Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller) - Page 25 - SexBaba
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Himmat-wala (incest .. adultery .. action .. thriller)

थैंक्स..!!

विज्जू और पूजा की शादी भी हो गई.. दोनों की ख़ुशी में सभी शामिल हुए और इस ख़ुशी को पूरी तरह से सेलिब्रेट किया, जूली ने सबब अच्छे से इंतेज़ाम किया, जूली ने वो भी किया जो विज्जू भूल चूका था.. जूली ने पैलेस में रह रही कोठे से लाइ गई लड़कियों को भी शामिल किया, वप सब भी विज्जू की शादी में शामिल हो गईं.. पूजा के लिए ये सबब से बढ़ कर ख़ुशी की बात थी, कबसे वो विज्जउ को पूरी तरह से पाने क लिए बेचैन थी, विज्जू के मक़सद के लिए उसने भी सालों तक्क इंतज़ार किया है.. पूजा इस रात को पूरी तरह से एन्जॉय करेगी..

अपनी अधूरी सभी ख्वाहिशों को पूरा करेगी...
 
थैंक्स डिअर..!!

बेहतरीन कमेंट और सुग्गेस्टिव के लिए थैंक्स... कुछ राडेस को ऐसा भी कुछ पासंफ है, इस लिए ऐसा लिखना पड़ता है.. स्टोरी 70% कम्पलीट हो चुकी है, सभी को उनका प्यार देना भी विज्जू क लिए ज़रूरी है, इसी लिए विज्जू के सेक्स सन दिए जा रहे हाँ, कोशिश करूँगा क सेक्स सन को शार्ट कर दिया.. पारर अभी कुछ सन पहले से hi लिखे जा चुके हाँ, वो मुझे पोस्ट करने पड़ेंगे..
 
अपडेट ::: 114

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दीदी मेरे सर्र पर अपनी उँगलियाँ चलते हुए मुझसे अपनी ख़ुशी का इज़हार कर रही थी.. दीदी के दर्द को मैंने उनके बूब्स से बेपनाह प्यार करते हुए निचोड़ लिया था.. दीदी अब्ब मुझपर अपना प्यार बरसा रही थी..

दीदी की छूट में मेरा लुंड फंसा हुआ था.. अंदर से दीदी की छूट में पानी छोड़ कर मेरे लुंड को नहलाना शुरू कर दिया था.. मैंने दीदी के बूब्स से अपना मोहन हटाया..

दीदी को शांत करने क चककर में मैंने दीदी क बूब्स का सत्यानास कर दिए था.. दीदी क पुरे बूब्स और निप्पल रेड कलर में बदल चुके थे.. मैंने दीदी की आँखों में देखा तो दीदी मुझे देख कर मुस्कुराने लगी..

दीदी:- लव यू विज्जू मुझे अब्ब दर्द कम् हो रहा है.. जितना मई दर्री थी, अब्ब मुझे उतना hi मज़ा आ रहा है, तुम्हरा लुंड मैं अपनी में पा कर बहुत ख़ुशी महसूस कर पा रही हों.. अब्ब उसे हिला कर मुझे और भी ख़ुशी दो.. कबसे मई तुम्हरे लुंड क लिए मचल रही थी.. और मेरी छूट में तेरे लुंड को खुद में सामने क लिए बेचैन थी.. मेरी और मेरी छूट की बेचैनी को कम् करो ना मेरे सरताज.. अपनी दीदी, अपनी पत्नी की टाइट छूट को पूरी तरह से खोल दो नाआ.. आज मुझे और मेरी छूट को पूरा पूरा मज़ा दो नाआ..

दीदी की आँखों की चमक hi नहीं बढ़ी थी, दीदी की आँखन में इन्तहा का प्यार और शान्ति दिखने लगी थी..

मैं ऊपर हुआ और दीदी के होंटो को अपने होंटो में लेकर अपने लुंड को हरकत देने लगा.. दीदी मेरी पीठ पर हाथ लाते हुए मेरे पीठ को सहलाने लगी और बहुत hi प्रेम से मेरे होंठ को अपने होंटो में कैद करते हुए उसे चूसने लगी.. मेरे लुंड क हिलने से उन्हें दर्द तो हुआ पारर वो अब्ब उस सहन कर पाने की हालत में आ चुकी थी..

मैं दीदी को किश करते हुए अपने लुंड को भी हिलाते हुए बहार खेंचने लगा. दीदी का प्यार मुझपर बरसने लगा.. मेरा लुंड धीरे धीरे करके दीदी की छूट से बहार आने लगा..

दीदी की छूट का पानी जो उनकी छूट की दीवारों से रिस रहा था, मेरे लुंड को भिगोने अलग, मेरा लुंड लेसदार पानी में नाहटा हुआ सुपड तक्क दीदी की छूट से बहार आ गया.. दीदी की टाइट छूट को लूसे करने क लिए मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट में फिरसे एंटर करना शुरू कर दिया..

मेरा लुंड फास्ट हुआ दीदी की छूट में जाने लगा.. दीदी ने अपने दोनों पेअर मेरे चुत्तड़ो पर रख दिए और मेरे लुंड को अपनी छूट में फस फस कर जाते हुए महसूस करने लगीं.. दीदी की गांड ऊंची थी तो मेरा लुंड बहुत अच्छे से दीदी की छूट में एंटर होने लगा था..

मैं बार बार अपने लुंड को सलौली सलौली सुपड तक्क बहार खेंच कर फिरसे दीदी की छूट में एंटर कर रहा था..

8-10 बार ऐसा करने से दीदी की छूट कुछ मेरे लुंड क लिए सेट हो गई तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी..

दीदी अब्ब गरम हो कुहकी थी और उनकी छूट ने पानी उगलना शुरू कर दिया था, तो दीदी की किश भी वाइल्ड होने लगी, मेरे ढक्कू के सास्ठ साथ दीदी के पैरों का दबाओ भी मेरे चूतड़ों पर बढ़ने लगा.. पर मैंने ढाया रखा था क मेरा लुंड एक hi बार में कही उनकी कहत में न घुस जाए.. अभी दीदी मज़े में थी तो उन्हें अब्ब मैं दर्द नहीं देना चाहता.

एक बार अपने लुंड से दीदी की छूट का पानी निकल देना चाहता था.. मेरी स्पीड कुछ और भी बढ़ी तो दीदी ने मुह्जे किश करने छोड़ दिया और मेरे गालों को चूमने लगी..

फिर मेरे गालों पर अपने मोहन को दबाते हुए गहरी गहरी साँसे लेने लगीं..

दीदी की छूट चरम पर पोहंचती जा रही थी....

मैंने भी दीदी की छूट का पानी जल्द निकलने क लिए अपनी सपेद और भी बढ़ा दी........... सीईईई अह्ह्ह्हह मेरी साजन और तेज़ करो ना मेरा पानी निकलने वाला hi.. उफ्फ्फ लुंड ले के आज मैं पहली बार झाड़ रही हों, आज पहली बार तुम्हरा लुंड मेरी छूट में घुसा हुआ मुझे छोड़ रहा है.. हाय विज्जू मुझे और भी मज़ा दो ना. थोड़ी सी स्पीड और भी बढ़ा दो.. और निकाल दो अपनी दीदी की छूट से अमृत.. उस अमृत से नेहला कर अपने लुंड को भी अमर बना लो... अह्ह्ह्ह

ोीीीी हम्मम्मम्मम्म बे फ़ास्ट विजजूउउ धीरे धीरे बहुत हुआ फ़क में हार्ड..

मैंने भी दीदी की बेचैनी को कम् करने क लिए अपने धक्को में तूफानी लानी शुरू कर दी.. दीदी की सिसकियाँ और मेरे धक्कों में तब्दीली आने लगे..

कुछ hi देर में दीदी के शरीर की अकड़न बढ़ने लगी और दीदी केपैरों का दबाओ भी मेरे धुत्तादो पर बढ़ें लगा पारर मेरी स्पीड कम् नहीं हुई..

दीदी झड़ने लगी तो अचानक से hi दीदी बे मुझे अपनी बहन में कस लिए और पैरों का पूरा ज़ोर मेरे चुत्तड़ो पर बढ़ा दिया.. मेरा लुंड पूरा hi लुंड दीदी की गीली छूट को अंत तक्क खोलता हुआ अंदर जा घुसा.. दीदी की बच्चेदानी मेरे लुंड के सुपाद को चुमने लगी.. दीदी दर्द और चार्म के नशे से चीखते हुए झड़ने लगीं..

मेरा लुंड जड़ तक्क दीदी की छूट में समां चूका था.. दीदी ने मुझे ऐसा कैसा हुआ था क मैं हिल भी नहीं सकता था.. जल्द hi दीदी सुस्त पद गईं.. दीदी के हाथ बीएड पर ाँ पड़े.. दीदी की साँसों फिरसे रूम में शोर मचने लगी..

मैं दीदी को देखने लगा... दीदी ऑंखें बंद करके लुंड से होने वाले चरमसुख का आनंद ले रही थीं.. लुंड से दीदी का पहले बार पानी निकला था..

अभी दीदी नशे में थी तो दीदी को दर्द नहीं हो रहा था.. मैंने इसी मोके को ग़नीमत जाना और अपने लुंड को दीदी की छूट में अंदर बहार करके उनकी छूट की बाकी बची तिघटनेस को ख़तम करने लगा.. मेरा पूरा hi लुंड स्पीड से दीदी की छूट से बहार आ कर फिरसे अंदर जा रहा था,.....

जब तक दीदी की सांस बहाल हुआ मैं दीदी को छोड़ता रहा.. दीदी ने मुझे फिरसे चूमना शुरू कर दिया..

कुछ देर बाद मैं भी रुक गया रु दीदी ने मुझे चूमना भी बंद कर दिया..

दीदी:- विज्जू कितना मज़ा और सुकून मिला है मुझे मैं बता नहीं सकती.. हम्मम्मम्हा मेरा जानू कितना अच्छा है... हममममः मैं दीदी के गालों पर जीब फेरने लगा..

विजय:- क्यों मेरी रानी की छूट अब्ब तो खुश है ना..

दीदी:- हाँ मेरे जानू मेरी छूट और मेरा सबब कुछ तुमसे बहुत बहुत खुश है..

विजय:- तो इसी ख़ुशी में मुझे आज आपकी गांड भी मिलेगी... दीदी के चेहरे का रंग अचानक से hi बदल गया..

didi:-(chut के दर्द को याद करते हुए) विजजू पहले hi बहुत दर्द झेल चुकी हों मैं.. अब्ब गांड के दर्द को कैसे सहन कर पाऊँगी..

vijay:-didi आपकी गांड एक न एक दिन तो खोलनी hi है मैंने.. तो आज hi खोल कर नेक्स्ट के लिए पुरे पुरे मज़े का सामान भी कर लेते हाँ..

दीदी:- वीइज्जउ ये भी तुमने सही कहा, पारर .. चलो खैर है मुझे भी तुमसे आज ढेर सारा प्यार करना है.. पारर अभी मेरी छूट की आग ठंडी करो पहले.

मैं दीदी क ऊपर से उठा..

विजय:- दीदी आप ऐसे तो थक गई होंगी.. पोजीशन बदल लेते हाँ..

दीदी:- हाँ विज्जउ मई लेते लेते थक गया हों.. मैं सीधा हुआ और अपने लुंड को देखने लगा.. दीदी की गांड के नीचे रखा हुआ तकिया पूरा hi खून से सना हुआ tha..maine अपना लुंड दीदी की छूट से निकला.. दीदी को उठने में मदद दी.. दीदी ने उठ कर जब्ब तकिये पर लगे अपने खून को देखा तो शर्मा गईं..

दीदी:- विज्जउ तुमने मेरा इतना खून निकाल दिया..

विजय:- ारी दीदी जितना खून निकलेगा छूट भी तो बाद में उतनी hi चमकेगी..

दीदी शर्माती हुई मुस्कुराती हुयी घोड़ी बन्न गई.. मैं दीदी ककी गांड के पीछे हुआ और अपने दोनों हाथ दीदी के चुत्तड़ो पर रख दिए..

अभी दीदी ठंडी पद चुकी थी वर्ण मेरे हाथ अपने चुत्तड़ो पर पाते hi वो मचल जाती दीदी के चुत्तड़ भी माँ के जैसे hi सेंसिटिव थे..

दीदी के दोनों नितम्बो को सेहलते हुए मैं दीदी की छूट और गांड का दीदार करने लगा... मैं दीदी की गांड का भी आशिक़ था.. मुझे शुरू से hi दीदी की गांड मारने का मैं हो गया था, और दीदी भी ये सबब समझती थी..

मैं झुका और दीदी की गांड पर अपनी जीब रख दी.. siiiiiiiiiii की आवाज़ आई और दीदी मचल उठी.. दीदी की गांड का नन्हा और रेड छेड़ मेरी जीब की गरमाहट सहन नहीं कर पाया और एक करंट का झटका दीदी को देते हुए दीदी की सिसकी निकाल गया...

दीदी:- विज्जउ मुझे लगता है किसी दिन तुम मेरी गांड में अपनी पूरी जीब hi घुसा डोज.. पता नहीं तुम्हे मेरी गांड क्यों इतनी पसंद है..

मैंने दीदी को कोई जवाब नहीं दिया. मेरी जीब दीदी की गांड को चाटने में लगी रही.. और दीदी जल्द hi अपनी गांड की चटाई से गरम होने लगीं. दीदी की छूट फिरसे पानी पानी होने लगी, दीदी की गांड हरकत करने लगी थी..

मैंने कुछद ेर दीदी की गांड को छाता और फिर अपने लुंड को दीदी की छूट पर सेट कर दिया.. दीदी के चुत्तड़ मसलते हुए मैं अपने लुंड के सुआपद को दीदी की छूट

में अंदर बहार करने लगा.. दीदी की छूट के लिप्स थोड़े से खुल कर बहुत खूबसूरत दिख रहे थे... बालों से पाक दीदी की छूट मेरे लुंड से लगी हुई बहुत hi पायरी लग रही थी..

छूट पर चमक रहा पानी मेरे लुंड को छूट में एंटर होने का सिग्नल देने लगा..

कुछ देर मैं दीदी के चुत्तड़ मसलते हुए अपने लुंड के सुपडे से दीदी को छोड़ता रहा.. फिर एकदुम्म से hi मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट में पूरा hi घुसा दिया..

जितना दर्द एक hi बार में होगा उतना मज़ा भी देगा.. और आज मैं दीदी को पूरा पूरा मज़ा में देना चाहता था..

दीदी फिरसे चीख पड़ी.. मेरा मोटा लुंड दीदी की टाइट छूट को खोलता हुआ पूरा hi अंदर जा घुसा था.. दीदी ये दर्द सहन नहीं कर पाई..

दीदी:- aiiiiiiiiii वीजजजजज्जजूउउउउ अब्ब क्यों दर्द दे रहे हो.. ोीीीी

दर्द के साथ किना मज़ा भी मिला है मुझे..

मैं दीदी की कमर को कस के पकड़ते उहे दीदी की छूट में अपने लुंड को तेज़ी से अंदर बहार करने अलग.. दीदी को दर्द तो अब्ब्ब चुदाई एक ख़तम होने के बाद hi होगा. तो पूरा मज़ा ले लेना चाहिए.. और दीदी को भी पूरा मज़ा देना चाहिए..

मेरे धक्को में तूफानी आ गई और दीदी जल्द hi फिरसे पूरी तरह से गरम जो गई तह... दीदी अपनी गांड को हिला हिला कर मेरे लुंड अपनी छूट में ले रही थी..

दीदी मुसलसल चलने वाली चुदाई सहन नहीं कर पाई और एक बार फिरसे पानी छोड़ दिया..

दीदी ने अपने सर्र को बीएड पर डाल दिए.. मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट से निकला.. बीएड से उतर कर साइड टेबल की दराज़ में पड़ी हुई क्रीम उठाई और फिरसे बीएड पर आ कर दीदी की गांड पर वो क्रीम लगाने लगा..

अपनी एक ऊंगलीपर वो क्रीम लगा कर मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड क छेड़ में घुसा दी.. दीदी मचल उठी, अभी वो अपनी सांस बहाल कर रही थी तो दर्द से चीखी नहीं थी..

मैंने अच्छे से दीदी की गांड के अंदर वो क्रीम पोहंचाई फिर अपने लुंड पर भी कलगा आकर दीदी की गांड फाड़ने क लिए रेडी हो गया..

दीदी अब्ब रिलैक्स थी और गांड मरवाने क लिए तैयार भी... एक बार फिरसे उनके चेहरे के भाव दर्द भरे the..maine दीदी के चुत्तड़ो को खोलते हुए अपने लुंड को दीदी की गांड के छेड़ पर सेट किया..

लुंड को एक आहत में पकड़ कर दीदी की गांड पर पुश करने लगा. जब्ब लुंड का सिरा दीदी की गांड के छेड़ से मास्स हॉग आया तो मैंने दीदी को वारं किये बिना hi एक ज़ोरदार धक्का मार दिया..

दीदी की गांड बहुत टाइट था क्रीम लगी हुई थी, मेरा लुंड स्लिप कर गया..

दीदी की चीख निकल गई.. और वो कुछ आगे भी हो गई थी.. मैंने दीदी को कमर से पकड़ा.. अपने लुंड को फिरसे दीदी की गांड क छेड़ पर रखा.. अंगूठे को दीदी की गांड के छेड़ के ऊपर रखा.. फिरसे एक ज़ोरदार शूटर मार दिया. इस बार मेरे लुंड का सुपड दीदी की गांड क छेड़ को खोलता हुआ अंदर जा घुसा..

दीदी की चीख मेरे कान के परदे फाड़ने लगी.. मैंने दीदी को देखा तो मेरे होंटो पर मुस्कान आ गई.. दर्द के बिना तो ये रात यादगार होने से रही..

मैंने दीदी की कमर को कस एक पकड़ते हुए एक बार फिरसे पूरा ज़ोर लगते हुए एक ढककर मार दिया.. दीदी की गांड phat'ti चली गई और मेरा लुंड दीदी की फटी गांड में अंदर तक उतरता चला गया.. दीदी की चींखोंसे पूरा रूम hi गूँज रहा तह.

मैंने ये भी नहीं सोचा क कोई बहार से दीदी की चीखों को सुनलेगा..

कोई सुनता है तो सुनले.. पहल भी तो कइयों की चीखें मैं निकलवा चूका था, दीदी की माँ की भी पहाड़ दी थी, तो दीदी की अगर phat'ti है तो ये कोई नयी बात नहीं थी..

मेरा लुंड दीदी की टाइट गांड को फाड़ता हुआ 5" तक्क अंदर अंदर जा घुसा था..

लगता है ज़ोर कुछ ज़यादा hi लग्ग गया था.. मैंने अपनी 2 उँगलियाँ दीदी की छूट में घुसा डीएन और दीदी की छूट को रहत पुहंचाने लगा...

कुछ देर तो दीदी सिर्फ रोटी बिलक्ति hi रही कुछ और नहीं कहा..

कुछ देर बाद

दीदी:- विज्जउ तुम कितने ज़ालिम हो.. छूट और गांड में फर्क होता है.. छूट नरम होती है और गांड सख्त... हाई ज़ालिम तूने मेरी गांड कितनी बेदर्दी से पहाड़ दी है.. मुझे माफ़ करदे मेरे साजन और निकाल ले अपने खतरनाक लुंड को मेरी गांड से ...........

मेरी उँगलियाँ दीदी की छूट में बहुत स्पीड से अंदर बहार हो रही थे.. दीदी रोटी रही और मेरी उँगलियों को अपनी छूट में लेती रही..

5 मिंट बाद दीदी रिलैक्स यही तो मैंने अपनी उँगलियों को उनकी छूट से निकला अपने लुंड को थोड़ा सा हिलाया..

दीदी:- नननननननन....... naaaaaaaaaaaaaaaa अभी मत्तत्ततत्तत हिलाआआआओ अपने लुंड को......... maaaaaaaaaa मेरी gaandddddddddddd

मैंने अपने लुंड को थोड़ा सा हिलाया. दीदी की गांड क छेड़ में मेरा लुंड फंसा हुआ था... हिलना आसान नहीं था..

पर हिलाये बगैर ोी चारा भी तो नहीं था.. मैंने दीदी की कमर को कस के थामे हुए hi अपने लुंड को उनकी गांड से बहार खेंचने लगा.. धीरे धीरे से hi सही पर मेरा लुंड दीदी की गांड से सुपड तक बहार आ hi गया..

अब्ब बारी थी दीदी की गांड को खुला करने की तो मैंने अपने लुंड को अंदर बहार करना शुरू कर दिया.. दीदी फिरसे ाआहें भर्ती हुई अपने सर्र को परकने लगीं.. मैं लगा रहा दीदी की गांड को खुला करने में..

