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अपडेट NO.81
मेरी आंख सीधा सुबह खुली जब मेरी आंख खुली मेरा हाथ में किसी का हाथ था जब मैं न्य आंखें खोल क देखा तो रानी का हाथ था जिस को मैं न्य कस क पकड़ा हुवा था और वह भी उठी होइ थी और बीएस मुझी देखी जा रही थी.
मैं हार्बर क उठा जिस सी वह होश में ी थी और मैं न्य उसका हाथ चोर दिया.
मैं:- आईएम सॉरी मुझी पता नहीं चला कब मैं न्य हाथ पाकर लिया.
रानी:- अरे कोई बात नहीं वैसी आपको कोई परेशानी थी.?
मैं:- N..Nahi मैं ठीक हूँ.
रानी:- तो रात को मेरा हाथ इतना कस क क्यू पकड़ा था क कहीं भाग जाओं गई मैं.?
मैं:- रात सी.?
रानी:- जी रात को अचानक पाकर लिया पता ही पेहली मैं दर गई फिर जब देखा आप सू रही हैं तो मैं न्य भी रहंय दिया और सू गई सोच जब उठो गई चोर दी गए लेकिन अभी भी पकड़ा था.
मैं:- सॉरी मुझी पता नहीं चला और मुझी उठा देती.
रानी:- अरे सोते हुवे इतने ाच्य लग रही थय उठाने का डिल hi नहीं किया और सुबह सी माँ 3 बार बुलाने आ चुकी हैं.
मैं:- मतलब.? टाइम क्या हुवा.?
मैं न्य टाइम देखा तो 10 बज रही थय मतलब इतनी देर तक सू रहा था मैं.
मैं:- ओह्ह no मुझी तो जाना था लेट होजाओं गए.
रानी:- रिलैक्स कुछ नहीं होता आराम सी चली जाना.
मैं जड़ली सी वाशरूम चला गया हुए नाहा क बाहिर आया तो मेरी कापरी पारी थय और मैं पेहेन क नीची चला गया जहाँ सब बैठी थय.
शांति:- इतनी देर सी उठे हो दोनों काहिर तो है न.
मैं:- हाँ वह थोड़ी तबियत खराब थी इसी लिए देर सी सोता रहा.
भाग्य:- हाँ रानी उठी होइ थी और यह सू रहा था इसकी तबियत नहीं थी ठीक ीा लिए वह नीची देर सी ी.
शांति:- वह सब चोर इन सब को ज़रा शोपिंग जाना ही तो साथ जाये गए तो आसानी होजाये गई.
मैं:- कोण कोण जा रहा ही.?
बुआ:- मैं तो नहीं जा रही यह लड़कियां hi जाये गई बीएस.
मैं:- अमित कहाँ ही.?
बुआ:- वह भैया क साथ गया ही.
शांति:- रानी किरण भाग्य और रश्मि hi जाये गई बीएस.
मैं:- हम्म्म चलती हैं नाश्ता क्र लोन.
फिर मैं नाश्ता करनी बेथ गया तभी किरण नीची अति होइ दिखी एक बार भी मैं न्य उसकी तरफ नहीं देखा.
शांति:- किरण तो रेडी ही न यह लय जाये गए तुम लोगों को.
किरण:- हाँ माँ मैं रेडी हूँ.
शांति:- और तेरी आंखें क्यू लाल होइ हैं नींद नहीं ी क्या.?
किरण:- हाँ मैं ठीक हूँ माँ.
और इधर सैम यह सुनता ही और उठ क बाहिर चला जाता ही यह कह क.
मैं:- रेडी होकय बाहिर अजना मैं वेट क्र रहा हूँ बाहिर.
रानी:- नाश्ता तो ठीक सी क्र लेती.
मैं:- नहीं भूक नहीं ही.
यह कह क मैं बाहिर गारी क पास आज्ञा.
किरण क बारी में मैं जितना न सोचना की कोशिश क्र रहा था उतना hi ध्यान उसकी तरफ जा रहा था क वह रात भर रोटी रही होगी.
