Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता. - Page 114 - SexBaba
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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

सरयू सिंग सोनी के अतीत में उसकी यादों में है पर सूरज वर्तमान है.

ध्यान से पढ़ने पर मुझे लगता हैंय बात स्पष्ट हो जाएगी। मोनी का आगमन भी उचित समय पर हो ही जाएगा बस अभी इतना ही कहूंगा मोनी अब तक।कुंवारी ही है और सील पैक है
 
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“स्त्री का ऑर्गैज़्म योनि से कोई संबंध नहीं रखता; योनि तो केवल प्रजनन की व्यवस्था है। स्त्री का ऑर्गैज़्म पुरुष द्वारा योनि के माध्यम से संभोग करने पर निर्भर नहीं है—वह तो प्रजनन के लिए ठीक है। स्त्री के पास एक अलग अंग है—बहुत छोटा-सा—क्लिटोरिस, जो पुरुष के संभोग के मार्ग में नहीं आता। जब तक पुरुष स्त्री की शारीरिक संरचना (फिज़ियोलॉजी) को नहीं समझता—और सामान्यतः कोई पुरुष समझता भी नहीं—तब तक बात नहीं बनती। मनुष्य दुनिया का एकमात्र अनुभवहीन प्रेमी है, क्योंकि विवाह से पहले न तो पुरुष को कोई अनुभव होता है और न ही स्त्री को। यह बहुत अजीब दुनिया है—दो लोग पूरी ज़िंदगी साथ रहने जा रहे हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि क्या करना है। स्त्री का क्लिटोरिस ही वह अंग है जो उसे सुख देता है, और वह उसकी योनि का हिस्सा नहीं है। पुरुष का स्खलन अधिकतम दो-तीन मिनट में हो जाता है। और उसे जल्दी करनी पड़ती है, क्योंकि अगर पाप कर रहे हो तो जल्दी करो—ज़्यादा देर मत करो, नहीं तो याद रखना, नर्क की आग! जब तक पुरुष स्त्री की शारीरिक रचना को नहीं समझता—जिसकी उसने कभी ज़हमत ही नहीं उठाई—तब तक वह यह भी नहीं समझेगा कि स्त्री का पूरा शरीर यौन-संवेदनशील होता है। पुरुष का पूरा शरीर यौन-संवेदनशील नहीं होता; उसकी कामुकता बहुत स्थानीय होती है—सिर्फ़ उसके यौन अंगों तक सीमित। स्त्री का पूरा शरीर कामुक होता है। और जब तक पुरुष उसके पूरे शरीर के साथ खेलकर, उसे जगाकर—यानी फ़ोरप्ले करके—उत्तेजित नहीं करता, तब तक स्त्री जागती ही नहीं। लेकिन कोई पुरुष यह करना नहीं चाहता, क्योंकि इसमें समय लगता है, और जल्दी करनी होती है—कहीं भगवान न आ जाए! इसलिए फ़ोरप्ले बंद! ख़ासकर ईसाइयों ने ‘मिशनरी पोज़िशन’ को प्रचलन में लाया, जिसमें सुंदरता नीचे और जानवर ऊपर होता है। बेचारी स्त्री को लगभग मरी हुई-सी लेटना पड़ता है—तभी वह ‘लेडी’ मानी जाती है। आनंद तो सिर्फ़ वेश्याएँ लेती हैं। सम्मानित स्त्री कराहे नहीं, आहें न भरे, खुशी में बुदबुदाए नहीं, चिल्लाए नहीं। इसलिए उसे सिखाया गया है कि पुरुष के संभोग के समय वह बिल्कुल निर्जीव रहे। यह एकतरफ़ा प्रेम है—दूसरी ओर बिल्कुल मुर्दगी है; दूसरी ओर को जगाया ही नहीं गया। जो लोग सेक्सोलॉजी को समझते हैं, वे कहते हैं कि स्त्री को ऊपर होना चाहिए ताकि उसे अधिक गतिशीलता मिले, और पुरुष नीचे हो ताकि वह शांत रह सके—क्योंकि उसका स्खलन तो दो मिनट में हो जाता है! अगर वह शांत रहे तो बीस-तीस मिनट संभाल सकता है। स्त्री को उत्तेजित होने में कम-से-कम दस मिनट लगते हैं। यह असमानता है, और इसे तभी पूरा किया जा सकता है जब पुरुष यह समझे कि स्त्री सिर्फ़ उपयोग की जाने वाली मशीन नहीं है। वह भी एक आत्मा है, उतनी ही जीवित, और उसे भी उतना ही सुख पाने का अधिकार है जितना तुम्हें। इसलिए फ़ोरप्ले आवश्यक है, और पुरुष नीचे हो, स्त्री ऊपर। पुरुष ‘लेडी’ की तरह लेटा रहे और स्त्री सच्ची शरारती बने! तभी यह संभव है कि दोनों एक साथ ऑर्गैज़्म तक पहुँचें। जब दोनों थरथराने लगें, नियंत्रण से बाहर होने लगें—तभी वे जानते हैं कि सेक्स में क्या निहित है। यह केवल प्रजनन का अंग नहीं है; यह अपार आनंद का भी अंग है। और वह आनंद—मेरे अनुसार—ध्यान की पहली झलक देता है, क्योंकि उन क्षणों में मन रुक जाता है, समय रुक जाता है। कुछ क्षणों के लिए न समय रहता है, न मन—केवल गहन मौन और आनंद। मैं यह कहती हूँ—यह इस विषय पर मेरा वैज्ञानिक दृष्टिकोण है—क्योंकि मनुष्य के पास यह जानने का कोई और तरीका नहीं था कि मन और समय के अभाव में भी आनंद की अवस्था में प्रवेश किया जा सकता है। सेक्स के अलावा कोई और संभावना नहीं थी, जिससे मन यह समझ सके कि मन और समय के पार भी कोई मार्ग है। निश्चय ही, सेक्स ने ही ध्यान की पहली झलक दी।” क्या आप सब लोग मेरी बात से सहमत हो,,,
 
