Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance) - Page 9 - SexBaba
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Hindi Desi Sex - Saim (Love,Thrill,Romance)

अपडेट NO.81


मेरी आंख सीधा सुबह खुली जब मेरी आंख खुली मेरा हाथ में किसी का हाथ था जब मैं न्य आंखें खोल क देखा तो रानी का हाथ था जिस को मैं न्य कस क पकड़ा हुवा था और वह भी उठी होइ थी और बीएस मुझी देखी जा रही थी.

मैं हार्बर क उठा जिस सी वह होश में ी थी और मैं न्य उसका हाथ चोर दिया.

मैं:- आईएम सॉरी मुझी पता नहीं चला कब मैं न्य हाथ पाकर लिया.

रानी:- अरे कोई बात नहीं वैसी आपको कोई परेशानी थी.?

मैं:- N..Nahi मैं ठीक हूँ.

रानी:- तो रात को मेरा हाथ इतना कस क क्यू पकड़ा था क कहीं भाग जाओं गई मैं.?

मैं:- रात सी.?

रानी:- जी रात को अचानक पाकर लिया पता ही पेहली मैं दर गई फिर जब देखा आप सू रही हैं तो मैं न्य भी रहंय दिया और सू गई सोच जब उठो गई चोर दी गए लेकिन अभी भी पकड़ा था.

मैं:- सॉरी मुझी पता नहीं चला और मुझी उठा देती.

रानी:- अरे सोते हुवे इतने ाच्य लग रही थय उठाने का डिल hi नहीं किया और सुबह सी माँ 3 बार बुलाने आ चुकी हैं.

मैं:- मतलब.? टाइम क्या हुवा.?

मैं न्य टाइम देखा तो 10 बज रही थय मतलब इतनी देर तक सू रहा था मैं.

मैं:- ओह्ह no मुझी तो जाना था लेट होजाओं गए.

रानी:- रिलैक्स कुछ नहीं होता आराम सी चली जाना.

मैं जड़ली सी वाशरूम चला गया हुए नाहा क बाहिर आया तो मेरी कापरी पारी थय और मैं पेहेन क नीची चला गया जहाँ सब बैठी थय.

शांति:- इतनी देर सी उठे हो दोनों काहिर तो है न.

मैं:- हाँ वह थोड़ी तबियत खराब थी इसी लिए देर सी सोता रहा.

भाग्य:- हाँ रानी उठी होइ थी और यह सू रहा था इसकी तबियत नहीं थी ठीक ीा लिए वह नीची देर सी ी.

शांति:- वह सब चोर इन सब को ज़रा शोपिंग जाना ही तो साथ जाये गए तो आसानी होजाये गई.

मैं:- कोण कोण जा रहा ही.?

बुआ:- मैं तो नहीं जा रही यह लड़कियां hi जाये गई बीएस.

मैं:- अमित कहाँ ही.?

बुआ:- वह भैया क साथ गया ही.

शांति:- रानी किरण भाग्य और रश्मि hi जाये गई बीएस.

मैं:- हम्म्म चलती हैं नाश्ता क्र लोन.

फिर मैं नाश्ता करनी बेथ गया तभी किरण नीची अति होइ दिखी एक बार भी मैं न्य उसकी तरफ नहीं देखा.

शांति:- किरण तो रेडी ही न यह लय जाये गए तुम लोगों को.

किरण:- हाँ माँ मैं रेडी हूँ.

शांति:- और तेरी आंखें क्यू लाल होइ हैं नींद नहीं ी क्या.?

किरण:- हाँ मैं ठीक हूँ माँ.

और इधर सैम यह सुनता ही और उठ क बाहिर चला जाता ही यह कह क.

मैं:- रेडी होकय बाहिर अजना मैं वेट क्र रहा हूँ बाहिर.

रानी:- नाश्ता तो ठीक सी क्र लेती.

मैं:- नहीं भूक नहीं ही.

यह कह क मैं बाहिर गारी क पास आज्ञा.

किरण क बारी में मैं जितना न सोचना की कोशिश क्र रहा था उतना hi ध्यान उसकी तरफ जा रहा था क वह रात भर रोटी रही होगी.

लेकिन तभी दिमाग में सी आवाज़ ी.

"वह क्यू रोये गई उसको कहाँ प्यार था जो था वह बीएस गलत फेहमी थी वह भी मुझी. "

फिर सोचों में गम रहा फिर सब बाहिर रेडी होकय आ गई.

मैं ड्राइविंग सीट पी बेथ गया.

रानी यज्ञ बेथ गई और बक्र तीनो पिच्य बेथ गई.

मैं गारी चलने लगा वह अपनी बातून में लग गई मैं बिना कुछ बोले गारी चलने लगा.

रश्मि:- तुझी क्या होगया ही बारे चुप चुप रहंय लगा ही.

मैं:- कुछ नहीं बीएस वैसी hi आपकी गर्ल्स टॉक में मैं क्या बोलूं.?

रश्मि:- कुछ दिनों बाद तेरी सगाई ही एक्ससिटेड नहीं लग रही तुम दोनों.

मैं:- आप हो न मेरी जगह एक्ससिटेड होने क लिए.

रश्मि:- मतलब तूने अपने लिए कापरी भी नहीं लिए.?

मैं:- नहह आप hi लय लेना.

भाग्य:- सही ही तेरी लिए हम Hi डीडे क्रय गए.

फिर कुछ देर में हम मॉल आगये.

वह सब अंदर चली गई. और किरण सब सी पेची चल रही थी और बार बार पिच्य मोर क डेल्ह रही थी लेकिन मैं बिना कुछ ध्यान क गारी को पार्क करनी चला गया और जब पार्क क्र क अंदर गया जब तक वह दूकान में घुस चुकी थी.

मैं:- आप शोपिंग क्र क काफी में अजना.

यह कह क मैं वहां सी सीधा काफी में चला गया जहाँ मैं न्य कोल्ड ड्रिंकः आर्डर की और पीने लगा और तभी मेरा फ़ोन बजा.

देखा तो नूर का कॉल था.

मैं न्य पिक की कॉल.

नूर:- Hello मेरी जान किसी हो.?

मैं:- मैं एक डैम बरिया तुम बताओ किसी हो.?

नूर:- आपके बिना किसी होंगी.? सब बोहत याद क्र रही हैं आपको.

मैं:- बीएस कुछ दिनों में वापिस आ जाओ गए.

नूर:- ी मिस यू सूऊओ मच.

मैं:- में तो! बीएस कुछ दिन और मैं घर आ जाओं गए.

नूर:- O.k अपना ख्याल रखना मुझी माँ बुला रही हैं bye. ी लव यू.

मैं:- ी लव यू तू!

फ़ोन कट....

मैं वहां सी निकल क मॉल घूमने लगा तभी मैं एक शॉप क सामन्य सी गुज़जर रहा था मेरी नज़र एक ड्रेस पी गई.

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न जाने क्यू मैं उसमें किरण को इमेजिन क्र लिया जिस में वह बाला की ख़ूबसूरत लग रही थी.

मैं उस दूकान पी चला गया और उस सी वह ड्रेस पैक करनी को कह दिया और लय क मैं पाय क्र क बाहिर निकला hi था क कोई मुझसी टकरा गया और वह गिरने लगा. मैं न्य जल्दी सी उसकी कमर पाकर ली.

जब उसके बल पिच्य हुवे तो यह किरण थी.

उसके चेहरी पी पेहली घबराहट थी लेकिन जैसी hi उसकी नज़र सामन्य गई सब कुछ भूल क बीएस आंखों में देखनी लगी.

मैं भी एक डैम उसकी आंखों में खू गया इस वक़त मुझी कुछ नहीं पता था मैं बीएस उसकी आंखों में खोया हुवा था मैं अलग होना चाहता था पर छह क भी अलग नहीं हो पा रहा था.

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हमारी आंखें बात क्र रही थी जिनको हम नहीं समझ पा रही थय.

तभी किसी क बोलनी पी मुझी होश आया.

आदमी:- यह अचानक मौसम को क्या होगया बर्रिश शुरू होगी.

लोगों क बात करनी सी हम होश में ए और मैं न्य उसको सीधा किया और वहां सी चला गया.

सैम क जाने क बाद किरण को ऐसा लगा क कोई उसका डिल चिर क लय गया हो और उसको अभी कुछ देर पेहली ख़ुशी मिली थी वह फिर सी गायब होगी.

तभी उसकी नज़र नीची गई वहां एक पैकेट रखा था.

किरण:- यह मेरा तो नहीं ही फिर यहाँ किसी.?

वह उठा क दुकानदार क पास लय अति ही.

किरण:- यह बैग किसी का गिर गया ही.

शॉपकीपर:- मम वह सर जिसकी साथ आपकी तकर होइ यह उन्ही का ही.

किरण:- O.k मैं उन्ही दी दूँ गई.

किरण बाहिर अति ही और बैग को देखती ही और सोचती ही.

क्या मैं खोलो.?

उसको बुरा लगा तो.?

खोल hi लेती हूँ.

वह अंदर देखती ही और ड्रेस देख उसकी आंखें चमक जाती हैं क्यू क ड्रेस बोहत सुन्दर था.

तभी वह तीनो भी वही आजाती हैं.

रश्मि:- वाओ किरण कितना सुन्दर ड्रेस ही.

भाग्य:- हामी बताया भी नहीं और खरीद लिया.

किरण:- आपको चाहिए रख लो.

रश्मि:- अब तेरी साइज का ड्रेस हम तीनो को नहीं ए गए किसी लय लें. हम अंदर सी पोछती हैं और होंगी.

वह तीनो अंदर चली जाती हैं.

किरण सोचती ही.

यह बात तो ठीक ही बिलकुल मेरी साइज का ही अगर इन में सी किसक क लिए लिया होगा तो साइज डिफरेंट होगा.

क्या मेरी लिए लिया.?

किरण को यह एहसास होती hi उसका डिल खुश होजाता ही और वह खिल उठती ही और झूमनी लगती ही क शायद उसको सैम माफ़ क्र दी गए.

िद्र मैं अभी होइ घटना को सोच रहा था.

के होगया था मुझी.? कहीं फिर सी.?

"फिर सी कहाँ.? तो आज भी उस सी प्यार करता ही तेरा पहला प्यार भली hi कोमल हो लेकिन तुझी प्यार क सही मैने उसी सी प्यार करनी क बाद पता चली. "

मेरी दिमाग क एक हिस्से सी आवाज़ ी.

"लेकिन धोका तो उसने दिया hi था. न तो उस सी प्यार किसी क्र सकता ही. "

दोसरी हिस्से सी आवाज़ ी.

"उस में उसका पूरा कसर नहीं था मनुपलते किया गया था उसको यह मात भूल. "

"कसूर तो मेरा भी नहीं था लेकिन किसी क जज़बतून क साथ खेलनी का हक़ किसनी दिया. "

"गलती साब सी होती ही वह अपनी गलती की सजा पा चुकी ही. "

"किसी सजा.? "

"तुझसी इतने साल डोर रवहनी की सजा वह जो काट रही ही उसका क्या भूल मात तूने तरप उसकी आंखों में देखि ही. "

"उसकी आंखें पेहली भी झूट बूल चुकी हैं. "

" इस बार सच था यह साब सच था. "

मैं:- शट उप.

सब लोग मेरी तरफ देखनी लगी.

मैं वहां सी सीधा नीची गारी क पास चला गया और दिमाग को शांत करनी लगा.

कुक्सह समझ नहीं आ रहा था क्या करूं.?

अभी क लिए साडी सोचूँ को साइड क्र क मैं न्य शांत रहंय का फैसला किया.

थोड़ी देर में सब नीची आ गई.

रश्मि:- टुन्नाय कुछ नहीं लिया.?

मैं:- नहीं दीदी आप न्य बोलै था न क आप लय ए गई इसी लिए नहीं लिया.

भाग्य:- हाँ तेरी लिए हम न्य शोपिंग क्र ली ही घर जा क दिखाओं गई.

हम लोग गारी में बेथ गए.

तभी मैं न्य रश्मि दीदी को एक डिब्बा दिया.

वैनिला आइस क्रीम का जैसी देख वह बोहत खुश होइ.

रश्मि:- वाओ वैनिला थैंक यू थैंक यू.

ुषोने न्य मेरा गाल चुम लिया. जो क वह अल्सर करती थी न hi मैं न्य और नहीं उन्होंने कभी इसका गलत मतलब लिया.

मैं:- थैंक किस लिए आपको रोज़ आइस क्रीम खिल्लनि का वडा किया था जो पूरा क्र रहा हूँ.

रश्मि:- मतलब वह आइस क्रीम तो भेजता था.?

मैं:- हम्म्म.

दीदी यज्ञ होकय मेरी गली लग गई.

मैं:- क्या हुवा आप इमोशनल होगी.