लेकिन तभी दिमाग में सी आवाज़ ी.
"वह क्यू रोये गई उसको कहाँ प्यार था जो था वह बीएस गलत फेहमी थी वह भी मुझी. "
फिर सोचों में गम रहा फिर सब बाहिर रेडी होकय आ गई.
मैं ड्राइविंग सीट पी बेथ गया.
रानी यज्ञ बेथ गई और बक्र तीनो पिच्य बेथ गई.
मैं गारी चलने लगा वह अपनी बातून में लग गई मैं बिना कुछ बोले गारी चलने लगा.
रश्मि:- तुझी क्या होगया ही बारे चुप चुप रहंय लगा ही.
मैं:- कुछ नहीं बीएस वैसी hi आपकी गर्ल्स टॉक में मैं क्या बोलूं.?
रश्मि:- कुछ दिनों बाद तेरी सगाई ही एक्ससिटेड नहीं लग रही तुम दोनों.
मैं:- आप हो न मेरी जगह एक्ससिटेड होने क लिए.
रश्मि:- मतलब तूने अपने लिए कापरी भी नहीं लिए.?
मैं:- नहह आप hi लय लेना.
भाग्य:- सही ही तेरी लिए हम Hi डीडे क्रय गए.
फिर कुछ देर में हम मॉल आगये.
वह सब अंदर चली गई. और किरण सब सी पेची चल रही थी और बार बार पिच्य मोर क डेल्ह रही थी लेकिन मैं बिना कुछ ध्यान क गारी को पार्क करनी चला गया और जब पार्क क्र क अंदर गया जब तक वह दूकान में घुस चुकी थी.
मैं:- आप शोपिंग क्र क काफी में अजना.
यह कह क मैं वहां सी सीधा काफी में चला गया जहाँ मैं न्य कोल्ड ड्रिंकः आर्डर की और पीने लगा और तभी मेरा फ़ोन बजा.
देखा तो नूर का कॉल था.
मैं न्य पिक की कॉल.
नूर:- Hello मेरी जान किसी हो.?
मैं:- मैं एक डैम बरिया तुम बताओ किसी हो.?
नूर:- आपके बिना किसी होंगी.? सब बोहत याद क्र रही हैं आपको.
मैं:- बीएस कुछ दिनों में वापिस आ जाओ गए.
नूर:- ी मिस यू सूऊओ मच.
मैं:- में तो! बीएस कुछ दिन और मैं घर आ जाओं गए.
नूर:- O.k अपना ख्याल रखना मुझी माँ बुला रही हैं bye. ी लव यू.
मैं:- ी लव यू तू!
फ़ोन कट....
मैं वहां सी निकल क मॉल घूमने लगा तभी मैं एक शॉप क सामन्य सी गुज़जर रहा था मेरी नज़र एक ड्रेस पी गई.
न जाने क्यू मैं उसमें किरण को इमेजिन क्र लिया जिस में वह बाला की ख़ूबसूरत लग रही थी.
मैं उस दूकान पी चला गया और उस सी वह ड्रेस पैक करनी को कह दिया और लय क मैं पाय क्र क बाहिर निकला hi था क कोई मुझसी टकरा गया और वह गिरने लगा. मैं न्य जल्दी सी उसकी कमर पाकर ली.
जब उसके बल पिच्य हुवे तो यह किरण थी.
उसके चेहरी पी पेहली घबराहट थी लेकिन जैसी hi उसकी नज़र सामन्य गई सब कुछ भूल क बीएस आंखों में देखनी लगी.
मैं भी एक डैम उसकी आंखों में खू गया इस वक़त मुझी कुछ नहीं पता था मैं बीएस उसकी आंखों में खोया हुवा था मैं अलग होना चाहता था पर छह क भी अलग नहीं हो पा रहा था.
हमारी आंखें बात क्र रही थी जिनको हम नहीं समझ पा रही थय.
तभी किसी क बोलनी पी मुझी होश आया.
आदमी:- यह अचानक मौसम को क्या होगया बर्रिश शुरू होगी.
