत पद गया था.. उसे इस वक़्त सिर्फ अपने भाई की टेंशन थी. और अपने जान्ने वलु में अच्छे डॉक्टर को ढूंढ कर यही आने क लिए बोल रहा था.. जब्ब तब्ब जितेंद्र ठीक नहीं होता. या जीतेन्द्र की लाइफ बच नहीं जाती. तब तक महेंद्र कही और धयान नहीं देने वाला था.. उसके दोस्त भी उसके साथ hi ग़म में डूबे हुए थे...



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लोकेशन: पुणे

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TIME:01:15:AM:



दन्न अपनी हवेली में बने अपने एक सीक्रेट रूम में बैठा हुआ था, और उसके साथ hi उसके दोस्त भी थे. दन्न क दोस्तों में से एक बहार वापिस चला गया था.. उसे एक मीटिंग अटेंन्ड करनी थी.. बाकी क दोस्त अक्सर hi दन्न क पास आते रहते थे.. बहार क कन्ट्रीज क साथ साथ इंडिया में भी उनके धंदे पहले हुए थे.. इसलिए वो अक्सर hi दन्न क पास आते रहते थे..

इस वक़्त रूम में दन्न क इलावा उसके 3 और दोस्त भी थे.. चौथा फ्रेंड बहार था..

सभी लास्ट 35 मिंट से खामोश किसी गहरी सोच में डूबे हुए the.sabhi के हाथ में एक पेन और एक नोटबुक थी. दन्न के सामने एक छोटी सी टेबल पड़ी थी, दन्न उस टेबल पर झुका कुछ लिख भी रहा था.. कुछ देर में दन्न अपने काम से फ्री हुआ तो ...

दन्न क दोस्तों के नाम ये हाँ..



1:-मार्टियन.

2:-जोसेफ

3:-स्टीवर्ट




मारतें:- हाँ तो दन्न तुम अपने काम से फ्री हो hi गए हो.. क्या कुछ नोट कर लिया है तुमने..

दन्न:- मारतें हालात जिस ातरः से अपना रुख बदल रहे हाँ. वो बहुत hi ज़ायदा सुर्प्रिसिंग है... लास्ट कई सालों से बहुत कुछ हुआ है इंडिया में.. पर इस बार क हालात कुछ और hi इशारा कर रहे हाँ.... पहले तुम बताओ क लास्ट 1 वीक से जितने से गैर कानूनी धंदे चल रहे हाँ इंडिया में.. तुमने उनके खिलाफ हुए हमलों क बारे में कितना कुछ नोट किया है..

मार्टियन ने दन्न से पहले hi एक पेपर पर अपने हिसाब से कुछ लिख लिया था.. दन्न और उसके दोस्तों की मीटिंग लास्ट 3 घंटे से चल रही थी.. और फिर 55 मिंट पहले hi सबब ने खुद क मैं में चल रहे विचारो को सामने रखते हुए कुछ पॉइंट्स नोट करने क लिए एक दुसरो को कह दिया था..

मार्टियन ने एक पेपर उठाया..

मार्टियन:- दन्न लास्ट 1 वीक में जो भी काण्ड इस देश में हुए हाँ, जो मेरी जानकारी में आये हाँ, वो 15 हाँ, इन सभी हुए काण्ड में ज़यादा तर पुलिस ने hi धंदे करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया है.. और जैसा एक्शन लिया गया है, ऐसा तो हर 2-4 महीने में होना एक रूटीन है.. मैंने अपने हिसाब से पूरा पूरा हर एक घंटा पर ध्यान दिया है.. तो जो मुझे लगता है.. हमारे लिए सब्बसे हैरान कुन घटना शंकर गैंग क साथ हुई घंटा hi है.. उस घटना में भी पुलिस शामिल हुई थी. पर सबब इतना भी सेक्रेटली कैसे हो सकता है. कोई भी गैंग हो, उसका कोई न कोई कनेक्शन पुलिस डिपार्टमेंट में ज़रूर होता है.. पुलिस ने शंकर क खिला फक्शन लिया था, तो शंकर गैंग इस बात से बेखबर कैसे रह सकती है.

शनकर गैंग का सफाया जितनी जल्दी हुआ है, अपने पुरे करियर में मैंने कही भी नहीं देखा.. दन्न हमारा धंदा तो पूरी दुन्या में hi पहला हुआ है. हमारे गैंग की ब्रांचेज कहा कहा नहीं हाँ. हमे तो पूरी दुन्या में हुई हर एक बड़ी घटना बारे इन्फो मिल hi जाती है... तो उस इन्फो क हिसाब से भी शंकर गैंग का अचानक से ख़तम हो जाना हैरान कुन बात है... दन्न शंकर गैंग को ख़तम करने क पीछे कुछ तो ऐसा है जो हमें या किसी भी गैंग वाले को समझ नहीं आ सका..

जोसेफ और स्टीवर्ट ने भी कुछ ऐसे hi विचार सामने रखे. वो सभी कमाल क इंसान थे, कितना परफेक्ट सोच रहे थे..

ये सबब दिल्ली में हुए काण्ड को ले के थे.. वो भी हैरान थे क दिल्ली में उनको भी घुसने क लिए सैलून लग रहे थे. लेकिन दिल्ली में 3 बड़ी गैंग्स के होने की वजा से उनकी दाल नहीं गल्ल रही थी..

दन्न और उसके पार्टनर्स कैसे भी करके दिल्ली में अपना धंदा शुरू कर सकते थे.. पर पैसा और आदमियों का नुसकान रेगुलर hi होना कन्फर्म था, इसलिए दन्न और उसके फ्रेंड्स दूसरे लफ़्ज़ों में पार्टनर्स ऐसा चांस नहीं ले पा रहे थे...

दिल्ली में एक गैंग ख़तम हुआ तो बाकी दोनों गैंग्स भी खतरे में आ गए थे.. जैसा हालमा आज हुआ था, उसपर दन्न और उसके फ्रेंड्स सुरप्रीसेड थे.. एक हिसाब से ये सबब दन्न क लिए सही भी था, क दिल्ली में पेअर ज़माने क लिए उन्हें जगा मिलनी शुरू हो गई थी.. पर अननोन हमला करने वळून से वो भी कुछ परेशां हो गए थे.. वो सोचने लगे क वो दिल्ली में अपनी एंट्री शुरू करें या न करें..

बात अभी भी खतरनाक थी, अभी तो पहले से hi मौजूद गैंग्स को ख़तम किया जा रहा था, तो दन्न क लिए अभी अपना धंदा दिल्ली में सेट करना सही नहीं tha..wo सभी इसी काम में लगे हुए थे.. पर दन्न कुछ और भी सोच रहा था.... लेकिन उसे कोई इशारा नहीं मिल रहा था..

तीनो दोस्तों की बातें ख़तम हुई तो दन्न तीनो की बातें सुन कर किसी और hi सोच में चला गया था..

जोसेफ;- दन्न तुम क्या सोच रहे हो..

दन्न:- जोसेफ बहुत कुछ है हमारे सोचने क लिए, इस बार जैसे हालत बार बार और हरणकूं तरीके से बदल रहे हाँ.. वो सबब हमारे लिए शॉकिंग भी है. और इंटरेस्टिंग भी..

शॉकिंग इसलिए क इस बार जिस तरह से हालत ने रुख बदला है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.. पहले शंकर गैंग का खत्म और फिर फ़ौरन hi रेखा बाई क कोठे पर होने वाली घटना.. फिर अब्ब 4 hi दिन बाद फिरसे दिल्ली में 2 लड़कियों का रपे एक गैंग लीडर का भाई करता है. उसी दिन hi उस गैंग के लीडर पर हल्ला बोल दिया जाता है.. यहाँ जो सबब से हैरान कर देने वाली बात है, वो ये है क एक तो मला मारा गया और दूसरी जो सबसे ख़ास है, वो ये क दोनों गैंग्स एक hi जगा पर क्यों हाँ.. जहाँ तक्क मेरी इन्फो थी, उस हिसाब से तो दिल्ली के तीनो hi गैंग एक दूसरे क मुखालिफ थे...

आज अलोक नाथ पर हमला हुआ तो वो महेंद्र गैंग क सबसे खास इलाके में था. जहाँ पर हमला कर पाना मेरे जैसे आदमी क लिए भी आसान नहीं है.. खैर जिसने भी हमला किया, उसे बाद में डिसकस करेंगे.... दिल्ली में कुछ तो ऐसा है, जो दोनों गैंग्स वळून को एक करने का सबब बना... आज हमें इसी पर चर्चा करनी है.

इसी से हमें इंटरेस्टिंग पहलु भी मिलता है, जो भी है जिसने शंकर गैंग को ख़तम किया है, और अब्ब बाकी क दोनों गैंग्स को भी ख़तम करने में लगा है, हमें इसका फायदा होने जा रहा है, जो काम हम सालों में न कर सके, वो अब्ब कोई कर रहा है..

अब्ब बात आती है, हमने जो नोट किया है, सबने hi अपने अपने हिसाब से कुछ न कुछ लिखा है, और जितने भी काण्ड दिल्ली में और दिल्ली से हट के पुरे इंडिया में हुए हाँ. उस पर ग़ौर करते हुए अपने पॉइंट्स नोट किये हाँ..

दन्न कुछ देर चुप हुआ तो तीनो दोस्त उसे देखने लगे.. दन्न ने सामने टेबल पर रखा हुआ गिलास ऑफ़ वाटर उठाया और उसे मोहन से लगा लिया.. आधा गिलास खली करके उसने फिरसे गिलास वापिस टेबल पर रख दिया..

मार्टियन:- दन्न तुम कुछ उससे पहले मैं कुछ कहना चाहता हों..

दन्न:- हाँ, हाँ क्यों नहीं हम सभी यहाँ इसीलिए hi तो बैठे हाँ.. कुछ भी अगर हमारे मंद में है तो उसे डिसकस किया जाए..

मार्टियन:- दन्न पहले दिल्ली में शंकर गैंग का सफाया. फिर फ़ौरन hi मुंबई में रेखा बाई क कोठे का सफाया, और अब्ब दिल्ली में दूसरे दो गैंग पर हुआ आजका हमला. और हमला करने वाला भी एक hi बताया जा रहा hai..DNN तुमने श्वेता और उसके बेटे को लेके जैसे सबब हमे बताया था क श्वेता का बीटा जब्ब रेखा बाई क कोठे से भगा था तो उसका रुख दिल्ली की तरफ था.... और रेखा बाई क कोठे पर हुई घसटना के बाद कोई भी घटना ऐसी नहीं है, जो हरणकूं पहलु न रखती हो.. मुझे जहाँ तक्क ध्यान जाता है, उस हिसाब से श्वेता का बीटा विजय hi इस सबब क पीछे है.......... ये सबब होना कन्फर्म नहीं है.. अगर हम रेखा बाई की कोठे वाली घटना को ले के ग़ौर करें तो कुछ ऐसा hi सामने आने का ामकान है.

दन्न मार्टिन की बात सुन कर मुस्कुरा दिया तो जोसेफ और स्टीवर्ट मार्टियन की बात सुनकर अपना मोहन होल उसे देखने लगे..

दन्न ने अपना लिखा हुआ पेपर तीनो के hi सामने कर दिया..

दन्न:- फ्रेंड्स मैंने भी कुछ ऐसा hi जज किया है.. सूरत सिटी में सबब अचानक से hi ग़ायब हो गए थे.. सबब कहाँ गए कही से कोई क्लू नहीं मिल रहा था. पारर क्लू मिटा देने से भी क्लू मिल hi जाता है... और यहाँ भी कुछ ऐसा hi हुआ है...

दन्न तीनो को देख कर मुस्कुराने लगा...

