Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 21 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

अपडेट ::: 93

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मई जैसे hi मालिकान की पंतय उतारने लगा.. तो किसी ने दूर नॉक कर दिया..

मई तो नार्मल hi रहा, पर मालिकान एक झटके में hi उठ बैठी..

मालिकान:- विज्जू बीटा कोई आ गया है तू ऐसा कर बाथरूम में जा कर छुप जा..

मैं भी सीधा हो गया.. और मालिकान के होंटो को एक बार फिरसे अपने होंटो में लेकर अच्छे से चूस लिया...

विजय:- कोई दूर पर है तो क्या हुआ, उसे भगा देते हाँ, अभी मज़ा करने दो न..

मालिकान ने मुझे साइड में धक्का दिया..

मालिकान:- तुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा.. पर मुझे तो फर्क पड़ता है न.. अभी मई इस सबब की आदि नहीं हुई हों, कोई मुझसे सवाल करेगा, तो कैसे मई जवाब दे पाऊँगी..

हम दोनों hi धीरे धीरे बात कर रहे the..maine मालिकान ने बूब्स को पकड़ कर दबा दिया..

विजय:- आप यही से पूछ लें बहार कौन है..

मालिकान को मेरी बात भी सही लगी.. इतनी जल्दी तो वो सबब सेट करके दूर ओपन करने से रगीन.. पंतय के इलावा उनके बदन पर था hi क्या, उन्हें कपडे पहने कर दूर खोलने में टाइम लग्न था..

मालिकान:- (ऊंची आवाज़ में) कौन है बहार...

बहार से:- मई हों दीदी पद्मा... साथ में मतली भी है..

विजय:- चलो अब्ब तो आपका काम हो गया, कोई टेंशन नहीं है.. उन दोनों से कैसी शर्म.. सबब hi तो आप दोनों को दिखा चुकी हाँ.. इतना बोलते हुए मैं झट से बीएड से उतरा.. और जा कर दूर खोल दिया.. दूर खोलते hi साइड में हो गया.. बहार कड़ी हुई दोनों की hi नज़र मुझपर नहीं पड़ी थी..

दोनों अंदर आएं तो बीएड पर मालिकान को नंगी हालत में देख क्र शॉकेड कम् और एक्ससिटेड ज़यादा हो गयीं..

मैंने धीरे से दूर बंद करके लॉक कर दिया.. और बिना आवाज़ किये उनके पीछे आने लगा.. मालिकान को नंगा देखकर दोनों ने इस बात कारसे भी धयान हटा दिया था क दूर किसने खोला होगा..

दोनों बीएड के पास पोहंची..

भाभी:- वाह दीदी क्या सन बनाया हुआ है.. और... अर्र्रे ये क्या.??

पद्मा आंटी:- क्या हुआ मल्टी, ऐसा क्या देख लिया तुमने.?

भाभी:- पद्मा दीदी क बूब्स देखो, ऐसे लग रहा है, जैसे किसी ने मोहन में लेकर उन्हें चूसा हो.. देख तो सही अभी भी गीले han.aur उनपर दांतों क निशान भी दिख रहे हाँ... भाभी की बात सुनकर मालिकान का चेहरा मारे शर्म के लाल पड़ने लगा..

उन्हों ने झटसे अपनी टांगों को फोल्ड कर लिया.. पारर हाय रे किस्मत.. जिस चीज़ को वो छुपाना छह रही थी.. अपने पैरों को फोल्ड करने क चक्कर में खुद hi दिखा बैठी.... मालिकान की गीली पंतय दोनों को hi दिख गयी.. इस बार पद्मा आंटी भी शॉकेड हूँ गयी

पद्मा आंटी:- दीदी ये आपकी पंतय क्यों गीली है..

भाभी:- पद्मा तुम भी बुद्धू हो.. दीदी क बूब्स किसी ने चूसे हाँ. तभी तो दीदी की छूट ने पानी छोड़ा है...

पद्मा:- ाररी हैं.. ये तो कमाल हो गया मालती..

मालिकान का बास नहीं चल रहा था.. क बीएड फटे और वो उसमे छुप जाएँ.. उनका सर्र कुछ ज़यादा hi नीचे हो चूका था.. भाभी और पद्मा आंटी मालिकान के कुछ ज़ायदा hi मज़े ले रही थीं..

अब्ब इन दोनों को भी मज़े देने का टाइम आ गया था....

मैं भाबी क पीछे आया और अचानक से hi उन्हें पीछे से अपनी बहन में भर लिया.. इससे पहले hi मैंने अपना लुंड पेण्ट की ज़िप खोल कर बहार निकाल लिया था...

भाभी को पीछे से जकड़ा तो मेरा लुंड सीधा जा कर भाभी की गांड की दरार में जा फंसा...

भाभी:- oiiiiiiiiiii maaaaaaaaaa marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiii....

पद्मा आंटी और मालिकान ने मुद कर देखा तो मुझे देख कर पद्मा आंटी की ऑंखें बड़ी हो गए.. और मालिकान को कुछ हौसला मिला.. वर्ण पहले वो बहुत नर्वस हो चुकी थीं..

मैंने अपने लुंड को भाभी की गांड दबाना शुरू कर दिया.. और दोनों हाथों से भाभी क बूब्स को कस क दबाना शुरू कर दिया..

भाभी:- vvvvv....vijjjjjj..vijjuuuuuu tttt..tummmmmmm..

विजय:- हाँ मेरी रानी मैं hi हों.. मेरे लुंड को अपनी गांड पर महसूस करके अंदाज़ा नहीं हुआ क्या.. मैं पद्मा आंटी को देखकर बोलै.. तो पद्मा आंटी जो मुझे hi देख रही थीं.. अब्ब उनके चेहरे की बारी थी लाल होने की..

भाभी:- विज्जू छोडो मुझे..

मैंने अपने हाथ भाभी के बूब्स से हटाए और भाभी को बीएड पर धक्का दे दिया.. भाभी बीएड पर गिर, मैंने पीछे से उनके कमीज को उठा कर उनके चुत्तड़ो से ऊपर कर दिया..

पद्मा आंटी ने साड़ी पहनी हुई थी.. भाही ने शलवार कमीज..

मैंने भाभी के चुत्तड़ पार्स कमीज हटाई और उनकी शलवार को उठा कर चेक करने लगा क उनकी शलवार में डोरी है या इलास्टिक..

भाभी की शलवार में डोरी थी.. मैं भाभी को सीधा करने के मूड में नहीं था.. मैंने भाभी की शलवार की डोरी में अपनी उँगलियाँ फँसायें और एक झटका दे कर भाभी की शलवार की डोरी को तोड़ दिया.. डोरी टूटी तो साथ hi भाभी की शलवार भी फट गई..

भाभी:- विज्जू ये क्या कर रहे हो.. मेरी शलवार क्यों पहाड़ दी..

विजय:- मेरा मैं हुआ तो मैंने पहाड़ दी.. इतना बोल कर मैंने भाभी की पंतय भी नीचे सरका दी और अपने मोहन नीचे लेट हुए भाभी की गांड पर रख दिया.. मेरे मोहन से मेरी जीब निकली और भाभी की गांड के छेड़ को चाटने लगी...

भाभी:- siiiiiiiiiiii हाय्ययएईएए marrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii vijuuuuuuuuuu

कितने बेशरम हो तुम, दोनों के सामने hi ये सबब कर रहे हो..

मैं लगा रहा भाभी की गांड को चाटने में.. भाभी की बात का जवाब मालिकान ने बहुत hi अच्छे से दे दिया..

मालिकान:- क्यों पहले हम दोनों से सामने अपनी गांड नहीं चटवाई क्या.. एक hi बार में मुझसे अपनी छूट और पद्मा से अपनी गांड चतवती हो.. अब्ब क्या हुआ करने दो न मज़ा विज्जु को.. जितनी आग तुम्हारी छूट में लगी है, तुम्हारे साथ ऐसा hi होने चाहिए.. विज्जू इसकी गांड पहाड़ दो, बड़ी कुरक है इसे गांड में..

भाभी डर गई..

भाभी:- नहीं विज्जू वहां मैट डालना प्लीज...

मई कौनसा अभी डालने वाला था.. अभी डाला तो 1 घंटा लग जाएगा पानी निकलने में... सबब को hi पता था, क टाइम कम् है तो मालिकान जिसकी मैंने झिझक ख़तम करदी थी, कुछ उनकी आँखों के सामने भाभी की गांड को चाट कर झिझक ख़तम कर दी थी..

भाभी और पद्मा आंटी दोनों hi मालिकान की सेक्स पार्टनर थी.. अब्ब मालिकान को दोनों से कैसे शर्म.. जो कुछ देर पहले उन्हें हो रही थी.. भाभी की गांड क नंगा होते hi साड़ी ख़तम हो गई.. मालिकान ने पद्मा आंटी को पकड़ा और बीएड पर खेंच लिया, उनके ऊपर चढ़ कर उन्हें किश करने लगी और साथ में hi पद्मा आंटी के दोनों बूब्स भी कस कस के दबाने लगीं..

पद्मा आंटी की झिझक कुछ कुछ बाकी थी, पारर उनकी छूट ने भी पानी निकलना शुरू कर दिया था.. वो झिझकती हुई भी मालिकान का साथ देने लगीं..

bhabhi:-(dono को देखती हुई) तो तुम दोनों से भी नहीं रहा गया.... विज्जू वहां से कर कुछ और करलो ना.. बोहत गुदगुदी हो रही है वहां मुझे...

मैंने भाभी की गांड से अपनी जीब हटाई.. भाभी को अच्छे से बीएड पर लिटाया.. फिर उनके ऊपर आ कर उनकी पहात चुकी शलवार से दिख रही छूट पर अपने लुंड को सेट किया, और भाभी क ऊपर छड्ड कर अपने लुंड को भाभी की छूट पर रगड़ने लगा....

भाभी:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह विजजूउउ कितनी जल्दी तुमने मेरी छूट से पानी निकाल दिया.. कितनी गीली करदी है तुमने मेरी छूट.. अब्ब छूट को मूड में ला खड़ा कर hi दिया है, तो अब्ब तेज़ तेज़ रगड़ो अपने लुंड को मेरी छूट पर.. कोई भी आ सकता है, उससे पहले hi मुझे ठंडा कर देना प्लीज....

इतना बोल कर भाभी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर पद्मा आंटी की छूट पर रख दिए... मालिकान पद्मा आंटी क ऊपर छड़ी हुई उन्हें किश कर रही थी.. साथ में उनके बूब्स दबा रही थी.. भाभी का हाथ आगे बढ़ा तो उन्हें भाभी क हाथ को पद्मा आंटी की छूट पर रखने क लिए जगा दे दी थी...

टाइम कम् था, तो तीनो की hi छूट का पानी निकाल्न लेना चाहती थी. मेरा तो जल्दी निकलने से रहा.. मई भाभी की छूट को निचोड़ने क लिए अपने लुंड को अच्छे से उनकी छूट पर रगड़ रहा था.. भाभी की छूट पहले hi बहुत अच्छे से खुली हुई थी. तो मेरा लुंड कुछ कुछ भाभी की छूट के लिप्स को खोल कर छूट के छेड़ में भी घुस रहा था.. जिस वजा से भाभी जल्द hi चार्म के करीब पोहचने लगी थीं..

भाभी के दिल में मेरे लुंड को अपनी छूट में लेने की तालाब बहुत बढ़ी हु थी..