लोगों क बात करनी सी हम होश में ए और मैं न्य उसको सीधा किया और वहां सी चला गया.
सैम क जाने क बाद किरण को ऐसा लगा क कोई उसका डिल चिर क लय गया हो और उसको अभी कुछ देर पेहली ख़ुशी मिली थी वह फिर सी गायब होगी.
तभी उसकी नज़र नीची गई वहां एक पैकेट रखा था.
किरण:- यह मेरा तो नहीं ही फिर यहाँ किसी.?
वह उठा क दुकानदार क पास लय अति ही.
किरण:- यह बैग किसी का गिर गया ही.
शॉपकीपर:- मम वह सर जिसकी साथ आपकी तकर होइ यह उन्ही का ही.
किरण:- O.k मैं उन्ही दी दूँ गई.
किरण बाहिर अति ही और बैग को देखती ही और सोचती ही.
क्या मैं खोलो.?
उसको बुरा लगा तो.?
खोल hi लेती हूँ.
वह अंदर देखती ही और ड्रेस देख उसकी आंखें चमक जाती हैं क्यू क ड्रेस बोहत सुन्दर था.
तभी वह तीनो भी वही आजाती हैं.
रश्मि:- वाओ किरण कितना सुन्दर ड्रेस ही.
भाग्य:- हामी बताया भी नहीं और खरीद लिया.
किरण:- आपको चाहिए रख लो.
रश्मि:- अब तेरी साइज का ड्रेस हम तीनो को नहीं ए गए किसी लय लें. हम अंदर सी पोछती हैं और होंगी.
वह तीनो अंदर चली जाती हैं.
किरण सोचती ही.
यह बात तो ठीक ही बिलकुल मेरी साइज का ही अगर इन में सी किसक क लिए लिया होगा तो साइज डिफरेंट होगा.
क्या मेरी लिए लिया.?
किरण को यह एहसास होती hi उसका डिल खुश होजाता ही और वह खिल उठती ही और झूमनी लगती ही क शायद उसको सैम माफ़ क्र दी गए.
िद्र मैं अभी होइ घटना को सोच रहा था.
के होगया था मुझी.? कहीं फिर सी.?
"फिर सी कहाँ.? तो आज भी उस सी प्यार करता ही तेरा पहला प्यार भली hi कोमल हो लेकिन तुझी प्यार क सही मैने उसी सी प्यार करनी क बाद पता चली. "
मेरी दिमाग क एक हिस्से सी आवाज़ ी.
"लेकिन धोका तो उसने दिया hi था. न तो उस सी प्यार किसी क्र सकता ही. "
दोसरी हिस्से सी आवाज़ ी.
"उस में उसका पूरा कसर नहीं था मनुपलते किया गया था उसको यह मात भूल. "
"कसूर तो मेरा भी नहीं था लेकिन किसी क जज़बतून क साथ खेलनी का हक़ किसनी दिया. "
"गलती साब सी होती ही वह अपनी गलती की सजा पा चुकी ही. "
"किसी सजा.? "
"तुझसी इतने साल डोर रवहनी की सजा वह जो काट रही ही उसका क्या भूल मात तूने तरप उसकी आंखों में देखि ही. "
"उसकी आंखें पेहली भी झूट बूल चुकी हैं. "
" इस बार सच था यह साब सच था. "
मैं:- शट उप.
सब लोग मेरी तरफ देखनी लगी.
मैं वहां सी सीधा नीची गारी क पास चला गया और दिमाग को शांत करनी लगा.
कुक्सह समझ नहीं आ रहा था क्या करूं.?
अभी क लिए साडी सोचूँ को साइड क्र क मैं न्य शांत रहंय का फैसला किया.
थोड़ी देर में सब नीची आ गई.
रश्मि:- टुन्नाय कुछ नहीं लिया.?
मैं:- नहीं दीदी आप न्य बोलै था न क आप लय ए गई इसी लिए नहीं लिया.
भाग्य:- हाँ तेरी लिए हम न्य शोपिंग क्र ली ही घर जा क दिखाओं गई.