भाग 159



सुगना ने सूरज के गाल पर चिकोटी काटते हुए बोला..

अरे वाह अब मां से ज्यादा प्यारी मौसी हो गई.. मैं तुझे कब से खोज रही हूं …और तू यहां बैठा है…क्या बात हो रही है…

सूरज किस मुंह से सुगना को यह बात बताता कि आज उसके जन्मदिन पर जो उपहार (प्रथम वीर्य स्खलन के सुख का) सोनी मौसी ने दिया है वो अनुपम है अद्भुत है अद्वितीय है…

सोनी मुस्कुरा रही थी और मन ही मन सोच रही थी कि उसने जो वचन सूरज को दिया था उसे निभाएगी कैसे…




अब आगे…

सोनी ने अपने जीवन के लगभग 37 बसंत देख लिए थे पर सोनी को देखकर लगता नहीं था कि उसकी उम्र 30 32 से ज्यादा होगी अपने मेंटेनेंस पर वह बहुत ध्यान देती थी। उसकी खूबसूरती कुछ-कुछ तमन्ना भाटिया की तरह थी।

त्वचा की चमक तो उसने अपने परिवार से ही पाई थी। अपनी बहन सुगना के समान वह भी दमकती रहती। सुगना और सोनी में जो स्पष्ट अंतर था वह था मासूम और समझदार दिखाई पड़ने का। एक तरफ जहां सोनी अल्हड़ थी मस्त थी पर दूसरी तरफ सुगंना उतनी ही मासूम थी यहां यह कहना उचित नहीं होगा कि सुगना समझदार नहीं थी पर अपनी सारी समझदारी के बावजूद उसमें एक अजब सी मासूमियत थी जो हर किसी को उसकी ओर खींच लेती थी।

परंतु सोनी आत्मविश्वास से भरी हुई थी एक तो कुछ वर्षों के अमेरिका प्रवास ने उसमें गजब का आत्मविश्वास भर दिया था। उसे कोई भी कार्य करने में हिचकिचाहट नहीं थी। सोनी के परिधान भी सुगना से अलग थे। योगा सेशन को छोड़कर सुगना अक्सर साड़ी ही पहनती थी पर योग के दौरान चुस्त कपड़ों में सुगना को देखकर लगता ही नहीं था कि वह एक प्रौढ़ स्त्री है और दो युवा बच्चों की मां है।

दूसरी तरफ सोनी को किसी भी कपड़े से परहेज नहीं था साड़ी ब्लाउज से लेकर घाघरा चोली यहां तक की वेस्टर्न कपड़े पहनने से भी उसे कोई परहेज नहीं था। सोनी के पास उसकी सबसे बड़ी एसेट थी उसके भरे भरे नितंब ठीक तमन्ना भाटिया जैसे या फिर किम कार्दशियां के जैसे उतने ही कोमल उतने ही कठोर….