दन्न:- मैं समझाता हों, तुम तीनो को.. सूरत में सबब hi अचानक से कही ग़ायब हो गए, किसी का कोई पता नहीं चला.... मैंने अपने आदमियों से पुरे दिन जिसने जो जो भी देखा था, कोई आम से बात भी, मैंने वो सबब रिकॉर्ड कर लिया था, और फिर 1 दिन और 1 रात की रेस्ट करने के बाद मैंने सकूँ से सभी रिकॉर्डिंग्स को दोबारा से सुना..

पहले तो मैं मुसलसल रात अरु दिन जाग रहा था तो दमाग सही से काम भी नहीं कर रहा था.. इसलिए कुछ बातों को मैं फोरि जज नहीं कर पाया था.. पर जब्ब मैंने वो रिकॉर्डिंग फिरसे सुनी, तो मुझे बहुत कुछ समझ में आने लगा.. सबसे पहले अगर बात की जाए तो, सूरत सिटी से कुछ लोगों ने बी एयर दिल्ली के लिए ट्रेवल किया, और फिर दिल्ली में ऐसे ग़ायब हुए, जैसे गधे के सर्र से सींघ.... उनमे सिर्फ एक लड़का था और बाकी सभी फीमेल hi थीं... ये सिचुएशन भी रेखा बाई क कोठे से मिलती जुलती है, अगर ये सबब श्वेता का बीटा विजय कर रहा है.. शायद उसने hi किया होगा. हम एक बार विजय को hi सामने रख कर बात करते हाँ.... जिस तरह से वो अपना ब्रेन सबब को hi बचने के लिए चलने में लगा हुआ है, उस हिसाब से साफ़ साफ़ समझ में आता है, क उसने से पहले अपनी माँ और बहनो क साथ सोनाक्षी और उसके दो बच्चो को दिल्ली में भेजा होगा.. कन्फर्म नहीं है, मैं एक एक्साम्प्ले क तौर पर बात कर रहा हों... क्यूंकि किसी की भी चेहरों से शनाख्त नहीं हुई hai..mujhe मिली उस दिन की डिटेल में सभी क hi चेहरे मैच नहीं कर पाए the..jitna दमाग रेखा बाई वाली घटना में चलाया जा रहा है, फेस मास्क से चेहरा भी बदला जा सकता है.. इस पॉइंट को भी मिस नहीं किया जा सकता....

फिर उसके बाद मेरे स्टुपिड आदमियों ने बताया था क उन्हों ने एक ट्रक में कुछ मज़दूरों को जाते हुए देखा था.. लेकिन किसी पर ग़ौर नहीं किया गया था..

कल hi वहां से जो रिपोर्ट आई है. उस हिसाब से सूरत में उस दिन बहार से कोई भी तरकक मज़दूरों को लेकर नहीं आया था.. ट्रक में बैठे मज़दूर सभी सूरत से बहार जा रहे थे, जिसका मतलब साफ़ था, क वो सारा दिन काम करने के बाद वापिस अपने इलाके में जा रहे han..surat सिटी में उनकी एंट्री क कही भी निशान नहीं पाए गए हाँ.. वो सब सूरत सिटी के बहार ट्रक में बैठ कर गए थे..

पर वो सबब गए कहाँ.. आगे चाँद किलोमीटर क बाद उस ट्रक क कही से भी गुजरने क इशारे तक्क नहीं मिले हाँ, वो बीचे रास्ते में hi कही ग़ायब हो गया.. साफ़ ज़ाहिर है क वो सबब ट्रक से उतर कर किसी और तरीके से किसी और इलाके में गए हाँ... उसके बाद वो सबब कहाँ गए, इस बात का कोई इशारा नहीं मिला है. लेकिन उन सबब का रुख दिल्ली की तरफ hi था.. भले hi फासला बहुत ज़यादा हो.. पारर जैसे कुछ फ्रेमलेस बी एयर दिल्ली में जा के ग़ायब हो गई हाँ. उस हिसाब से बाकी भी कैसे भी करके क दिल्ली पोहंच कर कही ग़ायब हुए हाँ...

ीनता बोल कर दन्न एक बार फिर से चुप कर गया.... और टेबल पर रखा हुआ आधा पानी का गिलास उठा कर पीने लगा...

दन्न की बात सुन कर सबब फिर से सटी घण्टाओं को जोड़ने में लग गए थे..

स्टीवर्ट:- दन्न अगर हम सबब hi इस सभी हुई घण्टाओं में श्वेता क बेटे वजिजय को ले कर hi सोचें तो इस का मतलब है, क श्वेता का बीटा विजय hi दिल्ली में खुद को पावरफुल बनाने क लिए ये सबब एफर्ट कर रहा है....

दन्न:- हाँ अगर देखा जाए तो श्वेता क बेटे विजय को कही भी कोई ऐसी जगा नहीं मिल सकती जहाँ वो अपनी माँ और बहनो को बचा क रख सके.. पूरी दुन्या hi तो हमारी है, कहा नहीं हम श्वेता और उसके बच्चो को नहीं ढूंढ सकते.. अगर ये असबब श्वेता क वेता विजय hi कर रहा है, तो वो भी ये सबब जान गया होगा क मैं क्या हूँ और मेरी पावर क्या है.. खुद को और अपनी और बहनो को मुझसे बचने क लिए उसे भी पॉवरफुल बनना hi पड़ेगा.. तब्ब hi वो ये सबब कर सकता है.... अब इसी बात को सामने रखते हुए हमें आगे का सोचना है.. अब्ब जल्द hi दिल्ली में हमे अपने धंदे क लिए भी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.. जैसे hi दोनों गैंग्स का सफाया होता है.. हमें दिल्ली में अपने पाऊँ मज़बूती से जमा देने होंगे.. कुछ बड़े कनेक्शन तो मेरे पहल से hi हाँ दिल्ली में, उसके साथ मिलकर आगे की प्लानिंग करता हों..

एक हफ्ते क अंदर हमें दिल्ली क लिए निकलना होगा.. और उससे से पहले hi हमें अपने आदमियों को दिल्ली में पहला देना है, वो आम जनता में शामिल हो कर सबब डिटेल इकठा करेंगे.. वहां रहे के लिए और धंदे क लिए कोई मुनासिब जगा भी ढूंढ़नी होगी..

दन्न की बात सुनकर तीनो फ्रैंड्स से भी दन्न को "ok" बोल दिया.......






टोटल वर्ड्स: 2749



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थैंक यू वैरी मच डिअर..!!

विज्जू के लिए उसकी फॅमिली से प्यार बहुत है.. जैसे सबब विज्जउ से डिमांड करते हाँ, विज्जू सभी को वैसे hi प्यार देता है.. विजू को hi खुश देखना चाहता है.. और सभी की दिल की हसरतें पूरी करना चाहता है.. किसी अपने को प्यार देने क िलए विज्जू को सभी अंदाज़ अख्तियार करने पड़ते हाँ.. यही तो रंग hi तो अंदर से पूरी तरह से हैप्पीनेस लाते हाँ...

दन्न लगा ले अपना दमाग.. विज्जू भी अब्ब मैदान में आ गया है.. कहते हाँ, योंग्सटर्स हमेशा hi कुछ नैया और मुनफ़रद करते हाँ.. तो दन्न अब्ब विज्जू से बच क दिखाए..
 
थैंक्स..!!

हाँ भाई अब्ब श्वेता भी सभी की टीम भी शामिल हो गई है. तो अब्ब उसे सभी क साथ मिलकर अपनी ख़ुशी को पुरे मैं से सेलिब्रेट करना hi होगा.. और उसने किया..

सबब hi तो एक हाँ, तो फिर दिल की बता सभी से कह देना भी सही है.. क्कुह दिन अफरा तफरी में गुज़रे तो पूजा की अतराफ़ किसी का स्पेशल मंद नहीं गया.. पूजा जितना डेसेर्वे करती थी,, उसे उतना टाइम नहीं दिया था.. और न hi स्पेशल थैंक्स बोलै गया.. अब्ब श्वेता ने सही फैसला लिया है.. विज्जू और पूजा को एक करने का.. .. श्वेता विज्जू की पत्नी भी बनना चाह्हती है. और उसके बच्चे की माँ भी.. ये उसके दिल क अरमान थे.. जो अब्ब वो पुरे करना चाहती है.. ऐसे hi कुछ अरमान तीनो तितलियों क भी हाँ.. श्वेता और विज्जू ने फ़ौरन hi तीनो को इंकार नहीं किया.. बात को अच्छे से समझायेंगे.. क अभी उनके लिए टाइम है.. फ़ौरन बताने से कही कुछ दिल पे ने ले लें.. वैसे ऐसी कोई बात है तो नहीं.. क उन्हें मन करने से वो मंद करेंगी.. पर फ़ौरन फिर भी श्वेता या विज्जू ने नहीं टोका तीनो को..
 
थैंक्स..!!

किसी को कुछ समझ आएगा भी कैसा.. विज्जू ने सबब किया hi बहुत परफेक्ट था.. वो अकेला hi सबब पर भारी पद गया... दन्न साला और उसके फ्रेंड्स हाँ तो बहुत hi तेज़ दमाग क.. पारर अब्ब उनका ज़वाल शुरू हो चूका है.. वो तो खुद को हवाओ में hi समझ रहे हाँ.. पर वो ये नहीं देहक प् रहे क निचे से उनकी सुप्परत कमज़ोर होने लगी है.. उनसे मुकाबले क लिए विज्जू बहुत hi हाइली ट्रेंनेड हो क आया है.. शरीर से भी और दमाग से भी.. दन्न अगर दिल्ली आना hi चाहता है तो आ जाए.. कोई भी गलती करेगा तो मोहन की खायेगा.... महक को और विज्जू को पता तो चलना hi है.. यही तो एक प्लस प्पोइंट है महक और विज्जू क पास..
 


अपडेट ::: 83


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सूबा मेरी आंख खुली तो सबब hi मुझसे लिपटी सो रही थें.. मैं एक एक करके सभी क hi चेहरे ग़ौर से देखने लगा.. सबके hi चेहरे चमक रहे थे.. सबब क hi दिल अंदर से मुनावर हो चुके थे, दिल क जगमगाने से सभी क चेहरों कुछ ज़यादा hi चमक रहे थे.. दिल शायद हो तो चेहरों का ग्लो भी बढ़ जाता है..

मैंने पहले माँ को अच्छे से किश किया, माँ थोड़ा सा कसमसाई पारर उठी नहीं. रात देर से सोए थे, और मैं सूबा जल्दी उठ गया था.. अभी सभी को सुये हुए 3 hi घंटे हुए थे.. सबब लेट hi उठने वाला थे..

मैंने माँ को किश करने क बाद बाकी की तीनो को भी उसके हिस्से का प्यार दिया..

फ्रेश होकर रूम से बहार आया और अपने रूटीन वर्क में बिजी हो गया..





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6:50:ऍम पर मैं एक गाडी ले कर पैलेस से बहार निकल गया.. और ऐसे hi गाड़ी रोड्स पर घूमता रहा..

मैं खुद को रेलसक्स कर रहा था.. थका हुआ तो नहीं था. बास आज मैं हुआ तो मई गाडी ले कर बहार निकल गया.. सूरज अच्छा खासा निकल चूका था, रोड्स पर ट्रैफिक भी बहुत बढ़ चुकी थी..

मैं ऐसे hi आउटिंग क लिए निकला था तो डिफरेंट रोड्स पर गाडी को घुमा रहा था. आज मैं कुछ करने वाला था.. और वही इस वक़्त मेरे अंदर चल रहा था.

मुझे रह रह कर दोनों लड़कियों के साथ हुआ काण्ड याद आने लग गया था.. अलोक क भाई सिद्धार्त ने अपने फ्रेंड्स क साथ मिल कर बहुत गलत किया था.. और वो कल कही अंडरग्राउंड हो गया था.. वर्ण मुझसे बहस पाना उसके के लिए मुमकिन नहीं था.. अब्ब मुझे उसका जल्द hi कुछ करना था.. वर्ण सस्पेक्ट लडकियां यूही अंदर hi अंदर जलती रहेंगी. शारीरिक और मानसिक दोनों की hi हालत सही नहीं थी.. मैं उनके सार्ड को समझ सकता था...