भाभी एक्ससिटेड हो कर अपनी गांड को उठा उठा कर मेरे लुंड से सर्विस करवा रही थी.. जितना गरम और मोटा मेरा लुंड था, भाभी को मज़ा तो फिर आना hi था.. भाभी क हाथ पद्मा आंटी की छूट पर कुछ ज़यादा hi चलने लगा था..

मतलब मेरे लुंड ने भाभी की छूट की अच्छे से बंद बजाई हुई थी.. मालिकान के भी आज रंग बदल चुके the..malikan पद्मा आंटी को अपने नीचे दबाये किसी माहिर खिलाडी की तरह से लगी हुई थीं...

उनकी झिझक ख़तम हुई तो वो पद्मा आंटी से पूरा पूरा मज़ा लेने लगीं..

कुछ देर गुज़री तो रूम में तीनो की सिसकियाँ गूंजने lagee...bhabhi ने अपना हाथ पद्मा आंटी की छूट से हटा लिया था.. मालिकान अब पद्मा आंटी को किश नहीं कर रही थीं.. वो पद्मा आंटी क बूब्स को दबाते हुए अपनी छूट को पद्मा आंटी की छूट पर पुरे जोश से रगड़ रही थीं...

मालिकान:- आअह्ह्ह्ह मेरी कुत्तिया... तेरी छूट पर अपनी छूट को रगड़ते हुए कितना मज़ा आता है.. अभी पंतय भी नहीं ुआती फिर भी तेरी छूट की गर्मी मेरी छूट को जला रही है...

पद्मा आंटी:- तू भी तो मेरी कुत्तिया है.. कितनी बार तूने मेरी छूट और गांड को छाता है.. अपनी पूरी जीब मेरी गांड में घुसाई है तुमने विज्जू की रंडी.

मई भाभी की छूट पर अपने लुंड को रगड़ते हुए दोनों की बातें सुनकर हैरान रह गया..

vijay:-(bhabhi की छूट से पानी निकलते हुए) भाभी ये दोनों कैसी बातें कर रही हाँ....

भाभी:- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह विज्जउ और तेज़ मेरी छूट बरसने वाली है.. और तेज़.. ओह्ह्ह्हह अहह उफ्फ्फ्फ़ हाय विजजूउउ.. ये दोनों hi नहीं मैभी ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करती हों.. अभी तुमने हमारे रंग देखे hi कहाँ हाँ.. जब औरतों की छूट सालों से न चूड़े तो वो पागल होने लगती हाँ.. एक बार तुम्हारा लुंड तीनो की छूट में घुस गया ना तो देखना हम तीनो तुमसे ऐसे छुड़ेगी जैसे कोई रंडी चुदती है...... मालिकान की छूट हम तीनो में से सबब से ज़यादा गरम ही.. और पद्मा वो तो पूरी रंडी है साली कुटिये की छूट को एक बार क्या छठा मैंने.. मुझे भी गन्दी गन्दी बातें सीखा दी पद्मा रंडी ने.. हाई उफ्फ्फ्फ़ आह्हः

मेरी छूट पानी छोड़ने वाली है विजजूउउउ थोड़ा सा लुंड दाल कर धक्के मारदे ना प्लीज.....

मैं भाभी की बातें सुनकर हैरान तो था hi.. पर भाभी की बातें सुन कर मेरा लुंड कुछ और भी अकड़ गया था.. और भाभी की छूट पर बहुत जोरसे से रगड़ खा रहा था.. भाभी ने थोड़ा डालने को कहा तो मैंने आखरी झटके कुछ ज़यादा hi देने का मैं बना लिया.. मेरी रंडी बनना चाहती हाँ तीनो.. तो फिर कुछ तो झटका बनता है..

बास एक बार भाभी झाड़ ले.. मैंने थोड़ा सा लुंड भाभी की छूट में डाला और आगे पीछे करने लगा..

पद्मा और मालिकान भी आखरी स्टेज पर थीं.. भाभी भी आखरी स्टेज पर थी.. मैंने अपनी स्पीड कुछ और भी दी.. भाभी की छूट ने पानी छोड़ा तो भाभी एक तेज़ सिसकी लेते हुए ढीली पद गई..

मैं भी रुक गया.. मैंने अपना लुंड अच्छे से भाभी की छूट पर सेट कर दिया.. अंदर नहीं डाला... कुछ देर वेट किया भाभी खुद को रिलैक्स कर रही थी.. मैंने मालिकान और पद्मा आंटी की तरफ देखा तो वो दोनों भी झड़ने के बाद लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी...

मालिकान को मैंने गरम किया था, तो पद्मा आंटी भी कई दिनों से बेचैन थी.. इसलिए... इसलिए दोनों जल्दी hi जहद गयी ..

भाभी कुछ रिलैक्स हुई तो मैंने भाभी के चुत्तड़ो को पकड़ते हुए एक धक्का मार दिया.. मेरा लुंड भाभी की पानी छोड़ चुकी छूट में 4" तक्क घुसता चला गया..

भाभी जो कुछ रिलैक्स हो चुकी थी..

aiiiiiiiiiiiiiiii विजजूउउउउउ marrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii टेरररी

bhaaabhhhiiiiiiiiiiiiiiii.. मेरी छूट को पहाड़ दियाआआ तुममनेई..


भाभी की तेज़ चीख निकल गई.. पहली बार उनकी छूट में मेरा मोटा लुंड घुसा था.. भाभी को दर्द तो होने hi था... मालिकान और पद्मा आंटी हमें देखने लगीं..

मालिकान:- विज्जू बीटा मल्टी चीख क्यों..

विजय:- पता नहीं मालिकान, मैं तो भाभी की छूट पर अपना लुंड hi रगड़ रहा हों..

bhabhi:-(rote हुए मालिकान से) विज्जू ने मेरी छूट में अपना मोटा घोड़े जैसा लुंड डाल दिया है दीदी.. मुझे बताया भी नहीं... कितना ज़ालिम है ना हमारा विज्जू...

मालिकान ने भाभी की बात सुनी तो झट से उठ कर मेरे पास आई और मेरे लुंड को देखने लगी.. जो भाभी की छूट में घुसा हुआ था...

मालिकान:- विज्जू तुमने तो सच में hi दाल दिया है...

विजय:- क्या दाल दिया है मालिकान..

मालिकान:- वही जो है तेरे पास.... मालिकान की छूट ने पानी छोड़ा तो फिरसे शरीफ बन्न गई थीं..

विजय:- कुछ देर पहले पद्मा आंटी से आप क्या कह रही थीं.... मैंने अपना लुंड हिलाया नै था, जितना भाभी की छूट में गया था, उल्टा hi रहने दिया..

मालिकान:- (हैरानगी से) मैं क्या कह रही थी पद्मा से.. कुछ भी तो नहीं कहा मैंने... तुमने क्या सुन लिया विज्जू बीटा............... भाभी अभी भी आंसू बहा रही थी....

मैंने एक हाथ से मालिकान के एक निप्पल को पकड़ कर मरोर दिया..

vijay:-jabb आपकी छूट पानी छोड़ने वाली थी, तो आप कैसे पद्मा आंटी को कुटिया कह रही थीं.. और तीनो जब एक दूसरे की छूट में मोहन घुसती हाँ तो क्या तब्ब आप तीनो मेरी रंडी बनने की बातें करने लगती हाँ.

मालिकान को एक झटका लगा मेरी बात सुनकर...

malikan:-mmmm.. मई ऐसा बोली क्या..

मैंने पद्मा आंटी को देखा वो मुझे देख रही थीं.. जब मैंने देखा तो अपनी नज़रें फेर लें.. ......... मैंने भाभी की छूट में अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा और फिरसे एक करारा शॉट मार दिया...

भाभी एक बार फिरसे चीख पड़ी..

भाभी:- विज्जउ मुझे मज़ा दे रहा है या ...

विजय:- भाभी आप सबब का फवौरीते hi तो है मेरा लुंड.. वही तो आपकी छूट में डाला है.. देखो कितनी जल्दी आपका नंबर लगा दिया मैंने.. अब्ब मालिकान और पद्मा आंटी से बोलो जो पहले ये दोनों बोल रही थीं..

bhabhi:-(padma से) रंडी तू hi कुछ बोलदे, वर्ण विज्जू मेरी छूट का हशर करदे गए.....

padma:-(chehra साइड में करते हुए) हाँ विज्जू मल्टी सही बोल रही है.. हमें छूट की गर्मी ने कुछ ज़यादा hi बेचैन किया हुआ है.. हम ऐसे hi गन्दी गन्दी बातें करते हाँ.. पता नहीं तुम्हारे साथ कैसे रहेगी हम तीनो... पर तुमने जो पूछा है वो सबब सच है..

मैंने अपने लुंड को प्यार से बहार निकला और प्यार से hi फिर भाभी की छूट में दाल दिया.. ऐसे hi मैंने अपना लुंड 4" तक्क भाभी की छूट में 8-10 बार किया.. फिर निकाल कर सीधा खड़ा हो गया..

भाभी ने चैन की सांस ली...

विजय:- मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जैसे आप तीनो के मैं की चाह होगी, मैं वैसे hi तीनो को छोडूंगा....

मैंने पद्मा आंटी को बीएड पार्स उठा कर नीचे खड़ा किया और उनके होंटो को अपने होंटो में लेकर किश करने लगा.. पद्मा आंटी पहले तो मछलीन. फिर खुद पर काबू पाते हुए मेरा किश में साथ देने लगीं.. मैं पद्मा आंटी को किश करते हुए उनके बूब्स भी कस कस के दबाने लगा...

कुछ देर पद्मा आंटी को भी अपना प्यार दिया, फिर बाथरूम में घुस कर अपने लुंड को अच्छे से धोया.. लुंड को फिरसे छुपा कर बहार आ गया..

मैं अब्ब चलता हों, बहुत देर हो गई है.... बाकी का टाइम निकाल कर बहुत प्यार से और अच्छे से करूँगा...

तीनो की hi आँखों का रंग अब्ब बदल चूका था.. तीनो hi सालों से जिस की तमन्ना कर रही थी.. वो उन्हें अब्ब जल्द hi मिलता दिखने लगा था... उनके दिल अंदर से झूमने लगे थे.. जिस वजा से उनके चेहरे चमक रहे थे... मालिकान अपने नंगे दूध लिए मुझे प्यार से देख रही थीं.. और भाभी अपनी फटी हुई शलवार लिए मुझे निहार रही थी.. उनकी छूट में कुछ दर्द हुआ था.. तो उनकी दोनों पेअर कुछ खुले उहे थे..

इसी दर्द के लिए तो वो तड़प रही थीं.. पद्मा आंटी की भी आँखों में आशा की डीप जल उठे थे..... मैं तीनो को bye बोल कर रूम से निकल गया..


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पैलेस के पार्क वाली लाइट्स मैंने बंद करवा दी थीं.. जहाँ मई इस वक़्त लेता हुआ था, वहां अँधेरा था.. दूर से जल रही लाइट्स की मद्धम मद्धम रौशनी इस तरफ आ रही थी..

डिनर का टाइम अभी नहीं हुआ था... पैलेस के पार्क में मैं इस वक़्त माँ क साथ ग्रास पर लेता हुआ था..