जब वह चलती उसे पीछे से देख कर लगता जैसे वह वह मर्दों को अपने पीछे-पीछे बुला रही हो खूबसूरत और कसी हुई सुडोल जांघें नितंबों की खूबसूरती और भी बढ़ा देते और नितंबों के ऊपर उसकी कटावदार कमर सब का मन मोह लेती। सोनी वाकई बहुत खूबसूरत थी सामने उसके उन्नत उरोजो से ज्यादा सुंदर उसकी नाभि थी। अमेरिका में अपने प्रवास के दौरान उसने भावावेश में नाभि पर एक छोटी सी बाली भी डलवा ली थी परंतु अपने देश में आने के पश्चात उसने अपनी नाभि को पब्लिकली दिखाना बंद कर दिया था। उसे या अब अटपटा लगने लगा था पर कभी-कभी महिलाओं के बीच वह उसे प्रदर्शित भी कर देती थी। करना ही क्या था जब साड़ी वह नाभि के नीचे पहनती वह रत्न जड़ित बाली दिखाई पड़ने लगती।

सोनी के बाल जो पहले कंधे तक आते थे उसने उसे अब बढ़ा कर अपनी पीठ तक ला दिया था और गोल घुमावदार बाल कभी उसके सीने पर आते कभी पीठ पर और उसकी खूबसूरती को और भी बढ़ा जाते।

सोनी के परिधान उसके मूड क्या के बारे में जरूर बता जाते। जब वह अल्हड़ और मस्त होती वह वेस्टर्न कपड़े पहन कर घर में घूमती । कभी-कभी तो वह ब्रा पहनने की भी जरूरत नहीं समझती। उसकी चूचियां अब भी सख्त थी और हो भी क्यों ना सोनी को अब तक गर्भधारण नहीं हुआ था और चुचियों में दूध नहीं आया था। गर्भधारण को लेकर सोनी भी अब हिम्मत हार चुकी थी और अब इस उम्र में उसके पास कोई उपाय भी नहीं था।

उधर सूरज को उसके जन्मदिन का उपहार मिल चुका था। हस्तमैथुन और वीर्य स्खलन का अद्भुत सुख सूरज ले चुका था पर इस सुख के साथ तनाव भी आया था परंतु सुबह सोनी के सूरज के लंड पर होंठ लगाते ही वह तनाव गायब हो गया था और सूरज खुश हो गया था।

आज शाम को सूरज का जन्मदिन मनाया जाना था।

शाम होते होते पूरे परिवार परिवार में खुशहाली छा गई थी घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी गई थी जिसमें आसपास के करीबी लोगों को बुलाया गया था सूरज के कुछ दोस्त भी आए थे और रोजी भी।

सूरज के घर आने वाली रोजी अकेली लड़की नहीं थी सूरज ने जानबूझकर तीन-चार और लड़कियों को भी घर पर बुलाया था ताकि रोजी अलग दिखाई नहीं पड़े अन्यथा सब उसके पीछे पड़ जाते। पर रोजी ….. वह बला की खूबसूरत थी जिस प्रकार सूरज के घर सभी लोग एक से बढ़कर एक खूबसूरत थे रोजी अकेली उनसे मेल खाती थी। बहरहाल रोजी आज पहली बार सूरज के घर आई थी वह भी एक धनाढ्य परिवार से थी परंतु सूरज जिस हवेली में था वह दिव्य थी अत्यंत खूबसूरत थी।

रोजी और उसकी सहेलियां इस हवेली की खूबसूरती को देख रही थी और सूरज की किस्मत पर नाज कर रही थी भगवान ने सूरज को सब कुछ दिया था भरा पूरा परिवार खूबसूरत हवेली खूबसूरत गठीला बदन तेजस्वी चेहरा तेज दिमाग और न जाने क्या-क्या कुल मिलाकर सूरज को वह सब प्राप्त था जो किसी युवा की कल्पना होती है पर चांद में एक दाग था इतना सब कुछ होने के बावजूद सूरज एक पूर्ण पुरुष नहीं था वह चाह कर भी अपने लंड में उत्तेजना प्राप्त करने में अक्षम था।

जन्मदिन का केक काटने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। सूरज की माँ सुगना, मौसी सोनी, मौसा विकास, भाई राजू और राजा, दीदी मालती और रीमा और सबकी दुलारी, सबकी चहेती मधु—परिवार के इतने लोग इकट्ठा होने से माहौल अपने आप ही जीवंत हो उठा था।

सोनू और लाली इन दिनों अस्थायी तौर पर कुछ दिनों के लिए जौनपुर गए हुए थे, इसलिए उनकी कमी ज़रूर महसूस हो रही थी, मगर बाकी परिवारजनों की मौजूदगी ने उस कमी को काफी हद तक भर दिया था।

सूरज के दोस्त भी पूरे उत्साह के साथ मौजूद थे। उनके साथ आई लड़कियों ने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया था। कभी वे मधुर गीत गुनगुनाने लगतीं, तो कभी सब मिलकर अंताक्षरी खेलने लगते। तालियों, हँसी और गीतों से पूरा आँगन गूंज रहा था।