कुछ hi देर में दीदी किओ चैन मिलने लगा. तो मैंने अपने धक्कों की स्पीड कुछ बढ़ा दी..

5 मिंट ऐसे hi दीदी को छोड़ते हुए गुज़रे तो

दीदी:- विज्जू गांड में लुंड लेने का भी अपनी hi एक चार्म है.. दर्द तो मुझे बहुत हुआ है.. पारर मुझे अब्ब मज़ा भी आने लगा है.. अंदर से सबब गरमागरम सा लग रहा है..

vijay;-garam तो लगेगा hi.. मेरा लुंड भी गरम है और आपकी गांड भी गरम, अब्ब छूट भी आपकी फीररसे गरम होने लगी है तो ठंडा कहाँ से लगेगा दीदी..

didi:-vijjuuu कितने लुंड से छोड़ रहे हो मेरी गांड..

विजय:- दीदी 6"

दीदी:- अभी भी बहार है, मतलब अभी और भी दर्द डोज मुझे..

विजय:- ज़रूरी है दीदी, वर्ण पूरा मज़ा कैसे आएगा..

दीदी:- तो दो न मुझे पूरा मज़ा...

दीदी के बोलते hi मैंने एक ज़रदार धक्का मार दिया और मेरा बचा हुआ लुंड भी दीदी की गांड को चीरता हुआ अंदर जा घुसा..

दीदी:- aiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaa सच में hi घुसा दिया..

विजय:- तो और क्या करता इतनी देर हो गई है, अभी तक्क सिर्फ दर्द वाली hi चुदाई हुई है, मज़े वाली कब्ब शुरू करेंगे..

दीदी:- विज्जू मई ऐसे थक गई हों..

मैंने दीदी की गांड से लुंड निकले बिना hi दीदी के पैरों को खेंचा कर लम्बा कर दिया.. और दीदी क साथ जुड़ा हुआ hi नीचे लेट गया.. मैंने अपने लुंड को नहीं हिलाया और दीदी की गर्दन को चूमने लगा..

दीदी की पीठ फिरसे पसीन बहाने लगी थी.. पसीने की महक से रूम गूंजने लगा था.

कुछ देर ऐसे hi लेते रेने क बाद मैंने अपने चुत्तड़ उठाये और अपने लुंड को दीदी की गांड से बहार निकलने लगा.. दीदी को फिरसे दर्द होने लगा..

मैं अपना आधा लुंड निकल कर दीदी की गांड मारने लगा, धीरे धीरे दीदी को भी मज़ा आयने लगा, दीदी भी अपनी गांड को हिलने लगीं..

मेरे धक्कों की स्पीड फिरसे बढ़ी तो दीदी की गांड जो अब्ब मेरे लुंड के लिए खुदल चुकी थी, दीदी को मज़े देने लगी, दीदी की सिकियाँ बढ़ने लगीं..

हम फिरसे तब तक्क नहीं रुके जब्ब तब्ब दीदी की छूट ने एक बार फिरसे पानी नहीं छोड़ दिया..

मैं कुछ देर क लिए रुक गया.. दीदी खुद को रिलैक्स करने में लगी हुई थीं तो मैं फिरसे दीदी को चूमने चाटने लगा..

कुछ दे बाद

दीदी:- विज्जू अब्ब उठो मेरे ऊपर से..

मैं दीदी क ऊपर से उठा तो मेरा लुंड भी फस फस कर दीदी की गांड से निकल गया... दीदी के ऊपर से उठा और साइड में लटग आया.. दीदी उठ कर सीढ़ी होने लगी तो एक झटके में hi बीएड पर गिर गयीं

मेरी हस्सी निकल गई..

दीदी:- विज्जू कमीने अब्ब दांत क्यों निकाल रहे हो.. इतनी ख़राब करदी है तुमने मेरी हालत.. oiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaa पूरा बदन hi दुखने लगा है..

एक एक जोड़ दर्द कर रहा है, और मेरी गाआंद्द्द अह्हह्ह्ह्ह माआ वो भी नहीं बची, अब्ब कल मई बैठूंगी कैसे... और सभी से नज़रें कैसे मिला पाऊँगी..

विजय:- दीदी ज़यादा ड्रामे न करें.. शादी क बाद तो सभी की hi paht'ti है वो भी तो सभी की नज़रों को फेस करती hi हैब,, ये कोई नयी बात थोड़ी न है..

और माँ की भी तो गांड पहाड़ी है मैंने.. माँ भी तो पूरा दिन अपने रूम में बंद रही हाँ.. आप भी एक दिन खुद को रूम में बंद कर लेना.. अब्ब छूट और गांड खुल hi चुकी है तो नेक्स्ट टाइम धमाके दार छुड़ाए करने में मज़ा आएगा.

दीदी:- बड़ा आया मज़ा लेना वाला... हुंह..... अब्ब मई इस दर्द का क्या करून..

विजय:- मेरे पास इसका भी इलाज है.

दीदी:- तो करो न विज्जू कुछ मेरे दर्द का.. हाई मा बौह्त दुखन हो रही है.. मैंने दीदी को पीठ के बॉल बीएड पर लिटाया और उनके ऊपर आ कर उनके पेअर खोलते हुए अपन लुंड को एक झटके में उनकी छूट में घुसा दिया.

दीदी की फिरसे चीख निकल गई.. मैं दीदी को किश करते हुए दीदी को स्पीड से छोड़ने लगा.. तब्ब तक्क नहीं रुका जबतक दीदी की छूट फुल ग्राम नहीं हो गई..

दीदी का दर्द ख़तम हो चूका था.. तो मैंने धक्के मारने बंद कर दिए.

विजय:- दीदी दर्द ख़तम हुआ या नहीं..

दीदी:- हाय विजजूउउ अब्ब दर्द नहीं है मुझे, अब्ब तो मई बहुत सुरूर में हों. तू रुका क्यों है............. मार न ढके..

vijay:-(hont पर किश करते हुए) पानी निकला तो फिरसे दर्द होगा..

दीदी भी मुझे किश करती हुई:- तो फिरसे अपनी स्पीड बढ़ा कर मुझे फिरसे गरम कर देना.. दर्द ख़तम हो जाएगगा........

मैं दीदी के अंदाज़ पर मुस्कुराने अलग, दीदी अब पूरी तरह से फॉर्म में थी, दीदी को उसकी मैं की पूरी ख़ुशी मिल गई थी..

अब्ब दीदी पुरे मैं से मेरे लुंड से चुद रही थी, गुज़रे सालों की साड़ी हसरतें पूरी करते हुए मुझसे चुद रही थीं..

दीदी की छूट में मेरा लुंड फुल धमाल मचा हुआ अंदर बहार हो रहा था.. अब्ब मेरे लुंड के झड़ने की बारी थी .. मेरे लुंड को एक रिधम के साथ चुदाई करने को मिली तो वो पुरे मूड में आने वाला, धीरे धीरे मेरे लुंड में भी जोश बढ़ने लगा..

उसकी अकड़न और सख्ती बढ़ने लगी.. मेरा खून मेरे बदन से सरकता हुआ मेरे लुंड पर परसुरे बढ़ने लगा.. दीदी की छूट भी अब्ब मेरे लुंड को खुश करने के मूड में आए गई थी..

दीदी की छूट ने टाइट होकर मेरे लुंड की रगों को सुरूर देना शुरू कर दिया.. मेरा लुंड फस फस कर दीदी की छूट में अंदर बहार होने लगा..

इस बार दीदी के साथ साथ मेरी भी सांस फूलने लगी थी, दीदी के फूल चुके बूब्स भी मुझे झड़ने में मदद देने लगे थे.. दीदी के निप्पल्स की रगड़ मुझे अपने लुंड के सुपड पर महसूस हो रही थी.. धीरे धीरे मेरे लुंड का जोश आखरी सीमा तक जा पोहंचा..

180 की स्पीड पर पोहचते hi मेरे लुंड के दीदी की छूट में उल्टियां करनी शुरू क्र दीं.. दीदी की बच्चेदानी मेरे लुंड से निकलने वाले पानी को पीनी लगी...

मैं दीदी के ऊपर ढेर हो गया और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगा....




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अपडेट ::: 115


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दीदी की छूट में झड़ते हुए मुझे नींद आ गई थी, दीदी भी शायद सो गई थी,

रात एक hi बार में मेरे लुंड से पानी निकला था, दीदी की छूट से 4 बार..

दीदी की छूट में झड़ते hi मुझे नींद आ गई थी..

सूबा मेरी आंख खुली तो मेरा लुंड दीदी की छूट की गर्मी के कारन खड़ा हुआ था.. दीदी ने साडी रात hi मेरा वज़न खुद पर सहन कर लिया था.. दीदी के चेहरे पर मेरी नज़र पड़ी तो दीदी का चहेरा चमक रहा था. दीदी की मासूम बच्ची के जैसे मेरे लुंड को अपनी छूट में समाये सो रही थी...

मुझे दीदी पर बहुत प्यार आने लगा.. मैंने दीदी को किश करना शुरू कर दिया.. मेरा फिरसे दीदी को छोड़ने का मैं होने लगा तो मैंने अपने लुंड को फिरस दीदी की छूट में अंदर बहार करना शुरू कर दिया.. दीदी के होंटो को मैं अपने होंटो में लिए धीरे धीरे चूसने लगा..

दीदी की छूट मेरे लुंड के आगे पीछे होने से कुछ दर्द करने लगी, जिस वजा से दीदी की आंख खुल gai.maine दीदी क होंटो को छोड़ दिया.. लेकिन लुंड को आगे पीछे करना नहीं छोड़ा. दीदी की नज़र मुझपर पड़ी.. तो दीदी के होंटो पर मुस्कान आ गई..

दीदी:- विज्जू रात तुम मेरे ऊपर hi सो गए थे और तुम्हारा ललललललल.. ओह्ह्ह तुम फिरसे मुझे छोड़ रहे हो............. दीदी ने सर्र घुमा कर वाल क्लॉक पर नज़र दौड़ाई.............. ओह्ह्ह सूबा 4:35 हो चुके हाँ.. मतलब 1 घंटा हमने नींद भी ले ली है.. चलो ये भी अच्छा हुआ.. अब्ब जल्दी करो मुझे फ्रेश भी होना है..

विजय:- दीदी धीरे धीरे से छोड़ने में भी बहुत मज़ा है.. अब्ब फिरसे आपकी छूट बहुत टाइट हो गई है..

मैंने अपने होंठ दीदी के होंटो से जोड़ते और दीदी को किश करते हुए छोड़ने लगा..

अगले 50 मिंट तक्क मैंने अच्छे से दीदी की छूट को खोल दिया था.. इस बार मैंने दीदी की गांड नहीं मारी थी.. खोलनी थी तो खोल दी.. अब्ब तो वो मेरे लुंड क लिए पूरी तरह से तैयार थी.. दिन चढ़ने वाला था तो मैंने उन्हें ज़यादा परेशां करना सही नहीं समझा..

माँ की बार और थी.. माँ को रेस्ट ज़यादा मिल गई थी, पारर दीदी को कम् hi कोई रेस्ट देने वाली थीईईई... सभी मिलकर अपने हिसाब से दीदी की गांड मारने वाली थीई.. जितनी मैंने मारनी थी मार ली.. अब्ब पैलेस में रह रही लड़कियों ने दीदी की गांड मारी थी..

सभी हाथ लगा लगा कर दीदी की छूट और गांड का हशर करने वाली थी..

दीदी की दुमदार चुदाई क बाद मैंने दीदी को अपनी बहन में उठाया और फिर हम दोनों मिलकर नहाये..

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दिन क 9 बै तक्क सभी खूब मस्ती करते रहे... मैंने 9 बजे तक्क का टाइम सभी के साथ बिताया...

जूली के पास पोहंचा.. दीदी अभी तक पैलेस में hi थीई..

जूली से कुछ देर बात हुई.. क़ैदियों से रिलेटेड डिस्कशन हुई.. राजा का पता चला क वो सभी फिरसे सिटी में मौजूद बेस पर हाँ....

फार्महाउस पर माजूद क़ैदियों के पास 2 आदमी थे जो हर्ष अंकल के भरोसेमंद थे.. बाकी अभी मैं तो वहां नहीं गया था, राजा पार्टी और गुरनाम वहां क चक्कर लगा लिया ाकरते थे.. वोई सभी क़ैदियों से भी मिल चुके थे..

मैं महक के साथ गाडी में बैठ कर 10 बजे क करीब सिटी क िलए निकल पड़ा.

अब्ब टाइम था सोनम क लिए कुछ करने का..

वाहन पोहंचे तो सबब hi वहीँ मिल गए...

सभी एक बड़ी गोल टेबल के गिर्द कुर्सियों पर बैठ गए..

विजय:- हाँ उदय क्या रिपोर्ट है..

उदय:- विजय सोनम क घर से हो कर हम ए हाँ.. वहां से मिलने वाली रिपोर्ट के हिसाब से वहां का एक गुंडा अकरम गुज्जर इस सब क पीछे है, सोनम की माँ और सोनम पर उसकी बुरी नज़र थी.. इसी बात को लेके सोनम क पिता और अकरम गुज्जर में लड़ाई भी हुई थी.. उसी क चलते उस रात घर पर हमला हुआ था.. सोनम के पिता उसी रात मारे गए थे, पारर सोनम की माँ का कुछ पता नहीं चला.. सुनने में आया यही क वो भी उसी रात खुद को बचने क लिए वहां से भाग गई थी, वो सच में hi भाग गई थी या अभी भी अकरम गुजर के कब्ज़े में है, ये कन्फर्म नहीं है..

हम फिरसे उसी काम में निकलने वाले थे.. अब्ब अकरम गुज्जर पर हल्ला बोलने के लिए हम निकलने hi वाले थे, क तुम दोनों आ गए..

महक:- और बच्चे के बारे में क्या अंदाज़ा लगाया है..

उदय गुरनाम की तरफ देखने लगा...

गुरनाम:- जब्ब मई सर्विस में था तो यहाँ क एक बिजनेसमैन पवन बचो की तस्करी का काम करता था.. वो अब्ब भी करता है या नहीं ये पता लगाना पड़ेगा. अगर बच्चे को किसी ने अगवा किया है तो इसी लाइन पर चलते हुए हमे कुछ इन्फो मिल सकती है.. अब्ब पेठे हम सोनम की माँ को ढूंढ़ने क लिए अकरम गुज्जर से टकरा करने जा रहे हाँ.. वही कही देखेंगे अगर मुझे कोई पवन गैंग का कोई आदमी दिखा तो उदय भी उठा कर उससे इन्फो निकलते हाँ...

महक:- मई भी चलती तुम लोगों के साथ..

विजय:- सभी साथ में hi चलते हाँ...

कुछ देर में सभी दो गाड़ियों पर सवार होकर सिटी से बहार निकल लिए.. हमे उसी इलाके से गुज़र कर आगे आगे जाना था, जहाँ मैं पूजा दीदी और महक के साथ गया था..

सोनम के पिता का घर एक बड़े टाउन में था.... हम स्पीड से जा रहे थे.. तो 50 मिंट में वहां पोहंच गए थे..

राजा पार्टी लगता है सूबा सूबा hi अपने काम पर लग गई थी, तभी तो इतनी इन्फो निकल पर फिरसे वापिस भी लौट आई थी..'

हम सीधे hi अकरम गुज्जर के डेरे पर जा पोहंचे.. डेरा टाउन से हट कर tha..gate खुला हुआ tha..andar जा कर गाड़ियां रोक दी गयी..

हम गाडी से उतरे तो डेरे के अंदर एक दरख़्त के नीचे एक बहुत बड़े मंजे पर कुछ गुंडे बैठे हुए थे.. सभी खड़े हो कर हमें देखने लगे.....

डेरा एक कैनाल से कुछ बड़ा hi था, सिंगल स्टोरी था, 10 के करीब कमरे थे. कुछ कच्चे तो कुछ पक्के... सभी एक लाइन में बने हुए थे...

हम चलते हुए उनके पास पोहंचे.. सभी हुलिए से hi आवारा लुच्चे लग रहे थे..

एक बोलै:- देख रे कल्लू आज हमारे डेरे पर छमिया ै है...

उसकी छममिया वाली बात पर उसके साथी क्या हस्ते, हम सबब hi हस्सन लगे.. उन सबब की बोलती hi बंद हो गई..

महक:- छहममममममममिया.... गटर की पैदाइश यही छममिया तुम सबब की गांड के डंडा देने आई है, बोलो तुम सबब का हरामी बाप गुज्जर कहाँ है..

सबब ग़ुस्से में आ गए..

2ंद बोलै:- तमीज से बात करो हमारे उस्ताद के बारे में... वर्ण यहाँ से जिदना नहीं जाने दिया जाएगा..

महक:- जान तो तुम सबब ने अच्छी बनाई हुई है, जान है भी या ऐसे hi हवा भरी हुई है. दुम्म भी है या ावें hi कुत्ते की तरह से भोंकना hi आता है..

जिसे देख कर महक बोल रही थी, वो अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं कर पाया और भागता हुआ महक के पास आया और एक चांटा महक को मारने लगा..

महक ने उसका हाथ कलाई पार्स हवा में hi थाम लिया.. महक उसकी आँखों में देखते हुए एक डेविल स्माइल देती हुई उसके हाथ को मरोड़ने लगी...

पहले तो वो हैरान हुआ फिर अचानक से hi उसकी चीखों से पूरा डेरा hi गूँज उठाए..... सबब उसकी चीखो को सुनके हैरान रह गए.. एक लड़की ने उसका ये हाल कर दिया था.. दो गुंडे और आगे बढे तो मैंने उदय को देखा..

उदय भी हरामी था, उसने वार्निंग देने की बजाये दोनों के hi घुटनो पर गोलियां बरसा दीं...

उदय ने कब शर्ट के अंदर से पिस्तौल निकला कब्ब गोलियां चलाई किसी को अंदाज़ा नहीं हुआ, बास 2 बार शोर हुआ और फिर दोनों hi गुंडों की चीखे भी डेरे में गूंजने लगीं, दोनों अपने घुटने थामे ज़मीन पर लूट पूत हो रहे थे..

टोटल हमें दिख रहे गुंडे 7 थे... पुरे डेरे पर hi हमारी नज़र थी..

जिसका हाथ महक ने थामा था, उसकी चीखे अभी भी गूँज रही थी.

महक:- अब बोल तुम्हारा बाप कहाँ है...

वो चीखता हुआ कुछ बोलता उससे पहले hi एक जीब अंदर आती हुई दिखी उसकी स्पीड बहुत थी, शायद वो भी गोलियों की आवाज़ सुनके स्पीड से आये थे.. जीब हमारे पास आई.. उसके अंदर से 5 गुंडे निकले.. एक सबब के अलग था.. वही होगा अकरम गुज्जर..

वही बोलै:- ऐ हरामजादो कौन हो तुम सबब, मेरे डेरे पर ये सबब करने hi जुरअत कैसे हुई तुम सबब को.. एक एक को काट डालोगे.. ऐ लड़की छोड़ मेरे आदमी को..

महक:- ऊऊऊऊओ तो ये तेरा आदमी है.. अगर ये तेरा आदमी है तो चल अंदर चल के इसका लुंड अपनी गांड में ले..

महक की बात सुनकर हम सबब ज़ोर जोरसे हंस पड़े..

अकरम गुज्जर की माँ hi मर्डर गई महक की बात सुनकर..

वो गाली देने वाला था क

महक:- गाली दी तो मैं hi तेरी गांड पहाड़ कर रख दूंगी.. चल बैठ और बात करते हाँ..

अकरम गुज्जर ने अपने आदमियों को कुछ इशारा किया.. वो महक की कोई बात नहीं सुन्ना चाहता था.. चुटिया कही का किसके सामने उछलने की कोशिश कर रहा है ..

उसके आदमी कुछ करते उससे पहले hi कई गोलियों राजा पार्टी के पिस्टल्स से चलीं. अकरम गुज्जर और महक के शिकार को छोड़ कर बाकी सबब hi ज़मीन कर गिरे हुए तड़प रहे थे... टाउन पास में hi था और वहां एक थाना भी था.. वहां से पुलिस वन के साईरन की आवाज़ सुनाई देने लगी..

ये भी मरने क लिए आ रहे हाँ... ये भी गुज्जर के साथी hi होंगे.. अगर ऐसा है तो फिर इन्हे ज़िंदा रखने का कोई फायदा नहीं होगा, साले इनके होते हुए सोनम का घर उजाड़ गया था...

गुज्जर और महक का शिकार अपने सभी आदमियों को तड़पते देख कर कांपने लगे.