हम दोनों hi अपना एक एक बाज़ो को फोल्ड करके अपने सरों को अपनी हथेलियों पर टिकाये हुए एक दूसरे की आँखों में गम थे... यहाँ ए हुए हमें अभी कुछ hi देर हुई थी.. और आते hi हम माँ बीटा ग्रास पर लेते हुए एक दूसरे की आँखों में गुम्म हो गए थे..

प्यार हो, बेशुमार भी हो, तो अँधेरा में भी आँखों की गहराई देखि जा सकती है, हलकी हलकी रौशनी में हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों में उतर कर गहराई को नाप रहे थे.. हम दोनों के हाथ एक दूसरे की कमर पर थे.. और हम दोनों hi एक दूसरे की कमर को धीरे धीरे प्यार से सेहला रहे थे....

माँ ने आज साड़ी पहनी हुई थी.. इस वक़्त माँ की कमर मेरे हाथ के नीचे नंगी थी.. माँ की गरम और चमकदार कमर पर मेरा हाथ मज़े से हरकत कर रहा था. माँ की मुलायम कमर मेरे हाथ क नीचे किसी मछली की तरह के जैसे लग रही थी. हाथ गिरते हुए मुझे बहुत मज़ा मिल रहा था... और माँ ने भी मेरी श्रित के अंदर हाथ दाल कर मेरे नंगे बदन पर अपने नमो मुलायम हाथ को फेरा रही थी... माँ की उँगलियाँ मेरी कमर पर चलते हुए मुझे और भी सुरूर दे रही थी..

हम दोनों hi इस वक़्त सुरूर की इन्तहा में पोहचने हुए थे.. एक माँ माँ लम्स. दूसरा मेहबूब के वजूद का लम्स.. सालों की तड़प.. फिर एक दूसरे को पा के लेने के बाद की फीलिंग्स...

ठंडी ठंडी हवा... मौसम जितना बहार से सुहाना था, हमारे अंदर का मौसम बहार के मौसम से हज़ार गुना बढ़कर सुहाना था.. धीरे धीरे हम एक दूसरे

की आँखों में उतारते हुए एक दूसरे के होंटो की और बढ़ने लगे.. और फिर कुछ hi पलों में हमारे होंटो एक दूसरे से जा मिले....

जैसे hi हमारे होंठ आपस में मिले.. चरों और शहनाइयां सी गूँज उठीं..


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थैंक्स..!!

अँधेरे में किसे दिख क विज्जू और श्वेता किश कर रहे हनन... किश करने से अगर अंदर का मौसम बदलता है.. तो बहार का भी बदलता हुआ लगने लगता है.. ये शहनाइयां भी कुछ वैसी hi थीं.. शादी भी जल्द hi हो जायेगी.. सुकून से और कुछ अच्छे से करेगा विज्जू अपनी माँ से शादी .. स्पेशल करेगा तो गांड भी मिलेगी श्वेता की..

मालिकना भाभी और पद्मा ने भी अपने अंदर का हाल विज्जू को बता दिया.. कुछ तो विज्जू जानता था.. पर अंदर की साड़ी बातें वो नहीं जानता था.. अब्ब विज्जू जान गया है तो सभी को पुरे मैं से खुशियां देगा.. जैसे किसी का मैं हुआ उसे वैसे hi छोड़ेगा,.
 
थैंक्स..!!

तीनो की जोड़ी बानी हुई है.. मालिकान के रूम में भाभी और पद्मा का आना ाचा हुआ .. मालिकान के साथ विजू ने पद्मा आंटी की भी झिझक ख़तम करदी.. तीनो एक टीम हाँ तो तीनो जब्ब विज्जू के सामने hi सबब करने लगीं तो अंदर की सारी झिझक ख़तम हो गई... भाभी की छूट में थोड़ा सा लुंड घुसा कर विज्जू ने भाभी को नयी दुन्या के शामिल होने की खुशखबरी सुना दी.. अब्ब भाभी भी कहसह और उनकी छूट भी खुश.. गांड तो उनकी खूब रोयेगी जब खुलेगी....

विज्जू के मैं में माँ के साथ कुछ अलग से टाइम स्पेंड करने का विचार आया तो विज्जू माँ को लिए पार्क में जा घुसा... दोनों मस्त माहौल का भरपूर मज़ा लेने लगे.. किश करते hi उनके अंदर और बहार घंटियां सी बज उठी.. ये माहौल उनके अंदर का था, जो उन्हें बहार भी महसूस होने लगा..
 


अपडेट ::: 94


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मई माँ क साथ पैलेस के पार्क में था, हम दोनों एक दूसरे की आँखों में गुम्म थे, और एक दूसरे की कमर को अपने एक हाथ से सेहला रहे थे.. धीरे धीरे करके हमारे होंठ आपस में मिले.. तो पुरे माहौल में hi गुनगुनाहट होने लगी..

माँ और मेरे प्यार को देखकर चाँद की मद्धम रौशनी भी ख़ुशी मानाने लगी.. और छान छान करती हुई हमारे आस पास बिखरने लगी.. पैलेस का खामोश माहौल ऐसा लगने लगा, जैसे चरों और चिह्नाइयाँ सी बजने लगी हों...

माँ से रोमांटिक माहौल में मई आज पहली बार मिला था.. ऐसा समा पहले कभी नहीं बना था..

आस पास की एक चीज़ हमारे प्यार भरे मिलान को देखते हुए.. हमारे प्यार की गहराई को समझते हुए ख़ुशी से झूमने लगी थी..

मेरा मैं में ये सबब आया तो मई माँ को लेकर पार्क में आ गया था.. और आस पास की सभी लाइट्स को बंद करवा दिया था... मुझे आईडिया तो था, क माँ से ऐसे माहौल में टाइम स्पेंड करके मुझे बहुत मज़ा आने वाला है, पारर जितना आ रहा था, वो बताने लायक नहीं था.. इन्तेहाओं को भी कभी कोई बयां कर सका है जो मई बयां करूँगा... मई तो बास इस सुरूर को महसूस hi कर प् रहा tha..ise जांचने का पैमाना मेरे पास नहीं था..

हम दोनों hi धीरे धीर एक दूसरे के होंटो को चूम रहे थे.. माँ बहुत सलौली सलौली मेरे ऊपर वाले होंठ को अपने होंटो में लिए पीने लगी.. कुछ देर ऐसे hi हम एक दूसरे को किश करते रहे..

फिर माँ ने मुझे ग्रास पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गई.. माँ अपनी नाक से मेरी नाक को टकराने लगी.. माँ मेरी आँखों में देखते हुए अपने सर्र को लेफ्ट राइट घूमने लगी... माँ की नाक मेरी नाक से टकराती तो माँ की आँखों की चमक कुछ और भी बढ़ जाती..

माँ मेरी नाक से नाक रगड़ती रही तो मई बेच बीच में कभी कभी माँ के होंटो पर किश कर दिया करता... माहौल कुछ और भी रंगीन होने लगा...

माँ मेरी आँखों में देखती हुई मंद मंद मुस्कुराने लगी.. फिर माँ ने अपनी जीब निकल कर मेरी आँखों को चाटना शुरू कर दिया... मेरी एक आंख बंद हुई तो में मैं दूसरी आंख से माँ को देखने लगा.. माँ ने दूसरी आंख को चेतना शुरू किया तो मई पहली आंख से माँ को देखने लगा...

माँ ये सबब करते हुए बहुत खुश दिख रही थी.. माँ को मेरे साथ ये सबब करना बहुत अच्छा लग रहा था.. कुछ देर माँ मेरी आँखों को चाट टी रही, फिर माँ कुछ ऊपर हुई और मेरे मोहन के ऊपर अपने क्लीवेज को रख दिया.. ज़यादा ज़ोर नहीं दिया... माँ क क्लीवेज से मधुर खुशबु मेरे नाक के नथनों से टकराई तो मेरी अंदर आत्मा तक मज़े की एक लेहेर सी दौड़ गई.. और हवाओ में सफर करने लगा.

माँ ने कोई परफ्यूम नहीं लगाया हुआ था.. माँ के शरीर की ओरिजिनल स्मेल मेरे अंदर अंतर्ने लगी, तो मई खुद पर माँ के शरीर की खुशबु से होने वाले नशे में खोने से नहीं रोक पाया..

माँ यही नहीं रुकी, माँ ने धीरे धीरे करके मेरे मोहन पर अपने क्लीवेज को लेफ्ट राइट करना शुरू कर दिया..

मैंने भी अपनी जीब निकल कर तेज़ सांस लेते हुए माँ की हीरों से भी ज़यादा दमकते हुए, फॉलोऑन से भी ज़यादा महकते हुए बदन को चाटना और सूचना शुरू कर दिया...

सुरूर की इन्तहा का एक और सिलसिला शुरू हुआ, जो हमें नयी नयी दुन्या दिखने लगा.. कुछ देर माँ ने अपने क्लीवेज का को मेरे मोहन पर रख कर अपनी खुशबु मेरे अंडर उतारी.. फिर माँ कुछ नीचे हुई और फिरसे मेरे होंटो को अपने होंटो में ले लिया.. इसबार फिरसे माँ मेरे होंटो को प्रेम से पीने लगी..

एक बार फिरसे माँ क होंटो का अमृत मेरे अंदर उतरने लगा.. कुछ देर हम एक दूसरे के होंटो की शराब को पीते रहे.. फिर माँ ने अपना मोहन खोला और अपनी जीब निकाल कर मेरे मोहन में दाखिल करने लगी.. मैंने भी अपना मोहन खोल कर माँ की जीब को अपने मोहन में घुसने की परमिशन देगी... मई भी तो माँ के प्यार को, माँ के अंदाज़ को, माँ के एक एक अंग को पूरी तरह से फील करना चाहता था.. और जैसा समा बन्न गया था.. जितना मज़ा माँ ले रही थी, मुझे भी तो उतना hi मज़ा लेना था.. मई क्यों इस सबब से पीछे रहता..

माँ की जीब मेरे खुले मोहन में अंदर तक जा पोहंची, तो माँ ने अपनी जीब को मेरे टालो पर चलना चूरू कर दिया... क्या मज़ा था, माँ की जीब के सुपर्ष का, माँ धीरे धीरे मेरे मोहन में अपनी जीब घूमती रही.. फिर माँ ने अपनी जीब मेरे जीब से लड़ना शुरू कर दी.. माँ वही नहीं रुकी माँ ने मेरे पुरे मोहन के अंदर अपनी जीब को चलन शुरू कर दिया.. कुछ देर बाद मैंने अपना मोहन बंद किया और माँ की जीब को चूसने लगा.. माँ को को बहुत मज़ा आ रहा था.. कुछ देर मई माँ की जीब को चूसता था, माँ ने अपनी जेब मेरे मोहन से निकली तो मैंने अपनी जीब माँ के मोहन में दाल दी.. इस बार माँ मेरी आँखों में देखती हुई मेरी जीब पर लगा हुआ अमृत पीने लगी.. कुछ देर हम इसी में गुम्म रहे.. फिर हम अलग हो गए..

माँ ने कुछ देर अपनी ऑंखें बंद करके जहीर गहरी साँसे लीं,

माँ ने अपनी ऑंखें खोली और फिरसे मेरी आँखों में उअतरने की कोशिश करने लगीं.. मई माँ की आँखों में उतरने लगा.....

माँ:- थैंक्स विज्जू बीटा, आज की उस खूबसूरत रात को मेरी लाइफ में लाने क लिए.. इतने खूबसूरत पल भी मेरी ज़िन्दगी में आएंगे मैंने कभी सोचा भी नहीं था..