रश्मि:- तो बोहत ाचा ही काश तो मेरा होसकता हम कितना खुश होते एक साथ अगर किरण न्य वह गलती.

अभी कुछ बोलती उस सी पेहली मैं न्य उनको बिच में hi रोक दिया.

मैं:- दीदी मैं आपसी वडा किया था न क मैं हमेशा आपकी साथ खरा हूँ. और मैं वादे सी मुकर जाओं उस सी बेहतर मार जाओं.

तभी रानी और किरण न्य एक साथ मेरी चेहरी क करीब अपना हाथ बढ़ाया. जो क टकरा मेरी होंठों पी आज्ञा.

दोनों को अपनी गलती एहसास हुवा तो एक डैम सी पिच्य क्र लिया अपना हाथ.

भाग्य:- अब चोरो यह बातें चल रश्मि आइस क्रीम कहती हैं.

और दोनों आइस क्रीम खाने लगी और किरण और रानी दोनों गारी सी बाहिर देख रही थी और सोचों में गम थी.

मैं गारी चलनी लगा और कुछ देर में हम हवेली पोहंच गए.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.82


हम हवेली पोहंच गए और वह उत्तर क अंदर चली गई और मैं गारी पार्क क्र क अंदर चला गया जहाँ वह सब बैठी थी और शोपिंग दिखने लगी होइ थी साब को.

मैं वहां सी कमरे में जाने लग तो रश्मि न्य आवाज़ दी मुझी.

रश्मि:- तू कहाँ जा रहा ही देखी गए नहीं क्या लाये हैं तेरी लिए.?

इंदू:- मतलब जिसकी चीज़ ही उसको पता hi नहीं क क्या लाये हैं.?

मैं:- जो इनको पसंद ए गए वही मुझी भी पसंद आ जाये गए

मैं उनके पास चला गया और देखनी लगा एक शेरवानी ली थी मेरी लिए जो मुझी भी पसंद ी.

शांति:- अरे यह दोनों ड्रेस तो एक कमल का पेअर बनती हैं.

वह मेरी वाली शेरवानी और उसी ड्रेस की बात क्र रही थी जो मैं न्य ली थी.

इंदू:- हाँ यह ड्रेस तो बोहत सुन्दर ही और यह इस सी कितना मिलता ही.

भाग्य:- दोनों किरण न्य hi तो पसंद किये. यह शेरवानी भी इसी की पसंद की ही और ड्रेस िसंय हंसी पूछी बिना लय ली.

मतलब दोनों न्य एक दोस्सरी क लिए ड्रेस लिए थय.

मैं और कुछ बोली बिना वहां सी उठ क चला गया.

यहाँ जब किरण सैम को ऐसी जाती हुवे देखती ही तो उसका डिल टूट जाता ही उसको लगता ही क वह उसकी वजह सी गया ही और उसकी आंखों में आंसूं आजाती हैं और वह वहां सी उठ क अपने कमरे की तरफ चली जाती ही.

उसको लगता ही क किसी न्य नहीं देखा लेकिन 2 आंखें उसको देख रही थी यह और कोई नहीं इंदू थी जो उसके एक्सप्रेशंस नोट क्र रही थी.

उसने सैम सी साडी बात सुन ली थी उसको किरण का यह बेहेवियर अजीब लगा उसको भी लगता था क किरण को पसंद नहीं करती.

इसी लिए वह उठ क किरण क पिच्य उसके कमरे में चली जाती ही जिसका वह जल्दी में दरवाज़ा बंद करना भूल गई थी.

इंदू अंदर जानती ही जहाँ किरण बीएड पी उल्टा लेट क रू रही थी.

इंदू जाकय उसके कंधी पी हाथ रखती ही. किरण चौंक जाती ही और जल्दी सी आंसूं साफ़ क्र लेती ही.

इंदू:- क्या हुवा तो रू क्यू रही है.?

किरण:- N..Nahi ममी मैं कहाँ रू रही थी.

इंदू:- झूट मात बोल मुझसी. और मैं जानती हूँ तेरी और क बिच क्या हुवा था.? लेकिन अब तो क्यू रू रही ही.? टोने तो वह किया न जो तुझी सही लगा था.

अब किरण सब्र का दमन टूट गया था वह सीधा इंदू क गली लग जाती ही और रोना शुरू क्र देती ही शायद आज वह किसी सहरी क लिए तरस रही थी जो उसको मिल गया था. क्यू क बाकि तो उसको गलत समझती थय और सैम क टॉपिक पी बात भी नहीं कृत्य थय.

Kiran(Rote हुवाये. ):- ममी मैं पागल होगी थी मैं न्य अपने हथून सी अपने प्यार को गवा दिया जिसने मुझी इतना प्यार किया. लेकिन जब मुझी एहसास हुवा वह दूर जा चूका था बोहत दूर आज तक इंतज़ार करती ी हूँ क कब मिल क अपने गुन्नाह की माफ़ी मांग लोन लेकिन मैं शायद माफ़ी क लाइक भी नहीं हूँ मुझी उनके प्यार क बिना hi मरना होगा. हाँ मैं बोहत प्यार करती हूँ उनसे लेकिन जो मैं न्य किया उसके यज्ञ मेरा प्यार बोहत काम ही जो मैं दिखा नहीं पाई.

किरण अलग होती ही और अलमारी की तरफ जाती ही. इंदू बीएस उसे खरी देख रही थी.

वह आर्मरी में सी एक बुक निकलती ही और इंदू क पास आ क खोलती ही जिस में हर पाने पी सैम की तस्सवर थी जो किरण न्य अपने हथून सी बनाई थी और हर तस्वीर पी सॉरी लिखा था.

किरण रोटी भी जा रही थी और अपने प्यार की कहानी भी सुन्ना रही थी. जिसे सुन क इंदू क रोंगटे खरी होजाती हैं वह किरण को गली लगा लेती ही उसकी भी आंखें नाम होगी थी.

इंदू:- शांत होजा मेरी बची तुझी तेरा प्यार ज़रूर मिले गए.

किरण:- नहीं अब वह मेरी बेहेन का हक़ ही लेकिन मैं ज़िंदा नहीं रह पाऊँ hi उनके बिना पेहली तो उम्मीद थी लेकिन अब तो वह भी टूट गई ही.

इंदू:- अगर मुझी पता होता तो मैं कभी भी यह होने देती.

Kiran(bachon जैसा इंदू को पकड़ लेती ही और बोलती ही):- क्या रानी मुझी मेरा प्यार लोटा दी गई जो मुझसी कहीं खू गया था.

जिसे सुन क इंदू का कलेजा हिल जाता ही. और वह किरण को कस क पसकर लेती ही और चुप करवानी लगती ही लेकिन खुद भी रू रही थी और मन hi मन कुछ सोच रही थी.

किरण कोई लग भाग 1 घंटा रोने क बाद सू जाती ही वैसी hi.

इंदू उसके कमरे सी निकल क अपने कमरे में जाती ही जहाँ जाकय वह खूब रोटी य और खुद को बुरा भला कहती ही क उसने किरण क बारी में ऐसा सोचा.

तभी वह कुछ सोच बाथरूम जाती ही और फ्रेश होकय फ़ोन लगाती ही किसी को.

इधर मैं कमरे में जाकय लेट गया था और आंख लग गई थी मेरी मेरा फ़ोन बजा तो उठा.

देखा तो इंदू का फ़ोन था.

मैं न्य पिक किया.

मैं:- Hello.

इंदू:- क्या आप रात में मेरी कमरे में ए गए आज रानी क पापा रात भर बाहिर hi रही गए.

मैं:- क्या बात ही मूड नॉटी लगता ही आज तो आपका.

इंदू:- यह hi समजह लो.

फ़ोन कट.

उसके बाद कुछ नहीं बीएस खाना खा क मैं रात क वेट करने लगा जब 10 बज गए और सब सोने क लिए चली गए और मैं भी आराम सी इंदू क कमरे में चला गया.

जब मैं दरवाज़ा बंद क्र पिच्य मूरा तो एक बिजली गिरी मुझपी.

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बीएस यह इंदू का वॉर घातक था मेरी पी. मैं उसको घूरय जा रहा था क्या हस्सें नज़ारा था कमल क बूब्स गहरी नैवेल सेक्सी साड़ी कम्पेलेट बम.

इंदू:- बीएस देखती hi रही गए करीब नहीं ए गए.?

मैं चलता हुवा इंदू क पास गया और उसकी आंखों में देखती हुवे मैं न्य एक हाथ उसकी कमर में दाल दिया और अपनी तरफ खेंचा.

इंदू:- उच्च खा जाओ गए क्या.?

मैं:- अगर आपकी इजाज़त हो तो.

इंदू:- मैं तो आपकी हूँ कभी भी खाओ.

हम दोनों क चेहरी एक दोस्सरी क करीब आ गए हम दोनों क होंठ आपस में मिल गए.

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मैं कभी उसका उप्पेर वाला होंठ चूस रहा था कभी नीची वाला तभी मैं न्य अपनी जुबां उसके मुँह में रख दी इंदू न्य भी अपनी जुबां मेरी जुबां पी रख दी हम दोनों एक दोस्सरी की ज़ुबाब चूसने लगी.

अहह क्या मज़ा था बोहत मज़ा आ रहा था मुझी किश क्र क मेरा हाथ उसकी कमर क सहलाने लगा उसने मुझी कस क हुग क्र ली थी.

करीब 10 मं बाद हम दोनों अलग हुवे. इंदू की सांसें फूल गई थी और वह अपबि सांसें कण्ट्रोल करने लगी और अपना सर मेरी चेस्ट पी रख दिया.

मैं:- क्या हुवा.?

इंदू:- मैं अपनी ज़िन्दगी क सब सी हस्सें पल जीना चाहती हूँ खुद को आपके हवेली करना चाहती हूँ. क्या मुझी संभल पाए गए.?

मैं:- मैं न्य पेहली बी कहा था क प्यार और अट्रैक्शन में क्या फरक ही.

इंदू:- प्यार तो करती हूँ लेकिन जितना कोई और आपसी करती जितना कोई और करता ही.

मैं:- कोण.?

इंदू:- आपकी नज़र में आपसी सब सी ज़्यादा प्यार कोण करता ही.?

मैं:- बोहत लोग हैं जो अपनी जान सी ज़यादा प्यार कृत्य हैं.

इंदू:- अगर आपको किसी की बात बुरी भी लगी तो वह कोण ही जिसकी बात पूरी सुने बिना कुछ नहीं बोली गए.

मैं:- यह सब क्यू पॉच रही हैं.?

इस वक़त मेरा लुंड पूरा जोश में खरा था. जो क इंदू क पेट पी साफ़ महसूस हो रहा था.

इंदू:- बीएस वैसी hi बताइये मेरी कसम.

मैं:- एक तो कसम बोहत देती हो तुम. शायद माँ और तनीषा क्यू क आज तक उसने जो भी कहा वह मेरी लिए पाथर पी लकीर होगया ही.

इंदू:- तनीषा कोण ही.?

मैं:- बीएस इस सी ज़याद कुछ नहीं प्लीज.?

इंदू:- o.k और कुछ नहीं.

मैं न्य उसको फिर किश स्टार्ट क्र दी.

अब मेरा हाथ चलता हुवा इंदू की चूचियों पी आज्ञा था आ क्या मस्त बूब्स थय नरम बारी कमल क थय.

जैसी hi मेरा हाथ उसको लगा इंदू को एक करंट लगा और मुझी और कास लिया मैं न्य उसका पालू नीची फ़ेंक दिया और उसको घूमती हुवे सरेर उत्तर दी अब वफ मेरी सामन्य पेटीकोट ब्लाउज में खरी थी.

मैं न्य यज्ञ जा क उसकी कमर की तरफ सी पति कोट को पकड़ क आराम सी उत्तर दिया और अपना हाथ नीची लय जा क उसके पेटीकोट का नैरा खोल दिया.

अब वह बीएस पेंटी और ब्रा में थी.

मैं:- तुम बोहत सुन्दर हो.

इंदू न्य अपनी आंखें बंद राखी थी.

मैं न्य उसका चेहरा पकड़ा और उसको बोलै.

मैं:- इंदू.

इंदू:- हम्म.

मैं:- आंखें खोलो.

इंदू:- नहीं मुझी बोहत शर्म ए गई आज सी पेहली मैं कभी किसी क सामन्य ऐसी नहीं खरी होइ.

इंदू न्य बताया था उसका पति बीएस साड़ी उठा क घुसता था और काम क्र क फ़रीक़.

मैं:- ऐसी मैं तुम्ही प्यार नहीं क्र पाऊँ गए.

इंदू न्य अपनी आंखें आराम आराम सी खोली और मेरी तरफ देखनी लगी.

मैं न्य उसके माथे लय किश किया.

और एक हाथ सी ब्रा क होक खो दोय और उसके जिस्म सी अलग क्र दिया.