जल्द hi पुलिस भी अंदर ाँ पोहंची.. पुलिस वन से 8 पुलिस वाले बहार निकले और गन्स को हमारी तरफ सीधा कर लिया..

पुलिस आईएनएस चलता हुआ हमारा पास आया..

गुज्जर:- आईएनएस साब देखिये ये मेरे hi डेरे में घुस कर मेरे hi आदमियों को मार रहे हाँ..

आईएनएस:- क्यों बे हरामजादो कौन हो तुम लोग और क्यों मार रहे हो गुज्जर के आदमियों को..

मई कुछ बोलता महक फिरसे बोल पड़ी.. आज का दिन महक का था..

महक:- तू भी हरामी पोलिसवाले है, तेरे रहते ये ीालके के लोगों का जीना हराम किये हुए है और तुम उसे कुछ कहने क बजाये ुटला हमपर hi भोंक रहे हो.

आईएनएस:- ऐ लड़की पुलिस वाला हों मैं, और ों ड्यूटी पुलिस वाले से तमीज से बात करो..

महक:- है है है है ों ड्यूटी, तू ड्यूटी पर रहते हुए अपनी माँ छुड़ाता रहता है.. तेरे रहते इलाके क लोग दुखी है, गुज्जर से किसी की भी इज़्ज़त मेहफ़ूज़ नहीं है, तुझे भी इन्ही के साथ hi लिटाना पड़ेगा.. तेरी माँ भी यही छोड़नी पड़ेगी.. गुज्जर के तलवे chat'ta होगा तू भी.. मैं सही बोली ना..

आईएनएस:- aaaaaaaaaaaeeeeeeeeee launadiyaaaaaaaaaaaaaaaa teriiiiiiiiiiiiiii ित्त्त

महक ने जिसके बाज़ो को पदक हुआ था उसे घुमा कर आईएनएस पर दे मारा.. आईएनएस दूर जा गिरा.. महक की जुर्रत देखकर पुलिस वळून की हिम्मत तूने लगी थी.. हमारे हाथ में भी पिस्टल्स थे.. पुलिस वाले मरना नहीं चाहते थे..

mehak:-(sabhi पुलिस वळून से) क्या तुम सबब भी गुज्जर के पालतू हो... जल्दी बोलो वर्ण तुममे से आज कोई भी ज़िंदा नहीं बचेगा...

महक क तेवर बहुत खूंखार हो गए थे.. महक का ये रूप देख कर मैं भी दांग रह गया था.. महक की आँखों में मुझे खून उतरा हुआ दिख गया था..

महक गुज्जर के लुंड पर एक किक मारी, फिर उसके बालों को पकड़ कर खेंचते हुए आईएनएस के पास जा पोहंची.. उदय ने महक के पहले शिकार को शूट कर दिए था.. जिस वजा से पलिस वळून की हिम्मत और भी टूट गई थी, सभी थाने के टपोरी पुलिस वाले थे, सालों से उन्हें गन चलने का मौका नहीं मिलता, और किसी को शुत कर देने पर हज़ारों सवाल भी सुनने पड़ते हाँ.. इसलिए पुलिस वाले चुप hi रहे.. अगर उनका आईएनएस कुछ करने का आर्डर पहले hi दे देता तो शायद को कुछ कर भी लेते.. पारर अब वो कुछ भी करने लायक नहीं रहे थे..

डेरे पर 13-14 लाशें पड़ी हुई थी.. कैसे करते वो इतनी हिम्मत

महक ने गुजर को आईएनएस के ऊपर फेंका..

महक:- अब बोलो कुछ वक़्त पहले एक काण्ड किया था गुज्जर तुमने, मुझे इसकी डिटेल चाहिए और उस औरत का क्या किया मुझे ये भी बताओ.. और उस औरत के बच्चे के बारे में क्या जानते हो..

गुजर के सारे hi कस बॉल निकल चुके थे.. उसकी पूरी hi फाॅर्स ख़तम हो चुकी थी, उसके सामने आईएनएस धुल चाट रहा था.. उसका तनतना ख़तम हो चूका था.

गुज्जर सबब फार फार बोलने लफा.. मैं और महक सुकि आँखों में hi देख रहे थे. वो भी बोल रहा था सच hi बोल रहा था..

सोनम की माँ उस रात सच में hi कही ग़ायब हो गई थी..... मुझे अचानक से hi कुछ याद आया तो मैंने शुष्मा दीदी को फोन लगा दिया..

दीदी:- हाँ भाई कैसे याद किया..

विजय:- दीदी सोनम से पूछो क उसकी माँ कहाँ जा सकती है..

दीदी:- क्याआआआआ... दीदी ज़िंदा हाँ.. पारर हमने तो कुछ और सुना था..

सोनम भी पास hi थी.. उसने फोन झपट लिया..

सोनम:- bbb.....bhhai mmmm....maa ज़िंदा हाँ,.

विजय:- हैं सोनी माँ ज़िंदा हाँ, तुम सोच कर बताओ क माँ कहाँ जा सकती हाँ..

सोनम कुछ देर चुप रही.. फिर वो अचानक से hi बोली.

सोनम:- भाई मई दीदी से कह कर पता करती हों.. अगर माँ ज़िंदा हाँ तो ज़रूर

वो झज्जर में होंगी, वहां माँ के दूर के रिश्तेदार रहते हाँ..

विजय:- ठीक है सोनम तुम मुझे पता करके बताओ....

महक भी रुक गई थी मुझे फोन करते उहे सुनकर..

महक:- पुलिस वळून से.......... तुम सबब जा सकते हो और इस आईएनएस की लाश तुम्हे कही और से मिल जायेगी.. अगर तुममे से कोई इसका साथी है तो मैं उसे यही ख़तम कर देती हों, सभी पुलिस वाले एक दूसरे की सूरत देखने लगे..

एक पुलिस वाला:- मैडम अगर आप इसे सच में hi मारने वाली हाँ तो हम यहाँ से चले जाते हाँ, अगर ये कही बच कर वापिस आ गया तो हमारे लिए मुसीबत बन्न जायेगा.. गुज्जर जैसे इसकी और भी कई लोगों से कनेक्शंस हाँ, ये तो हमे दूसरा सांस भी नहीं लेने देगा...

महक कुछ बोलती उदय ने आईएनएस के के दोनों घुटनो पर गोलियां मार दीं.. आईएनएस चीखने लगा..

उदय:- किसी से इतना मैट डरो, दो पैसे की नौकरी क लिए किसी के आगे मैट झुको. अगर घर से तंगी है टी नौकरी छोड़ कर हमारे साथ शामिल हो जाओ, पैसे खुला मिलेगा और इज़्ज़त भी बढ़ेगी.. काम गैर कानूनी ज़रूर होगा, पर कभी कोई गिल्ट नहीं होगा..

उदय की बात सुनकर मैं और महक शॉक में रह गए.. उदय ने कितनी बड़ी बात कर दी थी....

विजय:- तुम हो क्या, कांस्टेबल या ऐसी.......

वो:- सर मई ऐसी हों.... मैंने उसे अपने पास बुलाया... वो मेरे पास आया..

विजय:- जल्द hi तुम्हे आईएनएस के ओहदे पर प्रमोट कर दिया जाएगा.. काम हमारा hi होगा, मतलब जनता की सेवा.. मैं लगा कर करना.. और इस आईएनएस की तुम टेंशन मैट लो, इसके मरने पर भी तुम्हे कोई नहीं पूछेगा..

मेरी बात सुनकर ऐसी बहुत खुश हुआ, और बाकी पुलिस वाले भी, वो भो सभी ऐसी को पसंद करते थे.. पारर आईएनएस क वजा से कुछ कर नहीं पाते थे...

गुज्जर और आईएनएस को गाडी के दिग्गी में ठोस दिया गया, और हम वापसी क लिए निकल पड़े... हमारे पीछे गुज्जर के आदमियों की लाशें पुलिस वाले खुद hi कही िदःर उधर कर देते..

रास्ते में hi मुझे दीदी की कॉल आ गई थी, दीदी बहुत खुश थी.. सोनम की माँ का पता चल गया था, पारर वो बहुत बीमार थी.... मैंने जूली को कॉल करके सोनम के साथ किसी को भेजने का कह दिया.. सोनम अपनी माँ को भी यही पैलेस में लेकर आ जाती..

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अब्ब राहुल का मसला रह गया था..... अपने ठिकाने पर पोहंच मैं और महक कुस्रियों पर बैठ गए.. गुज्जर को राजा पार्टी अंदर ले गाइट hi, अब्ब गुज्जर से गुज्जर जैसे का भी पता करके गुज्जर जैसे सभी को ठिकाने लगाना था..

छोटा कचरा ख़तम करना ज़यादा ज़रूरी था.. आस पास के सभी इलाके भी गंदगी से साफ़ करने थे..

मुझे गहरी सोच में देख कर महक बोली..

महक:- किस सोच में गुम्म हो.?

विजय:- (महक को देख कर गहरी सांस लेते हुए) राहुल को लेके सोच रहा हों.. बच्चो को अगवा करवा कर कहाँ भेजते होंगे.. सोनम की माँ भी मिल गई, और गुज्जर भी ठिकाने लग्ग गया, अब्ब राहुल और राहुल जैसों क लिए भी कुछ करके चाहिए....

महक:- सिटी में बच्चो से भीक मंगवाने क लिए भी बच्चो को अगवा किया जाता रहता है.. कही ऐसी hi कोई गैंग न हो..

विजय:- हाँ हो भी सकती है.. पापा से पूछता हों, वो ऐसे कितने गैंग क बारे में जानते हाँ..

मैं फोन निकला और पापा से बात करने लगा, महक मुझे hi देख रही थी.. कुछ देर पापा से बात होती रही..

महक:- क्या हुआ, मेरा शक सही निकला ना, दिल्ली में भी ऐसी hi कोई गैंग है..

विजय:- हाँ दिल्ली में भी भीक मानगो की माफिआ है..

महक:- रो आज से hi उसे भी ख़तम करते हाँ.. अगर राहुल उनके पास है, और कही राहुल को कही और अपाहिज न बना दें, देर करना सही नहीं है..

बाकी सबब भी आ गए महक की बात सबने सुन ली थी.

गुरनाम:- फिर तो ज़रूर उस सबब में पवन भी शामिल होगा.. वो भी ऐसा hi मिलता जुलता धंदा किआ करता था..

महक:- ठीक है तो फिर अभी से hi काम पर लग जाओ.. विजय के पास इन्फो है कुछ उनकी...

टेबल पर hi एक पेपर पर मैंने पापा से मिली इन्फो लिख दी.. राजा पार्टी इन्फो पेपर उठाये काम क लिए निकल गई..

महक:- तो अब्ब आगे का क्या प्लान है.. क़ैदियों क लिए क्या कुछ करने का सोचा है.....

विजय:- क्यों ना ाजो hi चलें क़ैदियों से मिलके आते हाँ..

महक:- हाँ चलो, अभी रेस्ट का टाइम भी कब्ब है तो उन्हें भी सबब जल्दी से सीखना पड़ेगा.. जब सीख जायेंगे तो रेस्ट के लिए बहुत टाइम बचेगा..

विजय:- हाँ अभी वैसे भी सभी ने कौनसा किसी से जुंग लड़नी है.. कुछ बेसिक्स पहल से hi सीखा देते हाँ..

कुछ देर में हम गाडी में बैठे फार्महाउस की और जा रहे थे..





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अपडेट ::: 116


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जब हम फार्महाउस पोहंचे तो गेटकीपर ने हमसे कोडवर्ड्स जो हमने बता दिए..

वो जान गया क हम यहाँ बे बॉस हाँ..

ये सेटअप भी बनाया गया था.. 200 मीटर दूर से hi आने वाला आटोमेटिक महसिनेगुन की रेंज में आ जाता था, कोई भी फार्महाउस के आस पास वेपन लेकर नहीं घूम सकता था.. पैलेस से मिलने वाले वेपन्स में से 4 हैवी मशीन गन्स जो ऑटो मोड़ पर सेट की जा सकती थीं.. उनमे से 2 फार्महाउस की छत पर सेट की गई थी, नाईट विज़न सीएएम उस मशीन गन के साथ आत्ताच था..

रात के टाइम 200 मीटर की रेंज में आने वाले किसी को भी मोशन सेंसर की मदद से डिटेक्ट करके उसे वही शूट कर सकता था.. ये सबब जूली ने hi सेट किया था, मुझे इस सबब का पता था, मैं बिजी था तो जूली ने ये सबब सेट क्र दिया था.. फार्महाउस सुरक्षित था, कोई भी इसके आस पास नहीं फाटक सकता तह.

मैं और महक गाड़ी को फार्महाउस के अंदर ले गए..

फार्महाउस का नज़ारा hi बदला जा चूका था.. हम गाड़ी से उतरे तो हर्ष अंकल के दोनों आदमी हमें ाँ मिले.. गेटकीपर से शायद अंदर पैग़ाम भेज दिया था.

हम उन दोनों क साथ चलते हुए अंदर जा पोहंचे.. सभी क़ैदियों को एक हाल में इकठा करने का कहा गया..

सबको hi बता दिया गया था क यहाँ क बॉस आ गाये हाँ तो सभी दौड़े दौड़े आये..

सबब हुमेह देख कर कुछ हैरान ज़रूर हुए थे.. पर फिर सबब ने hi जल्द खुद पर काबू प् लिया..

मई और महक सभी को देखने लगे और वो हमें... उनके चेहरे जोश से तमतमा रहे थे. सब hi कुछ न कुछ कहना चाहते थे..

विजय:- आप सबब को यहाँ देख कर मई बहुत खुश हों, आप सबब यहाँ पर आज़ाद हाँ, आप सबब से hi जीने का हक़ छीन लिया गया तह, मैंने अपनी टीम के साथ मिलकर आप सब को जेल से निकल कर आपकी ज़िन्दगी लौटा दी है, आप सबब अगर यहाँ से जाना चाहते हाँ तो ख़ुशी से जा सकते हाँ, किसी पर किसी किसम की कोई पाबन्दी नहीं होगी...

लेकिन आप सबब भी जानते हाँ क बहार आप सबब क लिए बहुत खतरा है, आप सबब को कुछ दिन यहाँ रहना होगा.. यहाँ आये जाने का मक़सद भी आप सबब को बता दिया गया है.. आप सबब पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं की जायेगी, आप सबब अगर अपनी मर्ज़ी से मेरे मक़सद में शामिल होना चाहते हाँ तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी..

जैसे आप सबब से ज़िन्दगी की खुशियां छीन ली गई थीं, आप सबब क खिलाफ साज़िश करके आप सबब को hi जेल की ज़िंदज़गई जीने पर मजबूर कर दिया गया था, वैसे hi और भी कई ऐसे हाँ जो सिसक सिसक कर जी रहे हाँ..

मेरा मक़सद एक ऐसी गैंग बनाना नहीं जो दिल से समाज सेवा करे, खुद को बेबसों की भाली क लिए वक़्फ़ करदे.. मुझे और भी कई लोग मिल सकते थे.. लेकिन आप जैसे नहीं मिल सकते थे..

एक तो आप सबब को ने लाइफ देने का मेरा मक़सद था....

आप सबब जेल में रह कर अपने खिलाफ की जाने वाली साज़िशों को बहुत अच्छे से समझ गए होंगे.. दुन्या में पैसा और पावर जिसके पास हो वो किसी से भी जीने का हक़ छीन लेते हाँ.. आप सब जेल में रहते हुए ये सब बहुत अच्छे से समझ गए होंगे.. जितनी आग आप सबब क दिलों में लगाईं जा चुकी है मुझे ऐसी hi आग की ज़रूरत है, और यही मेरा दूसरा मक़सद है..

जेल की लाइफ गुजरने पारर आप में से कई ऐसे भी होंगे जिसके मैं अंदर से कुछ बदल भी गए होंगे.. मैं उनसे कहना चाहता हों, क अगर अपने अंदर की आग उनसे सहन नहीं होती तो वो अपनी आग को किसी अपने hi जैसे कमज़ोर, बेबस और लाचार

पर इस्तेमाल में न लाये..

ऐसो के लिए मई ये कहूंगा, क अपने अंदर की आग को और भी बढ़ाओ, अपने hi जैसो की मदद करने क लिए खुद को जौलड बनाओ, खुद की लाइफ भी बनाओ, खुद का नाम बनाओ, खुद की इज़्ज़त भी बढ़ाओ, अपने घर वळून के लिए वो सबब भी करो जो तुम कभी नहीं कर सके..

तुम सबब की हर एक मामले में भरपूर मदद की जायेगी, तुम सबब को हर वो ट्रैंनिंग दी जायेगी, जिनकी आप खवाहिश रखते हाँ, गैंग में रहते हुए जैसे आप सबब का मैं करे, वैसे काम करें...

गैंग क लिए कभी कुछ गलत न होने पाए उनसे, और न hi वो कभी किसी क साथ गलत होते हे देखें..

मेरी बात सुनके सबब शोर मचने लगे.........

एक बोलै:- बॉस आपने हमारे लिए जो कुछ कर दिया है, हमे ओट कुछ सोचने की भी ज़रूरत नहीं है, पारर फिर भी आपने हम सबब के लिए ीनता कहा उसके लिए हम दिल से बहुत खुश हाँ, अब हम सबब hi अपने पुरे मैं से आप के लिए आपकी गैंग के लिए वो सबब करेंगे, जो आप चाहेंगे.

दूसरा:- भाई, ये सबब हमारे लिए एक सपना है, जो हमने कभी नहीं सोचा था, वो हो गया है, अब्ब हम भी दूसरों की hi तरह से एक आज़ाद लाइफ जी सकते हाँ, सबब पहले जैसा तो नहीं हो सकता पर फिर भी हम इतने से hi बहुत खुश हाँ..

मैं भी अपनी आखरी सांस तक्क आप के साथ हों..

3रद:- मेरी फॅमिली मुझसे बहुत प्यार करती है, पैसे भी बहुत है मेरी फॅमिली क पास.. पर वो दुश्मनी करना नहीं जानते.. मुझे एक बार फिरसे आज़ाद देख कर वो सभी बहुत खुश होंगे.. मेरी साथ साथ मेरी फॅमिली भी अब्ब आपके साथ होगी. मेरी तरफ से आपको जैसे भी सपोर्ट चाहिए होगी, मई पीछे नहीं हटोगे और न hi मेरी फॅमिली का कोई फारद पीछे रहेगा..

4तह:- हमें आज़ादी मिली है तो हम अपनी इस नयी आज़ादी वाली ज़िन्दगी को अच्छे कामों में लाएंगे... मेरे बाज़ुओं में वो ताक़त तो नहीं है, पर मई अपनी आखरी सांस तक्क आपके साथ हों.. आप बास मेरी फॅमिली को कही सेफ करवा दें, उन्हें पुलिस वाले कही तंग न करें..

विजय:- आप सबब की फॅमिली को हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया जाएगा. आप सबब के लिए वो सबब किया जाएगा जो आपने मैं की छह होगी.. मैं एक बात कह डॉन क ये सबब मैं सिर्फ और सिर्फ समाज सेवा क लिए कर रहा हों.. मुझे अपने मैं की शान्ति के इलावा किसी और चीज़ से कोई ग़र्ज़ नहीं है.. आप सबब जो भी करेंगे वो सबब करके आप सबब को भी मैं की शांति मिलेगी.

सबब बहुत थे मेरी बातों से और खुद को आज़ाद पा कर..

महक ने भी उनसे बात की.... फिर एक एक करके सभी ने अपने विचार सामने रखे, 3 घंटे सभी से दोस्ताना अंदाज़ में बात चीत हुई.. दोबारा फिरसे मिलने का कह कर मैं और महक फार्महाउस से निकल लिए..

बेसिक ट्रैंनिंग की बात हुई थी.. वेपन चलने की ट्रैंनिंग उन्हें आज से hi शुरू करवाई जाने वाली थी.. पहला काम यही था गन की ट्रैंनिंग का..

प्लास्टिक सर्जरी से फेस चेंज करने की ज़रूरत ज़यादा नहीं थी, सभी बाल बढ़ा कर खुद को किसी हद्द तक चेंज कर सकते हथे, बाकी का उन्हें फेस मास्क की ट्रैंनिंग भी दी जाने वाली थी.. धीरे धीरे करके सभी को इस काम भी स्पेशलिस्ट बना दिया था.. किसी से भी उसकी असली सूरत छेन्ना आसान नहीं था.

वैसे भी जल्द hi हमारी गैंग दिल्ली में फेमस होने वाली थी, कम हमारा था, पापा थे कम थे, पुलिस अगर किसी को रास्ते में रोक कर ईद भी मांगती है तो रिलेशन का उसे करके उनसे बचा जा सकता था..