विज्जू बीटा तुम्हारे प्यार के सारे hi रंग मुझे बहुत ज़यादा पसनद आ रहे हाँ.. मेरी नस नस में तेरा प्यार उतरता जा रहा है.. विज्जू बीटा मेरे अंदर का दर्द तो कबका जा चूका है, पर बुरी यादें नहीं जल्दी जाने वाली..

तुम्हारा इस तरह से प्यार करना मुझे बहुत अच्छी यादें दे रहा है, अब्ब जब जब मुझे गुज़रा समय याद आएगा तो मुझे ये पल भी याद आएंगे, और फिर मुझे अपनी बुरी यादों से निकलने में देर नहीं लगेगी... (माँ ने फिरसे मेरे होंटो अच्छे से चूसा) एक बार फिरसे थैंक्स विज्जू बीटा मेरी लाइफ में आने क लिए, मुझे वो सबब देने क लिए, जिसकी कल्पना कभी मैंने की थी..

मैंने माँ को पलटा, माँ क ऊपर आया.. माँ क चेहरे पर अपने दोनों हाथों की उँगलियाँ चलने लगा, फिर मई भी माँ के चेहरे को चाटने और चूमने लगा. अंत में माँ के होंटो पर किश करते हुए मई माँ से बोलने लगा..

विजय:- माँ मुझे थैंक्स क्यों बोलती हो, मई तो आपके वजूद का एक हिस्सा हो ना. आप का मुझपर पूरा पूरा हक़ है, जो मई न भी करना चहु आप मुझे वो भी करने पर मजबूर कर सकती हाँ.. मई भी आपसे बेंहटा मोहब्बत करता हों. मुझे भी आपके साथ बिताये हुए पल हमेशा याद रहेंगे.. मेरी ज़िन्दगी भी तो आपके hi दुम्म से है, आपकी खुशियों से जुडी हुई हाँ मेरी साँसे.. मई अब्ब कभी भी आपको उदास नहीं देखना चाहता...

माँ ने मुझे पलटा और मेरे ऊपर आ कर मेरे होंटो पर टूट पड़ी.. इसबार ये सबब कुछ अलग था, माँ की इसबार की किश ने मेरे लुंड को खड़ा करना शुरू कर दिया था..

माँ मुझे किश करते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट को भी रगड़ने लगी.. माँ मेरे होंटो पर वाइल्ड किश करते हुए अपनी छूट को मेरे लुंड कर रगड़ रही थी, कुछ देर माँ होंटो और छूट के मज़े लेती रही, फिर माँ रुक गई..

माँ कुछ देर तेज़ तेज़ सांस लेती रही. फिर माँ नार्मल हुई तो..

माँ:- विज्जू बीटा... थैंक्स जो तुमने मुझे मेरी शुशी से मिला दिया.. उसके लिए मेरा दिल बहुत तड़प रहा था.. पता हिअ विज्जू बीटा शुशी का नाम भी मैंने hi रखा था.. उसकी सूरत भी मुझसे बहुत मिलती है, वो भी मुझसे बहुत प्यार करती है, पहले भी जब हम मिला करते थे.. तो एक दूसरे से दूर जाने का मैं नहीं होता था.. उसे देख कर मुझे बहुत सुकून मिला है विज्जू बीटा, जैसे तुम सबब मेरे वजूद का हिस्सा हो, वैसे hi शुशी भी मेरे लिए बोहत ख़ास है, तुम सबब क आने से पहले शुशी hi मेरी जान थी.. पारर वक़्त के बेरहम थपेड़ों ने एक दसूरे से दूर कर दिया था.. पारर अब्ब मैं उसे फिरसे पा कर बहुत खुश हों..

विजय:- माँ दीदी से कुछ पूछा क्या आपने..

माँ:- नहीं विज्जू बीटा अभी नहीं पूछा.. मई आज की खुशियों को ख़तम नहीं होने देना चाहती थी. मुझे अंदाज़ा है, मेरे कोठे पर पोहचने क बाद बहुत कुछ हुआ होगा.. वो सबब सहन करना मेरे लिए मुमकिन नहीं होगा.. एक बार फिरसे में वो सबब जान कर मैं उसी दर्द में चली जाऊँगी, उस समय मुझपर जो बीता था, वो सबब लौट आएगा.. विज्जउ बीटा बहुत दर्द झेला है मैंने.. बड़ी तकलीफ दी गई है तेरी माँ को... बोहत धुत्कार भी मिली है मुझे... माँ क शिव कोई नहीं था मेरे दर्द को बांटने वाला, पर तब्ब माँ को भी मेरे लिए कुछ करने नहीं दिया गया... शुशी को देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था.... माँ के बारे में जान्ने क लिए मेरा दिल बहुत तड़प रहा था.. पारर मुझे बहुत अच्छे से पता है, सबब जान कर कितना दर्द एक बार फिरसे मुझे मिलने वाला है.. इसलिए खुद पर जबर करते हुए कुछ भी नहीं पूछा मैंने.. कल पूछोगी उससे..

विजय:- माँ बहुत दर्द सहा है ना aapne.....(maa नम्म आँखों से हाँ में सर्र हिलने लगी) माँ मई सारे दर्द आपके दूर करदूंगा, मई हूँ ना आपके पास, आपके दिल में, आपकी नस नस में आपका दर्द बांटने क लिए..

माँ:- वही तो सोचा है मायने विज्जू बीटा.. एक तुम hi तो हो जिसके होने से मेरा दर्द कम् हो जाता है,, तुम्हारा प्यार पा कर मेरा दर्द कम् होता है, पारर गुज़रा समय भी तो बार बार सामने आता रहता है ना.. बुरी यादें कब्ब जान छोड़ती हाँ.. अभी खुश हुई तो कुछ hi पल में कुछ याद आया तो फिरसे दर्द शुरू.. शुशी का फिरसे मेरी लाइफ में आना, जहाँ मेरे लिए बेशुमार खुशियां लाया है, वही दर्द के भयंकर तूफ़ान भी तो साथ में लाया है ना.. अब्ब शुशी से सबब जानोगी तो वही सबब फिरसे याद आने लगेगा.. माँ कैसे होगी..

मई भी तो माँ हों ना, अब्ब मैं भी जान गई हों ना क एक माँ का दर्द क्या होता है.. जैसे मई तुम्हरे लिए सालों तक तदपि हों, वो भी तो मेरे लिए उतना hi तदपि होगी.. तू तो मुझे मिल गया है, पारर मैं माँ से नहीं मिल पाई हों..

विज्जू मुझे इतना प्यार दे दो क मैं वो सारा दर्द सहन करने की शक्ति पा सकूँ. इतनी खूबसूरत यादें मुझे दे दो, क बुरी यादों को जाने में समय न लगे... मई अब्ब कभी भी दर्द में नहीं रहना चाहती... मई हर दुम्म अपने विज्जू के प्यार में रहना चाहती हों.. ये ज़िन्दगी इतनी भी बुरी नहीं है, दर्द दिए हाँ, बेहिसाब दिए हाँ, पारर तुम भी तो हो इस ज़िन्दगी में..

मुझे अपनी बाकी की बची हुई ज़िन्दगी में हर पल खुशियां hi खुशियां सुकून hi सुकून चाहिए विज्जू beta..jitne मेरे आस पास हाँ, मुझे सभी क साथ एक खूबसूरत ज़िन्दगी बितानी है विज्जू बीटा.. मई ये सबब तुम्हारे बिना नहीं कर सकती.. तुम्हारे प्यार hi मुझे ऐसी लाइफ दे सकता है विज्जू बीटा...

माँ की आँखों से आंसू बहने लगे.. माँ की सिसकियाँ शुरू हुई तो आस पास किसी और की भी सिसकियों की आवाज़ें आणि शुरू हो गईं.. मैंने उधर देखा तो मेरी तीनो hi तितलियाँ कुछ फासले पर लेती हुई थीं, वो कब्ब आएं मुझे नहीं पता, पारर माँ की बातें सुनकर वो भी आंसू बहाने लगी थीं..

फिर तीनो hi आ कर माँ और मुझसे लिपट गईं... और आंसू बहाने लगीं..

तीनो hi माँ को कही न कही चूम रही थीं..

मई भी सोचने लगा क माँ का दर्द बहुत बड़ा है, माँ को कैसे इस दर्द से हमेशा क लिए निकला जाए.. सभी से बदला लेकर भी मई माँ को बुरी यादों से हमेशा क लिए नहीं निकाल सकता था...

माँ को सिर्फ हर दुम्म खुशियां देकर, माँ के दिल की हर्र छह को पूरा करके hi मैं माँ को हमेशा क लिए खुश रख सकता था...

माँ की चाह थी, मेरा उनके साथ हमेशा रहना, और मेरा प्यार पाते रहना...

माँ के दुशमनो से बदला लेना और माँ को उनकी माँ से मिलाना.. माँ पास हो तो सबब दर्द बैठत जाता है, माँ का अंचल hi दर्द को कम् कर सकता है... माँ को जो उनके दिल में बास्ते हाँ, वो सभी को लौटा कर देने होंगे...

माँ की एक बड़ी चाड मेरी पत्नी बनने की भी थी.. मुझे कैसे भी करके माँ से फ़ौरन शादी करके माँ की मांग में अपने नाम का सिन्दूर और गले इ मंगलसूत्र डालना होगा.. इन दोनों चीज़ों से क औरत को बड़ी शक्ति मिलती है..

माँ के सारे दर्द hi सिन्दूर और मंगलसूत्र के मिल जाने की ख़ुशी में घुल जायेंगे..

हम चरों hi माँ को ढेर सारा प्यार दे रहे थे.. दर्द ख़तम नहीं होगा, फोरि तौर पर तो बहुत पीछे जा सकता था, और हम चरों hi माँ के दर्द को कम् करने लगे..

माँ से शादी मुझे इस हिसाब से करनी थी, क माँ क दिल में कोई खलिश न रहे.

जैसी माँ की चाह होगी मई माँ से वैसे hi शादी करूँगा.. कल hi कुछ न कुछ करना पड़ेगा..

माँ को ढेरों खुशियां देना hi तो एक बेटे का काम था.. माँ की शुशी को माँ खुद hi सबब समझा देगी, वो माँ की टेंशन थी, माँ की मौसी भी अब्ब जल्द hi आने वाली थी.. आने वाले समय में माँ को उनकी माँ भी मिलने वाली थी, उन्हें कितना गलत लगेगा मेरा माँ से शादी करना.....

उन्हें ये सबब अच्छा लगे या बुरा..

ये सोचना मेरा काम नहीं था...

ये पैलेस हमारा था.. ये लाइफ हमारी थी.. और हमें हमारी लाइफ अपनी मर्ज़ी से जीनी थी.. अगर किसी को ऐतराज़ हुआ तो वो अपनी लाइफ अपनी मर्ज़ी से जिए... जिस को मेरी माँ से शादी पर ऐतराज़ होगा.. उसे इस पैलेस से जाना होगा...

ये पैलेस मेरा था.. और उन सबब का था.. जो मेरे और मेरी माँ और बहनो क थे.

बाकियों क लिए इस पैलेस में कोई जगा नहीं थी..

चाहे वो कोई भी हो....




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दोनों गैंग्स के लीडर्स ख़तम हो चुके थे.. महेंद्र सिंह के हाथों और पैरों में कई गोलियां लगी थी, जिस वजा से वो बेहोश हो गया था.. विज्जू ने महेंद्र सिंह क हाथो और पैरों क जोड़ गोलियों के अलग कर दिए थे..

