Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 23 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स.!!

प्लान तो विज्जू बहुत पहले hi बना चूका tha..gurnam भी राजा पार्टी के साथ मिलकर विज्जू को बहुत सपोर्ट देगा.. जल्द hi गुरनाम को सब बना दिया जाएगा, गुरनाम पर किसी किसम का शक तो है किसी को, लेकिन मक़सद बहुत है तो गलती की कोई गुंजाइश नहीं है विज्जू के पास, सबब सोच समझ कर करना है.. महक के आने से विज्जू को बहुत सुप्परत मिलेगी, महक विज्जउ से सीनियर भी है.. सुष्मा मो खुलना भी ज़रूरी है, वर्ण वो अंदर hi अंदर मरती रहेगी, विज्जू कैसे किसी अपने को दर्द में देख सकता है..
 
थैंक्स..!!

शुष्मा को बताना भी ज़रूरी था, अब्ब वो भी सब में शामिल हो चुकी है, बाद में बताना सही नहीं है. धीरे धीरे विजू शुष्मा को भी खोल देगा, जल्द hi वो भी विजू के रंग में रंगने लगेगी.. शादी तो विज्जू को जल्द करनी hi पड़ेगी, वर्ण श्वेता का दर्द पूरी तरह से नहीं जायेगा.. शुशी को अपने रंग में तो विज्जू रंग कर hi रहेगा, श्वेता को शुशी बहुत पसंद है तो.. तो शुशी का दर्द श्वेता का दर्द होगा, विज्जू कैसे शुशी और श्वेता को दुखी देख सकता है.. समय के साथ विज्जु शुशी के लिए सही फैसला करेगा
 
थैंक्स..!!

दन्न के कुत्ते हाँ भी तो बहुत फ़ास्ट. अब्ब महक और विज्जु से तो बढ़कर नहीं हो सकते.. महक और विज्जू एक पूरी आर्मी को नाको चने चबवा दें, दन्न के गुंडे क्या बेचते हाँ..

दन्न के भूँकने से क्या होगा, होगा तो वही जो महक के दिल की आवाज़ है, विज्जू को देखते hi महक के मैं में हलचल हो हुइवी थी, पर अभी वो खुद के अंदर सही से झांक नहीं सकीय, कोई भी लम्हा महक को सबब समझा देगा क विज्जू उसके लिए कितना परफेक्ट है..

दन्न साला कुत्ता है, बहार मोहन मारता है, और उसके घर की औरतें भी बहार मोहन मारती रहती हाँ, अजीब है ये दन्न भी.. महक से उलझ कर मरेगा स्टुपिड, और दिल्ली में कर तो वो गलती hi करेगा, खुद के घमंड के चलते k"koi उसका कुछ नहीं बिगड़ सकता" जल्द hi उसको सब अच्छे से समझ आ जाएगा, क देलहिओ जा कर उसने बहुत बड़ी गलती कर दी
 
अपडेट ::: 104

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हमारे बहार घूमने जाने से सबब hi खुश थे, सबब भी बहार जाना चाहते थे

पर अभी बहार का मौसम सभी क लिए साज़गार नहीं था, सभी अपना मैं मार कर अच्छे समय तक क लिए खुद गए थे...

शिखा रूपा, शीतल और राज फिरसे स्कूल जाने लगे थे.. नताशा दीदी की पढाई पूरी हो चुकी थी.. वो अब्ब पैलेस में hi थी.. किसी और को अभी पढ़ने क लिए पैलेस से बहार जाने की इजाज़त नहीं थी.. अनिल राज के साथ रह क्र पढ़ने लगा था.. कोठे पार्स लाइ जाने वाली गर्ल्स के लिए पढाई की शिक्षा शुरू करवा दी गई थी..

अब्ब आगे उन्हें किसी न किसी बिज़नेस में शामिल करना था, तो जो ज़रूरी स्टडी उनके लिए थी, वो उन्हें दी जाने लगी थी.. ऐसे hi कुछ छोटे मोठे काम जो होने चाहीये थे, वो सबब स्टार्ट कर दिए गए थे..

अपर्णा और कृति जूही के साथ मिलकर पढ़ने लगी थीं. जूही को भी यहाँ रह के बहुत मज़ा आने लगा था.. जूही कारन और जूही माँ चरक्टेर्स में ईंटे स्ट्रांग थे क पैलेस का ओपन माहौल उनके लिए कबि परेशानी का सबब नहीं बना था..

पढाई तो मेरी तितलियों की भी अधूरी थी, पारर वो माँ के साथ रह कर बहुत कुछ जान गई थीं, और अभी वो इस समय को भरपूर एन्जॉय करना छह रही थीं. पढ़ना लिखना तो वो जानती hi थीं.. बाकी का कुछ वक़्त गुजरने के बाद जान जाती..

पैलेस में hi एक लाइब्रेरी बनाये जाने पर हुआ किया जाने लगा.. जहाँ पर कोई भी जा कर पूरी दुन्या का नॉलेज हासिल कर सकता था.. मैंने जूली को इस बारे में भी कह दिया था..

जूली ने शुष्मा दीदी क साथ मिलकर और भी जो कुछ पैलेस क लिए ज़रूरी है, वो डिसकस करने में लग्ग गई थीं.. जल्द hi पैलेस में और भी बहुत कुछ नया होने वाला था.....

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TIME:10:45:AM:

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लाली से आधे घंटे की मस्ती करके पद्मा आंटी और मालिकान क रोम में घुस गया था.. दोनों को मैंने पहले से hi कह दिया था.. वो दोनों hi बहुत एक्ससिटेड हो गई थीं.. वो लास्ट 15 मिंट से मेरा रूम में इंतज़ार कर रही थी..

मैंने माँ को बता दिया था क मैं पद्मा आंटी और मालिकान की छूट फाड़ने वाला हों, माँ ने हस्ते हुए कहा था , क ध्यान से फाड़ना वो दोनों hi सालों से नहीं चूड़ी हाँ, दोनों की छूट hi बहुत टाइट हो चुकी होगी.. एक बार फिरसे न कही फट जाए, जो भी करना प्यार से करना..

मैंने हस्ते हुए मा से कहा था..

विजय:- माँ आपको एक बात और मैंने नहीं बताई, क पद्मा आंटी और मालिकान मुझसे रंडी की तरह से छोड़ना चाहती हाँ..

माँ:- kyaaaaaaaaaaaaaaa.??

विजय:- हाँ माँ उस दिन जब्ब मैंने मालिकान के साथ मस्ती की थी तो भाभी और पद्मा आंटी भी आ गई थी, फिर जब्ब सबब ने मिलकर मस्ती की तो पद्मा आंटी और मालिकान बहुत गन्दी गन्दी बातें कर रही थीं..

माँ पेट पकड़ पकड़ कर हस्ती रही थी..

लाली की आज मैंने छूट चाट कर लाली की छूट से पानी निकाल दिया था. लाली अब्ब बहुत बेहतर थी, लाली की छूट से पानी निकला तो लाली को बहुत सुकून मिला था. लाली का चुत्तड़ भी अब्ब बहुत ठीक था, शादी के बाद लाली भी चुदाई क लिए तैयार थी.. लाली की मस्त गांड मुझे बहुत भाई थी.. लाली ने मुझसे कहा था क वो गांड में लुंड लेकर झड़ने से बहुत खुश होती हाँ, लाली अपनी छूट से भी ज़यादा गांड में मज़े लेने की खवाहिश मंद थी.. मैंने भुई लाली से कह दिया था, क जल्द hi मैं उसकी साड़ी तमन्नाएँ पूरी करदूंगा.. वो बास जल्द से जल्द खुद को ठीक कर ले.. और मेरी ताबड़ तोड़ चुदाई को सहन लेयक हो जाए..

पोन गियर क आस पास मैं पद्मा आंटी और मालिकान के पास पोहंचा तो रूम पहले से hi बंद था, मैंने दूर नॉक किया तो मुझसे पूछ कर दूर ओपन किया गया था..

जब्ब मई अंदर पोहचना था तो दूर फ़ौरन hi बंद कर दिया गया था..

मैंने रूम में एंटर होते hi दोनों को देखा तो दोनों पहले से hi पूरी तरह से नंगी थीई..

बिजय:- आप दोनों पहले से hi क्यों नंगी हम, क्या छूट की आग सहन नहीं हो रही है..

मालिकान:- विज्जू बीटा, अब्ब जितना हमने खुद से लड़ना था, लड़ लिया.. यहाँ पैलेस में रहते हुए जितनी शर्म करनी थी कर ली.. अब्ब जब्ब हमारा टाइम भी आ गया यही, तो हम सबब hi अपनी मर्ज़ी से करना चाहती हाँ, हम दोनों ने hi फैसला किया है, क अपने अंदर के सारे एहसासात को जगा कर आज तुमसे चुदाई करवाएंगी..

पद्मा आंटी:- विज्जू बीटा आजसे पहली जितनी शर्म हमने करनी थी वो कर्ली...

अब्ब तुम हमारे रंग देखना, जितना तुमने हमें ख़राब किया है, उस सबब का भुगतान तुम्हे आज देने पड़ेगा..

विजय;- मैंने कहाँ आप सबब को ख़राब किया है..

मालिकन:- तुमने hi तो ख़राब किया है, इतना बड़ा लुंड लेके यहाँ किसी को भी छोड़ा है तुमने.. मेरी इतनी शरीफ पूजा बेटी को शुरू से hi गन्दा कर दिया..

पद्मा:- और मेरी भोली भली रानी को कितनी बेशरम और कमीनी बना दिया है तुमने.... कल से hi वो कमीनी मुझे कमीनी मुस्कान देते हुए लंगड़ा कर चल रही है, मुझे देख के ऐसे रिएक्शन देती है, जैसे उसकी शादी उसकी अपनी मर्ज़ी से हुई है, सुहागरात मानाने के सारे रिएक्शंस hi वो मुझे दिखा रही थी..

जब मेरी रानी तेरे लुंड से नहीं बच सकीय तो हम ने फिर भी पूरी दुन्या hi घूम फिर ली है, हम मायें होकर क्यों तुमसे शर्माएं..

मालिकान:- इन दो दिनों में हमारे छूट ने रिसना बंद नहीं किया, छूट ने रिस रिस कर हमें और भी बेशरम बना दिया है...

पद्मा आंटी:- और आज हम तुम्हे कच्चा hi खा जाएँगी...

दोनों मेरे पास आएं.. पद्मा आंटी मुझे किश करने लगी. मालिकान नीचे बैठ कर मेरी बेल्ट खोलने लगें..

मैं भी पद्मा आंटी की किश के मज़े लेने लगा.. मालिकान ने जेठ से hi मेरी बेल्ट खोल कर मेरी पेण्ट अंडरवियर सपेट नीचे सरका दी और मेरे लुंड को पकड़ कर मसलने लगी..

मैं भी पद्मा आंटी को किश करते हुए उनके बूब्स दबाने लगा.. दो पहले से hi हार्ड हो चुके थे.. मैं उन्हें कस कस के दबाने लगे.. आंटी मुझे वाइल्ड किश करने लगीं..

मालिकान कुछ देर मेरे लुंड को मसलती रही, फिर उन्हों ने अपना बड़ा मोहन खोला और मेरा आधा से ज़यादा लुंड अपने मोहन में ले लय और छुपे लगाने लगी..

कुछ देर हम तीनो hi लगे रहे.. पद्मा आंटी से अब्ब सहन नहीं हो रहा था, उनकी सांस उखाड़ने लगी तो उन्हों ने मुझे किश करना छोड़ दिया..

मालिकान ने मेरे लुंड को अपने मोहन से निकल दिया.. पद्मा आंटी मेरी शर्ट को उतरने लगीं.. कुछ hi देर में मैं भी दोनों की तरह से नंगा हो गया था..

उस दिन मालिकान की छूट मई देखने से रह गया था.. मालिकना का पेट थोड़ा सा बढ़ा हुआ था, उनकी छूट जे बड़े बड़े लिप्स बंद थे.. मैंने नज़र घुमाई पद्मा आंटी को देखा तो उनकी छूट पानी से चमक रही थी.. उनकी छूट के लिप भी बंद the.saalon से न चुद पाने की वजा से दोनों की hi छूट के लिप्स आपस में जुड़ चुके थे..

दोनों ने hi आज अपनी छूट को चमकाया हुआ था... मुझे अपनी छूट को घूरने देख दोनों ने देखा तो दोनों hi मेरे लुंड को झटके देने क लिए अपनी अपनी छूट में ऊँगली करने लगी.. मेरा लुंड जो मालिकान ने मोहन में लेकर खड़ा कर दिया था, वो और भी झटके खाने अलग..

दोनों हस्सन लगी..

पद्मा आंटी:- विज्जू बीटा आज दोनों बूढी औरतें तुम्हरे लुंड को झटके दे दे कर बुरा हाल कर देंगी..

विजय:- किसने कहा आप दोनों बूढी हो गई हाँ.. दोनों की hi छूट किसी कमसिन लड़की की तरह से दिख रही है, लुंड लेते हुए आप दोनों की hi तो चीखें निकल जायेगी, टाइट छूट जिसकी हो वो बूढी कैसे हो सकती है..

पद्मा:- अब्ब बातें मैट करो चलो बीएड पर और हमारी छूट को भोसड़ा बना दो, इस छूट की आग ने हमे कुत्तिया hi बना दिया है, आज हमें अपनी रखैल बना कर छोड़ना समझे कोई माफ़ी मैट देना..

मालिकान:- और मुझे भी घोड़ी और कुत्तिया बना कर छोड़ना.. मेरी छूट का भी भोसड़ा बना देना... आज तुम्हारी मालिकान रंडी बनने तक तुम्हारे लुंड से चुदती रहेही...

विजय:- अच्छा तो पहले किश की छूट पहाड़ो..

दोनों:- तुम पहले बीएड पर तो आओ, फिर बताती हाँ, पहले किसकी छूट में लुंड घुसना है.. मई बीएड पर जा कर लेट गया..

पद्मा औरनय मेरे लुंड पर आई और मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया. मालिकान ने अपनी छूट मेरे मोहन पर रख दी.. मालिकान की छूट से रस टपक रहा था, मैंने जीब निकल कर उसे चाट लिया..

मालिकान:- अह्हह्ह्ह्ह मायआ विज्जू तुम्हरी जीब कितनी गरम है, मेरी छूट पर लगते hi मेरी आग को और भी भड़का दिया..

मैंने दोनों ाहतो की उँगलियों से मालिकन की छूट को खोला.. मालिकन की छूट अंदर से पूरी तरह से पानी से भरी हुई थी, मालिकना की छूट अंदर से आग के दहकने से रंगत बदल चुकी थी.. मालिकान की छूट अंदर से गुलाबी नहीं थी..

जितनी आग बढ़ी हुई थी, मालिकान की छूट ने अंदर से सड़ना तो था, hi.. मैंने मालिकना की छूट में लिप्स खोल कर अपनी जीब को अंदर दाखिल कर दिया..

अह्हह्ह्ह्ह सीईई हममममममः अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह विज्जू और भी अंदर डालो अपनी जीब को. अपनी जीब से hi मुझे छोड़ दो.. और निकल दो सारा पानी मेरी छूट से .. सालों से बहार निकलने क लिए तड़प रहा है..

मैं भी मज़ा से मालिकान की छूट का पानी पीने लगा.. मालिकान अपने निप्पल्स को पकड़ कर मरोड़ने अलगी..

पद्मा आंटी मेरे लुंड को मोहन में लिए चूसने लगी.. धीरे धीरे तीनो की hi स्पीड बढ़ने लगी.. मालिकान की छूट ने पानी और भी ज़यादा छोड़ना शुरू कर दिया..

अजीब से स्मेल मालिकान की छूट से आ रही थी, जो मेरे लुंड को झटके देने लगी थी. मेरा लुंड पद्मा आंटी के मोह में और भी फूलने लगा..

कुछ देर में मालिकान की आग बढ़ी तो उनसे कण्ट्रोल नहीं हुआ.. वो मेरे ऊपर से उठ गई.

पद्मा आंटी ने भी मेरे लुंड को छोड़ा और बीएड पर लेट गई.

पद्मा:- मालिकान तुम कुत्तिया बन्न कर मेरी छूट को छतो विज्जू तुम्हारी पीछे से तुम्हारी छूट में लुंड घुसता है..

मालिकलां:- हाँ आज मई कुत्तिया बननन कर तेरी छूट चाटेंगी.. चल बिज्जू पीछे से मेरी छूट में अपना मूसल घुसा, देखो मुझपर रेहम मैट कर करना..

मुझे आज अपनी रंडी बना कर छोड़ना.. पूरा दर्द और पूरा मज़ा देना है आज अहह

अह्ह्ह अह्ह्ह ओह्ह पहले से hi मेरी सिसकियाँ निकलने लगी हाँ.. आज तो हमारी चंडी हो गई है..

इतना बोल कर मालिकान पद्मा की छूट पर झूल गई और अपनी जीब निकल कर पद्मा आंटी की छूट को चाटने लगीं..

मई मालिकान के पीछे आया अपने लुंड को मालिकान की छूट के लिप्स पर लगा दिया.. मालिकान की कमर पर थोड़ा सा वज़न दाल कर उनकी छूट को बहार निकला.. मालिकान ने भी अपनी छूट को पूरी तरह से बहार निकल दिया.. अब्ब मेरा लुंड मालिकान की छूट को फाड़ने क लिए पूरी तरह से तैयार था..

मैं मालिकान के बड़े बड़े चूतड़ों को देखने लगा. मुझे बड़ी बड़े चुत्तड़ो को देख कर गांड मारने का बहुत मैं होने लगा था, अभी तक्क मैंने किसी की गांड में लुंड नहीं घुसाया था, पारर रोज़ hi किसी न किसी के चुत्तड़ देख कर मेरी बेचैनी बढ़ने लगी थी.. मुझे जल्द hi माँ की गांड मार कर बाकी सबब की भी गांड मारनी थी.

सबसे पहले मुझे माँ की गांड मारने का मैं था.. शादी की रात पूजा दीदी की गांड भी मैं मारने वाला था, तो उससे पहले hi मुझे माँ की गांड का सवाद ले लेना चाहिए था..

मैंने मालिकान की कमर को कस के पकड़ा और अपने लुंड को उनकी छूट पर रखते हुए धक्का मर दिया. मेरा लुंड मालिकान की टाइट छूट में थोड़ा सा hi गया था..

मालिकान:- आआआआआ आईईईई माआआआ विजजूउउ मेरी छूट बहुत टाइट है, दर्द होने लगा है..

विजय:- क्यों मेरी रंडी साली को दर्द होने लगा है..

मालिकान:- हाय विज्जू तेरे मोहन से गाली कितनी अजीब लग रही है ..

विजय:- चल रंडी अपने नीचे लेती हुई कुत्तिया की छूट को चाट और मेरी तरफ धयान मैट लगा, मुझे मेरा काम करने दे.. सालों से नहीं चूड़ी तो क्या हुआ, छूट अंदर से तो पूरी तरह से खुली हुई है ना.. थोड़ा hi दर्द होगा, ज़यादा मैट चीख..

मेरा लुंड 2" hi मालिकान की छूट में गया था, मैंने एक और ज़ोरदार धक्का मार दिया, मालिकना की छूट अंदर से बहुत गीली थी, छूट टाइट थी तो क्या हुआ, मेरा लुंड मालिकान की गेली छूट में स्लिप होता हुआ उन्हें दर्द देता हुआ 6" तक्क अंदर जा घुसा....... मालिकान से शायद पद्मा आंटी की छूट पर काट लिया था.. पद्मा आंटी की भी चीख निकल गई.

पद्मा:- हरामज़ादी मेरी छूट पर क्यों काट रही है, लुंड लिया है छूट में तो सहन भी कर, मेरी छूट का हशर तो ख़राब मैट कर ना..

मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा और फिर एक और करारा शॉट मर्डर कर पूरा लुंड hi मालिकान की छूट में उतार दिया.. मालिकान ने इतना बड़ा लुंड पहले कभी नहीं लिया था..

मालिकान:- aiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaa मइईईई marrrrrrrrrrrr गइईईई

सारा hi एक बार क्यों दाल दिया...... ahhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

पद्मा:; कुत्तिया की तरह से चिल्ला क्यों रही है, लुंड घुसेगा तो दर्द तो होना hi है ना.. चल विज्जउ ज़ोर से छोड़ इस रंडी को निकाल दे इसकी छूट की सारा पानी.. करदे बुरा हाल इसका..

मैंने भी देर नहीं की जितनी आग मालिकान की छूट में थी, कुछ hi देर में वो शांत हो hi जाती.. मैंने अपने लुंड को बहार निकला और इस बार मई नार्मल स्पीड से अपने लुंड को पूरा hi मालिकान की छूट में अंदर बहार कर रहा था..

कुछ देर मालिकना शोर करती रहीं. फिर शांत हो गईं और पद्मा आंटी की छूट को चाटने लगीं..

धीरे धीरे करके मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर di..mea लुंड सुपडे तक बहार आता और फिरसे पूरा hi मालिकान की छूट की दीवारों को खोलता हुआ फस फस कर अंदर जाने लगा.. धीरे धीरे मालिकान की छूट ने मेरे लुंड को खुद में पूरी तरह से बर्दाश्त कर लिया था.. मालिकान ने शायद पद्मा आंटी किओ छूट में ऊँगली भी दाल दी थी..

पद्मा आंटी की भी सिसकियाँ निकलने लगीं थीं.. मैंने नज़र पद्मा आंटी पर डाली तो वो मुझे hi देख रही थी..

विजय:- क्यों पद्मा रंडी मज़ा आ रहा है ना..

पद्मा:- हाँ विज्जु तेरी रंडी को बहुत मज़ा आ रहा है, पारर अभी मुझे पूरा मज़ा नहीं आ रहा है, जब्ब तेरा लुंड अपनी छूट में लूंगी तब्ब पूरा मज़ा मिलेगा मुझे..

विजय:- तो टेंशन न ले, बास कुछ hi देर में ये कुटिया झड़ने वाली है, फिर तेरी छूट का भी भोसड़ा बनता हों..

पद्मा आंटी खुश हो गए.. और मैंने अपने फोकस मालिकान की छूट पर बढ़ा दिया..

मालिकन की बुरी हालत थी, मालिकान की दो उनलगियां पद्मा आंटी की छूट में थी पारर अब्ब मालिकान पद्मा आंटी की छूट को चाट नहीं रही थी.. उनकी छूट पर अपना मोहन रखे तेज़ सांस लेते हुए मेरे लुंड को अपनी छूट में घुसने का मज़ा ले रही थी..