सबसे ख़ास बात जो थी, स को इतना फेमस कर दिया जाना था क स का नाम आते hi कम् hi कोई किसी से पूछता..

स से रिलेटेड कार्ड्स मैंने बनवाने का सोच लिया था.. स गैंग से रिलेटेड मुझे हर एक फील्ड में अपने पेअर पेहलाने थे..

बाहर से प्लान मेरे मैं में आते जा रहे थे.. स एक ब्रांड बन गया तो किसी को कम् hi कही छुपने की ज़रूरत पड़ेगी........

ये सबब सोचते हुए मैंने महक से कहा.. गाडी महक ड्राइव कर रही थी..

विजय:- महक क्यों ना आस पास के स्कूल कॉलेजेस और ुनिवर्सिज़ में अपना डोमिनान्स बढ़ाया जाए............. स्टूडेंट को अपने साथ मिला कर हम जल्द hi फेमस हो सकते हाँ.. और स्ट्रांग भी...

महक:- हाँ ये तो है.. स्टूडेंट की पावर बहुत होती है, सिद्दार्थ को मार कर तुमने वो पावर हासिल भी कर ली है, दोनों लड़कियों के कॉलेज में तो तुम फेमस हो hi चुके होंगे.. लेकिन अभी सभी को नहीं पता तो स का नाम लेकर सभी को सबब बता दिए जाए.. क्या नाम बताया था तुमने हाँ वो अनुष्का और उसकी बेहेन इसमें हमारे काम भी आ सकती हाँ.. पुरे कॉलेज में उस घटना को विथ डिटेल वायरल कर देना चाहिए..

विजय:- जूली से कह कर वो वीडियो एक नई सन्देश के साथ फिरसे सोशल मीडिया पर दिखा दी जायेगी..




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शाम के 7 बजे सभी सिटींग हाल में बौठे हुए थे, एक सूफी पर मैं अपनी दोनों पत्नियों के साथ बैठा हुआ था..

माँ मेरे टाइट साइड में तो पूजा लेफ्ट साइड में.. सभी बैठे हुए न्यूज़ सुन्न रहे थे..

जहाँ स को लेकर अच्छा ख़ासा हंगामा बरपा था.... और नेवस्कस्टर चीख चीख कर बोले जा रही थी.... साली कमीनी बहुत मज़े से मिर्च मसाला लगा कर बोल रही थी, साथ साथ पब्लिक रेविएवस भी दिखाए जा रहे थे..

स्टूडेंट के तो मज़े हो गए थे, ख़ास कर गर्ल्स के वो बहुत खुश थी, क स उन लड़कियों के लिए मैदान में आ गया है.. अब्ब लड़कियों दर्रे बिना hi अपने खवाबो को पूरा कर पाएंगी... आये दिन किसी न किसी शकल कॉलेज या यूनिवर्सिटी में कोई न कोई घंटा होती hi रहती थी....

लड़कियां स से अपील कर रही थी, वो ऐसी घंटाओ को रोकने क लिए भी कुछ करे..

सभी कभी टीवी को तो कभी मुझे देख रहे थे... माँ और पूजा दीदी ने मेरे हाथो को दबाया हुआ था, वो बहुत खुश थी.. मेरा हर एक काम हमने बहुत पसंद आ रहा था.. दोनों hi बारी बारी मेरे गालों को चूम लेती थी..

और बाकी सब देख कर हस्सन लगती थीं...

माँ की गांड अब पूरी तरह से ठीक थी, पूजा दीदी की गांड में अभी भी थोड़ा थोड़ा दर्द था.. पूजा दीदी की छूट और गांड खुली तो माँ ने पूजा दीदी को भी वही क्रीम लगाने को दे दी थी.. माँ नहीं चाहती थी क मैं पूजा दीदी की छूट और गांड मार मार कर भोसड़ा बना डॉन.. माँ पूजा दीदी की छूट और गांड भी अपनी जैसी hi देखना चाहती थी..

पूजा दीदी ने शरमते हुए माँ से वो क्रीम ले ली थी.. क्रीम पूजा दीदी के हाथ में आई तो रानी ने झपट ली,

रानी:- मैं लगाओगी ना दीदी की छूट पर गांड के फटते हुए छेड़ पर ये क्रीम.. और सबब हस्सन लगी थी...

माँ ने पूजा दीदी को जब्ब ये क्रीम दीदी थी, तो साड़ी hi महिलाएं रूम में थी.. सबब की सबब hi बेशरम थीं.. एक नयी नवेली दुल्हन के खूब मज़े ले रही थी सबब hi..




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दन्न फ्रैंड्स दिल्ली में मौजूद एक कोठी के एक रूम में बैठे हुए थे.. दीवार पर लगी हुई एक स्क्रीन पर दन्न दिख रहा था..

आते hi पूरा सेटअप तैयार कर लिया गया था.. पर अभी कोई ासिटीवी नै शुरू की गई थी.. किसी को कुछ करने hi नहीं दिया जा रहा था... दिल्ली में इंटेलिजेंस एजेंसीज ने डेरा जमाया हुआ था..

जेल की हुई घटना ने दिल्ली को रेड जोन एरिया में बदल दिए था.. जेल में हुई घटना ने दन्न एंड फ्रेंड्स को एक बार फिरसे सोचने पर मजबूर कर दिए था..

ये तो वो समझ hi गए थे, ये सबब एक hi आदमी कर रहा है, इस सबब क पीछे उसका मक़सद क्या है, ये वो नहीं जान पाए थे..

दन्न:- मार्टियन सर्र चकराने लगा है ये सबब देख कर.. वो कोई इंसान hi है या रोबोट.. कितना फ़ास्ट और कितने खतरनाक काम वो पालक झपकते में hi करता जा रहा है.. अब्ब जेल पर हुए हमले से उसका क्या मक़सद हो सकता है... ऐसा तो कोई पागल भी नहीं करता, जैसा वो करता फिर रहा है, भला जेल में घुसने की हिम्मत भी किसी में होती है..

और अब्ब वो स बनकर सबके hi सामने आ गया है.. कितनी जल्दी वो एक ब्रांड बन्न कर उभरा है... ऐसे इंसान से उलझना हमारे लिए भी आसान नहीं होगा..

तुम सबब उससे बचते हुए अपने धंदे को फेलाओ..

martian:-(apne चहरे को दोनों हाथो से मसलते हुए) हाँ अब्ब तो सबब hi सोच समझ कर करना पड़ेगा.. देखते हाँ नेक्स्ट वो क्या करता है..

फिर ऐसे hi सभी स को लेकर बातें करने अलगे..

पहले वो उससे अंजान थे.. पर अब्ब वो जान गए थे, क ये सबब करने वाले का नाम स है........... सभी स से उलझे बिना hi अपना धंदा जमाना चाहते थे...




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दिल्ली से बहार 25 किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाकों में मौजूद एक छोटा सा इलाका था डबलपुर.........

डबलपुर के इलाके में बने सभी हाउस लकड़ी क थे.. पत्थरो को काट कर एक रास्ता बनाया गया था..

डबलपुर में बने हुए लकड़ी के 20 घर थे.. 3 बड़े बड़े गोदाम बने हुए थे..

उन गोदामों को अंदर वाली साइड से लोहे की बड़ी बड़ी चादरों से कवर किया गया था. बारिश आये, तूफ़ान आये अंदर रखे हुए सम्मान को कोई खतरा नहीं रहता था..

आस पास का इलाके जंगली था.. और वहां अपर जंगल के कटे हुए दरख्तों के ढेर भी पड़े हुए थे..

देखने को यहॉ लगता था क ये सबब सिर्फ दरख़्त काटने वाले hi हाँ.. यहाँ और कोई काम नहीं होता...

पारर यहाँ चोरी छुपे बहुत कुछ हो रहा था.. कई किसम क इललीगल धंदे यहाँ पर हो रहे थे.. आस पास से लड़कियों और बच्चो को अग़वा करके यहाँन लाया जाय था...

लकड़ी के बने हुए बड़े बड़े बॉक्सेस ट्रकों पर लाये जाते थे, जिनके अंदर बच्चे और लड़कियां क़ैद होते थे.. वो सभी यहाँ पारर और फिर यहाँ से आगे मंज़िल तक्क पोहचने तक्क ड्रग्स दे कर बेहोश रखा जाता था..

ये सबब इतने अच्छे अंदाज़ में किया जा रहा था क किसी को अभी तक्क कोई भी अंदाज़ा नहीं हो पाया था...

पवन नाम का एक बिजनेसमैन जिसका दमाग कुछ ज़यादा hi चलता था, वो और उसके कुछ पार्टनर्स ये सबब कर रहे थे.. पवन को एक पार्टी मिली थी, बहार के किसी कंट्री की, पवन उनके साथ मिलकर लड़कियों की तस्करी करने लगा..

बच्चो को किडनैप करवा कर उन्हें माज़ूर बना कर अलग अलग शहरों में भीग मांगता था.. पवन का ये धंदा भी छुपा हुआ था.. आस पास के 8 शहरों में पवन और उनके पार्टनर्स के अड्डे बने हुए थे..

बहुत से बच्चो को मचिनो के ज़रिये अपाहिज बना कर उनके फेस को बिगड़ कर भीग जैसे घटिया काम पर लगा दिया गया था...

राहुल इस वक़्त इन्ही 3 गोदामों में से एक गोदाम में रखे हुए लकड़ी के बॉक्स में क़ैद बेहोश पड़ा हुआ tha..rahul को और बाकि सब को ड्रग्स की हैवी दोसे दी गई थी.




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दिल्ली सिटी के एक स्माल टाउन से एक बच्चा लापता हो गया.. उसी बच्चे के घर के पास में hi एक घर था..

और वो घर था संदीप सिंह निर्वाण का... ये संदीप सिंह निर्वाण गुरनाम सिंह का दोस्त था.. गुरनाम की hi तरह से ये भी कभी पुलिस लाइन में था, पारर अपने असूलों से न हटने की वजा से उसे नौकरी से हाथ धोने पड़े..

पारर संदीप सिंह ने पुलिस जॉब की भी परवा न की, और अपने उसूलों पर कोम्प्रोमाईज़ न करते हुए रिजाइन कर दिया..

जॉब छूती पारर समाज सेवा नहीं छोड़ पाया.. पैसों क लिए उसे कभी कोई मसला नहीं रहा था.. संदीप सिंह पैसे गुंडों को मार कर हासिल कर लिया करता था..

स्माल टाउन से जो बच्चा ग़ायब हुआ.. संदीप सिंह को उस बच्चे से बहुत प्यार था.. बच्चे के गम हो जाने पर संदीप सिंह खुद से बच्चे को ढूंढ़ने निकल पड़ा..

संदीप सिंह बेहतरीन निशाने बाज़ भी था, अच्छा चाकू चलना भी जानता था.. हैंड तो हैंड फाइट में भी वो अच्छा था, पर स्पेशलिस्ट नहीं था.. 3-4 गुंडों से अकेले hi लड़ जाता था, हौसला उसका पहाड़ जैसा था..

उसी हौसले को काम में लाते हुए वो बच्चे को ढूढ़ने के लिए निकल पड़ा..

कई दिनों की म्हणत के बाद वो उसी एरिया में जा पोंछा जहाँ 3 बड़े बड़े लकड़ी के गोदाम बने हुए थे...

लेकिन वहां से संदीप सिंह को कुछ भुई नहीं मिल पा रहा था.. संदीप सिंह की 6तह सेंस उसे उकसा रही थी क इन गोदामों में ज़रूर कुछ तो गलत हो रहा है.

यहाँ से भरे हुए ट्रक जाने की बजाये आ कुयं रहे हाँ......

इसी बात का पता लगाने क लिए संदीप सिंह ने वो इलाका नहीं छोड़ा, और गोदामों को अंदर से देखने क लिए जोड़ तोड़ करने लगा..





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राजा पार्टी भी भी काम में लगी हुई थी, गुरनाम के शिव किसी ने भी पवन को नहीं देखा था.. गुरनाम अपनी कोशिश में लग गया, और पवन का पता लगाने लगा.

राजा गैंग भी गुरनाम के साथ hi थी.. पवन को कम् hi शहर में देखा गया था, इस लिए वो इस समय कहाँ होगा कोई नहीं जानता था...

गुरनाम भी कम् नहीं था. उसने हर अंदाज़ से सोचना शुरू कर दिया.. कहीं से कोई क्लू नहीं मिला तो वो वापिस आया और गुज्जर का एक एक अंग अलग करना शुरू कर दिया.. गुज्जर से अस पास के लुच्चों के नाम जानने लगा.. गुज्जर जो कुछ जानता था.. सबब बताने लगा..

गुज्जर जैसे लुच्चों की एक लम्बी लिस्ट बन गई थी.... गुरनाम बड़े गौरसे उस लिस्ट को देखने लगा.. वो देख रहा था क इनमे से कौन ऐसा है, जो कभी पवन के साथ देखा गया था..

उस लिस्ट में एक औरत भी थी, जो कभी धंदा किया करती थी.. उसका कनेक्शन पवन से है या नहीं. ये पता नहीं चल सका.. लेकिन गुरनाम की 6तह सेंस ने उसे ुस्काया क पहले उस रंडी को hi उठाया जाए..

1 घटने बाद सभी उस रंडी के ठिकाने पर जा पोहंचे.. साली उस रंडी कुत्तिया एक बहुत बड़ी कोठी में रहती थी..

उदय:- साली रंडी ने बहुत बड़ी कोठी बनाई हुई है..

जीतो:- हाँ उदय यार.. आज क्यों न उसका गैंगबैंग कर दिया जाए.. बहुत दिनों से किसी की छूट नहीं मारी.. और ज़बरदस्ती तो कभी किसी की छूट और गांड भी नहीं मारी, तो क्यों ना आज उसकी बंद बजा दें..

ऑन:- मेरा तो अभी से hi लुंड खड़ा होने लगा है..

राजा और गुरनाम मुस्कुराने लगे..

गुरनाम:- जो दिल चाहे कर लेना. लेकिन यहाँ नहीं पहले उसे यहाँ से ले जाते हाँ, अपने ठिकाने पर hi उसके साथ बाकी का सबब कर लेना..

सभी अंदर गेटकीपर को बेहोश करके बाँध कर अंदर जा घुसे... अंदर 2 गार्ड्स भी थे, उनके पास गन्स थी, दोनों को फ़ौरन hi सीलेंसर लगी पिस्तौल से शूट कर दिया गया...... दोनों गुंडे कुछ भी समझने से पहले hi दुन्या छोड़ गए थे.

और आगे बढे तो दिंनिंग टेबल पारर वो रंडी किसी की गॉड में बैठी हुई उसे खाना खिला रही थी.

साली अपनी अदाओ से एक मर्द को लुभा रही थी.. जैसे hi उस रंडी की नज़र सबब पर अपड़ी तो..

रंडी:- कौन हो तुम और मेरी कोठी में कैसे घुसे चले आ रहे हो..

उदय आगे बढ़ा, साइड को साइड में हटाया, मर्द को खेंच कर नीचे फर्श पर फ़ेंक दिए.. जीतू ने उसे सर्र पर गन मार कर बेहोश कर दिए.... उदय रंडी क बूब्स को पकड़ कर दबाने लगा..

uday:-maal तो तू बाहय hi कड़क है भय, छोड़ने में तू मज़ा hi आ जाएगा..

रंडी:- तमीज से बात करो..

अनु भी आगे बढ़ा और उसकी गांड में ऊँगली देते हुए बोलै

अनु:- गांड भी तेरी बहुत मस्त है, जीतू मैं तो इसकी गांड मारूंगा..

जीतू:- नहीं पहले मैं इसकी गांड मारूंगा.. तेरा लुंड बड़ा है, इसकी गांड खुल गई तो मुझे मज़ा नहीं आएगा.... ये बोलते उहे जीतू हस्सन लगा.. बाकी भी सबब हस्सन लगे..

राजा:- चलो इसे लेकर चलो... और इस नीचे गिरी पड़े को भी उठा लो. हो सकता है, ये भी हमारे काम का हो............ रंडी डर गई और कुछ बिजल्ने hi वाली थी क पीछे से अनु ने उसके सर्र को पिस्तौल मार दिया वो भी बेहोश हो गई..

दोनों को उठा कर गाडी में दाल दिए गया.... एक नौकर और एक माइड भी वहां आ गाइट हीं , उसे कुछ नहीं कहा गया..

सभी गाडी में बैठे अपने ठिकाने पर जा पोहंचे..

अंदर एक कमरे में आदमी को बांध दिया गया.. राजा और गुरनाम आदमी का इन्तेर्विएव लेने वाले थे.. और बाकी के तीनो रंडी को लिए एक रूम में जा घुसे..

देर किये बिना hi रंडी के कपडे पहाड़ दिए गए और तीनो भी फ़ौरन hi नंगे हो गए..

उदय:- अरे सालो कंडोम भी हाँ किसी के पास.. या ऐसे hi छोड़ने वाले हो..

अनु:- इस रंडी को बिना कंडोम के हम तो नहीं छोड़ने वाले.. मरना है क्या, पता नहीं कितनो क लुंड लिए हों इसने और क्या बीमारी हो इसे..

जीतो रूम में hi मौजूद एक अलमारी से कंडोम निकल लाया... तीनो ने hi हस्ते हुए ालने लुंड पर कंडोम चढ़ा लिए..

तीनो hi एक दूसरे को देख कर हस्सन लगे..

जीतो:- इसे होश में कौन लाएगा..

उदय:- (हस्ते हुए) तू पहले इसकी गांड में लुंड दाल कुछ देर में खुद hi होश में आ जायेगी..

जीतू भी हस्ते हुए आगे बढ़ा और रंडी को उल्टा करके उसके चुत्तड़ो को खेंच कर बहुत सारा थूक उसकी खुली हुई गांड के छेड़ पर दाल दिया.. फिर अपने लुंड को थूक और रंडी की गांड पर रगड़ने लगा..

अनु:- साले तू उसे मज़ा दे रहा है क्या.. दाल एक hi झटके में, वो रंडी है उसे भला आराम से लुंड लेकर क्या पता चलेगा..

जीतू ने हस्ते हुए रंडी की गांड के छे दपर अपने लुंड को सेट किया और एक झटके में hi अपने लुंड किओ रंडी की गांड में उतार दिए.. पूरा लुंड एक hi झटके में अंदर जा घुसा..

रंडी थोड़ी सी हिली, उसे कुछ दर्द हुआ था शायद..

जीतू ने रंडी की पीठ कर वज़न डालते हुए ज़ोर ज़ोर से थक्के मारने शुरू कर दिए.. रंडी की सुखी हुई गांड ने रंडी को दर्द देना शुरू कर दिया.. जिस बिना पर वो जल्द hi होश में आने लगी..

जीतू 7 मिंट तक्क रंडी को अच्छे से चदोटा रहा.. रंडी पूरी तरह से होश में आ चुकी थी..

उसकी नज़र जैसे hi अनु और उदय के लुंड पर पड़ी तो

रंडी:- यययययय.......... ये सब क्या है.. और मई कहाँ हों..

जीतू लेते हुए hi रंडी की गांड मार रहा था, जीतू ने एक जोर्का धक्का मारा तो जीतू की जाएंगें रंडी के चुत्तड़ो से जोरसे टकराएं रंडी की चीख निकल गई..

उदय:- चल गया पता क ये सबब क्या है, जीतू और जोरसे छोड़ इस रंडी को, साली को ज़यादा फर्क hi नहीं पद रहा...

जीतू धक्के पर धक्के मारने लगा.. रंडी की चीखें रूम में गूंजने लगी..

उदय:- वाह जीतू तूने तो रंडी की भी चीखें निकलवा दीं. क्या बात है.

जीतू 13 मिंट तक्क रंडी की गांड मार राया फिर वो जहद गया, जीतू ने अपना लुंड रंडी की गांड से निकला.. साइड में हो कर कंडोम को उतार कर फ़ेंक दिया..

उदय:- चल अनु मिल कर इसे छोड़ते हाँ.. अकेले में मज़ा नहीं आएगा....

रंडी रट हुए:- मुझे किस बात की सजा दे रहे हो.. मैंने क्या किया है..

अनु:- पहले तुझे छोड़ len,uske बाद बात करेंगे.. अभी सिर्फ तुझे छोड़ने का मूड है.. तुझे भी तो लुंड लेने की बड़ी छह है ना..