महेंद्र सिंह का ट्रीटमेंट शुरू हुआ तो कम साब भी आ गए थे.. महेंद्र की हालत जान क कम ने कम को ऑर्डर्स दे दिए थे, क जल्द hi उससे जो इन्फो मिल सकती है, वो लेकर महेंद्र सिंह को शूट कर दिया.

कम भी महेंद्र को और जीने नहीं देना चाहता था.. महेंद्र के लिए अपनी मौत को आसान बनाने क लिए सबब कुछ बकना hi पड़ेगा.. वर्ण चैन से मरणसे भी नहीं दिया जाएगा....

वो कुछ करने लायक तो रहा हो नहीं था.. जैसी उसकी और उनके गैंग की हालत हो चुकी थी.. कोई भी महेंद्र सिंह की सपोर्ट क लिए आगे नई बढ़ा था... एक टूटे फूटे गैंग का लुंगदा लूला बॉस अब्ब किसी क किश काम आने वाला था.. सभी ने महेंद्र सिंह से अपने रिलेशन ख़तम कर लिए थे..

अलोक गैंग के एरिया में मौजूद गुंडों के खिलाफ भी एक ग्रैंड ऑपरेशन शुरू हुआ.

कुछ hi घंटों में अलोक गैंग का भी सफाया क्र दिया गया..

महेंद्र गैंग के 3 बड़े अड्डे तो विज्जू ने पहले से hi ख़तम कर दिए the..baaki बचे हुए एक बड़े अड्डे को भी पुलिस में अंडर ले लिया..

दोनों गैंग्स क खिलाफ होने वाली जुंग में इस बार कम खुद भी शामिल थे.. तो कम ने दोनों गैंग्स क सारे अड्डे विज्जू को देने का फैसला ले लिया... कम ने रंजीत से कहा क विज्जू आगे भी कुछ ऐसा hi करता रहे.. कोई भी डिपार्टमेंट खुल कर ऐसे घटिया लोगों के खिलाफ नहीं जा सकता.. पोलिटिकल पावर की वजा से सभी गैंग्स बहुत स्ट्रांग होते हाँ.. ऐसा hi तरीका कार हम सबब क लिए ठीक रहेगा. ..

कम की बात सुनकर रणजीत ने कह दिए क विज्जू खुद की एक गैंग बनाने वाला है, तो कम ने ख़ुशी ख़ुशी विज्जू की भरपूर सपोर्ट का एलान कर दिया. वो पार्टी में रहे या न रहे, वो हमेशा hi गंदगी को ख़तम करने में उनके साथ है..

दोनों गैंग्स से मिली बालक मनी का 70% विज्जू गैंग्स क लिए साइड में कर लिया गया.

अब्ब विज्जू गैंग क पास पैसा कभी ख़तम नहीं होने वाला था.. और तीनो गैंग्स को ख़तम करके के तीनो गैंग्स की साड़ी प्रोपोएर्टय भी अब्ब विज्जू गैंग की कस्टडी में आने वाली थी..

विज्जू गैंग को अब्ब गैंग क लिए ईमानदार स्टाफ की ज़रूरत थी.. बाकी का सबब काम तीनो गैंग्स के ख़तम होने से हो चूका था..

जल्द hi अब्ब विज्जू गैंग दिल्ली पर राज करने वाली थी..

शाम क बाद राजा पार्टी और गुरनाम विज्जू के कहने पे महेंद्र गैंग और अलोक गैंग क एरिया में घूम फिर रहे थे. . और वहां से मिलने वाली सभी इन्फो को कलेक्ट कर रहे थे..

गुरनाम को रहने क लिए फार्महाउस में जगा दी गई थी, गुरनाम की फॅमिली पैलेस में थी.. और अब्ब तो पुरे दिल्ली में hi रहने क लिए अनगिनत कोठियां, फार्महाउस, बेसेस, होटल्स और भी न जाने क्या कुछ इन सबब को मिल गया था....

गैंग की लाटरी निकल पड़ी थी.. कुछ hi दिनों में अरबो का पैसा कलेक्ट हो गया था.. इतनी प्रॉपर्टी मिल गई थी, जिसका हिसाब hi नहीं था... अभी तो सब को प्रॉपर्टी की डिटेल hi कलेक्ट करने में बोहतु समय लगने वाला था..

अलोक नाथ की फॅमिली अब्ब दिल्ली में रह नहीं सकती थी.. जब्ब उन्हें अलोक का पता चला, तो वो बहुत रोये, पारर वो ये भी अच्छे से जानते थे.. क यहाँ रुकना अब्ब खतरे से खली नहीं है, वर्ण पब्लिक hi उन्हें मार देगी......

गुरनाम सिंह राजा पार्टी के साथ दोनों गैंग्स क एरिया में घूम रहे थे.... अब्ब कुछ दिनों क लिए ये सभी इन दोनों एरिया में hi रहने वाले थे.. अब्ब गैंग्स में शामिल गुरनाम सिंह क मश्वरे भी काम में लाये का रहे थे..

गुरनाम सिंह क अंदर एक जोश सा भर गया था.. उसने जो कभी सोचा भी नहीं था, बास एक कल्पना की थी, उसके वो सभी खवाब अब्ब पुरे होने लगे थे.. गुरनाम के अंदर का टैलेंट उभर कर बहार आने लगा.. और राजा पार्टी भी गुरनाम के साथ मिलकर दोनों गैंग्स क अड्डों पर चक्कर लगते हुए गुरनाम सिंह को फॉलो कर रहे थे...

गुरनाम से बेहतर दिल्ली को कोण जान सकता था... गुरनाम से बेहतर क्रिमिनल्स के बारे में किसे सूज बूज हो सकती थी.. गुरनाम जब तक पुलिस डिपार्टमेंट में रहा था.. उसका एक नाम था, उसके काम का एक अंदाज़ था..

एक विज्जू क्या कम् था, दिल्ली के गैंगस्टर क लिए जो गुरनाम भी इनमे शामिल हो गया था... गुरनाम क अंदर भी आग कुछ कम् नहीं थी...

दिल्ली शहर में घुमते हुए गुरनाम अपनी लाइफ के बारे में भी सभी को बता रहा था.. राजा बड़े गौरसे उसकी बातें सुन रहा था, वो अचानक से hi बोलै..

राजा:- तुम अपने दोस्त का कुछ ज़यादा hi ज़िक्र नहीं कर रहे गुरनाम, वो है वो, कहाँ है वो.. जिस तरह से तुम उसका ज़िक्र कर रहे हो.. कुछ तो ख़ास बात है उसमे..

गुरनाम:- संदीप सिंह निर्वाण नाम है उसका.. कभी वो भी मेरी hi तरह से पुलिस डिपार्टमेंट में था.. जैसा टैलेंट उसमे था, वो पुलिस के लिए सही भी नहीं था, वो तो किसी इंटेलेजन्स डिपार्टमेंट में होना चाहिए था.. ऐसा था वो.. पारर जब्ब से मई जेल से आया हों, वो मुझे कही दिखा नहीं.. हमारे ठाणे अलग अलग थे.. मई इक साइड में था तो वो दूसरी साइड में... बोहत याराना था हमारा एक दूसरे से.. मैंने उसे ढूंढा भी बहुत पर मुझे वो नहीं मिला.. अगर वो मुझे मिल जाए तो मैं उसे भी अपने साथ शामिल कर लूंगा..

जिस मक़सद को सामने रखते हुए ये गैंग कड़ी की जा रही है.. वो इस सबब क लिए बेस्ट है..

उदय:- तो हमें उसकी साड़ी डिटेल दो, हम उसे ढूंढ़ते हाँ.. जल्द hi वो कही न कही से मिल जाएगा.. अब्ब तो तुम्हे फिरसे पावर और भरपूर सुप्परत भी मिल गई है.. हम साथ मिलकर उसे ढूंढ़ते हाँ.. मुझे यकीन है वो जल्द hi हमें मिल जाएगा..





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सिद्धार्त और उसके फ्रेंड्स की वीडियो ऐसे वायरल हुई जैसे कोई वायरस फैलता है..

कुछ hi पलों में पुरे वल्र्ड में उस वीडियो को हर न्यूज़ चैनल कर दिखाया जाने लगा..

वीडियो क नीचे रिटेन मस्सगे भी था... जिसमे लड़कियों पर हुए रपे की डिटेल दी गई थी..

उसका रपे करने वाले किस सिटी के, किस एरिया के, किस गैंग के हाँ ये भी लिखा हुआ था..

जिसे शक हो वो दिल्ली में किसी से भी पूछ सकता है.. दिल्ली में तो सभी जानते hi थे.. अब्ब सबब hi जान गए थे...

हर मुल्क में इस वीडियो को अलग अलग विचार के साथ दिखाया जाने लगा.. अक्सर इसे गैर इंसानी एक्ट करार देने लगे..

जो लोग किसी क ज़ुल्म का शिकार हुए थे.. वो भी सोशल मीडिया पर अपने विचार देने लगे...

न्यूज़ में अक्सर इसे गलत कहा गया.. तो सोशल मीडिया पर इस सबब की भरपूर हमायत की गई.......

अलोक नाथ, महेंद्र, शंकर जैसे लोगों क लिए ये सबब दरिंदगी थी.. वो खुद ऐसा करें तो अच्छा है, कोई और करे तो दरिंदगी...

आम लोग इस सबब से बहुत खुश थे..

अलोक नाथ की फॅमिली भी सबब देख चुकी थी.. अलोक की माँ सबब देखते hi चल बसी, उसकी एक बेहेन पागल हो गई, तो दूसरी ने अपना सर्र दीवार से टकरा टकरा कर खुद को लहुलहान कर लिया था..

अलोक का हरामी पिता ये सबब देख कर परलिज़्ड हो गया....

दन्न और उसके फ्रेंड्स एक बार फिरसे सर्र जोड़ कर बैठ गए.... वीडियो वायरल होने से पहले दन्न के फ्रेंड्स दिल्ली क लिए निकलने वाले थे.. वो एक बार फिरसे अपनी तैयारी को साइड में रखते हुए सर्र जोड़ कर बैठ गए थे..

दिल्ली जाना उनके लिए इतना खतरनाक होने वाला था.. वो सोच भी नहीं सकते थे.. कहाँ वो दिल्ली में धंदा ज़माने क लिए सर गरम होने वाले थे..

वीडियो के वायरल होने से एक बार फिरसे सबब सोचो में बैठे गुम्म थे... अब्ब उन्हें एक बार फिरसे दिल्ली में घुसने का प्लान बदलना पड़ेगा.. अलोक क भाई के साथ होने वाली दरिंदगी को देख कर दन्न और उसके फ्रेंड्स के अंडरवियर उनकी गांड से निकलने वाली हवा को नहीं रोक पा रहे थे..

ऐसा तो वो भी कभी किसी क साथ नहीं कर पाए थे.. इतना स्टैमिना तो उनमे भी नहीं था... ऐसी दरिंदगी का मुज़ाहिरा करना उनके बास से बहार था..

वो सभी खुद को उन्ही लाशों में देखने लगे.. अगर दिल्ली में कही उस दरिंदे के हाथ लगे तो अगली वीडियो कही उनकी न बन्न जाए......

कुछ ऐसा hi सबब क मैं में था..