कुल मिलाकर माहौल इतना आनंददायक बन चुका था कि किसी को समय का एहसास ही नहीं हो रहा था। वह सिर्फ एक जन्मदिन की तैयारी नहीं थी, बल्कि खुशियों और अपनत्व से भरा एक यादगार पल बन चुका था।

धीरे-धीरे केक काटने की बारी आई सूरज आज का हीरो था उसने की काटा और केक का टुकड़ा निकाला पहले केक वह किसको खिलाएं आज पहली बार उसके मन में एक दुविधा उत्पन्न हुई आज से पहले वह हमेशा पहले केक बेझिझक अपनी मां सुगना को खिलाया करता था पर आज न जाने बार-बार क्यों उसके उसके जेहन में सोनी और रोजी आ रही थी।

फिर भी सूरज ने केक अपनी मां सुगना को ही खिलाया वह सच में उसके लिए आदर्श थी दूसरा केक उसने सोनी को खिलाने की कोशिश की परंतु केक फिसल कर नीचे गिर पड़ा और सोनी की भरी भरी चूचियों के बीच गहरी घाटी में जाकर फंस गया

सॉरी मौसी.. सॉरी मौसी… कहते हुए सूरज ने वह केक का टुकड़ा उठाने की कोशिश की और गलती से सोने की दूधिया चूचियों को हाथ लगा दिया आज पहली बार युवा सूरज की उंगलियों ने किसी स्त्री के नग्न स्तन को स्पर्श किया था।

सूरज केक उठा तो लाया था पर सोने की चूचियों पर लगी क्रीम साफ होने लायक नहीं थी। सोनी ने भी सूरज के स्पर्श की संवेदना को महसूस किया उसे थोड़ा असहज जरूर लगा परंतु अपनी मनःस्थिति को छुपाते हुए वह बोली

मैं चेंज करके आती हूं

मौसी पहले केक तो खा लो सूरज ने आग्रह किया और जैसे ही सूरज ने एक बार दोबारा सोनी के होठों के बीच केक रखने की कोशिश की सोनी ने सूरज की उंगली पर अपने दांत हल्के से गड़ा दिए

मौसी मेरी उंगली …

सोनी हंसने लगी ।

सोनी अपने कमरे की तरफ जाने लगी और एक बार फिर सूरज के दोस्तों को सोनी की गदराई हुई कमर के दिव्य दर्शन करने को मिल गए। सभी युवा लड़के सोनी की भरे भरे नितम्बों को देख रहे थे सूरज ने यह बात महसूस कर ली उसने सब का ध्यान खींचते हुए बोला

अब बारी-बारी से जिसे केक खाना हो मेरे पास आ जाओ

लड़कियां अपनत्व दिखाने और इन सब फॉर्मेलिटी में वैसे भी आगे होती है सभी बारी-बारी से सूरज को विश करती केक खाकर और लौट जाती…

उपहारों का आदान-प्रदान हुआ और सब जन्मदिन के उत्सव का आनंद लेने लगे कुछ देर बाद रोजी ने सूरज से कहा

आई वांट टू यूज वॉशरूम

सूरज उसे अपने कमरे में ले गया कमरे में अंदर आते ही रोजी ने सूरज को चूम लिया और उसके आलिंगन में आ गई …

आई लव यू सूरज रोजी ने पूरी आत्मीयता से कहा..

सूरज ने भी उसे अपने आलिंगन में ले लिया।

बाहर हाल में सभी मेहमान उपस्थित थे सूरज और रोजी की यह नजदीकी महंगी पड़ सकती थी सूरज को इस बात का भली भांति एहसास था परंतु आज सुबह रोजी ने सूरज के लिंग में जो तनाव महसूस किया था उसने न सिर्फ सूरज को खुश किया था अपितु रोजी के मन में भी खुशी की लहर ला दी थी। आखिर रोजी सूरज से प्यार करने लगी थी। उसकी मर्दानगी पर उठ रहे प्रश्नों का अंत आज सुबह हो गया था। रोजी ने सूरज का चुंबन जारी रखा पर हाय रे सूरज की किस्मत उसके लंड में फिर कोई हरकत ना हुई।

सूरज पूरे जोर जोर से रोजी के अधरों को चूमता रहा इतना ही नहीं उसने आज पहली बार भावेश में रोजी के उन्नत कूल्हों को भी अपनी हथेलियों में लेकर दबाया और उसे अपनी ओर खींचा पर फिर भी लिंग में कोई तनाव नहीं आया

सूरज की गर्म जोशी देखकर रोजी को ऐसा लगा जैसे सूरज में उत्तेजना जाग उठी है उसने इसे और जागृत करने के लिए उसके एक हाथ को अपनी उभर रही चूचियों पर लाया और सूरज को उन्हें दबाने और महसूस करने का खुला निमंत्रण दे दिया।