उदय बीएड पर लेता तो अनु ने को उठा कर उदय के लुंड के ऊपर बिठा दिया.. उदय ने अपने लुंड को रंडी की छूट पर सेट किया तो अनु ने रंडी को उदय के लुंड पर

जोरसे दबा दिया.. रंडी की चीख निकल गई.. रंडी की छूट जीतू के गांड मारने की वाज से गीली नहीं हुई थी.. रंडी थी तो गरम होने में टाइम तो लेना hi था.. सूखी छूट में लुंड घुसा तो उसकी चीख निकल गई..

उदय ने रंडी को कस के पकड़ लिया अनु पीछे आया अरु अपने लुंड को पकड़ कर रंडी की गांड पर रखते हुए पुरे ज़ोर से सारा hi लुंड उतार दिया.

रंडी की चीखें एक बार फिरसे गूंजने लगीं.. लुंड तो उसने भी दो दो करके कई बार लिए होंगे. पारर सूखी छूट और गांड में एक साथ दो दो नहीं लिए होंगे..

दर्द के मारे उसकी आँखों से सावन बरसने अलग.. वो रोटी हुई दो दो लुंड से छोड़ने लगी..

जीतू का लुंड (6.5"..2.8) था तो उदय का 7"..3.1) और अनु का 7.8" और 4" मोटा था..

अनु ने एक hi झात्मे में लुंड रंडी की गांड में डाला तो रंडी की माँ भी साथ में hi चुद गई थी..

दोनों मिलकर रंडी का गैंगबैंग करने लगे.. दोनों के धक्के के साथ साथ रंडी की चीखों से रूम गूंजने लगा था..

23 मिंट तक्क चली इस चुदाई ने रंडी के सारे hi जोड़ हिला डाले थे.. अंत में वो भी झाड़ गई थी.. दर्द सहते सहते वो भी मज़ा की दुन्या में जा पोहंची थी.

एक राउंड चला तो रंडी बहुत थक्क चुकी थी..

उदय:- अब्ब इसकी छूट मारना कैंसिल.. अब्ब मुसलसल इसकी गांड हम तीनो बारी बारी 3 घंटों तक्क मारनेगे..

रंडी ने हाथ जोड़ दिए और मिन्नतें करने लगी.

रानीद:- मुझे छोड़ दो, मैं अभी और नहीं चुद सकती, मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा है... क्यों मेरे साथ ये सबब कर रहे हो.......

उदय:- पवन सेठ के बारे में क्या जानतिओ हो, उदय रंडी की आँखों में देखते हुए अचानक से hi बोलै तो रंडी घबराते हुए ऑंखें चुराने लगी......

अनु:- लो भई उदय जी, ये रंडी तो अपने काम की निकली.. मुझे लगता है ये अभी सबब सही से नहीं बताएगी.. जीतू तो मिर्चे ले कर आ.. कंडोम के ऊपर मिर्चें लगा कर इसकी गांड मारते हाँ.. खुद hi सबब बक्क देगी..

उदय;- हाँ जेतु जा और मिर्चें लेकर आ, इसे ज़यादा टाइम देने की ज़रूरत hi क्या है.. जीतू जाने लगा तो रंडी उदय के पैरों में गिर गई..

रंडी:- mmmmmmmmmm....... मैं सबब बता डोंगी पवन सेठ क बारे में.. पारर फिर मुझे वो जिदना नहीं रहने देगा, बहुत हरामी बाँदा है वो.... अब्ब तक्क तो उसे पता भी चल गया होगा, उसका नेटवर्क बहुत स्ट्रांग है.. उसका एक आदमी भी था मेरे साथ, उसका क्या किया है तुम लोगों ने..

अनु:- वो भी हमारे पास hi है, तू सबब बक्क जो जो जानती है, और जो जो तुमने किया है, वो भी सबब बता, कुछ भी छुपाया तो तेरा अंजाम तू खुद सोच लेना. हमें किसी पर दया करने की आदत नहीं है..

फिर उस रंडी से सबब hi बता दिया.. जब उससे पूछा गया क उसने अब्ब तक्क क्या कुछ किया है तो आना कानि करने लगी.. अनु के रंडी की गांड में पिस्टन घुसा दिया तो वो सबब फर्र फर्र बोलने लगी..

रंडी बहुत आगे की चीज़ निकली.. साली कुत्तिया ने कई लड़कियों को अगवा करवाया था.. शहर से बहार जा कर काम का लालच दे कर.. या किसी घर में घुस कर सभी को बेहोश करके जवान लड़कियों को किडनैप कर लाती थी, इसके साथ 2 आदमी और भी होते थे.. जिन्हे रंडी की कोठी में घुसते hi मार दिया गया था..

सबब डिटेल लेकर रंडी को भी शूट कर दिया गया.. ऐसो को माफ़ करना समाज क लिए बहुत खतरनाक होता है....... कितने hi घरों से इस कुत्तिया ने रौनक छीन ली थी...




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राजा और गुरनाम ने भी उस आदमी का एक एक अंग अलग कर दिया था.. जल्द hi राजा और गुरनाम समझ गए थे क ये कुत्ता पवन का ख़ास आदमी है.... उससे भी सबब इन्फो लेकर उसे भी शूट कर दिया गया...

इन्फो में रंडी और आदमी ने 3 गोदामों के बारे में भी बताया था..




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अपडेट ::: 117

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दन्न ने स से ुक्तये हुए अपने कई और भी आदमी दिल्ली के लिए रवाना कर दिए थे.

अब्ब तक्क दन्न के 300+ आदमी दिल्ली पोहंच चुके थे..

दन्न फ्रेंड्स ने भी दिल्ली और दिल्ली के बहार के इलाके छानने शुरू कर दिए थे, वो अपने लिए कोई बेस्ट प्लेस ढूंढ रहे थे, वो किसी ऐसी जगा अपना मैं बेस बना चाहते थे.. जहाँ उन्हें किसी से कोई खतरा न रहे..

पुलिस हो, कोई एजेंसी हो या स... कोई उनका कुछ भी न उखड सके.. दन्न एंड फ्रेंड्स लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से आरास्ता थे.. सभी क्कुह hi था, इनके पास..

दन्न और उसके फ्रेंड्स ने बहार से और भी बहुत कुछ अपने लिए मंगवा लिए था.

सबसे ख़ास जो उनके पास था, वो था ड्रोन कैमरा....

15 ड्रोन कामर्स लिए वो दिल्ली में दाखिल हुए थे.. मार्टियन एंड पार्टी ने अपने आदमियों को शहर में और शहर से बहार डरने सीएएम से चेकिंग क लिए भेजा हुआ था..

दन्न से स को लेके वो अभी बात कर hi रहे थे.. एक दिल्ली शहर से बहार की इन्फो कलेक्ट करने वाले एक लीडर की कॉल आने लगी..

मार्टियन:- दन्न डिनायल की कॉल है, मैं वो सुन्न lon..itna बोलकर मार्टियन ने कॉल पिक की.

डिनायल:- बॉस हमें दिल्ली से बहार 60 किओमेटेर दूर पहाड़ी इलाके में किसी बेस का आभास हो रहा है.. सुरंगो के ज़रिये अंदर जाने का रास्ता भी दिख रहा है.. पर बहार कोई आदमी नहीं दिखा हमें.. वहां आस पास कई गाडिओय्न के तीरों के निशान भी पाए गए हाँ.. और जैसी हमारी ट्रैंनिंग हुई है, उस हिसाब से हमने लगता है क यहाँ पर बहुत कुछ है..

DNN:-(khush होते हुए) मार्टियन फिर तो कमाल hi हो गया, जैसा डेनिएल ने कहा है, अगर वहां वैसा hi कुछ है तो हमें जल्द से जल्द उस जगा को अपने कब्ज़े में लेना hoga..wahan पर बेस बना कर तो हम जल्द hi दिल्ली पर अपना धंदा जमा लेंगे..

मार्टियन:- डेनिएल तुम वही रहो और मुझे पूरी रिपोर्ट दो.. तुम्हारे पास कितने आदमी हाँ..

डेनिएल;- बॉस मेरे पास 12 आदमी हाँ..

मार्टियन:- तुम लेना से कांटेक्ट करो, और दिल्ली से बहार जो भी हाँ, सभी को अपने पास बुला को.. और आस पास के पुरे एरिया को अपने अंडर ले लो.. अगर वो जगा हमारे काम की है तो जल्द से जल्द उसी हासिल करो..

डिनायल:- ok बॉस मैं करता हों लेना से बात..




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डिनर के बाद मैं, माँ, मेरी तितलियाँ और पूजा दीदी पार्क में टहल रहे थे..

हम सबब hi बहुत खुश थे.. मुझसे ज़यादा मेरी तितलियांमा और पूजा दीदी खुश थी..

दीदी अभी भी तोडा सा लंगड़ा कर चल रही थी.. यहाँ आने से पहले रानी ने दीदी की गांड में ऊँगली जोरसे दबा दी थी, जिस वजा से दीदी की गांड फिरसे दुःख गई थी... रानी खिलखिलाती हुई भाग गई थी..

माँ ने चलते समय दीदी के मोहन को चूम लिया था.. दीदी माँ के चूमने से शर्म गई थी..

प्रिय:- विजजूउउउ भाभी अभी भी शर्मा रही हाँ, रात में साड़ी शर्म उतारी नहीं क्या.....

जहान्वी:- जब तक दर्द रहेगा, शर्म भी रहेगी..

श्रुति:- दर्द तो जाते जाते जायेगा.. गांड एक hi बार में तो विज्जू के लुंड की आदि होने से रही..

माँ:- चुप करो सबब क्यों मेरी बेटी को पैशन कर रही हो तुम तीनो..

प्रिय ने माँ की गांड में ऊँगली डाली और हलके हलके दबाने लगी..

प्रिय:- माँ हम कहाँ दीदी को तंग कर रही हाँ. सच hi तो कहा है हमने. आप के जैसी गांड तो नहीं है ना दीदी की...

माँ ने दर्द के चलते पंतय नहीं पहनी थी, पिरया के माँ की गांड के छेड़ पर ऊँगली लगाने से माँ के बदन में मस्ती की लहर सी दौड़ गाइट hi, माँ सिसकी लेने लगी.. और बाकी सबब हस्स दिए.. दीदी और भी शर्म गई..

मैंने दीदी को अपनी बहन में भर लिया और उनके होंटो को चूसने लगा..

सबब देख कर हस्ससने लगें..

प्रिय:- दीदी अब्ब आप हम में से एक हाँ, तो हमारी जैसी बनना तो पड़ेगा hi.. हम सबब मिलकर एक जैसी hi रहेंगी.. शर्म तो हमारे अंदर भी है, पर हम अपनी शर्म की वजा से अपनी जीने क हसन पल नहीं खो सकतीं.. पता है दीदी जब्ब हम कोठे पर थी तो हमने कभी नै सोचा था क विज्जू हमारे शिव भी कभी किसी का होगा.. पारर देखो हालत ने विज्जउ को कितने हिस्सों में बाँट दिया है.. पारर हम फिर भी बहुत खुश हाँ.. हमारे विज्जू को इतना प्यार मिल रहा है, ये देख क्र हम अंदर तक्क निहाल हो चुकी हाँ..... विजजूउउ से सेक्स hi तो हमारी छह नहीं है.. बास जितनी महिलाएं विज्जू के आस पास जमा हो चुकी हाँ, तो विज्जउ से कुछ पल का प्यार पाने क लिए हमें ऐसे hi बेसहराम बन्न कर रहना पड़ेगा.. वर्ण सहराम के चक्कर में विज्जउ को देखते hi रह जाएंगी हम सबब.

विज्जू न तो किसी को इंकार कर सकता है, और न hi किसी को छोड़ सकता है, विज्जू का पूरा प्यार पाने क लिए सभी को hi विज्जू का पूरा टाइम चाहिए.. पारर विज्जउ किसी एक को नज़र अंदाज़ करके किसी और को पूरा टाइम नहीं दे सकता.. इसी लिए आप भी सभी के साथ शामिल होकर अपने हिस्से का प्यार प् लिया करें.

माँ ने प्रिय का मोहन चूम लिया.. दीदी भी सबब सुन रही थी..

दीदी ने मुझे चरों के सामने किश करना शुरू कर दिया.. दीदी अब्ब शर्म किये बिना hi मेरे होंटो को पुरे मैं से चूस रही थी.. कुछ देर बाद दीदी ने मुझे छोड़ा.

दीदी:- प्रिय किसी भी लड़की की लाइफ में जब्ब उसका हीरो आता है तो वो अपने हीरो को किसी के साथ बाँट नहीं सकती.. विज्जू के लिए मैं शुरू से hi ऐसी हों, मेरी फीलिंग्स और सोच भी तुम्हारे जैसी hi है. मुझे भी सभी का विज्जू से प्यार करना अच्छा लगता है, मेरा विज्जउ सब को hi बहुत पसंद है, ये देख आकर मुझे भी बहुत ख़ुशी होती है.. पारर प्रिय जैसा माहौल तुम्हे सालों से मिला है, उसने तुम सबब को बदला कर रख दिया है, विज्जू के आने के बाद मुझे भी एक अलग hi माहौल मिला है, विज्जउ के आने से पहले मई ऐसी नहीं thi,jaisi मैं अब हो गई हों.. मुझमे शर्म भी है, और बेसहरामि भी.. अभी मेरे लिए ये सबब नया नया है ना तो कुछ दिन तो लगेंगे hi.. मैं भी तो अपनी लाइफ तुम सबब के साथ भरपूर तरीके से जीना चाहती हों.. और फिर एक पत्नी का पति जैसा होगा, जैसा उसका ससुराल होगा, पत्नी को भी तो वैसा hi बन्न कर रहना पड़ता है, और रही बात विज्जू के प्यार को पाने की.. तो पहले भी साड़ी hi लड़कियों के सामने मैं विज्जउ से हर किसम का प्यार कर चुकी हों.. मैं तो विजू के साथ हर रात hi बिना लिबास के सोती रही हों, कभी मेरे और विज्जू के साथ rani,kabhi शिखा तो कभी रूपा, कभी शीतल तो कभी नताशा.. सबब के सामने hi तो मैंने विजजूउउ का प्यार हर अंदाज़ में पाया है..

jhanvi:-(didi को छेड़ते हुए) तो क्या आपने विज्जउ का लुंड भी सभी के सामने अपने मोहन में लिया है..... जहान्वी की बात से दीदी को छोड़ कर सबब जोरसे हस्सन लगे..

दीदी अचानक से hi फिरसे शर्मा गईं..

विजय:- हाँ दीदी मेरा लुंड सभी क सामने निचोड़ चुकी han.mere लुंड से निकलने वाली मलाई बहुत शॉक से पीती रही हाँ. दीदी को मुझसे और मेरे लुंड से बहुत प्यार है..

प्रिय:- मैं नहीं मानती, मुझे इस बात का यकीन नहीं है.... प्रिय की बात का

मतलब सबब hi समझ गए थे.. दीदी का चेहरा झुकता चला गया.. माँ के होंटो पर भी मुस्कान आने लगी... जहान्वी और षुरूति प्रिय को कंधे पर थपकी देने लगी..

jhanvi,shruti:- वेल दोने प्रिय, तुमने बहुत अच्छा सवाल उठाया है, अब्ब तो हमें भी दीदी की बात का यकीन नहीं रहा.. अगर विज्जउ दीदी की सिफारिश में कहे क दीदी हर किसम का प्यार सबके सामने hi विज्जू से कर चुकी हाँ तो उसे सबत करके दिखाया जाए.. माँ हम सबब सही कह रही हाँ ना..

माँ हस्ते हुए:- हाँ बिलकुल मैं भी तो तुम्हारी hi टीम में हों.... मैंने ड्डी को फिरसे अपनी बहन में भर लिया, दीदी का बदन कांपने लगा था.. दीदी सभी के सामने कई बार मेरे लुंड को अपने मोहन में ले चुकी थी.. अपनी छूट मुझसे चटवा चुकी थीं.. अपनी गांड पर मेरे लुंड की रगड़ से बहुत साड़ी सिसकियाँ ले चुकी थीं.. अभी भी दीदी में बहुत शर्म बाकी थी..

दीदी के होंटो को धीरे से चूसते हुए..

विजय:- क्या हुआ दीदी ऐसे हुए ठन्डे पसीने छोड़े जा रहे हाँ... ये कोई नयी बात तो है नहीं..

दीदी ने मेरी आँखों में देखा, वहां मुझे बहुत साड़ी शर्म और झिझक दिख रही थी.. धीरे धीरे दीदी की ऑंखें की शर्म और झिझक ख़तम होते हुए चमक में बदलने लगी.. दीदी की ऑंखें कुछ कर दिखने क लिए बेचैन सी दिखने लगी.. दीदी ने अचानक से hi मुझे वाइल्ड किश करनी शुरू कर दी.. दीदी के एक हाथ मेरे सर्र के पीछे हुआ और दूसरा हाथ मेरे लुंड पर आ लगा.. दीदी मुझे किश करते हुए मेरे लुंड को भी दबाने लगीं.. मुझे दीदी को ऐसे देख कर बहुत प्यार आयने लगा..

मेरे हाथ दीदी के चुत्तड़ो पर आ गए और मैं दीदी के चुत्तड़ो को मसलने लगा..

दीदी को फार्म में आते देख कर माँ और तीनो ने हलकी हलकी तालियां मारनी शुरू कर दीं.. सभी दीदी को अप्प्रेसियते करने लगीं..

दीदी ने कुछ देर मुझे किश किया, फिर किश तोड़ कर मेरी आँखों में नॉटी स्टाइल से देखते हुए बाक़िओं को भी देखने लगीं, फिर दीदी ने आस पास देखा कोई है तो नहीं, जब्ब कोई नहीं दिखा तो दीदी नीचे बैठ गईं और मेरी ज़िप खोल कर मेरे लुंड को बहार निकलने लगी..

जल्द hi मेरा लुंड बहार आ गया, जो अभी सर्र उठाने hi वाला था, दीदी के हाथ में आया तो दीदी ने सभी को एक स्माइल देते हुए मेरे लुंड को अपने मोहन में ले लिया. चरों से फिरसे तालियां बजाएं.. दीदी मेरे लुंड को मोहन में लिए हुए चूसने लगीं.. मेरे लुंड को भी इस सबब में मज़ा आने लगा.. दीदी के मोहन में जाते hi वो मज़े में आना लगा.. दीदी के मोहन की हीट पाते hi वो खड़ा होने लगा..

जैसे hi लुंड खड़ा होने लगा दीदी की स्पीड बढ़ने लगी.. लुंड के खड़ा होने से लुंड का साइज भी बड़ा होने लगा तो दीदी लुंड को चूसने हुए बाकि एक लुंड को मसलने लगीं..

बाकी भी सभी साइड में कड़ी हो गए थी.. दूर से किसी को कुछ पता नहीं चलना था, और पता चल भी जाता तो क्या हो जाता..

पैलेस के पार्क में पैलेस का राजा और उसकी रानियां थी.. तो फिर राजा के पैलेस में तो राजा और उसकी रानियों की hi चलनी थी.. जल्द hi मेरा लुंड पूरी तरह से जाफ गया और दीदी भी पूरी फार्म में आते हुए मेरे लुंड को चूसने लगीं..

माँ ने दीदी के सर्र पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.. दीदी मेरा लुंड चूस कर गरम हो गईं theen,unki बेताबी देख कर मैं समझ गया क दीदी अब्ब लुंड लिए बगैर नहीं रहने वाली..

विजय:- माँ जब्ब मूड बना hi दिया है, तो किसी कोने में चल के सभी चुदाई hi कर लेते हाँ, रूम में तो होती hi रहती है, आज खुले में hi सभी मिलकर लुंड और छूट का खेल खेलते हाँ...

प्रिय:- हाँ विज्जू आज ये मज़ा भी लेके देखते हाँ, दीदी छोडो विजजू के लुंड जको और udhar(jahan रौशनी कम् थी) चल के पूरा मज़ा लेते हाँ.. दीदी भी अब्ब पूरी तरह से बेसहराम बन्न जाना चाहती थीं.. उन्हों ने hi भी हाँ बोल दी..

हहम सभी पार्क के संसान हिस्से की और बढ़ चले.. वहां पोहंचे तो प्रिय ने माँ को किश करनी शरू कर दी.. माँ भी अपनी प्रिय से लेस्बियन खेल खेलने के मूड में आने लगीं..

मैंने दीदी को पकड़ा और दीदी की साड़ी खोलनी शुरू कर दी, कुछ देर में साड़ी साइड पड़े हुई थी.. पंतय तो गांड के दर्द क वजा से पहनी नहीं हुई थी.. मैंने दीदी का पेटिकाओत उठा दिया नीचे बैठ कर दीदी की छूट को चाटने लगा, दीदी की गले छूट में मेरी जीब का सवागत किया, दीदी के हाथ मेरे सर्र पर आ गए..