मैं कोई प्लान सोच रहा था.. क कैसे उन हराम क जाने को सबक़ सिखाया जाए..

जितना बुरा बर्ताव सिद्दार्थ और उसके फ्रेंड्स ने लड़कियों क साथ किया था, मुझे उससे भी बढ़कर उन सभी के साथ करना था..

रात तो उनके इलाके में घुस कर हमला कर दिया था. अब्ब हर बार तो उनके इलाके में घुस कर मैं ऐसा नहीं कर सकता था.. कोई ठोस प्लान बनाना पड़ेगा.. जिस से सबब जल्द और बढ़िया से हो जाए..

मैं यही सबब सोचते हुए गाडी ड्राइव कर रहा था.. आधे घंटे तक्क मैं ऐसे hi गाडी घुमाता रहा, और फिर गाडी को वापिस पैलेस की तरफ मोड़ लिया ...

मैं जल्द hi पैलेस पोहंच गया, और फिर सीधा hi मैं कण्ट्रोल रूम में जा घुसा.. वहां जूली क ख़ास केबिन में घुस कर राइटिंग पर बैठ कर एक पेपर पर कुछ लिखने लगा.. लिख कर वहीँ वो पेपर ऐशट्रे क नीचे hi रख दिया.. जूली सिगरेट भी पिया करती थी....

जूली क लिए मैंने एक नोट छोड़ दिया था.. जूली से मुलाक़ात कही मैं भूल hi ना जाऊं, इसलिए मैंने जूली क लिए नोट लिख कर रख दिया..

मेरे मंद में कुछ चलने लगा था, और मुझे इसमें जूली की ज़रूरत थी.... रात क हमले में hi मुझे पता चल गया था. क दोनों गैंग्स को जड़ से ख़तम करना आसान नहीं है.. शंकर का main-base पैलेस था, जो मेरे अंडर आते hi शंकर गैंग ख़तम हो गया था.. जैसे शंकर क पैलेस में घुस कर शंकर को ख़तम करना आसान नाही था.. वैसे hi दोनों गैंग्स भी कुछ कम् नहीं थे, बल्कि वो तो शंकर गैंग से भी बहुत आगे की चीज़ थे.. रात मुझे बहुत अच्छे से समझ में आ गया था..

एक हमला तो मैंने डायरेक्ट कर दिया था, पर हर बार ऐसा होना मुमकिन नहीं था. मेरी जगा रात को कोई और होता तो वो उनके इलाके से निकल नहीं सकता था.. मेरे लिए भी ये आसान नहीं था.. ये सबब राज सर और उनकी टीम की मोहब्बत और हार्ड ट्रैंनिंग का hi नतीजा था, जो मैंने रात सबब कर दिखाया था.. वर्ण ऐसी सिचुएशन में खुद पर काबू रखना मुमकिन नहीं रहता.. एक एक सेकंड खुद पर कण्ट्रोल रखना पड़ा था मुझे. एक लम्हे की चूक मेरे शरीर से मेरी आत्मा को अलग कर सकती थी.

मिलने वाली रिपोर्ट क हिसाब से महेंद्र सिंह गैंग ने जिस एरिया पर कब्ज़ा कर रखा था. जहाँ उनके गैंग का गढ़ था.. वहां क 30% लोग उनके खिलाफ थे.. और वो महेंद्र सिंह को मजबूरन बर्दाश्त कर रहे थे..

अलोक नाथ की गैंग जिस एरिया में थी, वहां क 60% लोग उनके खिलाफ the..lekin कोई कुछ कर नहीं पा रहा था.. सब hi चाहते थे, क दोनों hi गैंग्स ख़तम हो जाएँ, पारर कोई किसी किसम का कोई एक्शन लेने की हिम्मत खुद में नहीं पाटा था.

अब्ब मुझे किसी ऐसे को ढूंढ़ना था, जो मुझे वहां रहते हुए थोड़ी सी सपोर्ट दे सके .. हर बार वहां से भागना मुमकिन नहीं था.. किसी टाइम मुझे वहां छुपना भी पद सकता था..

एक हमला करके मैं वापिस फिरसे भी कोई हमला भी कर सकता था.. और ऐसा करने क लिए मुझे ऐसे hi किसी पर्सन की ज़रूरत थी.. जो मुझे दिल से सुप्परत कर सके.. और दोनों गैंग्स वळून क खिलाफ भी वो हो..

हर ज़ुल्म की नगरी में कई ऐसे लोग होते हाँ, जो ज़ुल्म की नगरी को ख़तम होता हुआ देखना चाहते हाँ, पर वो तो कुछ कर नहीं सकते, हाँ किसी की बैकग्राउंड में रहते हुए मदद ज़रूर कर सकते हाँ. और मुझे ऐसे hi किसी पर्सन को ढूंढ़ना था. 1 घंटा की ड्राइविंग से मुझे यही प्लान मिला था.. वर्ण डायरेक्ट एक्शन से दुश्मन का नुकसान तो होता hi है.. खुद क लिए भी नुकसान के चांस बने रहते han..aur मुझे खुद को सेफ रखते हुए सबब्ब करना था....

राजा गैंग को मैं अब्ब खुद क साथ शामिल नहीं करना चाहता था.. उन्हें नई गैंग बनाने क लिए मैं टाइम देना चाहता था.. अगर उनकी ज़रूरत पड़ी तो मैं उन्हें साथ ले जाऊँगा.. पर ज़यादा खतरे वाले मामले में मैं चरों को साइड में hi रखना चाहता था.. भले hi वो सबब त्रिनेड थे .. पारर मेरा दिल हर बार उन्हें शामिल करने क लिए नहीं मानता था..

ब्रेकफास्ट का टाइम हो राह था, तो मैं सीधा hi अपने रूम में चला गया.. अंदर चरों hi उठ चुकी थीं.. माँ नाहा कर बीएड पर बैठी हुई थी.. और तीनो तितलियाँ एक साथ नहाने क लिए बाथरूम में घुसी हुई थी..

माँ:- आ गया मेरा राजा बीटा...

विजय:- हाँ माँ गया आपका राजा बीटा..

माँ:- कहाँ गया था बीटा..

विजय:- माँ बहार घूमने गया था.. आप बताएं.. कैसे लग रहा है.. सालों बाद हम साथ जो साये थे..

माँ:- एक माँ क जिगर का टुकड़ा उसके कलेजे से लग कर सोये.. तो जो सकूँ मिलता है. और जो एहसास दिल में जगता है. उसे तो बयां नहीं किया सकता था ना विज्जू बीटा .. बास तुम मेरे चेहरे को देख कर खुद hi अंदाज़ा लगा लो..

विजय:- माँ वो तो मैंने सूबा उठते से जान लिया था.. आपके चेहरे का बचा खुचा खिंचाव भी अब्ब खतम हो गया है.. मुझे लगता है, अब्ब आप अंदर से पूरी तरह से सबंतुष्ट हाँ.. अब्ब कोई ग़म नहीं है आपको और न hi कोई दर्द . और न hi कोई दर्द भरी यादें..

माँ:- हाँ बीटा तुम ठीक कह रहे हो.. कुछ ऐसा hi हाल है मेरा.. रत को मिला तुम्हारा प्यार और फिर जो मेरे दिल ने फ्यूचर को लेके फैसले लिए हाँ, उसकी वजा से मेरा अंदर अब्ब सारा hi शांत है..

तीनो भी नाहा कर आ गयी.. तीनो बिना कपड़ों क hi आ गई थी.. और ऐसे hi चेंज करने लगी.. ब्रेकफास्ट का टाइम हो रहा था. तो मस्ती को छोड़ दिया और खुद को तैयार करने में लग गईं.. इसमें भी टाइम लगने वाला था..




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ब्रेकफास्ट ख़तम हुआ तो माँ ने सबब को hi सिटींग हाल में बैठने क लिए कह दिया. मैं और मेरी तितलियाँ सबब समझ गए.. माँ क्या बात करने वाली है..

सबब ने माँ को "ok" बोल दिया..




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मेल फीमेल सभी सिटींग हॉल में मौजूद थे..

माँ ने पूजा didi(sorry पूजा डार्लिंग) और मालकिन को अपने साथ hi सूफी पर बिठा लिया.. राइट साइड में मालिकान और लेफ्ट साइड में पूजा डार्लिंग..

बाकि भी सबब अपनी अपनी जगा बेथ गए थे.. सबब माँ को बड़े ग़ौर से देख रहे थे. माँ क चेहरे से कुछ दिख रहा था. वही सबब समझने की कोशिश कर रहे the..maa क चेहरे की चमक कुछ तो कह रही थी..

पापा:- क्या बात है श्वेता.. आज कुछ ख़ास बात है क्या..

माँ:- हाँ रंजीत, ख़ास hi नहीं बहुत ख़ास है, तभी तो सभी को यहाँ एक साथ बुलाया है...

पापा:- तो अब्ब सबब hi हाँ यहाँ पर, अब्ब बताओ क्या कहना चाहती हो.

माँ सब को बारी बारी देखने लगी. फिर पूजा डार्लिंग और मालकिन का एक एक हाथ थाम कर चेहरा सबब की तरफ hi घुमाते हुए बोली..

माँ:- मैंने विज्जू बीटा और पूजा बेटी की शादी करवाने का सोचा है.... और इसी लिए सबब को यहाँ एक साथ बुलाया है..

एक बार तो सबब hi सुंनंन रह गए थे. धमाका hi इतना बड़ा था. मैं पूजा दीदी को hi देख रहा था.. पूजा दीदी का हाथ माँ क हाथ में कांपने लगा.. मालिकान की भी कुछ ऐसी hi कंडीशन थी..

कुछ देर सभी चुप रहे... फिर सबसे पहले पापा hi बोले..

पापा:- श्वेता तुमने ये बात बोल कर मुझे बहुत ख़ुशी दी है.. सच कहु तो मेरे मैं में भी कुछ ऐसे hi विचार थे.. पर मैंने खुद को बाद के लिए रोक लिया था..

हर्ष अंकल:- श्वेता बहन... ऐसा होने मेरे भी दिल की खवाहिश है.. पूजा बेटी विज्जू क लिए बेस्ट है.. जितना पूजा बेटी ने विजय बीटा क लिए किया है.. उतना हममे से कोई भी नहीं कर पाया.. मुझे डिटेल बताने की ज़रूरत नहीं है.. सब hi तो सबब कुछ जानते हाँ..

दीक्षा आंटी:- हाँ श्वेता.. विजय बीटा और पूजा का एक होना बहुत hi सही फैसला है.. जितना प्यार पूजा बेटी ने विजय बीटा को दिया है.. उतना तो मैं भी नै दे पाई..

मालिकान और पूजा दीदी की आँखों में आंसू आ गए थे.. मालिकान कुछ बोलना चाहती थी. पर वो बोल नहीं पा रही थी.. ख़ुशी hi इतनी थी,, क आंसू गले में उतरने लगे थे.. कैसे बोल पाती वो..

मैं अपनी जगा से उठा और जा कर मालकिन क पैरों में बैठ गया और उनके एक हाथ को थाम कर अपने होंटो से लगा लिया.. फिर अपना सर उनके घुटनो पर दाल दिया.. मालिकान ने मेरे सर्र पर अपना काँपता हुआ हाथ रख दिया.. और हलके आवाज़ में रोने लगीं.. मैंने तिरछी नज़रो से पूजा दीदी को देखा तो वो मुझे hi देख रही थी.. उनकी ऑंखें आंसुओं से लबा लब्ब भरी हुई थीं.. उनकी ऑंखें मुझे थैंक्स बोल रही थीं..