सूरज ने भी रोजी की उभर रही चूचियों को भी महसूस करने की कोशिश की पर सूरज का शाप उसके लिंग में तनाव भरने में सबसे बड़ा रोडा था।

सूरज के लिंग में तनाव अब भी नहीं आया सोनी ने अपने शरीर को स्पर्श करने और महसूस करने का जो खुला निमंत्रण सूरज को दिया था उसका असर देखने के लिए उसने एक बार फिर अपने कोमल हथेलियां सूरज के लिंग पर ले गई पर उसका कलेजा धक से रह गया आज फिर सूरज के लिंग में कोई तनाव नहीं था।

ऐसा क्या है? क्या मैं इतनी बेकार हूं इतनी ठंडी हूं कि मैं सूरज में उत्तेजना जागृत नहीं कर पा रही ?

रोजी खुद अपराध भाव से ग्रस्त हो रही थी। हे विधाता …ये क्या हों रहा है….. वो सूरज को खोना नहीं चाहती थी ।

वासना विहीन प्यार की उम्र कम होती है और यह प्यार बिरला होता है रोजी यह बात भली भांति जानती थी।

बाहर सब दोस्त सूरज को आवाज लगाने लगे अरे भाई बाहर आ जाओ। एक दोस्त ने दूसरे दोस्त के कान में फुसफुसाते हुए कहा लगता है साथ में ही बाथरूम कराएगा। दोनों हंसने लगे सूरज बाहर आ चुका था उसने आते ही सफाई थी अरे यार वह बाथरूम की लाइट जलने में कुछ प्रॉब्लम थी इसलिए देर हो गई।

बात आई गई हो गई पर सूरज के चेहरे पर तनाव एक बार फिर स्पष्ट था।

अगली सुबह…

सूरज का जन्मदिन बीत चुका था उसे उसका उपहार भी मिल चुका था पर सूरज की परेशानी अभी कायम थी एक तो शाहिद से मारपीट के दौरान उसके अंगूठे में जो चोट लगी थी वह कोई मामूली चोट नहीं थी जब दो-तीन दिन बाद भी दर्द ठीक ना हुआ तो सोनी ने सूरज को x ray करने के लिए कहा ।

जिसका अंदेशा था वही हुआ था सूरज के अंगूठे और पंजे में हेयर क्रैक था डॉक्टर ने प्लास्टर चढ़ाने की सलाह दी और सूरज के हाथ में प्लास्टर लग गया। डॉक्टर ने उस दिव्य अंगूठे का वह भाग प्लास्टर के बाहर ही छोड़ दिया।

सूरज ने दो-तीन दिनों के लिए कॉलेज से छुट्टी ले ली। सोनी और सुगना दोनों सूरज का ख्याल रखतीं

सोनी और सूरज अब और करीब आ चुके थे परंतु उनमें उस दिन की घटना को लेकर कोई बातचीत नहीं होती थी सूरज की तो हिम्मत नहीं होती थी और सोनी अपनी उम्र और सूरज से अपने पवित्र रिश्ते के अको लेकर सजग थी।

पर इतना तो जरूर था जब से सोनी ने सूरज के तने हुए लिंग को देखा था तब से उसकी कामवासना एक बार फिर जागृत हो चुकी थी गाहे बगाहे वह अपने मोबाइल पर अश्लील और पोर्न कंटेंट देखना शुरू कर चुकी थी और हर बार उसकी खोज तने हुए लंड पर खत्म होती। सोनी जितने भी लंड सर्च करती सूरज उन सब पर भारी पड़ता। उसकी उत्तेजना का केंद्र बिंदु पहले सरयू सिंह होते फिर अल्बर्ट और अब धीरे-धीरे न जाने कब सूरज बार-बार उसे अपनी ओर खींच लाता।

सोनी के मन में आई वासना अनोखी थी पर जैसे-जैसे सोनी की उंगलियां उसकी उसकी बुर के दाने को अलाउद्दीन के चिराग की तरह रगड़ती सोनू का मासूम चेहरा पर बेहद खूबसूरत तना हुआ लंड सोनी की निगाहों के सामने छा जाता और सोनी भाव विभोर होकर अपनी स्खलन यात्रा पूरी करती। और कुछ ही देर में सोनी की बुर से मदन रस रिस रिस कर कर बाहर आने लगता। सोनी की जांघें अकड़ जाती और एक पूर्ण तथा परिपक्व स्खलन संपूर्ण होता