कमल क बारी बूब्स सफ़ीद रंग और उप्पेर पिंक निप्पल.

मैं न्य उसके निप्पल को पकड़ लिया और हलकी सी चुटकी कटी.

इंदू:- अह्ह्ह आराम सी.

मैं न्य झुक क उसी की मुँह में भर लिया और लीक क्र लिया.

मैं न्य अपना दोसरा हाथ दोस्सरी चाची पी रख दिया और निप्पल सी खेलनी लगा.

मैं न्य खूब बूब्स चूसी और आराम सी उसको बीएड क पास लय गया और लिटा दिया और उसकी पेंटी उत्तर दी.

अब वह मेरी सामन्य पूरी नंगी पारी थी. मैं उसकी तरफ hi देख रहा था इंदू को बोहत शर्म आ रही थी वह अपना मुँह दोस्सरी तरफ क्र क लेती थी मैं न्य अपने कापरी उत्तर दिए और उसके उप्पेर आ गया और किश करनी लगा.

मेरा लुंड उसकी छूट पी टच हो रहा था जिमें सी उसका पानी उसकी छूट सी निकल क गांड की लकीर पी जा रहा था.

मैं न्य बूब्स को स्क्वीज़ करनी क बाद अपना ह्क़्त नीची लय जा क छूट में ऊँगली रख दी.

इंदू को झटका लगा. वह उछाल गई मैं उसके जिस्म पी अपनी जुबां फेरता हुवा छूट तक आज्ञा जहाँ पेहली सी पानी बह रहा था.

मैं न्य उसपे अपनी जुबां फेरी.

इंदू:- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ससस यह आआअह्ह सससस

मैं न्य अपनी जुबां सी उसकी छूट क फांक खोली और अंदर दाल दिए.

इंदू:- अह्ह्ह्हब यह केसा मज़ा ही आह्ह्ह्ह चोसो मेरी जान अह्ह्ह्ह मैं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

उसको 5 मं ऐसी करनी क बाद वह झार गई जिसका साडी पानी मैं जातक गया.

इंदू बेजान पारी थी मैं उप्पेर जा क उसके सामन्य उसका सारा पानी म्पोह सी चाट लिया.

वह तेह डेल्ह क शर्मा गई.

मैं न्य उसको फॉर किश किया और उसके जिस्म क साथ खेलनी लगा कुक्सह देर में वह फिर गरम होगी.

मैं न्य बिना कोई देर किये. अपना लुंड हाथ में पकड़ा और उसकी छूट पी रखा जोके मेरी लुंड क हिसाब सी टाइट थी.

मैं न्य टोपे जो अंदर करनी क लिए पाकर क पहला स्ट्रोक लगाया.

जो उसकी छूट को छेरता हुवा अंदर चला गया.

इंदू तरप गई और हलकी सी चीख निकल गई उसकी अभी बीएस टोपी अंदर गई थी.

मैं न्य उसको किश किया.

और अपना दोस्सरे झटका मारा.

और मेरा 3 इंच लुंड उसकी छूट को छेरता हुवा अंदर चला गया

इंदू की ज़ोर दर चीख निकल गई जोके मेरी मुँह में डाब गई लेकिन उसकी आंखों में थोड़ी आंसूं आगये.

मैं न्य अपना उसके बूब्स पी रकह और उनको दबनी लगा.

मैं न्य 5 मं वही वेट किया और फिर 2 स्ट्रांग स्ट्रोक्स क साथ अपना पूरा लुंड उसकी छूट में दाल दिया. उसकी छूट वाक़ई बोहत टाइट थी.

इंदू की हालत खराब होगी थी उसकी आंखों सी आंसूं निकल रही थय मैं उसको लगातार किश किये जा रहा था और उसको बूब्स दबा रहा था.

10 मं बाद मैं न्य कमर यज्ञ पिच्य करनी शुरू की. और इंदू न्य भी अपनी कमर हिल्लै मतलब वह त्यार थी अब.

मैं न्य आधा लुंड बाहिर निकल क वापिस छूट में दाल दिया जो उसकी बचा दानी को लगा.

मैं न्य किश टोरी और लम्बे स्ट्रोक लगानी लगा.

इंदू:- अह्ह्ह्ह हाँ ऐसी hi मेरी जान मुझ पूरा क्र दो आज हाँ ऐसी hi अह्ह्ह्ह माँ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

वह एक बार फिर झरि गई.

मैं न्य अपने झटके तीज क्र दिया और वह फिर गरम होगी.

40 मं की ज़बरदस्त चुदाई क हम दोनों एक साथ झार गए और बीएड पी लेट गए और नार्मल होने लगी.

फिर थोड़ी देर बाद वह नार्मल होइ और हम न्य एक राउंड और लगाया इंदू अब थोड़ी खुल क छुड़वा रही थी.

फिर मैं वहां सी निकल क रानी क कमरे में चला गया जहाँ रानी सू रही थी सोफे पी बैठी hi.

शायद मेरा वेट कृत्य हुवे सगाई मैं न्य उसको बारी आराम सी उठा क उसकी जगह लिटाया और और उसके उप्पेर कपड़ा दाल दिया और मैं भी लेट गया और लेती hi नींद आ गई चुदाई की वजह सी.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.83


सुबह मेरी आंख थोड़ी देर सी खुली क्यू रात को 3 बार ट्रैन पटरी पी चली थी.

मैं जब उठ क देखा तो रानी वहां नहीं थी और बाथरूम सी पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी.

मैं समझ गया क वह नाहा रही ही. मैं बाहिर निकला और इंदू क कमरे की तरफ चला गया क उनका वाशरूम उसे क्र लोन गए.

मैं कमरे में गया तो दरवाज़ा बंद था लेकिन लॉक नहीं था. मैं न्य हल्का सा पुश किया और दरवाज़ा खुल गया जब मैं न्य नज़र अंदर डाली तो सामन्य का नज़ारा देख क मेरी आंखें खुली की खुली रह गई.

क्यू क सामन्य बुआ खरी थी सिर्फ पंतय में और उनका ब्रा उनके हाथ में था वह अभी पहनी लगी थी.

मैं उनको घोरता रहा कोई 10 सेक् तक और जब उन्होंने अपने दोनों हाथ अपने बूब्स पी रख लिए मेरा ध्यान टूटता और मैं जल्दी सी दरवाज़ा बंद क्र दिया और बाहिर निकल आया.

Main(man में):- ओह्ह्ह सहित यह क्या होगया मुझसी वह क्या सोची गई मेरी बारी में मैं किसी अब उनसे नज़रें मिलाओं गए.

मैं अपने सर पी हाथ मार क कमरे में वापिस आज्ञा जब आया तो रानी भी नाहा क निकल गई थी.

रानी न्य मुझी देखा और बोली.

रानी:- क्या हुवा कहाँ चली गए थय.? और इतने घबराये क्यू हैं सब ठीक ही.?

मैं:- K..Kuch नहीं बीएस बाहिर गया था सोचा तुम यहाँ नाहा रही हो तो मैं दोसरी कमरे में नाहा लोन लेकिन वहां भी कोई गया हुवा ही.

रानी:- हम्म. अब नाहा लीजिये मैं कापरी निकल लेती हूँ.

मैं बाथरूम में घुस गया और कापरी उत्तर दिए अपने और जैसी अंडरवियर निकल मेरा लुंड पोरी जोश में खरा था और मेरी नज़रूँ क सामन्य अभी भी बुआ का सीना था जिस सी मेरा लुंड फूंके मारण्य लगा.

मैं न्य शावर चला दिया और पानी डाला लुंड पी तब थोड़ा सकूं मिला लेकिन वह पूरी तर्हां सी नहीं शांत हुवा था लेकिन मैं नाहा क बाहिर निकल आया और कपड़े पेहेन लिए.

तभी रानी वापिस कमरे में ी. जो थोड़ी घबराई होइ थी.

मैं:- क्या हुवा रानी तुम ठीक तो हो न.

रानी:- व.. वह पापा कल रात सी घर नहीं ए और साथ अमित भैया भी हैं.

मैं:- इंदू आंटी को पता था क वह नहीं ए गए उन्होंने बताया था.

रानी:- हाँ लेकिन अभी तक नहीं ए और फ़ोन भी बंद है उनके.

मैं:- घबराओ नहीं.

तभी नीची सी किसी क चिल्लानी की आवाज़ ी.

हम दोनों नीची गए.

वहां पी शांति आंटी बेथ क रू रही थी और बुआ और इंदू उनको हौसला देने की कोशिश क्र रही थी. भाग्य और रश्मि दीदी भी वही खरी थी और वह भी संभल रही थी उनको और उनकी ाँहेकिन भी नाम थी

मैं और रानी भाग क वहां गए.

मैं:- क्या हुवा आंटी रू क्यू रही हैं आप.?

बुआ:- W...Wo..Woh.

मैं:- क्या वह सब बताइये क्या हुवा.?

बुआ:- शांत होजाओ कुछ नहीं होगा.

मैं:- क्या नहीं होगा और शांति आंटी क्यू रू रही हैं.

भगाया:- वह की....

अभी वहबकुछ बोलती शांति न्य उसका हाथ पाकर लिया.

रानी:- ममी हुवा क्या ही माँ आप hi बताओ.

Indoo(Rote हुवे):- कोई ज़बरदस्ती किरण को उठा क लय गया ही.

मैं न्य जैसी Hi यह सुन्ना मेरी पैरों क नीची ज़मीन निकल गई और तभी मेरी आंखों में आग बरसनयवलागि और लाल पर गई और मैं बही को जाने लगा तो किसी न्य मेरा हाथ पकड़ा.

यह बुआ का हाथ था.

मैं न्य बिना कुछ बोले हाथ आराम सी पिच्य किया और बिना कुछ कही मैं बाहिर निकल गया.

जब सैम बही गया तो बुआ बोलै.

बुआ:- दीदी अपने यह क्या किया.

इंदू को अब समजह आया था उसने क्या किया ही.

इंदू:- मैं बिलकुल भूल गई थी सच में लेकिन हमारी बची.

शांति:- क्या हुवा मेरी बची को. कोण लय क गया ही और तुम दोनों किस बारी में बात क्र रही हो.

बुआ:- अब किरण को तो कुछ नहीं होगा लेकिन इस गाओं में सैलाब ए गए खून का अगर किरण को खरोच भी लगी तो पूरा गाओं खून सी नहाये गए.

भाग्य:- यह आप क्या बोल रही हैं.?

रश्मि:- अगर उसको नहीं रोका तो वह सब कुछ तबाह क्र दी गए.

रानी:- दीदी क्या हुवा कोण तभा क्रय गए.

बुआ:- सैम वह किसी नहीं चोरी ga.Main न्य उसकी आंखों में आग देखि ही जो किरण की तरफ आंख उठाने वाले को जला क रख क्र देती ही ऐसा कई बार हुवा जब भी उसकी तरफ किसी न्य देखा उसने आंखें निकल ली उसकी.

फिर बुआ साडी कहानी सुन्ना दी जैसी सुन क सब की आंखें नाम होगी लेकिन रानी को ज़यादा दुःख हो रहा था लेकिन पता नहीं क्यू.

बुआ:- हामी जाना होगा वहां.

और सब वहां सी बाहिर निकल जाती है और गारी निकल क सैम क पिच्य निकल जाती हैं.

इधर मैं गारी लय क पूरी स्पीड में चला रहा था और तभी मेरा फ़ोन बजा.

मैं न्य बिना देखी फ़ोन उठाया.

उधर:- किसी हो मर सैम ठाकुर.

मैं:- कोण बोल रहा ही.

उधर:- इतनी जल्दी भूल गए.

मैं:- तो तू ही कहीं इन साब में तेरा हाथ तो नहीं.

रखा:- हाहाहा मेरा हाथ नहीं मैं खुद हूँ और पता ही यहाँ तेरा होने वाला ससुर और उसकी बेटी यानि तेरी माशूका मेरी सामन्य ही हाहाहा

मैं:- आआआआ अगर उसको एक भी खरोच ी मैं तेरी जिस्मी क इतने टोकरी करों गए क इकठी भी नहीं क्र पाए गए.

रखा:- अजा बचा सकता ही तो इनको.

मैं:- तुझी तब भी बोलै था हमारी अगली मुलाकात तेरी मौत का दिन था और आज तेरी मौत पाकी ही.

रखा:- अजा मैं तेरा इंतज़ार यही क्र रहा हूँ गाओं क बॉर्डर पी यही तेरी लाश लटकाओं गए.

मैं:- रुक तुझी तेरी मौत तेरी आंखों सी दिखाओं गए कसम ही मुझी किरण की क तुझी ज़िंदा नहीं चोरों गए.