मैं अपनी स्पीड बधाई तो मालिकान की सिसकियाँ और भी तेज़ हो गई, मालिकान ने अचानक से hi अपनी ुलगलियों को तेज़ तेज़ पद्मा आंटी की छूट में चलना शुरू कर दिया..

मालिकान की छूट अब्ब बास कुछ hi देर में बरसने वाली थी... मैं अपनी सपेद और भी बधाई तो मालिकना की छूट मेरे लुंड की धुवां धार रगड़ को सेह नहीं पाई और पानी छोड़ने लगी.. मालिकिन हंप्टी हुई देह गई तो पद्मा आंटी ने मालिकान को साइड में किया, मरी लुंड मालिकना की छूट से निकला तो पद्मा आंटी बीएड पर लेट कर अपनी टांगों को उठाये अपनी छूट के दर्शन देती हुई मेरी आँखों में देखने लगी, पद्मा आंटी की आँखों में लाल डोरे तैर रहे थे.. वो मुझे तरसी हुई निगाहों से देखने लगी थी..

मैं पद्मा आंटी के ऊपर आया अपने लुंड को उनकी छूट पर सेर क्र दिया.. और झुक कर पद्मा आंटी को किश करने लगा..

पद्मा आंटी ने एक हाथ से मेरे लुंड को पकड़ लिया, और उसे अपनी छूट के लिप्स में घुसा दिया.. मैंने अपने लुंड को जगा पाया तो एक धक्का मार दिया.. मेरा लुंड पद्मा आंटी की छूट में घुसता चला गया.. आंटी ने मेरे होंटो को कस लिया, काटा नहीं था..

मुझे पता था क दर्द हुआ तो आंटी मेरे होंटो को काट भी लेंगी, जैसे मालिकान ने उनकी छूट पर काट लिया था..

मैंने पद्मा आंटी के होंटो से अपने होंटो को अलग किया और एक ज़रदार धक्का मार कर अपने लुंड को उनकी छूट में और भी अंदर उतार दिए..

aiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiii मेरी छुट्ट्ट्ट

phattttttttttt gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii

विजजू थोड़ा सा रुको.. पर मैं नहीं रुका मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा लुंड पद्मा आंटी की छूट को पूरा hi खोलता हुआ उनकी बच्चेदानी तक जा पोहंचा.

पद्मा आंटी की इस बार की चीख बहुत भयानक थी..

मैंने अपने मोहन को पद्मा आंटी के बूब्स पर धरा और उनके एक निप्पल को मोहन में लिए ज़ोर से चूमने लगा, दूसरे हाथ से मैंने आंटी के दसूरे दूध को को भी जोरसे दबाना शुरू कर दिया..

दोनों को hi रंडी बन्न कर छोड़ना था, दर्द तो फिर होना hi था.. और फिर एक hi बार में सारा लुंड उतर कर एक hi बार दर्द देना सही था, जैसी सैलून से उनकी कहत लुंड के बिना रही थी, छूट टाइट तो होती hi थी, दर्द भी ज़यादा होना था..

कुछ देर मैं आंटी के बूब्स को चूसना और दबाता रहा, आंटी भी दर्द से मचलती रही, फिर वो शान्तो हो गईं..

पद्मा:- विज्जू तुमने तो मेरी जान hi निकाल दी थी.. तेरा लुंड इतना बड़ा है, सारा hi एक बार में कैसे जाता, रुक रुक कर नहीं दाल सकता था क्या...

मालिकनां:- क्यों रंडी मेरी बारी पर तो बहुत उछाल रही थी. अब्ब पता चला क सैलून बाद लुंड छूट में घुसे और वो भी इतना बड़ा तो कितना दर्द होता है..

पद्मा:- हाँ लग गया पता, मई वो वैसे hi कह रही हों, दर्द में भी तो ज़यादा मज़ा hai..chal विज्जउ अब्ब छोड़ मुझे जोरसे अब्ब तो मेरे दोनों दूध भी लाल हो चुके हाँ तेरे चूसने और दबाने से..

मैंने अपने लुंड को पद्मा आंटी की छूट से सुपड तक बहार निकला और फिरसे पुरे ज़ोर के साथ अंदर घुसा दिया..

padma:-aiiiiii सीईई माआ अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह विजजूउउ ऐसे hi बार बार क्र, मेरी टाइट छूट तेरे बड़े लुंड से बहुत खुश दिखने लगी है, ऐसे में दर्द तो है पारर मज़ा भो बहुत है. अब्ब रुकना मैट और धक्के पर धक्के लगता जा..

मैंने भी अपने लुंड को स्पीड दे दी, वो पद्मा आंटी की टाइट छूट को धीरे धीरे खुला करता हुआ अंदर बहार होने लगा..

कुछ देर गुज़री तो मालिकान ने मुझे रुकने का कहे दिया..

मालिकान बीएड पर अपनी छूट को खोल कर लेट गई, पद्मा आंटी भी समझ गई वो कुत्तिया बन्न कर मालिकान की छूट को चाटने लगीं.. मई पद्मा आंटी के पीछे आया और अपने लुंड को एक hi झटके में फिरसे पद्मा आंटी की छूट में उतार दिया..

दोनों की hi सिसकियाँ निकलने लगी.. मैं पुरे जोश से पद्मा आंटी की कमर को पकड़ कर अपने लुंड को उनकी छूट में अंदर बहार करने लगा...

मालिकान भी फिरसे गरम हो चुकी थीं,. उनकी सिसकियाँ बढ़ने लगीं. पद्मा आंटी भी मज़े से उनकी छूट को चाट रही थी, मेरा लुंड मुसलसल hi पद्मा आंटी की छूट में अंदर बहार हो रहा था, धीरे धीरे पद्मा आंटी की छूट ने भी पानी निकलना शुरू कर दिया..

उन्हें ने मालिकना की छूट को चाटन छोड़ा और मेरे लुंड का सवाद लेने ालगीं..

कुछ देर में आंटी भी झटके कहते हुए झाड़ गई.. मैंने अपने लुंड को उनकी छूट से निकला और बीएड पर लेट गया..

मुझे दोनों की चुदाई करते हुए 25 मिंट होने वाले थे.. मेरा भी आधे से ज़यादा सफर पूरा हो चूका था..

मालिकान ने मेरे लुंड को छत की अतराफ़ खड़ा देखा तो वो उठ कर मेरे लुंड पर अपनी छूट को रख कर बैठ गई.. और पुरे रिधम के साथ मेरे लुंड पर उछलने लगीं.. धीरे उनकी छूट ने फिरसे पानी उगलना शुरू कर दिया.. मालिकान अपने बूब्स को दबाते हुए मेरे लुंड पर उछाल रही थी. कुछ देर में वो फिरसे जहटके लेते हुए जहदने ालगीं..

मालिकान के बाद पद्मा आंटी मेरे लुंड पर आई और अपनी छूट को मेरे लुंड पर रखते हुए नीचे बैठ गईं. फि वो भी मालिकान के जैसे hi मेरे लुंड पर उछलने लगी. पद्मा आंटी जल्दी थक गयी. वो मेरे ऊपर झुकी तो उनकी गांड कुछ ऊपर उठ गई... मैंने पद्मा आंटी के चुत्तड़ो को पकड़ कर अपने लुंड को उनकी छूट में अंदर बहार करना शरू कर दिया..

अब्ब मेरा लुंड भी पूरी तरह से फूल चूका था, उसकी राजन भी खून से भर चुकी थी. अब्ब उनमे करंट के दौड़ने की रफ़्तार बढ़ती जा रही थी..

मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. मेरे धक्को को पद्मा ओत्तय सहन नहीं कर पाया ुर वो फिरसे जड़ गईं.. उनकी छूट का पानी मेरे लुंड के आस पास टपकने लगा..

उनकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी.. मालिकान भी ये सबब देख रही थी.. उन्हों ने पद्मा आंटी को मेरे ऊपर से उठाया और मेरे लुंड को पकड़ कर अपने मोहन में लिया और बाकी के बचे हुए लुंड को हाथ से मसलने लगी. मेरा लुंड और भी फूलने लगा. जल्द hi मेरे लुंड का सारा माल सुपाद तक आ पोहंचा, मालिकान को भी इसका एहसास हो गया था, पर उन्हों ने मेरे लुंड को अपने मोहन से नहीं निकला.

कुछ hi देर में मेरे लुंड का सारा माल पिछकारियाँ छोड़ता हुआ मालिकान के मोहन में जमा होने लगा.. मालिकान ने तब्ब तक्क मेरे लुंड को मसलना नहीं छोड़ा जब्ब तक्क मेरे लुंड का सारा माल उनके मोहन में न चला गया...

मेरी भी साने बहुत तेज़ हो गई थीं, मई भी हांपने लगा था..

पद्मा आंटी ने मालिकान को पकड़ कर अपनी तरफ खेंचा और मालिकन को किश करने लगीं. फिर दोनों ने hi मिलकर मेरे लुंड के पानी को आधा आधा बाँट लिया..




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अपडेट ::: 105

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Time:04:40:PM:



इस वक़्त mai,shushma दीदी, महक और जूली पैलेस के पार्क में बैठे हुए थे, वहां धुप से बचने क लिए एक 15क्ष15 का शेड बनाया गया था..

सबब hi जान गए थे क शुष्मा दीदी से मेरा क्या रिश्ता है, शेखर और दीदी की वैल्यू पैलेस में बहुत बढ़ गई थी.. दीदी का एक हाथ मेरे हाथ में था, अब्ब दीदी को उतनी उलझन नहीं होती थी, जितनी पहले होती थी, धीरे धीरे करके दीदी मेरे रंग में रंगने लगी थीं..

एक टेबल के गिर्द हम चरों hi बैठे हुए थे..

महक भी मेरे सारे प्लान जान गई थी.. महक ने मेरी भरपूर हौसला अफ़ज़ाई की थी, और खुद भी पूरा पूरा टाइम देने का कैद दिया था, अब्ब महक दिल्ली में hi रहने वाली थी.

बिज़नेस और गैंग के लिए महक पूरी तरह से सरगरम हो गई थी.. महक के पास भी बेशुमार आइडियाज थे, महक पूरी दुन्या घूम चुकी थी, महक को बहुत नॉलेज था, हर एक चीज़ का, महक का एक्सपीरियंस भी बहुत काम आ रहा था.

महक:- विजय तुम वो जेल का काम कब्ब कर रहे हो, उसे अब्ब जल्द hi कर लो तो अच्छा है, जितनी देरी होगी, हमें भी उतनी hi देरी होगी.. और अब्ब दन्न दिल्ली में अपने कदम रख चूका है तो इससे से पहले क वो यहाँ रह कर स्ट्रांग बने, हमें उसके क़दमों को दिल्ली में जमने से पहले hi उखड फेंकना है.. बार बार की हार से वो कोई न कोई ऐसी गलती कर ज़रूर कर बैठेगा, जिससे हमें फायदा हो.. अब्ब तो वो मेरी वजा से भी तेनसेद है.. मई भी अब्ब दिल्ली में हों.. वो भी जल्द hi दिल्ली आने वाला होगा..

जहाँ तक्क मेरा ख्याल है अगर दन्न अपने इलाके से निकल कर दिल्ली में आता है तो तुम्हारे लिए भी कुछ असानिया बन जाएगी.. वहां पुणे में दन्न के खिला कुछ कर पाना आसान नहीं होगा. वहां का पूरा एरिया hi ऐसा है, वहां तुम्हारा घुस पाना खतरे से खली नहीं होगा.. अगर दन्न दिल्ली में काबू आ जाता है, तो अच्छी बात है, दन्न को काबू करके तुम अपना बाकी का रिवेंज भी आसानी से ले सकते हो.. फिर तुम्हे दन्न की टेंशन नहीं रहेगी..

हम तीनो hi महक की बातें सुन रहे थे.. मैं हलके हलके दीदी क हाथ को दबा भी रहा था.. पारर दीदी बिना भाव के hi महक की बातें सुन रही थी..

शुष्मा दीदी:- विज्जउ मेरे भाई, जितना घटिया दन्न है, तुम्हे अपना रिवेंज भी उसी हिसाब से लेना होगा, दन्न जैसे कुत्ते दर्द से ारी होते हाँ, तुम कुछ ऐसा करना क वो पल पल दर्द से बिलबिलाता रहे..

जूली:- हाँ विजय मैंने भी माँ जी के दर्द को महसूस किया है, दन्न सिर्फ टार्चर के लायक नहीं है, उसकी सजा ऐसी होनी चाहिए क माँ जी के अंदर का सारा hi दर्द निकल जाए..

दीदी:- जूली ये तुमने सही कहा, दीदी के दर्द को सारा hi उनके अंदर से निकलना होगा, और वो दन्न को दी जाने वाली सजा से जुड़ा हुआ है.. अगर दन्न को सजा दीदी की मंशा क हिसाब से मिली तो दीदी फिर कभी भी दुखी नहीं रहेंगी... विजजू मेरे भाई तुम ऐसा hi करना...

मैं महक को देखने लगा..

महक:- विजय तुम मुझे ऐसे मैट देखो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, और फिर तुम सिर्फ दन्न को hi तो नै सबक सीखने वाले, मेरे घर के बाकी बचे हुए भी तो तुम्हारे रिवेंज से नहीं बच पाएंगे.. तुम उसके साथ भी वो सबब करोगे.. उन्हें भी तो वो सारा दर्द डोज जो तुम्हे और बाकी सबब को मिला है.. विजय मैंने उस हवेली में रहते हुए अनगिनत बेबस लड़कियों और औरतों की सिसकियाँ और चीखें सुनी हाँ, मेरा अब्ब किसी से कोई लेना देना नहीं है.. मेरी तरफ से तुम कोई टेंशन नहीं लेनी चाहिए.. बल्कि मैं तो इस सबब में तुम्हारी मदद hi करुँगी..

विजय:- ऐसा है तो फिर मुझे भी दन्न के दिल्ली में आने का बड़ी शिद्दत से इंतज़ार रहेगा.. मैं सबसे पहले दन्न को अपने कब्ज़े में लेना चाहता हों, फिर सबब hi दन्न की आँखों के सामने करना चाहता हों, मैंने प्लान पहले सही सोच बना रखा है, दन्न के साथ क्या करना है.. दन्न अब मुझसे नहीं बचने वाला... उसका तो मई वो हाल करूँगा, वो उसे अपनी चल रही एक एक सांस भरी पड़ने लगेगी.. वो एक एक सांस के साथ hi मुझसे अपनी ज़िन्दगी की भीक मांगे... वो कही से भी दया क लायक नहीं है, उससे सोच सोच के जितनी आग मेरे अंदर भड़क चुकी है..

और रही बात जेल वाले क़ैदिओं की तो मैंने आज hi उस काम में लगने वाला हों. साड़ी तैयारी हो चुकी है.. आज की रात जेल के क़ैदी, जेल से बहार होंगे..

महक:- मई भी तुम्हारे साथ चलेंगी..

विजय:- हाँ क्यों नहीं, तुम मेरे साथ hi रहना.. मिलकर सबब करेंगे...

महक:- चलो वो सबब तो हो गया है, अब्ब मुझे उस हरामज़ादी रेखा को देखना है, मई भी तो देखों क उसके साथ क्या कुछ किया है तुमने.. जितने बुरे काम थे उसके सजा भी उसे वैसी hi मिल रही है या नहीं..

दीदी:- विज्जू भाई मुझे उस कुत्तिया को देखना है..

विजय:- दीदी आपसे वो नहीं देख जायेगा.. वो सबब

दीदी:- नहीं भाई मुझे वो सबब देखना है..

विजय:- जूली सबब सेट करो, सबब दीदी के हिसाब से करो, और कुछ देर के लिए रेखा बाई का ट्रीटमेंट रुकवा दो..

जूली ने बैठे बैठे hi फोन कर दिया. फिर 10 मिंट के बात जब सबब सेट हो गया तो हम बेसमेंट क लिए निकल पड़े.. रेखा बाई क हाल सबब के hi देखने लायक था..

कुछ देर में हम सबब बेसमेंट में थे.. रेकः बाई को फिरसे फूलों से महकते हुए रूम में पोहंचा दिया गया था, जब से वो पैलेस में आई थी, वो नंगी hi थी, उसे भी बहुत शोक था नंगा रहने का, और सभी को नागा देख का.. बहुत से ज़िन्दगी बर्बाद की थीं रेखा बाई ने..

रेखा बाई वाले रूम की एक दीवार में भी शीशा लगा हुआ था.. रेखा बाई रूम में एक छोटे से पलंग पर नंगी hi लेती हुई थी..

मैंने दीदी क कान में कहा.

विजय:- दीदी अगर रेखा बाई को नंगा देख कर बुरा लगे तो बहार जा कर हमारा इंतज़ार कर लेना.... दीदी ने मुझे घूर कर देखा और फिर मेरे कान में बोली..

दीदी:- विजू यहाँ कुछ भी गन्दा नहीं है समझे, ये सबब सिर्फ एक सजा है, और ऐसे हाल में रेखा कुत्तिया को देख कर तो मुझे चैन मिल रहा है, नंगी है तो क्या हुआ, यहाँ कोई गन्दा काम तो नहीं हो रहा ना. और अब्ब तुम मेरे अंदर दूसरे विचार मैट डालो, मुझे इस कुत्तिया को देखने दो..

मैंने दीदी की बात पर हैरान रह गया, यहाँ पैलेस की आबो हवा भी कितनी जल्दी सभी को बदल देती है, कल की एक किश ने hi दीदी के लाइफस्टाइल को बदल दिया था, दीदी को रेखा बाई को नंगा देख कर बाद फीलिंग्स नहीं आ रही थीं..

रेखा को देखा तो रेखा बाई का शरीर इतने थोड़े से hi दिनों में गलना शुरू हो गया था. रेखा बाई को दी जाने वाली खुराक भी बहुत कम् थी, ऊपर से रेगुलर hi चुद चुद के उसकी छूट ने बहुत सा पानी निकाल दिया था, जिस वजा से रेखा बाई में पानी की कमी होने लगी थी..

रेखा बाई का वेट 12-15 किलो कम् हो गया था, उसके बदन की साड़ी hi चर्बी उसकी छूट के पानी में बह कर निकल चुकी थी, रेखा बाई की स्किन पर झुर्रियां सी पड़ने लगी थीं.. रेखा बाई सूरत से 60 से ऊपर की दिखने लगी थी.. रेखा बाई का चेहरा भी झुर्रियों से भरने लगा था..

कुछ hi दिनों में रेखा का गोश्त भी ख़तम होकर रेखा बाई की हाड़ियों को दिखने लगता.. जूली ने एक काम और भी किया था, वो मेरे मंद में नहीं आया था..

जूली ने रेखा बाई के खाने और पीने क लिए चमड़े के जूतों को इन्तेमल में लाया था, रेखा बाई को जब भी कुछ खाना या पीना होता तो वो शूज में hi सबब कहती पीती थी.. शुरू के 2 दिन तो रेखा बाई ने कुछ भी नहीं खाया पिया था, पारर अब्ब रेखा बाई पागलों की तरह से जूतों में मौजूद खाती पीती थी..

अभी रेखा बाई को रूम में शिफ्ट किये थोड़ी hi देर हुई थी.. जूली भी सबब कुछ हमें दिखाना चाहती थी, कुछ hi देर में एक माइड आई और रूम में पड़े हुए शूज में थोड़ा सा पानी दाल कर चली गई, रेखा बाई अपने होंटो पर जीब फेरते हुए खुद में हिम्मत जुटती हुई उठी और जुटे के पास पोहंच कर पेट के बल लेट गई और अपनी जीब निकल कर जुटे में रखा हुआ पानी चाटने लगी..

दीदी और महक ये देख कर हैरान रह गई..

दीदी:- विजजूउउ ये क्या है, रेखा बाई की ये हालत जुटे में पानी वो भी मज़े से चाट रही है..

विजय:- हाँ दीदी ये सबब जूली ने किया है... खाना भी रेखा बाई को एक टाइम में ऐसे hi दिया जाता है..

महक:- जूली मेरी आवाज़ रेखा कुत्तिया तक पोहंच सकती है क्या..

जूली:- हाँ क्यों नहीं, मई अभी आपकी आवाज़ उस तक पोहंचती हों.. जूली रूम की साइड में गई और एक बटन को प्रेस कर दिया.. वहां पड़ा हुआ माइक उठा कर हमारे सामने रख दिया, माइक की रेंज बहुत थी, उसे हाथ में लेने की ज़रूरत नहीं थी..

जूली के इशारे पर महक ने बोलने शरू कर दिए..

महक:- हेलललललूओ रेकः बाई, क्या हाल हाँ तुम्हारे.. मैं हों महक दन्न हरामी की बेटी.

रेखा बाई महक की आवाज़ सुन कर रूम में लगे हुए स्पीकर की और देखने लगी, रेखा बाई को महक की आवाज़ से झटका नहीं लगा था.. जितने झटके उसे मिल चुके थे, अब्ब और झटके वो सहने की हिम्मत नहीं रखती थी.. वो बास स्पीकर को देखने लगी..

महक:- क्या हुआ तुम्हे शॉक नहीं लगा क्या.. तुम्हे तो खुद लोगों को शॉक देने की आदत रही है, अब्ब खुद hi शॉक प्रूफ हो गई हो.. है है है है देखा रेखा कुत्तिया तुमने, ऐसी लाइफ जीने का क्या अंजाम होता है.. साली कुटिया अगर ऐसी hi लाइफ जीनी थी, पुरे दुन्या के मर्दों के लुंड अपनी छूट में लेने hi थे, तो लेती रहती, पारर किसी की इज़्ज़त से खेलना नहीं चाहिए था तुझे, काया कमी थी तेरे पास, पैसा था, पावर थी तेरे पास, फिर भी तू रही एक वैश्य hi.. खुद न चुद कर दूसरों को छुड़वा कर मज़े लिया करती थी..

अब्ब मिल रहा यही तुझे मज़ा हरामज़ादी.. छूट की आग अगर तेरे कण्ट्रोल में नहीं थी, तो किसी कुत्ते के आगे अपनी छूट को खोल देती, और ले लेती उसका लुंड अपनी छूट में.. फिर तेरे साथ ऐसा कभी नहीं होता...

पारर तू खुद को कैसे रोक पाती इस सबब से, दुन्या तेरी छूट क नीचे जो आ गई थी, सारा बड़े बड़े हरामज़ादे तेरे दीवाने जो हो गए थे, सब से चुद चुद के तूने सब को hi अपने साथ मिला लिया.. और बेबस और मजबूर लड़कियों और औरतों को बर्बाद करना शुरू कर दिया..

बड़ा घमंड था तुझे अपने रुतबे पर, बहुत पावर आ गई थी तुझमे, बड़ा तनतना था न तेरा पुरे बाजार में..