कुछ देर दीदी की छूट को चाटने क बाद मैंने दीदी के पेटिकाओत को दीदी के हाथ में थमाया... दीदी नशीली आँखों से मुझे देखने लैग. दीदी नीचे से नंगी हो चुकी थी... मैंने दीदी को ग्रास पर घोड़ी बनने का िसहरा किया तो दीदी मुस्कान देते हुए घोड़ी बन्न गयी..

मैं दीदी क बराबर आया और अपने लुंड को दीदी की छूट पर सेट करते हुए दीदी की छूट में एंटर करने लगा.. दीदी की गीली छूट मेरे लुंड को अपने अंदर लेने लगी, धीरे धीरे करके मैं सारा hi लुंड दीदी की छूट में उतार दिया, दीदी की सिसकियाँ शुरू हुई तो दीदी ने अपने होंटो को दबा कर अपनी सिसकियों को रोक दिया.

मैं दीदी की कमर को पकडे दीदी को छोड़ने लगा, दीदी को छोड़ते हुए मैंने माँ और बहनो को देखा तो वो एक दूसरे को किश करते हुए एक दूसरे के बूब्स दबा रही थीं.. माँ भी हमारी टीम मेंबर बन्न कर पूरा पूरा मज़ा ले रही थीं..

माँ अपनी प्रिय को बड़े चाओ से किश कर रही थीं.. और प्रिय भी माँ को किश करते हुए अपने दूध से भरे हुए मटकों को माँ के दूध से भरे हुए मटकों से रगड़ रही थी.. ऐसा hi कुछ जहान्वी और श्रुति कर रही थीं..

मैं चारों को देखते हुए दीदी की छूट से पानी निकलने लगा. मेरा मोटा लुंड दीदी की तंग छूट में अंदर बहार हो रहा था, दीदी की छूट एक बार फिरसे टाइट हो चुकी थी, एक hi रात में तो छोड़ने से तो पूरी तरह से खुलने से रही, मई दीदी की छूट को पूरी तरह से खोलने में लगा हुआ था, मेरे लुंड का फोकस दीदी की छूट में था तो मेरा पूरा फोकस चरों के चल रहे लेस्बियन सन पर रहा..

कुछ देर में hi पार्क का संसान एरिया सभी किस सिसकियों से गुनने लगा, ये भी इस पैलेस में होने वाला पहला ऐसा इंसिडेंट था, आज पैलेस भी कुछ ज़यादा hi खुश दिख रहा था..

ऐसे hi माहौल में चुदाई होती रही और दीदी की छूट ने पानी छोड़ दिया.. माँ ने ट्रॉउज़र पहना हुआ था जिसे नीचे करके प्रिय माँ की गांड को लीक कर रही थी.. तीनो तितलियों ने जींस की पेण्ट पहनी हुई थी, तीनो की पेण्ट खुल चुकित थी..

जहान्वी भी और शुरूई एक दूसरे की छूट में घुसी हुई थीं..

प्रिय ने जैसे hi देखा क पूजा दीदी की छूट में पानी छोड़ दिया है तो प्रिय ने माँ की गांड को चाटना बंद किया, और मेरे पास आ कर मुझे ग्रास पर लिटा दिया. अपनी पेण्ट और और पंतय को सरकते हुए मेरे लुंड पर अपनी छूट को रखते हुए नीचे बैठने लगीं, माँ ने प्रिय को देखा तो हस्ते हुए मेरे मोहन पर अपनी गांड रखकर बैठ गयीं..

मई माँ की छूट और गांड चाटने लगा, प्रिय मेरे लुंड पर उछलने लगी, मेरा लुंड फस फस कर प्रिय की छूट में जा रहा था.. माँ के बैठने से माँ की छूट सही से खुल गई थी, मेरी जॉब माँ की छूट में अंदर तक्क घुसने लगी..

मई अपनी जीब से अच्छी तरह से माँ की छूट की दीवारों से डायरेक्ट hi पानी पीने लगा.. दीदी की सांस अभी भी तेज़ चल रही थी.. दीदी भी मुझसे पार्क में और सबके सामने चुद के बहुत खुश थी. दीदी की शर्म आज ख़तम हो गई थी, दीदी ने सबके सामने चुड़के खुद को मनवा लिया था..

मैं माँ के चुत्तड़ो पर उँगलियाँ चलते हुए माँ की छूट से रस काशीद करने लगा.. मेरी एक ऊँगली माँ की खुल चुकी गांड में घुसने लगी तो माँ की सिसकी निकल गई..

माँ:- आह्हः विज्जउ वेता घुसा दे अपनी माँ की गांड में अपनी एक फिंगर, और दे दे अपनी माँ को एक और ख़ुशी, मज़ा आ गया विज्जू बीटा ऐसे खुले में तुझसे प्यार करके... ऐसे भी कभी मुझे मज़ा मिलेगा मैंने नहीं सोचा था.. अह्ह्ह ओह्ह्ह उफ़

और घुसा अपनी जीब और ऊँगली को मेरी छूट और गांड में...

प्रिय:- हाय विज्जउ उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह मा कितना ामज़ा आ रहा है, पैलेस को देख कर चुड़ते हुए, खुली और ठंडी हवा आईईईई ऊह्ह्ह्ह माआआआ मैं तो हवाएं में उड़ने लगी हों, मैं और मेरी छूट कितनी खुश हो रहिहन इस चुदाई से..

प्रिय ने भी अपने उछालें की स्पीड बढ़ा दी.. शायद माँ ने प्रिय के बूब्स को दबा दिया था, प्रिय की सिसकीअन बड़ी और बड़ी और फिर प्रिय भी झाड़ गई..

माँ ने प्रिय को साइड में किया और मेरे होंटो पर अपने होंटो रखते हुए एक हाथसे मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट कर दिया, माँ मेरे ऊपर आई तो मैंने एक धक्का मार कर माँ की छूट में लुंड उतार दिया..

25 मिंट में तीसरी बार मेरा लुंड किसी की छूट में घुसा था, आज तो मज़ा hi आ रहा था..

माँ मुझे किश करते हुए अपनी गांड को हिलने लगी. मैं भी माँ को किश करते हुए नीचे से अपने लुंड को माँ की छूट में अंदर बहार करने लगा..

माँ को प्रिय ने पहले से hi गरम कर दिए था, माँ मुझसे अपनी छूट और गांड भी चटवा चुकी थी, माँ की छूट आखरी सीमा पर आ चुकी थी, माँ ने मुझे किश करना छोड़ा और मेरे लुंड पर सही से बैठते हुए उछलने लगी, माँ की छूट में मेरा लुंड अंदर बहार होने लगा, माँ स्पीड से मेरा पूरा hi लुंड ले रही थी,. माँ सुपड तक मेरा लुंड को अपनी छूट से निकलती और फिरसे मेरे लुंड को एक hi बार में अपनी छूट में उतार लेती..

माँ की सिसकियाँ बद्दी तो माँ की स्पीड भी बढ़ गई.. माँ मेरे सीने पर हाथ रखते हुए तेज़ तेज़ मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी..

कुछ hi देर में माँ की छूट ने भी पानी छोड़ दिया.. मैंने जहान्वी और श्रुति को देखा तो वो मुझे तरसी हुई निगाहों से देख रही थीं..

didi,priya और माँ को मुझसे चुड़ते देख कर उन्हों ने एक दूसरे की छूट से मोहन हटा लिया था...

माँ की छूट ने पानी निकला तो जहान्वी मेरे पास आ कर घोसी बन गई... मैंने माँ को साइड में किया और जहान्वी के पीछे आते हुए जहान्वी की छूट में एक hi झटके में लुंड घुसा दिया.. जहान्वी की पूरी मस्ती में एक बड़ी सिसकी निकल गई... श्रुति मेरे पास आ गई और मुझे किश करने लगी.

मैंने श्रुति को किश करते हुए जहान्वी को छोड़ने लगा.. 4 मिंट में hi जहान्वी झटके कहते हुए झाड़ गयी..

श्रुति ने मुझे ग्रास पर धक्का दिए और मेरे लुंड के बराबर अपनी छूट रखते हुए पहल लुंड को अपनी छूट पर अच्छे से सेट किया, फिर वो स्पीड से मेरे लुंड पर बैठ गई.. इस बार मेरा चेहरा पैलेस की और था. और मैं पैलेस की बिल्डिंग को देखने लगा.. फिर मैंने इधर उधर नज़र घुअमाई, लेता हुआ था सबब सही से नहीं दिखा, पर जो भी दिखा वो देख कर बहुत मज़ा आया मुझे..

यौन पैलेस की बिल्डिंग से कुछ दूर पैलेस के hi पार्क में मेरा लुंड बार बार छूट बदल रहा था.. कैसा समा था ये, कितन मुनफ़रज़ नज़ारा था ये, क्या ऐसे भी कभी किसी ने किसी की छोड़ा होगा.. रंडियों को छोड़ कर तो ऐसे मौका बन्न hi जाया करते हाँ, कभी किसी ने अपनी hi माँ बहनो को अपने hi पैलेस में ऐसे खुले आम छोड़ा होगा..

हैआईईईई कितनी मज़ेदार फीलिंग्स मुझे आने लगी थी.. श्रुति की टाइट

छूट में मेरा लुंड फस्स फस्स कर अंदर बहार हो रहा था, आस पास पैलेस की रोशनियां चमक रही थीं.. मेरे पास hi माँ , दीदी और बहने छूट की आग को शांत करने के बाद लेती हुई श्रुति को चुड़ते हुए देख रही थी..

श्रुति ने मेरे सीने पर हाथ रखते हुए अपनी छूट को और भी टाइट करते हुए मेरे लुंड पर उछाल रही थी, इस मस्त नज़ारा का और भी मज़ा लेने क लिए मैंने शरूरी के बूब्स को थाम लिया, अब्ब तक्क मेरा लुंड भी चार्म पर उतर आया था, इतनी छूटों की खुशबु इतने मस्त माहौल में उसे मिल गई थी, वो आज पुरे जपोबन कर उतर आया था, उसकी राजन और भी फूल चुकी थी. मेरे लुंड का सुपडे श्रुतुइ की छूट की दीवारों को चूमता हुआ आगे पीछे होने अलग, मैंने श्रुति के फूल चुके दूध को नोचोड़े लगा, श्रुति की सिसकियाँ भी बढ़ चुकी थी..

बढ़ती भी क्यों न 4-4 छूट से पानी निकलते देख चुकी थी, उसकी छूट में तो तूफ़ान मचा हुआ था, उसके उछाल रहे बूब्स को मई पकड़ कर और भी उछाल रहा था.

श्रुति की उछाल कूद मेरे लुंड को और भी बेचैन करने लगी, मेरे लुंड का पानी भी श्रुति की छूट में निकलने के लिए बेक़रार होने लगा..

जैसे जैसे श्रुति की स्पीड बढ़ते गई, मेरे लुंड का सारा माल चलते हुए लुंड के सुपड तक्क ाँ पोहंचा..

श्रुति झटके खाते हे झड़ी तो मेरे लुंड ने भी हार मार कर श्रुति की छूट में खून उगलना शुरू कद दिया.

ये मेरा खून hi था, जो मेरे लुंड का पानी बन कर निकल रहा था..

शरूरी भी छूट का ठंडा करके साइड में लुढ़क गई. मई भी तेज़ तेज़ साँसे लेने लगा.. मैंने साइड में नज़र घुमा कर देखा तो सभी मुझे निहार रही थी..

माँ:- विज्जू बीटा आज के इस एडवेंचर का बहुत मज़ा आया, ऐसा लगा जैसे किसी हिल स्टेशन पर तुमसे प्यार किया है, यौन खुले आम ये सबब करके बहुत अच्छा और बहुत hi अलग लग रहा है, अंदर का सबब बहुत hi हरा भरा लगने लगा है.

प्रिय ने दीदी कर किश कर दी..

प्रिय:- थैंक्स दीदी हममे पूरी तरह से शामिल होने क लिए.. आगे भी कभी आपने शर्माना नहीं है..

दीदी:- मैं क्यों शर्माने लगी... दीदी इतना बोल कर प्रिय की छूट में ऊँगली करने लगी, मैं माँ और जहान्वी दीदी को देख कर खुश हो गए.. दीदी अब्ब सही से पुरे रंग में दिखने लगी थी..




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अपडेट ::: 118

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आज रूम में मेरे साथ माँ और पूजा दीदी सोइ थीं, आज की रात मैंने रेस्ट की थीं.. रूम में होने वाली चुदाई पार्क में कर ली थीं, दीदी को अभी रेस्ट दे दी थी, छूट के मज़े थे, तो गांड बहुत दर्द कर रही थी, दीदी की, माँ भी खुश थी. तो माँ और दीदी मुझसे लिपट कर सो गईं थे..

मैं निक्कर पहन कर सोया था, तो दीदी और माँ दोनों hi नाईट पहन कर सोइ थी. बिना ब्रा और पंतय के चुत्तड़ो पर आने वाली निघ्त्य पहन कर सोना भी क्या सोना है.. साड़ी रत hi चुत्तड़ नंगे रहते हाँ..

सूबा जब्ब मेरी आंख खुली माँ और दीदी दोनों के hi चुत्तड़ नंगे थे, और दोनों का hi एक एक हाथ मेरे सीने पर था और दोनों hi उलटी सो रही थीं.. जैसे hi मुझे इस बात का अंदाज़ा हुआ तो मेरे लुंड ने झटके मारने शुरू कर दिए..

मैंने माँ और दीदी क हाथ खुद पर्रे हटाए और उठ बैठा..

माँ और दीदी के पैरों में आते हुए मैं दोनों को देखने लगा, माँ और दीदी की गांड का फर्क निकलने लगा.. दोनों hi कमाल की दिख रही थीं, मेरा लुंड की अकड़न एक दुम्म hi आखरी हद्द तक्क जा पोहंची..

ऐसा मेरे साथ पहले बार हो रहा था, माँ और दीदी दोनों की hi गांड का मई फैन था.. दोनों की hi गांड मेरे सामने खुली पड़ी थीं और दोनों की hi गांड में मेरा लुंड घुस चूका था..

काश ऐसा होता क मैं एक साथ hi दोनों की गांड में अपना लुंड उतार देता.. चलो कोई बात नहीं, अलग अलग hi सही पारर आज माँ और दीदी की गांड तो मुझसे नहीं बचने वाली.......

मैं नंगा होकर अपने हाथ पर ढेर सारा थूक लगा कर लङकी मालिश करने लगा.

कभी माँ की गांड को देखता तो कभी दीदी की गांड को देखते हुए अपने लुंड की मालिश करने लगा..

माँ की गांड ज़यादा बेहतर थी और माँ की गांड का हक़ भी ज़यादा था तो मैं अपने लुंड की मालिश करते हुए झुका और माँ के चुत्तड़ो को चाटने लगा.. दोनों चूतड़ों को चाटने के बाद मैंने अपने लुंड पर से हाथ हटाया और माँ के चुत्तड़ पहला कर माँ की गांड को चाटने लगा.. माँ कसमसाने अलगी..

अच्छी से माँ की गांड को चाटने क बाद मैंने अपने लुंड को माँ की गांड के छेड़ पर अच्छे से सेट किया माँ के चुत्तड़ो को अच्छे से खोला.. लुंड का दबाओ बहदया तो वो माँ की गांड के छेड़ में फँस गया, माँ की कमर को पकड़ कर मैंने अपने लुंड का दबाओ भी बढ़ाना शुरू कर दिया.. माँ की नींद टूटने अलगी, लेकिन मैं नहीं रुका धीरे धीरे करके मैंने अपना सारा hi लुंड माँ की गांड में घुसा दिया..

माँ की टाइट गांड ने मेरे लुंड को आसानी से नहीं लिया था, माँ को दर्द हुआ तो माँ उठ गई माँ ने सर्र घुमा कर मुझे देखा, पहल तो वो हैरान हुई, फिर मुझे मुस्कान देते हुए बोलने लगी,..

माँ:- क्या हुआ, मेरे बेटे को सूबा सूबा माँ की गांड पर कुछ ज़यादा hi प्यार आने लगा है..

मैंने माँ के झुकता हुआ अपने लुंड को और भी माँ की गांड की गहराई में उतारता हुआ..

विजय:- माँ क्या करून, आप दोनों की hi गांड मुझे बेचैन करती रहती है, और आज तो आप दोनों ने hi सूबा सूबा मुझे अपनी गांड दिखा कर सरप्राइज कर दिया है, कैसे अब्ब मैं आप दोनों की गांड में लुंड उतारे बिना रह सकता हों..

मैं अपने लुंड को धीरे धीरे माँ की गांड में अंदर बहार करते हुआ माँ के साइड से गाल को चूमने लगा..

सूबा सूबा की इरेक्शन का भी एक अलग hi मज़ा होता है.. लुंड बुरी तरह से तना हुआ माँ की गांड की तिघटनेस को कम् करने की कोशिश कर रहा था..

माँ:- बीटा मेरी गांड भी तो तुम्हरी hi है, बजा दो उसकी बंद, और कार्डो उसे अच्छे से खुला, अपनी दीदी की भी गांड मारने का मैं है क्या अभी..

विजय:- हाँ माँ अभी दोनों की hi गांड के मज़े लेने के मूड में हों मई, वर्ण आज का सारा दिन hi बोर बोर लगेगा मुझे..

एक हाथ से मैंने माँ के चेहरे को घुमाया और माँ को किश करने लगा.. माँ के साइड से होंठ को किश करते हुए माँ की गांड में धक्को की भी स्पीड बढ़ने लगी..

जल्दी hi माँ की छूट ने भी पानी बहा कर माँ को मज़ा देना शुरू कर दिया..

मैंने दीदी को देखा.

विजय:- माँ देखों ना आपकी बहु कैसे मज़े से सो रही यही, उसे बीएड के हिलने का भी पता नहीं चल पा रहा, उसकी सास की गांड उसका पति मार रहा है और वो मज़े से सो रही है..

maa:-ahhh विजजूउ बीटा अच्छा है ना तू जल्दी से मेरी छूट का पानी निकल कर पूजा बेटी की भी गांड में अपना मूसल जैसा लुंड दाल दो, उसका भी दिन मेरी तरह से अच्छा गुज़रेगा...

मैंने दीदी के चेहरे को देखा तो वो किसी मासूम बच्ची के जैसे गांड नंगी किये हुए सो रही थी, मैंने भी माँ की गांड के बखिये उधेड़ने शुरू कर दिए..

मेरे हर एक धक्के से माँ की गांड और भी खुलती जा रही थी, मेरा मोटा और लमबा लुंड माँ की गांड को धुवां धार छोड़ रहा था, जल्द hi माँ की सिसकियाँ बढ़ने ालगीं, मुझे लगा का अब्ब दीदी उठ जायेगी, पारर दीदी नहीं उठी..

लगता है मेरा लुंड लेके hi उठेगी.. मैंने स्पीड बढ़ा कर माँ की अगंद मारनी शुरू कर दी..

कुछ मिंट के बाद माँ झाड़ गई तो मैं माँ को चूमता हुआ उठ खड़ा हुआ, मेरा लुंड माँ की गांड से आवाज़ निकलता हुआ बहार निकल आया, माँ अपनी सांस बहाल करने लगी, तो मैंने अपने लुंड को माँ की गांड की दरार पर मारना शुरू कर दिया, मुझे ऐसा करने में भी मज़ा आ रहा था..

मई दीदी के ऊपर आया.. सबसे है दीदी की गांड को छाता अच्छे से दीदी की गांड को नरम किया, दीदी हिलने लगी थीं उनकी नींद टूट रही थी..

मैंने अपने लुंड के सुआपद को दीदी की गांड पर रखा.. दीदी के चुत्तड़ो को खेँचाउर धीरे से लुंड को दीदी की गांड में फंसा दिया..

दीदी के ऊपर झुकते हुए एक धक्का मार दिया..

दीदी:- ोीीीी maaaaaaaaaaaa ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह दीदी गांड में लुंड घुसते hi एक झटके में उठ कड़ी हुयी..

विजय:- क्यों लुंड लिए बिना उठने मि आदर नहीं है ना, िटनिओ देर से माँ की गांड मार रहा हों, और आप हाँ क उठ hi नहीं रही थीं.

दीदी:- विज्जू प्लीज धीरे से, अभी मेरी गांड में दर्द है..

विजय:- अरे मेरी बुलबुल वही दर्द तो निचोड़ रहा हों. लुंड अआप्की गांड को अच्छे से खल देगा तो दर्द भी फ़ौरन hi चल जायेगा...

मैं दीदी के ऊपर आया और दीदी की गांड में बाकी का बचा लुंड भी 2 झटको में घुसा दिया.. दीदी रोने लगी..