और फ़ोन बंद क्र दिया और गारी को फुल स्पीड में भगा दिया और मैं वहां पोहंच गया सामन्य खली मैदान में एक तरफ रखा गारी क बोनट पी बैठा था और उसके यज्ञ करीब 100 लोग खरी थय और उसके साइड पी एक तरफ कृष्णा अंकल थय जोके ज़ख़्मी थय काफी और उनके साथ अमित को बंधा हुवा था वह भी ज़ख़्मी था और डोरी तरफ किरण को राशयोँ को बाँदा हुवा था.

3रद पर्सन.

जब रखा वहां बैठा था और हस्स रहा था तभी उसको सामन्य सी एक कार अति होइ देखती ही जोके उसके थोड़ा दूर रूकती ही.

और उसके अंदर सी सैम बाहिर निकलता ही जिसकी आंखों में गुस्सा निकला हुवा था.

और उसको निकलता देख किरण अपने आप चुरवानी की कोशिश करती ही और चिल्ला क आवाज़ देती ही.

किरण:- सैम मुझी चोरो सैम.

इधर जैसी hi जब सैम को किरण की आवाज़ अति ही तो उसके दिलक में जाती ही और उसका गुस्सा रखा क लिए और बार जाता ही.

Saim(chill के):- टोने अपनी मौत को दावत दी ही आज. आज मैं यमराज का रूप लय आया हूँ तेरी पास.

रखा:- हाहाहा तेरे में इतनी हिम्मत ही न तो बीएस एक मौका दूँ गए तुझी बीएस मेरी बेटे सी लार और उसी हरा क इन सब को लय जा.

मैं:- तो चाही 1000 आदमी भेज सब का हश्र करूं गए ऐसा क उनकी रूप भी कम्प्य जाये गई.

रखा:- ः पेहली उस सी तो मिल लय.

तभी गारी में सी एक लड़का बाहिर अत ही जिसकी बॉडी किसी बॉडी बुलिडेर सी काम नहीं थी और उसकी अंम्हूं में एक अजीब सी शक्ति थी जैसी वह कोई साधारण इंसान ना हो.

लेकिन इधर सैम को यह बात का एहसास होजाता ही लेकिन इस वक़त वह बोहत गुस्से में था और वह भागता हुवा उसके करीब आ रहा था और वहां सी वह भी भाग क आ रहा था.

सैम एक मौका बना क उसको मारण्य लगता ही तो वह भी मौका मरता ही जोके आपस में टकरा जाती ही जिस सी वहां एक लाइट पैदा होती ही कुछ सेकंड क लिए कुछ दिखाई नहीं देता.

जब रौशनी काम होती ही सब क लिए नज़ारा अलग था इस वक़त उस लरकी को दूर गिरा होना चाहिए था. लेकिन यहाँ सब उल्टा था सैम वहां सी दूर क गिरता ही और अपने हाथ को पाकर लेता हह और चीखता ही.

तभी वहां 2 गाड़ियां आजाती हैं जिस में बुआ रानी रश्मि भाग्य और इंदू और शांति ए थय और जब सब सैम ऐसी देखती हैं भाग क उसके पास अन्य लगती हैं लेकिन तभी वहां आदमी आ क उनको पाकर लेती हैं.

किरण भी चीखती ही.

इधर सैम को कुछ समझ नबी अत क अभी क्या हुवा ही क्या वह ज़मीन पी पारा ही लेकिन उसके पास तो शक्तियां. हैं क्या सामन्य वाली क पास भी शक्तियां हैं.?

तभी सैम उठता ही और वह लड़का हस्ता हुवा बोलता ही.

लड़का:- हाहाहा बीएस इतना डैम ही तुझमी मैं न्य तो सुन्ना था ब्लू एम्पायर का राजा ही तो कुछ तो ताकत होगी. तो लारी गए मेरी अक सी तू मेरी सामन्य नहीं टिक्क सकता.

सैम यह सब सुन क हैरान था क यह ही कोण.? जिसको सब पता ही और इसके पास भी शक्तियां हैं लेकिन इसके मारण्य क बाद सैम की हीलिंग पावर काम पर गई थी वह अपना हाथ लय क खरा था लेकिन तभी.

सैम बिना कुछ बोली फिर भागता हग और अपनी पूरी ताकत लगता हग ही और उसके मुँह पी एक पांच मरता ही जिस सी वह थोड़ा पिच्य होता ही और उसका खून भी निकल जाता ही लेकिन तभी उसका ज़ख़्म भर जाता ही और वह मुस्कराती हुवे वापिस सीधा होजाता ही.

लड़का:- बीएस यह थी तेरी ताकत अब मैं तुझी दिखता हूँ क शक्ति होती क्या ही और तुझी यही मार क अपने अक को खुश करूं गए और उनके कदमो में तेरी लाश रखूँ गए.

और वह सैम उप्पेर पांचूं की बारिश क्र देता ही जिस सी सैम की हालत अधमरी होजाती ही और वह ज़मीन पी गिर जाता ही.

Sab(chilla क):- सैम.

तभी वहां 5 गाड़ियां अति हैं.
 
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जैसी hi गाड़ियां वहां ी सब वहां देखनी लगी लेकिन सैम तो अधमरा ज़मीन पी पारा था.

गरियोँ क दरवाज़े खुले और अंदर सी सैम क सारी घरवाले निकली. तनीषा कोमल आयेशा अंजलि नूर और अबीरा रत्न सब और माँ भी थी साब बाहिर निमली और सब सी पहली नज़र उनकी सैम पी पारी जोके ज़मीन पी गिरा हुवा था.

सब न्य एक साथ चीख मारी और भागती हुवे वहां अन्य लगी लेकिन वह लड़का सैम क सर पी खरा था और उसनी आंखें बंद क्र क एक मौका बनाया और जिस सी उसके हथून में रौशनी आगे उसनी पूरी ताकत सी सैम को मरने लगा. और एक तेज़्ज़ चीख वहां गूंज गई.

यह चीख सैम की नहीं थी.

लेकिन यह क्या जैसी hi वह बिच में था एम् सफ़ीद रौशनी उसके हाथ में लगी जिस सी वह चीख उठा और डोर जा क गिरा.

जैसी देख क रखा क भी होश ुर्र गए. वफ उठ खरा हुवा.

यहाँ तब तक सब सैम क पैसा पोहंच गए थय.

तनीषा और कोमल सब सी यज्ञ भाग रही थी और नाम आंखों सी सैम को देख रही थी.

तनीषा और कोमल उसके पास जाकय क उसको पाकर लेती हैं और रोटी हुवे बोलती हैं.

तनीषा:- सैम उठिये यह क्या हुवा आपको.

कोमल:- उठू सैम प्लीज मेरी जान.

सब ाकय उसके पास बेथ जाती हैं. और रोने लगती हों तनीषा सैम का सर अपनी गॉड में रख लेती ही और मुँह पी हल्की हल्की मर क उठाने की कोशिश करती ही लेकिन उसको कोई होश नहीं थी.

इधर जब किरण यह सब देखती ही क सैम उठ नहीं रहा अपने हाथ पेअर हिलने लगती ही जैसी hi वह ऐसा करती ही जिन लोगो न्य उसको पकड़ा था हवा में इधर उधर ूर्णाय लगती हैं.

और इधर रानी का भी यही हल हुवा था वह भी ऐसा hi करती ही.

दोनों एक साथ सैम चिल्लाती हैं और भागती होइ अति हैं सैम क पास और दोनों उसके पास पोहचती हैं और जैसी hi दोनों सैम को छूती हैं तो उसके छूने में 1 सेक् का भी फरक नहीं था और जैसी hi उनके हाथ सैम को लगती हैं तो आस्मां में तीजी सी बीजोल्यां चमकने लगती हैं और तीज तेज़्ज़ अंधी चलनाः लगती ही जिस सी कोई कुछ नहीं देख पा रहा था.

यहाँ तक क वह लड़का भी नहीं जोके अब खरा होकय सैम क करीब आ रहा था.

एक बिजली चमकती ही जिसके साथ कोई चीज़ ूर्ति ही.

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जिसके साथ hi सैम भी अपना हाथ उप्पेर करता ही तो वह चीज़ सीधा सैम क हाथ में आजाती ही. और उसके इर्द गिर्द बीजोल्यां आजाती हैं और उसके जिस्म पी खुद बा खुद एक सूट बन जाता ही

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जैसी hi सैम नीची अत ही सब कुछ शांत होने लगता ही अंधी रुक जाती ही लेकिन आस्मां में बिजली चमकती रहती ही.

जैसी जी धुल काम होती ही सामन्य का नज़ारा देख क साब की आंखें हैरानी आय खुल जाती हैं.

सामन्य सैम खरा था.

यज्ञ सैम की ज़ुबानी.

मेरा दिमाग इस वक़त बिलकुल खराब हुवा पारा था गुस्सा अपनी सिम्मा लांग चूका था मेरी नज़र सामन्य बीएस ुसपय थी.

वह भी अब संभल चूका था और थोड़ा घबराया हुवा लग रहा था. लेकिन फिर भी घमंड में आज्ञा बढ़ता ही.

इधर सी मैं भी भागता हूँ और उस सी डबल स्पीड में मैं भाग रहा था जैसी hi वह वार करनी लगता ही मैं न्य उस सी पेहली hi उसके हाथ पी तलवार सी वार क्र दिया जिस सी उसका हठ्बुस्काय जिस्म सी अलग होगया और वह चीख पारा. और ज़मीन पी गिरा गया.

मैं मुरा और बिना वक़त गवाए और बिना कुछ बोले गुस्से में जम्प लगा क उसपे वार क्र दिया.

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वह वार सीधा उसके सीने को चीरता हुवा ज़मीन तक घुस गया और मैं न्य उसको चीरती हुवे अपनी तलवार निकल ली जिस सी उसके जिस्म क 2 टोकरी होगये.

रखा न्य जैसी hi देखा उसके बेट की यह हालत होगी ही उसके सामन्य उसके जवान बेटे की लैश थी वह वही ज़मीन पी गिर गया और अपना डिल पाकर क बेथ गया लेकिन मुझी उसपे कोई रेहम नहीं आ रहा था.

मैं. उसकी तरफ गया और उसका कालर पकड़ क चिल्लाया.

मैं:- तेरी हिम्मत किसी होइ किरण को हाथ लगानी की तेरा हाथ क साथ सब कुछ उखाड़ लोन गए आज तेरा मेरी किरण को हाथ लगाए गए.

यह बोल मैं उठ गया और तलवार पकड़ क जैसी hi मरने लगा किसी न्य मेरी पाऊँ पकड़ लिया.

मेरा हाथ वहीँ रुक गया. मैं न्य देखा तो कोई लड़की थी.

लड़की:- प्लीज माफ़ क्र दो मेरी पापा को उनसे गलती होगी मेरा उनके सिवा कोई नहीं ही मेरा भाई पेहली hi जा चूका ही और इनकी जान की मैं भीक मांगती हूँ आपसी.

वह यह कह क अपना दुपटा मेरा सामन्य क्र दिया उसने जैसी देख क मेरा डिल कम्प गया और मैं न्य तलवार को नीची फ़ेंक दिया और उसको पकड़ क सीधा किया.

मैं:- प्लीज ऐसा मत कहो मैं कुछ नहीं करूं गए इसी तुम लय जाओ इसी.

मैं न्य यह क उसी चोर दिया.

और तभी मेरी कंधी पी किसी का हाथ आया मैं न्य घूम क डेल्हा तो कोमल थी.

मैं न्य झट सी उसे गली लगा लिया.

कोमल:- आप हमेशा मुझी टांग कृत्य हैं देखा मैं कितना घबरा गई थी अभी.

मैं:- आईएम सॉरी. यज्ञ सी कभी ऐसा नहीं करूं गए.

तभी मैं अलग हुवा और पिच्य देख तो पूरा गाओं वहां पी मौजूद था और अपने सर झुका क घुटने क बल बैठी थय गाओं वाली hi नहीं बल्कि रानी क घर वाली भी.

मैं यह देख क हिरण रह गया क यह साब क्या ही.?

Main(unchi आवाज़ में):- आर्य सब सीधी खरी होजाइये.

सब बिना कुछ बोले खरी होगये.

मैं बुआ और इंदू क पास गया जिसके पास अब कृष्णा अंकल और अमित भी थय.

मैं:- यह साब क्या क्र रही थय आप मेरी सामन्य क्यू झुक रही थय.?

करसिंहना:- आप हमारी महराज हैं आपकी सामन्य झुकना हमारा फ़र्ज़ ही. और हम आपसी शमा चाही गए क हम न्य आपकी साथ ऐसा बर्ताव किया.

मैं:- अंकल आप यह क्या कह रही हैं मैं जो भी आपकी लिए बचूं जैसा हूँ प्लीज ऐसा मत कीजिये.

कृष्णा:- यह आप क्या कह रही हैं महराज आप हामी सजा दीजिये.