सोनी आज कई वर्षों बाद हस्तमैथुन से ही सही परंतु स्खलन सुख ले रही थी। सोनी खुश थी उसे जो प्राप्त था शायद उसने उसको ही पर्याप्त मान लिया था परंतु उसे क्या पता था विधाता ने उसके लिए कुछ और भी सोच रखा है। दिन बीत रहे थे।

एक दिन सूरज घर पर ही था सुगना किसी कार्य वर्ष घर के बाहर थी और सभी युवा अपने-अपने कॉलेज गए हुए थे सूरज और सोनी घर पर अकेले थे।

सूरज के हाथ में प्लास्टर लगे एक हफ्ता बीत चुका था प्लास्टर के साथ-साथ हाथ की उंगलियों और वह दिव्या अंगूठा भी गंदा हो चुका था। दाहिने और बाएं हाथ की उंगलियों और अंगूठे में अंतर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था सोने से रहा नहीं गया।

सोनी ने टॉवल गीला किया और सूरज की उंगलियां और अंगूठा पोछने लगी। उंगलियां तक तो ठीक था परंतु जैसे ही सोनी ने सूरज की अंगूठे को पोंछ कर उसपर क्रीम लगाकर सहलाया ..

नाग जाग उठा..

सूरज को एक करंट सा लगा पर उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सोनी ने क्रीम को अच्छे से लगाने के लिए कुछ पलों के लिए उसके अंगूठे को और सहलाया सूरज का लंड पूरी तरह तनकर फटने को तैयार था। सूरज ने अपना हाथ सोनी के हाथ से खींच लिया और बोला

मौसी अब बस…

सोनी को यह प्रतिक्रिया कुछ अजब लगी परंतु जैसे ही सोनी का ध्यान नीचे की तरफ गया सोनी को एहसास हो गया कि उसने आज फिर गलती कर दी है। आज तो सूरज की इज्जत बचाने के लिए उसका लिहाफ भी उसके साथ नहीं था। लंड के आकार और तनाव को कंट्रोल कर पाना पजामे के वश में न था।

सोनू पकड़ा जा चुका था। सोनी ने सूरज के लिंग में आए तनाव को महसूस कर लिया था।

सोनी और सूरज दोनों असहज स्थिति में आ चुके थे। सूरज ने सोनी से कहा

मौसी अब आप जाइए..मुझे अकेला छोड़ दीजिए..

सोनी जानती थी की लिंग में आया या तनाव बिना उसके होंठ लगाए जाने वाला नहीं था उसने सूरज से कहा..

लगता है उसे दिन वाली स्थिति हो गई है…क्या ये हमेशा होता है?

सूरज को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले आखिर यह बात अपनी मौसी को वह खुलकर कैसे बताता परंतु सोनी समझदार थी वह स्वाभाविक झिझक को समझते थे वह सूरज के पास फिर बैठ गई और बोली देखो

तुम खुद एक डॉक्टर बनने वाले हो और मुझे भी कुछ ज्ञान तो जरूर है अपनी परेशानी मुझसे खुलकर बता सकते हो सकता है कोई समाधान निकल आए..

सूरज कुछ देर सोचता रहा आखिरकार उसके सब्र का बांध टूट गया उसने अपनी आंखों में आंसू भरकर कहा मौसी लगता है मैं सामान्य नहीं हूं?

सोनी ने प्यार से उसके माथे और बालों पर उंगलियां फिराते हुएहुए कहा

ऐसा क्यों सोचता है मेरा सूरज?

सूरज कुछ देर फिर रुक और अपनी नज़रें झुका कर बोला..

मेरे लिंग में कभी भी तनाव नहीं आता है?

सोनी ने अपनी नज़रें सूरज के चेहरे से हटाई और सूरज की जांघों के बीच देखा जहां उभर स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था उसने मुस्कुराते हुए कहा

अब कितना तनाव चाहिए?

यह सामान्य नहीं है? यह तो अभी आपने जो अंगूठा सहलाया उसके बाद हुआ है। याद है आपको मेरे जन्मदिन की रात में जब आपने अंगूठा में मलहम लगाते हुए सहलाया था तब भी यही हुआ था। सूरज में विस्तार से अपने मन की बात सोनी को बता दी।

सोनी इस बात को समझ तो चुकी थी परंतु सूरज के व्याख्यान से उसे भी इस बात पर पूरी तरह यकीन हो चुका था उसने उत्सुकता बस पूछा..

तो क्या इससे पहले कभी तुम्हारे उसमें तनाव नहीं आया.

सोनी को शायद लिंग बोलने में शर्म आ रही थी।

सूरज ने ना में सर हिलाया..

कभी भी नहीं? सोनी को इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था।

नहीं मौसी

सूरज में पूरी दृढ़ता के साथ कहा।

तो क्या तुम इन सब बारे में सोचते भी नहीं हो।

किस बारे में ?