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सॉरी फ्रैंड्स कीच दिनों से मेरे राइट हैंड में कुछ प्रॉब्लम शुरू हुई थी.. जो अचानक से hi बढ़ गई थी, अपडेट लिखने क लिए अच्छा ख़ासा टाइम चाहिए था, तो लास्ट 1 वीक से अपने बाज़ो की तकलीफ को नज़र अंदाज़ करते हुए स्टोरीज लिखत रहा.. अचानक से hi दर्द बढ़ गया है, जैसे hi कुछ आराम मिलता है, मई आप सबब क लिए फिरसे हाज़िर हों..

एक बात का वडा करता हों ... हिम्मत वाला को 1 महीने में hi कम्पलीट कर दिया जाएगा..
 
थैंक्स डिअर..!!

हिंदुस्तान का असली समरथ जनम ले चूका है, विज्जू के आगे अब्ब किसी की दाल नहीं गलने वाली.... माँ के साथ बीता समय तो मस्त होगा hi, विज्जू और श्वेता और दूसरे के हाँ, और एकदूसरे से बेशुमार प्यार करते हाँ.. जैसा प्यार होगा सन भी वैसा hi होगा, अभी तो विज्जउ बौह्त मसरूफ है जब्ब फ्री होगा तो सभी से खुल कर प्यार करेहगा...

देखते हाँ आने वाले समय में किसकी शादी विज्जू से होती है...
 
थैंक्स..!!

शुशी का आना श्वेता के लिउए खशी का कारण बना है तो दुःख का कारन भी बनेगा, श्वेता को अपनी दर्द भरी यादों से निकलने क लिए विज्जू से मिली प्यार भरी यादें मरहम का काम देंगी, विज्जू अपनी माँ का सही से ख्याल रख रहा है.. जितना श्वेता को ज़रूरत है, विज्जू उससे बढ़कर उसे प्यार दे रहा है.. विज्जू के प्यार की नयी और अनगिनत यादें श्वेता को आने वाले दर्द से लड़ने में मदद देंगी.. विजु ने श्वेता से शादी का फैसला सही किया है, दो दो जवान बच्चो की माँ बन्न गई है अभी तक्क शादी नहीं हुई, श्वेता को शादी की बहुत ज़रूरत है, उसका अंदर का खली पत्र शादी से भर जाएगा..

विजजू को राजा पार्टी के बाद गुरनाम और अब्ब गुरनाम का फ्रेंड्स संदीप मिल रहा है विज्जू लकी है तो उसे दिल्ली आने के बाद एक के एक अच्छे लोग मिल रहे हाँ... गुरनाम गैंग को कड़ी करने में वहुत काम आएगा.. और वैसे भी जब्ब क़ैदी जेल से भगाये जायेंगे तो काम और भी आसान हो जाएगा..

सिद्धार एंड फ्रेंड्स का हाल देखकर एक बार तो दन्न की माँ hi चुद गई है, दिल्ली में इतने खतरनाक लोग भी रहते हाँ वो नहीं जानता था, अब्ब दन्न सोच समझ कर कोई भी स्टेप लेगा,.,. जल्द बाज़ी करेगा तो मरेगा कुत्ते की मौत.......................
 
थैंक्स तो आल रीडर्स....

ज़िन्दगी के साथ साथ प्रोब्लेम्स भी चलती रहती हाँ.. हर गुज़रते समय के साथ कुछ न कुछ इंसान की लाइफ में होता hi रहता है... कभी ख़ुशी, तो कभी ग़म.. कभी दर्द तो कभी रहत...

फिटनेस इश्यूज भी इंसानी लाइफ का एक हिस्सा हाँ.. मेरे साथ भी कुछ ऐसा hi हुआ था.. इसमें मेरी hi एक मिस्टेक थी, माउस उसे के लिए मैंने एक नई काउंटर बनवाया था, उसकी सेटिंग कुछ हट के थी, वैसे तो मेरे लिए वो काउंटर बेस्ट था, पारर मेरे हाथ क लिए डिस्टर्बेंस का सबब बन्न गया...



कबिताल टनल सिंड्रोम का इशू बन्न गया था.. वो तो शुक्र है क मैंने फ़ौरन hi इसे सीरियसली लिया, वर्ण बाद में कुछ खतरनाक भी हो सकता था.

प्रॉपर ठीक होने में तो टाइम लगेगा.. पारर मेजर इशू खतम्म हो रहा है.. काउंटर सेटिंग फिरसे बदल दी गई है..

जल्द hi एक बार फिरसे मैं आप सबब के बीच में होंगे.. टाइपिंग का इशू भी ख़तम हुआ.. तो अब्ब मैंने सोचा है क कुछ उपदटेस एक साथ लिख कर पोस्ट कर डॉन........................................................... जब तक्क इंसान के अंदर सांस है.. तब्ब तक्क इंसान को चैन नहीं है.. मेरे साथ भी कुछ ऐसा hi चक्कर है..

मई HIMMAT-WALA को जल्द से जल्द कम्प्लेटेर कर देना चाहता हों.. कुयं की मुझे एक और स्टोरी शुरू करनी है.. वो शार्ट स्टोरी होगी.. मैं सो स्टोरीज को

कम्पलीट लिस्ट में शामिल करना चाहता हों.. इससे एक काम हो jaayega.k रीडर्स ये समझते हाँ क अक्सर वरिटेरस स्टोरीज को बीच में hi छोड़ कर भाग जाते हाँ.. थे विल आल बे सटिस्फीएड

जल्द hi मिलते हाँ... और स्टोरी को कम्पलीट करते हाँ.........
 
थैंक्स..!!

आपने सही कहा क पहले सेहत पर धयान देना चाहिए.. मई भी दे रहा हों, अब्ब जितनी रेस्ट कर सकता था, कर ली...

ज़रूरत की रेस्ट भी कर ली............... ज़यादा रेस्ट भी इंसान को सुस्त कर देती है, बाँदा जितना एक्टिव रहे उतना hi जल्दी वो फिट रहता है.. और फिर काम से भी तो रेगुलर लीव नहीं ली जा सकती.. इसलिए मई फिरसे आप सबब के बीच में हों.. और उम्मीद है इस बात मैं रेगुलर hi परफॉरमेंस डोंगा...
 


अपडेट ::: 95


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डिनर के बाद सबब सिटींग हाल में बैठ गए थे.. मेरे सामने रानी और नताशा दीदी बैठी हुई थी.. दोनों मुझे hi देख रही थी.. और भी कई ऑंखें मुझे देख रही थी, पर उन दोनों के देखने में कुछ ख़ास बात थी..

आप सब भी तो समझते होंगे.. रानी और नताशा मुझे क्यों ऐसी नज़र से देख रही होंगी...

मैंने दोनों को देखा तो रानी ने मुझे स्माइल पास करदी.. नताशा दीदी की नज़रें जैसे hi मेरी नज़रों से टकराएं.. तो उनकी नज़रें झुकती चली गयी.. उनके चेहरे क रंग आज बदल चूका था..

दोनों hi शाम के बाद से कुछ ज़यादा hi चमक दमक रही थीं.. रानी के खुले बाल एक साइड से उसके बूब्स को कवर किये हुए थे.. दूसरे साइड का बूब्स रानी ने हवा देने क लिए रख छोड़ा था.. हलकी गुलाबी लिपस्टिक लगा कर रानी बहुत खूबसूरत लग रही थी.... रानी ने जींस की पेण्ट और स्लीवलेस शर्ट पहनी हुई थी. रानी का बदन भी रानी के चेहरे के जैसा hi चमक रहा था.. रानी का बदन आज मेरे तसर्रुफ़ में आने वाला था..

नताशा दीदी ने कुरता लेग्गिंग ड्रेस पहना हुआ था.. हलके मेकअप की वजा से उनका चेहरा भी आज बहुत ग्लो कर रहा था.. उनके चेहरे की चमक, झिझक और शर्म की वजा से कुछ ज़यादा hi बढ़ी हुई थी.. आज उनके चेहरे का रंग पूजा दीदी क साथ मैच हो रहा था.. जैसे शादी क बाद से पूजा दीदी के चेहरे ने रंग बदल गया था.. कुछ वैसी hi शर्म आज नताशा दीदी के चेहरे पर थी.........

नताशा दीदी की आज आधी शादी थी.. सुहागरात थी, बिना शादी के hi उनकी छूट आज खुले वाली थी, वो ये सोच कर बहुत शर्मा रही थी.. शादी नहीं थी, पारर सुहातरात तो थी, ये भी उनके जीवन की सबसे हसीं रात थी. जबसे वो जवाब हुई थी, वो भी दूसरी लड़कियों की तरह से इस रात के इंतज़ार में थी.. सालों का इंतज़ार आज खतम होने जा रहा था.. उनके दिल के सारे अरमान आज पुरे हो रहे थे.. वो भी उसके साथ हो उनके दिल में बसा हुआ था.....

शादी क बाद सुहागरात का सोच कर दुल्हन क चेहरे का रंग बदला हुआ होता है...

वैसा hi रंग नताशा दीदी के चेहरे पर दिख रहा था..

मई सोनाक्षी आंटी के बगल में बैठा हुआ था, दूसरी साइड में कृति बैठी हुई थी.. अनिल राज के साथ बैठा हुआ था..

मेरा एक हाथ कृति वाली साइड में सोनाक्षी आंटी के कंधे पर था.. मेरा सर्र सोना आंटी के कंधे पर धरा था..

सोनाक्षी आंटी बहुत खुश थी, मैं उनके पास जो बैठा हुआ था...

पापा, हर्ष अंकल, अजित भाई भी बैठे हुए थे.. माँ के बोलने की आवाज़ सुनाई दी, तो मेरी तान्त्र टूटी

माँ:- रंजीत विज्जू बीटा और पूजा बेटी की शादी क लिए कौनसी डेट रखें..

पापा ने हर्ष अंकल को देखा, अजित भाई और फिर मालिकान को देखकर बोले..

पापा:- मेरा ख्याल है, क हमें इस सबब में जल्दी करनी चाहिए.. आगे विजय बीटा को बहुत मसरूफ होना है, तो इस हिसाब से शादी 4-5 दिन में hi हो जानी चाहिए.. लम्बी चौड़ी तैयारी का चक्कर तो है नहीं.. जो देरी की जाए..

और फिर यहाँ किसी चीज़ की कमी भी तो नहीं है....

हर्ष अंकल:- तैयारी का क्या है वो भी तो 2 दिनों में हो hi जाएगी.. कुछ भी चाहिए होगा तो यही पारसभी इंतेज़ाम हो जाएगा, सबब hi जाननी वाले हाँ, एक कॉल करनी है और सबब इधर पैलेस में ढेर हो जाएगा... लड़की को कौनसा डोली पर बिठा कर कही और भेजना है.. ज़रूरत का सबब ले लिया जाएगा.. जो रह गया वो बात में भी लिया जा सकता है..

दीक्षा आंटी:- हाँ लेटेस्ट जो कुछ आया होगा वो सभी यहाँ लाने में किसी को क्या परेशां hi होगी... पैलेस का एक नाम बन्न चूका है, कोई भी दुकानदार हमें अपने हाथ से जाने नहीं देगा... पैलेस जैसा कस्टमर किसी को कहाँ मिलेगा..

अजित भाई:- और फिर अभी हामरे लिए दिल्ली शहर में खतरा भी काम हो गया है,

तो मुंबई से लाइ गई सभी फ्रेमलेस को छोड़ कर बाकी सबब hi तो माल में जा कर शॉपिंग कर सकती हाँ.....