सबब hi फिर माँ और मालकिन से बातें करने लगे.. आज अजित भाई भी हामरे साथ थे.. वो और भाबी भी अपनी खुशी का इज़हार कर रही थीं..

पद्मा aunty..sonakshi aunty..juhi माँ..... अंडा सभी गर्ल्स पार्टी भी ख़ुशी मानाने लगी थी.. नतथा दीदी और रानी ने माँ के पीछे आ कर पूजा दीदी को पीछे से hi थाम लिया था.. शीतल.. शिखा.. रूपा.. राज.. किसी के भी मैं में ये नहीं आया था..

क पूजा hi क्यों. और भी तो हाँ.. पारर यहाँ फर्क वाली बात hi कहाँ थी..

कारन और जूही, कृति और अनिल भी इस ख़ुशी को सेलिब्रेट करने लगे.

और भी तो कई हाँ.. विज्जू से शादी करने लायक.. पर किसी के भी दिल में 1% भी कोई ऐसी बात नहीं आई....

मालकिन ने मुझे उठा कर खुद क गले से लाग लिया था..

मालिकान:- विज्जउ बीटा तू सच में hi मेरा बीटा बन्न गया है.. मुझे कितना चैन मिल रहा है. मेरा दिल आज कितना खुश है. मैं कैसे बताओं.. मुझे कोई शक तो नहीं था.. क ऐसा कभी नहीं होगा.. पारर जुबां की बात hi और होती है विजजू बीटा.. दिल क किसी चोर खाने में अगर कोई बात छुपी हुई थी. तो अब्ब कुछ भी नहीं ऐसा वैसा मेरा मैं में .. मैं तेरे लिए और पूजा के लिए बहुत खुश हों.. हर माँ अपने दामाद को कुछ न कुछ कहती है.. क उसकी बेटी को सदा खुश रखना .. पर यहाँ मुझे कुछ भी कहने की कोई ज़रूरत नहीं है.. सदा खुश रहो मेरे बच्चे ... भगवन तुझे लम्बी उम्र दे.. ................................... फिर मालकिन मेरे चेहरे को चूमने लगी.. और साथ में आंसू भी रेगुलर hi बह रहे थे..

डेट क लिए अभी कोई बात नहीं हुई थी... मिठाई लाइ गई और सभी का मोहन मीठा किया गया.. पैलेस में मौजूद सभी क लिए मिठाई बांटने की तैयारी शुरू हो गई..

अभी राजा गैंग को ते खुश खबरि देनी थी.. लाली भी इस ख़ुशी की मुस्तहिक़ थी.

आधा घंटा और सभी क साथ इस ख़ुशी को मनाया गया.. फिर मैं सबब को hi अपने काम का बता कर बहार निकल गया..




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जूली क पास गया, वहां जाने से पहले एक नौकर को मिठाई कण्ट्रोल रूम में लाने का कह दिया था..

वहां पोंछा तो जूली को आये अभी कुछ hi देर hi थी. वो अभी अपने सीक्रेट केबिन में नहीं गई थी.. मतलब अभी उसे मेरा नोट नहीं मिला था..

जूली स्टाफ से बातें क्र रही थी.. मुझे देखते hi चहकते हुए मेरे पास आने लगी..

जूली:- विजय आज सूबा सूबा कैसे आना हुआ..

विजय:- क्यों मैं सूबा सुना तुम्हारा ये सूंदर मुखड़ा नहीं देख सकता क्या..

जूली:- अब्ब ये इतना भी सूंदर नहीं रहा..

विजय:- चलो केबिन में बताता हों, कितना सूंदर है तुम्हारा ये मुखर..

julie:-(mera हाथ पकड़ते हुए) हाँ चलो, देखते हाँ मेरा मुखर कितना सूंदर है..

जूली मसखरी करती हुई मेरे साथ hi केबिन की तरफ बढ़ने लगी..

अंदर पोहंच कर जूली ने मेरा हाथ छोड़ दिया और अपने दो हाथ ेरे कंधो पर रख कर मेरी आँखों में देखने लगी..

जूली:- अब्ब बताओ, कैसे और कहा से मेरा मुखर सूंदर दिख रहा है तुम्हे ..

विजय:- बताने से पता कैसे चलेगा, वो तो मुझे प्रोवे करके दिखाना पड़ेगा.

जूली:- तो करो न, देर क्यों कर रहे हो.. अगर आज का मेरा दिन अच्छा बनाने आ hi गए हो, तो देर मैट करो.. सूबा सूबा तुम्हारे मेरे पास होने से मेरा आज का दिन बहुत hi अच्छा जाने वाला है..

मैंने अपने होंटो को जूली के होंटो की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया.. जल्द hi हम दोनों क hi होंठ मिल गए.. जूली ने मेरे कंधो से हाथ हटा कर मेरे सर्र क पीछे रख लिए.. और मेरे होंटो को अपने होंटो में लिए किश करने लगी.. करना तो मैं चाहता था, पारर जूली भी पीछे नहीं रही, और मेरे सर्र क बोलों में उँगलियाँ चलते हुए मेरे होंटो पर लगे हुए हनी को चाटने लगी..

मैं भी जूली क नरम और गरम होंटो का रस खुद क अंदर उतरने लगा.. हम दोनों hi एक दूसरे क होंठ बदल बदल कर किश कर रहे थे.. और मूड में आते जा रहे थे.. पर किसी ने हमारे मौऊद का बेडा घरक कर दिया..




ukhuuuu...ukhuuuu...




आवाज़ सुनकर हम अलग हुए तो देखा दूर पर उदय खड़ा आँखें बड़ी किये हुए नौटंकी स्टाइल में हमे घूर रहा था.. उदय क पीछे अनु भी था..

जूली ने मेरे हाथ को थम लिया और फिर उदय को जलती आँखों से देखने लगी..

जूली:- आ गया कबाब में हड्डी.. कुछ देर चुप नहीं खड़े रह सकते थे.. 5 मिंट और वेट नहीं कर सकते थे क्या.. सारा मज़ा hi ख़राब कर दिया..

उदय:- सॉरी... सॉरी... जूली जी सच में hi हमने आपका मज़ा ख़राब कर दिया..

जूली:- और नहीं तो क्या.. आज hi तो विजय सूबा सूबा मेरे पास आया है, इतनी अच्छी सूबा मेरी होने वाली थी.. सबब बेडा घरक कर दिया तुमने..

मैं, उदय और अनु हस्सन लगे.. पीछे से राजा और जीतो भी आ गए..

जीतो:- क्यों भाई लोग.. अकेले अकेले क्यों हस्स रहे हो.. हम भी हाँ यहाँ पर.. हमे भी थोड़ा हंसा दो..

राजा कुछ नहीं बोलै.. बास मुस्कुराती आँखों से सबब को hi देखने लगा. जूली की आँखों में देख कर hi राजा सबब समझ गया था...

एंटी देर में hi नौकर एक ट्रे म मिठाई ला के रख गया.. मैंने उसे छाए लाने का भी कह दिया..

सबब hi मिठाई देख कर कुछ हैरान हुए..

उदय:- भिड़ु, मिठाई किश ख़ुशी में खिलाई जा रही है.. कुछ ख़ास है क्या.? उदय चलता हुआ आया और एक पीेछे उठा कर खाने लगा..

जूली भी कुछ हैरान हुई थी मिठाई देख कर..

विजय:- पैलेस से आते हुए तुमने कुछ सुना नहीं क्या..??

राजा:- विजय हम तो पार्क में थे.. पैलेस से हम जल्दी hi नाश्ता करके निकल लिए थे..

विजय:- तभी किसी को पता नहीं चला... आज माँ ने मेरी और पूजा दीदी की शादी की बात की है..




सबब:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa???





विजय:- हाँ, कुछ ऐसा hi हुआ है आज, ब्रेकफास्ट क बाद..

फिर सबब ने hi मुझपर यलग़र कर दी.. और मुझे निचे गिरा कर मुझपर छड़ दौड़े... हलके हलके मुक्के भी मुझे मारने लगे.. राजा भी पीछे नहीं रहा.. मेरे सर्र क बालो का पकड़ कर झटके देने लगा..

उदय:- बिना बाल क hi सिक्सर मार दिया तुमने... साले अभी हम तुमसे बड़े बैठे हुए हाँ शादी करने लायक, और तुम हमसे पहल शादी करने जा रहे हो..

सबब ऐसी hi बातें कर रहे थे.. मेरे सर्र क बालो का सत्यानास कर दिया था था राजा ने..

जूली साइड में कड़ी मुस्कुराते हुए सबब को hi ऊँगली देने में लगी हुई थी.. सबब मुझसे लगे हुए थे तो वो कैसे पीछे रहती..

जूली:- उदय, मेरा काम तो तुमने ख़राब कर hi दिया है.... अब्ब इसका भी हशर ख़राब कार्डो.. बड़ी जल्दी है इसे शादी करने की.. तुम सबब का सोचे बिना hi ये शादी करने चला है.. इसे छोड़ना मैट आज्ज.. हाथ लगा तो बदला ले लो इससे.. वर्ण बाद में जल्दी हाथ नहीं आने वाला..

10 मिंट ऐसे hi गुज़र गए... फिर सभी मुझसे अलग हुए और मुझे गले से लग्ग कर बधाई देने लगे.. जूली भी मुझसे एक बार फिरसे गले आ लगी.. इस बार जूली का गले लग्न और किसम का था.. जूली ने भी मुझे बधाई दी.. और भरपूर ख़ुशी का इज़हार किया.

सबब बेथ कर मोहन मीठा करने लगे.. मिठाई क बाद छाए पि जाने लगी.

उसके बाद..

विजय:- जूली मैंने सूबा यहीं आकर तुम्हारे लिए एक नोट छोड़ा था, तुम्हे तो वो मिला नहीं.. अब्ब हम सबब hi एक साथ बैठे हाँ तो लिखे हुए की ज़रूरत नहीं रही..... मैं वैसे hi बता देता हों..

जूली मुझे दोनों गैंग्स क खिलाफ काम शुरू करना है.. तो मैंने सोचा है क अब्ब डायरेक्ट हमला कारगर सबत नहीं होगा. कल रात में जितना हुआ वो भी बहुत था, ाहर बार इतना सबब होना पाना आसान नहीं है, वो सबब अब्ब सावधान हो चुके हाँ.. तो कोई भी स्टेप लेने ईस्ट नहीं है..

मुझे उनके अंदर घुस कर उन्हें ख़तम करना होगा, उसके लिए पहले हमे महेंद्र सिंह गैंग क ख़ास इलाके में अपने लिए सोर्स बनाना है.. मुझे वही कही छुप कर गैंग से भिड़ना है.. तो वहां क कुछ ऐसे लोग जो महेंद्र सिंह गैंग क अगेंस्ट हों.. उनका पता लगाना है.. और ये काम जल्द से जल्द hi करना होगा.

उदय:- विजय तो इस काम क लिए हर्ष चौहान क कनेक्शंस काम आ सकते हाँ..

विजय:- नहीं उदय मैं ये रिस्क नहीं लेना चाहता.. इस तरह से हर्ष अंकल नज़र में आ जायेंगे.. और फिर पैलेस के भी सभी की नज़रो में आने क ामकान बढ़ जाएंगे.. नहीं ऐसा रिस्क नहीं लिया जा sakta.papa क भी कनेक्शंस होंगे लेकिन अब्ब वो रोज़ hi पैलेस में आते हाँ, तो उसके जान्ने वळून से सोच समझ कर मिलना पड़ेगा.. कौन कैसा है, ये नहीं पता, किसी को भी अब्दलते देर नहीं लगती.. और अगर कोई पकड़ा गया तो, तो वो पापा का नाम बता देगा.. फिर किसी को भी हम तक्क पोहचने में देर नहीं लगेगी.. इस तरह से दन्न भी हमारे बारे में जान सकता है... दन्न इस ा बिग्गेस्त क्रिमिनल.. उस हरामी का दमाग बहुत चलता है.. अभी तो वो ये नहीं समझ पाया क मैं सबब को लेके दिल्ली आया हुआ hoon..agar उसे शक भी हुआ तो शंकर गैंग की इन्फो निकाल कर मुझ तक्क पोहंच जाएगा...