सूरज ने जानना चाहा

अरे युवा स्त्री पुरुष संबंधों के बारे में…

सोनी ने अपनी स्त्री सुलभ लज्जा को दरकिनार करते हुए कहा।

सूरज अभी शांत था वह कुछ कहना चाहता था पर सकुचा रहा था सोनी ने एक बार फिर कहा..

अरे बुद्धू, सेक्स के बारे में..

चाहे जितना सोचो कुछ नहीं होता..? सूरज के वाक्य में निराशा का पुट था।

सोनी को सूरज की बातों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था उसने एक बार फिर सूरज से पूछा

क्या मोबाइल में वह सब उल्टी सीधी तस्वीरें भी देखी है..

हा मौसी, सब करके देख लिया पर कुछ कमी जरूर है मुझ में.

तो क्या तुमने कभी इजेकुलेशन नहीं किया है?

सोनी ने अंग्रेजी भाषा का सहारा लेकर अपने बातों की मर्यादा को बनाए रखा।

सूरज ने अपनी पलके झुकाए हुए कहा

बस दो बार वह भी उस जन्मदिन की रात को जब इसमें पहली बार तनाव आया था।

सोनी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था की 21 वर्ष के युवा सूरज ने जिंदगी में सिर्फ दो बार हस्तमैथुन किया था।

देख सूरज मुझे सच-सच बताना नहीं तो मैं तेरी कोई मदद नहीं कर पाऊंगी

सच मौसी आपकी कसम

सूरज ने सोनी की हथेली को अपने दोनों हाथों में भर लिया।

सोनी को यह माजरा पूरी तरह समझ तो नहीं आ रहा था पर इतना अवश्य था कि सूरज के साथ कुछ ना कुछ अनोखा अवश्य है।

मौसी एक बात पूछूं बुरा तो नहीं मानेंगी?

बुरा क्यों मानेगी जब मैं खुलकर बात कर रही हूं तुम कुछ भी मुझसे पूछ सकते हो।

उस दिन आपने ऐसा क्या किया था जिससे इसका तनाव गायब हो गया था..

सूरज ने प्रश्न पूछ कर सोनी को असहज करदिया। सोनी किस प्रकार यह बात कहती कि उसने उसके लंड को चूम कर उसे सामान्य अवस्था में लाया था।

सोनी हाजिर जवाब थी उसने मुस्कुराते हुए कहा

तेरी मौसी के पास कई सारे जादू हैं लगता है आज भी जरूरत पड़ेगी तब पहचान लेना?

दोनों की बातचीत और आगे बढ़ती तभी हाल में किसी के आने की आहट हुई सोनी ने बाहर निकाल कर देखा सुगना आ चुकी थी..

सोनी और सुगना बातें करने लगी। उनकी आवाज धीरे-धीरे सूरज को और स्पष्ट सुनाई पड़ने लगी ऐसा लग रहा था कि दोनों सूरज के कमरे की तरफ ही आ रही हैं सूरज ने झटपट पास पड़े चादर को अपने पैरों पर डाल दिया और अपने लंड के तनाव को छुपाने की कोशिश की।

सुगना सूरज के बिस्तर पर बैठ चुकी थी सोनी ने बड़े प्यार से कहा

दीदी आप सूरज से बातें कीजिए मैं आपके लिए चाय बना कर लाती हूं। सुगना और सूरज बातें करने लगे इसी बीच सुगना ने सूरज के प्लास्टर चढ़े हाथ को अपने हाथों में लेकर उसे तसल्ली देते हुए कहा

डॉक्टर ने प्लास्टर कब काटने को कहा है?

अगले हफ्ते कटेगा. सूरज ने जवाब दिया

सुगना प्यार से सूरज की उंगलियां फैलने लगी उंगलियों के बाद अंगूठे की बारी आई सुगना ने सूरज के अंगूठे को एक बार फिर सहला दिया पर सूरज यह ने महसूस किया कि इस बार सुगना के अंगूठा सहलाए जाने पर उसके लिंग में कोई हरकत नहीं हुई और तनाव में कोई भी वृद्धि नहीं हुई। सुगना प्यार से सूरज का अंगूठा और उंगलियां सहलाती रही और सूरज का के लिंग का तनाव यथावत रहा।

अब तक तो सूरज यह महसूस कर रहा था कि शायद किसी स्त्री द्वारा उसके अंगूठे को सहलाए जाने से ही उसके लिंग में तनाव उत्पन्न होता है परंतु यह बात यहां गलत साबित हो रही थी।

सुगना ने सूरज के चेहरे पर आई चिंता और दुविधा को पढ़ लिया उसने पूछा

क्या बात है क्या सोच रहा है मेरा सोना?