हम लोग गारी में बेथ गए.
तभी मैं न्य रश्मि दीदी को एक डिब्बा दिया.
वैनिला आइस क्रीम का जैसी देख वह बोहत खुश होइ.
रश्मि:- वाओ वैनिला थैंक यू थैंक यू.
ुषोने न्य मेरा गाल चुम लिया. जो क वह अल्सर करती थी न hi मैं न्य और नहीं उन्होंने कभी इसका गलत मतलब लिया.
मैं:- थैंक किस लिए आपको रोज़ आइस क्रीम खिल्लनि का वडा किया था जो पूरा क्र रहा हूँ.
रश्मि:- मतलब वह आइस क्रीम तो भेजता था.?
मैं:- हम्म्म.
दीदी यज्ञ होकय मेरी गली लग गई.
मैं:- क्या हुवा आप इमोशनल होगी.
रश्मि:- तो बोहत ाचा ही काश तो मेरा होसकता हम कितना खुश होते एक साथ अगर किरण न्य वह गलती.
अभी कुछ बोलती उस सी पेहली मैं न्य उनको बिच में hi रोक दिया.
मैं:- दीदी मैं आपसी वडा किया था न क मैं हमेशा आपकी साथ खरा हूँ. और मैं वादे सी मुकर जाओं उस सी बेहतर मार जाओं.
तभी रानी और किरण न्य एक साथ मेरी चेहरी क करीब अपना हाथ बढ़ाया. जो क टकरा मेरी होंठों पी आज्ञा.
दोनों को अपनी गलती एहसास हुवा तो एक डैम सी पिच्य क्र लिया अपना हाथ.
भाग्य:- अब चोरो यह बातें चल रश्मि आइस क्रीम कहती हैं.
और दोनों आइस क्रीम खाने लगी और किरण और रानी दोनों गारी सी बाहिर देख रही थी और सोचों में गम थी.
मैं गारी चलनी लगा और कुछ देर में हम हवेली पोहंच गए.
तो बे कंटिन्यू.
मेरी आंख सीधा सुबह खुली जब मेरी आंख खुली मेरा हाथ में किसी का हाथ था जब मैं न्य आंखें खोल क देखा तो रानी का हाथ था जिस को मैं न्य कस क पकड़ा हुवा था और वह भी उठी होइ थी और बीएस मुझी देखी जा रही थी.
मैं हार्बर क उठा जिस सी वह होश में ी थी और मैं न्य उसका हाथ चोर दिया.
मैं:- आईएम सॉरी मुझी पता नहीं चला कब मैं न्य हाथ पाकर लिया.
रानी:- अरे कोई बात नहीं वैसी आपको कोई परेशानी थी.?
मैं:- N..Nahi मैं ठीक हूँ.
रानी:- तो रात को मेरा हाथ इतना कस क क्यू पकड़ा था क कहीं भाग जाओं गई मैं.?
मैं:- रात सी.?
रानी:- जी रात को अचानक पाकर लिया पता ही पेहली मैं दर गई फिर जब देखा आप सू रही हैं तो मैं न्य भी रहंय दिया और सू गई सोच जब उठो गई चोर दी गए लेकिन अभी भी पकड़ा था.
मैं:- सॉरी मुझी पता नहीं चला और मुझी उठा देती.
रानी:- अरे सोते हुवे इतने ाच्य लग रही थय उठाने का डिल hi नहीं किया और सुबह सी माँ 3 बार बुलाने आ चुकी हैं.
मैं:- मतलब.? टाइम क्या हुवा.?
मैं न्य टाइम देखा तो 10 बज रही थय मतलब इतनी देर तक सू रहा था मैं.
मैं:- ओह्ह no मुझी तो जाना था लेट होजाओं गए.
रानी:- रिलैक्स कुछ नहीं होता आराम सी चली जाना.
मैं जड़ली सी वाशरूम चला गया हुए नाहा क बाहिर आया तो मेरी कापरी पारी थय और मैं पेहेन क नीची चला गया जहाँ सब बैठी थय.