पैलेस को ले के अभी दिल्ली क गैंग्स वळून को कुछ शक है... हर्ष अंकल की रेपुटेशन की वजा से और उनके करैक्टर की वजा से ये पैलेस सुरक्षित है....... एक आध भी क्लू हमसे छूटा तो सबब की तवज्जु हमारी तरफ हो जायेगी.. और फायर किसी को भी समझने में देर नहीं लगेगी.. क शंकर गैंग को खतम करने में हर्ष चौहान और उससे जुड़े लोगों का hi हाथ है..

मैं कुछ और बोलता एक मुलाज़िम मेरा मोबाइल लिए हुए हमारे पास आता हुआ दिखा.

एक तो मेरा मोबाइल अक्सर hi इधर उधर हो जाता था... वो मुझे मोबाइल दे के चला गया .. तो मैं मोबाइल देखने लगा .

कॉल हिस्ट्री देखि तो महक की 23 मिस्ड कॉल्स थीं...

इतनी कॉल मैं हैरान रह गया.. मैं समझ गया क कुछ तो ख़ास है..

मैंने महक को बैक कॉल मिला दी..

महक:- हेल्लो विजय कहाँ the,kitni देर से फोन तरय कर रही हों. तुमसे राब्ता hi नहीं हो पा रहा था.. अब्ब मुझे किसी और का भी नंबर दो. कबि कोई इमरजेंसी में पद सकती है..

विजय:- अरे बाबा यही पैलेस में hi था.. सब एक साथ बैठे हुए थे और मोबाइल शायद अंदर रूम में hi रह गया था.. तुम बताओ सबब खरियत तो है ना..

mehak:-(hasste हुए, बहुत hi फ्रेश मूड में दिख रही थी.) मैंने कहा था ना, दन्न साला, कुत्ता, मेरा बाप बहुत आगे की सोच लेता है, उसे कही से भी एक सिरा मिल जाए तो वो उसे पकड़ कर सही जगा तक्क पोहंच जाता है..

विजय:- मतलब दन्न का दमाग काम करने लगा है...

महक:- हाँ विजय, दन्न का दमाग कुछ ज़यादा hi काम करने लगा है.. वो तुम्हारी लोकेशन को फंड करने में 90% कामयाब हो चूका है.. वो कन्फर्म तो नहीं है.. पारर वो जल्द hi 100% कन्फर्म करलेगा... असल में बी एयर सूरत से दिल्ली जाने वळून क ग़ायब हो जाने से दन्न को शक पद गया है.. हो न हो वो तुम hi हो सकते हो.. अगर उसने सिरे को को शंकर गैंग से जोड़ लिया तो उसे तुम तक्क पोहचने में कोई दिक्कत नहीं होगी..

विजय:- चला ले दन्न अपना दमाग, अब्ब सालों से वो एक बड़ा साम्राज्य चला रहा है, तो वो समझता है, क सबब कुछ hi उसके हाथ में हमेशा hi रहेगा.. अभी उसे खुद पर hi गुमान करते रहने दो.. जितना उसे खुद की पावर और अपने दमाग पर घमंड है, वो मैं उसे सही से दिखाऊँगा.. तुम सुनाओ कब्ब आ रही हो दिल्ली में..

महक:- बास दो दिन में hi निकलने वाली हों.. तुम माँ और बहनो की सुनाओ, वो सबब कैसी हाँ..

विजय:- वो सबब एकदुम्म से बढ़िया हाँ, यहाँ मेला लगा हुआ है , तो कम् hi किसी को कोई परेशानी है... अब्ब बास एक तुम्हारी hi कमी है इस पैलेस में..

महक:- ह्म्म्मम्म्म्म मेरी कमी.. अच्छा .. मुझे किसने मिस करना है..

विजय:- मैं हों ना, मिस करने क लिए और फिर एक नई फॅमिली भी बनाई है हम दोनों ने मिलकर, उन्हें भी तो मिलना है ना.. और एक बात.. तुम जल्दी hi आ जाओ.. फिर तुम्हे मेरी शादी में भी शामिल होना है..

महक:- वूऊऊव्व. शादी.. वो भी तुम्हारी.. that's ग्रेट..... पारर इतनी जल्दी क्यों.??

विजय:- हाँ मेरी shadi..tum आओ तो सबब डिटेल में बताता हों..

महक:- ठीक है. अब्ब तो जल्दी hi निकलना पड़ेगा. अब्ब मई रखती hon.bye.

विजय:- bye..

राजा:- तो दन्न ने अपना दमाग चलना शुरू कर दिया..

उदय:- चलने दो दन्न का दमाग, जल्द hi दन्न के दमाग की वर्किंग 10 गुना और भी बढ़ा देंगे.. और बिठा देंगे उस चूतिये को एक चेयर पर .. निचे उसकी गांड में एक किल्ली थोक देंगे.. और फिर उस उस किल्ली को एक इलेक्टिक मोटर से कनेक्ट कर देंगे.. वो किल्ली खुद hi दन्न की गांड में घुस कर उसके दमाग को और भी तेज़ करती रहेगी, बड़ा शोक है उसे दमाग चलने का..



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उदय की बात सुनकर हम सबब hi हस्सन लगे........

होना तो कुछ ऐसा Hi चाहिए था दन्न के साथ

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Laa-Waris अपडेट:28

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थैंक यू वैरी मच..!!

श्वेता ने भी कुछ सोच कर ये सबब किया है. पूजा ने जितना विज्जू और उसकी फॅमिली क लिए किया है.. पूजा इस बेस्ट गर्ल इन विज्जू लाइफ.. पूजा ने विज्जू को अंदर से बदलने में बहुत मदद दी है.. वर्ण जैसे विज्जू कहता था.. वो सिर्फ देरिदा बनेगा.. और प्यार से डरने लगा था.. पूजा ने विज्जू क लिए बहुत कुछ किया है.

श्वेता का पूजा क लिए सभी क सामने ऐसा बोलना ज़रूरी भी था.. सबब को hi तो पता होना चाहिए ना.

विज्जु ने पीएलए तो अच्छा बनय्या यही.. बास अब्ब खुद को सेफ रखते हुए उसे ये सबब ाकर्ण पड़ेगा.. महक के आने से पैलेस में कुछ और भी बदलाव आने क चांस हाँ....
 


अपडेट ::: 84


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जूली और राजा गैंग से गुरनाम सिंह क बारे में भी बात होती रही. गुरनाम सिंह आज अपनी फॅमिली को लेकर आने वाला था.. यही उसकी फैमली उसके दुश्मनो से और उसके श्रीको से सुरक्षित रह सकती थी..

आगे क्या और कैसे करना है.. उस बारे में हम सभी चर्चा करते रहे.. जूली भी उम्दा मश्वरे देती रही.. जूली को इस फील्ड में बहुत एक्सपीरियंस था..

अब्ब ज़रूरत थी पैलेस को सुरक्षित करने क लिए लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से आरास्ता करने की.. इस बारे में भी काफी देर बातें होती रही.. ये भी सोचा गया क अचानक से अगर कभी कोई गैंग पैलेस में घुस जाए तो कैसे सभी को सेफ रखा जा सकता था.. किसी किसम से नुसकान से बचते हुए सभी को कैसे निकला जा सकता है, उसपर बात करते रहे.. अब्ब दन्न से जुंग छिड़ चुकी थी, तो किसी किसम की गलती या लापरवाई की गुंजाइश नहीं थी.. मुझे दन्न की सोच से 10 कदम आगे रहना था..

जब सब टॉपिक डिसकस हो गए तो राजा गैंग को जूली के पास छोड़ कर मैं पैलेस जाने क लिए उठ खड़ा हुआ.

जूली लग गई थी, महेंद्र गैंग क इलाके में मेरे लिए कोई सस्पेक्ट ढूंढ़ने में.

वो जल्द hi मुझे बताने वाली भी थी...



आफ्टर 35 मिंट

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मैं इस वक़्त पूजा दीदी क रूम में था, मेरे और पूजा दीदी क शिव कोई भी रूम में नहीं था.. रानी और नताशा दीदी ने मुझे और पूजा दीदी को अकेले कुछ टाइम बिताने क लिए दे दिया था..

मुझे रूम में ए 10 मिंट हो चुके थे.. रानी और नताशा दीदी को रूम से गए 2 मिंट हो गए थे, लास्ट 8 मिंट रानी और नताशा दीदी ने मुझे खूब बधाई दी थी, रानी ने अपने हिसाब से दी तो नताशा दीदी ने अपने हिसाब से... सबब hi आज बहुत खुश थे... रानी तो कुछ ज़यादा hi खुश दिख रही थी...

दूर अंदर से लॉक था और मैं वही खड़ा हुआ दीदी को देख रहा था.... दीदी कभी मुझे देखती और कभी नज़रें चुरा कर साइड में देखने लग जाती थी.. कभी अपने पैरों को आपस में उलझने लगती..

कुछ hi घंटो में पूजा दीदी के अंदाज़ बदल गए थे. उनके चेहरे की चमक बढ़ गई थी, और उस चमक ने दीदी को और भी हसीं बना दिया था..

पहले वो क्या थीं और अब्ब क्या हो गयी थीं. दीदी के अंदाज़ और चेहरे की चमक ने दीदी को कुछ घंटो में hi बदल कर रख दिया था.. पूजा दीदी की चेहरे की चमक और अंदाज़ मुझे घायल करने लगी...

मैं दीदी की और बढ़ने लगा.. जैसे जैसे मैं दीदी की पास पोहंच रहे था. दीदी की साँसों में उतार चढ़ाओ आना शुरू हो गया था.. दीदी के चेहरे के अपना रंग कुछ और भी गहरा करना शुरू कर दिए था ..

शादी की बात से hi लड़कियों का सबब कुछ बदलने लग जाता है.. दीदी क साथ भी कुछ ऐसा hi हो रहा था.. दीदी हर गुज़रते समय क साथ और भी अट्रैक्टिव लगें लगी थी.. दीदी बुरी तरह से शर्मा रही थी.. ये आज नयी पूजा दीदी थी.. दीदी ऐसे शर्मा रही थी. जैसे मैं उन्हें पहली बार मिल रहा हों, और उनके घर में उनका रिश्ता लेने आया हुआ हों.. और घर वळून ने हमें एक अलग रूम में बंद कर दिया हो जैसे..

हाय रे लड़कियों का यौन शर्माना उनकी ये कातिल अदाएं... हम जैसो के दिल पर na-jaane कितनी छुरियां चलने लॉगी हाँ.. पारर अपनी अदाओं को दिखते समय वो हम बेचारो पर कब्ब ध्यान दे पति हाँ.. आग बरसाएंगी तो सामना वाला जले न तो और क्या करे.. दीदी आज मुझे कुछ ज़यादा hi घायल करने पर तुली हुई थीं..

मेरे अंदर से अल्फ़ाज़ शायरी बन्न कर निकलने लगे..



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ये निराला है शर्म का अंदाज़..

बात करते हो चरुअ कर ऑंखें.


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ये शर्म ो हाय खूब जचती है तुमपे.

तेरी हर ऐडा पे हमे प्यार आता है........