दीदी को फीररसे दर्द होने लगा था, मैं दीदी को चुमते हुए धक्के मारने लगा, धीरे धीरे धक्के भी बढ़ते गए और दीदी की चीखें भी बढ़ती गयीं..

5 मिंट बाद दीदी की गांड का दर्द छूट में पानी आ जाने से ख़तम होने लगा, तो मैंने दीदी की गांड को भी माँ की गांड के साइज के हिसाब से बनाते हुए धक्के मारने लगा.. दीदी बीएड पर उछाल रही थीं.. नयी नयी गांड इस अंदाज़ से चूड़े तो दर्द भी होता है..

शुरू में दीदी को बहुत दर्द हुआ, पारर अब्ब वो शांत थी, और मेरे लुंड से अपनी गांड खुलने का पूरा मज़ा ले रही थी..

जल्द hi दीदी की भी सिसकियाँ बढ़ने लगी मेरे धक्कों की स्पीड भी बढ़ने लगी..

अगले 5 मिंट में दीदी की छूट में पानी छोड़ दिया...... मैंने दीदी की छूट से लुंड निकला तो माँ मुझे देख कर मुस्कुराने लगी.. माँ समझ गई अब्ब उनकी छूट की बारी है..

मैंने माँ की छूट भी मारनी शुरू कर दी माँ सूबा सूबा गांड और छूट खुलवा कर बहुत खुश थीं..

माँ की छूट से पानी निकल आकर दीदी की छूट से भी पानी निकला तो उसके बाद मेरे लुंड को दोनों ने hi चूस चूस कर ढीला कर दिया..

फिर तीनो hi मिलकर नहाये.. माँ और दीदी ने मेरे लुंड को फिरसे खड़ा क्र दिए था, लेकिन अब्ब दोनों की चुदाई का समय नहीं था.. तो मैं दोनों की छूट को चूम कर बाथरूम से बहार निकल आया..

बहार आ क्र सीधा बावर्ची काने में जा घुसा तो वहां भाभी और सोना आंटी दोनों hi थीं..

विजय:- खैर तो है आज दोनों कैसे एक साथ... दोनों के hi बूब्स को दबाते हुए पुछा..

भाभी:- (सिसकी लेते hue)kyun हम दोनों एक साथ नहीं मिल बैठ सकती..

विजय:- (दोनों को बारी बारी किस करते हुए) क्यों नहीं सूबा सूबा जल्दी उठना अच्छा होता है, क्या पता कभी कोई चांस भी बन्न जाए..

सोएं:- इसी लिए तो आज जल्दी उठी हों, आज तो तुमसे चुद के hi दिल को चैन मिलेगा.. आज मेरा बहुत मैं है तेरे लुंड को छूट में लेने का..

विजय:- सिर्फ छूट में गांड का क्या करना है बचा कर..

सोना;- पहले छूट तो मार लो, गांड भी मिल जाएगी, क्यों मालती..

bhabhi:-mera तो कोई मैं नहीं है गांड में लुंड लेने का.. छूट hi बहुत है, गांड अभी सील पैक है तो खुलवाने से जो दर्द होगा, अभी मेरा वो दर्द सहने का मूड नहीं है, तू ले ले दोनों छेड़ में विज्जू का लुंड... जा आज ऐश कर मेरी तरफ से तुझे छुट्टी है..

सोना:- क्या बात करती है, तू नहीं लेगी विज्जू का लुंड..

भाभी:- विज्जू का लुंड कौन छोड़ सकती है.. मैं तो कभी भी विज्जू के लुंड के बिना रहने को नहीं मानता... पारर तेरा पहली बार है ना तो तू पूरा मज़ा लेले.. विज्जू तो सभी का है, कहाँ भाग क्र जाएगा, जब्ब चहुँ विज्जू का लुंड अपनी छूट में ले सकती हों..

सोना आंटी ने भाभी को किश करनी शुरू करदी, भाभी के बूब्स भी वो अच्छे से दबा रही थी..

सोएं:- थैंक्स मालती मेरे लिए इतना सोचा तुमने.. चलो विज्जू आज फिरसे छत पर चलें..

मैं सोना आंटी का मूड देख कर इंकार कैसे कर सकता था, मैं तो अभी माँ और दीदी को छोड़ कर आया था, मई तो रिलैक्स hi था, अगर सोना आंटी का मैं था मुझसे छोड़ने का तो उनका दिल दुखाना अच्छी बात तो नहीं थी..

विजय:- हाँ चलो आज आपको भी खुश कर देता हों..........

10 मिंट बाद..

सोना:- अह्ह्ह्ह विज्जउ अपनी पूरी जीब घुसा दो मेरी छूट में अह्ह्ह मई छूट पानी छोड़ने वाली, ह्म्म्मम्म siiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaaaaaaaaa कितना सवाद आ रहा है................. सोना मेरे लुंड पर झुकी हुई सिसकियाँ ले रही थी, मेरा लुंड वो अपने मोहन से निकल चुकी थी... मैं सोना की गांड मङ्गली घुसाए, उसे घूमते हुए सोना की छूट में अपनी जीब डाले चाट रहा था..

सोना की हालत अंत सीमा पर थी, वो अपनी गांड हिलाते हुए झड़ने लगी.. उसकी कहत का सारा hi पानी मेरे मोहन में जाने लगा..

मैंने सोना को साइड में किया... वो ुतली लेट कर साँसे लेने लगी. अभी सोना की छूट शांत हो गई थी, तो मेरा मैं हुआ क पहले सोना की गांड मार लोन, जल्द hi वो फिरसे गरम हो जायेगी तो उसकी छूट में भी लुंड दाल दूंगा..

मैं सोना के ऊपर आया, सोना के दोनों चुत्तड़ो को खोल कर अपने लुंड को सोना की गांड के छेड़ पर टिका दिए... मैंने देखा क सोना की गांड खुश्क है तो मैंने अपने मोहन से काफी सारा थूक सोना की गांड पर गिरा दिए, एक ऊँगली से सोना की गांड के छेड़ पर उस थुक्क को मलना लगा, फिर एक ऊँगली सोना की गांड में घुसा कर अच्छे से नरम करने लगा.. फिर दूसरी ऊँगली भी दाल दी, सोना की गांड पहले से hi खुली हुई थी, सोना को पेरशानी नहीं हुई..

परेशानी तो मेरे लुंड के घुसते समय होगी सोना को, मेरा बड़ा लुंड सोना की गांड को पहाड़ देने वाला था..

उँगलियाँ निकल कर मैंने सोना की गांड के छेड़ पर अपने लुंड को सेट किया, सोना के चुत्तड़ो को खोल कर अपने लुंड का दबाओ बढ़ाया तो सुपड अंदर जाने लगा..

sona:-haaye विज्जू पहले अपनी सोना की गांड मारने का मैं है क्या, मार लो, उसे भी पूरा प्यार चाहिए न, बाद में क्या लेना अभी से hi उसे पूरा प्यार दे दो.. दाल दो अपने लुंड को अपनी सोना की गांड में और दे दो उसे अपना पूरा प्यार, कर डॉन अपनी सोना को पूरा, बहुत तदपि है तुम्हारी सोना प्यार के लिए... स्वामी के बाद तो मेरी ज़िंदगी hi नर्ग बन गई थी, अब्ब से तुम hi मेरे स्वामी हो, अपना लुंड दाल कर मुझपर अपना हक़ बना लो..

सोना के चुत्तड़ो को खोलते हुए मैंने एक धक्का मारा तो मेरा लुंड सोना की गांड में 5" तक उतरता चला गया, सोना की चीख निकल, लेकिन उसने खुद पर काबू प् लिया था, मैंने एक और धक्का मारा तो मेरा सारा लुंड सोना की गांड में जा घुसा.. सारा लुंड सोना की गांड में घुसा कर मैं रुक गया..

सोना लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.. कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिरसे सोना की गांड मारनी शुरू करदी, सोना की टाइट गांड में मेरा मोटा लुंड फस फस कर जा रहा था, सोना भी सालों से चुद चुद कर आदि हो चुकी थी, जल्द hi वो मज़ा लेने लगी, उसकी सिसकियाँ बढ़ने लगी तो मैंने भी धक्कों की स्पीड बढ़ा दी..

अगले 10 मिंट तक मैंने अच्छे से सोना की गांड को खोल दिए.. सोना की छूट भी अब्ब गरम हो चुकी थी, मैंने सोना की गांड से अपना लुंड निकला, और सोना की छूट पर सेट कर दिया था, सोना ने भी अपने चुत्तड़ उठा कर अपनी छूट को मेरे लुंड के हिसाब से सेट किया, जब मुझे लगा क अब्ब लुंड को सोना की छूट में घुसा देना चाहिए तो मैंने साइड मत पर अपने दोनों हाथो का वज़न डालते हुए एक धक्का मार दिया, सोना की छूट गीली थी, माँ की दवाई से टाइट हो चुकी थी, मेरा लुंड सोना की छूट की तिघटनेस को चीरता हुआ अंदर घुसता चला गया, सोना की दर्द और मज़े से भरपूर चीख गूँज उठी..

मैंने एक धक्का और मारा तो मेरा लुंड सोना की छूट में अंत तक जा पोहंचा.. सोना के तो मज़े hi हो गए थे..

सोना:- हम्मम्मम्मम्मम्हा अह्हह्ह्ह्ह siiiiiiiiii विज्जउ आज मुझे सही से शान्ति मिली है, मुझे बहुत सुकून मिला है, तेरे लुंड को अपनी छूट की गहराई में लेकर.. विज्जउ अब्ब रुकू मैट, बार बार मेरी छूट की गहराई नापते रहो, अह्ह्ह ओह्ह्ह मा

सालों बाद फिरसे मैं मज़े में हो गई हो, ऐसी प्यार भरी चुदाई क लिए hi तो मैं तरस रही थी..

मैं सोना को मज़ा देने क लिए अपने लुंड को सुपड तक्क बहार निकल कर अंदर बहार करने लगा. धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.. सोना की सिसकियाँ भी बढ़ने लगी. सोना की छूट फिरसे बहने वाली हो गई थी, सोना आहें भरने लगी, सोना अपनी गांड को हिलाते हुए मुझसे छोड़ने लगी.. सोना नशे में होनी लगी, तो सोना एक हाथ से अपने hi चुत्तड़ को सहलाने लगी..

जल्द hi सोना की छूट बे पानी छोड़ दिया.. मैं नहीं रुका जब तक सोना रिलैक्स नहीं हो गई, सोना की पानी छोड़ चुकी गीली छूट में मेरा लुंड पांच पांच धप्प धप्प की आवाज़ करता हुआ अंदर बहार होने लगा था.... मेरी जाएंगें स्पीड से सोना के चुत्तड़ो से टकरा रही थी..

सोना:- विज्जू अब्ब तुम लेटो मई खुद से hi सब karungi..maine लेट गया तो सोना ने पहले मेरे लुंड को अच्छे से साफ़ किया, फिर मेरे लुंड पर बैठ कर मेरे लुंड को अपनी छूट में लिया, जब्ब सारा लुंड सोना की छूट में छुप तो सोना मेरे सीने पर हाथ रखते हुए मेरे लुंड पर ऊपर नीचे होने लगी.. मेरा लुंड फिरसे फस फस कर सोना की छूट में जाने लगा.. धीरे धीरे करके सोना अपनी स्पीड बढ़ने लगी, सोना की छूट ने फिरसे गरम होना शुरू किया तो सोना ने मेरे लुंड को अपनी छूट से निकल कर अपनी गांड पर सेट कर दिया, मेरी आँखों में देखती हुई, मुझे स्माइल देती हुई सोना मेरे लुंड को खुदसे अपनी गांड में लेने लगी, धीरे धीरे करके सोना ने मेरा सारा hi लुंड अपनी गांड में ले लिया, फिरसे सोना से उछलना शुरू कर दिए, सोना की स्पीड फिरसे धीरे धीरे बढ़ने लगी...

कुछ मिंट अपनी गांड में मेरा लुंड लेते हुए अपनी गांड को पूरी तरह से खुलवाते हुए सोना ने फिरसे मेरे लुंड को अपनी गांड से निकल कर अपनी छूट में ले लिया, इसबार सोना की स्पीड बहुत तेज़ थी, सोना की छूट ने फिरसे पानी छोड़ना शुरू कर दिया.. सोना पूरी स्पीड से मेरे लुंड पर उछलने लगी तो मैंने सोना के उछाल रहे बूब्स को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिए, सोना के बूब्स फूल चुके थे, सोना के निप्पल अकड़ चुके थे, मैं सोना के बूब्स ुर निप्पल को दबाना लगा..

जल्द hi सोना की हिम्मत फिरसे से जवाब दे गई, सोना फिरसे खाद गई, सोना मेरे ऊपर गिरी तो मैंने सोना के चुत्तड़ो को पकड़ कर सोना की छूट में अपने लुंड को अंदर बहार करने लगा.. इस बार मेरी भी स्पीड बढ़ गई थी, सोना की छूट और गांड मरते हुए मैं भी बहुत मज़े में था, मेरा लुंड भी पूरी तरह से परफॉरमेंस देता हुआ सोना को खुश कर रहा था. सोना की सांस ठाक हुई तो सोना मेरे ऊपर से उठ गई.. सोना मेरे पैरों की और रुख कर मेरे लुंड पर बैठी और मेरे लुंड को अपनी गांड में लेते हुए स्पीड से छोड़ने लगी, इस बार मेरे झड़ने की बारी थी, इस बार सोना पुरे जोश से मुझे मज़ा दे रही थी, सोना को भी गांड में लुंड लेना बहुत पंसद था, सोना की स्पीड बढ़ती चली गई, और मेरे लुंड की नसें भी फूलती चली गई, सोना तक तक्क नहीं रुकी जब्ब तक्क मेरा लुंड अंदर से खली हो कर सारा पानी सोना की गांड को भर नहीं दिया...

सोना भी समझ गई क अब्ब मैं भी झाड़ गया हों तो सोना मेरे ऊपर से उठी और मेरे ऊपर सही से आते हुए मुझे किश करने लगी, इस बार सोना किश बहुत hi जानदार थी, सोना पूरी तरह से खुश थी, मेरे लुंड ने सोना को बहुत खुश कर दिए था.

सोना मुझे अपना प्यार देने लगी, और मई भी सोना को अपना प्यार देने लगा, सोना मुझे किश करते हुए मेरे चेहरे को भी चूम रही थी........

सोना:- थैंक ु विजजूउउ मुझे अपना पूरा प्यार देने क लिए, आज बहुत सालों बाद मई किसी पेड़ की ठंडी छाओं में खुद को महसूस कर पा रही हों.. तुमने मुझे बहुत सुकून दिए है.. ी लव यू विज्जू.. विज्जउ तुम सदा ऐसे hi रहना.. तुम्हारा प्यार पा के सभी को ढेर साड़ी खुशियां मिलती हाँ, चुदाई का क्या है, गन्दी लत्त तो सबब को hi लग्ग चुकी है, पारर तुम्हारे साथ चुदाई करके हमे सिर्फ सेक्स शान्ति hi नहीं मिलती.. हमें आत्मा तक की ख़ुशी मिलती है.. ऐसे hi सबब को अपना प्यार देते रहा करना.. सोना मुझे फिरसे चूमने लगी..

और मैं सोना को खुश देख कर बहुत खुश था.. यही तो मेरा काम था, अपनों में खुशियां बांटना.. मुझे रोज़ रोज़ नयी छूट की चाह नहीं थी, मुझे सिर्फ प्यार की चाह थी...

प्यार के बिना संसार में और है भी क्या...


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अपडेट ::: 119


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मुझे रात को hi राजा पार्टी ने रंडी और आदमी के बारे में बता दिया था, तो मैंने उनसे आज मिलकर बात करने का कह दिया था...

ब्रेकफास्ट क बाद मैं महक के साथ राजा पार्टी के पास जा पोहंचा..

विजय:- हाँ क्या इन्फो हाथ लगी है.... मेरे पूछने पर मुझे सबब बता दिया गया. जिसे सुन कर मई हैरान रह गया क इतना कुछ हो रहा है, और किसी को पता भी नहीं.. पुलिस डिपार्टमेंट क्या कर रहा है..

महक:- तुम सबब वही जाकर पहले और भी इन्फो कलेक्ट करो, फिर अगर वही कुछ कर गुजरने का चांस बने तो कर देना.. लेकिन कोई भी रिस्क मैट लेना.. और जो भी कुछ नया पता चला हमें बता देना.. अब्ब देर करना सही नहीं है, तुम सभी तैयारी करके निकल जाओ.... विजय तुम रंजीत अंकल और कम से सबब बात करलो.. जैसी इन्फो मिली है, उस हिसाब से तो हम वहां मौजूद गुंडों को मार सकते हाँ, उनके अड्डे तबाह कर सकते हाँ... पारर सभी को वहां से लाना आसान नहीं है, और फिर ये पुलिस मटर भी है.. तो सभी को इस सबब का पता होना चाहिए..

विजय:- हाँ महक मुझे भी ऐसा करना सही लग रहा है, राजा तुम सभी वहां जा कर पहले सबब अच्छे से चेक कर लो.. फिर जो भी रिपोर्ट बने हमें बता देना.. इमरजेंसी न हो तो पहले से कोई हमला न करना.. पहले सबब अच्छे से देख लेना....

फिर सबब और भी इसी टॉपिक पर बात करते रहे.... गुरनाम को रह रह कर अपने दोस्त की बहुत याद आ रही थी, वो अपने दोस्त को जल्द से जल्द पा लेना चाहता था... गुरनाम को लगता था क उसका दोस्त उसके बहुत काम आएगा..

एक घंटे बाद पांचू निकल गए.. और मई महक के साथ किसी कॉफ़ी शॉप के लिए निकल पड़ा..

शहर के सबसे फेमस कॉफ़ी शॉप पर बैठे हम कॉफ़ी पि रहे थे.. दिन के 11:40 का टाइम था..

अच्छी खासी रौनक लगी हुई थी, और वही कुछ स्टूडेंट बैठे स को डिसकस कर रहे थे, लड़कियां जहाँ एक्ससिटेड थी, वही कुछ लड़के इस टॉपिक से बोर हो रहे थे, ये वो चूतिये थे, जो लड़कियों से अपना मतलब निकलने क लिए फ्रेंडशिप रखते हाँ...

महक उन्हें बहुत घोर से देख रही थी..

विजय:- क्या देख रही हो वहां..

महक:- देख रही हों क ऐसे लोग कभी नहीं सुधरते.. गंदगी सिर्फ गुंडों में hi नहीं होती.. आम लोग के मैं में भी बहुत सा गंध भरा हुआ है.. जिसे भी मौका मिले वो मोहन मारने से बाज़ नहीं रहता... महक उन लड़कों को नफरत की निगाह से देखते हुए बोली

vijay:-aise लोगों क लिए hi तो गैंग बना रहा हों.. अगर मार्र्ण चाहते हाँ तो किसी को म्ररने से तो नहीं रोका जा सकता ना.. लिमिट में रहेंगे तो बचे rahenge,warna सभी का सिद्धार्त एंड फ्रेंड्स के जैसा hi हाल होगा....

मेरे कहने पर जूली अनुष्का से राब्ते में थी.. दोनों ladkiyan(jinka रपे हुआ था) अभी रेस्ट पर थीं.. अनुष्का और उसकी बेहेन ने अपना काम करना शुरू कर दिया tha..student को स से कनेक्टेड करने क लिए काम शुरू हो गया था... एक आर्गेनाइजेशन भी बनाई जायेगी, हमें सुटूडेन्ट की पावर भी चाहिए होगी. तभी हम ज़यादा स्ट्रांग हो सकते हाँ, सिर्फ मारा मारी से hi काम नहीं चलेगा, हमें हर्र फील्ड में hi अपने पाऊँ ज़माने होंगे..

कॉफ़ी ख़तम हुई तो हम उठ खड़े हुए टेबल पर hi बिल भी विथ टिप्प रख दिया गया था, हम बहार की तरफ चलने hi वाले थे क महक अचानक से hi रुक गई..

कुछ फासले पर मौजूद एक टेबल की तरफ महक बड़े घोरसे देख रही थी..

विजय:- क्या हुआ उधर क्या देख रही hi..