शांति:- इतनी देर सी उठे हो दोनों काहिर तो है न.
मैं:- हाँ वह थोड़ी तबियत खराब थी इसी लिए देर सी सोता रहा.
भाग्य:- हाँ रानी उठी होइ थी और यह सू रहा था इसकी तबियत नहीं थी ठीक ीा लिए वह नीची देर सी ी.
शांति:- वह सब चोर इन सब को ज़रा शोपिंग जाना ही तो साथ जाये गए तो आसानी होजाये गई.
मैं:- कोण कोण जा रहा ही.?
बुआ:- मैं तो नहीं जा रही यह लड़कियां hi जाये गई बीएस.
मैं:- अमित कहाँ ही.?
बुआ:- वह भैया क साथ गया ही.
शांति:- रानी किरण भाग्य और रश्मि hi जाये गई बीएस.
मैं:- हम्म्म चलती हैं नाश्ता क्र लोन.
फिर मैं नाश्ता करनी बेथ गया तभी किरण नीची अति होइ दिखी एक बार भी मैं न्य उसकी तरफ नहीं देखा.
शांति:- किरण तो रेडी ही न यह लय जाये गए तुम लोगों को.
किरण:- हाँ माँ मैं रेडी हूँ.
शांति:- और तेरी आंखें क्यू लाल होइ हैं नींद नहीं ी क्या.?
किरण:- हाँ मैं ठीक हूँ माँ.
और इधर सैम यह सुनता ही और उठ क बाहिर चला जाता ही यह कह क.
मैं:- रेडी होकय बाहिर अजना मैं वेट क्र रहा हूँ बाहिर.
रानी:- नाश्ता तो ठीक सी क्र लेती.
मैं:- नहीं भूक नहीं ही.
यह कह क मैं बाहिर गारी क पास आज्ञा.
किरण क बारी में मैं जितना न सोचना की कोशिश क्र रहा था उतना hi ध्यान उसकी तरफ जा रहा था क वह रात भर रोटी रही होगी.
लेकिन तभी दिमाग में सी आवाज़ ी.
"वह क्यू रोये गई उसको कहाँ प्यार था जो था वह बीएस गलत फेहमी थी वह भी मुझी. "
फिर सोचों में गम रहा फिर सब बाहिर रेडी होकय आ गई.
मैं ड्राइविंग सीट पी बेथ गया.
रानी यज्ञ बेथ गई और बक्र तीनो पिच्य बेथ गई.
मैं गारी चलने लगा वह अपनी बातून में लग गई मैं बिना कुछ बोले गारी चलने लगा.
रश्मि:- तुझी क्या होगया ही बारे चुप चुप रहंय लगा ही.
मैं:- कुछ नहीं बीएस वैसी hi आपकी गर्ल्स टॉक में मैं क्या बोलूं.?
रश्मि:- कुछ दिनों बाद तेरी सगाई ही एक्ससिटेड नहीं लग रही तुम दोनों.
मैं:- आप हो न मेरी जगह एक्ससिटेड होने क लिए.
रश्मि:- मतलब तूने अपने लिए कापरी भी नहीं लिए.?
मैं:- नहह आप hi लय लेना.
भाग्य:- सही ही तेरी लिए हम Hi डीडे क्रय गए.
फिर कुछ देर में हम मॉल आगये.
वह सब अंदर चली गई. और किरण सब सी पेची चल रही थी और बार बार पिच्य मोर क डेल्ह रही थी लेकिन मैं बिना कुछ ध्यान क गारी को पार्क करनी चला गया और जब पार्क क्र क अंदर गया जब तक वह दूकान में घुस चुकी थी.
मैं:- आप शोपिंग क्र क काफी में अजना.
यह कह क मैं वहां सी सीधा काफी में चला गया जहाँ मैं न्य कोल्ड ड्रिंकः आर्डर की और पीने लगा और तभी मेरा फ़ोन बजा.
देखा तो नूर का कॉल था.
मैं न्य पिक की कॉल.
नूर:- Hello मेरी जान किसी हो.?