देख वो सबब तेरे मोहन के पास रखे हुए जुटे में जा समाया है.. अब्ब यही तेरी औकात है और यही तेरा अंजाम..

महक की आँखों उबाल रही थीं.. वो बहुत ग़ुस्से में थी, रेखा बाई स्पीकर को देखते हुए आंसू बहाने लगी, वो कुछ बड़बड़ा रही थी.. मैं कुछ बोलता जूली से झट से एक एक बटन दबाया..

रेखा बाई की बड़बड़ाहट सुनाई देने लगी...

""मुझे मर दो मुझसे अब और सहन नहीं होता, मेरा अंदर ज़ख़्मी हो चूका है, ये फूलों की खुशबु भी मेरे जान लेने लगती है, मुझसे अब्ब कुछ भी सहन नहीं होता.. मुझे मार दो.. मुझे मार दो..

चुदाई की लत्त ने और पावर पाने की लत्त ने मुझे कही का नहीं छोड़ा.. अपने hi घरवळून को मैंने मरवा दिया था, ऐसी सजा तो मुझे मिलनी hi चाहिए.. मेरे माता पिता मुझे गंदे कामों से रोकते थे.. मई क्या करती बचपन से hi मेरी छूट में आग लग गई thi..mere खवाब बड़े बड़े थे.. मैं किसी को खातिर में नहीं लाइ, जो मेरी राह में आया मैं सभी को मारती हुई आगे बढ़ने लगी.. मेरी दोस्ती एक कोठे वाली से हुई तो मैं उसके साथ मिलकर धंदा करने लगी.. फिर आगे और आगे बढ़ती चली गई..

मेरे शरीफ माता पिता की इज़्ज़त भी मैंने मिटटी में रोल दी.. जब्ब मैंने अपने माता पिता की इज़्ज़त की धज्जियां उदा दी थीं तो फिर मुझे किसी की इज़्ज़त की कैसे परवा हो सकती थी..... इसलिए मैं अनगिनत लड़कियों और औरतों को उजाड़ना शरू कर दिया.... कभी कोई मुझपर भरी नहीं पद सका था, इसलिए मैं दर्रे बिना hi सबब करती रही.. और आगे और आगे बढ़ती चली गईइइइइइइइ

अब्ब सबब मुझे समझ आने लगा है, मुझे एहसास भी हो रहा यही क मैंने अपने माता पिता क साथ कितना गलत किया था.... मुझे मार दो.. मुझे मार दो..

मुझे अब्ब और नहीं जीना है.. मुझे मर्डर कर अपने माता पिता की आत्माओं से माफ़ी मांगनी है.. मुझे माड़ दो मुझे मार दो..

रेखा बाई की हालत बहुत ख़राब थी.. रेखा बाई कुछ hi दिनों में अंदर से पूरी तरह से टूट चुकी थी.. ये भी पता चल गया क रेखा बाई ने इस मुक़ाम को पाने क लिए अपने माँ बाप को भी अपनी राह से हटा दिया था..

विजय:- रेखा बाई तुम अपने माता पिता के पास जा कर माफ़ी तो मांग लोगी, वो शायद तुम्हे माफ़ भी कर दें.. पर अभी भी कई ऐसे लोग जो सिसक सिसक कर ज़िन्दगी गुज़र रहे हाँ.. कई ऐसे लोग जिनकी बेटियों को तुमने उनके घरों से उठाया था, वो अब्ब शायद hi अपनी बेटियों को फिरसे अपने घरुन में जगा दे सकें.. उनपर किये कए अत्याचार का दंड भी तो तुम्हे भुगतना है ना.

महक:- और तू कुत्तिया कुछ hi दिनों में सबब भूल कर पछतावे के आंसू रोने लगी है.. अभी तो तेरे लिए बहुत कुछ बाकी है.. अभी तो तेरे लिए सजा शुरू हुई है, हममे से किसी को तुझपर दया नहीं आएगी.....

विजय अब्ब इसकी आगे की सजा शुरू कार्डो.. चुद चुद के तो ये अब्ब इस हालत को पोहंच hi चुकी है.. अब्ब इसकी नेक्स्ट ट्रीटमेंट शुरू करवाओ....

विजय:- अब्ब इसकी फाइनल ट्रीटमेंट शुरू करवाए जायेगी.. कल से hi मैं इसके लिए सबब इंतेज़ाम करवाता हों..

दीदी की हालत सब से ज़यादा खराब थी, दीदी रेखा बाई को नंगा देख कर तो खुद पर काबू पा गई थीं, पर महक की बातें सुनकर और फिर रेखा बाई की बातें सुनकर उनके चेहरे क रंग पल पल बदल रहे थे..

कुछ देर में हम सबब बेसमेंट से बहार आ gaye..didi ने कस के मेरे हाथ को पकड़ लिया था, दीदी का हाथ कानो रहा था.. महक के मोहन से गन्दी गन्दी बातें सुनकर दीदी अंदर से बहुत मचल गई थीं.. मई दीदी के अंदर का सबब hi समझ रहा था..

बहार आये तो मैं महक और जूली से फिर मिलने का बोलकर दीदी को साथ लिए पैलेस की तरफ जाने लगा..

दीदी भी तेज़ तेज़ क़दमों से पैलेस की तरफ जाने लगीं..

मैं दीदी को कल वाले रूम में hi ले गया.. अंदर जाते hi मैंने दूर को अंदर से लॉक कर दिया.. और दीदी को लिए हुए बीएड पर आ गया..

बीएड पर गिरते हुए दीदी ने मुझे कस के पकड़ लिया, दीदी मेरी आँखों में देखने लगीं..

मैंने दीदी को बीएड पर लिटाया और उनके ऊपर आ गया..

विजय:- दीदी क्या हुआ.?

दीदी:- पता नहीं भाई मुझे क्या हुआ था, मैं तो शांत hi थी, पर फिर अचानक से hi मेरे अंदर कुछ बदलाव सा आने अलगे..

विजय:- दीदी एक बात पूछो, सच सच बातएंगी आप..

दीदी:- हाँ भाई पूछो ना.. क्या पूछना है..

विजय:- दीदी आपको सेक्स किये कितना समय बीत चूका hai..meri बात सुनके दीदी को एक झटका लगा..... दीदी ने अपना चेहरे साइड में घुमा लिया.....

दीदी की आँखों से फिरसे आंसू बहने लगे...

दीदी ने साडी पहनी हुई थी...

मैं दीदी के सर्र के बालों में अपनी उँगलियाँ चलने लगा.. दीदी के बालों को बखेरने भी लगा.. दीदी का चेहरा अभी भी साइड में था, और दीदी आंसू बहा रही थी..

दीदी का बदन बहुत टप्प रहा था.. मुझे अंदाज़ा होने लगा क दीदी के बदन में अचनाक से hi आग का बढ़ना कही ऐसा तो नहीं क दीदी की सेक्स लाइफ लम्बे आरसे से रुकी हुई हो.. अरु दीदी की छूट ने एक लम्बे समय से पानी भी न छोड़ा हो..

अगर ऐसा है तो दीदी क लिए ये सही नहीं होगा.. एक अबार दीदी को रिलैक्स कर देने से दीदी बहुत हद्द तक्क शांत हो जाएँगी.. दीदी ऐसे रिलेशन्स भगति भी थीं.. फिर भी उनके बदन की गरमी उन्हें बेचैन करती रहती थी..

दीदी के अंदर आग भी थी और दर्द भी था.. मैं दीदी के बूब्स को देखने लगा. मुझे एहसास होने लगा क दीदी क बूब्स भी बहुत ज़यादा फूल चुके हाँ..

वो तो मैंने कल hi हलके से हाथ लगा कर देख लिया था, दीदी क बूब्स बहुत hi ज़यादा ठोस थे.. दीदी कुछ शो नै करवाती थी, पर दीदी अंदर से बुरी तरह से मचल रही थीं..

ये मेरा अपना अंदाज़ा था.

मैंने अपने होंठ दीदी के क्लीवेज पर रख दिए और हलके से किश कर दी.. दीदी को एक झटका लगा और मेरे सर्र को पकड़ कर अपने ऊपर से हटा दिया.. दीदी की आँखों में आंसू थे..

और दीदी न में सर्र हिलने लगी..

मैंने दीदी नहीं मानी और दीदी क चेहरे को दोनों हाथों से थाम कर उनकी आँखों में देखते दीदी के होंटो पर अपने होंटो को रखने लगा.. दीदी फिरसे मचलने लगी.. और खुद को मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगीं..

मेरी पकड़ दीदी पर बहुत hi सख्त थी.. दीदी खुद को मुझसे अलग नहीं कर पाएं.. मेरे होंटो दीदी के होंटो से जा मिले.. दीदी ने अपनी ऑंखें फिरसे बंद कर लीं.. मैंने थोड़ी देर दीदी को किश किया दीदी के होंटो पर लगी लिपस्टिक को अपने होतनो की मदद से साफ किया...

फिर किश तोड़ कर दीदी को देखने लगा, जल्द hi दीदी ने अपनी ऑंखें खोल कर मुझे देखा.. मुझे खुद की तरफ देखते हुए पाया तो अपनी ऑंखें फिरसे बंद कर लीं..

मैं फिरसे दीदी के होंटो पर झुका और दीदी को इस बार और भी जोश से किश करने लगा, मैं दीदी के होंटो और चेहरे को चूमने अलग, 5 मिंट बाद hi दीदी ने अपनी आंख्ने खोल दीं,..

दीदी:- विजजू मेरे भाई मेरे साथ ऐसा मैट करो, देखो मई ऐसी नहीं हों, मुझे ये सबब नहीं करना है.. तू मेरा भाई है, मेरी दीदी का बीटा भी है.. न करो ये सबब मेरे साथ प्लीज..

विजय:- तो फिर आप बताएं आपने लास्ट टाइम सेक्स कब्ब किया था.. और इतनी जल्दी आपके शरीर में आग कैसे बढ़ने लगी...

दीदी:- नहीं भाई वो मई तुम्हे नहीं बताने वाली.. चाहे कुछ भी हो जाए..

विजय:- दीदी वो तो मैं आज जान कर hi रहूँगा. चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े.. मैं करूँगा, और आप मुझे रोक भी नहीं पाएंगी, दीदी मेरी आँखों में देखती रहें फिर अचानक से hi दीदी ने अपना चेहरे घुमा लिया, दीदी की आँखों के आंसू अब्ब थम चुके थे.





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अपडेट ::: 106


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दीदी के साथ मुझे आज ज़बरदस्ती hi करने पड़ेगी, वर्ण दीदी तो मुझे कुछ भी नहीं बताने वाली थी.. मैंने दीदी के गाल पर अपने होंठ रख दिए और धीरे धीरे दीदी के गाल को चाटने लगा, दीदी फिरसे मचलने लगीं..

इस बार मैंने अपने कुछ वज़न दीदी पर दाल दिया था.. मेरा लुंड दीदी की छूट के ऊपर धरा था, वो अभी सोया हुआ था, परर अब्ब उसके उठने का टाइम होने लगा था, दीदी की छूट पंतय के बंद होने के बावजूद भी गर्मी छोड़ रही थी..

मुझे हैरत भी होने लगी क दीदी एंटी आग सहन कैसे कर पा रही हाँ.. इतनी आग किसी में बढे तो वो तो पागल होकर किसी पर भी टूट पड़े, पारर दीदी खुद पर काबू पाए हुए थीं और मुझे भी कुछ करने नहीं दे रही थीं...

मैंने लुंड के बारे में सोचा तो वो खड़ा होने लग गया.. दीदी को भी मेरे लुंड के खड़ा होने का एहसास हो गया था, दीदी फिरसे मचलने लगीं और मेरे नीचे से निकलने क लिए ज़ोर लगाने लगीं..

दीदी:- विज्जू भाई ये सबब सही नहीं है, प्लीज मुझे बख्श दो, मई ये सबब तुम्हारे साथ नहीं कर सकती.. कही ऐसा न हो मई अपनी hi नज़रों में गिर जाऊं. भाई मुझे मेरी hi नज़रों में गिरने से बचा लो प्लीज..

मैं दीदी की बात को नज़र अंदाज़ करते हुए दीदी के गाल को चाटने लगा, नीचे से मैंने अपने लुंड को भी दीदी क छूट पर हलके हलके रगड़ना शुरू कर दिए था.

मेरा लुंड जल्द hi जोबन पर उतर आया तो मैंने एक हाथ से अपनी ज़िप को खोल कर अंदर हाथ डाला और लुंड को अंडरवियर से निकलना शुरू कर दिया..

दीदी को भी सब पता चल रहा था.. दीदी इस बार पूरा ज़ोर लगा कर मेरे नीचे से निकलने लगी..

दीदी:- छोड़ दे मुझे कुत्ते तुम मेरे भाई नहीं हो सकते, मई कह रही हों मुझे छोड़ दो.. तुम कुछ ज़यादा hi आगे बढ़ रहे हो.. दीदी ने मुझे थप्पड़ भी मारने शुरू कर दिए.. मैं एक हाथ से दीदी के हाथो को थामने लगा..

जल्द hi मैंने अपने लुंड को बहार निकल लिया. मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर दबा diya..didi की हलकी सी चीख निकल गयी.

मैंने दीदी की आँखों में देखा तो दीदी मुझे बहुत ग़ुस्से से देख रही थीं..

दीदी की ऑंखें ग़ुस्से से लाल होने अलगी थीं..

दीदी:- विज्जू तुमने अपनी हद्द पार कर दी है, मैंने इतना भी नहीं सोचा था, अब्ब उठो मेरे ऊपर से मैं अभी क अभी ये पैलेस छोड़ रही हों, मुझे नहीं रहना यहाँ, और न hi यहाँ फिरसे मई लौट कर आने वाली हों.. जितनी ख़ुशी मुझे तुम सबब से मिलकर हुई थी अब्ब मुझे उल्टा hi दुःख दे रहे हो तुम, कितने चीप हो गए हो तुम.. कोई अपनी मौसी के साथ भी ऐसा करता है क्या.. छोड़ दो मुझे..

दीदी के दोनों hi हाथ मेर हाथो में थे.. मैं दीदी की आँखों में देख रहा था..

विजय:- तो फिर आप मुझे बता दें, कबसे आपने सेक्स नहीं किया है..

दीदी:- विज्जू कमीने मई ये तुम्हे क्यों बताओ, और ये मेरी पर्सनल लाइफ है, तुम्हे मेरी पर्सनल लाइफ में दखल देने का हक़ किसने दिया है, तुमसे मैंने फ्री हो कर गलती करदी है, अब्ब छोडो मुझे, मुझे अभी जाना है यहाँ से..

मैंने अपने लुंड कर दबाओ दीदी की छूट पर बढ़ा दिए..

दीदी:- आईईईई माआ विज्जू कुट्टी ये क्या कर रहा है.. वहां से मुझे कुछ मैट करो.. उसे दूर रखो मुझसे..

दीदी के दोनों हाथो की उँगलियाँ मेरे हाथो की उँगलियों में फँसी हुई थीं.. मैंने अपने चेहरे को फिरसे दीदी के चेहरे पर कर दिया.. दीदी ने अपने चेहरे को फिरसे घुमा दिए.. अब्ब दीदी मुझे किश नहीं करने देना चाहती थी, इस बार दीदी मुझसे कुछ भी नहीं करना छह रही थीं..

मैंने दीदी क होंटो का धयान छोड़ा और दीदी की गर्दन पर अपने होंठ रख diye..jaise hi मेरे होंठ दीदी की गर्दन से मास्स हुए..

दीदी:- ोीीी माआ सीईई.. छह... chhhhhh..chhod दे मुझे.. प्लीज विज्जू मुझे जाने दे.. देख मई तेरी दीदी हों ना.. मैं तेरी मौसी भी हों ना, मेरे साथ ऐसा मैट कर.. सीईई मुझे गुदगदी हो रही है..

दीदी की टोन इस बार बदली हुई थी.. मैं दीदी की गर्दन पर अपने होंठ रखे दीदी की गर्दन को धीरे धीरे चूमने लगा. दीदी सटपटाए लगीं थी.

मेरा चेहरा पूरी तरह से दीदी पर था, इस अबार दीदी अपनी गर्दन को कही और नै मोड़ सकती थीं.. कुछ देर दीदी खुद को छुड़ाने की कोशिश करती रही, फिर धीरे धीरे शांत होने लगी..

मैंने अपनी जीब निकाल कर दीदी की गर्दन को चाटन शुरू कर दिया, दीदी की हालत और भी पतली होने लगी.. कुछ देर दीदी की गर्दन को चूमने और चाटने के बाद मैंने अपना चेहरा ऊपर उठाया और दीदी की आँखों में देखने लगा.

दीदी अब्ब भी मुझे ग़ुस्से से देख रही थी. पर अब्ब उनकी आँखों का रंग ग़ुस्से से कम् और छूट की आग के कारन ज़यादा लाल था.. मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई..

विजय:- दीदी आप अंदर से बहुत जल रही हाँ ना, बहुत आग भड़क चुकी है ना आपके अंदर..

दीदी:- मेरी ऑंखें ग़ुस्से की वजा से लाल है विज्जू तो एक बार मुझे छोड़ फिर तुम्हे मई बताती हों क मेरे साथ ज़बरदस्ती करने का क्या अंजाम होता है..

vijay:-(kameeni स्माइल से) दीदी मई कहाँ ज़बरदस्ती कर रहा हों आपके साथ.. मैं तो आपके साथ बहुत hi प्यार से सबब कर रहा हों..

दीदी:- आया बड़ा मुझे प्यार करने वाला.... चल अब्ब मुझे छोड़..

विजय:- (न में सर हिलाते हुए) जब तक आप मुझे सबब नहीं बातएंगी मई तो नहीं छोड़ने वाला आपको..

दीदी:- देख विज्जू मेरा पायरा भाई है ना तू, अपनी दीदी को छोड़ दे... अपनी दीदी से प्यार करता है न तू.. उसकी बात मान le........didi खुशामद पर उतर आई थी...... दीदी पल पल रंग बदल रही थीं..

मैंने अचानक से hi दीदी क होंटो को फिरसे अपने होंटो में ले लिया, दीदी फिरसे मचलने लगी.. और इस बार मैंने कस के दीदी के होंटो को चूसना शुरू कर दिया, नीचे से मैं अपने लुंड को भी दीदी की छूट पर ज़ोर से रगड़ रहा था.. दीदी की हालत और भी ख़राब होने अलगी.. दीदी पूरा ज़ोर लगा कर मेरे हाथों की उँगलियों से अपनी उँगलियाँ निकलने की कोशिश में लग गईं.. पारर अब्ब मैं दीदी को कोई माफ़ी नहीं देने वाला था..

5 मिंट तक्क मैं दीदी को किश करता रहा, 5 मिंट में hi दीदी की छूट ने अपनी आग और भी बढ़ा दी थी, दीदी अब्ब बहुत हद्द तक खुद के कण्ट्रोल से बहार हो चुकी थी.. मैंने दीदी क हाथ नहीं छोड़े और नीचे झुकता हुआ दीदी के क्लीवेज पर आ कर अपने होंटो वो रख दिया और वहां किश करने लगा, कभी मैं अपनी जीब से दीदी के बूब्स के ऊपर से चाटने लगता..

इस ढेंगा मुष्टि में दीदी के साडी उनके बूब्स से हट चुकी थी.. दीदी के क्लीवेज बहुत अच्छे से शो हो रहे थे..

मैं मज़े से दीदी के थोड़े से दिख रहे बूब्स को चूमे और चाटने लगा...

कुछ hi देर में दीदी की सिकियाँ शुरू होने लगीं..

दीदी:- आए ओह्ह्ह विजजू chh..chhhhod दे अपनी दीदी को.. न तड़पा अपनी दीदी को.. सीई माआआ ोीीी क्यों अपनी दीदी की आग को भड़का रहा है.. ह्म्म्मम्म्म्म ओह्ह्ह्ह

ज़यादा भड़क गई तो कही तुम्हारी दीदी मर hi ना जाए.. छोड़ दे मुझे..

दीदी के बदन hi हीट बहुत बढ़ चुकी थी, और अब्ब दीदी को जल्द hi झाड़ जाना चाहिए था.. वर्ण दीदी क लिए सहन कर मुश्किल हो जाएगा.. दीदी अपने अंदर की आग की आदि थीं.. पर इस हालत में वो अपनी आग को सहन नहीं कर पाती..

उन्हें नुकसान भी हो सकता था.. मैंने दीदी के दोनों हाथो को एक हाथ में ले लिया, दीदी ने इस बार खुद को नहीं छुड़ाया, दीदी कुछ सुस्त पद चुकी थी.. या उनके अंदर का भी हाल अब्ब बदलने अलग....

माइए खुद को थोड़ा सा ऊपर उठाया और दीदी के पेटीकोट की डोरी खिलने लगा..

दीदी फिरसे से मचलने लगी, इस बार की उनकी उछाल कूद और भी बढ़ गई थी..

दीदी:- विज्जू कमीने पहले से मैं नहीं भरा क्या जो अब्ब और भी करने लगे हो, प्लीज विज्जू और आगे मैट बढ़ो.. वहां से अपना हाथ हटा लो. मुझे वहां पहले कभी किसी ने नहीं छुआ है, मान ले ना अपनी दीदी की बात..

मैं दीदी की सुनने क मूड में नहीं था.. दीदी के पेटीकोट की डोरी मेरे हाथ में आई तो मैंने उसे खेंच दिया, वो एक झटके में hi खुल गई..

फोरि लूसे हुई तो मैंने दीदी क पति कोट को और भी लूसे करने लगा..

कुछ hi देर में दीदी का पेटीकोट लूसे हुआ तो मैं दीदी क ऊपर से उठा और दीदी को पलट दिया.. मैंने ये सबब बहुत स्पीड से किया था, दीदी खुद क लिए कुछ भी नहीं कर पाती..

पलटते हुए मैंने दीदी की साड़ी को पकड़ लिया था. दीदी कुछ समझ पाती उससे पहले hi साड़ी दीदी के बदन से अलग हु चुकी थी, दीदी शॉक में थी, उसी शॉक का फायदा उठाते हुए मैंने दीदी का पेटीकोट भी एक झटके में नीचे कर दिया..

दीदी अब्ब पेट के बल बीएड पर लेती हुई थी.. मैं दीदी की जागों के ऊपर आ कर बैठ गया.. दीदी की ब्लैक पंतय दीदी के गोर बदन पर बहुत जांच रही थी..

दीदी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी, शायद वो खुद पर कबौ पा रही थीं..

वो एक्ससिटेड ज़यादा थी या ग़ुस्से में ज़यादा थी.. ये तो मुझे नहीं पता था, दीदी का चेहरा छुपा हुआ था....