माँ:- तो फिर पैलेस में जो छोड़ा सा मंदिर बनवाया गया है, आने वाले संडे को दोनों की शादी पैलेस के मंदिर में करदी जायेगी...

सबब:- हाँ ये सही रहेगा... बड़े ऐसी hi बातों में लग गए और गर्ल्स ने पूजा दीदी कको छेंद शुरू कर दिया..

शादी की बात शुरू हुई तो मैं पूजा दीदी को देखने लगा था, मैं दीदी को घोरसे देख hi नहीं पाया... raj,anil और कारन ने मुझे जकड लिया, फिर शुरू हुआ छेड़ छड़ का दौर.. बड़े अपनी बातों में लग्ग गए तो.. तो गर्ल्स एंड बॉयज पार्टी ने मिलकर हल्ला गुल्ला करना शुरू कर दिया....

बड़े अपनी बातों में बिजी हुए तो गर्ल्स बॉयज पार्टी के सभी मेंबर्स हम दोनों ko(didi और मुझे) लिए पैलेस की छत की और बढ़ गए ..

छत पर पोहंचे तो..

rani:-(puja दीदी से) दीदी अब्ब तो आप की शादी की डेट भी फिक्स हो गई है तो कैसा फील कर रही हाँ आप..

पूजा दीदी क तो चेहरा hi लाल हो चूका था. शादी की बात पर अंदर का सबब बदल जाता है, एक्ससिटेमेंट बढ़ जाती hai..excitement के साथ शर्म भी बढ़ जाती है.. पारर जैसा माहौल बन चूका था, उसे सभी की बातों का जवाब तो देना hi है.... कारन जूही भी सबब the..to लफ़्ज़ों का चुनाव सोच समझ कर किया जाने लगा..

पूजा:- (एक नज़र मुझे देखा फिर शर्मा कर नज़रे झुका लीं) रानी विज्जू से शादी मेरे दिल की चाह थी, माँ ने हमारी शादी की डेट फिज़ की तो मुझे बहुत ख़ुशी हुई....

नताशा:- ऐसे नहीं कुछ रोमांटिक अंदाज़ में बोलो...

पूजा दीदी:- ऐसे कैसे रोमांटिक अंदाज़ में.... दीदी की ऑंखें झुक रही थी या वो झुका रही थी.. कातिल अंदाज़ था दीदी कहा..

juhi:-(natasha से) दीदी मई कुछ कहु..

सबब जूही को देखने लगे.. अब जूही क्या पटाखा फोड़ती है.... ज़रूर कुछ तो ख़ास बोलेगी hi जूही..

नताशा:- जूही तुम्हे कुछ पूछने की क्या ज़रूरत है, तुम हममे से एक हो... जैसे हम सब कुछ भी कह देते हाँ तुम भी de-dhadak कह दिया करो.. यहाँ किसी से कोई फर्क नहीं किया जाता..

जूही:- ठीक है दीदी, आगे से धयान रखोगी, मैं कह रही थी, क आज पूजा दीदी और विजय भाई दोनों से एक दूसरे के तारीफ शायरी के ज़रिये करेंगे..

जूही का आईडिया सुनके सभी हूँ हां हूँ हां करने लगे.. सभी को ये आईडिया बहुत पसंद आया था... राज और अनिल ने तो लुड्डी डालनी शुरू कर दी... अभी ढोल बजा नहीं और लुड्डी शुरू हो gai.......dono को देख कर मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई..

मई पूजा दीदी को देखने लगा जो नीचे देखते हुए मंद मंद शर्मा और मुस्कुरा रही थी, शर्म तो उनके चेहरे से कही गई hi नहीं थी..

रानी ने पूजा दीदी के हाथ को पकड़ कर हिलाया तो वो ऑंखें ऊपर उठा कर रानी को देखने लगे.

रानी:- दीदी कुछ विज्जू के लिए शायरी हो जाए..

पूजा:- मुझे नहीं आती कोई शायरी वायरी... मैंने कभी कोई शेर नहीं कहा..

दीदी चेहरा लिए इस सबब का मज़ा भी ले रही थी.. उन्हें भी ये सबब बौह्त अच्छा लग रहा था.. लगता भी क्यों नहीं सबब अपने hi तो थे...

शीतल:- दीदी आप विज्जू भाई का हाथ थम कर कुछ भी बोल दें, शायरी अपने आप बन जायेगी..

शिखा:- शायरी तो खूब बनेगी, दीदी तो सालों से अपने मैं में नजाने क्या क्या ग़ज़लें लिख चुकी होंगी..

रूपा:- हाँ शिखा क्या खूब याद दिलाया तुमने, दीदी बड़ी छुपी रुस्तम हाँ, उन्हों एक डायरी भी लिख राखी है, विज्जू के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ मैंने खुद अपनी इन प्यारी प्यारी आँखों से देखा है..

रूपा की बात सुनकर सबब के hi कान खड़े हो गए, कान तो मेरे भी खड़े हो गए थे, पूजा दीदी की डायरी वाली बात तो मैं भी नहीं जानता था.. बड़ी hi खूबसूरती और चालाकी से ये सबब उन्हों ने छुपा हुआ था..

राज:- दीदी अब आप सुना भी दें, कितना इंतज़ार करवाएंगी..

नताशा:- रानी तो भाग कर जा और पूजा की डायरी उठा कर ला. मैं वो लिखा हुआ पढ़ कर सुनाती हों... नताशा दीदी की बात सुनकर पूजा दीदी हड़बड़ा गई..

पूजा:- nnnn...nahi नहीं, रानी तू डायरी लेने नहीं जायेगी.. ममममम.. मैं कुछ सुना देती हों.. मैं दीदी को देख रहा था... बड़ी छुपी रुस्तम थी दीदी.

एक बार फिरसे सबब शोर मचने लगे.. अपर्णा भी इस सबब का भरपूर मज़ा ले रही थी... वो मुझसे, माँ से और मेरी तितलियों से फुल फ्री थी.. ऐसे माहौल में वो भी शोर तो मचा रही थी, पारर किसी की बातों के बीच में नहीं बोल रही थी.. उनसे प्रिय का हाथ पकड़ा हुआ था..

प्रिय:- विज्जू चल दीदी का हाथ पकड़, और सामने जा कर बैठ जा..

jhanvi:-(sab से) चलो हम भी यही बैठते हाँ...... ऊपर आते हुए एक कारपेट भी लाया गया था, आते hi उसे बिछा भी दिया गया था..

कारन इस सबब को खूब एन्जॉय कर रहा था.... राजा और अनिल मिलकर बहुत चहक रहे थे..

पूजा दीदी और मैं सबके सामने बैठ गए...

षुरूति:- ऐसे नहीं एक दूसरे के आमने सामने बैठ कर एक दूसरे के हाथो को थाम कर एक दूसरे की आँखों में देखते हुए अपने अपने दिल का हाल बताना है..

षुरूति का आईडिया भी लाजवाब था.. सबब क चीखने की आवाज़ों से पैलेस की छत पर एक बार फिरसे हंगामा मच गया..

सबब hi फिर कहने लगे.. हाँ हाँ जैसा षुरूति ने कहा है वैसे hi बैठो. हमें भी तो देखना है, कैसे एक दूसरे की आँखों में देखते हुए एक दूसरे के हाथो को थामे हुए एक दूसरे की तारीफ करते हो...

शीतल:- वो भी पोएट्री में.... yaaaaahoooooooooooooo.. आज मज़ा आएगा...

हम दोनों फिर आमने सामने बैठे, एक दूसरे के हाथों को थमा, एक दूसरे की आँखों में देखने लगे.. जैसे hi हमारी नज़रें मिलें तो पूजा दीदी की आँखों में बहुत श्रम थी, पर प्यार की इन्तहा भी थी, उनकी जेएल जैसी आँखों में मैं गुम्म होने लगा.... कुछ hi देर हुई थी , क पूजा दीदी के शराबी होंटो खुले और उनके अंदर से कोयल के जैसी सुरीली आवाज़ निकली, दीदी थोड़ी गुनगुनाहट क अंदाज़ में शायरी सुनाने लगी.. क्या आवाज़ थी......

पूजा:-


लाख पार्डन मैं रहूँ भेड़ मेरे खोलती है. शायरी सच बोलती है.





दीदी के होंटो से मधुर आवाज़ में शायरी के बोल निकले तो सभी ने भरपूर अंदाज़ में तालियां बजानी शुरू कर दीं.. और दीदी को अप्प्रेसियते करने लगे.

शीतल:- विज्जू भाई, पहले बार पूजा दीदी यौन सबब के सामने आपसे अपनी मोहबत का इज़हार कर रही han..shetal शरारत से बोली, दिल थाम के बैठिएगा, लेडीज का तारीफ करना बन्दे को घायल कर देता है...

शीतल की बात पर नताशा दीदी और रानी ने शीतल की थपकी दी..

मेरी तो आँखों में पूजा दीदी क लिए एक नयी hi दुन्या आबाद होने लगी थी..

पूजा दीदी नशेटल की तरफ देखा...

पूजा:- शीतल अगर ऐसे hi मुझे बीच में टोका ना तो मई कहे देती हों, मई आगे नहीं और नहीं सुनाने वाले...

sab:-(shor करते हुए) नहीं नहीं, आज कोई माफ़ी नहीं है..... चलो फिरसे शुरू करो.. वर्ण एक के बाद एक और ग़ज़ल सुननी पड़ेगी...

राज:- कोई कुछ न बोले.. दीदी को टोकने से दीदी कही सबब भूल hi न जाएँ..

एक बार फिरसे सबब हसने लगे..

पूजा दीदी फिरसे मेरी आँखों में ऑंखें डाले आगे बोलने लगीं..



मैं ने देखा है की जब मेरी ज़ुबान डोलती है

शायरी सच बोलती है

तेरा इसरार, क चाहत मेरी बेताब न हो

वाक़िफ़ इस ग़म से मेरा halqa-e-ahbaab न हो

तो मुझे ज़ब्त के सहराओं में क्यों रोलटि है

शायरी सच बोलती है




शीतल:- विज्जू भाई ने दीदी को बहुत िनेटज़र करवाया है.. विज्जू भाई अब दीदी को और इंतज़ार न करवाना.. देखो कैसे वो खुद पर ज़ब्त किये हुए हाँ..

शीतल भी आज हरी मिर्च बानी हुई थी.. वो कैसे खुद को बोलने से बाज़ रख सकती थी..

शीतल के रंग hi आज कुछ और थे.. बोहत दिनों बाद वो फिरसे अपने रंग में लौटने लगी थी....

पूजा दीदी ने एक बार फिरसे शीतल को घूरा.. सबब को एक नज़र देखा, कुछ शरमाई, कुछ लजाई, फिरसे मेरी आँखों में देखते हुए आगे बोलने लगी

ये भी क्या बात की छुप छुप के तुझे प्यार करूँ

रानी भागती हुई आई और धीरे से बोली....... दीदी हम सबब hi तो मिलकर प्यार करते हाँ, छुप छुप कर प्यार करने वाली बात कहाँ से आ गई.... रानी इतना बोल कर वापिस चली गई, मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. दीदी कुछ शर्मा गई, बाकी सबब रानी से पूछने लगे क तुमने क्या बोलै तो रानी ने किसी को कुछ नहीं बताया..................... दीदी फिरसे बोलने लगी..