मैं:- मैं एक डैम बरिया तुम बताओ किसी हो.?
नूर:- आपके बिना किसी होंगी.? सब बोहत याद क्र रही हैं आपको.
मैं:- बीएस कुछ दिनों में वापिस आ जाओ गए.
नूर:- ी मिस यू सूऊओ मच.
मैं:- में तो! बीएस कुछ दिन और मैं घर आ जाओं गए.
नूर:- O.k अपना ख्याल रखना मुझी माँ बुला रही हैं bye. ी लव यू.
मैं:- ी लव यू तू!
फ़ोन कट....
मैं वहां सी निकल क मॉल घूमने लगा तभी मैं एक शॉप क सामन्य सी गुज़जर रहा था मेरी नज़र एक ड्रेस पी गई.
न जाने क्यू मैं उसमें किरण को इमेजिन क्र लिया जिस में वह बाला की ख़ूबसूरत लग रही थी.
मैं उस दूकान पी चला गया और उस सी वह ड्रेस पैक करनी को कह दिया और लय क मैं पाय क्र क बाहिर निकला hi था क कोई मुझसी टकरा गया और वह गिरने लगा. मैं न्य जल्दी सी उसकी कमर पाकर ली.
जब उसके बल पिच्य हुवे तो यह किरण थी.
उसके चेहरी पी पेहली घबराहट थी लेकिन जैसी hi उसकी नज़र सामन्य गई सब कुछ भूल क बीएस आंखों में देखनी लगी.
मैं भी एक डैम उसकी आंखों में खू गया इस वक़त मुझी कुछ नहीं पता था मैं बीएस उसकी आंखों में खोया हुवा था मैं अलग होना चाहता था पर छह क भी अलग नहीं हो पा रहा था.
हमारी आंखें बात क्र रही थी जिनको हम नहीं समझ पा रही थय.
तभी किसी क बोलनी पी मुझी होश आया.
आदमी:- यह अचानक मौसम को क्या होगया बर्रिश शुरू होगी.
लोगों क बात करनी सी हम होश में ए और मैं न्य उसको सीधा किया और वहां सी चला गया.
सैम क जाने क बाद किरण को ऐसा लगा क कोई उसका डिल चिर क लय गया हो और उसको अभी कुछ देर पेहली ख़ुशी मिली थी वह फिर सी गायब होगी.
तभी उसकी नज़र नीची गई वहां एक पैकेट रखा था.
किरण:- यह मेरा तो नहीं ही फिर यहाँ किसी.?
वह उठा क दुकानदार क पास लय अति ही.
किरण:- यह बैग किसी का गिर गया ही.
शॉपकीपर:- मम वह सर जिसकी साथ आपकी तकर होइ यह उन्ही का ही.
किरण:- O.k मैं उन्ही दी दूँ गई.
किरण बाहिर अति ही और बैग को देखती ही और सोचती ही.
क्या मैं खोलो.?
उसको बुरा लगा तो.?
खोल hi लेती हूँ.
वह अंदर देखती ही और ड्रेस देख उसकी आंखें चमक जाती हैं क्यू क ड्रेस बोहत सुन्दर था.
तभी वह तीनो भी वही आजाती हैं.
रश्मि:- वाओ किरण कितना सुन्दर ड्रेस ही.
भाग्य:- हामी बताया भी नहीं और खरीद लिया.
किरण:- आपको चाहिए रख लो.
रश्मि:- अब तेरी साइज का ड्रेस हम तीनो को नहीं ए गए किसी लय लें. हम अंदर सी पोछती हैं और होंगी.
वह तीनो अंदर चली जाती हैं.
किरण सोचती ही.
यह बात तो ठीक ही बिलकुल मेरी साइज का ही अगर इन में सी किसक क लिए लिया होगा तो साइज डिफरेंट होगा.
क्या मेरी लिए लिया.?
किरण को यह एहसास होती hi उसका डिल खुश होजाता ही और वह खिल उठती ही और झूमनी लगती ही क शायद उसको सैम माफ़ क्र दी गए.