मैं दीदी क छत्तड़ो पर हाथ फेरने लगा.. दीदी खुद की फीलिंग्स से बहार आने लगी.

दीदी:- vvvv..viijjj...vijjjuuu कुत्ते तुमने ये क्या किया, मुझे नंगा hi कर दिया. मैंने पहले कभी किसी के सामने नंगी नहीं हुई हों.. प्लीज भाई हाट जाओ और मेरे ऊपर मेरी साड़ी दाल दो.. मुझे सबब बहुत अजीब लग रहा है, मान लो ना अपनी दीदी की बात... कमीने तू सुन क्यों नहीं रहा है.. मैंने कहा हटो मेरे ऊपर से.. सीईई तुम्हारे हाथ.. मायआ विज्जू प्लीज न करो..

मैं धीरे धीरे करके दीदी के चुत्तड़ दबा रहा था..

विजय:- दीदी आपके गोर बदन कर बालक पंतय की खूबसूरत लग रही है ना..

मैंने दीदी की ब्लैक पंतय को थोड़ा सा ऊपर खेंचा ..

दीदी:- मा.. कोई मुझे बचाओ, विज्जउ मेर भाई और न करो..

मई थोड़ा सा पीछे हुआ और दीदी के चूतड़ के ऊपर झुक कर दीदी के एक चुत्तड़ पर किश कर दी.... ोीईईईई siiiiiiiiiiiii दीदी ने सिसकी ली.. मैंने दीदी की पंतय को पकड़ा और एक झटके में hi नीचे कर दिया, दीदी की गांड नंगी हो गई..

दीदी:- भाई ये क्या, नहीं भाई ये मैट करो उसे वापिस से ऊपर कार्डो.. माँ कोई मुझे बचाये मेरे भाई से, ये कितना गन्दा हो गया है... दीदी मुझे विज्जू से बचाओ

मैंने देर न करते हुए पूरी पंतय दीदी के पैरों से निकाल दी.. मैं खड़ा तो दीदी जो अब्ब नीचे से नंगी हो चुकी थी वो सीढ़ी होकर मुझसे नज़रें मिलाने की हिम्मत नहीं रखती थीं.. दीदी ने बीएड में अपना चेहरा छुपा लिया था..

दीदी के बदन पर अब्ब सिर्फ एक ब्लाउज hi था.. वर्ण दीदी पूरी hi नीचे से नंगी हो चुकी थीं..

मैंने भी अपने कपडे उतारने शुरू कर दिए, दीदी को इसका अंदाज़ा नहीं हुआ, वो अपनी शर्म में hi डूबी हुई थीं..

मैं नंगा होकर नीचे हुआ और दीदी की जांघों को पकड़ कर थोड़ा सा खोल दिया. इस बार दीदी कुछ नहीं बोली.. कैसे बोलती अब्ब तो वो नीचे से नंगी थी.. अब्ब उनमे कुछ बोलने की हिम्मत नहीं बची थी..

मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर लगा दिया.. दीदी मचल गई पारर इस बात वेकुछ नहीं बोलीं.. मैं अपने लुंड को दीदी की छूट पर लगा कर दीदी के ऊपर hi लेट गया...

मैंने अपने चेहरा दीदी के चेहरे के बराबर कर दिया..

दीदी ने अपनी ऑंखें बंद कर ली थीं, दीदी से दीदी अपनी गांड को हिला रही थीं. दीदी को अपनी छूट से सत्ता हुआ मेरा लुंड बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, दीदी की छूट से उठ रही भाप मेरे लुंड को और भी ज़यादा गरम कर रही थी..

विजय:- (दीदी के सर्र को चूमते हुए) डीइइइइइइइइडीइइइइइइइ

दीदी कुछ नहीं बोली, बास मेरे नीचे पड़ी बुरी तरह से काँप रही थी. दीदी की छूट मेरे लुंड से लगी हुई फड़फड़ा रही थी...

विजय:- सॉरी दीदी, अगर आपको ये सबब बुरा लगा है तो...

दीदी बास तेज़ तेज़ सांस ले रही थीं. बास भी बोल नै रही थी.. दीदी की आँखों में आंसू नहीं थी, कोई ग़म भी नहीं था.. भले hi दीदी की ऑंखें बंद थी.. मुझे दीदी के चेहरे पर बेचैनी भी दिखी और एक सुकून भी दिख रहा था, दीदी ने नीचे अपनी गांड को कुछ और भी हिलना शुरू कर दिया tha..maine दीदी के ऊपर ज़यादा वज़न नहीं डाला था.. मेरा लुंड थोड़ा सा hi दीदी की छूट पर लगा हुआ था, में वहां से भी खुद को कुछ ऊपर रखा हुआ था, मुझे पता था दीदी खुद को रोक नहीं पाएंगी..

धीरे धीरे दीदी कुछ फ़ास्ट होने लगी थीं.. मैंने भी अपने लुंड को दीदी की छूट से रगड़ना शुरू कर दिया था..

कुछ hi देर में दीदी की साँसे कुछ तेज़ होने ालगीं तो मुझे दीदी की छूट कुछ गीली लगने लगी..

मैंने सोचा क दीदी को कुछ हॉर्नी किया जाए, यही सोचते हुए मैं दीदी क ऊपर से उठा और दीदी की गांड पर झुकता हुआ दीदी की गांड के छेड़ को चाटने अलग..

दीदी:- oiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaa marrrrrrrrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiii

siiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii अह्हह्ह्ह्ह ननननननननन naaaaaaaaaaaaaa विज्जज्जूउउउउ

yyyyyyyyyy yeeeeeeeeeeeee naaaaaaaaaaaaaa karrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr

मैंने दीदी क दोनों चूतड़ों को साइड एम् खोला और स्पीड से दीदी की गांड को चाटने लगा. दीदी को झटके पर झटके लगने अलगे.. दीदी मुसलसल अपन सर्र पटखते हेउ उछाल रही थी.. वो सिकियाँ भी ले रही थी.. मुझे रोक भी रही थीं और गालियां भी दे रही थी..

पारर दीदी इस बार मुझसे अलग होने के लिए कुछ भी नहीं पर रही थीं.. दीदी ें अपनी गांड को पुरे जोश से हिलना शुरू कर दिए था.. कुछ hi देर में दीदी ने झटके लेने शुरू कर दिए.. दीदी की छूट को मैंने नहीं छेड़ा था, दीदी अपनी गांड पर मेरी जीब सहन नहीं कर पा रही थी. मेरी जीब दीदी की गांड के छेड़ में थोड़ी अंदर जा रही थी, मेरी जीब की गरम नोक दीदी की अंदर से उबाल रही गांड में मिलने लगी.. तो दीदी से सहन करना मुश्किल होने लगा, दीदी कराहती हुई झड़ने अलगी.. जाहदते समय दीदी के चुत्तड़ बहुत ज़यादा उछले थे, दीदी की चीख भी निकली थी....

दीदी की छूट से पानी निकला तो मैंने दीदी की गांड से मोहन हटा दिया.. दीदी को पलट कर सीधा किया.. दीदी ज़ोर ज़ोर से सांस ले रही थी.. मैंने दीदी के ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए, अभी दीदी खुद की साँसों में उलझी हुई थें दीदी को अपने ब्लाउज के खुलने का एहसास नहीं हो प् रहा था..

मई आज दीदी की साती शर्म अरु झिझक ख़तम कर देना चाहता था.... चुदाई अगर दीदी मुझसे करना चाहें गई तो मैं कर भी लूंगा.. पर मैं दीदी की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं करना चाहता था...

बेशर्मी तो मुझसे वरासत में निल hi चुकी थी, तो फिर दीदी को भी बेसहराम बना कर दीदी एक अंदर का हाल जाना जा सकता था..

कुछ hi देर में दीदी का ब्लाउज खुल गया तो मैंने दीदी के ब्लाउज को साइड में किया और दीदी की ब्रा को ऊपर करके दीदी के बूब्स भी नंगे कर दिए..

दीदी के बूब्स को देखते हए मुझे झटका लगा था... दीदी के बूब्स और माँ के बूब्स शामे थे.. दीदी एक निप्पल्स का कलर भी माँ के निप्पल्स से मैच कर रहा था.. दीदी क बूब्स की शेप भी शामे माँ के जैसी थी...

मेरे हाथ धीरे धीरे करके दीदी के बूब्स पर आ गए. मैं उन्हें धीरे धीरे करके दबाने अलग. फिर छोड़ दिया.. मेरा मैं तो होने लगा क मैं दीदी क बूब्स को मोहन में ले लोन..

जब दीदी की छूट के साथ अपना लुंड लगा दिया था, तो बूब्स को मोहन में लेना कोई बड़ी बात नहीं थी..

पर मैं ये सबब दीदी की मर्ज़ी से करना चाहता था..

मैंने अपने लुंड को फिरसे दीदी की छूट से जोड़ा और दीदी के ऊपर आ गया.. अब्ब तक्क दीदी की सांस बहुत हद्द तक्क ठीक हो चुकी थी....

न तो मैंने अभी दीदी की छूट को हाथ लगाया था और न hi करीब से दीदी की छूट को देखा था... मेरा लुंड दीदी की पानी छोड़ चुकी छूट से लगा हुआ था.

मैं दीदी क ऊपर आया तो दीदी के नंगे बूब्स मेरे सीने में दबने लगे.. मैंने अपने होंटो फिरसे दीदी के होंटो पर रख दिए.. दीदी को किश नहीं किया, बास दीदी के होंटो पर रखते हुए अपने जेब निकाल कर दीदी के होंटो पर डरने लगा..

मैं ये सबब करते हुए दीदी की आँखों में देख रहा था.. मैं देखना चाहता था, अब्ब दीदी की आँखों में मुझे क्या दीखता है..

जल्द hi दीदी ने अपनी ऑंखें खोल दीं.. मुझे दीदी की आँखों में एक सुकून दिखा.

दीदी की छूट से पानी निकल तो दीदी के बदन की तपिश भी ख़तम हो गई थी, दीदी अब्ब पूरी तरह से ठंडी हो चुकी थी.. दीदी ने मेरी आँखों में देखा, कुछ देर वो मेरी आँखों में देखती रही.. फिर अचानक से hi दीदी ने मेरे सर्र के बालों को कपड़ कर खेंचना शुरू कर दिया .. दीदी ने अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग किया..

दीदी:- कमीने तू ने कर ली ना अपनी मनमानी.. कर दिया ा मुझे गन्दा.. मैंने कितना कहा था, क मेरे साथ ऐसा मैट करो.. मुझे नंगा भी कर दिया, और भी बहुत कुछ तुमने मेरे साथ कर दिया, मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी..

दीदी इतना बोल कर मेरे गाल पर एक चांटा मार दिया...




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अपडेट ::: 107

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मैं दीदी क तेवर देख रहा था, दीदी की बातों में ग़ुस्सा नहीं था, एक अलग hi किसम का भाव था.. दीदी अब्ब शांत थी, शांत थी तो फिर ग़ुस्सा तो अब्ब आने से रहा.. मैंने अपने होंठ फिरसे दीदी के होंटो पर रख दिए..

मैंने दीदी का बुरा भला सुनके दीदी को कोई जवाब नहीं दिया, दीदी के चांटे की भी मैंने कोई परवा नहीं की....

इस बार मैंने फिरसे दीदी को अच्छे से किश करनी शरू कर दी... दीदी जल्द hi रिलैक्स हुई और मुझे किश में साथ देने लगी.... फिर जल्द hi दीदी ने मेरे सर्र को पकड़ कर मेरा चेहरा साइड में कर दिया..

दीदी:- विजजूउ तेरे मोहन से ये गन्दी स्मेल, और अजीब सा टास्ते कहा से आ रहा है..

मैं हस्सन लगा..

विजय:- दीदी ये तो आपकी hi गांड की स्मेल है.. अच्छी नहीं लगी क्या..

दीदी:- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.. विजजू उठो मेरे ऊपर से.. दीदी ने मुझे साइड में धक्का दे दिया.. अचानक से hi दीदी को एहसास हुआ क मैं भी पूरा नंगा हों, और उन्हें भी मैंने ननगा कर दिया है.. दीदी एक दुम्म से hi मेरे ऊपर कर गई अरु मेरे सीने में अपना मोहन छुपा लिया.. मैंने दीदी को कमर से पकड़ कर अपने ऊपर सीधा कर लिया, इस बार दीदी ने कुछ नहीं कहा.. मेरा खड़ा लुंड भी दीदी को चुभ रहा था, पारर दीदी को अब्ब ज़यादा फर्क नहीं पद रहा था..

अभी वो खुद की शर्म में थी.. मैं दीदी की पीठ को सहलाने लगा.. दीदी का लूसे ब्लाउज बीचे में आ रहा था.. पर इस बार मैंने और कुछ नहीं किया.. '

जितना दीदी को खोलना था मैंने खोल दिया था.. दीदी मेरे सीने में मोहन छुपाये गहरी गहरी साँसे ले रही थी..

डीड:- भाई तुमने ये ठीक नहीं किया है, मुझे ऐसे कैसे तुमने नंगा कर दिया.. पता है मैं कभी माँ के सामने भी ऐसी नंगी नहीं आई कभी..

विजय;- दीदी क्या हमेशा hi इंसान को एक जैसा रहना चाहिए...

दीदी:- भाई तुम सही कह रहे हो.. पर ऐसे अचानक से hi तो सबब थोड़ी न होता है, दो hi दिनों में तुमने मेरा सबब hi ओपन कर दिया.. अगर मेरा हार्ट फ़ैल हो जाता तो...

विजय:- दीदी अब्ब भी मुझसे खुद को छुपाएँगी..

दीदी:- भाई एक बेहेन कैसे अपने भाई से सबब कह सकती है..

विजय:- दीदी अब्ब हम आगे बढ़ चुके हाँ ना तो आप मुझे बता दें..

दीदी:- नहीं भाई मई अभी नहीं बता सकती, अभी मुझसे सबब बताने की हिम्मत नहीं है...

विजय:- चलो वो न बताएं, ये तो बता hi सकती हाँ क अब्ब आपको कैसा लग रहा है, अच्छा लगा या फिर सबब बुरा लगा..

दीदी:- नहीं मई ये भी नहीं बताऊँगी.. दीदी मेरे सीने को अपने नाख़ून से कुरदने लगी..

विजय:- दीदी अब्ब अंदर बेचैनी तो नहीं है ना..

दीदी:- नहीं ाब्ब नहीं है.. अब्ब सबब ठीक है,...

विजय:- दीदी एक बार और करें, आप और भी अच्छी हो जाएँगी..

दीदी ने मुझे चुटकी काट ली.. मैंने दीदी के चुत्तड़ पर हाथ रख कर दबा दिया..

दीदी:- भाई अभी और मैट करो, सबब कुछ एक hi बार तो मैं नहीं कर सकती ना..

विजय:- दीदी अब्ब अगर मई इतना और आपके साथ करना चहु तो..

दीदी अचानक से hi बीएड पार्स पड़े हुए अपने पेटीकोट, पंतय और साड़ी को पकड़ा और उठ कर बाथरूम की तरफ भाग कड़ी हुई.. वही कड़ी हो कर दीदी ने मुझे मुद कर देखा और एक ठंडा दिखा कर स्माइल देते हुए अंदर जा घुसीं..

मुझे दीदी का ऐसा करना बहुत अच्छा लगा था.. दीदी बहुत खुल चुकी थीं..

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पापा और कम से मिलने वाली रिपोर्ट के हिसाब से 50 के करीब कैद हमारे काम के थे.. जिनमे 5 बुसिनेस्स्में थे.. जिन्हे झूठे कतल केस में उम्र कैद हुई थी, जिनमे 2 मर्डर चुके मला से रेलेटेड थे.. 3 भी ऐसे hi थे.. पावर तो थी उनके पास पारर उनके दुश्मन भी किसी से कम् नहीं थे..

उन 5 बुसिनेस्स्मेंन कैदियों को मिला कर 49 कैदी थे, जिन्हे हमें आज की रात जेल से निकलना था..

कम को भी इस सबब के बारे में बता दिया था.. वो भी अब्ब हमारे साथ hi शामिल हो चुके थे.. वो अच्छे इंसान थे.. लोगों की भलाई के लिए सर गरम रहना चाहते थे.. पार्टी में रहे या न रहें. अब्ब वो हमारे साथ hi थे..

कम के कहने पर एक काम और भी किया गया था.. वो ये था, क महेंद्र गैंग और अलोक गैंग के जो गुंडे अभी तक्क पुलिस रिकॉर्ड में नहीं लाये गए थे.. उन्हें पहले से hi कम के ख़ास आदमियों ने शहर से बहार पोहंचा दिया था.. जहाँ हमने खतरनाक क्रिमिनल्स को छोड़ना था..

जेल से भय्ये गए खतरनाक कैदियों को महेंद्र गैंग और अलोक गैंग के गुंडों से मिक्सउप किया जाता.. अजब्ब वहां सबब hi मारे जाते तो सबब यही समझते क इन्हे इन्हे आलोक और महेंद्र गैंग के बचे हुए गुंडों ने जेल तोफ कर निकला है.... हमारा प्लान फूलप्रूफ था.. हमारे लिए टेंशन कम् थी..

पारर टेंशन कम् न होकर भी बहुत बड़ी टेंशन थी..

जेल के कैदियों को जेल से निकलना कोई मज़ाक नहीं था.. बहुत सोच समझ कर प्लान बना पड़ा था.. एक छोटी सी गलती से सबब कुछ बर्बाद हो सकता था..

बहुत मग़ज़ मारी करनी पड़ी थी प्लान बनाने क लिए, तब्ब जा के कोई परफेक्ट बन्न पाया था.. वो भी अगर किस्मत ने साथ दिया तो सक्सेसफुल हो सकता था..

जिस साइड में हमने कैदियों को लेकर भागना था, उसके उलट साइड में हमने 3 खली जगाओं पर छोटे छोटे बम प्लान किये थे, जो एक hi समय भी ब्लास्ट होते..

ठीक उसी समय से 5 मिंट पहले जेल की फ्रंट साइड में भी एक बम ने ब्लास्ट होना था.. जेल का ज़यादा ात्र अमला वहां पोहंच जाता.. और वही रखे हुए 2 बॉम्ब्स भी अपने टाइम पर फटने लगते और फिर उमसे निकलने वाला धुवां वहां मौजूद सभी को बेहोश कर देता..

फिर तीनो ब्लास्ट के होते hi इस पुरे एरिया की लाइट्स को बंद कर दिया जाता.. इसमें मदद करने क लिए पापा और कम ने हामी भर ली थी...

जेल की बैक साइड में हमने वो जगा मार्क कर ली थी.. जहाँ हमारे मतलूबा कैदी थे.. टोटल 3 बाररिक थी. जहाँ से हमें कैदियों को निकलना था..

हमें बास 20 मिंट hi चाहिए थे.. बुलेटफ्रूप ड्रेस सबब ने hi पहने हुए थे..

और सबब hi किसी भी वक़्त कुछ भी करने क लिए तैयार थे...

काउंटडाउन शुरू हुआ और फिर जेल की फ्रंट साइड का बम ब्लास्ट हुआ.. हमें बाकी के तीन बम के फटने का इंतज़ार और लाइट के जाने का इंतज़ार था..

पहले बम के ब्लास्ट होते hi दोनों कंटेनर्स को जेल की दीवार के पास ला खड़ा कर दिया गया था. इस साइड में लोग ब्लास्ट की आवाज़ सुनते हुए जेल की फ्रिंट की और भाग खड़े हुए थे..

जल्द hi फिर और भी ब्लास्ट तीन ब्लास्ट हुए जिसने हर तरफ चीखो पुकार मचा दी. इस सभी बम ब्लास्ट में किसी जान का कोई नुकसान नहीं हुआ tha,is सबब का ख़ास ख्याल रखा गया था..

तीनो बॉम्ब्स के ब्लास्ट होते हुए लाइट भी चली गई.. हमने भी अपना काम शुरू कर दिया. ब्लास्ट करके दीवार को तोड़ दिया गया..

फिर सबब hi जेल के अंदर भाग खड़े हुए.. जूली मैं और महक जेलके आगे थे.. बाकी के पांचू कैदियों को ढूंढ के उन्हें बहार लेजाने क लिए भाग दौड़ में मसरूफ हो गए थे..

हम सभी क hi बदन गोलियों की टेंशन से फ्री थे.. हमें देखते hi पुलिस वळून ने गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी.. जेल की लाइट नहीं गई थी..

हम लाइट्स को तोड़ते हुए स्मोक बम गिरते हुए आगे बढ़ने लगे. हमारे आस पास पुलिस वाले बेहोश होकर गिरते जा रहे थे.. जो नहीं गिर रहा था, वो बेहोश कर देने वाली गन्स की गोली से बहसः कर दिया जाता.. जल्द hi हमने जेल के आधे से ज़यादा हिस्से को संसान बना दिया..

हमारा प्लान ये था, क राजा पार्टी को अपना काम करने में आसानी रहे.. इसलिए मैं महक और जूली आगे रहे थे...

जेल में हमला हुआ था, जेल के इलावा साइड का पूरा एरिया hi अँधेरे में डूबा हुआ tha..jail पर नाज़िल होने वाली तबाही सभी को hi नज़र आने लागित hi.. पर कोई कुछ भी नहीं कर सकता था..

जेल के अंदर के ज़यादा तर पुलिस वाले फ्रंट ब्लास्ट की वजा से बहार चले गए थे, और वही बहसः भी हो गए थे.. अब्ब कम् hi जेल में पुलिस वाले रह गए थे.. वो मरने क लिए क्यों आगे आते..

उन्हें तो पता भी नहीं था क उनके साथी मर नहीं रहे हाँ.. वो सिर्फ बेहोश हुए हाँ... वो तो सब यही समझ रहे थे क जेल पर भयंकर हमला हुआ है..

जल्द hi हमें राजा पार्टी की तरफ से सिग्नल मिलने लगा.. हम तीनो वापसी क लिए मुद गए..

आधे घंटे बाद दोनों hi कंटेनर्स जेल के एरिया से बहुत दूर आ चुके थे..

अगले 10 मिंट में हम अपने एक ठिकाने पर थे.. फ़ौरन hi कंटेनर्स को खली कर दिया गया था..

खतरनाक कैदियों की क्वांटिटी 15 थी.. उन्हें पापा और कम के 3 भरोसे मंद आदमियों की निगरानी में पास के शहर के लिए रवाना कर दिया गया..

वहां कम के आदमी भी मौजूद थे.. और बाकी का प्लान पापा कम और कम करने वाले थे..

जब इतने लोग शामिल हों तो प्लान सक्सेसफुल कैसे नहीं हो सकता था..