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मैं दीदी क पास पोहंचा और उनके चेहरे के पास अपने चेहरा ले जा क हलकी हलकी फूंके चेहरे पर मारने लगा... दीदी का चेहरे कुछ और भी चमकने लगा.. मेरी जुबां मेरे मोहन से निकली और दीदी क गालों पर चलने लगी. दीदी के बदन में काँपन शुरू हो गई.. दीदी ने एक दो गहरी साँसे ले और फिर उनके चेहरे के बहन भी बदलने लगे.. दीदी पहले वाली शर्माओ हाय से कुछ कुछ बहार आने वाली.. पहले वो शर्मा रही थी, और कुछ नर्वस भी थी.. पारर अब्ब उनमे चेंज आने लाग था.. शायद वो खुद पर काबू पाने में लगी हुई थीं.. वर्ण मुझसे काहे की शर्म और काहे का नज़रे चुराना.. दीदी चेहरे साइड में करती हुई मुझे एक आंख को ज़यादा hi खोल कर मुस्कान देती हुई दहकने लगीं.





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एक आंख में हाय तो एक में शरारत है.......

ये शर्म है ग़ज़ब की, वो शोखी बाला की.


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मेरे हाथ दीदी के चेहरे पर चलने लगे.. मैं अपनी उँगलियों की पूरो से दीदी क गालो को सहलाने लगा. इतने से hi दीदी के शरीर में करंट सा दौड़ने लगा था.

दीदी के रंग पल पल बदल रहे थे.. आज दीदी क अंदर का कुछ भी उनके पुरे कण्ट्रोल में नै था.. वो मेरे साथ मेरे hi हिसाब से चलना चाहती थी.. पारर आज और अभी तो ये होने से रहा.. शादी वाली बात उनके अंदर कुछ ज़यादा hi हलचल मचाये हुए थी..

मैं दीदी क बड़े ग़ौर से देख रहा था.. दीदी की ऑंखें बार बार झुक रही थी.. वो मुझे रेगुलर hi देखना तो छह रही थी. पारर आज शादी की बात सुन कर वो खुद पर काबू खोने लग गई थी.. शादी की फीलिंग्स होती hi ऐसी हाँ.

शादी लफ्ज़ hi सुनते hi अंदर कही शहनाइयां सी बजने लगती हाँ.. और मैं अंदर hi अंदर नाचने लगता है.. और फिर उससे कुछ अजीब ो गरीब हरकतें होने लगती हाँ.. रिएक्शन पल पल बदलते रहते हाँ..

दीदी ने सोने की बालियान अपने कानो में पहनी hi थी. दीदी का चेहरा इक साइड में झुका तो एक बाली दीदी क गाल को चूमने लगी.. साली मेरे हिस्से पर डाका दाल रही थी....

हाय क्या नज़ारा था.. मेरी जगा वो बाली दीदी के कोमल गालो के मज़े ले रही थी...




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कान की जानिब झुकती है..........

शर्माती है, बॉल खाती है.

आज इरादा ठीक नहीं है.........

दीदी तेरे कान की बाली का.......


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दीदी आज मेरे मोहन से शायरी सुन कर कुछ हैरान तो थीं पर उन्हों ने मुझसे कुछ पूछा नहीं.. बास अपना चेहरा कुछ और भी लाल करने में लगी हुई थीं. कुछ ज़यादा hi शर्मा रही थी.. आज कैसे कैसे कातिल रूप मुझे दीदी दिखा रही थी.. काया मस्त घायल करने देने वाले अंदाज़ थे आज दीदी के.. दीदी क गाल और होंटो थरथरा रहे थे.. मेरा दिल मेरे बास से बहार होने लगा..



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गाल गुलाबी ये लाल ऑंखें और होंठ शबनमी.

पी के आई हो या खुद शराब हो.....................


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दीदी खुद तो घायल कर hi रही थी. पर मेरी शायरी से उनका भी खुद पर कण्ट्रोल टूटने लगा था.. उनका दिल भी मचलने लगा था..

पूजा:- विज्जउ................ इतना बोलल कर गहरी सांस लेते हुए मेरे कंधे पर अपना सर्र रख लिया.. दीदी की सियाह घनी ज़ुल्फ़ें लहराती हुई उनके चेहरे को ढांपने लगी.. दीदी के बालो से बहुत hi मधुर खुशबु आ रही थी.




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सर्र से गिरती है तो शानो पर बिखर जाती है....

तूने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर्र पे चढ़ा रखा है....


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दीदी ने पहात से मेरे कंधो से अपना सर्र उठाया और मेरी आँखों में देखने लगी.. उनके पलकें थरथरा रही थीं.. मैंने दीदी की आँखों को चूम लिया.. दीदी की सांस कुछ और भी तेज़ हो गई थी.. दीदी क चुके उनकी साँसों के चलने से ऊपर निचे हो रहे थे.. दीदी की क्लीवेज कुछ ज़यादा hi दिखने लगी thi..znazara तो बहुत hi मस्त था, और सिचुएशन भी कुछ ज़यादा hi रोमांटिक होने लगी थी..

मैंने दीदी क बूब्स को ताड़ना छोड़ा और फिरसे उनके चेहरे पर अपना फोकस बढ़ा दिया.. दीदी के होंठ भी कुछ कुछ काँप रहे थे.. मैंने अपने एक हाथ की ऊँगली उनके होंटो पर रख दी.. और उन्हें छेड़ने लगा.....




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हैं होंठ तेरे किताबो में लिखी तेहरीरो जैसे.

ऊँगली रखो तो आगे पढ़ने को जी चाहता है..


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दीदी और भी शर्माती हुई नज़रो से मुझे देखने लगी... मैंने दीदी के होंटो पार्स ऊँगली हटाई और उन्हें एक किश कर दी.... दीदी मेरी आँखों में देखती हुई अपने होंटो को अपने दांतो से काटने लगी.. ये भी आज्ज उनका एक नया अंदाज़ था.





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वो होंठ अपने दांतो में दबा कर मुझसे बोली यौन..

खुद काटों तो दर्द क्यों, तुम काटो लुत्फ़ क्यों...........


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मैंने दीदी को घुमाया और पीछे से hi उन्हें अपनी बहन में भर लिया.. और अपने होंटो को दीदी की गर्दन पर रख दिया.. मैं हलके हलके दीदी को किश कर रहा था.. मैं दीदी की खुशबु खुद में उतार रहा था. किश करते हुए मैं लम्बी लम्बी सांस भी ले रहा था.. दीदी क बदन और पसीने की महक परफ्यूम में मिक्स हो कर कुछ ज़यादा hi ग़ज़ब ढाने लगी थी.. मुझे नशा सा होने लगा..

फिर मैंने दीदी के एक कान पर अपनी जीब फेरनी शुरू कर दी.. दीदी दी सांस कुछ और भी तेज़ हो गई थी..

मेरे हाथ दीदी के पेट पर चल रहे थे.. जो मैंने दीदी की कमीज के अंदर डाले हुए थे.. दीदी की नाभि में एक उनलगी में बार बार दाल कर दीदी की नाभि के गिर्द गोल गोल चक्कर लगा रहा था.. दीदी के बदन में सरसराहट बढ़ने लगी तो दीदी कुछ आगे की तरफ झुक गई थी.. दीदी की गर्दन के मसामो ने पसीना उगलना शुरू क्र दिया था.. जो मैं अपनी जीब से चाट रहा था.. दीदी अंदर से तो ग्राम हो hi रही थी.. पर बहार से उनका बदन कुछ ठंडा होने लगा था..

फिर मैंने एक हाथ से दीदी क गाल को अपनी तरफ मोड़ा और दीदी क गाल पर अपने होंठ रख कर दीदी को किश करने लगा.. दीदी ने अपनी ऑंखें बंद कर ली थी.. मेरा दूसरा हाथ दीदी के पुरे पेट पर और दीदी की कमर पर चल रहा था.. मेरे हाथो की रगड़ दीदी से सहन करना मुश्किल होने लगा था..

दीदी फुल मस्ती में आना शुरू हो गई थी.. अब्ब्ब तो दीदी की छूट ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.... पर मैं दीदी की छूट की तरफ नहीं बढ़ा..

बास दीदी की छूट क ऊपर वाले एरिया पर अपनी उँगलियाँ चला रहा था...

विजय:- दीदी हमारी शादी होने जा रही है.. आप खुश तो हाँ ना..

दीदी:- hmmmmmmmmmmmm....

विजय:- दीदी शर्म आ रही है.. जो ह्म्मम्म्म्म करके जवाब दे रही हो..

didi:-(tez सांस लेते हुए) ह्म्म्मम्म..

मैंने दीदी को पलटा कर उनके चेहरे को थाम लिया और दीदी की आँखों को चूमना शुरू कर दिया.. दीदी ने अपनी ऑंखें नहीं खोली... मैंने दीदी की ऑंखें चूम कर दीदी के गालों पर जीब फेरते हुए दीदी के होंटो पर आ गया.. और फिर दीदी क होंटो को अपने होंटो में ले लिए.. और धीरे धीरे करके किश करने लगा.. दीदी तो पहले से hi बहुत हॉट हो चुकी थी.. दीदी ने मुझे कस क पकड़ लिया और मुझे किश में साथ देने लगीं... दीदी क हाथ मेरे सर्र के पीछे चले गए और दीदी मुझे पुरे जोश में किश करने लगी.. दीदी हॉर्नी हो गई थी.. कुछ देर पहले वो सहरमा रही थी.. पर अब्ब वो फिर से पहले वाले मूड में आ चुकी थीं

दीदी मुझे तब्ब्ताक्क किश करती रही जब्ब तक्क उनकी सांस नहीं फूल गई.. दीदी ने मुझे छोड़ा और मेरे कंधे पर अपना सर्र दाल कर गहरी गहरी सांस लेने लगी..

मैं दीदी की पीठ पर हाथ फेरने लगा.. मेरे हाथ निचे का सफर भी कर रहे थे.. कुछ देर में hi मेरे हाथ दीदी क चूतड़ों पर जा पोहंचे और मैंने उन्हें हलके हलके दबाने लगा..

दीदी:- विजजूउउ... मैं आज मैं बहुत खुश हों.. आज माँ जी ने मुझे तुम्हारे लिए मांग कर मुझे बहुत बड़ी मुझे दी है.. जानते हो विज्जू, मई तो तुम्हे देखने hi तुम्हारे नाम हो गई थी.... भले hi तुम कम् आगे क थे, पर तुम्हारे आँखों में मुझे वो सबब दिख गया था, जो हर लड़की क दिल में होता है.. पारर मैं तब्ब सही से समझ नहीं पाई थी. पर धीरे धीरे हम एक दूसरे क करीब ए तो मुझे तुमसे अपनी आगे की पूरी ज़िंदेग दिख गई थी.. मैं अंदर मैं में hi सारे सपने सजाये लिए थे.. पर मैं कभी ये सबब कह नै पाई.. विज्जू तब्ब तुम्हे माँ और बहनो को लाने क लिए खुद को काबिल बनाना था.. मेरा प्यार तुम्हारे लिए हर रंग में था, माँ वाला भी, बड़ी बहन वाला भी, दोस्त वाला भी, और एक लवर वाला भी....

बाद में हम पूरी मस्ती करने लगे थे, तो मैं सबब आगे का सोच कर hi सबब किया करती थी.. पारर मैंने कभी खुल क बताया नहीं.. विज्जू आज मेरे दिल की मुराद पूरी हो गई है.. ी लव यू.. एंड थैंक यू सो मच.. मुझे अपने दिल में जगा देने क लिए...

विजय:- दीदी आप ये क्या बोल रही han..jo आप क दिल में है, वही तो मेरे दिल में भी है. मेरे दिल में आपका क्या मुक़ाम है, क्या आप वो नहीं जानती..

दीदी:- जानती हों, विज्जू, मेरे जानू.. मेरे दिलबर.. मेरे साजन..