महक:- अक्सर फ्रेंड्स में ऐसा भी होता है विजय, क एक लड़की अपनी किसी फ्रेंड से दोस्ती के चलते कही आउटिंग पर निकल आती है, लेकिन असल में उसकी फ्रेंड किसी के चक्कर में ये सबब आकर रही होती है, और मुझे उस टेबल पर बैठी हुई लड़की को देख क्र कुछ ऐसा hi लग रहा है, वो लड़की सूरत से hi ऐसे माहौल की आदि मालूम नहीं पड़ती.. उसे फोर्स करके यहाँ पर लाया गया है, ohhhhhhhhhh मययययय गॉडडडडडडड विजय देखो उस लड़की के फेस एक्सप्रेसशन घोरसे देखो, ज़रूर उस लड़की को शोके से ड्रग्स पिलाया गया है.. चलो मेरे साथ

विजय:- रुको पहले देख तो सही क वो करने की सोच रहे हाँ..

महक:- उस बेचारी के साथ कुछ गलत न हो जाए..

विजय:- हामरे रहते किसी के साथ कुछ गलत कैसे हो सकता है..

उस टेबल पर 3 लड़के और दो लड़कियां बैठी हुई थीं.. जिसे ड्रग्स पिलाई गई थी, वो लड़की शलवार कमीज में थी, और दसूरी लड़की टाइट फिटिंग वाली स्लीवलेस शर्ट और जींस की पेण्ट में थी, पेण्ट भी घुटनो तक hi थी..

विजय:- स्टुपिड लड़की ऐसी आवारा लड़कियों से दोस्ती करते hi क्यों हाँ..

महक:- ये भी एक लेवल है.. ऑस्कर कई लड़कियों किसी के मीठे बोलों पर जल्द hi यकीन कर लती हाँ.. किसी लड़की में किसी को इंकार करने की भी एबिलिटी नहीं होती...

लड़की की हालत और भी कहरन हुई तो उसकी दोस्त ने उसे थम कर खड़ा कर दिया, वो कुछ पूछ भी रही थी.. फिर सभी खड़े हुए और लड़की को सपोर्ट देकर बहार ले जाने लगे..

चारो के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी..

मतलब सच में hi वही कुछ था जो महक ने सोचा था.. हम भी उनके पीछे चल पड़े..

बहार उनकी स्कार्पियो कड़ी हुई थी, सभी ने लड़की को पीछे वाली सीट पर लिटा दिया.. और किसी ठिकाने क लिए निकल पड़े..

हम भी उनके पीछे पार्किंग में पोहंचे थे.. महक ने ड्राइविंग सीट संभाली और उनके पीछे लग गई..

विजय:- महक इन्हे रास्ते में hi किसी जगा रोकते हाँ, लड़की के साथ रास्ते में hi कुछ गलत न करने लग जाएँ.

महक:- जानती हों विजय आज इनके का भी वही हाल होगा जो मैं ऐसे हरामजादो के साथ किया करती हों..

15 मिंट बाद hi गाडी एक वीरान इलाके से गुजरने लगी.. तो महक ने गाड़ी उनकी गाण्डी के सामने लाते हुए स्लो करदी.. वो हॉर्न बजने लगे, कुछ फासले पर महक ने गाडी रोक di..mehak गाडी से उत्तरी..

महक जैसी लड़की को देख कर तीनो hi बहार निकल आये वो ग़ुस्से में आने की बजाये राल टपकने लगे...

मैं गाडी में बैठा महक को देखने लगा.. महक अकेली hi काफी थी इन् क लिए..

महक उनके पास जाते hi हवा में उछली और तीनो को लिए हुए ज़मीन पर आ गिरी.. तीनो जो महक को देख कर चहकने लगे थे.. अब्ब वो चीख रहे थे.

महक:- क्या हुआ हराम जादो अब्ब उठो और दिखा मुझे अपने दांत.. माँ के लोदो किसी को ड्रग्स देकर रपे करने का बहुत मैं होता है, अभी कल hi तो स का नाम दिया गया है, कुछ दिन पहले hi कुछ लड़को को रपे करने की सजा दी गई है.

फिर भी तुम जैसे हरामज़ादे नहीं सुधरते... कैसे सुधरेंगे तुम जैसो की माँ और बने भी तो रोज़ किसी न किसी से चुदती होंगी, तभी तो तुम जैसे पैदा होते हाँ, हरामज़ादे गन्दी नाली के कीड़े...

महक की धुवां धार आग बरसाती हुई बातें सुनकर तीनो की hi माँ चुद गई..

एक जो शायद किसी अमीर माँ बाप की बिगड़ी हुई औलाद था...

लड़का:- बहुत बकवास क्र रही हो, तुम जानती नहीं हो मुझे, तेरा भी यही पर रपे कर डोंगा..

महक:- है है है है है मेरा रपे करेगा, साले मैं तो तुम सबब क लुंड hi काट देने वाली हों, बिना लुंड क कैसे रपे करेगा..

लड़का:- तू यहाँ से बचेगी तो कुछ करेगी ना... इतना बोल कर उसने अपने कोट की जेब से पिस्तौल निकल लिया....

हाथ ऊपर करने से पहले hi एक किक उसके हाथ पर पड़ी.. पिस्तौल 5 फ़ीट ऊपर उछाल कर गया.. जब्ब तक्क वो पिस्तौल नीचे गिरता महक ने हवा में उछाल कर दोनों पेअर खोल कर दो लड़को के सीने पर मार दिए, एक हाथ से उसी लड़के के सर्र के बालों को पकड़ कर दूसरे हाथ से पिस्तौल को हवा में hi कैच कर लिया..

जिन्हे किक्स लगी थी, वो उछाल कर दूर जा गिरे.. महक ने लड़के के सर्र पर पिस्तौल मार दिया, वो गिर कर बेहोश हो गया..

दोनों लड़के उठते उससे पहले hi दो बार

धायें......... धायें.......... की आवाज़ गूंजी और दो गोलियां दोनों लड़को के घुटनो के आर पार हो गईं, दोनों लड़के चीखने लगे.. महक ने गाडी में बैठी हुई लड़की को भी बहार आने को बोलै, लड़की डर्टी हुई बहार आ गई..

महक ने उसे थप्पड़ मार दिया.. वो नीचे गिर पड़ी, महका ने उसे बालों से पकड़ कर उठाया.. कुछ दूर दो गाड़ियां रुकी हुई थीं, वो भी शायद गोलियों की आवाज़ सुन चुके थे, मरने से बचने क लिए वो वही रुक गए थे..

महक:- तेरी छूट में ज़यादा आग लगी है तो तू किसी को बर्बाद क्यों करना चाहती है... अगर इतनी hi आग लगी है तो अपनी माँ और बेहेन को लेकर किसी कोठे पर जा कर बैठ जाओ, रोज़ hi कई लुंड तेरी और तेरी माँ बेहेन की छूट में घुसेंगे तो शान्ति मिल जायेगी..

लड़की थार थार काँप रही थी...

लड़की:- मुझे छोड़ दो, मेरे डैड तुम्हे ज़िंदा नहीं छोड़ेगे.. लड़की दररते हुए अटकते हुए बोल रही थी..

महक:- कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर कुछ लड़कों को रपे के चक्कर में डाँडो से मार मार कर लोथड़ों में तब्दील कर दिया गया था.. क्या तुमने उस बात से कोई असर नहीं लिया था.. तू क्या समझती है तू लड़की होकर बछ जायेगी.. नहीं तेरा भी वही हशर होगा.. तेरा बाप बहुत बड़ी टॉप है ना, तो उसे तेरा जिस्म के सैंकड़ों टुकड़े भेज दिए जाएन्गे..

महक ने मेरी तरफ देखा तो मैं सबब समझते हुए गाड़ी से बहार आ गया..

महक:- इन कुत्तों को गाड़ी में डालने में मेरी मदद कार्डो..

विजय:- मतलब का करिया करम तुम खुद अपने हाथो से करने वाली हों.. गुड देखने में मज़ा आएगा..

महक हस्सन लगी..

मैंने गुंडों को उनकी hi स्कार्पियो में डाला, स्कार्पियो में से लड़की को निकल कर अपनी गाडी में डाला, दोनों लड़कियां महक के पास थी..

मई स्कार्पियो में बैठा स्कार्पियो को फार्महाउस की तरफ लेजाने लगा..





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फार्महाउस पर पोहंचे, तो हमें फिरसे अपने बीच में देख कर सभी बहुत खुश हुए.. महक मज़लूम लड़की को उठा कर गाडी से बहार निकली..

महक:- गाड़ियों में कुछ गुंडे हाँ उन्हें निकल कर लाओ.. एक लड़की भी hai,use भी रगड़ते हुए लाओ.....

महक ने लड़की को एक रूम में पोहंचाया, ड्रग्स उसपर हावी हो चुकी थी. वो पूरी तरह से होश में नहीं थी, उलटी सीढ़ी हरकतें कर रही थी..

महक ने उसे बीएड पर सुला दिया.. बहार आ कर

महक:- क़ैदियों से..... कुछ दिन पहले एक घंटा घाटी टी. शायद जेल में रहते तुम में से किसी ने सुना हो .. 2 लड़कियों का रपे हुआ था, और फिर जिन लड़कों ने लड़कियों का रपे किया tha.unhe टार्चर करके मार दिया गया था... क्या तुममे से किसी ने कुछ सुना था..

क़ैदी बोलने लगे, कुछ क़ैदी इस बारे में सुन चुके थे,..

महक:- ये लड़के और लड़की भी मिलकर एक लड़की का रपे करने वाले थे.. अगर हम न पोहचते तो इस मासूम लड़की का भी रपे हो जाता.. हम कोई और काम करें या न करें, एक काम ज़रूर करेंगे क रपीएस्ट को भयानक मौत ज़रूर देंगे.. तो अभी इन सभी के साथ भी वही कुछ किया जाने वाला है..

चलो अब्ब तैयारी करते हाँ, सभी को गुनाहो भरी ज़िन्दगी से मुक्त करते हाँ...

सभी एक्ससिटेड हो गए थे. सबब hi वही जाने लगे... चरों एक बड़े रूम में फर्श पर बेहोश पड़े हुए थे..

महक:- सबब अपने अपने चेहरे कवर करलो.. और रूम में एक जगा वेदो रिकॉर्डिंग भी चालू कार्डो..

सब ने अपने चेहरे कवर कर लिए... मैंने और महक ने भी अपने फेस कवर कर लिए थे...

महक लड़की और लड़कों के पास बैठी, गाडी में से hi महक ने खंजर भी निकल लिया था...

कैमरा की तरफ देखते हुए महक बोलने लगी..

महक:- अभी दिन hi कितने हुए हाँ, 2 लड़कियों का बुरी तरह से रपे कर दिया गया.. लड़कियां अपने हक़ के लिए बोल भी न सकीं. लड़कियों के साथ हुई घटना को दबा दिया गया... फिर हमने दोनों लड़कियों का रपे करने वाले को भयंकर टार्चर करके मार दिया... फिर भी किसी को अकाल नहीं आई..

मैं एक बात आप सबब को बता देना चाहती हों, क जो भी दिल्ली शहर में किसी लड़की का रपे करेंगे, ज़ोर ज़बरदस्ती करेगा.. मैं उसकी माँ चुद के रख दूंगी..

कोई किसी मला का बीटा हो, किसी डॉन का बीटा हों, किसी मिनिस्टर का बीटा हो, कोई भी हो उसका बछना मुमकिन नहीं है...

बहुत दुःख के साथ कहना पद रहा है, क ऐसा अक्सर स्कूल कॉलेजेस ुनिवर्सिज़ में अक्सर hi देखने सुनंने को मिलता रहता है... कई लड़के और लड़कियों रपे जैसे घटिया काम करते हुए ख़ुशी महसूस करते हाँ..

स्टूडेंट सिर्फ अपनी पढ़ाई पर धयान दें.. किसी लड़की को फाॅर्स करके, रपे करके बर्बाद मैट करें.. वर्ण क्या फायदा उनकी ज़िन्दगी जल्द hi ख़तम कर दी जायेगी.. चाँद दिन अगर वो इस दुन्या में रहना चाहते हाँ तो खुद को बदल लें वर्ण उसका अंजाम बहुत hi भयानक होगा..

कुछ लड़ियाँ भी अपने बॉयफ्रैंड्स के साथ मिलकर उन्हें नयी नयी लड़की ढूंढ कर देती हाँ, वो रईस माँ बाप की औलाद हाँ तो क्या, वो किसी की भी इज़्ज़त उतार सकती हाँ....

नहीं अब्ब से कोई लड़की हो या लड़का किसी के साथ कुछ गलत नहीं कर सकेगा.. ऐसे हर्मियों के लिए मई मैदान में आ गई हों.. एक एक को चीयर कर रख डोंगी..

पहले दिखाया गया टार्चर किसी को सही राह कर नहीं ला सका, अब्ब टार्चर का तरीका कार बदला जा रहा है.. आप सबब भी इस टार्चर को देखिये और खुद को गलत राह पर जाने से बचाइए. किसी को बर्बाद मैट करो, किसी के खवाबो को चकना चूर मैट करो.. खुद के खवाब पुरे नहीं कर सकते तो किसी को उसकी राह से मैट भटकाओ.. वर्ण फिर अपने अंजाम के लिए तैयार रहो..

इतना बोल कर महक ने झांजर से सभी लड़के और लड़कियों के कपडे काटने शुरू कर दिए.. महक का भयानक रूप देखकर सारे क़ैदी कांपने लगे थे..

महक ने जल्द hi लड़की समेत चरों को नंगा कर दिया... कपडे काटने से चरों के hi बदन से खून निकलने लगा था..

महक बड़े मज़े से ये सबब कर रही थी, हर रोज़ hi महक एक नया रूप मेरे सामने आ रहा था, मुझे महक ये सब करते देख कर बौह्त खुश था, कोई तो मिला था मुझे अपने जैसा... महक भी मेरी hi तरह थी, डेरिंग और दरिंदगी में मेरे जैसी थी, सोच के मामले में भी महक मेरे जैसी hi थी..

फर्क था तो बास एक hi.......... मेरा लुंड छूट के बिना रहने का आदि नहीं था, और महक ड्रग्स अडिक्ट होने के बावजूद भी सेक्स से कोसों दूर थी..

महक:- यहाँ ग्लव्स नहीं हाँ क्या..... क़ैदियों में कोई बोलै तो नहीं, पारर एक फ़ौरन hi बहार चला गया और ग्लव्स ने कर आ गया..

महक ने ग्लव्स पहने और फिर एक लड़के का लुंड पकड़ कर चीरना शुरू कर दिया था.. दो लड़के तो पहले से hi घुटनो पर गोलियां लगने से ज़ख़्मी थे.. उन दोनों में से एक के लुंड को महक ने चीरने शुरू कर दिया था..

उसकी चीखें बहुत hi भयानक थीं.. लुंड जो हलके से दबा दिया जाए तो दर्द सहन नहीं होता, यहाँ तो खंजर से महक उनके लुंड चीयर रही थी.. कैसे वो इस दर्द को सहन कर पाटा ..

उसकी भयानक चीखों से मेरे शिव सबके hi दिल देहल उठे.. बाकी के होशशइ में से वापिस आने लगे..

लीडर लड़का सबसे पहले होश में आया और फिर जैसे hi उसकी नज़र अपने दोस्त के छिरर्र रहे लुंड पर पड़ी तो उसके होश फिरसे उड़द गए, पर अब्ब वो बेहोश नहीं हो सकता था.. वो ज़ोर ज़ोर से चीखने लगा..

तीसरा लड़का और लड़की भी होश में आने लगी.. वो भी ये सबब देख कर दहशत ज़ादा हो गए और भयंकर आवाज़ में चीखने लगे..

लड़की की चीखे सबसे ज़यादा दहशत वाली थी, लड़की अपना सर्र पकडे ज़ोर जोरसे चीखने लगी..

महक सभी को नज़र अंदाज़ करते हुए मज़े से उसका लुंड चीयर रही थी.. कुछ hi देर में उसका लुंड कही लम्बी लम्बी धारों में बदल बया..

महक:- अब्ब कौन अपना लुंड मुझसे चिररवाना चाहता है... लीडर और लाड़गड़ा लड़का चीखते हुए उठ कर भागने लगे..

रूम में इतने लोगों के रहते वो कैसे भाग सकते थे, वो खुद को बचने क लिए दीवाना वॉर चीखने लगे, पारर उनकी चीखे सुनने वाला कोई नहीं था..

महक ने फिर दोनों लड़कों के लुंड भी चीर दिए.. लुंड के बिना ज़िंदा रहने का कोई मतलब hi तो नहीं है.. एक एक करके महक ने तीनो के hi गले काट दिए. लड़की चीख चीख कर पागल हो गई थी..

उसकी हालत देख कर hi पता चल रहा था क वो अब्ब दिमागी तौर पर किसी काम की नहीं रही... महक के इशारा पर कैमरा को ऑफ कर दिया गया..

महक:- इस लड़की के लिए इतनी सजा काफी है, अगर कभी होश में आई तो सबब याद रखेगी, कभी भूलेंगे नहीं.. और वैसे भी वीडियो के वायरल होने से इसकी थू ठयऊ तो होगी hi.. सब hi इसे नंगा देख चुके हाँ, और इसके करतूत भी जान चुके हाँ.

महक और मैं रूम से बहार आ गए..

महक के फ्रेश होने के बाद क़ैदियों से कुछ देर बात की फिर मज़लूम लड़की को उठा कर पैलेस क लिए निकल पड़े.. वहां पोहंच कर जूली की मदद से वीडियो को वायरल भी करना था...




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दिन के तीन बज चुके थे... दन्न एक बार फिरसे अपने फ्रेंड्स से राब्ते में था..

दन्न:- ये कुत्तिया महक का स से कुया कनेक्शन है.. और वो क्यों उसके साथ मिलकर ये सब करती फिर रही है....

मार्टियन:- अब्ब तो समझ में आ गया ना दन्न. मुंबई में रेखा बाई के कोठे पर भी

महक का hi दमाग चला होगा.. महक hi उस लड़के के साथ मिलकर ये सबब करती फिर रही है.. महक का किसी तरह से श्वेता के बेटे से राब्ता हुआ होगा, और फिर दोनों hi मिलकर ये सबब करते फिर रहे हाँ... अब मुझे नहीं लगता क वो लड़का श्वेता का बीटा विजय नहीं होगा...

दन्न:- मार्टियन अब्ब तो सबब कुछ समझ में आने लगा है, श्वेता का बीटा hi स है, और वही अपनी माँ, बहनो और सभी को दिल्ली में लाया होगा, और जैसे पहले उसने एक एक करके सभी गैंग्स को ख़तम किया, उससे एक बात क्लियर हो जाती है, क वो मुझसे बचने क लिए खुद को पावरफुल बनाने की कोशिश में लगा हुआ है.. और सबसे पहले उसने शंकर गैंग को ख़तम करके पैलेस पर कब्ज़ा किया होगा..

मार्टियन ड्रोन कैमरा तो हमारे पास हाँ hi, तो फिर देर करना सही नहीं है, पहले हमें अपना शक दूर कर लेना चाहिए, ड्रोन कैमरा से पैलेस के अंदर का सबब hi देख लेते हाँ.. मैं भी आअज hi दिल्ली आ रहा हों.. तुम अपने 4-5 आदमियों को पैलेस की तरफ भेज कर बाकी के सभी को शहर से बहार भेज कर उस बेस पर कब्ज़ा जमाओ.. अब्ब जल्द hi हमें वहां बैठ कर दिल्ली पर भी अपना धंदा सेट करना है, और उस स या जो भी वो है उससे भी इस दुन्या से उठाना है, पहले तो मूड था क उससे बच कर धंदा करते हाँ, पारर अब्ब मुझे लग रहा है, क उसे मारे बगैर हम अपना धंदा नहीं जमा पाएंगे.. और फिर ये जुंग श्वेता से भी जुडी हुई है, विजय उर्फ़ स को अब्ब इस हम अपने हिसाब से देखेंगे.. सबब सोच समझ कर और प्लान से करना है..

दन्न की बात सुन कर सभी खुश हो गए..

सबब:- ये है असली दन्न, और हमें भी ऐसा hi दन्न चाहिए, अब्ब तो जो होगा देखा जाएगा.. हम भी कोई गए गुज़रे नहीं हाँ, इंटरनेशनल लेवल पर हमारा धंदा hai..humse टकराना स के लिए बहुत घातक होगा.. वो खुद में बहुत कुछ होगा, पर हमारे आगे वो कुछ नहीं......





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थैंक्स अलोक भाई..!!

दन्न ीनता चालक तो है hi क सबब जान ske,DNN को भी एक इशारा hi चाहिए सबब समझने क लिए, ऐसे hi तो नहीं पुरे महाराष्ट्र पर हुकूमत कर रहा है, दन्न बहुत ज़हीन है, वो जान गया है क स और महक मिलकर ये सब कर रहे हाँ, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के साथ वो विज्जू के लड़ने वाला है, स वस दन्न जुंग मज़े की होगी..
 
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