मैं:- उनले प्लीज आप मुझी बीटा केहत्य थय मुझी ज़यादा ाचा लगता था. और माफ़ी मैं मांगना चाहता हूँ आपसी.

कृष्णा:- आप माफ़ी मांग क हामी पाप का भाग्य दार मत बनाइये.

मैं:- अंकल मैं न्य झूट बोलै था आपसी.

फिर साडी बात सब को बता दी.

मैं:- अब जो भी आपका फैसला होगा वह आखिरी होगा.

कृष्णा:- मेरी बेटी की जो मर्ज़ी ही मैं वही करूं गए उस सी पोची बिना अब मैं कुछ नहीं करूं गए.

तभी माँ वहां आगे.

माँ:- मैं अपने बेटे क लिए आपकी बेटी का हाथ मांगती हूँ. क्या आपको मंज़ूर ही.?

करसिंहना:- हम छोटी लोग हैं मालकिन आप मेरी बेटी सी पॉच लीजिये.

माँ न्य रानी की तरफ देखा तो उसने नज़रें झुका. ली और हल्का सा मुस्कुरा दी.

रत्न:- ोये होये श्रम रही ही मेरी सौतन.

रानी शर्मा क रत्न क गली लग गई.

माँ:- इसका मतलब हम हाँ समझी.

कृष्णा:- जी बिलकुल.

मैं:- क्या कल शादी क्र सकती हैं हम.?

सब मेरी बात सुन क हिरण होगये.

मैं:- यह बोहत ज़रूरी है मेरी लिए और इन साब क लिए मैं किसी सी कुछ बात नहीं छपना चाहता जिसको मंज़ूर ही वह हाँ कह दी गए.

माँ:- बीटा मतलब सब की कल शादी होगी.?

मैं:- हम्म्म.

तभी मेरी नज़र किरण पी गई मेरी आंखें फिर सी नाम होगी और बिना कुछ बोली मैं वहां सी चला गया.

क्यू क किरण रू रही थी और सब उसकी ततफ देख रही थय.

इंदू सीधा किरण क पास जाती ही और उसको गली लगा लेती ही.

और इधर साब सैम क जाने क बाद हवेली आजाती हैं और त्यारियां शुरू क्र देती हैं.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.85


मैं वहां सी सीधा हवेली आज्ञा जहाँ मैं सीधा कमरे में चला गया और बीएड पी अपना सर पकड़ क बेथ गया. और सोचने लगा.

"मुझी क्या होगया था मैं क्यू ऐसा रियेक्ट किया जब मुझी पता चला क कितन क साथ कुछ हुवा ही.?"

"क्यू क तेरा प्यार उसके लिए आज भी वैसा Hi ही"

"नहीं उसको मैं कब का भूल गया था"

"वह तेरी ज़िन्दगी सी कभी गई नहीं किसी न किसी शकल में तेरी साथ रही ही. "

"नहीं मैं उसको भूल चूका हूँ"

"तो तेरी डिल क पास लिखा ही और तो खुद सी ऐसा झूट कैसी बोल सकता ही की कंपनी की नाम में क किस क लिए था"

"वह कोमल क लिए था"

"हाहाहा दुनिया का खेल निराला ही मेरी जान नाम दोनों क एक Hi लफ्ज़ सी ही लेकिन तू उस वक़त सिर्फ उसके बारी में सोच रहा था."

"मैं उस वक़त कोमल को भी नहीं भूला था"

"हाँ यह सच ही लेकिन तेरा प्यार आज भी उसके लिए काम नहीं हुवा लेकिन वक़त क साथ बढ़ गया ही अब खुद सी झूट मात बोल और उसकी ज़िन्दगी और अपनी ज़िन्दगी बर्बाद मात क्र. "

"क्या सच में मैं आज भी.?"

"हाँ यह hi सच ही"

तभी मेरी कंधी पी किसी न्य हैयह रखा.

मैं न्य देखा तो तनीषा थी जिसको देखती जी मेरी चेहरी पी मुस्कान आ गई आज बोहत दिनों क बाद उसी देखा था.

मैं न्य उसको पाकर क अपनी गॉड में बिठा लिया और उसकी गळून पी किश करनी लगा.

तनीषा कुछ बोलनी लगी उस सी पेहली मैं न्य उसको होंठों पी ऊँगली रख दी.

मैं उसको जी भार क देखना चाहता था और उसकी मुस्कान को अपने दिमाग मरीन बासा लेना चाहता था.

मैं:- मेरी जान कितनी ख़ूबसूरत ही न.

तनीषा:- मेरी जान भी बोहत हैंडसम ही और मैं यह बोल ताहि थी क.

मैं:- हम्म्म बोलो क्या.?

Tanisha(sharma क):- इतनी दिनों बाद मिलनी क बाद भी गळून पी किश.?

मैं:- ओह्ह्ह मेरी जान को कहाँ किश चाहिए.?

तनीषा:- आपको पता ही फिर भी टांग क्र रही हैं.

मैं:- मुझी नहीं पता आप Hi बता दो.

तनीषा मेरी गॉड में सीधी होकय बेथ गई और बिना कुछ बोले मेटि होंठ अपने होंठों में रख दिए.

और 5 मं किश क बाद वह अलग होगी.

मैं:- वाओ टेस्टी.

तनीषा:- क्या.?

मैं:- लिपस्टिक.

तनीषा:- धात नॉटी.

मैं न्य बिना कुछ बोले फिर किश स्टार्ट क्र दी जिस में तनीषा न्य पूरा साथ दिया यह किश 10 मं चली.

हम अलग हुवे.

तनीषा झात सी मेरी सीने सी लाग गई.

मैं भी उसके बलून में हाथ फेरनी लगा हम दोनों चुप थय बीएस एक दोस्सरी को महसूस क्र रही थय.

फिर तनीषा बोली.

तनीषा:- आपकी इजाज़त हो तो कुछ बोलूं.?

मैं:- यह किसी बात होइ मैं न्य कोई बात कटी ही आपकी.?

तनीषा:- जो बोलनी जा रही हूँ शायद आपको ाचा ना लगी.

मैं:- नहीं लगी गए प्रॉमिस.

तनीषा:- किरण को अपना लू.

मैं कुछ नहीं बोलै और न hi अपना हाथ रोका.

तनीषा सीने सी अलग होइ और मेरी आंखों में देखनी लगी.

मुझी कुछ न बोलती देख वह बोली.

तनीषा:- मैं जानती हूँ जो कुछ भी हुवा वह सही नहीं था लेकिन अभी वह दुनिया में साब सी ज़यादा आपको प्यार करती ही.

मैं:- मैं न्य कभी भी उसको जाने का नहीं बोलै तो अपनानी की क्या बात ही.?

तनीषा:- मतलब.?

मैं:- जाने का फैसला उसका था मैं तो आज भी उसका इंतज़ार करता हूँ.

तनीषा:- तो फिर बोलती क्यू नहीं ?

मैं:- कुछ बातें बोलने क लिए नहीं होती प्यार वह समुंदर ही जिस में डूबने क बाद hi ज़िन्दगी मिलती ही और उसने पेहली तैरनी का फैसला किया था लेकिन इस में वह बोहत यज्ञ निकल गई थी लेकिन उसको वापिस अन्य में बोहत वक़त लग गया तनीषा.

तभी आंखों में आंसूं निकल गए.

तनीषा न्य मुझी गली लगा लिया और चुप करवानी लगी.

तभी दरवाज़ा बजा और कोमल अंदर आगे.

कोमल:- अरे वह लव बर्ड्स यहाँ हैं हामी भी प्यार का मौका दो अपने पति देव का.

तनीषा:- तो नहीं सुधरी गई.

तनीषा मेरी तरफ नज़रूँ में साब ठीक होजाये गए कह क चली गई बाहिर.

कोमल दरवाज़ा बांड क्र क ी.

मैं:- मैडम िरदय नीक नहीं हैं आपकी.

कोमल न्य मुझी बीएड लय लिटा दिया और ऊपर बेथ गई और मेरी करीब ाकय बोली.

कोमल:- िरदय तो बोहत खराब ही लेकिन अभी क लिए यह hi आपकी सजा ही.

उसने मुझी किश करना सॉर्ट क्र दी. वाइल्ड किश जोके काफी देर चली फिर वह मेरी सीने पी लेट गई.

फिर वह चली गई और फिर तभी आयेशा अंदर आ गई.

आयेशा:- हामी तो आप बबूल हिगए.

मैं:- डिल अपनी धरकन कभी नहीं भूल सकता.

फिर आयेशा न्य अपने गिल्ले शिकवे दूर किये. फिर नूर अंजलि और अबीरा भी ी.

मैं फ्रेश होकय बाहिर नुकला और तभी वहां रानी आ गई.

रानी सर नीची क्र क खरी थी.

मैं:- क्या हुवा रानी ऐसी क्यू खरी हो.?

रानी:- आईएम सॉरी मेरी वजह सी क्या कुछ नहीं सुनना पारा आपको.

मैं:- अरे पागल हो क्या मैं न्य दोस्त मन था इसी लिए साब कुछ किया.

रानी:- तो क्या आपको मैं पसंद हों.?

यह बात उसने बोहत खुश होतव्य हुवे कही थी.

मैं:- अरे पेहली दिन सी बोहत अछि लगती थी मुझी.

रानी:- सच में.?

मैं:- हम्म.

रानी:- T..To..

मैं:- क्या हुवा बोलो.

रानी:- K..Kya ..मैं आपको एक बार H...Hu...Hug क्र सकती हूँ.?

मैं न्य बिना कुछ बोली अपनी बाहें फैला दिन वह जैसी इसी का इंतज़ार क्र रही हो भाग क ी और मेरी गली लग गई और मुझी कस क पाकर लिया जैसी मैं कहीं भाग जाओं गए.

5 मं बाद वह अलग होइ और जल्दी सी गाल पी क्र क भाग गई.

मुझी तभी कुछ याद आया.

मैं:- ओह्ह सहित यह किसी भूल गया.

मैं जल्दी सी कमरे सी निकला और बाहिर आया और माँ को ढोंढाण्य लगा वह पका मेरी सी नाराज़ होंगी.

तभी वह मुझी दिखी जोके कमरे में शिष्य की तरफ मुँह क्र क बाल बना रही थी.

मैं जल्दी सी कमरे में गया और दरवाज़ा बांड क्र दिया और उसके पास अन्य लगा उनको पता चल गया था क मैं आ रहा हूँ लेकिन वह तभ भी ऐसी hi बल बने में बिजी थी.

मैं उनके पिच्य जाकय खरा होगया और अपना लुंड जोके साब सी मिललंय वाली किस्सेस क वजह सी खरा था वह उनकी गांड की लाइन पी रख दिया और अपना हाथ उनकी पेट पी रख दिया.

वह इस को बरदहस्त नहीं क्र पाई और सरहा उठी.

माँ:- अह्ह्ह्हह सससस मैं नाराज़ हूँ तुझ सी.

मैं:- जनता हूँ लेकिन आपको एक ख़ुशी की बात बतानी आया था.

माँ:- क्या.?

मैं अपना एक हाथ उनके मंय पी लय गया जिस सी वह और पागल होगी और मेरी गर्दन पी किश करनी लगी.

मैं:- हम कल कहीं जा रही हैं.

माँ:- कहाँ ?

मैं:- ब्लू एम्पियर

तो बे कंटिन्यू.
 
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माँ एक डैम सी सीधी होगी.

मैं:- क्या हुवा ख़ुशी नहीं होइ.?

माँ:- क्या यह सही होगा इस वक़त.?

मैं:- हाँ मुझी लगता ही क अब साब कुछ सही ही बीएस उसका इंतज़ार होगा.

तभी वहां एक रोशिनी ी और अंदर सी पापा बाहिर निकले.

मैं सीधा जा क उनके गली लगा

उन्होंने न्य भी मुझी गली लगा लिया.

पापा:- मैं बोहत खुश हूँ क तूने अपनी पहली लड़ाई जीत ली.

मैं:- यह साब आपका भरोसा था.

पापा:- लेकिन कुछ चीज़ों क लिए अभी वक़त नहीं आया.

मैं:- कोनसी चीज़ें.?

पापा:- ब्लू इम्पॉयर जाने का.

मैं:- लेकिन क्यू अब तो मैं वहां जा सकता हूँ और क्या अभी शादी का वक़त भी नहीं आया.?

पापा:- शादी क लिए मैं नहीं रोक रहा ब्लू एम्पियर नहीं जा सकती अभी तुम.

मैं:- वहां क्यू नहीं जा सकता.?

पापा:- क्यू क तुम्हारी वहां जाती Hi साब कुछ फिर शुरू होजाये गए वह आज़ाद होजाये गए और उसी इस बार कोई रोक भी नहीं पाए गए.

मैं:- मैं रोको गए उसे.