विजय:- अरे.. अरे.. दीदी ये सबब इतनी जल्दी सबब नाम दे दिए मुझे.. कुछ hi घंटो में..

दीदी:- विज्जू ये घंटो की बात नहीं है.. माँ जी ने बात करके मुझे ये सबब रंग अपने अंदर से बहार निकलने का मौका दिया है.... वर्ण मैं तो कब्ब का ये सबब्ब नाम तुम्हे दे चुकी होती... पर वो सही समय नहीं था ना.. इसलिए खुद पर जबर करते हुए दिल की बातें दिल में hi दफ़न किये रखीं.. आज मुझे पूरा हक़ मिल गया है.. अब्ब मैं सबब कुछ अपने अंदर का बहार निकल देना चाहती हों... विज्जू.. तुम मेरी ज़िन्दगी हो, विज्जू मैं तुम्हरे बिना नहीं रह सकती..

विजय:- वो मैं रहने भी नहीं डोंगा.. मैं कैसे अपनी दीदी डार्लिंग को छोड़ सकता हों..

दीदी:- क्याआआ... दीदी डार्लिंग.. ः ः ः

विजय:- हाँ अब्ब तो हमे सनद मिल गई है ना. तो जैसे मैं किया बोल लिया करेंगे..

दीदी:- हाँ मेरे बालम.. मेरे ज़िन्दगी क मालिक.. मेरे तन्न मेरे मैं क maalik..meri आत्मा के मालिक. मेरी साँसों क मालिक... हमे अब्ब सर्टिफिकेट मिल गया है..

विजय:- तो फिर अब्ब आगे की कार्रवाई शुरू की जाए.. माँ ने और मालकिन ने ok बोल दिया है.. तो आगे की रस्म अभी से hi शुरू कर दूँ.. दूर ओपन करने का सही समय है तो जो बाद में करना है.. वो अभी कर लेते हाँ.. चलें बीएड पर..

दीदी ज़ोर लगा कर मेरी बहन से निकली और कुछ फासले पर कड़ी हो कर मुझे ठेंगा दिखते हुए बोली..

दीदी:- अब्ब तो तुम मेरे कमरे में आ गए हो.. दोबारा तब्ब तक्क नहीं आना, जब्ब तक्क सर्टिफिकेट की ओरिजिनल कॉपी न ला कर तुम मुझे दिखा दो.. अब्ब से मुझे हाथ भी मैट लगाना .. अंडरस्टैंड.. जितने मज़े ले लिए हाँ.. उतने से hi गुज़ारा करो.. और अब्ब फोटो यहाँ से...

दीदी का ये रंग भी कितना दिल को बहाने वाला था.. ज़िन्दगी की सबसे बड़ी खुवाहिश जब्ब पूरी होती है, तो ऐसे hi रंग अंदर से निकलते हाँ...

दीदी का ये रूप देख कर मेरे अंदर एक सुरूर सा उअतरने लगा...




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TIME:06:40:PM:








मैं इस वक़्त महेंद्र गैंग क इलाके में था...



जिस हॉस्पिटल में महेंद्र सिंह का भाई जीतेन्द्र सिंह एडमिट था.. उस हॉस्पिटल से 400 मीटर के फासले पर एक कोठी थी, और उसी कोठी के ड्राइंग रूम में मैं इस वक़्त बैठा हुआ था, मेरे सामने इस कोठी क मालिक दिवाकर पटेल बैठे हुए थे..

दिबाकर पटेल महेंद्र सिंह गैंग से बहुत खार रखता था, बिज़नेस के चलते दिवाकर पटेल के बेटे की एक टांग काट दी थी मेहन्द्र सिंह ने.. दूसरा बीटा छोटा था, और एक बेटी जवान थी दिवाकर पटेल की.. इसलिए उसने महेंद्र सिंह से दूर रहना hi सही समझा.. मर्द का बच्चा था, पीछे हटना नहीं चाहता था. पर अपनी फॅमिली को सादे रखने क लिए वो पीछे हट गया था..

पारर दिल में ठान लिया था क जैसे hi उसे कोई मौका मिला, वो महेंद्र सिंह से बदला ज़रूर लेगा.. अभी तक्क उसे कभी कोई मौका नहीं मिला था....

अब्ब वो मौका पटेल के हाथ लग्ग गया था. मैंने पटेल को सबब तो नहीं बताया पारर जितना ज़रूरी था, वो बया दिया, और ये भी क रात हुआ काण्ड मैंने hi किया था... तो पटेल ने मुझे फुल सुप्परत देने का वडा कर लिया.. वो तो खुद आग में जल रहा था.. अगर महेंद्र सिंह गैंगस्टर न होता, तो पटेल महेंद्र की माँ छोड़ क रख देता.. कुछ ऐसी hi पर्सनालिटी का मालिक था.. दिल का अच्छा था, सेहत भी अच्छी थी.. पर फॅमिली क सफिटी क लिए पीछे हट गया था.. वर्ण पटेल जैसे लोग मर तो जाते हाँ. पीछे नहीं hat'te

मैंने दिवाकर पटेल को अपना नाम रॉकी बताया था.

विजय:- पटेल साब, आप पहले hi बहुत दुःख झेल चुके हाँ. तो मैं अब्ब ये चाहता हों, क मज़ीद कोई भी खतरा मोल लिए बिना आप अपना बदला लें.. पारर अपनी फॅमिली को कुछ वक़्त के लिए यहाँ से कही और भेज दें..

पटेल:- रॉकी बीटा मेरे सभी तीखाने महेंद्र कुत्ता जानता है, मेरे पास ऐसी कोई जगा नहीं है, जहाँ मैं अपनी फॅमिली को सुरक्षित कर दें..

विजय:- मेरे पास है एक जगा, वहां आपकी फॅमिली सेफ रहेगी...... मैंने पटेल जी को फार्महाउस का एड्रेस बता दिया. और जूली को फोन पर सबब बता दिया. वहां पटेल की फॅमिली सुरक्षित रह सकती थी.. हर्ष अंकल की भी कई कोठियां थी दिल्ली शहर में.. पर मैंने ये सही नहीं समझा....

30 मिंट बाद पटेल की फॅमिली फार्महाउस क लिए निकल गई.. तो हम फिरसे ड्राइंग रूम में जा कर बैठ गए..

विजय:- जी पटेल साब.. अब्ब आप बातएं.. मुझे क्या करना चाहिए.. आप तो सालो से यहाँ रह रहे हाँ.. आप तो सबब hi जानते होंगे.. महेंद्र गैंग का मैं बेस कहाँ है, और कहाँ वो ज़यादा पावरफुल है, और कहाँ होने वाला लोस्स उसके गैंग की कमर तोड़ सकता है...

पटेल:- रॉकी बीटा ऐसे 4 पॉइंट हाँ, जिसकी वजा से महेंद्र गैंग बहुत ज़यादा स्ट्रांग है, वहां बहुत hi ज़यादा hi-tech सेक्युर्टी है.. रात पता नहीं कैसे तुमने उनपर हमला कर गया था........ वर्ण ये सबब इतना भी आसान नहीं था. पहले उनसे कभी कोई ऐसी चूक नहीं हुई ..हर तरफ कामर्स लगे हुए हाँ. एक पूरी टीम है जो पुरे इलाके को कक्तव से कण्ट्रोल करती है.. चूंकि ये एक पब्लिक एरिया भी है. तो रात शायद इसी वजा से वो कुछ चूक गए थे.. पर अब्ब वो हर दुम्म से पुरे एरिया को नज़र में रखे हुए होंगे..

विजय:- उनकी सिक्योरिटी को भी देख lenge..aap मुझे सबब डिटेल में बताएं..

पटेल साब उठकर अंदर चले गए और एक चार्ट पेपर, एक स्केल और एक पॉइंटर ले आये.. उसे टेबल पर रख कर वो एक नक्शा बनाने लगे... कुछ देर बाद..

पटेल:- रॉकी beta..(chart पर एक जगा पॉइंटर रखते हुए) ये एक अड्डा है महेंद्र का और इसे दांय नाम का बाँदा संभालता है.. वो और उसके ज़यादा तर गुंडे अभी हॉस्पिटल में होने.. इस वक़्त वहां हमला करना किसी हद्द तक्क आसान है.. पर उसके साथ hi एक नाईट क्लब भी नहीं.. वहां से उनके गुंडे अड्डे की सुरक्षा क लिए सकते हाँ.. वहां कुछ भी करना हो.. वो जल्दी hi करना है..

विजय:- ये इलाका यहाँ से कितनी दूर है..

पटेल:- ठहरे मैं पहले कुछ और काम कर लून फिर बताता हों.... पटेल साब बनाये गए नक़्शे पर मुख्लिफ जगा का नाम लिखने लगे.. और स्केल से कुछ लाइन भी खेंच रहे थे.....

पटेल:- रॉकी बीटा.. ये जगा इसी साइड में hi है.. ye(ek जगा िश्रा करते हुए) मेरी कोठी है, और यहाँ से 130 मीटर क फासले पर ये अड्डा है... बीच में कुछ शॉप्स और एक कोठी आती है...

विजय:- ठीक है, आप आगे बताएं..

पटेल: साब फिर मुझे बाकी के 3 बेस क बारे में भी बताने लगे...

पटेल:- रॉकी बीटा, मैं तुम्हे ये नहीं बता पाऊँगा क पहले तुम कहाँ हमला करो.. ये फील्ड तुम्हारी है, तुम मुझसे बेहतर समझते हो... हाँ पर एक बात है.. तुम इन चरों बेसेस में से किसी पर भी हमला करते हो तो तुम्हे जल्द hi वहां से निकल भी जाना होगा, वर्ण फिर तुम्हारे लिए वहां से निकल पाना आसान नहीं रहेगा.. कुछ hi देर में उसके सारे गुंडे चरों तरफ से तुम पर यलग़र कर देंगे... पूरा एरिया उनका है.. तो अक्सर ऐसा भी होता है.. क पास क दुकान वाले भी उनकी मदद क लिए तैयार हो जाते हाँ.. यहाँ की 70% महेंद्र गैंग की हामी है.. ऑस्कर उनमे बुरा आदमी भी हाँ..

विजय:- वो भी मैं देख लूंगा.. पटेल सब आप मुझे ये बातें.. इस एरिया का सेवेरेगे सिस्टम कैसा है.. क्या उनके ज़रिये कई आया जाय जा सकता है..

पटेल:- (खुश होये hue)rocky बीटा ये तो तुमने मुझसे पूछ कर बहुत अच्छा किया है, मेरा इस तरफ तो ध्यान hi नहीं गया.. यहाँ कई ऐसी अंडरग्राउंड पिपलिनेस हाँ, जो किसी वजा से अधूरी छोड़ दी गई थीं.. अब्ब उनकी अंदर से क्या कंडीशन होगी. मैं नहीं जानता.. लेकिन मेरे हिसाब से उसे इस्तेमाल में लाया जा सकता है..

विजय:- आप मुझे उन पिपलिनेस की लोकेशन भी बता दें.. इमरजेंसी में उसे भी इस्तेमाल में लाया जा सकती है.. हॉस्पिटल क आस पास कोई पाइपलाइन है तो उसके बारे में भी बता दें..

मज़ीद आधे घंटे तक्क पटेल साब मुझे सबब समझते रहे.. मैं इस वक़्त बदले हुए रूप में था.... और मैं अपनी ज़रूरत का सामान भी साथ hi लाया था, ज़यादा की ज़रूरत नहीं थी.. यहाँ वेपन की कमी नहीं थी, वेपन मुझे महेंद्र गैंग से हासिल करने में भी कोई पेशानी नहीं होने वाली थी..

8 बज्ज चुके थे, और आज मुझे पैलेस में भी नहीं जाना था, आज की रात तो मेरी रानी और नताशा दीदी को उनकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी ख़ुशी देने वाली रात थी.. और उन्हें मज़ीद इंतज़ार करवाना उनके साथ ज़ियादती भी थी, पारर बात यहाँ रानी और नताशा दीदी की खुशियों की नहीं थी..