दोनों कंटेनर्स को शहर से बहार भेज दिया गया था.. अपने ठिकाने पर लाते हुए ख़ास धयान भी रखा गया था.. किसी को कुछ पता न चले क कंटेनर्स कहाँ के लिए रवाना हुए थे..

सबब काम से फ्री होकर हम मई महका ुर जूली पैलेस क लिए रवाना जो गए थे..




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जैसा हमला जेल पर हुआ था, ऐसा इंडिया की अब्ब तक्क हिस्ट्री में पहले कभी नहीं हुआ था..

जेल के के सामने 2 ब्लास्ट हुए थे. और कुछ फासले पर 3 और ब्लास्ट हुए थे.. फ़ौरन hi पुरे इलाके की लाइट का जाना भी एक बहुत बड़ा मसला क्रिएट क्र गया था..

कैड़कियों को निकल कर ले जाना और और फिर अनगिनत पुलिस वालों को बेहोश कर दिए जाना..

पुरे देश में hi तहलका मच चूका tha..media ने सबब का hi जीना हराम कर रखा था.. किसी को भी छोड़े बिना वो ाहर किसम की बकवास करने में लगा हुआ था.

पहले hi तीनो गैंग्स के साथ हुई झड़प ने पुरे दिल्ली को हिलाया हुआ था, और अब्ब जेल का होने वाला काण्ड..

उम्र क़ैद के कियदि और खतरनाक क्रिमिनल्स भाग चुके थे जेल से.. उनके भाग जाने से और कितने काण्ड जनम लेने वाले थे.. सभी इस बारे में भी बहुत शोर मचा रहे थे..

सबब कम को hi इस सबब का ज़िम्मेदार मान रहे थे, कम ने रिजाइन कर कह दिया तो उनकी पार्टी ने कम को रिजाइन करने से रोक दिया..

कम के रिजाइन करने का कह देने से तन्क़ीदों का रुख कम से हट कर बाकी सबब की और मुद गया..

कम इस सबब से बच निकले और फिर अपन मीठे बोलों से जल्द hi सभी खतरनाक क़ैदियों को ज़िंदा या मुर्दा ढूंढा निकलने के 24 हॉर्स का टाइम भी सभी को दे दिया... ोथेरविसे वो किसी की भी ना मानते हुए रिजाइन कर देंगे..

कम के अल्टीमेटम के बाद मीडिया कुछ ठंडी हो गई थी..

पर देश में मौजूद दूसरे इदारे चुप बॉटने वाले नहीं थे. वो भी अपने काम में लग्ग गए और इस सबब की इन्फो निकलने क लिए टीम्स रेडी की जाने लगी..

फिर कुछ hi देर में

1:-N.I.A

2:-C.B.I

3:-R.A.W

की टीम्स इन्वेस्टीगेशन करने निकला पड़ीं..

जल्द hi सभी ठन्डे पड़ने वाले थे.. कल दिन में hi भी तीनो एजेंसीज को कई और रुख को सामने रख कर सोचना पड़ेगा... सबब उलझ जायेंगे, जब्ब किसी और सिटी के भागे हुए क्रिमिलनस मिलेंगे.. फिर सोचें क बाकी के क़ैदी कहाँ होंगे..

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अगले दिन मैं ब्रेकफास्ट के बाद जूली की तरफ गया, वहां मुझे दीदी भी दिखी, अभी दीदी क लिए कोई और जगा मुंतखिब नहीं की गई थी, इस लिए दीदी अभी वही थीं अभी जूली के साथ दीदी की मीटिंग्स चल रही थीं, तो दीदी कुछ दिन वही रहने वाली थीं..

जूली और दीदी टेबल पर पेपर्स रखे हुए बातों में लगी यही थीं, और कुछ पॉइंट्स को नोट भी कर रही थीं, मेरे आने की आहात हुई तो दोनों ने सर्र उठा कर मुझे देखा, दोनों ने hi मुझे स्माइल दी..

फिर दीदी ने अचानक से hi अपने सर्र को झुका लिया, उनके चेहरे का रंग कुछ बदल गया था, वो नीचे मोहन किये शर्माने लगी थीं.. मैंने दीदी को जूली के सामने कुछ नहीं कहा..

कुछ देर दोनों से बातें हुई तो जूली किसी काम से उठ कर बहार चली गई..

मैंने दीदी का हाथ थाम लिया.. दीदी ने सर्र उठा कर मुझे देखा फिर दूर की तरफ देखा और सर्र झुका लिया..

दीदी:- भाई मेरा हाथ छोड़ा, यहाँ नहीं please..koi आ जाएगा.. दीदी शर्मा भी रही थी मुझसे अपना हाथ भी नहीं छुड़ाया..

विजय:- (दीदी को छेड़ते हुए) दीदी चलो रूम में चलते हाँ, कल आपने सब देखने भी नहीं दिया..

दीदी ने मुझे घूर कर देखा और फिर उनके चेहरे पर लाली बढ़ने अलगी..

दीदी:- भाई तुम बहुत गंदे हो, मुझे भी अपने जैसा बना रहे हो.. प्लीज कुछ भी मैट बोलो, कोई सुनले गाए.

vijay:-(didi का हाथ दबा कर) कोई सुनता है तो सुनले, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

दीदी:- पर मुझे बहुत फर्क पड़ता है भाई. मैं ऐसी बातों की आदि नहीं हों.

विजय:- अच्छा ज़यादा तंग नहीं करता, बास मुझे इतना बता दें, क कल जो मैंने किया, आपको बुरा तो नहीं लगा.. जैसे कल आप सबब बोल रही थी, मुझे गलियां भी दे रही थी..

दीदी:- भाई यहाँ ऐसी बातें मैट करो प्लीज, कही और बैठे तब्ब पूछ लेना..

मैंने भी दीदी को ज़यादा तंग नै किया, दीदी किसी और केटेगरी की इंसान थी, उन्हें लाइफ उनके hi हिसाब से जीने देने चाहिए थी, जिंटा मुझे उनके लिए सही लगा वो मैं कर दिए करूँगा, अगर दीदी को सबब के सामने ऐसे hi रहना अच्छा लगता है तो मुझे तो बास दीदी की ख़ुशी चाहिए थी....

विजय:- ठीक है दीदी, मुझे भी आपको परेशां करके क्या मिलने वाला यही, मई तो सबब कुछ hi आपको खुश रखने क लिए कर रहा हों, वर्ण मुझे किसी चीज़ की कमी नहीं है... मुझे बास आपके प्यारर की ज़रूरत हिअ..

didi:-(door की तरफ देखते हुए अचानक से मेरे गाल पर किश कर दी) थैंक्स भाई.. और उठ कर बहार चल दी.... मैं दीदी को खुश देख क्र खुश हो गया.. दीदी के मैं में कोई भी गिल्ट नहीं था..




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मेरी शादी में 2 दिन रह गए थे और मुझे माँ से भी शादी करनी थी, तो मैं सोचने लगा क मा से शादी आज hi कर लेनी चाहिए.. माँ को जितनी जल्दी मुकम्मल कर दिया जाए उतना hi अच्छा है..

यही सबब सोचते हुए मैंने तैयारी शुरू करदी..

शुष्मा दीदी को मैंने बता दिया था, तो वो आज यही पैलेस में रुकने वाली थीं..

पापा क रहते माँ से शादी एक अजीब बात थी, पारर पापा को इससे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने वाला था, पारर ये सबब पापा को बताये बिना नहीं किया जा सकता था..

हर्ष अंकल भी ख़ास थे, सबब को hi बाद में पता चलना hi था, तो सबब को पहल से hi बता देना सही था, किसी को कोई ऐतराज़ होता तो तो उससे बात की जा सकती थी, ये हमारी पर्सनल लाइफ थी..

कोई भी हमें नहीं रोक सकता था..

पापा समेत सबब को hi मैंने बता दिए क मैं आज शाम क बाद माँ से शादी करने वाला हों.. पापा को एक झटका लगा था ये सबब सुनकर.. पापा को शॉक नहीं लगा था, वो भी सबब पहले से hi जानते थे क आने वाले समय में कुछ ऐसा hi हो सकता है..

माँ को जब्ब पता चला क मई उनके साथ शादी करने वाला हों वो भी सभी के सामने तो माँ बहुत खुश हुई मेरी तीलियाँ माँ को छेड़ने लगी थी...

मेरी तितलियों ने माँ के हहतों पर मेहँदी लगनी शुरू कर दी थी.. पैलेस की छत पर सबब इंतेज़ाम किया जाने लगा.. मेरे सभी रिलेटिव्स इसमें शामिल थे..

राजा पार्टी पैलेस में नहीं थी, उनकी फैमिलीज़ को भी नहीं बताया गया था, उनकी अपनी लाइफ थी, वो हममे ज़रूरत के टाइम hi उठते बैठते थे..

जूही, कारन और जूही माँ को भी शामिल किया गाय था, महक भी इस सबब से बहुत खुश थी.. ये सबब उसके लिए एडवेंचर्स से भरपूर था. वो हर एक काम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा भी ले रही थी..

पूजा दीदी ने भी कुछ देर के लिए शर्म छोड़ कर माँ को दुल्हन जानते हुए छेड़ छड़ शुरू कर दी थी, अभी माँ मेरी दुल्हन बनने वाली थी..

पद्मा aunty,malikan,bhabhi, दीक्षा aunty,sona आंटी, सभी माँ को छेड़ रही थी.. ये सबब फालतू के सभी लोगों से सीक्रेट रखा जा रहा था.....

शादी के लिए भी पंडित को कही दूर से लाया जाने वाला था, पैलेस के पंडित का यहाँन कोई काम नहीं था...

ग़र्ज़ आज सबब hi खुश थे....... शाम के बाद फिर मेरी माँ से शादी करवा दी गई, माँ का कन्या दान, मालिकान, दीक्षा aunty,deeksha aunty,sona aunty,bhabhi और जूही माँ ने किया.....

पापा ने भी माँ को सदा सुहागन कहा, हर्ष अंकल भी मज़ा लेते हुए मुझे छेड़ रहे थे.. और अजित भाई तो आज कुछ ज़यादा hi खुश दिख रहे थे... उन्हें आज किश बात की ज़यादा ख़ुशी थी मुझे नहीं पता..

शुष्मा दीदी और मेरी तितलियाँ माँ के साथ साथ hi रही थीं.. शेखर को भी ये सबब नहीं बताया गया था.. शेखर अभी पैलेस के सीक्रेट्स नहीं जनता था.. और न hi हमारी कहानी..

माँ को रूम में ला क्र बीएड पर बिठा दिया गया.. रूम को आज सजाया गाय था, आज मेरी तितलियों ने भी रूम में आने से इंकार कर दिए था.. तीनो ने हस्ते हुए मुझे कहा था..

तीनो:- विजजूउउ आज माँ से खुल कर प्यार करना और माँ की गांड खोलते हुए ज़रा भी रेहम मैट करना माँ पर.. सुहागरात पर दुल्हन की चीखें निकलती hi हाँ.. चीखों के बिना सुहागरात का मज़ा भी नहीं आता...

बहुत शरारती हो गई थी तीनो, अपनी hi माँ की गांड अपने hi भाई से खुलवाना छह रहे थीं.. वो भी बड़ी बेदर्दी से......

अपर्णा ने मुझसे रस्म के पुरे पैसे लील्ये थे, फिर hi मुझे अंदर जाने दिए था अपर्णा ने..... वो भी इस सबब में शामिल हुई थी.. लाली शामिल तो नहीं हुई थी, पारर उसने फोन पर सबब होते हुए सुना था, और फोन पर hi हमें मुबारक भी दी थी..

कितने करैक्टर थे पैलेस में... सभी का अलग अलग ज़िक्र करना ufffffffffff





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अपडेट :::108


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माँ बीएड पर सच में hi एक दुल्हन की hi तरह से बैठी हुई थी. साड़ी तो नहीं पर ज़रूरी रस्मे ज़रूर पूरी की गई थीं.. माँ के लिए मई एक ज़बरदस्त किसम का ड्रेस लाया था, और इस वक़्त माँ उसी ड्रेस में बीएड पर बैठी हुई किसी अप्सरा से कम् नहीं लग्ग रही थी..

खूबसूरत रंगों से आरास्ता खूबसूरत ड्रेस माँ के खूबसूरत बदन पर आते hi अपनी खूबसूरती पर शर्मा रहा था..

वो सोच रहा था क मई ज़यादा खूबसूरत हों या जिसके बदन पर मई हों वो ज़यादा खूबसूरत है... माँ इस ड्रेस में दुन्या की हसीं तरीन हस्ती दिख रही थीं..

माँ का चमकदार चेहरा, जो माँ के दिल के चमकने से आज हमेशा से भी ज़यादा खूबसूरत दिख रहा था... माँ के चेहरे की चमक से रूम जगमग जगमग कर रहा था..

माँ सर्र झुकाये हुए मंद मंद मुस्कान देती मेरे अपने पास आने का इंतज़ार कर रही थी, और मैं दूर लॉक करने के बाद वही खड़ा माँ के हुसैन को देख रहा था.. कोई था मेरी माँ के जैसा सूंदर..

नहीं हो सकता कोई इतना सूंदर चेहरा इस धरती पर.. सिर्फ एक hi चेहरा इस धरती पर सबसे खूबसरूआत है और वो मेरी माँ का चेहरा..

जो अब्ब मेरी पत्नी भी बन्न चुकी हाँ... मैं धीमे धीमे कदमो से चलता हुआ बीएड के पास पोहंचा...

माँ के चेहरे की मुस्कान और भी गहरी हो गई.... माँ ने सर्र उठा कर मुझे नहीं देखा.. दोनों हाथ अपनी गॉड में रखे मेरे बीएड पर बैठने का वेट कर रही थी....

मैं माँ की तड़प को और नहीं बढ़ाना चाहता था.. मैं माँ के सामने बीएड पर बैठ गया..

माँ ने घूंघट तो नहीं लिया था.. पर सर्र झुकाया हुआ था.. सर्र कर धरी ओढ़नी कुछ माँ के चेहरे पारर आ रही थी.. माँ का आधा चेहरा उस ओढ़नी ने छुपा लिया था..

विजय:- श्वेता........ मैंने माँ का नाम लिया, तो माँ के जिस्म के थरथराहट होने लगी.... मैं माँ क चेहरे को hi देख रहा था, मैंने माँ का नाम लिया था, तो माँ के चेहरे की चमक अचानक से कुछ और भी बढ़ गई थी..

विजय:- श्वेताआआआ.......... मैंने कुछ खेंच कर माँ का नाम लिया, तो माँ कुछ और भी काँप उठी....

मैंने माँ की चीन को पकड़ कर माँ का चेहरा ऊपर उठाया तो माँ की ऑंखें मुझे नम्म दिखें... मैं सबब समझ रहा था, पर मैं माँ से पूछना चाहता था.

वजय:- श्वेता ये नम्म ऑंखें क्यों...

माँ ने अचानक से hi मुझे गले से लगा लिया और हलकी अवैज में रोने लगी..

माँ:- ी लव यू विज्जू ी लव मेरे जानू, ी लव यू मेरे सरताज.... विज्जू तुमने मेरा नाम लिया तो मुझे बहुत अच्छा लगा.. मैंने ये नहीं सोचा था क तुम मुझे नाम से भी बुलाओगे.. तुम्हारे मोहन से अपना नाम सुनकर मुझे कितना अच्छा लगा है, मई सही से नहीं बता सकती.... विज्जू आज मई बहुत बहुत खुश हों, अब्ब मुझे कोई ग़म नहीं है.. अब्ब देखन मई हर दुम्म hi खुश रहूंगी.. मुझे अब्ब कभी कोई दुःख नहीं मिलेगा... (अपने माथे को दिखते हुए) ये देखो अब्ब तुम्हारे नाम का सिन्दूर मेरी मांग में है, इससे मुझे वो शक्ति मिली है क मैं अब्ब कभी भी दुखी नहीं hongi...(mangalsutra को पकड़ कर) ये वो चीज़ है जिसके होते हुए कोई औरत कभी टूट नहीं सकती.. बहुत ताक़त है इसमें विज्जउ

मैंने भी माँ को खुद में भींच लिया और माँ की पीठ को सहलाने लगा... जल्द hi माँ नार्मल भी हो गई.....

मैंने माँ का हाथ थमा और माँ को बीएड से उतार कर मिरर के सामने ला खड़ा किया..

विजय:- माँ मैं तुमसे शादी करके माँ को नहीं खोना चाहता था, आपको ख़ुशी देने क लिए मैंने आपको नाम से बुलाया है, पारर मैं अक्सर hi आपको माँ कहूंगा. आपका मैं बुरा तो नै होगा ना..

माँ:- नहीं मेरे लाल मई तो हमेशा hi तुमसे खुश रहूंगी.. मुझे भी तेरे मोहन से अपना नाम सुनकर बहुत ख़ुशी मिली है, मैं भी तो तुम्हरे जैसा बीटा नहीं खो सकती.. तुम मुझे मैं से माँ hi कहा करों विज्जू बीटा... ये शादी भी हम दोनों की ख़ुशी है, पारर जो हमारा असली रिश्ता है वो तो हम नहीं भूल सकते ना..

विजय:- माँ सामने शीशे में देखो ना.. हम दोनों की जोड़ी कितनी पायरी लग रही है ना.. भगवन किसी की नज़र ना लगाए हमारी जोड़ी को..

माँ भी आईने में खुद को और मुझे देखने लगी.. माँ की आँखों की चमक और भी बढ़ने अलगी..

माँ:- हाँ विज्जू हमारी जोड़ी बहुत hi कमाल की लग रही है, तुम कितने घाबरू जवान हो गए हो ना...

माँ:- माँ आप भी तो बहुत कम् आगे की दिख रही हाँ ना.. आपने हमेशा hi तो खुद को संभल कर रक्खा यही..

माँ:- विजऊ तेरे लिए hi तो खुद को संभाला है मैंने... देख मैं तुमसे कुछ hi तो बड़ी दिख रही हों.... माँ हस्ते हुए बोली... मैंने पीछे से hi माँ को बहन में भर लिया....

विजय:- हाँ वो तो मुझे भी दिख रहा है... अब्ब आपको मोहन दिखाई क्या चाहिए माँ...

माँ:- मुझे कुछ नहीं चाहिए तू मेरा अब्ब सबब कुछ बन्न चूका है, यही मेरे लिए मोहन दिखाई है विज्जू बीटा..

मैंने माँ के बदन से साड़ी अलग करनी शुरू कर दी.. साड़ी माँ के बदन से अलग कर के मैंने साइड स्टूल पर रख दी... फिर एक एक करके माँ के सारे ज़ेवर भी उतारने लगा., माँ मुझे आईने में सबब करते हुए देख रही थी, माँ बहुत कहसह दिख रही थी... माँ की ओढ़नी मैं पहले से hi उतार चूका था..

अब्ब माँ सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी.. माँ का दूधिया रंग आईने में चमकने लगा.. मैंने माँ को फिरसे बहन में भरा और माँ की गर्दन पर किश करते हुए आईने में देखने लगा....

विजय:- मा देख ना हम इस रूम में कितने प्यारे लग रहे हाँ.. माँ अपने बदन की चमक देखो ना.. कही आईने hi ना टूट जाए आपके बदन की चमक से....

माँ ने अपना एक हाथ मेरे गाल पर रख दिया..

माँ:- ये चमक भी तो तेरे hi दम्म से हां विज्जू.. वर्ण इसमें वो बात कहाँ..

vijay:-(maa के पेट पर उँगलियाँ चलता हुए) हाँ ये भी आपने सही कहा...

मेरे हाथ ऊपर आये और मैंने माँ के ब्लाउज के बुतों भी खोलने शुरू कर दिए..

जल्द hi माँ का बॉस खुल गया, फिर मैंने अपने हाथ को नीचे लाते हुए माँ के पेटीकोट की डोरी को भी पकड़ कर खेंच दिया...

पेंटकट नीचे गिर गया... माँ के बदन की चमक और भी बढ़ गई.. माँ आईने में खुले ब्लाउज और पंतय में भी हसीं दिख रही थी.. मैंने पीछे हट के माँ के ब्लाउज को उनके बदन से अलग कर दिया.. फिर ब्रा का हक्क खोल कर उसे भी साइड में फ़ेंक दिया... छान से रूम में रौशनी बढ़ गई, माँ के बूब्स भी चमक रहे थे..

मैंने दोनों हहतों में माँ के बूब्स लेते हुए उन्हें हलके से दबा दिआ..

माँ;- सीईईई आअह्ह्ह्ह कितना सुकून है विज्जउ तुम्हारे सुपर्ष में..

विजय:- माँ आपके hi वजूद का तो हिस्सा हों, सुकून तो मिलेगा hi आपको.... मैं नीचे बैठा और माँ की पंतय भी खेंच कर नीचे कर दी.. माँ ने अपने पैरों से उसे अपने आप से जुड़ा कर दिया.. अब्ब माँ मेरे सामें बिलकुल hi नंगी थी.. आइये में माँ की सुंदरता की चमक दमक और भी बढ़ गई..

माँ को पूरा नंगा करके मैंने अपने पॉकेट से हीरों का एक पायरा सा नेकलेस निकला और उसे माँ की गर्दन पर बांधने आगा.. माँ आईने में नेकलेस को देखने लगी,....

माँ;- विज्जू बीटा बहुत hi खूबसूरत है ये नेकलेस.. ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. कभी इसकी भी मुझे बहुत तमन्ना रही थी.. जवानी में मेरे पास ऐसे नजाने कितने hi थे.. ये सबब मेरी गर्दन पर सजते भी बहुत थे.. ये भी सबब मुझसे छूट गए तेह.. पारर अब्ब फिरसे ये मेरी लाइफ में आ गए हाँ.. अब्ब मैं इन्हे कभी खुद से जुड़ा नहीं करुँगी.. ये तो फिर भी मेरे विजजू का तोहफा है..

विजय:- माँ देखो अब्ब आपका बदन कैसे चमक रहा है, बिना ड्रेस के आपके बदन पर एक मंगलसूत्र है और एक ये नेकलेस......

आप इस अंदाज़ में कितनी पायरी लग रही हाँ..... माँ भी खुद को आईने में निहार रही थीं.. माँ कुछ देर खुद को देखती रही, फिर माँ घूमी और मेरे चेहरे पर चुम्बन की बारिश कर दी.. जल्द hi माँ का ये प्यार मेरे होंटो की तरफ ट्रांसफर होने लगा..

माँ भरपूर तरीके से इस पल को मानाने में लग्ग गई थीं..

माँ की लाइफ की ये पहली सबसे खूबसूरत रात थी.. मेरे हाथ माँ के नंगी पीठ पर चलने लगे, मेरे खुरदरे हाथों में माँ के बदन में बिजलियाँ सी भरनी शुरू कर दीं.. माँ की किश वाइल्ड होने लगी..