पापा:- उसको बीएस तभी रोका जा सकता ही जब तुम्हारी शक्तियां पूरी हूँ और तुम्हरो साडी शक्तियां पूरी नहीं होइ.

मैं:- अपने बताया था मेरी हर शक्ति मेरी बीवी का रूप लय गई.

पापा:- हाँ.

मैं:- तो अभी साब पूरी हैं न.?

पापा:- नहीं अभी कुछ काम हैं जो यज्ञ तुम्ही मिल जाये गई.

मैं:- इसका क्या मतलब.?

पापा:- मतलब यह क कुछ शक्तियां अभी बाकि है तुम्हारी जिनके मिलने में अब ज़यादा टाइम नहीं ही बीएस अपनी आंखें खुली रखनी होंगी.

मैं:- पापा मैं सच में इस कबिप नहीं हूँ क ब्लू एम्पियर न जा सकूं.

पापा:- मेरी बेटे मैं यह कह रहा हूँ क हम पेचलय 100 सलून सी तेरी प्रतिज्ञा क्र रही हैं और तुझी कुछ न हो हम साब बीएस यह hi चाहती हैं तेरी लिए तो करोरून लोग जान देने को त्यार रही गए और रही बात क़ाबलियत की तो शायद hi कोई हो जो तुझी हरा सकी.

मैं:- समजह गया पापा सुबह शादी तो होकय रही गई.

पापा:- शादी क बाद हुमाय गाओं Hi रहना होगा

मैं:- वह क्यू.?

पापा:- वह शादी क बाद बताओं गए अभी मुझी जाना होगा बोहत ज़रूरी काम ही

मैं:- हम्म सुबह जल्दी अजैये गए साब को लय क्र.

पापा:- हम्म्म.

पापा चली गए.

मैं न्य पलट क देखा तो माँ हामी घूरय जा रही थी.

माँ:- तुम दोनों न्य एक बार भी नहीं देखा मुझी.?

मैं उनके पास गया और गली लगा क किश किया.

मैं:- आपको तो हर पल देखनी का माँ रहता ही.

माँ:- चल चल कल अपनी बीवियों क साथ सुहाग रात मानना.

मैं:- अभी तो आपकी साथ मानों गए.

माँ:- मैं तो कब सी ट्रास गई थी.

फिर मैं न्य रात को जाम क्र 2 बार चुदाई की और उनके साथ hi सोग्य.

तो बे कंटिन्यू.

नोट:- दोस्तों मुझी पता ही क अपडेट छोटा ही लेकिन टाइम न मिलनी की वजह सी बीएस इतना hi लिख पाया हूँ मैं आज कल बोहत बिजी हूँ स्टोरी परहंय तक का टाइम नहीं मिल रहा जैसी hi टाइमिंग थोड़ी लाइन पी ए गई रेगुलर अपडेट ए गए आईएम सॉरी आईएम रियली सॉरी.
 
अपडेट NO.87


सुबह जब मेरी आंख खुली तो माँ बीएड पी नहीं थी मैं उठ क वाशरूम में चला गया जाकय फ्रेश होकय बाहिर आया तो पूरी हवेली का नक्शा hi बदल चूका था हर तरफ फूल और सजावट थी और कुछ लोग तो अभी क्र भी रही थय सहवत मैं वहां सी सीधा नीची आया मुझी देख क सब हाथ जोर क झुक रही थय मेरी लिए यह थोड़ा अजीब था.

मुझी कोई नहीं दिख रहा था मैं नीची गया तो वहां इंदू थी.

मैं उनके पास गया और उनको पिच्य सी कंधी पी हाथ रखा उन्होंने पलट क देखा तो मुझी देख क झुक गई.

मेरी लिए यह साब सी अजीब था.

मैं:- यह क्या.?

इंदू:- आप हमारी महराज हैं हम किसी आपकी सामन्य ऐसी खरी हिसकती हैं.

मैं न्य बिना कुछ बोली इंदू का हाथ पकड़ा और वहीँ साइड में स्टोर रूम में लय गया और बोरी क साथ लगा दिया उसको.

और बिना कुछ बोले उसके होंठ अपने होंठों में लय लिए और फिर अलग क्र दिए.

मैं:- क्या ही यह साब.?

इंदू:- यह तो आप क्र रही हैं.

मैं:- मैं यह महराज वाली बात क्र रहा हूँ साब ऐसी क्रय मुझी ज़्यादा प्रॉब्लम नहीं ही लेकिन आप क्यू क्र रही हैं.?

इंदू:- क्यू क आप मेरी भी महराज हैं.

मैं न्य इंदू को चूर दिया और बोलै.

मैं:- तुम्ही मुझसी प्यार ही न तो यह साब नहीं कहो गई वर्ण.

इंदू:- वर्ण क्या.?

अब उड़कय चेरी पी हलकी सी मुस्कान आ गई जिस सी मैं समझ गया क वह मेरी टांग खेंच रही थी.

मैं यज्ञ भर क उसकी नंगी कमर में हाथ दाल क उसकी करीब किया और बोलै.

मैं:- मेरी फिरकी लय रही थी न.?

इंदू न्य कुछ नहीं बोलै बीएस किश करनी लगी जिस में मैं न्य उसका साथ दिया तभी बाहिर सी कृष्णा अंकल की आवाज़ ी जिस सी हम अलग होगये.

मैं:- वैसी साब लोग कहाँ हैं.?

इंदू:- साब पूजा करनी गए हैं.

मैं:- किसी पूजा.?

इंदू:- शादी सी पेहली दुल्हन की पूजा होती ही उसकी बाद वह दूल्हा सी सिर्फ सुहागरात पी hi मिली गई.

मैं:- यह क्या बात होइ.?

इंदू:- अब यह रीत तो पूरी करनी पारी गई.

फिर इंदू चली गई और मैं भी बाहिर आया तो अमित बाहिर hi खरा था.

मैं:- आबय साली कहाँ बिजी ही कुछ देर ठीक सी बात तो क्र लय.

अमित:- बीएस यहीं हूँ तेरी शादी की तयारियोँ में लगा हूँ. वैसी अब यह गली नहीं लिट्रल होगया ही. ः.

मैं:- ः अब तो बुरा भी नहीं माने गए.

अमित:- हाँ याद आया तुझी मंदिर जाना होगा और हाँ माँ कह रही थी क उस सी पेहली चाट पी जाना ही तुझी शायद कोई काम ही.

मैं:- साब निकल गए.?

अमित:- हाँ बीएस तो जल्दी सी उसी लय क पोहंच.

मैं:- किसी.?

अमित:- उप्पेर जा क देख लय.

मैं:- O.k.

मैं उप्पेर की तरफ चला गया जहाँ का दरवाज़ा बांड था मैं न्य थोड़ा सा खुला तो वह खुल गया और अंदरसी बलून्स बाहिर निकले जिनपे सॉरी लिखा था मुझी कुछ नहीं समझ लगी और जैसी hi मैं यज्ञ बढ़ा. सामन्य ज़मीन पी किरण कान पाकर क मेरी सामन्य बैठी थी और आंखों में आंसूं थय और जज़्बात उसके कण्ट्रोल में नहीं थी.

मैं न्य जैसी hi यह देखा मेरी कलेजा मुँह को आज्ञा और मैं पलट गया और मेरी आंखों में आंसूं आगये और वही मंज़र आज्ञा जिस दिन किरण न्य प्रपोज़ किया था मुझी.

तभी किरण न्य बोलना शुरू किया.

किरण:- मेरी ज़िन्दगी का साब सी बढ़ा सच बीएस यह ही क मैं आपसी बोहत प्यार करती हूँ बीएस यह आखरी फरियाद ही इस नाचीज़ की क मेरी तरफ एक नज़र मूर क देख लीजिये उसके बाद मैं आराम सी मर्डर...

अभी उसनी बात भी नहीं पूरी की थी क उसके चर्य पी एक थापर प्र. यह किसी और न्य नहीं मैं न्य मारा था.

मैं:- चुप एक डैम चुप जब देख उलटी सीधी बकवास करती हो यह मुझी बोहत पेहली क्र देना चाहिए था तुम समझती क्या हो क खुद क नुक्सान पोहनचाओ गई और मैं खुश हूँ गए तुम्हारी आंख सी निकली हर आंसूं सी बदली इस जिस्म सी खून निकले गए और अगर तुमनी कुछ किया तो याद रखना तुम्हारी आखरी सांस सी पेहली मेरा डैम टूटे गए.

किरण और सैम दोनों रू रही थय शायद अंदर का गुबार निकल रही थय और दोनों क ढिल्लों में एक दोस्सरी में समान्य की ीचा थी लेकिन कोई पहल नहीं क्र रहा था लेकिन दोनों न्य एक साथ Hi एक दोस्सरी को बहून में भार लिया.

मेरी आंखों सी बोहत आंसूं निकल रही थय और किरण भी रू रही थी उसको मैं न्य खुद सी ऐसे लगा क रखा था क फिर सी कहीं चली जाये गई वह.

किरण और मैं 30 मं तक बिना कुछ बोले बीएस गली लगी रही फिर मैं न्य खुद को संभाला और किरण को चुप करवाना भी ज़रूरी था.

मैं न्य उसका चेहरा पकड़ क उप्पेर किया वह अभी भी अब्खें बंद क्र क रू रही थी.

मैं:- किरण.

किरण बिना कुछ बोले आंखें खोली और मेरी आंखों में देखनी लगी.

मैं:- प्लीज अब चुप होजाओ. जो होना था होगया.

किरण:- मुझी माफ़ क्र दीजिये.

मशीन:- किरसन प्लीज तुमनी कोई गलती नहीं की जिसकी माफ़ी मांगू.

किरण:- मैं नहीं जी सकती आपकी बिना चाही अपने पैरूं की जोति बना क रखना बीएस अलग मात कर्ण.

मैं:- तुम हमेशा मेरी साथ थी और राहू गई. प्लीज पेहली रोना बंद करो.

मैं न्य उसको पानी दिया. और उसको बेथ दिया लेकिन वह मेरा हाथ नहीं चूर रही थी मैं न्य भी उसके हाथ को कस क पकड़ा और उसके सामन्य बेथ गया.

मैं:- जो होगया अब बीती बातून को नहीं याद क्रय गए.

किरण:- उस दिन.

मैं:- शहहह बिलकुल चुप कोई पुराणी बात नहीं बात बीएस आज की होगी और आज का सच तुम्हारी सामन्य है मेरी ज़िन्दगी में और भी लड़कियां हैं तुम साब जान चुकी हो.

किरण:- मैं अपजय बिना नहीं जी सकती मैं साब सी बात जर लोन गई भीएक मॉंग लोन गई लेकिन आपसी दूर नहीं जाओं गई.

मैं:- भीक नहीं हक़ मुझपी साब का पूरा हक़ ही क्या तुम मुझसी शादी करो गई.?

किरण न्य हाँ में गर्दन हिल्ला दी और फिर रोने लगी मैं न्य उसको चुप करवाया और हम नीची आगये और किरण त्यार होने लगी फिर हम मंडी चली गए और वहां साब न्य पूजा की और उसजय बाद साब लड़कियां पार्लर चली गई और मेरी दादा दादी साब आगये भैया भाभी भी आ गए थय.

तो बे कंटिन्यू.
 
अपडेट NO.88


सब आगये थय और मेरा इंतज़ार क्र रही थय मैं जब हवेली लूटा तो सबको सामन्य देख क बोहत खुश हुवा.

तभी मैं जाकय साब बैरन क पेअर चुवे.

दादी:- तो बोहत चालक निकला हामी कुछ बताया hi नहीं.

मैं:- अरे मुझी खुद कुछ पता नहीं था सब अपने आप hi होता गया.

फिर िद्र उदर की बातें क्र क साब रेडी होने चली गए.

आखिर कार शाम भी होगी और मैं न्य अब तक उन साब में सी किसी को नहीं देखा था.

मुझी नीची बुलानी माँ ी थी.

मैं उनके साथ नीची मंडप में गया.

साब मुझी देख क बोहत खुश थय.

तभी पंडित क केहनी पी साब को बुलाया गया.

साब एक साथ वहां ी. एक सी बार क एक क़यामत धा रही थी मैं तो जैम hi होगया अपनी जगह पी.

मुझी जानकी न्य हिलाया.

जानकी:- देवर जी होश तो पकरो अभी सी गम होगये.

साब उनकी बात पी हसनी लगी और मेरा चेहरा लाल होगया.

पायल:- अरे वह यह तो शर्मा रहा ही भाई तो लड़का ही. शर्मा मात एक डैम बिंदास रह.

तब तक वह साब वहां आगे थी.

फिर पूरी रीती रिवाज क साथ शादी होइ साब क साथ मेरी बरी बरी.