बात यहाँ उन दो मासूम लड़कियों की लाइफ को बर्बाद करने वळून भेड़ियों की बर्बादी की थी. बात उन दो मासूम लड़कियों क घर वळून की तड़प को समझने की थी.. बात थी उन दोनों मस्सों लड़कियों को इन्साफ दिलाने की.. बात थी उनके जिस्म को नोचने वाले कुत्तो को इस दुन्या से मुक्त करने की...

कहाँ कहाँ से लड़कियां खुद की लाइफ बनाने के लिए पढ़ने आती हाँ, और उन्हें यहाँ साले कुत्ते भँभोङना शुरू कर देते हाँ.. ज़िन्दगी तो बर्बाद कर hi देते हाँ मासूम लड़कियों की.. साथ hi उसके सारे खवाब भी चकनाचूर कर देते हाँ..

और ये बात कोई छोटी बात नहीं थी, ये बात किसी मर्डर से भी कई गुना बढ़ कर थी, लड़कियों की इज़्ज़त को पामाल करने वलु को मैं ज़यादा समय नहीं देने वाला था.. रानी और नताशा दीदी तो हमेशा hi मेरे साथ रहने वाली थीं. एक रात और सही.... रानी और नताशा दीदी को भी इस सबब से कोई परेशानी नहीं थी... वो दोनों मुझसे प्यार चाहती थीं, जो मैं उनसे करता hi रहता था, कुछ ख्वाहिशें लेट सही...




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TIME:09:15:PM:




मैं इस वक़्त महेंद्र सिंह क 3रद अड्डे की बैक साइड में खड़ा था. मेरा चेहरा ढाका हुआ था, और मैंने बेस में घुसने क लिए रेडी था.. मैं यहाँ तक्क कक्तव से बचता हुआ आया था..

मैं जल्द से जल्द इस बेस को उड़ा कर सब का hi धयान इस तरफ करके हॉस्पिटल में घुसना चाहता था. हॉस्पिटल में इस वक़्त पटेल की रिपोर्ट क मुताबिक़ 100+ गुंडे थे, और दोनों गैंग्स क हेड 3रद दलूर पर थे, और फर्स्ट फ्लोर के इलावा सभी फ्लोर्स दोनों गैंग्स के अंडर में थे, और वहां घुसना मुमकिन नहीं था..

अगर मैं हॉस्पिटल में नहीं घुस पाया तो मेहन्द्र गैंग को तो ख़तम कर hi सकता था.. जितने अड्डे और जितने गुंडे मरेंगे, गैंग उतना ज़यादा कमज़ोर होगी... गुंडों को ढूंढ कर फिरसे गैंग में शामिल करना कोई आसान काम थोड़ा न था.. अड्डे तबाह होते hi गैंग का पूरा स्ट्रक्चर hi बिगड़ कर रह जाता.. महेंद्र की माँ तो मैं आज छोड़ने hi वाला था...

लेकिन इस सबब में दोनों गैंग्स क लीडर्स का मरना ज़यादा ज़रूरी था.. और मैं 24 हॉर्स में hi ये सबब क्र लेना चाहता था.. वर्ण जितनी देर होती .. गैंग खुद को और भी ज़यादा मज़बूत बना लेता.. फिर उसे ख़तम करना आसान नहीं होता..

वो सबब तो पहले से hi साबधान हो चुके थे.. रात हुए काण्ड की वजा से सभी के मंद डाइवर्ट थे.. सब hi अपने अपने बॉस क लिए बेचैन थे.. वर्ण किसी को भी ख़तम करना आसान नहीं था..

ज़यादा तर नफरी हॉस्पिटल की तरफ थी... एक हमले के बाद बाकी क भी सभी फुल एक्टिव हो चुके थे.. और गुंडे जब एक्टिव होते हाँ, तो शहर में भूंचाल आ जाता है.. आज या तो वो सबब मरेंगे या इस शहर में भूंचाल ले आएंगे..

3रद बेस 2 मंज़िला था, बेसमेंट तो ज़रूर होगा hi.. और ये बेस 40 मीटर तक पहला हुआ था.. कुछ फासले पर एक नाईट क्लब था, जो इसी गैंग का hi था.. वहां से भी इसका बैकअप आ सकता था... और मुझे खुद को उनके कब्ज़े में आने से बचना था.. यहाँ वारर जोन जैसी सिचुएशन बनने वाली थी...

पूरा इलाका hi महेंद्र सिंह का था.. और मैं अकेला सांपो से भरे हुए कुंवे में कूद गया था.... अब्ब मुझे खुद को सेफ रखते हुए इन सभी सांपो का सर्र कुचलना था..

मुझे 2ंद फ्लोर पर से कोई भी इधर उधर नज़र रखता हुआ नहीं दिखा था..

पटेल क हिसाब से यहाँ hi-tech सिक्योरिटी थी, तो कहीं वो कक्तव की ज़रिये चेकिंग में तो नहीं लगे हुए...

ये सबब मुझे धयान में रखते हुए अंदर घुसना था... नाईट विज़न गूगल मेरे पास hi थे.. पहले मैंने दूरबीन से एक एक जगा को बड़े ध्यान से देखा और फिर बेस में घुसने क लिए तैयार हो गया...

जैसे hi-tech सिक्योरिटी और कक्तव कामर्स यहाँ पर मौजूद थे.. उसी हिसाब से मैं ज़यादा देर किसी की नज़रो से छुप नहीं सकता था.. यहाँ आदमी कम् थे तो मुझे डायरेक्ट hi हमला करना था..

इस लिए मुझे बैक साइड में दिख रही लाइट्स को उड़ा कर फ़ौरन hi अंदर घुसना था.... मैंने पिस्तौल को हाथ में लिया और फिर 3 दिख रही लाइट्स को एक एक करके गोलियों से उड़ाने लगा.. पिस्तौल पर सीलेंसर लगा हुआ था, गोलियों की आवाज़ तो आने से रही.. हाँ लाइट्स क टूटने से आवाज़ ज़रूर हुई थी..

मैंने फ़ौरन hi नाईट विज़न गूगल लगाए और भागता हुआ दीवार पर चढ़ने लगा. दीवार पर ऊपर चढ़ने क लिए जगा मैंने पहले से hi ढूंढ ली थी...

अँधेरा हो चूका था और अभी अंदर से मौजूद कोई कुछ समझता मुझे इसी अँधेरा का फायदा उठा कर अंदर किसी जगा छुपना था..

दीवार से अंदर कूदने में मुझे ज़यादा समय नहीं लगा.. अंदर अँधेरा था, पारर मेरे लिए नहीं.. मई पिस्तौल हाथ में लिए तेज़ी से आगे बढ़ने लगा... कुछ फासले पर आवाज़े सुनाई दे रही थीं.. 2-3 आदमी थे, जो लाइट्स के टूटने पर आपस में बात चीत कर रहे थे..

मैं तेज़ी से आगे बढ़ा, बिल्डिंग क कार्नर के पास पोहचते hi मैंने सर्र आगे करके देखा, वो 3 आदमी थे और इधर hi आ रहे थे.. माने एक के सर्र का निशाना लेकर गोली चला दी.. गोली लगते hi वो पीछे गिर गया.. गोली चलने की आवाज़ हो हुई नहीं थी.. इसलिए बाकी क दो हैरान हो कर पीछे मुद कर उसे देखने लगे...... दोनों क सर्र पर पीछे गोली मार कर मैंने उन्हें भी उनके साथी के पास hi सुला दिया....

मैंने सामने कक्तव कैमरा ढूंढ़ने लगा.. जो मुझे दिख गया था..

मतलब मैंने जिन 3 गुंडों को मारा था, उन्हें अंदर से देखा जा चूका होगा.. और अब्ब जल्द hi मेरे लिए जुंग शुरू होने वाली थी.. मैंने पीछे मुद कर देखा कोई खिड़की अंदर घुसने क लिए है या नहीं.. पर बैक साइड में कोई खड़िकी नै था.

सामने वाली साइड में लगी लाइट्स पारर मैं निशाना लगाने लगा.. अब्ब मुझे गुंडों से लड़ने क लिए अँधेरे की ज़रूरत थी.. सबब hi मुझे ढूंढ निकालेंगे..

इसलिए मैं अपने रास्ते में आने वाली सभी लाइट्स को तोड़ देना चाहता था.. मैं किसी की नज़रो मैं नहीं आना चाहता था...

यहाँ 2 बड़ी और 1 छोटी लाइट थी, मैंने मैंने वो तीनो लाइट से उड़ा दें.. पिस्तौल का मैगज़ीन चेंज किया. और फिर तेज़ी से आगे बढ़ने लगा. मैं इस साइड से अंदर घुसने क लिए जगा ढूंढ़ने लगा.. पर सालो ने बहुत अच्छा सेटअप बनाया हुआ था.. दोनों साइड से अंदर घुसने का कोई रास्ता नहीं था.. फोरन्त साइड से अंदर जाने का रास्ता था...

एक पाइप ऊपर जा रहा था, मैंने उसी से ऊपर जाने का socha..main ऊपर जाने का सोच hi रहा था, क राइफल की गोलियों का शोर फ़िज़ा में गूँज उठा, मैं एक झटके में hi निचे लेट गया और सामने देखने लगा.. मुझे कोई नहीं दिखा..

मैं समझ गया क गोलियां चला कर सबब को hi सावधान करने की कोशिश की गई है... अब्ब मेरे लिए ये अड्डा जल्द hi चुके दान बनने वाला था.. कुछ hi देर में नाईट क्लब की छत पार्स भी गोलियां चलने की आवाज़ें आने लगी.. साले कितने एक्टिव थे सबब क सबब... अब्ब कुछ hi देर में सबब इधर hi आने वाले थे..

मैंने अंदर घुसने का प्लान कैंसिल किया, पीठ पर बंधे बैग को उतारा और खोल कर उसमे से स्माल बम निकल कर दीवार से चिपकने लगा.. दोनों साइड में मैंने टोटल 8 बम चिपका दिए.. बम पर लगे टाइमर पर मैंने पहले से hi 2 मिंट का टाइम सेट कर दिया था, ये सबब इमरजेंसी क लिए था.. और इमरजेंसी बन गई थी... अब्ब मैं बेस को ऐसे hi तो छोड़ कर जाने से रहा.... सारा न सही कुछ तो धमक होगा hi... कुछ और लोग मरेंगे.. अगर किसी दीवार क पास hi बारूद पड़ा हुआ है, तो ये बेस खुद hi उड़ जाएगा...

मैं तेज़ी से बम लगा कर उसका बटन प्रेस करता हुआ आगे बढ़ गया था...

40 सेकंड बाद मैं वापिस फिरसे दीवार कूद कर बहार निकल चूका था.. मुझे आते और जाते हुए किसी ने नहीं देखा था...

मैं अँधेरे में रहते हुए तेज़ी से महेंद्र गैंग क अड्डे से दूर होने लगे..

अभी मैं कुछ hi दूद गया था.. क एक्के बाद दीगरे धमाके होने लगे.. और अड्डे के पास का पूरा एरिया hi रौशनी में नाहा गया था... मेरे लगाए गए बम एक एक करके ब्लास्ट हो रहे थे.. मैंने खुद को सेफ कर लिया था.. मैं वही खड़ा रह कर ये सबब नहीं देख सकता था.. मैं तेज़ी से एक साइड में भागने लगा..

अभी कुछ आगे गहा hi था.. क एक दिल दहला देने वाला धमाका हुआ और मैं भागते भागते गिर पड़ा...




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Laa-Waris:Update:29.................. पोस्टेड

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HIMMAT-WALA Part 2 स्टार्ट कर दिए गया है..

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