जल्द hi माँ की सांस उखड़ी, तो माँ ने मुझे किश करना छोड़ दिया.. मैंने नीचे बैठा और माँ की छूट पर अपनी जीब रख दी.. माँ सांस बहाल करते हुए मेरे सर्र के बालों को सहलाने लगी.. मैंने माँ के चुत्तड़ो पर दोनों हाथ रखते हुए माँ की छूट को चाटना शुरू कर दिया...

माँ की छूट गीली होना शुरू हो गई थी, माँ की छूट का मीठा पानी मेरे होंटो से लगा तो मैंने उसे पीना शुरू कर दिए.. ऐसी हालत में माँ की छूट का पानी सीधा hi मेरे हलक से होता हुआ नीचे जाने लगा.. साथ hi मैंने अपनी उँगलियों को माँ की गांड की दरार और छूट की पीछे वाले हिस्से पर चलना शुरू कर दिया... माँ की सांस ठीक हुई तो माँ सिसकियाँ लेने लगी..

माँ:- ाः ओह्ह्ह विज्जू बीटा आज की रात अपनी माँ के लिए स्पेशल बना दो.. आज की रात तुम मेरे सरताज भी हो.. आज की रात तुम्हे मेरी गांड भी गिफ्ट में मिलने वाली है.. आज मुझे पुर कार्डो विज्जू मेरे सरताज..

जल्द hi मैंने माँ की छूट को छोड़ दिया.. मैं खड़ा हुआ तो माँ ने मेरे कपडे उतारने शुरू कर दिए.. माँ बोहत प्रेम से धीरे धीरे करके मुझे नंगा कर रही थी.. कुछ hi देर में मैं सिर्फ एक अंडरवियर में खड़ा था.... माँ मुझे मुस्कुराती हुई देखने लगी, फिर माँ नीचे बैठी और मेरे अंडरवियर को भी नीचे सरका कर मेरे पैरों से निकाल दिया..

मेरा खड़ा लुंड माँ के मोहन से टकराया तो माँ एक शरारती मुस्कान देती हुई मुझे देखने लगी..

माँ:- विज्जउ आज ये कुछ ज़यादा hi नहीं उछाल रहा यही..

विजय:- श्वेता डार्लिंग आज hi तो इसके असली मज़े होने वाले हाँ, उछलेगा क्यों नहीं..

माँ:- ह्म्म्मम्म श्वेता डार्लिंग.. आज तो तुम सच में hi खूब मूड में हो, और तुम्हरा लुंड भी.. आज तो सच में hi पूरा पूरा मज़े आने वाला है.. हाय मेरे सरताज आज अपनी श्वेता को पूरा कार्डो बहुत बेचैन है सालों से.. बेगानो से भी चुद में मैंने अपने बेटे से भी चुद लिया, आज अपने सरताज से छोड़ने का भी मैं मज़ा लेने वाली हों... सच में hi आज मैं पूरी होने वाली हों... विज्जू मेरे सरताज आज मुझे जल्दी से पूरा क्र दो. एक बार मेरी छूट से पानी की नदियां बुझा दो, फिर मेरी गांड की भी ओपनिंग कार्डो.. तभी मैं पूरी हो पाऊँगी...

विजय:- श्वेता डार्लिंग वो तो ठीक है, पारर गांड एक दर्द का क्या करना है..

माँ:- वो भी हो जाएगा, तुम बास अब्ब सबब जल्दी से hi शुरू करो.. रात गुज़रती जा रही है, और आज की रात मैं भी नहीं सोने वाली.. आज पूरी रात hi तेरा प्यार मुझे चाहिए है.. आज की पूरी रात न मैं सोने वाली हों और न hi तुम्हे मैं सोने डोंगी..

विजय:- कौन कम्बख्त ऐसे सुन्दर से शरीर को छोड़ कर सोयेगा.. मैं भी तो आज पूरी रात इस संग इ मर्मर से तराशे हुए बदन के पुरे पुरे मज़े लेना चाहता हों....

माँ:- तो फिर लो न मज़े देर काहे को करनी.. मैंने माँ को बहन में उठाया और बीएड पर ला कर ढेर कर दिया.. माँ मुझे निहारने लगी.. माँ की छूट भी आज कुछ ज़यादा hi चमक रही थी..

मैं माँ के ऊपर आया और माँ को किश करने लगा माँ भी मुझे किश करने लगी. मेरा लुंड माँ की गाली छूट पर आ गया था.. पर अभी उसे माँ की छूट में जाने की इजाज़त नहीं थी.. मैं माँ के होंटो का रस पीने लगा.. माँ भी अपने सरताज के होंटो का रस पीने लगी.. माँ ने अपने पैरों को कस लिया जिस वजा से मेरा लुंड माँ की छूट पर धंस गया, माँ की छूट गरम होना शरू हो गई थी.. माँ कभी अपने पैरों को खोलती तो कभी कस लेती.. आ मुझे किश करते हुए मेरे लुंड के भी मज़े ले रही थी..

कुछ देर हम दोनों hi एक दसूरे के होंटो को पीते रहे फिर मैंने माँ के होंटो को छोड़ा और माँ की गर्दन पर अपने होंठ रखते हुए माँ की गर्दन को चाटने lga..maa कुछ मछली, माँ ने मेरे लुंड को भी कस लिया.. मैं धीरे धीरे करके माँ की गर्दन को चाटने चूमने लगा... मेरी नज़र माँ के कान पर पड़ी तो मैंने माँ के कान को भी अपने होंटो में जकड लिया..

माँ:- आअह्ह्ह्ह विज्जउ बीटा,, मज़ा आए गया ओह्ह्ह्हह कान पर किश में भी मज़ा आता है, ये मैंने पहले कबि नहीं किया.. कुछ देर छतो विज्जू बीटा मेरे कान को..

मैं माँ के कान की लो को अपने होंटो में लिए चूसने लगा कुछ देर चूसने के बाद मैं माँ के कान पर अपनी जीब फेरने अलग, माँ और भी मचलने लगी.. माँ को इस सबब में बहुत मज़ा आ रहा था.. आज मैं माँ के साथ पूरा प्यार करना चाहता था.. माँ के एक कान को चूमने और चाटने के बाद मैंने माँ के दूसरे कान को भी प्यार किया.. माँ अंदर तक्क निहाल हॉग ै.. मैं फिर माँ के पुरे चेरे को छूने चाटने लाग.. धीरे धीरे मैं नीचे आने लगा..

माँ के गले से होता हुआ मैं माँ के बूब्स के ऊपर वाले हिस्से को चूमने और चाटने लगा.. माँ की सिसकियाँ बढ़ने लगी, माँ ह्म्म्मम्म आआ सीई आअह्ह्ह्ह उफ़

की आवाज़ें निकलने लगी.

माँ को भी आज बहुत ज़यादा मज़ा आ रहा था.. आज की रात माँ पुरे जोश से हर एक एक लम्हे का पूरा पूरा मज़ा ले रही थी.. माँ के मोहन से सिसकियाँ खुल कर बहार आ रही थे..

माँ अपने अंदर की फीलिंग्स को दबा नहीं रही थी.. माँ कबि मेरे सर के बालों को सेल्हाटी कभी मेरे पीठ को सहलाती कभी अपने नखानो से कुरेद रही होती..

माँ मचल मचल कर इस सबब का भरपूर आनंद ले रही थीं..

मैंने माँ के फूल चुके दूध को अपने मोहन में लिया दूसरे को हाथ से दबाने लगा. तो माँ की मस्ती और भी बढ़ने लगी... मेरी महनार से माँ एक दोनों hi दूध और भी फूलने लगे... जो डोपोड मेरे माँ एक मोहन में था, माँ ुसया पनि उँगलियों से दबा कर अच्छे से मेरे मोहन में देने लगें..

माँ कहहुद भी अपने नाख़ून से अपने दूध को कुरेद रही थीई.. माँ खुद से भी अपने जिस्म के मज़े ले रही थी.. में माँ के निप्पल को मोहन में ले कर चूसने लगा.. मैं आज माँ को इतना प्यार देना चाहता था, क माँ के अंदर फिर कोई हसरत न रहे.. माँ क लिए आजकी रत मैं यादगढ़ बना देना चाहता था..

कुछ देर मई माँ एक दोनों hi दूध को बरी बारी चूसता और दबाता रहा.. जब्ब दोनों hi बूब्स अच्छे से लाल हो गए.. अच्छे से फूल गए तो मैंने नीचे आने लगा..

माँ के एक एक अंग को चूमता chat'ta हुआ मैं माँ की नाभि में आया और फिर मेरा प्यार माँ की नाभि पर बरसने अलग....

माँ की नाभि की गहराई में अपनी जीब की नोक से नापने लगा. में गीली जीब जैसे hi माँ की नाभि में घुसी माँ के अपनी गांड को उठा कर अपनी ख़ुशी और मज़े का इज़हार किआ....

माँ:- आह्ह्ह्ह मेरे सरताज ऐसे ही आज अपनी पत्नी को मज़ा दो, आज उसी भी पूरा होने का एहसास करा दो.. सीईई हम्म्म्म हहहहहह ohhhhhhhhhh

माँ की नाभि से प्यार करने क बाद मैं नीचे आने लगा और माँ की छूट के ऊपर वाले हिस्से को चाटने लगा, माँ की मदहोशी कर भी बढ़ने लगी.. माँ के बदन की कपकपाहट तो पहले से hi बढ़ी हुई थी, माँ ने पसीना भी छोड़ना शुरू कर दिया था.. माँ बहुत देर से गरम थी.. माँ का जिस्म झटके भी खा रहा था.

पारर माँ ने ये नहीं कहा था क विज्जू अब्ब जल्दी से मेरी छूट में लुंड दाल कर उसे ठंडा कर दो..

माँ भी पूरा प्यार पा लेना चाहती थी.. और मैं भी आज कोई कसार नहीं छोड़ना चाहता था.. माँ की छूट से अतराफ़ को छाते के बाद मैं माँ की जांघों को चाटने लगा..

माँ की छूट मेरे प्यार से महरूम रही थी, तो माँ बहुत ज़यादा मचलने अलगी थी, माँ से सहन करना मुश्किल होने अलग था.. माँ की छूट ने भाप छोड़नी शुरू कर दी थी..

मुझे लगा क माँ ऐसे hi बिना लुंड क अपनी छूट का पानी निकाल देगी..

छूट का पानी जैसे भी निकले, बात तो माँ के मैं की शान्ति की थी..

मैं अपनी जेब से माँ की जांघों को चाटने लगा.. कभी इक साइड की तो कबि दूसरी साइड की. कभी माँ की छूट के पास तो कभी छूट से दूर.. कभी माँ की छूट के तीनो साइड में अपनी जीब घूमता तो कभी माँ की छूट पर अपनी गरम सांस छोड़ देता..

माँ इतना सबब कुछ सहन नहीं कर पानी और अचानकसे hi माँ ने मेरे सर्र को पकड़ा और अपनी छूट पर दबा दिया.. माँ की छूट ने भल भल पानी छोड़ना शुरू कर दिया...

माँ की साँसे बहुत तेज़ चल रही थीई.. माँ का वो हाल हो रहा था, जैसे कई किलोमीटर फुल स्पीड से दौड़ कर आ रही हों..

माँ की ऐसी हालत आज से पहले कभी नहीं हुई थी.. मैं भी माँ की छूट से निकलने वाला अमृत पीने लगा....

कुछ देर में माँ की सांस ठीक हुई थी तो मई माँ की छूट को चाट कर साफ़ कर चूका था... माँ की छूट से निकलने वाला नमकीन पानी मेरे अंदर उतर चूका था...

एक खुशगवार खुशबु रूम में फेल शुकी थी...

माँ मेरे बालों में उँगलियाँ फेरने अलगी.. जब मुझे लगा क अब्ब माँ रिलैक्स है तो मैंने अपना सर्र उठा कर माँ को देखा माँ छत की तरफ देख रही थी..

मैं सरकता हुआ ऊपर माँ के चेहरे पर पोहंचा माँ ने मुझे देखा और फिर माँ ने मुझे पकड़ कर मेरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया, फिर माँ ने मेरे होंटो पर लगे हुए अपनी hi छूट के पानी को भी चाटना शुरू कर दिया.. माँ की अपनी छूट का पानी था, माँ मज़ा से उसे चाटने अलगी..

कुछ देर बा माँ मुझसे अलग हुई..

माँ:- विज्जउ बीटा इतना खतरनाक प्यार, मुझसे तो सहन hi नहीं हो प् रहा था... ऐसा भी आज से पहले मुझे कभी फील अनहि हुआ..

विजय:- माँ आज की रात हमारे लिए स्पेशल है ना, तो आज सबब कुछ hi स्पेशल होना चाहिए ना..

माँ:- चल फिर आप मैं भी तुझे कुछ स्पेशल दिखती हों...

माँ ने मुझे अपने ऊपर से हटाया... मई साइड में हुआ तो माँ ने मुझे लिटा दिया.

माँ मेरे ऊपर औ और मुझे किश करते हुए धीरे धीरे नीचे आने लगी, माँ नीचे जाते हुए अपने बूब्स मेरे जिस्म से भी रगड़ रही थी, माँ बार बार मेरी आँखों में देख रही थी, माँ की आँखों की चमक कुछ और भी बढ़ गई थी, एक धीमी सी मुस्कान रेगुलर hi माँ के होंटो पर थी..

जल्द hi माँ मेरे सीने पर आई और मेरे अपने नाखुनो से मेरे निप्पल्स को कुरेदने अलगी, माँ मेरिअ नखों में देखने लगी, वो मेरे अंदर होने वाले चेंज को देखना छह रही थी.. माँ के कुरेदने से मेरा लुंड झटके मारने अलग.. तो माँ ने मुझे स्माइल देनी शुरू कर दी.. माँ ने फिर मेरे एक निप्पल को अपने दांतों में लिया और उसे खेंचने लगी.. दूसरे निप्पल को भी माँ अपनी उँगलियों से दबाने लगीं, ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ था..

मुझे एक अलग hi मज़ा मिलने लगा, मेरे अंदर करंट कुछ ज़यादा hi डाउने लगा.. मेरे जिस्म के सारे बाल hi एक एक करके खड़े होने लगे.. माँ भी सबब महसूस कर पा रही थी.. माँ अब्ब खुल के मेरे निप्पल को चूस कर काट रही थी..

बार बार माँ अपना सर्र उठा कर मेरी आँखों में शरारती मुस्कान देते हुए देखने लगती..

जितनी हालत मैंने माँ की ख़राब की थी, माँ उसका पूरा पूरा बदला मुझसे ले रही थी..

मेरे लुंड की हालत भी माँ की छूट के जैसे होने लगी थी, मुझे ऐसा लगने लगा क वो भी माँ की छूट में गए बिना अपना पानी निकाल देगा...

माँ को मुझपर तरस आया या माँ कुछ और बह करना छह रहे थी, माँ नीचे मेरे लुंड की और बढ़ी.....

माँ ने मेरे लुंड को अपने आहत में थाम लिया, उसे पकड़ कर खेंचा, फिर माँ ने नीचे से मेरे लुंड की जड़ से ऊपर सुपड तक मेरे लुंड को चाटना शुरू कर दिया. मेरी हालत और भी बुरी होने लगी.. मेरा मैं होने लगा क माँ मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर जोपश से छूओंसे लगे, और तब्ब तक्क न रुके जब तक मेरे लुंड के अंदर से सारा माल न निकल जाए..

पर मुझसे आज पूरा बदला लेना छह रही थी.. माँ ने मेरे लुंड को तो मोहन में नहीं लिया. मेरे लुंड की गोलियों को अपने मोहन में लेकर चूसने लगीं..

अब्ब मेरे लिए सहन करना मुश्किल होने लगा, मेरा लुंड आखरी हद्द तक्क अकड़ चूका था, खून का सारा hi प्रेशर मेरे लुंड के अंदर समां चूका था.. माँ ने एक काम और भी करना शुरू कर दिया..

माँ मेरे लुंड के सुपड को अपने एक नाख़ून से कुरेदने लगी.. नीचे से मेरे लुंड की गोलियों की लोल्लिपोप की तरह से वो चूस रही थी.... माँ तब तक्क नहीं रुकी जब्ब तक मेरे लुंड ने एक ज़ोर दर झटका कहते हुए बिना चुदाई के hi छत की तरफ पिचकारियां न छोड़ दीं...

माँ की तरह से hi मेरी भी सिसकियाँ निकलने लगी थी, जैसे hi लुंड का माल निकला मुझे चैन मिल गया..

20 मिंट में hi हम माँ बीटा झाड़ चुके थे... इतनी जल्दी मैं पहले कभी नहीं जेहड़ा था... आज माँ ने मेरे लुंड का सारा hi घमंड तोड़ दिया था..

माँ हर काम में स्पेशलिस्ट जो थीं... आज माँ ने भी खुल कर सबब कुछ किया था....

एक राउंड ख़तम हुआ तो अब्ब दूसरा और सबसे बढ़िया रोड शुरू होने वाला था.. उसी राउंड में मुझे माँ की गांड की सील खोलने का मौका मिलने वाला था..





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अपडेट :::109

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जल्द hi हम दोनों रिलैक्स हो गए.. अचानक से hi माँ के kah-kahe रूम में गूँज उठे. माँ खुल कर हस्स रही थीं..

माँ:- क्यों मेरे सरताज के लुंड में इतना hi दुम्म था, कितनी जल्दी और बिना अपनी पत्नी की छूट में hi झाड़ गया.... है है है है है

मैं माँ को देखने लगा.. माँ बहुत ज़यादा खुश और फ्रेश दिख रही थी.. मुझे माँ पर बहुत प्यार आने लगा..

विजय:- माँ आपने तो आज मेरा दुम्म hi निकाल दिया था...

माँ:- chich..chich..chich..chich.. अभी कहाँ अभी तो मैंने तुम्हे अपने रंग दिखाए hi कहाँ हाँ मेरे सरताज अभी तो तुम्हारी शेवटा अपने खोल में hi क़ैद है, आज तो मई वो सारे hi खोल तोड़ कर अपने अंदर के सारे hi रंग निकाल कर तुम्हारा हशर करदूंगी.. आज तो मेरा मैं है तो tumhe(danto को कचकचाते हुए) तुम्हे मई कच्चा hi खा जाओ..

मैं माँ को दहकने लगा.. माँ का अंदाज़ भी बदल गता था..

विजय:- तो खा जाओ न श्वेता डार्लिंग अपने पति को कच्चा...

माँ:- ऐसे थोड़ी ना खाऊँगी, पूरी रात पड़ी है तो थोड़ा थोड़ा करके खाऊँगी ना..... इतना बोल कर माँ मेरे लुंड को मोहन में लेकर चूसने लगीं, मेरे लुंड से निकला हुआ माल माँ चाटने लगी, माँ के गरम मोहन में जाते hi मेरा लुंड फिरसे अकड़ने लगा, माँ तब्ब तक्क मेरे लुंड को चूसती रही, जब तक वो पूरी तरह से फार्म में नहीं आ गया..

माँ ने मेरे लुंड को अपने मोहन से बहार निकल दिया..

माँ:- चल अब्ब एक राउंड चुदाई का भी हो जाए, फिर तू मेरी गांड की सील खोल देना, उसके बाद बाकि का सबब करेंगे.....

माँ ने अपना चेहरा मेरे पैरों की तरफ कर लिया, और मेरे लुंड पर बैठने lagi..dheere धीरे करके मेरा सारा hi लुंड माँ की छूट में जा समाया.

माँ:- विज्जू पीछे से अपनी माँ की छूट में अपने लुंड को जाते हुए अच्छे से देखने, पारर तुम खुद से कुछ मैट करना अभी मुझे खुद hi अपनी छूट मेरे लुंड को लेना है...

विजय:- ok डार्लिंग............. मैंने माँ की चुत्तड़ो पर उँगलियाँ चलनी शुरू कर दीं...

माँ ने मेरे पैरों को थमा और मेरे लुंड पर उछलने लगी, मैं बड़े घोरसे अपने लुंड को माँ की छूट में जाते हुए देखने लगा....

मेरा मोटा और लम्बा लुंड माँ की छूट से सुपड तक बहार आता और फिरसे माँ की छूट में ग़ायब हो जाता..

धीरे धीरे माँ की सपेद बढ़ने अलगी, माँ की छूट ने पानी भी छोड़ना शुरू कर दिया.. मेरी उँगलियाँ माँ के चुत्तड़ो पर चलते हुए माँ की गांड के छेड़ पर आ गईं.. जिस तरह से माँ मेरे पैरों की तरफ झुक कर मेरा लुंड अपनी छूट में ले रही थीं.. माँ की गांड का छेड़ भी कुछ कुछ खुल जाता था.. मई वही अपनी ऊँगली को रखे माँ की उछाल कूद का मज़ा लेना लगा...

मैं माँ के खूबसूरत बदन को देखने में खो गया, माँ की कब्ब स्पीड बढ़ी कब माँ की छूट ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया मुझे नहीं..

माँ के जिस्म में झटके शुरू हुए तो मुझे एहसास हुआ था, मैंने माँ को देखा तो माँ की छूट ने पानी छोड़ दिया था, और मेरी ऊँगली कुछ माँ की गांड के छेड़ में जा घुसी थी, शायद माँ उसी वजा से हॉर्नी हुयो थी..

माँ के छुटद और गांड माँ के लिए सेंसीटिव थी..

माँ मेरे पैरों पर गिर कर हांपने लगी... मई माँ के चुत्तड़ो से खेलने लगा.. माँ जल्द hi मेरे ऊपर से उठी..

माँ:- विज्जउ मेरी गांड में ऊँगली क्यों डाली, कितनी जल्दी मेरी छूट ने पानी छोड़ दिया.. मई अभी और भी मज़ा लेना चाहती थी..

विजय:- माँ मैंने तो आपके चुत्तड़ो की शेप, खूबसूरती और गांड की खूबसूरती में खो गया था, मुझे तो कुछ एहसास भी नहीं रहा था. आपकी गांड की लालजी ने hi मुझे मदहोश कर दिया था.. इसलिए मई आपको चुड़ते हुए नहीं देख सका..

माँ:- चल कोई ना, अभी और भी मोके हाँ छोड़ने के.. चल अब्ब तो भी मेरी गांड का उपघटन करदे, बहुत मचल रही है तेरे लुंड क लिए..

विजय:- माँ की गांड क लिए मैंने एक क्रीम भी ले ली थी, मई बीएड से उतरा और अपने फर्श पर पेड़ हुए पकड़ों में से वो क्रीम निकल कर फिरस बीएड पर आ गया..