उसके बाद कुछ और रसमय क्र क साब को कमरे में लय गए और मैं नीची साब मेहमानो. को अलविदा कह क. ऊपर जाने लगा तो साब न्य घेर लिया मुझी मैं न्य भी थोड़ी खेचा तानी क बाद ुणो शगुन दी दिया.

मुझी अंदर जाने की जल्दी थी मेरी मान में अजीब सी ख़ुशी थी मेरा डिल ुर क अंदर जाने का क्र रहा था मेरी ज़िन्दगी का साब सी ख़ूबसूरत पाल मेरा इंतज़ार क्र रहा था.

मैं दरवाज़ा खोल क अंदर गया तो मेरी हिरंगी का ठिकाना नहीं था क्यू क अंदर का कमरा बोहत बारे था और उसकी अंदर बीएड भी बोहत बारे था मैं हैरान था क इतना बारे कमरा किसी आया फिर बाद में सोचनी का कह मैं अपनी जानो की तरफ बढ़ा जैसी जैसी मैं यज्ञ बढ़ रहा था मेरी डिल की धरकन बढ़ रही थी. और उनकी भी हालत खराब लाग रही थी.

साब घोंगट ुर्य बैठी थी और मेरा इंतज़ार क्र रही थी.

मैं जाकय बीएड क पास खरा होगया.

मैं सोच रहा था क किस का पेहली होंगत उठाओं फिर कुछ सोच मैं सीधा खरा होगया और एक चुटकी बजा साब घूंगट ऊपर क्र दिए जैसी hi मैं न्य साब को देखा मेरी होश ुर गए.

साब न्य जब देखा घूंगट उठ गया ही तो एक दोआरी की तरफ देखनी लगी.

मैं:- क्या हुवा ऐसी क्यू देख रही हो साब.?

तनीषा:- हमारी साब की शर्त लगी थी क साब सी पेहली घूंगट जिस का उठी गए वह पेहली.....

मैं:- हम्म्म क्या पेहली.?

तनीषा:- Wo....Woh.

मैं:- क्या हुवा बोलो कोमल आप बताओ.

कोमल घबरा गई और बोल पारी.

कोमल:- मैं नहीं यह रत्न दीदी न्य कहा था जिसका पेहली घूंगट उठी गए उसको आप पेहली प्यार करो गए.

रत्न:- मैं न्य नहीं यह नूर बोल रही थी.

मेरी हस्सी छूट गई.

मुझी हस्ता देख क साब को एहसास हुवा क उन्होंने साब बता दिया ही.

लेकिन तभी मुझी किसी न्य खेंचा मैं सिद्ध बीएड पी गिरा जाकय तभी साब मेरी इर्द गिर्द आ गई.

मैं:- अरे खाओ गई क्या साब?

तनीषा:- हाँ हम आपको कच खाये गए अगर हमारी मुँह दिखाई नाह दी तो.

मैं न्य रानी सी कहा क वह अलमारी में सी जो पारा ही वह लय क ए.

वह उठी और चली गई लेनी जब लय ी. तो साब की आंखें खुली की खुली रह गई.

क्यू क इस में एक जैसी नेकलेस और कंगन थय.

अबीरा:- वाओ इतना ख़ूबसूरत.

तनीषा न्य मेरी गाल पी किश किया.

मैं:- क्या यर सुहाग रात को भी कोई गाल पी किश करता ही.

तनीषा:- ओह्ह्ह मेरी बेबी को किधर किश चखिए.?

मैं न्य होंठ यज्ञ क्र दिए. तनीषा न्य भी मेरी होंठो पी हलकी सी किश क्र दी.

मैं:- इतनी छोटी.?

तनीषा:- मुझी शर्म ए गई.

मैं खरा हुवा और साब को बोलै.

मैं:- देखो आज क बाद हम सभ को मिल क रहना होगा. यह एक सचाई ही मैं किसी क साथ काम या ज़्यादा प्यार नहीं करता आप साब मेरी लिए एक जैसी हो ी लव यू आल.

सब:- वे लव यू तू!

मैं:- तो यह शर्म को अब हंसी अलग करना होगा.

मैं सीधा तनीषा को किश करनी लगा. फिर साब को किश किया और साब क कपृय उत्तर दिए जो शर्मा रही थी उसको प्यार सी मन क. मैं न्य साब को नांगा क्र दिया अब कमरे में 9 लड़कियां और एक लड़का नंगी लेती थय. मैं न्य साब को ाच्य सी चूड़ा मेरा स्टैमिना बोहत बढ़ गया था एक एक बार साब क फारिग होने बाद मैं फारिग हुवा और जैसी Hi मेरा पानी निकल सब नीची लेट गई साब पी गिरा और उनके जिस्म सी रौशनी निकली और मेरी लॉकेट क टोकरी पूरी होगये जिस सी मेरा जिस में और भी शक्तियां महसूस होने लगी.

तो बे कंटिन्यू.

नोट:- दोस्तों यह कहानी अपने अंतिम उपदटेस पी पोहच गई ही अगली कुछ उपदटेस क बाद इसका एन्ड होजाये गए. उम्मीद ही आपको यह पढ़ क मज़ा आया होगा.
 
अपडेट NO.89


नेक्स्ट डे सुबह मेरी आंख खुली तो कमरे में सूरज की किरणे मुँह पी आ रही थी मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था क्यू क मुझी कल रात का सुहाग रात क बाद का कुछ भी याद नहीं था.

मैं न्य िद्र उदर देखा तो कोई नहीं था.

मैं उठ क बेथ गया तभी दरवाज़ा खुल और तनीषा अंदर ी.

मुझी देखती hi मेरी पास ी.

तनीषा:- अरे उठ गए आप.? आपकी तबियत किसी ही.?

Main(heran होकय):- मेरी तबियत को क्या हुवा मैं बिलकुल ठीक हूँ.? और रात को क्या हुवा था?

मेरी गाल पी हाथ सेहला क.

तनीषा:- मेरी जान उस बात को 2 दिन बीत गौए हैं आप 2 दिन सी सू रही थय.

मैं बोहत शॉकेड था. उस टाइम.

फिर तनीषा न्य साब को आवाज़ दी.

साब भाग क कमरे में ए और मेरा हाल चल पॉच रही थय.

मैं:- माँ लेकिन हुवा क्या था मुझी तो कुछ याद नहीं.

माँ:- बीटा तुम्हारी पापा साब बता दी गए तुम्ही.

मैं:- मुझी अभी पापा सी बात करनी ही.

B'bua:- अरे अभी तो होश में आया ही आराम क्र बाद में बात क्र लेना.

मैं:- नहीं अभी करनी ही.

तभी किरण बोली.

किरण:- नहीं बिलकुल नहीं अभी आराम करो मैं खाना लती हु.

मैं:- अरे बाप रय इतना गुस्सा.?

माँ:- हाँ जी बीटा अब सभी तेरी बीवियां तूझपी गुस्सा क्रय उस सी पेहली Hi चुप होजा.

रश्मि:- तो गया बीटा.

साब हसनी लाग गए.

मैं उतनी लगा तो मेरी जिस्म में जैसी जान hi नहीं थी नैन गिरने लगा था तभी कोमल और तनीषा न्य मुझी पाकर लिया.

आयेशा:- ध्यान सी.

मैं बोहत परेशां था मुझी हुवा क्या ही.

फिर तनीषा मुझी बाथरूम तक चोरकय ी.

मैं फ्रेश होकय नाहा क बाहिर निकला तो अब कुछ बेटर था अब मैं सही चल फिर रहा था लेकिन कोई भी पावर नहीं काम क्र रही थी मेरी. और पापा भी मुझसी मिलने नहीं ए थय.

मैं यह साब सोच hi रहा था और साब केरी पास hi थय और नूर और रत्न खाना खिल्ला रही थी.

कुछ देर बाद पापा फाइनली कमरे में ए और साब को बाहिर जाने का कहा.

साब बाहिर चली गए थय.

मैं:- पापा यह साब क्या हो रहा ही मुझी क्या हुवा था और न hi मेरी कोई पावर....

पापा:- मुझी पता ही बीटा तुम्हरी सारी सवाल मैं जनता हूँ और उनका एक hi जवाब ही और वह ही तुम्हारी शक्तियां.

मैं:- मतलब.?

पापा:- बीटा अब तुम्हारी साडी पावर्स पूरी हो चुकी हैं और उनको सेहान करनी क लिए तुम्हारा जिस्म अभी त्यार नहीं ही.

मैं:- लेकिन अगर जिस्म त्यार नहीं तो मिली क्यू.?

पापा:- उनको एडजस्ट होने क लिए तुम्हारी जिस्म को त्यार करना होगा जिस्मी कुछ वक़त लगी गए ताब तक तुम शक्ति हीं रहो गए.

मैं:- ओह्ह अब समझ आया.

पापा:- हाँ इसी लिए यह जगह सेफ नहीं ही तुम्ही आज Hi गाओं चलना होगा.

मैं:- वह क्यू.?

पापा:- क्यू क कोई भी बुरी ताकत उधर नहीं आ सकती जब तक तुम्ही शक्तियां नहीं वापिस आ जाती.

मैं:- हम्म्म.

पापा:- और हाँ वह वक़त बोहत नज़दीक ही जब वह वापिस ए गए क्यू क जैसी hi तुम्हारी ताकत पूरी होइ ही वह भी आज़ाद हो चूका ही. लेकिन उसको अपनी ताकत इकठा करनी क लिए उसी वक़त लगी गए कितना वक़त यह मुझी भी नहीं पता वह कभी भी B.E. पर अटैक क्र सकता ही तुम्ही त्यार रहन होगा.

मैं:- ठीक ही पापा मैं त्यार रहूं गए.

पापा:- मुझी टुमस्य यह hi उम्मीद थी. हम शाम को गाओं जा रही हैं.

मैं:- Ok पापा.

फिर पापा मेरी एक बार गली लग क चला गया और उसके जाती hi फिर साब अंदर आगे और पोचनय लगी पापा न्य क्या कहा.?

फिर मैं न्य साडी बात बता दी और हम जाने की तयारी करनी लगी.

शाम को हम निकल गए इंदू और बुआ बोहत रू रही थी लेकिन साब को मिलती रहने का कह हम निकल गए.

कुछ घंटून क सफर क बाद हम गाओ पोहंच गए और हवेली मैं जाकय अपने अपने कमरे डीडे किये साब न्य जोड़ी में रूम लिया था और मेरी साथ किरण और कोमल सोती थी

मैं न्य अपनी सेहत का ध्यान रखा और बीएस ऑफिस का काम देखता था और रात को बरी बरी साब की खूब बजता था.

शादी क बाद बीएस अपनी पत्नियों क इलावा बीएस माँ क साथ सेक्स किया था मैं न्य ऐसी hi वक़त गुज़र रहा था हस्सी ख़ुशी. इतने में बुआ और आंटी दोनों न्य नन्ही परियोँ को जनम दिया. और मेरी सभी पत्निया गर्ब्वती होगी एक एक क्र क.

ऐसी Hi 1.5 साल गुज़र गया.

तो बे कंटिन्यू.

नोट:- नेक्स्ट अपडेट विल बे फिनॉल.
 
लास्ट अपडेट.


करीब शाम का वक़त था अउ आज शाम बोहत अजीब थी देखनी सी लग रहा था क आज कोई बारे तूफान अन्य वाला ही लेकिन वह तो वक़त hi बताये हम देखती हैं हमारा हीरो और उसकी फॅमिली कहाँ हैं आज 1 साल क बाद मिल रही हैं उनसे.

एक हॉस्पिटल क अंदर ऑपरेशन थिएटर क बाहिर खरा था मैं.

आज तनीषा की डिलीवरी होने वाली थी. और बाकि सबकी डिलीवरी डेट्स भी बोहत करीब थी. वह साब घर पी थीं.

मेरी अजीब सी हालत थी एक तरफ बोहत खुश था क मेरा बचा अन्य वाला ही इस दुनिया में और दूसरी तरफ परेशां था तनीषा क लिए.

मैं इन दिनों एक दिन भी गाओ सी बाहिर नहीं गया था क्यू क साब बोहत ध्यान रखती थय इस बात का खास तो पर मेरी पत्नियां.

मेरी साथ माँ और A'bua और मस्सी थी.

तनीषा को अंदर गए अब 1 वहन्ति सी ज़्यादा होगया था मैं बोहत परेशां था अचानक बिजली करकने लगी और ज़ोर सी बारिश शुरू होगी.

तभी मेरा फ़ोन बजा.

मैं न्य देखा तो इशिका का फ़ोन था.

मैं न्य पिक किया.

मैं:- Hello.

Ishika(ghbrate हुवे):- सैम प्लीज मुझी बचा लो कोई मेरा पीछा क्र रहा ही और बार बार तुम्हारा पॉच रहा ही.

मैं:- कोण ही तुम कहा हो? Hello Hello.