ये भी क्या बात की छुप छुप के तुझे प्यार करूँ

गर कोई पूछ hi बैठे तो मैं इंकार करूँ

जब किसी बात को दुनिया की नज़र तौलती है

शायरी सच बोलती है




इस बार किसी ने नहीं टोका तो दीदी आगे बोलने लगीं..




मैं ने इस फ़िक्र में कटान कई रातें कई दिन


मीरे शेरोन में तेरा नाम न आये लेकिन

जब तेरी सांस मेरी सांस में रास घोलती है

शायरी सच बोलती है

तेरे जलवों का है पर तेरी मेरी एक एक ग़ज़ल

तो मेरे जिस्म का साया है तो कटरा के न चल

parda-dari तो ?हुड अपना hi भरम खोलती है

शायरी सच बोलती है





पूजा दीदी ने अपनी पोएट्री ख़तम की तो सभी उठ कर नाचे लगे.. कारन साइड में खड़ा हुआ सबब को नाचते देख कर मुस्कुरा रहा था.... वो नाचने वाला बाँदा नहीं था.. पारर इस माहौल कर पूरा पूरा मज़ा ले रहा था.. जुली भी सभी में शामिल नाचने लगी.. लड़कियां तो नाचने में बेसहराम होती hi हाँ, और ऐसा मौका तो वो कभी मिस hi नहीं करती...

10 मिंट तक्क सभी हल्ला गुल्ला करते रहे.. नाचते रहे और आवाज़ों का शोर जागते रहे.... पैलेस की छत को भी आज रौनक बख्शी जा चुकी थी.. जबसे बना था, कभी इसे भी ऐसा माहौल नहीं मिला था....

रानी:- विज्जू अब तुम्हरी बारी है.. चल अब्ब चूरू हो जाओ..

प्रिय:- विज्जू दीदी दीदी से कम् नंबर नहीं लेने हाँ..

जहान्वी:- प्रिय तू टेंशन न ले... विज्जू भी किसी से कम् नहीं है.. हर बॉल पे सिक्सर मारेगा..

सबब एक बार फिरसे हुल्लड़ बाज़ी करने लगे.. आज सबब खुल के अच्छे से ोधाम मचा रहे थे.. कोई भी लम्हा जाया नहीं कर रहे थे.. एक एक पल को पुरे जोश ो खरोश से मन रहे थे.. मसूस और ढोल नहीं था, वर्ण तो आज hi रात इस पुरे एरिया को hi जगा दिया जाता....

मैंने भी पूजा दीदी की आँखों में देखते हुए अपने दिल का हाल सुनना शुरू कर दिया..

मेरे होंटो से जैसे hi शायरी के अल्फ़ाज़ निकले तो पूरा पैलेस hi धुवां धार शोर ो घुल से गूंजने लगा.... जैसा शोर हो रहा था.. नीचे बैठे हुए बड़े भी हमारी महफ़िल को ज्वाइन करने के लिए आते हुए दिखे..

जैसे hi नाच रहे सभी की नज़र आने वळून पर पड़ी तो..

मेरी titliyaan...rani,shetal,rupa,shika,juhi.aparna,kriti, ने और भी जोश से नाचना शुरू कर दिया.. नाचते समय कोई सीटी मार रही थी.. कोई मोहन पर हाथ रख कर ऊंची ऊंची आवाज़ में हूवोआए की आवाज़ें निकाल रही थी...

साउंड सिस्टम की ज़रूरत hi नहीं रही थी.. एक सभी का hi साउंड काफी था..

मेरी तितलियों के डांस क आगे तो सबब की hi बास थी.. आखिर कोठे से ट्रैंनिंग ले चुकी थीं.. उनके जैसा डांस कोई कैसे कर सकती थी..

सभी बड़े करीब पोहंचे तो छत पर जमी महफ़िल को देख कर पूछने लगे..

अपर्णा भाग कर माँ क पास पोहंची और माँ क दोनों गालों को चूम कर सबब बताने लगी.. अपर्णा का चेहरा जोश से भरा हुआ था.... उसे इतनी ख़ुशी, इतना मज़ा पहले कभी नहीं मिला था... माँ ने भी अपर्णा का चेहरा चूम लिया...

कुछ hi देर में सबब पांच गए... अब्ब वो भी सबब जान गए थे.. तो सबब भी बैठ कर मज़ा लेने लगे....

हर्ष अंकल:- चलो भई शुरू करो, हमें भी अपनी महफ़िल के मज़े लूटने दो..

य्र्र हम भी तो अभी जवान हाँ. क्यों अजित, क्यों रंजीत मैंने सही कहा ना..

पापा:- हाँ हाँ.. हम भी तो अभी जवान हाँ, और सारे रंग हमे भी देखने हाँ.. क्या हुआ जो पुलिस की नौकरी कर्ली.. ऐसी महफ़िल के रस्सिया तो हम भी हाँ.

अजित भाई:- हम साड़ी उम्र hi काम में बिजी रहे हाँ .. इसका मतलब ये तो नहीं, क हम लाइफ को एन्जॉय करना भूल गए हाँ.. चल भई विजय शुरू हो जा.. हमे भी दिखाओ अपने रंग, देखने क्या कुछ तुममे नाते दहकने को मिलता है.. लड़ाई तो तुम करहि लेते हो.. अब्ब शायरी भी बोल कर दिखाओ..

सबब के आते hi पूजा दीदी कुछ नर्वस सी हो गई थीं..

माँ:- मेरा विज्जू मेरी बहु क गुण gaayega..uske पोएट्री बोलेगा.. चल सुअन मई भी तो सुनो तेरे दिल की आवाज़, जो तू पूजा के लिए अपने मैं में रखता है..

बड़े बैठ गए तो कुछ छोटे साइड खड़े हो गए.. उन्हें बैठने की ज़रूरत hi क्या थी.. बात बात तो वो खड़े हो कर नाचने लगते थे... माँ के हाथ में जूही माँ का हाथ था, अपर्णा एक बार फिरसे प्रिय क पास थी..

विजू:- मैं एक बार फिरसे पूजा दीदी की आँखों में देखते हुए आगे बोलने लगा.





कोई साजन हो कोई पायरा हो

कोई दीपक हूँ कोई तारा हो

जब जीवन रात अँधेरी हो

एक बार कहो तुम मेरी हो



पूजा दीदी की आँखों में प्यार का समंदर उतरने लगा, सबब फिरसे शोर मचने लगे.. पर इस बार मैं पूजा दीदी की आँखों में कही दूर बहुत दूर चला गया था.. मैंने किसी और की तरफ धयान नहीं दिया.. फिर आगे बोलने लगा..



जब सावन मैं बादल छाए हों

जब चंदा रूप देखता हो

जब सूरज धुप नाहटा हो

या शाम ने बस्ती घेरि हो

एक बार कहो तुम मेरी हो



हर्ष अंकल:- बहुत अच्छे वजिजय बीटा, य्र्र तुमतो बड़े कमाल के शायर भी हो.. क्या खूब बोलते हो.. आग भी बरसते हो और फूल भी....

पापा:- आखिर बीटा किसका का है... हम भी तो किसी दौर में किसी से कम् नहीं थे..

अजित भाई:- सही कहा रंजीत हम भी अपने दौर में किसी से कम् रहे हाँ क्या..

हमने भी अपनी ज़िन्दगी बड़े मज़े से काटी है.. हम भी तो कम् रोमांटिक नहीं रहे अपनी जवानी में.....

अपने बाप की बात कर shikha,rupa और राज ने सीटी बजानी शुरू क्र दी.. और भाभी शर्माने लगी. उनका चेहरे श्रम से लाल पद गया था.. बच्चों क सामने उनके बाप क मोहन से ऐसी बात सुनकर उन्हें शर्म आने लगी थी..

पर वो खुद hi अपनी बात भूल गई थीं.. जब्ब विज्जु ने अपना चेहरा बदला था, तो कैसे भाभी ने विज्जू की कमर पर हाथ रखे हुए, अपने hi बच्चों की गांड की हवा टाइट की हुई थी...

माँ:- बहुत आला मेरे बेटे ... लगा रह और दिखा दे सबब को मेरा विज्जू किसी से कम् नहीं है, वो लड़ना hi नहीं जानता है, और प्यार के भी सारे रंग जानता है..

मैंने माँ को मुस्क़ुअरा कर देखा, फिर दीदी की आँखों में देखते हुए आगे बोलै.



हम कब तक पीट के धोके में

तुम कब तक दुर्र झरोके में

हाँ दिल का दमन पहला हो

क्यों गोरी का दिल मेला हो

कब मेरे दिल में सवेरा हो

एक बार कहो तुम मेरी हो



जैसे दीदी की पोएट्री सुने हुए मैं दीदी में गुम्म होने लगा था, दीदी भी मेरी शायरी में खोटी चली गईं.. उनकी आँखों की चमक कई गुना बढ़ चुकी थी, हम एक दूसरे की आँखों में मालकिन झुकाये बिना hi देख रहे थे... सच्चा प्यार था.. बेपनाह प्यार था, दिल की अंत गहराई तक्क सच्चे प्रेम की जड़ें पहेली हुई थीं..



हम घूम चुके बस्ती बन में

एक आस की फाँस लिए मन में

कोई साजन हो कोई पायरा हो

कोई दीपक हो कोई तारा हो

जब जीवन रात अँधेरी हो

एक बार कहो तुम मेरी हो





मेरी पोएट्री ख़तम हुई तो एक बार फिरसे तालियों की गूँज शुरू हुई और इस बार बड़े भी साथ में शामिल थे.. माँ मेरी बहने सब दौड़ती हुई मेरे पास आ गईं..

इनको आते देख कर सभी पास आ गए.. माँ ने मुझे अपनी बहन में लेकर जोश से चूमना शुरू कर दिया.. पूजा दीदी को मेरी तितलियों ने दबोच लिया.

उनका चेहरा भी चमकाया जाने लगा.. एक एक करके सभी हमें प्यार देने लगे..

शोर भी था, प्यार भी था..

शोर इन्तहा का था... तो प्यार की हद्द की सीमाएं भी वहां तक थीं, जहाँ तक पोहंच पाना हर किसी क लिए मुमकिन नहीं था..

रात 12:30 तक यही हल्ला गुल्ला चलता रहा फिर सभी अपने अपने रूम में चले गए.. और मैं रानी और नताशा दीदी क साथ उनके रूम में जाने लगा..

माँ और तितलियों ने मुझे प्यार दिया.. रानी और नताशा दीदी को होने वाले मिलान की बधाई दी.. रानी भी इस बार मारे शर्म क अपना सर्र झुका गई थी..

माँ और बहनो के सामने उसकी सील खुलने की बात थी, शर्म तो आएगी hi.. बिना शादी के hi रानी अपनी छूट की सील मुझसे खुलवाने वाली थी..

नताशा दीदी की हालत माँ और मेरी बहनो की बात सुनकर बहुत ख़राब होने लगी थी.. इतना ओपनली माँ और मेरी तितलियाँ उनसे ये सबब कहेगी ये नहीं सोचा था.

उनको कौन बताये क जब्ब सुहाग रात होती है.. तो कमरे के बहार मेला लगा हुआ होता है.. सबब hi तो जानते है क अंदर सील खुलने का समय हो गया है..

यहाँ शादी नहीं हुई थी, तो क्या हुआ मेरी रानी और नताशा दीदी क साथ सुहागरात तो थी hi....

मैं दोनों का हाथ थामे छूट खोलने वाले स्थान की और बढ़ने लगा..





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