माँ;- वाह अपनी माँ की गांड खोलने के लिए इतना बेताब है मेरा बीटा.. माँ हस्ते हुए बोली..

विजय:- क्रीम कर भी तो आपकी चीखे निकलेंगी, मरी लुंड बोहतु मोटा है और आप की गांड का छेड़ बहुत छोटा सा..

माँ:- हां पारर मेरी सहन शक्ति भी तो बहुत है, तो ज़यादा टेंशन न लें..

विजय:- तो फिर आ जाएँ पोजीशन में और अपनी गांड को मेरे लुंड के लिए सेट करें.... मई माँ के मज़े लेते हुए बोलै..

माँ मुझे स्माइल देते हुए घोड़ी बन्न गई.. सबसे पहल तो मई माँ की गांड के छेड़ को अच्छे से चाट लेना चाहता था, मई नीचे झुका और माँ के चूतड़ों को पकड़ कर थोड़ा सा खेंचा और माँ की गांड पर अपनी जीब रख दी..

माँ:- अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ विज्जू तेरी जीब कितनी गरम है, माँ अहह हहह उफ्फ्फ

मैं अपनी जीब को माँ ाकि गांड के छेड़ में दाल कर चाटने लगा.. मैं माँ की छूट में ऊँगली करते हुए माँ की गांड को चाटने लगा.. माँ की गांड का सवाद मेरे मोहन में घुलने अलग, मेरे अंदर से सुरूर उतरने लगा..

कुछ देर माँ की गांड को चाटने के बाद मैंने अपना मोहन हटा दिए..

माँ की गांड पर और अपने लुंड पर अच्छे से वो क्रीम lagaai..fir अपने लुंड को माँ की गांड के छेड़ पर सेट करने लगा.. माँ के चुत्तड़ो को कस कर पकड़ लिया..

विजय:- माँ अब्ब आप मेरे लुंड को अपनी गांड में लेने क लिए रेडी हाँ ना..

माँ:- हाँ विज्जू बीटा आज मैं पूरी तरह से रेडी हों, अपने बेटे अपने सरताज से अपनी वर्जिन गांड खुवाने क लिए.. शुरू में ध्यान से डालना विजजूउउउ.

विजय:- माँ आप टेंशन न लें आपकी गांड के साथ मई पुरे मैं से प्यार करूँगा..

मैंने अपने लुंड को माँ की गांड क छेड़ पर सेट किया. अपने लुंड को थोड़ा सा दबाया तो व माँ के गांड के छेड़ पर थोड़ा सा डब्ब गया. माँ कुछ हिली लेकिन बोली नहीं, माँ की गांड का छेड़ छुप गया, पारर वो था तो सही पोजीशन में hi..

माने अपने लुंड का दबाओ कुछ और भी बढ़ा दिए.. मैंने एक आहत से अपने लुंड को थमा एक हाथ से माँ की कमर को पकड़ा और धक्का लगा लिया, मेरे लुंड का आधा सुपड माँ की गांड को खोलता हुआ अंदर जा घुसा..

माँ:- aiiiiiiiiiiiiiiiiii.. माँ चीखती हुई आगे गिर गई.. मेरा लुंड माँ की गांड के छेड़ से बहार निकल आया.. '

विजय:- माँ ज़यादा दर्द हुआ क्या..

माँ:- हाँ विज्जू बीटा दर्द तो बहुत हुआ है मुझे, पारर तू रुक मैट.. माँ फिरसे अपनी गांड को मेरे लुंड पर ले आई..

मैंने अपने लुंड को माँ की गांड पर सेट कर दिए और दोनों हाथो से माँ की कमर को कस के पकड़ लिया.. लुंड माँ की मोरी पर पूरी तरह से एडजस्ट था.. मैंने एक ज़ोरदार धक्का मार दिया..

aiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaaaaa maarrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr गईइइइइइ

meriiiiiiiiii gandddddddddddddd phatttttttttttt gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

मेरा लुंड सुपड समेत माँ की गांड को खोलता हुआ 1.5" तक अंदर जा घुसा था. माँ ककी भयानक चीख निकल गई थी.. आज की रात तो थी hi चेख़ो वाली.. शादी के बाद तो सभी की hi चीखें निकलती हाँ.. मुझे अपनी प्रिय की बात याद आ गई, उसने भी कहा था माँ पर रेहम मैट करना और मैं माँ पर आज कोई रेहम नहीं करना चाहता था..

बिना ज़ुल्म किये तो माँ को पूरा मज़ा भी नहीं मिलने वाला था.. मैंने अपने लुंड को देखा जो माँ की गांड में फंसा हुआ tha,uska सुपड माँ की गांड में छुप चूका था. माँ तो बिलबिलाती hi रहगेगी.. मैंने माँ की चीखों पर धयान नहीं दिया और एक करारा शॉट माँ की गांड में मार दिया.. इस अबार मेरा लुंड 5" तक्क मि गांड में जा शुका था, इसबार की चीख ने मुझे भी हिला डाला था..

माँ को बहुत दर्द हुआ था, मैं रुक गया. और माँ को देखने लगा, माँ अपना सर्र पटक रही थी, माँ की कुंवारी गांड खुल चुकी थी, माँ की गांड में मेरा 3.5" मोटा लुंड घुस चूका था.. मैं अपना एक हाथ की छूट पर रख दिया और 3 उँगलियाँ माँ की छूट में दाल कर तेज़ी से अंदर बहार करने लगा..

माँ:- हाईटी मई marrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiii इतनाआए darddddddddddd

हाय हाय हाय ोीईईईई अह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaaaa aiiiiiiiiiiiiiiii विजजूउ

निकल ले अपना लुंड मेरी गांड से मुझे नहीं लेना तेरा इतना मोटा लुंड अपनी गांड में............ तू छूट में hi दाल दे बीटा, रेहम कर अपनी माँ पे...... अह्ह्ह्ह

maaaaaaaaaa मर्डर गईइइइइइ.... माँ के आंसू तो मुझे नहीं दिखे पर माँ रोने लगी थीई......... सील जब भी टूटे दर्द तो बेइंतेहा देगी होई..

विजय:- माँ आप परेशां न हों, जल्द hi आपका दर्द कम् हो जाएगा..

मा:- हाँ पता ोीीीी मायआ, दर्द तो मुझे होना hi था, मैं भी तो ऐसे hi कर रही हों, तू निकलना मैट अपने लुंड को, और हिलना भी मैट अभी.. अभी मुझे बहुत दर्द है गांड में .......... मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मई एक बार फिरसे बचा जनम दे रही हों........ बहुत दर्द है, और तेरा लुंड भी तो देखा कैसे मेरी गांड में फंसा हुआ है.. हाईए ये दर्द अह्ह्ह्हह्हह ोीईईईई आईईईई

माँ बहुत तड़प रही थी पारर माँ खुद से भी लड़ रही थी..

जल्द hi मेरी उंगलयों ने माँ की छूट को गरम करना शुरू कर दिया.... माँ को कुछ रहत मिली..

माँ:- विज्जू बीटा अब्ब बाकी का लुंड भी एक hi बार में दाल दे. बार बार मुझे ये दर्द न दे.. अब्ब एक hi बार और मुझे दर्द दे.. फिर कुछ देर के लिए रुक जाना....

मैंने अपने लुंड को हिलाया तो तो वो नहीं हिला, मेरा लुंड माँ की गांड में बुरी तरह से फंसा हुआ था.. मैंने माँ की कमर को कस्सके पकड़ा और फिर थोड़ा सा ज़ोर लगते हुए बहार खेंचा, थोड़ा सा बहार आया टॉप मेङे फिरसे एक धक्का मार दिए.. इस बार मेरा सारा hi लुंड माँ की गांड को चरते उहे अंदर जा घुसा था......

माँ की चीख इस बार सबसे ज़यादा दर्द भरी थी.. माँ की गांड पूरी तरह से खोल चाकी थी.. माँ को दर्द होने लगा.. माँ चीखे मारते हुए रोने लगी.. इस बार माँ से सहन नहीं हुआ था.. पहले जो माँ ने थोड़ा सा बर्दाश्त कर लिया था, इस बार नहीं हुआ था..

मा ने अपना सर्र बीएड पर दाल दिया.. मैं माँ के ऊपर आया और माँ के दोनों बूब्स को पकड़ कर पुरे ज़ोर से दबाने लगा, माँ के निप्पल्स को भी मरोड़ने लगा.. माँ की पीठ को भी मई चूम रहा था..

10 मिंट लगे माँ को सुकून में आते आटे.. तब तक माँ बहुत तड़पती रही थी...

माँ को चैन आया तो मैं सीधा हो गया और अपने लुंड जको देखने लगा.. जो जड़ तक्क माँ की गांड में धंसा हुआ था........

माँ की गांड पूरी तरह से फट चुकी थी, माँ की गांड साइड से पूरी लाल हो कुहकी थी, थोड़ा थोड़ा कौन भी दिख रहा था.. माँ की गांड सही से चिर्र गई थी..

माँ की सालों से बची रह जाने वाली गांड भी आज खुल चुकी thi..maine माँ के चुत्तड़ो पर अपने हाथ फेरने अलग.. माँ को ऐसे भी बहुत मज़ा आता था.. मैं अपने लुंड को हिलाये बिना hi माँ के चूतड़ों को सहलाने लगा..

कुछ देर बाद मैंने अपने एक हाथ की उनलगियों को माँ की छूट में डाला तो माँ की छूट पानी छोड़ रही थी.. मैंने अपनी उंगलियों से hi माँ को छोड़ना शुरू कर दिया..

4 मिंट बाद मैंने अपने लैंड को हिलाया तो माँ भी हिल गई गई, इस बार माँ को ज़यादा दर्द नहीं हुआ.. मैं थोड़ा ज़ोर लगा कर अपने लुंड को बहार खेंचा तो लुंड के साथ hi खून भी बहार आने लगा..

थोड़ा थोड़ा करके मैंने सुपड तक लुंड को बहार खेंच लिया.. मेरा लुंड मोटा और लम्बा लुंड माँ की गांड से बहार आ कर मुझे बहुत पायरा दिखने लगा था..

मैंने माँ की कमर को पकड़ा और फिरसे उसे अंदर डालने लगा, इस बार भी लुंड फस फस कर hi अंदर गया था, पारर माँ ने अब्ब चीखने तो नहीं निकालें थे, पारर माँ को दर्द ज़रूर हुआ था..

माँ:- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह विज्जउ अब्ब कुछ ेद्र धीरे धीरे करके छोड़ मेरी गांड को अपने लुंड से लिए फिर बना ले.. फिर दुमदार छोड़ना..

मैं माँ की मानते हुए अपने लुंड को पूरा hi बहार निकल कर धीरे धीरे अंदर डालने लगा.. जल्द hi माँ की गांड ने मेरे लुंड को आसानी से खुद में सामना शुरू कर दिया.. धीरे धीरे करके मेरी स्पीड भी बढ़ने अलगी.. और माँ की सिसकियां भी अपने चार्म पर पोहचने लगी..

माँ की छूट तो पहले से hi मैंने उँगलियों से छोड़ छोड़ कर गरम करदी थी...

अगले 10 मिंट में माँ की छूट फिरसे बहने वाली हो गई, माँ भी अपनी गांड का दर्द भूल कर अपनी छूट के सुख में डूब गई....

माँ की आहें बढ़ने लगी तो मेरे धक्कों में भी स्पीड आने लगी..

अब्ब माँ की गांड खुल चुकी थी तो मैंने सोचा क अब्ब लुंड को माँ की गांड से निकल कर माँ की छूट में दाल देना चाहिए, कुछ माँ को भी मज़ा देना चाहिए.. माँ जहद गई तो फिर अच्छे से अपनी गांड में मेरा लुंड ले सकेगी..

यही सोचते हुए मैंने माँ की गांड से अपना लुंड निकल दिया.. माँ ने भी सुकून भैर सांस ली.. मैंने माँ के पैरों को खेंच कर उल्टा hi बीएड पर लिटा दिया.. माँ के पैरों को खोलते हुए अपने लुंड को माँ की छूट में पीछे से hi दाल दिया. और माँ केऊपर आते हुए माँ को छोड़ने लगा..

माँ घोड़ी बन के थक गई थी, माँ को मरी ऐसा करना अच्छा लगा, माँ ने अपनी ख़ुशी का इज़हार भी कर दिए था..

मैं माँ के ऊपर आ कर अपने लुंड को माँ ाकि छूट में उतरने लगा, धीरे धीरे करके मई अपनी स्पीड बढ़ने लगा..

माँ:- अहह ओह्ह सी विज्जू बीटा ऐसे hi अपनी माँ को छोड़ो, ऐसे hi अपनी धरम पत्नी को सुख दो, और तेज़ ोभूत अच्छे पूरा लुंड निकल कर पूरा hi डालते रहो.. आठ अब्ब कितना अच्छा लगने लगा है, तेरा लुंड सीधा hi मेरे अंदर गहराई तक जा रहा है, और तेज़ और तेज़ अहह अह्ह्ह अहह ओह्ह ओह्ह्ह उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह

माँ की सिसकियाँ और मेरे धक्के तेज़ होने लगे.. जल्द hi माँ अपने चार्म पर पोहंच गई.. जब मुझे लगा क अब्ब माँ जहदने वाली है तो मेरे धक्कों की भी स्पीड बढ़ने लगी..

जल्द hi माँ का जिस्म अकड़ना शुरू हुआ फॉर माँ मेरे नीचे दबी हुई hi झटके पर झटके खाने लगी..

एक तेज़ सिसकी लेते हुए माँ जहद गई.. मैंने भी खुद को माँ के ऊपर दाल दिया. मेरा लुंड माँ की छूट की गहराई में उतर कर शांत खड़ा हो गया.. और अंदर hi अंदर माँ की छूट के बह रहे कमरस से नहाने लगा....

माँ की साँसे बहुत तेज़ चल रही थी.. मैं माँ को पीछे से hi चूमने और चाटने लगा....

फिर पूरी रात hi मैं और माँ पोजीशन बदल बदल कर एक दूसरे का प्यार पाते रहे.. माँ की गांड का दर्द बार बार माँ की गरम होने वाली छूट में डब्ब रहा था.. माँ की गांड का सही हाल तो कल hi पता चलना था.... आज की रात तो दर्द को खुल कर अपना आप दिखने का भी मौका नहीं मिल पा राहत है..

पूरी रात माँ कितनी बार झड़ी मुझे नहीं पता.. मैंने अपने लुंड से 6 बार माल निकला... 2 बार माँ की गांड में माल डाला, एक बार माँ ने अपने मोहन में लेकर जातक लिया... दो बार माँ ने अपनी छूट में लिया, एक बार माँ के बूब्स फ़क करते हुए माँ के दूध पर hi अपना माल बहा दिया...

मई भी बहुत थक चूका था, पारर माँ का बहुत बुरा हाल था, रात भर चुद चुद के माँ के बदन का अंग अंग ढीला हो गया था.. पर माँ की पियास थी क बुझ hi नहीं रही थी..

माँ की पियास सूबा का के बुझी... आखरी चुदाई माँ की गांड की जारी थी, जब्ब दूर किसी ने नॉक किया था.. बहार से hi तीनो तितलियों की आवाज़ें आना शुरू हो गए थी..

4.30 का टाइम हो रहा था.. मैंने माँ की गांड से लुंड निकला और जाकर दूर खोल दिया था..

तीनो hi अंदर आ कर दूर को लॉक कर चुकी थीं.. और बीएड की हालत देख कर वो भाग कर माँ के पास पोहंची.. और माँ को चूमने लगीं.. माँ थकी हुई तो बहुत थी..

पारर माँ नेसभी से मिल कर ख़ुशी को सेलिब्रेट ज़रूर किया था. तीनो ने hi माँ को बहुत बधाई दी थी..

प्रिय:- विज्जू चलो ाब्ब हामरे सामने hi माँ की गांड में लुंड को पेलो.. हमें भी देखना है माँ की गांड में तेरा लुंड.. चल अब्ब देर मैट कर.. पूरी रात hi हमें एक्सइटमंट में नींद नहीं आई

जहान्वी:- हम तीनो hi साड़ी रात ये बातें करती रही हाँ क विज्जू इस पोसियन में माँ की गांड में लुंड को दाल कर छोड़ रहा होगा..

षुरूति:- और विज्जू का लुंड जब्ब माँ की गांड की सील को तोड़ता हुआ अंदर घुसे गए तो माँ कैसे चिल्लायेगी......... उसपर बातें कर रही थी.. श्रुति फिर मॉनिंग करते हुए दर्द का इज़हार करने लगी.. आह्हः विज्जू धीरे से मेरी गांड बहुत टाइट है और तुम्हारा लुंड बौह्त बड़ा, आह्ह्ह्हह मा मेरी गांड फट गई, धीरे डालो..

सबब hi श्रुति की बात और अंदाज़ कर हस्सन लगे.. माँ के चेहरे कोई चमक भी बहुत बढ़ गई थी..

फिर मैंने तीनो के सामने माँ की गांड मारी.. तीनो hi माँ की गांड में जाते हुए मेरे लुंड को बड़े घोरसे देख रही थी..

प्रिय माँ को बार बार पोजीशन बदल बदल कर मेरा लुंड गांड में लेने को बोल रही थी.. माँ भी प्रिय के बताये हुए के मुताबिक मेरा लुंड अपनी गांड में ले रही थी..

प्रिय:- माँ आपकी गांड तो एक hi रात में पूरी खुल गई है.. देख के तो नहीं लगता क आपको दर्द है...... क्या हमारी गांड भी एक hi रत में खुल कर ऐसे हो जाएगी..

जहान्वी:- प्रिय एक घंटे बाद hi छूट की आग गांड के दर्द को खा जाती है.. देखा नहीं माँ की गांड का क्या हशर हो रहा है..

षुरूति:- हाँ जब्ब माँ की छूट में लुंड जाना रुक जाएगा तो देखना माँ की गांड ने वो दर्द देना है माँ को क माँ से सहन करना मुश्किल हो जाएगा..

विजय:- हाँ आज का दिन तो माँ चलने लायक नहीं रहने वाली.. अभी तो माँ बीएड पर है ना तो माँ को सही से अंदाज़ा भी नहीं हो प् रहा..

प्रिय :- चलो फिर जल्दी से अब्ब्ब आप दोनों अपना अपना पानी निकालों, हमें देखना है माँ को कितना दर्द है..

20 मिंट में hi मेरे लुंड ने पानी निकलना शुरू कर दिए था.. मेरे लुंड का पानी माँ की गांड का छूट में नहीं निकला था..

तीनो ने hi मेरे लुंड को थाम कर माँ की गांड के पानी से साणे हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में लेकर टास्ते किया था.. तीनो hi अपनी माँ की गांड का पानी चीख करना छह रही थी,.. उसी हालत में मेरे लुंड ने भी पानी छोड़ दिया था..

मेरे लुंड का पानी माँ की गांड के गांध में शामिल होकर तीनो के मोहन पर गिरने लगा तह, जिसे वो तीनो मज़े से पी गई थी..

फिर माँ ने प्रिय के कहने पे बीएड से उतर कर नीचे चल कर दिखाया था..

माँ अपने पैरों पर पूरा वज़न भी नहीं दाल पाई थीं.. माँ सच में hi चलने लायक नहीं रही थी..

तीनो hi फिर पेट पकड़ पकड़ कर हस्सन लगी थी..

ऐसे hi हंसी ख़ुशी टाइम बीतने लगा... तीनो मलकर माँ की सेवा में लग गयी. और मैं फ्रेश होकर रूम से बहार निकल गया..





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अपडेट :::110


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महक का चेहरा बदल चूका था.. मैंने भी अपना चेहरा बदल लिया था.. एक आरज़ी मास्क मेरे चेहरे पर था. जिसे में जब्ब चेहरे उतर सकता था..

देखने पर किसी को भी नहीं पता चलता था क दोनों hi चेहरे ओरिजिनल नहीं हाँ.

शाम क 5 बजे का टाइम था.. माइए और महक गाडी में बैठी हुए बहार घूम फिर रहे थे.. हमें पैलेस से निकले हुए आधा घंटा होने वाला था.

हम ऐसे hi घूम फिर रहे थे. मक़सद सिर्फ एक दूसरे के साथ कुछ टाइम बिताना था..

एक बार फिरसे मैं उसी तुख पर जा रहा था, जिधर मई पूजा दीदी के साथ बाइक पर निकला था..

महक बहुत hi मस्त माहौल में मुझसे बातें कर रही थी. महक मेरी और माँ की शादी को लेकर के मुझे छेड़ रही थे. महक के हस्सन से गाडी का माहौल खुशगवार होने लगता था, महक के हस्सन से एक गुनगुनाहट से होने लगती थी.

महक के सफ़ेद चमकदार दांत हस्सन हुए बहुत hi ज़यादा अट्रैक्टिव बना देते थे महक को.. महक थी भी बहुत खूबसूरत.. महक के जिस्म की खतरनाक शेप किसी को भी बेचैन कर सकती थी, महक के कड़ब पहाड़ों जैसी उठान लिए हुए बूब्स महक के हस्सन से और बुइ ज़यादा मस्त नज़ारा दिखने लगते थे. महक की शर्ट कुछ नीचे थी तो महक के आधे बूब्स क्लियर दीखते थे.. बूब्स की लकीर अंदर तक्क देख जाती थी.. मैं महक के क्लीवेज को बार बार देखने लगता था.. महक ने भी मुझे खुद की सुन्दस्रता का दीदार करते हुए देख लिया था..

महक:- क्यों रात भर शराब जो पि है तुमने अपनी मा की, उससे दिल नहीं भरा जो अब्ब मेरे भरे हुए मटके देख कर मोहन में पानी आने लगा है..... महक कोई भी बात खुल कर कर जाय करती थी.. वो बेहया नहीं थी, कभी किसी से उसके रिलेशन नहीं थे.. मर्द ज़ात से शारीरिक भवान्यें भी उसके मैं में नहीं थी,. फिर भी वो हर किसम की बातें कर लिया करती थी..

vijay:-(mehak को स्माइल देता हुआ) नहीं भगवन ने जिस किसी को सुंदरता से नवाज़ा है, उसे देखना तो चाहिए hi.. और फिर तुम हो भी तो कई पर भारी.. तुम्हरे बदन के हर एक अंग की बनावट भीत ो पूरी पैमाइश से बनाई गई है.. तुम्हरे बदन पर ये दोनों दिख रहे मटके बनाने के बाद भगवन ने भी इनको बनाने वाला साँचा तोड़ दिया होगा.. तुम्हारे बाद इन जैसे पूरी दुन्या में किसी और के तो होने से रहे..

महक मेरी बार सुनकर मेरी आँखों में देखती हुई खिलखिला कर हस्सन लगी.