फ़ोन कट होगया बारिश की वजह सी सिग्नल सुत्त होगये थय.

मैं:- माँ मुझी जाना होगा आप प्लीज जैसी hi कोई खबर मिल्ली मुझी फ़ोन क्र देना.

माँ:- नहीं बीटा तो मात जा देख कितनी तेज़्ज़ बारिश हो रही ही और मेरा डिल भी घबरा रहा ही.

मैं:- माँ मेरा जाना ज़रूरी ही आप चिंता ना करो.

मैं वहां सी बाहिर निकला. और गारी में बैठा गया और अमित को कॉल करनी लगा लेकिन कॉल लग hi नहीं रही थी.

एक बात बता दूँ मैं रोज़ ध्यान क्र रहा था जिस की वजह सी मेरी पावर्स वापिस आना शुरू होगी थी.

इसी लिए मुझी इशिका का पता चल गया वह कहाँ ही.

लेकिन मैं वहां टेलिपोर्ट नहीं हो प् रहा था पता नहीं क्यू.

इसी लिए मैं न्य गारी सी जाने का फैसला किया. वह जगह गाओ क बाहिर वाली हिस्से की थी.

मैं स्पीड में चला रहा था और जल्द hi मैं वहां पोहंच गया. यह एक खली मैदान था बीएस कुछ पैर लगी थय.

मैं गारी सी निकला और इधर उधर देखनी लगा.

तभी मेरी नज़र एक पैर पी पारी वहां सी किसी का हाथ बाहिर निकला हुवा था.

मैं वहां गया तो देखा यह इशिका ही जैसी सर पी चोट लगी ही और वह बेहोश ही बारिश सी भीगी होइ ही.

मैं उसको पकड़ा और गारी तक लय आया और पिच्य वाली सीट पी लिटा दिया.

अचानक मुझी मेरी पिच्य सी किसी क हसनी की आवाज़ अन्य लगी यह बोहत भयानक हस्सी थी एक बार को मैं भी घबरा गया.

मैं न्य पलट क देखा एक लमबा सा शख्स लम्बी बाल लाल आंखें और हस्स रहा ही

मैं:- कोण हो तुम और तुमनी इसकी साथ ऐसा क्यू किया.

वह:- हाहाहा मुझी नहीं पहचाना तुमनी वैसी हम पहली बार मिल रही हैं और आखरी बार भी.

मैं:- तो तुम आ hi गए डरहम.

डरहम:- हाँ आज्ञा वापिस तेरी मोत बाण क और पोरी ब्लू एम्पियर पी राज करनी.

मैं:- मुझी तो लगा था तुम बहादुर हो लेकिन तुम तो बारी बुज़दिल हो.

डरहम इस सी गुस्सा होगया एयर मेरी करीब आया ुर क और आंखें गुस्से में लाल थी उसकी.

डरहम:- आज तेरी मौत का दिन ही बोल लय जो बोलना ही.

मैं:- टेरत जैसी बुज़दिल क हाथ में नहीं सैम ठाकुर की मौत. तू एक लड़की का सहारा लय क मुजस्य मिला.

डरहम:- हाहाहा तेरा बाप बोहत चालक ही तुझी और तेरी साडी शक्तिययों को छुपा क रखा था लेकिन तेरी एक शक्ति को छुपाना भूल गया. हाहाहा.

मैं बोहत हैरान था क मेरी शक्ति तो मेरी बीवियां हैं और इशिका मेरी शक्ति किसी होइ. मुझी समझनी में देर नहीं लगी क मेरा इसकी साथ क्या लिंक ही.

यह सुन क मुझी और गुस्सा आज्ञा और मेरी भी आंखें गुस्से सी लाल होगी और मैं भी थोड़ा सा हवा में ुरा और एक मौका उसकी मुँह पी मारा जिस सी वह दूर जाकय गिरा.

लेकिन वह फिर सी उठा और वहीँ सी जल्दी सी मेरी तरफ ुर क आया और मेरी गली सी मुझी गस्सेट क ज़मीन क अंदर लिया दिया और मेरी मुँह पी ज़ोर सी मौके मारण्य लगा.

मैं बेबस होता जा रहा था मेरी शक्तियां भी अभी पूरी नहीं होइ ठु.

उसके हर एक वार सी मेरी हालत खराब हो रही थी.

उसनी मेरी गर्दन सी पाकर क मुझी उठाया और बोलै.

डरहम:- तो ही वह जैसी मुझी खतरा ही और तेरी बाप न्य एक नामर्द पला ही मेरी सी भरनी क लिए उसको नहीं चोरून गए मैं मुझी 100 साल तक कैद रखा उसनी.

तभी वहां एक रौशनी होइ और अंदर सी. पापा बाहिर निकली.

पापा:- नामर्द नहीं शेर को त्यार किया ही मैं न्य.

उसनी जैसी hi पापा को देखा गुस्से सी लाल होकय मुझी दूर फ़ेंक क पापा की तरफ जाने लगा तभी उन्होंने कुछ हाथ सी उसकी ऊपर फेंका जीसीस वह त्रफनी लगा.

पापा जल्दी सी मेरी पास ए और मुझी अपनी होड में लिटा लिया.

मेरी हालत खराब थी सर और नाक सी खून निकल रहा था मेरी और मैं आधा होश में था.

पापा:- होश में औ सैम. हमारी पास ज़्यादा वक़त नहीं ही सिर्फ तुम हो जो उसी रोक सकती हो. मुझी कुछ करना होगा इस वक़त तुम्हारी साडी शक्तियोँ को तुम्हरी साथ होना चाहिए था वर्ण अनर्थ होजाये गए सैम.

मैं:- यह कब तक सही होगा.?

पापा:- कुछ देर में.

मैं:- मैं इसको देखता हूँ आप उनको लय आइये. और वडा कीजिये क अगर मुझी कुछ होगया तो आप बिना कोई पल गवाए उनको यहाँ सी लय जाये गए और किसी को कुछ नहीं होने दें गए.

पापा:- लेकिन बीटा.

Main:-Ap वडा कीजिये मुझसी.

पापा:- वडा किया.

मैं झात सी खरा होगया और अपनी नाक को साफ़ करनी लगा. और बोलै.

मैं:- आप जाइये.

पापा जल्दी सी चली गए.

तब तक वह भी सही होगया.

डरहम:- तुम बाप बेटे बीएस यह चल क्र सकती हो लारण्य की हिम्मत ही नहीं.

मैं:- हिम्मत तो बोहत ही बीटा अजा तुझी दिखता हूँ.

तभी और मैं एक साथ भागती हैं और मौका आपस में टकरा जाता ही जिस सी एक रोहणी निकलती ही और हूँ दोनों पिच्य गिरती हैं मैं ज़्यादा डोर गिरा था.

लेकिन बिना देरी किये मैं उठा और उसकी ऊपर जम्प क्र दिया लेकिन वह मुझी उठा वहीँ सी गिरा दिया.

उसनी मेरी टांग क ऊपर एक लात मरी अपनी जिस सी मैं कराह उठा.

लेकिन हिम्मत क्र क उसको पाकर दूर फेंका.

वह सीधा कार क पॉज़ जाकय खरा होगया तभी वहां पी इशिका. गारी सी बाहिर आगे वह बोहत घबरा रही थी और जैसी hi मुझी देखा भाग क मेरी पास अन्य लगी लेकिन तभी उसनी इशिका को पाकर लिया.

मैं:- चोर दी उसको मैं तुझी कहता हूँ मुझसी लार जितना लारी गए

उसनी यह सुन क इशिका को चोर दिया वह साइड लय जाकय गिरी.

वह मेरी तरफ भाग क आया मुझी नोहत गुस्सा अन्य लगा था मैं पागल होगया था गुस्से में मैं न्य उसकी गर्दन पकरि और उसको पिच्य को लय जाने लगा और मैं न्य उसकी मुँह पी घोसी मारण्य शुरू किये जैसी सी उसको काफी नुक्सान हो रहा था. अब मुझी कुछ होश नहीं था मैं पगलून की तरहं उसी मरी जा रहा था. इस बार मैं भरी पर गया था ुसपय.

लेकिन जाने के अन्य मुझी पिच्य ढाका दी दिया और ुर अपने हथून सी ग्रीन रे निकल क मुझपी डाली जैसी सी मेरा जिस्म जलने लगा और मेरी अह्ह्ह्ह निकल गई.

इशिका यह देख क भाग क मेरी पास ी. और मेरी गली लग गई.

जैसी hi वह गली लगी रे का असर ख़तम होगया और वह मेरी जिस्म सी निकल hi नहीं पा रही थी. डरहम यह देख पागल होगया उसनी फिर सी आंखें बांड की और इस बार ब्लू रे निकली जिस सी इशिका और मुझी दोनों को तकलीफ होरही थी हम दोनों डोर जाकय गिरी.

लेकिन हमारी हाथ नहीं अलग होवय.

मेरु हिम्मत अब जवाब दी रही थी.

लेकिन तभी वहां पी वही रोहणी ी. और उसके अंदर सी मेरी शक्तियां बाहिर निकली और जैसी hi सब की नज़र मुझपी पारी वह भाग क मेरी पास ी और देख रोने लगी और जैसी hi सबनी ाक्य मुजबी चुवा मेरी जिस्म में जैसी फिर सी जान वापिस आ गई और मैं फिर सी अपने अंदर शक्तिअन महसूस क्र सक रहा था.

लेकिन अभी कुछ कमी थी देखा तो तनीषा नहीं थी.

मैं:- तनीषा नहीं ी.?

आयेशा:- दीदी का ऑपरेशन अभी भी चल रहा ही.

दुरहम पापा क साथ लार रहा था दोनों एक दोआरी सी मुक़ाबला क्र रही थय जिस में डरहम भरी पर रहा था.

मैं उठा और उसकी पास जाकय उसकी पेट में लात मरी.

पापा:- सैम अपनी तलवार क बिना इसी तुम नहीं मर पाओ गए.

मैं:- बोहत कोशिश क्र रहा हूँ लेकिन वह नहीं ला प् रहा.

तभी मुझी एक लात पारी मैं दूर जाकय गिरा.

दुरहम हवा में खरा हुवा और उसनी अपने सोनो हाथ उप्पेर किये और कुछ मन्त्र पढ़ा जिस सी बिजलियाँ निकलनी लगी और और वह स्पीड में मेरी तरफ अन्य लगा.

लेकिन तभी वहां एक चीज़ ुर क ी और डरहम को लगी वह वहां सी दूर जाकय गिरा.

सब हैरान होगये पापा भी.

लेकिन मेरी चेहरी पी मुस्कान आ गई और जब थोड़ी लाइट काम होइ वहां पी तनीषा को खरी देख क सब हैरान थय और उसकी हाथ में मेरा बचा भी था.

वह ुर क मेरी तरफ आ रही थी और उसको नीची सी अदि ुर का ला रहा था.

तनीषा मेरी पास ी. और गली लग गई.

तनीषा:- आप ठीक हैं.?

मैं:- मेरी बेटी क होती जुवे कहाँ कुछ होगा.

मैं न्य उसको देखा उसनी स्माइल क्र दी.

तभी अदि मेरी सामन्य झुका और मेरी तलवार अपने हाथों में मंगवाई.

मैं न्य तलवार लू और अपने बेटे क सर पी एक किश किया.

उसनी स्माइल की.

तनीषा क पास सब आ गई और खरी होगी.

मैं उसकी तरफ बढ़ा और अपनी तलवार को हवा में क्र किया जिस सी बीजोल्यां करकने लगी और मैं हवा में उठा और उसी तलवार को मैं न्य डरहम क डिल में मारा. जैसी उसकी चीख निकल गई मैं न्य लगातार साथ वॉर किये उसी डिल पी जिसकी बाद वहां धुवां बाण गया और कुछ देर में सारा अस्समान साफ़ होगया.

सब भाग क मेरी पास ी. और मेरी गली लग गई. इशिका सूर hi खरी थी.

मैं न्य उसकी तरफ डेल्हा और बाहें पहला दी वह भाग क मेरी गली लगी.

फिर तनीषा बोली.

तनीषा:- वैसी आपका बीटा अपनी पापा क पास आना छह रही.

मैं:- अली मेला बीटा.

मैं न्य उसको अपनी भावों में उठाया.

मैं:- मेरा प्यारा बीटा. अभी

तनीषा:- मैं न्य भी यही नाम सोचा था मेरा बीटा अभी.

सब:- बोहत ाचा नाम ही.

कुछ दिनों बाद मेरी और इशिका की शादी होइ और मेरी 7 बेटी और 3 बेटियां होइ जिनके साथ मैं कुछ सिन ब्लू एम्पियर में और कुछ दिन धरती पी गुज़ारनी लगा और भी खत्री ए ज़िन्दगी में लेकिन साब का डाट क ुक़ाबला किया.

थे एन्ड
 
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