िद्र मैं अभी होइ घटना को सोच रहा था.
के होगया था मुझी.? कहीं फिर सी.?
"फिर सी कहाँ.? तो आज भी उस सी प्यार करता ही तेरा पहला प्यार भली hi कोमल हो लेकिन तुझी प्यार क सही मैने उसी सी प्यार करनी क बाद पता चली. "
मेरी दिमाग क एक हिस्से सी आवाज़ ी.
"लेकिन धोका तो उसने दिया hi था. न तो उस सी प्यार किसी क्र सकता ही. "
दोसरी हिस्से सी आवाज़ ी.
"उस में उसका पूरा कसर नहीं था मनुपलते किया गया था उसको यह मात भूल. "
"कसूर तो मेरा भी नहीं था लेकिन किसी क जज़बतून क साथ खेलनी का हक़ किसनी दिया. "
"गलती साब सी होती ही वह अपनी गलती की सजा पा चुकी ही. "
"किसी सजा.? "
"तुझसी इतने साल डोर रवहनी की सजा वह जो काट रही ही उसका क्या भूल मात तूने तरप उसकी आंखों में देखि ही. "
"उसकी आंखें पेहली भी झूट बूल चुकी हैं. "
" इस बार सच था यह साब सच था. "
मैं:- शट उप.
सब लोग मेरी तरफ देखनी लगी.
मैं वहां सी सीधा नीची गारी क पास चला गया और दिमाग को शांत करनी लगा.
कुक्सह समझ नहीं आ रहा था क्या करूं.?
अभी क लिए साडी सोचूँ को साइड क्र क मैं न्य शांत रहंय का फैसला किया.
थोड़ी देर में सब नीची आ गई.
रश्मि:- टुन्नाय कुछ नहीं लिया.?
मैं:- नहीं दीदी आप न्य बोलै था न क आप लय ए गई इसी लिए नहीं लिया.
भाग्य:- हाँ तेरी लिए हम न्य शोपिंग क्र ली ही घर जा क दिखाओं गई.
हम लोग गारी में बेथ गए.
तभी मैं न्य रश्मि दीदी को एक डिब्बा दिया.
वैनिला आइस क्रीम का जैसी देख वह बोहत खुश होइ.
रश्मि:- वाओ वैनिला थैंक यू थैंक यू.
ुषोने न्य मेरा गाल चुम लिया. जो क वह अल्सर करती थी न hi मैं न्य और नहीं उन्होंने कभी इसका गलत मतलब लिया.
मैं:- थैंक किस लिए आपको रोज़ आइस क्रीम खिल्लनि का वडा किया था जो पूरा क्र रहा हूँ.
रश्मि:- मतलब वह आइस क्रीम तो भेजता था.?
मैं:- हम्म्म.
दीदी यज्ञ होकय मेरी गली लग गई.
मैं:- क्या हुवा आप इमोशनल होगी.
रश्मि:- तो बोहत ाचा ही काश तो मेरा होसकता हम कितना खुश होते एक साथ अगर किरण न्य वह गलती.
अभी कुछ बोलती उस सी पेहली मैं न्य उनको बिच में hi रोक दिया.
मैं:- दीदी मैं आपसी वडा किया था न क मैं हमेशा आपकी साथ खरा हूँ. और मैं वादे सी मुकर जाओं उस सी बेहतर मार जाओं.
तभी रानी और किरण न्य एक साथ मेरी चेहरी क करीब अपना हाथ बढ़ाया. जो क टकरा मेरी होंठों पी आज्ञा.
दोनों को अपनी गलती एहसास हुवा तो एक डैम सी पिच्य क्र लिया अपना हाथ.
भाग्य:- अब चोरो यह बातें चल रश्मि आइस क्रीम कहती हैं.
और दोनों आइस क्रीम खाने लगी और किरण और रानी दोनों गारी सी बाहिर देख रही थी और सोचों में गम थी.
मैं गारी चलनी लगा और कुछ देर में हम हवेली पोहंच गए.
तो बे कंटिन्यू.