महक:- क्यों रात भर अपनी नयी नवेली दुल्हन के मटके दबा दबा कर नहीं देखे क्या, जो अब्ब मेरे मटको के पीछे पद गए हो.. मुझे भी पता है ये बहुत ख़ास हाँ.. मैंने इनपर म्हणत भी बहुत की है.. (महक शरारती मुस्कान से मेरी अकनकहों में देखतने लगी) पारर ये तुम्हारे किसी काम नहीं आने वाले.. इनपर तुम्हरा नाम कही भी नहीं लिखा हुआ. फ्यूचर का कुछ कह नहीं सकते. अभी ये सिर्फ मेरे हाँ समझे, और अब्ब इन्हे ताड़ना बंद करो.... महक हस्ते हुए मेरे कंधे पर एक धप्प्प मर्डर दी और फिरसे खुल क्र हस्सन लगी..

ये भी एक रंग था औरत जाट का.. हर किसम की बात भी कर लेती है, किसी को कुछ करने भी नहीं deti..mann में किसी के साथ सेक्स के विचार भी नहीं हाँ..

हालांकि महक को सेक्स ड्रग्स भी दिए गए थे.. फिर भी महक ऐसे रेस्ट आकृति थी, जैसे उसे इस सबब में कोई इंटरेस्ट नहीं है.... महक को देख कर हैरत होती थी क महक एंटी स्ट्रांग कैसे है अंदर से...

बहरहाल महक एक ज़िंदा दिल लड़की थी, महक के साथ लाइफ जीने में मज़ा आने वाला था.. माइए भी महक के बदन के लिए बेचैन नहीं था..

हम जल्द hi उसी पार्क के पास जा पोहंचे...

मैसे गाडी को साइड में करके रोक दिया, यहाँ पार्किंग वाला कोई चक्कर नहीं था, तो पार्क की साइड में hi गाडी लगा दी.. महक फ़ौरन hi गाडी से उतर गई..

महक ने टाइट जीन्ज़ शर्ट पहनी हुई थी. उसके सख्त बूब्स कुछ और भी कैसे हुए दिखने लगे थे.. आधे तो पहले से hi दिख रहे थे..

मैंने भी जीन्ज़ और टीशर्ट पहनी हुई थी.. हाफ बाज़ो टीशर्ट में मेरे मसल्स दूर से hi दिख रहे थे..

काफी लोग थे पार्क में.. कपल्स भी बौह्त थे.. अक्सर एक दूसरे के हाथो को थामे हुए अंदर जा रहे थे..

महक ने भी मेरा हाथ थाम लिया और लोगों को जलने क लिए खुल कर हस्ती हुई मुझसे बातें करती हुई अंदर जाने लगी..

महक की आवाज़ से सबब hi हमें देखने लगे.. और अहम दोनों सभी को नज़र अंदाज़ करते हुए आगे बाहड़ने लगे.. कुछ कपल्स तो रुक कर हमें देखने अलगे..

वो सभी मैं hi मैं में सोच रहे होंगे क वाह्ह क्या जोड़ी है...

उनको कौन बताये क हमारे एक होने का चांस दूर दूर रक् नहीं है.. मेरे साथ में मौजूद मस्त फिगर वाली लड़की है ज़रूर.. उसके अंदर सेक्स न नशा भी बहुत है..

पारर उसके अंदर लड़कियों वाली कोई बात hi नहीं है, महक तो आधी मर्द थी... मैं दिल hi दिल में मुस्कराता हुआ महक का हाथ थामे आगे बढ़ रहा था..

विजय:- महक सबब हमें hi देख रहे हाँ, सबब hi हमें देख कर जलन का शिकार हो रहे होंगे.. पारर उन्हें क्या पता क

महक:- उन्हें क्या पता क मुझसे लड़कियों वाली बातें कम् हाँ.. महक इतना बोल कर हस्सन लगी.. महक की हंसी भी 100 लड़कियों पर भारी थी.. कुछ फिरसे महक को रुक कर देखने लगी..

एक लड़की से नहीं रहा गया तो वो हमारी तरफ आने अगली..

महक:- विजय आज से मैं कभी किसी मर्द के साथ यौन किसी पब्लिक प्लेस पर नहीं आई.. पारर आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.. वो देखो वो लड़की ज़रूर कुछ अच्छे कमैंट्स hi करेगी हमारे बारे में, कुछ मैट बोलना अभी मुझे मज़ा लेने देना समझे..

लड़की पास आई..

लड़की:- hi, क्या मैं कुछ देर आपसे बात कर सकती हों.?

महक:- हाँ, ज़रूर चलो चलते हुए बातें करते हाँ.. महक ने उसका हाथ थाम लिया.... वो लड़की अपनी फॅमिली के साथ थी..

लड़की:- सॉरी पर मेरी फॅमिली सामने hi कड़ी है.. वही चल कर कुछ बातें न कर लें, आपको देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा तो मैं खुद को आपके पास आने से रोक नहीं पाई..

लड़की के इशारे पर मैंने जरूर महक दे देखा.. वहां लड़की की फॅमिली कड़ी थी, और लड़की की फॅमिली में एक छोटा लड़का एक 32 आगे का आदमी, एक 30 के कर्रेब औरत जिसने एक क्यूट से बेबी को ुटिह्या हुआ था, एक बोधि औरत खड़े थे.. सभी के चेहरों को देख कर अंदाज़ा हुआ क पूरी फॅमिली hi दिल से कदर करने वळून की है.. हमारे पास जो लड़की आई थी, वो 20 के करीब थी..

हम चलते हुए उनके पास जा पोहंचे, महक ने मेरे हाथ को दबा दिया था, जिसका मतलब था क मैं कुछ भी बोलो, वो सोच समझ कर बोलों.. महक इस सबब को एन्जॉय करना छह रही थी..

उनके पास पोहंचे तो हेल्लो हाय hui..maine और महक ने बूढी औरत के पैरों को छुआ, बूढी औरत ने हमें आशीर्वाद दिया.. हमारी जोड़ी को किसी की नज़र न लगे ऐसी दुआएं दीं.. मैं और महक मैं hi मैं में मुस्कुरा रहे थे...

महक पूरा पूरा मज़ा ले रही थी, महक ने अपने एक्सप्रेशन भी चेंज कर लिए थे.....

लड़की:- भाभी देखो मैं इन्हे ले आई हों..

भाभी:- बहुत प्यार जोड़ी, भगवन किसी की नज़र न लगाए, (मुझसे) भाई आप दोनों बहुत जांच रहे हाँ, इस पुरे पार्क में आप दोनों के जैसा कोई भी नहीं होगा..

लड़कीअ का bhai:-(mehka के सर्र पर हाथ गिरते हुए) सदा सुहागन रहो, और सदा खुश रहो.. तुम दोनों को देख कर दिली ख़ुशी हुई है.. तुम दोनों हस्ते हुए बहुत भले दीखते हो, इसलिए मैंने radha(ladki) से कहा क इनसे मिलना चाहिए, तो फ़ौरन तुम दोनों की तरफ बेहद गई.. भगवन तुम्हे इन दुन्या की साड़ी खुशियां दे.. कहाँ से हो भाई...

विजय:- भाई हम दिल्ली से हाँ, आज इस तरफ आये तो फिर पार्क में भी आ गए..

लड़की:-( अपनी ख़ुशी को दबा न पाई) मुझे आप दोनों के साथ एक पिछ लेनी है मैना अपनी फ्रेंड्स को दिखाओगी.. मई उन्हें बताऊँगी क देहको इस कपल से बेस्ट कपल पहले कभी देखा है... लड़की का दिल तो हम नहीं दुख सकते थे.. फिर मैंने और महक ने लड़की के साथ कुछ पिछ बनवाई.. बाकियों का भी मान होने लगा तो हमने उनके साथ भी कुछ पिक्स बनवाई..

कुछ देर हम उनके साथ बातें करते रहे फिर हम उनसे अलग हो गए.. महक ऐसे मिली जाइए सच में hi वो मेरी लवर हो.. महक जब्ब उनसे मिलके कुछ फासले पर पोहंची टी पेट पकड़ पकड़ कर हस्सन लगी..

महक:- विजय सच में hi आज मज़ा आ गया.. ऐसा मेरे साथ पहले कभी नहीं हुआ, मुझे तुम्हारी होने वाली बीवी समझ रहे थे.. और पार्क में मौजूद सब hi मुझे तुमसे रिलेटेड समझ रहे हाँ..

vijay:-(maza लेते हुए) तो हर्ज hi क्या है, बन्न जाओ मेरी गफ मेरे बाद तुमहेब भी तो कोई और नहीं मिलेगा..

महक मेरी बार पर हस्सन lagi,mere हाथ पर अपने दबाओ को बढ़ाना शरू कर dia..kuch देर पहले महक का हाथ मेर हाथ में बहुत hi नरम और गरम था, अचानक से महक के हाथ की सख्ती बढ़ने अलगी, मुझपर तो कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ने अल्वा था, पारर महक के हहत की सख्ती अचे अच्छों की चीखें निकलवा सकती थी..

महक:- देख रहे मेरे हाथ की सख्ती, हर कोई इसकी सख्ती नहीं झेल सकती, तुम हो तो बहुत hi ख़ास, पारर मेरे बॉयफ्रैंड्स बनने के सपने छोड़ दो.. कही मई तुम्हरा लुंड भी दूसरे मर्दो की तरह से ना चीयर दो.. मेरी नज़र में अभी तक तो लुंड के दो hi काम हाँ, या तो मूट लिया जाए या फिर मेरे हाथों में आने के बाद छिरर्र जाई.. महक मेरी आँखों में देखते हुए मुस्कुराती हुए बोली, महक की मुस्कान बहुत hi पुरे थी, महक के साथ टाइम स्पेंड करने में बहुत मज़ा आ रहा था.. महक जैसी बातें भी किसी से नहीं हो सकती थी...

इससे पहल जिससे भी मैंने ऐसी बाटे की थीं उन सभी से मरे सेक्स रिलेशन्स थे या बनने वाले थे, पारर महक के साथ ऐसा कुछ भी नहीं था..

हम दोनों hi सेक्स फीलिंग्स से दूर रहते हुए हर तरह की बातें कर रहे थे, हम रोमांटिक बातें तो कर नहीं सकते थे.. हम दोनों कपल थोड़ी न थे, बस ऐसे hi बातों में हम पार्क घुमते रहे.. आज की शाम भी महक के नाम होकर बहुत खूबसूरत हो गई थी.. महक भी खिली खिली मेरा पूरा साथ दे रही थी..

पार्क में जहाँ कोई नहीं दिखा वहां मैंने महक को अपनी बहन में भर लिया.. महक के बूब्स मेरे चौड़े सीने में डब्ब गए, इतने सख्त थे क वो पचके नहीं मुझे hi सेने में चुभने लगे.. महक के शरीर की हीट hi शुष्मा दीदी जितनी hi थी, पारर महक में विल पावर की इन्तहा थी, जहाँ दीदी टूट गई थी वही महक और भी ज़यादा स्ट्रांग बन्न जाती थी..

मई महक की आँखों में देखने लगा, और महक मेरी आँखों में देखने अलगी.. हमारी आँखों का फैसला 3" hi था, उतना hi फैसला हमारे होंटो का भी था... महक के होंटो की तपिश मेरे होंठ बहुत अच्छे से महसूस कर पा रहे थे..

मेरे दिल की धड़कन बिलकुल भी नहीं बढ़ी, ये महक की रेस्पेक्ट थी, मेरे अंदर कोई भी दूसरी फीलिंग्स नहीं थी..,

हम दोनों hi एक दूसरे की आँखों की गहराई को नापने लगे.. मेरी hi तरह से महक की भी आँखों में बहुत गहराई थी, महक की आँखों में मुझे पूरी दुन्या hi दिख रही थी, महक की आंखों की कशिश मुझे अपनी और खेच रही थी... पर मेरा खुद पर पूरा पूरा कण्ट्रोल था.. महक मेरी आँखों में देखती रही..

mehak:-(dheeme से) विजय खुद को टेस्ट कर रहे हो क्या.. वैसे तुम्हारी आँखों में देख कर मुझे बोहत अछ्हा लगा, जैसे मैंने तुम्हरे बारे में सोचा था, तुम बिलकुल भी वैसे hi हो.. इतने करीब पा कर भी तुममे मुझे कोई बदलाव नहीं दिख रहा.. मेरी hi तारा तुम भी अंदर से बाउट मज़बूत हो..

जोड़ी तो अस्त है हमारी.

क्या हुआ अगर हमारी जोड़ी में GF,BF वाला सिस्टम नहीं है, कपल्स वाली चक्कर को छोड़ कर अहम सच में hi इस पूरी दुन्या में लाजवाब जोड़ी हाँ.. आज मुझे तुम और भी पसंद आ रहे हो.. वर्ण मुझे देख करते लोग डोर से hi अपना लुंड हिलने लगते हाँ, पारर तुम तो मेरे अंदर की आग से भी नहीं जल रहे... ऐसा hi इंसान मुझे अपनी लाइफ में चाहिए था... थैंक्स फॉर किंग तो माय लाइफ...

अब लाइफ कुछ अच्छी गुज़रेगी... पारर तुम मुझसे एक वडा भी करो विजयो..

मैंने महक के होंटो पर एक फूंक मार दी.. महक की आँखों में चमक सी आ गई.. नीचे से लेकर ऊपर तक hi हम दोनों एक दूसरे में समाये हुए थे.. मेरा लुंड भी महक की छूट पर टिका हुआ था..

ऑंखें भी पास थी और होंठ भी एक दूसरे के बिलकुल पास पास.. फिर भी सबब कण्ट्रोल में था..

विजय:- यही ना क जैसे तुम्हे सेक्स ड्रग्स की लत्त लगाई गई है, जब्ब तुम पर सेक्स का नशा हावी होने लगे तो तुम्हे टूटने से भी बचाओ, और अगर तुम मेरे लिए मचलने लगो तो मैं ऐसा कुछ भी न करों, जिससे तुम्हारे ईगो को ठेस पोहंचे.

तुम्हारा लाइफ में अभी सेक्स के लिए भी कोई जगा नहीं है, तुम्हे उस स्टेज पर कमज़ोर पड़ते देख कर, तुम्हेर बिगड़ती हालत को देख कर भी मई उस टाइम तुम्हारी कोई मदद न करों, यही कहना चाहती हो न तुम...

महक ने मेरी आँखों में देखते हुए hi मेरे माथे से अपने माथे को जोड़ दिया..

महक:- थैंक्स मुझे इतना समझने क लिए, तुम सच में hi बहुत अच्छे हो.. तुम्हारे साथ रह के जीने का मज़े आएगा.. विजय मैं भी एक लड़की hi हो, और इस सबब से नहीं बास चक्ति, फितरत से बग़ावत मुमकिन नहीं रहती.. पारर अभी मेरे अंदर ऐसा कुछ भी नहीं है, हमेशा से hi मई इस सबब से नफरत करती ा रही हों, मेरे मैं में सेक्स रिलेशन्स के लिए अभी कोई जगा नहीं है.. पारर मैं हंसः hi ऐसी तो नहीं रह सकती कभी भी कुछ भी हो सकता है..

तुम आये हो मेरी लाइफ में तो कुछ अलग सा लगने लगा है, पहले तो इतना सबब भी नहीं था मेरी लाइफ में, इतना सबब चेंज हो रहा है, तो आगे भी बहुत कुछ चेंज हो सकता है, पारर कुछ भी मेरी मज़बूरी में नहीं होना चाहिए.. मुझे तुमसे बेहतर खुद के लिए मिल भी नहीं सकता.. अगर कभी मेरी फीलिंग्स तुम्हारे लिए जागने लगीं, तो मैं वो सबब तुम्हारे साथ दिल से करुँगी, पारर सेक्स ड्रग्स के नशे में नहीं.. वो तो सिर्फ वक़्ती तौर पर जाएगी हुई हवस होगी..

और ऐसे लम्हे में कुछ भी अगर मई कर बैठी तो मुझे ऐसा लगेगा क मैंने खुद पार्स कण्ट्रोल खोते हुए सबब कर लिए है... तुम समझ रहे हो ना मेरी बात..

विजय:- हाँ सबब समझ रहा हों, महक ये तुमने सही किया क अपने अंदर के सच को मेरे सामने रख दिया.. सच सामने रखना भी बहुत बड़ी बात है.. तुम्हारा मेरे पास होना मुझे भी बहुत अच्छा लगने लगा है, अब्ब मेरी बहन में हों, तो मुझे ये दुन्या बहुत खूबसरूआत दिखने लगी.. पर मेरे अंदर भी अभी वो फीलिंग्स नहीं जाएगी हाँ, जो लवर्स में होती हाँ, मैं तो ऐसे hi तुम्हे छेड़ने क लिए तुम्हे अपनी बहन में भर लिया था.. पारर फिर बात hi बहुत आगे निकल गई.. तुम भी और मैं भी एक दूसरे के और भी करी आ गए, और हम अब्ब अपने बारे में सबब hi बाते खुल कर कर रहे है...

सबब कुछ hi तो है मेरे पास एक तुम भी मुझे मिल गई तो लाइफ और भी अब्ब मुझे अच्छी और पायरी लगने लगी है.. मैं कुछ भी ऐसा नहीं करूँगा जिससे तुम्हे कभी गिल्ट लगे, या तुम्हे मुझे लेके कभी कोई परेशानी हो.. तुम मेरे पास हर दम्म रहो यही मेरे अंदर से आवाज़ आ रही है, अब्ब तुम मेरे पास किस सूरत में रहती हो ये तो वक़्त hi बताएगा.. अगर कभी हमारी फीलिंग्स जाएगी तो यकीनन वो लम्हा बहुत hi रोमांचिक होगा..

महक:- हाँ वो लम्हा बहुत hi मस्त होगा. जब्ब हम एक दूसरे के लिए कुछ हट के सोचेंगे.. तो अभी हमारी फीलिंग्स नहीं जाएगी हाँ तो मुझे छोड़ दो अब्ब, या अभी से hi उन्ही फीलिंग्स को जगा देना चाहते हो...

विजय:- है है है वैसा आईडिया बुरा भी नहीं है.. कहु तो तरय करो, वैसे भी जितना फासला घाट चूका है, अब्ब रह भी क्या गया है. इसे भी ख़तम कर देते हाँ..

महक एक झटके में मुझसे अलग हो गई, मेरे पैरों को उलझा के मुझे नीचे गिरा दिया, मैं गिरता तो नहीं पारर मैंने महक के गिराने से गिर गया.. महक उछाल कर मेरे ऊपर आ गिरी.. पता नै आस पास कोई आया या नहीं, हमने धयान नहीं दिया..

महक मेरे ऊपर आई और मेरी आँखों में मुस्कुराती हुई देख के बोली..

महक:- तेरे लुंड का तो पता नहीं, पर तेरे अंडे मई ज़रूर फोड़ डोंगी.. ज़यादा शायना बनने की कोशिश भी मैट करना..... (फिरसे हस्ते हुए) वैसे इस सबब में भी एक अलग hi मज़ा है.. ये सबब भी बुरा नहीं है.. पारर मुझे ज़यादा तंग करके मेरे अंदर के ड्रग्स को एक्टिव न कर देना, वर्ण बहुत गड़बड़ हो जायेगी.

महक इतना बोल कर मेरे ऊपर से उठ गई.. मई भी उठ गया.. महक ने हाथ दे आकर मुझे उठने में मदद दी.. महक मेरे साथ बहुत अच्छा टाइम स्पेंड कर रही थी..

कुछ दूर कड़ी हुई गर्ल्स हमें देख रही थी.. उन्हों ने हमें इशारा कर दिए..

थम्ब्स उप का इशारा करते हुए "लगे raho'lage रहो" मस्त लग रहे हो.. कुछ ऐसे hi इशारे थे.. वो हस्ती हुई आगे बढ़ गई थी.

हम दोनों भी हस्ते हुए फिरसे एक दूसरे के हाथ को थामे हुए पार्क से बहार की और चल पड़े..

ये सबब बहुत hi अजीब था.. ऐसा किसी भी फ्रेंडशिप में नहीं देखने को मिलता..

ऐसा सबब हो, GF,BF जैसा भी कुछ न हो, लवर कपल वाला सन भी न हो...

ऐसा सबब ओनली फ्रेंड्स में भी देखने को नहीं मिलता..

मेरी लाइफ से जुड़े हुए सभी कही न कही से अजीब hi थे.. ऐसे hi खुश खुश टाइम बिताते हुए हंसी मज़ाक में हम पार्क से बहार निकल पड़े..

शाम होने वाली थी.. हम गाडी में बैठे दिल्ली के लिए निकल गए... कुछ आगे बढ़ो तो एक औरत सड़क के किनारे एक बच्चे को गॉड में लिए दूसरे हाथ में एक फोटो हाथ में लिए लोगों को रोक रोक कर कुछ पूछ रही थी..

आईडिया hi था क उसके हाथ में फोटो होगी, दूर से सही नज़र तो नहीं आया पारर लोग उस फोटो को देख कर ना में सर्र हिलाते हुए मुझे दिखे थे.

महक:- विजय उस औरत के पास गाड़ी रोकना... मुझे कुछ गड़बड़ लग रही है..

मई भी समझ गया क औरत बहुत दुखी है, कोई तो प्रॉब्लम होगी उसे.. मैंने गाडी उसके पास ले जा कर रोक दी..

महक गाडी से उत्तरी मैं भी उतर गया..

महक:- दीदी क्या हुआ आप ऐसे क्यों परेशां दिख रही हाँ, और लोगों से क्या पूछ रही हाँ..

औरत ने मुद कर देखा तो उसे देख के मेरा दिल खून के आंसू रोने लगा.. वो कोई औरत नहीं थी, 18 बरस की एक लड़की थी, उसकी हालत देख के लगता था जैसे क वो 35 य्र्र की हो, उसकी गॉड में एक छोटी सी बच्ची थी.. उसका चेहरा न जाने कितने दिनों से नहीं धुला था.. उनकी ऑंखें रो रो कर सूजी हुई थी. जिस बच्ची को उसने गॉड में थामा हुआ था, वो भी ऐसे दिख रही थी जैसे क कई दिनों की भुकी हो..

गाडी में बैठे हुए थे, तो सही से न तो उसकी सूरत दिखी और न hi उसकी आवाज़ सुन्न पाए थे.. अब्ब करीब से उसकी सूरत देखि, फिर जब्ब वो बोली तो उसकी आवाज़ सुन कर मेरे और महक के रोंगटे hi खड़े हो गए.. मेरा दिल किया क कही टक्कर मार कर अपना सर्र hi फोड़ डॉन..

मेरे इलावा भी लोग दर्द की इंतेहा तक्क पोहंच कर जी रहे हाँ..





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