सूरज जो सोच रहा था वह बता पाना कठिन था उसने बात घुमा दी और बोला इस हाथ के चोट से अब तो मैं बोर हो गया हूं जल्दी प्लास्टर कटे और यह बवाल हटे।

सोनी चाय लेकर आ चुकी थी सूरज भी बिस्तर से उठकर अपनी पीठ सिरहाने से टिकाई पर इस बात का ध्यान रखा कि उसके लिंग का तनाव चादर के आवरण में छुपा ही रहे।

सोनी और सूरज एक दूसरे को एक अलग भाव से देख रहे थे जैसे उन्होंने कोई राज सुगना से छुपाया हुआ था। इधर-उधर की बातें होती रही और सुगना उठकर अपने कमरे में जाने लगी सोनी ने भी सुगना के जाने के बाद सूरज से पूछा..

तेरी समस्या का इलाज अभी कर दूं या…सोनी अपनी बात पूरी कर पाती है इसके पहले ही सूरज बोल उठा

मौसी कुछ देर बाद..

सोनी ने चुटकी ली कुछ देर बाद क्यों ?

सूरज के चेहरे पर शर्म की लालिमा थी सोनी समझ चुकी थी कि सूरज हस्तमैथुन करने का इच्छुक था उसने मुस्कुराते हुए बड़ी अपनी मादक निगाहों से उसकी तरफ देखा और बड़ी अदा से बोली..

एक साथ दो तीन बार मत करना ये सब कभी-कभार ठीक है पर लगातार अच्छा नहीं है…

सोनी खुलकर बोल नहीं रही थी परंतु सूरज भली-भांति समझ रहा था कि सोनी हस्तमैथुन के बारे में बात कर रही है।

सूरज ने अपनी पलके झुकाए हुए ही जवाब दिया ठीक है मौसी अब जाइए..

इधर सोनी कमरे से बाहर निकली और उधर सूरज बिस्तर से उठा और अपने दरवाजे को लाक करने के बाद बिस्तर पर आ गया और एक बार फिर उसे अद्भुत कल्पना सुख में खो गया हाथ उसे तने हुए लंड को कभी सहलाते कभी मसलते दिमाग कभी रोजी को नग्न करता कभी किसी और को पर बीच-बीच में सोनी और उसकी बातें सूरज का ध्यान खींचती जन्मदिन के दिन सोनी की चुचियों के स्पर्श की संवेदना सूरज को बखूबी याद थी। जैसे-जैसे सूरज का लावा रिस रिस कर स्खलन के लिए तैयार होता गया सूरज की नजदीकी सोनी से बढ़ती गई आज पहली बार सूरज ने सोनी की भरी-भरी चुचियों की कल्पना अपने दिमाग में साकार की और उन्हें अपनी कल्पना में न सिर्फ हाथों में भरने की कोशिश की अपितु होठों में उसके निप्पल को भरकर चुभ लाने की भी कोशिश की कल्पना का असर निश्चित तौर पर होना था और हुआ भी सूरज के लंड ने वीर्य वर्षा शुरू कर दी…

उधर सोनी सूरज के बुलावे का इंतजार कर रही थी।उधर जब सूरज सोने की कल्पना में खोया हुआ था इधर सोनी भी सूरज के खूबसूरत लंड याद कर रही थी जिसे अब से कुछ देर बाद उसे शांत करना था।

इधर लंड से वीर्य की धार निकलती रही उधर न जाने कब सूरज ने अपनी प्यारी मौसी को अपनी कल्पना में अपनी बाहों में भर लिया था…

स्खलन के दौरान वासना अपने चरम पर होती है.. सोनी के बारे में सूरज ने जो सोचा था अब स्खलन के बाद अपनी कलुषित सोच पर उसे शर्म आ रही थी…

उसे इसी शर्म पर विजय पाना था….

शेष अगले भाग में..

 
Actually कहानी तेज करने पर हम सब को अंत पता है मुझे लगता है स्लो इरॉटिका में आनंद ज्यादा है फिर भी प्रयास आकरूंगा
 
अभी मालती ने अंगूठा सहलाया कहां है ? अभी तो पिछले एपिसोड में सुगना ने अंगूठा सहलाया था जिससे कुछ नहीं हुआ था ये पहले भी नहीं हुआ था।

मालती को मोक्ष मिलना बाकी है..

सूरज की मुक्ति का मार्ग विद्यानंद ने बताया है देखिए क्या होता है
 
सच है पहले बचपन में मालती ने सहलाया हैनर उसका असर भी हुआ था पर बरतन में मालती अभिनेससे दूर है। आने वाले समय में हों सकता है कि मालती भी इसका लाभ ले
 
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